मेरी माँ गर्म अध्याय 9
देख सोनू की मम्मी हलके मुस्कान रही थी
सोनू : अरे मम्मी पहले खातो लो। उसके बाद डैडी को कॉल करेंगे बोल देना की आज भी यहीं रुक जाएंगे।
पूनम देवी :: अच्छा बेटा।
ओह अम्माजी सब्जी और रोटी बहुत स्वस्थ हैं। गान की रोटी की बात ही अलग है।
सोनू :: हा मम्मी..बहुत स्वादिष्ट हैं। एकदम कल रात जैसा (सोनू ने मम्मी की ओर इशारा करके आंख मारा))
बूढिया :: कल रात जैसा क्या बेटा
सोनू :: अरे वो वो अम्माजी। मेरा मतलब..कल जो वहन शादी में खाना बनाना था विह भी ऐसे ही मजादार था।
सोनू की डबल मीनिंग बात सुनके सोनू की मम्मी जल्दबाजी में ही खाने लगी अब। खाने के बाद अब सोनू और उसकी मम्मी अपनी झोपड़ी में चले आए। सोनू की मम्मी ने सोनू के पिताजी को फोन करके बताया की आज भी रुक जाएंगे इधर ही क्यों की कच्ची सड़क पर पानी भरा है अभी।
सोनू की मम्मी फोन कट करके खिड़के के बहार देख रही थी। बहार हलकी बूंदी हो रही थी अब भी। पर मौसम बहुत सुहाना था। वो बहार का नज़र देख ही रही थी के सोनू पीछे से आके फिर से उनको गले करलिया।
सोनू :: (अपनी मम्मी की कमर में हाथ दाल के) उम्म्म..क्या देख रही हो मम्मी। बोल्डिया क्या डैडी को आपने फोन पे।
पूनम देवी :: हम्म बोल डाला बेटा। वो बस बहार गान कितना सुंदर लगरा ना।
सोनू :: हा .अब तो मजा आ जाएगा आज हम दो अकेले हैं जोपड़ी मील रोमांस करेंगे पर मेरे लिए तो सबसे सुंदर नजर ये है या अपने होंगे को अपनी मम्मी के चिकने गालो पर रख कर चुन लेंगे
पूनम देवी :: श्ह्ह्ह सोनू। उन् सुबा सुबह ही शुरू हो गया।
सोनू :: प्यार के लिए क्या रात क्या आई लव यू डार्लिंग
पूनम देवी :: डर लगता है बेटा.. किसी को पता चल गया तो।
सोनू :: shhh.. किसी को नहीं पता चलेगा.. आप सिर्फ मेरे हो .. पिताजी से मांग लुंगा मैं आपको मम्मी।
पूनम देवी :: नहीं सोनू बेटा.. ये संभव नहीं..तेरे पिताजी ये समाज…
सोनू :: सब कुछ मैं सम्भल लुंगा। पर आप.. अपको तो मैं पसंद हूं ना मम्मी। आप भी मुझसे प्यार करता है ना।
सोनू ने अपनी मम्मी को फिर अपनी तरफ पलटाया और उनकी आंखों में देखते हुए प्यार से पूछा।
सोनू :: प्यार है ना मम्मी। बस एक बार बोल्डो ना आप भी के प्यार है मुझसे।
पूनम देवी :: उन्न्नं श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… न ….शरम आते हैं बाबा.
सोनू:: अच्छा.. अगर मैं सब कुछ मैनेज कर दूंगा तो.. मेरे साथ रहेंगे ना.. मेरी होज आओगी न सिर्फ मेरी।
पूनम देवी :: सब कुछ मैनेज करलेगा…पर….पिताजी..दादी…सब लोग..
सोनू :: श्ह्ह … सबकुच मैनेज करलंगा मम्मी.. बस आपका प्यार चाहिए.. मैं पूरी दुनिया जीत सकता हूं आप मेरे हो जाओ बस।
सोनू की मम्मी सोनू की आंखों में आंखें दाल कर, उनके चेहरे एक दसरे के इतने करीब थे कि दोनो एक दसरे की सांसो को महसस कर रहे थे
सोनू की मम्मी; इतना पुर कर्ता ही मुजे
सोनू; अपनी जान से जायदा। अब से तुम मेरी हूं सिर्फ मेरी
सोनू की मम्मी; प्रति तेरे पापा
सोनू; मैं उनको तुमसे मांग लूंगा कहुंगा बस मुझे तुम दे दो मुजे या कुछ नहीं चाहिए तुम्हारे बदले वो मुझसे मेरी जान बि मांगे गे तो हंसते दे दूंगा
सोनू की मम्मी; अगर उन्हो ने इन्कार कर दिया तो
सोनू; एसा हो नहीं सकता या अगर ऐसा हुआ तो मैं तुम्हें भागा कर ले जाउगा।भाग्यवान
सोनू की मम्मी; ये क्या कह रहा है तू भाग्यवान बोले का हक तो तेरे पापा का ही
सोनू; वही तो मेरे कह रहा दे दो मुजे वो हक तो पापा को ही तुम सिर्फ मेरी या सिर्फ मेरी
सोनू की मम्मी; नहीं सोनू
सोनू; प्रति क्यू क्या तुम्हें मेरा प्यार कबूल नहीं
सोनू की मम्मी; ऐसी बात नहीं प्रति जब तक तुमरू दादी या पापा
सोनू, थिक ही जब दादी या पापा खुद तुम्हारे मुझे देंगे तब तो कह सकता हूं ना
सोनू की मम्मी ने मुस्कान कर अपनी सहमती दे दी
सोनू के अंदर इतना प्यार देखके अब सोनू की मम्मी भी जैसी उसे प्यार की समुंदर में बह रही थी। कुछ बोला तो नहीं पर उसके गले लगाओ
पूनम देवी जैसी खूबसूरत औरत अगर किसी को अपनी बहो मील ले तो वो मर्द कैसे ये मोका हाथ से छोड सकती है। सोनू की मम्मी की बहे सोनू के गाले मील थी या सोनू को देख कर मुस्कान रही थी
सोनू; अच्छा अगर अभी तुम्हे भाग्यवान नहीं कह सकता तो नाम से तो बुला ही सकता हूं ना मेरी जानेमन। सोनू या पूनम दोनो किसी लैला मजनू की तरह खोये दुनिया से बेखबर थे या सोनू ने अपने होने को आगे बड़ा कर अपनी मम्मी के गुलाबी होंतो को चुम लिया
सोनू की मम्मी सोनू की आंखों में प्यार से देख खुद अपने होते हैं सोनू के होने पर लगा दिए। अब उसकी मम्मी भी सोनू के होते हैं हलके चूम रही थी। सोनू और उसकी मम्मी अब जैसे प्यार के समुंदर में धीरे-धीरे डूब रहे हैं और होंठ एक दोसरे को समरपित कर रहे हैं। सोनू ने उसे मम्मी को और उसकी मम्मी ने सोनू को कासके पक्का था और वो दोंनों डीप किसिंग, स्मूचिंग करने लग गए द अब
सोनू; ppppppppppppppppppoooooooooooooonam
सोनू की मम्मी; सोनूउ.उम्ममम्मम्ममम्मम उम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम उम्मम्ममम्मम्मम्मम्मम्ममम्मम ऊम्मम्ममम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्म धुम घुत रहा हाय सांस तो लेने दे
सोनू अब मम्मी के लोअर लिप्स को कभी अपने दोनो होठों से चूस्ता… तो कभी उनके ऊपर वाले होंठों को। रासील होंथ में बहुत रस भरा था और सोनू की मम्मी किस करते समय सोनू के सर पे हाथ फेर रही थी
तीन मिनट बाद सोनू ने होठ हटाये तो सोनू की मम्मी ने अपने भीगे होंठों को साड़ी से पोंचा। फ़िर उन्होन शर्मा
के सोनू की ओर देखा तो वो उनके होते घोर रहा था।
सोनू अपने होंथो पर अपनी जीभ से फिरने लगा मानो अभी द्वि वो अपनी मम्मी के होने को चाट रहा था या उसरे से अपनी मम्मी को पास आने के लिए बुला रहा था
पूनम देवी :: ऐसा क्या देखा। किस तो दी ना उधार…
सोनू :: हा ..पर मैंने बोला था न आपका अंग अंग … इंच .. इंच … पसंद है .. मम्मी वो आप की ज़बान एक बार निकलो ना। कितनी मीठी हो तुम। निकलू ना अपनी जीभो
पूनम देवी :: हाई। दया… क्यूं पर..
सोनू :: प्यार में सवाल नहीं करते…प्यार में बस प्यार करते हैं मेरी जान।
सोनू की मम्मी ने झिझकते हुए उनकी जीभ को होठों के अंदर से बहार निकला। उनकी जीभ पाटली सी और लाइट पिंक कलर में थी। या बड़े ही कामुक तारिके से अपने होने पर लिपस्टिक की तरह घुमने लगी
सोनू ने झट से अपना चेहरा आगे करके अपने होने से अपनी मम्मी की जीभ को पक्का लिया और चूसना लगा। सोनू की मम्मी अचंबे में पढ़ गई पर सोनू उनकी जीभ चुनो जराहा था।
सोनू ::: yummmmmslurrrppppppppp yummslurpppppppppppppppppppppppppppppppppppppppppppppp
पूनम देवी :: ऊम्मम्मम्म आआआआ आ आ आआ आआ आआ आआआआआआआआ
सोनू जैसे मम्मी की जीभ से पूरा रास चूस रहा था और सोनू की मम्मी धीमे धीमे सांस ले रही थी क्यों की सोनू के ऐसी जीभ चुनने से उनको अपना पूरा मुह खुला रखना पड़ रहा था।
सोनू 2 मिनट तक अपनी मम्मी की रसीली जीभ को चुनकर फिर जीभ आज़ाद किया तो उसकी मम्मी ने झट से ज़बान और करली और फिर से मुह पोंचने लगी साड़ी से।
पूनम देवी: पागल, कैसे कैसे किस करता है, पता नहीं कहां से सीखता है सब।
सोनू: प्यार सब कुछ पढ़ा देता है
पूनम देवी: अच्छा, बातें तुझसे तलाश कोई।
सोनू: हा मैं आपको बातें सिखाऊं गा, आप मुझसे प्यार सिखो।
पूनम देवी; मी तुझे सिखबाल्की वो बि तू ही सिख रहा ही मुजे
सोनू अपनी मम्मी के पास आया और खड़े खड़े ही मम्मी को गोदी में उठा लिया। उनके फिर नीचे उतरते हुए गर्दन पर चूमने लगा उन्हें कसके पका कर।
सोनू: उम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्म, उम्म्म, आज सुबह से रात तक करेंगे पूनम रोमांस
पूनम देवी :: आहहहह्ह्हह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हों को नाला अबी प्लस रत को कर लेना बीटा।
सोनू ने अब अपनी मम्मी के ब्लाउज के हुक पे हाथ रखा। सोनू की मम्मी ने शर्मके हाथ हटा दिया।
सोनू: कृपया ये तो एक बार दिखादो ना, बहुत मन कर रहा ही देखने का
पूनम देवी: उन, शर्म आती हैं, तू अब बच्चा नहीं रहा, क्या देखेंगे
सोनू; क्या जानू पापा को बी तो दिखी हो ना
पूनम देवी; दत्त, उनका तो हक ही देखने का
सोनू; अब से नहीं अब से तुम मेरी हो सिरफ मेरी
सोनू: उम्म आपके डूधू, बचपन के जैसे आपके दूध पिलाडो ना।
पूनम देवी: हतत्त, बेसाराम कहीं का, बड़ा होगा है अब, और शर्म आते हैं, दांत देखे तेरे कितने बड़े हैं, डर लगता है।
सोनू : हे, अच्छा पर रात को वादा ना आपके दूध… बोलो वादा ना
पूनम देवी :: ज़िद्दी सोनू, वो वो पर देखेंगे न सिर्फ।
सोनू: सिर्फ देखना नहीं, मेरे जानू के दूध को बचपन में जैसा करता था वैसा करना है।
पूनम देवी:: हे भगवान, उन्न्नन्नन्नन, नहीं नहीं, शर्म आएगी।
सोनू: कृपया, कृपया ना, धीरे से करुंगा ना, वादा धीरे से करुंगा दूध को। पापा को बी तो पिलाती हो
पूनम देवी: हे, उन्न्न, मनवाके ही रहता है सब बातें, बदमाश … पर अभी नहीं रात को, अब बहुत हुआ बदमाशी तेरे सब से।
अब घन में बैठे दोंन और बातें करने लगेंगे। शादी में क्या हुआ था बातें, इधर उधार की सब बातें, सोनू अपनी मम्मी को हसने को चुटकुले भी सुनवाता, उसके कॉलेज में जो जो किससे हुए सब सुनारा था, मम्मी की भी सब बातें सुन रहा था वो। प्यार में सिर्फ प्यार नहीं, बाल्की एक दोसरे की बातें सुन्ना, समाधान से भी प्यार बढ़ता है एक दूसरे पर, ये बात जनता था सोनू
सोनू: आई लव यू सो बहुत डार्लिंग
पूनम देवी: हे अरे ये क्या डार्लिंग
सोनू; आपको प्यार से दिया है नाम, डार्लिंग, बस आप और मैं जब हो तबी बुलाउंगा, फ़िकर क्यूं करता हो पू
पूनम देवी: पागल, डार्लिंग क्या नाम हुआ, मम्मी ही ठीक हैं।
सोनू: कभी मम्मी कभी ज्यादा प्यार आया आप पर तो मेरी डार्लिंग।
पूनम देवी: हे पागल, तू साथ रहता है तो समय का पता ही नहीं चलता बेटा।
सोनू: अब बस हमेश आपके साथ रहेंगे, हम साथ रहेंगे मां, हमशा हमेशा, एक होके रहेंगे। दोपहर का फिर उन लोगों ने खाना खलिया और फिर से घन पे दो प्यार भरे बातें करने लग गए।
सोनू और उसकी मम्मी ऐसे ही प्यार भरी बातें करते हुए हुए घन में वो दोपहर पूरी बिटादिये। सोनू की मम्मी को सोनू ने फिर ऐसे आसमान में चांद दिखाया के देखो रात होगा। जिस रात का इंतजार था !!
एम
सोनू और उसकी मम्मी बातें करते हुए हुए हैं पूरा दिन निकाले दिए। रात का खाना खाते सोनू ने अपनी मम्मी को आखो के ईशरे से उन्हे अपना सूबा वाला वादा याद दिला से सोनू की मम्मी बुरी से शर्मा कर आंखों से इसशरे
से ये बताने की कोशिश करने लगी की बूढिया देख लेगी लेकिन सोनू प्रति तो जैसी अपनी मम्मी के हुस्न का जादू छाया हुआ था और फिर बूढिया अपनी झोपड़ी में जाके सोगयी। सोनू की मम्मी घन पे लाते थे और ऊपर देख रही थी। दुकान की चाट थोड़ी सी टूटी थी और आसमान में चांद तारे नजर आराहे। सोनू भी मम्मी के पास आके लेटा और वो दोनो ही आसमान की ओर देख रहे थे। बहुत ही खूबसूरत रात थी। उधार सोनू के पापा शहर में आज भी निश्चिंत होके सोने जा रहे थे। उन्हें इसी बात की हिम्मत थी की सोनू भी तो साथ है उनकी पत्नी के। पर उनको क्या पता था की उनका गाथा और उनकी पत्नी का लाडला बेटा ही अपनी मम्मी को प्यार करने लग गया था और पूनम देवी भी सोनू के प्यार में पढ़ रही थी। सोनू के डैडी बेड पे लेटे थे, इधर सोनू और उसकी मम्मी दूर गानव में झोपड़ी के और थे। या नींद उनकी आंखों से कासो दूर थी
पूनम देवी :: कितनी खूबसूरत है ना सोनू..देख आज तो चाँद भी निकला है
सोनू :: हा बहुत खूबसूरत है। पर हमारे चांद में तो दाग है। पर मेरा चंद तो मेरी बहो मील ही या मेरा चांद हमें चांद से भी ज्यादा खूबसूरत है।
पूनम देवी:: हाहा…फिल्मी बातें पागल.. इतनी खूबसूरत नहीं हूं वैसा..पर थैंक यू बेटा।
सोनू:: मेरी डार्लिंग मेरी नज़र से देखो तो तुम्हें पता चले की तुम कितनी खूबसूरत हो सबसे खूबसूरत हैं। है ना डार्लिंग
पूनम देवी :: हे .. क्या डार्लिंग डार्लिंग .. ऐसे दोसों के सामने मत पुकारना मुजे
सोनू :: वैसा तो मुझे किसी का डर नहीं। अपनी जान को प्यार करने से कैसा डर हा।
पूनम देवी :: अच्छा जी.. तेरे डैडी के सामने बोलेगा तो खैर नहीं फिर तेरी
सोनू :: अरे। अब मैं बच्चा नहीं रहा न मम्मी। डैडी से कहूंगा के तुम मेरी हो सिरफ मेरे..
पूनम देवी :: श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ः.. अभी नहीं बेटा। कुछ मत कहना उनसे।
सोनू:: मम्मी.. आप मत लो टेंशन.. मैं सच में अच्छी जॉब मिलेगी तो बस आपको अपना बनाउंगा.. डैडी से आपको मांग लूंगा।
पूनम देवी :: ओह्ह्ह क्या सपने हैं तेरे बेटा… ये सब पर मुमकिन नहीं
सोनू:: होगा मुमकिन..मैं आपके लिए कुछ भी करुंगा.. बस अभी कॉलेज मेरा खतम होते ही देखना मैं नौकरी मिलेगा तो आपको मांग लूंगा डैडी से।
पूनम देवी :: हा अच्छा और वो मांगते ही तुझे सौंप देंगे क्या मुझे पागल।
सोनू:: हा क्यों नहीं मुझे उनको विश्वास दिला दूंगा की हम दोनो एक दसरे के लिए ही बने हैं।
सोनू अब फिर से मम्मी की आंखों में लेटा हुआ प्यार से देखते हुए पूछे लगा।
पूनम देवी :: सबसे ज्यादा भरोसा है ना तुझपे ही। मां को बेटे पे ही भरोसा होता है सबसे ज्यादा।
सोनू :: तो बस…. और प्यार भी तो है ना क्यों..है ना.. कहो ना प्यार है।
पूनम देवी :: (शर्माके) उन्न्नं हा प्यार हैं।
सोनू :: मेरी प्यारी प्यारी..
सोनू ने फिर से बाहर में भरके उनके हाथ पर धीरे-धीरे से चूमना शुरू किया।
फिर सोनू हाथ से होते हुए मम्मी के फेस के पास आके चूमने लगा।
अब सोनू ने घन में अपनी मम्मी को अपनी बहो में भरते हुए घन में रोल किया, या अपना हाथ बड़ा कर पास पड़ी हुई लालटेन की बत्ती धीमी करदी और चेहरा को चुनने लगा। होंथो को चुनने लगा। उसकी मम्मी अब जब भी सोनू होठों पे किस करता तो वो भी प्यार से उसका साथ देने लगी थी।
सोनू :: ppppppppppppooooooooooooonammmmmmmmmmmmmmm मैं तुमसे प्यार करता हूँ
पूनम देवी:: उम्मम्ममम्मम्मम्मम्ममम्म सोनू बेटा उम्मममम्मम्मम्म
कुछ डर सोनू अपनी मम्मी के होंथो को चुस्ता वो थोड़ा सा नीचे आया, मम्मी के नाभि पे एक हल्की सी किस दी। उसकी मम्मी सिहर उठी। वो मम्मी को जैसे धीरे-धीरे फिर से ऐसे फोरप्ले से एक्साइट कररा था।
फिर से वो ऊपर आके सोनू ने हाथ मम्मी के ब्लाउज पे डाला और हुक पे रखा। धीरे से वो उनग्लियों से पहला हुक खोलने की कोशिश कर्रहा था। पर सोनू की मम्मी का बड़ा ब्लाउज बहुत टाइट था। सोनू की मम्मी को महसूस हुआ सोनू का हाथ टू अनहोन किस तोड़ा और शर्मके हाथ पक्का।
पूनम देवी :: शाह..उन्न क्या कर रहा है सोनू
सोनू:: उन् वाहिन..जो सुबा आपने वादा किया था
पूनम देवी :: क्या वादा किया था। ((अंजान बनते हुए))
सोनू :: ओह अच्छा जी। सुबाह का वादा शाम को याद नहीं।
सोनू ने मम्मी को इधर उधार गुडगुडी करना शुरू किया।
पूनम देवी :: हे ऐ अरेई ही हे हे हे सोनूउउउउउ हे प्लस क्या कर्ता
सोनू :: हे क्यों याद नहीं वादा बोलो बोलो
पूनम देवी :: हे अच्छा अच्छा रुक रुक… याद याद है बाबा हा याद है
सोनू:: हम्म अच्छा तो फिर.. अब…
पूनम देवी :: शर्म आती है मुझे सोनू बेटा
सोनू :: कोई भी तो नहीं ना इधर है झोपड़ी में pls।
पूनम देवी :: उन पर धीरे से ना.. अब बड़ा हो गया है तू
सोनू; पूनम में बड़ा हो गया हूं तो क्या पापा बचे हाय
पूनम देवी; धत्त कुछ बी बोलता ही उनका तो हक ही देखने का ओर
सोनू; मुस्कान या चुसने का लेकिन प्रिय आब तुम मेरी या सिर्फ मेरी या अब में से खेलना का हक सिरफ मेरा ही
पूनम देवी :: दांत नहीं लगाना plsss बेटा
सोनू:: जी नहीं लगाउंगा धनर बस ऐसे चुसुंगा जैसा आम चुस्ता हूं..मेरी भोली मम्मी कितनी डरती हो..प्लस उन अब खोलो ना ये ब्लाउज। देखो कितना टाइट बंधन है। ऐसा लग रहा के फट न जाए।
पूनम देवी :: ये मेरा कहा ही उस बूड़िया का ही इस्लिये तंग ही मेरा आकार थोड़ा ही ये .रुक मानेगा कहा तू शैतान
सोनू; फिर तुम्हारा साइज क्या ही वो बता दो
पूनम देवी; स्मृति
हुए बड़ा शैतान हो गया ही तू मार खाएगा
सोनू की मम्मी का मंगलसूत्र भी लतक रहा था ब्लाउज पे। वो अब बैठे घन पे, उन्होन अब धीरे से मंगलसूत्र थोड़ा साइड किया और बस दो हुक निकले लगे। वो पहले तो बस एक ही साइड का ब्लाउज उठाके सोनू को अपने बूब के दर्शन देने का सोने रही थी। बस एक हाय बूब। पर सोनू ने भानप लिया और बोला।
सोनू : मम्मी प्लीज दोनो साइड के खोलो ना प्लीज.. कोई भी तो नहीं है इधर. Plss बहुत मन है पूनम pls.
पूनम देवी :: उन्न्नं शर्म आती ना बेटा। कृपया एक हाय।
सोनू :: बहुत मन है दोनो देखना है मुझे pls।
पूनम देवी : उन्न अच्छा.. बदमाश.. एक से तो जी नहीं भरेगा तेरा
सोनू की मम्मी अब निकली लगेंगी।
पहला हुक निकला
दूसरा हुक निकला
तीसरा हुक निकला
सोनू अब बस अपनी खूबसूरत मम्मी को बिना ब्लाउज के देखे पागल होराहा था। अंदर एक बस काली ब्रा पहनने थी उसकी मम्मी जो उनके गोरे बदन पे बहुत सूट कर रहा था। ब्लाउज अब ब्रा के ऊपर उनके बदन पे लातक रहा था। वो शर्मा के बैठी अपने ऋषि बेटे के सामने घन पे।
सोनू :: पूनम निकलाल्डो ना ब्लाउज अब। Plsss
सोनू की मम्मी ने शर्मा के अपने हाथ ऊपर किए और ब्लाउज को धीरे से अपने हाथों से निकल रही थी। ऐसा करते समय उनके हाथों की चूड़ियां खानेक रही थी चान।
और ऐसा जब आओनू की मम्मी ब्लाउज निकल रही थी तो सोनू की नज़र मम्मी के बगल पे पड़ी उनके बगल में भी एकदम साफ। सोनू को ऐसा महसूस हो रहा था की मेरी मम्मी तो ऊपर से नीचे तक पूरी चिकन है। मन कर रहा था के बस उनके बगल को सूंघ ले, चूम ले। पर अभी उसका ध्यान बस बूब्स पे था। ब्लाउज पूरा निकलके सोनू की मम्मी ने साइड में रख दिया घन पे। सोनू अब धीरे से आके उनके ब्रा स्ट्रैप को साइड करने लगा शोल्डर पर से।
पूनम देवी :: उन्हुन्नन वहन नहीं..वो वो.. पीचे है हुक इस्का।
सोनू:: ओह सॉरी..मुजे पता नहीं था आज पहली बार ब्रा का खुल रहा हूं ना।
सोनू की मम्मी सोनू की तराफ पीठ की। उन्की गोरी मुलायम पीठ। सोनू ने हाथ बढ़ाया और पीछे लगा ब्रा के हुक को धीरे से निकलते ही ब्रा उसकी मम्मी के बदन से आजाद होगा
ब्रा पर अब बूब्स से चिपका था। बूब्स नज़र नहीं आरा थे. सोनू फिर से आया आया।
सोनू :: उन मम्मी pls अब हटाडो। ब्रा को. कृपया तड़पाओ मत ना जान pls।
सोनू का लुंड तो जैसे स्तन देखने को मचल रहा था और पंत में सांप की तरह फंफना रहा था। सोनू की मम्मी शर्मा रही थी बहुत .. आंखें बंद थी उनकी। ऐसे ही दो मिनट तक वो ब्रा को अपने बूब्स से चिपके राखी और फिर धीरे से ब्रा को नीचा गिरा दिया।
ब्रा के आला गिरते ही सोनू की मम्मी के रस से भरे संतरे अब सोनू की नजरों के सामने। एक बूब उनका 36 का साइज का था। बहुत ही गोरा और सॉफ्ट जैसे की उल्लू पर मखन का लेप लगा हो। उसे उतना ही आइडिया लगा था ये उसकी मम्मी के बूब्स तो उससे भी बड़े। सोनू की मम्मी ने सोनू को इस तरह अपनी बूब को घूटे देख फिर से हाथों से अपने दून स्तन कवर कर लिए शर्मा कर।
सोनू: अरे क्या हुआ, प्लीज फिर से कवर करलिया, हटाओ ना हाथ, प्लीज और क्यों तड़पा रही हो
पूनम देवी: बहुत शर्म आ रही हैं बेटा उन्।
सोनू; प्लीज अब हटादो ना, मेरी अच्छी मम्मी, स्वीट मम्मी हो ना हटाओ ना पापा के सामने शर्म आती ही क्या तो मेरे सामने क्यों। अब मैं पापा की जग हूं कृपया हटाओ ना हाथ
शर्माते हुए ही धीरे से सोनू की मम्मी ने हाथ हटाये बूब्स से। एक बेटे के लिए मां के स्तन देखने का सौभाग्य मिलना बहुत बड़ी बात होती है। सोनू शायद उन्हीं किस्मत वालों में से था। वो बस आंखें फड़ के निहार रहा था मम्मी के बड़े बूब्स को तो उसकी मम्मी शर्म से पानी पानी होराही थी।
पूनम देवी के गोरे स्तन के बीच में जो निप्पल था उसे देख तो और भी सोनू का दिमाग पागल हो रहा था और उसका गला सुखा रहा था। इतने गोर बूब के बीच में उसकी मम्मी का निप्पल डार्क कलर का था जैसे की नजर का टीका हो। निप्पल की चौडाई (चौड़ाई) तक्रीबन आधा इंच थी और लंबी तकरीबन एक इंच थी। निप्पल और बूब के बीच में एक हलका सा डार्क सर्कल भी था।
सोनू की मम्मी के निप्पल शायद थांड के करन धीरे-धीरे कंपकंपी कर रहे थे। सोनू बस बारीकी से घोर रहा था हर चीज उनके बूब्स की। मानो उसे तो जैसे सनप सूंघ गया था और उसका लुंड तो ऐसा था की पंत फड़के बहार ही ना आजाय।
पूनम देवी :: हे भगवान.. शर्म आराहिइइइइ बहुत। क्या देखा सोनू..
सोनू: उफ्फ। कितने बड़े और खूबसूरत आना है आपके। इस्लिये चुपाके रखती हो इतना ..
पूनम देवी :: उन्हन्न देखलिये न अब .. उन्न ब्रा पेहेन लुन क्या
सोनू:: हैं.. ऐसे कैसे मेरे प्यारे मम्मी। अभी तो प्यारे प्यारे आपके बूब्स से प्यार करने दो
सोनू धीरे से अपना हाथ आगे करके एक उल्लू को पक्का। कानप उठी उसकी मम्मी।
पूनम देवी: आहहहहहहहहहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह
धीरे धीरे अब वो हम बूब को दबाने लगा। क्या कोमल था बूब मम्मी का। वो तो ज़ोर से आहें भरने लगे अब सोनू जब बूब को हल्के से दबा रहा तो। अब सोनू ने दूसरा हाथ भी दूसरे उल्लू पर रखा और दोनो हाय बूब्स को दबने लग गया।
पूनम देवी :: आह्ह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह इस्सएसएसएसएसएसएसएसएसएसएसएसएसएस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.एस.ए.
सोनू तो उल्लू को ऐसे फोंडले करते हुए मम्मी के चेहरे के भाव देख रहा था। कैसे वो अपने मुह से सिस्कियां निकलराही थी। कैसे आहें भर रही थी। कैसे उनकी धड़कन तेज हो रही थी। सोनू ने अब धीरे से अपनी उनगली और अंगूठे के बीच मम्मी के निप्पल को पक्का के रगड़ किया।
पूनमदेवी :: अब्बाबाबाबाबब्बब्बब्ब्बा…आह सोनू plsss। क्या कर रहा मत करना… Plsss आदत नहीं मुझे
सोनू :: उन धीरे से कराह न मम्मी उन्म प्लस धीरे से। तुम क्या कह रही हो तुम्हें आदत नहीं ही में सब की क्या पापा में से नहीं खेलता मेरा तो दिल करता ही सारी रात से खेल रहा में। आज कितने टाइट ही ऐसे जैसे किसी कुंवारी लड़की के हो
सोनू की मम्मी को सब फोरप्ले में आदत नहीं थी इसलिये वो बेचान हो रही थी। पर सोनू नहीं रुका। उसे दूसरे निप्पल को भी उसी तरह से रगड़ किया। ऐसा करने से तो उसकी मम्मी ने ऐसी आवाज निकली जैसे की औरें रोते समय निकाले।
पूनम देवी ::: eeeeeeee sshhhhहहहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हहहहहह्ह्ह्ह्हाहहहिई
सोनू ऐसे ही दोनो निपल्स को हल्के हल्के रगड़ कर रहा था अपनी मम्मी के चेहरे को देखते हुए और वो बहुत ज्यादा बेचान होराही थी। कभी वो पीछे जाके सामने से हाथ डालके दोंन स्तन अच्छे से सहलाता, दबाता।
एक मिनट तक ऐसा करके उसे अब हाथ हटा दिया। उसकी मम्मी अब चैन की सांस थोड़ा लेने लगी। शर्माके आंखें खोली।
सोनू :: पूनम अब कृपया मुझे दूधु पिलाओ ना
पूनम देवी :: उन न ची ..कोई दूधू नहीं आता अभी..पागल। उन्नाव
सोनू :: आचा जब पापा इसे पीठे ही तब दूध नहीं तो रस निकलाता ही में अच्छा तो बस वैसा ही बस महसूस करलंगा की दूधू आरा..बस आप इसे देदो मुझे।
सोनू ने अपना मुह खोलके इशारा किया के उसे अब बूब को अपने मुह में लेना है।
पूनम देवी :: बदमाश। उन पर याद है ना धीरे से..
सोनू :: हा मम्मी याद है ना। कैसे भूलुंगा..
पूनम देवी :: उन्न्नं अच्छा… पास आ थोड़ा। बहुत बदमाश, एक नंबर का शैतान है
सोनू की मम्मी घन पे शर्मा के बैठी थी। उनके दो विशाल नागपुर संतरे जैसे सोनू को बुला रहे थे। सोनू अब अपना फेस पूनम देवी के एक उल्लू के पास ले गया। धीरे से उसे मुह खोला और अपने ल्होंथ मम्मी के निप्पल पर लगा दिए। मम्मी के नाज़ुक निप्पल पे। बूब को हाथ से पका के निप्पल को मुह में लेटे ही फिर से कंपकंपी होगी उसकी मम्मी।
सोनू भले ही पूनम देवी का बेटा था पर था तो एक मर्द ही ना किसी बी औरत के चुचो को कोई मर्द अपने होंथो मील ली कर चुसे उसके बदन मि आग तो लग ही जाति हाय
सोनू :: ummm sooooorrrppppp…Slurrpppppppppppppppppppppppppppppp,, SSSLURPPRSRPLSRPRPSRSRPSR (चुनने लगा))
पूनम देवी ::: ufff … शहह unn shhhhhhhhhhhh’ unnn dheere se unnn dheeme pls unnnn, sssssss shhhhhhHHHHHHHHHHHHHHHHHHHHHH
सोनू की मम्मी अपना सर बैठे हुए बस इधर उधार करके जोर की सिस्की लेरही थी जब वो उनके निपल्स चूसराहा था।
सोनू अब जान बुझ के उसकी मम्मी के निपल्स को होठों से जीभ से जाने लगा। वो फिर से अपनी नोकीली ज़बान से मम्मी के निप्पल को चाटने लगा..
पूनम देवी :: ऐ आईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई)
((तिलमिलके बोली उसकी मम्मी))
पूनम देवी की आंखे मस्ती मील बंद थी या धेमे के करह रही थी सिसक रही थी आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् वहां नहीं नहीं नहीं नहीं.
फिर से सोनू अपनी मम्मी के निप्पल को होठों के बीच लेके बहुत धीरे धीरे चुनने लगा उनकी गोदी में बैठे, जैसे वो बचपन में शायद पीठ था दूध। उस समय सोनू एक बच्चा की तरह दूधिन आज पीठ वो पेट मि अपना बच्चा दलने की हिम्मत रखता था वैसा चुस रहा था। सोनू की मम्मी अब एक मर्द का चेहरे अपनी भगवान मील लिया अपनी चुचिउयो की चुस्वाई का मजा उसके फेस पे हाथ रख उसके बाल सहलाराही थी हल्की हल्की आवाज से सिस्की ले रही थी। उसकी मम्मी के दो बड़े स्तन हलके से लातक रहे थे जब वो गोदी में बैठा था और वो उनको जैसे एक पाके हुए आम की तरह चूस रहा था। एक बेटे के लिए इसे अच्छा अनुभव क्या हो सकता है, की वो बड़े होने के बाद भी अपनी मम्मी के गोदी में ऐसे बैठे उसके स्तन चुनें। सोनू आज है अनुभव को पूरा कर रहा था। और भी उत्तेजित होराहा था।
पूनम देवी :: एसएसएसएस…
सोनू::yummmmmslurrppppp.soorppp.slurpppp….slurpppppp
सोनू एक निप्पल को धीरे-धीरे पूरा मजा लेके चुनेंगे दूसरे बूब पे हाथ रखके धीरे से उसे दबा रहा था। उसकी मम्मी के दोनो हाय निपल्स अब सख्त होने लग गए थे। एक औरत के निपल्स अगर ऐसे सच होने लगे तो वो संकेत होता की उसे भी मूड आरा है। पर सोनू की मम्मी गरीब अपनी तक से अपनी भावनाओं को कंट्रोल में रखने की कोशिश कर रही थी। लेकिन कब तक पर सोनू भी अपनी खूबसूरत मम्मी के स्तन निपल्स को कामुक तारीके से प्यार कररा था। छेड रहा था। कुछ डर राइट साइड के निप्पल को चूसके अब वो दूसरे बूब पे गया।
सोनू :: पूनम दुसरे वाला बी दो ना.चुनने को प्लीज
पूनम देवी :: उन्न इसे भी धीरे से करना plss बेटा
सोनू :: क्यू जैसे मि चुस्ता हम से मजा नहीं आता
सोनू ने अब मुह खोलके लेफ्ट साइड वाली चुची के निप्पल को मुह में लेलिया। हल्के हल्के होठों से चुनने लगा और दूसरा चुची को हाथ से दबाने लगा। उसका तो जैसा मन नहीं भर रहा था मम्मी के दोनो स्तन को देख ऐसे चूसके भी। पर सबसे कामुक था उनका वो बेटे के सर पर प्यार से हाथ फर्ना जब वो ऐसा चूसरा था।
सोनू जब लेटे हुए गोदी में मम्मी के स्तन बारी बारी चूस रहा था तो चुनने की आवाज भी आराही थी और उसकी मम्मी भी जोर से सिस्कियां लेके आहें भर रही थी। चुनने की साउंड कुछ ऐसी आराही थी की जैसे हम एक गुब्बारे पर अगर हाथ रगड़े तो जो साउंड आते क्यों की मम्मी के बड़े बड़े स्तन को वो अच्छे से प्यार से मजा लेके चूस रहा था। उसके सर पर हाथ फर्टी, कभी आंखें खोलती कभी बंद करती, पूनम देवी को सौदा आज जीवन में पहली बार अपनी चुचिया चुसवाने पर इतना मजा आ रहा था ये सब हरकातेन जैसे सोनू को जीत और ज्यादा।
उसका लुंड ऐसा होगा था मानो कोई आयरन रॉड हो। उसकी मम्मी सर को सहलाराही थी। ऐसा दो किशोर मिनट तक निप्पल को चुनने के बाद सोनू ने धीरे से बोला।
सोनू :: पूनम
पूनम देवी :: उन्ं क्या है सोनू बेटा उन अब होगा ना
सोनू:: मम्मी.मम्मी वो माई क्या pls एक बार इस्को
पूनम देवी :: अब क्या बदमाश..ब्लाउज़ पहनने लेने देना
सोनू:: मम्मी कृपया एक बार इस्को.. ((निप्पल को)) मैं… धीरे से एक बार काटे कार्लुन plsss मम्मी