इस फ्री हिंदी चुदाई कहानिया में पढ़ें कि कैसे मैंने अपने पड़ोस की सेक्सी प्यासी भाभी की चूत को चाटा, मेरा लंड चूस कर मेरा रस पीया. और फिर मैंने भाभी की चूत चुदाई की.
अब तक की इस फ्री हिंदी चुदाई कहानिया के पिछले भाग में
पड़ोसन भाभी को मदमस्त चोदा-2
में आपने पढ़ा कि मैंने भाभी की चुत को चूस कर झाड़ दिया था और उसकी चुत का पूरा रस चाट लिया था.
अब आगे:
चुत चुसाई के बाद भाभी ने मुझे गले से लगा लिया और मेरे होंठों को चूमने लगी. मैंने भी उसको अपनी बांहों में भर लिया और एक एक करके उसके सभी अंग सहलाना शुरू कर दिए.
मैंने सबसे पहले भाभी की बड़ी बड़ी चुचियों को दबाया, पीठ को सहलाया. फिर उसके गोल गोल और गोरे गोरे चूतड़ों को सहलाया और दबाया.
तभी भाभी का एक हाथ मेरी पैंट के अन्दर जाने लगा. अगले ही पल भाभी मेरा लंड अपने हाथ में लेकर दबाने लगी.
उसकी यह हरकत देख कर मैं तो पागल सा हो गया. मैंने उसको वहीं सोफ़े पर लेटा दिया और उसके होंठों को अपने होंठों में दबा लिया. हम दोनों चूमाचाटी में लग गए.
दस मिनट तक उसके होंठों चूसने के बाद मैंने उसका ब्लाउज़ उतार दिया. फिर साड़ी को भी उससे अलग कर दिया. बाद में उसके पेटीकोट का नाड़ा भी खोल कर उसके पेटीकोट को उतार दिया.
अब इस समय भाभी सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी. मैंने भाभी की चूचियों को ब्रा पर से ही रगड़ना और चूसना शुरू कर दिया. कुछ पल बाद मैं भाभी के पेट को चूमता हुआ उसकी नाभि पर आ गया. मैंने भाभी की नाभि में जीभ की नोक डाल कर उसको खूब मज़े से चूमा और चूसा.
आखिर में मैंने फिर से भाभी की चूत को पैंटी के ऊपर से चाटना और काटना शुरू कर दिया.
मेरे ऐसा करने से भाभी की आवाज एकदम से बदल गयी. वो अम्म अम्म अम्म करने लगी. अब मैंने उसकी ब्रा और पैंटी को उसके शरीर से अलग कर दिया.
भाभी ने मेरे कान में सरसराया- मुझे भी चूसना है.
ये सुनते ही मैं भाभी से अलग हुआ और हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए.
इस पोजीशन में आकर मैंने उसको बेड पर पीठ के बल लेटा दिया और मैंने अपना मुँह उसकी चूत के तरफ कर लिया.
मैंने अपना लंड भाभी के मुँह की तरफ कर दिया था. भाभी लंड को पकड़ कर सूँघ रही थी. मैं उसकी चूत को बड़े चाव से चाटने लगा. उसी पल भाभी भी मेरे लंड को खूब मज़े से चूसने में लग गई थी.
लंड चुत की मस्त चुसाई चलने लगी. ऐसा करते हुए हम लोगों को दस मिनट से ज्यादा का समय हो गया था.
इसके बाद मैं उठा और भाभी के दोनों पैरों के बीच में आकर बैठ गया. मैं भाभी की चुत निहारने लगा.
भाभी बोली- इतना क्यूँ तड़पा रहे हो मुझे … मेरी चूत में जल्दी से अपना लंड डाल कर इसकी प्यास को शांत करो … अब देर ना करो … जल्दी से अपने लंड से मेरी चूत को फाड़ डालो … इसे चोद चोद कर इसका पानी निकाल दो.
मैंने अपना लंड भाभी की चूत के छेद में सैट किया और एक ज़ोरदार धक्का दे मारा. एक ही झटके में मेरा पूरा लंड भाभी की चूत में समा गया.
उसी समय भाभी के मुँह से ‘ऊई माँ … मर गई..’ निकल गया.
भाभी कराहते हुए बोली- तुम्हारा लंड तो मेरे पति से भी बड़ा है और मोटा भी है.
मैंने अपना लंड थोड़ा बाहर निकाल कर फिर से धक्का मारा, तो भाभी बोली- थोड़ा धीरे धीरे करो यार … कहीं भागी नहीं जा रही हूँ.
मैंने भाभी की एक ना सुनी और उसके पैरों को और चौड़ा करके पूरी ताकत से भाभी की चुदाई करने लगा. भाभी भी मस्ती में अपने चूतड़ों को उछाल कर मेरा पूरा लंड अपनी चूत में ले रही थी … साथ ही अपने मुँह से अम्म अम्म की आवाजें भी निकाल रही थी.
भाभी की चुदाई करते हुए मुझे कुछ समय ही हुआ होगा कि उसका बदन फिर से अकड़ने लगा. भाभी ने मुझे अपने सीने से लगा लिया. फिर भी मैं नहीं रुका … मैं भाभी की चुदाई करता जा रहा था.
अचानक भाभी की चूत से पानी की फुहार निकली और वो बोल पड़ी- आह … कितने दिनों के बाद मेरी ऐसी चुदाई हुई है … आज से मैं तुम्हारी हूँ … और आगे भी तुम्हारी ही रहूँगी मेरे राजा.
इतना सुन कर मुझे रहा नहीं गया और मैंने भी भाभी की चूचियों को दबाते हुए उसके होंठों को चूसा. मैं अपने लंड को और तेज़ी से उसकी चूत में पेलने लगा.
भाभी बोलती रही- आह … अब बस करो मेरे देवर राजा … मेरी बर्दाश्त के बाहर हो रहा है.
पर मैं कहां सुनने वाला था. मैं लगातार भाभी की चूत को चोदता रहा.
भाभी ने कहा- जल्दी करो … जो करना है … नहीं तो मेरे सास-ससुर आ जाएंगे.
मुझे एकदम से ख्याल आया कि कहीं लफड़ा न हो जाए. अगले ही पल मैंने भाभी को उठाया और उसे अपने लंड के ऊपर बैठा लिया.
मैंने भाभी से कहा- अब आप मेरे लंड को अपनी चूत में डाल कर ऊपर-नीचे करो.
भाभी ने वैसा ही किया. वो मेरे लंड को अपने हाथ से अपनी चूत पर रगड़ने लगी और एक झटके में अपनी चूत में डाल कर अपने चूतड़ों को तेज़ी से ऊपर-नीचे करने लगी. उसके चूतड़ों के साथ साथ उसकी चूचियां भी ऊपर-नीचे हो रही थीं.
मैंने अपने हाथों में भाभी की उछलती चूचियों को पकड़ कर अपने मुँह में ले लिया. मैं चुत चुदाई के साथ भाभी के दूध चूसने का भी मजा लेने लगा. ऐसा करने से भाभी और ज्यादा तड़पने लगी. वो और तेजी से मेरे लंड पर ऊपर-नीचे हो रही थी. जब वो थक गयी, तो मैंने उसे सोफ़े पर ही घोड़ी बनने को कहा.
जब भाभी घोड़ी बनी, तो मैं उसके पीछे आकर उसके चूतड़ों को अपने हाथों से फैलाकर उसकी चूत के छेद में अपना लंड सैट करते हुए एक धक्का दे मारा. मेरा पूरा लंड उसकी चूत के छेद में घुसता चला गया. अब मैंने भाभी के दोनों चूतड़ों को कसके पकड़ कर उसकी चुदाई शुरू कर दी.
दोस्तो, क्या मज़ा आ रहा था इस पोजीशन में. मैं अपना पूरा लंड बाहर निकाल कर फिर से भाभी की चूत में पेल रहा था. वो भी एकदम से मस्त होकर गांड हिला रही थी.
भाभी बोली- आह क्या मस्त चुदाई करते हो तुम … मेरी चूत तो ऐसा लंड पाकर धन्य हो गई.
कोई पांच मिनट बाद मैंने कहा- मेरा छूटने वाला है रेनू … मैं क्या करूं?
भाभी बोली- चिंता मत करो मेरे राजा … मेरी चूत में ही अपना माल निकाल दो.
मैंने ज़ोर के धक्कों के साथ अपना माल भाभी की मखमली चूत में भर दिया.
कुछ देर बाद हम दोनों खड़े हुए और कपड़े पहन कर खुद को सही करने में लग गए. मैंने अपने कपड़े पहने और भाभी को भी उनकी ब्रा और पैंटी भी पहनायी.
जब वो पूरे कपड़े पहन कर तैयार हो गई, तो मैंने भाभी को अपनी बांहों में भर लिया और कहा- रेनू भाभी आप ही पहली हो, जिसके साथ मैंने पहली बार चुदाई की है. सच मानो मुझे आपको चोदने में मज़ा आ गया.
भाभी भी बोली- हां मैं भी तुमसे चुद कर बहुत खुश हूँ. अब तुम्हारा जब भी मन करे, तुम मुझे अपनी बांहों में ले सकते हो और जी भरके मुझे चोद सकते हो.
इतना सुन कर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. भाभी को भी पता चल गया कि मेरा लंड उसे सलामी दे रहा है, तो उसने कहा- तेरे लंड को अभी भी मेरी चूत चाहिए … देख कैसे इशारे कर रहा है.
मैंने बोला- तो हो जाए फिर से.
भाभी बोली- यार मैं बहुत थक गयी हूँ और मम्मी पापा के आने का टाइम भी हो गया है. फिर किसी दिन पूरा मजा लूंगी. लेकिन अभी तो इसको शांत करने का मेरे पास एक तरीका है.
भाभी ने मेरी पैंट से मेरा लंड निकाला और उसे चूमने लगी. फिर एक ही बार में उसे अपने मुँह में भर कर फिर से चूसने लगी कि जैसे वो मेरे लंड को पूरा का पूरा निगल जाएगी.
दोस्तो, क्या बताऊं … भाभी मेरा लंड ऐसे चूस रही थी कि मैं भी उसके मुँह में ही अपने लंड को आगे पीछे करने लगा. या यूं कहा जाए कि इस वक्त मैंने अपने लंड से भाभी के मुँह को ही चोदना शुरू कर दिया था.
कुछ ही मिनट में मेरा माल निकलने को हो गया था, तो मैंने भाभी को बोला- मैं झड़ने वाला हूँ.
भाभी हाथ का इशारा करती हुई बोली- कोई बात नहीं … तुम मेरे मुँह में ही अपना पूरा माल निकाल दो.
मैंने भाभी के सिर को कसके पकड़ लिया और अपना लंड तेजी से भाभी के मुँह में अन्दर बाहर करने लगा.
फिर एक जोरदार धार के साथ मैंने भाभी के मुँह को भर दिया. भाभी भी मेरा पूरा माल पी गयी और मेरे लंड को चाट चाट कर पूरा साफ कर दिया.
मैंने भाभी को कहा- भाभी आप कमाल की चुसक्कड़ हो.
भाभी बोली- वो कैसे?
मैं बोला- भाभी आपको लंड चूसना और लंड से चुदवाना बहुत अच्छे से आता है.
भाभी हंस दी.
फिर मैं अपने घर को चलने के लिए तैयार हुआ, तो भाभी ने कहा- शाम को पार्टी में आना ना भूलना.
मैंने कहा- अब तो भाभी आना जाना लगा रहेगा.
भाभी ने हंस कर कहा- हां हां क्यों नहीं … मैं तो खुद बेसब्री से तुम्हारा इंतज़ार करूंगी.
इतना कह कर मैं उनके घर के बाहर आ गया और अपने घर आ गया.
फिर जैसे तैसे शाम हुई. मैं भी बन ठन कर भाभी के घर पहुंच गया. सामने ही उनके सास ससुर बैठे थे, तो मैंने उनको नमस्ते किया.
उन्होंने कहा- बेटा तुमने घर को बहुत अच्छा सजाया है.
मैंने कहा- भाभी जी ने भी मेरी बहुत मदद की … तब जाकर हो पाया है.
अंकल खुश हो गए.
मैंने कहा- वैसे भाभी जी है कहां?
भाभी की सास बोलीं- वो रसोई में है.
मैंने उनसे पूछा- मैं अन्दर चला जाऊं … उनसे मिल लूं, उनका कोई और काम तो नहीं बाकी है.
उनकी सास ने बोला- हां देख लो … बेचारी सुबह से अकेले ही परेशान हो रही है. तुम साथ में रहोगे, तो उसकी कुछ मदद हो जाएगी.
इतना सुनते ही मैं रसोई में चला गया. भाभी किचन में कुछ कर रही थी.
भाभी ने उस समय गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी. पीछे से क्या गजब माल लग रही थी. मेरा मन तो कर रहा था कि पीछे से साड़ी उठाकर अपना लंड उसकी चिकनी चूत में पेल दूँ.
लेकिन पार्टी का माहौल था, कोई भी आ सकता था, तो मैंने भाभी को पीछे से आवाज दी- भाभी क्या कर रही हो?
मेरी आवाज सुनते ही भाभी झट से पलट गयी और बोली- तुम कब आए?
मैंने उसकी बात बीच में काटते हुए कहा- भाभी, तुम तो कमाल की माल लग रही हो.
भाभी हंस कर बोली- सच में!
मैंने बोला- हां भाभी.
लेकिन भाभी ने लिपस्टिक नहीं लगाई थी, तो मैंने बोला- भाभी लिपस्टिक नहीं लगाई आपने?
भाभी बोली कि चलो … तुम ही लगा दो.
मैंने बोला कि नेकी और पूछ पूछ … चलो.
भाभी ने कहा कि तुम बेडरूम में चलो, मैं आती हूँ.
मैं उसके बेडरूम में चला गया और टीवी देखने लगा. लगभग दस मिनट में भाभी कमरे में आ गयी और दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया.
मैं बोला- ये क्या कर रही हो भाभी?
भाभी ने कुछ नहीं कहा, बस मुझे बेड पर धक्का दे कर मेरे ऊपर चढ़ गयी और मेरे होंठों को चूमने लगी.
मैं भी भाभी के होंठों को कस के चूमने लगा और उसको अपनी बांहों में कस लिया.
कुछ देर बाद हम दोनों उठे.
मैंने बोला- रेनू, आज तो आप कमाल की चहक रही हो.
भाभी ने कहा- सब तुम्हारा कमाल है … कितने दिनों बाद मैं अपने आप को खुश महसूस कर रही हूँ.
हम दोनों एक दूसरे के बांहों में चिपक गए.
मैं बोला- मैं बहुत नसीब वाला हूँ कि आज इतनी खूबसूरत भाभी मेरी बांहों में है.
भाभी ने कहा- मैं भी बहुत खुश हूँ कि तुम जैसा साथी मुझे मिला, जिसने मुझे इतनी खुशी दी है. जो कि मेरा पति मुझे कभी भी नहीं दे पाया. तुमने मुझे संतुष्ट भी किया है.
इतना कह कर हम दोनों ने एक बार फिर एक दूसरे को चूमा, फिर अपने आपको सही किया.
मैंने भाभी से बोला- भाभी मुझे आपके साथ सुहागरात ऐसे मनानी है, जैसे एक पति और पत्नी शादी के बाद मनाते हैं.
भाभी जी ने कहा- ओके मैं कुछ करती हूँ. जब मुझे मौका मिलेगा, तो मैं तुमको बता दूंगी.
ये कह कर भाभी बेडरूम के बाहर निकल गयी.
एक्सरसाइज करवाते वक़्त भाभी को चोदा-1
मैं जिम ट्रेनर हूँ. मुझे सेक्सी कहानियाँ पसंद हैं तो सोचा कि मैं भी अपनी असली सेक्सी स्टोरी लिख भेजूं. एक भाभी ने मुझे घर पे कसरत करवाने के लिए नियुक्त किया. भाभी को टाईट कपड़ों में देख मेरा लंड खड़ा हो जाता था. तो क्या मैंने भाभी को चोदा?
नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम विशाल है, मैं पंजाब का रहने वाला हूं और चंडीगढ़ में रहता हूं. मैं एक पर्सनल फिटनेस ट्रेनर हूँ. मेरी शादी को दो साल हुए हैं, मेरी उम्र 40 साल है और कद 6 फुट, भुजाओं की माप 17 इंच है, छाती 44 इंच की है और कमर 34 की है. मेरे लंड का साइज बड़ा मस्त है. ये पूरा 8.5 इंच लंबा है और 3 इंच मोटा है. दिखने में मैं गुड लुकिंग हूँ, रंग गोरा है.
दोस्तो और सहेलियो, मैं आपसे सच कहूँ तो मैंने अन्तर्वासना सेक्सी कहानियां पर बहुत सी सेक्स कहानी पढ़ी हैं, ये सब मुझे बहुत पसंद आती थीं. हर सेक्स कहानी बहुत बार तो सोचा भी कि मैं भी क्यों न अपनी कोई असली सेक्स कहानी लिख कर अन्तर्वासना पढ़ने वाले पाठकों के साथ सांझा करूं, पर फिर हर बार मन बदल जाता और रहने देता था.
फिर एक दिन ऐसे ही सेक्सी कहानियाँ पढ़ते पढ़ते अचानक मन बन गया और अब मैं अपनी असली सेक्स कहानी यहां आपको बताने जा रहा हूं.
यदि मेरी कोई भी किसी भी तरह की बात या शब्दों का इस्तेमाल बुरा लगे तो उसके लिए मैं आप सबसे दिल से माफी चाहता हूं और कोशिश करूंगा कि अपनी कहानी को और बेहतर ढंग से लिख सकूं.
यह सेक्स कहानी मेरी शादी के एक साल बाद की है, तब मेरी बीवी अपने मायके कुछ महीनों के लिए गई हुई थी क्योंकि वो माँ बनने वाली थी.
मैं जहां रहता हूं, वहां चंडीगढ़ के एक सेक्टर में जिम में जाया करता था. लोगों को पर्सनल ट्रेनिंग देने के लिए, जिसमें लड़के और लड़कियां, आदमी और महिलाएं सब आते थे.
ज़ाहिर सी बात है कि गुडलुकिंग इंसान को कौन पसंद नहीं करता, खास तौर पर उसे, जिसकी अच्छी बॉडी हो.
उस जिम में एक लेडी आती थी, जिसका नाम अपूर्वा था. इधर उसके असली नाम की पहचान गोपनीय रखी गई है. वो दिखने में ज्यादा सुंदर तो नहीं पर थी. लंबे बाल थोड़ी सी मोटी … ज्यादा मोटी नहीं बस थोड़ी सी थी. उसके स्तनों का साइज 36 इंच का था और कमर 34 और चूतड़ों का साइज 38 इंच था. वो दिखने में बड़ी सेक्सी थी, उसकी मुस्कुराहट बहुत सेक्सी थी. वो जब जिम में आयी … तो मेरे पास आई.
उसने मेरे पास आकर पूछा कि इस जिम में आप ही ट्रेनर हो?
मैंने कहा- हां जी कहिए, मैं ही ट्रेनर हूं.
वो बोली- मुझे आपसे पर्सनल ट्रेनिंग लेनी है … क्योंकि मुझे अपना थोड़ा सा पेट काम करना है और थोड़ा पतला होना है … ज़्यादा नहीं पर मैं अपना फिजिक मेंटेन करना चाहती हूँ.
मैंने बोला- ठीक है मेम, आप जैसे चाहती हैं … वैसे हो जाएगा.
फिर अचानक उसने कुछ ऐसा कहा, जिसे सुन कर मुझे मुझे अचंभा सा हुआ.
वो बोली- मेरी एक प्रॉब्लम है कि मैं जिम नहीं आ सकती … क्योंकि मेरे घर पर मेरा एक साल का छोटा सा बेबी है … मुझे उसकी देखभाल करनी होती है. मेरे पति जब अपने काम पर चले जाते हैं, तो उस बच्चे को संभालना भी होता है और फिर घर के काम भी करने होते हैं. इसलिए मैं जिम नहीं जा सकती. अगर आपको बुरा न लगे और आपको कोई परेशानी न हो, तो क्या आप एक्सरसाइज करवाने के लिए मेरे घर पर आ सकते हैं?
मैंने कुछ सोचने के बाद उससे बोला कि ठीक है … मेम पर मेरी फीस पांच हज़ार है.
तो वो बोली- मुझे कोई परेशानी नहीं है … मैं दे दूंगी.
फिर मैंने पूछा कि आपको कौन सा टाइम ठीक रहेगा?
वो बोली कि सुबह 11 बजे … तब तक मेरे पति भी चले जाते हैं और घर के थोड़े बहुत जो काम होते हैं, वो भी खत्म हो जाते हैं और बच्चा भी सो जाता है.
मैंने कहा- ठीक है जी … तो मैं कल से आपके घर आ जाऊंगा.
उसने मुझे अपना फ़ोन नंबर, अपना नाम पता आदि लिखवा दिया और फिर वो चली गई.
मैं अगले दिन उसके घर पहुंच गया. मुझे दिए हुए पते पर और जाकर घंटी बजाई. कुछ सेकंड बाद दरवाजा खुला और वो लेडी मेरे सामने खड़ी थी.
उसने मुस्कुराते हुए मुझसे ‘हैलो..’ बोला और अन्दर आने के लिए कहा. मैं अन्दर गया और एक सोफे पर बैठ गया. घर काफी साफ सुथरा था. उसने चाय पानी के लिए पूछा.
मैंने पानी के लिए कहा, तो वो अन्दर गई और पानी ले आयी. मैंने पानी पिया और कहा- शुरू करें एक्सरसाइज?
वो बोली- हां … बस मैं एक मिनट में आयी.
वो किचन में गई और चाय बना करके ले आयी, साथ में कुछ नमकीन भी था.
मैं क्या कहता, मैंने और उसने चाय पी और हम दोनों में थोड़ी बहुत बातें हुईं हमने चाय खत्म की. फिर वो झट से अन्दर के कमरे में गई और एक थोड़ा सा खुला सा टॉप और सिलेक्स पहन कर आ गई. वो नीछे बिछाने के लिए एक योग मैट लेकर आई थी.
मैंने उसे एक्सरसाइज करवानी शुरू कर दी. करीब एक डेड घंटे मैंने उसे कसरत करवाई, फिर मैं चला गया.
बस इसी तरह मैं उसे एक्सरसाइज करवाने उसके घर जाता रहा. उसके घर जाते हुए मुझे एक महीना हो चुका था, तो जाहिर सी बात है कि हम दोनों में अच्छी जान पहचान हो चुकी थी. हम दोनों एक दूसरे से पूरी तरह फ्रैंक हो चुके थे. आपस में ‘आप’ शब्द का सम्बोधन खत्म होकर ‘तुम’ पर आ गए थे. बस हमारे बीच कभी चूत और लंड की बातें नहीं हुई थीं.
मैं जब उसे एक्सरसाइज करवाता था, तो मेरी नज़र कभी कभी उसके मम्मों पर जाती थीं. जब वो उलटा लेट कर एक्सरसाइज करती, तो उसके चूतड़ों के बीच की दरार को देखने लगता.
सच में उसके बहुत ही प्यारे और सेक्सी चूतड़ हैं. मेरा लंड तो एकदम धीरे धीरे गर्म होने लग जाता और लोअर के अन्दर ही धीरे धीरे अकड़ने लगता.
जब कभी एक्सरसाइज करने के लिए वो थोड़ा ऊपर को उठती, तो मेरे उस खड़े लंड से उसके मोटे और सेक्सी चूतड़ टच हो जाते, पर वो एक्सरसाइज करती रहती. उस वक्त मेरा दिल तो करता था कि इसे यहीं पकड़ लूं और उसको यहीं चोद डालूं … पर फिर सोचता कि नहीं यार किसी दिन इसको खुद मौका देने की इंतज़ार करता हूं, फिर इसे अच्छे से पेलूँगा.
चाहती तो शायद वो भी थी कि मैं उसे चोद दूं, तभी तो वो कोई भी प्रतिक्रिया किए बिना मेरे लंड के छूने से उसने कभी कोई बुरा नहीं माना और न कुछ कहा.
एक दिन की बात है, मैं जब उसके घर पर उसे एक्सरसाइज करवाने के लिए गया … तो वो बहुत बिजी लग रही थी.
मेरे पूछने पर उसने बोला- मेरे पति आज सुबह ही 2 दिन के लिए बाहर जाने वाले थे, तो उनकी तैयारी में टाइम लग गया … इसलिए मेरा काम अब तक खत्म ही नहीं हुआ.
मैं कुछ नहीं बोला.
वो बोली- तुम बैठो … मैं 15-20 मिनट में अपना सारा काम खत्म करके अभी आयी. मैंने बच्चे को तो सुला दिया है ताकि वो मुझे काम करते हुए परेशान न करे.
मेरे शैतान मन में घंटी बजी और मैं सोचने लगा कि काश आज इसे ठोकने का मौका मिल जाए … तो मेरे लंड को भी शांति मिल जाएगी.
मैं बोला- कोई बात नहीं तुम अपना काम खत्म कर लो, मैं बैठा हूं, इन्तजार कर लेता हूं.
वो ओके कह कर मुझे एक मैगजीन पकड़ा कर अन्दर चली गई. अन्दर का सारा नजारा मुझे यहीं से दिख भी रहा था.
अपूर्वा जब रसोई में काम खत्म कर रही थी, तो उसके टॉप में से उसके बड़े बड़े मम्मे और लोअर में से उसके चूतड़ साफ दिखाई दे रहे थे. उसने एक झीना सा टॉप और लोअर पहना हुआ था. ये दोनों इतने अधिक झीने थे कि उनमें से उसकी ब्रा और पेंटी का रंग भी दिख रहा था, उसने काले रंग की ब्रा और काले रंग की पेंटी पहनी हुई थी.
ये नजारा देख देख कर मेरा लंड लोअर के अन्दर ही हरकत करने लगा और गर्म होने लगा. मैंने अपने लंड पर चुपके से हाथ रखा.
जैसे ही मैंने अपने लंड पर हाथ रखा, उसी वक्त उसने अचानक ही मेरी तरफ देखा और मुझसे कुछ कहने लगी. पर मैं अपने लंड को सहला रहा था, तो ये देख कर उसने फिर से मुँह फेर लिया और अपने काम करने में लग गई.
मैंने जल्दी से खुद को ठीक किया और आराम से बैठ गया. मैंने देखा कि वो काम करते वक़्त बीच बीच में मेरी तरफ देखती और फिर मन ही मन में मुस्कुरा देती. शायद उसे मेरी हरकत के बारे में पता चल गया था.
खैर … कुछ देर बाद उसने सारा काम खत्म कर दिया और मेरे लिए और अपने लिए भी चाय बना कर ले आयी. कुछ वक़्त तक हम दोनों में कुछ देर बातें हुईं और हमने चाय पी.
फिर वो अन्दर चेंज करने के लिए चली गई और जाते हुए बोली- तुम एक मिनट और रुकना, बस मैं अभी तैयार होकर आयी.
मैं बाहर सोफे पर बैठा यही सोच रहा कि आज तो अपूर्वा को पकड़ ही लूंगा … उसे पेल ही दूंगा.
इतने में अपूर्वा आ गई और एक्सरसाइज करने में लग गई. वो कुछ देर तक तो एक्सरसाइज करती रही, जो भी मैंने बताई हुई थीं. फिर जब वो उल्टी लेट कर उठ कर करने वाली एक्सरसाइज करने लगी और उल्टा लेट गई.
वो बोली कि यार आज ये वाली एक्सरसाइज करने में तुम मेरी थोड़ी हेल्प कर देना … मुझे पीछे कमर में थोड़ा दर्द है.
मैं बोला- ठीक है.
वो एक्सरसाइज करने लगी और जब वो पुशअप लगाने लगी, तो उसने मुझे खुद को पकड़ने के लिए बोला … ताकि उसे उठने में थोड़ी मदद मिल सके.
फिर मैंने उसे उसके दोनों मम्मों वाली तरफ से पकड़ लिया और उसने पुशअप लगाने स्टार्ट कर दिए. वो जब ऊपर उठती, तो उसके चूतड़ मेरे लंड को छू जाते और जब वो नीचे जाती, तो मेरे दोनों हाथ थोड़ा फिसल कर उसके मम्मों को छू जाते. फिर उसे ऊपर उठाने में मदद करने के लिए वो जब ऊपर को आती, तो मेरे लंड पर अपने चूतड़ थोड़ा कुछ ज्यादा दबा देती. शायद वो भी आज मुझसे चुदने के मूड में थी. वर्ना ऐसा उसने कभी नहीं किया था.
जब वो मेरे लंड पर अपने चूतड़ दबाती, तो हर बार मेरा 8.5 इंच का लंड अकड़ने लगता और सख्त होने लगता. शायद ये बात उसे भी समझ आ गई थी. इसलिए वो जब जब ऊपर आती, तो वो मेरे लंड को अपनी गांड में लेने के लिए थोड़ी उत्सुक लगती. उधर से मैं धीरे धीरे अपने हाथ, उसके मम्मों के और पास ले जाता और उन्हें दबा देता. वो मेरी इस हरकत का बुरा न मानती और एक्सरसाइज करती रहती.
इस तरह थोड़े से पुशअप लगवाते हुए मैंने अपूर्वा से कहा- अपूर्वा, अगर तुम बुरा न मानो, तो मैं तुमसे एक बात कहूँ.
वो बोली- हां बोलो न?
मैंने कहा- चलो छोड़ो … तुम बुरा मान जाओगी … और फिर मुझसे बात नहीं करोगी.
वो बोली- क्या पता मैं भी वहीं सुनना चाह रही होऊं … और तुम्हारी बात से मैं कुछ भी बुरा न भी मानूं.
मैं समझ गया कि ये आज मुझसे अपनी चूत ठुकवायेगी पक्का. फिर मैंने कहा- नहीं रहने दो तुम बुरा मान जाओगी … रहने दो.
वो थोड़ा ज़ोर से बोली- अगर तुमने नहीं बोला, तो मैं ज़रूर बुरा मान जाउंगी.
मैंने सोचा कि इससे पहले कि ये चुत हाथ से निकल जाए, मैं खुल कर बोल ही देता हूं.
मैंने उससे कहा- अपूर्वा मैं तुम्हें बहुत पसंद करता हूं … तुम मुझे बहुत अच्छी बहुत हॉट और बहुत सेक्सी लगती हो … मैं तुम्हें चोदने के सपने देखता रहता हूँ.
बस इतना कहते ही मैंने उसके दोनों बड़े बड़े मम्मों को दबा दिया और उसको कसके पकड़ कर पीछे से ही उसे चूमना शुरू कर दिया. मैं पागलों की तरह उसके चूचों को दबाता रहा.
उसने मुझसे हटने को कहा, पर मैं उसके बोबे दबाता रहा और उसे चूमता रहा.
कुछ देर ऐसे ही वो मुझसे हटने को बोलती रही और मैं अपनी मस्ती में दबाने और चूमने में लगा रहा.
फिर उसने मुझे थोड़ा गुस्से से बोला- रुको … बस मैं तुमसे कब से बोल रही हूं हटो हटो … रुको रुको … और तुम हट ही नहीं रहे.
उसकी तेज आवाज सुनकर मेरी फट गई और मैं रुक गया. मैं अपने घुटनों के बल बैठ गया.
वो सीधा हुई और वो भी अपने घुटनों के बल बैठ गई. वो मेरी तरफ देखने लगी.
मैं उसके चेहरे पर थोड़ा गुस्सा और नाराज़गी देख रहा था, तो मैंने झट से अपूर्वा से बोला- अपूर्वा मुझे माफ़ कर दो प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो, मैं तुम्हें सच में बहुत पसंद करता हूं और मैंने जो कुछ तुमसे कहा, वो सब सच है तुम्हारी कसम.
वो मुझसे बोली- चुप … एकदम चुप!
मैं डर गया और बिल्कुल चुप करके बैठ गया.
अब बोलने लगी- तुम पागल हो क्या? ऐसा करते हैं क्या किसी औरत के साथ? तुम्हें पता है ना … मैं शादीशुदा हूं और एक साल के बच्चे की माँ हूँ?
मैंने कहा- मैं क्या करूं अपूर्वा … जब से तुम्हें देखा है और एक्सरसाइज करते वक़्त तुम्हारे बूब्स और हिप्स और उसके बीच की दरार देख देख कर मैं तुम्हें बेहद पसंद करने लगा हूं और हर रोज़ तुम्हें चोदने के सपने देखता हूं. मैं चाहते हुए भी खुद को ऐसा सोचने और देखने से रोक नहीं पाता. तुम्हारे जैसी औरत के साथ सेक्स करने को मेरा बड़ा जी करता है … मैं तुमको बहुत ज्यादा पसंद करने लगा हूं. मुझे खुद भी शादीशुदा औरतों के साथ सेक्स करना बहुत अच्छा लगता है … मुझे शादीशुदा औरतें बहुत ज़्यादा पसंद हैं.
अपूर्वा बोली- मुझे पता नहीं था तुम्हें ये सब इतना पसंद है और शादीशुदा औरतें बहुत पसंद हैं.
इतना कह कर पहले तो उसने अपने चेहरे पर गुस्से और नाराज़गी के भाव दिखाए, फिर कुछ पल के लिए एकदम से चुप हो गई. हम दोनों के बीच में एकदम शांति हो गई और कमरा एकदम शांति से भर गया.
फिर पता नहीं अपूर्वा को क्या हुआ, वो अचानक मेरी तरफ देखते हुए मुस्कुराने लगी और फिर हंस पड़ी.
लौंडिया हंसी तो फंसी, मेरे दिमाग में तुरंत ये कहावत गूँज गई और मैं समझ गया कि अपूर्वा भाभी भी चुदने को मचल रही हैं.
एक्सरसाइज करवाते वक़्त भाभी को चोदा-2
मैंने एक सेक्सी भाभी को चोदा. मैं भाभी के घर उसे एक्सरसाइज कराने जाता था. कामुकता वश मैंने एक दिन कह दिया कि भाभी मैं आपको चोदना चाहता हूँ. तो उसने क्या किया?
अब तक की मेरी इस मस्त सेक्स कहानी के पहले भाग
एक्सरसाइज करवाते वक़्त भाभी को चोदा-1
में आपने पढ़ा था अपूर्वा नाम की एक भाभी को कसरत करवाने मैं उसके घर जाता था. उधर उसके कामुक जिस्म को देख कर मैं उसे चोदने को मचल गया. फिर एक दिन मैंने उससे अपनी बात कह दी. थोड़ा नाटक करने के बाद अपूर्वा भाभी ने हंस कर अपनी चूत चुदाई का इशारा कर दिया.
अब आगे:
वो कुछ देर तक हंसती रही और मैं बेबस हैरान सा चुपचाप उसे देखता रहा.
कुछ देर बाद जब वो चुप हुई, तो थोड़ा मेरी तरफ खिसकती हुई आयी और बोली- क्यों डर गए थे न तुम … सच बताना?
उसकी इस बात से मुझे कुछ राहत मिली और मैंने कहा- हां मैं सच में डर गया था, चाहो तो अपने कान लगा कर मेरे दिल की धड़कन सुन लो … ये अभी भी तेजी से धड़क रहा है.
वो मुस्कुराने लगी और थोड़ा सा मेरी तरफ झुक कर उसने अपना कान मेरी छाती पर रख दिया और मेरी दिल की धड़कन को सुनने लगी.
अपूर्वा बोली- अरे ये तो सच में बहुत ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा है.
फिर वो ऊपर को उठी और बोली- मुझे माफ़ करना यार … मैं तो बस मज़ाक कर रही थी. मैं देखना चाहती थी कि तुम किस तरह रियेक्ट करते हो.
मुझे उसकी बात से शान्ति सी मिली.
फिर उसने कहा- जोश जोश में भला ऐसे भी कोई करता है, तुम्हें क्या लगता है कि मुझे पता नहीं कि तुम मुझे पसंद करते हो … मेरे बूब्स को दबा देते हो, छुप छुप कर मेरे चूतड़ देखते हो और मेरे चूतड़ों की बीच की दरार पर अपना लंड टच करते हो. मुझे पता है कि तुम्हारा मन मुझे चोदने का है. मुझे सब पता है और पहले दिन से पता है, जब से तुम मेरे मम्मों और चूतड़ों को देखते हो. तुम क्या सोचते हो तुम बस ही मुझे पसंद करते हो और मेरे साथ सेक्स करना चाहता हो … मैं भी तुम्हें बहुत पसंद करती हूं … तुम्हारी ही तरह मेरा भी तुम्हारे से अपनी बुर और गांड को चुदवाने का मन होता है और मैं हर वक्त यही सपना भी देखती रहती हूं. मैं बस ये देख रही थी कि तुम कितना सब्र रखते हो और कब खुद मुझे ये सब बोलते हो. आज करीब डेढ़ महीने बाद वो दिन आया, जब तुमने ये बोला. आई रियली लाइक यू अ लॉट.
ये कहते हुए उसने मुझे अपने गले से लगा लिया और मुझसे लिपट गई. वो मुझे बेतहाशा चूमने लगी. उसके मुँह से लंड चूत चुदाई जैसे खुले शब्द सुनकर मेरे लंड को ताकत मिल गई थी.
बस फिर क्या था, मुझे जो चाहिए था, जैसा मैं चाहता था, वो हो गया. मैंने बिना वक़्त गंवाए अपूर्वा को कसके अपने गले से लगा लिया और हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे. हम दोनों पागलों की तरह ऐसे लिपट गए थे, जैसे हम दोनों जन्मों से अपनी सेक्स की आग को बुझाने के लिए प्यासे हों.
बस फिर कमरे में देखते ही देखते कमर हमारे चुम्बनों की आवाज़ से भर गया ‘उउम्म उउम्म आउच उच उच पुच पुच..’
हम करीब 15 मिनट तक एक दूसरे को चूमते रहे और मैं उसके मम्मों को दबाता रहा. वो भी मेरे लोअर के ऊपर से ही एक हाथ से मेरे लंड को सहला रही थी. ‘आह आह आह … हहम्म इस्स..’ की आवाजों से कमरा गूंज रहा था. कमरे में हम दोनों की सिसकारियों की आवाज़ शोर कर रही थी.
कुछ देर बाद मैंने उसका टॉप उतार दिया और उसके उरोजों को ब्रा के बाहर से ही दबाने लगा. वो लगातार ‘उंहहम्म … हहम्म …’ की मादक सिसकारियां भर रही थी. मैं उसे बिना रुके चूमता ही जा रहा था.
एक दूसरे को चूमते हुए, मैं उसके उरोजों को मसलते दबाते हुए यूं ही जिस्मों में गर्मी और चुदास बढ़ती चली गई.
फिर हम दोनों कुछ ही देर में एक दूसरे के सामने पूरे नंगे हो चुके थे. कब हमने एक दूसरे के कपड़े उतार फेंके, हमें खुद भी पता ही नहीं चला.
मैंने अपूर्वा को वहीं योग मैट पर लिटा दिया और उसके मुँह में अपना मुँह डाल कर उसे स्मूच करने लगा. अपनी जीभ से उसकी जीभ को चूसने लगा, उसके मुँह में अपना मुँह डाल कर अपनी सांस उसके मुँह में छोड़ने लगा.
वो कुछ ही देर में हांफने लगी, मैं लगातार सांस छोड़ता जा रहा था और कम से कम 5 मिनट तक उसे स्मूच करने के बाद मैंने मुँह हटा दिया.
वो हांफते हुए सांस लेने लगी और मुझे प्यार से देखने लगी. फिर मैं उसकी गर्दन से चूमने लगा और अपनी जीभ से उसे चाटता हुआ उसके उभारों तक आ पहुंचा. अब पहले तो मैंने उसके उरोजों को ज़ोर ज़ोर से काफी देर तक दबाया और खूब चाटा. वो भी लेटे हुए ही अपने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ कर सहलाने लगी.
मैं उसके मम्मों को अपनी जीभ से चाटने लगा ‘सर्र सरर … सपप्प पप्प …’ मैं उसके एक दोनों मम्मों को अपने मुँह में लेकर बारी बारी से एक एक करके चूसने लगा.
वो बेहद चुदासी हो गई थी और मादक सिसकारियां भर रही थी.
इस तरह करीब आधा घंटे तक प्रेमालाप करने के बाद हम दोनों का जिस्म पूरी तरह से गर्म हो गया था.
मैं लगातार उसके मम्मों को चूसता मसलता जा रहा था और दबाता जा रहा था. वो भी सिसकारी भरती हुई मेरे लंड को हाथ से आगे पीछे करती जा रही थी. इस वक्त मेरा लंड एकदम लोहे की तरह सख्त और कड़क हो गया था.
अब उसने मुझे कसके पकड़ लिया. मैं अपना एक हाथ उसके पेट से फेरता हुआ उसकी बुर तक ले गया और उसकी बुर को ऊपर से सहलाने लगा. उसकी चूत इतनी अधिक तप रही थी कि मुझे झटका सा लग गया. ऐसा लगा मानो किसी बिजली के गर्म तार से मुझे करंट लग गया हो. उसने मेरे सिर को अपने हाथ से कस के पकड़ लिया.
मैं समझ गया कि अपूर्वा अब पूरी गर्म हो चुकी है, उसे चूत का मजा लेने का मन हो गया है.
बस मैं बिना वक़्त गंवाए अपने मुँह से उसके पेट को चाटता हुआ उसकी बुर तक आ गया. मैंने उसकी बुर को पहले कुछ देर सहलाया और फिर अपनी उंगली को उसकी बुर में ऊपर से ही ऊपर नीचे फेरने लगा. उसकी बुर को थोड़ा सा खोल कर अपनी उंगली ऊपर नीचे फेरने लगा. बीच बीच में मैं अपनी उंगली उसकी बुर के अन्दर डाल देता और वो ‘आह आह..’ की आवाज़ निकाल देती थी.
कुछ देर ऐसा करने के बाद मैंने उसे उठ कर घुटनों के बल घोड़ी बन कर बैठने को बोला. वो झट से वैसे ही बैठ गई फिर मैं उसके मुँह की तरफ गया और अपने लंड को हाथ से पकड़ कर उसे लंड को चूसने को कहा.
वो इतनी अधिक प्यासी और चुदासी थी कि उसने मेरे लंड को अपने हाथ से नहीं पकड़ा, सीधे अपने मुँह में लेकर लंड को चूसना शुरू कर दिया. उसकी जीभ और मुँह का गर्म अहसास पाते ही मेरी सीत्कार निकल गई- आह आह मेरी जान … ऊँहहुऊ हहुऊ … यू आर सो जूसी..
वो मेरे लंड को अन्दर तक लेकर चूसने में मस्त होने लगी और एक हाथ से मेरे आंडों को भी सहलाने लगी. मैं अपने हाथ उसकी पीठ पर फेरता जा रहा था और उसके मम्मों को दबाता और मसलता जा रहा था. जैसे जैसे मैं उसके मम्मों को जोर से दबाता और मसलता, वो और तेज़ तेज़ से मेरा लंड चूसने लगती और उसे पूरा अन्दर तक ले जाती.
बीच बीच में मैं भी अपने लंड को एकदम उसके गले के अन्दर तक ले जाता. इससे वो एकदम ज़ोर से खांस उठती. पर मैंने लंड को उसके मुँह से निकलने नहीं दिया. मैं उसके मुँह को अपने लंड से चोदता रहा और ऊपर से ही उसके चूतड़ों पर ज़ोर ज़ोर से झापड़ मारता रहा.
कोई 15-20 मिनट ऐसे ही चलता रहा. फिर मैंने उसे सीधा लिटा दिया और उसकी टांगें खोल कर फैला दीं.
इसके बाद मैंने अपने मुँह को उसकी बुर के पास ले जाकर अपनी जीभ से उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया. चूत पर मेरी जीभ का टच पाते ही वो एकदम से गनगना उठी और उसने एक बड़ी लंबी सिसकारी भरी- उईईस्स … मर गई रे … आह यू आर सो गुड..
वो मेरे सिर को ज़ोर से पकड़ कर अपनी चूत पर दबाने लगी. मैं लगातार उसकी बुर को चाटता जा रहा था और बीच बीच में अपनी जीभ उसकी बुर के काफी अन्दर तक डाल कर उसे अन्दर ही घुमाता और चूत की दीवारों को अपनी खुरदुरी जीभ से चाट देता. इससे वो तड़प उठती और अपने चूतड़ों को ऊपर उठा देती.
‘ऊफ़्फ़ ऊफ़्फ़ उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मुआह..’ उसकी मदमस्त आवाजें आ रही थीं. मैं कम से कम आधे घंटे तक उसकी बुर को चाटता रहा और वो इस बीच 2 बार झड़ भी गई थी. मैं उसकी बुर का सारा रस पी कर उसकी चूत को चाटने में लगा रहा.
अब उससे मेरा उसकी बुर को लगातार चाटना और चूसना सहा ही नहीं जा रहा था. उसने मुझसे कहा- प्लीज़ अब अपने लंड को मेरी बुर डाल दो … मुझे जल्दी से चोद दो … आह मुझसे अब और नहीं सहा जा रहा है … मुझसे बर्दाश्त नहीं हो पा रहा है.
मैंने बोला कि ठीक है … अपूर्वा जान, मैं तुम्हारी ये इच्छा भी पूरी किए देता हूं.
मैंने उसे घोड़ी बनाया और उसकी बुर में पीछे से अपने लंड को रख कर उसे अन्दर घुसेड़ने लगा.
मेरा लंड अभी 2 इंच ही अन्दर घुस पाया था कि वो जोर से चीख उठी- आई आई मरी … ऊफ़्फ़ ऊफ़्फ़ … थोड़ा धीरे डालो न … मुझे दर्द हो रहा है.
मैंने आश्चर्य किया और पूछा- क्या हुआ तुमको दर्द क्यों हो रहा है?
वो बोली- मुझे चुदाई का सुख मिलता ही नहीं है. ये सब मत पूछो … मैं बाद में बताऊंगी … अभी तुम धीरे धीरे करो.
मैंने भी समय की नजाकत को समझते हुए कहा- ओके … जान बस थोड़ा दर्द और होगा … फिर तो मज़ा ही मज़ा आएगा.
फिर मैंने धीरे से अपने लंड को उसकी बुर में एक ही झटके से पूरा अन्दर डाल दिया.
इससे उसे एक ज़ोर से झटका लगा और वो चिल्ला उठी- आई ऐईई … मर गई … मेरी फट गई … आह तूने मार दिया.
बस फिर क्या था, मैं एक तरफ अपने दिनों हाथों से उसके उभारों को दबाता रहा और उसकी बुर को ठोकता रहा.
‘उनंह … आंह … येह … येह … फक मी मोर … आह आह..’
दस मिनट तक मैंने अपूर्वा भाभी को घोड़ी बना कर भाभी को चोदा और इसके बाद उसे नीचे सीधा लेटा दिया.
वो अपनी चूत खोल कर मेरे लंड के लिए फ़ैल गई. मैंने उसकी दोनों टांगों को हाथ से पकड़ कर और ज्यादा फैला दिया और उसकी बुर में अपने लंड को घुसेड़ दिया.
लंड घुसवाते ही वो झटके से हिली, पर अगले ही पल उसे लंड का मज़ा आने लगा. वो अपनी गांड उठाते हुए अपनी बुर की ठुकाई का मज़ा लेने लगी ‘यएहह … यू आर सो स्ट्रोंग … यएहह … फक मी हार्ड … उंह!’
मेरे हर झटके के साथ उसके मुँह से मस्त आवाज़ आ रही थी. वो मेरे 8.5 इंच लंबे और 3 इंच मोटे लंड से अपनी बुर की चुदाई का मज़ा ले रही थी.
कुछ देर बाद उसने अपने चूतड़ ऊपर उठाने शुरू किए और बुर को कसने लगी. इससे मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है. मेरे कुछ और झटकों के बाद वो झड़ गई और निढाल होकर लेट गई.
वो तो झड़ गई थी, पर मेरा लंड तो अभी खड़ा ही था और लोहे की तरह सख्त था. मेरा लंड अभी भी उसकी बुर को लगातार पेले जा रहा था. वो कुछ भी नहीं कर रही थी, बस शान्ति से मेरे लंड के हमलों को झेल रही थी.
मेरे झटके ज़ोर ज़ोर से अपनी रफ्तार बढ़ाने लगे. अब वो कराह रही थी- आह जल्दी करो न … मुझे बहुत दर्द हो रहा है तुम्हारा लंड बहुत मस्त लम्बा और मोटा है … मुझे मज़ा भी आ रहा है … और दर्द भी हो रहा है.
करीब और 5 मिनट उसकी बुर को ठोकने के बाद मैं भी उसकी चूत में झड़ गया. मैंने अपने लंड का सारा पानी उसकी बुर के अन्दर ही गिरा दिया. मैं उसके ऊपर यूं ही चित लेट गया.
हम दोनों एक दूसरे से इसी तरह न जाने कितनी देर तक लिपटे रहे. फिर करीब आधे घंटे बाद हम दोनों उठ गए. पहले तो हम दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा और फिर एक दूसरे की चूमने लगे.
थोड़ी देर बाद फिर से वही सारा सिलसिला शुरू हो गया. मैंने दो घंटे तक लगातार भाभी को चोदा, सेक्स किया. चुदाई का भरपूर मजा लेने के बाद हम दोनों वाशरूम में आ गए. मैं खुद को साफ किया. तभी उसने शॉवर चला दिया. हम दोनों नंगे तो थे ही, फव्वारे के नीचे खड़े होकर एक दूसरे के साथ खेलने लगे.
बाथरूम में फव्वारे की बौछार के नीचे फिर से एक बार हमने खुल कर चुदाई की और नहा कर अपने अपने कपड़े पहन लिए.
बाहर निकल कर मैं सोफे पर बैठ गया. वो मेरे लिए गर्म गर्म कॉफ़ी बना कर लाई और अपने लिए भी.
हम दोनों ने साथ में बैठ कर कॉफ़ी पी और कुछ देर बातें की. मैंने उसे एक बार गले से लगा कर कर किस किया और चला गया.
उस दिन मैंने 3 बार भाभी को चोदा था. इसके अगले दिन भी 3 बार भाभी को चोदा.
तीन दिन उसका पति अपने काम से लौट आया था. अब भी मैं रोज़ उसे एक्सरसाइज करवाने उसके घर जाता और मौका देख कर उसे चोद देता.
अब मैं उसके घर नहीं जाता हूँ. वो भी काफी पतली हो चुकी है और उसका पेट भी कम कर लिया.
अब वो मेरे बिना ही अपने घर पर एक्सरसाइज कर लेती है. आज भी कभी कभी उसका फ़ोन आता है और वो मिलने के लिए बुलाती है. मैं ज़्यादा बिजी होने की वजह से उससे कम ही मिल पाता हूं.