पापी परिवार की पापी वासना Chapter 3
बहनचोद ! रुका क्यों ? टट्टे सूख गये क्या !” । जिस्मानी जुनून में बेक़ाबू होकर मासूम लगने वाली डॉली गाली-गलौज कर रही थी। उसकी पीठ कमान की तरह पीछे को तनी थी। लम्बे बाल जन्गली जानवर जैसे हवा में लहरा रहे थे। उसने अपनी आँखेन बन्द कर रखी थी। सर्दी के मौसम में भी दोनो के बदन पर बेलौस पसीना बह रहा था। राज तसल्लि से बहन की चूत को लम्बे, गहरे ठेले देकर चोद रहा था।
उस रात डॉली तीन बर झड़ी थी। उसके बाद राज ने अपने खौलते वीर्य को बहन की उचकती चूत में बहा दिया था। उसके बाद डॉली फिर चार बार झड़ी थी।
आज उस हसीन रात की याद कर के डॉली की चूत में फिर वही उबाल आ ह था। अपने मासूम मजेदार गुनाह की सुहागरात के बाद भी ऐसी अनगिनत रातें हुई थीं।
डॉली के भाई की सैक्स की प्यास मम्मी के साथ मिलकर भी वो नहीं मिटा पाती थी। अभि सुबह-सुबह ही तो चोद कर उसने डॉली को नींद से जगाया था। डॉली को अब एक और चुदाई की फ़ौरी जरूरत थी। पर मिस्टर शर्मा के फ़ोन पर बुलावे पर राज वहाँ दफ़ा हो गया था। ऐसी भी क्या जल्दी थी बहनचोद को ? डॉली ने सोचा। “क्या मिसेज शर्मा से उसका टाँका तो नहीं भिड़ गया था ?” एक शैतानी भरी मुस्कान उसके कमसिन चेहरे पर नाच रही थी, “ह्मम! शैतान का लन्ड, जभ भी चूत मिलती है, चोद डालता है !”
अपनी मैगजीन को अलग फेंकती हुई डॉली सीधे मकान के पीछे बगीचे में पहुंची। पड़ोस में मिस्टर शर्मा के घर में झाँका तो पूल के आस-पास कोई भी नहीं था। दौड़ कर डॉली शर्मा जी के बाहर पहुंची और बाजू वाले दरवाजे को खुला हुआ पाया। घर के अन्दर झाँकी और कान खड़े कर के किसी आहट को सुनने की कोशिश करने लगी। | पूरा घर सुना लग रहा था, तो बेखौफ़ होकर डॉली अन्दर खुसी। मेहमान खाना और किचन दोनों खाली थे। पर ऊपर किसी रूम से दबी से आवाजें सुनाई पड़ती थीं। जैसे-जैसे वो गलियारे में अन्दर चल रही थी, उसे वो आवाजें ज्यादा साफ़ और तेज सुनाई दे रही थीं। उसके कानों पर कराहने की जानी-पहचानी आवाज़ पड़ी, उसके भाई की। ‘पक्का किसी लौन्डिया को चोद रहा था। पर आखिर किस को ? मिसेज शर्मा ही होंगी। राज हर वक़्त टीना जी की चूत को एक न एक दिन फ़तह करने का दावा करता फिरता था। लगता है आज हरामी ने मैदान मार ही लिया!’ दबे पाँव डॉली आवाजों की जानिब पहुंची। आवाज एक बेडरूम से आ रही थी। मारे रोमांच के, डॉली की नब्ज़ बढ़ने लगी।
28 अब अपनों से क्या छुपाना
बेडरूम का दरवाजा बंद था। डॉली ने दरवाजा खोलने की कोशिश की – दरवाजा लॉक नहीं था। असमंजस में थी कि खोले या नहीं। बहुत हुआ तो कह देगी कि उसे कराहने की आवाजें सुनकर लगा था कि राज किसी खतरे में है। डॉली ने हैन्डल दबा कर बड़े धीमे से दरवाजे को एक इन्च भर खोला। अन्दर झाँक कर देखा तो बिस्तर पर दो नगे जिस्म एक दूसरे से लिपटे हुए सैक्स के जुनून में कराह रहे थे। एक नगा जिस्म उसके भाई राज का था। दुसरे जनाने जिस्म की पहचान डॉली नहीं कर पा रही थी। जो भी थीं, वो मोहतरमा पीठ पर लेटी हुई अपनी टंगें फैलायी थीं और राज की पीठ दरवाजे की तरफ़ थी। मोहतरमा पर चढ़ा हुआ राज अपना लन्ड उसकी टाइट चूत में ठेल रहा था। दरवाजे पर खड़ी डॉली को अपने भाई की टंगों के बीच का नज़ारा साफ़ दिख रहा था!
औरत की रिसती हुई चूत उसके प्यारे भाई के लन्ड को जबरदस्त शिकंजे में जकड़े थी। चूत के होंठ लन्ड के साथ चिपक कर अंदर-बाहर खिंच रहे थे। “अल्लाह मियाँ! ये नजारा तो मेरी चूत में भी गर्मी पैदा कर रहा है !” डॉली ने अपने सूखे होंठों पर जीभ फेरते हुए सोचा। अचानक बिस्तर पर लेटी लौंडीया चीखी: । “चोद हरामी! अपनी बहन की चूत समझ के लन्ड से मरहम लगा रहा है क्या ?! कस के चोद !”
* जानेमन, यूं कहूं क्या ?”, राज ने अपने कूल्हों के झटकों में और जोश भर कर हुंकार भरी। ।
“उह्ह्ह! अब लगा बहन के लौड़े में कुछ दम है! ऊऊ मजा आ गया! ऊहूह, चोद्दे! अम्म्म्म , ऐसे ही! कटुवे! बिलकुल ऐसे ही! अब रोकना मत”
तभी डॉली ने अनजान औरत की आवाज़ पहचान ली। “सोनिया ?” डॉली ने अचरज से सोचा, “अट्ठारह साल की बच्ची से !” डॉली को यक़ीन नहीं हो रहा था! उसका भाई इतनी कम उम्र की लौन्डी को चोद रहा था। हालाँकि हरामजादी गाली-गलौज तो ऐसे कर रही थी जैसे मन्झी हुई रन्डी हो! डॉली ने और करीब जा कर देखा तो लगा कि सोनिया के तेवर बच्ची जैसे तो बिलकुल नहीं थे! पेशेवर रन्डी जैसे जाँघों को फैलाये अपनी एड़ियां अपने आशिक़ की गाँड पर बाँधे हुए थी।
जैसे राज अपने लन्ड को जवाँ हसीना की खिंची हुई चूत में हथौड़े की तरह चला रहा था, सोनिया के कमसिन कूल्हे बिस्तर से ऊपर उचक-उचक कर राज के ताकतवर झटकों को झेल रहे थे। डॉली ने अपने भाई के लन्ड को सोनिया की टपकती चूत के अंदर-बाहर लगातार ठेलते देख कर अपने होंठों पर जीभ फेरी और नज़ारे का भरपूर लुफ्त उठाया। डॉली के जिस्म की भूख भी अब जाग चुकी थी। वो भी दोनों की मस्ती में शरीक होने के लिये बेटाब हो रही थी। उसे यक़ीन था कि उसके भाई राज को इस पर कोई ऐतराज नहीं होगा, लेकिन सोनिया पर इसका क्या असर होगा ? । “एक ही रास्ता है” डॉली ने तय किया, और रूम के अंदर दाखिल होकर अपने पीचे दरवाजा लॉक कर दिया। बिस्तर पर अपने वहशी जिस्मों की भूख में मशगूल नौजवान जोड़े को इसकी भनक भी नहीं हुई।
वाह! वाह! बहुत खूब!” डॉली ने बड़ी आवाज कर के ऐलान किया और बिस्तर की जानिब बढ़ी। आवाज सुनकर राज और सोनिया अपनी बेशरम हरकत में जैसे थे वैसे ही जम से गये। । “अबे डॉली तू? साली डरा ही दिया मुझे !” उसे पा कर राज के चेहरे पर कुछ राहत हुई।
“क्यों बड़े भाई ? लगता हैं मुझे देख कर आपको कुछ परेशानी हो रही है ?” डॉली ने बेतकल्लुफ़ लहजे में बिस्तर पर तशरीफ़ ली। दोनो जुड़वाँ थे लेकिन वो हमेशा राज को अदब से बड़े भाई कहती थी। पहले तो इसलिये कि राज उससे एक मिनट पहले पैदा हुआ था। फिर इसलिये कि डॉली ने जबसे उसके लन्ड को देखा था और उसके साईज को नापा-तौला था, तब से बड़ी मोहब्बत से उसे बड़े भाई कहती थी।
सोनिया को तो जैसे साँप सूंघ गया था। उसका मुँह अब भी खुला का खुला रह गया था, पर उसमें से जरा भी आवाज नहीं निकल रही थी। डॉली के खुराफ़ाती दिमाग़ में उस खुले हुए मुंह के अंदर अपने भाई के लन्ड को देखने की ख्वाहिश पनप रही थी। । “तुझे क्या हुआ सोनिया ? क्या तेरी नानी मर गयी ?” सोनिया ने डरी हुई लड़की पर तरस खा कर मुस्कुरा कर उसे इत्मिनान दिलाया।
“अ अ अरे डॉली दीदी! तुम कब आयीं ?” राज के चौड़े सीने के पीछे अपना नंगा जिस्म छुपाते हुए बोली।
“मुझे खबर हुई कि तुम्हारे घर में कुछ ऐयाशी और रंगरेलियों का प्रोगराम है। बस चली आयी मैं भी शरीक होने !”
29 दो से भले तीन
डॉली के इन लफ़्जों ने सोनिया को और उलझन में डाल दिया, “क्या मतलब ? मेरी तो समझ में कुछ भी नहीं आ रहा !”
“मतलब मेरे बड़े भाई तुम्हें बेहतर समझा सकते हैं।”, अपने भाई की माँसल गाँड पर च्यूटी भरती हुई बोली।
“राज ! मुझे लगता है कि तुम्हारी बहन शायद मेरी मम्मी और डैडी से हमारी चुगल करने की धमकी दे रही है ?” सोनिया अब काफ़ी परेशान लगने लगी थी।
“नामुमकिन! उल्टा मुझे तो ऐसा लगता है कि पछता रही कि जरा देर से यहाँ आयी। मैं अपनी बहन को अच्छी तरह से पहचानता हूं। पक्का वो भी बिस्तर में हमारे साथ शामिल होना चाहती है।” राज ने बदमाश्ही से मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “क्या कहती हो सोनिया ? कर लें शामिल ?”
“पर डॉली तो तुम्हारी सगी बहन है ना ?” सोनिया इलज़ाम सा लगाते हुए पूछा। सोनिया जानती थी कि अपने भाई के साथ बाथरूम में सुबह ऐसी ही करतूतें करने के बाद वो किसी पर ऐसा इल्ज़ाम लगाने की हक़दार नहीं थी।
“बहन है तो क्या ? बहन को क्या मोहब्बत का इजहार नहीं किया जा सकता ? ईमान से कहूं तो मैं तो बहन को रोजाना चुदता हूं।” राज ने शेखी बघारी, और अपनी मम्मी को भी। अरे भाई, इस दुनिया में ये दो शख्स ही तो मुझे सबसे प्यारे हैं! दिल में जो उनसे प्यार-मुहब्बत है, उसका अपने लन्ड से इजहार करता हूं! और दोनों मुझसे बे-इन्तेहाँ मुहब्बत करती हैं, जिसका इजहार अपनी चूतों से करती हैं ? लो कर लो बात, इसमें क्या बुराई है। ?” अपने तसाव्वुर में राज को अपनी मम्मी और बहन से चुदाई करते हुए देख कर सोनिया की चूत की लन्ड पर जुबिश और बढ़ गई।
“हाँ, मुहब्बत में कैसे बुराई ?” लजाती हुए सोनिया ने डॉली के चेहरे को देखा।
मुहब्बत जब बे-इन्तेहाँ हो तो इजहार भी लाजिमी है। राज की बात कहूं तो मेरे मन में भी आजकल ऐसी ही मुहब्बत जाग रही है।” सोनिया बोली।
वाकई ? कौन है वो खुशक़िस्मत ?” डॉली ने पूछा। सोनिया अपना राज खोलने में कुछ हिचकिचाई, पर हिम्मत कर के बोलि।
मेरे डैडी और मेरे भाई !” सोनिया ने झंपते हुए अपने जुर्म का इक़बाल किया। फिर सोनिया ने सारा माजरा कह दिया। अपने मम्मी-डैडी को जो देखा था, फिर उसका सपना, अपने भाई के साथ बाथरूम में की करतूत और अपने डैडी के साथ सुबह पूल के पास हुई आँख-मिचौली।।
“खुदा का क़रम है! अब समझ में आयी कि दोपहर को मुझ पर क्यों ऐसे लपक रही थी तू! इतना सब हो जाने के बाद तेरी चूत में आग लग रही होगी।”, राज सोनिया के मम्मों को मसलता हुआ बोला। उसका लन्ड अभी भी सोनिया की टाइट, गरम चूत में क़ायम था, हालंकि पहले से कुछ कम तना हुआ। । “अब बातें ही करते रहेंगे कि कुछ चुदाई भी करोगे ?’, डॉली ने अपने कपड़े उतारने के लिये खड़े होते हुए पूछा।
दोनों ने डॉली को अपना सलवार सूट उतारते हुए देखा। अपनी मम्मी की तरह ही उसके बाल लम्बे और सुनहरे थे। ब्रा नहीं पहन रखी थी। जैसे ही उसके सेब जैसे मम्मे कपड़ों के क़ब्जे से छूटे, उन्हें देख कर सोनिया के बदन में ऐसी शोरिश हुई, जो उसने पहले कभी महसूस नहीं की थी। राज ने भी सोनिया के बदन के अन्दर चन्द पलों से ठन्डे पड़े शोलों के पुर – तशद भभक उठने से उसकी चूत में आयी तरावट को अपने लन्ड पर महसूस किया।
“डॉली, आओ ना हमारे साथ बिस्तर में।” सोनिया ने उसका इस्तेक़बाल किया, “हाय! ऐसे न देखो मुझे !” ।
“शर्माती क्यों है मुई ? ले में आ गयी।”, डॉली अपने सलवार को उतार कर ऐड़ियों से अलग करती हुई बोली। बिस्तर पर दोनों सोनिया और राज उसे अपने कपड़े उतारते हुए देख रहे थे। डॉली ने अपनी पैन्टी नही उतरी, और दोनों के पास अपनी जाँघों को पूरी तरह फैला कर बैठ गयी।
राज अपनी बहन की जानी-पहचानी चूत को पैन्टी पर रिसते हुए देख कर मुँह से लार टपकाता हुआ होठों पर जीभ फेर कर मुस्कुराने लगा। डॉली ने उसकी कमीनगी-भरी हरकत को देख कर मुस्कुरा कर पूछाः ।
“भाई, भूखे हैं क्या ?”, डॉली आहें भरती हुई अपनी उंगलियों से पैन्टी पर अपने पेड़ को मलते हुए बोली। पतले नायलॉन कपड़े के पार भी अपनी चूत के सोज का एहसास उसे हो रहा था। राज जानता था की हस्तमैथुन करते सम उसकी बहन पैन्टी पहने रहती है। उसे अपनी लसलसी चूत पर गीले नायलॉन का एहसास एक अतिरिक्त मजा देता था।
“खुदा क़सम ! बड़ी हसीन लग रही हो, शब्बो !” अपनी बहन की उंगलीयों को पैन्टी के पतले कपड़े को चूत में डालता देख राज शराबी अन्दाज में बोला और अपना लन्ड सोनिया की चूतं में चलाने लगा।
“बड़े भाई, आज चूत – चाटाई का शोक़ नहीं फ़रमायेंगे आप ?”, डॉली अपनी पैन्टी के इलास्टिक को खींच कर अपनी गीली चूत के गुलाबी नजारे की राज को एक झलक दिखाते हुए मुस्कुराती हुई बोली।
30 नायाब अन्दाज
“मोहतरमा, अपनी रसीली चूत जरा इधर खिसकायिए, बन्दे को भी एक जाम चखने का मौक़ा मिल जाये !”
सोनिया बड़े गौर से भाई-बहन के बीच होती बेहूदा आशिक़ाना डयलॉगबाजी को सुन रही थी, जो उसे कुछ ही दिन पहले सपने में भी मुमकिन नहीं लग सकती थी। वो अपनी चूत को राज के लन्ड पर उचका कर उसे चोदने के लिए उकसा रही थी। अपनी बहन के बिस्तर पर आ जाने के बाद से राज का लन्ड अब और भी बड़ा हो गया था, इस कारण सोनिया को चुटकी भर जलन हो रही थी।
“देखते क्या हो राज , सोनिया ने फ़रमाइश की, “पहले जैसे एक और बार मुझे चोदो!” लौन्डा अपने कूल्हे फिर से हिलाने लगा। अप्ना लम्बा लन्ड जवान लौन्डीया की तन्ग जकड़ती चूत में अन्दर-बाहर टेलने लगा।
डॉली एक बार और खड़ी हुई और अपनी भिगी पैन्टी को उतार फेंका। 4 शाबाश राज ! चोद साली को!”, उसे यूं उकसाती हुई बिस्तर पर फिर छड़ गयी, “लगा कर चोद हरामजादी की चूत ::: बड़ी गालियाँ दे रही थी ना? खोद दे आज रंदी की चूत। हाथ के हाथ मेरी भी चूत चाट ले ना !” ।
डॉली अपने भाई के ठीक सामने बिस्तर पर अपनी टांगों को सोनिया के कन्धों के दोनों ओर रख कर खड़ी हो गई। अपनी फैली हुई टांगों के बीच अपनी चुंगराली, काली झाँटों के दर्मयान उग़लियों से रगड़ते हुए राज के वास्ते अपनी चूत के होंठों को खोल डाला। अपनी आँखों के बीच इस खुदाई कैफ़ियत को देख राज के गले से एक गहरी आह निकली।
उसकी बहन की चूत बड़ी ही चिकनी थी, और तीन साल से, जब उसने पहली बार उस नशीली चूत पर अपने लबों का चुम्बन दिया था, उस शराबी चूत का दीवाना था। कमसिन कली जैसी खिलती चूत की पंखुड़ीयों के बीच उसके अन्दर राज अपनी हवस भरी आँखों से ताक रहा था।
“करीब आ डॉली! मेरे मुँह के पास !”, राज अपने सर को आगे को झुकाता हुआ मुँह बाये होंठों को अपनी बहन की चूत की जानिब करता हुआ बोला। उसके झुकने से उसका लन्ड भी सोनिया की चूत में और गहरा घुसा। और गहरे धक्को से मजा पाकर सोनिया हलके से चीखी। डॉली ने पेड़ को अपने भाई के मुँह की तरफ़ धकेला। और राज अपना प्यासा मुँह उसकी तपती, रिसती चूत में लगा कर उसको पागल की तरह चूसने और चाटने लगा। सोनिया ने अपने ऊपर देखा तो राज की जीभ को डॉली की कुलबुलाती चूत के अन्दर घुसते हुए देखा।
जवान लौन्डी को बड़ी हैरत हो रही थी! सैक्स के इस नायाब तरिक़ के बारे में पढ़ा सुना तो था, पर कभी आँखों से देखा न था। ये नजारा सोनिया को सैक्स पर और आमादा कर रहा था, खास कर के इसलिये कि लड़का-लड़की सगे बहन-भाई थे। सोनिया ने अपने भाई का तसव्वुर करके सोचा कि वो दोनों भी अगर इस तरिक़ को अख्तियार करें तो कैसा रहे। फिर अपने भाई से चूत चटवाने के खयाल से जोश खाकर अपनी काम्पती चुतिया को राज के चाबुक से चलते लन्ड पर फुदकाने लगी। । “ओहह, यार !”, सोनिया सोच रही थी, “बड़ा मजा आयेगा अगर जय मेरी पैन्टी उतार कर अपनी जीभ को मेरी चूत में इसी तरह डाल कर चाटे। अम्म्म्म! और डैडी ? अगर डैडी उसकी गरम चूत चाटने को राजी हो जाएं तो और भी मजा आये ? अगर जय और डैडी दोनों एक साथ उसकी चूत पर लगे हों तो फिर बात ही क्या हो !” उसके बेलगाम दिमाग़ में ऐसे पाप-भरे खयाल उठ रहे थे और वो अपनी टाइट चूत को राज के लन्ड पर वहशियाना अंदाज में फुदका रही थी। |
राज पागल कुत्ते की तरह अपनी जीभ से डॉली की चूत के अंदर और उसके चारों तरफ़ सड़प- सुडुप, चपड़-चुपड़ कर के चाट रहा था। वो अच्छी तरह जानता था कि उसकी बहन को किधर और किस लहजे से चटवाने में मजा आता है। रह-रह कर राज चूत के ऊपर से सटा कर अपनी जीभ को नीचे ले जाता हुआ उसकी गाँड के छेद तक चाटता, और फिर जीभ आगे लाकर चूत के अन्डर घुसा डालता। उसकी इस जंगली हरकत से डॉली अपनी भड़की हुई जवानी के आगोश में आ कर बुलन्दी से चीख पड़ती और अपने भाई के सर को दबोच कर अपनी उतावली चूत पर और दबाती। । “राज ! ओओह मेरे अल्लाह! बहनचोद, जीभ को अपनी लन्ड की तरह मेरी चूत में घुसा !”
राज खुशी से हुक्म बजा लाया। अपनी जीभ से झाँटों को अलग करता हुआ अपनी लम्बी जीभ को डॉली की ऐंठती चूत में जितना अंदर जा सकती थी, उतना अंदर घुसाया, और वैसी ही बेहूदा आवाजें करता हुआ चाटने लगा।
“आर्रघघहुह! ऊउन्घ अहह! माँ के लन्ड, अभी से झड़ायेगा क्या मुझे !”
31 नवाबी शौक़
सोनिया बड़ी दिलचस्पी से राज को अपनी बहन के सख्त, तने हुए चोचले को अपने होंठों के बीच दबोच कर खेलते हुए देख रही थी। मस्ती के इस मुक़द्दस एहसास के मारे डॉली अपने घुटने टेके देती थी। डॉली की खुली जाँघों के ठीक नीचे लेटी हुई सोनिया बारीकी से बहन-भाई के बीच होती हरक़तों का जाजा ले रही थी। राज से चुदते हुए और उसे अपनी बहन की बलखाती चूत को चाटते हुए, सोनिया खुद बड़ी तेजी से झड़ने की घड़ी को पास आता महसूस कर रही थी। राज का लन्ड अब घोड़े की रफ़्तार से सरपट चल रहा था। अपनी जीभ के जितनी ही तेज रफ़्तार से राज लन्ड को भी सोनिया की चूत में ठेलमठेल कर रहा था। खुदा के तिनों बन्दे अब झड़ने के करीब आ चुके थे, पूर कमरा पसीने से लथ जिस्मों की आपस में छप-छप आवाजों और सैक्स के बुख़ार से गरमती हुई चूतों की बू से महक रहा था।
राज ने अपना सार ध्यान दोनों मोहतरमाओं की चूत के चोचले पर केन्द्रित कर रखा था। बहन के चोचले को अपनि थूक में लबालब करे हुए उसे दोनों होंठों के दरम्यान चूस रहा था। साथ ही सोनिया के चोचले पर अपने मोटे लन्ड से ताबड़-तोड़ वार कर रहा था। दोनों लड़कीयों जिस्म को बलखाती, गाँडे हवा में लहराती, अपने मम्मे फुदकाती हुई झड़ने की तड़प में पागलों जैसे चीख रही थीं। आखिरकार, डॉली मस्ती में चीखती हुई और टपकती चूत को अपने भाई के चेहरे पर रगड़-रगड़ कर उसके चेहरे को दोनों हाथों से थूक और चूत के पानी से सनी जाँघों के बीच लथेड़ने लगी।
ऊहहह! आह्ह्ह अररगगग! चोद्दों! मैं झड़ रही हूँ !”, डॉली ने गरजते हुए ऐलान किया।
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अपने जिस्म में आये सैक्स के जलजले के झटकों के असर से डॉली की टांगें आगे और पीचे हिलने लगीं और उसकी पीठ कमान की तरह तन गयी। चन्द ही पलों में सोनिया भी घायल शेरनी की तरह तड़पती और चिल्लाती हुई झड़ने लगी। झड़ते हुए सोनिया ने अपनी नाजुक कमर से ऐसे मजबूत झटके राज के लन्ड पर दिये कि उसका मुँह अपनी बहन की झड़ती चूत से अलग हो गया।
इतनी कसरत करने के बाद थक कर डॉली दोनों के पास वहीं बिस्तर पर पड़ गयी और बड़ी दिलचस्पी से भाई को अपने मोटे सूजे हुए लन्ड से जवान लौन्डिया की फैली हुई चूत में जोरदार लम्बे धक्के देते हुए देखने लगी। “अल्लाह बरक़त दे! क्या लन्ड है!”, डॉली गौर किया, “सोनिया की कोख तक घोंप रखा है। अगर आपने उस बिस्तर पर लेटे हुए सोनिया के चेहरे को देखा होता तो आप भी ऐसा ही सोचते। सोनिया ने अपनी पलकें मूंद रखी थीं पर उसका खूबसूरत मुँह खुला हुआ था और वो एक के बाद एक आहें, चीखें और मुहब्बत की गालियाँ दे रही थी। सोनिया की चूत से सिलसिलेवार सैक्स और मस्ती की लहरें उठ-उठ कर उसके जवाँ- उम्र, नाजुक बदन की भड़कती आग को इतमिनान के मीठे से सैलाब में डुबो देती थीं।
“ऍह ऍह ऍह !”, ताव खाती घोड़ी जैसे हिनहिना रही थी वो। “बहनचोद राज ! चोद मुझे !”
“बहनचोद मत बोल सोनिया, क़सम से। बरदाश्त नहीं होता। मेरा लन्ड जल्दी झड़ जायेगा!”, राज चीखा।
सूअर, बहन की चूत चूसता है! कस के चोद मुझे !”
कितना मोटा है रे तेरा कटुवा लन्ड! चोद हरामी !” । सुबह बहन की चूत को कितना वीर्य पिलाया था ?” इस तरह राज के चुतड़ों को दोनों हाथ में दबोच कर अपनी गंदी जुबान से उसे चोदने के लिये उकसा रही थी सोनिया।
अपने ठेलते लन्ड पर राज सोनिया की टाइट चूत के माँस को कसता हुआ महसूस कर रहा था। अब उसक जुनून बर्दाश्त के बाहर हो चला था। कुछ ही पलों में उसने अपने कूल्हों को पागल कुत्ते की तरह झटकाना शुरु कर दिया। और उसके सुपाड़े के रास्ते उसके सूजे हुए टट्टों ने उबलता हुआ वीर्य उडेल दिया। खौलते वीर्य की बौछार फेंकते हुए लन्ड से सोनिया की संकरी गरम चूत में गहरे ठेले लगाता हुआ अपने मुँह से गालियाँ निकालने लगा राज ।।
ले साली! बड़ी तड़पा रही थी रन्डी! ले पाल मेरा बच्चा अपने पेट में! कुतिया, भाई के साथ बाथरूम में गुलछरें उड़ाती है, और मुझे बहनचोद बुलाती है! अब नौ महीने बाद तुझे राज के लन्ड की याद आयेगी! ले एक और तोहफ़ा मेरे टट्टों से, हरामजादी! फिर बहनचोद बुलाया तो तेरी और तेरी माँ की गाँड मारूंगा !” |
अपनी चूत में पीले- पीले वीर्य की गरम बौछारों का एहसास पा कर सोनिय फिर एक बार झड़ने लगी और अपने पेडू को राज के लन्ड पर अपनी पूरी ताक़त से रगड़ने लगी।
डॉली लेट कर अपनी रसीली, गुलाबी चूत को मसलती हुई अपने भाई के वीर्य को उसके सुपाडे से रिसकर चिकने लन्ड पर गाढ़ा झाग बनाकर सोनिया की चूत के होंठों से छलक कर बहते हुए देख रही थी। उसकी निगाहें इस खौफ़नाक रोमांचक नजारे पर लगी हुई थीं।
राज ने अपना मुँह झुका कर सोनिया के कंपकंपाते होंठों को हवस से चूमा। उसका लन्ड झड़ने के बाद भी धीमे-धीमे सोनिया की चूत के अंदर हरकत कर रहा था। राज उसकी टपकती चूत की टाइट जकड़ का लुफ्त उठाता हुआ उसके जिस्म के ठन्डे होते हुए शोलों के आखिरी ताप को सेक रहा था।
तभी डॉली ने अपने हाथों के बल बिस्तर पर रेंगते हुए अपने मुँह को दोनों की जाँघों के बीच घुसा दिया और अपने टट्टों पर बहन के होंठों के एहसास से राज के मुँह से एक आह निकल गयी। डॉली ने एक एक कर के दो बड़े अण्डों को अपने मुँह के अंदर ले कर चूसा। और फिर जीभ को अपने भाई के लम्बे लन्ड पर, उस हद थक जहाँ पर वो सोनिया की भिंचती चूत में घुस गया था, फेर कर अपनी मुहब्बत का इजहार किया।
डॉली सिहर उठी और अपनी जीभ को धीमे से सोनिया की वीर्य से सनी चूत के होंठों पर फेरा। डॉली ने जैसे-जैसे अपनी जीब्ब को अट्ठारह साल की लड़की की फड़कती और वीर्य से सनी चूत पर फेरा, सोनिया भी उसके साथ कराहने लगी।
राज ने आगे झुक कर सोनिया के सख्त निप्पलों को होंठों के बीच मसलते हुए ऊपर देखा और मुस्कुरा कर कहा, “तुझे मैं एक बात बताना तो भूल ही गय। डॉली भी
अपने भाई की तरह कभी कभार चूत – चटाई का शौक़ रखती है :: . ”
32 खेल-खेल में
सोनिया ने हैरान होकर उसकी तरफ़ देखा और राज ने बात आगे बढ़ाई। “जब मैं मम्मी को चोदता हूं तो भी ये ऐसे ही करती है, और फिर मम्मी? वो तो सातवें आसमान पर पहुं जाती हैं! मम्मी को एक ही वक़्त पर मुझसे चूत चुदवाना और डॉली से चूत चटवाना बड़ा अच्छा लगता है।”
“स : सच ? तुम्हारी माँ डॉली से अपनी चूत चटवाती हैं ?”, सोनिया ने दम भरते हुए पूछा।
“अरे अट्ठारह आने सच! जब मैं घर पर न हूं दो दोनों एक दूसरे की चूत चाटती हैं। चाहो तो कभी खुद चल कर देख लेना !” | सोनिया ने राज की माँ और बहन को अंग्रेजी की 69 मुद्रा में एक दूसरे से लिपटे हुए तसव्वुर किया। उस बेहूदा खयाल ने उसकी चूत के चोचले में पुर – जोश नये सिरे से करन्ट दौड़ा दिया। | डॉली की आवाज ने उसके तसव्वुर में खलल डाला। वो अपना सर ऊपर उठा कर अपने भाई से कह रही थी “भाई, प्लीज अपने लट्ट जैसे मोटे लन्ड को थोड़ी जेहमत दीजिये और सोनिया की चूत से बाहर निकालिये, ताकि मैं तुम दोनों की ठीक से खिदमत कर सकूँ ?”
राज गर्दन पलट कर अपने कन्धे के ऊपर से उसे देखा और मुस्कुराया।
लो, मुझे भूखा बुलाती थी, और अब खुद चाटना चाहती है ?”
डॉली ने खिलखिलाते हुए अपने भाई के चूत में गड़े लन्ड को अपने मुँह मे लिया और अपने दाँतों में पकड़ कर चूत के बाहर खींचने लगी।
“आ आ! कुतिया,! चबाती क्यों है ? दर्द होता है !”, वो हँसा। “कितनी बार कहा है भाई के लन्ड के साथ जरा मुहब्बत से, आहिस्ता खेला कर !”
राज अपना टपकता हुआ लम्बा लन्ड सोनिया की गरम चूत की गिरफ़्त से सलाप! की आवाज के साथ खींच कर बाहर निकाला और उसके बाजू में बिस्तर पर ढेर हो गया। सोनिया लपक कर उसके सीने पर लेट गयी और उससे चिमट कर अपनी गोरी जाँघों के बीच उसके लन्ड को दबोच लिया। राज का लन्ड उसकी कुछ ही पल पहले बुरी तरह से चुदी चूत के कुछ ही इन्च दूर था। जैसे ही राज का लन्ड सोनिया की चूत के कब्जे से स्प्रिंग की तरह फुदक कर आजाद हुआ, उसकी बहन डॉली ने बड़ी फुर्ती से आगे झुक कर अपने भाई के लम्बे, लसलसाते हुए, काले लन्ड को अपने कमसिन मुँह में दबोच लिया था। अप्ने गाल को सोनिया की रिसती चूत पर टेक कर डॉली राज के लन्ड और टटॐ पर फैले हुए वीर्य और चूत के तेल के महकाते शराब से घोल को चाट रही थी। | सोनिया अपनी चूत के चोचले पर पड़ते दबाव से और ताव खा कर अपनी कमर को चक्कर लगाकर बलखाती हुई अपनी हवस – अंगेज चूत के खुले होंठों को डॉली के गाल पर मसल रही थी।
“ओह्ह अमममम! मजा आ गया!”, वो अपने नारंगी जैसे रसीले गोल पुख्ता मम्मों को राज के टटोलते मुं में दबाती हुई कराही। प्यासे मेमने की तरह राज को अपने छोटे-छोटे सख्त निप्पलों को चूसते देख कर उसकी चूत में जुबिश हो रही थी। सोनिया ही हवसनाक कराहटों को सुनकर डॉली ने अपने होंठ भाई के लन्ड से जुदा किये और लपक कर अपना मुँह लौन्डिया की फड़कती चूत पर दे डाला। सोनिया ने जिस हितानी लहजे से अपनी जीभ को उसकी चूत में घुसाया था और जैसे वहशियाना अंदाज से उस जीभ ने उसके चोचले को छुआ था, उससे सोनिया के पूरे जिस्म में बेखुदी की लहरें उठ गयी थी।
“ओह डॉली ! उहहहनघनघ! आह! और चूस, हरामजादी !” वो जोर से चीखी। उसका चोचला डॉली की जीभ पर कर कड़ा होता जा रहा था। सोनिया ने इससे पहले किसी से अपनी चूत नहीं चटवायी थी। यहाँ तो एक लड़की ही उसकी चूत चाट रही थी! पर इस वक़्त तो वो अपनी लबालब चूत को डॉली के पुचकारते मुँह पर दबा दबा कर कस रही थी, जैसे इस फ़न में पुरानी उस्तादी हो!
“मेरी बहन, नाचीज के लन्ड पर भी जरा तवज्जो बसें !” राज अपने मुँह को सोनिया के मम्मों से अलग करता हुआ बोला। डॉली ने सोनिया की चूत पर से मुँह से कुछ बड़बड़ाया। फ़िलहाल तो उसे चूत – चटाई में बड़ा लुफ्त आ रहा था, भाई का लन्ड तो घर की मुर्गी है।
राज समझ गया कि एक बार चूत मिल गयी तो मोहतरमा की शौक़- पोशी में वो क्या, उसके बाप का लन्ड भी कोई खलल नहीं डाल सकता था। पर राज अपने लन्ड को किसी कमसिन हसीना की चिकनी गिरफ्त में कैद करवाने के लिये बड़ा उतावला हो रहा था। उठा और अपने तने हुए लन्ड को सोनिया के दो मुलायम मम्मों के बीच मसलने लगा। लन्ड का सुपाड़ा सोनिया की ठोड़ी पर लग रहा था। सोनिया ने चेहरा ऊपर कर के राज को हवस से मदमस्त अपनी दो आँखों से देखा।
“हरामजादी, अगर खानदानी रन्डी है तो खोल अपना मुँह और चूस मेरे लन्ड !” हाँफ़ते हुए राज ने सोनिया को ललकारा। | लौन्डिया ने सर झुका कर हुक्म की तामील की और अपना मासूम मुँह राज के मोटे बेरहम लन्ड के लिये खोल दिया। अगर सोनिया जिन्दगी में पहली दफ़ा चूत चटवा सकती थी तो भला पहली दफ़ा लन्ड क्यों नहीं चाट सकती थी ? राज का काला लन्ड जब सोनिया की लाल जिभ पर पड़ा तो उसे लन्ड का जायका कुछ अटपटा सा लगा, फिर उसे याद आया कि उसी की चूत के तेल और राज के वीर्य का ही जायका होगा। इस खयाल ने उसकी चूत को डॉली की लसलसाती जीभ पर और जबरदस्त कस दिया।
डॉली की मंझी हुई जीभ और होंठों के असर से सोनिया की सुलगती चूत को बेइन्तहाई लुफ्त मिल रहा था। अपनी छोटी सी जिन्दगानी में पहली दफ़े ऐसे हवसनाक तजुर्बो से गुजरने का रोमंच उसे और खुशगवार कर रहा था। अपनी आँखें मूंद कर बड़े खुलूस से उसने राज का लन्ड मुँह में क़बूल किया। अपने कमसिन होंठों के बीच उसके धड़कते लन्ड के ताक़तवर ठेले और उसके मजबूत माँस और लसलसेपन से उसे एक नायाब एहसास हो रहा था। राज अपने कूल्हे आगे-पीछे हिला हिलाकर लन्ड की लम्बाई को सोनिया के मम्मों के बीच से रगड़ता हुआ उसके छोटे गरमा-गरम मुँह के अन्दर ठूस रहा था।
“डरती क्या है लड़की! समझ लॉलीपॉप है! चूस लन्ड को !”, राज कराहा, “हाँ ऐसे ही! अब लगा खानदानी रन्डी है!”
जरा थूक लन्ड पर! और मज़ा आये !”
“थू!”, सोनिया ने काले लन्ड पर झागदार थूक डाली और आँखे मटाकर मुस्कुराते हुए ऊपर राज की आँखो में देखा।
“बहुत अच्छे! और थूक !”, सोनिया ने दो-चार बार और पेशेवर रन्डीयों जैसे लन्ड के सुपाड़े पर थूका।।
“ऊपर वाले का क़रम! जन्नत का मजा आ रहा है! अब निगल जा पूरा!”
सोनिया ने अपने गले को ढीला कर के लन्ड की लम्बाई को धीरे-धीरे निगलना चालु किया। राज ने भी बड़ी नजाकत से अपना लन्ड इन्च -दर-इन्च सोनिया के गले के अंदर उतारा।।
या ऊपर वाले! शाबाश, एक इन्च और, निगल ले पूरा, लड़की !” राज चीखा और लगभग बर्दाश्त खो बैठा।।
चाहता तो था कि लन्ड की पूरी लम्बाई को लड़की के गले में उतार दे पर जानता था कि लड़की नादान है, अगर ऐसा कुछ किया तो डर जायेगी, क्या पता उल्टी ही न कर दे। फिर लन्ड चुसायी से तौबा न कर ले! किये-कराये पर पानी फिर जायेगा! एहतियातन , राज ने अपना लन्ड दो इन्च बाहर निकाल लिया और सोनिया को चूसने के लिये अपना सूजा हुआ सुपाड़ा दे दिया। सोनिया वहशीयाना अंदाज़ में अपनी लाल-लाल जीभ को साँप के फ़न की तरह लन्ड के सिरे पर डंक मारती हुई चला रही थी। उसके खुद के कूल्हे डॉली के मुंह पर उचक रहे थे। डॉली अपना पूरा मुँह सोनिया की मस्त चूत में ठूस कर पागलों जैसे अपने सर को आजू-बाजू पटकती हुई सपड़ – सपड़ चूत को चाट रही थी और अपनी जीभ को सोनिया की चूत में गहरे-गहरे घुसा कर चूसती जा रही थी।
उधर जैसे जैसे सोनिया के गरम लबों की रफ़्तार उसके लन्ड पर ऊपर-नीचे और तेज होती जा रही थी, राज को अपने टट्टों में वीर्य उबलता हुआ महसूस हो रहा था।
बदजुबान! इसी जुबान से गाली दी थी ना ? अब चाट लन्ड को !” * शाबाश सोनिया! रुकना मत! लगे रह सुपाड़े पर !”
बहनचोद, देखें शर्मा खानदान के टट्टों में कितना दूध है! पूरा पी जाउंगी !”, सोनिया ने राज को और ताव दिया।
हरामजादी! बोला था गाली मत देना! अब किसी भी सैकन्ड झड़ जाऊंगा मैं !” राज चीख पड़ा।
सोनिया ने चूसने की रफ़्तार और तेज कर दी। वो राज के गर्मागरम वीर्य की बौछारों का अपने मुँह मे एहसास पाने के लिये और उसके गाढे-मलाईदार जायके को चखने के लिये बेताब हो रही थी। पर डॉली के इरादे कुछ और ही थे!
“नहीं बड़े भाई !”, डॉली चीख कर अपने भीगे हुए मुँह को सोनिया की ऐंठती चूत से उठा कर बोली।
“आप सोनिया को पहले चोद चुके हैं। इस बार आपके मोटे और काले लन्ड पर मेरा हक़ बनता है !” डॉली लपक कर सोनिया के बाजु में अपनी लंबी गोरी जाँघे चुअड़ी फैला कर लेट गयी।
“क्या सोचते हो मजनू प्यारे ?”, गुर्राती हुई डॉली बोलि , “डाल बहन की चूत में अपन लन्ड और बुलन्द कर दे शर्मा खानदान का नाम !” | डॉली ने शैतान जैसे मुस्कुरा कर ऊपर भाई कि ओर देखा और अपनी उंगलियों से अपनी फैली हुई जाँघों के बीच हवसनाक लहजे से चूत को मसला। राज भी उसे देख कर मुस्कुराया।
“तेरा हक़ कौन छीन सकता है, डॉली ।” कय कर झुका और बहन के जवाँ होंठों पर अपने सुलगते होंठ सटा दिये। “सॉरी सोनिया! लगता है तुझे जरा सब्र करना होगा। बहन की तरफ़ मेरा भी कुछ फ़र्ज बनता है।”
सोनिया भाई-बहन के बीच बे-इन्तहाँ मुहब्बात को देख कर मुस्कुराई और राज को अपनी बहन की जाँघों के बीच लपक कर पहुंचता हुआ देखने लगी। राज को बहन से चुदाई का इरादा बनाते देख कर सोनिया के चेहरे पर जो हल्की सी मायुसी छायी थी, उसे पढ़ कर डॉली ने अपना हाथ बढ़ा कर सोनिया की जाँघ पर रखा और कहा :
“मजनू मियाँ जब तक मेरी चूत पर मेहरबान हैं, क्यों न तू मेरे मुँह पर अपनी चूत स्टा कर बैठ जाती। मेरा कुछ काम अधूरा छूट गया था!”, उम्र में बड़ी डॉली ने अपने हाथों को सोनिया के जिस्म पर सहलाते हुए अपने इरादों का खुलासा किया।
सोनिया भाई-बहन के बीच बे-इन्तहाँ मुहब्बात को देख कर मुस्कुराई और राज को अपनी बहन की जाँघों के बीच लपक कर पहुंचता हुआ देखने लगी। राज को बहन से चुदाई का इरादा बनाते देख कर सोनिया के चेहरे पर जो हल्की सी मायुसी छायी थी, उसे पढ़ कर डॉली ने अपना हाथ बढ़ा कर सोनिया की जाँघ पर रखा और कहा :
“मजनू मियाँ जब तक मेरी चूत पर मेहरबान हैं, क्यों न तू मेरे मुँह पर अपनी चूत स्टा कर बैठ जाती। मेरा कुछ काम अधूरा छूट गया था!”, उम्र में बड़ी डॉली ने अपने हाथों को सोनिया के जिस्म पर सहलाते हुए अपने इरादों का खुलासा किया।
सोनिया एक पल गंवाये बगैर अपनी टपकती चूत को डॉली के ऊपर उठे मुंह पर सटा कर राज की तरफ़ मुँह कर के बैठ गयी। डॉली भी अपने अधुरे काम को पूरा करने के लिये उतनी ही बेताब थी।
* डॉली, तुम कितनी अच्छी हो!”, सोनिया चीख पड़ी जैसे ही डॉली ने अपने मुँह को ढूंस-ठूस कर पुर – जोर पहले से जुनून के साथ उसकी चूत को चूस – चूस कर चाटना चालू किया। | इतने बरसों के बाद राज भली तरह से जानता था कि उसकी जुड़वाँ बहन को किस तरतीब से चोदने पर सबसे ज्यादा लुफ्त मिलता है। शुरुआती पलों में उसे कुछ छेड़छाड़ और शोखी पसंद थी, जिसके बाद उसकी जवाअँ चूत गर्मा कर भाई के मोटे, मजबूत लन्ड की भीख माँगने लगती थी। राज ने अपने लन्ड के सिरे को डॉली की गुलाबी चूत के होंठों के बीच टेका और फिर फूले हुए मोटे सुपाड़े को दूध-सी-लसलसाती म्यान के उपर-नीचे दर्जानों बार रगड़ा। रह-रह कर बहन की छलकती चूत में लन्ड को पूरा घुसा देता और चूत में से भीग कर लन्ड बाहर आता तो उसके धड़कते हुए छोटे से चोंचले पर दबा देता।
राज के कुल्हों की हरकत के साथ-साथ लन्ड का मजबूत सुपाड़ा लिसलिसाती चूत में आगे पीछे फिसल रहा था। अपने जिस्म की आग के असर से डॉली अपनी चूत को और धड़कता
और लिसलिसा होता महसूस कर रही थी। उसके कूल्हे अपने भाई के छेड़ते हुए लन्ड की धीमी रफ़्तार के साथ-साथ धीमे-धीमे खुद-ब-खुद चक्कर काटते हुए ऐंथ रहे थे। डॉली कि जुबान बेतहाशा सोनिया की मस्त चूत को चाट रही थी। सोनिया ने कराहते हुए अपनी बाहें राज की गर्दन पर लपेटीं और उसके मुंह को अपने मुँह पर खींच कर चिपाका दिया। डॉली उसकी जवान चूत को चाट- चाट कर बेहाल कर दे रही थी।
डॉली अब बदहवासी की हालत में थी। अपनी लाल, मखमली चूत में भाई के फिसलते लन्ड का एहसास उसके बर्दाश्त के बाहर था। पूरी तरह ताव खा चुकी डॉली सोनिया की चूत से अपना मुँह अलग कर के हवसनाक लहजे में चीखी।
* चोद राज ! चोद !”, वो गिड़गिड़ायी, “बहन को और मत तड़पा। अब नहीं सहा जाता !”
बहनचोद ! प्लीज चोद मुझे ! जोर लगा के चोद !” मेरी चूत भाई के वीर्य की प्यासी है!” ।
राज को जैसे इसी घड़ी का इंतजार था। उसकी बहन भी अब तैयार थी! पलक झपकाते ही उसने अपने लन्ड को निशाने पर दागा और करारा जहटका दे कर अपने हैवानी लन्ड को डॉली की चूत में गहरा उतार दिया।
“अमममम :: : उंघ! उंघ! उ उ उ उ हह, या ऊपर वाले! राज !”, राज का लन्ड जैसे ही टट्टों तक उसकी चूत के आगोश में समाया, तो सोनिया की चूत में ढूंसे हुए डॉली के मुँह से चीख निकली।
राज हमेशा से अपनी जुड़वाँ बहन की चूत की टाइट गिरफ़्त का कायल था। चाहे जितनी बार उसे चोद ले, उसके लन्ड पर हर वक़्त ऐसा एहसास होता था जैसे एक गरम, मखमली म्यान में जकड़ा हुआ हो! जिस वहशियाना रफ़्तार से उसका भाई अपने कमाल के मोटे लन्ड से उसकी चूत को चोद रहा था, उसी रफ़्तार से डॉली सोनिया की लिसलिसाती चूत में अपनी जुबान चलाती हुई राज के जिस्म के नीचे कराह और ऐंठ रही थी। ऐसा लगता था कि उसकी कोख राज के मजबूत लन्ड से भर गयी यै और हर दफ़ा जब उसका फूला सुपाड़ा कोख़ पर लगता था, तो उसके सारे बदन में एक तेज और खुशगवार झटका दे जाता था।
या भगवान! राज चोद मुझे ! और तेज ! आँह आँह आँह! क्या लन्ड है!” जैसे उसका भाई उसकी कंपकंपाती चूत को लम्बे, गहरे और ताकतवर झटके मार कर चोदे जा रहा था,
डॉली को अपना मुंह सोनिया की चूत पर कायम रखने में और दिक्कत हो रही थी। डॉली ने अपने मुं से नये जोश के साथ सोनिया की चूत में खौफ़नाक हरकत जारी रखि। वो सोनिया की चूत के लाल, लिसलिसाते माँस चो चाटती हुई अपनी जुबान को चूत में गहरा घुसा रही थी। सोनिया ने अपने कुल्हे नीचे को दबा कर डॉली के ऊपार ताकते चेहरे पर और कसा और अपने मखमली पेड़ को उसकी गरम टटोलती जुबान पर मसलने लगी। । “ओहहहहह ! डॉली! बढ़िया! चाट मेरी चूत हरामजादी! मेरी चूत को अपनी जीभ से चोद !” हवस में दीवानी होती लौन्डिया ने कराहते हुए कहा।
सोनिया के नारंगी जैसे गोल पुख्ता और रसीले मम्मे राज के चेहरे के सामने ऊपर-नीचे झुलते हुए उसे ललचा रहे थे। बहन की चूत में अपने लन्ड की दनादन रफ़्तार को कम किये बगैर, राज आगे को झुका और सोनिया के एक सख्त, गुलाबी निप्पल को अपने मुँह मे लेकर चूसने लगा। सोनिया मस्ती से चीख पड़ी। अब उसके जवाँ जिस्म को दो मुँह चाट – चाट कर मचला रहे थे। ऐसी मस्ती उसके बर्दाश्त के बाहर थी!
“दोनों भाई-बहन कितने हरामी हैं! ओहह ओहह! उंह हा! राज मैं झड़ रही हूं! उंह आँह! डॉली चोचले को भी चूस! आँह आँम्ह आँह !” |
डॉली ने जब उसके धड़कते हुए चोंचले को अपने मुँह के अंदर लेकर एक छोटे से कड़क लन्ड की तरह चूसना चालु किया और अपने गाल पर सोनिया की जाँघों की माँसपेशियों को सिकुड़ते और कसते हुए महसूस करने लगी।
साथ ही राज ने भी अपने हाथ को सोनिया के निप्पल से ऊपर सरका कर पहले उसकी भींची हुई गर्दन पर सहलाया, फिर उसके खुले मुँह की ओर बढ़ाने लगा। सोनिया ने अपने मुँह को राज के मुँह पर झुकाया, दोनों के मुँह एक दूसरे से चिपके और दोनों जुबाने चूसने, टटोलने और आपस में रगड़ने लगीं।
सोनिया अपनी चूत को अपनी जाँघों के बीच चूसते मुंह और मचलती जीभ पर दबाती हुई राज के कुचलते चुंबन में जोर से कराहती हुई झड़ने लगी। सोनिया की चूत ने डॉली के मुँह को गरम, मलाईदार रिसाव से लबालब कर दिया, जिसे डॉली ने भी बड़ी खुशी से चाट लिया और उसकी चूत से आखिरी बूंद को भी निगल गयी।
जैसे सोनिया के जिस्म के धधकते शोले ठंडे पड़ने लगे, उसने अपनी टपकती चूत को डॉली के रिसाव से लथे हुए मुँह से उठाया और वहीं बिस्तर पर चकनाचूर हो कर पड़ गयी।
“लौन्डिया, कैसी रही चुदाई ?”, राज ने पूछा।
सोनिया ने मदहोश हो कर ऊपर देख और गौर किया कि राज उसकी आनन- फानन फैली हुई चूत पर और उसकी लाल – लाल गहराईयों में से चुहुते हुए गाढ़ेरिसाव पर नजरे गाड़े था।
ओह, बढ़िया थी! चुदाई में मजा आ गया !”, लौन्डिया को चुदाई के बाद वाकई बड़ा इतमिनान मिला था।
मेरा लन्ड तो रॉकेट की तरह सर्र – सर्र झड़ रहा था!”, राज ने सोनिया के बचकाने उतावलेपन पर मुस्कुराते हुए कहा।
राज का लन्ड अब भी डॉली की चूत के अंदर पुरजोर फुदक रहा था। अब जो सोनिया की चूत उसके मुंह पर नहीं दबी हुई थी, डॉली अब अपना पूरा ध्यान उसकी कोख में ठंसे हुए लम्बे मोटे लन्ड पर लगा सकती थी। राज के हैवानी लन्ड को जैसे अपनी अंतड़ियों पर महसूस कर सकती थी वो। उसकी चूत के माँस पर लन्ड की गर्मी का एहसास होता था। अपनी कोख़ के दर पर लगातार खटखटाता सुपाड़ा उसके रग रग को गुदगुदा रहा था, खासकर उसके मुंमों को। उसने अपने हाथों को ऊपर कर के राज का सर बाँहों में लिया और अपने धौंकते मम्मों के दरम्यान रख दिया। उसके चाटते मुंह को पकड़ कर एक निप्पल से दूसरे निप्पल पर लगाने लगी। जल्द ही उसके दोनों मम्मे राज की थूक से सन गये। डॉली ने हवस से भरे लहजे में कराह कर कहा, “राज , मुझे और चोद! कस के चोद! हमेशा कि तरह चोद चोद कर झड़ा दे!”
राज ने अपनी बहन के चेहरे पर बेपनाह बेटाबी देखी। मारे जुनून के डॉली उसकी पीठ पर अपने नाखून गड़ाती हुई अपने पूर बलबूते से चूत को रौंद रही थी।
बहुत हो चुका डॉली बह!”, वो गुर्राया, “अपनी टांगें ऊपर कर, हम सोनिया को असली चुदाई का नमूना दिखाते हैं !”
डॉली ने बात मानते हुए अपने घुटनों को फैला कर चौरा किया और अपनी टपकती चूत को पूरी तरह से खोल दिया। सोनिया तो डर रही थी कि राज का लन्ड उसकी बहन की चूत को फाड़ ही देगा, पर डॉली तो ऐसी ताबड़-तोड़ चुदाई की आदी थी। उसे भरोसा था कि उसकी चूत भाई के लन्ड के इन्च – इन्च को झेल सकती है! राज के लन्ड के हर फुख्ता ठेले के साथ राज का पेड़ छप्प-छप्प कर के सोनिया के चोंचले से मसल रहा था जो उसके तन-बदन में हवस की लहरें उठाये देता था। |
सोनिया ये देख कर हैरान थी कि किस जंगली जोश से राज अपनी सगी बहन को चोद रहा है! उसे ये पूरा हादसा गैर – काबिल-ए-यक़ीन सा लगता था। उसका गीला, लिसलिसा लन्ड इतनी फुर्ती डॉली की तसल्ली से फैलायी हुई चूत में सिलसिलेवार हरक़त कर रहा था कि उसे जाँघों के बीच बस एक मोटी, काली धुंधलाहट सी ही धिख पा रही थी। राज का लन्ड उस टाइट म्यान की गिरफ्त में कैद था, और सोनिया बड़ी हैरात से चूत के सुर्ख होंठों को राज के लम्बे, मोटे अंग को एक छोटे से मुंह की तरह चूसते हुए देख रही थी। बेखुदी से सिसकियाँ भरते हुए डॉली अपने भाई के रौंदते लन्ड के हर झटके के साथ अपने कूल्हे ऊंचे उठा कर अपनी फैल कर खोली हूई चूत को उस पर धकेलती जा रही थी।
सोनिया ये देख कर हैरान थी कि किस जंगली जोश से राज अपनी सगी बहन को चोद रहा है! उसे ये पूरा हादसा गैर – काबिल-ए-यक़ीन सा लगता था। उसका गीला, लिसलिसा लन्ड इतनी फुर्ती डॉली की तसल्ली से फैलायी हुई चूत में सिलसिलेवार हरक़त कर रहा था कि उसे जाँघों के बीच बस एक मोटी, काली धुंधलाहट सी ही धिख पा रही थी। राज का लन्ड उस टाइट म्यान की गिरफ्त में कैद था, और सोनिया बड़ी हैरात से चूत के सुर्ख होंठों को राज के लम्बे, मोटे अंग को एक छोटे से मुंह की तरह चूसते हुए देख रही थी। बेखुदी से सिसकियाँ भरते हुए डॉली अपने भाई के रौंदते लन्ड के हर झटके के साथ अपने कूल्हे ऊंचे उठा कर अपनी फैल कर खोली हूई चूत को उस पर धकेलती जा रही थी।
“बहनचोद! उंघ! उंघ! ओओह! रहम कर भगवान !”, इस तरह डॉली चिखती रही। राज ने नीचे झुक कर अपानी एक उंगली इत्मिनान से उसकी छोटी सी टाइट गाँड में घुसा दी। राज अपनी बहन को अच्छी तरह से पहचानता था और उसे ताव देने के दो- चार शर्तिया गुर जानता था। दोनों के बीच जैसे मुक़ाबला हो रहा था, कि कौन पहले झड़ता है।
सोनिया ने राज की उंगली को डॉली की गाँड के धेद में जाते देखा और नीचे हाथ सरका कर अपनी चिकनी, गीली चूत से खेलने लगी। इस छेद का खयाल तो अब तक उसके जेहन में नहीं आया था। ताज्जुब कर रही थी कि कैसा एहसास होगा वो! सोनिया ने अपनी टांगों को पूरी तरह फैला दिया और अपनी चूत के रिसाव में एक उंगली को भिगो कर अपनी गाँड के छेद पर मलने लगी। गाँड के गुदाज छेद पर उंगली का खुशगवार एहसास पाकर उसने एक गहरी साँस भरी। अपनी नजरें चुदाई में मशरूफ़ वहशी जोड़े पर लगातार गाड़े हुए सोनिया ने धीमे-धीमे अपनी उंगली को मरोड़ते हुए गाँड के छेद में टटोला और अचानक छेद की माँसपेशी कुछ ढीली हुई और उसकी उंगली एक इन्च अपनी गाँड अंदर फिसल गयी।
“ओहह! अम्मम्म!”, सोनिया शैतानी जुनून में कराह रही थी और हैरान हो रही थी कि कितनी आसानी से उंगली गाँड में घुस गयी थी। कुछ पलों बाद सोनिया हैरान हो रही थी कि गाँड में उंगली डालने में भी इतना कमाल का मज़ा मिल सकता है! संकरी सी गाँड उसकी टटोलती उंगली पर एक गर्मा-गरम, मखमली कसाव डाल रही थी और सोनिया अपनी उंगली और भी अंदर घुसाये जा रही थी। ऐसे एहसास उसके जवाँ जिस्म में आज से पहले कभी नहीं उठे थे। अपनी टाइट गाँड में उंगली घुसा – घुसा कर चोदने की उसकी इच्छा अब बर्दाश्त के बाहर हो रही थी। भाई-बहन सोनिया को अपनी गाँड के टाइट छेद में एक उंगली डाल कर अंदर बाहर हिलाते हुए देख रहे थे। राज ने मुस्कुरा कर नीचे डॉली कि तरफ़ देखा और बोला, “देख बहन ! लगता है सोनिया गाँड मरवाने की शौक़ीन है !” | डॉली ने पलट कर देखा थो सोनिया की उंगली को उसकी गाँड में पूरा घुसा हुआ पाया। सोनिया की अनछुई गाँड अब खुल कर फैल चुकी थी और उसकी उंगली एक लन्ड की तरह सोनिया की गरम, मक्खनदार गाँड को चोद रही थी।
“सोनिया, साथ-साथ, अपना अंगूठा चूत में डाल !”, डॉली ने नसीहत दी, “लन्ड जैसा ही मजा आता है !” सोनिया ने कहे अनुसार किया। चूत की चिकनी गुफ़ा में अपना अंगूठा डाल और उसकी बीच की उंगली से अपनी गाँड में खुजली जारी रखी।
“आह! मममम ! ओह! आहा !”, जवान लौन्डिया अपने दोनो छेदों को एक साथ भर कर कराह रही थी। सोनिया तो जैसे सातवें आसमान पर थी! आँखें मूंद कर अपने हाथ से खुद को चोद रहि थी। अपनी गाँड और चूत पर दनादन रफ़्तार में रगड़ते हुए लगातार चीख और कराह रही थी। अपनी हवस से तैश खाकर ऐसी बेहूदी हरकतें करती हुई सोनिया को देख कर राज और डॉली ने भी अपने जिस्मों की मशक़्क़त में और जोश और फुर्ती दिखायी। डॉली की टांगें ऊंची उठी और फैली थीं, और उसके भाई का लन्ड उसकी बेसब्र चूत में बार बार अपना लन्ड गहरा घुसाता, फीर सुपाड़े तक बाहर खिंचता और फुर्ती से अंदर ठूस देता। राज के टट्टे फिच्च आवाज के साथ डॉली की चूतड़ों से टकराते।
ऊंघ! मेरी रन्डी बहन! कैसे फड़का रही है हरामजादी! चूत है या पटाखा ? क्या ये हुनर मम्मी ने सिखाया है ?”, डॉली ने जैसे ही अपनी चूत की माँसपेशियों को सिकोड़ कर भाई के लंबे लन्ड को अंदर -ही-अंदर मसला, राज चीक उठा। डॉली मुस्कायी। उसने अपने तुरुप का पत्ता फेंका था। जानथी थी अब राज ज्यादा देर मैदान में नहीं टिक सकता। पर राज भी कच्चा खिलड़ी नहीं था। अपने मजबूत हाथों से बहन ही टांगों को ऊपर उठा कर अपने कन्धों पर टेक दिया और उसके कमसिन चूतड़ों को दोनों हाथों मे जकड़ कर अपनी पूरी ताकत से आगे ठेलने लगा। अब राज का लन्ड अपनी बहन की ऊपर उठी चूत में पहले से भी ज्यादा गहरा चोद रहा था। अपने भाई के ताबड़तोड़ बरसते लन्ड के हर झटके के साथ शबनमे के कान बज रहे थे। डॉली अपने पंजों से कुरेदती हुई अपने नाखूनों को राज की पीठ में गाड़ रही थी। उसके लन्ड को अपनी चूत के हर कोने में थूसने की चेष्टा में बिस्तर पर उचक-उचक कर चूं-चू आवाज कर रही थी।
चोद राज ! और कस के! और गहरा! उंघहहह! बहनचोद !”, डॉली चीखी, उसकी आवाज अपनी हैरतंगेज़ मेहनत के मारे घर्रा रही थी।
राज ने बहन के चूतड़ों को आपस में भींच कर अपने ठोकते लनंद पर उसकी चूत के माँस के शिकंजे को और कसा। अपने लन्ड के हर जबरदस्त झटके के साथ वो डॉली की ऐंठती गाँड को बिस्तर के गद्दे में और टूसे देता था। सोनिया भाई-बहन के बीच होती इस बेहतरीन रस्सा-कशी को गौर से देख रही थी। दोनों पूरा दम लगा कर दूसरे को झड़ाने की कोशिश कर रहे थे पर खुद और अपने जिस्मों के उबाल पर मुश्किल से क़ाबू कर पा रहे थे। बहुत ही कड़ा मुक़ाबला था, दोनों खिलाड़ी एक दूसरे के जिस्मों से अच्छी तरह वाक़िफ़ थे और सैक्स के हर हुनर में माहिर भी। पर धीरे-धीरे राज का पलड़ा भारी लग रहा था, डॉली अब बहुत देर तक खुद पर क़ाबू नहीं रख रकती थी। उसके पेड़ में से एक जबरदस्त सैलाब उठ रहा था, जिसे कोई भी ताक़त नहीं रोक सकती थी।
“हाँ राज ! ओह्ह्ह , मैं झड़ी! उंहहह! चोद डाला साले! आँहुहुहुहुहुहुहुहुह !”
अपने भाई के मोटे थूषे हुए काले लन्ड के दोनो तरफ़ डॉली की पतली गोरी टंगें कसी हुई थीं। उसके जिस्म में उबलते हुए जुनून के असर से उसकी गोश्त से भरी चूत रह-रह कर फड़क रही थी।
अपनी ऐथती बहन के ऊपर झुका हुआ राज भी अब ज्यादा देर सब्र नहीं रख सकता था। अपने अंदर खौलते हुए वीर्य को बहन की जकड़ती चूत में उडेलने की तड़प के मारे उसके टट्टे कुम्हला रहे थे। पर किसी तरह उसने चन्द और पलों के लिये सब्र किया।
“शाबाश डॉली! रन्डी! देखी मेरे लन्ड की ताक़त! तुझे झड़ा दिया !”, राज चीखता हुआ वहशी की तरह कूल्हे झटक-झटक कर अपने काले लन्ड से बहन की सुलगती सुख़ चूत को चोद रहा था।
सोनिया भी अब झड़ने वाली थी। बुरी तरह से ताव खाकर अपने दोनों हाथों को खुद पर रगड़ रही थी। जिस जबरदस्त रफ़्तार से एक फ़ीत दूर राज अपनी बहन को चोद रहा था, उसी रफ़्तार में सोनिया भी अपनी चूत मसल रही थी। गाँड और चूत – दोहरी चुदाई का एहसास सोनिया को इससे पहले कभी नहीं हुआ था, और आज इसी कारं उसकी हवस के बरूद में चिंगारी का काम कर रहा! और उस पर राज के लट्ट जैसे मजबूत काले लन्ड से जुड़वाँ बहन की हवस से भीगी चूत को बेरहमी से चोदने का नजारा!
पूरे बेडरूम में सैक्स की जंगली आवाजें गूंज रही थीं। मस्ती भरी कराहें, हवस से भरी चीखें और सिलसिलेवार एक जिस्म से दूसरे जिस्म के टकराने की छप्प-छप्प आवजें। डॉली के बदन में जुनून का एक ऐसा सैलाब उमड़ रहा था, जिसका एहसास उसे पहले नहीं हुआ था। इतनी बेखुदी से उसके भाई ने उसे पहले नहीं चोदा था। डॉली का मानना था कि सोनिया की मौजूदगी से राज के गैर-मामूली जोश का गहरा ताल्लुक़ था। यही नहीं, डॉली की बे-इन्तेहाई दीवानगी की जिम्मेदार भी सोनिया की उस बिस्तर पर उनके साथ गुनाह में शिरक़त थी। एक बार तो वो झड़ चुकी थी, और अब दूसरी बार राज का बेरहम लन्ड उसकी बेचारी चूत को झड़ा डाल रहा था।
“आँह! ऊंह! बहनचोद ! ऊंह! ऊंह! बेरहम, फिर झड़ा रहा है मुझे !” , वो चीखी।
डॉली ने अपनी पीठ को बिस्तर से उचका कर ताना, और चूत को अपने भाई पर कसा। लन्ड की रगड़ाहट उसे पागल बना रही थी। उसने अपनी कमार ऐंठ कर अपनी टंगें ऊपर की और उनसे राज के जबर्दस्त चलते हुए चूतड़ों को जकड़ लिया। अपनी एड़ियों को राज के चूतड़ों पर मार-मार कर जैसे घोड़े को एड़ लगा रही थी। उसी के बगल में सोनिया मारे तड़प के बिस्तर पर ऐंठ रही थी और हाँफ़ती हुई मुं में घिघिया रही थी।
“ऊंगगग! ओहहूंघह! हरामियों! मैं भी झड़ रही हूँ !”, सोनिया चीखी और हैवानी लहजे में झड़ने लगी। उसकी जवान चूत अपने जिस्म के ताप के मारे फड़क रही थी, उसकी गाँड घुसी हुई उंगली पर और कसती जा रही थी।
राज भी अब क़ाबू खोने वाला था। सोनिया को बेहूदगी से अपनी बेलगाम हवस की नुमाइश करते देख कर और बहन डॉली की चूत की जोरदार जकड़नों का एहसास पाकर उसके लन्ड में फ़ौरी जुम्बिश चालु हो गयी थी, जिसे वो थाम नहीं सकता था। उसकी बहन को भी लन्ड की जुम्बिश का एहसास हुआ और वो नीचे से कमर को बलखाती हुई अपने कूल्हे बिस्तर से उचका उचका कर राज के हर झटके को झेल रही थी। भाई के लन्ड के सिरे से जल्द ही फूट कर उसकी प्यासी चूत को लबालब करने वाली गर्मागरम बौछार की उम्मिद में वो मस्ती से कराहने लगी। राज का पूरा बदन ऐंठ गया और उसे अपना लन्ड डॉली की लिसलिसी चूत के फड़कते माँस पर पिलता हुआ और भी सूजा हुआ लगने लगा। एक अपने राज को अपने टट्टों में उबाल का एहसास हुआ, और दूसरे ही पल लन्ड में एक अलग तरह की फड़कान हुई।
“आरघ! हराम की भोंसड़ी! ले मेरी रन्डी बहन! ले भाई के टट्टों का दूध !” फिर बहन की चूत उसके लन्ड पर इस क़दर फुर्ती से कसी कि एक पल उसे लगा कि चक्कर आ जायेगा।
अपने लन्ड पर चूत की लगातार खींचातानी ने उसके टट्टों को उसके लन्ड पर सटा दिया था। राज ने अपना सर छत की तरफ़ उठाया और अपनी पलके भींच कर बंद कीं। उसका मुं खुला हुआ था और चेहरे को मारे दीवानगी के भींच रखा था। जैसे ही उसके गाढे, मलाईदार वीर्य की बौछारें लन्ड के सिरे से फूट कर बहन की झूमती चूत की गहराईयों में बहने लगीं, राज के मुँह से एक चीख निकल गयी। डॉली भी जुड़वाँ भाई को अपनी चूत में झड़ते हुए देख कर मजे से चीखी। चूत में छलकते वीर्य और मोटे फड़कते लन्ड के गहरे दबाव के असर ने उसे भी तीसरी बार झड़ाना शुरू कर दिया।
ऊहहघहघ! ओह! राज ! और चोद मुझे! कस के चोद! ऊंगहहह !”
मेरे साथ झड़! हाँ बहन! आजा! शाबाश हरामजादी! क्या गरम चूत है! कुर्बान जाऊ!”, राज चीखा। गुनाहगार भाई-बहन एक दूसरे के कांपते बदनों से लिपटते हुए अपनी हवस की प्यास बुझा रहे थे।
कराहतैइ और ससकती हुई सोनिया उनके पास बिस्तर पर लेटी, अपनी उंगलियों को अभी भी अपने दोनों टपकते छेदों में घुसेड़ी हूइ, पतली सी कमर को बेखुदी से बिस्तर पर ऊपर-नीचे उचकाती हुई थमते हुए जुनून के आगहोश मे तैर रही थी। सर फेरकर उसने राज और डॉली को देखा तो वो दोनों एक दूसरे के जिस्मों से लिपटे हुए इंतेहाई दीवानगी से एक दूसरे को चूम रहे थे। राज का लन्ड अभी भी बहन की चूत में धंसा हुआ था और वो धीमे-धीमे से अपने कुल्हे हिला रहा था। सोनिया डॉली को दबी आवाज़ में कराहते हुए सुन पा रही थी। उसकी कराहें राज के चाटते मुँह में दब रही थीं। | अपनी जाँघों से उंगलियाँ हटा कर सोनिया बिस्तर पर घुटनों के बल बैठ कर अपनी उंगलियों को राज के मजबूत चूतड़ों पर मुहब्बत से सहलाने लगी। सहलाते हुए उसकी उंगलियाँ नीचे की तरफ़, राज की जाँघों के बीच पहुंचीं और उसके के टट्टों पर लिपट गयीं। राज के टट्टे सूज कर साईज मे दुगुने हो गये थे। सोनिया को यक़ीन था कि डॉली की चूत अपने भाई के गाढे, चिपचिपे वीर्य से लबालब हो रही होगी। यह खयाल उसे गुदगुदा रहा था। झट से उसने अपना हाथ और नीचे बढ़ा कर इंगिल्यों को राज के लन्ड और डॉली की चूत के संगम पर लगया तो उसे डॉली की चूत के रिसाव के गीलेपान का गरम एहसास हुआ।
राज ने पलट कर सोनिया को देखा और मुस्कुराया। “कैसे रही, सोनिया ?”, उसने पूछा, “इसे कहते हैं बहन और भाई की मुहब्बत !”
“सचमुच, दाद देनी होगी, सोनिया ने मुसुरा कर जवाब दिया, “बेपनाह मुहब्बत की भी, और सैक्स में तुम दोनो की महारत की भी! लगता है बहन-भाई ने बड़ी मेहनत से इस हुनर को निखारा है !”
हाँ भैइ, दोनो कड़ी मेहनत करते हैं! है ना शब्बो ?” राज ने बहन की तरफ़ आँख मारते हुए चुटकी ली।
डॉली ने अपने भाई की तरफ़ आँखे आधी मूंदे हुए देखा। “दोनो नहीं बेवकूफ़, हम तीनों कह! घर पर मम्मी भी तो हैं !” ।
बिगड़ती क्यों हो बहन ? मैने कभी तुम्हे लन्ड की कमी महसूस होने दी है!”, राज हँसा और खुद को अपनी बहन के जिस्म से उठ कर अलग किया। सोनिया ने गौर से देखा कि उसका आधे- कड़क लन्ड डॉली की चूत से स्लड़ाप्प की आवाज के साथ खिंच कर बाहर निकला और थप्प कर के बहन की जाँघ पर गिर गया। राज अपनी बहन के साथ बिस्तर पर लेट गया और लेटते ही उसके हाथ बहन के फूले हुए स्तनों पर काले जामुनों जैसे रसीले और नुकीले निप्पलों से खेलने लगे।
“अम्म, बेशक़ तेरे साथ सैक्स में मुझे कमाल का मजा आता है। पर सच कहूं तो कैई बार मेरे जेहन में दूसरे मर्दो के लन्डों से भी चुदने का खयाल आता है।” डॉली ने बड़ी बेतकल्लुफ़ी से दिल की ख्वाहिश बयान की। राज ने अपना हाथ बहन के मम्मों से हटा कर एक झटके से उसे अपने सीने से कसा।।
“तेरे खयालों मे जिनके लन्ड आते हैं, कौन हैं वो मर्द ?”, उसने पूछा।
सोनिया बिस्तर पर दोनो के सामने बठ गयी और अपनी बाँहों को भाई-बहन पर डाल कर बोली। । “जलते क्यों हो राज ?”, वो बोलि , “अभी-अभी तुमने मुझे डॉली के सामने चोदा, तो उसे कोई ऐतराज नहीं हुआ। अगर डॉली भी लगे हाथ किसी दूसरे मर्द के साथ मुहब्बत के दो पल गुजारती है, तो इसमें बुरा ही क्या है ?”
राज ने सोनिया की बात पर गौर किया तो तर्क को जाज़ज़ पाया। लड़की है तो अट्ठारह साल की, पर छुपी रुस्तम है।
“तुम ठीक कहती हो।”, राज अपनी बहन के होंठों पर एक हलका सा चुम्बन देता हुआ बोला, “मुझे गलत मत समझना शब्बो। मेरा मक़साद सिर्फ बहन की हिफ़ाजत ही था। पर इसका ये मतलब तो नहीं की मैं तुझे घर में कैद कर के रखू ?” इस बात पर तिनो ने खुशी से गले मिल कर खिलखिलाने पड़े।
आखिरकार, सोनिया अपनी जनाना उत्सुकता को दबा नहीं पायी, “ पर डॉली तुमने बात आधी छोड़ दी। तुम किन मर्दो के साथ चुदाई के सपने देखती हो ?”, इचकिचाते हुए उसने पूछा। जवाब देने से पहले डॉली ने एक सरसरी निगाह से भाई राज को देखा।
“पहले तो तुम मुझसे ये वादा करो कि जो राज मैं तुम पर जाहिर करने वाली हूं, उसे सुन कर बिगड़ोगी नहीं।” । “हाँ भैइ, वादा रहा!”, सोनिया साँस रोके हुए जवाब क इंतजार कर रही थी, “अब कहो भी !”
अच्छा तो सुनो, जब राज मुझे चोद रहा होता है ::या फिर कभी मुझे नीचे चाट रहा होता है तो … ।
हाँ, हाँ! तो क्या .. ”, बेचैन सोनिया ने उसे उकसाया। “म … मैं फ़र्ज करती हूं कि मिस्टर शर्मा, यानि तेरे डैडी, मुझे चोद रहे हैं !”
मारे हैरत के, सोनिया का मुँह खुला का खुला रह गया। राज ने भी बहन के इस इक़बालिया बयान से हैरान हो कर दो सीटियाँ दीं।
इसका मतलब तुम डैडी से चुदाई करना चाहती हो ?”, सोनिया ने भौचक्के लहजे में पूछा।
हाँ सोनिया, मैं तुम्हारे डैडी पर लट्ट हूं। सच कहूं तो अपने बाप की उम्र के मर्दो पर मैं खास फ़िदा हूं।” डॉली ने अपने भाई के लन्ड को हाथ में दबोचते हुए कहा, “हूं ना बड़े भाई ?”
सोनिया ने मारे शरम और जलन के अपनी नजरें नीची कर लीं। ऐसा नहीं था कि वो डॉली से खफ़ा थी, क्योंकि अपने दिल की गहराईयों में, वो जानती थी की उसके जेहन में भी ये हवास का ये पापी खयाल आता था। जानती थी कि वो अपने डैडी से चुदना चाहती थी, पर इस बात का इक़रार डॉली के सामने भला कैसे करे ? पर वो दोनो उससे जिस क़दर ईमानदारी और खुलुस से पेश आये थे, उसे देख कर, सोनिया ने उनके सामने अपने गुनहगार दिमाग़ के खौफ़नाक इरादों को जाहिर करने की हिम्मत जुटा ली। इसमें उसे खतरा नहीं बलकी ज्यादा मजेदार और हवसनाक हादसों का इमकान हो रहा था।
सोनिया के चेहरे पर गहरी सोच के बादलों को छाया हुआ देख कर राज ने धीरे से उसकी जाँघ को छुआ, “कहाँ खो गयी ?” |
सोनिया ने ऊपर देखा और उसके खूबसूरत जवाँ चेहरे पर एक दिलकश मुस्कान फै गयी, “लगता है शर्मा परीवार और शर्मा परीवार के सम्बन्ध और गहरे होने जा रहे हैं।” |
इस बात पर राज की तो बाँछे ही खिल गयीं। “हाँ हाँ, पड़ोसियों में प्यार मुहब्बत तो होनी ही चाहिये।”,
मिसेज शर्मा और उनके शहौर के बीच हुई चुदाई के सोनिया द्वारा दिये हुए ब्यौरे को याद करता हुआ राज बोला।
“मैं जानती हूं तेरा इशारा किसकी ओर है!”, डॉली ने अपनी जाँघ पर भाई के लन्ड की सरसराहट का एहसास पाकर खिलखिलाते हुए कहा।
क्या ? क्या मतलब ?” डॉली ने राज के लन्ड को दबोच कर एक झटका दिया। अब ज्यादा भोला मत बन ! जानती हूं कि तू मिसेज शर्मा की गीली और गरम चूत में इस बम्बू को ठूसने के ख्वाब देख रहा है। है ना मेरे प्यारे भैय्या ?”
राज ने अपने लन्ड पर अचानक हुए इस हमले से सकपका हर गहरी साँस ली और खुद-ब-खुद उसका लन्ड बहन की फैली हुई चूत की टोह लेने लगा। | सोनिया को तो कानों-कान यक़ीन नहीं हो रहा था! एक डॉली थी, जो उसके डैडी से चुदने का इरादा रखती थी! और अब जाहिर था कि उसका भाई राज उसकी मम्मी पर फ़िदा था। हालात ने उसे जिंदगी के उस मोड़ पर खड़ा कर दिया था जहाँ से उसे अपने आगे कैई राहें खुलती हुई दिख रही थीं। कुछ महीनों से उसके दिल में पनपती हुई मुराद लगता है कि अब पूरी हो जायेगी। उसे अपने सपनों की हक़ीक़त में तब्दीली के आसार नजर आ रहे थे।
“डॉली और राज , दोनो चुप होकर मेरी बात सुनो !”, सोनिया ने अचानक कहा, “अगर मेरा कहा मनोगे तो हम सबको अपनी मनचाही चीज हासिल हो सकती है!” लौन्डिया की बात सुनने के लिये राज और सोनिया झट से बिस्तर पर पूरा ध्यान लगा कर बैठ गये।
राज ने अपने लन्ड पर अचानक हुए इस हमले से सकपका हर गहरी साँस ली और खुद-ब-खुद उसका लन्ड बहन की फैली हुई चूत की टोह लेने लगा। | सोनिया को तो कानों-कान यक़ीन नहीं हो रहा था! एक डॉली थी, जो उसके डैडी से चुदने का इरादा रखती थी! और अब जाहिर था कि उसका भाई राज उसकी मम्मी पर फ़िदा था। हालात ने उसे जिंदगी के उस मोड़ पर खड़ा कर दिया था जहाँ से उसे अपने आगे कैई राहें खुलती हुई दिख रही थीं। कुछ महीनों से उसके दिल में पनपती हुई मुराद लगता है कि अब पूरी हो जायेगी। उसे अपने सपनों की हक़ीक़त में तब्दीली के आसार नजर आ रहे थे।
“डॉली और राज , दोनो चुप होकर मेरी बात सुनो !”, सोनिया ने अचानक कहा, “अगर मेरा कहा मनोगे तो हम सबको अपनी मनचाही चीज हासिल हो सकती है!” लौन्डिया की बात सुनने के लिये राज और सोनिया झट से बिस्तर पर पूरा ध्यान लगा कर बैठ गये।
“बोलो, हमें क्या करना होगा ?”, शब्नम ने पूछा। सोनिया उनमें जगी हुए कौतुहूल को देख कर मुसुरायी। सोनिया ने तफ़सील से अपनी पूरी योजना जुड़वाँ भाई-बहन के सामने रखि।
आगे होने वाले हादसों की उपेक्षा में तीनों चर्चा करते हुए एक दूसरे को हवस भरी नज्ज्रों से देख कर मुस्कुरा रहे थे :::::::
40 किचन में पकी खिचड़ी
जब तक जय और उसके मम्मी-डैडी घर आयें, सोनिया ने सबके लिये खाना पका कर रख दिया। उस रात का खाना जय की जीत का जश्न साबित हुआ। मैच में जय की टीम ने फिछले बरस चैम्पियन रही टीम को हरा कर जीता था। जीत की खुशी में मिस्टर शर्मा ने एक बीयर की बोतल भी खोली। और कोई वक़्त होता, तो मिस्टर शर्मा क़तैइ अपने बच्चों के सामने शराब नहीं खोलते, पर आज तो खुशी के मौका था। मिस्टर शर्मा ने सब के लिये एक जाम का गिलास बनाया और अपने बेटे को बधाईयाँ देते हुए खुशी से परोसा।
जय भी जीत के जोश में फूला नहीं समा रहा था। जब मिस्टर शर्मा ने उसकी तन्दुरुस्ती और ताक़त की तारीफ़ की, तो जय अपनी माँ को देख कर चुपके से एक आँख कारी ल मिसेज शर्मा भी मुस्कुरायीं और अपने बेटे के लन्ड की अपनी योनि के भीतर आज सुबह दी हुई आनन्दमय अनुभूतियों को स्मरण कर अपनी जाँचें सिकोड़ने लगीं।: