वासना का मस्त खेल अध्याय 3

मैं अब धीरे से खिसक कर उसके नजदीक हो गया और उसके दोनों कंधों को पकड़ कर धीरे से उसे बिस्तर पर धकेलने लगा.
“ओह.. उय्यय.. नहींईई.. नहींईईई.. ईई..ई..” कहते हुए नेहा ने मुँह से तो मना किया, मगर साथ ही वो बिस्तर पर लेट भी गयी. उसने अब भी एक हाथ से अपनी मुनिया को और दूसरे हाथ से अपनी दोनों चूचियों को छुपाया हुआ था. मगर मेरा तो सारा ध्यान उसकी कमसिन मुनिया पर ही था. मेरे देखने से नेहा भी समझ गयी कि मेरी निगाहें कहां पर हैं. इसलिए जैसे ही मैंने अपना हाथ उसकी मुनिया की तरफ बढ़ाया, तो “नहींईई..” कहते हुए नेहा ने अपना दूसरा हाथ भी अपनी चूचियों पर से हटा कर अपनी जांघों पर ही रख लिया.

मुझसे अब और सब्र नहीं हो रहा था. उसकी कमसिन चुत को देखने के लिए मैं मरा जा रहा था. इसलिए मैंने अपने दोनों हाथों से उसके हाथों पकड़ कर उसकी जांघों पर से हटा दिया और वो अब फिर से “नहींई.. नहींईइ.. नहींईईई..” करती रह गयी.

नेहा की चूत पर से उसके हाथों को तो मैंने हटा दिया था. मगर उसने अपनी जांघों को अब भी बन्द किया हुआ था. उसकी जांघें भी कुछ ज्यादा ही भरी हुई व काफी सुडौल थीं, जिससे उसकी चुत दोनों जांघों के बीच बिल्कुल छुपी हुई थी. मुझे उसकी चुत का बस फूला हुआ ऊपरी भाग और उसके छोटे छोटे बाल ही दिखाई दे रहे थे.

“खोलो ना‌ इन्हें.. देखने तो दो..” मैंने उसकी चुत के उभार को देखते हुए कहा.
“नहींईई.. मुझे शर्म आ रही है.. बस्स्स.. अब कर लो.. तुमको जो करना है.” नेहा ने अपने हाथों को मेरे हाथों से छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा.

मैंने भी उसके हाथों को छोड़ दिया और अपने दोनों‌ हाथों से उसकी जांघों को खोलने‌ की कोशिश करने लगा. “प्लीईईज.. एक बार.. बस्स.. एक बार देखने दो प्लीईईईज..” मैंने उसकी आंखों में देख कर अब विनती करते हुए कहा.

नेहा ने भी मेरी विनती को स्वीकार करके अपनी जांघों को तो हल्का खोल दिया मगर मेरे देखने‌ से वो शर्मा रही थी इसलिए दोनों हाथों से उसने अपने चेहरे को छुपा लिया. नेहा ने बस अपने पैरों को हल्का सा ही खोला था, बाकी का काम अब मेरे हाथों ने किया. जैसे ही अब नेहा की जांघें खुलीं, मेरी आंखों में चमक सी आ गयी. क्योंकि नेहा का वो खजाना, जिसके लिए मैं इतनी‌ देर से तड़प रहा था. वो अब मेरे सामने आ गया था.

प्रिया के जैसी ही छोटी सी मगर काफी फूली हुई चुत थी उसकी, जो कि छोटे छोटे काले घने बालों से भरी हुई थी. शायद दस पन्द्रह दिन पहले उसने अपनी मुनिया के बालों को साफ किया था.

चुत की फांकों के नजदीक के बाल कामरस से भीगकर चुत से चिपक गए थे. इसलिए छोटे छोटे बालों के बीच चुत की हल्की गुलाबी लाईन अलग ही नजर आ रही थी.

नेहा की रसभरी चुत को देख कर मेरा गला सूख गया था, इसलिए उसकी चुत का रस पीने के लिए अपने आप ही मेरी गर्दन अब उसकी जांघों के बीच झुकती चली गयी, जहां से वो कामरस का झरना फूट रहा था. मैंने पहले तो उसकी दूध सी सफेद गोरी चिकनी जांघों को चूमा और फिर धीरे से उसकी चुत के फूले हुए उभार पर आ गया. अब जैसे ही मेरे होंठों ने नेहा की चुत को छुआ.

उसने एक सुबकी सी ली “इईई.. श्श्शशश.. ओय्य.. उह्ह्हह..” और अपनी दोनों जांघों को बन्द करके अपनी चुत को छुपा लिया.
मैंने गर्दन उठाकर नेहा की तरफ‌ देखा, जैसे कि उससे पूछना चाह रहा हूँ कि क्या हुआ?
उसने एक बार मुझसे नजरें मिलाईं और फिर अपनी गर्दन को दूसरी तरफ घुमा लिया. मैंने अब फिर से उसकी जांघों को खोल दिया. इस बार मैंने उसके घुटनों को मोड़कर उसकी जांघों को फैला दिया और खुद उसकी दोनों जांघों के बीच आ गया.

नेहा “उऊऊ.. हुहुँहूँ..” कहकर हल्का सा कुनकुनाई तो‌ जरूर मगर उसने कहा कुछ भी नहीं.

नेहा की रसीली चुत अब फिर से मेरे सामने थी और उसकी मादक गंध मुझे बेचैन कर रही थी. मैं नहीं चाहता था कि नेहा की चुत के रस की एक भी बूंद जाया हो, इसलिए उसकी चुत की दोनों फांकों पर जो रस लगा हुआ था. सबसे पहले तो मैंने अपनी जीभ से चाटकर उसको साफ किया और फिर धीरे से अपनी जीभ को चुत की दोनों फांकों के बीच घुसा दिया. इससे वो “इ.इईईई.. श्श्श्शशशश.. ओयह्ह्हह..” कहकर जोरों से सिसक उठी और उसकी दोनों जांघें मेरे सिर पर कस गईं. लेकिन मैं अब रूका नहीं, अपने दोनों‌ हाथों को नेहा की जांघों के बीच लाकर मैंने‌ उसकी जांघों को फिर से खोल दिया और एक हाथ से उसकी चुत की दोनों फांकों को फैलाकर चुत के बीच के गुलाबी भाग को चाटना शुरू कर दिया. अब नेहा के मुँह से हल्की हल्की सिसकारियां फूटनी शुरू हो गईं.

मैंने चुत की फांकों के बीच के गुलाबी भाग को ऊपरी छोर से चाटना शुरू किया और धीरे धीरे नीचे की तरफ बढ़ने लगा. इससे नेहा की जांघें अब अपने आप‌ ही फैलने लगीं. उसने दोनों हाथों से अब भी मेरे सिर को पकड़ा हुआ था, मगर मुझे रोकने या हटाने का प्रयास वो बिल्कुल भी नहीं कर रही थी.

नेहा की चुत की फांकों के बीच चाटते हुए मेरी ललचाई जीभ भी अब उसके खजाने के द्वार पर दस्तक दे‌ने‌ लगी. इससे नेहा की सिसकारियां और भी तेज हो गईं और उसके हाथ मजे से मेरे सिर के बालों को सहलाने‌ लगे. मगर जैसे ही मेरी‌‌ जीभ ने नेहा के खजाने के द्वार को छुआ, उसने “अअओ.. ओइईई.. इईई.. श्श्श्शश.. आआआ.. ह्ह्हहह..” की एक मीठी सीत्कार भरकर दोनों हाथों से मेरे सिर को जोरों से अपनी चुत पर दबा लिया.

मैंने भी नेहा को अब ज्यादा नहीं तड़पाया और धीरे से अपनी जीभ को नुकीला करके उसकी छोटी सी चुत के संकरे द्वार में पेवस्त कर दिया, जिससे एक बार फिर वो “अअओ.. ओइईई.. इईई.. श्श्श्शश.. अह.. आआआ.. ह्ह्हहह..” कहकर उचक गयी और अपने दोनों‌ हाथों से मेरे सिर को अपनी चुत पर दबा लिया. मैंने एक दो बार उसकी चुत के द्वार में अपनी जीभ को घिसा और फिर अपनी गर्दन उठा कर उसके चेहरे की तरफ देखने लगा.

इस बार नेहा शर्मायी नहीं बल्कि मेरी तरफ देखती रही, जैसे कि वो पूछना चाह रही हो कि मैं रुक क्यों‌ गया? उसकी आंखों में उत्तेजना की तड़प अब साफ दिखाई दे रही थी. दरअसल जो सुख मैं नेहा को दे रहा था, वही सुख मैं भी नेहा से लेना चाह रहा था. मुझे पता था कि नेहा ये सब पहले भी कर चुकी है इसलिए शायद वो ऐतराज नहीं करेगी.

ये सोचकर मैं अब धीरे उठकर नेहा के सिर की तरफ अपने पैर करके उसके बगल में लेट गया और उसकी जांघों को पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचने लगा.

नेहा समझ रही थी कि मैं ये सब क्या कर रहा हूँ इसलिए उसने बिना कुछ कहे चुपचाप करवट बदलकर अपना मुँह मेरी तरफ कर लिया. हम दोनों अब एक दूसरे के पैरों की तरफ मुँह करके लेटे हुए थे. मैं तो सोच रहा था कि नेहा अपने आप ही मेरे लंड को अपने मुँह भर लेगी, मगर वो तो मेरे लंड को बस आंखें फाड़ फाड़ कर देखे जा रही थी.

ऐसा नहीं था कि नेहा ये सब पहली बार कर रही थी, उसके पहले भी किसी के साथ सम्बन्ध रहे हैं और जब किसी के साथ सेक्स सम्बन्ध रहे होंगे तो उसने ये सब तो किया ही होगा. शायद मेरे साथ ये सब करते हुए वो शर्मा रही थी इसलिए मैंने अब खुद ही अपनी कमर को खिसका कर अपने लंड को उसके होंठों से लगा दिया.‌ वो हल्का हल्का कुनकुनाई मगर उसने मेरे लंड को अपने होंठों पर से हटाने की कोशिश नहीं की.

अपने लंड को नेहा के होंठों पर लगाकर धीरे धीरे मैं उसके होंठों पर लंड का दबाव बढ़ाने लगा, जिससे वो “उउऊऊ.. उह्हहुहं.. उहुँहूँ..” कहकर हल्का सा कुनकनाने तो लगी.. मगर साथ ही अपने मुँह को भी हल्का सा खोल दिया, जिससे मेरे लंड का सुपारा उसके मुँह में थोड़ा सा घुस गया. मुझे अब उसके नर्म‌ नर्म होंठों की नर्मी व उसके मुँह की गर्मी अपने सुपाड़े पर महसूस होने लगी थी. अब अपने आप ही नेहा के‌ मुँह पर मेरे लंड का दबाव बढ़ गया और मेरा सुपारा थोड़ा सा और उसके मुँह में घुस गया. इसी तरह मैं अब धीरे धीरे अपने लंड का दबाव बढ़ाता गया‌ और अपना सारा सुपाड़ा उसके मुँह में घुसा दिया. नेहा ने कोई विरोध नहीं किया, बस हल्का सा कुनकुनाकर रह गयी.

अपना सुपारा नेहा के मुँह में घुसाकर मैंने भी अब अपना सिर उसकी जांघों के बीच घुसा दिया और उसकी चिकनी जांघों को धीरे धीरे अन्दर की तरफ से चूमने चाटते हुए ऊपर उसके खजाने की तरफ बढ़ने लगा.

मैं नेहा की जांघों को चूमते चाटते हुए धीरे धीरे पग पग धरते हुए उसकी चुत की तरफ बढ़ रहा था. शायद नेहा से अब सब्र नहीं हुआ इसलिए अपनी कमर को आगे खिसकाकर उसने खुद ही अपनी चुत को मेरे मुँह से लगा दिया.

नेहा अब शर्माना छोड़कर खुलने लगी थी, इसलिए मैंने भी अब उसकी चुत को ऊपर से नीचे तक चाटना शुरू कर दिया. वो फिर से अब हल्के हल्के सिससकने लगी. नेहा को तड़पाने के लिए मैं उसकी चुत को ऊपर से नीचे तक तो चाट रहा था.. मगर मैंने अपनी जीभ को उसके प्रवेशद्वार से दूर ही रखा हुआ था. बस कभी कभी प्रवेशद्वार पर गोल गोल घुमा दे रहा था, जिससे नेहा जोरों से सिसक उठती और अपनी कमर को आगे पीछे करके खुद ही अपनी मुनिया के द्वार को मेरे मुँह पर लगाने की कोशिश करने लगती.

कुछ देर तक तो नेहा ये सहती रही, फिर जब उससे ये बर्दाश्त नहीं हुआ तो कसमसाकर वो मेरे ऊपर चढ़ गयी और अपनी दोनों जांघें खोलकर खुद ही अपनी मुनिया के द्वार को मेरे होंठों से लगा दिया.

नेहा अब मेरे ऊपर थी और मैं उसके नीचे था. उसकी चुत मेरे मुँह पर लगी हुई थी, तो मेरा लंड भी उसके मुँह में था. वो कहते है ना 69 की पोजिशन में आ गए थे.

धीरे धीरे नेहा अब खुलती जा रही थी उत्तेजना के वश उसने अब शर्म हया छोड़ दी और खुद ही अपनी चुत को मेरे मुँह पर घिसना शुरू कर दिया.अब तक की इस मस्त सेक्स कहानी में आपने पढ़ा था कि नेहा अब खुलती जा रही थी उत्तेजना के वश उसने अब शर्म हया छोड़ दी और खुद ही अपनी चुत को मेरे मुँह पर घिसना शुरू कर दिया था.
अब आगे:

मैंने भी अब उसे ज्यादा नहीं तड़पाया और अपनी जीभ को नुकीला करके उसकी संकरी गुफा में पेवस्त कर दिया, मगर जैसे ही मैंने अपनी जीभ को उसकी चुत की गहराई में उतारा, मेरा मोटा सुपारा उसके मुँह में होने के बावजूद वो ‘उह … उउऊऊ … अह्हहहं …’ कहकर जोरों से सिसक उठी और अपनी चुत को मेरे मुँह पर जोर से दबा दिया ताकि मेरी जीभ अधिक से अधिक उसकी चुत की गहराई में उतर जाए.

शायद नेहा की जीभ भी अब मेरे सुपारे पर हल्की हल्की जुम्बिस सी करने लगी थी क्योंकि मुझे अपने सुपारे पर कुछ गर्म गर्म और गीला गीला सा महसूस हो रहा था. मेरे लिए शायद ये नेहा की तरफ से इशारा था कि मैं भी अब अपना काम शुरू कर दूँ … इसलिए मैंने अब अपनी पूरी जुबान निकालकर धीरे धीरे उसकी प्रवेशद्वार की दीवारों पर घिसना शुरू कर दिया.

इससे नेहा के मुँह से अब मस्ती भरी ‘उऊऊ … ह्हहुँहुँहंउ … उऊऊ … ह्हहुँहुँ हंउ …’ आवाजें निकलने लगीं. साथ ही उसने भी अब मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया. लंड चुसाई से मेरे आनन्द की अब कोई सीमा नहीं थी. इसलिए मैं भी अब मजे से नेहा की चुत को चाट चाट कर उसके रस को पीने‌ लगा. नेहा और मैं अब अपनी पूरी तन्मयता से एक दूसरे के अंगों को चूम चाट रहे थे.

तभी मुझे खिड़की पर किसी के होने का आभास सा हुआ, जिससे मेरी नजर खिड़की पर चली गयी, जो कि हल्की सी खुली हुई थी. मुझे कोई नजर तो नहीं आया, मगर बाहर सूरज की रोशनी के कारण उसके कपड़ों के लाल रंग की लालिमा फैली हुई दिखाई थी. मुझे ये समझते देर नहीं लगी कि यह प्रिया है क्योंकि उसने ही लाल रंग की टी-शर्ट पहनी हुई थी. नेहा का मुँह दूसरी तरफ था … इसलिए नेहा को तो इसका अहसास नहीं हुआ, मगर मैं समझ गया था कि यह प्रिया है … जो कि चोरी चोरी खिड़की से हमें देख रही थी.

मैं प्रिया के बारे में सोच ही रहा था कि तभी नेहा ने अपनी चुत को मेरे पूरे चेहरे पर जोरों से दबाकर रगड़ दिया. खिड़की की तरफ ध्यान देने के कारण मैं नेहा की चुत को भूल ही गया था, जिसका अहसास नेहा ने अपनी चुत को मेरे चेहरे पर जोर से रगड़कर करवाया. मैंने भी अपना ध्यान अब फिर से नेहा की चुत को चाटने पर लगाया और अपनी पूरी जीभ निकाल कर उसकी चुत में गहराई तक पेलने लगा. नेहा भी अब मेरे लंड को जोरों से चूम चाट रही थी.

नेहा की चुत को चाटते हुए मैं बीच बीच में अपनी निगाहें खिड़की पर भी ले जा रहा था, प्रिया अब भी खिड़की पर ही थी और चोरी चोरी हमें देख रही थी. इस तरह प्रिया का हमें इस हालत में देखने से मेरी उत्तेजना दोगुनी हो गयी थी. मैं अब जोरों से‌ नेहा की‌ चुत को‌ ऊपर से‌ नीचे तक चाटने‌ लगा, जिससे नेहा की‌ सिसकारियां और भी तेज हो गईं.

वो भी अब मेरे लंड को जोरों से चूमने चाटने लगी. नेहा की चुत से निकलने वाले रस से मेरा मुँह तरबतर हो गया था. उधर नेहा की मुँह की लार और मेरे लंड से निकलने वाला रस नेहा के मुँह से रिसकर मेरे लंड के सहारे अब मेरी भी जांघों पर फैलने लगा था.

धीरे धीरे नेहा की सिसकारियां भी अब बढ़ती जा रही थीं- उऊऊ … अह्ह … हुँहुँहंउ … उऊऊ … ह्हहुँहुँहंउ …’ मादक आवाजें निकालते हुए उसने अब खुद ही अपनी कमर को आगे पीछे करके अपनी मुनिया को मेरे मुँह पर घिसना शुरू कर दिया था, साथ ही मेरे लंड को भी वो अब जोरों से चूसने और चाटने लगी थी. इस वक्त नेहा ने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ लिया था और उसे ऊपर से नीचे तक सहलाते हुए वो जोरों से चूस व चाट रही थी. साथ ही वो अपनी कमर को भी अब हिला हिलाकर अपनी चुत को भी मेरे मुँह पर घिस रही थी.

शायद नेहा चर्मोत्कर्ष के करीब पहुंच गयी थी … इसलिए मेरे लिए उसका ये इशारा था कि मैं भी अब अपनी जुबान की हरकत को तेज कर दूँ, जिसको मैं बखूबी समझ गया और अपनी जुबान की हरकत को और भी तेज कर दिया.

मैं भी अब अपने हाथों को उसके भरे हुए नितम्बों पर ले आया और एक हाथ उसके नितम्बों को मसलते हुए दूसरे हाथ से उसके गुदाद्वार को सहलाने लगा. इससे नेहा की सिसकारियां और भी तेज हो गईं और वो तेजी से अपनी मुनिया को मेरे मुँह पर घिसने लगी.

फिर कुछ ही देर बाद उसकी सिसकारियां कराहों में बदलने लगी. अचानक से उसका बदन अकड़ गया, उसने अपनी दोनों जांघों से मेरे सिर को जोरों से भींच लिया और सुबकियां भरते हुए रह रह के अपनी चुत से मेरे चेहरे पर प्रेमरस की बौछार सी करनी शुरू कर दी, जिससे मेरा सारा चेहरा भीग गया. मैं भी चरमोत्कर्ष के करीब ही था, मगर अपने रस्खलन के कारण नेहा मुझे भूल गयी थी … इसलिए मैं खुद ही अब अपनी कमर को उचका उचका कर अपने लंड को नेहा के मुँह के अन्दर बाहर करने लगा. सुबकियां भरते हुए नेहा का मुँह पूरा खुल और बन्द हो रहा था, इसलिए मेरा करीब एक चौथाई लंड नेहा के मुँह में अन्दर बाहर होने लगा.

मैं सच कह रहा हूँ उस आनन्द की कोई सीमा नहीं थी. मैंने बस पांच छः झटके ही लगाये थे कि मेरे लंड ने भी नेहा के मुँह में अपना लावा उगलना शुरू कर दिया.

मैंने नेहा को जोरों से भींच लिया और चार पांच किस्तों में अपना सारा लावा नेहा के मुँह में ही उगल दिया. वीर्य की धार शायद नेहा के गले तक पहुंच गयी होगी … मगर नेहा अपने ही रस्खलन की बदहवासी में थी इसलिए उसको‌ ध्यान ही नहीं था कि मैं क्या कर रहा हूँ.

नेहा को इस बात का अहसास तब हुआ, जब उसका सार मुँह मेरे वीर्य से भर गया और उसको सांस लेने में दिक्कत होने लगी. अब जैसे ही नेहा ने मेरे लंड को बाहर निकाला ढेर सारा वीर्य नेहा के मुँह से निकलकर मेरी जांघों पर फैल गया.

मेरी जांघों पर जोरों से चपत लगाते हुए बाकी का बचा हुआ वीर्य भी अब नेहा ने मेरी जांघों पर ही थूक कर उगल दिया और फिर मुझ पर से उतरकर मेरी बगल में लेट गयी.

कुछ देर तक तो हम दोनों‌ अब ऐसे ही लेटे रहे. फिर मैंने करवट बदलकर अपना मुँह नेहा की तरफ‌ कर लिया. नेहा अब भी अपना सिर मेरे पैरों की तरफ ही करके लेटी हुई थी, उसकी जांघें खुली हुई थीं, इसलिए उसकी फुली हुई चुत ने अब फिर से मेरा ध्यान अपनी तरफ खींच लिया. उसकी चूत प्रेमरस और मेरे मुँह की लार से गीली होकर चमक सी रही थी. प्रेमरस और मेरे मुँह की लार से उसकी चुत के सारे बाल गीले होकर चुत से चिपक गए थे, इसलिए चुत की गुलाबी फांकें अब अलग ही नजर आ रही थीं.

नेहा की चुत का एक बार मैं रसपान कर चुका था और रस्खलन के बाद मेरा पप्पू भी अब मूर्छित अवस्था में था. मगर उसकी रसभरी चुत से मेरा दिल अब भी भरा नहीं था. उसकी‌ रसभरी चुत को देखकर मुझसे अब रहा नहीं गया इसलिए आगे होकर एक बार फिर से मैंने उसकी चुत को जोर से चूम‌ लिया.

“इईई … श्श्श्शशश … ओय्य्य … अह्ह्हह …” नेहा ने सिसकते हुए कहा और दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़कर अपनी चुत पर से हटा दिया.
“क्या हुआ?” मैंने नेहा की तरफ देखते हुए उससे पूछा.
“बस्स … अब क्या बचा है?” नेहा ने मेरी तरफ देखकर शर्माते हुए कहा और बिस्तर से उठकर खड़ी हो गयी.
“कहां जा रही हो अभी?” मैंने उसका हाथ पकड़कर उसे फिर से बिस्तर पर खींचते हुए कहा.
“बस्स … अब क्या है? प्रिया आ जाएगी …” उसने फिर से बिस्तर पर बैठते हुए कहा.

प्रिया का नाम सुनते ही मेरी नजर अब फिर से खिड़की पर चली गयी … वो अब भी खिड़की पर ही थी मगर अपना नाम सुनकर शायद दीवार के पीछे छुप गयी थी. उसके कपड़ों की लालिमा अब भी खिड़की पर फैली हुई दिखाई दे रही थी.

“नहीं आएगी वो … वो तो अपनी सहेली के घर गयी हुई है …” मैंने खिड़की की तरफ देखते हुए ही कहा.
“और उसको भेजा भी तुमने ही होगा?” नेहा ने अब शरारत से मुस्कुराते हुए कहा.
“क्याआआ?” हैरानी के कारण मेरे मुँह से निकल गया और मैं तुरन्त नेहा की तरफ देखने लगा … वो अब मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी.
“सब पता है मुझे … पिछले दो दिन से देख रही हूँ … वो रोज रात को अपने बिस्तर से गायब रहती है …” नेहा ने बनावटी सा गुस्सा दिखाते हुए कहा.

अब झटका लगने की मेरी बारी थी. मैं फिर से खिड़की की तरफ देखने लगा. प्रिया अब भी खिड़की पर ही थी और शायद उसने भी ये सुन लिया था.

“अच्छा तो ये बात है … इसलिए ही इसने आज मेरा इतना विरोध नहीं किया. पहले शायद वो डरती‌ थी, मगर अब प्रिया के बारे में पता लगने‌ के बाद इसमें हिम्मत आ गयी थी.” मैं ये सब सोच ही रहा था कि तभी नेहा ने मुझे गहरी निगाहों से देखते हुए छुआ.
“क्यों? क्या हुआ? तुम क्या सोच रहे थे कि मुझे कुछ पता नहीं? तुम दोनों के बीच जो कुछ चल रहा है, मुझे सब पता है.” नेहा ने शरारत से मुस्कुराते हुए अपनी आंखों को मटकाते हुए कहा.

नेहा अब पूरी तरह से खुल‌ गयी थी‌ और मुझसे बिना शर्माये अपने नंगे बदन को लहरा लहरा कर बातें कर रही थी. नेहा के गोरे चिकने नंगे बदन को देखकर मुझसे भी अब रहा नहीं गया.

“अच्छा तो तुमको सब पता था?” कहते हुए मैंने नेहा को फिर से बिस्तर पर गिरा लिया.
“ओय्य … नहींईई … नहींईईई.ईई … ईईई …” सिसयाते हुए उसने‌ मुझे रोकने की कोशिश तो की, मगर तब तक मैंने उसको बिस्तर पर गिरा लिया था. नेहा को बिस्तर पर गिराकर मैंने सीधा उसके होंठों को मुँह में भर लिया और उन्हें जोरों से चूसने लगा.

वो “उह … उउऊऊ … उम्म्म …” कराहते हुए कसमसाने लगी. होंठों को चूसते हुए मैं उसके गोरे चिकने नंगे बदन को भी सहला रहा था, जिससे उसकी सांसें अब फिर से भारी होने लगीं.

कुछ देर तक तो वो कसमसाती रही, मगर फिर उसने भी मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया.

नेहा के होंठों और गालों पर अब भी मेरा वीर्य लगा हुआ था और उसके मुँह से भी मेरे वीर्य की महक आ रही थी. चुत के रस का स्वाद तो मैं काफी बार ले चुका था मगर आज अपने ही वीर्य को स्वाद लेना ये कुछ अजीब सा लग रहा था. फिर मैंने सोचा कि नेहा की चुत का रस भी तो मेरे होंठों पर लगा हुआ है, जिसको वो भी तो चूस रही है, ये सोचकर मैं उसके होंठों को चूसता रहा.

हम दोनों ही एक दूसरे के होंठों को चूसते हुए अब अपने अपने अंगों के रस का स्वाद ले रहे थे, जो कि अजीब तो था मगर काफी उत्तेजक भी लग रहा था.

नेहा के बदन को सहलाते हुए मेरा एक हाथ अब उसके उभारों पर आ गया था. मैंने तुरन्त उसकी चूचियों को दबोच लिया और उसके होंठों का रसपान करते हुए बारी बारी से उसकी दोनों चूचियों को भी मसलने‌ लगा. नेहा ने अब मेरा कोई विरोध नहीं किया, शायद वो अब फिर से उत्तेजित होने लगी थी. उसकी सांसें अब गहरी और तेज होती जा रही थीं.

कुछ देर नेहा की चूचियों से खेलने के बाद मैंने अपना हाथ धीरे से उसकी मुनिया की तरफ बढ़ा दिया. मगर जैसे ही मेरा हाथ उसकी मुनिया के करीब पहुंचा, उसने मेरे होंठों पर अपने दांतों से काट लिया और तुरन्त जांघों को भींच कर अपनी मुनिया को छुपा लिया.

होंठ पर काटने से मैं दर्द से कराह उठा और जल्दी से अपने होंठों को नेहा के मुँह से छुड़वाकर उसके चेहरे की तरफ देखने लगा. वो अब शरारत से हंस रही थी. नेहा को मजा तो आ रहा था मगर वो‌ जानबूझकर मुझे तड़पाना चाह रही थी.

मैं भी नेहा की तरफ देखकर हंस दिया मगर दोबारा से उसके होंठों चूमने की बजाए इस बार मैंने उसकी एक चूची को दबोच लिया. मैंने उसकी एक चूची को पकड़कर उसके निप्पल को मुँह में भर‌ लिया और उसे जोरों से चूसना शुरू कर दिया. इससे नेहा के हाथ अब अपने आप ही मेरे सिर पर आ गए और वो मस्त होकर मुँह से हल्की हल्की सिसकारियां भरने लगी.

नेहा के निप्पल को चूसते हुए मेरा हाथ अब भी उसकी बन्द जांघों पर व उसकी मुनिया के उभार पर ही रेंग रहा था. तभी नेहा की जांघों को खोलने के लिए मुझे भी एक शरारत सूझ गयी. मैंने नेहा की चूची को चूसते हुए उसके निप्पल को दांतों से हल्का सा दबा दिया. जिससे वो ‘ओय्य्य … अआआ … ह्ह्हहह …’ कहकर जोरों से चिहुंक पड़ी. उसने अपने दोनों‌ हाथों‌ से मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चूची पर से हटा दिया. इस दौरान उसकी जांघें थोड़ा सा खुल गयी थी … तभी मौका देखकर मैंने अपना हाथ उसकी जांघों के बीच घुसा दिया. जब नेहा ने फिर से अपनी जांघों को भींचा, तो अब मेरा हाथ उसकी जांघों के बीच, उसकी कमसिन मुनिया पर जम गया था.

नेहा ने मेरे हाथ को पकड़ कर खींचने की कोशिश भी की, मगर कामयाब नहीं हो पायी. मेरी इस चालाकी पर नेहा जब और कुछ कर नहीं पायी तो वो मस्त आवाजें निकालने लगी ‘ओय्य्यय … ह्ह्हहह … हुहुँ हूँअ … हूँहऊ …’ वो अपने दूसरे हाथ से मेरी पीठ पर घूंसे बरसाने लगी. खैर मेरा हाथ अब नेहा की जांघों के बीच उसकी मुनिया पर जम गया था.

नेहा ने अपनी जांघें भींच रखी थीं और एक हाथ से वो मेरे हाथ को भी पकड़े हुए थी. मगर मेरे हाथ की उंगलियां स्वतंत्र थीं … जिनसे मैंने अन्दर ही अन्दर धीरे धीरे उसकी मुनिया को मसलना शुरू कर दिया.

अपनी उंगलियों से नेहा की मुनिया को मसलते हुए मैंने फिर से उसकी चूची को मुँह में भर लिया. मगर इस बार मैंने चूची बदल ली थी. मैं अब उसकी दूसरी चूची को चूसने लगा था. तभी मैंने देखा कि उसकी पहली चूची, जिसको मैं अब तक चूस रहा था, उसका निप्पल बिल्कुल लाल हो गया था. उसकी चूचियों के निप्पल गुलाबी थे … मगर जिस निप्पल को मैंने अभी तक चूसा था, वो एकदम लाल और तन कर कठोर हो गया था.

मैं अब ऊपर से नेहा की चूची को चूस रहा था, तो नीचे से मेरी उंगलियां भी उसकी मुनिया को मसल‌ रही थीं. इस दोहरे हमले का जो असर होना था, वही हुआ. कुछ ही देर में उसकी‌ मुनिया ने कामरस का रिसाव करना शुरू कर दिया और उसकी जांघों की‌ पकड़ भी ढीली हो गयी‌.

कामरस से गीली होकर नेहा की मुनिया अब चिकनी हो गयी थी, जिससे मेरी उंगलियां उसकी मुनिया पर अपने आप‌ ही फिसलने लगीं और नेहा के मुँह से हल्की हल्की सिसकारियां फूटनी शुरू हो गईं.

नेहा के हाथ अब अपने आप ही फिर से मेरे सिर पर आ गए और मेरे बालों को सहलाते हुए वो मुँह से हल्की हल्की सिसकारियां निकालने लगी.

नेहा की चूची को चूसते हुए मैं एक हाथ से उसकी मुनिया को भी मसल रहा था जिससे धीरे धीरे अपने आप ही अब उसकी जांघें पूरा फैल गईं और उसकी मुनिया पर मेरे हाथ का अधिकार हो गया. मैं अब खुलकर उसकी मुनिया को सहलाने लगा, मेरी उंगलियां उसकी मुनिया के ऊपरी छोर से लेकर नीचे उसके प्रवेशद्वार और उसके गुदाद्वार तक का सफर करने लगी. इससे नेहा की वासना से भरी सिसकारियां तेज हो गईं. उसकी कमर अपने आप ही हरकत में आ गयी.

नेहा की मुनिया को सहलाते बीच बीच में मैं अपनी उंगली को उसके प्रवेशद्वार में बस गोल‌ गोल फेरे दे रहा था, जिससे वो “इइईई … श्श्श्श्श्श … आआ … ह्हह्ह्ह …” कहते हुए जोरों से सिसक उठती और मेरी उंगली के साथ साथ अपनी कमर को हिलाने लगती. नेहा की तड़प बता रही थी कि वो अब पूरी तरह से उत्तेजित हो गयी‌ है और उसकी चुत अब कुछ मांग रही है. मगर फिर भी उसको तड़पाने के लिए मैं ऐसे ही अपनी उंगली की हरकत करता रहा.

कुछ देर तो नेहा ये सहन करती रही, फिर जब उसकी बर्दाश्त से ये बाहर हो गया … और अबकी बार जैसे ही मैं अपनी उंगली को उसकी चूत के प्रवेशद्वार पर लाया, उसने खुद ही मेरे हाथ को अपनी मुनिया पर जोरों से दबा लिया. इससे मेरी आधी से ज्यादा उंगली उसकी मुनिया में उतर गयी.

इसके साथ ही वो “इइईई … इश्श्श्श … आआह … ह्हहह …” करके जोरों से सिसक उठी. प्रिया की तरह नेहा की मुनिया भी अन्दर से किसी भट्ठी की तरह सुलग रही थी. उसकी मुनिया की अन्दर की गर्मी को महसूस करके मैंने भी अब अपनी पूरी उंगली को उसकी मुनिया में उतार दिया. इससे वो और भी जोरों से सिसक उठी और अपनी कमर को ऊपर हवा में उठाकर मेरी उंगली को अधिक से अधिक अपने अन्दर लेने का प्रयास करने लगी.

इसी मजे के कारण मैंने अब नेहा की चूची को छोड़ दिया और अपनी गर्दन उठा कर उसके चेहरे की तरफ देखने लगा … वो भी मेरी तरफ ही देख रही थी. वो कुछ बोल तो नहीं रही थी मगर उसकी आंखों में उत्तेजना के लाल डोरे साफ‌ दिखाई दे रहे थे.

मैं यह कहूँ कि मुझे नेहा की हालत पर तरस आ गया … या फिर ये कहूँ कि मेरी खुद की हालत खराब हो रही थी, एक ही बात होगी.

मैं अब धीरे से उठकर नेहा के ऊपर आ गया और उसके नंगे बदन से किसी जौंक की तरह चिपक गया. जैसे ही मैं नेहा के ऊपर आया, तो पहले तो वो हल्का सा कसमसाई … मगर फिर उसने खुद ही अपने पैरों को फैलाकर मुझे अपनी जांघों के बीच में ले लिया.

नेहा को‌ मालूम था कि अब आगे क्या होने वाला है. इसलिए उसने खुद ही अपनी जांघों को फैलाकर अपनी चुत को मेरे लिए परोस दिया था. मेरा उत्तेजित लंड अब उसकी कामरस से भीगी हुई मुनिया को छू रहा था, जिससे उसकी मुनिया की तपिश मुझे अब अपने‌ लंड पर महसूस हो‌ने लगी थी.अब तक की इस मस्त सेक्स कहानी में आपने पढ़ा था कि मैं नेहा की चूत में लंड घुसाने की तैयारी में था.
अब आगे …

नेहा वैसे तो बिल्कुल शांत थी, मगर उसकी सांसें अब तेजी से चलने लगी थीं और मुँह से हल्की हल्की कराहें निकल रही थीं. मैंने अब पहले तो नेहा के होंठों पर एक प्यार भरा चुम्बन किया और फिर उसके गाल, गर्दन, उसकी चूचियां और फिर उसके पेट पर से चूमते हुए धीरे धीरे मैं उसकी जांघों के बीच आकर अपने घुटनों के बल बैठ गया.

नेहा की जांघों के बीच बैठकर मैंने एक हाथ से अपने लंड को पकड़कर सीधा उसकी मुनिया की फांकों के बीच लगा दिया. जैसे ही मेरे लंड के सुपारे ने नेहा की मुनिया को छुआ … उसके पैर जोरों से कंपकंपा गए और उसने ‘इइईईई … श्श्श्श्श्श … अह्हहहह …’ की एक सुबकी सी ली. सही में नेहा की मुनिया उस समय किसी भट्ठी की तरह तप रही थी और उसके प्रवेशद्वार से मानो आग ही निकल रही थी.

मैंने अपने लंड को नेहा की मुनिया पर लगाकर उसकी नाजुक फांकों के बीच धीरे धीरे घिसना शुरू कर दिया. जिससे नेहा के मुँह से हल्की हल्की सिससकियां निकलने लगीं और उसने अपनी जांघों को और भी अधिक फैला लिया.

अपने‌ लंड‌ के सुपारे को नेहा की मुनिया पर घिसते हुए मैंने फिर से एक बार नेहा के चेहरे की तरफ देखा. वो आंखें बन्द करके मुँह से हल्की हल्की सिसकारियां निकाल रही थी और अपने बदन को कड़ा करके मेरे लंड के घुसने का इन्तजार कर रही थी.

मैंने अब देर ना करते हुए अपने सुपारे को सही से उसके प्रवेशद्वार पर लगाया और एक जोर का धक्का लगा दिया.

नेहा पूरी तरह से उत्तेजित थी और उसकी मुनिया का प्रवेशद्वार भी कामरस से भीगकर चिकना हो रखा था, इसलिए एक ही झटके में लगभग मेरा आधा लंड उसकी मुनिया की नाजुक फांकों को भेदता हुआ अन्दर उतर गया. लंड घुसते ही नेहा के मुँह से ‘अआआ … ह्ह्हहहह … मम्मीई.ईई … ईईई …’ की एक जोरदार चीख निकल गयी.

नेहा कुंवारी तो नहीं थी … मगर उसकी मुनिया में अब भी काफी कसाव था. करीब मेरा आधा लंड नेहा की मुनिया में था. जो कि मुझे काफी कसा हुआ सा महसूस हो रहा था. ऊपर से नेहा जोर जोर से सांसें ले रही थी, जिससे उसकी मुनिया में संकुचन व प्रसारण भी हो रहा था. चूत के इस संकुचन को मैं अपने लंड पर स्पष्ट महसूस कर रहा था. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि नेहा की मुनिया अपने आप ही मेरे लंड को अब अन्दर खींच रही हो.

“क्या कर रहा है? आराम से कर ना …” नेहा ने मुझे डांटते हुए कहा, मगर नेहा की तरफ ध्यान देने के लिए मुझे होश ही कहां था. मैंने और अपने लंड को थोड़ा सा बाहर खींचा और एक जोर का धक्का फिर से लगा दिया.

अबकी बार लगभग मेरा पूरा ही लंड नेहा की मुनिया में समा गया. इससे वो फिर से कसमसा उठी- इइईईई … श्श्श्श्शश … मम्मीईईई … उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओय्य्यय … ह्हह्ह्हह!
नेहा फिर से चीख पड़ी और उसने अपने दोनों हाथों से मेरी कमर पर कस कर चिकोटी भर ली.

नेहा के चिकोटी काटने से जब मुझे दर्द हुआ तो जैसे मैं होश में आ गया और मैंने नेहा की तरफ देखते हुए उससे पूछा- क्या?? क्या है?
“क्या है? जान से मारेगा क्या?? आराम से भी तो कर सकता है ना …” नेहा ने कराहते हुए कहा.
“क्या … दर्द हो हो रहा है क्या?” मैंने शरारत से हंसते हुए कहा.
“और नहीं तो क्या … उस रात तो … उस रात … आज फिर से वैसे … ही … उस रात तो मैं डर के मारे कुछ बोल भी नहीं पाई थी मगर आज तो आराम से कर …” नेहा ने मेरी तरफ थोड़ा गुस्से से देखते हुए कहा.

गुस्से और दर्द से नेहा का चेहरा मुझे और भी प्यारा लग रहा था. इसलिए थोड़ा सा आगे होकर मैंने उसके होंठों को चूम लिया. मेरे चूमने से पहले तो नेहा कसमसाई मगर फिर गुस्से में वो मेरे होंठों को जोरों से चूसने और काटने लगी.
नेहा के इतनी जोर से मेरे होंठों को चूसने से मुझे दर्द तो हो रहा था, मगर उससे कुछ कहने की बजाए मैंने अब नीचे से धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए. इससे मेरा लंड उसकी मुनिया की संकरी दीवारों को घिसते हुए अन्दर बाहर होने लगा.

मेरे धक्के लगाने से नेहा ने मेरे होंठों को छोड़ दिया और अपने बदन को कड़ा करके हल्का हल्का कराहने‌ लगी. अबकी बार मैंने के होंठों को अपने मुँह में भर लिया और धीरे धीरे धक्के लगाते हुए उसके होंठों‌ को प्यार से चूसने लगा.

कुछ देर तक तो नेहा कराहती रही, फिर उसने अपने बदन को ढीला छोड़ दिया. वो भी अब मेरा साथ देने लगी. उसने भी अब मेरे होंठों को फिर से चूसना शुरू कर दिया मगर इस बार वो प्यार से चूस रही थी. नेहा का ध्यान अब मेरे होंठों को चूसने में था. इसलिए धीरे धीरे मैंने अब अपने धक्कों के माप को बढ़ा दिया और अपने पूरे लंड को नेहा की चुत में अन्दर बाहर करने लगा. जिससे अब हल्की हल्की फच …फच … की सी आवाजें आना शुरू हो गईं.

नेहा पूरी तरह से उत्तेजित थी और उसकी चुत की दीवारें भी कामरस से भीगकर बिल्कुल की चिकनी हो रखी थीं. इसलिए मेरे लंड के अन्दर बाहर होने के कारण उसमें से अब तेज “फच …फच …” की आवाजें निकल‌ने लगी थीं. मेरे धक्कों का माप बढ़ाने से एक बार तो नेहा हल्का सा कराही, मगर फिर धीरे धीरे उसके मुँह से हल्की हल्की सिसकारियां फूटनी शुरू हो गईं और उसके दोनों हाथ अपने आप ही मेरी पीठ पर आकर रेंगने लगे.

मेरे होंठों को चूसते हुए नेहा अब बीच बीच में मुँह से “इ.श्श् … आ.ह्हह … इई.श्श्श … आ.ह्हहह …” की मीठी सीत्कारें भी भर रही थी.

नेहा का साथ पाकर मैंने भी अब अपने धक्कों के माप के साथ साथ गति को भी बढ़ा दिया, जिससे नेहा की वासना से युक्त सिसकारियां तेज हो गईं और उसकी कमर भी हरकत में आ गयी. नेहा के घुटनों को मोड़कर उसके पैरों को मैंने ऊपर हवा में उठाया हुआ था, मगर फिर भी मेरे धक्कों के साथ साथ वो नीचे से धीरे धीरे अपनी कमर को उचकाने लगी थी. मेरे आनन्द की अब कोई सीमा नहीं थी. मैं मजे से नेहा को चोद रहा था और नेहा अपनी कमर को उचका उचका कर मेरा जोश बढ़ा रही थी.

मैंने भी अब नेहा का जोश बढ़ाने के लिए उसके होंठों को चूसते हुए धीरे से अपनी जुबान को उसके मुँह में घुसा दिया. जिसे नेहा अब जोरों से चूसने लगी और धीरे धीरे उसकी कमर की हरकत अपने आप ही तेज होने लगी.

मेरा भी जोश अब बढ़ता जा रहा था. इसलिए मैंने अपनी कमर की हरकत को और भी तेज कर दिया. इससे नेहा की सिसकारियां भी और तेज हो गईं.

मेरे धक्कों के साथ साथ नेहा भी अब तेजी से अपने चूतड़ों को उठाते हुए अपनी कमर को चला रही थी.

कुछ देर तो नेहा अपनी कमर को ऐसे ही तेजी से हिलाती रही, फिर जब उसकी उत्तेजना का ज्वार बढ़ गया तो उसने अपने दोनों पैरों को उठाकर मेरी कमर में फंसा लिया और जोरों से ‘इश्श् … आह्हह …’ की सिसकारियां भरते हुए तेजी से अपने कूल्हों को उचकाने लगी.

एक एक बार हम दोनों का ही रस स्खलित हो चुका था इसलिए मुझे पता था कि ये चुदाई का दौर लम्बा चलने वाला है. मगर मेरे सब्र की अब इन्तेहा हो गयी थी, इसलिए मैंने नेहा के होंठों को छोड़ दिया और अपने हाथों के बल होकर अपनी पूरी ताकत और तेजी से धक्के लगाने लगा.

अब “फच्च … फच्चच् …” की आवाज के‌ साथ साथ तेज “पट्ट … पट्ट्ट …” की आवाजें भी आना शुरू हो गईं. मेरे लंड के नेहा की चुत में अन्दर बाहर होने से फच् …फच्च … की आवाज तो आ ही रही थी, अब मेरे जोरों से धक्का लगाने और नेहा के कूल्हों को उचकाने से मेरी और नेहा की जांघें आपस में टकराने लगी थी. जिससे ये मधुर संगीत पूरे कमरे के माहौल को और भी रूमानी बना रहा था. इन्हीं मादक आवाजों के साथ नेहा की सिसकारियां भी कमरे में गूंजने लगी थीं.

हम दोनों ही अब अपने अपने पूरे शवाब पर थे और हम दोनों में अपनी अपनी मंजिल पर पहुंचने की जैसे कोई प्रतियोगिता सी शुरू हो गयी थी. जितनी तेजी से मैं धक्के लगा रहा था, उतनी ही तेजी से अब नेहा भी नीचे से अपने कूल्हों को उचका कर मेरे धक्के का जवाब दे रही थी. इस धक्कमपेल से हम दोनों की ही सांसें अब फूल गयी थीं और बदन पसीने से भीगकर तर हो गए थे. मगर फिर भी हम दोनों में से कोई भी हार मानने को तैयार नहीं था. पूरा कमरा हम दोनों की धक्कमपेल और नेहा की किलकारियों से गूंज रहा था.

फिर कुछ ही देर में आखिरकार नेहा की मुनिया ने मेरे लंड के आगे हथियार डाल दिए और नेहा का बदन अकड़ने लगा. नेहा अपने मुँह से ‘इईईई … उईईईई … इश्श् … अह्हह …’ की जोरों से किलकारी मारते हुए मुझसे किसी बेल की तरह चिपट गयी और उसकी मुनिया रह रह कर मेरे लंड को अपने प्रेमरस से नहलाने लगी.

मुझसे भी अब ज्यादा सब्र नहीं हुआ और एक दो धक्कों के बाद ही मेरे लंड ने भी अपना वेग नेहा की मुनिया में उगलना शुरू कर दिया. मैंने नेहा को जोरों से भींच लिया और उसकी मुनिया को अपने वीर्य से पूरा भरकर उसके ऊपर ही लेट गया.

हम दोनों ही चुदाई के इस‌ लम्बे सफर से थक कर चूर हो गए थे. इसलिए काफी देर तक हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे की बांहों में समाए पड़े रहे. फिर नेहा ने मुझे अपने ऊपर से धकेलकर नीचे गिरा दिया और उठकर कपड़े पहनने लगी.

अपने कपड़े पहनने के बाद नेहा अब मुझे भी कपड़े‌ पहनकर अपने कमरे से जाने के लिए कहने लगी. नेहा के कहने पर मैंने अपने कपड़े तो पहन लिए, मगर मैं फिर से उसके बिस्तर पर लेट गया क्योंकि नेहा को छोड़कर जाने का मेरा दिल ही नहीं कर रहा था. नेहा अब अपने बिस्तर को सही करने का और अपनी मम्मी व प्रिया के आ जाने का हवाला देकर मुझसे जाने की विनती करने लगी.

प्रिया का नाम सुनते ही मेरा ध्यान फिर से खिड़की‌ पर चला गया. प्रिया अब खिड़की पर नहीं थी. शायद वो अब वहां से जा चुकी थी.

नेहा को छोड़ने का मेरा दिल तो नहीं कर रहा था मगर मुझे अब प्रिया को भी तो मनाना था. इसलिए मैं नेहा के कमरे से बाहर आ गया और प्रिया से मिलने के लिए सीधा ड्राईंगरूम में चला गया. मगर प्रिया वहां नहीं थी.

प्रिया को ड्राईंगरूम में ना पाकर मैंने अब वापस अपने कमरे में जाने की सोची. जैसे ही मैंने अपने कमरे का दरवाजा खोला तो देखा कि प्रिया मेरे बिस्तर पर लेटी हुई थी.

मुझे देखते ही वो बिस्तर से उठकर खड़ी हो गयी.
“हो गयी तसल्ली? कर आया अपनी मर्जी? या और भी कुछ बाकी है …” उसने गुस्से से मेरी तरफ देखते हुए कहा और वहां से जाने लगी.

प्रिया को रोकने के लिए मैंने एकदम से उसका हाथ पकड़ लिया, जिससे वो झुंझला उठी ‘ऊह … क्या है? हाथ छोड़ मेरा?’ प्रिया ने अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा.
मैं भी उसका हाथ‌ पकड़े रहा और जबरदस्ती उसके गाल पर चूम लिया, जिससे वो और भी जोर से गुस्सा हो गयी.
“अब क्या है? हाथ छोड़ मेरा … मेरे पास क्या है? जा उसी के पास …” प्रिया ने जोर से गुस्सा करते हुए कहा, मगर मैं भी उसके‌ हाथ को‌ पकड़े‌ रहा.

कुछ देर तो वो अपना हाथ छुड़ाने के लिए ऐसे ही कसमसाती रही. जब मैंने उसका हाथ नहीं छोड़ा तो पता नहीं उसको क्या सूझा, उसने अपने बदन के भार से धकेलकर मुझे बिस्तर पर गिरा लिया और खुद भी‌ मेरे साथ साथ मेरे ऊपर ही गिर गयी.

अचानक से प्रिया की इस हरकत के कारण प्रिया का हाथ मेरे हाथ से छूट गया और वो सीधा मेरे पेट पर चढ़कर बैठ गयी- ऐसा क्या है उसके पास … अं … बोल … अंअं … क्या है अंअंअं? क्या है उसके पास जो, मेरे पास नहीं है?

प्रिया ने गुस्से से मेरे सिर के बालों को पकड़कर कहा और फिर जोरों से मेरे गालों व होंठों को चूमने काटने लगी. प्रिया से ऐसी हरकत की मुझे कोई उम्मीद ही नहीं थी, वो जोरों से मेरे गालों व होंठों को चूमे जा रही थी और मुँह से!
“ऐसा क्या है उसके पास हैअंअंअं … है … अंअं …हअं … ऐसा क्या है … बोल‌अ …बोलअ … क्या है? उसके पास जो, मेरे पास नहीं … हैअंअं?”

वो कांपती हुई आवाजें निकालते हुए सिसक रही थी. शायद अभी अभी मैं नेहा के साथ जो खेल‌ खेलकर आ रहा हूँ, ये उसका असर था, प्रिया की बात ना मानकर मैं नेहा पास चला गया था. उससे वो गुस्सा तो थी, मगर उसने मेरा और नेहा खेल भी देखा था, उससे वो जोरों से उत्तेजित भी हो गयी थी. अनायास ही मेरा हाथ अब प्रिया की जांघों के जोड़ पर चला गया.

अब जैसे ही मैंने वहां हाथ लगाकर देखा तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए क्योंकि उसकी चुत के पास से उसकी पेंटी व लोवर बिल्कुल भीगे हुए थे और ये सारा कामरस प्रिया की चुत ने मेरी और नेहा की चुदाई देखने के कारण उगला था.

मैं अभी अभी दो बार स्खलित होकर आया था, इसलिए मैं इतनी जल्दी तैयार तो नहीं हो सकता था. मगर फिर भी प्रिया का साथ देने के लिए मैं उसके होंठों को चूमने लगा. तभी मेरा ध्यान दरवाजे पर चला गया जो खुला हुआ था. प्रिया को रोककर मैंने अब उसे दरवाजा बन्द करने के लिए कहा. मगर उसे होश ही कहां था, वो लगातार मुझे जोरों से चूमे चाटे जा रही थी.

मुझे चूमते चाटते हुए ही उसने अपने शर्ट को तो उतारकर फैंक ही दिया … साथ में ब्रा को भी खोलने लगी. मुझे अब दरवाजे पर किसी के होने का आभास सा हुआ, मगर मैंने जब दरवाजे की तरफ देखा तो मुझे‌ नेहा नजर आयी. शायद वो मुझे देखने‌ के लिए आई थी, मगर हमें इस हालत में देखकर दरवाजे से ही‌ लौट गयी थी.

मैंने अब प्रिया को फिर से रोककर दरवाजा बन्द करने के लिए कहा. मगर उसने मना कर‌ दिया और बोली- रहने दे … मुझे कोई परवाह नहीं है … जिसे देखना है देखने दो!
शायद प्रिया को भी पता चल गया था कि नेहा ने हमें देख लिया है, इसलिए ही उसने ये बात थोड़ा जोर से कही.

‘ओ तेरी …’ मेरा दिल अब धक्क से रह गया और मैं तुरन्त उसके चेहरे की तरफ देखने लगा. मगर वो तो अब‌ भी अपनी ब्रा को उतारने में व्यस्त थी.

मैंने भी अब सोचा कि जब ये लड़की होकर नहीं डर रही तो मुझे क्या है और वैसे भी घर‌ में नेहा ही है, जिसको पहले से ही सब पता है.‌ अब तक प्रिया ने अपनी ब्रा को उतारकर अपने दोनों सफेद कबूतरों को आजाद कर लिया था और उनकी तीखी चोंच को मेरे सीने में चुभोने लगी थी. मेरे भी मुर्दा पड़े लंड में अब जान आने लग गयी थी और आये भी क्यों नहीं? प्रिया के जैसी कमसिन नवयौवना के दूध जैसे सफेद उन्नत उभारों को देखकर तो किसी बूढ़े के लंड में भी जान आ जाए, फिर मैं तो जवान हूँ.

अपनी‌ शर्ट और ब्रा को उतारने के बाद प्रिया फिर से मुझ पर टूट पड़ी थी और अपनी चूचियों के तीखे चोंच को मेरे सीने में चुभोते हुए मेरे होंठों को जोरों से चूमने चाटने लगी.

मेरे होंठों को चूमते चाटते हुए प्रिया का एक हाथ अब अपनी सलवार को निकालने के लिए नीचे सलवार के नाड़े पर भी चला गया था. मगर काफी देर तक‌ कोशिश करने के बाद भी वो अपने नाड़े को ही खोल नहीं पाई.

शायद जल्दबाजी में सलवार के नाड़े की गांठ उलझ गयी थी या फिर मेरे ऊपर लेटे होने के कारण उससे वो नाड़ा खुल‌ नहीं रहा था. सलवार के नाड़े को खोलने के लिए कुछ देर तो वो ऐसे मेरे ऊपर लेटे लेटे ही कोशिश करती रही, मगर जब कामयाब नहीं हो सकी तो वो झुंझला उठी और झटके से मुझे छोड़कर अलग हो गयी.

मैं भी अब प्रिया की तरफ देखने लगा, जो कि अब अपने पैरों को मेरे दोनों तरफ करके घुटनों के बल खड़ी हो गयी थी और दोनों हाथों से अपनी सलवार के नाड़े को खोलने की‌ कोशिश कर रही थी. मगर‌ उससे वो अब भी नहीं खुल रहा था. नाड़े की गांठ उलझ चुकी थी, जिससे वो और भी झुंझला उठी और मेरी तरफ देखने लगी.

प्रिया की ये बेसब्री देख देख कर मुझे उस पर प्यार तो आ रहा था. मगर उसकी हरकत पर‌ मुझे अब हंसी आ गयी. जिससे प्रिया और भी जोरों से झुंझला उठी और गुस्से में उसने नाड़े को अपने दोनों हाथों से पकड़कर इतनी जोरों से खींच‌ दिया कि “टक् …” की आवाज के साथ नाड़ा ही टूट गया.

अब सलवार का नाड़ा टूटते ही वो बेजान सी होकर तुरन्त नीचे गिर गयी और उसके घुटनों में जाकर फंस गयी, जिसे प्रिया ने अब पूरा ही उतारकर नीचे फर्श पर ऐसे फेंक दिया, जैसे कि वो उसकी सबसे बड़ी दुश्मन हो.

तभी मेरी नजर उसकी पैंटी पर चली गयी, जो कि चुत के पास से पूरी भीगी हुई थी. प्रिया ने नीले रंग की पैंटी पहनी हुई थी, मगर उसकी चुत के पास से वो गीली होने के कारण अलग ही नजर आ रही थी.

मैं तो सोच रहा था कि वो अब अपनी पैंटी भी निकाल फैंकेगी … मगर तभी वो मेरी तरफ घूर घूर कर ऐसे देखने‌ लगी जैसे कि मुझे कच्चा ही खा जाएगी.

मैं अब भी उसकी तरफ देख‌कर मुस्कुरा रहा था, जिससे वो चिढ़ सी गयी और मेरे कपड़ों को उतारने के लिए उन्हें पकड़ कर जोरों से नोचने लगी.

मुझे भी अपने कपड़े फड़वाने से बेहतर उन्हें उतारना ही सही लगा. इसलिए मैंने भी अब उसका साथ दिया और अपने सारे कपड़े उतारकर बिल्कुल नंगा हो गया.

दो बहनों की चुदाई की इस मस्अब तक की इस मस्त सेक्स कहानी में आपने पढ़ा कि प्रिया ने मुझे फिर से उसके साथ सेक्स करने के लिए मजबूर कर दिया था और वो मेरे कपड़े उतारने के लिए उन्हें फाड़ने पर उतारू थी.
अब आगे …

जैसे ही मैं अपने सारे कपड़े उतारकर बिल्कुल नंगा हुआ, प्रिया की नजर मेरे मुर्झाये लंड पर चली गयी, जिससे वो सवालिया निगाहों से मेरी तरफ देखने लगी. उसकी निगाहों से ऐसा लगा जैसे वो पूछना चाह रही हो कि मेरा लंड खड़ा क्यों नहीं हो रहा है?

मैं प्रिया के दिल‌ की बात समझ‌ गया था ‘ये नाराज है तुमसे, पहले तुम‌ इसे अपने होंठों से प्यार करके मनाओ!’ मैंने शरारत से हंसते हुए ही प्रिया से कहा‌.

प्रिया अब मेरी तरफ गुस्से से देखने लगी. मगर साथ ही उसने एक हाथ से मेरे‌ लंड को भी पकड़ लिया था. जिससे मेरे लंड ने प्रिया के हाथ में ही हल्की ठुनकी सी खाई.

एक हाथ से मेरे लंड को पकड़कर कुछ देर तो वो मेरी तरफ ऐसे ही गुस्से से देखती रही. मगर फिर बगैर कुछ बोले मेरे लंड को मुँह में लेने के लिए वो उस पर झुक गयी. इससे पहले भी मैं काफी बार प्रिया को मेरा लंड मुँह में लेने‌ के लिए बोलता रहता था मगर हमेशा वो मना कर देती थी. फिर आज पता नहीं कैसे वो एक बार बोलते ही मेरे लंड को अपने मुँह में लेने के लिए तैयार हो गयी थी.

ओह … शायद ये सारा असर नेहा का था, मेरी और नेहा की चुदाई देखने के बाद एक तो प्रिया काफी उत्तेजित थी और दूसरा वो नेहा से चिढ़ भी रही थी. इसलिए शायद वो किसी भी हाल में नेहा से कम नहीं रहना चाहती थी.

मेरे लंड को मुँह में लेने‌ के लिया प्रिया अब उस पर झुकी ही थी कि तभी‌ उसे मेरे लंड पर लगे‌ हुए सफेद सफेद धब्बे दिखाई दे गए और वो कहने लगी- छीईईई … पहले इसे साफ तो करके आओ.
प्रिया ने मेरे लंड पर से हाथ हटाते हुए कहा. मैंने भी अब एक हाथ से अपने लंड को पकड़कर देखा तो मेरे चेहरे पर हल्की मुस्कान सी आ गयी क्योंकि मेरे लंड पर नेहा की चुत का रस लगा हुआ था, जोकि सूख कर अब सफेद हो गया था.

“अरे … कुछ नहीं है … तुम्हारी बहन का ही तो रस है ये …” मैंने शरारत से हंसते हुए कहा, इससे प्रिया के चेहरे पर फिर से गुस्से के भाव उभर आए.
“नहींईईई … पहले तुम इसे साफ‌ करके आओ …” प्रिया ने अब गुस्से से कहा.
“मगर क्योंओओ … देखो तो कितनी अच्छी‌ खुशबू आ रही है इससे …” मैंने जिस हाथ से अपने लंड को पकड़ा हुआ था, उसे पहले तो खुद सूंघकर देखा और फिर प्रिया के नाक की तरफ ले जाते हुए कहा.
“छीईईई …ईई … हटाओ … इसे …” प्रिया ने मेरे हाथ को झटकते हुए कहा और खुद ही अपने सूट को उठाकर मेरे लंड को साफ करने लगी.

मेरे लंड को अच्छे से साफ करने के बाद प्रिया ने एक बार अब फिर से मेरे लंड को अपने मुँह लेने की कोशिश की, मगर जैसे ही वो अपने होंठों को मेरे लंड के पास लेकर गयी, उसने मितली सी ली और अपने मुँह को‌ वहां से हटाकर मेरी तरफ देखने लगी. शायद मेरे लंड से अब भी नेहा की चुत के रस की महक आ रही थी, जो कि प्रिया को पसंद नहीं आई.

मैंने अब उससे पूछा कि क्या हुआ?” तो उसने मेरी बात का तो कोई जवाब नहीं दिया मगर उसने अब अपनी ब्रा को उठा लिया और मेरे लंड पर ढेर सारा थूक कर उसे अपनी ब्रा से साफ करने‌ लगी.

इसी तरह दो तीन बार मेरे लंड को अपने थूक से गीला कर करके उसने अपनी ब्रा से बिल्कुल साफ कर दिया. प्रिया के गर्म गर्म थूक के अहसास से मेरे लंड में भी अब हल्की उत्तेजना सी आ गयी थी. मगर ये इतनी अधिक भी नहीं थी कि लंड अपनी दम पर खड़ा हो जाए.

अपने थूक से मेरे लंड को अच्छे से साफ करने के बाद प्रिया ने अपना मुँह फिर से मेरे लंड पर झुका दिया. उसने अब पहले तो मेरे लंड पर हल्की सी जीभ लगाकर उसके स्वाद को चखा और फिर धीरे से उसे अपने मुँह में भर लिया.

उफ्फ … क्या गर्म‌ गर्म‌ अहसास था वो प्रिया के मुँह का. उसके वो नर्म‌ नर्म नाजुक होंठ और उसके गर्म गर्म गीले मुँह की‌ गर्मी … मेरे लंड से होते हुए मेरे पूरे बदन पर चढ़ने लगी थी. इससे अपने आप ही मेरे में लंड में अब हल्की हल्की चेतना सी आने लगी. प्रिया भी अब मेरे लंड को मुँह में भरकर उसे हल्का हल्का चूसने लगी थी. जिससे प्रिया के मुँह में ही मेरा लंड अब धीरे धीरे फूलने लगा.

प्रिया मेरे लंड को चूस तो रही थी … मगर उसे शायद मेरे लंड को चूसना अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकि मेरे लंड को चूसते हुए वो बार बार थूक भी रही थी. शायद अपनी उत्तेजना के वश मेरे लंड को खड़ा करने के लिए या फिर नेहा से जलन के कारण वो मेरे लंड को चूस रही थी.

मेरे लंड में अब हल्की हल्की चेतना आने लगी थी. इसलिए मेरे लंड को चूसते हुए प्रिया ने अब अपनी लचीली गर्म जीभ को भी धीरे धीरे मेरे सुपाड़े पर घुमाना शुरू कर दिया. इससे अब कुछ ही देर में मेरा लंड अकड़ कर फूल गया और मेरे सुपाड़े से प्रिया का पूरा मुँह भर गया.

प्रिया मेरे बगल में बैठकर मेरे लंड को चूस रही थी और मैं मजे से लेटा हुआ था. तभी‌ मेरी नजर प्रिया की कमर पर चली गयी. प्रिया की कमर पर एक लम्बी लाईन में बिल्कुल लाल निशान सा बना हुआ था‌‌, जो‌ छिलने‌ का निशान था.

ओह … शायद सलवार के नाड़े को‌ जोरों से खींचने के कारण उसकी कमर छिल‌ गई थी. प्रिया का इस तरह का ये बेसब्री वाला प्यार देखकर मुझे उस पर इतना प्यार उमड़ आया कि सच बता रहा हूँ उस समय मेरी आंखों में हल्की नमी सी आ गयी. मुझसे अब रहा नहीं गया, मैंने आगे बढ़कर उसकी छिलने वाली जगह को अपनी जीभ से चाट लिया.

“अ.आआ … उह्ह.” कहकर प्रिया जोरों से कराह उठी … मगर उसने कुछ कहा नहीं.

मैंने भी अब सोचा कि जब प्रिया मुझे इतना मजा दे रही है तो क्यों ना मैं भी प्रिया को मजे देने के साथ साथ खुद भी उसकी चुत के रस का स्वाद ले लूँ. प्रिया को‌ पकड़ने के लिए मैं अब थोड़ा सा उठा ही था कि तभी अपने कमरे की खिड़की पर मुझे नेहा दिखाई दे गयी. शायद उससे भी रहा नहीं गया था इसलिए वो भी अब खिड़की से मेरी और प्रिया की चुदाई देखने के लिए आ गयी थी.

मैंने अब अपना ध्यान खिड़की से हटाकर प्रिया पर लगाया और धीरे से उसकी‌ कमर में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींचने लगा. प्रिया मेरा इशारा समझ गयी थी, इसलिए उसने एक ही झटके में अपनी पेंटी को उतार फैंका और बिना कुछ कहे चुपचाप मेरे सिर के दोनों तरफ पैर करके अपने घुटनों के बल ऐसे बैठ गयी कि उसकी गीली चुत सीधा ही मेरे मुँह पर लग गयी. बिल्कुल नेहा के जैसे ही.

मैंने भी अब अपनी पूरी जीभ बाहर निकालकर उसकी चुत की गीली फांकों को चाट लिया. इससे प्रिया के पूरे बदन ने झुरझुरी सी ली और ‘ओय्य्य … ईईई. श्श्शशश … आह्ह्ह्ह …’ की एक जोर की सिसकारी भरकर अपनी दोनों जांघों के बीच मेरे सिर को दबा लिया. मगर मैं अब रूका नहीं … मैं वैसे ही धीरे धीरे प्रिया की उस रस भरी चुत को चाट चाट कर उसके रस को पीने लगा.

मेरे आनन्द की अब कोई सीमा नहीं थी क्योंकि प्रिया को अपना लंड चुसाते हुए मैं खुद भी अब मजे से उसकी रसीली चुत के रस को गटक रहा था‌. उत्तेजना के वश अब अपने आप ही मेरी कमर हरकत में आ गयी‌ और नीचे से धीरे धीरे अपनी कमर को उचका उचका कर मैंने अपने लंड को प्रिया के मु्ँह में अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.

मगर प्रिया को शायद इस तरह से मेरा ये आनन्द लेना सहन‌ नहीं हुआ. वो मुझसे गुस्सा थी, इसलिए उसने तुरन्त मेरे लंड को छोड़ दिया और मेरे लंड पर ढेर सारा थूक कर मेरे ऊपर लेट गयी.
“क्या हुआ? कितना मजा तो आ रहा था!” मैंने हैरानी से प्रिया के चेहरे की तरफ देखते हुए उससे पूछा.
प्रिया ने इस पर कुछ कहा तो नहीं, मगर एक बार मेरी तरफ गुस्से से देखा और फिर जोरों से मेरे होंठों‌ को चूसने और‌ काटने लगी.

प्रिया के इतनी जोरों से मेरे होंठों को चूसने और काटने पर मुझे दर्द होने लगा था. मगर मैंने उससे कुछ कहा नहीं क्योंकि मुझे पता था कि वो ऐसा मुझ पर अपना गुस्सा निकालने के लिए कर रही है.

वो तो मुझ पर अपना गुस्सा निकाल रही थी लेकिन मुझे उस पर बहुत ही प्यार आ रहा था. इसलिए मैंने भी उसके एक होंठ को अपने‌ मुँह में भर लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया मगर प्यार से.

प्रिया मुझ पर गुस्सा तो थी मगर वो काफी उत्तेजित भी थी, इसलिए कुछ देर मेरे होंठों को जोरों से चूसने और काटने के बाद उसने मेरे होंठों को छोड़ दिया और अपने पैर मेरी कमर के दोनों तरफ करके मेरे ऊपर बैठ गयी.

मैं अब बस मूक होकर उसकी हरकतें देखने लगा. मेरे ऊपर बैठकर प्रिया ने एक बार फिर से अब मेरी तरफ‌ देखा. इस बार उसकी आंखों में उत्तेजना के साथ साथ हल्की सी हया के भी भाव थे. तभी वो थोड़ा उठी और अपने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़कर उसे सीधा ही अपनी चुत के प्रवेशद्वार पर लगा लिया.

जैसे ही मुझे अपने लंड पर प्रिया के गर्म गर्म और गीले प्रवेशद्वार का अहसास हुआ, खुशी के मारे मेरे लंड ने तुनक कर एक झटका सा खाया और मेरा सुपाड़ा फूल कर और भी मोटा हो गया.

मेरे लंड को अपने प्रवेशद्वार पर लगाकर प्रिया अब धीरे धीरे उस पर बैठने लगी. उसकी चूत पहले ही गीली होने के कारण चिकनी हो रखी थी, इसलिए आसानी से ही मेरे सुपाड़ा प्रिया की चुत में घुस गया. सुपाड़ा घुसने के बाद प्रिया ने मेरे लंड पर से अपना हाथ हटा लिया और दोनों हाथ मेरे सीने पर रख कर धीरे धीरे मेरे लंड को अपनी चूत के अन्दर उतारते हुए उस पर बैठने लगी.

अब जैसे जैसे मेरा लंड उसकी चुत के अन्दर जा रहा था, वैसे वैसे ही प्रिया के चेहरे के भाव बदल रहे थे. शायद मजे के साथ साथ उसे हल्की पीड़ा का भी अहसास हो रहा था. मगर फिर भी वो रुकी नहीं. आधा लंड अपनी चुत में उतारने के बाद प्रिया ने अब फिर से मेरी तरफ देखा. मगर मैं अब भी मूक ही बना रहा.

प्रिया ने अपने होंठों को दांतों से भींच लिया और एकदम से मेरे लंड पर बैठ गयी, जिससे मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी चुत में उतर गया और प्रिया के मुँह से ‘आअह्ह्ह् … मर गई मम्मीईई …’ की एक जोरदार कराह फूट पड़ी.

मेरा पूरा लंड अपनी चुत में उतारने के बाद कुछ देर तो प्रिया वैसे ही रुक कर हल्के हल्के सिसकती‌ रही. फिर धीरे धीरे उसने अपनी‌ कमर को आगे पीछे हिलाना शुरू कर दिया, जिससे मेरा लंड अब प्रिया की चुत की संकरी दीवारों पर घिसने लगा.

मुझे तो अब कुछ करना ही‌ नहीं पड़ रहा था. प्रिया खुद ही अपनी चुत की दीवारें मेरे लंड पर घिस रही थी, जिससे प्रिया के साथ साथ मेरे बदन में भी अब आनन्द की लहरें उठने लगीं. प्रिया की इस अदा पर तो मैं अब फिदा ही हो गया था.

अभी तक मैंने काफी बार और काफी औरतों व लड़कियों से सम्बन्ध बनाये थे, मगर इस तरह से मेरे लंड पर बैठकर अभी तक किसी ने भी मजा नहीं दिया था. मेरा ये पहला अनुभव था, जब कोई‌ लड़की मेरे लंड पर बैठकर इस तरह से खुद मजा लेने के साथ साथ मुझे भी उतना‌ ही मजा दे रही थी. मैंने इस तरह की सेक्स पोजिशन बस सेक्स वीडियो में ही देखी थी. मगर अभी तक मेरे साथ इस तरह से किसी ने भी सम्बन्ध नहीं बनाये थे. पता नहीं प्रिया ने ये सब कहां से सीखा था.

कुछ देर तक तो मैं अब प्रिया को बस प्यार से देखता ही रहा. फिर अपने हाथ आगे बढ़ा कर मैंने भी उसकी कोमल चूचियों को पकड़ लिया. अब जैसे ही मैंने उसकी चूचियां पकड़ीं, प्रिया के मुँह से एक‌ हल्की सीत्कार सी‌ फूट पड़ी और उसकी चुत में एक तनाव सा पैदा हो गया. ऐसा लगा जैसे कि उसकी चुत की दीवारें मेरे लंड पर कस सी गयी हों.

मैंने भी अब प्रिया की दोनों चूचियों को हल्के हल्के दबाना और मसलना शुरू कर दिया. इससे प्रिया के मुँह से हल्की हल्की सिसकारियां फूटनी शुरू हो गईं और उसने अपनी कमर को‌ भी थोड़ी गति दे दी.

तभी मुझे दरवाजे पर किसी के होने का आभास सा हुआ … मगर मैंने जब दरवाजे की तरफ देखा, तो मुझे‌ कोई नजर नहीं आया. मैंने अब एक बार खिड़की‌ की तरफ देखा तो नेहा अब भी खिड़की‌ पर ही थी. मैं अब सोचने‌ लगा कि अगर नेहा खिड़की‌ पर है … तो फिर दरवाजे पर कौन आया होगा? काफी देर तक मैं दरवाजे की तरफ‌ ही देखता रहा. मगर मुझे उधर कोई भी नजर नहीं आया. मैंने भी सोचा कि हो सकता है कि ये मेरा वहम‌ हो.

मैंने अपना ध्यान दरवाजे से हटाकर प्रिया की चूचियों पर लगा दिया.

प्रिया की चूचियों को‌ जोरों मसलते हुए मैं अब उसके चेहरे की तरफ देखने लगा. मगर उसे तो होश ही नहीं था, उसने अपना मुँह ऊपर छत की तरफ किया हुआ था और मजे से ‘इईईई श्श्शशश … आआह … अहह … इईईई … इश्श्शश … आआहह …’ की जोरों से सिसकारियां भरते हुए मेरे लंड की सवारी कर रही थी.

प्रिया ने अपने दोनों हाथों से मेरी बांहों को पकड़ा हुआ था और जैसे कोई घोड़े पर बैठकर उसकी सवारी करते हुए आगे पीछे हिलता है, बिल्कुल वैसे ही प्रिया भी मेरे लंड पर बैठकर आगे पीछे हिल रही थी. इससे उसकी पूरी चुत मुझ पर घिस रही थी तो मेरा लंड भी उसकी चुत की दीवारों पर घिस रहा था. मैं भी अब मज़े से प्रिया की दोनों चूचियों को दबा दबाकर मजे लेने लगा. तो प्रिया भी अपनी कमर को हिला हिला कर मेरे लंड को अपनी चूत से चूसने लगी.

प्रिया का ये बड़ा ही मादक और मनमोहक‌ अन्दाज था. कसम से बता रहा हूँ कि प्रिया के जैसी कोई भी लड़की या औरत अभी तक मुझे नहीं मिली थी. मैं बयान नहीं कर सकता कि कुदरत के बनाये इस खेल में कितना आनन्द भरा है. ये तो उस वक़्त बस मैं समझ रहा था या फिर प्रिया.

धीरे धीरे प्रिया की कमर की हरकत अब तेज‌ होने लगी थी, उसने मेरे हाथों को छोड़ कर अब मेरे सीने‌ पर अपने हाथों को रख लिया और थोड़ा तेजी से अपनी कमर को हिलाने लगी‌. साथ ही‌ प्रिया की सिसकारियां भी अब तेज होती जा रही थीं.

मेरे भी आनन्द की कोई सीमा नहीं थी, इसलिए उत्तेजना के वश मैं अब थोड़ा सा उठ गया और प्रिया की एक चूची को अपने मुँह में भर लिया, जिससे प्रिया और भी जोरों से चहक उठी. उसने दोनों हाथों से मुझे अपनी बांहों में भरकर पूरा ही ऊपर खींच लिया, जिससे मैं अब उठकर बिस्तर पर बैठा सा हो गया‌.

प्रिया की चूची को चूसते हुए मैंने भी अब अपने दोनों हाथों को पीछे ले जाकर उसके कूल्हों को पकड़ लिया और उसे अपनी ओर खींच लिया. जिससे प्रिया मेरे लंड को अपनी चुत में घुसाये घुसाये ही मेरी गोद में बैठ गयी और हम दोनों के नंगे बदन एक दूसरे के साथ बिल्कुल चिपक गए.

प्रिया की कमर की हरकत अब भी रूकी‌ नहीं थी. उसने अब अपनी बांहें मेरे गले में डाल ली थीं और जोरों से सिसकारियां भरते हुए अब भी लगातार अपनी कमर को हिला रही थी. प्रिया की चूची का रस पान करते हुए मैंने भी अब अपनी तरफ से धक्के लगाने शुरू कर दिए, जिससे प्रिया की सिसकारियां अब किलकारियों में बदल गईं और उसकी‌ कमर‌ की‌ हरकत और भी तेज हो गयी.

प्रिया ने अपनी बांहों‌ को मेरे गले में डाला हुआ था, जिनके सहारे वो अब जोरों से ‘ईईई श्श्शश … आआह …’ की किलकारियां सी मारते हुए जोरों से मेरी गोद में ही मे‌रे लंड पर फुदक‌ने लगी थी.

मेरे लंड पर उछलते हुए प्रिया ने अब एक‌ हाथ से मेरे सिर के बालों को पकड़ कर मेरी गर्दन को ऊपर उठा लिया. जिससे मेरे मुँह से उसकी चूची छूट गयी. एक बार तो मुझे ये बुरा लगा था, मगर तभी प्रिया ने अपने होंठों को मेरे होंठों पर लगा दिया.

मैं अब फिर से खुश हो गया और प्रिया के होंठों को अपने मुँह में भरकर उन्हें जोरों से चूसने लगा.

मेरे हाथ अब भी प्रिया के कूल्हों पर ही थे. इसलिए उत्तेजना के वश मैंने प्रिया के कूल्हों को अब जोरों से पकड़ लिया और नीचे से धक्के लगाते हुए उसके कूल्हों को‌ पकड़कर उसे जल्दी जल्दी आगे पीछे करने‌ लगा. अब तो मानो‌ प्रिया पर कहर बरस पड़ा और वो और भी जोरों से‌ कूदने‌ लगी.‌ क्योंकि मेरा लंड प्रिया की चुत में अन्दर बाहर होने के साथ प्रिया की चुत के पास की चमड़ी पर भी लंड की रगड़ लगने लगी थी.‌ जिससे प्रिया के मुँह से अदभुत सी आवाजें निकलना शुरू हो गईं.

हम दोनों की ही सांसें अब फूल गयी थीं और हम दोनों पसीने से बदन नहा गए थे. मैं अभी अभी दो बार स्खलित होकर आया था, इसलिए मेरी मंजिल अभी दूर थी … मगर शायद प्रिया अब अपने चरमोत्कर्ष के करीब पहुंच गयी‌ थी. उसका बदन अब जलने सा लगा था और उसकी चुत में भी काफी संकुचन सा हो रहा था. ऐसा लगा रहा था जैसे कि प्रिया की चुत अब अपने आप ही मेरे लंड को अन्दर खींच रही हो.

मैं नहीं चाहता था कि इतनी जल्दी प्रिया स्खलित हो जाए क्योंकि मुझे पता था कि मेरी मंजिल अभी दूर है और स्खलन के बाद प्रिया ढीली पड़ जाएगी इसलिए मैंने अब धक्के लगाने थोड़ा धीरे कर दिए.

प्रिया ने अब मेरे मुँह से अपने होंठों को छुड़वा लिया और मेरी तरफ‌ घूर घूर कर ऐसे देखने लगी‌ जैसे कि कोई भूखी शेरनी के मुँह में हड्डी स्लो स्पीड से जाने लगी हो.
“ज्यादा चालाक बन रहा है क्या?” प्रिया ने मेरी तरफ घूर घूर कर देखते हुए ही कहा. उसकी आंखें उत्तेजना के ज्वार के कारण जल सी रही थीं और अब भी अपनी कमर को जोरों से उचका रही‌ थी.

प्रिया काफी देर से उत्तेजना के कारण जल रही थी … क्योंकि जब से उसने मेरी और नेहा की चुदाई देखी थी. तब से ही वो उत्तेजित थी. इसलिए उसका शायद अब खुद पर ही बस नहीं रहा था.

मजा आ रहा है अब तक इस हॉट कहानी में आपने पढ़ा कि प्रिया इस वक्त बहुत ही चुदासी हुई पड़ी थी. उसकी चुदाई को मैंने स्लो कर दिया था. जिससे वो मुझे घूरने लगी थी.
अब आगे:

प्रिया की हालत पर मुझे भी अब तरस आ गया, इसलिए मैंने अब फिर तेजी से धक्के लगाने शुरू कर दिए‌.‌ इससे प्रिया ने मुझे अब कुछ कहा तो‌ नहीं मगर उसने फिर से मेरे होंठों से अपने होंठों को जोड़ दिया.

इस बार उसने मेरे दोनों होंठों को अपने मुँह में भर लिया और उन्हें जोरों से चूसते हुए काटने लगी. मेरे होंठों को जोरों से चूसते हुए प्रिया अब खुद भी अपनी कमर को अपनी पूरी तेजी से हिलाने लगी थी. मैं भी अब तेजी से प्रिया की चुत को अपने लंड पर घिसने लगा था.

बस कुछ देर ही हमने ऐसे ही तेजी से धक्के लगाये थे कि अचानक से प्रिया मुझसे किसी बेल‌ की तरह लिपट गयी और उसका बदन अकड़ सा गया. उसकी चुत की दीवारें मेरे लंड पर कस गईं और उसने मुँह से ‘उऊऊऊ … अह्हहह … ओहहह …’ की आवाजें निकालते हुए रह रह कर अपनी चुत के अन्दर ही अन्दर मेरे लंड को प्रेमरस से नहलाना शुरू कर दिया.

मैं सच बता रहा हूँ, उस दिन प्रिया की चुत ने इतना प्रेमरस उगला था कि मेरा लंड उसकी चुत‌ में घुसा हुआ होने के बावजूद भी किनारों से उसकी चुत ने प्रेमरस की इतनी पिचकारियां मारी थीं कि उससे मेरे पेट के साथ साथ मेरी दोनों जांघें भी भीग गयी थीं.

प्रिया का स्खलन हो गया था, मगर मैं अब भी प्यासा ही था. इसलिए मैं अब जल्दी से प्रिया को अपनी गोद में लिए लिए ही आगे की तरफ गिर गया. इससे प्रिया अब मेरे नीचे आ गयी और मैं उसके ऊपर चढ़ गया. प्रिया के ऊपर आकर मैंने अब तेजी से धक्के लगाने शुरू कर दिए, जिससे मेरा पूरा लंड अब प्रिया की नन्ही सी चुत में अन्दर बाहर होने लगा.

प्रिया अब भी बेसुध सी ही थी, मगर तेजी से मेरा लंड अब उसकी नन्ही चुत की दीवारों को घिसने लगा, तो वो अब कराहने लगी. हालांकि प्रिया की चुत से निकले प्रेमरस से उसकी चुत की दीवारें अब और भी चिकनी हो गयी थीं, मगर तब भी प्रिया को शायद तकलीफ हो रही थी. इधर मुझे अब होश ही कहां था. मैं अपनी ही धुन में लगातार धक्के लगाता रहा, जिससे प्रिया अब जोरों से कराहने लगी- आआ … अहह्हह … ओय्य … बस्स्स … अब बहुत जल रहा है …
प्रिया ने मेरी कमर को पकड़कर कराहते हुए कहा.

‘बस्स मेरी जान … हो गया अब …’ कहते हुए मैंने प्रिया को सांत्वना देने के लिए उसके गालों पर एक बार प्यार से चूमते हुए कहा और फिर से तेजी से धक्के लगाने लगा.
प्रिया अब भी कराहती रही, मेरे हरेक धक्के के साथ वो जोरों से ‘आआआ … अह्हह … मम्मीईई … मरीईईई … आआआह … इह्हह … ओय्य्य …’ कर रही थी, मगर फिर भी मैं धक्के लगाता रहा … क्योंकि मैं भी अब चरमोत्कर्ष के करीब ही था.

प्रिया ने कराहते हुए एक बार फिर से मुझे अब रोकने की कोशिश की, मगर मैं अब रूका नहीं और अपनी पूरी तेजी और ताकत से लंड से धक्के लगाता रहा. फिर कुछ ही देर में मैं भी चरम पर पहुंच गया, मैंने प्रिया को अपनी बांहों में जोरों से भींच लिया और चार पांच किस्तों में उसकी चुत को अपने वीर्य से पूरा भरकर उसके ऊपर ही निढाल होकर गिर गया.

कुछ देर तक तो मैं ऐसे ही प्रिया के ऊपर लेटा रहा मगर फिर प्रिया बोल उठी- चलो अब उठो … बहुत हो गया हां … मम्मी भी आने वाली होंगी!
प्रिया ने प्यार से मेरे गालों को चूमते हुए कहा.

“नहीं थोड़ी देर और लेटी रहो ना!” मैंने प्रिया पर लेटे लेटे ही कहा‌, मगर प्रिया ने धकेलकर मुझे अपने ऊपर से उतार दिया और उठकर अपने कपड़े पहनने लगी.

अपने कपड़े पहनने‌ के‌ बाद प्रिया ने मुझे भी अब कपड़े‌ पहनने के‌ लिए कहने लगी लेकिन‌ थकान के कारण मेरा‌ तो उठने का दिल‌ ही नहीं कर रहा था.

“मैं जा रही हूँ … मम्मी आने वाली होंगी, इसलिए तुम‌ भी‌ अब‌ अपने‌ कपड़े‌ पहन‌ लो.” प्रिया ने अब जबरदस्ती मुझे खींचकर उठाते हुए कहा.
मेरा उठने का दिल‌ तो नहीं कर रहा था मगर सुलेखा भाभी के डर के कारण मैं भी अब उठकर अपने‌ कपड़े पहनने‌ लगा‌ और प्रिया‌ कमरे से बाहर चली गयी.

मैं अभी‌ अपने‌ कपड़े पहन‌ ही रहा था कि तभी मुझे आवाज आई ‘अरे … मम्मी आप‌ कब आईं?’ बाहर से ही प्रिया की घबराई हुई आवाज सुनाई दी.
शायद सुलेखा‌ भाभी आ गयी थीं. डर के मारे मैं अब जल्दी जल्दी अपने‌ कपड़े‌ पहनने‌ लगा.

मगर तभी मेरे दिमाग में आया कि उस समय दरवाजे पर जो आया था, कहीं वो सुलेखा भाभी तो नहीं थीं?
नहीं … नहीं … सुलेखा भाभी कैसे हो सकती हैं? अगर वो सुलेखा भाभी होतीं, तो अभी तक‌ घर में हंगामा नहीं हो जाना था. मुझे अब डर लगने लगा था इसलिए कपड़े पहनने के बाद मैं सुलेखा भाभी की व प्रिया की बातें सुनने के लिए दरवाजे के पास जाकर खड़ा हो गया. मगर बाहर मुझे सब‌ कुछ सामान्य ही लगा.

मैंने भी अब सोचा कि शायद वो मेरा वहम था, इसलिए कुछ देर बाहर की बातें सुनने के बाद मैं वापस अपने बिस्तर पर आकर लेट गया. नेहा और प्रिया की चुदाई से मैं काफी थक गया था, इसलिए पता नहीं, कब मुझे नींद आ गयी.

थकावट के कारण मुझे इतनी गहरी नींद लगी कि पता ही नहीं चला, कब रात हो गयी. रात में जब मुझे अपने सीने पर भार सा महसूस हुआ तो मेरी नींद खुली. मैंने आंखें खोलकर देखा तो नेहा मेरे ऊपर लेटी हुई थी और गालों‌ को चूम‌ रही थी. मैंने अब घड़ी में देखा तो उस समय रात के ग्यारह बज रहे थे.

मैंने रात का खाना भी नहीं खाया था और शाम‌ से सो ही रहा था. मैंने जब नेहा से पूछा कि मुझे उठाया क्यों नहीं तो उसने बताया कि वो प्रिया ने मम्मी को बोल‌ ये दिया था कि तुम्हारी तबियत खराब है इसलिए!

इतना कहकर नेहा अब फिर से मेरे गालों को चूमने लगी. नेहा ने भी खिड़की से मेरी और प्रिया‌ की चुदाई देख ली थी, इसलिए शायद वो तब से ही उत्तेजित थी.

मैंने भी अब नेहा की एक अच्छी सी चुदाई करके उसका साथ दिया. मगर नेहा की चुदाई करते समय बार बार मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे कि खिड़की से कोई हमें देख रहा हो … बाहर अन्धेरा था इसलिए कोई नजर तो नहीं‌ आया था मगर काफी बार मुझे किसी‌ के‌ होने‌ की आहट हुई थी.

खैर चुदाई के बाद नेहा तो वापस अपने कमरे में चली गयी. मगर उसके कुछ ही देर बाद ही प्रिया मेरे कमरे में आ गयी. अब प्रिया के साथ भी मेरा एक अच्छा खासा चुदाई का दौर चला. मगर प्रिया की चुदाई करते समय भी मुझे ऐसा लगता रहा, जैसे कि अभी भी कोई हमें खिड़की से देख रहा है.

नेहा और प्रिया की चुदाई करते करते मुझे रात के तीन बज गए थे और मैं काफी थक‌ भी गया था. इसलिए बिस्तर पर गिरते ही मुझे अब नींद आ गयी.

अगले दिन एक तो इतवार की छुट्टी थी और दूसरा नेहा व प्रिया के कारण मैं रात भर ठीक से सोया भी नहीं था, इसलिए अगले दिन मैं काफी देर तक सोता रहा‌.

बारह बजे के करीब जब मेरी नींद खुली और जब तक मैं तैयार होकर अपने कमरे से बाहर आया तो दोपहर के खाने का समय हो गया था.

नेहा, प्रिया और सुलेखा भाभी साथ में ही खाना खा रही थीं, इसलिए मैं भी अब उनके साथ ही खाना खाने के लिए बैठ गया.
“तबीयत कैसी है अब तुम्हारी?” सुलेखा भाभी ने मुझे घूरकर देखते हुए कहा.

मैंने सोचा कि मैं देर तक सोता रहा था, इसलिए सुलेखा भाभी ऐसा पूछ रही हैं.
“जी … अब बिल्कुल ठीक है.” मैंने हंसते हुए बिल्कुल सामान्य सा ही जवाब दिया‌‌.
“अरे … मम्मी ठीक‌ क्यों नहीं होगा? कल से ही मैं और नेहा दीदी इसे दवाई दे रहे हैं.” प्रिया ने अब शरारत से मेरी तरफ देखते हुए कहा, जिससे मुझे भी हंसी आ गयी और मैं नेहा की तरफ देखने लगा.

नेहा भी मेरी तरफ देख रही थी. उसे ये तो पता चल गया था कि प्रिया ने बातों ही बातों में हमारे सम्बन्धों पर ताना मारा था. मगर उसे ‘दवाई’ के बारे में कुछ समझ नहीं आया था. इसलिए वो गुस्से से मेरी तरफ देखने लगी.

मगर तभी …
“ठीक है … ठीक है … पता है मुझे!” सुलेखा भाभी ने अब गुस्से से प्रिया की तरफ देखते हुए कहा, जिससे प्रिया सहम सी गयी और मेरी तरफ देखने लगी.

मुझे भी अब ये कुछ अजीब सा लगा था. इसलिए मैं अब सुलेखा भाभी की तरफ देखने लगा. वो अब फिर से मेरी तरफ घूर घूर कर देख रही थीं.
“दवाई की नहीं, इसे अब डॉक्टर की जरूरत है!” सुलेखा भाभी ने अब फिर से मेरी तरफ घूर कर देखते हुए कहा और खाना खाने लगीं. जिससे मुझे अब थोड़ा डर सा लगने लगा और मैं चुपचाप खाना खाने लगा.

अब किसी ने कोई बात नहीं की, सब चुपचाप‌ अपना अपना खाना खाने लगे. मगर जब तक हमने खाना खाया, तब तक सुलेखा भाभी ऐसे ही मुझे घूर घूर कर देखती रहीं. सुलेखा भाभी के ऐसे देखने से मुझे अब डर सा लगने लगा था.

खैर खाना खाने के बाद मैं अब अपने कमरे में आ गया और सुलेखा भाभी के बारे में सोचने लगा. मुझे अब शक सा होने लगा था कि कहीं सुलेखा भाभी को हमारे बारे पता तो नहीं चल गया, क्योंकि कल शाम से ही सुलेखा भाभी का व्यवहार और बातचीत मुझे कुछ अजीब सी लग रही थी. मैं जब भी उनके सामने जाता था, तो वो मुझे घूर घूर कर और कुछ अजीब सी ही नजरों से देखने‌ लगती थीं.

अगर सुलेखा भाभी को सब पता चल ही गया है तो फिर अभी तक वो मुझसे, या फिर नेहा व प्रिया से कुछ कह क्यों नहीं रही थीं. कहीं वो किशोर भैया के आने का इन्तजार तो नहीं कर रहीं क्योंकि आज सुबह ही किशोर भैया ऑफिस के किसी काम से दो दिनों के लिए शहर से बाहर चले गए थे.

शायद सुलेखा भाभी किशोर भैया के ही आने का इन्तजार कर रही हैं, इसलिए ही वो मुझे ज्यादा कुछ कह नहीं रही थीं. अगर सही में सुलेखा भाभी को हमारे बारे में पता चल गया है, तो कल किशोर भैया आने के बाद मेरी पिटाई होना अब तय ही था.

मैं ये सब सोच ही रहा था कि तभी सुलेखा भाभी मेरे कमरे में आ गईं.

“ये जो रोज रोज तुम्हारी तबियत खराब हो रही है … ये ऐसे नहीं ठीक होने वाली, तुम्हें अब डॉक्टर की जरूरत है.” सुलेखा भाभी ने मेरी तरफ घूरकर देखते हुए गुस्से से कहा.
“ज …ज जी …” डर के कारण मेरे मुँह से बस अब इतना ही निकला था कि तब तक सुलेखा भाभी मेरे बिस्तर के पास आ गईं.
“तुम्हारी तबियत बार बार क्यों खराब हो रही है और नेहा व प्रिया तुम्हें कौन सी दवाई दे रही हैं … मुझे ये सब पता है … कल‌ से तुम‌ तीनों का ये खेल देख रही हूँ मैं!” सुलेखा भाभी ने गुस्से से मेरी तरफ‌ देखते हुए कहा और वापस मुड़कर जाने‌ लगीं.

डर के कारण मेरा गला अब सूख गया था और मुझे अब अपनी पिटाई होना तय ही लगने लगा था. मेरी सोच ने मेरी बुद्धि खराब कर दी थी. पिटाई तो ठीक है, मगर मुझे जब यहां से निकाल देंगे तो मैं अपने घर पर क्या जवाब दूँगा? अब ये सोच कर तो मैं अन्दर तक‌ ही हिल सा गया.

“अब क्या करूँ? क्या ना करूँ?” ये सोच सोचकर मेरा दिमाग खराब हो रहा था कि तभी मेरे दिमाग आया.
“अगर सुलेखा भाभी को सब पता चल ही गया है और मेरी पिटाई होना तय ही है, तो क्यों ना मैं सुलेखा भाभी को ही पटाने की एक आखिरी कोशिश कर लूँ?”

वैसे भी सुलेखा भाभी के साथ ऐसा कुछ करने के विचार तो मेरे दिल में तब से ही थे, जबसे मैं यहां आया था‌ क्योंकि मेरे साथ सुलेखा भाभी का व्यवहार की कुछ ऐसा था. उनका मुझसे वो खुलकर बातें करना, हंसी मजाक करना … और बातों बातों में मुझे छेड़ना कुछ अलग सा ही था. वैसे भी देखने में सुलेखा भाभी बहुत खूबसूरत हैं.

जब इस दिशा में सोचना शुरू किया तो दिमाग आगे सोचता ही चला गया. किशोर भैया और सुलेखा भाभी की उम्र में काफी अन्तर है‌ और जब उनकी उम्र में इतना इतना अन्तर है, तो उनके रिश्तों में भी कुछ ना कुछ कमी तो रहती ही होगी.

मैं काफी बार सोचता रहता था कि क्यों ना मैं सुलेखा भाभी और किशोर भैया की उम्र के इस अन्तर के तार को छेड़ कर सुलेखा भाभी के साथ अपने प्यार की पींग बढ़ाने की कोशिश कर ली‌ जाए. मगर प्रिया और नेहा में उलझे रहने के कारण कभी कोशिश करने का समय ही नहीं मिल पाया था.

अब वैसे भी मेरी पिटाई तो होना तय ही है. अगर कुछ गड़बड़ भी हो जाएगी तो अब इससे ज्यादा कुछ फर्क‌ नहीं पड़ने वाला और अगर … अगर मैं कामयाब हो जाता हूँ तोओओ … एक चूत और मेरे लंड के नाम हो जाएगी. लोगों की तो दो उंगलियां घी में होती हैं मगर मेरी तो तीन हो जाएंगी … प्रिया, नेहा और सुलेखा‌ भाभी!

सुलेखा भाभी अभी दरवाजे पर ही पहुंची‌ थीं कि अब ये बात मेरे दिमाग में आते ही मैंने बिजली की सी फुर्ती से उठकर सुलेखा भाभी को दरवाजे पर ही पकड़ लिया.

अचानक हमले से सुलेखा भाभी अब बुरी तरह घबरा गईं- य ये ये … त त तुम्म्म … क्क्या कर रहे होओओ? छ छछोड़ मुझे … उउऊ ऊह्ह्ह …
सुलेखा भाभी ने मेरी‌ बांहों में कसमसाते हुए कहा.
“कुछ‌ नहींई … आप ही तो कह रही हो कि नेहा और प्रिया की दवाई से मेरा कुछ नहीं होने वाला, मुझे अब डॉक्टर की‌ जरूरत है इसलिए अब डॉक्टर से दवाई लेने की कोशिश कर रहा हूँ.” मैंने सुलेखा भाभी को अपनी बांहों में भरकर जोरों से भींचते हुए कहा.

“आने दो कल तुम्हारे भैया को, अब वो ही खबर लेंगे तुम्हारी?” सुलेखा भाभी ने अपने आपको छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा.
“आपको जब कल से पता था, तो आपने कल ही भैया को क्यों नहीं बता दिया, कल तो वो घर पर ही थे? मगर कल तो आप भी खिड़की से हमें देख देख कर मजा ले रही थीं.” मैंने सुलेखा भाभी की आंखों में देखते हुए कहा.

एक पल के लिए सुलेखा भाभी ने अब मेरी आंखों में देखा और फिर अपना चेहरा घुमा लिया. उनका पूरा बदन अब जोरों से कांपने लगा था.

मुझे नहीं पता था कि कल जो मुझे खिड़की से किसी के देखने का वहम सा हुआ था, वो सुलेखा भाभी ही थीं. मैंने तो ये अन्धेर में ऐसे ही तीर चलाया था मगर वो सही निशाने पर लगा था. क्योंकि मैंने सुलेखा भाभी की मनोदशा भांप ली थी. मैंने आगे बढ़कर उनके चेहरे को एक बार फ़िर अपने हाथों में लेकर अपनी तरफ घुमाया और एकटक देखते हुए उनके जवाब का इंतज़ार करने लगा.

उनका चेहरा अब टमाटर की तरह लाल हो गया था और होंठ थरथराने से लगे थे. आंखें अब भी नीचे थीं और एक अजीब सा भाव उनके चेहरे पर उभर आया था, जैसे कि उनकी चोरी पकड़ी गई हो.
बड़ा ही मनोरम दृश्य था वो, लाल साड़ी में लिपटी लाल लाल गालों से घिरा वो खूबसूरत सा चेहरा … जी कर रहा था कि उनके पूरे चेहरे को ही चूम-चाट लूँ. मगर मेरे दिल में अभी भी एक डर सा बना हुआ था.

“छोड़ो … छोड़ो मुझे … नहीं तो मैं शोर मचाकर सबको बुला लूँगी.” सुलेखा भाभी ने अब कसमसाते हुए कहा. लेकिन मैंने उन्हें कस कर पकड़े रखा, मैंने भी सोच लिया था कि अब जो होगा सो देखा जाएगा.

मैं और सुलेखा भाभी अब एक दूसरे पर अपना अपना जोर आजमा रहे थे. मैंने उन्हें जोर से जकड़ा हुआ था और वो अपने आप को छुड़ाने का प्रयास कvर रही थीं. मगर इस कसमसाहट में उनकी चूचियां बार बार मेरे सीने से रगड़ कर मेरे अन्दर के शैतान को और भी भड़का रही थीं. सुलेखा‌ भाभी की सांसें धीरे धीरे अब गर्म और तेज़ होती जा रही थीं. मैं समझ नहीं पा रहा था कि अब आगे क्या करना चाहिए.

मगर तभी सुलेखा भाभी ने ही हथियार डाल दिए और कहने लगीं- उफ्फ … महेश, जाने दे मुझे … नेहा और प्रिया यहीं पर हैं.
सुलेखा भाभी ने अपने चेहरे को घुमाकर बाहर की तरफ देखते हुए कहा.

मेरे लिए तो सुलेखा भाभी का बस इतना कहना ही काफी था. मुझे मेरा सिग्नल मिल गया था, इसलिए अगले ही पल मैंने सीधा सुलेखा भाभी के होंठों से अपने होंठों को जोड़ दिया … और जब तक वो कुछ समझतीं, तब मैंने उनके होंठों को अपने मुँह में भरकर जोरों से चूसना शुरू कर दिया.

“उउऊ ऊह्ह्ह … हुहुहुँ … ऊऊउउ …” ये कहकर सुलेखा भाभी अब जोरों से कसमसाने‌ लगीं और अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़कर अपने होंठों से अलग कर दिया.
“उफ्फ् … समझा कर ना, नेहा और प्रिया यहीं पर हैं, अगर गलती से कोई बाहर आ गयी तोओ …” सुलेखा भाभी ने अपनी अनियंत्रित साँसों को इकठ्ठा करते हुए कहा.
“आ जाने दो … मैं नहीं डरता उनसे …” मैंने सुलेखा भाभी की नशीली आंखों में देखकर उनके मुलायम गाल को चूमते हुए कहा.
‘हांआ … हांआआ … तुम्हें डर क्यों लगेगा? वे दोनों तुम्हें दवाई जो दे रही हैं … तुम्हें तो डर नहीं, मगर मुझे तो अपनी बदनामी का डर है …” सुलेखा भाभी ने अब थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए कहा और मेरे चेहरे को अपने से दूर हटा दिया.
“आपको डर है तो ये लो.” मैंने दरवाजे को बन्द करके अन्दर से कुण्डी लगा ली और‌ सुलेखा भाभी को खींचकर बिस्तर की तरफ लाने लगा.
“ये ये … त् तुम्म्म क्क्या कर रहे हो … छ छछोड़ मुझे … उउऊ ऊह्ह्ह …” सुलेखा भाभी ने मुझसे छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा लेकिन मैं अब कहां छोड़ने वाला था.

सुलेखा भाभी को अपनी बांहों में पकड़े पकड़े ही मैं उन्हें बिस्तर के पास ले आया और कहा- बताया ना कि डॉक्टर की दवाई लेने की कोशिश कर रहा हूँ!
मैंने सुलेखा भाभी के गालों को‌ चूमते हुए कहा जिससे उनके गाल तो क्या अब तो पूरा का पूरा चेहरा ही शर्म से सिन्दूरी सा हो गया.अब तक की इस मस्ती भरी सेक्स कहानी में आपने पढ़ा था कि मैंने सुलेखा भाभी के गालों को‌ चूमते हुए उन्हें अपनी बांहों में कस लिया था … जिससे उनके गाल तो क्या अब तो पूरा का पूरा चेहरा ही शर्म से सिन्दूरी सा हो गया.
अब आगे …

“आह … ये क्या कर रहा है? जाने दो मुझे … अभी मुझे ढेर सारा काम है घर में … प्लीज जाने दो अभी … फिर कभी?” सुलेखा भाभी ने कसमसाते हुए कहा और मेरे बांहों से निकलने का प्रयास करने लगीं. मगर मैंने उन्हें बांहों में लेकर बिस्तर पर गिरा लिया और अपने शरीर के भार से दबाकर फिर से उनके नर्म नर्म गालों पर चुम्बनों की‌ बौछार सी‌ कर दी.

मेरे चुम्बनों से बचने‌ के लिए सुलेखा भाभी अब बिस्तर पर पड़े पड़े ही घूम‌ कर उलटी हो गईं. मेरे लिए ये तो और भी अच्छा हो गया था, क्योंकि सुलेखा भाभी का ब्लाउज पीछे से काफी खुला हुआ था, जिससे गर्दन के नीचे से उनकी आधी से ज्यादा नंगी पीठ अब मेरे सामने थी.

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