गोरी- बताओ कहाँ लगानी है दवाई
देव-पीठ पर और पैरो पर और थोड़ा सा जाँघ के उपर वाले हिस्से पर भी
तो गोरी ने मेरी टी-शर्ट निकाली और बोली चलो अब सीधे बैठ जाओ मैं लगाती हूँ दवाई तो मैं सीधा होकर बैठ गया गोरी अपने नरम नाज़ुक हाथो से मेरी पीठ पर दवाई मलने लगी तो लगा कि आज कुछ ज़्यादा ही सुकून सा मिल रहा है मैने कहा यार तेरे हाथो मे तो बड़ा ही जादू सा है
तो वो बोली क्या कुछ भी बोलते रहते हो पीठ पर दवाई लगाने के बाद उसने कहा निक्कर उतारो गे तभी तो मैं दवाई लगा पाउन्गी तो मैने निक्कर उतार दी अब मैं खाली अंडर वेअर मे ही था और उपर से गोरी की नाज़ुक उंगलियो का मादक स्पर्श जब वो जाँघ पर दवाई लगा रही थी तो उसका हाथ बार बार लंड से छू रहा था तो वो धीरे धीरे करेंट मे आने लगा था
गोरी अपनी आँखो मे शरारती मुस्कान लाते हुए कहने लगी खाट मे पड़े हो पर हरकते वही है तुम्हारी मैने कहा अब तुम हो ही इतनी प्यारी और फिर मिली भी कितने दिनो बाद हो तो फिर अब हाल तो बुरा होना ही है वो कच्छे के उपर से ही मेरे लंड को पकड़ ते हुवे बोली लगता है इसे भी इलाज की ज़रूरत है मैने कहा है तो सही पर करेगा कॉन
ये सुनकर गोरी दरवाजे तक गयी और उसको बंद करके मेरे घुटनो के नीचे फर्श पर बैठ गयी और कच्छे को भी उतार दिया और मेरे खड़े लंड को सहलाते हुवे बोली देव ये तो बड़ा ख़ूँख़ार लग रहा है मैने कहा तुम्हे देखकर ही हो रहा है वो धीरे धीरे से मेरी मुट्ठी मारने लगी मैने अपनी आँखे बंद कर ली गोरी उफ़ फफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़
कुछ देर बाद मुझे लंड पर गीला गीला सा लगा तो मैने आँखे खोल कर देखा तो गोरी लंड को अपनी जीभ से चाट रही थी उसने अपनी आँखे मेरी तरफ की और आँख मार दी मैने उसके सर को दबा दिया तो लंड उसके गले मे अड़ गया गोरी के थूक से मेरी जांघे भी गीली होने लगी थी अब वो भी जवान थी और शायद कच्ची कली थी तो उसकी भी सेक्स की इच्छा भड़कने लगी थी
अब वो पूरी तरह से मेरे लंड पर झुक गयी थी बार बार उसे मूह मे लेती और निकाल देती मेरे बदन मे एक मज़े की तरंग दौड़ रही थी पूरी रफ़्तार से 10-15 मिनिट तक मज़े से वो मेरा लंड चूस्ति रही फिर मेरे लंड से सफेद द्रव्य की धार निकली और उसके गले से टकराई तो उसने घबरा कर लंड को मूह से बाहर निकाल दिया पर लंड से जो पिचकारी फुट पड़ी थी
तो उसकी नाक , और गले को भिगोति चली गयी गोरी खाँसते हुए बोली बड़े ही कमिने हो तुम सारा मूह खराब कर दिया और पास रखे तोलिये से अपना मूह सॉफ करने लगी फिर उसने कुल्ला किया और बोली आइन्दा से मूह मे नही लूँगी मैने कहा यार तू इतनी ज़ोर से चूस रही थी कि फिर कंट्रोल हुआ ही नही कुछ पल बाद गोरी अपनी सलवार का नाडा खोलते हुवे बोली
देव इधर मेरी ये भी नीचे से बहुत ही गीली हो गयी है और इसमे लग रहा है कि जैसे चींटिया काट रही हों इधर भी कुछ करो ना मैने कहा एक काम कर तू बेड पर लेट जा उसने अपनी सलवार और पैंटी उतारी और झट से बिस्तर पर चढ़ गयी और मैं भी उपर आ गया मैने कहा ज़रा टाँगे तो फैलाओ तो उसने अपनी सुडोल जंघे विपरीत दिशाओ मे फैला दी जिस से मुझे थोड़ी जगह मिल गयी
और फिर मैने भी उसकी रस से भीगी हुवी रोयेन्दार बालो वाली गुलाबी चूत पर अपने होठ रख दिए तो लगा कि जैसे समुन्दर का ढेर सारा खारा नमक किसी ने मेरे मूह मे भर दिया हो और गोरी का तो हाल उस एक चुंबन से ऐसा हो गया कि क्या कहूँ , गोरी की आँखे उस मस्ती मे डूबती चली गयी और चाहकर भी वो आपनी आह को अपने होटो मे ना दबा पाई और उसकी सिसकारी फुट पड़ी आहह आईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई उूुुुुुुुुउउफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़
देव ये क्या कर दिया तुमने तो मैने कस्के उसकी चूत की गुलाबी पंखुड़ियो को अपने होटो मे भर लिया तो जैसे काम रस फुट पड़ा उन मे से गोरी की टाँगे अपने आप ही उपर को उठती चली गयी और वो मस्त मस्त आहे भरने लगी गोरी बोली उफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ये तुम्हारी गरम जीभ का स्पर्श मेरी जान ही लिए जा रहा है देव रुक जाओ मैं पिघल रही हू
पर मैं अब उसकी कुछ नही सुन ने वाला था , गोरी अपने हाथो से अपने उभारों को दबाने लगी थी और अपनी निप्पल्स को उंगलियो से सहलाते हुए बेड पर पैर पटक रही थी और मैने अब अपने हाथो से चूत की पंखुड़ियो को थोड़ा सा फैलाया और फिर अंदर के हिस्से को चाटने लगा जहा मैं मज़े से उसकी अन्छुइ चूत का रस पिए जा रहा था और वो भी उस सुख को प्राप्त कर रही थी
कामदेव का बान गोरी के दिल को चीर गया था कामुकता उसकी नस नस मे भर गयी थी और मैं , मैं मेरी क्या हालत बयान करू अगर मैं ठीक होता तो मैं अब तक तो उसकी चूत मे लंड डाल चुका होता पा अभी तो बस चूत को ही पी सकता था पल पल उसकी चूत और भी रस बहाती जा रही थी
उसकी चूत से बहता काम रस अब उसकी गान्ड तक आ गया था गोरी किसी नागिन की तरह झूम रही थी और ऐसे ही आख़िर वो पल आ ही गया जब सारे जहाँ की मस्ती उसकी नसों से बाहर छलक उठी और गोरी बिस्तर पर पस्त होकर पड़ गयी और अपनी भागती हुवी सांसो को थामने की कोशिश करने लगी उसकी चूत से निकले पानी की बूँद बूँद को मैने सॉफ कर दिया
र्म
कुछ देर हम दोनो यू ही बेड पर पड़े रहे फिर उठ कर कपड़े पहने गोरी बोली देव क्या मैं सच मे तुम्हे अच्छी लगती हूँ मैने कहा हाँ तुम बहुत पसंद हो मुझे तो वो शर्मा गयी फिर उसने कहा देव, अब मैं चलती हूँ देर हो रही है मैने कहा फिर कब आओगी तो वो बोली जल्दी ही आउन्गि उसके जाने के बाद पता नही कब मेरी आँख लग गयी जब मैं उठा तो दिन ढल चुका था
मैं अपनी बैंत का सहारा लेते हुए बाहर आया पता नही क्यो आज मेरा मूड हो रहा था कि कहीं बाहर घूम आउ मैने कार का गेट खोला और उसे स्टॅट करने लगा तो हमारा दरबान आया और बोला मालिक आपकी तबीयत भी ठीक नही है इस हालत मे बाहर जाना उचित नही है और महॉल भी ठीक नही है कही कुछ हो गया तो, मैने कहा तुम चिंता ना करो मैं बस पास तक ही जा रहा हू
जल्दी ही आ जाउन्गा तो वो बोला ठीक है पर आपकी सुरक्षा के लिए दो चार आदमी साथ ले जाइए पर मैने मना कर दिया और कार लेकर चल पड़ा पर मुझे भी नही पता था कि जाना कहाँ है कच्चे रास्ते पर इधर उधर कार दौड़ी चली जा रही थी इस एरिया मे मैं पहली बार आया था आगे रास्ता भी थोड़ा सा संकरा था और झाड़िया भी बहुत ही ज़्यादा थी अजीब सी जगह थी ये
तो मैं उतरा और पैदल पैदल ही आगे को बढ़ने लगा थोड़ी दूर जाने पर मुझे पानी बहने की आवाज़ सुनाई देने लगी पर कोई नदी या नाला दिख नही रहा था और फिर जैसे ही उन कॅटिली झाड़ियो को पार करके मैं कुछ आगे बढ़ा तो बस मैं देखता ही रह गया ये तो एक बगीचा सा था छोटा सा था पर बेहद ही सुंदर था चारो तरफ तरहा तरहा के फूल खिले हुए थे कुछ पक्षी चहचाहा रहे थे
इतना सुंदर नज़ारा मैने तो अपने जीवन मे पहली बार देखा था मंत्रमुग्ध सा मैं थोड़ा सा और आगे बढ़ा तो देखा कि एक तरफ पेड़ो के नीचे दो चार बेंच भी लगी हुई थी तो मैं उधर ही चला गया अब पानी बहने की आवाज़ और भी प्रबल हो गयी थी तो मेरे पाँव अपने आप ही उस ओर बढ़ने लगे कुछ दूर आगे जाने पर मैने देखा कि नदी से कटकर एक पानी का सोता बनाया गया है इधर
गला सा भी सूखने लगा था तो मैं सोते से पानी पीने लगा, पानी पी ही रहा था कि पीछे से एक आवाज़ आई कॉन हो तुम? तो मैं उठा और पीछे देखा , और क्या देखा कि कोई मेरी ही हमउमर लड़की खड़ी है और उसका तेज इतना था कि उसके रूप की ज्योति से वो सारा क्षेत्र ही जगमग करने लगा , इतनी सुंदर कि लिखने लगूँ उसके रूप के बारे मे तो फिर ये शब्द ही कम पड़ जाए
रूप ऐसा जैसे किसी ने मलाई वाले दूध मे चुटकी भर केसर छिड़क दिया गया हो गोरे रंग पर गुलाबी रंगत लगा कि जैसे सख्शियत स्वर्ग से कोई देवी उतर आई हो और उसके गुलाबी अधरो पर जो वो छोटा सा तिल था बस अब मैं क्या कहूँ , कानो मे सोने के बूंदे गले मे रेशमी माला की डोरी और उस लाल घाघरा चोली मे क्या खूब लग रही थी मैं तो उसके उस रूप की आँधी में कहीं खोता ही चला गया
जब उसे लगा कि मैं एकटक उसे ही देखे जा रहा हू तो उसने चुटकी बजाते हुवे मेरा ध्यान भंग किया और बोली कॉन हो तुम और इधर कैसे आए मैने जवाब देते हुवे कहा कि जी मैं तो मुसाफिर हू रास्ता भटक कर इस ओर आ निकला तो ये बगीचा दिख गया बड़ा ही सुंदर है मेरा तो मन ही मोह लिया इसने कुछ प्यास भी लग गयी थी तो फिर इधर पानी पीने आ गया तो वो लड़की अपने खुले बालो पर हाथ फिराते हुवे बोली क्या तुम्हे पता नही कि ये किसकी मिल्कियत है मैने कहा जी अब मैं तो ठहरा मुसाफिर मैं क्या जानू तो वो बोली ये मेरा बाग है आज तो इधर आ गये हो आगे से मत आना उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ये अंदाज उस रूप दीवानी का मैने कहा जी ऐसा क्यो तो वो तुनक कर बोली कह दिया ना कि हमें अपनी मिल्कियत मे किसी अंजान का दखल पसंद नही
क्या तेवर है हुजूर के , मैने कहा जैसी आपकी मर्ज़ी मालकिन साहिबा पर थोड़ी से भूख भी लग आई है तो आप आग्या दें तो दो चार फल खा लूँ तो वो बोली हाँ ठीक है पर इधर वापिस ना आना तो मैं एक पेड़ के पास गया और कुछ फल तोड़ने की कोशिश करने लगा उसके रूप की कशिश मे मैं अपने शरीर की हालत को भी भूल ही गया था
भूल गया था कि पैर के जखम अभी ताज़ा ही है तो मैं जैसे ही उछला तो चोटिल पाँव पर पूरा ज़ोर आ गया और मैं धडाम से गिर पड़ा तो जखम का टांका खुल गया तो दर्द की एक लहर मेरे बदन मे रेंग गयी कोहनी पर भी लग गयी थी मैं जैसे तैसे करके उठा और अपने आप को संभाल ही रहा था कि तभी बदक़िस्मती से गीली ज़मीन पर मेरा पैर फिसल गया और एक बड़े पत्थर से जा टकराया और चाहकर भी मैं अपनी चीख को ना रोक पाया
जखम खुलते ही खून की एक धार बह निकली और मैं वही पड़ा पड़ा कराहने लगा तो वो ही लड़की मेरी कराह सुनकर दौड़ते हुवे मेरे पास आई और बोली ये चोट कैसे लगी तुम्हे मैने कहा लंबी कहानी है बाद मे बताउन्गा पहले आप ज़रा मुझे खड़ा होने मे मदद कर दीजिए तो उसने मुझे सहारा दिया और बेंच पर बिठा दिया और बोली काफ़ी खून बह रहा है तुम्हारा तो
मैने दर्द भरी आवाज़ मे कहा कि बहुत दर्द हो रहा है तो वो कहने लगी दो मिनिट रूको मैं कुछ करती हू तो उसने मेरे जखम को सॉफ किया और फिर मेरी शर्ट की आस्तीन को फाड़ कर पट्टी सी बाँध दी और बोली कि जल्दी से किसी डॉक्टर को दिखा लेना मैने कहा ठीक है जी पर मेरी हालत ऐसी थी कि मुझसे खड़ा ही नही हुआ जा रहा था बहुत ही तेज दर्द हो रहा था
मैने कहा ज़रा सुनिए आप मेरी थोड़ी सी मदद और कर दीजिए उधर पास मे ही मेरी गाड़ी है आप मुझे प्लीज़ उधर तक छोड़ दीजिए तो वो बोली चलो ठीक है और फिर मुझे सहारा देते हुए वहाँ तक ले आई और मेरी शानदार कार को देखते हुए बोली इतनी महँगी कार तो मैने झूठ बोलते हुए कहा कि जी मेरे मालिक की है और फिर जैसे तैसे करके जल्दी से कार मे बैठ गया
उसके माथे पर उलझन की डोर मैने सॉफ देख ली थी और मेरा खुद ही बुरा हाल था तो घायल पैर की वजह से कार ड्राइव करने मे भी बड़ी ही मुश्किल हो रही थी पर आख़िर कार मैं हवेली के गेट तक पहुच ही गया, कार सीधी मैने अंदर लाकर रोकी और गेट खोलते ही नीचे गिर गया…
हवेली के करमचारी मुझे उठा कर अंदर ले गये और तुरंत ही डॉक्टर को बुलवाया गया उसने जल्दी से ड्रेसिंग की और पट्टी बाँधते हुवे बोला ठाकुर साहब आप को मना किया था कि ज़ख़्म ताजे है तो आप बस आराम ही करना पर आप बात मानते ही नही है देखो अब और भी नुकसान हो गया है अभी तो आपको बिल्कुल भी बिस्तर से नही उठना हैं , मैने कहा डॉक्टर, वो मेरा पाँव फिसल गया था तो बस फिर लग ही गयी लगी हुई जगहा पर
डॉक्टर बोला , पर वर कुछ नही
………. डॉक्टर साहब
आप बस अभी आराम ही करेंगे और ये कुछ दवाइयाँ दिए जा रहा हूँ टाइम से खानी है इनके असर से दर्द कुछ कम हो जाएगा पर आप अपनी सेहत का ख़याल रखे तो बेहतर होगा फिर कुछ देर बाद डॉक्टर चला गया उसके जाते ही पुष्पा बोली मालिक आख़िर आप बात क्यो नही मानते है मैने कहा यार अब पता थोड़ी ना था कि चोट लग जाएगी तो वो पूछने लगी कि पर आप कहा गये थे तो मेरा ध्यान उस रूप दीवानी की तरफ चला गया
पल भर के लिए मेरी आँखे मूंद गयी और उसका वो चंद्रमा सा चमकता हुवा चेहरा मेरी आँखो के सामने आ गया तो मैं उस कशिश मे जैसे खोने सा लगा था तभी पुष्पा की आवाज़ से मैं वापिस ख़यालो से बाहर निकल कर वास्तविकता मे आया तो वो बोली कहाँ खो गये आप मैने कहा कुछ नही बस थोड़ी सी थकान हो रही है तो उसने कहा आप आराम करे मैं आती हू थोड़ी देर मे
पर वो बेचारी कहाँ जानती थी कि देव को अब कहाँ नींद आनी थी ज्यो ही वो आँखे बंद करता उसके सामने वो ही खूबसूरत चेहरा आने लगता था अब देव का हाल बुरा हुआ रात आधी से ज़्यादा बीत गयी थी पर वो बिस्तर पर पड़ा हुवा टेबल लॅंप का स्विच ऑन ऑफ करे उसकी आँखो से ख्वाब कहीं दूर उड़ चले थे मॅन बस करे कि उड़ चलूं और पहुच जाउ उस बाग़ीचे मे जहाँ उस सुंदरी के दर्शन किए थे
आँखो आँखो मे रात कट गयी सुबह जब नोकर जगाने आया तो उसने देखा कि देव तो जगा ही हुआ है तो वो वापिस चला गया इधर देव तो जैसे किसी शराब की बॉटल में डूब गया हो ऐसा हाल हुआ उसका खोया खोया सा लग रहा था वो जब पुष्पा ने उसको नाश्ता परोसा तो भी उसका ध्यान कही ओर ही था तो पुष्पा बोली मालिक नाश्ता कर लीजिए , लगता है आपको पसंद नही आया मैं कुछ और बना कर लाती हू,
देव- अरे नही ऐसी बात नही है
बस मेरा मन नही कर रहा है बात करते करते ही देव बिस्तर से उठने लगा तो पुष्पा टोकते हुए बोली मालिक आप उठ क्यो रहे है आपकी तबीयत फिर से बिगड़ जाएगी आप लेटे ही रहे पर उसने कोई ध्यान नही दिया और अपनी बेंत का सहारा लेकर बेड से नीचे उतर गया पर उतरते ही उसके पैर से साथ नही दिया और वो कराहते हुवे बिस्तर पर फिर से बैठ गया
पुष्पा- दर्द हुआ मालिक , आप से पहले ही कहा था कि मत उठिए
तो हार कर फिर से बिस्तर ही पकड़ना पड़ा पर मन जो था वो भटक रहा था एक अजनबी की ओर तो फिर कुछ याद ना रहा दवाई के असर से जल्दी ही नींद आ गयी फिर बस ऐसा ही चलता रहा 10-15 दिन बस ऐसे ही कट गये हालत मे भी काफ़ी सुधार सा हो गया था पर अभी भी बस बिस्तर पर ही पड़ा रहता था लक्ष्मी लगभग हर दोपहर मे आ ही जाया करती थी तो उस से बाते करके थोड़ा सा टाइम कट जाया करता था और फिर पुष्पा भी तो थी
पर फिर उस दोपहर कुछ ऐसा हो गया की उस तकलीफ़ मे भी मुझे हवेली से बाहर निकलना ही पड़ा आख़िर ठाकुर देव तड़प ही गये उस घटना से हुआ दरअसल ये था कि कुछ काम से गोरी अपनी सहेलियो के साथ शहर गयी थी तो जब वो जा रही थी तो रास्ते मे कुछ लड़को ने गोरी से बदतमीज़ी की और उसकी चुन्नि खीच ली थी गोरी ने रोते हुए सारी बात मुझे बताई
तो बस मैं तड़प कर ही रह गया मैने तुरंत ही बंदूक उठाई और अपने सारे दर्द को भूल कर चलते हुवे मैं बाहर आया और नंदू से कहा कि कार निकाल जल्दी से आज ये पहली बार थी जब मेरा स्वर गुस्से से भरा हुवा था तो नंदू ने बिना कुछ कहे तुरंत ही कार दरवाजे पर लगा दी मैने कहा गाड़ी को सहर के रास्ते पर ले पुष्पा मुझे टोकना चाहती थी पर गुस्से से दहक्ती हुई मेरी आँखो को देख कर वो चुप कर गयी
सहर से कुछ किलोमेटेर दूर मुझे गोरी और उसकी सहेलिया मिल गयी , गोरी दौड़कर मेरे सीने से लग गयी और ज़ोर ज़ोर से रोने लगी मैने कहा बस चुप हो जा मैं आ गया हू तू ये बता वो किस गाँव के थे तो उसने बता दिया मैने नंदू से पूछा की सुबह सहर जाने वाली बस वापिस कब तक आती है तो पता चला कि 3 साढ़े तीन तक वापिस आती है मैने कहा गाड़ी को रोड पर लगा दे नंदू
तीन बजने मे थोड़ी देर थी तो मुझे इंतज़ार ही करना था किसकी इतनी हिम्मत हो गयी जो गोरी की तरफ आँख उठा कर देखे, मेरी गोरी की इज़्ज़त को शर्मसार करे मुझे खुद पर भी गुस्सा आ रहा था कि ठाकुर देव बस अब नाम का ही ठाकुर रह गया क्या जो उसके होते हुवे गोरी को ये अपमान का घूँट पीना पड़ा गोरी के अपमान की आह मेरे सीने मे क्रोध की ज्वाला बनकर धधकने लगी थी
मैं गुस्से से पागल हो रहा था तभी मुझे दूर से बस आती दिखी तो मेरे नथुने फड़कने लगे चूँकि मेरी कार सड़क के बीचो बीच खड़ी थी तो बस ड्राइवर को बस मजबूरी मे रोकनी पड़ी, वो चिल्लाता हुवा बोला बाप का रोड समझा है क्या हटा कार यहाँ से तो मैने कहा साले चुप करके खड़ा होज़ा वरना अगले पल तेरी ज़ुबान हलक से खीच लूँगा तो वो सहम गया
मैने गोरी का हाथ पकड़ा और बस मे चढ़ गया और बोला बता कॉन थे वो तो उसने लास्ट की सीट की तरफ इशारा किया कुछ 6-7 लड़को का ग्रूप था मैने कहा चुन्नि किसने खीची थी तो उसने उंगली से बता दिया और मैं झपटा उस ओर और सीधा उसकी छाती पर लात मारी और उसको खीच कर बस से उतार लिया और मारने लगा तो उसके जो दोस्त थे वो भी उतर आए ये तो नंदू ने भी बंदूक उठा ली
मैने कहा नही नंदू ये मेरे शिकार है , तू बस देख तो एक बोला तू कॉन है बे साले जो इतना उफन रहा है क्या हो गया जो थोड़ी छेड़खानी कर ली कुछ तोड़ तो नही लिया ना इसका जानता है मेरा बाप कॉन है ये सुनकर मुझे और भी गुस्सा आ गया मैने कहा हराम की औलाद शूकर मना कि मैने अभी तक नही बताया कि मैं कॉन हू और गोर से देख तूने किस का आँचल पकड़ा था
गोर से देख इसे ये गोरी है देव की गोरी , अर्जुनगढ़ के ठाकुर देव की गोरी, ये सुनते ही उस लड़के के चेहरे का रंग उड़ गया उसके साथ जो भी दोस्त थे वो तुरंत ही मेरे पाँवो मे गिर गये और उस लड़के का पॅंट मे ही मूत निकल गया मैं आगे बढ़ा और उसकी कॉलर पकड़ते हुवे बोला साले तेरी इतनी हिम्मत कि तू लड़की का हाथ पकड़ेगा बुला साले तेरा बाप कॉन है बल्कि तू क्या बुलाएगा मैं ही तुझे और तेरे बाप को आज तुम्हारी औकात दिखाता हू
मैने कहा नंदू बाँध साले को गाड़ी के पीछे और ले चल घसीट कर इसके गाँव मे मैने कार से रस्सी निकाली और नंदू की सहायता से बाँध दिया उसको पीछे वो बार बार रोते हुए माफी माँगने लगा पर मैं उसको माफ़ नही करने वाला था मैं जहर भरी नज़रो से उन लड़को को देखता हुआ बोला हराम जादो अगर कोई तुम्हारी बहन को छेड़ता तो कैसा लगता तुम्हे लड़कियो की इज़्ज़त करनी सीख लो
तुम्हारी माँ बहन भी तो सहर जाती होंगी कोई उनके बदन को जब निहारे तो तुम्हे कैसा लगेगा तो वो सब माफी माँगने लगे मैने गोरी को कार मे बिठाया और उसकी सहेलियो को कहा कि तुम सब बस मे घर जाओ और बेफिकर हो कर जाओ मेरे रहते किसी की औकात नही जो अर्जुन गढ़ की बहन बेटियो की ओर आँख उठा कर देख सके मेरे बैठते ही नंदू ने कार स्टार्ट कर दी मैने शीशा थोड़ा नीचे कर दिया ताकि उस कमिने की चीखे सुन सकूँ , सड़क पर घिसते हुए हर पल उसकी चीखे बढ़ती जा रही थी जब हम उसके गाँव मे पहुचे तो उसकी खाल बुरी तरह से उतर गयी थी अंदर का माँस कट कट रहा था और खून तो ऐसे बह रहा था कि बस … मैने कहा खोल नंदू इसे गाँव मे भीड़ जमा होने लगी थी उसका बाप गाँव का ज़मींदार था
उसे पता लगते ही वो दौड़ा हुआ आया और अपने बेटे की हालत देख कर विलाप करने लगा मैने दहाड़ते हुवे कहा उस लड़के से देख साले तेरा बाप भी इधर है करवा मेरा जो करवा ना है तुझे उसका बाप मेरे पाँव पड़ता हुवा बोला ठाकुर साहब इस ना समझ से भूल हुई माफी दे दो इसको इसके बदले मुझे सज़ा दीजिए पर इसे इलाज की आग्या दीजिए मैने कहा मुझे कुछ लेना देना नही
इस से चाहे मरे या जिए पर अगर ये बच जाए तो समझा देना कि आशिक़ी अपनी औकात मे रहकर करे अगर इस गाँव के किसी भी लोंडे ने मेरे गाँव की छोरियों की तरफ ग़लती से भी देखा तो ये मेरा वादा है कि इस गाँव को शमशान का ढेर बना दूँगा और वो जो इसके दोस्त थे उनको भी समझा देना कि मोत से ना खेले वो लोग माफी माँगने लगे फिर मैं गोरी को लेकर उसके घर गया सारी बात सुनकर लक्ष्मी थोड़ी परेशान हो गयी
पर मैने उसको दिलासा देते हुवे कहा जब तक देव जिंदा है गोरी की तुम चिंता ना करो लक्ष्मी मेरा शुक्रिया अदा करने लगी मैने कहा आप इस घटना के बारे मे मुनीम जी से जिकर ना करना वरना वो परेशान हो जाएँगे और अब मैं भी चलता हू तो फिर मैने भी हवेली का रास्ता पकड़ लिया
हवेली आकर मैं धम्म से सोफे पर गिर गया और अपने मूड को ठीक करने की कोशिश करने लगा पुष्पा मेरे लिए पानी लेकर आई मैने अपना गला तर किया और फिर उसको सारी बात बताई तो वो बोली अच्छा किया जो सज़ा दी मैं तो कहती हूँ कि उस कमीने को जान से मार देना चाहिए था मैने कहा बहुत थक गया हू एक कड़क चाइ पीला दो तो पुष्पा अपने होटो पर जीभ फिराते हुए बोली बस चाइ या कुछ और भी
तो मैने कहा क्या बात है आज बड़ी अच्छी वाली बाते कर रही हो तो वो बोली कुछ नही बस आपका मूड ठीक कर रही थी आप मायूष अच्छे नही लगते हो और फिर मैं तो सेविका हू आपकी मैने कहा चल जा अभी और चाइ ले आ जा वो जाने के लिए मूडी तो मेरी नज़र उसकी गान्ड पर ठहर गयी ना जाने क्यो वो और मोटी मोटी सी लग रही थी पर हाय हमारी हालत ऐसी कि बस नज़रो से ही काम चला लेना था
तो इसी तरह लगभग एक महीना गुजर गया , सेहत मे काफ़ी हद तक सुधार हो गया था ज़ख़्म भर गये थे पर उनके निशान रह गये थे कई दिनो से लंड भी शांत पड़ा था तो उसकी खुजली भी कुछ बढ़ गयी थी पर अब पुष्पा रात को हवेली मे नही रुकती थी और नंदू था तो चंदा को भी नही चोद सकता था तो अब क्या करूँ मैने लक्ष्मी को फोन किया कि मुझे बड़ी याद आ रही है तुम्हारी
तो उसने बताया कि वो कुछ दिनो के लिए अपने बेटे से मिलने जा रही है , तो आकर वो पक्का मिलेगी तो उधर भी बस निराशा ही हासिल हुई तो मैने सोचा कि चल फिर आज शाम को उस बगीचे की तरफ डेरा डाला जाए तो क्या पता उस रूप दीवानी से फिर मुलाकात हो जाए तो मैने आज सिंपल से पैंट शर्ट पहने और फिर उधर का रास्ता पकड़ लिया काफ़ी दिनो बाद उधर जा रहा था तो रास्ता भूल गया
पर फिर आख़िर पहुच ही गया बगीचा वैसा ही था बिल्कुल खिला खिला सा तो मेरी निगाहें उस अजनबी चेहरे को ढूँढ ने लगी पर शायद आज वो उधर नही थी मैने काफ़ी इंतज़ार किया पर वो नही आई शायद रोज ना आती हो तो फिर वापिस हवेली आ गया एक वो बोझिल दिन भी निकल गया अगले दिन सुबह सुबह ही गोरी आ गयी मैने कहा आज इधर का रास्ता कैसे भूल गयी
तो वो बोली माँ है नही घर पर तो आ गयी मैने कहा अच्छा किया मैं भी बोर हो रहा था मैने गोरी को खीच कर अपनी गोद मे बिठा लिया और उसकी गर्दन पर अपनी ज़ुबान फिराने लगा तो गोरी कसमसाते हुवे बोली देव मत छेड़ो ना फिर मुझे खुद पर काबू करना मुश्किल हो जाता है मैं अपने दाँत उसकी सुरहिदार गर्दन पर गढ़ाते हुवे बोला तो फिर आज हो जाना बेकाबू किसने रोका है
मैं अपने हाथ उपर ले गया और सूट के उपर से ही उसके पुष्ट उभारों को दबाने लगा तो गोरी शरमाते हुए बोली देव मत छेड़ो मुझे मान भी जाओ ना तो मैने कहा गोरी बस कुछ देर खेलने दे ना अच्छा लग रहा है तो वो शरमाते हुए बोली पर मुझे तुम्हारा वो नीचे चुभ रहा है तो मैने गोरी को बेड पर लिटा दिया और उसके उपर चढ़ गया
और उसको अपनी बाहों मे दबोच लिया गोरी के काँपते होठ मुझे अपनी ओर बुला रहे थे तो मैने अपने प्यासे लबो पर जीभ फेरी और गोरी के सुर्ख होटो से अपने होटो को मिला लिया मैं तो कई दिनो से प्यासा था आज मैं जी भर कर गोरी के शहद से भरे होटो को पीना चाहता था तो मैं काफ़ी देर तक उनको चाट ता ही रहा फिर गोरी ने अपना मूह अलग किया
और हान्फते हुवे बोली उफफफफफफफफ्फ़ सांस तो लेने दो ज़रा मैने उसके सूट को समीज़ समेत उतार कर साइड मे रख दिया तो गोरी का उपरी हिस्सा पूरी तरह नंगा हो गया मैने तुरंत उसकी एक चूची को अपने मूह मे भर लिया और दूसरी को हाथ से भीचने लगा तो गोरी मस्ती के सागर मे गोते खाने लगी उसने अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ लिया और उस से खेलने लगी
10-12 मिनिट तक उसके उभारों को चूस चूस कर मैने बिल्कुल ही लाल कर दिया गोरे के गाल गुलाबी हो गये थे अब मैने उसकी सलवार के नडे पर अपना हाथ रखा और उसको खीच दिया गोरी ने ज़रा सा भी विरोध नही किया गुलाबी रंग की कच्छि मे क्या मस्त लग रही थी वो बस मैं तो मर ही मिटा उसके योवन पर मैने अपनी नाक उसकी चूत पर रखी तो बड़ी भीनी भीनी सी खुश्बू आ रही थी
मैं कच्छि के उपर से ही उसको किस करने लगा तो गोरी बेड पर नागिन की तरह मचलने लगी मस्ती उसके रोम रोम मे भरती जा रही थी तभी गोरी बोली देव रुक जाओ ना सुबह का टाइम है पुष्पा आती ही होगी थोड़ी देर मे मैने कहा तू उसकी चिंता ना कर बस मेरा साथ दे तो फिर उसने कुछ नही कहा मैने उसकी कच्छि की एलास्टिक मे अपनी उंगलिया डाली और उसको भी उतार कर फेक दिया
हल्की रोएँदार झान्टो के बीच मे छुपी हुई उसको छोटी सी गुलाबी योनि रस से भरी पड़ी थी तो मैं अपनी उंगली को उसकी चूत की दरार पर फिराने लगा गोरी बड़ी मस्त होकर हल्की हल्की सी सिसकारियाँ भरने लगी थी फिर मैं अपनी उंगली को अंदर घुसाने की कोशिश करने लगा तो गोरी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली ऐसा ना करो दर्द होता है तो मैने कहा और जब इसमे लंड जाएगा तब ,
तो वो शरमाते हुए बोली धात, बेशर्म हो तुम तो मैने अपने होटो मे उसकी चूत को भर लिया तो गोरी जैसे सीधा आसमान की सैर पर पहुच गयी और बोली उफफफफफफफफफफ्फ़ ओह देवववववववववववववववव ईईए कैसा जादू कर देते हो तुम कितना अच्छा लगता है जब तुम वाहा पर क़िस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स करते ईईईई हूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ ओह आआआआआआआआाआआआआआआआ
उसकी चूत से जैसे उस गरम मजेदार रस का झरना ही बह चला था गोरी ने अपनी आँखो को मस्ती के मारे बंदकर लिया था और मेरे सर को अपनी जाँघो पर भीच ने लगी थी सुडूप सुडूप मैं अपनी जीभ को तिकोना कर के उसकी चूत को चाटे जा रहा था फिर मैं वहाँ से उठा तो गोरी मेरी ओर ऐसे देखने लगी कि जैसे किसी ने भूखी शेरनी के आगे से शिकार छीन लिया हो
मैने उसकी जाँघो को फैलाया और अपने लंड को चूत पर सेट किया ही था कि तभी फोन की घंटी बज उठी तो मेरा मूड भन भना गया मैने गोरी के उपर से हट कर फोन को उठाया और कान से लगा लिया तो दूसरी तरफ थानेदार की आवाज़ जैसे ही मेरे कानो से टकराई कुछ पॅलो के लिए जैसे मैं सुन्न ही हो गया था मैने सोचा नही था कि ऐसी न्यूज़ भी मिलेगी
मैने बस इतना ही कहा कि बस मैं थोड़ी ही देर मे पहुचता हूँ और फटा फट से अपने कपड़े पहन ने लगा तो गोरी बोली क्या हुआ मैने कहा यार एक कांड हो गया है मुझे अभी जाना होगा तो वो अपने कपड़े डालते हुए बोली मैं भी चलती हू मैने कहा नही तू इधर ही रह, जैसे तैसे मैने अपने तन पर कपड़े उलझाए और फिर गाड़ी लेकर सीधा अपने नदी किनारे वाले खेतो को ओर चल पड़ा
वहाँ पहुचने मे करीब बीस पच्चीस मिनिट लग गये मैं जैसे ही तो वहाँ पहुचा तो देखा कि कुछ लोग जमा थे वहाँ पर और पोलीस की गाड़ी भी खड़ी थी मुझे देखते ही इनस्पेक्टर मेरे पास आया और बोला कि ठाकुर साहब मेरे साथ आइए तो मैं उसके पीछेपीछे चल पड़ा और फिर मैने कुछ ऐसा मंज़र देखा की मेरा कलेजा काँप गया लगा कि जैसे ये क्या हो गया
मेरी आँखो के सामने एक लाश थी , चंदा की लाश मैं एक पल मे ही समझ गया था कि मेरे किसी दुश्मन ने ही इसका काम तमाम कर दिया है पर बात सिर्फ़ वो ही नही थी दो खेत आगे एक लाश और थी , और उस लाश को देख कर मैं बहुत ही ज़्यादा अपसेट हो गया था , वो जिसे मैं अपना दोस्त मानता था वो जो मेरे हर काम किया करता था वो लाश नंदू की थी
अब मेरी आँखो से रुलाई फुट पड़ी मैं वही उसकी लाश से लिपट लिपट कर रोने लगा हाई राम!!!!!!!!!!!!!!!!!! ये क्या हो गया मुझे लगा की जैसे मेरे सर पर जैसे क़यामत ही टूट पड़ी थी ये सिर्फ़ दो लाशें ही नही थी बल्कि ठाकुर देव के चेहरे पर एक करारा तमाचा थी , मेरी आँखो मे जैसे खून उतर आया था मैने घोर रुदन करते हुए कहा थानेदार आज रात तक मुझे
इनके कातिल मेरी आँखो के सामने चाहिए वरना मैं सब कुछ तहस नहस कर दूँगा तो इनस्पेक्टर बोला हम कोशिश कर रहे है , वो बोला मैं लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा देता हू तो मैने मना करते हुए कहा नही अब इनकी और मिट्टी खराब नही करनी है ये मेरे जीवन का एक और दुख था परिवार तो पहले ही छोड़ कर चला गया था ले दे कर ये कुछ लोग ही थे और अब चंदा और नंदू का भी कतल हो गया था
कुछ ही देर मे खबर आग की तरह फैल गयी थी और गाँव के कई लोग आ गये थे , मैने अपने हाथो से उन दोनो का अंतिम-संस्कार किया आख़िर मेरे लिए परिवार ही तो थे वो लोग , मैं खुद को बड़ा कोस रहा था उस रात हवेली मे बस घोर अंधेरा छाया हुआ था एक दीपक भी नही जला था , सब लोग गहरे सदमे मे थे और मेरी आँखो मे भी कुछ आँसू थे, और दिल रोए जा रहा था
उस रात चूल्हा नही जला बस दिल जल रहा था सुबह हुई पर कातिलों का कुछ नही पता चला , उफफफफफफ्फ़ कितना बेबस महसूस कर रहा था मुझे लगा कि मैं जैसे एक कीड़ा हू जिसे किसी ने कुचल कर छोड़ दिया हो कितना बेबस था मैं उस कमजोर पल मे बाग मे लखन और बादल दो ही आदमी रहा करते थे तो ना जाने मुझे क्यो उनकी सुरक्षा भी कमजोर लगी तो मैने उधर भी 10-15 आदमी 24 घंटे के लिए छोड़ दिए
और सख़्त आदेश दिया कि किसी भी अनहोनी की आशंका हो तो सीधा गोली चला देना जो होगा देख लेंगे आख़िर अपने हर करम्चारी की रक्षा मेरी ज़िम्मेदारी थी मैने एक पिस्टल पुष्पा को दी और कहा कि इसे हमेशा अपने पास रखना हिफ़ाज़त के लिए सच तो ये था कि उस घटना से मैं अंदर से बुरी तरह हिल गया था खुद को इतना अकेला मैने कभी नही पाया था
2-4 दिन गुजर गये थे पर कातिलों का कुछ अता-पता नही चला था पर वो कहते है कि भगवान के घर देर है अंधेर नही उस रात करीब दस बज रहे थे मेरे खेत मे काम करने वाला मजदूर बिरजू भागते हुवे हवेली आया और उसने कुछ ऐसा बताया कि मेरी आँखो मे चमक आ गयी मैने उसी समय बिरजू और अपने दो चार आदमियो को साथ लिया और सुल्तान पुर जो कि करीब 3-4 कोस दूर का गाँव था उधर के दारू के ठेके की ओर चल दिए
वहाँ पहुचते ही मैने बिरजू से इशारा किया तो वो बोला हुकुम जब मैं दारू लेने इधर आया तो वो लोग इधर ही पी रहे थे और चंदा के बारे मे बात कर रहे थे पर अभी वो दिख नही रहे है मैने कहा ठेके वाले को बुलाओ ज़रा तो मैने उससे कहा भाई करीब दो घंटे पहले कुछ अजनबी लोग इधर दारू पी रहे थे वो किधर गये तो वो बोला रे बावले भाई इधर ना जाने कितने अजनबी आते है
मैं किस किस का ध्यान रखू रे, एक तो मेरा दिमाग़ पहले ही भन्नाया हुआ था और उपर से उसने मुझे सीधी तरह से जवाब नही दिया तो मेरी खोपड़ी घूम गयी तो मैने एक गोली सीधा उसके पाँव मे मार दी और बोला अब याद आया कुछ तो ज़मीन पर पड़ा हुवा दर्द से कराहते हुवे बोला माफी दे दो साहब बता ता हू , वो लोग पेशेवर गुंडे है
और आजकल पहाड़ी के काली मंदिर पर डेरा डाले हुए है मैने बिरजू से कहा कि डॉक्टर बुला कर इसकी दवा-दारू करवा देना और फिर मैने गाड़ी काली मंदिर की तरफ घुमा दी मंदिर के पीछे जो जंगली इलाक़ा था उधर ही उन्होने अपना टेंट जैसा कुछ लगा कर अड्डा बनाया हुआ था जाते ही हम लोगो ने उनको धर लिया वो दारू के नशे मे चूर और मैं अपने क्रोध के नशे मे चूर
3-4 तो वही पर मर गये और 2-3 को हम अपने साथ ले आए पर मैं उनको हवेली की बजाय सीधा अपने बाग मे लेकर गया और फिर लखन से कहा कि इन सालो की जब तक मरम्मत कर तब तक कि ये बात करने लायक ना हो जाए तो फिर मेरे आदमियो ने भी दबाकर अपनी भडास निकली , फिर मैने पूछताछ शुरू की , मैने कहा उन माँ बेटों को क्यो मारा
पर वो ठहरे ठीठ तो इतनी आसानी से जवाब नही देने वाले थे तो मैने कहा ज़रा प्लास ले कर आओ और फिर उसकी उंगली के नाख़ून उखाड़ने लगा तो वो दर्द से चीख ने लगा पर मैं नही रुका और उसकी दोनो हाथो की उंगलियो के सारे नाख़ून निकाल दिए लाल लाल खून चारो तरफ बिखरने लगा अब मैं दूसरे आदमी की ओर गया और उसकी उंगली को पकड़ लिया तो वो चीखते हुवे बोला माफ़ करदो मैं सब कुछ बता ता हूँ
आपको जो भी पूछना है मैं सब बता ता हू तो उसने कहा कि हमे सुपारी मिली थी चंदा और उसके बेटे को मारने की मैने कहा नाम बता उस का तो वो बोला वो तो मैं नही जानता क्योंकि सुपारी राका ने ली थी जिसे आपने मार डाला हाँ पर मैं इतना जानता हू कि राका को 1 लाख रुपये किसी औरत ने दिए थे, अब मेरा दिमाग़ घूमा मैं उसे मारते हुए पूछने लगा कि बता साले कॉन थी वो , बता पर वो बार बार चीखते हुए बस इतना ही कहता रहा कि कोई औरत थी कोई औरत थी
जब मुझे लगा कि वास्तव मे इस को कुछ पता नही है तो मैने कहा मार दो दोनो को और लाशों को जनवरो को खिला देना मैने लखन को समझाया कि चोकन्ने रहना और सब लोग साथ ही रहना अकेले ना रहना आकल अपना टाइम कुछ ठीक नही है तो होशियार रहना फिर मैं हवेली आ गया और सोचने लगा कि कॉन औरत हो सकती है वो मैने पुष्पा को बुलाया और कहा कि पुष्पा तू कितनी औरतो को जानती है जो लाख रुपये झटके मे खरच कर सकती है तो वो बोली मालिक लाख रुपये कितनी बड़ी रकम होती है ,हम ग़रीबो के पास कहाँ से आए मैने कहा गाँव मे बता तो वो बोली मालिक, मेरे हिसाब से तो गाँव मे 3-4 औरते ही होंगी जिनके पास इतना रुपया हो सकता है मैने कहा बता ज़रा तो वो बोली एक तो सरपंच की पत्नी, सुना है सरकारी पैसा खूब दबाया है सरपंच ने
मैने कहा और तो वो बोली फिर सुनार जी के पास भी खूब धन है आख़िर धंधा भी ऐसा ही है, हलवाई रामचरण के पास पैसा तो है पर इतना नही होगा कि लाख रुपये जोरू को दे दे पर मालिक … ………. ………… ….. मैने कहा बोल तो सही तो वो बोली मालिक आप को बुरा लग जाएगा मैने कहा अरे तू बोल ना तो पुष्पा बोली मालिक मुनिमाइन के पास भी बड़ी रकम है……
पर मुझे लक्ष्मी पर पूरा भरोसा था ये बात पुप्षपा भी अच्छी तरह से जानती थी पर एक बात जो मुझे भी थोड़ी सी खटक रही थी कि बार बार बुलाने पर भी लक्ष्मी आजकल कोई ना कोई बहाना मार के कट लिया करती थी आख़िर ये सब हो क्या हो रहा था मैं बड़ा ही परेशान हो चला था इस बीच एक महीना और गुजर गया था पर इस बीच कोई भी अप्रिय घटना नही हुई
मेरी सेहत भी काफ़ी हद तक सुधर गयी थी , एक शाम में ऐसे ही बाहर घूमने जाने की सोच रहा था तो मैं अचानक से ही उस छोटे से बगीचे की तरफ हो लिया इस उम्मीद मे कि वो सोख हसीना क्या पता फिर से मिल ही जाए पता नही कुछ तो कसिश थी उसकी उन नशीली आँखो मे , वैसे तो उसने मना किया था कि इधर ना आना पर हम ठहरे हम
मैने अब अपनी गाड़ी काफ़ी दूर खड़ी की और पैदल चलते हुवे झाड़ियो को पार करके उधर पहुच गया कुछ भी तो नही बदला था वहाँ पर हर एक चीज़ खिली खिली सी हुई लगता था कि कोई बड़े ही प्यार से उस जगह को आबाद करने मे लगा हुआ था और मुझे भी बड़ा अच्छा लगता था इधर आ कर , मैं उसी बेंच पर बैठ गया और दो पल के लिए अपनी आँखे मूंद ली
कि तभी एक मिशरी सी आवाज़ मेरे कानो मे जैसे घुलती ही चली गयी मैने आँखे खोली तो मेरे ठीक सामने वो ही हसीना खड़ी थी, गोद मे एक खरगोश लिए वो मुझे देखते हुए बोली कि अरे तुमको मैने कहा था ना कि उस दिन, इधर फिर ना आना फिर क्यो चले आए, तुम मुझे जानते नही हो मैं कॉन हू मैने कहा जी आपका बगीचा है ही इतना मनमोहक कि मैं खुद को रोक ही नही पाया इधर आने से
वरना मेरी क्या मज़ाल जो हुजूर की शान मे गुस्ताख़ी कर सकूँ, तो वो बोली क्या तुम्हे अच्छा लगता है इधर आना मैने कहा जी बहुत तो वो बोली ठीक है तो तुम आ सकते हो पर रोज नही कभी कभी और हाँ इधर आओगे तो बगीचे को सँवारने मे मेरी मदद भी करनी होगी मैने कहा जी जैसा आप कहें, तो वो भी मेरे सामने वाली बेंच पर आकर बैठ गयी
और बोली तुम इधर के तो नही लगते हो तुम्हारा रंग रूप कुछ अलग सा है , तो मैने कहा जी उस दिन आपको बताया भी तो था कि मैं एक मुसाफिर हू उसने पूछा –कहाँ रहते हो मैने झूठ बोलते हुए कहा कि जी वो जो दूर पहाड़ियाँ है ना उनके पीछे जो डॅम बन रहा है उधर ही काम करता हू, वो बोली इतनी दूर से इधर आते हो मैने कहा जी अब जी इधर ही लगता है तो आ जाता हू
उसने फिर से पूछा- नाम भी होगा कुछ तूहरा,- जी नंदू, अपने आप ही मेरे मूह से निकल गया वो बोली ये कैसा ग़रीबो सा नाम है तुम्हारा नंदू पुराने जमाने वाला , मैने कहा जी अब जो है वो ही है अगर आप चाहे तो आप किसी और नाम से बुला सकती है तो वो बोली नही मैं भी नंदू ही बुलाउन्गी, मैने कहा अगर आपकी आग्या हो तो मैं एक बात पुछु
वो बोली कहो- मैने कहा जी आपका नाम क्या है तो वो मुस्कुराते हुए बोली क्या करोगे मेरा नाम जानकर, मैने कहा जी करना तो कुछ नही है पर अगर नाम पता होता तो ठीक रहता तो वो बोली मेरा नाम दिव्या है और यही कुछ दूरी पर मेरा घर है तुम देखोगे मैने कहा जी ज़रूर तो उसने कहा फिर मेरे पीछे आओ, तो मैं चुप चाप से उसके पीछे-पीछे चलने लगा
करीब 15 मिनिट तक हम खामोशी से पेड़ो के बीच बने कच्चे रास्ते पर चलते रहे, फिर एक झुर्मुट के पीछे से उसने मुझे कहा देखो ये है मेरा घर तो मैने देखा कि एक बेहद ही विशाल सफेद संगमरमर की चमकती हुई इमारत खड़ी थी जिसे देख कर मेरी आँखे चौंधियाँ गयी मैने कहा तो आप इस महल की मालकिन है , तो वो हँसते हुए बोली नही रे,
मैं तो इधर काम करती हू, नौकरानी का तो मालिक लोगो ने इधर ही एक कमरा रहने को दिया हुआ है और इस बगीचे की जो ज़मीन है ये भी बड़ी मालकिन ने मुझे मेरे काम से खुश होकर दी है ये बताते हुए उसकी आँखे गर्व से चमक रही थी मैने कहा पर आप नौकरानी तो लगती नही हो , मेरा मतलब आप इतनी सुंदर है आपके कपड़े इतने अच्छे
तो वो बोली तो तुम भी कॉन सा ड्राइवर लगते हो , मैने कहा पर मैं तो हूँ ही , तो वो तपाक से बोली तो मैं भी नोकरानी ही हूँ, ये सब गहने और कपड़े तो हमारी मालकिन की बड़ी बेटी की उतरन है उनके बड़े शौक है तो मुझे मिल जाते है ये कपड़े पहन ने को तभी मेरे दिमाग़ मे एक सवाल आया मैने कहा और आपके मालिक का क्या नाम है तो वो बोली ठाकुर राजेंदर
ओह ओह तो इसका मतलब था कि इस समय मैं नाहरगढ़ मे खड़ा था , कच्चे रास्ते की भूल भुलैया मुझे ये कहाँ ले आई थी फिर भी मैने कनफार्म करने के लिए पूछा जी आपके गाँव का नाम क्या था वो मैं भूल गया तो वो बोली नाहरगढ़ मे हो तुम इस समय मैने कहा हाँ याद आया काफ़ी अच्छा गाँव है आपका तो वो सवाल करते हुए बोली-तुम कब गये थे गाँव मे
मेरी चोरी पकड़ी गयी थी मैने किसी तरह बात को संभालते हुवे कहा कि जी जब आप का घर ही इतना सुंदर है तो गाँव भी सुंदर होगा इसी लिए बोल दिया वो थोड़ा सा ब्लश करते हुए बोली वैसे बाते बड़ी अच्छी करते हो तो मैने कहा आप भी तो कितनी अच्छी हो थोड़ा थोड़ा सा अंधेरा होने लगा था तो उसने कहा चलो अब मैं चली काम भी करना होगा
मैने कहा जी अच्छा मैं भी चलता हू, कुछ दूर चला ही था कि उसने आवाज़ दी तो मैं मूड गया उसने कहा वैसे मैं हर मंगल , और शनि को इधर शाम को होती हू और पलट कर तेज तेज कदमो से आगे को बढ़ चली और मैं ना जाने क्यो मुस्कुरा पड़ा और फिर मैं भी अपने आप से बाते करता हुआ कार तक आया और फिर अपने गाँव की ओर चल पड़ा
हवेली आया तो मेरा मूड बड़ा ही खुश खुश सा था पुष्पा रसोई मे थी तो मैं उधर ही चला गया और उसको अपनी बाहों मे भर लिया मैने उसको रसोई की दीवार से सटा दिया और उसके लाल लाल होटो पर किस करने लगा वो बोली छोड़िए ना कोई आ जाएगा मैने कहा किसकी मज़ाल जो मेरे और तुम्हारे बीच मे आए और वैसे भी कई दिन हो गये है तुम्हे प्यार नही किया है वो बोली पहले मुझे रसोई का काम समेट लेने दें फिर मैं आती हू आपके पास
तो मैं उसकी गान्ड पर चिकोटी काट ते हुवे बोला थोड़ा जल्दी कर के आना , वो एक आह भर कर ही रह गयी थी मैं आकर बाल्कनी मे डाली कुर्सी पर बैठ गया और दिव्या के बारे मे सोचने लगा कितनी अच्छी थी वो कितनी सुंदर कुछ तो बात थी उसमे जो मेरा मन बार बार उसकी ओर भागने लगा था ये ठंडी हवा क्या संदेशा लेकर आ रही थी मैं समझ नही पा रहा था
मैं बेसब्री से पुष्पा का इंतज़ार कर रहा था तो करीब घंटे डेढ़ घटने बाद पुष्पा कमरे मे आई गीले बालों को देखकर मैं समझ गया था कि नहा कर आई है मैने कहा ये अच्छा किया जो नहा लिया अब तो मज़ा ही आ जाएगा तो मैने उसे अपन बेड पर खीच लिया और उसके शरीर से छेड़ खानी करने लगा मैने अपना हाथ उसकी साड़ी के अंदर घुसा दिया और उसकी केले के तने जैसी चिकनी सुडोल टाँगो पर फिराने लगा तो उसके बदन मे सुरसूराहट बढ़ने लगी
पुष्पा ने अपने ब्लाउज के बटन्स को खोल दिए और उसे उतार दिया और अपने एक बोबे को मेरे मूह मे देने लगी तो मैं उसकी चूची पर अपनी जीभ फिराने लगा उधर साड़ी के अंदर अब मेरे हाथ उसके कुल्हो पर पहुच गये थे और मैं कच्छि के उपर से ही उनको दबा रहा था बड़े बड़े गोल मटोल और रूई से भी मुलायम चूतड़ उसके पुष्पा की चूचियो के निप्पल्स अब तन ने लगे थे और उसकी आँखो मे चढ़ती हुवी खुमारी मुझे भी महशूस होने लगी थी
वासना का सागर हम दोनो के शरीर मे हिलोरे मारने लगा था मैने पुष्पा को खड़ी किया और उसकी साड़ी उतार कर उसे नंगी कर दिया और फिर से अपनी बाँहों मे ले लिया उसके सुर्ख होटो पर लगी लिपीसटिक को चाट ते हुवे मैं उसे छूने जा रहा था जबकि उसका हाथ अब मेरे कच्छे मे घुस कर मेरे लंड को थाम चुका था पुष्पा थरथराते हुवे बोली मालिक अब जल्दी से अपने इस मूसल को मेरी चूत मे घुसा दीजिए अब सहा नही जा रहा है मैने कहा ए अभी कहा अभी तो पहले जी भर कर तेरे इस हुस्न का दीदार करूँगा
तू पहले ज़रा मेरे लंड को चूम तो सही तो पुष्मा मेरी टाँगो के बीच मे बैठ गयी और मेरे लंड पर अपने होठ टिका दिए और उपर उपर से उसको चूम ने लगा फिर दो पल बाद ही उसने लंड की खाल को हटा कर सुपाडे को बाहर निकाला और उस को अपने मूह मे ले लिया नाज़ुक खाल पर उसकी गरम जीभ के असर से मेरे बदन मे एक झनझनाहट ही फैल गयी मैने अपने हाथ अपनी कमर पर रख लिए और उसे लंड चूस्ते हुवे देखने लगा मैने कहा पुष्पा अपने हाथ से गोलियो को सहला तो वो वैसा ही करने लगी और मेरा मज़ा दुगने से भी दुगना हो गया था
कई देर तक मैं ऐसे ही उसे अपना लंड चुस्वाता रहा अब मैने उसे बेड पर घोड़ी बना दिया और उसके मस्त चुतड़ों को फैलाते हुवे अपने लंड को चूत पर सटा दिया पुष्पा ने एक मीठी सी झुरजुरी ली और मैने उसकी कमर पर अपने हाथ रखते हुवे लंड को चूत मे घुसाना शुरू कर दिया लंड चूत की फांको को फैलाता हुवा पुष्पा की चूत मे जा रहा था और वो अपनी टाँगो को आपस मे चिपका रही थी उसके चौड़े चुतड़ों को सहलाते हुवे मैं अपने लंड को आगे पीछे करने लगा था पुष्पा आहें भरते हुवे बोली मालिक थोड़ा सा धीरे धीरे कीजिए ऐसे ही मज़ा आ रहा था मैने कहा ठीक है जैसे तू कहे
मैं उसकी गरदन पर चूमने लगा तो कामोत्तेजित और भी भड़कने लगी उसके जिस्म मे अब मैने उसकी कमर पर अपने दोनो हाथ डाल कर उसे कस लिया और उसकी चुदाई शुरू कर दी तो पुष्पा भी अपनी गान्ड को पीछे कर कर के मेरा पूरा साथ देने लगी थी उसका जिस्म इतना कसा हुआ था कि किसी षोड़शी कन्या का भी ना था उसकी तुलना मे पुष्पा घोड़ी बनी हुई मेरे हर एक प्रहार को अपनी चूत मे झेल रही थी उसकी पायल की खनखन सुनकर चुदाई का मज़ा और भी बढ़े जा रहा था
करीब दस मिनिट तक उसे घोड़ी बना ने के बाद मैं बेड पर लेट गया और उसे अपने उपर ले लिया मैं उसके चुतड़ों को दबाते हुवे उसके गुलाबी होटो को अपने मूह मे लेकर खाने लगा कभी कभी मैं वहाँ पर अपने दाँतों से भी काट लेता था तो वो चिहुनक जाती थी पर इस खेल मे ये छोटी मोटी चुहलबाजी तो चलती ही रहती है पुष्पा ने योनिरस मे लथपथ मेरे लंड को फिर से अपनी चूत पर रगड़ना शुरू किया और फिर वो लंड पर बैठ गयी उसकी झूलती हुई छातिया बड़ी ही मनमोहक लग रही थी , लगा कि सारी उमर बस उनको ऐसे ही देखते रहूं तो पुष्पा अब लंड पर उछल रही थी उसकी सुंदर नाभि बड़ी ही प्यारी लग रही थी मैने अपने हाथो मे उसके उभारों को थाम लिया और बड़े ही प्यार से हौले हौले उनको सहलाने लगा तो पुष्पा मंद मंद मुस्कुराने लगी चुदाई का खेल अपनी पूरी रफ़्तार से आगे बढ़ा जा रहा था दोनो के बदन मे शोले फुट रहे थे अब मैने उसको अपने नीचे ले लिया और उस पर चढ़ कर चोदने लगा
उसके निचले होठ पर अपने दाँतों के निशान बनाते हुए उसकी प्यारी चूत मारने मे बड़ा ही मज़ा आ रहा था पुष्पा की छातिया मेरे बोझ तले दबे हुई जा रही थी उसने अपनी दोनो टाँगे मेरी कमर के इर्द-गिर्द लपेट दी और हम दोनो एक दूजे मे समाए हुए उन पलों का मज़ा लूटने लगे थे, पुष्पा की चूत की फांके बार बार लंड पर जैसे चिपक सी जाती तो सच मे उसकी चूत मारने मे बहुत ही मज़ा आ रहा था पुष्पा अब मेरे कानो पर काटने लगी थी उफ़फ्फ़ ये औरत के जिस्म की गर्मी अच्छे अच्छे को पिघला कर रख दे एक पल मे ही तो हमारी चुदाई चल रही थी पुष्पा भी नीचे से अपनी कूल्हे मचका मचका कर लुफ्त ले रही थी
करीब 40-45 मिनिट तक हम दोनो ऐसे ही एक दूजे मे समाए रहे इस बीच पुष्पा झड चुकी थी पर फिर भी मेरा साथ दे रही थी और फिर मेरे लंड से वीर्य की धारे निकल कर उसकी चूत मे गिरने लगी तो मैं भी आनंद के सागर मे जैसे डूब गया मैं उसके उपर ही पड़ा रहा जब तक कि उसकी छूट ने वीर्य की अंतिम बूँद तक को अपने अंदर ना सोख लिया फिर पुष्पा उठी और बोली मालिक आपने अंदर ही छोड़ दिया , कुछ दिनो पहले ही मेरा महीना हुआ है कही बच्चा ना ठहर जाए मैने कहा चिंता ना कर कुछ नही होगा
और अगर कुछ होगा तो मैं हूँ ना तू क्यो फिकर कर रही है तो फिर उसने अपने कपड़े पहने और जाने लगी तो मैने कहा यहीं सो जा तो वो बोली नही मालिक रात को गेट पर रहने वालों को चाइ देनी पड़ती है कही आँख लग गयी तो फिर परेशानी होगी तो वो चली गयी और मैं बिस्तर पर अकेला रह गया
अगले दिन मैं पैदल ही हवेली से निकल गया और पीछे पहाड़ो की तरफ चल पड़ा मेरे मन मे कई तरह के सवाल थे जिनके जवाब मुझे तलाश करने थे हर हाल मे आख़िर कॉन था जो इतनी घहरी पैठ रखता है कि हवेली की इतनी कड़ी सुरक्षा होने के बाद भी ये खत छोड़ जाए कि देव ठाकुर हवेली का सूरज जल्दी ही अस्त हो जाएगा दरअसल बात ये थी कि कल रात पुष्पा के जाने के बाद मैं तो सो गया था
पर जब मनोहर जो कि हवेली की चोकीदारी का काम कर रहा था वो पेशाब करने के लिए जब कुँए की पिछली तरफ उगी हुई झाड़ियो मे गया तो उसे एक पोटली मिली जिसमे वो खत था जाहिर है ये मेरे लिए परेशानी वाली बात थी क्योंकि चार दीवारी भी काफ़ी उँची करवा दी गयी थी फिर भी को हवेली मे घुसकर कैसे वो पोटली छोड़ कर जा सकता था मैं सवालो में बुरी तरह से उलझा हुआ था
किस पर भरोसा करू किस पर नही करू कुछ समझ नही आ रहा था हवेली के चारो और मजबूत बौंडरी बनवा दी गयी थी तो मतलब ही नही पैदा होता था कि कोई बाहर से या दीवार फाँद कर घुस सके तो इसी कशमकशम मे मैं उलझा हुआ था आख़िर जब कोई अंदर घुस सकता है तो कल को कोई कांड भी कर सकता है देव ठाकुर इन सवालो की भूल भुलैया मे उलझ कर रह गया था आख़िर कोई तो मदद गार मिले जो इस मुसीबत का हाल निकालें
तराई मे दूर दूर तक मैदान था जो कि झाड़ झंखाड़ और पेड़ो से ढका हुवा था तो मैं उधर ही चलने लगा करीब 1 कोस के बाद इलाक़ा और भी गहराई मे जाने लगा तो पेड़ पोधो की कतार और भी लंबी होने लगी थी सुनसान इलाक़ा और दूर दूर तक किसी इंसान का पता नही मेरे माथे से पसीना चू निकाला पर मैं आगे और आगे चलता रहा और फिर मुझे कुछ ऐसा दिखा जिसकी मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नही थी मैं तेज़ी से दौड़ ते हुए उस ओर गया
ये तो सफेद कलर की फ़ोर्ड गाड़ी थी गाड़ी को इस तरह से छुपाया गया था कि बिल्कुल पास आने पर ही पता चले वरना बाहर से तो किसी को सपना भी ना आए कि इधर एक गाड़ी छुपाई गयी है देखने से ही पता चलता था कि गाड़ी कई दिनो से इधर ही खड़ी होगयि थी टायरो मे हवा भी कम कम ही लग रही थी मैने गाड़ी की नंबर प्लेट पर पड़ी धूल हटाई तो मेरी आँखे चमक उठी
और मन परेशान होगया ये कार तो लक्ष्मी की थी और अगर कार यहाँ है तो फिर लक्ष्मी कहाँ है मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा मैने जेब से फोन लिया और लक्ष्मी का नंबर मिलाया पर उस जगह पर नेटवर्क था ही नही तो मैं सोचने लगा कि इतनी झाड़ झंखाड़ वाली जगह पर कोई इस गाड़ी को लेकर आया कैसे रास्ता इधर ही कही होगा तो मैं गाड़ी को छोड़ कर रास्ता ढूँढने लगा
थोड़ी देर बाद मुझे एक कच्ची सड़क दिखाई दी जिज्ञासा वश मैं उधर ही चल पड़ा घने पेड़ो के बीच से ये रास्ता बनाया गया था और इतना अंधेरा था पेड़ो की वजह से की सॉफ सॉफ दिखना बड़ा ही मुश्किल था पर मैं धीरे धीरे आगे चला जा रहा था टेढ़ा मेढ़ा होते हुए वो रास्ता जब ख़तम हुवा तो मैने देखा कि एक झोपड़ी सी थी पर वहाँ कोई दिखाई नही दे रहा था तो मैं अंदर चला गया वहाँ जाकर देखा
तो खाने पीने का समान पड़ा था जैसे कि कोई कल या परसो ही यूज़ किया गया हो मेरे दिमाग़ की सारी नसें जैसे फटने को ही हो रही थी मैं झोपड़ी की तलाशी लेने लगा तभी मेरा पैर किसी चीज़ से टकराया तो मैं दर्द से बिल बिला उठा ये कोई कुण्डा सा था जो फर्श मे लगाया गया था मैने उसे खोला तो
तो देखा कि नीचे की ओर जाने के लिए सीढ़िया बनी हुई थी तो मैं नीचे उतर गया रास्ता सांकरा सा था पर इतना था कि आदमी सीधा होकर चल सके तो मैं आगे आगे बढ़ता गया कुछ अंधेरा सा था तो मैने मोबाइल की टॉर्च जला ली करीब 30 मिनिट तक मैं नाक की सीध मे चलता रहा फिर जाके थोड़ा थोड़ा सा उजियारा दिखाई देने लगा और उपर जाने के लिए सीढ़िया भी
तो मैं उपर चढ़ने लगा जब मैं उपर चढ़ा तो देखा कि मैं तो हवेली मे ही वापिस आ गया हू अब बारी मेरे आश्चर्यचकित होने की थी ये हवेली का वो कमरा था जिसमे दादा जी रहा करते थे अब मेरी समझ मे एक बात तो आ गयी थी कि जो भी हवेली मे आया था वो इसी रास्ते से आया था क्योंकि जो भी चौकीदार थे वो सब गेट पर ही बने कमरों मे रहते थे हवेली मे आने का हक़ बस मुझे और पुष्पा या कुछ ही लोगों को ही था
लेकिन वो रास्ता किसने बनाया ज़रूर वो पुराना रास्ता होगा क्योंकि अक्सर ऐसी जगहों मे ख़ुफ़िया रास्ते भी बनाए जाते रहे है पर लक्ष्मी की कार वहाँ पर क्या कर रही थी मैने लक्ष्मी को फोन किया तो पहली ही घंटी मे फोन उठ गया मैने सीधा पूछा कहाँ हो तुम और कब तक आओगी तो उसने कहा कि मैं मेरे बेटे के पास हूँ और दो चार दिन मे आ जाउन्गी
मेरे दिमाग़ मे कुछ शक़ का कीड़ा बुलबुलाने लगा था तो मैने तुरंत ही गोरी को बुलावा भेजा तो पता चला कि वो स्कूल गयी हुई है तो मैं सीधा स्कूल के ही पहुच गया मैने कहा गोरी तेरा भाई जहाँ पढ़ता है उधर का अड्रेस दे अभी और इस बारे मे किसी को मत बताना तो उसने कुछ नही पूछा और पता दे दिया मैं उसी टाइम उस शहर के लिए निकल पड़ा
वहाँ पहुचते पहुचते मुझे ऑलमोस्ट अगली सुबह ही हो गयी थी आँखे नींद मे डूब रही थी बदन थक कर चूर हो रहा था पर मुझे अब जल्दी से जल्दी लक्ष्मी के बेटे से मिलना था , तो मैं करीब 11 बजे उसके कॉलेज के विज़िटर्स ऑफीस मे था उन्होने कहा आप थोड़ा इंतज़ार करें हम बुलवा रहे है , जैसे ही मैने लक्ष्मी के बेटे को देखा कुछ ख़ास नही लगा वो मुझे दुबला पतला सा आँखो पर नज़र का चश्मा, मैने उसे अपना परिचय दिया और कहा कि माँ कहाँ है तो वो बोला माँ इधर क्या करने आएँगी
जब भी आता हूँ तो मैं ही गाँव आता हूँ आज तक तो वो कभी आई ही नही इधर नही कभी बापू आए है बस पैसे भेज देते है टाइम टू टाइम मैने कहा पर वो तो कह रही थी कि तुमसे मिलने आ रही हैं पर उसने तो मना कर दिया अब मैं और भी उलझ कर रह गया था आख़िर कुछ तो राज था कुछ तो खिचड़ी बन रही थी पर क्या था वो मुझे पता नही चल रहा था तो मैने फ़ैसला किया कि वापिस हवेली ही चला जाए
हवेली आने के बाद मैं इसी पेशो-पेश मे था रात घिरी आई थी पुष्पा अपने घर जा चुकी थी मैने सोचा कि क्यो ना आज रात हवेली को अच्छे से देखा जाए आख़िर इतने कमरे थे जो अब भी बंद पड़े थे कुछ तो मिलेगा ही कोई तो राज़ है जिसका मुझे पता नही था तो मैने एक एक कमरे को खंगालना शुरू कर दिया दो-चार कमरो मे तो बस कपड़ो गहनो के अलावा कुछ ना मिला कुछ मे किताबें और फालतू की चीज़े पड़ी थी
पर मैं तलाश करता रहा आख़िर मे मुझे एक कमरे मे एक बॉक्स मे एक चाँदी का हार मिला उसे देख कर मुझे लगा कि ऐसा का ऐसा मैने कही तो देखा है पर याद नही आ रहा था काफ़ी याद करने पर भी याद नही आया तो मैने उसे साइड मे रखा और फिर से चीज़ो को तलाशने लगा आख़िर एक कमरे मे मुझे कुल दस्ता वेज मिल गये करीब पाँच साल पुराने थे धूल मे पड़े हुए
कुछ की हालत तो बहुत ही ख़स्ता हो चली थी पर उनसे कुछ इंपॉर्टेंट भी पता चला उसमे हमारे खानदान की संपत्ति का ब्योरा था पर उसमे जो लिखा था वो रकम और मिल्कियत बहुत ज़्यादा थी जबकि वकील और मुनीम ने जो बताई थी वो तो इस से काफ़ी कम थी तो मेरा दिमाग़ घूमा और मैन बात ये थी कि दादाजी तो बीमार ही थे और मैं यहाँ था नही तो आख़िर कितना पैसा खरच हुआ होगा
मैने वो कागज साइड में रखे और फिर से अपने काम मे लग गया एक बात तो पक्का हो गई थी कि दाल पूरी ही काली हो गयी थी सुबह तक मैने काफ़ी कुछ खंगाल मारा था पर उन प्रॉपर्टी के पुराने पेपर्स के अलावा कुछ काम की चीज़ नही मिली थी मैं हवेली से निकल कर सीधा वकील की पास शहर गया और वो कागज वहाँ पर रखते हुए पूछा कि …………
ये पेपर्स तो प्रॉपर्टी के बारे मे कुछ और ही कहते है तो उसके माथे पर परेशानी के बल पड़ गये मैने कहा 5 मिनिट मे सब सच बता वरना फिर तुम जानते ही हो तो वो बोला ठाकुर साहब सच मे आपकी प्रॉपर्टी बहुत ही ज़्यादा है पर लक्ष्मी जी के दबाव मे मुझे ऐसा करना पड़ा मैने कहा और कोन कॉन है उसके साथ तो वो बोला जी मुझे नही पता मुझे तो लक्ष्मी ने ही कहा था और मोटी रकम भी दी थी ऐसा करने के लिए
मैने कहा असली पेपर्स कहाँ है और सबसे इंपॉर्टेंट बात बता कि जब अगर लक्ष्मी को प्रॉपर्टी का ही लालच था तो मुझे यहाँ क्यो बुलाया गया चुप चाप से ही क़ब्ज़ा क्यो नही कर लिया तो वकील घबराई हुई सी आवाज़ मे बोला ठाकुर साहब आपने शायद वसीयत ठीक से नही पढ़ी उसमे ये लिखा था कि अगर किसी कारण से देव प्रॉपर्टी को क्लेम ना कर पाए तो ये सब कुछ सरकार के पास चला जाए और उनकी निगरानी मे एक अनाथालय बना दिया जाए
इस लिए आप को बुलाना यहाँ पर मजूबूरी थी, आपके बिना सारी प्रॉपर्टी लॅप्स हो जाती मैने कहा वकील जो भी बात तेरे मेरे बीच मे हो रही है वो तूने अगर लीक की तो मेरा वादा है कि तेरी लाश कही पड़ी हुई मिलेगी तो वो बोला माफ़ कीजिए देव साहब आगे से मैं पूरी वफ़ादारी करूँगा , शाम को मैं दिव्या से मिलने उसी बगीचे मे चला गया ना जाने क्यो उस से मिलकर बड़ा ही अच्छा लगता था
जब मैं वहाँ पर पहुचा तो वो खरगोशो के साथ खेल रही थी मुझे देख कर बोली मुसाफिर, काफ़ी दिनो मे आए हो इधर मैने कहा जी वो कुछ काम से बाहर जाना हो गया था पर समय मिलते ही इधर आ गया वो बोली अच्छा किया मेरा भी बड़ा मन हो रहा था तुमसे बाते करने का मैने कहा दिव्या जी अगर आप बुरा ना मानें तो एक बात पुछु वो बोली हम कहो क्या बात है
मैने कहा जी वो कल रात कुछ लोगो से मुझे अर्जुनगढ़ और नाहरगढ़ के ठाकूरो की कहानी के बारे मे पता चला पर मुझे यकीन नही हुआ तुम तो इधर महल मे रहती हो तुम्हे तो पता ही होगा तो वो बोली बात पुरानी है मुझे इसके बारे मे कुछ ज़्यादा पता नही है मैने कहा कि वो लोग कह रहे थे कि वसुंधरा देवी को उनकी माँ ने ही जहर दे दिया था
तो दिव्या के चेहरे पर गुस्से से लाली आ गयी पर तुरंत ही उसने अपने आप को संयंत कर लिया और बोली ऐसा कुछ नही हुआ था बल्कि उनकी मौत तो महल मे हुई ही नही थी, मैने कहा तुम्हे कैसे पता तो वो बोली पता है मुझे उसकी एक बात से मेरे अंदर एक हलचल मच गयी थी पर मैने खुद को संभाल लिया था आख़िर दिव्या झूट क्यो बोलेगी
मैने कहा दिव्या तुम्हे जो भी पता है क्या तुम मुझे बताओगी मुझे बहुत ही उत्सुकता हो गयी है उसने एक ठंडी आह भरी और कहा कि देखो मुझे पक्का ये तो नही पता कि आख़िर ठाकुर वीरभान और भीमसेन के बीच ऐसी कॉन सी बात थी जिस से वो एक दूसरे से नफ़रत करने लगे थे पर ये भी सच है कि वीरभान और वसुंधरा एक दूसरे से प्रेम करते थे
और फिर इसी बात को लेकर काफ़ी बड़ा कांड भी हो गया था पर फिर भी दोनो प्रेमियो का ब्याह हो गया था और उनका बेटा भी हो गया था पर फिर एक दिन वसुंधरा को उनकी माँ सारी बाते भूलकर इधर यानी नाहरगढ़ ले आई और फिर वसुंधरा जी की मौत हो गयी जिसका इल्ज़ाम उनकी माँ पर लगा मैने कहा हम इतना तो पता है मुझे और फिर उनकी माँ को जैल हो गयी थी
वो बोली हाँ पर जैसा कि सब मानते है कि उनको जहर उनकी माँ ने दिया था पर वास्तव मे ऐसा कुछ हुआ ही नही था
मैने कहा दिव्या क्या तुम मुझे पूरी कहानी शुरू से बताओगी तो उसने कहा कि नही वो उस सब के बारे मे बात नही करना चाहती है पर उसके चेहरे पर एक गुस्से की लकीर को मैने देख लिया था मैने कहा मैने कभी भी ज़िंदगी मे महल नही देखा है क्या तुम मुझे दिखाओ गी तो उसने कहा कि वो कैसे तुम्हे दिखा सकती हूँ अगर मालिक लोगो ने देख लिया तो उसकी नौकरी पे बन आएगी तो मैने भी फिर कुछ ना कहा उसके साथ वक़्त बिता कर बड़ा ही अच्छा लग रहा था मुझे पर फिर अंधेरा घिरने लगा था तो घर आना ही था
दो चार दिन ऐसे ही गुजर गये और फिर हवेली मे लक्ष्मी आई मैने कहा कहाँ गयी थी तुम कितने दिन लगा दिए आने मे तो उसने बताया कि वो बेटे से मिलने गयी थी जबकि मुझे पहले से ही पता था कि वो कहीं और से आ रही है मैने पर कुछ भी जाहिर नही होने दिया और उस से बाते करता रहा अब कैसे उगलवाऊ उस से कि वो कहाँ गयी थी बात करते करते मुझे कुछ सूझा तो मैने कहा कि मुझे शहर तक जाना है पर मेरी गाड़ी मे कुछ प्राब्लम है तो क्या तुम्हारी कार ले जाउ
उसने कहा ये भी कोई पूछने की बात है मेरा सब कुछ तुम्हारा ही तो है मैने गाड़ी ली और स्टार्ट कर के बाहर निकल गया सुनसान जगह में आते ही मैने गाड़ी को चेक करना शुरू किया आख़िर कुछ तो मिले जिस से पता चले कि आख़िर ये गयी कहाँ थी पर इधर भी हताशा ही हाथ लगी कुछ नही मिला दो-तीन बार अच्छे से चेक किया पर रह गये खाली हाथ पर कुछ तो खिचड़ी पक ही रही थी जिसमे लक्ष्मी भी शामिल थी पर डाइरेक्ट्ली उस से कुछ पूछ नही सकता था
एक एक दिन बड़ा भारी सा हो रहा था पर फिर एक रोज नाहरगढ़ से ठाकुर राजेंदर की तरफ से निमंत्रण आया कि उनकी बेटी संयोगिता का जनमदिन है तो ज़रूर शिरकत करें मैं सोचने लगा कि जाउ या नही , जाउ या नही मुनीम जी से बात की तो वो बोले आपको बिल्कुल भी नही जाना चाहिए पिछले 19 बरस से इधर से कोई उधर नही गया है पर अगर आप जा ही रहे है तो अपने साथ कुछ आदमी ज़रूर ले जाएँ ना जाने कोन घड़ी क्या हो जाए मैने कहा नही जाउन्गा तो मैं अकेला ही अब जब उन्होने आगे से खुद न्योता भेजा है तो हमारा जाना भी बनता है
मैं मुनीम जी के घर से निकल कर कुछ दूर चला ही था कि मुझे कुछ याद आया तो मैं अंदर कमरे मे पैर रखने ही वाला था कि मैने सुना मुनीम फोन पर कह रहा था कि हाँ अब सही समय आ गया है अपना काम भी हो जाएगा और शक़ भी नही होगा , अब ये कॉन सा काम कर रहा है कहीं ये भी कुछ प्लॅनिंग तो नही कर रहा है मैं हैरान परेशान पर फिर उसकी बाते सुन ने के बाद मैं वहीं से ही मूड गया दो रोज बाद मुझे नाहरगढ़ जाना था
अगले दिन सुबह सुबह ही गोरी आ गयी मैने कहा गोरी आज तुमने दिल खुश कर दिया गोरी ने कहा ऐसा मैने क्या कर दिया
तो मैने कहा आज दिल बहुत परेशान था
तो वो बोली माँ है नही घर पर तो आ गयी मैने कहा अच्छा किया मैं भी बोर हो रहा था मैने गोरी को खीच कर अपनी गोद मे बिठा लिया और उसकी गर्दन पर अपनी ज़ुबान फिराने लगा तो गोरी कसमसाते हुवे बोली देव मत छेड़ो ना फिर मुझे खुद पर काबू करना मुश्किल हो जाता है मैं अपने दाँत उसकी सुरहिदार गर्दन पर गढ़ाते हुए बोला तो फिर आज हो जाना बेकाबू किसने रोका है
बड़ा मज़ा आएगा जब मिल बैठेंगे दीवाने दो
मैं अपने हाथ उपर ले गया और सूट के उपर से ही उसके पुष्ट उभारों को दबाने लगा तो गोरी शरमाते हुए बोली देव मत छेड़ो मुझे मान भी जाओ ना तो मैने कहा गोरी बस कुछ देर खेलने दे ना अच्छा लग रहा है तो वो शरमाते हुए बोली पर मुझे तुम्हारा वो नीचे चुभ रहा है तो मैने गोरी को बेड पर लिटा दिया और उसके उपर चढ़ गया
और उसको अपनी बाहों मे दबोच लिया गोरी के काँपते होठ मुझे अपनी ओर बुला रहे थे तो मैने अपने प्यासे लबो पर जीभ फेरी और गोरी के सुर्ख होटो से अपने होटो को मिला लिया मैं तो कई दिनो से प्यासा था आज मैं जी भर कर गोरी के शहद से भरे होटो को पीना चाहता था तो मैं काफ़ी देर तक उनको चाट ता ही रहा फिर गोरी ने अपना मूह अलग किया
और हान्फते हुवे बोली उफफफफफफफफ्फ़ सांस तो लेने दो ज़रा मैने उसके सूट को समीज़ समेत उतार कर साइड मे रख दिया तो गोरी का उपरी हिस्सा पूरी तरह नंगा हो गया मैने तुरंत उसकी एक चूची को अपने मूह मे भर लिया और दूसरी को हाथ से भीचने लगा तो गोरी मस्ती के सागर मे गोते खाने लगी उसने अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ लिया और उस से खेलने लगी
10-12 मिनिट तक उसके उभारों को चूस चूस कर मैने बिल्कुल ही लाल कर दिया गोरे के गाल गुलाबी हो गये थे अब मैने उसकी सलवार के नडे पर अपना हाथ रखा और उसको खीच दिया गोरी ने ज़रा सा भी विरोध नही किया गुलाबी रंग की कच्छि मे क्या मस्त लग रही थी वो बस मैं तो मर ही मिटा उसके योवन पर मैने अपनी नाक उसकी चूत पर रखी तो बड़ी भीनी भीनी सी खुश्बू आ रही थी
मैं कच्छि के उपर से ही उसको किस करने लगा तो गोरी बेड पर नागिन की तरह मचलने लगी मस्ती उसके रोम रोम मे भरती जा रही थी तभी गोरी बोली देव रुक जाओ ना सुबह का टाइम है पुष्पा आती ही होगी थोड़ी देर मे मैने कहा तू उसकी चिंता ना कर बस मेरा साथ दे तो फिर उसने कुछ नही कहा मैने उसकी कच्छि की एलास्टिक मे अपनी उंगलिया डाली और उसको भी उतार कर फेक दिया
हल्की रोएँदार झान्टो के बीच मे छुपी हुई उसको छोटी सी गुलाबी योनि रस से भरी पड़ी थी तो मैं अपनी उंगली को उसकी चूत की दरार पर फिराने लगा गोरी बड़ी मस्त होकर हल्की हल्की सी सिसकारियाँ भरने लगी थी फिर मैं अपनी उंगली को अंदर घुसाने की कोशिश करने लगा तो गोरी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली ऐसा ना करो दर्द होता है तो मैने कहा और जब इसमे लंड जाएगा तब ,
तो वो शरमाते हुए बोली धात, बेशर्म हो तुम तो मैने अपने होटो मे उसकी चूत को भर लिया तो गोरी जैसे सीधा आसमान की सैर पर पहुच गयी और बोली उफफफफफफफफफफ्फ़ ओह देवववववववववववववववव ईईए कैसा जादू कर देते हो तुम कितना अच्छा लगता है जब तुम वहाँ पर क़िस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स करते ईईईई हूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ ओह आआआआआआआआाआआआआआआआ
उसकी चूत से जैसे उस गरम मजेदार रस का झरना ही बह चला था गोरी ने अपनी आँखो को मस्ती के मारे बंदकर लिया था और मेरे सर को अपनी जाँघो पर भीच ने लगी थी सुडूप सुडूप मैं अपनी जीभ को तिकोना कर के उसकी चूत को चाटे जा रहा था फिर मैं वहाँ से उठा तो गोरी मेरी ओर ऐसे देखने लगी कि जैसे किसी ने भूखी शेरनी के आगे से शिकार छीन लिया हो
गोरी ने बेड की चादर अपने पे लपेट ली थी मैने किवाड़ को बंद किया पर कुण्डी नही लगाई और बेड पे आके गोरी के पास बैठ गया हमारी आँखे एक दूसरे से टकराई वो शरमाते हुवे बोली प्लीज़ बल्ब बुझा दो तो मैने कहा फिर मैं तुम्हारे इस मादक जिस्म का दीदार कैसे करूँगा तो उसने अपने चेहरा नीचे की ओर कर लिया मैने उसके मुखड़े को अपने हाथो से उपर की ओर उठाया और उसके होंटो पे अपनी उंगलिया फेरने लगा
उसका बदन पता नही क्यों कांप रहा था तो मैने उसे बिल्कुल रिलॅक्स होने को कहा और बोला कि अगर वो कंफर्टबल नही है तो रहने देते हैं तो वो बोली नही ठीक हैं तो मैने अपना हाथ उसकी गर्दन मे डाला और उसे थोड़ा मेरी ओर खींच लिया गोरी कसमसाने लगी मैने देर ना करते हुवे उसके गालो को चूम लिया अब गरम तो वो थी ही बस थोड़ा ठहराव आ गया था गालो को चूमते चूमते मैं उसके हल्के लाल लाल होंटो की ओर बढ़ रहा था और फिर मैने अपने होंठ उसके होंटो से जोड़ दिए ऐसा लगा जैसे को पिघली हुवी आइस क्रीम हो धीरे से मैने उसके शरीर पे लिपटी चादर को एक साइड कर दिया और उसकी पीठ सहलाने लगा फिर उसे लिटा दिया और उसका हाथ अपने लंड पे रख दिया
उसने बिना किसी शरम के उसे थाम लिया मैं एक बार फिर से उसके कोमल अधरो का रस चूसने लगा वो उत्तेजना के शिखर की ओर अग्रसर होने लगी उसके हाथ का दबाव लंड पे बढ़ता ही जा रहा था गोरी का बदन ऐसे तप रहा था जैसे उसे बुखार चढ़ा हो अब मैने उसके बोबे को चूसना शुरू किया और उसकी चूत पे अपनी उंगलिया फेरने लगा बिना बालो की एक दम करारी चूत जिसपे आज मेरे लंड की मोहर टिकने वाली थी उसकी निप्पल बिल्कुल गुलाबी रंग की थी वो खुद मेरे चेहरे को अपनी छातियों पे दबाए जा रही थी जब मेरी उंगलिया उसकी चूत से टकराई तो मैने गीलापन सॉफ मह सूस किया उसकी चूत थोड़ी लंबी सी थी बाकियों से थोड़ी अलग सी मैं उसके दाने को जोरो से रगड़ने लगा
उसकी टाँगे अकड़ने लगी मैं थोड़ा उपर हुआ और उसके होंठो को एक बार फिर अपने मूह मे भर लिया मैं बहुत ही ज़ोर से उंगली करता जा रहा था गोरी बुरी तरह कांप रही थी मैने दूसरी उंगली भी चूत मे सरका दी और पूरी स्पीड से अंदर बाहर किए जा रहा था उसका हाल बहुत बुरा हो रहा था फिर मैं झट से नीचे आया और चूत पे अपने होंठ टिका दिए अब मेरी जीभ उसे अपना कमाल दिखाने लगी वो 5 मिनिट भी ना टिक पाई और अपना गाढ़ा सफेद पानी छोड़ दिया और किसी लाश की तरह पसर गयी उसकी आँखे बंद थी और छातिया किसी ढोँकनी की तरह उपर नीचे हो रही थी मैं उसके पास लेट गया और उसे से सट गया उसने आँख खोली और बड़े प्यार से मेरी ओर देखने लगी
मैने कहा गोरी इसे चुसोगी तो उसने अपना सर हां मे हिला दिया और मेरी टाँगो के पास बैठ ते हुवे लंड को अपने मूह मे भर लिया और तुरंत ही निकाल भी दिया और थूकते हुवे बोली ये तो खारा खारा हैं तो मैने कहा कुछ नही होता जानेमन दुनिया तो इसे चाटने के लिए मरती है और तुम्हे पसंद नही आ रहा तो उसने उसे पानी से धोया और चूसने लगी उसकी जीभ का स्पर्श बहुत ही जबरदस्त था मेरे हाथ खुद ब खुद उसके सर पे कस गये वो बड़ी ही अदा से लंड चूस रही थी पहले वो उसे पूरा मूह मे लेती चुस्ती और झट से बाहर निकाल देती थी
मैं बिना रुके उसके होंठो को पिए जा रहा था मैने अपनी हथेली उसकी चूत पे रख दिया और उसको मसल्ने लगा उसकी चूत तो बहुत ही ज़्यादा गरम हो रही थी उसकी चूत की साइड से पसीना बह रहा था मैं अपनी उंगली को उसकी चूत के दाने और उसकी लाइन पे फिराने लगा उसके बदन मे कंपकंपी होने लगी
मेरे लंड का भी बुरा हाल हो रहा था तो देर करना उचित नही था मैने उसे लिटा दिया और उसकी टाँगो को चौड़ा कर दिया मैने अपने मुँह को नीचे किया और ढेर सारा थूक उसकी चूत पे लगा दिया थोड़ा अपने लंड की टोपी पे भी लगाया और लंड को चूत पे सेट कर दिया पहली बार मे लंड फिसल गया कई ट्राइ की पर लंड घूंस ही नही रहा था तो मैने सुपाडे को कस के छेद पे रखा और अपना पूरा ज़ोर लगाते हुए धक्का मारा अबकी बार सुपाडा अंदर घूंस गया जैसे ही सुपाडा अंदर घूँसा उसकी आँखो की आगे तारे नाच उठे सांस गले मे ही अटक गयी उसने अपनी जीभ को दाँतों मे दिया आँखो से आँसुओ की धारा बह निकली गोरी रोते हुए बोली
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इतनी जल्दी किस लिए उसकी आँखो मे आँसू आ गये और गालो पे बहने लगे मैने उसके आँसू चाट लिए और उसके कान मे कहा थोडा अड्जस्ट करने की कोशिश करो ये दर्द बस कुछ ही देर मे गायब हो जाएगा और उसके होंठ चूमने लगा कुछ मिनिट बाद मैने लंड को थोड़ा सा खींचा और फिर से अंदर डाल दिया गोरी की आआआआआआः निकल गयी मैं धीमे धीमे धक्के मारने लगा उसकी चूत बहुत ज़्यादा टाइट थी और मेरे लंड पे पूरा दवाब पड़ रहा था गोरी ने अपनी बाहें मेरी पीठ पे कस दी और अपने दाँतों से मेरी गर्दन पे काटने लगी वो किसी जंगली बिल्ली की तरह बिहेवियर कर रही थी
मैने उसे कस्के दबोच लिया था मैने अपने हाथ की पकड़ उसके मुँह पे कस दी तो बुरी तरह से फड़फड़ाने की कोशिश कर रही थी पर मेरी बाँहो के चंगुल से निकल नही पाई 5-7 मिनट तक मैं ऐसे ही उसके उपर पड़ा रहा वो भी कुछ शांत हुई तो मैने अपना हाथ उसके मुँह से हटाया उसकी सांसो की गति बहुत ही तेज हो गयी थी मैने पूछा ठीक हो तो वो बोली बहुत दर्द हो रहा है मैं बोला बस अभी दूर हो जाएगा थोड़ी हिम्मत करो मैने उसके होंठो को फिर से चुंसना शुरू किया और धीरे धीरे अपनी कमर को हिलाने लगा बस धीरे धीरे ही समय बीतने के साथ वो कुछ नॉर्मल तो हो रही थी पर उसको दर्द तो हो ही रहा था उसकी चूत तो हद से ज़्यादा टाइट थी ऐसा एहसास तो मुझे आज तक कभी नही हुई था लग रहा था कि जैसे लंड किसी बोतल मे फस गया हो
चूत ने उसे पूरी तरह से लॉक कर लिया था मैने लंड को एक दम किनारे तक खेंचा और दुबारा अंदर डाल दिया उसने अपनी टाँगो को सीधा कर दिया काफ़ी देर हो चुकी थी तो मैने अब धक्को की रफ़्तार को बढ़ा दिया उसके होंठ मेरे मुँह मे थे तो उसकी हर सिसकी मेरे मुँह मे ही घुल गयी थी मैं धक्के मारे जा रहा था उसके चूतड़ भी अब हिलने लगे थे मुझे ऐसे लग रहा था कि जैसे मेरे लंड पे पिघला हुआ लावा उडेल दिया गया हो फिर उसने अपने होंठ हटाए और लंबी लंबी साँसे लेने लगी मैं पूछा अब ठीक हो तो उसने इशारा किया तो मैं भी आस्वश्त हुआ उसके हाथ मेरी पीठ पे रेंगने लगे उसके नाख़ून मेरी पीठ मे धँस गये वो बहुत ही ज़ोर से अपने नखुनो को गढ़ाए जा रही थी पूरी तरह से वो भी अब जवानी के मज़े मे बहने लगी थी
मैने लंड को बाहर निकाला उसपे थूक लगाया और फिर से चूत मे धकेल दिया अब लंड चूत की सड़क पर सरपट दौड़ लगाने लगा गोरी मेरी गर्दन पे बुरी तरह काट रही थी दूसरी तरफ उसके नाख़ून मेरी पीठ मे धन्से जा रहे थे तो मैने भी जोश मे उसके निचले होंठ को बुरी तरह काट लिया उसमे से खून की बूंदे छलक उठी वो कराहती हुवी बोली ऐसा मत करो ना तो मैने कहा अभी तुम क्या कर रही थी नीचे लंड गपा गॅप अंदर बाहर हो रहा था मेरी उंगलिया उसकी उंगलियो मे फसि पड़ी थी चुदाई अपने शबाब पे थी कमरे का वातावरण बहुत ही गरम हो चुका था मेरा लंड गोरी की चूत को चौड़ा किए जा रहा था अब वो भी नीचे से धक्के लगाने लगी थी
फॅक फॅक की ही आवाज़ आ रही थी उसकी चूत से बहता पानी मेरी गोलियो तक को भिगो चुका था ऐसी गरमा गरम चूत तो आज तक नही मारी थी गोरी मेरे कान मे फुस्फुसाइ कि उसकी पीठ मे दर्द होने लगा हैं तो मैने फॉरन एक तकिया उसकी कमर पे लगाया इस के दो फ़ायदे हुवे एक तो उसकी कमर को आराम मिला और दूसरा उसकी चूत और भी उभर आई मैने अब लंड को दुबारा सेट किया और फिर से उसमे समा गया उसकी आहें मुझे रोमांचित कर रही थी और मैं अपने अंत की ओर बढ़ रहा था मैने धक्को की रफ़्तार बढ़ा दी गोरी बहुत मज़े से चुदवा रही थी
मैं अपनी गति को निरंतर बढ़ाए जा रहा था मैं उसकी चिन को अपने दाँतों से खाए जा रहा था कुछ भी होश नही था मुझे तो मैं उसमे पूरी तरह से खो चुका था तभी उसने अपनी टाँगो को मेरी कमर मे फसा लिया और बेसूध होकर पड़ गयी उसने अपने चरम को पा लिया था मैं भी बस थोड़ी ही दूर था तो मैने अपने लंड को बाहर निकाला और उसके पेट पे अपना वीर्य छोड़ दिया जब खुमारी उतरी तो मैने देखा मेरा लंड पूरी तरह से खून मे सना पड़ा था और उसमे बहुत ही जलन हो रही थी मैने किसी तरह से पेंट पहनी फिर उसको उठाया उसका भी हाल ज़्यादा बेहतर नही था उस से चला ही नही जा रहा था बड़ी ही मुश्किल से वो उठी कोई आधे घंटे बाद उसकी हालत थोड़ी सुधरी वो बोली ऐसी तैसी मे जाए ऐसा मज़ा आज के बाद सौगंध है मैं ना चुदु किसी से मेरी तो फट ही गयी . मुझे अहसास हुआ कि वास्तव में गोरी की हालत खराब हो गई थी गोरी ने कुछ देर आराम किया फिर वो लगड़ाते हुए अपने घर चली गई .
उस दिन और कोई ऐसी घटना नही हुई जिसका वर्णन यहाँ किया जा सके
अगले दिन शाम को विलायती सूट पहन कर मैं तैयार हो चुका था पर मैं ये भी समझ गया था कि आज कुछ ना कुछ होगा ज़रूर क्योंकि मुनीम भी आज का ही बोल रहा था फोन पर कपड़ो मे जितने छोटे हथियार मैं छुपा सकता था उतने मैने छुपा लिए शाम घिरने लगी थी तो मैं भी नाहरगढ़ के लिए निकल पड़ा, दिल थोड़ा सा ज़्यादा ही धड़क रहा था पर देव भी कुछ कुछ सियासत समझने लगा था महल आज किसी दुल्हन की तरह सज़ा हुआ था
रात धीरे धीरे जवान हो रही थी मैने गाड़ी रोकी तो तुरंत ही दरबान मेरी ओर लपका बड़े ही अदब से उसने गाड़ी का दरवाजा खोला और गाड़ी उसके हवाले करके मैं सफेद संगमर मर की सीढ़िया चढ़तेहुवे महल के अंदर जाने लगा और अंदर पहुचते ही वहाँ की चकाचोंध से मेरी आँखे चुन्धिया गयी खूब मेहमान थे एक पल के लिए मेरे दिल मे ख़याल आया कि अगर मेरी फॅमिली भी आज ज़िंदा होती तो ऐसी ही शानो-शोकत मेरे घर पर भी होती मैं अपने ख़यालो मे डूबा हुआ था कि…
ठाकुर राजेंदर मेरे पास आए और बोले देव, हम तुम्हारी ही राह देख रहे थे अपने ननिहाल मे आपका स्वागत है वो बोले अच्छा लगा आपको यहाँ देख कर मैने कहा अब आपने बुलाया है तो आना ही था पर शायद मेरा यहाँ आना कुछ लोगो को अच्छा ना लगे ये बात मैने धनंजय को देखते हुए कही थी तो वो बोले आप चिंता ना करे आज की शाम के खास मेहमान है आप और नाहरगढ़ की मेजबानी का लुफ्त लीजिए फिर वो मुझे और लोगो से मिलवाने लगे थे पर मैं ना जाने क्यो दिव्या को ढूँढने लगा था आख़िर वो भी तो इसी महल मे रहती थी
पर वो कही दिखाई नही दे रही थी और मेरा मन भी पार्टी मे बिल्कुल नही लग रहा था तो बस टाइम काट ही रहा था और फिर मैने जो देखा मैं उसे देख कर हक्का बक्का रह गया सीढ़ियो से एक परी उतार कर चली आ रही थी अपनी सहेलियो के साथ एक खूबसूरत चेहरा , ठाकुर साहब ने सबसे परिचय करवाते हुवे कहा कि दोस्तो स्वागत कीजिए हमारी बेटी दिव्या का , तो दिव्या भी मेरी तरह झूठ के साए की पहचान करवा गयी थी मैने खुद को मेहमानो की भीड़ मे जैसे छुपासा लिया था
पर ये छुपान छुपाई भला कितनी देर रहती तालियो की गड़गड़ाहट के बीच दिव्या ने केक कटा और अपने माता पिता को खिलाने लगी तो ठाकुर साहब ने कहा कि दिव्या केक आज के ख़ास मेहमान को भी खिलाओ तो वो चहकते हुए बोली कॉन पिताजी तो उन्होने कहा अर्जुनगढ़ के ठाकुर देव, अब बारी थी हम दोनो के आमना सामना करने कि जैसे ही उसने मुझे देखा तो वो शॉक हो गयी और उसके मूह से निकल गया तूमम्म्ममममममममम
मैने कहा हाँ मैं पर ये बातचीत बस इतनी ही थी कि बस हम दोनो ही सुन सके तो फिर उसने मुझे केक खिलाया और फिर बाते होने लगी कई बार धनंजय से भी नज़रे मिली पर वो मुझसे कट ता ही रहा दिव्या बोली तुमने बताया नही कि तुम ही देव ठाकुर हो मैने कहा आपने भी तो नही बताया कि आप नाहरगढ़ के ठाकूरो की बेटी है तो वो बोली ऐसे कैसे बता देती मैने कहा तो फिर कैसे बता सकता था हम बाते कर ही रहे थे कि ममाजी ने कहा आओ आपको महल घुमा देता हूँ
ऐसे ही रात का 1 बज गया था पार्टी तो कब की ख़तम हो गयी थी और फिर मैं भी उनसे विदा लेकर अर्जुनगढ़ के लिए निकल ही रहा था कि दिव्या भागते हुए गाड़ी के पास आई और बोली देव मुझे आपसे कुछ इंपॉर्टेंट बात करनी है तो मैने कहा अभी मुझे जाना होगा दिव्या पर मैं जल्दी ही बगीचे मे आप से मिलूँगा वो मुझे रोकती ही रह गयी चेहरे से कुछ हैरान परेशान सी लग रही थी पर उसकी बातों पर इतना गोर नही किया मैने और हवेली के लिए निकल गया
आधा रास्ता पार किया था कि मोसम ने करवट ले ली तेज हवा चलने लगी कुछ कुछ आँधी सी तो मैं गाड़ी को थोड़ी कम स्पीड से लहराते हुवे हवेली की ओर जाने लगा था और जब मैं वहाँ से कुछ दूर ही था तो बूँदा-बूँदी शुरू हो गयी थी काली स्याह रात और ये बिन मोसम की तेज हवा और बारिश मेरे कानो मे ऐसी आवाज़ आई की जैसे कहीं पर सियार रो रहे हो
मेरा दिल में एक सर्द लहर दौड़ गई पता नही आज क्या होने वाला था जब मैं हवेली पहुँचा तो गेट पर कोई भी नही था चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था पता नही सभी लोग कहाँ गये ये सोच कर मेरा दिल धड़क उठा . मैने गाड़ी पार्क की और मैं धड़कते दिल से अंदर बढ़ा तो वहाँ पुष्पा खड़ी थी
मैं दौड़ कर उसके पास गया वो भी मेरे गले लग गयी मैं उस से पूछने ही वाला था कि ये सब क्या हुआ और क्या वो ठीक है पर तभी साला धोखा हो गया शरीर मे दर्द के लहर दौड़ती चली गयी , बड़ी सी साफ़गोई से पुष्पा ने पीठ मे खंजर घोप दिया था ये धोखा किया उसने पर क्यों पुस्स्स्स्स्स्शपा……. मेरे मूह से कराह निकली उसने एक वार और किया और मैं ज़मीन पर आ गिरा उसके कदमो में .
मेरी ओर हिकारत से थूकते हुए पुष्पा बोली साले आज तेरी मौत के साथ ही ठाकुरों के इस वंश का अंत हो जाएगा उसने मेरी पसलियो मे एक कसकर लात मारी तो मैं दर्द से दोहरा होता चला गया मैने दर्द भरी आवाज़ मे पूछा कि क्यों किया तुमने ऐसा मैने क्या बिगाड़ा तुम्हारा तो वो बोली मेरा नही पर उनका ज़रूर , ज़रा देख उधर , मैने निगाह दरवाजे की ओर की
तो वहाँ पर लक्ष्मी खड़ी थी, लक्ष्मी जिस पर मुझे शक़ तो हो ही गया था पर इस टाइम मैं खुद बेबस सा था , वो आकर सोफे पर बैठ गयी और उसने एक सिगरेट जला ली फिर उसने किसी को फोन किया और कहा कि हाँ वो इधर ही है तुम पीछे से आ जाओ तो थोड़ी देर बाद एक शख्स और दाखिल हुआ जिसे देख कर मैं और भी हैरत मे पड़ गया ये थे मुनीम जी जो की अब बिल्कुल सही थे और बिना किसी की सहायता के खड़े थे .
मुनीम ने भी आकर मुझे ठोकर मारी और मेरे उपर घूँसो की बोछार कर दी, मैं दर्द से तड़पने लगा पीठ से खून बहे जा रहा था कुछ ही देर मे ठाकुर राजेंदर, मेरे मामा और धनंजय और उसके पिता भी वहाँ पर आ गये थे अब कुछ कुछ माजरा मेरी समझ मे आया कि ये सब इन लोगो का मास्टर प्लान था मुझे नाहर गढ़ बुलाना और पीछे से हवेली की सुरक्षा व्यवस्था को ध्वस्त कर देना ताकि आसानी से मेरा शिकार किया जा सके
कलियुग मे आज फिर एक अभिमानु कौरवों के चक्रवहू मे फँस गया था , मुझे मेरा अंत आँखो के सामने दिख रहा था और मैं बुरी तरह से लाचार था बेबस था मदद की बड़ी शिद्दत से ज़रूरत थी उस समय पर कॉन आता धनंजय ज़हरीली हसी हँसते हुए मेरे पास आया और मुझे खड़ा करता हुआ बोला देव ठाकुर आज दिखाओ तुम्हारी मर्दानगी, आज करो मुझ पर वार और कस कर एक घूँसा मेरे पेट मे जड़ दिया
किसी तरह से खुद को संभालते हुए मैने कहा, कुत्ते की औलाद सालो धोखे से घेर लिया तुमने हिम्मत थी तो सामने से हमला करते और उसके मूह पर थूक दिया तो फिर उसने मुझ पर हमला करना शुरू कर दिया काफ़ी देर तक वो मुझे मारता ही रहा फिर लक्ष्मी खड़ी हुई , और बोली नही छोटे ठाकुर बस अब रुक जाओ कही मर मरा ना जाए इसके प्राण निकलने से पहले सारे डॉक्युमेंट्स पर इसके साइन तो लेलो वरना फिर दिक्कत होगी
और फिर वैसे भी मरने से पहले, इसे पता तो होना चाहिए कि आख़िर आज हम इसकी मौत का जशन क्यो मनाएँगे, धनंजय ने मुझे छोड़ा और मैं नीचे ज़मीन पर गिर पड़ा ,मैने कहा पर तुम लोग तो मेरे अपने हो फिर मुझे क्यो मारना चाहते हो, मैं तो तुम्हारी दुनिया से बहुत दूर था फिर क्यो मुझे बुलवाया तुमने, लक्ष्मी मेरे चेहरे पर सिगरेट का धुआ छोड़ते हुवे बोली क्या करे देव बाबू मजबूरी थी हमारी भी
तुम्हारे दादा ने वसीयत ही कुछ ऐसी लिखी थी कि अगर ओफ्फिसीयाली तुम ना आते तो सब कुछ अनाथालय को चला जाता और हम रह जाते ठन ठन गोपाल पर इन पैसो से ज़्यादा मेरी रूचि थी अपना बदला पूरा करने मे, जो आग मेरे सीने मे धड़क रही है आज तेरे खून से वो बुझेगी अब करार आएगा मुझे .लक्ष्मी ने एक जोरदार अट्टहास किया मैने पुष्पा की ओर देखा ,
वो हँसने लगी मैने कहा तुम्हे तो दोस्त माना था तुमने ऐसा क्यो किया तो ठाकुर राजेंदर बोले वो हमारा मोहरा है मेरे प्यारे भान्जे,लक्ष्मी ने छुरी उठाई और मेरे सीने पर हल्के हल्के कट लगा ने लगी मैं दर्द से बिलखने लगा खून से सने चाकू को चाट ते हुए लक्ष्मी बोली देव, जानते हो तुम्हे ये सज़ा जो मिल रही है वो सब तुम्हारे बाप के कर्मों का फल है
हाँ देव तुम्हारा बाप कोई साधुसंत नही था बल्कि एक नंबर का ऐय्याश था ना जाने गाँव की कितनी औरतो को उसने अपने नशे और गुरूर के नीचे कुचल दिया था . देव आज तुम्हारे खून से नहा कर मैं शुद्ध हो जाउन्गी इस बार चाकू कुछ ज़्यादा अंदर तक घुस गया था तो मैं दर्द से दोहरा हो गया था लक्ष्मी अपनी धुन मे थी वो एक और नया जख्म बनाते हुए बोली
देव , जानते हो इस बदले की आग मे मैं कितना जली हू, मैने तुम्हारे बाप का कतल करते हुए कसम खाई थी , कि मैं उसके वंश को ही मिटा दूँगी, और फिर जब मुझे पता चला कि तुम्हारे दादा ने वसीयत बना दी है तो फिर उनको भी रास्ते से हटा कर तुम्हे इधर बुलवा लिया गया और अब देखो आज बरसो की मेरी प्यास शांत होगी लक्ष्मी पागलो की तरह हँसने लगी
उसने कहा चिंता मत करो सब कुछ जाने बिना तुम्हारी जान नही निकलने दूँगी , तो देव बात उन दिनो की है जब मैं ब्याह कर बस आई ही थी कुछ रस्मों के बाद, मेरी पति बड़े ठाकुर का आशीर्वाद दिलाने मुझे इसी मनहूस हवेली मे लेकर आए थे, यहीं पर उस शैतान जो तुम्हारा बाप था उसकी हवस की गंदी निगाह मुझ पर पड़ गयी अब उसका रुतबा था गाँव मे , उसके आगे कोई आवाज़ नही उठा ता था
नशे मे चूर उस शैतान ने इसी हवेली मे मेरी अस्मत का शिकार किया पूरी हवेली मे मेरी चीख गूँजती रही पर किसी ने भी मेरी मदद नही की मैं रोती बिलखती रही पर मेरी चीखे इधर ही दब गयी कहाँ तो मैं एक नयी नवेली दुल्हन थी और कहाँ अब मैं क्या से क्या हो गयी थी उस हवस के पुजारी ने मुझे बर्बाद कर दिया था उसी दिन मैने ठाकूरो का समूल नाश करने की सौगंध उठा ली थी और तकदीर देखो देव बाजी मेरे हाथ मे आती चली गई .
मैं अपने दर्द से जूझता हुवा ज़मीन पर पड़ा उनकी बाते सुनरहा था और वो लोग भी किसी तरह से जल्दी मे नही लग रहे थे बल्कि उनका मकसद तो देव को तडपा तडपा कर मरना था कुछ देर के लिए उस कमरे मे चुप्पी सी छा गयी पर क्या ये खामोशी किसी आने वाले तूफान की तरफ इशारा कर रही थी, फिर ठाकुर राजेंदर ने उस सन्नाटे को तोड़ते हुवे कहा कि
चलो अब बहुत हुआ लक्ष्मी तुमने इसे बता ही दिया कि आख़िर क्यों हम लोग इसे मारने वाले है रही सही कसर मैं पूरी कर देता हू, देव बबुआ, तुम्हारे आय्याश बाप ने हमारी भोली भाली बहन को अपने जाल मे फँसा लिया था तुम्हारा बाप था ही एक नंबर का कमीना लोग अक्सर कहते है कि हमने अपनी बहन को मार दिया पर सच्चाई ये है कि उसने आत्महत्या की थी
देव के लिए ये एक और शॉक था , उसने दर्द भरी आवाज़ मे कहा नहीं आप झूठ कह रहे हो उनको तो नानी ने जहर दिया था तो ठाकुर राजेंदर हँसते हुवे बोले ना ना मुन्ना , तुम्हारी माँ को भी तुम्हारे पिता के गुलच्छर्रों के बारे मे पता चल गया था तो इसी लिए उनकी बेवफ़ाई से आहत होकर उसने जहर खा लिया जिसका इल्ज़ाम मेरी माँ पर लगा और उन्हे जेल जाना पड़ा पर आज तुम्हारे खून से इस हवेली को पवित्र किया जाएगा ठाकूरो का सूरज अब कभी नही उगेगा ,
देव भली-भाँति ये समझ गया था कि ठाकुर राजेंदर सही कह रहे थे उसकी हालत खराब थी और अब बच पाना मुश्किल था उसने देखा कि लक्ष्मी ने वो छुरी मेज पर रख दी है और शराब के गिलास को उठा कर चुस्कियाँ ले रही थी तो उसकी आँखे उस छुरी पर जैसे जम गयी थी उसने सोचा कि वो ऐसे ही नही मरेगा किसी मज़लूम की तरह उसकी रगों मे वीरों का खून दौड़ रहा है
अगर वो मरेगा तो अपने साथ इन सब को लेकर ही मरेगा पर कैसे, कैसे, आख़िर कर उसने अपना निर्णय ले लिया कि तभी धनंजय उठा और बोला पिताजी इसने मेले मे बहुत मारा था मुझे तो ज़रा मुझे भी मोका दीजिए हाथ सॉफ करने का तो राजेंदर हँसता हुआ बोला हाँ मेरे बेटे हम क्यो नही तो धनंजय उठा और देव के पेट मे एक लात मारी , लात पड़ते ही उसके मूह से खून निकल गया
पर तभी शायद किस्मत को भी उसपर तरस आ गया था , शायद तकदीर भी नही चाहती थी कि अर्जुनगढ़ का आख़िरी चिराग इस कदर बुझे धनंजय ने उसे उठा कर पटका तो वो मेज के पास जा गिरा पल भर मे ही वो तेज धार छुरी देव के हाथ मे आ गयी थी कोई कुछ समझ पाता उस से पहले ही देव ने अपना काम कर दिया था मुलायम मक्खन की तरह धनंजय की गर्दन को वो छुरी चीरती चली गयी
गले की नस कट ते ही खून की गढ़ी धारा लबा लब बहने लगी थी किसी के कुछ समझ पाने से पहले ही धनंजय की लाश ज़मीन पर गिरी पड़ी थी अचानक से ही देव को अटॅक करते देख सभी हैरान रह गये थे पुष्पा ने पिस्टल से तुरंत ही देव पर फाइयर किया पर वो सोफे की आड़ मे बच गया और फिर अगले ही पल वो छुरी पुष्पा के पेट मे धसती चली गयी थी वो बस आहह करती ही रह गयी थी
पुष्पा की आत्मा परमात्मा मे विलीन हो गयी थी पर अभी भी तीन लोग बचे हुए थे देव को मुनीम का ध्यान नही रहा था और यही पर मुसीबत और बढ़ गयी थी मुनीम की बंदूक से निकली गोली उसके पैर मे धँस गयी देव के गले से चीख उबल पड़ी जो सारी हवेली मे पसरे सन्नाटे को चीर गयी थी गोली लगते ही वो ज़मीन पर गिर पड़ा और ठाकुर राजेंदर ने उसे दबोच लिया और पागलों की तरह उस पर लात-घुसे बरसाने लगे थे देव का चेहरा बुरी तरह से लहू लुहान हो गया था
देव को मदद की बहुत ज़रूरत थी पर मदद का तो कोई सवाल ही नही था आज की रात बहुत लंबी होने वाली थी राजेंदर पागलो की तरह उसे पीटे जा रहा था तो लक्ष्मी ने उसे देव से दूर किया और बोली क्या कर रहे हो ठाकुर साहब अभी हमे कुछ देर इसको जिंदा रखना है , उसने मुनीम को इशारा किया तो वो कुछ पेपर्स ले आया लक्ष्मी देव के पास आई और बोली कि साइन कर इनपर तो देव ने उसके मूह पर थूक दिया पर लक्ष्मी पर कुछ असर नही हुई वो बोली वाह रे तेरा घमंड अभी तक नही टूटा
उसने अपने बालो से क्लिप खोली और देव की कलाई मे घोप दी उसकी चीख एक बार फिर से गूँज गयी वो हँसते हुवे बोली देख उस दिन ऐसे ही मेरी चीखे इस हवेली की छत से टकराते हुए दम तोड़ रही थी आज मुझे बहुत सुकून मिलेगा आज मेरे जीवन का बहुत महत्वपूर्ण दिन है तुझे मैं ऐसे नही मारूँगी तुझे मारने से पहले मैं तेरे साथ रास रचाउन्गी तू भी क्या याद करेगा
ठाकुर राजेंदर लक्ष्मी से बोला सुबह होने ही वाली है तो दिक्कत हो जाएगी टाइम पास ना करो किस्सा ख़तम करो इसका तो लक्ष्मी बोली हाँ हाँ करते है पर पहले तुम से तो निपट लें, ये सुनकर राजेंदर सकपका गया और बोला मुझसे निपट क्या बोली तुम तो लक्ष्मी बोली देव के मरने के बाद इसके कतल का इल्ज़ाम तुम पर ही तो लगेगा इस से पहले राजेंदर कुछ समझ पाता उसके सर पर मुनीम ने बंदूक की बट से वार किया तो वो बेहोश हो गया
मुनीम ने फॉरन उसे रस्सियो से बाँध दिया लक्ष्मी ने अपने पूरे प्लान को पहले ही सोच लिया था कि कैसे क्या करना है और काफ़ी हद तक वो कामयाब भी हो गयी थी इधर देव को भी अपना अंत नज़दीक लग रहा था लक्ष्मी ने मुनीम से कहा कि इसको बाहर पेड़ के पास ले चलो मैं इसको जिंदा जलाना चाहती हू इसकी चीखो से मुझे शांति मिलेगी तो देव को मुनीम बाहर घसीट कर ले जाने लगा पर सीढ़ियो के पास………………….
वो देव का बोझ से लड़खड़ाया और उसी पल मे देव ने अपनी बची कुची शक्ति को बटोरते हुवे उसके अंडकोषो पर वार किया तो मुनीम दर्द से दोहरा हो गया और नीचे को बैठ गया और बिजली की सी फुर्ती से देव ने उसकी बंदूक उठाई और मुनीम की छाती पर गोली दाग दी मुनीम का राम नाम सत्य हो गया पर फिर वो भी ज़मीन पर गिर पड़ा कि दौड़ती हुई लक्ष्मी उधर आई तो मुनीम की लाश देख कर वो जैसे पागल ही हो गयी थी
इधर देव ने पड़े पड़े ही लक्ष्मी पर फाइयर किया पर अबकी बार किस्मत ने उसका साथ नही दिया बंदूक की गोलियाँ ख़तम हो चुकी थी , अपने पति को मरा देख कर लक्ष्मी जैस विक्षिप्त हो गयी थी वो देव को घसीट कर पेड़ के पास ले आई और पास रखी तेल की बॉटल्स से उसको भिगोने लगी वो ज़ोर ज़ोर से चीख रही थी शैतान उस पर सवार हो गया था
लक्ष्मी ने देव के पर पर जहाँ गोली लगी थी वहाँ अपनी बीच वाली उंगली घुसेड दी थोड़े चाह कर भी अपनी चीख पर काबू ना रख सका पूरा जिस्म उसका खून मे नहाया हुआ था मौत पल पल उसकी ओर बढ़ रही थी लक्ष्मी ने उसे पेड़ के तने से सटा दिया और उसको रस्सी से बाँध ही रही थी कि देव ने आख़िरी कोशिश करते हुए पूरी ताक़त से लक्ष्मी को धक्का दिया तो वो नीचे ज़मीन पर गिर गयी और देव उस पर कूद गया और उसके गले को दबाने लगा पर शायद उसकी ताक़त अब कम पड़ने लगी थी
और लक्ष्मी तो वैसे ही वहशी बन चुकी थी उसने अपने उपर से देव को साइड मे कर दिया और खुद उसके उपर सवार हो गयी उसने देव की पॅंट से उसकी बेल्ट को खीच लिया और उस से देव का गला घोटने लगी थी देव की साँसे दम तोड़ने लगी थी आँखो के आगे अंधेरा छाने लगा था किसी भी पल देव इस दुनिया से अलविदा होने वाला था पर शायद आज उसकी मौत का दिन नही था जब उसने अपने हाथों को निढाल छोड़ दिया तो
तभी वो जैसे किसी पत्थर से टकराया तो उसने वो पत्थर अपनी मुट्ठी मे लिया और लक्ष्मी के सर पर दे मारा उसके माथे से खून बह चला और वो दर्द से बिलबिला पड़ी उन कुछ ही सेकेंड्स मे देव को मोका भी गया हवा के दुबारा से फेफड़ो मे जाते ही जैसे उसमे उर्जा का संचार हो गया उसके पास बस यही एक लास्ट मौका था उसने उसी पत्थर से लक्ष्मी के सर पर मारना शुरू किया
पता नही वो कितने वार करता रहा वो भी पागल पन पर उतर आया था क्या क्या वो बड बड़ा रहा था और लक्ष्मी के सर पर वार किए जा रहा था लक्ष्मी के प्राण कब का उसका साथ छोड़ गये थे पर देव उस पर वार करता ही रहा , फिर ना जाने उसे क्या हुआ उसने लक्ष्मी को अपनी बाहों मे भर लिया और रोने लगा काफ़ी देर तक वो रोता ही रहा फिर उसे किसी के आने की आहट सुनाई दी तो वो घिसट ते हुवे उसकी ओर चलने लगा
तो उसने देखा कि वो गोरी थी वो गोरी की बाहों मे झूल गया और काँपति आवाज़ मे उसे बताने लगा गोरी ने उसे अपनी बाहों मे ले लिया तो देव को जैसे दो पल के लिए राहत मिल गयी थी पर तभी गजब हो गया उसका पूरा बदन दर्द मे जैसे भीगता चला गया गोरी का चाकू उसकी पसलियो मे धंसा पड़ा था ज़मीन पर गिरते हुए उसने कहा गोरी तुम भी ……………………………… तो गोरी बोली कमीने मेरी माँ को मार दिया तूने कातिल हो तुम तुम्हे भी जीने का कोई हक़ नही है
गोरी हँस ही रही थी कि तभी पीछे से एक फाइयर हुवा और गोरी का सर फट गया वो किसी पेड़ के कटे तने की तरह ज़मीन पर आ गिरी ये दिव्या थी जो वहाँ आ पहुचि थी असल मे उसने ठाकुर राजेंदर को किसी से फोन पर देव को मारने की बात करते हुए सुन लिया था पोलीस को लेकर आने मे उसे देर हो गयी थी पर वो बिल्कुल सही टाइम पर पहुचि थी दिव्या दौड़ती हुई देव के पास पहुचि सांस अभी चल रही थी
पोलीस की सहयता से उसने देव को अपनी गाड़ी मे डाला और गाड़ी सहर की ओर दौड़ा दी वो किसी भी कीमत पर देव को मरने नही दे सकती थी इधर पोलीस ने हवेली को अपने अंडर ले लिया और स्थिती को समझने का प्रयास कर रही थी आज अगर कोई रेस होती तो पक्का दिव्या ही जीत ती , क्र्र्रर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर चर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर करते हुए गाड़ी हॉस्पिटल के गेट के बाहर रुक गयी देव को तुरंत ऑपरेशन थियेटर मे ले जाया गया
जहाँ 5 दिन तक वो आइसीयू मे रहा पर बच गया , ठाकुर राजेंदर को पोलीस ने गिरफ्तार कर लिया उन्होने अपना जुर्म कबूल कर लिया देव ने सारी हत्याएँ अपनी जान बचाने के लिए की थी तो उसको बरी कर दिया गया था समय गुजरने के साथ दिव्या और उसके करीब आती गयी और अंत मे दोनो ने विवाह कर लिया तो ये थी कहानी देव की आपको कैसी लगी ज़रूर बताना .
समाप्त