माँ का आशिक अध्याय 7

गाड़ी चलाते हुए शादाब को अपने उपर बहुत गुस्सा अा रहा था कि वो रेशमा के साथ ना चाहते हुए भी बहक गया था। मेरी अम्मी मुझ पर कितना यकीन करती है अगर उन्हें पता चलेगा तो मुझसे हमेशा के लिए रिश्ता खत्म कर लेगी। लेकिन जो सुख आज उसे रेशमा ने दिया था वो अभी तक महसूस कर रहा था, रह रह कर उसे अपने लंड पर रेशमा की जीभ जी की रगड़ याद अा रही थी और उसका पूरा जिस्म एक अजीब सी मस्ती से भरा हुआ था।

कोई शाम को छह के आस पास शादाब घर पहुंच गया और दादा दादी आपके घर वापिस आकर खुशी से फूले नहीं समाए। आखिर अपनी मिट्टी की खुशबू अपनी ही होती हैं, ये बात दोनो अच्छी तरह से महसूस कर रहे थे। शादाब गाड़ी पार्क करने चला गया और दादा दादी दोनो नीचे बैठक में बैठ गई। उन्हें हैरानी हो रही थी कि शहनाज़ अब तक उनके पास क्यों नहीं अाई क्योंकि शहनाज़ तो हमेशा दौड़ती हुई आती थी जब भी दादा जी बाहर से आते थे। उन्हें लगा शायद सो रही होगी इसलिए नहीं अाई। दरअसल शहनाज के पूरे बदन में से हल्दी की खुशबू अा जाती और उसके बदले हुए रूप को अगर दोनो देख लेते तो उन्हें जरूर शक हो जाता। बस ये सब सोचकर शहनाज़ नीचे आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। हल्दी की खुशबू तो शादाब के बदन में भी थी लेकिन शादाब ने सुबह ही अपने बदन पर एक तेज गंध वाला परफ्यूम लगा लिया था जिससे वो बच गया था लेकिन शहनाज़ ने तो आज तक परफ्यूम नहीं लगाया था इसलिए वो नहीं लगा सकती थी। शादाब गाड़ी पार्क करके अा गया और दादा बोले:”

” बड़ी जोर से प्यास लगी है बेटा, थोड़ा पानी तो ला से मुझे, शहनाज़ नहीं अाई शायद सोई होगी बेचारी।

शादाब अपने दादा जी की बात सुनकर उपर की तरफ चल दिया तो उपर पहुंचते ही उसे सामने ही शहनाज़ नजर आईं और उसने दौड़कर शादाब को अपने गले लगा लिया। शादाब में भी शहनाज़ को अपनी बांहों में कस लिया। शहनाज़ एक पागल दीवानी की तरह उसका चूम चूमने लगी मानो सदियों के बाद उसे उसका खोया हुआ प्रेमी मिला हो। शादाब ने उसके गाल गुलाबी चूमते हुए कहा:”

” अम्मी दादा जी पानी मांग रहे हैं और आप नीचे नहीं अाई उन्हें अजीब सा लग रहा है।

शहनाज़:” कैसे जाऊ मै उनके सामने ? तूने मुझे इस लायक छोड़ा ही कहां है, मेरे बदन से उठती हुई हल्दी की खुशबू वो एक दम पहचान लेंगे और फिर मेरा चेहरा और स्टाइल पूरी तरह से बदल चुका हैं। वो क्या सोचेंगे।

शादाब:” अम्मी आप अपना मुंह ढक लेना बाकी आप मुझ पर छोड़ दो।

शहनाज़ ने अपने बेटे की बात मानते हुए दो ग्लास में पानी भरा और घूंघट निकाल कर नीचे की तरफ चल पड़ी। जैसे ही वो दादा दादी के पास पहुंच गई तो शादाब पीछे से अपना परफ्यूम का डिब्बा लिए आया और उसको हिलाते हुए कहा:”

,” उफ्फ मेरा ये डिब्बा खराब हो गया शायद,

इतना कहकर उसने डिब्बे को जोर से दबा दिया तो उसमें से निकलता हुआ परफ्यूम शहनाज़ के जिस्म पर गिरने लगा और दादा दादी के मुंह से हंसी छूट गई। शहनाज़ ने ट्रे उनके आगे कर दी और दोनो के एक एक ग्लास पानी उठा लिया।

दादा जी:” हा हा हा शादाब, तूने तो डिब्बे को ठीक करने के चक्कर में शहनाज़ पर ही परफ्यूम छिड़क दिया। अरे शहनाज़ तुमने पर्दा क्यों किया हैं आज ?

शहनाज़ कांप उठी लेकिन बात को संभालते हुए बोली:”

“आप मेरे बड़े हैं ना इसलिए मैंने फैसला किया है कि अब आगे से आपसे पर्दा करूंगी।

दादी:” अरे शाहनाज तू तो हमारे लिए बेटी जैसी हैं और पहले ही तुम कौन सा पर्दा करती थी इनसे जो अब कर रही है ?

शाहनाज घबरा गई और मदद के लिए शादाब की तरफ देखा तो शादाब बोला:”

” अम्मी पर्दा इसलिए कर रही हैं क्योंकि आपके जाने के बाद कुछ औरतें अाई थी जो अम्मी को बता रही थी कि असली शर्म ती आंखो की होती हैं। बस शायद इसीलिए कर रही है।

दादा जी:” हान बेटी शहनाज़ हमारे जमाने में तो आंखो की शर्म बहुत बड़ी बात मानी जाती थी, चल अगर तुझे लगता हैं कि तुझे पर्दा करना चाहिए तो हम ज्यादा जबरदस्ती नहीं करेंगे।

दादी:” बस शहनाज हमे तो तेरी ख़ुशी चाहिए जो तुझे अच्छा लगे कर बेटी ।

शादाब:” अम्मी पर्दा करना अच्छी बात हैं लेकिन ध्यान देना कि पर्दे के चककर में कहीं दादा दादी जी की खिदमत पर असर ना पड जाए

शहनाज़ अपनी गर्दन हिलाते हुए:” मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगी कि उनकी खिदमत में कोई कमी ना आए, अगर मुझे लगा कि कोई कमी अा रही हैं तो मैं पर्दा खोल दूंगी।

शहनाज़ ने बड़ी चतुराई से इस बात की भी तसल्ली कर ली कि जब एक दुल्हन का रंग उसके उपर से पूरी तरह से उतर जायेगा तो वो आराम से पर्दा खोल सके।

शादाब:” बिल्कुल अम्मी आपको ऐसा ही करना चाहिए। अब आप खाने का कुछ इंतजाम कीजिए दादा दादी जी को भूख लगी होगी।

दादा जी:” हान बेटी खाना खाकर सो जायेंगे वैसे भी इस उम्र में इतना लंबा सफर पूरी तरह से थका देता है।

शहनाज़ और शादाब दादा जी की बात सुनकर अंदर ही अंदर खुश हो गए। शहनाज़ और शादाब दोनो उपर चले गए तो सीढ़ियों में जाते ही शादाब ने शहनाज़ को अपनी बांहों में उठा लिया तो शहनाज़ भी अपना पर्दा हटाकर उसकी आंखो में देखने लगी और बोली:”

” थैंक्स शादाब मुझे बचाने के लिए, तूने अच्छा बहाना बना दिया नहीं तो आज मै फस जाती

शादाब:” अम्मी आपको मैं कभी फसने नहीं दूंगा आप बेफिक्र रहे और खुश रहे।

शहनाज़ किचेन के पास जाकर उसकी बांहों में से उतर गई और बोली:” सुन शादाब खाना तो मैंने पहले ही बना दिया था बस सब्जी गर्म करके रोटी बना देती हूं।

शादाब:” उफ्फ दिन में ही खाना बना दिया क्यों रात को कुछ जरूरी काम हैं क्या ?

शहनाज़ शर्मा गई और उसकी छाती में हल्के हल्के मारते हुए बोली:” जब देखो मुझे परेशान करता है तू, थोड़ी देर और रुक जा फिर देखना तेरा क्या हाल करूंगी ?

शादाब अपने लंड को पेंट के उपर से ही सहलाते हुए:”

” अम्मी तरबूज चाहे चाकू पर गिरे या चाकू तरबूज पर, अंजाम एक ही होता हैं तरबूज का कटना, फटना।

शहनाज़ उसे पीछे से पकड़ लेती है और अपनी चूची उसकी पीठ से रगड़ते हुए बोली:”

” बड़ा समझदार हो गया है तू तो, अच्छा बात सुन, आज तेरे दादा जी अा गए हैं तो कल से उन्हें कूटे हुए मसाले कि सब्जी चाहिए होगी

शादाब ने अपने हाथ पीछे ले जाकर शहनाज की गांड़ पर रख दिए और हल्का सा दबाते हुए बोला:”

” शहनाज़ मेरी जान, आज औखली तैयार रखना, सारी रात मसाला कूटेंगे दोनो,

इतना कहकर हुए शादाब ने हाथ को शहनाज़ की चूत पर रख दिया और जोर से दबोच लिया तो शहनाज़ के मुंह से आह निकल पड़ी और शादाब की गर्दन चाटते हुए बोली:”

” आह राजा, उफ्फ पूरी जोर जोर से मसाला कूटना, बहुत अच्छा लगता है जब तू तेजी से जोर जोर से कूटता हैं,

इतना कहकर शहनाज़ ने शादाब के लंड को पेंट के उपर से ही पकड़ लिया और दबाते हुए बोली:”

” उफ्फ तेरा मूसल तो आज बहुत ज्यादा टाईट हो गरम हो रहा हैं शादाब, आज तो मेरी औखली गई काम से मेरे राजा

शादाब भी एक एक हाथ को शहनाज की सलवार के अन्दर घुसा कर उसकी चूत को मुट्ठी में भर लिया तो शहनाज़ की गीली चूत का रस उसके हाथ में लग गया तो शहनाज़ कसमसा उठी और शादाब उसकी चूत पर उंगली फेरते हुए बोला:”

” आह अम्मी ये ती अभी से पूरी गीली हो रही है, मजा आ जाएगा आज तो उफ्फ मेरी शहनाज़

इतना कहकर शादाब ने एक उंगली उसकी चूत में घुसा तो शहनाज़ मस्ती से सिसक उठी और उससे दूर हो गई और बोली:”

” आह बस कर शादाब, उफ्फ पहले दादा दादी जी को खाना खिला दे फिर जी भर कर मुझे प्यार करना।

शादाब भी नहीं चाहता था कि बीच में चुदाई को अधूरा छोड़ना पड़े इसलिए वो मान गया। शहनाज़ रोटी बनाने में जुट गई और शादाब बाथरूम में घुस गया। शादाब ने बुरी तरह से अकड़े हुए लंड को बाहर निकाला तो उसकी गांड़ फट गई क्योंकि लंड पर अभी तक रेशमा की लिपस्टिक के निशान पड़े हुए थे। बाल बाल बच गया आज तो उफ्फ अगर शहनाज़ गलती से भी लंड देख लेती तो कयामत ही अा जाती।

शादाब ने लंड को पूरी तरह से पानी से साफ किया और और बाहर अा गया तब तक शहनाज़ रोटी बना चुकी थी तो दोनो मा बेटे खाना लेकर नीचे की तरफ चल पड़े।

दादा दादी खाना खाने लगे तो दादा जी एकदम समझ गए कि सब्जी में कूटे हुए मसाले नहीं पड़े हुए हैं इसलिए वो बोले:

” बेटी कोशिश करना कि कल से घर के कूटे हुए मसाले सब्जी में डालो क्योंकि उनसे खाने का टेस्ट बढ़ जाता हैं।

शहनाज़ ने अपना सिर हिला दिया तो उसके ठीक सामने बैठे शादाब ने अपना पैर नीचे से ही उसकी जांघ पर रख दिया और सहलाते हुए बोला:”

” दादा जी आप फिक्र ना करे, मैं आपके लिए मसाला खुद कूट दूंगा।

इतना कहकर शादाब ने अपने पैर को शहनाज़ की चूत पर टिका दिया तो शहनाज़ का जिस्म कांप उठा। दादा जी बोले:

” बेटा थोड़ा ज्यादा बारीक कूटना मुझे वो ज्यादा पसंद हैं।

शहनाज़ की चूत में चिंगारी सी उठ रही थी क्योंकि वो जानती थी कि दोनो दादा पोते उसकी चूत कूटने की बात कर रहे हैं।

दादी :” बेटा शादाब, ज्यादा बारीक पीसने के चक्कर में कहीं औखली मत फोड़ देना

दादा जी:” अरे शहनाज़ बेटी ये तो ठहरा जवान लड़का, तुम एक काम करना औखली में अच्छे से तेल लगाकर इसे देना ताकि फूटने से बच जाए।

दादा जी की तेल वाली बात सुनकर शादाब ने जोश में आकर अपने अंगूठे को जोर से शहनाज़ की चूत पर दबा दिया तो शहनाज़ के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी जिसने उसने बड़ी मुश्किल से दबाया।

शादाब अंगूठे को चूत पर रगड़ते हुए:” अम्मी खूब अच्छे से चिकनी करके मुझे औखली तब देना कहीं बाद मैं शिकायत करो।

शहनाज़ का जिस्म अब पूरी तरह से सुलग उठा और बोली;”

” तुम औखली की फिक्र मत करो, मैं उसे अच्छे से चिकनी करके तुम्हे दूंगी बस तुम मसाला ठीक से बारीक कूट देना।

इतना कहकर शहनाज़ ने अपनी एक अंगुली को अपनी गीली हो चुकी चूत में घुसा दिया और पूरी तरह से चिकनी करके शादाब के अंगूठे पर लगा दिया मानो उसे दिखा रही हो कि चूत कितनी गीली होकर तड़प रही है।

शादाब ने अपने पैर को वापिस खींच लिया और एक बार दादा दादी की तरफ देखा और एक उंगली को अपने अंगूठे पर फेरकर अपने मुंह में घुसा दिया तो शहनाज़ का जिस्म जोर से कांप उठा। शहनाज़ के पसीने छूट गए और वो पूरी तरह से मदहोश होकर अपनी जांघो को आपस में रगड़ने लगी।

दादा दादी दोनो खाना खा चुके थे इसलिए शहनाज़ बरतन उठाने लगी और उपर की तरफ चली गई। शादाब बोला:”

” दादा जी मैं भी चलता हूं और कुछ चाहिए तो बता देना।

दादा जी:” नहीं बेटे कुछ नहीं बस, थक गया हूं तो आराम से सो जाऊंगा अब।

शादाब उपर चला गया तो उसने देखा कि शहनाज़ आंखे बंद किए हुए अपने कमरे में बेड पर पड़ी हुई थी और गहरी गहरी सांस लेने के कारण चूचियां उछल रही थी। शहनाज़ कपड़ों के ऊपर से ही अपनी चूत सहला रही थी और मस्ती में डूबी हुई थी। शहनाज़ का बेडरूम अब तक सजा हुआ था और अभी भी बेड पर फूल पड़े हुए थे। शादाब ने अपने सारे कपड़े उतार फेंके और शहनाज़ के उपर चढ़ गया तो शहनाज़ ने आंखे खोलते हुए शादाब को कस लिया तो उसे उसके नंगे होने का एहसास हुआ तो शहनाज़ मस्ती से सिसक उठी

” आह शादाब, बहुत तड़प रही हूं मैं सुबह से, उफ्फ मुझे प्यार कर बेटा, नहीं तो मर जाएगी तेरी शहनाज़ हाय उफ्फ।

शहनाज़ ने शादाब के होंठो को चूसना शुरू कर दिया तो शादाब ने शहनाज़ की सलवार के साथ साथ पेंटी भी एक झटके के साथ उतार कर फेंक दी और शहनाज़ लंड अपने आप शहनाज़ की चूत पर जा लगा तो शहनाज़ ने किस तोड़कर शादाब की आंखो में देखते हुए लंड को अपनी चूत के छेद पर टिका दिया और शादाब को स्माइल दी तो शादाब ने जोश में आकर एक जोरदार धक्का लगाया तो लंड एक तेज झटके के साथ शहनाज़ की चूत में उतरता चला गया। शहनाज़ को तेज दर्द का एहसास हुआ और उसके मुंह से एक जोरदार मस्ती भरी आह निकल पड़ी और उसने जोर से शादाब को अपनी बांहों में कस लिया

” आहहहह सीई आइआइआइ हाय मा री उफ्फ।

शहनाज़ भूल गई थी कि नीचे उसके सास ससुर हैं और खुले दरवाजे में से उसकी सिसकी नीचे दादा जी को सुनाई पड़ी तो उनकी आवाज आई

” क्या हुआ शहनाज़ बेटी ? सब ठीक तो है

शहनाज़ और शादाब दोनो ही एक पल के लिए कांप उठे और फिर शहनाज़ अपने आपको संभालते हुए शादाब की आंखो में देखते हुए बोली”

” अब्बा जी वो मुझे छिपकली दिख गई थी

दादा जी के हंसने की आवाज सुनाई दी और बोले:”

” इतनी बड़ी हो गई हो तुम और किसी छोटे बच्चे की तरह डरती हो छिपकली से। ध्यान रखो अपना।

दोनो ने राहत की सांस ली और शादाब ने लंड घुसे घुसे ही शहनाज़ को उठा लिया और शहनाज़ शादाब के होंठो को चूसने लगी। शादाब शहनाज़ को लिए हुए पहली सीढ़ियों का गेट बंद कर दिया और फिर शहनाज़ ने कमरे के गेट को अच्छे से बंद कर दिया और सभी खिड़कियां बंद हो गई तो शादाब ने शहनाज़ को बेड पर लेकर लेट गया और शहनाज़ ने अपने दोनो हाथ उसकी गर्दन में लपेट दिए। शादाब ने लंड को बाहर की तरफ खींचा और जोर से धक्का मारकर अंदर घुसा दिया तो शहनाज़ मस्ती से उछल पड़ी और शादाब ने शहनाज़ की चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिए और सूट के उपर से उसकी चूचियां दबाने लगा तो शहनाज़ ने अपने सूट के साथ साथ आपनी ब्रा को भी उतार दिया और शादाब ने उसकी नंगी चूचियों को जोर जोर से मसलते हुए उसे चोदना शुरु किया तो शहनाज़ का जिस्म उत्तेजना के मारे उछलने लगा और उसकी गांड़ मस्ती से अपने आप उपर नीचे होने लगी

” आह्हह शादाब, उफ्फ मेरे राजा, चोद ऐसे ही मुझे, घुसा दे जड़ तक लोला, उफ्फ देख तो अपनी मा चोद रहा हैं शादाब

शादाब शहनाज़ की सिसकियां सुनकर जोश में अा गया और पूरा दम लगाकर शहनाज़ को चूत में धक्के लगाने लगा।

दोनो मा बेटे सुबह से ही तड़प रहे थे इसलिए दोनो पूरी ताकत से चुदाई में लगे हुए थे। शहनाज अब पूरी मस्ती से सिसकियां भर रही थी और शादाब को जोश दिला रही थी। शादाब के ताकतवर धक्कों के सामने शहनाज़ की चूत ज्यादा देर तक नहीं टिक गई और शहनाज़ का पूरा जिस्म बुरी तरह से कांप उठा और उसने कसकर शादाब को भींच लिया और जोर जोर से आंहे भरते हुए झड़ गई

” आह्ह् उफ्फ गई मेरी चूत, हाय शदाब चुद गई तेरी मा।

शहनाज़ की चूत पूरी तरह से चिकनी हो गई तो लंड फटाफट अंदर बाहर होने लगा। शहनाज़ की चूत अब जोर जोर से रगड़ी जा रही थी। शहनाज़ पागलों की तरह शादाब को चूम रही थी, चाट रही थी। शादाब भी शहनाज़ को पूरी ताकत से कस लिया और एक जोरदार धक्का लगाया और लंड को पूरा अंदर घुसा दिया तो शहनाज़ किसी अमर बेल की तरह कांपती हुई उससे लिपट गई और शादाब के लंड ने शहनाज की चूत को भरना शुरू कर दिया। जैसे ही लंड से पिचकारी निकलना बंद हुई तो लंड अपने आप सिकुड़ कर बाहर निकल गया।

शहनाज़ ने शादाब को एक तरफ को धक्का दिया और बाथरूम में घुस गई। शहनाज अच्छे से मल मल कर नहाई और अपनी चूत को साफ किया और एक टॉवेल अपने बदन पर लपेटकर बाहर अा गई और शादाब को डांटते हुए बोली:_

” जा जल्दी नहा कर आजा, मुझे भूख लगी हैं,

शादाब शहनाज़ की तरफ आंख मारते हुए बोला:”

” कौन सी भूख लगी हैं जिस्म की या पेट की ?

शहनाज़ के होंठो पर स्माइल अा गई और उसका हाथ पकड़ कर बाथरूम के अंदर धकेल दिया और बोली;”

“चल जल्दी नहाकर अा जा, मैं तेरा इंतज़ार कर रही हूं।

शादाब नहाकर अा गया तो उसने देखा कि शहनाज़ ने सिर्फ एक पतले से कपडे की नाइटी पहनी हुई थी और बहुत खूबसूरत लग रही थी। शहनाज ने खाना लगा दिया था इसलिए शादाब जिसने की अपने जिस्म पर सिर्फ एक चादर लपेट रखी थी वो शहनाज के सामने बैठ गया और और दोनो मा बेटे एक दूसरे को प्यार से खाना खिलाने लगे।

जल्दी ही दोनो खाना खा चुके तो शहनाज मूसल और औखली में मसाला लेकर अा गई, उसका चेहरा पूरी तरह से लाल हो चुका था और चूत सोच सोच कर गीली हो रही थी कि आज वो उसी हालत में चुदने जा रही हैं जहां से उसके रिश्ते की शुरुवात हुई थी। शहनाज़ ने कुछ मोटा सख्त मसाला औखली में डाल दिया और नीचे जमीन पर बिछे गद्दे पर बैठ गई तो शादाब ने अपनी चादर को जिस्म से उतार दिया और पूरी तरह से नंगा हो गया और शहनाज़ के सामने आकर खड़ा हो गया तो शहनाज़ की सांसे लंड को खौफनाक रूप से हिलता देख कर तेज तेज चलने लगी।

शहनाज़: अा जा मेरे राजा, मसाला तैयार हैं कूटने के लिए

इतना कहकर शहनाज ने अपनी जांघो को हल्का सा खोलकर शादाब का लन्ड सहला दिया तो शादाब शहनाज़ के पीछे बैठ गया और उसकी नाइटी को उतार कर उसे पूरी तरह से नंगा कर दिया। शहनाज़ गद्दे पर बैठी हुई थी और शादाब ने एक हाथ आगे बढ़ाते हुए अपना मुंह शहनाज़ के कंधे पर टिका दिया और लंड अपने आप शहनाज़ की कमर पर जा लगा तो शहनाज़ के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी। शहनाज़ के हाथ में मूसल था और उस हाथ को शादाब ने पकड़ लिया और जैसे ही उसने जोर से मूसल औखली में मारा तो शहनाज़ आगे को झुक गई और मूसल औखली में धम्म की आवाज करता हुआ घुस गया और शादाब का लंड जोर से शहनाज़ की कमर में लगा तो शहनाज़ का पूरा जिस्म मस्ती से भर उठा और कमरे में शहनाज़ के साथ साथ उसकी चूड़ियों की खनक भी गूंज उठी।

शादाब ने स्पीड बढ़ा दी और मूसल तेजी से औखली में अंदर बाहर होने लगा और लंड शहनाज़ की कमर में जोर जोर से लगने लगा और शहनाज़ की चूचियां बेलगाम होकर उछलने लगी और उसकी चूत से रस टपकना शुरू हो गया।

शहनाज़ ने अपनी कमर को पूरी तरह से शादाब के जिस्म से सटा दिया और थोड़ा सा आगे को झुकने गई तो लंड का सुपाड़ा चूत पर दस्तक देने लगा और अगली बार जैसे ही शादाब ने मूसल पूरा बाहर निकाल कर जोर से अन्दर घुसाया तो शहनाज़ जान बूझकर आगे को गिर पड़ी और शादाब उसकी कमर पर छाता चला गया और उसका सूखा हुआ लंड एक झटके के साथ शहनाज़ की चूत में जड़ तक घुसता चला गया।

” आह्हह शादाब, मेरी चूत फट गई, उफ्फ मार दिया तूने मुझे, हाय एसआईयूआईआई एक बार में ही पूरा घुस गया।

लंड पहली बार इस पोजिशन में घुसा था और चूत को पूरी तरह से फैला दिया था। शहनाज़ ने एक बार गर्दन झुका कर शादाब की तरफ मुस्कुरा कर देखा और तो शादाब ने लंड को बाहर निकाला और फिर से घुसा दिया तो शहनाज़ की आंखे मस्ती से बंद हो गई। शहनाज़ के हाथ में मूसल था जो हर धक्के पर औखली में घुस रहा था और शादाब जितनी जोर से चूत में लंड घुसा रहा था उतनी ही जोर से मूसल औखली में घुस रहा था। शहनाज़ की चूड़ियों की आवाज गूंज रही थी और शहनाज़ की चूत अभी पूरी तरह से गीली नहीं हुई थी जिस कारण उसे दर्द हो रहा था।

शादाब ने पूरे लंड को बाहर निकाला और पूरा एक ही धक्के में घुसा दिया तो लंड शहनाज़ की चूत की फांकों को पूरी कठोरता से रगड़ता हुआ घुस गया तो शहनाज़ दर्द और मस्ती से तड़प उठी और उसका मुंह खुल गया

” आह शादाब उफ्फ अभी औखली पूरी चिकनी नहीं हुई है मेरे राजा, दर्द होता हैं

शादाब उसकी गर्दन चाटते हुए बोला:” दादी ने आपको पहली ही कहा था कि पूरी तरह से चिकनी कर लेना ताकि अच्छे से कुटाई हो सके आह शहनाज़ मेरी जान

शहनाज़:” आह राजा गलती हो गई, उफ्फ मैं तेल ले आती हूं, रुक जा आह

शादाब ने शहनाज़ की बात पूरी होने से पहले ही धक्का लगाया तो शहनाज़ की उसकी चूत फटती हुई नजर आईं तो शहनाज़ ने अपनी सिसकी दबाने के लिए गद्दे में अपना मुंह छिपा लिया और जोर जोर से सिसकने लगी।

शादाब:” आह्ह शहनाज़ मेरी जान, उफ्फ कितनी टाइट चूत हैं तेरी, उफ्फ मजा आ रहा है

मसाला पूरी तरह से कूट चुका था इसलिए शादाब ने औखली को एक तरफ कर दिया जोर से धक्के मारते हुए बोला:”

” आह शहनाज़ ये मसाला तो पिस गया अब तेरी चूत का मसाला अच्छे से कूटता हूं।

शादाब ने अपने मुंह से थूक निकाल कर अपने लंड को पूरी तरह से गीला कर दिया और शहनाज़ की चूत पर झुक कर किस किया तो शहनाज़ का पूरा जिस्म मस्ती से लहरा गया और सिसक उठी

” आह शादाब , मेरी चूत चूस रहा है तू, कितना गन्दा हो गया है मेरा बेटा हाय अल्लाह

शादाब ने शहनाज़ की चूत को चूस कर पूरी तरह से चिकना बना दिया और लंड के सुपाड़े को चूत के मुंह पर रख कर धक्का लगाया तो लंड पुरा अंदर घुस गया और जैसे कमाल हो गया। शहनाज़ के मुंह से अब दर्द की जगह मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी

” आह शादाब, उफ्फ मेरी जान हैं तू, बहुत मजा आया, मार अपनी मां की चूत राजा, घुसा दे पूरा लोला

शादाब ने शहनाज़ के दोनो कंधे पकड़ लिए और जोर जोर से उसे चोदने लगा और हर धक्के पर लंड शहनाज़ की बच्चेदानी से टकरा रहा था जिससे शहनाज़ मस्ती से उछल रही थी

” हाय मेरे राजा उफ्फ ऐसे ही चोद, हाय मुझे कुछ हो रहा है उफ्फ शादाब का लोला, हाय तेरा लोला मेरी चूत में घुस गया!!

शहनाज़ से इतना मजा बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने अपनी गरदन उठा कर शादाब की तरफ देखा तो शादाब उसके मुंह पर झुक गया और दोनों के होंठ आपस में मिल गए और एक दूसरे का रस चूसने लगे।

तभी शादाब ने एक जोरदार धक्का लगाया तो शहनाज़ की चूत ये धक्का नहीं झेल पाई और उसकी चूत से रस छूट गया और शहनाज़ ने अपनी जीभ शादाब के मुंह में घुसा दी और उसकी जीभ चूसने लगी। शादाब बिना रुके धक्के लगाने लगा तो शहनाज़ की चूत में अब हल्का हल्का दर्द होने लगा तो उसके मुंह से दर्द भरी सिसकारियां निकलने लगीं और शादाब को और जोश अा गया क्योंकि मर्द का सपना होता है कि वो औरत को बिस्तर पर मसल कर रख दे और शादाब अब यही कर रहा था। शहनाज़ की चूत से फच फच की आवाज गूंज रही थी और उसकी सिसकियां तेज होती जा रही है। शहनाज़ की अब हालात खराब होने लगी तो वो शादाब को अपने उपर से हटाने लगीं क्योंकि उसकी चूत में जलन होने लगी थी।

” आह शादाब, हट जा मेरे राजा, उफ्फ दर्द हो रहा हैं तेरी शहनाज़ की चूत में अब !!

शादाब ने दोनो हाथो में शहनाज़ की गांड़ को पकड़ा हुआ था और उसकी गांड़ को जोर जोर से दबाते हुए धक्के पर धक्के लगा रहा था और शहनाज़ का जिस्म पूरी रफ्तार से उछल रहा था और उसके काले बाल हवा में लहरा रहे थे और शहनाज़ ने अपने आपको संभालने के लिए दोनो हाथो से बेड शीट को दबोच रखा था

शादाब अब पूरी ताकत से उसकी गांड़ मसलते हुए किसी पागल सांड की तरह धक्के लगाने लगा। हर धक्के में पूरा लंड बाहर आता और घप से अंदर घुस जाता। शहनाज़ का जिस्म पूरी तरह से हिल रहा था हर धक्के पर और उसकी दर्द भरी मादक सिसकियां पूरे कमरे में गूंज रही थी।

” आह्हह नहीं ही शादाब, मार ही डालेगा क्या मुझे, छोड़ दे मुझे नहीं कुट्वाना मसाला तुझसे,

शादाब पूरी ताकत से चोदता रहा और शहनाज़ ने दर्द के मारे अपनी टांगे बंद कर ली तो लंड पूरी तरह से फस कर अंदर बाहर होने लगा और शादाब का धैर्य जवाब दे गया और उसने एक आखिरी धक्का पूरी ताकत से लगाया और शहनाज़ की चूत में अपने लंड को किसी मूसल की तरह ठोक दिया तो शहनाज पूरी जोर से सिसक उठी क्योंकि लंड उसकी बच्चेदानी में घुस सा गया था। शादाब के लंड से वीर्य की पिचकारी निकलने लगी और शहनाज़ की जलती हुई चूत को ठंडक मिल गई। शादाब शेर की तरह दहाड़ मारता हुआ अपनी मा की पीठ पर ढेर हो गया

जैसे ही लंड से वीर्य की पिचकारी निकलनी बंद हुई थी तो लंड बेजान सा होकर चूत से बाहर निकल गया। शाहनाज अभी तक पूरी तरह पसीने से भीगी हुई थी और लंबी लंबी सांस ले रही थी। उसे सपने में भी उम्मीद नहीं थी कि ये चॉकलेटी सा दिखने वाला उसका अपना बेटा उसकी ऐसी हालत कर देगा। शहनाज़ के जिस्म को आज उसने ऐसा रगड़ दिया था कि नस नस अच्छे से मटक गई थी। उपर चढकर उसने शहनाज़ की गांड़ को आज इतनी जोर जोर से मसल दिया था कि उसकी गोरी गांड़ लाल सुर्ख टमाटर जैसी हो रही थीं। उसकी गर्दन पर कंधो पर शादाब के प्यार से काटे जाने और मसलने के निशान पड़ गए थे। शहनाज़ की चूत का आज सबसे ज्यादा बुरा हाल हुआ था और वो इस दमदार चुदाई के बाद आराम से शहनाज की टांगो के बीच में सिमटी हुई पड़ी थी। चूत की दीवारों को आज लंड ने पूरी ताकत से रगड़ा था जिस कारण शहनाज़ ने आज मस्ती का नया अनुभव किया था और चूत की सारी तड़प और आग अब ठंडी सी पड़ गई थी।

शादाब ने अपनी जीभ निकाल कर शहनाज़ की गर्दन को चुन लिया और बोला:”

” शहनाज मेरी शहनाज़

शहनाज़ धीरे से बोली मानो उसकी आवाज किसी गहरे कुवे से निकल रही हो

” हम्म शादाब मेरे राजा,

शादाब:” कैसा लगा मेरा प्यार ?

शहनाज़ ने अपनी बन्द आंखो को खोला और प्यार से शादाब की तरफ देखा और स्माइल करते हुए बोली:”

” शादाब ऐसा लग रहा था कि तू आज मेरी जान ही ले लेगा

शादाब उसकी गांड़ को अपनी जांघो से दबाते हुए:”

” मेरी जान हैं तू शहनाज, मजा आया या नहीं ?

शहनाज़ के होंठो पर स्माइल अा गई और शर्म से पलके झुक गई तो शादाब बोला:”

” अब बता भी दो मेरी जान, जो जिस्म से बोल रही हो मुंह से भी बोल दो मेरी जान

शहनाज़ की गांड़ पर जैसे ही शादाब की जांघो का दबाव पड़ा तो उसने शादाब के हाथ को पकड़ कर जोर से दबा दिया और बोली:”

” आह राजा, बहुत मजा आया आज, चुदाई में इतना मजा भी अा सकता है आज महसूस किया
लेकिन दर्द बहुत हुआ शादाब।

शादाब उसके कंधे मसलते हुए बोला :” दर्द ज्यादा था या मजा मेरी जान?

शहनाज़:” उफ्फ जब तूने चिकनी कर दी थी मेरी औखली फिर मजा आ गया, पहले तो बिल्कुल मूसल की तरह लग रहा था

शादाब:” उफ्फ अम्मी जब आप मूसल चिकना नहीं कर सकती तो फिर से दर्द होगा ही

शहनाज़ उसका मतलब समझ गई कि उसका बेटा उसे लंड चूस कर चिकना करने के लिए बोल रहा हैं तो उसकी सांसे तेज हो गई और पूरा जिस्म कांपने लगा। उसने शादाब की तरफ गुस्से से देखा और बोली:”

” उफ्फ मैं तेरी तरह कितनी गंदी नहीं हू, पता नहीं कहां से सीखता हैं ये सब ? मेरी उसको नहीं चूम रहा था और फिर मेरे होंठ चूसता हैं तू । शर्म किया कर

शादाब:” उफ्फ अम्मी मेरी जान, तुम्हारे नीचे वाले होंठ ज्यादा रसीले और टेस्टी हैं।

शहनाज़ शर्मा गई और मुंह नीचे किए हुए ही बोली:”

” उफ्फ समझाऊं तुझे राजा, वो नहीं चूसते मेरे बेटे।

शादाब:” अम्मी एक बात बताओ कैसा लगता है तब मैं वहां किस करता हूं।

शहनाज़ का रोम रोम कांप उठा और उसकी चूत के होंठ शादाब की जीभ के एहसास को सोच कर तड़प उठे और शहनाज़ बोली:”

“उफ्फ शादाब, मुझे बहुत ज्यादा गुदगुदी सी होती हैं, लगता हैं जैसे चीटियां सी चल रही हों।

शादाब:” इसका मतलब आपको अच्छा लगता हैं अम्मी?

शहनाज़ पहले तो शर्मा गई और फिर उसके होंठो पर स्माइल फैल गई जो शहनाज़ का मुंह झुका होने के बाद भी शादाब ने देख ली और उसकी कमर को अपनी छाती से रगड़ते हुए बोला:”

” आपकी हंसी बता रही हैं कि आपको बहुत अच्छा लगता हैं अम्मी जब मैं चूत पर किस करता हूं आपको।

शहनाज़ मचलते हुए अदा के साथ बोली:”

” कमीना कहीं का, अपनी मा से कैसी गंदी गंदी बाते करता है।

शादाब:” उफ्फ अब तुम मेरी जान मेरी बीवी बन गई हो शहनाज़, तुम्हे वो रेहाना और उसका बेटा याद है ?

शहनाज़:” उस कमीनी कूतिया को मैं कैसे भूल सकती हूं शादाब ?

शादाब:” अम्मी देखा था आपने वो कैसे अपने बेटे के लंड को चूस रही थी।

शहनाज़:” हान देखा था उसके बेटे का वो मरीयल सा लंड, जैसी वो ऐसा उसका बेटा

शादाब:” और जैसी मेरी मा शहनाज़ वैसा उसका बेटा शादाब। वैसे मेरा लन्ड मरियल तो लगा तुम्हे ?

शहनाज़ की आंखो में खुमारी छाने लगी और बोली:”

” उफ्फ मेरे राजा ये तो मुझे पसंद हैं, बस मोटा हैं इसलिए दर्द थोड़ा ज्यादा देता हैं।

शादाब उसकी गांड़ मसल देता है तो शहनाज़ जोर से कराह उठी और शादाब बोला:”

” मोटा हैं तभी तो इतना मजा देता हैं शहनाज़, दर्द तो झेलना पड़ेगा मजे के लिए।

शहनाज़:” उफ्फ शादाब तू मुझे ये दर्द रोज दिया करना, उफ्फ बहुत अच्छा लगता हैं जब ये अंदर घुसता हैं।

शादाब फिर से बात घुमा कर बोला:” उफ्फ अगर दर्द से बचना है तो गीला कर दिया करो इसे।

शहनाज़:” उफ्फ तू भी ना, अरे मुझसे नहीं चूसा जाएगा लंड शादाब, मुझे अच्छा नहीं लगेगा।

शादाब:” अम्मी आपको लंड अच्छा लगता है क्या ?

शहनाज़:” उफ्फ ये तो अब मेरी जान बन गया हैं राजा!

इतना कहकर शादाब अपनी गांड़ को उपर को उठाते हुए लंड पर दबाव डालती है तो शादाब मस्ती से बोला:”

” आह शहनाज़ जब इतना पसंद हैं तो एक किस तो कर दे मेरी जान बस एक किस।

शहनाज़ के होंठो पर स्माइल अा गई और बोली:”

” उफ्फ ये लड़का, मुझे बिगाड़ देगा ऐसे तो, तू समझता क्यों नहीं शादाब?

शादाब:” अम्मी बस एक किस कर दो मुझे बहुत अच्छा लगेगा,

इतना कहकर शहनाज़ लंड को शहनाज़ की जांघो में घुसा देता हैं और हल्के हल्के धक्के मारने लगता हैं तो शहनाज़ फिर से बहकने लगी और बोली:”

” उफ्फ शादाब, बस एक छोटा सा करूंगी वो भी तेरी खुशी की खातिर।

शादाब शहनाज़ की बात सुनकर खुश हो गया और मुंह उपर की तरफ उठाता है और उसके होंठो पर अपने होंठ रख देता और दोनो एक दूसरे के होठों को चूसने लगे। शादाब ने अपनी जीभ शहनाज़ के मुंह में घुसा दी और शहनाज उसकी जीभ आइस क्रीम की तरह चूसने लगी। दोनो की आंखे मस्ती से बंद हो गई थी और शादाब ने शहनाज़ की चूचियों को हाथ में भर कर जोर से दबा दिया तो किस अपने आप टूट गई और शहनाज़ जोर से सिसक उठी

” आह थोड़ा प्यार से दबा मा मेरे राजा, उफ्फ तेरी मा की चूचियां हैं शादाब। इनके दूध की ताकत इनपर ही दिखा रहा हैं।

शादाब उसकी चूची के निप्पल मसलते हुए:”

” अाहहह शहनाज़ मेरी जान मैं तो तेरी इन चुचियों का कर्ज चुका रहा हूं मेरी अम्मी!!

शादाब की ये बात सुनकर शहनाज़ पूरी तरह से मदहोश हो गई और बोली:’

” राजा थोड़ा प्यार से मसल मेरी चूची, उफ्फ दुखती है

शादाब धीरे धीरे उसकी चूचियों को सहलाता है और शहनाज़ की चूत पूरी तरह से चुदने के लिए चिकनी हो गई थी तो उसने शादाब को अपने उपर से उतरने का इशारा किया और शादाब नीचे उतर गया तो शहनाज़ उसके उपर चढ़ गई और उसके होंठ चूसने लगी। शादाब ने अपने दोनो हाथों में उसकी गांड़ को भर लिया और जोर जोर से दबाने लगा तो शहनाज़ का पूरा जिस्म कांपने लगा और वो अपनी चूचियों को शादाब के सीने पर रगड़ने लगीं तो निप्पल शादाब के सीने में अपनी अकड़ दिखाने लगे। शहनाज़ की चूत अब दबाए जाने से हल्का हल्का दर्द कर रही थी इसलिए शहनाज़ के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी और वो नीचे की तरफ झुकने लगी और जल्दी ही शादाब की जांघो में पहुंच गई। शहनाज़ की आंखे मस्ती से बंद थी इसलिए जैसे ही वो झुकी तो शादाब का एक लोहे के मूसल की तरह सख्त ही चुका लंड उसके माथे से जा टकराया तो शहनाज़ के मुंह से एक दर्द भरी आह निकल गई

” उफ्फ मा री कितना कठोर हैं शादाब ये, ऐसा लगता है जैसे लोहे का कोई टुकड़ा हो

शादाब:” आह शहनाज मेरी अम्मी तुम्हारे होंठो के लिए तड़प रहा है इसलिए इतना इतनी अकड़ दिखा रहा हैं।

शहनाज़ की नजरे शर्म के मारे नीचे ही झुकी हुई थी। उसने लंड को आंखे खोलकर ध्यान से देखा तो एक बार फिर से उसका जिस्म कांप उठा, ऐसा नहीं था कि वो लंड को पहली बार देख रही थीं लेकिन सच में अब लंड उसे सबसे ज्यादा खतरनाक लग रहा था, खून के दबाव के कारण नसे साफ चमक रही थी और लंड बेचैनी से इधर उधर लहरा रहा था। लंड का ये रूप देखकर शहनाज़ की चूत इस बार डरने की बजाय गीली होने लगी मानो अपने आपको जंग के लिए तैयार कर रही हो। शहनाज़ ने लंड को हाथ में पकड़ लिया और बोली:

“तेरे ये मूसल तो तेरे से भी बेताब नजर आ रहा हैं,अभी इसकी सारी अकड़ दूर करती हूं।

शहनाज़ ने लंड को हल्का सा दबा दिया तो शादाब के मुंह से आह निकल पड़ी और शहनाज मस्ती से उसे अपनी हाथ से सहलाने लगी और वो बोली:’

” उफ्फ शादाब ये तो बहुत गर्म हो रहा हैं, उफ्फ डर लगता हैं मुझे

शादाब ने अपने एक हाथ से शहनाज का सिर लंड पर हल्का सा झुकाया तो उसका मुंह बिल्कुल लंड के करीब चला गया और शहनाज़ की चूत से रस बुरी तरह से टपक रहा था। शहनाज़ ने आंखे खोलकर लंड को देखा तो लंड उसे बेहद खूबसूरत नजर आया क्योंकि वो पहली बार लंड को इतने करीब से देख रही थी, शादाब का पूरा बदन मस्ती से भर गया था क्योंकि शहनाज़ उसकी शहजादी, उसकी मा आज अपने नाजुक होंठो से लंड को चूमने जा रही थी। शहनाज़ ने हिम्मत करके एक बार अपने होंठ लंड के सुपाड़े पर टिका दिए और शर्म और डर के मारे अगले ही पल अपने आप इसके होंठ हट गए। शहनाज़ के होंठो का लंड पर ये पहला छोटा सा स्पर्श महसूस करके शादाब मस्ती से तड़प उठा और बोला :

” आह मेरी अम्मी उफ्फ तेरे होठ कितने गर्म है, मेरी जान हैं तू, उफ्फ अब और मत तड़पा मुझे, मार ही देगी क्या ?

शहनाज़ अपने बेटे के होंठो से सिसकी सुनकर मदहोश हो गई और लंड के सुपाड़े पर होंठ टिका दिए और चूमने लगी।

शादाब की आंखे मस्ती से बंद हो गई और उसके मुंह से एक आह निकल पड़ी

” आहउह शहनाज, उफ्फ हाय अम्मी, उफ्फ साी सिई आई री उफ्फ

शादाब का जिस्म पूरी तरह से उत्तेजना से भर गया और उसका जिस्म अपने आप झटके खाने लगा जिससे लंड का दबाव शहनाज़ के होंठो पर पड़ने लगा और अपने बेटे के मुंह से निकली मस्ती भरी सिसकियां सुनकर शहनाज़ को अच्छा लगा। लंड से निकलती हुई मादक खुशबू उसके होशो हवास उड़ाती चली गई और अपने आप ही उसका मुंह खुल गया और लंड अंदर की तरफ घुसने लगा तो शहनाज़ की जीभ अपने आप लंड पर रगड़ खाने लगी और शादाब से ये उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हुई और लंड का एक हल्का से झटका शहनाज़ के मुंह पर लगा दिया तो लंड का मोटा सुपाड़ा शहनाज़ के मुंह को पूरी चौड़ाई में खोलते हुए अंदर दाखिल हो गया और और शादाब के मुंह से जोरदार मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी

” आह शहनाज़, उफ्फ ओह मेरी मा, कितनी अच्छी हैं तू शहनाज़ मेरी शहनाज,

शहनाज़ के मुंह में हल्का सा दर्द हो रहा था लेकिन उसने लंड के सुपाड़े को चूसना शुरू कर दिया
शहनाज के जलते हुए गर्म होंठो को अपने लंड पर महसूस करके शादाब मस्ती के सातवे आसमान पर पहुंच गया और उसने हाथ आगे बढा कर शहनाज की चूत को हथेली में भर लिया और जोर से भींच दिया तो शहनाज़ की आंखे खुल गई और उसने एक आखिरी जोरदार किस लंड पर किया।

शादाब ने जोश में आकर एक उंगली शहनाज़ की चूत में घुसा दी और शहनाज़ के जिस्म तो एक झटका लगा और लंड का सुपाड़ा अपने आप मुंह से बाहर निकल गया और शादाब ने शहनाज को अपने उपर खींच लिया और एक दीवाने की तरह से उसका चेहरा चूमने लगा। शहनाज अपने बेटे के इस प्यार से गदगद हो उठी और अपनी चूत उसके लंड पर रगड़ने लगी तो शादाब ने एक पलटा खाया और शहनाज के उपर चढकर लंड को चूत पर टिका दिया तो शहनाज़ ने उसके गले में अपने दोनो हाथ लपेट दिए और मचलते हुए सिसकी:”

” आह शादाब, मार ले मेरी चूत, घुसा दे अपना लोला शहनाज़ की चूत में मेरे लाल

शादाब ने शहनाज़ की आंखो में देखते हुए एक झटका लगाया और सुपाड़ा अंदर घुस गया तो शहनाज़ दर्द और मस्ती से सिसक उठी:”

” हाय शादाब, उफ्फ पूरा घुसा, पूरा घुसा दे मेरे राजा सीईईई

शादाब ने शहनाज़ की आंखो में देखते हुए एक तगड़ा धक्का लगाया और शहनाज़ ने भी अपनी गांड़ उपर की तरफ उठाई जिससे लंड एक ही बार में उसकी चूत में जड़ तक उतरता चला गया और शहनाज़ को दर्द का एहसास हुआ और उसके मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी

” आह शादाब, उफ्फ मार दी मेरी चूत तूने, घुस गया मेरे शादाब का लोला मेरी चूत में।

शादाब ने बिना रुके धक्के लगाने शुरू कर दिए तो शहनाज़ के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी और उसने अपनी दोनो टांगे पूरी तरह से खोल कर शादाब की कमर पर लपेट दी नीचे से अपनी चूत लंड पर उछालने लगी और सिसकी:”

” उई मा, उफ्फ शादाब, तेरा लोला मेरे बेटे, हाय कैसे मेरी चूत को रगड़ रहा है, कहां था टी अब तक मेरी जान !!

शादाब ने शहनाज़ को पूरी तरह से अपने नीचे दबा दिया और और उसकी गर्दन चाटते हुए कस कर धक्के लगाने लगा तो शहनाज़ का जिस्म पूरी तरह से कांप उठा और शहनाज़ अपनी को उपर उठाकर अपनी खुशी जाहिर करने लगी। पूरे कमरे में शहनाज़ की मस्ती भरी सिसकारियां गूंज रही थी और शादाब बहुत प्यार से उसकी सूजी हुई चूत को और सूजा रहा था। हर धक्के पर शहनाज़ का बदन उपर की तरफ उठता और उसकी चूचियां शादाब के सीने में घुस जाती। शहनाज़ की चूत लंड के धक्के ज्यादा देर नहीं झेल पाई और उसकी चूत ने अपना रस छोड़ दिया और एक झटके के साथ शहनाज का पूरा जिस्म कांप उठा और वो शादाब से लिपट गई।

” आह शादाब, उफ्फ मार दी मेरी चूत, उफ्फ हाय मेरे राजा,

शहनाज मस्ती से सादाब का चेहरा चूमने लगी और उसकी कमर पर हाथ फेरने लगी। शहनाज़ की चूत उसके रस से पूरी तरह से चिकनी हो गई तो शादाब ने पूरे लंड को जोर देते हुए बाहर की और निकालने लगा तो शहनाज की झड़ती हुई चूत की दीवारें झनझना उठी और उसने उसने निकलते हुए लंड को बाहर जाने से रोकने के लिए अपनी चूत को भींच लिया लेकिन जब तक लंड पूरी तरह से बाहर निकल चुका था इसलिए शहनाज़ को हल्की सी निराशा हुई लेकिन अगले ही पल शादाब ने पूरी ताकत से एक जोरदार धक्का लगाया जो शहनाज़ की पूरी तरह से कस चुकी चूत को एक झटके में खोलते हुए अंदर घुस गया और शहनाज़ को बहुत दर्द का एहसास हुआ और वो दर्द से सिसक उठी

” आहउह मार डाला मुझे, उफ्फ ये क्या कर दिया शादाब, फट गई मेरी चूत बेटा।

शादाब को शहनाज़ की पीड़ा का एहसास हुआ और वो बहुत धीरे से लंड अंडर बाहर करते हुए उसका मुंह चूमने लगा और शहनाज की चूचियों को प्यार से सहलाने लगा तो शहनाज की आंखे मस्ती से बंद हो गई और गांड़ अपने आप लंड पर उछलने लगी। शहनाज़ की टांगे पूरी तरह से खुल गई थी और शादाब आराम से उसकी कमर को थामे धक्के लगा रहा था। हर धक्के पर शादाब लंड को जोर से दबाता जिससे शहनाज़ की चूत की फांके पूरी तरह से रगड़ी जा रही थी और शहनाज इस एहसास को पूरी तरह से महसूस करके मस्त हो रही थी।

शहनाज़ की चूचिया एक लय में उछल रही थी और शादाब ने उसे आवाज लगाई:”

” आह शहनाज़, उफ्फ मेरी तरफ देखो ना मेरी अम्मी मेरी जान

शहनाज़ बंद आंखो के साथ ही बोली:” उफ्फ शादाब, बस ऐसे ही चोदता रह, मुंह से नहीं लोले से बोल मेरे राजा।

शादाब ने शहनाज को जोर से कस लिया और पहले से तेज धक्के लगाने लगा तो शहनाज़ पूरी तरह से मस्त हो गई और उसके मुंह से मादक सिसकिया निकलने लगी

शहनाज़ पूरी तरह से एक बार फिर से गर्म हो चुकी थी और उसने अपने दोनो हाथो में बेड शीट को दबोच रखा था और शादाब अब थोड़ी ज्यादा ताकत से उसे चोद रहा था। शहनाज का खूबसूरत चेहरा उसे पूरी तरह से जोश दिला रहा था और चुदती रह हुई शहनाज़ के चेहरे पर एक असीम सुख का एहसास हो रही था और हर धक्के पर चूत के साथ साथ उसके होठ खुल और बंद हो रहे थे। शादाब ने शहनाज के होंठो को चूम लिया और शहनाज़ ने अपनी जीभ उसके मुंह में घुसा दी और उसकी जीभ पकड़ कर चूसने लगी तो शादाब का धैर्य जवाब दे गया और लंड ने अब अपना असली जौहर दिखाना शुरु कर दिया तो शाहनाज का जिस्म पूरी तरह से हिलने लगा और चूत से फच फच की मधुर आवाज गूंज रही थी। शादाब ने लंड को बाहर निकाला और पूरी ताकत से अंदर घुसा दी थी शाहनाज को उसकी चूत की धज्जियां उड़ती महसूस हो और लंड सीधे बच्चेदानी में घुस गया तो किस अपने आप टू गई और शहनाज की सिसकियां पूरे कमरे में गूंज उठी

” आह शादाब, बच्चेदानी में घुस गया लोला, उफ्फ कितना मस्त चोदता हैं, घुसा ऐसे ही जोर जोर

शादाब के लंड में भी उबाल आने लगा तो उसके धक्के बिजली की स्पीड से पड़ने लगे और शहनाज़ की बच्चेदानी हर साल पर सिकुड़ रही थी। वो उत्तेजना से कराह रही थी और अपने दोनो हाथों को शादाब की गर्दन में लपेट लिया और अपने टांगे उसकी कमर पर रख कर नीचे को दबाने लगी। शादाब एक पागल सांड की तरह अब उसकी चूत में धक्के मार रहा था।

हर धक्का पहले से तेज पड़ रहा था और शहनाज़ की चूत लंड के तगड़े धक्कों के सामने एक बार फिर से जवाब दे गई और शहनाज़ जोर से सिसकते हुए झड़ गई

” आह मेरे बेटे, मेरी चूत गई, उफ्फ क्या चोदता हैं तू, मेरी चूत तेरे लोले की दीवानी।

शादाब भी शहनाज़ की चूत की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाया और अपने जिस्म की सारी ताकत समेटकर एक आखिरी धक्का लगाया और उसके साथ ही लंड चूत में जड़ तक घुस गया। शहनाज़ इस धक्के से मस्ती से बिफर गई और बोली:”

” आह शादाब, तेरी मा की चूत भोसडी के, उफ्फ मेरी चूत।

शादाब ने शहनाज़ को पूरी ताकत से कस लिया और लंड उसकी चूत को भरने लगा। शहनाज़ की आंखे मस्ती से बंद थी और वो पूरी तरह से इस एहसास को महसूस कर रही थी।

उस रात शादाब ने शहनाज़ को दो बार और चोदा और शहनाज़ की चूत का हाल बेहाल कर दिया। शहनाज़ को महसूस हो गया था कि वो आज तक कितने बड़े सुख से वंचित थी। आखिर उसके बेटे ने उसे चुदाई का वो सुख दिया जो दुनिया के हर सुख से बढ़कर होता हैं। सुबह शहनाज़ की आंखे खुली तो लंड को अपनी चूत से सटे हुए पाया जो कि पूरी तरह से अकड़ रहा था। शहनाज़ ने थूक से अपनी चूत को गीला किया और अपने बेटे के उपर लेट गई और लंड पर चूत को घिसने लगी तो शादाब की आंखे खुल गई और वो एक झटके के साथ शहनाज़ के उपर चढ गया और लंड को चूत में घुसा दिया और एक बार फिर से शहनाज़ की चुदाई शुरू हो गई। शादाब जोर से धक्के लगाने लगा और शहनाज़ अपनी चूत उठाने लगी। आखिर कार दोनो मा बेटे एक बार फिर से झड़ गए और शहनाज़ बाथरूम में घुस गई और नहाकर चाय बनाने चली गई। शादाब भी नहा चुका था इसलिए चाय लेकर नीचे अा गया और दादा दादी को चाय दी।

अपनी मा से शादी के बाद शादाब के चेहरे पर एक अलग ही हुई दमक रही थी और रात शहनाज़ ने उसके लंड को किस किया था ये सोच कर उसके होंठो पर बार बार स्माइल अा रही थी जो दादा जी से छुपी ना रह सकी और वो शादाब से बोले:”

” क्या बात हैं शादाब, कल से मैं देख रहा हूं कि तुम अंदर ही अन्दर खुश हो रहे हो, ऐसा क्या खजाना मिल गया तुम्हे ?

शादाब एक बार तो डर ही गया और उसका पूरा वजूद अपने दादा जी की बात सुनकर हिल गया लेकिन अगले ही पल अपने आपको संभालते हुए कहा:”

” नहीं दादा जी, बस आपको देखकर अच्छा लग रहा हैं मुझे, कितने दिनों के बाद आपको देखा

दादी भी दादा जी की बातो से हान मिलाती हुई बोली:”

” बेटा शादाब हमने दुनिया देखी है, बता दे ऐसा कौन सा खजाना मिल गया हैं तुझे ?

शादाब मन में सोचने लगा कि उसकी अम्मी शहनाज सच में खजाने से भी बढ़कर हैं वो मिल गई सब कुछ मिल गया। अब वो बताए तक कैसे बताए।

दादी:” कहीं ऐसा तो नहीं शादाब की कोई लड़की पसंद अा गई है तुम्हे मेरे पोते ?

दादा:” हान शादाब अगर ऐसा हैं तो बता देना मुझे मैं उसके घर वालों से बात कर लूंगा।

शादाब तो शहनाज़ से शादी के बाद सुहागरात तक मना चुका था और दादा दादी अभी सिर्फ रिश्ते तक पहुंचे थे। सच में आजकल के लड़के बहुत एडवांस होते हैं।

शादाब:” दादा जी ऐसा कुछ भी नहीं हैं अभी, अगर कुछ हुआ तो मैं आपको नहीं तो और किसे बताऊंगा।

दादा दादी चाय पी चुके थे तो शादाब खाली कप लेकर उपर की तरफ चल पड़ा और शहनाज़ तब तक शादाब के लिए नाश्ता बना चुकी थी। शहनाज़ के बाल अभी तक गीले थे और उसके चेहरे के चारो और फैले हुए थे।

शादाब ने उसे देखा तो शहनाज़ ने एक प्यारी सी स्माइल दी और खड़ी हो गई। शादाब ने आगे बढ़कर अपने प्यासे होंठो को उसके होंठो पर रख दिया और दोनो मा बेटे किस में डूब गए।

दोनो किस कर ही रहे थे कि शादाब का मोबाइल बज उठा तो उनकी किस टूट गई। शादाब ने देखा कि उसके कॉलेज के दोस्त का कॉल था तो उसने पिक किया और बोला:”

” हान अजय भाई बोलो कैसे हो दोस्त ? आज कैसे याद किया मुझे ?

अजय:” अरे शादाब हावर्ड विश्वविद्यालय के एमबीबीएस के फार्म आए हुए हैं और आखिर तारीख हैं अगर चाहे तो भर सकते हो।

शादाब खुशी से खिल उठा और बोला:” अरे अजय भाई, बहुत अच्छी ख़बर दी तूने, वहां जाना तो मेरे लिए सबके के सच होने जैसा है। मैं अभी थोड़ी देर बाद ही निकल रहा हूं।

इतना कहकर शादाब ने फोन काट दिया और शहनाज़ की तरफ देखा जो कि उसकी आज ही जाने की बात सुनकर पूरी तरह से उदास हो गई थी।

शादाब:” शहनाज़ बुरा लगा कि मैं आज ही जाने की बात कर रहा हूं

शहनाज़ भरे हुए गले के साथ बोली:” मैं कौन होती हू नाराज होने वाली, जैसे आपका मन करे करों शादाब

शादाब समझ गया कि उसकी अम्मी बुरा मान गई हैं इसलिए उसने मोबाइल निकाला और वापिस अजय को कॉल करने लगा तो शहनाज़ ने पूछा :”

” अब कहां फोन कर रहे हो तुम ?

शादाब:” अम्मी वो अजय को कॉल करके कहना था कि वो अपना फार्म भर ले मैं नहीं अा पाऊंगा।

शहनाज:” तुम पागल तो नहीं हो गए हो? जब तुम्हारा सपना पूरा हो सकता हैं तो तुझे फार्म भरना चाहिए।

शादाब मासूमियत से उसकी तरफ देखते हुए:”

” लेकिन अम्मी आपकी उदासी मुझसे नहीं देखी जा रही हैं,

शहनाज़ उसकी मासूमियत देख कर मुस्कुरा उठी और बोली:”

” कितना भोला बन रहा हैं तू, उफ्फ कितनी मासूम सूरत हैं और पूरी रात मेरी हालत खराब कर दी तूने

शादाब का चेहरा लाल हो उठा और उसने अपना चेहरा शहनाज़ के बालो में छुपा लिया तो शहनाज़ बोली:”

” आज नहीं तो कल तुझे जाना ही होगा बेटा, इसलिए तुम आज ही चले जाओ और फार्म भरो।

शादाब:” लेकिन अम्मी आपका मन लग जाएगा क्या मेरे बिना ? मैं तो सोच कर ही डर रहा हूं कि आपके बिना कैसे रह पाऊंगा।

शहनाज़ उसके गाल को चूमते हुए बोली:” शादाब में तेरे बिना खुद नहीं रह सकती लेकिन बेटे तेरे कुछ सपने है और मैं नहीं चाहती कि मेरी वजह से आपका कोई सपना अधूरा रहे मेरे भोले सैयां शादाब ।

शादाब शहनाज़ की बात सुनकर उससे कस कर लिपट गया और दोनो ने एक दूसरे को पूरी ताकत से अपनी बांहों में कस लिया। शहनाज़ अंदर से पूरी तरह से टूट गई थी लेकिन शादाब की खुशी की वजह से वो अपने आपको खुश दिखा रही थी।

शहनाज़ उससे लिपटी हुई ही बोली:” किस टाइम निकलना हैं तुम्हे ?

शादाब:” थोड़ी देर बाद ही निकलना पड़ेगा तभी जाकर मै फार्म भर पाऊंगा।

शहनाज़:” तो एक काम करो पहले दादा दादी जी को बता दो और उसके बाद तैयार हो जाओ।

शादाब नीचे की तरफ दौड़ पड़ा और दादा दादी को सब बताया तो पहले तो खुश हुए लेकिन अगले ही पल उदास हो गए क्योंकि शादाब फिर से वापिस जा रहा था।

दादा:” बेटा खूब मन लगाकर पढ़ाई करना और टेस्ट पास करना ही होगा तुझे।

दादी:” बस शादाब बेटा थोड़ा जल्दी ही वापिस अा जाना क्योंकि अब कमजोरी अा गई हैं शरीर में, क्या पता कब खुदा का बुलावा अा जाएं

दादा:” तुम भी पता नहीं कैसी बाते करती हो, बेटा जा रहा हैं उसे हंस कर विदा करना चाहिए।

शादाब भी अपने दादा दादी का प्यार देखकर उदास हो गया और आखिर कार वो उदास मन से उपर की तरफ चल पड़ा जहां शहनाज़ उसके लिए खाना बना चुकी थी ताकि रात तक शादाब आराम से घर का खाना खा सकें

शहनाज़ पूरी तरह से उदास थी और उसकी आंखे आंसू से भीगी हुई थी। शादाब के आने का उसे प पता नहीं चला और शादाब ने उसे पीछे से अपनी बांहों में भर लिया तो शहनाज़ शादाब का चेहरा पीछे होने का फायदा उठाकर अपने आंसू साफ़ करने लगी लेकिन शादाब से ये सब ना छुपा रह सका और उसने शहनाज़ को अपनी तरफ घुमा दिया और उसकी आंखो में आंसुओ को देखकर उदास हो गया और बोला:”

” मा मैं आपका दर्द समझ सकता हूं, लेकिन क्या करू मजबूरी है! आप एक बार बोल दो मैं रुक जाता हूं।

शहनाज़ ने एक जोर की सिसकी ली और उसकी रुलाई फूट पड़ी तो वो शादाब से कस कर लिपट गई। शहनाज़ अपने बेटे की छाती से लगकर जोर जोर से सुबकने लगी तो शादाब उसकी कमर सहलाने लगा और बोला:”

” अम्मी मै आज नहीं जाऊंगा आपको छोड़कर, मैं आपको ऐसे रोता हुआ नहीं छोड़ सकता।

शहनाज़ ने अपना चेहरा उपर उठाया जो कि पूरी तरह से आंसुओ से भीग गया था और उसकी आंखे लाल हो गई थी और रह रह कर उनमें से अमृत की धारा बह रही थी। शहनाज़ का चेहरा देखकर कोई भी आदमी विश्वास कर सकता था कि इस औरत का सब कुछ लूट लिया गया है। शादाब ने शहनाज़ के चेहरे को हाथो में भर लिया और उसके आंसू साफ करने लगा तो शहनाज़ ने पूरी हिम्मत से अपनी रुलाई को तो रोक लिया लेकिन चेहरे पर उभरी हुई पीड़ा साफ नजर आ रही थी।

शहनाज़ ने बड़ी कठिनाई से अपने आपको संभाला और बोली:
” खबरदार शादाब जो रुकने की बात करी तो, मेरे आंसू तो रुक जायेंगे लेकिन अगर तेरे सपने अधूरे रह गई तो तेरी शहनाज़ जीते जी मर जाएगी।

शादाब शहनाज़ की बात सुनकर अंदर से दुखी हुआ लेकिन वो जानता था कि उसकी आंख से निकला एक भी आंसू शहनाज़ के पूरे वजूद को तबाह कर देगा इसलिए सारे दुख दर्द को अपने अंदर ही समेटने लगा।

शहनाज़ ने उसका गाल फिर से चूम लिया और अपने होंठो पर स्माइल लाते हुए बोली:”

” चल अा मेरे पास बैठ मेरी गोद में, तुझे अपने हाथो से खाना खिला कर भेजूंगी मेरे राजा।

शहनाज़ ने बेड पर दस्तरखान लगा दिया और सब खाने का सामान उस पर रख दिया और अपनी बांहे फैला दी तो शादाब भी हल्की सी दर्द भरी स्माइल करता हुआ उसकी गोद में बैठ गया और अपनी बांहे उसके गले में लपेट दी और उसके चेहरे को एक सदियों से बिछड़े हुए प्रेमी की तरह चूमने लगा।

शहनाज़ अपने बेटे का ऐसा भावपूर्ण प्यार देख कर गदगद हो उठी और बोली:”

” उफ्फ मेरे राजा शादाब, पहले खाना तो खा ले मेरी जान

शादाब ने शहनाज़ के गाल को मुंह में भर कर चूस लिया और शहनाज़ ने उसका चेहरा आगे की तरफ कर दिया। अब शहनाज़ की चूचियां शादाब की पीठ में सटी हुई थी लेकिन दोनो को इसका बिल्कुल भी एहसास नहीं था क्योंकि अब सिर्फ उनके दरमियान बस आत्मिक प्यार रह गया था और जिस्मानी प्यार से दोनो कोसो दूर थे। शहनाज़ ने एक रोटी का निवाला बनाया और शादाब के मुंह में डाल दिया तो शादाब प्यार से उसे खाने लगा और शहनाज़ अपने बेटे को खाना खाते हुए देखकर खुद को अंदर से सहज महसूस कर रही थी।

शहनाज़ ने एक और खाने का निवाला बनाया और फिर से शादाब के मुंह में दिया तो शादाब ने शहनाज़ की उंगली को हल्का सा काट दिया और शहनाज़ मुस्कुराई और बोली:”

” लगता है मेरे बेटा कुछ ज्यादा ही भूखा हैं जो मेरी उंगलियां भी खा जाना चाहता है।

शादाब ने भी हल्की सी स्माइल दी और बोला:”

” अम्मी आप खाना ही इतना टेस्टी बनाती है कि आपकी उंगलियां तक चाट जाने को मन करता हैं।

शहनाज़: अब मस्का लगाने से कुछ मिलने वाला नहीं हैं, सब कुछ तुझे दे दिया राजा।

शादाब:” उफ्फ अम्मी मैं मस्का नहीं लगा रहा हूं बल्कि सच बोल रहा हैं मेरी शहनाज़

शादाब भी शहनाज़ को खाना खिलाने लगा और जल्दी ही दोनो मा बेटे खाना खा चुके तो अब सादाब के जाने का समय हो गया तो शहनाज उससे नजरे नहीं मिला पा रही थी ताकि वो बिना रोए शादाब को विदा कर सके।

शहनाज़ बरतन उठाकर किचेन में के गई और शादाब ने अपने जूते पहन लिए और बैग उठाकर चलने के लिए तैयार हो गया। शादाब कुछ भी शहनाज़ का सामना नहीं करना चाह रहा था क्योंकि वो जानता था कि वो खुद को नहीं रोक पायेगा और उसके साथ साथ शहनाज़ भी रो देगी जो वो नहीं चाहता था।

शहनाज़ किचेन के गेट से खड़ी हुई बाहर की तरफ देख रही थीं और शादाब अपना बैग उठाए मुंह नीचा करके उदास मन लिए भीगी आंखो के साथ धीमे धीमे कदम लिए चलने लगा।

उसका दिल कर रहा था कि वो जाते जाते बस एक बार आखिरी झलक शहनाज़ की देख ले लेकिन उसका दिमाग शादाब को इसकी इजाज़त नहीं दे रहा था। शहनाज़ की आंखे पूरी तरह से भीग गई थी और अपनी जान अपने बेटे शादाब को जाते हुए देख रही थी और चाह कर भी उसे आवाज नहीं लगा पा रही थी।

चलते चलते शादाब सीढ़ियों तक पहुंच गया और जैसे ही पहली सीधी पर कदम रखा तो शहनाज़ के दिल में एक दर्द भरी टीस सी उठी और ना चाहते हुए उसके दिल में एक बार शादाब को देखने की इच्छा जाग गई और वो सुबकते हुए बोली:”

” शादाब जल्दी आना मैं तेरा इंतजार करूंगी बे…..

शहनाज़ इससे आगे नहीं बोल पाई और उसकी रुलाई फूट पड़ी तो शादाब के हाथ से बैग छूटकर नीचे गिर गया और वो पलटकर शहनाज की तरफ दौड़ पड़ा तो शहनाज़ भी अपनी बेटे की तरफ दौड़ती हुई अाई और दोनो एक दूसरे की बाहों में समा गए और उनकी आंखो से आंसुओ की धारा बह चली।

दोनो में से कोई कुछ नही बोल रहा था बस एक दूसरे को गले से लगाकर रोए जा रहे थे। आखिरकार शहनाज़ ने जी भर कर रोने लेने के बाद अपने आंसू रोक लिए और शादाब के चेहरे को चूमने लगी। शादाब अभी तक अपनी मा के गले से लगा हुआ सुबक रहा था।

शहनाज उसकी आंखो में देखते हुए बोली:” बस शादाब चुप होजा अब मेरे बेटे, तुम रोते हुए बिल्कुल भी अच्छे नहीं लगते हो।

शादाब ने जैसे तैसे करके खुद को काबू किया एयू शहनाज का गाल चूम लिया और बोला:”

” मैं जल्दी ही वापिस अा जाऊंगा अम्मी, मुझे नहीं बनना डॉक्टर, मुझे तो बस अपनी अम्मी को प्यार करना हैं।

शहनाज़ के होती पर एक फीकी सी स्माइल अा गई और बोली:”

” चुप कर तू, आते रहना बीच बीच में और मेरा भी मन नहीं लगेगा तेरे बिना शादाब। आज के बाद अगर ये डॉक्टर ना बनने वाली बात दोबारा तेरे मुंह से सुनी तो कभी तेरी सूरत नहीं देखूंगी।

शादाब ने शहनाज को वादा किया कि अब वो कभी ऐसा नहीं बोलेगा और शहनाज़ को शादाब ने अपनी बाहों में उठा लिया और नीचे की तरफ चल पड़ा तो शहनाज़ ने अपनी बांहे उसके गले में लपेट ली और दोनो किस करते हुए नीचे की तरफ चल दिए।

जैसे ही वो सीढ़ियों से नीचे उतरे तो शहनाज आपके आप शादाब की गोद से उतर गई और शादाब अपने दादा दादी की दुआएं लेकर घर से बाहर की तरफ चल पड़ा और दादा दादी भी रो पड़े ।

शादाब ने एक बार मुड़कर पीछे की तरफ देखा और सभी की आंखों में आंसू निकलते देख कर वो वो उदास होते हुए पीछे मुड गया और लगभग रोते हुए अपनी मंजिल की तरफ चल पड़ा।

शादाब आंखो में आंसू लिए घर से बाहर निकल गया और वो जानता था कि पीछे दरवाजे पर खड़ी हुई शहनाज उसकी तरफ ही देख रही होगी लेकिन पलट कर देखने की हिम्मत शादाब के अंदर नहीं थी। शहनाज़ गेट पर खड़ी हुई उसे तब तक देखती रही जब तक वो आंखो से ओझल नहीं हो गया। शहनाज़ घर के अंदर लौट अाई और आते ही दादी के गले लग कर फफक पड़ी।

दादी उसकी पीठ सहलाते हुए:

” बस कर मेरी बच्ची और कितना रोएगी, मैं तेरा दर्द समझ सकती हूं तेरा इकलौता बेटा हैं

शहनाज़ और जोर जोर से सिसक उठी क्योंकि बेटे का ग़म तो वो पिछले 15 साल से झेल नहीं थी लेकिन अब अपने शौहर शादाब के जाने का गम उसे अंदर तक तोड़ गया। अभी उसके हाथो की मेहंदी भी ठीक से नहीं उतरी थी और शादाब उससे दूर हो गया।

दादा:* बस कर शहनाज़ मेरी बेटी, जब तेरा मन करेगा मैं उसे वापिस बुला लूंगा, खुदा के लिए छुप हो जा बेटी।

दादा दादी के बार बार समझाने पर शहनाज़ ने जैसे तैसे करके खुद को संभाल लिया और बिना कुछ बोले उपर की तरफ चल पड़ीं और दादा दादी के लिए खाना बनाने लगी।

दूसरी तरफ शादाब शहर पहुंच गया और अपने दोस्त अजय से मिला तो अजय ने उसे गले लगा लिया। कॉलेज में सबसे अच्छे दोस्तो में उनका नाम आता था, अजय और शादाब दोनो ही एकदम तेज दिमाग और दोस्ती में एक दूसरे पर सब कुछ लुटा देने वाले दोस्त थे।

अजय:” साले कमीने घर जाकर मुझे तो भूल ही गया था, एक फोन तक नहीं किया।

शादाब: हान भाई एक तू ही तो हैं पूरे कॉलेेज में को मुझे रोज फोन करता था।

अजय:” बकचोदी मत कर, देख मैंने तुझे कॉल करके बताया कि होवार्ड यूनिवर्सिटी के फार्म अा हुए हैं।

अजय ने ये बात पूरे तरह से अपनी गर्दन ऊंची करके अकड़ते हुए कही तो शादाब के होंठो पर स्माइल अा गई और बोला:”

” ज्यादा मत अकड़, गर्दन तिरछी हो जाएगी तेरी, भाई तेरा एहसान हैं मुझ पर। बस अब खुश।

अजय:” भाई भी बोलता हैं और एहसान भी मानता है, ये सही बात नहीं है।

शादाब:” अच्छा ठीक हैं, अब मेरी गलती अब खुश।

अजय ने दांत निकाल कर स्माइल दी तो दोनो हंस पड़े और निकल पड़े फार्म भरने के लिए। शादाब और अजय दोनो के फार्म भर दिया और दोपहर के दो बज गए थे और बहुत जोरो की भूख लगी थी इसलिए अजय बोला:”

” यार भाई बहुत तेज भूख लगी है मुझे तो, चल कोई होटल देखते है

शादाब:” अरे होटल की कोई जरूरत नहीं अजय, मैं घर से खाना लेकर आया हूं।

अजय:” क्या चिकन बिरयानी लेकर आया है क्या ? तू अच्छी तरह से जानता है कि मैंने मांसाहारी खाना नहीं खाता।

शादाब:” अरे मेरी जान मुझे पता है, देख मैं तेरे लिए एक दम शुद्ध देसी शाकाहारी खाना लाया हूं।

अजय:” बहुत बढ़िया, फिर तो मजा आ जाएगा आंटी के हाथ का खाना खाने में, उम्मीद हैं बहुत स्वादिष्ट बना होगा।

शादाब के होंठो पर स्माइल अा गई और मन में सोचा कि अब वो तेरी आंटी नहीं बल्कि भाभी बन गई हैं। दोनो दोस्त सामने बने एक पार्क में घुस गए और अजय ने पहले ही ठंडे पानी की कुछ बॉटल खरीद ली थी। एक घने पेड़ की छाव में दोनो बैठ गए और ठंडी ठंडी हवा उनका पसीना सुखाने लगीं। शादाब ने टिफिन को खोलना शुरू किया और अजय खाने की महक सूंघते हुए बोला:”

” उफ्फ कितनी अच्छी खुशबू अा रही है शादाब, तेरी अम्मी बहुत टेस्टी खाना बनाती हैं।

शादाब ने टिफिन खोल दिया और शहनाज़ ने शादाब को दाल मखनी और कड़ाही पनीर की सब्जी बनाकर दी थी और साथ में घर का बना हुआ अचार और दही भी थी। दोनो दोस्तो ने मजे से खाना खाया और अजय जी भर कर शहनाज़ की तारीफ करता रहा। खाना खाने के बाद अजय को उसके किसी दोस्त की कॉल अा गई और वो फोन पर बात करते हुए थोड़ी दूर चला गया तो शादाब ने अपना मोबाइल निकाला और शहनाज़ को मिला दिया।

शहनाज़ बेड पर उदास पड़ी हुई थी और जैसे ही उसने शादाब का कॉल देखा तो जलते हुए रेगिस्तान की रेत को मानो एक ठंडक का एहसास हुआ और उसने फोन उठाया तो शादाब की आवाज सुनाई पड़ी।

शादाब:” अस्सलाम वालेकुम शहनाज, कैसी हो अम्मी ?

शाहनाज:” वालेकुम अस्सलाम शादाब, बस जिंदा हू तेरे बिना किसी तरह। कब आएगा तू ?

शादाब उसका दर्द समझते हुए:

” अम्मी मेरा भी मन नहीं लग रहा हैं, बस मैं शहर पहुंच गया हूं परसो से क्लास शुरू हो जाएगी।

शहनाज़:” अच्छा तेरे फार्म का क्या हुआ शादाब ?

शादाब:” अम्मी मैंने फार्म भर दिया है और सब कुछ ठीक से हो गया हैं। अम्मी दो दिन बाद रमज़ान शुरू हो रहा हैं। मैं ईद पर घर आऊंगा और अपनी पहली ईद अपनी जान शहनाज़ के साथ ही मनाऊंगा।

शहनाज़:” ईद तो अभी एक महीने बाद होगी शादाब, तब तक मेरा क्या होगा ? आंखे तरस गई है तुझे देखने के लिए

शादाब:” अम्मी आपके बिना मन तो मेरा भी नहीं लगेगा लेकिन मजबूरी हैं। हम दोनों फोन पर वीडियो कॉल किया करेंगे।

शहनाज़ को अपने बेटे की बात सुनकर कुछ सुकून मिला क्योंकि कम से कम उसे रोज उसका बेटा देखने को तो मिल जाएगा।

शहनाज़:” अच्छा शादाब ठीक है मुझे तेरे दादा दादी जी के लिए खाना बनाना होगा बेटा।

शादाब के होंठो पर शरारत भरी स्माइल अा गई और बोला:”

” अम्मी आपको पता है ना दादा जी को कूटे हुए मसाले की सब्जी पसंद हैं।

शहनाज़ के जिस्म ने एक झटका सा खाया और बोली:”

” हान मेरे राजा मुझे पता हैं, मै उनके लिए बना दूंगी क्योंकि कल रात काफी सारा मसाला कूट गया था शादाब।

शहनाज़ की आंखो के आगे वो दृश्य तैर गए जब शादाब उसके उपर चढकर उसे चोदते हुए मूसल से मसाला कूट रहा था। शादाब ने बोला:”

” ओह अम्मी, मेरी शहनाज़ रात में तूने सचमुच काफी सारा मसाला कूटवाया हैं अपने बेटे से।

दोनो मा बेटे के जिस्म में हलचल सी मचने लगी और शादाब के लंड ने सिर उठाना शुरू कर दिया तो शहनाज़ की चूत में भी थिरकन बढ़ गई। शहनाज़ लंबी लंबी सांस लेती हुई बोली:”

” शादाब लेकिन रात तो तूने मसाले के साथ साथ मेरी उसकी भी धज्जियां उड़ा दी। अब तक चलने से दर्द हो रहा हैं मुझे।

शादाब को अपने लंड पर गर्व महसूस हुआ और बोला:”

” उफ्फ शहनाज़ मेरी जान, कल तुमने ही तो मेरे लंड को चूम को लोहा बना दिया था।

शहनाज़ का चेहरा शर्म से लाल हो गया और वो धीरे से बोली:

” उफ्फ शादाब, सच में ये मेरे मूसल पर किस का कमाल था क्या ? इतना खुश हुआ क्या वो ?

शादाब'” क्या बताऊं मेरी जान, अभी फिर से खड़ा हो गया हैं, तूने तो जान ही निकाल दी थी। लंड इतना खुश हुआ कि अब सारी रात तुम्हारे किस का बदला उतरता रहा।

शहनाज़ का एक हाथ अपने आप उसकी जांघो के बीच में अा गया और अपनी चूत सहलाते हुए बोली'”

” उफ्फ हाय शादाब, ये बदला उतारा जाता है क्या ? उफ्फ दर्द कर रही है अब तक ?

शादाब के बार अजय जी की तरफ देखा जो अभी भी दूर ही खड़ा होकर बात कर रहा था इसलिए बोला:”

” उफ्फ शहनाज़ तेरी चूत हैं ही इतनी टाइट कि बड़ी मुश्किल से घुसता हैं, मैं आगे से ध्यान रखूंगा कि सब कुछ प्यार से करू।

शहनाज़ को शादाब की बात सुनकर झटका सा लगा और बोली:” क्यों तुझे अच्छा नहीं लगा था क्या तेज तेज?

शादाब:” उफ्फ मुझे तो बहुत अच्छा लगा था, लेकिन आपको दर्द हुआ था मा ।

शहनाज़ ने अपनी चूत की फांकों को मसला सा दिया और सिसकते हुए बोली:”

” आह शादाब, उस दर्द का भी अपना अलग ही मजा हैं बेटा,

शादाब समझ गया कि उसकी अम्मी को तेज तेज धक्के पसंद आए थे लेकिन अभी शर्म के मारे खुलकर नहीं बोल पा रही हैं। शादाब बोला:”

” अम्मी अगर आपको दर्द में मजा आता हैं तो आपको बेटा आपके पूरे जिस्म को मीठे मीठे दर्द से भर देगा। उफ्फ बस आपको फिर से लंड पर किस करना होगा।

शहनाज़ ने कपड़ों के उपर से ही एक उंगली चूत में हलकी सी घुसा ली और बोली:”

” आह शादाब कर दूंगी किस अपने शादाब के लोले पर, कितना अच्छा मोटा लोला हैं तेरा।

शादाब:” उफ्फ शहनाज़ चूत में उंगली पूरी घुसा दी क्या ?

शहनाज़ को एक तेज झटका सा लगा और उसने अपनी जांघो को जोर से भींच दिया और बोली:”

” उफ्फ शादाब, तुझे कैसे पता चला मेरे राजा,

शादाब:” मेरी जान शहनाज़ मैं सब जानता हूं कि मेरी शहनाज़ क्या कर रही हैं और क्यों इतनी सेक्सी बाते कर रही है ?

शहनाज़ अपनी चूत कि कलिट रगड़ते हुए:”

” उफ्फ शादाब तूने ही तो मुझे बिगाड़ दिया है मेरी जान, उफ्फ लोला याद आ रहा है मुझे, शादाब अगर तू मेरे पास होता तो उस पर बहुत सारी किस करती मैं।

शादाब:” उफ्फ इसका मतलब तुम्हारा जोर जोर से चुदने का मन हैं तभी लोला चूसने को बोल रही हो अम्मी ।

शहनाज़ से बर्दाश्त नहीं हुआ और अपनी सलवार के अन्दर हाथ घुसा कर चूत में आधी उंगली घुसा दी और सिसकते हुए बोली:”

” हान शादाब, बहुत चुदती मैं, पूरी नंगी होकर चुदती तेरे लोले से
खूब ताकत से चोदता हूं मुझे।

शादाब:” हाय शहनाज़ जब किस करने से लंड ने चूत को सूजा दिया उफ्फ अगर तुम पूरा लंड मुंह में भर कर चूस लोगी तो तुम्हारी चूत का क्या हाल होगा ?

पूरा लंड चूसने की बात सुनकर शहनाज़ की चूत में एक तूफान अा गया और उसने एक झटके के साथ अपनी पूरी उंगली चूत में घुसा ली और उसकी चूत ने अपना रस बहा दिया तो शहनाज़ मस्ती से सिसकते हुए बोली:’

” आह शादाब, तेरा पूरा लोला चूस जाऊंगी मुंह में भर कर, उफ्फ हाय मेरी चूत गई।

शहनाज़ बेड पर सिसकती हुई गिर गई और अजय ने अपना फोन काट दिया था और शादाब के पास अा रहा था इसलिए शादाब ने शहनाज़ को बाय बोला और फोन काट दिया। शादाब का लंड पूरी तरह से खड़ा होकर तन चुका था इसलिए अजय की नजरो से छुपा ना रह सका और अजय स्माइल करते हुए बोला:”

” लगता हैं तूने गर्ल फ्रेंड बना ली हैं शादाब

शादाब शर्मा गया और मुंह नीचे करके स्माइल दी और दोनो एक साथ जोर जोर से हंस पड़े। उसके बाद दोनो चल पड़े कॉलेज की तरफ।

अजय: यार शादाब दिल्ली के पास मेरे एक परिचित के यहां शादी हैं आज, कल हमारी क्लास भी नहीं हैं। अगर तू चाहे तो चले दोनो भाई ?

शादाब:” चल पड़ते हैं भाई, फिर तो पढ़ाई शुरू हो जाएगी फिर कहां मोका मिलेगा ?

अजय ने गाड़ी दिल्ली की तरफ घुमा दी जो यहां से 200 किमी दूर थी। लगभग रात के सात बजे वो शादी में पहुंचे और अजय को वहां उसके मामा और मामी मिल हुए तो अजय ने उनसे शादाब को मिलाया तो दोनो बहुत खुश हुए। अजय अपने रिश्तेदारों से बात करने लगा और शादाब अकेला पड़ने लगा।

ऐसा नहीं था कि अजय उसका ख्याल नहीं रख रहा था लेकिन फिर भी शादाब कहीं का कहीं उदास होने लगा। तभी शादाब का मोबाइल बज उठा और उसने देखा कि रेशमा का कॉल था।
रेशमा का नंबर देख कर शादाब खुश होने के बजाय परेशान सा हो गया। फोन बजता रहा लेकिन उसने पिक नहीं किया तो दूसरी बार रेशमा ने कॉल कर दिया। आखिरकार मजबुर होकर शादाब को फोन उठाना पड़ा।

शादाब:” आदाब बुआ, कैसी है आप ?

रेशमा:’ ठीक हूं मैं तो लेकिन तुमने तो मेरा फोन भी उठाना जरूरी नहीं समझा।

शादाब:” नहीं बुआ ऐसा नहीं है, मैं एक शादी में आया हुआ हूं और यहां शोर हो रहा हैं जिस कारण आवाज नहीं अा पाई।

शादाब ने साफ तौर से झूठ बोलते हुए कहा लेकिन रेशमा ने हैरानी से पूछा:”

” तुम किसकी शादी में हो ? शहनाज़ और अम्मी अब्बू कहां हैं ? मुझे तो किसी ने नहीं बताया ?

रेशमा ने एक साथ कई सारे सवाल कर दिए तो शादाब सकपका सा गया और बोला:”

” बुआ मैं आज ही हॉस्टल अा गया था, मुझे एक जरूरी काम पड़ गया था, अम्मी और दादा दादी जी घर पर हैं। शादी मेरे एक दोस्त के यहां हैं।

रेशमा ये सुनकर पूरी तरह से उदास हो गई और शिकायती लहजे में बोली:”

” ये क्या बात हुई शादाब ? बिना मुझे बताए चले गए, तुम्हे अपना वादा भी याद नहीं रहा ?

शादाब बात को संभालते हुए:” बुआ याद तो हैं लेकिन सब कुछ इतनी जल्दी में हुआ कि सोचने समझने का मौका ही नही मिला।

रेशमा कुछ देर चुप रही और फिर अपना जाल बुनते हुए बोली:”

” शादाब तुझे पता हैं हम नवाबी खानदान से जुड़े लोग हैं। हमारे यहां ने पूर्वजों ने अपनी जुबान के लिए आप जान तक लुटा दी और तुम्हारी रगो में भी वही खून दौड़ रहा हैं शादाब।

शादाब को रेशमा की ये बात सुनकर अपने आप पर गर्व महसूस हुआ और उसका चेहरा खुशी से खुल उठा। शादाब बोला:”

” बुआ मैं अपने बड़ों की इस परम्परा को बरकरार रहने दूंगा।

रेशमा समझ गई कि चिड़िया दाना चुगने के लिए तैयार हैं। बस सही मौका आने का इंतजार करना होगा लेकिन उससे क्या पता था कि किस्मत उस पर आज ही मेहरबान हो सकती हैं।

रेशमा:” बहुत अच्छा शादाब मुझे तुमसे यही उम्मीद थी। फिर कब आओगे मेरे पास ?

शादाब:” मेरी प्यारी बुआ जब आप कहो मैं तैयार हूं।

रेशमा;” शादाब इतनी बड़ी बात बोलने से पहले सोच लो कहीं बाद में निभा ना सको।

शादाब:” अपने खून पर भरोसा रखो बुआ अगर बोला हैं तो पूरा भी कर सकता हूं।

रेशमा:” ठीक हैं शादाब फिर आज ही अा जाओ। आप निभाओ अपना वादा

रेशमा नहीं जानती थी कि शादाब दिल्ली आया हुआ हैं जहां से उसके घर का रास्ता एक दो घंटे का हैं इसलिए शादाब को ये बात बोल दी थी।

शादाब:” ठीक हैं बुआ, आपकी जानकारी के लिए बता दू कि मै अभी दिल्ली मैं हू।

ये बात सुनते ही रेशमा मस्ती से झूम उठी और बोली:”

” सच शादाब, तू सच बोल रहा हैं मेरे बच्चे ? क्या तू सचूमच दिल्ली में हैं ?

शादाब : हान बुआ मैं दिल्ली मैं हू, अजय के साथ दिल्ली ही शादी में आया था।

रेशमा:” ठीक हैं शादाब तुम एक काम करो वहां से मेट्रो पकड़ कर लास्ट स्टेशन पहुंचो मैं तुम्ही वहीं मिल जाऊंगी कार लेकर।

शादाब:” ठीक हैं बुआ, आप अा जाओ मैं अजय को बोल देता हूं कि मेरी बुआ अा रही हैं।

इतना कहकर शादाब ने फोन काट दिया और अजय को बताया कि उसकी बुआ का फोन था और वो उसे लेने के लिए अा रही है तो अजय जानता था कि वो बिज़ी रहेगा इसलिए उसने शादाब को जाने के लिए बोल दिया।

शादाब को अजय मेट्रो स्टेशन छोड़ आया और शादाब चल पड़ा अपनी बुआ से किया हुआ वादा पुरा करने। हालाकि उसका मन उसे बार बार कचोट रहा था और शहनाज का चेहरा उसकी आंखो के आगे घूम रहा था लेकिन जब से बुआ ने वो खून वाली बात बोली थी शादाब जोश में भरा हुआ था।

उधर रेशमा के लिए तो जैसे उसकी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा दिन होने जा रहा था। वो फोन काटने के बाद सीधे बाथरूम में गई और और नहाई। उसके हाथ उसने एक अच्छा मस्त परफ्यूम अपनी बॉडी पर लगाया और एक हल्के रंग की बहुत खूबसूरत ड्रेस पहनी जिसमे उसके दोनो गोरे कंधे बिल्कुल नंगे थे। नकमे एक पतली सी बाली और स्टेट किए हुए बाल जो कि पूरी तरह से खुले हुए थे। रेशमा की चुचियों की खाई साफ नजर आ रही थी जो रेशमा की खूबसूरती में चार चांद लगा रही थी।

रेशमा ने अपनी कार निकाली और चल पड़ी मेट्रो स्टेशन की तरफ। जल्दी ही वो पहुंच गई और शादाब का इंतजार करने लगीं। स्टेशन से बाहर निकलते हुए हर आदमी में उसकी आंखे शादाब को ढूंढ रही थी।

आखिरकार इंतजार खत्म हुआ और शादाब जैसे ही स्टेशन से बाहर निकला तो उसे सामने रेशमा खड़ी हुई दिखाई दी। जैसे ही दोनो की नजरे टकराई तो रेशमा ने उसे स्माइल दी।

रेशमा ने शादाब को एक प्यारी सी स्माइल दी और शादाब भी अपनी बुआ को देखकर मुस्कुराए बिना नहीं रह सका।

रेशमा:” बहुत प्यारे लग रहे हो शादाब आज किसी पर बिजली गिराने का इरादा है क्या ?

शादाब:” नहीं बुआ बस आपसे ही तो मिलने अाया हूं , जो भी गिरेगा आप पर ही गिरेगा।

रेशमा अपनी आंखो को हैरानी से बड़ा करते हुए:”

” जो भी मतलब? बिजली कम हैं क्या जो तू कुछ और भी गिराना चाहता है मेरे उपर?

शादाब उसके जिस्म को उपर से नीचे तक घूर कर बोलता हैं:”

” बुआ बुरा मत मानना लेकिन आप हैं बहुत खूबसूरत, देखो ना आपकी और लंबाई बिल्कुल बराबर हैं

रेशमा:” आखिरकार है तू मेरा ही खून शादाब, चल अा जा अब अपनी बुआ के गले लग जा, कब तक ऐसे ही दूर खड़े होकर बात करता रहेगा ?

शादाब रेशमा की तरफ आगे बढ़ा और जैसे ही उसके गले लगने के लिए हाथ खोले तो शादाब का मोबाइल बज उठा। शहनाज़ का फोन था जो उसने शायद अपने बेटे को रेशमा के गले लगने से रोकने के लिए किया था। शहनाज़ का फोन देख कर शादाब जैसे होश में अा गया और उसके हाथ अपने आप बंद हो गए और चेहरे पर गंभीरता छा गई।

शादाब:” सलाम अम्मी, कैसी हैं आप ?

शहनाज़:” सलाम बेटा, भूल गया क्या अपनी मा को ? पांच घंटे से फोन नहीं किया तूने।

शादाब:” नहीं अम्मी, अपनी का को भी कोई भूलता है क्या भला ?

शहनाज़:” तो फिर फोन क्यों नहीं किया तूने ?

रेशमा गाड़ी का दरवाजा बहुत प्यार से खोल चुकी थी और उसने शादाब को कार में बैठने का इशारा किया तो शादाब कार में बैठ गया और रेशमा ने कार घर की तरफ बढ़ा दी।

शादाब:” अम्मी मैं अजय के साथ शादी में अा गया था इसलिए ध्यान नहीं रहा ?

शहनाज़ के दिल में एक टीस सी उठी और वो बोली:”

” यहां मुझे अकेली छोड़ गया और वहां शादी में तितलियां देख रहा होगा। फिर मेरी कहां याद आएगी ?

शादाब जानता था कि रेशमा के कान शादाब के मुंह से निकले हुए एक एक शब्द पर लगे हुए है इसलिए वो बहुत सोच समझ कर बोल रहा था।

शादाब:” नहीं अम्मी, आप तो दुनिया की सबसे प्यारी अम्मी हो, बस अजय अपने परिवार और दोस्तों से मिलवा रहा था।

शहनाज़:” अजय एक अच्छा लड़का हैं, बेटा तुम वहां ज्यादा किसी से मतलब मत रखना।

रेशमा की कार शहर से बाहर निकल चुकी थी और अब हाईवे पर अंधेरा था इसलिए रेशमा ने कार को साइड में लगा दिया। शादाब का सारा ध्यान शहनाज़ की बातो पर लगा हुआ था इसलिए उसे पता ही नहीं चल पाया कि रेशमा ने कब गाड़ी रोकी और उसके लंड को पेंट की चैन खोलकर बाहर निकाल लिया!

शादाब:” अम्मी आप फिक्र मत करो, आपको अपने बेटे पर यकीन होना चाहिए।

रेशमा ने अपना मुंह खोला और लंड के सुपाड़े को मुंह में भर लिया तो शादाब को एक झटका सा लगा और रेशमा बिना देर किए हुए सुपाड़े पर अपनी जीभ रगड़ते हुए उसे चूसने लगी। शादाब से ये मस्ती भरा एहसास बर्दाश्त नहीं हुआ और उसके मुंह से ना चाहते हुए भी एक आह निकल गई।

शहनाज़:” अपने बेटे पर भी यकीन हैं और उससे कहीं ज्यादा अपने शौहर पर मेरे शादाब, शादाब क्या हुआ ? तुम ठीक तो हो बेटा ?

शहनाज़ की बात सुनकर शादाब को अपने उपर गुस्सा आया कि वो ये सब गलत कर रहा हैं लेकिन तब तक रेशमा ने आधे से ज्यादा लंड को अपने मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया तो शादाब के हाथ अपने आप रेशमा के सिर को लंड पर दाबने लगे।

शहनाज़ जोर से बोलते ह हुए:”

” शादाब बोलो मेरे बेटा, क्या हुआ तुम्हे ?

शादाब एकदम से जैसे नींद से जागा और बोला:”

” कुछ नहीं अम्मी पैर मुड गया था मै बाद में करता हूं, अजय ओ अजय के बच्चे !!

शादाब ने जान बूझकर एक्टिंग करते हुए फोन काट दिया। शहनाज़ बेचारी परेशान हो रही थी कि शादाब को ज्यादा चोट तो नहीं लगी और यहां शादाब रेशमा के मुंह को पूरी ताकत से लंड पर दबा दिया। लंड एक झटके के साथ रेशमा के मुंह में घुसता चला गया और रेशमा का मुंह पूरी तरह से खुल गया। उसने अपनी नजर उठाकर शादाब की तरफ देखा और उसकी आंखो में देखते हुए लंड को चूसने लगी। लंड पूरी तरह से फस फस कर घुस रहा था जिस कारण दोनो को बहुत अच्छा लग रहा था।

रेशमा ने शादाब के लंड पर जीभ रगड़ दी तो शादाब के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगीं।

” आह मेरी बुआ रेशमा, उफ्फ कितनी अच्छी हो तुम, चूस लो शादाब का लोला,

शहनाज़ समझ गई कि उसकी मेहनत रंग ला रही हैं और शादाब अब पूरी तरह से बहक गया है इसलिए उसने जोर जोर से लंड को चूसना शुरू कर दिया तो शादाब का लंड जोर जोर से झटके खाने लगा और उसका पूरा जिस्म मस्ती से भर उठा। शादाब को लगा जैसे वो हवा में उड़ रहा हैं और उसका लंड फटने वाला हैं तो उसने पूरी ताकत से रेशमा के सिर को लंड पर दबा दिया और लंड उसके हलक में उतरता चला गया और शादाब ने शहनाज़ की चूत को मुट्ठी में भर कर जोर से दबा दिया और शादाब का मुंह मस्ती से खुलता चला गया

” आह रेशमा मेरी जान, उफ्फ चूस गई मेरी लोला, उफ्फ ये मार दिया मुझे हाय तेरी चूत रेशमा

शादाब के लंड ने वीर्य की पिचकारी उसके मुंह में मारनी शुरू कर दी और अपनी चूत दबाए जाने से रेशमा भी बेकाबू हो गई और उसकी चूत ने अपना रस शादाब को हाथो में ही छोड़ दिया।

” आह शादाब, उफ्फ सिर्फ मेरी चूत छू कर ही मेरी जान निकाल दी, उफ्फ तो तू मेरी चूत का हाल बेहाल कर देगा सुबह तक।

दोनो अपनी अपनी सांसे दुरुस्त कर रहे थे कि फिर से शादाब का मोबाइल बज उठा।

शहनाज़ का फोन था। शादाब ने पिक किया तो शहनाज़ गुस्से से बोली:”

” मैं तेरे फोन का इंतजार कर रही थी। तुझे ज्यादा चोट तो नहीं अाई शादाब ?

शादाब ने अपने लंड को रेशमा के हाथ से अलग करके अपनी पैंट में डाल दिया और बोला:”

” नहीं अम्मी, मैं ठीक हूं बस हल्की सी मोच अा गई है। आप चिंता ना करें।

शहनाज:” उफ्फ शादाब अब तू मेरा सब कुछ तू ही हैं मेरे राजा, तुझे कुछ होता हैं तो लगता हैं जैसे जान निकल जाएगी।

शादाब ने एक बार रेशमा की तरफ देखा तो रेशमा ने अपनी जीभ निकाल कर होंठो पर लगे शादाब के वीर्य को एक कामुक अंदाज के से चाट लिया और उसे स्माइल दी। शादाब ने अपना मुंह दूसरी तरफ घुमा लिया और बोला:

” अम्मी मै जानता हूं आपसे इतने दिन दूर रहा और अभी फिर से दूर अा गया हू इसलिए आपको मेरी इतनी फिक्र होती है।

रेशमा गाड़ी आगे बढ़ाने लगी तो शादाब ने इशारे से मना कर दिया और शहनाज से बोला:”

” अम्मी अजय ने डॉक्टर को बुला लिया हैं बस जरा सी ही तो बात थी। अभी करता हूं मैं आपको।

शहनाज़:” बेटा अच्छे से दिखा और उसके बाद मुझे फोन कर।

शादाब ने फोन काट दिया और रेशमा से बोला:”

” बुआ आप जाओ घर, मैं वापिस अजय के पास चला जाऊंगा।

रेशमा को जैसे यकीन ही नहीं हुआ, उफ्फ ये क्या हो गया इस लडके को। उसे अपने सारे सपने टूटते हुए नजर आए तो उसने गाड़ी आगे बढ़ा दी तो शादाब बोला:”

” बुआ गाड़ी रोक दो नहीं तो मैं कूद जाऊंगा।

रेशमा ने डर के मारे गाड़ी रोक दी तो शादाब खिड़की खोलकर बाहर निकलने लगा तो रेशमा ने उसका हाथ पकड़ लिया और बोली:”

” क्या हुआ शादाब, इतना गुस्सा क्यों मेरे राजा?

शादाब:” बुआ मुझे किसी से प्यार हो गया हैं और मैंने उसे किसी भी कीमत पर धोखा नहीं दे सकता।

रेशमा:” फिर मेरे साथ जो वादा किया था उसका क्या ?

शादाब ने रेशमा के आगे दोनो हाथ जोड़ दिए और बोला:”

” बुआ मुझे माफ़ करना मैं बहुत मजबुर हूं।

इतना कहकर वो फिर से गाड़ी से उतरने लगा तो रेशमा ने उसका हाथ फिर से दबा कर उसे बिठा और बोली:”

” शादाब इतनी रात को कहां जाएगा तू?

शादाब:” कहीं भी चला जाऊंगा, बस तुम्हारे साथ नहीं जाना हैं मुझे बुआ।

रेशमा ने एक ठंडी आह भरी और कुछ सोचने लगी और बोली:”

” देख शादाब मैं तेरी बुआ हूं, मैं वादा करती हूं कि तुझे किसी भी बात के लिए फोर्स नहीं करूंगी।
बस अब तू खुश चल अब मेरे साथ घर।

शादाब खुश होते हुए:”

” सच बुआ आप सच कह रही हैं , आप मेरे साथ कोई जबरदस्ती नहीं करेगी ?

रेशमा :” हान शादाब मुझ पर यकीन कर।

शादाब ने खुश होकर रेशमा का गाल चूम लिया और रेशमा में गाड़ी आगे बढ़ा दी। रेशमा खुश हो गई कि बकरा काबू में अा गया है। एक बार तू घर तो चल तुझे ऐसा हलाल करूंगी कि ज़िन्दगी भर मेरा नाम नहीं भूलेगा।

शादाब ने रेशमा को चुप रहने का इशारा किया और शहनाज़ को फोन मिला दिया।

शहनाज:” हान शादाब क्या बताया डॉक्टर ने बेटा ?

शादाब:” सब ठीक है अम्मी, बस पैन किलर दे दिया हैं जिसे खाकर मुझे अब नींद अा रहीं हैं।

शहनाज़:” कोई बात नही शादाब, तू आराम कर ले बेटा। पूरा दिन सफ़र में रहा तो थक गया होगा।

शादाब:” ठीक हैं अम्मी बाय गुड नाईट मेरी प्यारी अम्मी

शहनाज ने भी उसे गुड नाईट विश किया और फोन काट दिया तो रेशमा के होंठो पर स्माइल अा गई और बोली::”

” शादाब तुमने शहनाज भाभी को झूठ क्यों बोला ?

शादाब:” बुआ उन्हें अच्छा लगी लगेगा कि मैं पढ़ाई के बहाने रात को घूम रहा हूं।

रेशमा चुप हो गई और जल्दी ही कर घर पहुंच गई तो दोनो घर के अंदर घुस गए।रेशमा के जिस्म में मस्ती छाने लगी क्योंकि उसे अपने आप पर पूरा यकीन था कि आज वो शादाब का मोटा तगड़ा लंड अपनी चूत में ले लेगी।
गेट बंद करते हुए उसके हाथ कांप रहे थे तो शादाब ने खुद गेट बंद किया और रेशमा इसी बीच अपनी ड्रेस को थोड़ा ऊपर सरका चुकी थी जिससे उसकी जांघों का आकार साफ दिख रहा था।
शादाब जैसे ही गेट बंद करके पलटा तो रेशमा ने अपनी गांड़ को पूरा मटका कर चलना शुरू कर दिया तो शादाब बिना पलके झपकाए उसकी गांड़ को देखने लग तो रेशमा ने पलट कर उसे स्माइल दी तो शादाब भी मुस्कुरा उठा।

शादाब खाना खा चुका था इसलिए उसे भूख नहीं थी। रेशमा उसके लिए दूध गर्म करने के लिए किचेन में चली गई तभी उसे याद आया कि उसका पति सेक्स पॉवर बढ़ाने वाली दवा खाया करता था जिससे उसका लंड पूरी तरह से सख्त हो जाता था और उससे सेक्स के बिना नहीं रहा जाता था। रेशमा स्टोर में गई और जोश में आकर एक टैबलेट निकाल लाई और दूध में मिला दी और दूध को अच्छे से हिलाकर शादाब की तरफ चल पड़ी। उसकी चूत अपने आप गीली हो रही थी, उसने शादाब के पास जाकर दूध का ग्लास उसकी तरफ झुकते हुए बढ़ा दिय तो उसकी चूचियां आधे से ज्यादा बाहर झाकने लगी और बोली:”

“लो शादाब दूध पियो बेटा ?

शादाब ने उसकी चूचियों को घूरते ग्लास थाम लिया और दूध पीने लगा। जैसे जैसे दूध का ग्लास खाली होता जा रहा था रेशमा की आंखे लाल होती जा रही थी और चूची अकड़ रही थी।

शादाब ने दूध का खाली ग्लास रख दिया तो रेशमा ने उसे उठाया और अपनी गांड़ को मटकाते हुए चल दी और बोली:”

” शादाब मुझे तो बहुत गर्मी लग रही हैं नहाकर आती हूं ।

शादाब:” ठीक हैं बुआ, जल्दी आना नहीं तो मुझे नींद अा जायेगी फिर मत बोलना कि मैंने आपसे बात भी नहीं करी।

रेशमा अलमारी से अपने लिए एक एक सफेद रंग की बहुत पतले से कपडे की ड्रेस निकाली और शादाब से बोली:”

” बस मै अभी गई और अाई शादाब, तुम जब तक टीवी देखो

इतना कहकर रेशमा ने टीवी का चैनल बदल दिया और अब चैनल पर रोमांटिक गाने अा रहे थे। रेशमा अपनी गांड़ हिलाती हुई चली गई और शादाब गाने देखने लगा। टीवी में टिप टिप बरसा पानी वाला हॉट गाना चल रहा था। दूध में मिलाई गई गोली शादाब पर अब अपना असर दिखाने लगी और उसके लंड ने ना चाहते हुए भी अपना सिर उठाना शुरू कर दिया। शादाब को तो जैसे अपने लंड पर यकीन ही हो रहा था क्योंकि आज पहली बार वो उसकी मर्जी के बिना अकड़ता जा रहा था।

दूसरी तरफ रेशमा ने बाथरूम में घुस कर नहाना शुरु कर दिया और तेज मर्दों वाला परफ्यूम अपने पूरे बदन पर लगा लिया और उसने सफेद रंग की वो पतली सी ड्रेस बिना ब्रा के पहन ली तो उसकी चूचियां उसमे साफ नजर आने लगी। रेशमा के होंठो पर मुस्कान अा गई और उसने एक डिब्बा पानी का भरकर अपने उपर डाल लिया तो ड्रेस पूरी तरह से उसके जिस्म से चिपक गई। अब उसकी चूचियां लगभग पूरी ही नंगी नजर अा रही थी। बीच में हल्के से कपड़े का होना या ना होना एक जैसा हो गया था। चूचियों के भूरे रंग के निप्पल खड़े हो चुके थे और रेशमा बाहर की तरफ चल पड़ी। उसके कदम कांप रहे थे और सांसे भारी हो गई थी।

दूसरी तरफ शादाब का लंड तो जैसे आज बगावत पर जी उतर अाया था। जितना वो उसे दबाने की कोशिश कर रहा था वो उतना ही ज्यादा उछल रहा था। शादाब के जिस्म में उत्तेजना छाने लगी । कहते हैं जब लंड खड़ा होता हैं तो इंसान के सोचने समझने की शक्ति खत्म हो जाती है और शादाब का हाल भी कुछ ऐसा ही हो गया था । उसने अपने लंड को सहलाना शुरु कर दिया लेकिन उसे सिर्फ चूत ही ठंडा कर सकती है। चूत सिर्फ रेशमा के पास थी जो कब से शादाब के इस लंड के लिए तड़प रही थी।

रेशमा ने धीरे से कमरे में झांक कर देखा तो शादाब को लंड सहलाते देखकर उसका रोम रोम मस्ती में सुलग उठा। उसने जान बूझकर जोर जोर से कदम रखे ताकि शादाब उसके आने की आहट सुन सकें। शादाब ने जैसे ही रेशमा के क़दमों की आहट सुनी तो लंड को एक बार जोर से दबाया और हाथ हटा लिया।

रेशमा कमरे के अंदर घुस गई तो शादाब की आंखे उसे देखकर फटी की फटी रह गईं।

रेशमा के खुले हुए बाल जिनसे पानी की बूंदे टपक रही थी और उसकी चूचियां मानो नंगी ही लहरा रही थी। शादाब का लंड काबू से बाहर हो गया और उसने अपने लंड पर हाथ टिका दिया और बहुत प्यार से सहलाने लगा जिससे रेशमा को पता ना चले लेकिन रेशमा तो इस खेल की मांझी हुए खिलाड़ी थी इसलिए सब समझ गई और बोली:”

” क्या हुआ शादाब ? कहां खो गए बेटा ?

शादाब उसकी चूचियों को घूरता हुआ बोला:” कहीं नहीं बुआ, बस देख रहा हूं कि आप कितनी खूबसूरत हैं

शादाब ने अब रेशमा की तारीफ करना शुरू कर दिया तो रेशमा समझ गई कि दवा अपना असर ठीक तरह से दिखा रही है। रेशमा ने अपने बालो को एक झटका दिया तो उसकी चूचियां जोर से उछली और एक चूची बाहर निकल गई तो शादाब के मुंह से आह निकल गई। रेशमा शादाब की आंखो में देखते हुए अपनी चूची को अंदर करने लगी और बोली :”

” उफ्फ कितनी अकड़ती हैं मेरी चूचियां भी ? काश तेरे फूफा होते तो इनकी सारी अकड़न दूर कर देते।

रेशमा आगे की तरफ बढ़ी और जान बूझकर फर्श पर गिर गई और जोर से चिल्ला उठी मानो सारी दुनिया का दर्द उसे ही हुआ हो। शादाब अपनी बुआ के मुंह से दर्द भरी आह निकल दौड़ता हुआ आया और उसे उठाते हुए कहा:”

” उफ्फ ज्यादा चोट तो नहीं लगी आपको ? आप ठीक तो हैं बुआ ?

रेशमा खड़ी होने की एक्टिंग करते हुए फिर से गिर पड़ी और बोली:”

” उफ्फ शादाब, मेरे पिछवाड़े पर चोट लग गई है, उफ्फ कमर भी दर्द कर रही हैं, मुझसे चला नहीं जाएगा, एक काम कर मुझे बिस्तर पर छोड़ दें।

शादाब ने खुशी खुशी रेशमा के भारी भरकम शरीर को उठा लिया तो रेशमा ने अपनी बांहे उसके गले में लपेट दी और उससे कसकर लिपट गई जिससे रेशमा की चूचियां उसके सीने में घुस गई।

शादाब रेशमा को लेकर बेड की तरफ चल पड़ा

रेशमा वजन में शहनाज के मुकाबले काफी भारी थी इसलिए शादाब को ज्यादा ताकत लगानी पड़ रही थी लेकिन फिर भी वो उसे उठा कर बेड के पास पहुंच गया और उसने रेशमा को बेड पर लिटा दिया तो रेशमा बेड पर लेटते ही जान बूझकर दर्द से कराह उठी।

” आह शादाब, मुझे लग गई है उई मा दर्द हो रहा हैं।

शादाब को रेशमा की फिक्र हुई इसलिए वो उसके पास बैठ गया और बोला :”

” ज्यादा दर्द हो रहा है क्या बुआ ? कहां दर्द हो रहा है

रेशमा एक हाथ अपने कंधो से नीचे लाई और अपनी चुचियों को थोड़ा जोर से दबाते हुए अपनी जांघो तक ले अाई और बोली:”

” आह शादाब, यहां दर्द हो रहा हैं मुझे बहुत, उफ्फ कमर में भी दर्द हो रहा है शायद लचक गई हैं।

इतना कहकर रेशमा पलट गई और शादाब को उसकी लगभग नंगी कमर साफ नजर आ रही थी। शादाब आंखे फाड़ कर देखने लगा क्योंकि रेशमा का मुंह दूसरी तरफ था। रेशमा जानती थी कि शादाब उसे घूर रहा होगा इसलिए वो अपना हाथ कमर से नीचे लाते हुए अपनी गांड़ पर टिका कर हलका सा मसल दी और बोली:”

” आह शादाब, यहां बहुत दर्द हैं बेटा, मेरी गांड़ सबसे ज्यादा जोर से नीचे टकराई थीं

रेशमा ने जान बूझकर गांड़ बोल दिया और शादाब की तरफ देख कर उसे स्माइल दी तो शादाब बोला:”

” बुआ मैं आपके लिए पैन किलर ले आता हूं , आपको आराम मिल जाएगा।

रेशमा:” आह शादाब, पैन किलर तो बहुत लेट आराम करेगी, तुम एक काम करो स्टोर से ट्यूब ले आओ और मेरी मालिश कर दो।

शादाब अपनी बुआ को दर्द में तड़पता बुआ देख कर जल्दी से स्टोर में गया और ट्यूब निकाल कर वापिस आने लगा तभी उसकी नजर दवा के एक खाली स्ट्रिप पर पड़ी तो उसे अजीब सा लगा। शादाब ने स्ट्रिप को उठा लिया और देखा कि रेशमा ने उसे 100 एमजी साइडनाफिल सित्रेट खिला दी थी। शादाब डॉक्टर लाइन से जुड़ा हुआ था इसलिए उसने मोबाइल निकाला और साइडनाफिल सित्रेट लिखा तो उसे समझ अा गया कि रेशमा ने उसे सेक्स पॉवर की दवा खिला दी हैं जिस कारण उसका लंड फटने को तैयार हो रहा है। उसे रेशमा पर बहुत गुस्सा अाया और ट्यूब लेकर कमरे में चल दिया। रेशमा भी जब शादाब नहीं आया तो गेट पर खड़ी हुई सब देख रही थी और वो समझ गई कि शादाब उसकी चाल समझ गया है।

रेशमा ने नया प्लान किया और शादाब के आते ही बोली:”

” शादाब लाओ मुझे ट्यूब दे दो, मैं मालिश कर लेती हूं।

शादाब को लगा था कि रेशमा उसे मालिश के लिए कहेगी लेकिन रेशमा ने प्लान बदल दिया और शादाब ने ट्यूब उसके हाथ में दे दी और बोला :”

” बुआ आप आराम से मालिश करो मैं चलता हूं दूसरे कमरे में सोने के लिए।

रेशमा :” शादाब चले जाना, पहले बात तो कर ले अपनी बुआ से, वैसे भी मैं ज्यादातर अकेली ही रहती हूं।

शादाब जनता था कि अगर वो रुक गया तो बहक सकता हैं क्योंकि लंड उसके काबू से बाहर होता जा रहा था। इसलिए जैसे ही उसने जाने के लिए कदम उठाए तो रेशमा ने लगभग रोनी सी सूरत बना ली और बोली:”

” शादाब मैं जानती हूं कि तुम मुझे एक खराब चरित्र की औरत मान रहे हो लेकिन बेटा ये बिल्कुल ग़लत है। मैं तुझे कुछ बताउंगी आजा बैठ मेरे पास।

शादाब और रेशमा दोनो की नसो में एक ही खून दौड़ रहा था और आखिरकार शादाब अपने खून की पुकार सुनने के लिए मजबूर हो गया और रेशमा के पास बेड पर बैठ गया।

शादाब की नजरे झुकी हुई थी और चाह कर भी वो रेशमा के लगभग पूरे नंगे जिस्म को नहीं देख रहा था। रेशमा ने धीरे से अपनी ड्रेस उतार दी और पूरी नंगी हो गई और सिर्फ एक पतली सी चादर अपने जिस्म पर डाल ली। शादाब की नजरे झुकी हुई थी और उसकी आंखो में सिर्फ शहनाज़ की सूरत घूम रही थी जिस कारण वो चाह कर भी नजरे नहीं उठा पा रहा था।

रेशमा ने हाथ में ट्यूब से क्रीम निकाली और अपनी जांघो पर मालिश करने लगी और बोली:”

” शादाब बेटा पहली मेरी तरफ तो देख मैं तेरी बुआ हूं कोई दुश्मन नहीं बेटा।

आखिरकार शादाब ने नजरे उठाई तो रेशमा का पूरा जिस्म चादर से ढका हुआ था और शादाब ने राहत की सांस ली और बोला:”

” बताओ बुआ, अब मैं आपको हर बात सुनुंगा।

रेशमा ने अपनी जांघो की मालिश करते हुए कहा:”

” शादाब ये सच हैं कि तुम बहुत प्यारे हो और कोई भी लड़की तुम्हारी दीवानी हो सकती हैं और मैं भी तुम्हें पसंद करती हूं। उपर से जब से मैंने उस दिन तेरा लंड देखा तो मैं हैरान हो गई कि इतना बड़ा लंड भी होता हैं। बस इसलिए मैं बहक गई थी और तुझे पाने के लिए मैंने सब कुछ भी करने का फैसला किया था।

रेशमा ने देखा कि शादाब ध्यान से उसकी बात सुन रहा था इसलिए रेशमा आगे बोली:”

” जब तुमने मुझे दादा दादी जी खिदमत करने के लिए कहा तो मैं झट से मान गई क्योंकि मेरे मन में तेरे लिए लालच था शादाब। मैंने अपने मा बाप की कभी कद्र नहीं करी इसलिए मुझसे ज्यादा शहनाज़ को अपनी बेटी मानते हैं। जब तुम्हारे लंड के लालच में मैं उन्हें घर ले अाई और उनकी सेवा करने लगी तब मुझे एहसास हुआ कि मैं कितनी गलत थी और तुमने मुझे सही रास्ते पर ला दिया हैं शादाब।

इतना कहकर रेशमा रोने लगी और उसका पुरा चेहरा आंसू से भीग गया तो शादाब को उस पर बड़ा प्यार आया और उसका चेहरा साफ करने लगा। रेशमा ने फिर से बोलना शुरू किया:”

” शादाब मैंने सब कुछ तुझे पाने के लिए किया था लेकिन सच में मेरे मन में अब कोई लालच नहीं था लेकिन जरा सोच मेरे पति को दुबई गए हुए 5 साल हो गए हैं। मैं भी एक औरत हूं और मेरी भी जरुरते हैं, मेरा भी मन प्यार के लिए तड़पता हैं लेकिन मैंने कभी अपनी मर्यादा नहीं लांघी। नहीं तो मेरे एक इशारे पर मर्दों की लाइन लग जाती।

शादाब को अपनी बुआ पर गर्व महसूस हुआ और बोला:”

” बुआ मुझे आप पर पूरा यकीन हैं आप कोई ग़लत कदम नहीं उठा सकती।

रेशमा:” लेकिन शादाब जब भी मैं तुझे देखती हू तो अपने होश खो देती हूं, खुद को रोकने की बहुत कोशिश करती हूं लेकिन रोक नहीं पाती, और आज पाने के लिए ही आज मैने तुझे गर्म दवा भी खिला दी है। तू ही पता मैं क्या करूं

इतना कहकर रेशमा जोर जोर से रोने लगी तो शादाब ने आगे झुककर उसे गले लगा लिया तो रेशमा ने शादाब का हाथ अपने हाथ में भर लिया।

शादाब:” बुआ मैं आपकी मजबूरी समझ रहा हूं लेकिन मैं भी किसी से प्यार करता हूं इसलिए मजबुर हूं, आप मुझे समझो।

रेशमा को लगा जैसे उसका दिल ही टूट गया है इसलिए बोली:”

” शादाब अगर चाहे तो दूसरे कमरे में जाकर सो जा लेकिन मेरी कमर तक मेरा हाथ नहीं जा रहा है क्या तू मेरी मालिश कर देगा बेटा ?

शादाब को इसमें कोई बुराई नजर नहीं आई और वैसे भी वो अपनी बुआ से भावनात्मक रूप से जुड़ गया था इसलिए स्माइल करते हुए मान गया।

रेशमा ने ट्यूब शादाब की तरफ बढ़ा दी और शादाब ने हाथ में क्रीम लेकर चादर के अंदर हाथ घुसा दिया और जैसे ही रेशमा की कमर पर रखा तो उसके पूरे बदन में बिजली का करंट सा दौड़ गया क्योंकि रेशमा की कमर बिल्कुल नंगी थी। शादाब ने धीरे धीरे उसकी कमर पर हाथ फेरना शुरू किया और रेशमा की आंखे मस्ती से बंद हो गई।

रेशमा मस्ती से बोली:”

” शादाब बेटा थोड़ा सा टाइट हाथ से कर दे, आज सालो बाद किसी मर्द का हाथ लगा हैं।

शादाब अपने आपको मर्द कहे जाने से खुश हो गया और लंड झटके लगाने लगा। शादाब ने फिर से क्रीम निकाल ली और रेशमा की कमर रगड़ने लगा तो रेशमा का मुंह मस्ती से खुल गया और बोली:”

” आह शादाब, तेरे हाथ में जादू हैं बेटा, उफ्फ थोड़ा नीचे तक कर दे,

शादाब ने जैसे ही उसकी कमर पर नीचे के उपर की तरफ हाथ बढ़ाया तो रेशमा थोड़ा थोड़ा आगे खिसकने लगी और अब कमर के साथ साथ उसकी गांड़ भी शादाब के हाथ में अा गई तो रेशमा दर्द से तड़प उठी और बोली:”

” उफ्फ शादाब बेटा, सबसे ज्यादा दर्द तो यहीं हैं, कर बेटा खूब दबा दबा कर, उफ्फ शादाब तूने मालिश कहां सीखी?

शादाब अपनी तारीफ सुनकर बहक रहा था और रेशमा जानती थी कि अगर ये मोका हाथ से निकल गया तो शादाब उसे कभी नहीं मिल पाएगा। शादाब अब जोर जोर से रेशमा की गांड़ दबा रहा था जिससे उसका लंड उसकी बर्दाश्त से बाहर हो गया और उसने एक हाथ से अपने लंड को बाहर निकाल लिया और सहलाने लगा जिससे शादाब की आंखे मस्ती से बंद हो गई और रेशमा ने अपने जिस्म से चादर अलग कर दी।

अब रेशमा पूरी तरह से नंगी थी और पेट के बल लेटी हुई थी। रेशमा ने गर्दन झुका कर देख लिया कि शादाब अपना लंड सहला रहा है तो रेशमा बोली:’.

” शादाब मालिश करने में मजा आ रहा हैं क्या ?

इतना कहकर उसने अपनी गांड़ उपर को उठा दी जिससे शादाब ने उसकी पूरी गांड़ पकड़ ली और जोर जोर से भीचने लगा। रेशमा के मुंह से मादक सिसकियां निकलने लगी और उसने अपनी गांड़ को हल्का सा उपर उठाते हुए टांगो को पूरी तरह से खोल दिया जिससे अब शादाब का हाथ उसकी गान्ड पर ही जम गया और जैसे ही रेशमा हल्का सा हिलती तो शादाब की उंगलियां चूत से टकरा जाती जिससे शादाब भी पूरी तरह से बहक गया और उसकी चूत को जोर से मसल देता। अगली बार जैसे ही शादाब ने रेशमा की चूत की फांकों को मसला तो रेशमा मस्ती से सिसक उठी और उसकी उठी हुई गांड़ नीचे गिर गई। शादाब का हाथ अपने आप लंड पर से हट गया और उसने रेशमा की गांड़ के दोनो पटो को हाथ में भर लिया और उन्हें जोर जोर से अलग अलग दिशा में फैलाने लगा तो रेशमा की चूत के साथ साथ गांड़ का भी छेद साफ दिखाई देने लगा।

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