माँ का आशिक अध्याय 3

इतना बोलकर शहनाज अपने ससुर को पानी देने के थोड़ा सा आगे हुई जिससे उसके पैर टेबल के नीचे से ही शादाब के पैरो से जा टकराए तो शादाब ने एक बार अपनी अम्मी की तरफ देखा तो शहनाज़ का चेहरा शर्म से लाल होकर झुक गया।

शादाब अपनी अम्मी के पैरो को अपने पैरो से सहलाते हुए बोला:”

” अम्मी मूसल की आप फिक्र ना करे उसकी जिम्मेदारी मेरी हैं आप बस औखली तैयार रखें !

इतना कहकर उसने जोर से अपनी अम्मी का पैर दबा दिया जिससे शहनाज़ के मुंह से हल्की सी मस्ती भरी आह निकलते निकलते बची। कमीना पैर भी इतनी जोर से दबा रहा है मानो मसाला कैसे कुटेगा ये दिखा रहा हो। शहनाज़ ने अपने बेटे के पैर में हल्का सा नाखून चुभा दिया तो शादाब ने अपनी अम्मी की तरफ शिकायत भरी नजरो से देखा तो शहनाज़ पहली बार उसकी आंखो में देखते हुए बोली:”

” तेरे दादा जी को खूब तगड़ा कुटा हुआ बारीक मसाला पसंद हैं क्या तू कूट पाएगा इतना बारीक ?

अपने सास ससुर के सामने ऐसी बाते करते हुए शहनाज की हालत खराब हो चुकी थी। लेकिन वो पीछे हटने के लिए तैयार नहीं थी चाहे कुछ भी हो जाए।

” अम्मी मैं मसाले को ऐसा तगड़ा करके कूट दूंगा कि उसकी सारी धज्जियां उड़ा दूंगा, दादा जी खुश हो जाएंगे ऐसे बारीक मसाले की सब्जी खाकर। क्यों दादा जी?

इतना कहकर शादाब ने थोड़ा जोर से अपनी अम्मी का पैर दबा दिया तो उसकी चूत टप टप करने लगी। वो अपने नीचे वाले होंठ को दांतो से काट रही थीं

ससुर:” हान बेटी, मुझे अपने पोते पर पूरा यकीन हैं, ये मूसल से बहुत तगड़ा मसाला कूटेगा, बस तुम औखली को अच्छे से साफ करके तैयार कर लेना कहीं धूल ना जम गई हो !!

शहनाज बुरी तरह से तड़प उठी अपने ससुर की बात सुनकर, उफ्फ ये कहीं मुझे मेरी चूत साफ करने की सलाह तो नहीं दे रहे हैं।

दादा की बात सुनकर दादी भी मैदान में कूद पड़ी और बोली:”

” जाओ जी आप तो अपने पोते का ही पक्ष लोगे, बेटी तुम खूब टाइट टाइट मसाला डालना अपनी औखली में फिर देखती हू कैसे कूट पाएगा ये !!

उफ्फ शहनाज़ की तो जिससे बोलती बंद हो गई। ये दोनो मिलकर मुझे मेरे बेटे से चुदवाना तो नहीं चाह रहे है सोचते ही शहनाज का पूरा जिस्म मस्ती से कांपने लगा।

दादा दादी दोनो खाना खा चुके थे इसलिए वो चुपचाप बर्तन समेटकर उपर की तरफ चल पड़ी तो शादाब अपने दादा दादी के पास ही बैठ गया।

शहनाज खाना बनाते हुए पसीने से भीग गई थी इसलिए नहाने के लिए बाथरूम में घुस गई। उसने धीरे धीरे अपने सारे कपड़े उतार दिए और हमेशा की तरह आंखे बंद करके नहाने लगी क्योंकि उसमे अभी भी खुद को नंगा देखने की हिम्मत नहीं आई थी। इसलिए वो आराम आंखे बंद करके नहा रही थी, जैसे ही उसका हाथ उसकी चूचियों से टकराया तो उसकी उंगलियां उस जगह पर रुक गई जहां उसके बेटे के मस्ती से अपने दांत गड़ाए थे। शहनाज रोमांच से भर उठी और उस जगह को हल्के हल्के सहलाने लगी। उसका दूसरा हाथ अपनी चूत पर चला गया तो उसे अपनी सास की बात याद आ गई कि बेटी अपनी औखली को अच्छे से साफ कर लेना, ये सोचते ही उसकी सांसे रुक सी गई और उसने अच्छे से अपनी चूत पर हाथ फेरकर देखा तो उस पर कल साफ होने के कारण एक भी बाल नहीं था, मगर फिर भी उसने वीट क्रीम उठाई और फिर से अपनी चूत के आस पास लगा दिया ताकि बिल्कुल चिकनी कर सके। थोड़ी देर के बाद उसने अपने शरीर का पानी से साफ कर दिया तो उसकी चूत चांद की तरह चमक उठी। शहनाज़ ने कांपते हुए हाथो से अपनी चूत पर हाथ फिराया और एक दम चिकनी पाकर खुशी के मारे उसके मुंह से हल्की सी आह निकल गई और अपने बदन को टॉवल से साफ करने लगी।

नीचे शादाब अपने दादा दादी के पास बैठा हुआ था और उनसे बात करने लगा।

शादाब:” और बताए दादा जी कुछ, क्या आपका मन लग जाता हैं घर में लेटे हुए पूरे दिन?

दादा के मुंह पर एक दर्द भरी टीस साफ दिखाई दी और उन्होंने भावुकता के साथ बोलना शुरू किया :” हान बेटा, थोड़ी दिक्कत तो होती हैं लेकिन क्या करे अब जिस्म में ताकत नहीं रही पहले जैसी इसलिए जब कभी ज्यादा दिल करता है तो लाठी के सहारे थोड़ा घूम आता हूं!!

शादाब को अपने दादा जी की पीड़ा का अनुभव हुआ और वो उनका हाथ प्यार से सहलाने लगा जिससे दादा दादी दोनो भावुक हो गए और उन्हें लगा कि उनका अपना बेटा वापिस लौट आया हैं।

दादी:” बेटा बस तेरे आने से थोड़ी हिम्मत बढ़ गई है इसलिए अब अच्छा लगता है कुछ। बस हमारी खुशियों की किसी की नजर ना लगे।

दादा जी:” हान बेटा, हमने बेटा बहुत बुरे दिन देखे हैं सबने जिसका तुझे अंदाजा भी नहीं हैं, खासतौर से तेरी अम्मी शहनाज़ ने तो अब तक ज़िन्दगी में बस दुख ही उठाए हैं।

दादी दादा जी की बात सुनकर सिसक उठीं और उसकी आंखो से आंसू की एक बंद छलक आई जिसे शादाब ने आगे बढ़कर साफ किया और बोला:”

” क्या हुआ दादी आपकी आंखो में आंसू ?

दादी:” बस बेटा तेरी मां के बारे में सोच कर आंसू निकल पड़े। बेचारी जैसे दुख उठाने के लिए ही पैदा हुई है। छोटी सी थी तो मा गुजर गई और बाप ने दूसरी शादी कर ली और सौतेली मा ने बेचारी को एक पल के लिए भी चैन नहीं लेने दिया, ज़ुल्म पर ज़ुल्म करती रही और उसका पढ़ना भी बंद हो गया!!

दादी उम्र ज्यादा होने के कारण इतना बोलकर सांस लेने के लिए रुकी तो उसने देखा कि शादाब उसकी बाते ध्यान से सुन रहा हैं।

दादी उम्र ज्यादा होने के कारण इतना बोलकर सांस लेने के लिए रुकी तो उसने देखा कि शादाब उसकी बाते ध्यान से सुन रहा हैं।

शादाब के दिल में अपनी अम्मी के लिए प्यार उमड़ पड़ा और भावुक होते हुए बोला:” फिर क्या हुआ दादी ?

दादी की आंखे फिर से नम हो गईं और अपने आंसू को थामते हुए भारी गले के साथ बोलना शुरू किया :” बेटा फिर तेरी अम्मी की छोटी सी उम्र में ही शादी हो गई और वो दुल्हन बनकर हमारे घर में आ गई, तेरे बाप ने भी कभी उसकी कद्र नहीं करी लेकिन इस बेचारी ने कभी एक शब्द नहीं बोला और अपने आपको किस्मत के सहारे छोड़ दिया, लेकिन जैसे अभी ज़ुल्म की इंतहा बाकी थी इसलिए एक दिन तेरा बाप भी इसे भरी जवानी में बेवा बनाकर इस दुनिया से चला गया। जब तू इसके पेट में था बेटे, मैंने और तेरे दादा जी ने बहुत कोशिश करी कि इसकी दूसरी शादी कर दी जाए लेकिन इसने साफ मना कर दिया कि अब वो इस घर को छोड़कर कहीं नहीं जाएगी क्योंकि मेरा बिना आप दोनो का कोई सहारा नहीं है।

इतना कहकर दादी की सांसे उखड़ने लगी तो दादी फिर से सांसे लेने के लिए रुकी तो उसने देखा कि शादाब की आंखो से भी आंसू निकल रहे थे जिन्हें उसने साफ किया और बोलना शुरू किया:”

” बेटा इस बेचारी ने हमारी खूब मन लगाकर सेवा करी, भरी जवानी में भी इसने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे घर की इज्ज़त खराब हो बेटा। हमारी सगी बेटी रेशमा भी शादी के बाद बदल गई और हमसे मुंह मोड़ लिया लेकिन तेरी मा ने कभी हमे बेटी की कमी महसूस होने नहीं दी और एक बहु बेटी सब का फ़र्ज़ उसने निभाया। जब तू छोटा सा था तो उसने गांव की भलाई के लिए तुझे शहर भेज दिया और अकेले में घुट घुट कर रोती रही लेकिन कभी उफ्फ तक नहीं की, उसने अपनी ममता का पूरी तरह से गला घोट दिया।

शादाब की हिम्मत जवाब दे गई और वो अपने दादा जी के गले लगकर फफक पड़ा तो दादा जी ने उसे सहारा दिया और बोले:”

” बेटा अगर आज हम दोनों जिंदा हैं तो बस तेरी मा की वजह से हैं, उसके एहसान हम कभी नहीं भूल सकते बेटा।

दादी अपने दोनों हाथों को जोड़ते हुए बोली:” बेटा बस तुझसे एक गुज़ारिश हैं कि हम दोनों का तो पता नहीं कब तक जिए इसलिए तू हमेशा अपनी मा का ख्याल रखना बेटा ।

दादा जी:” हान बेटा, अब बस तू ही उसका एकमात्र सहारा हैं, इसलिए बेटा कभी उसकी आंखो में आंसू मत आने देना। कभी भूलकर भी उसका दिल मत दुखाना मेरे बच्चे।

शादाब ने अपना चेहरा उपर उठाया जो कि पूरी तरह से आंसुओ से भीगा हुआ जिससे दादा जी का कुर्ता भी गीला हो गया था, दादी दादा दोनो अपने बेटे के चेहरे को साफ करने लगे तो शादाब उनका इतना प्यार देख कर फिर से सिसक उठा। बार बार उसकी आंखो के आगे उसकी मा का मासूम चेहरा घूम रहा था। उफ्फ मेरी मा तो त्याग की देवी हैं और उसके दिल में अपनी मम्मी के लिए इज्जत और प्यार बहुत ज्यादा बढ़ गया।

दादी उसके बालो में उंगलियां निकालते हुए बोली:”

” बेटा संभालो अपने आप को तुम, तुम तो मेरे बहादुर बेटे हो ऐसे बच्चो कि तरह नहीं रोते।

शादाब ने बड़ी मुश्किल से अपने आंसू रोके और मन में एक आखिरी निर्णय किया और अपने दादा दादी के सिर पर हाथ रख कर बोला:”

” आप दोनो की कसम, मैं अपनी अम्मी को कभी किसी तरह की दिक्कत नहीं आने दूंगा, अपने आपसे ज्यादा उनका ख्याल रखूंगा।

अपने पोते की बात सुनकर दोनो की आंखे खुशी के मारे छलक उठी और दादी बोली:”

” बस अब रोना बंद कर मेरे बच्चे और जा उपर जाकर खाना खा ले तेरी मा भूखी होगी, वो तेरे बिना खाना नहीं खाएगी बेटा!

शादाब ने बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला और उपर की तरफ चल दिया। बाथरूम के अन्दर घुसी शहनाज़ अब बाहर निकल रही थी जिसने अपने जिस्म पर सिर्फ एक लाल रंग का टॉवेल बांधा हुआ था वो बाथरूम से बाहर निकल गई।

जैसे ही दोनो की नजरे टकराई तो शादाब को अपने अम्मी में अब त्याग और समर्पण की मूर्ति नजर आई और बहुत प्यार के साथ उन्हें देखने लगा। शहनाज़ के दोनो कंधे बिल्कुल नंगे थे जिन पर उसके काले घने बाल बिखरे हुए थे और बालो से टपकती पानी की बूंदे उसकी खूबसूरती को पूरी तरह से निखार रही थी। काले बालों में बीच में उसका खूबसूरत चेहरा ऐसे लग रहा था मानो बादलों के बीच से चांद निकल आया हों। अपने बेटे को देखकर उसे बड़ी शर्म महसूस हुई और उसके गाल एक दम गुलाबी हो उठे। उसने एक हाथ से कसकर टॉवल को पकड़ लिया और अपने बेटे की तरफ देखा जो पूरी तरह से खोया हुआ सिर्फ उसे ही देख रहा था। शहनाज ने अपने बेटे की तरफ देखते हुए उसे बोली:

” जाओ बेटा अपने कमरे में जाओ, मुझे अपने कमरे में जाना हैं , जल्दी जाओ।

अपनी अम्मी की बात सुनकर शादाब जैसे नींद से जागा और बिना कुछ बोले अपने कमरे में घुस गया। शहनाज़ ने उसके जाने के बाद राहत की सांस ली लेकिन अपने बेटे का ऐसे बिल्कुल भावहीन चेहरा देख कर उसे हैरानी हुई और वो अपने कपड़े पहनने लगीं। जल्दी ही वो बाहर आ गई और दोनो मा बेटे खाना खाने लगे। शादाब ने खाने का एक निवाला बनाया और अपनी अम्मी के मुंह की तरफ बढ़ा दिया तो शहनाज़ ने अपना मुंह खोलते हुए निवाला अंदर ले लिया और खाते हुए कहा:”

” क्या बात हैं आज अपनी अम्मी पर बड़ा प्यार आ रहा हैं मेरे बेटे को ??

शादाब एकटक अपनी अम्मी की तरफ प्यार भरी नजरो से देख रहा था जिनमें वासना नाम के लिए भी नही थी। शहनाज अपने बेटे की आंखो में झांकने लगी। खुदा ने औरत के अंदर ये गजब की ताकत दी है कि वो अपनी तरफ देखने वाली हर नजर को बड़ी सफाई से पहचान लेती है। शहनाज़ को अपने बेटे की आंखो में अपने लिए प्यार और सिर्फ प्यार नजर आ रहा था। इसलिए जैसे ही अगली बार शादाब ने खाने का निवाला उसकी तरफ बढ़ाया तो शहनाज़ ने निवाले के साथ साथ उसकी उंगली में हल्का सा काट खाया जिससे शादाब के होंठो पर पहली बार स्माइल आ गई और बोला:”

” अम्मी लगता हैं आप बहुत भूखी है, खाने के साथ साथ मेरी उंगली भी खा जाएगी क्या!!

शहनाज को अपने बेटे के चेहरे पर स्माइल देख कर खुशी हुई और बोली:”

” बेटा तूने जब मुझसे इतनी ज्यादा मेहनत कराई हैं तो भूख तो जोर से लगनी ही थी।

शादाब पूरी तरह से अपनी अम्मी की बात नहीं समझ पाया और बोला:” अम्मी मैंने तो आपसे कोई मेहनत नहीं कराई, आप ही बताए।

शहनाज़ को अपने बेटे के भोलेपन पर तरस आ गया और उसके थोड़ा करीब होते खाने का निवाले बनाकर उसके मुंह में डालते हुए बोली:”

” भूल गया मेरा राजा बेटा, इतनी मेहनत जो कराई तूने मसाला कूटने में अपनी मा से !!

शहनाज ने बड़ी मुश्किल से ये बात कहीं और कांपने लगी। शादाब का भी चेहरा लाल हो गया और बोला :”

” मुझसे गलती हो गई, आगे से मैं ध्यान रखूंगा, आराम से मसाला कूट दूंगा !!

शहनाज़ अपने बेटे के इस बदले हुए रुख को देखकर थोड़ा हैरान हुई और उसे छेड़ते हुए उसके कान के पास धीरे से बोली:”

” बेटा मुझे बिल्कुल भी बुरा नहीं लगा, जब तेरे पास इतना बड़ा मूसल हैं तो उससे तो ऐसे ही जोर जोर से औखली को ठोकना चाहिए !!

शहनाज़ ने जान बूझकर मसाला नहीं बल्कि सीधे औखली बोल दिया जिससे शादाब अपनी अम्मी की बात सुनकर थोड़ा खुश हुआ और बोला:” अम्मी क्या फिर से आप मेरे साथ मसाला कुटना चाहोगी?

शहनाज़:” नहीं बिल्कुल नहीं, अगर मैं तेरे साथ ऐसे ही मसाला कूटने लगी तो तू तो दो चार दिन में ही मेरे सारे कपड़े फाड़ देगा!!

शहनाज़ ने बड़ी मुश्किल से बोला और शर्म से लजा गई। शादाब ने अपनी अम्मी की तरफ देखा और बोला

” आपका ये दोस्त आपके लिए कपड़ों की लाइन लगा देगा एक से बढ़कर एक मॉडर्न कपडे, आप बस मसाला कूटने के लिए हान तो करो?

दोनो बात करते हुए खाना भी खाते जा रहे थे। अपने बेटे की बात सुनकर अवाक रह गई और बोली:” ना बेटा, रोज एक सूट फटेगा तो कितना ज्यादा खर्च बढ़ जाएगा हमारा ?

शादाब तो जैसे इसके लिए पहले से ही तैयार था इसलिए बोला:”

” अम्मी अगर आप थोड़े ढीले कपडे पहनोगी तो सूट फटने से बच जाएगा।

शहनाज़ को जैसे ही अपनी बेटे की बात का मतलब समझ आया तो जैसे शर्म के मारे हालत खराब हो गई और वो अपने दांत निकालते हुए अपने बेटे को मारने के लिए बढ़ी तो शादाब उसकी तरफ जीभ निकालता हुआ भाग उठा। शहनाज़ उसे पकड़ने के लिए उसके पीछे दौड़ पड़ी।

शादाब कमरे में घुस गया और गेट बंद करने लगा तो शहनाज ने तेजी से अपना पैर गेट में फसा दिया क्योंकि वो जानती थी कि उसका बेटा चाह कर उसे चोट नहीं पहुंचा पाएगा। शादाब ने जैसे ही अपनी अम्मी के पैर को दरवाजे में देखा तो उसने गेट पर से हाथ हटा दिया और शहनाज़ मौके का फायदा उठाकर अंदर घुस गई और शादाब को पकड़ लिया और उसे बेड पर गिराकर उसके उपर चढ़ गई और बोली :”

” अब बता ना क्या बोल रहा था शैतान मुझे ?

शहनाज भगाकर आई थी जिससे उसकी सांसे तेज होने के कारण चूचियां उपर नीचे हो रही थी जिन्हे देखकर शादाब मुस्कुरा दिया तो शहनाज़ की नजर अपने चूचियों पर पड़ी तो उसका चेहरा एक बार फिर से लाल हो उठा।

शहनाज ने अपने बेटे के एक हाथ को पकड़ लिया और दूसरे हाथ को उसकी आंखो पर रख दिया और बोली:”

” बेटे ऐसे मत देख मुझे, शर्म आती हैं मेरे राजा बेटा,

शादाब अपनी अम्मी की बात पर मुस्कुरा दिया और उसका हाथ फिर से सहलाने लगा जिससे शहनाज़ की सांसे एक बार फिर से उखड़ने लगी और उसकी चूचियां अपने बेटे के सीने में घुसने लगी। शादाब इस एहसास से तड़प उठा और उसने अपनी अम्मी से हाथ छुड़ाकर उसकी कमर पर रख दिया और जोर से अपनी तरफ खींचा तो शहनाज के मुंह से एक दर्द भरी आह निकल पड़ी और उसका हाथ उसके मुंह पर से हट गया।

शादाब अपनी अम्मी को दर्द में देख कर परेशान हो गया और बोला:” क्या हुआ अम्मी? आपको दर्द हुआ क्या ?

शहनाज़ की कमर पर शादाब ने उस जगह दबा दिया था जहां पर लंड ने अपना जोर दिखाया था, वो जगह लाल होकर सूज गई थी जिससे शहनाज को दर्द हुआ था। शर्म के मारे वो दोहरी हो गई अब अपने बेटे को कैसे बताए!!

शादाब ने हाथ की प्यार से उसकी कमर पर फेरा तो उसकी सूजी हुई कमर का एहसास हुआ तो डर के मारे बोला:”

” अम्मी प्लीज़ बताओ ना कैसे हुआ ये सब?

शहनाज़ ने अपने बेटे की बेटे सुनकर शर्म से अपना मुंह उसकी छाती में छुपा लिया और उसके एक हाथ को पकड़ लिया। शादाब अपनी अम्मी की हालत समझते हुए बोला:” अम्मी प्लीज़ बताओ ना आप मुझे, कैसे हुआ ये सब ?

शहनाज़ उसके कान में धीरे से बोली :” उफ्फ बेटा कैसे बताऊं तुझे, मुझे बहुत शर्म आती है

शादाब बोला: ” अम्मी बेटा नहीं एक दोस्त समझ कर ही बता दो आप मुझे,!

शहनाज़ ने उसके हाथ पर अपने हाथ से थोड़ा ज्यादा दबाव बढ़ाते हुए कहा”

” वो बेटा तूने मसाले के साथ साथ म म म री !!!

शहनाज शर्म के मारे इससे आगे नहीं बोल पाई तो शादाब अपनी अम्मी के बालो में प्यार से उंगली फिराने लगा तो शहनाज भावनाओ में बह गई और एक झटके के साथ बोल पड़ी:”

” बेटा तूने मसाले के साथ साथ मेरी कमर को भी कूट दिया था !

इतना कहकर शहनाज ने अपने बेटे का मुंह चूम लिया और उसके अपने एक हाथ से अपना चेहरा फिर से ढक लिया। शादाब को सब कुछ समझ में आ गया और उसका लंड खड़ा हो गया जिसका एहसास शहनाज़ को अपनी जांघो पर हुआ और चेहरा लाल सुर्ख होकर दहकने लगा।, उसने अपनी अम्मी को शरमाते हुए देखकर थोड़ा मजा लेने की सोची और बोला:”
” आपकी कमर को कैसे कूट दिया मूसल तो औखली में था और मसाला कूट रहा था।

शहनाज ने एक बार अपने बेटे की तरफ देखा तो उसे अब सिर्फ अपने सपनों का शहजादा नजर आया और वो पूरी तरह से बहक गई और बोली:”

” जरूर तेरे पास कोई दूसरा मूसल रहा होगा जिससे तूने मेरी कमर कूटी हैं! बता ना क्या तेरे पास नहीं था?

शादाब का लंड अपनी अम्मी की बात सुनकर अपनी औकात पर आ गया एक तेज झटके के साथ उसकी जांघो में जा लगा जिससे शहनाज़ के मुंह से फिर से एक दर्द भरी आह निकल पड़ी।

शादाब सब कुछ जानता था इसलिए उसका गाल चूमते हुए बोला:* क्या हुआ अम्मी फिर से मूसल चुभ गया क्या?

शहनाज़ की आंखे एक दम वासना से लाल हो उठी और उसके चेहरे के भाव बिगड़ने बनने लगे और उसने एक बार अपनी टांगो को थोड़ा सा लंड पर दबा दिया तो लंड किसी सांप की तरह फुफकारते हुए झटके मारने लगा जिससे शहनाज़ का मुंह फिर से मस्ती से खुल उठा

” आह राजा ये मूसल तो औखली वाले मूसल से भी ज्यादा खतरनाक हैं, उफ्फ कितना ठोस हैं ये, ये तो अपने आप ही झटके मार मार कर मेरी जांघों को कूट रहा है; हाय मेरे राजा कहां से लाया तू ये करामाती मूसल ??

शादाब अपनी अम्मी की मस्ती भरी बाते सुनकर जोश में आ गया और अब थोड़ा जोर से लंड के झटके मारने लगा तो शहनाज़ ने पूरी तरह से अपने जिस्म पर से काबू खोते हुए अपने बेटे के हाथ को जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया और उसके शहनाज के जिस्म को अपने आप मस्ती से झटके लगने लगे जिससे उसका जिस्म हिलने लगा और उसका जिस्म थोड़ा सा ऊपर खिसक गया जिससे अब उसकी चूत लंड के ठीक ऊपर थी और लंड के झटके उसकी चूत पर पड़ रहे थे।

शहनाज़ की मस्ती भरी सिसकारियां अब कमरे में गूंज रही थी और शादाब पूरी मस्ती से उसके गाल चूम रहा था। शादाब ने एक हाथ को उसकी कमर पर से नीचे की तरफ लाते हुए जैसे ही उसकी गांड़ पर रखा तो शहनाज़ का समूचा जिस्म मस्ती से भर उठा। उफ्फ मेरे बेटे के चौड़े चौड़े हाथ मेरी गांड़ पर हैं ये सोचकर वो अपनी सब लाज शर्म त्याग कर अपने बेटे की गर्दन चाटने लगी।

शादाब ने भी जोश में आते हुए अपनी अम्मी की भारी भरकम उभरी हुई गांड़ को अपने चौड़े हाथो में भर लिया। शहनाज़ की मस्ती का अब कोई ठिकाना नहीं था, उसकी मोटी गांड़ पूरी तरह से उसके बेटे के हाथो मे भर गई थी तो शहनाज़ को यकीन हो गया कि उसकी गांड़ सिर्फ उसके बेटे के लिए ही बनी हैं और शहनाज़ के लिए तो जैसे ये सपने के साकार होने जैसा था । जैसे ही शादाब ने अपनी अम्मी की गांड़ को पहली बार दबाया तो शहनाज़ के मुंह से एक जोरदार मस्ती भरी आह निकल पड़ी और उसने अपनी चूत को जोर से लंड पर दबा दिया और एक बार फिर से झड़ती चली गई। शादाब भी अपनी अम्मी की चूत की पहली रगड़ लंड पर बर्दाश्त नही कर पाया और उसके लंड ने एक बार फिर से अपना लावा उगल दिया। दोनो मा बेटे ने एक दूसरे को पूरी तरह से कस लिया और अपनी सांसे दुरुस्त करने लगे।

जैसे ही शहनाज़ की सांसे नॉर्मल हुई तो उसे शर्म का एहसास हुआ और अपने बेटे का मुंह चूमते हुए उठकर अपने कमरे में घुस गई।

शहनाज अपने कमरे में अा गई और उसकी सांसे अभी तक तेजी से चल रही थी। वो सोचने लगी कि मुझे पता नहीं क्या हो जाता हैं जब मैं शादाब को हाथ लगाती हू। कैसे नशा , कैसी मदहोशी हैं उसके स्पर्श में कि मेरा रोम रोम महक जाता हैं, काश ये मेरा बेटा ना होता तो मैं कब की मर मिटी होती इस पर। ये सोचते ही उसके होंठो पर मुस्कान अा गई और खुद से ही बाते करते हुए बोली कि मैं तो उसके उपर मर मिटी ही चुकी हूं, बस मेरे अंदर की मा मुझे कभी कभी मुझ पर हावी हो जाती है। ये सब सोचते हुए उसे नींद आने क्योंकि उसका तपता हुआ जिस रात से दो बार ठंडा हो चुका था इसलिए बिस्तर पर गिरते ही उसकी आंख लग गई।

दूसरी तरफ शादाब को अपने उपर हैरानी हो रही है कि अपनी दादा दादी जी की बात सुनकर निस देवी की वो इबादत करने की सोच कर रहा था, उसके साथ फिर से बहक गया। तभी उसे अपनी अम्मी की बाते याद आने लगी तो उसे एहसास कि बहकने में सिर्फ उसकी अकेले की गलती नहीं है शायद मेरी अम्मी को भी ये सब अच्छा लग रहा है इसलिए मेरे साथ ऐसी बाते करती है। लेकिन कुछ भी हो मेरी अम्मी शहनाज हैं बहुत खूबसूरत, एक दम किसी किसी परी की तरह जो किसी के भी सपनो की शहजादी हो सकती है। इस उम्र में भी इतनी सुंदर लगती है कि कुंवारी लड़कियां भी उन्हें देख कर पानी मांग उठें। आपको आपको अम्मी में इतना फिट रखा हैं कि उनकी उम्र 30 साल के ही आस पास लगती हैं, एक दम कसा हुआ बदन, उफ्फ चूचियां कितनी ठोस थी मानो बहुत ज्यादा फुरसत से बनी हो। इन्हीं विचारों में खोया हुआ शादाब अपने कमरे से बाहर निकल आया तो उसने देखा कि उसकी अम्मी गहरी नींद में सो रही हैं और उनका चांद सा सुंदर चेहरा चमक रहा हैं तो ना चाहते हुए भी उसके कदम अपनी अम्मी के कमरे में घुस गए। शहनाज़ उल्टी लेटी हुई थी और उसकी गांड़ पूरी तरह से उभरी हुई और उसके काले लम्बे बाल उसके जिस्म पर फैले हुए थे।

शादाब अपनी अम्मी के पास पहुंच गया और उनके चेहरे को देखते हुए खुद पर से काबू खो बैठा और अपनी अम्मी का माथा चूम लिया। जैसे ही शादाब के होंठो का एहसास शहनाज़ को हुआ तो उसकी नींद टूट गई और आंखे बंद किए हुए ही लेटी रही। शादाब ने अपना चेहरा थोड़ा नीचे लाते हुए अपनी अम्मी के गाल को चूम लिया और बहुत धीरे से बुदबुदाया :” अम्मी आप दुनिया की सबसे अच्छी अम्मी हैं, आपका बेटा आपसे बहुत प्यार करता है।!!

इतना कहकर उसने फिर से एक बार अपनी अम्मी का गाल चूम लिया और एक हसरत भरी नजर उसके चेहरे पर डालते हुए अपने कमरे में लौट आया और सोने लगा। शहनाज़ अपनी बेटे की इस हरकत से पूरी तरह से अपने बेटे की दीवानी हो गई क्योंकि उसका बेटा चाहता तो उसे नींद में सोचकर उसके होंठ भी चूम सकता था लेकिन उसने ऐसा नहीं किया! सचमुच मेरा बेटा करोड़ों में एक हैं ये सब सोचते हुए शहनाज़ भी गहरी नींद में चली गई।

कमर में सूजन होने के कारण शहनाज़ थोड़ा देर तक सोती रही और कोई 6 बजे के आस पास उसकी आंखो खुली तो वो अपने आंखे मलती हुई कमरे से बाहर निकल अाई तो उसने देखा कि शादाब ने मसाला कूट कर रख दिया और सब्जी भी काट दी थी और आटा गूथने के लिए हल्का गर्म पानी भी रख दिया था शहनाज की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। वो अपने बेटे के कमरे में गई तो देखा कि वो अपनी पढ़ाई कर रहा था।
शहनाज़ को देखते ही उसने एक स्माइल दी तो शहनाज़ ने उसके पास बैठ गई और उसके बालो में उंगली फिराने लगी तो शादाब अपनी अम्मी के थोड़ा और करीब खिसक कर उससे सट गया।

शहनाज़ :” बेटा क्या बात हैं घर के काम सीख रहा हैं सब, तुझे किसने बोला था ये सब करने के लिए मेरे बच्चे ?

शादाब अपनी अम्मी की तरफ देखते हुए:” अम्मी मैं आपका दोस्त हूं , इसलिए मेरा फ़र्ज़ बनता हैं कि आपकी मदद करूं और मैं अब बच्चा नहीं रहा, बड़ा हो गया हैं अम्मी !!

शहनाज़ को अपने बेटे को छेड़ने का बहाना मिल गया:”

” मैं भी तू देखू मेरा बेटा कहां से बड़ा हो गया हैं, मुझे तो अभी भी बच्चा ही लगता है।

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनकर जोश में अा गया क्योंकि बात उसके स्वाभिमान पर अा गई थी इसलिए बोला:”

” अगर आप मेरी अम्मी ना होती तो मैं आपको जरूर बताता कि मैं कहां से कितना बड़ा हो गया हूं।

शहनाज अपने बेटे की बात सुनकर शर्मा उठी और बोली:”

” धत तेरी की, बदतमीज कहीं का, कोई अपनी अम्मी से ऐसे बात करता हैं क्या ?

शादाब अम्मी का हाथ पकड़ते हुए बोला:”
” अब आप मेरी दोस्त हूं अम्मी नहीं, इसलिए इतना मजाक तो चलता है ना दोस्त ?

शहनाज अपने बेटे की चालाकी पर मुस्कुरा उठी और बोली:”

” तू ना सचमुच बहुत चालाक हो गया है, दोस्ती के बहाने अपनी अम्मी को बिगाड़ना चाहता है !!

हालाकि शहनाज़ ने ये बाते सिर्फ उससे मजाक में कही थी लेकिन शादाब के दिल में किसी तीर की तरह चुभ गई और उसकी आंखो में पानी अा गया और वो बिना कुछ बोले कमरे से बाहर निकल गया। शहनाज़ को एहसास हुआ कि उसने गलती से अपनी बेटे पर इल्ज़ाम लगा दिया हैं तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने तेजी से बाहर निकलते हुए आगे बढकर शादाब का हाथ पकड़ लिया और बोली:”

” माफ नहीं करेगा अपनी दोस्त को मेरे राजा ? गलती हो गई मुझसे, मेरा वो मतलब नहीं था।

शादाब ने एक बार अपने चेहरे को उपर उठा कर अपनी अम्मी की तरफ देखा तो शहनाज़ को उसकी आंखो में आंसू साफ दिखाई दिए और एक झटके के साथ अपना हाथ छुड़ाकर बाहर चला गया। शहनाज़ का दिल टूट सा गया, उसने अपने बेटे को आवाज लगाई लेकिन उसने एक बार भी पीछे मुड कर नहीं देखा और सीढ़ियों से नीचे उतर गया तो उसकी नजर उसके दादा दादी पर पड़ी जिन्हे देखते ही उसने सलाम किया तो दादा सलाम लेकर बोले:”

” बड़ी जल्दी में हो, कहीं जा रहे हो क्या बेटा ?

शादाब को एक पल के लिए तो कुछ नहीं सूझा मगर जल्दी है बोल उठा:” बस दादा जी सोच रहा था थोड़ा बाहर घूम आऊ!

दादा जी थोड़ा खुश होते हुए:”
” ठीक है बेटा, अच्छा हैं घूम लो देख लो गांव को ठीक से, फिर बाद में तो घूम ही नहीं पाओगे,
अच्छा बेटा एक काम करना बाहर शर्मा जी की दुकान से मेरे लिए गुलाब जामुन लेते आना !!

इतना कहकर दादा जी ने कुछ पैसे उसकी तरफ बढ़ाए तो शादाब ने लेने से मना कर दिया और बोला:”
” मेरे पास पैसे हैं दादा जी, आप रहने दीजिए।

दादा जी:” कोई बात नही बेटा, पहली बार तेरे दादा जी कुछ से रहे हैं तो मना नहीं करते।

शादाब ने पैसे ले लिए और दादी से बोला:”
” आपके लिए भी कुछ लेकर आना हैं क्या दादी जी ?

दादी:” बेटा अब मुझ में दांत नहीं है तो क्या कुछ खा पाऊंगी, बस गुलाब जामुन ही लेते आना, तेरे दादा जी की तरह मैं भी चूस चूस कर ही खा लूंगी!!

इतना कहकर उसने अपनी पति की तरफ देखा और दोनो एक साथ मुस्कुरा दिए। शादाब भी उनके साथ हल्का सा मुस्कुरा दिया और उसे सच में बुढ़ापे की पीड़ा का अनुभव हुआ। भारी मन के साथ वो बाहर की तरफ निकल गया और एक पार्क में जाकर बैठ गया।

शादाब को अपनी अम्मी याद आने लगी तो उसे उनकी बड़ी फिक्र होने लगी। तभी उसे अपनी अम्मी की बाते याद अाई कि तू अपनी अम्मी को बिगाड़ना चाह रहा हैं तो उसका दिल फिर से उदास हो गया। अम्मी को ऐसा नहीं बोलना चाहिए मैंने तो उनकी कितनी मदद करी थी मसाला भी कूट दिया था और सब्जी काट कर पानी भी गर्म कर दिया था। अम्मी को ये सब समझना चाहिए था लेकिन उन्होंने मुझ पर इतना बड़ा इल्ज़ाम लगा दिया एक बार भी नहीं सोचा कि मैं तो उनका अपना खून हूं क्या मैं उनके बारे में ऐसा सोच सकता हूं।

अपने खून शब्द के ध्यान में आते ही शादाब को एक झटका सा लगा। अम्मी भी तो मेरा अपना ही खून हैं क्या मैंने जो उनके साथ किया वो सही है । बेशक उनसे गलती हुई है लेकिन वो तो माफी भी मांग रही थी मुझसे साथ साथ ही, मैंने उनके साथ कई बार गलती करी, गाल पर जोर से काट दिया, सीने पर दांत गडा दिए, जोश में उनका सूट फाड़ दिया, उफ्फ मसाले के साथ साथ कमर कूट दी लेकिन उन्होंने तो मुझे हमेशा माफ कर दिया। नहीं मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था, इससे अम्मी को दुख होगा और मैं अपनी अम्मी को दुखी नहीं देख सकता क्योंकि मैंने तो उन्हें हमेशा खुश रखने का वादा किया हैं अपने दादा दादी के साथ।

ये सब विचार मन में आते ही वो उसने अम्मी को कॉल करने के लिए मोबाइल निकाला तो देखा कि उसकी अम्मी की दस से ज्यादा कॉल अाई हुई थी और फोन साइलेंट होने की वजह से उसे पता नहीं चल पाया।

उसने देखा कि एक संदेश भी था तो उसने मैसेज को ओपन किया और पढ़ने लगा !

” बरसो बाद मैंने अपने दोस्त की वजह से मुस्कुराना सीखा था, हर ग़म भुला कर खुशियों को गले लगाना सीखा था, एक तेरे सहारे ज़िन्दगी कोई चांदी सोना नहीं चाहती, लौट आओ फिर से मेरे राजा मैं तुम्हे खोना नहीं चाहती।
कुबूल करूंगी हंस कर हर सजा तुम खुशी से जो भी दोगो
नहीं तो ज़िन्दगी भर पछताओगे जब मेरा मरा हुआ मुंह देखोगे।

प्लीज़ लौट आओ बेटा

तुम्हारी दोस्त
नाज

शादाब ने जैसे ही अपनी अम्मी का मैसेज पढ़ा तो वो बुरी तरह से डर गया और अम्मी को वापिस कॉल किया जो शहनाज ने नहीं उठाया तो शादाब एक के बाद एक लगातार कॉल करने लगा लेकिन कोई उत्तर ना पाकर वो उसकी आंखे नम हो गईं और वो अपने दादा दादी के गुलाब जामुन भी भूल कर तेजी से वापिस घर की तरफ दौड़ पड़ा।

शहनाज़ पूरी तरह से टूट चुकी थी और जब उसके बेटे ने बार बार कॉल करने के बाद भी फोन नहीं उठाया तो उसका दिल बैठ गया और सब्जी बनाने के लिए किचेन में घुस गई ताकि दादा दादी जी को खाना मिल सके।

शादाब घर के अंदर घुस गया तो दादा दादी को देखा और उनसे पहले खुद ही बोल पड़ा:”

” माफ करे दादा जी मुझे काफी ढूंढने के बाद भी दुकान नहीं मिली लेकिन कल मैं आपको पक्का ला दूंगा।

दादा और दादी थोड़ा सा उदास हुए और बोले:”

” कोई बात नहीं बेटा, तुम गांव में रहे ही कहां हो, शायद इसलिए तुम्हे दुकान नहीं मिल पाई, कल तुम ला देना।

शादाब :” ठीक हैं दादा जी,

इतना कहकर शादाब तेजी से दौड़ता हुआ उपर की तरफ चल दिया और अपनी अम्मी को उसके कमरे में देखा तो नहीं मिली, अपने कमरे में देखा नहीं मिली तभी उसे किचेन से खाना बनने की आवाज सुनाई दी तो किचेन की तरफ चल पड़ा। उसने देखा कि उसकी अम्मी रोटी बना रही थी और आंखे पूरी तरह से भीगी हुई थी। शादाब से बर्दाश्त नहीं हुआ और वो आगे बढ़ा और पीछे से अपनी अम्मी को बांहों में भर लिया और उनके आंसू साफ करने लगा

शहनाज़ अपने बेटे का स्पर्श महसूस करते ही सब कुछ भूलकर पलटी और एक दीवानी की तरह उससे लिपट गई।

शादाब भी अपनी अम्मी से लिपट गया
शादाब की आंखो से भी आंसू निकल पड़े और अपनी अम्मी के खूबसूरत चेहरे को हाथो में भर कर बोला:”

” अम्मी बस चुप हो जाइए आप, माफ कर दो मुझे, आपका बेटा अब कभी आपसे नाराज नहीं होगा ये आपके दोस्त का वादा हैं।

शहनाज़ ने उसका माथा चूम लिया और बोली :”

” गलती मेरी ही है बेटा, मुझे तुझे ऐसे नहीं बोलना चाहिए था लेकिन मैंने तो सिर्फ मजाक में बोला था मेरे लाल!

इतना कहकर शहनाज़ एक बार फिर से सिसक उठी।शादाब अपनी अम्मी के गाल सहलाता हुआ बोला:”

” बस अम्मी अब आप नहीं रोएगी, अम्मी मुझे लगा था शायद आप मुझ पर इल्ज़ाम लगा रही है

शहनाज़ उसका माथा चूम कर बोली:”
” नहीं बेटा, ऐसा कभी मत सोचना, तू तो मेरा अपना खून हैं और खुदा के बाद मैं सबसे ज्यादा भरोसा तुझ पर ही करती हूं। चल बता क्या सजा देगा अपनी इस दोस्त कों?

शादाब अपनी अम्मी की तरफ देखकर पहली बार स्माइल किया और बोला:”
” जाओ आपको माफ किया, आपके दोस्त का दिल बहुत बड़ा है क्या याद रखोगी !

शहनाज़ के होंठो पर भी मुस्कान तैर गई और अपने बेटे को छेड़ते हुए बोली:” तेरा तो सिर्फ दिल ही नहीं और भी कुछ बहुत बड़ा है

इतना कहकर शहनाज़ ने शर्म के मारे अपना मुंह उसकी छाती में छुपा लिया, अपनी अम्मी को पहले की तरह छेड़ छाड़ करते देख कर शादाब बहुत खुश हुआ और बोला:”
” अच्छा दिल के अलावा और क्या बड़ा लगा मेरी अम्मी को ?

शहनाज़ के गाल एक दम फिर से गुलाबी हो उठे और उसका एक हाथ हल्के से दबाते हुए बोली:”

” मूसल नहीं देखा तूने कितना बड़ा है, आज तूने इतना बारीक मसाला पीस दिया, पता नहीं कौन से मूसल से पीसा हैं?

शादाब का लंड अपनी अम्मी की बाते सुनकर खड़ा होना शुरू हो गया और वो बोला:”

” अम्मी मसाला कूटने के लिए तो घर में मूसल है ही, मेरे वाले से मसाला थोड़ी ही कुटा जाता हैं?

शहनाज़ ने अपने बेटे की बात सुनकर जोश में आते हुए अपनी जांघो का दबाव उसके लंड पर बढ़ा दिया और बोली:”

” मसाला नहीं तो फिर और क्या कूटा जाता है मेरे राजा ?

शादाब अपनी अम्मी की इस हरकत पर अपना काबू खो बैठा और अपनी अम्मी की कमर पर सूजी हुई जगह को सहलाते हुए बोला “

” आपको सब हैं अम्मी , उससे क्या कूटा जाता हैं,

शहनाज़ को अपनी बेटे के भोलेपन पर हंसी अा गई और अपनी कमर का दबाव उसके हाथ पर बढ़ाते हुए बोली:”

” मेरे राजा ये तो तुम कूट ही चुके हो बुरी तरह से !!

शादाब अपनी अम्मी के मुंह से राजा सुनकर बहुत खुश हुआ और बोला:”
” अम्मी अगर आपका ये दोस्त आपको सजा देना चाहे तो आप कुबूल करेगी ?

शहनाज़:” जान भी हाज़िर है बोल कर तो देख!

शादाब अपने लंड का दबाव अपनी अम्मी की जांघो पर बढ़ाता हुआ बोला;”

” ठीक है आज के बाद आप मुझे सिर्फ मेरा राजा बुलाएगी, मंजूर हैं तो बोलो!

शहनाज़ ने अपने बेटे का गाल चूम लिया और बोली:”

” ठीक हैं मेरे राजा, अब तो मुस्कुरा दे ज़ालिम

शादाब जोर से हंस पड़ा तभी रोटी जलने की बदबू पूरे किचेन में फैल गई। शहनाज़ को जैसे होश आया और बोली:’

” तेरे चक्कर में रोटी ही जल गई मेरे राजा, तुम चलो मैं आती हूं।

शादाब अपनी अम्मी की तरफ स्माइल देकर बाहर निकल गया और अपने कमरे में बैठ गया। थोड़ी देर बाद खाना बन गया और शादाब और शहनाज़ ने पहले दादा दादी को खाना खिला दिया और उसके बाद दोनो उपर अा गए। खाना लग चुका था तो शहनाज आगे बढ़कर अपने बेटे की गोद में बैठ गई और अपने हाथ से उसे खाना खिलाने लगी।

दोनो मा बेटे ने एक दूसरे को अच्छे से खाना खिलाया और शहनाज बरतन उठा कर किचेन जाने लगी तो शादाब भी उसके पीछे पीछे उसके साथ ही अा गया और दोनो मा बेटे ने एक साथ बर्तन धोए। शहनाज़ अपने बेटे का ऐसा प्यार देखकर गदगद हो उठी। वो किचेन में बर्तन सजाने लगी और शादाब को बोली:

” राजा तुम एक बार अपने दादा दादी से पूछ लो कि उन्हें कुछ चाहिए तो नहीं, कहीं रात में बेचारे परेशान ना हो।

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनते ही नीचे चला गया और दादा दादी से बोला:”

” आपको किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो बता दीजिए, कहीं आपको रात को कोई तकलीफ़ ना उठानी पड़े!
दादा: बेटा मुझे कुछ नहीं चाहिए, जाओ अब तुम आराम कर लो!

शादाब:” दादा जी अगर आपको किसी भी चीज की जरूरत हो तो बता देना चाहे कोई भी टाइम हुआ हो।

दादा जी अपने बेटे की बात सुनकर खुश हो गए और शादाब उपर की तरफ चल पड़ा कि उसका मोबाइल बज उठा। उसने देखा कि रेशमा उसकी बुआ का फोन था, उसने सलाम किया और बात करते हुए उपर की तरफ जाने लगा!

रेशमा:” हां शादाब, मैं ठीक पहुंच गई हूं बेटा, बस तू अा जाता तो अच्छा होता!

शादाब उपर पहुंच गया था और उसकी आवाज शहनाज के कानों में पड़ रही थी तो शहनाज ध्यान से उसकी बाते सुनने लगी। शहनाज़ अब अपने कपड़े बदल चुकी थी और उसने एक ढीली एक गहरे रंग का नाइट सूट पहन लिया था।

शादाब:” बुआ मैं तो घर पर ही रहूंगा यहीं अपनी अम्मी और दादा जी के साथ। मेरी अम्मी बहुत अच्छी हैं और मुझे लगता हैं कि मुझे अपनी मा का ध्यान रखना चाहिए।

रेशमा:” हां बेटा वो बात तो हैं, कोई बात नहीं, थोड़े दिन के बाद अा जाना मैं सब्र कर लूंगी।

शादाब:” अब तो मै अपनी सारी छुट्टी अपनी मा के साथ घर पर ही रहूंगा, बुआ बुरा मत मानना मैं बाद में फिर कभी आपके पास अा जाऊंगा। अच्छा मैं बाद में करूंगा मुझे नींद अा रही हैं।

इतना कहकर शादाब ने कॉल काट दिया। शहनाज अपने बेटे की बाते सुनकर खुशी के मारे उछल पड़ी। मेरा बेटा सचमुच बहुत समझदार हो गया है और अब उस चुड़ैल रेशमा के कब्जे में नहीं आएगा।

शादाब को अपने दादा दादी की बात सुनकर रेशमा से नफ़रत सी हो गई थी इसलिए उसने उसको ज्यादा भाव नहीं दिया और सबसे बड़ी बात अब अपनी अम्मी को छोड़कर कहीं जाने का उसका बिल्कुल भी मन नहीं था। फोन जेब में रख कर वो अंदर की तरफ चल पड़ा।

शहनाज़ अपने बेटे को देखते ही खुश हो गई और दोनो मा बेटे एक दूसरे से बाते करते रहे। थोड़ी देर के बाद शादाब को नींद आने लगी तो वो बोला:”

” अम्मी मुझे नींद आ रही हैं, अगर आप कहें तो मैं सो जाऊ ?

शहनाज ने तरफ देखते हुए बड़ी अदा के साथ अपना दुपट्टा थोड़ा सा नीचे गिरा दिया जिससे उसकी चूचियों का उभार साफ़ नजर आने लगा और वो अपनी आंखो को नचाते हुए अपने होंठो पर कामुक मुस्कान लाती हुई बोली:”

” अच्छा इतनी जल्दी नींद आने लगी, तूने जो मसाले के चक्कर में मेरी कमर कूटी हैं उसकी मालिश कौन करेगा ?

शादाब अपनी अम्मी की इस अदा पर पूरी तरह से फिदा हो गया और अलमारी की तरफ बढ़ कर एक ट्यूब निकाल ली और अपनी अम्मी के पास अा गया। शहनाज़ अपने बेटे की आंखो में देखते हुए उल्टी होकर पेट के बल लेट गई। आज पहली बार उसका बेटा उसकी पूरी सहमति के साथ उसको छूने जा रहा था ये सोच सोच कर उसकी हालत खराब होती जा रही थी।

शादाब बेड पर अपनी अम्मी के पास बैठ गया और हाथ में क्रीम निकाल कर नाईट सूट के अंदर से ही शहनाज़ की कमर पर अपने हाथ को रख दिया और उसकी कमर की सूजी हुई जगह की मालिश करने लगा। शहनाज़ अपने बेटे के स्पर्श से पूरी तरह से रोमांचित हो गई और अपनी कमर हल्की सी उपर की तरफ उभार दी जिससे उसका बेटा और ज्यादा अच्छे से मालिश करने लगा। थोड़ी देर बाद ही शहनाज़ का सारा दर्द जैसे गायब हो गया और वो बोली:”

” बस बेटे, तेरे हाथो में तो एकदम जादू हैं, पूरा दर्द जैसे गायब हो गया हैं।

शादाब अपनी अम्मी को गोद में भर कर नाच रहा था। शहनाज़ उसके कान खींचते हुए बोली:”

” अब कुछ बताएगा भी कि हुआ क्या हैं मेरे राजा?

शादाब :” अच्छा एक बात बताओ, आपका शहर जाने का घूमने का मन करता हैं या नहीं ?

जैसे शादाब ने शहनाज की दुखती हुई रग पर हाथ रख दिया था, इसलिए वो उदास होकर बोली :”

” बेटे मैं तो शादी के बाद से आज तक शहर नहीं गई, पहले बहुत मन करता था घूमने के लिए, लेकिन ये सब एक सपना बनकर रह गया है, लेकिन तू ये सब क्यों पूछ रहा हैं?

शादाब अपनी अम्मी के गाल चूम कर बोला:”
” अपनी दोस्त उसी सपनो के पूरा करने के लिए, मैंने दादा दादी जी से बात कर ली हैं, आप जल्दी से उनके लिए कुछ बनाओ और तैयार ही जाओ।

शहनाज खुशी से चहकते हुए उसका हाथ चूम लिया और बोली

” ये तो बहुत खुशी की बात हैं मेरे राजा, अच्छा तू इसलिए ही चाय लेकर नीचे गया था , अब समझी, मैं जल्दी से उनके लिए देशी घी का हलवा बना देती हूं, फिर चलते हैं।

शादाब उसका एक हाथ थोड़ा जोर से दबाते हुए:”

” हमे भी खिला दी कभी देशी घी का हलवा, अपने राजा से क्या दुश्मनी हैं तुम्हारी ?

शहनाज़ को उसके दबाने से हल्का सा दर्द महसूस हुआ और उसकी छाती हौले हौले मारती हुई बोली :”
” तेरे अंदर तो पहले ही सांड जैसे ताकत हैं, अगर देशी घी का हलवा तुझे खिला दिया तो तू तो अगली बार मसाले के साथ औखली को भी कूट देगा,

इतना कहकर शहनाज़ ने शर्म के मारे अपना मुंह उसके सीने में छुपा लिया ।

शादाब:” आय हाय इतनी शर्म, अच्छा जल्दी से हलवा बना दो आप, फिर चलते हैं!

शहनाज़ उसे उलाहना देते हुए बोली :” पहले मुझे नीचे उतारेगा तभी तो हलवा बनाऊंगी, इतनी भारी हूं फिर भी गुड़िया की तरह उठा लेता हैं मुझे !!

शहनाज़ ने उसे धीरे धीरे नीचे उतार दिया और बोला:”.

” किसने कहां आप भारी हो, आप एक दम नाजुक हो किसी गुड़िया की तरह।

शहनाज़ उसकी बात सुनकर हंसते हुए बोली:” जब देखो झूठी तारीफ करता रहता हैं मेरी, तुम भी तैयार हो जाओ।

इतना कहकर वो किचेन में घुस गई और दूध गर्म करके एक थरमस में भर लिया और जल्दी दे हलवा तैयार कर लिया। उसे खुद पर हैरानी हो रही थी कि उसने इतनी जल्दी सब कुछ कैसे बना दिया। फिर वो तैयार होने के लिए कमरे में अा गई और तैयार होने लगी। उसने एक एक हल्के गहरे रंग का सूट पहन लिया और फिर अपने चेहरे का मेक अप करने लगी। उसने अपने बालो को खुला छोड़ दिया

शहनाज़ ऐसे ही अपने बेटे के रूम की तरह जाने लगी। शादाब उसे देखते ही बोला “

” क्या बात हैं बहुत सज ढक गई हो, आज किस पर बिजलियां गिराने का इरादा है ?

शहनाज एक दम से लजा गई और बोली:”

” मुझे तो तेरे सिवा कोई और नजर नहीं आता यहां मेरे राजा?

शादाब मुस्कुराते हुए उसकी तरफ बढ़ा और बोला:”

” हम तो पहले ही आपके दीवाने हो गए हैं मल्लिका ए हुस्न, अब जान ही ही ले लोगी क्या ?

शहनाज़ ने अपनी एक उंगली को अपनी बेटे के होंठो पर रख दिया और उसे चुप रहने का इशारा करके उससे लिपट गई। शादाब ने भी अपनी अम्मी को अपने गले से लगा लिया और बोला:”

” चले फिर?

शहनाज़ ने अपना बुर्का निकाला और उसे औढ़ने लगी तो शादाब की हंसी छूट गई और बोला:”

” अम्मी आप बिना बुर्के के ज्यादा खूबसूरत लगती हो, रहने दो ना बुर्का !

शहनाज़ उसकी तरफ थोड़ा नाराजगी से देखते हुए:”

” मेरे साथ खुद भी मार खाएगा क्या, आज तक बिना बुर्के के मैंने चौखट के बाहर कदम नहीं रखा।

और इतना कहकर उसने अपना बुर्का पहन लिया और दोनो एक दूसरे का हाथ पकड़े नीचे की तरफ चल पड़े। दादी दादा के पास जाने से पहले ही शादाब ने शहनाज़ का हाथ छोड़ दिया और शादाब ने हलवा और दूध का थार्मास दादा जी को से दिया और फिर शादाब गाड़ी निकालने चला गया।

दादी :” बेटी अच्छा हुआ शादाब को कॉलेज का कुछ काम पड़ गया इसके बहाने तू भी शहर घूम आएगी और हमे भी कुछ नए कपड़े मिल जाएंगे।

शहनाज़ को अब जाकर सारी बातें समझ अाई कि उसके बेटे का कॉलेज का कुछ काम है इसलिए वो शहर साथ में उसे भी घूमने ले जा रहा है।

तब तक शादाब कर लेकर गेट पर अा गया और शहनाज़ आगे बढ़ते हुए उसके बैठ गई।

दादी चिंतित होते हुए:”

” बेटा थोड़ा आराम से ही जाना और जल्दबाजी मत करना, तेज गाड़ी मत चलाना बेटा ।

शादाब अपनी दादी की बात मानते हुए उन्हें एक स्माइल देकर आगे बढ़ गया। गाड़ी गांव के रास्ते को पर करती हुई मुख्य रोड पर अा गई और शहर की तरफ चल पड़ी।

शहनाज़ आज अपने आपको दुनिया की सबसे खुश नसीब मा समझ रही थी कि उसका बेटा उससे इतना प्यार करता । उससे लग रहा था मानो उसका बेटा नहीं बल्कि उसके सपनों का शहजादा सपनो से बाहर निकल आया हैं।

शादाब अपनी अम्मी की तरफ देखते हुए बोला:”

” अम्मी आप खुश तो हो ना अपने दोस्त के साथ घूमने आकर!!

शहनाज़ ने अपने बेटे की तरफ देखते हुए उसका हाथ अपनी हाथ में भर लिया और बोली:”

” बहुत ज्यादा मेरे राजा, शुक्रिया मेरे दोस्त मेरी ज़िन्दगी में आने के लिए ।।

शादाब उसकी तरफ स्माइल देकर:”

” अम्मी अब आप ये बुर्का उतार दीजिए ना, ये आप पर बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा हैं

शहनाज का दिल जोर से धड़क उठा और बोली:”
” मा बेटा कभी ऐसा सोचना भी मत, अगर किसी ने मुझे बिना बुर्के के देख लिया तो गजब हो जाएगा मेरे राजा!

शादाब समझ गया कि उसकी मम्मी के मन में डर हैं इसलिए वो बोला:”

” देखो अम्मी ना तो आज तक आपका चेहरा किसी ने देखा हैं और ना ही गांव में मुझे कोई जानता है, इसलिए आप बेफिक्र होकर उतार दीजिए।

शहनाज़ को अपने बेटे की बात बिल्कुल सही लगी लेकिन समाज का डर उसके ऊपर पूरी तरह से हावी था, उसके बचपन से लेकर अब तक के संस्कार उसे इसकी इजाज़त नहीं दे रहे थे। इसलिए वो डरते हुए बोली:”

” ना बेटा मुझसे ना हो पाएगा, समझने की कोशिश कर तू।

शादाब ने थोड़ा उदास होते हुए कहा :” क्या अम्मी आप अपने दोस्त के लिए इतना भी नहीं कर सकती है ?

शहनाज़ ने एक बार अपने बेटे की तरफ देखा और बोली:”

” प्लीज़ बेटा जिद मत कर, मुझसे नहीं हो पाएगा, बहुत शर्म आएगी बुर्का निकालते हुए घर से बाहर!

शादाब अपनी अम्मी की मजबूरी समझ गया और बोला:”

” मानता हूं आप खुद नहीं निकाल पायेगी, लेकिन अगर आपका ये दोस्त आपकी मदद करे तो क्या ख्याल हैं आपका ?

शहनाज़ अपने बेटे की बात सुनकर एक बार प्यार से उसकी तरफ देख कर मुस्कुराई और फिर लजा गई, चेहरा शर्म से लाल हो गया और उसने अपनी आंखे बंद करते हुए अपना सिर उसके कंधे पर रख दिया। शादाब समझ गया कि उसकी अम्मी ने उसे एक मूक सहमति दे दी है।

शादाब ने रोड पर एक खाली जगह देखकर साइड में गाड़ी रोक दी और शीशे चढ़ा दिए तो शहनाज़ की हालत खराब होने लगी। शादाब ने अपनी अम्मी के एक हाथ को अपने हाथ में लिया और हल्का हल्का सहलाना शुरू कर दिया तो शहनाज़ ने भी उसके हाथ हल्का सा दबा दिया। शादाब थोड़ा आगे हुआ तो उसकी अम्मी उससे पूरी तरह से चिपक गई। शादाब ने एक हाथ नीचे की तरफ बढ़ाया और उसके बुर्के के नीचे वाले हिस्से को पकड़ लिया तो शहनाज़ की सांसे किसी सुपर फास्ट ट्रेन की तरह दौड़ने लगी और उसने अपने हाथ अपने बेटे की गर्दन में लपेट दिए। शादाब ने बुर्के के सिरे को थोड़ा सा ऊपर की तरफ उठाया तो शहनाज़ का जिस्म सूखे पत्ते की तरफ कांपने लगा, उसे ऐसे लग रहा था कि शादाब सिर्फ उसका बुर्का ही नहीं उतार रहा है बल्कि उसे पूरी नंगी कर रहा है। शहनाज़ का एक पैर अपने आप उसके दूसरे पैर को रगड़ने लगा। शादाब ने बुर्के को सिरे को घुटनो तक उठा दिया और उसकी जांघो पर बहुत धीरे धीरे हाथ फेरते हुए ऊपर की तरफ बढ़ता जा रहा था। एक तो बुर्का उतारने कि शर्म और ऊपर से शादाब के हाथ की उंगलियां जो कि शहनाज़ के जिस्म पर एक सितार की तरह बज रही थी उससे शहनाज पूरी तरह से उत्तेजित हो गई और अपने चेहरे को और आगे करते हुए उसकी गर्दन के बिल्कुल पास ले गई।

शादाब को अपनी गर्दन पर जैसे ही अपनी अम्मी की गरम गरम सांसे महसूस हुई तो उसने जोश में आकर बुर्के को थोड़ा और ऊपर उठाया जिससे अब बुर्का उसके पेट से उपर आते हुए उसके सीने की गोलाईयों तक अा गया। शहनाज़ को जैसे ही अपने बेटे के हाथ अपनी चूचियों पर महसूस हुए तो उसकी सांसे और तेज हो गई । शहनाज़ ने अपने हाथों की उंगलियों का दबाव अपने बेटे की कमर पर थोड़ा सा और बढ़ा दिया। बुर्का शहनाज़ की शानदार, शानदार चूचियों पर आकर हल्का सा फस सा गया तो शादाब ने अपनी हथेलियों का दबाव बढ़ाते हुए बुर्के को जोर से पकड़ा जिससे एक पल के लिए ही सही लेकिन शहनाज की चूचियों उसके बेटे की हथेलियों में समा गई जिसे महसूस करके शहनाज का रोम रोम कांप उठा । शादाब ने जैसे ही उपर की तरफ बुर्के को उठाते थोड़ा दबाव दिया तो शहनाज़ की चुचिया दब गई और उसके मुंह से एक हल्की मस्ती भरी सिसकी निकल पड़ी और उसके हाथ की उंगलिया शादाब की कमर में गड़ गई।
शादाब से अब बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने एक झटके के साथ बुर्के को उतार दिया तो शर्म और डर के मारे शहनाज़ के मुंह से एक आह निकल पड़ी

“हाय अल्लाह, उफ्फ ये क्या गुनाह हो गया मुझसे !!

और शहनाज़ के अमर बेल की तरह शादाब से लिपटती चली गई। शादाब ने भी अपनी अम्मी को अपनी बांहों में कस लिया और उसकी कमर थपथपाने लगा मानो उसे तसल्ली दे रहा हो। आज एक पर्दे की बहुत बड़ी दीवार दोनो मा बेटे के बीच गिर चुकी थी। शहनाज़ की आंखे अभी तक बंद थी और उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी कि अपनी आंखे खोल पाए। उसे ऐसा लग रहा मानो किसी ने भरे बाजार उसके कपड़े उतार दिए हो और शर्म से सिमटी हुई अपने बेटे की बांहों में थी। शादाब समझ रहा था कि ये उसकी अम्मी के लिए कितनी बड़ी बात है इसलिए उसने कोई जल्दबाजी नहीं करी और अपनी अम्मी को गले लगाए रखा। धीरे धीरे शहनाज़ की सांसे नॉर्मल होने लगी और जब उसकी सांसे एकदम सामान्य हो गई तो शादाब ने उसका माथा चूम लिया और बोला:”

” मल्लिका ए हुस्न जरा एक अपनी नाजुक प्यारी सी आंखो को खोल दीजिए !

शहनाज़ ने अपने दिल पर पत्थर रखते हुए बड़ी मुश्किल से अपनी आंखे खोली और अपने बेटे से मिला दी और अगले ही पल शर्म के मारे फिर से उसकी पलके झुक गई और दोनो आंखे बंद हो गई। शादाब ने उसका हौसला बढ़ाने के लिए फिर से उसके हाथ को सहलाना शुरू कर दिया जिसका नतीजा ये हुआ कि शहनाज़ ने अपनी आंखे खोल दी। शहनाज़ इस बार गजब का आत्म विश्वास दिखा रही थी और लगातार अपनी आंखे खोले रही तो शादाब ने आगे बढ़कर उसका माथा चूम लिया और बोला:

” अगर इजाज़त हो तो शहर की तरफ चले ?

शहनाज ने अपने बेटे को हल्की सी स्माइल देते हुए आगे बढ़ने का इशारा किया और शादाब ने गाड़ी आगे बढ़ा दी। थोड़ी देर बाद ही वो शहर पहुंच चुके थे इसलिए शादाब ने गाड़ी सबसे पहले एक शॉपिंग मॉल के सामने रोक दी और बाहर निकल आया। शहनाज़ की हिम्मत नहीं पड़ रही थी कि वो बिना बुर्के के बाहर निकले इसलिए शादाब ने अपनी अम्मी का हाथ पकड़ कर उसे बाहर खींच लिया। शहनाज़ बाहर निकलते ही बुरी तरह से शर्मा गई और उसकी दोनो आंखे फिर से एक बार बंद हो गई। शहनाज़ का हुस्न एक बार फिर से पूरी तरह से खिल उठा और अपनी हालत के बारे में सोचते हुए मंद मंद मुस्कुराने लगी।

शादाब एक बार फिर से अपनी अम्मी की हालत देख कर मुस्कुरा उठा। आज शहनाज़ का अंग अंग निखर कर चमक रहा हैं और उसका हुस्नों शबाब पूरे उफान पर था। शादाब ने एक योजना बनाते अपनी अम्मी का हाथ पकड़ लिया और आगे की तरफ बढ़ गया तो शहनाज़ की आंखे डर के मारे अपने आप खुल गई। सब लोग आंखे खोल फाड़ फाड़ कर उसकी तरफ देख रहे थे, ये सब देख कर जहां एक और उसे शर्म महसूस हुई वहीं शहनाज़ थोड़ा खुश हुई कि आज भी उसके हुस्न और बलखाते जिस्म में वो जादू हैं कि लोगो की निगाहें उस पर ठहर रही हैं। उसने थोड़ा सा मजा लेने के लिए अपने बेटे को छेड़ा और बोली:”

” राजा ये सब लोग मुझे ऐसे घूर घूर कर क्यों देख रहे हैं ?

शादाब अपनी अम्मी का हाथ जो कि उसके हाथ में था उसे हल्का दबाते हुए बोला:”

” अम्मी क्योंकि आपसे खूबसूरत इन्हे यहां कोई लग नहीं रही है इसलिए आपको देख कर अपनी आंखे ठंडी कर रहे है।

शहनाज़ के होंठ हल्की सी मुस्कान के साथ खुले और वो अपने बेटे से बोली:”

” लेकिन बेटा यहां तो एक से बढ़कर एक जवान लड़कियां हैं, मैं तो इनके सामने कुछ भी नहीं हु

शादाब अपनी अम्मी का हाथ सहलाते हुए उसकी आंखो में देखते हुए बोला:”

” अम्मी सिर्फ उम्र कम होने से कोई जवान नहीं होता, आपकी दिलफरेब खूबसूरती और कसे हुए शरीर के आगे ये आज कल की तितलियां पनाह मांगती है,और सबसे बड़ी बात अम्मी कच्चे फल की जगह लोग पके हुए मीठे फल खाने से ज्यादा खुश होते हैं !

इतना कहकर उसने एक बार बड़ी हसरत भरी निगाहों से अपनी अम्मी की गोल गोल चूचियो की तरफ देखा तो उसकी नजरो का आभास होते ही शहनाज़ शर्म के मारे फिर से लाल ही गई और अपने बेटे के हाथ में हल्का सा नाखून चुभाते हुए बोली:

” बेशर्म कहीं का, कुछ भी बोल देता है। तुझे घर जाकर ठीक करती हूं।

शादाब उसे छेड़ते हुए:”घर जाकर क्या आप मेरे साथ मसाला कुटोगी ?

शहनाज़ ने उसे एक बार घूर कर देखा और आगे बढ़ गई। वो दोनो एक साथ मॉल के अंदर घुस गए तो एस्केलेटर सीढ़ियां देख कर शहनाज़ के चेहरे पर हैरानी फैल गई और बोली:” बेटे ये सब क्या हैं ये कैसी सीढ़ियां है?

शादाब जानता था कि उसकी अम्मी ने ये सब पहली बार देखा हैं तो उसने समझाया:

” अम्मी ये अब ऑटोमैटिक सीढ़ियां होती हैं जो अपने आप उपर नीचे जाती रहती हैं।

इतना कहकर शादाब शहनाज़ का हाथ पकडकर जैसे ही एस्केलेटर पर पैर रखने लगा तो शहनाज़ डर गई और उसने अपना पैर वापिस खींच लिया। शादाब ये सब देखकर मुस्कुरा उठा और बोला:

” अम्मी आप डरों मत, जैसे ही मैं अपना पैर रखू, आप भी एकदम से अपना पैर रख देना।

शहनाज़ ने अपने बेटे की बात मानते हुए शादाब के पैर के साथ ही पैर रख दिया और उसके साथ ही एस्केलेटर पर सवार हो गई। लेकिन पैर रखते ही उसे एक झटका लगा और वो डर के मारे अपने बेटे से लिपट गई और देखने लगी कि एस्केलेटर में सीढ़ियां बन गई और दोनो उपर जाने लगे तो शादाब ने अपनी अम्मी को समझाया कि उसके साथ ही पैर हटाए तो दोनो ने एक एक साथ पैर हटा दिया तो एक हल्का सा झटका शहनाज़ को लगा लेकिन उसके बेटे ने उसका हाथ पकड़ रखा था इसलिए कोई दिक्कत नहीं अाई। शादाब और शहनाज़ उपर पहुंच गए थे लेकिन शादाब अपनी अम्मी के दिल से पूरी तरह से एस्केलेटर का डर निकालना चाहता था इसलिए उसे समझाते हुए वो एक बार फिर नीचे की तरफ जा रहे एस्केलेटर पर सवार हो हुए। इस बार पहले के मुकाबले शहनाज़ का आत्म विश्वास गजब का था और जल्दी ही वो दोनो नीचे पहुंच गए।

शादाब ने इस बार अपनी अम्मी को खुद अकेले ही जाने के लिए कहा तो उसने मना कर दिया तो शादाब उसके साथ चल पड़ा लेकिन उसने इस बार शहनाज़ का हाथ नहीं पकड़ा और वो अपने आप ही आराम से एस्केलेटर पर चढ़ गई। शहनाज मुस्कराई और अपने बेटे की तरफ देखा तो शादाब ने भी मुस्करा कर अपनी अम्मी का साथ दिया क्योंकि वो जानता था कि अब शहनाज़ का डर निकल चुका हैं। दूसरी तरफ शहनाज़ ऐसा महसूस कर रही थी मानो उसने बहुत बड़ी जंग जीत ली है। जल्दी ही वो एक कॉटन की दुकान में घुस गए और दादा दादी के लिए कपडे पसंद करने लगें। शहनाज़ ने अपने सास ससुर के लिए बहुत ही अच्छे डिजाइन के कॉटन के दो दो जोड़ी कपड़े लिए और कुछ चादर भी ले ली क्योंकि आगे गर्मियां आने वाली थी।

उसके बस शादाब अपनी अम्मी को एक लेडीज शॉप के सामने ले गया जहां बाहर ही एक से बढ़कर एक बेहतरीन ड्रेस लगी हुई जिन्हे देख कर शहनाज़ खुश हुई और बोली:”

” बेटा ड्रेस तो अच्छी हैं, लेकिन मेरे पास तो पहले से ही काफी कपडे हैं इसलिए रहने देते हैं।

शादाब :” अम्मी आपको ड्रेस मुझ पर उधार हैं क्योंकि उस दिन मसाला कूटते हुए आपका सूट फट गया था।

अपने बेटे की बात सुनते ही शहनाज़ की आंखों के आगे एक बार फिर से वो नजारा घूम गया और वो शर्म से गड़ गई। हिम्मत करके वो बोली:”
” नहीं बेटा कोई बात नहीं, मुझे नहीं चाहिए बस आदत सी नहीं रही नए कपड़ों की अब !

शादाब अपनी अम्मी का हाथ पकड़ कर सहलाते हुए बोला:

” इसका मतलब ये है कि आपको उस दिन अच्छा नहीं लगा और अब आप आगे से मेरे साथ मसाला नहीं कूटना चाहती ?

शहनाज़ की पलके एक बार फिर से हया से झुक गई और उसने अपने बेटे का दबाते हुए कहा:”

” नहीं बेटा, मैंने ऐसा तो कुछ नहीं कहा मेरे राजा !

शादाब खुश हो गया और अपनी अम्मी को लेकर अंदर स्टोर में घुस गया। अंदर एक से बढ़कर एक मॉडर्न ड्रेस लगी हुई थी जो कि जिनमें से कुछ घुटनो तक अा रही थी तो कुछ में कंधे बिल्कुल नंगे नजर अा रहे थे। शहनाज़ ने ऐसी ड्रेस पहली बार देखी थी इसलिए उसे बड़ी शर्म महसूस हुई। शहनाज़ मुंह नीचे किए हुए खड़ी थी और चोरी चोरी बीच बीच में ड्रेस की तरफ देख रही थी। ये देखकर सेल्स गर्ल को हंसी अा गई और बोली:”

” मैडम अगर इतनी शर्म करोगी तो ड्रेस कैसे खरीद पाओगी आप, देखिए ना आपकी गर्ल फ्रेंड कैसे शर्मा रही हैं?

सेल्स गर्ल ने अपने आखिरी शब्द शादाब के खूबसूरत चेहरे पर अपनी नजरे टिका कर कहे। शहनाज़ खुद को अपने बेटे की गर्ल फ्रेंड कहे जाने से हैरान हुई और बोली :”

” देखिए आपको गलतफहमी हो रही है, मैं इनकी गर्ल फ्रेंड नहीं हूं, मैं तो इसकी …..

इससे पहले की शहनाज़ की बात पूरी होती सेल्स उसकी बात काटते हुए बीच में ही बोल पड़ी :

” मैडम यहां आने वाली हर औरत कोई अपने आपको लडको की आंटी तो कोई भाभी कहती है, उफ्फ जब बेटे की उम्र के लड़के फसाने में शर्म नहीं करती तो फिर बताने मा कैसी शर्म ?

सेल्स गर्ल की बात सुनकर दोनो मा बेटे अवाक से खड़े रह गए, शहनाज की गुस्से से आंखे लाल होने लगी तो शादाब ने सेल्स गर्ल से बोला:”

” आप फालतू बात बंद कीजिए और ड्रेस दिखा दीजिए, अपने काम पर ध्यान दो

शादाब को भड़कते देख कर सेल्स गर्ल की फट गई क्योंकि उसे लग रहा था ये दोनो कपल हैं और रोमांस पर निकले हैं।

सेल्स गर्ल:” सोरी सर, माफ कीजिए, मैं आगे से ध्यान दूंगी, मैडम ये देखिए हमारे पास नए डिजाइन के एक से बढकर एक सूट हैं!!

शहनाज़ ने एक बार फिर से गुस्से से सेल्स गर्ल को घूरा तो शादाब ने उसे इशारे से मना कर दिया और शहनाज़ सूट देखने लगी। उसने दो सूट पसंद कर लिए। शादाब की नजर एक नई काले रंग की ड्रेस पर पड़ी जिसमे गले पर हल्की सी स्ट्रिप थी और कंधे पर बिल्कुल नंगी थी। शादाब ने शहनाज को वो ड्रेस दिखाते हुए कहा “

” अम्मी वो ड्रेस देखिए आप पर बहुत खूबसूरत लगेगी, ऐसा लग रहा हैं जैसे वो ड्रेस बनी ही आपके लिए हैं।

शादाब के मुंह से अम्मी शब्द सुनकर सेल्स गर्ल के होश उड़ गए। उफ्फ उससे सच में बहुत बड़ी गलती हो गई। उसने एक बार शहनाज की तरफ देखते हुए स्माइल दी और अपने दोनो कान पकड़ कर उठक बैठक करने लगी और बोली:”

” आंटी जी मैं सच में बहुत शर्मिंदा हू, मुझे नहीं पता था कि ये आपके बेटे हैं, अपनी बेटी समझ कर माफ कर दीजिए।

शहनाज उसे उठक बैठक करते देख कर हल्की सी मुस्कुराई तो सेल्स गर्ल को थोड़ा सुकून मिला और उसने वो काले रंग की ड्रेस शहनाज़ के सामने रख दी तो शहनाज़ उसे देखने लगी और शादाब से बोली:”

” बेटे ये कुछ ज्यादा छोटी लग रही हैं, मुझे बहुत शर्म आएगी क्योंकि मैंने कभी ऐसे कपड़े नहीं पहने हैं।

शादाब:” अम्मी अभी गर्मियां आने वाली हैं, आप इन्हे घर में पहन सकती हैं, बाहर मत पहनना और वैसे भी आज कल इनका ही फैशन चल रहा है।

शहनाज अपने बेटे की बात मान तो गई लेकिन ये सोच कर शर्मा रही थी कि इसे कैसे पहन पायेगी अपने बेटे के आगे। खैर उसने वो ड्रेस पसंद कर ली।

सेल्स गर्ल बोली:” मैडम हमारे पास गर्मियों के लिए कुछ स्पेशल नाइटी अाई हैं, रुकिए मैं आपको दिखाती हू।

सेल्स गर्ल ने कुछ नाइटी निकाल कर शहनाज के सामने रख दी तो शहनाज़ उन्हें देखते ही शर्मा गई। शादाब अपनी अम्मी को समझाते हुए बोला:

” अम्मी ये ड्रेस रात में सोते हुए पहनी जाती हैं, इसे आप अपने कमरे में सोते टाइम पहन सकती है और ये बिल्कुल कॉटन से बनी हुई हैं इसलिए गर्मी में सही रहेगी।

शहनाज़ ने बड़ी मुश्किल से नाइटी की तरफ देखा और बोली:”

” ठीक हैं बेटा, रात में पहन लिया करूंगी बस।

शादाब ने अपनी अम्मी के लिए अपनी पसंद से एक गहरे गुलाबी रंग की नाइटी खरीद ली क्योंकि वो जानता था कि उसकी अम्मी को गुलाबी रंग बहुत पसंद हैं।

शहनाज जैसे ही पैसे देने लगी तो शादाब ने मना कर दिया और अपना एटीएम आगे सेल्स गर्ल की तरफ बढ़ा दिया।

सारा सामान पैक हो गया और वो दोनो उस दुकान से बाहर निकल गए। शहनाज़ बोली:”

” बेटे तेरे पास कहां से इतने पैसे आए ? बता मुझे?

शादाब अपनी अम्मी की तरफ देख कर बोला:” अम्मी में ट्यूशन पढ़ाता था बस उससे ही पैसा बचाया था।

शहनाज़ खुश हो गई और बोली:

” वाह मेरा बेटा तो सचमुच बड़ा समझदार हो गया हैं।

शादाब अपनी अम्मी के गाल को हल्का सा सहलाते हुए बोला:”

” और अम्मी वैसे ही आपका सूट मेरी वजह से फटा था इसलिए एक दोस्त होने के नाते मेरा फर्ज़ बनता था।

शहनाज़ अपने बेटी की चालाकी पर शर्मा गई और दोनो आगे बढ़ गए। वो दोनो एक मल्टी प्लेक्स के सामने से गुजरे तो शहनाज़ बोली :”
” बेटा यहां क्या होता है? इतनी भीड़ क्यों है यहां पर?

शादाब:” अम्मी ये सिनेमा हॉल हैं और अंदर मूवी चलती हैं, ये सब लोग उसके लिए ही टिकट खरीद रहे हैं ।

शहनाज़ थोड़ा सा उदासीन अंदाज़ में बोली :” अच्छा बेटा ठीक हैं,

शादाब ने अपनी अम्मी से पूछा :”

” अम्मी क्या आप फिल्म देखना चाहती हो, आज तक मैने भी हॉल में नहीं देखी ?

शहनाज़ अपने बेटे की बात सुनकर खुश हो गई और फिल्म देखने के लिए हान कर दी। दोनो मा बेटा टिकट लेकर सिनेमा हाल में घुस गए और पीछे की सीट पर बैठ गए। थोड़ी देर बाद फिल्म शुरू हो गई जो कि एक बी ग्रेड फिल्म थी जिसके बारे में दोनो मा बेटे को कोई अंदाजा नहीं था।

थोड़ी देर बाद मूवी शुरू हो गई और बड़े पर्दे पर स्क्रीन आने लगी तो शहनाज पूरी तरह से हैरान हो गई ये देखकर।

शहनाज़:” बेटा यहां इतने बड़े दिखते हैं सब, देखो कितना बड़ी दीवार पर फिल्म चल रही हैं?

शादाब:” हां अम्मी , आज कल ऐसा हो होता हैं, इसलिए सब लोग यहां देखने आते हैं।

शहनाज़ अपने बेटे की बात सुनकर खुश हुई कि उसका बेटा कितना समझदार हैं, हर बात का हैं इसे। मूवी शुरू हुए अभी कुछ मिनट बीत गए थे। बी ग्रेड मूवी थी और एक ऐसी औरत की कहानी थी जिसका पति पैसे कमाने के लिए बाहर चला गया था और वो अकेली बहुत प्यासी थी। एक दिन उसके घर में एक लड़का जिसने अभी कॉलेज में एडमिशन लिया था किराए पर रहने लगा। लड़का एकदम जवान और खूबसूरत था और देखते ही देखते वो औरत जिसका नाम सविता था उस लड़के पर डोरे डालने लगीं। शहनाज़ बड़ी हैरानी से उस मूवी को देख रही थी और साथ ही साथ उसकी नजर आगे बैठे हुए लोगो पर भी जा रही थी।
एक दिन जब वो उस औरत ने लड़के को पटा लिया और दोनो के बीच रोमांस शुरू हो गया।

लड़का बहुत समझदार था और सेक्स के बारे में काफी जानता था इसलिए उसने रात को सविता को अपनी बांहों में भर लिया तो सविता भी मस्ती से उससे चिपक गई और उन दोनों के होंठ एक दूसरे से जुड़ गए। ये सब देख कर शहनाज़ की भी आंखे गुलाबी हो गई। उसने एक बार अपने बेटे की तरफ जो कि बहुत ध्यान से मूवी देख रहा था। शहनाज भी मूवी देखने लगी और अब लड़के ने अपनी जीभ सविता के मुंह में घुसा दी और चूसने लगा तो शहनाज़ को अजीब लगा, तभी उसकी नज़र अपने सामने बैठे हुए लोगो पर जाने लगी तो उसने देखा कि उसकी ही उम्र की कई औरतें अपने साथ बैठे कम उम्र के लड़के को किस कर रही हैं और लड़का जोश में आकर उसकी ब्रा में हाथ डाल कर उसकी चूची सहला रहा था, ये सब देखकर शहनाज़ के जिस्म ने एक आग भर गई और उसकी सांसे भारी होने लगीं। उसके मुंह से सांसों के साथ आग की लपटे सी निकलने लगी और उसका गला सूखता चला गया। उसकी। आग एक कदर भड़क चुकी थी कि एसी में बैठे होने के बाद भी उसके माथे पर पसीना साफ दिखाई दे रहा था। तभी सामने स्क्रीन का रंग बदल रहा था जिससे उसकी नजर उस औरत पर पड़ी तो उसे याद आया कि मैंने इसे कहीं देखा है। दिमाग पर जोर दिया तो याद अा गया कि ये कमीनी तो उस दिन पार्टी में अाई थी और मेरे बेटे के बारे में गंदी गंदी बाते कर रही थी और शादाब का नंबर भी लेकर गई थी।

अब तक वो औरत जिसका नाम गुलशन था लड़के के लंड को पेंट के उपर से ही सहला रही थी। शहनाज़ सामने चलती हुई मूवी को भूलकर उस औरत को देखने लगी तो शादाब की नजरे अपनी अम्मी की नजरो का पीछा करने लगी तो उसे एहसास हो गया कि उसकी अम्मी क्या देख रही है।

उस औरत ने लड़के की पेंट की जिप खोलकर उसका लंड बाहर निकाल लिया और हाथ में लेकर सहलाने लगी। शहनाज़ ने शर्म के मारे नजरे हटा ली लेकिन फिर से उसकी नजरे अपने आप लंड पर चली गई। आज शहनाज अपनी ज़िन्दगी में दूसरा लंड देख रही थी। कोई 5 इंच के आस पास की लंबाई, मोटाई बहुत कम और एक दम काला मरियल सा लंड जो ठीक से खड़ा भी नहीं हो रहा था उसे देखकर आज शहनाज़ को एहसास हुआ कि अगर ये लंड हैं तो को उसके बेटे के पास हैं वो क्या हैं?

उफ्फ इससे तो दोगुने से भी ज्यादा मोटा हैं, लंबा भी बहुत ज्यादा है और कठोर तो एकदम मूसल की तरह से हैं। अपने बेटे के बारे में सोचते ही शहनाज़ पूरी तरह से सुलग उठी और उसकी चूत भीगना शुरू हो गई। शहनाज़ ने अपने बेटे को एक नजर देखने के लिए जैसे ही नजरे उठाई तो उसकी नजर स्क्रीन पर पड़ी जहां वो लड़का सविता की चूची नंगी कर चुका था और कभी दबा रहा था तो कभी चूस रहा था। शहनाज़ से बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने अपनी जाघो को आपस में रगड़ना शुरू कर दिया और एक हाथ अपने बेटे के हाथ पर रख दिया। शादाब ने एक दम अपनी अम्मी के हाथ को अपने हाथ में भर लिया और हल्का हल्का दबाने लगा तो शहनाज़ का पूरा जिस्म कांपने लगा और उसने अपने भारी हो चले सिर को अपने बेटे के कंधे पर टिका दिया। शहनाज़ ने देखा कि उस औरत गुलशन ने लड़के की गोद में झुकते हुए अपने मुंह में उसका लंड भर लिया और मस्ती से चूसने लगीं। शहनाज़ को ये सब देखकर बहुत अजीब लगा और उसने आंखे बंद कर ली और अपनी जांघो को और तेजी से रगड़ने लगीं। तभी उसे शादाब का हाथ अपने बालो में घूमता हुआ महसूस हुआ तो उसकी आंखे एक बार फिर से खुल गई। उसने देखा कि वो औरत बार बार इस लड़के के लंड को चूस चूस कर खड़ा करने की कोशिश कर रही थी लेकिन लंड इतना कमजोर था कि खड़ा नहीं हो पाया और उस औरत को गुस्सा अा गया तो उसने जोर से एक थप्पड़ उस लड़के को जड़ दिया तो लड़का दर्द से कराह उठा और उसकी आह निकल गई

” आह अम्मी , थप्पड़ क्यों मारा मुझे आपने?

गुलशन गुस्से से फुफकारती हुई:”

” कमीने के लंड में दम नहीं है और सपने देखता है अपनी मा चोदने के, मेरा दूध पीकर भी उसका कर्ज नहीं चुका पाया साले!

वो औरत उस लड़के को गंदी गंदी गाली देने लगी और तभी इंटरवल हो गया। सब लोग बाहर की तरफ जाने लगे तो शहनाज़ भी जल्दी से अपने बेटे का हाथ पकड़कर बाहर की तरफ चल पड़ी क्योंकि वो उस रण्डी औरत का साया भी अपने बेटे पर नहीं पड़ने देना चाहती थी। दोनो बाहर अा गए और शहनाज़ ने को कुछ अंदर देखा था वो उस पर अब तक यकीन नहीं कर पा रही थी।

एक एक बज गया और दोनो को भूख लगने लगी थी इसलिए शहनाज़ बोली:”
” बेटा अब मुझे भूख लगी हैं, खाना कहां खाएंगे ?

शादाब अपनी अम्मी को लेकर एक फ्लोर और ऊपर चला गया जहां पर एक शानदार होटल था। शादाब ने वहां जाकर अपनी अम्मी के पसंद से खाने का आर्डर दिया और जल्दी ही खाना लग गया तो दोनो मा बेटे खाना खाने लगे। शहनाज़ को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी उसे इतने शानदार होटल में खाना खाने के लिए मिलेगा। सब सब्जी एक से बढ़कर एक, आज शहनाज़ के बोले बिना ही उसकी हर खुशी का ख्याल उसका बेटा रख दिया था। खाना खाने के बाद शहनाज़ ने अपना कपडे का बैग खोल कर उसमें से एक टिफिन निकाल लिया जो वो घर से लेकर अाई थी। शादाब उत्सुकतावश उसकी तरफ देखने लगा और शहनाज़ ने प्यार से वो टिफिन खोला तो देशी घी की खुशबू फैल गई।

शादाब ये देखकर अपनी अम्मी की तरफ स्माइल दिया और बोला:
” ओह मेरी प्यारी अम्मी मेरे ए देशी घी का हलवा चोरी से छिपा कर लाई है। लव यू अम्मी ।

शहनाज़ अपने बेटे की खुशी देखकर खुश हुई और अपने बेटे को सरप्राइज देने के लिए ही तो वो हलवा छुपा कर लाई थी।

शहनाज़ अपने बेटे को हलवे का टिफिन देने के लिए थोड़ा आगे को हुई तो उसके पैर शादाब के पैरो पर जा लगे। टिफिन उसे देकर वो पीछे हो गई लेकिन पैर उसके बेटे के पैरो पर ही रखे रहे।
शादाब ने एक चम्मच हलवा खाया और अपनी जीभ से चम्मच चाटते हुए बोला:”

” अम्मी सचमुच बहुत टेस्टी बना हैं और घी तो कुछ ज्यादा ही डाल रखा हैं आपने इसमें, अपने बेटे को क्यों इतना ताकतवर बनाना चाहती हो?

शहनाज़ अपने पैर से उसका पैर सहलाते हुए बोली:”

” मैं चाहती हूं कि मेरा बेटा दुनिया का सबसे ताकतवर बेटा बने, और घर के हर काम ने मेरी मदद करे ?

शादाब अपनी अम्मी के पैर को अपने पैर की उंगलियों से सहलाते हुए बोला:” अम्मी सब काम में तो मसाला कूटना भी अा जाएगा ?

अपने बेटे की बात सुनकर शहनाज़ के गाल फिर से लाल होने लगे और उसके पैर में नाखून दबाते हुए बोली:”

” ठीक हैं, मसाला भी कूट देना, लेकिन ध्यान रखना अगर पिछली बार की तरह मेरी कमर कूट दी तो तेरी खैर नहीं ?

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनकर खुश हो गया और अपने पैर से अब थोड़ा उपर आते हुए उसके घुटने सहलाने लगा और बोला:” फिक्र मत करो आप अम्मी, अगर कमर कूट भी गई तो आपका बेटा फिर मालिश कर देगा आपकी।

शहनाज़ ने उसे जोर से घूरकर देखा तो शादाब ने अपने कान पकड़ लिए। उसने देखा कि शादाब हलवा धीरे धीरे खा रहा है इसलिए उसे मौका मिल गया और शहनाज़ उसे डांटने के लिए बोली :”

” जल्दी से खा लिया तू देशी घी से बनी चीज़े नहीं तो बाद में थप्पड़ खाने पड़ेंगे।

शहनाज के मुंह जल्दी से ये बात निकल तो गई लेकिन जैसे ही उसे
सब याद आया तो शर्म के मारे उसकी पलके झुक गई और मुंह नीचे करके हल्की सी मुस्कुरा उठी। शादाब ने जैसे ही अपनी अम्मी की बात उसने बचे हुए हलवे को एक चम्मच में भरते हुए खा लिया और खड़ा होते हुए शहनाज़ के पीछे आकर उसके दोनो कंधे थाम लिए। शहनाज़ की तो जैसे सांसे रुक सी गई और जिस्म कांप उठा क्योंकि सभी लोग इधर ही देख रहे थे।

शादाब अपने चेहरे को थोड़ा नीचे करते हुए अपनी अम्मी के कान के बिल्कुल करीब ले आया और उसके कंधो पर दबाव दबाते हुए धीरे से बोला:”

” अम्मी थप्पड़ की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि मूसल और केले में बहुत फर्क होता हैं।

शादाब की बात सुनते ही शहनाज़ का रोम रोम सुलग उठा क्योंकि वो जानती थी कि इसके बेटे का लंड सच में मूसल ही तो हैं। थोड़ी देर वो गहरी गहरी सांस लेती रही और बोली:”

“बेटा सब देख रहे हैं, हाथ हटा ले अपने मुझे बहुत शर्म अा रही है।

शादाब ने अपनी अम्मी की बात मानते हुए हाथ हटा लिए और दोनो होटल से बाहर निकल गए। वो मॉल में घूम ही रहे थे कि तभी शादाब की नजर एक ब्यूटी पार्लर पर पड़ी तो अपनी अम्मी को लेकर अंदर चला गया और उसे समझाने लगा।

शहनाज़:”ना राजा मुझे नहीं मेक उप करवाना, मैं तो जैसी हूं ऐसे ही ठीक हूं।

शादाब अपनी अम्मी को समझाते हुए बोला:” प्लीज़ एक बार बस, उसके बाद आप खुद को आईने में देखकर खुद ही शर्मा जाओगी! प्लीज़ मान जाओ।

शहनाज़ आखिरकार अपने बेटे की जिद के आगे झुक गई और एक लड़की शहनाज़ को अंदर ले गई। ब्यूटी पार्लर वाली लेडी ये सब देख रही थी और बोली:

“मैडम आप बहुत खुश नसीब हैं जो इतना प्यार करने वाला पति मिला हैं, यहां तो अक्सर ये ही होता है कि औरत जिद करती हैं और पति मना कर देता है।

शहनाज़ ने एक बार उसकी तरफ देखा और मुंह नीचे कर लिया तो लेडी आगे बोली :”

” लगता हैं मैडम आपका और आपके पति का झगड़ा चल रहा है, उफ्फ इतने खूबसूरत पति से नहीं लड़ना चाहिए क्योंकि औरतें ऐसे लोगो पर जान छिड़कती हैं। आपके तो एकदम चॉकलेटी हीरो जैसे हैं।

शहनाज़ इस बार उस औरत की तरफ देख कर मुस्कुरा उठी तो उस औरत ने अपना काम शुरू कर दिया। उसने सबसे पहले शहनाज़ की थ्रेडिंग करी और उसके सिर के बालो को पूरे उपर की तरफ फोल्ड करते हुए शानदार कट किया । फिर उसके चेहरे को अच्छे से साफ किया और एक 3डी क्रीम से उसका फेसियल किया जो कि बहुत महंगी थी और इसकी सबसे बड़ी खास बात ये थी कि एक एक हफ्ते एक रोज लड़की पहले से ज्यादा ग्लो करती थी। उसकी आंखो में गहरा काला काजल लगाया। फिर उसने शहनाज़ के पर जिस्म को अच्छे से साफ किया और परफ्यूम लगाया तो शहनाज़ एक फूल की तरह खिल उठीं। उसका हर एक अंग महक रहा था। फिर उसने शहनाज़ के होंठो पर लिपस्टिक लगाई जो कि डार्क महरूम रंग की थी तो शहनाज़ के होठ खिल उठे।

उसके बाद उसने शहनाज को शीशा दिखाया तो सच में खुद को देखते ही शहनाज़ यकीन ही नहीं कर पाई कि वो अपना चेहरे देख रही हैं।एक दम खूबसूरत किसी ताजे खुले हुए गुलाब की तरह। अपने चमचमाते रूप सौंदर्य पर शहनाज खुद ही मोहित हो गई और ब्यूटी पार्लर वाली लेडी का शुक्रिया अदा किया। लेडी ने उसे एक शानदार मेक अप किट जिसमे कई तरह की क्रीम और एक से बढ़कर एक लिपस्टिक थी। उसके बाद उसने घंटी बजा दी जो कि शादाब के लिए थी तो शादाब अंदर घुस गया। उसने देखा ही शहनाज़ को देखा तो बस देखते ही रह गया।

लेडी:” लीजिए सर आपकी मैडम तैयार हो गई है।

जब शादाब लगातार अपनी अम्मी को देखता रहा तो शहनाज को खुशी के साथ साथ शर्म भी महसूस हुई और वो शादाब की आंखो के आगे चुटकी बजाते हुए बोली:”

” कहां खो गए मेरे राजा ?

शादाब ने खुद पर से काबू खो दिया दोनो फिर से एक दूसरे की आंखो में खो गए। शादाब ने उस लेडी के सामने ही शहनाज को को पीछे से उसके गले में हाथ डाल कर अपनी तरफ खींच लिया। उसका दूसरा हाथ जो कि शहनाज़ के पेट पर था उस पर शहनाज़ ने अपन हाथ रख दिया।

शादाब ने थोड़ा नीचे झुकते हुए शहनाज़ के सेब की लाल सुर्ख हो चुके गाल को चूम लिया तो मस्ती से शहनाज की आंखे बंद हो गई और अपने पेट पर रखे बेटे के हाथ को सहलाना शुरू कर दिया।

” अरे कुछ तो शर्म करो तुम दोनो , अगर तुम्हारी मैडम सुंदर हैं तो इसका ये मतलब नहीं कि उसे सबके सामने ही प्यार करना शुरू कर दो, घर जाकर जी भर कर प्यार कर लेना।

जैसे ही दोनो के कानों में उस लेडी की बार पड़ी तो दोनो जैसे होश में आए और लगा हो गए। शहनाज़ को अब बहुत शर्म लग रही थी लेकिन कहीं ना कहीं उसका आत्म विश्वास बढ़ता जा रहा था।

दोनो बिल चुका कर मॉल से बाहर अा गए और खरीदा हुआ सब सामान गाड़ी के अंदर रख दिया। उसके बाद वो गाड़ी लेकर आगे बढ़ गया और एक मिठाई की दुकान के सामने गाड़ी रोक दी और अपने दादा दादी जी के लिए काफी सारी बेहतरीन मिठाई लेने के लिए बाहर अा गया। शहनाज़ कार में लगे शीशे में अपने चांद की तरह खिले हुए हुस्न को बार बार देख रही थीं। शहनाज़ जानती थी कि उसके बेटे ने आज उसे एक नया जीवन सा दे दिया हैं बिल्कुल उसके सपनो के राजकुमार की तरह। वो अपने बेटे पर फिदा होती चली गई और आज पहली बार उसके दिल में अपने लिए के लिए प्यार जाग उठा जो एक मा का प्यार तो बिल्कुल भी नहीं था।

शादाब मिठाई लेकर अा गया और घर की तरफ दिया। गाड़ी सड़क पर दौड़ रही थी और शहनाज़ ने अपने बेटे का हाथ चूम लिया और उसकी आंखो में देखते हुए बोली:”

” थैंक्स राजा, तुमने सचमुच मुझे एक ही दिन में बदल दिया, ऐसा लग रहा हैं कि मैं एक सपना देख रही हूं।

शादाब ने अपनी अम्मी की तरफ देखते हुए कहा:”

” अम्मी वो तो एक दोस्त होने के नाते मेरा फर्ज़ था कि आपका खूब ध्यान रखूं।

शहनाज पहली बार उसकी आंखो में पूरे आत्म विश्वास के साथ देख रही थी और बोली :”

” जब तू मुझे अपनी सच्ची दोस्त मानता हैं तो आज के बाद तू मुझे अम्मी नहीं बल्कि नाज़ कहकर बुलाएगा। वैसे ही ब्यूटी पार्लर वाली भी मुझे तेरी मैडम ही समझ रही थी गलती से ।

इतना कहकर उसने अपने बेटे का गाल सहला दिया। शादाब सचमुच बहुत खुश था क्योंकि उसकी अम्मी आज खुल कर ज़िदंगी जी रही थी। उसने एक हाथ आगे बढ़ा कर शहनाज़ का हाथ थाम लिया और चूमते हुए बोला:”

” ठीक है नाज मुझे मंजूर हैं। लेकिन सबके सामने मैं आपको अम्मी ही बुलाऊंगा।

शहनाज़ ने जैसे ही अपने बेटे के मुंह से नाज़ सुना तो उसके दिल में घंटियां सी बजने लगी और उसकी सांसे तेज हो गई। उसे लगा जैसे उसके बेटे ने नहीं बल्कि उसके सपने के राजकुमार ने उसका नाम लिया हैं। शहनाज़ अपने बेटी की समझदारी पर बहुत खुश हुई और उसे एक स्माइल दी।

थोड़ा आगे जाकर एक बहुत बड़ा पार्क था जिसमें लोग घूमने के लिए आते थे इसलिए शादाब ने गाड़ी उस पार्क के बाहर रोक दी और अपनी अम्मी को लेकर अंदर चला गया। दोनो आज एक मा बेटे की तरह नहीं बल्कि एक लवर किर तरह घूम रहे थे।

पार्क के साइड में एक झूला लगा हुआ तो शादाब ने अपनी अम्मी को उसमे बैठने का इशारा किया तो शहनाज़ किसी छोटे बच्चे की तरह खुश होती हुई उसमें बैठ गई और शादाब ने अपनी अम्मी के पीछे आते हुए उसे झटके देना शुरू कर दिया तो झूला आगे पीछे जाने लगा और शहनाज की खुशी देखते ही बनती थी। जैसे ही झूला शादाब के पास आता तो शहनाज़ उसे एक स्माइल देती और शादाब उसकी कमर पकड़ कर फिर से आगे झटका देता जिससे झूला आगे चला जाता। शहनाज़ को अपनी कमर पर अपने बेटे के हाथ बहुत अच्छे महसूस हो रहे थे। धीरे धीरे झूले की ऊंचाई बढ़ने लगी तो शहनाज़ की नजर दूर दूर तक जाने लगी और उसने देखा कि एक झाड़ी के दूसरी तरफ एक लड़की पड़ी हुई थी जिसके उपर के लड़का चढ़ कर उसके नंगे बूब्स दबा रहा था। ये सब देख कर शहनाज़ की सांसे तेज होने लगी और उसका चेहरा शर्म से लाल होने लगा । वो उन्हें ठीक से देखने के लिए हलका सा पीछे को हुई जिससे उसका बेटा उसे जोर से धक्के दे सके और इस चक्कर में उसकी गांड़ आधे से ज्यादा झूले से बाहर अा गई। शादाब ने जैसे ही उसे धक्का देने के लिए पकड़ा तो उसके हाथ मे शहनाज़ की थोड़ी सी गांड़ अा गई और दोनों मा के इस एहसास से तड़प उठे। जैसे ही शहनाज़ आगे की तरफ गई तो उसे लड़की की चूची चूसता वो लड़का दिखाई दिया। शहनाज़ की हालत एक बार फिर से खराब होने लगी और मस्ती में उसकी गांड़ थोड़ा सा और ज्यादा पीछे को निकल गई जिससे उसके आधे से ज्यादा गांड़ शादाब के हाथो में जाने लगी। शहनाज़ की चूत एक बार फिर से गीली होने लगी तभी झूले की रस्सी ढीली होने लगी तो शादाब ने एक दम तेजी से अपनी अम्मी को उतार लिया और एक झटके के साथ झूला टूट कर दूर जा गिरा। ये सब देख कर शहनाज़ बुरी तरह से डर गई और शादाब से चिपक गई तो शादाब उसकी कमर सहलाते हुए उसे तसल्ली देने लगा और बोला “

।” नाज जब तक आपका ये दोस्त ज़िंदा हैं आपका बाल भी बांका नहीं होने देगा। शहनाज़ खुशी होते उसे उससे लिपट गई।

उसके बाद गाड़ी चल पड़ी और जल्दी ही दोनो घर पहुंच गए। रास्ते में ही शहनाज़ ने बुर्का पहन लिया था। घर जाकर शहनाज़ ने बिना बुर्का हटाए सास ससुर को सलाम किया और उन्हें कपडे उन्हें दिखाने लगीं। दोनो बहुत खुश हुए और शहनाज़ उपर चली गई क्योंकि अगर गलती से भी वो उसका मुंह देख लेते तो सजी धजी देख कर पता नहि क्या सोचते। शादाब अपने दादा दादी जी के पास बैठ गया और उन्हें मिठाई खिलाने लगा जी उन्हें भूटी पसंद अा रही थी।

शहनाज़ ने उपर जाते ही अपना बुर्का उतार फेंका और जैसे ही अपने आपको शीशे में देखा तो फिर से खुश हो गई। उसने आज के खरीदे हुए कपडे निकाले और अलमारी में रखने लगीं। तभी उसकी नजर पिंक रंग की नाइटी पर पड़ी तो उसने सोचा ये तो रात में पहनी जाती हैं इसलिए उसने अपना सूट सलवार उतार दिया और मिट्टी पहन ली। ये एक बहुत बारीक धागे से बनी हुई थी और काफी बाद तक पारदर्शी थी जिसमे उसके जिस्म का एक एक कटाव साफ नजर आ रहा था।

अपने आपको इस सेक्सी नाइटी में देखकर उसकी आंखो में लाल डोरे तैरने लगे और उसकी सांस फिर से तेज होने लगी। आज सुबह से उसके बेटे की वजह से उसका जिस्म सुलग रहा था और उसकी आंखो के आगे एक के बाद फिल्म के सीन घूमने लगे तो उसकी सांस एक बार फिर से तेज होने लगी। उसने अपनी चुचियों का हल्का हल्का सहलाना शुरू कर दिया और एक हाथ अपने आप उसकी टांगो के बीच में चला गया। उसकी चूत पुरी तरह से भीगी हुई थी और वो अपनी चूत को सहलाने लगी। मस्ती से उसकी आंखे बंद हो गई, लेकिन आज उसे उस दिन जितना मजा नहीं आया जब वो अपने बेटे के साथ मसाला कूटते हुए अपनी चूत सहला रही थी। क्या मुझे आज फिर से अपने बेटे के साथ मसाला कूटना चाहिए ये सोचते ही शर्मा गई और चूचियां सांसे तेज होने से उपर नीचे होने लगी। उफ्फ कमीने ने कहीं अगर आज भी मेरी कमर को कूट दिया तो, लेकिन उस दिन मालिश करके सब ठीक कर दिया था और जैसे ही उसके नजर उसकी नाइटी के ढीले गए पर गई तो उसे यकीन हो गया कि आज उसके कपड़े भी फटने से बच जाएंगे। शहनाज़ अपने आपको पूरी तरह दिमागी और शारीरिक तौर पर मसाला कूूटने के लिए तैयार कर चुकी थी। उसकी चूत तो जैसे आज सुबह से ही तैयार थी और अब पूरी तरह से गीली हो गई थी। मेरे बेटे ने मेरे लिए इतना कुछ किया हैं तो मुझे उसके साथ मसाला जरूर कूटना चाहिए। लेकिन नाइटी की तरफ देखते हुए उसे शर्म आने लगी तो उसने कमरे में सिर्फ एक लाल रंग का नाइट बल्ब जला छोड़ दिया और औखली लेने के लिए चली गई। उसने किचेन से कुछ बहुत ज्यादा टाईट और मजबूत सूखे मसाले निकाले और उन्हें औखली में डाल कर अपने बेटे का इंतजार करने लगी।

जैसे ही शादाब उपर आया तो शहनाज़ के दिल की धड़कन अपने आप बढ़ने लगी और चूचियों के निपल्ल टाइट होने लगे। वो अपने रूम में गया और अपने कपड़े उतार कर एक इलास्टिक वाला पायजामा पहना और अपनी अम्मी के कमरे की तरफ चल पड़ा। जैसे वो कमरे में घुसा तो उसे शहनाज़ नीचे फर्श पर बिछी कालीन पर मसाला कूटती हुई नजर आईं।

शहनाज़ उसे देखते ही बोली:”

” अा गया मेरा राजा , देख ना मुझसे ये मसाला नही कूट रहा हैं इसलिए तू अपनी नाज़ की मदद कर दे।

शादाब ने ध्यान से देखा तो उसकी अम्मी उसे नाइटी में नजर आईं लेकिन कमरे में हल्की रोशनी होने के बाद भी उसे सब साफ नजर आ रहा है। वो जोश में अा गया और अपनी अम्मी के पीछे बैठ गया और बोला :”

” अम्मी आज आप फिर से बड़ा मूसल ले अाई, आपको बड़े मूसल ज्यादा पसंद हैं क्या?

शहनाज़ की हालत खराब हो गई और बोली:”
” बेटा मोटे मूसल से मसाला अच्छे से बारीक कूट जाता हैं लेकिन देख ना राजा ये कितना ज्यादा सूखा हुआ और ज़िद्दी मसाला है जो कूट ही नहीं रहा था। तू ही देशी घी की ताकत दिखा दे आज !!

शहनाज ने उसे खुला इशारा कर दिया कि वो पूरी ताकत के साथ आज उसके मजे ले सकता हैं।

शादाब उसकी गरदन पर गर्म सांसे छोड़ता हुआ बोला:”

” अगर मसाले के साथ साथ कमर भी कूट गई तो फिर मुझे मत कहना!

शहनाज बोली:” अगर गलती से कमर कूट भी गई तो मालिश कर देना मेरे राजा, ठीक हो जाएगी।

शादाब समझ गया कि आज की रात उसकी अम्मी को कोई ऐतराज़ नहीं है तो उसने अपना एक हाथ शहनाज़ के नंगे कंधे पर टिका दिया तो शहनाज़ के जिस्म में एक तेज झंकार सी दौड़ गई। शादाब ने थोड़ा और आगे होते हुए उसके कंधे पर अपना सिर रखते हुए उसका हाथ पकड़ लिया जिसने मूसल था। शादाब का लंड जो कि पूरी तरह से खड़ा हो चुका था शहनाज़ की कमर से सट गया तो शहनाज़ का जिस्म इस एहसास से कांप उठा। शादाब ने शहनाज के हाथ को पुरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया और उसने एक झटके के साथ मूसल को उपर उठाया और जोर से औखली में दे मारा। जैसे ही मूसल घुसा शादाब का लंड उसकी अम्मी की कमर पर जोर से लगा और शहनाज़ के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी। झीनी नाइटी होने के कारण आज लंड का एहसास बिल्कुल सही तरह से हुआ और शादाब ने अपनी अपनी नजरे उसकी चूचियों पर टिका दी और तेज़ी से मूसल ठोकने लगा जिससे शहनाज़ की चूचियां पूरी तरह से उछलने लगी और ढीला गला होने के कारण आधे से ज्यादा बाहर आने लगी। शादाब की आंखे खुशी से चमक उठी और उसने अपना मुंह थोड़ा और नीचे झुका दिया और तगड़ा मूसल औखली में ठोकने लगा जिससे शहनाज़ की एक चूची पूरी तरह से उछल कर बाहर आ गई और शादाब ने निप्पल पर अपनी जीभ फेरते हुए एक लंड का तगड़ा धक्का उसकी कमर में लगा दिया। जैसे ही शहनाज़ के निप्पल पर शादाब के होंठ लगे तो उसके मुंह से एक जोरदार मस्ती भरी सिसकी निकल पड़ी और लंड के झटके के कारण वो आगे को होते हुए पेट के बल कालीन पर जा गिरी जिसका नतीजा ये हुआ कि नाइटी उपर आप उपर खिसक गई और उसकी गांड़ बस अब पेंटी में थी। शादाब भी उसके उपर गिर गया और लंड का झटका अब उसकी गांड़ पर लगा जिससे दोनो मा बेटे की आंखे मस्ती से बंद हो गई। औखली वहीं गिर गई थी और मूसल पास में ही पड़ा हुआ था। शहनाज़ ने हाथ बढ़ा कर मूसल को उठा लिया अपने बेटे की तरफ उसकी आंखो में देखते हुए मूसल को औखली में घुसा दिया तो शादाब ने अब अपनी अम्मी के उपर पूरी तरह से कब्जा जमा लिया और उसकी गर्दन के पास मुंह रखते हुए जोर जोर से मूसल मारने लगा। शहनाज को उसके नंगे चूतड़ों पर धक्के मारता हुआ उसके बेटे का लंड उसे बहुत मजा दे रहा था। इसलिए उसने अपनी गांड़ हल्का सा उपर की तरफ उभार दी।

शहनाज़ अपने बेटे की तरफ देख कर बोली:”
उफ्फ बेटा देख ना कितना जिद्दी मसाला हैं, कूट ही नहीं रहा, आज तो जो मन करे कूट दे लेकिन ये मसाला जरूर कूटना चाहिए आह

शादाब ने अपनी अम्मी की तरफ से पूरी सहमति पाकर उसकी गान्ड को पूरी तरह से ठोकना शुरू कर दिया हर झटके पर शहनाज़ की गांड़ अपने आप उछलने लगी। मूसल तो बस कभी कभी औखली में घुस रहा था, और शहनाज़ मसाले के बहाने अपनी गांड़ कुटवा रही थी। शहनाज़ की चूत पुरी तरह से पानी पानी हो गई थी और उसकी खुजली पूरी तरह से बढ़ गई थी। शहनाज़ ने अपनी गांड़ को थोड़ा सा ऊपर उठा दिया और एक हाथ को अपनी चूत पर ले गई जिससे अब शादाब का बिल्कुल उसकी के छेद पर धक्के मार रहा था। अपनी अम्मी को अपनी चूत सहलाते देखकर शादाब की भी हिम्मत बढ़ गई और उसने एक झटके के साथ लंड को बाहर निकाल लिया। शादाब ने अपने होंठ शहनाज़ की गरदन पर रख दिए और चाटने लगा। शहनाज़ अब पूरी तरह से मस्त हों गई और जोर जोर से सिसकी लेने लगी। मूसल उसके हाथ में जरूर था लेकिन अब तो बस औखली के अंदर पड़ा हुआ था। शादाब ने अपने नंगे लंड पहला का जोरदार धक्का शहनाज़ के चूतड़ों पर मारा शहनाज़ नंगे लंड को महसूस करते ही कांप उठी।

” हाय मेरे राजा , ऐसे ही कूट उफ्फ कितना मोटा मसाला है देख ना?

शादाब:”हाय मेरी नाज़, मैं सारा मसाला कूट दूंगा क्योंकि मुझे आपसे थप्पड़ नहीं खाना है

शादाब की ये थप्पड़ वाली बात सुनते ही शहनाज़ का जिस्म पूरी तरह से उछलने लगा और शादाब भी अपनी अम्मी की गांड़ को अब पूरी ताकत से कूट रहा था। शादाब ने शहनाज़ को थोड़ा सा कमर से उठा दिया तो उसकी गांड़ के साथ साथ चूत भी उभर कर खुल गई। शहनाज की पेंटी पूरी तरह से भीग चुकी थी और रस बहकर उसकी जांघो तक अा रहा था।

जैसे ही शादाब ने अगला धक्का मारा तो लंड सीधे पेंटी के उपर से ही चूत से जा टकराया। शहनाज़ को आज 18 साल के बाद अपनी चूत पर लंड का एहसास हुआ था इसलिए वो जोर से सिसक उठी।

” आह मेरे राजा, सब कुछ क्या आज ही कूट देगा मेरा? उफ्फ तेरा मूसल कितना ख़तरनाक है, उफ्फ तो कभी थप्पड़ नहीं खाएगा मेरे हाथो।

शादाब तो लंड चूत पर लगते ही कांप उठा और एक मस्त एहसास को फिर से महसूस करने के लिए उसने एक और जोरदार धक्का मारा तो शहनाज़ की गीली चूत में पेंटी थोड़ा सा अन्दर सरक गई और शहनाज़ का पूरा जिस्म एक झटके के साथ अकड़ता चला गया

” आह मेरे राजा, उफ्फ हाय मर गई तेरी नाज, हाय अल्लाह

अपनी अम्मी की सिसकी सुनकर शादाब ने अगला धक्का मारा और लंड पहली बार चूत से जा टकराया और शादाब ने एहसास के साथ ही शहनाज़ की चूत के मुंह पर अपनी वीर्य की बौछार कर दी और अपनी अम्मी की कमर पर जा गिरा और उसे पूरी ताकत से कस लिया। थोड़ी देर जैसे ही दोनो होश में आए तो शहनाज़ उठकर बाथरूम में भाग गई और जब फ्रेश होकर आई तो देखा कि शादाब मसाला कूट रहा हैं तो में ही मन मुस्कुरा दी और बेड पर चढ़ते हुए अपनी बांहे फैला कर बोली

” आ जा मेरे राजा, सोना नहीं हैं क्या ?
मसाला तो कल दिन में भी कूट जाएगा।

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनकर दौड़ता हुए उसकी बाहों में समा गया और दोनो मा बेटे के दूसरे की बाहों में सो गए

सुबह शहनाज़ की आंखे खुली तो कल की तरह आज भी वो अपने बेटे की बांहों में लिपटी हुई थी। उसने देखा की उसकी नाइटी उसकी कमर पर सरक गई थी और उसके बेटे के हाथ उसकी उसकी नंगी गांड़ पर रखे हुए थे। शहनाज़ को बहुत शर्म महसूस हुई और उसने प्यार से अपने बेटे का हाथ हटा दिया। अपने बेटे के हाथ को हटाने के चक्कर में उसका हाथ अपनी गांड़ से जैसे ही लगा तो उसकी आंखे मस्ती से बंद हो गई और एक झटके के साथ हाथ अपने आप हट गया। उफ्फ ये कैसा एहसास था ये सोचते ही उसने फिर से अपनी गांड़ पर हाथ रखा और उसके पूरा जिस्म मस्ती से झनझना उठा, हाय ये कैसी गुद गुदी हैं मेरी गान्ड में, मस्ती से पागल होकर वो बार बार अपनी गांड़ को सहलाने लगी, फुली हुई गांड़ पर लंड का टाइट सुपाड़ा लगने से गांड़ हल्की सी सूज गई थी और शहनाज़ को एक मीठा मीठा दर्द होने लगा। गांड़ सहलाते सहलाते उसका हाथ जैसे ही उसकी पेंटी से टकराया तो शहनाज़ को पेंटी थोड़ा टाइट सी महसूस हुई। उसने अपने हाथ से जैसे ही अपनी पेंटी को छुआ तो महसूस हुआ की पेंटी उसकी चूत को हल्का सा अंदर घुस गई थी और रस से भीगी होने के कारण पूरी तरह से चिपक गई थी।

शहनाज़ अपनी पेंटी को चूत से बाहर निकालने लगी तो पेंटी उसके चूत के होंठो को मस्ती से रगड़ते हुए बाहर निकलने लगी तो अपनी ही पेंटी की रगड़ से शहनाज़ उत्तेजना से पागल हो गई और बेटे की तरफ देखते हुए बोली:”

“उफ्फ ये क्या कर दिया मेरे राजा ने तूने ? जान ही ले ली अपनी मा की उफ्फ हाय, ये कैसा मस्त एहसास हैं !!

शहनाज़ एक दम से दीवानी होकर अपने बेटे का चेहरा चूमने लगी। जैसे जैसे पेंटी बाहर निकलती गई शहनाज़ के चुंबनों की गति बढ़ती गई गई। जैसे ही उसने एक जोश में आकर एक झटके के साथ पेंटी को बाहर खींचा तो शहनाज़ की चूत इस रगड़ से एक बार फिर से झड़ गई और उसकी चूत ने फिर से अपना रस बहा दिया और उसका मस्ती से फिर से खुल गया

” आह मेरे खुदा, उफ्फ ये क्या हो गया, हाय मर गई मैं फिर से!

शहनाज़ ने सिसकते हुए जोश में आकर अपने बेटे के गाल को मुंह में भर कर जोर से अपने दांत गडा दिए तो शादाब के मुंह से नींद में भी एक हल्की दर्द भरी आह निकल गई। शहनाज़ जल्दी से उठी और बाथरूम में घुस गई।

नहाकर वो बाथरूम में घुस गई और अपने सास ससुर के लिए चाय बनाने लगीं। वो कल के बारे में सोचने लगी और उसे महसूस हुआ कि कल उसने पहली बार अपनी ज़िन्दगी खुल कर जी हैं।उसका बेटा उसके लिए सच में उसके सपनों का शहजादा बनकर आया हैं जो उसे हर पल खुश देखना चाहता है। काश उसका पति भी ऐसा ही होता, उसे दुख हुआ और उसकी आंखो के आगे एक के बाद एक दृश्य घूमने लगा कि किस तरह से उसका पति उसे कोई भाव नहीं देता था। सारा दिन नशे में डूबकर अय्याशी करता रहता था और पैसा उड़ाता रहता था। कभी प्यार से एक किस तक करी मेरे साथ, प्यार का एहसास क्या होता हैं मुझे कभी महसूस नहीं हुआ था, सेक्स भी एकदम जानवरो के जैसे ही करता था, उफ्फ कभी प्यार से कहीं चूमा नहीं, सहलाया नहीं बस एक कुत्ते की तरह सीधे उपर चढ़ जाना। शहनाज़ को याद अा रहा था कि उसकी चूत कभी भी उसके पति के लिए गीली नहीं हुई थी।अय्याशी और शराब ने उसे इतना कमजोर कर दिया था कि लंड भी ठीक से खड़ा नहीं हो पाता था। और उसने मुश्किल से कुल मिलाकर दो या तीन बार ही मेरी चूत में अपना छोटा सा लंड घुसाया था। लंड के अंदर घुसते ही वो झड़ जाता था मानो बस अंदर वीर्य छोड़ने के लिए ही लंड खड़ा करता हो। शहनाज़ ने पहली बार अपने बेटे की वजह से ही जाना कि चूत का गीला होना क्या होता है,चूत का झड़ना क्या होता हैं। लेकिन रात जब शादाब का लंड पेंटी के ऊपर से ही छुआ था मेरी चूत के होंठ कैसे कांप उठे थे। काश मुझे पति के रूप में मेरा बेटा ही मिला होता ये ख्याल मन में आते ही उसकी आंखो से आंसू टपक पड़े।

दूसरी तरफ शादाब भी उठ गया था और उसे अपने गाल पर हल्का सा दर्द महसूस हुआ तो उसने खुद को शीशे में देखा तो उसकी आंखे खुली की खुली रह गई। उफ्फ उसका सारा मुह शहनाज़ की लिपस्टिक की वजह से लाल हो गया था। इसका मतलब अम्मी ने रात को मुझे किस किया होगा जरूर मेरे गाल पर। शादाब मुस्कुरा उठा और तभी किचेन से बरतनों की आवाज आने लगी तो वो किचेन की तरफ चल दिया और अपनी अम्मी को पीछे से अपनी बांहों में भर लिया। शहनाज़ अपने ख्यालों में खोई हुई थी इसलिए वो डर सी गई और चिहुंक उठी। शादाब ने हाथ बढ़ा कर उसका एक हाथ थाम लिया तो वो अपने बेटे के स्पर्श को पहचान गई। उसने दूसरे हाथ से जल्दी से अपने आंसू साफ किए और बोली:”

” मेरे राजा डरा ही दिया था मुझे, क्यों इतना सताते हो मुझे ?

शादाब अपनी अम्मी को थोड़ा जोर से कसते हुए बोला:”

” अच्छा अब आपका बेटा आपको सताने लगा, और आप जो करती हो उसका क्या ?

शहनाज़ पेट पर रखे उसके हाथ को सहलाते हुए बोली:”

” मैंने क्या कर दिया जो सुबह सुबह इल्ज़ाम लगा रहा हैं अपनी अम्मी पर तू?

शादाब बिना एक भी शब्द बोले उसकी तरफ घूम गया तो लिपस्टिक से लाल उसका चेहरा देखकर शहनाज़ की हंसी छूट गई। शादाब किसी छोटे बच्चे की तरह शिकायत करते हुए बोला:”

“अम्मी एक तो चोरी, उपर से सीना जोरी, कमाल करती हैं आप, अगर आपको किस ही करना था जागते हुए कर लेती !!

शहनाज़ उसका गाल खींच कर बोली :” अगर जागते हुए करती तो तुम्हारे चेहरे पर ये खुशी कैसे देखने को मिलती मेरे राजा ?

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनकर खुश होते हुए उससे चिपक गया और बोला:”

” अम्मी मैं तो बहुत खुश हूं, आप जैसी दोस्त मिल गई जो मेरा इतना ख्याल रखती है और प्यार करती हैं!

शहनाज़ थोड़ा सा आगे को हुई और उसकी आंखो में देखते हुए बोली :”
” तुझे किसने बोल दिया कि मैं तुझसे प्यार करती हूं राजा ?

शादाब समझ गया कि उसकी अम्मी मजाक कर रही हैं इसलिए उसके हाथ को जोर से दबाते हुए बोला :” जरा एक बार मेरे मुंह के हालत देखो और फिर बताओ ?

हाथ जोर से दबाए जाने से शहनाज को दर्द महसूस हुआ और बोली :”
” उफ्फ इतनी जोर से मत दबा कमीने मेरे हाथ बहुत नाजुक हैं ?

शादाब अपनी अम्मी की चुचियों की तरफ देखते हुए बोला:”

“हाय अम्मी हाथ ही क्या आपका तो सब कुछ नाजुक हैं, उफ्फ ये नाजुक नाजुक फूल ?

शहनाज़ समझ गई के उसका बेटा उसकी चूचियों के बारे में बोल रहा हैं इसलिए थोड़ा गुस्सा करती हुई बोली:”

” क्या बोला तुमने अभी ? तुम बहुत बिगड़ते जा रहे हो ?

शादाब अपनी अम्मी को जोर से अपनी बांहों में कसते हुए बोला:”

” अम्मी मैं तो कह रहा था कि आपका बदन फूल की तरह नाजुक हैं एकदम !!

शहनाज़ उसके कान खींचते हुए:”

” चल झूठा कहीं का, मुझे सब पता हैं तू क्या कह रहा था ?
अच्छा एक बात बता तूने तो बोला था कि तुझे शहर में कॉलेज का कुछ काम था फिर किया क्यों नहीं ?

शादाब अपनी अम्मी के गाल सहलाते हुए बोला:”

” अम्मी मेरे लिए सबसे बड़ा आपको खुश रखना था, इसलिए पूरे दिन आपको घुमाया मैंने !

शहनाज़ उसे स्माइल देते हुए:”

” मेरे राजा सीधे सीधे बोल दो कि मुझे घुमाने के लिए बहाना बनाया था तुमने।

शादाब की चोरी पकड़ी गई और मुंह नीचे कर लिया तो शहनाज़ आगे बढ़ी और उसका चेहरा उपर उठाते हुए बोली :”

” थैंक्स बेटा मुझे कल घुमाने के लिए, तूने मेरे अधूरे सपने पूरे किए हैं मेरे लाल।

शादाब खुश होते हुए:”

” अम्मी आपके जो भी सपने अधूरे हैं मुझे बता दो अब आपका बेटा उन्हें पुरा करेगा।

शहनाज़ अपने बेटे की बात सुनकर उससे लिपट गई और उसके मुंह को चूम लिया। जब तक चाय बन चुकी थी इसलिए शादाब चाय लेकर नीचे चला गया। दादा दादी दोनो उठ चुके थे इसलिए शादाब उन्हें चाय देकर उनके पास बैठ गया।

दादा:” बेटा मैं चाहता हूं कि तुम एक बार हमारी सारी जमीन देख लो और सब कुछ समझ लो, मैं तो बूढ़ा हो गया हूं। क्या पता कब अल्लाह का बुलावा आ जाए।

शादाब:” नहीं दादाजी ऐसे बेटे नहीं करते, आपको तो अभी बहुत सारे काम करने हैं।

दादा जी :” बेटे फिर भी एक बार तुम सब देख लो तो मैं अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाऊ !!

अभी दोनो बात कर ही रहे थे कि शादाब का फोन बज उठा। रेशमा का फोन था इसलिए शादाब बात करने लगा।

रेशमा:” कैसे हो बेटा ? तुम हो हमे भूल ही गए?

शादाब :” ऐसी कोई बात नहीं हैं बुआ, बस काम और पढ़ाई करता रहता हूं ।

रेशमा दर असल शादाब के बिना तड़प रही थी और आज उसका पति एक महीने के लिए विदेश जा रहा था और बच्चे छुट्टी होने के कारण अपनी बुआ के यहां गए थे जिस कारण वो अकेली थी। इसलिए उसने शादाब को फसाने की सोची।

रेशमा:” काम तो चलता ही रहेगा, अच्छा बात सुन, मैं अभी बिल्कुल अकेली हो गई हूं और तेरी बहुत याद आती है, तू एक बार मिल जा मुझसे आज दिन में आकर?

शादाब:” जी बुआ मैं कोशिश करता हूं।

इतना कहकर शादाब ने फोन काट दिया। शादाब अपनी अम्मी को जी भर कर घुमाना चाहता था इसलिए आगे का प्लान बनाने लगा। शादाब अपने दादा दादी से बोला:”

” दादा जी अगर आप इजाज़त दे तो मैं बुआ के घर चला जाऊ ? शाम तक वापिस अा जाऊंगा। बुआ बुला रही हैं।

दादा जी:” इसमें पूछने की क्या बात है बेटा तुम चले जाओ ?

शादाब ऊपर अा गया और शहनाज़ से बोला:”

” अम्मी आप जल्दी से तैयार हो जाओ, हम रेशमा बुआ के घर चल रहे हैं, शाम तक अा जाएंगे।

शहनाज़ का मूड पूरी तरह से खराब हो गया और गुस्से से बोली:” तुम ही चले जाओ, मुझे नहीं जाना, आया कहीं से अपनी बुआ का लाडला ?

शादाब :” अम्मी प्लीज़ चलो, शाम तक वापिस अा जाएंगे, घूमना भी हो जाएगा।

शहनाज़ किसी शेरनी की तरह दहाड़ते हुए:” तुझे समझ नहीं आता क्या एक बार में?

शादाब अपनी अम्मी का मूड देख कर डर गया और अकेला ही तैयार होने रूम में चला गया। थोड़ी देर बाद शादाब तैयार होकर नीचे जाने लगा तो शहनाज़ बोली:”

” तुझे अपनी अम्मी की जरा भी फिक्र नहीं है जो मुझे अकेले छोड़कर जा रहा है?

शादाब उसकी तरफ देखते हुए:’

“अम्मी इसलिए ही तो कह रहा हूं कि साथ चलो,

शहनाज़ को लगा कि उसे अपने बेटे की बात मान लेनी चाहिए क्योंकि अगर अकेला चला गया तो पता नहीं वो चुड़ैल क्या क्या करेगी इसके साथ !!

शहनाज़;” लेकिन बेटे क्या तेरे दादा दादी मान्य जाएंगे ?

शादाब ,;” अम्मी एक काम करते हैं उनको भी लेकर चलते हैं, वो भी घूम आएंगे घर से बाहर तो उन्हें अच्छा लगेगा।

शहनाज़ को अपने बेटे की बात से थोड़ा दुख हुआ क्योंकि वो अपने बेटे के साथ अकेली ज्यादा खुश रहती, लेकिन बूढ़े सास ससुर थोड़ा बाहर घूम आएंगे तो अच्छा होगा।

शहनाज़ :” ठीक हैं बेटा, अपने दादा दादी जी को बोल दे कि वो तैयार हो जाए।

शादाब ने अपने दादा दादी को बोल दिया तो वो दोनो खुश हो गए । कोई दो घंटे बाद ही उनकी रेशमा के घर के सामने खड़ी हुई थी। जैसे ही सारा परिवार बाहर निकला तो ये देख कर रेशमा की झांटे सुलग उठी। मगर मजबुर क्या करती इसलिए सबका स्वागत किया और अंदर ले गई।

सबने नाश्ता किया और दादा दादी के चेहरे पर आज सालो ये बाद इतनी खुशी अाई थी क्योंकि वो घर से बाहर निकले थे।

रेशमा किसी तरह से शादाब से अकेले मिलकर बात करना चाह रही थी इसलिए बोली:”

” अरे बेटा तू मेरे साथ बाजार चल, कुछ सामान लेकर आना हैं

शादाब:” ठीक हैं बुआ,

इतना कहकर शादाब गाड़ी लेकर अा गया और बुआ उसमे बैठ गई। शहनाज़ को चिंता हुई इसलिए बोली:”..

” बेटा थोड़ा जल्दी अा जाना !

शादाब ने अपनी अम्मी को स्माइल दी और गाड़ी आगे बढ़ा दी। थोड़ी दूर चलते ही शहनाज़ ने उसे गाड़ी रोकने का इशारा किया तो शादाब मुस्कुरा उठा।

रेशमा:” बेटा ये मेरा ही दूसरा मकान हैं जो बंद रहता हैं, एक बार चेक कर लेते है।

दोनो उसके अंदर घुस गए और बुआ जान बूझकर लड़खड़ा गई तो शादाब ने उसे पकड़ लिया तो बुआ डरने का बहाना करते हुए उससे लिपट गई और इसकी कमर सहलाते हुए बोली:”

“कितनी आसानी से तूने मुझे संभाल लिया, तू तो बहुत तगड़ा मर्द बन गया है।

इतना कहकर उसने शादाब का गाल चूम लिया। शादाब को भी अच्छा लगा और उसने अपनी बुआ का गाल चूम लिया। रेशमा ने जान बूझकर अपना दुपट्टा नीचे गिरा दिया और शादाब के सामने उसकी चूचियां उभर आई। शादाब उन्हें घुरकर देखने लगा,
रेशमा खुश हुई कि शिकार फंस रहा है।

रेशमा ने जैसे ही अपना दुपट्टा उठाने के लिए झुकी तो उसने अपनी चूची पर कोहनी का दबाव दिया और नीचे ब्रा ना होने के कारण उभर कर उसकी एक चूची बाहर निकल गई। रेशमा खड़ी हुई और शादाब ने जैसे ही अपनी बुआ की चूची को देखा तो शरमाते हुए बोला:”

” बुआ आपकी ये बाहर निकल गई है,

रेशमा शादाब के भोलेपन पर फिदा हो गई और बोली:

” बेटा इसे चूची कहते है, उफ्फ मेरी चूचियां बड़ी बेशर्म हैं, बार बार बाहर निकल जाती है, थक गई हूं मैं तो क्या तू उसे अंदर कर देगा ?

शादाब ने बिना कुछ बोले अपना हाथ आगे बढ़ा दिया और चूची को थाम लिया और जोर से दबा दिया तो रेशमा समझ गई कि लड़का लाइन पर अा गया है और जल्दी ही इसका कुंवारा लंड मेरी चूत में होगा।उसने थोड़ा आगे होते हुए शादाब के खड़े हुए लंड पर अपनी चूत रगड़ने लगी।
शादाब ने रेशमा की दूसरी चूची को भी बाहर निकाल लिया और जोर जोर से दबाने लगा तो रेशमा मस्ती से सिसकियां लेने लगी। उसने सीधे शादाब की पेंट की चैन खोलकर लंड को बाहर निकाल लिया। उफ्फ लंड देखते ही उसकी समझे खुशी से चमक उठी और उसे हाथ में पकड़ लिया। रेशमा को उम्मीद नहीं थी कि लंड इतना मोटा और लम्बा भी हो सकता हैं। उसके होंठ कांप उठे और उसने जैसे ही शादाब के लंड को मुंह में लेना चाहा तो शादाब पीछे हट गया।

रेशमा हैरानी से बोली:”क्या हुआ , डर गया क्या ? ।।

शादाब :” नहीं, ये लंड आपकी किस्मत में नहीं है।

रेशमा तड़प रही थी और बोली:”

” नहीं बेटा, तुझे जो चाहिए मैं दूंगी ऐसा मत बोल, मर जाऊंगी मैं इसके बिना, कितना मोटा है ये लंड नहीं पूरा लोला हैं! ।।

शादाब:” दादा जी कह रहे थे कि आप उनका ध्यान नहीं रखती, अगर आपको ये लंड अपनी चूत में चाहिए तो पहले उनका दिल जीतना होगा, फिर देखना मैं तुम्हारी चूत को कैसे फाड़ दूंगा ?

रेशमा:” बेटा एक बार चूस तो लेने दे मुझे? उफ्फ मेरे होंठ देख कैसे तड़प रहे हैं? तुझे बहुत मजा दूंगी।

शादाब:” नहीं, पहले आपको दादा दादी जी का दिल जीतना होगा, उनका ध्यान रखना होगा, जिस दिन वो खुश हो गए लंड आपको खुश कर देगा और सबसे पहले ये आपकी चूत में ही घूसेगा मेरी बुआ!

इतना कहकर शादाब ने अपना लंड पेंट में डाल लिया। रेशमा झुक गई और उसकी बात मान गई।

रेशमा:” मुझे मंजूर हैं लेकिन ध्यान रखना तेरे इस लोले की सील मैं ही तोड़ूंगी ।

उसके बाद दोनो ने बाहर से थोड़ा सा सामान लिया और घर आ गए। शादाब को देख कर शहनाज़ ने चैन की सांस ली। थोड़ी देर बाद खाना बन गया और सबने खाया। उसके बाद शाम के कोई चार बज गए तो वापिस जाने की बात होने लगी।

रेशमा अपने पापा से बोली :”

“मैं सोच रही थी कि अगर और अम्मी मेरे पास कुछ दिन के लिए रुक जाए तो ठीक रहेगा। मै भी अकेली हू और आपकी कुछ सेवा भी कर लूंगी।

रेशमा की बात सुनकर सब चौंक पड़े , किसी को भी उसकी बात पर यकीन नहीं हुआ। दादा दादी को अंदर से खुशी हुई कि उनकी बेटी बदल गई हैं ।

शहनाज़ बोली:” नहीं रेशमा, मैं अकेली रह जाऊंगी ऐसे तो, मेरा मन नहीं लगेगा अम्मी पापा के बिना।

रेशमा:” बस भाभी मुझे कुछ नहीं सुनना अब, मै उन्हें नहीं जाने दूंगी।

दादा जी:” बेटी शहनाज़ जब रेशमा इतनी जिद कर रही है तो हम थोड़े दिन यहीं रुक जाते हैं।

शहनाज़ चुप हो गई और थोड़ी देर बाद ही शादाब गाड़ी निकाल लाया और शहनाज़ उसमे बैठ गई। दादा जी बोले:”

” बेटा शादाब अपनी अम्मी का ध्यान रखना और उन्हें तंग मत करना, और मुंशी से जमीन के सब कागज समझ लेना।

शादाब :” ठीक हैं दादाजी । मैं ध्यान रखूंगा आपकी बात का।

इतना कहकर शादाब ने गाड़ी आगे बढ़ा दी और अपने अम्मी की तरफ मुस्कुरा कर देखा तो शहनाज़ भी मुस्कुरा उठी।

जैसे ही गाड़ी शहर से बाहर निकली तो शहनाज़ ने खुद ही अपना बुर्का निकाल दिया और अपने बेटे को स्माइल दी। शादाब अपनी अम्मी की इस अदा पर उसका दीवाना हो गया।

शहनाज़ की समझ में एक बात नहीं आ रही थी कि रेशमा के अंदर इतना बड़ा बदलाव कैसे आ गया इसलिए वो बोली:”

” बेटा ये रेशमा कैसे बदल गई अचानक से ? वो तो किसी से ढंग से बात नहीं करती फिर अम्मी पापा को अपने पास रखने के लिए कैसे तैयार हो गई ?

शादाब अपनी अम्मी की तरफ स्माइल करते हुए बोला:*

” अम्मी उसमे बदलाव आया भाई बल्कि लाया गया हैं, आपको पता हैं ना वो मुझे अपने साथ ले जाने वाली थी, तब मुझे सही गलत का नहीं पता था, इसलिए मैंने जिद कर रहा था। अम्मी दरअसल वो मुझ पर डोरे डालकर मुझे बहकाने की कोशिश कर रही थी। बस इसी बात का मैंने फायदा उठाया और आज जब उसका फोन आया तो मैंने सब कुछ प्लान किया। बाजार ले जाने के बहाने वो मुझसे दोस्ती करना चाहती थी ताकि मुझे बिगाड़ सके। मैंने भी साफ मना कर दिया कि अगर मुझसे दोस्ती करनी हैं तो पहले दादा दादी का दिल जीतना होगा बस ये असली कहानी है

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