मां बेटे की प्रेम कहानी अध्याय 2

अब्दुल्ला भी लुंड को मम्मी के मुह में कमर हिला कर और बहार करते हुए या धीरे धीरे मम्मी के मुह को चोदने लगता है।  मम्मी भी अब लुंड को पूरा मुह में ले कर चुस रही थी।   लुंड पुरा मम्मी की हलक तक चला जटा।  जिस माँ को बिना लेने में समस्या होती … Read more

मां बेटे की प्रेम कहानी अध्याय 1

हेलो दोस्तो मेरा अजय में चंडीगढ़ से हूं।  मेरी उम्र 19 साल एच.  क्या कहानी का मुखय पातर मेरी माँ है।  मेरी मम्मी सीमा शर्मा उम्र 40 साल रंग एकदम गोरा हाथ लाल हो जाए भरा हुआ बदन बड़ी बड़ी चुचिया भारी हुई कदर कासी हुई गंद जो बहार निकली हुई मम्मी चली ज तो … Read more

रिश्तों की गर्मी अध्याय 5

गोरी- बताओ कहाँ लगानी है दवाई देव-पीठ पर और पैरो पर और थोड़ा सा जाँघ के उपर वाले हिस्से पर भी तो गोरी ने मेरी टी-शर्ट निकाली और बोली चलो अब सीधे बैठ जाओ मैं लगाती हूँ दवाई तो मैं सीधा होकर बैठ गया गोरी अपने नरम नाज़ुक हाथो से मेरी पीठ पर दवाई मलने … Read more

रिश्तों की गर्मी अध्याय 4

पुष्पा को देख कर लखन कुश हो गया था तो मैने उन दोनो को वहाँ पर छोड़ा और गोरी और मैं आगे की तरफ बढ़ चले उसका नाज़ुक हाथ मैने अपने हाथ मे थमा हुवा था बात करते करते हम दोनो काफ़ी दूर निकल आए थे बाग के लास्ट वाले हिस्से मे काफ़ी घने पेड़ … Read more

रिश्तों की गर्मी अध्याय 3

और मैने भी कई बार आपकी आँखो मे प्यास देखी है जब मैने आपको कपड़े बदलते हुवे देखा तो बड़ी मुश्किल से खुद को रोका पर आज मुझे ना रोको मैं अपना हाथ उसकी जाँघो के जोड़ पर ले गया और उसकी फूली हुवी चूत को मसल्ने लगा जैसे ही मैने उसकी चूत को मसला … Read more

रिश्तों की गर्मी अध्याय 2

और ठीक नो महीने बाद यहा एक खुस-खबरी आई जब आपका जनम हुवा ठाकुर ने सारे गाँव को भोज का निमंत्रण दिया और सारे गाँव को किसी नवेली दुल्हन की तरह सज़ा दिया चारो ओर खुशिया ही खुशिया थी पर ये खुशिया बस थोड़ी देर की ही थी आपके दादा वीरभान से तो बात नही … Read more

रिश्तों की गर्मी अध्याय 1

रिश्तों की गर्मी लेखक-अभय गर्मी की उस दोपहर मे सर पर तप्ता सूरज मेरी परीक्षा ले रहा था मंज़िल अभी भी दूर थी प्यास से गला सूख रहा था पर पानी भी नही था मेरे पास पिछले चार दिनो से सफ़र जारी था मेरा अंजाना सफ़र और अंजानी मंज़िल थी रास्ता पूरी तरह से सुनसान … Read more

वासना का मस्त खेल अध्याय 4

जब तक मेरे होंठ सुलेखा भाभी की नंगी पीठ को चूमते हुए उनकी गर्दन तक पहुंचे, तब तक तो वो सहती रहीं, मगर जब गर्दन को चूमते हुए मैं ऊपर उनकी कानों की लौ के पास पहुंचा तो सुलेखा भाभी की बर्दाश्त के बाहर हो गया. वो अब जोरों से सिसक उठीं और तुरन्त ही … Read more

वासना का मस्त खेल अध्याय 3

मैं अब धीरे से खिसक कर उसके नजदीक हो गया और उसके दोनों कंधों को पकड़ कर धीरे से उसे बिस्तर पर धकेलने लगा.“ओह.. उय्यय.. नहींईई.. नहींईईई.. ईई..ई..” कहते हुए नेहा ने मुँह से तो मना किया, मगर साथ ही वो बिस्तर पर लेट भी गयी. उसने अब भी एक हाथ से अपनी मुनिया को … Read more

वासना का मस्त खेल अध्याय 2

सुलेखा भाभी ने बताया कि आज शाम को मैं कहीं बाहर ना जाऊं क्योंकि वो सब लोग बाजार जा रहे हैं और यहां पर घरों में चोरी बहुत होती है, इसलिये मुझे घर पर ही रहना है. इसके साथ साथ ही मुझे एक बुरी खबर भी मिली, प्रिया और उसके भाई कुशल की तो छुट्टियां … Read more