माँ का आशिक अध्याय 9

दादा जी:” ओह लगता हैं मेरा पोता काफी समझदार हो गया है, अच्छा है बेटा वैसे भी एक दिन अब तुम्हे ही सारे घर की जिम्मेदारी लेनी है। शादाब:” जी दादा जी, आप फिक्र ना करे, मैं सब कुछ अच्छे से संभाल लूंगा। दादा:” चल ठीक हैं, तू रात नजर सफर से थक गया होगा, … Read more

माँ का आशिक अध्याय 8

रेशमा की चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और गांड़ का छेद अपने आप खुल और बंद हो रहा था। शादाब ने उंगली से रेशमा के गांड़ के छेद को सहला दिया तो रेशमा से इतना मजा बर्दाश्त नहीं हुआ और सिसक उठी ” उफ्फ शादाब हाय तू तो कमाल की मालिश करता … Read more

माँ का आशिक अध्याय 7

गाड़ी चलाते हुए शादाब को अपने उपर बहुत गुस्सा अा रहा था कि वो रेशमा के साथ ना चाहते हुए भी बहक गया था। मेरी अम्मी मुझ पर कितना यकीन करती है अगर उन्हें पता चलेगा तो मुझसे हमेशा के लिए रिश्ता खत्म कर लेगी। लेकिन जो सुख आज उसे रेशमा ने दिया था वो … Read more

माँ का आशिक अध्याय 6

सब्जी कट चुकी थी इसलिए शहनाज़ खाना बनाने लगी और शादाब छत पर घूमने चला गया। थोड़ी देर खाना बन गया था और दोनो मा बेटे के खाना खाना शुरू किया तो आज शहनाज़ ने अपने हाथ से खाने का निवाला बनाकर अपने बेटे को खिलाया तो शादाब खुशी से झूम उठा और उसने भी … Read more

माँ का आशिक अध्याय 5

शादाब का दिल तड़प उठा अपनी अम्मी की ये दर्द वाली बात सुनकर इसलिए उसकी आंखे छलक उठी और बोला;” ” अम्मी आपको सिर्फ जिस्मानी दुख हुआ है और आपके दर्द से मुझे जो रूहानी दुख पहुंचा है मैं बता नहीं सकता। अम्मी अंदर तक टूट गया हूं मैं। शहनाज़ ने अपने बेटे की आंखे … Read more

माँ का आशिक अध्याय 4

शहनाज अपने बेटे को किसी अजूबे की तरह देखने लगी कि इसका दिमाग कितनी तेज चलता है। अगले ही पल एक चिंता की लकीर शहनाज़ के चेहरे पर दिखाई पड़ी और वो बोली:” ” तो अब तू क्या रेशमा से भी दोस्ती करेगा क्या ? शादाब अपनी अम्मी की आंखों में देखते हुए उसका हाथ … Read more

माँ का आशिक अध्याय 3

इतना बोलकर शहनाज अपने ससुर को पानी देने के थोड़ा सा आगे हुई जिससे उसके पैर टेबल के नीचे से ही शादाब के पैरो से जा टकराए तो शादाब ने एक बार अपनी अम्मी की तरफ देखा तो शहनाज़ का चेहरा शर्म से लाल होकर झुक गया। शादाब अपनी अम्मी के पैरो को अपने पैरो … Read more

माँ का आशिक अध्याय 2

शादाब अपनी अम्मी के गाल चूम कर बोला:” ” अम्मी आप सच में बहुत खूबसूरत है, आपके गाल एक दम मीठे हैं बिल्कुल शहद की तरह। अपने बेटे की बात सुनकर वो पूरी तरह से शर्मा कहीं गई और हाथ से निकल कर बोली: ” बेशर्म कहीं का, कोई अपनी अम्मी से ऐसे बात करता … Read more

माँ का आशिक अध्याय 1

आज सुबह से शहनाज़ बहुत खुश थी क्योंकि इकलौता बेटा शादाब दस साल के बाद घर वापिस लौट रहा था। इन सालों के दौरान दोनो के बीच बहुत कम बात हुई क्योंकि बेटा हॉस्टल में रहता था। दरअसल शहनाज़ के पति की मौत गांव में डॉक्टर ना होने की वजह से हो गई थी इसलिए … Read more

मासूम स्वाहश भाभी अध्याय 5

लुभय रामू ने देखा कि वे बाहर आने वाले थे और वह जल्दी से आसन्न खाली बेडरूम में पहुंचे और बंद दरवाजे के पीछे इंतजार किया। जब उन्होंने सुना कि उनके नक्शा सीढ़ियों से नीचे आते हैं तो वह बाहर निकल गया और शालिनी के कमरे में चले गए। शालिनी ने नदियों को सुना और … Read more