सुलेखा भाभी ने बताया कि आज शाम को मैं कहीं बाहर ना जाऊं क्योंकि वो सब लोग बाजार जा रहे हैं और यहां पर घरों में चोरी बहुत होती है, इसलिये मुझे घर पर ही रहना है.
इसके साथ साथ ही मुझे एक बुरी खबर भी मिली, प्रिया और उसके भाई कुशल की तो छुट्टियां चल ही रही थीं, अगले दिन से नेहा की भी छुट्टियां होने वाली थीं … इसलिये वो सब अगले दिन ही कुछ दिनों के लिये गांव जाने वाले हैं और उसके लिये ही वो सब बाजार से कपड़े वगैरह खरीदने बाजार जा रहे थे.
यह जानने के बाद मैं मायूस सा हो गया और चुपचाप अपने कमरे में आकर लेट गया.
मेरे सारे सपने मुझे अब बिखरते से नजर आ रहे थे. अभी कुछ देर पहले ही मैं नेहा के साथ साथ प्रिया के साथ भी मस्ती की योजना बना रहा था, मगर उनके गांव जाने की बात जानकर एक पल में ही मेरी सारी योजनाएं धराशाही हो गयी. खैर … मैं कर भी क्या सकता था.
अगले दिन जब मैं कम्प्यूटर कोर्स के लिये निकल रहा था, तब वो सब भी शायद गांव जाने की तैयारी कर रहे थे. शायद बस सुलेखा भाभी ही गांव नहीं जा रही थीं और वो भी मेरे वहां रहने की वजह से बाकी सब गांव जा रहे थे.
उन सब को गांव छोड़कर आने के लिये प्रिया के पापा ने भी ऑफिस से छुट्टी ली हुई थी. मेरी अब ज्यादा किसी से बात करने की या पूछने की हिम्मत नहीं हुई इसलिये मैं चुपचाप अपने कम्प्यूटर कोर्स के लिये निकल गया.
दोपहर को कम्प्यूटर कोर्स से जब मैं वापस आया तो पूरे घर में शांति सी लग रही थी. मुझे घर में बस सुलेखा भाभी ही मिलीं … शायद बाकी सब गांव चले गए थे. पहले मैं जब घर आता था तो उनका घर भरा हुआ सा लगता था, बाकी कुछ हो या ना हो … मगर घर में जब नेहा, प्रिया और कुशल होते थे तो एक रौनक सी रहती थी … इसलिये दिल लगा रहता था. मगर उस दिन खाली खाली घर को देखकर मेरा वहां से भाग जाने को दिल कर रहा था.
उस दिन मेरा दिल नहीं लग रहा था इसलिये मुझे खाना खाने की भी इच्छा नहीं हो रही थी. सुलेखा भाभी ने मुझसे पूछा भी, मगर मैंने ऐसे ही तबीयत खराब होने का बहाना बना दिया और अपने कमरे में आकर लेट गया. उसके बाद पता नहीं कब मुझे नींद आ गयी.
मैं गहरी नींद में सो रहा था कि किसी के जोरों से हिलाने के कारण मेरी नींद खुल गयी. मैंने आंखें खोलकर देखा तो प्रिया का हंसता चेहरा मेरे सामने था. मैंने ये सपना समझा और करवट बदल कर फिर से सो गया. मगर फिर से किसी ने मुझे जोरों से हिला दिया … अबकी बार मैं उठकर बैठ गया और देखा तो सही में मेरे सामने प्रिया ही खड़ी हुई थी. मुझे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था इसलिये मैंने एक बार अपनी आंखें मलकर फिर से उसे देखा. सही में वो प्रिया ही थी.
“क्या हुआ? मम्मी कह रही हैं कि ज्यादा तबियत खराब है तो डॉक्टर से दवा ले आओ!” प्रिया ने मेरी तरफ देखते हुए कहा.
जैसे कि मैंने उसकी बात सुनी ही नहीं और मैंने प्रिया से पूछा- तत तुम … तो गांव चली गयी थीं ना?
“तुम्हें किसने कह दिया कि मैं गांव चली गयी?” प्रिया ने अब हंसते हुए कहा.
“अरे … बाकी सब गए तो तुम भी तो उनके साथ ही जा रही थी ना?” मैंने कहा.
“नहीं मेरा दिल नहीं लगता गांव में, इसलिये मैं नहीं गयी, मम्मी तुम्हें डॉक्टर से दवा ले आने के लिये कह रही हैं. चलो उठो.” प्रिया ने ये सब अब एक साथ ही कहा.
प्रिया को देखकर मेरे शरीर में अब जान सी आ गयी थी और मेरी नींद भी कोसों दूर भाग गयी.
“मुझे डॉक्टर की दवा की जरूर नहीं है मेरी दवाई तो तुम्हारे पास है, मगर तुम हो कि देती ही नहीं हो.” मैंने अब प्रिया की तरफ देखकर हंसते हुए कहा.
“अच्छा जी …” प्रिया ने कहा.
“हांआंआं … मेरी तो तबियत ही खराब ये सोचने के कारण हो गयी थी कि तुम गांव चली गयी हो.” मैंने उसके हसीन चेहरे को देखते हुए कहा और उसे पकड़ने के लिये धीरे धीरे अपने पैरों को बिस्तर से नीचे कर लिया.
“अच्छा जी … मेरी वजह से या फिर नेहा दीदी की वजह से?” उसने अपने एक हाथ को हिलाकर इशारा करते हुए पूछा.
तभी झटके से उठकर मैंने उसे पकड़ लिया, वो कुछ समझे उससे पहले ही मैंने उसे बांहों में भरकर बिस्तर पर गिरा लिया और उसके नर्म मुलायम कश्मीरी सेब से लाल गालों को चूमने लगा.
“ओययय … छोड़ … छोड़ मुझे …” प्रिया ने कसमसाते हुए कहा और मुझसे छुड़ाने का प्रयास करने लगी. तब तक मैं उसके गालों को चूमते हुए उसके होंठों पर आ गया और उसके शहद से भी मीठे रसीले होंठों को जोरों से चूसने लगा.
मगर तभी बाहर से सुलेखा भाभी की आवाज सुनाई दी- तुम आकर यहीं बैठ गयी क्या?
जिससे मैं चौंक गया और मेरी पकड़ ढीली हो गयी. प्रिया ने भी अपनी पूरी ताकत से मुझे धकेलकर अलग कर दिया और मुझसे दूर होकर खड़ी हो गयी. मुझसे छुड़ाकर प्रिया अलग हुई ही थी कि तभी सुलेखा भाभी भी मेरे कमरे में आ गईं.
“आकर यहीं बैठ गयी क्या तुम?” सुलेखा भाभी ने पहले तो प्रिया से कहा और फिर मुझे भी डॉक्टर से दिखाने के लिये कहा, मगर मैंने मना कर दिया.
“नहीं, अब मेरी तबियत ठीक है और मैंने दवा भी ले ली है.” मैंने प्रिया की तरफ देखते हुए कहा.
प्रिया भी मेरी तरफ ही देख रही थी. वो मेरी बात का मतलब समझ गयी थी, इसलिये उसके चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी और शर्माकर उसने नजरें झुका लीं.
“कहां से मिली दवा?” सुलेखा भाभी ने पूछा तो मुझे शरारत सूझ गयी और मैंने प्रिया की तरफ इशारा करते हुए कह दिया कि प्रिया के पास थी.”
“प्रिया? तुम दवा कहां से ले आईं? सुलेखा भाभी ने प्रिया की तरफ देखते हुए कहा, जिससे प्रिया थोड़ा घबरा सी गयी और प्रिया ने हकलाते हुए कहा- व्वव.वव.ओ … म्म.मम्मीई … मेरे पास पहले की रखी हुई थी, जब मैं बीमार हुई थी ना … तब की बची हुई थी.
“ठीक है, मगर ऐसे ही किसी की दवा नहीं खाते हैं.” सुलेखा भाभी ने मुझे हल्का सा डांटते हुए कहा और फिर कमरे से बाहर चली गईं.
सुलेखा भाभी के जाते ही प्रिया ने मुझे आंखें दिखाते हुए थप्पड़ का इशारा किया. मैं उसे अब फिर से पकड़ना चाहता था, मैं धीरे धीरे करके बिस्तर से उठ ही रहा था कि प्रिया समझ गयी और जल्दी से कमरे से बाहर भाग गयी.
रात को खाना खाते समय सुलेखा भाभी ने फिर से मेरी तबीयत के बारे में पूछ लिया. मैं, प्रिया और सुलेखा भाभी साथ में ही खाना खा रहे थे, तबियत के बारे में पूछते ही मेरी नजर अब प्रिया पर चली गयी और मुझे फिर से शरारत सूझ गयी.
मैंने प्रिया की तरफ देखते हुए उनसे कहा कि वैसे तो अब ठीक है … अगर प्रिया रात के लिये भी दवा की एक खुराक और दे देगी, तो सुबह तक बिल्कुल ठीक हो जाऊंगा.”
“कोई बात नहीं, वो दे देगी.” सुलेखा भाभी ने पहले तो मुझसे कहा और फिर प्रिया से कहा- अगर और दवा है … तो दे देना इसे.
“ज्ज …जी …” प्रिया बस इतना ही कहा और मुझ आंखें दिखाने लगी.
खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में आ गया और प्रिया के बारे में सोचने लगा. मैं सोच ही रहा था कि प्रिया तो लगभग तैयार ही है, बस मुझे ही कोई मौका ही नहीं मिल रहा. तभी मेरे दिमाग में आया कि आज घर पर बस प्रिया और सुलेखा भाभी ही हैं, रात को प्रिया कमरे में भी अकेली ही होगी … तो क्यों ना मैं आज रात में प्रिया के कमरे में ही चला जाऊं?
यह बात मेरे दिमाग में आते ही मैं तुरंत अपने कमरे से बाहर आ गया.
मैंने बाहर आकर देखा तो सुलेखा भाभी रसोई में बर्तन साफ कर रही थीं और प्रिया के कमरे का दरवाजा बन्द था. शायद वो कमरे में ही थी. मैंने अब धीरे से प्रिया के कमरे के दरवाजे को खोलना चाहा मगर दरवाजा अन्दर से बन्द था.
मुझे बस सुलेखा भाभी के सोने का ही इन्तजार था मगर साथ ही ये भी डर था कि कहीं प्रिया ही ना सो जाए. अब क्या करूँ? मैं सोच ही रहा था कि तभी सुलेखा भाभी रसोई के काम निपटाकर बाहर आ गईं और उन्होंने मुझे प्रिया के कमरे के बाहर खड़े देखकर पूछ लिया कि मैं यहां क्या कर रहा हूँ?
मैं थोड़ा घबरा तो गया था. मगर तभी मुझे प्रिया से दवाई लेने की बात याद आ गयी. मैंने उनसे कहा कि वो प्रिया से दवाई लेनी है न.
“वो शायद नहा रही होगी, तुम आराम करो, वो नहाने के बाद दे देगी.” उन्होंने मुझसे कहा और फिर कमरे के बाहर से ही प्रिया को आवाज देकर बताया कि नहाने के बाद वो बाद मुझे दवा दे दे.”
अन्दर से भी प्रिया की आवाज सुनाई दी- जी ठीक है.
मैं अब वापस अपने कमरे में आ गया और सुलेखा भाभी भी अपने कमरे में चली गईं.
सुलेखा भाभी के अपने कमरे में चले जाने बाद मैंने तीन चार बार अपने कमरे से बाहर आकर देखा कि प्रिया के कमरे का दरवाजा खुला या नहीं. मैंने कई बार उसे धीरे धीरे आवाज भी दी मगर उसका कोई जवाब नहीं आ रहा था. मैं अब ज्यादा शोर भी तो नहीं कर सकता था, नहीं तो सुलेखा भाभी के आ जाने का डर था. तीन चार बार कोशिश करने के बाद जब प्रिया ने कोई जवाब नहीं दिया तो थक कर मैं वापस अपने कमरे में आ गया.
मैं अपने बिस्तर पर आकर बैठा ही था कि तभी प्रिया ने मेरे कमरे के दरवाजे पर आकर पूछा- क्या हुआ? क्यों शोर कर रहा है?
उसने नीचे स्कर्ट … स्कर्ट तो नहीं थी वो क्योंकि स्कर्ट घुटनों तक ही लम्बी होती है … मगर वो जो भी था, उसके पंजों तक की लम्बाई का था. उसने शायद घाघरे के जैसा कुछ पहना हुआ था, जो कि काफी खुला हुआ भी था. ऊपर उसने एक ढीली सी टी-शर्ट पहनी हुई थी, जिसका गला कुछ ज्यादा ही खुला हुआ था. शायद उसने अन्दर ब्रा भी नहीं पहनी थी, तभी तो उसकी साँसों के साथ साथ उसके अनार आजादी से ऊपर नीचे हो रहे थे. इन कपड़ों में वो बला की खूबसूरत लग रही थी, जिसको देखकर एक बार तो मैं खो सा गया था.
मगर तभी प्रिया ने तीन चार बार अब चुटकी बजाकर हंसते हुए कहा- ओ … हैल्लोओओओ … क्या हुआ? क्यों शोर कर थे?
प्रिया के चुटकी बजाने से एक बार तो मेरा ध्यान उसके बदन से हट गया था. मगर फिर से मैं उसकी ऊपर नीचे होती चूचियों को देखने लगा और उसकी चूचियों की तरफ देखते हुए कहा कि वो मेरी दवाई का क्या हुआ?
प्रिया ने अब हंसते हुए कहा- तुम्हारे लिये ही दवाई तैयार कर रही थी.
“क्या? मैं कुछ समझा नहीं?” मैंने उसके चेहरे की तरफ देखते हुए कहा.
सही में, उस समय मैं उसकी बात का मतलब नहीं समझ पाया था … जो मुझे बाद में समझ आया.
“समझ जाओगे …!” उसने फिर से हंसते हुए कहा.
“क्या समझ जाऊंगा …” ये कहते हुए मैं उसे पकड़ने के लिये उठने ही वाला था कि तभी प्रिया ने हंसते हुए कहा- रहने दे … रहने दे … ये चालाकी, मैं आ रही हूँ वहीं पर!
और सही में वो मेरी तरफ आने लगी.आज प्रिया का व्यवहार कुछ बदला हुआ सा लग रहा था, पहले तो वो मुझसे बच कर भागती रहती थी, मगर अब वो खुद ही चलकर मेरे पास आ गयी थी. शायद उसको भी ऐसे ही मौके का इन्तजार था और इसलिये ही वो गांव भी नहीं गयी थी. खैर मैं इस बात से खुश था कि मुझे बिना प्रयास के अपनी हर मनोकामना पूरी होती दिख रही थी.
सही में प्रिया ने एक हाथ में दवाई ली हुई थी, उसने मुझे वो दवाई पकड़ा दी और फिर मेरे पास ही खड़ी हो गयी.
“अरे …! मैं इस दवाई की बात थोड़े ही कर रहा था … म मैं …” मैं अभी उससे ये सब बोल ही रहा था.
“तो फिर कौन सी दवाई चाहिये?” प्रिया ने आगे झुक कर हंसते हुए कहा.
उसकी टी-शर्ट का गला तो काफी खुला था ही, उसने ब्रा भी नहीं पहनी हुई थी ऊपर से उसने आगे झुक कर ऐसी अदा के साथ कहा कि मुझे उसकी चूचियों की गहराई अन्दर तक दिखाई दे गयी.
अब तो मुझे यकीन हो गया था कि ये मुझसे चुदने के लिये ही आई है. मुझसे भी अब रहा नहीं गया और मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया, जिससे वो खींचती हुई मेरे पास आ गयी. मैंने उसकी चूचियों की तरफ देखते हुए कहा कि दिन में तो बताया ही था.
“अच्छा जी … खानी है तो चुपचाप ये दवाई खा लो … नहीं तो चिल्लाकर अभी मम्मी को बुला लूँगी.” प्रिया ने हंसते हुए कहा, साथ ही चुपचाप मेरी बगल में बैठ भी गयी.
वो आगे कुछ कहे, उससे पहले ही मैंने उसको अपनी बांहों में भर लिया. मेरी इस हरकत से प्रिया जैसे सिहर सी गई. उसने एक लम्बी सांस लेते हुए मेरे हाथों को पकड़ लिया और उसी अवस्था में बैठी रही.
“अब ये क्या कर रहे हो … नहीं सुधरोगे तुम? मैंने बताया ना कि उस रात दीदी तुम्हारे साथ थीं. ये सब दीदी के साथ ही करना!” प्रिया ने झूठमूठ का गुस्सा दिखाते हुए कहा, मगर मुझे हटाने की कोशिश या फिर मेरा विरोध उसने बिल्कुल भी नहीं किया.
“तो क्या हुआ, मैंने भी तो बताया था कि तुम भी उसकी बहन ही हो, नेहा नहीं तो तुम ही सही.” मैंने उसके गालों पर प्यार से चूमते हुए कहा और धीरे धीरे उसके सुर्ख गुलाबी रसीले होंठों की तरफ बढ़ गया … जो थरथरा से रहे थे.
“अअओय … च्च.छछो …ड़ो …” वो टूटे फूटे शब्दों में बोल ही रही थी कि मैंने अपने होंठ उसके रसीले होंठों पर रख दिए और उसके नर्म नाजुक अधरों को हल्के हल्के चूसने लगा. जिससे प्रिया के होंठों के साथ साथ अब उसकी आंखें भी बंद होती चली गईं.
प्रिया के होंठों को चूमते हुए मैं अपने दोनों हाथों से भी उसकी पीठ व गर्दन को सहलाकर उसे उत्तेजित करने की कोशिश करने लगा. मगर वो तो पहले से ही जोश में थी. प्रिया ने अपने दोनों हाथों से मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मुझे अपने करीब खींचने लगी. हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूमते हुए बिल्कुल चिपक गए थे.
मेरे होंठों को चूसते हुए प्रिया के हाथ भी अब मेरे पीठ पर घूमने लगे, जिससे मुझे एक अजीब सा अहसास होने लगा और मेरी पकड़ और भी मजबूत हो गई. मैंने अपना एक हाथ धीरे से आगे लाकर प्रिया की टी-शर्ट के ऊपर से उसके मुलायम अनारों पर रख दिया और जैसे ही मैंने उसकी चूचियों को पकड़ा … तो प्रिया ने मेरे होंठों को अपने दांतों से काट लिया … और “इइईईई …श्श्शशश …” एक हल्की सी सिसकारी के साथ प्रिया ने मुझे अपनी बांहों में और भी जोरों से भींच लिया.
मैंने अब धीरे धीरे उसकी चूचियों को सहलाना शुरू कर दिया और साथ ही उसके होंठों को भी चूसता रहा. उसकी चु्चियां मस्त, ठोस भरी हुई और एकदम कड़क थीं. प्रिया ने ब्रा नहीं पहनी हुई थी इसलिये टी-शर्ट के ऊपर से ही मुझे उसकी ठोस चूचियों का अहसास बहुत ही अच्छे से हो रहा था.
एक तो उसने ब्रा नहीं पहनी हुई थी और दूसरा उसकी टी-शर्ट का गला भी काफी गहरा था, जिसके कारण मुझे उसकी चूचियों की घाटी और उस पर निकले हुए हल्के हल्के काले भूरे रंग निप्पल स्पष्ट नजर आ रहे थे.
मैंने अब उसके होंठों को छोड़ दिया और अपने गीले होंठ उसकी घाटी के ऊपर रख दिए और एक प्यारा सा चुम्बन कर दिया … जिससे प्रिया के मुँह से ‘इइईईई … श्श्शशश … महेश्श्श्श् …’ की सिसकारी सी निकल गयी.
अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को मसलते हुए मेरी जीभ भी उसकी चूचियों की दरारों को ऊपर से नीचे तक चाटने लगी, जिससे प्रिया जोश में भर गयी और बड़े मज़े से अपनी आंखें बंद करके मुँह से मादक सिसकारियां निकालने लगी.
अब और ज्यादा बर्दाश्त करना मुश्किल था, मैंने प्रिया की चूचियों को छोड़ कर उसे खुद से थोड़ा सा अलग किया और अपने हाथों से उसकी टी-शर्ट को निकालने लगा, मगर अचानक से प्रिया ने मेरे हाथों को रोक दिया और बिस्तर से उठकर खड़ी हो गयी.
मैंने चौंक कर उसकी तरफ देखा और उससे विनती भरे शब्दों में कहा- क्या हुआ?
उसने इशारे से मुझे दरवाज़े की तरफ दिखाया, तो मुझे होश आया कि मैं भी कितना बेवक़ूफ़ हूँ, दरवाज़ा पूरा खुला हुआ था. गलती से कहीं सुलेखा भाभी आ जातीं और उन्होंने हमें इस हालत में देख तो क्या होता?
मैंने जल्दी से जाकर दरवाजा बंद किया और फिर वापस प्रिया की तरफ लपका. वो अब भी बिस्तर के पास ही खड़ी थी. मैंने उसके पास जाकर जोर से उसकी एक चूची को मसल दिया, जिससे प्रिया कराह उठी और उसने चीखते हुए कहा- उईईइ … मां शैतान … उखाड़ेगा क्या इनको?
मैंने अब खड़े खड़े ही उसे अपनी बांहों में भर लिया और अपने हाथ आगे बढ़ा कर उसकी टी-शर्ट को पीछे से ऊपर करने लगा. मैं उसकी टी-शर्ट को ऊपर करते हुए उसकी चिकनी और गोरी गोरी गर्दन पर अपने होंठों से हल्की हल्की पप्पी दिए जा रहा था.
प्रिया से ये बर्दाश्त नहीं हुआ … उसने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़कर अपनी गर्दन पर से हटा दिया और मेरे चेहरे को घुमाकर मेरे होंठों को चूसने लगी.
मैंने भी अपनी जीभ बाहर निकाल कर उसके मुँह में घुसा दी, जिसे वो जोरों से चूसने लगी. प्रिया ने मेरे बालों को अपने उंगलियों में पूरा जकड़ लिया था और कस कस कर मेरी जीभ को चूसने लगी. मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी टी-शर्ट को उठा रखा था, जिसे मैं बाहर निकल देना चाहता था, मगर वो तो मेरे होंठ व जीभ को चूसने में ही व्यस्त थी.
तभी मैंने अपने हाथों को थोड़ा सा और ऊपर करके उसको इशारा सा किया. प्रिया काफी समझदार निकली, वो मेरे होंठों को छोड़कर मुझसे थोड़ा अलग हो गयी और उसने खुद ही अपनी टी-शर्ट को पूरा बाहर निकाल दिया.
प्रिया ने नीचे ब्रा नहीं पहनी हुई थी इसलिये टी-शर्ट के निकालते ही, अब मेरे सामने दो आज़ाद सफेद कबूतर उछलने लगे. मैं तो बस अब आंखें फाड़ कर उसकी चूचियों को ही देखने में मस्त हो गया.
“देख लो जी भर के … तुम्हारे लिए ही मैंने आज ब्रा नहीं पहनी …” प्रिया ने मेरे सामने खड़े खड़े ही मादक अदा के साथ कहा और हंसने लगी.
मुझसे अब रहा नहीं गया, मैंने हाथ आगे बढ़ा कर उसकी नंगी चूचियों को अपनी हथेली में पूरा भर लिया और जोर से दबा दिया.
“उह्ह्ह्ह … आऐईईइ … धीरे … मार डालेगा क्या?” प्रिया पूरी उत्तेजना में थी. उसने अपना सर इधर उधर करते हुए कहा.
मुझमें अब और सब्र नहीं बचा था इसलिये मैंने अपना मुँह उसकी नंगी चूची के निप्पल पे रख दिया और किशमिश के दाने जैसे उसके छोटे से गुलाबी निप्पल को मुँह में भर लिया जिससे प्रिया ने
“इइईईई … श्श्शशश … अअआह … आह्ह्हहह …” की एक जोर की सिसकारी भरी.
मैंने भी अब पूरे जोश में आकर उसकी चूचियों को चूसना शुरू कर दिया मानो आज ही उनका सारा रस निचोड़ कर पी जाऊंगा. उसकी चूची को चूसते हुए मेरा एक हाथ अब भी उसकी दूसरी चूची पर ही था, जिससे मैं उसकी चूची को मसल भी रहा था.
प्रिया के मुँह से अब निरंतर मादक आवाजें निकलने लगीं, जो मेरा जोश बढ़ाये जा रही थीं … उसकी एक चूची का सारा रस पीने के बाद मैंने अब उसकी दूसरी चूची को मुँह में भर लिया और उसी तरह से चूसने लगा. पहली चूची मेरे चूसने की वजह से पूरी लाल हो गई थी. उस पर मेरे होंठों के निशान साफ़ दिख रहे थे, मगर उसका चूचुक अब कड़ा होकर तन गया था.
मैंने उसकी चूची को चूसते हुए अपने दोनों हाथ नीचे किये और घाघरे के ऊपर से उसके भरे हुए मासंल नितम्बों को सहलाने लगा. तभी मुझे कुछ अजीब सा लगा, मैंने अपने हाथों को और अच्छी तरह से सहला कर देखा तो पाया कि प्रिया ने पेंटी भी नहीं पहनी हुई थी, इसका मतलब था कि वो पूरी तैयारी के साथ ही मेरे पास आई थी.
ये सोचकर मेरा जोश और भी अब बढ़ गया, मैंने अपना एक हाथ उसके घाघरे में घुसा दिया और उसकी चिकनी जांघों को सहलाते हुए धीरे धीरे ऊपर उसकी चुत की तरफ बढ़ने लगा. नर्म मुलायम रेशम के जैसे ही चिकनी और मुलायम थी उसकी जांघें … ऐसा लग रहा था, जैसे कि मैं मक्खन पर ही अपना हाथ चला रहा हूँ.
जैसे जैसे मेरा हाथ ऊपर की तरफ बढ़ रहा था, प्रिया के पैर अपने आप ही अलग होने लगे. मैंने अपने हाथ को उसकी जांघों के बीच सरका दिया और धीरे धीरे ज़न्नत के दरवाज़े की तरफ बढ़ने लगा … जैसे जैसे मेरा हाथ उसकी चूत की तरफ बढ़ रहा था, मुझे कुछ गीलापन और गर्मी महसूस होने लगी. मैं समझ गया था कि ये इतने देर से चल रहे इस चुदाई क्रीड़ा का असर था कि उसकी चूत ने अपना रस बाहर निकाल दिया था.
मुझसे अब और सब्र नहीं हुआ, इसलिये मैंने अब सीधा ही अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया और उसकी छोटी सी नर्म मुलायम चिकनी चूत को अपनी हथेली में भर लिया.
प्रिया तड़प उठी … उसने जोरों से “इईई … श्श्श्शशशश … ओयह्ह्हहह …” की सिसकारी भरते हुए मेरे कंधे पर अपने दांत गड़ा दिए.
आह … क्या गर्म चूत थी उसकी, मानो किसी आग की भट्टी पर ही मैंने अपना हाथ रख दिया हो … मैं अच्छे से उसकी चुत को सहला कर देखने लगा.
बहुत ही चिकनी चुत थी उसकी, एक भी बाल नहीं था उसकी चुत पर, ऐसा लग रहा था … जैसे कि अभी अभी ही उसने बाल साफ किये हों.
तभी मेरे दिमाग में उसकी “तुम्हारे लिये ही दवाई तैयार कर रही थी.” वाली बात आ गयी … ओह … तो ये दवाई तैयार कर रही थी वो मेरे लिये … ये बात मेरे दिमाग में आते ही मैं उत्तेजना से भर गया और मेरी हथेली ने उसकी कमसिन चूत को पूरी तरह से अपनी मुट्ठी में भरकर जोर से मसल दिया.
जिससे ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… इइईईई … श्श्शशश … ओय्य्येऐऐऐ …’ की आवाज के साथ प्रिया के मुँह से सिसकारी निकल गयी और उसने दोनों हाथों से मेरे हाथ को पकड़ लिया.
मैं उसकी चिकनी चुत को देखने के लिये अब उतावला सा हो गया और जल्दी से अपना हाथ उसके घाघरे से बाहर निकालकर उसके घाघरे को उतारने की कोशिश करने लगा.
मगर घाघरे में ना ही तो रबड़ लगा हुआ था, जिसको मैं खींच कर उतार सकूं और ना ही उसे खोलने के लिये उसमें मुझे कहीं कोई नाड़ा या कोई चैन दिखाई दे रही थी. मैं कोशिश किये जा रहा था … और प्रिया को मेरी इस कोशिश में मज़ा आ रहा था. मुझे अब झुंझलाहट सी होने लगी.
तभी मेरे मुँह में उसकी जो चूची थी, उसे मैंने उसे हल्का सा काट लिया … जिससे प्रिया ‘अआआ … ईईई … ईईईई … ओययय …’ की आवाज के साथ चीख पड़ी और उसने अचानक से मुझे धक्का देकर बिस्तर पर गिरा दिया.
“जानवर कहीं के … यह देख क्या हाल किया है तुमने इनका …”प्रिया ने अपनी लाल हो चुकी चूचियों मुझे दिखाते हुए कहा.
तभी प्रिया अपनी चूचियां छोड़ कर अपने हाथ अपनी बगल में ले गयी और दोनों हाथे से पकड़कर अपने घाघरे का हुक खोल दिया. हुक के खुलते ही घाघरा उसके पैरों से होता हुआ नीचे फर्श पर गिर गया और कमरे में जैसे कि उजाला बढ़ सा गया.
मैंने प्रिया का हाथ पकड़ कर उसे अब बिस्तर पर खींच लिया और वो भी लहराती हुई मेरे सीने से चिपक गयी.
मैंने उसकी कमर को पकड़ कर उसे पीठ के बल सीधा किया और उसके दूधिया गोरे बदन को निहारने लगा.
प्रिया अब बिल्कुल नंगी मेरी बगल में लेटी हुई थी और ट्यूबलाईट की दूधिया रोशनी में उसका बदन किसी संगमरमर की मूर्ति की तरह चमक रहा था. ऐसा लग रहा था मानो उसके गोरे बदन से ही रोशनी फूट रही हो. बिल्कुल चिकना बदन … एक रोयां तक नहीं था उसके बदन पर … तभी मेरा ध्यान उसकी चिकनी चुत ने खींच लिया, जिसको देखने के लिये तो मैं मरा जा रहा था.
मैं तुरन्त खिसक कर नीचे उसकी चुत के पास आ गया और उसकी चुत को ध्यान से देखने लगा. बाल तो क्या एक रोंया भी नहीं था उसकी चुत पर. सही में उसने अपनी चुत के बालों को अभी कुछ देर पहले ही साफ किया था. बिल्कुल छोटी सी, कमसिन और चिकनी चुत थी उसकी और चूत की दीवारें रस से भरी हुई थीं. कामरस से भीग कर उसकी चुत कमरे की रोशनी में चमक सी रही थी.
प्रिया की बहन नेहा की चुत को उस रात मैंने देखा तो नहीं था मगर हाथों से महसूस जरूर किया था. प्रिया की चुत भी उसकी बहन नेहा के जैसी ही लग रही थी बिल्कुल छोटी सी और काफी फूली हुई.
मैंने अपने अँगूठे और उंगली से चुत की फांकों को थोड़ा सा फैलाकर देखा तो उसकी मुनिया की दरार बंद थी, उसे देखकर तो यही लग रहा था कि ये अभी तक कुंवारी होगी … या फिर नहीं भी हो … क्यूंकि उसकी बहन नेहा की चुत भी तो मुझे ऐसी ही लगी थी. मगर वो कुंवारी नहीं थी. प्रिया की तो हरकतें और अदाएं ही उस पर शक करने के लिए काफी थे.
खैर उसकी चुत के रस से भरी फांकों को देखने के बाद मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था. अपने आप ही मेरा सिर अब उसकी दोनों जांघों के बीच झुकता चला गया और मेरे नाक में उसकी चूत की एक मादक सी सुगंध समां गई. उसकी चूत से एक और भी भीनी भीनी खुशबू आ रही थी. मुझे समझते देर नहीं लगी कि ये उसी क्रीम की खुशबू थी, जिससे प्रिया ने अपनी चुत के बालों को साफ़ किया था.
अपना मुँह नीचे करके मैंने उसकी चुत को चूम लिया और जैसे ही मैंने उसे चूमा ‘ओयह्ह्ह …’ कराहते हुए प्रिया ने एक जोर की सांस ली और अपनी कमर को ऊपर हवा में उठा लिया.
मैंने लगातार कई चुम्बन उसकी चूत पर किये और अपने दांतों से हल्का सा काट लिया.
“आईईईई … क्या कर रहा है? दुखता है ना.” कहते हुए प्रिया ने अपनी जांघों को बन्द कर लिया और मुझे अपनी चुत पर से हटाने की कोशिश करने लगी. मगर अब मैं कहां रूकने वाला था, अबकी बार मैंने अपनी जीभ को बाहर निकालकर सीधे उसकी चूत की दरार पर रख दिया. प्रिया को जब मेरी जीभ की गर्मी का अहसास हुआ, तो उसने अपने आप ही अपनी जांघों को खोल दिया.
मैंने भी अब अपनी जीभ को पूरी तरह से बाहर निकाल कर उसकी चूत की दरारों पर ऊपर से नीचे की तरफ सहलाया, जिससे प्रिया का पूरा बदन सिहर गया और उसने ‘इइईईईई … श्श्श्शशश … महेश्श्श्श …’ जोर से सिसकते हुए कहा और मेरे बालों को खींचने लगी.
मैंने अब उसकी चुत की दोनों फांकों के ऊपर से चाटना शुरू कर दिया, जिससे मेरे मुँह में उसकी कमसिन चुत का नमकीन स्वाद घुलने लगा. उसकी चुत की फांकों के ऊपर से चाटते हुए धीरे धीरे मैंने अपनी जीभ को चुत की दोनों फांकों के बीच घुसा दिया और अब चुत की दोनों फांकों के अन्दर के गुलाबी भाग को अपनी जुबान से चाटने लगा.
प्रिया अब जोरों से सिसकियां भरने लगी और उसकी कमर हरकत आ गयी. मैं भी थोड़ा तेज़ी से उसकी चूत को अन्दर तक चाटने और चूसने लगा.
“इईईई … श्श्शशश … आआह्ह्ह … इईईई … श्श्शश … आआह्ह्हह … महेश्श्शश … खा जाओ मेरी चुत को …” प्रिया ने उत्तेजना के जोश में आकर सिसकियां भरते हुए कहा.
प्रिया के मुँह से अचानक ‘चूत’ शब्द सुनकर मैं सन्न रह गया. मुझे यह उम्मीद नहीं थी कि वो इस तरह की भाषा का भी इस्तेमाल करेगी. कसम से दोस्तों, मैंने बहुत सी लड़कियों व औरतें से सम्बन्ध बनाये हैं … मगर आज तक प्रिया के जैसी कोई नहीं मिली थी.
मैं भी अब जोश में आकर जल्दी जल्दी अपनी जीभ चलाने लगा, मेरी जीभ उसकी चुत की दोनों फांकों के बीच ऊपरी भाग से लेकर नीचे उसके गुदाद्वार तक चल रही थी, कभी कभी मैं अपनी जीभ से उसके चूचुक को भी कुरेद दे रहा था … जिससे प्रिया का पूरा बदन झनझना जाता. उसकी चुत पहले ही कमरस से तर थी और अब तो उसमें जैसे बाढ़ ही आ गयी थी.
“ओह्ह्ह्हह … मां … मुझे कुछ हो रहा है महेश्श्श … प्लीज कुछ करो … मैं मरर … जाऊंगी.” प्रिया ने मेरे बाल जोर से खींचते हुए मेरा मुँह अपनी चुत से हटा दिया और मेरी आंखों में देखने लगी.
उसे देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे कोई भूखी शेरनी हो. मैंने प्रिया के हाथ पकड़ लिये और वापस अपना मुँह उसकी चूत से लगा दिया … प्रिया को उसके मुकाम तक पहुंचाने के लिये मैंने अब अपना आखिरी दांव चला और अपनी जुबान को नुकीला करके उसके प्रवेशद्वार में घुसा दिया.
जैसे ही मैंने जीभ को चुत के प्रवेशद्वार में घुसाया.
“इ.ईईई … श्श्.शशश … आआह्ह्ह … महेश्श्शश …” प्रिया ने जोरों से सुबकते हुए कहा और अपनी कमर को ऊपर हवा में उठा लिया.
प्रिया की चूत की खुशबू लेते हुए मैंने अब फिर से अपना काम चालू कर दिया. मैं अब उसकी चुत के प्रवेशद्वार के भीतर तक चाटने लगा था, जिससे प्रिया की कमर की हरकत के साथ साथ उसकी आवाजें भी बढ़ने लगी थीं.
प्रिया ने मेरे हाथों से अपने हाथ छुड़ा लिये और दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़कर जोर जोर से अपनी चूत पर रगड़ने लगी … साथ ही साथ वो “इईई.श्श्शश … आआह्ह्हहह … इईईई.श्श्शशश … आआह्ह्ह …” की जोर जोर से सिसकरियां भरते हुए अपनी कमर को भी जल्दी जल्दी ऊपर नीचे करने लगी.
मैंने भी अब एक लम्बी सी सांस अन्दर खींची और तेज़ी से अपनी पूरी जीभ उसकी चूत में डाल कर अन्दर बाहर करने लगा. प्रिया के पांव अब कांपने लगे और वो जोर जोर से “इईईई … श्श्शशश … आआह्ह्ह …” की सिसकियां भरते हुए जल्दी जल्दी अपनी चुत को मेरे मुँह पर घिसने लगी.
फिर तभी अचानक से “आअह्ह ह्ह …. बस महेश्श्शश … अब बस्स्स …” कहते हुए प्रिया का बदन अकड़ गया. उसने अपने दोनों हाथों और जांघों से मेरे सिर को अपनी चुत पर जोरों से दबा लिया और मादकता से आवाजें निकालते हुए अपनी चुत से रह रह कर किस्तों में मेरे मुँह पर ढेर सारा पानी उगलने लगी.
जब तक कि प्रिया की चुत ने अपना सारा रस मेरे मुँह पर नहीं उगल दिया, तब तक वो मेरे सिर को ऐसे ही दोनों हाथों और जांघों से अपनी चुत पर दबाये रही. फिर धीरे धीरे उसकी पकड़ ढीली हो गयी और वो निढाल सी होकर बिस्तर पर ढेर हो गयी.इस मस्त सेक्स कहानी में अब तक की आपने पढ़ा कि मैंने प्रिया की चूत को चूस कर उसे झड़ा दिया था.
अब आगे …
मैं भी अब उसकी जांघों के बीच से अपना सिर निकाल कर प्रिया के बगल में लेट गया. जितना कामोत्तेजक प्रिया का रस्खलन हुआ था, उसे देखकर लग रहा था कि वो कम से कम अगले तीन चार मिनट तक होश में नहीं आयेगी. मैंने भी अब उसे छेड़ा नहीं और चुपचाप उसकी बगल में लेटा रहा.
कुछ देर तक प्रिया वैसे ही पड़ी रही और फिर धीरे से उसने करवट बदल कर अपना मुँह मेरी तरफ कर लिया. उसकी आंखों में सन्तुष्टि के भाव मैं साफ देख सकता था साथ ही हल्की सी शर्म भी उसकी आंखों में दिखाई दे रही थी.
मैंने भी करवट बदल कर अपना मुँह उसकी तरफ कर लिया और धीरे धीरे उसके नंगे बदन को सहलाते हुए “कैसी रही? मैंने आंख मारकर कहा.
“शैतान, मुझे तो पूरी नंगी करके सब कुछ देख लिया मेरा और खुद … खुद??” प्रिया ने मेरे कान में धीरे से कहा.
“देखा है तो इतना मजा भी तो दिया है, वैसे मेरा क्या देखना है तुमको?” मैंने भी सेक्सी आवाजें निकलते हुए कहा.
“तुम्हारा वो!” प्रिया ने थोड़ा शर्माते हुए कहा.
“वो क्या … ठीक से तो बताओ?” मैंने प्रिया छेड़ने के लिये जानबूझकर ऐसा पूछा.
मैंने प्रिया को अपने गले से लगा रखा था और उसके बदन के साथ ठिठोली भी कर रहा था. मैंने उससे खुलकर बताने के लिए कहा, तो वो जैसे छुई मुई सी शर्मा गई.
“धत्त, बड़े शैतान हो तुम … मुझे नहीं पता उसे क्या कहते हैं.” प्रिया ने अपनी आंखें मेरी आंखों में डालकर शर्माते हुए कहा.
“प्लीज प्रिया … ऐसा मत करो … बोलो ना … मैं जानता हूँ, तुम्हें सब पता है.” मैंने आंख मारते हुए उससे विनती की.
प्रिया अब धीरे से मेरे कानों के पास आकर फुसफुसा कर बोल पड़ी- तुम्हारा लंड …
यह कह कर उसने अपना मुँह मेरे सीने में छुपा लिया. मैंने अपने हाथों से उसका चेहरा ऊपर उठा लिया और एक बार प्यार से उसके होंठों को चूमने के बाद उसकी चूची को पकड़ लिया, मगर तभी प्रिया ने मुझे धक्का देकर खुद से अलग कर दिया और बिना कुछ कहे फुर्ती से उठकर दोनों हाथों से मेरी निक्कर के साथ साथ मेरे अण्डरवियर को भी निकालकर अलग कर दिया, जिसमें मैंने भी अपने कूल्हों को उठाकर उसकी मदद की.
मैं नीचे से अब नंगा हो गया था और मेरा उत्तेजित लंड प्रिया के सामने था, जिसे वो आंखें फाड़ फाड़ कर ऐसे देख रही थी … जैसे कि वो पहली बार किसी के लंड को देख रही हो.
मैंने अब अपनी टी-शर्ट को भी उतार कर अलग कर दिया और बिल्कुल नंगा होकर प्रिया का हाथ अपने लंड पर रखवा दिया. प्रिया के कोमल हाथ का स्पर्श होते ही मेरे लंड ने झटका सा खाया और अकड़ कर वो और भी सख्त हो गया.
मेरे लंड को देखकर एक बार तो प्रिया की आंखें ऐसे चमक उठी थीं, जैसे कि किसी बच्चे को उसकी सबसे मनपसंद चॉकलेट या खिलौना मिल गया हो. मगर साथ ही उसकी आंखों में हैरानी के साथ साथ चिंता के भी भाव उभर आये.
मैंने उसकी मनोस्थिति भांप ली थी, ऐसा शायद मेरे लंड के आकार के कारण था. प्रिया के हाथ के दबाव से मेरे लंड के आगे की चमड़ी थोड़ा सा पीछे हो गयी थी और गुलाबी रंग का हल्का सा सुपारा नजर आ रहा था.
तभी प्रिया ने लंड के आगे की चमड़ी को खींचकर पूरा पीछे कर दिया और सुपारे को बाहर निकाल लिया, जो कि एकदम लाल होकर चमक रहा था. इतनी देर से यह सब चल रहा था, तो ज़ाहिर है कि मेरे लंड ने भी अपना काम रस निकाल दिया था. इस वजह से वो और भी चिकना और चमकीला हो गया था.
प्रिया का हाथ फिसलता हुआ अब मेरे गोलों पर आ गया, जो कि उत्तेजना में आकर सख्त और गोल हो गए थे. मेरे गोलों को हाथ से पकड़कर देखते हुए प्रिया ने गोलों को अपनी मुट्ठी में पकड़ कर दबा दिया.
“उह्ह्हह्ह … क्या कर रही हो?” मैंने दर्द से तड़पते हुए कहा, जिससे प्रिया जोर से हंसने लगी और वापस अपना हाथ मेरे लंड पर ले आई. वो मेरे लंड को पकड़ कर धीरे धीरे हिला रही थी कि तभी मैंने एक हाथ से उसकी गर्दन को पकड़ कर अपने लंड पर दबा दिया, जिससे मेरा सुपारा उसके होंठों से छू गया.
प्रिया मेरा इशारा समझ गयी थी. उसने मेरे सुपारे को पहले तो होंठों से चूमा और फिर अपनी जुबान को बाहर निकालकर हल्का सा सुपारे को छूकर देखा.
पता नहीं … उसे मेरे लंड के रस का स्वाद पसंद नहीं आया था शायद. उसने अपनी गर्दन ऊपर उठा ली और अजीब सा मुँह बनाकर मेरी तरफ देखने लगी, जैसे कि वो बताना चाह रही हो कि उसे ये अच्छा नहीं लगा.
मैंने अब उसका हाथ पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया और वो किसी अच्छे बच्चे की तरह चुपचाप मेरी बगल में आकर लेट गयी. मैंने उसकी एक चूची को अपने मुँह में भर लिया और जोर से चूसने लगा.
“अआआहह … ओययय … धीरे … अभी भी दुःख रहा है.” प्रिया ने एक सिसकारी लेकर मेरे सिर के बालों को सहलाते हुए कहा.
उसकी चूची को चूसते हुए मैंने अपने हाथ को हरकत दी और उसके चिकने बदन को ऊपर से नीचे तक सहलाने लगा. प्रिया उत्तेजित हो गयी थी और मज़े से हल्की हल्की सिसकारियां भरने लगी थी. प्रिया के बदन को सहलाते हुए मैं अपने हाथों को उसकी जांघों पर ले आया और उसकी चिकनी जांघों को हल्के हल्के मुट्ठी में भर कर दबाना शुरू कर दिया. इससे प्रिया ने अब खुद ही अपने पैरों को फैला लिया. यह इस बात का इशारा था कि अब उसकी चूत कुछ मांग रही थी.
प्रिया की जांघों को सहलाते हुए मैं अपना हाथ उसकी चुत पर ले आया और उसकी छोटी सी नर्म मुलायम चिकनी चूत मेरी हथेली में खो गयी. कामरस और मेरे मुँह की लार से उसकी चुत अभी तक काफी गीली थी. प्रिया की चुत को सहलाते हुए मैंने अपनी बीच वाली उंगली को चुत की दोनों फांकों के बीच घुसा दिया और फिर चुत की दरार को ऊपर से सहलाते हुए नीचे उसके प्रवेशद्वार पर ले आया … जो कि मुझे सुलगता हुआ सा महसूस हो रहा था. मेरी उंगली मानो जल ही उठी थी. उसकी चुत से बहुत ही तेज गर्मी निकल रही थी और गर्म गर्म प्रेमरस का रिसाव करता उसका प्रवेशद्वार तो जैसे सुलग ही रहा था.
जैसे ही मैंने अपनी उंगली को प्रिया की चुत के प्रवेशद्वार पर रखा, प्रिया ने सुबकते हुए कामुक आवाज में कहा- अआह्ह्ह … महेश्श्श्शश …
उसने अपने दोनों हाथों से मेरे हाथ को जोर से पकड़कर अपनी कमर को ऊपर उठा लिया. उसे एक झटका सा लगा था और उसने अपनी अवस्था का ज्ञान अपनी कमर हिलाकर करवाया.
मैंने पहले तो अपनी उंगली को प्रेमद्वार पर गोल गोल घुमाया और फिर उंगली को प्रेमद्वार पर रख कर हल्का सा दबा दिया, जिससे मेरी उंगली का लगभग आधा पौरा उसमें धंस गया और प्रिया के मुँह से एक जोर की सिसकारी निकल गयी- उइइईईई … इश्श्श्श्श … अह … ओह … उय्य्य्य …
उसने मेरे हाथ को जोर से अपनी चुत पर दबा लिया और फिर से अपनी कमर को ऊपर हवा में उठा लिया. प्रिया के ऐसा करने से मेरी उंगली उसके प्रवेशद्वार में थोड़ा और घुस गयी, जिससे प्रिया के मुँह से “इइईईई … श्श्शशश … आआआह्ह्हह …” की जोरों से आवाज निकल गयी.
प्रिया अब फिर से पूरे जोश में आ गयी थी और मेरा तो हाल बस पूछो ही मत. मुझमें अब और सब्र बाकी नहीं था इसलिए मैं अब उठ कर प्रिया की दोनों टांगों के बीच में आ गया और एक भरपूर निगाह उसकी चूत पर डाली, जो कि मेरे मुँह के लार और उसके खुद के रस से सराबोर होकर चमक रही थी.
मैं एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर थोड़ा सा आगे की तरफ झुक गया और अपने सुपारे को उसकी चुत की दरार पर लगा दिया, जिससे प्रिया ने एक आह … भरी और अपनी टांगों को थोड़ा और फैला लिया. उसे पता था कि मैं अब आगे क्या करने वाला हूँ … इसलिये वो पहले ही समझ गयी थी.
मैंने अपने लंड के सुपारे को उसकी चूत की दोनों फांकों के बीच में लगाकर पहले तो धीरे धीरे घिसकर उसकी चुत को सहलाया और फिर धीरे से सुपारे को उसके प्रवेशद्वार पर लगा दिया.
मेरे लंड के दबाव से चूत की दोनों फांकें फैल गयी थीं, जिससे उसकी चूत का मुँह भी थोड़ा सा खुल गया.
प्रिया ने भी अब अपनी सांसें रोक लीं और वो अब धक्के खाने के लिए पूरी तरह से तैयार थी. मैंने भी देर ना करते हुए धीरे से अपने लंड को प्रिया की चूत में धकेल दिया, मगर मेरा लंड फिसल गया और धक्का उसकी चूत के दाने पर लगा.
“आआह … आ …ह्ह्ह्हहह … ओओययय … क्या कर रहा है … आराम से करर … ना … मेरा ये पहली बार है!”
प्रिया ने कराहते हुए कहा और एक जोर की सांस लेकर अपने शरीर को कड़ा कर लिया.
“क्याआआ …” प्रिया के मुँह से ये सुनते ही, मेरे मुँह से हैरानी के कारण निकल गया और मैं चौंक कर उसकी तरफ देखने लगा.
वो अपनी आंखें बन्द करके कसक सी रही थी और मेरे धक्का लगाने के डर से अपने शरीर को कड़ा किए हुए थी. प्रिया की हरकतों से तो नहीं लग रहा था कि वो अभी तक वो कुंवारी बची होगी, मगर जैसा उसने कहा और उसकी चुत को देखकर ये लग भी रहा था कि ऐसा हो भी सकता है.
खैर ये तो अभी पता चल ही जाएगा, मैंने फिर से अपने लंड को ठीक जगह पर लगाया और अबकी बार मैंने थोड़ा जोर से धक्का दे दिया.
एक तो कामरस के निकलने से प्रवेशद्वार भीगकर चिकना हो रहां था और दूसरा प्रिया खुद भी शारीरिक और मानसिक रुप से इसके लिये तैयार थी. इसलिये मेरा सुपारा उसकी चूत के छोटे से दरवाज़े को भेदकर अन्दर घुस गया.
प्रिया, “अआआआ … ईईईई …” कहकर फिर से कराह पड़ी. उसकी आंखें फैलकर चौड़ी हो गईं और उसने दोनों हाथों से मेरी कमर को पकड़ लिया.
“ओयय … बहुत दर्द हो रहा है, मम्मीईईई …!,ओय्यय … महेश्श्स … बहुत दर्द हो रहा है.” प्रिया ने दर्द से कराहते हुए कहा.
सच में उसकी चूत बहुत कसी हुई थी. अब तक जैसा कि मैं सोच रहा था कि उसने पहले भी ये सब किया होगा वैसा लग नहीं रहा था. उसकी चूत की दीवारों ने मेरे लंड के सुपारे को पूरी तरह से जकड़ लिया था, जिससे मेरे सुपारे में एक खुजली सी होने लगी.
मैं आगे झुक कर उसके गालों को चूमने लगा और “हो गया … हो गया … अब तो बस … बस एक बार हल्का सा दर्द और होगा …” मैंने उसे ये बस तसल्ली देने के लिये कहा था. मगर मुझे पता था असली दर्द तो अभी उसे झेलना बाकी है. उसने भी मेरी बात मान ली और अपने शरीर को फिर से कड़ा करके वो मेरा अगला धक्का खाने के लिये तैयार हो गयी.
कुछ देर मैं ऐसे ही उसके गालों को चूमता चाटता रहा और फिर अचानक से अपनी पूरी ताकत लगाकर एक जोर का धक्का लगा दिया. अबकी बार … अबकी बार लगभग मेरा आधे से ज्यादा लंड उसकी चुत की दीवारों को चीरता हुआ अन्दर घुस गया था, जिससे प्रिया के मुँह से एक जोर की चीख निकल गयी.
“अआआआ … उईईईई … मर गईईई … ईई …ई …” उसने फिर से मेरी कमर को कस कर पकड़ लिया. प्रिया की चीख कहीं उसकी मम्मी को ना सुनाई दे जाए इसलिये जल्दी से मैंने उसके होंठों को अपने मुँह में भरकर उसका मुँह बन्द कर दिया. लेकिन उसकी घुटी घुटी सी आवाज़ अब भी निकलती रही.
मैंने उसी तरह प्रिया होंठों को चूसते हुए ही पहले तो अपने लंड को थोड़ा सा बाहर खींच लिया, जिससे प्रिया को कुछ राहत मिल गयी और मेरी कमर पर उसके हाथों की पकड़ भी कुछ हल्की हो गयी.
इसके तुरंत बाद ही मैंने एक जोरदार धक्का फिर से लगा दिया, जिससे प्रिया के मुँह से “उऊऊहू … उह … ऊऊऊई …” की आवाज निकली और उसकी आंखें बाहर को उबल आईं. उसके हाथ मेरी कमर पर जोर से कस गए और उसकी आंखों में आंसू भर आए.
प्रिया का मुँह मेरे होंठों से बन्द था इसलिये उसने “ऊगूंगूगूगू … गूऊऊ …” कहते हुए पहले तो अपने होंठों को मेरे मुँह से छुड़वाया और फिर दर्द से बिलबिलाने लगी. “आईईई … मम्मीईईई … बहुत दर्द हो रहा है इसे बाहर निकाल लो प्लीईज, मुझसे नहीं होगा … ओययय … महेश्श … इसे बाहर निकाल ले …” ये कहते हुए वो छटपटाने लगी.
मैंने थोड़ा सा ऊपर उठकर नीचे अपने लंड की तरफ देखा तो मेरी आंखों में एक नयी चमक सी आ गयी, क्योंकि मेरा आधे से ज्यादा लंड प्रिया की चुत में घुसा हुआ था और उस पर मुझे कुछ खून लगा हुआ दिखाई दे रहा था, इसका मतलब था कि सही में प्रिया अभी तक कुंवारी ही थी. प्रिया जैसी खूबसूरत लड़की और उसके कौमार्य को भंग करने का सौभाग्य मुझे मिला, ये सोचकर ही मैं उत्तेजना से भर गया.
बस, अब तो हो गया, यह आखिरी दर्द था … बस थोड़ा सा और सह लो … फिर सब ठीक हो जाएगा.” मैंने एक हाथ से उसकी चूची को सहलाते हुए कहा और साथ ही फिर से एक धक्का और लगाकर अपना पूरा लंड उसकी चुत में घुसा दिया जिससे प्रिया फिर से तिलमिला उठी- आआईईई … मम्मीईईई … ईईई!
अब उसकी आंखों से टप टप आंसू बहने लगे.
मैं उसको चूमे जा रहा था और प्रिया ने मुझे धक्के देकर हटाने की कोशिश करते हुए कहा- नहीं … मुझे नहीं करना … आईईई … मम्मीईईई … इसे तुम बाहर निकाल लो … प्प् …प्लीज!
लेकिन मैं अपने लंड को प्रिया की चुत में घुसाये हुए उससे लिपटा रहा और उसके गालों को चूमने चाटने लगा. मैं नीचे से अब कुछ भी हरकत नहीं कर रहा था, बस ऊपर से ही उसके होंठों व गालों को चूमे जा रहा था.
कुछ देर तक मैं नीचे से बिना कोई हरकत किये ऐसे ही प्रिया के बदन पर लेटे हुए उसके होंठों व गालों को चूमता चाटता रहा और उसे सांत्वना देने के लिये उसके सिर के बालों को भी प्यार से सहलाता रहा, जिससे प्रिया कुछ शांत होने लगी.
प्रिया जब कुछ शांत हो गयी, तो मैं उस पर लेटे लेटे ही धीरे धीरे अपने लंड को चुत में अन्दर बाहर करने लगा. मगर जैसे ही लंड ने हरकत करनी शुरू की, प्रिया को फिर से दर्द का एहसास होने लगा.
“अआआह्ह हह … महेश्श … बहुत दुःख रहा है … प्लीज मेरी बात मान लो … आईई … मुझसे नहीं होगा … ओह्ह्ह … मम्मीईई … ओय्यय … महेश्श …”
मैंने अब रुकना ठीक नहीं समझा और बस यूं ही लंड को चूत में हिलाने लगा. मेरे लंड की हरकत के साथ साथ प्रिया ने कराहते हुए मुझसे कहा- आईईई … अआआ … ह्ह्हहह … उऊऊ … ह्ह्हहह …ओय्य्यय … अआआ … ह्ह्हहह … उऊऊ … ह्ह्हहह …”
वो दर्द से आवाज कर रही थी लेकिन मैं अब रूका नहीं बल्कि एक हाथ से उसकी चूचियों को भी दबोच लिया और वैसे ही धीरे धीरे को अपने लंड को उसकी चुत में अन्दर बाहर करता रहा. साथ ही उसे फिर से उत्तेजित करने के लिये मैं उसके होंठों व गालों को चूमते चाटते हुए उसकी चूचियों को भी सहलाने लगा.
कुछ देर तक तो प्रिया ऐसे ही कराहती रही. फिर धीरे धीरे वो शांत होने लगी और मेरी कमर पर उसके हाथों की पकड़ कुछ ढीली पड़ने लगी. वो भी अब हल्का हल्का मेरे होंठों को अपने होंठों से दबाने लगी थी, जिससे मैं समझ गया कि उसका दर्द अब कम हो रहा है.
इसलिये मैंने अपना काम जारी रखते हुए धीरे से अपनी जुबान को उसके मुँह में घुसा दिया, जिसे प्रिया भी हल्का हल्का चूसने लगी.
प्रिया अब धीरे धीरे उत्तेजित होने लगी थी क्योंकि उसकी चुत में अब हल्की सी नमी आ गयी थी, जिससे चुत की दीवारें चिकनी हो गईं … और इसका अहसास मुझे अपने लंड से हो रहा था. मेरा लंड इस समय थोड़ा आसानी से चुत के अन्दर बाहर हो रहा था.
मैं भी उसके होंठों का मजा लेते हुए वैसे ही धीरे धीरे धक्के लगाता रहा, जिससे कुछ ही देर में प्रिया अपना सारा दर्द भूल कर उन मादक पलों का आनन्द लेने लगी. उसकी कमर भी अब नीचे से धीरे धीरे हरकत करने लगी थी. ये इस बात का इशारा था कि उसे भी अब मजा आने लगा है.
मैंने भी अब धीरे धीरे अपने कूल्हों को उठाकर धक्के लगाने शुरू कर दिए … जिससे प्रिया फिर से कराहने लगी और मेरे होंठों से अपने होंठ अलग करके सिसियाना शुरू कर दिया था.
“ओह्ह … मम्मीईईई … दुख रहा है ना … प्लीज … धीरे करो … बहुत दर्द हो रहा है … उफ्फ्फ्फ़ … मुझे अगर पता होता ना … कि इतना दर्द होता है, तो मैं ये कभी भी नहीं करती …”
ये सब उसने दर्द से कराहते हुए कहा. वो मुझसे शिकायत तो कर रही थी … मगर साथ ही उसकी कमर अब भी नीचे से धीरे धीरे हरकत कर रही थी.
“अच्छा जी … और अब … अब क्या करोगी?” मैंने उसकी आंखों में देखते हुए उससे पूछा और उसके गाल पर एक चुम्मी लेकर फिर से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
प्रिया ने मेरी बात का कोई जवाब तो नहीं दिया, मगर उसने अपना मुँह खोलकर फिर से मेरी जुबान को अपने मुँह में खींच लिया और उसे जोरों से चूसने लगी. उसके दोनों हाथ भी मेरी कमर पर से मेरे सिर पर आ गए और वो अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़ कर मेरे होंठों व जीभ को जोरों से चूसने लगी.
धीरे धीरे प्रिया की कराहें, मादक सिसकारियों में बदल गईं और उसके दोनों हाथों ने मेरे सिर को छोड़ दिया और अब वे वापस मेरी पीठ पर रेंगने लगे. अब तक जिस दर्द की वजह से प्रिया के चेहरे का रंग उड़ा हुआ था, वही दर्द अब उसे मज़े दे रहा था.
मैं भी अब धीरे धीरे अपने धक्कों की गति को बढ़ाने लगा, जिससे प्रिया के मुँह से सिसकारियां फूटनी शुरू हो गईं. मेरे धक्कों के साथ साथ प्रिया भी अब अपने कूल्हों को जोरों से उचकाने लगी थी. उसने मेरे होंठों को छोड़ दिया और जोरों से अपने कूल्हों को उचका उचका कर अपनी चुत से मेरे लंड का स्वागत करने लगी.
वो अब पूरी तरह से उत्तेजित हो गयी थी, इसलिये उसकी चुत ने भी अब कामरस उगलना शुरू कर दिया. कामरस ने चुत की दीवारों की चिकनाई को और भी बढ़ा दिया और मेरा लंड अब आसानी से चुत के अन्दर बाहर होने लगा.अब तक की इस मस्त सेक्स कहानी में आपने पढ़ा कि प्रिया की चुदाई जारी थी और उसकी कुंवारी चूत की सील टूट चुकी थी. उसकी चूत ने लंड को सहन कर लिया था और अब रस निकलने के कारण चूत में लंड को आने जाने में सुगमता हो चली थी.
अब आगे:
चूंकि प्रिया अब पूरी से तरह मेरा साथ देने लगी थी, इसलिये मैंने अपने धक्कों का माप बढ़ा दिया और तेजी से धक्के लगाने लगा. मेरा पूरा लंड अब उसकी चुत में अन्दर बाहर हो रहा था, जिससे प्रिया की सिसकारियां तेज हो गईं और मेरे हरेक धक्के के साथ वो जोरों से अपने कूल्हों को उचका उचका कर चुदास से भरी आवाजें निकालने लगी ‘इइ.ईईई …श्श्श्श्श्श … अआआआह … उहा … उइइ … ईईई … इश्श्श्श्श … अआह … ह्ह्ह्ह्ह ह्ह्ह्हहा …’
मैंने भी अब थोड़ा और तेजी से धक्के लगाने शुरू कर दिए … जिससे प्रिया की सिसकारियां और भी तेज हो गईं. उसने भी अब अपने पैरों को उठाकर मेरे कूल्हों पर रख लिया और तेजी से अपने कूल्हे उचका उचका कर मुँह से मादक आवाजें निकालने लगी.
प्रिया अब पूरे जोश में थी और मेरी ताल से ताल मिलाकर अपने कूल्हों को उचका रही थी. इसलिये मैं भी अब अपने पूरे जोश में आ गया. मैंने अपनी कमर के ऊपर के हिस्से को अपने हाथों के सहारे ऊपर उठा लिया और अपनी पूरी तेजी व पूरी ताकत से धक्के लगाने लगा.
मेरा आठ इंच का मूसल लंड अब प्रिया की मुनिया को तहस नहस करने पर उतारू था. वो जिस वेग से प्रिया की मुनिया के अन्दर जा रहा था, तो उससे भी दुगने वेग से बाहर आकर फिर से अन्दर जा रहा था. जिसका प्रिया भी अब कोई विरोध नहीं कर रही थी. उत्तेजना के वश वो तो खुद ही ‘इई … इश्श्शश … अआ … ओह्हह …. इईई.श्श्शश … आआह्ह्ह … इईईई श्श्शश … अआह्हह …” की किलकारियां सी मारते हुए अब अपने कूल्हों को उचका उचका कर मेरे मूसल को अधिक से अधिक अपनी मुनिया में उतारने का प्रयास कर रही थी.
मैं अपने मूसल लंड से प्रिया की उस छोटी सी मुनिया के परखच्चे उड़ाने पर उतारू था, तो प्रिया भी अपनी मुनिया की संकरी गुफा में मेरे लंड को दबोचकर मारने का प्रयास कर रही थी. इस धक्कमपेल से हम दोनों की सांसें अब फूल गयी थीं और बदन पसीने से भीगकर बिल्कुल तर हो गए थे. मगर फिर भी हम दोनों ही अपनी मंजिल को पाने के लिये जुटे रहे.
जोरों से धक्के लगाते हुए अचानक से प्रिया गुर्राने सी लगी. उसकी सिसकारियां फिर से कराहों में बदल गईं. मगर ये कराहें अब दर्द की नहीं थीं … बल्कि आनन्द की कराहें थीं. उसने अपने हाथों व पैरों से मेरे शरीर को कस कर पकड़ लिया और किसी बेल की तरह मेरे शरीर से लिपट गयी. उत्तेजना और चरम सुख के चलते एक पल तो वो शायद सांस लेना तक भूल गयी और फिर सुबकते हुए “अहां … आहां … अहां …” की कामुक आवाज निकालते हुए अपनी चुत से प्रेमरस उगलने लगी, जिसने मेरे लंड को नहला दिया.
अपनी चुत का सारा ज्वार उगलने के बाद प्रिया निढाल होकर बिस्तर पर धम्म से गिर गयी और लम्बी लम्बी सांसें लेने लगी. मैं भी चरमोत्कर्ष के करीब ही था. इसलिये मैं अब ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा. प्रिया की चुत के कामरस से भीगकर मेरा लंड और भी चपल हो गया था और वो और भी तेजी से चुत के अन्दर बाहर होने लगा.
लगातार चार पांच धक्के अपनी पूरी ताकत व तेजी से लगाने के बाद मेरा लंड भी उसकी चुत में लावा उगलने लगा … मैं भी अपना सारा वीर्य प्रिया की चुत में उगलने के बाद ढेर होकर प्रिया पर गिर गया और अपनी उफनती सांसों को काबू में करने की कोशिश करने लगा.
काफी देर तक हम दोनों ऐसे ही पड़े रहे. फिर प्रिया ने धीरे से कराहते हुए मुझे उठने का इशारा किया और मैं उसके बदन पर से लुढ़क कर उसकी बगल में लेट गया. मेरे उठते ही प्रिया उठकर बिस्तर पर बैठ गयी.
तभी उसका ध्यान बेडशीट पर चला गया, जिस पर खून के धब्बे लगे हुए थे.
“हे …भगवान … ये … ये सब क्या है?” उसने हैरानी से बेडशीट पर लगे खून के धब्बों को देखते हुए कहा.
“कुछ नहीं हमारे प्यार की निशानी है ये!” मैंने शरारत से उसकी जांघों पर हल्की थपकी मारते हुए कहा जिससे प्रिया हल्का सा शर्मा गयी और उसने मेरे सीने में दो तीन घूंसे लगा दिए.
“जानवर कहीं के … प्यार क्या कोई ऐसे करते हैं … देखो क्या हाल बना दिया तुमने इसका?” उसने अपनी चुत की तरफ देखते हुए कहा जिसमें से खून और मेरा वीर्य अब भी रिस रहा था.
“कोई नहीं, तो अब तुम बता दो कि प्यार कैसे करते हैं?” मैंने हंसते हुए कहा और प्रिया को फिर से अपने ऊपर खींच लिया.
तभी प्रिया का ध्यान दीवार पर लगी घड़ी पर चला गया, जिसमें दो बज रहे थे.
“छोड़ मुझे अब … सुबह उठना भी है.” कहते हुए प्रिया मुझसे खुद को छुड़वाकर खड़ी हो गयी और जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहनने लगी.
कपड़े पहनने के बाद प्रिया ने उस बेडशीट को खींचते हुए कहा- इसे छोड़ … मैं इसे अभी धुलाई कर देती हूँ, कल अगर गलती से मम्मी ने देख लिया, तो तेरा सारा प्यार निकल जाएगा.
वो उस बेडशीट को लेकर अपने कमरे में चली गयी. इसके बाद मैं भी अपने कपड़े पहनकर सो गया. मैं मुश्किल से दो अढ़ाई घण्टे ही सोया था कि किसी के जोरों से हिलाने के कारण मेरी नींद खुल गयी. मैंने आंखें खोलकर देखा तो हाथ में बेडशीट लिये प्रिया मेरे सामने खड़ी मुस्कुरा रही थी.
“तुम तो बड़े स्वार्थी हो … मैं रात भर से सोई नहीं हूँ … और तुम हो कि घोड़े बेचकर सो रहे हो … ये लो पकड़ो इसे, मैंने इसे धुलाई करके सुखा भी दिया है.”
प्रिया ने उस बेडशीट को मेरे ऊपर फेंकते हुए कहा और वापस मुड़कर कमरे से बाहर चली गयी.
प्रिया की इस अदा पर मुझे बड़ा ही तरस और प्यार आ गया, सही में उसने रात में ही उस बेडशीट की धुलाई की और फिर प्रेस करके उसे सुखा लाई थी. मैं उसे कुछ कहता, तब तक वो कमरे से बाहर निकल गयी.
प्रिया की मम्मी के उठने का भी समय हो गया था … इसलिये मैं अब उसके पीछे नहीं गया और बेडशीट को बिछाकर फिर से सो गया.
प्रिया के साथ इतने मजे से दिन निकले कि पता नहीं कैसे हफ्ता भर गुजर गया. प्रिया के पापा ने ऑफिस से एक हफ्ते की ही छुट्टी ली हुई थी और शायद नेहा का भी गांव में दिल नहीं लगा, इसलिए हफ्ते भर गांव रहने के बाद प्रिया के पापा और नेहा गांव से वापस आ गए. मगर कुशल अब भी गांव में ही रहा.
प्रिया और नेहा अब एक ही कमरे में सोने लगीं, मगर फिर भी प्रिया चुपके से रात में मेरे कमरे में आ जाती … जिससे हमारा काम बन जाता था.
प्रिया के साथ तो मेरा काम चल ही रहा था, मगर अब नेहा के आ जाने के बाद मेरा दिल उसको भी पाने के लिए मचलने लगा था. वैसे भी मैं तो उसी को ही पाने की कोशिश कर रहा था, प्रिया तो गलती से फंस गयी थी. अब तो मुझे मालूम भी हो गया था कि उस रात नेहा ने मेरे साथ सम्बन्ध बनाये थे, इसलिए मेरा काम मुझे आसानी बनता भी नजर आ रहा था.
ये बात मैंने प्रिया को भी बताई मगर मेरे साथ देने के बजाए वो मुझसे नाराज हो गयी. हालांकि वो दोनों सगी बहनें ही थीं, मगर फिर भी प्रिया को ये गंवारा नहीं था कि मैं अब नेहा के साथ सम्बन्ध बनाऊं.
खैर … प्रिया तो मेरा साथ देने के लिए तैयार नहीं हुई, मगर फिर भी मैं अब नेहा के अधिक से अधिक पास रहने की कोशिश करने लगा और जानबूझकर उससे उस रात के बारे में बातें करने की कोशिश करता, जिससे नेहा के चेहरे के भाव बदल जाते थे. वो अगर मेरे साथ अकेली होती तो वहां से चली जाती थी और अगर नेहा या सुलेखा भाभी के साथ होती, तो तुरन्त ही बातों का विषय बदल देती थी.
नेहा को भी पता चल गया था कि मैं उस रात की असलियत जान गया हूँ इसलिए मुझसे वो डर डर कर रहती थी. फिर भी अगर कभी हमारा आमना सामना हो भी जाता, तो वो जानबूझकर अनजान बनने का नाटक करने लगती.
मैं अब दिल ही दिल में नेहा को पाने के लिए योजनायें बनाता रहता था. मगर नेहा से अकेले में मिलने का मुझे कोई मौका ही नहीं मिल रहा था.
ऐसे ही तीन चार दिन बीत गए और फिर एक दिन ऊपर वाले ने मेरी सुन ली. उस दिन सुलेखा भाभी अपनी पड़ोसन के साथ बाजार गयी हुई थीं और घर में बस नेहा और प्रिया ही थीं. संयोग से उस दिन मैं भी कम्प्यूटर कोर्स से जल्दी ही घर आ गया था.
मैं घर पहुंचा, उस समय घर के काम निपटाकर प्रिया तो टीवी देख रही थी और नेहा अपने कमरे में शायद ऐसे ही लेटी हुई थी.
अब जैसे ही मुझे पता चली कि सुलेखा भाभी बाजार गयी हुई हैं और घर में बस नेहा और प्रिया ही हैं … मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा. सबसे पहले तो मैंने अब प्रिया को मनाने की कोशिश की. मगर वो कहां मानने वाली थी. मैंने भी अब सोचा कि प्रिया को तो मैं बाद में भी मना सकता हूँ. मगर नेहा को पाने का ऐसा मौका शायद मुझे फिर कभी नहीं मिलने वाला था. इसलिए प्रिया के मना करने के बावजूद भी नेहा के कमरे में चला गया. मुझे नेहा के कमरे में जाने से रोकने के लिए प्रिया मेरे पीछे पीछे भी आई थी, मगर वो दरवाजे पर ही रूक गयी और मैं नेहा के कमरे में घुस गया.
नेहा बिस्तर पर आराम से लेटी हुई थी. मुझे देखते ही वो थोड़ा घबरा सी गयी और तुरन्त उठकर बिस्तर पर बैठ गयी.
“उस रात के बाद तुम मुझसे मिली क्यों नहीं?” मैंने अब उसके पास ही बिस्तर पर बैठते हुए कहा.
“क्क्.क. कौन सी रात? तुम क्या कह रहे हो मुझे नहीं पता?” नेहा ने घबराहट में हकलाते हुए कहा और बिस्तर से उठकर खड़ी हो गयी.
मैंने भी अब उसका हाथ पकड़कर उसको अपनी तरफ खींच लिया, जिससे वो बुरी तरह घबरा गयी.
“य.ये …क् … क्या कर रहे हो? छ.छोड़ो मेरा हाथ!” नेहा ने हकलाते हुए कहा.
नेहा थोड़ा घबरा तो रही थी मगर पहले के जैसे नहीं कि मेरा हाथ छुड़ाकर वहां से भाग जाए, वो अब भी अपने आपको सामान्य ही दिखाने का प्रयास कर रही थी. पता नहीं ये बदलाव उसमें कैसे आ गया था. पहले तो वो अकेले में मेरे साथ एक मिनट भी नहीं रुकती थी, मगर आज उसने वहां से भागने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं की.
“अब ज्यादा मत बनो, मुझे सब पता चल गया है!” मैंने उसको अपनी तरफ खींचते हुए कहा और उसे बांहों में भरकर अपनी गोद में बिठा लिया, जिससे मेरा उत्तेजित लंड सीधे उसके भरे हुए कूल्हों की गहराई में कहीं खो सा गया. मेरे उत्तेजित लंड का अपने कूल्हों पर स्पर्श पाते ही नेहा के बदन ने झुरझुरी सी ली.
“छ्छ.छो.ड़ … छोड़ो मुझे … मुझे नहीं पता तुम क्या कह रहे हो?” नेहा ने अपने आपको छुड़ाने की कोशिश करते हुए घबराई सी आवाज में कहा.
घबराहट के कारण उसके मुँह से अब ठीक से आवाज नहीं निकल रही थी.
मैं अब कहां छोड़ने वाला था, मैं उसको अपनी बांहों में भरकर बैठे बैठे ही बिस्तर पर लुढ़क गया और वो ‘क्क्या कर रहे हो? छ.छोड़ो … छोड़ो मुझे …’ करती रह गयी.
नेहा को बांहों में भरकर मैं अपनी पीठ के बल बिस्तर पर लेट गया था, जिससे नेहा मेरे ऊपर आ गयी और मैं उसके नीचे था. नेहा का मुँह ऊपर की तरफ ही था. इसलिए मैं अब अपने दोनों हाथों को उसकी गोलाईयों पर ले आया और एक साथ उसकी दोनों चूचियों को पकड़ कर मसलने लगा.
नेहा अब सहम सी गयी और “अआह … ये क्या कर रहे हो? छोड़ो … छोड़ो मुझे!” उसने जोरों से कसमसाते हुए कहा और उठने का प्रयास करने लगी. मगर तभी मैंने करवट बदलकर उसको नीचे गिरा लिया. कसमसाकर उसने अब फिर से उठने की कोशिश तो की, मगर तब तक मैंने नेहा के ऊपर आकर उसके बदन को अपने शरीर के भार से दबा लिया. नेहा का मखमली बदन अब मेरे नीचे था और मैं उसके ऊपर लदा था.
नेहा के ऊपर आकर मैंने उसके कोमल गालों पर चूमना शुरू कर दिया और साथ ही एक हाथ से उसकी एक चूची को भी फिर से दबोच लिया. घबराहट के कारण नेहा का बदन अब हल्का हल्का कांपने लगा था.
“छ्छ् छो ड़ दो मुझे … प्रिया … प्रिया आ जाएगीईई … छोड़ अओ ना!” उसने कसमसाते हुए धीरे से कहा.
“वो नहीं आएगी … वो अपनी सहेली के घर चली गयी है और हां, उसे तो पहले से ही सब कुछ पता है … उसने ही तो मुझे बताया कि उस रात तुम मेरे साथ थीं.” मैंने उसके कानों के पास चूमते हुए कहा.
यह सुनते ही नेहा को झटका सा लगा. “क्या …आआ?” नेहा के मुँह से हैरानी से निकला और वो बिल्कुल स्थिर सी हो गयी.
इस वक्त नेहा ने नीचे एक ढीला सा लोवर पहना हुआ था और ऊपर कुर्ते के जैसा ही कुछ पहना हुआ था, जो कि काफी ढीला था. मौके का फायदा उठाकर मैंने भी अब धीरे से अपना हाथ उसके कुर्ते में घुसा दिया, कुर्ते के नीचे उसने ब्रा पहनी हुई थी, इसलिए मैं अब ब्रा के ऊपर से ही उसकी दोनों चूचियों को मसलने लगा.
मेरे होंठ भी अब उसके गालों को चूमते हुए उसके रसीले होंठों पर आ गए थे. मैंने देर ना करते हुए तुरन्त उसके होंठों को अपने मुँह में भर लिया और उन्हें धीरे धीरे चूसना शुरू कर दिया.
नेहा मेरा अब इतना विरोध तो नहीं कर रही थी, मगर वो अब भी कसमसा रही थी. उसकी निगाहें कमरे के दरवाजे पर ही टिकी हुई थी, जो कि खुला हुआ था. उसको डर था कि कहीं प्रिया ना आ जाए. मुझे तो विश्वास था कि प्रिया अब इस कमरे में नहीं आएगी, मगर फिर भी नेहा का ये डर दूर करने के लिए मैं उसको छोड़कर अलग हो गया और जल्दी से जाकर कमरे का दरवाजा बन्द कर दिया.
मेरे छोड़ने पर नेहा अब उठकर बिस्तर पर बैठ गयी. उसने वहां से जाने का बिल्कुल भी प्रयास नहीं किया बल्कि वैसे ही बिस्तर पर बैठी रही. कमरे का दरवाजा बन्द करके मैं भी अब जल्दी से वापस उसकी तरफ लपका और उसे बांहों में भरकर फिर से बिस्तर पर लुढ़क गया. अब उसने मेरा बिल्कुल भी विरोध नहीं किया और चुपचाप मेरे साथ बिस्तर पर लेट गयी.
नेहा को बिस्तर पर गिराकर मैं फिर से उसकी गर्दन व गालों पर चूमने लगा. उसके गालों पर चूमते हुए धीरे धीरे मैं उसके होंठों पर आ गया और उसके रसीले होंठों को मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया, जिसका नेहा अब कोई विरोध नहीं कर रही थी.
उसके होंठों को चूसते हुए मैंने अपनी जुबान धीरे से उसके होंठों से होते हुए उसके मुँह के अन्दर घुसा दी, जिसे नेहा ने भी अब हल्का हल्का चूसना शुरू कर दिया.
इस चूमाचाटी के चलते मैंने अपने एक हाथ को फिर से उसके कुर्ते में घुसा दिया था. उधर नेहा मेरे होंठों को चूसने में व्यस्त रही कि तब तक मैंने कुर्ते के अन्दर ही अन्दर उसकी दोनों चूचियों को ब्रा की कैद से आजाद करके नंगी कर लिया और बारी बारी से उसकी दोनों चूचियों को मसलना शुरू कर दिया. इससे नेहा ने भी मेरे होंठों को अब थोड़ा जोरों से चूसना शुरू कर दिया.
शायद नेहा भी अब उत्तेजित हो गयी थी क्योंकि उसकी सांसें अब तेजी से चलने लगी थीं.
एक हाथ से उसकी चूचियों का मर्दन करते हुए मैंने अब दूसरे हाथ से उसके कुर्ते को भी धीरे धीरे ऊपर खिसकाना शुरू कर दिया. जैसे जैसे उसका कुर्ता ऊपर हो रहा था, उसके बदन की चिकनाहट को देखकर मेरी आंखों की चमक भी बढ़ने लगी थी. मगर जल्दी ही नेहा को इसका अहसास हो गया, इसलिए उसने मेरा हाथ पकड़ लिया.
नेहा ने मेरे होंठों को को छोड़ते हुए ‘नहींईई …’ कहा और वापस अपने कुर्ते को नीचे करने लगी. लेकिन मैं कहां मानने वाला था. मैं भी अब तुरंत ही खिसक कर थोड़ा सा नीचे हो गया और अपने गीले होंठों को उसके नंगे पेट पर रख दिया, जिससे वो सिहर सी गयी.
मैं अब रुका नहीं … धीरे धीरे उसके नंगे पेट पर से चूमते और चाटते हुए उसकी चूचियों की तरफ बढ़ने लगा, जिससे नेहा मचलने लगी और उसकी सांसें और भी तेज़ हो गईं. कुछ देर तो नेहा ये सहती रही, फिर शायद उससे ये बर्दाश्त नहीं हुआ इसलिए मुझे रोकने के लिए उसने अब अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़ लिया. मगर मैं मानने वाला नहीं था. नेहा के पकड़ने के बावजूद भी मैं धीरे धीरे ऊपर बढ़ता रहा. जैसे जैसे मैं ऊपर उसकी चूचियों की तरफ बढ़ता गया, वैसे वैसे ही नेहा के हाथों की पकड़ मेरे सिर पर कसती गयी.
जब नेहा के दोनों हाथ मेरे सिर को पकड़ने में व्यस्त थे, तभी मौके का फायदा उठाकर मैंने झटके से कुर्ते को उसकी चूचियों के ऊपर तक खिसका दिया. उसकी चूचियों को मैंने ब्रा की कैद से पहले ही आजाद किया हुआ था. अब जैसे ही मैंने उसके कुर्ते को उठाया उसके दोनों सफेद कबूतर मेरे सामने आ गए. नेहा शर्मा गयी और “ओय्य्ययय … नहींईईई … ईई.ई …” की आवाज के साथ उसने मेरे सिर को छोड़कर तुरन्त ही दोनों हाथों से अपनी चूचियों को छुपा लिया.
मैंने भी उसके दोनों हाथों को पकड़ कर उसकी चूचियों पर से हटा दिया और उसकी दूधिया गोरी चूचियों को ध्यान से देखने लगा. शर्म के कारण नेहा अब दोहरी हो गयी और ‘नहींईईई … ऐसा मत करो … प्लीईज … ऐसे ही कर लो … मुझे शर्म आ रही …’ कहते हुए अपने सिर को इधर उधर करने लगी.
“आज तो देखने दो प्लीज … उस रात तो अन्धेरा था इसलिए कुछ दिखा नहीं, आज तो देखने दो प्लीईईईज!” मैंने उसकी दूध सी सफेद गोरी चिकनी चूचियों को ध्यान से देखते हुए कहा और उसके कुर्ते को खींचकर पूरा ही बाहर निकालने लगा.
“देख तो लिया … बस्स्स … अब … प्लीईईज अब … पूरा मत उतारो … मुझे शर्म आ रही है.” नेहा ने मुझे रोकते हुए कहा.
लेकिन मुझे तो होश ही कहां था. मैंने झटके से उसके कुर्ते को उतारकर उसके बदन से अलग कर दिया.
“ओय्य्य … उह्ह्ह …” नेहा ने कराहते हुए कहा और जल्दी से उठकर बैठ गयी.
नेहा ने अब फिर से दोनों हाथों से अपनी चूचियों को छुपा लिया था. मगर उसके बैठने से मेरा काम आसान हो गया. मैंने अब पीछे से उसकी ब्रा को भी खोलकर निकाल दिया और वो “नहींई.ई … नहींईई …” करती रह गयीअब तक की इस सेक्स कहानी में आपने पढ़ा कि नेहा मेरे साथ बिस्तर पर थी और मैं उसे चोदने के लिए उसके कपड़ों को उतारने में लगा था.
अब आगे..
नेहा की ब्रा को उतारने के बाद मैंने अब फिर से उसे बिस्तर पर लेटा दिया और अपने दोनों हाथों से उसके हाथों को पकड़कर उसकी चूचियों पर से हटा दिया. नेहा का गोरा चिकना बदन अब मेरे सामने था, जिसे मैं अब आंखें फाड़ फाड़ कर देखने लगा.
किसी कोरे कागज की तरह सफेद, बेदाग और बिल्कुल दूधिया गोरा बदन था उसका. मैं टकटकी लगाये कुछ पल तो बस उसके बदन को ही देखता रहा.
तभी मेरे दिल में प्रिया का ख्याल आ गया, रंग के मामले में तो दोनों बहनें समान ही थीं मगर नेहा की चूचियां प्रिया से काफी बड़ी, भरी हुई और मस्त थीं. प्रिया की चूचियां उसके कुंवारेपन के कारण कड़ी जरूर थीं. मगर माप के मामले में नेहा प्रिया से कही आगे थी. बिल्कुल कोरे कागज सी सफेद उसकी गोरी गोरी व बड़ी बड़ी चूचियां और उन पर किशमिश के दाने के जैसे गुलाबी निप्पल को देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया था. मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था इसलिए मैं अब सीधा ही उसके एक निप्पल को मुँह में भर कर गप्प कर गया और नेहा के मुँह से एक मीठी सीत्कार सी फूट पड़ी.
इन दिनों गर्मी का मौसम था, जिसमें वैसे ही पसीना आना आम बात है, मगर हमारी हाथापाई और डर के कारण नेहा को कुछ ज्यादा ही पसीना आया हुआ था. इससे नेहा की चूची का स्वाद भी नमकीन सा था. मगर उस समय मुझे उसकी चूची का वो नमकीन स्वाद भी एक नया ही सुख दे रहा था.
नेहा की एक चूची को चूसते हुए मैंने अब एक हाथ से उसकी दूसरी चूची को भी दबोच लिया. उसकी एक चूची का रस पीते पीते मैंने उसकी दूसरी चूची को हाथ से मसलना शुरू कर दिया. जिससे नेहा अब जोरों से सिसकारने लगी. उसके दोनों हाथ आजाद हो गए थे, जो कि अपने आप ही अब मेरे सिर के बालों को सहलाने लगे.
कुछ देर तो नेहा की चूची नमकीन स्वाद देती रही, मगर जब उसका सारा पसीना साफ हो गया तो धीरे धीरे उसकी चूची की चिकनाहट अब मेरे मुँह में घुलना शुरू हो गयी. नेहा की दोनों चूचियों के निप्पल तन कर अब छोटी सुपारी की तरह बड़े व सख्त हो गए थे और उसके मुँह से भी हल्की हल्की सिसकारियां निकलने लगी थीं.
कुछ देर उसकी चूची को मसलने के बाद मैं अपना हाथ उसके पेट पर ले आया और प्यार से उसके मखमली पेट को सहलाते हुए धीरे से अपना हाथ उसके लोवर में घुसा दिया. लोवर के नीचे उसने पेंटी पहनी हुई थी. जैसे ही मेरा हाथ उसके लोवर के बाद उसकी पेंटी में घुसने लगा तो वो मचल उठी. ‘अअह … औय …’ की आवाज करते हुए नेहा ने अपने दोनों हाथों से मेरे हाथ को पकड़ लिया और उसे खींचकर अपने लोवर से बाहर निकालने की कोशिश करने लगी.
“क्या हुआ? छोड़ो ना.. प्लीईईज..” मैंने उसकी चूची को मुँह से बाहर निकालते हुए कहा.
नेहा उत्तेजित थी और उसे मजा भी आ रहा था मगर शायद वो शर्मा रही थी इसलिए उसने मेरे हाथ को छोड़ा तो नहीं, मगर अपने हाथों की पकड़ को थोड़ा सा ढीला जरूर कर दिया. नेहा की पकड़ ढीली होते ही मैंने अपना पूरा हाथ अब उसकी पेंटी में घुसा दिया जो अन्दर से गीली गीली सी महसूस हो रही थी. फिर जैसे ही मैंने अपना हाथ उसकी पेंटी में घुसाया, नेहा के मुँह से हल्की एक ‘आह्ह …’ सी निकल गयी और उसने घुटनों को मोड़कर अपनी जांघों को जोरों से भींच लिया.
मैंने अपना हाथ नेहा की पेंटी में तो घुसा दिया था.. मगर मेरा हाथ अब भी उसकी चुत से दूर था. क्योंकि नेहा ने अब अपनी जांघों को भींच लिया था. मैंने अपने हाथ की उंगलियों को उसकी जांघों के जोड़ पर रख लिया और धीरे से उसकी जांघों को टटोलते हुए उसे जांघों को खोलने का इशारा सा किया.
नेहा समझदार थी और वैसे भी ये खेल वो पहले खेली हुई थी. इसलिए मेरा इशारा समझते हुए उसने अब खुद ही धीरे से अपनी जांघों को थोड़ा सा खोल दिया. नेहा ये खेल पहली बार नहीं खेल रही थी, मुझे ये तो नहीं पता कि कब और किसके साथ खेली. मगर हां ये खेल वो पहले भी खेली हुई थी, इसलिए मेरे इशारों को वो अच्छे समझ रही थी.
अब जैसे ही नेहा ने अपनी जांघों को खोला मेरे हाथों की उंगलियां उसकी छोटी सी मुनिया को छू गयी और एक बार फिर उसके मुँह से हल्की सीत्कार सी फूट पड़ी. उसने फिर से अपनी जांघों को भींचने की कोशिश की, मगर अब तो सेंध लग चुकी थी.. मेरी उंगलियां उसकी छोटी सी मुनिया तक पहुंच गयी थी, जो कि कामरस से भीगी हुई थी.
मैं भी उसकी चुत की फांकों को सहलाते हुए धीरे धीरे अपनी उंगलियों को नीचे की तरफ बढ़ाने लगा, जिससे नेहा का बदन कड़ा सा हो गया और उसकी सांसें गहरी होती चली गईं. मैं अपनी उंगलियों से नेहा की चुत की फांकों को सहलाते हुए नीचे उसके खजाने के द्वार की तरफ बढ़ रहा था. मगर जैसे ही मेरी उंगलियों ने उसके खजाने के द्वार को छुआ.. मेरी उंगलियां मानो जल ही उठीं, क्योंकि अन्दर से उसकी चुत किसी भट्ठी की तरह सुलग सी रही थी. नेहा की चुत में से बहता कामरस तो गर्म लावा सा महसूस हो रहा था.
उस रात अन्धेरे की वजह से मैं नेहा की चुत को देख नहीं पाया था. मैंने बस उसे छूकर ही महसूस किया था. मगर आज उसकी भीगी हुई चुत को छूते ही मेरा दिल अचानक उसे देखने के लिए बेताब हो गया. मैंने बस एक दो बार ही उसकी चुत को सहलाने के बाद अपने हाथ को उसके लोवर व पेन्टी से बाहर निकाल लिया और धीरे से उठकर उसकी बगल में बैठ गया.
नेहा की बगल में बैठकर मैंने अब पहले तो एक नजर उसके चेहरे की तरफ देखा.. उसने आंखें बन्द की हुई थीं और अपना मुँह एक तरफ करके लम्बी व गहरी गहरी सांसें ले रही थी. सही मौका जानकर मैंने अब धीरे अपने दोनों हाथों को उसके उसके लोवर व पेंटी में फंसा लिया और दोनों को ही एक साथ पकड़ कर उतारने लगा.
तभी “ओय्ययय.. नहींईईई..” कहते हुए नेहा ने अपने लोवर व पेंटी को पकड़ लिया और तुरन्त ही उठकर बैठ गयी.
“क्या हुआ निकालो ना इन्हें.. प्लीईईईज..” मैंने जोश जोश में उसके लोवर व पेंटी को थोड़ा जोरों से खींचते हुए कहा. जिससे वो उसकी जांघों तक उतर गए और मुझे उसकी काले बालों से भरी हुई चुत व दूध सी सफेद गोरी चिकनी जांघों की झलक दिखने लगी.
“नहींईईई.. इन्हें नहीं.. मुझे शर्म आ रही है.” उसने शर्माते हुए कहा और अपने लोवर व पेंटी को फिर से ऊपर करने लगी. मगर मैं कहां मानने वाला था. नेहा के पकड़ने के बावजूद भी मैंने उसके लोवर व पेंटी को उसके घुटनों तक खींच दिया.
“ओय्ययय.. नहींईईईई.. अच्छा तो ठीक है.. अब बस्स्स.. पूरा मत उतारो.. प्लीईईईज..” नेहा ने एक से हाथ अपनी मुनिया को छुपाते हुए कहा.
नेहा का एक हाथ अब अपनी मुनिया को छुपाने में व्यस्त हो गया था और वो बस अब एक ही हाथ से ही अपने लोवर व पेंटी को पकड़े हुए थी. इसलिए मौके का फायदा उठाकर मैंने झटके से उसके लोवर व पेंटी को खींचकर पूरा ही उतार दिया और वो “ओय्यय.. ओय्यय.. नहींईई.. नहींईईई..” करती रह गयी.
नेहा को मैंने अब बिल्कुल नंगी कर दिया था. उसके बदन पर एक भी कपड़ा मैंने शेष नहीं रखा था, जिससे वो अब शरम से दोहरी हो गयी और उसने हाथ पैरों को समेटकर अपने बदन को छुपाते हुए कहा- “शर्म नहीं आती क्या तुम्हें?
“इसमें शर्म की क्या बात है? तुम कहो तो मैं भी अपने कपड़े उतार देता हूँ!” मैंने बस इतना ही कहा और जल्दी से अपने सारे कपड़े उतारकर बिल्कुल नंगा हो गया.
“ये लो तुम भी देख लो जो देखना है?” कहते हुए मैंने नेहा के एक हाथ को पकड़ कर अपने उत्तेजित लंड पर रखवा दिया.
“अ.अ..अह.. अओ.य्य्य..” कहते हुए नेहा ने तुरन्त ही अपने हाथ को झटक कर ऐसे हटा लिया, जैसे कि उसने कोई बिजली की तार को छू लिया हो.
“बहुत बेशर्म हो तुम..” कहते हुए नेहा ने अब चोरी की निगाहों से एक बार मेरे उत्तेजित लंड की तरफ देखा और फिर शर्माकर उसने अपनी गर्दन दूसरी तरफ घुमा ली. शर्म के कारण उसका चेहरा गुलाबी हो गया था और उसके गाल तो कश्मीरी सेब से भी ज्यादा लाल लग रहे थे.