माँ का आशिक अध्याय 6

सब्जी कट चुकी थी इसलिए शहनाज़ खाना बनाने लगी और शादाब छत पर घूमने चला गया। थोड़ी देर खाना बन गया था और दोनो मा बेटे के खाना खाना शुरू किया तो आज शहनाज़ ने अपने हाथ से खाने का निवाला बनाकर अपने बेटे को खिलाया तो शादाब खुशी से झूम उठा और उसने भी शहनाज़ को अपने हाथ से खाना खिलाया। दोनो मा बेटे जल्दी ही खाना खाकर सोने के लिए बेड पर चले गए। शहनाज़ ने एक ढीली सी नाइटी जबकि शादाब ने भी बहुत बारीक कपडे पहन लिया था। बेड पर जाते ही शहनाज़ ने शादाब को अपनी बांहों में भर लिया और अपना सिर उसके कंधे पर टिका दिया तो सादाब ने भी अपनी अम्मी को खुद में समेट लिया और दोनो मा बेटे एक दूसरे से पूरी तरह से चिपक गए।

शहनाज़ आज दिन में हुए हादसे के बारे में सोच रही थी कि किस तरह से शादाब ने उसकी जरा सी भी बुराई बर्दास्त नहीं करी और बिना सोचे समझे रेहाना से लड़ पड़ा। शहनाज़ अपने बेटे की इस बात पर बहुत खुश हुई और उसने शादाब का गाल चूम लिया तो शादाब ने हैरानी से उसकी तरफ देखा तो शहनाज़ बोली:”

” शादाब बेटा जितना प्यार तू मुझसे करता हैं, उससे कहीं ज्यादा मै तुझसे करती हूं मेरे लाल।

शादाब ने बस शहनाज़ को स्माइल किया और चुप हो गया

शहनाज:” बेटा वो मुझे जाहिल और पुराने जमाने की बोल रही थी, मेरे बेटे को मेरी वजह से सुनना पड़ा मुझे इसका दुख हैं शादाब।

शादाब:” अम्मी जाहिल औरत वो खुद हैं जो अपने पति के जिंदा होते हुए भी अपनी बेटे और मुझे भी फसा रही थी।

शहनाज़:” बेटा अब तेरी मा तेरे हिसाब से चलेगी, बदल दे मुझे नए जमाने के हिसाब से शादाब, मैं एक दिन उसकी आंखो में आंखे डाल कर उसे जवाब दूंगी

शादाब को जैसे उसकी बात पर यकीन ही नहीं हुआ इसलिए वो खुशी छिपाते हुए बोला:”

” क्या अम्मी ? क्या कहा आपने प्लीज़ एक बार और बताओ मैंने ठीक से सुना नहीं ?

शहनाज़ जानती थी कि उसका बेटा जान बूझकर दोबारा पूछ रहा हैं इसलिए वो पूरे आत्म विश्वास के साथ बोली:

” बेटा बदल दे मुझे अपने हिसाब से जैसे तू चाहे, मैं उस कमीनी को दिखा दूंगी कि मैं भी जमाने के साथ चल सकती हूं।

शादाब:” ठीक हैं अम्मी, कल से आपकी ट्रेनिंग शुरु, मैं आपको पूरी तरह से बदल दूंगा।

शहनाज़ ने खुश होकर शादाब का गाल चूम लिया और उससे लिपट गई। दोनो मा बेटे एक दूसरे से लिपट कर सो गए। अलग दिन सुबह 5 बजे शादाब और शहनाज़ दोनो उठ गए और शादाब ने अपनी अम्मी को अपने हाथ बहुत हल्की कसरत कराई तो शहनाज़ आज एक अलग ही खुशी महसूस कर रही थी। उसके बाद नाश्ता करने के बाद शादाब शहनाज़ को लेकर शहर की तरफ निकल गया।

शहनाज ने रोड पर चढ़ते ही खुद ही अपना बुर्का उतार दिया और शादाब को एक स्माइल दी तो शादाब समझ गया कि शहनाज़ सचमुच बदल रही हैं। उसके बाद दोनो मॉल में गए और शादाब ने अपनी अम्मी के लिए एक से बढकर ट्रैक सुइट और जिम में कसरत करने के लिए ड्रेस ली, शहनाज़ के लिए उसने उसने कुछ जीन्स और टी शर्ट भी खरीद ली, शहनाज़ आज कुछ बोल नहीं रही थी बल्कि खुश होकर अपनी पसंद के अनुसार ड्रेस खरीद रही थी। जब शॉपिंग का सब काम खत्म हो गया तो शादाब अपनी अम्मी को एक लेडीज सैलून में के गया और उसके बालो को स्टेट किया और एक नए डिजाइन का कट करवा दिया। शहनाज़ अपने आपको शीशे में देखना चाहती थी लेकिन शादाब ने मना कर दिया और बोला:”

” अम्मी जब तक मैं नहीं कहूंगा आप खुद को शीशे में नहीं देखेंगे।

शहनाज़ अपने बेटे की जिद के चलते मजबुर हो गई और उसके बाद शादाब ने अपनी अम्मी को खाना खिलाया और फिर आते हुए एक जिम में अपना और शहनाज़ का रजिस्ट्रेशन करा दिया और उसके बाद दोनो घर की तरफ चल पड़े। आज शहनाज़ बहुत खुश थी इसलिए घर आते ही शादाब से कस कर चिपक गई। दोनो मा बेटे एक दूसरे के दिल की धड़कन सब रहे थे और किसी दूसरी दुनिया में ही पहुंच गए थे। शहनाज़ बोली:”

” शादाब तू मेरा इतना ख्याल रख रहा है बेटा, तुझे कभी कभी मुझ पर बहुत गुस्सा आता होगा कि मैंने तुझे तेरा प्यार नहीं दिया।

शादाब:” अम्मी मैं उस बारे में कोई बात नहीं करना चाहता, आप खुश हो मेरे लिए बहुत हैं।

शहनाज़:” लेकिन मेरा बेटा खुश नहीं हैं, मैं ये जानती हूं शादाब, मैं बहुत बुरी मा हूं ना।

शादाब उसका गाल चूम कर:” अम्मी आप तो दुनिया की सबसे अच्छी अम्मी हो जो अपने बेटे को इतना प्यार करती है।

शहनाज़;” बेटा मुझे थोड़ा टाइम दे, ऐसा नहीं है कि मैं तुझे प्यार नही करती, मैं दुनिया की सबसे अच्छी मा के साथ साथ कुछ और भी बनना चाहती हूं।

शादाब:” कुछ और क्या बनना चाहती हो आप ?

शहनाज़:” बेटा मैं नहीं बोल पाऊंगी, वक़्त आने पर तुझे अपने आप पता चल जाएगा।

शादाब ने मुस्करा कर शहनाज़ को देखा और दोनो मा बेटे घर के काम में लग गए। शहनाज़ खाने की तैयारी करने लगी और शादाब अपने मोबाइल में फिर से मूवी देखने लगा। शादाब की औरत के जिस्म के बारे में जिज्ञासा बढ़ती ही जा रही थी और वो मौका मिलते ही मूवी देखने लगता था।

खाना बन चुका था इसलिए दोनो ने खाना खा लिया और उसके बाद शादाब बोला:”

” अम्मी आज जल्दी सो जाना,कल से आपको जिम करने के लिए जाना हैं।

शहनाज़:” ठीक हैं बेटा, आओ चलते हैं सोने के लिए।

उसके बाद दोनो मा बेटे अपने कपडे बदल कर सोने के लिए चले गए। दोनो रोज की तरह एक दूसरे की बांहों में सो गए। अगले दिन सुबह दोनो जिम के लिए निकल पड़े, शहनाज़ ट्रैक सुट में बहुत खूबसूरत लग रही थीं। दोनो मा बेटे ने एक ही रंग के कपड़े पहने हुए थे तो शादाब बोला:”

” अम्मी एक बात कहूं अगर आपको बुरा ना लगे तो ?

शहनाज़:” हान बोल बेटा मुझे अब तेरी कोई बात बुरी नहीं लगती मेरे बेटा ?

शादाब:” देखो अम्मी, आपको देखने से बिल्कुल भी नहीं लगता कि आप एक जवान बेटे की मा हो, इसलिए मैं चाहता हूं कि मैं आपको जिम में अम्मी ना बुलाऊ?

शहनाज़:” ठीक हैं बेटा, लेकिन फिर क्या कहकर बोलेगा ?

शादाब:” अम्मी मुझे लगता हैं कि मुझे आपको नाज़ कहकर पुकारना चाहिए।

शहनाज़:” ठीक हैं बेटा, मुझे बहुत पसंद आया ये नाम, शहनाज़ का आधा नाम नाज ही होता है।

शादाब:” लेकिन आप मुझे बेटा कहकर बुलाएगी तो मुझे आपकी नाज़ कहने का कोई फायदा नहीं होगा नाज !!

शहनाज अपनें बेटे के मुंह से नाज सुनकर खुश हो गई और बोली:”

” ठीक हैं मैं तुझे बेटा नहीं बल्कि राजा कहकर बुलाऊंगी। अब खुश हो राजा ?

शादाब मुस्कुरा दिया और दोनो मा बेटे जिम एक अंदर घुस गए। अंदर जाते ही शहनाज़ को देखते ही वहां जिम कर रहे लड़को की आंखो में चमक उभर आई। शादाब और शहनाज दोनो से ये सब छुपा ना रह सका और दोनो के दूसरे को देख कर मुस्करा दिए। उसके बाद दोनो ट्रेनर के हिसाब से जिम करने लगे, शहनाज़ का जिस्म पूरी तरह से भरा हुआ था और घर के काम की वजह से बहुत हद तक फिट भी था लेकिन जिम करने की वजह से अब सही जगह पर कट पड़ जाने तय थे।

शादाब बाथरूम करने के लिए गया तो एक लड़का शहनाज को इंप्रेस करने के लिए अा गया और बोला :” मैडम आपका जिस्म तो पहले से ही फिट हैं बस थोड़ी सी मेहनत कीजिए बिल्कुल फिट ही जाएगी आप।

शहनाज़ ने एक तिरछी नजर उसे देखा और फिर से जिम करने लगी तो लड़का बोला:”.

” मैडम क्या आप मुझसे दोस्ती कर सकती है?

शहनाज़ को उसकी बात पर यकीन नहीं हुआ, कमीना अपनी मा की उमर की औरत पर लाइन मार रहा हैं इसलिए शहनाज़ बोली :”

” जाइए आप अपना काम कीजिए, अगर राजा अा गया तो आपको दिक्कत ही जाएगी।

लड़का:” अच्छा जो आपके साथ आया है वो राजा हैं, बहुत खूबसूरत है आपका बॉय फ्रेंड मैडम। आपकी जोड़ी एक दम मस्त हैं।

इतना कहकर वो लड़का वहां से चला गया और थोड़ी देर के बाद शादाब भी अा गया तो दोनो मा बेटे घर की तरफ चल पड़े। ऐसे ही मात्र 10 दिन के अंदर ही शहनाज़ के जिस्म पूरी तरह से बदल गया और सीना और चूतड़ पहले से ज्यादा भारी होते चले गए जबकि कमर एक दम पतली सी हो गईं। शहनाज अपने जिस्म में बदलाव तो साफ महसूस कर रही थी लेकिन शीशा नहीं देख रही थी। एक औरत के लिए शीशा ना देख पाना किसी सजा से कम नहीं होता और शहनाज़ हंस कर इस सजा को कुबूल कर रही थी।
अब तो शहनाज़ ने घर में भी शादाब को बेटा बोलना बंद का दिया था और राजा ही बोलती थी वहीं शादाब को शहनाज़ को मा कहकर पुकारें हुए एक लंबा टाइम बीत गया और बस नाज़ ही बुला रहा था।

एक दिन जिम करते हुए एक लड़की ने शहनाज़ को बोला दिया :”

” नाज़ तुम बहुत किस्मत वाली हो तुम्हारा बॉय फ्रेंड एक दम हीरो के जैसा हैं, इतना खूबसूरत लड़का मैंने आज तक नहीं देखा।

शहनाज़ अंदर ही अंदर मुस्करा उठी और लड़की को स्माइल दी, फिर धीरे धीरे बात यहां तक अा गई कि जिम में ही कुछ लडको ने तो शहनाज़ को नाज़ भाभी कहना शुरू कर दिया जिसका उसने बिल्कुल भी विरोध नहीं किया। शादाब अपनी अम्मी में आए इन बदलाव को देख रहा था और खुश था, अब लोगो की नजर में दोनो कपल बन चुके थे। शहनाज़ को विश्वास हो गया था कि सच में उसका जिस्म एकदम जवान हैं और पूरी तरह से कस गया हैं जिम करने की वजह से।

फिर एक दिन वहीं हुआ जिसका शहनाज़ को डर था, जब वो रास्ते से लौट रहे थे तो रेहाना के भेजे हुए गुंडों ने उन पर हमला कर दिया। शादाब ने उनका डटकर सामना किया लेकिन कुछ गुंडे शहनाज़ को खेत में उठा ले गए और शादाब बाकी गुंडों से लड़ता रहा। शादाब शहनाज़ को ले जाते देखकर गुस्से से बाहर उठा और उसके हाथ में एक मोटा लकड़ी का डंडा अा गया तो उसने एक के बाद भी करके गुंडों को पीटना शुरू कर दिया। जल्दी ही सब गुंडे जमीन पर पड़े हुए थे, शादाब शहनाज़ को ढूंढ रहा था लेकिन वो नहीं मिल रही थी।

गुंडे शहनाज़ को एक गन्ने के खेत में उठा ले गए जिस कारण शादाब को शहनाज़ नहीं मिल पा रही थी। दो गुंडों ने शाहनाज के हाथ पैर पकड़ लिए और उसे बांध दिया और एक काले जानवर से दिखने वाले गुंडे ने उसकी सलवार फाड़ दी। शहनाज़ बुरी तरह से रो रही थी और गुंडों के आगे हाथ जोड़ रही थी लेकिन एक गुंडे ने अपना काला गंदा सा लंड लेकर उसकी जांघो के बीच अा गया और एक गुंडे से बोला:”

” जैसे ही मैं इसकी चूत में लंड घुसा दू तो इस साली के मुंह पर तेजाब फेंक देना।

शहनाज़ ने डर के मारे अपनी जांघों को पूरी तरह से भींच लिया और जोर जोर से शादाब को आवाज देने लगी। शादाब को जैसे ही शहनाज की आवाज सुनाई दी तो वो तेजी से खेत में घुस गया और अपने मा को इस हालत में देखते ही उसकी आंखो में खून सवार हो गया और उसने शहनाज़ की टांगो के बीच में घुसे हुए गुंडे के सिर में जोर से वार किया और वो गिर पड़ा। शहनाज़ तेजी के साथ खड़ी हो गई और अपने कपड़े ठीक करने लगीं उसके बाद शादाब ने एक के बाद एक सभी गुंडों की लाशे बिछा दी और शहनाज़ डर के मारे कांपती हुई शादाब से लिपट गई।

शहनाज:_ बेटा अच्छा हुआ तू अा गया,। नहीं तो मैं तो आज किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहती।

शादाब:” अम्मी जब तक मै जिंदा हू कोई आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

शहनाज़ और शादाब ने मिलकर गुंडों की लाश को गाड़ी में डाल दिया और घर की तरफ चल पड़े। शहनाज़ अभी तक बुरी तरह से डरी हुई थी। बाहर रात गहरा चुकी थी तो शादाब ने सभी गुंडों कि लाशे रेहाना के घर के अंदर फेंक दी और शादाब ने जान बूझकर खून के निशान उसके घर के दरवाजे पर भी बना दिए और दोनो मा बेटे अपने घर की तरफ चल पड़े।

शादाब को भी चोट लगी थी लेकिन बहुत ज्यादा चोट नहीं थी। घर जाकर शादाब ने सबसे पहले अपने खून से रंगे हुए कपडे निकाले और नहाने के लिए घुस गया। शहनाज़ नीचे बने हुए बाथरूम में घुस गई। जल्दी ही दोनो मा बेटे नहाकर कपड़े बदल चुके थे।

दोनो में से किसी को भी भूख नहीं थी इसलिए दोनो शहनाज़ के बेड पर लेट गए। शहनाज़ आज अपने बेटे के बारे में सोच रही थी कि किस तरह से शादाब ने चोट लगने के बाद भी उसे बचाया, नहीं तो आज वो किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहती। शादाब ने सिर्फ उसकी जान ही नहीं बल्कि इज्जत भी बचाई और जब उसकी सलवार फट गई थी तो शादाब ने एक बार भी नजरे उठाकर शहनाज़ की तरफ नहीं देखा था जब तक कि उसने अपने कपड़े ठीक नहीं कर दिए। शहनाज़ ये सब सोचते सोचते आज शहनाज पूरी तरह से अपने बेटे के सामने हार गई। उसने आखिर आज वो फैसला ले ही लिया जो दुनिया और समाज के नियमो के खिलाफ था।

शहनाज ने अपने बेटे के चेहरे को अपने हाथो में भर लिया और उसकी आंखो में देखते हुए बोली:”

” शादाब तूने तो मुझे एक बेटे की तरह प्यार दिया और शौहर की तरह मेरा ध्यान रखा और जान पर खेलकर बचाया, आज मैं तेरे आगे हार गई शादाब।

शादाब ने अपनी अम्मी की आंखो में देखा तो उसे सच्चाई नजर अाई और वो खुश होते हुए बोला : क्या अम्मी सच में ?

शहनाज़ उसके होंठ चूमकर बोली:” शादाब निकाह तो तुमने पहले ही कर लिया था आज मेरा सब कुछ जीत लिया, ये शहनाज़ आज तुम्हे तन मन धन से अपना शौहर मानती हैं।

इतना कहकर शहनाज़ ने शादाब का गाल चन लिया तो शादाब ने शहनाज को अपनी बांहों में भर लिया और बोला :”

” शहनाज़ मैं कहीं सपना तो नहीं देख रहा हूं ?

शहनाज़:” तुम्हारे हर सपने को अब मैं हक़ीक़त में बदल दूंगी। इतना कहकर शहनाज़ बेड पर सीधी लेट गई और शादाब की तरफ देखते हुए बोली:”

” अा जाओ मेरे राजा, आज अपने सुहागरात मनाए।

शादाब को तो जैसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि ये सब उसकी अम्मी बोल रही हैं। शादाब ने शहनाज़ का हाथ पकड़ कर उसे बैठा दिया और बोला:”

” शहनाज़ मैं तुम्हारे जिस्म का नहीं बल्कि तुम्हारे प्यार का भूखा हू, अा जाओ मेरी बांहों में।

शहनाज और शादाब दोनो एक दूसरे की बाहों में खो गए और दिन भर के थके होने के कारण उन्हें नींद अा गई।

अगले दिन सुबह जब रेहाना और उसके पति ने अपने पालतू कुत्तों की लाशे अपने घर के अंदर देखी तो दोनो की गांड़ फट गई। घर के बाहर फैला हुआ खून देखकर एक पड़ोसी ने पुलिस को फोन कर दिया। पुलिस अा गई और रेहाना के घर के अंदर घुस गई तो लाशे देखकर दोनो को पकड़ लिया और थाने के गई। पूरा मोहल्ला रेहाना के खिलाफ था, ना कोई गांव और ना ही किसी रिश्तेदार ने उनका पक्ष लिया। चूंकि उनका पहले से ही अपराधिक रिकॉर्ड था इसलिए अदालत ने मर्डर का जिम्मेदार मानते हुए उन्हें जेल भेज दिया। रेहाना सब सच्चाई जानती थी लेकिन बोल नहीं पाई क्योंकि बोलकर भी उसने और ज्यादा फस जाना था।

जब शहनाज़ को ये खबर पता चली तो उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था, उसे अपने बेटे/ पति के दिमाग पर गर्व महसूस हुआ।

जैसे ही शहनाज़ को रेहाना के जेल जाने की खबर मिली तो वो खुशी से झूम उठी और शादाब को अपनी बांहों में भर लिया और बोली:”

” तुमने तो कमाल ही कर दिया राजा, ऐसा बदला लोगे मुझे सपने में भी उम्मीद नहीं थी।

शादाब अपने अम्मी के गाल सहला कर बोला:” आपकी तरफ नजर उठाने वाला का यहीं हाल कर दूंगा मैं नाज।

शहनाज़ अपने बेटे की बात सुनकर उसके गाल को चूमते हुए बोली:” शादाब मैं ऐसे ही पति के सपने देखती थी जो ना सिर्फ मुझे प्यार करे बल्कि मेरी रक्षा भी करे और ये सब खूबी तुम्हारे अंदर हैं मेरे राजा।

शादाब:” अम्मी एक बार आप फिर से सोच लो, कहीं बाद मैं आपको पछतावा ना हो ?

शहनाज़ समझ गई कि शादाब के दिल में अभी उससे पहले हुई गलती की कसक हैं इसलिए शहनाज़ बोली:”

” जान तेरे नाम”

शादाब अपनी अम्मी के इस अंदाज़ पर फिदा हो गया और बोला :” बस शहनाज, अब मैं तुम्हे इतना प्यार दूंगा जिसकी तुमने कल्पना भी नहीं करी होगी।

शहनाज़ उसकी आंख में देखते हुए :” तो करो ना मेरे राजा, मैं तो कब से तड़प रही हूं।

शादाब:” अम्मी मैं आपको पूरी तरह से शारीरिक और मानसिक तौर भी तैयार करना चाहता हूं ताकि आप हमारे इस मधुर मिलन को हमेशा याद रखे।

शहनाज़:” मैं तो सब तरह से तैयार हूं राजा, जब तेरा मन करे मेरे शरीर के ज़र्रे ज़र्रे पर तेरा हक हैं मेरी जान।

इतना कहकर शहनाज़ ने अपने बदन को शादाब की बांहों में ढीला छोड़ दिया तो शादाब ने उसे खुद से चिपका लिया और बोला:”

“ठीक है अम्मी, आप हल्का पानी गर्म करो, मैं बाज़ार जाकर आता हूं, कुछ जरूरी सामान लाना हैं

शहनाज़ ने उसे स्माइल दी और शादाब ने जैसे ही अपने होंठ शहनाज़ की तरफ बढ़ाए तो शहनाज़ के होंठ कांपने लगे क्योंकि ये इज़हार के बाद पहली किस होने जा रही थी। शहनाज़ ने अपनी आंखे बंद कर ली और शादाब ने जान बूझकर शहनाज़ के माथे को चूम लिया तो एक झटके के साथ शहनाज़ की आंखे खुल गई। उसने अपने बेटे को देखा और स्माइल कर दी तो शादाब उसका हाथ थोड़ा जोर से दबा कर बाहर चला गया।

शहनाज़ ने उसे स्माइल दी और शादाब ने जैसे ही अपने होंठ शहनाज़ की तरफ बढ़ाए तो शहनाज़ के होंठ कांपने लगे क्योंकि ये इज़हार के बाद पहली किस होने जा रही थी। शहनाज़ ने अपनी आंखे बंद कर ली और शादाब ने जान बूझकर शहनाज़ के माथे को चूम लिया तो एक झटके के साथ शहनाज़ की आंखे खुल गई। उसने अपने बेटे को देखा और स्माइल कर दी तो शादाब उसका हाथ थोड़ा जोर से दबा कर बाहर चला गया।

शादाब ने बाजार से मिठाई, कुछ सूती चादर, नए टॉवेल के साथ साथ हल्दी, बेसन, बादाम पाउडर, सब कुछ खरीद लिया और फिर घर की तरफ लौट पड़ा जहां शहनाज़ बेताबी से अपने बेटे का इंतजार कर रही थी।

शाहनाज ने पानी गर्म कर दिया था और शादाब का इंतजार कर रही थी। उसे समझ नहीं अा रहा था कि गर्म पानी का क्या काम होगा लेकिन अपने बेटे की हर इच्छा पूरी करना उसका फ़र्ज़ था क्योंकी वो जानती थी कि शादाब की हर बात के पीछे कोई ना कोई लॉजिक जरूर होता हैं। वो अपने बेटे को खुशी से अपना जिस्म सौंपने के लिए तैयार तो हो हुई थी लेकिन उसके अंदर डर अभी भी पनप रहा था क्योंकि वो जानती थी कि शादाब का लंड झेलना उसके लिए कितना मुश्किल होने जा रहा हैं।

शादाब अंदर अा गया तो शहनाज़ उसे देखते ही खुशी से खिल उठी और बोली:”

” अा गए मेरे राजा, क्या लेकर आए हो बाजार से ?

शादाब ने सब कुछ शहनाज़ को दिखा तो शहनाज़ मन ही मन मुस्कुरा उठी और बोली:”

” शादाब तू नहीं जानता कि जब मेरी शादी हुई थी तब भी मुझे हल्दी नहीं लगी थी क्योंकि एक ही दिन में सब कुछ हो गया था।आज पहली बार मेरे शरीर पर हल्दी लगेगी मेरे राजा।

शादाब:” आपक बेटा खुद अपने हाथो से आपको हल्दी लगाएगा मेरी जान, अपनी दुल्हन में खुद तैयार करूंगा।

शहनाज:” हान राजा, मैं भी तुझे खुद हल्दी लगाऊंगी, अपने दूल्हे को मैं भी खुद ही तैयार करूंगी।

शादाब:” वैसे अम्मी ऐसा दुनिया में पहली बार होगा कि कोई अपनी दुल्हन और दूल्हे को खुद तैयार करेगा।

शहनाज:” कमीने अगर मा से। कोई बेटा सुहागरात भी तो पहली ही बार मनाएगा।

इतना कहकर शादाब आज बहुत दिनों के बाद पहले की तरह शर्मा गई और शादाब के गले लग गई तो शादाब बोला:”

“अम्मी जितना शर्माना हैं पहले ही शर्मा लेना, कहीं सुहागरात को शरमाने में ही दिन ना निकल जाए।

शहनाज़ शादाब का हाथ पकड़ कर दबाते हुए बोली:”

“कोई बात नहीं राजा, तू फिर सुहागदिन मना लेना अपनी शहनाज़ के साथ।

शहनाज़ के मुंह से अपनी शहनाज़ सुनकर शादाब मस्ती से भर उठा और बोला:”

” अम्मी प्लीज़ एक बार और बोलो ना अपनी शहनाज़, बहुत अच्छा लगा आपके मुंह से मेरी जान।

शहनाज़ शर्म से लाल हो गई लेकिन बोली:”

” आह मेरे लाल, मेरे राजा, मैं सिर्फ अपने शादाब की शहनाज़ हूं, शादाब की शहनाज़।

शादाब की खुशी देखने लायक थी, उसने शहनाज़ को अपनी बांहों में उठा लिया और झूमने लगा तो शहनाज़ ने अपनी दोनो बांहे उसके गले में लपेट दी।

शहनाज़:” कितना तगड़ा हैं तू राजा, मुझे किसी फूल की तरह से उठा लेता हैं, सचमुच बहुत ताकत हैं तेरे अंदर।

शादाब अपनी तारीफ सुनकर खुशी से झूम उठा और लंड ने भी अपना सिर उठा दिया और शहनाज़ की कमर पर लग गया तो शहनाज़ को उसकी सांसे रुकती हुई सी महसूस हुई। शादाब शहनाज़ की हालत समझ गया और बोला:”

” अम्मी इसके अंदर भी बता दो कितनी ताकत हैं !

इतना कहते हुए शादाब ने अपने लंड को शहनाज़ की कमर में थोड़ा जोर से गड़ा दिया तो शहनाज का जिस्म मस्ती से भर उठा और बोली:”

” इसमें तो तेरे से भी ज्यादा ताकत हैं राजा, मूसल से भी ज्यादा अच्छा कूटता हैं ये, बस गलत चीज कूट देता है मेरे राजा। इसे फर्क नहीं पड़ता चाहे कितनी ही टाइट क्यों ना हो।

शादाब शहनाज़ की आंखो में देखते हुए बोला:”

” उफ्फ अम्मी जान टाइट जब ये टाइट चीज की धज्जियां बना देता हैं तो सोचो जो पहले से ही इतनी मुलायम हैं उसका क्या हाल कर देगा मेरी शहनाज़ !!

शहनाज़:” हाय अल्लाह, मुलायम चीज तो गई काम से, उफ्फ कहां वो मासूम बच्ची और कहां ये खूंखार जानवर!!

शादाब अपने लंड की तारीफ सुनकर खुश हुआ और फिर शहनाज़ को गोद से उतार दिया और बोला:”

” अम्मी आप उबटन तैयार करो, तब तक मैं ये सूती कपड़े पहन कर आता हूं।

इतना कहकर शादाब अंदर चला गया और अपने कपड़े उतार कर सिर्फ एक सूती चादर को अपनी जांघो पर बांध दिया और चल पड़ा। शहनाज़ ने उबटन तैयार कर लिया था और जैसे ही उसने शादाब को सिर्फ लुंगी में देखा तो उसकी आंखे वासना से लाल हो गई, शहनाज़ भी शादाब के आने से पहले ही अपने कपड़े उतार चुकी थी और सिर्फ के नया लाल रंग का टॉवेल उसने अपने सीने पर बांध रखा था जिसमें से उसकी चूचियों की गोलाई नजर आ रही थी।

शादाब बोला:”

” तो अम्मी बताए कि पहले आप अपने दूल्हे हो हल्दी लगाएगी या मैं अपने दुल्हन को लगा दू ?

शहनाज़ शादाब की बात सुनकर अंदर ही अंदर कांप उठी क्योंकि वो जानती थी कि उसका बेटा उसके पूरे जिस्म पर हल्दी लगाएगा तो उसकी हालत क्या हो जाएगी, इसलिए शहनाज़ बोली:”

” बेटा एक काम कर पहले तू ही लगा दे अपनी दुल्हन को हल्दी, ताकि फिर में आराम से तुझे हल्दी लगा दू।

शादाब अपनी अम्मी को बांहों में भर लिया और जैसे ही जोर से पकड़ा तो हाथो के दबाव के कारण शहनाज़ की चूचियां बाहर को छलक सी पड़ी। बस निप्पल को छोड़ कर लगभग पूरी चूची बाहर थी। शहनाज़ अपने बेटे की मजबूत पकड़ से कसमसा उठी और बोली:”

” आह ज़ालिम इतनी जोर से क्यों कसता है मुझे अपनी बांहों में!! लगता हैं जैसे हड्डी तोड़ देगा!

शादाब शहनाज़ की गर्दन चाटते हुए बोला: आह अम्मी , हड्डी नहीं पर और बहुत कुछ तोड़ना हैं मुझे आपका,

इतना कहकर शादाब ने एक हाथ शहनाज़ की गांड़ पर रख दिया तो शहनाज़ तड़प सी उठी और जोर लगाकर उसकी पकड़ से आजाद हो गई और बोली:”

” आह मेरी जान, जो तेरा मन करे तोड़ लेना मेरे राजा, सब कुछ तेरा ही तो हैं, चल अब जल्दी से मुझे हल्दी लगा दे।

शहनाज़ वहीं पड़े हुए एक गद्दे पर लेट गई जो कि शादाब ने अंदर से लाकर बिछा दिया था। शहनाज़ का जिस्म पूरी तरह से कांप रहा था और सांसे तेज होने से चूचियां उछल कूद कर रही थी जिससे शहनाज़ का मुंह शर्म से लाल हो गया और उसने शर्म के मारे हाथो से अपना मुंह छुपा लिया तो शादाब के होंठो पर मुस्कान अा गई और बोला:”

” हाय मेरी शर्मीली अम्मी, तुम्हारी इसी अदा ने तो मुझे तुम्हारा दीवाना बना दिया है।

इतना कहकर उसने शहनाज़ के हाथो पर हल्दी लगानी शुरू कर दी तो अपने बेटे के स्पर्श से शहनाज़ मचल उठी और शादाब ने उसके दोनो हाथो को उसके चेहरे से हटाकर पकड़ लिया तो शहनाज़ की आंखे हया से बंद हो गई और वो मुस्कुरा उठी। शादाब ने शाहनाज के दोनो हाथो पर बहुत अच्छे से हल्दी लगाई और फिर शहनाज़ की गर्दन पर मुंह पर हल्दी लगाने लगा तो शहनाज़ ने अपनी आंखे खोल दी और शादाब की तरफ प्यार भरी नजरो से देखने लगी।

शादाब:” ऐसा क्या देख रही हो शहनाज़ मुझे ?

शहनाज़ को अपने बेटे के मुंह से अपना नाम सुनना बहुत अच्छा लगा और वो बोली:”

” देख रही हूं कि कितने अच्छे से अपनी दुल्हन को हल्दी लगा रहे हो मेरे राजा

शादाब ने हाथ में थोड़ी हल्दी ली और उसके पैरो पर लगाते हुए बोला:”

” अम्मी मैं चाहता हूं कि मेरी दुल्हन दुनिया की सबसे खूबसूरत दुल्हन लगे सुहागरात को, बस इसलिए कर रहा हूं।

शादाब ने शहनाज़ के दोनो पैरो पर अच्छे से हल्दी लगाने के बाद उसकी जांघो में अपना हाथ घुसा दिया तो शहनाज़ का रोम रोम कांप उठा और उसने शर्म के मारे अपने जांघें बंद कर ली तो शादाब उसकी टांगो को खोलने लगा तो शहनाज ने इशारे से मना कर दिया तो शादाब बोला:”

” आह अम्मी, लगाने दो ना प्लीज़ हल्दी मुझे

शहनाज़ अपनी आंखे बंद करते हुए बोली:”

” आह मेरे राजा, ऐसे लगाएगा तो टॉवेल खराब हो जाएगा

शादाब;” हाय अम्मी, उफ्फ रुको में टॉवेल उतार देता हूं, फिर आराम से करता हूं,

शहनाज़ को अपनी गलती का एहसास हुआ कि टॉवेल उतारने से तो पूरी नंगी हो जाएगी, मगर तब तक शादाब टॉवेल की गांठ खोल चुका था। शादाब ने जैसे ही टॉवेल को हटाना चाहा तो शहनाज़ ने उसके हाथ पकड़ लिए और बोली:”

” आह राजा मत कर मेरे लाल, टॉवेल हटाते ही मैं पूरी नंगी….

शहनाज़ ने बीच में ही अपना शर्म के मारे अपनी बात अधूरी छोड़ दी तो शादाब समझ गया कि उसकी मा नंगी हो जाएगी इसलिए वो उसके कान में बोला:”

” हाय अम्मी नंगा तो आपको होना ही हैं, निकाह किया हैं जब मर्जी कर सकता हूं,!!

इतना कहकर शादाब ने टॉवेल जोर से खींचा तो शहनाज़ ने कसकर पकड़ लिया और बोली:”

” आह राजा आज नहीं, सुहागरात को, उफ्फ समझ मेरी जान।

शादाब:” अम्मी लेकिन फिर मैं हल्दी कैसे लगाऊंगा पूरे शरीर पर ?

शहनाज़ कुछ सोचती हैं और फिर बोली :” तू इधर मेरे पास अा जा, मैं बताती हू।

शादाब शहनाज़ के पास बैठ गया तो शहनाज़ ने उसे कहा:”

” अपनी आंखे बंद कर ले मेरे राजा, और जब तक मैं ना कहूं मत खोलना।

शादाब अपनी आंखे बंद करके बैठ गया और शहनाज़ ने अपने दुपट्टे को तीन बार फोल्ड किया और शादाब की आंखो पर बांधने लगी तो शादाब को सब समझ अा गया। जल्दी ही शहनाज ने शादाब की आंखों पर पट्टी बांध दी और बोली:”

” अब कर ले जो तेरा मन करे, लेकिन ध्यान रखना सिर्फ हल्दी लगानी हैं, कहीं से भी मसलना या दबाना नहीं है मेरे राजा।

शादाब:” उफ्फ, अम्मी ये क्या ज़ुल्म हैं मुझ पर, खाना सामने हैं भूख लगी हैं मगर खा नहीं सकता।

शहनाज:” बेटा बस 7 दिन और सब्र कर ले, फिर को तेरा मन करे करना मेरे राजा!!

शादाब ने अब शहनाज़ के जिस्म पर पड़ा टॉवेल हटा दिया तो शहनाज़ का जिस्म पूरी तरह से नंगा होकर खिल उठा। शहनाज़ की 36 के आकार की गोल गोल मोटी मोटी ठोस चूचियां पूरी तरह से छलक उठी। शहनाज़ की चूत का लगभग पूरी तरह से बंद हो चुका छेद अपने गुलाबी रंगत लिए हुए था।

शादाब ने हाथ में हल्दी ली और हाथ शहनाज़ की तरफ बढ़ा दिया तो ये देखकर शहनाज़ की सांसे उखड़ गई और चूचियां उछल कूद करने लगी मानो शादाब को बुलावा दे रही हो। शादाब ने अपना हाथ शहनाज़ के पतले से मुलायम त्वचा वाले पेट पर रख दिया तो शहनाज़ के जिस्म में हलचल मच गई और वो अपनी जांघो को आपस में रगड़ने लगीं। शादाब ने बहुत धीरे धीरे हल्के हाथो से शाहनाज के पेट को अच्छे से हल्दी लगाई और शादाब ने जैसे ही अगली बार हाथ में हल्दी लेकर शहनाज़ की तरफ बढ़ाया तो शहनाज़ जान बूझकर कर पलट गई जिससे शादाब का हाथ उसकी कमर पर जा लगा, शादाब को उम्मीद थी कि इस बार वो अपनी अम्मी की चूचियों को पकड़ कर अच्छे से हल्दी लगाएगा लेकिन जैसे ही कमर पर हाथ लगा तो निराशा के साथ साथ हैरानी शादाब के चेहरे पर साफ नजर अाई जो अपने ही पल मुस्कान में बदल गई और शादाब बोला :”

” उफ्फ अम्मी, मेरी आंखे बंधे होने का फायदा उठा रही हो!

इतना कहकर शादाब ने शहनाज़ की कमर को थोड़ा जोर से दबा दिया तो शहनाज़ के मुंह से आह निकल गई और सिसकते हुए बोली:” ” आह मेरे राजा, कोई फायदा नहीं उठा रही, सब कुछ तेरा ही तो हैं शादाब।

शादाब ने जैसे ही शहनाज़ की सिसकी सुनी तो वो जोश में अा गया और शहनाज़ की कमर को थोड़ा ज्यादा ही जोर से रगड़ दिया तो शहनाज़ के होंठो से एक मादक आह निकल पड़ी और वो बोली :” हाय मेरे राजा, हट जा मैं खुद लगा लूंगी, दबाने को मना किया था अभी तुझे ??

शादाब को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने अपने कान पकड़ लिए और बोला:”

” उफ्फ आपकी कमर इतनी चिकनी और नाजुक हैं कि मैं खुद को रोक नहीं पाया शहनाज़ !!

शहनाज़ अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गई और बोली:”

” माफ किया राजा, बस थोड़ा प्यार से लगा ना, मसल मत अभी मुझे शादाब।

शादाब ने शहनाज़ की कमर पर बहुत प्यार से हल्दी लगाई और फिर हाथ में हल्दी ली और कमर से नीचे की तरफ आने लगा। जैसे जैसे शादाब के हाथ शहनाज़ की गांड़ की तरफ बढ़ रहे थे शहनाज़ की चूत में गीलापन बढ़ता जा रहा था। शादाब ने अपने दोनो हाथ पहली बार शहनाज़ की पूरी नंगी गांड़ पर रख दिए तो शहनाज़ के होंठो से अपने आप एक मस्ती भरी सिसकारियां निकल पड़ी। शादाब ने शहनाज़ की गांड़ को खूब अच्छे से हाथ में भर लिया और हल्का हल्का हाथ फिराने लगा, उफ्फ क्या मस्त मस्त मोटी गांड़ थी शहनाज़ की, एक दम कोरी, बाहर की तरफ निकली हुई , शादाब का मन तो कर रहा था कि उसकी गांड़ को दबा दबा कर लाल कर दे, एक फूल की तरह मसल कर रख दे लेकिन वो मजबूर था। शहनाज़ को अपनी गांड़ पर पड़ते शादाब के हाथ एक अलग ही मजा दे रहे थे क्योंकि उसकी गांड़ पूरी तरह से उसके बेटे के हाथो में समाई हुई थी। उस मनचले ने बिल्कुल ठीक कहा था ये लड़का ही इसकी गांड़ को अच्छे से मसल सकता हैं, शहनाज़ का भी मन तो कर रहा था कि शादाब कम से कम एक बार ही सही अच्छे से उसकी गांड़ मसल दे लेकिन मजबुर थी इसलिए बोल नहीं सकती थी। शादाब ने हाथ में हल्दी ली और शहनाज़ की गांड़ के दोनो पटो पर रगड़ना शुरू कर दिया, शादाब गांड़ को दबा नहीं रहा था बस थोड़ा टाइट हाथो से हल्दी लगा रहा था जिससे शहनाज़ की गांड़ मचल उठी और अपने आप थोड़ा सा ऊपर की तरफ उभर गई तो शादाब शहनाज़ का इशारा समझ गया और उसने हल्दी लेकर थोड़ा सा तगड़ा हाथ गांड़ पर रगड़ा तो शहनाज़ के होंठो से आह निकल पड़ी और जिस्म अपने आप उपर नीचे होने लगा। शादाब ने जोश में आकर शहनाज़ की गांड़ को थोड़ा जोर जोर से रगड़ना शुरू कर दिया तो शहनाज़ के मुंह से निकलती हुई हल्की हल्की सिसकारियां कमरे में गूंजने लगी।

” आह शादाब, उफ्फ क्या मस्त लड़का हैं तू राजा, बाद मसलना या दबाना मत, ऐसे ही रगड़ उफ्फ बेटा बहुत अच्छा लग रहा हैं मुझे ।

शादाब ने शहनाज़ की गांड़ को दाए बाए फैला दिया और थोड़ा सा अन्दर की तरफ हल्दी लगाने लगा तो शहनाज़ की चूत से रस टपकना शुरू हो गया और शहनाज़ अपनी जांघो को जोर जोर से आपस में रगड़ रही थी।

शादाब ने जैसे ही शहनाज़ के गांड़ के छेद के आस पास हल्दी लगाई तो शहनाज़ ने शर्म से घबराकर अपनी टांगे बंद कर ली और बोली:”

,” आह मेरे राजा वहां नहीं, उफ्फ गंदी जगह हैं वो शादाब!!

शादाब:” हाय अम्मी, आपका जिस्म का हर हिस्सा एक दम साफ़ हैं कुछ भी गंदा नहीं है मेरी शहनाज,

शहनाज़:” मत कर बेटा,

शादाब:” करने दो मेरी शहनाज़ अपनी जान को, बस थोड़ी सी लगाऊंगा।

शहनाज़:” अच्छा बाद में लगा देना वहां, बस अब खुश

शादाब शहनाज़ की बात सुनकर मुस्कुरा दिया और हाथो में हल्दी लेकर उसकी कमर से उसकी पैर की उंगलियों तक लगाने लगा। कमर से उंगलियों की तरफ आते शादाब के हाथ जैसे ही गांड़ पर आते तो शहनाज़ की गांड़ खुशी में अपने आप थोड़ा सा उभर जाती और शादाब अच्छे से रगड़ देता। आखिर कार जल्दी ही शहनाज़ के पिछले हिस्से पर जब पूरी तरह से हल्दी लग गई तो शहनाज़ अपने आप पलट गई।
शादाब ने हल्दी ली और जैसे ही अपने हाथ टिकाए तो हाथ में शहनाज़ की चूचियां अा गई, शहनाज़ अपनी नंगी चूचियों पर शादाब का पहला स्पर्श महसूस करते हुए सिसक उठी!!

” आह राजा, उफ्फ बस दबाना मत, प्यार से लगा दे हल्दी मुझे सारे जिस्म पर मेरे राजा बेटा।

शादाब ने शहनाज की चूचियों को हाथो में भर लिया तो शहनाज़ का चेहरा लाल सुर्ख होकर दहकने लगा और आंखे मस्ती से खुलने बंद होने लगी। शादाब ने पहली बार अपनी मा की चूचियों को छू रहा था और उसे महसूस हुआ कि सच में शहनाज़ की चूंचियां कुदरत का नायाब नमूना हैं। बिल्कुल कश्मीरी सेब के आकार की, शादाब ने हल्दी लगाने के बहाने हल्का सा दबाव दिया तो चूचियां अकड़ गई और झुकने से मना कर दिया मानो शहनाज़ को चुनौती दे रही हो। शादाब से बर्दास्त नहीं हो रहा था, उसका बहुत मन था कि बस एक बार दबा कर देखे इसलिए वो थोड़ा सा आगे को झुका और शहनाज़ के कान में बोला:”

” आह मेरी मा शहनाज़, उफ्फ क्या मस्त चूचियां हैं, एक दम ठोस, प्लीज़ अम्मी एक बार दबा दू क्या ?

इतना कहकर शादाब ने शहनाज़ का निप्पल हल्दी लगाने के बहाने हल्का सा सहला दिया तो शहनाज़ के होंठो से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी!!

” आह मेरे राजा, पहली बार किसी ने मेरी जवानी की कदर करी हैं, दबा ले शादाब बस एक ही बार दबाना, कहीं ऐसा ना हो कि जोश में आज ही सुहागरात हो जाए।

शादाब ये सुनते ही जोश में अा गया और उसने जोर से शहनाज़ की चूचियों को भींच दिया तो शहनाज़ मस्ती और दर्द से कराह उठी क्योंकि उसके सीने में बहुत मीठा मीठा दर्द हुआ ।

” उफ्फ हाय मेरे बच्चे, थोड़ा प्यार से दबाते हैं राजा, बस अब जल्दी से हल्दी लगा दें

शादाब ने शहनाज़ की दोनो चूचियों को हल्दी से तर कर दिया और उसके हाथ ना चाहते हुए एक बार फिर से मचल उठे और उसने जोर से शहनाज़ की चूचियों को दबा दिया तो शहनाज़ के मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी

” आह कमीना कहीं का, उफ्फ मार ही देगा क्या मुझे, मत दबा सुहागरात में सब तेरा ही तो हैं।

शादाब जनता था कि शहनाज़ कैसे मनाना है इसलिए उसने दोनो कान पकड़ लिए तो शहनाज़ मुस्करा उठी। शादाब ने फिर से हल्दी ली और शहनाज़ की चूचियों से पेट और कंधे तक लगाने लगा।

शादाब का भी लंड पूरी तरह से अकड़ चुका था और शहनाज़ की चूत को जैसे पानी पानी हो रही थी। शादाब ने अगली बार हल्दी लेकर शहनाज़ की जांघो पर लगाना शुरू कर दिया तो शहनाज़ की चूत के होंठ अपने आप मस्ती से खुलने बंद होने लगे। शादाब का हाथ जैसे ही जांघ के अंदर की तरफ जाता तो चूत कांप सी जाती। शादाब ने हल्दी ली और दोनो जांघो के जोड़ पर लगाने लगा, शहनाज़ पूरी तरह से तड़प रही थी , उसकी जीभ अपने आप उसके होठों पर घूम रही थी। शादाब का हाथ जैसे ही एक चूत के उपर से गुज़रा तो शहनाज़ के मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी।शादाब ने जोश में आकर शहनाज की चूत को मुट्ठी में भर लिया तो शहनाज़ से बर्दाश्त नहीं हुआ और उसकी गांड़ अपने आप उपर नीचे होने लगी और सिसक उठी।

” आह मेरे राजा, मेरे शादाब, इसे मत दबा देना मेरे लाल, बस जल्दी से हल्दी लगा दे।

शादाब ने एक बार चूत पर अच्छे से अपनी उंगली फिराई तो शहनाज़ अपनी कमर को उठा उठा कर पटकने लगी। चूत के आकार को महसूस करते ही शादाब को बेरी की याद आ गई और बोला:”

” हाय अम्मी, ये तो बिल्कुल बेरी है, उफ्फ कितना रस निकल रहा है इसमें से मेरी शहनाज़।

शहनाज़ सिसकते हुए:_

” आहओह नहीं, उस दिन तूने इसमें ही तो उंगली घुसा दी थी मेरे राजा बेरी समझकर। उफ्फ हाय मा जल्दी लगा से मुझे कुछ हो रहा है शादाब।

शादाब चूत के दाने को सहलाते हुए:”

” आह अम्मी, एक बार घुसाने दो ना उंगली फिर से मुझे, उफ्फ कितनी गर्म हैं ये एकदम तपी हुई है शहनाज़।

शहनाज़ तड़पते हुए:” बस कर कमीने, अब भी उंगली ही घुसाएगा क्या, मूसल डालकर कूट देना अच्छे से सुहागरात को,

शादाब चूत पर उपर से नीचे उंगली फेरते हुए:”

” आह अम्मी, इसको मैं ऐसी कूट दूंगा कि आप ज़िन्दगी भर याद रखोगी, मूसल से सारा रस निकाल दूंगा मार मार कर।

शहनाज़ की चूत में तूफान सा उठ रही थी और वो खुद ही अपनी चूत अपने बेटे के हाथ पर रगड़ रही थी और जोर जोर से सिसक रही थी। बस शहनाज़ ने एक झटके के साथ अपनी जांघो को जोर से भींच दिया तो शादाब ने अपना हाथ बाहर निकाल लिया।
शहनाज़ तड़प उठी क्योंकि उसका रस निकलते निकलते रह गया और बोली:”

” आह शादाब मेरी जान, बस रगड़ दे इसको एक बार, चाहे तो दबा से जोर से मेरे राजा, आह निकाल दे मेरा रस !!

शादाब ने शहनाज़ के जिस्म पर चादर डाल दी और अपनी आंखे खोल दी तो देखा कि शहनाज़ का पूरा जिस्म कांप रहा था, चूचियों पर से चादर उछल रही थी।

शादाब:” शहनाज़ अब तो तुम्हारा ये रस सुहागरात को ही निकलेगा मेरी जान।

शहनाज़:’ आह बेटा, उफ्फ तब तक तो मैं इस आग से मर ही जाऊंगी, हाय कुछ कर ना तू

शादाब ने शहनाज़ का हाथ पकड़ के उसे गद्दे पाए से उठा दिया और खुद लेट गया तो शहनाज़ समझ गई और उसने अपने हाथ में हल्दी ली और शादाब के बदन पर लगाने लगी। शहनाज़ पूरी तरह से गरम हो रही थी और कुछ भी करके झड़ जाना चाहती थी इसलिए एक हाथ से अपनी चूत सहलाने लगी तो शादाब ने शहनाज़ का हाथ पकड़ लिया और बोला:”

” बस करो अम्मी, थोड़ा सा सब्र रखो, फिर आपका बेटा आपकी सब प्यास बुझा देगा।

शादाब ने शहनाज़ का हाथ अपने बदन पर रख दिया तो शहनाज़ उसे हल्दी लगाने लगी, हालाकि उसकी चूत मर रह रह कर चिंगारी सी उठ रही थी लेकिन फिर भी वो मजबुर थी।

शादाब ने शहनाज़ की छाती को जैसे ही छुआ तो दोनो मा बेटे के साथ सिसक उठे, शहनाज़ ने शादाब निप्पल पर अच्छे से हल्दी लगाई और फिर नीचे की तरफ आने लगी तो उसकी चादर में लंड का उभार देखकर उसकी आंखे डर के मारे एक बार तो बंद ही हो गई। शादाब के होंठो से हंसी छूट गई तो शहनाज़ उसे हल्का सा मारते हुए बोली:”

” उफ्फ कमीने मेरा मजाक उड़ाता है, शर्म नहीं आती तुझे

शादाब अपने लंड की तरफ इशारा करते हुए:

:” अम्मी इसे देखते ही डर क्यों जाती हैं,

शाहनाज का मुंह शर्म से झुक गया और बोली:’

” साइज देखा हैं तूने इसका, लगता हैं जैसे इंसान का ना होकर किसी राक्षस का हो

शादाब:” उफ्फ अम्मी सबके ऐसे ही होते है, इसमें अलग क्या हैं?

शहनाज़:” ऐसा ही तो नहीं होता राजा, तेरे पापा का मैंने देखा तो नहीं लेकीन इसका आधा भी नहीं था, और रेहाना के लड़के का तो मरियल सा था, ठीक से खड़ा भी नहीं हो रहा था

शादाब का लंड अपने तारीफ सुनकर खुश हो गया और तेज झटका खाया तो शहनाज कांप सी उठी। शहनाज़ ने शादाब की जांघो पर हल्दी लगानी शुरु कर दी तो शादाब की आंखे मस्ती से बंद हो गई जिससे शहनाज़ की शर्म कुछ दूर हुई और वो खूब अच्छे से हल्दी लगाने लगी।
शादाब ने शहनाज़ का हाथ पकड़ कर लंड पर रख दिया और बोला:”

” आह शहनाज़ इस पर हल्दी लगा दे अम्मी !!

शहनाज़ का बदन कांप उठा और हाथ में हल्दी लेकर बोली:”

” शादाब अपनी आंखे मत खोलना बेटा नहीं तो मुझे शर्म आएगी।

शादाब ने अपनी गर्दन हा में हिला दी तो शहनाज़ ने शादाब की चादर के अन्दर हाथ घुसा दिया और जांघों की जड़ में मालिश करने लगी। शादाब पूरी तरह से तड़प रहा और उससे कहीं ज्यादा लंड मचल रहा था। शहनाज़ ने एक हाथ जैसे ही लंड के ऊपर से घुमाया तो शादाब सिसक उठा और बोला:”

” आह अम्मी मेरी जान, चादर उतार कर अच्छे से लगाओ

शहनाज़ ने अपनी आंखे बंद कर ली और धीरे धीरे हाथ आगे ले जाते हुए चादर को पकड़ कर खींच दिया तो लंड आज़ाद होकर लहराने लगा। लंड के आजाद होते ही शादाब की आंखे खुल गई तो उसने देखा कि शहनाज़ का पूरा जिस्म कांप रहा था, चेहरा पूरा लाल भभूका हो रहा था और आंखे बंद थी। शादाब ने अपनी आंखे बंद कर ली और बोला:”

” आह अम्मी, बस अब हल्दी लगा दे जल्दी दे, खूब अच्छे से लगा देना! देर ना कर अब।

शहनाज़ ने पहले धीरे धीरे अपने आंखे खोली और लंड को देखा तो उसकी आंखे डर और शर्म से झिझक सी गई लेकिन फिर से देखने लगी। एक दम लंबा मोटा, किसी लहराते हुए सांप जैसा, शहनाज़ आज जी भर कर लंड देख रही थी। किसी पहाड़ी आलू की तरह से मोटा सुपाड़ा, एक दम लाल सुर्ख मानो गुस्से में लाल हो रहा हो। शहनाज़ की उम्मीदों से कहीं ज्यादा खतरनाक लग रहा था आज ये लंड, शहनाज़ की चूत तो जैसे शांत पड़ गई थी और सब चिंगारी सी बुझ गई थी लंड का ये खौफनाक रूप देखकर।

शहनाज़ ने अपने हाथो में हल्दी ली और कांपते हुए हाथो को लंड की तरफ बढ़ा दिया। जैसे ही लंड पर शहनाज़ के हाथ लगे तो शादाब तड़प उठा और बोला:

” आह अम्मी, उफ्फ मेरी शहनाज़ लगा दे हल्दी हल्दी से पकड़ ले इसे, तेरे लिए ही हैं बस।

शहनाज़ ने लंड को अच्छे से पकड़ लिया और हल्दी लगाने लगी तो शादाब के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी।

” आह मेरी नाज़ पूरे लंड पर लगाओ, जड़ तक लगाओ

शहनाज़ अपने बेटे की बात सुनकर समझ गई कि शादाब लंड को जड़ तक घुसा देगा इसलिए जड़ तक हल्दी लगाने के लिए कह रहा है। शहनाज़ ने लंड को को दोनो हाथो की मुट्ठी बनाकर पकड़ लिया और फिर से कम से कम तीन इंच लंड बाहर रह गया। उफ्फ कितना लंबा हैं ये और मोटा तो उससे भी ज्यादा।शहनाज़ लंड को हल्दी से जल्दी लगाने लगी, लंड सुपाड़े पर से एक दम बिल्कुल ठोस था मानो लोहे का बना हो। शहनाज़ से रहा नहीं गया और उसने जोर से सुपाड़ा दबा दिया तो शादाब सिसक उठा।

” आह अम्मी, आपके नाजुक हाथो से ये कहां दब पाएगा

शहनाज़ को ठेस पहुंची और उसने जोर से लंड का सुपाड़ा दबा दिया तो हल्का सा दब गया और शादाब तड़प उठा।

” आह उखड़ ही दोगी क्या शहनाज़ इसे मेरी जान ?

शहनाज़ के होंठो पर मुस्कान अा गई और जोर जोर लंड पर मालिश करने लगी। शादाब का पूरा जिस्म मस्ती से भर उठा और बोला:”
” हाय ऐसे ही अम्मी, उफ्फ आप कितनी अच्छी हैं, आह मुझे कुछ हो रहा हैं हाय शहनाज़।

शहनाज़ ने अपने बेटे को ऐसे तड़पता देख कर लंड पर से अपना हाथ हटा लिया और पेट पर हल्दी लगाने लगी तो शादाब तड़प उठा और उसका हाथ फिर से लंड पर टिका दिया और बोला:’

” हाय सिकी, उफ्फ करो ना अम्मी, निकल जाएगा मेरा उफ्फ

शहनाज़:’ तड़प अब तू ऐसे ही सुहागरात तक मेरे राजा।

इतना कहकर वो खड़ी हो गई और पतली सी चादर से उसकी गांड़ साफ नजर आ रही थी।

मा बेटे वहीं छत पर एक दूसरे के सामने ही बैठ कर नहाने लगे। शहनाज़ चादर के अन्दर से शादाब के सामने ही अपनी चूची और चूत साफ करने लगी तो शादाब ने भी अपने लंड को खून हिला हिला कर साफ किया। शहनाज़ की नजरे लंड पर ही टिकी रही और वो अंदर ही अंदर डर महसूस कर रही थी।

उसके बाद दोनो मा बेटे ने एक साथ खाना खाया और एक दूसरे को बांहों में सो गए। पूरी रात शादाब का लंड शहनाज़ की चूत पर कपड़ों के ऊपर से ही झटके मारता रहा और शहनाज़ की चूत रह रह कर टपकती रही लेकिन दोनो मजबूर थे।

अगले दिन सुबह दोनो मा बेटे एक साथ जिम करने गए और उसके बाद सुहागरात के लिए शॉपिंग करने लगे।

शहनाज़:”” बेटा मैं तो सब कुछ तेरी पसंद से लूंगी, जो तेरा मन करे दिला दे मुझे।

शादाब ने शहनाज़ को एक से बढ़कर एक कपडे दिलाए और दोनो ने बाहर ही खाना खाया और उसके बाद घर की तरफ चल पड़े। शाम होने वाली थी इसलिए हल्का हल्का अंधेरा होने लगा था।

शहनाज़:” बेटा थोड़ा तेज चला, अंधेरे में पता नहीं क्यों डर लगता हैं मुझे ?

शादाब ने गाड़ी की रफ्तार बढ़ा दी और दोनो घर पहुंच गए। शहनाज़ ने पानी गर्म किया और सिर्फ कल वाली चादर लपेटकर हल्दी लगाने के लिए तैयार हो गई। आज वो कल के मुकाबले अच्छा महसूस कर रही थी। शादाब भी अा गया तो शहनाज़ उससे बोली:”

” बेटा तुम लेट जाओ, पहले मैं हल्दी लगा देती हूं।

शादाब गद्दे पर लेट गया और शहनाज़ ने हाथ में हल्दी लेकर उसके बदन पर लगाना शुरू कर दिया। शहनाज़ की आंखे फिर से लाल होने लगी और धड़कने बढ़ गई। शहनाज़ ने जैसे ही हल्दी लेने के लिए कड़ाही की तरफ देखा तो शादाब ने अपनी चादर उतार दी और पूरा नंगा हो गया। लंड अभी पूरी तरह से खड़ा हो चुका था इसलिए जैसे ही शहनाज़ ने लंड देखा तो उसकी सांसे फिर से रुक सी गई और माथे पर पसीना छलक उठा।

शादाब:” क्या हुआ शहनाज़ ?

शहनाज़:” उफ्फ राजा ये कैसे फन उठा उठा कर लहरा रहा है किसी नाग की तरह !!

शादाब:” अम्मी डरो मत आप, ये आज नहीं काटेगा आपको, आराम से आप हल्दी लगाओ।

शहनाज़ ने शादाब को स्माइल दी और लंड को एक हाथ से पकड़ लिया और दूसरे से उस पर हल्दी लगाने लगी, आज लंड कल से ज्यादा अकड़ रहा था। मा बेटे दोनो एक साथ तड़प उठे और जल्दी ही शहनाज़ ने शादाब के पूरे जिस्म को हल्दी से ढक सा दिया। शहनाज़ की चूत गीली हो गई थी और चुचियों में अपने आप मीठा मीठा दर्द महसूस हो रहा था।

शादाब:” अम्मी आज आपने बहुत ज्यादा हल्दी लगा दी मुझे, आप एक काम करो लेट जाओ, मैं आपको लगाता हू।

शहनाज़ लंबी लंबी सांस लेती हुई लेट गई और शादाब ने देखा कि हल्दी बहुत कम बची हुई थी क्योंकि उत्तेजना में शहनाज़ ने उसे बहुत ज्यादा हल्दी लगा दी थी। शादाब ने थोड़ी सी हल्दी ली और शहनाज़ के हाथो पर लगाने लगा तो शहनाज़ का जिस्म कापने लगा। हल्दी खत्म हो गई तो शादाब बोला:”

” उफ्फ अम्मी हल्दी तो खत्म हो गई आज, अब कैसे हल्दी लगेगी मेरी दुल्हन को।

शहनाज़:’ मैं तैयार करके ले आती हूं, तू रुक थोड़ी देर।

शादाब शहनाज़ के कान में बोला:”
” अम्मी मेरे जिस्म पर ज्यादा हल्दी लग गई है, कहो तो अपने बदन से आपको हल्दी लगा दू।

शहनाज़ को शादाब का सुझाव पसंद अाया लेकिन वो जानती थी कि वो अपने पूरे जिस्म को उसके बदन से रगडेगा। ये सोचकर शहनाज़ की चूत सुलग उठी और उसने शादाब की तरफ देखते हुए कहा:”.
” अा जा फिर लगा दे अपनी दुल्हन को हल्दी, देखती हूं कितनी अच्छी लगायेगा।

शादाब पूरी तरह से नंगा था इसलिए वो शहनाज़ के उपर नंगा ही चढ़ गया। जैसे ही दोनो के बदन टकराए तो शहनाज़ के मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी।

” आह शादाब, कितना भारी हैं तू मेरी जान, तू तो पूरा मर्द बन गया है मेरे राजा।

शादाब अपने बदन को शहनाज़ के बदन से रगड़ने लगा और बोला:”

” आह अम्मी आपका बदन बिल्कुल फूलो की तरह नाजुक हैं,

शहनाज़:” कमीने तो मेरे पूरे को पीस कर रख देगा बहुत बुरी तरह से, उफ्फ डर लगता है सोचकर ही मुझे तो राजा।

शादाब का लंड चादर के उपर से शहनाज़ की चूत पर रगड़ रहा था जिससे शहनाज़ का जिस्म हल्के हल्के झटके खा रहा था। शादाब उसके कन्धे सहलाते हुए बोला:”

” आह मेरी शहनाज़, अब मर्द बोल दिया है तो मर्दानगी तो दिखानी पड़ेगी ना अम्मी।

दोनो के बदन हिलने से शहनाज़ के जिस्म पर से चादर सरकने लगी और शहनाज़ बोली:”

” आह राजा, थोड़ा जोर जोर से रगड़ कर लगा हल्दी मुझे।

शादाब ने जैसे ही अपनी चौड़ी छाती पर शहनाज़ की तनी हुई चूचियों पर रगड़ना शुरू किया तो फटने के डर से चादर मानो अपने आप बीच से सरक गई और पहली बार शादाब का पूरा नंगा जिस्म शहनाज़ के जिस्म पर छा गया जिससे शहनाज़ की आंखे मस्ती से बंद हो गई और मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां अपने आप निकलने लगी।

” आह शादाब, उफ्फ ये क्या हो गया मेरे राजा, कितना अच्छा लग रहा है, हाय मेरी मा,

शादाब अपना लंड उसकी जांघो में घुसाते हुए बोला:”

” आह मेरी शहनाज़, उफ्फ कितना गर्म हैं तेरा बदन,

शहनाज़ ने अपनी जांघें मस्ती से खोल दी शादाब का लंड चूत से जा टकराया तो शहनाज़ ने अपने दोनो हाथ उसकी गांड़ पर रख दिए और चूत पर दबाने लगी और सिसकते हुए बोली:”

” आह मेरा नंगा शादाब,मेरे राजा बेटा, उफ्फ अच्छे से लगा हल्दी मुझे।

शादाब अपनी छाती को शहनाज़ की चुचियों से रगड़ने लगा तो शहनाज़ एक दम पूरी तरह से मस्त हो हुई और उसकी चूत से रस टपकना शुरू हो गया। जैसे ही शादाब को लगा कि शहनाज़ झड़ सकती हैं तो वो हटने लगा तो शहनाज़ उसे अपने ऊपर खींचने लगी और बोली:”

” आह राजा, और लगा ना हल्दी मुझे, देख मेरी जांघो के बीच ठीक से नहीं लगी है।

शादाब ने अपनी जांघ पर से हल्दी लेकर हाथ से उसकी चूत पर अच्छे से लगा तो शहनाज़ की बोलती बंद हो गई। शादाब उसकी पीठ से अपनी पीठ रगड़ने लगा और दोनो के जिस्म पर पूरी तरह से हल्दी लग गई।

उसके बाद दोनो नहाए और साथ में ही खाना खाया। ये सब अगले छह दिन तक चलता रहा और आखिरकार वो दिन अा ही गया जिसके लिए दोनो मा बेटा तड़प रहे थे, शहनाज़ पिछले छह दिन से जिस्म की आग में जल रही थी। उसकी चूत तो हरदम गीली रही लेकिन खुलकर बह नहीं पाई जिससे उसका पूरा जिस्म अकड़ रहा था। शरीर बहुत पूरी तरह से आग से तप रहा था और रह रह कर चिंगारी सी निकल रही थी। उसकी चूचियां अकड़ कर एकदम सख्त हो गई थी मानो अब बुरी तरह से मसलने, दबाने के बाद ही उनका दर्द खत्म होगा। शहनाज़ की चूत पर हल्दी लगने से एक अलग ही रंगत अा हुई थी जिससे वो अब पहले से ज्यादा खूबसूरत लग रही थी। शहनाज़ को खुद यान नहीं था कि वो आखिरी बार कब चुदी थी इसलिए चूत का छेद पूरी तरह से बंद हो गया था। आज शहनाज़ की चूत के होंठो पर एक अलग ही नशा छाया हुआ था और वो पूरी तरह से रस से भीगे हुए और बेकरारी में एक दूसरे को चूम रहे थे।

शहनाज़ की आंख खुली तो उसने अपने बेटे के लंड को अपनी जांघो में घुसे हुए पाया तो उसके होंठो पर मुस्कान उभर गई। फ्रेश होने के बाद शहनाज़ ने अपने नए कपड़े निकाले और टॉवेल लेकर बाथरूम में घुस गई। आज उसकी चाल में एक अजीब सी मस्ती छाई हुई थी क्योंकि आज वो अपना सब कुछ अपने सपनों के शहजादे अपने बेटे शादाब पर लुटा देना चाहती थी।

शहनाज़ ने बाथरूम में घुस गई और चादर को अपने जिस्म से अलग कर दिया तो उसका बदन पूरा नंगा होकर खिल उठा। उसके हाथ अपने आप अपनी चूचियों पर चले गए तो उसकी आंखे मस्ती से बंद हो गई। उफ्फ कितनी टाइट हो गई है मेरी चूचियां, लगातार जिम करने से उसकी चूचियां सच में एक दम गोल गोल और मस्त हो गई थी। शहनाज़ ने अपनी चूची को हल्का सा दबाया तो उसके मुंह से आह निकल पड़ी। शहनाज़ की चूत आज सुबह से ही गीली हो रही थी, शहनाज़ ने अपने जिस्म को अच्छे से पानी से साफ करना शुरू कर दिया तो सारी हल्दी उतर गई और उसका जिस्म गुलाब की तरह खिल उठा। शहनाज़ की चूत पर हल्के हल्के बाल उग आए थे जो उसे अच्छे नहीं लग रहे थे क्योंकि वो अपने बेटे को एक दम साफ चिकनी चूत गिफ्ट करना चाहती थी इसलिए उसने क्रीम लगाकर सब बाल साफ कर दिए और उसकी चूत बिल्कुल चिकनी हो गई। शहनाज़ ने बंद आंखों के साथ ही एक उंगली अपनी चूत पर फिराई तो उसका जिस्म कांप उठा और मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी। शहनाज़ के घुटने कमजोर पड़ने लगे तो वो फर्श पर ही बैठ गई। उसने शॉवर का पाइप लिया और अपनी चूत पर मारने लगी

शहनाज़ अपनी चूत को खूब अच्छे से रगड़ रगड़ कर साफ़ करने लगी मानो युद्ध की तैयारी से पहले अपने आपको तैयार कर रही हो। शहनाज़ ने अपनी चूत के होंठो को पानी से साफ किया और अंदर तक पानी मारने लगी जिससे उसकी चूत एक इंच अंदर तक पूरी तरह से साफ हो गई।

शहनाज ने अपनी चूत पर हाथ फिराया और जब संतुष्ट हो गई कि उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं हैं और पूरी तरह से चिकनी और साफ स्वच्छ हो गई है तो उसके होंठ मुस्कुरा उठे और उसने अपने कपड़े पहन लिए और बाहर की तरफ चल पड़ी। उसने शादाब को उठाया तो शादाब उसे नए कपड़ों में देख कर बहुत खुश हुआ और उसका गाल चूम लिया। पिछले 10 दिन से ना शादाब ने अपनी अम्मी के होंठ छुए और मा ही शहनाज़ ने पहल करी। शहनाज़ को उपर से नीचे तक निहारने के बाद शादाब बोला:”

” उफ्फ अम्मी बिल्कुल क़यामत लग रही हो, उफ्फ ये हुस्न ये जवानी,

शहनाज़ अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गई और बोली:’

” शादाब मेरे राजा, अब तो मैं पूरी तरह से तेरी बीवी बन गई हूं, अब तो अम्मी मत बुला मुझे, शहनाज़ ज्यादा अच्छा लगता है मुझे।

शादाब:” ओह अभी आदत पड़ी हुई है ना अम्मी बोलने की मेरी जान, बस इसलिए निकल जाता हैं, धीरे धीरे कम हो जाएगी।

शहनाज़:” अब खड़ा हो जा और नहाकर अा जा, मैं कुछ खाने के लिए बना देती हूं।

शादाब खड़ा हुआ और दोनो हाथो में शहनाज़ की गांड़ को भर लिया तो शहनाज़ एक झटके से अदा के साथ उसकी पकड़ से निकल गई और बोली:”

” उफ्फ इतनी जल्दी ठीक नहीं होती राजा, रात तो होने दे मेरी जान।

शादाब:” उफ्फ अम्मी बर्दाश्त नहीं होता अब, आज देखना मैं आपको कैसे रगड़ रगड़ कर, मसल मसल कर प्यार करूंगा।

शहनाज़:” कमीने वो तो मैं जानती हूं कि आज तू मेरे पूरे जिस्म को अपने मूसल से कूट देगा बुरी तरह से।

शादाब अपने लंड को चादर के उपर से शहनाज़ को दिखा कर सहलाते हुए:”

” आह आम्मि, आज तो आपका ऐसा मसाला कूट दूंगा कि आज मेरे मूसल की दीवानी हो जाओगी मेरी मां।

शहनाज़ उसकी तरफ जीभ निकाल कर किचेन में चली गई और शादाब नहाने के लिएं। शादाब ने चादर उतार दी और नंगा हो गया तो उसका लंड आजाद होकर झटके खाने लगा। शादाब उसे पुचकारते हुए बोला:”

” बस कर मेरे बच्चे, बस आज मिल जाएगी तुझे मेरी मा की चूत, शाम तक सब्र कर।

लंड ने एक तगड़ा झटका खाया मानो अपनी खुश ज़ाहिर कर रहा हो।शादाब नहाने लगा और अपने सारे जिस्म से बाल साफ़ किए और टॉवल बांध कर बाहर निकल गया। शादाब ने अपने कपड़े पहन लिए और शहनाज़ के कमरे में अा गया तो काजू बादाम केसर वाला दूध और देशी घी का हलवा टेबल पर रखा हुआ था। शहनाज़ शादाब की गोद में बैठ गई और दोनो ने एक दूसरे को दूध पिलाया और हलवा खिलाया।

शादाब:” अम्मी थोड़ी देर बाद हम शहर निकल जाएंगे और रात के लिए कुछ जरूरी सामान लाना हैं

रात का नाम सुनते ही शहनाज़ के गाल अपने आप गुलाबी हो उठे और एक बार शादाब की तरफ नजरे उठा कर देखा और फिर शर्मा गई। शादाब ये सब देख कर मुस्कुरा उठा।

थोड़ी देर बाद ही शादाब ने गाड़ी निकाल ली और दोनो मा बेटे शहर की तरफ चल पड़े। शहनाज़ ने आज अपना बुर्का नहीं निकाला और ना ही शादाब ने उसे बुर्का उतारने के लिए कहा।

शादाब:” अम्मी मैं आपको ब्यूटी पार्लर छोड़ दूंगा, वहां मैडम आपको अच्छे से तैयार कर देगी, बस आप शीशा मत देखना अभी।

शहनाज़:” बेटा वो तो मैं पिछले 15 दिन से नहीं देख रही हूं।लेकिन आज दुल्हन बनकर मैं खुद को जरूर देखूंगी।

शादाब:” अम्मी हम दोनों साथ में ही देखेंगे।

दोनो बाते करते हुए शहर पहुंच गए और शादाब ने शहनाज़ को ब्यूटी छोड़ दिया और खुद अपने जिम वाले दोस्तो और कॉलेज वाले दोस्त जो उस दिन निकाह में शामिल थे उन्हें सब को आज 2 बजे के लिए एक पार्टी का बुलावा भेज दिया।

शादाब ने एक हॉल बुक किया और मालिक को सब कुछ समझा उसे जिम्मेदारी दे दी। उसके बाद वो वापिस शहनाज़ को लेने के लिए चल दिया। तीन घंटे हो चुके थे और शहनाज़ का मेक उप भी पूरा हो गया था।

मैडम ने शादाब को आवाज लगाई तो शादाब अंदर चला गया और जैसे ही शहनाज़ को देखा तो उसकी आंखे खुशी से खुली की खुली रह गई। सचमुच वो एक पारी की तरह लग रही थी, उफ्फ माथे पर सजा हुआ टीका, सेब की तरह सुर्ख गाल, लाल सुर्ख होंठ, नाक में एक बाली, गले में शानदार ज्वेलरी, और मेहंदी से रचे हुए लाल हाथ कुल मिलाकर एक सपनो की शहजादी।

शादाब बिना पलके झपकाए एकटक शहनाज़ को देखता रहा तो शहनाज़ की आंखे अपने आप शर्म से झुक गई और उसके होंठो पर स्माइल आ गई।

शादाब बिना पलके झपकाए एकटक शहनाज़ को देखता रहा तो शहनाज़ की आंखे अपने आप शर्म से झुक गई और उसके होंठो पर स्माइल आ गई।

शादाब चलता हुआ उसके पास आया और उसके पीछे आकर खड़ा हो गया और शहनाज़ के चेहरे को हल्का सा उपर उठाया तो शहनाज़ चेहरा अपने आप उठता चला गया। शादाब बोला:”

” शहनाज़ अपनी आंखे बंद कर लो, तुम्हे आज एक बहुत बड़ा झटका लगने वाला हैं।

शहनाज़ ने अपनी आंखे बंद कर ली और शादाब उसे मैडम के सामने ही बांहों में लिए हुए शीशे के सामने के गया और बोला:”

” आंखे खोलो मेरी जान, दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की दुल्हन आपको देखना चाहती हैं।

शहनाज़ ने जैसे ही अपनी आंखे खोली तो उसे जैसे खुद पर यकीन ही नहीं हुआ। वो दीवानी की तरह खुद को देखने लगी और जब उसे एहसास हो गया है कि ये शीशे में उसकी ही फोटो है तो वो खुशी के मारे शादाब से लिपट गई और बोली:”

” ओह शादाब मेरे राजा तुमने तो मुझे पूरी तरह से बदल दिया। तुम्हारे बिना मैं बिल्कुल अधूरी थी मेरी जान।

शादाब:” शहनाज़ मैं आपको और भी बहुत खुशी दूंगा, आप देखती रहो बस।

शहनाज़ शादाब को कसकर गले लगाती हुई:”

” शुक्रिया मेरी ज़िन्दगी में आने के लिए शादाब, ऐसा लग रहा है जैसे मेरी ज़िन्दगी असल में अब शुरू हुई हैं।

उसके बाद दोनो मा बेटे वहां से सीधे हॉल पहुंच गए जहां सब दोस्त उनका ही इंतजार कर रहे थे। ये शहनाज़ के लिए बिल्कुल सरप्राइज था क्योंकि उसे शादाब से ये उम्मीद नहीं थी। शादाब ने अपना हाथ आगे बढाया तो शहनाज़ गाड़ी से उतर गई और शादाब उसका हाथ पकड़े स्टेज की तरफ बढ़ गया। दोनो सामने रखी हुई बड़ी बड़ी सजी हुई कुर्सियों पर बैठ गए।

शहनाज़ की खूबसूरती का असर सब पर हो रहा था। एक के बाद एक दोस्त मुबारकबाद देने लगे। हर कोई शहनाज़ के लिए कोई ना कोई गिफ्ट लेकर आया था जिससे शहनाज़ की खुशी बढ़ गई थी। जिम वाला लड़का आया और शहनाज़ को एक गिफ्ट पैक देते हुए बोला;’

” मुबारक हो भाभी जी, आखिरकार आपको आपका प्यार मिल ही गया।

उसकी बात सुनकर शहनाज़ ने एक बार शादाब की तरफ देखा और दोनो एक साथ मुस्कुरा दिए तो शहनाज़ बोली;”

” प्यार अगर सच्चा हो तो मिल ही जाता है।

उसके बाद सभी लोग खाना खाने लगे तो शादाब और शहनाज़ के लिए भी एक टेबल पर खाना लग गया और दोनो ने बहुत हल्का खाना खाया और उसके बाद एक एक एक करके सभी दोस्त जाने लगे और आखिकार शादाब भी शहनाज़ को लेकर घर की तरफ चल दिया।
दोनो चुप बैठे हुए थे और शहनाज़ का चेहरा लाल भभुका हो रहा था। बीच बीच में वो शादाब की तरफ नजरे चुरा चुरा कर देख रही थी और जैसे ही दोनो की नजरे मिलती तो शहनाज़ शर्मा जाती। आगे आने वाले पलो के बारे में सोच सोच कर उसकी चूत गीली होने लगी थी।

कोई शाम के छह बजे तक वो घर पहुंच गए और शहनाज़ ने अपने आपको पूरी तरह से बुर्के में छुपा लिया था ताकि किसी मोहल्ले वाले को किसी तरह का कोई शक ना हो। शहनाज़ कांपते हुए कदमों से गाड़ी से उतरी हुई और शादाब गाड़ी पार्क करने लगा। शादाब वापिस आया तो शहनाज़ ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसके गले लग गई तो शादाब ने शहनाज़ को अपनी बांहों में उठा लिया तो शहनाज़ ने अपनी बांहे शादाब के गले में डाल दी और दोनो मा बेटे एक दूसरे की आंखों में देखने लगे। शादाब उसे बाहों में लिए हुए ही उपर आ गया और जैसे ही शहनाज़ के कमरे को धक्का दिया तो वो खुलता चला गया तो शहनाज़ की आंखे एक बार फिर से खुशी से चमक उठी क्योंकि पूरा कमरे एक सुहागरात के कमरे में तब्दील हो चुका था और दो बेड को जोड़कर एक बहुत बड़ा बेड गोल बेड बनाया जा चुका था जिस पर एक साफ सुथरी सफेद रंग की चादर बिछी हुई थी।

शादाब धीरे धीरे शाहनाज के हाथ पकड़े बेड तक पहुंच गया। शाहनाज ने अभी तक बुर्का पहना हुआ था और उसके हाथ पैर कांप रहे थे। जिस्म में एक अजीब सी गुदगुदी हो रही थी और रह रह कर उसकी सांसे रुक सी रही थी। शहनाज़ ने धीरे से अपने सैंडिल निकाले और बेड पर चढ़ गई और बैठ गई। शादाब ने शहनाज़ का हाथ हल्का सा दबाते हुए कहा:”

” अम्मी आप बैठो मैं अभी आया पांच मिनट में।

शहनाज़ ने बिना मुंह से कुछ बोले अपने गर्दन हिला दी और शादाब कमरे से बाहर अा गया। शादाब किचेन में चला गया और केसर बादाम वाला दूध गर्म करने लगा। सच में शादाब आज बहुत खुश था क्योंकि उसकी अम्मी ने अब हर तरह से उसे अपना लिया था।

दूसरी तरफ शहनाज़ ने शादाब के जाने के बाद अपना बुर्का उतार दिया और एक तरफ रख कर अपने घूंघट को ठीक किया और शादाब का इंतजार करने लगी। शहनाज़ के कदम कदमों कि आहट पर लगे हुए थे और उसकी चूत अपने आप टपक रही थी।

शादाब ने ग्लास में दूध भर लिया और एक डिब्बा लेकर शहनाज़ के रूम की तरफ चल पड़ा। कमरे में घुसने के बाद शादाब ने गेट को लॉक लगाकर बंद कर दिया तो शहनाज़ के रोंगटे खड़े हो गए। शादाब ने दूध को टेबल पर रख दिया और डिब्बे में से एक मस्त तेज महक वाला परफ्यूम पूरे कमरे में छिड़क दिया तो पूरा कमरा महक से भर उठा। शादाब ने अपने जूते उतारे और बेड पर चढ़ गया और शहनाज़ के सामने बैठ गया। घूंघट से शहनाज़ के कांपते हुए लाल सुर्ख होंठ साफ दिख रहे थे।

शादाब ने कहा:” उफ्फ अम्मी आज मेरी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा दिन हैं क्योंकि मेरा सबसे बड़ा सपना पूरा हो रहा हैं। आप मिल गई मुझे सब कुछ मिल गया।

शहनाज़ सिर्फ हल्का सा मुस्कुरा उठी तो शादाब बोला:”

” उफ्फ शहनाज़ मेरी अम्मी, मेरी जान बस अब अपना ये चांद सा चेहरा मुझे दिखा दो। मैं अपनी दुल्हन को जी भर कर देख तो लूं एक बार।

शहनाज़ ने ना मैं सिर हिला दिया और तो शादाब बोला:”

” उफ्फ अम्मी आज तो मना मत करो, आज क्यों ज़ुल्म कर रही हो मुझ पर ?

शहनाज़ समझ गई कि उसका बेटा अभी काफी नादान हैं इसलिए धीरे से बोली:”

” मेरे राजा, आज के दिन मुंह दिखाई गिफ्ट में दी जाती हैं, पहले मेरा गिफ्ट दो, तब जाकर ये घूंघट हटेगा।

शादाब समझ गया कि उसकी अम्मी क्या चाह रही हैं इसलिए वो उठा और डब्बे से एक हीरे की अंगूठी निकाल ली और बेड की तरफ चल पड़ा। अब दोनो मा बेटे एक दूसरे के सामने बैठे हुए थे और शादाब बोला:”

” शहनाज़ मैं मुंह दिखाई देने के लिए तैयार हूं, बस अब देर ना कर मेरी जान।

शहनाज़ के होंठो पर मुस्कान अा गई और वो उठी और बेड के सिरहाने से एक डिब्बे से अंगूठी निकाल ली। शादाब भी खड़ा हो गया और शहनाज़ को पीछे से अपनी बांहों में भर लिया तो शहनाज़ के मुंह से आज अपने बेटे के पहले स्पर्श से एक सिसकी निकल पड़ी।

” आह राजा, थोड़ा प्यार से मेरी जान, बहुत नाजुक हैं तेरी अम्मी

शादाब का एक हाथ शहनाज़ की छाती तो दूसरा उसके पेट पर टिका हुआ था। शहनाज़ ने अपने हाथ आगे लाते हुए शादाब के हाथो पर रख दिए तो दोनो एक दूसरे को अंगूठी पहनाने लगे।

शादाब का पूरी तरह से खड़ा हुआ लंड शहनाज़ की गांड़ से लगा हुआ था जिससे शहनाज़ का बदन तपता जा रहा था। अंगूठी पहन लेने के बाद शादाब बोला:”

” बस शहनाज़ मेरी अम्मी अब तो दिखा दे अपना चांद सा चेहरा मुझे।

शहनाज़ ने एक स्माइल दी और शादाब को हान में सिर हिला दिया तो शादाब ने अपने हाथ आगे बढ़ा कर शहनाज़ का घूंघट उठाने लगा। जैसे जैसे घूंघट उठता जा रहा था शहनाज़ की सांसे तेज होती जा रही थी। जैसे ही घूंघट हट गया तो शहनाज़ का चांद से ज्यादा चमकता हुआ चेहरा शादाब के आगे अा गया और शादाब बिना पलके झपकाए उसे देखता रहा।

शहनाज़ दुनिया की सबसे खूबसूरत दुल्हन बनी हुई थी और शादाब अपलक उसे देखे जा रहा था। शहनाज़ की आंखे बंद शर्म से झुकी जा रही थी इसलिए वो शर्म के मारे अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमाने लगीं।

शादाब ने शहनाज़ के चेहरे को हाथ से थाम लिया और बोला:”

” उफ्फ मेरी जान, मेरी शहनाज़ देखने दो ना जी भर कर मुझे अपनी दुल्हन को।

शहनाज़ अपने बेटे की बाते सुनकर शर्मा सी गई और बोली:’

” बस कर मेरे राजा और कितना देखेगे मुझे, कहीं नजर लग गई तो?

शादाब :” अम्मी दीवाने की नजर नहीं लगती हैं।

शादाब ने इतना कहकर शहनाज़ का एक हाथ पकड़ लिया तो शहनाज़ ने एक झटके के साथ उससे अपना हाथ छुड़ा लिया तो शादाब ने हैरानी से उसकी तरफ देखा और बोला:”

“इतना गुस्सा किसलिए शहनाज़ ? क्या मुझसे कोई गलती हुई है ?

शहनाज़ ने उसे जलाने के लिए कहा:” हान बहुत बड़ी भूल कर रहा हैं तू राजा, अभी तेरा मेरे सिर्फ पर हक नहीं हैं।

शहनाज़ के मुंह से निकले ये लफ़्ज़ शादाब को एक तीर की तरह से चुभे और बोला:”

” अम्मी ऐसा क्यों बोल रही हो आप ? सब कुछ आपकी मर्जी से तो रहा हैं।

शहनाज़ शादाब का रोना सा मुंह देखकर अंदर ही अंदर मुस्करा उठी और धीरे से अपना मुंह उसके कान के पास लाते हुए बोली:” राजा पहले निकाह में बंधे हुए मेरे मेहर दो मुझे, उसके बाद ही तुम मुझे छू सकते हो।

शादाब को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसके होंठो पर मुस्कान तैर गई और बोला:”

” शहनाज़ क्या तुम मेरे मेहर माफ करोगी ? या मैं आपको चुका दू।

( मेहर निकाह के वक़्त लड़की की सुरक्षा के लिए तय की गई एक रकम होती हैं। अगर पति तलाक चाहे तो उसे मेहर की रकम पत्नी को देनी होती हैं।)

शहनाज़: जा माफ कर दिए मेरे राजा।

जैसे ही शहनाज़ ने मेहर माफ किए तो शादाब ने तेजी से आगे बढ़ कर उसे अपने सीने से लगा लिया तो शहनाज़ भी अपने बेटे से चिपक गई।

शादाब:” ओह शहनाज़ आई लव यू मेरी जान।

शहनाज़:: लव यू टू मेरे शादाब।

शादाब:” अम्मी मुझे आज सब कुछ मिल गया। आप जैसी दुल्हन पाकर मेरी किस्मत खुल गई।

शहनाज़:” शादाब सच में तुम एकदम मेरे सपनो के शहजादे हो, तुम्हे पाकर आज मैं भी पूरी हो गई हूं मेरे राजा।

शादाब ने अपना लंड शहनाज़ की जांघो में दबाते हुए कहा:”

” आह अम्मी, अभी आप कहां पूरी हुई हो ?

शहनाज़ उसका हाथ दबाते हुए:”

” उफ्फ शैतान, क्यों तंग करता हैं मुझे डराकर इससे ?

शादाब:” आज तक मेरी रात हैं, मैं जो चाहे करू, आज मुझे पूरा हक है शहनाज़ ।

दोनो मा बेटे ऐसे ही बेड पर लेट गई और शहनाज़ पूरी तरह से शादाब से कस कर लिपट गई और बोली:”

” आह मेरे राजा, आज तुझे पूरा हक मुझ पर, मेरा सब कुछ तेरा हैं अब हमेशा के लिए।

दोनो मा बेटे एक दूसरे की आंखो में देख रहे थे और शादाब की नजरे बार बार शहनाज़ के रस टपकाते हुए लिप्स पर ठहर रही थी। दोनो मुस्कुरा दिए और शहनाज़ ने अपनी जीभ निकाल कर अपने होंठो को रस से पूरी तरह से गीला कर दिया तो शादाब के होंठ अपने आप शहनाज़ के होंठो की तरफ बढ़ गए। शादाब ने शहनाज़ का मुंह से उपर किया तो शहनाज़ का चेहरा शर्म से लाल हो गया और शादाब ने अपने प्यासे होंठ अपनी दुल्हन, अपनी शहनाज़ के होंठो पर टिका दिए। जैसे ही शहनाज़ को अपने बेटे के होंठो का स्पर्श हुआ तो उसकी आंखे मस्ती से बंद हो गई और उसके हाथ शादाब की गर्दन में कस गए तो शादाब ने शहनाज़ के होंठो को चूसना शुरू कर दिया और उसके हाथ शहनाज़ के बालो को सहलाने लगे। शहनाज़ भी पूरी तरह से किस में डूब गई और उसने भी अपने बेटे के होंठो को चूसना शुरू कर दिया तो शादाब ने कसकर बिल्कुल अपने करीब कर लिया जिससे लंड फिर से शहनाज़ की जांघो में घुस गया। लंड लगते ही शहनाज़ पूरी तरह से जोश में आ गई और शादाब के कभी उपर वाले तो कभी नीचे वाले होंठ को पूरी ताकत से चूसने लगी।

शादाब भी शहनाज़ के होंठो को किसी रसभरी की तरह से चूस रहा था और उसके हाथ शहनाज़ की गर्दन को मसल रहे थे जिससे शहनाज़ मदहोश होती जा रही थी। शादाब ने अपनी जीभ बाहर निकाली और शहनाज़ के दांतो पर दबाव दिया तो शहनाज़ का मुंह खुल गया और शादाब की जीभ उसके मुंह में घुसती चली गई। जैसे ही शहनाज़ की जीभ शादाब की जीभ से टकराई तो शहनाज़ का रोम रोम सुलग उठा और अपनी चूत को शादाब के लंड पर रगड़ने लगीं। दोनो मा बेटे की जीभ अब एक दूसरे के मुंह में घुस रही थी।

जब दोनो की सांसे उखड़ने लगी तो दोनो कर होंठ सांस लेने के लिए अलग हुए और फिर से जुड़ गए। शादाब के हाथ इस बार शहनाज़ की कमर को मसल रहे थे जिससे शहनाज़ उसके होंठ पूरे जोश में चूस रही थी। एक लंबे किस के बाद आखिर कार दोनो को अलग होना पड़ा और शादाब ने शहनाज़ की आंखो में देखा जो किस की वजह से लाल सुर्ख होकर दहक रही थी। शादाब ने शहनाज़ के लहंगे पर रख दिया तो शहनाज़ शादाब से मुंह नीचा करके शरमाते हुए बोली:”

” आह पहले लाइट बंद कर दीजिए ना आप।

शादाब समझ गया कि शहनाज़ लाइट की वजह से ज्यादा शर्मा रही है इसलिए उसने उठकर लाइट बन्द कर दी और बोला:”

” शहनाज़ मेरी जान, अगर आपकी इजाज़त हो तो कुछ मोमबत्तियां जला दू ?

शहनाज़ अपना मुंह नीचे किए हुए ही बोली:” शादाब मैं आज तक किसी के सामने पूरे कपडे नहीं निकाले है बेटा। इसलिए तू रहने दे।

शादाब:” आह शहनाज़ आज तो आपका बेटा आपको पूरी तरह से नंगी करके प्यार करेगा।

शहनाज़ अपने आप में ही सिमट सी गई और बोली:”

” तेरे लिए तो मेरी जान भी हाज़िर है मेरे राजा।

शादाब:’ अगर आपकी इजाज़त हो तो मैं कुछ मोमबत्तियां जला दू मेरी जान ?

शहनाज़ ने सिर हिलाकर अपनी सहमति दे दी तो शादाब ने कमरे में रखी गई मोमबत्तियों को जलाना शुरू कर दिया तो शहनाज़ भी उसका सहयोग करने लगी।

जल्दी ही पूरा कमरा मोमबत्तियों की हल्की रोशनी से भर गया और उसमे शहनाज़ पहले से ज्यादा सेक्सी और खुबसुरत नजर आने लगी। शहनाज़ बेड पर लेटी हुई थी और शादाब आगे आकर उसके उपर चढ़ गया तो शहनाज़ ने अपने दोनो हाथ उसकी कमर पर बांध दिए। शादाब ने शहनाज़ के माथे को चूम लिया और फिर धीरे धीरे उसकी आंखो को प्यार करने लगा। शहनाज़ ने अपने जिस्म को पूरी तरह से ढीला छोड़ दिया और शादाब का लंड उसकी जांघो में घुसा जा रहा था।

शादाब ने नीचे आते हुए शहनाज़ के गाल पर अपने होंठ टिका दिए और चूसने लगा। शहनाज़ ने अपने दोनो हाथों से शादाब की कमर को सहलाना शुरू कर दिया तो शादाब ने जोश में आते हुए शहनाज़ के गुलाबी गाल को मुंह में भर कर काट किया तो शहनाज़ के होंठो से आह निकल पड़ी।

” उफ्फ आराम से मेरे राजा, दर्द होता हैं मुझे।

शादाब उसके गाल को सहलाते हुए कहा:” ” मेरी जान शहनाज़ आज की रात तो तुम्हे बहुत दर्द होंगे मीठे मीठे इस से भी बढ़कर।

शहनाज़ ने उसकी बात सुनकर उसे जोर से कस लिया और बोली:” आह मेरे राजा, आज तेरी मा हर दर्द सहने के लिए तैयार हैं तेरे लिए।

शादाब ने शहनाज़ के दोनो गालों को बारी बारी से चूमा, चाटा और हल्का हल्का दांतो से काट काट कर लाल कर दिया। शादाब ने अब अपने होंठ फिर से शहनाज़ के होंठो पर टिका दिए और चूसने लगा तो शहनाज़ भी उसका साथ देने लगी। शादाब का एक हाथ नीचे सरक कर उसकी चूचियों पर अा गया और हल्का हल्का दबाने लगा तो शहनाज़ ने अपने दोनो हाथ शादाब की कमर पर घुमाने शुरू कर दिए।

शादाब ने शहनाज़ की कान की लौ को जीभ से चाटना शुरू किया तो शहनाज़ के जिस्म में बिजली सी दौड़ने लगी और उसकी सिसकी निकल पड़ी। शादाब ने जैसे ही उसकी लौ दांतो से हल्का सा काटा तो शहनाज़ की सिसकियां तेज होने लगी और वो शादाब की गांड़ पर हाथ फेरने लगी। शादाब ने नीचे आते हुए शहनाज़ की गर्दन पर अपने होंठ टिका दिए और उसकी गर्दन को चाटने लगा।

शहनाज़ से ये सब बर्दाश्त नही हुआ और उसकी गर्दन अपने आप ही शादाब की जीभ पर थिरकने लगी। (शहनाज़ को आज पहली बार एहसास हो रहा था कि प्यार क्या होता हैं, उसके पति ने सीधे लंड घुसा दिया था)!

शहनाज़ ने अपना हाथ नीचे लाते हुए शहनाज़ के सूट को पकड़ लिया और उपर की तरफ बढ़ाने लगा तो शहनाज़ की सांसे तेज होने लगी और चूत गीली हो गई। शहनाज़ ने अपने दोनो हाथ उपर उठा दिए और शादाब ने उसका सूट उतार दिया तो शहनाज़ शर्म के मारे शादाब से कसकर लिपट गई तो शादाब के हाथ उसकी नंगी कमर पर जा लगे तो शहनाज़ के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी।

” आह शादाब मेरे राजा, उफ्फ

शादाब ने शहनाज़ की कमर को अपने हाथो में भर कर सहलाना शुरू कर दिया तो शहनाज़ किसी अमर बेल की तरह उससे लिपट गई। शादाब उसकी कमर दबाते हुए कहा:’

” आह अम्मी, आपकी कमर कितनी चिकनी और पतली हैं मेरी शहनाज़ !!

इतना कहकर उसने शहनाज़ की कमर को जोर दे दबा दिया तो शहनाज़ मस्ती से सिसक उठी और बोली:”..
” आह मेरे शादाब थोड़ा प्यार से राजा, सब कुछ तेरे लिए ही है मेरी जान।

शादाब के हाथ शहनाज़ की कमर से होते हुए उसकी गांड़ तक पहुंच गए और वो प्यार से शहनाज़ की गांड़ सहलाने लगा। शहनाज़ तो जैसे पागल ही हो गई और अपने दोनो हाथ अपने बेटे के हाथो पर रख दिए और अपनी गांड़ को दबाने लगी। शादाब ने अब शहनाज़ की सलवार के नाड़े को एक झटके में खोल दिया तो शहनाज़ के मुंह से उत्तेजना में फिर से सिसकी निकल पड़ी और शादाब ने उसकी सलवार को नीचे सरका कर उतार दिया तो अब शहनाज़ सिर्फ ब्रा पेंटी में पड़ी हुई थी और शर्म के मारे अपने आप में सिमट रही थी। (कमरे में जल रही मोमबत्तियां मैजिक कैंडल की तर्ज पर बनी हुई जिनका प्रकाश थोड़ी देर के बाद ट्यूब लाइट से भी तेज हो जाता हैं और अब धीरे धीरे कमरे में प्रकाश बढ़ रहा था) शहनाज़ की गांड़ सिर्फ पेंटी में थी।

शहनाज़ शर्म के मारे पेट के बल लेट गई और शादाब ने अपने हाथ आगे बढ़ा कर उसकी गांड़ को पकड़ लिया और दोनो हाथो में भर कर जोर जोर से दबाने लगा। शहनाज़ मस्ती से भर उठी और सिसकते हुए बोली:”

” आह शादाब, उफ्फ थोड़ा प्यार से मेरी जान,

शादाब अपनी अम्मी की सिसकियां सुनकर जोश में अा गया और पूरी ताकत से उसकी गांड़ दबाने लगा।

शहनाज़ पूरी तरह से मस्ती में सिसकते हुए:”

” आह मार ही देगा क्या मुझे, उफ्फ दर्द होता हैं राजा थोड़ा प्यार से मसल।

शादाब उसकी के पटो को खोलकर अंदर की तरफ दबाते हुए:” आह शहनाज़, कितनी मस्त उभरी हुए गांड़ हैं तेरी, दबाने दे जोर जोर से आह टाइट है।

शादाब के मुंह से अपनी गांड़ की तारीफ सुनकर शहनाज़ बहक गई और अपनी गांड़ खुद ही उसके हाथो में मारने लगी और बोली:”

” आह मेरे राजा, मसल पूरी तरह से रगड़ मुझे ऐसे ही, दबा पूरी भर भर दबा मुझे।

शादाब ने शहनाज़ की गांड़ को पूरी अपने हाथो में भर लिया और जोर जोर से मसलने लगा तो शहनाज़ सिसकते हुए बोली:”

” आह मेरे बच्चे,तेरे हाथ तो मेरी गांड़ के लिए ही बने हैं, उफ्फ कितनी बड़ी हैं फिर भी पूरी समा गई।

शादाब ने शहनाज़ की गांड़ को पूरी तरह से दबा दबा कर लाल कर दिया और शहनाज़ मस्ती से अपनी गांड़ मसलवाती रही। शादाब ने एक हाथ से शहनाज़ की गांड़ दबाते हुए दूसरे हाथ से खुद को नंगा करना शुरू कर दिया और उसके जिस्म पर अब सिर्फ अंडर वियर बचा हुआ था।

शहनाज़ की गांड़ को जी भर कर दबा कर लाल सुर्ख कर देने के बाद शादाब शहनाज़ की पीठ पर लेट गया तो शहनाज़ को उसके नंगे होने का एहसास हुआ और उसके मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी। शादाब उसकी गर्दन चाटते हुए अपना खड़ा हुआ लंड उसकी गांड़ में घुसाने लगा। शहनाज़ की चूत पूरी तरह से गीली हो गई और कच्छी भीग चुकी थी। शादाब ने अब शहनाज़ की कमर को चूमना शुरू कर दिया तो शहनाज़ की सिसकियां निकलने लगी।

शादाब अपनी जीभ निकाल कर शहनाज़ की कमर को चाटने लगा तो शहनाज़ ने दोनो हाथो से बेड शीट को दबोच लिया और अपनी चूची और चूत बेड शीट पर रगड़ते हुए बोली:”

” आह मेरे राजा, उफ्फ ऐसे ही प्यार कर मुझे, बहुत प्यासी है तेरी अम्मी शादाब।

शादाब की जीभ जैसे ही शहनाज़ की ब्रा से टकराई तो दोनो मा बेटे एक साथ मस्ती से सिसक पड़ें। शादाब ने शहनाज़ की ब्रा के हुक को दांतो से भर लिया और खोलने लगा तो शहनाज़ का पूरा जिस्म मचलने लगा। शादाब ने ब्रा के हुक को खोल दिया तो शहनाज़ की कमर पूरी तरह से नंगी हो गई और शहनाज़ फिर से सिसक उठी। शादाब में अपनी जीभ से उसकी पूरी कमर को चाटना शुरू कर दिया तो शहनाज़ से बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने ने हल्की सी अपनी कमर उपर उठाई और अपने दोनो हाथ अपनी चुचियों के नीचे टिका दिए। जैसे ही उसकी कमर नीचे अाई तो चूचियां अपने आप दबती चली गई और शहनाज़ का मुंह मस्ती से खुल गया :”

” आह मेरे राजा, उफ्फ मेरा शादाब।

शादाब ने उसकी कमर को हल्का हल्का काटना शुरू किया तो शहनाज़ पागल हो उठी और एक हाथ से अपनी चूची को दबाते हुए दूसरे हाथ से चूत को पकड़ कर जोर से दबा दिया। शादाब ये सब देख कर आपे से बाहर हो गया और शहनाज़ को पलट दिया तो शर्म के मारे शहनाज़ ने दोनो हाथो से अपनी चुचियों को ढक लिया और आंखे बंद कर ली।

शादाब ने अपने हाथ शहनाज़ के हाथो पर टिका दिए और उसकी चूचियों को हल्का हल्का दबाने लगा। शादाब का लंड अब उसकी चूत पर गड़ गया था और शादाब हल्के हल्के धक्के मार रहा था जिससे शहनाज़ पूरी तरह से मदहोश हो गई। शादाब ने उसके हाथो को हटाना चाहा तो शहनाज़ ने जोर से अपनी चूचियों को पकड़ लिया क्योंकि आज तक उसने खुद भी अपनी चूची और चूत को नहीं देखा था।

शादाब: ” आह अम्मी क्यों तड़पा रही हो, उफ्फ हाथ हटा लो ना ?

शहनाज़ कांपते हुए:” आह राजा,मुझे शर्म आती हैं, आज तक मैंने खुद ही इन्हे नहीं देखा और ना ही कभी अपनी टांगो के बीच झांका हैं।

शादाब अपनी अम्मी की सुनकर मस्ती में अा गया और शहनाज़ का एक हाथ पकड़ कर नीचे की तरफ ले जाने लगा तो शहनाज़ ने दूसरे हाथ की कोहनी से अपनी दोनो चूचियों को छिपा लिया। शादाब ने शहनाज़ का हाथ अपने लंड पर टिका दिया तो शहनाज़ की चूत कुलबुलाने लगी। शादाब ने शहनाज़ के हाथ से धीरे धीरे अपने अंडर वियर को नीचे सरकाना शुरू कर दिया और जैसे ही अंडर वियर उतरा तो लंड अपने आप शहनाज़ के हाथ में अा गया। शहनाज़ के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी और उसने लंड को हाथ में थाम लिया और शादाब ने शहनाज़ का दूसरा हाथ उसकी चूचियों पर से हटा दिया। शहनाज़ के मुंह से एक जोरदार सिसकी निकल पड़ी और उसके शर्म और उत्तेजना के मारे अपनी आंखो को बंद कर लिया।

” आह मेरे शादाब, उफ्फ ये कर दिया बेटा, हाय मेरी चूची देख ली
तूने राजा।

शादाब ने अपनी नजरे पहली बार शहनाज की चुचियों पर टिका दी। एक दिन गोल गोल मोटी तनी हुई ठोस चूचियां, बिल्कुल किसी मोटे कश्मीरी सेब के आकार की। बीच में तने हुए निप्पल एक दम सीधे खड़े हुए।

शादाब ने अपने दोनो हाथ आगे बढ़ा कर शहनाज़ की चूचियों पर रख दिए और उन्हें हल्के हल्के सहलाने लगा। शहनाज़ की चूचियां पूरी तरह से अकड़ी हुई थी और शादाब को निप्पल चुनौती दे रहे थे। शादाब ने अपनी मा की चूचियों को दोनो हाथो में भर कर जोर से दबा दिया तो शहनाज़ के मुंह से एक जोरदार मस्ती भरी आह निकल पड़ी।

” आह शादाब, थोड़ा प्यार से मेरे राजा, उफ्फ दबा धीरे धीरे अच्छा लग रहा है।

शादाब तो पिछले छह दिन से तड़प रहा था शहनाज़ की चूचियों को दबाने के लिए इसलिए उसने पूरी जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया तो शहनाज़ की चूचियां में हल्का हल्का मीठा मीठा दर्द होने लगा और उसकी आह निकल गई और उसने जोर से अपने बेटे के लंड को दबा दिया तो शादाब मस्ती से भर उठा और जोर जोर से उसकी चूचियां दबाने लगा।

शहनाज के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगीं और वो अपनी चूचियां उपर की तरफ उछालने लगी जिससे शादाब मस्त हो गया और एक निप्पल को अपनी उंगलियों में भर कर मसल दिया तो शहनाज़ दर्द और मस्ती दे कराह उठी।

” आह मेरे शादाब, उखाड़ ही देगा क्या राजा मेरी चूचियां आज ?

शादाब :” आह अम्मी आपकी चूचियां कितनी सख्त हैं, उफ्फ कितना मजा आ रहा है आह मेरी शहनाज़ उफ्फ ।

शहनाज़ की चूत पूरी तरह से भीग चुकी थी और रस जांघो तक बह रहा था। शहनाज़ ने शादाब के लंड को मसलना शुरू कर दिया तो शादाब ने झुक कर शहनाज़ की एक चूची के उभार को चाटना शुरू किया तो शहनाज़ का जिस्म मस्ती से हवा में उड़ने लगा और उसका एक हाथ अपने शादाब के सिर पर पहुंच हुआ और उसे उसे अपनी चूची पर दबाने लगी। शादाब ने अपना मुंह खोल कर उसकी एक चूची को मुंह में भर लिया तो शहनाज़ के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी और उसकी चूत ने दो बूंद रस और टपका दिया तो शहनाज़ से अब बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने शादाब का हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर टिका दिया।चूत पर हाथ लगते ही दोनो मा बेटे आपे से बाहर हो गए और शादाब ने उसकी चूची को जोर जोर से चूसना शुरू किया तो शहनाज़ की आंखे मस्ती से बंद हो गई और बोली:”

“आह मेरे बेटे, चूस ले मेरी चूचियों को, उफ्फ कहां था तू अब तक ?

शादाब ने शहनाज़ के निप्पल को जोर जोर से चूसा तो शहनाज़ शादाब का लंड मसलने लगी और शादाब ने शहनाज़ की पेंटी को एक तरफ सरका दिया और उसकी टपकती हुई चूत को उंगली से सहलाने लगा। शहनाज़ से बर्दाश्त नहीं हुआ और वो अपनी टांगे पटकते हुए शादाब को अपने उपर खींचने लगी तो शादाब उसके बेट को चूमने लगा। शहनाज़ को गुदगुदी हो रही थी और चूत पूरी तरह से बह रही थी। शहनाज़ का जिस्म पूरी तरह से गरम हो गया था और वो अपने टांगे बुरी तरह से पटक रही थी, कभी मचल रही थी तो कभी जोर जोर से सिसक रही थी।

शादाब ने अब शहनाज़ की जांघो को चूमना शुरू कर दिया तो शहनाज़ खुद ही जोर जोर से अपनी चूचियां दबाने लगी। कमरे में पूरी तरह से प्रकाश फैल गया था लेकिन शहनाज़ को अब कोई शर्म या हया नहीं रही थी। शादाब ने जैसे ही उसकी पेंटी को पकड़ कर खींचा तो शहनाज़ ने अपनी गांड़ उपर उठा दी और शादाब ने उसे पूरी तरह से नंगा कर दिया तो शहनाज़ का बदन पूरी तरह से कांपने लगा और उसने अपनी टांगो को भींच लिया। शादाब ने धीरे से उसकी टांगो को खोल दिया तो शहनाज़ ने शर्म के मारे आंखे बंद कर ली । शादाब ने पहली बार शहनाज़ की चूत को देखा। गुलाबी रंगत लिए हुए दो होंठ एक दूसरे में बिल्कुल घुसे हुए और पूरी तरह से रस से भीगे हुए, एकदम छोटी सी चिकनी मासूम चूत, चूत का दाना पूरी तरह से अकड़ कर खड़ा हुआ। शादाब ने चूत पर उपर से नीचे एक उंगली फिरा दी तो शहनाज़ जोर से सिसक उठी। शादाब ने अब उसकी जांघो को चूमना शुरू कर दिया तो शहनाज़ का जिस्म मस्ती से उछलने लगा। शादाब के होंठ जैसे ही उसकी चूत के पास पहुंच गए तो शहनाज़ ने उसका सिर थाम लिया और बोली:”

” आह शादाब, वहां नहीं बेटे, उफ्फ गंदी हैं वो।

शादाब ने अपने दोनो हाथों से शहनाज़ के हाथो को पकड़ लिया और जीभ निकाल कर उसकी चूत पर फेर दी।

चूत पर जीभ लगते ही शहनाज़ मस्ती से उछल पड़ी और सिसकते हुए बोली:’

” उफ्फ शादाब, वहां मत चूम बेटे, मुझे कुछ होता है, आह हाय मा हट जा बेटा।

शादाब ने शहनाज़ की टांगो को पूरी खोल दिया और उसकी चूत को चाटने लगा तो शहनाज के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी

” आह शादाब,उफ्फ कितना अच्छा लग रहा है, चूस ले तू अपनी मा की चूत, मेरी जान हैं तू

शादाब ने शहनाज़ के दोनो हाथ पकड़ लिए और उसकी चूत के अंदर अपनी जीभ घुसा दी तो शहनाज़ बिस्तर पर पड़ी पड़ी उछलने लगी और मुंह उठा कर शादाब को देखने लगी। जैसे ही शादाब ने उसकी चूत के दाने को मुंह में भर कर चूसा तो शहनाज़ ने उसे अपनी टांगो के बीच में भींच लिया और अपनी गांड़ उठा उठा कर उसके मुंह पर मारने लगी

” आह मेरे शादाब, चूस अपनी अम्मी की चूत, आह कितना अच्छा है तू।

शादाब ने जैसे ही उंगली से उसकी चूत को सहलाया तो शहनाज़ पूरी तरह से तड़प उठी और अपनी पूरी ताकत लगाकर शादाब को अपने उपर खींच लिया। शादाब शहनाज़ के उपर छा गया और दोनो के नंगे जिस्म आपस में चिपक गए। शहनाज़ की चूत पूरी तरह से रस से लबालब भरी हुई थी और शादाब शहनाज़ के होंठो को चूसने तो शहनाज़ ने अपने हाथ से पकड़ कर लंड को खुद ही अपनी चूत पर टिका दिया और शादाब को जोर से कस लिया। शादाब का मोटा मूसल अपनी चूत पर लगाकर शहनाज़ डर के मारे कांप उठी। शादाब ने लंड का सुपाड़ा उसकी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया और रस से पूरी तरह से सुपाड़ा भीग गया।

लंड की रगड़ से शहनाज़ तड़प उठी और अपनी चूत खुद ही उठाने लगीं। शादाब ने एक बार शहनाज़ की आंखो में देखा तो शहनाज़ हल्का सा मुस्कुरा उठी और शर्म से अपनी आंखे बंद कर ली तो शादाब ने शहनाज़ के होंठो को मुंह में भर लिया और दोनो हाथो से उसकी चूचियां भरकर लंड का सुपाड़ा का धक्का शहनाज़ की चूत पर लगा दिया लेकिन लंड फिसल गया और उसकी जांघ से जा लगा। शहनाज़ को लगा कि कोई लोहे की रॉड उसकी जांघ से टकरा गई है। शहनाज़ सिसक उठी और उसने खुद लंड को चूत के छेद पर टिका दिया तो शादाब में एक जोर का धक्का मारा और मोटा तगड़ा सुपाड़ा अन्दर घुस गया

शहनाज़ के होंठो से एक दर्द और मस्ती भरी आह निकल पड़ी

” उफ्फ शादाब, आह कितना मोटा है ये, दर्द होता है। हाय शादाब, घुसा दे पूरा अंदर,

शादाब ने शहनाज़ के होंठो को मुंह में भर लिया और उसकी दोनो चूचियों को हाथो में थाम लिया और लंड का एक और जोरदार धक्का लगाया तो आधा लंड शहनाज़ की चूत में घुस गया। शहनाज़ दर्द से कराह उठी और शादाब से कसकर लिपट गई। शहनाज़ की आंखो से आंसू निकल पड़े जिन्हे शादाब ने अपनी जीभ से चाट लिया और शहनाज़ की आंखे खुल गई और अपने बेटे का प्यार देख कर दर्द में भी मुस्कुरा उठी और शादाब को देखने लगी। शादाब ने अब तक का सबसे जोरदार धक्का लगाया और शादाब का लंड शहनाज़ की चूत को फाड़ते हुए जड़ तक घुस गया। शहनाज़ को लगा जैसे उसके अंदर कोई मोटा मूसल घुसेड़ दिया गया हैं और वो दर्द से कराहती हुई शादाब से बुरी तरह से लिपट गई और उसके मुंह से निकली एक जोरदार चीनख़ पूरे घर में गूंज उठी।

” आह नहीं शादाब, मर गई मेरी अम्मी, हाय बहुत दर्द हो रहा है

लंड सीधे बच्चेदानी से जा टकराया और इस अदभुत एहसास को महसूस करते ही शहनाज़ के सब्र का बांध टूट गया और उसकी चूत ने अपना रस छोड़ दिया।

” आह बेटे, उफ्फ ये क्या हो गया, गई मेरी चूत, हाय अल्लाह,

शहनाज़ ने उपर उठते ही शादाब के होंठ चूम लिए और बोली:”

” आह मेरे राजा, बस घुसा लिया, अब हट जा मुझे बाथरूम जाना हैं शादाब।

शादाब ने शहनाज़ को पूरी तरह से कस लिया और लंड को पूरी ताकत से बाहर निकाला और फिर से एक ही धक्के में पूरा घुसा दिया। शहनाज़ दर्द और मस्ती से सिसक उठी और बोली:_

” ये क्या था मेरे राजा, बहुत अच्छा लगा, उफ्फ दर्द होता है अभी बहुत।

शादाब उसकी चूचियों को दबाते हुए:’

” आह अम्मी इसे चुदाई कहते हैं,कितनी टाइट और गर्म हैं आपकी चूत।

शहनाज़ ने शादाब की आंखो में देखते हुए बोली:”

” उफ्फ बेटे, तेरे पापा तो एक ही बार में घुसा कर मेरे अंदर माल छोड़ देते थे। मुझे क्या पता चुदाई इसे कहते हैं।

शादाब ने धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और शहनाज़ तो जैसे मस्ती से पागल सी हो गईं और शादाब के होंठो को चूसने लगी। सख्त लंड का सुपाड़ा चूत को पूरी तरह से रगड़ रहा था।
शहनाज़ मस्ती से अपने की आंखो में देखते हुए बोली:”

” आह राजा, बहुत मजा आ रहा हैं, ऐसा लग रहा है जैसे मूसल की तरह मसाला कूट रहा है तेरा लंड, कूट शादाब मेरी चूत का मसाला आह सआईआईआईआईआई उफ्फ

कुछ धक्कों के बाद चूत शहनाज़ के लंड से हिसाब से खुल गई तो अब दर्द तो जैसे खतम हो गया और बस मजा ही मजा रह गया। शहनाज़ ने नीचे से अपनी गांड़ उठानी शुरू कर दी और शादाब उसके होंठ चूसते हुए प्यार से धक्के लगाने लगा। दोनो अब एक दूसरे की आंखो में देखते हुए धक्के लगा रहे थे, जैसे ही शादाब लंड बाहर की तरफ खींचता तो शहनाज़ अपनी चूत उठा देती जिससे लंड अंडर घुस जाता और शहनाज़ का मुंह मजे से खुल जाता।

” आह शादाब, चुदाई में इतना मजा आता हैं आज पता चला, करता रह ऐसे ही हाय शादाब तेरा लंड कितना अच्छा है मेरे राजा,

शादाब ने लंड को पूरा बाहर निकाला तो शहनाज़ तड़प उठी और लंड को हाथ में पकड़ कर चूत में घुसाने लगी तो शादाब ने एक जोरदार धक्का लगाया और लंड जड़ तक घुसा दिया और बोला;_

” आह मेरी शहनाज़ ये लंड नहीं लोला हैं मेरी जान, हाय अम्मी तेरी चूत।

शहनाज़ इस धक्के से मस्ती से भर उठी और शादाब की तरफ देखते हुए बोली;_
” आह शादाब का लोला, मेरे बेटे का लोला घुस गया मेरी चूत में, मेरी चुदाई कर रहा है शादाब तू, चोद अपनी मां की चूत बेटा, आह

शादाब ऐसे ही प्यार से धक्क लगाता रहा और शहनाज़ की मस्ती भरी सिसकारियां पूरे घर में गूंज रही थी। शहनाज़ की चूत से अब फच फ़च की मधुर आवाज गूंज रही थी जो कमरे के माहौल को और गर्म कर रही थी। शादाब शहनाज की एक चूची को मुंह में भर कर चूस रहा था तो दूसरी को जोर जोर से भींच रहा था। शहनाज़ की टाइट चूत का असर लंड पर होने लगा तो शादाब ने पूरा लंड बाहर निकाला और एक तेज झटके के साथ शहनाज़ की चूत में घुसा दिया और लंड सीधे बच्चेदानी को जा लगा। शादाब ने कसकर शहनाज़ को भींच दिया मानो उसकी हड्डी ही तोड़ देना चाहता हो।

” आह शहनाज़ तेरी मा की चूत, एसआईआईआईआईए, गया मैं तो मेरी जान।

शादाब के लंड ने वीर्य की पिचकारी मारने शुरू कर दी और इसके साथ ही शहनाज़ ने भी अपनी चूत पूरी ताकत से लंड पर दबा दी और बेटे के चेहरे को बहुत बुरी तरह से चूमने लगी।

” आह शादाब, मर गई मेरी चूत, हाय उफ्फ

शहनाज़ की चूत ने एक बार फिर से अपना रस बहा दिया और वो शादाब से पूरी ताकत से लिपट गई। शादाब शहनाज़ की चुचियों पर गिर पड़ा और शहनाज़ ने उसकी कमर पर अपने दोनो हाथ लपेट दिए और उसे पूरी तरह से कस लिया।
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शादाब ऐसे ही शहनाज़ के उपर पड़ा रहा और दोनो मा बेटे एक दूसरे की तरफ प्यार से देखते हुए अपने सांसे दुरुस्त कर रहे थे। शहनाज़ ने थोड़ा उपर की तरफ उठते हुए अपने बेटे के गाल को चूम लिया। शादाब के होंठो पर मुस्कान अा गई और बोला:”

” बहुत प्यार अा रहा हैं अपने बेटे पर आज आपको ?

शहनाज़ उसकी तरफ स्माइल करते हुए अपने हाथ उसकी कमर पर थोड़ा और जोर से कस देती है और बोली:”

“मेरा बेटे है ही प्यार करने लायक। लव यू शादाब आज मुझे लगता है कि मैं तेरे बिना कितनी अधूरी थी।

शहनाज़ के बाल उसके चेहरे पर अा गए तो शादाब उन्हें प्यार से हटाते हुए बोला:”

” ऐसा कर कर दिया आपके बेटे ने जो आप अपने आपको पूरा समझने लगी हो ?

शहनाज़ एक दम से शर्मा गई और अपने आपको शादाब की छाती में छुपा लिया। शादाब ने थोड़ा झुकते हुए शहनाज़ के कंधे चूम लिए और बोला:”

” बताओ मा मेरी जान शहनाज़, अब पूरी नंगी मेरी बांहों में लेती हो और फिर भी शर्मा रही हो ?

शहनाज़ को अपनी हालत का एहसास हुआ और वो शादाब की कमर में हल्का हल्का मारने लगी और बोली:”

” उफ्फ कितना तंग करता हैं तुझे मुझे, अब तुझे कैसे बताऊं मेरे राजा?

शादाब :” बस प्यार से बता दो मेरी जान, अब हमारे बीच में कोई पर्दा नहीं रहना चाहिए।

शहनाज़:” लेकिन बेटा मुझे शर्म आती हैं, अच्छा चल पहले मुझे उठने दे !

शहनाज़ उसे अपने ऊपर से हटाने लगती हैं तो शादाब कसकर उसके कंधे थाम लेता हैं और बोला'”
” ऐसे कैसे जाने दू मेरी जान, अभी तो हमारा प्रेम मिलन शुरू हुआ हैं, अभी तो रात बाकी हैं।

शहनाज़ फिर से शर्मा जाती हैं तो शादाब बोला:”

” अम्मी प्लीज़ बताओ ना आप मुझे, आप कैसे पूरी हो गई ?

इतना कहकर शादाब शहनाज़ की कान की लौ को अपनी जीभ से सहलाने लगता हैं तो शहनाज़ फिर से अपने होश खोने लगती है, वो अपने बेटे के नीचे एक बार फिर से मचलना शुरू कर देती हैं तो शादाब जैसे ही उसकी कान की लौ को हल्का सा दांतो से काटता हैं तो शहनाज़ के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल गई

” आह्ह शादाब, उफ्फ मत कर बेटा, मुझे कुछ होता है।

शादाब:” आहह मेरी जान, अभी तो बहुत कुछ होगा देखती जाओ तुम !

शहनाज़ के जिस्म में फिर से उत्तेजना छाने लगी और शहनाज़ की चूचियों के निप्पल फिर से कड़क होने लगे जिनका एहसास शादाब को अपनी छाती पर होने लगा तो उसने अपनी छाती से ही शहनाज़ की चूचियों को रगड़ना शुरू कर दिया तो शहनाज़ की आंखे खुल गई और लाल सुर्ख होकर दहकने लगे और सांसे भारी होने से चूची उछलने लगी मानो खुद ही अपने आपको मसलवाना चाहती हो।

शादाब शहनाज़ की चूचियों को जोर से रगड़ते हुए बोला:”

” आह अम्मी बताओ ना कैसे पूरी हो गई आप ?

शहनाज़ के उपर अब जिस्म का बुखार फिर से चढ़ गया था इसलिए वो मचलती हुई बोली:”

” आह शादाब आज जो सुख तूने दिया तो मुझे कभी महसूस नहीं हुआ राजा।

शादाब के लंड में भी तनाव आने लगा तो वो शहनाज़ की जांघो में घुस गया जिससे शहनाज़ पूरी तरह से मस्त हो गई और शादाब की कमर सहलाने लगी तो शादाब बोला:”

” आह अम्मी ऐसा कौन सा सुख दे दिया आपके बेटे ने आपको जो पहले नहीं मिला था?

शहनाज़ की चूत फिर से भीगने लगी और वो अपने पैरो को अपने बेटे के पैरो से रगड़ने लगी और आंखे बंद करके बोली:”

” शादाब मूसल तो मेरी औखली में पहले भी घुसा था, लेकिन मसाला आज पहली बार तूने ही कूटा हैं मेरे राजा!

शहनाज़ ने अपनी जांघो को थोड़ा सा खोल दिया तो लंड चूत पर दबाव बनाने लगा तो शहनाज़ तड़प उठी और अपनी चूत हिलाने लगी तो शादाब ने शहनाज़ के होंठो पर अपने होंठ रख दिए और दोनो मा बेटे एक दूसरे को होठ चूसने लगे।शहनाज़ किसी दूसरी ही दुनिया में मस्ती कर रही थी और उसने खुद ही अपनी जीभ शादाब के मुंह में घुसा दी और चूसने लगी।

शादाब भी अपनी अम्मी का साथ देने लगा और एक लंबे किस के बाद दोनो के होंठ अलग हुए तो लंड पूरी तरह से अकड़ कर मूसल बन चुका था और चूत फिर से पूरी भीगकर उसका स्वागत करने को तैयार थी।

दोनो मा बेटे के दूसरे की आंखो में देख रहे थे और शादाब लंड को चूत पर रगड़ रहा था जिससे शहनाज़ पूरी तरह से तड़प रही थी और लंड लेने के लिए चूत उपर उठा रही थी लेकिन शादाब उसे तड़पा रहा था। शहनाज से बर्दास्त नहीं हुआ और बोली:”

” आह शादाब मुझे प्यार कर बेटा, बहुत प्यासी हैं तेरी मा?

शादाब लंड का थोड़ा दबाव बढ़ाते हुए:” अम्मी प्यार कर रहा हूं, तभी तो आप इतने करीब हो मेरे शहनाज़।

इतना कहकर शादाब उसके गाल चूम लेता हैं और लंड को चूत की कलिट पर जोर से रगड़ा देता है तो शहनाज़ उससे पागल सी होकर लिपट गई और सिसकते हुए बोली:

” आह राजा किस वाला नहीं, नीचे वाला, मूसल दे दे मुझे

शादाब शहनाज़ को पूरी तरह से खोलना चाहता था ताकि आराम से दोनो मा बेटे मस्ती कर सके इसलिए उसने एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी चूत पर रख दिया और सहलाते हुए बोला:”

” आह अम्मी, मूसल तो आपके पास ही पास हैं, देखो ना आपकी टांगो में घुसा हुआ हैं।

इतना कहकर उसने शहनाज़ की चूत को लंड के साथ साथ उंगली से सहलाना शुरु कर दिया और एक उंगली थोड़ी सी अंदर घुसा दी तो शहनाज़ ने खुद ही अपना हाथ लंड पर रख दिया और बोली:”

” आह उंगली नहीं राजा, ये मूसल घुसा दे मेरे अंदर ।

शादाब :” आह अम्मी मूसल नहीं इसे लोला कहते है मेरी शहनाज़ ?

इतना कहकर शादाब ने शहनाज़ की गर्दन को चाटना शुरू कर दिया तो शहनाज़ मस्ती से बिफर पड़ी और बोली:”

” आह मेरे शादाब, अपनी अम्मी की चूत में अपना लोला घुसेड़ दे मेरे राजा, चोद ले मुझे!!

इतना कहकर शहनाज़ ने शादाब के लंड को दबा दिया तो शादाब ने लंड का एक धक्का लगाया और सुपाड़ा फिर से शहनाज़ चूत में घुस गया और दर्द के मारे शहनाज़ फिर से तड़पते हुए बोली:

” आह शादाब तेरा लोला, उफ्फ घुसा कर चोद मुझे राजा।

शादाब अपने होंठ शहनाज़ के होंठो पर रख दिए और जोर से धक्का मारा तो आधा लंड अंदर घुस गया और शहनाज़ की चुदाई से लाल हो चुकी चूत में पहले से ज्यादा दर्द हुआ लेकिन मजा भरपूर था इसलिए वो सिसक उठी :”

” आह शादाब, उफ्फ कितना मोटा हैं तेरा लोला, उफ्फ कैसे फैला रहा हैं मेरी चूत, हाय मा उफ्फ दर्द होता हैं

शादाब :” आह अम्मी आपकी चूत बहुत टाइट हैं, बड़ी मुश्किल से घुसता हैं

शहनाज़ उसका मुंह चूमते हुए:”

” चुदाई नहीं हुई मेरी शादाब कभी, आज तुमने ही चोदा हैं मुझे राजा, उफ्फ मार मेरी चूत शादाब,

शादाब ने एक बार लंड को बाहर निकाला और पूरी ताकत से जड़ तक अन्दर घुसा दिया तो शहनाज़ इस हमले से तड़प उठी और सिसकते हुए बोली:”

” आह मा री, मार देगा क्या मुझे ? थोड़ा प्यार से मेरे राजा, उफ्फ तेरी ही चूत ये तो !! पूरा ही घुसा दिया

शादाब का लंड पूरा घुसते ही शहनाज़ दर्द से भर उठी और शादाब ने उपर उठते हुए शहनाज़ की एक चूची को मुंह में भर लिया तो शहनाज़ मस्ती से भर उठी और शादाब का सिर सहलाने लगी तो शादाब ने पूरा मुंह खोलते हुए उसकी चूची को आधे से ज्यादा मुंह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगा तो शहनाज़ मजे से पागल हो गई और आनह भरते हुए बोली:”

” आह शादाब, मेरा बेटा, मेरा राजा, आह

शादाब ने अपने लंड को बाहर निकाला तो वो शहनाज़ की चूत की दीवारों को बुरी तरह से रगड़ते हुए बाहर निकल आया तो शहनाज़ की चूत की फांके लंड के साथ ही खींची चली गई तो शहनाज़ इस एहसास से पूरी तरह से चुदासी हो उठी और बोली:”

“आह शादाब देख कैसे फस रहा है तेरा लोला हाय जैसे मूसल फसता था औखली में!

शादाब शहनाज़ की सिसकी सुनकर जोश में आ गया और एक ही धक्के में पूरा लंड घुसा दिया तो दर्द और मस्ती से शहनाज़ की आंखो के आगे लाल पीले तारे नाच उठे और उसका मुंह मस्ती से अपने आप खुल गया:”

” हाय शादाब, ये लोला तो जैसे मेरी चूत के लिए ही बना हैं राजा, देख ना कैसे अंदर तक पूरा घुस रहा है हाय चोद अब मुझे!!

शादाब शहनाज़ की एक चूची को जोर से मसल दिया तो शहनाज़ दर्द से कराह उठी और शादाब की आंखो में देखने लगी तो शादाब ने लंड को बाहर निकाला और फिर से पूरी ताकत से ठोक दिया तो शहनाज़ मस्ती से उछल पड़ी और बोली:”
” आह शादाब, ऐसे ही बस, बहुत अच्छी हैं चुदाई, उफ्फ हाय मा

शादाब शहनाज़ को ऐसे ही प्यार से चोदने लगा। धक्का जोर से मार रहा था लेकिन धक्कों की स्पीड बहुत हल्की थी जिससे लंड हर बार चूत को पूरा रगड़ रहा था और दोनो में बेटे इस अद्भुत एहसास को पूरी तरह से महसूस कर रहे थे। जैसे ही अंदर अंदर घुसता तो शहनाज़ का हर धक्के पर अपने आप मूह खुल जाता और सिसक पड़ती लेकिन जैसे ही लंड बाहर निकलता तो उसके हाथ शादाब की कमर पर जोर से कस जाते और वो उसे जोर से अपनी तरफ खींचती और लंड फिर से घुस जाता। शहनाज़ की पायल और चूड़ियां दोनो धक्कों के साथ बहुत धीरे धीरे खनक रही थी जिनकी मधुर आवाज दोनो को और जोश दिला रही थी। दोनो के होंठ आपस में जुड़े हुए और बहुत प्यार से एक दूसरे के होंठो को चूस रहे थे। शादाब शहनाज़ के कंधे सहला रहा था और मस्ती में शहनाज़ की टांगे अपने आप उछल रही थी।

कमरे में दोनो की मादक सिसकियां गूंज रही थी जिससे दोनो और जोश में एक दूसरे से लिपट रहे थे। शहनाज़ की नजर दूध के ग्लास पर पड़ी तो उसके होंठो पाए स्माइल अा गई और उसने शादाब को इशारा किया तो दोनो मा बेटे मुस्करा उठे। दूध तो ऐसे ही रखा रह गया था इसलिए शहनाज़ ने दूध की तरफ हाथ बढ़ाया तो शादाब ने उसे अपनी बांहों में उठा और बेड पर बैठ गया। लंड अभी भी चूत के अंदर ही घुसा उठा था। शहनाज़ ने दूध को शादाब ने होंठो से लगा दिया तो शादाब ने एक घूंट भर लिया और ग्लास शहनाज़ की तरफ बढ़ा दिया तो शहनाज़ ने ग्लास को बीच में ही रोक दिया और अपने होंठ शादाब के होंठो से चिपका दिए और दोनो मा बेटे दूध पीने लगे। जल्दी ही एक एक घूंट के बाद ग्लास खाली हो गया तो दोनो के हाथ एक दूसरे की कमर पर कस गए। शादाब ने को बाहर की तरफ निकाला और फिर से शहनाज़ की चूत में घुसा दिया तो शहनाज़ की आंखे फिर से मस्ती से बने बंद हो गई। शहनाज़ अपने आप शादाब की गोद में धीरे धीरे उपर नीचे होने लगी और लंड अपने आप अंदर बाहर होने लगा। दोनो के दूसरे के मुंह को चूम रहे थे चाट रहे थे और दोनो के हाथ एक दूसरे की कमर को दबा रहे थे, मसल रहे थे सहला रहे थे।

शहनाज़ को ज्यादा मजा अा रहा रहा था और दर्द बिलकुल भी नहीं था क्योंकि लंड पुरा बाहर नहीं अा रहा था जिससे शहनाज़ को सिर्फ मजा ही मजा आ रहा था। दोनो को कोई जल्दी नहीं, बिल्कुल आराम से प्यार से धक्के लग रहे थे, बस इस चुदाई में अब मजा ही मजा था कोई दर्द नहीं कोई कराह नहीं बस शहनाज़ के होंठो से मस्ती भरी सिसकारियां गूंज रही थी।

शहनाज़ ने अगले धक्के पर गांड़ थोड़ा ज्यादा उछाल दी तो लंड चूत से बाहर निकल गया लेकिन शादाब ने नीचे से अपने लंड का धक्का लगाया और फिर से पूरा लंड शहनाज़ की चूत में घुसा दिया। लंड के पत्थर से टाइट सुपाड़े ने जैसे ही चूत की फांकों को रगड़ा शहनाज़ के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी और वो सिसकते हुए बोली'”

” आह शादाब, बहुत अच्छा लगा रहा है, एसएसआईआईआईआई उफ्फ ये चुदाई, रोज ऐसे ही चोदना अब मुझे।

शादाब अपने लंड को अंदर घुसते हुए:” आह अम्मी, उफ्फ मेरी शहनाज़, हाय तेरी चूत कितनी मस्त एयू गर्म है।

शहनाज़ की चूत पूरी तरह से गीली थी और झड़ने के कगार पर पहुंच गई तो उसने कस कर शादाब को पकड़ लिया और जैसे ही लंड अंदर घुसा तो शहनाज़ की चूत ने अपना रस बहा दिया और सिसक उठी:”

” आह शादाब, उफ्फ मर गई तेरी अम्मी, हाय ये मजा, उफ्फ मेरा राजा बेटा।

शादाब भी शहनाज़ की चूत के रस की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाया और अगले धक्के पर उसने शहनाज़ के कंधो को जोर से नीचे दबा दिया जिससे लंड शहनाज़ की बच्चेदानी में जा लगा और शहनाज़ पागल सी होकर उससे लिपट गई और अपनी चूत पूरी तरह से लंड पर कस दी और शादाब के होंठो से भी आह निकल पड़ी और उसके लंड ने फिर से शहनाज़ की चूत को भरना शुरू कर दिया ।

लंड की पिचकारी जैसे ही चूत में पड़ी तो शहनाज़ की जलती हुई चूत पर मानो ठंडे बादल से बरसने लगे और उसने शादाब को पूरी तरह से कस लिया। दोनो मा बेटे पूरी ताकत से एक दूसरे से चिपके रहे और लंड शहनाज़ की चूत को भरता रहा। दोनो मा बेटे सब कुछ भूल गए थे और इस अद्भुत एहसास से दोनो की ही आंखे बंद हो गई थी।

धीरे धीरे लंड की पिचकारियां बंद हुई तो दोनो जैसे मस्ती के आसमान से धरातल पर अा गिरे और एक दूसरे की आंखो में देखते हुए मुस्करा उठे।

शादाब:” अम्मी शायद ये दुनिया की पहली सुहागरात होगी जहां चुदाई के बाद दूध पिया गया है।

शहनाज़ शर्मा गई और उससे कसकर लिपट गई और प्यार से बोली:”

“हान मेरे राजा क्योंकि पहली बार ही किसी मा ने अपने बेटे से सुहागरात मनाई हैं।

इतना कहकर शहनाज़ ने मुस्कुराकर शादाब की तरफ देखा तो शादाब ने भावहीन चेहरे के साथ शहनाज़ को देखा तो शहनाज़ ने उसके दोनो कान पकड़ कर खींच दिए और बोली:”
” कमीना कहीं का मुझे परेशान करता हैं।

शहनाज़ की इस अदा पर शादाब पूरी तरह से निसार हो गया और जोर जोर से हंस पड़ा तो शहनाज़ भी हंस पड़ी और दोनो ने एक दूसरे को कस लिया।

शहनाज और शादाब दोनो कुछ देर ऐसे ही एक दूसरे से चिपके रहे और शहनाज तो जैसे सब कुछ भूलकर बिल्कुल नंगी अपने बेटे की गोद मे बैठी हुई थी।

शहनाज शादाब की पीठ सहलाते हुए:”

” शादाब अब मैं तेरे बिना नही रह सकती मेरे बेटे।

शादाब अपनी अम्मी की ज़ुल्फो मे हाथ फिराते हुए:”

” अम्मी मेरे बिना क्या इसके बिना ?

इतना बोलकर शादाब शहनाज का एक हाथ अपने लंड पर रख देता हा तो शहनाज को फिर से अपनी साँसे रुकती हुई सी महसूस होती हैं और वो शादाब को ज़ोर से कस लेती हैं. शादाब शहनाज के हाथ पर अपना हाथ रख देता है और लॅंड को धीरे धीरे सहलाने लगता हाँ तो शहनाज अपने मदहोश होते हुए शादाब के कंधे को चूम लेती हैं और बोली:”

” बेटा मुझे तो प्यार तो तुझसे ही हाँ लेकिन ये भूत अच्छा हाँ, मुझे बहुत मज़ा दिया है इसने.

शादाब शहनाज को बेड पर लिटा देता है और बोलता और उसकी आँखो मे देखते हुए बोला:”

” आह अम्मी अभी तो शुरुआत हाँ, आपक बेटा आपको इतना प्यार देगा कि आप खुद को दुनिया की सबसे खुश नसीब माँ महसूस करोगी.

शहनाज आगे झुक कर शादाब का गाल चूम लेती है और अगले ही पल उदास हो जाती हाँ तो शादाब उसके चेहरे को अपने हाथो मे भर कर बोला:*

” उफ्फ आपके चाँद जैसे चेहरे पर उदासी क्यों शहनाज ?

शहनाज ज़ोर से शादाब से लिपट गयी और बोली:’

” तू अब मुझे छोड़ कर वापिस चला जाएगा तो मैं तो मर ही जाउन्गी तेरे बिना शादाब .

शादाब उसके होंठो पर एक उंगली रख देता है और बोला:” अम्मी ऐसी मनहूस बाते नही करते, आज के बाद दोबारा ये मत बोलना आप कभी भी .
F
शादाब का प्यार देख कर शहनाज की रुलाई छूट गई और बोली:”

” बेटा मैं नही रह सकती अब तेरे बिना, बहुत प्यार करती हूँ तुझसे ..

शादाब उसके आंशु सॉफ करते हुए:”

” अम्मी आप फिकर मत करो, मैं कुछ करता हूँ, मैं खुद भी अब आपसे दूर नही रह सकता.

शहनाज उसका मूह चूम लेती हैं और धीरे धीरे नॉर्मल हो जाती हाँ क्योंकि वो जानती थी कि उसका बेटा ज़रूर कुछ ऐसा कर देगा ताकि
दोनो माँ बेटे साथ रह सके।

शहनाज की सिसकियाँ अब पूरी तरह से रुक गयी थी और उसकी चूत दो बार हुई चुदाई की वजह से वीर्य से लबालब भरी हुई थी इसलिए
उसने बाथरूम जाने की सोची ताकि अपनी चूत को सॉफ कर सके।

शहनाज:” बेटा मुझे बहुत ज़ोर की सूसू लगी हाँ, मैं आती हूँ अभी.

शादाब:” अम्मी मैं भी आपके साथ चलता हूँ, चलिए।

शहनाज शरमा गयी और बोली:” तुम यहीं रहो बाद मे जाना, पहले मैं आती हू।

शादाब:” हे अम्मी अभी तो कह रही थी कि मेरे बिना नही रह सकती और अभी साथ ले जाने से भी मना कर रही हो.

शहनाज उसे डाँटते हुए:”

” चुप कर तू बड़ा शैतान को गया हाँ,

इतना बोलकर शहनाज ने एक चादर उठा ली और अपने जिस्म पर लपेटने लगी तो शादाब ने चादर को छीन लिया और बोला:”

” मैं आपकी बात मान लेता हूँ आपके साथ नही जाउन्गा लेकिन आपको मेरी एक बात माननी होगी कि आप नंगी ही जाओगी !

शहनाज की हालत खराब हो गई उफ्फ मैं कैसे इसके आगे नंगी जौ. वो सोच मे पड़ गयी और बोली:”

” अच्छा तू मेरे साथ ही चल, अब खुस है तू ?

शादाब मुस्कुरा दिया और दोनो माँ बेटे बाथरूम की तरफ चल दिए. शहनाज ने अपने जिस्म पर एक चादर लपेट ली और और साथ चल दी.

शहनाज आगे आगे और शादाब पीछे पीछे चल रहा था. चुदाई की वजह से गुलाब की कुछ पत्तियाँ शहनाज की गान्ड के बीच मे घुस गई जो
उसके चलने से नीचे गिर रही थी.

शायदी ये देख कर मुस्कुरा उठा और बोला:”

” आह शहनाज देखो ना तुमने अपनी टाँगो के बीच गुलाब की पत्तियाँ छुपा रखी हैं..

शहनाज ने चादर के अंदर से अपनी गान्ड पर हाथ अंदर तक घुमाया तो कुछ गुलाब की पत्तियाँ उसके हाथ में आ गई और उसने शादाब की तरफ एक कामुक स्माइल दी तो शादाब ने एक झटके के साथ उसकी चादर को खींच कर अलग कर दिया तो शर्म और डर के मारे शहनाज के मूह से आह निकल पड़ी

” आअह शादाब नही मेरे राजा, यहाँ नंगी मत कर उफ्फ मेरी चादर दे दे प्ल्ज़

शादाब ने चादर को एक तरफ फेंक दिया तो शहनाज शर्म से पानी पानी हो गई और खड़ी खड़ी थर थर काँपने लगी.

शहनाज ने एक हाथ नीचे के जाकर लंड को अपनी चूत पर टिका दिया और शादाब की आँखो मे देखते हुए उसे एक स्माइल दी तो शादाब लंड को चूत की क्लिट पर उपर नीचे रगड़ने लगा तो शहनाज तड़प उठी और शादाब को ज़ोर से कस लिया और अपना निचला होंठ दबाते हुए उसे इशारा किया तो शादाब ने शहनाज की आँखो मे देखते हुए एक जोरदार धक्का मारा जिससे पूरा लोल्ला एक ही बार में जड़ तक घुस गया तो शहनाज के होंठो से एक तेज दर्द भरी आ निकल पड़ी क्योंकि चूत पूरी तरह से गीली नही हुई थी और लंड ने चूत की दीवारो को
पूरा रगड़ दिया था.

” आअह शादाब, उफ्फ मर गई आहह सीईईईई ये कर दिया तूने, उफ्फ ये लोल्ला

शादाब उसकी चुचि दवाते हुए बोला:”

” आह शहनाज मेरी अम्मी, उफ्फ तेरी चूत कितनी टाइट हैं और गर्म !!

शादाब ने लंड को पूरा बाहर निकाला और फिर से अंदर जड़ तक घुसा दिया तो शहनाज का जिस्म उछल पड़ा और वो कराहते हुए बोली:”

” आअह बेटा, रुक जा हट जा तू, उफ्फ आहह नही उफ़फ्फ़ बहुत मोटा हाँ ये लोल्ला

शादाब उसके होंठ चूस कर बोला:”

” आअह शहनाज, उफ्फ चाँद पर चलने के लिए तैयार हो जाओ, अब देखो लंड का असली कमाल तुम

इतना बोलकर शादाब ने अपने लंड को बाहर निकाला और घुसा दिया और फिर तो शादाब ने स्पीड पकड़ ली और तेज़ी से शहनाज को
चोदने लगा तो शहनाज के मूह से दर्द और मस्ती भरी सिसकारिया गूंजने लगी

” आअह उफ्फ सीईईई ओह्ह्ह नही शादाब, उफ्फ, माआअ रीईई उफफफफ्फ़ आहह मीयरीईई चुतत्त्तत्त

शहनाज के मूह से अब तेज तेज सिसकियाँ निकल रही थी, हर धक्के पर उसका पूरा जिस्म हिल रहा था और उसकी पायल की तेज छन छन पूरे कमरे मे बाज रही थी, शादाब ने लंड को बाहर निकाला और पूरी तेज़ी से अंदर ठोक दिया तो लंड सीधे शहनाज की बच्चेदानी से जा लगा तो शहनाज मस्ती से पागल सी हो उठी और ज़ोर से शादाब को कस लिया और बोली:”..

” आअह शादाब, हाययययी बहुत मज्जा आ रहा है, उफ्फ चोद अपनी अम्मी को मेरे नंगे शादाब

शादाब ने हाथ शहनाज की गान्ड पर रखे तो शहनाज मस्ती से सिसक उठी और बोली:”

” आअह शादाब, दबा मेरी गान्ड, उफ्फ मसल मेरे लाल,

शादाब ने शहनाज की टाँगो को पूरा खोलते हुए उपर की तरफ मोड़ दिया और पूरी ताक़त से उसकी चूत मे ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा तो
शहनाज ने जोश मे अपने बेटे के दोनो कंधे थाम लिए और नीचे से अपनी गान्ड उठाने लगी और मस्ती से सिसक उठी

” आहह मीयरीईई चुतत्त्तत्त, चोद अपनी माँ शहनाज की चूत, उफ़फ्फ़ सीईईई और तेजज़्ज़्ज हायययी मेरे शादाब !!

शादाब की जांघे हर धक्के पर अब शहनाज की जाँघो से टकरा रही थी और ठप ठप की आवाज़ गूँज रही थी. शादाब एक पागल सांड़ की तरह धक्के मार रहा था और हर धक्के पर शहनाज की गान्ड एक एक फुट उपर उच्छल रही थी. शहनाज की चूत ज़्यादा देर तक धक्के नही
सह पाई और उसकी चूत ने अपने बाँध तोड़ दिए और शहनाज अपने बेटे को पूरी ताक़त से कस कर मस्ती से सिसक उठी:”

” आहह शादाब, उफफफ्फ़ चुद गयी ईई तेरी अम्मिईिइ , हायययी मेरि चूत मज्ज्जा देगिइिईईईई हायययी सीईईईई

शहनाज पूरी ताक़त से शादाब का मूह चूमने लगी और शादाब ने अपने लंड को बाहर निकाला और फिर से पूरी ताक़त से घुसा दिया अपनी माँ की चूत मे तो शहनाज की गीली हो चुकी चूत मे लंड एकदम से घुस गया और सीधे बच्चेदानी से जा टकराया तो शहनाज मस्ती भरे दर्द से कराह उठी

” आह शादाब, उफ्फ दर्द होता है, उफ्फ मेरी बच्चेदानी में घुस रहा है ये लोल्ला

शादाब के लंड में भी उबाल आने लगा और अब बिजली की रफ़्तार से धक्के लगाने लगा तो शहनाज का पूरा जिस्म बेड पर हिलने लगा और शहनाज की पायल और चूड़ियो की आवाज़ ज़ोर ज़ोर से गूँज उठी और उसने शादाब को पूरी ताक़त से कस लिया.

शादाब ने एक आख़िरी धक्का पूरी ताक़त से मारा और पूरा लंड शहनाज की चूत मे जड़ तक घुस गया, शहनाज को लगा जैसे उसकी
बच्चे दानी उलट जाएगी इसलिए वो मस्ती भरे दर्द से सिसक उठी..

” आहह सीईईई मरररर दिया मुझी, फटत्त गाइ मेरि चूत,

इस धक्के के साथ ही शहनाज की कई चूड़िया टूट गयी और उसकी गान्ड बेड में धस सी गयी, शादाब ने शहनाज को पूरी ताक़त से जकड
लिया और उसकी चूत मे वीर्य की बौछार करने लगा.. दोनो माँ बेटे एक दूसरे से पूरी तरह से चिपके हुए थे और पसीने पसीने हो रहे थे।

शहनाज़ शादाब के नीचे पूरी तरह से दबी हुई पड़ी थी और शादाब ने उसे पूरी तरह से कस रखा था तो शहनाज़ के हाथ भी पूरी ताकत से शादाब की कमर पर कसे हुए थे। लंड से निकलती हुई वीर्य की पिचकारियां शहनाज़ की चूत में एक अजीब सी ठंडक प्रदान कर रही मानो तपते हुए रेगिस्तान को ठंडे पानी की बरसात मिल रही हो।

जब तक लंड से वीर्य की पिचकारी निकलती रही तब तक शादाब का वजन शहनाज़ को अच्छा लगा रहा था लेकिन जैसे ही लंड ने बरसना बंद किया तो शहनाज़ को वजन लगने लगा और वो कसमसाने लगी।

शहनाज़:” आह शादाब उफ्फ कितना वजन हैं तेरे अंदर, उतर जा बेटा मेरे उपर से अब

शादाब शहनाज़ की आंखो में देखते हुए:” थोड़ी देर पहले तो आपको वजन नहीं लग रहा था अम्मी, अब क्या हो गया ?

शहनाज़ शर्म से लाल हो गई और निगाहें नीची करके बोली:”

” जब मस्ती चढ़ती हैं तो वजन नहीं लगता मेरे राजा बेटा

शादाब शहनाज़ की बात सुनकर मस्त हो गया और उसके ऊपर से उतर गया। अब शहनाज़ और शादाब दोनो बगल में लेते हुए थे और एक दूसरे की तरफ देख रहे थे तो शहनाज़ ने आगे बढ़कर उसका मुंह चूम लिया और बोली:”

“शुक्रिया बेटा, सच में तू मुझसे बहुत प्यार करता हैं। आई लव यू शादाब

शादाब ने शहनाज़ का चेहरा अपने दोनो हाथों में थाम लिया और उसकी आंखो में देखते हुए बोला:”

” लव यू टू मेरी शहनाज़, एक बात पूछूं आप इतनी जोर जोर से क्यों आवाज निकाल रही थी?

शहनाज़ की आंखे शर्म से झुक गई और बस होंठो पर हल्की सी स्माइल अा गई तो शादाब ने फिर से पूछा:”

” बताओ ना अम्मी प्लीज़ मुझे

शहनाज़ शरमाते हुए:”

” उफ्फ बेटा तू इतनी जोर जोर से कर रहा था कि मेरे मुंह से अपने आप ही वो सब आवाजे निकल रही थीं।

शादाब:’ अम्मी आपको अच्छा तेज तेज ?

शाहनाज:” आह शादाब, बहुत ज्यादा अच्छा लगा, लेकिन धीरे धीरे भी ठीक था, लेकिन इस बार तो तूने मेरी हालत ही खराब कर दी मेरे राजा !!

शादाब शहनाज़ के होंठ चूम कर बोला:” अम्मी अभी तो सिर्फ शुरुवात हैं, आपका बेटा आपको हर वो खुशी देगा जो हर किसी लड़की को नहीं मिलती बस सपने देखती हैं उसके।

शहनाज़ शादाब से कसकर लिपट गई,। शहनाज़ की चूत में अभी भी हल्का हल्का मीठा मीठा दर्द हो रहा था क्योंकि शादाब ने उसकी चूत की को इस बार की चुदाई में थोड़ा तेज करके चोद दिया था। शहनाज़ तो जैसे एक चुदाई से बेहाल सी हो गईं थीं, शादाब ने उसकी चूत कि एक एक नस मटका दी थी।

दोनो मा बेटे ऐसे ही एक दूसरे से चिपके रहे और दोनो एक दूसरे की बाहों में सो गए। अगले दिन कोई सुबह नौ बजे के आस पास दोनो की आंखे एक साथ शादाब का फोन बजने से खुली तो शादाब ने देखा कि दादाजी का फोन था तो उसने उठाया और बोला:”

” सलाम दादा जी कैसे हैं आप ?

दादा:” सलाम बेटा, ठीक हैं मैं, काफी दिनों से तेरा फोन नहीं आया था इसलिए सोचा बात कर लू, घर की बहुत याद अा रही हैं।

शादाब:” बस दादा जी घर के काम में लगा रहा और पढ़ाई भी थोड़ी करता रहा।

दादा जी:” अच्छा बेटा ये बताओ शहनाज़ कैसी हैं ?

शादाब का फोन लाउड स्पीकर पर था इसलिए शादाब ने शहनाज़ की तरफ देखा तो दोनो मुस्कुरा दिए और शादाब बोला:”

” जी दादा जी शहनाज़ बिल्कुल ठीक हैं

दादाजी:” अबे शहनाज़ वो मेरे लिए हैं बेटा तेरे लिए अम्मी हैं, ऐसे नाम नहीं लेते अपनी मा का मेरे अच्छे बेटे।

शादाब को अपनी गलती का एहसास हुआ। दर असल वो शहनाज़ को अब अपनी बीवी समझ रहा था इसलिए उससे ये गलती हो गई। शहनाज़ अपने ससुर की बात सुनकर हल्के हल्के मुस्कराने लगी और शादाब को जीभ निकाल कर चिढाने लगी।

शादाब को अपनी गलती का एहसास हुआ। दर असल वो शहनाज़ को अब अपनी बीवी समझ रहा था इसलिए उससे ये गलती हो गई। शहनाज़ अपने ससुर की बात सुनकर हल्के हल्के मुस्कराने लगी और शादाब को जीभ निकाल कर चिढाने लगी।

शादाब:” माफ करना दादा जी आपके मुंह से नाम सुनकर मुझसे गलती हो गई, आगे से ध्यान रखूंगा मैं।

दादा जी:” कोई बात नहीं बेटा, आगे से ध्यान रखना, चल मेरी बात करा करा शहनाज़ से तू

अपने दादा जी की बात सुनकर शादाब ने फोन शहनाज की तरफ कर दिया तो शहनाज़ बोली:”

” सलाम अब्बा जी, कैसे हैं आप ?

दादाजी:” सलाम बेटी ठीक हूं, शादाब परेशान तो नहीं करता है ना तुझे ?

शहनाज़ शादाब का गाल चूम कर बोली:”

” बिल्कुल नहीं अब्बा, शादाब तो दुनिया का सबसे अच्छा और प्यारा बेटा हैं, मुझे बहुत खुश रखता हैं।

दादाजी:” चलो अच्छा हैं बेटी, अच्छा मेरा अब घर आने का मन हैं क्योंकि दो दिन बाद शादाब भी वापिस चला जाएगा इसलिए सोच रहा था कि कुछ टाइम इसके साथ बिता लूंगा। तुम इसको भेज दो मुझे ले जाएगा ये आकर।

शहनाज़ शादाब के वापिस जाने और दादाजी के घर आने की बात से अंदर ही अंदर बहुत दुखी हुई लेकिन दिखावे के लिए बोली:”

” जी मैं आज ही शादाब को भेज देती हूं। वो आपको ले आएगा।

दादाजी:” अच्छा ठीक है बेटी, मैं इंतजार करूंगा उसका।

इतना कहकर दादा जी ने कॉल काट दिया तो शहनाज़ ने शादाब की तरफ देखा तो मायूस हो गई क्योंकि एक तो दो दिन बाद शादाब को वापिस जाना था दूसरी बात आज दादा दादी भी वापिस अा रहे थे जिससे उनकी आजादी खत्म होने वाली थी। शहनाज़ की आंखो में आंसू अा गए और उसने जोर से शादाब को अपनी बांहों में कस लिया और सिसक उठी।

शादाब:” अम्मी मुझे पता हैं आप मेरे जाने से दुखी हो, अरे मै आपके बिना नहीं रह सकता अब, आप फिक्र ना करे मैं देखता हूं कुछ तरीका जल्दी ही।

शहनाज़ उससे जोर से लिपटते हुए बोली:”

” शादाब मुझे तुझ पर पूरा यकीन हैं बेटा, अच्छा चल मुझे उठने दे, नहा लेती हूं मैं।

इतना कहकर शहनाज़ उठ गई और बाथरूम की तरफ जाने लगी तो उसे अपनी जांघो के बीच में दर्द का एहसास हुआ क्योंकि उसकी चूत सूज गई थी और चलने से चूत जांघो से टकरा रही थी जिससे शहनाज़ को दर्द महसूस हो रहा था। शादाब के होंठो पर ये देखकर हंसी अा गई और बोला:”

” क्या हुआ अम्मी? ऐसे क्यों चल रही है आप ?

शहनाज़ को अपने बेटे की हरकत पर बहुत गुस्सा आया और बोली:’

” उफ्फ कमीने पहले मेरी हालत खराब कर दी और अब मजे ले रहा हैं रुक तुझे अभी मजा चखाती हूं।

इतना कहकर वो शादाब को पकड़ने के लिए उसकी तरफ बढ़ी लेकिन तेजी से नहीं चल पा रही थी तो शादाब को नहीं पकड़ पाई और जान बूझकर ड्रामा करते हुए गिर गई और दर्द से कराह उठी

” आह्हज उफ्फ

शादाब अपनी अम्मी को दर्द में देख कर दौड़ता हुआ आया और शहनाज़ ने मौके का फायदा उठाते हुए उसे पकड़ लिया।

उसके कान खींचती हुई बोली:’

” बहुत मजाक उड़ा रहा था मेरा, एक तो मेरी ये हालत कर दी और उपर से हंस रहा है!!

इतना कहकर शहनाज़ ने शादाब का कान थोड़ा जोर से खींच दिया तो शादाब दर्द से कराह उठा और शहनाज़ की एक चूची को जोर से दबा दिया तो शहनाज़ ने मजे से सिसकते हुए अपने आप उसका कान छोड़ दिया और बोली:”

“आह्हहह हट जा बेटा, देख पूरी लाल हो गई है, उफ्फ और कितना दबायेगा।

शादाब ने देखा कि शहनाज़ की चूचियों पर दबाए और काटे जाने से लाल निशान पड़ गए थे तो शादाब ने चूचियों पर प्यार से हाथ फेर दिया तो इस एहसास से शहनाज़ मस्त हो गई और अपने दोनो हाथ शादाब के गले में डाल दिए और बोली:”

” चल अब मुझे बाथरूम तक छोड़ के अा मेरे राजा,

शादाब ने उसे अपनी बांहों में उठा लिया और दोनो मा बेटे एक दूसरे की आंखो में देखते हुए बाथरूम की तरफ चल पड़े। दोनो पूरी तरह से खो गए थे इसलिए कब वो गेट पर पहुंचे और अंदर घुस गए पता ही नहीं चला। शादाब ने हल्का सा धक्का देकर गेट को बंद कर दिया तो गेट की आवाज सुनकर जैसे शहनाज़ होश में आई और बोली:’

” थैंक यू बेटा, अब तुम जाओ मैं नहा लेती हूं।

इतना कहकर वो शादाब की गोद से उतर गई वो शादाब को बाहर की तरफ जाने का इशारा किया तो शादाब ने मुस्कुराते हुए शॉवर चालू कर दिया और पानी उन दोनों के नंगे जिस्म पर बरसने लगा। ठंडा ठंडा पानी जैसे ही शहनाज़ के जिस्म पर पड़ा तो वो कांपती हुई शादाब से लिपट गई तो शादाब ने भी उसे अपनी बांहों में भर लिया। शादाब ने हाथ आगे बढाया और गीजर चालू कर दिया और शहनाज़ की कमर पर हाथ फेरने लगा।

शादाब की उंगलियां शहनाज़ की कमर पर एक बार फिर से अपना जादू दिखाने लगी और शहनाज़ का जिस्म सुलगने लगा। शॉवर से निकली पानी की बूंदे अब भी उनके जिस्म पर पड़ रही थी। शहनाज़ ने एक बार शादाब की आंखो में देखा और उसके होंठ अपने आप आगे बढ़ गए और शादाब के होंठो से मिल गए। उफ्फ दोनो मा बेटे फिर से एक दूसरे के होंठ चूसने लगे। शहनाज़ के हाथ उसकी गर्दन में कस गए और शादाब का लंड एक बार फिर से सिर उठाने लगा और शाहनाज की जांघो में टक्कर मारने लगा।

शहनाज़ की हालत फिर से खराब होने लगी और उसकी जीभ अपने आप शादाब के मुंह में घुस गई तो तो शादाब पूरे जोश में अपनी अम्मी की जीभ चूसने लगा। बाथ टब में पानी भर चुका था इसलिए शादाब शहनाज को लेकर बाथ टब में उतर गया। हल्का गुनगुना पानी दोनों के जिस्मों को राहत प्रदान करने लगा। शादाब ने शहनाज़ को लिटा दिया और उसके बदन को साबुन से साफ करने लगा। जैसे ही शादाब के हाथ शहनाज़ की चूचियों से गुजरते तो शहनाज़ कांप उठती और मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकल पड़ती। शादाब ने प्यार से उसकी चूचियों के निप्पल को हाथ से सहलाया और हल्का सा रगड़ते हुए साफ किया तो शहनाज़ का बदन एक शोल की तरह जल उठा और उसने जोश में शादाब का सिर अपनी चूचियों पर झुका दिया तो शादाब ने उसकी एक चूची को अपने मुंह में भर लिया तो शहनाज़ का मुंह मस्ती से खुल गया और वो सिसकते हुए बोली:”

” अहहह शादाब एसईईईई उफ्फ मेरा बेटा, उफ्फ चूस मेरे राजा,

शादाब ने शहनाज़ के निप्पल को चूसते चूसते हल्का हल्का काट दिया तो शहनाज़ पूरी तरह से मदहोश हो गई और उसका एक हाथ अपने आप शादाब के लंड पर पहुंच गया और मुट्ठी में भर कर दबाने लगी। लंड बिलकुल सख्त हो गया था और झटके मार रहा था। लंड पर शहनाज़ के हाथ पड़ते ही शादाब ने शहनाज़ की दूसरी चूची को हथेली में भर कर जोर से दबा दिया तो शहनाज़ से बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने खुद ही अपने बेटे का हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर टिका दिया और जोर से सिसक उठी। शहनाज़ की चूत पूरी तरह से पानी के अंदर थी लेकिन एकदम गर्म हो गई थी और उसमें से आग की लपटे सी निकल रही थी। शादाब ने कसकर उसकी चूत को दबा दिया तो शहनाज़ ने शादाब की जीभ को पकड़ कर जोर जोर से चूसना शुरू कर दिया। शादाब ने एक उंगली शहनाज़ की चूत में घुसा दी तो शहनाज़ तड़प उठी और किस अपने आप टूट गई और बोली:”

” आहहझ बेटा, दुखती हैं मेरी, उफ्फ मा री, हाय शादाब।

शहनाज़ की चूत आखिरी बार हुई दमदार चुदाई में पूरी तरह से रगड़ी गई थी जिससे चूत के होंठ और अंदर की दीवारें सूज गई थी और हल्का सा छूने से ही शहनाज़
को दर्द का एहसास हो रहा था।

शादाब ने उसका दर्द समझते हुए उंगली को बाहर निकाल लिया तो शहनाज़ ने शिकायती नजरो से उसकी तरफ देखा और बोली:”

” आह शादाब, बाहर निकालने के लिए तो मैंने नहीं कहा था मेरे राजा, आहहह मा उफ्फ

शादाब ने एक झटके के साथ अपनी दो उंगलियां शहनाज़ की चूत में घुसा दी तो शहनाज़ दर्द और मस्ती से कराह उठी और अपनी टांगो को जोर से कस लिया और बोली:”

” आह क्या करता हैं कमीने, मर जाएगी तेरी शहनाज़, उफ्फ शादाब आह्ह्हह्ह

शादाब अपनी उंगलियां धीरे से अन्दर बाहर करते हुए:’

” आहओह अम्मी, उफ्फ कितनी टाइट हो गई है ये चूत, उफ्फ उंगलियां कैसे फस कर घुस रही है

शहनाज़ की चूत के होंठ सूज कर मोटे हो गए थे और पूरी तरह से एक दूसरे से चिपके हुए थे इसलिए चूत पहले से ज्यादा टाईट हो गई थी। चूत के होंठ पर रगड़ती हुई शादाब की उंगलियां शहनाज़ को जन्नत दिखा रही थी लेकिन दर्द हो रहा था मीठा मीठा। शादाब का लंड पर पूरी तरह से तैयार हो गया था इसलिए शहनाज़ ने लंड को छोड़ दिया और शादाब की तरफ देखा तो शादाब ने एक झटके के साथ शहनाज़ को घुमा दिया और अपनी गोद में ले लिया। अब शहनाज़ की पीठ शादाब की छाती से लगी हुई थी और शादाब ने अपने दोनो हाथों में उसकी चूचियां पकड़ ली तो शहनाज़ हल्का सा उपर को हुई और लंड अपने आप उसकी चूत पर जा लगा तो दोनो मा बेटे मस्ती भर गए।

शहनाज़ हलका सा आगे पीछे होने लगी जिससे चूत लंड पर रगड़ खाने लगी और शादाब लंड को चूत में घुसाने के लिए तड़प उठा लेकिन जैसे ही लंड चूत पर दबाव डालता तो शहनाज़ को दर्द का एहसास होता और आगे को हो जाती जिससे चूत लंड पर से हट जाती, शादाब तड़प उठा और बोला:’
” आह्हझ शहनाज़, क्यों तड़पा रही हो, लोला लेलो मा अपनी चूत में उफ्फ

शहनाज़ मस्ती से सिसकते हुए:”

” आहओह उफ्फ दर्द होता है, कितना मोटा है तेरा लोला, उफ्फ मेरी चूत सूज गई है शादाब,

शादाब समझ गया कि शहनाज़ डर गई है इसलिए उसने दोनो हाथो से शहनाज़ की चूचियों को छोड़कर उसकी जांघो को थाम लिया तो शहनाज़ का पूरा बदन कांप उठा और उसने एक बार गर्दन उठा कर शादाब की तरफ देखा और बोली:’

” आह शादाब प्यार से करना मेरे राजा, नहीं तो मर जाएगी तेरी अम्मी

शहनाज़ शादाब की आंखो में देख रही थी और खुद ही अपनी चूत का मुंह खोल दिया तो शादाब ने लंड का मोटा सुपाड़ा चूत पर टिका दिया तो शहनाज़ तड़प उठी और शादाब के दोनो हाथ अपनी चुचियों पर टिका दिए तो शादाब ने लंड का दबाव बढ़ाया और सुपाड़ा चूत के अंदर दाखिल हो गया तो शहनाज़ का मुंह दर्द और मस्ती से खुल गया।

” आह ओह उफ्फ शादाब, हाय मेरे राजा, मेरी जान हैं तू,

शादाब ने लंड का दबाव बढ़ाया तो लंड चूत की दीवारों को बुरी तरह से रगड़ते हुए अंदर घुसने लगा और शादाब से ये एहसास बर्दाश्त नही हुआ और उसने एक तेज झटके में लंड पुरा शाहनाज की चूत ने उतार दिया। लंड घुसते ही शहनाज़ दर्द से कराह उठी और शादाब से लिपट गई।

” आहआह उफ्फ मार दिया मुझे, उफ्फ ज़ालिम हाय मा बचा ले मुझे उफ्फ कमीना, प्यार से कर शादाब बेटा

शादाब ने अपने कान पकड़ लिए तो शहनाज़ दर्द में भी मुस्करा उठी और शादाब ने धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया तो शहनाज़ के मुंह से मस्ती और दर्द भरी सिसकारियां निकलने लगी।

” आह शादाब, उफ्फ कितना अच्छा लग रहा हैं बेटे, ऐसे ही प्यार से करता रह

शादाब आराम से ऐसे ही धक्के लगाता रहा और शहनाज़ की दोनो चूचियों को दबाता रहा, लंड के साथ साथ चूत में हल्का हल्का गुनगुना पानी घुस रहा था जिससे शहनाज़ का मजा दोगुना हो रहा था और उसने खुद ही अपनी गांड़ को हिलाना शुरू कर दिया।

शादाब का हाथ हल्का सा फिसला तो वो पानी में लेट गया तो शहनाज़ अपने आप ही उसके उपर अा गई। अब दोनो मा बेटे एक दूसरे की आंखो में देख रहे थे और शहनाज़ अपने आप लंड पर अपनी चूत चलाने लगी

शहनाज़ को ये बहुत पसंद आया क्योंकि वो अपनी मर्जी से लंड घुसा रही थी और चुदाई पूरी तरह से उसके कंट्रोल में थी, इसलिए वो आराम से धक्के मार रही थी जिससे दोनो मस्ती में डूबे हुए थे। शहनाज़ जैसे ही उपर को उछलती तो नीचे से शादाब हल्का सा धक्का लगा देता जिससे लंड पूरी तरह से घुस जाता। पानी की छप छप की आवाज गूंज रही थी जो माहौल को और गर्म बना रही थी। शहनाज़ की चूत पूरी तरह से पानी पानी हो रही थी और शहनाज़ ने शादाब को चिढाने के लिए लंड को बस सुपाड़े तक ही घुसाती और बाहर निकाल लेती, शादाब लंड को पूरा अंदर घुसाना चाह रहा था जबकि शहनाज़ उसे तड़पा रही थी और जीभ निकाल कर उसे चिढ़ा रही थी। शादाब ने एक झटके के साथ पलटी मारी और अब शहनाज़ उसके नीचे थी, शादाब ने उसकी दोनो चूचियों को जोर जोर से मसलते हुए लंड का एक जोरदार धक्का लगाया और पूरा अन्दर घुसा दिया तो शहनाज़ दर्द से कराह उठी और शादाब ने बिना रुके तेजी से धक्के लगाने शुरू कर दिए तो शहनाज के मुंह से दर्द भरी आह निकलने लगी

” आह शादाब, उफ्फ नहीं बेटा, आह उफ्फ मेरी चूत मर जाएगी, प्यार से ज़ालिम

शादाब ने शहनाज़ की परवाह ना करते हुए तेजी से लंड को बाहर निकाल और पूरी ताकत से फिर से घुसा दिया तो शहनाज़ शादाब से जोर से कस कर लिपट गई

” आह तेरी मा की चूत शादाब, आह मार दिया मुझे।

शादाब बिना शहनाज़ के दर्द की परवाह किए हुए तेज तेज धक्के लगाने लगा और शहनाज़ हर धक्के पर जोर जोर से उछल रही थी, मचल रही थी, सिसक रही थी, बाथ टब में पानी उछल उछल कर बाहर निकल रहा था जिससे शादाब को और जोश अा रहा था और शहनाज़ की चूत ज्यादा देर तक धक्के नहीं झेल पाई और वो जोर से सिसकते हुए झड़ गई और शादाब को कस लिया तो शादाब के लंड में भी उफान आने लगा और उसने पूरी ताकत से कुछ धक्के लगाए तो शहनाज़ को उसकी सांसे रुकती हुई सी महसूस हुई और शादाब ने आखिरी जोरदार धक्का लगाया और लंड को जड़ तक अपनी मा की चूत में घुसा दिया और जोर से शहनाज़ से चिपक गया।

” आह शहनाज़ तेरी चूत, उफ्फ चूस गई मेरी लोला!!

शादाब ऐसे ही शहनाज़ के उपर पड़ा रहा और थोड़ी देर बाद जब जब दोनो नॉर्मल हो गए तो दोनो ने एक दूसरे को अच्छे से प्यार से नहलाया और फिर शादाब शहनाज़ को नंगी ही अपनी बांहों में लेकर कमरे में आ गया।

शहनाज ने एक सूट सलवार पहन लिया और किचेन में कुछ खाने के लिए तैयार करने चली गई तो शादाब भी तैयार हो गया और शहनाज़ तब तक नाश्ता तैयार कर चुकी थी इसलिए शादाब शहनाज़ को गोद में बैठ गया और प्यार से बोला:”

” मेरी प्यारी अम्मी अब खिलाओ अपने हाथ से खाना अपने बेटे को

शहनाज शरमाते हुए बोली:”

” उफ्फ अब तू मेरा बेटा नहीं शौहर बन गया हैं मेरे राजा

शहनाज़ ने खाने का निवाला बनाया और उसके मुंह में डाल दिया तो दोनो एक दूसरे को प्यार से खाना खिलाने लगे और जल्दी ही दोनो मा बेटे नाश्ता कर चुके तो शहनाज़ ने शादाब का गाल चूम लिया और बोली:”

” बेटा अब तू अपने दादा जी को लेने चला जाएगा तो मेरा मन भी नहीं लगेगा घर में शादाब।

शादाब:” अम्मी मैं जल्दी ही अा जाऊंगा क्योंकि आपके चांद से सुंदर चेहरे को देखे बिना अब मुझे भी सुकून नहीं मिलता।

इतना कहकर शादाब ने शहनाज़ के गाल चूम लिए तो शहनाज़ उससे लिपट और बोली:”

” बेटा वहां वो कमीनी रेशमा भी तो हैं, उससे बच कर रहना तुम कहीं तुम अपना वादा ना निभाने लग जाओ।

इतना कहकर शहनाज़ पूरी तरह से उदास हो गई और आंखे नम हो उठी । शादाब के होंठो पर स्माइल अा गई और बोला:”

” अम्मी आपको अपने पति ना सही लेकिन अपने बेटे पर तो यकीन होना चाहिए। आप मेरे साथ चलो थोड़ी ही देर की तो बात हैं शहनाज़।

शहनाज़:” नहीं बेटा मेरा जाना ठीक नहीं होगा, तू उस कमीनी रेशमा को नहीं जानता, मेरी हालत देखकर एक दम समझ जायेगी कि दाल में जरूर कुछ काला हैं।

शादाब:” ठीक हैं अम्मी, फिर मैं चलता हूं, आप अपना ध्यान रखना, अब मैं यू तूफान की तरह उड़ता हुआ जाऊंगा और आंधी की तरह वापिस अा जाऊंगा। अब जल्दी से अच्छी बीवी की तरह किस देकर विदा करों

शहनाज़ के होंठो पर स्माइल अा गई और आगे बढ़ कर अपने होंठ शादाब के होंठो पर रख दिए और चूसने लगी। शादाब भी उसके होंठो को चूसने लगा तो दोनो की आंखे मस्ती से बंद हो गई। एक लंबे किस के बाद दोनो के होठ अलग हुए तो शादाब के होंठो पर शहनाज़ की लिपस्टिक लग गई थी जिसे देखकर शहनाज़ मुस्कुरा उठी तो शादाब भी मुस्करा दिए और गाड़ी की तरफ जाने लगा तो शहनाज़ ने उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और बोली:” उफ्फ राजा ऐसे जाओगे क्या ? लो शीशे में अपना मुंह देखो

शादाब ने अपना मुंह शीशे में देखा तो स्माइल कर उठा और शहनाज़ ने अपने दुप्पटे के पल्ले को थूक से गीला किया और शादाब का चेहरा साफ करने लगी तो शादाब शादाब बोला:”

” शहनाज़ मा के आंचल का कपड़ा अब दुल्हन का दुपट्टा बन गया है!!

शहनाज मुस्करा उठी और शादाब गाड़ी लेकर आगे निकल गया तो शहनाज़ जोर से बोली:”

” शादाब धीरे चलाना गाड़ी बेटा, आराम से आना, जल्दी मत करना कोई भी।

शादाब उसे स्माइल देकर चला गया और शहनाज़ ने अपने सास ससुर के लिए उनकी पसंद की चीजे बनाने के लिए तैयारी शुरू कर दी। उधर शादाब रेशमा के घर पहुंच गया तो दादा दादी जी उसे देखते ही खिल उठे।

दादा:’ अा गया मेरा पोता, कितने दिनों के बाद देखा हैं तुझे

शादाब अपने दादा जी के गले लग गया और दादा जी एक दम भावुक हो उठे। काफी देर तक दोनो दादा पोते एक दूसरे के गले लगे रहे तो दादी बोली:”

” शादाब बेटा बस दादा जी को ये प्यार करेगा क्या खाली?

शादाब को जैसे होश आया और वो अपनी दादी को गले लगाया तो दादी भी खुश हो गई।

तब तक रेशमा भी उपर से अा गई और बोली:”

” अा गया शादाब मेरा बेटा, बस दादा दादी को ही प्यार करेगा क्या तू, तेरी बुआ नहीं दिखती क्या तुझे मेरे बच्चे ?

दादाजी:” ओह शादाब बेटा रेशमा ने हमारा बहुत ध्यान रखा है, बेटा इसने तो दिन रात हम दोनों की खिदमत करी हैं।

रेशमा स्माइल करते हुए:”

” देखा शादाब जिस तरह से अब्बा बोल रहे हैं उसको ध्यान में रखते हुए तुम्हे मुझे बहुत प्यार करना चाहिए।

दादी:” करेगा क्यों नहीं, मेरा पिता जानता हैं कि बेटी उसकी और तुम्हारी रगों में एक ही खून दौड़ रहा हैं।

अपने खून की बात सुनकर शादाब को जोश अा गया और वो रेशमा को अपनी बांहों में लेने के लिए आगे बढ़ा तो रेशमा बोली:”

” रुक जा शादाब , देख मैं अभी पसीने से भीगी हुई थी बेटा, आजा चल मेरे साथ उपर चल, पहले नहाऊंगी उसके बाद प्यार प्यार कर लेना मुझे।

सभी रेशमा की बात सुनकर हंस पड़े और रेशमा उपर चली गई और दादा दादी जी शादाब से बात करने लगे।

दादा:” बेटा रेशमा तो मुझे अभी भी घर जाने से मना कर रही थी, कितना ध्यान रखा इसने हमारा।

दादी:” हान बेटा, खाने के लिए दो दो सब्जियां, घी, बिल्कुल साफ प्रेस किए हुए कपडे।

दादा:” एक बार मेरे सिर में हल्का सा दर्द हुआ तक बेचारी पूरी रात ठीक से सो नहीं पाई और मेरा सिर दबाया और ध्यान रखा।

शादाब मन ही मन खुश हो रहा था कि चलो उसकी वजह से दादा दादी की रेशमा से खूब अच्छे से सेवा की हैं। शादाब को अपनी मां की याद आई तो उसने शहनाज़ को कॉल किया

शादाब:” हान अम्मी मैं अा गया हूं दादा जी के पास, बस थोड़ी देर बाद खाना खाकर निकल जाएंगे।

शहनाज़:” ठीक हैं बेटा, आराम से आना और हान उस रेशमा से दूर ही रहना मेरी जान।

शादाब:” जी अम्मी आप फिक्र ना करे, मैं ध्यान रखूंगा।

शहनाज़ उसे छेड़ते हुए:” एक बार मुझे शहनाज़ बोल ना मेरे राजा, तेरे मुंह से अच्छा लगता हैं।

शादाब की नजर सामने बैठे दादा दादी पर पड़ी तो वो बोला:”

” हान अम्मी दादा दादी बिल्कुल ठीक हैं और मेरे पास ही है।

शहनाज़ समझ गई कि शादाब दादा दादी के पास ही बैठा हुआ हैं इसलिए मस्ती करते हुए बोली:

” हाय मेरी जान, बोल देना एक बार मुझे शहनाज़,

शादाब बात को घुमाते हुए:”

” हान अम्मी मैं सब समझ गया हूं आप फिक्र ना करे।

शहनाज़:” उफ्फ बात मत घुमा ध्यान से बात सुन, अगर इतना डरता हैं तो फिर अपनी मा को कैसे भगा पाएगा तू राजा ?

शादाब:” अम्मी हान मैं सुन रहा हूं आप बोलिए।

शहनाज़:” उफ्फ मेरा ये शौहर कितना डरपोक हैं, अच्छा सुन अगर तू आज मुझे शहनाज़ बोल देगा तो मैं तेरा मूसल खुद अपने हाथ से अपनी औखली में घुसा लूंगी मेरे राजा।

शादाब से अब बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने फोन को म्यूट कर दिया और हेल्लो हेल्लो करने लगा और बोला:”

” उफ्फ अंदर नेटवर्क ठीक नहीं अा रहे हैं, आवाज नहीं अा रही है

इतना कहकर वो बाहर निकल गया और बोला:”

” शहनाज़ मैं आपकी बात समझ गया हूं ठीक हैं अब।

इतना कहकर शादाब ने फोन काट दिया और घर के अंदर घुस गया और शहनाज़ को मेसेज किया कि अब वो दादा दादी जी की गाली खा रहा हैं तो ये पढ़कर शहनाज़ मुस्करा उठी और लिखा:”
“कोई बात नहीं बेटा, शाम को तुझे दूध पिलाऊंगी, बस अब खुश

तभी उपर से रेशमा की आवाज अाई कि शादाब अा जाओ नाश्ता कर लो बेटा।

शादाब:” आओ दादा दादी आप भी चलो मेरे साथ ।

दादा:” नहीं बेटा तुम जाओ, हमने तो कर लिया। फिर थोड़ी देर बाद घर जाना हैं इसलिए नीचे उतरना पड़ेगा। तुम जाओ

शादाब के मन में हजारों सवाल उठ रहे थे कि वो रेशमा का सामना कैसे करेगा। आखिरकार वो डरते हुए उपर पहुंच गया और देखा और जैसे ही रेशमा को देखा तो अपने होश ही खो बैठा।

शहनाज़ ने एक गुलाबी रंग की शॉर्ट ड्रेस पहन रखी थी जिसमे कंधो पर सिर्फ हल्की सी तनिया थी और उसकी चुचियों की गहराई साफ नजर आ रही थी। शादाब एक जवान लड़का था इसलिए ना चाहते हुए भी उसकी नजरे रेशमा की चुचियों पर पड़ रही थी जिससे रेशमा अंदर ही अंदर खुश हो रही थी।

रेशमा उठी और शादाब की तरफ झुकते हुए उसकी तरफ दूध का ग्लास बढ़ा दिया और बोली:”

” लो दूध पियो शादाब

शहनाज़ के झुकने से उसकी चूचियां बाहर की तरफ उछल पड़ी तो एक पल के लिए तो शादाब को समझ ही नहीं आया कि कौन सा दूध पिए। फिर अपने आपको संभालते हुए दूध का ग्लास पकड़ लिया और दूध पीने लगा। बीच बीच में उसकी नजर रेशमा की चूचियों पर पड़ रही थी और जैसे ही रेशमा की नजर उससे मिलती तो डर के मारे अपनी नजरे झुका लेता। जल्दी ही शादाब ने नाश्ता खत्म कर दिया तो रेशमा ने ग्लास और सामान की प्लेट उठाई और किचेन में रखने चली गई और बिजली की गति से वापिस अा गई। वो शादाब के सामने खड़ी हो गई और बोली:”

” ले शादाब कर ले अपनी बुआ को प्यार जितना तेरा मन करे

इतना कहकर उसने अपने दोनो हाथ शादाब की तरफ बढ़ा दिए तो शादाब दिखावे के लिए आगे बढ़ा और रेशमा को अपने गले लगा लिया। ये पूरी तरह से एक पाकीजा मिलन था। हवस या उत्तेजना का नामो निशान नहीं था शादाब की तरफ से लेकिन रेशमा के इरादे तो कुछ और ही थे। क्या ने शादाब की कमर को सहलाना शुरू किया तो शादाब उसका मतलब समझते हुए थोड़ा सा पीछे हटने लगा तो रेशमा बोली:”

” क्या हुआ शादाब बेटा मुझसे कोई गलती हुई क्या ?

शादाब कुछ नहीं बोला और किसी गुनाहगार की तरह सिर झुका कर खड़ा हो गया। रेशमा आगे बढ़ी और एक झटके के साथ उसका चेहरा उपर उठाया और बोली:”

” शादाब मैने तेरी हर एक बात मानी हैं और अम्मी अब्बू का बहुत ध्यान रखा है बेटा। शुरू में तो मैंने ये सब तुझे फसाने के लिए किया था लेकिन बाद में मुझे एहसास हुआ कि मा बाप की सेवा से बड़ा कोई पुण्य नहीं है दुनिया में बेटा।

शादाब मेरी तेरे फूफा ने कोई कद्र नहीं करी, बच्चे हॉस्टल भेज दिए और खुद हफ्ते हफ्ते बाद घर आता हैं

इतना कहकर रेशम ने अपना हाथ नीचे लाते हुए शादाब की पेंट पर रख दिया और बोली:”

” शादाब मुझे ये चाहिए बेटा। बहुत प्यासी हैं तेरी बुआ

रेशमा ने शादाब को कस लिया और उसके होंठो पर अपने होठ टिका हुआ और चूसने लगी तो शादाब पीछे हटने लगा तो रेशमा ने एक झटके के साथ उसे बेड पर गिरा दिया और उसके ऊपर लेट गई। रेशमा अब शादाब के होंठ चूस रही थी और अपनी चूत उसके मुरझाए हुए लंड पर घिस रही थीं। शादाब किस में बिल्कुल भी सहयोग नहीं कर रहा था, रेशमा ने शादाब के पेट में गुलगुली करी तो शादाब का मुंह खुल गया और रेशमा की जीभ उसके मुंह में घुस गई और शादाब भी बहक गया क्योंकि रेशमा उसकी जीभ चूसने लगी थी। पहली बार शादाब के हाथ रेशमा की कमर पर कस गए और रेशमा ने जोश में आते हुए शादाब के लंड को पेंट के उपर से ही पकड़ लिया और सहलाने लगीं।

शादाब को बहुत अच्छा लगा रहा था और रेशमा ने जान बूझकर अपने कंधे से एक तनी को सरका दिया जिससे उसकी एक चूची नंगी हो गई। जैसे ही किस खत्म हुई तो शादाब को रेशमा की चूची नजर आईं और उधर रेशमा मौके का फायदा उठाकर उसकी पेंट खोलकर नीचे सरका चुकी थीं। शादाब को ये एहसास तब हुआ जब रेशमा ने उसके लंड को हाथ में पकड़ लिया और सहलाने लगी। वासना शादाब के उपर हावी होने लगी और उसने रेशमा की चूची को पकड़ लिया और दबाने लगा तो रेशमा मस्ती से भर उठी और बोली:”

” आह शादाब, थोड़ा जोर दबा ना मेरी चूची, बहुत तड़पाया है तूने मुझे

शादाब जोर जोर से रेशमा की चूची दबाने लगा। रेशमा की चूची में कसाव तो था लेकिन शहनाज़ के मुकाबले बिल्कुल लटकी हुई थी लेकिन आकार ठीक ठाक था।

रेशमा नीचे झुकते हुए शादाब की टांगो के बीच अा गई और उसके लंड के सुपाड़े को एक झटके के साथ मुंह में भर लिया और चूसने लगी। शादाब के मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी।

” आह बुआ, उफ्फ मेरी बुआ, उफ्फ कितनी अच्छी हो तुम

शादाब का लंड पहली बार कोई चूस रही थी जिससे शादाब को बहुत मज़ा अा रहा था और उसने एक तेज झटका मारा और आधा लंड रेशमा के मुंह में घुसा दिया। रेशमा का मुंह पूरी तरह से भर गया और वो लंड को जोर जोर से चूसने लगी। शादाब की आखें मजे से बंद हो गई और वो रेशमा के सिर को अपने लंड पर दबाने लगा पूरा लंड उसके मुंह में घुसा दिया तो रेशमा के गले में लंड जा टकराया और रेशमा को दर्द हुआ लेकिन वो लंड को चूसती रही।

कभी हल्का हल्का दांतो से दबा देती तो कभी लंड पर जीभ फेर देती। शादाब का एक हाथ अपने आप रेशमा की चूत पर चला गया और शादाब में अपनी दो उंगलियां उसकी चूत में घुसा दी तो रेशमा मस्ती से भर उठी और पूरी ताकत से शादाब का लंड चूसने लगी। तभी शादाब का मोबाइल बज उठा। शहनाज़ का फोन था लेकिन रेशमा ने मोबाइल को एक तरफ रख दिया और मस्ती से लंड चूसती रही। शादाब रेशमा की जीभ का सामना ज्यादा देर नहीं कर पाया और उसने एक तेज झटके के साथ लंड को रेशमा के गले में उतार दिया और उसके लंड से वीर्य की पिचकारी छूटने लगीं। शादाब ने जोश में आकर रेशमा की चूत में उंगली जोर से रगड़ते हुए घुसा दी और रेशमा की चूत ने भी अपना रस बहा दिया तो उसने जोर से अपनी टांगो को कसते हुए शादाब की उंगलियों को अपनी चूत में कस लिया और मस्ती से सिसक उठी।

थोड़ी देर के बाद जब रेशमा बाथरूम में चली गई तो शादाब को होश आया तो उसने देखा कि शहनाज़ की चार मिस कॉल पड़ी हुई थी तो उसने वापिस फोन किया तो उधर से शहनाज की गुस्से में कड़कती हुई आवाज अाई:”

” कहां था तू फोन क्यों नहीं उठाया ?

शादाब एक पल के लिए तो डर गया लेकिन जल्दी ही अपने आपको संभालते हुए कहा:”

” अम्मी मैं नहाने चला गया था इसलिए नहीं उठाया।

शहनाज़:” अच्छा ऐसा कर कर दिया तूने वहां जाकर जो नहाना पड़ गया।

शादाब:’ अरे अम्मी मैं पसीने से भीग गया था इसलिए।

शहनाज़:” ध्यान रखना अगर मुझे धोखा दिया तो तेरी जान ले लूंगी

शादाब:” मैं तो पहले ही अपनी जान आपके नाम कर चुका।

शहनाज़:” अच्छा ठीक हैं, एक काम कर जल्दी वहां से निकल यहां मेरा मन नहीं लग रहा है।

शादाब:’ ठीक हैं अम्मी, मैं जल्दी ही निकलता हूं।

इतना कहकर शादाब ने फोन काट दिया।
जैसे ही शादाब ने फोन काटा तो रेशमा बाथरूम से अा गई थी और फिर से शादाब को अपनी बाहों में लेने लगी तो शादाब बोला:

” बुआ पहले मुझे खाना खिलाओ बहुत भूख लगी हैं।

रेशमा अपनी चूची दिखाते हुए:”

” खाना छोड़ ना मेरे राजा, तू दूध पी ले आजा।

शादाब:” वो मैं पियूंगा और जी भर कर पियूंगा लेकिन आज नहीं, बाद में कभी हॉस्टल से आऊंगा आपके पास पूरी रात के लिए तब आराम से पियूंगा।

रेशमा को शादाब की बात सुनकर झटका सा लगा और बोली:”

” नहीं शादाब आज ही पी ले मेरी जान, उफ्फ देख ना यहां कितनी ज्यादा खुजली हो रही हैं?

इतना कहकर रेशमा ने अपनी सलवार को खोल दिया और अपनी पेंटी सहित नीचे सरका कर चूत दिखाने लगी। शादाब आगे बढ़ा और उसकी चूत पर हाथ फेरते हुए कहा:”

” उफ्फ बुआ ये तो पूरी गर्म हो रही है,

रेशमा;” इसलिए तो बोल रही हूं कि इसको पहले ठंडा कर दे

शादाब:” ऐसे जल्दी में आपकी आग और भड़क जाएगी, मैं अगले हफ्ते आपके पास आऊंगा और पूरी रात इसकी गर्मी निकाल दूंगा अच्छे से ।

रेशमा:” आह शादाब, तू सचमुच आएगा ना मेरे पास

शादाब:” अपने खून पर भरोसा रखो बुआ, मैं जरूर आऊंगा।

रेशमा खुश हो गई और जल्दी से खाना बनाया और फिर सबने खाना खाया और थोड़ी देर बाद शादाब गाड़ी निकाल लाया तो दादा दादी बैठ गए तो रेशमा उदास हो गई और उसकी आंखे भर आई और रुंधे गले से बोली:”

” कुछ दिन और रुक जाते तो अच्छा होता, मेरा बहुत मन लगा हुआ था।

दादा जी:” कोई बात नहीं बेटी,दिल छोटा मत कर, फिर अा जाएंगे हम।

रेशमा:” मैं आपको लेने खुद अा जाऊंगी। अपना ध्यान रखना आप दोनों।

उसके बाद शादाब ने गाड़ी घर की तरफ बढ़ा दी और शहनाज को कॉल करके बता दिया कि मैं निकल गया हूं तो शहनाज़ ने राहत की सांस ली। शादाब के मन में आज एक अजीब सी खुशी भरी हुई थी। रह रह कर उसे अपने लंड पर रेशमा के होंठो का नाजुक स्पर्श याद अा रहा था। लंड चूसे जाने से इतना मजा आता है ये उसे आज महसूस हुआ। वो इन्हीं विचारों में डूबा हुआ घर की तरफ बढ़ता जा रहा था जहां उसकी बीवी उसकी जान उसकी अम्मी शहनाज़ बेताबी के साथ उसका इंतज़ार कर रही थी।

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