पूजा दीदी-“मम्मी, मेरे ससुराल में इनके एक अंकल हैं, जो आर्मी में थे, अकेले रहते हैं। वो अक्सर मुझे घूरते रहते हैं। और कभी-कभी गंदे-गंदे इशारे भी करते हैं। मैंने इनको कहा तो इन्होंने कहा-पूजा, ये तो अच्छा है की तुम उनको लिफ्ट दो और उनके साथ हम बिस्तर होकर बच्चा पैदा करो…”
मम्मी-“तो फिर तूने क्या सोचा? अगर वो तैयार है तो तुझे क्या दिक्कत है? इससे तुझे मर्द का सुख भी मिलेगा और शायद तुझे उनसे बच्चा भी हो जाए…”
पूजा दीदी-“मम्मी वो सब तो ठीक है की उनके साथ सेक्स करके मुझे ये सब मिलेगा। पर सोचो अगर ये बात मेरे ससुराल में पता चल गई तो कितनी बदनामी होगी? वहां सब मुझे एक बदचलन औरत कहेंगे। इसे वो सब इनका कसूर नहीं, बल्की मुझे ही वेश्या समझेंगे…”
मम्मी-“ये बात तो तेरी ठीक है… तो फिर ये सब कैसे होगा?”
पूजा दीदी-“मम्मी, मैंने इनसे कहा था की अगर आप चाहें तो मैं आपके किसी दोस्त के साथ संबंध बनाकर बच्चा पैदा कर सकती हूँ। ये उसके लिए मान भी गये थे, पर जो इन्होंने मुझसे कहा की अगर मैं इनके किसी दोस्त के साथ संबंध बनाती हूँ तो हम लोग कितनी बड़ी मुश्किल में फँस सकते हैं…”
मम्मी-“मुश्किल? वो कैसी? बेटी, अगर तुम किसी और से संबंध बनाती हो और दामाद जी भी यही चाहते हैं तो फिर कैसी मुश्किल? इससे तो तुम लोगों को फ़ायदा ही होगा। एक तो तेरी जिंदगी में मर्द की कमी पूरी हो जाएगी, और दूसरा तुम्हारी लाइफ में बच्चे की जो कमी है वो भी पूरी हो जाएगी…”
पूजा दीदी-“हाँ मम्मी, मुझे उसके साथ संबंध बनाने के ये फ़ायदे तो हैं। पर सोचो इससे बड़ा नुकसान भी है। मम्मी, अगर मैं इनके किसी दोस्त से सेक्स करती हूँ तो वो आदमी कभी किसी और के सामने ये बोल सकता है की यार (रमेश) की बीवी मुझसे फँसी हुई है, मेरी रखैल है, मैं रोज उसकी लेता हूँ। और हो सकता है की मुझे चोदने के बाद वो मुझे अपने दोस्तों से भी चुदवाए। रोज मुझे नये-नये मर्दों के नीचे लिटाए। और इसकी क्या गारन्टी है कि अगर मैं उसके बच्चे की माँ बन जाऊँ तो कल को वो उसे अपना बच्चा कहकर हमसे छीन भी सकता है। उस हालत में हम क्या करेंगे?”
मम्मी-“ये बात तो ठीक है बेटी, फिर क्या करोगे तुम लोग?”
पूजा दीदी-“मम्मी, ये तो कह रहे थे कि हम कहीं आउट स्टेशन चलते हैं। वहां पर किसी वेटर से या फिर ये किसी आटो ड्राइवर को बुलाकर मुझे पेट से करवा देंगे। पर मैं किसी लो क्लास आदमी का बच्चा पैदा नहीं करूँगी, इसके लिए मैंने इन्हें एक लड़के का नाम बताया, जिसे सुनकर ये झट से तैयार हो गये। अब पता नहीं वो लड़का तैयार होता भी है या नहीं, मुझे माँ बनाने के लिए? इन्होंने तो मुझसे वादा भी लिया है कि अगर वो लड़का तैयार नहीं हुआ मुझे माँ बनाने के लिए तो मुझे मजबूरन इनकी बात मान कर आउटस्टेशन जाकर किसी वेटर या किसी ड्राइवर से चुदवाकर माँ बनना पड़ेगा…”
मम्मी-“पूजा, आख़िर कौन है वो लड़का, जिसके साथ तू सेक्स करके माँ बनना चाहती है? और तूने ये क्या कहा कि अगर वो तुझसे सेक्स करने को नहीं माना तो? आख़िरकार वो लड़का क्यों नहीं मानेगा? तू खूबसूरत है सेक्सी है, मैं जहाँ तक जानती हूँ की तेरी एक झलक पाने के लिए लड़के तो क्या बुड्ढे भी घर के बाहर लाइन लगाकर खड़े रहते थे। आख़िर उस लड़के का नाम क्या है?”
पूजा दीदी-“दीपूउ…”
मम्मी-“क्या दीपू? तेरा दिमाग़ तो खराब नहीं हो गया? जानती भी है, तू क्या बोल रही है? दीपू तेरा भाई है…
”
पूजा दीदी-“हाँ मम्मी, जानती हूँ कि दीपू मेरा भाई है और मैं ये भी जानती हूँ कि इसके लिए दीपू ज़रूर राज़ी हो जाएगा और जहाँ तक मैं सोचती हूँ, दीपू तो खुशी के मारे पागल हो जाएगा और फिर पूजा मम्मी को दीपू और उसके बीच क्या-क्या हुआ था सब बताती है।
जिसे सुनकर मम्मी के चेहरे पर हल्की सी स्माइल आ जाती है। मम्मी-“पूजा, इसका मतलब की जिस बच्चे की तू माँ बनेगी, मैं उस बच्चे की नानी की बनूंगी और उस बच्चे की दादी भी बनूंगी…” और फिर दोनों आपस में ऐसे ही बातें करती रहती हैं।
मैं और जीजू ऐसे ही बातें करते-करते घर पहुँच गये। जीजू मुझे अपने रूम में खींच रहे थे, दीदी पहले ही अपने रूम में उनका इंतेजार कर रही थी। जब मैं जीजू को पकड़कर उनके रूम में छोड़ने गया तो दीदी सवालिया नज़रों से मेरी ओर देखने लगी। लेकिन मैं जीजू को रूम में छोड़कर बाहर निकल आया। मेरे अंदर दीदी को गुस्से से चोदने की प्लानिंग बन रही थी, और मैं मन ही मन सोच रहा की अब साली को ऐसे चोदूंगा की साली जिंदगी भर याद रखेगी।
दीदी के लिये मैं 3-4 साल तड़पा था। पुरानी हवस और गुस्सा था मेरे अंदर, मैंने अपने रूम में जाकर अपनी दराज़ खोला और उसमें पड़ी दूज-14000 डिले स्प्रे की बोतल चेक की, जो ¼ भरी थी, यह मेरी फ़ेवरेट डिले स्प्रे थी, कुछ खास-खास मोके पे ही मैं इसे इस्तेमाल करता था।
जिस दिन किसी की बहुत गुस्से से चुदाई करनी हो या बहुत देर तक चोदना हो तो मैं 10 मिनट पहले इसको अपने लण्ड के सुपाड़े पे स्प्रे कर लेता हूँ, फिर 30-60 मिनट तक तो गारन्टी के साथ मेरा पानी नहीं निकलता और लड़की का इस दौरान 3-4 बार पानी निकल जाता है और वो लड़की मुझसे मिन्नतें करती है की बस कर अब वो सहन नहीं कर सकती। मैं जैसे चाहूं वैसे आराम से चुदाई कर सकता हूँ, इतना टाइम लगने के बाद भी मुझे लण्ड का पानी निकालने के लिए बहुत जोर- जोर से तेज चुदाई करनी पड़ती है।
मैं अपनी इस स्प्रे को कल के लिए तैयार करने लगा, ताकि मैं कल जब इस स्प्रे को लगाकर दीदी की चुदाई करूं तो वो मेरी मर्दानगी के पीछे मर मिटे । उसकी चीखों से पूरा कमरा गूँज उठे। फिर जब मैंने बेड पे लेटकर अपनी आँखें बंद की तो सामने दीदी की सेक्सी फिगर घूमने लगी, पूजा दीदी की मस्त बड़ी-बड़ी टाइट चूचियां गोल मटोल उभरी उठी हुई गाण्ड, सब मेरी आँखों के सामने आ रहा था।
मैंने इतनी पी हुई थी की नशा होने के वाबजूद भी नींद नहीं आ रही थी, आने वाले कल के बारे में सोचकर खुशी भी हो रही थी और गुस्सा भी आ रहा था, कि जब मेरा लण्ड तरस रहा था तब तो मेरी रंडी बहन ने मेरी एक ना सुनी, और अब अपनी गाण्ड फटने लगी है तो दीपू भैया याद आ गया। दिल कर रहा था कि मूठ मारकर हल्का हो जाऊँ। लेकिन मैं करीब एक महीने से रुका हुआ अपने लण्ड का कीमती माल बरबाद नहीं करना चाहता था। अब मैं अपना ये कीमती लण्ड का माल पूजा दीदी के जिश्म के अंदर ही डालना चाहता था, और अपने अंदर की पूरी आग दीदी को दिखाने के लिए यह रोकना ज़रूरी भी था। मेरे मन में अभी से बेचैनी थी दीदी को चोदने की।
मैंने देखा कि दीदी बाहर मम्मी के साथ अभी बातें कर रही थी और कल आउटस्टेशन पर जाने की तैयारी कर रही थी। कुछ देर बाद दीदी उठी और सीधा जीजू के पास रूम में गई और जीजू से उत्सुकता से पूछने लगी-“क्या हुआ, दीपू ने क्या कहा? क्या वो मान गया मुझे माँ बनाने के लिए?”
जीजू-“हाँ पूजा दीपू मान गया है, अरे उसका लण्ड तो अभी से खड़ा हो गया था तुझे चोदकर माँ बनाने के लिये। तू देखना कल वो तेरी ऐसी चुदाई करेगा की सब कुछ भूल जाओगी, वो अपनी बरसों की हसरत तेरी चूत फाड़कर निकालेगा। मुझे नहीं लगता की वो तुम्हें अगले 3 दिन में एक पल के लिए भी आराम करने देगा। वो बस तुझे इन तीन दिनों तक कभी तेरी आगे से और कभी तेरी पीछे से फाड़ता रहेगा, हर टाइम तुझे अपने लण्ड पर चढ़ाकर है रखेगा। और मुझे पूरा यकीन है की इन तीन दिनों में तुम दीपू से चुदवाकर माँ ज़रूर बन जाओगी।
पूजा दीदी-“मैं तो कब से जानती थी की दीपू मुझे चोदने का ये हसीन मोका कभी हाथ से जाने नहीं देगा। ये तो उसकी लाइफ की सबसे बड़ी खुशखबरी होगी की मैं पूजा, उसकी बहन, जिसे वो बचपन से चोदना चाहता था और जिसके नाम पर ना जाने उसने कितनी बार अपने लण्ड का पानी निकाला होगा, आज खुद उससे चुदवाकर उस पर मेहरबानी कर रही हूँ…” पूजा दीदी को अपने इस रूप और हुश्न पर घमंड था।
फिर वो जीजू की ओर देखकर बोली-“देखना कल मैं दीपू को अपनी जवानी के ऐसे जलवे दिखाऊूँगी की वो सारी उमर मेरे तलवे चाटता रहेगा, मेरे पीछे दुम हिलाता रहेगा…”
पूजा दीदी की ये बात सुनकर मुझे बड़ा गुस्सा आया की साली की इतना गरूर है अपने इस जिश्म पर। कल देखना इस साली कुतिया को मैं ऐसे चोदूंगा कि साली खुद तड़पेगी मुझसे चुदवाने को। इस साली को रंडी की तरह चोद-चोदकर इसकी चूत का भोसड़ा ना बनाया तो मेरा भी नाम दीपू नहीं। कल ये खुद मुझसे भीख माँगेगी कि प्लीज़… दीपू, मैं मर जाऊँगी। दारू पीने की वजह से अगले दिन सुबह मैं काफ़ी देर से उठा। दीदी सुबह बहुत जल्दी ही उठ गई थी और दीदी ने अपनी बाडी को पूरी तरह से वेक्स कर लिया था। जीजू और दीदी अपना सामान कार में रख रहे थे।
मैं शावर करके नीचे आया तो मम्मी के सामने जीजू ने दीदी से कहा-“पूजा, क्यों ना हम दीपक को भी साथ ले चलें?”
दीदी-“हाँ… आपको ड्राइविंग में भी हेल्प हो जायेगी…” यह कहते हुये दीदी मेरे और जीजू के बीच में खड़ी जीजू को स्माइल दे रही थी, उसने जींस और टाइट टाप के साथ काले चश्मे को सर के खुले बालों पे चढ़ा रखा था। फिर अपना सैंडल ठीक करने के बहाने जानबूझकर मेरे सामने झुक गई, जिससे दीदी का टाइट टाप ऊपर सरक गया और जींस भी थोड़ा नीचे, दीदी की गोरी कमर और गुलाबी पैंटी की इलास्टिक मुझे नज़र आने लगी वो मेरे सामने एकदम डोगी स्टाइल में झुक के अपना सैंडल ठीक कर रही थी, उसके बड़े-बड़े गोल मटोल चूतड़ मुझे अपनी तरफ खींच रहे थे, जैसे कह रहे हों कि दीपक आओ, अब डाल भी दो ना अपना लण्ड मुझसे अब और बर्दास्त नहीं होता।
कुछ भी हो दीदी साली शादी के दो साल बाद भी मेरे दिल पे राज कर रही थी, शादी के बाद उसके जिश्म में कोई खास फरक नहीं पड़ा था, वो आज भी सेक्सी फिट थी।
फिर जीजू मेरी तरफ देखते हुए बोले-“दीपक, जल्दी से अपना सामान तैयार करके आ जाओ, हमें आधे घंटे के अंदर शिमला निकलना है, जाते ड्राइव तुम करोगे और आते हुए मैं करूँगा या फिर आधी-आधी कर लेते हैं…”
वो दोनों ऐसा शो कर रहे थे कि वो दोनों ही जा रहे हैं, फिर मेरे जाने का अचानक प्रोग्राम बन गया ड्राइविंग की वजह से।
मैंने कहा-“जीजू, आप लोग जाओ मेरी तबीयत ठीक नहीं है…”
यह सुनते ही दीदी हैरान हो गई और खेल उल्टा घूमते देखकर दीदी ने आकर मुझे दाईं बाँह से पकड़ लिया और बहुत अच्छे तरीके से अपने चूचियों को छुआते हुए मेरा हाथ अपने दोनों हाथों में पकड़कर बोली-“दीपूउउ, प्लीज़्ज़… चलो ना मेरे अच्छे भैया…”
फिर मुझे छोड़कर मम्मी के पास चली गई और बोली-“मम्मी, आप बोलो ना दीपू को कि हमारे साथ चले, हमें आराम हो जायगा…”
मम्मी भी मुझे जाने के लिये बोलने लगी और मम्मी ने कहा-“जा दीपू चला जा, अगर तुम्हारी दीदी कह रही है तो दीदी की बात मना मत कर। दीदी की सेवा करेगा तो तुझे इसका फल अच्छा मिलेगा…” और मम्मी मेरी ओर देखकर फिर पूजा दीदी की ओर देखकर मुश्कुराने लगी।
मम्मी के इतना बोलने पर भी मैं कुछ ना बोला और दीदी से हाथ छुड़ाकर ऊपर अपने रूम में चला गया।
मुझे इस तरह बर्ताव करता देखकर दीदी का चेहरा उतर गया और वो मेरे पीछे-पीछे ऊपर कमरे में आ गई। और कमरे में आकर मेरा हाथ पकड़कर बोली-“क्या हुआ दीपू, तू क्यों नहीं चल रहा हमारे साथ?”
मैं-“दीदी, मैं आपके साथ इसलिए नहीं चल रहा की आप नहीं जानती की जीजू मुझसे क्या चाहते हैं…” और मैं इतना कहकर चुप हो गया।
पूजा दीदी-“मैं सब जानती हूँ, क्या तू ये नहीं चाहता?”
मैं-“नहीं दीदी, आप कुछ नहीं जानती…”
पूजा-“अरे बाबा, मैंने कहा ना मैं सब जानती हूँ…”
मैं-“अच्छा… अगर आप सब जानती हैं तो बताओ फिर कि जीजू ने मुझसे क्या कहा?”
तो इस पर दीदी थोड़ा मुश्कुराते हुए बोली-“ मैं जानती हूँ की तू हमारे साथ चलकर मुझे माँ बना देगा…”
मैं-“दीदी, मैं ये सब नहीं कर सकता। आप सब बड़ी मतलबी हैं…” अब मैं अपना निशाना सीधा दीदी पर लगाना चाहता था।
पूजा दीदी-“ये तू क्या कह रहा है दीपू?”
मैं-“और नहीं तो क्या? आप चाहती हैं कि मैं आपको चोदकर, आपको माँ बना दूं और फिर आप मुझसे माँ बनकर चली जाएंगी, फिर मेरा क्या होगा? मैं तो फिर उसी तरह तड़पता रहूंगा। आप तो मुझे फिर हाथ नहीं लगाने देंगी। ये तो वोही बात हुई कि आपका मतलब हुआ तो आपने मुझे इस्तेमाल कर लिया…”
पूजा दीदी मेरे गले में अपनी बहे डालकर, और मेरी आँखों में देखकर-“ये तुझे किसने कहा की माँ बनने के बाद मैं तुझे अपने बदन पर हाथ नहीं लगाने दूंगी। अगर तुम मुझे अपने बच्चे की माँ बनाओगे तो तुम भी तो उसके पिता बनागे। मेरे अच्छे भैया, जो मर्द किसी लड़की को माँ बनने का सुख देता है वो लड़की उस मर्द को कभी नहीं भूल सकती, वो मर्द उस औरत के लिए देवता होता है, उसके दिल पर वो मर्द राज करता है। आज से ये सब अधिकार मैं तुम्हें देती हूँ। मेरे इस बदन, मेरी आत्मा, मेरे हर एक अंग-अंग के तुम स्वामी हो। मैं तुम्हारे चरणों की दासी हूँ। मैंने तुम्हें इतने सालों तक दुख दिया शायद ये उसी की सज़ा है। अब तुम मुझे अपनी दासी, बीवी, रखैल, कुछ भी बनाकर रखोम मुझे मंजूर होगा। तुमको दुख देकर मेरे नसीब में देखो की मैं दो साल शादी हो जाने पर भी अभी औरत नहीं बनी, शादी शुदा होते हुए भी कुँवारी हूँ…”
पूजा दीदी की दर्द भरी बातें सुनकर मैंने पूजा दीदी को अपनी बाहों में कस लिया और फिर अपने होंठ दीदी के नाज़ुक लाल होंठों पर रख दिया और अपना हाथ नीचे ले जाते हुए दीदी की बड़ी-बड़ी गाण्ड पर रख दिए। मैं दीदी के होंठों को अपने होंठों में दबाकर चूसता रहा और दीदी भी मेरे चुंबन के जवाब में मेरे होंठों को चूस रही थी और मैं दीदी के होंठों को चूस रहा था और साथ ही साथ दीदी की बड़ी गाण्ड को सहला रहा था। दीदी की आँखें मस्ती में बंद थीं।
तभी मैंने दीदी के होंठों को अपने होंठों से अलग किया। जैसे ही मैंने अपने होंठों को दीदी के होंठों से अलग किया, दीदी जैसे नींद से जागी। मैंने दीदी की आँखों में अपनी आँखें डालकर कहा-“दीदी, आज मैं तुम्हें पूरी औरत बना दूंगा, एक कच्ची कली से पूरा फूल बना दूंगा, और उस फूल की खुशबू सिर्फ़ मेरे लिए ही होगी…”
मेरी बातें सुनकर दीदी की आँखें शर्म से झुक गईं और फिर दीदी मेरी बाहों से निकलकर नीचे भाग गई।
तो मैंने दीदी की कलाई को पकड़कर अपनी ओर खींच लिया। दीदी मेरी सीने से टकराई और मैंने पूजा दीदी को अपनी बाहों में भर लिया और उसकी गाण्ड पर जोर-जोर से थप्पड़ मारते हुए मुश्कुराते हुए पूछने लगा-“फिर आज तुम अपने भैया को अपना सैंया बनाओगी, तो बताओ ना फिर जो दुनियाँ के सामने तुम्हारा सैंया है, उसे क्या भैया बनाओगी?”
तो दीदी भी मेरे गले में बाहें डालते हुए बोली-“जो तेरी मर्ज़ी हो, उसे बना डालना…”
अब मैं भी दीदी की आँखों में आँखें डालकर मुश्कुराते हुए पूछने लगा-“क्या तुमको लगता है की मेरा ‘वो’ तुमको संतुष्ट कर पाएगा? मेरा छोटा सा तो है…”
इस पर दीदी टपक से बोली-“छोटा और तेरा? मुझे तो लगता है की मेरी तो फाड़ ही देगा…”
तो मैंने दीदी की चुटकी लेते हुये कहा-“अच्छा तो तुमको अभी भी मेरा वो याद है?”
दीदी शर्मा गई और मेरी बाहों से निकलकर भाग गई।
फिर मम्मी के कहने पे मैं तैयार हो गया। मैं भी तो ड्रामा ही कर रहा था। सारी रात तो में दीदी को चोदने की प्लानिंग करता रहा था। मैंने अपने सारे कपड़े और डिले स्प्रे वगैरा सब पहले से ही तैयार किया हुआ था, बस बैग उठाकर कार में रखना था। जाइनली मैं ड्राइविंग सीट पे जा बैठा, जीजू मेरे साथ आगे की सीट पर और मेरी कुतिया बहन पीछे वाली सीट पे थी। रोड पे ड्राइविंग करते हुये भी मेरे दिमाग़ में दीदी के जिश्म के बारे में सोच-सोचकर लड्डू फूट रहे थे।
जैसे ही सिटी से बाहर निकले, तभी जीजू ने मुझसे कहा-“दीपू, लाओ मैं ड्राइविंग करता हूँ…”
जीजू की बात सुनकर मैंने कहा-“नहीं आप रहने दीजिए जीजू, मैं करता हूँ…”
तभी जीजू ने कहा-“चल यार छोड़, मैं ड्राइविंग करता हूँ और तू पीछे जाकर उस कुतिया की ड्राइविंग कर, साली कब से इंतेजार कर रही है की कब तू आएगा और इस कुतिया के मस्त बदन की सवारी करेगा…”
जीजू की बात सुनकर मैं मुश्कुराता हुआ ड्राइविंग सीट से उठा और पीछे जाकर दीदी के बगल में बैठ गया। मैं अपना हाथ दीदी के गले में डालकर दीदी के नरम गालों को सहलाता हुआ जीजू से बात करने लगा।
जीजू गाड़ी चलाते हुए हुए मुझसे बोले-“दीपू देख ले, तुम्हारी दीदी बिल्कुल वैसे ही है जैसे पहले थी…”
मैं दीदी की चूचियों को टाप के ऊपर से सहलाते हुए बोला-“जीजू, लगता है आपने ज्यादा मेहनत दीदी की चूचियों पर ही की है…”
इससे पहले कि जीजू कुछ बोलते, दीदी बोल पड़ी-“बस इन्होंने मेहनत इनपर ही की है और कही नहीं की…”
दीदी की बात सुनकर मैं पूजा दीदी को अपनी बाहों में समेटते हुए उसके होंठों को चूमते हुए बोला-“मेरी जान, चिंता क्यों करती हो, जीजू ने अगर तुम्हारी चूचियों पर मेहनत की है तो हम नीचे मेहनत कर लेंगे…”
दीदी की बात सुनकर जीजू को थोड़ा गुस्सा आया और वो मुझसे बोले-“दीपू, आज इस कुतिया को ऐसे चोदना की साली चीखती रहे। आज तू इसकी चूत का भोसड़ा बना दे, साली की चूत की सारी आग ठंडी कर दे…”
मैं-“जीजू आप चिंता ना करो, आज मैं इसको ऐसे चोदूंगा कि ये चिल्लायेगी-प्लीज़… मुझे बचाओ, मैं मर जाऊँगी, निकाल लो मेरी चूत से लण्ड, आगे से कभी भी कुछ नहीं कहूंगी…”
मेरी बात सुनकर दीदी ने शर्म और स्माइल के साथ अपनी आँखें नीची कर ली। पूरे रास्ते मैं दीदी के होंठों को चूमता रहा, कभी दीदी की चूची को मसलता रहा, और दीदी सारे रास्ते मेरे लण्ड को सहलाती रही। और जीजू को मुझसे अपनी बीवी यानी दीदी को चुदवाने की जल्दी थी इसलिये शायद कार की स्पीड अपने आप तेज हो रही थी, 4 घंटे का सफ़र 3 घंटे में पूरा कर लिया।
हम शिमला पहुँचे तो जीजू ने होटेल में मुझे और दीदी को पति-पत्नी के रूप में बताया और खुद को दीदी के भाई के रूप में बताकर दो रूम लिए। अब जब जीजू ने यहां पर मुझे और दीदी को मियाँ-बीवी और अपने को दीदी का भाई बताया तो इस तरह से अब जीजू मेरे साले बन गये। हम दोनों रूम की चाबियाँ लेकर रूम में चले गये।
रूम में जाते ही दीदी बोली-“भाई, मुझे तो पहले नहाना है, मैं फ्रेश होकर आती हूँ…” यह कहते हुए दीदी अपने बैग से कुछ कपड़े निकालकर टायलेट की तरफ चली गई।
हम दोनों जीजा साला बेड पे बैठ गये फिर जीजू बोले-“कम ओन दीपक, अब शरमाना छोड़ो यार… हम घर से बहुत दूर हैं अब। देखा मुझे पता थाकि तुम दोनों अकेले कुछ नहीं कर पाओगे, इसीलिये मुझे तुम लोगों को शुरूवाती प्रोत्साहन देना ज़रूरी था…” यह कहते हुये जीजू ने बैग से पीटर स्कॉच की बोतल निकाल ली।
फिर फ़ोन उठाकर काउंटर से कुछ ऑर्डर करने लगे। फिर जीजू ने दो डिस्पोजल ग्लास निकालकर उनको आधा व्हिस्की से भर दिया और दीदी की आधी पी और बाकी आधी पड़ी पेप्सी की बोतल से पेप्सी मिक्स कर ली फिर बोले-“उठा यार, और बच्चों की तरह मत पीना, एक ही बार में खतम कर, चीयर्स…”
हम दोनों ने ग्लास उठाई और खाली करके रख दी।
फिर जीजू बोले-“तुम्हारी दीदी तो आइस के बिना पीती नहीं और आइस और बाकी सामान का ऑर्डर आने में अभी पता नहीं कितना टाइम लगेगा? हमसे तो इंतेजार नहीं होता भाई, सामान आने तक तो अपना पूरा मूड बन चुका होगा…”
लग रहा था कि आज जीजू मुझे शराबी बनाने के चक्कर में थे, उन्होंने दूसरा पेग भी काफ़ी स्ट्रांग बना लिया था। हम कुछ देर बैठे रहे फिर जीजू बोले-“दीपक, तू कपड़े चेंज कर ले, शॉर्टस वगैरा पहन ले…”
फिर शरारत में आँख दबाकर इशारा करते हुये बोले-“वैसे कपड़ों की ज़रूरत तो पड़ेगी नहीं, चाहे तो तू नंगा ही रह…”
फिर झट से हम दोनों की नज़र दूसरी तरफ पलटी, तो सामने दीदी टायलेट की तरफ से आ रही थी। हे भगवान्, दीदी ने स्काइ ब्लू कलर की पतली सिल्की नाइटी पहनी थी, नाइटी बस घुटनों से ऊपर तक ही थी, उसकी गोरी लंबी टांगें तो सॉफ-सॉफ नज़र आ ही रही थीं, लेकिन चलकर आने से उसके गोरी-गोरी गोल-गोल जांघें भी नज़र आ रही थीं। ओिफ्र्फ… ऊपर से व्हिस्की का नशा, मेरा लण्ड थकावट के वाबजूद भी खड़ा होना शुरू हो गया था। साली कितनी सेक्सी लग रही थी, नाइटी का गला नीचे तक खुला था, जिससे डाकद कलर की नाइटी में दोनों चूचियां बाहर झाँकती कितनी सेक्सी लग रही थीं। ब्रा ना पहनी होने के कारण दोनों निप्पल्स ने पतली नाइटी को ऊपर उठा रखा था, यानी नाइटी से तीखे निपल बाहर झाँकने की कोशिश कर रहे थे। मेरा दिल चाह रहा था कि मैं अभी ही दीदी पे झपट पड़ूं, लेकिन जीजू की वजह से मैं चुप था।
मुझे ऐसे देखते देखकर जीजू काफ़ी खुश लग रहे थे, मुझे ऐसा लग रहा था जैसे दीदी जीजू ने यह सब करके मुझे गरम करने की पहले ही प्लानिंग कर रखी थी। वो मेरी तरफ देखकर बोले-“दीपक, अब शरमाना छोड़ो यार, और तुम भी चेंज कर लो…”
मुझे ऐसे देखते देखकर जीजू काफ़ी खुश लग रहे थे, मुझे ऐसा लग रहा था जैसे दीदी जीजू ने यह सब करके मुझे गरम करने की पहले ही प्लानिंग कर रखी थी। वो मेरी तरफ देखकर बोले-“दीपक, अब शरमाना छोड़ो यार, और तुम भी चेंज कर लो…”
मैंने कहा-“मैं भी पहले नहा लूँ…”
दीदी हम दोनों के पास आकर बैठ गई। मैंने अपना दूसरा पेग भी खतम किया और धीरे से अपनी डिले स्प्रे, शॉर्टस और टी-शर्ट निकालकर नहाने चला गया, और टायलेट में जाते ही मैंने पहले अपनी डिले स्प्रे निकालकर अपने खड़े लण्ड के सुपाड़े पे स्प्रे किया, क्योंकि मुझे पता था कि मैं दीदी के जिश्म का भूखा था, और कहीं ऐसा ना हो कि उसके नंगे सेक्सी जिश्म को देखकर ही मेरी पिचकारी निकल जाये। अच्छी तरह से अपने लण्ड की टोपी पे स्प्रे करने के बाद मैंने नहाना शुरू कर दिया और 10 मिनट के बाद जब मेरा लण्ड स्प्रे की वजह से पत्थर जैसा सख्त हो गया तो मैं शॉर्ट और टी-शर्ट में बाहर निकल आया।
बाहर दीदी और जीजू के सामने टेबल पे एक ट्रे पड़ी थी जिसमें व्हिस्की में आइस से भरे तीन काँच के गिलास और कुछ खाने का सामान, आइस, सोडा, और पेप्सी वगैरा पड़ा हुआ था, शायद मेरे पीछे वेटर ऑर्डर दे गया था। दीदी जीजू के करीब बैठी थी और जीजू का दायां हाथ दीदी की जांघों पे रेंग रहा था। मेरा लण्ड शॉर्टस में तना हुआ था। इस बार भी मैंने शॉर्टस की पाकेट में हाथ डालकर उसको दबाया हुआ था, मैं उनके पास आकर बैठ गया।
दीदी और जीजू ने अपने-अपने ग्लास उठाये और मुझे भी उठाने के लिये इशारा किया। हम तीनों ने चीयर्स किया और सिप करने लगे। दीदी मुझसे नज़र नहीं मिला रही थी, लेकिन उसने अपना एक हाथ मेरी जांघों पे रखकर मसाज करना शुरू कर दिया। फिर जीजू बेड से उठकर दीदी की टांगों के बीच फर्श पे बैठ गये और उसकी टांगों को फैलाकर नाइटी को पीछे हटाकर धीरे-धीरे दीदी के घुटनों को चूमते हुए ऊपर दीदी की चूत की तरफ जाने लगे।
दीदी की दोनों जांघों को कुछ देर चूमने के बाद उठकर खड़े हो गये और अपने कपड़े उतारने लगे। फिर अपना व्हिस्की का ग्लास उठाकर खतम कर दिया और हम दोनों को भी खतम करने के लिये बोलने लगे। जीजू के जिश्म पे सिर्फ़ अंडरवेर थी, वो ऐसे ही दीदी के सामने खड़े हो गये।
मैं बैठा सब देख रहा था।
दीदी बाहर से ही उनकी अंडरवेर के ऊपर से ही उनके लण्ड को पकड़कर सहलाने लगी, लेकिन मुझसे नज़र चुरा रही थी, जैसे इस रूम में वो दोनों ही थे।
जीजू ने मेरी तरफ गर्दन घुमाई और बोले-“कम ओन दीपक यार, अभी तक व्हिस्की ने भी असर नहीं किया क्या? दारू पीकर तो सब माँ-बहन भी सेक्सी लगने लगती हैं, और तुम अभी भी शर्मा रहे हो?”
फिर वो मेरी तरफ पलटे और मेरी शॉर्टस में हाथ डालते हुए उन्होंने मेरे लण्ड को बाहर निकालते हुए कहा-“लगता है मुझे ही सब करना पड़ेगा?”
मेरा लण्ड बाहर आते ही उनके मुँह से निकला-“यार तुम्हारा हथियार तो मुझसे भी बड़ा लग रहा है…” फिर मुझे बाँह से पकड़ते हुए खड़ा होने के लिये बोले .
मैं उनके साथ ही दीदी के सामने खड़ा हो गया, मेरा शॉर्टस मेरी कमर से थोड़ा नीचे था और मेरा खड़ा लण्ड शॉर्टस से बाहर था। दीदी ने जीजू की अंडरवेर के अंदर अपना हाथ डालकर उनके लण्ड को बाहर निकाल लिया और मेरा अंडरवेर नीचे खींच दी, अब मेरा खड़ा लण्ड दीदी के मुँह के बिल्कुल सामने था।
मेरा ध्यान जीजू के लण्ड की तरफ गया, उनका लण्ड 3” से 4” लंबा, लेकिन पतला था। मेरा लण्ड उनके मुकाबले काफ़ी मोटा था और लंबाई तकरीबन 8” थी। दीदी जीजू की आँखों में देख रही थी।
तभी जीजू बोले-“कम ओन बेबी, गेट हिम रेडी, गिव हिम रियली नाइस ब्लो जाब, ऐसे चूसना, ऐसा कुछ करना कि हम सब रिश्ते भूल जायें और यह ट्रिप यादगार बन जाये…”
दीदी ने हम दोनों के लण्ड को अपने दोनों हाथों में पकड़ा और हिलाने लगी। आज पहली बार दीदी ने मेरे लण्ड को अपनी मर्ज़ी से अपने नाज़ुक हाथों में पकड़ा था। मैं लिख नहीं सकता कि उस वक़्त मुझे कैसी फीलिंग हो रही थी। दीदी बैठे-बैठे हम दोनों के लण्ड से खेलने लगी। फिर जीजू का सिग्नल मिलते ही दीदी ने अपना मुँह खोलकर मेरा लण्ड अपने मुँह में डालकर अंदर गले तक ले गई। वो अपने दोनों हाथ मेरे चूतड़ों पे रखकर उसे दबाने लगी। मेरा 8” से भी बड़ा और मोटा लण्ड दीदी के मुँह में पूरा समा चुका था, और दीदी उसको और अपने मुँह के अंदर पुश करने की कोशिश कर रही थी। पता नहीं ऐसा अनुभव उसे कहाँ से मिला? शायद जीजू ने ही उसे ट्रेंड किया होगा।
कुछ देर मेरा लण्ड दीदी के मुँह के अंदर ही रहा, मैं हैरान था कि उसका इतना स्टैमना कैसे बन गया? इतनी देर तक सांस रोकना कौन सी आसान बात है। मैं उड़ने लगा था, मेरा लण्ड और भी सख्त होता चला गया। थैंक गोड कि मैंने अपने लण्ड पे डिले स्प्रे लगा रखा था जिससे मेरे लण्ड को दीदी के मुँह की गर्मी का कुछ खास फरक नहीं पड़ा, नहीं तो अब तक 100% मेरे लण्ड से पिचकारी दीदी के मुँह में ही छूट जानी थी।
व्हिस्की भी अब हम तीनों पे अपना असर खूब दिखाने लगी थी, मैं सोच रहा था कि जीजू के सामने शर्म करने का ड्रामा भी अब खतम कर दूं। फिर झटके से दीदी ने अपने मुँह से मेरा लण्ड बाहर निकाला और हाँफने लगी। मेरा लण्ड पहले से बड़े नज़र आ रहा था, उसपे लगा दीदी का सलाइवा नीचे फर्श की तरफ टपक रहा था। मेरी आँखों में कामुकता देखकर जीजू मुश्कुरा रहे थे। फिर उन्होंने दीदी की नाइटी के गले से अंदर हाथ डालकर उसकी चूची को मसलना शुरू कर दिया।
दीदी ने एक हाथ में मेरा लण्ड पकड़ा था और दूसरे से जीजू का लण्ड पकड़कर उसपे अपनी जीभ फिराना शुरू कर दिया। दीदी के दोनों हाथ और मुँह पूरा बिजी थे। क्या नशारा था… मेरी बहन किसी रंडी से कम नज़र नहीं आ रही थी। कोठे की रंडी भी इतनी मस्ती से अपने यार का लण्ड नहीं चूसती, जितना मेरी बहन मेरा चूस रही थी।
जीजू मेरी तरफ देखते हुये बोले-“दीपू यार, मैं पूजा को कभी संतुष्ट नहीं कर पाया, पता नहीं क्यों मैं जल्दी डिस्चार्ज हो जाता हूँ? व्हिस्की पीने से फिर भी थोड़ा टाइम लग जाता है लेकिन बिना पिए तो बस 5 मिनट भी नहीं लगते, बस पूजा के हाथ लगते ही मेरा लण्ड पानी छोड़ देता है…”
दीदी जीजू के लण्ड को चूसे जाया रही थी और मेरे लण्ड को हिलाती जा रही थी।
करीब 3-4 मिनट के बाद जीजू पीछे की तरफ सरक गये और दीदी को बोले-“पूजा यार, मेरा होने वाला है, थोड़ा रुक जाते हैं, मैं नहाकर फ्रेश होकर आता हूँ तब तक तुम दीपक का मस्त टेस्टी लोलीपोप चूस लो…” फिर वो जाते-जाते सबके लिये पेग बनाने लगे।
हम तीनों बैठकर ड्रिंक खतम करने लगे, दीदी हमारे बराबर दारू पी रही थी। पेग खतम करने के बाद जीजू नहाने चले गयेई। पूजा दीदी ने जल्दी से उनके कुछ कपड़े निकालकर उनको दे दिए और मेरे पास बैठती हुई मेरी आँखों में आँखें डालती हुई, किसी बेशर्म रंडी की तरह स्माइल देते हुए मेरे लण्ड को पकड़कर हिलाने लगी। फिर मेरी टांगों के बीच फर्श पे बैठ गई, और मेरे लण्ड को हिलाती हिलाती मेरी जांघों पे किस करने लगी। फिर ऊपर आते-आते मेरे बाल्स को मुँह में लेकर चूसने लगी, जैसे कोई रंडी सदियों से सेक्स की प्यासी हो। फिर बाल्स पे अपनी जीभ फिराती हुई लण्ड की टोपी के आस-पास जीभ फिराती रही। मेरा लण्ड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और मुँह के अंदर ही मेरी टोपी के ऊपर जीभ घुमाने लगी।
मेरी आँखें मस्ती से बंद हो रही थीं, और मेरे हाथ दीदी के सिर पर उसके बालों को सहला रहे थे। जीजू टायलेट में नहा रहे थे। वैसे भी हम सभी काफ़ी ड्रंक हो चुके थे। मुझसे रहा ना गया तो मैं खड़ा हो गया और अपने सामने बैठी अपनी बड़ी बहन के सिर को दोनों हाथों से पकड़कर अपना पूरा लण्ड दीदी के मुँह में घुसेड़ दिया, और उसको मुँह में ही चोदने लगा।
मैं दीदी की इतनी तेज मुँह में चुदाई करने लगा कि उसके मुँह से “ऊरल, ऊओरल ऊल, ककरूंवल, ल्ल…” की आवाजें निकलने लगी।
फिर एकदम से मैंने अपना लण्ड दीदी के मुँह से निकाल लिया और उसके मुँह के करीब थोड़ा झुक गया। मेरा लण्ड चूसने के लिए उसके खुले मुँह में मैंने अपने थूक की लार छोड़ दी, मेरा थूक सीधा दीदी के मुँह में जा रहा था, मैं थोड़ा और झुका और धीरे-धीरे दीदी के होंठों के आस-पास और गालों पे लगा अपने लण्ड का जूस और उसके थूक का मिक्चर चाटने लगा, जो कि मेरा लण्ड चूसने से दीदी के होंठ और गालों पे फैला था। उसके बाद मैंने अपने होंठ दीदी के होंठों पे रख दिए और स्मूच करने लगा।
शायद दीदी इसके लिए पहले से ही तैयार थी, उसने झट से अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी और मैं उसकी जीभ को चूसने लगा। करीब 5 मिनट के बाद हमारे मुँह का लाक खुला तो दीदी बोली-“सारी दीपू, मैंने तुम्हें बहुत तरसाया, बहुत तडपाया ना… काश, मैं उस वक़्त तुम्हें समझ जाती…”
मैं कुछ नहीं बोला, बस दीदी की नाइटी के गले के अंदर हाथ डालकर उसकी चूचियां दबाना शुरू कर दिया, आज भी दीदी की चूचियां वैसे ही सख़्त थीं। पता नहीं जीजू ने कभी उनको दबाया भी था या नहीं? निप्पल्स भी वैसी ही टाइट थे। मैं एक चूची को बाहर निकालकर उसको चूसने लगा।
दीदी मेरे गले में अपनी दोनों बांहें डालकर प्यार से कहने लगी-“दीपू, कुछ बोलो भी… अपनी दीदी को माफ़ नहीं करोगे क्या? आई एम रियली सारी मेरे बच्चे, अब तुम जैसा कहोगे वैसा ही करूँगी…”
तबी मुझे लगा कि शायद जीजू टायलेट से आ रहे हैं तो मैं खड़ा हो गया। और दीदी ने फिर से मेरा लण्ड अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। दीदी मेरा लण्ड चूसे जा रही थी और मैंने अपना मुँह ऊपर छत की तरफ करके आँखें बंद कर ली थी।
तभी जीजू टायलेट से आते हुए बोले-“यार तुम लोग अभी तक यहीं पे फँसे हुए हो? इस रांड़ को अपना लण्ड चुसवा रहे हो। मैंने तो सोचा था कि अब तक तो इस साली कुतिया की टांगें एक बार खोलकर उसकी चूत में अपना लण्ड डालकर एक सेशन भी कर लिया होगा…”
फिर दीदी ने उनको आते देखकर मेरा लण्ड छोड़कर उनका लण्ड पकड़ लिया और उसे चूमने चाटने लगी।
कुछ ही देर में फिर हम दोनों दीदी के आगे खड़े अपने खड़े लण्ड चुसवा रहे थे। जीजू इस बार बहुत उत्तेजित हो गये और उन्होंने दीदी को कंधों से पकड़कर सीधा पीछे की तरफ बेड पे लिटा दिया, उसकी नाइटी को खोल दिया और दीदी की चूचियां चूसने लगे। फिर अचानक मुझे ऐसे ही खड़ा देखा तो बोले-“दीपक यार, तुम भी बहुल ढीले हो, खुलकर रेस्पॉन्स नहीं दे रहे हो…” फिर उन्होंने दीदी की नाइटी उतार दी और उसे सीधा बेड पे लेटने को कहा, और मुझे लण्ड से पकड़कर बेड के ऊपर खींचने लगे।
अब हम तीनों बेड पे थे। दीदी खाली पैंटी में सीधी लेटी हुई थी, उसका गोरा बे-दाग बदन देखकर मेरे होश उड़ गये। जिसे मैं बरसों से पाने के लिये तरस रहा था, आज मेरे सामने थी। उसकी गोल-गोल चूचियां पतले जिश्म पे अलग ही नज़र आ रही थीं। जीजू ने मुझे दीदी की टाँगों के सामने बिठा दिया और खुद दाईं साइड पे बैठ गये। फिर जीजू ने दीदी की स्काइ ब्लू कलर की प्री-कम से भीगी पैंटी को उतारकर चूमा और बोले-“वाह… मेरी जान, आज बहुत गरम लग रही हो, कितनी गाढ़ी मलाई निकल रही है तुम्हारी चूत से…”
फिर उन्होंने दीदी की टांगें थोड़ा मोड़ करके मेरे सामने फैला दी और मुझे घुटनों के बल बिठाकर मेरे लण्ड की पोज़ीशन दीदी की चूत के सामने सेट करने लगे। फिर उन्होंने दीदी की कमर को नीचे अपने हाथ डालकर थोड़ा ऊपर उठाया और मेरे लण्ड को पकड़कर उसमें डालने की कोशिश करने लगे।
तो मैंने कहा-“जीजू, आप रहने दो, मैं कर लेता हूँ…”
वो खुश होते हुए बोले-“दैटस लाईक आ गुड बाय, यह बात हुई ना…” फिर वो अपने काम यानी दीदी की चूचियों को चूसने में जुट गये।
मैं दीदी की चूत की तरफ देखे जा रहा था, उसकी चूत चुदी हुई नहीं लग रही थी। दीदी की चूत का रंग गोरे से थोड़ा लाल ज़रूर हो गया था, लेकिन काला नहीं पड़ा था। मैंने दो सालों में जिसकी भी चुदाई की थी, वोही चूत काली पड़ गई थी। लेकिन दीदी की सॉफ सुथरी चूत देखकर मेरा दिल उसको चाटने के लिये तरस रहा था। लेकिन क्या करता, जीजू तो मुझे दीदी को चोदने के लिए तैयार कर चुके थे। फिर मैंने एक तकिया दीदी की कमर के नीचे रखा और उसी स्टाइल में दीदी की पोज़ीशन बना ली, जिस स्टाइल में दीदी को चोदने की कोशिश दो साल पहले कर चुका था।
मैंने दीदी की दोनों टाँगों को दोनों साइड पे फैला दिया, फिर अपने लण्ड की पोज़ीशन दीदी की चूत पे सेट करके जोरदार झटका मारा।
तो दीदी के मुँह से एकदम-“आह्ह… उउउच…” निकल गया। मेरा मोटा लण्ड दीदी की चूत को क्रश करता हुआ उसके अंदर गया चुका था। भीगी होने के वाबजूद भी मुझे दीदी की चूत काफ़ी टाइट लग रही थी। मैंने दीदी की कमर को अपने दोनों हाथों से दोनों तरफ से पकड़कर जोर-जोर से चुदाई शुरू कर दी।
दीदी ने अपना सर पीछे की तरफ सरकाकर आँखें बंद करके चैन की लंबी सांस ली। जीजू दीदी की चूचियों पे झुके उन्हें चूसने में मस्त थे, फिर टेढ़ी आँख से मुझे दीदी की चूत में चोदते देखने लगे। मेरा लण्ड पूरी तेजी से दीदी की चूत के अंदर-बाहर आ जा रहा था, में अपना 8-10 साल पुराना गुस्सा निकाल रहा था। इस जिश्म के लिए मैं 4-5 साल तड़पा था। चोदते-चोदते मुझे जब भी दीदी की डाँट का ख्याल आता तो मेरा गुस्सा और भड़क जाता और मैं अपना पूरा लण्ड बाहर निकालकर उसे जोरदार झटके से चूत के निशाने पे हिट करता, और जोर से झटका मारता तो दीदी का सारा जिश्म हिल जाता।
कई बार तो दीदी का सर बेडरेस्ट से जा टकराता लेकिन मुझे उस बात से कोई फरक नहीं पड़ता था। अगले ही पल मैं जल्दी से भूखे शेर की तरह दीदी की कमर पे चिपके अपने हाथों से दीदी के सारे जिश्म को नीचे खींच लेता, और फिर से जोरदार चुदाई शुरू कर देता। दिल कर रहा था कि दीदी की चूत का ऐसा हाल कर दूं कि उसे हमेशा याद रहे।
जोरदार झटकों के लगने से दीदी के मुँह से-“अया… अया… उम्म्म… उम्म…” की आवाजें की सिसकन हो रही थी।
मेरा लण्ड तेजी से दीदी की चूत को ड्रिल कर रहा था जिससे मेरे लण्ड के पीछे वाली साइड और दीदी की चूत के आस-पास एक सफेद कलर का झाग जमा होने लगा था। जीजू दीदी की चूचियों को किस करते-करते नीचे मेरे लण्ड और दीदी की चूत की तरफ आ गये, जीजू ने उस सफेद झाग को अपनी उंगली से सॉफ किया और अपने अंगूठे और पहली उंगली से उसकी गोंद टाइप चिपचिपाहट देखने लगे। फिर उन्होंने वोही सफेद झाग थोड़ा और अपनी उंगली पे लगाया और अपनी उंगली दीदी के मुँह में डाल दी।
मैंने चुदाई की स्पीड और तेज कर दी। मैं दीदी पे अब तक का सारा गुस्सा निकाल रहा था। और दीदी की चूत से अपना लौड़ा बाहर निकलकर ऐसे हिट करता जैसे कोई सांड़ किसी इंसान को पीछे हटकरके अपने सर से हिट करता है। मेरे अंदर लण्ड के पीछे जलन हो रही थी कि कब मैं अपना सारा गरम पानी निकालकर दीदी के अंदर छोड़ दूं। लेकिन इतना तेज चोदने के वाबजूद अभी भी मेरा लण्ड पानी छोड़ने के आस-पास भी नहीं था। दूज डिले स्प्रे ने अपना अच्छा असर दिखाया था।
उधर जीजू कभी दीदी की चूचियों को दबाने लगते, और कभी किसिंग करते-करते दीदी को स्मूच करने लगते। मैं अपना पूरा जोर लगा रहा था कि मेरे लण्ड से पानी निकल जाए, और ऐसा लग भी रहा था कि थोड़ा और तेज दीदी की चूत पर धक्के मारने से मेरे लण्ड का पानी निकल जाएगा। उसी चक्कर में दीदी को चोदने की मेरी स्पीड और तेज होती गई, इतना तेज करने से मेरे लण्ड की स्किन जलने जैसी लग रही थी।
अब दीदी भी नीचे से अपनी गाण्ड उचका-उचका के चुदवा रही थी और पूरा मज़ा ले रही थी-“आह्ह… आह्ह… आह्ह… आह्ह… आह्ह… दीपूउउ, चोद ले अपनी दीदी को… अगर मुझे पहले पता होता की तुझसे चुदवाने में इतना मज़ा आयेगा तो कब का चुदवा लिया होता। हाईई मर गई मेरे दीपू राजा… उस दिन क्यों नहीं मेरा बलात्कार कर दिया… हाए नहीं, अपना ये लण्ड मेरी चूत में डालकर मेरी चूत फाड़ दी…” जैसी दीदी की आवाजें अब और तेज हो गई थीं, और तभी दीदी ने अपनी चूची चूसते जीजू को बालों से पकड़कर जोर से नोंच लिया, फिर दीदी की कमर ऊपर उठी और 3-4 झटके खाने के बाद “आआह्ह… ऊप्प…” की आवाज़ के साथ ही कमर घूमी और ढीली पड़ गई।
जीजू मेरी तरफ देखने लगे लेकिन मेरे लण्ड से पानी अभी नहीं निकला था। मुझे पता था कि दीदी झड़ चुकी हैं, मैं फिर भी दीदी की तेजी से चुदाई करता रहा। लेकिन दीदी मृत शरीर की तरह पड़ी कोई रेस्पॉन्स नहीं दे रही थी, इसलिए मैं थोड़ा धीरे हो गया और फिर रुक गया। मैंने अपना लण्ड दीदी की चूत से बाहर निकाल लिया, मेरा लण्ड दीदी के चूत जूस से पूरा भीगा हुआ था। मेरी और दीदी दोनों की सांस फूली हुई थी और मुझे काफ़ी प्यास भी लग चुकी थी। मैं टेबल से पानी उठाकर पीने लगा।
जीजू भी मेरे पास आ गये और पेग बनाते मुझे बोले-“दीपक रुक क्यों गया यार, चोदता रह… जब तक तुम डिस्चार्ज नहीं होते लगे रहो…”
मैं अपनी सांसें कंट्रोल करता हुआ बोला-“जीजू, अब आपकी बारी है, लगता है दीदी को भी ब्रेक चाहिये…”
दीदी भी उठकर बेड पे बैठ गई। फिर कुछ देर हम बातें करते रहे और पेग लगाते रहे। मैंने और जीजू ने अपना गिलास खाली कर दिया था, लेकिन दीदी का गिलास भरा पड़ा था। फिर दीदी उठी, अपना पेग उठाया और आधा गिलास ड्रिंक अपने मुँह में भर ली, फिर जीजू को अपने होंठ पे इशारा करके किस करने के लिए कहा।
जीजू ने दीदी के दोनों होंठ अपने मुँह में लेकर लाक कर लिया। अब दीदी ने अपने फूले हुए गालों वाले मुँह में भरी सारी व्हिस्की जीजू के मुँह में ट्रांसफर कर दी, और 1-2 मिनट तक वो दोनों एक दूसरे की जीभ चूसते रहे, स्मूच करते रहे। दीदी साथ में एक हाथ से जीजू का लण्ड भी हिलाने लगी थी और जीजू भी दीदी की चूचियों को दबाकर मस्त हो रहे थे।
फिर कुछ देर के बाद दीदी ने स्माइल के साथ मेरी तरफ देखा और अपना बाकी आधा भरा व्हिस्की का गिलास उठाया और अपनी एक टांग बेड पे रखकर अपनी चूत के आगे गिलास करके अपनी चूत को गिलास के किनारों से सॉफ कर दिया, चूत जूसेज गिलास के किनारों पे रेंग रहे थे, फिर दीदी ने व्हिस्की के गिलास के अंदर अपना हाथ डालकर व्हिस्की और चूत जूसेज को मिक्स कर दिया। अब ठीक पहले की तरह व्हिस्की का सारा गिलास खाली करके सारी ड्रिंक अपने मुँह में भर ली और मुझे अपने होंठों की तरफ इशारा करके किस करने को बोली।
मैंने भी जीजू की तरह ही दीदी के बंद दोनों होंठों को अपने मुँह में ले लिया तो दीदी ने सारी ड्रिंक मेरे मुँह में भर दी। हम दोनों बहन भाई बेशर्म हो चुके थे, अब जीजू की प्रेजेन्स का भी कोई खास असर नहीं हो रहा था। हम करीब 5 मिनट तक एक दूसरे के होंठ और जीभ चूसते रहे, साथ-साथ मैं दीदी के हाथ मेरे लण्ड से और मेरे हाथ दीदी की चूत और चूचियां पे खेल रहे थे।
दीदी फिर से गरम हो गई लगती थी, जीजू और दीदी बिल्कुल नंगे खड़े थे लेकिन मेरे जिश्म पे अभी भी टी-शर्ट थी। फिर दीदी ने मेरी टी-शर्ट को कमर के करीब से पकड़ा और उतार दिया। अब मैं और जीजू फिर दीदी के सामने खड़े हो गये। दीदी हम दोनों के लण्ड को एक साथ मुँह में डालने की कोशिश करने लगी। जीजू का लण्ड तो मेरे लण्ड से आधा भी नहीं था और मेरा लण्ड लंबा होने के साथ-साथ काफ़ी मोटा भी था। दीदी हम दोनों के लण्ड से खेल रही थी। कुछ देर के बाद दीदी हमारे लण्ड चूसने के बाद खड़ी हो गई और मैं और जीजू दीदी के जिश्म को भूखे कुत्ते की तरह चाटने लगे। जीजू दीदी के पीछे खड़े होकर उसके कान, गर्दन, कंधे और उभरी हुई गाण्ड के गोले चूमने लगे, तो मैं पहले मुँह में मुँह डालकर स्मूच करने लगा, फिर गर्दन पे किसिंग करता नीचे आ गया, चूचियों को दोनों हाथों से पकड़कर अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। धीरे-धीरे नीचे नाभि पे ही पहुँचा था।
तभी जीजू बोले-“पूजा बेड पे सही रहेगा, खड़े-खड़े मुश्किल हो रही है…”
अगले पल हम तीनों बेड के ऊपर थे। मैं दीदी की चूत चाटने के लिए मरा जा रहा था, लेकिन फिर भी जीजू की प्रेजेन्स मुझे थोड़ा रोक रही थी। अब मैं सोच रहा था कि दीदी को इतना मज़ा देना है कि दीदी यह सोचने के लिये मजबूर हो जाये कि काश, उसने यह मज़ा पहले ही ले लिया होता। दीदी को चोदकर आज मुझे उसे अपनी कुतिया बनाना था। इसलिये मैंने स्लो मोशन शुरू किया, दीदी के पैर के अंगूठे को किस करना शुरू कर दिया, फिर धीरे-धीरे पैर की बाकी उंगलियों को चाटने लगा, फिर टांगों पे किस करता हुआ ऊपर जांघों की तरफ जाने लगा।
दीदी की गोरी चिकनी टांगों पे मेरी तरह कोई बाल नहीं था, मैं दीदी के घुटनों को चूमता ऊपर जांघों पे आ पहुँचा था। फिर मैंने दीदी की दोनों टांगों को इकट्ठे करके अपने सामने 90° डडग्री पे ऊपर खड़ा कर दिया और चूतड़ों पे अपना मुँह घुमाने लगा, दीदी की गाण्ड के दोनों चूतड़ों को किस करता-करता फिर टांगें खोलकर दीदी की जांघों पे लगाकर उसकी चूत और मेरे लण्ड का मिक्स जूस चाटने लगा। फिर चूत के आस-पास अपनी जीभ घुमाकर सारा जूस चाट लिया और दीदी की नाभि पे अपना सलाइवा डालकर उसे अपनी जीभ से नीचे दीदी की चूत की तरफ फैला दिया।
इस बीच दीदी का एक हाथ, स्मूच कर रहे जीजू के सर के पीछे था और दूसरे हाथ से वो जीजू के लण्ड को हिला रही थी।
अब मुझसे सबर नहीं हो रहा था, मैंने दीदी की चूत के होंठों को अपने दोनों हाथों से खोला, चूत के बीच में जो रेड कलर की संतरे की फांकों जैसी चमड़ी होती है उस पे अपनी जीभ लगाकर उस पे लगा जूस चाटने लग गया।
दीदी से भी कंट्रोल नहीं हुआ तो उसने जीजू का लण्ड छोड़कर झट से अपने दोनों हाथों से मेरा सिर अपनी चूत पे दबा दिया। जैसे-जैसे मैं चूत पे अपनी जीभ फिराता, दीदी की कमर और ऊपर उठने लगी थी। फिर मैंने स्मूच करने वाले स्टाइल में दीदी की चूत को पूरा अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और अपनी जीभ को दीदी की चूत के अंदर घुसेड़ने की कोशिश करने लगा।
दीदी के मुँह से बहुत जोर से निकला-“अयाया दीपू, मेरे भाई, अब शुरू कर दो… अब रहा नहीं जाता मेरे प्यारे भैया…”
मैं दीदी की बात सुनकर बोला-“मेरी जान, मेरी छम्मकछल्लो, अब मैं तेरा भैया नहीं, अब तो मैं तेरा सैया हूँ, अब तो लण्ड डालने के लिए भैया से नहीं अपने सैंया से कह…”
दीदी-“हाँ मेरे सैंया, अब से तुम मेरे भैया भी हो, और मेरे सैंया भी। अब क्यों तड़पाते हो, डाल भी दो ना अपना ये मस्त लौड़ा मेरी चूत में…”
जीजू स्माइल करते हुये मेरी तरफ देखने लगे फिर बोले-“एक मिनट दीपक…”
तो मैं दीदी की चूत चाटता चाटता उनकी तरफ देखने लगा।
वो फिर बोले-“पूजा तुम उठो, दीपक तुम लेट जाओ सीधे…”
हम दोनों बहन भाई ने उनको फॉलो किया। मैं सीधा लेट गया और जीजू ने मेरे सर के पीछे दो तकिए रख दिए, जिससे मेरा सर ऊंचा हो गया। जीजू की प्लानिंग के हिसाब से दीदी ने अपनी टांगें मोड ली, और अपने घुटनों पे बैठकर मेरे सिर के दोनों तरफ अपनी टांगें कर ली और अपनी चूत मेरे मुँह के बिल्कुल सामने कर दी थी, दीदी के दोनों हाथ मेरे सर के पीछे थे, वो जब चाहे मेरे सर को पकड़कर अपनी चूत पे दबा सकती थी, यानी दीदी मेरे मुँह के ऊपर चढ़कर अपनी चूत चटवाने लगी थी, मेरा लण्ड किसी सख़्त डंडे की तरह खड़ा उठक बैठक कर रहा था, में दीदी की चूत चाटने में मस्त हो गया।
दीदी अपना पानी छोड़ती जा रही थी, और मैं चाटता जा रहा था। अब दीदी खुद जैसे उसको अच्छा लगता था, अपनी चूत ऊपर-नीचे करके मेरे मुँह पे रगड़ रही थी। दीदी अपनी कमर चला-चलाकर मुझे अपनी चूत चटवा रही थी-“हाए मेरे राजा, मेरे सैंया, मेरे भैया, चाटो मेरी चूत… अपनी इस रांड़ सजनी की चूत…”
और जीजू दीदी को पीछे से किस करते-करते, मेरे पेट पे हाथ फिराने लगे, कुछ देर बाद उन्होंने मेरे लण्ड को पकड़कर हिलाना शुरू कर दिया, और मुझे स्ट्रोक करने लगे फिर धीरे-धीरे मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे, मैं चकित हो गया, मेरा शक सही निकला, जीजू ‘गे’ ही निकले थे। उन्होंने बहुत शौक से मेरे लण्ड को चूमना चाटना शुरू कर दिया।
दीदी मेरे मुँह पे सवार हुई अपनी चूत चटवा रही थी, जीजू की तरफ उनकी पीठ थी। मैं भी जीजू को देख नहीं सकता था, क्योंकि मेरा मुँह दीदी की जांघों में फँसा हुआ था, मेरी आँखों के सामने दीदी की लाल चूत और गोरर-गोरी जांघें नज़र आ रही थीं। मैं थोड़ा ऊपर देखने की कोशिश करता तो दीदी की गोल-गोल चूचियां और गोरा पेट नज़र आता। दीदी ऊपर-नीचे होकर खुद मेरे मुँह को चोद रही थी, मुझे जीजू नज़र नहीं आते थे लेकिन मैं महसूस तो कर रहा था।
जीजू मेरा लण्ड पूरी मस्ती से अपने मुँह में लेकर चूस रहे थे। अब मुझे और टेंशन हो गई कि दीदी के साथ जीजू की गाण्ड भी मारनी पड़ेगी, मैंमें बलि का बकरा बना हुआ था। दीदी और जीजू दोनों अपना-अपना मज़ा लेते हुये मुझे अपने तरीके से चोद रहे थे। करीब 15 मिनट यही सब चलता रहा।
फिर जीजू उठे और उन्होंने दीदी को कमर से पकड़कर ऐसे ही पीछे खींच लिया मैं सीधा लेटा हुआ था और मेरे ऊपर दीदी झुकी हुई थी, दीदी के दोनों पैर मेरी कमर के आस-पास थे दीदी का मुँह मेरे मुँह के करीब था और उसके दोनों हाथ मेरे दोनों कंधों के आगे मेरे सर के आस-पास थे, जिन पे दीदी का बैलेन्स बना हुआ था। मेरी टांगों के बीच खड़े जीजू पहले दीदी की गाण्ड चाटते रहे, फिर अपने लण्ड को पकड़कर दीदी की चूत में डालते हुये जोर से झटका मारा।
तो दीदी का बैलेन्स हिल गया, और वो मेरे ऊपर गिरती-गिरती संभल गई-“उउम्म्म्म…” की आवाज़ के साथ दीदी मेरे ऊपर झुकी, अपने डोगी स्टाइल में जीजू से चुदवाने लगी थी, मेरे सामने अजीब नज़ारा था, दीदी का गोरा सेक्सी जिश्म डोगी स्टाइल में मेरे सामने जीजू से चुद रहा था, जीजू के झटकों के साथ दीदी की गोरी-गोरी चूचियां मेरे सामने आगे पीछे लहरा रही थी।
मैं अपनी बहन को चुदते हुए सॉफ देख रहा था। इसलिये मुझसे सबर नहीं हो पा रहा था, और मैं पागल हुआ जा रहा था, फिर मेरी निरें दीदी की नज़रों से टकराई तो दीदी ने स्माइल के साथ अपनी जीभ बाहर निकालकर हिलाते हुए मुझे किस करने का इशारा किया।
मैंने थोड़ा ऊपर उठकर स्मूच के लिए अपना मुँह खोल दिया, तो दीदी ने झट से अपने मुँह में इकट्ठा हुआ सलाइवा मेरे मुँह में फैंकना शुरू कर दिया।
अजीब नज़ारा था। जीजू जोर-जोर से दीदी की चुदाई कर रहे थे। मैं थोड़ा ऊपर उठकर दीदी के सर के पीछे अपना हाथ रखकर उसे स्मूच करने लगा, लेकिन जीजू के झटकों से बैलेन्स नहीं बन पा रहा था और स्मूच करते-करते हमारे दोनों बहन भाई के सर टकरा जाते थे। फिर मैं थोड़ा नीचे सरक गया और दीदी के हवा में लहराती चिकनी चूचियों से खेलने लगा, उन पे अपना मुँह फिराने लगा।
करीब 5 मिनट के अंदर ही जीजू के मुँह से जोर से आवाज़ निकली-“ऊऊऊपप्प्प्प, ऊवू…” और वो डोगी स्टाइल में झुकी दीदी की कमर के ऊपर ही झुक गये और रिलेक्स हो गयर।
मैंने अपने ऊपर डोगी स्टाइल में झुकी हुई दीदी की आँखों में देखा तो उन्होंने अपना थोड़ा सा सर हिलाते हुए मुझे अजीब सी स्माइल दी, जैसे उनका कहना हो कि जीजू का बस इतना ही टाइम होता है। अब माहौल शांत हो गया था, दीदी वैसे ही मेरे ऊपर झुकी थी, जीजू का सिकुड़ा हुआ लण्ड दीदी की चूत से बाहर आ चुका था। अब जीजू बैठ गये और फिर मेरे लण्ड को हिलाने लगे और डोगी स्टाइल में झुकी दीदी को ऐसे ही मेरे लण्ड के ऊपर बैठने को कहने लगे।
दीदी ऐसे ही झुकी हुई मेरे ऊपर बैठने लगी तो जीजू के हाथों में पकड़ा मेरा मोटा लण्ड दीदी की चूत में समाता चला गया। मैंने अपने घुटने मोड़ लिये। बैठने के बाद, दीदी ने अपने दोनों हाथ मेरे पेट पे रखे और मेरे घुटनों से अपनी पीठ सटाते हुए रिलेक्स हो गई। फिर अपने खुले सिल्की बालों को बांधने लगी। कितने आराम से बैठी थी मेरी बहन मेरे लण्ड पे, जैसे एक मासूम बच्ची अपने डैड की गोद में बैठी हो और उसे दुनियाँ की कोई खबर ना हो, कुछ पता ना हो।
मुझे यह सोचकर कितनी अच्छी फीलिंग हो रही थी कि अब मेरा सारे का सारा लण्ड पूजा दीदी की चूत के अंदर था। कितना तरसा था मैं इस पल के लिये, यह सोचते ही मुझे फिर गुस्सा आने लगा और मैंने नीचे से अपनी गाण्ड उठा-उठाकर दीदी की चूत पर जोर-जोर से धक्के मारने लगा।
मेरे जबरदस्त धक्कों से दीदी एकदम हिल गई और बोली-“उह्ह… मम्मी, मेरी फट गई भैया धीरे…”
मैं-“साली रांड़, अब माँ को याद कर रही है। आज तो तेरी चूत फाड़कर रख दूंगा साली रांड़। अब तुझे मेरे इस लण्ड का पानी निकालना है। साली कुतिया, आज अगर तू मेरे इस लण्ड का पानी नहीं निकालेगी तो क्या तेरी माँ मेरे इस लण्ड का पानी निकालेगी साली रांड़?”
पूजा दीदी-“भैया, प्लीज़ निकाल लो… धीरे-धीरे डालो… ऐसा तो मम्मी भी नहीं ले सकती… प्लीज़्ज़ मेरे सैंया, अब मैं और नहीं ले सकती… आप चाहो तो इसको मम्मी की चूत में डाल दो…”
मैं-“साली कुतिया, उस रांड़ की चूत में भी डालूंगा ही, साली वो कौन सी कम रंडी है। सारा दिन घर पर मेरे सामने अपनी चूची और गाण्ड हिला-हिलाकर चलती है…”
पूजा दीदी मेरे लण्ड पर उछलते हुए-“भैया, लगता है तुम्हारा दिल मेरा सैंया बनने के बाद अब माँ का सैंया बनने का है?”
मैं-“हाँ मेरी रांड़ मस्त बहना, उस साली रांड़ की चूत भी तो लण्ड की प्यासी होगी? उसको भी तो लण्ड की ज़रूरत होगी? अब अगर मैं बहेनचोद बन ही गया हूँ तो फिर मादरचोद बनाने में क्या बुराई है?” और मैंने दीदी को जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। मेरा लण्ड दीदी को चोदने की फीलिंग से ही और भी सख्त होता जा रहा था।
जीजू बेड के साथ पड़ी चेयर पे बैठकर पेग बनाने लगे थे।
अब दीदी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी, वो भी ऊपर-नीचे होकर मुझे चोदने लगी थी, जीजू पेग बनाते हुये हमारी तरफ देख रहे थे। मैं थोड़ा ऊपर उठ गया और दीदी की चूचियों को मुँह में लेकर उनपे अपनी जीभ फिराने लगा।
तो दीदी के मुँह से फिर पतली सी आवाज़ में निकला-“आआह्ह… दीपू, में लील बेबी, ईई, मैंने क्यों तुम्हें इतना तंग किया?” और वो मेरे सर को अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपनी चूचियां पे दबाने लगी। दीदी की चूचियां सख्त थीं लेकिन स्किन एकदम मुलायम थी। मैं उसकी चूचियां पे अपना सलाइवा गिराकर चाटने लगा फिर बीच-बीच में हम दोनों बहन भाई एक दूसरे को चोदना भी शुरू कर देते, करीब 10-15 मिनट यह सब चलता रहा, उसके बाद मैं सीधा लेट गया और दीदी अपनी कमर ऊपर-नीचे करके मुझे चोदने लगी। वो भी मेरे स्टाइल में ही मज़ा ले रही थी।
पहले सेकेंड में उसका पूरा जिश्म ऊपर उठता और मेरा लण्ड उसकी चूत के बाहर होता, फिर अगले सेकेंड वो जोरदारर झटका नीचे मारती तो मेरा पूरा लण्ड उसकी साफ्ट चूत को फाड़ता हुआ उसके अंदर चला जाता, वो तेजी से ऐसा करने लगी, कभी-कभी तो निशाना चूक जाता तो मेरा लण्ड उसकी चूत की जगह उसकी जांघों में से स्लिप करता पीछे निकल जाता, और कभी आगे की तरफ निकल आता तो वो खुद ही जल्दी से पकड़कर उसे अंदर डाल लेती। दीदी को पता नहीं क्या सूझा।
एक बार तो जब मेरा लण्ड स्लिप करके उसकी गाण्ड के छेद को छूता हुआ उसके पीछे की तरफ उसकी गाण्ड में चला गया तो अगले ही पल वो ऊपर उठी और मेरे लण्ड को पकड़कर अपने अंदर डालने लगी तो मुझे ऐसा लगा कि मेरा लण्ड पिस रहा है, इस बार इतना टाइट छेद था कि मेरा लण्ड आधा भी अंदर नहीं घुस पाया था, मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरे लण्ड की स्किन फट जायेगी। मैंने दीदी की तरफ देखा तो उसके माथे पे सिकुड़न थी, लेकिन फिर भी वो मेरे लण्ड पे अपना वजन डाले जा रही थी, लेकिन लण्ड इतना मोटा था कि मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरा लण्ड किसी लोहे के पाइप में फँस गया है।
फिर दीदी ने सिर हिलाया और धीरे से बोली-“माई गोड, नहीं जा रहा है…”
मैं समझ गया कि दीदी झड़ने वाली थी इसलिए टाइम बढ़ाने के लिए वो मेरे लण्ड को अपनी गाण्ड में डालने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मेरा लण्ड ज्यादा मोटा होने के कारण बहुत मुश्किल हो रही थी, बिना कोई लोशन लगाये दीदी की टाइट गाण्ड में मेरा लण्ड घुसना मुश्किल था। फिर अगले पल ही दीदी फिर ऊपर उठी और एक हाथ से मेरे लण्ड को पकड़कर अपनी चूत पे आगे पीछे घिसने लगी, ताकी मेरा सूखा हुआ लण्ड फिर से उसकी चूत के पानी से चिकना हो जाये। कुछ देर दीदी ऐसे ही करती रही, फिर मेरे लण्ड को अपनी चूत में डालते हुए ऊपर-नीचे होकर चुदवाने लगी।
जीजू ने फिर से हम सबके लिये पेग बनाकर रख दिए थे और वो अपना पेग धीरे-धीरे खतम कर रहे थे और हमारी तरफ देखकर उनका फिर मूड बन चुका था। उनका लण्ड भी अब खड़ा था, वो बैठे बैठे हमारी तरफ देखकर अपने लण्ड को हिला रहे थे।
मेरी रंडी बहन जो मुझसे बात नहीं करना चाहती थी, आज मेरे लण्ड की दीवानी हो चुकी थी, इसीलिए तो अपनी गाण्ड और चूत दोनों में चुदवाना चाहती थी। दीदी का मांसल जिश्म देखकर मेरा लण्ड लोहे की रोड जैसा होता जा रहा था। जब मेरे दिमाग़ में यह आया कि मेरी यही कुतिया बहन मेरे बच्चे की माँ बनेगी तो मैं आउट आज कंट्रोल हो गया और मैं चाह रहा था कि अब मैं झड़ जाऊँ, इसलिये मैंने दीदी को नीचे से अपनी कमर उठाकर जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया।
दीदी भी बहुत तेजी से ऊपर-नीचे होकर चुदवा रही थी। फिर दीदी ऊपर-नीचे होती मेरे ऊपर झुकी और मेरे होंठों पे अपने गुलाबी होंठ रखकर अपना मुँह लाक कर दिया। फिर उसकी जीभ मेरे मुँह में घूमने लगी। मैंने दीदी की जीभ कुछ देर अपने दांतों में दबाकर रखी फिर उसे चूसने लगा, फिर हम दोनों की जीबे आपस में खेलने लगीं, फिर दीदी ने मेरी जीभ को अपने मुँह में खींच लिया और चूसने लगी। हम दोनों बहन भाई पूरी मस्ती में लग रहे थे।
तभी दीदी-“ऊवप्प्प्प्प्प्प…” की आवाज़ के साथ झटके से ऊपर उठने लगी।
तो जीजू ने पीछे से उनके कंधे पे हाथ रखकर फिर नीचे दबा दिया। मेरे मुँह पे झुकी होने के कारण दीदी की गाण्ड का छेद पीछे से शायद सॉफ-सॉफ नज़र आ रहा था और उसी को देखते हुये जीजू ने अपने लण्ड पे थोड़ी क्रीम लगाकर दीदी की गाण्ड में घुसेड़ दिया था।
अब दीदी फिर से मेरे मुँह में मुँह डालकर मेरी जीभ को अपने मुँह के अंदर खींचकर उसे चूसने लगी थी, मैं नीचे पड़ा दीदी को पंप कर रहा था और जीजू पीछे से दीदी की गाण्ड में लगे थे। दीदी हम दोनों के बीच में थी, सैंडपवच स्टाइल में हम दीदी की गाण्ड और चूत दोनों को फाड़ रहे थे। हम दोनों ने अपनी स्पीड बहुत तेज कर दी थी, मुझे लगा कि मैं अभी झड़ जाउन्गा। लेकिन तभी मेरी जीभ चूसते-चूसते दीदी ने अपने दाँत भींच लिये और दोनों हाथों से मेरे सिर को भी जोर से अपने मुँह पे दबोच लिया, फिर कुछ झटके खाने के बाद दीदी शांत हो गई।
मेरी जीभ दीदी के दांतों में दबने के कारण दर्द करने लगी थी और कट भी गई थी, इसलिये मैंने चुदाई करनी रोक दी। लेकिन जीजू अभी भी जोर-जोर से दीदी की गाण्ड में पंपिंग कर रहे थे। कुछ ही देर में जीजू को भी झटके लगे और वो भी शांत हो गई। हम तीनों रिलेक्स लेटे रहे, लेकिन मेरे लण्ड के पीछे अभी भी बहुत जलन हो रही थी, मैं लण्ड का पानी निकालने के लिये तरस रहा था। इस बार तो मैं झड़ते-झड़ते रह गया, पपछले डेढ़ घंटे में दीदी और जीजू 2-2 बार झड़ चुके थे, लेकिन मैं एक बार झड़ने के लिये भी तरस रहा था। हम तीनों कुछ देर बेड पे रिलेक्स लेटे रहे, फिर उठकर बैठ गये और ड्रिंक करते हुये बातें करने लगे।
जीजू-“पूजा, आज मेरा एक और शौक पूरा हो गया। दीपू जब भी मैं ब्लू-फिल्म देखता था तो मेरा भी दिल करता था कि मैं भी किसी का लण्ड अपने मुँह में लेकर चुसूं, मैंने पूजा को यह सब बताया है, लेकिन अब तुम यह मत समझ लेना कि मैं गे हूँ, अब ऐसा दिल किया, कुछ भी हो पूजा, इस सेशन में बहुत मज़ा आया ना… क्यों दीपक?”
दीदी मेरी तरफ देखते हुए स्माइललंग चेहरे के साथ बोली-“सच में स्वीट हार्ट, पहली बार इतना मज़ा आया है…” दीदी बहुत खुश नज़र आ रही थी। वो बार-बार मेरे जिश्म से छेड़-छाड़ कर रही थी, कभी मेरे गाल पे लगा कुछ पोंछने लगती, तो कभी मेरे बालों में उंगलियां डालकर उन्हें ठीक करने लगती, तो कभी मुझे कुछ खाने को कहती और कभी कुछ पीने को कहती। फिर मेरे लण्ड को किस करके जीजू की तरफ देखती हुई बोली-“जानू, तुम भी कुछ ऐसा करो ना कि तुम्हारा भी स्टेमिना दीपू जैसा हो जाये, देखो हम 2-2 बार झड़ चुके हैं और दीपू पहली बार भी कितनी मुश्किल से झड़ा है…”
फिर जीजू बोले-“दीपक, यार तुम्हारा लण्ड तो डिस्चार्ज होने के बाद भी वैसा है खड़ा है…”
मैंने दीदी और जीजू की तरफ देखा फिर बोला-“जीजू, मैं अभी डिस्चार्ज कहाँ हुआ हूँ?”
दीदी और जीजू हैरानी से एक दूसरे की तरफ देखने लगे। फिर दीदी बोली-“माई गोऽऽड, मुझे पहले ही शक था, क्योंकि मुझे ऐसा कुछ महसूस नहीं हुआ कि मेरे अंदर कुछ गिरा है, फिर मैंने सोचा क्या पता…” दीदी की आँखें फटी-फटी थीं।
जीजू मज़ाक में बोले-“मेरे बाप, हमें जल्दी बच्चा चाहिये। जल्दी से यह बता कि तू कैसे छूटेगा? दो घंटे में एक बार भी नहीं छूटा…”
फिर दीदी की तरफ देखते हुये बोले-“चलो मेरी तो बात छोड़ो, मैं तो जल्दी झड़ जाता हूँ, लेकिन ये रांड़ तुम्हारी दीदी भी तो 2-2 बार झड़ गई है…”
मैंने स्माइल दी और बोला-“जीजू, आपने मुझे व्हिस्की पिला-पिलाकर ओवर ड्रंक कर दिया है, शायद इसीलिये नहीं हो रहा है…”
फिर जीजू बोले-“चल, यह बता कि तुम्हारा फ़ेवरेट स्टाइल कौन सा है?”
मैंने कहा-“डोगी स्टाइल…”
जीजू-“इसीलिये नहीं हुआ, तुमने अपने फ़ेवरेट स्टाइल में तो पूजा को चोदा नहीं, फिर होता कैसे? मेरा भी डोगी फ़ेवरेट है, लेकिन मैं तो डोगी में शुरू करते ही झड़ जाता हूँ, व्हिस्की थोड़ा रोक लाती है बस…”
फिर चेयर पे बैठे-बैठे दीदी को बोले-“उठो मेरी जान, मुख्य काम तो अभी बाकी है। अभी डोगी स्टाइल में अपने भाई को भी झड़वा दो…”
दीदी चेयर पे बैठे जीजू की जांघों पे अपने हाथ रखकर मेरे सामने डागी स्टाइल में झुक गई, यानी मेरे सामने घोड़ी बन गई, मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी है, कि कोई सेक्सी फिगर वाली लड़की डोगी स्टाइल में मेरे सामने झुकी होती है तो उसकी सुराही जैसी कमर और गाण्ड और गोल मटोल चूतड़ देखकर मैं आउट आज कंट्रोल हो जाता हूँ। दीदी अभी भी उसी स्टाइल में मेरे सामने झुकी हुई थी, तो मेरा लण्ड किसी खंबे की तरह लहराने लगा लेकिन मैंने पहले दीदी की चूत को चाटना सही समझा।
दीदी जीजू की जांघों पे झुकी उनके आधे खड़े लण्ड को चाटने लगी थी और मैं दीदी की वीर्य से भीगी चूत को चाटने लगा था। क्या मस्त नज़ारा था… दीदी के बड़े-बड़े चूतड़ मुझे पागल कर रहे थे, मुझसे ज्यादा देर इंतजार ना हुआ, मैं खड़ा हो गया और दीदी की चूत के सामने अपना लण्ड सेट करके दीदी की कमर को दोनों तरफ से पकड़कर दबोच लिया और जोरदार झटका मारा, तो मेरा सारा लण्ड स्लिप करता हुआ दीदी की चूत के अंदर चला गया। कमर से पकड़े हुए मैंने जोरदार तेज झटकों से दीदी की चुदाई शुरू कर दी। मैं जोर-जोर से झटका मारता तो जीजू का लण्ड चूसती दीदी का सिर जीजू की सीने से जा टकराता। अब मेरे लण्ड के पीछे जलन और बढ़ती जा रही थी, और दीदी को चोदने की मेरी स्पीड भी तेज होती जा रही थी।
जीजू अब दीदी की चूचियों से खेलने लगे थे, उनका भी मूड बन चुका था। लेकिन मेरी तेज चुदाई के कारण दीदी को अब जीजू का लण्ड चूसने का मौका नहीं मिल रहा था। दीदी ने अपने दोनों हाथों से जीजू की जांघों को कसकर पकड़ लिया ताकी उनका बैलेन्स ना बिगड़ जाये।
फिर पता नहीं जीजू ने दीदी के कान में क्या कहा कि दीदी तेजी से सिसकने लगी थी-“अया… उम्म्म… दीपू, कम ओन बेबी, फक मी हार्ड, हाँ और जोर से… और जोर से मेरे भाई…”
यह सब सुनकर मैं और भी पागल होने लगा था, और जोर से दीदी के बाल खींचकर अपनी कमर हिला-हिलाकर पीछे से दीदी की चूत मार रहा था। दीदी भी मस्ती से आहें भर रही थी की तभी दीदी के फ़ोन की रिंग बज उठी। दीदी अपना फ़ोन उठाने के लिए जाने को हुई तो मैंने दीदी के बालों को कसकर धक्के मारते हुए कहा-“साली, कहां भाग रही है? मेरे लण्ड का पानी क्या तेरी माँ निकालेगी? ये जीजू क्या कर रहे हैं, इसको बोलो ये उठाते हैं फ़ोन, तब तक मैं तुम्हारी चूत में अपना पानी निकाल लूँ…”
मेरा इतना कहना ही था की जीजू उठ गये और दीदी का फ़ोन उठाकर देखा तो फ़ोन मम्मी का था। जीजू ने दीदी को देखते हुए कहा-“पूजा, तुम्हारी मम्मी का फ़ोन…”
तो दीदी के कहने पर जीजू ने फ़ोन स्पीकर फ़ोन पर लगा दिया।
मम्मी-“पूजा, एक बात सुन… तू दीपू को बोलना की बच्चे के लिए सुबह कोशिश करे। सुबह करने से बच्चा ठहरने का चान्स ज्यादा होता है…”
पूजा दीदी-“मम्मी, आप सुबह करने की बात कर रही हैं, सुबह तक अगर बची तो ही न… मुझे नहीं लगता कि मैं सुबह तक जिंदा बच पाऊूँगी। आह्ह… दीपू ने तो अभी तक पानी नहीं छोड़ा… मेरा तो अब तक 4 बार हो चुका है, पर अब तक उसका एक बार भी नहीं छूटा। अभी भी ये मुझे घोड़ी बनाए पीछे से मेरी बजा रहा है। ओह्ह… मम्मी प्लीज़… आप इसको बोलो कि मुझपर रहम करे…”
मम्मी-“क्या बोल रही है तू पूजा? तेरा 4 बार हो गया और दीपू का एक बार भी नहीं?”
तभी फ़ोन कट हो गया। ना चाहते हुए भी मेरे मुँह से निकल गया-“ओके दीदी, मैं तम्हें हर खुशी दूंगा, तुम जैसा कहो मैं वैसा करूँगा। तुम्हें अपने बच्चों की मम्मी बनाऊूँगा। आज से तुम मेरी हो, मेरी बीवी, मेरी जान मेरी सब कुछ हो। दीदी, ऊओह्ह दीदी, अया…”
शायद मेरे दीदी कहने का असर मेरी बहन पे भी हो रहा था और वो भी चुदवाने में मेरा पूरा साथ दे रही थी-
“ऊवू दीपू मेरे भाई, फाड़ डालो मुझे आज, कम ओन माइ लीज दटल बेबी, मैं पागल हो रही हूँ, आह्ह… अया…”
मेरा पूरा जोर लग चुका था मुझे लग रहा था कि मैं झड़ने जा रहा हूँ, लेकिन फिर थक जाता, सांस कंट्रोल नहीं होती थी।
जब थोड़ा रुकता तो दीदी फिर बोलने लगती-“कम ओन मेरे बच्चे फक मी सोऽ हार्ड, अपनी बहन की सारी प्यास बुझा दो आज… अया और जोर से मेरे भाई…”
मैं अपनी सांस को कंट्रोल करते हुए रेस्पॉन्स देता-“ऊवू दीदी, मेरा होने वाला है दीदी…”
यह सुनकर वो और जोर से चीखने चिल्लाने लगती-“अयाया… ऊऊओ… अपनी बहन को जी भर के चोदो मेरे भाई…”
जब मैं थोड़ा थक जाता तो दीदी खुद आगे पीछे होकर चुदवाने लगती। दीदी की चूत और मेरा लण्ड जूस से भीग चुके थे, दीदी की चूत इतनी स्लिपरी हो गई थी कि कभी-कभी लण्ड और चूत का लुब्रीकेंट वाला पानी नीचे टपकने लगता था। दीदी की चूत ने इतना पानी छोड़ा कि उसकी दोनों जांघों पे पानी नीचे की तरफ टपक रहा था। दीदी की चूत ज्यादा स्लिपरी होने से मेरा लण्ड अंदर-बाहर आने जाने का कुछ पता नहीं चल रहा था। मैं झड़ने के बिल्कुल करीब था, लेकिन दीदी की चूत में लण्ड स्लिप होता जाता, जिससे लण्ड को कोई खास ग्रिप नहीं मिलता था।
मैं 10-15 मिनट में तेज-तेज चुदाई करता रहा, फिर थोड़ा रुक गया। मेरी सांस भी फूल गई थी, मैंने अपना लण्ड दीदी की चूत से बाहर निकाला और दीदी की जांघों पे नीचे की तरफ टपकता पानी चाटने लगा। फिर उसे अपनी जीभ से सॉफ करता हुआ उसकी चूत पे आ गया और एकदम भीगी चूत पे अपना हाथ रख दिया और अपने हाथ से सारी चूत को सॉफ कर दिया। दीदी की चूत के पानी से भीगे अपने हाथ को मैंने दीदी के मुँह में घुसेड़ दिया। दीदी भी मेरा साथ देते हुये मेरे सारे हाथ को चाटने लगी।
फिर मैंने अपने लण्ड पे लगे दीदी के चूत-रस को पोंछकर अपने मुँह में अपना हाथ डालकर चूस लिया। अब मैं झड़ने के बहुत करीब था लेकिन मैं थोड़ा और मज़ा लेना चाहता था इसलिये मैंने दीदी की ब्रा उठाई और दीदी की चूत को अच्छी तरह से पोंछ दिया। फिर अपने लण्ड को भी ठीक वैसे ही सॉफ कर दिया। अब मेरा लण्ड और दीदी की चूत दोनों सूखी थी, मेरा 10 साल पुराना बदला अब पूरा होने जा रहा था, मैंने अपने लण्ड को दीदी की चूत के निशाने पे रखा और जोरदार झटका मारा। इस बार दीदी की जोरदार चीख निकल गई। मेरा मोटा लंबा लण्ड, सूखा होने की वजह से दीदी की चूत को काटता हुआ आगे बढ़ गया था।
अब मुझे भी लगा कि जैसे मेरा लण्ड किसी कुंवारी लड़की की चूत में घुस गया हो, मैंने तेजी से चुदाई शुरू की तो दीदी झट से अपना एक हाथ अपनी चूत पे रखकर उसे सहलाने लगी। मेरा लण्ड तेजी से अंदर-बाहर आ जा रहा था, लग रहा था कि दीदी की चूत सूखी होने की वजह से अभी भी मेरा लण्ड उसकी चूत को काट रहा था। वो कभी-कभी मेरे लण्ड के पीछे हाथ रखकर हिट करने से रोकने की कोशिश करती। करीब 5-7 मिनट के अंदर फिर से दीदी की चूत बहुत पानी छोड़ चुकी थी, अब फिर स्लिपरी चूत में मेरा लण्ड एक सेकेंड में दो बार अंदर-बाहर आने जाने लगा था, मेरा लण्ड पूरा टाइट हो गया और मुझे लगा कि मैं अभी झड़ने वाला हूँ। मैंने जल्दी से अपना लण्ड बाहर निकाला और दीदी को कमर से पकड़कर घुमा दिया। उसे बेड पे बिठाकर पीछे की तरफ सीधा लिटा दिया और उसकी टांगें फैलाकर फिर से अपना लण्ड जल्दी से दीदी की चूत के अंदर घुसेड़कर चोदने लगा।
दीदी बहुत खुश लग रही थी और वो भी मुझे नीचे से अपनी कमर ऊपर उठाकर रेस्पॉन्स दे रही थी, मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी, मेरे चोदने से आगे पीछे तेजी से लहराती दीदी की चूचियां मुझे झड़ने में बहुत हेल्प कर रही थीं। दीदी की चूत ने इतना पानी छोड़ा कि मेरे तेजी से चुदाई करते-करते ‘पूउलछ पूल्छ छाप छाप’ की आवाजें आने लगी और पानी हम दोनों की जांघों पे फैल गया था।
दीदी का मुँह मेरे मुँह के बिल्कुल करीब था, अब दीदी दबी आवाज़ में बोली-“अया… आह्ह… एस, एस, कम ओन, कम ओन माइ बेबी, और जोर से, तेज, तेज, आऽऽ फक मी हार्डर बेबी, मेरा होने वाला है राजा…” हम दोनों बहन भाई अपनी अलग ही दुनियाँ में पहुँच गये थे।
मैं अपनी स्पीड बढ़ाता गया, अब मैंने दीदी के होंठों पे अपने होंठ रख दिए और उसकी जीभ को अपने मुँह में खींचकर चूसने लगा। बस उसी वक़्त दीदी ने मुझे अपनी दोनों बाहों में भींच लिया, शायद दीदी फिर झड़ रही थी। दीदी के गोल-गोल टाइट चूचियां मेरे सीने के नीचे दब गईं, और इसी फीलिंग ने मुझपे ऐसा असर किया कि मेरे अंदर से ‘छररर छररर’ करती जोरदार 5-6 पिचकाररयां छूटी। कुछ सेकेंड तक मेरे जिश्म को झटके लगते रहे, फिर शांत हो गया। एक महीने से भरा गरम पानी मैंने अपनी बहन की चूत के अंदर खाली कर दिया था, हम दोनों रिलेक्स थे।
मैं ऐसे ही दीदी के ऊपर पड़ा रहा फिर दबी आवाज़ में पूछा-दीदी आपका हो गया?
दीदी-“हाँ, मेरा तो तुमसे पहले ही हो गया था, तुम्हारा भी हो गया ना?”
मैंने इनकार में अपना सिर हिला दिया और मुश्कुराने लगा।
दीदी मेरे गाल पे हल्की सी चपत लगाते हुए बोली-“नाटी… मुझे पता है कि तुम्हारा भी हो गया है…”
हम दोनों बहन भाई इस सेशन में जीजू को भूल गये थे। जब मैंने जीजू की तरफ देखा तो उनकी पानी जैसी पतली वीर्य उनके हाथ पे और नीचे फर्श पे पड़ी थी और उनका लण्ड उनके हाथ में था। मेरे ख्याल से हम दोनों की चुदाई देखकर ही उन्होंने मूठ मारकर अपना काम कर लिया था। वैसे भी उनको झड़ने के लिये 2-4 मिनट ही लगते थे। मैं दीदी के ऊपर लेटा हुआ था।
दीदी ने जब जीजू की तरफ देखा तो बोली-“ऊवू मेरा सोना… उधर अकेला ही बैठा है… इधर आओ मेरा सोना…”
जीजू किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह कुस़ी से उठकर हम दोनों के पास आ गये। मैं बेड पे दीदी की दायें साइड पे सरक गया और जीजू दीदी के बाईं साइड की तरफ लेट गये। मुझे नींद आने लगी थी इसलिए मैं सीधा ऊपर की तरफ मुँह करके सोने लगा।
तो दीदी ने मेरा हाथ पकड़कर अपनी चूचियां पे रख लिया और बोली-“दीपू मेरे बच्चे, इधर आओ, तुम भी मेरी तरफ करवट लेकर सो जाओ, मैं सुलाती हूँ अपने दोनों बच्चों को…” फिर हम दोनों दीदी को बीच में लिटा के सो गये।
दीदी सोते-सोते भी कभी मुझे स्मूच करती तो कभी जीजू को, मुझे नींद आ रही थी लेकिन दीदी अभी भी मेरे लण्ड से छेड़छाड़ कर रही थी। मैं हैरान था कि दीदी इतनी गरम है तो जीजू इसे ऐसे कैसे सभालते होंगे? वैसे दीदी की इसमें कोई गलती नहीं था, हमारे परिवार में सेक्स के मामले में सब लोग एक्स्ट्रा हाट हैं। पता नहीं मुझे कब नींद आ गई और जब आँख खुली तो जीजू सो रहे थे लेकिन दीदी उठकर नहा चुकी थी उसके नंगे जिश्म पे पानी की बूँदें कितनी सेक्सी लग रही थी। मैं भी रिचार्ज हो चुका था। दीदी को देखते ही मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया।
तो दीदी मेरे लण्ड पे किस करते बोली-“उम्म्म… मेरे राजा को भी भूख लग गई…” फिर दीदी ने उल्टे लेटे जीजू को उठाने की कोशिश की।
लेकिन जीजू ने बहुत ज्यादा पी रखी थी इसलिये वो नींद में ही बोले-“यार मुझे सोने दो…”
दीदी-“जान उठो, कुछ करोगे नहीं तो बच्चा कैसे पैदा होगा?”
जीजू फिर नींद में बोले-“यार तुम लोग कर लो जो करना है, मेरा सर फट रहा है मुझे सोने दे…”
जीजू उल्टे लेटे थे। मैंने जीजू की गाण्ड की तरफ देखा, फिर अपने लण्ड को पकड़कर दीदी को हाथ के इशारे से कहा-“पेल दूं जीजू की गाण्ड में अपना लौड़ा?”
तो दीदी की हँसी निकल गई और उसने अपने मुँह पे हाथ रख लिया।
दीदी को नंगे घूमते देखकर मेरे अंदर का शैतान फिर जाग गया था, और मुझे लग रहा था कि दीदी तो पहले ही चुदवाने के लिए तैयार हैं। मैंने अपने लण्ड को हिलाते हुए दीदी को टायलेट में जाने का इशारा किया। मेरी रंडी बहन अब मेरे लण्ड की दीवानी हो चुकी लगती थी, इसलिये अब मेरे इशारे भी समझने लगी थी। दीदी ने इशारे से ही मुझे जीजू की प्रेजेन्स के बारे में कहा, फिर मुझे हाथों के इशारे से ही तसल्ली देते हुए बोली-“दीपू पहले नहाने जाओगे या ऐसे ही नाश्ता करना है?”
मैं अपने लण्ड को हिलता बोला-“दीदी पहले नहाना है, लेकिन भूख भी बहुत जोर से लगी है…”
दीदी-“ओके, मैं तुम्हारा तौलिया टायलेट में रख देती हूँ तुम नहा लो पहले…” यह कहती हुई वो मेरा तौलिया उठाकर टायलेट की तरफ चली गई और इशारे से मुझे भी अपने पीछे आने को बोला।
मैं छलाँग लगाकर जल्दी से दीदी के पीछे टायलेट में चला गया, जीजू सो रहे थे। टायलेट में पहुँचते ही मैंने दीदी को दबोच लिया, उसकी चूचियां अपने मुँह में डालते हुए बोला-“दीदी मैं आपको चोदने के लिये कितने बरस तरसा, कितना तडपाया आपने मुझे?”
दीदी मेरे बालों में उंगलियां फिरते हुए बोली-“सारी मेरे बच्चे… मैंने तुमको बहुत तरसाया है, मुझे पता है। काश मैं उस वक़्त तुम्हारी फीलिंग्स समझ जाती, तो अपने घर हम बहन भाई जो मर्ज़ी करते… अब जब मैंने तुझे इतना तरसा कर गलती की है तो मैं तुझे इसका इनाम भी दूंगी। तू मम्मी को चोदना चाहता है मेरे भैया राजा? अब मैं तुम्हारी मम्मी को चोदने में हेल्प करूँगी ताकि तुझे और तुम्हारे इस लण्ड को चूत के लिए कभी तरसना ना पड़े…” यह कहते हुए वो मेरे मुँह में अपनी जीभ डालकर स्मूच करने लगी।
मैंने शावर खोल दिया, और हम दोनों बहन भाई एक दूसरे के जिश्म से खेलने लगे।
दीदी मेरे बालों में अपनी लंबी-लंबी उंगलियां फिराते हुए बोली-“अया मेरे राजा भैया, मुझे तुमको तरसाने की सज़ा मिल रही है, तुम्हें क्या पता कि मैं शादी करके कितनी प्यासी हूँ, तुम्हारे जीजू दो मिनट में अपना काम करके सो जाते हैं, इससे मेरी प्यास क्या बुझनी है, उल्टा मेरे अंदर आग लगाकर सो जाते हैं, उसके बाद मुझे ही पता है मेरी क्या हालत होती है? सुहागरात से लेकर आज तक तेरे जीजू मुझे एक बार भी शांत नहीं कर पाये, कभी-कभी फिंगरिंग करके अपने आपको शांत कर लेती हूँ। कल तुम्हारे साथ सेक्स करके मुझे पहली बार एहसास हुआ कि असली चुदाई क्या होती है? मर्द से औरत की प्यास कैसे बुझती है? कल तूने मुझे कली से फूल बनाया…” यह कहती वो मेरे जिश्म को जल्दी-जल्दी चूमने लगी थी।
शावर का पानी हम दोनों पे गिर रहा था और अब दीदी मेरे लण्ड को नहीं छोड़ रही थी और मैं उसके गोल-गोल चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से दबा रहा था। मैं दीदी के कान को किस करता बोला-“दीदी आपको पता है कि मैं आपको चोदने के लिये 10 साल पहले से स्कूल टाइम से कोशिश कर रहा हूँ…”
दीदी-“मुझे सब पता है मेरे भाई, एक-एक बात याद है, लेकिन पता नहीं क्यों मैं उस वक़्त तुमको समझ नहीं पाई, शायद इसीलिये आज प्यासी हूँ। तुम्हारे जीजू तो मुझे अपने किसी कजिन विकास के साथ यह सब करने को कह रहे थे, लेकिन मुझे वो बिल्कुल पसंद नहीं था, उसकी बाडी पे परफ्यूम लगाने के बाद भी इतनी गंदी गंध आती है कि उसके पास खड़े होना भी मुश्किल है। पता नहीं कैसे-कैसे मैंने तेरे जीजा को तुम्हारे लिये पटाया है, मेरे सोना भाई…”
मैं-“दीदी, मैं आपकी प्यास बुझाऊूँगा। आप फिकर मत करो, मैं आपकी हर इच्छा पूरी करूँगा…” यह कहते हुये मैं दीदी के गालों पे, होंठ पे, कानों पे और गर्दन पे किस करने लगा। हम दोनों बहन भाई एक दूसरे के जिश्म से खेलने लगे, दीदी मेरे लण्ड को हिलाती जा रही थी, मैंने दीदी की टांगों के बीच चूत पे अपना हाथ फिराना शुरू कर दिया फिर धीरे-धीरे अपनी दो उंगलियां दीदी की चूत में घुमाने लगा।
दीदी बहुत गरम हो चुकी थी उसके होंठ फड़फडाने लगे थे। वो मेरा हाथ अपनी चूत पे दबाती हुई बोली-“दीपू मेरे बच्चे, अब और मत तड़पाओ… मैं पहले ही दो साल से तड़प रही हूँ…”
मैं दीदी की टांगों के बीच बैठ गया और दीदी की चूत चाटने लगा।
दीदी ने अपनी टांगें फैला ली और मेरे सर को पकड़कर अपनी चूत पे दबाने लगी, शावर का पानी हम दोनों के जिश्म पे गिरता जा रहा था और हम दोनों बहन भाई सेक्स के इस दौर में मस्त होते जा रहे थे, कुछ देर बाद दीदी ने मुझे ऊपर उठा लिया और हम फिर एक दूसरे की जीभ चूसने लगे।
फिर दीदी बोली-“दीपू मेरे बच्चे, जल्दी करो अब सबर नहीं हो रहा और तेरे जीजू भी पता नहीं कब उठ जाये?” यह कहते हुये दीदी डोगी स्टाइल में मेरे सामने झुक गई, और पीछे हाथ करके मेरा लण्ड पकड़कर खुद ही अपनी चूत के छेद पे रख दिया।
मैंने दीदी की कमर को दोनों हाथों से दोनों तरफ से पकड़कर जोर से झटका मारा।
तो दीदी चैन की सांस लेते हुए दबी आवाज़ में बोली-“अया दीपू मेरे भाई, अपनी दीदी के अंदर चल रही हलचल को शांत कर दो मे ेरे बच्चे, जितना भी जोर से चोद सकते हो अपनी इस बहन को चोदो…”
अपनी बहन के मुँह से ‘दीपू मेरे भाई और चुदाई’ जैसे शब्द सुनकर मैं बेकाबू होता जा रहा था। मैंने दीदी के ऊपर झुक के दीदी की दोनों चूचियां पकड़ ली और दबाने लगा।
अब दीदी अपनी कमर हिला-हिलाकर चुदवाने की कोशिश करती हुई बोली-“दीपू, तुम्हारी दीदी का सारा जिश्म तुम्हारा है, जैसे दिल चाहता है वैसे खेलो मेरे भाई…”
मैंने जोर-जोर से दीदी की चुदाई शुरू कर दी, और जीजू के उठने के ख्याल से तेज-तेज करने लगा। तकरीबन 10-15 मिनट के बाद दीदी झड़ गई, लेकिन जब तक मैं अपने आपको झड़ने के लिये तैयार करता और स्पीड तेज करता तो किसी ना किसी बात पे डिस्टर्ब हो जाता और फिर झड़ने से रह जाता। बाथरूम के अंदर कोई ठीक से पोज़ीशन सेट नहीं हो पा रही थी, मैंने शावर बंद किया और दीदी को अपने कंधे पे उठाकर वापिस बेड के करीब आ गया।
जीजू अभी भी सो रहे थे और हम दोनों बहन भाई पानी से भीगे हुए रूम में आ गये थे, मैंने दीदी को कुर्सी पे बिठाया और सामने से उसकी टांगों को अपने कंधों पे रख लिया। दीदी ने खुद ही जल्दी से अपने हाथ से मेरा लण्ड पकड़कर अपनी चूत के अंदर कर लिया। मैंने चुदाई शुरू कर दी जोर-जोर से। अब दीदी की गरम सांस भी मुझे पूरी तरह महसूस हो रही थी और दीदी की भीगी चूत बता रही थी कि दीदी फिर से तैयार हो रही है। मेरे सामने दीदी के लाल होंठ। गोल-गोल गोरी चूचियां और गरम सांसें थीं, जो कि मुझे झड़ने में बहुत हेल्प करने वाले थे।
दीदी का सारा जिश्म मेरे सामने गोल गठरी की तरह इकट्ठा हो गया था, मैं जोर-जोर चोदता तो कुर्सी हिलने लगती और कुर्सी के गिरने का भी खतरा रहता। लेकिन मुझे लग रहा था कि मैं झड़ने वाला हूँ। मैंने चोदते-चोदते दीदी की चूचियों को चूसना शुरू कर दिया। फिर कुर्सी पे भी स्ट्रगल करते हमें 10-15 मिनट तक लग गये तो मैंने दीदी की तरफ देखा।
दीदी स्माइल करती हुई बिल्कुल धीमी आवाज़ में मेरे कान में बोली-“दीपू रुक जाओ, मैं फिर से छूटने वाली हूँ, तुम अपना करने के लिये थोड़ा टाइम मेरे पीछे वाले छेद में कर लो…”
मैं रुक गया, मैंने चोदना बंद करके अपना लण्ड निकालकर दीदी के मुँह में दे दिया। दीदी मेरे लण्ड को चूसने लगी और जोर-जोर से स्ट्रोक भी करने लगी ताकी मैं जल्दी झड़ सकूँ। करीब 5 मिनट के बाद मैंने फिर से अपना लण्ड दीदी की चूत में डालकर जोर-जोर से बहुत तेज चुदाई शुरू कर दी। करीब 2-3 मिनट के अंदर ही दीदी की सिसकियां निकली और वो मेरे जिश्म से लिपटकर उसे नोचने लगी, फिर कुछ झटकों के बाद शांत हो गई। मैं चोदता रहा, रुका नहीं।
दीदी झड़ने के वाबजूद भी मेरी हेल्प कर रही थी, अपनी जीभ बाहर निकालकर मेरे होंठ सॉफ कर रही थी।
अगले 5 मिनट के अंदर मेरी चुदाई की स्पीड बहुत ज्यादा बढ़ गई और फिर मेरे जिश्म को भी 4-5 झटके लगे और मेरे अंदर की सारी गरम क्रीम दीदी के अंदर खाली हो गई। मैंने अपना लण्ड दीदी की चूत से बाहर निकाला तो मेरे लण्ड के मुँह पे मेरी फेवीकौल जैसी गाढ़ी वीर्य के कुछ बूँदें बाकी थीं।
दीदी ने उन्हें भी बरबाद नहीं होने दिया, झट से मेरा लण्ड पकड़कर अपने मुँह में लेकर सॉफ कर दिया। जीजू के उठने के बाद फिर नाश्ता वगैरा करने के बाद यही सब चलता रहा। हम दो दिन शिमला में रहे लेकिन होटेल से बाहर निकलकर नहीं देखा। बस खाना पीना सब अंदर ही ऑर्डर करके आ जाता था। हम लोगों को 3 ही काम थे चोदना, चुदवाना, सोना, खाना-पीना और फिर शुरू चोदना, चुदवाना। टाइम का किसी को कुछ पता नहीं था कितना हुआ, बस सोकर उठते तो चोदना और खाना शुरू हो जाता।
जीजू मेडिकल स्टोर से प्रेग्नेन्सी टेस्ट स्ट्रिप ले आये और दीदी को प्रेग्नेन्सी टेस्ट करने को कहा।
मैं और जीजू आमने सामने लिविंग रूम में बैठे थे और टायलेट जीजू के पीछे और मेरी फ्रंट साइड की तरफ था। दीदी टेस्ट करने के लिये टायलेट जाती हुई टायलेट के दरवाजे के सामने जाकर रुक गई, फिर पलट के पीछे देखा तो मेरी नज़र दीदी की नज़र से मिली। तो दीदी ने मुझे प्रेग्नेन्सी टेस्ट स्ट्रिप दिखाते हुए उसे अपने दोनों हाथों में लेकर मसल दिया, टेस्ट स्ट्रिप टूट फूट के एक गोली की शकल में आ गई थी। दीदी वो गोली मुझे दिखाते हुए टायलेट के अंदर चली गई।
मेरा आँखें सिकुड़ गई कि दीदी करना क्या चाहती है? अगर टेस्ट नहीं करेगी तो प्रेग्नेन्सी का पता कैसे चलेगा? फिर 10 मिनट के बाद दीदी टायलेट से बाहर निकली और पीछे से आकर जीजू के गले में अपनी बाहें डालती और मुँह बनाते हुए बोली-“जानू, टेस्ट अभी भी नेगेटिव है आया है…”
जीजू थोड़ा सोचने लगे फिर उठकर मेरे पास आकर बोले-“मैं पूजा को कुछ दिन यहीं छोड़कर घर जा रहा हूँ…” जीजू वहीं से वापिस निकल पड़े।
फिर मैं और दीदी घर के लिए रवाना हो गये। जैसे ही मैं और दीदी घर पहुँचे तो मम्मी ने दरवाजा खोला।
मम्मी के चेहरे पर आज अलग ही तरह की मुश्कान थी। हमें अंदर बुलाते हुये मम्मी ने कहा-“पूजा, अब तू दामाद जी के साथ आई है, या फिर दीपू मेरे लिए बहू लेकर आया है?”
मम्मी की बात सुनकर मैंने शर्म से अपनी आँखें नीची कर ली।
दीदी मेरी ओर देखकर मम्मी के गले मिलती हुई बोली-“मम्मी, अभी तो मैं इसे लेकर आई हूँ, तो इस नाते ये तुम्हारा दामाद हुआ और जब ये मुझे लेकर आएगा तब तुम समझ लेना की दीपू तुम्हारी बहू लेकर आया है…” और इतना कहकर वो दोनों हूँसने लगी।
मैं मम्मी और दीदी इसी तरह हँसी मज़ाक करते रहे। तभी दीदी उठकर अपने रूम में चली गई। कुछ देर बाद मैं भी उठकर दीदी के रूम में जाने लगा।
तभी मम्मी ने मुझे रोक कर कहा-“दीपू, आज पूजा कितनी खुश है और ये सब तेरे कारण है। तूने उसे कितनी खुशी दी, जिसके लिये मेरे पास कोई शब्द नहीं हैं। बस तुम उसे हमेशा ऐसे ही खुश रखना…” और मम्मी ने खुश होकर मुझे होंठों पर किस कर लिया।
और जब मैंने भी मम्मी को वापिस उसके होंठों पर किस किया और अपने हाथ पीछे लेजाकर मम्मी की बड़ी-बड़ी गाण्ड को थपथपा दिया।
मेरे द्वारा मम्मी के होंठों पर किस और उसकी गाण्ड पर मेरा हाथ पड़ने से मम्मी भी गरम हो उठी और अपनी चूत मेरे खड़े लण्ड पर रगड़ने लगी।
लेकिन मैंने मम्मी को अपने आपसे अलग किया और दीदी के कमरे की तरफ बढ़ गया। पूजा दीदी बिस्तर में थी, लेकिन जाग रही थी। मैंने उसको बाहों में भरकर जोर से होंठों पर किस किया और चूची भी मसल डाली। अब मेरी प्यारी दीदी को पता चल गया था की उसका भाई अब उसकी चूत का दीवाना है और उसने अपने जीजा की जगह ले ली है। दीदी को खूब चूमने के बाद मैं उतेजित हो गया। दीदी नहाने चली गई। जब वो बाहर निकली तो एक सफेद नाइटी पहने हुई थी और नीचे कोई पैंटी नहीं थी,
मैं-“आज से तुमको अपनी बाहों में सुलाऊूँगा, देखना कितना मज़ा आता है…” रात को व्हिस्की लेकर आऊूँगा, मम्मी से चोरी-चोरी। हम थोड़ी सी पी लेंगे अगर मेरी प्यारी दीदी चाहेगी तो। सच दीदी, बहुत सुंदर हो तुम। तेरा हुश्न मेरे दिल का क्या हाल बना रहा है, मुझसे पूछो…”
दीदी शर्म से लाल हो रही थी। फिर मैं किसी ज़रूरी काम से कुछ देर के लिये घर से बाहर चला गया। मैं जानता था कि मेरे आने तक उसकी चूत मचल रही होगी चुदने के लिए। बाहर जाते हुए मैंने दीदी और माँ को सारा प्लान बता दिया और वो शरारती ढंग से मुश्कुराने लगीं।
रात जब मैं वापिस लौटा तो दीदी मेरा इंतजार ऐसे कर रही थी जैसे कोई पत्नी अपने पति का इंतजार करती है। मुझ पर हवस का भूत सवार था। मैंने दीदी को बाहों में भर लिया और चूमने लगा। दीदी के जिश्म पर मेरे हाथों का स्पर्श उसपर जादू कर रहा था। फिर मैंने ग्लास में व्हिस्की डाली और दीदी को ग्लास पकड़ा दिया।
दीदी बिना कुछ बोले पी गई। थोड़ी देर में नशा होने की वजह से दीदी के अंदर वासना ने जोर पकड़ लिया लगता था। मैंने अपना हाथ दीदी की चूत पर रखा और उसको रगड़ने लगा।
मैंने कहा-“दीदी, मैं जानता हूँ की जीजाजी ने तुझे प्यार नहीं किया। तुझे प्यासी छोड़ा था अब तुम्हारी इस मस्त जवानी पर मेरा हक है और मैं तुम्हारी इस जवानी का पूरा मज़ा लेकर पीऊँगा…” दूसरा पेग पीकर मैंने दीदी को अपनी गोद में बिठाया और उसके जिश्म को नाइटी के ऊपर से सहलाने लगा
दीदी के मस्त चूतड़ बहुत गुदाज थे और मेरा लण्ड उनके चूतड़ में घुसने लगा।
दीदी-“दीपू, मुझे तेरा चुभ रहा है। उई… बस कर…”
मैं-“हाए मेरी जान, क्या चुभ रहा है तुझे? ये तो तुझे प्यार कर रहा है तेरी इस मस्त चूतड़ों को चूम रहा है। दीदी क्या तुम मेरे लण्ड को प्यार करोगी? इसको सहलाओगी? दीदी मैं भी तेरे जिश्म को चूमून्गा, चाटूगा, इतने प्यार से जितने प्यार से किसी ने भी न चूमा होगा…” मैं अब पूजा दीदी के जिश्म के हर अंग को प्यार से सहला रहा था।
और दीदी भी गरम हो रही थी-“हाए मेरे भैया, तुम ही अब मेरे सैंया हो, उस कुत्ते का नाम मत लो, मेरे भाई। उसने मुझे इतना दर्द दिया है की बता नहीं सकती। मुझे इस प्यार से भी डर लगने लगा है… मुझे दर्द ना पहुँचाना, मेरे भाई…”
मैंने देखा की दीदी गरम है, तो मैंने दीदी की नाइटी ऊपर उठाई और उसका जिश्म नंगा कर दिया। मेरी बहन का गुलाबी जिश्म बहुत कातिलाना लगता था। पूजा दीदी की जांघें केले की तरह मुलायम थीं और उसके चूतड़ बहुत सेक्सी थे। सफेद जा और पैंटी में दीदी बिल्कुल हीरोइन लग रही थी। मैं अपना मुँह दीदी के सीने पर रखकर उसकी चूचियों को किस करने लगा।
दीदी ने आँखें बंद की हुई थी और वो सिसकियां भरने लगी।
मैंने दीदी का हाथ अपने लण्ड पर रख दिया। दीदी अपना हाथ खींचने लगी तो मैं बोला-“दीदी, इसको मत छोड़ो, पकड़ लो अपने भाई के लण्ड को। ये तुझे दर्द नहीं देगा, बल्की सुख देगा। तुम मेरी बीवी बन जाओ और फिर जवानी के मज़े लूट लो आज की रात। मेरा लण्ड अपनी बहन की प्यारी चूत को स्वर्ग के मज़े देगा। अगर मैंने तुझे दर्द होने दिया तो कभी मुझसे बात मत करना। मेरी रानी बहना ये लण्ड तुझे हमेशा खुश रखेगा…”
दीदी कुछ ना बोली लेकिन उसने मेरा लण्ड पकड़े रखा। मेरा लण्ड किसी कबूतर की तरह फड़फडा रहा था, अपनी बहन के हाथ में। मैंने फिर दीदी की ब्रा को खोल दिया और उसकी चूची मस्ती से भर के मेरे हाथों में झूल उठी। दीदी के स्तन बहुत मस्त हैं।
दीदी-“अह्ह… ऊऊह्ह… दीपू क्या कर रहे हो?” वो सिसकी।
मैं-“क्यों दीदी, अपने भाई का स्पर्श अच्छा नहीं लगा?” मैंने दीदी की गुलाबी चूची पर काली निपल को रगड़कर कहा…”
दीदी-“अच्छा लगा दीपू, लेकिन ऐसा पहले कभी महसूस नहीं हुआ है मुझे। ऐसा अनुभव पहली बार हो रहा है…”
मैंने हैरानी से पूछ लिया-“क्यों दीदी, क्या जीजाजी ऐसे नहीं करते थे तुझे प्यार?”
अब मेरा दूसरा हाथ दीदी की फूली हुई चूत सहला रहा था और दीदी अपनी चूत मेरे हाथ पर जोर से रगड़ रही थी, कहा-“तेरा जीजा मादरचोद तो बस मेरी जाँघ पर ही अपना पानी निकाल देता है। मेरे भाई, मैं तो तड़पती चीखती रहती थी पर वहां मेरी सुनने वाला कौन था? मेरे भाई मुझे आनंद आ रहा है। तेरा लण्ड भी बहुत खुश्बूदार है, बहुत सुंदर है, तेरा स्पर्श बहुत सेक्सी है। दीपू तेरे हाथ मेरे अंदर एक मज़ेदार आग भड़का रहे हैं। तेरी उंगलियां मेरी चूत में खलबली मचा रही हैं। मेरी चूत से रस टपक रहा है। तेरा स्पर्श ही मुझे औरत होने का एहसास करा रहा है। मैं तेरे अंदर समा जाना चाहती हूँ। चाहती हूँ की तू भी मेरे अंदर समा जाए। मेरे जिश्म का हर हिस्सा चूम लो मेरे भाई, और मुझे अपने जिश्म का हर हिस्सा चूम लेने दो…”
मैं जान गया था की दीदी अब तैयार है। मैंने एक पेग और बनाया और हम दोनों ने पी लिया। दीदी ने अपनी पैंटी अपने आप उतार डाली और मेरे लण्ड से खुले आम खेलने लगी। एक हाथ दीदी अपनी चूत पर हाथ फेर रही थी। मैंने झुक कर दीदी के निप्पल्स चूसना शुरू कर दिया और दीदी मेरे बालों में उंगलियां फेरने लगी। दीदी की चूची कठोर हो चुकी थी और अब मैंने अपने होंठ नीचे सरकाने शुरू कर दिए।
जब मेरे होंठ दीदी की चूत के नज़दीक गये तो वो उत्तेजना से चीख पड़ी-“दीपू, मेरे भाई। क्यों पागल कर रहे हो अपनी बहन को? मुझे चोद डालो मेरे भाई। तेरी बहन की चूत का प्यार मैंने तेरे लण्ड के लिये संभाल रखा है। डाल दो इसको मेरी चूत में…”
मैं अपने सारे कपड़े खोलता हुआ दीदी के ऊपर चढ़ गया। दीदी का नंगा जिश्म मेरे नीचे था और उसने बाहें खोलकर मुझे आलिंगन में भर लिया। दीदी की चूत रो रही थी, आूँसू बहा रही थी। मैंने प्यार से अपना सुपाड़ा दीदी की चूत की लंबाई पर रगड़ना शुरू कर दिया। हम भाई बहन की कामुकता हद पार कर गई।
फिर दीदी ने बबनती की-“भैया, अब रहा नहीं जाता। घुसेड़ दो मेरी चूत में। होने दो दर्द मुझे परवाह मत करो, पेलो मेरी चूत में अपना लण्ड…”
लेकिन मैंने अपना सुपाड़ा चूत के मुँह पर टिकाकर हल्का धसका मारा। चूत रस के कारण सुपाड़ा आसानी से चूत में घुस गया।
दीदी तड़प उठी, जिसमें दर्द कम और मज़ा ज़्यादा था-“हे भैया मर गई… आह्ह… हाय बहुत मज़ा दे रहे हो तुम… और धकेल दो अंदर… पेलते रहो भैया… ऊऊह्ह… मेरी चूत प्यासी है। आज पहली बार चुद रही है। बहुत प्यारे हो तुम मेरे भाई। डाल दो पूरा…”
मैंने लण्ड धीरे-धीरे आगे बढ़ाना शुरू कर दिया। चूत गीली होने से लण्ड ऐसे अंदर घुस गया जैसे मक्खन में छुरी। पूजा दीदी की चूत क्या थी बिल्कुल आग की भट्ठी। मैं भी मज़े में था। दीदी के निप्पल्स चूसते हुए मैंने पूरा लण्ड ठेल दिया अंदर। दीदी की सिसकारियाँ उँची आवाज़ में गूँज रही थी। मुझे शक था की माँ ना सुन ले।
लेकिन मेरे मन ने कहा-“अगर माँ सुन लेती है तो सुन ले। उसकी बेटी उसके दामाद के साथ बंद कमरे में कोई भजन तो करेगी नहीं, आख़िरकार उसकी बेटी है, चुदाई के मज़े लूट रही है। उसे भी तो लण्ड का मज़ा चाहिए। आख़िर मेरी दीदी को भी तो लण्ड का सुख चाहिए ही ना। अगर उसका पति नहीं दे सका तो भाई का फर्ज़ है उसको वो मज़ा देना…” फिर मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ानी शुरू कर दी।
दीदी भी अपने चूतड़ ऊपर उठाने लगी। उसको लण्ड का मज़ा मिल रहा था। दीदी ने अपनी टांगे मेरी कमर पर कस दी और मुझसे पागलों की तरह लिपटने लगी। मेरा लण्ड तूफ़ानी गति से चुदाई कर रहा था। दीदी के हाथ मेरे नितंबों पर कस चुके थे।
मैं-“दीदी, कैसा लगा ये चुदाई का मज़ा? मेरा लण्ड? तेरी चूत में दर्द तो नहीं हो रहा? मेरी बहना तेरा भाई आज अपनी मासूका को चोद रहा है, किसी लड़की को और वो भी अपनी सगी बहन को…”
दीदी नीचे से धक्के मारती हुई बोली-“दीपू, मुझे क्या पता था की चुदाई ऐसी होती है, इतनी मज़ेदार। भाई मेरे अंदर कुछ हो रहा है। मेरी चूत पानी छोड़ने वाली है। मैं झड़ने को हूँ… जोर से, और जोर से चोद मेरे भाई… उउिफ्र्फ… और जोर से भैयाआ…”
मैं भी तेज चुदाई कर रहा था। मेरा लण्ड चूत की गहराई में जाकर चोद रहा था और मुझे भी झड़ने में टाइम नहीं लगने वाला था ‘फ़च-फ़च’ की आवाज़ें आ रही थी। तभी मेरे लण्ड की पिचकारी निकल पड़ी, मैं सिसका-“आआह्ह… दीदीईईई मैं भी गया… मैं गयाअ…”
दीदी की चूत से रस की धारा गिरने लगी और हम दोनों झड़ गये। मम्मी बाहर से हम भाई बहन को देख रही थी। लेकिन हम इस बात से अंजान थे। फिर मैं पूजा दीदी के साथ लिपटकर सो गया। चुदाई इतनी जोरदार थी की मुझे पता ही नहीं चला की मैं कब तक सोता रहा। जब नींद खुली तो दोपहर के 12:00 बज चुके थे। दीदी मेरे बिस्तर में नहीं थी।
उठकर कपड़े पहने और मैं नहाने चला गया। पपछले दिन की शराब का नशा मुझे कुछ सोचने से रोक रहा था। सिर भारी था। नहाकर जब बाहर निकला तो मैं चुस्त महसूस करने लगा। दीदी के साथ चुदाई की याद मुझे अभी भी उतेजित कर रही थी। रात के बाद दीदी की चुदाई का अपना ही अलग मज़ा था, पर मुझे डर था की कहीं माँ हमारे इस रिश्ते से नाराज तो ना होगी? ये सवाल मेरे दिमाग़ में कौंध रहे थे। जब मैं मम्मी के रूम से गुजर रहा था तो मुझे मम्मी और दीदी की आवाज़ सुनाई पड़ी,
दीदी-“मम्मी, दीपू ने मुझे जिंदगी का असल आनंद दिया है। उसी ने मुझे बताया की एक मर्द एक औरत को कितना मज़ा और आनंद दे सकता है, सच माँ, विनोद ने तो जितना दर्द दिया सब भुला दिया भाई ने। चाहे दुनियाँ इस प्यार को जो चाहे नाम दे, या पाप कहे लेकिन मेरे लिए दीपू किसी भगवान से कम नहीं है। मेरे लिए देवता है, मेरा मालिक है, मैं तो अपने भाई के साथ ये जिंदगी बिताने के लिए कुछ भी करने को तैयार हूँ। कल तक लण्ड, चूत, चुदाई जैसे शब्द मुझे गाली लगते थे, लेकिन आज ये सब मेरी जिंदगी हैं। मम्मी, तू तो मेरी मम्मी है। तुझे तो मेरी खुशी की प्रार्थना करनी चाहिए। अब तो तुझे भी मर्द का सुख ना मिलने पर दुख हो रहा होगा। मम्मी, अब मैंने दीपू को अपना पति, अपना परमेश्वर मान लिया है…”
मुझे खुशी थी की पूजा दीदी खुद सारी जिंदगी मेरी बनकर रहना चाहती थी। वाह… बहन हो तो ऐसी।
पूजा दीदी और मम्मी को अकेले छोड़कर मैं अपने रूम में चला गया। कपड़े चेंज किए और घर से निकल गया। शाम को जब वापिस आया तो मम्मी मुझे अजीब नज़रों से देख रही थी। मम्मी ने भी आज लो-कट गले वाली स्लीवलेस कमीज़ और सलवार पहनी हुई थी। मम्मी का सूट इतना टाइट था की उसमें से मम्मी की बाडी का हर अंग का पूरा आकार सॉफ-सॉफ नज़र आ रहा था।
मेरे सामने मम्मी आंटा गूंधने लगी। जब वो आगे झुकती तो उसकी चूची लगभग पूरी झलक जाती, मेरी नज़र के सामने। मेरा लण्ड खड़ा होने लगा। अपने लण्ड को मसलते हुए मैंने सोचा की चलो दीदी को कमरे में लेजाकर चोदता हूँ। तभी माँ फिर से आगे झुकी और मेरी तरफ देखने लगी। उसकी नज़र से नहीं छुपा था की मैं मम्मी की गोरी-गोरी चूचियों को घूर रहा हूँ। तभी उसकी नज़र मेरी पैंट के सामने वाले उभार पर पड़ी। मेरी प्यारी मम्मी मुश्कुरा पड़ी।
मम्मी की मुश्कुराहट को देखकर मेरे मन में आया की उसको बाहों में भर लूँ और प्यार करूँ। मैंने कहा-“मम्मी, पूजा दीदी कहाँ है? दिखाई नहीं पड़ रही कहीं भी…”
मम्मी-“अब सारा प्यार अपनी पूजा दीदी को ही देता रहेगा या अपनी इस मम्मी को भी कुछ हिस्सा देगा? बेटा, पूजा तुझसे बहुत खुश है। लेकिन हम लोगों को प्लान करना पड़ेगा। हम तीनों को किसी ना किसी चीज़ की ज़रूरत है। सबसे बड़ी चीज़ पैसा है, जो हमको विनोद से लेना है। जमाई राजा ने जमाई का काम तो कुछ नहीं किया, लेकिन उसको हम ब्लैकमेल ज़रूर कर सकते हैं। तुम ऐसा करो की कुछ बीयर वगैरा ले आओ और हम मिलकर रात को बीयर पीकर बात करेंगे और हाँ कुल्फि तो तू अपनी दीदी को ही खिलाएगा, माँ की तुझे क्या ज़रूरत है? तुझे तो बस यही पता चला की मुझे एक अच्छे दामाद की ज़रूरत है। पर तूने इस बात का कभी नहीं सोचा की पूजा को भी पापा की कमी महसूस होती होगी…”
मेरे मन में माँ के लिए इतना प्यार आया की मैंने उसको बाहों में लेकर चूम लिया। माँ की साँस भी तेज हो गई और उसके सीने का उठान ऊपर-नीचे होने लगा। माँ की छाती मेरी छाती से चिपक गई। मुझे वोही फीलिंग हो रही थी जो पूजा दीदी को किस करते हुए हो रही थी। मुझे लग रहा था की मेरा प्यार मेरी बाहों में है। जब मैंने माँ के मुँह में अपनी ज़ुबान डाल दी तो माँ उसको चूसने लगी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और मेरा लण्ड अब माँ के पेट से टकरा रहा था।
मैंने अब हर हद पार करते हुए माँ का हाथ अपने तड़पते हुए लण्ड पर रख दिया और बोला-“मेरी जान, अगर तूने मुझे पहले बताया होता की पूजा को एक पापा के प्यार की कमी महसूस हो रही थी तो अब तक तो उसको पापा कब का मिल गया होता, और मम्मी तुझे क्यों नहीं खिलाउन्गा कुल्फि? ऐसा कोई बेवकूफ़ ही होगा जो तुम जैसी सुंदर औरत को कुल्फि खिलाने से मना करे। तुम मुझे हुकुम करो, तुम्हें तो मैं अभी मस्त स्वादिष्ट कुल्फि खिला सकता हूँ…”
मम्मी ने पहले तो मेरा लण्ड थाम लिया लेकिन फिर अचानक अपना हाथ पीछे खींच लिया-“नहीं दीपू बेटा, नहीं। ये ठीक नहीं है… छोड़ दो मुझे…”
लेकिन अब मैं कहां मानने वाला था। मेरे दिमाग़ में अपनी माँ के लिए वासना भर चुकी थी। मैंने मम्मी का हाथ पकड़कर अपनी ओर खींचा, तो मम्मी मेरी बाहों में आ गई। मैंने मम्मी को अपनी बाहों में भरते हुए अपना एक हाथ पीछे लेजाकर मम्मी की बड़ी-बड़ी गाण्ड को सहलाते हुए मम्मी से कहा-“क्या हुआ मम्मी, क्या तुम्हें मेरी कुल्फि पसंद नहीं आई?”
मेरी बात सुनते ही मम्मी बोली-“अरे नहीं बेटा, ऐसी बात नहीं है, तेरी ये कुल्फि नहीं ये तो मस्त कुलफा है कोई भी औरत तुम्हारा ये मस्त कुलफा देख ले, तो मुझे पूरा विश्वास है की इसे खाए बगैर चैन नहीं लेगी…”
मम्मी का इतना कहना ही था की मैं मम्मी की चूचियों को मसलने लगा और मंजू की गर्दन पर किस करने लगा। सच बात तो ये है की मम्मी को ये सब अच्छा लगता था लेकिन वो ऊपर से नाटक करती थी, ताकि उसके और उसके बेटे के बीच में शर्म का परदा बना रहे।
मम्मी-“दीपू बेटा, प्लीज़्ज़… पीछे हटो, मुझे अभी बहुत काम करना है…”
मैं मम्मी की चूचियों को मसलते हुए-“मोम, मुझे भी तो आज आपका सारा काम करना है…”
मम्मी शरारत से-“बदतमीज़ कहीं का… अपनी मोम से डबल मीनिंग बात करता है…”
मैं-“बदतमीज़ दिल… बदतमीज़ दिल… माने ना माने ना…”
मम्मी-“हाँ, बड़ा आया हीरो… चल पीछे हट। अगर पूजा आ गई तो गड़बड़ हो जाएगी…”
मैं-“हाए मम्मी, गड़बड़ तो हो जाएगी, लेकिन मोम मुझे प्यार करने दो…” ओर मैंने अपने एक हाथ को मम्मी की चूची से हटाया और नीचे लेजाकर मम्मी की सलवार का नाड़ा ढीला कर दिया और अपना हाथ मम्मी की सलवार के अंदर ले गया।
जब मेरा हाथ मम्मी की पैंटी के ऊपर से उसकी चूत पर छुआ तो उसके हाथ से बर्तन छूटकर गिर गये और वो मदहोस होकर बोली-“उिफ्र्फ… दीपू पीछे हट… ये सब इस तरह से करना अच्छी बात नहीं है…”
मैंने ने मम्मी के गले पर किस किया और बोला-“मुझे नहीं पता मोम, मुझे आपसे प्यार करना है बस… और ये सब मैं किसी दूसरी औरत से नहीं बल्की अपनी होने वाली बीवी से कर रहा हूँ…”
मम्मी की हालत खराब हो चुकी थी, क्योंकि मैं लगातार उसकी चूत को पैंटी के उपर से सहला रहा था। तभी मम्मी झटके से मुझसे अलग हुई और मुझे चिढ़ाती हुई किचेन की ओर भाग गई। मम्मी अब किसी खुशबूदार गुलाब की तरह खुद ही मेरे पहलू में गिरने को तैयार थी, तो भला मैं अब कैसे पीछे हट सकता था। मम्मी एक औरत होने के नाते पहल करने में झिझक रही थी, सो मुझे ही आगे बढ़कर मम्मी की शर्म को दूर करना था। इसलिये मैं भी मम्मी के पीछे-पीछे किचेन की ओर गया तो मम्मी से झट से दरवाजा बंद कर लिया और खुद दरवाजे से सटकर खड़ी हो गई।
मैंने दरवाजा खटखटाया पर मम्मी ने दरवाजा नहीं खोला, तो मैंने बाहर से मम्मी को छेड़ते हुए कहा-“मम्मी, क्या हुआ? प्लीज़ दरवाजा खोलो ना… देखो अगर पूजा ने देख लिया तो वो क्या सोचेगी की उसका पापा उसकी मम्मी को प्यार नहीं करता, इसलिए प्लीज़ दरवाजा खोलो…”
तो मम्मी ने अंदर से धीरे से ना में जवाब दिया।
तो मैंने मम्मी को बोला-“ठीक है रानी, मत खोलो दरवाजा। अब तुम जितना मुझे तड़पाओगी, देखना रात में उतना ही जोर से ठोंकूंगा…” और इतना कहकर हूँसने लगा।
मैं जानता था की मम्मी ये सब सुन रही है और मैं वहां से जाने लगा। तो मैंने जाते-जाते मम्मी से बोला-“और हाँ मम्मी, अपनी अभी से चिकनी कर लेना, मुझे तुम्हारी एकदम चिकनी पसंद है…” और घर से बाहर निकल गया।
मैं जानता था की मम्मी अब पूरी से तैयार थी और वो ज़रूर आज अपनी चूत को किसी लौंडिया की तरह एकदम चिकनी करके रखेंगी। मैं जानता था की मम्मी अपने बेटे के साथ पहले नाजायज़ सम्बंध से घबरा गई थी। लेकिन चिंता की कोई बात नहीं थी। रात को बीयर वाली बात मेरे लिए फ़ायदेमंद होगी। शराब से आदमी की झिझक खतम हो जाती है। मैं बाजार से कुछ बीयर और एक बोतल वोड्का की ले आया, जिसको मैंने फ्रिज में रख दिया।
पूजा दीदी भी वापस आ चुकी थी। उसने एक सिल्क की हल्के नीले रंग की पारदर्शी साड़ी पहनी हुई थी। माँ और दीदी ड्राइंग रूम में बैठे हुए थे। मैं दीदी के साथ सटकर छोटे सोफे पर बैठ गया। दीदी के जिश्म से भीनी-भीनी सुगंध उठ रही थी और उसका मखमली बदन मुझे उतेजित कर रहा था।
मैं-“मम्मी, मैं बीयर लाया हूँ। क्यों ना थोड़ी सी हो जाए? दीदी का मूड भी ठीक हो जाएगा और हम कुछ मस्ती भी कर लेंगे…”
माँ ने सिर हिला दिया और मैं तीन ग्लास में बीयर के साथ वोड्का मिक्स करके ले आया। माँ और पूजा दीदी ने ग्लास पकड़ लिए और धीरे-धीरे पीने लगीं। शराब के अंदर जाते ही मेरे लण्ड में आग भड़क उठी। मुझे अपनी दीदी और माँ बहुत ही कामुक लगने लगीं। एक प्लेट में मैंने फ्राइड फिश और सास रखी हुई थी। दीदी ने जब चुस्की लेने के बाद फिश खाई तो उसके होंठों पर सास फैल गई।
मम्मी-“पूजा ध्यान से खा। देख अपना मुँह गंदा कर लिया है तुमने। मैं नैपकिन लेकर आती हूँ…” माँ उठी और बाहर चली गई।
मैंने देखा की दीदी के मुँह पर सास लगी हुई थी। मैंने दीदी को बाहों में लेते हुए उसके होंठों से सास चाटनी शुरू कर दी-“माँ तो पागल है। मेरी स्वीट दीदी के स्वीट होंठों से सास सॉफ करने के लिए जब उसका भाई बैठा है तो नैपकिन की क्या ज़रूरत? भाई है ना दीदी के होंठों को प्यार से सॉफ करने के लिए…” कहकर मैंने दीदी को कसकर आलिंगन में ले लिया और उसके चेहरे को चूमने लगा।
दीदी भी उतेजित हो रही थी क्योंकि वो मुझे वापिस किस कर रही थी। जब माँ वापिस आई तो हम भाई बहन के मुँह एक दूसरे से ऐसे जुड़े हुए थे जैसे की कोई प्रेमी हों।
माँ चुपचाप बैठ गई-“दीपू बेटा, तू यहाँ अपनी दीदी को किस कर रहा है और बाहर दरवाजा खुला है। अगर कोई अंदर आ जाता तो? मेरे बच्चों, मेरी खुशी तुम्हारी खुशी में ही है। मैंने कल रात सब कुछ देख लिया था और पूजा ने मुझे सब कुछ बता दिया था। मैं तुम दोनों के साथ हूँ…”
मैंने दूसरा ग्लास बनाया जब सबने पहला ग्लास खाली कर दिया था। इस बार मैंने ग्लास में वोड्का की मात्रा बढ़ा दी ताकी सबको नशा जल्दी हो जाए।
माँ चुपचाप बैठ गई-“दीपू बेटा, तू यहाँ अपनी दीदी को किस कर रहा है और बाहर दरवाजा खुला है। अगर कोई अंदर आ जाता तो? मेरे बच्चों, मेरी खुशी तुम्हारी खुशी में ही है। मैंने कल रात सब कुछ देख लिया था और पूजा ने मुझे सब कुछ बता दिया था। मैं तुम दोनों के साथ हूँ…”
मैंने दूसरा ग्लास बनाया जब सबने पहला ग्लास खाली कर दिया था। इस बार मैंने ग्लास में वोड्का की मात्रा बढ़ा दी ताकी सबको नशा जल्दी हो जाए।
मेरा प्लान आज रात को अपने परिवार की दोनों औरतों को एक साथ इकट्ठे चोदने का था। पूजा दीदी के साथ मैं रात बिता चुका था, जिसका माँ को पता था। अब माँ को छोड़ देना बेवकूफ़ी होगी। क्योंकि कल को पूजा अपने घर चली जाएगी तो फिर मेरे लण्ड की आग शांत करने के लिये मम्मी तो होगी ना… इसलिए मैं आज मम्मी को चोदकर अपनी बना लेना चाहता था।
आख़िर माँ की भी कुछ ज़रूरतें थी। मेरी माँ की भी लण्ड की भूख मुझे ही मिटानी होगी। अपनी माँ के गदराए जिश्म को देखकर मैं पागल हो रहा था। मैं दीदी को ग्लास पकड़ाकर माँ के साथ सटकर बैठ गया। माँ ने घूँट भरा तो शराब उसके होंठों से नीचे बह गई और उसकी गर्दन तक शराब के कारण उसका जिश्म भीग गया। मैंने जीभ से शराब चाटना शुरू कर दिया।
माँ ने अपने आपको छुड़ाने का प्रयास किया लेकिन मैंने उसको जकड रखा था। कुछ हिस्सा माँ की चूची तक चला गया, जिसको मैं चूम-चूमकर चाटने लगा।
दीदी चुपचाप देख रही थी जब मेरे हाथ माँ की चूची पर कस चुके थे।
माँ की साँस ऐसे चल रही थी जैसे कोई जानवर चुदते वक्त साँस लेता हो। मैं थोड़ी देर में मम्मी से अलग होता हुआ बोला-“मम्मी, आज से हम दोनों तेरी हर बात मानेंगे, लेकिन मेरी एक बात तुम दोनों को माननी होगी। तुम दोनों के साथ मेरा रिश्ता वैसा ही होगा, जैसा रिश्ता तुमने कल रात दीदी के साथ देखा था। आज से मेरा कब्ज़ा ना सिर्फ़ पूजा पर होगा बल्की मम्मी, तुझ पर भी होगा। मैं जानता हूँ मम्मी की तुझे भी जिश्म की भूख लगती है और दीदी के भी कुछ अरमान हैं। मैं घर का मर्द हूँ। आप दोनों का मेरे जिश्म पर पूरा हक है और मेरा तुम दोनों पर। यानी पति एक पत्नियाँ दो। दीपू पहले बना था बहनचोद और आज बनेगा मादरचोद। बोलो मंजूर है आपको?” कहते हुए मैंने मम्मी का हाथ पकड़कर अपने लण्ड पर रख दिया।
इस बार मम्मी ने अपना हाथ नहीं खींचा।
मैं-“पूजा, क्या तुम मुझे मम्मी के साथ बाँट सकती हो?” मैंने पुजा से पूछा।
तो पूजा अपनी सीट से उठी और मम्मी के होंठों पर होंठ रखकर किस करने लगी। अब मुझे किसी जवाब की ज़रूरत नहीं थी।
मम्मी मेरे लण्ड से खेलने लगी और अपनी बेटी को किस करने लगी।
मैंने मम्मी की जांघों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया और दीदी की साड़ी खोल डाली।
मम्मी-“दीपू बेटा, तू और पूजा तो ठीक हो, मुझे इस काम में मत घसीटो। मैं अब जवान नहीं हूँ। मैं अब तुम्हें पूजा का पति ही मानूंगी, ये मेरा वादा रहा। मुझे तुम जैसा जमाई और पूजा बेटी जैसी बहू कहाँ मिलेगी? और मैं तुम दोनों का प्यार अपनी आँखों के सामने देख सकूँगी…”
मम्मी की बात सुनते ही दीदी बोली-“मम्मी, तुम्हें तो दीपू जैसा दामाद और पूजा जैसी बहू मिल जाएगी। क्या मुझे दीपू जैसा जवान पापा नहीं चाहिए, जो मेरी प्यारी और सेक्सी सुंदर मम्मी को खुश रख सके? और आप जैसे हाट भाभी जो मेरे प्यारे भैया को मेरे जाने के बाद अपनी जवानी से भरपूर मज़ा दे सके?”
मैं दीदी की बात सुनकर खुश हो गया। बिना मम्मी के मेरी गृहस्ती पूरी होने वाली नहीं थी। आज रात को मेरी मम्मी मेरे लिए मेरी प्यारी मंजू बन जाएगी। बिल्कुल मेरी बहन जैसी एक चोदने वाली औरत, मेरी एक और पत्नी। मैंने अपनी जिप खोल दी और मम्मी का हाथ अपने गरम लण्ड पर रख दिया, कहा-“मंजू, अपने बेटे का लण्ड पकड़कर देखो की तुम्हारे पहले पति से बड़ा है या नहीं? मेरी प्यारी मंजू, चाहे ये लण्ड तेरी चूत से निकला हो, आज तेरी चूत को चोदकर तुझे औरत का सुख देगा, तुझे मेरे बाप की कमी महसूस नहीं होने देगा…”
मम्मी ने मेरा लण्ड सहलाया तो वो और भी कड़ा हो गया। पूजा दीदी ने अपना हाथ मम्मी की कमीज़ में डालकर उसकी चूची को सहलाना शुरू कर दिया। मेरी मम्मी मंजू का जिश्म अब वासना से गुलाबी होने लग चुका था।
पूजा दीदी भी बहुत सेक्सी अंदा से मम्मी को किस कर रही थी-“मम्मी, दीपू तुझे भी उसी तरह प्यार करेगा, जिस तरह मुझे कर चुका है। बहुत प्यारा है मेरा भाई, तेरा बेटा, हमारा ख्याल रखेगा, हमारा मर्द दीपू। हम दोनों इसकी बनकर रहेंगी, और ये हमारा… ना मेरा, ना तेरा… माँ और बेटी का एक मर्द, एक यार, एक लण्ड, जो मेरा भी है और तेरा भी… हम इसकी दो बीवियाँ, इसकी दो रखैल, इसकी दोनों रंडियाँ…”
मम्मी का चेहरा और गुलाबी हो गया। शायद शर्म और वासना का मिला- जुला असर था, कहा-“हाँ बेटी, जिसको जमाई बनाया था, वो तो धोखा दे गया। अब अपने खून पर ही भरोसा है मुझे…”
तभी मैं मम्मी के गाल को पिंच करके बोला-“मेरी छम्मकछल्लो ये क्यों नहीं बोलती की जिसे अपनी चूत का मालिक बनाया था, वो भी धोखा दे गया…”
मम्मी-“दीपू मेरा बेटा भी है और दामाद भी, और पति भी। है भगवान मेरे प्यारे हरे-भरे परिवार को किसी की नज़र ना लगे। हाँ दीपू, मेरे बेटे, तेरा लण्ड तेरे बाप से भी बड़ा है और मोटा भी। मुझे यकीन है कि तुम इससे हम माँ बेटी दोनों को संतुष्ट रखोगे। तेरे लण्ड का स्पर्श मेरे अंदर एक ज्वाला भड़का रहा है। मेरे अंदर की औरत को जगा रहा है। मुझे कोई आपत्ती नहीं अगर पूजा मुझसे भी तेरा प्यार बाँटने के लिए राज़ी है। मेरे बेटा जैसा मस्त जवान हमारे लिए बहुत है। जो मन में आए कर ले तू बेटा…”
मैं उठ खड़ा हुआ और मम्मी की कमीज़ उतारने लगा। मैंने मम्मी के बालों का जूड़ा भी खोल दिया। पूजा दीदी ने अपना ब्लाउज़ और पेटीकोट उतार दिया। पूजा दीदी का गोरा जिश्म प्यार और शराब के नशे से बहुत गुलाबी हो रहा था।
मैं-“मम्मी, पूजा दीदी को चोद चुका हूँ मैं। तुझे चोदकर आज की रात यादगार बनाना चाहता हूँ। मम्मी अगर मैं आपको मंजू कहूँ तो कोई एतराज तो नहीं होगा?”
मम्मी-“अरे बेटा, ऐतराज कैसा? अब मैं तेरी मम्मी ही नहीं, तेरी रांड़ भी हूँ। तू अब चाहे जिस नाम से चाहे मुझे बुला सकता है…”
मैं-“मुझे यकीन है की पूजा दीदी को भी जलन नहीं होगी, अगर मैं आप दोनों को चोदूं?”
पूजा ने अपनी पैंटी उतारते हुए कहा-“दीपू, मेरे भाई, माँ बेटी में कैसी जलन? घर का माल घर में ही तो रहेगा। और वैसे भी मम्मी की मर्ज़ी से ही हमारा मिलन संभव होगा। तेरा जितना हक अपनी बहन पर है, उतना ही अपनी माँ मंजू पर होगा। मैं तुम दोनों को चुदाई करते देखकर माँ से कुछ सीख लूँगी। क्यों माँ?”
मम्मी-“ठीक है बेटी। मुझे भी आज 20 साल के बाद लण्ड नसीब हो रहा है और वो भी अपने बेटे का। सच बेटा, तेरा लण्ड बिल्कुल तेरे बाप जैसा है, बस मोटा थोड़ा अधिक है। आज अपनी माँ को वो सुख दे दो जो तेरा बाप देता था। पूजा बेटी, चुदाई का सबसे पहला कदम है मर्द का लण्ड सहलाना, मुठयाना, इसे प्यार करना, इसको चूमना, चाटना। जैसा मैं करती हूँ तू भी वैसे ही करना। जितना मज़ा लण्ड से खेलने पर दीपू को आएगा, उतना ही तुझे और मुझे भी आएगा…” कहकर माँ ने मेरा लण्ड अपने गरम हाथों में ले लिया और ऊपर-नीचे करने लगी।
मम्मी ने मेरे सुपाड़े पर ज़ुबान फेरी तो पूजा दीदी के मुँह से आऽऽ निकल गई। पूजा अब मम्मी की हर हरकत गौर से देखने लगी। मेरा लण्ड बेकाबू हो रहा था। पूजा दीदी ने मम्मी की नकल करते हुए मेरे लण्ड पर ज़ुबान फेरनी शुरू कर दी।
ड्राइंग रूम में ये सब करना मुझे आरामदायक नहीं लग रहा था, तो मैंने दोनों से कहा-“हमको बेड पर चलना चाहिए। यहाँ मज़ा नहीं आएगा। मुझे लगता है की मम्मी के बेड पर चला जाए। उसी बेड पर जहाँ मम्मी को पहली बार पापा ने चोदकर गर्भवती किया था, उसी बेड पर बेटा भी अपनी प्यारी माँ की चुदाई का महूरत करना चाहता है। क्यों किया विचार है मंजू?”
मम्मी के चेहरे पर एक खास मुश्कान उभर आई। आज मम्मी का चेहरा ऐसे चमक रहा था जैसे कोई नई नवेली दुल्हन अपनी पहली चुदाई की प्रतीक्षा कर रही हो। हम तीनों पूरी तरह से नंगे होकर माँ के बेडरूम की तरफ बढ़ गये। जब मम्मी आगे-आगे चल रही थी तो मुझे उसकी गाण्ड बहुत उतेजक लग रही थी। मंजू मेरी माँ के चूतड़ बहुत सेक्सी थे।
मैंने अपने आपसे वादा किया-“एक दिन मंजू के मखमली नितंबों के बीच से उसकी गाण्ड ज़रूर चोदूंगा…”
“तुम दोनों बिस्तर पर चलो, मैं एक लास्ट पेग बनाकर लाता हूँ…” मैंने कहा और पेग बनाने लगा। शराब के नशे को वासना ने दोगुना बढ़ा दिया था। मैंने तीन बड़े पेग बनाए और माँ के रूम में जा घुसा। मैंने मम्मी को लिटा लिया और उसकी जांघों को पूरी खोलते हुए उसकी चूत को प्यार से सूँघा। मम्मी की चुदासी चूत रो रही थी खुशी के मारे। फिर मैंने अपना सुपाड़ा मंजू की चूत पर टिकाया और चूत पर रगड़ने लगा।
मम्मी-“उिफ्र्फ दीपू… क्यों तरसा रहे हो, जालिम? डाल दो ना…”
पूजा दीदी मेरी पीठ से सटकर मुझसे लिपटने लगी, और कहा-“भाई, पेल डालो अपनी मंजू को। फिर मेरी बारी आएगी अपने प्यारे भाई के लण्ड से चुदवाने की। दीपू, मंजू की चूत मस्ती से भरी पड़ी है। मसल डालो इसको, अपनी माँ की प्यासी चूत को। जो काम पापा ने किया था आज उनका बेटा भी कर डाले। गाड़ दो इस रांड़ की चूत में अपना डंडा। भैया माँ के बाद फिर मुझे कल रात वाली जन्नत दिखा देना। मैं महसूस कर रही हूँ की आज तेरा लण्ड कल से भी अधिक उतावला हो रहा है। और मेरा राजा भैया का लण्ड उतावला हो भी क्यों ना? आज बहन के साथ-साथ माँ भी मेरे भाई की हमबिस्तर हो रही है। शाबाश भाई, चोदना शुरू करो, तब तक मैं माँ से अपनी चूत चुसवाती हूँ। मेरी चूत भी जल रही है…” फिर पूजा दीदी ने मेरा लण्ड पकड़कर माँ की चूत के अंदर धकेल दिया।
मेरी माँ की चूत से इतना पानी बह रहा था की लण्ड आसानी से चूत की गहराई में उतर गया। माँ की टाँगों ने मेरी कमर को कस लिया और वो अपनी गाण्ड उछालने लगी।
पूजा दीदी ने अपनी टाँगों को फैलाकर अपनी चूत माँ के मुँह पर रख दी और मम्मी ने अपनी ज़ुबान उसकी चूत में घुसा दी। पूजा अब मम्मी की ज़ुबान पर चूत हिलाने लगी। पूजा की साँस भी बहुत भारी हो चुकी थी। माँ और दीदी दोनों कामुक सिसकारियाँ भर रही थीं।
मैंने मम्मी की चूची को जोर से मसलते हुए धक्कों की स्पीड बढ़ा डाली। लण्ड फच- फच चूत के अंदर-बाहर होने लगा। जब मैंने माँ के निप्पल्स चूसना शुरू किया तो वो बेकाबू हो गई और पागलों की तरह नीचे से अपनी गाण्ड उठाकर चुदवाने लगी।
मम्मी ने अपना मुँह मेरी बहन की चूत से अलग करते हुए कहा-“वाह बेटा वाह… चोद मुझे। चोद अपनी माँ की चूत… चोद मेरी चूत। अपनी माँ की चूत से पैदा होकर आज उसको चोद, मादरचोद आज तू अपनी बहन के साथ अपनी माँ को भी गर्भवती बना दे। तू अपनी माँ को जो आनंद दे रहा है, उसका कोई मुकाबला नहीं। दीपू, ओह्ह मादरचोद पूजा, तेरा भाई वाकई है बहुत दमदार है। तुझे और मुझे ये हमेशा खुश रखेगा। हम दोनों को खुश रखेगा। खूब चोदेगा हम दोनों को…”
पूजा दीदी अब उठकर आई और मेरे अंडकोष से खेलने लगी और मम्मी की गाण्ड में उंगली करने लगी। लगता था की अब मेरी बहना चुदाई में अधिक दिलचस्पी लेने लगी थी। ज्यों ही पूजा की उंगली माँ की गाण्ड में गई तो माँ का जिश्म ऐंठने लगा, उसकी गाण्ड तूफ़ानी गति से ऊपर उठने लगी। मम्मी अब झड़ने वाली थी। मैंने भी चुदाई और तेज कर दी।
लेकिन मुझसे पहले माँ झड़ गई-“आह्ह… बेटा, मैं गई… दीपू तेरी मंजू, तेरी रांड़ झड़ी… तेरी माँ झड़ रही है। आआअह्ह…” मंजू की चूत का रस उसकी जांघों से होता हुआ बिस्तर पर गिरने लगा। कोई दो मिनट छटपटाने के बाद मम्मी शांत हो गई।
लेकिन मैं अभी नहीं झड़ा था। मैंने अपना भीगा हुआ लण्ड मंजू की चूत से निकाला और माँ की बगल में ही पूजा दीदी को लिटा दिया। दीदी मेरे लण्ड को भूखी नज़रों से देख रही थी। वो आगे झुकी और मेरे लण्ड को चूसने लगी, चाटने लगी। पूजा दीदी की आँखें उत्तेजना कारण बंद थीं, और वो किसी रांड़ की तरह अपने भाई का लण्ड चूस रही थी। मुझे खुशी थी की वो पूजा, जिसको अपने पति का लण्ड गंदा लगता था, आज अपने भाई के लण्ड को किस तरह प्यार से चूम रही थी।
मैंने दीदी को बालों से खींचकर घोड़ी बनाया और लण्ड घुसेड़ दिया एक ही झटके में,
पुजा-“उम्म्म… उिफ्र्फ… इन्न्नम… उम् म्म्म… उिफ्र्फ… आआह्ह… भैया धीरे… माँ मर गई मैं…” पूजा बिलबिलाने लगी।
मैं अब दीदी को बेरहमी से चोदने लगा, कहा-“पूजा, कैसा लग रहा है? मेरा लण्ड तेरी चूत में घुस चुका है। बहुत टाइट है तेरी चूत। मुझे बहुत मज़ा दे रही है ये…”
उधर माँ हम दोनों को देखकर मुश्कुरा रही थी और मुश्कुराती भी क्यों ना… आख़िर घर का मर्द घर की औरत को चोदकर आनंदित कर रहा था। मैं पूजा दीदी को जोरदार तरीके से चोद रहा था, जिससे दीदी जोर-जोर से कराह रही थी।
दीदी की चीखें सुनकर मम्मी भी दीदी को छेड़ते हुए बोली-“अब पता चला साली को की इतना बड़ा लौड़ा कोई ऐसे ठोंके तो कितना दर्द होता है? जब ये मेरी चूत में ठोंक रहा रहा था, तो तब साली कैसे मुश्कुरा रही थी। अब देखती हूँ की तू कैसे मुश्कुराती है, जब मेरा ये राजा बेटा अपना ये मस्त लौड़ा तेरी चूत में ठोंक रहा है…
”
मेरा हाथ कई बार पूजा दीदी की चूची मसल देता और कई बार उसके चूतड़ पर छपत मार देता, जिससे मेरी दीदी की कामुकता और तेज हो जाती। दीदी आगे की तरफ झुकी हुई थी और मैं उसको घोड़ी बनाकर चोद रहा था। घोड़ी बनाकर चोदने का मज़ा ही कुछ और होता है। कमरे के अंदर सेक्स की खुश्बू फैली हुई थी। मुझे दीदी के नंगे जिश्म की तस्वीर और भी कामुक बना रही थी। धक्के तूफ़ानी हो चुके थे और दीदी अपने चूतड़ पीछे धकेल कर मेरे मज़े को दोगुना कर रही थी।
पुजा चीख रही थी-“दीपू मेरे भाई, मेरे सॉफन तेरी बहन जा रही है। मेरी चूत पानी छोड़ रही है। आआह्ह… मैं झड़ रही हूँ। जोर से चोदो भाई… मैं मर गई… चोदो भैयाआ…”
मेरा लण्ड भी छूट रहा था। मैं अपना रस दीदी की चूत के अंदर छोड़ने वाला था। मैंने पूजा को कस के पकड़ रखा था और ताबड़तोड़ चोद रहा था-“ऊऊऊह्ह… उऊह्ह… उम् म्म्म… आआऽऽ उम्म्म…” मेरा लण्ड अपना फव्वारा छोड़ने लगा। मैं कुत्ते की तरह हाँफ रहा था।
पूजा दीदी का भी हाल बुरा हो रहा था। मैं दीदी की चूत में लण्ड डालकर पड़ा रहा फिर हम सब इतना थक गये थे की मम्मी पूजा और मैं सब सो गये।
अगले दिन जब मैं उठा तो दीदी और माँ दोनों कमरे में नहीं थी। सवेरे के 8:00 बज रहे थे। मैं उठकर बाथरूम में गया। नहा धोकर जब बाहर निकला तो देखा की माँ पूजा कर रही थी और दीदी उसके साथ बैठी हुई थी। जब मैं वहाँ पहुँचा तो पहले दीदी ने और फिर माँ ने झुक कर मेरे पैरों को स्पर्श किया।
जब मैंने उनको ऐसा करने से रोका तो वो शर्माकर बोली-“दीपू, तुम आज से हमारे पति हो और हम तेरी पत्नियाँ। दुनियाँ हमारे रिश्ते को कुछ भी समझे, लेकिन तुम हमारे स्वामी हो…”
मैंने मम्मी को और पूजा दीदी को उठाया और अपने गले से लगाकर कहा-“नहीं, मैं तुम्हारा स्वामी नहीं बल्कि तुम दोनों मेरे दिल की रानियाँ हो…” और फिर उन दोनों को अपने गले से लगा लिया।
मम्मी और पूजा दीदी दोनों मेरी बाहों में थी। मेरे हाथ मम्मी और पूजा दीदी दोनों के पीछे उनकी गाण्ड को सहला रहे थे और वो मेरी छाती के बालों से खेल रही थीं। तभी पूजा दीदी मुझसे अलग हुए और अंदर रूम में चली गई।
मुझे और मम्मी को कुछ समझ में नहीं आया की पूजा दीदी को क्या हुआ? इससे पहले की हम कुछ समझ पाते दीदी कुछ ही देर में बाहर आ गई। उस वक़्त दीदी के एक हाथ में एक सिंदूर की डिब्बी और दूसरे हाथ में मम्मी का मगलसूत्र था। हम कुछ बोलते इससे पहले ही दीदी ने मेरी ओर देखकर कहा-“दीपू, तुमने मुझे इतनी खुशी दी, इतना मज़ा दिया है जो मुझे आज तक कभी नहीं मिला और सबसे बड़ी खुशी जो तूने मुझे दे दी की तूने मुझे अपने बच्चे की माँ बना दिया है। इस एहसान का बदला मैं सारा जीवन नहीं उतार सकती…”
मैं-“दीदी, इसमें एहसान कैसा? अब तुम मेरी हो और मैं तुझे अपनी बीवी मानता हूँ तो इसमें एहसान कैसा? एक पति ही तो अपनी बीवी को माँ बनाता है और साथ में बीवी तेरी जैसी मस्त और हाट हो तो कोई भी उसे एक से छः बच्चो की माँ बना देगा…”
दीदी-“भैया, आपने मम्मी को रात को इतना मज़ा दिया। मम्मी, जो इतने सालों से बिना किसी मर्द के प्यार को तरस रही थी, तूने मम्मी को फिर से औरत बनने का सुख दिया। भैया क्या आप ये सुख पूरी जिंदगी माँ को दे सकते हो? क्या आप मम्मी को अपना नाम दे सकते हो? उसके साथ शादी करके मम्मी को अपने जीवन में शामिल कर सकते हो?”
दीदी की बात सुनते ही मम्मी ने तो शर्म के मारे अपनी नज़रें नीचे कर ली।
मैंने दीदी की बात सुनते ही दीदी के हाथों से सिंदूर लेकर माँ की माँग में भरते हुए कहा-“दीदी क्यों नहीं? मैं तो मम्मी जैसी पत्नी पाकर अपने आपको बहुत खुशकिस्मत समझूंगा…”
फिर मैंने झट से दीदी की गाण्ड पर जोर से थप्पड़ मारते हुए कहा-“दीदी, मम्मी को अपनी बीवी बनाने में मुझे फ़ायदा ही फ़ायदा है की अब माँ के साथ उसकी मस्त सेक्सी बेटी भी चोदने को मिलेगी…”
दीदी मेरी बात सुनते ही मुश्कुराने लगी। तभी दीदी ने मम्मी का मंगलसूत्र देते हुए कहा-“भैया, आपने भगवान के सामने मम्मी की माँग में सिंदूर तो भर दिया, अब जल्दी से मम्मी के गले में मंगलसूत्र बांधकर उसे पूरी तरह अपना बनो लो…”
मैंने दीदी के साथ से मंगलसूत्र ले लिया, ये वोही मंगलसूत्र था जो पापा ने शादी के वक्त मम्मी को पहनाया था। उस मंगलसूत्र को देखकर मैंने कहा-“पूजा, ये मंगलसूत्र मेरी बीवी के लिए, वो भी उस नामर्द आदमी का जिसने मेरी इतनी सेक्सी मम्मी को बीच रास्ते में तड़पने के लिए छोड़ दिया, उस हरामी नामर्द आदमी का ये पुराना मंगलसूत्र मैं मम्मी को कैसे पहना सकता हूँ? मैं तो अपनी इस सुंदर सेक्सी बीवी को नया मंगलसूत्र जो मेरे नाम का होगा पहनाऊूँगा। अगर मंजू को ये ही मंगलसूत्र पहनना हो तो ठीक है…”
मेरा इतना कहना ही था की मम्मी ने मेरे हाथ से मंगलसूत्र ले लिया और उससे तोड़कर दूर फैंक दिया और मुझसे कहने लगी-“नहीं नहीं, मुझे ये मंगलसूत्र नहीं पहनना… अब मुझे सिर्फ़ आपके नाम का ही मंगलसूत्र पहनना है…”
दीदी मम्मी की बात सुनकर बोली-“वो मम्मी, आप तो अभी से भैया की हो गई। आज जब आप भैया की हो ही गई हैं तो आज भैया पर सिर्फ़ आपका हक होगा, और मैं भी आज भैया को भैया या दीपू नहीं कहूंगी, बल्कि आज मैं इनको पापा कहूंगी…”
मैंने उनकी बातें सुनकर कहा-“जिसको जो कहना है कह लेना, पर अभी तुम दोनों तैयार हो जाओ, ताकि हम जल्दी से मार्केट जाकर तुम्हारी मम्मी के लिये नया मंगलसूत्र ले आएं…”
पूजा दीदी-“हाए पापा, बड़ी जल्दी है बाजार जाकर वापिस आने की ताकि घर आते ही आप मम्मी का बैंड बजा सकें…”
मैं-“बैंड तो मैं तेरी मम्मी का बजाऊँगा ही… अगर तू कहे तो तेरा भी तबला बजा दूं?” और मैंने जोर से दीदी की गाण्ड पर थप्पड़ मारा।
पूजा दीदी-“हाए पापा, चाहती तो मैं भी यही हूँ की आप मेरा तबला अभी बजा दो… पर क्या करूं, आज तो आपको बस मेरी मम्मी का तबला बजाना है…”
मम्मी हम दोनों की मस्ती भरी सुनते हुये शर्म से आँखें नीचे किए हुई थी।
तभी मैंने कहा-“जाओ तुम भी और फटाफट तैयार हो जाओ…”
दीदी-“पापा, मुझे तैयार होने में कितना टाइम लगेगा? तैयार होने में टाइम तो आपकी दुल्हन को लगेगा…”
दीदी की बात सुनते ही हम सब जोरों से हँस पड़े। फिर हम सब तैयार होने के लिए अंदर रूम में चले गये, 15 मिनट बाद जब हम तैयार होकर निकले तो मैं तो मम्मी को देखते ही दंग रह गया। मम्मी आज एकदम कयामत लग रही थी, वो ऐसे तैयार होकर बाहर आई थी की जैसे कोई नई नवेली दुल्हन पहली बार अपने पति के साथ बाहर जा रही हो।
मम्मी को मेरे कुछ कहने से पहले ही दीदी बोली-“वाउ पापा… देखा मम्मी क्या लग रही है? लगता है आप आज अभी अपनी जवानी दिखाकर आपका खड़ा कर देगी…”
मम्मी हमारी बात सुनकर साथ में शर्मा रही थी। दीदी ने फिर से मम्मी को छेड़ते हुए कहा-“क्यों मम्मी, बाजार कैसे चलना है? गाड़ी में या फिर आज आपको पापा के लण्ड पर बैठकर मार्केट जाना है?
दीदी के द्वारा मम्मी को इस तरह छेड़ते देखकर मम्मी के गाल एकदम सुर्ख लाल हो रहे थे। मम्मी के मुँह से एक भी बोल नहीं निकल रहा था। मम्मी के मन की दफ़ा को समझकर मैं दीदी के कुछ और कहने से पहले ही मैंने अपना लण्ड जो पहले से ही खड़ा था बाहर निकाल लिया और दीदी का हाथ पकड़कर उसे खींचकर अपनी बाहों में भरते हुए कहा-“दीदी, मम्मी तो क्या… तुम कहो तो मैं मम्मी के साथ-साथ मम्मी की बेटी को भी अपने लण्ड पर बैठाकर मार्केट ले जाऊँ?”
मेरी इस हरकत पर दीदी मेरे लण्ड को अपने हाथ से सहलाती हुई बोली-“हाए मेरे प्यारे पापा, मैं तो तैयार हूँ आपके इस लण्ड पर बैठकर मार्केट चलने को, पर क्या करूं आज तो इस पर बैठने का हक सिर्फ़ मम्मी को है…” और फिर दीदी ने नीचे बैठकर मेरे लण्ड पर अपने होंठ रख दिए। जिसे मम्मी किसी भूखी नज़रों से देख रही थी।
पर वो अपने अंदर की बात को छुपाते हुए बोली-“चलिए ना… क्या आप भी इसको अपना खिला रहे हैं? अगर आपको इसको खिलाना ही है तो मैं नहीं जाती…” और अंदर की ओर जाने लगी।
तभी दीदी ने झटके से मम्मी की बांह को पकड़ लिया और बोली-“मम्मी, आप क्यों अंदर जा रही हो? चलते है ना मार्केट… मैं तो बस पापा का थोड़ा सा चेक कर रही थी, अगर आप चाहो तो आप इसको चख सकती हैं…”
मम्मी-“नहीं मुझे नहीं चखना…”
दीदी-“देखो पापा, मम्मी अभी बोल रही है कि नहीं चखना उसे, और देखना रात को कैसे उछल-उछलकर चखेगी आपका ये मस्त लौड़ा…”
दीदी की बात सुनते ही में और दीदी जोर से हँस पड़े और मम्मी शर्म के मारे आँखें नीचे करते हुए बाहर की ओर निकल पड़ी। मम्मी के पीछे-पीछे मैं और दीदी भी बाहर की ओर चल पड़े। कुछ ही देर में हम एक ज्वेल्लरी शॉप पर पहुँचे। मैंने वहां मम्मी के लिए सोने का मंगलसूत्र लिया। मैं अब जल्दी से जल्दी घर वापिस आना चाहता था, क्योंकि मेरा मन मम्मी और दीदी को चोदने का बहुत कर रहा था, तो इसलिए मैं जल्द से जल्द घर आना चाहता था।
पर दीदी थी कि वो अभी घर जाने का नाम ही नहीं ले रही थी।
मैंने जब देखा की दीदी अभी घर जाने के मूड में नहीं है तो मैंने मम्मी से कहा-“मम्मी, अब मंगलसूत्र ले लिया अब चलें घर चलें…”
इससे पहले मम्मी कुछ कहती, दीदी बोली-“अभी नहीं भैया, अभी तो मम्मी को दुल्हन के रूप में तैयार होने के लिये किसी ब्यूटी पार्लर में जाना है…” और फिर मैं, दीदी और मम्मी एक ब्यूटी पार्लर में आ गये, जहाँ उसने मम्मी को दुल्हन के रूप में तैयार कर दिया।
जैसे ही मम्मी तैयार होकर पार्लर से बाहर आई, मम्मी को देखते ही मेरा मुँह खुला का खुला रह गया। उस टाइम मेरा लण्ड इतना हार्ड हो गया की मुझे लगता था की अभी ये पैंट फाड़कर बाहर आ जाएगा। अब मैं जल्द से जल्द घर जाकर मम्मी को चोदना चाहता था, और शायद अब मम्मी भी अंदर है अंदर जल्द से जल्द घर पहुँचकर मेरे साथ सुहगरात मानने, यानी अपने नये पति के साथ मस्ती करना चाहती थी। पर शर्म से कुछ बोल नहीं पा रही थी।
पूजा दीदी ने हमारे मन की बात को समझा और बोली-“मम्मी, चलो अब घर चलते हैं बड़ी देर हो गई…” और हम सब गाड़ी में आकर बैठ गये।
गाड़ी में आते ही पूजा दीदी ने फिर से मम्मी से मज़ाक करना शुरू कर दी और मम्मी से बोली-“मम्मी, आपको इस रूप में देखकर पापा का डंडा एकदम हार्ड होकर लोहे का बन गया है। मुझे लगता है कि आज आपके तबले की खैर नहीं। देखते हैं कि घर जाते ही पापा अपने इस मूसल डंडे से आपके तबले पर कितनी जोर से थाप देते हैं…” और इतना कहकर पूजा दीदी ने मम्मी की गाण्ड को जोर से दबा दिया।
मम्मी तो शर्म से लाल हो रही थी पर मम्मी ने भी दीदी का जवाब देते हुए कहा-“अगर तुझे पापा के डंडे से अपने तबले पर थाप लेनी है तो ले लेना…”
पूजा दीदी-“हाए मम्मी, मैं तो चाहती हूँ की पापा का डंडा मेरे तबले पर थाप दे… पर क्या करूं? आज पापा के इस डंडे की थाप तो आपके तबले पर पड़ेगी…”
और हम तीनों इसी तरह हँसी मज़ाक करते घर आ गये। ये तो मैं ही जानता था की मेरे लण्ड का क्या हाल होगा? जब पूजा दीदी और मम्मी जैसा मस्त माल साथ में हो तो किसका लण्ड होगा जो उछल-कूद नहीं करेगा, और मेरे लण्ड का तो ये हाल था की अभी पैंट फाड़कर बाहर आ जाएगा। घर पहुँचते ही मैं जल्दी से जल्दी मम्मी को लेकर रूम में उनकी जोरदार चुदाई करना चाहता था। मेरे लिये अब कंट्रोल करना बड़ा मुश्किल था।
पर दीदी थी जो अब भी मुझे तड़पा रही थी। जैसे ही मैं मम्मी की कमर में हाथ डालकर बेडरूम की ओर ले जाने लगा तो दीदी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली-“पापा, अभी कहां ले जा रहे हो मम्मी को?”
मैं-“अरे वहीं, ज़रा तुम्हारी मम्मी को जन्नत की सैर करवा दूं। ये देख मेरा घोड़ा कैसे उछल रहा है?” और मैंने दीदी का हाथ पकड़कर अपने लण्ड पर रख दिया।
दीदी-“हाए मम्मी, पापा का घोड़ा अभी से कैसे उछल रहा है… जब ये आपके अंदर दौड़ लगायेगा तो पता नहीं आपका क्या हाल होगा? पर पापा ये सब करने से पहले तुम्हें पूर्ण रूप से मम्मी को अपना बनाना होगा…”
मैं-“अरे क्या दीदी, बना तो लिया है अब क्यों तड़पा रही हो?”
दीदी-“अभी कहां पूर्ण रूप से? अभी तो मम्मी के गले में मंगलसूत्र डालना नहीं है क्या?”
मैं-“ओह्ह… सारी, मैं जल्दी-जल्दी में ये सब भूल ही गया…”
दीदी-“हाँ हाँ अब आपको ये क्यों याद रहेगा? आपको बस अब मम्मी की चूत का ध्यान है…” कहकर दीदी हँसने लगी।
दीदी की बात सुनते हैी मम्मी शर्म से लाल हो गई और बड़े प्यार दीदी के गालों पर थप्पड़ लगती बोली-“बड़ी नटखट है तू…”
फिर दीदी ने मुझे मंगलसूत्र दिया और जो मैंने मम्मी के गले में बांध दिया।
जैसे हीमैंने मम्मी के गले में मंगलसूत्र बाधा, दीदी ने ताली बजाकर स्वागत किया और कहा-“पापा, आज से मम्मी पूर्ण रूप से तुम्हारी हो गई, अब से मम्मी किसी अश्वनी की विधवा नहीं बल्कि एक सुहागन मिसेज़ दीपक हैं…”
तब मम्मी नीचे झुक के मेरे पैर छूने लगी।
तो दीदी ने मुझे मम्मी को आशीर्वाद देने को कहा।
मैं मम्मी को आशीर्वाद देने में हिचकिचा रहा था, क्योंकि मम्मी उमर में मुझसे बड़ी थी।
मेरे मन की दशा को समझते हुए दीदी ने कहा-“भैया, आप ये सोच रहे हैं की मम्मी आपसे बड़ी हैं, तो अब आपका ये सोचना गलत है। अब मम्मी आपसे बड़ी नहीं बल्कि छोटी हैं। जैसे मेरा स्थान अब आपके चरणों में है, उसी तरह अब मम्मी का स्थान भी आपके चरणों में है। अब मम्मी का ये धर्म है आपकी हर इक्षा को पूर्ण करना, क्योंकि ये पत्नी का कर्तव्य है। जैसे एक माँ का अपने बच्चो पर ये हक होता है की वो उन्हें प्यार करे, और गलती करने पर सज़ा दे, तो इसी तरह एक पति का भी ये हक होता है कि वो अपनी पत्नी को प्यार करे और अगर वो गलती करे तो उसे सज़ा दे मारे, इससे प्यार बढ़ता है…”
मैं दीदी की बातें बड़े ध्यान से सुन रहा था। फिर मैंने मम्मी को सुहागन का आशीर्वाद दिया और मेरे कुछ कहने से पहले ही दीदी मम्मी को लेकर बेडरूम में जाने लगी।
जब मैं भी उनके पीछे जाने लगा तो दीदी ने मुझसे कहा-“बस… अभी नहीं, थोड़ी देर में आपको बुलाती हूँ फिर आप अंदर आना पापा…” और मेरी ओर देखकर मस्ती से अपने होंठ काटने लगी। 5 मिनट के बाद दीदी का रिप्लाई आया की भैया रूम में आ जाओ।
मैंने बिल्कुल ऐसा ही किया, और मैं मंजू के रूम के बाहर खड़ा हो गया। मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा, और मेरी उत्तेजना बहुत ही बढ़ चुकी थी। फिर मैंने दरवाजा खोला और अंदर देखा की रूम की लाइटें बंद हैं, बेड के चारों तरफ कैंडल जल रही है, जिससे हल्की-हल्की रोजनी पूरे कमरे में हो रही है। एकदम किसी फिल्म की सुहागरात के दृश्य जैसे। मैं रूम के अंदर आ गया।
जब मैं आगे बढ़ा तो देखकर हैरान हो गया। मंजू सुहागन के जोड़े में अपने पूरे बदन को हीरे जवाहरातों से भरकर घूँघट निकाले बैठी थी। मंजू किसी राजकुमारी से कम नहीं लग रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे मानो आसमान से सारे चाँद सितारे मंजू के गोरे बदन पर आकर चमकने लगे हैं। मुझे तो ये सब एक सपने की तरह लगने लगा। मंजू बिस्तर पर चुपचाप बैठी थी। उसकी आँखें नीचे झुकी हुई थीं, और वो धीरे-धीरे मुश्कुरा रही थी। मुझे ये अनुभव हो रहा था की मेरी सचमुच में शादी की सुहागरात हो।
मैं बेड की तरफ बड़ा ही था की पूजा दीदी ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे पास रखे सोफे पर बैठा दिया और मुझसे कहने लगी-“पापा, इतनी जल्दी भी क्या है? मैंने आप दोनों का मिलन करवाया है, पहले इसके बदले में मेरा उपहार…”
मैंने दीदी की बाजू पकड़कर अपनी ओर खींचा जिससे दीदी सीधी मेरी गोद में आ गिरी।
और मैं दीदी के होंठों को चूमते हुआ बोला-“मेरी जान, तुझे तो मैं ऐसा गिफ्ट दूंगा की तू सारी लाइफ याद रखेगी…” और मैंने दीदी का हाथ पकड़कर अपने लण्ड पर रख दिया।
दीदी मेरे लण्ड को सहलाती बोली-“हाय पापा, आपका ये गिफ्ट लेने के लिये मैं अब हमेशा ही बेताब रहती हूँ। पर क्या करूं, आज आपके इस गिफ्ट पर सिर्फ़ मम्मी का हक है। आज आप इस पर सिर्फ़ मम्मी को ही बिठा सकते हो…” फिर दीदी ने मुझे मम्मी के पास जाने की इजाज़त दे दी।
फिर मैं बेड पर मम्मी के पास गया और अपने दोनों हाथों से मंजू का घूँघट पकड़ा और धीरे से मंजू के चेहरे से हटाया। मैंने देखा की मंजू ने अपनी नज़रें नीचे झुका रखी हैं और वो बेतहाशा खूबसूरत लग रही है। जिसे देखकर मैं बोला-
“सुहानी रातों की वो मदमस्त मुलाकातें,
भूल सकता है भला कौन वो हमारी प्यारी बातें,
अरमान पूरे हुये मेरे, कोई शिकायत नहीं तुमसे,
तुमने सज़ाई है मेरी बेशुमार हसीन रातें…”,
ये सुनकर मंजू अपने चेहरे पर मुश्कुराहट लाई और एक पल मेरी ओर देखकर फिर से अपनी नज़रें नीचे झुका ली। फिर मैंने मंजू का चेहरा अपने हाथों में ले लिया और धीरे-धीरे चूमने लगा। सबसे पहले मैंने अपने होंठ मम्मी के गुलाबी गालों पर रख दिए और उसके गालों को किस किया, फिर आँखों को चूमा, फिर मैंने अपने होंठ मम्मी के लाल-लाल होंठों पर रख दिए और मम्मी के रसीले होंठों को पूरे जोश के साथ चूसने लगा। और मम्मी भी खुलकर मेरा साथ देते हुए मेरे होंठों को चूसने लगी। हम लोग एक दूसरे को चूमते हुए बिस्तर पर लेट गये। अब मैं मम्मी के ऊपर था।
मैं मम्मी के ऊपर होकर मम्मी के होठों को जोर-जोर से चूसने लगा और इतना जोर लगाया की मंजू के होंठ मेरे दाँत से लगने लगे। हमारी जीभ एक दूसरे से टकरा रही थी और हम लोग एक दूसरे की जीभ चूसते हुए एक दूसरे को प्यार कर रहे थे। हम लोग अपनी-अपनी जीभ एक दूसरे के मुँह के अंदर डालकर घुमा रहे थे। फिर धीरे-धीरे मैंने मम्मी के बदन पर से गहने उतारने शुरू कर दिए। मैंने मम्मी के ब्लाउज़ को जैसे ही खोला तो मंजू की बड़ी-बड़ी चूचियां कूदकर बाहर आ गईं। मम्मी ने ब्रा नहीं डाली थी।
मैंने जैसे ही मम्मी के नंगे चूचों के दर्शन किए, मैं पागल सा हो गया और झट से हाथ में लेकर दबाने लगा और मंजू को किस करने लगा। मेरा और मम्मी का जिश्म तपते सूरज की तरह जलने लगा और हमें एसी में भी अपने जिश्म पर नमी महसूस होने लगी। फिर मैंने किस करते हुए मंजू को खड़ा किया और उसकी साड़ी को उसके गोल सुडौल बदन से अलग कर दिया।
मंजू मदमस्त होकर मुझसे लिपट गई। उसे भी यही एहसास था की आज से मैं उसका बेटा नहीं उसका पति हूँ, जिसके साथ वो सुहागरात मना रही है। मैं मम्मी की हिरनी जैसी गर्दन को चूमने लगा और दोनों हाथों से पेटीकोट का नाड़ा पकड़कर खींच दिया। जैसे ही मैंने मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा खींचा, मम्मी का पेटीकोट खुलकर सिर्फ़ दो सेकेंड में नीचे सरकते हुए मंजू के पैरों पर आ गिरा। मंजू की चिकनी गोरी टांगे अब नंगी हो चुकी थीं, और वो मेरे सामने सिर्फ़ पैंटी में थी। मम्मी को किस करते-करते मैंने भी अंडरवेर को छोड़कर बाकी सारे कपड़े उतार दिए।
अब हम दोनों के जिश्म कुछ यूं मिलने लगे जैसे कोई दो गुलाब के फूल हों आपस में मिल चुके हो। हम दोनों पूरी गर्मी में आ चुके थे। मंजू की लण्ड की प्यासी चूत की तपन आज खुलकर बाहर आ रही थी। हम दोनों दुबारा बिस्तर पर एक दूसरे से लिपटकर लेट गये, और एक दूसरे के होंठों को बेतहाशा चूसने लगे, एक दूसरे के नंगे बदन पर हाथ फेर रहे थे, और एक दूसरे के नंगे बदन की हर एक इंच को चूम रहे थे। मंजू को चूमते हुए मैं मम्मी के चूचों से होते हुए उसकी जांघों की तरफ आ गया।
मैंने मंजू की टांगों को पूरी तरह खोल दिया और पैंटी के ऊपर से एक किस मम्मी की चूत पर की तो मंजू के मुँह से एक धीमी सिसकारी निकली। फिर मैंने अपने दोनों हाथों से मम्मी की पैंटी के किनारों को पकड़ा और खींचते हुए पैंटी को मम्मी की टांगों में से निकाल दिया। जैसे ही मैं मम्मी की पैंटी को उतारने लगा तो मम्मी ने नीचे बिस्तर से अपनी गाण्ड उठाकर अपनी पैंटी उतारने में मेरी मर्द की। मैंने मम्मी की पैंटी उतारकर रूम में सोफे पर बैठी पूजा दीदी के ऊपर फैंक दी।
अब मम्मी की नंगी एकदम सफाचट चिकनी चूत मेरी आँखों के सामने थी। मुझे अपनी चूत की ओर इस तरह देखते हुए मम्मी को अचानक शर्म आ गई और उसने अपने हाथों से अपनी चूत को ढक दिया। जब मैंने मम्मी की तरफ देखा तो उसने शर्म से मुश्कुराकर अपनी नज़रें दूसरी तरफ कर ली। फिर मैं मम्मी के पैरों का अंगूठा अपने हाथों में लिया और उसे मुँह में भरकर उसपर जीभ फेरने लगा।
मंजू के मुँह से एकदम सिसकारी निकली-“ उफफफफफ्फ़…उफफफफफ्फ़ हइईईईई…” और मंजू सातवें आसमान पर पहुँच चुकी थी, उसकी तेज सांसों की वजह से उसकी छाती बहुत जोरों से ऊपर-नीचे हो रही थी।
फिर मैं मम्मी की टांगों को चूमते हुए वहां आ गया, जहाँ मम्मी ने हाथ रखा हुआ था। जब मैंने मम्मी के हाथ के पास किस की तो मम्मी की सिसकारी निकल गई ‘आह्ह’, क्योंकि वो मम्मी की लाल परी के एकदम करीब था। फिर मैंने मम्मी के हाथ को धीरे से पकड़ा और साइड में कर दिया। मम्मी की पानी से भरी हुई लाल पंखुड़ियों वाली चूत नंगी हो गई, जिसे देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया।
फिर जब मैंने मम्मी की लाल परी पर किस की तो वो और भी गरमा गई और उसकी बेचैनी ने कंट्रोल खो दिया। मम्मी ने मेरा सर पकड़कर अपनी चूत की तरफ धकेल दिया और मेरे सिर को अपनी जांघों में छिपा लिया। मैं बेसबरों की तरह मम्मी की चूत को चाटने लगा, ठीक जैसे भंवरे फूलों का रस पी जाते हैं। मुझे मम्मी की चूत का स्वाद बिल्कुल मम्मी के नाम के जैसा लग रहा था।
जैसे-जैसे मैं अपनी मम्मी की चूत को जोर-जोर से चाटने लगा, मम्मी पागल होकर सिसकारी मारने लगी और उसने अपने हाथों से मेरा सिर पकड़कर अपनी चूत पर कसकर दबा लिया और अपनी दोनों मोटी-मोटी जांघों से मेरे मुँह को जकड लिया। मैंने अपनी जीभ को जितना हो सकता था मम्मी की चूत के अंदर डाल दिया, और जीभ अंदर घुमा-घुमाकर चूत के अंदर चाटना शुरू कर दिया, कभी-कभी उसकी चूत की गुलाबी पंखुड़ियों को भी अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।
थोड़ी देर के बाद मम्मी का शरीर एकदम से अकड़ गया, उसने कसकर मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा दिया। मैं मम्मी की चूत में अपनी पूरी जीभ अंदर डालकर चाट रहा था, जिससे मम्मी मस्ती से सातवें आसमान पर थी।
मम्मी अपनी चूत मुझसे चटवाते हुए मस्ती से सिसकती बोली-“हाई िी, ये क्या कर रहे हो? क्या मार ही डालोगे?”
मैं-“क्या हुआ मेरी रानी? क्या तुम्हें मेरे इस तरह चाटने से मज़ा नहीं आ रहा?”
मम्मी-“नहीं नहीं, ऐसी बात नहीं है। मज़ा तो इतना आ रहा है कि इतना मज़ा तो आज तक कभी नहीं आया। आज पहली बार कोई मेरी इस तरह से चाट रहा है…”
मैं-“क्यों मेरी जान, क्या उस नामर्द, यानी के तेरे पहले पति ने कभी तेरी चूत को इस तरह से नहीं चाटा?”
मम्मी-“नहीं नहीं, इस तरह मेरी चाटनी तो दूर, उसने कभी इस पर प्यार भी नहीं किया…”
मैं-“साला नामर्द कहीं का। तेरे जैसी मस्त छमिया की जवानी का रस पीने की उस नामर्द में हिम्मत ही नहीं होगी, साला लगता है तुझे देखते ही उसका पानी निकल जाता होगा…” मैं मज़े के साथ अपने ही बाप को गालियां दे रहा था-“मेरी रानी अब देख तू ज़रा मैं कैसे तेरी इस मस्त जवानी का रस चूसता हूँ…” और मैं मम्मी की चूत से झटके दे-देकर पानी निकाल रहा था और चूत से निकला मीठा-मीठा रस मेरे पूरे मुँह में भर गया और मैं उस रस को जितना ज्यादा हो सकता था पी गया।
जब मधु झड़कर शांत हो गई तो उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरे लण्ड को पकड़कर उसके सुपाड़े को खोल लिया। फिर मम्मी ने झुक कर मेरे लण्ड का खुला हुआ सुपाड़ा पहले अपनी जीभ से चाटा और फिर उसको अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी। मैं मम्मी द्वारा लण्ड चुसाई से मिलता आनंद ले रहा था। अब जबकि मम्मी मेरा लण्ड अपने मुँह में भरकर चूस रही थी तो मुझे बहुत है आनंद मिला। मम्मी ने मेरे लण्ड को चूसते-चूसते धीरे-धीरे पूरा का पूरा लण्ड अपने मुँह में भर लिया और मेरा लण्ड मम्मी के गले से टकराने लगा और मम्मी मेरे लण्ड को अपने होंठों और हाथों से सहलाने लगी। मम्मी अपने हाथों से मेरे अंडों को पकड़कर सहला रही थी और साथ ही मेरा लण्ड चूस रही थी।
मैं मज़े से पागल हुआ जा रहा था। मैंने सिसकारियाँ भरते हुए मधु से कहा-“आआह्ह… मोम उफ़फ्फ़ … क्या लण्ड चूसती हो तुम… और अंदर ले जाओ मोम… आह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है। मोम मैं आज आपको जम कर चोदूंगा। बड़ी मस्त रांड़ हो तुम… मेरी छमिया, मेरी छम्मकछल्लो। आअह्ह…”
मैं पूजा दीदी की ओर देखकर-“देख पूजा, तेरी मम्मी कितने प्यार से मलाई वाली कुल्फि खा रही है। ये तो ऐसे खा रही है ये कुल्फि की जैसे इसकी सारी मलाई ही खा जाएगी…”
पूजा-“हाए पापा, आपकी ये कुल्फि नहीं कुलफा है। मम्मी तो क्या अगर मैं भी होती तो मैं भी इस मस्त कुलफा की मस्त मलाई खा जाती…” और इतना बोलते ही पूजा दीदी ने अपने होंठों पर जीभ फेरकर एक मस्त अदा से मुझसे कहा।
मैं मज़े से पागल हुआ जा रहा था। मैंने सिसकारियाँ भरते हुए मधु से कहा-“आआह्ह… मोम उफ़फ्फ़ … क्या लण्ड चूसती हो तुम… और अंदर ले जाओ मोम… आह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है। मोम मैं आज आपको जम कर चोदूंगा। बड़ी मस्त रांड़ हो तुम… मेरी छमिया, मेरी छम्मकछल्लो। आअह्ह…”
मैं पूजा दीदी की ओर देखकर-“देख पूजा, तेरी मम्मी कितने प्यार से मलाई वाली कुल्फि खा रही है। ये तो ऐसे खा रही है ये कुल्फि की जैसे इसकी सारी मलाई ही खा जाएगी…”
पूजा-“हाए पापा, आपकी ये कुल्फि नहीं कुलफा है। मम्मी तो क्या अगर मैं भी होती तो मैं भी इस मस्त कुलफा की मस्त मलाई खा जाती…” और इतना बोलते ही पूजा दीदी ने अपने होंठों पर जीभ फेरकर एक मस्त अदा से मुझसे कहा।
मम्मी मेरी बात सुनकर और भी मस्ती से मेरे लण्ड को और अंदर तक लेकर चूसने लगी। फिर लण्ड बाहर निकालकर बोली-“ऊह्ह… सच में मेरे स्वामी, मैं तो आपके लण्ड की दीवानी हो चुकी हूँ। औरतों के शरीर में तीन छेद होते हैं जिसमें आदमी अपना लण्ड पेलता है। और आज मैं आपसे तीनों छेद चुदवाऊूँगी मेरे सैंया।
बोलिए ना… पेलेगे ना अपना लण्ड मेरे सब छेदों में?” और मम्मी फिर से मेरे लण्ड को मुँह में लेकर चूसने लगी।
मैं अपना लण्ड चुसवाते हुए-“हाँ मम्मी, मेरी रानी। मैं तो तुम्हें उस दिन से ही चोदना चाहता था, जिस दिन मैंने तुम्हारी नाज़ुक सी गोल मटोल गाण्ड पर अपना लण्ड लगाया था, वो भी मालिश के बहाने…”
मंजू लण्ड चूसते हुए बोली-“मैं समझ गई थी मेरे सरताज । मुझे उसी दिन एहसास हो चुका था की आपका लण्ड मेरी चूत का दुश्मन बन चुका है…”
मैं सिसकारी भरते हुये-“हाँ मोम, मुझे प्यार करो… मेरे लण्ड को प्यार करो मम्मी… मेरी बिल्लो रानी, मैं झड़ने वाला हूँ। आह्ह…” तभी मेरे लण्ड ने मम्मी के मुँह के अंदर ढेर सारा पानी छोड़ दिया।
मम्मी मेरे लण्ड के पानी को बड़े आराम से पी गई। फिर भी, मेरे लण्ड का पानी मधु के मुँह से रिस-रिस कर उसके नथुनों से होकर उसकी चूचियों पर और मेरे पेट पर गिर गया।
मम्मी को इस तरह मेरे लण्ड का मक्खन चटखारे लेते हुए खाते देखकर पूजा दीदी जो वहां बैठी ये सब देख रही थी उससे रहा नहीं गया और वो उठकर आई और पूजा दीदी ने अपने होंठ मम्मी के होंठों पर रख दिए और मम्मी और पूजा दीदी दोनों एक साथ मेरे लण्ड का मक्खन मस्ती से खाने लगी। पूजा दीदी ने मम्मी के गालों और चूचियों पर गिरे मेरे लण्ड के माल को चाट कर पूरी तरह से सॉफ कर दिया।
थोड़ी देर के बाद जब वो मेरे लण्ड का मक्खन पूरी तरह से चट कर गई तो मम्मी फिर से मेरे लण्ड को चूमती हुए बोली-“मेरा बेटा अब जवान मर्द बन चुका है, मेरा खसम बन चुका है, और एक तंदुरुस्त जवान लण्ड से बहुत पानी निकलता है। म् म्म्मम… मुझे तुम्हारा लण्ड बहुत पसंद है। ये वाकई में एक जवान पुरुष का लण्ड है। आपके इस लण्ड को मैं हमेशा हमेशा के लिए अपनी चूत के अंदर रखना चाहूँगी। तुम चाहे जो भी करो, लेकिन मुझे अपने इस खूबसूरत लण्ड से जुदा मत करना, मेरे सैया ये आज आप वादा करो। मैं अपनी पूरी जिंदगी आपकी और आपके इस लण्ड की गुलाम, दासी और रखैल बनकर रहूंगी…”
मैं मम्मी की बात सुनकर उसकी चूची को मसलते और चूसते हुए बोला-“मम्मी, अब मेरी जिंदगी का मकसद आज के बाद सिर्फ़ तुमको प्यार करना और चोदना रहेगा। तुमको जीवन में कभी कोई दुख नहीं दूंगा…” कहकर मैं मम्मी की चूची को खूब जोर-जोर से चूस रहा था और मैं यह उम्मीद कर रहा था कि मम्मी की चूची चूसने से उसकी चूची से दूध निकलेगा। मम्मी की चूची चूसाई से मम्मी की चूची से दूध नहीं निकला, लेकिन फिर भी मैं मम्मी की चूची को मसलता रहा और उनको अपने हाथों से पकड़कर चूसता रहा।
हम लोग कुछ देर के लिए एक दूसरे की बाहों में लेटे रहे और अपनी-अपनी उखड़ी हुई सांसें संभालते रहे। साथ ही हम दोनों तरह-तरह की बातें भी कर रहे थे।
मैं-मोम, मैं कितना खुशनसीब हूँ जो मुझे तुम्हारे जैसी सेक्सी माँ मिली, और अब आपके रूप में एक सेक्सी बीवी…”
मम्मी मेरे लण्ड पर हाथ फेरते हुए-“मैं भी बहुत खुशनसीब हूँ, जिसे आप जैसा जवान मर्द मिला पति के रूप में। आपने मुझे अपने चरणों की दासी दासी बनाकर मुझ पर बहुत बड़ा उपकार किया। जो औरत सारी उमर मर्द के प्यार के लिए तड़पती रही, उसे आप जैसा जवान मर्द मिले प्यार करने को तो भला उस औरत को और क्या चाहिए?”
मैं-“नहीं मेरी जान, तुम्हारी जगह मेरे चरणों में नहीं, मेरे दिल में है। मम्मी, मैं तुम्हें प्यार करना चाहता हूँ, ऐसा प्यार जो कभी किसी बेटे ने अपनी माँ के साथ नहीं किया होगा…”
मम्मी-“मैं सिर्फ़ तुम्हारी हूँ मेरे राजा, जो मन में आए वो करो। और अब आप मुझे ये क्या मम्मी-मम्मी कह रहे हैं, अब मैं आपकी मम्मी थोड़े ही हूँ। अब तो मैं आपकी पत्नी हूँ…”
मैं-“अच्छा मेरी जान, तुम मेरी मम्मी ना सही, पर मेरे होने वाले बच्चों की तो मम्मी तो हो ना?” और इतना कहकर मैंने मम्मी के निपल को पकड़कर जोर से मसल दिया।
मम्मी दर्द से कराह उठी और बोली-“हाए उफफफ्फ़ धीरे… हाँ उफफफ्फ़, अब मैं आपके होने वाले बच्चों की मम्मी हूँ। मुझे तो लगता है की आप मुझे आज ही अपने बच्चों की मम्मी बना दोगे…” इतना कहकर मधु ने अपनी दोनों टांगे ऊपर को उठा लिया और दोनों टाँगों को पूरी तरह चौड़ी कर लिया।
इस तरह से मंजू की चूत पूरी तरह से खुलकर मेरे सामने हो गई और मेरे लिए मम्मी की चूत में लण्ड डालना और भी आसान हो गया। मैंने मम्मी की खुली टाँगों के बीच बैठकर अपना लण्ड मम्मी की चूत पर टिका दिया। तभी पूजा दीदी अपनी जगह से उठी और मेरा लण्ड पकड़कर अच्छी तरह से मम्मी की चूत के ऊपर फिट कर दिया।
मैं अपना लण्ड मम्मी की चूत के ऊपर रखकर धीरे-धीरे अंदर डालने लगा। मम्मी की चूत इस समय मुझको थोड़ी टाइट लग रही थी, लेकिन मैं धीरे-धीरे अपने हाथों से मम्मी के चिकने चूतड़ सहलाता रहा और कभी मम्मी की तरबूज जैसी मस्त गाण्ड पर थप्पड़ मार देता और कभी मम्मी की गाण्ड में अपनी उंगली डालने लगता। थोड़ी देर तक गाण्ड में उंगली करने के बाद मम्मी की चूत से पानी निकलने लगा और चूत गीली हो गई। मम्मी की चूत को गीला होते देखकर मैंने एक झटके के साथ अपना लण्ड पूरा का पूरा जड़ तक मम्मी की चूत में घुसेड़ दिया।
चूत के अंदर जाते ही मम्मी ने नीचे से अपनी कमर उठाना शुरू कर दिया और मैं भी मम्मी के ऊपर से झटके दे-देकर अपना लण्ड मम्मी की चूत में अंदर-बाहर करने लगा। हम लोग एक दूसरे को चोद रहे थे और मैं ऊपर से धसका मारकर मम्मी को चोद रहा था और मम्मी नीचे से गाण्ड के धक्के मारकर अपनी गाण्ड उछालकर मुझे चोद रही थी। चोदते और चुदवाते समय हम एक दूसरे से मीठी-मीठी बातें भी कर रहे थे।
मम्मी बोली-“उम्म… मेरे राजा, मेरे बलम, मेरे जानू, मैं कितना खुशनसीब हूँ की मेरी चूत में तेरा लण्ड जा रहा है। तेरा लण्ड बिल्कुल मेरी चूत की साइज़ का है…”
मैं बोला-“मम्मी तुम सिर्फ़ मेरे लिए ही बनी हो और हमेशा रहोगी। देखो भगवान भी यही चाहता था की मेरी बन जाओ तभी वो नामर्द हिजड़ा तुम्हें छोड़कर चला गया…”
मम्मी-“हाँ मेरे राजा, मेरी इस जवानी को लूटने का हक शायद तुझे ही था। मैं कितनी खुश किस्मत हूँ जो मुझे तुझ जैसा गबरू जवान मर्द मिला। आज मैं तुम्हारे नीचे लेटकर धन्य हो गई…”
मैं मम्मी की चूची को पकड़कर धसका मारते हुए बोला-“मोम, मैं सपने में भी नहीं सोच सकता था की एक दिन तुम्हारी चूत में अपना लण्ड डालकर तुम्हें चोद सकूँगा…”
मम्मी बोली-“हाए िी, क्या आपको मेरी चूत पसंद है?”
मैं मम्मी की बात सुनकर बोला-“मेरी छम्मकछल्लो, तुम पसंद की बात कर रही हो, मेरा तो दिल करता है की तुम माँ बेटी की चूत के ऊपर से उतरूं ही नहीं, अपना लण्ड हमेशा तुम दोनों की चूत में डाले रहूँ…”
मम्मी ने मुझसे पूछा और फिर से बोली-“देख, मुझको खुश करने के लिए झूठ मत बोलना…”
मैं मम्मी की बात सुनते ही मम्मी के होंठों को चूमते हुए बोला-“मेरी जान, झूठ और वो भी तुमसे? अब से तुम दोनों माँ बेटी की चूत पर मेरा हक है, देखो मैंने अपने इस लण्ड से तुम्हारी बेटी की चूत पर दस्तख़त कर दिए और आज मैं तुम्हारी सुहगरात को ही तुम्हारी इस चूत पर अपने दस्तख़त कर दूंगा…”
मेरा मतलब था की मैंने पूजा दीदी को तो चोदकर अपना वीर्य दीदी के पेट में डालकर उसे अपने बच्चे की माँ बना दिया था और अब मैं मम्मी को चोदकर अपना वीर्य मम्मी के गर्भ में डालकर मम्मी को भी अपने बच्चे की माँ बना दूंगा।
मैं मम्मी की चूची को अपने हाथों से दबाते हुए बोला-“माँ, मैं तुमसे और तुम्हारी बेटी से प्यार करता हूँ और मेरे लिए तुम दोनों प्यार और सुंदरता की देवी हो। मैं तुम दोनों से हमेशा प्यार करता रहूँगा और जब-जब तुम चाहोगी मेरा लण्ड तुम्हारी चूत की सेवा के लिए तैयार रहेगा…”
मम्मी मुश्कुरा कर बोली-“बस अब बहुत हो चुका है। चलिए अब मुझे जल्दी से चोदिए। हाँ जी … मैं अपनी चूत की खुजली से मरी जा रही हूँ। आप अपना लण्ड जड़ तक अंदर डालकर मेरी चूत के अंदर चल रही चींटयों को मार कर मुझे शांत कर दो। हाए चोदो मेरी चूत, खूब कसकर चोदो…”
मैं मम्मी की चूत पर धक्के मारते हुए-“मोम, आज के बाद ना तो मैं तेरा बेटा हूँ और ना है तू मेरी माँ है। आज के बाद से तू मेरी पत्नी है और मैं तेरा पति। तुझे मैं अब रोज अपनी रांड़ बनाकर चोदूंगा…”
मम्मी अपनी कमर उछालते हुए बोली-“आज की रात हमारी शादी की सुहगरात है। स्वामी, मैं वो सब काम करूँगी जो एक पत्नी अपने पति के लिए करती है। आपको जो भी पसंद है, मुझसे बोलिए, मैं आपकी हर बात मानने के लिये तैयार हूँ। आज से आप मेरे इस जिश्म के ही मालिक नहीं, मेरी रूह के भी मालिक हैं…”
हम दोनों ने एक दूसरे को अपनी-अपनी बाहों में जकड रखा था और अपनी-अपनी कमर उठा-उठाकर एक दूसरे की चूत और लण्ड चोद रहे थे। मम्मी की इस चुदाई के पहले मेरा लण्ड एक बार मम्मी के मुँह में झड़ चुका था और इसलिए इस बार मम्मी की चूत चुदाई में मेरा लण्ड झड़ने में ज्यादा वक़्त ले रहा था। मम्मी की चूत अब तक की चुदाई में दो बार अपना पानी छोड़ चुकी थी।
और मम्मी अपनी चुदाई की खुशी में पागल होती जा रही थी। मम्मी मुझको अपने हाथों से पकड़कर बेतहाशा चोद रही थी और मुझसे लिपट रही थी। ऐसा होता भी क्यों ना? नई दुल्हन नये-नये चुदाई के सुख से पागल हो रही है। जैसे-जैसे मम्मी मुझे नीचे से अपनी गाण्ड उठाकर चोद रही थी, मेरा खून भी खौल रहा था और मुझे अपने अंडों में तनाव महसूस होने लगा था।
थोड़ी देर के बाद मेरे लण्ड ने मम्मी की चूत को चोदते-चोदते अपना पानी छोड़ दिया, मम्मी की चूत में। मम्मी की चूत में अपना पानी छोड़ने के बाद मैं मम्मी के ऊपर ही ढेर हो गया। मम्मी मेरे बालों में हाथ फेर रही थीं और कह रही थी-“हे जी, आप कितना अच्छा चोदते हो… मैं कितनी खुशकिस्मत हूँ, जो मुझे तुम्हारा लण्ड मिला…”
मैंने मम्मी के गालों को चूमना शुरू कर दिया, उस वक़्त सुबह होने वाली थी और लगभग 4:25 बज रहे थे। मैंने मम्मी से एक सवाल पूछा-“मम्मी, क्या आप मेरा बच्चा पैदा करोगी?”
तो मम्मी ने कहा-“ऐसे ही थोड़ी मैंने आपका पानी अपने अंदर लिया है। जब तुम मुझे इतना चाहते हो, अब जब हमारी शादी हो गई है और मैं आपकी बीवी बन गई हूँ तो मैं आपकी मेहनत को बेकार कैसे होने दूंगी? मैं तो आपके प्यार की निशानी को जन्म देकर अपने आपको भाग्यशाली समझूंगी …” कहकर मम्मी मुझे चूमने लगीं और कहने लगीं-“हाँ, मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनूँगी, मैं तुम्हारे बच्चे पैदा करूँगी…” और फिर मम्मी अपने हाथों से मेरे लण्ड को सहला रही थीं।
धीरे-धीरे मेरा लण्ड फिर से टाइट हो गया और हमने फिर से चूमना चाटना शुरू कर दिया। इस बार मैंने सोच लिया की मम्मी को डागी स्टाइल में चोदूंगा। जब मैंने देखा की मम्मी गरम हो चुकी हैं तो मैंने मम्मी से कहा-“आप उल्टी होकर लेट जाओ…”
मम्मी ने कभी भी इस तरह की चुदाई नहीं करवाई थी और फिर मैंने बिस्तर पर उन्हें डागी स्टाइल में खड़ा कर दिया। मम्मी को बिस्तर पर घोड़ी बनाकर मैंने मम्मी से कहा-“माँ, जब तक मैं अपनी बीवी को घोड़ी ना बना लूँ, मेरी सुहगरात अधूरी रहेगी। तुम अब घोड़ी बन जाओ और अपने पति को घोड़ी पर सवार होने दो। मैं तेरे सेक्सी चूतड़ देखना चाहता हूँ, अपना लण्ड तेरी चूत में घुसता हुआ देखना चाहता हूँ…”
मम्मी की गोरी गाण्ड हवा में उठी हुई देखकर मैं पागल हो गया और पेीछे जाकर लण्ड चूत में डालने लगा। लण्ड घुस गया, एक बार फिर से मम्मी की भीगी चूत में। मैंने आगे झुक के उसकी पीठ को चूम लिया और बगलों में हाथ डालकर चूची मसलने लगा।
तो मम्मी बोली-“कर ले सवारी मेरे राजा, बना ले मुझे अपनी घोड़ी। बना ले मुझे अपनी कुतिया, अगर तेरा दिल करता है। लेकिन इस कुतिया को चोदो मेरे राजा। जोर से चोद अपनी कुतिया को राजा…” कहकर मम्मी अपनी गाण्ड पीछे धकेल रही थी और लण्ड चूत में ले-लेकर आनंद उठा रही थी।
अब मेरे लण्ड का पानी फिर से छूटने को था। जब मैं मम्मी की चूत में पीछे से धसका मारता तो मेरे बाल्स मम्मी के चूतड़ से टकराने लगे थे। मैंने मम्मी के बालों को पकड़कर खींच लिया जैसे की मैं अपनी घोड़ी की लगाम खींच रहा हूँ।
मम्मी-“उईईई माँ, हे जी मैं झड़ने को हूँ। हाय रब्बा, मेरी चूत पानी छोड़ने वाली है राजा। तेरी माँ, अरे नहीं नहीं जी, आपकी बीवी की चूत रस छोड़ रही है, पूजा के पापा। चोदो अपनी मंजू को। भर दो मेरी कोख राजा। मैं गई… हाय रब्बा मैं गई…”
मैंने भी धक्के जोर से लगाने शुरू कर दिए, क्योंकि मेरे लण्ड से भी वीर्य निकलने लग गया था। अपनी सेक्सी घोड़ी की सवारी करते हुए मैं झड़ने लगा-“उििफ्र्फ… आअह्ह… हायइ… ऊऊह्ह… मैं गया मंजूउ… ओह्ह… माँ, मैं झड़ाऽ हाय मम्मीऽऽ…”
लण्ड से पिचकारी चलने लगी, रस की धारा मम्मी की चूत में गिरने लगी और मैं पागलों की तरह चोदता चला गया। फिर मैं मम्मी की पीठ पर निढाल होकर गिर गया। सारी रात मैंने अलग-अलग स्टाइल में, कभी घोड़ी बनाकर, कभी अपने लण्ड पर बिठाकर, और कभी दीवार के सहारे खड़ी करके चोदता रहा और मम्मी भी पूरे जोश से मुझसे ताल से ताल मिलाकर मुझसे चुदवाती रही।
पूरी रात मैं मम्मी को चोद-चोदकर थक गया। मैं और मम्मी पूरी रात चुदाई से थक गये थे। और पूजा दीदी जो हमारे सामने बैठी हमारी चुदाई से पूरी गरम होकर अपनी चूत का पानी अपनी उंगली से निकालकर, वो भी पूरी थक गई थी जिस कारण हम तीनों को कब नींद आ गई पता ही नहीं चला, और हम तीनों ऐसे ही नंगे साथ-साथ सो गये।
हम सुबह 12:00 बजे तक सोते रहे। जब मैं उठा तो मम्मी नहाकर पहले ही जैसे कोई नई दुल्हन तैयार हो जाती है, बिल्कुल दुल्हन के रूप में खड़ी थी। मैं जब उठा तो मम्मी ने एक अच्छी बीवी का फर्ज़ निभाते हुए मेरे पांव छुए।
मम्मी जैसे ही मेरे पांव छूने के लिए नीचे झुकी ही थी कि मैंने मम्मी को ऊपर उठाया और कहा-“अरे मम्मी, ये आप क्या कर रही हैं? आप मेरे पांव क्यों छू रही हैं?”
मेरी बात सुनते ही मम्मी ने कहा-“ये क्या जी, अब तो ये मेरा धर्म है, अब आप मेरे स्वामी, मेरे मालिक हैं…”
मम्मी को अपने गले से लगाकर मैंने कहा-“मंजू, आई लव यू। अब से मेरी लाइफ में तुम और पूजा हो और मैं ये उमीद करता हूँ की जब मैं पूजा दीदी को प्यार करूँगा तब तुम पूजा दीदी से जलन नहीं करोगी, कभी उसे अपनी सौतन मानकर पूजा दीदी से जलन नहीं करोगी, तुम्हारे और पूजा दीदी के आपस के सम्बंध जैसे पहले थे ऐसे ही रहेंगे…”
मेरा इतना कहना ही था कि मम्मी तपाक से बोली-“ये आप क्या कह रहे हैं, मैं पूजा को अपनी सौतन क्यों मानूंगी? अब तो मेरा इससे प्यार और भी बढ़ गया है, पहले हम माँ बेटी थी और अब हम दोनों एक माँ बेटी नहीं बल्कि पूजा मेरी छोटी बहन है। अब हम दोनों बहनें आपकी पूरी तरह से सेवा करेंगी…” और मम्मी ने पूजा को अपने गले से लगा लिया और फिर मम्मी और पूजा दोनों एक दूसरे के होंठों को चूमने लगे।
दीदी अभी एक महीने घर पर और हैं, इस एक महीने में मैंने दीदी की इतनी चुदाई की की मेरी इस चुदाई से दीदी का जिश्म इस एक महीने में इतना भर गया की अब दीदी की चूची भी मम्मी के जैसी ही बड़ी-बड़ी 38” साइज़ की और गाण्ड का साइज़ भी 40” हो गया।
एक महीने के बाद जीजू आकर दीदी को ले गये।
पूजा दीदी के जाने के बाद मैं मम्मी को लेकर किसी दूसरे शहर में चला गया और वहीं पर बिजनेस करने लगा। वहां पर मैंने मम्मी को अपने दोस्तों और स्टाफ में अपनी बीवी के रूप में परचित करवाया था और पूजा दीदी को मेरी बहन।
मम्मी अब लोगों के सामने पूजा दीदी को जो की असल में उनकी बेटी थी, अपनी ननद बताती और पूजा दीदी सबके सामने मम्मी को भाभी बुलाती। आज मुझे मम्मी से शादी किए 5 साल हो गये और इन 5 सालों में पूजा दीदी और मोम मेरे दो-दो बच्चों की माँ बन गई थीं।
इन 5 सालो में शायद ही कोई ऐसा दिन हो, जिस दिन मम्मी ने मुझसे चुदवाया ना हो। मम्मी आज भी मेरे दोनों बच्चो के सो जाने के बाद सारी रात नंगी होकर मुझसे चिपक कर सोती है। मम्मी ने मुझे इतना प्यार और सुख दिया, जो शायद मुझे कोई दूसरी औरत कभी न दे सकती। क्योंकि मम्मी ने हमेशा मेरी खुशी को अपना धर्म माना। मैंने मम्मी को जिस तरह चाहे और जैसे चाहे मम्मी ने अपने दर्द की परवाह किए बिना मुझसे चुदवाया।
आज मैं अपने आपको खुश-किस्मत मानता हूँ की मुझे अपनी मम्मी जैसी पत्नी मिली।
दोस्तो इस तरह इस कहानी को अपनी मंज़िल मिल गई कहानी कैसी लगी ज़रूर कमेंट करें
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