जीजा के कहने पर बहन को माँ बन अध्याय 2

मेरे बाहर आते ही दीदी टायलेट में चली गई। मैं अपने बेड पे ढेर गया और दिमाग़ में ख्याल आ रहा था, मुझे लग रहा था कि दीदी जाग रही थी, और हो सकता है कि मेरा लण्ड देखकर उसका मूड बन गया हो और वो भी अब फिंगरिंग करने के लिए टायलेट में गई हो। मगर पता कैसे लगाया जाये कि दीदी के दिल में क्या है? वैसे भी अब तक कितनी बार तो कोशिश कर चुका हूँ, उल्टा बातें सुननी पड़ती हैं। 

लेकिन मैं तो अब शांत हो चुका था इसलिये सोचने लगा-“दीदी, अपने आपको पता नहीं क्या समझती हैं? साला जब भी कोशिश करता हूँ, डाँट देती है। अगर दिल है तो चुप रहकर भी तो रेस्पॉन्स दे सकती है? फिर सोचा कि चल छोड़ कोई और लड़की देख ले चोदने के लिये। लेकिन जब भी कोशिश करता था कि किसी दूसरी लड़की से 

बात करके उसको चोदने की प्लानिंग कर लूँ तो मेरा दिल नहीं मानता था। ऐसा लगता था कि मेरी दीदी जैसी सेक्सी और खूबसूरत लड़की और कोई बनी ही नहीं है, दीदी की बड़ी-बड़ी गोल मस्त चूचियां और उभरी हुई गाण्ड हमेशा मेरी आँखों के सामने रहती थी और जो चुदाई का मज़ा अपनी बहन के साथ है वो किसी और के साथ नहीं मिल सकता…” 

फिर एक दिन दीदी अकेली सोफे पे लेटी टीवी देख रही थी, उसने हल्के ब्लैक कलर की पतली और एकदम फिट सलवार कमीज़ पहन रखी थी। उसने दाईं कोहनी पे अपना वजन रखा हुआ था और टांगें भी तकरीबन सोफे के ऊपर ही थीं, उसकी दाईं बाँह और दाईं टांग नीचे वाली साइड और बाईं बाँह और बाईं टांग ऊपर वाली साइड पे थी, उसके दायां हाथ के ऊपर उसका दायां गाल था जिससे उसके सर का वजन बैलेन्स हुआ था। दाईं साइड पे टेढ़ी लेटी होने के कारण दीदी की कमीज़ का कमर से नीचे का हिस्सा बल खाकर उसके पेट पे आ चुका था, जिससे उसकी दोनों टांगों के बीच वाला हिस्सा भी सॉफ-सॉफ नज़र आ रहा था। पटियाला सलवार में मेरी बहन की टांगें उसके नरी तक नज़र आ रही थीं। 

लेकिन उसका ध्यान तो टीवी की तरफ था। मैं कुछ देर खड़ा अपनी दीदी की सेक्सी बाडी को देखता रहा, मेरी नज़र दीदी के सर से शुरू हुई, दीदी के सिल्की बाल, गोरी लंबी गर्दन, और उसके गोरे जिश्म पे कमीज़ के गले में से बाहर झाँक रही तनी चूचियां, पतली कमर, फिर उभरी हुई गाण्ड और लंबी टांगें, मैं देखकर पागल हो रहा था। लेकिन दीदी को कुछ खबर ही नहीं थी। उसकी चुनरी भी साइड पे पड़ी हुई थी। मैंने सोचा मौका अच्छा है दीदी को गरम करके देखता हूँ। 

मैं सीधा दीदी के सामने खड़ा हो गया तो वो चिल्लाने लगी-“पीछे हट, इधर आकर नहीं बैठ सकता, टीवी के आगे क्यों खड़ा होता है?” 

मैं दीदी वाले सोफे के सेंटर में बैठ गया, मतलब अब दीदी की चूत का हिस्सा मेरी कमर के पीछे था। मैं थोड़ा सा और पीछे को सरक गया। अब दीदी का पेट और चूत की गम़ी मेरी कमर को महसूस हो रही थी। मेरे पीछे दायें साइड पे दीदी की चूचियां और चेहरा था और बाईं साइड पे लंबी टांगें और पैर थे। 

मैंने डरते-डरते अपना बायां हाथ दीदी के घुटने पे रख दिया और दायें हाथ से दीदी से रिमोट माँगने लगा-“दीदी रिमोट देना…” 

दीदी-“चुप करके बैठ। मुझे हकीकत देखने दे पहले, बाद में ले लेना…” 

मुझे कौन सा रिमोट चाहिये था, मैं तो अपना काम करने का बहाना ढूँढ रहा था। मैं तो खुद दीदी के हाथ में इस रिमोट की जगह अपना रिमोट, यानी कि अपना लण्ड पकड़ाना चाहता था। मैंने धीरे-धीरे अपना हाथ दीदी के घुटने से ऊपर उसकी चिकनी मुलायम जांघों की तरफ सरकाना शुरू कर दिया, क्या मुलायम और गोल-गोल टांगें थी दीदी की, बिना ट्रिम किए भी कोई बाल ना होने के कारण टांगें और भी चिकनी लग रही थीं। मैं हल्की-हल्की मालिश करता हुअ घुटने से अपना बायां हाथ ऊपर जांघ की तरफ ले आया और सोचने लगा कि लगता है कि दीदी को भी मज़ा आ रहा है और प्लानिंग करने लगा कि दायें हाथ से दीदी की चूची को कैसे टच करूँ? 

दीदी की चुप्पी से मुझे लग रहा था कि दीदी भी मज़ा ले रही है। लेकिन मैं डरता भी था, मैंने शॉर्टस और टी-शर्ट पहन रखी थी, शॉर्टस में मेरा लण्ड उठक बैठक करने लगा था। मैं यह सोचकर बेकाबू हुआ जा रहा था

दीदी अब तक कुछ नहीं बोली, इसका मतलब ग्रीन सिग्नल है और वो गरम हो गई है, और हो सकता है आज बात बन जाये, अब कंट्रोल नहीं हो पा रहा था मेरा दायां हाथ धीरे-धीरे दीदी की चूची की तरफ सरकने लगा और अब दिल कर रहा था कि बायें हाथ को झटके से उठाकर दीदी की चूत पे रखकर मसलना शुरू कर दूं। मैंने दीदी का चेहरा पढ़ने की कोशिश की तो वो पूरे ध्यान से टीवी में मस्त लग रही थी। आज दिमाग़ में आ रहा था कि जो होगा देखा जायगा, आर या पार कर डालना है आज। 

मेरे जिश्म में जैसे 440 वोल्ट का करेंट दौड़ने लगा था, हाथ काँपने लगे थे। मैंने बाये हाथ को सरकाते-सरकाते आख़िरकार हल्के से दीदी की चूत पे रख दिया। कुछ सेकेंड के लिये मेरा सारा जिश्म फ्रीज हो गया, कोई हरकत नहीं हुई। फिर दिल में आया कि साले तू टारगेट पे तो पहुँच चुका है, अब आगे बढ़। मेरा हाथ दीदी की दोनों टांगों के बीच उसकी पटियाला सलवार के ऊपर हल्के से पड़ा था, अब अगला काम चूत को मसाज देना था। मैंने हिम्मत करके टांगों के बीच चूत के ऊपर हल्के से रखे अपने बायें हाथ को दीदी की चूत पे सलवार के ऊपर से ही ग्रिप कर लिया। अगले ही पल दीदी की दोनों टांगें पूरी खुल गईं, मेरा हाथ पूरा चूत पे टांगों के बीच चला गया। 

और फिर उससे अगले पल ही झटके से दीदी उठकर सोफे पे बैठ गई और तड़ातड़ 4-5 थप्पड़ मेरे सर और कानों पे दिए, और बोली-“तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यह सब करने की?” 

मेरा रंग पीला पड़ गया होंठ सूखने लगे, मैंने अपने गालों और कानों पे दोनों हाथ रख लिये और मैं-“सारी दीदी, सारी दीदी…” कहकर अपना मुँह छुपाने लगा। 

सनडे की दोपहर होने की वजह से मम्मी अपने रूम में रेस्ट कर रही थीं। 

दीदी जोर-जोर से चिल्लाने लगी-“मैं अभी तुम्हारा इलाज करती हूँ…” 

मैं-“सारी… सारी दीदी, प्लीज़्ज़ धीरे बोलो…” 

दीदी-“तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई? मम्मी को भी तो पता चले कि तुम्हारी नियत क्या है?” यह कहती हुई वो सोफे पे फिर उसी तरह दायें साइड की तरफ लेटी हुई मम्मी को आवाज़ लगाने लगी। 

तो मैंने झट से दीदी के मुँह पे अपना हाथ रख दिया, तो उसके मुँह से ‘उम्म्म्माआ’ ही निकल सका। फिर मैं दबी हुई आवाज़ में बोला-“दीदी, मैं सारी बोल रहा हूँ, और यह भी कहता हूँ कि दुबारा ऐसा नहीं करूँगा, लेकिन प्लीज़्ज़ अब चुप हो जाओ…” 

वो अपने दोनों हाथों से अपने मुँह से मेरा हाथ उठाने की कोशिश करने लगी। मैंने थोड़ा सा हाथ ढीला किया तो उसके मुँह से फिर जोर से आवाज़ निकलने लगी-“मुंम्म्म…” 

मैंने फिर जोर से दीदी के होंठ पे अपना बायां हाथ दबा दिया। मेरा भी अब दिमाग़ खराब हो गया था, गुस्से से भी और सेक्स से भी। सोफे पे आधी लेटी हुई दीदी की टांगों के नीचे से दायां हाथ डालकर मैंने उसका सारा जिश्म सोफे पे रख दिया और बायें हाथ से दीदी के होंठ दबाये हुए ही मैं दायें हाथ को दीदी की चूत के अंदर घुसेड़ने की कोशिश करने लगा। 

दीदी हैरानी से मुझे देखने लगी, और अपने आपको छुड़ाने के लिये स्ट्रगल करने लगी। मैं उस पे भारी पड़ रहा था, मैंने दायें हाथ से दीदी का सूट ऊपर करके अंदर हाथ डाल दिया, फिर उसकी चूचियों को जा के ऊपर से ही दबाने लगा, फिर चिकने पेट पे हाथ फिराता सलवार को खोलने की कोशिश करने लगा। लेकिन जब नाड़ा नहीं खुला तो ऐसे ही हाथ अंदर घुसेड़ने की कोशिश करने लगा। 

लेकिन दीदी ने नाड़ा कस के बांधा हुआ था और अब उसके हाथ मेरे दायें हाथ को सलवार के अंदर जाने से रोकने की कोशिश करने लगे थे। मैंने काफ़ी कोशिश की लेकिन मेरा हाथ सलवार के अंदर नहीं जा पाया तो मैंने सलवार के ऊपर से ही अपने दायें हाथ से दीदी की चूत को मसलना शुरू कर दिया। उसके दोनों हाथ मेरे दायें हाथ को रोकने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उसका बस नहीं चल रहा था। वो अपनी टांगों की उछल-कूद करके मेरी पकड़ से निकलने की कोशिश कर रही थी। 

तभी मैं अपना मुँह अपने बायें हाथ के करीब उसके होंठों के पास ले जाकर बोला-“ठीक है, अब अगर तुमने बताना ही है तो डर किस बात का? अब जो मेरा दिल कहेगा वोही करूँगा, अब यह बताना कि मेरी चुदाई हो गई…” 

दीदी के मुँह से ‘म् म्म्मम’ ही निकल पाया। वो अपने सर को झटके देकर आज़ाद होने की कोशिश कर रही थी, उसकी टांगें ऊपर-नीचे चलती रही। वो अपने आपको आज़ाद करने के लिये पूरा स्ट्रगल कर रही थी, लेकिन उसका बस नहीं चल रहा था। वोही दीपक जो अपनी इस बहन से थर-थर काँपता था, आज उसी बहन पे जबरदस्ती सवार होने जा रहा था। आज मुझे भी और उसे भी यह एहसास हो गया कि मर्द मर्द होता है और औरत औरत। 

करीब 5-10 मिनट तक हम बहन भाई कुश्ती करते रहे और इस 5-10 मिनट में दीदी की चूत को जबरदस्ती अपने हाथ से मसाज करते हुये, मुझे जो मज़ा आया था वो आज तक पहले कभी नहीं मिला था। कभी-कभी दीदी की टांगें अपने आप खुल जाती और वो स्ट्रगल करना बंद कर देती, जैसे थक गई हो, लेकिन यह ज़रूरी नहीं था कि थक गई हो, यह भी हो सकता था कि उसे भी मज़ा आने लगा हो? जब वो ढीली पड़ जाती तो मैं कोशिश करता कि अपनी बिचली उंगली को दीदी की चूत के अंदर घुसेड़ सकूँ। लेकिन बाहर से ऐसा करना मुश्किल था, एक तो दीदी की सलवार और उसके बाद पैंटी, और जब मैं उंगली घुसेड़ने की कोशिश करता तो दीदी फिर अपनी टांगों से मुझे हिट करने की कोशिश करती, और कभी उसके हाथ मेरे बायें हाथ को मुँह से उठाने की कोशिश करते और कभी मेरे दायें हाथ को चूत से उठाने की, कभी-कभी मुझे यह भी लगता कि अब दीदी को मज़ा आ रहा है। 

लेकिन साली फिर भी नाटक पूरा कर रही थी। मेरा लण्ड भी बेकाबू हो रहा था। कुश्ती करते-करते दीदी का गरम जिश्म महसूस करके मुझे लग रहा था कि पता नहीं कब मेरी पिचकारी निकल जाये… बस थोड़ा जोर जबरदस्ती करते-करते ध्यान बँट जाता था, इसलिये अब तक वीर्य निकलने से बचा हुआ था। अब मैंने अपना हाथ दीदी की चूत से उठा लिया और फिर से उसकी सलवार खोलने की कोशिश करने लगा। लेकिन साली ने मेरा हाथ तक तो अंदर नहीं जाने दिया था तो सलवार का नाड़ा कैसे खोलने देती? 

मैं कोशिश करता रहा, और जब नाड़ा नहीं खुल पाया तो मैं उसके ऊपर चढ़ गया। और मैंने अपने दायें हाथ से दीदी की चूचियां दबानी शुरू कर दी। वो अभी भी अपने हाथों से मेरे हाथों को पकड़कर रोकने की कोशिश कर रही थी। मेरा बाया हाथ एक ही जगह पे दबाने की वजह से वो थोड़ा थक गई, तो मैंने झटके से अपना बायां हाथ दीदी के होंठों से उठाकर उस पे दायां हाथ रख दिया। फिर बायें हाथ को दीदी की कमीज़ के गले से अंदर कर दिया। मेरा हाथ सीधा दीदी की दाईं चूची की निपल पे चला गया। मैंने पहले अपनी पहली उंगली और अंगूठे से दीदी की निपल को थोड़ा मसला, निपल एकदम सख़्त था। फिर अपने हाथ से दीदी की गोल-गोल चूचियां दबाने लगा। 

आज पहली बार मैंने दीदी के अंदरूनी जिश्म को छुआ था। अब कंट्रोल नहीं हो पा रहा था, लगता था कि मेरी पिचकारी निकल जायेगी, लेकिन तभी दीदी ने अपने दोनों हाथों से मेरे मुँह पे थप्पड़ मारने शुरू कर दिए। लेकिन मुझे उसकी परवाह नहीं थी, मेरे लिये तो अच्छा ही हुआ कि मेरा ध्यान फिर थोड़ा बँट गया और मेरी पिचकारी निकलने से बच गई। 

अब मैंने अपने बायें हाथ को अंदर ही से दूसरी चूची की तरफ घुमा दिया। मैं बड़ी-बड़ी दोनों चूचियां दबा रहा था, एकदम पत्थर के जैसे सख़्त टाइट चूचियां थीं दीदी की, लेकिन स्किन उतनी ही साफ्ट थी। मेरा लण्ड मेरे शॉर्ट में लोहे की रोड जैसा खड़ा था, और मेरा दिल कर रहा था कि किसी तरह जल्दी से इसे दीदी की चूत में डाल दूं। लेकिन दीदी साली नाड़ा तो खोलने नहीं दे रही थी। 

मैंने फिर अपने बायें हाथ से कोशिश किया, लेकिन नाड़ा खोल पाना बहुत मुश्किल था, टाइम बरबाद करना ही लग रहा था। फिर मेरे दिमाग़ में एक आइडिया आया कि नाड़ा तोड़ दूं, तो मैंने वो भी कोशिश कर लिया। लेकिन शायद मेरी किस्मत खराब थी, मेरे कितने ही झटके देने के वाबजूद भी नाड़ा टूटने का नाम नहीं ले रहा था। फिर मैंने ऐसे ही बिना नाड़ा तोड़े और खोले सलवार को नीचे खींचकर उतारने की कोशिश की, तो सलवार थोड़ी सी नीचे सरकी फिर अटक गई। 

सलचार दीदी की मोटी गाण्ड से ऐसे कैसे नीचे आ सकती थी, हो सकता था सलवार नीचे सरक भी जाती, लेकिन एक हाथ से उसे नीचे खींचना मुश्किल था, सारी कोशिश बेकार जा रही थी। फिर मैंने दीदी की कमीज़ उसके पेट से ऊपर उठा दी और उसके गोरे पेट और नाभि पे किस करने लगा। मेरे अंदर का गरम पानी अंतिम सीमा पे था, लग रहा था अब पिचकारी छूटने ही वाली है। 

तभी दीदी ने फिर से मुझे हिट करने के लिए अपनी बाईं टांग मोड़ करके ऊपर उठाई तो मैंने उसी वक़्त अपनी बाईं बाँह दीदी की टांग के पीछे से घुमा दी। अब दीदी की बाईं टांग मेरे कंधे पे आ गई, फिर मैंने झट से अपना दायां हाथ दीदी के होंठ से उठाकर उस पे अपना बायां हाथ रख दिया और फिर दाईं वाली बाँह को भी दीदी की दाईं वाली टांग के पीछे से घुमाकर दीदी के मुँह की तरफ आगे को झुक गया। अब दीदी की दोनों टांगें मेरे कंधों पे थीं, और एकदम फिट चुदाई का स्टाइल बन चुका था। 

काश कि दीदी की सलवार का नाड़ा खुल या टूट गया होता तो अब मुझे अपना लण्ड दीदी की चूत के अंदर करने में कोई परेशानी नहीं होनी थी। मेरा लण्ड मेरी शॉर्टस के अंदर डंडे जैसा खड़ा था, मैंने अपना शॉर्ट एक हाथ से खींचकर नीचे किया और एक टांग शॉर्ट से बाहर निकाल ली। फिर ऐसे ही सलवार के ऊपर से दीदी की चूत का निशाना लगाकर उसको हिट करना शुरू कर दिया। 

दीदी की दोनों टांगें मेरे कंधों पे थीं और उसका का पूरा जिश्म मेरे सीने के सामने था। मैं कुछ देर ऐसे ही सलवार के ऊपर से दीदी को चोदने और चोदने की एक्टिंग करता रहा। मुझे ऐसा लग रहा था की जैसे मैं दीदी 

को चोद रहा हूँ। लेकिन कोई जायदा नहीं था, ऊपर से मेरे लण्ड का पानी निकलने के बहुत करीब था, मेरी सांस भी फूल गई थी, लेकिन दीदी को सबक सिखाना भी बहुत ज़रूरी था। फिर मेरे दिमाग़ में एक आइडिया आया और मैंने एक-एक करके दीदी की दोनों टाँगों को छोड़ दिया, फिर दीदी के पेट के ऊपर बैठ गया। 

मेरा 8” इंच लंबा और 2½” मोटा खड़ा लण्ड देखकर दीदी की आँखें फटने की तरह हो गईं। 

मेरा एक हाथ दीदी के होंठ पे था और दूसरे से मैंने अपने लण्ड को मूठ मारना शुरू कर दिया। मेरा लण्ड पानी छोड़ने के लिए तो पहले ही तैयार था, इसलिये बहुत मुश्किल से 40-50 सेकेंड ही मूठ मार पाया होऊूँगा कि मेरे अंदर से गरम क्रीम की पिचकारी छूटी, जो सीधी दीदी की चूचियों से होती हुई उसके चेहरे की तरफ गई। मेरे लण्ड की सारी क्रीम दीदी की चूचियों के ऊपर कमीज़ पे जाकर गिरी थी और उसमें से 1-2 बूँद दीदी की गर्दन, गालों पे और उसके होंठ पे गिरी थी। 

अब दीदी भी ढीली पड़ चुकी थी और मैं तो बिल्कुल ढीला पड़ गया था। 

मैं कुछ देर ऐसे ही उसके ऊपर बैठा रहा फिर ठंडी सांस ली और उसके ऊपर से उठ गया। फिर मैं अपनी शॉर्टस पहनता हुआ टायलेट की तरफ जाता हुआ बोला-“अब जिसको बताना होगा बता देना, लेकिन यह भी सोच लेना कि मेरे पास भी बताने के लिये बहुत कुछ है, स्कूल से लेकर अब तक की तुम्हारी चोदा-चोदी, और मम्मी को बहाना लगाकर नाइट क्लब जाने तक…” 

दीदी कुछ नहीं बोली, और आँखें फाड़-फाड़कर मेरी तरफ देखती रही। फिर गाल पे लगे वीर्य की बूँद को हाथ से पोंछने लग गई। मैं टायलेट से वापिस आया तो वो सोफे पे बैठी रो रही थी, फिर अपने रूम में चली गई, शायद कपड़े चेंज करने के लिये। 

मेरा दिल अभी भी डर रहा था केज कहीं वो मम्मी को ना बता दे? मैं बैठा सोचता रहा, फिर दिमाग़ में बचने की तरकीब आ गई। मैं मम्मी के रूम में गया और मम्मी को बोला-“मैंने आपसे कोई बात करनी है अकेले में…” और मम्मी से प्रोमिश लिया कि आप दीदी को कुछ नहीं कहोगे और ना ही उससे कुछ पुछोगे । फिर मैंने स्कूल से लेकर एक-एक बात तरीके से मम्मी को बतानी शुरू कर दी। 

मैंने मम्मी को कहा-“मैं आपको टेंशन नहीं देना चाहता था, इसलिए पहले नहीं बताया। लेकिन अब बात बहुत बढ़ रही है…” 

मम्मी सोचने लगी और बोली-“मैं दो महीने के अंदर-अंदर इसकी शादी कर दूंगी…” 

अब मुझे अपनी साइड सेफ नज़र आ रही थी, अगर दीदी कुछ बताती भी तो मम्मी इतनी जल्दी उस पे यकीन नहीं करती। 

दीदी ने उस दिन के बाद मुझसे बात करना बंद कर दिया और मेरे रूम में सोना भी बंद कर दिया, और दीदी मुझसे सीधे मुँह बात नहीं करती थी। तकरीबन दो महीने के बाद पूजा दीदी की मँगनी हो गई, मँगनी के बाद दीदी दिन रात अपने मंगेतर के साथ फ़ोन पे लगी रहती थी, और अब खुलकर अपनी मर्ज़ी करने लगी थी, 

मम्मी और मेरी मर्ज़ी के खिलाफ हर काम करती और फिर मँगनी के दो महीने के अंदर ही दीदी की शादी हो गई। 

उस वक़्त दीदी 21 साल की थी और मैं 20 साल का। दीदी की शादी वाले दिन मैं बस यही सोचता रहा की जीजू के तो मज़े हो गये, जो उन्हें पूजा दीदी जैसा माल मिला। वो तो आज पूरी रात पूजा दीदी को सोने ही नहीं देंगे। पूरी रात पूजा दीदी को नंगी करके अलग-अलग स्टाइल में पूजा दीदी को चोदेंगे। 

मुझे सिर्फ़ इस बात का बहुत दुख हो रहा था कि मेरा पुजा दीदी को चोदने का सपना बस सपना ही बनकर रह गया, लेकिन अब में क्या कर सकता था? क्योंकि अब दीदी की चूत पर जीजू के लण्ड का नाम लिख दिया गया था। मुझे तो दीदी की सुहगरात वाली रात को नींद ही नहीं आ रही थी, बार-बार मेरी आँखों के सामने दीदी की सुहगरात का ही दृश्य सामने आ रहा था की कैसे अब जीजू ने दीदी का ब्लाउज़ उतारा होगा और अब दीदी की जा उतारकर उसके मोटे-मोटे मम्मे दबा रहे होंगे, दीदी के निपल को चूस रहे होंगे, अब जीजू ने दीदी की पैंटी उतारकर नंगी करके दीदी की टांगें खोलकर उसकी चूत चाट रहे होंगे। हाए अब दीदी को अपना लौड़ा चुसवा रहे होंगे। 

कभी ऐसा दृश्य मेरी आँखों के सामने होता की दीदी के ऊपर चढ़कर दीदी को चोद रहे होंगे, कभी दीदी को अपने लण्ड पर बैठाकर, और कभी दीदी को घोड़ी बनाकर चोद रहे होंगे। 

बस यही बातें सोच-सोचकर मेरा लण्ड बैठने का नाम नहीं ले रहा था। दीदी की शादी का दिन मुझसे बहुत मुश्किल से कटा। उसके हाथों में लगी मेहन्दी और सुहाग का जोड़ा किसी भी जवान आदमी को पागल कर सकता था, वो कितनी खूबसूरत और सेक्सी लगती थी। लेकिन वो मुझे करीब आने का मोका भी नहीं देती थी। 

फिर आख़िरकार डोली तक ले जाने के वक़्त मेरी तमन्ना पूरी हो गई। वो मेरे गले मिलकर रो रही थी और मैं अपना मज़ा ले रहा था, और कार में बिठाते वक़्त भी मैंने उसकी चूचियों को दबाने और चूत को छूने का मौका नहीं छोड़ा। शादी के काफ़ी दिन बाद दीदी धीरे-धीरे मुझसे बात करने लगी थी, लेकिन मेरे दिल में दीदी के लिए आज भी वोही फीलिंग्स थीं, जो उसकी शादी से पहले थी, लेकिन एक बात का बहुत दुख भी था कि मैं अपनी बहन को शादी से पहले चोद नहीं पाया, आज भी दीदी घर में आती तो मैं उसके पूरे जिश्म को बहुत ध्यान से देखता तो मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था। 

इस बात का उसे भी पता था, शायद मुझे तरसाने के लिये वो और भी सेक्सी बनकर आती थी, और कभी-कभी मेरे सामने ही अपने पति के साथ नोक-झोंक भी करती रहती थी। 

जीजू के साथ मेरे सामने दीदी को इस तरह की हरकतें करते देखकर मुझे मन ही मन दीदी पर बड़ा गुस्सा आता, और मैं दीदी को मन ही मन बहुत गालियां देता की साली अब रोज दिन में 4-5 बार जीजू का लण्ड चूत में लेती होगी, तभी साली कुछ ज्यादा ही गदरा गई है और मुझे अपनी जवानी दिखा-दिखाकर जला रही है। कहते हैं कि ‘अगर किसी चीज़ को दिल से चाहो तो वो एक ना एक दिन आपको हासिल हो ही जाती है’ यह मेरा अनुभव भी कहता है। 

शादी के दो साल बाद एक दिन दीदी और जीजू घर में आये, शाम को दीदी बोली-“दीपू अपने जीजू के साथ जाओ, वो कहीं जाने को बोल रहे थे…” 

मुझे दीदी की बात पे गुस्सा आता था फिर भी मैं कार निकालकर जीजू के साथ चला गया। जीजू खुश मिज़ाज आदमी थे, वो दीदी से करीब 5 साल बड़े थे, पहले उनका बिजनेस बाम्बे में था और वो वहीं रहते थे। शादी के बाद वो पंजाब में ही आ गये। उनका रंग गोरा और हाइट 5’9” थी। 

मुझे लग रहा था कि हाइट के हिसाब से उनका लण्ड भी मेरे लण्ड से बड़ा होगा, जिससे वो दीदी को पूरी रात रगड़-रगड़कर चोदकर खुश रखते होंगे। लेकिन पूजा दीदी इन दो सालों में अब तक माँ नहीं बनी थी, इसलिये मैं सोचता था कि शायद जीजू ने पूजा दीदी को अभी तक माँ इसलिए नहीं बनाया होगा की वो अभी दीदी की जवानी का पूरा मज़ा लूटना चाहते होंगे। पूजा दीदी की टाइट चूत जो की बच्चा होने से खुल जाती, उसे एक दो साल तक और मारकर अच्छी तरह पूजा दीदी की जवानी को निचोड़ लेना चाहते थे। पर बात वो नहीं थी बात दरअसल दूसरी थी की पूजा दीदी अब तक माँ क्यों नहीं बनी थी? ये बात मुझे जीजू ने बताई। 

कार को रोड पे चढ़ते ही मैंने जीजू से पूछा-“जीजू कहाँ जाना है?” 

तो वो बोले-“यार जाना कहाँ है, किसी अच्छे से होटेल में चल, जहाँ पे रश ना हो, आराम से बैठकर गप्पें लगा सकें और बातें भी कर सकें…” होटेल में पहुँचकर जीजू ने कॉर्नर वाली टेबल पसंद की, सामने के 1-2 टेबल बबिी थे, बाकी तकरीबन सब टेबल खाली पड़े थे। व्हिस्की भी आ गई और चिकेन भी, हम पीने लगे, मेरे एक लाइट पेग खतम करते-करते जीजू 2-3 डबल पेग गटक जाते। ऐसा लग रहा था जैसे जीजू अपने अंदर व्हिस्की भर रहे हों। लेकिन मैं उनको रोक भी नहीं सकता था, क्योंकि आख़िरकार वो मेरे जीजू थे। मेरे दूसरा ड्रिंक लेने तक उनका पाँचवा ड्रिंक था। जल्दी-जल्दी पीने से जीजू का अब अपने आप पे कंट्रोल नहीं लग रहा था, नशा अब उनके सर चढ़ चुका लगता था। 

उन्होंने बात शुरू की-“दीपक यार, तुमने कोई गर्लफ्रेंड नहीं रखी?” 

मैं-“नहीं जीजू…” 

जीजू-“यार लगता है तू शर्मा रहा है, मुझे अपना जीजू नहीं दोस्त समझ यार, खुलकर बात कर…” 

मैं जीजू से ज्यादा खुलना नहीं चाहता था। मुझे जीजू इतने पसंद नहीं थे क्योंकि आख़िर वो मुझसे मेरी सबसे प्यारी चीज़, यानी मेरी दीदी, मुझसे छीनकर ले गये थे, वो दीदी जिसकी जवानी का मज़ा मैं लेना चाहता था। अब वो पूजा दीदी से मज़ा ले रहे थे। लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था कि जीजू को कोई टेंशन है जो मेरे साथ शेयर करना चाहते थे। 

मैंने कहा-“नहीं जीजू, ऐसी कोई बात नहीं है…” 

जीजू-“यार, शादी से पहले तो सब करते हैं, शरमाता क्यों है? मैंने भी बहुत रंडीबाजी की है, लेकिन तू कोई भी एक गर्लफ्रेंड रख ले मगर किसी ऐसी वैसी लड़की के पास मत जाना, क्योंकि कभी-कभी बाद में पंगा पड़ जाता है, फिर डॉक्टर के पास घूमते फिरो…” 

फिर थोड़ा रुक के बोले-“यार, मुझे एक सलाह लेनी है तेरी, लेकिन समझ में नहीं आ रहा है कि कैसे कहूँ?” 

मैं-“जीजू, अभी तो आप मुझे अपना दोस्त कह रहे थे, और फिर सलाह लेने में क्या है? मैं तो आपका अपना ही हूँ…” 

जीजू के चेहरे पे टेंशन आ गई थी उन्होंने फिर एक लार्ज पेग बनवाया और एक ही बार में सारा अंदर। फिर जीजू बोले-“यार, मुझे तेरी हेल्प की ज़रूरत है…” यह कहते-कहते जीजू का चेहरा उदास सा हो गया और आँखें भारी-भारी सी लग रही थीं। 

मैं-“ओके जीजू, आप बताओ तो सही…” 

जीजू-“यार, मैं अपने घरवालों, अपने माँ बाप, भाई बहनों को कैसे समझाऊ? वो लोग मेरा जीना हराम कर रहे हैं, वो बातों-बातों में ही मुझे जलील करते रहते हैं…” 

मैं-“क्यों, क्या हुआ जीजू, ऐसा क्यों?” 

जीजू-“दीपक, मुझे यह भी नहीं समझ में आ रहा है कि मैं किस पे भरोसा करूँ? दो साल हो गये लेकिन अब सब का मुँह बंद करने के लिए कुछ न कुछ करना ही पड़ेगा…” 

मैं-“जीजू, बात क्या है, आप बताओ तो सही, मुझे बताओ क्या करना है?” 

जीजू-“हाँ… दीपक, पूजा की बात सही है, तू कर सकता है तुझ पे भरोसा भी किया गया सकता है और तुम किसी को बता भी नहीं सकते…” 

मैं-“बोलो जीजू, क्या करना है?” 

जीजू-“यार काम तो कुछ टेढ़ा है, पता नहीं तू इसे भी करेगा या नहीं?” 

मैं-“जीजू प्रोमिश, आप जो बोलोगे मैं करूँगा, आप टेंशन मत लो, और मुझे बताओ आख़िर बात क्या है?” 

जीजू-“यार, मैंने 14 साल की उमर में ही अयाशी शुरू कर दी थी, बहुत गलत काम किए, नशा, और रंडीबाजी बहुत ज्यादा बढ़ गई थी, इसीलिये मुझे आज यह दिन देखना पड़ रहा है। हमारी शादी को दो साल हो गये लेकिन मैं कुछ नहीं कर पा रहा, मैं बाप नहीं बन सकता, लेकिन मुझे बच्चा चाहिये तो बस पूजा से ही…” 

मैं-“फिर क्या है जीजू इस में कौन सी बड़ी बात है? आप दोनों किसी डॉक्टर से चेक करवा के ट्रीटमेंट करवा लो, यह तो कामन है आजकल…” 

जीजू-“हम सब कुछ कर चुके हैं यार, डॉक्टर भी कुछ नहीं कर सकते। मैंने दवा भी बहुत खाई, सब कुछ किया, कहाँ-कहाँ नहीं चेक करवाया, लेकिन मुझसे कुछ होता ही नहीं है। मेरा उसके ऊपर रखते ही हो जाता है, यह सब मेरे नशा और रंडीबाजी का नतीजा है। पूजा बिल्कुल सही है, मुझे मान लेना चाहिये कि मेरी मर्दानगी खतम हो गई है…” यह कहते-कहते उनका मुँह रोने जैसा हो गया, और वो अपने बालों को नोंचने लगे। 

मैं-“जीजू, आप टेंशन क्यों ले रहे हो? कोई ना कोई हल निकल आएगा, किसी देसी हकीम से चेक करवा लेते हैं…” 

जीजू-“कुछ नहीं हो सकता यार, लेकिन मुझे बच्चा चाहिये कैसे भी, अपने रिश्तेदारों का मुँह बंद करने के लिये मुझे कुछ भी करना पड़ेगा, बस मुझे बच्चा चाहिये…” और यह कहते हुये जीजू ने और व्हिस्की का ऑर्डर कर दिया। इस बार उन्होंने मेरा पेग भी एससट्रा लार्ज बनवाया था। 

मैं कुछ नहीं बोला, लेकिन मेरी आँखें चमकने लगी थीं। अब सारी कहानी समझ आ रही थी, कितने साल के बाद मेरी मुराद पूरी होने वाली थी, मैंने ड्रिंक उठाया और इस बार मैं भी जीजू की तरह एक ही बार में सारा गिलास खाली कर गया। 

जीजू फिर बोले-“कुझे बच्चा चाहिये कैसे भी, लेकिन किस पे भरोसा किया जाये, हमारी यही प्रोबलम है? मैं और पूजा एक साल से ऐसा आदमी ढूँढ रहे हैं, जो पूजा के साथ सेक्स करके हमें बच्चा दे सके और किसी को पता भी ना चले, लेकिन ऐसा कोई आदमी हमारी नज़र में नहीं आया। कल यही सोचते-सोचरे और बातें करते-करते पूजा के मुँह से अचानक तुम्हारा नाम निकल गया। 

तो मैंने झट से पूजा को कहा-“हम दीपक पे 100% भरोसा कर सकते हैं, लेकिन पता नहीं वो माने या ना माने? मैंने कैसे भी करके पूजा को तो मना के अपने साथ कर लिया लेकिन मुझे पता था कि तुम नहीं मनोगे। फिर भी पूजा ने मुझे तुमसे बात करने के लिये फोर्स किया और कहा कि एक बार पूछने में क्या हर्ज है? दीपक तुम हमारी हेल्प कर सकते हो। प्लीज़्ज़… ना मत कहना। मुझे पता है कि तुम दोनों बहन भाई हो लेकिन इसके बिना और कोई रास्ता भी तो नहीं…”

मैं-“जीजू, आपका मतलब कि मैं पूजा दीदी से सेक्स करके पूजा दीदी को माँ बना दूं, और आपको बच्चा दूं?” 

जीजू-“हाँ दीपक, प्लीज़्ज़… हम तुम्हारे अलावा और किसी पे भरोसा नहीं कर सकते, पूजा की फिकर मत करो, उसे मैंने मना लिया है, वो तैयार है तुमसे बच्चा हासिल करने के लिए…” 

मैं-“पूजा दीदी मेरी सगी बहन है, जीजू, आप किसी दोस्त की हेल्प क्यों नहीं लेते?” 

जीजू-“नहीं यार, किसी पे भी भरोसा नहीं किया जा सकता। कल को वोही दोस्त दूसरे दोस्तों को कहेगा कि यह आदमी नामर्द है, इसकी बीवी का मेरे साथ चक्कर है, मुझसे पूरी तरह फँसी हुई है, रोज उसको चोदता हूँ, मेरी रखैल है आदि। और फिर वो कभी भी अपने दोस्तों को भी ला सकता है और फिर वो सब भी तुम्हारी बहन के साथ मस्ती करेंगे, मेरे घर में, मेरे ही बिस्तर पर, वगैरा वगैरा। दीपू, अगर कोई एक-दो आदमी हों तो ठीक है। पर सोचो अगर कल को उसने तुम्हारी दीदी को रंडी बनाकर हर रोज अपने किसी ना किसी दोस्त अपने क्लाइंट के नीचे लिटा दिया, तब क्या होगा? कितनी बदनामी होगी? और ये भी हो सकता ही की वो तुम्हारी दीदी को माँ बनाकर सारी उमर ब्लैकमेल करे, और फिर हमसे बच्चा भी ले जाए। सोचो इस हालत में क्या होगा? और एक दूसरा रास्ता है की मैं तुम्हारी बहन पूजा को किसी दूसरे शहर में ले जाऊूँ और वहां किसी लो क्लास वेटर, ड्राइवर या फिर किसी रिक्शावाले से चुदवाकर बच्चा पैदा करूं। पर पूजा किसी लो क्लास आदमी का बच्चा पैदा नहीं करना चाहती। अगर तू राज़ी नहीं हुआ तो फिर मजबूरन मुझे उसे इस बात के लिए राज़ी करना पड़ेगा की पूजा अब इसके सिवा और कोई रास्ता नहीं है की उसे किसी लो क्लास आदमी के साथ सेक्स करके बच्चा पैदा करना होगा। वैसे दीपू, ये लो क्लास के मर्द तुम्हारी दीदी जैसी मस्त पटाका माल को चोदने के लिए एकदम तैयार भी हो जाएंगे। अब अगर तुम तैयार नहीं होते तो अब यही एक रास्ता है। और अगर कोई रिलेटिव होगा तो वो ब्लैकमेल भी कर सकता है और मुझे बदनामी से बहुत डर लगता है…” 

अब लार्ज पेग अंदर जाने और पूजा दीदी को चोदने के खयाल से ही मैं हवा में उड़ने लगा था, मैंने टेंशन की एक्टिंग करते हुए एक और लार्ज पेग मारा और जीजू को बोला-“जीजू, अगर किसी को पता चल गया तो?” 

जीजू एकदम उत्तेजित होते हुए बोले-“न, न… नहीं पता चलेगा दीपक, हम तीनों के अंदर ही बात रहेगी, हम लोगों ने प्लान बना रखा है कि हम तीनों कल शिमला चलेंगे, घूमने के लिए, और वहीं पे होटेल में सब होगा…” 

मैं-“जीजू, इस बात की क्या गारन्टी है कि मेरे 1-2 दिन सेक्स करने से दीदी प्रेग्नेंट हो जायेगी?” 

जीजू-“यार वो टेंशन तू मत ले, मुझ पे छोड़ दे सब। मैं तो शिमला तुम लोगों के साथ इसलिए जा रहा हूँ कि तुम लोगों को आपस में सेक्स के लिये खोल सकूँ, उसके बाद मैं पूजा को तुम्हारे पास एक महीने के लिए घर पे छोड़ जाउन्गा, जब तक कि वो पेट से नहीं हो जाती…” 

मैं कुछ सोचने की एक्टिंग करता चुप बैठा रहा। फिर कुछ देर के बाद बोला-“जीजू, पूजा मेरी बहन है, क्या उसके साथ ये सब करना ठीक होगा? अगर किसी को पता चल गया तो लोग क्या कहेंगे?” 

मेरी बात सुनकर जीजू बोले-“दीपू, तेरी सब बातें जानता हूँ की तू कब से पूजा पर लाइन मारता है। पूजा ने मुझे सब बता दिया है की कैसे तूने एक बार उसे पकड़कर सोफे पर लिटा दिया था और फिर उसकी टांगें चौड़ी करके अपने कंधे पर रखकर तू तो उसको उस दिन ही ठोंकने वाला था, वो तो पूजा की किस्मत अच्छी थी कि उस दिन जो तुझसे उसकी सलवार का नाड़ा नहीं टूटा। अगर उस दिन तुझसे पूजा की सलवार का नाड़ा टूट गया होता तो तूने उसी दिन पूजा को नंगी करके अपना ये मोटा लंबा लण्ड उसकी चूत में डालकर उसकी चूत का कबाड़ा कर दिया होता। वो तो ये सब भी बता रही थी की तेरी आँखें हमेशा से उसकी चूचियों और चूतड़ों पर लगी रहती थीं…” 

जीजू की बात सुनकर मैं झेंप गया, मेरे मुँह से कुछ भी नहीं निकल रहा था। फिर में धीरे से बोला-“जीजू, दीदी माँ नहीं बन सकती, कहीं कमी दीदी में तो नहीं?” 

तो जीजू बोले-“अरे यार नहीं, कमी तो तब होगी उसमें जब मैं उसको चोद पाता…” 

जैसे ही जीजू से कहा की वो दीदी को चोद नहीं पाते तो मुझे झटका लगा। तो क्या इसका मतलब दीदी अभी तक कुँवारी ही है? तो मैंने जीजू से कहा-“जीजू, ऐसी क्या बात है? क्या आपका लंबा नहीं?” 

तो वो बोले-“यार, अब मेरा खड़ा ही नहीं होता… और अगर किसी दिन पूजा जबरदस्ती खड़ा भी कर देती है तो साली को जब भी नंगी करता हूँ, तो मेरा लण्ड पानी छोड़ देता है…” 

तो मैं मन ही मन मुश्कुराया और अपने आपसे बोला-“ये साला कंज़र है…” और हम दोनों कुछ देर ऐसे ही चुप बैठे रहे। मेरे दिमाग़ में अब आगे की प्लानिंग आने लगी, जिससे की मैं पूजा जैसे माल को बिना किसी रोक- टोक के जब चाहूँ चोद सकूं। मैं ये बात पक्का कर लेना चाहता था की कहीं जीजू एक बार पूजा दीदी को मुझसे चुदवाकर माँ बनने बाद कहीं पूजा दीदी से मुझे संबंध बनाने ही ना दें और मैं पूजा दीदी को जब भी अपने सामने पाऊूँ और मुझे अपनी जवानी दिखा-दिखाकर चिढ़ाती रहे। क्योंकि जीजू ये जानते थे की मैं पूजा को सेक्स के बाद में उसकी मर्ज़ी के खिलाफ इस्तेमाल नहीं कर सकता था, उसे ब्लैकमेल करके चोद नहीं सकता था, क्योंकि आख़िरकार पूजा मेरी सगी बहन थी और अगर मैं बाद में पूजा को सेक्स के लिए ब्लैकमेल करता और किसी को पता चल जाता तो इसमें मेरी ही बदनामी होती। 

इसलिए थोड़ा चुप रहने के बाद मैंने जीजू से कहा-“जीजू, मान लीजिए की अगर मैंने पूजा दीदी से सेक्स करके उन्हें माँ बना दिया और आप पूजा दीदी को लेकर अपने घर चले जाएंगे। आप तो जानते ही हैं की मेरे जैसा जवान लड़का अगर एक बार पूजा दीदी जैसी हाट लड़की के साथ सेक्स कर लेगा तो क्या उसके बाद वो बिना किसी औरत के रह पाएगा? फिर पता नहीं पूजा दीदी मुझे कभी अपने बदन पर हाथ लगाने देगी या नहीं? हो सकता है की फिर मैं पूजा दीदी के जिश्म को याद कर-करके किसी रंडी के पास जाने लगूं और अपनी लाइफ बर्बाद कर लूं…” 

मेरी बात सुनते ही जीजू ने कहा-“यार, तू इतनी चिंता क्यों करता है? अब से तू ये समझ की पूजा मेरी नहीं तेरी बीवी है। दुनियाँ के सामने वो मेरी बीवी है, पर असल में वो तेरी बीवी होगी। और यार तू सोच जिस तरह मर्दों ने घर के बाहर दूसरी औरतों को रखा होता है, अपनी रखैल बनाकर। अब से तू समझ की पूजा तेरी बहन नहीं तेरी रखैल है, और तुझे तो पता ही होगा की एक रखैल अपने यार को इतना मज़ा देती है, जितना मज़ा ना एक बीवी और ना एक मासूका दे सकती है। अरे रखैल जितना मज़ा तो लाइफ में कोई रंडी भी नहीं दे सकती…” और इतना कहकर मेरी जाँघ पर हाथ उससे दबाकर मुश्कुरा दिए। 

मैं-“ठीक है जीजू, जैसा आप और दीदी को सही लगता है, वैसे ही होगा…” अब मेरे लिए पूजा दीदी को आगे भी चोदने का रास्ता सॉफ हो गया था। अब मैं खुलकर पूजा दीदी का मज़ा ले सकता था, जैसे मैं चाहता वैसे ही पूजा दीदी की मस्त गदराई हुई जवानी को चूस सकता था। अब मेरे मन में सिर्फ़ पूजा दीदी की चुदाई के बारे में विचार आ रहे थे की कैसे मैं अपनी प्यारी दीदी पूजा की चुदाई करूँगा? उसको किस-किस स्टाइल में चोदूंगा और कहां-कहां चोदूंगा? ये सब विचार मेरे मन में आ ही रहे थे की तभी मेरी आँखों के सामने पूजा दीदी की मस्त तरबूज जैसे चूतड़ आ गये। 

मैंने अपने दोस्तों से सुना था की ज्यादातर लड़कियां अपनी गाण्ड मारने नहीं देती, अगर पूजा दीदी ने भी मुझे अपनी मस्त गाण्ड मारने नहीं दी तो क्या होगा? और वैसे भी जीजू और पूजा दीदी को मुझसे बच्चा ही चाहिए था, जो पूजा दीदी मुझसे अपनी चूत चुदवाकर पैदा कर सकती थी। मन में पूजा दीदी के द्वारा उसकी गाण्ड ना मारने देने के विचार से मेरा मन कांप उठा और मैं जीजू से कन्फर्म कर लेना चाहता था की पूजा दीदी मुझे अपनी गाण्ड मारने से ना रोकें। 

इसलिये मैंने जीजू से कहा-“जीजू, पूजा दीदी को मुझसे बच्चा चाहिए, पर आप बताएं की पूजा दीदी जैसी मस्त पटाका लड़की का तबला (गाण्ड) देखकर किस मर्द का मन नहीं करेगा की पूजा दीदी जैसी मस्त लड़की का तबला बजाये…” 

जीजू मेरी बात सुनकर मुश्कुरा दिए और बोले-“यार, तुझे कहा ना कि अब पूजा को अपनी दीदी मत समझ… बल्की उसे अपनी रखैल समझ। अब तू उस रांड़ की आगे से बजा, या पीछे से उसका तबला बजा… बस तू उसे पेट से करके माँ बना दे…” 

इसके बाद लास्ट ड्रिंक खतम करने के साथ-साथ हम घर को चल दिए। जीजू आउट हो गये थे, उनसे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था। जब मैं ड्राइव कर रहा था तो रास्ते में जीजू मेरे लण्ड पे हाथ रखकर बोले-“साले, अपना हथियार तो दिखा दे, कितना बड़ा है? पूजा बता रही थी की तेरा हथियार बड़ा लंबा और मोटा है…”

एक पल के लिए तो मुझे लगा कि जीजू गान्डू हैं, शायद दीदी की चूत लेने से पहले इनकी गाण्ड भी मारनी पड़े गी। मेरा लण्ड आधा खड़ा था जो उन्होंने मेरी पैंट के ऊपर से ही थोड़ा झुक के अपने दायें हाथ में पकड़ रखा था। 

फिर कुछ सोचकर जीजू बोले-“चल छोड़ कल ही देखेंगे जब तुम मेरी बीवी की चुदाई करोगे…” 

मेरे दिल में आया कि मादरचोद, तेरी बीवी को चोदने का तो पता नहीं मुझे मज़ा आएगा या नहीं? लेकिन अपनी बहन को चोदने के लिए तो मैं बरसों से तरस रहा हूँ, उसे चोदने में तो मुझे जन्नत का मज़ा आएगा। 

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दूसरी ओर घर पर मम्मी पूजा से बात कर रही थी-“पूजा बेटी, तुझसे एक बात पूछूं?” 

पूजा दीदी-हाँ मम्मी पूछो, क्या बात है? 

मम्मी-“बेटी, तुम्हारी शादी को दो साल हो गये और ये क्या तुम लोगों ने अभी तक अपने बच्चे का कुछ प्लान नहीं किया?” 

पूजा दीदी-“वो मम्मी बस ऐसे ही… कर लेंगे…” 

मम्मी-“बेटी, देखो मैं जानती हूँ की आजकल के बच्चे, शुरू में मस्ती के लिए बच्चा नहीं करते फिर बाद में प्राब्लम हो जाती है। तुम्हारी शादी को दो साल हो गये हैँ, अब तुमको अपने बच्चे के बारे में सोचना चाहिए। कहीं ये तो नहीं की दामाद जी अभी बच्चा नहीं चाहते?” 

पूजा दीदी-“नहीं मम्मी, ऐसी कोई बात नहीं है, हम दोनों चाहते हैं…” 

मम्मी-“तो फिर तुम्हें बच्चा क्यों नहीं होता? क्या तुम सेक्स के टाइम पिल्स इस्तेमाल करती हो? या फिर दामाद जी कंडोम इस्तेमाल करते हैं?” 

पूजा दीदी-“मम्मी, हम दोनों ये सब कुछ इस्तेमाल नहीं करते…” 

मम्मी-“बेटी, तो फिर किसी डॉक्टर को दिखाना था। देखो बेटी, जब लड़की की शादी हो जाती है तो वो बेटी नहीं सहली बन जाती है, और अपनी हर सुख दुख की बातें शेयर करती है। देखो बेटी मुझसे क्यों छुपा रही हो? अगर कुछ है तो मुझे बता ताकि अगर कोई दिक्कत हो तो उसका कुछ हल निकल सके। अगर तूझमें कोई कमी है तो फिर उसका भी कुछ करेंगे?” 

पूजा दीदी-“मुझमें तो कोई कमी नहीं है, पर आप ये जान लो की मैं कभी माँ नहीं बन सकती…” 

मम्मी-“पर क्यों? तू माँ क्यों नहीं बन सकती? क्या दामाद जी तुझसे सेक्स नहीं करते?” 

पूजा दीदी मम्मी के गले लगकर-“मम्मी, अब क्या बताऊूँ मैं आपको… आप सेक्स की बात करती हैं, तो आप ये समझ लो की आपके दामाद किसी औरत के काबिल नहीं हैं, वो किसी भी औरत को संतुष्ट नहीं कर सकते…” 

मम्मी को पूजा दीदी की बात सुनते एक झटका सा लगता है-क्या बोल रही है? 

पूजा दीदी-“हाँ मम्मी, ठीक कह रही हूँ। वो सच में किसी औरत की काबिल नहीं हैं…” 

मम्मी-“तो बेटी, किसी डॉक्टर को दिखाना था…” 

पूजा दीदी-“मम्मी, क्या दिखाऊूँ? उनका इतना छोटा और पतला है…” और इतना बोलते ही दीदी चुप हो गईं। 

मम्मी-“क्या कहा पूजा? उसका लण्ड इतना छोटा है…” और मम्मी का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। 

पूजा दीदी-“हाँ मम्मी, उनका 3 इंच से भी छोटा है, उन्होंने कभी शर्म के मारे मुझे हाथ भी नहीं लगाया…” 

मम्मी पूजा दीदी की बात सुनकर सदमें खा गई और बोली-“पूजा, अब तेरा क्या होगा? कैसे तू सारी जिंदगी बिना मर्द के गुजार पायेगी। क्यों नहीं तुम कोई बच्चा गोद ले लेती?” 

पूजा दीदी-“मम्मी, मैं किसी और का बच्चा गोद नहीं लूँगी। वैसे ये भी बोलते हैं कि उन्हें भी बच्चा मुझसे ही चाहिए…” 

मम्मी गुस्से से-“तुझसे बच्चा चाहिए उस नामर्द को, कैसे होगा ये? शादी को दो साल हो गये, और वो नामर्द तुझे चोद नहीं पाया तो बच्चा कौन उसका बाप पैदा करेगा?” 

पूजा दीदी-“मम्मी, आपके दामाद भी यही कहते हैं की किसी और साथ हम-बिस्तर होकर उसके साथ बच्चा पैदा करूं…” 

मम्मी-“उस नामर्द का तो दिमाग़ खराब हो गया है। ऐसा कौन होगा जिससे तू ये सब करेगी?” 

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