पुष्पा को देख कर लखन कुश हो गया था तो मैने उन दोनो को वहाँ पर छोड़ा और गोरी और मैं आगे की तरफ बढ़ चले उसका नाज़ुक हाथ मैने अपने हाथ मे थमा हुवा था बात करते करते हम दोनो काफ़ी दूर निकल आए थे बाग के लास्ट वाले हिस्से मे काफ़ी घने पेड़ थे तो थोड़ी ठंड सी भी थी और अंधेरा सा भी था तभी मुझे वो वाला पेड़ दिखाई दिया जहाँ मैने लक्ष्मी को चोदा था तो मेरे चेहरे पे स्माइल सी आ गयी
गोरी पूछने लगी क्या हुआ बिना बात के ही मुस्कुरा रहे हो मैने कहा कि बस ऐसे ही अब उसको क्या बता ता कि इधर ही उसकी माँ चुदि थी मुझसे फिर हम थोड़ा और आगे चले तो बाग ख़तम ही हो गया और अब हम नदी किनारे पर आ गये थे बस ठंडी हवा चल रही थी तो एक जगह देख कर मैं और गोरी बैठ गये मैने कहा गोरी क्या बात है तू तो पहले से और भी सुंदर हो गयी है
वो बोली कहाँ तुम तो ऐसे ही कह रहे हो मैने कहा अरे नही सच्ची बोल रहा हूँ तो अपनी तारीफ सुनकर वो थोड़ा सा शरमा गयी उसके गाल सुर्ख हो गये मैं थोड़ा सा उसकी ओर और सरक गया गोरी बोली आज कहाँ गये थे तुम तो मैने उसे सबकुछ बताया वो बोली तुम्हारे पास पहले से ही सबकुछ है और फिर ना जाने कितनी ज़मीन तुम्हारी लोगो ने दबा ली है अब पहले जैसा वक़्त कहाँ रहा है और फिर तुम अकेले क्या क्या करोगे तो मेरी मानो तो जाने दो उस टुकड़े को
मैने कहा गोरी परंतु वो बस ज़मीन का टुकड़ा ही नही है मेरे पुरखो की विरासत है मैं उसको कैसे किसी और को दे दूं गोरी बोली मैने किताब मे पढ़ा है कि दुनिया मे जितनी भी लड़ाइयाँ हुई है वो या तो ज़मीन पर हुवी है या फिर औरत के लिए तुम इन पचड़ो मे ना पडो और आगे अपनी ज़िंदगी का सोचो मैने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया मैने कहा जाने दे ना अब इन बातों को अपनी बाते करते है
बाते करते करते समय का कुछ पता ही नही चला हल्का हल्का सा अंधेरा हो चला था मैने कहा आजा चल वापिस चलते है जब वो खड़ी हो रही थी तो उसका पाँव थोड़ा सा लड़खडाया और वो गिरने से बचने के लिए मेरी बाहों मे समाती चली गयी गोरी की नुकीली छातियाँ मेरे सीने मे दबाव देने लगी तो मुझ पर उसके बेपनाह खूबसूरत हुस्न का नशा सा चढ़ने लगा
गोरी के बदन से फुट ती कशिश मुझे उसकी ओर खीचने लगी और फिर मैने आख़िर उसके रसीले लाल लाल होटो को अपने होटो से जोड़ ही लिया गोरी ने अपने निचले होठ को थोड़ा सा खोल दिया जिसे मैने अपने मूह मे दबा लिया और उसकी मिठास का अनुभव करने लगा उसने अपनी पकड़ मेरी पीठ पर और भी तेज कर दी बस फिर हमें कुछ याद ना रहा याद रहा तो उसके खुसबुदार सांसो की महक जो मेरे मूह मे घुलने लगी थी काफ़ी देर मैं उसको चूमता ही रहा फिर कही जाकर हम अलग हुवे
गोरी ने अपनी नज़रे चुराते हुवे कहा चलो देर हो रही है वापिस चलते है मैने कहा जैसी तुम्हारी मर्ज़ी फिर आते आते काफ़ी देर हो गयी जब हम उन लोगो के पास पहुचे तो पुष्पा और लखन हमारा ही इंतज़ार कर रहे थे लखन बोला मालिक किधर रह गये थे आप इस तरफ कुछ जनवरो का भी ख़तरा रहता है और अंधेरा भी हो गया है आप ऐसे अकेले ना निकला करें मैने कहा आगे से ध्यान रखूँगा फिर थोड़ी देर और बाते हुई लखन को कुछ पैसे दिए ताकि वो बचा हुआ काम भी जल्द से जल्द पूरा करवा सकें
मैने पुष्पा से कहा कि तुम यही रुकोगी या चलोगि तो वो बोली क्या मालिक आप भी घर तो जाना ही पड़ेगा ना फिर मैने कार स्टार्ट की और हम हवेली आ गये मैने गोरी से कहा कि तुम अंदर जाओ और खाने की तैयारी करो आज मैं तुम्हारे हाथ का खाना खाना चाहूँगा तुम जाओ मैं पुष्पा को घर छोड़ कर आता हू और फिर हम गाँव की ओर चल पड़े
मैने हवेली के गेट पर गाड़ी रोकी और गोरी को कहा कि तुम अंदर चलो मैं पुष्पा को उसके घर छोड़ कर आता हूँ तब तक तुम खाने की व्यवस्था देख लो तो पुष्पा बोली मालिक मैं हूँ ना मैं बना दूँगी खाना , पर मैने मना करते हुए कहा कि नही आज मैं गोरी के हाथो से बना हुआ खाना ही कहूँगा , फिर गोरी हवेली मे चली गयी और मैने कार गाँव की ओर बढ़ा दी बस्ती आने से थोड़ी देर पहले ही पुष्पा ने कहा कि मालिक गाड़ी यही पर रोक दीजिए
मैने कहा पर घर तो अभी दूर है , वो कहने लगी कि अगर कोई देखेगा कि आप मुझे गाड़ी मे छोड़ने आए है तो फिर कई बाते चलेंगी मैं हूँ औरत जात आप समझ ही सकते है तो मैने गाड़ी वही पर रोक दी वो बाहर उतर गयी मैं भी उसके पीछे पीछे उतर गया वो जाने लगी तो मैने कहा ज़रा रूको, तुमने मेरे सवाल का जवाब नही दिया अभी तक
तो उसने एक बड़ी ही गहरी जालिम नज़र से मेरी ओर देखा और फिर पलट कर तेज तेज कदमोसे बस्ती की ओर बढ़ गयी और मैं रह गया वही पर कुछ देर उसको जाते देखता रहा फिर मैं भी वापिस हवेली की तरफ बढ़ गया गाड़ी पार्क की और सीधा रसोई की तरफ हो लिया पर गोरी वहाँ पर नही थी
मैने उसको फिर कमरे मे देखा पर वो वहाँ पर भी नही थी, तो मेरे दिल थोड़ा घबरा सा गया मैं उसको पुकारते हुए इधर उधर देखने लगा कि देखा वो बाथरूम की तरफ से चली आ रही थी गीले रेशमी बाल जिन्होने उसके सूट को भी आधे से ज़्यादा भिगो दिया था माथे से टपकती शबनमी बूंदे उसके चंद्रमा से चेहरे की रोनक को और भी बढ़ा रही थी
वो बोली क्यो चिल्ला रहे हो तुम, नहाने ही तो गयी थी मैने कहा वो तुम मुझे दिखी नही तो मैं थोड़ा सा घबरा गया था वो मुस्कुराते हुवे बोली इतनी फिकर क्यो करते हो आख़िर हम आपके है ही कॉन? मैने कहा ये तो पता नही कि तुम मेरी कॉन हो पर मेरी कुछ तो हो ही और मैं भी मुस्कुरा दिया मैने कहा आगे से ज़रा बता कर जाया करो मुझे फिकर है तुम्हारी
अपने गीले रेशमी बालो को तोलिये से झटकते हुवे बड़े ही प्यार से उसने मेरी ओर देखा और बोली कि तुम बस थोड़ा सा इंतज़ार करो मैं अभी फटा फट से खाना बना देती हू और रसोई की ओर जाने लगी मैं भी उसके पीछे-पीछे रसोई मे चला गया और उस से बाते करने लगा ना जाने गोरी मे कैसी कशिश थी जो मुझे बरबस ही उसकी ओर जाने को मजबूर करती रहती थी
पता ही नही चला कि कब उसके ख़यालो मे में डूब सा गया तभी उसने मेरी तंद्रा तोड़ी और बोली कहाँ खो गये मैने कहा कुछ नही इधर ही हूँ दिल तो कर रहा था कि बस उसको हमेशा ऐसे ही देखता रहूं एकटक पर फिर मैं रसोई से बाहर आ गया गोरी जब जब मेरे पास होती थी मुझे पता नही एक अलग सा ही एहसास सा होने लगता था मैं जैसे कहीं खो सा जाता था
फिर हमने साथ साथ ही डिन्नर किया तो वो बोली मैं कहाँ सोउंगी मैने कहा इतना बड़ा घर है जहा मर्ज़ी हो उधर सो जाओ वो बोली इतने बड़े घर मे बस दो ही तो कमरे खुले है और बेड तो तुम्हारे ही कमरे मे है मैने कहा तो मेरे साथ उधर ही सो जाओ , वो बोली ना बाबा ना तुम्हारा क्या भरोसा फिर से मुझे शरारत करने लगोगे मैने कहा तो फिर क्या हुवा………
वो बोली बाते ना बनाओ , मुझे बहुत नींद आ रही है और फिर सुबह स्कूल भी जाना है मैने कहा तू बेड पर ही सो जा मैं बाहर सो जाता हू तो वो तो पड़ते ही सो गयी थी पर मेरी आँखो मे नींद नही थी आज पता नही क्यो मेरा मन भटक रहा था जैसे की वो मुझे कोई संकेत देना चाहता हो, कहना चाहता हो कुछ रात आधे से ज़्यादा बीत चुकी थी
चंदा की चाँदनी चारो ओर बिखरी हुई थी हवा हल्की हल्की सी चल रही थी और एक मैं था अपने अशांत मन के साथ, जब रहा नही गया तो मैं उस कमरे मे चला गया जहाँ मेरे माँ-पिता की तस्वीरे थी एक ख़ालीपन सा मेरे अंदर कितनीही बाते थी जो मैं उनके साथ करना चाहता था पर मेरी सुन ने के लिए वो नही थे वहाँ पर , मेरा गला भर आया
आख़िर मेरे पास भी तो एक दिल था , इमोशंस थे पता ही नही चला कब मेरी सूनी आँखो से आँसू निकल कर बहने लगे माँ की तस्वीर मैने दीवार से उतारी और उसको अपनी बाहों मे लेकर मैं रोने लगा टपकते आँसू तस्वीर की धूल को भिगोने लगे फिर जब रहा नही गया तो मैं वहाँ से बाहर आ गया और कुर्सी पर बैठ गया
तभी मुझे ऐसे लगा कि जैसे हवेली मे कुछ हलचल हुई हो पर वहाँ तो बस मैं और गोरी ही थे , तो फिर ये कैसी आवाज़ थी तो मैं उस ओर चला तो मैने देखा कि कुँए की तरफ से जो दीवार टूटी हुई है उधर तीन लोग थे और अंदर की तरफ ही आ रहे थे मैने सोचा कि कॉन होंगे, चोर या फिर कोई दुश्मन
तभी मुझे गोरी का ख़याल आया और मैं अंदर की ओर भागा और जो बंदूक मुझे राइचंद जी ने दी थी उसको उठाया और बाहर आया वो लोग भी अब अंदर आ चुके थे बस कुछ ही दूरी थी वैसे मैं घबरा तो गया था पर फिर भी हिम्मत करते हुए मैने थोड़ा दिलेरी दिखाते हुवे कहा कि कॉन हो तुम लोग और इतनी हिम्मत की ठाकुर यूधवीर सिंग की हवेली मे घुस गये
वो लोग थोड़ा सा सकपका गये, तभी ना जाने कैसे मेरे हाथोसे उसी टाइम गोली चल गयी हालाँकि इस से पहले मैने ऐसा कभी नही किया था पता नही कैसे शायद घबराहट के मारे पर वो गोली उनमे से एक को लग गयी और वो वही पर गिर पड़ा और उसके वो दोनो साथी तुरंत ही रफूचक्कर हो लिए गोली की आवाज़ चली तो दूर तक गयी गोरी भी दौड़ते हुए बाहर आई और अपनी सांसो को संभालते हुवे बोली देव…………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………….
देव, देव तुम ठीक तो होना ये क्या हुआ कॉन है ये आदमी बताओ मैने कहा शांत हो जाओ मैं ठीक हू तीन लोग थे पर ये यहाँ पर क्यो मैने उस आदमी के चेहरे से नकाब हटाया पर अब मुझे क्या पता वो कॉन था गोरी बुरी तरह से घबरा गयी थी और मुझसे बिल्कुल चिपक कर खड़ी थी पसीना उसके माथे से बह चला था तभी हवेली के गेट पर किसी की दस्तक हुवी तो मैं उस ओर गया एक आदमी था हाथ मे लालटेन लिए हुए
मैने कहा तुम कॉन हो वो बोला साहब इधर पास मे ही मेरा खेत है मैं उधर ही सोया हुआ था तो गोली की आवाज़ सुनी तो इधर आ गया मैने कहा अंदर आओ और गेट खोला मैने कहा कुछ लोग थे पता नही कॉन थे कोई दुश्मन या चोर थे एक को धर लिया तुम देखो ज़रा कि पहचान हो पाएगी या नही और उसको उसे दिखाया पर वो भी पहचान नही पाया
राइचंद जी हॉस्पिटल मे थे और गाँव मे मेरा कोई ऐसा था नही जिसपर मैं भरोसा कर सकूँ बड़ी मुस्किल हो गयी थी मेरे लिए मैने गोरी के घर पर फोन किया और उसके नोकर से कहा कि अभी इसी वक़्त कुछ आदमियो को लेकर हवेली आ जाओ सच तो था कि मैं बेहद घबरा गया था अगर मानलो कुछ ज़्यादा लोग हमला कर देते तो कुछ भी हो सकता था
आधे घंटे भर बाद राइचंद जी के घर से कुछ लोग हवेली पर आ गये थे मैने कहा आप सभी को यहाँ की सुरक्षा करनी है बाकी सब काम बाद मे, तभी गोरी बोली पुलिस बुला लो मैने माथे पर हाथ मारा कि ये ख़याल मेरे दिमाग़ मे क्यो नही आया सुबह होते होते 5-6 जीप मे पोलीस वाले हवेली आ गये थानेदार खुद आया था तो मैने उसको पूरी बात बताई उसने मुझे पूरी सुरक्षा का वादा किया पर सवाल ये था कि कॉन थे वो लोग????????????????????????
काफ़ी तहकीकात की गई पर पता नही चला कि आख़िर वो लोग कॉन थे मुझे खुद की इतनी फिकर नही थी जितनी कि उन लोगो की थी जो हवेली मे काम करने आते थे इधर महादेव मंदिर की पूजा वाला दिन भी नज़दीक आ रहा था तो मैने तय किया कि मंदिर का काम निपट जाए फिर हवेली की टूटी दीवार की भी मरम्मत करवा लूँगा पर फिर भी कुछ आदमी तो चाहिए ही थे हवेली की चोकीदारी के लिए
आख़िर मैने लक्ष्मी को फोन लगाया और कहा कि वो कब तक आएगी तो पता चला कि उन्हे आने मे कुछ दिन और लग जाएँगे तो मैं और परेशान हो गया अब करूँ तो क्या करूँ कुछ समझ ना आया तो फिर दिल को ये कहकर समझा लिया कि कोई चोर होंगे अबकी बार कुछ होगा तो देखेंगे तो फिर बस मंदिर के प्रोग्राम की तैयारियो मे जुट गया ऐसे ही सोमवार आ ही गया
मंदिर को बहुत ही अच्छे तरीके से सजाया गया था मैने अपनी तरफ से गाँव वालो के लिए भोज का आयोजन किया था एक कोशिश की थी गाँव वालो को अपना बना ने की बस देखना बाकी था कि कामयाबी मिलती है या नही तय समय पर कार्यक्रम शुरू हुआ और अच्छे से पूजा संपन्न हो गयी और फिर भोज शुरू हो गया इन सब कामो मे शाम ही हो गयी थी मेरा पूरा दिन उधर ही लग गया था
उधर ही प्रसाद ले लिया था तो फिर इतनी भूख भी नही थी तो मैं वहाँ से निकला और गाँव से बाहर की ओर चल पड़ा जब मैं थोड़ा जंगल की ओर बढ़ा तो देखा कि एक पेड़ के नीचे कुछ लोग शराब पी रहे थे मैं भी उनके पास चला गया और राम राम करके पता पूछने के बहाने से उधर ही बैठ गया और बाते करने लगा तो पता चला कि वो लोग नाहरगढ़ के थे और अक्सर नशा करने को इधर जंगल मे आते रहते थे
अब वो लोग फुल नशे मे थे और अजीब अजीब बाते कर रहे थे तभी उनमे से एक बोला यार तूने सुना क्या अर्जुनगढ़ की हवेली मे कल गोली चल गयी एक आदमी मारा गया मैने चोन्क्ते हुए कहा नही भाई मैं तो परदेसी आदमी मुझे तो नही पता कुछ तुम ही बताओ कुछ तो वो बोला कि अरे कुछ नही यार सुना है ठाकूरो का वारिस लॉट आया है तो पक्का हमारे गाँव के मालिकों ने ही हमला करवाया होगा पर गाँव मे कोई चर्चा सुनी नही
मैने कहा भाई कुछ हमें भी बताओ इस बात के बारे मे तो एक आदमी जो खुद को स्पेशल सा समझ रहा था वो बोला भाई हम तो मजदूर आदमी है हम को कुछ नही पता पर कल जब मैं अफ़ीम के खेत मे थोड़ी अफ़ीम चुराने गया था तो वहाँ के चोकीदार आ गये तो मैं मार से बचने को छुप गया तो वो लोग कुछ बात तो कर रहे थे इसी बारे मे एक जना कह रहा था रामू तुझे क्या लगता है कि उधर हमला अपने ठाकुर सहाब ने करवाया होगा
तो दूसरा बोला नही रे ऐसा नही है ठाकुर साहब तो विलायत गये है और छोटे मालिक भी नही है तो कॉन ऐसा करेगा तो दूसरा बोला कि हाँ भाई बात तो सही है फिर भाई मैं उधर से खिसक लिया बस हमे तो इतना ही पता है फिर थोड़ी देर बाद मैं भी वहाँ से उठ कर चल दिया पर अब मेरा दिमाग़ खराब और भी हो गया था क्योंकि जो मैं सोच रहा था वैसा तो कुछ नही था फिर आख़िर कॉन थे वो लोग
मैं जब हवेली पहुचा तो बाबा और तीन-चार और लोग गेट के बाहर खड़े थे मैने कहा अरे आप सब लोग यहाँ सब ठीक तो है ना तो वो बोले ठाकुर साहब हम लोग रात को इधर ही रहेंगे और चोकीदारी करेंगे मैने कहा अरे आप सब लोग क्यो कष्ट करते है तो वो बोले जब आप गाँव वालो की मदद कर सकते है तो हमारा भी कुछ फ़र्ज़ तो बनता ही है ना
तो फिर मैं अंदर गया तो देखा कि गोरी भी थी मैने कहा माफ़ करना गोरी तुम्हारे बारे मे तो मुझे ध्यान ही नही रहा था आने मे थोड़ी देर हो गयी पर तुम यहाँ क्यो चली आई बोली मुझे तो आना ही था ना वो बोली खाना खा लो मैने कहा भूख नही है और सर भी बड़ा दुख रहा है तो बस सो ही जाता हू और अपने कमरे मे चला गया और सोने की कोशिश करने लगा फिर थोड़ी देर मे गोरी भी एक कटोरी मे थोड़ा सा तेल लेकर आ गयी और बोली लाओ मैं सर की मालिश कर देती हू तो थोड़ा आराम मिलेगा
सचमुच उसके हाथो मे जादू ही था पल भर मे ही मेरा दर्द गायब हो गया पता ही नही चला कि कब नींद आ गयी जब मैं उठा तो देखा कि गोरी मेरी बगल मे ही सोई पड़ी है तो मैने उसे नही जगाया और बाहर आ गया बाहर बाबा और बाकी सब लोगो से राम राम हुई मैं फ्रेश होने चला गया आया तबतक पुष्पा भी आ चुकी थी मैने कहा सबसे पहले बाहर जितने भी लोग है उनके लिए चाइ-नाश्ते का इंतज़ाम करो
गोरी अभी तक उठी नही थी मैने सोचा आज स्कूल नही जाएगी क्या ये पर फिर जगाया नही उसको पुष्पा ने मेरा नाश्ता टेबल पर लगा दिया था मैने चुप चाप नाश्ता किया सुबह सुबह ही मैने कुछ सोच लिया था तो मैने गाड़ी निकाली और उसको अपनी उस ज़मीन की तरफ मोड़ दिया जिस पर नाहरगढ़ वालो का कब्जा था मैं कुछ करने जा रहा था पर पता नही था कि ये सही है या ग़लत
रेतीले रास्ते पर धूल उड़ाती हुई मेरी गाड़ी सरपट दौड़ी चली जा रही थी आधे-पोने घंटे बाद मैं उस फार्महाउस के सामने था मैं गाड़ी से उतरा और अंदर चल दिया पर आज गेट पर ही उन्ही लोगो ने मुझे रोक दिया और बोले कि तुझे उसी दिन मना किया था ना की दुबारा इधर ना आना मालिक को पता चलेगा तो ठीक नही रहेगा मैने कहा पर इस ज़मीन का मालिक तो मैं ही हू
वो ठहाका लगाते हुवे बोला अबे जा जा , काहे दिमाग़ खराब करता है सुबह सुबह मैने कहा तो ठीक है जा तेरे मालिक को ही बुला ला वो खुद ही बता देगा कि मैं कॉन हू वो मुझे हड़काते हुवे बोला अगर दो मिनिट मे तू यहाँ से नही निकला तो तेरी हड्डिया सलामत नही बचेंगी मुझे भी तैश आने लगा था मैने जेब से पिस्टल निकाली और उसके माथे पर लगा दी
ऐसा होते ही उसके माथे से पसीना बह चला मैने कहा जब भी तेरा मालिक आए उस से बस इतना ही कहना कि अर्जुनगढ़ से ठाकुर देव आया था फिर मैं वापिस हो लिया मैने सोच लिया था की एक बार अपने रिश्तेदारो से मुलाकात कर ही लेनी चाहिए मैने अपनी तरफ से शुरुआत कर दी थी बस अब इंतज़ार था रेस्पॉन्स का वहाँ से मैं सीधा खेतो मे गया कई दिन हो गये थे इधर आया ही नही था तो दोपहर तक इधर का काम काज ही देखता रहा
फिर मैं वापिस हवेली आ गया लंच किया और बाहर बैठ कर बाबा से बात चीत करने लगा उन्होने कहा कि देव आप किसी भी तरह की टेन्षन ना लें अब आपको हवेली की फिकर करने की बिल्कुल भी ज़रूरत नही है इतने आदमियो की व्यवस्था हो गयी है जो ये काम संभाल सके आधे लोग दिन मे रहेंगे और आधे लोग रात को मैने कहा बाबा सब आपकी ही मेहरबानी है तो बस वो मुस्कुरा गये
फिर कुछ और मुद्दो पर बात हुई , फिर मैं उठ कर अंदर चला गया तो पुष्पा के दीदार हुए वो बोली मालिक आपके गंदे कपड़ो का ढेर लगा था मैने सारे धो दिए है मैने कहा पर इसकी क्या ज़रूरत थी चंदा कर लेती वो काम वो बोली मालिक मैने धो दिए कोई बात नही मैने कहा गोरी कहाँ है तो उसने बताया कि वो तो अपनी किसी सहेली के घर गयी है
पीले ब्लाउज और नीले घाघरे मे पुष्पा का मादक बदन और भी खिला खिला सा लग रहा था मैने कहा पुष्पा मुझे तुमसे कुछ ज़रूरी बात करनी है वो बोली मुझे मालूम है मालिक आप क्या कहना चाहते है मैने कहा यार वो नही मैं तो बस इतना पूछ रहा था कि क्या मैं तुम पर भरोसा कर सकता हू , तो पुष्पा हाथ जोड़ते हुए बोली कि मालिक आपकी वजह से मेरे जीवन मे थोड़ा सुख आया है आप कहकर तो देखो जान भी दे दूँगी …
देव- वक़्त आने पर तुमको मेरा एक काम करना होगा
पुष्पा- जी जैसा आप कहे ,
तो मैने कहा अभी तुम जाओ और मेरे लिए एक कॉफी भेज देना मैने लक्ष्मी को फोन किया और मुनीम जी की तबीयत के बारे मे पूछा तो उसने बताया कि हालत कुछ ठीक नही है तो मैने कहा ठीक है मैं कल ही सहर आता हू पर वो मना करने लगी पर मैने ज़ोर देते हुवे कहा कि नही मैं आता हूँ कल
मुझे लक्ष्मी का व्यवहार कुछ अजीब सा लगा पर फिर मैने सोचा कि अब हॉस्पिटल का महॉल है तो बंदा थोड़ा चिड़चिड़ा हो ही जाता है तभी पुष्पा कोफ़ी लेकर आ गयी मैने कहा तुम बैठो ज़रा , मैने उस से पूछा कि तुम हवेली के बारे मे क्या जानती हो तो उसने बताया कि जी जितना सब लोगो को पता है उतना ही मुझे पता है पर हम एक बात याद आई कि पहले ठाकुर साहब के यहाँ एक बुजुर्ग रहते थे
वो ही उनके छोटे-मोटे काम किया करते थे मैने कहा तुमको कैसे पता पुष्पा बोली वो दरअसल हमारे घर के सामने जो परचून की दुकान है वो अक्सर वहाँ आते थे तो बस ऐसे ही पता चल गया पर जब बड़े ठाकुर का देहांत हुआ उसके बाद से मैने उनको कभी नही देखा , मैने कहा उनका कुछ नाम-पता तो वो बोली साहब अब मैं क्या जानू
मैने कहा चल कोई नही मैं पता कर लूँगा पर इस बात ने मुझे और भी उलझा दिया था खैर रात गुजर गयी भोर हुई मुझे शहर के लिए निकलना था मैने बाबा से कहा कि बाबा हवेली की ज़िम्मेदारी आप पर है मुझे आने मे देर हो सकती है क्या पता मैं शहर मे ही रुक जाउ तो वो बोले देव आप बेफिकर हो कर जाइए तो मैं चल पड़ा शहर
हॉस्पिटल गया मुनीम जी से मिला कुछ सुस्त से लगे फिर डॉक्टर्स से तस्सली से बात की तो पता चला कि दवाइयाँ असर नही कर रही थी मैने कहा पर ऐसा कैसे हो सकता है डॉक्टर साहब तो वो बोले यही बात तो हमे भी उलझन मे डाले हुवे है तो मैने कहा ये घर कब तक जा सकेंगे तो पता चला कि हफ्ते भर बाद फिर मैने लक्ष्मी से कहा कि मुझे अकेले मे मुनीम जी से कुछ बात करनी है
तो वो बाहर चली गयी, फिर मैने उनको पिछले दिनो की घटना बताई तो वो बोले मालिक ये ज़रूर बाहर वालो से करवाया काम है वरना आप ही सोचो हवेली सालो से खामोश खड़ी है पर आज तक एक पैसे की चोरी ना हुई फिर एक दम से चोर कैसे आ सकते है बात मे दम था , मैने कहा कुछ लोग राज़ी हो गये है हवेली की चोकीदारी करने को पर कुछ हथियार भी चाहिए
तो उन्होने अपनी पुरानी डायरी निकली जेब से और फिर किसी को फोन किया बात की काफ़ी देर फिर मुझसे कहा मालिक कल तक व्यवस्था हो जाएगी आप की सुरक्षा बेहद ज़रूरी है पर तकदीर देखिए मैं अपाहिज़ खुद मोहताज हो गया हू मैने कहा आप बस आराम करे फिर काफ़ी देर तक मुनीम जी से मेरी ख़ास बाते होती रही पर रिज़ल्ट सेम था उनका शक़ भी नहरगढ़ की ओर ही था
शाम होने लगी थी मैं चलने को हुआ तो लक्ष्मी ने कहा कि आज इधर ही रुक जाओ काफ़ी दिन से इधर ही पड़ी हू तुम रहोगे तो थोड़ा होसला मिलेगा और कुछ बाते भी हो जाएँगी मैने कहा ठीक है फिर मैने हवेली फोन किया और बताया कि मैं आज नही आ पाउन्गा तो सब चोकस रहना और पुष्पा को विशेष रूप से कहा कि आज वो घर ना जाए बल्कि गोरी के साथ ही रहे कुछ और बाते उसको समझाई
राइचंद जी सो रहे थे मैने लक्ष्मी से कहा आओ बाहर चलते है कुछ खाना वाना खा कर आते है तो हॉस्पिटल से थोड़ी दूर ही एक होटेल था हम वहाँ चले गये खाते खाते बाते भी होने लगी आज काफ़ी दिन बाद लक्ष्मी के चेहरे पर मुस्कान देखी थी तो मुझे भी अच्छा लगा डिन्नर के बाद हम फिर से वापिस आ गये रात भी घिर आई थी लक्ष्मी ने राइचंदजी को खाना खिलाया फिर दूध के साथ कुछ दवाइयाँ दी
फिर एक छोटा सा बातों का दॉर चला , बाते करते करते ही मुनीम जी नींद के आगोश मे समा गये अब बचे लक्ष्मी और मैं मैने कहा सोएंगे कहाँ तो उसने कहा मैं तो नीचे ही बिस्तर लगा के सो जाती हू तुम भी मेरे पास ही सोओ गे कहा उसने अपनी निचले होठ को दाँतों से काट ते हुए कहा और फिर एक नशीली मुस्कान मुझे दी मैं समझ गया कि आज तो ये चुद के ही रहेगी
उसने फटा फट से बिस्तर बिछाया और लाइट बंद करके ज़ीरो पॉवेर वाला बल्ब जला दिया मैने कहा ये भी बंद करदो तो वो बोली रात को कई बार नर्स राउंड पे आ जाती है इस लिए इसको जलने दो फिर मैं और वो बिस्तर पर लेट गये कुछ देर तो वो शांत रही फिर उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने बोबो पर रख दिया और दबाव डालने लगी मैं तो पहले से ही तैयार था मैने उसकी तनी हुई चूचियो को कस कर दबाना शुरू किया तो उसने मेरी पॅंट की ज़िप खोली और मेरे लंड को बाहर निकाल लिया
और मेरे आंडकोषो को अपनी मुट्ठी मे भरकर दबाने लगी तो बड़ा ही मज़ा आया मुझे मैने उसके ब्लाउज को हुको को खोला और फिर ब्रा भी हटा दी और उसकी पुस्त चूचियो पर टूट पड़ा इस उमर मे भी ऐसी कसी हुई चूचिया उफफफ्फ़ मैं तो पागल सा ही होने लगा मैं पूरे दम से उसके उभारों को दबा ने लगा लक्ष्मी हौले हौले सिसकारिया निकालने लगी उपर मैं उसकी चूचियो से खेल रहा था और नीचे वो मेरे लंड पर आनी उंगलियो का जादू चला रही थी
मैने अपने होंठो मे उसके निप्पल को दबा लिया और उस पर अपनी जीभ फिराने लगा तो लक्ष्मी के तन बदन मे बिजलिया रेंगने लगी वो मदहोश होने लगी उसकी चूचिया उसके सेंसेटिवे पायंट्स थे 10-12 मिनिट तक मैं उसके बोबो को ही पीता रहा आग अब बढ़ती ही जा रही थी फिर मैं जब उसकी साड़ी खोलने लगा तो उसने मुझे रोक दिया और अपनी साड़ी को कमर तक कर लिया और खुद ही पेंटी भी उतार दी
तो मैने उसकी योनि को अपनी मुट्ठी मे भर लिया और भीचने लगा उफ्फ क्या गरम चूत थी उसकी तभी लक्ष्मी ने अपना कमाल दिखाया और मेरे उपर आते हुवे 69 मे आ गयी और झट से मेरे लंड को अपने मूह मे दबा लिया और मज़े से चाटने लगी और अपनी योनि को मेरे चेहरे पर दबाने लगी तो मैने भी उसके मोटे मोटे कुल्हो को अपने हाथो से थाम लिया और उसकी चूत पर अपना मूह लगा दिया
जैसे ही मेरी जीभ उसकी योनि से टकराई तो उसने अपनी जाँघो मे मेरे चेहरे को भीच लिया और मस्त हो गयी वो भी कस कर अपनी खुरदरी जीभ मेरे लंड पर रगड़ रही थी मुझे लगा कि बस मैं तो गया काम से पर गजब तो जब हुआ जब उसने अपने मूह मे मेरे अंडकोसो को भर लिया मैं तो जैसे पिघल ही गया उस जादुई अहसास मे तो मैने भी अब उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया
काम रस से भीगी हुई उसकी चूत के होठ जब जब फड़फड़ाते तो कसम से बड़ा ही मज़ा आता था मुझे तो काफ़ी देर तक हम दोनो एक दूसरे के अंगो का रस पान करते रहे फिर उसने मेरे लंड को अपने मूह से बाहर निकाला और फिर अपनी चूत को वहाँ पर रगड़ने लगी उसकी रागड़ाई से मुझे बड़ा ही मज़ा आ रहा था फिर झट से वो मेरे लंड पे बैठ ती चली गई कुछ ही पॅलो मे पूरा लंड उसकी चूत मे घुस चुका था और वो करने लगी मेरी सवारी
उसकी झूलती चूचिया मेरे चेहरे से टकराने लगी तो मैने उनको अपने मूह मे भर लिया और चूसने लगा तो लक्ष्मी और भी ज़्यादा मस्ती मे आ गयी और धप धप से मेरे लंड पर कूदने लगी और मैं उसकी मोटी गान्ड को मसल्ने लगा बड़ा ही मज़ा आ रहा था फिर थोड़ी देर बाद वो उतर कर लेट गयी और मैं उसके उपर आ गया तो उसने खुद ही अपनी टाँगे उठा कर मेरे कंधे पर रख दी और मैने एक बार फिर से चूत और लंड का मिलन करवा दिया
अब शुरू हुवा धमाल , मैं कस कस के उसकी चूत पर धक्के लगाए जा रहा था लक्ष्मी ने बड़ी मुश्किल से अपनी आहो को दबाया हुवा था कुछ देर बाद मैं पूरी तरह से उसपर चढ़ गया और उसके होंठो को चूस्ते हुए चुदाई करने लगा बड़ा ही मज़ा भर गया था मेरी नस नस मे आधे घंटे से भी ज़्यादा देर तक मैं उसकी चूत मारता रहा और वो भी पूरा मज़ा ले रही थी
अब मैं झड़ने के करीब आ गया था उसका हाल भी कुछ ऐसा ही था तभी उसने मुझे कस्के अपनी बाहों मे दबा लिया और मस्ती से मेरे होंठो को चूस्ते हुए अपने काम सुख को प्राप्त करने लगी और फिर मैने भी अपना गाढ़े रस से उसकी योनि को भर दिया
वो बोला जी हुकुम फिर उसने कहा कि हुकुम एक बात कहनी थी मैने कहा बता वो बोला अगर एक साइकल होती तो थोड़ी आसानी होती मैने कहा ले ले फिर पूछ क्यो रहा है तो वो बोला मालिक लेकर तो आप ही दोगे ना मैने कहा ठीक है अबकी बार शहर जाउन्गा तो लेता आउन्गा वो बोला हुकुम अपने गाँव मे ही एक आदमी साइकल सुधारने की दुकान चलाता है और साइकल बेचता भी है
कुछ देर मैं उसके उपर ही लेटा रहा फिर जब वासना का तूफान शांत हुआ तो मैं उसकी बगल मे आ गया और उसके होटो की पप्पी लेकर उसका शुक्रिया अदा किया तो वो मेरे सीने से सट गयी हालाँकि मैं एक बार और उसको चोदना चाहता था पर उसने मना कर दिया तो फिर बस सोना ही रह गया था सुबह हुई अब मुझे वापिस गाँव आना था तो कुछ देर और राइचंद जी से गुफ्त गु हुवी और करीब दस बजे मैं वहाँ से गाँव के लिए चल पड़ा
पर तभी मुझे याद आया कि मुझे बॅंक मॅनेजर से मिलना है तो मैं बॅंक हो लिया असल मे मुझे मेरे कुछ खातो का पिछले समय की ट्रॅन्सॅक्षन डीटेल्स चाहिए थी तो बॅंक मे बड़ी ही देर लग गयी कुछ पैसे भी निकल वा लिए थे अब काफ़ी डेटा था तो मॅनेजर ने कहा सर टाइम लग रहा है आप एक काम करो अभी आप घर जाओ मैं 1-2 दिन मे पोस्ट से डीटेल्स भिजवा देता हू तो फिर बस घर ही जाना था
फिर मैं बॅंक से निकला तो तीन बज रहे थे मैं गाँव के लिए निकला तो फिर मुझे कुछ याद आया तो मैने फोन निकाला और एक नंबर डाइयल किया तो उसने मुझे मिलने के लिए बुला लिया असल मे ये वो आदमी था जो कुछ हथियारो की व्यवस्था करने वाला था अब ये काम बेहद ज़रूरी था तो उस से फिर डील होने लगी उसने कहा कि वो एक हफ्ते बाद सब काम कर्देगा तो कुछ पैसे अड्वान्स देकर मैं गाँव की ओर हो ही लिया
शाम हो रही थी मुझे जल्दी से जल्दी घर पहुच ना चाहिए था गाँव से थोड़ी ही दूर पर जब मैं था तो एक आदमी ने हाथ के इशारे से कार को रुकवाया तो मैने गाड़ी रोक दी वो बोला बाबूजी मेरे पैर मे चोट लगी है क्या आप मुझे गाँव तक छोड़ देंगे तो मैने कहा हाँ आजो उसके पास एक बॅग भी था तो मैने सोचा कि मैं ही उठा कर रख देता हू मैने गाड़ी का गेट खोला और बाहर आ गया पर ये तो साला गजब ही हो गया
मेरे बाहर आते ही झाड़ियों से कुछ 7-8 लोग और बाहर निकल आए और मुझे घेर लिया मैने कहा लुटेरे हो लूटने आए हो तो उनमे से एक बोला ना ठाकुर साहब ना ना धन ना चाहिए हमको आपका तो मैने कहा फिर क्या चाहते हो तो वो बोला हमारे मालिक ने कहा है कि ज़रा ठाकुर साहब की थोड़ी सी खातिरदारी करके आओ तो आ गये मैने कहा तो ठीक है फिर अपने मालिक का पता बताओ आज का डिन्नर उधर ही करता हूँ मैं
मैं अंदर ही अंदर समझ गया था की आज बेटा कलदाई आ गयी है आज तो गया तू काम से मैने फुर्ती करते हुवे जेब से पिस्टल निकाल ली तभी किसी का लात मेरे हाथ पर पड़ा और पिस्टल गिर गयी मैं कुछ समझपाता उस से पहले ही दना दन वार होना शुरू हो गया मुझ पर कुछ रियेक्शन करने का टाइम ही ना मिला बस फिर मेरी चीख ही गूंजने लगी उस वीराने मे
मैं तो प्रतिरोध भी ना कर पाया था पता नही कब मेरे होश गुम होते चले गये जब मेरी आँख खुली तो मैं हॉस्पिटल मे था आँखे खुलते ही मैने महॉल देखा फिर मैने आवाज़ लगाई तो नर्स दौड़ते हुए आई और बोली अरे आप आराम से रूको ज़रा फिर उसने मुझे बैठने मे मदद करी और डॉक्टर को बुलाने चली गयी तब तक नंदू अंदर आ चुका था
उसने पानी भरी आँखो से मेरी ओर देखा और रोने लगा मैने कहा पगले कुछ नही हुआ मुझे बस कुछ चोट है ठीक हो जाएँगी फिर देखा तो लक्ष्मी भी अंदर आ गयी और मेरे पास स्टूल पर बैठ गयी और मेरा हाथ पकड़ कर पूछा कि ठीक हो मैने कहा जी ठीक हू तो पता चला कि आज 4 दिन बाद होश आया है डॉक्टर ने आकर कुछ इंजेक्षन दिए
फिर पता चला कि कोई हड्डी तो नही टूटी पर कुछ पसलियो मे चोट है और गुम चोट तो पूरे शरीर मे ही थी तबीयत से मारा था सालो ने मुझे पोलीस ने आकर बयान लिया तो मैने झूट बोलते हुए कहा कि सर मुझे कुछ याद नही है शायद कुछ चोर-लुटेरे थे तो इनस्पेक्टर ने कहा कि ठाकुर साहब चोर नही थे वो लोग गाड़ी से हमे 12 लाख रुपये मिले है अगर चोर होते तो ले जाते पर सिर्फ़ आप पर हमला पहले हवेली मे कोसीश और अब ये कुछ तो है जो आप बता नही रहे है मैने कहा मुझे कुछ भी नही पता है और वैसे भी ये पोलीस का काम है आप तहकीकात शुरू कीजिए
इनस्पेक्टर ने बड़ी घहरी नज़रो से देखा मुझे और फिर कहा कि कुछ याद आए तो इत्तिला दीजिए फिर चला गया लक्ष्मी बोली मुझे तो पक्का यकीन है कि नाहरगढ़ वालो न ही हमला करवाया है मैने कहा ऐसा क्यो लगता है तुम्हे जबकि मुझे भी यही लग रहा था मैने पूछा क़ी मुझे यहाँ तक किसने पहुचेया तो पता चला कि नंदू उसका बहनोई और उसकी बहन गाँव आ रहे थे
तो रास्ते मे उन्हे मेरी कार दिखी उसके पास ही मैं बेसूध पड़ा था उसका जीजा किसी सेठ का ड्राइवर था वो ही हॉस्पिटल लाया कार को फिर गाँव सूचना दी गयी मैने उन सबका धन्यवाद किया 5-6 दिन बाद हॉस्पिटल से छुट्टी हो गयी तो मैं हवेली आ गया हवेली की सुरक्षा कड़ी हो गयी थी अब गाँव के लोग भी थोड़ा सा दुखी थे मेरे उपर हुवे हमले को लेकर
बस दिन गुजर रहे थे लक्ष्मी एक दो दिन मे चक्कर लगा जाया करती थी , चंदा तो थी ही हम पर पुष्पा पूरे दिल ओ जान से मेरी तीमार दारी मे जुटी हुई थी अब वो 24 घंटे ही हवेली मे रहा करती थी कुछ ज़रूरी हो तो ही घर जाती थी वहाँ उसकी सास तो थी ही संभालने को धीरे धीरे मेरी हालत मे भी सुधार होने लगा था एक दोपहर पुष्पा ने मुझे दवाई पकडाई और बोली मालिक आपको क्या लगता है कॉन ऐसी हरकत कर सकता है
मैने कहा कोई भी हो सकता है , मेरे मामा भी हो सकते है वो बोली अरे एक मिनिट मे अभी आई मैने कहा कहाँ जा रही हो बताओ तो सही पर वो बाहर दौड़ पड़ी पाँच मिनिट बाद वो आई तो उसके हाथ मे एक लिफ़ाफ़ा था उसने कहा कि मालिक जिस दिन आप सहर गये थे उस दिन नाहरगढ़ से दो लोग आए थे और ये देकर गये थे फिर आप पे हमले की खबर आई तो फिर दिमाग़ से निकल गया
मैने कहा तू बैठ ज़रा , तो पास रखी कुर्सी पर बैठ गयी मैने वो एन्वेलप खोला तो उसमे एक रजिस्ट्री थी जिसमे नाहर गढ़ की फॅमिली ने मेरी वाली ज़मीन जो कई सालो से दबाई हुई थी वो मुझे वापिस दे दी थी मैने 3-4 बार वो रेजिस्ट्री पढ़ी अब साला ये क्या हो गया ये तो बात ही घूम गयी मैने कहा पुष्पा टेबल पे रखी डायरी मे से वकील साहब को फोन लगाओ और उन्हे कल यहाँ बुलाओ
फिर मैने उसको सारी बात बताई तो वो बोली मालिक कही कोई खेल ना खेल रहे हो वो लोग मैने कहा हो सकता है पर ज़मीन तो वापिस करदी उन्होने अगले दिन वकील आया तो मैने राइचंद जी को भी गाड़ी से इधर ही बुलवा लिया फिर विचार विमर्श होता रहा मैने कहा अब उनका धन्यवाद तो करना ही चाहिए वैसे भी अब मैं काफ़ी हद तक ठीक हो गया हू
मुझे अब रिश्तेदारो से मिल ही लेना चाहिए तो राइचंद जी घबरा गये और बोले आप वहाँ नही जाएँगे बस तो मैने उनका मन रखने को बोल दिया ठीक है नही जाउन्गा पर मैने अपना इरादा कर ही लिया था वकील बोला मैं कल ही जाकर वो ज़मीन अपने क़ब्ज़ मे ले लेता हू मैने कहा ठीक है
फिर मैं और राइचंद जी अनुमान लगाते रहे कि आख़िर हमला किसने करवाया क्योंकि वो घात लगा कर किया गया वार था तो किसी को तो पता था ही कि मैं आ रहा हू साला कॉन हो सकता है अगले कुछ दिनो मे हवेली के लोगो को हथियार भी मिल गये थे खेतो का काम लक्ष्मी देख रही थी तो चिंता नही थी हफ्ते भर बाद की बात है उस दिन सुबह से ही बड़ी बारिश हो रही थी
तो रात तक सिलसिला चलता रहा , पर रात को बारिश तूफ़ानी हो गयी थी रात के खाने के बाद मैं किताब पढ़ रहा था तो पुष्पा दूध लेकर आई मैने पूछा बाहर लोगो का खाना हो गया तो वो बोली हाँ मलिक रात वाले लोग घर से ही खाकर आते है मोसम ठंडा सा है तो मैं बस उनको चाइ पकड़ा कर ही आई हू आज पुष्पा काली साड़ी मे बड़ी ही गजब लग रही थी
मेरे दिल पर तो कटार ही चल गयी थी उसके उस रूप को देख कर मैने कहा पुष्पा मुझे तुमसे आज एक बात करनी है वो बोली जी कहिए मैने कहा ज़रा इधर तो आओ तो वो बेड के पास आकर खड़ी हो गयी मैने कहा मेरे पास बैठो तो वो सकुचाने लगी पर मैने उसको अपने पास बिठा लिया और उसका हाथ पकड़ कर बोला कि पुष्पा मैने कई दिन पहले तुमसे एक सवाल किया था उसका जवाब नही मिला मुझे अभी तक
उसका सुन्दर मुखड़ा लाल हो गया पर वो चुप ही रही मैने कहा तुम्हे तो पता ही है मैं तुमको दिल से अपना मानता हू क्या तुम मुझे दोस्त होने का हक़ भी नही दे सकती हो तो वो बोली मालिक ऐसी बात नही है पर ……. …….. मैने कहा पर क्या तो वो बोली हवेली मे इतने लोग होते है बात खुल गयी तो मेरा क्या होगा मैं उसकी हथेली को दबाते हुए कहा कि क्या तुम्हे भरोसा नही मुझ पर
वो बोली आप कैसी बात करते है , मैने उसे सीधा आमंत्रण देते हुवे कहा कि ठीक है मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रहा हू सारा काम निपटा कर आओगी ना तो वो उठी और दरवाजे की तरफ चल पड़ी और वहाँ पहुच कर जब उसने मुझे स्माइल दी तो मैं तो मर ही गया ……
बाहर मोसम भी आज रोद्र रूप मे था घनघोर बरसात हो रही थी फिर बिजली भी चली गयी मैं उठा और रोशनी की फिर खिड़कियो के पर्दे लगा दिए ताकि कुछ बाहर का शोर कम हो जाए मैने लालटेन ली और बाहर का हाल देखने जा निकला गेट पे जाके देखा कि वो लोग जो वहाँ कमरा बनाया था उधर बैठे थे मैने कहा आप आराम से रहना बारिश मे ना भीगना तो वो बोले मालिक आप चिंता ना करो और आराम कीजिए तो मैं फिर से अपने कमरे मे आ गया
तो देखा कि पुष्पा सोफे पर बैठी है मैने गेट बंद किया और उसके पास जाकर बैठ गया और उसके हाथ को अपने हाथ मे ले लिया वो बोली मालिक , मैने कहा क्या हुआ वो कहने लगी कुछ होता है मुझे मैं बस हँस दिया उसकी टाँग से मेरी टाँग रगड़ खाने लगी थी मैं आज पूरी रात उसको भोगना चाहता था मैने उसकी ठोडी को अपने हाथ से उठा कर उसके चेहरे को उपर की ओर किया और बिना कुछ कहे अपने होंठो से उसके होंठो को मिला लिया
पुष्पा उसी समय मेरी बाहों ने पिघल गयी मलाईदर होंठो को चूसने मे मुझे बड़ा ही मज़ा आ रहा था ऐसा लगा कि जैसे ताज़ा ताज़ा मलाई हो वो दस पंद्रह मिनिट तक बस उसके अधरो का रास्पान ही करता रहा मैं फिर वो अलग हुई मैने उसे खड़ा किया और अपने से चिपका लिया और साड़ी के उपर से ही उसकी गदराई गान्ड को सहलाने लगा एक बार फिर से मैं उसको किस करने लगा था
फिर मैने उस से कहा कि पुष्पा बिल्कुल भी शरमाओ ना, वरना मैं तुम्हे प्यार कैसे कर पाउन्गा मैने उसकी साड़ी का पल्लू पकड़ा और साड़ी को खोलने लगा वो सिर्फ़ ब्लाउज पेटिकोट मे थी वो शरम के मारे अपना मूह मेरे सीने मे छुपाने लगी और मैने मोके का फ़ायदा उठाकर उसके पेटिकोट का नाडा भी खोल दिया जैसे ही पेटिकोट उसके पैरो मे गिरा मैं तो पगला ही गया नीचे से वो पूरी नंगी हो गयी थी
गाँवो की औरते वैसे भी ब्रा-पेंटी इतनी कहाँ पहना करती है मैं कुछ देर उसके चुतड़ों से खेलता रहा फिर उसके ब्लाउज को भी उतार दिया और उसको बेड पर पटक दिया उसने एक चादर अपने उपर ओढ़ ली मैने जल्दी से अपने कपड़े उतारे और चादर मे घुस गया और उसके उपर आ गया फिर एक लंबा सा किस किया और उसके हाथ मे अपना लंड दे दिया
तो उसने अपना हाथ पीछे खीच लिया तो मैने कहा पकडो ना इसे तो फिर उसने मेरे लंड को अपनी मुट्ठी मे भर लिया और तभी उसके मूह से निकल गया ये तो बहुत ही लंबा और मोटा है मैने कहा लखन का ऐसा नही है क्या तो वो बोली नही वो तो इस से काफ़ी छोटा है पर तभी उसे अपनी बात का अहसास हुआ तो वो शर्मा गयी मैने कहा पुष्पा तुम खुश तो हो ना तो वो शरमाते हुवे बोली हाँ मालिक
मैं उसके निचले होठ को अपने दाँतों से काटने लगा तो वो मेरे लंड को मसल्ने लगी पुष्पा लक्ष्मी से भी बहुत ज़्यादा हॉट और जबरदस्त पीस थी काफ़ी देर तक बस चूमना चाटना ही लगा रहा बाहर बारिश से जो ठंड हो गयी थी तो मज़ा और भी बढ़ गया था फिर मैं अपना हाथ उसकी योनि पर ले गया गहरे बालो से धकि हुवी गुलाबी चूत मैं तो देख कर खुश हो गया
उसकी झान्टो पर मैं अपनी उंगलिया फिराने लगा तो वो अपनी जाँघो को कसने लगी आख़िर फिर मैने अपनी बीच वाली उंगली उसकी चूत के अंदर डाल दी तो वो सिसकते हुवे बोली आहह मालिक आराम से दर्द होता है मैने कहा यार अब इस उमर मे कहाँ दर्द होगा अब तो मज़ा लेने की उमर है ज़रा अपनी टाँगे थोड़ी सी फैला तो उसने पाँवो को चौड़ा कर दिया मैं आहिस्ता आहिस्ता से चूत मे उंगली रगड़ने लगा
पुष्पा भी आहिस्ता आहिस्ता से इस आग मे जलने लगी थी अब तन की प्यास जब भड़के तो फिर बस भड़क ही जाती है चूत मे उंगली करते करते मैने पुष्पा को किस भी करना शुरू कर दिया उसने अपना मूह खोला तो मैं उसकी जीभ को चूसने लगा उसके तन बदन मे तरंग दौड़ गयी और उसने भी अब मेरे लंड पर अपना हाथ चलाना शुरू कर दिया तो मैं भी मस्त होने लगा
काफ़ी देर की चूमा चाटी के बाद अब मैं उठा और उसकी टाँगो को बेड के किनारे पर फैलाते हुवे अपने चेहरे को उसकी योनि पर झुका लिया तो वो बोली छी मालिक क्या कर रहे हो गंदी जगह पर कोई मूह रखता है क्या तो मैने कहा लखन तेरी चूत को चाट ता नही है क्या , वो बोली जी मैने तो आज तक अपनी चूत नही चटवाई है मैने कहा फिर आज तू देख और मैने अपने होठ उसकी गरमा गरम चूत पर रख दिए
जैसे ही मैने अपनी लॅप लपाती हुवी जीभ उसकी नमकीन योनि पर फेरी उसके जिस्म मे तो भूचाल ही आ गया पुष्पा एक अंजाने से अहसास मे डूबती चली गयी थी उसकी टाँगे अपने आप चौड़ी होती चली गयी मीठा सा टेस्ट था उसकी रस से भरी चूत रूपी कटोरी का पुष्पा की सिसकारिया बाहर बरसती बारिस की टिप टिप मे डूबती चली गयी थोड़ी देर चूत को चाटने के बाद
मैने उसके दाने को अपने होटो मे दबा लिया तो बस अब उसके मूह से आहे ही फुट रही थी अपनी मांसल जाँघो को बेड पर पटकते हुवे वो मुझे अपनी चूत का रस पिलाए जा रही थी मैं भी उसे अच्छे से उत्तेजित करना चाहता था ताकि वो लाज शरम सब भूल जाए तो मैं दाने को चूस्ते चूस्ते चूत मे उंगली करने लगा तो पुष्पा का फिर खुद पे किसी भी तरह का काबू ना रहा
10-12 मिनिट तक टूट के मैं उसकी योनि को पीता रहा और फिर आख़िर उसका बदन ऐंठ गया और उसने अपने रस की नदी मेरे मूह मे छोड़ दी मैं चतकारे लेते हुवे उसकी चूत से रिस्ति छोटी से छोटी बूँद को भी पी गया फिर मैं उठा पुष्पा अपनी आँखे बंद किए बेड पर पड़ी थी मैं उसकी बगल मे लेट गया और उसको पूछा मज़ा आया वो बोली ज़िंदगी मे आज पहली बार चूत चटवाई है बड़ा ही मज़ा आया सुकून सा मिला है मुझे
मैं उसके बदन को सहलाने लगा तो थोड़ी देर मे ही वो फिर से गरम हो गयी तो मैने उसकी योनि पर अपने बेकाबू लंड को रखा और रगड़ने लगा और फिर एक धक्का लगाते हुए सुपाडे को अंदर पहुचा दिया पुष्पा दर्द से चीख पड़ी और बोली रुकिये ज़रा बहुत दर्द हो गया है ज़रा आराम से मैने कहा दर्द, वो बोली दो-ढाई साल बाद आज चुद रही हू
तो दर्द तो होगा ही ना मैने कहा बस एक मिनिट की बात है और एक तेज धक्का और लगा दिया अब आधा लंड उसकी बेहद ही तंग चूत मे घुसने लगा उसकी चूत का छेद लंड के हिसाब से फैल गया था वो जैसे तड़पने ही लगी तो मैने उसके होटो को अपने होटो से चिपका लिया और थोड़ा थोड़ा करके लंड को चूत मे डालने लगा कुछ देर की कोशिश के बाद आख़िर पूरा लंड अंदर हो ही गया
मेरा पूरा वजन उस पर पड़ गया था मैं लेटे लेटे उसके रसीले होटो का मदिरा पान करता रहा फिर करीब 5 बाद मैने अपनी कमर हिलानी शुरू कर दी थी अब तक उसकी चूत भी फैलकर लंड के साइज़ की हो गयी थी मैने अब उसके होठ छोड़े और कहा करूँ तो वो बोली धीरे धीरे करो और दर्द भरी आवाज़ निकालने लगी मैं उसकी गुलाबी चूचिको सहलाते हुवे
हल्के हल्के धक्को के साथ पुष्पा को चोदना शुरू किया मैं बोला तेरी चूत बहुत ही टाइट है लगता है जैसे कुँवारी कन्या हो तो वो शर्मा गयी और बोली कई सालो से चुदि नही हू तो टाइट हो गया है कुछ देर मे उसको भी मज़ा आने लगा वो मेरी पीठ को सहलाने लगी और फिर खुद ही मेरी गर्दन पर अपने दाँतों से काटने लगी बेड के नरम गद्दो पर हमारी मस्त चुदाई चालू हो गयी थी
ऐसी करारी चूत की क्या बताऊ बस भोग ता ही रहूं मैं उसको बाहर घनघोर बरसात और अंदर बेड पर वासना का तूफान लक्ष्मी तो पुष्पा के आगे कुछ भी नही थी पुष्पा तो खरा सोना निकली थी कोई बता ही नही सकती थी कि उसका बेटा 9थ मे पढ़ता होगा मैने उसकी दोनो टाँगे उपर कर दी और फिर उसकी लेने लगा पुषपा की सिसकारियाँ छत से टकराने लगी थी मैं खुद उसके जिस्म की गर्मी मे पिघलता जा रहा था
लंड पूरा उसकी चूत से रिस्ते काम रस मे गीला हो गया था और पच पुच करते हुवे चूत के अंदर बाहर हो रहा था पर जल्दी ही उसके बोझ से मैं थकने लगा तो मैं उसे बेड से उठा कर सोफे पर ले आया और उसको घोड़ी बना दिया सोफे पर उसकी बड़ी गान्ड और भी फूल गई तो मैं उसके कुल्हो को चूमने लगा और वो अपनी गान्ड को हिलाने लगी
अब चुदती चूत से अचानक से लंड बाहर निकाल लो तो कोई भी औरत अधीर हो गी ही पुष्पा बोली मालिक अब आप रुक क्यो गये जल्दी से डालो ना अंदर तो मैने उसकी बलखाती हुवी कमर को थामा और अपने नटखट लंड को चूत मे डाल दिया पुष्पा इस प्रहार से आगे की ओर को झुक गयी और फिर अपनी गान्ड को पीछे करते हुए चुदाई का लुत्फ़ उठाने लगी मैं तो खुद मस्ती के सागर मे डूबा पड़ा था
8-10 मिनिट तक मज़े से घोड़ी बनाके चोदने के बाद मैने उसे वही सोफे पर लिटा दिया और उसके उपर आकर चोदने लगा पुष्पा ने अपनी टाँगे मेरी कमर पर लपेट दी और आँखे बंद करके चुदाई का मज़ा ले ने लगी मैं अब पूरी ताक़त से उसको चोद रहा था बस अब आहे ही सुनाई दे रही थी और फिर कुछ देर बाद पुष्पा मुझसे किसी बच्चे की तरह चिपक गयी
और उसकी चूत की पंखुड़िया मेरे लंड पर दबाव डालने लगी उसका बदन झटके खाते हुवे झड़ने लगा पुष्पा फिर से अपने चरम की ओर अग्रसर हो गयी थी पर मैं अभी भी लगा हुवा था जब उसे थोड़ा होश आया तो वो बोली मालिक आप अपना पानी अंदर मत गिराना वो कह ही रही थी की मैने अपना लंड फॉरन छूट से बाहर खीचा और उसके पेट पर अपना गरम पानी गिरा दिया और उसकी बगल मे पड़ गया
कुछ देर बाद मैं उठा और अपनी निक्कर से उसके पेट को सॉफ किया पास रखे जग से पानी पिया और उसको भी गिलास भर के दिया फिर उसके पास लेट गया पुष्पा मेरे सीने पर अपना हाथ फिराते हुए बोली मालिक आज तो आपने मुझे ऐसा सुख दिया है जो ब्याह के पंद्रह साल मे कभी ना मिला और मेरे होंठो पर एक किस कर दिया
मैं उसकी चूची को सहलाते हुवे बोला पर तुम ऐसा क्यो कह रही थी कि दो ढाई साल बाद चुद रही हू तो वो बोली मालिक ये एक ऐसी बात है जो मैने किसी से नही बताई पर आपको बता ती हू कि दरअसल ढिल्लू के बापू एक बार काम पर थे तो लेंटार गिर गया था तो उनकी टाँगो पर काफ़ी चोट लगी थी तब से ही उनकी पॉरश शक्ति चली गई है तो फिर मैने भी अपनी इच्छा को मार लिया था
फिर आप आ गये और आज तो बस आपने मुझे अपनी गुलाम ही बना लिया है कसम मे मैं तो आपकी हो गई हू आज से मैने प्यार से उसके सर पर हाथ फेरा तो वो मेरे सीने से लग गयी मैने कहा तूने लंड चूसा है तो बोली ना जी पर आज आपका ज़रूर चुसुन्गि तो फिर वो उठी और मेरे लंड को अपने मूह मे ले लिया और अपनी जीभ को गोल गोल करके लंड पर फिराने लगी तो वो भी फिर से अपने रंग मे आने लगा 8-10 मिनिट तक वो अच्छे से लंड को चुस्ती रही
पूरा लंड उसके थूक से सना हुआ था उसने अब अपनी टाँगे फैलाई और बोली मालिक आ जाइए अपनी दासी को फिर से मज़ा दीजिए और मैं फिर से उसको चोदने लगा हम दोनो एक दूसरे की जीभ को पूरी मस्ती से जीभ को चूसे जा रहे थे कसम से ऐसी चुदाई करके मैं तो बड़ा ही खुश हो गया था अब मेरे हर धक्के का जवाब वो अपनी गान्ड को उचका उचका के दे रही थी ये चुदाई तो और भी लंबी हो गई थी उसका मादक जिस्म पल पल मेरे हार्मोंस को और भी आक्टिव करते जा रहा था
मैं दीवानों की तरह उसके गालो होटो गर्दन को चूमे जा रहा था पुशा के नाख़ून मेरी पीठ गर्दन मे धन्से जा रहे थे बड़ा ही मस्त आलम था उस कमरे के अंदर पता नही कितनी देर तक हम एक जिस्म हुए रहे पर हर शुरआत की तरह अंत भी होना ही था इस चुदाई का तो आख़िर मैने उसकी चूत को अपने पानी से भर दिया और फिर पता नही कब नींद ने हम दोनो को अपने आगोश मे ले लिया
अगली सुबह जब मैं उठा तो देखा कि बारिश रुक गयी थी पर पुष्पा नही थी पूछने पर पता चला कि वो घर गयी थी मैं बाहर आया तो देखा कि चंदा बरामदे मे पोछा लगा रही थी उसने साड़ी को जाँघो तक किया हुआ था तो ठोस जांघे जैसे निमंत्रण दे रही हो और फिर उसके ब्लाउज से बाहर को झाँकते आधे उभारों का तो कहना ही क्या सुबह सुबह ही मेरे लंड मे फिर से तनाव आने लगा
तो मैं उसको इग्नोर करते हुए बाथरूम मे घुस गया नहा कर आया तो वकील साहब आए थे उन्होने बताया कि ज़मीन पर क़ब्ज़ा ले लिया गया है बिना किसी परेशानी के पर वहाँ पर कई एकड़ मे अफ़ीम खड़ी है उसका क्या करना है मैने कहा या तो उसको उन्ही को दे दो या फिर जला दो मैं नही चाहता कि किसी को उसकी लत लगे फिर उसने बताया कि शहर मे भी एक मॅरेज हॉल है जो सालो से बंद पड़ा है कई पार्टी है उसको खरीदने को तैयार
और अच्छा ख़ासा पैसा भी मिल जाएगा अगर आप कहे तो मैं बात करू मैने कहा हाँ ठीक है आप देख लेना फिर कुछ हो तो मुझे बता देना बाप दादा इतना कुछ छोड़ गये थे कि मुझसे सम्भल ही नही रहा था मैं नाहरगढ़ जाना चाहता था एक बार पर राइचंद जी के दबाव की वजह से जा नही पा रहा था लंच ख़तम किया ही था कि थाने से इनस्पेक्टर साहब आ गये
मैने आने का सबब पूछा तो उन्होने बताया कि ठाकुर साहब बात दरअसल ये है कि कुछ दिनो मे बलदेव का मेला लगेगा तो दोनो गाँवो के लोग मेला देखने आएँगे मैने कहा फिर उसमे क्या है जो रीत है उसे चलने दो वो बोला आप पहले मेरी बात सुने ज़रा , बात ये है कि पुराने जमाने मे रीत चली आ रही है कि ठाकूरो की तरफ से देवता को बलि दी जाती है
बरसो से आपके पुरखे ये परंपरा निभा रहे थे फिर जब हवेली मे वो घटना हुवी तो उसके बाद से विजय स्वरूप नाहरगढ़ के ठाकूरो ने बलि देना शुरू कर दिया मैने कहा तो फिर मैं क्या करूँ वो बोला आप समझ नही रहे है अब हालत पहले जैसे नही है अब आप आ गये है तो आपका अधिकार है वो पर उधर से वो लोग भी ज़िद करेंगे तो कही शांति-व्यवस्था बिगड़ ना जाए
मैने कहा आप की ज़िमेदारी है सुरक्षा की आप अपना काम कीजिए वो बोला क्यो मज़ाक करते है ठाकुर साहब अब आप लोगो के सामने हमारी क्या चलती है बस आपसे गुज़ारिश है कि मामले को बिगड़ने ना देना मैने कहा ठीक है देखता हू क्या कर सकता हू इनस्पेक्टर के जाने के बाद मैं सोचने लगा मुझे मोका मिल गया था अपने रिश्तेदारो से आमना सामना करने का
मैने लक्ष्मी को तुरंत बुलावा भेजा और कुछ देर बाद वो मेरे साथ थी मैने कहा मेला लगने वाला है तो हमारी तरफ से देवता को कुछ भेंट चढ़ाई जाए वो सुकचाते हुवे बोली देव तो आख़िर तुम्हे पता चल ही गया पर हम ऐसा नही कर सकते अगर तुम वहाँ जाओगे तो तुम्हे दुश्मनो की चुनोती स्वीकार करनी पड़ेगी और अभी तुम पूरी तरह से ठीक नही हुए हो
मैने कहा तुम ज़ख़्मो की चिंता ना करो और वैसे भी ज़ख़्म तो क्षत्रियो का गहना होता है तुम आज शाम ही गाँव मे मुनादी करवा दो कि इस बार देवता को बलि ठाकुर देवराज सिंग चढ़ाएँगे लक्ष्मी बोली सोच लो देव ये बात मज़ाक की नही है बल्कि प्रतिष्ठा की है अगर तुम कामयाब ना हुए तो अर्जुनगढ़ का सर झुक जाएगा मैने कहा जो होगा देख लेंगे
फिर मैने गाँव से सुनार को बुलवाया और कहा कि देवता को सोने का छात्र चढ़ाएँगे इंतज़ाम करो , और हलवाई को महा प्रसाद बनाने का हुकम दिया अब मुझे इंतज़ार था बस मेले के दिन का जो अभी थोड़ा दूर था शाम को मैं नदी किनारे बैठा था तो दिल्लू आया बोला हुकुम आप इस बार बलि चढ़ाने वाले है मैने कहा हाँ तो वो बोला ये बड़ा अच्छा किया आपने वरना हर बार हमे शर्मिंदा होना पड़ता है उनके सामने मैने कहा इस बार नही होगा तू
तो वो मुस्कुराया और मेरे ही बैठ गया वो बोला आप रोज यहाँ आते है मैने कहा नही जब मैं उदास होता हू तभी इधर आता हू उस से बाते करते अंधेरा सा होने लगा था तो फिर वो बोला मैं अब चलता हू घर पर मैं उधर ही बैठा रहा सच तो था कि मुझे ये अकेला पन काट ता था कभी कभी तो मन मे आता था कि सब कुछ बेच कर मैं वापिस लंदन चला जाउ पर अब तो जीना भी यही और मरना भी यही पर
फिर मैं भी हवेली आ गया , डिन्नर मे अभी देर थी तो मैं उपर की तरफ चला गया आज मैने एक और कमरे को खोल दिया और समान को देखने लगा तो मुझे एक अलमारी मे गहनो के कई बॉक्स मिले सोने चाँदी हीरे हर तरह की ज्वेल्लरी थी उसमे मैने फिर उनको साइड मे रख दिया और वहाँ दीवारों टन्गी तलवारो को देखने लगा
कुछ अब वक़्त की रेत के असर से जंग खा गयी थी और कुछ ऐसी थी जैसे बस आज ही खरीदी गयी हो एक तो बड़ी ही सुन्दर थी चाँदी की मूठ वाली मैने उसे मेज पर रख दिया फिर एक अलमारी मे कुछ तस्वीरे निकली जो अब बस नाम की ही रह गयी थी मैं उन्हे देखने लगा पर कुछ समझ नही आया क्योंकि वो काफ़ी पुरानी थी पर थी तो मेरे अपनो की ही
फिर दरवाजे पर दस्तक हुवी तो मैने देखा कि पुष्पा थी वो बोली मालिक भोजन तैयार हो गया है आप को बुलाने आई थी मैने कहा ज़रा इधर आओ और उसको वो गहने दिखाते हुवे कहा कि जो भी तुम्हे पसंद आए रख लो कुछ लम्हो के लिए तो वो गहनों को देख कर मंत्रमुग्ध हो गयी पर फिर बॉक्स को वापिस रखते हुवे बोली नही मालिक मुझे कुछ नही चाहिए
मैने उसे बार बार कहा पर उसने नही लिए तो फिर हम नीचे आ गये डिन्नर के बाद वो बोली मालिक दूध ले लीजिए मैने कहा बैठो ज़रा और उस से बाते करने लगा मैने पुष्पा से पूछा कि मुनीम जी और उनके परिवार के बारे मे बता कुछ तो वो बोली मैं क्या बताऊ मैने कहा जैसे कि गाव के लोगो के प्रति उनका व्यवहार कैसा है , जब मैं नही था तो हवेली वो ही तो संभालते थे ना बस इसी लिए पूछ रहा हू
वो बताने लगी कि मुनीम जी तो भले मानस है पर लक्ष्मी बड़ी ही तेज औरत है , हरदम बस रोब झाड़ती रहती है और कई औरतो से उसका लड़ाई झगड़ा चलता ही रहता है तो गाँव के कम लोग ही उसके मूह लगते है कभी किसी ने मुनीम जी से सूद पर रुपया ले लिया और टाइम पर ना दे सका तो फिर बस लक्ष्मी के ड्रामे देखो ना जाने कितने ग़रीबो की ज़मीन दबा कर बैठी है
और बेटी के बारे मे तो आप जानते ही है मैने कहा हाँ तो वो बोली पर एक बात और है जो आपको नही पता मैने कहा क्या बता ओ ज़रा तो वो बोली मुनीम जी का एक बेटा भी है जो बाहर कहीं पर पढ़ाई करता है सुना है कि वकील का कोर्स कर रहा है मैने कहा यार पर उन्होने तो कभी बताया नही इस बारे मे , पुष्पा बोली मालिक लक्ष्मी बड़ी ही घाग औरत है मैं तो बस इतना ही कहूँगी कि आप उसे ज़्यादा मूह ना लगा ना जब से मुनीम जी खाट मे पड़े है लक्ष्मी के तो सुर ही बदल गये है
मैने कहा ठीक है मैं ध्यान रखूँगा पर अभी तू मेरा ध्यान रख और उसको अपनी गोद मे उठा लिया तो वो बोली मालिक वैसे तो मेरी हसियत नही है कि मैं आपको मना कर सकूँ पर मैं चाहती हू कि मेले के बाद जब आप विजयी होकर आए तो मैं आप के साथ सोऊ मैने कहा ठीक है तेरी फरमाइश है तो पूरी करनी ही पड़ेगी तो फिर वो रसोई मे चली गयी और मैं सोचने लगा कि कही मेरे मामा लोग कोई साजिश तो नही बुन रहे मेरे खिलाफ
पर जो भी था अब इंतज़ार था मेले के दिन का मैने सब कुछ उपर वाले के हाथ मे छोड़ दिया पर हक़ तो मेरा ही था ना बलि देने का मैं कुछ उलझ सा गया था अपने ही सवालो के घेरे मे पर ऐसा कोई था नही जो मुझे मेरे सवालो के जवाब दे सके तो बस यही सब सोचते सोचते मैं सो गया
दो दिन बस उधेड़बुन मे ही निकल गये और आख़िर वो दिन आ ही गया मेरी तरफ से सब तैयारी पक्की थी मेले वाले दिन मैने तड़के महादेव मंदिर मे पूजा की और महादेव जी से आशीर्वाद लिया आज तो जैसे सारा गाँव ही आरती मे उमड़ आया था हालाँकि मुझे अंदर ही अंदर घबराहट हो रही थी पर शायद ठाकूरो का खून मेरी नसों मे उबलने लगा था
मैने आज कुर्ता और धोती पहनी थी जिसमे बड़ा ही तेजस्वी लग रहा था ऐसा लक्ष्मी ने मुझे बताया था तो फिर मैं चल पड़ा वन्देव के मेले मे अब सुबह सुबह ही थी तो इतनी भीड़ भी नही थी पर मंदिर के कपाट खुले हुवे थे मैं मंदिर के अंदर गया और पुजारी को अपना परिचय दिया और अपने आने का उद्देश्य बताया तो वो कुछ सकुचाते हुए से बोले कि ठाकुर साहब नाहरगढ़ के लोग अब इस परंपरा को निभा रहे है
मैने कहा पर हक़ तो मेरा है ना तो फिर वो कुछ नही बोले मैने कहा आप बलि की तैयारी करवाईए अब पुजारी की कहाँ इतनी हिम्मत कि वो मुझे मना कर सके तो आख़िर मंदिर मे तूत्नि बज ही गयी ये संकेत था कि देवता के लिए बलि की तैयारिया शुरू हो गयी है आस पास के सारे इलाक़े मे इसी बात को लेकर बड़ा ही कौतूहल था तो धीरे धीरे पूरा प्रांगण ही भीड़ से भरता चला गया
ये बात मुझे भी महसूस हुई कि मेले मे लोगो का ध्यान ना होकर बस इसी बात मे था कि बलि कॉन चढ़ाएगा लक्ष्मी मेरे पास आई और बोली कि देव ना जाने क्यो मेरा मन बड़ा ही घबरा रहा है कल रात से मैने कहा तुम ऐसे ही टेन्षन ले रही हो सब ठीक ही होगा मैं और लक्ष्मी बाते कर ही रहे थे कि तभी एक सेव्ड सफ़ारी गाड़ी मंदिर की सीढ़ियो पर आकर रुकी
और एक मेरी ही उमर का नोजवान बड़े ही गुस्से मे उतरा और चीखते हुए बोला कि कॉन है देव ठाकुर जो यहाँ आया है अपना शीश दान करने मैने लक्ष्मी को पीछे किया और तेज तेज कदमो से सीढ़िया उतरने लगा और उसके सामने जाकर खड़ा हो गया मैने कहा मैं ही हूँ देव, और तू जो भी है तमीज़ से ठाकुर साहब बोल तो उसने अपनी बंदूक मेरे सीने से सटा दी और बोला तू मुझे तमीज़ सिखाएगा जानता भी है कि मैं कॉन हू
मैने शांत स्वर मे कहा बंदूक को हटा ले अगर तुझे चलानी होती तो आते ही सीधा फाइयर कर देता और वैसे भी ये देख कि तेरे सामने कॉन खड़ा है तो वो झुंझलाते हुवे बोला कि म मैं नाहरगढ़ का युवराज हू मैने कहा अच्छा तो तू है अफ़ीम की खेती वाला मेरा फार्महाउस तो चुपचाप वापिस कर गया था जा आज देवता का दिन है चला जा कहीं ऐसा ना हो कि देव के हाथो कुछ ग़लत हो जाए
तभी वो हंसता हुवा बोला तकदीर वाला हूँ जो कि अर्जुनगढ़ के आख़िरी ठाकुर का खून बहाने का सोभाग्य मुझेही मिलेगा आज तू देखना ये आसमान भी रुदन करेगा और मरने से पहले तू ज़रूर ये महसूस करेगा की कैसे मेरे खानदान ने तेरे घरवालो को तडपा तडपा कर के मारा था आज फिर से इतिहास दोहरा या जाएगा वो चीखते हुवे बोला कि गाँव वालो
आज अर्जुन गढ़ का आख़िरी ठाकुर भी हलाल हो जाएगा क्या किसी ने इसे नही बताया था कि कैसे इसके चाचा का सर काट कर हम ने दरवाजे पर टांक दिया था मैं ही बचा हुआ था पर आज इसको मारकर मैं भी अपना पराक्रम साबित कर दूँगा उसकी बाते सुनकर मेरे जिस्म का अंग अंग गुस्से से फड़कने लगा था , क्रोध की ज्वाला से मैं जलने लगा था
मैने एक मुक्का उसके मूह पर दे मारा तो वो पीछे की ओर फीक गया और ठीक उसी पल मैं उसकी छाती पर सवार हो गया और उसके चेहरे पर मुक्को की बरसात कर दी मेरी आँखो मे जैसे खून सा उतर आया था पर उस टाइम वो झड़प कुछ ही देर मे ख़तम हो गयी क्योंकि थानेदार साहब ने हम को अलग कर दिया पोलीस हमारे बीच आ गयी थी मैने कहा कसम है महादेव जी की बलि तो मैं ही चढ़ाउंगा और कोई रोक सके तो रोक ले ये ठाकुर देव की ज़बान है अगर नाहरगढ़ मे किसी माँ ने कोई सूरमा पैदा किया है तो आए देव की तलवार आज बरसो की प्यास को बुझाएगी क्रोध से मेरा अंग अंग कांप रहा था थानेदार मुझे समझाते हुए बोला ठाकुर साहब मेरी विनती है आप बात को ना बढ़ाइए इतनी फोर्स भी नही है और फिर लड़ाई का काला माथा आप जाने दीजिए ,मैने कहा ना जी ना अब तो जो होगा वो होकर ही रहेगा ये साला इतिहास को दोहराएगा ये हवेली की शान मे गुस्ताख़ी करेगा मुझे पता ही नही था कि गुस्से मे मैं क्या क्या बोल रहा था
तभी कुछ और गाडिया आकर रुकी तो मेरा ध्यान उधर ही चला गया तो मैने देखा कि गाड़ी से एक पुरुष और महिला उतरी तो लक्ष्मी मेरे पास दौड़ते हुए आई और बोली देव तुम्हारे मामा और मामी जी है बेशक दुश्मन है पर तुम पहली बार मिल रहे हो तो थोड़ा जज्बातो पर काबू रखना
मामा मामी के चेहरे तेज से चमक रहे थे वो सीढ़िया चढ़ते हुए मेरी ही ओर आ रहे थे थानेदार ने उनको सलाम ठोका और बोला वो ठाकुर साहब वो वो ………… ………….. …….. तो उन्होने अपना हाथ उठा कर उसे चुप करवा दिया और सीधा मुझसे मुखातिब होते हुए बोले देव…….. आँखे ही तरस गयी थी तुम्हारी एक झलक देखने को और उन्होने अपना हाथ मेरे सर पे रख दिया तो मैने लक्ष्मी की तरफ देखा उसने मुझे शांत रहने को इशारा किया मामा बोले देव बिल्कुल ही अपने पिता की तरह दिखते हो बस आँखे तुम्हारी माँ जैसी है, पता तो लग गया था कि तुम आ गये हो, कब से इच्छा थी कि तुम्हे देखें पर आ ही नही सके पर मैं शांत खड़ा रहा तभी पुजारी ने आकर कहा कि बलि का समय हो गया है
मैने कहा चलिए पुजारी जी, और मैं दो कदम ही बढ़ा था कि पीछे से किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रख कर रोक लिया , मैं मुड़ा तो मामा जी ने कहा कि रूको देव बलि चढ़ाने का हक़ तुम्हारा नही है बल्कि तुम्हारे भाई का है और अपने बेटे को बुला लिया मैने उनका हाथ अपने कंधे से हटाया और उनकी आँखो मे देखते हुवे बोला कि मामा जी बलि तो मैं ही चढ़ाउंगा बाकी आप जाने
मामा बोले बच्चे ज़िद नही करते जाओ लौट जाओ मैने कहा देव को बात दोहराने की आदत नही है बलि तो आज ठाकुर वीरभान का बेटा ही चढ़ाएगा किसी मे दम है तो रोक ले तो उन्होने कहा तो फिर ठीक है आज फ़ैसला हो ही जाएगा दोनो घरानो के युवराज इधर ही है तो फिर हो ही जाए मुक़ाबला ज़रा हम भी तो देखे की हवेली के अंतिम चिराग मे कितनी लौ बाकी है
ना जाने क्यो उसकी बात मुझे चुभ सी गयी, मैने कहा ममाजी अब भी समय है कदम पीछे हटा लो वरना फिर मुझे दोष ना देना तो वो बोले कल के लोंडे हो और फिर तुम्हे पता ही क्या है , मैने कहा तो फिर ठीक है हो ने दो जो होता है तो ये तय हो गया कि मल्लयुध मे जो जीतेगा वो ही बलि चढ़ाने का अधिकार पाएगा पुजारी ने हम दोनो योधाओ का तिलक किया
और फिर शुरू हो गया मुक़ाबला जो किसी एक के रक़्त से ही ठंडा होना था मामा की उपहास उड़ाती नज़रे मेरे दिल मे घाव करती चली गयी और मेरा गुस्सा बढ़ने लगा मुकाबला बराबर का सा ही था ताक़त मे वो मेरे जैसा ही था पर बस मैं उस से लंबाई मे कुछ ज़्यादा था कभी वो प्रहार करे कभी मैं मेरा ज़रा सा ध्यान भटका और उसने ऐसा प्रहार किया मेरे पेट मे कि बस मैं तो बुरी तरह से तड़प कर ही रह गया आँखो के आगे तारे नाच गये और मैं ज़मीन पर गिर पड़ा तो उसने कई लात मेरी कॉल मे लगा दी मैं दर्द से दोहरा होता चला गया उसने मुझे खड़ा किया और दना दन 4-5 मुक्के नाक पर जड़ दिए तो नाक फट गयी और खून का फव्वारा बह चला नाहरगढ़ के लोग जय जय कर करने लगे जब थोड़ा सा दर्द कम हुआ तो मैं उसके प्रहारो को रोकने लगा
अब मेरी बारी थी तो मैं उसे पीटने लगा उसके कान को फाड़ दिया मैने तो वो भी चीत्कार करने लगा मैने उसकी छाती मे लात मारी तो वो दूर जा गिरा और तड़पने लगा मेरी नाक से बहता खून मेरे गुस्से को और भी भड़का रहा था तो मेरा दिमाग़ बुरी तरह से खराब हो गया मैने उसको फिर लात और घूँसो से धर लिया और उसकी फुटबॉल बना दी मैने मामा जी के चेहरे पर घबराहट के भाव देखे अब बारी थी अर्जुनगढ़ के लोगो की जयकारा लगाने की
मेरे मन मे आई कि चल छोड़ अब साले को कहीं मर ना जाए पता नही उस एक पल को कैसे मेरे मन मे दया आ गयी और ठीक उसी पल उस कमीने ने धोखा करते हुए मेरी आँखो मे धूल गिरा दी तो मैं रेत आँखो मे जाते ही तड़प उठा कुछ देर के लिए मैं तो जैसे अँधा ही हो गया उसी पल का लाभ उठाते हुवे उसने तलवार ले ली और फिर मेरी पीठ पर वार कर दिया
मेरे गले से एक तेज चीख उबल पड़ी और मेरी पीठ पर एक लंबा घाव होता चला गया एक तो आँखो से कुछ दिख नही रहा था और दूसरी तरफ उसके पास पूरा मोका था अगला वार मेरे पाँव पर हुवा और मैं धरती पर गिर पड़ा लगा कि जैसे टाँग तो कट ही गयी मेरी फिर कुछ लाते और पड़ी मुझ पर तो मेरी घिग्गी बँध गयी वो अट्टहास करता हुआ बोला देखो गाँव वालो ये है ठाकूरो का वारिस दो पल मे ही ढेर हो गया ये लेगा बदला अपने परिवार का ये आया है देखो इसे
उसने अपना पाँव मेरी छाती पर रख दिया और मुझे मसल्ते हुवे बोला देव ठाकुर बड़ा दंभ भर रहे थे तुम बड़ी गाथा गा रहे थे तुम क्या हुआ निकल गयी सारी हेकड़ी तू तो शेर की खाल मे बकरी निकला रे कुछ तो जख़्मो का दर्द और कुछ आँखो मे तेज जलन हो रही थी मैने कहा हे महादेव जी लाज रखना मेरी अब तो आप ही मदद करो मालिक
उसने फिर से मुझ पर वार किया तो लगा कि जैसे किसी ने छाती मे मिर्च भर दी हो मैं बुरी तरह से दर्द से बिलबियाने लगा उसने कुछ मुक्के लात और बरसाए मुझ पर और फिर मुझे उठा कर फेक दिया और बस यही पर देवता की कृपा हो गयी मुझ पर जब उसने मुझे फेका तो मैं पशुओ के लिए बनाई गयी पानी की खेली मे जा गिरा और आँखो का कचरा पानी ने सॉफ कर दिया
मैं महादेव जी कि जय बोलता हुवा पानी से बाहर आया बदन तो जैसे दर्द से बिखर ही रहा था पर मैं उस दर्द को पी ही गया उसकी कही हर एक बात मेरे प्रतिशोध की अग्नि को धधका रही थी जैसे ही उसने अबकी बार तलवार लहराई मैने उसका हाथ पकड़ लिया और दूसरे हाथ से एक घूँसा उसकी पसलियो मे जड़ दिया तलवार उसके हाथ से छूट गयी तो मैने उठा ली
अगले ही पल मैने उसकी कलाई पर वार किया तो खून की धारा बह निकली मैने रुदन किया और उसको उठा कर पटक दिया और उसके उपर टूट पड़ा मैने कहा धनंजय उठ आज तू देखे गा कि नरक की यातना कैसी होती है आज तू साक्षात मृत्युदेव को अपनी आँखो से देखे गा मैं उसकी छाती पर चढ़ गया और बस मारता ही रहा उसको मारता ही रहा उसकी छाती को फाड़ दिया मैने रक्त उसके पूरे जिस्म से बह रहा था पर प्राण अभी बाकी थे उसके
रक्त तो मेरे ज़ख़्मो से भी काफ़ी बह रहा था पर अब मुझे किसी भी जख्म की कोई परवाह नही थी मैने उसकी टाँग पकड़ी और उसे घसीट ते हुए मंदिर की सीढ़िया चढ़ने लगा और मैं मंदिर मे आ ही गया अब मैने तलवार उठाई और भयनकर रुदन करते हुवे बोला धनंजय आँखे खोल देख देव ठाकुर आज तेरे सर की बलि चढ़ाएगा देख कमिने उठ मैने उसको लात मारी और कहा साले उठ , उठता क्यो नही आँखे खोल मैं बस उसका सर काटने ही वाला था कि
मेरी मामी भागते हुए आई और मेरे पैरो मे गिर गयी और रोते हुवे बोली देव, बेटे रुक जाओ , भगवान के लिए रुक जाओ इसे बख्स दो भाई है ये तुम्हारा मैं तुमसे माफी मांगती हू एक माँ तुमसे अपने बेटे के प्राणो की भीख मांगती है , उसने अपना आँचल मेरे पाँवो मे फैला दिया पता नही मुझे क्या हुआ मैने कहा ले जाओ इसे और आगे से कह देना इस से कि अपनी हद मे रहे
देव का नाहरगढ़ पर ये एहसान है वातावरण मे एक अलग सा ही डर सा छा गया था मैने चिल्लाते हुवे पुजारी से कहा कि आओ और बलि दने की रस्म को पूरा कर्वाओ तो उसने तुरंत ही मंत्रोचारण शुरू कर दिया और मैने बलि चढ़ा दी
पर हालत मेरी भी कुछ ज़्यादा अच्छी नही थी तो बस फिर लक्ष्मी ने मुझे संभाला और हवेली ले आई डॉक्टर पहले ही आ चुका था उसने घाव को सॉफ किया और कुछ घाव पर टाँके लगाए और कुछ पर दवाई लगा कर पट्टी बाँध दी वो बोला शूकर है ठाकुर साहब ज़ख़्म ज़्यादा गहरे नही है पर पाँव मे जो घाव लगा है उसका विशेष तोर पर ध्यान रखना और अभी कुछ दिन आराम ही करे आप तो बेहतर रहेगा
डॉक्टर के जाने के बाद लक्ष्मी बोली देव, जो भी हुआ अच्छा नही हुआ अब हमे और भी चोकस रहना होगा आज तुमने बरसो से दबी चिंगारी को हवा दे दी है भगवान ही जाने अब क्या होगा मैं तुम्हारी सुरक्षा को और भी चोकस करवा देती हू आज से ही कम से कम 20-30 लोग तो हमेशा ही तुम्हारी सुरक्षा मे रहेंगे मैने कहा फिलहाल इसकी ज़रूरत नही है तुम बस मेरा एक काम करो
थोड़ी देर मेरे साथ यू ही रहो मुझे दर्द हो रहा है तुम साथ रहोगी तो आराम रहेगा तो लक्ष्मी बोली देव अभी मुझे जाना होगा मुनीम जी सुबह से ही अकेले है और तुम तो जानते ही हो कि आजकल उनकी तबीयत भी ठीक नही रहती है पर मैं जल्दी ही वापिस आ जाउन्गी मैने कहा ठीक है लक्ष्मी के जाते ही थोड़ी देर बाद पुष्पा हल्दी वाला दूध ले आई बोली मालिक इसे पी लीजिए आराम मिलेगा
मैं दूध पीने लगा वो वही पर बैठ गयी और बोली हुकुम मेरा तो दिल ही निकल आया था आज जब आप की पीठ पर तलवार का वार हुआ था मैने कहा छोटी सी चोट है ठीक हो जाएगी वो बोली मालिक पूरी पीठ इतनी गहरी चिर गयी है और आप कह रहे है कि छोटी सी है बड़े ही जीवट वाले है आप
मैं हल्का सा मुस्कुरा दिया पर उस मुस्कान मे भी दर्द था जिसे मैं छुपा ना सका
मैने कहा पुष्पा , जब बिन माँगे उन लोगो ने मेरी ज़मीन वापिस कर दी तो फिर बलि को लेकर ऐसा क्यो हुआ इस घटना से मैं उलझ सा गया हू तो पुष्पा बोली मालिक मैने भी एक बात पर गोर किया कि मंदिर मे आपके छोटे मामा और उनका परिवार ही था पर बड़े वाले ठाकुर नही दिख रहे थे , मैने कहा उनसे बड़े भी हैं क्या वो बोले हम उनका नाम राजेंदर है
मैने कहा हो सकता है कि कुछ गड़बड़ हो पर इन सवालो के जवाब आख़िर है कहाँ वो बोली मालिक अब मैं क्या जानू मैने कहा पुष्पा तू कुछ दिन इधर ही ठहर जाएगी क्या तो वो बोली ये भी कोई कहने की बात है क्या जब तक आप की सेहत सुधर नही जाती मैं इधर ही हू आपकी सेवा मे दिन रात तो दोस्तो 6-7 दिन गुजर गये इलाज जारी था पर उस दोपहर कुछ अलग ही हो गया
मैं खाना खा कर आराम ही कर रहा था कि पुष्पा भागते हुए आई और बोली कि हुकुम ज़रा बाहर आइए मैने कहा क्या हुआ क्यो परेशान कर रही हो तो पुष्पा हान्फते हुवे बोली कि मालिक वो वो आपके बड़े मामा और मामी आए है मैने कहा पर वो यहाँ क्यो आए है तो वो बोली मालिक गाड़ी गेट पर ही रुकी है कहो तो वापिस कर दूं मैने कहा अरे ना रे , घर पे आया दुश्मन भी मेहमान होता है
तो उनको आदर से मेहमान खाने मे बिठाया जाए और अच्छे से उनके लिए जलपान की व्यवस्था की जाए अब वो खुद चल कर आए है तो मेहमान नवाज़ी तो बनती ही है और बाहर से बाबा को बुला लाओ ताकि वो मुझे मेहमान खाने तक ले चले तो वो सर हिलाते हुवे बाहर चली गयी और फिर बाबा की सहायता से मैं भी मेहमान खाने मे आ गया मामा राजेंदर बड़े ही ओजस्वी थे गर्व जैसे साक्षात झलक रहा था उनके मुख से और वैसा ही तेज मामी जी का था
मैने हाथ जोड़ कर उनको प्रणाम किया और सोफे पर बैठ गया उनसे ये पहली मुलाकात थी तो मैं थोड़ा सा नर्वस सा हो रहा था मामी उठी और प्यार से मेरे सर पर हाथ फेर कर बोली देव अब तबीयत कैसी है तुम्हारी मैने कहा जी ज़ख़्म ताज़ा है तो बस दर्द ही होता रहता है पर उम्मीद है जल्दी ही भर जाएँगे तभी उनका ड्राइवर और हमारे दो आदमी कई सारी मिठाइयो के डब्बे और उपहार ले आए
मामा बोले देव ये कुछ भेंट है तुम्हारे लिए मैने कहा अरे इसकी क्या ज़रूरत थी तो वो बोले अब बहन के घर आए है तो खाली हाथ कैसे आ सकता था तभी पुष्पा नाश्ता लेकर आ गयी तो मैने उन्हे नाश्ता करने को कहा सच बताऊ तो पहली नज़र मे बड़े ही सज्जन से लगे मुझे तो फिर नाश्ते के बाद फिर से बातों का सिलसिला शुरू हो गया वो बोले
सूचना तो कई दिन पहले ही मिल गयी थी कि तुम विलायत से वापिस आ गये हो पर फ़ुर्सत ही ना मिली कुछ कामो मे इतना उलझे पड़े थे कि बस चाहकर भी तुमसे मिलने आ ही ना सके पर आज तुम्हारी मामी का भी मन था तो हम खुद को रोक ना सके बिल्कुल तुम्हारे पिता से ही लगते हो तुम मैने पूछा धनंजय कैसा है तो वो बोले ठीक है अब हालत मे सुधार है पर 2-3 महीने तो हस्पताल मे लग ही जाएँगे
मैने कहा माफी चाहता हू उसकी हालत का ज़िम्मेदार मैं ही पर क्या करू हालात ही कुछ ऐसे हो गये थे , तो वो बोले जो हुआ सो हुआ उस दिन हमें अर्जेंट बाहर जाना पड़ा वरना ऐसा कुछ होता ही नही मामा जी बोले देव हमे पता चला था कि पहले भी तुम पर हमला हुआ था हम ने अपनी तरफ से भी खोज करवाई थी पर कुछ हाथ ना लगा मैने कहा जाने दीजिए वो बात अब पुरानी हो गयी
और वैसे भी छोटी मोटी बाते तो चलती ही रहती है तो वो बोले बेटा अब तुम्हे पुरानी बातों का तो सब पता चल ही गया होगा तो मैं बस इतना ही कहना चाहूँगा कि अतीत के बारे मे हम जितना सोचेंगे वो उतना ही हमें दुख देगा और फिर तुम या हम कोई भी चाहकर अतीत को नही बदल सकता है ना झुटला सकता है बस उसे भूलने की कोशिश ही कर सकते है
और फिर तुम तो हमारी बहन की एक्लोति निशानी हो तो अगर तुम्हारी इजाज़त हो तो कभी कभी आ जाया करेंगे तुमसे बात करने को तो हमारा पाप भी कुछ कम हो जाएगा बल्कि हम तो ये भी कहेंगे कि हमारा घर भी तो तुम्हारा ही है जब भी दिल करे आ जाना सदा इंतज़ार रहे गा तुम्हारा मैं मुस्कुरा दिया मैने बाहर से एक आदमी को बुलवाया
और कहा कि पुष्पा से जाकर कहो कि महमानों के लिए उच्च स्तर के पकवान और लज़ीज़ भोजन तैयार किया जाए तो वो लोग मना करने लगे तो मैने कहा आज पहली बार हवेली मे मेरे रहते मेहमान आए है आपको भोजन तो करके ही जाना पड़ेगा तो फिर वो मेरा आग्रह टाल ना सके तो इसी तरह उन लोगो से बाते करते हुवे ना जाने का सांझ ढाल गयी पता ही नही चला
जाते जाते मामा ने मुझसे वादा लिया कि जल्दी ही मैं भी नाहरगढ़ आऊ तो मैने भी हाँ कह ही दी वापिस आकर मैं लेट सा गया काफ़ी देर सोफे पर बैठने के कारण कुछ दर्द सा होने लगा था पुष्पा बोली हुकुम जो मिठाइया वो लोग लाए थे उनको बाहर फिकवा दूं क्या मैने कहा किसलिए तो वो कहने लगी क्या पता जहर मिला दिया हो उन लोगो का आप बिल्कुल भरोसा ना करे
मैने कहा अरे पगली ऐसा कुछ नही होता तू इतनी फिकर ना किया कर वो बोली मालिक अगर आप की इजाज़त हो तो थोड़ी देर ढिल्लू के बापू से मिल आऊ कई दिन हो गये है मैने कहा चली जाना पूछने की बात क्या है इसमे जब भी तेरा दिल करे चली जाया कर तो वो मुस्कुराती हुई चली गयी मुझे भी भूक तो थी नही तो मैं भी फिर बस सो गया
अगली सुबह मैं नाश्ता कर ही रहा था कि गोरी आ गयी मिलने मैने कहा क्या बात है तुम तो भूल ही गयी हो तो उसने बताया कि उसकी अर्ध वार्षिक परीक्षाएँ थी पर अब वो फ्री है मैने कहा आओ तो नाश्ता कर लो वो बोली मैं घर से खा कर आई हूँ माँ ने ये कुछ घी भेजा है तुम्हारे लिए मैने कहा पुष्पा को दे आ तो गोरी रसोई मे चली गयी मैने भी ऑलमोस्ट अपना नाश्ता ख़तम कर ही लिया था
फिर मैं और गोरी दोनो बगीचे मे आ गये ठंड थी तो आज मैने सोचा कि गोरी से बाते भी कर लूँगा और धूप भी सेंक लूँगा गोरी बोली मेले वाले दिन क्या ज़रूरत थी इतना खून ख़राबा करने की अब पड़े हो कितनी चोट लगी है मैने कहा चोट तो लगी है पर तुझे एक पल भी याद ना आई तूने तो पराया ही कर दिया है रे
गोरी,- अरे बताया तो सही ना कि मैं पढ़ाई को लेकर व्यास थी और फिर माँ तो बताती ही रहती है घर पर
देव- ज़्यादा बाते ना बना माँ को भी तो कितने दिन हो चले है आई ही नही इधर
तो वो बोली देव क्या बताऊ पिताजी की तबीयत तो तुम जानते ही हो ना जाने किसकी है हमारी खुशियो को लग गयी है
देव – गोरी, तू चिंता ना कर सब ठीक हो जाएगा
गोरी- चलो वो सब छोड़ो और बताओ कि अब तबीयत कैसी है
देव- ठीक ही है बस चलने फिरने मे
कभी कभी तकलीफ़ होती है बाकी कुछ ज़ख़्म भर गये है , कुछ भर जाएँगे
हम बात कर ही रहे थे कि पुष्पा आई और बोली- हुकुम दवाई लगाने का समय हो गया है तो गोरी बोली तुम जाओ मैं लगा दूँगी दवाई तो पुष्पा ने गहरी नज़रो से उसको देखा और फिर चली गयी और मैं और गोरी वापिस कमरे मे आ गये