और ठीक नो महीने बाद यहा एक खुस-खबरी आई जब आपका जनम हुवा ठाकुर ने सारे गाँव को भोज का निमंत्रण दिया और सारे गाँव को किसी नवेली दुल्हन की तरह सज़ा दिया चारो ओर खुशिया ही खुशिया थी पर ये खुशिया बस थोड़ी देर की ही थी आपके दादा वीरभान से तो बात नही करते थे पर आपसे बड़ा प्यार था उनको घंटो आपको खिलाया करते थे मै खुद देखा करती थी
दिन किसी तरह से कट रहे थे आपके आने से हवेली भी जैसे दुबारा से खिल गयी थी पर तभी कुछ ऐसा हो गया जिसकी उम्मीद किसी ने नही की थी ये कहकर लक्ष्मी चुप हो गयी तो मै उनकी ओर देखने लगा मेरे दिल-ओ-दिमाग़ मे हज़ारो तरह की भावनाए उमड़ आई थी अब मै बड़ी शिद्दत से अपने परिवार के साथ जीना चाहता था मै उनके साथ हसना चाहता था रोना चाहता था पर अफ़सोस अब कोई नही था
वो आगे कहने लगी की बात उन दिनो की है आपका पहला जनमदिन आकर गया ही था की एक रोज वसुंधरा की मा यानी आपकी नानी हवेली चली आई उन्होने बड़े ठाकुर से कहा की अब जो हो गया वो हो गया उसको तो बदला नही जा सकता पर मै अब चाहती हूँ की मेरी बेटी और दामाद चैन से रहे मै अपने दोह्ते को देखने के लिए मरी जा रही हू तो खुद को रोक ना सकी और चली आई अगर आप आग्या दे तो कुछ दिन वसुंधरा को हमारे घर पे भेज दीजिए काफ़ी दिनो से इस से मिली नही हू तो जी भर के बाते भी कर लूँगी अपनी बेटी से
बड़े ठाकुर ने तो कुछ नही कहा और वीरभान भी वसुंधरा को नही जाने देना चाहते थे परंतु वसुंधरा अपनी मा को देख कर पिघल गयी और जाने की ज़िद करने लगी तो हार कर वीरभान को हा कहनी पड़ी पर उन्होने आप को ये कहके रोक लिया की देव के बिना पिताजी का मान नही लगेगा तो इसे आप यही छोड़ जाओ तो आपकी मा चली गयी और ऐसी गयी की फिर कभी वापिस नही आई
आज की रात बड़ी ही भारी थी मुझपर दिल को एक से एक झटके लग रहे थे मैने कहा की क्यो , क्यो नही आई वो फिर वापिस तो लक्ष्मी ने एक ठंडी सांस ली और बोली की यहा से जाने के कुछ दिन बाद उनके घरवालो ने उनको जहर देकर मार दिया ये सुन ना मेरे लिए किसी वज्रपात से कम नही था पर मै कुछ कर भी तो नही सकता था तकदीर ने मुझे एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया था की
सब कुछ होकर भी कुछ नही था मेरे पास ये जो एक पल की खुशी मिली थी किसी रेत की तरह मेरी मुट्ठी से फिसल गयी थी दिल टूट कर बिखर गया था मेरा पर फिर भी हिम्मत करे पूछ ही लिया की उसके बाद क्या हुवा तो लक्ष्मी ने बताना शुरू किया की जब आपके पिता को वसुंधरा देवी की मोत की सूचना मिली तो उन पर जैसे पहाड़ ही टूट पड़ा
उनको तो बस उनका ही सहारा था वो इस कदर टूट गये की फिर कभी संभाल ही ना पाए उन्होने खुद को शराब मे डुबो दिया आपकी नानी को सज़ा हुवी और जेल मे ही उनकी मोत हो गयी सब तकदीर का लेख है देव बाबू एक ऐसा खानदान जिसके झंडे चारो दिशाओ मे गढ़े थे अब तबाह ही हो गया था समझो आपके पिता ने अपना गम भूलने को शराब को साथी बना लिया था
दूसरी ओर बड़े ठाकुर का हाल भी कुछ ऐसा ही था पर वो आपके सहारे जी रहे थे किसी तरह से , दिन यू ही काट ते रहे वीरभान अब नशे मे धुत्त घूमते रहते कभी किसी से उलझते तो कभी किसी से ठाकूरो की वर्षो की इज़्ज़त अब धूल मे मिलने लगी थी जिस हवेली के नाम से सारा गाँव झुक जया करता था वो अब ठाकुर के सामने बोलने लगे थे हवेली का सूरज अस्त होने लगा था तो कुछ और दुश्मनो ने भी सर उठाना शुरू कर दिया था
शराब का नशा ऐसा लगा की अब वो एक पल भी उनके बिना नही रह सकता थे पर शराब ही अकेली नही थी कुछ उनकी संगत ऐसी हो गयी थी की वो शराब के साथ साथ अब वो शबाब पर भी मूह मारने लगे थे फिर उनको ऐसी लत लगी की हर औरत बस उन्हे भोगने को ही दिखती थी जी किया उसको ही पकड़ लिया अब वो पहले वाले ठाकुर वीरभान नही रहे थे नशे मे चूर वो इस कदर हो चुके थे की गाँव की औरते उनको देखते ही अपना रास्ता बदल दिया करती थी
कुछ दीनो तक तो गाँव वालो ने उनकी हर्कतो को सह लिया पर अब ठाकुर मे वो रुतबा नही था तो धीरे धीरे गाँव वालो की हिम्मत भी बढ़ने लगी आए दी ठाकुर किसी ना किसी से भिदता ही रहते थे जो इजत थोड़ी बहुत बची थी वो भी अब ना के बराबर ही रह गई थी ठाकुर वीरभान बस एक ऐसे इंसान बनकर रह गये थे जो बस शराब और शबाब से ही जीता था उनका गोरव नॅस्ट हो गया था
आपकी उमर 3 साल हुवी तो आपके दादा जी ने आपको लंडन भिजवा दिया और कहा की वहाँ देव को एक आम आदमी की तरह से जीना सीखना होगा इसकी मदद वही की जाएगी जब इसको ज़रूरत हो हम चाहते है की देव शंघर्सो की आग मे जल कर एक ऐसा फौलाद बने जिसमे सूरज तक को पिघला देने की तपिश हो
तो आपके लंडन जाने के बाद बड़े ठाकुर ने खुद को एक कमरे मे क़ैद कर लिया मुनीम जी बस उनके साथ रहते पर फिर कभी वो हवेली से बाहर नही गये हन आपके जाने के कुछ दिनो बाद एक बात और हुवी बड़े ठाकुर ने आपके पिता को घर से बाहर निकाल दिया और जायदाद से बेदखल कर दिया ऐसा क्यो हुवा ये मुझे मालूम नही है मैने उनको टोकते हुवे कहा की क्या मेरे पिता ज़िंदा है
तो लक्ष्मी कुछ नही बोली मैने फिर पूछा तो उसने कहा की नही हवेली से निकले जाने के कुछ साल बाद उनकी भी बीमारी से मोत हो गयी थी उनकी मोत की सूचना हस्पताल से आई थी इस घटना से बड़े ठाकुर और भी हताश हो गये थे उन्होने बिस्तर पकड़ लिया था लकवे के शिकार तो पहले ही थे और फिर उन्होने अपने जाने से कोई 6 महीने पहले मुनीम जी को कहा की देव के बीस साल का होते ही उसे यहा बुलवा लेना और उसे सब कुछ संभला देना
मेरी आँखे फिर से डब डबा गयी मैने कहा की क्या दादाजी भी …………………………. तो लक्ष्मी बोली हां देव बाबू वो भी अब नही रहे ये शब्द मेरे दिल को किसी तीर की तरह चीर गये मै बुकका फाड़ कर रोने लगा तभी कही बादल गरजा और बरसात और भी तेज हो गयी ना जाने रात का कोन सा पहर चल रहा था मेरे अंदर की सारी भावनाए बाहर निकल आई थी
मैं उठा और बाहर को भाग चला अंधेरा इतना घनघोर था की कुछ नही दिख रहा था पर मुझ पता था की मेरी मंज़िल कहा है मै बस उस तूफ़ानी बारिश मे रोता हुवा दौड़ता जा रहा था मेरी साथ बरसात भी रो पड़ी थी मै गिरता-पड़ता चला जा रहा था मुझे अब कोई परवाह नही थी मेरा सब कुछ जैसे छूट गया था आख़िर मै अपनी मंज़िल पर पहुच ही गया था
मैं हवेली के आँगन मे खड़ा था मैण अपने घर लॉट आया था कल तक जो पराया लगता था अब मुझे सब अपना लग रहा था ऐसा लग रहा था कि मैण कभी इस जगह से जुड़ा हुआ ही नही था मैं दौड़ता हुवा उपर की मंज़िल की ओर भागा और सीधा उसी कमरे मे गया जहाँ मैने वो तस्वीरे देखी थी वो कमरा वैसे ही खुला पड़ा था जैसे मैने उसको छोड़ा था
अंधेरे मे ही उन तस्वीरो को टटोल कर मैने अपने हाथो मे उठा लिया और अपने सीने से लगाकर ना जाने कितनी देर तक मैं रोता ही रहा ये मेरे माँ-बाप की तस्वीरे थी जो मुझ अभागे को अकेला छोड़ कर चले गयी थे मैं बस उन तस्वीरो को लिए दरवाजे के सहारे बैठा ही रहा और सोचने लगा कि काश मेरी ज़िदगी मे ये रात आई ही ना होती तो सही रहता
मैं निढाल सा बैठा हुवा था तभी मुझे कुछ लोगो की आवाज़े सुनाई दी तो मैने देखा कि लक्ष्मी और गौरी भी मेरे पीछे पीछे आ गये थे लक्ष्मी ने लालटेन को कुर्सी पर रख दिया जिसे से सारे कमरे मे रोशनी सी हो गयी लक्ष्मी अपनी सांसो को नियंत्रित करते हुवे बोली कि मालिक आपको यहा ऐसे नही आना चाहिए था मुनीम जी को पता चलेगा तो मेरी शामत आ जाएगी
आप वापिस चलिए पर वो मेरी हालत कहाँ समझ सकती थी मैने उसको कोई जवाब नही दिया बल्कि वही पर बैठा रहा तो वो लोग भी हताश होकर कमरे मे ही बैठ गये ना जाने सुबह होने मे अभी कितनी देर थी बारिश अब और भी घनघोर हो चली थी मेरे आँसुओ की तरह ऐसे ही ना जाने किस पहर नींद ने मुझे अपनी बाहों मे ले लिया सुबह जब मेरी आँख खुली तो मैने देखा कि हल्की हल्की बारिश अब भी हो रही थी
मुझे लगा जैसे मेरा पूरा बदन अकड़ सा गया हो नींद की खुमारी जब टूटी तो मैने देखा कि गोरी उस धूल भरे बेड पर ही सोई पड़ी है सोते हुए वो किसी प्यारी सी गुड़िया की तरह लग रही थी पर लक्ष्मी मुझे कही दिखाई नही दी मैं उठा और नीचे की ओर चल दिया और नीचे बरामदे मे डाली हुई कुर्सियो पर बैठ गया और आँगन मे गिरती बारिश की बूँदो को देखने लगा ऐसा लगा जैसे कि आसमान भी मेरे दर्द से जुड़ सा गया था
थोड़ी देर बाद गोरी भी नीचे उतर आई और मुझसे कहने लगी कि मुझे क्यो नही उठाया तो मैने कहा कि मैं तुम्हे परेशान नही करना चाहता था वो बोली माँ कहाँ है मैने कहा मुझे नही पता वो बोली बड़ी प्यास लगी है इधर पानी कहाँ है मैने कहा मुझे नही लगता इधर पीने का पानी होगा क्योंकि इधर कोई रहता नही है ना वो बोली अब मैं क्या करूँ
मैने कहा तुम अपने घर जाओ उधर पी लेना पानी तो वो बोली घर तक जाउन्गी तो कही मैं मर ही ना जाउ इतनी दूर पहुचते पहुचते फिर वो बोली कि कुआँ तो है कुवें से पानी निकाल लेती हू मैने कहा जैसी तुम्हारी मर्ज़ी और वही कुर्सी पर बैठे बैठे उन फुहारो को देखने लगा दिमाग़ अभी भी दर्द कर रहा था आधा घंटा बीत चला था पर गोरी वापिस नही आई तो मुझे थोड़ी चिंता होने लगी
तो थोड़ी देर राह देखने के बाद मैं उसको खोजने के लिए जिस तरफ वो गयी थी उस ओर चल पड़ा तो मैने देखा कि उस ओर काफ़ी झाड़ियाँ और पेड़ पोधे उगे हुवे है मैं कुवे की मुंडेर पर चढ़ गया परंतु मुझे गोरी नही दिखी बारिश ने फिर से झड़ी लगा दी थी मैं भीगने लगा पर मुझे उसकी चिंता हो रही थी तो मैने उसको आवाज़ लगाना शुरू कर दिया गोरि गोर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्रृिईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई कुछ देर तक मैं आवाज़ लगाता रहा
फिर झाड़ियो मे कुछ सुरसूराहट हुई तो मैने सोचा कि कही कोई जानवर तो नही है पर फिर देखा कि गोरी झाड़ियो को हटा ती हुवी मेरी ओर आ रही है उसने मुझसे कहा कि क्या हुवा क्यो पुकार रहे थे तो मैने कहा कि कहाँ गयी थी तुम कितनी देर हो गयी मुझे फिकर हो रही थी तुम्हारी
तो वो बोली कि वो मैंन्ननणणन् मैंन्णणन् तो मैने कहाँ मैं क्या तो वो शरमाते हुवे बोली कि मैं जंगल होने चली गयी थी मैने कहा अच्छा , कोई बात नही हम दोनो बारिश मे खड़े भीग रहे थे गोरी की सफेद सलवार उसकी ठोस जाँघो पर चिपक गयी थी और उसकी जाँघो का मस्ताना नज़ारा मुझे देखने को मिल रहा था हालाँकि मैं रात से थोड़ा दुखी था पर मेरी भावनाए उस कातिल नज़ारे को देख कर भड़क उठी थी
गाओ मे अक्सर औरते और लड़किया अंडरगार्मेंट्स नही पहना करती है और उपर से उसने सफेद सूट-सलवार डाला हुवा था बाकी काम बारिश ने कर दिया था ना चाहते हुवे भी मेरी नज़रे गोरी के ताज़ा-ताज़ा खिले हुवे योवन का दीदार करने लगी उसकी चुन्नी थोड़ी से सरक गयी थी तो उसके उन्नत उभार जिसकी गुलाबी निप्प्लस उसके गीले सूट से बाहर आने को बेताब लग रही थी मुझे दिखने लगी
मुझे लगा कि मैं कही अपने होश ना खो दूं पर तभी गोरी की आवाज़ मुझे वापिस धरातल पर खीच लाई वो बोली अब क्या इधर ही भीगना है वापिस नही चलना है क्या तो मैं उसके साथ अंदर आ गया गोरी अपने गीले कपड़ो को झटकने लगी मुझे भी ठंड सी लगने लगी थी मैने कमरो मे देखा तो मुझे कुछ सूखी लकड़िया और एक पुरानी माचिस मिल गयी तो गोरी ने आग जला दी जिस से थोड़ा अच्छा लगा
ना जाने बादलों को क्या हो गया था वो बिल्कुल भी रहम के मूड मे नही थे दिन निकला ही था पर आसमान मे काले बदल इस कदर छाए हुवे थे कि लग रहा था कि मानो रात हो गयी हो उस अजीब से वातावरण की खामोशी को तोड़ती हुवे गोरी ने पूछा कि आप विलायत मे क्या करते थे मैने उसे बताया कि मैं वहाँ पर पढ़ता था और पार्ट टाइम छोटे-मोटे काम भी करा करता था
वो बोली आप इतने अमीर है फिर भी आप काम करते थे मैने कहा कि यहाँ आने के बाद पता चला वो तो उधर तो मैं ग़रीब ही था ना तो वो बोली अभी तो आप यहाँ ही रहोगे ना मैने कहा हन अभी मैं अपने घर मे ही रहूँगा बारिश हो रही थी तो आज मजदूर भी नही आने वाले थे जबकि मैं हवेली के अपने घर के एक एक हिस्से को अच्छे से देखना चाहता था
मैने कहा गोरी मैं हवेली को अच्छे से देखना चाहता हू क्या तुम मेरी मदद करोगी तो वो बोली कि हाँ पर मुझे भूख लगी है मैं पहले कुछ खाना चाहती हू तो मैने कहा कि पर इधर तो कुछ भी नही है खाने के लिए मैने कहा बारिश रुकते ही तुम्हारे घर चलेंगे तो वो बोली कि ठीक है आओ पहले देखते है मैं भी बहुत उत्सुक हू मैं हमेशा से ही इधर आना चाहती थी पर माँ मना करती थी और अकेले आने की हिम्मत होती ही नही थी
हम अंदर जाने की बात कर ही रहे थे कि हवेली के गेट पर एक कार की झलक दिखी और फिर वो अंदर आ गयी कार का दरवाजा खुला और लक्ष्मी उतरी अपनी छतरी लिए उसके दूसरे हाथ मे एक बास्केट थी वो हमारे पास आई और खाली पड़ी कुर्सी पर बैठ गयी उसने कहा कि माफी चाहूँगी सुबह बिना बताए यहाँ से चली गयी पर वो क्या है ना मुझे नाश्ते की तैयारी करनी थी
मैने कहा कोई बात नही फिर उसने बास्केट से थर्मस निकाला और हमे गरमागरम चाइ पकड़ा दी साथ मे कुछ और चीज़े भी थी खाने की अगले कुछ मिनट तक मेरा ध्यान पूरी तरह से बस खाने पर ही रहा जल्दी ही हम लोग नाश्ते से फारिग हो गये फिर चल पड़ा बातों का सिलसिला मैने लक्ष्मी से पूछा कि मेरे घरवालो से तो गाँव के लोग नफ़रत करते है तो क्या मुझसे भी ठीक से बात नही करेंगे
लक्ष्मी बोली देव, अब जमाना बदल गया है अब पहले जैसा कुछ भी नही रहा है और अब तुम्ही इस हवेली के वारिस बचे हो तुम्हारे पुरखे बहुत कुछ छोड़ कर गये है अब ये तुम पर है कि तुम कैसे जीना चाहोगे तुम चाहो तो अपनी खोई हुवी प्रतिष्ठा पाने की कोशिश कर सकते हो या फिर वापिस जा सकते हो हमे बड़े ठाकुर का आदेश था तो हम ने पूरा किया अब तुम अपनी संपत्ति को सम्भालो और हमें इस भार से मुक्त करो
कम ने कहा पर आप लोग भी तो मेरे परिवार का ही एक हिस्सा है आपलोग हमेशा से ही मेरे घरवालो के साथ थे तो मेरा साथ भी दीजिए तो लक्ष्मी बोली हम तो मरते दम तक आपके साथ है पर अब को अपनी विरासत संभालनी होगी वैसे भी सारी उमर हो गयी ये सुनते सुनते की मुनीम जी हवेली का सब कुछ खा गये मैने कहा दुनिया कुछ भी कहे मैं नही मानता मैं बस इतना जानता हू कि इस गाँव मे अगर कोई मेरा बचा है तो बस आप लोग ही हो
लक्ष्मी थोड़ा सा मुस्कुरा दी मुझे दुख भी था कि मेरा पूरा परिवार कैसे तबाह हो गया पर थोड़ी तसल्ली भी थी कि ये लोग मेरे पास है वो बरसते हुवे मेह को देखकर बोली कि कई सालो बाद इतनी घनघोर बारिश आई है गाँव मे आज तो रुकनी मुश्किल है मैने कहा रयचंद जी कब तक आएँगे वो बोली कि उन्हे थोड़ा टाइम और लग जाएगा कुछ कागज़ी कार्यवाही करनी है और फिर हवेली की मरम्मत और भी कई छोटे-मोटे काम है ख़तम होते ही आ जाएँगे
मैने कहा ठीक है लक्ष्मी बोली अब आप घर चलें यहाँ कब तक यू बैठे रहेंगे मैने कहा नही मैं यही रहूँगा आप मेरा सामान घर से मंगवा दीजिए और जब तक बिजली नही लग जाती रात को रोशनी का इंतज़ाम भी करवा दीजिए लक्ष्मी मुझे अकेले नही रहने देना चाहती थी पर मेरी ज़िद के आगे उसकी एक ना चली तो उसने कहा कि बारिश रुकते ही आपके लिए नया बिस्तर और ज़रूरत की कुछ चीज़ी भिजवा दूँगी पर अभी मैं जाती हू घर पे भी कई काम पड़े है और ये तेज बारिश
फिर उन्होने गोरी से कहा कि तुम देव के साथ ही रहना मैं सांझ तक वापिस आउन्गि तुम साथ रहोगी तो मुझे इनकी फिकर नही होगी इतना कहकर लक्ष्मी कार मे बैठी और चली गयी रह गये मैं और गोरी आग ठंडी होने लगी थी तो गोरी ने कुछ लकड़िया और डाल दी बारिश मे आग के पास बैठना एक अलग सा अहसास दे रहा था गोरी बोली तुम लंडन से यहाँ कैसे आए तो मैने कहा प्लेन से वो बोली अच्छा , वो बोली तुम्हारा सहर कैसा होता है मैने कहा जैसे तुम्हारे है वो बोली मैं क्या जानू मैं तो कभी सहर गयी ही नही मैने कहा क्यो वो बोली मुझे कॉन ले जाए
तो मैने कहा मैं कभी जाउन्गा तो तुमको ले चलूँगा साथ वो बोली हम तो बस दिल खुश करने को जब कभी मेला लगता है तो उसी मे घूम आते है दिल खुश हो जाता है मैने कहा ये मेला क्या होता है तो वो बोली अरे तुम्हे मेले का नही पता मैने कहा सच मे नही पता तो उसने मुझे बताया तो मैने कहा कि अबकी बार जब मेला लगेगा तो मैं भी तुम्हारे साथ चलूँगा
कुछ देर और बाते करने के बाद मैने कहा आओ गोरी कुछ कमरो को खोल कर देखते है तो वो बोली हाँ चलो तो हम लोग उपर की मंज़िल पर चले गये कुछ कमरो का ताला हम ने तोड़ डाला और देखने लगे इतना तो पक्का था कि अपने टाइम मे ये खंडहर बड़ा ही खूबसूरत था हर कमरा बड़े ही करीने से सज़ा हुवा था बस फरक इतना था कि वो सजावट वक़्त के थपेड़ो मे कही खो गयी थी मैने कहा गोरी खुशकिस्मत होंगे वो लोग जो यहाँ रहते होंगे वो बोली हाँ काश मैं भी ऐसे ही घर मे रहती
मैने कहा ये भी तो तुम्हारा ही घर है ना जब तुम्हारा दिल करे तुम आ जाना यहाँ पर काफ़ी धूल जमी हुवी थी तो हम लोग उसको सॉफ करने लगे तभी गोरी को उपर की स्लॅब पर कुछ दिखा तो वो बोली उपर कुछ है मैने कहा हाँ कुछ संदूक जैसा लग रहा है पर इसको उतारे कैसे उपर चढ़ा तो नही जाएगा मैं कुछ ढूँढ ही रहा था कि मुझे गॅलरी मे एक पुराना स्टूल दिख गया जो अब बस नाम-मात्र का ही बचा हुवा था
गोरी बोली तुम इसको कसकर पकड़ लेना मैं उपर चढ़ जाती हू मैने कहा स्टूल कही टूट ना जाए तो वो बोली अगर मैं गिरु तो तुम मुझे थाम लेना तो हम ने उसको सेट किया और गोरी उपर चढ़ ने की कोशिश करने लगी पर वो चढ़ नही पा रही थी वो बोली तुम इसको कसकर पकड़ लो मैं संदूक को खीचती हू और तुमको पकड़ा दूँगी तुम उसको नीचे रख देना मैने कहा ठीक है पर आराम से करना कही चोट ना लग जाए तुमको संदूक थोड़ा भारी था जैसे ही गोरी ने संदूक को स्लॅब से खीचा स्टूल उन दोनो का भार नही से पाया और टूट गया गोरी झटके से मेरे उपर आ पड़ी और मुझे लिए लिए ही फरश पर आ गिरी
अचानक से हुवी इस घटना से मैं संभाल नही पाया पर शूकर था कि संदूक दूसरी ओर गिरा वरना हमारे सर भी फुट सकते थे कुछ पल तो समझ ही नही आया कि क्या हुआ गोरी मुझ पर लदी हुवी थी मेरे हाथ उसके मांसल कुल्हो पर आ गये थे उसकी सुडोल छातिया मेरे सीने मे धँसी जा रही थी मेरे लिए ये अलग सा ही अहसास था वैसे गिरने से मुझे पीठ और पैर मे थोड़ी चोट लगी थी पर वो दर्द ना जाने कहाँ गायब सा हो गया था
मैने देखा गोरी अपने चेहरे को मेरी बाहों मे छुपाए मेरे उपर पड़ी थी ना चाहते हुवे भी मैने अपने हाथो से उसके दोनो कुल्हो को दबा दिया गोरी की गरम साँसे मेरे चेहरे पर पड़ रही थी मुझे पता नही कैसा रोमांच सा चढ़ने लगा गोरी ने अपनी आँखे बंद की हुवी थी एक पल मे ही मेरे सारे हार्मोंस आक्टिव हो गये थे मैने धीरे से उसके कान मे कहा गोरी , पर वो कुछ ना बोली शायद उसके लिए भी ये एक नया नया सा अहसास था
आख़िर वो भी तो जवानी मे कदम रख चुकी थी मैं उसकी पीठ सहलाने लगा तो उसने अपना मूह मेरे सीने मे छुपा लिया मैने फिर से कहा गोरी उठ जाओ पर वो टाइम पता नही हमे क्या हो गया था मैने उसे लिए लिए ही पलटी खाई और अब मैं उसके उपर वो मेरे नीचे हो गयी उसके लरजते हुवे गुलाबी होंठो की मादकता मुझे बड़ी ही सुंदर लगी और उपर से निचले होठ पर एक छोटा सा काला तिल मैं तो कुर्बान ही हो गया जैसे मुझ पर खुमारी छाने लगी
बड़ा ही नाज़ुक सा लम्हा था वो मैं अपनी भावनाओ को रोकने की पूरी कोशिश कर रहा था पर मेरा दिल मेरे काबू से बाहर हो गया था गोरी की मासूमियत से मेरा अंग-अंग जैसे एक नये रंग मे रंग गया था मैं अपने होशो-हवश खोते जा रहा था और फिर मैं थोड़ा सा गोरी के उपर झुका और उसके कोमल होंठो को अपने लबो से जोड़ लिया उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ कैसा ये अहसास था जो मेरी रूह तक मे उतर गया था
ये मेरा पहला चुंबन था किसी लड़की के साथ गोरी ने अपना मूह थोड़ा सा खोल दिया तो मैने उसके निचले होठ को अपने मूह मे भर लिया और उसको चूमने लगा मेरा लॅंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था और गोरी की योनि वाली जगह पर रगड़ खा रहा था एक अजीब सी परिस्थिति बन गयी थी मेरे लिए तो जैसे समय रुक सा ही गया था बड़ा ही अलग सा एहसास था ये पर ये सब ज़्यादा देर नही चला गोरी ने मुझे धक्का दिया और अपने से दूर कर दिया
मैं बगल मे लुढ़क गया और अपनी तेज रफ़्तार से भागती हुवी सांसो को कंट्रोल करने लगा गोरी उठ कर बैठ गयी और उसकी उपर नीचे होती चूचिया भी उसकी बदहवासी का विवरण दे रही थी बाहर घनघोर बरसात हो रही थी पर अंदर कमरे मे सन्नाटा पसर गया था कुछ देर हम दोनो खामोश ही रहे जो भी कुछ पॅलो पहले जो कुछ हुवा था उसने हम दोनो को एक अलग अहसास करवा दिया था
गोरी उठी और कमरे से बाहर जाने लगी पर दरवाजे पर जाकर ठिठक गयी और उसने नज़र भर कर मेरी ओर देखा ना जाने वो कैसी कशिश थी उसकी नज़रो मे उस पल मैं तो जैसे फ़ना ही होने लगा था मैं दो कदम आगे बढ़ा और गोरी को खीचते हुवे उसे पास की दीवार से सटा दिया और एक बार फिर से अपने लबो को उसके लाबो से जोड़ दिया गोरी ने भी अपनी बाहें मेरी पीठ पर कस दी और मैं उसके शरबती होंठो से जाम पीने लगा
मैं उसको ऐसे चूम रहा था जैसे कि रेगिस्तान की गरम रेत पर नंगे पैर चलते हुवे किसी मुसाफिर को पानी का दरिया मिल गया हो मैं दीवानो की तरह उसके लबो, गालो और गर्दन को चूमे जा रहा था गोरी भी मेरे साथ उस अनकही भावनाओ के तूफान मे शामिल हो गयी थी कुछ मिनिट तक हमारा ये सीन चलता ही रहा फिर मैने अपने होठ हटा लिए पर उसको अपनी बाहों मे जकड़े रहा बाहर बरसती बारिश मे एक प्रेम का अंकुर फुट पड़ा था
फिर गोरी मुझसे अलग हो गयी और गॅलरी मे आकर बारिश को देखने लगी मैं भी उसके पास आकर खड़ा हो गया पर हम दोनो ही अब चुपचाप खड़े थे मुझे समझ नही आ रहा था कि बात कैसे शुरू करू आख़िर मैने चुप्पी तोड़ते हुवे कहा कि क्या हुवा तुम चुप क्यो हो तो गोरी बोली कि तुमने ऐसा क्यो किया मैने कहा मुझे नही पता बस हो गया अपने आप मैने उसकी आँखो मे देखते हुवे कहा कि गोरी प्लीज़ मुझे ग़लत ना समझना सब कुछ अपने आप ही हो गया
तो गोरी अपनी बड़ी बड़ी आँखो को गोल गोल घूमाते हुवे बोली कि ये अच्छा है किसी को भी तुम ऐसे करो और फिर कह दो कि अपने आप हो गया ऐसा तुम्हारे लंडन मे होता होगा पर यहा नही होता अगर मेरी जगह कोई और लड़की होती तो अब तक तुम्हे बता चुकी होती तो मैने कहा फिर तुमने कुछ क्यो नही कहा तो वो मैं……….मैं……..करने लगी मैने कहा गोरी एक बात कहूँ
उसने हू कहा तो मैने कहा गोरी क्या तुम मेरी दोस्त बनोगी मैं यहाँ पर बिल्कुल अकेला हूँ किसी को जानता भी नही तुम्हारे सिवा और तुम अच्छी लड़की हो तो करोगी मुझसे दोस्ती तो गोरी अपनी गर्दन हिलाते हुए बोली ना बाबा लोग कहते है ठाकूरो की ना दोस्ती अच्छी ना दुश्मनी तो मैने कहा पर मुझे तो कुछ दिन पहले ही पता चला है ना कि मैं ठाकुर हू इसमे मेरा दोष क्या तो वो बोली ठीक है मैं तुमसे दोस्ती करूँगी पर तुम माँ को मत बताना मैने कहा ठीक है
ना जाने क्यो वो मुझे क्यो अच्छी लगने लगी थी शाम हो रही थी बारिश की रफ़्तार भी काफ़ी कम हो गयी थी बस अब हल्की-हल्की फुहारे ही पड़ रही थी तो गोरी ने कहा कि काफ़ी देर हो गयी है मुझे घर जाना चाहिए मैने कहा पर तुम्हारी माँ ने कहा था कि वो आएँगी तो वो बोली बरसात अब रुक ही गयी है समझो एक काम करो तुम भी मेरे साथ घर चलो यहाँ अकेले कैसे रहोगे
हालाँकि मैं हवेली मे ही रुकना चाहता था पर ना जाने क्यो मैं उसकी बात को टाल ना सका और कहा कि ठीक है चलो तुम्हारे घर चलते है फिर हम नीचे आए मैने गेट पर एक नया ताला लगाया और हल्की हल्की फुहारो का नज़ारा लेते हुवे हम दोनो मुनीम जी के घर की ओर चल पड़े रास्ते मे वो मुझे गाँव के बारे मे बता ती जा रही थी एका-एक गोरी का साथ मुझे बड़ा ही अच्छा लगने लगा था
ऐसे ही बाते करते करते हम दोनो उसके घर पहुच गये लक्ष्मी हमे देखते ही बोली अच्छा किया जो आप लोग यहाँ आ गये बिजली का तो कोई भरोसा नही उपर से मोसम भी मेहरबान है आप आराम करो मैं कुछ देर मे भोजन की व्यवस्था करती हू मैं बैठक मे जाकर लेट गया और गोरी अपने कमरे मे चली गयी और कुछ देर बाद अपने कपड़े बदल कर आ गयी अब उसने घाघरा-चोली डाल ली थी जिसमे वो बड़ी ही प्यारी लग रही थी
मैं अपने मन मे दोनो माँ बेटियो की तुलना करने लगा दोनो ही बड़ी कॅटिली थी मैं सोचने लगा कि लक्ष्मी की चूत मिल जाए तो मुझे मज़ा ही आ जाएगा पर सवाल ये था कि लक्ष्मी मुझे चूत क्यो देगी पिछली रात भी मैं जागा था तो खाना खाते ही मुझे नींद आ गयी और सुबह जब मेरी आँख खुली तो मुझे घर मे कोई दिखाई नही दिया मैने सोचा गोरी तो स्कूल गयी होगी
पर लक्ष्मी कहाँ है मैं उसको ढूँढते हुवे घर के अंदर की तरफ चला गया तो एक दरवाजे के बाहर से मैने अंदर झाँका तो मेरे होश ही उड़ गये मेरा खुद पर काबू रखना मुश्किल हो गया मैने देखा कि लक्ष्मी लक्ष्मी कमरे मे नंगी खड़ी हुई है उसकी पीठ मेरी ओर थी जिस कारण वो मुझे नही देख पाई पर मेरी निगाह उसकी चिकनी पीठ और बड़ी सी गान्ड पर जम ही गयी थी
शायद वो कुछ देर पहले ही वो नहा कर आई होगी कुछ देर वो अपने अंगो को मसल्ति रही शायद तेल लगा रही थी फिर उसने कच्छि पहनी जब उसने अपनी टाँग उठाई तो उसकी फूली हुवी मस्त चूत देख कर मेरा लंड एक झटके मे ही खड़ा हो गया मैं क्या कहूँ उस समय क्या हालत हुवी मेरी कच्छि पह्न ने के बाद उसने घाघरा पहना हालाँकि उसी समय मुझे वहाँ से खिसक लेना चाहिए था
पर ये भी एक लालच सा ही था तो मैं खुद को वहाँ से हटा नही पाया लक्ष्मी ने बिना ब्रा पहने ही चोली पहन ली और वो अचानक से पलटी और मैं वही दरवाजे पर पकड़ा गया मैने सकपकाते हुवे कहा कि वो……………………वओूऊऊऊऊओ वो मैं आपको देखने आया था कि आप कहाँ गयी और बैठक की ओर भाग लिया थोड़ी देर बाद लक्ष्मी आई और शांत स्वर मे बोली की नाश्ता कर्लो फिर मैं खेतो की ओर जाउन्गी
मैने कहा मैं भी चालू तो वो बोली नही वकील साहब का फोन आया था थोड़ी देर मे वो हवेली पहुच जाएँगे कुछ और कागज़ी कार्यवाही करनी है उनको मैने ड्राइवर से कह दिया है वो आपको छोड़ आएगा मैने कहा उसकी ज़रूरत नही है मैं घूमते-घूमते ही निकल जाउन्गा तो लक्ष्मी बोली नही आप गाड़ी से ही जाएँगे और हाँ बिजली विभाग से भी आज लोग आएँगे तो आप देख लेना मैने कहा ठीक है फिर वो बोली और हाँ दोपहर का खाना आप इधर ही खाना तब तक मैं खेतो से वापिस आ जाउन्गा
फिर मुझे नाश्ता करवा कर लक्ष्मी चली गयी और कुछ देर बाद मैं भी उनके घर से बाहर निकल आया मैने ड्राइवर से कहा कि मालकिन जब आए तो तुम कह देना कि तुम ही मुझे हवेली लेकर गये थे और बाहर चल पड़ा पिछले दिनो जो बारिश हुवी थी उस से प्रकृति जैसे शृंगार कर उठी थी गाँव महक उठा था ठंडी ठंडी हवा चल रही थी पेड़ो पर कोयल कूक रही थी ऐसा वातावरण मैने तो कभी नही देखा था मैं थोड़ी दूर आगे चला तो मैने देखा कि उसी चोपाल पर कुछ लोग बैठे है तो मैं भी वही जाकर बैठ गया
मैने उन लोगो को नमस्ते किया और उनकी बात चीत मे शामिल हो गया कुछ लोगो ने कहा मुसाफिर तुम किसके मेहमान हो तो मैने राइचंद जी का नाम ले दिया मैं उनको बताना नही चाहता था कि मैं ठाकुर यूधवीर सिंग का पोता हू उनकी बातों से पता चला कि गाँव को पानी पहुचाने वाली लाइन टूट गयी है और सबको पानी के लिए नदी का सहारा लेना पड़ रहा है कई अधिकारियो के आगे गुहार लगाई पर बस आश्वासन ही मिला है कोई भी लाइन को ठीक नही कर रहा
तो मैने कहा कि पर गाँव मे पानी की टंकी तो होगी ना एमर्जेन्सी के लिए तो वो बोली कि नही टंकी भी नही है तब मुझे पता चला कि ये काफ़ी पिछड़ा हुवा गाँव है मैने कहा आप मुझे उस अधिकारी का नाम बताए जो पानी का डिपार्टमेंट संभालता है मैं आपकी समस्या को दूर करवाउन्गा तो वो लोग मेरा उपहास उड़ाते हुवे बोले मुसाफिर जब पूरे गाँव से कुछ ना हुवा तो तुम अकेले क्या कर लोगे मैने कहा एक कोशिश तो कर ही सकता हू
उनकी बातों मे मसगूल हुवा तो समय का ध्यान ही नही रहा एकाएक मुझे याद आया कि वकील साहब आ गये होंगे हवेली तो मैं वहाँ से अपने घर चल पड़ा मैं वहाँ पहुचा तो वकील के साथ वहाँ पर कुछ लोग और थे वकील ने मेरा इंट्रो उनसे करवाया तो उनमे से एक ज़िले के कलेक्टर थे और एक तहसीलदार था मैने कहा बताइए मैं आपके लिए क्या कर सकता हू
तो वकील ने कहा कि देव बाबू जब मैने डीसी साहिब को बताया कि हवेली का वारिस लॉट आया है और फिर कुछ फॉरमॅलिटीस भी करनी थी तो ये पर्सनली आपसे मिलने आए है फिर हमारी बाते होने लगी तो पता चला कि गाँव के दूसरी तरफ नाहरगढ़ की सीमा पर हमारी कोई 50 एकड़ ज़मीन है जिसपर वहाँ के ठाकुर खानदान का क़ब्ज़ा है अब तो डीसी साहब चाहते थे कि वो मामला आराम से सुलझाया जाए और ऐसी परिस्थिति ना हो जिस से की प्रशासन को प्राब्लम हो
तो मैने कहा सर आप किसी भी प्रकार की टेन्षन ना ले मैं तो अभी आया हू और मुझे अभी कुछ भी नही पता कि मेरा क्या क्या कहाँ कहाँ है एक बार मैं सबकुछ देख लूँ जान लूँ फिर आप जैसे कहेंगे वैसा ही कर लेंगे डीसी साहब मेरी बात सुनकर खुश हो गये और बोले आप से मिलकर अच्छा लगा कोई काम हो तो याद करिएगा तो मैने कहा सर आपकी मदद तो चाहिए ही चाहिए
वो बोले आप तो बस हुकम करिए मैने कहा कि सर गाँव की पानी सप्लाइ की लाइन टूटी पड़ी है और अधिकारी ठीक नही कर रहे है तो उन्होने तुरंत ही फोन मिलाया और अगले दिन तक लाइन ठीक करने का हुकम सुनाया मैने उनको धन्यवाद दिया उनके जाने के बाद मैं वकील से मुख़्तीब हुवा तो उसने फिर से मुझसे कई पेपर्स पर साइन करवाए घंटो बाद उसने कहा कि सर अब आप लीगली हवेली और सारी प्रॉपर्टी के मालिक हो गये है तो बस मैं मुस्कुरा कर रह गया
मैं वकील से बात कर ही रहा था कि तभी राइचंद जी भी आ गये उन्होने कहा कि देव बाबू सारा काम हो गया है कल शाम तक हवेली मे बिजली लग जाएगी और कुछ दिनो मे ये हवेली फिर से रहने लायक हो जाएगी राइचंद जी ने घर फोन किया और कोई आधे घंटे बाद लक्ष्मी हम सब के लिए चाइ नाश्ता ले कर आ गयी और हम कुछ और बातों पर चर्चा करने लगे
कल मुझे राइचंद जी के साथ शहर जाना था कुछ काम थे जो मेरे बिना नही हो सकते थे तो अगले दिन हम शहर चल पड़े उन्होने कहा आप को जो भी कार पसंद हो आप खरीद लीजिए मैने कहा मुझे इन सब चीज़ो की कोई आवश्यकता नही है पर वो बोले नही कार तो चाहिए ही ना और फिर कही आना जाना हो तो वो मुझे एक बड़े कार शोरुम मे ले गये और हम ने दो कार खरीदी
मैने कुछ नये कपड़े भी खरीदे और थोड़ा ज़रूरत का सामान भी लिया रात होते होते हम वापिस गाँव आ गये पूरा दिन बेहद थका देने वाला था तो आते ही मैं सीधा सो गया हवेली की सॉफ सफाई करवाई जा रही थी मैने बता दिया था कि किन दो कमरो मे रहूँगा तो उनके इंटीरियर का काम चालू था इधर राइचंद जी मुझे हर बारीकी का ज्ञान करवा रहे थे उन्होने मुझे बताया कि कितनी ज़मीन है मेरे पास और कहाँ कहाँ है मुझे तो यकीन ही नही हो रहा था कि मेरे पुरखे मेरे लिए इतना कुछ छोड़ कर गये है
गाँव की पानी की लाइन ठीक हो गयी थी और पानी की टंकी मैने मेरी तरफ से बनवा दी थी दिन ऐसे ही गुजर रहे थे अक्सर मैं गाँव की चोपाल पर चला जाता था लोगो को ये तो पता चला था कि हवेली का वारिस आया है पर उनको ये नही पता था कि मैं ही ठाकुर देव हू और मैने भी इस बात का ज़िक्र करना आवश्यक नही समझा 24 घंटे राइचंद साथ रहता तो फिर गोरी से भी नज़र दो-चार नही हुवी थी और लक्ष्मी के तो कहने ही क्या थे
दिन गुजर रहे थे मुझे यहाँ आए 15 दिन हो गये थे और आज हवेली का काम ख़तम हो गया था मैं अपने बाप-दादा के घर मे रहने के लिए आ गया था अब यहाँ का हाल देख कर कोई नही कह सकता था कि कुछ दिन पहले ये बस एक खंडहर का टुकड़ा था हालाँकि अभी भी कुछ हिस्सो को मरम्मत की ज़रूरत थी पर मैं अकेला ही रहने वाला था तो उस हिस्सो को वैसे ही रहने दिया था
शुरू शुरू मे मुझे अकेले रहने मे थोड़ा अजीब सा लगता था पर फिर आदत हो गयी और गाँव मे भी लोगो से जान पहचान होने लगी थी इधर मैं लक्ष्मी को चोद्ने की सोचता रहता था पर कुछ बात नही बन रही थी और फिर किस्मत आख़िर मुझ पर मेहरबान हो ही गयी एक दिन राइचंद जी जब गाँव मे किसी से मिलने जा रहे थे तो एक पागल सांड ने उनको अपने लपेटे मे ले लिया और उनको घसीट मारा
हम लोग तुरंत उनको हॉस्पिटल ले गये तो डॉक्टर ने बताया कि ये ठीक तो हो जाएँगे परंतु इनकी रीढ़ की हड्डी टूट गयी है तो इनका चलना फिरना अब पासिबल नही होगा ये खबर हम सब के लिए बड़ी ही दुखदायक थी ख़ासकर गोरी और लक्ष्मी के लिए मैने कहा डॉक्टर आप इनका बेस्ट इलाज करिए पर ये ठीक होने चाहिए तो डॉक्टर बोला बात ये है कि रीढ़ की हड्डी कई जगहों से टूटी है और रिकवरी नही हो पाएगी कुछ दिन मैं उनके साथ ही हॉस्पिटल मे रहा फिर उनको छुट्टी दिलवा कर घर ले आए
मैने राइचंद से कहा कि आप किसी भी तरह की चिंता ना करना आपका परिवार मेरा परिवार है मैं हर घड़ी आप लोगो के साथ हू वैसे भी मैं दिन मे दो बार उनके घर खाना खाने तो जाता ही था कई लोगो से बात की थी पर कोई भी हवेली की रसोई संभालने को राज़ी ना हुवा था लक्ष्मी उमर मे राइचंद जी से काफ़ी छोटी थी तो उसके जिस्म की ज़रूरते भी थी और मैं भी उसको भोगने को तैयार था पर शुरुआत नही हो पा रही थी
थोड़े दिन ऐसे ही गुजर गये खेतो मे गन्ने की फसल तैयार खड़ी थी और बागों मे आम भी तैयार ही हो गये थे पहले तो सब काम मुनीम जी संभाल लेते थे दूसरी ओर उन्होने भी खुद के खेत मे गन्ने लगाए हुवे थे हमे लोगो की ज़रूरत थी काम के लिए पर कोई भी गाँव वाला ठाकूरो के यहाँ काम नही करना चाहता था इस बात से मैं भी परेशान था तो मैने राइचंद से कहा कि ऐसे तो हमे बहुत नुकसान हो जाएगा
तो बोले मालिक मैं तो अब अपाहिज़ हो गया हूँ मैं खुद इस बात को लेकर चिंतित रहता हू अब कोई चमत्कार हो जाए तो ही आस है लक्ष्मी बोली फसल का नुकसान होगा तो हाथ तंग हो जाएगा मैने कहा आप लोग कोई भी टेन्षन ना लो मैं करूँगा कुछ ना कुछ बंदोबस्त और वहाँ से बाहर निकला ही था कि गोरी दिख गयी मैने कहा गोरी हवेली चलेगी क्या तो वो बोली बापू से पूछ कर आती हू और फिर हम मेरे घर आ गये गोरी बोली कुछ परेशान लगते हो
मैने कहा यार बात ये है कि फसल कटाई पे है और मेरे खेतो मे कोई काम नही करना चाहता है पहले तो तुम्हारे बापू बाहर से मजदूर लाकर काम करवा लेते थे पर उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद अब कॉन मदद करेगा दुगनी मज़दूरी पर भी गाँव वाले तैयार नही है मेरे खेतो मे काम करने को बस वो ही टेन्षन है गोरी गाँव वालो को बुरा भला कहने लगी और बोली ये तो है ही कामीने सदा से
मैने कहा दुगनी मज़दूरी पर भी कोई मेरे लिए काम करने को तैयार नही है समझ नही आता कि क्या करू मेरे पुरखो के किए करमो फल मुझे ही भुगतना होगा मैं उदास हो गया गोरी ने मेरा हाथ अपने हाथ मे लिया और बोली तुम दिल पे बोझ मत लो कुछ ना कुछ हाल निकल ही आएगा तभी उसने एक ऐसी बात बताई जिस से कुछ उम्मीद बँधी वो बोली एक रास्ता है पर ये नही पता कि काम आएगा या नही मैने कहा जो भी है जल्दी से बता
तो गोरी बोली की सालो पहले किसी बात से नाराज़ होकर ठाकुरों ने गाँव के महादेव मंदिर के दरवाजे को गाँव वालो के लिए बंद कर दिए थे और तब से आज तक मंदिर बंद ही पड़ा है अगर तुम मंदिर खोल दो तो क्या पता गाँव वालो के मन मे तुम्हारे लिए कुछ हमदर्दी हो जाए मैने कहा गोरी ठीक है कल ही चल कर मंदिर का दरवाजा खोल देता हू इसमे क्या है
तू मुझे कल सुबह ही वहाँ ले चलना तो वो बोली कि सुबह तो मुझे स्कूल जाना होता है मैं तुम्हे रास्ता बता देती हू तुम चले जाना वैसे मेरा मन तो है साथ चलने को पर स्कूल की छुट्टी नही कर सकती मैं मैने कहा चल कोई ना मैं ही देख लूँगा कुछ देर बाद गोरी बोली देर हो रही है मुझे घर जाना चाहिए मैं कहा कुछ देर और रुक जा तू आती है तो मेरा मन भी लगा रहता है
मैने उसका हाथ पकड़ लिया और गोरी को खीच कर अपने सीने से लगा लिया गोरी बोली तुम ऐसे ना किया करो मुझे कुछ- कुछ होता है मैने कहा मैं ऐसा क्या करता हू जो तुझे कुछ होता है वो बोली तुम जो ये शरारत करते हो तो मेरे मन के तार झनझणा जाते है मैने कहा गोरी इधर देख जैसे ही उसने अपना चेहरा उपर किया मैने उसके चाँद से मुखड़े को चूम लिया
गोरी मेरी बाहों मे और भी सिमट गयी मैं उसके लबों को चूमने लगा उसकी खुश्बुदार साँसे मेरे मूह मे घुलने लगी मेरा मन उन्माद मे डूबने लगा बड़ी ही कशिश थी उसमे जब जब मैं उसके पास होता था तो खुद को रोकना बड़ा ही मुश्किल हो जाता था तो एक लंबे चुंबन के बाद मैने कार स्टार्ट की और गोरी को उसके घर छोड़ने चला गया
मुनीम जी के घर से आते आते मुझे बड़ी देर हो गयी जब मैं वापिस आ रहा था तो मुझे खेतो के पास कोई पड़ा हुवा दिखाई दिया मैं गाड़ी से उतरा और देखा की एक ** साल का लड़का पड़ा हुआ था मैने गाड़ी से पानी की बोतल निकाली और उसके मूह पर कुछ छींटे मारे तो उसको होश आया मैने कहा कि अरे कॉन हो तुम और यहा क्यो पड़े वो कराहता हुवा बोला कि मेरा नाम नंदू है
मैने कहा ले थोड़ा सा पानी पी और बता कि यहाँ रास्ते पर क्यो पड़ा है तो उसने कहा कि शाम को जब वो अपनी बकरी चरा कर वापिस गाँव की तरफ आ रहा था तो गाँव के कुछ लोगो ने उसको बहुत मारा और उसकी बकरी भी छीन ली मैने कहा ऐसे कैसे वो तुझे मार सकते है तो उसने कहा मैं नीच जात का हू ना हमे तो हर कोई धमकाता रहता है
मैने कहा चल आजा बता तेरा घर कहाँ है मैं तुझे छोड़ देता हू वो बोला नही साहब मैं खुद चला जाउन्गा किसी को पता चला कि आपने मुझे गाड़ी मे बिठाया तो फिर से मेरी पिटाई होगी मैने कहा तू मुझे नही जानता तू चल अभी आजा मैं तुझे तेरे घर ले चलता हू तो वो घबराता सा गाड़ी मे बैठ गया मैने कहा भूख लगी है वो बोला हाँ साहब मैने कहा आजा तुझे कुछ ख़िलाता हू और उसको मैं हवेली ले आया
हवेली देखते ही वो और भी घबरा गया और बोला आप मुझे यहाँ क्यो लेकर आए है किसी ने मुझे यहाँ देख लिया तो मेरे लिए मुसीबत हो जाएगी मैने कहा क्या यार तू एक ही बात की पीप्नि बजा रहा है ये हवेली घर है मेरा और मैं ठाकुर देव हू इस हवेली का अंतिम बचा हुवा सदस्य वो बोला ठाकुर साहब आप मुझे नीच जात को अपने घर लेकर आए मैने कहा यार जहाँ से मैं आया हू वहाँ पर ये जात वात नही होती मैने उसको एक बिस्कुट का पॅकेट दिया और कहा कि ले अभी ये ही है इसे ही खाले
फिर उसको थोड़ा कुछ खिला कर मैं उसे उसके घर छोड़ने चला गया रास्ते मे नंदू ने बताया कि उसके परिवार मे बस वो और उसकी मान ही है उसके पिता का कई साल पहले ही देहांत हो गया था बाते करते करते हम लोग उसके घर आ गये घर तो क्या था बस एक टूटी-फूटी सी झोपड़ी थी नंदू को देख कर उसकी माँ बाहर आ गयी और मेरी ओर हाथ जोड़कर बोली बाबू मेरे बेटे से कोई ग़लती हुवी हो तो मैं आपसे माफी मांगती हू मैने कहा अरे पहले आप मेरी बात तो सुनिए
फिर मैने उनको पूरी बात बताई और कहा कि मैं नंदू की बकरी कल सुबह वापिस दिला दूँगा बात करते करते पता चला कि नंदू की माँ का नाम चंदा था उमर कोई 37-38 के फेर मे होगी पर जिस्म काफ़ी भरा हुआ था और एक घिसी हुवी सूती साड़ी उसके जिस्म को ढँकने मे असमर्थ थी फिर कुछ देर बात करने के बाद मैने कहा कि नंदू तू कल सुबह हवेली आ जाना तो वो सकुचाते हुवे बोला कि जी आ जाउन्गा
फिर मैं घर के लिए निकल पड़ा और सीधा बिस्तर पर गिर गया मेरी आँख तब खुली जब मुझे किसी ने जगाया मैने देखा कि एक लड़का खड़ा है मैने कहा कॉन है भाई तू तो वो बोला मालिक मैं नंदू कल रात को मिला था आपको मैने कहा अरे हां याद आया नंदू पर तू अंदर कैसे आया वो बोला मालिक दरवाजा खुला पड़ा था मैने कहा हो सकता है मैं रात को दरवाजा बंद करना भूल गया हुंगा
मैने कहा भाई तू थोड़ी देर बैठ मैं ज़रा फ्रेश होकर आता हू कोई आधे घंटे बाद मैने कहा नंदू मैं तेरी बकरी वापिस दिलवाउन्गा पर पहले तुझे मेरा एक काम करना हो गा वो बोला जी हुकम कीजिए मैने कहा मेरे साथ महादेव मंदिर चल तो वो बोला जी वो तो कई सालो से बंद है मैने कहा बंद है पर अब नही रहेगा फिर मैं मंदिर पहुच गया नंदू के साथ मंदिर बेशक पुराना था पर दिलकश था मैने कहा यार कोई बड़ा पत्थर तो ला और फिर मैने मंदिर के ताले को तोड़ कर कपाट खोल दिए
चर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्रररहर्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर करता हुआ लड़की का दरवाजा खुलता चला गया और मैं अंदर चला गया नंदू ने तो सॉफ मना कर दिया अंदर आने से अंदर काफ़ी जाले लगे थे जगह जगह कई जब गयी थी अंदर सफाई की सख़्त दरकार थी तो मैं नंदू को लेकर गाँव की चोपाल पर आया और जो बाबा वहाँ पर बैठते थे मैने उनको राम-राम की और कहा कि बाबा मैने महादेव मंदिर को खोल दिया है पर अंदर काफ़ी सफाई की दरकार है मुझे कुछ लोग चाहिए मदद के लिए मैं सबको पैसे भी दूँगा तो वो बाबा बोले पर वो मंदिर तो सालो से बंद था और तुम कैसे खोल सकते हो उसको
आस पास कुछ और लोग भी जमा हो गये थे मैने कहा बाबा मुझे हक था तो मैने खोल दिया वो बोले सच बता कॉन है तू मैने कहा मैं देव हू बाबा हवेली का अंतिम वारिस और मैं यहाँ अपने घरवालो की ग़लतियो को सुधारने आया हू चूँकि कुछ लोगो से मेरा मेलजोल हो चुका था तो वो बोले नही तुम ठाकुर नही हो सकते मैने कहाँ मैं ही हू और आज से मंदिर सबके लिए खुला है मतलब कोई जात-पात नही सभी एक समान
और हां मेरे घरवालो ने गाँव वालो के साथ जो भी किया हो मैं आप सब से हाथ जोड़कर उसके लिए माफी माँगता हू ये सारा गाँव मेरा है मेरा परिवार है आप लोग मुझे अपने परिवार के सदस्य के रूप मे अपनाए और हां हवेली के दरवाजे आप सब के लिए हमेशा खुले है आपका जब जी चाहे आप आ जाइए बाबा बोले बेटा तुमसे नाता सा जुड़ गया था पर तुम कुछ और ही निकले
मैने कहा नाता तो अब भी है बाबा मैं भी आप लोगो का ही बेटा-पोता हू मेरा परिवार तो रहा नही जो कुछ भी है ये गाँव ही है मेरे लिए आप चाहे मुझे दुतकारो या अपनाओ आपकी मर्ज़ी है फिर मैने नंदू को बुलाया और कहा कि बाबा कल गाँव के कुछ लोगो ने इसको मारा और इसकी बकरी छीन ली तो मैं चाहता हू कि इसका पशु इसे वापिस दिया जाए
मैने कहा बाबा आप बुजुर्ग है आप ही इस ग़रीब का न्याय करो तो बाबा ने नंदू से उनलोगो का नाम पूछा और उनको वही चोपाल पर बुला कर जलील किया और उसकी बकरी दिलवाई मैने कहा देव अब बस इस गाँव के लिए जिएगा आप लोगो से विनती है कि मंदिर की सॉफ सफाई कर देना ताकि वहाँ फिर से पूजा-अचना की जा सके फिर मैं नंदू के साथ उसके घर चला गया
उसकी माँ बोली मालिक आपने बड़ा अहसान किया हम पर जो हमारा पशु हमे वापिस दिला दिया मैने कहा आप मुझे शर्मिंदा ना करे दोपहर हो गयी थी मैने कहा अब मैं चलता हू मुझे खाना खाने जाना है क्या करू कोई भी हवेली मे काम करने को तैयार नही है मुझे बड़ी मुस्किल हो रही है मैने कहा क्या आप नंदू को हवेली मे काम करने देंगी मैं उसको अच्छी पगार दूँगा
मैने कहा ये उधर रहेगा तो मुझे भी अकेला पन महसूस नही होगा तो कुछ सोच कर चंदा ने हां करदी मैने कहा ठीक है नंदू तुम कल से आ जाना और मैं हवेली आ गया गर्मी बहुत थी तो मैं नाहया और थोड़ी देर लेट गया पता नही कब नींद आ गयी नींद आई तो अपने साथ सपना भी ले आई काफ़ी दिनो बाद ऐसी घेरी नीड आई थी और सपना भी जबरदस्त
सपने मे मैं लक्ष्मी की चूत मार रहा था आख़िर आजकल बस यही तो मेरी एक इच्छा थी और जैसे ही मेरा होने को हुआ किसी ने मुझे जगा दिया अपनी आँखे मल्ता हुवा मैं उठा तो देखा कि मेरी आँखो के सामने लक्ष्मी ही खड़ी थी उसने कहा यहाँ क्यो सोए पड़े हो तो मैने देखा कि मैं बरामदे मे पड़े तख्त पर ही सो गया था उसने कहा कि जल्दी तैयार हो जाओ आम के बाग मे चलना है
मैने नीचे देखा तो लॅंड ने निक्कर मे टॅंट बनाया हुवा था लक्षी की नज़र जब उस पर पड़ी तो एका एक उसके होंठो पर एक मुस्कान आ गयी मैने कहा क्या हुवा वो बोली कुछ नही तुम जल्दी चलो मैने कहा तुम बैठो मैं अभी आता हू और फिर थोड़ी देर बाद पैदल पैदल ही बाग की ओर चल पड़े लक्ष्मी ने अपने घाघरे को नाभि से काफ़ी नीचे बाँधा हुवा था तो उसका पुरा पेट और नाभि चिकनी कमर को देखकर मुझ पर जैसे नशा सा छाने लगा
मैं कुछ रुक सा गया और उसके मादकता से भरपूर चौड़े नितंबो को हिलते हुवे देखता रहा तभी वो पीछे को पलटी और बोली रुक क्यो गये जल्दी जल्दी चलो पर उसको कौन बताए कि जब वो ऐसे बिजलियाँ गिराते हुवे चलेगी तो फिर हम जैसो को होश कहाँ रह जाएगा और एक मेरा लंड था जो कि बैठने का नाम ले ही नही रहा था मैने निक्कर मे हाथ डाला और उसको अड्जस्ट किया थोड़ी दूर आगे जाने के बाद मैने कहा मैं पेशाब कर लूँ
वो बोली ठीक है और थोड़ा सा आगे जाके खड़ी हो गयी मैने अपनी निक्कर नीचे की और अपने तने हुवे लंड को बाहर निकाल लिया जैसे ही उसे खुली हवा लगी वो किसी साँप की भाँति फुफ्कारने लगा मैने तिरछी नज़रो से देखा कि लक्ष्मी चोर नज़रो से मेरी ओर ही देख रही है तो मैं थोड़ा सा और टेढ़ा हो गया ताकि वो अच्छे से मेरे लिंग का दीदार कर सके
फिर लंड से पेशाब की धार निकली और नीचे धरती पर गिरने लगी मैने देखा की लक्ष्मी बड़ी गहरी नज़रो से मेरे लंड को ही देखे जा रही थी फिर मैं उसके पास आया और बोला कि चलो जल्दी से फिर हम बाग मे आगये मैने आज तक ऐसा बाग नही देखा था पता नही कितनी दूर तक फैला हुवा था वो काफ़ी घने घने पेड़ थे और सभी पेड़ो पर ताज़ा आम लटक रहे थे पर मुझे उन आमो से ज़्यादा इंटेरेस्ट लक्ष्मी के आमो मे था
वो बोली ये तुम्हारा बाग है पता है कोई तुम्हारे लिए काम नही करना चाहता कोई चौकीदार नही है तो पता ही नही है कि कितनी चोरी हो रही है रोज अब तो बस जल्दी से कुछ लोग काम करने वाले मिल जाए तो किसी तरह से नुकसान रुके मैने कहा आप फिकर ना करे मैने गाँव के लोगो से बात की है कुछ लोग तो तैयार हो जाएँगे ही
हम चलते चलते थोड़ा और आगे की तरफ निकल आए लक्ष्मी बोली आम खाओगे मैने कहा खा लूँगा अगर आप खुद तोड़ कर खिलाओगी तो वो बोली पर मैं कैसे तोड़ पाउन्गी पेड़ तक तो मेरा हाथ पहुचेगा ही नही मैने कहा वो मुझे नही पता अपने हाथो से तोड़ कर खिलाओ तो खाउन्गा वो बोली तुम भी ना जाने कैसी कैसे ज़िद कर लेते हो मैने कहा और आप भी कभी ज़िद पूरी नही करती हो
कुछ देर बाद वो बोली ठीक है आज मैं तुम्हे अपने हाथो से ही आम तोड़कर खिलाउन्गी तुम एक काम करो मुझे उठा कर उपर करो क्या पता कोई आम मेरे हाथ लग ही जाए मैने कहा पर आप इतनी भारी हो मैं आपको कैसे उठा पाउन्गा तो वो बोली अरे कहाँ भारी हू मुनीम जी के खाट पकड़ने के बाद तो मैं कितनी दुबली हो गयी हू तो मैने कहा क्यो मुनीम जी क्या आपको मोटा होने की घुट्टी पिलाते थे क्या तो लक्ष्मी के गाल लाल हो गये वो बोली इस बात को तुम अभी नही समझोगे
मैने कहा मैं क्यो नही समझूंगा और फिर आप तो हो ही समझने के लिए तो लक्ष्मी बोली अच्छा छोड़ो इस बात को और मुझे उपर करो मैने कहा जी अभी करता हू वो बिल्कुल मेरे सामने खड़ी थी तो मैने उसके भारी भारी चुतड़ों पर से उसको उठाया और उपर कर दिया वो बोली थोड़ा सा और उपर उठाओ तो मैने थोड़ा सा और किया अब हुआ ये कि उसके मोटे चूतड़ मेरी नाक के सामने आ गये
वो उपर आम तोड़ने लगी उसके कूल्हे मेरे इतने पास थे कि मुझे पता नही क्या हुवा मैने अपना चेहरा उसके कुल्हो की दरार पर सटा दिया और अपने मूह से उनको दबाने लगा आगे की तरफ मेरे हाथ जो कि उसकी ठोस जाँघो पर थे मैने उसकी जाँघो को कसकर दबा दिया लक्ष्मी के मूह से एक आह निकल गयी मैने कहा क्या हुवा वो बोली कुछ नही तुम मुझे अच्छे से पकड़ना कही गिरा ना देना
मेरी नाक उसकी दरार मे घुसने को बेताब हो रही थी लक्ष्मी थोड़ा कसमसाने लगी पर मैं अपनी नाक को वहाँ पर रगड़ता रहा मुझे पता था कि उसने अंदर कच्छि तो पहनी नही है उसकी गान्ड के इतने करीब होने के एहसास से ही मैं उत्तेजित हो गया था तभी लक्ष्मी बोली कि मैं ऐसे आम नही तोड़ पा रही हू तुम मुझे पलटो और उन छोटी वाली टहनी की तरफ चलो तो मैने उसे उतारा और उधर ले जाकर फिर से उपर कर दिया
पर अबकी बार वो ऐसी उपर हुई कि उसकी चूत मेरे मूह पर थी अब मैं तो पागल ही होने वाला था मुझसे कंट्रोल नही हो रहा था उसकी चूत बिकलूल मेरे मूह पर ही थी मैने सोचा कि अभी सही मोका है इधर एक किस कर दूं तो मैने अपना मुँह उसकी योनि पर रख दिया जैसे लक्ष्मी को अपनी चूत पर मेरे होठ महसूस हुए उसके बदन मे कंपन होने लगा मैने कहा क्या करती हो आराम से खड़ी रहो ना वरना गिर जाओगी वो अजीब सी आवाज़ मे बोली कि सही तो खड़ी हू
पीछे मैं धीरे से उसके चुतड़ों को छेड़ने लगा था मैं बहुत ज़्यादा उत्तेजित हो चुका था और पता नही कैसे मैने उसकी योनि पर अपने दाँत गढ़ा दिए लक्ष्मी का बॅलेन्स बिगड़ गया और वो मुझे लिए लिए ज़मीन पर आ गिरी वो मेरे उपर थी उसका घाघरा कमर तक उठ गया था और उसकी चूत मेरे लंड पर अपना दबाव डालने लगी थी लक्ष्मी उठना चाहती थी पर मैने उसको अपनी बाहों मे दबा लिया अब वो मेरे सीने से बिकुल चिपक गयी थी
पर जल्दी ही वो अपनी स्थिति को भाँप गयी और उठ गयी उसने अपने घाघरा को सही किया मैं भी खड़ा हो गया मेरी निगाह उसके तेज़ी से उपर नीचे होते सीने पर गयी तो फिर मैं अपने होश-हवास भूल गया मैने लक्ष्मी को पेड़ के तने के सहारे लगाया और पागलो की तरह उसके काटीले होंठो को पीने लगा मैने उसको मजबूती से पकड़ लिया और उसको किस करते ही जा रहा था
मैने उस एक पल मे ही सोच लिया था कि चाहे अब कुछ भी हो जाए अब पीछे नही हटना आज लक्ष्मी की चूत मारनी ही मारनी है मैं अपना एक हाथ नीचे ले गया उसके घाघरे के नाडे को खोल दिया एक पल मे ही घाघरा उसके पैरो मे आ गिरा लक्ष्मी भी समझ गयी थी कि अब बात हद से आगे बढ़ गयी है तो उसने मुझे धक्का दिया और अपने से दूर कर दिया
और अपने घाघरे को उठा कर कमर तक चढ़ा लिया पर वो नाडा नही बाँध पाई मैं फिरसे उसके पास गया तो वो बोली देव रुक जाओ मैं उसके पास गया और बोला नही आज मैं नही रुक सकता मुझे आपकी ज़रूरत है मैं आउट ऑफ कंट्रोल हो गया था मैने उसको फिर से किस करते हुवे कहा कि प्लीज़ एक बार मुझे करने दो नही तो मैं मर जाउन्गा वो बोली पर ये ग़लत है ऐसा नही हो सकता मैं किसी और की अमानत हू मैने कहा हाँ पर आपके पति शायद आपको फिर कभी ये सुख नही दे पाएँगे