घर में मेरे ससुर जो 66 साल के हैं, मेरे पति जो 44 साल के हैं और मेरा सौतेला बेटा जो अब 17 साल का हैं रहतें हैं. नौकर चाकर तो इतने हैं कि मैं गिनने की कोशिश भी नहीं करती. मेरे पति का नाम देश के टॉप राईसो मैं आता है.
में दिखने में बहुत ही गोरी और क्यूट हूँ. लोग कहते है कि में बिल्कुल कटरीना कैफ़ जैसी दिखती हूँ. मेरा फिगर भी एक मॉडेल की तरह सेक्सी हैं. मेरे बूब्स बड़े हैं और मेरी कमर पतली. में अपने फिगर का बहुत ख़याल रखती हूँ और हर रोज़ एक घंटा उसको मेनटेन करने के लिए एक्सर्साइज़ करती हूँ. मुझे बचपन से ही मेरी सुंदरता पे नाज़ रहा हैं. सारे लड़के मुझ पे मरते थे और मुझ से बातें करने की कोशिश करते थे. मेरी मा ने मुझे बचपन से सीखा के रखा था कि ‘किसी भी लड़के के चक्कर में मत पड़ना, तू इतनी सुंदर है कि बड़ी होकर तुझे बहुत अछा और राईस पति में ढूंड के दूँगी. मेरी बात याद रखना बेटी. यह सेक्स वेक्स से शादी से पहले दूर ही रहना. यह सेक्स एक गहरी खाई की तरह हैं. अगर इस में गिरगी तो गिरती ही चली जाऊगी’. मुझे अपने आप पर पूरा विश्वास था. में अपने मा से कहती ‘फिकर मत करो मा. तुम्हारी बेटी बहुत स्ट्रॉंग हैं. मेरे मनोबल को कोई नही तोड़ सकता’ . उस वक़्त मुझे वासना की ताक़त का अंदाज़ा नही था. आज जब मैं उस समय के बारे में सोचती हूँ तो लगता हैं कि कितनी बेवकूफ़ थी में. मेरी मा की सलाह कोई आम लड़की के लिए ठीक होगी लेकिन में आम लड़कियों के जैसे नही हूँ. में सेक्स की पुजारन हूँ. मेरा ज़िंदगी का एक ही मकसद हैं और वो हैं चुदाई.
यह कहानी तब से शुरू होती हैं जब मैं 16 साल की थी और 10थ क्लास में पढ़ती थी. मैं एक अमीर घर में बड़ी हुई थी. मेरे घर में सिर्फ़ मैं और मेरी मा थे. पिताजी का स्वरगवास कई साल पहले हो चुक्का था. पढ़ाई में ठीक ठाक ही थी लेकिन मेरी मा की तरह दुनियादारी के मामले काफ़ी होशियार थी. उस वक़्त सारी लड़कियों की तरह मुझे भी सेक्स मैं बहुत इंटेरेस्ट था पर में अपनी मा की सलाह मानते हुए लड़को से दूर ही रहती थी. मेरी सारी सहेली कहती थी की मेरा फिगर बहुत ही सेक्सी हैं. मेरे बड़े बूब्स और पतली कमर काफ़ी लड़को को पागल कर रहा था पर मेने मेरी मा की बात मान कर ठान लिया था के शादी से पहले में लड़को के चक्कर में नहीं पाड़ूँगी. मेरी सारी सहेली अपनी अपनी चुदाई की बातें करती थी. दो लड़कियाँ ने तो अपने बाप के साथ भी चुदाई का मज़ा लिया था. उनकी बातें सुनकर मुझे बहुत जलन होती थी. में उन सबसे से कई ज़्यादा सेक्सी थी फिर भी में ने आज तक किसी लड़के को कपड़े बिना नही देखा था. मुझे कई बार अपनी सहेली के सेक्स के किस्से सुन कर बहुत सेक्स चढ़ जाता. ऐसे मोके पे में अपने आप को अपनी उंगलियाँ से संतुष्ट कर लेती. पर में जानती थी के जो मज़ा किसी मर्द के लॉड से मिल सकता हैं वो उंगलियों से कभी नही मिल सकता हैं. मैं कई बार सारी सारी रात सेक्स के बारे में सोच कर अपनी चूत से खेलती रहती लेकिन हमेशा मन मे यह बात रखती की कुछ भी हो जाए शादी से पहले में किसी लड़के को हाथ नहीं लगाने दूँगी और अपने होने वाले पति के लिए बिल्कुल कुँवारी रहूंगी.
एक दिन में स्कूल से निकल कर घर जा रही थी. मुझे बहुत ही जोरो से मूत लगी थी. मुझे स्कूल के मूत्रालय में जाना अछा नही लगता था क्यों कि वहाँ बहुत बदबू आती थी. मेने सोचा कि स्कूल के बगल में ही पब्लिक टाय्लेट था में वाहा मूत लूँगी. वाहा जाने पर पता चला कि लॅडीस टाय्लेट पे ताला लगा था. मुझसे अब रुका नही जा रहा था. मेने सोचा क्यों ना जेंट मूत्रालय में मूत लूँ अगर कोई अंदर ना हो तो किसी को पता नही चले गा. मेने जेंट्स मूत्रालय के पास जा कर उसका दरवाज़ा खोल दिया. वहाँ अंदर काफ़ी अंधेरा था और में 1 मीं. तक दरवाज़े पर ही खड़ी रही. धीरे धीरे मुझे दिखाई देने लगा. अंदर सामने तीन टाय्लेट थे. तीन मैं से एक कोने वाला टाय्लेट बंद था और उसके अंदर से कुछ अजीब सी आवाज़ आ रही थी. मुझे और कोई नज़र नही आया तो मैने 2 कदम अंदर बढ़ा लिए. अंदर जाने पे पता चला के दूसरे कोने में एक और आदमी मूत रहा था, उसकी नज़र मुझ पर पड़ी और वो हस्ते हुए बोला ‘कुछ चाहिए बेबी?’
यह कह हर वो मेरी तरफ मूड गया. मेरी नज़र उसके लंड पे गिरी जो उसके पॅंट के ज़िप से बाहर लटक रहा था. वो आदमी लगभग 50 साल की उमर का होगा और दिखने में मुझे कादर ख़ान जैसा लग रहा था. उस आदमी का लंड खड़ा नही था पर फिर भी इतना बड़ा था कि मुझे यकीन नही हुआ. मैने आज तक किसी आदमी का लंड नहीं देखा था. में डर गयी और डर के मारे भाग के बीच वाले टाय्लेट में जा कर दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया.
अंदर जा कर में चुप चाप 2 मिनिट खड़ी रही. फिर में ने मूत लिया. मुझे बाजू वाले टाय्लेट की आवाज़ अब सॉफ सुनाई दे रही थी. ऐसा लग रहा था कि कोई चीखने की कोशिश कर रहा हो पर उसका मूह किसी ने दबा के रखा हो. मैने देखा कि टाय्लेट के साइड में कई बड़े छेद थे. में अपने हाथ और घुटनो के बल कुत्ति की तरह ज़मीन पर बैठ कर आपनी आँखे ऐसे ही एक छेद पर लगा कर बाजू की टाय्लेट के अंदर का नज़ारा देखने लगी. अंदर मैने जो देखा वो देख कर मेरे होश उड़ गये. मेने देखा की अंदर एक लड़का जो मेरी क्लास में पढ़ता है और लगभग मेरी ही उमर का होगा, अपने घुटनो तले ज़मीन पर बैठा था. लड़के का नाम विवेक था. उसके सामने हमारा स्पोर्ट्स का टीचर जो एक बड़ा काला सा मोटा आदमी हैं अपने लंड को उसके मूह में घुसेडे हुए था. विवेक एक दम ही गोरा और चिकना था और पूरा नंगा था. मेने देखा कि उसका का छोटा सा लंड खड़ा था. वो अपने हाथो से टीचर को दूर धकेलने की कोशिश कर रहा था. लेकिन टीचर ने अपने दोनो हाथ लड़के के सर पे रख के उसके सर को अपने लंड की ओर खीच लिया था और पूरा लंड उसके मूह में घुसेडे हुआ था. दो मिनिट बाद किसी तरह से विवेक ने अपना मूह टीचर के लंड से दूर किया. जब स्पोर्ट्स टीचर का लंड उसके के मूह से निकला तो में दंग रह गयी. वो लगभग 8” लंबा होगा और मोटा भी बहुत था और एकदम काला था. मुझे यकीन नही हो रहा था कि इतना बड़ा लंड उस लड़के के मूह में समा केसे गया. विवेक अब ख़ास रहा था. इतना बड़ा लंड मूह में लेकर उसका हाल बहाल हो गया था. उसने कहा ‘बस अब और नही होगा टीचर जी’. टीचर ने कहा ‘साले मदारचोड़ चुप चाप मेरा लंड चूस वरना तुझे फैल कर दूँगा’. लड़के ने उपर देखते कहा ‘नही टीचर मुते फैल कर दोगे तो ….’. लड़के की बात पूरी होने से पहले ही टीचर ने अपना लंड उसके मूह मे फिरसे डाल दिया. टीचर ने फिर से उसके सर को अपने हाथो से पकड़ा और अपना लंड उसके मूह में अंदर बाहर करने लगा. मुझे विवेक का खड़ा लंड देख कर लग रहा था कि शायद लड़के को भी मज़ा आ रहा था.
मुझे ये सारा नज़ारा देख कर बहुत मज़ा आ रहा था. मैने आज तक किसी भी आदमी का लंड नही देखा था. और अब मेरे सामने दो लंड थे. मेरे बदन में एक गर्मी सी छा गई थी. हैरत की बात तो मुझे ये लगी की विवेक से ज़्यादा मुझे वो काले टीचर का बड़ा लंड अच्छा लग रहा था. मेरी नज़र वो मोटे लंड से हट नही पा रही थी. में मन ही मन में सोच रही थी कि काश मुझे वो काला लंड चूसने को मिल जाए. में वाहा टाय्लेट में कुत्ति की तरह ज़मीन पर बैठी थी. मेरी पॅंटी पूरी गीली हो गयी थी. मैने अपनी स्कर्ट उपर कर ली और पॅंटी उतार दी. मेने एक हाथ से अपने चूत को सहलाना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ की उंगली को अपने गांद के छेद पे फिराने लगी. मुझे ये बिलकूल खबर नही थी कि जिस तरह में बाजू की टाय्लेट में झाक रही थी वैसे हे तीसरी टाय्लेट के छेद से मुझे कोई झाक रहा था. जिस आदमी ने मूत्रालय में आते ही मुझे आपना लंड दिखाया था वो मेरे पीछे मेरे बाजू के टाय्लेट में घुस गया था. उसे पता था की टाय्लेट के बीच में छेद हैं. अब उसे जो नज़ारा दिख रहा था वो उससे पागल हो रहा था. उसके सामने में घूम के पॅंटी निकाल के बैठी थी, मेरी चिकनी, गोरी गांद और चूत उसे साफ दिखाई दे रही थी. वो देख रहा था कि में अपनी चूत में दो उंगली डाल के ज़ोर से अंदर बाहर कर रही थी और अपनी गांद के छेद पे उंगली घुमा रही थी. उसका लंड खड़ा हो गया और वो उसे सहलाने लगा.
यहाँ टीचर और तेज़ी से विवेक का मूह चोद रहा था. विवेक भी अपना लंड ज़ोर से हिला रहा था. दो मिनिट मे टीचर ज़ोर से आवाज़ करने लगा ‘आआआआआअहह, आआआआआआः’ और पागल की तरह बहुत तेज़ी से लड़के के मूह में आपना लंड अंदर बाहर करने लगा. विवेक का बुरा हाल था. मैं अपने आप को झरने के करीब पा रही थी और ज़ॉरो से अपनी उंगलियाँ चूत के अंदर बाहर करने लगी. टीचर झड़ने के बहुत करीब था. ‘साले . के आआआअहह… आआआआआआः पी जा मेरा पानी आआअहह’ टीचर ने यह कहते अपना सारा पानी लड़के के मूह मे निकालना शुरू कर दिया. टीचर के साथ में भी अब झार रही थी. लड़के के लंड से भी फुवरे के जैसे पानी निकल रहा था. टीचर के लंड से इतना विर्य निकला के लड़का पूरा पी नही पाया और कुछ पानी उसके मूह के साइड से निकल कर नीचे बहने लगा. यह देख मेरा झरना और तीव्र हो गया. टीचर का झार ना ख़तम हो गया था पर उसने थोड़ी और देर तक अपना पूरा लंड लड़के के मूह में ही रखा. जब उसका लंड पूरा बैठ गया तब उसने उसको निकाला. उसका बैठा हुआ काला लंड भी बहुत बड़ा था और वीर्य और विवेक की थूक से चमक रहा था. लड़का नीचे देख कर ज़ोर ज़ोर से साँसे ले रहा था और खास रहा था. टीचर के काले लंड ने उसकी हालत बूरी कर दी थी. टीचर के मोटे लंड पे काफ़ी सफेद वीर्य अभी भी चिपका हुआ था. टीचर ने विवेक से कहा ‘मेरा लंड कौन साफ करेगा ? तेरा बाप. चल इसको ठीक से चाट कर साफ कर’. लड़का उस काले लंड को पकड़ अपनी जीब निकाल के चाटने लगा और पूरा वीर्य लंड से साफ कर दिया. टीचर ने अब उसका हाथ हटा के पॅंट पहेनना शुरू किया और कहा ‘कल इसी वक़्त यहाँ मिलना. कल में तेरी गांद मारूँगा’ यह कह कर टीचर बाहर चला गया. लड़का भी अपने कपड़े पहन के वहाँ से चला गया.
वो दोनो चले गये थे पर मेरी बदन की आग अभी भी भड़की हुई थी. में टाय्लेट के ज़मीन पे लेट गयी. मेने अपने टॉप के उपर से ही एक हाथ से अपने बूब्स को दबा दबा कर उंगलियों से निपल को खीच रही थी. दूसरे हाथ से में अपनी चूत में दो उंगलियों डाल कर अंदर बाहर कर रही थी. मेरी मूह से सिसकियारी निकल रही थी ‘उम्म्म्ममम…. आआहह’. वो काला लंड मेरे दिल और दिमाग़ पर छा गया था.
तब अचानक मैने आवाज़ सुनी ‘मज़ा आ रहा है बेबी ?’. मेने आँख उठा कर देखा तो मुझे पता चला कि टाय्लेट के दूसरी साइड पे भी कई छेद थे और वैसे ही एक छेद से मुझे उस आदमी की आँखे दिखाई दी. में एक सेकेंड के लिए डर गयी खड़ी हो गयी. ‘डरो मत बेबी, तुम इतनी गरम हो गयी हो मेरे पास तुम्हे ठंडा करने के लिए कुछ हैं’ ऐसा कह कर उसने अपना लंड एक छेद में डाल दिया. उसका लंड भी वो काले टीचर की तरह मोटा और लंबा था.
‘यह लो बेबी तुम अपनी चूत के साथ साथ इस से भी खेलो. तुम्हे और मज़ा आएगा’. में तो वो लंड को देख के पागल सी हो गयी. मेरा सिर चकराना शुरू हो गया. मेरा सारा बदन एकदम गरम सा हो गया था. में लंड को छूना चाहती थी पर डर भी बहुत लग रहा था. मेरा दिमाग़ मुझसे कह रहा था कि में वहाँ से भाग कर घर चली जाउ पर मेरी नज़र उस लंड से नही हट रही थी. मैने अपने आप से कहा कि ‘ऐसा तो नही कि मैं किसी लंड से चुदवा रही हूँ. इस लंड से थोड़ा खेल लूँ फिर भी मैं कुँवारी ही रहूंगी’. एक बड़े लंड को अपने इतने करीब पा कर में अपनी मा की सलाह को बिल्कुल भूल गयी और धीरे से अपना हाथ उस लंड की तरफ बढ़ाने लगी. मुझे तब यह नही पता था कि जिस गहरी खाई से मेरी मा दूर रहने को कहती थी मैं उसी में कूदने जा रही थी. और एक बार कूदने के बाद में गिरती चली जाउन्गि.
मेरा हाथ मैने धीरे से बढ़ा कर वो लंड पे रख दिया. वो लंड गरम था और कड़क भी और मेरे हाथो में थोड़े हल्के से झटके खा रहा था. मेरे छूते ही उस आदमी के मूह से आवाज़ निकल गयी ‘आआआहह… क्या मुलायम हाथ है तुम्हारा बेबी. इसे पकड़ कर थोड़ा हिलाओ’. मुझे यह पता था कि लड़के अपने लंड को हिलाते हैं, पर यह नहीं पता था कि कैसे हिलाना चाहिए लंड को. मैने लंड को पकड़ लिया और लंड को उपर नीचे करने लगी.
‘ऐसे नहीं करते बेबी. हाथ को आगे पीछे करो उपर नीचे नहीं.’ मैने हाथ आगे पीछे करना शुरू कर दिया. हाथ पीछे करने से लंड की चमड़ी पीछे हो गयी और लंड का गुलाबी हिस्सा मुझे दिखाई दे रहा था. मेरा जी कर रहा था कि में उसे मेरे होंठो के बीच में ले लू और अपनी जीब से उसे चाटू, मेरे मूह में पानी आ गया. लेकिन में काफ़ी डरी हुई भी थी. मैने हिलाना ज़ारी रखा.
‘वेरी गुड बेबी आआआअहह…. तुम तो बिल्कुल कटरीना कैफ़ जैसे दिखती हो बेबी. मेरी तरफ़ ज़रा देखो. शरमाओ मत’. मुझे बहुत शरम आ रही थी और डर भी बहुत लग रहा था लेकिन मेने हिम्मत कर के अपनी आँखे लंड पे से ले कर उस आदमी की आँखों से मिला ली और हिलाते रही.
‘थोडा ज़ोर से हिलाओ बेबी, बहुत मज़ा आ रहा हैं’. में अब काफ़ी ज़ोर से हिलने लगी. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मेने अपने दूसरे हाथ की दो उंगलियाँ मेरी चूत में डाल दी थी और अंदर बाहर कर रही थी.
वो आदमी अब आवाज़ करने लगा ‘आआअहह… बेबी… और ज़ोर से हिलाओ. आआआआआअहह’. उसका लंड मेरे हाथो में थोड़ा और फूल गया और मेरे चेहरे पे उसका थोड़ा गरम वीर्य गिर गया. में चोंक गयी और लंड हिलाना रोक दिया.
‘रोको मत बेबी पूरे ज़ोर से हिलाओ, पूरी ताक़त से हिलाओ. आआआहह…..’ मैने पूरे ज़ोर से अब हिलाने लगी. वो आदमी अब आवाज़े निकाल रहा था. ‘आआआअहह… आआआआआआहह अपने मूह पे गिरने दो पानी बेबी आआआआअहह’ यह कहने के तुरंत ही उसके लंड से पानी छूटने लगा. उसके लंड से एक के बाद एक वीर्य के फव्वारे छूट रहे थे और हरेक फव्वारे से पहले उसका लंड थोड़ा मेरे हाथो में एक झटका देता. उसके कहने के मुताबिक मैने पानी अपने चेहरे पे गिरने दिया. उसके लंड से ढेर सारा पानी निकल रहा था और वो ‘आआआआआहह. …..आआआआआआआआअहह’ की आवाज़े निकाल रहा था. दो या तीन मिनिट तक लगातार वो ऐसे आवाज़े करता रहा और झरता रहा. मेरा सारा चेहरा वीर्य से गीला हो गया था. फिर उसकी आवाज़ से मुझे पता लगा कि मैं अब हिलना बंद कर सकती हूँ. मेरे चेहरे पेसे वीर्य सरकते हुए मेरे पूरे गले को भी गीला कर दिया था.
मुझे यकीन नही हो रहा था कि लंड से इतना सारा पानी निकलता हैं. वो लंड अब धीरे धीरे छोटा हो रहा था पर मुझे और लंड की तलब थी. मैने अपने चेहरे को टाय्लेट पेपर से साफ किया.
‘मज़ा आया बेबी ? और लंड चाहिए ? मेरा दोस्त मिस्टर डिज़िल्वा यही खड़ा है. उसे भी खुश कर दो प्लीज़.’ यह कह कर उस आदमी ने अपना छोटा हुआ लंड बाहर निकाल दिया.
‘डरना मत उनके लंड से’ उसने हस्ते हुए कहा. मुझे समझ में नहीं आया कि उनका मतलब क्या था.
तब मैने डिज़िल्वा की पहली बार आवाज़ सुनी. ‘यह ले’ उसने कहते हुए अपना लंड धीरे धीरे छेद में डाला. छेद से निकलते लंड की मोटाई को देख में चोंक गयी. धीरे धीरे वो लंड को छेद में डालता रहा और मेरी आँखें फैलती गयी. 5 इंच, 6 इंच … ऐसा लग रहा था जैसे कोई इंसान नही कोई घोड़ा हो. 7 इंच, 8 इंच लंड की मोटाई और बढ़ती लंबाई से मैं असल मे डर रही थी जैसे लंड नही कोई भयानक जानवर हो. 9 इंच , 10 इंच. आख़िर 10 इंच के बाद लंड छेद से बाहर आने से बंद हुआ. में तो उसे छूने से भी डर रही थी.
‘हाई क्या चिकनी है तू. उपर देख. ज़रा ठीक से चेहरा देखने दे तेरा’ डिज़िल्वा ने कहा. मैने उपर डिज़िल्वा की आँखों में देखा और फिर उसके लंड को. इतना बड़ा लंड देख के मेरे होश उड़ गये थे. दो मिनिट तक में वो लंड को ही देखती रही.
‘देख क्या रही हैं अब हिला इसको’. मैने हिम्मत करके उसके लंड को एक हाथ से पकड़ा. उसका लंड बहुत गरम लग रहा था मेरे हाथो में. मेरे सारे बदन में उसे छूते ही एक गरमी सी छा गयी. उसका लंड इतना मोटा था कि मेरे हाथ की उंगलियाँ अंगूठे को छू भी नही पा रही थी. मैने उसके लंड को हिलाना शूरू किया. उसके मोटे लंड से बास आ रही थी. उसकी चमड़ी पीछे जाने पे मैने देखा कि उस पर काफ़ी सूखा वीर्य चिपका हुआ था. लेकिन ये सब बातें वो लंड के मोटापे और लंबाई के आगे कुछ भी नहीं थे. मुझे उसके लंड से पहली ही नज़र मे प्यार हो गया था.
मैने अब अपना दूसरा हाथ भी लंड पे रख दिया और दोनो हाथो से लंड को हिलाने लगी. अब मुझ में बहुत सेक्स आ गया था. इतने बड़े लंड को देख में पागल हो गयी थी. मेरे दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया था. मैं अपना चेहरा लंड के करीब ला कर हिलाते हिलाते उसको अपने पूरे चेहरे पे लगा के रगड़ने लगी. लंड की गर्माहट को अपने होंठो, गाल, नाक और माथे पे एक साथ महसूस करके बहुत मज़ा आ रहा था. मैने अपनी झीभ होंठो के बाहर निकाल दी और लंड को चेहरें पे रगड़ती रही. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. कुछ मिनिट तक में ऐसे ही लंड रगड़ती रही.
‘आआआआहह……..मूह में ले साली रांड़’ डिज़िल्वा ने कहा. मुझे उसने ऐसे गंदी तरह से बात की और रांड़ कह कर बुलाया यह मुझे अछा नहीं लगा, लेकिन मुझे कोई परवाह नहीं थी. मुझे क़िस्सी भी हाल मे वो लंड चाहिए था.
मैने अपने मूह खोलके लंड अंदर डालना चाहा पर लंड इतना मोटा था कि मेरा मूह उतना खुल नहीं पाया. मैने अब पूरे ज़ोर से अपना मूह जितना खोल सकु उतना खोला और लंड को अंदर लिया. लंड के स्वाद से मैं मदमस्त हो रही थी. मेने लगभग 3 इंच तक लंड अपने मूह में ले लिया और फिर उसे अपने मूह के अंदर बाहर करके चूसने लगी. में इतनी पागल हो रही थी कि मुझे लग रहा था कि अपनी चूत को छुए बिना ही शायद में झार जाउन्गि. मैने एक हाथ ले कर अपनी चूत मैं झट से दो उंगली डाल ज़ॉरो से हिलाने लगी.
‘ज़ोर से चूस साली कुतिया, और मूह में ले’ डिज़िल्वा ने चिल्ला के कहा. उसका कहना मान मेने अपनी पूरी ताक़त लगाके उसका लंड मूह मे लेना शुरू किया और पूरा 6 इंच तक ले गयी. मुझे यकीन नही हो रहा था के में इतना सारा लंड मेरे मूह में ले सकती हूँ.
‘आआअहह… साली टॉप की रंडी हैं तू तो’. वो ऐसी बेशरम बाते कर रहा था और मुझे गंदी गाली दे रहा था पर हैरत की बात यह थी कि मुझे बुरा नही पर अछा लग रहा था की ये आदमी मेरे चूसने की तारीफ़ कर रहा था. अब वो झरने के बहुत करीबथा मैने पूरे ज़ॉरो से चूसना चालू रखा.
अब डिज़िल्वा ज़ॉरो से चिल्ला रहा था ‘आआआआआआआअहह आआआआआआआआआहह……’ और झरने ही वाला था. सारे वक़्त मैने अपनी आँखें डिज़िल्वा की आँखें से मिला कर रखी थी.
डिज़िल्वा का लंड मेरे मूह में थोडा और घुसा मुझे पता था कि उसका झरना शुरू हो गया हैं और अब इसका पानी मेरे मूह में निकलने वाला हैं अगले ही पल ‘आअहह.. आआअहह पी ले मेरा पानी रॅंड आआआअहह पूरा पी ले’ डिज़िल्वा चिल्लाया और उसके लंड से वीर्य निकलना शुरू हो गया. उसका वीर्य बिल्कुल गरम नमकीन लस्सी जैसा था और मैने पूरा पीने की ठान ली थी. मैं पागलो के तरह उसका लंड ज़ॉरो से चूस रही थी और वीर्य पी रही थी और में भी अब झार रही थी.डिज़िल्वा चिल्ला रहा था ‘पी ले साली रांड़ आआआआआआआहह….’ मैने पूरा पानी पीने की कोशिश की मगर बहुत ज़्यादा पानी था. दो या तीन मिनिट तक डिज़िल्वा चिल्लाता रहा. वो कहता रहा ‘रुक मत और ज़ोर से चूस आआआआआआहह….’ में भी सारे वक़्त ज़ॉरो से झार रही थी. इतनी देर तक मैं कभी नही झड़ी. में इतनी ज़ॉरो से झार रही थी की मेरी नज़र धुंधली हो गयी थी. डिज़िल्वा का इतना सारा वीर्य मैं पी गयी थी और वो फिर भी मेरे मूह में और निकाल रहा था. चूस्ते चूस्ते जब में उसका 6 इंच तक लंड मूह में लेती तो मूह मे वीर्य दबाव से मूह के साइड से बाहर निकलता और नीचे सरकने लगा. मेरा पूरा गला ऐसे गीला हो गया. मुझे वक़्त का कोई अंदाज़ा नही था. पता नहीं कितनी देर तक डिज़िल्वा अपना गाढ़ा वीर्य मेरे मूह में निकालता रहा और में पीती गयी. पर आख़िर उसके लंड ने झरना बंद किया और मेरा भी झरना बंद हुआ. मैने उसका लंड मूह से निकाला. उसके लंड पे काफ़ी सारा गाढ़ा वीर्य चिपका हुआ था. पता नही क्यूँ मगर मेरा दिल किया कि मैं वो सारा वीर्य चाट चाट कर उसका लंड सॉफ कर दू और मैने ऐसा ही किया. मैने उसके खड़े लंड को पड़के बिना अपनी जीब पूरी बाहर निकाल नीचे से उपर तक उसके सारे लंड को चाटने लगी. उसका लंड दो मिनिट मैं मैने पूरा सॉफ कर दिया पर फिर भी मैं उसे चाट ती रही. उसका लंड धीरे धीरे नरम हो गया में फिर भी चाट ती रही. मैं जैसे लंड की दीवानी हो गयी थी. लंड पूरा बैठ गया था और मेरी थूक से चमक रहा था. ‘मज़ा आया मेरी रानी’ यह कह के उसने अपना लंड छेद से निकाल दिया.
में इतनी ज़ोर से कभी नही झारी थी. दो मिनिट तक में ऐसे नीचे बैठी रही. फिर मैने अपना सिर उठा के छेद मे देखा तो पता चला कि डिज़िल्वा चला गया था. अब मैने अकेली टाय्लेट में थी. दो तीन मिनिट मैं मैने अपने कपड़े ठीक कर दिए और धीरे से दरवाज़ा खोल के देखा. टाय्लेट में कोई नहीं था. में दरवाज़ा खोलके ज़ोर से दौड़ पड़ी और मूत्रालय से निकल घर चली गयी. घर पे जाने के बाद मैं तबीयत खराब होने का बहाना कर के अपने बेडरूम में जा के लेट गयी. मेरे दिमाग़ में सिर्फ़ वो बड़े बड़े लंड थे. में चदडार के अंदर लेटी हुई थी और अपनी चूत से खेल रही थी. में सोचती रही के कैसे मैने इतना बड़ा लंड अपने मूह में लिया और कैसे मैने इतना सारा वीर्य पिया. यह सोच सोच कर में अपनी चूत से खेलती रही. पूरी शाम और सारी रात में चूत से खेलती रही, पता नही कितनी बार में झार गयी. इतना चूत को मसल्ने के बावजूद मुझे चैन नहीं आ रहा था.
अगले दिन स्कूल में भी यह ही हाल था. क्लास में बैठे बैठे मैं सिर्फ़ यह सोच ती रही कि कब स्कूल ख़तम हो और में फिर से उस टाय्लेट में जाउ. सारे वक़्त में सोचती रही कि वो टीचर उस लड़के की गांद कैसे मारेगा. आख़िर स्कूल ख़तम हो गयी. मैने देखा कि स्कूल ख़तम होते ही में विवेक के पीछे स्कूल से निकल गयी. पर वो बहुत तेज़ी से चल रहा था और आगे निकल गया. मुझे ऐसा लग रहा था कि उसे भी गांद मरवाने की जल्दी होगी.
मैं वो जेंट्स मूत्रालय तक पहुच गयी. दरवाज़ा खुला था. मैं धीरे से अंदर गयी. अंदर जाते ही मैने आवाज़ सुनी. ‘कैसी हो मेरी जान. फिर से लंड चाट ने आई हैं क्या ?. मैं तुम्हारा ही इंतेज़ार कर रहा था’ मुझे आवाज़ से पता चल गया कि यह वो डिज़िल्वा था. वो करीब 45 साल का होगा. वो काफ़ी मोटा सा आदमी था. मुझे वो परेश रावल जैसा दिख रहा था. वो मुझे घूर के देख रहा था और में बहुत डर गयी थी. एक सेकेंड के लिए लगा कि में मूड के वाहा से भाग जाउ पर मुझे अंदर जा कर लड़के की गांद मर्राई भी देखनी थी. में झट से भाग के बीच वाले टाय्लेट में घुस गयी और दरवाज़ा बंद कर दिया. मैने अपने पीछे डिज़िल्वा को भी बगल के टाय्लेट में आते सुन लिया.
मैं बहुत डरी हुई थी. मैं फिर से कुतिया की तरह ज़मीन पे बैठ के बगल वाले टाय्लेट में छेद से देखने लगी और अंदर का नज़ारा देखते ही मेरा सारा डर गायब हो गया. विवेक ज़मीन पे बैठ टीचर के बड़े और काले बाल चाट रहा था. टीचर का काला लंड आधा खड़ा था और विवेक के चेहरे पे टीका हुआ था. अपने लंड को विवेक के चेहरे पर घिस रहा था. ‘अया.. ज़ोर से चाट मेरे बॉल को’ टीचर ने कहा. धीरे धीरे वो काला लंड कड़क हो कर खड़ा हो गया. टीचर दिखने में एकदम ही गंदा था, पूरा काला, सारे शरीर पर घने बाल, मोटा पेट, ऐसे आदमी से तो में आज से पहले बात भी नही करती. पर उसका मोटा और लंबा लंड मुझे उसका दीवाना बना रहा था. लंड देख कर मेरा जी चाह रहा था कि काश मुझे उस लंड को चूसने को नसीब हो. ‘चल अब घूम जा’ टीचर ने कहा. लड़का घूम के कुत्ते के जैसे हो गया. टीचर ने अब अपने मूह से अपने लंड पे दो तीन बार थुका और वो थूक अपने हाथ से लंड पे फैलाने लगा. फिर उसने लड़के की गांद को दोनो हाथों से फैलाकर उसके गांद के छेद पे भी थूक दिया. टीचर अब लड़के की गांद दोनो हाथो से मसल रहा था और अपना पूरा लंड गांद के बीच घिस रहा था. विवेक ‘आआआआअहह….. आआआआआहह’ कर के सिसकियारी भर रहा था.
‘मज़ा आ रहा हैं ?’ टीचर बोला
‘हां टीचर जी’
‘लंड चाहिए अपनी गांद में ?’
‘हां टीचर पर धीरे से प्लीज़’
‘तो ये ले’ ……
‘तो यह ले’ ऐसा कह कर टीचर ने अपना लंड विवेक के गांद के छेद पे रख के एक झटका दिया और उसका दो इंच तक लंड गांद में घुस गया.
‘आाऐययईईईईईई’ विवेक ज़ोर से चीखा.
‘आआआआअहह…. क्या टाइट गांद हैं’ यह कह कर टीचर ने और एक धक्का दिया और उसका लंड 4 इंच तक गांद में घुस गया. विवेक फिर से चिल्लाया. ‘चिल्लाना बंद कर साले कुत्ते’. टीचर अब लंड 4 इंच तक अंदर बाहर कर रहा था. मैने देखा कि विवेक का भी लंड खड़ा था. शायद उसे दर्द के साथ साथ मज़ा भी आ रहा होगा.दस मिनिट तक टीचर ऐसे ही उसकी गांद मारता रहा फिर उसने पूछा ‘अब ठीक हैं?’. विवेक ने सर हां में हिलाया. टीचर ने अपना लंड लगभग पूरा बाहर निकाल एक और धक्का लगाया और उसका 6 इंच तक लंड अंदर घुसेड दिया. विवेक फिर से चिल्लाया अब कुछ देर तक टीचर ने विवेक की 6 इंच तक गांद मारी. ‘अब नहीं रहा जाता’ ऐसे कह कर टीचर ने फिर से लगभग पूरा लंड निकाल के एक तगड़ा झटका और मारा. लंड पूरा विवेक की गांद चीरते हुए अंदर तक चला गया. झटका इतना ज़ोरदार था कि विवेक के हाथ फिसल गये और वो गिर पड़ा. अब वो ज़मीन पर पेट तले सीधा लेटा हुआ था और चीख रहा था. टीचर का पूरा लंड उसके गांद में घुस गया था और वो ‘आआअहह आआआआआआआहह’ की आवाज़े निकाल के मज़े ले रहा था. दो मिनिट तक टीचर ने अपना पूरा लंड विवेक की गांद में रखा, विवेक ने भी चीखना बंद किया. अब टीचर ने लंड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. टीचर का मोटा लंबा और काला लंड विवेक की छोटी सी गोरी गांद में घुसता देख मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैं जानती थी कि वो देसील्वा बाजू की टाय्लेट से मुझे देख रहा हैं पर मुझे अब बहुत सेक्स चढ़ गया था. मैने अपना स्कर्ट उपर कर लिया और अपनी पॅंटी के उपर से ही अपने गांद के छेद पे उंगली रख कर ज़ॉरो से मसल्ने लगी.
टीचर ने अब ज़ोर से विवेक की गंद मारना शुरू कर दिया था. विवेक ज़मीन पे पेट तले सीधा लेटा था और टीचर के धक्कों से ज़मीन पे आगे सरक रहा था. उसको सरकने से रोकने के लिए टीचर ने अपने एक हाथ से उसके बाल पकड़ के उसको खीच लिया. दूसरा हाथ टीचर ने उसके चेहरे पे रख के दो उंगलियाँ उसके मूह में डाल दी ताकि वो चीखना बंद कर दे. अब टीचर ज़ॉरो से विवेक की गांद में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था. टीचर कोई जंगली जानवर जैसा लग रहा था. एक तो वो इतना काला, मोटा और घने बाल वाला था उपर से उसका मूह खुला था, जीब थोड़ी सी बाहर थी और उसके मूह से थोड़ी थोड़ी थूक टपक रही थी. ऐसा लग रहा था कि गांद मारके उसे इतना मज़ा मिल रहा हो कि वो बाकी सब सूदबुध गवाँ बैठा हो. वो आवाज़े भी जानवर जैसी निकाल रहा था ‘आआआआआआहह.. आआआआआहह’ . हरेक धक्के पे वो विवेक के बाल खिचके उसे सरकने से रोक लेता. वो विवेक को ऐसे ही ज़ोरदार पंद्रह मिनिट तक चोद्ता रहा. फिर अचानक वो और ज़ोर से ‘आआआआआअहह… आआआआआआअहह’ करके चिल्लाने लगा और बहुत ही तेज़ी से गांद मारने लगा. विवेक का, इतनी ज़ोर की चुदाई ले कर बुरा हाल हो गया था. टीचर अब झार रहा था और अपना वीर्य लड़के की गांद में निकाल रहा था. टीचर ने विवेक के बाल इतनी ज़ोर से खीच के रखे थे कि उसका सर उपर हो गया था और मुझे उसकी छाती और पेट नज़र आ रहा था. वो अपने दोनो हाथ से टीचर का हाथ अपने बालो से हटाने की कोशिश कर रहा था पर टीचर तो अब झार रहा था और विवेक की उसे कोई परवाह नही थी.गांद में लंड इतना टाइट था कि वीर्या के लिए भी जगह नही थी और हरेक धक्के पे वीर्य फुट के पिचकारी की तरह गांद से बाहर निकल आता. टीचर ऐसे ही ज़ॉरो से तीन या चार मिनिट तक लड़के को चोद्ता रहा और झरता रहा. दोनो चिल्लाते रहे. विवेक दर्द से और टीचर खुशी से. आख़िर टीचर ने चोदने का ज़ोर थोडा कम किया और लड़के के बाल छोड़ दिए. विवेक ज़मीन पर अब सीधा लेट गया. टीचर भी झार चुक्का था और विवेक के उपर लेट गया.
दो मिनिट बाद टीचर ने अपना लंड निकाल दिया और साइड पे पीठ लगाके बैठ गया. उसका लंड अभी भी पूरा खड़ा था और अपने वीर्य से चमक रहा था. विवेक का हाल बुरा था फिर भी वो कैसे भी करके ज़ोर लगाके अपने घुटनो और हाथ तले हो कर टीचर के लंड के पास जाके उसका वीर्य लंड से चाट चाट सॉफ करने लगा. अब मुझे लड़के की गांद दिखाई दे रही थी. टीचर की चुदाई से उसकी गांद का छेद और उसके आस पास की सारी चमड़ी टमाटर की तरह लाल हो गयी थी. टीचर का लंड विवेक ने अब चाटके सॉफ कर दिया था. में अब अपनी पॅंटी के उपर से ही अपनी चूत और गांद पे अपना हाथ रगड़ रही थी. में उस काले लंड को चाटना और चूसना चाह ती थी.
तभी वो डिज़िल्वा की आवाज़ सुनाई दी. ‘सुन अकेले अकेले कब तक खुद से खेले गी. तुझे एक बड़े लंड की ज़रूरत है.’
अचानक आवाज़ सुनके मैं खड़ी हो कर घूम गयी.
‘असली मज़ा लेना हैं तो मुझे अंदर आने दे’
‘नहीं’ मैने कहा.
‘तुझे उंगलियों की नहीं इसकी ज़रूरत है’
यह कह के उसने अपना लंबा लंड साइड के छेद में से डाल कर मेरे सामने रख दिया और कहा.
‘यह देख मेरे पास तेरे लिए क्या हैं’
लंड देख के मेरा हाथ अपने आप उसकी तरफ बढ़ गया, लेकिन में उसे पकड़ने ही वाली थी कि उसने लंड पीछे खीच लिया.
‘इतनी आसानी से नहीं मेरी जान, लंड चाहिए तो दरवाज़ा खोल के मुझे अंदर आने दे’
‘नहीं मुझे डर लगता हैं. मैने कभी सेक्स नही किया, मैं कुँवारी हूँ’
‘डरती क्यों हैं मेरी जान, मैं तुझे नहीं चोदुन्गा, मेरा लंड कल चूसा था वैसे ही आज भी चूस लेना. बदले में में भी तेरी चूत चाट लूँगा’. उसकी चूत चाटने की बात सुनकर मेरे मन में एक उत्सुकता सी आ गयी. किसी मर्द की जीब मेरे चूत को चाते ये सोच कर मेरा मनोबल टूट गया.
‘ठीक हैं’ मैने कहा.
मेरी सेक्स की भूक मेरे डर से ज़्यादा थी मैं सेक्स की पुजारन बन चुकी थीऔर मैने घबराते हुए दरवाज़ा खोल दिया.
मैने दरवाज़ा खोल दिया. सामने डिज़िल्वा खड़ा था उसने अपनी पॅंट उपर कर ली थी. मेरे दरवाज़ा खोलने पर तुरंत वो अंदर आ गया और दरवाज़ा बंद कर लिया उसने मुझे अपनी बाँहो में जाकड़ लिया और अपनी जीभ से पागल कुत्ते की तरह मेरे चेहरे को चाटने लगा ‘हाई क्या चिकनी है तू, चखने दे मुझे’. उसके मूह से बदबू आ रही थी फिर भी जाने क्यूँ मुझे एक अलग सा मज़ा आ रहा था. वो अपनी जीब पूरी बाहर कर के मेरे होटो को, मेरे गालों को चाट रहा था. उसने अपनी जीभ से चाट चाट कर मेरा पूरा चेहरा गीला कर डाला. फिर उसने अपने होंठ मेरे होंठो से लगा दिए और अपनी जीब मेरे मूह में डाल दी. दो मिनिट तक वो मुझे ऐसे ही चूमता रहा. उसने मुझे अपनी बाहों में ले कर ऐसे जकड़ा था कि मेरा सारा बदन उसके बदन से चिपक गया था. मेरे बूब्स उसकी छाती पे दब रहे थे और मुझे उसका लंबा लंड अपने पेट पे महसूर हो रहा था. फिर उसने अपना मूह अलग करके अपनी जीब पूरी बाहर निकाली और कहा ‘यह ले इसे छुओ’. मैने अपने होंठ खोलके उसकी जीब को अपने मूह में अंदर लिया और उसे चूसने लगी. मैं ऐसे ही उसकी जीब को कुछ देर चूस्ति रही. उसने मेरा स्कर्ट उठा कर मेरी पॅंटी में दोनो हाथ डाल दिए और मेरी गांद मसल्ने लगा. फिर उसने मुझे अपनी जीब पूरी बाहर निकालने को कहा. मेरी जीब बाहर निकलते ही उसने अपने होटो से उसको चूसना शुरू कर दिया. फिर उसने अपने होंठो को मेरे होंठो से अलग करके मेरे गले को चूमने लगा. मेरे मूह से सिसकारिया निकलने लगी. उसने मेरी पॅंटी खिच के फाड़ दी और फिर से मेरी गांद मसल्ने लगा. उसने अब मेरी गांद मसल्ते मसल्ते एक उंगली गांद के छेद पे रख दी. मेरे सारे बदन मे एक करेंट सा हो गया. उसने एक झटके से मेरी गांद में अपनी उंगली डाल दी. में चीख पड़ी
‘आआऐईई. निकालो अपनी उंगली’.
‘साली नखरे मत दिखा’कहते हुए उसने अपनी उंगली मेरी गांद में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. मुझे असल में तो बड़ा मज़ा आ रहा था पर मेने फिर भी कहा
‘प्लीज़ निकालो अपनी उंगली, यह गंदी बात हैं’
‘गंदी बात हैं इसी में तो मज़ा है मेरी जान’
उसने अपने दूसरे हाथ से अपनी पॅंट का बटन खोल कर पॅंट उतार दी, और मेरा हाथ लिए अपने लंड पर रख दिया. मुझे अपने हाथ में इतना बड़ा लंड लेके बहुत आनंद आ रहा था. उसका लंड एकदम गरम और कड़क था. मेने उसके लंड को पकड़ के हिलाना शुरू कर दिया. वो मुझे ज़ोर ज़ोर से चूम और चाट रहा था. कभी मेरे होंठो को चूमता और कभी मेरे चेहरे को चाट लेता. उसकी अब पूरी उंगली मेरी गांद के अंदर बाहर हो रही थी. उसने अब एक हाथ से मेरी टॉप के बटन खोलना शुरू किया. एक हाथ से बटन नही खोल पाने पर वह जंगली की तरह मेरा टॉप खिचने लगा. तीन चार झटके में मेरे बटन टूट गये और मेरा टॉप फॅट गया. उसने मेरे टॉप को मेरी फटी हुई पॅंटी के बाजू में ज़मीन पे डाल दिया. मेरी ब्रा में मेरे बड़े बूब्स देख कर उसकी आँखें फैल गई और उसका चेहरा ऐसा हो गया जैसे कोई भूखा कुत्ता हो. उसने ज़ोर से मेरी ब्रा खिच के निकाल दी. मेरे बूब्स मेरे ब्रा के चंगुल से बाहर हो गये. अब वह मेरा एक बूब अपने मूह मे लेके ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा. ऐसा लग रहा था जैसे वो पूरा बूब अपने मूह में समाने की कोशिश कर रहा था. दूसरे बूब को वो जोरो से मसल रहा था. मुझे तो जन्नत मिल गयी थी. अब में ज़ोर ज़ोर से ‘ऊयूयुवयन्न म्म्म्ममह’ करके सिसकारिया भर रही थी. मेरी गांद में उंगली और बूब की छूसा से ऐसा मज़ा मिल रहा था जो मैने पहले कभी नही पाया था.
तभी मेरी नज़र टाय्लेट के साइड के चेड मे पड़ी. दो अलग छेद से दो लोगो की आँखें दिखाई दे रही थी. साइड के टाय्लेट से विवेक और टीचर मुझे देख रहे थे. मैने सोचा कि कैसे मुझे देख कर दोनो अपने लंड को हिला रहें होंगे. यह सोच कर मुझे और मज़ा आने लगा. मैने बेहया होके उन दोनो की आँखों में आँखे मिला दी और देखती रही. मेरी बेशर्मी से में भी हैरान थी. पर वो सब सोच मेरे दिमाग़ से काफ़ी देर पहले ही जा चुकी थी. मुझे तो अब सिर्फ़ अपनी हवस की आग भुजानी थी. में डिज़िल्वा के लंड को और ज़ोर से हिलाने लगी. अब में सिर्फ़ अपने स्कर्ट में थी और डिज़िल्वा सिर्फ़ अपनी शर्ट पहने हुआ था. वो मुझको अपने से दूर हटा कर अपनी शर्ट निकालने लगा. में भी अब उसके लिए पूरी नंगी होना चाहती थी और झट से अपना स्कर्ट निकाल के पूरी नंगी हो गयी. डिज़िल्वा मुझसे दूर खड़ा रहा और अपने लंड को सहलाते हुए मेरे नंगे जवान बदन को उपर से नीचे देखता रहा उसके चेहरे पे एक हल्की सी मुस्कान थी. मेरी नज़र उसके मोटे लंड पे थी. मैने हिम्मत करके अपनी आँखे डिज़िल्वा की आँखों से मिला दी. मेरा सारा बदन गरम हो गया था. डिज़िल्वा को देखते हुए मैं अपने दोनो हाथ अपने बूब्स पे रख अपने बूब्स को मसल्ने लगी और उंगलियो से अपने निपल को खीचने लगी. इतनी बेशरम हरकत करके मुझे मज़ा आ रहा था. तीन लोगों की नज़र मेरे जवान नंगे बदन पे थी और यह सोच कर मेरी गर्मी और बढ़ रही थी.
बगल के टाय्लेट में टीचर और विवेक अपने खड़े लंड को सहला रहे थे. टीचर का एक हाथ विवेक की गांद को मसल रहा था. दोनो मुझे नंगा देख पागल हो रहे थे. विवेक को अपनी आँखों पे विश्वास नही हो रहा था. वो सोच रहा था कि स्कूल की सबसे सुंदर लड़की जिसपे सब लड़के मरते थे और जो किसी भी लड़के से बात भी नही करती थी अब अपने जवान, नंगे बदन की नुमाइश कर रही थी. जैसे कि वो कोई रांड़ हो. और वो भी ऐसे गंदे और मोटे पेट वाले आदमी के लिए.उसके भेजे मे यह बात नहीं आई कि वो मोटे आदमी के पैरों के बीच एक मोटा लंड भी था.
मैं यहाँ अपने बूब्स को दबाती रही और डिज़िल्वा को देखती रही. उसकी नज़रो से नज़रे मिला के अपने बूब्स को दबाना मुझे बहुत अछा लग रहा था.
‘अब मुझसे रहा नही जाता’ यह कह के डिज़िल्वा मेरी तरफ आगे बढ़ा…..
मैं पूरी नंगी हो कर डिज़िल्वा के सामने अपने बूब्स दबा रही थी. ये नज़ारा देख डिज़िल्वा से रहा नही गया और वो ‘अब मुझसे रहा नही जाता’ कह के मेरी तरफ बढ़ा.
मेरे पास आके डिज़िल्वा ने मुझे अपनी बाहों में ज़ोर से जाकड़ लिया. मेरा सोलाह साल का नंगा जिस्म अब डिज़िल्वा के चंगुल में था. दोनो के बदन एक दूसरे से चिपक गये थे. मेरे बड़े बूब्स डिज़िल्वा की छाती से चिपके थे और उसका लंबा लंड मेरे पेट पे चिपका हुआ था. डिज़िल्वा ने अपना एक हाथ मेरी गांद पे रख अपनी एक उंगली गांद के अंदर डाल दी और अंदर बाहर करने लगा. इस बार मेरे मूह से कोई शिकायत नहीं निकली सिर्फ़ ‘आआआआहह… आआआआआहह’ की सिसकी निकली. वो अपने दूसरे हाथ से मेरे सर को पीछे से पकड़ अपनी तरफ खीच रहा था. उसने अब अपने होंठ को खोल के अपनी जीब थोड़ी बाहर निकाल मेरे होंठो की तरफ लाना शुरू किया मेने भी अपने होंठ थोड़े खोल दिए. उसके होंठ मेरे होंठो को छूते ही मेरे बदन में एक करेंट सा फैल गया. उसने अपने होंठ ज़ोर से मेरे होंठो से लगा दिए थे और चूस रहा था. उसने अपनी जीब पूरी मेरे मूह के अंदर डाल दी. मैं भी अपनी जीब को आगे कर उसकी जीब के साथ रगड़ने लगी. मेरे ऐसा करने से वो और उत्तेजित हो गया और उसने मुझे और ज़ोर से जकड़ा और अपना शरीर मेरे बदन पर घिसने लगा. ऐसा करने से उसका लंड मेरे पेट पे रगड़ने लगा. मेरे बूब्स भी उसकी छाती पे ज़ोर से रगड़ रहे थे और उसकी छाती के बाल मेरे निपल्स को छू रहे थे, इश्स से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. हम दोनो के चूमने और एक दूसरे की जीब को रगड़ने से हमारे मूह से थूक बह रही थी और ये थूक टपक टपक ने नीचे मेरे बूब्स पे गिर रही थी. डिज़िल्वा को मुझ जैसी जवान और चिकनी लड़की को चूमने में बहुत मज़ा आ रहा था और वो ऐसे ही तकरीबन दस मिनिट तक जाकड़ के मुझे ज़ॉरो से चूमता रहा. में भी अब मस्त हो गयी थी और उसकी जीब को अपनी जीब से ज़ोर से रगड़ रही थी. हमारे मूह से इतनी थूक तपकी के मेरे बूब्स और डिज़िल्वा की छाती बहुत गीले हो गये थे. गीले होने के कारण मुझे अब अपने बूब्स का उसकी छाती पे रगड़ना और मज़ा आ रहा था.
दस मिनिट तक मुझे ऐसे चूम्के डिज़िल्वा ने अब मेरे होंठो से अपने मूह अलग किया और मेरे गले को चाटने लगा. में अब बिल्कुल बेकाबू हो गयी थी. मुझे डिज़िल्वा से अपनी चूत चटवानी थी. मैने अपने दोनो हाथ उसके सिर के उपर रख उसका सिर नीचे धकेलना शुरू कर दिया. मुझ में इतनी ताक़त तो थी नही पर डिज़िल्वा समझ गया कि मुझे क्या चाहिए. उसने मेरे गले से मूह हटा दिया.‘चूत चटवानी है ?’ वो मुस्कुरा के बोला