ननद और देवर ने भाभी को सेक्स स्लेव बनाया
जल्द ही शुरू होने वाली कहानी के पात्रों का परिचय :
[1] अभिषेक 27 साल का है. 5 फिट 6 इंच लम्बा सांवले रंग का और दिखने में औसत है लेकिन कम्पटीशन में पास होकर क्लास वन सरकारी अफसर की पोस्ट पर है और उसे शहर में रहने के लिए बँगला भी मिला हुआ है. अभी तक उसकी शादी नहीं हुई है लेकिन शादी की बात कई जगह चल रही है
[2] अभिषेक की छोटी बहन शिवानी 25 साल की है. 5 फिट 3 इंच लम्बी शिवानी देखने में सुन्दर है -उसका रंग गोरा और फिगर देखने में सेक्सी है. इसकी शादी दो साल पहले हुई थी लेकिन पति ने इसे तलाक इसलिए दे दिया था क्योंकि यह लेस्बियन थी और मर्दों के साथ सेक्स में इसे कोई दिलचस्पी नहीं थी. यह भी शहर के एक बड़े पब्लिक स्कूल में अंग्रेजी की टीचर है और अपने बड़े भाई अभिषेक के साथ ही उसके बंगले पर रहती है.
[3] अभिषेक और शिवानी का छोटा भाई विनीत 23 साल का है और अभी शहर में ही अभिषेक और शिवानी के साथ रहकर बी ए फाइनल ईयर में पढाई कर रहा है. विनीत 5 फिट 7 इंच लम्बा,देखने में गोरा और ठीक ठाक लगता है
[4] अभिषेक,शिवानी और विनीत के माता पिता (शंकर सिंह चौहान और उनकी पत्नी आशा) शहर से 60 किलोमीटर दूर एक दूर दराज़ के गाँव में अपने पुश्तैनी मकान में रहते हैं और गाँव में ही जमींदार हैं. माता पिता बच्चों के पास शहर नहीं आना चाहते हैं और बच्चे शहर छोड़कर गाँव में नहीं रहना चाहते हैं. इसलिए अभिषेक समेत उनके तीनों बच्चे शहर में रह रहे हैं और वे दोनों खुद गाँव में रह रहे हैं.
[5] किन्ही कारणों से (जिनका विस्तार से जिक्र कहानी में किया जाएगा )अभिषेक की शादी गाँव की एक भोली भाली, सीधी सादी और बिलकुल अनपढ़ लड़की से जब होगी तो इस कहानी में एक नया किरदार और जुड़ जाएगा और सारी कहानी इसी किरदार के इर्द गिर्द घूमती रहेगी.
PART-1
अभिषेक अपने दफ्तर में बैठा हुआ था. अभिषेक जिस केबिन में बैठता था, उसी केबिन में एक और अफसर राहुल भी बैठता था. दोनों एक साथ ही बैठते थे, इसलिए दोनों में काफी गहरी दोस्ती भी हो गयी थी. खाली वक्त में दोनों आपस में इधर उधर की बातें भी करते थे.
राहुल की शादी हो चुकी थी लेकिन अभिषेक की शादी अभी तक नहीं हुई थी
दोनों ने एक साथ लंच किया और उसके बाद दोनों रोज की तरह इधर उधर की बातों में लग गए
राहुल : यार तेरी शादी का क्या हुआ ? कब तक ऐसे ही काम चलाता रहेगा ?
अभिषेक : कुछ समझ नहीं आ रहा है. मम्मी पापा चाहते हैं कि मैं गाँव की ही किसी अनपढ़,सीधी सादी और घरेलू टाइप संस्कारी लड़की से शादी कर लूँ लेकिन मेरा मन नहीं है
राहुल : तेरा क्या मन है ?
अभिषेक : मैं तो यह चाहता हूँ कि मेरी शादी किसी ऐसी लड़की से हो जो मेरी तरह पढ़ी लिखी हो और जिसे हाई सोसायटी में उठने बैठने का सलीका हो
राहुल : भाई देख ले. तेरी मर्ज़ी है. हर चीज़ के अपने फायदे नुकसान होते हैं. गाँव की सीधी सादी भोली भाली घरेलू और संस्कारी लड़की से जितना मज़ा तू ले सकता है, वह शहर की पढ़ी लिखी हाई सोसायटी के सलीके वाली लड़की से तो कभी नहीं मिलने वाला है . अब तू खुद फैसला कर ले कि तुझे क्या चाहिए
अभिषेक : क्या बात कर रहा है भाई ? साफ़ साफ़ बता तेरी बात का क्या मतलब है ?
राहुल : मेरी बात का मतलब अगर जानना है तो किसी दिन मेरे घर आकर मेरी वाइफ को देख ले. तुझे सब समझ आ जायेगा. मैं भी उसे अपने गाँव से ही लेकर आया हूँ और वह भी एकदम सीधी सादी भोली भाली, घरेलू टाइप वाली संस्कारी वाइफ है जिसके लिए उसका पति ही उसका परमेश्वर होता है.
अभिषेक को राहुल की बात अब कुछ कुछ समझ में आने लगी थी लेकिन फिर भी वह राहुल से पूछता है : क्या शहर की पढ़ी लिखी लड़की से मज़ा नहीं लिया जा सकता है ?
राहुल : देख साफ़ बात यह है कि गाँव की सीधी सादी, भोली भाली ,घरेलू टाइप संस्कारी लड़की को अगर कुछ शब्दों में परिभाषित किया जाए तो वह एक “सेक्स स्लेव” की तरह होती है जबकि जिस तरह की लड़की तुझे पसंद है वह तुझे ही “जोरू का गुलाम” बनाकर रखेगी. अब फैसला तुझे करना है
अभिषेक को अब राहुल की बात काफी हद तक समझ में आ गयी थी.
अभिषेक दफ्तर से घर आ गया था और रात तो अपने बिस्तर पर लेटे हुई भी वह राहुल की कही गयी बातों के बारे में सोच रहा था
अभिषेक जितना राहुल की बातों के बारे में सोचता, उतना ही उसका लण्ड कड़क होता जा रहा था. उसे भी यह लग रहा था कि गाँव की लड़की को अपने कंट्रोल में करना बेहद आसान है जबकि शहर की लड़की को कंट्रोल में करके रखना लगभग नामुमकिन जैसा काम है
अगले दिन दफ्तर में राहुल ने फिर अभिषेक से पूछ लिया : तो कल मेरी बातों के बारे में तूने क्या सोचा है
अभिषेक : देख यार बात तो तेरी ही ठीक लग रही है. गाँव की सीधी सादी, भोली भाली, घरेलू टाइप वाली संस्कारी और सुन्दर लड़की ही अब मैं भी चाहता हूँ. रहा उसे हाई सोसायटी में उठने बैठने का सलीका सिखाने का, वह काम मैं अपनी बहन शिवानी पर छोड़ दूंगा. वह इस मामले में काफी एक्सपर्ट है
राहुल : तो फिर देर किस बात की है -जल्द ही गाँव पहुंचकर यह फैसला सुनाकर अपने मम्मी-पापा को भी खुश कर दे और अपने लिए भी लाइफ टाइम खुशी का इंतज़ाम कर ले.
अभिषेक : हाँ यार, कल शुक्रवार है. कल दफ्तर के बाद गाँव निकल जाता हूँ. शनिवार और रविवार की दो छुट्टियों में इस काम को भी निपटा लेते हैं.
अभिषेक घर आया और शिवानी को अपना फैसला सुनाते हुई कहने लगा : मेरे साथ तुम भी गाँव चलो. अगर लड़की को देखने जाना होगा तो तुम भी साथ रहोगी तो अच्छा रहेगा न ?
शिवानी तो अभिषेक के इस फैसले को सुनकर मन ही मन अभिषेक से भी ज्यादा खुश थी-उसे भी लग रहा था कि इस तरह की लड़की “भाभी” बनकर आएगी तो कुछ अलग ही तरीके का “मनोरंजन और मौज़ मस्ती” करने को मिलेगी. शिवानी लेस्बियन थी यह अभिषेक को मालूम था लेकिन शिवानी के मन में क्या चल रहा था, इसका अभिषेक को बिलकुल भी अंदाज़ा नहीं था .PART-2
शुक्रवार की शाम को दफ्तर से आने के बाद अभिषेक शिवानी को साथ लेकर अपनी ही कार से गाँव की तरफ निकल पड़ा. रास्ते में दोनों में कोई ख़ास बातचीत नहीं हुई क्योंकि दोनों ही अपने अपने ख्यालों में खोये हुए थे. अभिषेक की शादी की अभिषेक से ज्यादा ख़ुशी दरअसल शिवानी को हो रही थी क्योंकि अभिषेक की शादी के बाद उसे अपने मनोरंजन के लिए एक जीता जागता फुल टाइम खिलौना हाथ लगने वाला था.
रात को आठ बजे दोनों अपने गाँव वाले घर में पहुँच गए. घर में मम्मी पापा उन दोनों को एक साथ देखकर हैरान भी थे और खुश भी : क्या कोई ख़ास बात है आज तुम दोनों एक साथ यहां आये हो ? विनीत की पढाई तो ठीक ठाक चल रही है ना ?
शिवानी : विनीत बढ़िया है और उसकी पढाई भी ठीक चल रही है-दरअसल अभिषेक भैया की शादी के सिलसिले में हम लोगों का यहां आना हुआ है. मैंने इनसे कहा की मम्मी पापा इतने दिनों से शादी के लिए जोर दे रहे हैं तो अब शादी में ज्यादा देरी नहीं करनी चाहिए और अभिषेक भैया उसके लिए राजी हो गए हैं.
पापा एकदम खुश होते हुए बोले : यह तो बहुत खुशी की बात है-मैं आज ही तीनों जगह खबर भिजवा देता हूँ कि कल हम लड़की देखने के लिए आ रहे हैं
पापा जिन तीनों जगह की बात कर रहे थे उनमे एक गाँव के प्रधान गिरधारी लाल की 20 साल की लड़की पुष्पा थी, दूसरी लड़की 21 साल की अनीता थी जो गाँव के सरपंच रामलाल की बेटी थी. तीसरी लड़की 19 साल की माधुरी थी जो गाँव के एक आढ़ती ब्रज किशोर की बेटी थी. तीनों ही लडकियां काफी सुन्दर और मस्त थीं लेकिन आखिरी फैसला तो सबको देखने के बाद ही होना था कि किसके साथ अभिषेक की शादी होनी थी
अगले दिन सुबह नाश्ता करने के बाद अभिषेक के मम्मी पापा शिवानी और अभिषेक को लेकर सबसे पहले पुष्पा को देखने पहुँच गए. पुष्पा घूंघट में आकर बैठ गयी और उसका चेहरा नहीं दिख रहा था हालांकि शिवानी ने इन तीनों को पहले से ही देखा हुआ था. चाय पानी की औपचारिकता के बाद शिवानी यह कहते हुए पुष्पा को लेकर दूसरे कमरे में चली गयी कि उसे पुष्पा से कुछ बात करनी है
शिवानी ने अब पुष्पा के घूंघट को हटाकर उससे कहा : यह फैसला मुझे ही करना है कि भैया किस लड़की से शादी करेंगे -इसलिए मैं तुम्हे यहां लेकर आ गयी हूँ ताकि तुम्हे शर्म ना आये
यह कहते हुए शिवानी ने पुष्पा की साड़ी उतार दी और उसके मम्मे इस तरह पकड़कर दबाने लगी मानो वह किसी चीज़ को खरीदने से पहले उसकी ठीक से जांच कर रही हो. इसके बाद उसने पुष्पा के बदन को बाकी जगह से भी काफी देर तक टटोला और अपनी तसल्ली करने के बाद वह पुष्पा को साड़ी दुबारा से पहनाकर बाहर सबके सामने ले आयी.
शिवानी यही सब कुछ बाकी दो लड़कियों के साथ भी करने वाली थी. दरअसल शिवानी यह देख रही थी कि इन तीनों लड़कियों में से जो लड़की सबसे ज्यादा “डम्ब” होगी उसे ही फंसाने में ज्यादा मज़ा आएगा
पुष्पा के माता पिता को अपना फैसला बाद में बताने की बात कहकर यह सब लोग अब अनीता के घर पहुँच गए.अनीता भी घूंघट में ही आयी थी और उसे भी शिवानी अपने साथ पकड़कर दूसरे कमरे में ले आयी. शिवानी ने अनीता का घूंघट हटाकर उसकी साड़ी उतारी तो उसे अनीता के हाथ में मोबाइल फ़ोन दिख गया. उसे देखकर शिवानी एकदम चौंक गयी : तुम मोबाइल भी इस्तेमाल करती हो ?
अनीता बोली : नहीं, पापा ने मेरे हाथ में दे दिया था कि शादी के लिए लड़के वाले आने वाले हैं-इसे अपने हाथ में लेकर बैठना
यहां से निपटकर आखिर में यह सब लोग माधुरी के घर पहुँच गए. माधुरी 19 साल की थी लेकिन लम्बाई में 5 फिट 5 इंच के आसपास लग रही थी. वह भी घूंघट में ही बाहर आयी थी और उसे भी शिवानी बातचीत करने के बहाने दूसरे कमरे में लेकर आ गयी थी. घूंघट हटाने के बाद शिवानी ने जैसे ही माधुरी की साड़ी खोली तो अपना पेटीकोट और ब्लाउज़ वह खुद ही उतारने लगी. शिवानी समझ गयी कि यह लड़की बिलकुल “डम्ब” है और इसी तरह की लड़की अभिषेक के लिए एकदम “फिट” रहेगी .बाद में मालूम पड़ा कि माधुरी एकदम अनपढ़ थी और उसके घर में न कोई टी वी था न रेडियो और न ही कोई फ़ोन -कुल मिलाकर वह बाहर की दुनिया से पूरी तरह अनजान और बेखबर थी और शिवानी को अभिषेक के लिए और अपने लिए ऐसी ही लड़की की तलाश थी
घर आने के बाद शिवानी ने अभिषेक को तीनों लड़कियों के बारे में विस्तार से बता दिया था और यह भी बता दिया था कि क्यों माधुरी ही उसके लिए सबसे बढ़िया पसंद रहेगी
19 साल की “डम्ब” और कच्ची कली माधुरी के नाम पर अपनी फाइनल मोहर लगाने के बाद अभिषेक और शिवानी संडे की शाम तक शहर में वापस आ गए
PART-3
चट मंगनी पट ब्याह की तर्ज़ पर अभिषेक और माधुरी की शादी हो गयी थी और माधुरी अभिषेक के साथ अब शहर में आ गयी थी
अभिषेक ने शादी के लिए फिलहाल एक हफ्ते ही छुट्टी ले रखी थी
गाँव से शहर आकर अभिषेक के सरकारी बंगले में आज माधुरी का पहला दिन था. उसकी दुनिया एक दम बदल चुकी थी और उसे सब कुछ अजीब अजीब सा लग रहा था
आज की रात सुहागरात भी होने वाली थी जिसका माधुरी को छोड़कर सबको पता था
शाम को ६ बजते ही शिवानी माधुरी के पास आयी और उससे बोली : चलो अब तुम्हे सुहागरात के लिए तैयार करना है
यह कहकर शिवानी माधुरी को अपने कमरे में लेकर आ गयी
शिवानी : तुम्हे सुहागरात के बारे में कुछ पता है या नहीं ?
माधुरी ने सर हिलाते हुए कहा : नहीं, मुझे कुछ नहीं पता है
शिवानी : ठीक है. मैं तुम्हे सब बताती हूँ और मेरी बात को ध्यान से सुनो-शादी के बाद पहली बार पति के साथ जो रात बिताई जाती है उसे ही सुहागरात कहते हैं-इस रात को ही पति यह जांचने की कोशिश करता है कि तुम कितनी आज्ञाकारी हो. तुम्हे अपने पति की हर बात माननी होती है. पति कहे कि खड़ी हो जाओ तो तुम्हे खड़ा होना पड़ेगा और अगर वह कहे कि बैठ जाओ तो तुम्हे बैठना पड़ेगा. ठीक इसी तरह इस घर में मेरी और अपने देवर जी की भी हर बात तुम्हे माननी होगी. क्योंकि तुम गांव से नयी नयी शहर में आयी हो और बिलकुल पढ़ी लिखी भी नहीं हो इसलिए हम सब तुम्हे शहर में रहने के तौर तरीके सिखाने की कोशिश करेंगे. अगर तुम उन तौर तरीकों को सीखने में आनाकानी करोगी तो तुम्हे सज़ा भी दी जाएगी. समझीं ?
माधुरी : जी, समझ गयी
शिवानी : क्या समझ गयीं, ठीक से बताओ
माधुरी : यही कि मुझे आज के बाद से अपने पतिदेव, देवर जी और आपकी हर बात माननी होगी -अगर मैंने आप लोगों की कोई भी बात मानने से इंकार किया या आनाकानी की तो आप लोग मुझे अपनी मर्ज़ी के हिसाब से सजा भी दे सकते हो
शिवानी : ठीक है अब तुम ऐसा करो अपनी इस साड़ी को उतार दो
माधुरी ने अपनी साड़ी उतार दी
शिवानी : ब्लाउज़ और पेटीकोट भी उतारो
माधुरी ने अपना ब्लाउज़ और पेटीकोट भी उतार दिया और अब उसके बदन पर सिर्फ एक ब्रा और पैंटी बची थी.
शिवानी ( माधुरी की तरफ देखकर अपने मन ही मन कहती है ): यार क्या बात है-एकदम मस्त माल है साली-इसके साथ तो बहुत मज़ा आने वाला है
शिवानी माधुरी के ब्रा के अंदर कैद मम्मों को अपने हाथों से दबाती हुई कहती है : बहुत छोटे छोटे है-किसी ने अभी तक दबाया नहीं होगा इन्हे ? कोई बात नहीं, हम लोग अक्सर ही इन्हे दबाया सहलाया और मसला करेंगे तो कुछ ही दिनों में यह एकदम परफेक्ट हो जाएंगे.
यह कहने के साथ ही शिवानी ने उसकी ब्रा को उसके बदन से खोलकर अलग कर दिया और उसके छोटे छोटे सफ़ेद कबूतरों पर अपने दोनों हाथ फिराने लगी
माधुरी कुछ नहीं बोल रही थी क्योंकि उसे यही लग रहा था कि शादी के बाद यह सब होना आम बात है और पति के साथ साथ ननद और देवर भी उसके बदन के साथ इस तरह की मौज़ मस्ती करने के पूरे हकदार हैं.
इसके बाद शिवानी ने माधुरी की पैंटी भी उतरवा दी और उसे बेड पर लिटाकर उसके पूरे बदन पर बॉडी लोशन से मालिश करने लगी
माधुरी के नरम-मुलायम और मखमली बदन से खिलवाड़ करते करते शिवानी एकदम गर्म हो चुकी थी -उसने कमरे के नाईट बल्ब को जलाकर बाकी सभी रोशनी बंद कर दीं और खुद अपने कपडे भी उतारकर बेड पर ही माधुरी के साथ लेट गयी और उसके बदन से खेल खेलकर मस्ती करने लगी. शिवानी ने माधुरी के बदन को अपने बदन से दबा लिया था और अपने बदन को उसके बदन से रगड़ते हुए उसके होंठों को बेतहाशा चूमे जा रही थी. उसके चेहरे से थोड़ा नीचे खिसकते हुए अब शिवानी ने अपने चेहरे को माधुरी के मम्मों पर रगड़ना शुरू कर दिया और उसके मम्मों को एक एक करके अपने मुंह में लेकर चूसने लगी.
माधुरी के साथ यह सब पहली बार हो रहा था और इतने खिलवाड़ के बाद उसके अंदर भी अब गर्मी और उत्तेजना के लक्षण दिखाई देने शुरू हो गए थे और उसके मुंह से भी हर्ष मिश्रित आवाज़ें लगातार निकल रही थीं.
लगभग दो घंटे तक माधुरी के शरीर को इसी तरह रौंदने और मसलने के बाद शिवानी की प्यास कुछ शांत हुई तो उसने माधुरी को सुहागरात के लिए तैयार करना शुरू कर दिया
माधुरी को लाल रंग की शिफॉन साड़ी में रात के ९ बजे शिवानी उसके कमरे में छोड़ने आ गयी और उससे बोली : यहां बेड पर चुपचाप बैठकर अपने पतिदेव का इंतज़ार करो. जैसे ही तुम्हारे पतिदेव आएं तो जो कुछ भी वह कहते जाएँ उसे बिना किसी आनाकानी के एक आज्ञाकारी पत्नी की तरह करते रहना -सुहाग रात का यही नियम है.
यह कहकर शिवानी कमरे से बाहर आ गयी. अभिषेक उस समय बाज़ार गया हुआ था. जब वह बाज़ार से आया तो शिवानी उसे छेड़ते हुए कहने लगी : भैया, तुम्हारी सुहागरात की मैंने एकदम चकाचक सेटिंग कर दी है -आज की रात तो जो मांगोगे, वही मिलेगा.
अभिषेक समझ गया था कि शिवानी ने माधुरी को पूरी तरह से ट्रेंड कर दिया होगा इसीलिए वह इस तरह से कह रही है कि “आज की रात जो मांगोगे वही मिलेगा”
अभिषेक को अपने एक दोस्त की वह बात भी अब याद आने लगी जब वह कह रहा था : ” अपनी पत्नी को पहले ही दिन से एकदम टाइट करके अपने कंट्रोल में रखना चाहिए. पहले दिन की मेहनत पूरी जिंदगी काम आती है क्योंकि उस दिन पत्नी से जो कुछ भी करने के लिए कहो उसे वह नार्मल समझकर कर देती है और फिर वही उसकी आगे के लिए भी आदत बन जाती है.”
यही सब सोचता हुआ अभिषेक रात के लगभग १० बजे अपने कमरे में दाखिल होता है जहां माधुरी बेड पर बैठी उसकी प्रतीक्षा कर रही होती है.
अभिषेक कमरे में जाकर दरवाज़े को अंदर से बंद कर देता है और बेड पर बैठने की बजाये सोफे पर अपने दोनों पैर फैलाकर बैठ जाता है
PART-4
अभिषेक सोफे पर बैठा हुआ अपनी दोनों टांगों को हिला रहा था और उसकी उत्तेजना उसके हाव भाव से साफ़ झलक रही थी लेकिन उसके पास माधुरी के साथ मौज़ मस्ती करने के लिए पूरी रात पडी थी , इसलिए वह बिना किसी जल्दबाज़ी के आराम आराम से मज़े लेने के मूड में था.
माधुरी बिस्तर के ऊपर घूंघट किये हुए बैठी थी
कुछ देर तक अभिषेक माधुरी को इसी तरह देखता रहा और उसने माधुरी की तरफ देखकर कहा : माधुरी बिस्तर से उठकर मेरे पास आओ
माधुरी बिस्तर से उतरकर अभिषेक के सामने आकर खड़ी हो गयी
अभिषेक : अपनी साड़ी उतारो
माधुरी से साड़ी उतारनी शुरू कर दी और अब उसके बदन पर सिर्फ ब्लाउज़ और पेटीकोट था जिसमे माधुरी की खूबसूरत फिगर अभिषेक को साफ़ नज़र आ रही थी.
अभिषेक की पैंट के अंदर लण्ड खड़ा हो चूका था और उसका साइज लगातार बढ़ता जा रहा था- पैंट के अंदर कैद अपने लण्ड पर हाथ फिराते हुए अभिषेक ने अपनी उंगली के इशारे से माधुरी को अपनी तरफ बुलाते हुए कहा : इधर मेरे एकदम नज़दीक आओ
माधुरी अभिषेक के एकदम नज़दीक आकर उसकी दोनों टांगों के बीच में आकर कड़ी हो गयी -अब उसका बदन अभिषेक के एकदम नज़दीक था
माधुरी की ब्लाउज़ और पेटीकोट के बीच नाभि तक के पेट के चिकने हिस्से पर अभिषेक ने अपना हाथ फिराते हुए अभिषेक ने उससे पुछा : सुहाग रात का क्या मतलब होता है, जानती हो ?
माधुरी : नहीं लेकिन मुझे यह बताया गया है कि सुहाग रात को पत्नी को पति की हर आज्ञा का पालन करना होता है -जो कुछ भी पति कहें, वही करना होता है
अभिषेक (मन ही मन खुश होता हुआ) : यह सब तुम्हे किसने बताया है ?
माधुरी : मम्मी-पापा ने भी यही कहा था कि शादी के बाद पति की हर आज्ञा का पालन करना ही मेरा धर्म है और आज शिवानी ननद जीने भी यही कहा है कि मुझे इस घर में पति की हर बात भी बिना किसी आनाकानी के माननी है
माधुरी की बात सुनकर अभिषेक का लण्ड अब और भी कड़क हो गया था क्योंकि उसे लग रहा था कि यह बला की खूबसूरत 19 साल की कच्ची कली उसकी हर सेक्स फेंटेसी को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार खड़ी है
अभिषेक : चलो अपने दोनों हाथ ऊपर उठाओ
माधुरी ने अपने दोनों हाथ ऊपर उठा लिए
अभिषेक ने माधुरी की पतली कमर को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और अपने चेहरे को उसके चिकने पेट पर रगड़ रगड़ कर उसे जगह जगह चूमने लगा. कुछ देर बाद उसने माधुरी को पलट कर उल्टा खड़ा कर दिया और उसकी ब्लाउज़ और ब्रा के हुक को खोलकर माधुरी के बदन को ऊपर से बिलकुल निर्वस्त्र कर दिया और उसकी चिकनी गोरी पीठ पर अपने हाथ फिराने लगा. माधुरी को भी शायद मज़ा आ रहा था क्योंकि उसकी आँखें एकदम बंद हो गयी थीं और उसके मुंह से हर्षमिश्रित आवाज़ें धीरे धीरे निकल रही थीं.
अभिषेक ने अब दुबारा से माधुरी के बदन को पलटकर अपनी तरफ किया और उसके पेटीकोट के नाड़े को खीचकर उसके पेटीकोट को बदन से निकाल दिया -अब माधुरी के बदन पर सिर्फ एक लाल रंग की पैंटी बची थी
अभिषेक ने माधुरी की केले जैसी चिकनी जाँघों पर अपना हाथ फिराना शुरू कर दिया -उसकी पैंटी पर अपने हाथ को फिराते हुए अभिषेक ने माधुरी की पैंटी भी उतार दी
अब माधुरी उसके सामने अपने दोनों हाथ ऊपर करके एकदम निर्वस्त्र अवस्था में खड़ी थी
अभिषेक का लण्ड बेकाबू हो रहा था. वह सबसे पहले माधुरी से अपना लण्ड चुसवाना चाहता था लेकिन उसके लिए भी उसने एक अलग तरह का प्लान बना रखा था
उसने माधुरी से कहा : देखो वह फ्रिज रखा है. उसे खोलो और उसमे से आइस क्रीम का कप निकलकर लाओ
जितनी देर में माधुरी फ्रिज में से आइस क्रीम का कप लेकर आयी, उतनी देर में अभिषेक ने अपनी टी शर्ट और पैंट उतार फेंकी थी और सिर्फ एक अंडरवियर में सोफे पर बैठा था
माधुरी अपने हाथ में आइस क्रीम का कप लिए खड़ी थी
अभिषेक : घुटनों के बल मेरी टांगों के बीच में बैठ जाओ
माधुरी अपने घटनों के बल अभिषेक की दोनों टांगों के बीच में बैठ गयी
अभिषेक ने अंडरवियर में से अपना खड़ा लण्ड बाहर निकाला और माधुरी से बोला : इस कप में से आइस क्रीम अपनी उंगली से निकालो और मेरे इस लण्ड पर लगाओ
माधुरी वही करने लगी जो उससे अभिषेक ने कहा था. जब आधे कप की आइस क्रीम लण्ड पर माधुरी ने चारों तरफ लपेट दी तो अभिषेक उससे बोला: अब इस सारी आइस क्रीम को अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ़ करो -आगे से तुम्हे हर रोज़ आइस क्रीम इसी तरह से चाट चाट कर खानी है
माधुरी के नरम रसीले होंठ और जीभ दोनों ही अब अभिषेक के लण्ड की चूमा चाटी में लग गए थे और अभिषेक मनो जन्नत में पहुँच गया था. कप में बची बाकी की आइस क्रीम भी अभिषेक ने माधुरी से दुबारा से लगवाई और उसे दुबारा से चाटने का हुक्म दिया
लगभग १५ मिनट तक अभिषेक ने माधुरी के साथ इसी तरह मुख मैथुन का आनंद लिया और फिर क्लाइमेक्स आते ही अपने वीर्य रस की पिचकारी को माधुरी के मुंह में छोड़ दिया -माधुरी उसके सारे वीर्य रस को पी गयी लेकिन अभिषेक ने अपना लण्ड उसके मुंह के अंदर ही रखा और उससे बोला : इस पर अपनी जीभ फिराती रहो ताकि यह तुम्हारी जीभ से एकदम साफ़ हो जाए -लड़कियों की जीभ अपने पति का लण्ड साफ़ करने के लिए ही होती है
अभिषेक के मन में अपने दोस्त की यह बात घर कर गयी थी कि सुहागरात वाले दिन ही पत्नी से हर तरह का काम करवा लेना चाहिए ताकि उसे लगे कि यह सब नार्मल है और पति के लिए सारी जिंदगी यही करना है
अभिषेक ने अपने लण्ड को माधुरी के मुंह से निकाल लिया और उसे दुबारा से खड़ा कर दिया : अपनी टाँगे फैलाओ
माधुरी ने अपनी टाँगे फैला दीं.
अभिषेक ने अपनी उंगली को उसकी योनि में घुसेड़कर यह देखने की कोशिश की कि माधुरी सेक्स करने के लिए कितनी तैयार हो चुकी है
उसे हैरानी हुई कि माधुरी की योनि को जितना गीला अब तक हो जाना चाहिए था, उतनी गीली वह नहीं हुई थी. अपनी उंगली को उसने माधुरी के मुंह में घुसेड़कर कहा : इसे चाटकर साफ़ करो
माधुरी अभिषेक की उंगली चाट चाट कर साफ़ करने लगी
माधुरी को और अधिक उत्तेजित करने के लिए अब अभिषेक को कुछ और आईडिया आया
उसने माधुरी से कहा : अब ऐसा करो अपने कान पकड़ो और गिनती करते हुए 100 उठक बैठक लगाओ
माधुरी : मुझे गिनती नहीं आती और उठक बैठक लगानी भी नहीं आती है-आप सिखा दीजिये
अभिषेक को ध्यान आया कि माधुरी तो एकदम अनपढ़ थी और उसने स्कूल की शक्ल तक नहीं देखी थी
उसने माधुरी से कहा : कोई बात नहीं, गिनती मैं कर लूँगा, तुम अपने कान पकड़ो
माधुरी ने कान पकड़ लिए
अभिषेक : अब नीचे बैठो
माधुरी अपने दोनों कान पकडे पकडे नीचे बैठ गयी
अभिषेक : अब उठकर खड़ी हो जाओ
माधुरी फिर से उठकर खड़ी हो गयी
अभिषेक : इसी तरह से अपने कान पकडे पकडे उठती बैठती रहो-इसी को उठक बैठक लगाना कहते हैं
माधुरी उठक बैठक लगा रही थी लेकिन अभिषेक की नज़र माधुरी की योनि वाले हिस्से पर टिकी हुई थी कि वहां से पानी निकलना शुरू हुआ कि नहीं ताकि माधुरी के साथ उसकी योनि में लण्ड घुसेड़कर भी सेक्स किया जा सके
लगभग पचास उठक बैठक लगाने के बाद माधुरी काफी थक सी गयी और बोली : अब मैं थक गयी हूँ लेकिन आपकी आज्ञा का पालन करना भी जरूरी है -बताइये मैं अब क्या करूँ ?
अभिषेक अपनी आज्ञाकारी पत्नी से मन ही मन बहुत खुश था लेकिन वह उसे पूरी तरह अपना “सेक्स स्लेव” बनाने की तैयारी में था. वह माधुरी से बोला : कोई बात नहीं-तुम अब ऐसा करो कान पकड़कर मुर्गा बन जाओ
माधुरी : मुर्गा कैसे बनते हैं ?
अभिषेक : स्कूल न जाने का यह नुक्सान है कि तुम्हे कुछ भी नहीं आता
अभिषेक अब सोफे से उठा और माधुरी को पकड़कर उसे मुर्गा बनने में मदद करने लगा
अब माधुरी उसके सामने उसकी टांगों के पास मुर्गा बनी हुई थी
अभिषेक ने उसके सुडौल नितम्बों को मसलते हुए उन पर अपना हाथ फिराते हुए कहा : अब तुम्हारे इन नितम्बों पर छड़ी के 20 स्ट्रोक लगाए जाएंगे -तुम्हे अपना बैलेंस बनाकर रखना है -अगर बैलेंस बिगड़ा तो 20 की जगह 40 स्ट्रोक लगाए जाएंगे
यह कहने के साथ ही अभिषेक ने अपने हाथ में एक छड़ी लेकर उसे माधुरी के नरम-मुलायम-चिकने नितम्बों पर मारना शुरू कर दिया
PART-5
अभिषेक सोफे पर बैठा अपनी छड़ी से लगातार माधुरी के चिकने नितम्बों पर स्ट्रोक मार रहा था और वह हर स्ट्रोक पर कराहते हुए थोड़ा सा उछल रही थी-इस सारे तमाशे में अभिषेक को मज़ा आ रहा था -उसने शरारत करते हुए एक स्ट्रोक इतनी जोर से मारा कि माधुरी का संतुलन बिगड़ गया. जैसे ही उसका संतुलन बिगड़ा, अभिषेक बोला : अब तुम्हारे 20 नहीं 40 स्ट्रोक लगाए जाएंगे
माधुरी बेबस होकर अपने खूबसूरत बदन की दुर्गति करवा रही थी
जब अभिषेक ने 40 स्ट्रोक पूरे कर लिए तो वह माधुरी से बोला : अब उठकर खड़ी हो जाओ
माधुरी कराहते हुए खड़ी हो गयी
अभिषेक : टाँगे खोलो
माधुरी ने अपनी टाँगे फैला दीं
अभिषेक ने अपने हाथ को माधुरी के योनि प्रदेश पर फिरते हुए कहा : अब तुम सुहागरात के लिए एकदम तैयार हो चुकी हो-जाओ अब बिस्तर पर जाकर लेट जाओ-तुम्हारे साथ बाकी की मौज़ मस्ती अब बिस्तर पर ही की जाएगी
माधुरी बिस्तर पर जाकर लेट गयी. अभिषेक को मालूम था कि माधुरी एकदम कच्ची कली है और उसे पहली बार सेक्स करने में काफी दर्द होने वाला है. उसने बिस्तर पर जाकर उसके हाथ-पैरों को बेड के चरों कोनों से बाँध दिया और खुद अपने नंगे बदन को उसके बदन पर रगड़ते हुए धीरे धीरे अपने लैंड को उसकी योनि में घुसेड़ने लगा. इस बीच वह अपने चेहरे को माधुरी के चेहरे पर रगड़ते हुए उसके रसीले होंठों का रसपान भी करता जा रहा था. कुछ देर बाद उसने नीचे आते हुए उसके मम्मों को भी अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. अचानक ही अभिषेक अपने क्लाइमेक्स पर पहुंचा और माधुरी के मुंह से एक चीख सी निकल गयी लेकिन अपने दोनों हाथ और पैर बंधे होने की वजह से वह छटपटा कर रह गयी
अब अभिषेक ने माधुरी के हाथ पैर खोल दिए थे और दोनों ही बिस्तर पर निर्वस्त्र लेते हुए एक दूसरे को देख रहे थे.
लगभग आधे घंटे तक इसी तरह आराम करने के बाद अभिषेक ने माधुरी से कहा : अब तुम ऐसा करो मेरे पैरों की मालिश करो ताकि मुझे आराम से नींद आ जाए -पत्नी को हर रात सोने से पहले अपने पति के पैर भी दबाने होते हैं ताकि उसकी दिन भर की थकान दूर हो जाए
माधुरी बिस्तर पर ही उठकर बैठ गयी और अभिषेक की टांगों और पैरों को अपने नरम हाथों से दबा दबाकर मालिश करने लगी
अभिषेक : ठीक से मालिश करो. अपने हाथों को ऊपर जाँघों तक लाओ और जाँघों पर भी अपने हाथ फिराओ. तुम्हारी मालिश से मेरा यह लण्ड दुबारा से खड़ा हो जाना चाहिए -अगर यह खड़ा नहीं हुआ तो इसका मतलब यह है कि तुम ठीक से पैरों की मालिश नहीं कर रही हो. क्या समझी ?
माधुरी : जी समझ गयी
अभिषेक : क्या समझ गयी ? ठीक से बोलो
माधुरी : यही कि मेरी मालिश करने से आपका लण्ड खड़ा हो जाना चाहिए
अभिषेक : हाँ ठीक है. अब कुछ ठीक लग रहा है-ऐसे ही अपने नरम हाथों को फिरा-फिराकर मुझे खुश करती रहो
कुछ ही देर में अभिषेक का लण्ड दुबारा से तनकर खड़ा हो गया था
अभिषेक से फिर माधुरी से कहा : अब ऐसा करो इस खड़े लण्ड को अपने मुंह में लेकर इसे अपनी जीभ से धीरे धीरे इस तरह चाटो कि मुझे आराम से नींद आ जाये. जब तक मुझे नींद ना आ जाए, तुम्हे यह लण्ड अपने मुंह के अंदर ही रखना है. उसके बाद तुम भी यहीं मेरे ही पास बिस्तर पर सो जाना.
यह सब करते कराते रात के ३ बज गए थे. अगले दिन संडे था और सोमवार से अभिषेक को अपने दफ्तर जाना था.
संडे की सुबह माधुरी और अभिषेक दोनों ही गहरी नींद में सोते रहे और दस बजे सोकर उठे.
लगभग ग्यारह बजे अभिषेक,माधुरी,शिवानी और अभिषेक के छोटे भाई विनीत के एक साथ नाश्ता किया
उसी समय अभिषेक ने शिवानी से कहा : शिवानी देखों मैं तो कल से ऑफिस जाना शुरू कर दूंगा-अब तुम्हे और विनीत को मेरी कुछ मदद करनी होगी.
शिवानी और विनीत दोनों ही ध्यान से अभिषेक की बात सुनने लगे
अभिषेक बोला : माधुरी अच्छी लड़की है लेकिन इसे न तो शहर के तौर तरीकों की जानकारी है और न ही पढ़ी लिखी है -देखा जाए तो इसे शहर में हाई सोसायटी में रहने का सलीका ही नहीं है -तुम लोगों के पास जितना भी समय है, उसमे से कुछ समय माधुरी के ऊपर भी लगाओ और इसे थोड़ा पढ़ा लिखाकर शहर में रहने का सलीका आदि भी समझाओ.
शिवानी : भैया, आप उस बात की बिलकुल भी टेंशन न लें -मैं सुबह 7 बजे स्कूल में पढ़ाने के लिए निकल जाती हूँ और दोपहर के ढाई तीन बजे तक वापस आ जाती हूँ. तब तक घर पर विनीत रहता ही है क्योंकि इसका इवनिंग का कालेज है और यह तीन बजे जाकर रात को 8 बजे तक आता है. मैंने और विनीत ने आपस में यह तय कर लिया है कि माधुरी की पढाई लिखाई की जिम्मेदारी विनीत ले लेगा और माधुरी को इतना तो पढ़ा लिखा देगा कि यह किसी से बातचीत करे तो बिलकुल “अनपढ़” न लगे. बाकी माधुरी को रहन-सहन और हाई सोसायटी में उठने बैठने का सलीका मैं सिखा दूंगी. आपको इसमें ज्यादा टेंशन लेने की जरूरत नही है-हम लोग आपके साथ हैं.
दरअसल शिवानी और विनीत दोनों तो अभिषेक भैया की इस बात से मन ही मन बहुत खुश थे
अभिषेक ने विनीत और शिवानी से कहा : चलो, तुम दोनों ने मेरी एक समस्या तो दूर कर दी. इसके बाद अभिषेक माधुरी की तरफ देखकर बोला : अब तुम ठीक से समझ लो -शिवानी और विनीत दोनों मिलकर तुम्हे जो कुछ भी सिखाएंगे उसे तुमने ठीक से सीखना है और यह दोनों ही तुमसे उम्र में बड़े हैं इसलिए इनकी पूरी इज़्ज़त करनी है और इनकी हर बात माननी है- इनकी बात न मानने पर यह लोग तुम्हे कोई सजा भी दे सकते हैं. समझीं ?
माधुरी : जी समझ गयी
अभिषेक : ठीक से बताओ क्या समझ गयीं ?
माधुरी : मुझे शिवानी ननद जी और विनीत देवर जी की हर बात माननी है-इनकी बात न मानने पर यह लोग मुझे सजा भी दे सकते हैं
PART-6
अभिषेक की गैर हाज़िरी में माधुरी को किस तरह से पेल पेल कर मज़े लेना है, इसका पूरा प्लान शिवानी तो शादी के पहले ही बना चुकी थी, लेकिन अब जब अभिषेक ने यह कह दिया कि माधुरी को पढ़ाने -लिखाने और उसे सलीका सिखाने की जिम्मेदारी विनीत की भी है, उस समय से ही विनीत के मन में तरह तरह के ख्याल आने लगे और उसका लण्ड भी बेकाबू होकर खड़ा होने लगा. विनीत जिस इवनिंग कालेज में पढता था, वहां भी कोई लड़की इतनी खूबसूरत और सेक्सी नहीं थी जितनी माधुरी थी. माधुरी को देखते ही विनीत का लण्ड अपने आप खड़ा हो जाता था लेकिन वह उसकी भाभी है, यही समझकर वह अपना मन मसोस कर रह जाता था लेकिन अब उसे लग रहा था कि बैठे बिठाये उसे जो सुनहरी मौका मिल रहा है, उसका भरपूर फायदा उठाया जाना चाहिए. माधुरी को अपने काबू में करके किस तरह से उसकी ख़ूबसूरत जवानी के मज़े लेने हैं,रात को यही सब सोचते सोचते और तरह तरह के प्लान बनाते हुए विनीत सो गया.
अगले दिन सोमवार को शिवानी रोजाना की तरह सुबह 7 बजे अपने स्कूल चली गयी-वह अब 2 बजे वापस आएगी. इसके बाद 9 बजे अभिषेक भी अपने दफ्तर के लिए रवाना हो गया.
9 बजे से लेकर 2 बजे तक 5 घंटे का समय ऐसा था जब विनीत और माधुरी घर पर एकदम अकेले थे और इस दौरान माधुरी को विनीत की हर बात भी माननी थी.
अभिषेक के जाने के बाद विनीत अपने कमरे में सोफे पर बैठा टी वी देख रहा था. माधुरी उस समय किचिन में कुछ काम कर रही थी.
विनीत हालांकि टी वी देख रहा था लेकिन उसका ध्यान इस समय इस बात पर था कि किस तरह से माधुरी को अपने जाल में फंसाने की शुरुआत की जाए
कुछ सोचने के बाद विनीत ने एक जोर की आवाज़ लगाई : माधुरी यहां आओ
माधुरी दौड़ी दौड़ी विनीत के सामने आकर खड़ी हो गयी : जी आपने मुझे बुलाया
विनीत : क्या कर रही हो इस समय ?
माधुरी : मैं किचिन की सफाई कर रही हूँ.
विनीत : ठीक है, सफाई वगैरा निपटा कर मेरे पास आओ-आज से तुम्हारी पढाई लिखाई के साथ साथ और भी कई तरीके की ट्रेनिंग शुरू करनी है
माधुरी वापस किचिन में चली गयी और कुछ ही देर बाद विनीत के पास दुबारा से हाज़िर हो गयी
विनीत ने इस समय टी शर्ट और शार्ट पहने हुए था और शार्ट के अंदर उसका खड़े हो चुके लण्ड का उभार साफ़ नज़र आ रहा था
माधुरी को देखते ही विनीत अपनी जांघ पर हाथ मारते हुए उससे बोला : अपनी साड़ी उतारो और इधर मेरी जांघ पर आकर बैठ जाओ
माधुरी को सब कुछ अजीब सा लग रहा था लेकिन विनीत की आवाज़ इतनी रौबीली थी कि वह एकदम घबराकर अपनी साड़ी उतारकर उसकी बायीं जांघ पर आकर बैठ गयी -इस समय उसके बदन पर एक ब्लाउज़ और पेटीकोट था और उसका बाकी का बदन साफ़ दिख रहा था.
विनीत ने एक हाथ माधुरी की पीठ पर फिराते हुए और दूसरे हाथ से उसके गालों को सहलाते हुए कहा : आज मैं तुम्हे एक से लेकर दस तक की गिनती बोलना और लिखना दोनों सिखाऊंगा. इस तरह से तुम सौ तक की गिनती अगले दस दिनों में बोलना और लिखना सीख जाओगी
यह कहने के बाद विनीत उसे बोल बोलकर गिनती सुनाने लगा और माधुरी उस गिनती को दुबारा से बोलती जा रही थी- हर गिनती के साथ विनीत माधुरी के बदन के किसी न किसी अंग को छेड़ता भी जा रहा था- दरअसल वह यह देखने की कोशिश कर रहा था कि माधुरी कहाँ तक बिना किसी विरोध के उसकी शरारतो को चुपचाप सहन कर सकती है
इसी बीच विनीत के हाथ माधुरी के चिकने पेट से सरकते हुए उसकी ब्लाउज़ में कैद मम्मों तक पहुँच गए और उन्हें दबाने सहलाने लगे. माधुरी असहज होते हुए लगातार गिनती बोल रही थी लेकिन जैसे ही विनीत ने उसके मम्मों पर एक जोर की चुटकी ली ,वह एकदम चिल्लाकर बोल पडी : “यह क्या कर रहे हैं देवर जी ?”
PART-7
विनीत ने एक जोर का थप्पड़ माधुरी के खूबसूरत गलों पर लगाते हुए कहा : चल खड़ी हो जा, अभी तो मैंने तेरे साथ कुछ किया ही नहीं है-अब तुझे पता चलेगा कि तेरे साथ मैं क्या क्या कर सकता हूँ -चल सामने जाकर खड़ी हो जा और अपना पेटीकोट और ब्लाउज़ उतार दे.
माधुरी ने अपना पेटीकोट और ब्लाउज़ उतार दिया -उसके बदन पर अब सिर्फ एक ब्रा और पैंटी बची थी.
किसी लड़की को इस हालत में विनीत ने अब तक सिर्फ पोर्न फिल्मों में ही देखा था लेकिन यहां उसके सामने माधुरी जीती जागती खड़ी थी और लाइव शो दिखा रही थी.
विनीत ने अपने लण्ड पर हाथ फेरा और बोला : अब अपने बाकी के कपडे भी निकालकर एकदम नंगी हो जा
विनीत की रौबीली आवाज़ सुनते ही माधुरी ने अपनी ब्रा और पैंटी भी उतार दी
विनीत : अब अपने कान पकड़कर 10 तक की गिनती गिनते हुए उठक बैठक लगानी शुरू कर.
विनीत सोफे पर बैठकर मुस्कराते हुए माधुरी को देखता रहा और वह गिनती गिनते हुए उठक बैठक लगाने लगी.
विनीत : रुको मत. जब दस तक की गिनती पूरी हो जाये तो दुबारा से एक से लेकर दस तक की गिनती बोलते हुए उठक बैठक लगाती रहो. जब तक मुझे तसल्ली न हो जाए कि तुम्हे गिनती ठीक से याद हो गयी है, तुम्हे उठक बैठक लगाती रहनी है.
दरअसल विनीत उठक बैठक लगवाने के बहाने माधुरी के निर्वस्त्र खूबसूरत बदन को देख देखकर अपनी आँखें सेंक रहा था और अपने खड़े लण्ड को भी सहलाता जा रहा था.
कुछ देर बाद ही माधुरी उठक बैठक लगाते हुए थककर जमीन पर ढेर हो गयी और कहने लगी : अब मुझसे उठा भी नहीं जा रहा है-मैं बहुत थक चुकी हूँ.
विनीत : अरे अरे मेरी भाभी थक गयी हैं. अगर मेरी गोद में ही बैठी रहती तो यह सब नहीं करना पड़ता और थकान भी नहीं होती. आओ मेरी गोद में आकर फिर से बैठ जाओ.
माधुरी जमीन से उठी और विनीत की गोद में आकर बैठ गयी
विनीत ने माधुरी के नरम और सुडौल नितम्बों को अपने शार्ट के अंदर बन रहे लण्ड के उभार के ऊपर सेट किया और अपने दोनों हाथों से माधुरी के मम्मों को सहलाते मसलते हुए उसके रसीले होंठों को बेतहाशा चूमने लगा
काफी देर तक माधुरी के बदन से खिलवाड़ करने के बाद विनीत ने पुछा : क्यों भाभी, थकान दूर हुई कि नहीं ?
माधुरी को लगा कि अगर वह बोलेगी कि थकान दूर हो गयी है तो शायद उसे फिर से उठक बैठक लगानी पड़ेगी. इसलिए वह बोली : अभी भी कुछ कुछ थकान है
विनीत ” चलो मैं तुम्हारी बाकी की थकान का भी इलाज़ कर देता हूँ -चलो मेरी टांगों के बीच घुटनों के बल बैठ जाओ और मेरे लण्ड को अपने मुंह में लेकर चूसो
माधुरी विनीत की टांगों के बीच में बैठ गयी. विनीत ने अपना शार्ट और अंडरवियर दोनों उतार दिए और अपना खड़ा लण्ड माधुरी के होंठो पर टिकाते हुए उसे आदेश दिया : मुंह खोलो और इसे अंदर लेकर चूसो. जब तक लण्ड को मैं खुद तुम्हारे मुंह से बाहर न निकलूं तब तक इसे तुम्हे अपने मुंह में ही रखकर चूसते रहना है-मेरी आज्ञा का पालन नहीं हुआ तो तुम्हे बहुत सख्त सजा दी जाएगी
माधुरी अब एकदम एक “सेक्स स्लेव” की तरह विनीत के लण्ड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी और विनीत टी वी पर चल रहे सेक्सी डांस नंबर का आनंद लेते हुए अपने लण्ड को माधुरी के मुंह के अंदर बाहर करने लगा
बीच बीच में वह हँसते हुए माधुरी की तरफ देख रहा था और उसके गालों पर हलके हलके चपत लगाकर बोल रहा था : ठीक से चूसो इसे
कुछ ही देर में विनीत अपने क्लाइमेक्स पर पहुँच गया और अपने लण्ड की पिचकारी उसने माधुरी के मुंह में छोड़ दी. विनीत यह देखकर खुश भी हुआ और हैरान भी हुआ कि माधुरी उसके सारे वीर्य रस को चुपचाप पी गयी थी. ऐसा लगता था कि उसे लण्ड चूसने का पहले से अनुभव था. विनीत ने आज पहली बार अपना लण्ड किसी लड़की से चुसवाया था लेकिन पोर्न फिल्मों में वह लण्ड चुसाई के सीन देख चुका था -उसने अपने लण्ड को माधुरी के मुंह से बाहर निकाला और उससे बोला : इसे अपनी जीभ से चाटकर साफ़ करो
माधुरी से अपना लण्ड साफ़ करवाने के बाद विनीत उससे बोला : अब तुम ऐसा करो कि इस कॉपी में मैंने 1 से लेकर 10 तक की गिनती लिखी है-तुम इसे ही देख देखकर इसके आगे इसी गिनती को सौ बार लिखो. इस तरह से तुम्हारी दस तक की गिनती को लिखने और बोलने का आज का अभ्यास पूरा हो जायेगा और कल 11 से लेकर 20 तक की गिनती शुरू की जाएगी
माधुरी ने पेन और कॉपी जैसे ही हाथ में पकड़ी, विनीत उससे बोला : इधर मेरी गोद में आकर बैठो. मैं तुम्हे लिखना सिखाऊंगा
विनीत भी इस समय पूरी तरह निर्वस्त्र ही बैठा हुआ था-उसकी गोद में माधुरी आकर बैठ गयी और विनीत उसका हाथ पकड़कर उससे कॉपी में गिनती लिखवाने लगा-जब उसने देखा कि माधुरी को लिखना आ गया है तो उसने उसका हाथ छोड़ दिया और अपने हाथों से वह उसके मम्मों को मसलने लगा-माधुरी के मखमली नितम्ब विनीत के लण्ड के ऊपर टिके हुए थे और माधुरी की पीठ विनीत के सीने से चिपकी हुई थी. कुछ देर बाद विनीत ने अपने हाथ माधुरी की केले जैसी जाँघों पर फिराने शुरू कर दिए. विनीत की इच्छा हो रही थी कि माधुरी की योनि में अपना लण्ड घुसेड़कर वह उसकी चुदाई करे लेकिन उसने जल्दबाज़ी करना उचित नहीं समझा क्योंकि वह नहीं भूला था कि माधुरी उसकी भाभी थी.
विनीत का फिलहाल यही उद्देश्य था कि माधुरी को किसी भी तरह से पूरी तरह से अपने कंट्रोल में लेकर उसे “सेक्स स्लेव” बना लिया जाये और उसे लग रहा था कि वह इस काम में काफी हद तक कामयाब हो चुका था क्योंकि बी माधुरी उसकी रौबीली आवाज़ से डरने भी लगी थी और उसकी हर जायज़-नाजायज़ मांग को पूरी भी करती जा रही थी
PART-8
माधुरी ने एक से लेकर 10 तक की गिनती को देख देख कर सौ बार लिख लिया था -विनीत ने उसकी कॉपी को देखा और बोला : ठीक है , अब तुम्हे 10 तक की गिनती बोलनी और लिखनी आ गयी है-अब कल इसके आगे शुरू करेंगे. अब तुम ऐसा करो मेरे लिए एक कप कॉफी बनाकर लाओ
माधुरी : मुझे कॉफ़ी बनानी नहीं आती है-चाय ले आऊं क्या ?
विनीत : चलो मैं तुम्हे कॉफ़ी बनाना सिखाता हूँ
यह कहकर विनीत ने अपना अंडरवियर और शार्ट पहन लिए और माधुरी को लेकर किचिन में आ गया माधुरी अभी भी पूरी तरह निर्वस्त्र अवस्था में ही थी. माधुरी ने भी अपने कपडे पहनने की कोशिश की थी तो विनीत ने उसे यह कहकर रोक दिया था : जब तक मैं न कहूँ, तुम ऐसे ही नंगी रहोगी
किचिन में आने के बाद विनीत ने माधुरी से कॉफ़ी बनबाई और इस दौरान वह उसकी पीठ से सटकर खड़ा हो गया था और उसके नितम्बों पर अपने शार्ट में कैद लण्ड को भी रगड़ता जा रहा था. जब माधुरी ने कॉफी बना ली तो वह उसे किचिन में छोड़कर अपने कमरे में यह कहता हुआ आ गया : अब इसे कप में लेकर मेरे कमरे में आओ
अपने कमरे में आने के बाद विनीत ने अपने कमरे में लगे स्मार्ट टी वी को यू ट्यूब से कनेक्ट कर दिया और उस पर एक सेक्सी गाना लगा दिया जिसमे एक लड़की थिरक थिरक कर अर्ध नग्न अवस्था में डांस कर रही थी.
जब माधुरी कॉफी लेकर आयी तो विनीत ने कॉफी का कप अपने हाथ में ले लिया और माधुरी से बोला : जैसे यह लड़की टी वी में डांस कर रही है, इसकी तरह तुम भी डांस करके मुझे दिखाओ
माधुरी टी वी देख देखकर उसी लड़की की तरह सेक्सी डांस करने की कोशिश करने लगी. निर्वस्त्र माधुरी अब डांस कर रही थी और विनीत उसका सेक्सी डांस देखते हुए चुस्कियां लेते हुए कॉफी पी रहा था. डांस ख़त्म हो गया था और विनीत की कॉफी भी ख़त्म हो गयी थी.
उसने अब माधुरी की तरफ देखकर कहा : तुम्हे तो डांस करना भी ठीक से नहीं आता है. अब तुम्हे डांस भी मुझे ही सिखाना पड़ेगा. यह कहकर विनीत ने टी वी पर एक सेक्सी कपल डांस-“टिप टिप बरसा पानी ” लगा दिया और माधुरी से बोला : अब तुम्हे इस गाने पर ऐसे ही डांस करना है जैसे यह सेक्सी हीरोइन नाच रही है.
माधुरी ने डांस करना शुरू कर दिया. विनीत भी उसे डांस सिखाने के बहाने उसके शरीर से चिपक चिपक कर उसके बदन के साथ खिलवाड़ कर रहा था.
लगभग एक घंटे तक विनीत ने माधुरी को अलग अलग सेक्सी गानों पर डांस करवाया-ज्यादातर कपल डांस थे और विनीत ने कपल डांस के दौरान माधुरी के उन अंगों को उसी तरह चूमा चाटा जिस तरह से फिल्म में हीरो हेरोइन की चूमा चाटी कर रहा था.
यह सब करते कराते दिन के बारह बज गए थे. लेकिन विनीत की अय्याशी ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही थी-अब उसे लगा कि कालेज के लिए तैयार होने का समय आ गया है तो वह माधुरी को अपने कमरे में लगे बाथरूम में लेकर आ गया और बोला : अब हम दोनों यहां टब के अंदर शावर लेते हुए नहाएंगे. टब में पानी भरने के बाद विनीत टब में अधलेटा होकर बैठ गया और माधुरी जो टब के अंदर निर्वस्त्र खड़ी हुई थी, उससे बोला : अब तुम बाहर टी वी पर जो गाना चल रहा है, उसकी तर्ज़ पर थिरक थिरक कर डांस करो.
माधुरी अपने दोनों हाथ ऊपर करके कमर मटका मटका कर डांस करने लगी और विनीत के उसके ऊपर लगे शावर को भी खोल दिया और वह अब भीगते हुए विनीत के सामने नाचने लगी.
पानी में नहाते नहाते यह सब नाच गाना लगभग एक घंटे तक चला. इसके बाद विनीत ने तौलिया लेकर पहले अपने बदन को पोंछा और फिर उसी तौलिये से माधुरी के नंगे भीगे बदन को दबाते सहलाते हुए पोंछने लगा.
अब वह माधुरी से बोला : ठीक है, इसी तरह मेरा कहना मानती रहोगी और मुझे खुश रखोगी तो मजे में रहोगी वरना मेरी बात ना मानने का अंजाम तुम जानती ही हो. अब जाओ और जाकर अपने कपडे पहन लो और मेरे लिए गरमागरम खाना बनाओ ताकि मैं उसे खाकर अपने कालेज जा सकूं.
PART-9
माधुरी अब किचिन में खाना बनाने चली गयी और विनीत भी अपने कालेज जाने के लिए तैयार होने लगा.
कालेज पहुँचने में विनीत को आधा घंटा लगता था-उसने दस मिनिट के अंदर फटाफट खाना खाया और दो बजते ही अपना बैग उठाकर जाने लगा. अचानक उसने माधुरी को आवाज़ देकर अपने पास बुलाया और उसे देखते ही उसके चेहरे को पकड़कर उसके होंठों को बेतहाशा चूमने लगा. माधुरी बेबस होकर उसकी चूमा चाटी को सह रही थी-अचानक ही दरवाज़े की घंटी बजने लगी तो विनीत ने माधुरी को छोड़ा और दरवाज़ा खोला तो देखा की शिवानी स्कूल से आ गयी थी.
विनीत कालेज चला गया और शिवानी उसे शरारत से मुस्कराते हुए बाहर जाती देखती रही और फिर दरवाज़ा अंदर से बंद करके अंदर घर में आ गयी
शिवानी और माधुरी ने भी फटाफट खाना खाया और उसके बाद माधुरी किचिन में चली गयी और शिवानी अपने कमरे में आकर सोफे पर बैठकर टी वी देखने लगी
कुछ ही देर में शिवानी ने माधुरी को आवाज़ देकर अपने पास बुलाया : इधर आओ माधुरी
माधुरी दौड़ती हुई शिवानी के पास आकर खड़ी हो गयी
शिवानी को यह देखकर मज़ा आ रहा था कि माधुरी उसकी आवाज़ को सुनकर किस तरह से डरी सहमी सी दौड़ी दौड़ी चली आयी है
शिवानी ने अपनी आवाज़ को रौबीली बनाते हुए माधुरी से कहा : यहां जमीन पर बैठो और मेरे पैरों को दबाओ. बहुत थकान सी मह्सूस हो रही है.
माधुरी जमीन पर जैसे ही बैठी, शिवानी उससे बोली : खड़ी हो जाओ
माधुरी फिर से खड़ी हो गयी
शिवानी : यह तुमने अपनी साड़ी कैसे गँवारू ढंग से बाँध रखी है. तुमसे मैंने कहा था कि साड़ी और पेटीकोट दोनों इस तरह से बांधे जाने चाहिए कि तुम्हारी नाभि हमेशा दिखती रहे -चलो साड़ी उतारो
माधुरी से अपनी साड़ी उतार दी
शिवानी : पेटीकोट को खोलो और उसे नाभि के नीचे करके बांधो
माधुरी ने पेटीकोट का नाडा खोला और उसे नाभि के नीचे करके बाँध लिया-अब उसकी नाभि साफ नज़र आने लगी थी
शिवानी (हँसते हुए) : अब ठीक है. तुम्हारा पेटीकोट और साड़ी नाभि से ऊपर नहीं जानी चाहिए-अब बैठ नीचे और मेरे पैर दबा
माधुरी अब ब्लाउज़ और पेटीकोट में नीचे फर्श पर शिवानी की टांगों के पास बैठकर उसके पैर दबाने लगी
शिवानी ने टी वी पर एक अंग्रेजी लेस्बियन मूवी लगा ली थी जिसमे दो लडकियां एक दूसरे के बदन को सहला सहला कर चूमा चाटी कर रही थीं
शिवानी ने अब अपना ध्यान टी वी की मूवी से हटते हुए माधुरी की तरफ किया और अपनी आवाज़ को थोड़ा और कड़क बनाते हुए उससे पुछा : क्या चल रहा है सुबह से ? सुबह से अब तक क्या क्या किया, सब मुझे बताओ
माधुरी : किचिन की सफाई की, बर्तन साफ़ किये, सभी कमरों की सफाई की और खाना बनाया
शिवानी को शरारत सूझ रही थी और वह कुछ और ही सुनना चाहती थी-उसका मन यह मानने को तैयार ही नहीं था कि विनीत ने सुबह से अब तक के पांच घंटों में इस कच्ची कली को बिना चखे और बिना चूसे छोड़ दिया होगा -शिवानी को मालूम था कि शहर के कालेज में पढ़ने वाला उसका भाई एक नंबर का बदमाश है और अक्सर मोबाइल और टी वी पर पोर्न देखते हुए मुठ मारता रहता है.
शिवानी : तो तुम सच सच ऐसे नहीं बताओगी -चलो उठकर खड़ी हो जाओ
माधुरी सहमकर खड़ी हो गयी
शिवानी : देखो सामने वह चमड़े का हंटर लटका हुआ है, उसे लेकर आओ
माधुरी ने चमड़े के हंटर को लाकर शिवानी के हाथ में पकड़ा दिया
शिवानी : अब अपना पेटीकोट और ब्लाउज़ भी उतारो
माधुरी ने पेटीकोट और ब्लाउज़ भी उतार दिए और अपने दोनों हाथ ऊपर करके खड़ी हो गयी
शिवानी एकदम हैरान थी. उसने नोटिस किया कि माधुरी ने उसके कहे बिना ही अपने दोनों हाथ ऊपर क्यों उठा लिए हैं -इसका मतलब या तो अभिषेक या फिर विनीत ने इसे नंगा करके इसके हाथ इस तरह ऊपर उठवाये होंगे तभी से यह इसकी आदत बन गयी है -लेकिन मन ही मन शिवानी को मज़ा आ रहा था कि लौंडिया एकदम मस्त स्लेव बनने के लायक है और उसने सही “माल” पसंद किया है
माधुरी सिर्फ ब्रा और पैंटी में अपने खूबसूरत बदन को लिए अपने दोनों हाथ ऊपर खड़े करके शिवानी के अगले आदेश का इंतज़ार कर रही थी और यही सब देखकर शिवानी की उत्तेजना और अधिक बढ़ती जा रही थी -उसकी अपनी योनि पूरी तरह गीली हो चुकी थी.
शिवानी ने दो तीन चमड़े के हंटर माधुरी के बदन पर लगाते हुए उससे पुछा : मुझे फटाफट विस्तार से यह बता कि विनीत ने तेरे साथ बीते पांच घण्टों में क्या क्या किया है ?
PART-10
जैसे ही शिवानी ने माधुरी के चिकने गोरे खूबसूरत बदन पर हंटर लगाने शुरू किये. माधुरी एकदम बोली : मुझे और मत मारो. मैं सब बताती हूँ
अब शिवानी दुबारा से सोफे पर आराम से एक टांग के ऊपर दूसरी टांग रखकर बैठ गयी और माधुरी की तरफ देखकर बोली : चल अब फ़टाफ़ट शुरू हो जा
माधुरी ने अब विनीत के बारे में बताना शुरू कर दिया : विनीत देवर जी ने मुझे 1 से लेकर 10 तक की गिनती लिखनी और बोलनी सिखाई और जब मैं गिनती ठीक से लिख या बोल नहीं पा रही थी तो उन्होंने मुझे इसके लिए सज़ा भी दी -उन्होंने मेरे कपडे उतरवाए और मुझे कान पकड़कर उठक बैठक लगाने के लिए कहा -जब मैं थक गयी तो उन्होंने मुझे अपनी गोद में बिठाकर मेरे बदन को जगह जगह से दबाया -सहलाया और मसला और फिर ..”
जब बोलते बोलते माधुरी रुक गयी तो शिवानी ने एक हंटर और लगाते हुए कहा : और फिर क्या हुआ ?
माधुरी : और फिर उन्होंने मुझे अपनी टांगों के बीच में बिठा लिया और मुझसे अपना लण्ड चुसवाया -इसके बाद उन्होंने मुझे नाचना भी सिखाया और जब वह नहाने के लिए बाथरूम में गए तो उन्होंने वहां भी मुझे पानी से भरे टब में खड़ा कर लिया और मुझे नाचने के लिए कहा.
शिवानी मन ही मन सोचने लगी की माधुरी से अभिषेक से ज्यादा मज़े तो उसका देवर विनीत ले रहा है-लड़का पूरी अय्याशी अपनी भाभी के साथ कर रहा है
शिवानी ने अब माधुरी से कहा : चल अब तुझे विनीत ने डांस करना सिखा ही दिया है तो जरा मुझे भी नाचकर दिखा.
यह कहने के साथ ही शिवानी ने एक सेक्सी डांस नंबर टी वी लगा दिया और कडककर बोली : नाचो मेरी जान
माधुरी जो कि एकदम नंगी खड़ी थी, गाने की धुन पर नाचने लगी
शिवानी : मज़ा नहीं आ रहा है-अपने हाथ ऊपर उठाकर और अपनी कमर मटका मटकाकर नाच
माधुरी अपनी हाथ ऊपर उठाकर अपनी कमर को हिला हिलाकर नाचने लगी
शिवानी की उत्तेजना लगातार बढ़ती जा रही थी
गाना ख़त्म होने पर माधुरी रुक गयी
अब शिवानी माधुरी से पूछने लगी : अब मुझे तू एक बात सच सच बता -अगर सच नहीं बताएगी तो इस हंटर से तेरे कम से कम 100 कोड़े लगाए जाएंगे-अब तुझे यह फैसला करना है कि मेरे सवाल का सही सही जबाब देगी या फिर 100 कोड़े खायेगी
माधुरी सहमकर शिवानी के उस सवाल का इंतज़ार करने लगी जिसका जवाब न देने पर उसे 100 कोड़ों की सजा मिल सकती थी
शिवानी ने अब अपना 100 कोड़ों की सजा वाला सवाल माधुरी से पूछा : मुझे यह बता चिकनी कि अभिषेक और विनीत दोनों का लण्ड तूने अब चूस लिया है-तुझे किसका लण्ड चूसने में ज्यादा मज़ा आया ? जल्दी बता नहीं तो कोड़े लगने शुरू हो जाएंगे
माधुरी इस सवाल को सुनकर एकदम शर्म और ज़लालत से शर्म से लाल हुई जा रही थी क्योंकि उसे इस सवाल का जबाब देने के बहुत शर्मिंदगी और ज़लालत का अनुभव हो रहा था लेकिन शिवानी ने जैसे ही फिर से उसके बदन पर कोड़े मारने शुरू किये, माधुरी बोल पडी : विनीत देवर जी का लण्ड चूसने में मुहे ज्यादा मज़ा आया
शिवानी माधुरी को ज़लील कर करके खुद बहुत गर्म और उत्तेजित हो चुकी थी . उसने माधुरी की तरफ देखकर कहा : इधर आकर मेरी टांगों के बीच में बैठ
शिवानी एक गाउन पहने हुए थी . उसने अपनी गाउन की ज़िप खोल दी. गाउन के अंदर शिवानी एकदम नंगी थी.
जैसे ही माधुरी उसकी टांगों के बीच में आकर बैठी, शिवानी ने उसके चेहरे को अपनी हाथों से पकड़कर अपनी गीली हो चुकी योनि पर रगड़ना शुरू कर दिया और उससे बोली : चल साली, मेरी इस गीली योनि को अपनी जीभ से चाट चाट कर मुझे खुश कर
माधुरी तो बेबस थी. वह शिवानी के हुक्म की तामील करने लगी.
शिवानी कुछ देर बाद उससे बोली : अपनी जीभ को मेरी योनि के अंदर घुसाकर अपनी जीभ से मेरी योनि की मालिश कर चिकनी
माधुरी वही करने लगी जो शिवानी चाहती थी. पंद्रह बीस मिनट तक माधुरी के साथ इसी तरह खिलवाड़ करते करते शाम के चार बज गए थे. शिवानी को लगा कि 7 बजे से पहले न अभिषेक आएगा और न ही विनीत. इसलिए कम से कम 6 बजे तक यानि दो घण्टे का समय उसके पास अभी मौज मस्ती करने के लिए और है.
शिवानी ने अब अपना गाउन भी उतारकर एक तरफ रख दिया और माधुरी जो पहले से ही निर्वस्त्र खड़ी हुई थी, उसे लेकर अपनी बिस्तर पर आ गयी
माधुरी को बिस्तर पर सीधा लिटाकर शिवानी उसे देखकर शरारत भरी मुस्कान के साथ बोली : अभिषेक और विनीत के बाद अब मैं भी तेरे साथ सुहागरात मैं मनाऊंगी
यह कहने के साथ ही शिवानी ने माधुरी के पूरे बदन पर अपने हाथ फिराने शुरू कर दिए. उसकी जाँघों के अंदरूनी भाग को दबाते हुए उसने माधुरी की चिकनी योनि को काफी देर तक दबाया सहलाया और फिर अपना हाथ वह उसके पेट पर नाभि के पास ले गयी और उस पर अपना चेहरा मसल मसल कर उसे चूसने लगी. शिवानी ने अपने बदन को माधुरी के बदन पर पूरी तरह डालते हुए अपने मम्मे माधुरी के मम्मों पर रगड़ने शुरू कर दिए और माधुरी के रसीले होंठों को अपने होंठों की गिरफ्त में लेकर उन्हें बेतहाशा चूमने चाटने लगी.
यह सब करते कराते जब शाम के 6 बजने को हुए तो शिवानी ने अपने कपडे भी पहन लिए और माधुरी से भी अपने कपडे पहनने के लिए कहा
माधुरी ने इस बार अपना पेटीकोट और साड़ी दोनों ही अपनी नाभि से काफी नीचे करके बाँधी थी और इस की वजह से उसका वह पूरा भाग बहुत सेक्सी लुक दे रहा था
शिवानी ने माधुरी के नाभि वाले हिस्से पर चिकने पेट पर अपना हाथ फिराते हुए कहा : क्या बात है-अब एकदम मस्त और सेक्सी माल लग रही है -अब तुझे आगे से इसी तरह पेटीकोट और साड़ी पहनना है -तुझे हम सब लोग अपनी मौज़ मस्ती के लिए ही तो गाँव से लेकर हैं -इसलिए तू हम सब को मज़ा दे देकर खुश करती रह
यह करते करते अचानक दरवाज़े की घंटी बज उठी. शिवानी को लगा कि आज शायद अभिषेक दफ्तर से जल्दी आ गया है -उसने दरवाज़ा खोला तो वहां विनीत था
विनीत ने अंदर आते ही शिवानी को बताया : कालेज में आखिर के दो पीरियड वाले प्रोफ़ेसर आज छुट्टी पर थे इसलिए मैं जल्द ही घर आ गया
अचानक विनीत की नज़र शिवानी के साथ खड़ी माधुरी पर पडी और उसने भी देखा कि माधुरी ने अपनी साड़ी को फ़िल्मी हीरोईनों की तरह नाभि से काफी नीचे करके बाँधा हुआ है जिसके चलते वह एकदम मस्त और सेक्सी माल लग रही थी. विनीत का लण्ड एकदम खड़ा हो गया था लेकिन वह शिवानी से नज़रें बचाता हुआ अपने कमरे में आ गया.
विनीत तो अपने कमरे में चला गया लेकिन शिवानी की नज़रें ताड़ गयीं थीं कि विनीत की हालत सेक्सी माधुरी को देखकर बहुत बेचैन थी, इसलिए उसने माधुरी को हड़काते हुए कहा : जा विनीत को उसके कमरे में पानी का गिलास देने जा
माधुरी जब पानी का गिलास लेकर विनीत के कमरे में पहुँची तो विनीत सोफे पर बैठा हुआ जींस के अंदर अपने खड़े हुए लण्ड पर हाथ फिरा रहा था
माधुरी के हाथ से उसने पानी का गिलास ले लिया और रौबीली आवाज़ में उससे बोला : नीचे बैठो और मेरे जूते उतारो
माधुरी फर्श पर विनीत के पैरों के पास बैठकर उसके जूते उतारने लगी . विनीत पानी पीने लगा.
विनीत : अब मोज़े भी उतारो
माधुरी ने विनीत के मोज़े भी उतार दिए
जूते मोज़े उतारने के बाद वहां से उठकर जाने लगी तो विनीत ने उसे रोका : इधर मेरे नज़दीक आओ
माधुरी विनीत के नज़दीक आयी तो विनीत ने अपने हाथ को उसके चिकने नाभि प्रदेश पर फिराते हुए कहा : आगे से साड़ी ऐसे ही बाँधा करो ताकि तुम्हारे इस सेक्सी बदन को पूरी तरह से एन्जॉय किया जा सके.
उसी समय शिवानी भी वहीं विनीत के कमरे में आ जाती है
शिवानी को देखकर विनीत कहने लगा : मैं माधुरी से यह कह रहा था कि साड़ी इसी तरह नाभि से नीचे बांधनी चाहिए -शहर में यही फैशन है. और दीदी इसकी ब्लाउज़ भी बहुत पुराने जमाने की लग रही है -उसमे भी कुछ बदलाव होना चाहिए कि नहीं ?
शिवानी (हँसते हुए) : बिलकुल सही बात है-मैंने अपनी फैशन डिज़ाइनर दोस्त संगीता से बात कर ली है-उसने मुझे कहा है कि मैं माधुरी का नाप लेकर उसके मेजरमेंट उसे फोन पर Whatsapp मेसेज कर दूँ तो वह अलग अलग रंगों के ब्लाउज़ इसके लिए तैयार करवा देगी. ब्लाउज़ आगे से डीप कट होने चाहियें और पीछे कपडे की बजाये लम्बी डोरी होनी चाहियें ताकि पीठ का हिस्सा सबको दिखता रहे-यही आज का फैशन है.
विनीत : ठीक है दीदी, जैसा आप चाहें
शिवानी : पर हम इस काम में देरी क्यों करें -चल अपनी अलमारी में से इंची टेप निकाल और नाप लेकर मुझे लिखाता जा. इसी मेजरमेंट को मैं Whatsapp से भेज देती हूँ.
विनीत अपनी अलमारी में से इंची टेप निकाल कर शिवानी को देने लगा तो शिवानी बोली : नहीं नाप तो तुझे ही लेना है-मुझे नाप ले लेकर मेजरमेंट बताता जा.
विनीत समझ गया था कि शिवानी दीदी उसे मौज़ मस्ती का मौका देना चाहती थीं , जिसे उसने बिना किसी झिझक के फटाफट लपक लिया और माधुरी से बोला : चलो अपने हाथ ऊपर उठाओ
शिवानी : विनीत पहले इसने जो ब्लाउज़ पहना हुआ है, उसे इसके बदन से अलग करो, फिर ठीक से नाप लिया जाएगा
विनीत ने एक झटके में माधुरी के ब्लाउज़ को उतार दिया और उसके बाद अपने इंची टेप को वह उसके मम्मों के ऊपर और आसपासमें के हिस्सों लपेट लपेटकर नाप ले लेकर उसके मेजरमेंट शिवानी को लिखाने लगा । कुछ देर के लिए विनीत माधुरी के नितम्बों से एकदम सटकर भी खड़ा हो गया और अपने लण्ड के उभार को उसके नितम्बों पर रगड़ते हुए इंची टेप को उसकी पीठ तक ले आया था -शिवानी भी यह देख रही थी कि विनीत माधुरी से पूरे मज़े ले रहा था.
नाप लेकर शिवानी चली गयी लेकिन विनीत ने माधुरी को अभी तक अपने पास ही रोक रखा था. उसका मन तो बहुत कुछ करने को हो रहा था लेकिन अभिषेक के दफ्तर से आने का समय हो चुका था इसलिए उसने माधुरी के चेहरे को पकड़कर अपनी तरफ किया और उसे बेतहाशा चूमने लगा
जब अचानक दरवाज़े की घंटी बजने लगी तो विनीत ने माधुरी को अपनी गिरफ्त से आज़ाद कर दिया और वह उसके कमरे से बाहर चली गयी