रिश्तों की गर्मी अध्याय 3

और मैने भी कई बार आपकी आँखो मे प्यास देखी है जब मैने आपको कपड़े बदलते हुवे देखा तो बड़ी मुश्किल से खुद को रोका पर आज मुझे ना रोको मैं अपना हाथ उसकी जाँघो के जोड़ पर ले गया और उसकी फूली हुवी चूत को मसल्ने लगा जैसे ही मैने उसकी चूत को मसला लक्ष्मी सिसक उठी और उसी पल मैने उसके निचले होठ को अपने होंठो मे दबा लिया उसके रसीले होंठो को मर्दन करते हुवे मैने उसकी चूत मे अपनी बीच वाली उंगली सरका दी

उसकी चूत अंदर से बहुत ही गरम थी मैं अपनी उंगली को अंदर बाहर करने लगा लक्ष्मी भी अब धीरे धीरे गरम होने लगी थी कुछ देर चूत मे उंगली करने के बाद मैं अपने हाथ उसकी पीठ पर ले गया और उसकी चोली को भी खीच कर अलग कर दिया अब वो पूरी नंगी मेरे सामने खड़ी थी मैने अपनी निक्कर नीचे की और लक्ष्मी का हाथ अपने लंड पर रख दिया उसने अपनी मुट्ठी मे मेरे लंड को पकड़ लिया और उसको दबाने लगी

आज पहली बार किसी ने मेरे लंड को छुआ था औरत का स्पर्श पाते ही वो बुरी तरह से भड़क गया कुछ देर तक लक्ष्मी ने मेरे लंड को सहालाया और फिर ज़मीन पर घुटनो के बल बैठते हुए मेरे लंड को अपने होटो मे दबा लिया मेरे लिए बिल्लकुल ही नया अहसास था ये वो अपनी जीभ मेरे लंड पर फेर रही थी मेरा पूरा बदन एक अजीब से अहसास मे डूबे जा रहा था मैने अपने हाथ उसके कंधो पर रख दिए और अब वो मेरे लंड को जोरो से चूसने लगी

बड़ा ही मज़ा आ रहा था मुझे लंड चूस्ते चूस्ते वो मेरे अंडकोषो को भी अपनी मुट्ठी मे भर के दबाने लगी थी तो मैं क्या कहूँ एक अलग ही मस्ती मेरे तन बदन मे बढ़ने लगी थी 8-10 मिनिट तक वो मेरे लंड को अपने मूह मे ही लिए रही और फिर मेरा पूरा बदन एक आनंद मे डूबता चला गया लंड से सफेद पानी निकला और लक्ष्मी के मूह मे गिरने लगा जिसे वो गाटा गॅट पी गयी

मेरे तो घुटने ही कांप गये थे लगा कि किसी ने बदन की सारी ताक़त को निचोड़ डाला हो लक्ष्मी ने अपने घाघरे से अपने फेस को सॉफ किया और फिर खड़ी होकर बोली कि अब तुम भी ऐसे ही करो अपनी चूत की ओर इशारा करते हुए और अपनी टाँगो को चौड़ा करके खड़ी हो गयी अब बारी मेरी थी मैने उसकी टाँगो के बीच बैठा और उसकी झान्टो से भरी काली चूत की पंखुड़ियो को अपने हाथो से फैला दिया और उसकी लाल लाल चूत पर अपने होठ रख दिए

उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ कितनी गरम चूत थी उसकी मुझे लगा कही मेरे होठ जल ना जाए उसकी चूत से कुछ खारा खारा पानी बह रहा था पर उसका टेस्ट मुझे अच्छा लगा मैने सोचा जैसे ये मेरा लंड चूस रही थी वैसे ही मुझे भी इसकी चूत को चाट कर इसको भी वैसा ही मज़ा देना चाहिए तो मैने उसकी टाँगो को थोड़ा सा और फैलाया और अपनी जीभ को उसकी मस्त चूत पर रगड़ने लगा

लक्ष्मी की टाँगे धीरे धीरे काँपने लगी और वो मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगी जब बीच बीच मे मे उसकी योनि पर काट ता तो उसकी मस्त गरम आहे सुनके मेरा लंड दुबारा खड़ा होने लगा था फिर वो लरजती हुई आवाज़ मे बोली कि थोड़ी तेज़ी से अपनी जीभ चलाओ तो मैं जल्दी जल्दी अपनी जीभ उसकी योनि पर रगड़ने लगा और कोई 5 मिनिट बाद ही उसकी चूत से गाढ़ा द्रव्य निकल कर मेरे चेहरे पर गिरने लगा लक्ष्मी की साँसे बड़ी ही तेज हो गयी थी जबकि मेरा लंड दुबारा खड़ा हो गया था

थोड़ी देर बाद वो वही ज़मीन पर घोड़ी बन गयी उसका मस्त पिछवाड़ा और भी बड़ा लगने लगा था मैं उसके पीछे आया और अपने लंड को चूत पर टिका दिया लक्ष्मी ने अपने चुतड़ों को थोड़ा सा पीछे किया और मैने भी ज़ोर लगाते हुवे लंड को आगे की ओर सरका दिया जैसे ही लंड का अगला हिस्सा चूत मे घुसने लगा लक्ष्मी ने एक आह भरी और बोली थोड़ा आराम से घुआसो

पर मैं पहली बार किसी औरत की चूत मारने जा रहा था तो मैने एक तेज धक्का आगया और आधा लंड उसकी चूत मे घुस गया लक्ष्मी ने अपनी आँखे बंद कर ली मैने हाथ आगे बढ़ा कर उसकी कमर को थाम लिया और और फिर अगले शॉट मे पूरा लंड उसकी गरमा-गर्म चूत के अंदर था अब मैं धीरे धीरे धक्के लगाने लगा पर थोड़ी देर बाद अपने आप मेरी रफ़्तार बढ़ती चली गयी और लक्ष्मी मे अपनी गान्ड को बार बार हिलाते हुवे आगे पीछे कर रही थी

मुझे बड़ा ही मज़ा आने लगा था मन कर रहा था कि ज़ोर ज़ोर से लंड को आगे पीछे करू उसकी चूत मे कोई 5-7 मिनिट तक उसी पोज़िशन मे हमारी चुदाई चलती रही फिर वो उठ कर खड़ी हो गयी और सीधी खड़ी हो गयी मैं उसकी ओर देखने लगा तो उसने अपनी एक टाँग मेरी कमर पर लेपटि और लंड को चूत पर रगड़ने लगी और फिर अपनी जैसे ही मैने अपनी कमर को उचकाया लंड फिर से चूत मे घुस गया

उसकी बड़ी बड़ी चूचिया मेरे सीने मे समाने को आतुर हो रही थी फिर उसने अपने चेहरे को मेरी ओर किया और मुझे किस करने लगी बड़ा ही मज़ा आ रहा था मैं उसके मोटे चुतड़ों को दबाते हुए उसकी चूत मार रहा था हम दोनो का शरीर पसीने से भीग गया था आधे घंटे तक हम लोग एक दूसरे के जिस्मो को तोल्ते रहे फिर लक्ष्मी का शरीर कांपा और वो ढीली पड़ गयी और ठीक कुछ पलो बाद मेरा शरीर भी उस अजब से अहसास मे डूबता चला गया मेरा वीर्य उसकी चूत मे गिरने लगा

दो पल हम दोनो एक दूसरे की आँखो मे देखते रहे फिर लक्ष्मी ने अपने कपड़े उठाए और पहन ने लगी तो मैने भी अपनी निक्कर-टीशर्ट पहन ली पर अब वो मुझसे बात नही कर रही थी तो मैं उसके पास गया और कहा कि अच्छा नही लगा तुमको वो बोली तुमने मुझे खराब कर दिया मैने कहा ऐसी बात नही है आप मुझे बड़ी अच्छी लगती हो और फिर आप कितनी मस्त हो मैं खुद को रोक ही नही पाया

फिर मैने कहा आपको मेरी कसम आप सच बताना आपको अच्छा लगा या नही तो वो थोड़ा सा शरमाते हुए बोली ऐसी चुदाई तो कभी मुनीम जी ने भी नही की मेरी मैने कहा जब भी आपको ऐसी चुदाई करवानी हो आप मुझे बता देना तो वो बोली तुम बड़े शरारती और ये गुण तो तुमको विरासत मे मिले है मैं फिर से लक्ष्मी को चूमने लगा तो वो बोली काफ़ी देर हो गयी है हमे वापिस चलना चाहिए

मुझसे रुका ही नही जा रहा था रास्ते मे दो-चार बार आख़िर उसकी गान्ड को दबा ही दिया मैने वैसे भी मुझे खाना खाने तो उनके घर जाना ही था तो मैं उसके साथ ही चला गया लक्ष्मी रसोई मे चली गयी मैं मुनीम जी से बाते करने लगा मैने कहा जल्दी ही मजदूरो का इंतज़ाम हो जाएगा और फिर कुछ और बाते करने लगे थोड़ी ही देर मे खाना भी लग गया

लक्ष्मी मुझे खाना परोसते हुवे बोली कि आज तुम यही रुक जाना और हल्का सा मुस्कुरा दी मैने कहा ठीक है खाने के बाद मैं और गोरी बात करने लगे तो मैने उसको बताया कि मैने मंदिर खोल दिया है वो बोली हाँ शाम को मैं अपनी सहेली के घर गयी थी तो मैने देखा था और कुछ लोग वहाँ सफाई भी कर रहे थे मैने कहा ये तो अच्छी बात है यार गाँव वालो ने आख़िर मेरी बात मान ही ली

मैने कहा गोरी कल मैं खुद वहाँ जाके सफाई के काम मे हाथ बटाउंगा और पुजारी जी को भी कहूँगा पूजा शुरू करने को मैं बोला गोरी अगर मेरे कहने से गाँव के लोग जब मंदिर आ सकते है तो फिर खेत मे काम करने क्यो नही आएँगे वो बोली देव देखो कल क्या होता है फिर लक्ष्मी ने गोरी और मुझे दूध दिया पीने को थोड़ी देर बाद गोरी बोली मुझे नींद आ रही है मैं चली सोने को

तो मैं भी अपन बिस्तर पर लेट गया और बाग मे हुवी घटना के बारे मे सोचने लगा मुझे तो यकीन ही नही आ रहा था कि लक्ष्मी की चूत मैने मार ली थी मैं बिस्तर पर करवटें बदल रहा था पर मुझे नींद नही आ रही थी फिर मेरा ध्यान लक्ष्मी से हट कर नंदू की मान चंदा पर चला गया मैने सोचा अगर लक्ष्मी की चूत मारने मे इतना मज़ा आया तो चंदा जब चुदेगि तो कितना मज़ा आएगा

मेरा लंड फिर से फुफ्कारने लगा था तो मैने अपना ध्यान हटाने को उठा और बरामदे मे आकर पानी पीने लगा घर की लाइट बंद थी मतलब सब लोग सो रहे थे तो मैं भी वापिस बिस्तर पर आ गया और सोने की कोशिश करने लगा मुझे नींद आई ही थी कि तभी कोई आया और मेरे बिस्तर पर चढ़ गया मैने कहा कॉन है तो वो साया बोला धीरे बोलो मैं हू लक्ष्मी

और मेरी बगल मे आकर लेट गयी मैने कहा आप इस वक़्त कोई आ गया तो वो बोली सब सो रहे है मुनीम जी और गोरी को मैने दूध मे नींद की गोली दे दी है मैने कहा पर आपके पास गोली कहाँ से आई वो बोली मुनीम जी जब घायल हुए थे तो दर्द से सो नही पाते थे तब डॉक्टर ने दी थी ना उनको तो कभी कभी देती ही हू आज गोरी को भी एक गोली दे दी है अब तुम हो और मैं हू

उसने मेरी निक्कर के अंदर हाथ डाल दिया और मेरे लंड को जगाने लगी मैने कहा कपड़े तो उतार दो तो उसने जल्दी से अपने कपड़े उतार दिए और मैं भी नंगा हो गया हम दोनो एक दूसरे से लिपटने लगे मैं लक्ष्मी के बड़े बड़े चुतड़ों पर हाथ फेरता हुवा बोला आप बहुत ही मस्त हो तो वो मेरे लंड को दबाती हुवी बोली कि तुम्हारा औजार भी अच्छा है

और लंड पर अपने हाथ को चलाने लगी फिर वो बोली मेरी चूची को दबाओ तो मैं अपने हाथ से उसकी चूची दबाने लगा लक्ष्मी ने एक आह भरी उसकी बड़ी बड़ी चूची मेरे हाथ मे समा ही नही रही थी जितना ज़ोर से मैं उसको दबाता उतना ही वो और भी बड़ी होती जा रही थी फिर मैने अपना मूह उसकी चूची पर लगा दिया और उसको चूसने लगा अब चूची औरत का संवेदन शील अंग होता है तो जल्दी ही लक्ष्मी के शरीर मे वासना का कीड़ा काटने लगा

10-15 मिनिट तक चूस चूस कर मैने उसकी छातियो को लाल कर दिया मैने फिर लक्ष्मी ने मुझे अपने उपर खीच लिया और मेरे लंड को अपनी बालो से भरी हुई चूत पर रगड़ने लगी वहाँ पर रागड़ाई से मुझे गुदगुदी सी होने लगी और अच्छा भी बहुत लग रह था लक्ष्मी ने अपने पाँवो को फैलाया और मुझे कहा कि अंदर डालो तो मैं उस पर झुकता चला गया

जैसे जैसे मेरा लंड उसकी चूत मे घुसता जा रहा था मुझे लग रहा था कि मैं स्वर्ग की सैर पर जा रहा हू उसकी कसी हुई चूत मेरे लंड को दबा रही थी लक्ष्मी ने अपनी टाँगो को थोड़ा सा उपर उठा लिया और अपनी बाहें मेरी पीठ पर कस दी और मेरे चेहरे को चूमने लगी मैं भी उसे किस करने लगा वो बोली धीरे-धीरे धक्के लगाओ तो मैं आहिस्ता से लंड को चूत की सैर करवाने लगा

मैं उसके कान पर काट ते हुवे बोला कि आप सच मे बहुत मस्त हो तो वो शरमा गयी और अपनी टाँगो को मेरी कमर पर लपेट दिया मैं उसके गालो को चूमते हुए चुदाई करने लगा पूरा लंड उसकी चूत से बहते पानी से भीग गया और पच-पुच की आवाज़ हो रही थी चूत और लंड के घर्षण से लक्ष्मी बहुत ही धीमी आवाज़ मे आहे भर रही थी तभी उसने पलटी खाई और मेरे उपर आ गयी और मेरे सीने पर झुकते हुए लंड पर उपर नीचे होने लगी उसकी चूचिया मेरे चेहरे से टकराने लगी थी

तो मैने उसकी ब्लॅक निप्पल को अपने मुँह मे ले लिया और सक करने लगा तो वो और भी जोश से लंड पर अपनी गान्ड मटकाने लगी उस कमरे मे बिस्तर पर हम दोनो एक बड़ा ही मजेदार खेल खेल रहे थे अब वो बड़ी ज़ोर से लंड पर कूदे जा रही थी मुझे लगा कि कही इसकी रफ़्तार से लंड टूट ना जाए पर वो खाली मेरे मन का वहम था अब वो मेरे उपर से उतर गयी

और बोली कि मेरी टाँगे अपने कंधो पर रख कर चोदो मुझे तो मैं वैसा ही करने लगा अब उसकी चूत और भी ज़्यादा गीली हो गयी थी लंड बार बार फिसले जा रहा था पर मैं रुक नही रहा था और पूरा दम लगा कर उसकी चूत को चोदे जा रहा था मैं भी अब काफ़ी आगे आ चुका था पल पल मेरी मस्ती और भी बढ़ती ही जा रही थी मैं अब उसके उपर आकर उसको चोद्ने लगा

वो भी अपनी गान्ड को उपर कर कर के चुद रही थी उसने अपनी बाहों मे मुझे कस के जाकड़ लिया था और अपने नखुनो को मेरी पीठ पर रगडे जा रही थी हमारे होठ एक दूसरे से जुड़े हुवे थे और नीचे चूत और लंड आपस मे जुड़े हुवे थे काफ़ी देर हो गयी थी हमे एक दूसरे से घुथम घुथा होते हुवे पर कहते है ना कि अगर शुरुआत है तो अंत भी होगा लक्ष्मी ने मुझे कस के जाकड़ लिया और झड़ने लगी जैसे ही उसका हुआ मेरे लंड ने भी अपना वीर्य छोड़ दिया

हम दोनो अपने अपने सुख को प्राप्त हो गये थे पर मैं उसके उपर ही पड़ा रहा काफ़ी देर तक लंड अपने आप सिकुड कर चूत से बाहर निकल आया था तो फिर मैं लुढ़क कर उसकी बगल मे लेट गया वो मेरे सीने पर हाथ फिराते हुवे बोली कई दिनो बाद अच्छे से झड़ी हूँ सब तुम्हारी बदोलत है मैने कहा मैं आपका शुक्रेगुजार हू जो अपने मुझे अपनी चूत का मज़ा दिया

फिर थोड़ी देर बाद वो वहाँ से चली गयी और मैं सो गया सुबह मैं उठा तब तक गोरी स्कूल जा चुकी थी और मैं भी बिना बताए हवेली की तरह निकल पड़ा गेट पर ही नंदू मिल गया मैने कहा तू कब आया वो बोला मैं तो उठते ही आ गया था और आपका इंतज़ार कर रहा था मैने गेट खोला और अंदर आ गये मैने कहा यार पानी की मोटर चला दे और बगीचे मे पानी छोड़ दे

मैं नहाने चला गया फिर मैं तैयार हुवा और कहा कि नंदू पानी देना हो गया हो तो आजा मंदिर की तरफ चलते है रास्ते मे हम पुजारी के घर भी गये और उनसे थोड़ी बात चीत की फिर हम मंदिर पहुच गये तो कुछ लड़के सफाई करने मे लगे थे तो मैने कहा आजा नंदू हम भी इनकी मदद करते है पर नंदू बोला मैं नीच जात वाला मंदिर मे नही जाउन्गा

तो मैं उसे वही छोड़ कर अंदर चला गया वो लड़के मुझे देख कर बोले अरे आप यहाँ क्यो आ गये हम लोग कर लेंगे मैने कहा कोई बात नही मैं भी आप लोगो की सहयता कर देता हू और उनलोगो के साथ जुड़ गया दोपहर तक हम लोगो ने काफ़ी काम कर दिया था और थकान से मेरा बुरा हाल हो गया था और सुबह से कुछ खाया भी नही था तो मैने उन लड़को से कहा कि यार किसी का घर पास है तो थोड़ा पानी पिला दो

तो उनमे से एक लड़का बोला ठाकुर साहब आप हमारे घर का पानी पीओगे मैने कहा तुम्हारे घर का पानी क्यो नही पियुंगा जाओ थोड़ा लेके आओ तो वो भागते हुए गया और पानी का जग ले आयगा पानी हलक मे उतरा तो रूह को चैन मिला मैने कहा आप लोग भी काफ़ी थक गये है अब बाड़ी काम बाद मे देखेंगे मैने कहा गाँव मे कोई जलपान की दुकान है क्या

तो पता चला कि स्कूल के पास एक हलवाई की दुकान है मैने उन लड़कों को कहा कि आप लोग थोड़ी देर मे मुझे वही पर मिलना फिर मैं नंदू को लेकर वहाँ पहुच गया दुकान थोड़ी छोटी सी थी तो मैने सब के लिए चाइ-समोसो और कुछ मीठे का ऑर्डर दिया वो लड़के थोड़ा संकोच कर रहे थे पर फिर मेरे साथ घुल मिल गये फिर नंदू अपने घर चला गया और मैं चोपाल की तरफ बढ़ गया

बाबा वही नीम की नीचे बैठे हुक्का पी रहे थे तो मैं भी उनके पास जाकर बैठ गया उन्होने मेरा हाल चल पूछा मैने कहा बाबा बस थोड़ा सा परेशान हू वो बोले क्या हुआ मैने कहा बाबा वो ही परेशानी है लोग चाहिए काम करने को कुछ हवेली के लिए और कुछ खेतो और बाग के लिए समझ नही आता कि क्या करू वो बोले देव तुम शाम को आ जाना मैं लोगो को मनाने की कोशिश करूँगा कोई ना कोई तो मेरी बात मान ही लेगा

मैने कहा बाबा एक समस्या और है अगर कोई खाना बनाने वाली का भी इंतज़ाम हो जाता तो ठीक रहता मैं रोज मुनीम जी के घर खाना ख़ाता हू तो अच्छा नही लगता मैं उनको परेशानी नही देना चाहता वो बोले बेटा मैं देखता हू तेरे लिए क्या कर सकता हू फिर मैं कुछ देर बाबा के पास ही रहा और फिर घर आ गया करने को कुछ था नही तो अपने माँ-बाप की तस्वीरो से ही बाते करने लगा कि क्यो वो मुझे अकेला छोड़ कर चले गये

सच तो था कि मैं खुद को बहुत ही अकेला महसूस करता था मैं खुद को कोस्ता था कि आख़िर क्यो मेरा जीवन औरो की तरह नही है दिल कर रहा था कि बस रोता ही रहूं मेरा दिल बहुत भारी सा हो गया था तो मैं बाहर आ गया और लॉन मे लगे झूले पर बैठ गया पर मेरा मन उधर भी नही लगा तो मैने मैनगेट पर ताला लगाया और गाँव से बाहर चल पड़ा और घूमते घूमते नदी किनारे आ गया आज यहाँ पर कोई नही था तो एक साइड मे बैठ गया और पानी को देखने लगा

मैं अपने ख़यालो मे डूबा हुवा था कि तभी एक लड़का मेरे पास आकर खड़ा हो गया ये वोही था जिसने मुझे पानी पिलाया था वो बोला देव साहब आप यहाँ पर क्या कर रहे है मैने कहा यार पहले तो तुम मुझे अपना दोस्त ही समझो और मुझे बस देव ही कहो मैं थोड़ा सा परेशान था इसलिए इस तरफ आ निकला वो बोला मैं तो रोज ही शाम को इधर आता हू

मैने कहा तुम्हारा नाम क्या है वो बोला जी मैं ढिल्लू हू मैने कहा ढिल्लू तू पढ़ता है तो वो बोला हाँ मैं9वी मे पढ़ता हू मैने कहा तेरे घर मे कॉन कॉन है वो बोला माँ-बापू और मैं मैने कहा बापू क्या करते है बोला पहले तो मज़दूरी ही करते थे पर एक दिन छत से गिर गये तो टाँग खराब हो गयी आजकल चिलम पीकर पड़े रहते है और माँ छोटा-मोटा काम करके घर चला रही है ये बोलते बोलते वो रुआंसा हो गया

मैने कहा घबराता क्यो है पगले देख तेरे पास कम्से कम माँ बाप तो है ना मुझे देख मैं तो अनाथ हू इतना बड़ा घर है मेरा पर रहने वाला मैं एक तू जल्दी ही पढ़ लिख के नोकरी लग जाना फिर सब ठीक हो जाएगा फिर वो बोला आप परेशान क्यो हो मैने कहा यार मेरा एक आम का बाग है पर को राज़ी नही है चौकीदारी को रोज लोग आम चुरा कर ले जाते है मुझे काफ़ी नुकसान हो रहा है

बस इसी लिए थोड़ी से टेन्षन है वो बोला क्या आप मेरे बापू को चोकीदार लगा लो गे मैने कहा अगर वो काम करना चाहे तो पक्का रख लूँगा और तनख़्वाह भी औरो से ज़्यादा दूँगा तो उसकी आँखो मी चमक आ गयी वो बोला मैं कल अपने बापू को लेकर हवेली आता हू मैने कहा ठीक है फिर वो जाने को हुआ तो मैने कहा यार एक काम और है अगर कर सके तो वो बोला आप बस हुकम करो मैने कहा यार अगर कोई हवेली की रसोई को संभालने को तैयार हो तो बताना

फिर मैं चोपाल पर आ गया बाबा के कहने से कुछ लोग दुगनी मज़दूरी पर काम करने को राज़ी हो गये थे तो मैने कहा ठीक है आप लोग कल से खेतो पर आ जाना बाकी बाते वही पर करेंगे मैने कहा बाबा आपने मदद की आपका अहसान है मुझ पर , पर अभी आपकी थोड़ी और सहायता चाहिए मंदिर को फिर से पहले जैसा करना है मेरे कहने से तो लोग आना कानी करेंगे अब आप ही उधर की व्यवस्था संभाले तो बाबा बोले अगर तुम्हारी इच्छा है तो ऐसा ही होगा

मैने कहा बाबा जिस चीज़ की भी ज़रूरत हो आप बस आदेश करना पर ये काम जल्दीही होना चाहिए जैसे ही मैं चलने को हुवा तो बाबा बोले देव चाइ पीओगे मैने कहा बाबा आप पिलाएँगे तो ज़रूर पियुंगा तो वो बोले आओ मेरे साथ चलो तो मैं उनके साथ उनके घर आ गया बाबा ने मुझे बैठने को मुद्ढ़ा दिया और अंदर आवाज़ लगाई अरी ओ बहुरिया ज़रा दो कप चाइ तो बना मेहमान आए है घर पे

कोई दस मिनिट बाद चाइ आ गयी पर चाइ लेकर आया कॉन था ………………………. ढिल्लू मैने कहा ढिल्लू तुम यहाँ क्या कर रहे हो वो बोला देव साहब ये मेरा घर है बाबा बोले तुम जानते हो इसको मैने कहा हाँ बाबा अनजाने ही मैं उसके घर आ गया था मैने फिर बाबा को कहा कि अगर ढिल्लू के पिताजी मेरे बाग की चोकीदारी करें तो ठीक रहे बाबा बोले वो सारा दिन चिलम पीकर पड़ा रहता है वो क्या करेगा

पर अगर आपकी इच्छा है तो वो अंदर ही पड़ा होगा आप बात कर्लो तो मैने चाइ का कप रखा और अंदर चला गया ढिल्लू ने अपने बापू से मेरा परिचया करवाया और आने का मकसद बताया शुरू मे तो उसने मना किया पर फिर अच्छी तनख़्वाह की बात सुनकर मान गया हम लोग बात कर ही रहे थे कि तभी ढिल्लू की मम्मी भी आ गयी और उसके पति को काम देने के लिए मेरा शुक्रिया करने लगी

उसके बारे मे मैं आपको क्या बताऊ कितनी ही सुंदर औरत थी वो बेहद गोरी , एक दम साँचे मे ढला हुवा सुतवा शरीर जो कि ग़रीबी की मार से थोड़ा सा ढल गया था पर एक अलग ही कशिश थी उसमे मैने मन मे सोचा इस गधे को ऐसा फूल कहाँ से मिल गया पर ज़्यादा देर अपनी नज़र उस पर नही रख सकता था तभी ढिल्लू बोला मम्मी देव बाबू को हवेली की रसोई मे काम करने को कोई चाहिए आप उधर काम करने लग जाओ ना तो इनका काम भी हो जाएगा और घर की हालत भी सुधर जाएगी तो वो बोली पर मैं कैसीईईईईईईईई??? पर ढिल्लू का बापू जो मुझे थोड़ा लालची सा लगा उसने कहा मालिक ये आजाएगी हवेली मे रसोई का काम करने को कल से ही आ जाएगी

मैने कहा ठीक है मैं कल ही शहर जाके रसोई की ज़रूरत का समान खरीद लाउन्गा आप एक दो दिन मे आ जाना मैं भी खुश था कि चलो मेरी कुछ परेशानी तो दूर हुई फिर मैं उनलोगो से विदा लेकर मुनीम जी के घर चला गया और सारी बात उनको बताई तो लक्ष्मी बोली एक बार लोग आप पर थोड़ा भरोसा करने लग जाए फिर वो काम भी करने लगेंगे वो तो मुझे आज भी उधर ही रोकना चाहती थी पर मुझे सुबह जल्दी ही शहर जाना था तो मैं खाना खाते ही निकल लिया

17 

अगले दिन मैं जल्दी ही उठ गया और शहर जाने की तैयारी करने लगा तब तक नंदू भी आ गया था मैने उसको कहा कि मैं शाहर जा रहा हू तू मेरे आने तक इधर ही रहना घर की सफाई करना पानी भरना टंकी मे और कुछ काम दिखे तो वो भी कर देना और हाँ लखन आए तो उस से कहना कि सीधा बाग मे चला जाए और वहाँ संभाल ले फिर मैने कार स्टार्ट की और निकल पड़ा

सिटी पहुच कर मैने सबसे पहले राशन का सामान खरीदा जो भी मुझ चाहिए था कुछ देसी कुछ इंटरनॅशनल फिर मैने नंदू और ढिल्लू के लिए कुछ जोड़ी कपड़े खरीदे बॅंक गया कुछ रकम निकाली लंच भी वही पर कर लिया फिर मैं कार के शोरुम गया और कहा कि मेरी दूसरी कार की डेलिवरी अभी तक नही की है तो उन्होने बताया कि सर एक हफ्ते मे डेलिवरी हो जाएगी

मुझे तसीलदार ऑफीस भी जाना था अपनी पूरी ज़मीन की फिर से पैमाइश करवानी थी पर फिर वो काम पेडिंग ही रहने दिया अब एक दिन मे क्या क्या होता गाँव आते आते अंधेरा होने लगा था मैं तेज़ी से आगे बढ़ा चला जा रहा था पर फिर किसी को देख कर मैने ब्रेक लगा दिए और शीशा नीचे किया ये नंदू की माँ चंदा थी मैने कहा आप यहाँ इस वक़्त क्या कर रही है

किसी के खेतो मे काम करने गयी थी आते आते देर हो गयी मैने कहा अगर आप को बुरा ना लगे तो आप मेरे खेतो मे काम करने आ जाओ मैं पैसे भी दूसरो से ज़्यादा दूँगा तो वो बोली जी ठीक है मैं कल से आ जाउन्गी मैने कहा आओ बैठो मैं आपको घर छोड़ देता हू वो बोली मालिक काहे हम छोटी जात वालो को पाप लगाते हो मैं खुद चली जाउन्गी मैने कहा आप कैसी बाते करती है आप मेरे दोस्त की माँ हो आओ जल्दी और फिर मैने उनको उनके घर छोड़ा और हवेली आ गया

हॉर्न सुन कर नंदू ने गेट खोला तो मैने कार पार्क की और नंदू से कहा कि समान उतार कर अंदर रख दो मैं आता हू हाथ मूह धोके मैं फ्रेश होके आया तो देखा कि ढिल्लू है मैने कहा तुम इस टाइम यहाँ कैसे वो बोला माँ ने आपके लिए खाना और दूध भेजा है तभी नंदू बोला मालिक आपका खाना तो मुनीम जी के घर से आ गया है मैने कहा कॉन आया था तो वो बोला कि सेठानी जी आई थी

मैने कहा चलो कोई बात नही फिर मैने कहा नंदू तेरे लिए कुछ है और उसका पॅकेट उसको दे दिया और ढीलू का उसको मैने कहा ढिल्लू मम्मी से कहना कि कल 9 बजे तक आ जाए फिर मैने नंदू को कुछ रुपये दिए और कहा कि माँ को दे देना वो लोग खुश होते हुवे चले गये पता नही क्यो मुझे अच्छा लगा मैने गेट बंद किया और खाना खाकर सो गया अगले दिन मैने लक्ष्मी को फोन किया और कहा कि कुछ लोग खेत पर आएँगे थोड़ा सा देख लेना मैं दोपहर बाद तक आउन्गा उधर ,

वो बोली ठीक है मैं संभाल लूँगी नंदू सफाई के काम मे लगा था मैने उसको कहा कि नंदू मैं लकड़ी काटने पीछे की तरफ जा रहा हू ढिल्लू की मम्मी आए तो उसको उधर ही भेज देना वो बोला जो हुकुम मैने कुल्हाड़ी ली और पीछे की तरफ आ गया और लकड़ी काटने लगा लकड़ी की तो रोज ही ज़रूरत पड़ती रहती थी तो मैं काटने लगा काफ़ी देर तक मैं उसी काम मे बिज़ी रहा फिर मैने देखा कि ढिल्लू की मम्मी मेरी तरफ ही चली आ रही है

तो मैं पेड़ के नीचे बैठ गया और अपना पसीना पोंछने लगा वो बोली आप मालिक होकर भी ऐसे काम करते है मैने कहा मैं कोई मालिक वालिक नही हू बस आपकी तरह ही एक सामान्य इंसान हू और फिर अपना काम करने मे कैसी शरम मैने लकड़ी और कुल्हाड़ी वही पर छोड़ी और उस से कहा आओ मैं तुम्हे रसोई दिखाता हू पर रसोई की सफाई करवाना मैं भूल गया था

तो मैने नंदू को कहा कि पहले तू रसोई को चमका ताकि आज मेरे घर चूल्हा जल सके फिर मैं उस औरत को अपने कमरे मे ले आया और बैठने को कहा वो बोली मालिक मैं कैसे आपके सामने मैने कहा फिर वोही बात अगर आप ऐसा करेंगी तो मुझे बुरा लगेगा तो वो कुर्सी पर बैठ गयी मैने कहा तुम्हारा नाम क्या है तो वो बोली जी मेरा नाम पुष्पा है मैने कहा बड़ा ही सुंदर नाम है तो वो शर्मा पड़ी

मैने कहा देखो तुम्हे दो टाइम का खाना बनाना होगा बर्तन माँजने होंगे और कोई मेहमान आए तो बुलाने पर आना होगा वो बोली जी ठीक है मैने कहा अब ये भी बता दो कि तनख़्वाह कितनी लोगि तो वो बोली मालिक इतना दे देना कि गुज़ारा हो जाए मैने कहा तुम बताओ तुम कितनी लोगि फिर इसने कहा कि जी 2000 दे देना मैने कहा मैं तुमको 4000 हज़ार दूँगा पर शर्त ये है कि खाना कल की तरह ही अच्छा होना चाहिए

मैने अलमारी से पैसे निकाले और उसको दे दिए मैने कहा ये तुम्हारी तनख़्वाह अड्वान्स मे ही दे रहा हू वो बोली मालिक आपका शुक्रिया और कल जो आपने ढिल्लू को कपड़े दिए कितने महन्गे थे आप उसके पैसे काट लो मैने कहा तुम यहाँ काम करने आ रही हो तो मेरे घर की सदस्य ही हुई फिर ऐसी बात ना करना देख लो अगर रसोई ठीक हो गया हो तो एक चाइ ही पिला दो

तो वो बाहर की ओर चली गयी और मैं उसकी साड़ी से बाहर आने को बेताब गान्ड को निहारने लगा लंड मे सुरसूराहट होने लगी मैने सोचा देर सवेर इसको भी पटाना पड़ेगा थोड़ी देर बाद मैं रसोई की तरफ गया तो देखा कि वे दोनो रसोई की सफाई कर रहे है मैने कहा पुष्पा तुम क्यो कर रही हो नंदू कर लेगा तो वो बोली अब ये भी तो मेरे घर का ही काम हुआ ना मैने कहा ठीक है मैं खेतो की तरफ जा रहा हू तुम खाना बना कर रख जाना और किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो नंदू है ही यहाँ .

कोई आधे घंटे बाद मैं खेतो पर था लक्ष्मी भी वही पर थी और किसी साहूकार से लग रहे आदमी से बात कर रही थी फिर उसने मेरा परिचय उस सेठ से करवाया तो पता चला कि वो कई साल से हमारी फसल खरीद ता आ रहा था पर इस बात कटाई मे हो रही देरी से चिंतित था मैने कहा सेठ जी आप चिंता ना करे अनाज तय तारीख पर आपकी मिल मे पहुच जाएगा तो फिर वो बोला कि ठाकुर शहाब ये आधा पैसा है आधा मैं बाद मे दे दूँगा मैने कहा जो भी हिसाब है मैने सेठ से कहा आप लक्ष्मी जी से कर ले मैं ज़रा आता हू

जिस ओर कटाई चल रही थी उस ओर जाकर मैने भी औजार लिया और फसल काटने लगा वैसे मुझे आती नही थी कटाइ पर कोशिस तो कर ही सकता था चंदा मेरे पास आई और बोली मालिक आप ये क्या कर रहे है आपके हाथो मे छाले हो जाएँगे मैने कहा मैं भी इस खेत का एक मजदूर ही हू तो मैं उनसे बाते करता हुआ कटाई करने लगा चंदा ने अपना पल्लू कमर पर बाँधा हुवा था तो उसका ब्लाउज उसकी चूचियो का भार नही उठा पा रहा था

उसकी चूचिया तो लक्ष्मी की से भी काफ़ी बड़ी थी 40 की उमर मे चंदा एक बेहद ही जबर दस्त माल थी मेरा ध्यान अब कटाई पर नही था बस उसके बोबो पर ही था चंदा भी मेरी नज़रो को भाँप गयी थी परंतु उसने अपनी चूचियो को छुपाने की ज़रा भी कोशिश नही की बल्कि बार बार मुझे अपनी हिलती चुचियाँ दिखाने लगी मेरी पॅंट मे उभार बन गया था

जिस तरफ हम लोग कटाई कर रहे थे उस तरफ बस हम दोनो ही थे उसे पता तो था ही कि मैं उसके चुचे देख लार टपका रहा हू तो उसने ये कहते हुवे कि आज गर्मी कुछ ज़्यादा है अपने ब्लाउज के उपर वाले बटन को खोल दिया तो मुझे उसकी घाटी और भी अच्छे से दिखने लगी मेरा हाल बुरा होने लगा आख़िर मैने पॅंट के उपर से अपने लंड को मसल ही दिया

फिर चंदा ने कुछ ऐसा किया कि मैं समझ गया कि एक और चूत का जुगाड़ हो ही गया वो बोली मालिक खड़े खड़े कटाई से मेरी तो कमर ही दुखने लगी है मैं बैठ कर कटाई करती हू उसने अपने साड़ी को घुटनो तक चढ़ा लिया और फिर बैठ गयी तो मेरी नज़र उसकी मोटी मोटी टाँगो पर पड़ी थी तो पूरा जबर माल थी वो फिर मुझे तड़पाने को उसने अपनी टाँगे थोड़ा सा खोल दी तो मुझे उसकी फूली हुवी चूत दिखने लगी मेरा तो गला ही सूख गया

चूत पर हल्के हल्के बाल थे शायद कुछ दिन पहले ही उसने बालो को काटा होगा उसने थोड़ा सा और अपनी टाँगो को खोला और मैं तो जैसे पिघल ही गया वो जान बुझ कर मुझे ये मस्त नज़ारा दिखा रही थी पर फिर मुझे आवाज़ लगाती हुवी लक्ष्मी आ गयी तो चंदा भी सही हो गयी और कटाई करने लगी लक्ष्मी बोली मुझे आपसे कुछ ज़रूरी बात करनी है आना ज़रा

तो मैने चंदा को वही पर छोड़ा और लक्ष्मी के पीछे पीछे चल पड़ा कुवे पर बने कमरे मे अब हम दोनो ही थे उसने मुझे एक पॅकेट दिया और कहा कि ये लो वो सेठ जी ये पैसे दे गये थे मैने कहा आप ही रखो मैं जब बॅंक जाउन्गा तो ले लूँगा वो बोली मैं घर जेया रही हू तुम भी चलो मैने कहा नही मैं रुकता हू इधर थोड़ा टाइम पास भी हो जाएगा

वो चलने को हुई तो मैने कहा दो मिनिट रूको और जैसे ही वो पलटी मैने उसको अपनी बाहों मे भर लिया और उसके होठोको पीने लगा पर एक छोटा सा किस ही ले पाया उसने मुझे अपने से दूर कर दिया और बोली कि क्या करते हो इधर कोई भी आ सकता है खुद का नही तो मेरा तो ख़याल करो मैने कहा पर आपसे अकेले मिलने का टाइम ही नही मिल रहा है

वो बोली एक दो दिन मे मैं हवेली आउन्गि फिर देखते है और अपनी गान्ड को कुछ ज़्यादा ही हिलाते हुवे चली गयी उसके जाने के बाद मैं भी वापिस खेतों पर आ गया शाम होने लगी थी छुट्टी का समय हो गया था तो मैं सब से थोड़ी बहुत बाते करने लगा फिर सबको पेमेंट की तो एक एक करके वो लोग अपने घर जाने लगे चंदा भी जाने की तैयारी कर रही थी पर मैं उसके साथ थोड़ा और खुलना चाहता था

तो मैं वहीं पर उस से बाते करने लग गया मैं चाहता था कि सब लोग चले जाएँ मैने कहा ज़रा कमरे मे आओ कुछ काम है तो उसने अपनी तिरछी नज़रो से मुझे देखा और मेरे पीछे पीछे आ गयी अंदर आते ही मैने उसको पकड़ लिया और उसके बड़े बड़े बोबो को दबाने लगा वो बोली आहह मालिक क्या करते हो छोड़िए मुझे मैने कहा जब तो अपनी कॅटिली जवानी दिखा दिखा कर मुझे गरम कर दिया और अब छोड़ने को कह रही हो

मैं और ज़ोर ज़ोर से उसकी चूचिया दबाने लगा चंदा एक दर्द भरी आह भरते हुवे बोली मालिक अभी छोड़ दो मुझे जाने दो घर जाकर पानी भरना है और नंदू के लिए खाना भी बनाना है मैं वादा करती हू कि फिर कभी आपको पक्का दे दूँगी मैने कहा ठीक है पर जाने से पहले अपनी इस के दर्शन तो करवाती जाओ और उसकी चूत को मसल दिया उसने अपनी साड़ी कमर तक उठाई और मुझे उसकी मस्त चूत दिखने लगी चंदा के जाने के बाद यहाँ कुछ भी नही था करने को तो मैं भी हवेली आ गया

आया तो देखा कि पुष्पा खाना बनाने मे लगी हुवी थी उसने अपनी साड़ी का पल्लू कमर पे खोसा हुवा था और आटा लगा रही थी उसकी पीठ मेरी तरफ थी उसकी मोटी गान्ड बाहर की तरफ निकली हुवी थी उफफफफफफफफ्फ़ क्या कयामत लग रही थी दिल तो किया कि अभी इसकी गान्ड मार लूँ पर वो कहते है ना कि सबर का फल मीठा होता है मैने उसको कहा की एक कप चाइ मिलेगी

तो वो पीछे को मूडी और बोली आ गये आप , आप हाथ मूह धो लीजिए मैं अभी लाती हू मैने कहा नंदू के लिए भी बना लेना वो बोली नंदू तो है नही यहाँ पर वो आम के बाग पर गया है मैने कहा वहाँ क्यो गया है तो वो बोली कि मैने सोचा कि आपके लिए आमरस बना दूं तो बस उसी लिए भेजा है मैने कहा ठीक है पर उसको तुम्हे अकेला छोड़ कर नही जाना चाहिए था

हवेली अक्सर खाली ही पड़ी रहती है वो बोली मालिक किस की इतनी हिम्मत है जो आपके घर की ओर आँख उठा कर देख सके मैने कहा पर फिर भी उसे ऐसा नही करना चाहिए था मैने कहा 2-4 दिन मे इधर भी एक फोन लगवा देता हू ताकि यहाँ से कभी भी मुझसे बात हो सके फिर मैं बाहर आ गया और वो चाइ बनाने लगी

मैने हाथ-मूह धोया और कपड़े चेंज करके बाहर बगीचे मे डाली कुर्सी पर आकर बैठ गया और कल की प्लॅनिंग करने लगा तभी पुष्पा छाई लेकर आ गयी मैने कहा तुम्हारा कप कहाँ है वो बोली जी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, मैने कहा तुम भी तो चाइ पियो वो बोली पर मैं आपके आगे……………. मैने कहा फिर वोही बात जाओ और अपना कप लेकर आओ कुछ देर बाद हम बाते करते हुवे चाइ पी रहे थे

मैने कहा तुम खाना बहुत अच्छा बनाती हो शहर के होटेल भी फैल है तुम्हारे आगे वो बोली क्या आप भी मुझे चिढ़ा रहे है मैने कहा अरे मैं सच बोल रहा हू अपनी तारीफ सुनकर वो खुश हो गयी और मुझसे थोड़ा खुलने लगी फिर वो मेरा खाना बना कर चली गयी क्योंकि उसे घर जाकर अपने परिवार के लिए भी खाना बनाना था थोड़ी देर बाद नंदू भी आ गया आम लेकर मैने कहा नंदू आगे से घर को ऐसे छोड़ कर नही जाना और अगर जाना पड़े तो मुझसे पहले बात कर लेना कुछ दिनो मे इधर फोन लगवा दूँगा

मैने कहा अरे वो पुरानी साइकल देगा मैं तुझे नई साइकल लाकर देता हू ना फिर नंदू बोला मैं अब जाउ मैने कहा ठीक है उसके जाने के बाद मैने डिन्नर किया थोड़ी देर अपनी घरवालो की तस्वीरो को देखता रहा और फिर सो गया एक नये कल की उम्मीद मे …………………………………………………………………. ………………………. ……………………………… ………

अगली सुबह मैं थोड़ी जल्दी ही बाग की तरफ निकल गया लखन मुझे वही पर मिला मैने कहा हम भाई सब ठीक चल रहा है वो बोला मालिक आपकी दया है बस मैने कहा और बताओ तो वो बोला मालिक बात ये है कि बाग बहुत बड़ा है

और एक आदमी के बस की नही है रखवाली करनी 3-4 लोग चाहिए मैने कहा यार मैं तेरी बात समझता हू जल्दी ही करता हू कुछ वो बोला दो लोगो को तो मैं राज़ी कर लूँगा आने को मैने कहा वाह ये बढ़िया बात कही तूने वो बोला पर थोड़ी सी परेशानी है एक थोड़ा दारूबाज है मैने कहा बस अपना काम ठीक से करे फिर चाहे दारू पिए या जहर मुझे कोई मतलब नही

फिर वो बोला पीछे की तरफ तारबंदी करवानी है मैने कहा करवाले तुझे जो करना है काम होने के बाद बता दियो कितना खर्चा आया है फिर मैं घर आया तो देखा कि ना नंदू आया था और ना पुष्पा कुछ देर इंतज़ार किया पर कोई भी नही आया तो फिर मैं शहर के लिए निकल गया

शहर मे ऐसा उलझा कि बस फिर टाइम का पता ही नही चला आधा दिन तो तहसीलदार के ऑफीस मे लग गया कुछ पुराने नक्शे देखे और कहा कि जल्दी से मेरी पूरी ज़मीन की पैमाइश कर्वाओ फिर फोन के कनेक्षन के लिए अप्लाइ किया मैने सोचा इधर के जो भी काम है आज पूरे ख़तम करके ही घर जाउन्गा ताकि फिर कई दिन चक्कर लगाने की नोबत ही ना आए आते आते रात हो गयी थी तो बस मैं सो ही गया सुबह जब मैं उठा तो बारिश हो रही थी

बिजली थी नही मैं फ्रेश होकर आया मुझे चाइ के बड़ी तलब लगी थी पर जब पुष्पा आए तब चाइ बने पता नही क्यो मेरा मन हुवा बारिश मे भीगने को तो मैं गेट के पास आ गया और भीगने लगा ठंडी ठंडी बूंदे जब मेरे जिस्म पर पड़ रही थी तो बड़ा ही अच्छा लग रहा था मुझे दिल ऐसा खुश हुआ कि दिल फिर किया ही नही अंदर जाने को

तभी छतरी लिए पुष्पा आ गयी काले घाघरा-चोली मे क्या मस्त लग रही थी वो घाघरा उसकी जाँघो पर बिल्कुल चिपका हुवा था जिस से वी शेव मुझे सॉफ दिख रही थी वो बोली मालिक आप भीग क्यो रहे हो कही बीमार ना हो जाना मैने कहा दिल किया तो भीगने लगा तुम जाओ और जल्दी से चाइ बनाओ बड़ी तलब लगी है वो अंदर जाने लगी और एक बार मेरी नज़र उसके चुतड़ों पर ठहर गयी

ये जवानी भी एक अलग ही होती है और फिर मेरे मूह तो खून लग चुका था लक्ष्मी की लेने के बाद से मैं और भी ज़्यादा तप रहा था मुझे ज़रूरत थी एक चूत की जो मुझे ठंडा कर सके दिल तो किया कि मुट्ठी मार के हल्का हो जाउ पर फिर सोचा कि अब तो बस चूत ही मारनी है बारिश अब थोड़ी और तेज होने लगी थी तो मुझे और भी मज़ा आने लगा था

तभी पुष्पा अहाते से चिल्लाते हुवे बोली कि चाइ तैयार है आप आ जाइए पर मेरा मूड आज थोड़ा सा अलग था मैने कहा बगीचे मे ले आओ उधर ही पीऊंगा और मैं बगीचे की तरफ चल पड़ा और मेरे पीछे पीछे वो भी एक हाथ मे छतरी पकड़े और दूसरे मे कप और केतली बड़ी ही मुश्किल से संभाले हुए मेरी तरफ आने लगी मुझसे बस दो कदम ही दूर थी कि तभी उसका पैर गीली मिट्टी पर फिसला और छतरी और केतली उसके हाथो से छूट गयी

मैं जल्दी से उसकी ओर भागा और गिरने से पहले ही उसे अपनी बाहों मे थाम लिया इस कोशिश मे मेरा एक हाथ उसकी गान्ड पर आ गया और दूसरे मे उसकी चूची आ गयी उसका सारा वजन मेरी टाँग पर आ गया था मैने भी मोके का पूरा फ़ायदा उठाते हुवे उसके चूची को कसकर दबा दिया तो उसके मूह से सीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई की आवाज़ निकल गयी दो पल हम उसी पोज़िशन मे रहे फिर वो बोली मुझे खड़ा कीजिए मैं भीग रही हू तो मैने उसको खड़ा किया मैने जल्दी से छतरी उठा कर उसको दी इस बीच वो भी काफ़ी हद तक भीग गयी थी

वो थोड़ा सा घबराते हुवे बोली मालिक ग़लती हो गयी मैं अभी दूसरी छाई बना देती हूँ आगे से मैं ध्यान रखूँगी कि ऐसी ग़लती दुबारा ना हो गी मेरी नज़र तो उसके ब्लाउज मे से होते हुवे उसकी चूचियो की घाटी पर थी तो पता ही नही चला कि उसने क्या कहा फिर जब दुबारा उसने मुझे कहा तो मैने हड़बड़ाते हुवे कहा कि वो छोड़ो पहले बताओ तुम्हे कही चोट तो नही लगी ना तो वो बोली नही

फिर हम अंदर आ गये मैने कहा पहले तुम अपने कपड़ो को सूखा लो फिर दुबारा से चाइ बना लेना मैं भी तब तक कपड़े चेंज करके आता हू फिर जब मैं रसोई मे गया तो वो गॅस के पास खड़ी चाइ बना रही थी मैं बिस्कटो का डिब्बा उतारने के बहाने से उसके पिछवाड़े से बिल्कुल सट गया और थोड़ा सा आगे होते हुवे अपने लंड को उसकी गान्ड से सटा दिया

इस तरह से वो स्लॅब की पट्टी और मेरे बीच मे आ गयी मैने बस खाली निक्कर ही डाली हुवी थी तो लंड भी थोड़ा सा आज़ाद फील कर रहा था तो वो उसकी गान्ड की दरार पर रगड़ खाने लगा मुझे भी डिब्बा उतारने की कोई जल्दी नही थी पर हटना भी तो था फिर मैं वही उसके पास खड़ा हो गया और उस से बाते करने लगा उसने कहा कि मैं कल आई तो बड़े गेट पर ताला लगा था

मैने काफ़ी देर आपका इंतज़ार किया फिर शाम को भी ताला ही था तो काफ़ी राह देखने के बाद मैं वापिस चली गयी मैने कहा नंदू मिला वो बोली नही वो भी पिछले तीन दिन से नही दिखा है मैने कहा आज जाता हू उसके घर पर पता करता हू तो वो बोली मालिक बुरा ना माने तो एक बात कहूँ मैने कहा बोलो तो वो बोली कि आप इन नीच जात वालो को कुछ ज़्यादा ही मूह लगाते है

अब तो गाँव मे भी लोग यही चर्चा करते है कि एक नीच जात वाले के ज़िम्मे पूरी हवेली खुली छोड़ कर चले जाते है मैने कहा मुझे कोई फरक नही पड़ता कि लोग क्या कहते है और फिर वो भी तो एक इंसान ही है ना और फिर वो हर काम पूरी ज़िम्मेदारी से करता है पुष्पा बोली मालिक आपके विचार बड़े ठाकूरो से बिल्कुल अलग है मैने कहा तुम भी तो और गाँव वालो से बहुत अलग हो

वो बोली क्या आप भी मुझसे मसखरी कर रहे हो मैने कहा मैं तो सच बोल रहा हू तुम देखो कितनी सुंदर हो तुम्हे देखते ही लगता है जैसे ही कोई खिला हुआ गुलाब हो तो पुष्पा बुरी तरह से शरमा गयी उसके गोरे गालो पर लाली छा गयी वो बोली मैं कहाँ इतनी सुंदर हू आप तो ख़ामाखाँ मे ही इतनी तारीफ़ कर रहे है मैने उसको अपने साथ लिया और मेरे कमरे मे शीशे के सामने लाकर खड़ी कर दिया

मैने कहा ज़रा गोर से देखो आईना और फिर वो बताओ जो मैने कहा जब तुम बिना मेकप के इतनी सुंदर हो तो जब तुम शृंगार करोगी तो कितनी सुंदर दिखोगी पुष्पा अपनी तारीफ़ सुनकर बड़ी खुश हो गयी और मुझ से थोड़ा और खुल गयी मैने कहा तुम ऐसे ही हँसती रहा करो अच्छी लगती हो उसने कहा मैं खाना बना देती हू फिर मैं शाम को आ जाउन्गी

मैने कहा जाते टाइम गेट की दूसरी चाबी ले जाना ताकि अगर मैं बाहर होउँ तो तुम घर मे आ सको वो बोली मालिक आप अन्जान लोगों पर कुछ जल्दी ही भरोसा कर लेते है मैने कहा तुम कोई अजनबी थोड़ी ही हो तो वो बोली भरोसे के लिए शुक्रिया वो रसोई मे चली गयी मैने लक्ष्मी को फोन किया तो वो बोली कि आज तो बारिश हो रही है तो वो घर पे ही है मैने कहा हवेली आ जाओ तुम्हारी बड़ी याद आ रही है

तो वो बोली कि आज गोरी भी घर पर ही है और बारिश है तो कुछ बहाना भी नही बना सकती और ऐसे ही आउन्गि तो कही मुनीम जी शक़ ना कर लें मैने कहा तुम्हारी मर्ज़ी है जब तक तडपाओगी तड़पना पड़ेगा फिर थोड़ी बातें कर फोन काट दिया पुष्पा की वजह से लंड बार बार खड़ा हो रहा था पर मैं उस से डाइरेक्ट तो कह भी नही सकता था कि चूत दे दे

तो मैं टाइम पास करने को उपर चला गया इधर के पोर्षन की अभी सफाई नही करवाई थी सब कुछ पहले जैसा ही पड़ा था बाल्कनी मे बारिश की कुछ कुछ बूंदे आ रही थी तो अच्छा लगने लगा यहाँ से काफ़ी दूर तक का नज़ारा दिखाई देता था जहाँ तक नज़र जाती बस चारो तरफ हरियाली ही हरियाली प्रकृति के इतने करीब मैने पहले खुद को नही पाया था

पता नही कितनी देर तक मैं वही पर बैठा रहा फिर मुझे ढूँढते ढूँढते पुष्पा भी उपर आ गयी और बोली मालिक आप यहाँ क्यो बैठे है सब कही ढूँढकर यहाँ आई हू मैने कहा कुछ नही थोड़ा सा दिल उदास सा हो रहा था तो एकांत मे आकर बैठ गया मैने कहा पुष्पा अकेला रहता हूँ इस घर मे तो खाली घर काटने को दौड़ता है दिल भी नही लगता

पर घर है तो रहना ही पड़ता है ना कोई सन्गि-साथी है मेरा कोई भी नही है तो वो बोली मालिक आप खुद को अकेला ना समझे हम लोग है ना आपके साथ मैने कहा वो तो है पर फिर भी जीना तो मुझे इसी अकेलेपन के साथ ही है ना और और उठकर बाल्कनी मे खड़ा हो गया पुष्पा बोली आप खुद को कभी भी अकेला ना समझना और वो भी मेरे पास आकर खड़ी हो गयी

कुछ देर तक चुप्पी रही फिर मैने कहा अगर मैं तुमसे कुछ कहूँ तो बुरा तो नही मनोगी वो बोली मेरी क्या मज़ाल जो आपकी बात का बुरा मानू आप कहिए जो कहना है मैने कहा पुष्पा वो बात ऐसी है कि कि…………………. वो बोली अब कहिए भी तो मैने कहा कि क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगी ये सुनते ही उसके चेहरे का रंग उड़ गया और वो बोली मालिक ये आप क्या कह रहे है

मैने कहा वही जो तुमने सुना , तो वो बोली पर मालिक मैं आपसे दोस्ती कैसे कर सकती हू मैं शादी शुदा हू और फिर आपमे और मुझमे ज़मीन आसमान का फरक है आप ऐसा कैसे सोच सकते है और वैसे भी गाँवो मे ये दोस्ती वोस्ती कहाँ चलती है ये तो शहरो के चोंचले है मैने कहा देखो अभी मेरे दिल मे ख़याल आया तो बोल दिया वैसे भी मैं तुम्हे अपना समझता हू तभी तुमसे कहा

वो बोली पर मालिक मैईईईईईईई मैईईईईईईई…………………… और अपनी बात को अधूरा छोड़ दिया मैने कहा कि देखो दोस्ती मे कोई शर्त नही होती है और फिर दुनिया के आगे नही तो कम्से कम हवेली मे तो तुम मेरी दोस्त बन ही सकती हो ना वैसे कोई ज़बरदस्ती तो है नही तुम्हे अच्छा लगे तो हाँ कर देना मैं तुम्हारे जवाब का इंतज़ार करूँगा फिर हमारे दरमियाँ खामोशी छा गयी

थोड़ी देर बाद उसने कहा कि खाना ठंडा हो रहा है आप खा लो और नीचे चल गयी फिर मैं भी उसके पीछे पीछे नीचे आ गया फिर मैने खामोशी से खाना खाया पर पुष्पा कुछ बात नही कर रही थी तो मैने पूछा नाराज़ हो क्या वो बोली आपसे नाराज़ होकर कहा जाउन्गी मैने कहा फिर बात क्यो नही कर रही वो बोली कर तो रही हू मैने कहा देखो तुम इस बात की टेन्षन ना लो अगर तुम्हारे दिल मे हाँ हो तो हाँ कह दो और ना तो ना कह देना सिंपल सी बात है

कोई एक घंटे बाद उसने अपना सारा काम समेट दिया और बोली मैं जाती हू शाम को आउन्गि मैने कहा मोसम वैसे ही खराब है तो तुम कल ही आना वो बोली पर खाना मैने कहा जो बचा है वो ही खा लूँगा तुम उसकी चिंता ना करो और कल मैं तुम्हारा इंतज़ार करूँगा और तुम्हारे जवाब का भी मैने गेंद उसके पाले मे डाल दी थी

पुष्पा बोली पर मैं आजाउन्गी ना गरम खाना बनाने को मैने कहा कोई बात नही और वैसे भी शाम को मुझे कही जाना है इस लिए बोला फिर वो चली गयी और मैं रह गया वही पर अपने अकेले पन के साथ शाम होते होते बरसात भी थम चली थी मैने सोचा कि थोडा घूम भी आउन्गा और नंदू से पूछ आता हू कि वो आ क्यो नही रहा तो मैं पैदल ही चल पड़ा उसके घर की ओर

पैदल था और फिर कच्चा रास्ता भी बारिश से खराब हो गया था तो जब मैं नंदू के घर पहुचा तो अंधेरा हो गया था मैने किवाड़ खड़काया तो चंदा ने किवाड़ खोला और मुझे देख कर एक शरारती मुस्कान बिखेरते हुवे बोली अरे हुकुम आप यहाँ इस वक़्त मैने कहा हाँ वो मैं इस तरफ कुछ काम से आया था और पिछले कुछ दिनो से नंदू भी हवेली पर नही आ रहा तो बस पूछने आ गया

और फिर मैं अंदर घुस गया मैने कहा नंदू कहाँ है तो वो बोली कि जी वो तो अपनी बहन के ससुराल गया है कुछ काम से और थोड़े दिन मे आएगा आप हम को माफ़ करदो आप को सूचना बिना दिए ही चला गया मैने कहा कोई बात नही पर वो नही है तो थोड़ी दिक्कत हो रही है तो वो बोली हुकुम कल से उसकी जगह मैं आ जाउन्गी मैने कहा कल से क्यो तुम अभी चलो मेरे साथ हवेली

वो बोली पर मैं इस टाइम कैसे चल सकती हू मैने कहा क्यो नही आ सकती और फिर जो काम खेत मे अधूरा रह गया था वो भी तो पूरा करना है ये कहते ही मैने उसको अपने आगोश मे भर लिया और उसकी छातियो को दबाने लगा तो वो बोली आ ऐसा ना कीजिए मैने कहा चल ना हवेली आज मज़े करेंगे मैं बोला तू मुझे खुश कर मैं तुझे खुश रखूँगा

वो बोली पर मैं कैसे आउ मैने कहा मैं अभी जाता हू तू थोड़ी देर बाद आ जाना कुछ सोच कर उसने कहा जी ठीक है आप चलिए मैं आती हू तो मैं वापिस हवेली आ गया फटा फट से अपना डिन्नर निपटाया और चंदा का इंतज़ार करने लगा कि तभी लक्ष्मी का फोन आया मैने कहा रात को फोन किया क्या बात है वो बोली कुछ नही बस ऐसे ही कर लिया

वो बोली खाना खाया तुमने मैने कहा हाँ बस अभी बर्तन रखे है वो बोली कल मैं मुनीम जी को लेकर डॉक्टर के यहाँ जा रही हू तो आते आते देर हो जाएगी तो मैने गोरी से कह दिया है कि वो स्कूल से आते ही हवेली चली जाए तो थोड़ा देख लेना मैने कहा ठीक है और जो भी बात हो मुझे फोन करके बताना फिर कुछ और बातों के बाद फोन कट हो गया और मैं चंदा की राह देखने लगा

कोई घंटे भर बाद आख़िर चंदा आ ही गयी मैने कहा बड़ी देर लगाई आते आते तो वो बोली क्या करूँ हुकुम बस देर हो ही गयी मुझसे अब रुका नही जा रहा था तो मैने चंदा की बाँह पकड़ी और उसे लाकर बेड पर पटक दिया और उस पर चढ़ गया वो बोली आराम से मालिक अब तो मैं आपकी ही हूँ मैने उसकी साड़ी को खोलना शुरू किया और ब्लाउज भी उतार कर फेक दिया अब वो पूरी नंगी मेरे सामने खड़ी थी उसका था था करता हुआ भरा हुवा जिस्म मेरे बदन मे गर्मी पैदा कर रहा था

मैने अपनी निक्कर निकाल दी कच्छा तो मैं वैसे भी नही पहनता था मेरा लंड देखते ही चंदा की आँखे चमकने लगी मैने उसका हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया चंदा उस पर दबाव डालते हुवे बोली काफ़ी गरम है मैने कहा तुझे देख कर ही हो गया है वो हँसी मैने उसकी गान्ड पर थपकी मारते हुवे कहा कितनी मस्त औरत है तू कब से चाह रहा था कि तुझे बिना कपड़ो के देखु आज मोका लगा है

वो मेरे लंड को हिलाने लगी और मैं उसकी चूचियो की घुंडीयों से खेलने लगा तो वो सी सी करने लगी क्या मस्त पहाड़ो की खड़ी छोटियो सी चूचियाँ थी उसकी जितना दबाता उतनी ही वो फूलती हुवी चली जाती मैने कहा चंदा ज़रा ज़रा झुक के तो खड़ी हो जैसे ही वो झुकी उफ्फ क्या मस्त नज़ारा था वो ऐसा हसीन नज़ारा कि क्या बताऊ मैं उसके झुकने पर उसके मोटे मोटे चूतड़ और भी खुल गये थे और भी बड़े लगने लगे थे औ उसकी जाँघो के बीच दबी हुवी उसके फूली हुवी काली काली चूत मेरा लंड किसी गुस्से वाले नाग की तरह झटके खाने लगा वो नज़ारा देख कर अब रुकना बड़ा ही मुस्किल था मैं उसके पीछे गया और अपने लंड को उसकी चूत पर सटा दिया चंदा के मूह से एक आह सी निकली मैने उसकी कमर को थामा और धक्का लगा ते हुवे लंड को आगे की ओर ठेल दिया

उसकी योनि की मुलायम फांको को चीरता हुवा लंड चूत मे घुसने लगा चंदा थोडा सा आगे को हो गयी तो मैने उसकी कमर से पकड़कर फिर से उसको अपनी ओर खीच लिया और स्रर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर करता हुवा मेरा लंड उसकी चूत मे आगे को सरकता गया वो एक आह भरते हुवे बोली कि क्या मार ही डालोगे कई दिनो बाद लंड ले रही हू थोड़ा आराम से मालिक

मैं खुद मस्ती मे डूब गया था मैने एक सिसकी लेते हुवे कहा कि बस हो ही गया और जो कुछ हिस्सा बचा था वो भी अंदर कर दिया चंदा थोड़ा सा आगे को और झुक गयी और अपनी गान्ड को और फैला दिया अब वो तो चुदाई की पूरी खिलाड़ी थी और हम ठहरे नोसखिए बस लक्ष्मी को ही रगड़ पाए थे मैने लंड को किनारे तक खीचा और फिर से झटके से अंदर घुसा दिया

तो चंदा आह भरते हुवे बोली मालिक आहिस्ता से इतना ज़ुल्म ना करो पर मुझे मज़ा आने लगा था आगे हाथ बढ़ा कर मैने उसकी ढाई ढाई किलो की चूचियो को पकड़ लिया और उसको चोदने लगा सच कहा था किसी ने कि जो मज़ा मेच्यूर औरतो की चुदाई मे है को कमसिन कलियों मे कहाँ लंड अब अच्छे से उसकी चूत मे फिट हो गया था तो मैने उसको झुकाए झुकाए ही चुदाई शुरू कर दी अब बस कमरे मे चंदा की सिसकारियो की ही आवाज़ आ रही थी

कितने मुलायम चूतड़ थे उसके जब जब मेरे अंडकोष उनसे टकराते तो बड़ी ही मधुर ध्वनी उत्पन्न होती थी जिसको केवल चुदाई का मारा ही समझ सकता था थोड़ी देर बाद मैने उसको सोफे पर पटका और उसकी टाँगो को उठा कर अपने कंधे पर रख लिया और फिर से धक्कम पेल शुरू हो गयी उसकी चूत के चिकने पानी से भीगा हुआ लंड तेज़ी से अंदर बाहर हो रहा था और चंदा भी अपनी गान्ड को पटाकने लगी थी

चुदाई का खुमार जोरो पर था पर मैं ज़्यादा देर तक उसकी वजनी टाँगो को थाम ना पाया तो उसके उपर आ गया और उसके रसीले होंठो को चूस्ते चूस्ते चंदा को चोदने लगा उसकी चूत इतनी ज़्यादा टाइट तो नही थी पर ठीक ही थी अपना काम निकाल रही थी मेरे हर धक्के पर उसकी मोटी मोटी चूचिया किसी शराबी की तरह झूम रही थी चंदा भी अब मेरा पूरा साथ दे रही थी

वो आह अया आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ

आआआउूुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुउउइईईईईईईईईईईईईईईईई

ईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई

ईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई करते हुए मेरे लंड को अपनी चूत मे ले रही थी वो बोली मालिक आप बहुत ही अच्छा चोदते है मुउउउउउउउउउउउउज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्जीईईईई तूऊऊऊऊऊऊऊ तोड़ ही डाला आपने आअहह आअहह फिर उसने अपनी टाँगे मेरी कमर पे लपेट दी

और अपनी गान्ड को उचका उचका कर चुदाई का मज़ा लेने लगी चूत से रिस्ता पानी उसके कुल्हो तक आ गया था साथ ही मेरी गोलियो को भी गीला कर चुका था चंदा की साँसे अब बेहद भारी हो गयी थी उसकी आँखे मस्ती से बार बार बंद हो रही थी और उपर से मैं दे दना दन तूफ़ानी धक्के लगाते हुए उसकी चूत चोदे जा रहा था कसम से बड़ा ही मज़ा आ रहा था

और फिर चंदा किसी छोटे बच्चे की तरह मुझसे चिपक गयी और एक तेज आवाज़ करते हुए ढीली पड़ गयी और चूत से पानी का फव्वारा बह चला बड़ा ही अच्छा सा एहसास था वो अब निढाल पड़ गयी थी पर मैं अभी भी लगा हुआ था तो थोड़ी देर बाद मैं भी अपनी सीमा पर आ गया मैने लंड को चूत से भर निकाला और उसके चेहरे पर अपने वीर्य की पिचकारियाँ छोड़ने लगा

एक के बाद एक कई पिचकारियो से उसका चेहरा लिसलिसे सफेद गाढ़े रस से नहा गया वो मेरे वीर्य को अपने हाथोसे पोंछते हुवे बोली चाइयीयियीयियी च्ीईीईईईईईईईईई क्या किया मालिक ऐसा भी कोई करता है क्या और अपना मूह धोने को बाहर चली गयी और मैं वही पर बैठ गया और अपनी उखड़ी सांसो को जोड़ने लगा कुछ देर बाद मैं भी बाहर आ गया और पेशाब करने लगा

फिर मैं अहाते पर पड़े तख्त पर ही लेट गया चंदा भी आ गयी मैने कहा यार अच्छा मज़ा करवाया तूने और तेरी गान्ड तो बड़ी ही प्यारी है जी कर रहा है यहाँ भी अपना लंड घुसा दूं वो बोली ना मालिक आपके मूसल को वहाँ नही ले पाउन्गी मैं मेरी जान लेनी है तो वैसे ही बता दो मैने कहा आज तो नही पर फिर कभी तो ले ही लूँगा मैने कहा लंड चुसेगी

वो इठलाई और उपर चढ़ि और अपने चेहरे को मेरी टाँगो पर झुका दिया और अपने होंठो से लंड की पप्पी ले ली मज़ा ही आ गया फिर उसने अपनी कातिल नज़रो से मेरी ओर देखा और आँख मारते हुवे लंड के सुपाडे को अपने मुँह मे भर लिया उसकी जीभ के स्पर्श से ही लंड मे सुरसुराहट होनी शुरू हो गयी और वो उत्तेजित अवस्था मे आने लगा

मैं अपने हाथोसे उसके चुतड़ों को सहलाने लगा था और बीच बीच मे चूत को भी दबाने लगा था चूत भी गीली होने लगी थी और मेरा लंड भी अब पूर्ण रूप से खड़ा हो गया था पर वो चूसे ही जा रही थी फिर मैने उसको अपने उपर से हटाया और उसको टेडी करके लेटा दिया इस पोज़िशन मे उसकी गान्ड मेरी तरफ हो गयी थी मैने उसकी एक टाँग को थोड़ा सा ऊपर किया और अपने लंड के गरम सुपाडे को रसीली चूत पर टिका दिया और एक धक्का लगा दिया सुपाडा चूत मे घुस गया

तभी मैने उसके बोबो को पकड़ लिया और उनको दबाते हुवे लंड को अंदर घुसाने लगा चंदा आह भरते हुवे बोली मालिक पूरे खिला दी हो और अपनी गान्ड को थोड़ा सा पीछे कर दिया अब मैं धीरे धीरे अपनी कमर को हिलाते हुवे उसकी चूत मारने लगा क्या गरम चूत थी उसकी एक बार जो लंड घुसा फिर बस मज़ा ही मज़ा चंदा बोली मालिक ऐसे ही फाड़ दो मेरी चूत को ऐसे ही करो बड़ा अच्छा लग रहा है

चंदा की मस्त बाते सुनकर मुझे भी जोश चढ़ने लगा और मैं कस कस के उसको चोदने लगा काफ़ी देर तक मैं उसको उसी पोज़िशन मे रगड़ता रहा फिर चंदा ने मुझे अपने उपर ले लिया और पूरा मज़ा करवाती अपनी चूत मुझे देने लगी आधे पोने घंटे तक अच्छे से बजाया उसको मैने कहा मेरा होने ही वाला है तो वो बोली मैं भी बस गयी हीईीईईई आप अंदर ही छोड़ना और फिर कुछ देर बात मेरा अंग अंग एक अलग से अहसास मे डूब गया और हम दोनो साथ साथ ही झड़ने लगे

रात काफ़ी हो गयी थी फिर पता नही कब मेरी आँख लग गयी सुबह जब मैं उठा तो देखा कि दस बज रहे थे मैने एक जमहाई ली और कच्छे कच्छे मे ही बाथरूम की ओर चल पड़ा फ्रेश होकर बस चाइ ही पी रहा था कि पुजारी जी आ गये कुछ बातें उनके साथ हुई तो पता चला कि मंदिर सोमवार तक इस कंडीशन मे हो जाएगा कि पूजा की जा सके मैने कहा जी जैसा आप ठीक समझे

मैने कहा मैं शाम तक आता हू उधर थोड़ी देर और बाते करने के बाद वो चले गये पुष्पा ने पूछा कि खाना लगा दूं मैने कहा नही अभी भूख नही है मैने कहा चंदा कहाँ है तो पता चला कि वो झाड़ू-पोछा लगा कर अपने घर चली गयी थी मैने पुष्पा से कहा कि आज तुम यही पर रहना मुझे कुछ काम से बाहर जाना है पीछे से गोरी आएगी तो उसके खाने पीने का इंतज़ाम कर देना और उसके साथ ही रहना जब तक मैं नही आता

असल मे मैने उसको बताया नही था कि मेरा क्या प्लान है आज मैं अपनी उस ज़मीन को देखने जा रहा था जिसे नाहर गढ़ वालो ने दबाया हुआ था तो मैने कार निकाली और चल पड़ा उस ओर करीब आधे घंटे बाद मैं वहाँ पर पहुच ही गया गाड़ी पार्क की और पैदल ही बढ़ चला उस ओर तो थोड़ा सा आगे जाने पर मैने देखा कि एक बहुत बड़े भू-भाग पर फार्महाउस टाइप कुछ बनाया गया था

कुछ ज़मीन खेती के लिए थी पर ज़्यादातर खाली ही पड़ी थी एक बड़ा सा दरवाजा बनाया गया था अंदर जाने के लिए परंतु वो बंद नही था मैने एधर-उधर देखा और अंदर प्रवेश कर गया अंदर एक साइड मे कुछ पेड़ लगे हुवे थे तो मैं उधर ही घूमने लगा तभी कुछ 5-6 आदमी मेरे पास आए और बोले के तू यहाँ पर क्या कर रहा है मैने कहा जी भाई मैं एक मुसाफिर हू ऐसे ही इधर आ निकला

तभी उनमे से एक आदमी जो काफ़ी हॅटा-कट्टा सा था मुझे घूरते हुवे बोला कि चल जा अभी इधर से और दुबारा इधर ना आना क्या तुझे पता नही कि ये ज़मीन ठाकुर भुजबल सिंग की मिल्कियत है , ठाकुर भुजबल सिंग ये नाम मैने पहली बार ही सुना था मैने उनसे कहा कि पर भाई लोगो मैने तो सुना था कि ये ज़मीन अर्जुनगढ़ के ठाकुर यूधवीर सिंग की है

ये सुनकर वो चारो काफ़ी देर तक हंसते रहे और फिर वो ही बोला कि तुझे भाई किसने कह दिया अर्जुनगढ़ के ठाकूरो का खानदान तो बरसो पहले ख़तम कर दिया हमारे ठाकुर साहब ने पर तू अभी इधर से निकल जा छोटे साहब का इधर आने का टाइम हो गया है और उनका स्वाभाव बड़ा ही गुस्से वाला है और ख़ासतोर से वो अज्नबियो को पसंद नही करते है तू जा खामखाँ मारा जाएगा

मैने कहा आने दो तुम्हारे साहब को अब मैं जब खुद चल कर यहाँ आया हू तो उनसे भी ज़रा मिलता ही चलूं वो बोले भाई तू है कॉन मैने कहा अरे तुम इसकी फिकर ना करो कि मैं कॉन हूँ वो कुछ सोच मे पड़ गये और वो लोग बोले कि बस तेरी भलाई इसी मे है कि तू यहाँ से चला जा अगर उन्होने तुझे यहा देख लिया तो तेरे साथ साथ हमारी शामत भी आ जाएगी

अब तू जा भी या हम धक्के दे कर तुझे यहाँ से बाहर फेक दे मैने कहा गुस्सा ना कर भाई मैं जा ही रहा हू वैसे भी मैं पंगा नही करना चाहता था क्योंकि अभी मैं उस हालत मे नही था मैं आकर अपनी कार के पास खड़ा हो गया और कुछ सोचने लगा मेरे दिमाग़ मे कुछ सवाल घूमड़ आए थे जिनका जवाब मुझे बस राइचंद जी ही दे सकते थे तो उनका इंतज़ार ही करना था

शाम होते होते मैं वापिस हवेली आ गया तो देखा कि पुष्पा मेरा ही इंतज़ार कर रही थी मैने पूछा गोरी कहाँ है तो वो बोली कि वो तो खाना खाते ही सो गयी है मैने कहा ठीक है और मैं अपने कमरे मे जाने लगा तो पुष्पा बोली मालिक आप कहे तो मैं थोड़ी देर बाग मे हो आउ , उनसे भी मिल आउन्गि थोड़ी देर और मुझे आम खाने का भी बड़ा मन हो रहा है

मैने कहा एक काम करो गोरी को उठा दो फिर सब लोग साथ ही चलते है मैं भी उधर का चक्कर लगा आउन्गा मैने तब तक अपने कपड़े चेंज कर लिए थे फिर कोई आधे घंटे बाद हम लोग निकल पड़े बाग की तरफ वहाँ पहुचते ही लखन ने हमारा स्वागत किया था मैने देखा कि तार बंदी लगभग हो ही गयी थी और एक नया कमरा भी आधा बन ही गया था

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