माँ का आशिक अध्याय 5

शादाब का दिल तड़प उठा अपनी अम्मी की ये दर्द वाली बात सुनकर इसलिए उसकी आंखे छलक उठी और बोला;”

” अम्मी आपको सिर्फ जिस्मानी दुख हुआ है और आपके दर्द से मुझे जो रूहानी दुख पहुंचा है मैं बता नहीं सकता। अम्मी अंदर तक टूट गया हूं मैं।

शहनाज़ ने अपने बेटे की आंखे साफ करी और उसे अपने सीने से लगा लिया और बोली:”

” मुझे आज एहसास हो गया है कि मेरा बेटा मुझसे सचमुच कितना प्यार करता है। लव यू मेरे राजा।

शादाब ने भी अपने आपको संभालते हुए अपनी अम्मी के माथे को चूम लिया और बोला:”

” लव यू टू मेरी जान शहनाज। “

शहनाज गंभीर होकर सोचते हुए बोली:”

” बेटा हम प्यार तो कर बैठे लेकिन इसका अंजाम क्या होगा कभी सोचा है तुमने ?

शादाब ने पूरे विश्वास के साथ शहनाज की आंखो में देखते हुए कहा:'” अम्मी जब तक मेरे सिर्फ में आखिरी सांस होगी मैं आपका साथ नहीं छोडूंगा।

शहनाज़ उसकी बात सुनकर खुश हो गई और उसका हाथ थाम कर घूरते हुए:”

” कमीने बात प्यार की करता हैं और बोल अम्मी रहा हैं मुझे , कुछ तो शर्म कर।

शादाब उसका गाल चूम कर बोला:” अभी आदत पड़ी हुई है ना अम्मी बोलने की इसलिए धीरे धीरे छूट जाएगी मेरी शहनाज़।

शहनाज़:” चल ठीक हैं, मैं अब नहा लेती हूं। फिर तेरे लिए कुछ खाने को भी बना दूंगी मुझे भी भूख लगी हैं।

इतना कहकर शहनाज़ जाने लगी तो शादाब ने उसे हाथ से पकड़ कर खींच लिया तो शहनाज़ उसकी बांहों में गिर पड़ी तो शादाब बोला:”

” जाने से पहले मेरे होंठो पर मीठी सी प्यारी सी किस कौन करेगा ?

शहनाज़ ने आगे होकर शादाब के होंठो पर एक किस करी और बोली :”

” अब तो खुश हैं ना मेरे राजा, मैं चलती हूं अब नहाने के लिए।

शहनाज़ इतना कहकर आगे चली तो दर्द की वजह से उसे चलने में दिक्कत हो रही थी क्योंकि गांड़ की माशपेशियां कठोर लंड से बुरी तरह से छिल गई थी जिससे आपस में दोनो गांड़ के उभार टकराते ही उसे दर्द हो रहा था। शादाब अपनी अम्मी की हालत देख कर आगे आया और बोला:”

” क्या हुआ अम्मी ?

शहनाज उसकी तरफ शिकायत भरी नजरो से देखते हुए बोली:”

” होना क्या हैं मेरे अनाड़ी सैयां, सब मेरा कचूमर निकाल दिया हैं, दर्द हो रहा हैं मुझे!!

शादाब सब समझ गया और शहनाज को उसने अपनी बांहों ने उठा लिया और बाथरूम की तरफ चल दिया। शहनाज़ भी खुशी खुशी उससे लिपट गई और लंड को पेंट के उपर से सहला कर बोली :”

” बेशर्म तुझे किसने कहा था इसे इतना मोटा टॉइट करने के लिए,लगता हैं जैसे मूसल ही लटका लिया हैं तूने।

शादाब अपने लंड की तारीफ सुनकर खुश हो गया और बोला:”

” अम्मी आपको अच्छा नहीं लगा क्या ये,

शाहनाज: चल कमीना कहीं का, कोई ऐसी बात करता हैं अपनी मा से

शादाब:” उफ्फ अम्मी, कोई मा प्यार करती हैं क्या अपने बेटे से ?

शहनाज:” और तू जो अपनी अम्मी का दीवान बना हुआ है उसका क्या ?

शादाब के अंदर गालिब की आत्मा खुश गई और बोला:”

” आशिक हैं तेरे नाम के इस बात से इन्कार नहीं
झूठ कैसे बोलू की मुझे तुझसे प्यार नहीं,
कुछ कुसूर तो तुम्हारी अदाओं का भी हैं मेरी जान
हम सिर्फ अकेले ही तो गुनहगार नहीं।

शहनाज़ अपने बेटे की शायरी सुनकर मुस्कुरा उठी और तभी बाथरूम भी अा गया था तो अपने बेटे की गोदी से उतर गई और अंदर जाने लगी तो शादाब बेहद ही शरीफ अंदाज में बोला :”

” अगर आपकी इजाज़त हो तो क्या हम भी आपके साथ नहा ले ?

शहनाज़ ने उसकी तरफ गुस्से से देखा और अपनी आंखे मटकाती हुई अदा से बोली :”

” चल भाग, बड़ा आया मेरे साथ नहाने वाला !!

शादाब:” उफ्फ हाय मेरी अम्मी तुम्हारी ये अदाएं ही तो दिल पर असर कर जाती हैं।

शहनाज़ उसकी बात सुनकर बोली :” मजनू कहीं का,

शहनाज़ ने बाथरूम का गेट बंद कर दिया और अपनी मैक्सी उतार कर नहाने लगी। उसकी गांड़ में अभी भी दर्द था इसलिए उसने हल्के गुनगुने पानी के साथ प्यार से साफ किया। शहनाज़ अब काफी अच्छा महसूस कर रही थी और अपने बदन को अच्छे से साबुन से साफ किया और फिर टॉवल से अपना बदन सुखाने लगी।

दूसरी तरफ रेशमा पूरे जी जान से लगी हुई थी अपने मा बाप की सेवा करने में क्योंकि वो जानती थी कि जितने तारीफ उसके पापा शादाब के सामने मेरी करेंगे वो उतने ही जोश के साथ मेरी चुदाई करेगा।

रेशमा अपने अब्बा को खाना खिलाते हुए:” अब्बा देखिए मैने आपके लिए खीर बनाई हैं वो असली मावे के साथ, आप हैं कि खा ही नहीं रहे हा।

अब्बा:”बेटी और कितना खिलाएगी मेरा पेट तो भर गया हैं पहले से ही !! अब बस कर

रेशमा:” ना ये आखिरी चम्मच तो आपको खानी ही पड़ेगी।

और अब्बा के मना करने के बाद भी रेशमा जबरदस्ती खिला रही थी। रेशमा की अम्मी ये देख कर बहुत खुश हो रही थी कि चलो आखिर कार उनकी बेटी सही दिशा में लौट अाई हैं।

रेशमा ने अपनी अम्मी को भी मना करने के बाद दो तीन चम्मच खीर खिला ही दी। दोनो बहुत खुश थे और एक दूसरे से रेशमा की तारीफ कर रहे थे। रेशमा को अच्छा मौका लगा और बोली:”

” अम्मी शादाब अभी छोटा बच्चा ही है, पता नहीं कैसे मन लग रहा होगा उसके गांव में ?

रेशमा का तीर काम कर गया और अब्बा भावुक होकर बोल उठे:”

” अरे बेटी एक बात बात तो करा से उससे, दो दिन हो गए उसे गए हुए, पता नहीं कैसा होगा ?

रेशमा ने खुशी से झूमते हुए शादाब का नंबर मिला दिया तो जैसे ही शादाब ने रेशमा का नंबर देखा तक मुस्कुरा उठा और फोन उठा लिया।

शादाब:”सलाम बुआ कैसी है आप ?

रेशमा:” सलाम बेटा, बस ठीक हूं रे, तेरी बहुत याद आती हैं मुझे, कब आएगा तू मेरे पास ?

शादाब सब समझ गया और बोला:” बस बुआ जल्दी ही अा जाऊंगा मैं।

रेशमा:” अच्छा बेटा अब्बा तुझसे बात करने के लिए बोल रहे थे।

इतना कहकर रेशमा ने फोन अब्बा के हाथ में दे दिया तो अब्बा बोले:” मेरा बच्चा,कैसे हो शादाब मेरे बेटे?

शादाब:” सलाम दादा जी, मैं ठीक हूं आप बताए सर।

अब्बा:” मैं भी ठीक हूं बेटा, रेशमा बहुत ध्यान रख रही है बेटा हमारा, हर चीज बिना मांगे मिल रही है, सच में बेटी हो तो रेशमा जैसी मेरे बच्चे।

रेशमा अपने बाप की बात सुनकर खुशी से झूम उठी और रेशमा से कहीं ज्यादा उसकी चूत खुश हुई।
शादाब बोला:”..

” दादा जी आप आराम से रहे, जब भी आपका घर आने का मन करे तो बता देना, मैं गाड़ी लेकर अा जाऊंगा आपके पास!!

मोबाइल हैंड फ्री था जैसे ही रेशमा ने ये बात सुनी तो उसने अपने अब्बा से फोन ले लिया और बोली :”

” बेटा शादाब अभी इन्हे मेरे पास कुछ दिन और रहने दे ताकि मुझे भी अपने मा बाप की सेवा का पुण्य मिल सके।

इतना बोलते हुए रेशमा फोन लेकर अपने मा बाप से बोलकर कि उसे उपर काम हैं छत पर अा गई और शादाब से बोली:”

” शादाब अम्मी पापा के लिए मैंने दिन रात एक कर दिया हैं, और इससे कहीं ज्यादा इनके लिए करूंगी, बस तू अपना वादा याद रखना !

शादाब के होंठो पर स्माइल अा गई और बोला:’

” बुआ आप फिक्र ना करे, आपकी हर इच्छा पूरी करेगा, आपको वो सुख दूंगा जो आपके सपने में भी नहीं सोचा होगा। बस आप दादा दादी का ख्याल रखे कुछ दिन।

रेशमा शादाब की बात सुनकर जोश में अा गई और चूत कपड़ों के ऊपर से ही सहलाते हुए बोली:

” आह बेटा शादाब, देख ना तुझे याद करके मेरी नीचे वाली कैसे आंसू बहा रही हैं!!

शादाब :” जितना वो रोएगी उससे कहीं ज्यादा उसे सुकून दूंगा मैं।
अच्छा ठीक है बुआ बाद में करता हूं मैं।

शादाब ने जैसे ही फोन काटा तो उसे अपने पीछे खड़ी शहनाज़ नजर आईं जो उसकी सारी बाते सुन चुकी थी जिससे उसका खूबसूरत चेहरा एक लाल अंगारे की तरफ दहक रहा था। शादाब डर गया और बोला:”

” अम्मी रेशमा बुआ का फोन था, दादा जी भी बात कर रहे थे, बोल रहे थे कि रेशमा उनका बहुत ध्यान रख रही है।

दादा दादी वाली बात शहनाज़ ने नहीं सुनी थी क्योंकि तब वो बाथरूम में थी। गुस्से से शाहनाज लंगड़ाती हुई आगे बढ़ी और एक जोरदार थप्पड़ शादाब के मुंह पर रशीद कर दिया और किसी जख्मी नहीं की तरह फुफकारते हुए बोली:”

” धोखेबाज कहीं का, हर सुख देने की बात करता हैं उस रण्डी को और प्यार का ड्रामा मुझसे करता है। जा दफा होजा मेरी आंखो के आगे से,

शहनाज़ ने ये बात रोते हुए कही और अपने कमरे ने घुस गई और कमरा अंदर से बंद कर लिया। शादाब को एक पल के लिए कुछ नहीं समझ नहीं आया कि क्या करे इसलिए सिर पकड़ कर वहीं बैठ गया। उसने तो अपनी अम्मी को घुमाने के लिए ये प्लान बनाया था और शहनाज़ उसे ही गलत समझ रही हैं।

कुछ सोच कर शादाब उठा और शहनाज़ का रूम नॉक करने लगा और बोला:”

” अम्मी प्लीज़ पहले मेरी पूरी बात तो सुन लो आप फिर जो आप कहोगी मुझे मंजूर होगा।

शहनाज़ रोते हुए:” अब भी तुझे लगता है कि कुछ बच गया है सुनने के लिए, कितना बेशर्म हैं तू शादाब, मुझे शर्म आती हैं ये सोचकर कि तू मेरा बेटा हैं।

शादाब का दिल पूरी तरह से बैठ गया और आंखों के आगे अंधेरा सा छा गया और धड़ाम से एक कटे हुए पेड़ की छांव फर्श पर गिर पड़ा और बेहोश हो गया। शहनाज़ को जैसे ही कुछ गिरने की आवाज़ सुनाई दी तो उसका दिल घबरा गया और उसने एक झटके के साथ दरवाजा खोल दिया तो देखा कि उसके बेटा नीचे फर्श पर पड़ा हुआ हैं तो उसे बहुत दुख हुआ और उसके पास पहुंच गई और उसे हिलाते हुए बोली:”

” शादाब आंखे खोलो मेरे बेटे, क्या हुआ तुम्हे , ठीक तो हो तुम बात करो मुझसे ?

शादाब ऐसे ही मुर्दे की तरह पड़ा रहा तो शहनाज उसे उठा कर बेड पर ले जाने की कोशिश करने लगी लेकिन उसके जवान तंदुरुस्त जिस्म को उठाना तो दूर की बात ठीक से हिला भी नहीं पाई। शहनाज़ कुछ सोचते हुए किचेन में घुस गई और पानी लेकर अाई और इसके मुंह पर थोड़ा सा अपनी डाला तो शादाब के जिस्म में हल्की सी हलचल हुई जिससे शहनाज़ ने कुछ सुकून की सांस ली। उसने अपने बेटे के शरीर की हल्की मालिश करनी शुरू कर दी। धीरे धीरे शादाब को होश आने लगा और जैसे ही उसकी आंखे खुली तो उसने अपने आपको शहनाज़ की गोद में पाया जिसका चेहरा शादाब के उपर झुका हुआ था और आंखो से टपटके आंसू शादाब के चेहरे पर गिर रहे थे।

शादाब अपनी अम्मी से लिपट गया और बोला:”

” अम्मी प्लीज़ मेरा यकीन करो, मैंने सब कुछ आपकी खुशी के लिए किया हैं। आपका बेटा धोखेबाज नहीं हैं।

शहनाज़:” बस कर मेरे बेटे, बस तू ठीक हो गया मेरे लिए इतना बहुत हैं शादाब।

शादाब:” अम्मी प्लीज़ अगर आपको लगता हैं कि मैंने गलत किया हैं तू मुझे माफ़ कर दो नहीं तो कोई सजा दो।

शहनाज़:” शादाब मैंने सारे ज़माने की रश्मो और रिश्तों को ताक पर रखकर तुझे प्यार किया हैं, मुझे तेरी बेवफाई बर्दाश्त नहीं होगी

शादाब: अम्मी मेरे मन में कुछ भी ग़लत नहीं हैं, मैंने आपको सब बता तो दिया है।

शहनाज़ कुछ हद तक उसकी बात से सहमत हो गई लेकिन अभी उसके मन में कहीं ना कहीं एक कसक जरूर रह गई। उसने शादाब को सहारा देकर उठाया और बेड पर लिटा दिया और उसके लिए नाश्ता तैयार करने किचेन में घुस गई।

शहनाज़ ने दूध गर्म किया और अपने बेटे के लिए ब्रेड आमलेट बनाने लगी। उधर शादाब समझ नहीं पा रहा था कि अपनी अम्मी को कैसे यकीन दिलाया जाए क्योंकि दादा जी या बुआ से तो पूछने का सवाल ही नहीं बनता था कि मैं उनसे बात कर रहा था। पता नहीं क्या सोचेंगे वो मेरे और अम्मी के बारे में इसलिए ऐसा सोचना भी गलत हैं। इन्हीं विचारों में डूबा हुआ शादाब नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया।

शहनाज नाश्ता तैयार करके शादाब के रूम में अाई तो वो उसे नहीं मिला तभी बाथरूम से पानी गिरने की आवाज सुनकर उसे एहसास हुआ कि शादाब नहा रहा है। शहनाज़ ने अपने बेटे का मोबाइल उठा लिया कि देखू और क्या क्या कर रहता है ये मोबाइल के अंदर। शहनाज़ ने मोबाइल के फोल्डर चेक करने शुरू कर दिए और उसे कहीं कुछ नहीं मिला तभी उसे लास्ट में एक फाइल नजर अाई तो उसे उसने ओपन कर दिया तो फाइल दर असल एक रिकॉर्डिंग फोल्डर था जिसमें आज शादाब के द्वारा की गई बाते रिकॉर्ड हो गई थी। उसने जान बूझकर नहीं की थी लेकिन स्क्रीन टच मोबाइल होने की वजह से अपने आप गाल से लगकर रिकॉर्ड हो गई थी।

शहनाज़ ने रिकॉर्डिंग चला दी तो उसे पता चल गया कि फोन रेशमा ने किया था शादाब ने नहीं । रेशमा सच में उसके सास ससुर का बहुत ध्यान रही हैं ये एहसास उसे अपने ससुर की बाते सुनकर हो गया। आखिर में फोन काटने के लिए भी शादाब ने ही बोला था जो उसे सबसे ज्यादा अच्छा लगा और वो ये सब पता चलते ही शहनाज़ अपने आप पर अफसोस करने लगी कि उसने अपने बेटे पर गलत इल्ज़ाम लगा दिया है। मेरा बेटा कितना दुखी हुआ है मेरी वजह से ये सोचते ही शहनाज़ को अपने आप पर ही गुस्सा आया। लेकिन अब मैं अपनी गलती को सुधार लूंगी।
ये सोचते हुए शहनाज़ अपने रुम में चली गई और एक शॉर्ट रंगीन ड्रेस पहन ली जिसमें उसके कंधे पूरे नंगे थे और काले लंबे बाल कंधे पर लटक रहे थे। ड्रेस बहुत टाईट थी और गला थोड़ा चौड़ा था लेकिन उसमें शहनाज़ की चूचियां पूरी तरह से कसी हुई नजर आ रही थी। उसने अपने आपको सजाना शुरू कर दिया क्योंकि वो अपने बेटे के उपर पूरी तरह से अपना जादू चलाना चाहती थी ताकि वो उसे रेशमा से बचा सकें। शहनाज़ ने अपने खूबसूरत होंठो को लाल रंग की लिपस्टिक से सजाकर और ज्यादा खूबसूरत बना लिया और शादाब के रूम की तरफ चल पड़ी। शादाब नहा चुका था और अपने जिस्म को टॉवेल से साफ करने के बाद अपने कपडे पहन कर अपने रूम में अा गया।
कमरे में घुसते ही उसकी नजर सामने सोफे पर बैठी शहनाज़ पर पड़ी तो वो हैरान हो गया लेकिन उससे कहीं ज्यादा वो खुश हुआ क्योंकि शहनाज़ एक दम जन्नत से उतरी हुई किसी हूर की तरह खूबसूरत लग रही थी।

शादाब अपनी अम्मी को एक हल्की सी स्माइल देकर आगे बढ़ गया और अपने बाल में तेल लगाकर और कंघा करने लगा तो शहनाज़ उठी और उसके पीछे आकर खड़ी हो गई और उसके हाथ को पकड़ लिए जिसके कंघा था। वो अपने बेटे के बाल सेट करने लगी तो शादाब को लगा कि अम्मी अब उतनी भी ज्यादा नाराज नहीं है जितनी मै सोच रहा था । बाल सेट होने जाने के बाद दोनो ने हाथ धोए और एक दूसरे के सामने नाश्ता करने के लिए बैठ गए। दोनो के बीच अभी तक कोई बात नही हुई थी। शहनाज़ लगातार अपने बेटे के चेहरे को प्यार से देख रही थी तो शादाब भी बीच बीच में नजर उठा कर अपनी अम्मी को निहारने से खुद को नहीं रोक पा रहा था।

शहनाज़ खामोशी तोड़ते हुए बोली:” बेटा आज तेरी अम्मी तुझे खूबसूरत नहीं लग रही है ? आज तारीफ नहीं करेगा क्या मेरी ?

शादाब:” अम्मी आप तो हमेशा की तरह एकदम बिल्कुल हूर जैसी लग रही हैं !

शहनाज़ अपनी सीट से उठी और उसके पास आते हुए बोली:”

” बेटा इतनी दूर से तुझे शायद ठीक से नहीं दिख रहा है तभी आधे अधूरे मन से तारीफ कर रहा हैं मेरी। अब बता मेरे राजा एक दम पास से देखकर।

शहनाज़ इतना बोलते हुए बिल्कुल उसके सामने खड़ी हो गई तो शादाब को उसके बदन से उठती हुई मादक परफ्यूम की खुशबू महसूस हुई। शादाब ने एक बार अपनी अम्मी की तरफ नजरे उठा दी और जी भर कर उसकी सुंदरता को देखने लगा।

शहनाज़:” मुझे लगता है कि तुम अभी भी ठीक से नहीं देख पा रहे हो मेरे राजा !! रुक एक मिनट

इतना कहकर शहनाज़ झट से शादाब की गोद में बैठ गई। अब शहनाज़ की दोनो टांगे शादाब की कमर पर अटकी हुई थी और दोनो के चेहरे बिल्कुल एक दूसरे के सामने थे।

शहनाज़:” अब ठीक से देख ले मेरे राजा अपनी शहनाज़ को ?

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनकर खुश हो गया और उसकी आंखो में देखते हुए बोला:”

” अम्मी आप इस दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत हो। मैंने ऐसी खूबसूरती कहीं नहीं देखी।

शहनाज ने अपनी तारीफ से खुश हो कर अपने दोनो हाथ उसकी गर्दन में लपेट दिए और आगे को खिसक गई जिससे दोनो के होंठ बिल्कुल एक दूसरे के करीब अा गए। शहनाज उसकी आंखो में देखते हुए बोली:”

” मेरे राजा अपनी शहनाज़ को माफ कर दे मैंने गलतफहमी की वजह से तुझ पर शक किया।

इतना कहते हुए उसने अपने होंठ बिल्कुल शादाब के होंठो के सामने कर दिए और उसके बालो में उंगलियां फेरने लगीं तो शादाब को भी अपनी अम्मी की गर्म गर्म सांसे अपने चेहरे पर महसूस हो रही थीं। शादाब ने भी अपने हाथ शहनाज की गर्दन में लपेट दिए और बोला:”

” अम्मी मैं सिर्फ आपसे प्यार करता हूं, आपका बेटा पूरी तरह से आपका हैं, रेशमा तो क्या दुनिया की कोई भी लड़की मुझे आपसे नहीं छीन पायेगी।

जैसे ही शादाब की बात पूरी हुई शहनाज़ ने अपने होंठ शादाब के होंठो पर रख दिए और चूसने लगी। दोनो की आंखे एक बार फिर से मस्ती से बंद हो गई और दोनो एक लंबे किस में खोते चले गए और दोनो की जीभ एक दूसरे के मुंह में कबड्डी खेलने लगी।

आखिर में जब सांस उखड़ने लगी तो दोनो अलग हुए और एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा दिए। शादाब ने दूध का ग्लास टेबल से उठाया और शहनाज़ के होंठो से लगा दिया तो शहनाज़ ने एक घूंट भर कर शादाब को दिया तो वो दूध पीने लगा। दोनो मा बेटे के बीच अब सारी गलतफहमी दूर हो गई थी इसलिए दोनो मा बेटे एक दूसरे को खाना खिलाने लगें। जल्दी ही नाश्ता करने के बाद शहनाज़ ने सब बर्तन धो दिए और शादाब के पास अा गई।

शादाब:” अम्मी मैं सोच रहा था कि कहीं घूमने चलते है !!

शहनाज़:” ठीक हैं बेटा मैं कपडे बदल लेती हूं ।

शादाब:” क्या कपडे बदलने अम्मी, इन्हीं के उपर बुर्का पहन लो बस।

शहनाज़ शरमाते हुए:”

” अच्छा जी जनाब और फिर आप गांव से बाहर निकलते ही बुर्का उतार देंगे।

शादाब: बिल्कुल अम्मी आपको अब खुलकर जीना चाहिए, आपका बेटा आप को बहुत खुशी देने के लिए आया हैं।

शहनाज़ अपने गले से झांकती हुई अपनी चूचियों की गोलाईयों को देखते हुए:*

” तुझे अच्छा लगेगा क्या जब मुझे लोग ऐसी हालत में देखेंगे।

शादाब:” अम्मी ये ही मैं आपको एहसास कराना चाहता हूं कि आप कितनी खूबसूरत हैं, लोग पागल हो जाएंगे आपको इस हाल में देख कर !!

शहनाज़ शर्म से लाल होते हुए:”

” नहीं मेरे राजा, ऐसा मत कर मैं लोगो की नजरे कैसे बर्दाश्त कर पाऊंगी अपने जिस्म पर ? मुझसे नहीं हो पाएगा, डर लगता हैं मुझे तो बहुत सोच कर ही।

शादाब:” अम्मी इसमें डरने की कोई बात नहीं है, आजकल तो ये फैशन बन गया हैं। अम्मी प्लीज़ मेरी बात मान लो।

शहनाज़ :” ठीक हैं, अगर मैंने किसी को ऐसी ड्रेस पहने देखा तो बुर्का उतार दूंगी नहीं तो मेरे साथ जबरदस्ती मत करना।

शादाब:” अम्मी आप ये बात सपने में भी मत सोचना कि आपका बेटा आपके साथ कोई जबरदस्ती करेगा।

शहनाज़ उठकर चली गई और थोड़ी देर बाद ही बुर्का पहन कर अा गई। शादाब कार निकाल चुका था इसलिए दोनो मा बेटे शहर की तरफ चल पड़े। अभी गांव से बाहर निकल ही रहे थे कि शादाब के दादा जी का फोन आ गया।

शादाब:” सलाम दादा जी, कैसे है आप सब?

दादा:” ठीक हूं बेटा, बस तुम्हारी फिक्र रहती हैं। अच्छा बेटा वो करीम साहब का फोन आया था, हमारे पास के कस्बे के चेयरमैन हैं बेटा वो। विदेश गए हुए थे इसलिए पार्टी में नहीं अा पाए थे। वो अपने बेटे को डाक्टर बनाना चाहते हैं इसलिए उनकी बीबी रेहाना का फोन आया था उसने तुम्हे घर बुलाया हैं। थोड़ी देर बाद तुम्हे कॉल करेगी, उनके घर चले जाना बेटा, उनके बहुत एहसान हैं हम पर।

शादाब:” जी दादा जी आप फिक्र ना करे, मैं चला जाऊंगा।

इतना कहकर शादाब ने फोन काट दिया और शहनाज़ को सारी बाते बताई तो शहनाज़ समझ गई कि ये जरूर वहीं कमीनी रेहाना है जो मेरे बेटे का मोबाइल नंबर लेकर गई थी और उस दिन सिनेमा हॉल में भी अपने बेटे के साथ कैसी नीच हरकत कर रही थी। जिसने अपने सगे बेटे को नहीं छोड़ा वो कमीनी जरूर मेरे बेटे को फसाने के लिए बुला रही है मुझे रोकना होगा।

शहनाज़:” बेटा लेकिन हम तो शहर जा रहे हैं तो उसके घर नहीं जाएंगे।

शादाब:” अम्मी दादा जी ने बोला हैं कि वहां जाना ज्यादा जरूरी है और उन लोगो के हम पर बहुत एहसान हैं अम्मी।

शहनाज़:’ कुछ भी हो बेटा लेकिन मेरा मन नहीं मान रहा हैं तुझे वहां भेजने के लिए।

शादाब:’ अरे अम्मी मैं अकेला थोड़े ही जा रहा हूं। आप भी तो मेरे साथ जा रही है।

शहनाज़ शादाब की बात सुनकर थोड़ा राहत की सांस लेने लगी क्योंकि वो जानती थी कि अगर आज नहीं गए तो कहीं ऐसा ना हो कि बाद में शादाब को अकेले ही जाना पड़े।

शहनाज़:” ठीक हैं, लेकिन ज्यादा देर नहीं रुकेंगे।

शादाब आगे कुछ बोलता उससे पहले ही उसका मोबाइल बज उठा। वो समझ गया कि ये जरूर रेहाना का कॉल होगा।

रेहाना:” हेलो क्या मेरी बात शादाब से हो रही है?

शादाब के कानों में एक बहुत ही मधुर आवाज गूंज उठी।

शादाब:” जी मैं शादाब बोल रहा हूं, आप बताए।

रेहाना:” शादाब मै रेहाना बोल रही हूं, उम्मीद हैं आपके दादा जी ने आपको सब बता दिया होगा इसलिए मैं आपको अपना एड्रेस भेज रही हूं।

शादाब:” जी ठीक है, मैं पहुंच जाऊंगा।

रेहाना ने अपना पता भेज दिया और जल्दी ही शादाब और शहनाज़ रेहाना के घर के सामने खड़े थे। डोर बेल बजाने पर घर की एक नौकरानी ने दरवाजा खोला और दोनो को अंदर ले गई। घर बहुत ही आलीशान बना हुआ था। शादाब जैसे ही अंदर कमरे में पहुंचा तो उसे रेहाना दिखाई दी तो उसने सलाम किया।

रेहाना ने उसका सलाम लिया और साथ में शहनाज़ को देख कर वो हैरान परेशान हो गई। उसने पूछा:”..

” शादाब बेटा आपके साथ ये कौन अाई है ?

शादाब से पहले शहनाज़ खुद ही बोल उठी:”

” सलाम रेहाना जी, मैं शादाब की अम्मी हूं। मेरा नाम शहनाज़ है।

रेहाना को बुरा तो लगा लेकिन मजबूरी में उसने शहनाज़ को एक फीकी सी स्माइल दी और बोली:

” माशा अल्लाह शहनाज़ जी आप बहुत खूबसूरत है और शादाब बिल्कुल आप पर ही गया है।

शहनाज़ को बुरा लगा लेकिन उसने भी ऑपचारिकता पूरी करते हुए स्माइल दी। तीनो आमने सामने कुर्सी पर बैठे हुए थे , गर्मी की वजह से एसी में भी शहनाज़ को पसीना अा रहा था शायद धूप में आने की वजह से इसलिए रेहाना बोली:”

” आपको तो बहुत ज्यादा पसीना अा रहा है और उपर से आपने इतना भारी बुर्का पहन रखा है, इसे उतार दीजिए।

रेहाना के सवाल पर शहनाज़ डर से अपने आप में सिमट सी गई क्योंकि बुर्के के नीचे उसने बहुत छोटी ड्रेस पहन रखी थी। इसलिए बुर्का उतारने का तो कोई सवाल ही नहीं पैदा होता।

शहनाज़ अपने आपको संभालते हुए बोली:”

” माफ करना बहन आप मुझे, लेकिन मैंने कभी घर से बाहर बुर्का नहीं उतारा आज तक, इसलिए मैं ऐसे ही ठीक हूं।

रेहाना हैरान होते हुए:”

” आप भी कमाल की बात करती है शहनाज़, अब तो सब कुछ कितना बदल गया है, आपको जमाने के साथ चलना चाहिए।

शादाब को भी मजाक सूझी और बोला:” हान अम्मी, मैं भी आपको यहीं समझाता हूं कि जमाना बदल गया है, आप बुर्का उतार दीजिए।

शहनाज़ को शादाब पर बहुत गुस्सा अा रहा था इसलिए मन ही मन गालियां देते हुए बोली:”

” बेटा लेकिन मुझे मेरे संस्कार और तहजीब आप भी पसंद हैं और मैं उनसे समझौता नहीं कर सकती।

रेहाना सोचने लगी कि अजीब पागल औरत हैं ये शहनाज़ भी, इतनी खूबसूरत हैं उसके बाद भी अपने आपको कैसे कैद करके रखती है, इतना खूबसूरत लड़का हैं इसका, काश शादाब मेरा बेटा होता तो कब का इसे अपने उपर चढ़ा चुकी होती।

रेहाना:” आप दोनो बैठिए, मैं आपके लिए नाश्ते का इंतजाम करती हूं।

इतना कहकर वो बाहर चली तो उसके जाते ही शहनाज़ ने शादाब को थप्पड़ दिखाया और बोली:”

” कमीने कितना ज्यादा बिगड़ गया है तू, पहले मुझे जबरदस्ती छोटी ड्रेस पहनने को बोलता है और फिर यहां इस कमीनी के सामने उतारने को, घर चलकर तुझे अच्छे से ठीक करूंगी।

शादाब:” अच्छा माफ करो अम्मी मैं तो मजाक कर रहा था।

शहनाज़ ने उसे घूर दिया तो शादाब अपनी अम्मी का गुस्सा देखकर स्माइल कर दिया। तभी रेहाना के आने की आहट सुनाई पड़ी तो दोनो सीधे बैठ गए।
नाश्ता लग चुका था और तीनो ने साथ ने नाश्ता किया।

रेहाना:” अरे कमला जरा मेरे बेटे को देखना किधर हैं ? शादाब आया हुआ हैं तो इससे कुछ पूछ लेगा वो।

कमला की बाहर से आवाज आई कि अभी भेजती हूं बीबी जी। थोड़ी देर बाद ही रेहाना का लाडला अा गया जिसे देखकर शादाब चौंक पड़ा। उसे याद अा गया कि ये लड़का तो उस दिन सिनेमा हॉल में अपनी अम्मी को लंड चूसा रहा था। दरसअल उस दिन शादाब रेहाना का चेहरा ठीक से नहीं देख पाया था लेकिन उनकी बातो से इतना जरूर समझ गया था कि ये दोनों मा बेटे हैं। रेहाना का लड़का शादाब के पास ही बैठ गया और उससे बात करने लगा।

शादाब उसे पढ़ाई के बारे में काफी बाते समझाने लगा। कोई 12 बज गए थे और शादाब लडके को सब कुछ बता चुका था। रेहाना बीच बीच में हसरत भरी निगाहों से शादाब की तरफ देख रही थी जो शहनाज़ की शातिर निगाहों से नहीं छुप रहा था इसलिए शहनाज़ जल्दी से जल्दी वहां से निकलने की दुआ कर रही थी।

शादाब ने लड़के को सब कुछ बताने के बाद कहा:”

” अच्छा भाई मैंने तुझे सब बता दिया हैं और आगे कोई जरूरत हो तो मुझे कॉल कर लेना। मुझे शहर में कुछ काम है इसलिए मुझे जाना होगा।

रेहाना:” अरे बेटा इतनी जल्दी क्यों कर रहे हो, खाना खाकर जाना आराम से आप दोनो।

शादाब ने शहनाज़ की तरफ देखा तो शहनाज़ ने उसे चलने का इशारा किया तो शादाब बोला:”

” नहीं आप खाने के लिए तो माफ करे, शहर में मुझे बैंक में कुछ काम हैं इसलिए जल्दी जाना होगा

इतना कहकर शादाब खड़ा हो गया और फिर वो सब बाहर की तरफ जाने लगे। आगे आगे शादाब और रेहाना चल रही थी जबकि शहनाज़ थोड़ा पीछे थी। रेहाना अपने एक हाथ को अपनी चूची के नीचे लाकर उसे उभारते हुए बोली:”

” बेटा कभी कभी आया करना जब भी तुम्हारा मन करे क्योंकि ये भी तुम्हारा अपना ही घर हैं।

शादाब उसकी चूचियां देखते हुए:”

” ठीक है आंटी जी।

शहनाज़ अपने आपको संभालते हुए बोली:”

” माफ करना बहन आप मुझे, लेकिन मैंने कभी घर से बाहर बुर्का नहीं उतारा आज तक, इसलिए मैं ऐसे ही ठीक हूं।

रेहाना हैरान होते हुए:”

” आप भी कमाल की बात करती है शहनाज़, अब तो सब कुछ कितना बदल गया है, आपको जमाने के साथ चलना चाहिए।

शादाब को भी मजाक सूझी और बोला:” हान अम्मी, मैं भी आपको यहीं समझाता हूं कि जमाना बदल गया है, आप बुर्का उतार दीजिए।

शहनाज़ को शादाब पर बहुत गुस्सा अा रहा था इसलिए मन ही मन गालियां देते हुए बोली:”

” बेटा लेकिन मुझे मेरे संस्कार और तहजीब आप भी पसंद हैं और मैं उनसे समझौता नहीं कर सकती।

रेहाना सोचने लगी कि अजीब पागल औरत हैं ये शहनाज़ भी, इतनी खूबसूरत हैं उसके बाद भी अपने आपको कैसे कैद करके रखती है, इतना खूबसूरत लड़का हैं इसका, काश शादाब मेरा बेटा होता तो कब का इसे अपने उपर चढ़ा चुकी होती।

रेहाना:” आप दोनो बैठिए, मैं आपके लिए नाश्ते का इंतजाम करती हूं।

इतना कहकर वो बाहर चली तो उसके जाते ही शहनाज़ ने शादाब को थप्पड़ दिखाया और बोली:”

” कमीने कितना ज्यादा बिगड़ गया है तू, पहले मुझे जबरदस्ती छोटी ड्रेस पहनने को बोलता है और फिर यहां इस कमीनी के सामने उतारने को, घर चलकर तुझे अच्छे से ठीक करूंगी।

शादाब:” अच्छा माफ करो अम्मी मैं तो मजाक कर रहा था।

शहनाज़ ने उसे घूर दिया तो शादाब अपनी अम्मी का गुस्सा देखकर स्माइल कर दिया। तभी रेहाना के आने की आहट सुनाई पड़ी तो दोनो सीधे बैठ गए।
नाश्ता लग चुका था और तीनो ने साथ ने नाश्ता किया।

रेहाना:” अरे कमला जरा मेरे बेटे को देखना किधर हैं ? शादाब आया हुआ हैं तो इससे कुछ पूछ लेगा वो।

कमला की बाहर से आवाज आई कि अभी भेजती हूं बीबी जी। थोड़ी देर बाद ही रेहाना का लाडला अा गया जिसे देखकर शादाब चौंक पड़ा। उसे याद अा गया कि ये लड़का तो उस दिन सिनेमा हॉल में अपनी अम्मी को लंड चूसा रहा था। दरसअल उस दिन शादाब रेहाना का चेहरा ठीक से नहीं देख पाया था लेकिन उनकी बातो से इतना जरूर समझ गया था कि ये दोनों मा बेटे हैं। रेहाना का लड़का शादाब के पास ही बैठ गया और उससे बात करने लगा।

शादाब उसे पढ़ाई के बारे में काफी बाते समझाने लगा। कोई 12 बज गए थे और शादाब लडके को सब कुछ बता चुका था। रेहाना बीच बीच में हसरत भरी निगाहों से शादाब की तरफ देख रही थी जो शहनाज़ की शातिर निगाहों से नहीं छुप रहा था इसलिए शहनाज़ जल्दी से जल्दी वहां से निकलने की दुआ कर रही थी।

शादाब ने लड़के को सब कुछ बताने के बाद कहा:”

” अच्छा भाई मैंने तुझे सब बता दिया हैं और आगे कोई जरूरत हो तो मुझे कॉल कर लेना। मुझे शहर में कुछ काम है इसलिए मुझे जाना होगा।

रेहाना:” अरे बेटा इतनी जल्दी क्यों कर रहे हो, खाना खाकर जाना आराम से आप दोनो।

शादाब ने शहनाज़ की तरफ देखा तो शहनाज़ ने उसे चलने का इशारा किया तो शादाब बोला:”

” नहीं आप खाने के लिए तो माफ करे, शहर में मुझे बैंक में कुछ काम हैं इसलिए जल्दी जाना होगा

इतना कहकर शादाब खड़ा हो गया और फिर वो सब बाहर की तरफ जाने लगे। आगे आगे शादाब और रेहाना चल रही थी जबकि शहनाज़ थोड़ा पीछे थी। रेहाना अपने एक हाथ को अपनी चूची के नीचे लाकर उसे उभारते हुए बोली:”

” बेटा कभी कभी आया करना जब भी तुम्हारा मन करे क्योंकि ये भी तुम्हारा शहनाज़ ने दोनो की बात सुन ली लेकिन चूची का उभार उसे नहीं दिखाई दिया। वो अपने गुस्से को मन में दबाए हुए घर से बाहर निकल गई। शादाब ने गाड़ी स्टार्ट करी और शहनाज़ उसके साथ बैठ गई तो रेहाना ने एक कातिल मुस्कान के साथ शादाब को बाय किया। शादाब ने भी उसे बाय बोलते हुए गाड़ी आगे बढ़ा दी।
शादाब ने गाड़ी शहर की तरफ दौड़ा दी और उसने शहनाज़ की तरफ देखा जो उसकी तरफ गुस्से से देख रही थीं।

शादाब:” क्या हुआ मेरी जान ? गुस्से में तो और भी खूबसूरत लग रही हो अम्मी !!

शहनाज़ ने कुछ नहीं बोला और बस उसकी तरफ लगातार गुस्से से देखती रही। थोड़ी देर के बाद जैसे ही गाड़ी हाईवे पर पहुंच गई तो शहनाज़ बोली:”

” शादाब गाड़ी रोक !!

शादाब ने झटके के साथ ब्रेक मारते हुए गाड़ी रोक दी और शहनाज़ की तरफ देखा तो शहनाज़ ने गुस्से से उसके दोनो कान पकड़ लिए और खींचते हुए बोली :”

” कमीने अब बता तू उस रेहाना के सामने मुझे बुर्का उतारने को बोल रहा था। तुझे शर्म हैं कि नहीं

शादाब:” आह अम्मी इतनी जोर से मत कान खींचो दुखता है, मैं तो आपको छेड़ रहा था बस।

शहनाज़:” दुखेगा तो है ही क्योंकि इसलिए ही तो जोर से खींच रही हूं मेरे राजा !!

शादाब:” अच्छा अम्मी गलती हो गई, प्लीज़ माफ कर दो।

शहनाज़:” बस इतने से दर्द से ही तेरी बस हो गई, सुबह जो तूने मेरे साथ किया उसका क्या ?

शादाब:” आह अम्मी, मुझे सच में नहीं पता था कि गांड़ में घुस जायेगा आपकी,

शहनाज़ का दिल धड़क उठा और शर्म से पानी पानी हो गई और शादाब के कान भी अपने आप ही छूट गए उसके हाथ से।

शहनाज़ मुंह नीचे किए हुए ही बोली:” तुझे शर्म नहीं आती अपनी अम्मी से ऐसी बाते करते हुए बेशर्म !

शादाब उसकी तरफ सरकते हुए:_ उफ्फ कैसी शर्म तुमसे मेरी जान शहनाज़ ! शर्म करूंगा तो भगा के कैसे ले जाऊंगा?

शहनाज़:” उस कमीनी रेहाना को भगा के ले जा, कैसे तुझ पर लाइन मार रही थी बेटा अपना घर समझना, कभी कभी अा जाना।

शादाब:” अम्मी वो तो मुझे ऐसे ही बुला रही थी, आप गलत मत समझो,

शहनाज़:” मैंने दुनिया देखी हैं शादाब, उस दिन सिनेमा हॉल में ये ही कमीनी थी अपने बेटे के साथ मेरे राजा।

शादाब:’ हान अम्मी, लड़के को तो मैं पहचान गया था।

शहनाज़:” इसने अपना लड़का नहीं छोड़ा, तो मेरे बेटे को कैसे छोड़ देगी ?

शादाब:”अच्छा अम्मी बेटा तो आप भी अपना नहीं छोड़ रही हो,क्या पता वो भी अपने बेटे से प्यार करती हो ?

शहनाज़ को शादाब की बात सुनकर थोड़ा अच्छा नहीं लगा और बोली:”

” बेटा मैं तुझसे प्यार करती हूं, और उस कमीनी के तो पति भी जिंदा है। शर्म करनी चाहिए, उस दिन हॉल में कैसी गंदी हरकत कर रही थी अपने बेटे के साथ ?

शादाब:’ उफ्फ अम्मी मैं आपका दर्द समझ सकता हूं। और वो गंदी नहीं बहुत प्यारी हरकत कर रही थी अपने बेटे की खुशी के लिए।

शहनाज़:” हाय अल्लाह, कितना बिगड़ गया हैं तू !! कोई इसको भी मुंह में लेकर चूसता है क्या ?

शादाब:” उफ्फ मेरी नादान अम्मी, आपने तो खुद अपनी आंखो से देखा हैं सब।

शहनाज़:” कमीने चुप कर, कुछ तो लिहाज कर अपनी मा का, मैंने तो आज तक ठीक से हाथ नहीं लगाया चूसना तो दूर की बात हैं।

शादाब:” अभी आपने इस का कमाल देखा ही कहां हैं, ये वो रॉकेट हैं जो आपको चांद पर के जाएगा।

शहनाज़ शर्माती हुई:” चल बदतमीज, अब मूसल से रॉकेट कैसे बन गया ।अपना ही घर हैं।

शादाब उसकी चूचियां देखते हुए:”

” ठीक है आंटी जी।

शादाब:” हाय अम्मी, मूसल ही समझ लो बस एक बार अपनी औखली का मसाला कूटवा लो फिर देखना आप !!

शहनाज़ का पूरा जिस्म कांप उठा, उफ्फ कमीना कैसे मुझे चुदवाने के लिए बोल रहा है।

शहनाज़:” मेरे राजा, ख्वाब देखना छोड़ दे तू।

शादाब:” उफ्फ अम्मी बस एक बार आपकी औखली का मसाला कूट जाए, आपको इस मूसल की दीवानी हो जाओगी। फिर जब अच्छे से प्यार भरी नजरो से देखोगी तो आपका मुंह अपने आप खुल जाएगा उस रेहाना की तरह मेरी जान।

शहनाज़:” शादाब तू कुछ ज्यादा ही बिगड़ गया हैं, कैसी गंदी गंदी बाते करता हैं अपनी अम्मी से ?

शादाब उसे अपने सीने से लगा लिया तो शहनाज़ का दिल बहुत तेजी से धड़कने लगा। शादाब उसकी कमर सहलाते हुए बोला:”

” उफ्फ अगर तुमसे ना करू तो क्या उस रेहाना से गंदी गंदी बाते करू मेरी शहनाज़ ?

शहनाज़ उसकी पीठ में अपने नाखून गड़ाते हुए बोली:”

” मुंह तोड़ दूंगी तेरा अगर उसका नाम लिया तो। अच्छा ठीक है मेरे राजा, लेकिन गंदी गंदी बात सिर्फ रात में करना अपनी शहनाज़ से, बस अब खुश !!

शादाब ने शहनाज़ की गर्दन को चूम लिया और बोला:”

” भाग चलो मेरे साथ मेरी शहनाज़, अब मन नहीं लगता तुम्हारे बिना !

शहनाज़ का समूचा वजूद कांप उठा और बोली:”

” मन क्यों नहीं लगता तुम्हारे पास ही तो रहती हू सारा दिन मेरे राजा मैं फिर भी ?

शादाब :” उफ्फ अम्मी समझो, मैं आपसे निकाह करना चाहता हूं, अपनी बीवी बनाना चाहता हूं।
शादाब उसके बिल्कुल पास अा गया और उसकी आंखो में देखते हुए कहा :”

” अम्मी मैं सिर्फ आपको भगाना ही नहीं चाहता बल्कि आपके साथ निकाह करना चाहता हूं। क्या आपको कुबूल होगा ?

शहनाज़ को अपने बेटे से ये उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी कि वो निकाह तक की सोच कर बैठा हुआ है इसलिए वो उसके चेहरे को अजूबे की तरह देखने लगी।

शादाब:” ऐसे क्या देख रही हो अम्मी ?

शहनाज़:” बेटा दोस्ती और प्यार तक तो ठीक है लेकिन निकाह नहीं बेटा ये ग़लत होगा।

शादाब:” उफ्फ अम्मी, आपका बेटा आपको वो सभी खुशियां देने के लिए आया है जो आपका सपना रही हैं। आपके सपनों का शहजादा अब आपके सब सपने पूरे करेगा।

जैसे ही शादाब की बात पूरी हुई शहनाज़ की आंखो से आंसू निकल पड़े। शादाब ने दोनो हाथो में अपनी मा का चेहरा भर लिया और बोला:”

” क्या हुआ शहनाज़ इन आंखो में आशु क्यों ? क्या मेरी बात गलत लगी आपको ?

शहनाज़ उसके सीने से चिपक गई और बोली:” नहीं राजा तूने कुछ भी गलत नहीं कहा। बस अपनी किस्मत पर यकीन नहीं रहा मुझे।

शादाब ;” अम्मी आपका बेटा सब कुछ बदल देगा। आप मुझ पर यकीन रखे। बस ये बताए कि क्या आपको मुझसे निकाह कुबूल होगा ?

शहनाज़ ने अपनी बार अपनी बेटे की आंखो में पूरे विश्वास के साथ देखा और उसके होंठ चूम कर बोली :” मेरे साथ तो ये सब एक सपने के सच होने जैसा होगा।

शादाब ने शहनाज़ का हाथ पकड़ लिया और चूम कर बोला :

” आपके सपने सच होने का समय अा गया है अम्मी। मैं आज आपसे निकाह करूंगा।

शहनाज़ :” लेकिन बेटा सब क्या कहेंगे और काजी कहां से लायेगा तू ? गवाह भी तो होते है मेरे राजा।

शादाब :’ आप उसकी फिक्र ना करे। मैं सब इंतजाम कर दूंगा,

शहनाज़ को अपने बेटे पर पूरा यकीन था इसलिए उसके जिस्म में मस्ती भरी लहरे दौड़ने लगी। उफ्फ ये कमीना तू आज रात को मेरे साथ बेड पर …

ये सब सोचकर शहनाज़ की चूत गीली हो गई मानो खुद को तैयार कर रही हो। शादाब बोला:”..

” क्या हुआ अम्मी ? सुहागरात के सपने में खो गई क्या मेरी जान ?

शहनाज़ ने अपने दोनो हाथों से अपना मुंह ढक लिया और बोली:”..

” चल भाग, बेशर्म कहीं का, अभी तो अम्मी हूं तेरी कुछ तो शर्म कर।

शादाब मुस्कुरा दिया और शहर की तरफ गाड़ी बढ़ा दी।

शहनाज़:” बेटा लेकिन अपनी बुआ और दादा दादी जी क्या कहेगा तू ?

शादाब:” देखो अम्मी, हमे ये बात अभी सबसे छुपानी होगी, हम गांव से सब कुछ बेचकर शहर में शिफ्ट हो जायेगे। दादा दादी को भी अपने साथ ले जाऊंगा लेकिन उन्हें कभी नहीं बताएंगे।

शहनाज़:” लेकिन बेटा गांव का क्या होगा ? तुझे तो डॉक्टर बनना था मेरे राजा।

शादाब:’ अम्मी मैं अपनी पढ़ाई जारी रखूंगा और अगले एक महीने के अंदर ही गांव में हॉस्पिटल खोल दूंगा।

शहनाज़ अपने बेटे की समझदारी पर नाज़ करने लगी। जल्दी ही वो सब शहर पहुंच गए।

शादाब :” अम्मी पहले निकाह करना हैं या घूमना हैं ?

शहनाज़ उसके सीने में मारते हुए :” पहले निकाह होता हैं मेरे राजा, उसके बाद ही हनीमून ।

शादाब : मतलब आपने खुद को तैयार कर लिया है अपने बेटे के साथ हनीमून मनाने के लिए।

शहनाज़ शर्मा गई और मुंह नीचे कर लिया। शादाब बोला:_

” चलो अम्मी फिर आपको दुल्हन बनाने की तैयारी शुरू करते हैं।

शादाब ने एक मॉल से शहनाज़ के लिए दुल्हन का जोड़ा, ज्वेलरी, कपडे ,मेक उप किट सब कुछ खरीद लिया।

शादाब ” अम्मी चलो अब ब्यूटी पार्लर चलते हैं।

शहनाज़ सोच रही थी कि मैं तो आज शहर घूमने के लिए अाई थी और अब अपने बेटे की दुल्हन बनकर घर वापिस जाऊंगी। उसकी चूत तड़प उठी और कुछ बूंदे और टपका दी।

शहनाज़ सोच रही थी कि मैं तो आज शहर घूमने के लिए अाई थी और अब अपने बेटे की दुल्हन बनकर घर वापिस जाऊंगी। उसकी चूत तड़प उठी और कुछ बूंदे और टपका दी।

जल्दी ही दोनो ब्यूटी पार्लर में पहुंच गए तो लेडी ने उन्हें पहचान लिया और बोली:”

” वाह मैडम इतनी जल्दी फिर से ब्यूटी पार्लर ? शादी की सालगिरह हैं क्या आपकी ?

शादाब: मेरी जान को इस तरह सजाना कि चांद भी शर्मा उठे। आज हमारी सुहागरात हैं।

लेडी मुस्कुराई और बोली:”

” ठीक है सर, वादा रहा हैं कि आप इन्हे खुद ही नहीं पहचान पाएंगे।

शहनाज़ मुंह नीचे किए मंद मंद मुस्कुरा रही थी। शादाब बाहर चला गया और अपने दोस्तो को फोन करने लगा ताकि सारे इंतजाम हो सके। जल्दी ही शहनाज़ का मेक अप हो गया और वो एक प्यासे गुलाब की तरह खिल उठी।

शादाब ने उसे दुल्हन के कपड़ों में देखते ही खुद पर से काबू खो दिया और उसका मुंह चूम लिया।

लेडी:” सर आप कहें तो मैं बाहर चली जाऊ ?

शहनाज़ शर्म से लाल हो गई और उसने लेडी का हाथ पकड़ लिए मानो उसे बाहर जाने से रोक रही हो। लेडी रुक गई और शादाब ने उसका पेमेंट किया और दोनो बाहर निकल गए। शहनाज़ ने बुर्का पहन लिया और अपना मुंह उसके अंदर छुपा लिया। शादाब ये देखकर मुस्कुरा दिया।

शादाब:” उफ्फ अम्मी, अभी से इतनी शर्म, सुहागरात कैसे मानाओगी फिर ?

शहनाज़ ने जोर से एक बार से शादाब का हाथ दबा दिया और दूसरे हाथ की उंगली को उसके होंठो पर रख कर चुप रहने का इशारा किया।

शादाब:’ हाय अम्मी, तुम्हारी इन्हीं कातिल अदाओं ने मेरा सब कुछ लूट लिया हैं मेरी जान।

उसके बाद शादाब ने गाड़ी निकाली और अपनी मंजिल की तरफ चल पड़ा। जल्दी ही कार एक आलीशान घर के सामने खड़ी हुई थी। वहां शादाब के बहुत सारे दोस्त भी थे और जो उन्हें देखते ही दौड़ते हुए अा गए।
शहनाज़ ने अपने आपको पूरी तरह से ढक रखा था जिससे उसके जिस्म का कोई भी हिस्सा नहीं दिख रहा था।

शादाब का दोस्त:” चलो शादाब अंदर काजी इंतजार कर रहा हैं निकाह के लिए।

शहनाज़ ने जैसे ही ये काजी वाली बात सुनी तो उसकी आंखे खुली की खुली रह गई। वो तो अब तक हुई बातों को मजाक में ले रही थी, उसे यकीन नहीं था उसका बेटा इतना बड़ा कदम भी उठा सकता हैं।

दूसरा दोस्त :” यार शादाब अचानक से शादी का प्लान कैसे बन गया ?

शादाब:” मुझे शहनाज़ पसंद अा गई और इसके घर वाली इसकी शादी कहीं और कर रहे थे इसलिए मजबूरी में भागना पड़ा

पहला दोस्त::” लेकिन तेरे घर वाले तो होने चाहिए, दादा दादी और अम्मी, वो सब कहां हैं?

शादाब अपनी अम्मी का नाम सुनकर एक पल के लिए तो सकपका सा गया लेकिन अपने आपको संभालते हुए कहा:”

” दर असल मेरे घर वाले भी इस शादी के खिलाफ हैं, मेरे दादा दादी कभी इस बात के लिए राज़ी नहीं होंगे।

दोस्त:” चलो फिर अंदर चल कर निकाह की रस्म अदा कर ली जाए शादाब।

शादाब और उसके दोस्त अंदर की तरफ चल दिए तो शहनाज़ भी उनके साथ चल पड़ी। सच मूच सामने काजी ही बैठा हुआ था और निकाह के लिए सभी रशीद और दूसरे जरूरी सामान रखे हुए थे।

शहनाज़ का बुर्का आंखो से हल्का सा खुला हुआ था जिसमें से सब साफ नजर आ रहा था। ये सब देखकर शहनाज़ का दिल पूरी तेजी से धड़कने लगा। उसका मन वहां से भाग जाने का कर रहा था लेकिन अपने बेटे को उसके दोस्तो के सामने जलील नहीं करना चाहती थी।

शहनाज़ ने अपने हाथ में थमा हुआ शादाब का हाथ दबाया तो शादाब ने उसकी तरफ देखा तो शहनाज़ ने उसे कुछ इशारा किया तो शादाब समझ गया कि उसकी अम्मी उससे कुछ बात करना चाहती हैं। इसलिए वो सामने बने हुए एक कमरे में शहनाज को लेकर चला गया।

कमरे के अंदर घुसते ही शहनाज़ ने अपना मुंह खोल दिया और शादाब से बोली:”.

” ये सब क्या हैं शादाब ? तूने तो सचमुच ही निकाह का इंतजाम कर दिया पागल।

शादाब अपनी अम्मी की बाते सुनकर हैरान हुआ और बोला:”

” क्या हुआ अम्मी आपको ? सब कुछ आपकी मर्जी से तो हो रहा था, फिर आप इतनी हैरान क्यों हो ?

शहनाज़:” शादाब बेटा, क्या तू सच मच अपनी मा से निकाह करना चाहता है ?

शादाब थोड़ा गुस्से से:”

” अम्मी बाहर काजी बैठा है चार गवाह के लिए मेरे दोस्त अा गए हैं। आपको यकीन नहीं ही रहा क्या अब भी ?

शहनाज़:” नहीं बेटा ये गुनाहे अज़ीम होगा, मैं अपने सगे बेटे से निकाह नहीं कर सकती।

शादाब के चेहरे का रंग एक दम उड़ गया और गुस्से से लाल होकर बोला :”

” अम्मी ये क्या हो गया आपको ? आपने खुद ही तो मुझे लेकर भागने की बात कही थी।

शहनाज़ का चेहरा अपने आप शर्म से नीचे झुक गया और शादाब के सामने दोनो हाथ जोड़कर बोली:”

” बेटा मुझसे गलती हो गई, मेरे मुंह से ना जाने कैसे वो सब निकल गया।

शादाब ने गुस्से से शहनाज़ की तरफ देखा और बोला:

” अम्मी मेरी इज्जत और मेरे प्यार का तमाशा मत बनाओ, मेरे सब दोस्त क्या समझेंगे।

शहनाज़ :” बेटा मेरी मजबूरी समझने की कोशिश कर शादाब, उन्हें मना ले बेटा।

शादाब बिना कुछ बाहर की तरफ चल पड़ा तो शहनाज़ ने उसका हाथ पकड़ लिया और बोली:”

” मुझे माफ़ कर देना मेरे राजा, मैं मजबुर हूं।

शादाब:” अम्मी आपने मेरे दिल को तोड़ा हैं, मेरे प्यार को मजाक बनाया हैं, मैं आपकी कसम खाता हूं कि आज के बाद कभी आपको मुंह नहीं दिखाऊंगा

शादाब ने ये बात शहनाज़ के सिर पर हाथ रख कर रोते हुए कही तो शहनाज़ ने उसका हाथ अपने सिर पर से हटा दिया और उसके गले लग गई।

शहनाज़:” नहीं बेटा, ऐसी कसम मत खा मेरे लाल, तेरी मा तो मर ही जाएगी तेरे बिना।

शादाब बिना कुछ बोले फिर से बाहर की तरफ चल पड़ा तो शहनाज़ ने फिर से उसे पकड़ लिया। शहनाज़ बोली:”

” शादाब प्लीज़ बेटा, ऐसे मुझसे मुंह मोड़कर मत जा,

शादाब:” अम्मी छोड़ो मुझे, अब हमारे बीच कोई रिश्ता नहीं रहा।

शहनाज़ रोते हुए :”

” नहीं बेटा ऐसा मत बोल, मेरा क्या होगा तेरे बिना, मैंने तेरे लिए सब कुछ छोड़ दिया था और आज तू ही मुझे छोड़कर जा रहा है शादाब ।

शादाब:” अम्मी मैं भी आपके लिए, आपके प्यार के लिए सब कुछ ठुकरा रहा था और आपने मुझे ही ठुकरा दिया।

शहनाज़:” बेटा लेकिन जो तू चाह रहा हैं वो गलत हैं, एक मा बेटे के बीच जिस्म का रिश्ता नहीं बन सकता है ।

शादाब ने अब शहनाज़ का हाथ पकड़ लिया और बोला:_

” अम्मी आपने सोच भी कैसे लिया कि आपका बेटा जिस्म का भूखा हैं, रेहाना, रेशमा और भी ना जाने कितनी चोद चुका होता अगर जिस्म की भूख होती।

शहनाज़:” बेटा मेरा वो मतलब नहीं था, मैं तो कह रही थी ….

शादाब ने उसकी बात बीच में ही काट दी और बोला:”

” अम्मी प्लीज़ आप मुझे मेरे दोस्तो के सामने जलील होने से बचा लो, वादा करता हूं आपके जिस्म को गंदी नजर से देखूंगा भी नहीं, छूना तो दूर की बात हैं।

शहनाज़ अपने बेटे की बात सुनकर सोच में पड़ गई। उसे आज एहसास हो रहा था उसका बेटा सचमुच उसका दीवाना बन गया है।

शहनाज़:” लेकिन बेटा !!

शादाब ने शहनाज़ के मुंह पर उंगली रख दी और बोला:”

” बस अम्मी अब कोई सवाल नही, आप हान या ना बोल दो बस, निकाह सिर्फ मेरे दोस्तो को दिखाने के लिए ही कर लो, लेकिन मना मत करना।

शहनाज़ के पास अब कोई रास्ता नहीं बचा था इसलिए उसने हान कर दी और उसकी आंखो से आंसू निकल पड़े और अपने बेटे के गले लग गई।

शादाब:” अम्मी चले फिर काजी इंतजार कर रहा हैं।

शादाब आगे चला तो शहनाज़ भी उसका हाथ पकड़ कर चल पड़ी।

बाहर आकर दोनो बैठ गए। शादाब का दोस्त बोला:”

” शादाब भाई निकाह की रस्म अदा की जाए क्या क्योंकि आज शहर में दूसरी शादी भी हैं और काजी जी को वहां भी जाना हैं।

शादाब ने एक बार शहनाज़ की तरफ देखा तो उसने ना चाहते हुए भी उसने अपना सिर हान में हिला दिया। शहनाज़ की आंखो से आंसू निकल रहे थे जो कि बुर्के की वजह से छिप रहे थे।

काजी शाहब ने सारे कागज पूरे कर लिए और बोले :”

काजी:” दूल्हा पक्ष के दो लोग आए और गवाह बने।

शादाब के दो दोस्त अा गए और उनका नाम काजी ने लड़के के तरफ से लिख लिया। उसके बाद काजी ने लड़की के पक्ष से दो लोगो को आने को कहा तो शादाब के दो दोस्त शहनाज़ की तरफ से अा गए।

सब कागज पूरे करने के बाद काजी ने उसमे मेहर आजकल के नियम के हिसाब से भर दिए और सबसे पहले शादाब से पूछा :”

” शादाब पुत्र इरफान आपका निकाह शहनाज़ पुत्री रहीम से किया जा रहा हैं क्या आपको शहनाज़ अपने निकाह में कुबूल है ??

शादाब ने एक बार शहनाज की तरफ देखा और मुस्कुरा कर कहा:”

” जी काजी जी मुझे शहनाज़ अपने निकाह में कुबूल है।

काजी जी ने तीन बार बात दोहराई और शादाब ने तीनो बार कुबूल कर लिया। अब काजी जी ने शहनाज़ की तरफ देखते हुए कहा :” शहनाज़ पुत्री रहीम आपका निकाह शादाब पुत्र इरफान से किया जा रहा है क्या आपको ये निकाह कुबूल हैं ?

शहनाज़ को ऐसे लग रहा था मानो उसके कानों में काजी जी खौलता हुआ शीशा डाल रहे हैं। उसकी सोचने समझने की सब शक्ति लगभग खतम हो गई थी और जिस्म पूरी तरह से कांप उठा और उसने एक बार शादाब की तरफ देखा तो बहुत ही उम्मीद भारी निगाहों से उसकी तरफ देख रहा था।

शहनाज़ का कोई उत्तर ना पाकर काजी जी ने दोबारा कहा:*

“शहनाज़ पुत्री रहीम आपका निकाह शादाब पुत्र इरफान से किया जा रहा है क्या आपको ये निकाह कुबूल हैं ?

शहनाज़ ने अपने दिल पर पत्थर रख लिया और सिर्फ हल्की सी गर्दन हिला कर अपना इशारा कर दिया कि उसे निकाह कुबूल है।
काजी ने अपनी बात दो बार और दोहराई और शहनाज की गर्दन दोनो बार बड़ी मुश्किल से हिली और आखिरकार दोनो का निकाह मुकम्मल हो गया लेकिन असली खुशी दोनो मा बेटे के चेहरे से गायब थी।

काजी :” शादाब आज से शहनाज़ आपकी शरिके हयात बन गई है। आप उसके हर सुख दुख में इसका साथ देंगे और इस पर आने वाली हर मुश्किल का सामना आपको करना होगा।
चलो दुआ करते हैं।

उसके बाद सभी लोगो ने मिलकर दोनो की कामयाब और प्यार भरी ज़िन्दगी के लिए दुआए मांगी और तो मजबूरी में सबके साथ शहनाज़ को भी दुआ में हाथ उठाने पड़े। काजी जी अपने निकाह के इनाम में मिली रकम लेकर चले गए और उसके बाद शादाब के दोस्तो ने मिठाई का डब्बा निकाला और शादाब को मिठाई खिलाई। शादाब ने ना चाहते हुए भी थोड़ी सी मिठाई खाई और दोस्त शहनाज़ को मिठाई खिलाने के लिए जिद करने लगे तो शहनाज़ ने गर्दन हिला कर साफ कर मना कर दिया।

दोस्त:” भाभी जी आप बहुत खुश नसीब हैं जो शादाब जैसा हीरा आपको मिला। मेरे हाथ से ना सही लेकिन इस खुशी के मुबारक मौके पर आपको शादाब के हाथ से मिठाई जरूर खानी चाहिए।

अपने दोस्त के बहुत जिद करने पर शादाब ने मिठाई का एक छोटा सा टुकड़ा उठाया और बुर्के के नीचे से शहनाज़ के होंठो पर लगा दिया तो शहनाज़ को सबको दिखाने के लिए थोड़ी सी मिठाई खानी पड़ी।

दोस्त:” बस भाभी जी इतनी सी मिठाई खाई आपने ?

शादाब:” माफ करना दोस्त लेकिन इन्हें मिठाई ज्यादा पसंद नहीं है ।

शादाब के मुंह से अपने लिए इन्हे शब्द सुनकर शहनाज़ हैरान हो गई क्योंकि उसका बेटा उसे एक दुल्हन की तरह इज्जत दे रहा था। थोड़ी देर के बाद शादाब बोला :”

” अच्छा दोस्तो मै चलता हूं, आप सबका ये एहसान मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा।

दोस्त एक साथ :” शादाब तू अपना राजा हैं यार, होस्टल में तुझ पर एक से एक खूबसूरत लड़की मरती थी लेकिन तूने किसी को घास नहीं डाली, हमे तो लगता था कि तुझे प्यार हो ही नहीं सकता। आज तेरा घर बसने से सबसे ज्यादा खुश तो हम सब हैं भाई।

शादाब अपने सब दोस्तो को बाय बोलकर वहां से चल पड़ा। दोनो मा बेटे गाड़ी में आगे वाली सीट पर बैठे हुए थे। शहनाज़ ने अब भी बुर्का औढ़ कर रखा था। धीरे धीरे गाड़ी शहर से बाहर निकल गई और हाईवे पर अा गई तो शादाब को शहनाज के सिसकने की आवाज सुनाई दी तो उसने गाड़ी को साइड लगा दिया।

गाड़ी रोककर वो शहनाज के थोड़ा करीब हो गया और शहनाज़ का हाथ अपने हाथ में पकड़ लिया तो शहनाज़ की रुलाई फूट पड़ी और उसने अपना सिर अपने बेटे शादाब के कंधे पर टिका दिया।

शादाब अपनी अम्मी की कमर को प्यार से सहलाकर उसे तसल्ली देने लगा। शहनाज सिसकते हुए बोली:”

” उम् अा उन्नन, ये ठीक नहीं हुआ शादाब, मैं किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रही।

शादाब:” अम्मी आपको पहले सोचना चाहिए था, और मेरी गलती ये रही कि मैं आपका मजाक नहीं समझा पाया।

शहनाज़:” लेकिन बेटा ये सब बहुत गलत हो गया। मुझे खूब पर ही शर्म अा रही है बेटा।

शादाब: ” अम्मी आपने आज मेरे दोस्तों के सामने मेरी इज्जत रख ली और आप आजाद हो, आप चाहो तो मैं आपको अब तलाक दे सकता हूं ताकि अगर आपको ये सब गुनाह लग रहा है तो आप उससे बच सके।

शहनाज़ के उपर तो जैसे आसमान सा टूट पड़ा अपने बेटे की ये तलाक वाली बात सुनकर। वो एक दम सकते में अा गई क्योंकि उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि निकाह के लिए इतनी कोशिश करने वाला शादाब उसे एक पल में ही तलाक देने के बारे में सोच सकता हैं। शहनाज़ को यकीन हो गया कि उसका बेटा उसके जिस्म से प्यार नहीं करता।

शहनाज़:” एक गुनाह के बाद अब दूसरा गुनाह मत कर शादाब, लेकिन मुझसे एक वादा कर कि तू मुझ पर कभी भी पति वाला हक नहीं जमाएगा।

शादाब शहनाज़ का हाथ चूमकर बोला:”

” अम्मी मुझे आपकी हर शर्त मंजूर हैं। बस मुझे आपकी खुशी चाहिए और इससे ज्यादा कुछ नहीं।

शहनाज़ ने शादाब को गाड़ी आगे बढ़ाने के लिए कहा तो शादाब ने गाड़ी दौड़ा दी और थोड़ी देर बाद ही वो घर पहुंच चुके थे।

घर जाकर शहनाज़ गाड़ी से उतर गई और अंदर चली गई जबकि शादाब गाड़ी पार्क करने के लिए चला गया।

शहनाज़ ने अपने कमरे में जाकर अपना बुर्का उतार दिया तो अपने आपको फिर से सुबह पहनी हुई छोटी ड्रेस में पाया तो उसने अपने आपको दुल्हन के लाल जोड़े में पाया तो उसकी आंखो के आगे फिर से निकाह वाला सीन अा गया और उसका मुंह अपने आप शर्म से झुक गया। उसे खुद से बड़ी नफरत सी हो रही थी कि मैंने अपने बेटे के उकसावे में आकर ये क्या गुनाह कर दिया।

तभी उसके अंदर विचार आया कि मेरे बेटे ने को किया तो नादानी में किया लेकिन तू तो समझदार थी तुझे उसका विरोध करना चाहिए था लेकिन तूने तो उसे और बढ़ावा दिया और उसके साथ खुद ही बहक गई। जो आज हुआ उसकी जिम्मेदार तू खुद हैं और अपने इस गुनाह के लिए तू जिम्मेदार हैं।

तभी दिल में विचार आया कि मेरी क्या गलती हैं शादाब मेरा बेटा बिल्कुल मेरे सपनों के शहजादे जैसा हैं। उसके हाथ लगते ही मुझे पता नहीं क्या हो जाता था, अपना काबू खी देती थी मैं।

लेकिन तुझे खुद पर काबू रखना चाहिए था शहनाज़, वो तेरा सगा बेटा हैं, तुझे ये बात ध्यान रखनी चाहिए थी और तेरी सबसे बड़ी गलती ये हैं कि उसमे अपना शहजादा ढूंढने की कोशिश करी है और जैसे ही किसी भी लड़की या औरत ने उसकी तरफ हसरत भरी निगाहों से देखा तो तुझे एक मा नहीं बल्कि एक महबूबा की तरह जलन महसूस हुई तो अब तुझे परेशानी तो होगी ही। लेकिन अपने परिवार की मान मर्यादा और अपने चरित्र को तूने जिस तरह से आज तक बचा कर रखा है उम्मीद हैं तू अब आगे भी अपने आपको काबू में रखेगी बस एक महीने की ही तो बात है फिर शादाब वापिस चला जाएगा और सब कुछ ठीक हो जाएगा। लेकिन ध्यान रखना तुझे अपने बेटे को एक मा का प्यार देना होगा ताकि वो तुझसे नफरत ना कर बैठे। आखिरकार शहनाज़ ने फाइनल निर्णय कर लिया कि अब वो अपने ऊपर कभी भी निकाह वाली बात हावी नहीं होने देगी और अपने बेटे को एक मा का प्यार देगी।

शहनाज़ सुबह से भूखी थी और वो जानती थी कि शादाब भी भूखा हैं इसलिए वो जल्दी से कुछ बनाना चाहती थी और किचेन में घुस गई और देशी घी का हलवा बनाने लगी।

शादाब भी उपर अा गया था और अंधेरा पूरी तरह से गहरा चुका था इसलिए शादाब ने अपने कपड़े बदल लिए और अपने कमरे में ही बैठ गया और सोच में डूब गया। शहनाज़ ने हलवा बनाने के बाद दूध गर्म किया और और खाने की टेबल पर सब सामान रख दिया और शादाब को बुलाने के लिए उसके कमरे में चली गई!

शहनाज़ ने देखा कि उसका बेटा किसी गहरी सोच में डूबा हुआ है तो उसने आवाज लगाई:”

” शादाब बेटा तुझे भूख लगी होगी
मैंने हलवा और दूध बना दिया है अा जा खा लेते हैं।

शादाब:” नहीं अम्मी मुझे भूख नहीं हैं, आप खा लो।

शहनाज़ ने शादाब का हाथ पकड़ लिया और खींचते हुए बोली:”

” चुप चाप खड़ा हो जा और चल मेरे साथ खा ले नहीं मैं भी नहीं खाऊंगी।

शादाब अब ज्यादा विरोध नहीं कर पाया और अपनी अम्मी के साथ खींचा चला आया। दोनो मा बेटे ने हलवा खाना शुरू किया और हलवे से आती देशी घी की खुशबू से शादाब को कुछ दिन पहले बने हलवे की याद आ गई और वो काफी भावुक हो गया। दोनो मा बेटे चुपचाप मुंह नीचे किए खाना खाते रहे। खाना खाकर शादाब अपने कमरे में चला गया और शहनाज़ किचेन में बर्तन साफ करने के लिए घुस गई। थोड़ी देर के बाद काम खत्म करके शहनाज़ अपने रूम में आ गई और उसने अपने आपको शीशे में देखा तो खुद को दुल्हन के लाल जोड़े में पाया तो इस बार उसकी नजरे खुद पर से हटाए नहीं हट रही थी। वो अपने रूप सौंदर्य पर खुद ही मोहित हो रही थी। इतनी सुन्दर तो जब भी नहीं लगी थी जब भरी जवानी में उसकी शादी हुई थी। सचमुच ब्यूटी पार्लर वाली लेडी ने आज उसका रूप निखारने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। शहनाज़ ये सब सोचते हुए अपने बेटे के बारे में सोचने लगी कि उसका बेटा सच में उससे बहुत प्यार करता है और उसका बहुत ध्यान रखता हैं। वो बेड पर लेट गई और सोने की कोशिश करने लगी लेकिन नींद उसकी आंखो से पूरी तरह से गायब थी। एक तो अपने बेटे के साथ हुए निकाह की वजह से वो काफी दुखी थी क्योंकि वो जानती थी कि उससे बहुत बड़ी गलती हो चुकी है। दूसरी बात जिस दिन से शादाब आया था उस दिन से शहनाज़ को अपने बेटे की बांहों में सोने की आदत सी हो गई थी।
जब काफी देर तक कोशिश करने के बाद भी नींद नहीं अाई तो वो समझ गई कि उसे उसके बेटे की बांहों के बिना नींद नहीं आएगी इसलिए वो उठी और शादाब को बुलाने के लिए चल दी।

शादाब अपने कमरे में बेड पर लेता हुआ था आज दिन में हुई घटनाओं के बारे में डूबा हुआ था। कमरे में बिल्कुल हल्की सी रोशनी अा रही थी जिसमे उसका चेहरा नजर आ रहा था। शहनाज़ ने गेट को धक्का दिया तो वो अपने आप खुल गया और शहनाज़ अंदर घुस गई। अपनी अम्मी को रात के 11 बजे अपने कमरे में घुसता देख कर शादाब हैरान हो गया। शहनाज़ उसके पास जाकर बेड पर बैठ गई और बोली:”

” बेटा नींद नहीं अा रही हैं क्या ?

शादाब:” नहीं अम्मी, अा जाएगी नींद तो, बस सोने ही वाला था।

शहनाज़:” अपनी मा के बिना तुझे कैसे नींद अा सकती है, मुझे देख तेरे बिना बिल्कुल भी नींद नहीं आ रही है।

शादाब:” अम्मी अा जाएगी नींद आपको, आंखे बंद करके लेट जाओ आप अपने कमरे में।

शहनाज़:” बेटा सब कर चुकी हैं, लेकिन रोज तुझे गले लगा कर सोती रही हूं इसलिए आदत सी पड़ गई है। चल तू मेरे कमरे में चल, मुझे अकेले नींद नहीं आएगी।

शादाब ने अपना मुंह नीचे कर लिया और बोला:’

” माफ करे अम्मी, मैं आज आपके कमरे में नहीं जा पाऊंगा। कल से अा जाऊंगा।

शहनाज़:”क्यों आज ऐसा क्या हो गया कि तू अपनी मा के साथ नहीं सो सकता।

शादाब:” अम्मी आप प्लीज़ जाओ, समझने की कोशिश करो मैं आज नहीं सो सकता आपके साथ।

शहनाज़:” कोई बात नहीं, अगर तू मेरे रूम में नहीं अा सकता तो मैं ही तेरे रूम में सो जाती हूं तेरे साथ।

शहनाज़ ने अभी तक वहीं दुल्हन वाले कपडे पहने हुए थे और शादाब को शहनाज़ एक दुल्हन नजर आ रही थी अपनी दुल्हन, बस इसलिए ही वो उसके साथ नहीं सोना चाहता था कि कहीं उससे कोई ग़लत कदम ना उठ जाए और शहनाज़ को बुरा लगे।

शादाब:_ अम्मी प्लीज़, आप समझो मेरे उपर ज़ुल्म मत करो, बस आज रात की माफी दे दो।

शहनाज़:” बेटा तू तो बहुत बड़े बड़े दावे करता था कि मेरा हमेशा ख्याल रखेगा और कोई दिक्कत नही आने देगा मुझे।

शादाब:” अम्मी मैं अपनी बात पर कायम हूं, आप के लिए जान भी दे सकता हूं।

शहनाज़:” वो तो देख ही रही हूं कि किस तरह मुझसे जान बचाना चाहता हैं तू । बड़ा आया जान देने वाला।

शादाब को दुख हुआ और बोला:”

” अम्मी आप समझने की कोशिश करो, मेरी मजबूरी है।

शहनाज़:” यहीं मजबूरी कि आज तेरी सुहागरात हैं और तू मुझे अपनी बांहों में पाकर कहीं कोई गलती ना कर दे।

शादाब को जैसे अपने कानो पर यकीन ही नहीं हुआ। उसकी आमी ने कितनी बहादुरी से ये सब एक झटके में कह दिया, शादाब की तो जैसे बोलती ही बंद हो गई थी और सिर शर्म से झुक गया । शहनाज़ ने अपने हाथ से शहनाज़ का चेहरा उपर उठाया और बोली:”

” बेटा तुझे खुद पर यकीन नहीं हैं क्या कि तू अपने आपको काबू में नहीं रख पाएगा ।

शादाब ने पहली बार अपनी नजरे उपर उठाई और बोला:’

” अम्मी बात वो नहीं है, दर असल हर इंसान के अपने सुहागरात को लेकर कुछ सपने होते हैं। बस इसलिए ही सोच रहा था कि कहीं कमजोर ना पड़ जाउ मैं इसकी वजह से।

शहनाज़ को एक झटका सा लगा क्योंकि उसके भी अपनी सुहागरात को लेकर कुछ सपने और उम्मीद थी जो बुरी तरह से ध्वस्त हुई थी और उसका दिल बुरी तरह से टूट गया था। जैसे ही उसे अपनी पीड़ा का एहसास हुआ तो उसे अपने बेटे पर रहम अा गया और वो बोली:”

” शादाब मेरे लाल देखना तेरी शादी बहुत धूमधाम से करूंगी और तेरे सब सपने में खुद पूरे करूंगी ।

शादाब अपनी अम्मी की बात से बहुत ज्यादा आहट हुआ और रोनी सी सूरत बनाकर बोला:’

” अम्मी मेरी शादी हो चुकी हैं, अब मेरे लिए किसी और से शादी के बारे में सोचना भी पाप होगा। हान ये सच हैं कि मेरे सपने सिर्फ आप ही पूरे कर सकती है और वो भी तब जब मेरे सपने आपके सपने बन जाए।

शहनाज़ अपने बेटे की बाते सुनकर आवाज सी खड़ी रह गई क्योंकि उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। शादाब अपनी अम्मी का हाथ पकड़ कर बोला :”

” चलिए अम्मी अब आप ज्यादा मत सोचिए,। आपके रूम में चलते हैं।

शहनाज़ पूरी तरह से अपने विचारो में डूबी हुई थी और शादाब उसे लेकर उसके रूम में अा गया। शहनाज़ ने हो दुल्हन वाला सूट पहना हुआ था वो उसे निकालना ही भूल गई और दोनो मा बेटे पर शहनाज़ के बेड पर लेटे हुए थे। शादाब सीधा लेटा हुआ था जबकि शहनाज़ ने अपने बेटे की तरफ करवट लेकर अपना सिर उसके कंधे पर टिका रखा था। दोनो मा बेटे खामोश थे लेकिन मन में बहुत सारे विचार चल रहे थे बहुत सारी बाते थी जो वो एक दूसरे से करना चाहते थे लेकिन कभी कभी खामोशी बोलने से ज्यादा जरूरी हुआ करती हैं।

बाहर आसमान में काले काले बादल उमड़ने लगे और बाहर तेज तूफान चलना शुरू हो गया था लेकिन उससे भी तेज तूफान इन दोनो मा बेटे के अन्दर चल रहा था। एक झटके के साथ लाइट बंद हो गई और तभी आसमान में जोरदार बिजली कड़कने की आवाज आई तो शहनाज़ पूरी तरह से कांप उठी और डर के मारे शादाब से पूरी तरह से कस कर चिपक गई।शहनाज़ कांपते हुए बोली:”

” हाय अल्लाह रहम, बेटा मुझे बचपना से ही बहुत डर लगता है बिजली से !!

शहनाज़ ने कांपती हुई शहनाज के पूरे वजूद को अपने आगोश में समेट लिया और बोला:”

” क्यों अम्मी आपको क्यों डर लगता हैं बिजली से ?

शहनाज़:” बेटा जब मै छोटी थी तो मेरी एक सहेली के उपर बिजली गिर गई थी तब से लेकर आज तक मैं बहुत डरती हूं।

शादाब:” अम्मी आप फिक्र मत करो, आपका बेटा आपको कुछ नहीं होने देगा।

शहनाज़:” हान बेटा मुझे तुझ पर पूरा यकीन हैं मेरे लाल।

शादाब:” लेकिन अम्मी जब मैं हॉस्टल में था और बिजली कड़कती थी तब आप क्या करती थी ?

शहनाज शादाब की बात सुनकर शर्मा गई और बोली:”

” मैं बता नहीं पाऊंगी नहीं तो तू बाद में मेरी मजाक उड़ाएगा।

शादाब:” अम्मी आपको अपने बेटे पर यकीन नहीं हैं क्या ?

शहनाज़:” बेटा अब तो सिर्फ तुझ पर ही यकीन हैं, बेटा जब मैं अकेली होती थी और बिजली कड़कती थी तो मैं डर के मारे बेड के नीचे घुस जाती थी।

इतना कहकर शहनाज़ ने अपने बेटे के सीने में शर्म के मारे मुंह छिपा लिया। शहनाज़ की बात सुनकर शादाब की हंसी छूट गई और आज निकाह के बाद पहली बार हंसा था। शहनाज़ अपने बेटे को खुश देख कर सुकून महसूस करने लगी और मजाक में बोली:’.

” अम्मी मेरी बात पर हंस रहा है, तूने तो बोला था कि मेरा मजाक नहीं उड़ाएगा। झूठा कहीं का

शादाब अपनी हंसी रोक कर बोला:” सोरी अम्मी, लेकिन मैं आपका मजाक नहीं उड़ा रहा था, मुझे इसलिए हंसी अा गई कि आप इतनी बड़ी होकर भी बिजली से डरती हैं।

शाहनाज:” बेटा पूरी जवानी अकेले ही काट दी बस इसलिए डर लगता हैं।

शादाब:” हां अम्मी मैं आपका दर्द समझ सकता हूं लेकिन सही मैं अब आप पूरी तरह से जवान हुई हो अम्मी।

शहनाज़ उसकी कमर में मारते हुए:”

” चल कमीना, अच्छा अब मैं सो जाती हूं, गुड नाईट बेटा।

इतना बोलकर शहनाज़ ने अपने बेटे के माथे पर किस किया और पूरी तरह से उससे लिपट गई और सोने की कोशिश करने लगीं। शादाब के मजबूत कंधे शहनाज़ के लिए बहुत आरामदेह साबित हुए और उसे जल्दी ही नींद अा गई। बाहर तूफान और बारिश अभी भी जारी थी और रह रह कर बिजलियां कड़कने की आवाज अा रही थी जिससे शहनाज़ नींद में भी बुरी तरह से डर रही थी और अपने बेटे में पूरी तरह से सिमटी जा रही थी मानो उसके अंदर घुस जाना चाहती हो।

शादाब भी एक जवान लड़का था और शहनाज़ का पूरी तरह से दीवान बन चुका था। आज की रात उस पर जैसे ज़ुल्म पर ज़ुल्म कर रही थी क्योंकि आज उसकी शादी की पहली बार मतलब सुहागरात थी और शहनाज़ अभी तक दुल्हन के कपड़े पहने उसकी बांहों में सिमटी हुई पड़ी थी। बाहर कड़कती हुई बिजली से डरती हुई शहनाज़ पूरी तरह से खुद को बचाने के लिए उसके अंदर घुस जाना चाहती थी जिस कारण शादाब का लंड खड़ा हो गया। उसके सपनों की रानी दुल्हन बनी उससे लिपटी हुई थी और वो चाह कर भी कुछ नहीं कर सकता था। धीरे धीरे नींद का असर शादाब पर भी होने लगा और कोई रात के चार बजे के आस पास उसकी आंख लग गई ।

दोनो मा बेटे एक दूसरे की बाहों में सोए हुए थे और शहनाज़ को नींद में सपना अा गया। शहनाज़ ने देखा कि शादाब उससे नाराज होकर दूर जा रहा है तो शहनाज़ ने भागकर उसे अपनी बांहों में भर लिया। शहनाज़ ने अपने बेटे को एक झटका देकर अपने उपर बेड पर गिरा लिया और अपने दोनो हाथ उसकी कमर पर बांध दिए और उसके होंठ चूसने लगी। शादाब भी अपनी अम्मी के होठ चूस रहा था, दोनो पूरी तरह से मदहोश हो गए और एक लंबे किस के बाद जब दोनो के होंठ अलग हुए तो शहनाज़ बोली:”

” कहां जा रहे थे मुझे फिर से बेवा करके तुम ? अब तुम्हे कहीं नहीं जाने दूंगी, एक मा से ज्यादा अब तुम्हे तुम्हारी बीवी का प्यार दूंगी मेरे राजा।

शादाब ने शहनाज़ के मुंह को पागल दीवाने की तरह चूमना शुरू कर दिया तो शहनाज़ ने भी उसकी कमर सहलानी शुरू कर दी।शादाब ने दोनो हाथ जैसे ही शहनाज़ की गांड़ पर पहुंचे तो उसकी चूत पूरी तरह से गीली होकर रस बहाने लगी तो शहनाज़ ने पूरी तरह से बेकाबू होते हुए अपनी चूत को शादाब के खड़े हो चुके लंड पर जोर जोर से रगड़ना शुरू कर दिया। शहनाज़ के मुंह से अपने आप मस्ती भरी सिसकारियां निकल रही थी। वो पूरी ताकत से जोर जोर से अपनी चूत अपने बेटे के मोटे मूसल जैसे लंड पर मार रही थी। शादाब पूरी ताकत से उसकी मजबूत गांड़ को कस कस कर मसल रहा था जिससे शहनाज़ पूरी तरह से मदहोश होती जा रही थी। वो पूरे जोश में अपने बेटे का मुंह चूम रही थी और उसकी चूत में उठता हुआ तूफान बढ़ता ही जा रहा था और उसने अपने आप अपना हाथ नीचे ले जाकर अपनी सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसे घुटनो तक सरका दी और पैंटी को अपनी एक अंगुली से साइड करके अपनी नंगी चूत शादाब के लंड पर उसके पायजमे के उपर से ही रगड़ने लगी। शादाब को जैसे ही अपने लंड पर चूत का एहसास हुआ तो उसकी आंखे एक झटके से खुल गई और वो समझ गया कि शहनाज़ नींद में शायद कोई सपना देख रही है और इसलिए ऐसा कर रही हैं इसलिए वो हालात को समझते थोड़ा सा पीछे हुआ तो शहनाज़ किसी चुम्बक की तरह उसकी तरफ खींची चली आई और फिर से उसे पकड़ लिया। शादाब जितना पीछे होता शहनाज़ उतना ही आगे सरक जाती। शहनाज़ को लग रहा था कि उसका बेटा उसे दूर भगाना चाहता है इसलिए नींद में ही बोली:”

” उफ्फ मेरे राजा, मुझे मत छोड़ कर जा, मर जाऊंगी तेरे बिना मेर जान, प्यार कर मुझे। बहुत प्यार कर अपनी शहनाज़ को ।

शादाब अब बेड के किनारे पर अा गया था और जरा सा सरकने से वो नीचे गिर सकता था इसलिए उसने पीछे हटना बंद किया तो शहनाज़ फिर से अपनी चूत उसके लंड पर रगड़ने लगीं। शहनाज़ की चूत पूरी तरह से पानी पानी हो रही थी। तभी शहनाज़ को लगा कि उसकी चूत में तूफान सा आने वाला हैं इसलिए उसने पूरी ताकत से जोर से अपनी चूत को लंड में घुसेड़ सा दिया तो लंड का मोटा बारीक कपडे के उपर से चूत की दीवारों पर दबाव डालता महसूस हुआ और इसके साथ ही शहनाज़ की चूत ने एक झटके के साथ अपना सारा रस बाहर उगलना शुरू कर दिया और वो अपने बेटे के ऐसे लिपट गई मानो उसकी हड्डी तक तोड़ देना चाहती हो।

” आह मेरे राजा, उफ्फ मर गई रे तेरी शहनाज़। हाय मा उफ्फ

इसके साथ ही शहनाज़ की आंख खुल गई तो शादाब ने डर के मारे अपनी आंखो को बंद कर दिया मानो सो रहा हूं। शहनाज़ को जैसे ही खुद की हालत का अंदाजा हुआ तो उसके पैरो तले से जमीन खिसक गई। उफ्फ वो सपना देख रही थी लेकिन यहां तो हकीकत में उसने खुद ही अपनी सलवार खोल दी थी। हाय अल्लाह ये क्या गुनाह हो गया मुझसे, और शादाब का मुंह देखते ही वो कांप उठी, उसका पूरा मुंह शहनाज़ की लिपस्टिक से लाल हो चुका था। उफ्फ मेरा बेटा क्या सोचेगा मेरे बारे में, ये बेचारा तो खिसक खिसक कर बेड के किनारे पर अा गया और मैं खुद ही इसके उपर चढ़ रही थी।

शहनाज़ की सारी वासना हवा में उड़ में उड़ चुकी थी। उसे अपने बेटे पर बहुत प्यार आया कि किस तरह शादाब ने अपनी सुहागरात होने के बाद भी खुद पर काबू रखा नहीं तो आज मेरा सपने के चक्कर में चुद जाना तय था। शहनाज़ नहीं चाहती थी कि शादाब को कुछ नहीं पता चले इसलिए उसने शादाब के चेहरे को अपने दुपट्टे को थूक से गीला करके साफ प्यार से साफ करना शुरु कर दिया। जल्दी ही शादाब के मुंह पर लगी लिपस्टिक साफ हो चुकी थी, हालाकि शादाब जाग रहा था लेकिन चुप चाप पड़ा रहा

शहनाज़ ने अपने आपको ठीक किया और शादाब का माथा चूम कर बाथरूम में घुस गई नहाने के लिए क्योंकि सुबह हो चुकी थी।

शहनाज़ को आज नहाते हुए बहुत शर्म अा रही थी क्योंकि आज उसकी चूत ने इतना रस छोड़ दिया जितना वो शादाब के बाप के साथ पूरी ज़िन्दगी नहीं छोड़ पाई थी। शहनाज़ अपने आपको बहुत अधिक शर्मिंदा महसूस कर रही थी क्योंकि उसने अपने बेटे के साथ बहुत गलत हरकत करी थी। शादाब की तो आज तो आज सुहागरात ही थी और मैंने उसके साथ ये सब ठीक नहीं लिया। लेकिन शादाब बेड के किनारे पर कैसे पहुंच गया ये ख्याल मन में आते ही शहनाज़ की बोलती बंद हो गई, नहीं ये नहीं हो सकता, वो तो सो रहा था। नहीं शहनाज़ वो जाग रहा था और उसे सब कुछ पता हैं तभी तो खिसक कर बेड के किनारे पर पहुंच गया था। तू ही थी पूरी तरह से उसके उपर चढी जा रही थी, वो चाहता तो आराम से तेरे बदन पर हाथ फेर सकता , तेरा सब दबा सकता है लेकिन उसके मन में पाप नहीं जन्मा क्योंकि वो तुझसे प्यार करता है। आज ये सब बाते सोचकर शहनाज़ के दिल में शादाब के लिए इज्जत और भी ज्यादा बढ़ गई। शहनाज़ जल्दी जल्दी नहाने लगीं ताकि अपने बेटे के लिए खाने के लिए कुछ बना सके।

दूसरी तरफ शहनाज़ के जाते ही शादाब ने अपनी आंखे खोल दी और जो कुछ हुआ था उसे याद करके वो मुस्करा उठा। हालाकि उसने ऐसी सुहागरात का सपना कभी नहीं देखा था लेकिन शहनाज़ पूरी रात उसकी बांहों में रही और उसका मुंह चूम चूम कर लाल कर दिया ये सब भी कुछ कम नहीं था शादाब के लिए। शादाब का पायजामा शहनाज़ की चूत से निकले हुए रस से आगे से काफी हद तक गीला हो गया था। शादाब ये देखकर मुस्कुरा दिया और अपने कमरे में चला गया और नहाने के लिए कपडे निकालने लगा। शहनाज़ नहाकर अपने रूम में अा गई थी इसलिए शादाब बाथरूम में घुस गया और नहाने लगा। शहनाज़ कपडे बदल कर किचेन में चली गई और शादाब को आलू के परांठे बहुत पसंद थे इसलिए वो परांठे बनाने की तैयारी करने लगी क्योंकि वो अपने बेटे को बहुत खुश देखन चाहती थी। शादाब भी नहा कर अा चुका था और कपडे बदल कर अपने आपको तैयार कर रहा था। शहनाज़ ने परांठे टेबल पर लगा दिए और बोली “

” शादाब आजा बेटा देख मैंने तेरे लिए आलू के परांठे बनाए हैं बेटा।

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनकर खाने के लिए अा गया और दोनो मा बेटे नाश्ता करने लगे। परांठे बहुत स्वादिष्ट बने थे इसलिए शादाब बोला:”

” अम्मी आप के हाथो में जादू हैं, बहुत टेस्टी परांठे बनाए हैं आपने।

शहनाज़ जवाब में बाद हल्का सा मुस्करा दी और नाश्ता करने लगी। जल्दी ही दोनो के नाश्ता कर लिया तो शहनाज़ बोली:”

” बेटा तो पीसा हुए मसाला खत्म हो गया हैं क्या तू मेरी मदद कर देगा बेटा ?

शादाब :” ठीक हैं अम्मी, आप ले जाओ सब मसाला।

शहनाज़ ने रोज की तरह औखली और मसाला सब कालीन पर रख दिया और शादाब को इशारा किया तो शादाब शहनाज़ के पीछे नहीं बल्कि सामने बैठ गया और बोला :”

” अम्मी आज ही आप काफी सारा मसाला दे दो, मैं कूट दूंगा रोज रोज का झंझट खत्म।

शहनाज़ को अपने बेटे की बात पर जैसे यकीन ही नही हुआ, उसे लग रहा था कि शादाब मसाला कूटने के बहाने उसकी कमर में अपना लंड मारेगा जबकि सब कुछ बदल गया। शहनाज़ ने काफी सारा मसाला शादाब को दिया तो शादाब बोला:”

” अम्मी आप दूसरे काम खत्म कर लो, मैं इसको कूट देता हूं।

शहनाज़ हैरानी के साथ वहां से चली गई जबकि शादाब ने मसाला कूटना शुरू कर दिया और थोड़ी ही देर में सब मसाला कूट दिया और शहनाज़ को देते हुए बोला:”

” अम्मी कोई और काम हो तो बता दो नहीं तो आज मुझे वकील अंकल के साथ जमीन का हिसाब देखने खेत जाना हैं।

शहनाज़ को शादाब का पता नहीं क्यों अपने से दूर जाना अच्छा नहीं लगा। लेकिन उसके पास कोई बहाना भी नहीं था इसलिए वो चुप रही और शादाब घर से बाइक लेकर निकल गया। शादाब ने वकील को साथ में लिया और खेत जमीन का सब हिसाब देखने लगा। थोड़ी देर बाद जब सब हिसाब हो गया तो वकील घर चला आया और शादाब खेत में बने हुए मचान पर चढ़ गया लेकिन आज उसका मन उदास था। क्योंकि वो कुछ दिन पहले शहनाज़ के साथ मचान पर था और इसी वजह से उसका दिल दुख रहा था।

जब कुछ समझ में नहीं आया तो उसने मन बहलाने के लिए बी ग्रेड मूवी देखना शुरू कर दिया और यहीं से उसे पोर्न मूवी का लिंक मिल गया तो आज शादाब पहली बार पोर्न मूवी देख रहा था। जैसे जैसे मूवी आगे बढ़ती जा रही थी औरत के जिस्म और सेक्स क्रिया से शादाब का रहस्य उठता जा रहा था। आखिर कर मूवी खत्म होते होते शादाब का लंड पूरी तरह से अकड़ा चुका था और उसे सेक्स के बारे में काफी कुछ समझ अा गया था। उसने एक के बाद एक काफी मूवी देखी और नई नई चीज सीखता चला गया।

शहनाज का मन नहीं लग रहा था क्योंकि एक तो घर में कोई नहीं था उपर से जब से शादाब आया था आज पहली बार ऐसा हुआ था कि वो उसकी आंखो से दूर गया था। शहनाज़ को शादाब की बहुत याद आ रही थी इसलिए उसने शादाब का नंबर मिलाया तो शादाब बोला:”

” हान अम्मी, क्या हुआ ?

शहनाज़ बोली:” बेटा कहां है तू , जल्दी घर अा जा मेरा मन नहीं लग रहा है।

शादाब:” ठीक हैं अम्मी मैं अा जाता हूं।

शादाब घर पहुंच गया तो शहनाज गेट खोलते ही उससे लिपट गई और उसका मुंह चूम लिया।

शादाब:” क्या हुआ अम्मी, आज बड़ा लाड अा रहा हैं अपने बेटे पर ?

शहनाज़ ;” मेरा बेटा हैं ही इतना प्यारा, मैं प्यार नहीं करूंगी तो कौन करेगा। अब तू कभी मुझे छोड़ कर नहीं जाना,!!

शादाब:” अरे आप तो ऐसे हुक्म जमा रही है जैसे आप मेरी बीवी हो ?

शहनाज़:” बीवी तो तूने बना ही लिया था मुझे कल!! इसलिए मेरा जैसे मन करेगा हुक्म चलाऊंगी
समझा।

शादाब अपनी अम्मी की बाते सुनकर खुश हो गया और शहनाज़ शर्म से लाल हो गई कि जोश में उसके मुंह से क्या निकल गया।

शादाब:” अम्मी क्या आप सच मुच खुद को मेरी बीवी मानती हो ?

शहनाज़ की बोलती बंद हो गई और अपनी झेंप मिटाने के लिए बोली:”

” कितनी बात करता हूं तू, जा नहा ले फिर खाना खाते हैं।

ऐसे ही कुछ तीन बीतते चले गए और शादाब ने शहनाज़ का दिल पूरी तरह से जीत लिया। वो बिल्कुल एक पति की तरह से शहनाज़ का ध्यान रख रहा था। रोज उसे घुमाने ले जाता, उसकी पसंद का सब कुछ खिलाता, घर के काम में मदद करता जिसका नतीजा ये हुआ कि शहनाज़ भी शादाब की तरफ आकर्षित होती चली गई। शहनाज़ के मन में भी सवाल उठने लगा कि शादाब बिल्कुल एक पति की तरह उसका ध्यान रख रहा है। रात भर उसकी बांहों में सोता है लेकिन गलत नियत से हाथ तक नहीं लगाता। शहनाज़ को भी लगने लगा था कि उसे भी अपने पत्नी धर्म का पालन करना चाहिए।

लेकिन ये सब शहनाज़ के लिए इतना आसान नहीं था।

एक दिन दोपहर की बात है कि शादाब और शहनाज़ दोपहर का खाना खाकर आराम कर रहे थे। रोज की तरह दोनो मा बेटे एक ही साथ लेते हुए थे, थोड़ी देर बाद ही शहनाज़ की नींद लग गई। शहनाज़ गहरी नींद में जा चुकी थी तभी नीचे दरवाजे पर किसी की दस्तक हुई तो शादाब उठ गया और दरवाजा खोलने चला गया तो उसने देखा कि दरवाजे पर रेहाना खड़ी हुई थी।

शादाब:” अरे रेहाना मैडम आप ? मुझे ही बुला लिया होता आपने अगर पढ़ाई के बारे में कोई बात करनी थी।

रेहाना:” इधर से निकल रही थी तो सोचा तुमसे मिलती चलू, इसलिए अा गई, अंदर आने के लिए नहीं कहोगे ?

शादाब झेंपते हुए गेट के सामने से हट गया और जल्दी से बोला:”

” ओह माफ कीजिए, मैं आपको अचानक उस तरह से देखकर हैरान हो गया, आइए अंदर आइए।

शादाब रेहाना को नीचे बने दादा दादी जी के कमरे के साथ बने हुए गेस्ट रूम में ले गया और बोला:”

” आप तशरीफ रखिए, मैं आपके लिए पानी लेकर आता हूं !!

रेहाना:” नहीं रहने दीजिए, मुझे प्यास नहीं हैं, आपकी अम्मी जान नहीं नजर आ रही है ? कहीं बाहर गई हैं क्या ?

इतना कहकर रेहाना ने शादाब को एक बहुत ही कामुक स्माइल दी तो शादाब सब समझ गया था लेकिन बोला :”

” अम्मी तो यहीं हैं, उपर सो रही है, मैं बुला लाता हूं उन्हें !!

रेहाना एक दम तेजी से बोली:”

” अरे नहीं शादाब बेटा सोने दे उन्हें, क्यों उनकी नींद खराब करनी और वैसे भी मैं उनसे नहीं तुमसे मिलने के लिए अाई हूं।

शादाब:” जी मैडम लेकिन जब तक आप कुछ हमारे घर का खाएगी नहीं मुझे अफसोस सा रहेगा !!

शादाब की बात सुनकर रेहाना ने एक सरसरी नजर शादाब के खूबसूरत होंठो पर टिका दी और बोली:”

” आप तकल्लुफ ना करे शादाब जी, आपके घर का मै सिर्फ खाना ही नहीं बल्कि पीना भी चाहती हूं।

शादाब रेहाना का इशारा समझ चुका था और वो एक भरपूर मर्द बन चुका था इसलिए उसके जिस्म में भी हलचल होने लगी और उसकी पैंट में उभार बनने लगा। रेहाना बहुत पुरानी खिलाड़ी थी और जानती थी कि लडको को कैसे फसाकर उनका शिकार किया जाता हैं। रेहाना ने अपने दुपट्टे का पल्लू नीचे गिरा दिया तो उसकी चूचियों के बीच की गहरी खाई साफ नजर आने लगीं तो शादाब की नजरे अपने आप उधर टिक गई।

रेहाना समझ गई कि चिड़िया ने दाना चुगना शुरू कर दिया और बहुत ही जल्दी जाल में फस जायेगी। रेहाना ने अपने हाथ का हल्का सा दबाव अपने सीने पर बढ़ाया तो सूट के गले से उसकी चूचियां बाहर निकलने को बेताब सी नजर आईं। शादाब तो मंत्र मुग्ध सा होकर ये सब देख रहा था। शादाब के अलावा कोई और भी था जो ये सब बहुत ही गुस्से और नफरत के साथ देख रहा था और वो थी शहनाज़।

दर असल जैसे ही शादाब शहनाज़ की बांहों से निकला था तो उसकी नींद खुल गई और जब शादाब नीचे की तरफ गया तो शहनाज़ भी उसके पीछे पीछे ही चल दी थी। जब शादाब गेट खोलकर रेहाना को अंदर गेस्ट रूम में के गया था तभी शहनाज़ चुपके से दादा दादी जी के कमरे में घुस गई थी और दोनो कमरे के बीच लगे हुए दरवाजे से उन पर नजर रख रही थी और पूरी तरह से समझ गई थी कि रेहाना शादाब पर डोरे डाल रही हैं। वो चाहती थी अब तक का उसका मुंह तोड़ चुकी होती लेकिन वो ये देखना चाह रही थी कि शादाब उससे जो प्यार करने का दावा करता हैं वो कितना सच्चा हैं बस इसलिए खामोशी से सब देख रही थीं।

रेहाना:” और बताओ शादाब तुम्हारा मन लग रहा हैं गांव में ?

शादाब:” जी बस ठीक है, घर में रहता हूं अपनी अम्मी के साथ और अब जमीन का हिसाब भी देखना शुरू कर दिया है।

रेहाना:” वो तो ठीक है बेटा, लेकिन कहां वो हॉस्टल की ज़िन्दगी, दोस्तो के साथ मस्तियां, घूमना और कहां गांव की ये नीरस ज़िन्दगी, जहां ना अपनी मर्जी से पहन सकते हैं और ना खा सकते हैं शादाब।

शादाब:” आपकी बात ठीक हैं, लेकिन गांव में एक सुकून हैं अपनी मिटी की खुशबू ही अलग होती हैं।

रेहाना को लगा कि या तो शादाब बिल्कुल मासूम हैं जो उसके बोलना का मतलब नहीं समझ पा रहा हैं या फिर जरूरत से ज्यादा तेज हैं को जान बूझकर उसकी बात को घुमा रहा है। इसलिए रेहाना बोली:”

‘ शादाब मैं तो शहर में पली बढ़ी हुई हू इसलिए मुझे तो गांव का माहौल पसंद नहीं आता, मुझे तो बस घूमना और मस्ती करना चाहिए ।

शादाब:” वो तो सबकी अपनी अपनी पसंद होती हैं मैडम।

रेहाना शादाब को देखते हुए अपने होंठो पर जीभ फेरते हुए बोली:” तुम्हे क्या पसंद हैं शादाब ?

शादाब:” बस कुछ खास नहीं, पढ़ाई से अलग कुछ सोचा नहीं, किताबो से और ही नहीं उठाया अभी तक।

रेहाना समझ गई कि उसे एक दम फ्रेश माल मिला है इसलिए खुश होते हुए उसकी तरफ झुकते हुए टेबल पर अपनी दोनो कोहनियां टिका दी जिससे उसकी चूचियां बाहर निकलने को बेताब सी नजर आईं। रेहाना अपनी जीभ अपने होंठो पर घुमाते हुए बोली:’

” दुनिया बहुत खूबसूरत हैं शादाब, एक बार देखो किताबे भूल जाओगे।

शादाब बिना पलके झपकाए रेहाना की गोलाईयों को देखने लगा तो रेहाना समझ गई कि लड़का लाइन पर अा गया है तो उसने धीरे से टेबल के नीचे से अपना पैर शादाब के पैर पर रख दिया तो शादाब ने उसकी तरफ देखा तो रेहाना ने एक स्माइल दी और उसका पैर सहलाना शुरू कर दिया और बोली:”

:” शादाब तुझे रोज मेरे बेटे को पढ़ाने के लिए मेरे घर अा जाया करना, तुम्हे मैं पूरी दुनिया दिखा दूंगी।

इतना कहकर रेहाना ने अपने टेबल के नीचे से ही शादाब का पैर सहलाते हुए उसकी जांघ पर अपना एक हाथ रख दिया तो शादाब एक पल के लिए विचलित हो उठा और बोला:”

” माफ कीजिए मैडम, मै नहीं अा पाऊंगा, घर में मेरी अम्मी अकेली रहती हैं तो मैं उनके साथ रहता हूं।

रेहाना थोड़ा सा जोर से उसकी जांघ सहलाते हुए:” अच्छा अरे हान तुम्हारी अम्मी, वो तो पुराने जमाने की औरत हैं। माफ करना शादाब लेकिन उससे तुम पक जाते होंगे।

शादाब ने एक दम से गुस्से से रेहाना का हाथ हटा दिया और थोड़ा जोर से बोला:”

” थोड़ा तमीज से बात कीजिए, मेरी अम्मी बहुत अच्छी है, आप मुझे मत सिखाए, आप जा सकती हैं।

रेहाना को लगा कि उसने जल्दबाजी कर दी हैं और उसे शहनाज़ के बारे में ऐसे नहीं बोलना चाहिए था। रेहाना थोड़ा नरम पड़ते हुए बोली:”

” बेटा शादाब तुम तो बुरा मान गए, मेरा वो मतलब नहीं था जो तुम सोच रहे हो। मैं तो बस ये कहना चाह रही थी कि तुम्हारी अम्मी को दुनिया के साथ चलना चाहिए, अब कहां ऐसी सोच हैं कि घर के अंदर भी बुर्का नहीं उतर सकते।

शादाब का चेहरा गुस्से से लाल हो गया और बोला:’ रेहाना मैडम आप जा सकती हैं। बहुत हो गया, मुझे अपनी अम्मी के बारे में कुछ भी गलत बात बर्दाश्त नहीं।

रेहाना ने भी अपने शाही तेवर दिखाने शुरू कर दिए और बोली:” जुबान संभाल कर बात करो शादाब, मैं तो तुम्हारे घर के नौकर नहीं तो तुम्हारी मर्जी से आऊ या जाऊ ?

शादाब ने गुस्से से एक जोरदार मुक्का टेबल पर दे मारा तो रेहाना के टेबल पर टिके हाथ एक झटके से हट गए और उसका मुंह टेबल पर लगा जिससे उसके मुंह से दर्द भरी आह निकल पड़ी।

शादाब:” बस बहुत हो गया जाइए आप, कहीं ऐसा ना हो तुम्हे धक्के देकर बाहर निकालना पड़े।

रेहाना को ज्यादा चोट तो नहीं लगी थी लेकिन बस मुंह लाल सुर्ख हो गया था, थोड़ा सा चोट की वजह से तो बाकी अपमान की वजह से। वो गुस्से से खड़ी हुई और बोली:”

:’ शादाब तुम मुझे ठीक से नहीं जानते हो अभी, तुमने अपनी मा जैसी जाहिल औरत के लिए मेरी बेइज्जती की हैं देखना मैं क्या हाल कर दूंगी तुम दोनो मा बेटे का ?

शादाब ने एक झटके के साथ आगे बढकर रेहाना का हाथ पकड़ लिया और उसकी आंखो में गुस्से से देखते हुए बोला:”

” रेहाना अगर मेरी मा का बाल भी बांका हुआ ना तो तेरे पूरे खानदान को तबाह कर दूंगा, वो हाल करूंगा कि मेरी नाम से ही तेरी रूह कांप उठेगी।

रेहाना गुस्से से अपने कदम पटकती हुई बाहर की तरफ चल पड़ी और गाड़ी में बैठ गई और बोली :” शादाब आज से हमारी दुश्मनी शुरू।

शहनाज़ पीछे से चिल्लाती हुई अाई और बोली:’

” रुक कमीनी, अभी तुझे सबक सिखाती हूं ।

लेकिन तब तक वो तेज हवा के जैसे अपनी गाड़ी लहराती हुई निकल गई। शादाब अपनी अम्मी को देखकर हैरान हो गया और बोला :’
” अम्मी आपको क्या हुआ अब, आप इतना गुस्सा मत करो,

शहनाज़:” बेटा तुझे नहीं पता इसकी ताकत का, बेटा इसका पति एक बहुत बड़ा गुंडा आदमी हैं जो सिर्फ शराफत का ढोंग करता हैं। तुझे उससे नहीं उलझना चाहिए था।

शादाब:’ अम्मी गुंडा होगा अपने घर का, वो आपके बारे में भला बुरा बोल रही थी…

शहनाज़ बीच में ही उसकी बात काटते हुए बोली:”

” और तू सब कुछ बर्दाश्त कर सकता है लेकिन मेरी बुराई नहीं, ये ही बोलना हैं ना तुझे।

शादाब:” हान अम्मी मुझे कोई कुछ कहे तो बर्दाश्त कर लूंगा, आपको कोई कुछ कहे तो हाथ तोड़ दूंगा उसका, अच्छा हुआ ये लड़की थी अगर लड़का होता तो अब मार डाला होता मैंने इससे ।

शहनाज़ को अपने बेटे की बातो में मजबूती और आंखो में विश्वास दिखाई दिया।

शहनाज:” इतना प्यार करता हैं तू मुझसे शादाब ?

शादाब:” अम्मी इससे भी कहीं ज्यादा, कैसे यकीन दिलाऊ आपको मैं ?

शहनाज़;’ उसकी जरूरत नहीं, मुझे अपने बेटे पर खुद से ज्यादा यकीन हैं। अच्छा चल उपर चलते हैं खाना बनाना है मुझे।

दोनो मा बेटे उपर की तरफ चल पड़े और शहनाज़ सब्जी काटने लगीं तो शादाब बोला:”

” अम्मी आप तो सो रही थी ना आप कैसे उठ गई थी ?

शहनाज़ ने क्या बताती कि वो अपने बेटे की जासूसी कर रही थी इसलिए बोली:”

‘ बेटा जब मैंने जोर जोर से झगड़े की आवाज सुनी तो आंख खुल गई और मैं दौड़कर नीचे अाई। लेकिन ये कमीनी अचानक से कहां से आ गई और झडगा कैसे हुआ ?

शादाब बोला:” ये गंदी औरत मेरे पीछे पड़ी हुई हैं अम्मी, मुझ पर डोरे डालने अाई थी कि मेरे बेटे को पढ़ाने के लिए मेरे घर अा जाना तुझे पूरी दुनिया दिखा दूंगी।अम्मी दुनिया तो मैंने देखी है अब ये कौन सी दुनिया दिखाने की बात कर रही थी ?

शादाब ने इतने भोलेपन से कहा कि शहनाज़ की हंसी छूट गई तो शादाब उदास हो गया और बोला:”

,” अम्मी मेरा मजाक मत उड़ाओ, प्लीज़ बताओ ना ?

शहनाज़ इतनी भी बेवकूफ नहीं थी इसलिए वो रेहाना का मतलब समझ गई थी लेकिन शादाब को कैसे बताए इसलिए बोली:”

” मुझे नहीं पता शादाब, उसी रेहाना से पूछ लेना बता देगी।

शादाब गुस्से से:” मुझे नहीं पूछना उससे, उसका तो मैं मुंह तोड़ दूंगा।

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