दादा जी:” ओह लगता हैं मेरा पोता काफी समझदार हो गया है, अच्छा है बेटा वैसे भी एक दिन अब तुम्हे ही सारे घर की जिम्मेदारी लेनी है।
शादाब:” जी दादा जी, आप फिक्र ना करे, मैं सब कुछ अच्छे से संभाल लूंगा।
दादा:” चल ठीक हैं, तू रात नजर सफर से थक गया होगा, जा आराम कर ले
शादाब तो जैसे कब से अपने दादा जी के मुंह से यू सब सुनने के लिए तरस रहा था इसलिए वो बोला:”
” ठीक हैं दादा जी।
इतना कहकर शादाब उपर की तरफ चल दिया बिल्कुल दबे पांव क्योंकि वो शहनाज़ को सरप्राइज देना चाहता था। सीढ़ियों पर चढ़ते हुए उसकी सांसे तेज हो रही थी और वो जल्दी ही शहनाज़ के रूम के सामने जा पहुंचा तो उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा क्योंकि शहनाज़ के रूम का गेट खुला हुआ था और कमरे में फैली नाईट बल्ब की रोशनी में बहुत खूबसूरत लग रही थी।
शहनाज़ अभी सेहरी करके नमाज पढ़ने के बाद सोई थी और दिन निकलने ही वाला था इसलिए उसने गेट बंद नहीं किया था। शादाब कमरे के अंदर दाखिल हो गया, धीरे से गेट को बंद किया और शहनाज़ के बिल्कुल करीब पहुंच गया और उसके खूबसूरत चेहरे को प्यार से देखने लगा। शहनाज़ ने एक हल्के हरे रंग का सूट पहना हुआ था और और तकिए को अपनी बांहों में लिए हुए सो रही थी।
शादाब ने धीरे से अपने बैग से अपना नाईट सूट निकाला और बैग को वहीं टेबल पर रख दिया और अपने कपड़े बिना कोई आवाज किए बदल लिए। कपडे बदल लेने के बाद उसने आराम से नाईट बल्ब को बुझा दिया तो कमरे में पूरा घूप अंधेरा छा गया। शादाब बेड पर चढ़ा और शहनाज़ को अपनी बांहों में भर लिया तो शहनाज़ एक की एक तेज झटके के साथ नींद खुल गई और वो डर के मारे चिल्ला उठी तो शादाब ने उसके मुंह पर हाथ रख दिया और प्यार से उसके कान में बोला:”
” मेरी अम्मी शहनाज़ मैं शादाब।
इस आवाज के लिए तो कब से शहनाज़ के कान तरस रहे थे, शहनाज़ को लगा जैसे अपने आप ही जमाने भर की खुशियां उसकी झोली में सिमट अाई हैं और शहनाज़ अपनी सुध बुध ही खो बैठी और शादाब से किसी चुंबक की तरह चिपकती चली गई।
दोनो मा बेटे एक दूसरे से बुरी तरह से लिपट गए। शादाब के हाथ शहनाज़ की पीठ पर कसते चले गए और उसकी गर्म गर्म सांसे शहनाज़ की गर्दन पर पड़ने लगी और शहनाज़ ने भी पूरी ताकत से अपने सीने से लगा लिया और उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगी। दोनो में से कोई कुछ नहीं बोल रहा था बस दोनो एक दूसरे की धड़कने सुन रहे थे।दोनो के दिल एक दूसरे के इतने करीब धड़क मानो दोनो दोनो के सीने में एक ही दिल धड़क रहा हो। शहनाज़ ने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि उसका बेटा इस तरह से अचानक से आकर उसे अपनी बांहों में भर लेगा इसलिए वो खुशी से फूली नहीं समा रही थी और शादाब से चिपकी हुई पड़ी थी। दोनो के चेहरे आपस में टकरा रहे थे और शहनाज़ अपने गाल शादाब के गालों से रगड़ रही थी। बीच बीच में उनके होठ जैसे ही आपस में टकराते तो दोनो के जिस्म में बिजली सी कौंध जाती लेकिन दोनों ने ही रोजा रखा था जिस कारण दोनो अपने उपर काबू रखे हुए थे। शहनाज़ धीरे से शादाब के कान में शहद घोलती हुई अपनी मीठी आवाज में बोली:
” शादाब मेरे राजा, मेरी जान लव यू सो मच मेरे बेटे।
शादाब ने भी शहनाज़ के कान में धीरे से बोला:”
” लव यू टू मेरी शहनाज़, बहुत मिस किया मैंने तुम्हे।
शहनाज़:” मैंने भी मेरे राजा, मन नहीं लगता था तुम्हारे बिना, पूरा घर काटने को दौड़ता था।
शादाब उसकी खुली हुई जुल्फों में हाथ फेरते हुए बोला:”
” बस मेरी जान, अब मैं अा गया हूं ना अब आपके सारे अकेलेपन को खुशियों में बदल दूंगा।
शहनाज़ अपने हाथ से उसका गाल हल्का सा खींच कर बोली :”
” शादाब मुझे तो बिल्कुल भी उम्मदी नहीं थी तुम अचानक से ऐसे रात में ही आकर मुझे अपने बांहों में ले लोगे।
शादाब ने शहनाज के एक कंधे पर हल्का सा दबाव दिया और बोला:” आपको अच्छा लगा मेरी जान ये सब ?
शहनाज़ बिना कोई जवाब दिए शादाब से पूरी जोर से कस गई मानो उसे अपने अंदर समा लेना चाहती हो। शादाब सब समझ गया लेकिन वो शहनाज़ के मुंह से सुनना चाहता था इसलिए बोला:
” बोलो मेरी शहनाज़ मेरी जान ?
शहनाज़:” बहुत अच्छा लगा मेरे शादाब, सच में तुमने मुझे पूरी तरह से जीत लिया हैं शादाब।
शादाब थोड़ा जोर से उसका कंधा सहलाते हुए:” तो मेरी इस जीत का इनाम मुझे आज रात को मिलना चाहिए, क्या क्या मिलेगा मुझे शहनाज़ ?
शहनाज एकदम से शर्मा गई और उसकी सांसे तेज हो गई और बोली:” चुप कर बदमाश, रोजा नहीं रखा हैं क्या तूने ?
शादाब को अपनी गलती का एहसास हुआ और बोला:”
” रोजा रखा हैं अम्मी मैने, अभी तक सभी रोजे रखे हैं। मैं तो इनाम वाली बात मजाक में कर रहा था।
शहनाज़:” बस कर राजा, जहां एक महीने सब्र कर लिया कुछ घंटे और रुक जा, आज वैसे भी चांद रात हैं।
शादाब ने शहनाज़ का चेहरा अपने हाथों में भर लिया और बोला:” हान अम्मी मेरी शहनाज़ आज सच में मेरे लिए चांद रात हैं क्योंकि मेरा चांद मेरे हाथो में हैं।
शहनाज़ अपनी तुलना चांद से किए जाने पर खुश हो गई और बोली:’ चल अब सो जा, थक गया होगा पूरी रात का चला हुआ मेरा बेटा।
शादाब ने अपने आपको शहनाज़ के आंचल में छुपा लिया और दोनो मा बेटे एक दूसरे से चिपक कर सो गए। दोनो ही थके हुए थे इसलिए देर तक सोते रहे। दादा और दादी दोनो चाय का इंतजार कर रहे थे जबकि दोनो मा बेटे सारे दुनिया से बेखबर एक दूसरे से लिपटे हुए सो रहे थे क्योंकि दोनो को एक दूसरे की बाहों में बेहद सुकून मिल रहा था।
जब सुबह के नौ बजे तक कई बार आवाज लगाने के बाद भी दोनो नहीं उठे तो दादी जी धीरे धीरे चलती हुई उपर की तरफ आने लगी। आज करीब दो साल के बाद दादी उपर अा रही थी क्योंकि एक तो जब से उसे पता चला था कि शादाब अा गया हैं वो अपने पोते की झलक पाने के लिए बेताब थी और दूसरी बात उसे भूख भी लग आई थी।
लाठी के सहारे चलती हुई आखिर कार दादी छत पर अा गई और शहनाज़ को आवाज लगाई तो कोई आवाज नहीं अाई और वो शहनाज़ के कमरे में घुस गई। दादी ने देखा कि कमरे में पूरा अंधेरा था इसलिए उसने बड़ी मुश्किल से ढूंढ़कर कमरे की लाइट का स्विच ऑन कर दिया तो उसे शादाब और शहनाज़ एक दूसरे से चिपके हुए सोते नजर आए।
दादी के होंठो पर स्माइल अा गई क्योंकि उसके दिल को बहुत सुकून मिला दोनो मा बेटे को ऐसे सोते देखकर। दादी जानती थी कि शहनाज़ कदम कदम पर अपनी ममता का गला घोटती अाई हैं इसलिए आज उसे अपने बेटे पर प्यार लुटाने का मौका मिला तो जी भर कर प्यार लुटा रही हैं। दादा आराम से वहीं बैठ गई और इन दोनों के चेहरे को प्यार से देखने लगी कि कितना सुकून उमड़ आया था शहनाज़ के चेहरे पर शादाब के अा जाने से।
थोड़ी देर के बाद शहनाज़ की आंखे खुल गई तो वो दादी को अपने सामने पाकर अंदर तक कांप उठी। उसके दिल ने जैसे धड़कना बंद कर दिया और माथे पर पसीना साफ उभर आया। वो एक झटके के साथ शादाब से थोड़ा अलग हो गई और दादी से बोली:”
” माफ करना अम्मी, मेरी नींद नहीं खुल पाई क्योंकि मुझे तेज नींद अा गई थी।
दादी:” कोई बात नहीं बेटी, मुझे पता चला कि शादाब जल्दी ही सुबह अा गया हैं तो इसे देखने के लिए चली अाई तो पता चला कि ये तो तेरे सीने से लगा हुआ सो रहा हैं।
शहनाज़ हकलाते हुए बोली:” अम्मी वो मैं मैं..
शहनाज़ और दादी की बात सुनकर शादाब भी उठ गया लेकिन अपनी आंखे बंद किए चुपचाप लेता रहा।
दादी शहनाज के पास अा गई और उसके माथा चूमते हुए बोली:” मैं सब समझती हूं बेटी, तू आज तक अपनी ममता का त्याग करती अाई हैं, जब शादाब आता हैं तो तेरी दुनिया में चार चांद लग जाते हैं। बेटी जब तक शादाब यहां हैं तू जी भर कर शादाब पर अपनी ममता लुटा मेरी बच्ची।
शहनाज़ समझ गई कि मामला उतना भी गंभीर नहीं हैं जितना वो समझ रही हैं इसलिए दादी के गले लग गई और बोली:”
” आप ठीक कहती हैं अम्मी, मैने सच में शादाब को कभी अच्छे से मा का प्यार दिया ही नहीं है।
दादी:” कोई बात नहीं बेटी, अब हम सबका लाडला अा गया हैं इसलिए तू जी भर कर शादाब पर अपना प्यार लुटा । लेकिन ध्यान रखना बेटी वो अब जवान हो गया है इसलिए अपनी मर्यादा का ध्यान रखना और अपने बेटे को खूब प्यार कर लेकिन तेरे आंचल पर कोई आंच ना आए इसका ध्यान रखना।
शहनाज़ का मुंह शर्म से लाल हो गया और वो बोली:”
” आप बेफिक्र रहे अम्मी, मै आपको शिकायत का मौका नहीं दूंगी और शादाब पर इतना प्यार लुटा दूंगी कि ये अपने आपको दुनिया का सबसे खुश नसीब बेटा समझेगा।
दादी:” चल ठीक हैं, जा अब चाय बना ला, वो नीचे इंतजार कर रहे हैं बहुत देर से।
शहनाज़ फुर्ती से किचेन में चली गई और बहुत बढ़िया चाय बनाई और एक कप दादी को दिया और दूसरा नीचे दादा जी को देने के लिए चल दी। दादा जी को चाय दी तो दादा जी चाय पीते हुए बोले:”
” शहनाज़ आज आंख नहीं खुली थी क्या बेटी सुबह ?
शहनाज़ अपनी गलती पर शर्मिंदा हो गई और बोली:”
” जी दादा जी, लेकिन मैं आगे से आपको गलती का कोई मौका नहीं दूंगी।
इतना कहकर शहनाज़ उपर की तरफ चल पड़ी। शादाब अपना बहाना खत्म करते हुए उठ गया और दादी को सामने देखकर खुश हो गया और उनसे लिपट गया।
शादाब:” दादी मेरी प्यारी दादी कैसी है आप ? ।
दादी:” बस ठीक हूं बेटे, तुझे देखकर अब बिल्कुल ठीक हो गई हूं शादाब बेटा।
शादाब :” दादी आप उपर कब अाई ?
दादी उसे पुचकारते हुए:” जब मेरा लाडला पोता अपनी मा शहनाज़ की बांहों में चैन की नींद सो रहा था।
शादाब भी शर्मा गया और बोला:”
” वो दादी मैं पूरी रात का थका हुआ था इसलिए जैसे ही अम्मी ने मुझे गले लगाया तो मुझे बहुत तेज नींद अा गई।
दादी:” बेटा मा की गोद में दुनिया की सबसे अच्छी नींद आती हैं
शादाब अपनी दादी की बातो पर स्माइल किया और वॉशरूम में घुस गया। दादी आराम से बैठी चाय पीती रहीं और फिर नीचे की तरफ जाने लगी तो उसके हाथ से लाठी छूट गई और वो धड़ाम से गिर पड़ी तो शहनाज़ दौड़ती हुई अाई और उसे उठाया।
शादाब भी अा चुका था इसलिए उसने दादी से पूछा:’
” चोट तो नहीं लगी दादी आपको ?
दादी को कुछ खास चोट नहीं अाई थी इसलिए स्माइल करते हुए बोली:” नहीं कुछ खास नहीं बेटा। ठीक हूं मैं।
शादाब अलमारी से क्रीम निकाल कर दादी के घुटनो पर मल देता हैं तो दादी को बड़ा आराम मिला और वो बोली:”
” बेटा मुझे नीचे छोड़ कर आजा, मैं अब चल नहीं सकती।
शादाब ने अपनी दादी को बांहों में उठा लिया और नीचे छोड़ने के लिए चल दिया।
शादाब अपनी दादी को बाहों में लिए उसे नीचे लेकर अा गया तो दादा जी उसे शादाब की गोद में देख कर मुस्करा दिए और बोले:”
” क्या हुआ सांस फूल गई क्या तुम्हारी ? मैंने तो तुम्हे पहले ही मना किया था उपर मत जाओ इस उम्र में दिक्कत होगी। अब करवा दी ना शादाब से कसरत
दादा जी की बात शादाब मुस्कुरा दिया और दादी जी की बेड पर लिटा दिया, दादी थोड़ा तुनक कर गुस्से से बोली:’
” आपको तो जब देखो मेरी टांग खींचने का बहाना चाहिए, देखिए मुझे चोट लगी है घुटने में
इतना कहकर दादी अपनी घुटना दादा जी को दिखाने लगी तो दादी जी बोले:”
” उफ्फ बड़ी चोट लगी हैं तुम्हे तो ठीक से निशान तक नहीं पड़ा,
दादी जी अपनी आंखे लाल करके गुस्से से तरेरती हुई बोली:”
” आपसे तो बात करना ही बेकार हैं, आप को मुझे परेशान करने का बहाना चाहिए।मुझे सच में दर्द हो रहा हैं।
दादा जी:” ओह शादाब बेटा मुझे दर्द वाली ट्यूब ला दे मैं तेरी दादी की मालिश कर दूंगा।
दादी दादी का प्यार देख कर खुश हो गई और बोली:”
” मालिश तो शादाब ने पहले से ही कर दी हैं। अब जरूरत नहीं हैं उसकी ।
दादा:” कोई बात नहीं बेटा, तुम फिर भी क्रीम ला देना मुझे उपर से ताकि अगर बीच में दर्द हो तो मैं मालिश कर सकू, अब इस उम्र मत तेरी दादी का ध्यान मैं नहीं रखूंगा तो भला कौन रखेगा।
दादी खुश हो गई और शादाब बोला;’ जी दादा जी मैं ला दूंगा, दादा जी कल ईद हैं तो मैं सोच रहा था कि आज शहर चला जाऊ और सबके लिए नए कपड़े लेते आऊ ताकि ईद पर सबके पास नए कपड़े हो।
दादा जी:” ठीक हैं बेटा, तुम चले जाओ और एक काम करना शहनाज़ को भी अपने साथ ले जाना ताकि वो अपनी पसंद से मेरे लिए कपडे ला सके, पिछली बार एक मेरे लिए बहुत अच्छे कपड़े लाई थी।
शादाब को तो जैसे बिना मांगे ही इच्छित वर मिल गया और वो बोला:” ठीक हैं दादा जी, जैसे आप ठीक लगे।
इतना कहकर शादाब उपर की तरफ चला गया और किचेन में दादा दादी के लिए खाना बना रही शहनाज़ को पीछे से अपनी बांहों में भर लिया तो शहनाज़ बिना पीछे की तरफ देखे ही मुस्कुरा दी और बोली:”
” क्या बात है बेटा आज बड़ा खुश नजर आ रहा है ?
शादाब:’ अम्मी वो दादा दादी ने आपको मेरे साथ शहर जाने की इजाज़त दे दी हैं।
शहनाज़ इतना सुनते ही खुशी से पलट गई और शादाब से कस कर लिपट गई और अपनी बांहे उसके गले में लपेट दी। शादाब उसके कान में फसफुसाया:”
‘ अम्मी आपको याद हैं दादी क्या बोलकर गई है ?
शहनाज़ उसकी कमर में हल्के हल्के मुक्के मारते हुए बोली:”
” मैं तो डर ही गई थी उन्हें अचानक से ऐसे देखकर, और तू भी मुझसे पूरी तरह से चिपका हुआ सो रहा था
शादाब उसकी कमर हल्के से सहलाते हुए बोला:”
” और आप तो मुझे ऐसे लिपटी हुई थी मानो सदियों के बाद कोई प्रेमिका अपने प्रेमी से मिली हो।
शहनाज़ उसकी आंखो में देखते हुए बोली:”
” तेरी तो एक पल की भी जुदाई सदियों सी लगती है शादाब।
शादाब:” मेरा भी यही हाल हैं शहनाज़, आज तो आपको दादी भी बोल गई कि अपने बेटे पर जी भर कर प्यार लुटाओ
शहनाज़ हल्का सा चौंक गई और बोली;” तुझे कैसे पता तू तो रहा था ना ?
शादाब:” अरे मेरी प्यारी अम्मी जब दादी अाई और आप बात कर रही थी तभी मै उठ गया था।
शहनाज़ उसकी तरफ आंखे निकालते हुए:’ अच्छा जब जाग रहा था तो मेरा पक्ष क्यों नहीं लिया तूने दादी के सामने ?
शादाब:’ अम्मी उसकी जरूरत ही कहां पड़ी, वो तो खुद ही आपको मुझे और ज्यादा प्यार करने के लिए बोल गई है।
शहनाज़ हल्की सी स्माइल देकर बोली:” लेकिन शायद तूने ध्यान नहीं दिया कि वो मुझे मर्यादा में रहकर प्यार करने के लिए भी हिदायत देकर गई हैं।
शादाब:” तो रहिए ना आप मर्यादा में ही मेरी अम्मी, मुझे तो बस मेरी शहनाज़ चाहिए।
शहनाज़ उसकी चाल समझ गई और उसका हाथ जोर से दबाते हुए बोली:” उफ्फ बातो में तो तुझसे कोई नहीं जीत सकता।
अच्छा खाना बन गया हैं तू दादी दादा को खिला दे और मैं शहर जाने के लिए तैयार हो जाती हूं।
शादाब दादा दादी के लिए खाना लेकर अा गया और शहनाज़ नहाने के लिए बाथरूम में घुस गई। शहनाज़ ने अपने सब कपडे उतार दिए और देखा कि उसकी चूत पर बाल उग आए थे और बालो में उसकी चूत छिप सी गई थी। शादाब के चले जाने के बाद शहनाज़ को चूत की सफाई की जरूरत ही नहीं पड़ी लेकिन आज एक जानती थी आज की आज उसके लिए सुहागरात से कम नहीं होने जा रही है इसलिए उसने अपनी अपनी चूत साफ करने के लिए क्रीम लगाकर छोड़ दिया और थोड़ी देर बाद उसकी चूत एक दम चिकनी हो गई । शहनाज़ ये देख कर मुस्करा उठी और कपडे पहन कर बाहर आ गई।
शादाब दादा दादी को खाना खिला चुका था इसलिए वो भी जल्दी ही उपर जाकर तैयार किया गया और थोड़ी देर बाद ही दोनो शहर की तरफ चल दिए।
दूसरी तरह आज रेहाना को जमानत मिल जानी लगभग तय थी और कोर्ट लगने में बस थोड़ा ही टाइम बचा हुआ था। शादाब और शहनाज़ रेहाना के घर से सामने से निकल रहे थे और दोनो आपस में खुश होकर बाते करते हुए जा रहे थे। काजल ये सब देख कर गुस्से से लाल हो गई और सोचने लगी कि बस हो जाओ कितना खुश होना हैं तुम दोनो को क्योंकि आज की रात तुम्हारी ज़िन्दगी की आखिरी रात होगी।
लेकिन होनी को कौन टाल पाया और आज वकील एसोसिएशन ने अपनी मांगो को लेकर हड़ताल कर दी और मोहन सिंह को इसमें शामिल होना पड़ा जिसके चलते आज कोर्ट की कार्यवाही नहीं हो पाई और काजल और रेहाना के सारे अरमान धरे के धरे रह गए।
काजल:” रेहाना तुम बस एक बार कहो मैं आज ही उसके सारे खानदान को तबाह कर दूंगी।
रेहाना:” तुझसे ज्यादा आग तो मेरे अंदर सुलग रही हैं लेकिन दो दिन और जी लेने दे उन्हें। उसके बाद मैं अच्छे से उस शादाब को सबक सिखा दूंगी कि रेहाना से उलझने का अंजाम क्या होता हैं।
काजल गुस्से से अपनी मुट्ठी दीवार में मारते हुए बोली:”
“ये साली स्ट्राइक भी आज ही होनी थी अब तो कमीने ईद पर कल खुशियां मना रहे होंगे और हम दोनों बहने एक दूसरे से मिल भी नही पायेगी।
रेहाना के होंठो पर एक ज़हरीली मुस्कान फैल गई और बोली:’
“मनाने दे काजल उन्हें ईद की खुशियां क्योंकी ये उन बेचारों की ज़िन्दगी की आखिरी ईद होगी।
इतना कहकर रेहाना जोर जोर से ठहाका लगाकर हंसने लगी तो काजल के होंठो पर खूंखार स्माइल अा गई और वो बोली उसकी हंसी में शामिल हों गई। जेल में बंद दूसरे लोग उन्हें बड़ी हैरानी से देख रहे थे।
दूसरी तरफ शादाब और शहनाज़ शहर पहुंच गए और शादाब ने बड़े मॉल के सामने गाड़ी रोक दी और दोनो मा बेटे अंदर घुस गए। एस्केलेटर देखकर शहनाज़ मुस्कुरा दी और शादाब का हाथ पकड़ते हुए उस पर सवार हो गई तो दोनो एक साथ मुस्कुरा दिए।
शहनाज़ ने अपनी पसंद से सबसे पहले दादा दादी जी के लिए बेहतरीन कपडे खरीद लिए और उसके बाद अब बारी थी शहनाज़ के लिए कपडे खरीदने की तो शादाब उसे आज एक लेटेस्ट फैशन शॉप में ले गया तो सेल्स गर्ल ने एक स्माइल के साथ उनका स्वागत किया !
गर्ल:” आइए मैडम सर, आप यहां आए तब के सबसे खूबसूरत कपल हैं।
शहनाज़ ने शादाब की तरफ देखा तो दोनो सेल्स गर्ल की बात सुनकर मुस्करा दिए। शादाब बोला:”
” मैडम मुझे मेरी पत्नी के लिए कुछ लेटेस्ट फैशन की लिंगरी दिखाइए ब्लैक रंग में !!
सेल्स गर्ल ने देखते हुए देखते उनके सामने एक से बढ़कर एक काले रंग की लिंगरी की लाइन लगा दी और शादाब उन्हें देखने लगा तो शहनाज़ शर्मा गई क्योंकि ये सभी ड्रेस बहुत छोटी थी और उसके शरीर को ढक पाने में सक्षम नहीं थी।
शादाब ने तीन सबसे खूबसूरत लिंगरी शहनाज़ के लिए पसंद कर ली तो शहनाज़ मुंह नीचे किए हुए ही बोली:”
” शादाब, ये तो बहुत ज्यादा छोटी हैं कुछ भी नहीं छुपा पायेगी।
शादाब:” ओह कौन कमबख्त चाहता हूं आपके खूबसूरत अंग इसमें छुपे, बहुत अच्छी लगेगी आपको ये शहनाज़।
शाहनाज अपने बेटे की ज़िद के आगे ज्यादा कुछ नहीं कर पाई और ना चाहते हुए भी वो छोटी ड्रेस खरीद ली। उसके बाद दोनो ने शादाब के लिए कपडे खरीदे और कोई 3 बजे के आस पास दोनो घर की तरफ लौट पड़े।
रास्ते में से शहनाज़ ने शादाब को बहुत सारे फल और खजूर खरीदने के लिए कहा तो शादाब ने एक बहुत बड़ी मात्रा में फल खरीद लिए। कोई 5 बजे तक कोई मा बेटे घर पहुंच गए और सभी फलो को नीचे ही रख दिया। शहनाज ने दादा दादी को कपडे दिखाए और दादा दादी दोनो बहुत खुश हुए।
शहनाज़:” बेटा शादाब तुम अपने दादा दादी के साथ मिलकर ये फल गांव में लोगो में बांट दो क्योंकि हमारे यहां चांद रात वाले दिन लोगो में रोजा इफ्तार के लिए फल बांटने की परंपरा हैं।
शादाब:” जी अम्मी जैसा आप कहें।
उसके बाद शहनाज़ उपर चली गई और खाना बनाने की तैयारी में लग गई जबकि शादाब ने अपने दादा दादी के साथ मिलकर फलों के पैकेट तैयार किए और लोगो में बांटने के लिए चला गया। गाड़ी में शादाब के दादा जी बैठे हुए थे और शादाब उनकी सलाह से सभी काम कर रहा था। जल्दी ही लोगो में फल बांटकर घर की तरफ चल पड़े और घर में शहनाज़ खाना बन चुकी थी और सभी खाना नीचे ही टेबल पर लगा हुआ था। दादा दादी शहनाज़ शादाब सब रोजे खोलने के समय का इंतजार कर रहे थे।
आखिर कार इंतजार की घड़ियां खत्म हुई और जैसे ही ऐलान हुआ तो शादाब ने अपने दादा दादी के सामने ही अपने हाथ से खजूर उठाकर शहनाज़ की तरफ बढ़ा दिया तो शहनाज़ एक पल के लिए डर सी गई।
शादाब:” मेरी प्यारी अम्मी आज आपके बेटे के हाथ से रोजा खोलेगी। लो अम्मी ।
शहनाज़ ने हालात को समझते हुए धीरे से अपना मुंह खोल दिया और खजूर के साथ अपना रोजा खोल दिया।
शहनाज़ ने भी एक खजूर हाथ में लिया और शादाब की तरफ बढ़ा दिया तो शादाब ने भी अपना मुंह खोलते हुए रोजा खोल दिया।
दादा दादी दोनो मा बेटे का ये प्यार देख कर गदगद हो उठे और दादा जी बोले:”
” अल्लाह ये मेरी ये ही दुआ रहेगी की तुम दोनो मा बेटे के प्यार को किसी कि नजर ना लगे।
शादाब और शहनाज दोनो खुशी से झूम उठे और शादाब ने दादा जी को खजूर खिलाया तो शहनाज ने दादी को अपने हाथ से खजूर खिला दिया। उसके बाद सारा परिवार साथ बैठ कर खाना खाने लगा।
ऐसा बहुत दोनो के बाद हुआ कि सारा परिवार एक साथ बैठकर खाना खा रहा था और सभी बहुत खुश थे। बीच बीच में नजर बचाकर शहनाज़ शादाब की तरफ जीभ निकाल रही थी मानो उसे किसी छोटे बच्चे की तरह चिडा रही हो।
जल्दी ही सबने खाना खा लिया और दादा जी बोले:”
” बेटा शादाब मैं पहले तो हर साल ईद का चांद देखता था लेकिन अब मुझे दूर का कुछ दिखाईं नहीं देता इसलिए तुम चांद देखना, ईद का चांद देखना बहुत अच्छा माना जाता है।
शादाब अपने की तरफ देखते हुए उसके खूबसूरत चेहरे को एक बार अच्छे से देखता हैं और दादा जी से बोला:”
” जी दादा जी, मैं तो आज जी भरकर चांद का दीदार करूंगा। सच कहूं तो मैं तो आया हूं चांद देखने के लिए हूं।
शहनाज़ शादाब की बाते सुनकर बुरी तरह से झेंप गई और अपना मुंह शर्म से नीचे कर लिया। दादा जी बोले:”
” हान बेटा, अब तो बस तू ही हैं मेरे सारे सपने पूरे करने के लिए, तुझसे मुझे बहुत उम्मीदें हैं बेटा।
शहनाज़ बरतन उठाकर उपर की तरफ चल पड़ी ।शादाब अपने दादा जी का हाथ अपने हाथ में लेकर बोला:”
” आप फिक्र ना करे दादा जी, मैं आपके सभी सपने पूरे करूंगा। आप बस मुझे बताते जाइए।
इसी बीच शहनाज़ उपर सारे बर्तन किचेन में रख कर अा गई थी और दादा जी शादाब से बोले:”
” शादाब बेटा तेरी शादी में तेरी पसंद की लड़की से करूंगा । कोई हो नजर में तो बता देना।
शादाब ने आपके नजरे शहनाज़ पर गडा दी मानो उससे पूछ रहा हो कि दादा जी को बता दू क्या तो शहनाज़ ने आंखो ही आंखो में उसे चुप रहने का इशारा कर दिया तो शादाब बोला:”
” अभी तो नहीं दादा जी, अभी तो मैं बस पढ़ाई पर ध्यान देना चाहता हूं।
शादाब की बात सुनकर शहनाज़ की हंसी नहीं रुक पाई और वो जोर से हंस पड़ी तो दादा जी हैरान हो गए और बोले:”
” क्या हुआ बेटी शहनाज़? तुम ऐसे क्यों हंस पड़ी ?
शहनाज़ से कोई जवाब देते नहीं बना तो शादाब बहाना बनाते हुए बोला: दर असल दादा जी जब आप शादी की बात कर रहे थे तो शादी के नाम से मैं शर्मा गया था तो मेरी हालात देखकर अम्मी हंस पड़ी।
शहनाज़ ने राहत की सांस ली और तभी दादी बोल पड़ी:”
” शर्माएगा क्यों नहीं आखिर औलाद तो तू भी शहनाज़ की ही हैं, जैसे तेरी मा शर्म की गुड़िया तो तू कौन सा उससे कम है।
दादी की बात सुनकर सभी जोर जोर से हंस पड़े और शहनाज़ शर्म के मारे एक बार फिर से लजा गई।
शादाब:” अच्छा दादा जी मैं उपर छत पर जाकर चांद देखता हूं। आओ अम्मी आप भी चलो
शादाब और शहनाज़ दोनो जैसे ही सीढ़ियों पर चढ़े तो शादाब ने एक झटके के साथ शहनाज़ को अपनी बांहों में भर लिया और शहनाज़ ने भी शादाब के गले में अपनी बांहे डाल दी और दोनो का बेटे के दूसरे की आंखो में देखने लगे।
शहनाज़:” क्या देख रहा हैं मेरा राजा बेटा?
शादाब:” अपने चांद को देख रहा हूं अम्मी, कितनी दिनों के बाद आपको देखा हैं इतने करीब से
इतना कहकर शादाब ने अपने होंठ शहनाज के गाल की तरफ बढ़ा दिए तो शहनाज़ ने बीच में अपना हाथ अड़ा दिया और बोली:” पहले चांद दिखने दे मेरे राजा, उससे पहले कुछ नहीं ।
शादाब:” उफ्फ अम्मी ये तो चीटिंग है आपको भी पता है कि कल ईद हैं।
शहनाज़ उसके कान खींचती हुई बोली:” बुद्धू कहीं का, जब तक चांद नहीं दिखता ईद कैसे मनाई जाती हैं मेरे बच्चे ?
शादाब सब समझ गया और शहनाज़ को अपने गोद में लिए हुए ही छत पर अा गया और दोनो मा बेटे खड़े खिड़की से आसमान की तरफ देखने लगे। शहनाज़ अभी तक शादाब की बांहों में ही थी। शादाब आसमान की तरफ कम और शहनाज़ के चेहरे को ज्यादा देख रहा था। ये सब महसूस करके शहनाज अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रही थी।
तभी शहनाज़ का चेहरा खुशी से भर उठा और उसने अपना मुंह आगे बढ़ा कर शादाब का गाल चूम लिया। शादाब खुशी से झूम उठा और बोला:”
” अम्मी आपको इतनी जल्दी चांद कैसे दिख गया, मुझे तो नहीं दिखा ?
शहनाज़ उसका गाल पकड़ कर खींचते हुए बोली:” तुम चांद देखोगे तभी दिखेगा ना शादाब,
वो देखो ठीक मेरी उंगली के सामने।
शहनाज़ ने चांद की सीध में अपनी उंगली कर दी तो शादाब को भी चांद नजर अा गया।
चांद को देखते ही शादाब खुशी से झूम उठा और शहनाज़ की आंखो में देखते हुए अपने होंठ आगे बढ़ा दिए तो शहनाज़ ने भी अपने होंठ शादाब के होंठो पर रख दिए और उसके होठ चूसने लगीं। शादाब पूरी तरह से बहक गया और शहनाज़ के होंठो को जोर जोर से चूसने लगा। तभी शहनाज़ ने अपने दोनो हाथ शादाब की गर्दन पर रख दिया और अपना मुंह खोलते हुए अपनी जीभ की दस्तक शादाब के होंठो पर दी तो शादाब ने अपना मुंह खोल दिया और शहनाज़ की जीभ शादाब के मुंह में घुस गई। शादाब से बर्दाश्त नहीं हुआ और शहनाज़ को वहीं दीवार से लगा दिया और दोनो एक दूसरे की जीभ चूसने लगे।
उनकी ये किस बहुत लंबी चली और जैसे ही दोनो की सांसे उखड़ने लगी तो मजबूरन उन्हें किस तोड़ना पड़ा और शादाब शहनाज़ को गोद में लिए हुए ही कमरे में अा गया।
शहनाज़ ने शादाब को बेड पर लिटा दिया और खुद उसके उपर लेट गया। शहनाज़ ने अपने दोनो हाथ उसकी कमर पर कस दिए। दोनो ऐसे ही एक दूसरे की धड़कन सुनते रहे।
शहनाज़:” शादाब तुम जाओ अपने दादा जी को बताओ कि चांद दिख गया है। मैं तब तक नहा लेती हूं
शादाब:” मैं अभी बताकर अाया, दोनो साथ में ही नहाएंगे।
शादाब तेजी से दौड़ता हुआ नीचे की तरफ आया और दादा दादी जी बोला:”
” दादा जी चांद दिख गया हैं, मुबारक हो आपको, ईद कल होगी।
दादा दादी दोनो मुस्कुरा दिए और शादाब फिर से उपर की तरफ दौड़ पड़ा तो उसकी खुशी देखकर दादा दादी दोनो खुश हुए। शादाब के आने से पहले ही शहनाज़ अपने कपड़े लेकर बाथरूम में नहाने घुस गई थी।
जब शहनाज़ कमरे में नहीं मिली तो शादाब को बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ सुनाई दी तो वो शादाब तेजी से बाथरूम का दरवाजा पीटने लगा
शादाब:” अम्मी प्लीज़ दरवाजा खोल दीजिए, मुझे भी आपके साथ नहाना हैं।
शहनाज़ अंदर ही अंदर मुस्कुरा उठी और बोली:”
” अरे शादाब मैं बताना भूल गई कि बाहर शीर ( खीर की एक स्पेशल डिश) बनाने का सामान रखा हैं, इतना मैं नहाऊ तू उसे कूट दे ना मेरे राजा बेटा।
शादाब उदास मन से बोला:” ठीक हैं अम्मी, जैसे आपको ठीक लगे।
शहनाज़ उसकी मरी हुई आवाज से समझ गई कि शादाब उदास हैं इसलिए अपने कपडे उतारते हुए बोली:” उदास मत हो मेरे राजा, बस नहाने दे मुझे उसके बाद तेरी अम्मी आज तुझे इतना खुश कर देगी जो तूने सपने में भी नहीं सोचा होगा!
शादाब उसे छेड़ते हुए बोला:” क्या सच में अम्मी ? आपको मेरा लंड चूसना पड़ेगा फिर तो
शहनाज़ शर्म के मारे बाथरूम के अन्दर ही लजा गई और बोली:’
” चुप कर कमीना का, कुछ भी बोल देता हैं जा अब काम कर।
शादाब स्माइल करता हुआ किचेन में अा गया और गोला, छुवारा, काजू, बादाम, किशमिश, चिरोंजी, पिस्ता, अखरोट सारा सामान औखली में भर लिया और कूटने लगा और शादाब ने गैस पर दूध रख दिया। थोड़ी देर बाद ही तभी उसके दिमाग में एक नया विचार आया और उसने अपने जेब से वो टैबलेट निकाल ली जो रेशमा ने इसे खिलाई थी और आज शादाब ने उसे बाजार से खरीद लिया था। शादाब ने देखा कि दूध गर्म हो गया था इसलिए उसने काफी सारा कूटा हुआ माल औखली से निकाला और दूध के साथ खाने लगा। लास्ट में उसने धड़कते दिल के साथ वो गोली भी खा ली और आराम से औखली में मूसल मारने लगा।
दूसरी तरफ शहनाज़ पूरी तरह से नंगी हो गई थी और खुद ही अपनी चूचियों को प्यार से सहला रही थी। उसकी चूत पर एक भी बाल नही था क्योंकि वो सुबह ही साफ कर चुकी थी लेकिन फिर भी उसका मन नहीं माना और उसने फिर से बाल साफ़ करने वाली क्रीम को चूत के चारो तरफ लगा दिया। थोड़ी देर बाद शहनाज़ ने अपनी चूत को पानी से धोना शुरू कर दिया
चूत पर शाहनाज की उंगलियां जैसे जादू कर रही थी और उस पर उपर से ठंडे ठंडे पानी की फुहार जैसे शहनाज़ को पूरी तरह से तड़पा रही थी। चूंकि किचेन बाथरूम से ज्यादा दूर नहीं था इसलिए शादाब के मसाला कूटने की ठक ठक आवाज अा रही थी जिससे शहनाज़ को लग रहा था कि मूसल औखली को नहीं बल्कि उसकी चूत को कूट रहा है। शहनाज़ पूरी तरह से मस्त हो गई और उसने शॉवर का पाइप खींच लिया और खड़ी होकर उसे अपनी चूत पर मारने लगी। एक हाथ से वो अपनी चूत को हल्का हल्का खोल रही थी जबकि दूसरे हाथ से वो अपनी पानी का शॉवर अपनी चूत में अंदर तक मार रही थी।
शादाब ने जो गोली खाई थी अब उसका असर दिख रहा था और शादाब की आंखे हल्की हल्की लाल होनी शुरू हो गई थी और शादाब को ऐसा लग रहा था मानो उसके सारे शरीर का खून अब उसके लंड में दौड़ रहा है जिससे लंड आज एक विकराल रूप धारण कर चुका था। शादाब को अब औखली की जगह शहनाज़ की चूत नजर अा रही थी और उसने अपना दम दिखाना शुरू कर दिया तो शहनाज़ औखली से निकलती आवाज से बाथरूम के अन्दर ही कांप उठी और वो समझ गई कि आज शादाब औखली को उसकी चूत समझ कर मसाला कूट रहा है कहीं ऐसा ना हो वो औखली की तली निकाल दे इसलिए शहनाज़ जल्दी से नहाकर अपने जिस्म पर सिर्फ एक टॉवल लपेटकर किचेन की तरफ भागी और देखा कि शादाब पूरी तरह से पसीने में लथपथ था और जोर जोर से मूसल मार रहा था और तभी शादाब की नजर शहनाज़ पर पड़ी और उसने शहनाज़ की तरफ देखते हुए मूसल को पूरा बाहर निकाला और शहनाज़ की चूत पर टॉवेल के उपर से ही नजर गड़ाते पूरी ताकत से मूसल को औखली में मारा और जोर से सिसक उठा
” आह शहनाज़ मेरी अम्मी तेरी चूत में तेरे शादाब का लोला।
इस जोरदार वार से औखली की तली निकल कर दूर जा गिरी और शहनाज़ के मुंह से डर के मारे एक घुटी घुटी सी चींख निकल पड़ी और उसके हाथ से टॉवेल नीचे गिर गया जिससे वो पूरी तरह से नंगी हो गई । शादाब उसका नंगा जिस्म देखकर अपनी पलके तक झपकाना भूल गया । डर और शर्म के मारे शहनाज़ बिना अपना टॉवेल उठाए ही अपने कमरे में भाग गई।
शहनाज तेजी से दौड़ती हुई अपने कमरे मे घुस गई, वो अभी नहा कर निकली थी लेकिन अपने बेटे शादाब का ऐसा रूप देख कर पसीने पसीने हो गई। उसने गेट को बंद किया और आँखै बंद करके लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी। पता नही क्या खाता रहता है ये लड़का एकदम घोड़े जैसा हो गया है। उसने धीरें से एक हाथ अपनी चूत पर रख दिया और उसकी सिसकी निकल पड़ी।
आह मेरी चूत तो तू गई काम से आज, उफ्फ्फ
शादाब अपनी मा शहनाज के इस तरह डरकर भाग जाने से जोश मे आ गया और शहनाज का तौलिया लेकर उसे देने के लिए चल पड़ा। जैसे ही शादाब ने गेट को बजाया तो शहनाज जैसे वापिस होश मे आई और बोली:”
” क्या हुआ अब, क्यों गेट बजा रहे हो मेरा?
शादाब बड़ी मासूमियत से बोला:’
” अम्मी मेरी जान आपका तौलिया देने आया था मैं, किचन मे ही खुलकर गिर गया था ना। आप डर क्यों गई थी अम्मी?
शहनाज के लबो पर स्माइल आ गई और बोली:’ कमीने मैं तेरी ताकत देख कर डर गई थी, एक महीना दूर रहकर तू तो बहुत तगड़ा हो गया हैं मेरे राजा।
शादाब अपने खड़े हुए लंड को पेंट के ऊपर से ही सहलाते हुए बोला:” हाय मेरी शहनाज अभी से डर गई, अभी तो कुछ किया भी नही मैंने।
शहनाज अपने बेटे की बात सुनकर अंदर तक काँप उठी और बोली:” जो किया वो क्या कम था, अब क्या तू उस औखली के जैसे मेरी भी तली निकालना चाहता है ।
शादाब का लंड तो जैसे पूरे जोश मे आ गया और झटके पर झटके मारने लगा। शादाब बोला:’ आज तो देखती जाना मेरी जान क्या क्या निकाल दूंगा तेरा!!
शहनाज:” उफ्फ्फ तू ना बड़ा शैतान हो गया है, जा पहले नहा ले देख कितना पसीना आया हुआ है तुझे।
शादाब :” अम्मी वो मैं आपका तौलिया देने आया था।
शहनाज :” जा आज अपनी मा शहनाज के तौलिये से ही नहा ले मेरे राजा,।
शादाब:” ठीक हैं अम्मी, मै अभी आया बस आज जल्दी से तैयार हो जाओ। आज मैंने आपके लिए जो ड्रेस खरीदी थी वो आप पहन लेना।
इतना कहकर शादाब बाथरूम मे घुस गया और नहाने लगा। शहनाज ने अपने आपको सजाना शुरू कर दिया और सबसे पहले अपने जिस्म पर अपने बेटे का पसंदीदा परफ्यूम छिडक दिया और फिर अपनी आँखो मे गहरा काला काजल लगाया, उसके बाद अपना मैकअप बॉक्स खोल कर अपने चांद से खूबसूरत चेहरे को और खूबसूरत बनाने लगी। उसने आज अपने होंठो पर बिल्कुल गहरे लाल रंग की लिपिस्टिक लगाई और पूरी तरह से सजकर तैयार हो गई। उसके खुले बाल उसे और ज्यादा मादक बना रहे थे। शहनाज ने धड़कते दिल के साथ ही शॉर्ट ड्रेस उठायी और उसे पहन लिया।
शहनाज आईने के सामने खड़ी हो गई तो उसने देखा कि ये लिंगरी जैसी ड्रेस उसकी चूचियो को ठीक से नही ढक पा रही थी जिससे उसकी आधे से ज्यादा चूचिया बाहर झांक रही थी मानो आजाद होने के लिए फड़फड़ा रही हो। शहनाज की नजर उसकी चूत पर पड़ी जिसके होंठ आधे से ज्याद बाहर झांक रहे थे। कपड़े की एक पतली सी लकीर थी बस चूत पर जो चूत को ठीक से नही ढक पा रही थी और पूरी तरह से गीली हो चुकी चूत से हल्का हल्का रस बहकर बाहर जांघो तक आ रहा था। अपने आप को इस रूप मे देख कर शहनाज का रोम रोम सुलग उठा और जिस्म मे एक आग सी भर गई और वो पलट गई। उसके पलटते की उसकी गांड उसे नजर आ गई जिसमे लिंगरी की पतली सी एक पट्टी अंदर घुसी हुई थी और लगभग पूरी गांड नंगी थी।
शहनाज की आँखे लाल सुर्ख होकर दहकने लगी और उसने एक बार फिर से परफ्यूम का डिब्बा उठाया और अपनी चूत पर टिका कर जब तक छिड़कती चली गई जब तक कि डिब्बा खाली नही हो गया। शहनाज की चूत आज पूरी तरह से महक रही थी मानो शहनाज भी आज की रात अपनी पिछले एक महीने की प्यास बुझा लेना चाहती थी।
उधर शादाब ने अपने लंड के सब बाल साफ कर दिये और उसका लंड जड़ तक बिल्कुल साफ नजर आने लगा जिससे वो और ज्यादा लम्बा लग रहा था। शादाब आज शहनाज से अपना लंड चुसवाना चाहता था इसलिए लंड को बहुत अच्छे से रगड़ रगड़ कर साफ किया और नहाने मे जुट गया। शहनाज ने नाइट बल्ब को छोड़ कर सब बल्ब बंद कर दिये और अपने बेटे का इंतजार करने लगी तभी नीचे से दादा जी की आवाज सुनाई पड़ी।
” शादाब अरे बेटा शादाब!!
शहनाज ने एक सूट उठाया और पहन कर बाहर आ गई और बोली:” जी अब्बा क्या हुआ? वो नहा रहा हैं अभी।
दादा जी:” बेटी वो चाय नही पिलाई तुमने आज हमे।
शहनाज को अपनी गलती का एहसास हुआ कि चुदने की ख़ुशी मे उसने चाय नही बनाई।
शहनाज:” जी दादा जी अभी लाई
इतना बोलकर वो किचन मे घुस गई और चाय बनाने लगी। शादाब नहा कर आ चुका था और अपने जिस्म पर सिर्फ एक टावल लपेटा हुआ था। शहनाज को सूट सलवार मे देख कर उसका मूड पूरी तरह से खराब हो गया तो शहनाज सब समझ गई और बोली:”
” शादाब जाओ नीचे चाय दे आओ बेटा ।
शादाब ने जल्दी से अपने कपड़े पहने और चाय लेकर नीचे की तरफ चल दिया। दादा दादी को उसने चाय दी और दोनो पीने लगे।
दादा :” शादाब थक गया होगा बेटा, पूरे दिन इतनी भाग दौड़ करी हैं आज तुमने।
शादाब तो जैसे खुद ऊपर जाने के लिए मौक़े की तलाश मे था और मौका उसे दादा जी ने खुद दे दिया तो शादाब बोला:”
” जी दादा जी, बहुत थक गया हु आज तो।
दादी:” जाओ बेटा, आराम कर लो तुम अब।
शादाब उन्हे सलाम बोलकर खुशी खुशी ऊपर की तरफ चल दिया और गेट मे घुसते ही सबसे पहले उसने सीढीयो का पहला गेट बंद कर दिया और जैसे ही छत पर गया तो सीढीयो का ऊपर वाला गेट भी बंद कर दिया। शादाब का लंड आज पूरे उफान पर था।
शहनाज एक हल्के लाल रंग का सूट सलवार पहने शादाब का इंतजार कर रही थी। जैसे ही शादाब कमरे मे घुसा तो शहनाज ने उसे स्माइल दी।शहनाज बहुत खूबसूरत लग रही थी
इस ड्रेस में शहनाज़ की चूचियां पूरी तरह से उभर रही थी लेकिन फिर भी शादाब का मुह उतर गया और उसने शहनाज को एक फीकी सी स्माइल दी तो शहनाज चलती हुई उसके पास आई और ठीक उसके सामने खड़ी हो गई। शहनाज के जिस्म से उठती हुई परफ्यूम की मादक गंध शादाब के होश उड़ाने लगी और उसकी आँख मे फिर से लाली तैरने लगी।
शहनाज ने अपने हाथ से उसका मुह ऊपर किया और उसकी आँख मे देखते हुए बोली:”
” लगता हैं मेरी जान मुझसे नाराज़ हैं, क्या हुआ मेरे राजा कुछ तो बोल ?
शादाब उदास लहजे में बोला:”
” अम्मी मुझे लगा कि आप मेरे लिए आज वो ड्रेस पहन लेगी जो हमने आज दिन में आपके लिए खरीदी थी।
शहनाज़ ने शादाब का मुंह उपर उठाया और उसकी आंखो में देखते हुए बोली:_
” अच्छा तो ये बात है चल जल्दी से अपनी आँखे बंद कर अभी ख़ुश कर देती हु मेरे राजा।
शादाब ने जल्दी से अपनी आँख बंद कर ली और शहनाज ने अपनी आँख बंद करके अपना सूट सलवार उतार दिया।
अब शहनाज की पीठ शादाब की तरफ थी । उसने धीरे से शादाब के कान में उसे आँखे खोलने को कहा तो शादाब ने जैसे ही अपनी आँखे खोली तो उसे शहनाज उसी लिंगरी मे नजर आई जो उसने आज खरीदी थी।
लिंगरी की पतली सी पट्टी उसकी गांड मे पूरी तरह से धंसी हुई थी और उसकी गांड के दोनों उभार साफ नंगे नजर आ रहे थे। उसकी गोरी चिकनी कमर पर फैले उसके काले बाल उसे और ज्यादा सेक्सी बना रहे थे।
शादाब ये सब देख कर अपने होश खो बैठा और अपने जिस्म से अपने कपड़े उतार कर फ़ेंक दिये। अब उसके जिस्म पर सिर्फ एक अंडर वियर था जिसमे लंड बड़ी मुश्किल से समाया हुआ था।
शादाब:” उफ् क्या लग रही हो शहनाज तुम, जान ही ले लोगी क्या आज? बस अब पलट जाओ मेरी जान.!
शहनाज की साँस पूरी तरह से उखड़ चुकी थी और चूचिया ज्वार भाटे की तरह उछल रही थी। शहनाज का चेहरा गर्म से लाल हो गया था और उसका पूरा जिस्म मस्ती से काँप रहा था। शहनाज अपने जिस्म की सारी ताकत समेट कर पलट गई और शादाब तो जैसे शहनाज का ये रूप देख कर अपनी पलके तक झपकाना भूल गया।
शहनाज इस ड्रेस में स्वर्ग से उतरी किसी अप्सरा से कम नही लग रही थी। बोलती हुई आँखे, रस टपकाते हुए होंठ, लम्बी गर्दन, दोनों कंधे बिल्कुल नंगे, बिखरे हुए बाल, गोरी गोरी चूचियां आधे से ज्यादा बाहर , एकदम पूरी तरह से भरे हुए नंगे कूल्हे। गुलाबी रंगत लिए आधे से ज्यादा बाहर झांक रहे चूत के होंठ। चूत से निकले रस से उसकी जांघे चिकनी होकर चमक रही थी।
शादाब जैसे किसी यंत्रवत मशीन की तरह आगे बढ़ा और शहनाज की टांगो के बीच में बैठते हुए उसकी चूत से निकले रस को जीभ निकाल कर चाट लिया।
शहनाज के मुह से एक मस्ती भरी सिसकी निकल पड़ी और उसका मुह मस्ती से खुलता चला गया
” आह मेरी जान, बेड पर ले चलो अपनी शहनाज को मेरे राजा।
शहनाज को शादाब ने किसी गुड़िया की तरह उठा लिया क्योंकि रोजे रखने और एक्सरसाइज की वजह से उसका जिस्म बिल्कुल छरहरा बन गया था। शहनाज शादाब से कसकर लिपट गई और उसने खुले हुए गेट की तरफ इशारा किया तो शादाब उसे गोद में लिए हुए गेट पर गया तो शहनाज ने गेट को बंद कर दिया और उस पर एक मोटा पर्दा डाल दिया। उसके बाद जैसे ही कमरे की सभी खिड़किया बंद हुई तो शादाब ने शहनाज को जैसे ही बेड पर लिटाया तो शहनाज ने उसे अपने ऊपर खींच लिया और अपने होंठ शादाब के होंठो पर रख दिये और चुसने लगी। शादाब एक भूखे भेड़िये की तरह शहनाज के होंठो पर टूट पड़ा। शहनाज की चुचिया शादाब के सीने में घुसी जा रही थी और लंड तनाव के कारण अंडर वियर के होल से अपने आप बाहर निकल आया था और शहनाज की चूत पर रगड़ खा रहा था।
शादाब ने अपनी जीभ शहनाज के मुह में घुसा दी तो शहनाज उसकी जीभ को अपनी जीभ से चूसने लगी। शादाब अपनी मा के गोरे कंधो को जोर जोर से मसल रहा था। लंड के हल्के हल्के धक्के शहनाज की चूत पे पड़ रहे थे जिससे शहनाज की चूत पूरी तरह से भीगती जा रही थी।
किस करते करते ही शादाब ने शहनाज की लिंगरी को ऊपर की तरफ उठा दिया और शहनाज ने बिना कोई विरोध किए खुशी खुशी अपनी दोनों बाँहे ऊपर उठा दी और शादाब ने अपनी माँ को पूरी तरह से नंगा कर दिया।
नंगी होते ही उसकी चूचिया उछल कर बाहर आ गई और शादाब उन्हे देखने लगा तो शहनाज एकदम से शर्मा गई और लिंगरी को उठा कर अपनी चूचियो और चूत को ढक लिया।
शहनाज की नशीली आँखे, खूबसूरत चेहरे पर बिखरे हुए काले बाल, दूध सा गोरा जिस्म, सेब के आकार की बड़ी बड़ी ठोस चूचिया, जैसे ही शाहनाज ने शादाब को स्माइल दी तो शादाब ने एक झटके के साथ उसके हाथ से ड्रेस छीन कर फ़ेंक दी तो शहनाज के मुह से एक मस्ती भरी आह निकल गई और जैसे ही शादाब की नजर उसके नंगे जिस्म पर पडी तो वो शर्म के मारे पलट गई जिससे उसकी नंगी उभरी हुई गांड शादाब की आँखो के आगे आ गई।
शादाब ने उसकी नंगी गांड को हाथो में भर लिया और जोर से मसलते हुए बोला:”
” आह शहनाज मेरी अम्मी तेरी गांड कितनी बड़ी हैं।
गांड जोर से रगडे जाने की वजह से शहनाज के मुह से एक जोरदार आह निकल गई और शहनाज एक बार फिर से पलट गई और अपने दोनो हाथ अपनी चूचियो पर रख लिए और शादाब की तरफ जीभ निकाल दी तो अपनी नजरे उसकी चूत पर ले गया। शहनाज ने उसे अपनी चूत की एक झलक दिखा कर अपनी टांगो को बंद कर दिया और शादाब को एक बहुत ही कामुक स्माइल दी ।
शादाब ने एक झटके के साथ अपना अंडर वियर उतार उतार फेंका और पूरी तरह से नंगा होकर बेड पर चढ़ गया। शहनाज की नजर जैसे ही लंड पर पड़ी तो लंड उसे आज बिल्कुल चिकना साफ होने के कारण ज्यादा लम्बा नजर आया और लंड इतना टाइट हो चुका था कि एक एक नस उभर कर साफ दिख रही थी। शहनाज के चेहरे के रंग बदलने लगे। शादाब सब समझ और उसके कान में धीरें से बोला:”
” शहनाज आज तेरी चूत की तली भी निकाल देगा तेरे बेटे का लंड मेरी मा, तेरी आँख मिचोली बंद अब तू मेरा दम देख।
इतना कहकर शादाब ने शहनाज के दोनों हाथो को जोर से एक तरफ करके अपने एक हाथ मे पकड़ लिया और दूसरे हाथ मे उसकी चूची को भर लिया और जोर जोर से दबाने लगा, शहनाज को अपनी चूचियो मे मीठा मीठा दर्द होने लगा और वो सिसक पडी
” आह उफ्फ्फ थोड़ा प्यार से दबा ना मेरे राजा, तेरी मा की चूचिया है शादाब।
शादाब नीचे झुकते हूए शहनाज की दूसरी चूची को जीभ से चाटने लगा तो एक आनंद भरी लहर शहनाज के जिस्म में दौड़ गई। शहनाज अपनी चूची को ऊपर उठा उठा कर उसके मुह में घुसाने की कोशिश करने लगी लेकिन शादाब ने अपनी जीभ निकाल कर उसके तने हुए निप्पल पर फेर दी तो शहनाज़ का जिस्म झटके खाने लगा और शहनाज ने दम लगाते हुए अपने दोनों हाथो को शादाब से छुडा लिया और उसके सिर को अपनी चूचियो पर दबाने लगी और आन्हे भरते हुए बोली:_
” आह शादाब अा दाब अपनी मा की चूचियां मेरे राजा, चूस ले ना मेरी चूचियों को तू
शहनाज़ पूरी तरह से मस्त हो गई थी और अपनी नंगी चूत को लंड पर रगड़ रही थी। जब भी सुपाड़ा चूत के होंठो को जोर से रगड़ता तो शहनाज़ का जिस्म उछल पड़ता जिससे चूचियां उसके मुंह पर लगती। शादाब ने अब शहनाज़ की दोनो चूचियों को हाथो में भर लिया और जोर जोर से मसलने लगा।
शहनाज़ के मुंह से निकलती हुई मादक सिसकियां अब जोर पकड़ रही थी और शहनाज़ की चूत तो आज अपना पूरा रस बहा रही थी जिससे लंड का सुपाड़ा पूरी तरह से भीग गया था। शादाब ने फिर से अपनी जीभ शहनाज़ की चूची पर फिराई तो शहनाज़ ने जोर से उसका सिर अपनी चूचियों पर दबा दिया और तड़पते हुए बोली:”
,” आह उफ्फ सादाब, जान ही ले लेगा क्या री मेरी, चूस ले अब तो।
शादाब ने शहनाज़ की आंखों में देखा तो उसे एक तड़प दिखाईं दी और शहनाज़ ने अपनी चूची उठाकर उसकी तरफ बढ़ाई तो शादाब ने उसकी चूची को मुंह में भर लिया और शहनाज़ तो जैसे इस मस्त एहसास से कांप उठी और हाथ नीचे ले जाकर शादाब का लंड पकड़ लिया और अपनी टांगो चौड़ी करते हुए चूत पर टिका दिया और सिसकते हुए बोली: आह घुस जा शादाब अपनी मा की चूत में, दे दे लोला
शादाब ने शाहनाज की चूचियों को चूसना शुरू किया तो और शाहनाज ने मस्ती में अपनी चूत लंड पर उछाल दी जिससे सुपाड़ा चूत के होंठ रगड़ गया और शादाब ने शाहनाज के निप्पल को हल्का हल्का दांतो से काटना शुरू कर दिया तो शहनाज ने अपनी बांहे उसकी कमर पर कस दी और नीचे से गांड़ उठा उठा कर चूत में लंड घुसाने की कोशिश करने लगी। शादाब जानबूझकर लंड को उधर इधर हिला रहा था जिससे वो चूत के मुंह पर ठीक से नहीं लग पा रहा था। शहनाज़ उत्तेजना से पागल हो उठी और अपनी टांगे बेड पर पटकने लगी और बोली:_
” आह मेरे राजा, तेरी शहनाज़ की चूत तेरे मूसल से कूटने के लिए तड़प रही है, घुसा दे लोला मेरे शादाब
शादाब ने शहनाज़ की टांगों को पूरी तरह से खोल दिया और नीचे आते हुए उसकी जांघो को चूमने लगा, शहनाज़ से शादाब की जीभ की रगड़ बर्दाश्त नहीं हो रही थी और वो मस्ती से कांप रही थी।
शहनाज़ की चूत से उठती हुई मादक परफ्यूम की तेज गंध शादाब के दिलो दिमाग पर छाती गई और उसने शहनाज़ की चूत के आस पास चाटना शुरु किया तो शहनाज़ की चूत से रस बाहर निकलने लगा। शादाब अपने होंठ चूत के पास लेकर जाता लेकिन जैसे ही छूने को होता तो फिर से शहनाज़ की जांघो को चूमने लगता। शहनाज़ पूरी तरह से मचल रही थी और अपनी चूत चूसवाना चाहती थी लेकिन सीधे सीधे बोलने की हिम्मत उसमे नहीं थी। शहनाज़ ने अपने दोनो हाथों से शादाब का सिर थाम लिया और अगली बार जैसे ही शादाब के होंठ चूत के पास गए तो शहनाज़ ने थोड़ा नीचे सरकते हुए शादाब का मुंह अपनी चूत पर दबा दिया । शादाब तो जैसे बस इसका इंतजार कर रहा था उसने शहनाज़ की चूत पर उपर से नीचे तक जीभ फेर दी।
शहनाज़ चूत पर अपने बेटे की जीभ की रगड़ से मस्ती से भर उठी और सिसकते हुए बोली-“
” आह शादाब चूस ले बेटा अपनी मा की चूत, देख तेरे लिए कितना रस छोड़ रही है।
शादाब ने शहनाज़ की चूत पर उपर से नीचे की जीभ फेरना शुरू कर दिया और शहनाज़ खुद ही मस्ती में आकर अपनी चूचियों को मसलने लगी। शादाब ने अपनी जीभ को जैसे ही शहनाज़ की चूत में घुसा दिया तो शहनाज़ का बदन हिलने लगा और उसने अपनी एक टांग को पूरी तरह से खोलते हुए शादाब के सिर पर रख दिया और अपने जिस्म को पटकने लगी
” आह हाय शादाब, मेरी चूत इतनी अच्छी हैं आज पता चला, उफ्फ तो तू कमाल का लड़का निकला मेरे राजा।
शादाब ने शहनाज़ की चूत की दीवारों को अंदर से चाटना शुरू किया तो शहनाज़ की सिसकियां तेज होने लगी और शादाब ने जोश में आकर अपनी उंगली से चूत की कलिट को सहलाना शुरू किया तो शहनाज़ का जिस्म झटके पर झटके खाने लगा और वो अपने जिस्म को पटकने लगी और चूचियां उछलने लगी।
तभी शादाब की जीभ शहनाज़ की चूत के जी स्पॉट से जा टकराई तो शहनाज़ को लगा कि वो मस्ती से मर जाएगी और उसकी आंखे बंद हो गई जोर जोर से सिसकियां लेने लगी और बोली:_
” उफ्फ आह मेरी चूत यहीं यहीं चूस, उफ्फ यहां तो बहुत मजा अा रहा है, मेरी चूत हाय शादाब रोज चूसना ऐसे ही।
शादाब ने जैसे ही उपर से नीचे तक जी स्पॉट पर जीभ को जोर जोर से रगड़ा तो शहनाज़ की चूत का बांध टूट गया और उसने जोर से शादाब का सिर अपनी चूत में घुसा दिया और मस्ती से सिसक उठी:
” हाय मैं तो गई शादाब, तेरी मा की चूत शादाब, हाय चूत मेरी चूत
शहनाज़ की चूत से निकलती हुई खट्टे खट्टे नमके रस की धार शादाब के मुंह में पड़ने लगी जिसे वो चाटता चला गया। शहनाज़ का जिस्म झटके खाता रहा और शादाब उसकी चूत का सारा रस पी गया। जैसे ही शहनाज़ की चूत से रस टपकना बंद हुआ तो उसने शादाब को अपने उपर खींच लिया और दीवानी होकर उसका मुंह चूमने लगी। शहनाज़ ने अपने बेटे को झटका दिया और उसके ऊपर आ गई। दोनो मा बेटे एक दूसरे की आंखो में देख रहे थे। शहनाज ने आगे बढ़कर उसके होंठ चूम लिए और बोली:’
” हाय मेरी जान, बहुत मजा आया, तूने तो मुझे ये अद्भुत सुख देकर पूरी तरह से जीत लिया शादाब। सच में तू पूरा मर्द बन गया हैं बेटा।
शादाब अपनी तारीफ सुनकर खुश हुआ और शहनाज़ का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया तो शहनाज़ ने लंड को हल्का सा दबा दिया और बोली:_
” उफ्फ शादाब इसे क्या खिला दिया आज देख तो कैसे अकड़ रहा है और कितना मोटा लग रहा है आज ये।
शादाब:_ अम्मी आपके लिए प्यार के लिए तड़प रहा है ये।
शहनाज़ ने शादाब को स्माइल दी और उसकी आंखो में देखते हुए अपना मुंह नीचे की तरफ बढ़ाने लगीं क्योंकि आज शादाब ने उसकी चूत चूसकर जो सुख उसे दिया था उससे शहनाज़ आज शादाब की गुलाम बन गई थी।
शहनाज़ ने शादाब ने लंड को हाथ में पकड़ लिया और उसकी जड़ तक हाथ फिराने लगी। उसकी चूत कांप उठी क्योंकि लंड आज कुछ ज्यादा ही ठोस हो गया था। उफ्फ ये तो उस मूसल से भी ज्यादा ठोस लग रहा है आज, लगता हैं आज ये लड़का मेरी चूत की तली भी निकाल देगा।
शहनाज़ ने अपना मुंह खोल दिया और लंड के सुपाड़े को चाट लिया तो शादाब जोर से सिसक उठा । शहनाज़ ने अपने मुंह को खोलते हुए लंड के सुपाड़े को मुंह में भर लिया और चूसने लगी।
शादाब मस्ती से भर उठा और सिसकते हुए बोला:” आह शहनाज़ पूरा मुह में ले ले मेरी जान।
शादाब जोर जोर से लंड को चूसने लगी और अपनी गान्ड उठा कर लंड उसके मुंह में घुसाने की कोशिश करने लगा। शहनाज़ ने अपना पूरा दम लगाते हुए अपने मुंह को पूरा खोल दिया और आधे से ज्यादा लंड मुंह में भर लिया और चूसने लगी।
शादाब के हाथ अपने आप उसके सिर पर अा गए और शहनाज़ के मुंह को लंड पर दबाने लगे। शादाब का लंड एक घंटे से तड़प रहा था इसलिए शादाब कोशिश कर रहा था किसी तरह पूरा लंड शहनाज़ के मुंह में घुस जाए लेकिन लंड का साइज इतना ज्यादा था कि सिर्फ़ आधे लंड से ही उसका मुंह पूरी तरह से भर गया था। शादाब तड़पते हुए बोला:_
” आह अम्मी, पूरा लंड चूस लो, जड़ तक घुसा लो
शहनाज़ ने शादाब की तरफ इशारा किया मानो उसे बता रही हो कि लंड इससे ज्यादा मुंह में नहीं घुस पाएगा। शादाब ने शहनाज़ को पलट दिया और उसके ऊपर आकर उसकी आंखो के देखते हुए लंड का दबाव उसके मुंह पर बढ़ाया तो शहनाज़ ने स्माइल करते हुए अपना मुंह खोल दिया और शादाब ने पूरी ताकत से धक्का लगाया तो लंड उसके मुंह को पूरा खोलते हुए गले में घुस गया। शहनाज़ को शादाब से ऐसी उम्मीद नहीं थी इसलिए दर्द से तड़प उठी और शादाब ने बिना रुके उसके मुंह में लंड के धक्के लगाने शुरू कर दिए।
शहनाज़ को उसका मुंह फटता हुआ नजर अा रहा था और दर्द के मारे उसकी आंखो से आंसू बह चले और उसके गले से बस गें गें की आवाज निकल रही थीं कि शादाब मस्ती से आंखे बंद किए धक्के पर धक्का लगा रहा था। लंड पर शहनाज़ के टाइट मुंह का असर होने लगा और शादाब ने एक आखिरी धक्का लगाया है लंड को जड़ तक घुसा दिया। शहनाज़ को लगा जैसे लंड उसके गले को फाड़कर उसकी आंतो में घुस जायेगा। दर्द के मारे शहनाज़ का पूरा चेहरा आंसुओ से भीग चुका था। शादाब का लंड शहनाज़ के मुंह में पिचकारी मारता रहा और अंत में सिकुड़ कर बाहर आ गया।
लंड के ठंडा होते ही शादाब का जोश भी ठंडा हो गया और उसने शहनाज़ के चेहरे को जीभ से चाट चाट कर साफ़ कर दिया। शहनाज़ अपने बेटे का इतना प्यार देखकर दर्द में भी मुस्कुरा उठी और बोली:_
” जानवर कहीं का, आज तो लग रहा था जैसे मेरा मुंह फाड़ ही देगा तू।
शादाब को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने अपने दोनो कान पकड़ लिए तो शहनाज़ स्माइल करते हुए बोली:”
“पहले दर्द देता हैं और फिर माफी मांगता है मेरा बेदर्दी सनम।
शादाब ने शहनाज़ के गाल चूम लिए और उसे जोर से अपनी बांहों में कस लिया।
शादाब:” आई लव यू शहनाज़।
शहनाज़ उसकी कमर पर हाथ फेरते हुए बोली:” लव यू टू मेरे शादाब। पता हैं तेरे मुंह से शहनाज़ सुनकर बहुत अच्छा लगता हैं।
शादाब उसकी प्यारी सी नाक को पकड़ कर हिलाते हुए बोला:’
” अच्छा मेरी शहनाज़, तुम मेरी जान हो मेरा सब कुछ हो।
शहनाज़ उसकी कमर को हल्का सा दबाते हुए बोली:” सच में शादाब प्यार का इजहार मुझे ज़िन्दगी में सिर्फ तुमसे हुआ है।
शादाब ने शहनाज़ के चांद से सुंदर मुखड़े को दोनो हाथो में भर लिया और उसकी आंखो में देखते हुए बोला:_
” मैंने भी तेरे लिए सब कुछ ठुकरा दिया शहनाज़ रिश्ते नाते, मान मर्यादा समाज।
शहनाज़:” शादाब मुझे तुम्हारे रूप में दुनिया का सबसे ज्यादा प्यार करने वाला शोहर मिला है।
शादाब ने शहनाज़ का माथा चूम लिया और बोला:” अम्मी मैंने जब आपको एयरपोर्ट पर देखा तो मैं तो तभी आपका दीवाना हो गया था शहनाज़।
शहनाज़ उसे छेड़कर अपनी जीभ निकाल कर बोली:_
” मा का दीवाना मेरा बेटा शादाब।
शादाब शहनाज़ की इस बात से इतना खुश हुआ कि अपने होंठ उसके होठों पर टिका दिए और चूसने लगा। शहनाज़ भी अपने बेटे का साथ देते हुए उसके होंठो को चूसने लगी। शादाब पूरी तरह से शहनाज़ के उपर छाया हुआ था जिससे दोनो की टांगे आपस में टकरा रही थी। शहनाज़ किस करते करते ही अपनी टांगे शादाब की टांगो से रगड़ने लगी और शादाब ने जोश में आकर अपनी जीभ शहनाज़ के मुंह में घुसा दी तो शहनाज़ ने उसकी जीभ को लपक लिया और चूसने लगी। दोनो मा बेटे एक दूसरे का रस चूसने लगे। शादाब का लंड फिर से अपना सिर उठाने लगा और शहनाज़ के जिस्म में भी आग सुलगने लगी। किसे करते हुए ही शादाब ने शहनाज़ की चुचियों को अपनी मजबूत छाती से रगड़ना शुरू कर दिया। शहनाज़ और शादाब दोनो के होंठ अलग हुए और शादाब ने अपने होंठ शहनाज़ की गरदन पर रख दिए और चाटने लगा। शहनाज़ के लिए से मस्ती भरी आह निकल पड़ी। शादाब ने शहनाज़ की चुचियों को हाथो में भर लिया और प्यार से सहलाने लगा तो शहनाज़ का जिस्म पूरी तरह से तप गया और चूत से रस एक बार फिर से बाहर आने लगा।
शादाब का लंड एक बार फिर से अपनी पूरी औकात में अा गया और शहनाज़ की चूत से अड गया। शादाब ने जैसे ही शहनाज़ की चुचियों को मुंह में भरा तो शहनाज़ ने अपने मुंह से ढेर सारा थूक निकाल कर शादाब के लंड पर लगा कर उसे पूरी तरह से चिकना कर दिया। शादाब भी एक महीने से शहनाज़ की चुदाई के लिए तड़प रहा था इसलिए वो जोर जोर से अपनी अम्मी की चूची चूसने लगा और शहनाज़ ने शादाब की आंखो से देखते हुए उसका एक पकड़ कर अपनी चूत पर रख दिया और शादाब की एक उंगली को खुद ही अपनी चूत में घुसा दिया और सिसक पड़ी
” आह शादाब मेरे बेटे, मनाले अपनी अम्मी के साथ चांद रात
शादाब शहनाज़ की इतनी तड़प देखकर जोश में आ गया और उसकी चूत को जोर से रगड़ते हुए अपनी उंगली बाहर निकाल कर अपने तगड़े लंड का सुपाड़ा उसकी चूत पर टिका दिया और शहनाज़ ने मुंह से कुछ बोले बिना ही अपना निचला होंठ अपने दांतो में दबाकर शादाब को एक कामुक स्माइल दी और अपने एक हाथ की उंगली और अंगूठे को चूत के जैसे बनाकर उसमे एक उंगली घुसा दी। शादाब ने अपने लंड का एक जोरदार धक्का लगाया और सुपाड़ा चूत के होंठो को रगड़ते हुए अंदर घुस गया तो शहनाज़ दर्द भरी सिसकारियां लेने लगी और शहनाज़ ने जोर से अपनी बांहे शादाब के गले में लपेट दी। शादाब ने बहुत तगड़ा धक्का लगाया और लंड शहनाज़ की चूत को अंदर तक रगड़ते हुए जड़ तक घुस गया तो शहनाज़ के मुंह से दर्द भरी सिसकारियां निकल पड़ी
” आह शादाब मेरे राजा चांद रात मुबारक हो मेरे शौहर
शादाब ने जोर से शहनाज़ को कस लिया और लंड को चूत में अंदर ही रगड़ते हुए बोला:’
” तुम्हे भी मुबारक हो मेरी जान शहनाज, चांद रात पर अपने बेटे का लंड मुबारक हो।
दोनो एक साथ स्माइल कर दिए और शादाब ने लंड को पूरा बाहर निकाला और फिर से एक ही धक्के में जड़ तक शहनाज़ की चूत में घुसा दिया तो शहनाज़ फिर से दर्द भरी मस्ती से सिसक उठी और शादाब ने बिना देर किए शहनाज़ की चूत में लंड को तेजी से पेलना शुरू कर दिया और दोनो चूचियों को जोर जोर से मसलने लगा।
शहनाज़ का जिस्म हर झटके पर उछल रहा था और शहनाज़ की चूत में अब लंड आराम से अन्दर बाहर हो रहा था जिससे शहनाज़ मस्ती से मचल रही थी, सिसक रही थी, उछल रही थी।
शादाब के लंड की रगड़ आज शहनाज़ की चूत को हर धक्के पर सिसकने के लिए मजबूर कर रही थी और पूरे कमरे में शहनाज़ की मस्ती भरी सिसकारियां गूंज रही थी। अगर सीढ़ियों का गेट और कमरे का गेट ठीक से बन्द नहीं होता तो दादा दादी सब सुन लेते।
शादाब ने शहनाज़ की आंखो में देखते हुए दोनो हाथो से उसके गले को पकड़ लिया और जोर जोर से धक्के मारने लगा। शहनाज़ की चूत अब पूरी तरह से चिकनी हो गई थी जिससे लंड तूफान की स्पीड से घुस रहा था। हर धक्के पर बेड हिल रहा था।
शहनाज़ की चूत शादाब के धक्के बर्दाश्त नहीं कर पाई और वो सिसकते हुए झड़ गई
” आह शादाब उफ्फ, गई मेरी चूत, हाय मा चुद गई मैं तो।
शादाब बिना रुके धक्के लगाता
रहा और उसने शहनाज़ को उठाकर घोड़ी बना दिया जिससे उसकी चूत पूरी तरह से उभर कर अा गई और शादाब ने एक ही झटके में फिर से लंड को जड़ तक उतार दिया। शहनाज़ को एक अनोखे सुख की अनुभूति हुई और उसका मुंह मस्ती से खुलता चला गया
” आह शादाब उफ्फ कितना अच्छा लग रहा हैं कहां से सीखा तूने हाय मेरे राजा ?
शादाब ने जोर से लंड को बाहर निकाला और फिर से जड़ तक घुसा दिया तो लंड सीधे बच्चेदानी से जा लगा।
” आह शादाब मेरी बच्चेदानी में घुस गया तेरा लोला, घोड़ी सी बना दिया है तूने मुझे कमीने
शादाब ने शहनाज़ के बाल पकड़ लिए और जोर जोर से लंड घुसाने लगा। शहनाज़ की चूत एक बार फिर से गर्म हो गई और वो अपने आप अपने अपनी चूत को लंड पर धकेलने लगीं ।
” आह शादाब पूरा रगड़ रहा था मेरी चूत तेरा ये लोला, उफ्फ और चोद मुझे मार चूत।
शादाब ने पूरी ताकत से लंड को बाहर निकाला और एक तगड़ा धक्का शहनाज़ की चूत में लगा दिया तो शहनाज़ के पैर उखड़ गए और वो बेड पर आगे को गिर पड़ी और शादाब उसके उपर गिरा जिससे लंड उसकी चूत में घुसता चला गया।
” आह शादाब, उफ्फ मर गई हाय मा री,
शादाब ने शहनाज़ को जकड़ लिया और तूफान की गति से उसकी चूत में धक्के लगाते हुए बोला:”
” आह शहनाज़ देख मेरा लोला कैसे तेरी चूत का भोसड़ा बनाएगा अब ।
इतना कहकर शादाब ने अपना पूरा दम लगाते हुए तेज तेज धक्के लगाने शूरु कर दिए
शहनाज़ को बहुत मजा आने लगा और बोली:”
” आह शादाब, यूआईआईआई उफ्फ सआईआईआईआई तेरा लोला मेरी चूत मार रहा है
शहनाज़ एक बार फिर से जोर से सिसकते हुए झड़ गई और पूरी ताकत से बेड शीट को दबोच लिया। शादाब बिना रुके तूफानी रफ्तार से धक्के लगाने लगा तो शहनाज़ की चूत का हाल बेहाल हो गया और वो दर्द से कराह उठी
” आह शादाब कमीने छोड़ दे मुझे, ये मेरी चूत हैं औखली नहीं,
शादाब ने उसे जोर से कस लिया और तेज तेज धक्के लगाते हुए बोला:” आह शहनाज़ आज तेरी चूत की तली निकाल दूंगा, हाय तेरी चूत।
शहनाज़ आगे को खिसकी तो लंड बाहर निकल गया तो शादाब ने उसे फिर से पीछे को खींच लिया और लंड को उसकी चूत पर टिका दिया तो शहनाज़ ने एक बार शादाब की तरफ देखा तो शादाब ने जोर का धक्का लगाया और लन को फिर से चूत में घुसा दिया और धक्के पर धक्का लगाने लगा जिससे शहनाज़ फिर से सिसक उठी
” आह शादाब हट जा मेरे राजा, मार ही डालेगा क्या मुझे आऊ च उफ्फ हाय मा
शादाब ने एक हाथ से शहनाज़ की गर्दन को थाम लिया और दूसरे से उसकी गांड़ दबाते हुए जोर जोर से धक्के लगाने लगा।
गांड़ दबाए जाने से जैसे जादू हो गया और शहनाज़ की चूत फिर से सुलग उठी और वो मस्ती से सिसकते हुए बोली:_
“: आह शादाब दबा मेरी गान्ड, उफ्फ ये गांड़ दबवाने के लिए ही तो मैं तुझसे चुद गई राजा,
शादाब ने अब दोनो हाथो में उसकी गांड़ को दबोच लिया और जोर जोर से धक्के लगाने लगा तो शहनाज़ का पूरा जिस्म मस्ती से उछलने लगा और वो मजे से सिसकती हुई बोली:_
” आह शादाब उफ्फ मेरी चूत फिर से झड़ जाएगी निकाल देे मेरी चूत की तली मेरे राजा !!
शहनाज़ ने अपनी कमर और मुंह को उपर उठा लिया और हर धक्के पर उसका जिस्म हिलने से उसके बाल लहरा रहे थे और शहनाज़ पूरी जोर जोर से सिसक रही थी। पूरे कमरे में दोनो की मस्त मादक सिसकियां गूंज रही थी। शादाब ने अपने जिस्म की सारी ताकत समेट ली और शहनाज़ की चूत में लंड तूफान मचा दिया तो शहनाज़ एक बार फिर से सिसकते हुए झड़ गई
” आह शादाब गई मेरी चूत, हाय राजा बस कर
शादाब के लंड में भी उबाल आने लगा और उसके धक्के किसी पागल सांड की तरह पड़ने लगे। शहनाज़ की चूत से फाच फाच की मधुर आवाज गूंज रही थी। शादाब ने पूरी ताकत से एक आखिरी धक्का लगाया और लंड किसी रॉकेट की तरह शहनाज़ की चूत में जड़ तक घुस गया और शहनाज़ की बच्चेदानी के एक सिरे को दूसरे में घुसा दिया तो शहनाज़ दर्द से कराह उठी
” आह शादाब फाड़ दी मेरी चूत,उफ्फ मेरी चूत की तली निकल गई मेरी मा
शादाब जोर से सिसकते हुए शहनाज़ की पीठ पर ढेर हो गया
” आह शहनाज़ मेरी अम्मी।
शादाब के लंड ने एक के बाद एक वीर्य की पिचकारी की झड़ी सी शहनाज़ की चूत में लगा दी और शहनाज़ की लंड की मार से जलती हुई चूत को ठंडक मिलने लगी और वो मस्ती से शादाब का मुंह चूमने लगी मानो उसे इस दमदार चुदाई के लिए इनाम दे रही हो।
शादाब ने चांद रात की इस रात को पूरी तरह से यादगार बनाने के लिए शहनाज़ को और दो बार चोदा और उसके बाद दोनो मा बेटे एक दूसरे से लिपट कर सो गए।
अगले दिन सुबह कोई पांच बजे शहनाज की आंख खुली और उसने शादाब को भी उठा लिया और उसे बांहों में भर कर बोली:”
” ईद मुबारक हो मेरी जान शादाब।
शादाब ने शहनाज़ का गाल चूम लिया और उसकी आंखो में देखते हुए बोला:”
” आपको भी मुबारक हो मेरी नाज़।
शादाब और शहनाज़ दोनो एक दूसरे से चिपके हुए थे और ईद की मुबारकबाद दे रहे थे।
शहनाज़:”शादाब जल्दी से उठ जाओ, मैं भी नहाने जाती हूं फिर बहुत सारे काम भी करने हैं। खीर बनानी है, चाट पकौड़ी, और छोले चावल आदि।
शादाब:’ ठीक हैं अम्मी मैं आपकी मदद करूंगा और जल्दी से सब काम हो जाएगा।
शहनाज़ ने उसका गाल चूम लिया और टॉवेल लेकर नहाने के लिए बाथरूम में घुस गई और जल्दी ही अच्छे से नहाकर अपने बदन पर टॉवेल लपटेकर अा गई तो गीले बालो से टपकती हुई पानी की बूंदे उसकी सुन्दरता को पूरी तरह से बढ़ा रही थी।
शादाब उसकी सुन्दरता में फिर से खो गया तो शहनाज़ ने उसकी आंखों के आगे चुटकी बजाई और बोली:” कहां खो गए मेरे राजा ?
शादाब जैसे नींद से जागा और जल्दी से बोला:” आपको देख रहा था कि मेरी अम्मी सच में बहुत खूबसूरत हैं। मैं कितना खुशनसीब हूं जो मुझे मेरी खुबसुरत मा बीवी के रूप में मिली है।
शहनाज़ अपनी तारीफ सुनकर शर्मा गई और बोली:'”
” चल ठीक हैं बेटा, अब तुम जल्दी से नहाकर आओ, तब तक मैं चाय बना देती हूं।
शादाब बाथरूम में घुस गया और शहनाज़ चाय बनाने के लिए किचेन में चली गई। जब तक शादाब नहाकर आया तो चाय बन चुकी थीं ।
शहनाज़ ने चाय कप में कर दी और सादाब चाय लेकर नीचे चला गया। दादी और दादा दोनो शादाब को देख कर मुस्करा दिए और दादा बोले:”
“सालो के बाद घर की पहली ईद मुबारक हो शादाब।
शादाब ने चाय की ट्रे को टेबल पर रख दिया और दादा दादी दोनो को गले लगा लिया और बोला:”
” आपको भी ईद मुबारक हो दादा दादी जी।
शादाब ने उन्हें चाय दी और उपर की तरफ चल दिया। शहनाज़ खीर बनाने में जुटी हुई थी और शादाब उसकी हेल्प करने लगा ।
शहनाज़:” शादाब तुम अपने दादा जी को लेकर ईदगाह चले जाओ और नमाज पढ़ आओ। सारे काम में खुद खत्म कर लूंगी ।
शादाब ने शहनाज़ की बात मानते हुए अपने नए कपड़े पहन लिए और शहनाज़ को सबसे पहले आकर सलाम किया
” सलाम अम्मी! देखो मैंने नए कपड़े पहन लिए हैं।
शहनाज़ ने देखा कि शादाब कुर्ते पायजामा में बहुत खूबसूरत लग रहा था इसलिए बोली:
” मेरे प्यारे सनम आज अम्मी नहीं शहनाज़ कहकर सलाम करो मुझे
शादाब ने शहनाज़ को अपनी बांहों में भर लिया और उसकी आंखों में देखते हुए बोला:”
” सलाम मेरी अम्मी शहनाज़ मेरी बीवी मेरी जान।
शहनाज़ समझ गई कि शादाब उसे अम्मी कहना नहीं छोड़ने वाला इसलिए उसका गाल पकड़ कर जोर से खींच लिया और बोली:”
” तू कभी नहीं सुधरने वाला मेरे राजा शादाब।
शादाब भी स्माइल करते हुए शहनाज़ का गाल चूम कर नीचे चला गया और दादा दादी को सलाम किया तो दोनो ने एक बार फिर से शादाब को गले लगा लिया।शादाब दादा जी को अपने साथ गाड़ी में लेकर ईदगाह चला गया और जल्दी ही दोनो नमाज पढ़ कर वापिस अा गए।
शादाब दौड़ता हुआ उपर चला गया और शाहनाज जो कि अभी किचन में काम कर रही थी उसे पीछे से अपनी बांहों में भर लिया।
शादाब ने शहनाज की पीठ सहलाते हुए चुपके से अपनी जीभ से चॉकलेट निकाल लिया और शहनाज की आंखों के आगे लहरा दिया तो शहनाज़ खुशी के मारे पलट गई और शादाब ने शरारत करते चॉकलेट को शहनाज़ की ब्रा में डाल दिया तो शहनाज़ के होंठो पर स्माइल अा गई और बोली:”
” तू सचमुच बहुत शैतान हो गया है शादाब।
शादाब कुछ बोलता उससे पहले ही नीचे से दादा जी की आवाज़ अाई तो खाने के लिए कुछ मांग रहे थे। खीर बन चुकी थी इसलिए शहनाज़ ने जल्दी से एक ट्रे में कुछ कटोरिया रखी और उनमें खीर डाल दी और शादाब से बोली:”
” जाओ बेटा शादाब अपने दादा दादी जी को खीर दे आओ।
शादाब शहनाज़ की ब्रा से झांकती चॉकलेट देखते हुए बोला:”
” मुझे तो पहले अपनी मिल्क चॉकलेट खानी थी।
शहनाज़ के होंठो पर एक कामुक स्माइल अा गई और बोली:”
” चॉकलेट तो सुना था ये मिल्क चॉकलेट क्या होती हैं सादाब ?
शादाब ने आगे होकर उसकी चूचियां सूट के उपर से ही पकड़ ली और हल्का सा दबाते हुए बोला:”
” आपको मस्त चुचियों में मिलकर चॉकलेट अब मिल्क चॉकलेट बन गई है।
शहनाज़ ने उसका हाथ जोर से दबा दिया और बोली:”
” आजकल तो बड़ी बड़ी बाते करने लगा हैं शादाब।
शादाब उसकी चूत पर लंड का दबाव बनाते हुए बोला:”
” सिर्फ बाते ही नहीं काम भी बड़े बड़े करता हूं मेरी जान।
शहनाज़ उसके लंड पर अपनी चूत को रगड़ते हुए बोली:”
” जब तेरे पास इतना बड़ा हैं तो इससे तो अपने आप ही बड़े बड़े काम हो जाएंगे।
शादाब ने अपनी जीभ को निकाल कर शहनाज़ की गरदन को चाट लिया और बोला:”
” वैसे अगर आपकी इजाज़त हो तो कुछ बड़ा कर दू अभी ?
इतना कहकर सादाब ने शहनाज़ का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया और इससे पहले की शहनाज़ कुछ करती नीचे से दादा जी की आवाज़ फिर से अाई तो शहनाज़ ने एक झटके के साथ अपना हाथ हटा लिया और बोली:
” जा जल्दी से खीर लेकर जा दो बार तेरे दादा जी आवाज लगा चुके हैं।
शादाब ने खीर की ट्रे हाथ में उठाते हुए कहा:” ठीक है लेकिन काम अपनी मिल्क चॉकलेट मैं खुद ही निकालूंगा आकर ।
शहनाज़ उसकी तरफ देखते हुए बोली:” तू ना पक्का मुझसे मार खाएगा जा अब जल्दी से नीचे जा।
शादाब ने खीर की ट्रे उठाई और शहनाज़ की तरफ जीभ निकालते हुए बोला:”
” उफ्फ क्या दादागिरी हैं ये शहनाज़, कोई बीवी अपने शौहर को मारती है क्या ?
शहनाज़ ने रसोई में रखा हुआ बेलन उठा लिया और शादाब को दिखाते हुए बोली:”
” अब मा से शादी करेगा तो पिटाई का खतरा तो रहेगा ना मेरे राजा ।
शहनाज़ और शादाब दोनो एक साथ हंस पड़े और शादाब डरने का नाटक करते हुए ट्रे लेकर नीचे की तरफ भाग गया। शहनाज़ ये देख कर बहुत जोर जोर से किसी छोटे बच्चे की तरह हंस रही थी। शहनाज़ को प्यार क्या होता हैं इसका एहसास अब जाकर हो रहा था।
शादाब खीर लेकर नीचे अा गया और ट्रे दादा दादी के सामने करते हुए बोला:”
“;लीजिए दादा दादी जी आपकी खिदमत में ईद के दिन की खीर हाज़िर हैं, एक दम ताजे दूध और मावे से बनी हुई।
दादा दादी दोनो मुस्करा उठे और खीर की कटोरिया उठा ली और खाने लगे। दादी बोली:”
” अरे शादाब तुमने भी खीर खाई या नहीं अभी ?
शादाब अपना पेट पकड़ते हुए बोला:” अभी नहीं दादी अम्मी, भूख के मारे मेरे तो पेट में भी दर्द हो रहा है।
दादी उसकी नौटंकी समझ गई और बोली:” अरे मेरे बच्चे को भूख लगी हैं आजा इधर अा मेरे पास मैं खिलाऊंगी तुझे।
शादाब किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह दादी के पास चला गया और दादी ने एक चम्मच में खीर लेकर शादाब के मुंह के सामने करी तो जैसे ही शादाब ने अपना मुंह खोला तो दादी ने उसको ठेंगा दिखाते हुए खीर खुद खा ली और शादाब का मुंह देखने लायक था।शादाब दादा जी से शिकायत करते हुए बोला:”
” देखिए ना दादा जी, दादी मुझे सता रही हैं।
दादा:” अब बेटा अगर तू झूठ मूठ का ड्रामा करेगा तो फिर तो ऐसा ही होगा, तुम क्यों इस उम्र में भी शादाब के साथ बच्ची बन रही हो
दादी स्माइल करते हुए बोली:”
” इसको मजाक करते हुए देखकर अच्छा लगा और मैं अपने बचपन में पहुंच गई।
दादी की बात सुनकर सभी मुस्कुरा उठे और दादी बोली:”
” अच्छा चल मुंह खोल शादाब, इस बार पक्का खिला दूंगी तुझे।
शादाब ने अपना मुंह खोल दिया और दादी ने उसे खीर खिलाई, शादाब दो चम्मच खीर खाकर ऊपर अा गया और शहनाज़ को ढूंढने लगा। शहनाज़ अपने कमरे में थी और वो अपने ईद के नए कपड़े पहन कर सज चुकी थी।
शाहनाज ने एक गहरे लाल रंग का सूट पहना हुआ था और बहुत खूबसूरत लग रही थी। शादाब उसे प्यार से बिना पलके झपकाए देखता रहा तो शहनाज़ बोली:”
” बस कर सादाब, नजर लगाएगा क्या मुझे ?
शादाब ने उसका चेहरा अपने हाथों में भर लिया और बोला:’
” आशिक की नजर नहीं लगती बल्कि उससे हुस्न और ज्यादा निखरता हैं जैसे आपका हर रोज निखरता जा रहा है।
इतना कहकर शादाब ने अपने शहनाज़ के होंठो पर रख दिए और शहनाज़ ने मदहोश होकर अपनी बांहे उसके गले में लपेट दी और दोनो एक दूसरे के होंठ चूमने लगे।किस अभी शुरू ही हुआ था कि शादाब का फोन बज उठा। जैसे ही शादाब फोन निकलने लगा तो शहनाज़ ने उसका हाथ पकड़ लिया और जोर से दबा दिया तो शादाब ने अपने दोनो हाथ किस करते हुए ही शहनाज़ की गांड़ पर रख दिए और दबाने लगा तो शहनाज़ अपनी सुध बुध खोते हुए शादाब के पैरो पर चढ़ गई और उसके मुंह में अपनी जीभ घुसा दी तो शादाब उसकी जीभ मजे से किसी कुल्फी की तरह चूसने लगा। फोन बजता रहा लेकिन दोनो मा बेटे को जैसे उसकी आवाज सुनाई नहीं दे रही थी । काफी देर के बाद उनकी किस खतम हुई तो शहनाज़ ने अपनी कोहनी का दबाव अपनी चूची पर हल्का सा दिया तो उसकी चूचियों बाहर को उभर कर गले से झांकने लगी जिससे ब्रा में रखी हुई चॉकलेट साफ नजर आने लगी।
शादाब की आंखों में चमक अा गई और उसने अपना हाथ आगे बढाया और शहनाज़ की चुची पर रख दिया तभी उसका मोबाइल फिर से बज उठा तो शादाब ने शहनाज़ की आंखों में देखा तो शहनाज़ ने उसकी जेब से मोबाइल निकालकर उसकी तरफ बढ़ा दिया। अजय का कॉल था तो शादाब ने पिक किया
अजय:_” कितनी देर से तुझे फोन कर रहा हूं, कहां था तू?
शादाब:” अरे भाई सोरी, फोन साइलेंट पर था, अभी देखा।
अजय:” फोन क्या मुझे तो आज कल तू ही साइलेंट पर लगता हैं। अच्छा ईद की मुबारकबाद मेरे भाई। तेरे लिए एक गुड न्यूज़ हैं शादाब।
शादाब ने खुश होकर शहनाज़ का गाल चूम लिया और बोला;”
” तुझे भी ईद मुबारक हो अजय, बता भाई जल्दी बता क्या न्यूज हैं ?
अजय”: कल हमारा होवार्ड यूनिवर्सिटी का एग्जाम हैं।
शादाब के चेहरे एक पल के लिए खुशी की लहर दौड़ गई लेकिन अगले ही पल जैसे शहनाज़ का ख्याल आते ही गायब हो गई।शहनाज़ सब सुन रही थी और वो शादाब से कसकर लिपट गई मानो उसे अपने दूर नहीं जाने देगी। शादाब की तो जैसे आवाज ही गुम हो गई थी।
अजय:” अबे क्या हुआ अच्छा नहीं लगा क्या सुनकर ?
शादाब:” भाई वो इतने दिनों के बाद घर आया था इसलिए दिल नहीं कर रहा हैं आने के लिए वापिस, मैंने एक हफ्ते की छुट्टी तो ली हैं।
अजय:” कैसी पागलों जैसी बात कर रहा है, जल्दी से तैयार होकर आजा, एग्जाम देकर फिर घर चले जाना, एक ही दिन की तो बात हैं।
शादाब ने शहनाज़ की तरफ देखा जिसकी आंखे शादाब के जाने की बात सुनकर भर अाई थी । शादाब बोला:” चल ठीक हैं भाई, मैं देखता हूं।
अजय:” देखना वेखना कुछ नहीं जल्दी से निकल और हान मेरे लिए खीर जरूर लेते आना।
इतना कहकर अजय ने फोन काट दिया तो शादाब ने आंसुओ से भीगा हुआ शहनाज़ का चेहरा साफ किया और बोला:”
” अम्मी आप दुखी मत हो, मैं आपको छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा मेरी जान ।
शहनाज़ ने अपने बेटे का गाल चूम लिया और बोली:”नहीं शादाब, तुम जाने की तैयारी करो, मैं अजय के लिए खीर पैक करती हूं। एक ही रात की तो बात हैं कल तुम फिर से मेरी बांहों में होंगें
शादाब शहनाज़ से कसकर लिपट गया और शहनाज़ भी अपने बेटे की बांहों में फिर से समा गई।
दोनो काफी देर तक ऐसे ही एक दूसरे के दिल की धड़कन सुनते रहे और आखिरकार शादाब अपनी अम्मी की बात नहीं टाल पाया और तैयार होकर नीचे दादा दादी जी पूरी बात बताई तो दोनो उदास हुए लेकिन इस बात की खुशी की थी अगर एग्जाम पास हो गया तो शादाब उनका नाम सारी दुनिया में रोशन कर देगा।
शहनाज़ उपर से बैग लेकर अा गई और आखिरकार शादाब के जाने का पल अा गया और जैसे ही वो घर से निकलने वाला था तभी घर में उसकी बुआ रेशमा दाखिल हुई और सबको सलाम किया।
रेशमा:” सलाम अम्मी अब्बू, सभी को ईद मुबारक हो।
इतना कहकर रेशमा दादा की बांहों में समा गई क्योंकि उसे अब सच में अपने मा बाप से बड़ा लगाव हो गया था। अपनी बेटी को ऐसे बच्चे की तरह खुद से चिपकते देखकर दादा जी की भी आंखे नम हो गईं और दादी ने रेशमा की पीठ थपथपाई।
शादाब ये नजारा देख कर भावुक हो गए और समझ गया कि सच में रेशमा बदल गई है और उसे अपनी बुआ से हमदर्दी हुई। दादी दादा से अलग होने के बाद रेशमा शहनाज़ के गले लग गई और ईद की मुबारकबाद दी। शहनाज़ को रेशमा का ऐसे अपने गले लगना अच्छा नहीं लग रहा था और वो उदास नजरो से शादाब की तरफ देखने लगी तो शादाब ने उसे एक स्माइल दी। जैसे ही रेशमा शहनाज़ से अलग हुई तो शहनाज़ ने सुकून की सांस ली। शहनाज़ से गले मिलने के बाद रेशमा शादाब के गले लग गई तो शादाब ने भी अपनी बुआ को गले लगा लिया और शहनाज़ की छाती पर तो जैसे सांप लेट गया।
रेशमा शादाब से अलग हुईं और बोली:”
” कहीं जा रहे हो क्या शादाब ?
शादाब :” वो बुआ मेरा एग्जाम हैं कल इसलिए मुझे आज ही जाना होगा।
रेशमा ने आगे बढ़कर शादाब का गाल चूम लिया और बोली:”
” जा बेटा, ऑल द बेस्ट।
इसके बाद शादाब ने सबको बाय किया और घर से निकल गया। पता नहीं क्यों आज उसका मन घर से जाने को नहीं कर रहा था लेकिन उसकी मजबूरी थी इसलिए वो चल पड़ा।
रात को करीब 10 बजे तक शादाब शहर पहुंच गया और अजय ने उसे गले लगा कर ईद की मुबारकबाद दी तो शादाब ने अपने बैग से खीर निकाली और अजय को दी तो अजय मजे से खीर खाने लगा।
अजय:” सच में बहुत टेस्टी खीर बनाई है आंटी ने शादाब, मजा आ गया।
शादाब ने इसे स्माइल दी और उसके बाद सफर से थका होने के कारण उसके एक बार शहनाज़ को कॉल करके बताया कि वो ठीक पहुंच गया है और अब सो जायेगा ।शहनाज़ से बात करने के बाद शादाब आराम से सो गया।
रेशमा शादाब के जाने के बाद घर पर ही रुक गई और दादा जी दादी और शाहनाज से बात करती रही। पहले उसकी बातो में घमंड और नखरा जैसे पूरी तरह से शामिल होता था जबकि अब शहनाज ने रेशमा के व्यवहार में बदलाव साफ तौर पर महसूस किया। शाम को उसने जिद करके शहनाज़ को चाय बनाने से रोका और खुद सबके लिए चाय बनाई।सबने रात में खाना खाया और रेशमा नीचे ही दादा दादी के पास सो गई।
अगली सुबह जैसे रेहाना और काजल दोनो बहनों के लिए खुशियों का पैग़ाम लेकर अाई और मोहन सिंह ने कोर्ट में सरकारी वकील को बगले झांकने के लिए मजबुर कर दिया।आखिरकार आज फैसला रेहाना के पक्ष में आया और उसकी जमानत याचिका मंजूर हो गई।
रेहाना ने जैसे ही जेल से बाहर कदम रखा तो दुनिया की ताजी हवा ने उसका स्वागत किया और रेहाना के होंठो पर एक ज़हरीली मुस्कान फैल गई।
काजल भी उसका साथ देने हुए मुस्कुरा उठी और बोली:”
” क्या हुआ रेहाना आज बड़ी खुश नजर आ रही है ?
रेहाना:” काजल मैं एक महीने से ज्यादा जेल में बंद थी और ये सब उस कमीनी शहनाज़ और उसके बेटे की वजह से हुआ है। अब देखना मैं उनका क्या हाल करूंगी।
काजल:’ ओह तो आपको उन पर तरस भरी हंसी अा रही हैं मेरी बहन, मेरा तो खून खोल रहा हैं
रेहाना:’ काजल बस रात हो जाने दे फिर तू मेरा कमाल देखना, उसके सारे परिवार को खत्म कर दूंगी ताकि आज के बाद कोई रेहाना से टकराने की हिम्मत ना करे काजल।
काजल:’ ठीक हैं मैं उसकी तबाही का सब इंतजाम करती हूं।
इतना कहकर उसने अपना फोन निकाल लिया और अपने आदमियों को रात की प्लैनिंग के बारे में समझाने लगीं।
उधर शादाब और अजय दोनो दोनो एग्जाम देने चले गए थे और कोई दो बजे के आस पास उनका एग्जाम हुआ तो शादाब बोला:’
” अजय मुझे घर जाना होगा एक हफ्ते की छुट्टी ली हुई है मैने।
अजय:” अरे शादाब मैं भी तो घर जाऊंगा अब, बस एग्जाम की वजह से ही तो रुका हुआ था। एक काम करो मेरे साथ ही चलो मैं तुम्हे छोड़ते हुए आगे चला जाऊंगा।
शादाब को उसकी बात अच्छी लगी और अजय ने अपनी कार निकाली और दोनो उसमे घर की तरफ चल पड़े। अभी करीब 3 बजे थे और रात के 11 बजे तक शादाब को अपने घर पहुंच जाना था।
जैसे जैसे शाम होती जा रही थी वैसे वैसे रेहाना की आंखो में आग सुलगती जा रही थी। 9 बज चुके थे और रेहाना, काजल दोनो अपने आदमियों को साथ शादाब के घर की तरफ निकल पड़ीं।
गांव में जल्दी ही सब लोग सो गए थे और रेहाना दबे पांव अंधेरे का फायदा उठाते हुए अपने शिकार की तरफ बढ़ रही थी जबकि दादा दादी और रेशमा नीचे आराम से सो रहे थे और शहनाज उपर लेटी हुई शादाब के आने का इंतजार बड़ी बेताबी से कर रही थी।
करीब 10:30 के आस पास दरवाजे पर दस्तक हुई तो दादा जी खुशी के मारे नींद से उठ गए और गेट खोल दिया। रेहाना अपने गुंडों के साथ घर के अंदर घुस गई।
………………………
जैसे ही रेहाना अपने गुण्डो के साथ घर के अंदर घुसी तो नहीं उसने सबसे पहले गेट को अंदर से बंद कर दिया। दादा जी उसे इतनी रात गए देख कर चौंक गए और बोले :”
” रेहाना तुम इस इतनी रात को ? क्या हुआ सब ठीक तो है ?
रेहाना से पहले ही काजल बोल उठी:” रुक बुड्ढे पहला तेरा ही काम करती हूं
इतना कहकर काजल ने अपनी बात साइलेंसर युक्त पिस्टल निकाल कर दादा की तरफ निशाना लगाया। दादा जी ये सब देख कर डर के मारे कांप उठे और कुछ बोलने के लिए जैसे ही मुंह खोला तो काजल के पिस्टल से निकली गोली ने उनके मुंह को हमेशा के लिए बंद कर दिया और उनके मुंह से एक दर्द भरी चींख निकल पड़ी और वो धड़ाम से नीचे गिर पड़े।
दादा के नीचे गिरने से जोर की आवाज हुई और दादी मा एक झटके के साथ उठ गई और अपने अपने दादा जी की लाश देख कर दहाड़े मार मार कर रोने लगी ।
रेहाना:” बहुत हल्ला कर रही है ये हरामजादी बुढ़िया, इसकी आवाज हमेशा के लिए बंद कर दो।
रेहाना के इतना बोलने की देर थी बस उसके बाद काजल और पप्पू के पिस्टल से निकली हुई गोलियों ने दादी का भी काम तमाम कर दिया और वो भी एक कटे हुए पेड़ की तरह लहराकर दादा जी के उपर गिर पड़ी।
रेशमा जो कि दिन में काम करने की वजह से थक कर सो गई थी उसे शहनाज़ समझकर रेहाना ने बेड में एक जोरदार लात मारी और बोली:
” उठ हरामजादी देख तेरी मौत अाई हैं
लात लगने से रेशमा दूर जा गिरी और उसकी आंख खुल गई तो अपने मा बाप की लाशे देखकर वो दुख के मारे बेहोश हो गई।
रेहाना उसकी सूरत देखकर समझ गई कि ये शहनाज़ नहीं हैं इसलिए वो उपर की तरफ भागी। उपर जब शहनाज़ ने अपनी सास की आवाज सुनी तो वो खुद ही दौड़ती हुई नीचे की तरफ अा गई। सीढ़ियों में हल्का अंधेरा था इसलिए दोनो टकरा गई जिसका नतीजा ये हुआ कि दोनो सीढ़ियों से लुढ़कती हुई नीचे आ गिरी।
सीढ़ियों में लुढ़कने से रेहाना को काफी चोट अाई और उसके सिर से खून आने लगा तो वो अपना खून देखकर गुस्से से पागल हो गई और एक जोरदार लात शहनाज़ के पेट में मारी जो कि अपने सास ससुर की लाशों को पथराई हुई आंखो से देख रही थी।
लात लगते ही शहनाज़ के मुंह से एक दर्द भरी आह निकल पड़ी और वो अपना पेट पकड़कर फर्श पर ही दर्द से दोहरी हो गई।
काजल ने अपनी पिस्टल शहनाज़ पर तान दी और जैसे ही ट्रिगर दबाने वाली थी रेशमा की आंखे खुल गई और उसने एक भूखी शेरनी की तरह झपटते हुए काजल पर धावा बोल दिया जिससे उसकी पिस्टल नीचे गिर गई और काजल दूर जा गिरी। काजल या रेहाना किसी को भी रेशमा से एक हमले की उम्मीद नहीं थी। इससे पहले कि काजल अपने आपको संभालती रेशमा ने एक के बाद एक उसे थप्पड़ जड़ने शुरू कर दिए।
ये सब देख कर पप्पू और उसके गुंडों ने रेशमा को पकड़ लिया और रेहाना और काजल दोनो ने उसे बेरहमी से मारना शुरू कर दिया।
काजल उसके बाल पकड़ कर खीचती हुई:” हरामजादी कुटिया मुझ पर हाथ उठाती है ये ले मजा
इतना कहकर काजल ने रेशमा के मुंह पर वार कर दिया। शहनाज़ को गुण्डो ने पकड़ लिया और वो पूरी तरह से कोशिश कर रही थी छूटने की लेकिन कामयाब नहीं हो पा रही थी।
शहनाज़:” उसे छोड़ दो रेहाना, तुम्हारी लड़ाई मुझसे हैं।
रेहाना किसी चुड़ैल की तरह खूंखार हंसी हंसती हुई बोली:_
“। हा हा हा, इसे बहुत शौक चढ़ा हैं मा झांसी की रानी बनने का, पप्पू मारो साली को अच्छे से।
रेहाना के बोलने की देर थी कि चार पांच गुंडे रेशमा पर पिल पड़े और उसको जानवरो की तरह बेरहमी से मारने लगे। रेशमा की दर्द भरी चीखे गूंज रही थी और वो फिर भी बोली:’
” हरामजादी एक बार मुझे छोड़ दे बस अपने आदमियों को बोल, फिर देख मै तेरा खून पी जाऊंगी
शहनाज़ रोती हुई रेहाना के आगे हाथ जोड़ देती हैं और बोली:”
” रेहाना इसे मत मारो, ये बेचारी तो मेहमान हैं, मुझसे ले ले अपना बदला।
रेहाना ने एक नजर रेशमा पर डाली जो बुरी तरह से पिट रही थी लेकिन फिर भी झुकने के लिए तैयार नहीं थी। रेहाना:”
” माफ कर दू और इसे नखरे तो देख हरामजादी के, कौन हैं ये ?
शहनाज़ के पेट में लात लगने के कारण बहुत तेज दर्द हो रहा था इसलिए वो दर्द से कराहते हुए बोली:” ये शादाब की बुआ हैं।
रेहाना के होंठो पर स्माइल अा गई और बोली:” ओह इसलिए इतनी गर्मी दिखा रही है ये, कहां हैं वो हरामजादा
इतना कहकर रेहाना ने एक जोरदार थप्पड़ शहनाज़ के गाल पर जड़ दिया तो शहनाज़ फिर से दर्द से कराह उठी
:’ आह, वो एग्जाम देने गया है।
रेहाना:’ ओह इसका मतलब वो कुत्ते का पिल्ला घर में नहीं हैं ?
रेशमा:”: जुबान संभाल कर बोल, अगर वो होता तो अब तक तेरी लाश यहां पड़ी हुई होती।
रेहाना और काजल रेशमा की बात सुनकर जोर जोर से हंसने लगे और और बोली:”
” जरा मिला तो उस हीरो का नंबर काजल,
शहनाज़ डर के मारे थर थर कांपने लगी क्योंकि वो नहीं चाहती थी कि शादाब यहां आएं। काजल ने नंबर मिला कर रेहाना की तरफ मोबाइल बढ़ा दिया।
रेहाना:” सुन शादाब, मैं रेहाना तेरी मा और बुआ को अपने साथ ले जा रही हूं मुझसे दुश्मनी लेकर तूने बहुत गलत किया हैं।
शादाब ये सुनकर पूरी तरह से परेशान हो गया और बोला:”
” रेहाना अगर मेरे परिवार का बाल भी बांका हुआ तो तेरा वो हाल करूंगा जो तूने सपने में भी नहीं सोचा होगा।
रेहाना ठहाका मारकर हंसती हुई बोली:” जा घर जाकर देख कर कुछ लाशे तेरा इंतजार कर रही हैं। अगर तेरे मैं दम हैं तो कल तक आकर अपनी मा और बुआ को बचा लेना ।
इतना कहकर रेहाना ने फोन काट दिया और बोली:’
” पप्पू इनके दोनो के हाथ पैर और मुंह बांध कर उठा ले चलो।
पप्पू और उसके आदमी ने दोनो को बांध दिया और उठाकर गाड़ी में ले गए। रेशमा और शहनाज़ पूरी छटपटाई लेकिन कुछ नहीं कर पाई।
दूसरी तरफ शादाब को तो जैसे लकवा सा मार गया और उसकी आंखो में खून उतरने लगा और जबड़े किसी शेर की मानिंद कसते चले गए।
अजय :” क्या हुआ शादाब, ? सब ठीक तो है भाई ?
शादाब ने गुस्से में अपना मुक्का गाड़ी पर दे मारा और बोला:”
” कुछ गुंडे मेरी मा और बुआ को उठाकर ले गए हैं अजय, गाड़ी तेज चला मुझे जल्दी से घर जाना है।
शादाब की बात सुनकर अजय की आंखे भी लाल सुर्ख हो गई और उसकी रगो में बहता हुआ खून उबाल मारने लगा। “(अजय मार्शल आर्ट में ब्लैक बेल्ट था ये बात शादाब को नहीं पता थी।
अजय आंधी तूफान की तरह गाड़ी को उड़ाता हुआ शादाब के घर पहुंच गया तो वहां जमा हुई भारी भीड़ को देखकर शादाब का दिल बहुत जोर जोर से धड़कने लगा और वो गाड़ी से बाहर निकला तो लोग उसे देखते ही आपस में बात करने लगे।
शादाब घर के अंदर घुसा और नीचे बैठक में ही उसे अपने दादा दादी की लाशे पड़ी हुई नजर आईं और उसकी आंखो के आगे अंधेरा सा फ़ैल गया। अजय ने उसे सहारा दिया और शादाब अपने दादा दादी को देखकर दहाड़ मारकर रोने लगा।
उसका पूरा चेहरा आंसुओ से भीग हुआ था और सिसकियां तो जैसे तो जैसे रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। अजय ने जैसे तैसे करके शादाब को संभाल लिया और तभी वहां पुलिस की जीप आकर रूकी ।
इंस्पेक्टर हसन बाहर निकला और सारे हालत का जायजा लिया और बोला:_
” कैसे हुआ ये सब ?
शादाब:” मुझे नहीं पता कुछ भी, मैं तो अभी एग्जाम देकर आया तो घर में लाशे देखी। मेरी अम्मी और बुआ भी थी जो मिल नहीं रही हैं।
हसन:” इन्हे गोली मारी गई है, तुम्हारी किसी से कोई दुश्मनी तो नहीं थी ?
अजय कुछ बोलना चाहता था लेकिन शादाब ने उसका हाथ दबा दिया और अजय चुप हो गया।
शादाब:” नहीं दादा जी की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी।
हसन पड़ोसियों से बोला:”
” आपमें से किसी को कुछ पता हैं क्या ये सब कैसे हुआ ?
पड़ोसी:” साहब मैं जब गोलियों की आवाज सुनकर सुनकर बाहर आया तो वो लोग जा चुके थे।
हसन समझ गया कि ये मामला बहुत ज्यादा उलझा हुआ हैं इसलिए वो शादाब से बोला:
” तुम पुलिस स्टेशन आकर रिपोर्ट लिखा देना, पुलिस अपने तरीके से कार्यवाही करेगी। और मैं कुछ पुलिस वाले तेरे घर के बाहर सुरक्षा के लिए लगा देता हूं।
शादाब ने हान में सिर हिलाया और चुप चाप बैठ गया। हसन चला गया और एक एक करके सभी लोग चले गए। अब घर में बस अजय और शादाब बच गए थे। शादाब ने अपना चेहरा घुटनो में छुपा रखा था।
अजय:” भाई मैं तेरा दर्द समझ सकता हूं, अब हमे सबसे पहले अम्मी और बुआ को बचाना होगा
शादाब ने अपना चेहरा उपर उठाया तो उसकी आंखे किसी आग के गोले की तरह दहक रही थी। शादाब ने अपना मोबाइल निकाला और रेहाना का नंबर डायल किया
रेहाना जोर जोर से हंसते हुए बोली:” उम्मीद हैं घर पहुंचते ही पहला तोहफा तुझे मिल गया होगा शादाब।
शादाब का खूबसूरत चेहरा सख्त होता चला गया और बोला:”
” सीधी तरह बता मुझे कहां आना हैं ?
रेहाना:” बड़ी जल्दी काम कि बात पर अा गया तो सुन तू गाजियाबाद बाय पास पर आजा और उम्मीद हैं तू पुलिस के पास जाने की गलती नहीं करेगा।
शादाब ने फोन काट दिया और अजय को बोला:”
” अजय तुम घर पर ही रुको मैं मा और बुआ को लेकर आता हूं।
अजय :” नहीं शादाब मैं भी तुम्हारे साथ आऊंगा, तुम्हे मेरी जरूरत हैं।
शादाब उसका हाथ थामकर बोला:_ शुक्रिया अजय, लेकिन ये लड़ाई मेरी हैं और मैं खुद ही इसे लड़ूंगा। मैं नहीं चाहता कि तुम्हे मेरी वजह से कोई भी खरोच आए भाई।
अजय:_ भाई भी बोलता हैं और भाई का फ़र्ज़ निभाने से भी रोकता हैं शादाब, तूने टाइगर का नाम सुना हैं तो मार्शल आर्ट में ब्लैक बेल्ट हैं।
शादाब चौंकते हुए:” हान सुना हैं और आज तक उसका चेहरा किसी ने नहीं देखा हैं। लेकिन तू ये क्यों पूछ रहा है मुझसे ?
अजय ने अपने जेब से एक मास्क निकाला और उसको लगा लिया और अपनी दोनो आंखे अलग अलग दिशा में एक साथ घुमाई तो शादाब को जैसे यकीन ही नहीं हुआ और बोला:_
” क्या अजय तू टाइगर हैं ,
अजय:” हान भाई मैं ही टाइगर हूं हिंदुस्तान का सबसे बड़ा फाइटर लेकिन मेरी मा और बहन को ये सब पसंद नहीं है इसलिए छुप कर रहता हूं।
शादाब:” ठीक हैं हम दोनों यहां से पैदल जाएंगे ताकि पुलिस वालो को लगे की हम घर में ही हैं।
अजय:” ठीक हैं हम लोग पीछे के दरवाजे से ही बाजार जाएंगे।
उसके बाद दोनो धीरे से पीछे के दरवाजे से बाहर निकल गए। बाय पास यहां से कोई 15 किलोमीटर था और दोनो ने एक दूसरे की तरफ देखा और दौड़ लगा दी।
कोई आधे घंटे में वो बाय पास अा चुके थे और अब दोनो ने अपना चहेरा ढक लिया था और किसी जंगली शेर की तरह घात लगाकर आगे बढ़ रहे थे।
दूसरी तरफ शादाब के घर के बाहर पुलिस वाले ताश खेलने में व्यस्त थे और उन्हें बिल्कुल भी नहीं पता था शादाब घर से निकल चुका था।
रेहाना ने बाय पास पर एक बड़े खंडहर में रेशमा और शहनाज़ को बंधक बनाया हुआ था और रहकर उन्हें बेदर्दी से पीट रही थी। मार की वजह से दोनो के कपड़े आधे से ज्यादा फट गए थे जिनमें से चोट की वजह से पड़े हुए लाल निशान साफ नजर आ रहे थे। चेहरे पूरी तरह से सूज गया था और आंखो के नीचे काले काले रंग के निशान पड़ गए थे।
दोनो दर्द से बुरी तरह से तड़प रही थी और उनके पास खड़े हुए पप्पू और उसके गुंडे उन्हें वासना भारी नजरो से घूर रहे थे। ये सब देख कर रेहाना और काजल दोनो मुस्कुरा उठी। रेहाना ने अपनी पिस्टल को जोर शहनाज़ के सिर में मारा और उसका सिर फट गया जिससे उसकी दर्द भरी चींखें निकलने लगी। शहनाज़ का खूबसूरत चेहरा उसके सिर से निकले हुए खून से लाल हो गया था।
शहनाज़ की दर्द भरी चींखें सुनकर शादाब का खून खौल उठा और दोनो आवाज की दिशा में आगे बढ़ गए। रेहाना ने चारो तरफ गुण्डो का पहरा बिठा रखा था इसलिए शादाब और अजय धीरे धीरे रेंगते हुए आगे बढ़ रहे थे। चारो तरफ चांद की हल्की रोशनी फैली हुई थी जिसमें सब को धुंधला धुंधला नजर आ रहा था। अजय और शादाब दोनो खंडहर के करीब पहुंच गए और उन्हें रेहाना के गुंडे अब साफ दिख रहे थे क्योंकि अंदर से बाहर की तरफ लाइट पड़ रही थी।
अजय और शादाब दोनो ने दो गुण्डो के ठीक पीछे आते हुए उनकी गर्दन दबोच ली और मुंह पर हाथ रख कर एक झटके के साथ गर्दन मरोड़ दी और दोनो ने गुण्डो के कपड़े पहन लिए और मुंह पर उनका मास्क लगा दिया।
दोनो ने गुण्डो की पिस्टल को उठा लिया और पाइप के सहारे उपर चढ़ गए। अंदर हॉल में शादाब को शहनाज़ और रेशमा बंधी हुई नजर आईं और शहनाज़ का खून से तर चेहरा देखकर शादाब का चेहरा किसी पत्थर की तरह सख्त होता चला गया और आंखो से आग की लपटे सी निकलने लगी।
अजय नहीं चाहता था कि शादाब जोश में आकर कोई गलती करे इसलिए उसने शादाब को इशारे से समझा दिया और दोनो ने एक एक करके छत पर मौजूद गुंडों को मारना शुरू कर दिया।
जल्दी ही छत पर सभी गुण्डो की लाशे बिछी हुई पड़ी थी। अब अजय और शादाब दोनो नीचे की तरफ बढ़ गए।
रेहाना और काजल शहनाज़ को तड़पते हुए देखकर खुश हो रही थी और रेहाना ने एक थप्पड़ फिर से शहनाज़ जड़ दिया तो वो दर्द से कराह उठी और बोली:_
” आह रेहाना, एक बार मेरे बेटे को अा जाने दे फिर वो मेरे ऊपर हुए एक एक ज़ुल्म का बदला लेगा तुझसे।
रेहाना और काजल दोनो फिर से शैतानी हंसी हंसने लगी और बोली:”
” बस उसका ही तो इंतजार हैं मुझे, एक बार वो अा जाए फिर उसकी आंखो के सामने ही मेरे ये आदमी तुम दोनों को नोच नोच कर खा जाएंगे। पहले इसकी गांड़ कौन मारेगा ?
पप्पू और उसके गुंडे एक साथ बोले:_ पहले मैं, पहले मैं।
रेहाना:” देख शहनाज़ बेचारे कैसे तड़प रहे हैं तेरी चूत और गान्ड का ढोल बजाने के लिए।
पप्पू ने तो जोश में आते हुए अपना लंड बाहर निकाल लिया और शहनाज की तरफ देखते हुए बोला:”
” पसंद आया क्या मेरा लन्ड रण्डी ?
शहनाज़ ने नफरत भरी निगाहों से अपना मुंह दूसरी तरफ कर लिया और काजल आगे बढ़ी और पप्पू का लंड अपने हाथ में भर लिया और बोली:” साले इतने दिन से इतना मस्त लंड लिए मेरे साथ घूमता रहा और मुझे पता ही नहीं चला इसका।
काजल रेहाना की तरफ देखते हुए बोली: बहन अगर तू कहे तो पहले मैं चुद लू एक बार इससे ?
रेहाना:”साली मेरी बहन तू तो बहुत बड़ी चुद्दाकड़ निकली, जा ले ले मजे और हान शहनाज़ की आंखो के आगे चुदना।
पप्पू ने काजल को बांहों में उठा लिया और शहनाज़ के बिल्कुल सामने अा गया और काजल ने घोड़ी बनते हुए अपनी सलवार और पेंटी एक झटके के साथ नीचे सरका दी और पप्पू ने काजल की चूत में अपना लंड घुसा दिया और धक्के लगाने लगा। काजल की मजे से आंखे बंद हो गई और सिसकते हुए बोली:”
” आह भोसडी के थोड़ा प्यार से तुझे अपना असली दम इस शहनाज़ की चूत के लिए बचाकर रखना होगा।
रेहाना ने पास पड़ी हुई करीब 10 इंच मोटी और 1.5 फुट मोटी लोहे की रॉड उठा ली और बोली:_
” तू आराम से चुद मेरी बहन, इस रण्डी की चूत में मुझे आज ये रॉड घुसानी हं हैं।
शहनाज़ और रेशमा दोनो के शर्म और डर के मारे अपनी आंखे बंद कर ली और वहां मौजूद सारे लोग काजल और पप्पू के सेक्स का मजा ले रहे थे।
शादाब ने अजय को इशारा किया और अजय ने दोनो हाथो में पिस्टल थाम ली और शादाब चलते हुए अंदर की तरफ अा गया और रेहाना के ठीक पीछे बने हुए पिलर के पीछे छुप गया।
अजय ने शादाब को इशारा किया और अजय ने पिस्टल से दमादम गोलियां चलाना शुरू कर दी जो एक के बाद एक वाहन खड़े हुए गुण्डो के जिस्म में धंसती चली गई और वो धड़ाम से गिर पड़े।
रेहाना ने अपनी पिस्टल से जैसे ही अजय पर गोली चलानी चाही तो पहले से घात लगाकर तैयार शादाब ने रेहाना पर हमला कर दिया और उसकी पिस्टल छीन ली। रेहाना को पता ही नहीं चला कि पलक झपकते ही और क्या हो गया। काजल और पप्पू जब तक अजय पर हमला करते अजय ने उससे पहले ही दोनो पर गोली चला दी हो उनके पैर में लगी और अजय ने हवा में एक कलाबाज़ी खाते हुए पलक झपकते ही उनकी बदुके अपने कब्जे में ले ली।
शहनाज़ और रेशमा दोनो की आंखे खुल गई और शादाब को देखते ही दोनो फफक फफक कर रो पड़ी। अजय ने आगे बढ़कर शहनाज़ और रेशमा दोनो को खोल दिया तो शहनाज़ और रेशमा बड़ी मुश्किल से अपने पैरो पर खड़ी हुई और शादाब की तरफ चल दी।
रेहाना अब समझ चुकी थी कि उसका खेल खत्म हो चुका है इसलिए डर के मारे थर थर कांप रही थी। रेशमा ने लोहे की रॉड और शहनाज़ की तरफ बढ़ा दी तो दोनो के उस रोड को थाम लिया और रेहाना की डर के मारे जोरदार चीनख निकल गई।
रेहाना ने अपना पूरा दम लगा कर शादाब को धक्का दिया और भागने लगी तो शहनाज़ और रेशमा ने रॉड की भागती हुई रेहाना पर दे मारा और रॉड उसकी कमर पर जाकर लगी और उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई और रेहाना धड़ाम से गिर पड़ी। वो दर्द से बुरी तरह से कराह रही थी और हाथ जोड़कर माफी मांग रही थी।
” आह मुझे माफ कर दो शादाब, शहनाज़ तुम तो मेरी बहन जैसी हो, मुझे छोड़ दो ।
शहनाज़ रोती हुई शादाब के गले लग गई और सुबकती हुई बोली:”
” शादाब इसने दादा दादी को मार दिया है, ये बहुत नीच औरत हैं।
इसे खत्म कर दो बेटा।
रेशमा:” हान शादाब, इसे जीने का कोई हक नहीं हैं,
रेशमा ने गुस्से में रोड उठा ली और वापिस पलट गई पप्पू और काजल की तरफ जो कि अभी तक अजय की पिस्टल के सामने पड़े हुए थे।
रेशमा किसी शेरनी की तरह दहाड़ती हुई आगे बढ़ी और रोड का जोरदार नीचे से नंगे पप्पू के लंड पर कर दिया
” हरामजादे मेरी भाभी पर गंदी नजर डालेगा तू, मेरे घर की इज्जत खराब करेगा
पप्पू सिर कटे हुए जानवर की तरह छटपटाया और रेशमा ने फिर से अगला वार उसके पेट पर कर दिया और पप्पू की आंते बाहर बिखर गई। पप्पु ने तड़पते हुए दम तोड़ लिया और काजल ये सब देख कर बेहोश हो गई।
रेशमा ने एक बार फिर से अपनी रोड उठाई और जोर से चिल्लाई:_ आंखे खोल हरामजादी देख तेरी मौत तेरे सिर पर खड़ी है।
डर के मारे काजल की आंखे खुल गई और रेशमा ने रॉड का वार उसके मुंह पर कर दिया और काजल की दर्दनाक चींखें गूंज उठी।
रेशमा आगे अाई और शहनाज़ के हाथ में रॉड देते हुए बोली:
” ले शहनाज कर से इसका वहीं हाल जो ये तेरा करना चाहती थी। शहनाज़ ने रॉड को थाम लिया और रेशमा ने रेहाना की दोनो टांगे फैला दी तो मौत का खौफ रेहाना की आंखो में नाच उठा।
शादाब और अजय दोनो में अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया और शहनाज़ ने रॉड का भरपुर वार रेहाना की जांघो के बीच में किया और उसकी चूत में रॉड किसी रॉकेट की तरह धंसती चली गई। रेहाना के आंखे बाहर को उबल पड़ी और दर्द के मारे बेहोश हो गई और थोड़ी देर बाद ही उसका जिस्म शांत हो गया
शहनाज़ और रेशमा दोनो एक दूसरे के गले लग गई और रो पड़ी। दोनो चलते हुए शादाब के पास चली और शहनाज़ शादाब से कसकर लिपट गई और रोने लगी। शादाब ने अपनी अम्मी का चेहरा अपने दोनो हाथो में भर लिया और खून साफ करने लगा।
तभी रेहाना के जिस्म में हलचल हुई और उसने अपना खून से लाल हो चुका चेहरे उपर उठाया और अपनी जेब से एक तेज धार चाकू बाहर निकाला और जोर से चिल्लाई:”
” शहनाज़
शहनाज़ जैसे ही पीछे पलटी तो रेहाना ने चाकू का वार उस पर कर दिया और चाकू किसी कमान से निकले तीर की तरह हवा में उड़ता हुआ आया और रेशमा शहनाज़ के आगे अा गई जिससे चाकू रेशमा के पेट में घुसता चला गया। शादाब ने अपनी बुआ को अपनी बांहों में थाम लिया और अजय ने रेहाना पर गोलियों की बौछार कर दी और रेहाना ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया।
शहनाज़ रोते हुए रेशमा से लिपट गई और बोली:_
,” ये तूने क्यों किया रेशमा, मेरी मौत को अपने सिर पर ले लिया।
रेशमा लंबी लंबी सांस लेते हुए बोली:” तुम हमारे घर की बहू हो और तुम्हारी रक्षा मेरा फर्ज़ था शहनाज़ भाभी।
अजय:_ शादाब जल्दी से इन्हे किसी हॉस्पिटल में ले चलो इससे पहले कि देर हो जाए !!
शादाब ने रेशमा को अपने कंधे पर उठाया और दौड़ पड़ा हॉस्पिटल की तरफ। जैसे ही हॉस्पिटल पहुंचा तो उसने रेशमा को एडमिट किया तो डॉक्टर ने ऑपरेशन करने से साफ मना कर दिया और बोला कि ये तो पुलिस कैस हैं।
शादाब:” हां ये पुलिस कैस हैं, मैं पुलिस को कॉल करता हूं, तुम ऑपरेशन की तैयारी करो।
डॉक्टर:” नर्स जल्दी से ऑपरेशन की तैयारी करो।
शादाब ने पुलिस को फोन किया और उन्हें वहां आने के लिए बोला तो इंस्पेक्टर हसन बोला:”
” तुम कौन बोल रहे हो ?
शादाब ने फोन काट दिया और शहनाज़ और अजय भी हॉस्पिटल पहुंच चुके थे। शादाब शहनाज़ को रेशमा के पास से छोड़कर अजय के साथ घर की तरफ चल पड़ा। दोनो ने अभी तक अपने मुंह पर मास्क लगाया हुआ था जिससे कोई इन्हे नहीं पहचान पाया था।
शादाब और अजय दोनो पाइप से उपर चढ़ गए और घर के अंदर दाखिल हो गए। दोनो नहाए और अपने कपड़े बदल लिए।पुलिस वाले मुस्तैदी के साथ अभी नहीं बाहर पहरा दे रहे थे।
इंस्पेक्टर हसन हॉस्पिटल पहुंच गया और वहां उसे शहनाज मिली जो कि जख्मी थी और रेशमा का अंदर ऑपरेशन चल रहा था।
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इंस्पेक्टर ने आते ही शहनाज़ से पूछ ताछ शुरू कर दी।
हसन:” कौन हो तुम और जख्मी कैसे हुई और अंदर दूसरी औरत कौन हैं?
शहनाज़ को चेहरे पर काफी जख्म आए थे और डॉक्टर अभी उसकी ड्रेसिंग कर रहे थे इसलिए डॉक्टर बोला:”
” थोड़ा सा इंतजार कीजिए इंस्पेक्टर साहब, एक बार इनका इलाज होने दीजिए फिर आप अपने सभी सवाल पूछ लेना।
इंस्पेक्टर हल्का सा मायूस हुआ और बाहर बैठकर शहनाज़ का इंतजार करने लगा। करीब 15 मिनट के बाद शहनाज़ को कमरे में शिफ्ट कर दिया और इंस्पेक्टर अपने सवाल पूछने चला गया।
इंस्पेक्टर :” बताइए आप अब कैसा महसूस कर रही है ?
शहनाज़ को अच्छा लगा कि इंस्पेक्टर ने पहले उसका हाल पूछा इसलिए उसने इशारे से ही बता दिया कि वो अब पहले से बेहतर हैं।
हसन:” आप दोनो कौन है और आप जख्मी कैसे हुई ?
शहनाज़ को पहले ही सब कुछ शादाब ने समझा दिया था इसलिए वो जवाब देते हुए बोली:’
” मेरा नाम शहनाज़ हैं और अंदर जिसका ऑपरेशन चल रहा हैं और रेशमा मेरी ननद हैं । हमारे घर पर कल रेहाना नाम की एक औरत ने हमला कर दिया था जिसमें मेरे सास ससुर मारे गए।
हसन:” उसने तुम्हारे परिवार पर हमला क्यों किया ?
शहनाज़ जानती थी कि इंस्पेक्टर का अगला सवाल ये ही होगा इसलिए वो बोली:_
“: करीब दो महीने पहले वो हमारे घर अाई थी और उसने हमारी जंगल वाली जमीन खरीदने का प्रस्ताव रखा जिसे हमने मना कर दिया था। वो गुस्से में बोल कर गई थी कि हमें सबक सीखा देगी।
हसन ने थोड़ी देर तक गौर से शहनाज़ के चेहरे का मुआयना किया और बोला:”
” तुम्हारा तो किडनैप हो गया था फिर तुम यहां कैसे अाई ?
शहनाज़:'” दरसअल वो मुझे और रेशमा को बाय पास के पास एक खंडहर में ले गई ताकि वो मुझसे छोड़ने के बदले मेरे बेटे शादाब से जमीन हथिया सके। लेकिन पप्पू नाम के एक गुंडे ने दारू के नशे में रेहाना की बहन काजल की इज्जत लूट ली जिससे रेहाना नाराज हो गई और वहां उनमें आपस में ही लड़ाई हो गई।
पप्पू रेहाना और काजल के लिए काम करता था। सभी लोग एक दूसरे को मार रहे थे जिसका फायदा उठाकर हम भाग निकले लेकिन हम दोनों पर भी हमला हुआ फिर भी हम किसी तरह यहां पहुंच गए।
हसन सोच में पड़ गया और बोला:” डॉक्टर तो कह रहा था कि तुम्हे यहां दो नकाबपोश गुंडे छोड़ गए हैं।
शहनाज़:” वो दोनो पप्पू गैंग के आदमी थे और चूंकि रेहाना ने पप्पू को मार दिया था इसलिए वो रेहाना के खिलाफ थे और हमे यहां छोड़ गए । भले आदमी थे बेचारे
हसन के होंठो पर स्माइल अा गई और बोला:”: एक गुंडा भला कैसे हो सकता हैं तुम कुछ ज्यादा नहीं बोल रही हो ?
शहनाज़ के चेहरे पर एक आत्म विश्वास साफ तौर पर उभर आया और बोली:”
” गुंडे आपके लिए होंगे मेरे लिए तो वो भले इंसान ही थे, वो दोनो ना होते तो मैं शायद जिंदा ना बचती ।
हसन शहनाज़ से थोड़े तेज स्वर में बोला:’ मत भूलो कि थोड़ी देर पहले ये भले आदमी ही तुम्हारे सास ससुर को मारने और तुम्हे उठाकर ले गए थे । वकीलों की तरह दलीलें बंद करों
शहनाज़ चुप हो गई और हसन उसे अपने साथ लेकर बाय पास पर खंडहर में पहुंच गया। वहां पर चारो तरफ गुण्डो की लाशे बिखरी हुई थी और बीच में पप्पू और काजल की लाशे पड़ी हुई थी जिनके जिस्म पर कपडे नहीं थे। पुलिस ने सभी गुण्डो की लाशों को पोस्टमारटम के लिए भेज दिया और साथ ही साथ ये भी चेक करने के लिए कहा कि काजल का रेप हुआ है या नहीं।
हसन ने वापिस हॉस्पिटल आकर डॉक्टर से बात करी और तब तक दिन निकल गया था इसलिए वो शहनाज़ को लेकर घर की तरफ चल पड़ा। रेशमा का ऑपरेशन हो गया था लेकिन अभी तक बेहोश थी।
दूसरी तरफ शादाब और अजय से सारे सबूत मिटा दिए ताकि पुलिस वालों को हल्की सी नहीं भनक ना लगे कि वो कितना बड़ा कांड करके आए हैं।
इंस्पेक्टर ने शहनाज़ को गाड़ी में ही बिठा कर रखा और एक पुलिस वाले को बुलाया और बोला:”
” अरे रामू रात से घर से कोई अंदर या बाहर तो नहीं गया हैं
रामू:” सर मैं खुद पूरी रात जागकर ड्यूटी किया हूं, कोई परिंदा भी अंदर बाहर नहीं हुआ है आदमी तो बहुत दूर की बात हैं।
इंस्पेक्टर शहनाज़ को लेकर अंदर घर के अंदर चला गया तो शहनाज़ लाशों से लिपट कर रोने लगी और उसकी आंखो से आंसू बह रहे थे। शादाब उसे बार बार संभालने की कोशिश कर रहा हूं लेकिन शहनाज़ की तो जैसे दुनिया ही लुट गई थी। वो दादा दादी के साथ ही तो अपनी आधी ज़िन्दगी रही और उन्हें अपने सगे मा बाप की तरह प्यार करती थी।शहनाज़ का रोना मोहल्ले और परिवार की औरत अा गई और उसे समझाने लगीं।
इंस्पेक्टर शादाब को उपर छत पर ले गया और बोला:”
” रात रेहाना और उसके सभी गुण्डो का किसी ने खून कर दिया है कहीं ये नेक काम आपने तो नहीं किया हैं।
शादाब ने हसन की आंखो में देखते हुए कहा:” ये तो बहुत खुशी की बात हैं, मगर मुझे ज़िन्दगी भर अफसोस रहेगा कि उन कुत्तों को मैं नहीं मार सका।
हसन:”:शादाब ज्यादा बनने की कोशिश मत करो, मेरे पास इस बात का पक्का सबूत हैं कि तुम रात को घर से बाहर गए थे और उन्हें सबको मारा और फिर शहनाज़ और रेशमा को हॉस्पिटल में छोड़कर वापिस आ गए।और हान तुम्हारे साथ ये तुम्हारा दोस्त अजय भी था।
शादाब एक पल के लिए तो कांप गया लेकिन अगले ही पल खुद को काबू में करते हुए बोला:’
” इंस्पेक्टर साहब हवा में तीर चलाने से कुछ हासिल नहीं होगा, अगर कोई सबूत हो तो बताओ मुझे।
हसन के होंठो पर स्माइल अा हुई और बोला:_
” हॉस्पिटल के सीसीटीवी कैमरे में तुम और अजय साफ नजर आ रहे हो।
शादाब:’ जब मैं घर से बाहर निकला ही नहीं तो वहां कैसे जा सकता हूं, अपने पुलिस वालो से पूछ लो एक बार।
हसन समझ हुआ कि शादाब जरूरत से ज्यादा तेज हैं और बातो के दबाव में नहीं आएगा इसलिए बोला:_
” रेहाना ने तुम्हारे परिवार पर हमला क्यों किया और तुम्हारी उसकी क्या दुश्मनी थी।
शादाब ने सब कुछ वहीं बताया जो शहनाज़ पहले ही बता चुकी थी।
हसन:” क्या मुझे घर के बाहर लगे कैमरे की फुटेज मिल सकती हैं जब रेहाना तुम्हारे घर अाई थी ?
शादाब ने इंस्पेक्टर को वो सभी फुटेज निकाल कर दिखा दी कि रेहाना घर के अंदर दाखिल हुई थी और बाद में गुस्से में बड़बड़ाती हुई चली गई।
हसन:”: ठीक है लेकिन जब तक मुझे असली मुजरिम नहीं मिल पाता तुम दोनों मेरी नजरो में ही रहोगे।
शादाब और अजय दोनो ने एक दूसरे की तरफ देखा और मुस्करा दिए। हसन अपने चेहरे पर गुस्से कें भाव लिए हुए चला गया। सभी गांव के लोग, दादा जी के मिलने वाले, रिश्तेदार अा चुके थे इसलिए दादा दादी के जनाजे तैयार किए गए और लोगो की भीड़ उमड़ पड़ी।
दादी दादी दोनो को गमगीन माहौल में सुप्रदे ए खाक कर दिया और शादाब की आंखो से आंसू निकल रहे थे और अजय उसे बार बार समझा रहा था। आखिरकार दोनो घर अा गए और शाम तक सभी मेहमान और गांव वाले चले गए तो तीनो हॉस्पिटल की तरफ चल पड़े जहां अभी तक रेशमा बेहोश पड़ी हुई थी।
शहनाज़ के चेहरे पर भी काफी सारी चोट अाई हुई थी। डॉक्टर ने फिर से शहनाज़ को एडमिट कर लिया । शादाब और अजय आपस में बैठे हुए बाते कर रहे थे कि तभी इंस्पेक्टर हसन अंदर दाखिल हुआ।
हसन:” मेडिकल रिपोर्ट से साबित हो गया हैं कि पप्पू ने काजल का रेप किया है इसलिए इस बात की पुष्टि हो गई हैं कि रेप की वजह से गुण्डो में आपसी लड़ाई छिड़ गई और ज्यादातर मारे गए और बाकी भाग गए। लेकिन मुझे अभी भी लगता हैं कि ये खून तुमने जी किया हैं शादाब ।
शादाब इस बार थोड़े तेज स्वर में बोला:’ सिर्फ लगने से कुछ नहीं होता, साबित करके दिखाओ।
हसन:’ वो तो मैं जरूर करता लेकिन अभी फिलहाल मेरा ट्रांसफर हो रहा हैं और कमिश्नर साहब ने ये फाइल बंद करने का ऑर्डर दिया हैं क्योंकि वो सभी अपराधी थे इसलिए उनके मरने से कानून को फायदा ही हुआ है। रेहाना का पति अभी जेल में ही बंद हैं और उसे 20 साल की सजा हुई हैं। अब तुम दोनों मेरी तरफ से आजाद हो।
इतना कहकर हसन बाहर अा गया और अजय और शादाब दोनो मुस्कुरा दिए।
अजय:” अच्छा शादाब बात सुन भाई मुझे अब घर जाना होगा क्योंकि मेरी मम्मी के काफी फोन अा रहे हैं और मेरी बड़ी बहन भी मुझे बहुत याद कर रही हैं।
शादाब ने उसे जोर से गले लगा लिया और बोला:”
” अजय भाई मैं तुम्हारा ये एहसान कभी नहीं चुका पाऊंगा, मेरी कभी भी जरूरत पड़े तो मुझे याद करना।
अजय उसके गाल पर हल्की सी चपत लगाते हुए बोला:”
” भाई भी बोलता हैं और बात एहसान की करता हैं, सुधर जा अब तू।
शादाब एक बार फिर से अजय से लिपट गया और थोड़ी देर बाद अजय अपने घर की तरफ निकल गया। शादाब और शहनाज़ दोनो अलग अलग कमरे में थी। शादाब शहनाज़ के कमरे में गया तो देखा की शहनाज़ सो रही है तो वो फिर अपनी बुआ के कमरे में गया तो रेशमा अभी तक बेहोश थी ।
शादाब वापिस आया और शहनाज़ के माथे को चूम लिया। शहनाज़ अभी तक दवाई के नशे में पड़ी हुई थी और सुबह से पहले नहीं उठने वाली थी। शादाब शहनाज़ के कमरे में खाली पड़े हुए बेड पर लेट गया। वो बुरी तरह से थका हुआ था इसलिए जल्दी ही गहरी नींद में सो गया।
रात को करीब दो बजे शहनाज़ की आंख खुली और उसने शादाब को अपने सामने दूसरे बेड पर सोते हुए देखा तो उसे खुशी हुई। हालाकि दादा दादी की मौत से वो बुरी नजर से टूट गई थी लेकिन वो जानती थी कि शादाब अपनी दादा दादी से बहुत प्यार करता था इसलिए उसे बहुत ज्यादा दुख हुआ होगा। शहनाज़ जैसे ही उठने लगी तो उसे आपके सिर में दर्द का एहसास हुआ और उसके मुंह से एक दर्द भरी आह निकल पड़ी । शादाब की आंख खुल गई तो देखा कि शहनाज़ बेड से उतरने की कोशिश कर रही हैं तो वो एकदम से खड़ा हो गया और शहनाज़ के सामने जा पहुंचा।
शादाब को उठते हुए देखकर शहनाज़ को दुख हुआ और बोली:_ बेटा तुम आराम कर लो
शादाब शहनाज़ के पास बेड पर बैठ गया और उसका हाथ पकड़ते हुए बोला:’
” अम्मी जब आप दिक्कत में हो तो मुझे नींद कैसे अा सकती हैं ?
शहनाज़ ने शादाब की बात सुनकर आपके दोनो हाथ फैला दिए और शादाब उसकी बांहों में समा गया। शहनाज़ ने उसे अपनी गले से लगाकर जोर से कस लिया और दोनो मा बेटे कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे। दादा दादी को याद करके शहनाज़ की आंखे भर आई और उसकी रुलाई फूट पड़ी।
शहनाज़ रोते हुए बोली:” शादाब ये सब मेरी वजह से हुआ है, ना मेरी रेहाना से लड़ाई होती और ना आज ये दिन देखना पड़ता।
शादाब ने अपनी मा के चेहरे को साफ किया और और उसकी आंखो में देखते हुए बोली:”
” अम्मी दादा दादी की मौत का मुझे भी दुख हैं लेकिन होनी को कौन टाल सकता है, आप अपने आपको इसके लिए जिम्मेदार ना मानिए। मुझे रेहाना से ऐसी उम्मीद नहीं थी।
शहनाज़ के आंसू बहते रहे और शादाब साफ करता रहा। जब शहनाज के आंसू नहीं रुके तो शादाब ने उसका चेहरा अपने दोनो हाथो में भर लिया और बोला:” अम्मी बस आपको अब मेरी कसम, चुप हो जाइए।
शादाब की कसम से जैसे कमाल हो गया और शहनाज़ के आंसू अपने आप सूखते चले गए। शादाब शहनाज़ पीठ थपथपाते हुए बोला:”
” अम्मी आपने खुद अपने हाथों से उस कमीनी को उसके लिए की सजा दी हैं। बताओ शहनाज़ आपके लिए मैं और क्या कर सकता हूं ?
शहनाज़ को शादाब की बात सुनकर कुछ सुकून मिला और उसे वो पल याद आ गया जब उसने लोहे की वो मोटी रॉड रेहाना की चूत में घुसा दी थी और वो दर्द से तड़प रही थी।
शहनाज:” हान बेटा उस कूतिया की चींखें सुनकर जरूर दादा दादी को आराम मिला होगा।
शादाब:” अम्मी मैं दादा दादी के बाद बिल्कुल अकेला पड़ गया हूं, उनकी बहुत याद आएगी मुझे।
शहनाज़:” शादाब तेरा दर्द मैं समझ सकती हूं लेकिन मेरे लिए तो वो ही सबसे बड़ा सहारा थे। घर कितना खाली खाली लगेगा उनके बिना, मुझे तो उनकी आवाजे सुनाई देगी शहनाज बेटी चाय ले आओ, खाना ले आओ, शहनाज़ मेरे कपड़े प्रेस कार दो, शहनाज़ खाने में मसाला कुटा हुआ डालना।
मसाले शब्द मुंह से निकलते ही शहनाज़ की आंखे शर्म से झुक गई। शादाब की आंखो के आगे वो दृश्य याद अा गए कि किस तरह उनका प्यार मसाला कूटने से शुरू हुआ था।
शादाब ने शहनाज़ का हाथ हल्का सा दबा दिया और बोला:”
” अम्मी आप फिक्र ना करे, आपका बेटा कभी आपको किसी चीज की कमी नहीं होने देगा।
शहनाज़ को शादाब पर बहुत प्यार आया और उसने अपने बेटे का मुंह चूम लिया। शादाब प्यार से शहनाज़ के चेहरे को सहलाने लगा जो कि थप्पड़ पड़ने की वजह से लाल हुआ था और हल्के हल्के काले निशान पड़े हुए थे।
शादाब:” हरामजादी रण्डी साली रेहाना, क्या हाल कर दिया हैं मेरी जान शहनाज का उसने!!
इतना कहकर वो धीरे धीरे शहनाज़ के जख्मों को हल्का हल्का चूमने लगा। शहनाज़ को दर्द तो बहुत था लेकिन अपने बेटे का प्यार देखकर बड़ा सुकून मिल रहा था।
इतना कहकर वो धीरे धीरे शहनाज़ के जख्मों को हल्का हल्का चूमने लगा। शहनाज़ को दर्द तो बहुत था लेकिन अपने बेटे का प्यार देखकर बड़ा सुकून मिल रहा था।
शहनाज़:” बस कर शादाब, बेटा रेशमा मेरे लिए रेहाना और उसके गुण्डो से बहुत लड़ी जिस कारण उसे काजल ने बहुत बुरी तरह से पीटा था। अगर वो ना होती तो आज मैं ज़िंदा ना रहती ।
शादाब अपनी बुआ की तारीफ सुनकर खुश हुआ और बोला:”
” अम्मी सच में बुआ बिल्कुल बदल गई है, दादा दादी भी उसकी बड़ी तारीफ कर रहे थे।
शहनाज़:” हान शादाब, उसने सच में मेरे दिल को छू लिया है। लगता हैं जैसे मेरी सगी बहन हो ।
शादाब:” अम्मी बस आप और हुए ठीक हो जाए, मुझे आप दोनो की बड़ी फिक्र हैं ।
शहनाज़:” बेटा मुझे ज्यादा चोट नहीं हैं लेकिन रेशमा की तरह मुझे भी फिक्र हो रही हैं। उसके दो बच्चे हैं शादाब।
शादाब: सब ठीक हो जाएगा, बुआ का ऑपरेशन ठीक हो गया है और वो अब खतरे से बाहर है , कल दिन में उन्हें होश अा जाएगा।
शहनाज शादाब की बात सुनकर खुश हो गई और उसके बाद दोनो मा बेटे एक दूसरे की बाहों में सो गए। शहनाज़ को आज अपने बेटे की बांहों में बहुत सुकून मिल रहा था और ऐसा आज पहली बार हुआ था कि ना तो शादाब का लंड ही खड़ा हुआ और ना ही शहनाज़ के जिस्म में कोई हलचल हुई। आज दोनो को एहसास हो रहा था कि सेक्स और वासना कभी भी खून पर भारी नहीं पड़ सकती।
अगले दिन सुबह शादाब की आंख खुली और उसने खुद को अपनी अम्मी शहनाज़ की बांहों में पाया तो प्यार से उसका मुंह चूम लिया और धीरे से बेड पर से उठ गया और रेशमा को देखने के लिए चला गया। रेशमा अभी तक बेहोश ही पड़ी हुई थी और उसका चेहरा हल्का पीला पड़ा हुआ था। शादाब को एपीएम बुआ ज़िन्दगी में पहली बार इतनी प्यारी लगी और धीरे से नीचे झुकते हुए उसने रेशमा का माथा चूम लिया। रेशमा अपने खून के इस एहसास को महसूस करके बेहोशी की हालत में भी स्माइल करने लगी और उसने कसमसाते हुए अपनी आंखे खोल दी तो शादाब को अपने उपर झुका हुआ पाया।
शादाब ने रेशमा को स्माइल दी और बोला:”
” खुदा का लाख लाख शुक्र है बुआ कि आपको होश अा गया। मुझे तो आपकी बड़ी फिक्र हो रही थी।
रेशमा की आंखो में दर्द साफ उभर आया और उसकी पीड़ा उसके चेहरे से साफ छलक रही थी। शादाब ने उसका हाथ पकड़ लिया और बोला:”
” आप आराम से लेटी रहिए बुआ, अभी आपके जख्म हरे हैं, आपको आराम को सख्त जरूरत हैं बुआ।
रेशमा:” बेटा वो अम्मी पापा को अगर में आखिरी बार देख लेती तो अच्छा होता।
रेशमा की बात सुनकर शादाब की भी आंखे भर अाई और बोला:”
” बुआ मुझे माफ़ कर देना, उन्हें दफना दिया गया हैं। आप दो दिन से बेहोश थी।
रेशमा को इससे बहुत दुख पहुंचा और उसकी आंखो से आंसू छलक पड़े। शादाब ने अपनी बुआ का चेहरा अपने हाथों में भर लिया और बोला:”
” मैं दादा दादी की जगह तो नहीं ले सकता पर वादा करता हूं कि आपको ज़िन्दगी में कोई कमी नहीं आने दूंगा बुआ।
रेशमा:” शादाब शहनाज कैसी हैं? बेटा मैंने बहुत कोशिश करी लेकिन दादा दादी और शहनाज़ को नहीं बचा पाई मैं ठीक से ?
शादाब ने रेशमा का हाथ पकड़ लिया और बोला:”
” बुआ आप इतनी बड़ी बहादुर निकलोगी मुझे अंदाजा नहीं था, आपने तो मेरी अम्मी शहनाज़ को बचाया हैं। मुझे ये सोचकर खुशी हुई कि आप मेरी बुआ हैं।
रेशमा के होंठो पर अपनी तारीफ सुनकर दर्द में भी एक स्माइल अा गई और बोली:”
” शादाब शहनाज़ कैसी हैं? ठीक तो हैं वो ?
शादाब:” हान बुआ अम्मी बिल्कुल ठीक हैं बस सो रही है, जैसे ही उठेगी आपके पास ले आऊंगा।
रेशमा:” ठीक हैं शादाब, और बेटा मैं माफी के काबिल तो नहीं हूं लेकिन ही सके ती मुझे माफ़ कर देना मैंने तेरे साथ भी सही नहीं किया, जिस्म की आग के लालच में मैने तुझे बहकाया था। शादाब मुझे उस रात….
शादाब ने अपनी एक उंगली रेशमा के होंठो पर रख दी और नीचे झुकते हुए उसका गाल चूम लिया और बोला:”
” बुआ आप सब बाते अपनी दिल और दिमाग से निकाल दीजिए। आप बस आराम कीजिए।
शादाब इतना कहकर उठ गया तो रेशमा ने उसे स्माइल दी और शादाब एक बार फिर से शहनाज के कमरे में अा गया। शहनाज़ उठ गई थी और किसी गहरी सोच में डूबी हुई थी। शादाब को देखकर वो अपनी सोच से बाहर निकली और बोली:”
” रेशमा को होश अा गया क्या शादाब ? मेरा बहुत मन हैं उसे देखना का
शादाब एक बार फिर से शहनाज़ के पास बैठ गया और बोला :”
” अम्मी रेशमा बुआ को होश अा गया है और वो भी आपके ही बारे में पूछ रही थी। आप किस सोच में डूबी हुई थी ?
शहनाज़ अपनी आंखे बंद करके बोली:’
” बेटा बस ये ही सोच रही थी कि सच में रेशमा कितनी बदल गई हैं, दादा दादी का कितना ख्याल करने लगी थी, मेरे लिए तो वो एक फरिश्ता साबित हुई है।
और मैं उसके बारे में कितना गन्दा सोच रही थी।
शादाब:” अम्मी हान सच में बुआ बदल गई है, आज मुझसे भी माफी मांग रही थी।
शहनाज़ चौंकते हुए:’: तुझसे किस बात की माफी शादाब ?
शादाब:”; बोल रही थी मैंने तुझ पर गलत नजर रखी और तुझे बिगाड़ना चाहा, मैं माफी के काबिल तो नहीं हूं लेकिन फिर भी हो सके तो मुझे माफ़ कर देना।
शहनाज़ की आंखे भर आईं और वो बोली:” बेटा मुझसे जल्दी से उसके पास ले चल, आंखे तरस रही है उसे देखने के लिए।
शादाब ने शहनाज़ को अपनी गोद में उठा लिया और शहनाज़ ने खुशी के मारे अपने बेटे का मुंह चूम लिया और शादाब स्माइल करते हुए उसे लेकर चल पड़ा। जैसे ही वो रेशमा के कमरे में घुसे तो रेशमा शहनाज़ को देखते ही बोली:”
“: आप ठीक तो हो भाभी ? देखो अभी कितना जख्म और चोट के निशान हैं आपके चेहरे और जिस्म पर ?
शादाब ने शहनाज़ को रेशमा के पास बेड पर बिठा लिया तो शहनाज़ उसका हाथ पकड़ कर बोली:”
” ये जख्म तो भर जाएगी पगली लेकिन अगर तुझे कुछ हो जाता तो मै खुद को कभी माफ नहीं कर पाती, क्या जरूरत थी तुझे ये सब करने की ?
रेशमा जैसे ही हल्का सा शहनाज़ की तरफ झुकी तो उसके टांको में दर्द हुआ और उसके मुंह से एक आह निकल पड़ी। शहनाज़ ने उसका हाथ पकड़ लिया और बोली:”
” उठो मत रेशमा बाज़ी, अभी जख्म ताजा हैं तुम्हे दर्द होगा।
इतना कहकर शहनाज़ ने आपका चेहरा उसके चेहरे के पास कर दिया तो रेशमा ने आज सालो के बाद शहनाज़ के मुंह से अपने लिए बाज़ी शब्द सुना तो वो खुश हो गई और शहनाज का गाल चूम लिया और बोली:”
“भाभी आप हमारे घर की इज्जत हो और आपके दादा दादी की सेवा के लिए दूसरी शादी नहीं करी जिससे नाराज होकर आपके परिवार ने आपको ठुकरा दिया। आपने मेरे मा बाप के लिए इतना कुछ किया है तो मेरा भी फर्ज़ बनता है कि आपकी रक्षा करने का मेरी प्यारी भाभी।
शहनाज़ की आंखे भर आई और उसने एक बार रेशमा का गाल चूम लिया तो रेशमा शर्मा गई जिससे दोनो के होंठो पर स्माइल अा गई और शादाब ने वहां से निकलने में भलाई समझी ताकि दोनो खुलकर अपने दुख सुख की बाते कर सके।
शादाब:’ अम्मी बुआ आप लोग बाते करो तब तक मैं आपके लिए खाने का कुछ सामान लेकर आता हूं ।
इतना कहकर शादाब बाहर चला गया तो रेशमा बोली:”
” भाभी रेहाना के साथ क्या हुआ था जो उसने इतना बड़ा कदम उठाया। जहां तक मुझे याद हैं वो तो दादा जी को बहुत मानती थी।
शहनाज़ ने उसे सारी बाते एक एक करके बता दी और रेशमा हैरानी से सब सुनती चली गई। फिर बोली:’
” ओह तो उसकी नीयत शादाब पर खराब हो गई थी इसलिए इतना पंगा हुआ। वैसे भाभी एक बात कहूं आगर आपको बुरा ना लगे तो ?
शहनाज़ रेशमा का हाथ दबाते हुए बोली:’ बोल रेशमा मुझे अब तेरी कोई बात बुरी नहीं लगेगी
रेशमा अपनी आंखे झुका कर बोली:’ अपना शादाब हैं सच में बहुत खूबसूरत, पहली नजर में ही लड़कियां तो छोड़ो औरतें भी इसकी दीवानी हो जाती हैं।
शहनाज़ प्यार से उसका गाल खींचती हुई बोली:’
“:कहीं तू भी तो शादाब की दीवानी नहीं हो गई रेशमा ?
रेशमा के गाल गुलाबी हो उठे और बोली:’
“:अब नहीं भाभी, पहले कभी थी, अब मैंने अपने आपको बदल दिया है और सच कहूं तो मेरे अंदर ये बदलाव शादाब की वजह से ही आया हैं। अब देखना आप मैं आपको कभी शिकायत का मोका नहीं दूंगी।
शहनाज और रेशमा बाते कर ही रहे थे कि तभी शादाब खाना लेकर अा गया। उसके आते ही दोनो चुप हो गई और सभी खाना खाने लगे। रेशमा को शहनाज ने खुद आपके हाथ से खाना खिलाया।
खाना खाकर शहनाज़ बोली:’
” शादाब डॉक्टर से बोलकर एक बड़ा बेड रेशमा बाज़ी के कमरे में लगवा दो मैं अब इनके पास ही सोया करूंगी ताकि इन्हे किसी चीज की दिक्कत ना रहें।
शादाब के बोलने पर डॉक्टर ने एक बड़ा बेड रेशमा के कमरे में लगवा दिया और करीब सात दिन के बाद शहनाज़ तो पूरी तरह से ठीक हो गई जबकि रेशमा की भी हॉस्पिटल से छुट्टी हो गई। बस उसके टांको में अभी थोड़ा दर्द था लेकिन शादाब को एक बार रेशमा को हॉस्पिटल लेकर आना था ताकि उसके टांके कट जाए।
आखिरकार आज करीब आठ दिन के बाद शादाब अपने घर वापिस लौट रहा था। जैसे ही गाड़ी घर के गेट पर रुकी तो पड़ोसी इकट्ठा हो हुए और शहनाज़ और रेशमा का हाल चाल पूछने अा गए।
शादाब ने रेशमा को अपनी गोद में उठा लिया और घर के अंदर ले जाकर नीचे ही बेड पर लिटा दिया। घर में तीनो की नजरे रह रह कर दादा दादी को ढूंढ रही थी लेकिन तीनो जानते थे कि अब उन्हें दादा दादी की परछाई भी मिलने वाली नहीं हैं।
सबसे ज्यादा दुख शहनाज़ को हो रहा था और उसे पूरा घर खाली खाली और काटने को दौड़ रहा था। दादा दादी को याद करके शहनाज़ की आंखे भर आईं और वो शादाब के गले लग कर फिर से रोने लगी। शहनाज़ की देखा देखी रेशमा भी पिघल गई और उसने भी रोना शुरू कर दिया। माहौल पूरी तरह से गमगीन हो चुका था इसलिए शादाब भी अपने आंसू नहीं रोक पाया और शहनाज़ के गले लग कर जोर जोर से रोने लगा। पड़ोसियों ने बड़ी मुश्किल से तीनो को चुप कराया और एक आदमी पड़ोस से ही खाना लेकर अा गया।
पड़ोसी:’ शादाब बेटा खुद को संभालो और अपनी अम्मी और बुआ को भी क्योंकि अब सारा कुछ तुम्हे ही देखना हैं।
शादाब भरे हुए गले से बोला:’
” दादा जी मुझसे बहुत प्यार करते थे, लगता हैं जैसे वो अभी मुझे आवाज लगाकर बुलाएंगे
पड़ोसी:” बेटा मैं तुम्हारा दर्द समझ सकता हूं लेकिन तुम्हे आपको संभालना ही होगा शादाब , मैं कुछ खाना लेकर आया हूं थोड़ा सा खा लो तुम सभी लोग।
इतना कहकर उस आदमी ने खाना टेबल पर लगा दिया तो शहनाज़ सुबकती हुई बोली:”
“: रहने दीजिए भाई साहब आप, हमारा किसी का खाने का बिल्कुल भी मन नहीं हैं।
पड़ोसी:” बहन होनी को कौन टाल सकता हैं तुझे अब घर को अपने बेटे को संभलना होगा, थोड़ा थोड़ा खा लो आप लोग।
पड़ोसी के ज्यादा जिद करने पर सभी ने थोड़ा थोड़ा खाना खाया और जैसे जैसे रात होती गई एक एक करके पड़ोसी आपके घर चले गए।
चूंकि सबने नीचे ही सोना था इसलिए शहनाज़ ने बिस्तर तैयार कर दिए और तीनो आराम से लेट गए। थोड़ी देर के बाद उन्हें नींद अा गई और वो अपना सब दुख दर्द भूलते हुए सो गए।
……………………………………..
अगले दिन सुबह शहनाज़ थोड़ा जल्दी ही उठ गई और उपर जाकर नहाई और शादाब और रेशमा के लिए नाश्ते का इंतजाम करने लगी। शहनाज़ जानती थी कि अगर वो ज्यादा दुखी रही तो इसका सीधा असर शादाब और रेशमा पर पड़ सकता हैं इसलिए उसने अपने आपको आने वाले मुश्किल समय के लिए तैयार किया और अपने काम में जुटी रही। दादा दादी जी मौत का सबसे ज्यादा दुख शहनाज़ को हुआ था और वो अंदर से पूरी तरह से टूट गई थी लेकिन फिर भी अपने सीने पर पत्थर रख लिया । जल्दी ही नाश्ता बन गया और शहनाज़ नीचे गर्म अपनी लेकर अा गई और रेशमा और शादाब को उठाया। शादाब उपर नहाने के लिए चला गया जबकि शहनाज़ ने खुद रेशमा का मुंह धोया। थोड़ी देर बाद शहनाज़ ने नीचे से शादाब को आवाज लगाई कि बेटा उपर से आते हुए नाश्ता भी लेते आना।
जल्दी ही शादाब नाश्ता लेकर अा गया और उसने अपने हाथ से शहनाज़ और रेशमा को खुद नाश्ता कराया। दोनो के मना करने भी जबरदस्ती खिलाने लगा तो रेशमा बोली:”
” बस कर शादाब बेटा, मेरा पेट भर गया हैं, जिद मत कर अब नहीं खाया जाएगा मुझसे और
शादाब ने एक आखिरी निवाला बनाया और रेशमा के मुंह की तरफ करते हुए बोला:”
” बस ये आखिरी बाइट बुआ, मना मत करना आप। प्लीज़
शादाब के इतना जिद करने पर रेशमा ने अपना मुंह खोल दिया और निवाला खा लिया तो शादाब किसी छोटे बच्चे की तरह खुश होकर ताली बजाने लगा तो उसे देख कर दोनो मुस्कुरा उठी। दरसअल ये ही तो शादाब चाहता था और वो अपने प्लान में कामयाब रहा।
शादाब अपना पेट पकड़ते हुए बोला:” अम्मी मुझे भी भूख लगी हैं बहुत जोर से, मुझे कौन खाना खिलाएगा ?
शहनाज़ स्माइल करते हुए बोली:”
फिक्र मत कर बेटा, तेरी मा हैं ना मेरे राजा तुझे खाना खिलाने के लिए ।
शादाब ने रेशमा की तरफ देखा तो रेशमा पड़े पड़े ही बोली:”
” एक बार मुझे ठीक हो जाने देे, फिर तुझे इतना खाना खिलाऊंगी कि तुझसे पचाना मुश्किल हो जाएगा बच्चे।
शहनाज़ ने खाने का निवाला बनाया और उसकी तरफ बढ़ाया तो शादाब बोला:”
” ऐसे नहीं आपकी गोद में बैठ कर खाऊंगा अम्मी ।
शहनाज़ ने अपनी बांहे खोल दी और शादाब उसकी गोद में बैठ गया और शहनाज़ उसे खाना खिलाने लगी। रेशमा मा बेटे का अद्भुत प्यार देखकर खुश हो गई। थोड़ी देर बाद शहनाज़ ने शादाब को अच्छे से नाश्ता करा दिया और शादाब उसकी गोद से उतर गया और बोला:”
” अम्मी मैं दोपहर के खाने के लिए कुछ सब्जी लेकर आता हूं, घर में जो जी सामान चाहिए आप मुझे एक लिस्ट बनाकर दे दीजिए।
शहनाज़ ने एक लिस्ट बनाकर उसे दे दी और शादाब सामान लेने के लिए निकल गया।
शादाब के जाने के बाद रेशमा बोली:” देखो भाभी जो होना था वो तो हो गया। लेकिन अब हमे अपने आपको संभालना होगा, अगर हम नहीं संभले तो शादाब पर इसका बुरा असर पड सकता हैं। वो बच्चा हैं अभी।
रेशमा के मुंह से शादाब के लिए बच्चा सुनकर शहनाज़ अंदर ही अंदर सोचने लगी कि बच्चा नहीं सांड बन गया हैं वो। शहनाज़ रेशमा की बातो में हान से हान मिलाती हुई बोली:_’
” हान बाज़ी, लेकिन क्या करू दादा दादी के साथ ही रहती थी मैं तो सारा दिन। बहुत याद आती हैं उनकी।
रेशमा:” भाभी मैं आपका दर्द समझ सकती हूं लेकिन फिर भी आपको खुद को संभालना ही होगा।
शहनाज़;’: ठीक हैं मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगी।
दोनो बात कर ही रही थी कि रेशमा का मोबाइल बज उठा और कॉल उसके पति वसीम का था।
रेशमा:” अस्सलाम वालेकुम, कैसे हैं आप ?
वसीम:’:सलाम, ठीक हूं, दादा दादी के बारे में पता चला और तुमने तो मुझे खबर करना भी जरूरी नहीं समझा।
रेशमा:’ जी आप दुबई में थे बस इसलिए ही हमने फोन नहीं किया कि आप परेशान ना हो।
वसीम:’ मैं इंडिया अा रहा हूं और शाम तक तुम्हारे पास अा जाऊंगा।
रेशमा के होंठो पर मुस्कान अा गई और बोली:’
‘ ठीक है अा जाइए मैं आपका इंतजार करूंगी।
इतना कहकर रेशमा ने फोन काट दिया और शहनाज को वसीम के आने के बारे में बताया तो शहनाज़ उसे छेड़ते हुए बोली:_
” सालो के बाद साजन जी घर अा रहे है इसलिए इतना खुश दिख रही हो।
शहनाज़ की बाते सुनकर रेशमा बुरी तरह से झेंप गई और मुंह शर्म से लाल हो गया। रेशमा ने शहनाज़ का हाथ जोर से दबा दिया और बोली:”
” चुप करो भाभी, क्यों मेरी टांग खींच रही हो!!
शहनाज़ उसकी आंखों में देखते हुए बोली:’
” मैं क्यों तुम्हारी टांग खींचने लगी, अब तो अा रहा है तुम्हारी टांग खींचने वाला ।हर रात खिंचेगी
रेशमा ने शर्म के मारे अपना चेहरा दोनो हाथो से ढक लिया और बोली:’
‘” उफ्फ बस भी कीजिए भाभी, मुझे शर्म आती हैं।
शहनाज:’ अच्छा मुझसे शर्म अा रही हैं और वसीम तो जैसे तुम्हे बेशर्मी की दवा पिला देंगे।
रेशमा:_” भाभी आप बड़ी शैतान हो गई है। मेरी हालत तो देखो।
शहनाज़:’ अरे पेट में ही चोट लगी हैं और अब लगभग ठीक हो चुकी है, बेचारा वसीम सालो से प्यासा हैं। आज तो तू गई रेशमा ।
तभी गेट पर नॉक हुआ तो शहनाज ने दरवाजा खोल दिया और शादाब सब सामान लेकर अंदर अा गया। शहनाज ने उसे वसीम के आने के बारे में बताया तो शादाब खुश हुआ और बोला:”
” मैं बहुत छोटा था तब उन्हें देखा था। आज बहुत दिनों के बाद मुलाकात होगी।
शहनाज़:’ शादाब तुम अपनी बुआ का ख्याल रखो तब भी मैं खाना बना देती हूं।
शादाब:” ठीक हैं अम्मी, आप बुआ की फिक्र ना करे।
शहनाज़ उपर चली गई और खाना बनाने में लग गई जबकि रेशमा शादाब से बात करने लगी।
रेशमा:” बेटा कॉलेज कब से जाना हैं तुझे ? तेरी पढ़ाई भी खराब हो जाएगी।
शादाब:” बुआ कॉलेज तो जाना ही होगा लेकिन अब दादा दादी के बाद अम्मी घर में अकेली कैसे रहेगी इसका फिक्र हैं मुझे।
शादाब की बात सुनकर रेशमा के चेहरे पर फिर से एक दर्द भरी लकीर उभर आई क्योंकि अपने मा बाप फिर से याद अा गए। रेशमा सोच में पड़ गई और थोड़ी देर बाद बोली:”
” बेटा यहां गांव में हमारे पुश्तैनी घर और जमीन हैं इन्हें भी तो छोड़ा जा सकता है। लेकिन तू फिक्र ना कर तेरे फूफा अा रहे है तो बैठ कर बात करेंगे तो कुछ ना कुछ मसला हल हो जाएगा।
शादाब में अपनी हुआ की तरफ सहमति से गर्दन हिला दी। तभी रेशमा बोली:”
” बेटा शादाब क्या तुम मुझे थोड़ा सा गर्म पानी ला दोगे पीने के लिए?
शादाब खड़ा होते हुए बोला:’ ओह बुआ मैं अभी लेकर आया।
शादाब उपर छत पर गया तो उसने देखा कि शहनाज़ मसाला कूट रही हैं तो शादाब बोला:”
” अम्मी मैं कुछ मदद करूं क्या आपकी ?
शहनाज़ ने पलट कर उसे देखा और बोली:” तुम यहां क्या कर रहे हो ? तुम्हे तो मैं रेशमा के पास छोड़ा था नीचे।
शादाब:” वो बुआ ने पीने के लिए गर्म पानी मांगा हैं इसलिए आया हूं ऊपर।
शहनाज उठी और रसोई में चली गई और गैस पर पानी रख दिया।उसके बाद वो फिर से कमरे में अा गई और देखा कि शादाब मसाला कूटने वाली औखली को ध्यान से देख रहा था। शहनाज की सांसे तेज होने लगी और बोली:”
” इतने ध्यान से क्या देख रहा हैं शादाब बेटा ?
शादाब:” अम्मी आपने मसाला कूटने के लिए नई औखली निकाली हैं क्या ?
शहनाज़ उसकी तरह स्माइल करते हुए बोली:”
” और क्या करती, पुरानी वाली की तो तूने तली निकाल दी थी अब इसकी भी निकालेगा क्या जो ऐसे घूर घूर कर देख रहा है।
इतना कहकर शहनाज़ का चेहरा शर्म से लाल हो गया और उनकी नजरे झुकती चली गई। शादाब थोड़ा सा आगे बढ़ा और शहनाज़ का चेहरा ऊपर उठाया तो शहनाज़ सादाब से लिपटी चली गई और जोर से अपनी बांहों में कस लिया और बोली:’
” शादाब मेरा बेटा, मैं बिल्कुल अकेली हो गई हूं अब, मुझे छोड़ कर मत जाना कहीं ।
शादाब ने भी अपनी अम्मी को अपनी बांहों में कस लिया और उसका माथा चूमते हुए कहा:”
” नहीं जाऊंगा आपको छोड़कर, कहीं नहीं जाऊंगा मेरी शहनाज़।
शादाब के मुंह से अपना नाम सुनकर शहनाज़ बहक गई और उसके शादाब का चेहरा थामकर अपने होंठ उसके होठों पर रख दिए। शादाब ने बिना देर किए अपनी अम्मी के होंठो कि चूसना शुरु कर दिया।
तभी नीचे से रेशम की आवाज अाई :” क्या हुआ शादाब पानी गर्म नहीं हुआ क्या ?
शादाब और शहनाज़ जैसे होश में आए और शादाब किस तोड़कर जोर से बोला:”
“:हो गया हैं बुआ बस लेकर अा रहा हूं,
शहनाज़ ने शादाब का गाल चूम लिया तो शादाब ने आपके दोनो हाथ उसकी गान्ड पर रखकर हल्के से उसकी गान्ड को मसल दिया तो शहनाज़ के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी।
” आह क्या करता है शादाब, जा जल्दी से नीचे पानी लेकर जा, नहीं तो रेशमा शक करेगी
शादाब अपनी अम्मी को स्माइल देता हूं पानी लेकर नीचे अा गया और रेशमा ने धीरे धीरे गर्म पानी पिया। थोड़ी देर दोनो बैठे हुए बाते करते रहे और इतने में शहनाज़ ने खाना बना दिया और टेबल पर लगा दिया तो सभी ने साथ में खाना खाया।
उसके बाद शहनाज़ बरतन धोने चली गई और करीब दो बजे के आस पास वो वापिस अा गई। उसके बाद नीचे हॉल में ही सभी सो गए।
शाम को करीब छह बजे दरवाजे पर दस्तक हुई तो शादाब ने देखा कि एक करीब 44 साल का आदमी और उसके साथ दो बच्चे खड़े हुए थे
शादाब:’: जी बोलिए
वसीम:” तुम शादाब हो क्या?
शादाब हल्का सा हैरान होते हुए बोला:” जी लेकिन आप कौन ?
वसीम:” मैं तेरा फूफा हूं शादाब।काफी छोटा था जब तुझे देखा था, अब तुम गेट से हटो मैं अंदर आऊ?
शादाब को अपनी गलती का एहसास हुआ और वो हट गया तो वसीम अपने बच्चो को लेकर अंदर आ गया तो दोनो बच्चे रेशमा को देखकर अम्मी अम्मी चिल्लाते हुए इससे लिपट गए।
रेशमा ने अपने दोनो बच्चो को गले से लगा गया और उनका मुंह चूमने लगी। अपने बच्चो को गले से लगाकर रेशमा का दिल भरी हो गया और उसकी आंखो से आंसू छलक पड़े।
रेशमा ने अपने दोनो बच्चो को गले से लगा गया और उनका मुंह चूमने लगी। अपने बच्चो को गले से लगाकर रेशमा का दिल भरी हो गया और उसकी आंखो से आंसू छलक पड़े।
बच्चो की आवाज सुनकर उपर से शहनाज़ भी नीचे अा गई और वो जानती थी कि वसीम आया हैं इसलिए उसने पहले ही पर्दा कर लिया था। उसने वसीम को सलाम किया और सबको पीने के लिए पानी दिया।
बच्चे:” अम्मी अम्मी नाना नानी कहां हैं दिख नहीं रहे? मुझे कहानी सुननी थी उनसे।
मासूम बच्चों की प्यार भरी बातें सुनकर सभी को एक सदमा सा लगा और शहनाज़ के साथ साथ रेशमा की भी आंखे छलक उठी।
शादाब:_” अा जाओ बच्चो आपको जादू दिखाता हूं,
दोनो बच्चे दौड़ते हुए उसके पास चले गए और शादाब ने मोबाइल में छोटा भीम चला दिया तो दोनो बच्चे खुश होकर देखने लगे।
वसीम:” कैसे हुआ ये सब, मुझे पता चला तो सुनकर दुख हुआ।
शादाब ने एक एक करके सारी बातें उन्हें बतानी शुरू कर दी और फिर वसीम बोला:”
” अच्छा हुआ अपनी मौत खुद ही मर रेहाना, नहीं तो मैं उसे बहुत बुरी तरह से मारता।
शहनाज़ :” अच्छा आप लोग बाते करो मैं कुछ खाने का सामान लेकर आती हूं
इतना कहकर शहनाज़ उपर चली गई तो दोनो बच्चे उसके पीछे मामी मामी करते हुए चले गए।शहनाज़ ने उन्हें कमरे में बैठा दिया और खाने के लिए कुछ फल दिए तो बच्चे खुश हो गए।
शहनाज किचेन में जाकर काम करने लगी और उसने शादाब को आवज लगाई
” शादाब बेटा जरा उपर आना मुझे कुछ काम हैं।
शादाब उपर की तरफ अा गया तो वसीम रेशमा के पास बैठ गया तो रेशमा का चेहरा लाल हो गया और बोली:”
” आप वहीं सामने बैठ जाइए ना कोई देखा लेगा तो क्या कहेगा।
वसीम ने नीचे झुककर उसका गाल चूम लिया और बोला:”
” यहीं कि मैं अपनी पत्नी को प्यार कर रहा हूं,
रेशमा के होंठों पर स्माइल अा गई और वसीम ने अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिए और चूसने लगा। रेशमा भी उसका साथ देने लगी।
शादाब उपर पहुंच गया तो शहनाज़ बोली:”
” ले बेटा ये थम्स अप ले जा और अपने फूफा को पिला दे, बेचारे गर्मी में आए हैं गला सुख गया होगा।
शादाब ने ट्रे हाथ में ले ली और नीचे की तरफ अा गया तो उसने जैसे ही रेशमा और वसीम को किस करते देखा तो उसके होंठो पाए स्माइल अा गई और रेशमा की नजरे शादाब से टकरा गई तो वो झेंप सी गई और शादाब उसे स्माइल देकर वापिस अा गया।
शादाब के हाथ की ट्रे में भरे हुए ग्लास देखकर शहनाज़ बोली:”
” क्या हुआ बेटा, उन्हें थम्स अप पसंद नहीं है क्या ?
शादाब ने ट्रे स्लेफ पर रख दी और शहनाज़ का हाथ पकड़ कर आपकी तरफ खींच लिया और उसके होंठ चूम कर बोला:”
” अम्मी फूफा और बुआ तो ये वाली थम्स अप पी रहे हैं। मैंने उन्हें परेशान करना ठीक नहीं समझा।
इतना कहकर शादाब हल्का सा मायूस हो गया तो शहनाज़ शादाब की बात सुनकर बोली:”
” अरे तू क्यों उदास होता हैं मेरे राजा, मैं हूं ना
इतना कहकर शहनाज़ ने अपने होंठो पर जीभ फेरी तो शादाब ने शहनाज़ के होंठो को अपने होंठो में भर लिया और चूसने लगा। शहनाज़ भी इससे कसकर लिपट गई और शादाब ने अपने दोनो हाथ उसकी गान्ड पर रखकर उसकी गांड़ को मसलना शुरू कर दिया। शहनाज़ की चूत में हल्का गीलापन आने लगा और उसने अपनी चूचियां शादाब के सीने से रगड़नी शुरू कर दी।
तभी बच्चो के उधर आने की आवाज अाई तो दोनो अलग हो गए और शादाब फिर से ट्रे लेकर नीचे अा गया तो रेशमा का मुंह शर्म से झुक गया और शादाब ने इन्हे कोल्ड ड्रिंक दी तो दोनो पीने लगें।
वसीम उठकर बाथरूम में घुस गया तो शादाब ने रेशमा का हाथ पकड़ लिया और बोला:”
” क्या बात है बुआ, बड़ा रोमांस चल रहा था।
रेशमा स्माइल करते हुए बोली:”
” अब तू खुद तो करता नहीं तो क्या उन्हें भी ना करने दू।
शादाब के होंठो पर स्माइल अा गई और उसका गाल चूम कर बोला:” आप मेरी सबसे प्यारी बुआ हैं, आप ठीक हो जाओ फिर देखना कितना रोमांस करूंगा।
रेशमा:” पहले तो इतना नखरा करता था, जलन हुई क्या उन्हे मुझे किस करते देखकर ।
शादाब ने मायूसी में अपना सिर हिला दिया तो रेशमा ने शादाब को अपने पास झुकने का इशारा किया तो शादाब उसके पास आपका चेहरा ले गया तो रेशमा ने शादाब के होंठ चूम लिए और बोली:_
” अब खुश
शादाब खुश हो गया और रेशमा का हाथ पकड़ कर दबा दिया तो रेशमा इस एहसास से मस्त हो गई तभी उन्हें फूफा के आने की आहट सुनी तो दोनो सीधे होकर बैठ गए।
वसीम अा गया और तीनो बैठ कर बात करने लगे। धीरे धीरे रात होने लगी और बाहर अब पुरा अंधेरा हो गया था।
शहनाज खाना बना चुकी थी और सभी साथ में बैठे हुए खाना खा रहे थे।
वसीम:” शादाब आगे के बारे में क्या सोचा हैं तुमने?
शादाब:” फूफा जी पापा और दादा दोनो का सपना था कि गांव में हॉस्पिटल बने बस कल एक टीम आयेगी हमारी जमीन देखने के लिए। अगर उन्हें पसंद अा हुई तो वो जमीन किराए पर लेकर हॉस्पिटल बनाएंगे।
रेशमा:” ये तो बहुत अच्छी बात हैं शादाब। गांव वालो को इससे बड़ा आराम मिलेगा ।
शादाब:” वो तो हैं बुआ, बस अब कुछ दिन बाद वापिस चला जाऊंगा और अपनी पढ़ाई करूंगा।
शहनाज़ शादाब की ये बाते सुनकर उदास हो गई तो रेशमा बोली:”
” भाभी शादाब को अपनी पढ़ाई तो पूरी करनी ही होगी ना, बीच बीच में आता रहेगा आपसे मिलने
वसीम:” रेशमा अपने बच्चो से दूर होने का दर्द क्या होता हैं मुझसे बेहतर कौन समझ सकता हैं, शहनाज़ भाभी अब तक शादाब के बिना अकेली रही हैं।
रेशमा:” फिर तो एक तरीका हैं कि शादाब हॉस्टल में ना रहकर बाहर रहे और शहनाज़ भाभी भी उसके साथ आराम से रह लेंगी।
रेशमा को बाते सुनकर शहनाज़ का मन किया कि वो अभी रेशमा का मुंह चूम ले । उसे रेशमा इस टाइम दुनिया की सबसे प्यारी और अच्छी औरत लगी।
शादाब की खुशी का भी कोई ठिकाना नहीं था। वो जानता था कि उसे आराम से कॉलेज से अलग रहने की इजाजत मिल जाएगी लेकिन वो सबको ये दिखाना चाहता था कि वो शहनाज को खुशी से नहीं बल्कि मजबूरी में लेकर जा रहा था।
शादाब:” अापकी बात तो ठीक है लेकिन मुझे नहीं लगता कि मुझे कॉलेज से अलग रहने की इजाजत मिल जाएगी।
शहनाज़ को अपने बेटे की बात सुनकर सदमा सा लगा और उम्मीद भरी निगाहों से उसे देखा तो शादाब बोला:”
” मैं कल फोन करके मालूम कर लूंगा लेकिन अगर अम्मी मेरे साथ चली जाएगी तो घर का क्या होगा?
वसीम:” अगर आप सबकी मर्जी हो तो मैं घर रहने के लिए राज़ी हू, अब मैं अपने बच्चो और रेशमा से दूर नहीं रहना चाहता।
शहनाज़ बिना देर किए तपाक से बोल उठी:”
” ये तो बहुत अच्छी बात हैं आप तो मेरे अपने हैं इससे बच्चे भी खुश हो जायेंगे और आप यहां सब कुछ अच्छे से संभाल लेंगे।
रेशमा भी इससे सहमत हो गई क्योंकि बच्चो के एग्जाम हो गए थे इसलिए अभी पास के ही शहर में दाखिला हो जाएगा और दोनो बच्चे उसकी आंखों के सामने रहेंगे उससे ज्यादा एक मा को और क्या चाहिए।
बाते चलती रही और दोनो बच्चे सो गए थे। शहनाज़ बोली:”
” शादाब बच्चो को उपर ले चलो और यहां आराम से तुम्हारे फूफा और बुआ सो जाएंगे। बेचारे थके हुए होंगे सफर के।
अपनी अम्मी की बात सुनकर शादाब ने एक बच्चे को गोद में उठा लिया तो दूसरे को बिना डर किए वसीम ने उठा लिया और दोनो उपर की तरफ चल पड़े।
उनके जाते ही शहनाज़ ने रेशमा का मुंह चूम लिया और बोली:”
” शुरकिया रेशमा बाज़ी, कम से कम किसी ने तो मेरा दर्द समझा। अपने बेटे के बिना मैं कैसे जी सकती हूं।
रेशमा अपनी भाभी का ऐसा प्यार देखकर खुश हो गई और बोली :”
” मैं खुद एक मा हूं भाभी इसलिए आपका दर्द समझ सकती हूं।
दोनो की बाते चल ही रही थी कि उपर से शादाब और वसीम अा गए तो दोनो चुप हो गई और शहनाज बोली:”
” ठीक हैं आप लोग आराम कीजिए, किसी चीज की जरूरत हो तो आवाज लगा देना।
इतना कहकर शहनाज़ और शादाब उपर की तरफ चल पड़े। जैसे ही वो सीढ़ियों पर चढ़े तो शादाब ने अपनी अम्मी को अपनी बांहों में उठा लिया तो शहनाज़ ने प्यार से अपने बेटे का गाल चूम लिया।
दूसरी तरफ वसीम भी बिना देर लिए बेड पर रेशमा के साथ लेट गया और बोला:”
‘” ओह रेशमा मेरी जान, तुम तो पहले से ज्यादा सेक्सी लग रही हो कसम से ।
शादाब के बढ़ते कदम रुक हुए और दोनो मा बेटे उनकी बाते सुनने लगे।
रेशमा:” आप तो जैसे मुझे भूल ही गए थे, कितना याद किया है मैंने आपको ।
वसीम ने एक हाथ रेशमा की चूची पर रख दिया और हल्का सा दबाते हुए बोला:”
” बस मेरी जान, आज रात सब कमी दूर कर दूंगा, इतना प्यार दूंगा कि बस बस कर उठोगी ।
रेशमा:” आह वसीम, अभी नहीं, मेरी हालत ठीक होने दो, दो दिन बाद टांके कट जायेंगें उसके बाद जैसे तुम्हारा मन करे।
वसीम:” उफ्फ मतलब और इंतजार करना होगा,
रेशमा:” बस दो दिन और, जहां इतना कर लिया दो दिन और कर लो, वैसे भी सब्र का फल मीठा होता हैं।
वसीम मान गया और आराम से रेशमा को अपनी बांहों मे भरकर लेट गया।
शहनाज़ और शादाब दोनो एक दूसरे की आंखो के देख रहे थे। शहनाज़ ने शादाब को इशारा किया और शादाब उसे लेकर कमरे में अा गया। बेड पर बच्चे सो रहे थे।
शादाब :” अम्मी मेरे रूम में चले, यहां हमे जगह कम पड़ेगी।
शहनाज़ उसकी तरफ स्माइल करते हुए बोली:’
” बेटा आराम से यहीं सो जाते हैं, रेशमा आजकल पूरी रात ठीक से नहीं सो पाती है, अगर उसे हल्की सी भी आवाज चली गई तो बिना वजह हंगामा हो जाएगा।
शादाब उदास होकर मासूम सी सूरत बनाते हुए बोला:”
” अम्मी आप ही इतना ज्यादा आवाज करती हैं, इसमें मेरी क्या गलती ?
शहनाज़:” अच्छा मेरे राजा, तू एकदम बेकाबू होकर मेरे उपर टूट पड़ता है तो मेरी सिसकियां नहीं निकलेगी क्या !!
शादाब:” उफ्फ अम्मी मेरी जान शहनाज़, आप ही इतनी मस्त, आपकी ये मस्त कठोर चूचियां, और गांड़ को जैसे कपडे फाड़कर ही बाहर अा जाएगी, मेरी क्या गलती हैं,!!
शहनाज:” अच्छा तुझे सब्र करना चाहिए ना, थोड़ा प्यार से करे तो आवाज भी कम निकले।
शादाब:” बस मा, अब बर्दाश्त नहीं होता
इतना कहकर वो जोर से शहनाज़ की एक चूची दबा देता हैं तो शहनाज़ अपना एक हाथ अपने मुंह पर रख कर अपनी सिसकी रोकती हैं और शादाब की तरफ घूर कर देखती हैं
” उफ्फ मा क्या करू इस पागल लड़के का।
शादाब:” कुछ नहीं करना, बस चूत दे दे मुझे अपनी शहनाज़ ।
इतना कहकर शादाब आपके हाथ में उसकी चूत कपड़ों के ऊपर से ही भर लेता है तो शहनाज बेचैन होने लगी और बोली:
” तू ऐसे नहीं मानेगा शादाब, तुझे मेरी कसम अब अगर कोई छेड़छाड़ करी तो।
शादाब ने अपना हाथ पीछे खींच लिया और थोड़ा गुस्से से बोला:”
” अब ये क्या ज़ुल्म हैं मुझ पर शहनाज़ ? क्यों तड़पा रही हो ?
शहनाज़:” बेटा समझ मुझे, अगर इतना ही प्यार हैं अपनी अम्मी से तो ले चल मुझे अपने साथ शहर, खुद तेरे लंड पर चढ़ जाऊंगी।
शादाब:” बस अगले हफ्ते तक रुक जाओ फिर मैं तुम्हे अपने साथ ले जाऊंगा।
शहनाज अपने बेटे से कस कर लिपट गई और बोली:”
“शादाब तू मेरी जान हैं, तेरे साथ जाने के लिए तक मैं कब से तरस रही हूं। जी भर कर तुझे प्यार करूंगी मेरे राजा।
शादाब को शहनाज़ को अपनी बांहों में भर लिया और उठाकर बेड पर ले गया। दोनो मा बेटे एक दूसरे से लिपट कर सो गए।
अगले दिन किसी काम की वजह से हॉस्पिटल बनाने वाली टीम नहीं अा पाई। शादाब पूरे दिन घर पर ही रहा और परिवार के साथ टाइम बिताया।
धीरे धीरे दो दिन और निकल गए और आज हॉस्पिटल वाली टीम को आना था जमीन देखने के लिए वहीं दूसरी तरफ आज रेशमा के टांके भी कटने थे।
वसीम किसी जरूरी काम से शहर गया हुआ था इसलिए शाम तक जी वापिस अा सकता था। शादाब पहले रेशमा को हॉस्पिटल लेकर गया और उसके टांके कट गए तो फिर उसे लेकर घर अा गया।
घर आने के बाद शादाब ने रेशमा को नीचे ही बेड पर लिटा दिया और खुद ऊपर चला गया। शहनाज को देखते ही उसने अपनी बांहों में भर लिया और बोला:”
” अम्मी बड़ी जोर से भूख लगी हैं खाना बन गया क्या?
शहनाज़ उसका सिर अपनी चूचियों में दबाते हुई बोली:”
” दूध पिएगा क्या मेरे राजा ?
शादाब उसके होठ चूमकर बोला:”” रहने दो अम्मी क्यों जज़्बात जगा रही हो ? फिर आप पीछे हट जाओगी ।
शहनाज:” बेटा मेरी मजबूरी समझने को कोशिश कर।
शादाब उसके गाल पकड़ कर बोला:” इसलिए तो बोल रहा हूं मेरी शहनाज़,
शादाब और शहनाज़ उसके बाद खाना लेकर नीचे की तरफ अा हुए और रेशमा और बच्चो के साथ बैठकर खाना खाने लगे।
जल्दी ही सबने खाना खाया तो शादाब का मोबाइल बज उठा। उसने देखा कि हॉस्पिटल वाली टीम का फोन था।
शादाब:” जी सर बोलिए
आदमी:” वो आज हम सब जमीन देखने अा रहे हैं करीब 5 बजे तक पहुंच जाएंगे। सारे कागज तैयार हैं अगर जमीन अच्छी लगी तो आज ही फाइनल हो जाएगा।
शादाब:” ठीक हैं आप लोग आइए, हम आपको मैन हाईवे पर मिल जायेगे।
इतना कहकर शादाब ने फोन काट दिया और बोला:”
” अम्मी आज शाम को वो लोग अा रहे हैं इसलिए आप मेरे साथ चलने की तैयारी करे, अगर उन्हें जमीन पसंद अा गई तो सौदा पक्का हो जाएगा।
शहनाज़:” ठीक है बेटा, मैं चल पड़ूंगी तुम्हारे साथ।
रेशमा:” शहनाज़ ये मॉडर्न लोग हैं इसलिए थोड़ा अच्छे से सज कर जाना ताकि उन्हें लगे कि इस जमीन के मालिक अच्छे और नई सोच वाले लोग हैं।
शहनाज:” ठीक हैं बाजी जैसे आप कहें। लेकिन अभी वसीम भी तो नहीं आए हैं, तुम अकेली रह जाओगे ।
रेशमा:” आप मेरी फिक्र ना करे, थोड़ी देर में वो जाएंगे मेरी उनसे बात हो गई है।
शहनाज़:” ठीक हैं फिर तो।
शादाब:” अम्मी अब आप जाइए और जल्दी से तैयार हो जाईए।
शहनाज उपर चली गई और शादाब अपनी बुआ से बात करने लगा। शहनाज़ आज दादा दादी के मरने के बाद पहली बार सज रही थी। हालाकि उसका मन नहीं था लेकिन वो नहीं चाहती थी कि कोई बाहर का आदमी उसके बेटे के स्टैंडर्ड पर सवाल उठाए।
थोड़ी देर बाद ही शहनाज़ सज कर नीचे अा गई तो शादाब और रेशमा दोनो के मुंह खुले के खुले रह गए।
शहनाज़ ने एक काले रंगा का सूट सलवार पहना हुआ था और बेहद खूबसूरत लग रही थी।
रेशमा:” ओए होए नजर ना लग जाए मेरी भाभी को किसी की !!
शहनाज़ शर्मा गई और साथ में लाया हुआ बुर्का पहन लिया और शादाब से बोली:”
” चले बेटा
शादाब: ठीक हैं अम्मी आओ चलते हैं, बुआ आप अपना ध्यान रखना हम करीब 7 बजे तक वापिस अा जाएंगे।
रेशमा:” आप लोग मेरी फिक्र मा करे, वो आने वाले हैं, बेटा सौदा सोच समझ कर करना।
शादाब:” जी ठीक हैं बुआ आप फिक्र ना करे।
इतना कहकर शादाब गाड़ी लेकर अा गया और शहनाज़ उसमे बैठ गई। शहनाज बहुत खूबसूरत लग रही थी। शादाब गाड़ी लेकर निकल गया और रास्ते में बोला:”
” अम्मी आज आप बहुत खूबसूरत लग रही है।
शहनाज़ ने स्माइल दी।
थोड़ी देर बाद ही हाईवे पर इन्हे हॉस्पिटल टीम मिल गई और वो जमीन देखने के लिए पहुंच गए।
जमीन एक बहुत अच्छी लोकेशन पर थी इसलिए पहली नजर में ही उन्हें पसंद अा गई।
आदमी:’ हमे जमीन पसंद हैं और अगले पचास साल के लिए किराए पर चाहिए। बताओ
शादाब:” ठीक है आपको इसके लिए 5 करोड़ रुपए, मेरे फूफा को मैनेजर की नौकरी और गांव के लोगो को इलाज में 50% की छूट देनी होगी।
आदमी:” एक बार फिर से सोच लो शादाब, कुछ ज्यादा नहीं है ?
शादाब:” सर आपको हाईवे पर इससे अच्छी लोकेशन इससे कम दाम में कहीं नहीं मिलेगी
आदमी ने अपने साथ आए लोगो से सलाह और डील फाइनल हो गई। सारे कागज पर शादाब शहनाज़ के साइन कराने के लिए गाड़ी में अा गया और जल्दी ही सब औपचारिकता पूरी हो गई।
आदमी:” ठीक हैं शादाब, हम लोग चलते हैं, कल से जमीन पर काम शुरू हो जाएगा और एक महीने से भी कम समय में हॉस्पिटल बन जाएगा।
शादाब:” ठीक हैं।
उसके बाद वो सब आदमी चले गए तो शहनाज़ गाड़ी से बाहर अा गई और बोली:_
” शादाब बहुत अच्छा सौदा हुआ, अच्छी खासी रकम मिल गई, तेरे फूफा को नौकरी और गांव वालों का सस्ता इलाज, तुम तो बड़े तेज निकले।
शादाब:” बेटा भी तो अपनी मा शहनाज़ का हूं मैं।
दोनो हंस पड़े और शहनाज़ बोली:”
” बेटा आज मैं आखिरी बार अपनी जमीन को अच्छे से देख लेती हूं, कल से तो यहां काम शुरू हो जाएगा।
शहनाज़ और शहनाज़ दोनो अपनी जमीन देखने लगे। बाहर अब हल्का हल्का अंधेरा होने लगा था और हल्की हल्की ठंडी हवाएं चल रही थी।
शहनाज़ ने आस पास देखा और एक बड़े पेड़ के पीछे शादाब को खींच लिया और उसके होंठो पर उंगली घुमाते हुए बोली:”
” शादाब मेरे राजा, मुझे ऐसा मौसम बहुत अच्छा लगता है।
मेरे दिल में कुछ कुछ होता हैं।
शादाब ने शहनाज़ को अपनी बांहों में कस लिया और बोला:”
“मुझे भी मेरी जान, अम्मी आपके होंठ कितने रस भरे लग रहे हैं।
शहनाज़ ने अपने होंठो को उपर उठा कर अपनी जीभ फिराई और बोली:” सिर्फ तेरे लिए हैं मेरे राजा
शादाब ने जोश में आकर अपने होंठ शहनाज़ के होंठो पर टिका दिए और चूसने लगा। शहनाज़ भी पूरी तरह से मदहोश हो गई और अपनी जीभ शादाब के मुंह मे घुसा दी तो शादाब अपनी अम्मी की जीभ चूसने लगा और उसकी गांड़ को जोर जोर से दबाने लगा। शहनाज़ के जिस्म में आग लग गई और चूत एकदम गरम हो गई।
जैसे ही उनकी किस टूटी तो शादाब शहनाज़ का हाथ अपने खड़े हो चुके लंड पर रखते हुए बोला: ” आज अपनी चूत दे दे अपने बेटे को, मत तड़पा मुझे।
शहनाज़ लंड को सहलाते हुए बोली:” मैं तो खुद तुझसे जी भर कर चुदना चाहती हूं शादाब, बस अब हम शहर में अपना घर लेंगे और तब जाकर हमारी दोनो की प्यास अच्छे से शांत होगी।
शादाब समझ गया कि उसे आज भी चूत नहीं मिलने वाली थी इसलिए बोला:”
” अम्मी अब घर चले बिल्कुल अंधेरा हो चुका है।
शहनाज़:” हान बेटा चल, रेशमा दुखी हो रही होगी।
दोनो जैसे ही चलते हुए गाड़ी के पास पहुंचे तो अचानक से जोर जोर से बारिश और तूफान आने लगा। शहनाज़ डर के मारे शादाब से चिपक गई और शादाब उसे गाड़ी में लेकर घुस गया। शादाब ने तेजी से सभी खिड़की बंद कर दी और बोला:”
” अम्मी लगता हैं आज मुझे चूत मिल ही जाएगी।
शहनाज़ शादाब की बात सुनकर शर्मा गई और बोली:”
“तेरी किस्मत हैं बेटा, कोशिश कर क्या पता किस्मत खुल जाए तेरी
इतना कहकर शहनाज़ ने अपने बुर्का उतार दिया और एक जोरदार अंगड़ाई ली जिससे उसकी चूचियां बगावत करती नजर आईं। शादाब ने आगे बढ़कर शहनाज़ की चूचियों को पकड़ लिया और जोर जोर से दबाने लगा। शहनाज़ मचल उठी और सिसकते के बोली:_
” आह थोड़ा और से शादाब, दर्द होता हैं मुझे।
शादाब ने एक झटके के साथ शहनाज़ का सूट उतार दिया और बोला:” आज तो बड़े कितना अच्छा मौका मिला है, दूर दूर तक कोई नहीं, आज तो तेरी जी भर कर आवाज गूंजेगी यहां।
शहनाज़:” शादाब एक बार रेशमा को फोन कर दे कि हम लेट हो जाएंगे। कहीं वो परेशान ना हो।
शादाब ने रेशमा को कॉल किया तो वो बोली:” शादाब यहां भी बहुत तेज तूफान चल रहा है, आराम से आना बेटा जल्दी मत करना तुम।
शादाब:” बुआ यहां तो कुछ पेड़ टूटकर सड़क पर गिर गए हैं, रास्ता नहीं है शायद आज रात ना अा पाऊ मैं।
शहनाज़ ने शादाब की तरफ देखा और उसे मारने का इशारा किया तो शादाब ने फोन का स्पीकर ऑन कर दिया।
रेशमा:” बेटा घबराना मत और शहनाज़ भाभी का ध्यान रखना, वसीम अा गए हैं मेरी चिंता मत करना तुम ।
शादाब:” ठीक है बुआ, बाद मैं करता हूं।
इतना कहकर शादाब ने फोन काट दिया और शहनाज़ की आंखो में देखते हुए अपने सारे कपड़े उतार दिए और बिल्कुल नंगा हो गया। लंड खुशी के मारे उछल उछल कर ठुमके लगा रहा है तो शहनाज़ बोली:”
_” इसे क्या हुआ मेरे राजा?
शादाब ने शहनाज़ को वहीं सीट पर लिटा दिया और बोला:” चूत मिलने की खुशी हैं शहनाज़।
इतना कहकर शादाब शहनाज़ के ऊपर चढ़ गया और उसके होंठ चूसने लगा। शहनाज़ भी मस्त हो गई और किस करते करते ही अपनी सलवार के साथ साथ पेंटी भी नीचे सरका दी। शादाब अब शहनाज़ की चूचियों को मसल रहा था, रगड़ रहा था। और शहनाज़ मस्ती में उड़ी जा रही थी।
” आह शादाब, मेरी चूत गीली हो गई है बेटे, कुछ कर तू
इतना कहकर शहनाज़ ने अपनी टांगे पूरी खोल दी और शादाब कर लंड को अपनी चूत के होंठो पर लगा दिया और बोली;”
” मार ले मेरी चूत शादाब, घुसा दे अपना लोला मेरी चूत में। आह ।
शादाब ने शहनाज़ को सीट पर ही झुका दिया और दोनो चूचियों को पकड़ लिया और एक जोरदार धक्का लगाया तो लंड शहनाज़ को चूत में घुस गया, पूरा जड़ तक।
शहनाज़ दर्द और मस्ती से कराह उठी
” आह ज़ालिम घुसा दिया पूरा अन्दर, उफ्फ हाय मा।
शादाब ने बिना देर शहनाज़ की चूत को चोदना शुरू कर दिया और लंड तेजी से अंदर बाहर होने लगा। शहनाज़ की चूत अब खुल गई तो उसे पुरा मजा आने लगा और सिसकते हुई बोली:”
” आह, उर्फ हाय एसआईआईआई, मेरा शादाब मुझे चोद रहा हैं,
शादाब जोश में आ गया और तेजी से धक्के लगाने लगा।शहनाज़ को के मुंह से तेज तेज सिसकियां निकलने लगीं और शादाब को अपनी बांहो में कस लिया। शादाब और शहनाज़ दोनो की चुदाई के लिए तड़प रहे थे इसलिए ज्यादा देर नहीं टिक पाए और शादाब ने लंड को बाहर निकाल कर एक तगड़ा धक्का लगाया और जड़ तक अन्दर घुसा दिया तो शहनाज़ को चूत भी इस धक्के के साथ ही झड़ गई और इसके शादाब को जोर से कस लिया और शादाब के लंड से वीर्य की पिचकारी निकलने लगी।
चुदाई के बाद दोनो मा बेटे एक दूसरे से चिपक गए और किस करने लगे।
धीरे धीरे बारिश और हवा बन्द हो गई तो शहनाज़ अपने कपड़े पहनने लगीं और बोली:”
” चल जल्दी से अपने कपड़े पहन ले बेटा हम बहुत लेट हो गए हैं।
शादाब:” अम्मी यहीं रुकते हैं ना जंगल में ताकि आप मजे से आवाज निकाल सके, घर सुबह चले जाएंगे।
शहनाज़ ने उसके गाल पर एक प्यारी सी चपत लगाई और अपनी सलवार का नाड़ा बांधते हुए बोली:’
” मेरे राजा जल्दी ही हम शहर शिफ्ट हो जाएंगे फिर आराम से मजे करना, अभी जो टाइम हैं वो रेशमा के साथ बिताने दो मुझे। मुझे बहुत अच्छी लगती हैं बिल्कुल मेरी छोटी बहन जैसी।
शादाब अपने कपड़े पहनते हुए बोला:” थोड़े दिन पहले तो वो आपको बिल्कुल पसंद नहीं थी आपको देखकर लगता था मानो उसका खून पी जाओगी आप!!
शहनाज़ ने शादाब को घूरकर देखा और बोली:” तब की बात और थी शादाब, वो मेरे राजा के पीछे पड़ी हुई थी, अब वो बदल गई है।
शादाब:” मतलब अगर वो अब फिर से मुझे लाइन मारे तब आप क्या करेगी?
शहनाज़ के होंठो पर स्माइल अा गई और बोली:”अब नहीं मारेगी मेरे राजा क्योकी अब उसकी मारने वाला अा गया है।
इतना कहकर शहनाज हंस पड़ी और शादाब में भी हंसते हुए गाड़ी आगे बढ़ा दी। करीब आधे घंटे बाद वो घर पहुंच गए।
उनके घर पहुंचते ही रेशमा और वसीम ने सुकून की सांस। दोनो मा बेटे बारिश भीग गए थे इसलिए सबसे पहले नहाए। खाना आज वसीम बाहर से ही ले आया था क्योंकि उसे पता था आज शहनाज़ घर पर नहीं हैं और उसे आने में देरी हो सकती हैं।
सारा परिवार साथ बैठ कर खाना खा रहा था। रेशमा बोली:”
” तो शादाब बेटा डील का क्या हुआ ?
शादाब ने सारी बाते बताई तो सभी लोग बहुत खुश हुए और रेशमा बोली:”
‘:” तूने उनके लिए जॉब की बात करके बहुत अच्छा किया और अब इन्हें बाहर जाने की भी जरुरत नहीं पड़ेगी।
वसीम के चेहरे पर खुशी देखने लायक थी। सारा परिवार खुश था क्योंकि एक लंबे समय के बाद घर में खुशियां वापिस अाई थी।
खाना खाने के बाद सारा परिवार सो गया, वसीम और रेशमा कल की तरह नीचे ही सोए जबकि शहनाज़ और शादाब बच्चो के साथ ऊपर।
वसीम ने आज रेशमा को नंगी कर दिया और आराम से उसकी चुदाई करी। रेशमा ने भी अपनी पति का साथ दिया लेकिन दोनो की ताकत और लंड में जमीन आसमान का अंतर था। शुरू में जहां वसीम के लंड से रेशमा चुद कर मस्त हो जाती थी वहीं आज उसे छोटा और कमजोर महसूस हुआ और उसे शादाब से चुदने की इच्छा फिर से जाग उठी।
अगले दो दिन कैसे खुशी खुशी बीत गए पता ही नहीं चला। हॉस्पिटल बनने का काम शुरू हो गया था और वसीम की देख रेख में ही सारा काम हो रहा था। रेशमा अब ठीक हो हुई थी और घर के काम काज में भर शहनाज की मदद कर रही थी।
रेशमा और शहनाज़ घर पर बैठे हुए थे और रेशमा बोली:”
” भाभी कल तो आप शादाब शहर में घर देखने जाओगे अगर आप कहें तो आज मै हॉस्पिटल का काम देख आऊ एक बार ?
शहनाज़ खुश होते हुए बोली:”
” हान हान रेशमा क्यों नहीं, मैं शादाब को बोल देती हूं कि वो तुम्हे खेत पर ले जाएगा।
रेशमा खुश हो हुई क्योंकि वो शादाब के शहर जाने से पहले उसके साथ मजे करना चाहती थीं
शहनाज़:” अरे बेटा शादाब जरा नीचे आना ,
शादाब अपनी अम्मी कि आवाज सुनकर दौड़ता हुआ आया और बोला:”
“जी अम्मी बोलिए आप ?
शहनाज़:” बेटा वो अपनी बुआ को खेत पर ले जा और हॉस्पिटल दिखा ला, और हान आपके फूफा के लिए खाना भी लेता जा।
शादाब गाड़ी लेने चला गया और रेशमा की चूत खुशी के मारे गीली होकर रस छोड़ने लगी।थोड़ी देर बाद ही गाड़ी गांव से निकल कर जंगल की तरफ दौड़ने लगी।
रेशमा शादाब के साथ आगे वाली सीट पर ही बैठी हुई थी। वो बोली:”
” शादाब कल फिर तो शहर जा रहे हो नया घर देखने ?
शादाब:” हां बुआ अब पढ़ाई का बहुत नुकसान हो गया है।इसलिए जाना ही होगा।
रेशमा ने एक लम्बी आह भरी और बोली:”
” शहर जाकर तो टीम अपनी बुआ को भूल ही जाओगे।
शादाब ने गाड़ी एक तेज मोड़ पर घुमाई और रेशमा एक झटके के साथ शादाब से जा लगीं। शादाब उसकी आंखो में देखते हुए बोला:”
” आपको कैसे भूल सकता हूं बुआ, आपने अपने आपको बिल्कुल बदल दिया है, जान पर खेलकर मेरी अम्मी को बचाया, मैं आपको बहुत पसंद करने लगा हूं बुआ।
इतना कहकर शादाब ने रेशमा का गाल चूम लिया तो गाड़ी हल्की सी अनियंत्रित होकर लहरा सी गई तो रेशमा डर के मारे कांप उठी और बोली:”
” शादाब बेटा मरवाएगा क्या मुझे भी अपने साथ, प्यार बाद में कर लेना पहले ड्राइविंग पर ध्यान दे ।
इतना कहकर रेशमा ने शादाब के होंठ चूम लिए और शादाब की तरफ जीभ निकाल कर उसे चिढ़ा दिया तो शादाब ने एक झटके के साथ गाड़ी को सड़क के किनारे रोक दिया और रेशमा के होंठो पर टूट पड़ा। रेशमा तो जैसे इसके लिए कब से तरस रही थी और वो शादाब के होंठो को चूसने लगी और अपनी जीभ उसके मुंह में घुसा दी और शादाब मजे से अपनी बुआ की जीभ चूसने लगा।
किस करते करते शादाब ने रेशमा की चूचियों को दबा दिया तो रेशमा मस्ती से लहरा गई और किस तोड़ते हुए बोली:”
” शादाब हम लेट हुए तो खाना ठंडा हो जाएगा, पहले तेरे फूफा जी को खाना दे दें
शादाब ने फुर्ती से गाड़ी हाईवे पर दौड़ा दी और आंधी तूफान की तरह उड़ाता हुआ कुछ ही मिनटों में खेत पर पहुंच गया।
रेशमा ने वसीम को खाना दिया और वो आराम से एक पेड़ के नीचे बैठकर खाना खाने लगा ।
रेशमा:चल शादाब मुझे दिखा कि हॉस्पिटल में क्या क्या बनेगा ?
शादाब खुशी खुशी अपनी बुआ को लेकर चल दिया। बिल्डिंग की बड़ी बड़ी दीवारें खड़ी हो गई थी और दोपहर होने के कारण सभी मजदूर खाना खा रहे थे। रेशमा और शादाब अंदर अा गए और शादाब रेशमा को बताने लगा तो रेशमा के एक दीवार के पीछे शादाब को खींच लिया और बोली:”
” आह शादाब छोड़ ना तो हॉस्पिटल, अा जा मैं तुझे अपना आईसीयू दिखाती हूं
इतना कहकर वो शादाब के सामने घुटनों के बल बैठ गई और उसने शादाब की पेंट की चैन को खोल दिया और उसके लंड को बाहर निकाल लिया जो कि अभी सोया हुआ पड़ा था फिर भी वसीम के लंड के बराबर लग रहा था।
रेशमा ने बिना देर किए लंड के सुपाड़े को मुंह में भर लिया और चूसने लगी। शादाब मस्ती से भर उठा और आंखे बंद करके इस मस्त एहसास को महसूस करने लगा।
रेशमा की गर्म और लपलपाती हुई जीभ का असर हुआ और लंड पूरी तरह से अकड़ कर खड़ा हो गया तो रेशमा ने आधे से ज्यादा लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी। शादाब ने मस्ती थोड़ा सा झुकते हुए उसकी चूचियां पकड़ ली और दबाने लगा तो रेशमा ने लंड को मुंह से बाहर दिया और शादाब के होंठो को चूसने लगी
शादाब ने रेशमा की सलवार का नाड़ा खोल दिया और सलवार सहित पेंटी को नीचे सरका दिया और रेशमा को दीवार के सहारे झुका दिया तो रेशमा दीवार में बने हुए एक हॉल से बाहर देखने लगी और शादाब ने नीचे झुकते हुए एक जोरदार किस रेशमा की चूत पर किया और अपने मोटे लंड को उसकी चूत पर टिका दिया तो रेशमा मस्ती से भर उठी और बोली:”
” शादाब थोड़ा प्यार से करना, अभी हल्का हल्का जख्म हैं मुझे
शादाब ने अपनी बुआ की बात को ध्यान में रखते हुए अपने लंड पर ढेर सारा थूक लगाया और एक हल्का सा धक्का मारते हुए लंड के सुपाड़े को चूत में घुसा दिया तो रेशमा दर्द और मस्ती से सिसक उठी
” आह शादाब, उफ्फ कितना मोटा हैं तेरा लोला, हाय मा।
शादाब में धीरे धीरे लंड पर दबाव दिया तो लंड रास्ता बनाते हुए चूत में घुस गया और रेशमा लंड की रगड़ से मस्त हुई जा रही थी और उसने खुद ही अपनी चूत पीछे को लंड पर दबा दी तो लंड जड़ तक घुस गया। शादाब में मस्ती से रेशमा की गांड़ पकड़ ली और जोर जोर से मसलने लगा। रेशमा पूरी तरह से मस्त हो गई और बोली:”
” आह शादाब चोद मुझे अब, मेरी चूत,
शादाब में रेशमा की चूत में हल्के हल्के धक्के लगाने शुरू किए तो रेशमा ने उसे थोड़ा तेज करने का इशारा किया तो शादाब ने थोड़ी सी गति बढ़ा दी और तो रेशमा मस्त हो गई।
शादाब:” आह बुआ मस्त चूत हैं तेरी, उफ्फ टाइट घुस रहा हैं, कहीं कोई अा गया तो
रेशमा:” आह शादाब, तेरा लोला मोटा हैं इसलिए टाइट घुस रहा है, मैं हॉल से सब देख रही हूं तो चोद आराम से मुझे।
शादाब को सुकून मिला और दोनो आंखे बंद करके आगे हाथ करके उसकी चूचियों को थाम लिया और धक्के लगाने लगा।
रेशमा शादाब के धक्के ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसकी चूत झड़ती चली गई
” हाय गई मेरी चूत, उफ्फ मा री हाय सिई आह शादाब।
शादाब ने भी एक जोर का धक्का मारा और लंड को जड़ तक घुसा दिया तो रेशमा का बदन जोर से कांप उठा और उसके मुंह से एक दर्द भरी कराह निकल गई
” आह शादाब, उफ्फ नहीं आईआई
शादाब ने जोर से रेशमा को कस लिया और उसकी चूत में वीर्य छोड़ने लगा। दोनो अपनी अपनी सांसे दुरुस्त करने लगे।
थोड़ी देर बाद दोनो वसीम के पास पहुंच गए और उससे बात करने लगे।
वसीम: ” कैसा लगा रेशमा हॉस्पिटल का डिजाइन और काम ?
रेशमा के होंठो पर एक स्माइल अा गई और बोली:”
” बहुत ही बढ़िया, माफी लंबे और मोटे चौड़े अरिया में बन रहा हैं,
वसीम:” सब कुछ शादाब के हिसाब से हो रहा हैं
रेशमा:” शादाब हैं तो फिर तो सब कुछ मस्त हो होगा, मेरा भतीजा बहुत समझदार हैं। अच्छा सुनो मैं चलती हूं घर आप शाम को किस टाइम तक अा जाएंगे ?
वसीम:” अभी इतनी तेज धूप में कहां जाओगी , सब आराम कर रहे हैं तो तुम भी आराम करो
रेशमा उदास हो गई और शादाब की तरफ देखा तो शादाब बोला :”
” वो मुझे कल शहर जाना हैं इसलिए तैयारी करनी होगी।
वसीम:” ठीक है फिर चले जाओ तुम दोनो, आराम से जाना लेकिन तुम बहुत तेज गाड़ी चलाते हो।
शादाब में अपने फूफा को स्माइल दी और गाड़ी लेकर चल दिया। रेशमा शादाब की जांघ सहलाते हुए बोली:”
” शादाब सच में सड़के खाली पड़ी हुई है कोई नहीं हैं दूर दूर तक !!
शादाब अपनी बुआ का इशारा समझ गया और बोला:”
” बुआ बस अगले मोड़ से घुमा लूंगा वहीं एक सुनसान सड़क हैं जहां हम दोनों चुदाई…
रेशमा ने शादाब के होंठो पर उंगली रख दी और बोली:”
” आह नहीं शादाब करना बस मुंह से मत बोलो कुछ भी ।
शादाब ने एक हाथ रेशमा की जांघ पर रख दिया और सहलाने लगा तो रेशमा ने मस्ती में आकर शादाब का लंड बाहर निकाल लिया और चूसने लगी तो शादाब के मुंह से आह निकल गई। शादाब ने अगले मोड़ से गाड़ी घुमा दी और जल्दी ही वो एक जंगल में पहुंच गए।
दूर दूर तक कोई नहीं था तो शादाब ने अपनी बुआ को गोद में उठा लिया और जंगल के अंदर ले गया। उसे एक पहाड़ीनुमा जगह दिखी तो काफी ऊंचाई पर थी और वहां हल्की हल्की हवा चल रही थी। शादाब ने रेशमा को वहीं लिटा दिया और खुद अपने सारे कपड़े उतार फेंके तो रेशमा ने जोश में आकर अपनी एक अंगुली अपनी चूत में घुसा दी और अंदर बाहर करने लगी।
” आह शादाब देख ना कितनी तड़प रही है तेरे लोले के लिए मेरी चूत, अा जा चढ़ जा अपनी बुआ पर !!
शादाब का लंड हवा में लहरा रहा था और शादाब रेशमा की टांगो के बीच में अा गया और लंड को चूत पे रगड़ने लगा तो रेशमा का जिस्म उत्तेजना से हिलने लगा और शादाब ने उसकी आंखो में देखते हुए एक जोरदार धक्का लगाया तो आधे से ज्यादा लंड रेशमा की चूत में घुस गया।
रेशमा के होंठो से दर्द भरी सिसकारियां निकलने लगी और उसका मुंह खुलता चला गया
” आह शादाब, थोड़ा प्यार से कर ना, टांको की जगह पर दर्द होता हैं अभी । जंगल में मेरी चूत में मंगल हो रहा है शादाब
शादाब ने रेशमा की चूचियों को पकड़ लिया और हल्का हल्का सहलाते हुए लंड पर दबाव दिया तो लंड चूत को फैलाते हुए अंदर घुसने लगा। लंड की लंबाई और मोटाई की वजह से रेशमा की चूत फैल रही थी और रेशमा के मुंह से आनहे निकल रही थी। जल्दी ही पूरा लंड अंदर घुस गया तो रेशमा ने चैन की सांस ली।
रेशमा ने शादाब के होंठ चूम लिए और शादाब ने लंड को बाहर निकाला और एक ही धक्के में पूरा जड़ तक घुसा दिया तो रेशमा के मुंह से मस्ती भरी आज निकल पड़ी।
” सीई आईआईओ आह उफ्फ चोद ऐसे ही, उफ्फ ये मस्त लोला
शादाब ने रेशमा की दोनो टांगो को फैला दिया और उसकी आंखो में देखते हुए तेज धक्के लगाने लगा। हर धक्के पर रेशमा की चूचियां हिल रही थी और उसके मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकल रही थी।
शादाब रेशमा की आंखो में देखते हुए उसे चोद रहा था और उसे जोश दिलाने के लिए मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां भर रही थी।
शादाब ने रेशमा को लंड घुसे घुसे ही अपनी गोद में उठा लिया और हरी हरी घास लेट गया तो रेशमा अपने आप लंड पर उछलने लगी, लंड उसकी चूत की फांकों को रगड़ते हुए अंदर बाहर होने लगा तो रेशमा की आंखे मजे से बन्द हो गई और शादाब ने उसके चूतड़ों को थाम लिया और लंड पर उपर नीचे करने लगा।
रेशमा की चूचियां शादाब की आंखो के आगे लहरा रही थी जिसे उसने मुझ में भर लिया और चूसने लगा तो रेशमा मस्ती से बेकाबू हो गई और उसकी गांड़ तेजी से चलने लगी।
” आह शादाब चूस ले मेरी चूचियों को, आह मेरा क्या होगा तेरे जाने के बाद, कहां से मिलेगा ऐसा लोला मुझे!!
शादाब ने रेशमा के एक निप्पल पर जोर से काट लिया तो रेशमा के मुंह से एक मस्ती भरी कराह निकल पड़ी और उसका जिस्म लंड पर गिरता चला गया जिससे लंड उसकी चूत को पूरी जोर से रगड़ता हुआ अंदर तक घुस गया और रेशमा की चूत झड़ गई
” आह शादाब मार ली तूने मेरी चूत, उफ्फ गई मेरी चूत।
रेशमा की चूत से निकलते हुए गर्म गर्म रस के आगे शादाब का लंड भी जवाब दे गया और उसने अपने जिस्म की पूरी ताकत लगते हुए नीचे से धक्का लगाया तो लंड रेशमा की बच्चेदानी में घुस गया और उसके मुंह से दर्द भरी आह निकल पड़ी
” आह फाड़ देगा क्या मेरी बच्चेदानी को तू उफ्फ मा
शादाब ने एक के बाद एक वीर्य की पिचकारी रेशमा की चूत में मारनी शुरू कर दी और रेशमा इस एहसास को महसूस करके मस्त हो गई।
शादाब थोड़ी देर ऐसे ही रेशमा के उपर पड़ा रहा और और जैसे ही लंड बाहर निकला तो रेशमा को अपनी चूत के अंदर खाली पन महसूस हुआ। रेशमा उठ गई और चूत और वीर्य के मिश्रण से सने हुए लंड को मुंह में भर कर चूसने लगी। शादाब की आंखे एक बार फिर से मस्ती से बंद हो गई और रेशमा ने अपने हाथो से शादाब की गोलियों को सहलाना शुरू कर दिया तो जल्दी ही लंड फिर से खड़ा होता चला गया और रेशमा ने घोड़ी बनते हुए अपनी चूत शादाब के सामने खोल दी तो शादाब में फिर से एक झटके में उसकी चूत में लंड घुसा दिया और तेजी से धक्के मारने लगा।
एक बार फिर से रेशमा की सिसकियां निकलने लगी और शादाब उसको मस्ती से चोदता रहा। करीब आधे घंटे उसने रेशमा को चोदा और एक बार से अपने वीर्य से उसकी चूत को भर दिया। रेशमा की चूत तो आज इतनी झड़ी कि रेशमा गिनती तक भूल गई।
उसके बाद दोनो घर की तरफ चल पड़े। शहनाज़ ने दोनो को घर जाते ही पानी दिया और शाम तक वसीम भी घर अा गया। रात को सभी लोग आराम से सो गए।
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अगले दिन सुबह शहनाज़ जल्दी ही उठ गई क्योंकि आज वो इतनी खुश थी कि उसके पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे। उसने अपने पास लेटे शादाब का मुंह चूम लिया तो शादाब ने भी अपनी आंखे खोल दी और शहनाज़ को अपनी बांहों में भर लिया।
शहनाज़:” उठ जा शादाब, जल्दी से तैयार हो जा आज हमे शहर जाना हैं नया मकान देखने के लिए बेटा।
शादाब उसकी चूचियों में अपना मुंह घुसाते हुए बोला:”
” उम्म्म सोने दो ना शहनाज़, अभी तो ठीक से दिन भी नहीं निकला हैं।
शहनाज़:” आलसी कहीं का, मैं तो चली नहाने।
इतना कहकर शहनाज़ बाथरूम में घुस गई। रेशमा भी उठ गई और वो जानती थी कि आज सुबह जल्दी ही शादाब और शहनाज़ शहर जाएंगे इसलिए वो नाश्ता आज खुद तैयार करना चाहती थी।
जैसे ही वो ऊपर अाई तो उसने शादाब को सोते हुए देखा और उसे उस पर बहुत प्यार आया और उसने शादाब का मुंह चूम लिया। जैसे ही रेशमा को किसी के आने की आहट हुई तो वो सीधी होकर पीछे हट गई।
रेशमा ने देखा कि शहनाज़ नहाकर अा गई है। दोनो की एक दूसरे को देखकर हैरान हो गई, शहनाज़ उसे ऊपर देखकर डर गई और मन ही मन खुशी खुश हुई कि मैं पकड़ी नहीं गई जबकि रेशमा इसलिए खुश थी शहनाज़ ने उसे शादाब को किस करते हुए नहीं देखा।
रेशमा आगे बढ़ी और शहनाज़ से मजाक करते हुए बोली:”
” बड़ी जल्दी हैं शहर जाने की भाभी, इतनी सुबह ही उठ गई।
शहनाज़ अपनी असली खुशी छुपाते हुए बोली:”
” अरे मैं तो रोज ही सुबह उठ जाती हूं और खुश इसलिए हूं कि अपने बेटे के साथ रहने को मिलेगा मुझे।
रेशमा ने आगे बढ़कर शहनाज के गाल चूम लिए और बोली:”
” क्या बात हैं भाभी आप तो दिन प्रति दिन जवान होती जा रही हो, आप कहे तो किसी से दोस्ती करा दू आपकी !!
शहनाज़ के होंठो पर स्माइल अा गई और वो रेशमा को हल्का सा मारते हुए बोली:”
” चल बदतमीज कहीं की, जो मुंह में आए बोल देती हैं।
रेशमा ने शहनाज़ को अपनी बांहों में भर लिया और बोली:”
” सच में भाभी अगर मैं लड़का होता तो आपको लेकर भाग जाता शहनाज।
रेशमा ने उसे आंखे दिखाईं और थोड़ा सा बनावटी गुस्सा करते हुए बोली:”
” रेशमा तुम क्यों मेरे मजाक उड़ा रही हो, इतनी भी सुंदर नहीं हूं मैं।
रेशमा ने उसका चेहरा ऊपर उठाया और उसकी आंखो में देखते हुए बोली:”
” तुम सुंदर नहीं कयामत हो कयामत, अब उपर से शहर का फैशन देख लेना भाभी तुम पक्का कांड करके वापिस आओगी ।
शहनाज़ ने उसे जोर से डांट दिया और बोली:” जा चल अपना काम कर, आजकल तेरी जुबान बहुत चलने लगी हैं।
रेशमा उसे जीभ दिखाती हुई चली गई और नाश्ता तैयार करने लगी।थोड़ी देर बाद ही शादाब और शहनाज़ सारे परिवार के साथ नाश्ता कर चुके थे और शहर जाने के लिए तैयार थे तभी शादाब का मोबाइल बज उठा। उसके फोन उठाया और बोला:”
” अजय मेरे भाई मेरे दोस्त कैसे हो तुम ?
अजय:” ठीक ही मैं, घर में कैसे हैं सब, फिर कोई दिक्कत तो नहीं हुई ना ?
शादाब:” नहीं भाई, सब ठीक हैं, मैंने अपनी जमीन पर हॉस्पिटल का काम एक पार्टी को दे दिया है।जल्दी ही बन जाएगा।
अजय:” भाई ये तो बहुत अच्छी बात है, हमे भी किसी छोटी मोटी जॉब पर रख लेना ।
अजय की बात सुनकर शादाब के चेहरे पर हल्का दर्द दिखाई दिया और बोला:” भाई तुम तो मालिक हो यार, जो तुम्हे अच्छा लगे बता देना मुझे। आज मैं शहर में घर देखने जा रहा हूं क्योकि मैं और अम्मी अब साथ रहेंगे।
अजय:” अबे साले अगर घर ही खरीदना हैं तो होवार्ड यूनिवर्सिटी के आस पास खरीद ले।
शादाब खुशी के मारे उछल पड़ा और बोला:” क्या सच अजय, तू सच बोल रहा है भाई ?
अजय:” हान मेरी जान, तेरा सेलक्शन हो गया हैं, कल रिजल्ट आया है।
शादाब तो जैसे खुशी के मारे पागल हो गया, उसे समझ ही नहीं अा रहा था कि कैसे खुशी मनाए, उसने शहनाज़ को अपने गले लगा लिया और उसके गाल चूम लिए। शहनाज़ रेशमा और वसीम के आगे अपने गाल इस तरह चूमे जाने से शर्मा गई और सबसे बड़ी आज वो पहली बार वसीम के सामने बेपर्दा हुई थी तो उसने झट से अपने मुंह पर फिर से घूंघट डाल दिया लेकिन तब तक वसीम उसका खूबसूरत चेहरा देख चुका था ।
सभी लोग हैरानी से उसे देख रहे थे और मंद मंद मुस्कुरा रहे थे। हर कोई ये जानना चाहता था कि शादाब की इस खुशी का क्या कारण हैं।
शादाब:” अजय मैं तुझे बाद में कॉल करता हूं भाई, घर मैं सबको बता दू पहले।
इतना कहकर अजय ने फोन काट दिया और बोला:”
” अम्मी बुआ मेरा होवार्ड यूनिवर्सिटी में चयन हो गया है।
शादाब की बाते सुनकर सबके चेहरे खुशी के मारे दमक उठे और उसे मुबारकबाद देने लगे।
तभी शहनाज़ बोली:”
” अरे बेटा अजय का क्या हुआ, एग्जाम तो उसने भी दिया था ना ?
शादाब को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने तुरंत अजय को कॉल किया और बोला:”
” अरे मेरे भाई, ये तो बता तुम्हारे एग्जाम का क्या हुआ ?
अजय खामोश सा हो गया और उसकी मायूसी भरी आवाज उभरी :”
” शादाब मेरा एक नंबर से रह गया हैं भाई, लेकिन देखना अगली बार तेरा भाई टॉप करेगा।
शादाब की खुशियां आधी हो गई और बोला:”
” भाई मुझे तेरे पर पूरा यकीन हैं, देखना अगले साल सिर्फ तेरे ही चर्चे होंगे।
अजय:” चल ठीक हैं शादाब, मैं तुझे बाद मैं करता हूं।
अजय ने फोन काट दिया और शादाब ने होवार्ड यूनिवर्सिटी की वेबसाइट को चैक किया तो देखा कि उसका चयन हो गया है और अजय सच में एक नंबर से रह गया। शादाब को दुख हुआ लेकिन क्या कर सकता था।
दो दिन बाद शादाब और शहनाज एयरपोर्ट के बाहर खड़े हुए थे और दोनो 5 साल के लिए अमेरिका जा रहे थे।
रेशमा और शहनाज़ दोनो की आंखो में आंसू थे क्योंकि उनमें सगी बहनों जैसा प्यार हो गया था। लेकिन जाना तो था ही आखिर कार दोनो ने एक दूसरे को हसरत भरी निगाहों से देखा और दोनो एक दूसरे के गले लग गई।
रेशमा:” भाभी अपना ध्यान रखना और शादाब का भी।
शहनाज़:” तुम भी रेशमा अच्छे से रहना और हम फोन पर बात करेंगे।
इतना कहकर दोनो अलग हो गई और शहनाज़ और शादाब दोनो अंदर चले गए जबकि रेशमा और वसीम ने उन्हें देखकर हाथ हिलाते रहें।
अंदर प्लेन में बैठी हुई शहनाज़ आज जहां एक ओर खुशी थी वहीं डर भी रही थी। शादाब ने उसका हाथ अपने हाथों में लिया और बोला:”
” क्या हुआ शहनाज़ परेशान लग रही हो ?
शहनाज़:” बेटा वहां तो बड़ी सुन्दर सुन्दर लड़कियां होगी कहीं तू मुझे छोड़ तो नहीं देगा ?
इतना कहकर शहनाज़ की आंखे भर आई तो शादाब ने अपने रुमाल से उसका मुंह साफ किया और बोला:”
” क्या आपको अपने दूध और खून पर भरोसा नहीं है क्या अम्मी ?
शहनाज़ ने अपना सिर उसके कंधे पर टिका दिया और बोली:”
” अपने आप से भी ज्यादा मेरे राजा, लेकिन अब तू मुझे अम्मी नहीं सिर्फ शहनाज़ कहकर बुलाएगा ।
शादाब स्माइल करते हुए बोला:”
” ठीक हैं शहनाज़ मेरी जान जैसे आपको अच्छा लगे।
शहनाज़ उसकी बाते सुनकर खुशी से उसकी आंखो में देखने लगी तो शादाब बोला:”
” आई लव यू मेरी अम्मी शहनाज़
इसके साथ ही दोनो मा बेटे एक साथ मुस्कराए और शहनाज़ एक हाथ से उसका कान तो दूसरे से उसका लंड खींचते हुए बोली:”
” तू कभी नहीं सुधर सकता मेरे राजा।
शादाब ने शहनाज़ का हाथ अपने हाथ में पकड़ लिया और प्लेन उड़ गया।
The End