मैने पंडित से बात की तो उसने 3 दिनबाद का मुहूर्त बताया. 3 दीनो तक
मैने ऋतु की खूब जम कर चुदाई की. अब उसे और ज़्यादा मज़ा आने
लगा था. ऋतु चुदवा. समय मेरा पूरा साथ देती थी इस लिए मुझे
भी खूब मज़ा आता था. तीसरे दिन हम दोनो ने मंदिर में शादी कर
ली. रात में मैने ऋतु की गांद मारी. वो बहुत चीखी और चिल्लाई
लेकिन उसने एक बार भी मुझे रोका नहीं. उसकी गांद कयि जगह से कट
गयी थी और उसकी गांद की हालत एक दम खराब हो गयी थी. वो 2 दीनो
तक ठीक से चल भी नहीं पा रही थी. मैने पुछा, मैं जब
तुम्हारी गांद मार रहा था और तुम्हें इतनी ज़्यादा तकलीफ़ हो रही थी
तो तुमने मुझे रोका क्यों नहीं. वो बोली, मैं अपने पति को कैसे मना
करती. आख़िर बाद में मुझे भी तो गांद मरवाने में मज़ा आया.
मैने कहा, वो तो आना ही था. अब मेरे लिए कुँवारी चूत का इंतेज़ाम
कब करोगी. वो बोली, बस जल्दी ही हो जाएगा.
शादी के 4 दिन के बाद जब मैं दुकान से घर आया तो घर पर एक
लड़की बर्तन सॉफ कर रही थी. उसके कपड़े थोड़ा गंदे थे लेकिन वो
थी बहुत ही खूबसूरत. उसकी उमर लगभग 16 साल की रही होगी. मैं
सीधा अपने कमरे में चला गया. ऋतु भी मेरे पिछे पिछे आ
गयी. मैने ऋतु से पुछा, ये कौन है. वो मुस्कुराते हुए बोली, मैने
इसे घर का काम करने के लिए रखा है. इसका नाम लाली है. पसंद
है ना तुम्हें. मैं इसे तुम्हारे काम के लिए भी जल्दी ही तय्यार कर
लूँगी. मैने कहा, तुम्हारी पसंद का तो जवाब नहीं है. कहाँ रहती
है ये. ऋतु ने कहा, ये गाओं में रहती थी लेकिन अब यहीं रहेगी.
मेरे भैया जब शादी में आए थे तो मैने उन से कहा था कि मुझे
घर का काम करने के लिए एक लड़की चाहिए. उन्होने ने ही इसे यहाँ
पर भेजा है. ये हमारे साथ ही रहेगी. मैने कहा, जल्दी तय्यार
करो इसे. मैं इसे जल्दी से जल्दी चोदना चाहता हूँ. वो बोली, थोड़ा
सबर करो.
लाली बर्तन सॉफ कर के कमरे में आ गयी. उसने ऋतु से पुचछा,
मालकिन, मैने घर का सारा काम कर दिया है, और कुच्छ करना हो तो
बता दो. ऋतु ने कहा, तू तो मेरे गाओं की है, मुझे मालकिन मत कहा
कर. वो बोली, फिर मैं आप को क्या कह कर बुलाऊं. ऋतु ने कहा, तू
मुझे दीदी कहा कर और इन्हें जीजू. वो खुश हो गयी और बोली, ठीक
है, दीदी. ऋतु ने कहा, मेरी तबीयत कुच्छ खराब रहती है इस लिए
तू मेरे साथ ही सो जाना. वो बोली, फिर जीजू कहाँ सोएंगे. ऋतु ने
कहा, वो भी मेरे पास ही सोएंगे. वो बोली, फिर मैं आप के पास
कैसे सो पाउंगी ऋतु ने कहा, मेरे एक तरफ तुम सो जाना दूसरी तरफ
ये सो जाएँगे. वो बोली, ये तो ठीक नहीं होगा. ऋतु ने कहा, शहर
में सब चलता है. यहाँ ज़्यादा शरम नहीं की जाती. वो बोली, ठीक
है, मैं आप के पास ही सो जाउन्गि.
क्रमशः………..
हम सब ने खाना खाया उसके बाद मैं अपने कमरे में सोने के लिए आ
गया. मैने केवल लूँगी ही पहन रखी थी. थोड़ी देर बाद ऋतु और
लाली भी आ गये. ऋतु ने ब्रा और पॅंटी को छ्चोड़ कर अपने बाकी के
कपड़े उतार दिए. उसके बाद उसने मेक्सी पहन ली. ऋतु ने लाली से कहा,
अब तू भी अपने कपड़े उतार दे. मैं तुझे भी एक मेक्सी देती हूँ, उसे
पहन लेना. वो बोली, नहीं, मैं ऐसे ही ठीक हूँ. ऋतु ने कहा,
मैं जो कहती हूँ, उसे मान लिया कर. सोते वक़्त सारा बदन खुला
छ्चोड़ देना चाहिए. वो बोली, जीजू यहाँ हैं. ऋतु ने कहा, जीजू से
कैसी शरम, ये तुझे पकड़ थोड़े ही लेंगे. उतार दे अपने कपड़े. लाली
ने शरमाते हुए अपनी शलवार और कमीज़ उतार दी. उसका बदन देखकर
मैं दंग रह गया. उसकी चुचियाँ अभी बहुत ही छ्होटी छ्होटी थी.
ऋतु ने उसे भी एक मेक्सी दे दी तो उसने वो मेक्सी पहन ली.
ऋतु मेरे बगल में लेट गयी. लाली ऋतु के बगल में लेट गयी. हम
सब कुच्छ देर तक बातें करते रहे. उसके बाद सोने लगे. थोड़ी ही देर
में लाली सो गयी तो ऋतु ने मुझसे कहा, अब तुम मेरी चुदाई करो.
मैने कहा, इसके सामने. वो बोली, मैं चाहती हूँ कि ये हम दोनो को
देख ले, तभी तो मैं इसे तय्यार करूँगी. तुम मुझे खूब ज़ोर ज़ोर से
चोदना जिस से ये जाग जाए. मैने कहा, ठीक है.
मैने ऋतु को ज़ोर ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया. सारा बेड ज़ोर ज़ोर से
हिलने लगा. थोड़ी ही देर में लाली की नींद खुल गयी और वो उठ कर
बैठ गयी. जैसे ही वो उठी तो मैने अपना लंड ऋतु की चूत से बाहर
निकाल लिया. लाली ने जब हम दोनो को देखा तो शर्मा गयी. वो बोली,
दीदी, मैं बाहर जा रही हूँ. ऋतु ने कहा, क्यों, क्या हुआ. वो बोली,
मुझे शरम आती है. ऋतु ने कहा, पगली, इसमें शरमाने की कौन सी
बात है. तू अपना मूह दूसरी तरफ कर ले और सो जा. लाली उठ कर जाना
चाहती थी लेकिन ऋतु ने उसका हाथ पकड़ लिया. लाली कुच्छ नहीं बोली.
वो ऋतु के बगल में ही लेट गयी लेकिन उसने अपना मूह दूसरी तरफ
नहीं किया. ऋतु ने मुझसे कहा, अब तुम अपना काम जल्दी से पूरा करो,
मुझे नींद आ रही है.
मैने ऋतु को चोदना शुरू कर दिया. लाली तिर्छि निगाहों से हम दोनो
के देखती रही थी. 15 मिनट की चुदाई के बाद जब मैं झाड़ गया तो
मैने अपना लंड ऋतु की चूत से बाहर निकाला. ऋतु उठ कर बैठ गयी
और उसने मेरा लंड चाट चाट कर साफ कर दिया. लाली ने शरम के मारे
अपनी आखे बंद कर ली. ऋतु ने अपना मूह लाली की तरफ कर लिया और
अपना हाथ उसकी चुचियों पर रख दिया. उसने कहा, दीदी, अपना हाथ
हटा लो. ऋतु ने कहा, मुझे तो ऐसे ही सोने की आदत है. अब सो जा.
लाली कुच्छ नहीं बोली. उसके बाद हम सब सो गये.
सुबह हम सब उठ गये. लाली फ्रेश होने चली गयी. ऋतु ने मुझसे
कहा, अब तुम इसे बार बार अपना लंड दिखाने की कोशिश करना लेकिन
इसे हाथ मत लगाना. इसे ऐसा लगना चाहिए कि जैसे तुम अपना लंड
इसे दिखाने की कोशिश नहीं कर रहे थे. मैने कहा, ठीक है. लाली
फ्रेश हो कर आ गयी. ऋतु ने कहा, अब तू घर में झाड़ू लगा ले. वो
झाड़ू लगाने चली गयी. ऋतु ने मुझसे कहा, अब तुम जा कर फ्रेश हो
जाओ. आज से अपना टवल साथ मत ले जाना और एक दम नंगे ही नहाना,
मैं लाली से तुम्हारा टवल भेज दूँगी. मैने कहा, ठीक है.
मैं बाथरूम में चला गया. फ्रेश होने के बाद मैं एक दम नंगा ही
नहाने लगा. थोड़ी देर बाद मैने ऋतु को पुकारा और कहा, टवल दे
दो. ऋतु ने लाली से कहा, जा, जीजू को टवल दे आ. वो टवल ले कर
आई तो मैने बाथरूम का दरवाज़ा खोल दिया. मेरा लंड पहले से खड़ा
था. लाली की निगाह जैसे ही मेरे लंड पर पड़ी तो उसने अपना सिर नीचे
कर लिया. वो मुझे टवल देने लगी तो मैने कहा, थोड़ा रुक जाओ. मैं
अपने सिर को ज़रा साबुन से सॉफ कर लूँ. मैने अपने सिर पर साबुन
लगाना शुरू कर दिया. मैने देखा की लाली तिर्छि निगाहों से मेरे
लंड को देख रही थी. मैने कुच्छ ज़्यादा ही देर कर दी तो वो बोली,
जीजू, टवल ले लो, मुझे और भी काम करना है. मैं कहा, थोड़ा रुक
जाओ, मैं अपना सिर तो धो लूँ.
मैने अपना सिर धोया और फिर अपने लंड पर साबुन लगाते हुए कहा,
रात को तेरी दीदी ने इसे भी गंदा कर दिया था, ज़रा इसे भी साफ कर
लूँ. फिर मुझे टवल दे देना. वो चुप चाप खड़ी रही. मैं अपने
लंड पर साबुन लगाने लगा. वो अभी भी मेरे लंड को तिर्छि निगाहों
से देख रही थी. मैने उस से मज़ाक करते हुए कहा, साली जी, तिर्छि
निगाहों से मुझे क्यों देख रही हो. अपना सिर उपर कर लो और ठीक से
देख लो मुझे. वो बोली, मुझे शरम आती है. मैने कहा, कैसी
शरम, मैं तो तुम्हारा जीजू हूँ ना. बोलो, हूँ या नहीं. वो बोली,
हां, आप मेरे जीजू हैं. मैने अब ज़्यादा देर करना ठीक नहीं समझा.
मैने अपने लंड पर लगे हुए साबुन को धोया और उसके हाथ से टवल
लेते हुए कहा, अब जाओ. वो मुस्कुराते हुए चली गयी.
मैने अपना बदन साफ किया और लूँगी पहन कर बाहर आ गया. लाली
ड्रवोयिंग रूम में झाड़ू लगा रही थी. मैने ऋतु को पुकारा और कहा,
ज़रा तेल तो लगा दो. वो बोली, अभी आती हूँ. ऋतु मेरे पास आ गयी
तो मैने अपने लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा, आज तेल नहीं
लगओगि क्या. ऋतु समझ गयी और बोली, लगाउन्गि क्यों नहीं. उसने मेरे
लंड पर लगा कर मालिश करना शुरू कर दिया. लाली मेरे लंड को
देखती रही. इस बार वो ज़्यादा नहीं शर्मा रही थी. तेल लगाने के
बाद ऋतु जाने लगी तो मैने कहा, तुम कुच्छ भूल रही हो. ऋतु ने
मेरे लंड को चूम लिया. उसके बाद मैने नाश्ता किया और अपने कमरे
में आ गया.
10 बजे मैं दुकान जाने लगा तो ऋतु ने कहा, लाली के लिए कुच्छ नये
कपड़े और थोड़ा मेक-अप का समान ले आना. मैने कहा, अच्च्छा, ले
आउन्गा. उसके बाद मैं दुकान चला गया. रात के 8 बजे मैं दुकान से
वापस आया और मैने लाली को पुकारा. लाली आ गयी और उसने मुस्कुराते
हुए कहा, क्या है, जीजू. मैने कहा, मैं तेरे लिए कपड़े ले आया
हूँ और मेक-अप का समान भी. देख ज़रा तुझे पसंद है या नहीं.
उसने सारा समान देखा तो खुश हो गयी और बोली, बहुत ही अच्च्छा
है. मैने पुछा, ऋतु कहाँ है. वो बोली, फ्रेश होने गयी है. मैने
कहा, जा मेरे लिए चाय ले आ. वो चाय लाने चली गयी. मैने अपने
कपड़े उतार दिए और लूँगी पहन ली. वो चाय ले कर आई तो मैने
चाय पी. तभी ऋतु आ गयी. उसने पुछा, लाली का समान ले आए.
मैने कहा, हां, ले आया और इसे दिखा भी दिया. इसे बहुत पसंद भी
आया. मैं टीवी देखने लगा. ऋतु लाली के साथ खाना बनाने चली गयी.
रात के 10 बजे हम सब ने खाना खाया और सोने चले गये. आज लाली
बहुत खुश दिख रही थी. उसने आज ज़रा सा भी शरम नहीं की और
खुद ही अपने कपड़े उतार दिए और मेक्सी पहन ली. हम सब बेड पर लेट
गये. ऋतु ने मुझसे कहा, मुझे नींद आ रही है. तुम अपना काम कर
लो और मुझे सोने दो. मैं समझ गया. मैने अपनी लूँगी उतार दी. ऋतु
ने भी अपनी मेक्सी खोल दी और पॅंटी उतार दी. लाली देख रही थी. आज वो
कुच्छ बोल नहीं रह थी, केवल चुप चाप लेटी हुई थी. मैने ऋतु को
चोदना शुरू कर दिया. मैने देखा की लाली आज ध्यान से हम दोनो को
देख रही थी.
15-20 मिनट की चुदाई के बाद मैं झाड़ गया तो आज मैने ऋतु की चूत
को चाटना शुरू कर दिया. लाली ने मुझे ऋतु की चूत को चाट ते हुए
देखा उसने अपना हाथ अपनी चूत पर रख लिया. मैं समझ गया कि अब
वो धीरे धीरे रास्ते पर आ रही है. ऋतु की चूत को चाटने के बाद
मैने अपना लंड ऋतु के मूह के पास कर दिया तो ऋतु ने भी मेरा लंड
चाट चाट कर सॉफ कर दिया. उसके बाद मैं लेट गया. तभी लाली ने
कहा, दीदी, आप दोनो को घिन नहीं आती एक दूसरे का चाट ते हुए.
ऋतु ने कहा, कैसी घिन, मुझे तो मज़ा आता है और तेरे जीजू को भी.
उसके बाद हम सो गये.
सुबह मैं नहाने गया तो मैने लाली को पुकारा और कहा, टवल ले आ.
वो बोली, अभी लाई, जीजू. वो टवल ले कर आ गयी. मैने अपने लंड की
तरफ इशारा करते हुए कहा, थोड़ा रुक जा, मैं इसे साफ कर लूँ.
मैने अपने लंड पर साबुन लगाना शुरू कर दिया. आज लाली ने अपना सिर
नीचे नहीं किया और मेरे लंड को ध्यान से देखती रही. वो अब ज़्यादा
नहीं शर्मा रही थी. मैने अपने लंड को साफ किया और फिर उस से
टवल ले लिया. वो चली गयी. मैं बाथरूम से बाहर आया तो ऋतु ने
मेरे लंड पर तेल लगाया और फिर मेरे लंड को चूमा और किचन में
चली गयी. लाली इस दौरान मेरे लंड को ध्यान से देखती रही. मैने
नाश्ता किया और दुकान चला गया.
रात के 8 बजे मैं वापस आया तो मैं कुच्छ मिठाई ले आया था.
मैने लाली को पुकारा. लाली आ गयी तो मैने उसे मिठाई दे दी. उसने
मिठाई ले ली और कहा, आप के लिए भी ले आऊँ. मैने कहा, हां,
थोड़ा सा ले आ. वो मिठाई ले कर आई तो मैने मिठाई खाने लगा.
तभी ऋतु आई. उसने मुझे मिठाई खाते हुए देखा तो बोली, आज कल
साली की बहुत सेवा हो रही है. मैने कहा, क्या करूँ. मेरी तो कोई
साली ही नहीं थी. अब जब मुझे एक साली मिल गयी है तो उसकी सेवा तो
करूँगा ही. लेकिन मेरी साली मेरा ज़्यादा ख़याल ही नहीं रखती. लाली
बोली, जीजू, मेरी कोई बहन नहीं है इसलिए मेरा कोई जीजू तो आने
वाला नहीं है. आप ही मेरे जीजू हो, आप हुकुम तो करो. मैने कहा,
क्या तुम मेरा कहना मनोगी. वो बोली, क्यों नहीं मानूँगी. मैने कहा,
ठीक है, जब मुझे ज़रूरत होगी तो तुम्हें बता दूँगा.
अगले 2 दिनो में मैने लाली से मज़ाक करना शुरू कर दिया. धीरे
धीरे वो भी मुझसे मज़ाक करने लगी. अब वो मुझसे शरमाती नहीं
थी. अब लाली खुद ही टवल ले आती थी. उस दिन भी जब मैं नहा रहा
था तो वो टवल ले कर आई और खड़ी हो गयी और मेरे लंड को देखने
लगी. मैने कहा, साली जी, आज तुम ही मेरे लंड पर साबुन लगा दो. वो
बोली, क्या जीजू, मुझसे अपने लंड पर साबुन लगवाएँगे. मैने कहा, तो
क्या हुआ. वो बोली, दीदी क्या कहेंगी. मैने ऋतु को पुकारा तो वो आ गयी
और बोली, क्या है. मैने कहा, मैं लाली से अपने लंड पर साबुन लगाने
को कहा तो ये कह रही है कि दीदी क्या कहेंगी. अब तुम इसे बता दो की
तुम क्या कहोगी. ऋतु ने कहा, मैं तो कहूँगी कि लाली तुम्हारे लंड पर
साबुन लगा दे. आख़िर वो तुम्हारी साली है. मैं भला इसे कैसे मना
कर सकती हूँ. मैने लाली से कहा, देखा, ये तुम्हें कुच्छ भी नहीं
कहेगी. लाली ने कहा, फिर मैं साबुन लगा देती हूँ.
क्रमशः………..
गतान्क से आगे……….
ऋतु चली गयी. लाली ने थोड़ा सा शरमाते हुए मेरे लंड पर साबुन
लगाना शुरू कर दिया. मुझे खूब मज़ा आने लगा. उसकी आँखे भी
गुलाबी सी होने लगी. थोड़ी देर बाद वो बोली, अब बस करूँ या और
लगाना है. मैने कहा, थोड़ा और लगा दे, तेरे हाथ से साबुन लगवाना
मुझे बहुत अच्छा लग रहा है. वो सबुन लगाती रही. थोड़ी ही देर
में जब मुझे लगा कि अब मेरा जूस निकल जाएगा तो मैं कहा, अब
रहने दो. उसने अपना हाथ साफ किया और चली गयी.
मैं नहाने के बाद बाहर आया और ड्रॉयिंग रूम में सोफे पर बैठ
गया. मैने ऋतु को पुकारा, ऋतु, ज़रा तेल तो लगा दो. लाली मेरे पास
आई और बोली, मैं ही लगा दूं क्या. मैने कहा, ये तो और अच्छि
बात है. तुम ही लगा दो. लाली मेरे लंड पर तेल लगा कर बड़े प्यार से
मालिश करने लगी तो मैं कुच्छ ज़्यादा ही जोश में आ गया. लाली ठीक
मेरे लंड के सामने ज़मीन पर बैठी थी. मेरे लंड से जूस की धार
निकल पड़ी और सीधे लाली के मूह पर जा कर गिरने लगी. लाली शर्मा
गयी और बोली, क्या जीजू, तुमने मेरा मूह गंदा कर दिया. मैने कहा,
तुम्हारे तेल लगाने से मैं कुच्छ ज़्यादा ही जोश में आ गया और मेरे
लंड का जूस निकल गया. लाओ मैं सॉफ कर देता हूँ. वो बोली, रहने
दो, मैं खुद ही साफ कर लूँगी. लाली बाथरूम में चली गयी. ऋतु
किचन से मुझे देख रही थी और मुस्कुरा रही थी. ऋतु ने कहा, अब
तुम्हारा काम बन ने ही वाला है.
नाश्ता करने के बाद मैं दुकान चला गया. रात को मैं लाली के लिए
एक झूमकि ले आया. मैने उसे झूमकि दी तो वो खुशी के उच्छल पड़ी और
ऋतु को दिखाते हुए बोली, देखो दीदी, जीजू मेरे लिए क्या लाए हैं.
ऋतु ने कहा, तू ही उनकी एकलौती साली है. वो तेरे लिए नहीं लाएँगे
तो और किस के लिए लाएँगे.
रात को खाना कहने के बाद हम सोने के लिए कमरे में आ गये. मैने
लाली से मज़ाक किया, क्यों लाली, मेरा लंड तुझे कैसा लगा. उसने
शरमाते हुए कहा, जीजू, ये भी कोई पूच्छने की बात है. मैने
कहा, तेरी दीदी को तो बहुत पसंद है, तुझे कैसा लगा. उसने
शरमाते हुए, मुझे भी बहुत अच्च्छा लगा. मैने पूचछा, तुझे क्यों
अच्च्छा लगा. वो बोली, इस लिए की आप का बहुत बड़ा है. मैने
पूचछा, जब मैं तुम्हारी दीदी के साथ करता हूँ तब कैसा लगता
है. वो बोली, तब तो और ज़्यादा अच्च्छा लगता है. लेकिन जीजू, एक बात
मेरी समझ में नहीं आती कि तुम्हारा इतना बड़ा है फिर भी दीदी के
अंदर पूरा का पूरा घुस जाता है. मैने कहा, तेरी दीदी को इसकी
आदत पड़ गयी है. वो बोली, लेकिन पहली बार जब आप ने घुसाया होगा
तो दीदी दर्द के मारे बहुत चिल्लाई होगी. मैने कहा, दर्द तो पहली
पहली बार सब औरतों को होता है. इसे भी हुआ था और ये खूब
चिल्लाई भी थी. लेकिन लाली बाद में मज़ा भी तो खूब आता है. तुम
चाहो तो अपनी दीदी से पूच्छ लो. लाली ने ऋतु से पुछा, क्यों दीदी,
क्या जीजू सही कह रहे हैं. ऋतु ने कहा, हां लाली, तभी तो मैं
इनसे रोज रोज करवाती हूँ. बिना करवाए मुझे नींद नहीं आती. तुम
भी एक बार इनका अंदर ले लो. कसम से इतना मज़ा आएगा की तुम भी रोज
रोज करने को कहोगी. लाली बोली, ना बाबा ना, मुझे बहुत दर्द होगा क्यों
की मेरा तो अभी बहुत छ्होटा है. ऋतु ने कहा, छ्होटा तो सभी का
होता है. लाली बोली, मुझे दर्द भी तो बहुत होगा. ऋतु ने कहा,
पगली, एक बार ही तो दर्द होगा उसके बाद इतना मज़ा आएगा कि तू सारा
दर्द भूल जाएगी. तूने देखा है ना कि कैसे इनका मेरी चूत में सटा
सॅट अंदर बाहर होता है. वो बोली, हां, देखा तो है. ऋतु बोली, फिर
एक बार तू भी अंदर ले कर देख ले. अगर तुझे मज़ा नहीं आएगा तो
फिर कभी मत करवाना. वो बोली, बाद में करवा लूँगी. ऋतु ने कहा,
आज क्यों नहीं. वो बोली, मैं कहीं भागी थोड़े ही जा रही हूँ. ऋतु
ने कहा, तो फिर आज तू इसे मूह में ले कर चूस ले. जब तेरा मन
कहेगा तभी इसे अंदर लेना. वो बोली, ठीक है, मैं मूह में लेकर
चूस लेती हूँ.
राज और उसकी विधवा भाभी
ऋतु ने मुझसे कहा, तुम लाली के बगल में आ जाओ. मैं लाली के बगल
में आ गया. लाली ने मेरी लूँगी हटा दी और अपना हाथ मेरे लंड पर
रख दिया. उसके हाथ लगाने से मेरा लंड फंफनता हुआ खड़ा हो
गया. लाली उसे सहलाने लगी. मुझे मज़ा आने लगा. मैने कहा, अब इसे
मूह में ले लो. वो बोली, ज़रूर लूँगी, पहले थोड़ा सहलाने दो ना.
मैने कहा, ठीक है. थोड़ी देर तक सहलाने के बाद लाली उठ कर
बैठ गयी. उसने शरमाते हुए मेरे लंड का सूपड़ा अपने मूह में ले
लिया और चूसने लगी. ऋतु ने मुस्कुराते हुए पुचछा, क्यों लाली, कैसा
लग रहा है. वो बोली, दीदी, बहुत अच्च्छा लग रहा है. ऋतु ने कहा,
मेरी बात मान जा और इसे अपनी चूत के अंदर भी ले ले. फिर और ज़्यादा
अच्च्छा लगेगा. वो बोली, बहुत दर्द होगा. ऋतु ने कहा, तू इतना डरती
क्यों है. मैं हूँ ना तेरे पास. उसने कहा, अच्च्छा, मुझे पहले
थोड़ी देर चूस लेने दो, फिर मैं भी अंदर लेने की कोशिश करूँगी.
लाली मेरा लंड चूस्ति रही. मैने अपना हाथ बढ़ा कर उसकी चूत पर
रख दिया लेकिन वो कुच्छ नहीं बोली. मैने पॅंटी के उपर से ही उसकी
चूत को सहलाना शुरू कर दिया तो वो सिसकारियाँ भरने लगी. थोड़ी देर
में ही उसकी छुट गीली हो गयी तो मैने पुचछा, कैसा लगा. वो बोली,
बहुत अच्छा. लाली अब तक पूरे जोश में आ चुकी थी. मैने कहा,
जब तू मेरा लंड अपनी चूत के अंदर लेगी तो तुझे और ज़्यादा अच्च्छा
लगेगा. वो बोली, ठीक है जीजू, घुसा दो, लेकिन बहुत धीरे धीरे
घुसाना. मैने कहा, थोड़ा दर्द होगा, ज़्यादा चिल्लाना मत. वो बोली,
मैं अपना मूह बंद रखने की कोशिश करूँगी. मैने कहा, ठीक है,
तू पहले अपने कपड़े उतार दे. वो बोली, मैने कपड़े ही कहाँ पहन रखे
हैं. मैने उसकी ब्रा और पॅंटी की तरफ इशारा करते हुए कहा, फिर
ये क्या है. वो बोली, क्या इसे भी उतारना पड़ेगा. मैने कहा, हां,
तभी तो मज़ा आएगा. उसने कहा, ठीक है, उतार देती हूँ.
इतना कह कर लाली खड़ी हो गयी और उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए.
ऋतु मुझे देख कर मुस्कुराने लगी तो मैं भी मुस्कुरा दिया. लाली बेड
पर लेट गयी तो मैं लाली के पैरों के बीच आ गया. मैने उसके
पैरों को एक दम दूर दूर फैला दिया. उसके बाद मैने अपने लंड के
सूपदे को उसकी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया. वो जोश के मारे पागल
सी होने लगी और ज़ोर ज़ोर की सिसकारियाँ भरते हुए बोली, जीजू, बहुत
मज़ा आ रहा है, और ज़ोर से रागडो. मैने और ज़्यादा तेज़ी के साथ
रगड़ना शुरू कर दिया तो 2-3 मिनट में ही लाली ज़ोर ज़ोर की सिसकारियाँ
भरने लगी और झाड़ गयी.
लाली की चूत अब एक दम गीली हो चुकी थी इस लिए मैने अब ज़्यादा देर
करना ठीक नहीं समझा. मैने उसकी चूत की लिप्स को फैला कर अपने
लंड का सूपड़ा बीच में रख दिया. उसके बाद जैसे ही मैने थोड़ा सा
ज़ोर लगाया तो वो चीख उठी और बोली, जीजू, बहुत दर्द हो रहा है,
बाहर निकाल लो. मैने कहा, बस थोड़ा सा बर्दास्त करो. मेरे लंड का
सूपड़ा उसकी चूत में घुस चुका था. मैने फिर से थोड़ा सा ज़ोर
लगाया तो इस बार वो ज़ोर ज़ोर से चीखने लगी. उसने रोना शुरू कर
दिया तो ऋतु ने उसे चुप करते हुए कहा, दर्द को बर्दास्त कर तभी
तो तू मज़ा ले पाएगी. वो बोली, बहुत तेज दर्द हो रहा है, दीदी. ऋतु
उसका सिर सहलाने लगी तो थोड़ी ही देर में वो शांत हो गयी.
मेरा लंड इस उसकी चूत में 2″ तक घुस चुका था. जब लाली चुप हो
गयी तो मैने फिर से ज़ोर लगाया तो मेरा लंड थोडा सा और घुस गया
और उसकी सील मेरे लंड के रास्ते में आ गयी. वो फिर से चीखने
लगी और बोली, जीजू, बाहर निकाल लो, मैं मर जाउन्गि, बहुत दर्द हो
रहा है, मेरी चूत फॅट जाएगी. मैने उसकी चुचियों को मसलते हुए
कहा, बस थोडा सा ही और है. थोड़ी देर तक मैं उसकी चुचियों को
मसलता रहा और उसे चूमता रहा तो वो शांत हो गयी. मुझे अब उसकी
सील को फाड़ना था.
मैने लाली की कमर को ज़ोर से पकड़ लिया पूरी ताक़त के साथ बहुत ही
ज़ोर का धक्का मारा. उसकी चूत से खून निकलने लगा. मेरा लंड उसकी
सील को फाड़ते हुए 4″ से थोडा ज़्यादा अंदर घुस गया. लाली इस बार
कुच्छ ज़्यादा ही ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी तो ऋतु ने उसे चुप करते
हुए कहा, बस हो गया, अब रो मत. अब दर्द नहीं होगा, केवल मज़ा
आएगा. वो बोली, क्या पूरा अंदर घुस गया. ऋतु ने कहा, अभी कहाँ,
अभी तो आधा ही घुसा है. वो बोली, जब जीजू बाकी का घुसाएँगे तो
मुझे फिर से दर्द होगा. ऋतु ने कहा, नहीं, अब दर्द नहीं होगा, अब
तुझे मज़ा आएगा.
लाली जब शांत हो गयी तो मैने धीरे धीरे उसकी चुदाई शुरू कर
दी. उसे अभी भी दर्द हो रहा था और वो आहें भर रही थी. उसकी
चूत बहुत ही ज़्यादा टाइट थी इस लिए मेरा लंड आसानी से उसकी चूत
में अंदर बाहर नहीं हो पा रहा था. मैं उसे चोद्ता रहा तो वो
कुच्छ देर बाद वो धीरे धीरे शांत हो गयी. अब उसे भी कुच्छ कुच्छ
मज़ा आने लगा था. उसने सिसकिया भरनी शुरू कर दी. ऋतु ने
पुछा, अब कैसा लग रहा है. वो बोली, अब तो मज़ा आ रहा है. ऋतु
ने कहा, पूरा अंदर घुस जाने दे तब तुझे और मज़ा आएगा, ये तो
अभी शुरुआत है. मैने उसे चोदना जारी रखा तो थोड़ी ही देर बाद
उसने अपने चूतड़ भी उठाने शुरू कर दिए.
क्रमशः………..
थोड़ी देर की चुदाई के बाद लाली झाड़ गयी. उसकी चूत और मेरा लंड
अब एक दम गीला हो चुका था. मैने अपनी स्पीड धीरे धीरे बढ़ानी
शुरू कर दी. लाली पूरे जोश में आ चुकी थी. वो ज़ोर ज़ोर से
सिसकारियाँ भर रही थी. मैने हर 4-6 धक्के के बाद एक धक्का थोड़ा
ज़ोर से लगाना शुरू कर दिया. इस से मेरा लंड थोड़ा थोड़ा कर के उसकी
चूत में और ज़्यादा गहराई तक घुसने लगा. जब मैं तेज धक्का लगा
देता था तो लाली केवल एक आह सी भरती थी. वो इतने जोश में आ
चुकी थी कि उसे अब ज़्यादा दर्द महसूस नहीं हो रहा था. मैं इसी
तरह से उसे चोद्ता रहा.
थोड़ी देर की चुदाई के बाद ही लाली फिर से झाड़ गयी. अब तक मेरा
लंड उसकी चूत में 7″ अंदर घुस चुका था. मैने अपनी स्पीड बढ़ाते
हुए उसकी चुदाई जारी रखी. थोड़ी ही देर में मेरा पूरा का पूरा
लंड उसकी चूत में समा गया. ऋतु ने जब देखा की मेरा पूरा लंड
उसकी चूत में घुस चुका है तो उसने लाली से कहा, इनका पूरा का
पूरा लंड तेरी चूत के अंदर घुस गया है. अब तुझे केवल मज़ा
आएगा. वो बोली, मुझे विश्वास नहीं हो रहा है. ऋतु ने कहा, अगर
तुझे विश्वास नहीं हो रहा है तो हाथ लगा कर देख ले. लाली ने
हाथ लगा कर देखा तो बोली, दीदी, ये पूरा अंदर कैसे घुस गया,
मुझे तो कुच्छ पता ही नहीं चला. ऋतु ने कहा, जब तू थोड़ी देर की
चुदाई के बाद पूरे जोश में आ गयी थी तब ये बीच बीच में
ज़ोर का धक्का लगा देते थे. जिस से इनका लंड थोड़ा थोड़ा कर के तेरी
चूत के अंदर घुसा जाता था. तू जोश में थी इस लिए तुझे कुच्छ
पता ही नहीं चला.
मैने अपनी स्पीड और तेज कर दी क्यों कि अब मैं झड़ने वाला था. 2 मिनट
के अंदर ही मैं झाड़ गया तो लाली भी मेरे साथ ही साथ फिर से
झाड़ गयी. मैने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाल कर लाली से
पूछा, चतोगी. उसने मेरा लंड देखा तो उस पर जूस के साथ थोडा
खून भी लगा हुआ था. वो बोली, जीजू, इस पर तो खून भी लगा हुआ
है. मैं अगली बार चाट लूँगी. ऋतु ने कहा, तेरी चूत का ही तो
खून है और ये पहली पहली बार निकला है, चाट ले इसे. वो बोली, तुम
कहती हो तो मैं चाट लेती हूँ. उसने मेरा लंड चाट चाट कर साफ कर
दिया. ऋतु ने पूछा, चुदवाने में मज़ा आया. वो बोली, हां, मज़ा तो
आया लेकिन ज़्यादा नहीं. ऋतु ने पुछा, क्यों. वो बोली, जब मुझे ज़्यादा
मज़ा आना शुरू हुआ तो जीजू झाड़ गये. ऋतु ने कहा, अगली बार ज़्यादा
मज़ा आएगा. इस बार तो इनका सारा वक़्त तेरी चूत में रास्ता बनाने
में ही लग गया.
मैं लाली के बगल में लेट गया. वो मेरी पीठ को सहलाते हुए मुझे
चूमती रही. 10 मिनट में ही मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. मैने
लाली को डॉगी स्टाइल में कर दिया और उसकी चुदाई शुरू कर दी. उसे
इस बार चुदवाने में ज़्यादा मज़ा आया और मुझे भी. उसने इस बार
पूरी मस्ती के साथ खूब जम कर चुदवाया. मैने भी उसे पूरे जोश
के साथ बहुत ही ज़ोर ज़ोर के धक्के लगाते हुए खूब जम कर चोदा.
इस बार मैने लगभग 35 मिनट तक उसकी चुदाई की. लाली इस दौरान 4
बार झाड़ गयी थी.
मैं लाली के बगल में लेट गया. हम सब आपस में बातें करते
रहे. लगभग 1 घंटे के बाद ऋतु ने मुझसे कहा, क्यों जी, तुम मुझे
आज नहीं चोदोगे क्या. साली की कुँवारी चूत का मज़ा पा कर मुझे भूल
गये क्या. मैने कहा, भला मैं तुम्हें कैसे भूल सकता हूँ, तुम
तो मेरी बीवी हो. मैं रोज रोज घर का ही तो खाना ख़ाता हूँ. कभी
कभी होटेल के खाने का मज़ा भी ले लेना चाहिए. तुम तो मेरे लिए
घर का खाना हो और लाली होटेल का. आज मैने कुँवारी चूत का मज़ा
लिया है इस लिए मैं तुम्हारी चूत को आज हाथ भी नहीं लगाउन्गा.
आज तो मैं तुम्हारी गांद मारूँगा. ऋतु बोली, फिर मारो ना. लाली बोली,
जीजू क्या कह रहे हो. मैने कहा, ठीक ही कह रहा हूँ. ये कभी
कभी मुझसे गांद भी मरवाती है. गांद मरवाने में भी खूब मज़ा
आता है. तुम भी मर्वओगि. वो बोली, पहले आप दीदी की गांद मार लो.
ज़रा मैं भी तो देखूं की दीदी आप का इतना लंबा और मोटा लंड अपनी
गांद के अंदर कैसे लेती है.
ऋतु डॉगी स्टाइल में हो गयी तो मैने ऋतु की गांद मारनी शुरू कर
दी. लाली आँखें फाडे मेरे लंड को ऋतु की गांद में अंदर बाहर
होते हुए देखती रही. मैं 2 बार लाली की चुदाई कर चुका था इस
लिए मैं जल्दी झाड़ नहीं पा रहा था. ऋतु सिसकारियाँ भरते हुए
मुझसे गांद मरवा रही थी. लाली ऋतु को गांद मरवाते हुए देख रही
थी. उसकी आँखों में भी जोश की झलक साफ दिख रही थी. मैने
लाली से पुछा, कैसा लग रहा है. वो बोली, बहुत ही अच्च्छा लग रहा
है, जीजू. मैने पुछा, गांद मर्वओगि. वो बोली, फिर से दर्द होगा.
मैने कहा, गांद मरवाने में तो बहुत ही ज़्यादा दर्द होता है. वो
बोली, ना बाबा ना, मैं गांद नहीं मरवाउंगी. ऋतु ने कहा, लाली,
पहले तू खूब जम कर इनसे चुदवाने का मज़ा ले ले. उसके बाद एक बार
गांद भी मरवाने का मज़ा ले लेना. मैने लगभग 45 मिनट तक ऋतु की
गांद मारी और झाड़ गया.
मैने कयि दीनो तक लाली को खूब जम कर चोदा. उसे अब चुदवाने में
बहुत मज़ा आने लगा था. मुझे भी कुँवारी चूत को चोदने का मज़ा मिल
चुका था और मैं अब उसकी एक दम टाइट चूत को चोद रहा था. मैं
लाली की गांद भी मारना चाहता था लेकिन उसे मैं खूब तडपा तडपा
कर उसकी गांद मारना चाहता था. मैने काई बार लाली के सामने ऋतु की
गांद मारी तो एक दिन वो अपने आप को रोक नहीं पाई. वो मुझसे कहने
लगी, जीजू, एक बार मेरी भी गांद मार लो, मैं भी गांद मरवाने का
मज़ा लेना चाहती हूँ. मैने कहा, तुझे बहुत ज़्यादा तकलीफ़ होगी. वो
बोली, होने दो. मैने उस से कहा, तू नहीं जानती है कि मैने ऋतु की
गांद पहली पहली बार कैसे मारी थी. वो बोली, बताओगे तभी तो
जानूँगी. मैने कहा, तो सुन, तूने वो पिलर देखा है ना जो आँगन
में है. वो बोली, हां, देखा है. मैने कहा, मैने ऋतु को खड़ा
कर के उसी पिलर में कस कर बाँध दिया था. उसके बाद मैने इसके
मूह में कपड़ा थूस कर इसका मूह भी बाँध दिया था जिस से ये ज़्यादा
चिल्ला ना सके. उसके बाद ही मैं रातू की गांद मार पाया था. गांद
में लंड आसानी से नहीं घुसता है, बहुत मेहनत करनी पड़ती है और
दर्द भी बहुत होता है. गांद से बहुत ज़्यादा खून भी निकलता है.
वो बोली, चाहे जो भी हो आप मेरी गांद मार दो, मैं कुच्छ नहीं
जानती. मैने कहा, तू कयि दिनो तक बिस्तेर पर से उठ भी नहीं
पाएगी. वो बोली, जब दीदी ने आप से गांद मरवा लिया तो मैं क्यों
नहीं मरवा सकती. मैने कहा, सोच ले, बहुत दर्द होगा. तेरी गांद
भी फॅट सकती है. वो ज़िद करने लगी, मैं कुच्छ नहीं जानती, तुम
मेरी गांद मार दो बस. मैने कहा, अच्छा, कल मैं तेरी गांद मार
दूँगा. वो बोली, नहीं आज ही और अभी मेरी गांद मार दो.
ऋतु मेरी बात सुनकर मुस्कुरा रही थी. वो जानती थी कि मैं झूठ
बोल रहा हूं. वो ये भी संज़ह गयी थी मैं उसकी गांद को बहुत ही
बुरी तरह से मारना चाहता हूँ. ऋतु ने लाली से कहा, चल आँगन
में. मैं ऋतु और लाली के साथ आँगन में आ गया. ऋतु कुच्छ
कपड़े और रस्सी ले आई. उसके बाद मैने लाली से कहा, तू पिलर को
ज़ोर से पकड़ कर खड़ी हो जा. वो पिलर को पकड़ कर खड़ी हो गयी.
उसके बाद मैने रस्सी से उसकी कमर को पिलर से बाँध दिया. उसके बाद
मैने दूसरी रस्सी ली और उसके पैर को भी फैला कर पिलर से बाँध
दिया. फिर मैने लाली के दोनो हाथ भी पिलर से बाँध दिए. वो बोली,
जीजू, आप ने तो मुझे ऐसे बाँध दिया है कि मैं ज़रा सा भी इधर
उधर नहीं हो सकती. मैने कहा, गांद मारने के लिए ऐसे ही बांधना
पड़ता है. उसके बाद मैने लाली के मूह में कपड़ा थूस दिया और उसके
मूह को बाँध दिया.
मैने ऋतु से कहा, अब तुम मेरे लंड को तोड़ा सा चूस लो जिस से ये
पूरी तरह से टाइट हो जाए. ऋतु ने मेरे लंड को चूसना शुरू कर
दिया तो थोड़ी ही देर में मेरा लंड पूरी तरह से टाइट हो गया.
मैने ऋतु के मूह से अपना लंड बाहर निकाला और लाली के पिछे आ
गया. मैने लाली की गांद के छेद पर अपने लंड का सूपड़ा रखा और
पूरे ताक़त के साथ ज़ोर का धक्का मारा. लाली दर्द के मारे तड़पने
लगी. वो अपना सिर इधर उधर कने लगी. उसका मूह बँधा हुआ था इस
लिए उसके मूह से केवल गूओ गूओ की आवाज़ ही निकल रही थी. एक धक्के
में ही मेरा लंड उसकी गांद को चीरता हुआ 2″ तक घुस गया. उसकी
गांद से खून निकल आया. मैने दूसरा धक्का लगाया तो लाली के मूह
से बहुत ज़ोर ज़ोर से गूऊ गूऊ की आवाज़ निकलने लगी. मेरा लंड 4″
अंदर घुस गया. लाली की गांद से और ज़्यादा तेज़ी के साथ खून
निकलने लगा. मैने फिर से एक धक्का मारा तो मेरा लंड उसकी गांद
में 5″ तक घुस गया. उसके बाद मैने एक ही झटके से अपना लंड उसकी
गांद से बाहर खीच लिया. पक की आवाज़ के साथ मेरा लंड लाली की
गांद से बाहर आ गया. लाली के मूह से अभी भी ज़ोर ज़ोर से गूओ गूओ
की आवाज़ निकल रही थी.
मैने ऋतु को अपना लंड दिखाते हुए कहा, इसकी गांद तो बहुत ही
टाइट है. देखो कितना खून निकल आया है. ऋतु बोली, क्यों तड़पाते
हो बेचारी को. घुसा दो ना अपना पूरा लंड इसकी गांद में. मैने
कहा, ठीक है बाबा, घुस देता हूँ. मैने लाली की गांद के छेद पर
फिर से अपने लंड का सूपड़ा रख दिया. उसकी गांद खून से भीगी हुई
थी. मैने बहुत ही ज़ोर का एक धक्का लगाया तो मेरा लंड उसकी गांद
में 5″ तक घुस गया. उसके बाद मैने 2 धक्के और लगाए तो मेरा
लंड उसकी गांद में 7″ तक अंदर घुस गया. लाली का सारा बदन
पसीने से भीग गया था. वो अपना सिर पिलर पर पटक रही थी. उसकी
आँखो से आँसू बह रहे थे. मुझे खूब मज़ा आ रहा था. मैं
लाली की गांद इसी तरह से मारना चाहता था. मेरी तमन्ना पूरी हो
रही थी. ऋतु आँखें फाडे मुझे देख रही थी. उसने कहा, रहम
करो इस बेचारी पर. क्यों तडपा रहे हो इसे. मैने 2 बहुत ही जोरदार
धक्के और लगाए तो मेरा पूरा का पूरा लंड लाली की गांद में समा
गया.