पापी परिवार की पापी वासना chapter 1
पात्र परिचय
1st- फैमिली
दीपक शर्मा ( पापा )
टीना शर्मा ( मम्मी )
जय शर्मा ( बेटा )
सोनिया शर्मा ( बेटी )
राजेश ( सोनिया का दोस्त )
आशीष ( सोनिया का दोस्त )
कमलाबाई ( काम वाली )
2nd- फैमिली
कुणाल ( पापा )
रजनी शर्मा ( मम्मी )
राज शर्मा ( बेटा )
डॉली शर्मा ( बेटी )
और भी किरदार है जो समय पर आते रहेंगे
दोस्तो कहानी जल्द ही शुरू होगी
कहानी की एक छोटी सी झलक
सोनिया के नारंगी जैसे गोल पुख्ता और रसीले मम्मे राज के चेहरे के सामने ऊपर-नीचे झुलते हुए उसे ललचा रहे थे। बहन की चूत में अपने लन्ड की दनादन रफ़्तार को कम किये बगैर, राज आगे को झुका और सोनिया के एक सख्त, गुलाबी निप्पल को अपने मुँह मे लेकर चूसने लगा। सोनिया मस्ती से चीख पड़ी। अब उसके जवाँ जिस्म को दो मुँह चाट – चाट कर मचला रहे थे। ऐसी मस्ती उसके बर्दाश्त के बाहर थी!
“दोनों भाई-बहन कितने हरामी हैं! ओहह ओहह! उंह हा! राज मैं झड़ रही हूं! उंह आँह! डॉली चोचले को भी चूस! आँह आँम्ह आँह !” |
डॉली ने जब उसके धड़कते हुए चोंचले को अपने मुँह के अंदर लेकर एक छोटे से कड़क लन्ड की तरह चूसना चालु किया और अपने गाल पर सोनिया की जाँघों की माँसपेशियों को सिकुड़ते और कसते हुए महसूस करने लगी।
साथ ही राज ने भी अपने हाथ को सोनिया के निप्पल से ऊपर सरका कर पहले उसकी भींची हुई गर्दन पर सहलाया, फिर उसके खुले मुँह की ओर बढ़ाने लगा। सोनिया ने अपने मुँह को राज के मुँह पर झुकाया, दोनों के मुँह एक दूसरे से चिपके और दोनों जुबाने चूसने, टटोलने और आपस में रगड़ने लगीं।
सोनिया अपनी चूत को अपनी जाँघों के बीच चूसते मुंह और मचलती जीभ पर दबाती हुई राज के कुचलते चुंबन में जोर से कराहती हुई झड़ने लगी। सोनिया की चूत ने डॉली के मुँह को गरम, मलाईदार रिसाव से लबालब कर दिया, जिसे डॉली ने भी बड़ी खुशी से चाट लिया और उसकी चूत से आखिरी बूंद को भी निगल गयी।
जैसे सोनिया के जिस्म के धधकते शोले ठंडे पड़ने लगे, उसने अपनी टपकती चूत को डॉली के रिसाव से लथे हुए मुँह से उठाया और वहीं बिस्तर पर चकनाचूर हो कर पड़ गयी।
“लौन्डिया, कैसी रही चुदाई ?”, राज ने पूछा।
सोनिया ने मदहोश हो कर ऊपर देख और गौर किया कि राज उसकी आनन- फानन फैली हुई चूत पर और उसकी लाल – लाल गहराईयों में से चुहुते हुए गाढ़ेरिसाव पर नजरे गाड़े था।
ओह, बढ़िया थी! चुदाई में मजा आ गया !”, लौन्डिया को चुदाई के बाद वाकई बड़ा इतमिनान मिला था।
मेरा लन्ड तो रॉकेट की तरह सर्र – सर्र झड़ रहा था!”, राज ने सोनिया के बचकाने उतावलेपन पर मुस्कुराते हुए कहा।
सोनिया के नारंगी जैसे गोल पुख्ता और रसीले मम्मे राज के चेहरे के सामने ऊपर-नीचे झुलते हुए उसे ललचा रहे थे। बहन की चूत में अपने लन्ड की दनादन रफ़्तार को कम किये बगैर, राज आगे को झुका और सोनिया के एक सख्त, गुलाबी निप्पल को अपने मुँह मे लेकर चूसने लगा। सोनिया मस्ती से चीख पड़ी। अब उसके जवाँ जिस्म को दो मुँह चाट – चाट कर मचला रहे थे। ऐसी मस्ती उसके बर्दाश्त के बाहर थी!
“दोनों भाई-बहन कितने हरामी हैं! ओहह ओहह! उंह हा! राज मैं झड़ रही हूं! उंह आँह! डॉली चोचले को भी चूस! आँह आँम्ह आँह !” |
डॉली ने जब उसके धड़कते हुए चोंचले को अपने मुँह के अंदर लेकर एक छोटे से कड़क लन्ड की तरह चूसना चालु किया और अपने गाल पर सोनिया की जाँघों की माँसपेशियों को सिकुड़ते और कसते हुए महसूस करने लगी।
साथ ही राज ने भी अपने हाथ को सोनिया के निप्पल से ऊपर सरका कर पहले उसकी भींची हुई गर्दन पर सहलाया, फिर उसके खुले मुँह की ओर बढ़ाने लगा। सोनिया ने अपने मुँह को राज के मुँह पर झुकाया, दोनों के मुँह एक दूसरे से चिपके और दोनों जुबाने चूसने, टटोलने और आपस में रगड़ने लगीं।
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जॉनी भाई आपने शायद ध्यान नही दिया यहाँ राज अपनी बहन डॉली को चोद रहा है और सोनिया के मम्मे चूस रहा है और डॉली सोनिया की चूत चूस रही है
1 दाम्पत्य
जैसे-जैसे मिसेज़ टीना शर्मा अपने मुलायम होंठों से अपने पति के मुंह में कराह रही थी, उनके पति उनकी कमसिन कमर से उनकी पैन्टी को नीचे सरकाये जाते थे। दोपहर से ही आफिस में मिसेज शर्मा के बदन में कामोत्तेजना अंगड़ाइयाँ ले रही थी। आफिस के जवां-मर्दो के तने हुये लन्डों पर नजर जाती और चूत में एक सनसनी सी पैदा कर दी थी।
मिसेज शर्मा की उम्र कुछ चौंतीस साल होगी – पर जवानी की कामोत्तेजना में कुछ कमी नहीं आयी थी। जवानी में कईं आशिक थे उनके – पर एक मिस्टर शर्मा ही, जो उनके अब पति थे, उनके सुलगते अन्गारों से खेल सके थे। दोनों सैक्स के बड़े मजे लेते थे और इस कला में निपुण थे। दोनो का शिव और शक्ति सा तालमेल था।
“बच्चे सो तो रहें हैं ना ?” मिसेज शर्मा अपनी लम्बी उंगलियां पति के तनते हुए लन्ड पर फेरती हुई बोलीं।
मिस्टर शर्मा एक हाथ से उसके स्तनों को पुचकारते हुए बोले “बेफ़िक्र रहो जानेमन । जय का कल मैच है, वो तो कबका सो गया।”
टीना जी ने जवाब में उनके तने हुए लन्ड को प्यार से ऊपर-नीचे खींच कर उसकी फूलती लाल सुपारी को अंगूठे से दबाया, “और सोनिया ?”
“सोनिया को छोड़ो, वो तो हमेशा लाईट ऑन कर के सोती है। इस वक्त तो मुझे सिर्फ़ तेरी गर्मा-गर्म चूत से मतलब है।” | टीना जी ने जाँघों को फैलाते हुए अपनी चूत का द्वार अपने पति के दूसरे हाथ के लिए खोल दिया। मिस्टर शर्मा के हाथों का स्पर्श टीना की टपकती चूत पर पड़ा तो उसके मुंह से एक उन्मत्त कराह निकल पड़ी।
“म्माअह! मजा आ रहा है !” कहते हुए टीना जी ने अपनी फड़कती हुई चूत को पति की उंगलियों पर मसलना शुरू कर दिया।
ओह दीपक। और न तड़पा, बस चोद डाल मुझे! मेरी चूत गीली हुई जाती है।” यकीनन । जैसे ही मिस्टर शर्मा ने पत्नी की चूत में टोह ली, मादक गरम द्रवों ने उसकी उंगलियों को भिगो दिया। शोख चूत फुदक कर उंगलियों को गुदगुदाने लगीं।
“क़सम से जानेमन! बिलकुल सुलग रही है तेरी चूत !” मिस्टर शर्मा तने हुए लन्ड को पत्नी की फड़कती मांद में घुसाते हुए बोले।
“कस के चोदो मुझे। चोदो अपने मोटे लन्ड से!” । टीना जी ने पीठ के बल लेटते हुए अपनी टांगों को और फैलाया और उन्मत्त होकर पति के तगड़े पुरुषांग को धधकती योनि में डाला। पत्नी की प्रबल उत्तेजना ने बारूद में चिंगारी का काम किया। मिस्टर शर्मा अपने भारी- भरकम लन्ड को पत्नी की प्यासी मुलायम चूत में लगे ढकेलने। पति के मजबूत धक्कों को झेलने के लिएय टीना जी ने अपनी सुडौल टांगें और ऊंची उठा दीं। मिस्टर शर्मा की गाँड पर अपनी ऐड़ियां टेक कर वे उनकी टक्कर से टक्कर मिला रही थीं। जैसे मिस्टर शर्मा अपने लौड़े को टीना जी की चूत के भीतर सरकाते, वो चूत की मांसपेशियों को लौड़े पर जकड़ता हुआ महसूस कर रहे थे। उन्होंने वज्र सा लन्ड टीना जी की दहकती मान्द में इतना गहरा घोंप डाल था, कि टट्टे टीना जी की गुलाबी गाँड से टकरा रहे थे।
“आऽह! माँ क़सम, बड़ी गर्मा रही हो !” मिस्टर शर्मा अपने लन्ड पर जकड़ती मंसलता के अनुभव से सिसक उठे।
“चोद! साले चोद डाल मुझे !” टीना जी चूत के चोचले को पति के माँसल लन्ड से रगड़ती हुई कराह पड़ीं। |
मिस्टर दीपक दोनो बाजुओं के बल अपने मजबूत बदन को झुलाते हुए कभी लन्ड को पत्नी की चूसती चूत से बहर निकालते और फिर वापस मादक जकड़न मे ठूस देते। पत्नी की सुलगती कामग्नि में उनका पौरुष लगतार कोयला झोंक रहा था।
“ऊऽह! साली चोद दूंगा! मार कस के चूत !” टीना जी की आतुर चूतड़ में अपने चर्बीदार लन्ड को ठोंसते हुए मिस्टर शर्मा हुंकारे।
मिस्टर शर्मा के हर वहशी ठेले का टीना जी बिस्तर से उचक-उचक कर जवाब देतीं और जब लन्ड भीतर घुसता तो कराह उठतीं।
“ऊन्घऽ! ओहहहह! चोद दे! बस ऐसे ही! और कस के! ओहहह” टीना जी आगोश में चीखीं। शर्मा दम्पत्ति अपनी प्रबल कामक्रीड़ा में पूरी तरह लीन था। देह की सुलगती प्यास की तृप्ति में दोनो अब सारी दुनिया से अनजान हो चुके थे।
2 -अचरज में बेटी
मिस्टर शर्मा का अनुमान बिल्कुल गलत था कि बच्चे सो रहे हैं। सोनिया तो दरअसल जाग रही थी। अट्ठारह साल की सोनिया परिवार में नन्ही गुड़िया सी थी। भुरे बाल, कमसिन बदन, और मम्मे तो ऐसे परिपक्व कि स्त्रियों को भी ईर्ष्या हो जाए। सोनिया किताब से कफ़ी बोर हो चली थी और बोरियत मिटाने के लिए मटके से पानी पीने को उठी।
देर रात कहीं बाहर वाले जाग न जाएं, इसलिए बैठक में दबे पाँव पहुँची। पहुँचते ही कुछ फुसफुसाने की आवाजें उसके कान में पड़ीं। आवाज उस्के मम्मी – डैडी के बेडरूम से आ रही थी – जैसे कोई दर्द में कराह रहा हो। चिंता के मारे किशोरी सोनिया आवाज़ों की तरफ़ चली। पास आने पर उसे प्रतीत हुआ कि कोई दबे स्वर में बोलता हुआ कराह रहा था। सोनिया के चंचल मन में कौतुहूल जाग चुका थ। वो दरवाजे के पास कान लगा कर सुनने लगी।
“दीपक बाप क़सम ऊउहहह। चोद दे मुझे ! कस के! ऊउगह !” आवाज उसकी माँ की थी और जाहिर हो चुक था कि मामला क्या है। सोनिया साँस रोक कर सुनती रही।
अचानक उसके पिता की मर्दानी आवाज कमरे से सुनाई मे आई। “दे मार अपनी चूत ! ला उसे गाढ़े गरम लन्ड के तेल से लबालब कर दूं।” ।
सोनिया क दिल धकधक कर रहा था मगर पिता के वाहियात बोलों से उसकी चूत मारे उत्तेजन के नम हो चली थी। इन शब्दों के माने वो बखूबी जानती थी पर उनमें भरी प्रबल कमोत्तेजना सीधे उसकी चूत पर असर दिखा रही थी। अपने ही मम्मी-डैडी के बीच इस अश्लील वार्तालाप से उसकी नब्ज़ धौंकनी की तरह चल रही थी। अब वो अपनी आँखों से देखे बगैर नई रह सकती थी।
चाभी के छेद से उसने जो नजारा देख , उससे वो दन्ग रह गयी। उसका हलक सूख गया और दिल उछल कर गले में आ गया। मुँह फाड़े वो अपने माँ-बाप के बीच संभोग का पाश्विक दृश्य देख रही थी – एक्दम निर्विघ्न नजारा। दोनो नंगे पड़े थे – माँ पीठ के बल बिस्तर के ठीक बीच में टांगें ऊपर को पूरी चौड़ी कर तलुओं से बाप की कमर को जकड़े हुई थी। बाप अपने हथौड़े से लन्ड को माँ की टांगों के बीच गाड़े हुए था। अपने बाप के तने हुए लन्ड को माँ की फैली हुई चूत की मुलायम पंखुड़ीयों पर अंदर बाहर मसलते देख कर उसके जैसे होश उड़ गए। माँ की चूत के द्रवों से लथपथ वो फड़कता लन्ड रेल इंजन के पिस्टन की तरह अपनी ही लय में अंदर-बाहर चल रहा था। |
वैसे तो सोनिया अपने बाप के लन्ड को देख चुकी थी पर इस समय वो फूल-तन कर विशालकाय आकार ले चुका था जिसे देख कर उसकी चूत मे सिरहन सी पैदा हो जाती थी। साँप सी लचीली थिरकन थी उस लन्ड में जो उसे सम्मोहित करे लेती थी। वो उसकी माँ की चूत से बाहर उभरता, फूली लाल सुपारी की एक झलक दिखती, और तुरन्त वापस माँ की उछलती चूत मे समा जाता। सोनिया हैरान थी कि इतना विशाल को कैसे माँ की चूत मे घुस पा रहा था। इस नजारे ने सोनिया के मन में उथलपुथल मचा दी थी – रोमांचित भी थी। | सोनिया सैक्स – जीवन में सक्रिय तो नहीं थी पर ऐसी अनाड़ी भी नहीं। पिछली गर्मियों की छुट्टियों में राजेश, जो कि उसके ही स्कूल में था, से उसकी मुलाकात हुई थी। राजेश अट्ठारह साल का छरहरा जवान था और सोनिया का उससे काँटा भिड़ गया था।
3 बेटी सेर
राजेश ने जब उसे चूमा था, सोनिया मोम की तरह पिघल गई थी। कुछ ही देर में उसने अपनी पैंटी खोल कर अपनी कुंवारी चूत राजेश के लन्ड के सामने खोल दी थी। शुरू में दर्द हुआ, पर जल्द ही मजा भी आने लगा था। राजेश ने लंड बाहर निकाल कर उसके गोरे, नर्म पेट पर अपना सफ़ेद, चिपचिपा लन्ड का तेल उडेल दिया था। उस वक़्त तो उसे राजेश का लंड बड़ा लगा था, पर अब बाप के दमदार लन्ड के सामने कुछ भी नहीं लगता था।
सोनिया के मस्त जवाँ बदन में अब वही भावनएं मचल रहीं थीं जिन्हें वो सामान्य अवस्था में कभी उजागर नहीं होने देती थी। अंदर झांकने पर उसने देखा उसकी माँ जाँघों की छरहरी मांसपेश्हीयों को भींच कर अपनी भूखी चूत उछाल-उछाल कर पति के खौलते हुए लंड के झटके झेल रही थी। | सोनिया का मुँह खुला रह गया जब उसने अपने बाप के लसलसाते लंड को माँ की मलाईदार खाई में सटा- सट गोते लगाते और माँ को कराहते देखा। अब उसकी माँ आनंद से अपने प्रेमी को पुचकार रही थी – ऐसी बेशर्मी से गंदी बतें कर रही थी, जिसे सुनने को सोनिया व्याकुल थी।
“ऊन्हुह! ऊन्हह! चोद मुझे ! हरामी कस के चोद! बाप रे, क्या लन्ड है तेरा!” इस हैरान कर देने वाले नजारे को देख कर सोनिया के जवान बदन में कामुकता की लहरें उमड़ रहीं थीं। उसके पाँव जैसे जमीन से गड़ गये हों। मम्मी-डैडी की उत्तेजक चुदाई को देख सुन कर खुद-ब-खुद उसक एक हाथ अपनी गोल मखमली चूचियों को रगड़ने लगा। दूसरा हाथ अपनी पैंटी के अंदर सरक गया और अपनी किशोर चूत को सहलाने लगा। बारह साल की उम्र से वो हस्तमैथुन कर रही थी और जो चूत एक बार भड़की, उसे आनंद देना भली तरह जानती थी।
पहले उसने चूत के होंठों को एक उगली से सहलाया, जब उंगली गिली हो गयी तो उससे अपने मादा – द्रवों को चूत की पंखुड़ीयों पर मल कर उसे चिपचिपा कर दिया। उसकी जवान चूत में रोमांच की बिजली दौड़ पड़ी जब चूत के चोचले को दो उंगलीयों के बीच दबाया। सैक्स के बस एक ही अनुभव ने उसे सैक्स के गुप्त आनंद का ज्ञान करा दिया था। अब उसे चाहिये था तो बस एक मर्द जो उसकी चूत में एक लन्ड को भर दे।
“म्म्मूहहह! अन्न्घ! अम्म्म्म!” अपनी रिसती चूत में लन्ड के बदले एक और उंगली डाल कर सोनिया कराह पड़ि।
ऊहहह ! राजेश ! डैडी! कोई तो आओ !” उसकी उत्तेजित आंखें डैडी के थीरकते लन्ड पर चिपकी थीं। मम्मी-डैडी की सैक्स-क्रीड़ा की लय पर ही सोनिया अपनी कमर को ऐंठती हुई हस्तमैथुन कर रही थी। ठीक वैसे ही जैसे पहली बार जब राजेश ने अपने लन्ड से उसकी कुआँरी चूत को चोदा था। चरम आनंद के उमड़ते सैलाब में वो कल्पना करने लगी कि उसके डैडी ही विशालकाय लन्ड से उसकी जवान चूत को चोद रहे हैं। अपनी कल्पना में उसकी मम्मी नहीं बल्कि वही अपने डैडी के ठेलते बदन के नीचे उछल-मचल रही थी। पाप भरी इस कल्पना ने उसे उबाल दिया।
“ऊह्ह! डैडी चोद दो मुझे ! चोदो चोऽदो ना मुझे !” सिसकते हुए वो उंगलीयों पर ही बहने लगी। आने से उसका पूरा बदन ऐंठने लगा और मस्ती की लहरें जैसे थमने लगीं, अपने हाथों को उसने पतली जाँघों पर टेक दिया। पर डैडी-मम्मी की चुदाई देख कर जो आग उसमें भड़की थी, वो अभी शांत कहाँ हुई थी …
4 कौन बनेगा चोदपति
सोनिया ने फिर छेद से झांका तो अपने डैडी के चमचमाते लन्ड को मम्मी की खुली चूत पर पहले जैसे कार्यरत पाया। सोनिया ने फिर अपने फड़कते चोचले को रगड़ना चालू कर दिया।
उसने कली जैसे उत्तेजित चोचले को इतना रगड़ा कि दूसरी बार चरमानंद पर पहुंच गयी। दोनो उंगलीयों से अपनी टपकती चूत को मसलती हुई मस्ती से ऐंठने लगी।
चरमानंद जब थमा तो कुछ ऐसी शरम आयी कि चुपचाप अपने कमरे की ओर वपास चल पड़ी। अपने कमरे में बिस्तर पर लेटी और सोने की कोशिस तो की पर उसक सर कामुक खयालों से भन्ना रहा था। डर भी लग रहा था कि अपने ही बाप से चुदने की कल्पना क्यों उसे उत्तेजित कर रही थी!
मालूम नहीं कहीं वो मानसिक रूप से बीमार तो नहीं थी ? बस एक ही बात मालूम थी – कि आज उसके बदन में सैक्स के एक जानवर ने जन्म लिया था और वो इस जानवर से और खेलना चाहती थी।
अपने बाप के लन्ड की और राजेश के लन्ड की कल्पना कर उसने निश्चय किया कि जैसा मजा उसने हस्तमैथुन से पाया था, उसे फिर पायेगी। परन्तु इस बार ऐसे लन्ड से सो उस्की चूत्त को गर्मा-गरम उबलते लन्ड के तेल से लबालब भर कर उसे मजे से बेहोश कर दे। | सोनिया की जवानी के तेवर देख कर उसकी माँ ने उसे माला -डी” दे रखी थी – कहीं गुलछरें उड़ते पाँव भारी न हो जायें। बस अब क्या चिंता थी ? कोई लड़का मिलना चाहिए। पर कौन ? स्कूल के सब लड़के तो बिलकुल अनाड़ी थे। एक बार किसी लड़की को चोद लें तो सेखी इतनी बघारते कि पूरे मोहल्ले को खबर हो जाए। और राजेश ? वो तो मिनटों में झड़ जाता थ। हाँ पर उसके डैडी की तो बात ही कुछ और थी! पर उसे बाप का लन्ड नसीब कहाँ हो सकता। कोई और विकल्प ढूंढना पड़ेगा – कोई जो शहर भर ढिंढोरा न पीटता फिरे।
सोनिया को अपने 1 साल बड़े भाई जय का खयाल आया। दीवान पर लेटे टीवी देखते समय हरामी उसकी पैंटी में तांक-झांक करता रहता था। बाथरूम से निकलती तो बद्माश पीछे एक चपत भी जड़ देता। और जब कभी घर के प्राईवेट स्विमिंग पूल में अपनी काले रंग की तंग बिकीनी पहनती तो टुकुर-टुकुर देखता। वैसे तो बड़ा बनता थ, पर सोनिया को पता था कि अभी साले का लन्ड किसी चूत के परवान नहीं चढ़ा था। वैसे था बदन उसका हट्ट-कट्टा। क्रिकेट जो खेलता था। कितनी ही बर सोनिया उसे जिम की टाइट पसीने भरी टी-शर्ट मे देख कर उसके तगड़े बदन को निहारती थी। और जाँघों के बीच जो तना क्या हुआ बम्बू था – बिलकुल डैडी जैसा! “हरामी का डैडी जितना बड़ ही होगा ?” इस बेशरम खयाल ने खुद उसे चौंका डाला था। भाई के तने हुए लन्ड की कल्पना से बेकाबू होती वासना ने उसके तन को कंपकंपा दिया।
याद आया उसे वो दिन जब वो बाथरूम में दाखिल हुई और वहाँ जय को एकदम नंगा पया! शायद उसने जानबूझ कर दरवाजा बन्द नहीं किया था ताकि मम्मी या सोनिया घुस आयें। लन्ड तना तो नहीं था पर उसके आकार को देख सोनिया जान गयी थी की जो तन गया तो भारी-भरकम हथौड़े से कम नहीं होगा। सोनिया ने तुरण्त ही माफ़ी मंगी और बाथरूम से बाहर निकली तो जय के होंठों पर एक कुटिल मुस्कान देखी।
फिर उसकी यादें में आया आशीष – उसकी सकेली का यार था। लंबा मुस्टंडा जवान थ और सुनने में आया था कि लड़कीयों को चोदने में बड़ा माहिर भी! पर सहेली के यार से चुदवाना ठीक नहीं।
5 सपने की दुनिया
सोनिया को हल खुद-ब-खुद ही सूझ गया – राज शर्मा, पड़ोस में एक लड़का था। उम्र उन्नीस लम्बे फैशनेबल बाल, नशीली आँखें। दो साल पहले ही तो शर्मा परिवार पड़ोस में आया था। माँ रजनी शर्मा, जुड़वाँ बहन डॉली। डॉली का तो उसके घर अच्छा आना जाना भी था। “राज ही ठीक रहेगा! पर साले को लाइन कैसे मारू ? घर के प्रईवेट स्विमिंग पूल की मरम्मत करने जब आयेगा तभी मौका मिल सकता है।” सोनिया यूं योजना बना चुकी थी। राज को पटाने की इस साजिश उसके चेहरे पर वासना भरी एक मुस्कान ले आयी थी। |
नींद के आगोश में अब उसके मन में बाप के बारे में पाप भरी तस्वीरें नाच रहीं थीं। सपने मे उसने देखा कि डैडी अपने भारि-भरकम लन्ड को हाथ मे लिये उसकी फैली हुई जाँघों के बिच झुके हुए थे। पास ही उसकी मम्मी और भाई बिलकुल नगे खड़े थे। भाई जय का लंड बिलकुल बाप जैस लम्बा और कड़क तना हुआ। डैडी ने जैसे अपने लन्ड के सिरे से उसकी चूत के दरवाजे को खटखटाया, सोनिया शरम से माँ से कहने लगी। “मम्मी मुझे माफ़ करना। मैं खुद को रोक नहीं पायी!” पर मम्मी के चेहरे पर वासना की लाली थी और वो नजारा देख कर रन्डीयो जैसे बेशरम हो कर मुस्कुरा रही थी।
“मुझे कोई ऐतराज नहीं बेटी! मेरे वास्ते मस्ती की चीज तो मेरी मुठी में ही है!” माँ रीटा जी की हथेली प्यार से बेटे जय के कड़क लन्ड पर लिपटी हुई थी। जय जवाब में एक हाथ से मम्मी के उभरे हुए पुख्ता मम्मों को दबा हुआ था और दूसरे से मम्मी की रिसती हुई झांटेदार चूत को टोल रहा था।
“पर मम्मिं अपने ही बेटे से !!” माँ को भाई जय के तने लन्ड को अपनी चूत के झोलों में डालते देख वो बोली।
“तो क्या मेरा बेटा चोदना नहीं जानता ? एक बार तु भी आजमा कर देख मादरचोद को !” सोनिया को यकीन नहीं हुआ जब मम्मी ने एक झटके में भाई का लोहे सा तना लन्ड चूत मे हड़प लिया। ठीक उसी समय उसने अपने डैडी का बम्बू अपनी चूत को चीरता हुआ महसूस किया। फिर उसके मुँह से जो चीख निकली उसमे दर्द नहीं, केवल रोमांच था। अपने सपने की झूमती कल्पना में उसने अपनी माँ को भी उसी मिठे पाप के उन्माद में चीखते सुना।
6 अकेले नहाना मना है।
भोर के सूरज की किरनों ने सोनिया की बंद पलकों पर पड़ कर उसे जगा दिया। अंगड़ाइयां लेते हुए उसने रात की घटना और अपने सपने को याद किया। क्या मजेदार दिन गुजरा! इतना मजा थे कि अब भी उसकी पैंटी गीली थी। | फिर उसे अपनी साजिश की याद आयी जो उसने खुद के लिये लन्ड का जुगाड़ करने के लिये रची थी। मर्यादावश अपनी सैटिन की परदर्शी नाईटी, जिससे क्लीवेज पूरा दिखता था, पर तौलिया ओढ़े वो बाथरूम की ओर चल पड़ी। दरवाज खुला था तो वो घुस गयी। घुसते ही एक मर्दाना अवाज ने उसे चौंका डाला।
“आओ बहना !” उसका भाई जय फिर पुरानी करतूत दोहरा रहा था।
इस बार तो सोनिया उससे डरने वाली नहीं थी। इत्मिनान से मुस्कुराई और सीधे आँख से आँख मिला कर बोली “स्नान कर चुके भैया?”
“हः ‘हाँ सोनिया बस 2 मिनट और दो।” अपना सर तौलिये से पोंछता हुआ बड़े मजे से बहन के सामने नग्नता क प्रदर्शन कर रहा था। पलट के सोनिया की ओर मुस्कुराने लगा – सोचा था वो मारे शरम के नौ दो ग्यारह हो जायेगी।
सोनिया ने ऐसा कुछ नहीं किया, बल्की कुल्लम-कुल्ल भाई के बदन को घुर-घुर कर मुआयना करने लगी। जय की खिल्ली उड़ाने के लिये चुटकी ले कर बोली।
ऊह! मैं जानती हूं ये क्या लटक रहा है इधर !” भैया जय के झुलते लन्ड की ओर इशारा कर के बोली।
“तो बोलो क्या है ?” जय ने आशापूर्वक पूछा।
लन्ड जैसी ही कोई चीज है, पर उससे कहीं छोटी !” जय के अवाक् चेहरे को देख कर खिलखिला कर हँस पड़ी।
जय ने चेहरे से झेप को पोंछ कर खेल मे शमिल होना चाहा। । “हाँ भगवान ने मुझ से बड़ी नाइंसाफी की !” अपने लटकते लन्ड को देखते हुए बोला। झेपते हुए जय ने बहन से पुछा कि अगर तुम कहो तो मैं बाथरूम छोड़ दूँ ?
“बाहर जाने की ऐसी भी क्या जल्दी है प्यारे भैया !” सोनिया की निर्भीकता ने खुद उसे चौंका दिया।
जय को यक़ीन नहीं हो रहा था कि उसकी प्यारी बहना उसकी आँखों के सामने कपड़े उतारने जा रही थी।
जैसे ही सोनिया ने नाईटी के दोनो स्ट्रैप को धीरे से कन्धों से सर्काय, नाईटी देर हो कर उसके कदमों पर गिर गयी। सोनिया की अन्छुई किशोर चूचियाँ जैसे ही फुदक कर बन्धन से मुक्त हुईं,
जय उन दो पकते हुए आमों को देख कर दंग रह गया। “तेरी बहिन की तो.” अकस्मात् उसके मुंह से निकला।
बहिन की क्या ?’ सोनिया मुस्कुरायी।
कुछ भी तो नहीं !” जय ने सकपकाते हुए बहन के नंगे गोश्त पर गिद्ध सी नजरें गाड़ीं।
भैया की वासना भरी नजरों के सामने यों अंग-प्रदर्शन का सोनिया को अब अलग ही मजा आ रहा था।
जय ने अपने सूखे होंठो पर जीभ फेरी और उसकी नजरें सोनिया की उंगलियों के साथ-साथ उसकी पैंटी की इलास्टिक के अंदर फिसलीं। अब सोनिया अपने भाई को उंगलियों के इशारे पर नचा रही थी। “सोचा न था कि इतनी आसानी से फंस जायेगा” सोचते हुए सोनिया उस मखमली पैंटी को सो उसका आखिरी लज्जा वस्त्र था, अपने नाजुक छरहरे कूल्हों से सरकाने लगी।
जब सोनिया ने बड़ी नजाकत से एक के बाद एक अपनी दोनों चिकनी, सुडौल टाण्गें उठा कर पैंटी के दोनों पायों को जिस्म से अलग किया तो बहन के नंगे यौवन को देख जय की हवाइयाँ ही उड़ गयीं। वो बहन की गुलाबी टपकती चूत के झोलों को उसकी भूरी-भूरी महीन झान्टो के बीच साफ़ खिलता देख पा रहा था। खुद-ब-खुद उसकी जीभ से पापी वासना की लार टपकने लगी।
“कहो क्या बोलते हो ?” सोनिया खिलखिला पड़ी और जय को भौचक्क छोड़ शॉवर के नीचे खड़ी हो गई।।
सोनिया को एक कुटिल रोमांच का अनुभव हो रहा था। उसे लगने लगा था कि मर्दो के सामने जिस्म की नुमाइश में वाकई अलग ही मजा आता है। शॉवर के गरम पानी ने उसके जवाँ बदन को तरोताजा कर दिया था।
7 गंगा स्नान
सोनिया ने कनखियों से देखा कि भैया अभी भी बाथरूम में खड़े सीन का लुफ्त उठा रहें हैं। सोनिया जैसे अन्जान बन कर उसकी तरफ़ होकर खड़ी हो गयी और साबुन को जाँघों के बीच पेड़ पर मलने लगी। झाग चूत से टपक कर जाँघों को लसलसा बना रहा था।
जय ने देखा कि उसके पसन्दीदा अंग, जो बहन की चूचियाँ थीं, उनपर वो साबुन मल रही थी।
“जय मादरचोद! काश तेरी किस्मत मे होता बहिन पर साबुन मलना!” जय ने मन में सोचा। इस नजारे का असर अब सीधा उसके लन्ड पर होने लगा था। उसका दायाँ हाथ खुद-ब-खुद तेजी से तनते हुए लन्ड को अपनी मुट्ठी में ले चुका था। |
कनखियो से सोनिया ने भैया की उंगलियों को लन्ड को जकड़ कर उसे आगे- पिछे हिलाते हुए देखा। “भोसड़- चोद लगा मुठ मारने !” साबुन के झाग से से उत्तेजित उसकी चूत में इस खयाल ने एक करन्ट दौड़ा दिया। अपने नंगे जिस्म का भाई पर ये असर देख वो रोमंचित हो गयी थी और वासना के हॉरमॉन उसके जवान खून को खौला रहे थे।
अब वो भी भाई के सामने हस्तमैथुन करना चाहती थी। भाई जय की मुट्ठी में कूदते लंड पर नजरें गाड़े सोनिया ने साबुन से सनी एक उंगली से अपनी गर्माई चूत के झोलों को खोला। सोनिया ने शॉवर की धार को अपनी चूत पर डाला जैसे कोई तांत्रिक योनि को दूध से नहला रहा हो। सोनिया ने दीवार के सहारे पिछे हाथ टेक कर जाँघों को और फैलाया ताकि पानी की धार ठीक उसकी चूत पर बरसने लगे । “ऊऊह्ह्ह !”
सोनिया मजे से कराही। बहन सोनिया को बेधड़क मस्ती से कराहते सुन जय की मुठ्ठी डबल स्पीड से खून से उबलते लन्ड पर चलने लगी थी। चूत का फड़कता चोचला और उसके नीचे चूत की मादक गहराइयाँ उसे दिख रहीं थीं।
“रंडी की चूत बड़ी गरम और तंग होगी !” जय के लन्ड पर फैली नसें अब धड़क रहीं थीं और लन्ड खुद-ब-खुद फुदक रहा था – मालूम होता था कि टट्टों में वीर्य अब खौल रहा है। बस अब कभी भी सरसराता हुआ उडेल सकता था।
सोनिया ने भाई के लन्ड को निहार कर अपनी टपकती चूत में एक पतली उंगली डाली। बाथरूम में उनकी मुलाकात के बाद अब वो लन्ड कितना बड़ा हो गया था! वाकई तेल पिलाये लट्ठ सा सख्त था। पिछली रात डैडी के लन्ड से कोई कम नहीं। भैया को यूं ताबड़तोड़ मुठ मारते देख सोनिया की चूत का चोचला अब फड़कने लगा था। चोचले पर उंगलियाँ फेरते उसने देखा कि जय अपनी मुट्ठी से और तेजी से लन्ड को रगड़ने लगा।
सोनिया इस पाप भरे सुख की अनुभूति में पूरी तरह डूब चुकी थी। अब बस वो चाहती थी कि भाई-बहन एक साथ ही चरम आनन्द को पायें। जब भाई के लन्ड से मलाई की धार फूटे, ठीक उसी के साथ सोनिया की चूत मे भी मस्ती का करन्ट दौड़े। अब शरम को पूरी तरह त्याग कर के वो शॉवर बंद कर ठीद उसके सामने खड़ी हो गयी।
बहन के बेहया रंडीपने से जय के हाथ की हरकत में पल भर की रुकावट भी नहीं हुई। वॉशबेसिन के सहारे उसने अपने मुस्टंड लन्ड को दनादन दुहना जारी रखा। बहन सोनिया की मासुमियत की शराब को उसकी सैक्सोत्तेजना ने और भी नशीली बना दिया था। इस शराब का सुरूर जय की आँखों पर चढ़ रहा था। उसकी सुडौल चूचियों पर निप्पल काले मीठे जामुनों की तरह लगते थे। पानी की अन्गिनत बून्दै गोरी-गोरी चूचियों की मरमरी चमड़ी पर ओस की तरह चमचमा रही थीं।
8 दो बातें
जय ने फूलती साँसों से बहन सोनिया को अपनी कमसिन चूत के रोम रहित होंठों को उंगलियों से धीमे धीमे खोलते देखा। एक पल मे वो उंगली अन्दर थी, दूसरे पल गुलाबी योनि के ऊपर लगे चोचले को टटोलने लगीं। चोचला सुपारी की तरह ही धमनियों से भरपूर और संवेदनशील होता है।
“बहनचोद ! आज दो जन्नत के नजारे हो गये !” जय बुदबुदाया। * माल लग रही हो माल सोनिया !”
“ओह जय! सुबह से ही मेरे जिस्म में ये आग लगी हुयी है!” सोनिया कराही।
“मुझमें क्या कम है आग! देख बहन मेरा लौड़ा कैसा टनाटन हो गया है” जय अपना लन्ड बहन की ओर फुदकाता हुआ बोला।
कितना बड़ब्बड़ा हो गया है! क्या मेरे कारण ?” सोनिया ने बच्ची के स्वर मे नादानी का नाटक किया।
सोनिया बन मत ! तुझे हस्तमैथुन करते देख साले लन्ड से तेल ही निकाल दिया! मेरे तो टट्टे उबल रहे हैं !”
वैसे सच कहूं तो डैडी जितना ही बड़ा होगा!” सोनिया बोली।
क्या बोल रही है? डैडी का कब देख लिया तूने ?” जय ने शंकात्मक स्वर में पूछा।
कल रात । मम्मी और डैडी को अपने बेडरूम में मैने एकसाथ देख लिया।”
* रन्डी की चूत ! अपने ही माँ-बाप पर जासूसी करती है!” जय के होंठों पर साजिश भरी एक मुस्कान छा गयी।
“ठीक से दिखा सब ? मेरा मतलब :: मम्मी – डैडी एकसाथ कर क्या रहे थे ?”
“फिर बताउंगी। अभी हम दोनो अपना बाकी काम तो निपटा लें !”
“बिल्कुल बहना! हम साथ-साथ हैं!” दोनों काम निपटाने का मतलब खूब जानते थे।
सोनिया ने एक टांग कुछ इस तरह ऊपर उठाई कि उसकी चूत के पाट अब पूरी तरह खुले थे। हल्के भूरे रंग की झान्टे उसकी जाँघों के बीच एक मखमली चादर सी बिछाये थी। सोनिया जानती थी कि अंगारों जैसी लालम – लाल चूत का ये नजारा उसके भाई को और भी सुलगाए देता है।
“अन्दर झाँक जरा !” सोनिया ने जय को पास आते देख बोला।
देख तेरी बहन कैसे करती है हस्तमैथुन ! तू भी मुठ मार। हम साथ-साथ हैं !”
जवान बहन सोनिया को उंगलियों से चूत के फूले नरम झोलों पर ऊपर-नीचे मसलते देख रहा था जय। कमसिन जवानी की गीली चिकनी चूत को उगलियों के बीच मसलता देख जय सम्मोहित हो गया था। बहन के कामुक जिस्म से रिसते मादा-द्रवों ने पूरी चूत को लबालब कर दिया था। जय ने उसके चेहरे को देखा तो पाया कि सोनिया की नजरें भी उसके तगड़े नरांग पर गड़ी हुई हैं।
“मम्मी को चोदते डैडी का लन्ड भी ऐस ही लगता होगा!” अपनी हथेली में मोटे लन्ड को ले सोनिया की तरफ़ एक झटका देते हुए वो हुंकारा। जैसे डैडी का ही लन्ड मम्मी की चूत में घुस रहा हो। उसकी इस हरकत को देख सोनिया की चूत मे एक करन्ट दौड़ा ।
“बिल्कुल ऐसा ही !” अपने बाप के लन्ड का कल रात मम्मी की चूत में घुसने की तस्वीर अब भी उसके जेहन में थी। । हस्तमैथुन के समय अपने ही माँ- बाप के सैक्स की बात ने जो असर सोनिया पर दिखलाया था उससे जय ने भांप लिया कि लड़की इस बात से बड़ी गरम हो जाती है।
“ डैडी अपने लन्ड को मम्मी की चूत में ठूसते हैं!”
सोनिया इस बात को सुन कर बेकाबू हो चुकी थी। बेतहाशा अपनी चिकनी चूत को मसलने लगी। भाई की बात ने उसके सपनों की कल्पना को उड़ान दे दी थी और बड़ी तेजी से वो चरम आनंद के शिखर को चूमने वाली थी।
9 एक दूजे के लिए
अब जय अपनी बहन को इशारे पर नचा रहा था। बहन को कामाग्नि के पशोपेश मे तड़पता देख वो तसल्ली से मुठ मार रहा था। उसकी अभ्यस्थ उंगलियां लन्ड की काली चमड़ी को सुर्ख सुपारी पर मजे से फिसला रहीं थीं। सोनिया अपनी चुदाई की कल्पना कर हौले-हौले कराह रही थी।
। “ओहहह! म्म्म्हुहुहुह! आहह्म !” सोनिया की वासना भरी आवाज ने जय को निडर बना दिया था। वो सोनिया के इतना करीब खड़ा हो गया कि उसके जिस्म की गरमी को महसूस कर सकता था। सोचता था कि अगर हाथों से इसके जिस्म को टटोलने पर बिहड़ तो नहीं जायेगी।
बाएं हाथ से अपने तने लन्ड पर मुठ चलाते हुए, दाएं हाथ को बढ़ा कर उसने झिझकते हुए अपनी बहन की फुदकती चूची पर फेरा। शुरू में तो सोनिया को मालूम नहीं पड़ा पर जब जय ने चूची के नरम गोश्त को दाब कर मसला तो अपनी अध्खुली आँखों से भाई की हरकत को देखा। पर उसे अब इस बात की कोई परवाह नहीं थी। ।
“ओहहहह! रब्बा !” अपनी चूची को उसने जय के हाथों मे एंठा।
जय को यकीन नहीं हुआ। सोनिया खुद उससे चूची मसलवा रही थी। “बेहेण दी! मार लिया मैदान! अब तो चूत भी छू कर देखूगा!” सोचते हुए जय ने अपना हाथ फुदकती चूची से हटा कर धीमे-धीमे सोनिया की जाँघों के बीच सर्काया।
सोनिया पूरी कमर को उसके हाथ पर पटक कर कराह पड़ी। कमर के इस झटके ने जय का हाथ दोनों जिस्मों के बीच अटका दिया। जय का लन्ड बहन के पेट से भिड़ा हुआ दोनो जिस्मों के बीच से पैदा होती बिजली से फड़क रहा था।
“ओह्ह जय भैया!” सोनिया ने पेट पर लन्ड को महसूस कर के कराहा।
अपनी ही बहन सोनिया की पतली गोरी उंगलियों को अपने लन्ड से लिपटता देख जय मजे से गुर्रा पड़ा। नाजुक उंगलियों मे उसके लन्ड की पूरी मोटाई कहाँ समा पा रही थी।
“ओह! म्म्म्म! मज़ा आ रहा है !” जय की गरम साँसे उसके कानों पर पड़ रहीं थीं।
“हाथ को लन्ड पर ऊपर-नीचे हिला ना सोनिया !”
सोनिया ने वैसी ही हरकत की। चूत पर भैया के हाथ का स्पर्श अपने हाथों से कहीं ज्यादा मजेदार था। खसकर अब जो जय बड़ी निपुणता से उसके संवेदनशील चोचले को मसल रहा था।
“लगे रह बहनचोद! रगड़ मेरी चूत !” कामुक किशोरी सोनिया से अब तड़प सही नहीं जाती थी। आनन्द के शिखर के करीब पहुंच चुकी थी।
| भाई भी अब शिखर से दूर न था। एक तरफ़ बहन की चूत मे हो अपनी उंगली और दूसरी तरफ़ बहन के हाथ मे ऐंठता लन्ड। ऐसे मे सब्र का बाँध कैसे न टूटता। एक बार तो मन में खयाल आया कि दे घुसा दू चूत मे लन्ड। पर वर्जित सैक्स की इस हद को पार करने की हिम्मत अभी उसकी नहीं हुई थी।
जय! रुका नहीं जाता, अब बस झड़ने वाली हूँ मैं” राक्षसी जैसे झुमते हुई भाई के लन्ड
को खेंचती और उसकी पूरी लम्बाई पर उंगलियां मसलती हुई चीखी।
“मैं भी! मैं भी! क्या मुठ मारती है मेरी लाडली बहन !” वीर्य को अपने टटतों में खौलता महसूस कर अब जय का हाथ भट्टी की तरह बहन की टपकती चूत पर चल रहा था।
“जय भैया! चोदो मुझे! उंगलियों से चोदो! लन्ड से चोदो! ओ ओ ओ ओ! मैया रे ! बापू रे! मैं तो चुदी !” सोनिया आनंद के शिखर पर पहुंच चुकी थी और उसने दाँतों से होंठ दबा कर चीख को दबाया। सैक्स के अलौकिक सुख की लहरें उसके सुलगते बदन को बहाए ले जाती थीं। जय तो अपने ही जिस्म मे फूटते ज्वालामुखी में इतना मगन था, बहन की तड़पति आहों को क्या सुनता। उसका लन्ड दुलत्ती मारते गधे की तरह बहन के हाथ मे झटके मार रहा था। दो पल में ही उसके वीर्य की मोटी धार उसके लन्ड से फूट कर सोनिया के पेट पर पिच्कारी की तरह फाच – फाच – आधा दर्जन बार गाढ़े गरम वीर्या की बौछार हुई। सैक्स – सटुष्टी की प्रबल लहरें थमने तक सोनिया ने अपने हाथों से लन्ड को खेंचना चालू रखा था। थमने के बाद उसके जिस्म में सुख की मन्द-मन्द मिठास फैलने लगी। अपने पेट से गरम चिपचिपे वीर्य को बह कर चत से रिसते उसके मादा दुवों से घलते-मिलते वो देख रही थी। अपने जिस्म में शांत होती काम – लहरों के दर्मयान जय ने लपक कर बहन को अपने मजबूत सीने से लगा लिया। कमाल की बात थी कि वीर्य की नदियां बहा देने पर भी उसक लन्ड खास सख्त था। लन्ड का सिरा अब सोनिया की चूत पर दस्तक देने लगा। सोनिया की कंपकंपाती उंगलियां अब भी उसके मोटे लन्ड पर लिपटी हुई थीं।
सैक्स पृथ्वी के हर प्राणी की प्रकृति में है। तो सोनिया का अपने भाई के लन्ड को पकड़ कर चूत के होंठों पर छुआना उसी मासूम प्रकृति का अलौकिक नतीजा था। नरम चूत के अचानक स्पर्ष से दोनों काम- पुजारी अनयास ही रोमंच से कराह पड़े। जय के अन्दर वासना का साँप फिर फ़न उठा रहा था। बहन- वहन गई भाड़ में। चुदना वो भी चाहती है, तो क्यों न चोदू सोनिया को। पता था – भूखे लन्ड को कोई और चूत तो मिलने नहीं वाली। फिर घुमते रहना शहर में लटकाते हुए।
जय अपनी मन की बात पूरी करने ही वला था की अचानक बाथरूम के दरवाजे पर खटखटाहट ने दोनों की सिट्टी-पिट्टी गुम कर दी।
“बच्चों जल्दी आओ! नाश्ता तैयार है!” बाहर मम्मी पुकार रही थी। दोनो फ़ौरन ठिठक कर अलग-अलग खड़े हो गए। जय ने फटाफट पजामा पहना और बाहर निकल आया। सोनिया ने पानी के नल खोल कर नहाना फिर शुरू कर दिया। अपने भैया के जमे हुए वीर्य को धोते हुए उसके होंठों पर शैतानी मुस्कान थीरक रही थी।
अब आया है लाईफ़ में ट्विस्ट !”
सोनिया के टेबल पर पहुँचने तक सब नाश्ता कर चुके थे। नजरें भाई की झेपी नजरों से मिलीं और उसने आँख मार कर उससे कुछ ज्यादा ही गरम्जोशी से कहा “गुड मॉर्निन्ग !”
* बैठो बेटा। मैने आज ऑमलेट बनाया है।” मम्मी बोलीं।।
वाह !” सोनिया ने एक निगाह भाई की तरफ़ दौड़ाई। जय आँखें नीची कर नाश्ते में मगन होने का नाटक करने लगा।
*आज क्या प्रोगराम है सबका ?” सोनिया ने भरे मुँह से पूछा।
मैं और तेरे डैडी जय का मैच देखने जाएंगे फिर कुछ शॉपिंग। तुम भी चलोगी हमारे साथ ?” मिसेज तीना शर्मा ने पूछा।
“नहीं मैं घर पर ही नॉवल पढ्गी या स्विमिन्ग पूल में कुछ तैराकी करूंगी।” सोनिया ने झुट बोला। | सोनिया ने भाई पर निगाह डाली तो वो उस्ताद अपनी नजरें उसकी चूचियों पर गड़ाए हुए थे। उसकी टी-शर्ट का कट ऐसा था कि क्लिवेज और कमसिन स्तनों का उभार साफ़ दिखता था। भाई तो क्या अपने जिस्म से वो किसी भी जवां -मर्द को लुभा सकती थी। बाथरूम मे जय के साथ अछह मजा लूटा थ पर एक चुदाई की कसर रह चुकी थी जिसे वो पूरा करना चाहती थी। किसी भी कीमत पर। उसने अपनी सजिश का पहला पत्ता फेंका।।
“डैडी हमारे स्विमिन्ग पूल में कितनी गन्दगी इकट्ठी हो गई है। क्यों न राज को बुला कर मरम्मत करवा दें। मैं आज दोपहर तैरना चाहती हूं।” बेटी की इस फ़रियाद को कहाण नकारा जा सकता था।
ठीक है बेटी। अभी पूछता हूं उससे ।” पत्त ठीक निशाने पर लगा।
“बेटा राज । मैण दीपक शर्मा। आज दोपहर मेरा पूल तो साफ़ कर दो भाई। फ़र्स्ट क्लास। तय रहा। थैक्स। बाय !”
लो गुड़िया मैने तुम्हारी स्विमिन्ग का बन्दोबस्त भी कर दिया। पूरी दोपहर तुम पूल के मजे उठा सकती हो।”
“मेरे अच्छे डैडी! अब खूब मजा आएगा !” स्विमिन्ग का भी और लन्डबाजी का भी, सोनिया ने मन में सोचा।