मेरी बहन अध्याय 3

            मेरी बहन अध्याय    3 मेरी  करुणा से भरी हुई   विनती सुन के दोनों  को मुझ पर और मेरी दीदी पर दया आ गई..  आह बहनचोद…. तेरी रूपाली दीदी की चूत  कमाल की है बहन के लोड़े…. साली रंडी ने मेरे लोड़े का तेल निकाल  दिया ..इसकी मां को चोदूं…. साली … Read more

मेरी बहन अध्याय 2

                  मेरी बहन अध्याय 2             झोपड़ी के अंदर एक बाल्टी में पानी भरा हुआ था… मेरी रूपाली दीदी अपने नंगे बदन को उस पानी से साफ करने लगी… मेरी दीदी ने अपनी योनि को भी साफ किया… जुनैद की  मलाई से मेरी … Read more

मेरी बहन अध्याय 1

                       मेरी बहन अध्याय 1 मार्च का महीना था…. मैं अपनी रूपाली  दीदी और मुन्नी के साथ उन के ससुराल से ऑटो में निकला…. 2 साल हो चुके थे मेरी दीदी की शादी  के तब तक…. मुन्नी तो उस वक्त सिर्फ 6 महीने की थी…. शादी … Read more

DIL GALTI KAR BAITHA HAI

              DIL GALTI KAR BAITHA HAI  मैं एक मध्यम वर्गीय फेमिली से हूँ, दो वर्ष शादी को हो चुके हैं और इस समय मेरी आयु सत्ताइस वर्ष के ऊपर चल रही है, मेरे पति की आयु उनतीस वर्ष है, वह एक बड़ी कंपनी में अच्छे पद पर हैं और … Read more

मैं उसका दीवाना वह मेरी दीवानी अध्याय 6

            मैं उसका दीवाना वह मेरी दीवानी अध्याय 6 फिर थोडा टाइम हम लोग उन तस्वीरों को ही देखते रहे कुछ बेचैनी सी थी कुछ ख़ामोशी थी कुछ बात थी जो लबो तक आने से पहले ही दम तोड़ रही थी, दिल थोडा सा अजीब हो रहा था देखा जाये … Read more

मैं उसका दीवाना वह मेरी दीवानी अध्याय 5

  मैं उसका दीवाना वह मेरी दीवानी अध्याय 5 मैं बाथरूम में घुस गया हाथ मुह धोकर आया तब तक रति ने खाना लगा दिया था मोमबत्ती की हलकी सी रौशनी में अपना तो वोही कैंडल लाइट डिनर हो गया था चुप चाप हम भोजन कर रहे थे बदन में थोडा सा दर्द होने लगा था … Read more

मैं उसका दीवाना वह मेरी दीवानी अध्याय 4

   मैं उसका दीवाना वह मेरी दीवानी अध्याय 4 उसने अपनी मैक्सी को पीठ की तरफ से पूरा ऊपर कर लिया मैंने अपना हाथ उसकी पीठ पर टच किया कसम से बहुत जबदस्त फीलिंग आई इतनी मुलायम खाल थी उसकी मेरे छुते ही उसके बदन में सनसनाहट हुई , उसकी झुरझुरी को महसूस किया मैंने … Read more

मैं उसका दीवाना वह मेरी दीवानी अध्याय 3

            मैं उसका दीवाना वह मेरी दीवानी अध्याय 3 बिमला ने मेरी आँखों में देखा और धीरे से अपनी चोली की डोरी को ढील दे दी अन्दर ब्रा थी नहीं तो बस हवा में झूल गए वो शोख कबूतर मन ललचा गया अपना फिर धीर धीरे से उसने अपने घागरे को … Read more