माँ का आशिक अध्याय 4

शहनाज अपने बेटे को किसी अजूबे की तरह देखने लगी कि इसका दिमाग कितनी तेज चलता है। अगले ही पल एक चिंता की लकीर शहनाज़ के चेहरे पर दिखाई पड़ी और वो बोली:”

” तो अब तू क्या रेशमा से भी दोस्ती करेगा क्या ?

शादाब अपनी अम्मी की आंखों में देखते हुए उसका हाथ पकड़ कर बोला:”

” बिल्कुल भी नहीं अम्मी, रेशमा बुआ मुझे फसाना चाह रही थी मैंने उसको ही उल्लू बना दिया।

शहनाज़ अपने बेटे की इस चालाकी और मुस्कुराए बिना नहीं रह सकी और बोली:”

” तो तो बड़ा तेज निकला बेटा,

और इतना बोलकर उसने थोड़ा आगे होकर उसका माथा चूम लिया। शादाब खुश हो गया और उसने गाड़ी वहीं साइड में लगा दी तो शहनाज़ सोचने लगी कि इसे अचानक से क्या हुआ।

शादाब ने शहनाज़ के मन के से को भांप लिया था। शादाब ने आगे होते हुए अपनी अम्मी को अपनी बांहों में भर लिया और उसकी आंखो में देखते हुए बोला:*
” अम्मी आप ही मेरी पहली और आखिरी दोस्त हो, हम दोनों के बीच बीच कभी कोई नहीं आ सकता।

इतना कहकर शादाब ने उसका गाल चूम लिया। शहनाज़ के मन की सारे शंकाएं, सारे सवाल अपने बेटे के इस एक जवाब से खत्म हो गए। शहनाज़ आज अपने आपको दुनिया की सबसे खुशनसीब समझ रही थी। वो अपने बेटे के मुंह को हाथो में भर कर चूमने लगी।

शादाब :” अम्मी आप मैं आपको घूम घुमाऊंगा, क्योंकि अब दादा और दादी भी नहीं है घर पर इसलिए को चाहे वो कर सकते हैं ।

शहनाज अंदर ही अंदर से बहुत खुश थी कि अब वो दोनो मा बेटे पूरे घर में अकेले रहेंगे। उफ्फ आगे क्या होने वाला है ये सब ख्याल मन में आते ही शहनाज़ की आंखों में लाल डोरे तैरने लगे।।

शादाब अपनी अम्मी से अलग हुआ और गाड़ी आगे बढ़ा दी। आगे उसने एक शानदार होटल देखकर अपनी अम्मी को उनकी मनपसंद बिरयानी खिलाई। शादाब अपनी अम्मी के साथ कुछ फल खरीदने लगा। शहनाज़ को चेरी बहुत पसंद थी इसलिए शादाब ने अपनी अम्मी के लिए दो पैकेट खरीद लिए और फिर दोनो घर की तरफ चल दिए। रात में कोई 11:30 के आस पास दोनो घर पहुंच गए।

आज शहनाज़ बहुत खुश थी क्योंकि उसके बेटे ने आज जो रेशमा के साथ किया था उससे उसे पुरा यकीन हो गया था कि उसका बेटा अब पूरी तरह से सिर्फ उसका हैं। उससे ज्यादा खुशी उसे एक बात की थी कि कितनी सफाई से उसने अपने दादा दादी को रेशमा के यहां छोड़ दिया ताकि वो आराम से मेरे सपने पूरे कर सके। शहनाज ये सब सोच सोच कर खुश हो रही थी और उसे आज सच में अपने पर प्यार अा रहा था। वो अब उसे सिर्फ एक बेटे नहीं बल्कि मर्द की नजर से देख रही थी जो अपनी प्रेमिका से मिलने के लिए नए नए बहाने खोजता है।

घर जाकर शादाब पूरे दिन का पसीने से भीगा हुआ था इसलिए नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया और जल्दी ही नहाकर बाहर अा गया और तैयार होकर उपर छत पर जाने लगा क्योंकि चांदनी रात में ठंडी ठंडी हवाएं चल रही थी। शादाब अभी तक रेशमा की चूची के बारे में सोच रहा था क्योंकि उसने पहली बार असल ने किसी की चूची देखी थी। उफ्फ बुआ की चूची गोरी तो थी लेकिन अम्मी तो बुआ से बहुत ज्यादा सुंदर हैं तो अम्मी की चूचियां तो बुआ से कहीं ज्यादा मस्त होनी चाहिए। शादाब के उपर वासना हावी होने लगी तो उसे कल देखी हुई फिल्म याद अा गई और उसने तुरंत मोबाइल में वो मूवी देखनी शुरू कर दी। मूवी देखते हुए शादाब की हालत खराब होने लगी क्योंकि आज पहली बार उसे औरत के जिस्म देखने को मिल रहा था। जैसे ही मूवी में लडके ने सविता की पेंटी नीचे खीची तो शादाब के मुंह से आह निकल पड़ी और उसने पहली बार चूत के दर्शन किए। शादाब को हल्की ठंड में भी पसीना आने लगा और उसका लंड पूरी तरह से तन कर खड़ा हो गया। शादाब मूवी देखता रहा और लड़के ने देखते ही देखते अपनी एक उंगली को सविता की चूत में घुसा दिया तो सविता के मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी। फिर उसने उंगली को मुंह में भर कर चूस लिया और मस्ती में आकर उसने आंटी की चूत पर अपने होठ टिका दिए तो आंटी के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी। शादाब उसे गौर से देख रहा था और औरत के जिस्म के नए नए रहस्यों से आज उसका परिचय हो रहा था।

दूसरी तरफ शहनाज़ नहा चुकी थी और उसने टाइम देखा तो अभी 12 बजने में दस मिनट कम थे। वो रहस्यमयी ढंग से मुस्कुराई और आज उसने पहली बार अपने बेटे की लाई हुई काले रंग की शॉर्ट ड्रेस पहन ली जिसमें उसके दूध से गोरे चिट्टे कंधे एकदम नंगे थे। शहनाज़ ने अपनी मेक अप किट उठाई और अपने आपको सजाने लगी। दर असल आज शादाब शादाब का जन्म दिन था जिसे वो भूल गया था जबकि शहनाज़ को पूरी तरह से याद था इसलिए वो अपने बेटे को सरप्राइज देना चाहती थी।

शहनाज ने अच्छी तरह से मेक अप करने के बाद अपने बालो को चेहरे के दोनो तरफ कर लिया । उसका खूबसरत चेहरा ऐसा लग रहा था मानो काले स्याह आसमान में से चांद अपने पूरे नूर पर चमक रहा हो। शहनाज ने एक दम गहरे लाल रंग की सुर्ख लिपस्टिक लगाई तो उसके होंठ सजकर बिल्कुल रसीले हो गए। शहनाज ने एक बार खुद को शीशे में देखा और खुद ही अपने आपको देखकर शर्मा गई।
शहनाज़ ने अपने आपको तैयार तो कर लिया लेकिन शर्म की वजह से उसके पैर नहीं उठ पा रहे थे। उफ्फ मेरा बेटा मुझे इस हालत में देखकर क्या सोचेगा, मैं उसकी नजरो का सामना कैसे कर पाऊंगी। फिर शहनाज़ का दिल बोल उठा कि तेरा बेटा तो खुद तुझे इस ड्रेस में देखने के लिए तड़प रहा है तभी तो उसने तुझे अपनी पसंद से ये ड्रेस दिलवाई है और अगर तू इसी शर्म लिहाज के चक्कर में पड़ी रही तो शादाब के पीछे ना जाने कितनी लड़कियां , औरतें पड़ी हुई है कहीं ऐसा ना हो वो हाथ से निकल जाए। ये सोचते ही शहनाज़ ने अपनी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा फैसला किया और वो आत्म विश्वास से भर उठी। उसके पैर अपने आप उपर की तरफ तेजी से बढ़ गए। जहां थोड़ी देर पहले शहनाज़ छत की तरफ जाते हुए डर और संकोच कर रही थी वहीं अब नारी सुलभ ईर्ष्या के कारण उसके कदम तूफान की गति से पड़ रहे थे। वो अपने बेटे के पास जाने के लिए बुरी तरह से तड़प रही थी और ये कुछ कदम का फासला उसे बुरी तरह से तड़पा रहा था।

शादाब को जैसे ही अपनी मा के क़दमों की आहट सुनाई दी तो उसने मूवी को बन्द करते हुए फोन को जेब में डाल लिया और बिना अपनी अम्मी की तरफ देखे बाहर की तरफ देखने लगा क्योंकि मूवी देखने के कारण उसका लंड पूरी तरह से खड़ा होकर मूसल बन चुका था। शादाब बिल्कुल नहीं चाह रहा था कि उसकी अम्मी की नजर लंड पर जाए। शहनाज आगे बढ़ने लगी, उसके पैर कांप रहे थे लेकिन आज वो पीछे हटने वाली नहीं थी।

शहनाज़ ने शादाब को पीछे से अपनी बांहों में भर लिया और अपना सिर उसके कंधे पर टिकाते हुए बोली:”

” इतनी रात को अकेले छत पर मेरा राजा क्या कर रहा है?

शादाब को शहनाज़ के जिस्म से आती हुई परफ्यूम की मादक गंध महसूस हुई और वो आगे की तरफ देखते हुए ही बोला:”

” अम्मी बस चांद को देखने अा गया था, देखो ना कितना खूबसूरत लग रहा हैं अम्मी ?

शहनाज़ को चांद से भी जलन महसूस हुई और अपने बेटे की बातो पर हंसी अाई और बोली:”

” राजा जरा एक बार नजर पलट कर देख क्या पता दूसरा चांद भी नजर आ जाय!!

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनते ही घूम गया और उसकी नजरे शहनाज़ के चेहरे पर टिक गई और वो बिना पलके झपकाए उसे दीवाने की तरह देखता रहा। शहनाज समझ गई कि उसके रूप का जादू उसके बेटे पर चल गया है इसलिए उसके थोड़ा और करीब आते हुए बोली:”

” ध्यान से देख ले मेरे राजा, फिर आराम से आराम फैसला करना कि कौन सा चांद ज्यादा खूबसूरत हैं?

शादाब अपनी अम्मी के बिल्कुल करीब अा गया बस बीच में शादाब के खड़े हुए लंड का ही फासला था। वो गौर से शहनाज़ को देखता रहा, उफ्फ ये परियों का सुंदर चेहरा बिल्कुल चांद की तरह उसके काले बालों की घटा से झांकता हुआ, एकदम सेब की रंगत लिए हुए गाल, लिपस्टिक से रंगे लाल सुर्ख होंठ जिनसे रस टपकता हुआ और दूध से गोरे नंगे कंधे, सचमुच शहनाज़ एक क़यामत ही लग रही थी।

ये सब देख कर शादाब मचल उठा और उसके होंठो पर मुस्कान अा गई और अपनी अम्मी की आंखो में देखते हुए उसका हाथ पकड़ कर कहा:”

” आपसे खूबसूरत कोई हो ही नहीं सकता, फिर उस चांद की तो औकात ही क्या है !!

शहनाज़ अपने बेटे के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर शर्म के मारे लजा गई और उसका चेहरा लाल होकर शर्म से झुक गया और उसके होंठो पर स्माइल फैल गई और वो अपना मुंह नीचे किए हुए बोली :”

“शुर्किया बेटा, तू सच में मेरा प्यारा राजा हैं।

शादाब अपनी अम्मी की ये हालत देखकर मुस्करा उठा और उसने शहनाज़ का एक हाथ पकड़ लिया। शादाब का स्पर्श होते ही शहनाज़ फिर से कांप उठी और उसने अपने बेटे के हाथ को दबा दिया। तभी घड़ी में बारह बज चुके थे इसलिए शहनाज़ ने आगे होते हुए अपने बेटे के चेहरे को अपने हाथो में भर लिया और उसकी आंखो में देखते हुए बोली:*

” जन्म दिन मुबारक हो मेरे राजा !!

इतना कहकर शहनाज ने अपने जलते हुए होंठ शादाब के गाल पर टिका दिए और उसके गाल को चूम लिया। शादाब को जैसे याद अा गया कि आज तो उसका जन्म दिन हैं, वो खुशी से भर उठा और अम्मी को जोर से अपनी बांहों में भर कर कस लिया। शहनाज़ जैसे ही शादाब के गले से लगी तो उसे अपनी जांघो के बीच शादाब के खड़े हुए लंड का एहसास हुआ और पूरे जिस्म में उत्तेजना की एक लहर दौड़ गई।
शादाब ने अपनी अम्मी के चेहरे पर चुंबनो की बरसात कर दी और बोला:”
” ओह अम्मी आपको याद था , मैं तो बिल्कुल भूल ही गया था।

शहनाज़ ने अपनी नजरे उठाई और उसकी आंखों में देखते हुए बोली:”

” मेरी जान हैं तू राजा, अगर मैं याद नहीं रखूंगी तो कौन याद रखेगा !!

इतना कहकर उसने फिर से शादाब का गाल चूम लिया। शादाब ने जोश में आकर उसे पूरी ताकत से कस लिया और उसकी कमर को सहलाने लगा। पतली सी ड्रेस के उपर से शादाब के हाथ शहनाज़ के जिस्म में आग लगाने लगे। शहनाज़ ने भी अपने बेटे को पहली बार पूरी ताकत से अपनी बांहों में समेट लिया। शादाब उसके कान में बोला:”

” अम्मी आप इस ड्रेस में बिल्कुल परी लग रही हो, एक हसीन शहजादी अम्मी !!

शहनाज़ अपनी गर्म सांसे अपने बेटे की गर्दन पर छोड़ती हुई बोली :”

” क्या तुझे सच में तेरी अम्मी तुझे खूबसूरत शहजादी लगती हैं मेरे राजा बेटा ?

शादाब अपने हाथ पहली शहनाज़ के नंगे कंधो पर रखते हुए बोला:”

” हान अम्मी , आप तो मेरे लिए शहजादी ही हो एक दम सपनों की शहजादी।

शहनाज़ अपने बेटे की बात सुनकर पूरी तरह से अपने सपने में खो गई जहां उसने कल्पना की थी उसका शहाजदा उसे अपनी शहजादी कहकर बुलाएगा। तभी शादाब ने अपनी अम्मी के गोरे चिट्टे कंधो को सहला दिया तो शहनाज़ उसके स्पर्श से पूरी तरह से मदहोश हो गई और उसकी आंखो में देखने लगी। दोनो मा बेटे एक दूसरे को बिना पलके झपकाए निहार रहे थे। शादाब के हाथो का दबाव उसके कंधे पर बढ़ रहा था और लंड उसके पेट पर अड़ा हुआ था। शादाब उसके होंठो की तरफ देखते हुए बोला,:”..

” मेरा बर्थ डे गिफ्ट कहां है मेरी शहजादी?

इतना कहकर शादाब ने अपने होंठो पर जीभ फेरी तो शहनाज़ का रोम रोम सुलग उठा और होंठ कांपने लगे। शहनाज़ बुरी तरह से शर्मा गई और मुंह नीचे करके अपने दांतो से निचला होंठ चबाने लगी। शादाब ने अपना हाथ नीचे ले जाकर उसका चेहरा उपर उठाया तो शहनाज़ के होंठ पूरी तरह से उभर कर सामने आ गए और शर्म से उसकी आंखे पूरी तरह से बंद हो गई। शादाब ने अपने होंठो को बिल्कुल शहनाज़ के होंठो के सामने कर दिया जिससे दोनो की सांसे एक दूसरे से टकराने लगी।शादाब पूरी तरह से मदहोश होकर बोला:”..

” अम्मी प्लीज़ एक बार मेरी आंखो में देखो ना !!

शहनाज़ ने बड़ी मुश्किल से अपनी आंखे खोली और अपने बेटे के होंठो को अपने होंठो के सामने देख कर उसका चेहरा लाल हो गया और फिर से पलके झुक गई। शादाब ने अपने होंठ थोड़ा आगे बढ़ाए तो दोनो के होंठ आपस में मिल गए। जैसे ही होंठ जुड़े तो शहनाज़ अपने बेटे से पूरी तरह से कसकर लिपट गई और उसके हाथ अपने आप शादाब के सिर पर पहुंच गए। शादाब ने अपना मुंह खोलते हुए उसके होंठो को मुंह में भर लिया और चूसने लगा। शहनाज़ से अब बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने भी अपने बेटे के होंठो को चूसना शुरू कर दिया।

दोनो मा बेटे पूरी तरह से किस में डूब गए और दोनो एक दूसरे का रस चूसते रहे। तभी शादाब ने अपनी जीभ बाहर निकाल कर शहनाज़ के मुंह पर दस्तक दी तो शहनाज़ के होंठ खुल गए और शादाब की जीभ उसके मुंह में घुस गई। शहनाज़ के मुंह में पहली बार जीभ घुसी थी इसलिए वो अपने होश गंवाते हुए अपने बेटे की जीभ को चूसने लगी। शहनाज़ की चूत पूरी तरह से भीग चुकी थी। लंबाई कम होने के कारण वो अपने बेटे के पैरो पर चढ़ गई जिससे शादाब का लंड अब उसकी चूत से टकरा गया। दोनो मा बेटे एक साथ सिसक उठे, शादाब के हाथ अब शहनाज़ के कंधे को बहुत अच्छे से रगड़ रहे थे और उसका लंड अब शहनाज की चूत को चूम रहा था।जब दोनो की सांसे उखड़ने लगी तो दोनो सांस लेने के लिए अलग हुए और दोनो की आंखे खुल गई। दोनो ने एक दूसरे की आंखो में झांका और एक साथ मुस्करा दिए और फिर से उनके होंठ जुड़ गए। दोनो मा बेटे एक दूसरे का रस पीते रहे और जी भर कर शहनाज़ का रस चूसने के बाद शादाब के होंठ अलग हो गए।

शहनाज़ का दिल किसी बुलेट ट्रेन की तरह दौड़ रहा था तो शादाब की हालत भी कुछ जुदा नहीं थीं। आज पहली बार उसे एहसास हुआ कि असली किस तो होंठो पर किया जाता हैं। वो अपने अम्मी के कान में बोला:

” अम्मी आपके होंठ बहुत मीठे हैं, उफ्फ शहद जैसा रस निकल रहा था।

शहनाज़ शादाब की बात सुनकर खुश हो गई और उसके होंठो पर उंगली रखते हुए बोली:”

” बस कर मेरे राजा, तुझे अपनी अम्मी के होंठ इतने अच्छे लगे क्या ?

शादाब ने फिर से आगे झुककर उसके होंठो को चूम लिया और बोला:”

” हाय अम्मी, आज पता चला कि अगली किस का असली मजा तो होंठो में आता हैं।

शहनाज़ उसकी बाते सुनकर शर्मा गई और अपना मुंह छुपाते हुए बोली :”
” हाय अल्लाह, कितना बेशर्म हो गया हैं तू, कुछ तो शर्म कर !!

शादाब ने अपनी अम्मी को अपनी तरफ खींच लिया और गले से लगाते हुए बोला:”

” शर्म बहुत कर ली अम्मी, अब तो प्यार करने का समय अा गया हैं। देखना आपका बेटा आपको बहुत प्यार देगा।

शहनाज़:” लगता है अब तेरे लिए कोई लड़की देखनी पड़ेगी, तू तो पूरा जवान हो गया है।

शहनाज़ ने ये बात अपनी जांघो को अपने बेटे के लंड पर रगड़ते हुए कही। शादाब ने अपनी अम्मी की कमर को थाम लिया और उसकी जांघो में लंड घुसाते हुए बोला:”

” कहां अम्मी, अभी तो ठीक से बड़ा भी नहीं हुआ हूं, कहां से जवान हो गया !!

शहनाज का दिल धाड धाड़ करने और वो अपने बेटे के पैरो पर खड़ी हो गई तो लंड सीधा चूत पर रगड़ खाने लगा और वो अपनी चूत लंड पर दबाते हुए बोली:”

” इतना बड़ा तो हो गया है तू, लड़कियां तो डर ही जाएगी तुझसे, तेरी शादी कैसे करूंगी !!

शादाब ने अपनी अम्मी की ड्रेस के अंदर एक हाथ डाल दिया और उसकी नंगी कमर सहलाते हुए बोला:”

” अम्मी मुझे नहीं करनी शादी किसी लड़की से, मैं तो आपका दीवाना हूं बस !

शहनाज़ की धड़कने तेज हो गई और मुंह शर्म से लाल होकर नीचे हो गया। शहनाज उससे अपना हाथ छुड़ाते हुए बोली:”

” कुछ भी बोल देता हैं, आया कहीं से दीवाना, चल नीचे चलते हैं रात बहुत हो गई है।

शहनाज़ अपने बेटे से अलग हो गई और उसका हाथ पकड़ कर नीचे की तरफ चल पड़ी। शादाब भी अपनी अम्मी के पीछे पीछे अा गया और दोनों अपने कमरे में पहुंच गए। शादाब कमरे में आकर हैरान हो गया क्योंकि शहनाज़ ने पूरे बेड पर ग्रीटिंग्स फैला रखे थे जो वो अपने बेटे के जन्म दिन पर हर बार खुद अपने हाथ से बनाती थी लेकिन उसे हॉस्टल ना भेजकर अपने पास रख लेती थी।

शादाब ये सब देख कर खुशी से उछल पड़ा। उसे यकीन नहीं हो पा रहा था कमी उसकी अम्मी उससे इतना प्यार करती हैं जबकि शहनाज़ अपने बेटे को खुश देख कर स्माइल कर रही थी। शादाब ने आगे बढ़कर अपनी अम्मी को एक बार फिर से गले लगा लिया और बोला:”

” ओह अम्मी, आप तो मुझसे इतना प्यार करती हैं आज पता चला मुझे। सच में आप बहुत अच्छी हैं ।

इतना कहकर शादाब ने शहनाज़ का गाल चूम लिया तो शहनाज़ उसकी आंखो में देखते हुए बोली:

” बेटा मैं दुनिया में सबसे ज्यादा बस तुझे ही तो प्यार करती हूं। अच्छा चल अब सो जाते हैं रात बहुत हो गई है।

शादाब:” ठीक है अम्मी, क्या एक गुड नाईट किस मिलेगी ?

शहनाज़ ने अपने बेटे की बात सुनकर उसका गाल चूम लिया और बोली:” बस खुश ?

शादाब: क्या अम्मी आप भी, गाल पर किस तो बच्चो को दी जाती है, मैं तो अब बड़ा हो गया हूं ना अम्मी।

शहनाज़ तिरछी नजर से उसकी पैंट के उभार को देखते हुए:”

हान मुझे पता चल गया है कि तू सच में ना सिर्फ बड़ा बल्कि बहुत ज्यादा बड़ा हो गया है।

शादाब शहनाज़ के नंगे कंधे पर हाथ फेरते हुए:”

“अम्मी आपको अभी सही से अंदाजा नहीं हैं कि मैं सचमुच कितना ज्यादा बड़ा हो गया हूं।

शहनाज़ सोचने लगी कि कमीना कहीं का, अब इसे कैसे बतायू कि इसकी मा इसका पूरा मूसल देख चुकी है, हाथो में थाम चुकी है।

शादाब शहनाज़ के रसीले होंठों को घूरते हुए कहा:”

अम्मी दे दो ना प्लीज़ गुड नाईट किस मुझे?.

शहनाज़ :” बेटा तुझे कैसे समझाऊं कि बेटे को वहां किस नहीं दी जाती!!

शादाब:” अम्मी अभी छत पर तो दी थी आपने मुझे ! अब क्या हो गया इतनी जल्दी ?

शहनाज़ शर्मा गई और बोली:”

” बेटा मैं वो बहक गई थी, जब तूने गिफ्ट मांगा तो मेरे पास देने के लिए उस समय कुछ नहीं था।

शादाब ने अपनी अम्मी को खींच कर खुद से चिपका लिया और उसकी आंखो में देखते हुए कहा:

” अम्मी एक बार फिर से बहक जाओ ना, वैसे मै आपका दोस्त भी हूं, दोस्त समझ कर ही कर दो

शहनाज़ ने अपने बेटे की गर्दन में हाथ डाल कर उसे अपनी तरफ खींच लिया और दोनो के होंठ बिल्कुल करीब अा गए। शहनाज़ उसके कान में बुदबुदाई:”

” ले चूस ले अपनी अम्मी के होंठ मेरे राजा, फिर बाद में मत बोलना

इतना कहकर शहनाज़ ने अपनी होंठो पर जीभ फेरकर उन्हें पूरी तरह से चिकना और रसीला बना दिया। शादाब से अब बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने आगे बढ़ कर शहनाज़ के होंठो पर अपने होंठ चिपका दिए। एक बार फिर से शहनाज़ का रोम रोम सुलग उठा और उसके होंठ अपने आप खुल गए। शादाब कभी उपर वाले होंठ को चूस रहा था तो कभी नीचे वाले को। शहनाज़ ने भी शादाब के होंठो पर हमला कर दिया और दोनो पूरी तरह से मस्त होकर एक दूसरे का रस चूसने लगे। दोनो की जब सांसे उखड़ने लगी तो उनके होंठ अलग हो गए।

शहनाज़:’ बस अब खुश राजा ?

शादाब अपनी जीभ से अपने होंठ चाट कर बोला:”

” जाने ये कैसा रस हैं आपके होंठो में कि जितना चूसो और ज्यादा चूसने का मन करता है, एक बार फिर से हो जाए!!

शहनाज़:” चल जा अपना काम कर अब, जा ड्रेस बदल कर अा जा,फिर सोना हैं।

अपनी अम्मी की बात सुनकर शादाब अपने रूम में चला गया और कपडे बदलने लगा। जबकि शहनाज़ ने भी वो ब्लैक ड्रेस उतार कर अपनी नाइटी पहन ली और बिस्तर में घुस गई। शादाब आया और नाईट बल्ब जला कर अपनी अम्मी के बेड पर चढ़ गया और उसे अपनी बांहों में कस कर पकड़ लिया। दोनो मा बेटे एक दूसरे से लिपट कर सो गए।

रात को पेशाब के दबाव के कारण शादाब की आंख खुल गई तो उसने अपने आपको कल की तरह अपनी अम्मी की बांहों में ही लिपटे हुए पाया। शादाब का लंड पूरी तरह से अकड़ा हुआ था और शहनाज़ की नाइटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर लगा हुआ था। शादाब की आंखे लाल हो उठी। उसने एक बार अपनी अम्मी की तरफ देखा देखा तो वो गहरी नींद में सोई हुई थी। शादाब ने उसका माथा चूम लिया और जैसे ही उठने लगा तो उसकी नजर शहनाज़ की टांगो के बीच चली गई। उसकी दिल धड़कने लगा और सांसे भारी हो गई, नाइटी बिल्कुल बारीक कपडे की बनी हुई थी और नीचे पेंटी ना होने के कारण चूत का उभार साफ़ नजर आ रहा था। शादाब थोड़ा आगे बढ़ा और उसकी टांगो के बीच में अा गया और अपलक उसकी चूत निहारने लगा। चूत पूरी तरह से तो साफ नहीं दिख रही थी लेकिन उसका आकार साफ नजर आ रहा था। शादाब का लंड झटके पर झटके मार रहा था और उसने जोश में आकर अपनी अम्मी की नाइटी को पकड़ लिया और बस उठाने ही वाला था कि उसके दिल में विचार आया कि ये गलत हैं। एक तो मेरी सगी अम्मी, उपर से बिना उनकी मर्जी के ये सब गलत हैं। अगर उन्हें पता चल गया तो उन्हें बहुत बुरा लगेगा और मेरे बारे में क्या सोचेगी।

सब बाते मन में आते ही शादाब ने नाइटी को ढीला छोड़ दिया और बाथरूम की तरफ चला गया। वापिस आकर वो फिर से अपनी अम्मी को बांहों में भर कर सो गया। शहनाज़ ने नींद में ही उसे अपने गले से चिपका लिया और उसका मुंह चूम लिया। ।

सुबह दोनो मा बेटे एक साथ ही उठ गए। शादाब रोज की तरह कसरत लगने लगा तो शहनाज़ के पास आज कोई काम नहीं था इसलिए उसके पास ही बैठ गई। शहनाज़ ने अभी तक नाइटी नहीं उतारी थी, अभी बाहर हल्का हल्का अंधेरा था इसलिए उसे इसका एहसास नहीं था। शादाब को पसीना अा गया था लेकिन फिर भी लगा हुआ था। उसके जिस्म का एक एक कटाव साफ नजर आ रहा था, पसीने से भीग चुकी चौड़ी छाती बेहद उत्तेजक लग रही थी और शहनाज़ की नजरे वहीं पर जमी हुई और।

शहनाज़:” बेटा कितनी मेहनत करते हो! क्या शानदार और ठोस जिस्म बना लिया है।

शादाब अपनी अम्मी के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गया और बोला:”

” अम्मी मजबूत जिस्म का होना आजकल बहुत जरूरी है, अम्मी क्या आप नहीं चाहती कि आपका बेटा ताकतवर बने !

शहनाज़; ” मुझे तो बहुत खुशी होती हैं तुझे देखकर राजा, सच में पूरा घोड़ा बन गया है तू।

शादाब:” अम्मी क्या आपको अपने बेटे का जिस्म अच्छा लगता है ?

शादाब ने शहनाज़ की दुखती रग पर हाथ रख दिया तो शहनाज़ उदास होकर बोली:”

” हान बेटा बहुत अच्छा लगता हैं मुझे ऐसा ठोस और मजबूत जिस्म,

शादाब अपनी अम्मी की उदासी समझ गया और बोला:”

” अम्मी इतना ज्यादा ठोस भी नहीं हैं जितना आप समझ रही है, यकीन ना हो तो दबा कर देखो

शादाब ने अपनी अम्मी को खुला अवसर दे दिया जो शहनाज़ ने खुशी खुशी कुबूल कर लिया और उसने आगे बढ़ कर अपने दोनो हाथ शादाब की छाती पर रख दिए और उसकी चौड़ी छाती सहलाने लगी। हल्का हल्का दबा दबा कर देखने लगी और जब नहीं दबी तो थोड़े टाइट हाथ से दबाने लगी। शादाब पूरी तरह से मस्त हो गया था क्योंकि आज पहली बार किसी ने उसकी छाती को सहलाया था।

शहनाज़:” झूठा कहीं का, तू तो पूरा लोहे का बन गया है मेरे राजा, मुझे भी थोड़ा कसरत सीखा दे ना!

शादाब:” अम्मी आपका फूलो से नाजुक बदन ये सब नहीं झेल पाएगा, आप रहने दो।

शहनाज़ के स्वाभिमान को ठेस लगी और वो बोली:”..

” अब तो मुझे जरूर सीखनी है मेरे राजा, ताकि मैं तुझे दिखा सकू कि मेरा बदन इतना भी नाजुक नहीं है जितना तू समझ रहा हैं।

शादाब:” ठीक हैं अम्मी फिर तैयार हो जाओ।

शादाब ने शहनाज़ को अपने बराबर में खड़ा कर लिया और दोनों पैरो से अपने पैरो को झुक कर छूने लगा तो शहनाज भी अपने पैरो को झुक कर छूने लगीं जिससे उसकी गांड़ पूरी तरह से उभर कर सामने अा गई। शादाब ने अपनी अम्मी को ऐसे ही खड़े रहने के लिए कहा और खुद उसके पीछे पहुंच गया। पतली सी ड्रेस में शहनाज़ की गांड़ पूरी तरह से कसी हुई साफ नजर आ रही थी और शहनाज़ की चूत भी बिना पेंटी के साफ दिख रही थी।

चूत पर नजर पड़ते ही शादाब की आंखे फिर से चमक उठी और वो अपनी अम्मी के थोड़ा और करीब आते हुए उसकी टांगो के बीच में झांकने लगा। शहनाज़ को अपने पैरो के बीच से जैसे ही अपनी हालात का एहसास हुआ तो शर्म के मारे वो उसकी टांगे अपने आप बंद हो गई और वो आगे को लुढ़क गई। शादाब ने उसे अपनी जल्दी से अपनी गोद में उठा लिया। शादाब :”.

” क्या हुआ अम्मी, सब ठीक तो हैं ना एकदम ?

शहनाज़ की सांसे उखड़ गई, वो सोचने लगी उफ्फ ये क्या हो गया मुझसे और उसने शर्म से अपना मुंह ढक लिया। शादाब उसे अपनी गोद में उठाए हुए ही अंदर कमरे में चला गया और शहनाज़ उसके सीने से लिपटी रही।।

थोड़ी देर बाद शहनाज़ उठी और घर का काम करने लगी जबकि शादाब नहाने के लिए चला गया। शहनाज़ भी नहाकर नाश्ता बनाने में जुट गई। थोड़ी देर बाद ही दोनो मा बेटे नाश्ता कर रहे थे।

शादाब:” अम्मी बताओ फिर आज कहां घूमने चलना हैं आपको ?

शहनाज़:” जहां तू ले चले मेरे राजा ।

शादाब:” मैं सोच रहा था कि खेत पर चलते हैं, मैं भी अपने खेत देख लूंगा। क्या आपको रास्ता पता हैं?

शहनाज़:” हान बेटा तुम्हे खेत देखन चाहिए। एक बार गई थी मैं जब नए खेत लिए थे तेरे दादा जी ने मेरे नाम से।

शादाब:’ चलो ठीक हैं फिर, मैं गाड़ी निकाल लेता हूं। फिर चलते हैं।

थोड़ी देर बाद शहनाज़ ने सूट सलवार पहन कर बुर्का पहन लिया और दोनो मा बेटे खेत की तरफ चल पड़े। शहनाज़ आज कल से भी ज्यादा खुश नजर आ रही थी। जल्दी ही रास्ता खत्म हो गया तो पगडंडी शुरू हो गई इसलिए उन्हें कार को वहीं छोड़ देना पड़ा और पैदल ही आगे बढ़ गए। थोड़ी दूर जाकर दोनो एक पेड़ के नीचे चादर डालकर बैठ गए। शहनाज पैदल चलने की वजह से पसीने से पूरी तरह भीग चुकी थी। शादाब ने अपनी अम्मी का मुंह रुमाल से साफ करना शुरु कर दिया तो शहनाज़ शर्मा गई क्योंकि उसे डर था कि अगर किसी ने देख लिया तो गजब हो जाएगा।

शहनाज़:” बस कर बेटा, अच्छा बैग निकाल मेरा तो गला सूख गया है प्यास से।

शादाब ने अपने बैग से पानी की बोतल निकाल कर उसकी तरफ बढ़ा दी और शहनाज़ पानी गटागट पीती चली गई। शादाब को भूख लगी थी इसलिए बैग से सामान निकालने लगा तो स्ट्राबेरी का पैकेट भी निकाल लिया।

शादाब ने जैसे ही पैकेट से बेरी निकाली तो उसका आकार देख कर दंग रह गया। दो बेरी एक साथ जुड़ गई थी और बीच में से हल्की सी खुल गई बिल्कुल चूत की तरह।

शहनाज़ की नजर जैसे ही उस पर पड़ी तो उसे शर्म महसूस हुई और उसे एहसास हो गया कि ये तो उसकी चूत जैसी लग रही है। शहनाज़ ने अपनी चूत को देखा नहीं था लेकिन हाथ से पकड़ कर सहलाया जरूर था इसलिए वो समझ गई।

शादाब शहनाज़ को छेड़ते हुए:”

” अम्मी देखो ना ये बेरी कितनी प्यारी और सुन्दर लग रही है,

शादाब ने अपनी अम्मी की टांगो के बीच देखते हुए कहा लेकिन वहां उसे कुछ नजर नहीं आ रहा था।

शहनाज़ बुरी तरह से कांप उठी क्योंकि उसे लग रहा था शादाब उसकी चूत की बात कर रहा है।
उसकी सांसे तेज होने लगी और चूचियां उपर नीचे होना शुरू हो गई। शहनाज़ मुंह नीचे किए हुए ही बोली:”

” बेटा ये तो एक बेरी हैं जैसे दूसरी होती हैं, इसमें अलग क्या हैं ?

शादाब अपनी अम्मी के चेहरे को हाथ से पकड़ कर ऊपर उठाया और बोला:”

” अम्मी प्लीज़ एक बार पहले देखो तो ध्यान से इसे !

शहनाज़ ने बड़ी मुश्किल से अपनी आंखे खोली और अपने बेटे के हाथ में बेरी को देखा तो फिर से शर्म से उसका मुंह लाल हो गया और आपके झुक गई। शादाब आगे बढ़ा और बेरी को उसके होंठो पर फिराने लगा तो शहनाज़ ने बड़ी मुश्किल से कहा:”

” बेशर्म कहीं का, मत कर राजा ये सब, उफ्फ मान जा ना मेरे राजा।

शादाब: अम्मी आपको तो बेरी बहुत पसंद हैं ना इसलिए आपका बेटा आपको खिला रहा हैं।

इतना कहकर शादाब ने अपने हाथ से अपनी अम्मी का मुंह खोला और जैसे ही बेरी उसके होंठो से टच हुई तो शहनाज़ कांप उठी और वो पीछे को गिर पड़ी। शादाब भी अपनी अम्मी के लंबे चौड़े जिस्म पर ही गिर पड़ा और उसका एक हाथ शहनाज़ की जांघ पर टिक गया। शादाब बोला :”

” अम्मी प्लीज़ मुंह खोलो ना अपना, जिद मत करो!

शहनाज़:” तुझे मेरी कसम बेटा, मान जा, मुझसे नहीं खाई जाएगी ये मेरे राजा। फेंक दे इसे

और इतना कहकर उसने अपनी आंखें बंद कर ली। शहनाज़ का पूरा जिस्म मस्ती से भर चुका था और शादाब ने अब अपनी अम्मी की जांघ को सहलाना शुरू कर दिया दिया शहनाज़ के जिस्म में तरंगे उठने लगी थी।

शादाब:” नहीं अम्मी फेकुंगा नहीं, आप मत खाइए लेकिन आपको मेरी आंखो में आंखे डाल कर अपने हाथ से ये मुझे खिलानी पड़ेगी, बोलो मंजूर ?

शहनाज़ की तो जैसे बोलती बंद हो गई। उफ्फ ये कमीना चाह रहा है कि मैं खुद अपनी चूत जैसी बेरी इसे खिलाऊ , मुझसे ना हो पाएगा, उफ्फ लेकिन ये मेरा पीछा नहीं छोड़ेगा ऐसे तो।

शादाब के हाथ अब थोड़ी अंदर तक शहनाज़ की जांघ सहला रहे थे जिससे शहनाज़ मस्ती से मचल रही थी। उसने कहा:”

” बेटा अपने हाथ से खिला दूंगी लेकिन आंखे नीचे रखूंगी अपनी।

शादाब आखिरकार मान गया क्योंकि वो जानता था कि उसकी अम्मी बहुत ज्यादा शर्मीली हैं, इसलिए उसे धीरे धीरे खोलना होगा। शादाब ने बेरी को शहनाज़ के हाथ में पकडा दिया और खुद उसके हाथ से सामने अपना मुंह कर दिया। शहनाज़ ने आंखे बंद किए हुए ही बेरी को आगे बढ़ाया और जैसे ही वो शादाब के होंठो से टच हुई तो शहनाज़ के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी जिससे बेरी उसके हाथ से छूट कर उसके पेट से होती हुई जांघो के बीच में गिर पड़ी।

शहनाज़ के होंठ कांप रहे थे और मस्ती से खुल बंद हो रहे थे। शादाब एक हाथ की उंगली को उसके होंठो पर फिराने लगा और बोला:”
” क्या अम्मी, एक बेरी नहीं संभाल पाई आप,

शहनाज़ अपने बेटे की उंगलियों की रगड़ से मस्ती से भरी हुई थी इसलिए बोली:”
” बेटा इस बार नहीं गिरेगी, बस इस बार खिला दूंगी

शादाब अपनी अम्मी के होंठो पर अपनी गर्म सांस छोड़ते हुए बोला:”

” खिला तो आप देंगी ही, लेकिन जो गलती हुई है उसकी सजा भी तो मिलनी चाहिए !

शहनाज़मस्ती में डूबी हुई बंद आंखो के साथ ही बोली:”

“उफ्फ अब क्या सजा देगा तू अपनी अम्मी को मेरे राजा? सोच लेना कि कितनी नाजुक हैं तेरी अम्मी!

शादाब उसके गाल को चूम कर बोला:”

” ओह अम्मी मैं जानता हूं इसलिए मजेदार सजा होगी जब तक बेरी नहीं मिल जाएगी मैं आपके होंठ चूसता रहूंगा,

शहनाज़ ने कोई जवाब नहीं दिया और उसके होंठ थोड़ा सा ऊपर की तरफ उभर गए तो शादाब ने अपनी अम्मी का इशारा समझते हुए उसके होंठो को चूसना शुरू कर दिया। शहनाज़ भी पूरी तरह से मदहोश हो गई और उसकी गर्दन में हाथ डाल कर किस करने लगी। शहनाज़ और शादाब दोनो का एक एक हाथ नीचे की तरफ आ गया ताकि बेरी ढूंढ़ सके। बेरी ठीक शहनाज़ की चूत के सामने पड़ी हुई थी, जैसे ही शादाब का हाथ नीचे की तरफ आया तो उसने शहनाज़ की चूत को बेरी समझ कर पकड़ लिया जिससे शहनाज़ के मुंह से एक आह निकल पड़ी और उसका मुंह खुलते ही शादाब की जीभ अंदर घुस गई। शहनाज़ का जिस्म मस्ती से पूरी तरह से हिलने लगा और अपनी टांगे इधर उधर करने लगी। शादाब ने जैसे ही चूत को हल्का सा दबाया तो शहनाज़ ने अपनी पूरी ताकत लगाकर उससे अपने होंठ आजाद किए और तड़पते हुए बोली:”

” उफ्फ बेटा छोड़ दे उसे वो बेरी नहीं है, मर जाऊंगी नहीं तो आज मैं!! उफ्फ मत कर मेरे राजा

शादाब ने उसकी चूत को पूरी तरह से मुट्ठी में भर लिया और बोला;” आह ऐसे कैसे छोड़ तू अम्मी , इतना ढूंढने के बाद तो मिली है मुझे। ये तो बेरी ही हैं।

शहनाज़ ने उसके हाथ को पकड़ लिया और बोली:” उफ्फ बेटा ये बेरी नहीं है मेरे राजा!! मान जा उफ्फ मत कर

शादाब ने उसकी चूत को अच्छे से उंगली फेर कर महसूस किया और बोला:”
” उफ्फ अम्मी, ये तो बिल्कुल वहीं बेरी हैं, बस चिकनी हो गई है पहले से ज्यादा, शायद दबने से रस निकल रहा है इसका।

शहनाज़ पूरी तरह से तड़प रही थी और समझ गई कि उसका बेटा पूरी तरह से जोश में हैं इसलिए उसने खुद ही बेरी ढूंढने का प्लान किया। तभी शादाब की उंगली शहनाज़ के चूत के छेद से टकरा गई तो उसकी पूरी उंगली रस से भीग गई।

शादाब:” उफ्फ अम्मी, देखो ना कितना रस भरा हुआ है इस बेरी के अंदर, उफ्फ उसका तो मुंह में सारा रस चूस जाऊंगा जीभ से।

शहनाज़ का जिस्म झटके पर झटके खा रहा था और उसकी चूत पूरी तरह से गीली होकर अपना रस बहा रही थी। तभी शादाब ने चूत के छेद को हल्का सा सहला दिया तो शहनाज़ सिसक उठी और बोली;”

” आह नहीं मेरे राजा, उफ्फ मान जा शैतान वो बेरी नहीं है मेरे लाल, छोड़ दे उसे।

शादाब चूत के छेद पर अपनी एक मोटी उंगली को उपर से नीचे तक रगड़ते हुए बोला:”

” आह मेरी नाज़, देख ना इसमें तो छेद भी है, उफ्फ बिल्कुल वहीं बेरी हैं, छेद तो बहुत टाइट हैं एक दम कसा हुआ मानो बंद हो!!

शादाब ने ऐसा कहकर चूत के छेद पर उंगली का दबाव बढ़ा दिया तो शहनाज़ की चूत की दीवारें खुलने लगी और शहनाज़ को दर्द का एहसास होने लगा। तभी शहनाज़ के हाथ में बेरी लग गई लेकिन तब तक शादाब का सब्र जवाब दे गया और उसने एक तेज झटके के साथ एक इंच उंगली शहनाज़ की चूत में घुसा दी और शहनाज़ का जिस्म दर्द से भर उठा और उसकी सिसकी निकल पड़ी और उसने कराहते हुए अपनी जांघो को भींच लिया।

” आह नहीं, उफ्फ मा री, आह्हह मार डाला मेरे राजा, अहह ओएचएच उफ्फ एसआईआई

और इसके साथ ही शहनाज़ की चूत ने अपना रस बहा दिया और वो झटके पर झटके खाने लगी। शादाब भी चूत के इस पहले एहसास से तड़प उठा ऐसा लग रहा था मानो चूत ने उसकी उंगली को कस लिया हैं और उसके लंड ने वीर्य की पिचकारी मारनी शुरू कर दी। शहनाज का हाथ अपने आप बेरी लिए उपर उठ गया और जैसे ही वीर्य की पिचकारी बंद हुई तो उसकी आंखे खुल गई और उसे अपनी अपनी आंखो के आगे बेरी नजर आईं तो उसकी आंखे हैरानी से फैल गई । डर और शर्म के मारे चूत में घुसी उसकी उंगली अपने आप बाहर निकल गई और वो शहनाज़ की आंखो में देखते हुए एकदम भोली सूरत बनाकर बोला:”

” उफ्फ अगर ये बेरी हैं तो वो क्या हैं अम्मी जहां उंगली घुस गई थी!!

शहनाज़ अपने बेटे की इस अदा पर निहाल हो गई और उसके होंठ चूमते हुए बोली;”

” चुप कर बेशर्म कहीं का, जो मन में आए बोलता रहता हैं। सुधर जा अब तू।

शादाब अपनी रस से भीगी हुई उंगली को अपने मुंह के पास लाया और शहनाज़ को दिखाते हुए बोला

” उफ्फ अम्मी देखो ना कितनी रसभरी बेरी थी पूरी उंगली भीग गई है , आपको तो बेरी बहुत अच्छी लगती है एक बात टेस्ट करके देखो ना !!.

शहनाज का मन किया कि वो उठ कर भाग जाए लेकिन शादाब के नीचे दबी हुई थी । उसने एक बुरा सा मुंह बनाया मानो उसे कड़वी दवा खाने के लिए मजबूर किया जा रहा हो। उसके पास बोलने के लिए शब्द तो थे लेकिन डर और शर्म के मारे उसकी जुबान नहीं उठ पाई तो उसने शादाब की तरफ आंखे निकालते हुए उनके कान पकड़ कर खींच दिए। शादाब हल्के दर्द से कराह उठा और बोला:”

” आह अम्मी नहीं, उफ्फ दुखता हैं छोड़ दो मेरा कान, आपको नहीं चूसना तो मत चुसिए, मैं खुद ही चूस लेता हूं।

इतना कहकर शादाब ने अपने मुंह खोलते हुए जैसे ही उंगली अंदर डाली तो शहनाज़ ने मारे शर्म के अपना एक हाथ अपनी आंखो पर रख लिया और दूसरे को उसकी कमर पर मारते हुए बोली:”

” छी उफ्फ गंदा कहीं का, कितना बिगड़ गया हैं तू, क्या करू तेरा मैं!!

शादाब मस्ती से उंगली को चूसने लगा और सारा रस चूस कर उंगली को पूरी तरह से साफ कर दिया और बोला:”

” उफ्फ कितनी टेस्टी बेरी थी, मजा आ गया अम्मी , ऐसा टेस्ट मैंने आज तक महसूस नहीं किया।

शहनाज़:” बदतमीज कहीं का ,

इतना कहकर शहनाज़ ने उसकी गर्दन में अपनी बांहे लपेट कर उसे अपने सीने से चिपका लिया तो शादाब भी डर और शर्म के मारे शादाब शहनाज़ के जिस्म पर गिर पड़ा।

शादाब ऐसे ही अपनी अम्मी शहनाज़ के उपर पड़ा रहा तभी उन्हें किसी के आने की आहट सुनाई दी तो जैसे दोनो नींद से जागे और शादाब एक दम सही होकर बैठ गया। एक आदमी उसी रास्ते पर अा रहा था जो शायद किसी दूसरे गांव का था और रास्ता भटक गया था।

आदमी:” बेटा मुझे तिनकपुर गांव जाना था क्या ये रास्ता उधर ही जाता हैं ? थोड़ा पानी मिलेगा क्या पीने के लिए?

शादाब:” हान बाबा आप आगे जाकर दाईं तरफ मुड़ जाना तो आप पहुंच जाओगे।

आदमी:’ ठीक है बेटा , अल्लाह तुम्हे सलामत रखें।

शादाब ने पानी की बोतल उसे दी तो वो गटागट सारा पानी पी गया और फिर वो आदमी चला गया तो शादाब बोला:” अम्मी अभी कितने दूर हैं हमारे खेत ?

शहनाज़ :” बेटा बस थोड़ी दूर और जाना पड़ेगा फिर हमारी जमीन शुरू हो जाएगी।

इतना कहकर शहनाज़ भी खड़ी हो गई और शादाब उसके पीछे पीछे चल दिया। थोड़ी देर बाद ही दोनो एक बड़े रास्ते पर अा गए और वहीं से उनके खेत शुरू हो गए। शहनाज़ बोली:”

” बस बेटा ये सब खेत अपने ही हैं, सारी जमीन तेरे दादा जी के नाम पर हैं बस कुछ खेत अभी मेरे नाम पर भी कर दिए थे।

शादाब अपनी जमीन देख कर बहुत खुश हुआ और फसल से लहलाते हुए खेत उसने बहुत दिनों के बाद देखे थे इसलिए उसकी खुशी की कोई सीमा नहीं थी। अपनी जमीन की मिट्टी की खुशबू अलग ही होती हैं जो आज उसे समझ अा रही थी। खेतों के बीच में एक ट्यूबवेल लगा हुआ था जहां से सारे खेत में पानी दिया जाता था। खेतों के दूसरी तरफ लकड़ियों का एक ऊंचा मचान बना हुआ था जहां से मजदूर खेत की जानवरो के रक्षा करते थे।।

शादाब ने चाबी से ट्यूबवेल खोली और अंदर कमरे में घुस गया तो गर्मी से हांफती हुई शहनाज़ भी अंदर दाखिल हो गई। दोनो का पसीने से बुरा हाल था इसलिए शादाब वहां लगा हुए पंखा चलाने लगा लेकिन काफी दिन से इस्तेमाल ना होने की वजह से वो खराब हो गया था। दोनो गर्मी से बहुत ज्यादा परेशान थे इसलिए शादाब ने उपर मचान पर चढ़ने। का सोचा ताकि उपर होने की वजह से थोड़ी ज्यादा हवा लग सके।

शादाब:” अम्मी गर्मी से बुरा हाल हैं, उपर मचान पर थोड़ी हवा लगा जाएगी। चलो उपर चलते हैं

शहनाज को अपने बेटे की बात ठीक लगी इसलिए वो उसके साथ चल दी।

शादाब:” अम्मी पहले आप चढ़ जाओ, मैं बाद में आऊंगा।

शहनाज़ चढ़ने लगी लेकिन पहली लड़की थोड़ी ज्यादा उपर थी इसलिए उसके हाथ में नहीं अा रही थी तो उसने उम्मीद से अपने बेटे की तरफ देखा तो शादाब ने अपनी अम्मी को अपनी गोद में उठा लिया और उपर की तरफ कर दिया तो शहनाज़ आराम से उपर चढ़ गई।

शहनाज़:” बेटा तू पानी भी लेते आना, प्यास लग गई हैं फिर से गर्मी बहुत हैं।

शादाब वापिस ट्यूबवेल की तरफ आया और पानी की बोतल देखी जी कि गलती से उल्टी डल गई थी इसलिए खाली हो गई थी।

शादाब:”अम्मी बॉटल खाली हैं, सामने एक नल लगा हुआ हैं मैं भर कर ले आता हूं।

शहनाज़:” तुम रहने दो बेटा, ऐसे ही अा जाओ, वो दूर हैं बहुत तुम्हे घूम कर जाना पड़ेगा।

शादाब:” कोई बात नहीं अम्मी मैं चला जाऊंगा, मेरी मा अपने दोस्त के होते हुए प्यासी रहे ऐसा नहीं हो सकता।

इतना कहकर शादाब बॉटल लेकर नल की तरफ चल पड़ा। जितनी पास नल उसे लग रहा था वो सच में उससे कहीं ज्यादा दूर था, उपर से तेज गर्मी शादाब का पूरा जिस्म पसीने से भीग गया लेकिन वो चलता रहा।

दूसरी तरफ शहनाज़ को अब लग रहा था कि उसने अपने बेटे को गलत बोल दिया पानी के लिए। उपर सचमुच बड़ी अच्छी ठंडी हवा लग रही थी जिससे जल्दी ही शहनाज़ का पूरा पसीना सूख गया और उसे अब ठंडी हवा काफी सुकून दे रही थी। वो सोचने लगी कि उसका बेटा सच में उसका बहुत ध्यान रखता हैं, इतनी भयंकर धूप में भी पानी लेने चला गया। तभी उसके होंठो पर मुस्कान अा गई और सोचने लगी कि बड़ा शैतान भी तो हो गया हैं। कमीने ने बेरी समझ कर मेरी चूत को ही पकड़ लिया था,( चूत शब्द दिमाग में आते ही शाहनाज शर्मा गई) उफ्फ मेरी तो हालत ही खराब हो गई थी, लेकिन बेरी भी तो एक दम चूत जैसी ही थी, नीचे भी तो बिल्कुल ऐसा ही छेद था जैसे चूत में होता हैं। उफ्फ शादाब ने तो अपनी मा की चूत को ही बेरी समझ कर उसमे उंगली डालनी शुरू कर दी थी। शहनाज़ की आंखो के आगे वो दृश्य तैर गया जब शादाब उसकी चूत के छेद पर अपनी उंगली रगड़ रहा था। उसकी मस्ती से आंखे बंद हो गई और उसने सोचा कि मेरे बेटे ने तो हल्की सी उंगली घुसा ही दी थी। उफ्फ कितना दर्द हुआ था मुझे हाय लेकिन उससे बहुत ज्यादा अच्छा लगा था। अगर बेरी सही टाइम पर ना मिलती तो वो तो पूरी उंगली घुसा देता। उफ्फ अगर पूरी घुस जाती तो क्या होता !

ये सोचकर शहनाज़ की चूत एक बार फिर से भीगने लगी। ये कमीनी मेरी चूत भी आजकल कितना गीली होने लगी हैं। पिछले 18 साल से तो एकदम सूखी पड़ी हुई थी लेकिन जब से मेरा बेटा शादाब आया था ये नदियां बहा रही है। क्या ये उसके लिए तड़प रही हैं, उफ्फ उसकी एक इंच की उंगली घुसते ही मेरी हालत खराब ही गई उसका लंड…

नहीं ये सब गलत हैं, मुझे ऐसा नहीं सोचना चाहिए वो मेरा सगा बेटा हैं। उफ्फ मेरा बेटा भी तो एक दम मेरे सपनों के राजकुमार जैसा ही है क्या करू कैसे रोकु खुद को, कहीं ऐसा ना हो कि रेशमा उसे बिगाड़ ही दे। और वो कमीनी औरतें भी तो उसका नंबर लेकर गई हैं ! क्या करू ??

आखिरकार शहनाज़ ने बहुत देर तक सोचने के बाद फैसला किया कि उसे अपने बेटे को अगर इन सबसे बचाना हैं तो उसे अपनी ओर आकर्षित करना ही होगा। शहनाज़ अपने ख्यालों में डूबी हुई थी कि उसे शादाब आता हुआ दिखाई दिया। पसीने से पूरी तरह भीगा हुआ, चेहरा पूरी तरह से तपकर लाल हो गया था। उसे अपने बेटे पर बहुत प्यार अा रहा था जैसे जैसे शादाब पास आता जा रहा था शहनाज़ को अच्छा लग रहा था। तभी शादाब मचान के नीचे अा गया था।

शहनाज़:” उफ्फ बेटा कितना भीग गया हैं तू पसीने से, जल्दी उपर अा जा।

शादाब पानी की बोतल लेकर उपर चढ़ गया। शहनाज़ ने उसे गौर से देखा तो उसका चेहरा एक दम धूप से लाल हो गया था और जिस्म पसीने से इतनी बुरी तरह से भीगा हुआ था मानो नहाकर आया हो।

शहनाज़:” उफ्फ मेरे राजा तेरा क्या हाल हो गया गर्मी में, मुझे पहले पता होता तो तुझे बिल्कुल नहीं भेजती ।

इतना कहकर शहनाज़ अपने सूती दुपट्टे से अपने बेटे का चेहरा साफ करने लगी। उसने सब पसीना साफ कर दिया और अपने बेटे के माथे को चूम लिया।

शादाब:” अम्मी आप प्यासी थी इसलिए मेरा फर्ज़ बनता था कि आपकी प्यास बुझाऊं, पानी क्या मैं तो आपके लिए अपनी जान भी दे सकता हूं।

शहनाज:” बस बेटा बस, मुझे तुझ पर पूरा यकीन हैं मेरे राजा।

धीरे धीरे ठंडी हवा से शादाब का पसीना सूखने लगा तो शहनाज़ ने भी अब राहत की सांस ली। जैसे ही गर्मी कम हुई तो शादाब को शरारत सूझी और बोला:”

” अम्मी एक फिल्म में मैंने देखा था कि हीरोइन ऐसे ही हीरो का पसीना साफ कर रही थी अपने दुपट्टे से।

शहनाज़ उसकी बात पर शर्मा गई और बोली:” बड़ा शैतान हो गया हैं तू बड़ी बड़ी बाते करता है।

शादाब अपनी अम्मी का हाथ पकड़ कर बोला:’

” अम्मी देखो ना मैं तो आपका बिल्कुल छोटा सा राजा बेटा हूं, बस दोस्त समझकर मजाक कर लेता हूं कभी कभी।

शहनाज़ भी अब थोड़ा मस्ती में अा गई और बोली:’

” वैसे बेटा तूने काम तो हीरो वाला ही किया था, इतनी गर्मी में चला गया था मेरे लिए पानी लेने। लेकिन मैं तेरी मा हूं राजा हीरोइन नहीं समझा।

शादाब स्माइल करते हुए:”
” अम्मी सच कहा आपने हीरोइन नहीं हो क्योंकि आप तो एक दम आसमान से उतरी हुई परी हो।
चलो आम्मी आपने कम से कम अपने बेटे को हीरो तो मान लिया!!

शहनाज़ :” बाते बनाना तो कोई तुमसे सीखे,

शादाब:” अम्मी आपको बता हैं फिल्म में हीरोइन ने क्या किया था जब हेरी उसके लिए पानी लेकर आया था ?

शहनाज़:” अब मुझे कैसे पता चलेगा जब तक तू बताएगा नहीं ?

शादाब:” अम्मी हीरोइन ने उसके होंठ चूम लिए थे खुश होकर !!

शहनाज़ अपने बेटे की चालाकी पर मुस्कुराए बिना ना रह सकी और सोचने लगी कमीना किस के लिए कैसे कैसे बहाने बना रहा हैं।
शहनाज़ उससे बोली:”

” तेरा दिमाग आजकल कुछ ज्यादा ही चलने लगा हैं, चल थोड़ा खाना खा लेते है आजा ।

शादाब ने टिफिन खोल दिया और दोनों मा बेटे के दूसरे को खाना खिलाने लगे।थोड़ी देर बाद ही वो खाना खाकर आराम करने लगे।

शहनाज़:” अच्छा बेटा एक बात तो हैं कि यहां पर हवा बड़ी अच्छी चल रही है ठंडी ठंडी।

शादाब:” हान अम्मी, हवा अच्छी चल रही हैं। वैसे एक बात हैं कि अगर ये जगह शहर में हो तो मजा ही कुछ और हैं ।

शहनाज़ थोड़ा हैरान होते हुए:”

” वो क्यों बेटा ? शहर में क्या अलग हो जाएगा ?

शादाब:” देखो ना अम्मी ये मचान इतना उपर हैं कि दूर दूर से कोई देख नहीं सकता कि उपर क्या हो रहा है, इसलिए आराम से कपल रोमांस कर सकते हैं।

शहनाज़ अपने बेटे की बात सुनकर हल्की सी शर्मा गई और बोली;’
” बेटा ये कपल क्या होता है?

शादाब:” लड़का और लड़की अम्मी, जो आपस में दोस्त होते हैं और प्यार भी करते है।

शहनाज़ को लग रहा था जैसे सामने उसका बेटा नहीं बल्कि उसके सपने का शहजादा बैठा हुआ हैं और ठंडी ठंडी हवा का असर भी हो रहा था। इसीलिए मुंह नीचे किए हुए बोली:”

” बेटा दोस्त तो हम दोनों भी है!!

शादाब झट से बोल पड़ा :’

” हां अम्मी हम एक दूसरे से प्यार भी करते है इसका मतलब हम भी कपल हो गए।

शहनाज़ समझ गई कि उसका बेटा जरूरत से ज्यादा ही समझदार हो गया है। हल्की सी उंगली पकड़ाते ही पूरा हाथ खुद पकड़ लिया। शहनाज उसका हाथ हल्का सा दबाते हुए बोली:”
” लेकिन हम तो मा बेटा भी हैं ना मेरे राजा फिर कपल कैसे हो सकते हैं ?

शादाब को अचानक से उस दिन सिनेमा हॉल में हुआ हादसा याद अा गया और बोला:”

शादाब:” अम्मी उस दिन शहर में वो सेल्स गर्ल्स आपको मेरी मा नहीं बल्कि दोस्त समझ रही थी और ब्यूटी पार्लर वाली ने तो आपको मेरी बीवी ही समझा लिया था।

शहनाज़ भी आग में घी डालते हुए बोली:”

” अरे हां याद हैं ना जब हम मूवी देख रहे थे तो सामने मा बेटा दोनो कपल ही तो थे।

इतना कहते वो अपने बेटे के एक दम पास खिसक गई। शादाब ने उसके दोनो हाथ पकड़ लिए और उसकी आंखो में देखने लगा तो शहनाज़ बोली:”

” बेटा तुझे पक्का यकीन हैं ना कि यहां से कोई हमे देख नहीं पाएगा

शादाब समझ गया कि उसकी अम्मी काफी हद तक रोमांस के लिए तैयार हैं लेकिन डर रही हैं। शादाब बोल:”

” अम्मी मुझे पूरा यकीन है कोई नहीं देख पाएगा, आप घबराए नहीं।

इतना कहकर शादाब ने उसे अपनी तरफ खींच लिया तो शहनाज शर्म से अपनी आंखे किए हुए अपने बेटे की बांहों में अा गई। उसका पूरा जिस्म कांप रहा था। शादाब ने उसे मचान पर पड़ी चादर पर लिटा दिया और खुद उसके बराबर में लेट गया। अब दूर दूर से कोई पूरी कोशिश करके भी उन्हें नहीं देख सकता था। शहनाज़ शादाब की तरफ थोड़ा खिसकते हुए उससे सट गई और बोली:”

” बेटा तू सच में बहुत प्यारा है शादाब, काश तू मेरा बेटा ना होता।

शादाब ने उसके चेहरे को अपने दोनो हाथो में भर लिया और उसकी आंखो में देखते हुए बोला:”
” अगर बेटा ना होता तो क्या अम्मी ? आप भी मुझे बहुत अच्छी लगती है

शहनाज़ उसके गाल पर एक उंगली घुमाते हुए बोली:’

” उफ्फ कुछ नहीं , मुझे शर्म आती है मेरे राजा, तू समझ जा

इतना कहकर शहनाज़ ने अपना मुंह उसके चौड़े सीने में छुपा लिया और जोर जोर से सांस लेने लगी। शादाब उसकी कमर सहलाते हुए बोला:”

” अम्मी बताओ ना प्लीज़, अगर बेटा ना होता तो क्या होता ?

शहनाज़ उसकी कमर में हल्के हल्के घुसे मारते हुए :”

” जा मुझे नहीं पता, शर्म आती हैं मुझे बहुत, तुझे खुद समझना हैं तो समझ जा नहीं तो रहने दे।

शादाब:” उफ्फ अम्मी, आप पता नहीं इतना क्यों शर्माती हो, आप अपने राजा पर यकीन कर सकती हो आराम से ?

शहनाज़:” नहीं बेटा मुझसे ना हो पाएगा, तुम खुद ही समझ लेना अगर सच में तुम समझदार हो तो

शादाब:” उफ्फ अम्मी ये किस मुश्किल में डाल दिया मुझे आपने ? कुछ समझ नहीं अा रहा है मुझे तो अब।

शहनाज़ उसके पेट में गुलगुली करते हुए :”

“बेटा तुम्हे समझना ही पड़ेगा ये तो खुद ही मेरे राजा। वैसे मुझे कुछ समझ में आ रहा हैं

शादाब:” हान अम्मी बोलो ना प्लीज़ आपको क्या समझ में आ रहा हैं ?

अपने बेटे की बात सुनते ही शहनाज़ ने अपना चेहरा उपर उठाया और अपने होंठ शादाब के होंठो पर टिका दिए। उफ्फ ये पहली बार था जब खुद शहनाज़ ने किस की शुरुआत करी थी। उसने अपने बेटे के नीचे के होंठ को अपने होंठो में भर कर चूसना चालू कर दिया। शादाब भी सब कुछ भूलकर अपनी मा के होंठो पर टूट पड़ा और दोनो मा की मजे से आंखे बंद हो गई और किस में डूब गए। काफी देर के बाद दोनो के होंठ अलग हुए तो दोनो एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्करा दिए और शहनाज़ अपने बेटे से चिपक गई। शादाब ने भी उसे अपनी बाहों में कस लिया तो शहनाज़ को बड़ा सुकून मिला और वो बोली:”

” बेटा कितना सुकून मिल रहा हैं तेरी बांहों में मुझे, सो जाऊं क्या ?

शादाब अपनी अम्मी के बालो में उंगली निकालते हुए:”

” हान अम्मी, आप अपने बेटे की बांहों में पूरी तरह से महफूज हो, आप आराम कर लो।

शहनाज़ पूरी तरह से शादाब की बाहों में सिमट गई और आंखे बंद कर ली। ठंडी ठंडी हवा का असर दोनो मा बेटे पर होने लगा और जल्दी है दोनो की आंख लग गई।
शाम तक दोनो ऐसे ही सोते रहे और दोनो के साथ जाग गए तो शहनाज़ बोली:”

” बेटा सच में बड़ा सुकून मिला तेरी बांहों में मुझे, शाम हो गई हैं चलो घर चले ।

शादाब:” ठीक हैं अम्मी, पहले मैं उतर जाता है फिर आपको उतार लूंगा !

इतना कहकर शादाब नीचे उतर गया और फिर शहनाज धीरे धीरे नीचे उतरने लगी लेकिन उसका हाथ स्लिप हो गया और शादाब के उपर गिर पड़ी लेकिन शादाब ने उसे पूरी तरह से संभाल लिया और शहनाज़ डर के मारे उससे चिपक गई।

शहनाज़:” उफ्फ बेटा, तू कितना अच्छा हैं, हर बार मुझे बचा लेता हैं, सच में एक औरत मर्द के बिना कितनी अधूरी होती हैं।

शादाब:” अम्मी जब तक मैं हूं आपको कुछ नहीं होने दूंगा, आप बेकिफ्र रहे।

उसके बाद दोनो घर की तरफ चल पड़े। थोड़ी दूर पैदल चलने के बाद शहनाज़ के पैर दर्द करने लगे तो वो बोली:”

” बेटा मेरे तो पैर दर्द करने लगे, मुझसे अब नहीं चला जाता।

अपनी अम्मी की बात सुनते ही शादाब ने उसे अपनी गोद में उठा लिया और चलने लगा। शहनाज़ शर्म के मारे नीचे उतरने की कोशिश करने लगीं तो शादाब बोला:”

” अम्मी क्या हुआ क्यों उतर रही हो आप ?

शहनाज़:” बेटा मुझे शर्म आती हैं, किसी ने देख लिया तो क्या कहेगा?

शादाब :” अम्मी मुझे किसी के देखने या नहीं देखने से कोई फर्क नहीं पड़ता, आपका ध्यान रखना मेरे फ़र्ज़ हैं।

शहनाज़ चुप हो गई और अपनी दोनो बांहे उसके गले में लपेट कर उससे चिपक गई। शादाब आगे बढ़ता रहा और शहनाज़ दीवानी की तरह उसका सुंदर मुखड़ा देखती रही। शादाब की छाती से उठती हुई मादक मर्दाना गंध शहनाज़ को महसूस होने लगी और वो पूरी तरह से उसमे खोती चली गई। शहनाज़ की जीभ पता नहीं कैसे अपने आप बाहर निकल गई और उसने शादाब के सीने को चूम लिया तो शादाब के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी जिसे सुनकर शहनाज़ जैसे होश में आई और अपनी गलती पर शर्म से दोहरी हो गई। दोनो गाड़ी तक अा गए थे और शादाब ने गाड़ी घर की तरफ चला दी। आज शहनाज़ पूरी तरह से अपने बेटे पर फिदा हो चली थी जबकि शादाब के मन में बार बार वहीं बात घूम रही थी कि काश तू मेरा बेटा ना होता।

थोड़ी देर बाद वो दोनो घर पहुंच गए और शादाब सब्जी लेने के लिए बाजार चला गया तो वहां उसने एक नया होटल देखा जो गांव में उसने पहली बार देखा था। वहां से उसने अपनी अम्मी की पसंद का खाना पैक कराया और घर की तरफ चल पड़ा।

उसके दिमाग में वहीं दो बाते घूम रही थी कि काश तू मेरा मेरा बेटा ना होता और मर्द के बिना औरत कितनी अधूरी होती हैं। शादाब दूसरी बात तो जल्दी ही समझ गया कि उसकी अम्मी अभी ठीक से जवान होकर पूरी तरह से खिल चुकी हैं इसलिए ज़ाहिर हैं कि उसे मर्द की कमी खलती हैं। लेकिन दादा दादी जी तो कह रहे थे कि शाहनजा ने हमेशा घर की मान मर्यादा का ध्यान रखा और गलत कदम नहीं उठाया फिर अचानक से ये क्यों बोला कि औरत मर्द के बिना अधूरी होती हैं जब मैंने उन्हें अपनी बांहों में थामा था। क्या मेरे उन्हें अपनी थामनें से उन्होंने ऐसा बोला हैं ?

उफ्फ कुछ समय नहीं अा रहा हैं ठीक से लेकिन एक बात तो साफ हैं कि अम्मी प्यार के लिए तड़प रही है। भले ही वो किसी से शर्म के मारे कुछ ना कह पाती हो लेकिन उस रात मैने उन्हें खुद देखा था किस तरह से वो खुद ही अपने आपको मसल रही थी।

शादाब ये सब सोचते हुए घर पहुंच गया और उसने देखा कि उसकी अम्मी बेड पर पड़ी हुई थी और किसी गहरी सोच में थी और खुद से ही बाते कर रही थी। शादाब उसके पास पहुंच गया और उसका गाल चूम लिया। शहनाज़ एक झटके से डरकर खड़ी हो गई लेकिन अपने बेटे को देखते ही उसे मारने लगी।

” शैतान कहीं का, मुझे डरा ही दिया था तूने तो।

शादाब:” अम्मी मैं तो बस मजाक कर रहा था। देखिए मैं आपके लिए क्या लाया हूं ?

शहनाज़ अपनी पसंद का खाना देख कर शादाब से चिपक गई और उसका मुंह चूमते हुए बोली

” बड़ा ध्यान रखता हूं तू अपनी अम्मी का, क्या बात हैं मेरे राजा ?

शादाब भी थोड़ा खुलते हुए:”

” अम्मी अब आप मेरी हीरोइन जो बन गई हैं इसलिए ध्यान भी रखना पड़ेगा और प्यार…

शहनाज़ उसकी तरफ तिरछी नजरों से देखते हुए:’

” बोल बोल ना रुक क्यों गया तू ?

शादाब आगे आकर उसके दोनो हाथ पकड़ते हुए बोला:”

” और प्यार भी करना होगा मुझे अपनी हीरोइन को।

शहनाज़ थोड़ा नाराजगी जाहिर करते हुए अपने हाथ छुड़ाने लगी और बोली:’

” जरा मेरे हाथ छोड़ एक बार फिर तुझे ठीक करती हूं, बड़ा आया मुझे प्यार करने वाला !!

शादाब ने उसके हाथ थोड़ा जोर से पकड़ लिए तो शहनाज़ को दर्द होने लगा और बोली:”

” उफ्फ तोड़ ही देगा क्या मेरे हाथ तो, कितना टाइट पकड़ा हैं बात प्यार करने की करता है और करता ज़ुल्म हैं मुझ पर।

शादाब थोड़ा उसके हाथ ढीला छोड़ते हुए:” उफ्फ करना तो प्यार ही चाहता हूं लेकिन आप तो एकदम जंगली बिल्ली जैसी खतरनाक हो, बचना तो पड़ेगा।

शहनाज़ को हंसी अा गई और फिर अगले ही पल गुस्सा करते हुए बोली:’ तू बहुत ज्यादा बिगड़ गया हैं अपनी मा को जंगली बिल्ली बोलता है, तुझे सबक सिखाना पड़ेगा।

शादाब ने जिस जगह से शहनाज़ के गोरे चिट्टे हाथ पकड़े थे वहां से नीले पड़ गए थे इसलिए शहनाज़ उसे देखते हुए उसके कान में बुदबुदाई:”

” वैसे हैं तो एकदम पूरा सांड तू, देख ना कैसे हाथ नीला कर दिया मेरा। पूरा मर्द बन गया हैं।

शादाब:” उफ्फ अम्मी अभी पुरा कहां बना हूं, क्या मैं सचमुच मर्द बन गया हूं अम्मी ?

शहनाज़ अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करते हुए:”

” और नहीं तो क्या देख ना कैसे जोर से पकड़ हैं? अब तेरी शादी करनी पड़ेगी कोई तगड़ी सी लड़की देख कर ?

शादाब:” अम्मी मुझे नहीं करनी शादी, वैसे तगड़ी सी क्यों कहां आपने ?

शहनाज़ ने शादाब को बातो में लगाकर अपना एक हाथ छुड़ा लिया और उसके कान खींचते हुए बोली:”

” तगड़ी सी इसलिए क्योंकि दुबली पतली सी लड़की को तो तू पीसकर रख देगा।

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनकर खुश हो गया और बोला:”

” क्या सच में अम्मी ?

शहनाज़ अपनी आंखे नाचते हुए:” और नहीं तो क्या ? देखा तूने अपने आपको पता नहीं क्या खाता हैं ?

शादाब :”अम्मी बुरा ना मानो तो एक बात बोलूं ?

शहनाज़:” बोल दे अब जल्दी से जो बोलना है ?

शादाब;” लेकिन अम्मी आजकल के लड़के तो मोटी तगड़ी नहीं बल्कि एक दम आपके जैसी भरी हुई और पतली सी कमर वाली लड़की पसंद करते हैं ।

शहनाज़ उसके तरफ आंखे निकालते हुए :’ चल कमीना कहीं का, शर्म नहीं आती अपनी मा से ऐसी बाते करते हुए तुझे?

शादाब:” अम्मी प्लीज़ बुरा मत मानना, सच तो ये ही हैं !

शहनाज़:” बड़ी बड़ी बाते करने लगा हैं आजकल तू। चल जा जल्दी से हाथ धोकर अा मुझे भूख लगी हैं बहुत।

शादाब हाथ धोने चला गया और शहनाज़ टेबल पर खाना लगते हुए सोचने लगी कि उसका बेटा सचमुच पूरा जवान हो गया हैं और बड़ी बड़ी बाते करने लगा हैं। घुमा फिरा कर बोल रहा था कि आजकल के लड़के मेरी जैसी औरतें पसंद करते हैं, सीधे सीधे नहीं बोल पाया कि अम्मी आप मुझे अच्छी लगती हैं।

ये सब सोचते सोचते शहनाज़ का जिस्म कांप उठा। उफ्फ ये शैतान लड़का भी ना, अपनी ही अम्मी का दीवाना हो गया लगता हैं।

शादाब हाथ धोकर अा गया और दोनो मा बेटे एक साथ खाना खाने लगे। शहनाज़ ने अपने बेटे को खुद अपने हाथ से खाना खिलाया क्योंकि वो जानती थी कि उसका बेटा उसे बहुत प्यार करता हैं। जल्दी ही दोनो ने खाना खा लिया और शहनाज़ बर्तन लेकर किचेन में चली गई। शहनाज़ बर्तन धोते हुए अपने बेटे के बारे में ही सोच रही थीं। काश ये मुझे पहले मिल गया होता तो अपना सब कुछ इस पर लुटा देती। शहनाज़ सोचने लगी कि मैं तो अभी भी काफी जवान हूं और ये तो बोल रहा था कि इसे मेरी जैसी ही पतली और भरे हुए जिस्म की औरतें पसंद आती हैं। शैतान कहीं का अपनी ही मा पर डोरे डाल रहा था। तभी शहनाज़ को अपनी बाते याद आने लगी कि आज दिन में मेरे मुंह से क्या निकल गया था कि काश तू मेरा बेटा ना होता।

उफ्फ वो क्या सोच रहा होगा मेरे बारे में ! लेकिन मैंने ऐसी बात बोली क्यों, क्या मैं भी उसकी दीवानी हो गई हू। उफ्फ जब भी मैं उसे देखती हूं कहीं खो सी जाती हूं, और जब वो मुझे छूता हैं तो मेरे अंदर अपने आप सितार बजनें लगता हैं। क्या करू मैं !?

कैसे खुद को संभालू, कुछ समझ नहीं आता । खैर ये ही सोचते हुए वो धुले हुए बरतन सजाने लगी और जल्दी ही जल्दी ही काम खत्म करके अपने रूम में चली गई जहां उसका बेटा उसके इंतजार कर रहा था।

उधर शादाब पूरी तरह से अपनी अम्मी की बातो कि मर्द के बिना औरत कितनी अधूरी होती हैं और काश तू मेरा बेटा ना होता तो…
इन्हीं दोनों बातो में डूबा हुआ था लेकिन कुछ खास समझ नहीं पा रहा था।

शादाब अंदर कमरे में बिछी हुई कालीन पर बैठा हुआ था और शहनाज़ भी जाकर उसके पास बैठ गई।

शहनाज़:” क्या हुआ किस सोच में डूबे हुए हो मेरे राजा ?

शादाब:” कुछ खास नहीं अम्मी, बस ऐसे ही आपके बारे में सोच रहा था कि ना तो आपके साथ रहा ना ही आपके बारे में ज्यादा कुछ जानता हूं।

शहनाज़:” क्या बात हैं मेरे राजा! आज कल तू अपनी मा के बारे में कुछ ज्यादा ही सोच रहा है। तेरे इरादे तो नेक हैं ना ?

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनकर मुस्कराया और उसका एक हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा:”

” हां अम्मी, बस ये ही सोच रहा था कि भरी जवानी में आपने दूसरी शादी क्यों नहीं करी ? जबकि आपके जैसी हीरोइन के लिए तो लाइन लग जाती लड़की की बहुत लंबी।

शहनाज़ ने अपने बेटे के कंधे पर अपना सिर टिका दिया और बोली:”

” बेटा जो किस्मत को मंजूर था वो हो गया, मुझे तेरी बड़ी फिक्र थी तेरा क्या होगा? बस शायद तेरी वजह से ही शादी नहीं करिं

शादाब पहले से ही सब जानता था फिर भी अपनी अम्मी की बात सुनकर बोला:”

” सच अम्मी आप मुझसे इतना प्यार करती रही थी बचपन से ही?

शहनाज़ उसका हाथ सहलाते हुए बोली:” हान राजा, बस तेरे लिए ही मैंने अपनी सब खुशी त्याग दी ताकि तुझे कोई दिक्कत ना आय।

शादाब ने अपनी अम्मी की बात सुनकर शहनाज़ का गाल चूम लिया और बोला:”

” अम्मी आपने मेरे लिए अपनी सब खुशी त्याग दी अब देखना आपको बेटा आपको हर वो खुशी देगा जिसके लिए आप तड़पी हैं।

शहनाज़ बस हल्का सा मुस्कुराई और उसकी आंखे अपने बेटे के कंधे पर सुकून पाकर बंद हो गई।

शादाब अपनी अम्मी की जुल्फों की खुशबू सूंघता हुआ बोला:”

” अम्मी आपकी पापा से शादी कैसी हुई थी ? मतलब वो एकदम काले थे और आप बिल्कुल दूध सी गोरी ?

शहनाज़ को लगा जैसे किसी ने उसकी दुखती हुई रग पर हाथ रख दिया है। उसकी आंखो से अपने आप एक आंसू निकल आया तो शादाब ने उसे साफ किया और उसे लगा कि उसने गलत सवाल कर दिया है।

शादाब:” सोरी अम्मी, अगर आपको बुरा लगा हो तो ?

शहनाज़ भरे हुए गले से बोली:”

” नहीं बेटा, ये तो खुशी के आंसू हैं कि किसी ने तो मेरे दिल का हाल पूछा। सुन बेटा मेरी अम्मी की मौत के बाद मैं अपनी सौतेली मा के लिए एक बोझ बन गई थी। मेरे अब्बू पूरी तरह से उसके गुलाम बन चुके थे। मुझे बात बात पर वो मारती, परेशान करती थी। एक दिन तेरे दादा जी ने मुझे देखा और पसंद कर लिया और मेरे लालची बाप ने एक तरह से मुझे बेच दिया। तेरे दादा जी को लगा था कि मैं उनके बेटे को सुधार दूंगी लेकिन वो सब एक वहम साबित हुआ।

शादी के बाद तेरे अब्बा और बिगड़ते चले गए और मुझे बात बात पर मारते थे और एक दिन उनकी ऐक्सिडेंट में मौत हो गई। बस जब तू मेरे पेट में था। मैं तेरे ही सहारे रह गई थी। तेरे दादा जी ने अपनी गलती सुधारने के लिए मेरी दूसरी शादी की बहुत कोशिश करी लेकिन कोई भी मुझे बच्चे के साथ रखने को तैयार नहीं था और मेरा भी मन नहीं था दादा दादी को छोड़ कर जाने का। बस ये कहानी है तेरी अम्मी की बेटा।

शादाब की भी आंखे भर आई और उसने अपनी अम्मी का चेहरा अपने दोनो हाथों में थाम लिया और बोला:”

” अम्मी मैं माफी चाहता हूं कि आपको मेरे अब्बू की वजह से काफी सारी मुश्किल उठानी पड़ी। मेरी रगों में उनका ही खून हैं इसलिए आप मुझे माफ़ करे।

शहनाज़ गुस्से से चिल्ला पड़ी:”

” खबरदार जो आज के बाद बोला कि तेरी रगो में उसका खून हैं, तू सिर्फ मेरा बेटा है, बस मेरा खून हैं।

शादाब ने अपने दोनो हाथ अपनी अम्मी के आगे जोड़ दिए और बोला:”

” हां अम्मी, मैं सिर्फ आपका बेटा हूं, आज के बाद मैं कभी अपने बाप का नाम तक नहीं लूंगा।

शहनाज़ ने उसे अपने गले से लगा लिया और दोनो मा बेटे एक साथ सिसक उठे। शादाब ने अपनी अम्मी का मुंह साफ किया और बोला :”

” अम्मी एक बात पूछं लू क्या आपसे , अगर बुरा ना मानो तो ?

शहनाज़:” बोल बेटा तू भी, जो तेरा मन करे बोल?

शादाब:” अम्मी हर लड़की के सपनो में एक शहजादा होता हैं जिसके वो सपने देखती है। आपके सपनों का शहजादा कैसा है अम्मी ?

शहनाज़ ने एक लम्बी आह भरी और बोली :”

” बेटा शहजादे के सपने मैं पहले देखती थी अब नहीं !!

शादाब:” क्यों अम्मी आप तो अभी भी एक शहजादी ही तो लगती हैं, वैसे भी उम्र बढ़ने के साथ आपका हुस्न पूरी तरह से निखर गया है।

शहनाज़ अपने बेटे से अपनी तारीफ सुनकर मुस्कराई और बोली ;”

” तू बड़ा शैतान हो गया हैं अपनी अम्मी को कितना छेड़ता हैं तू शर्म नहीं आती तुझे ?

शादाब:” देखो ना अम्मी, आपका ख़ून हूं और एकदम बिल्कुल आपकी तरह से ही तो दिखता हूं जैसे हम दोनों जुड़वा पैदा हुए हो। आप थोड़ा मजाक तो बनता है ना दोस्त ?

शहनाज़ उसके कान खींचते हुए:’

” हां बनता हैं मेरे राजा, तो सुन मुझे बिल्कुल मेरे जैसा ही अपना शहजादा पसंद था। बिल्कुल ऐसा ही रंग, ऐसे ही नाक नक्श। समझा कुछ।

इतना कहकर शहनाज़ उठ गई और बोली:”

” जा कपड़े बदल कर आ जा, फिर सोते हैं थक गई हूं आज पूरे
दिन घूम कर।

शादाब उठ गया और अपने रूम में चला गया। वो सोचने लगा कि अम्मी को बिल्कुल अपने जैसा चाहिए था मतबल उनके जैसा तो बिल्कुल मैं हूं। तो क्या अम्मी को बिल्कुल मेरे जैसा अपना हीरो चाहिए था। वो आज दिन में बोल भी रही थी कि काश तू मेरा बेटा ना होता। इसका मतलब अम्मी के सपनों का शहजादा मैं ही हूं। लेकिन जब तक उनके मुंह से ना सुन लू तब तक मुझे चैन नहीं आएगा।

शादाब ने एक टॉवेल लिया और नहाने के लिए चला गया। शहनाज़ ने नहीं अपने कपड़े उतार दिए और गर्मी ज्यादा होने के कारण बस नाइटी पहन ली और नीचे ब्रा पेंटी नहीं पहनी। उसकी आंखो के सामने आज दिन में हुई बाते घूमने लगी कि किस तरह उसके बेटे ने बेरी समझकर उसकी चूत को पकड़ लिया था । शहनाज़ की सांसे तेज गति से चलने लगी और जिस्म में आग सी भर गई। उसके हाथ अपने आप उसकी नाइटी के अंदर घुस गए और चूचियों को पकड़ लिया। चूचियों पर हाथ लगते ही उसके मुंह से एक आह निकल पड़ी और वो आंखे बंद करके अपनी जांघो को आपस में रगड़ने लगी। उसकी चूत फिर से भीग गई और रस टपकना शुरू हो गया। शहनाज़ का एक हाथ अपने आप उसकी चूत पर चला गया तो रस से उंगली भीग गई। उफ्फ कितना रस छोड़ती हैं ये मेरी चूत , उफ्फ कितनी प्यासी हो गई है पिछले 18 साल से शांत थी अब मानो बगावत पर उतर आई है। उतरे भी क्यों नहीं , आखिरकार जिसके मैं और ये दोनो सपने देखती थी वो अभी मिला है। शहनाज़ पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थीं और गलत सही लाज शर्म सब पीछे छूट चुका था। उसने अपनी चूत के छेद पर उंगली फिराई और तड़प उठी तो दूसरा हाथ अपने हाथ गांड़ पर पहुंच गया। उसने अपनी गांड़ को सहला कर देखा टोवदिं भर की थकान का एहसास हुआ तो उसे याद आया कि दो दिन पहले उसके बेटे ने कैसे मसाला कूटने के बहाने उसकी गांड़ का सब दर्द मिटा दिया था। बस ये सोचते ही शहनाज़ पूरी तरह से बहक गई और नाइटी में ही किचेन में घुस गई और औखली उठा लाई। उसने जान बूझकर उसमे कुछ छोटे छोटे पत्थर भर दिए ताकि उसकी गांड़ की बहुत अच्छे से मालिश हो सके।

उसने कमरे का बल्ब बंद कर दिया और नाईट बल्ब जला दिया और पूरे कमरे में एक हल्के गुलाबी रंग की रोशनी फैल गई जिसमें उसका जिस्म एक शोला बनकर दहक रहा था। शादाब नहाकर सिर्फ एक टॉवेल पहले अपने कमरे में जा ही रहा था कि शहनाज़ ने उसे आवाज लगाई।

” राजा जरा इधर तो आओ मेरे पास !

शहनाज़ की आवाज में वो कशिश थी कि शादाब एक पुतले की तरह उसके साथ खींचा चला गया। शहनाज़ कालीन पर बैठी हुई थी और उसने आज जान बूझकर कालीन को डबल कर दिया था ताकि नीचे फिसल कर जब गिरने का बहाना करे तो एकदम गद्दे पर गिरे। एक फायदा ये भी होगा कि जितनी तेजी से उसका जिस्म झटके पर नीचे जाएगा उससे कहीं ज्यादा तेजी से उछाल के साथ उपर आएगा। शादाब उसके पीछे जाकर बैठ गया।

शहनाज़:” वो बेटा कल खाने के लिए मसाला कूटना था, अपनी हीरोइन की मदद कर देगा क्या मेरे हीरो ?

शादाब बिना कुछ बोले थोड़ा आगे हुआ और उसकी कमर से सट गया। शादाब ने एक हाथ आगे बढ़ा कर शहनाज़ के उस हाथ को थाम लिया जिसमें उसने मूसल पकड़ा था।

शादाब ने शहनाज़ के हाथ को उपर की तरफ उठाया और मूसल को जोर से औखली में दे मारा तो पत्थर से टकराने से एक अजीब सी आवाज हुई जिससे शादाब समझ गया कि आज मसाला माही कुछ और ही डाल दिया है अम्मी ने इसके अंदर मतलब मेरा दम चेक करना चाहती हैं।

ये ख्याल मन में आते ही उसके लंड में तनाव आना शुरू हो गया। शादाब बिल्कुल इससे सट गया और अपनी गर्म सांसे उसकी गर्दन पर छोड़ते हुए बोला:”

” अम्मी आज मसाला कुछ ज्यादा ही टाइट लग रहा है,

शहनाज़ अपनी कमर पीछे को करती हुई मानो लंड तलाश कर रही हो बोली:”

  • हान बेटा, हाथ दर्द करने लगे थे मेरे तो, लेकिन मेरे राजा इसको पीस कर रख देगा। मुझे अपने खून पर पूरा यकीन है।

शादाब :” अम्मी आप फिक्र ना करे, देखो मैं कैसे इसको पीसता हूं एकदम बारीक ।

इतना कहकर उसने जोर से मूसल मारा तो खड़ा हो चुका लंड शहनाज़ की कमर पर लगा जिससे उसकी आंखे मस्ती से बंद हो गई। इसी एहसास के लिए तो वो तड़प रही थी। फिर तो देखते ही देखते शादाब ने स्पीड बढ़ा दी और सटासट औखली में घुसने लगा। लंड शहनाज़ की कमर को अच्छे से रगड़ रहा था जिससे शहनाज़ पूरी मस्ती का अनुभव कर रही थी। तभी शहनाज़ ने कहा:_

” आह बेटे, थोड़ा जोर से कूट, देख ना अभी तो फूटा भी नहीं हैं, ऐसे कैसे पीसेगा र ?

शादाब ने मूसल जोर से मारा और उससे कहीं ज्यादा जोर से लंड का झटका मारा जिससे शहनाज़ अपने आप आगे को जा गिरी और शादाब ठीक उसके उपर पूरे जिस्म पर फैलता चला गया। एक झटके कर साथ मूसल हाथ से छुट गया और औखली पलट गई जिससे कुछ पत्थर के टुकड़े बाहर गिर गए तो शादाब पूरी तरह से निश्चिंत हो गया कि उसकी अम्मी जान बूझकर ये सब सब कर रही हैं। उफ्फ कितनी प्यासी है अम्मी,

आगे गिरने से शादाब का टॉवेल खुल गया और वो पूरी तरह नंगा हो गया। शहनाज़ ने मूसल उठाया और अपने बेटे की तरफ देखा तो शादाब ने एक सेक्सी स्माइल के साथ उसका हाथ थाम लिया और औखली में मूसल चलने लगा। लंड मूसल से भी ज्यादा टाईट हो चुका था इसलिए इसलिए शहनाज़ की गांड़ पर नंगा लंड नाइटी के ऊपर से ही लगने लगा। हर झटके पर शहनाज़ के मुंह से आह निकल रही थीं। टॉवेल शादाब के पैरो में फसने लगा तो उसने उठाकर एक तरफ़ फेंक दिया जो शहनाज़ ने देख लिया। उफ्फ हाय अल्लाह उसका मतलब ये मेरे उपर बिल्कुल नंगा चढ़ा हुआ है ये सोचते ही उसकी गांड़ अपने आप उपर उछलने लगी जिससे शादाब का हौसला बढ़ गया और उसने शहनाज़ के नंगे कंधे चूमने शुरू कर दिए। शहनाज़ पूरी तरह से मस्ती से भर उठी और मूसल तो बस नाम के लिए उसके हाथ में था, मसाला कुटाई तो कब की बंद हो चुकी थी और गांड़ कुटाई अपने चरम पर थी। धीरे धीरे हर धक्के पर शहनाज़ की नाइटी खिसकती रही और जल्दी ही उसकी कमर पर चढ़ गई जिससे शहनाज़ पूरी तरह से नीचे से नंगी हो गई। जैसे ही अगला झटका लगा तो लंड सीधे उसकी गांड़ की दरार पर जा लगा और मस्ती से उसका मुंह खुल गया !!

” आह मेरे राजा, ऐसे ही कूट , उफ्फ कितना अच्छा हैं तू मेरे राजा, दिखा दे अपना पूरा दम

शादाब समझ गया कि उसकी अम्मी अब पूरी मस्ती में अा चुकी है इसलिए वो एक तेज झटका मारते हुए कहा:”

,” अम्मी आपको अच्छा लगता हैं क्या अपने बेटे के साथ मसाला कूटना उफ्फ !!

धक्का लगते ही शहनाज़ मस्ती से सिहर उठी और बोली:”

” उफ्फ मेरे राजा, तेरे साथ तो मसाला कूटने का पूरा मजा आता है हाय मा,

शादाब उसकी कमर सहलाते हुए कहा:” अम्मी आप कुछ बोल रही थी दिन मैं कि औरत अधूरी होती हैं एक मर्द के बिना , उफ्फ कितना जिद्दी मसाला हैं ये ?

इतना कहकर शादाब ने अपने लंड को पूरी ताकत से उसकी गांड़ में धकेला तो शहनाज़ की आंखे मस्ती से बंद हो गई और बोली:

” हां राजा, अकेली औरत मसाला कैसे कूटेगी र , आह उफ्फ तेरे जैसा हीरो होना चाहिए ना हीरोइन की मदद के लिए राजा।

इतना कहकर शहनाज़ ने मस्ती से अपनी टांगे थोड़ी सी ऊपर उठा ली जिससे उसकी गांड़ और चूत दोनो पूरी तरह से खुल गए। शादाब अपनी अम्मी की गर्दन पर जीभ फिराने लगा और एक तगड़ा धक्का शहनाज़ की गांड़ पर रख दिया और बोला:

“हाय अम्मी, क्या आप मेरी हीरोइन हैं !?

शहनाज़ इस धक्के से कांप उठी थी इसलिए सिसकते हुए बोली:”

” हाय राजा मैं बस सिर्फ तेरी ही हीरोइन हूं, फोड़ दे मसाले को मेरे हीरो !!

इतना कहते ही शहनाज़ ने बहुत देर के बाद मूसल उपर उठाया और मूसल से ज्यादा अपनी गांड़ उपर उठा ली। शादाब ने उसकी हालत समझते हुए एक तगड़ा धक्का लगाया तो शहनाज़ का जिस्म फिर से गद्दे में धस सा गया। उसके आंखो के आगे मस्ती से लाल पीले तारे नाच उठे और पत्थर के कुछ टुकड़े टूट गए।

” आह मेरे हीरो, उफ्फ ऐसे ही बेटे सारा मसाला फाड़ दे नहीं तो हॉल वाले लड़के की तरह थप्पड़ खाएगा तू मेरे राजा!!

शादाब ने हाथ आगे बढ़ा कर शहनाज़ की कमर को पकड़ कर मोड़ लिया और लंड को आगे करते हुए जांघो के बीच घुसा दिया। कभी लंड गांड़ के छेद तो कभी चूत की फांकों को चूम रहा था। इतने सालो के बाद शहनाज़ अपनी चूत पर लंड महसूस करते ही मस्ती से भर उठी और उसकी सिसकी निकल पड़ी।

” उफ्फ हाय मा, क्या कर रहा हैं तू, हट मुझे गुलगुली हो रहीं हैं।

शादाब उसकी गरदन चूमते;”

” मसाला चेक कर रहा था कितना टाइट हैं, उफ्फ अम्मी बहुत गरम हैं ये तो ।

शादाब ने लंड को चूत पर उपर से नीचे रगड़ते हुए कहा। शहनाज़ पूरी तरह से मस्ती में चूर हो गई थी इसलिए उसने भी अपनी चूत को हिलाना शुरू कर दिया। शादाब समझ गया कि अब सही समय अा गया है क्योंकि पूरी तरह से रस से भीग चुकी चूत लंड को भी भिगो चुकी थी।

शादाब:” अम्मी आपके सपनों का शहजादा कौन हैं ?

ये कहते हुए शादाब ने लंड पर हल्का सा दबाव बढ़ा दिया तो शहनाज़ का मुंह चूत से पहले ही खुल गया और बोली:_

” आह, हाय मा री, तू हैं मेरे राजा, मेरा सब कुछ तू ही तो हैं ।

शादाब ने एक हाथ से पहली बार शहनाज़ की गांड़ को हल्का सा खोल दिया तो शहनाज़ ने खुद ही अपनी टांगे पूरी खोल दी और लंड पर हल्का सा पीछे को हो गई जिससे लंड चूत की फांकों को चूमने लगा। शादाब उसकी एक गांड़ को दबाते हुए बोला:”

” हाय अम्मी, कितना टाइट हैं आपका मसाला, पूरा दम लगा कर कूटना पड़ेगा।

शहनाज़ ने एक हाथ से अपनी चूची को पकड़ लिया और दबाने लगी। शादाब ने चूत के ठीक बीच में उसकी फांकों को लंड के सुपाड़े के खोलते हुए लंड का सुपाड़ा टिका दिया और कमर को लंड पर खींचते हुए बोला:_

” आह अम्मी उफ्फ मेरी जान, अगर मैं आपका बेटा ना होता तो आप क्या करती ?

इतना कहकर उसने दोनो हाथो में शहनाज़ की गांड़ को थाम लिया और मसलने लगा। गांड़ पर हाथ लगते ही शहनाज जैसे स्वर्ग में पहुंच गई और उसने पहली बार अपनी गर्दन घुमाकर शादाब की आंखो में देखा और बोली;”

“” अगर तू मेरा बेटा ना होता तो तुझे लेकर भाग जाती मेरे राजा!;

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनते ही पूरे जोश में अा गया और एक धक्का आगे की तरफ मारा तो लंड हल्का सा फिसल गया और चूत की फांकों को रगड़ता हुआ नीचे जा लगा।

शहनाज़ की चूत की फांकों को पहली बार इतनी बुरी तरह से लंड ने रगड़ा था इसलिए उससे बर्दाश्त नहीं हुआ और उसकी चूत ने अपना रस छोड़ना शुरू कर दिया और शहनाज़ का मुंह पूरी मस्ती से खुल गया।

” आह मर गई मेरे राजा, मेरे सपनो के शहजादे, मेरे हीरो, बना ले मुझे अपनी, ले जा भगा कर मुझे मेरे राजा।

शादाब ने मस्ती में आकर लंड को चूत पर फिर से टिका दिया लेकिन चूत के रस की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसके लंड ने भी अपनी मा की चूत पर पिचकारी मारनी शुरू कर दी और सिसकते हुए बोला;_

” उफ्फ नाज़ मेरी जान, भगा ले जाऊंगा तुझे सबसे दूर, उफ्फ मेरी मा तेरा बेटा पूरी तरह से तेरा दीवाना हो गया।

शहनाज़ ये बात सुनते ही जोश में पलट गई और शादाब के उपर चढ़ गई और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और दोनो मा बेटे एक दूसरे के होठों को चूसने लगे। नीचे लंड और चूत एक दूसरे को अपना रस पिला रहे थे और उपर दोनो के होंठ। एक जोरदार किस के बाद दोनो मा बेटे एक दूसरे की बाहों में ऐसे ही सो गए।

शाहनाज एक शादाब दोनो मा बेटे सुबह देर तक ऐसे ही सोते रहे। कोई आठ बजे के आस पास शहनाज़ की आंखे खुली तो उसने अपने आपको अपने बेटे के सीने पर लेटे हुए पाया तो उसे अपने आप पर यकीन ही नहीं हुआ। फिर उसकी आंखो के आगे एक के बाद एक सीन गुजरने लगा तो उसे यकीन हो गया हैं कि ये सब एक सपना नहीं बल्कि हकीकत है। उसने अपनी मैक्सी की तरफ देखा जो उसकी कमर पर पड़ी हुई थी और नीचे से उसकी चूत गांड़ सब बिल्कुल नंगे पड़े थे। उसे बड़ी शर्म अाई और रात हुई बातें याद करके वो मुस्कुरा उठी, उसका रोम रोम मस्ती से भर उठा और उसने शादाब का गाल चूम लिया। उससे बेटा उससे कितना प्यार करता हैं उसे रात पता चला। शहनाज़ को अपने उपर बड़ी मुश्किल से यकीन हो रहा था कि रात उसने शादाब को अपने दिल की बात बोल दी हैं जिसे उसके बेटे ने खुशी खुशी मान लिया है और खुद ही तो वो पहले से ही अपनी अम्मी का दीवाना बना हुआ है।

शहनाज़ उठने लगी तो उसे अपनी टांगो के बीच में शादाब के लंड का एहसास हुआ तो उसकी सांसे एक बार फिर से बढ़ने लगी। वो धीरे से उठी और खड़ी हो गई तो जैसे ही उसकी नजर हवा में लहराते हुए शादाब के लंड पर पड़ी तो उसे अपना पूरा वजूद हिलता हुआ नजर आया। आज वो दूसरी बार एक महान लंड को देख रही थी और उसे आज पहले से ज्यादा खतरनाक लग रहा था। उफ्फ कितना मोटा लाल सुर्ख सुपाड़ा, लंड ऐसे हवा में झटके मार रहा था मानो बहुत ज्यादा गुस्से में हो। शहनाज़ की टांगो के बीच हलचल बढ़ने लगी और उसने एक भरपूर नजर फिर से लंड पर डाली और जाने के लिए पलटी और बाहर की तरफ कदम बढ़ा दिया। उसके पैरो की छन छन करती पायल की आवाज से शादाब की नींद खुल गई और उसने पहले प्यार के आवेश में भाग कर शहनाज़ को अपनी बांहों में भर लिया। शहनाज़ को उसकी बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि उसका बेटा इतना जल्दी उठकर उसे इस तरह से बांहों में ले सकता हैं इसलिए डर के मारे उसकी चींख़ निकल गई।

शादाब :’ अम्मी डरो मत, मैं हूं शादाब आपका राजा!!

शहनाज़ थोड़ा नॉर्मल होते हुए:

” सुधर जा अब तू, ऐसी हरकतें मत किया कर, मैं तो डर ही गई थी पागल!

शादाब ने उसको पूरी तरह से अपनी बांहों में कस लिया और उसके हाथो पर हाथ रखते हुए कहा:”..

” अम्मी अब भी डर लग रहा है क्या आपको ?

शहनाज़ को हमेशा की तरह इस बार भी वहीं अदभुत सुकून मिला शादाब की बांहों में और एक पल के लिए पलटी और उसे जोर से कस लिया । शहनाज़ बोली:”

” बिल्कुल भी नहीं बेटा, तू जब साथ हैं तू मुझे किसका डर राजा ?

शादाब शहनाज़ के गाल सहलाते हुए :”
” वैसे सुबह सुबह आप आज कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लग रही है क्या बात हैं ?

शहनाज़ शर्मा गई और बोली:”

” झूठा कहीं का, जब देखो अपनी अम्मी पर डोरे डालता रहता हैं तू मेरे राजा ?

शादाब:” नहीं अम्मी, आप सच में बहुत अच्छी लग रही हो।

इतना कहकर शादाब उसकी आंखो में देखने लगता हैं तो शहनाज़ भी अपने बेटे के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर उसकी आंखो में झांकती हैं। दोनो मा बेटे जैसे एक दूसरे में खो से गए थे और शादाब के होंठ शहनाज़ के होंठो की तरफ बढ़ने लगे तो शहनाज़ कांप उठी। दिन के उजाले और रात के अंधेरे में बहुत फर्क होता है और शहनाज़ तो वैसे ही शर्म की गुड़िया थी। शादाब ने एक हाथ से शहनाज़ का चेहरे उपर उठाया तो शहनाज़ ने एक बार शादाब की तरफ देखा जो उसके होंठो को हसरत भरी निगाहों से देख रहा था और उसे ना कहने की हिम्मत आज शहनाज़ के अंदर नहीं थी इसलिए शहनाज़ ने शर्म के मारे आंखे बंद कर ली और बेड से एक चादर उठा कर खुद को और शादाब को उसमे लपेट लिया। शादाब ने अपने होंठ शहनाज़ के होंठो पर रख दिए और चूसने लगा। शहनाज़ ने भी अपने दोनो हाथ उसकी कमर पर रख दिए और वो भी अपने बेटे का साथ देने लगी।

दोनो पूरी तरह से किस में डूब गए और बिल्कुल नंगे शादाब का लंड शहनाज़ की जांघो में घुसा जा रहा था जिससे शहनाज़ के जिस्म में आग भरने के। शहनाज़ लंड के एहसास को एक बार फिर से अपनी चूत पर महसूस करने के लिए मरी जा रही थी इसलिए वो किस करती हुई एक बार फिर से अपने बेटे के पैरो पर चढ़ गई और लंड अपने आप उसकी चूत पर जा लगा।

इस मस्त एहसास को शहनाज़ बर्दाश्त नहीं कर पाई और किस टूट गई और उसके होंठो से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी। शादाब ने अपने होंठो को शहनाज़ की गर्दन पर रख दिया और चूमने लगा तो शहनाज़ पूरी तरह से जोश में अा गई चूत को लंड पर धकेलने लगी। शादाब के हाथ शहनाज की कमर को सहलाते हुए उसकी गांड़ तक पहुंच गए और जैसे ही शादाब ने शहनाज़ की गांड़ को हाथो में भरा तो शहनाज़ ने अपनी बेटे की गर्दन को चूमना शुरू कर दिया। अपनी गर्दन पर अपनी मा के होंठो की रगड़ से शादाब पूरी तरह से जोश में अा गया और जोर जोर से शहनाज़ की गांड़ को मसलने लगा। शहनाज़ इस गांड़ दबवाने की वजह से ही अपने बेटे की तरफ आकर्षित हुई थी और आज पहली बार उसका बेटा पूरी ताकत से उसकी गांड़ दाब रहा था, मसल रहा था और शहनाज़ को उसकी उम्मीद से ज्यादा अच्छा लग रहा था इसलिए वो अपने बेटे से एक अमर बेल की तरह लिपटी हुई थी।

शहनाज मस्ती से सिसकते हुए:”

” आई लव यू मेरे राजा , कहां था तू अब तक मेरी जान? आह राजा

शादाब शहनाज़ की गांड़ को जोर जोर से दबाते हुए:”

” लव यू टू मेरी नाज, आपके ही पास था अम्मी, बस डरता था, कहीं आप नाराज ना हो जाए।

शहनाज़ उसकी कमर को सहलाते हुए:”

” आह उफ्फ, नहीं रे मेरे राजा, तेरी मा क्यों नाराज होगी तुझसे, तो तू उसका शहजादा हैं मेरी जान!

शादाब अपनी अम्मी की बातो से पूरी तरह से बेकाबू हो गया और एक से शहनाज़ का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर टिका दिया तो शहनाज़ जा जिस्म थरथरा उठा और सिसक उठी।

” हाय अल्लाह, उफ्फ राजा ये क्या है इतना मोटा सा एक दम मूसल जैसा ?

इतना कहकर शहनाज़ का हाथ डर के मारे अपने आप ही लंड पर से हट गया। उसकी सांसे पूरी तरह से उखड़ चुकी थी, चूत एक दम गीली हो रही थी। शादाब ने फिर से शहनाज़ का हाथ अपने हाथ में पकड़ कर लंड पर रख दिया। शहनाज़ का पूरा जिस्म फिर से कांप उठा और पागल सी होकर अपनी चूत को लंड पर रगड़ने लगी। शादाब ने शहनाज के हाथ को लंड पर घुमाना शुरू किया तो शहनाज़ को पसीना आने लगा। शहनाज़ का हाथ लंड पर आगे बढ़ता जा रहा था और जब भी उसको लगता था कि लंड बस इतना ही बड़ा हैं शादाब उसके हाथ को और आगे की तरफ कर देता जिससे शहनाज़ की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। जैसे ही शहनाज़ का हाथ लंड के आखिर में पहुंचा तो उसकी चूत डर के मारे दुबक सी गई। उफ्फ हाय मा इतना मोटा लंबा भी लंड होता हैं ये शहनाज़ को सही से आज पता चला था कि क्योंकि आज उस रात की तरह झिझक नहीं थीं।
शादाब:” हाय मेरी नाज, ये वो मूसल हैं जिसने आपकी कमर को कूट दिया था।

शादाब ने एक दो बार लंड पर शहनाज़ का हाथ घुमाया तो शहनाज़ की उंगलियां अपने आप लंड पर चलने लगी तो शादाब ने अब दोनो हाथो से फिर से शहनाज़ की गांड़ को थाम लिया और पूरी ताकत से दाबने लगा। शहनाज़ के मुंह से हल्की हल्की दर्द भरी मस्त सिसकियां निकलने लगी और उसने अपने बेटे के लंड को सहलाना शुरू कर दिया। शहनाज़ लंड के सुपाड़े पर हाथ फेरते हुए बोली:”

” उफ्फ राजा ये तो बहुत टाइट हैं, उस मूसल से भी ज्यादा।

शादाब उसकी नाइटी को उपर उठा कर उसकी नंगी गांड़ को हाथो में भर लिया और जोर जोर से मसलने लगा और बोला:”

” आह मेरी नाज़, टाइट हैं तभी तो कमर को कूट दिया था।

शहनाज़ अपनी नंगी गांड़ पर शादाब के हाथ लगते ही तड़प उठी और लंड को पूरी लंबाई में रगड़ते हुए बोली:”

” आह राजा, इतना अच्छा मोटा मूसल क्या सिर्फ कमर कूटने के ही काम आता हैं क्या बस !!

शादाब अपनी अम्मी की गांड़ की दरार से चूत तक हल्का सा अंदर की तरफ उंगली से रगड़ते हुए बोला:”

” आह, उफ्फ मेरी जान, इससे तो बहुत कुछ कूटा जाता हैं, उफ्फ क्या कूटना हैं आप बताओ मेरी रानी ?

शहनाज अपनी चूत और गांड़ पर उंगली पड़ते ही समझ गई कि उसका बेटा पूरी तरह से उसे चोदने के लिए मरा जा रहा है। वो तड़पते हुए अपनी गांड़ को अपने बेटे की उंगली पर दबाते हुए बोली:”

” आह राजा, तू पहले इसे ही कूट दे, बड़ा दर्द हैं कल से यहां !!

शादाब अपनी अम्मी की चूत पर उंगली रगड़ते हुए बोला:”

” आह अम्मी उफ्फ ये कूट दू क्या !! उफ्फ अम्मी ये बहुत मुलायम हैं आराम से कूट जाएगी!

शहनाज़ मन ही मन सोचने लगी कमीना मेरी चूत फाड़ना चाहता है, अपनी मा की चूत चोदना चाहता है मेरा राजा। शहनाज़ उसके कान खींचते हुए बोली:”

” आह राजा, अभी से कमजोर पड़ गया क्या जो मुलायम चीज कूटना चाहता है, ऐसे कैसे अपनी अम्मी को लेकर भाग पाएगा तू !

शहनाज़ ने शादाब की मर्दानगी को एक चुनौती सी दी तो शादाब ने शहनाज़ की गांड़ को पूरी ताकत से हाथ में भर कर मसल दिया तो शहनाज़ दर्द से राहत उठी। शादाब उसकी गांड़ को जोर जोर से मसलते हुए बोला:”

“अम्मी बस एक बार इस टाइट चीज का नाम बता दो कि क्या कुटवाना हैं फिर कमाल देखना।

शहनाज़ शर्म के मारे अपने बेटे के सीने ने घुस गई। उफ्फ मैं गांड़ कैसे कहूं अपने मुंह से। ये सोचकर वो कांपने लगी।

शादाब :” बोलो ना मेरी रानी, अगर इतनी शर्म करोगी तो कैसे भागोगी मेरे साथ ?

शहनाज डरते हुए बोली:” आह राजा, मुझे नहीं पता बस तू कूट दे क्यों तड़पा रहा हैं अपनी अम्मी को ?

शादाब उसकी गांड़ के छेद के पास सहलाते हुए बोला:”

” आह अम्मी, आपको बताना हो पड़ेगा ! बोलो ना मेरी जान !

शहनाज़ उसके लंड को रागड़ती हुई बोली:” आह राजा, उफ्फ देख ना तेरा मूसल कैसे अकड़ रहा है, तू मेरा पिछ्वाड़ा कूट दे।

शहनाज़ ने बड़ी मुश्किल से कहा और पलट गई जिससे अब लंड उसकी गांड़ पर जा लगा। शहनाज पिछ्वाड़ा बोलकर बहुत ज्यादा शर्मा गई थी इसलिए पलटी थी लेकिन किस्मत ने साथ दिया और लंड अपने आप गांड़ पर अड गया।
शादाब हल्का हल्का लंड रगड़ते हुए :” आह मेरी मा, उफ्फ उसे पिछ्वाड़ा नहीं गांड़ कहते हैं! एक बार गांड़ बोलो ना प्लीज़

इतना कहकर शादाब ने शहनाज़ की गर्दन को चाटना शुरू कर दिया। शहनाज पूरी तरह से बहक चुकी थी इसलिए अपनी गांड़ लंड पर धकेलते हुए बोली:”

” आह राजा, उफ्फ कूट दे जल्दी से मेरी गांड़, बस अब मत तड़पा मुझे राजा, !

शहनाज़ एक झटके के साथ ही गांड़ बोल गई तो शादाब ने लंड का जोरदार धक्का लगाया तो शहनाज़ की गांड़ के उभार हल्का सा अंदर घुस गए। शहनाज़ तो कब से इसके लिए तड़प रही थी इसलिए उसके मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगीं।

” आह राजा, उफ्फ हाय कितना अच्छा है ये मूसल, कूट ऐसे ही दम लगा कर कूट

शादाब शहनाज़ की गर्दन चाटते हुए शहनाज़ की गांड़ को लंड से पीटने लगा तो हर धक्के पर शहनाज़ मस्ती से सिसक रही थी, आज दोनो मा बेटे जानते थे कि वो क्या कर रहे हैं, आज मसाला नहीं बल्कि सीधे गांड़ कूट रही थी। शादाब ने एक तगड़ा धक्का लगाया तो शहनाज़ आगे को गिर से गई लेकिन उसके दोनो हाथ बचने के लिए बेड पर टिक गए जिससे वो अपने आप ही घोड़ी बन गई और गांड़ पूरी तरह से उभर गई। शादाब ने अपनी अम्मी की कमर को पकड़ लिया और जोर जोर से लंड को नंगी गांड़ पर मारने लगा। शहनाज़ सिसकते हुए बोली:”

” उफ्फ राजा, बहुत मजा आ रहा है, हाय ये मूसल, तेज तेज कूट मेरे लाल नहीं तो थप्पड़ खाएगा तू। उफ्फ बहुत अच्छा लग रहा हैं

शादाब अपनी अम्मी की जोश भरी बाते सुनकर खुश हो गया और उसकी गांड़ को जोर जोर से कूटने लगा। दोनो मा बेटे पूरी तरह से मदहोश हो गए थे। दोनो में से कोई भी नहीं जानता था कि गांड़ में भी लंड घुसाया जाता हैं। लेकिन कहते है कि सेक्स सिखाया नहीं जाता अपने आप हो जाता हैं।

शादाब के हर धक्के पर शहनाज़ को बहुत मजा आता और वो अपनी गांड़ खुद पीछे को धकेल देती। लंड जैसे ही दोनो गांड़ के पटो के बीच में लगता तो शहनाज़ को ज्यादा अच्छा लगता जिससे उसकी गांड़ और मजा लेने के लिए अपने आप खुलने लगी।हर धक्के पर गांड़ थोड़ी थोड़ी खुल रही थी और जल्दी ही पूरी तरह से खुल गई।

शादाब ने जैसे ही अगला धक्का मारा तो लंड सीधे गांड़ के छेद से जा टकराया तो दोनो मा बेटे इस सुखद अहसास से तड़प पड़े।

” आह मेरे राजा, उफ्फ ये क्या था, उफ्फ हाय इतना मजा, सआईआई आह बेटा बस इसी जगह पर कूट दम लगा कर!!

शादाब ने भी पूरी ताकत से शहनाज़ की गांड़ के छेद को कूटना शुरू कर दिया। हर धक्के पर गांड़ का छेद हल्का सा खुलता और फिर से बंद हो जाता। शहनाज़ तो आज जैसे मस्ती के सातवे आसमान पर थी इसलिए उसने खुद ही अपनी नाइटी को उतार दिया और पूरी तरह से नंगी हो गई। गांड़ के खुलते बंद होते छेद पर लंड की रगड़ से उसकी आंखे भी मस्ती से खुलने और बंद होने लगी।

शहनाज़ की पूरी नंगी कमर देखते ही शादाब ने जोश में एक तूफानी धक्का लगाया तो शहनाज़ की गांड़ का छेद थोड़ा सा खुला और शहनाज़ मस्ती से सिसक उठी

” आह मेरे शादाब, कूट दे ऐसे ही अपनी मा की गांड़ अपने मूसल से मेरे राजा ! आह उफ्फ नहीआई

शादाब ने आगे झुक कर शहनाज़ का चेहरा अपनी तरफ घुमा दिया तो आग में जल रही शहनाज़ बिना पलके झपकाए अपने बेटे को देखने लगी और मुस्कुरा उठी।

शादाब:” आह मेरी जान शहनाज़, ये मूसल नहीं लोला हैं, तेरे बेटे का लोला मेरी अम्मी ?!

शहनाज़ शादाब के मुंह से पहली बार शहनाज़ सुनते ही बेकाबू सी हो गई और बोली:_

” हाय मेरे शादाब का लोला, मार अपना लोला अपनी मा की गांड़ पर मेरे राजा !!

शादाब पूरी तरह से मचल उठा और लंड में उबाल आने लगा इसलिए वो पूरी तेजी से शहनाज़ की गांड़ के छेद को ठोकने लगा। लंड से निकले प्री कम से शहनाज़ की गांड़ का छेद हल्का सा गीला हो गया था इसलिए हर धक्के पर पहले से ज्यादा खुल रहा था जिससे शहनाज़ पूरी तरह से मस्ती में अा गई और अपने दोनो हाथों से गांड़ को पूरी फैला दिया तो शादाब का अगला धक्का शहनाज़ के हिलने की वजह से चूत पर लगा तो शहनाज़ का मुंह मस्ती से खुल गया

” आह राजा, वहां नहीं, आह जल्दी कर मेरे लाल मुझे कुछ हो रहा हैं, उफ्फ हाय मेरी मा

शादाब को भी पता चला गया कि धक्का चूत पर लग गया है तो उसका लंड फटने को तैयार हो गया तो इसलिए उसने अगला अब तक का सबसे तगड़ा धक्का सीधे गांड़ पर पूरी ताकत से मार दिया। चूत के रस से सुपाड़ा पूरी तरह से भीग गया था और गांड़ का छेद पहले से काफी गीला हो गया था इसलिए लंड का भारी भरकम ठोस सुपाड़ा शाहनाज की गांड़ को फाड़ते हुए अंदर घुस गया और शहनाज़ की दर्द भरी चींखं निकल पड़ी।

” आह नईआईआई, हाय मा मर गई, उफ्फ ये कर दिया राज्ज्जा, मार डाला!!

शहनाज़ दर्द से बुरी तरह से कराह उठी क्योंकि उसकी कुंवारी गांड़ का छेद फट सा गया था। शादाब भी इतनी टाइट गांड़ में लंड घुसने से सिसक उठा और उसके लंड ने शहनाज़ की गांड़ में पिचकारी छोड़ दी।

” आह अम्मी, उफ्फ हाय मै गया, आह मेरी शहनाज़ तेरी गांड़।

शादाब शहनाज़ की कमर पर ही ढेर हो गया और लंड अपने आप सिकुड़ कर बाहर निकल गया। लंड के साथ ही शहनाज़ की गांड़ से खून भी निकल गया। शादाब डरकर शहनाज़ की कमर पर से उतर गया तो दर्द से कराहती हुई शहनाज़ बेड पर गिर पड़ी।
शाहनाज की सारी मस्ती और उत्तेजना दोनो की नादानी की वजह से दर्द में बदल गई थी।

हिंदी में एक कहावत है कि अनाड़ी का चोदना चूत का नाश वो यहां पूरी तरह से सही साबित हुई। शहनाज को लग रहा था कि जैसे किसी ने उसकी गांड़ के छेद को चाकू से चीर दिया है। उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे। शादाब अपनी अम्मी के पास लेट गया और उनका चेहरा साफ करने लगा तो शहनाज़ इस दर्द में भी प्यार भरी नजरो से उसकी तरफ देखने लगी और उसके कंधे पर अपना सिर टिका दिया तो शादाब अपनी अम्मी की कमर सहलाने लगा। काफी देर तक शादाब ऐसे ही अपनी अम्मी की कमर सहलाते हुए उसके बालो में उंगली फिराता रहा जिससे शहनाज का दर्द धीरे धीरे कम होता चला गया।

शहनाज़ अपने बेटे का अपने प्रति प्यार और देखभाल देख कर खुश हो गई और उसका गाल चूम लिया। शादाब ने मासूमियत से अपने दोनो कान पकड़ लिए और बोला:”

” सोरी अम्मी, मुझे नहीं पता था कि ये सब हो जाएगा, मुझे माफ़ कर दो आप।

शहनाज उसके कान खींचती हुई बोली:” एक तो आज के बाद मुझे अम्मी मत बोलना तेरे मुंह से शहनाज़ ज्यादा अच्छा लगता हैं मुझे, और दूसरी बात सच में बेटा मुझे भी नहीं पता था कि ऐसा हो जाएगा। हम दोनों इसके लिए बराबर जिम्मेदार हैं बस फर्क इतना हैं कि दर्द सिर्फ मुझे हुआ हैं मेरे राजा।

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