मेरी माँ गर्म अध्याय 6
राज :: अच्छा ओके ओके आंटी..हम जाते हैं छत पे कार्ड खेलने.. और सोनू आंटी को वो बॉक्स की सब चीजों का अनुभव देना..हाहाआआआ
अभिनव :: अच्छा चल सोनू हम ऊपर जाके फिर कार्ड खेल के सो जाएंगे..हम्म ऑल द बेस्ट… आंटी..सोनू को निराश मत करना।
सोनू :: हा हा तुम लोग जाओ आराम से छत पे..मेरी मीठी मम्मी को अब मैं अच्छे से गुदगुदी करूंगा। हाहा..
अभिनव ने आंख मारी सोनू को और राज के साथ फिर से छत पर गया और चुपके से वेंटिलेटर के पास..
सोनू की मम्मी बेड प्रति कुछ इस तरह लाती अपने अपनी जवानी का जलवे दीखा रही थी
या उसकी ब्लाउज़ मैं उठी चुचिया किसी पहाड़ की तरह लग रही थी जिस को देख कर किसी द्वि नमर्द का दिल तड़प जाए उसका लुंड बी एकबार के हमें हसीन ख़ूबसूरत हसीना की शाम मि सलामी के लिए सर उठा। सोनू तो भरपुर मर्द कैसे उनके लुंड खड़े नहीं होंगे बाल्की वो तो मनो आसे हो चुके द जैसे अभी वो तंबू को फड़ देंगे
अब अभिनव और राज दोनो फिर से वेंटिलेटर से झाँक रहे हैं। सोनू की मम्मी बेड पे लेटे थी। उनकी साड़ी का पल्लू भी काफ़ी साइड हो चुका था अब तो। हाथ और जोड़ी उनके बंधे द बेड को ही।
सोनू पांच मिनट बाद फिर से सब दरवाजे खिड़कियां बंद है की नहीं चेक करके आया रूम में। उसकी सुंदर मम्मी लेती थी बिस्तर पर और पल्लू सरकार था जिनसे उनका बड़ा सा ब्लाउज और पेट भी सोनू को अब नज़र आरा था..ये सब अब राज। अभिनव को भी वेंटिलेटर से नज़र आ ही रहा था।
सोनू फिर से आके मम्मी के साइड पे आके बैठा बिस्तर पे..
पूनम देवी :: ओए बदमाश अब क्या करना है उन्न जल्दी से करना हम्म कब तक ऐसे लेटे रहेंगे..
सोनू :: हा यस मम्मी..वो आपके तो तब खुद को आज़ाद करलिया था जब आपके पैरों को तेल लगाके मैं गुदगुदी कररा था न मम्मी..हाहा फिर से तेल लगाना पड़ेगा अब तो।
पूनम देवी :: ना ना प्लस ऐ नहीं प्लस बीटा वो तेल नहीं ना प्लस उन्न्नन्नन्न अहानन्नप्लस्स्स..
सोनू ने फिर से मम्मी के दोनो जोड़ी पके और बॉक्स से अब इलेक्ट्रॉनिक टूथ ब्रश फिर से निकला..उसके याद आया के अभिनव ने बताया था के उन लोगों के बीच की जगह में भी बहुत ज्यादा गुदगुदी महसूस होती है।
सोनू :: उन हिलना मत ओके ना प्यारी मम्मी.ये ये आपके सॉफ्ट सॉफ्ट फीट की उनग्लियों को ऐसे खोलके इनके बीच ब्रश ऐसे हाहा लगान तो।
पूनम देवी :: ऊह ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हेहेह सोनुउ हेहे plss nahii oohhhhहहहहहहहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहे हेहेहेहेहेहे
सोनू ने अपनी मम्मी के लेग्स को अच्छे से पक्का था और वो पागलों की तरह हसराही थी और फेस उठा उठा देख देख रही थी अपने पैरों की तरफ ऐसे।
पूनम देवी :: उच्छ्ह ऐ सून्नुह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह बस हे प्लस ऐ नहीं हे क्या करता है हे
pagalllllllllllllllllllllll
सोनू ने उसकी मम्मी की जोड़ी की छोटी उंगली के पास जब ब्रश लगा तो और तिलमिला उठी… इन सब में उसे मम्मी की साड़ी का पल्लू अब पूरी तरह से टोपी गया था और जाने में उनकी साड़ी जो कमर के पास बंद हुई थी वो भी नीच थोड़ी खिसक रही थी।
अब सोनू अपनी मम्मी को लगतार 7 8 मिनट तक फुट पे और जोड़ी की उन लोगों के बीच गुदगुदी करता रहा..उसकी मम्मी की ज़ोर ज़ोर की हसो निकल रही थी और साथ में उनकी साड़ी भी पूरी निकल रही थी इसे करना। राज और अभिनव की धड़कन भी तेज होराही थी क्यूं की सोनू की मम्मी की साड़ी लगभग निकल पड़ी थी बस उनकी कमर से तक कर अब बेड नीवे गिर रही थी साड़ी.. सोनू ने अब गुदगुदी बंद करो की कुछ डर… लगी सांस लेने उसकी मम्मू..
पूनम देवी :: हम्म्फ़्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हहहहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह
सोनू :: मेरी मीठी प्यारी मम्मी थोड़ी देर ब्रेक के बाद फिर से शुरू करेंगे।
पूनम देवी :: ऐ बदमाश नहीं plss आहन्नन्न अब बस ना बेटा plsss
सोनू :: उन कृपया न मम्मी रुको मैं बस आता हूं वॉशरूम जाके।
सोनू की मम्मी उस अवस्था में बिस्तर पे लेटी थी और राज.. अभिनव देखके कैसे उसकी मम्मी को गरम। होराहे द.
राज :: यार सोनू की मम्मी तो इतनी सेंसिटिव है क्या गोरा चिकना बदन है उनका..तो सोंच उनकी पुसी ((चुट)) कितनी और सेंसिटिव होगी।
अभिनव :: श अबे मुंगेरीलाल के हसीन सपने मत देख..चाची को गुदगुदी के लिए जी इतने बड़े पापड़ बेलने पाए ना..जांता है ना।
राज :: हा हा यार जनता तो हुं पर वो कल हॉट वीडियो देखा तो तबसे बस दीमाग में बैठा है यासर… और क्या तू चाहता क्या देखना वो सोनू उसकी मम्मी की चूत से भी मस्त एन्जॉय करेन।
अभिनव :: हा पर आंटी पवित्रा औरत है तू जनता है वो सहमत नहीं होगी।
राज :: तू तो मास्टर है ना आइडियाज बनाने में कुछ आइडिया निकला यार प्लीज देख आंटी का वो गोरा चित्त बदन ओह्ह देखके ही पागल होराहा मैं प्लीज यार।
अभिनव :: यार मुश्किल बहुत होगा..और वैसा भी सोनू ही भूले-बिसरे न हम तो बस देखें।
राज :: हा तो हमको वो उसकी मम्मी के पुसी बूब्स के दर्शन भी होंगे तो उससे बड़े क्या बात होगी सोने ना। यार आंटी जैसी सुंदर औरत फिर कहां मिलेगी देखने को देख कुछ जुगाड़ सोना होगा यार।
अभिनव इज प्लान का मास्टर माइंड था…पर अब क्या सोनू की मम्मी के बदन को देख…उनकी एक्सप्रेशन देख वो राज तो अभिनव को भी जैसा हौसला था।
दुनिया के बड़े बड़े युद्ध बहुत से औरत के लिए होंगे … तो क्या सोनू के दोस्त सोनू को अनाचार की दुनिया में उसे और गहरे ले जाएंगे?
सोनू पंच मिनट्स के बाद फिर से रूम में आया और उसकी सुंदर मम्मी लेती थी लगभग बिना साड़ी के क्यों की साड़ी बस एक जैसे उनकी बदन से किसी भी समय हारे नीचे फरश पे गिरने वाली थी। ऊपर से राज और अभिनव सब नज़र देख रहे हैं और रिकॉर्ड भी कर रहे हैं। राज तो अब जैसे अभिनव को अगले योजना के लिए भी प्रोत्साहित करना लग गया था। दादी माँ अपने कामरे में सबसे अंजान थी और गहरी मुझे थी।
सोनू फिर से एंटर होने के बाद फिर से अपनी प्यारी मम्मी के पास बैठा बेड पे।
सोनू :: उन मेरी प्यारी मम्मी..उन फिर से शुरू करें क्या मम्मी गेम।
पूनम देवी :: pls नहीं बेटा अब बस ना देख रात के 12 भी बज गए हैं अब बस भी ना अभी तो होगी ना तेरी विश पूरी। दादी मां भी कहीं उठ गई तो परशानी होगी।
सोनू: अरे क्या मम्मी, दादी तो कुंभकरण की तरह तो रही हैं, आप चिंता ना करो, अभी अभी देखा आया हूं मैं और हाहा मैंने उनका कमरा भी बहार से ताला करदिया है।
पूनम देवी: ओए बदमाश तू भी ना, बहार से क्यों ताला किया।
सोनू; चिंता मत करो ना, खोल दूंगा रूम कुछ डर बाद। अभी तो मुझे आपको थोड़ी देर और उन्न खेल खेलने दो ना।
पूनम देवी: हे भगवान, उन ये लड़का भी ना, अभी क्या बाकी है,
सोनू ने अब वो बॉक्स को फिर से देखा तो उसमें तो उसे सब चीज उसे इस्तेमाल कर चुकी थी, पर सिरफ एक ही बाकी थी। वो जो एक गुदगुदी कीड़ा था छोटी दिब्बी में बस वही बाकी रह गया था इस्तेमाल करने का।
पर सोनू ने फिर नोटिस किया की उसकी मम्मी की साड़ी तो अब फ़र्श पे पड़ी थी और कमर से अटकी थी पर उनका पेटीकोट अब भी उनकी गोल गहरी गहरी बड़ी नावेल से थोड़ा ऊपर ही बंद हुआ था। क्या ट्रिक को इस्तेमाल करने के लिए अपनी मम्मी की नाभि को एक्सपोज करना चाहिए होना जरूरी है सोनू याही सोनारहा था। और राज, अभिनव भी बस जैसे अब इंतजार करें द एक्साइटमेंट में सोनू कब आंटी की नाभि एक्सपोज करेगा।
भाई बहुत ही कामुक है यार बस रंदी का रंदीपन दिखने पर मजबूर करवाओ ब्रा पैंटी में लाओ जरा या छुट की मलिश करवाओ मजा आएगा ये तीनो की व्यक्तिगत रैंडी बन कर रहे या ये जब चाचा इस्तेमाल किसी शेयर के जैसे पढ़ो .. चौकीदार सब्जीवाला, धूधवाला आदि। भाई धूम मचा दो यार…
आगे का देखा आयशा होना चाहिए भाई.. तो बहुत मजा आएगा या वो शर्मये या सेक्स चैट भी गंदी गन्दी करवाओ रंदी से..
अब सोनू बस यही सोने में था की सोनू की मम्मी बोली।
पूनम देवी: अरे सोनू बेटा plss अब खोलदे न हाथ..क्या सोनचरा बाबा।
सोनू :: उन मम्मी खोलुंगा प्लीज बस अब आखिरी खेल ना प्लीज मेरी प्यारी मम्मी।
पूनम देवी :: अच्छा उन क्या है वो और कितना बदमाशी करेगा … वो क्या है हाथ में दिबया मैं।
सोनू :: उन मम्मी वो वो ये बस ये गुदगुदी कीड़ा है इसमे मम्मी वो..
पूनम देवी :: matlab….क्या वो क्या होता।
सोनू :: कुछ नहीं मम्मी बस वो बहुत छोटा सा कीड़ा होता बस जिससे बहुत गुदगुदी होती है इसलिय गुदगुदी कीड़ा बोले इस्को मम्मी।
पूनम देवी :: ओह्ह्ह्ह…हे भगवान..अरे तो क्या ना ना plss..
सोनू :: pls ना मम्मी इस्के बाद खोलूंगा वादा आपको..वादा ..plss मान जाओ ना ..आप दुनिया की सबसे अच्छी मम्मी हो ना मेरी।
पूनम देवी :: उन्न्नन बस बातें बनाना है और मुझे तंग करता है… अभी वो क्या ब्रश लगा उससे ही जान निकली और अब ये कीड़ा ना बाबा वो जोड़ी पे तो रखागा से मैं तो हे भगवान ना ना।
सोनू :: नहीं नहीं मम्मी वो कीड़ा जोड़ी पे नहीं रखूंगा।
पूनम देवी :: जोड़ी पे नहीं…..फिर…कहां।
सोनू की मम्मी कुछ इस तरह से कन्फ्यूज्ड सी हो गई थी की वो अब क्या करे
सोनू की मम्मी ने जैसे की कन्फ्यूज्ड और बालों वाले रिएक्शन के साथ पूछो सोनू को।
पूनम देवी :: क्या.. जोड़ी पे नहीं…तो क्या फिर किधर।
सोनू :: मम्मी वो ये ये गुदगुदी कीड़ा सिरफ एक जग पे डालके गुदगुदी करते हैं…
पूनम देवी ::: कक्कौनसी जगह….पहेलियां मत बुझा ना सोनू
(सोनू की मम्मी कुछ इस तरह से लेकर हुई पूछ रही थी सोनू से))
पूनम देवी: सोनू, बोल ना क्यूं पहलियां बुझा रहा हा, वर्ना चल अभी खोले मुझे देख कितनी दूर होगी हैं।
क्या यार लगता है की सोनू के यहां आप अपने पाठकों का मजा ले रहे हैं इतने छोटे अपडेट वो भी कुछ खास नहीं हुआ है अभी तक तो मामला कहीं से कहीं पता चलता इतना धीमा लेखक थाक गया है का उपयोग करें चाहिए कहानी से है….क्या यार लगता है की सोनू के जग आप अपने पाठकों का मजा ले रहे हैं इतने छोटे अपडेट वो भी कुछ खास नहीं हुआ है अभी तक तो मामला कहीं से इतना ज्यादा इतना धीमा लेखक था प्रयोग भी पूनम की तरह बाकी ले लेना चाहिए कहानी से है….
एफ
सोनू: मम्मी वो आपकी नाभी में मम्मी।
पूनम देवी: KYAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAA, पागल होगा क्या ..क्याआआ कहराहा सोनू……
सोनू की मम्मी जैसे वो चौक कर दंग रह गई, और ऐसे सर हिला दिया ना ना करते हुए।
सोनू की बात सुनके तो सोनू की मम्मी के जैसे होश ही उड़ गए। पर राज और अभिनव तो ऊपर से बसबरी से देखो द। बंधी हुए सोनू की मम्मी को देखे जैसे लाल तपका रहे द डोनो।
पूनम देवी :::: क्या बोला बोल्रहा पागल …
सोनू: प्लीज मम्मी ये लास्ट वाला ना आप ही ने बोला ना ये लास्ट वाला… प्लीज मम्मी प्लीज प्लीज।
पूनम देवी :: न बोला न मैंने सोनू ना….
सोनू :: उन मम्मी plss ना मम्मी pls ये अब आखिरी होगा और मम्मी प्लीज ना प्लीज प्लीज़ मम्मी
पूनम देवी :: ना अरे … इतना तो मैंने बदमाशी तुझे करने दी ना सोनू अब ये क्या हा… कृपया अब बस हाथ खोले मेरे plss
सोनू :: मम्मी वादा पूरा नहीं करोगे क्या आप plss..
पूनम देवी :: उन तबसे तो ना सोनू बेटा ये सब तो किया वादा पूरा ही तो की ना बाबा।
सोनू :: हा मम्मी तो ये भी करदो ना plss अब
पूनम देवी :: हे भगवान… सोनू तू ना इतना बदमाश कबसे होगा हा।
सोनू :: मम्मी plss karlene do na.. Plzzzzz
सोनू की मम्मी अब क्या करती हैं। अपने एकलाते बेटे की इतनी रिक्वेस्ट के बाद और उसे दिए हुए वादे के बाद वो बहुत मन ज्यादा डर कैसे करशक्ति थी। 15 मिनट बाद ठीक सोनू की मम्मी बोल पड़ी
पूनम देवी :: उन्ना अच्छा पर मेरे हाथ खोल पहले वो मेरी साड़ी को ठीक करना पडेगा
सोनू शायद समझ गया की उसकी मम्मी केहराही की साड़ी पूरी तरह से ही खोलनी मिलेगी..
सोनू :: अच्छा मम्मी थैंक यू….खोलूंगा..पर फिर से बंधन पाएगा ना हाथ जोड़ी वर्ना आप तो फिर से चूड़ा लोगी।
पूनम देवी :: उफ्फो अच्छा…पर plss हाथ बंधन फिर से जोड़ी नहीं अब खोले न जल्दी।
सोनू :: अच्छा मम्मी थैंक यू..खोलता हुं
सोनू अपनी मम्मी के बंधे हाथ की जोड़ी अब खोलने लगा..राज अभिनव अब सोनचरे थी क्या सोनू की मम्मी खुद साड़ी उतरेगी या सोनू खेंचेगा साड़ी !!!!
अब सोनू ने खुशी अपनी मम्मी के पहले हाथों को खोलना शुरू किया। उनके हाथ जो पुरानी साड़ी से बिस्तर से बंधे द उसे खोलना शुरू करदाला। उसके बाद उसे जोड़े के पास जेक उनके कोमल जोड़े पे बंधी साड़ी को भी धीरे से खोलना शुरू करदाला।
जैसे ही सोनू ने साड़ी खोल डाली तो उसकी मम्मी उठेगी बिस्तर से और अपनी साड़ी को जो दूर से लाटक रही थी उसे ठीक करने लगी। सोनू ने पर अब मजाक में अपनी मम्मी की साड़ी को इस तरह खींच डाला बेड पे लेटे।
पूनम देवी: आउच हैं पागल हम्म हैं बेटा छोडो ना साड़ी खराब हो जाएगी बेटा,
सोनू: हाहा आर मम्मी फ़िर मेरे विश के लिए ये तो निकलनी ही मिलेगी न मम्मी (कहते हुए सोनू ने लगभग पूरी साड़ी निकल दी और बेड पे रख डाली साड़ी))
सोनू की मम्मी का पेटीकोट भी है अफरा तफरी में शायद थोड़ा सा 2 इंच नीचे खिस्का था जिस्की वजाह से उनके गोल गहरे गहरे नाभि उनके चिकने गद्ररे पेट के बीच अब सोनू को नजर आने वाली। सोनू तो जैसी उसकी मम्मी की नाभी को देखने डांग ही रह गया। उसे इसी पेहले तो दूर से देखी थी एक बार मम्मी की नाभि और सोना था की वो पांच रुपये का सिक्का जितने बड़े हैं और कफी गहरे भी, पर इस बार तो कफी करीब से बिस्तर पे बैठा देखा था तो उसे याकेन था के उसि होराहा की नाभि उनके चिकने गोरे गदराए मक्खन जैसे पेट के बीच में जो थी, वो 10 रुपये के सिक्के जितने थे।ऊपर से देखो अभिनव और राज भी सोनू की मम्मी के चिकने गडरे पेट, उनकी कमर के साइड्स में पढ़ते हुए कातिलाना फोल्ड्स को और सबसे ज्यादा उनकी गोल गहरे कभी जो इतनी गहरी थी जिस्को देख ऐसा लग रहा था। सोनू भी अब इधर देखो जैसे सुन्न हो गया था और एक मिनट तो चुप ही था इतने में ही उसकी मम्मी ने साड़ी को पहचानना शुरू किया ही था और ऐसे वो साड़ी को अपनी कमर में बंद के ठीक कर रही थी।
सोनू: अरे मम्मी हैं फिर से साड़ी पहनने रही, ऐसे कैसे, आओ ना प्लस हैं इधर आओ
पूनम देवी; हे उन्न हैं बस ना बेटा plss हम्म मुझे डर लग रहा है, उससे बहुत गुदगुदी होगी plsss
सोनू: ना ना प्लस ये वाला लास्ट है ना आजो प्लीज आओ मम्मी मेरी अच्छी मम्मी हो आजो ना
सोनू ने अपनी मम्मी की साड़ी को खींचा तो उसकी मम्मी बेड पे ही गिर गई और अब वो फिर से साड़ी निकलाने लगा ऐसे।
सोनू; उम्म बहुत आप भी सतती हो मम्मी, कबसे सताराही हो हा,
पूनम देवी: उन तुझसे तो कम बदमाश हूं, तुझसे ज्यादा कौन होगा शैतान।
सोनू की मम्मी बस अब बिस्तर के आस पास हाथ फेर रही थी ऐसे !!
साड़ी निकलने के बाद थोड़ा सा उठने की कोषिश की उसकी मम्मी ने तो सोनू ने फिर से लिटा डाला।
सोनू: श, उन्न लेति रहो ना, फिर से किधर उठ रहे हो मेरी स्वीट स्वीट मम्मी।
सोनू ने कुछ इस तरह से फिर से उसकी मम्मी को लिटा दिया, उसकी मम्मी की नजरें और सोनू की नजरें एक दूसरे से मिल रही थी।
सोनू की मम्मी की नजरों में जैसे एक शर्म, घबड़ाहट थी तो सोनू की नजरों में बस अपनी प्यारी मम्मी के लिए प्यार भरा हुआ नजर आ रहा था। एक बेटे का अपनी मां के लिए प्यार। नज़र आ रहा था। एक बेटे का अपनी मां के लिए प्यार।
हमें उसने तो अपनी सुंदर मम्मी को बस देख देख कर निहारा था, पर आज बिस्तर पे थी मम्मी.. सोनू की मम्मी, सुंदर मम्मी।
सोनू ने अब फिर से अपनी खूबसूरत मम्मी को बिस्तर पर लिटा दिया। वो जनता था उसकी मम्मी बहुत ज्यादा उसे लटका रही थी। पर सोनू तो जितना चाहा उतना इंतजार करना को तयार था। जब आगे इतनी सुंदर मां हो तो इंतजार में भी मजा होता है।
सोनू ने अब अपनी मम्मी की आंखें में देखा और फिर उनकी कमर को देखा और कमर के पास से साड़ी को नीचा खिस्काया और भी ज्यादा जिस्से की अब सोनू की मम्मी की साड़ी शायद उनकी गोल गेहरी नाभी से तकीबन 2 इंच नीचे 2 इंच नीचे सोनू का तो जैसा गाला सुखा रहा था उसकी मम्मी के दूध जैसे गोर पेट और उनकी उतनी बड़ी गहरी नाभि देखके। किसी भी बेटे का हाल वही होगा। सोनू शरीफ बेटा था पर फिर भी वो भी तो इंसान था।
अभिनव और राज भी सांस रोके अब देख रहे थे।
राज ::: उफ यार क्या गोरा दूधिया पेट है और वो नाभि तो आंटी की जान लेवा है।
अभिनव :: श सही बोला यार। देखना तू जब सोनू उसे गुदगुदी करेगा वो गुदगुदी कीड़ा से चाची घर पूरा पर उठा लेंगे..
राज :: हा हा सच यार देख सोनू वो दिब्बे से शायद गुदगुदी कीड़ा निकला रहा।
अभिनव :: हा मैंने वो वर्म बस मेरी हाथ पे रखके ट्राई किया था तो माई खुद में बहुत पॉट होगा था इतनी गुदगुदी हुई थी … ..फिर ये कीड़ा सोनू उनकी गोल गहरे नाभी में डालेगा तो पगला जाएगी… तैयर होगा देखने को तू..
राज..अभिनव तैय्यर…….सोनू भी….
अब सोनू की मम्मी बिस्तर पे लाती थी। उनकी साड़ी को उनके ही बेटे सोनू ने नीचे खिस्का दिया था नाभि के 2 इंच तक।
पूनम देवी: उन्न्न डर लगरा जल्दी से करना
सोनू: हा मेरी प्यारी मम्मी, मैं हूं ना, बस आराम से लेकर रहो और देखो वादा बिलकुल हिलना नहीं। अच्छी आंखें बंद रखखो, आंखें बंद करो
सोनू ने अब वो दिबिया ली और उसमें से धीरे से गुदगुदी कीड़ा को निकला टूथ पिक से।
उसकी मम्मी की आंखें बंद थी पर ऊपर से देखो राज और अभिनव की आंखें को खुली थी।
सोनू ने जैसे ही हमें गुदगुदी कीड़ा को उसकी मम्मी के गोरे चिकने पेट पे कमर के साइड पे राखा वो खुद ही लुधक के उसकी मम्मी की गोल गहरी नाभी में जा गिरा ऐसा।
अब तो सोनू की मम्मी ने सच में ही जैसे घर पूरा सर पे उठालिया। आप लोग समझ सकते हैं हो की सोनू की मम्मी का बदन इतना चिकना गोरा मक्खन जैसा था जिस्की वजाह से वो बहुत ज्यादा टिक्लिश थी। और जब सोनू ने उनकी गोल दूधिया गहरे में नभी में जब ये कीड़ा दाल दिया तो क्या हाल होगा होगा उनका। सोनू और राज.. अभिनव के गरीब हिस्से में वर्तमान सा दौड़ गया जब वो कीड़ा पूनम देवी की गोल गहरी बड़ी सी नाभी में लुधक गया और मानो चुंबक जैसा चिपक गया। उनकी नहीं जितनी बाहर से बड़े गोल गहरी दिखी थी..और से नाभि की गोलाई और गहराई शायद उससे भी ज्यादा ही थी। और उनकी नाभि और और भी ज्यादा कोमल थी जिस जग पे गुदगुदी कीड़ा अब अटका था।
पूनम देवी: ae naaaaaaaaaa हैं eaareeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee plss nikaalo plss ae ee eplls nikaalo ई हैं SONUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUHHEHEHEHEHEHEHEHEHEHEHEHEHEHEHHEEHEHEHHEHEHEHEHEHEHEHEHEHEHEHEHEHEHEHEHEHEHEEE हैं
सोनू ने उसकी मम्मी के हाथ पके हुए रखे।
सोनू: हे ही हैं कुछ नहीं होगा मम्मी ही बस थोड़ी देर न हाहा हैं हिलो मत कुछ नहीं होगा, हे
पूनम देवी: नहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहे pls
Sonuhhehehehehe bahutt gudgude eheheheheheheheheheheheheheheheheheheh plshehehehehehehehehehhehehehehehehehehpsllehehehehplshehehehehehepslehehehehehehehhehehehehehehehehehhe ouchehhh couchhh ouhchhhhhhhhhhehehehheheheehheheheheheouchehhehehehehehe ouchehehhehe ouchhh cheheheh ouchhhheehehhehehehehehehehehehehhehehe
सोनू: हे आर आर गुडगुडी होराही मेरे मम्मी plss सीधी लेटो ना हा हैं कितने हिलते हो हाहा
सोनू की मम्मी की इतनी ज़ोर से अब हसी की आवाज़ आराही थी कि शायद उसके घर को पार करके पढ़ो, मौसी तक भी जराही थी। पड़ोस में एक आंटी रहती थी बूढ़ी जिन्का घर सोनू के घर से एकदम चिपक कराह था शायद उन तक भी सोनू की मम्मी की इतनी जोर वाली हसी की आवाज पहचान रही थी।
पूनम देवी: ouchheheheheh कृपया pols Nikaalo सोनू betahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh hhehehehe plss plssssssssssssssssssssshehehehe heheh हैं nahee plss ouchhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh
पर सोनू तो भूलभुलैया ले रहा था और उसके दोस्त अभिनव और राज भी देखे बहुत ज्यादा बढतेजित होरे थे। राज तो जैसे अब तक वेंटीलेटर से ही देख देख वहीं पर दीवार से अपने लुंड को रागद के जैसे हस्तमैथुन करने लग गया था।
सोनू के पढ़ो मील एक आंटी रहती थी पढ़ो वाली आंटी अकेली रहती थी 60 साल उमर की वो अब पूनम की मम्मी की आवाजें सुनके उठ रही थी और सोने रही थी ये क्या हैं आवाज जोर की
सोनू ऐसे अपनी मम्मी का हाथ पकड़ा था और वो गुदगुदी कीड़ा तो जैसे उनकी गोल गेहरी 10 रुपये का सिक्का जितनी बड़ी नभी में जैसा चिपक सा ही गया था जिसे उसी मम्मी को बहुत ज्यादा गुडगुडी हो रही थी। सोनू की मम्मी के हाथ तो पकडे थे सोनू ने पर वो लोट होके अपने जोड़ी पटक कर ज़ोर से है राही थी के अब तो राज अभिनव को भी जैसे डर लगने लगा की कहीं सच में कोई पदोसी न सुन लें।
पूनम देवी: उच्छी
PLZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZHEHAHHAHAHAHAHAHAHAHAHAHAHHAHAHAHAHAHAHAHAHAHAHHAHAHAHAHAHAHAHAHHAHAHAHAHAHAHAHAHHAHAHAHAHAHAHAHHAHAHAHAHA SONUU HEHEHEHEHEHEHEHEHEHEH बास बास बास PLZ बास बास बास बास बीए एस बी ए एस बी HEHEHEHEHEHEHEHEHEHEHEEHEHEHEHEHEHEHEHEHEHHEHEHEHEH
हेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहे हेहेहे हेहेहे हेहेहे हेहेहे हेहेहे हेहेहे
कुछ इस तरह से सोनू की मम्मी चीक चीक कर है राही थी और अब पाडोस की चाची सच में अपने घर से निकली और सोनू के घर के पास आरा ही थी दस्तक देकर पूछने की आखिरी हुआ क्या है।
सोनू अब उसकी मम्मी के हाथ के साथ अपने जोड़ी उनके जोड़े पे भी डाला जिससे की वो जोड़ी भी ना हिला लिए ज्यादा।
सोनू की मम्मी तो गुडगुडी के मारे इतनी ज्यादा पागल होराही थी, ऊपर से राज, अभिनव देखरे थे, राज तो हस्तमैथुन कररा था जोर से अपने लिंग को वही दीवार पे रागद के देखते देखते, कभी वली के लिए करीब पांच गायी
सोनू की मम्मी का हाल ऐसा था की है के गुडगुडी के मारे वो बहुत होगा।
सोनू की मम्मी अब भी है के चिलराही थी, उनकी तो है इतना बुरा हाल था के आंखों से अंश तक निकल गए में है, उधार छत के पास वाली वेंटिलेटर से देख रहे द राज और अभिनव का भी बुरा हाल था, अभिनव तो ये दृश्य और सोनू के मम्मी की आवाज़ सुनके अपने लुंड को सेहला रहा था और उसका लुंड अब बहुत ज्यादा ही सच होगा था। पर परेशानी की बात बस ये थी की पढ़ो की मौसी अब गेट के पास अगली थी और घंटी की अंगूठी करने लगी।
TRNGGG TRNGGGGGGGGGGGGGG
सोनू घबड़ा गया के इस समय पे कौन आया होगा। कहीं डैडी तो नहीं आएंगे सोनचा उसने। पर वो तो गान में होंगे अभी।
सोनू: श मम्मी आपको मेरी कसम उठना नहीं और ये निकलना नहीं गुदगुदी कीड़ा मेरे आने तक मेरी कसम आपको, पर उसकी मम्मी की आवाजें रुकने के लिए सोनू ने अपनी मम्मी के मुंह को बंद कर दिया है क्योंकि पास में एक है सोनू ने ऐसे अपनी रूमाल निकला के सोनू की मम्मी पे बंद दी,
अब तो उसकी मम्मी की हलत और खराब होरे थी, एक तो आवाज नहीं करसकती थी और ऊपर से सोनू ने वो कीड़ा भी नहीं निकला था। बेड पे लोट पॉट हो रहे थी वो और सोनू झट से उठा और दूर खोला तो पैडोस की मौसी थी।
चाची; अरे सोनू बेटा क्या बात है वो तुम्हारे घर से वो आवाज़ ज़ोर की कैसे, तुम्हारी मम्मी की आवाज़ जैसी थी।
सोनू: अरे हा वो आंटी वो मम्मी तो कॉकरोच से इतना डरते ना, वो कॉकरोच आगया था बेड पे तो इसलिये ज़ोर से चिल्लरही थी आंटी।
आंटी: अच्छा पर इतनी देर तक, सब ठीक तो है ना बेटा।
सोनू: जी जी आंटी वो कॉकरोच था बहुत डर तक इसलिये वो मम्मी, पर मैंने अब कॉकरोच मार डाला इसलिये देखो साउंड नहीं अरही हैं। वैसे आपको हैप्पी दिवाली आंटी।
आंटी: ओह अच्छा अच्छा बेटा, तुमको भी हैप्पी दिवाली बेटा, अच्छा बेटा ख्याल रखो फिर चलती हूं मैं।
सोनू : गुड नाईट आंटी।
उधार सोनू की मम्मी के बदन को देख कर अपने लुंड हिला रहे थे राज उनके क्लीवेज, खूबसूरत चेहरा, गोरी चिकनी कमर, गदरया पेट और गहरी नाभि, उनकी जागते सब सुनके अब हमें लुंड पे अपने जैसे कबू नहीं।
राज का लुंड मानो ऐसा होगा था जैसा कि उसका हिस्सा का खून पूरा जाम गया था उसके विशाल लुंड में ही। अभिनव का भी यही हाल था पर वो दिख नहीं रहा था ऊपर..और सोनू..सोनू के दिल का हाल क्या था..उसने तो इतने करीब से उसे सुंदर मम्मी को आज देखा था… मस्ती की थी…उसका क्या हाल था! उसका लुंड बी पंत फड़ने को बेटाब था या एकबार तो उसे नजर बचा कर अपने लुंड को बहार बी निकला
सोनू ने चाची के जाने के बाद दूर लगा और फिर से कमरे की ओर आया। ऊपर से राज.. अभिनव पालके बिना झपकाये देखे जराहे द सोनू की मम्मी को। सोनू ने रूम में आते ही फिर से मम्मी के मुह से रूमाल निकला तो फिर से उसकी आवाज चालू होगा।
पूनम देवी :: हे ऐ प्ल्स हे निकेल दे हे अब्टो प्ल्स हे। बरदास्त नहीं होता हेहे कृपया हेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहे
सोनू ने चाची के जाने के बाद दूर लगा और फिर से कमरे की ओर आया। ऊपर से राज.. अभिनव पालके बिना झपकाये देखे जराहे द सोनू की मम्मी को। सोनू ने रूम में आते ही फिर से मम्मी के मुह से रूमाल निकला तो फिर से उसकी आवाज चालू होगा।
पूनम देवी :: हे ऐ प्ल्स हे निकेल दे हे अब्टो प्ल्स हे। बरदास्त नहीं होता हेहे कृपया हेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहे
सोनू की मम्मी का गडराय गोरा पेट अब तो जैसा कंपकंपी कररा था.. है और बुरा हाल था..पर वो तो सोनू को वादा करके ही ये सब करवाने को मजबूर भी थी। सोनू की आंखें उसकी मम्मी के कमर पेट और गहरी नाभि पे थी..अब उसका भी लिंग न चाहते हुए भी पंत के अंदर तंग होराहा था। उसे उसी मम्मी को कमर की दोनो साइड्स पकाड़ा तकी ना हिल खातिर वो..उसका मन तो कराह था की कद वो गुदगुदी कीड़ा की जग वो खुद होता है। उसकी मम्मी के हिस्से को चुनने का सौभाग्य ही मिलना बड़ी बात थी..और वो कीड़ा तो उसकी मम्मी की नावेल में मस्ती कररा था। उसकी मम्मी का ब्लाउज का एक हुक भी है मीठी से युद्ध में शायद खुल गया था और गोरा गोरा क्लीवेज नजर आरा था सोनू को…उफ्फ वो भी क्लीवेज देखरा था कभी कभी कमर देखा था…उसका टाइट होके ऐसा लगा था की लिंग पंत को फट के ही बहार ना आजे। दुनिया का कौनसा बेटा होगा जो अपनी खूबसूरत मां को ऐसी स्थिति में देख अपने लुंड को सच होने से रोक पाएगा।
आजतक किसने रोका है तूफान को
अब रात के तकरीबन 1 बज रहे थे। है के बहल होगा थी सोनू की मम्मी। अब सोनू भी बहुत टाइट होगा था मम्मी को देख उसके सुंदर और मस्ती गुदगुदी करके। अब वो टूथ पिक लिया और धीरे से निकलाने लगा टिकल कीड़ा को मम्मी की नाभि से।
सोनू :: उन रुको ना अच्छा बाबा निकलाता हूं सीधी लेटो न मम्मी तो निकल पौंगा।
पूनम देवी :: उन्न हेहे आह्ह श ही बहुत ज्यादा गुडगुडी होतीईईई सांस फूल रही..जल्दी निकल हिहेहेहेहेहेहेहे प्लज़्ज़।
सोनू: हां हां निकला तो रहा न मम्मी।
सोनू ने टूथ पिक डाली और धीरे से मम्मी की नाभि से वो कीड़ा निकला तो जैसे जान में जान आई उसकी मम्मी के।
पूनम देवी :: ufffffff उह श्ह्ह्ह ओह्ह्ह एचएमपीपीएचह्ह्ह्ह्ह्ह उहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हहहहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हहहहहह्ह्ह्ह्ह
(वो हम्फ के लम्बे सांस लेने लगे))
फिर से दिबिया में रख डाला सोनू ने वर्म को और बॉक्स बैंड करदाला।
सोनू :: मम्मी आपके लिए पानी लाती हूं रुको।
पूनम देवी :: उन्ं हा हम्म्म बेटा
ऊपर से देखते राज तो हस्तमैथुन करते हुए अब अपने लिंग पर कबू नहीं करसका था और झड़ कर शांत होगा था। अभिनव ने रिकॉर्डिंग वाला कैमरा अब बंद करदिया। सोनू की मम्मी बिस्तर से उठके बैठी और बाल ठीक करके जूड़ा बंधने लगी बालों का। उनकी साड़ी भी जो फ़र्श पर पड़ी थी उसे उठा और जाने लग गई। सोनू धार पानी लाने गया पर उसकी मम्मी का बदन ही घूम रहा था दिमाग में और उसका लुंड भी जैसा बर्फ की सील जैसा तख्त होगा था। सोनू कभी हस्तमैथुन भी नहीं करता था..पर उसे अब ऐसा लगारा था के अब अगर वो उसके लुंड को हाथ लगाएगा तो वो मोटा ही जाएगा। ऊपर अभिनव और राज टेरेस पे गए और फिर से सिगरेट की एक काश लगाने लगे। सिगरेट के धुएं में भी उनको सोनू की मम्मी का बदन ही दिख रहा था।
अब रात के तकरीबन 1 बज रहे थे। है के बहल होगा थी सोनू की मम्मी। अब सोनू भी बहुत टाइट होगा था मम्मी को देख उसके सुंदर और मस्ती गुदगुदी करके। अब वो टूथ पिक लिया और धीरे से निकलाने लगा टिकल कीड़ा को मम्मी की नाभि से।
सोनू :: उन रुको ना अच्छा बाबा निकलाता हूं सीधी लेटो न मम्मी तो निकल पौंगा।
पूनम देवी :: उन्न हेहे आह्ह श ही बहुत ज्यादा गुडगुडी होतीईईई सांस फूल रही..जल्दी निकल हिहेहेहेहेहेहेहे प्लज़्ज़।
सोनू: हां हां निकला तो रहा न मम्मी।
सोनू ने टूथ पिक डाली और धीरे से मम्मी की नाभि से वो कीड़ा निकला तो जैसे जान में जान आई उसकी मम्मी के।
पूनम देवी :: ufffffff उह श्ह्ह्ह ओह्ह्ह एचएमपीपीएचह्ह्ह्ह्ह्ह उहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हहहहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हहहहहह्ह्ह्ह्ह
(वो हम्फ के लम्बे सांस लेने लगे))
फिर से दिबिया में रख डाला सोनू ने वर्म को और बॉक्स बैंड करदाला।
सोनू :: मम्मी आपके लिए पानी लाती हूं रुको।
पूनम देवी :: उन्ं हा हम्म्म बेटा
ऊपर से देखते राज तो हस्तमैथुन करते हुए अब अपने लिंग पर कबू नहीं करसका था और झड़ कर शांत होगा था। अभिनव ने रिकॉर्डिंग वाला कैमरा अब बंद करदिया। सोनू की मम्मी बिस्तर से उठके बैठी और बाल ठीक करके जूड़ा बंधने लगी बालों का। उनकी साड़ी भी जो फ़र्श पर पड़ी थी उसे उठा और जाने लग गई। सोनू धार पानी लाने गया पर उसकी मम्मी का बदन ही घूम रहा था दिमाग में और उसका लुंड भी जैसा बर्फ की सील जैसा तख्त होगा था। सोनू कभी हस्तमैथुन भी नहीं करता था..पर उसे अब ऐसा लगारा था के अब अगर वो उसके लुंड को हाथ लगाएगा तो वो मोटा ही जाएगा। ऊपर अभिनव और राज टेरेस पे गए और फिर से सिगरेट की एक काश लगाने लगे। सिगरेट के धुएं में भी उनको सोनू की मम्मी का बदन ही दिख रहा था।
सोनू पानी लेके रूम में पहुंचा तो उसकी मम्मी ऐसी साड़ी ठीक करही थी।
सोनू फिर से रुक के घोर देखने लगा..उसकी मम्मी के क्लीवेज..कमर..बदन को जब वो साड़ी फिर से वहां रही थी। पानी तो वो मम्मी के लिए लाया था..पर प्यासा तो खुद सोनू था।
सोनू फिर होश में आया और अपनी मम्मी को लाके पानी दिया। ऐसा बन रहा था सोनू जैसे की कुछ डर पहले जो मस्ती की थी उसे कभी हुआ ही नहीं।
पूनम देवी :: हा लाओ बेटा पानी..
सोनू का दिल तो एक बार किया की वो अपनी मम्मी को बोल दे की मम्मी है पानी से तुम्हारे जैसी खूबसूरत औरत की प्यास नहीं भुजेगी तुम्हारी प्यार भुजने के लिए मेरे पास जो ही हम से तुम्हारी जन्मं भुज की दुनिया में खो गया उससे एसा लगने लगा की उसकी मम्मी ने उसे मुसल लुंड को जिप खोल कर बहार निकला ही या बड़े प्यार से उसके लुंड को सहलाती
बोल रही थी
पूनम देवी सच कह रहा ही बेटा तू बरसो से प्यासी तेरी मम्मी की प्यास तुम्हारा ये ही भुजा सकता है लेकिन ये तो एक सपना था
पूनम देवी गत गत पानी पीने लगी.. तब सोनू को होश आया सोनू की नजरें अपनी मम्मी पे ही थी अब भी
पूनम :: उफ्फ बदमाश… कितना टंग करदाला ओह्ह्ह …. जान निकल गई थी …. बहत्तत बदमाश होगा है … अब वो तेरे दोस्त गए के नई बेटा
सोनू :: हा क्या मम्मी वो विश करने के लिए आपके ही वादे की थी ना..हा वो लोग जाएंगे मम्मी मैं जाके ऊपर देखके आता हूं वो खेल रहे होंगे कार्ड।
पूनम देवी :: अच्छा पर जल्दी आके सो जाना तेरे रूम में बहुत देर हो गई है देख 1 बज गए हैं।
सोनू :: जी जी मम्मी जल्दी ही सोजूंगा…शुभ रात्रि नम्मी।
1
सोनू अब उसकी मम्मी को देखते देखते ही अब छत पर जाने लगा..वाहन पे उसके दोस्त सिगरेट की काश मार रहे थे और बातें में उल्झे थे।
सोनू :: क्या बातें चल रही दोस्त
अभिनव:: ओह सोनू आ गया तू..आजा आजा ऐसा ही यार कुछ नहीं..तेरे तो भूलभुलैया ही भूलभुलैया आज हो गई असली दिवाली हुई तेरी।
सोनू :: ही हैं तुम लोगों ने भी मदद करने के लिए कि ना यार..तुम लोगों का भी क्रेडिट है इसमे
राज :: उम्म हम लोगन को बस क्रेडिट ही मिलेगा या कुछ और भी..
सोनू :: अबे.. क्या चाहिए तुझे
अभिनव :: हाहा पूच मत..ये राज की हलत खराब हो गई थी तू जब नीचे भूलभुलैया से मौसी को गुदगुदी कर रहा था तब..
राज :: श हैं चुप यार तू भी ना गरीब मोहल्ले को बताएगा क्या।
सोनू :: ओह्ह ….ओए तेरी …मेरी मम्मी पे बुरी नजर मत डालना.. वो हाथ भी नई लगा देगा वैसा भी जनता है ना तू…
राज: हा आर माई तो वो बस आंटी की सुंदरता देख के बस बहक गया था यार..अब क्या करुं। मेरा हाथ मेरे कबू में कहां रहता है… और क्या पता तुम लोग भी चुप चुप के करते होंगे निकल कर अपना हिलाते होंगे..ये सोनू भी छुपा रुस्तम निकला मस्त भूलभुलैया ले लिए आज…
सोनू :: हैं हट..सब तेरी तरह होते क्या…हा वैसा आज तो मजा ही आया बहुत…जितना सोना था उससे दस गुना मजार था वो।
राज :: हा हा अच्छा मजा करलिया..और अभिनव को धन्यवाद बोल.. इतना बड़ा उसे ही बनाया था न और वो टिकल बॉक्स भी तो वही लाया..वो गोल्ड चैन भी लाया..
सोनू :: हा यार अभिनव..धन्यवाद थैंक्स थैंक्स यार…तुम लोग सच्चे दोस्त हो मेरे…
राज : अरे वाह सिरफ थैंक्स से काम चला रहा तू तो।
सोनू:: अरे थैंक्स हाय बोल सकता हूं ना वैसा भी अभिनव को क्या काम है यार..सब कुछ तो है ना।
अभिनव :: इतने खूबसूरत तो हैं तो तेरे पास हैं…उसका कोई मुकाबला नहीं है।
राज :: सच में..भाग्यशाली है बहुत अपना सोनू।
सोनू :: हा यार वो तो है… मेरी मम्मी एकदम चांद का टुकड़ा है.. पर यार अभी तो मैंने गुदगुदी का मजा ले लिया अब तो जिंदगी आगे पूरी रूखी सूखी ही घटना की कैद में ही गुजरी है।
अभिनव :: हैं ऐसा क्यों सोनाटा है यार..तू तू चाह तो आगे भी हो सकता है।
सोनू :: अरे नहीं यार..ये ये काश होगा बहुत मजा आया पर कुछ सोना जोखिम भरा है बहुत ज्यादा
अभिनव :: अच्छा इस बारे में कल बात करेंगे देर से होगा बहुत..चल हमलोग निकलते हैं वर्ना ये राज के माता-पिता परशान होंगे।
सोनू :: ओके ओके ठीक है यार गुड नाइट..चलो कल मिलेंगे फिर।
सोनू की मम्मी का लाइव शो अब ख़तम हो चुका था सोनू के दोस्त अब चले अपने अपने घर..सोनू की मम्मी बहुत जायदा ठक जाने के कर अपने कमरे में गहरी मुझे सो रही थी..सोनू बिस्तर पर जाने कमरे में आए पर वो उसकी मम्मी का खूबसूरत चेहरा और उनका वो गोरा चिकना एकदम चांद जैसा गढ़राय बदन उसकी आंखों के आगे। आ रहा था..मम्मी की वो ज़ोर की हसी…उसका लुंड पंत के अंदर बहुत टाइट होगा था…ऐसे कैसे वो तो मिलेगा वो …मुथ भी नहीं करता था वो कभी पर आज बहुत बेचानी हो रही थी उसे..एक घंटे के बाद अब वो बीच होके अपना लैपटॉप खोला और उसकी मम्मी के तस्वीरें देखने लगा
और वो उनके बदन को कल्पना कर रहा था… उसे एसा लगाने लगा था कि उसके सामने ही बैठी ही या उसे अपनी नजर से आंखो से देख रही ही शेयर कर रही ही सोनू ना चाहते हुए अपने हाथ को तस्वीर ही ली गया या अपनी मम्मी के मुलायम गालो चिकनी गोरी बहे तो सहलेते ये महसूस करने लगा की वो अपनी मम्मी की तस्वीर को नहीं सक सह अपनी मम्मी के मुलायम गालो को सेहला रहा या उस की मम्मी से हमें सबसे पहले थी
का कर रहा ही तू निचे देख तेरा हाथी कैसे खड़ा ही या अगर तूने इसे आजाद नहीं किया तो कहीं ये तूफ़ान ना मचा दे या
ना चाहते हुए भी उसे अब अपने पंत से अब अपना लुंड को निकला
और लैपटॉप पे उसे मम्मी की तस्वीर थी जो ऊपर देख सकते हैं आप लोग..पर नीचे …नीचे सोनू का लुंड बहार पंत के निकल लिया था और फड़फड़ा रहा था..
उधार अपने घर पे जाकर अभिनव ने जो सोनू और उसकी मम्मी का वीडियो रिकॉर्ड किया था वही देखने लगा। कितना लकी है सोनू जो इतनी सुंदर मां उसे मिली है..ये सोना रहा था जितनी भी डर वो वीडियो देखा। इज फेटिश को पूरा करने को ही सोनू को तक्रीबन10 माही लग गए थे। और उसके और राज के नसीब में बस दूर से देखना ही लिखा था। फिर भी अभिनव को ज्यादा धिक्कार नहीं था सोनू से। क्यूं की वो उसका जिगरी दोस्त था और ऊपर से कोई भी लड़का अपनी ही मा को ऐसे दोस्तों को देखने मा मौका भी देना बड़ी बात ही थी। क्या खूबसूरत थी सोनू की मम्मी उफ्फ।
उधार सोनू भी अपनी मम्मी की तस्वीर देख देख तो जैसे उनके हर एक अंग का ही अंकलन करने लगा। और साथ साथ आज जो उसे अपनी मम्मी के साथ मस्ती की थी वो भी उसके दिमाग दिल में बस गया था। वो बड़ी बड़ी आंखें जैसे की मछली की आंखें हो। वो गाल जो थोड़े से चब्बी द और गुलाबी भी। जब जल्दबाजी थी उसकी मम्मी तो गाल दोनो और गोल-मटोल दिखते थे क्यों की पूरे गाल जब एक जग पे आ जाते थे। उनके होंठ जैसे के दो गुलाब के पत्ते थे। पिंक कलर के थोड़े से होंठ और उनकी जीभ भी और एकदम सुंदर सी लंबी और अंत पे आके नोकीली थी। एक बांध चमकते दांत जिसे देख ऐसा लगे की वो कोई भी टूथपेस्ट की एड में आ शक्ति थी। चिन के पास एक बहुत ही छोटा सा दो जैसा पढ़ाता था उसमें मम्मी के जिनसे उनके चेहरे की सुंदरता को और चार चांद लग जाते थे। चेहरे के नीचे ही थी सुरही जैसे एकदम कोमल सी गार्डन ((गर्दन)) जो सच में सुरही के आकार में थी और बहुत ही गोरी चिकनी जिसपे उनका मंगलसूत्र होता था। गार्डन से थोड़ा सा नीचे आओ तो ओह उनका बड़ा सा ब्लाउज के ऊपर क्लीवेज जिसको देखने का सौभाग्य भी आज सोनू को प्रप्त हुआ था। क्लीवेज के नीचे ओह…उसके नीच ब्लाउज के अंदर से बेस तक सोनू इमेजिन हाय कर सकता था की मम्मी के संत्रो का साइज शायद काम से काम 36 हाय होगा। उसे साइज का पता तो नहीं था पर मम्मी के बड़े ब्लाउज को देखता है था की कम से कम साइज तो 36 होगा ही..उससे कम होने का सवाल ही नहीं पाता होता.. मम्मी के छू के बारे में सोनेते ही जैसे सोनू के लुंड में और ज्यादा जैसा झंझनहाट सी होने लगी..ओह वो शांते कितने हूं गोर सॉफ्ट और बड़े होंगे। उसे देखा था आज जब उसकी मम्मी बेड पे में है के लोट पॉट हो रही जब उनका ब्लाउज ज़ोर से हिल रहा था तो अंदर उनके चुचे भू ज़रूर हिल ही रहे थे। और चुचिया पे मम्मी के निपल्स कैसे होंगे। ओह डार्क होंगे तो उनके गोर बदन पे और ज्यादा कामुक लगेंगे। निप्पल का आकार क्या होगा, लंबाई क्या होगी ये सब सोने के ही और ज्यादा जोश में आ गया था सोनू का लुंड। ब्लाउज के नीचे उनका गडरया पेट और कमर थी जिसके साथ आज सोनू ने काफी मस्ती करके गुदगुदी भी की थी। उनके कमर के साइड के फोल्ड्स भी कफी पसंद थे सोनू को जो अक्सर घर पे भी वो भूत रहता था। फोल्ड्स ऐसे लगते हैं जैसे समुंदर में कोई लहर उठ रही हो। और उनके गहरे गोल नाभि के तो क्या कहने। उसके और आज जब सोनू ने वर्म डालके गुदगुदी किया ती वो पगला गई थी उसी से ही सोनू को अंदाज होगा था की उनकी नाभि कितनी ज्यादा संवेदनशील और गहरी थी जिस्म हमें कीड ने अपना घर बना के गुडगुडी। उन्हीं पेट के नीचे तो पेटीकोट था और उसके अंदर का दृश्य क्या था बस उसकी तो कल्पना ही कर सकता था। उनके जांघें भी दूध जैसे गोर सॉफ्ट हाय होंगे पक्का।
हा आप सब सोंच ही रहेंगे की सोनू की मम्मी की पुसी और गांड ((चुट और गांद)) का क्या। जिस हिसाब से सोनू की मम्मी थी सोनू सोच रहा था की उनकी योनि (चुट) भी एकदम साफ और कोमल होगी। कभी देखा तो नहीं था पर बस कल्पना ही कर रहा था और अब उसका लुंड जैसा क्लाइमेक्स पे आ रहा था सोच सोच के। और चुत के पीछे उनकी गांद ओह ….. वो तो जब साड़ी में ही जब चलती तो सोनू की मम्मी के चुतड मटक मटक के गोल गोल फुटबॉल जैसी दिखती थी। साड़ी और कपड़ों के अंदर तो वो भी गोरी और सॉफ्ट होगी।
सोनू ने आखिर में फिर अपनी मम्मी की मातकती हुई गांद को देखते हुए जब अपने लुंड पे हल्के से हाथ रखा तो उसके लुंड ने उसके कंट्रोल में रहने का साथ चोर दिया। आखिरी एक बेटा अगर अपनी मम्मी की सुंदर ऐसी मातकती हुई गान देखेंगे तो फिर कंट्रोल कर पाना नामुमकिन के बराबर ही है। अपनी मुठी मील भर कर हिलाना शूरू कर दिया। उसके दिमाग मील अपनी मम्मी की तस्वीर पूरी तरह से बस छुकी थी या सोनू अपनी मम्मी के बारे में ही सोच सोच कर अपना लुंड तेज से हिलाने लगा
या कुछ ही मिनटो मील सोनू के लुंड ने वीरिए से भारी पिचकारिया चोरनी शुरू कर दी।
आज जीवन में पहली बार सोनू के लुंड ने इतना कीमती माल बहार निकला था। सयाद सोनू को बी नहीं पता था की उसके लुंड मील इतना माल भरा हुआ ही या आज उसके लुंड ने इतना माल बरसाया था वो किसी या के लिए अपनी खूबसूरत मम्मी को सोच कर के ही बहया था।
आओ आज अपने लुंड को अपने हाथ से शांत नहीं करता तो आज रात खुद को तो शायद उसके लिए इतना पाना मुश्किल था। और शायद आगे का सफर भी उसके लिए मुश्किल ही है अगर घर पर इतनी खूबसूरत मां हो तो।
जब सोनू का अपनी मम्मी के प्रति ये हाल था तो उसके बिंदु अभिनव या राज जिन के लिए सोनू की मम्मी उनकी मां नहीं बाल्की एक सुंदर या हसीन औरत थी कैसे उन्हो ने अपने ऊपर नियंत्रण किया होगा उनो ने सोनू की मम्मी पून देवी अपने ख्यालो मील ला कर कितनी बुरी तरह से छोटा होगा
अपने लुंड प्रति ऊंचा होगा कितना ही अपना किमिति रस पूनम देवी के छेद के और बरसाया होगा
कुछ दिन ऐसे ही बीट गए क्यों की सोनू को अपने मम्मी डैडी के साथ कुछ दिन गणव जाना पद गया। उसके डैडी ने वहन की जमीन बेची थी तो कुछ दिनों के लिए वहा जाके वो लोग भी चाचा जी के घर रहके आए एक हफ्ते। इधर उसि टाइम पे अभिनव और राज डोनों रोज़ ही वो सोनू और उसकी मम्मी का वीडियो देख देख शायद कुछ अलग ही प्लान बना रहे थे।
अभिनव: हम्म यार ये वीडियो तो अबतक मैं 20 बार देख चुका पर मन नहीं भरता ना।
राज: सच में यार, अच्छा किया वीडियो तो निकला लिया ट्यून, बड़ा मजार है, अश्लील वीडियो में भी इतना मजा नहीं
अभिनव; अश्लील वीडियो में ऐसी सुंदर देसी मम्मी कहां मिलेगी हाहा
राज: हाहा, सच्ची यार ये सोनू भी पता नहीं कब आएगा गान से
अभिनव: अच्छा सुन, मैं सोच रहा हूं के अगर सोनू अगला कदम बढ़ाए अपनी मम्मी पर तो कैसा रहेगा
राज: मस्त रहेगा, पर नहीं होगा यार, उसकी मम्मी कुछ भी नहीं करेंगे। और सोनू भी शायद कोशिश नहीं करेगा कुछ।
अभिनव: हा पर हम दून प्रोत्साहन तो कर सकते हैं न कोशिश करने को, इतनी सुंदर हैं उसकी मम्मी अगर सोनू उनको कोशिश न करें तो फिर यार उसका भी जीवन बर्बाद होगा।
राज: हा पर जोखिम भरा है, मुश्किल भी बहुत है यार, इतना करने में ही हमको दास महान लग गए जनता है ना, अब और क्या एक साल कोशिश करेगा वो।
अभिनव: हम्म बात तो सही है पर काश कुछ जुगाड़ होगा और हमको उनका रोमांस देखने को मिलेगा तो मजा ही आएगा।
राज: हाहा बस तू अब ख्वाबों में ही रहना, ऐसा कुछ नहीं होने वाला।
ख़्वाबों की दुनिया में ऐसे ही राज और अभिनव, पर अब वक़्त और ज़िंदगी क्या मोड लेने वाली थी कौन जनता है!!!
सोनू उधार गान में भी बस अपनी मम्मी को ही निहार रहा था। पर udhar चाची और रिश्तेदार तो हमें संभल के भी रहना था।
सोनू ने कुछ दून पेहले ही एक अखिल भारतीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के लिए अप्लाई किया था। उसकी सामान्य ज्ञान बहुत अच्छी थी और काफ़ी बुद्धिमान भी था वो। अभिनव के कोई दूर के रिलेटिव यूएस कॉम्पिटिशन के प्रोड्यूसर द. उन्ही से अभिनव को पता चला था इस्के बेयर मी। पर अभिनव ने सोनू को क्यों लागू करें काफ़ी ज्ञान थी। सोनू स्कूल और कॉलेज में भी बहुत सी ट्राफियां जीत चुका था। सोनू को अभिनव ने सूचित करके बताया गान से आते ही की वो शॉर्ट लिस्ट हुआ है प्रतियोगिता के लिए और उसे मुंबई जाना होगा प्रतियोगिता के लिए।
अनुभव :: हैं यार वो तू हम प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के लिए शॉर्ट लिस्ट हो गया ..मुंबई जाना होगा..पूरे भारत से आ रहे हैं और बड़ा प्रतियोगिता है.. पुरस्कार राशि जनता है कितना है विजेता के लिए 50 लाख और धावक के लिए 30 लाख यूपी।
सोनू :: ओह वाह यार.. इतना ज्यादा इनामी राशि… लखपति होने का मौका।
अभिनव :: हा यार वो प्रतियोगिता का फाइनल टीवी चैनल पे भी आएगा शायद..पता नहीं पर तू निकलाने की तयारी करले जल्दी।
सोनू :: आज ही गणव से आया हूं.. अच्छा मैं बोल्डुंगा घर में मम्मी डैडी को ऐसा निकलना है बोलके।
अभिनव :: हा हा बोल देना तू आज ही और सब पैकिंग भी कर लेना पार्सन ही निकलना होगा तुझको।
सोनू :: पर यार वहां पे जाके मैं अकेला..
अभिनव :: अच्छा तू टेंशन मैट ले.. मैं मेरे घर पर बोल के तेरे साथ चलूंगा ठीक है..मुंबई भी घूम लेंगे हम दो इसी बहाने से।
सोनू :: ओह धन्यवाद yaar.tu rahega to kafi Himmat rahegee mujhe.
अभिनव :: अरे थैंक्स कैसा दोस्ती में..चल अब तू जाकर घर पर बोल दे और तय्यारी करले।
सोनू जा के घर पर बोल दिया पर उसके डैड और मम्मी चिंता कर रहे थे की अकेला जाएगा और वहां कहां रहेगा।
चमन लाल शर्मा :: हैं बेटा पर तुम पहले गए नहीं न अकेले कैसे जाओगे। रहने का क्या इंतजार है वहां पे।
सोनू :: डैडी वो अभिनव भी आएगा मेरे साथ और फिर वो बस एक हफ्ते में लौटूंगा ना। प्राइज मनी भी काफी अच्छी है डैडी। वैसे भी तो मेरी छुट्टियाँ ही हैं ना अभी।
पूनम देवी :: अच्छा बेटा ठीक है पर संभल के जाना और मैं तेरी पैकिंग कर देता हूं.. सुनिए एपी कुछ पैसे भी दे दिजिये वहां खारच के लिए वर्ना परशानी होगी।
चमन लाल शर्मा :: हा भाग्यवान दे दूंगा तुम्हारे लाडले को. अच्छा बेटा पैकिंग करो तुम फिर।
सोनू की मम्मी ने बैग में सब पैकिंग करदाली। एक दिन बाद अभिनव सोनू निकालने को तैयार होंगे। ट्रेन की टिकट भी अभिनव ने ही बुक करवायी। और वहां रहने के लिए उसके एक रिश्तेदार का कमरा खाली था तो वही पे रहने का भी इंतजारम कर डाला सोनू ने। अब जाने से पहले सोनू ने अपने पिताजी और मम्मी की जोड़ी चूके आशीर्वाद लिया। उसे झुक के मम्मी के जोड़ी चुए तो फिर से उनके कोमल बदन की टच से हमें अनाचार भावनाओं जाग गई। उसकी मम्मी के सुंदर फेस और बदन को देखे उसे उनसे दूर जाने का मन भी नहीं कर रहा था। पर फिर भी दिल पे पत्थर रख कर सोनू घर से निकला पड़ा।
पूनम देवी :: संभल के जाना बेटा और फोन करना रोज़.. अलविदा बेटा..
अपनी ख़ूबसूरत मम्मी को अलविदा बोलते हुए सोनू निकल पड़ा। रास्ते में चलते हुए अभिनव के घर भी जहां से मिल के वो दोनो रेलवे स्टेशन जाने वाले सोनू अपने सपनों की रानी अपनी मम्मी की तस्वीर बार फोन पर देख रहा था।
सोनू और अभिनव अब ट्रेन में बैठे निकले पाए कॉम्पिटिशन के लिए मुंबई को। उधार राज अकेला बिना उसके दोस्तों के बोर होराहा था पर क्या कारक था। वो भी क्रिकेट टूर्नामेंट में व्यस्त है जब तक कॉलेज फिर ना शुरू हो जाए। अभिनव और सोनू रात तक ट्रेन से पहल गए। उतर कर ट्रेन से उन्होन टैक्सी ली और रूम पांच कर आराम लेने लगे। उधार सोनू की मम्मी भी दिन भर घर के काम के बाद सोने को लेकर सोबछराही थी सोनू के बारे में हाय। वो शायद पहली बार शहर से दूर गया था। बेटा बड़ा भी हो जाए तो माँ के लिए छोटा ही रहता और फ़िकर रहते हैं। सोनू भी लेटे हुए बिस्तर पर घर को याद कर रहा था और मम्मी को भी। रात बहुत हो चुकी थी इसलिय फोन भी नहीं कारक था। अभिनव से गहरे मुझे सो गया था। सोनू ने फिर से अपने वॉलेट में मम्मी की फोटो देखी.. आज उसके दिल में मम्मी के लिए अनाचार भावनाएं कम पर प्यार ज्यादा था। सोनू की मम्मी भी उनके बेडरूम में ही सोनू के उनके और सोनू के डैडी के साथ फोटो फ्रेम देखे सोनू को याद करके सोगे। सोनू को भी कुछ डर में आंख लग गई।
सुबाह उठके फ्रेश होके सोनू ने पहले घर को कॉल किया।
सोनू :: हेलो हेलो मम्मी…
पूनम देवी :: ओह सोनू बेटा पांच गया न ठीक से..फोन क्यों नहीं किया कल
सोनू :: हा हा मम्मी पांच गया और कोई चिंता नहीं अच्छा सा कमरा है और अभिनव भी है ना साथ में।
पूनम देवी : अच्छा बेटा पर टाइम पे खलेना ठीक से।
सोनू :: हा मम्मी खुलूंगा..और फोन भी करुंगा रोज। अच्छा मम्मी रखता हूं पापा को भी बोल्डना मैंने कॉल किया था बोलके.. बाय मम्मी।
पूनम देवी :: अच्छा बेटा..खयाल रखना..अलविदा…
सोनू को अपनी मम्मी की मीठी आवाज फोन पे सुनके जैसे एक अजिब ऊरजा मिली.रोज उनकी आवाज सुनने की आदत जो थी।
अभिनव :: चल रे सोनू..हम बहार टिफिन करके फिर निकलेंगे ना जाना है वो स्टूडियो को आज से प्रतियोगिता को
सोनू:: हा हा चल यार मैं तो तैयार हूं..
सोनू और अभिनव स्टूडियो पहले तो वहान से बहुत लोग..प्रतियोगिता के तकरीबन 500 लॉग शॉर्ट लिस्ट होके आए थे। अंदर सिरफ सोनू को ही भेजा गया। अभिनव को बहार ही इंतजार करना था। वो पास की रेस्टोरेंट में हाय इंतजार करना लगा
सोनू और जाने के बाद हमें पता चला की अलग राउंड होंगे इसमे और आखिरी राउंड में बस तीन लोग होंगे शॉर्ट लिस्ट होते होते। पहला दौर लिखा है। परीक्षा होने वाला था आज। सोनू भी बैठा और परीक्षा लिखना लगा। बड़े से हाल मी। एक घंटे की परीक्षा लिखके वो अब बहार आया तो अभिनव इंतजार कर रहा था।
अभिनव :: ओह आया तू.. कैसा था आजका गोल अंदर।
सोनू :: कठिन ही था पर देखते हैं मैंने जीता आया अच्छे से लिखा
अभिनव : टेंशन मत ले यार..तू अपना बेस्ट देना। हुआ तो ठीक कोई बात नहीं।
सोनू और अभिनव सिटी घूमकर शाम को आए रूम पे।
अगले दिन सुबा भी उसी तरह सोनू अपनी मम्मी को फोन करके प्रतियोगिता के लिए निकला। वहन जाके पता चला सोनू को के वो पहले राउंड पास कर चुका था। आज दूसरे दौर की परीक्षा जिसमे सवार और कठिन थी। उसे फिर भी दिमाग लगा के लिखा परीक्षा। परीक्षा के बाद फिर अभिनव के साथ शहर घूम लेटा था वो। पर रात को जब सोने जाता तब मम्मी की बहुत याद आती थी। मम्मी से बहुत लगा जो था.. प्यार, लगाव और अब तो मम्मी से आकर्षण भी था। जल्दी से जल्दी मम्मी को फिर से घर जाकर देखना चाहता था सोनू। सोनू की मम्मी भी तो अपने एकलाते बेटे को देखने को बेकरार थी।
सोनू अब दो राउंड अस कॉम्पिटिशन के क्लियर कर चुका था। अभिनव के साथ मिल्कर अब रोज़ शहर भी घूम रहा था। सुबाह रोज़ मम्मी से बात हो जाते भी थी सोनू की और रात को मम्मी की याद भी सतती थी।
अब कॉम्पिटिशन मी बेस 20 लोग बच गए थे। ये राउंड क्लियर हुआ तो सोनू फाइनल राउंड में जाने का मौका था जिसमे बस 3 लोग के बीच क्विज प्रतियोगिता होने वाला था। सोनू कॉम्पिटिशन हॉल में पहूँचा और वहन जाके वो क्विज एग्जाम लिख लग गया.. सवाल बहुत ज्यादा मुश्किल पर उसे बस भगवान का नाम लेके कुछ जवाब अनुमान लगाकर टिक कर डाले। सोने की किस्मत में हुआ तो ठीक वर्ण कुछ खाने को तो नहीं है
उधार सोनू की मम्मी आज मंदिर गई थी जैसे की हर सप्ताह जाती थी। वो भी अपने बेटे के लिए प्रार्थना करने लगी की वो अच्छा प्रदर्शन करे या न करें बस उसका ख्याल रखना। इसे ही शायद मां की ममता कहते हैं की बेटे से उम्मीद नहीं मां बस बेटे की भलाई की ही प्रार्थना करते हमेश। सोनू के पिताजी काफ़ी ख़ुश द ज़मीन बिकने के बाद और वो उन पैसे से ही यहाँ पर एक छोटा सा फ्लैट ख़रीद चुके थे जो किरये पर देने वाले थे। और कुछ पैसे वो अपनी दुकान में लगाके दुकान का बिजनेस बढ़ा रहे थे।
सोनू अब अभिनव के साथ शाम को कमरा पांच गया और रात का खाना करके बिस्तर पे लाता था। तबी उसके फोन पे मैसेज आया। संदेश खोला तो देखो उसे याकेन नहीं हुआ। ये प्रतियोगिता के आयोजकों की तरफ से था। बाप रे। सोनू खुशी से जैसे झूम उठा और अभिनव भी बहुत खुश होगा ये न्यूज सुनके।
अभिनव :: देखा मुझे याकेन था यार तेरे टैलेंट पे..कोई आसन बात नहीं फाइनल राउंड तक आना।
सोनू :: हा यार तूने ही तो मुझे प्रतियोगिता के लिए साइन करवाया..धन्यवाद यार।
अभिनव :: अरे वो सब छोड अब जल्दी सोजा..सुबाह ताजा रहेगा तो हाय फाइनल राउंड में अच्छे से कर पाएगा..
सोनू :: ओके ओके यार ठीक है चल फिर सो जाता हूं..शुभ रात्रि यार।
सोनू बिस्तर पे लेट गया और कुछ ही डर में थाकान की वजह से गहरी जरूरत में चला गया…पर जरूरत में बस उसके सपने में एक जैसे खूबसूरत परी आई जो उसे जैसे ऑल द बेस्ट बोल रही थी…धुंधला था चेहरा धुंधला …गया वो तो वो तो उसकी खूबसूरत मम्मी थी जो शायद पूजा करके उसे आशीर्वाद दे रही थी.. बस उसी मिले सपने में सोनू मम्मी को देखता हुआ मुस्कानाकर सो रहा था।
अगली सुबा सोनू थोड़ा सा जल्दी उठा, फ्रेश होके फिर वो मम्मी को फोन लगा तो उनका फोन लगा आरा था। शायद वो नानी से बात कर रही थी। अभिनव भी उत्थान था और उसे बोला के जल्दी निकलना पड़ेगा क्यूं की आज फाइनल राउंड है। वो दोनो नाश्ता करके फिर प्रतियोगिता के लिए निकले पाए। पर रास्ते भर सोनू को जैसे एक बेचानी थी की उसे मम्मी से बात नहीं की और उनको बताया भी नहीं की वो फाइनल राउंड में आया है। अभिनव के साथ वो अब प्रतियोगिता हॉल पांच गया और अंदर चला गया।
अभिनव: ऑल द बेस्ट सोनू, मैं इंतजार करुंगा।
सोनू: थैंक्स यार, हा देखते हैं अब किस्मत में क्या लिखा है।
सोनू जब और गया टू फाइनल राउंड के और दो कंटेस्टेंट। अब उनके साथ ही क्विज राउंड होने वाला था सोनू का। सोनू भी जाके खड़ा होगा और उन सबको नियम बताए गए। पांच मिनट में अब वो शुरू होने वाला था फाइनल राउंड। सोनू ने भगवान को याद किया और अब अपने वॉलेट से भी मम्मी की फोटो निकला के देख ली। उन सब बताया गया की विनर्स और फर्स्ट रनर अप की प्राइज मनी भी। प्रतियोगिता शुरू हो गया। बहार बैठे रेस्टोरेंट में अभिनव भी जैसे विश कर रहा था के सोनू अच्छा परफॉर्म करे और। अभिनव एक अमीर बाप का लड़का था, थोड़ा सा बड़ा हुआ पर सोनू उसका बहुत ही खास दोस्त था। शायद वो भी सोनू को लाइफ में आगे बढ़ते देखना चाहता था। क्यूं की उन दोनो ने बचपन से ही साथ बहुत से अच्छे पल बिटाये।
प्रतियोगिता शुरू हुआ और सोनू और वो दो प्रतियोगी भी देखा के जवाब अच्छे से ही देने लगे। सवाल अब और ज्यादा मुश्किल होने लग गए थे। एक प्रतियोगी अब बाहर हो गया था। अब बस सोनू और एक दूसरा प्रतियोगी हाय बच्चे गए। अब फाइनल राउंड था बस बाकी जिस में अगर जो भी देखा सही देगा वो विजेता होगा और गलत जवाब देने वाला फर्स्ट रनर अप। सवाल पूछे ही सोनू से पहले ही दूसरे लड़के ने बजर डबा कर जवाब दे दिया। सोनू को भी उसका जवाब पता था पर शायद उसने बजर दबने में डेरी करदी कुछ सेकंड की। ओह,, किस्मत भी कैसे कैसे खेलती हैं। कभी हम बस मंजिल से बस कुछ दूसरे से चुक जाते हैं।
विनर के लिए ज़ोर से ताली बाजी और अब सोनू ने भी उसे जाके किया को बधाई। अनाउंसमेंट हुआ विनर का पहले और बाद में सोनू का। पर सोनू ने ये तो बात भूल ही गया था रनर अप का प्राइज मनी भी 30 लाख था। हे भगवान, उसे अभी याद आया और 30 लाख उसके लिए बहुत ज्यादा रकम थी। उसी जैसी सारी उदासी फिर से दूर होगी। उसे लगा के जैसे वो हार कर भी जीत गया है। 30 लाख से हमें जैसे लड़के का तो जीवन भी बदल सकता था।
सोनू जैसे आसमान में उड़ रहा था जब उसे प्राइज मनी का चेक दिया गया। जब वो बहार आया हॉल के तो उसके हाथ में चेक देखो अभिनव भी खुश होगा।
अभिनव: ओह, सोनू, क्या विनर है तू ओह!!!
सोनू; नहीं यार, उपविजेता।, पर फिर भी ठीक है, मेरे लिए बहुत बड़ी बात है न मैंने तो खास तैयार भी नहीं किया था।
अभिनव: हा यार, 30 लाख बहुत बड़ी रकम होती है, आज तो पार्टी बनते हैं।
सोनू: हा हा जरूर आज बहुत खुश हूं, आज तो पार्टी करेंगे जाने से पहले शहर से है।
सोनू :: आर पार पार्टी अभी से कैसे..ये चेक तो पहले बैंक में डालना होगा घर जाके।
अभिनव :: चिंता मत करो यार..आज की पार्टी मेरी तरफ से..किसी अच्छे से रेस्टोरेंट में डिनर कर के..आज सो कर..कल सुबह निकल जाएंगे ट्रेन से।
सोनू :: अच्छा चल..फिर ऐसा ही करेंगे।
सोनू और अभिनव अच्छे से रेस्टोरेंट में जाके डिनर करके फिर रूम पे जाके रेस्ट लेने लगे। सोनू पर कुछ डर बाद ही उठा के छत पर गया और अपनी मम्मी को फोन लगा।
सोनू :: हेलो मम्मी कैसी हो आप।
पूनम देवी :: ओह आज सूबा क्यों नहीं किया बेटा कॉल.. कैसा है करलिया डिनर ट्यून
सोनू :: हा हा मम्मी कर लिया और ठीक हूं मैं। एक अच्छी खबर है मम्मी। माई वो सेकेंड प्लेस आया हुन कॉम्पिटिशन मी। जस्ट मिस होगया फर्स्ट प्राइज। (सोनू अब अपनी मम्मी को कैसा कहलाता की उसके इस्त ना आने की वजह बी पूनम देवी ही उसके सपनों की रानी पूनम देवी ने मुस्कराती प्रतियोगिता में जाने से पहले बेस्ट ऑफ लक नहीं कहा था जीत वो ये प्रतियोगिता कैसे था)
पूनम देवी ::::: ओह्ह्ह सच ……. भगवान का शुक्र है बेटा तेरा वहा इतने दिन जाना काम तो आया.. ये तो बहुत अच्छी न्यूज है. तेरे पिताजी को बोलूंगी मैं सुबा।
सोनू :: हा मम्मी मैं कल शाम तक घर पूँछ जाउंगा..आई मिस यू।
पूनम देवी :: हा बस अब जल्दी से घर आजा..तेरे सब पसंदीदा व्यंजन बनाके रखूंगी ठीक है ना बेटा।
सोनू :: हा मम्मी…गुड नाईट मम्मी..
पूनम देवी :: शुभ रात्रि बेटा।
सोनू ने फोन रखा पर उसे बहुत ही ज्यादा आज याद आ रही थी मम्मी की उसके .. फोन पे सभी पिक्स मम्मी के देखे स्कैन करने लगा। और उसे तो सबसे महत्वपूर्ण बात पुरस्कार राशि की ना ही उसकी मम्मी को ना ही पिताजी को बतायी थी। 30 लाख सोनू के लिए कोई ममूली बात नहीं थी।
अगली सुबा ट्रेन में घर वापस जाते समय भी अब बस सोनू बस अपनी सुंदर मम्मी को ही याद कर रहा था। और उसे मन में सोना की पुरस्कार राशि की बात डैडी को मम्मी को पूरी तरह से नहीं बतायेगा। ये बात उसे अभिनव को भी बोल्डी।
सोनू : अच्छा अभिनव सुन..ये पुरस्कार राशि की बात तू प्लीज मेरे घर पर मत बताना..मेरा मतलब की मैं डैडी को बोलूंगा की पुरस्कार राशि सिर्फ 10 लाख थी और उनको ही दे दूंगा पूरे 10 लाख.
अभिनव :: ओह पर किस लिए पूरा राशि डूबे तो तेरे डैडी और भी खुश होंगे ना यार।
सोनू :: हा पर वो दस लाख भी बहुत बड़ी रकम है ना..मेरे डैडी ने अभी पिछले महीने ही गानव की जमीन भी बेची थी यार तो उसके पैसे भी आए।
अभिनव :: अच्छा मतलाब 20 लाख तू रख लेगा और लखपति बन जाएगा..हाहा।
सोनू :: हा मेरे अकाउंट में ही रहेंगे… तुझे और राज को अच्छे से रेस्टोरेंट में पार्टी भी दूंगा और मम्मी को सोना रहा हूं पैसे से जी भर के शॉपिंग कारवां।
अभिनव :: ओह अच्छा मम्मी के लिए पैसे खार्च करेगा हम्म्म..वैसे एक बात कहूं क्या अगर तू बुरा ना माने तो
सोनू :: अरे यार तू भी ना..कैसे बात करता ही तेरी किसी बात का मी बुरा मान सकता है क्या तूने मेरी इतनी मदद की और जिगरी दोस्त है..बोल ना।
अभिनव :: क्या तू नहीं चाहता वो तू अपनी मम्मी से कुछ आने करना..मेरा मैटलैब ट्यून हमें दिन गुदगुदी करके अच्छे से एन्जॉय किया पर और कुछ आने मेरा मैटलैब रोमांस करने का मन नहीं करता क्या.. सच सच बताना।
सोनू :: यार वो पर..मम्मी के नंगे में जनता है ना तू..रिस्की है बहुत और मैं उनको भी नहीं करना चाहता।
अभिनव :: हा पर तू सोना नहीं क्या कभी के रोमांस करुण या कुछ करुं…तेरे वॉलेट में भी तू उनकी तस्वीर को देखता रहता ना..इससे ही पता चल रहा मुझे की तेरे और आंटी के लिए मां बेटे वाला प्यार नहीं बाल्की कुछ या हाय
सोनू; अभिनव से नज़र बचा क्या यार तू बी ऐसा कुछ नहीं ही
नया; ओनू तू जीता चाह झूठ बोल ले लेकिन मेरी तेरी आंखों में देख कर बता सकता हूं जिस तरह से तेरे और आंटी से मिलने की तड़प ही वो एक बेटे की तड़प नहीं
सोनू; तो फिर किस्की ही मील तो सुनो
नया; एक आशिक की जो अपनी मासूम से मिलने के लिए तड़प रहा ही उसकी हांसी उसके चेहरे के मुस्काना। मी सच कह रहा है ना सोनू तेरे मान मि मम्मी के लिए बहुत ज्यादा है अनाचार भावनाएं।
अब सोनू अभिनव से कहा छुपा सकता था अखिर वो दोनो जिगरी दोस्त एक दसरे के मान की बात को अच्छे से जाने द इस्लिये अब सोनू के लिए अभिनव से ये सब छुपाना मुश्किल ही नहीं नामुकिन था इस्लिये
सोनू; वो यार मैं वो..अब क्या बोलूं.. पर मम्मी से रोमांस करना मेरी किस्मत में नहीं
अभिनव :: मुस्कान मम्मी से रोमांस करना मुश्किल ही प्रति अपनी प्रेमिका से रोमांस करना तो मुश्किल नहीं ही। अगर तू कोशिश करे तो अपनी मम्मी को अपनी प्रेमिका बना सकता है या अगर तेरी मम्मी तेरी प्रेमिका बन गई तो रोमांस करना कोन सा मुस्किल ही तू कोशिश तो कर मेरा मतलब पिताजी को दस लाख को क्या जाता है। देगा तो वो तो बहुत ज्यादा तुझसे खुश हो जाएंगे..तू अपनी मम्मी को भी अब नियमित खरीदारी करवा…उनको अच्छी भारी साड़ी आदि दिलवाना..कुछ ज्वैलरी भी दिलवानी हो तो मेरी दुकान है ना वहन से काम दाम में। औरते शॉपिंग से जलदी पात जाती ही इम्प्रेस करके मम्मी के करीब हो सकता है। फिर तू कोशिश कर सकता है ना मौका देख के उनको धीरे धीरे बहकाने का।
सोनू :: ओह मैं और मम्मी को सेड्यूस?
अभिनव:: हा यार क्यों नहीं….तू मम्मी के लिए इतना कुछ कर रहा है..तेरे डैडी से ज्यादा तू उनका ख्याल रखेगा। उनके ऊपर इतने पैसे खर्च करेगा तो क्या तेरी मम्मी इंप्रेस नहीं होगी क्या तुझसे।
सोनू :: हा पर इंप्रेस होना अलग है और यार सेड्यूस करना अलग है। मम्मी मेरी बहुत ही शरीफ है।
भाई अब कहानी को उम्र भी ले जाओ जरा सा पूनम को सोनू नंगी नहीं देखते या मोठ मारे। फिर वो प्लान बनाये की अब की मम्मी को केसे सेड्यूस करना है या फिर अचानक वो मम्मी के नहेते में एक जाए या पूनम इस्तेमाल देख कर चोक जाए फिर उसके भी महसूस बदल जाए अपने बेटे के लिए कुछ ऐसा करो यार।
अभिनव :: हा मैं तो जनता ही हूं पर तू अगर थोड़ा सा छेड़खानी करेगा तो किसी को कहां पता चलेगा यार..तेरे पिता तो दुकान पर होंगे..दादी भी घर पर हो तो कुछ दूर नहीं ना..एक बार सोच ले ..देख अब तो तुझे पैसे की भी कमी नहीं..तू दास लाख तेरे डैड को देहा..दास लाख तेरे खाते में सावधि जमा रखागा तो उसका ब्याज भी आता रहेगा…उसको छोड कर और दास लाख है तेरे पास जो तू अपनी मम्मी पे अच्छे से खर्च कर सकता है ना। टेन लाख में तू तो मम्मी के लिए उनकी मनपसंद ज्वैलरी.. साड़ी और जो चाहोगे तो भी बहुत से पैसे बचाएंगे। देख तू मम्मी के लिए एकदम मस्त जैसे सीरियल में आंटीज पहचान न अच्छे अच्छे साड़ी खरीद सकता है। तू मम्मी को वो लेडीज केयर ब्यूटी पार्लर में भी तू कार्ड बनवाडे..वहन का कार्ड है सालाना 10000 रुपये। का पर वो लोग अच्छे से तेरी ख़ूबसूरत मम्मी को ख़ूबसूरती को और ज़्यादा निखार देंगे।
सोनू :: यार तू बात तो सही कह रहा पर फिर भी मम्मी को बहकाने का मतलब रिस्की भी है बहुत.. डैडी को कहीं कुछ पता चल गया तो मुश्किल हो जाएगा बहुत ज्यादा।
अभिनव :: नहीं होगा यार..अब ट्यून ये गुदगुदी वाली इच्छा पूरी की कुछ पता चला क्या.. अच्छा एक और काम कर सकता है तू की तेरी मम्मी की बड़ी सी पेंटिंग बनवा के हॉल ने रखदे तेरे। मैं जनता हूं एक पेंटर को वो 10000 में बड़ी पेंटिंग बनवा दूंगा। और जिस मंदिर में तेरी मम्मी जाते न वहां के मंदिर के पंडितजी को भी हम पैसे दे पाएंगे। वो तेरी मम्मी को बोलेंगे के आपका बेटा तो आपके नाम की अर्चना करवाता है हर सप्ताह.. बहुत ज्यादा सुशील बेटा है आप किस्मत वाली हो.. सोने ऐसे तू चारन तारफ से गर तेरी मम्मी पर प्यार के भावनाओं से हमला करेगा तो क्यों हमला करेगा होगी .or यार तू सोच की तू अपनी मम्मी को बाल्की किसी लड़की को पता रहा ही अपनी प्रेमिका को
सोनू :: ओह हम्मम्म यार तेरे प्लान। बहुत बढ़िया है…..मेरी मम्मी के साथ छेड़खानी होगी तो…..
बस सोनू जैसे ये कहते हैं.. बस मम्मी को सेड्यूस करने वाली सोच ही इतनी कामुक थी उसके लिए की उसका लुंड पंत में फिर से जैसे झटके देने लगा।
ट्रेन चल रही थी या सोनू फिर से सपनों की दुनिया में खो गया अभिनव सच ही तो कह रहा था की वो अब अपनी मम्मी को अपनी मम्मी के रूप में नहीं बाल्की अपनी प्रेमिका मील रूप में देखने लगा था उससे लगा प्यार। अपनी मम्मी पूनन देवी के बारे में सोचे सोचने लगा वो या उसकी मम्मी दूर अकेले किसी रोमांटिक जग में घुमने गए जहां वो या उसकी मम्मी पूनम देवी एक दुशे की बहो मि बहे डाले घूम रहे हो रोमांस कर रहे हैं
अब तो इस्का बी दिल करने लगा था की वो अपनी मासूम पूनम देवी को अपनी बहो में भर ले उसके रसीले होंथो का रस चुस ले।
अब सोनू को बी लगेगा था की अगर वो थोड़ी सी कोषिश करेगा तो हो सकता है उसकी मम्मी रोपी खुशबुदार फूल उसे भगवान मि गिरे इसे लिए उसे कोशिश तो करनी ही थी
सोनू अब कुछ घंटों में अपने शहर पांच गया…पंच कर वो और अभिनव अपने अपने घर की ओर चले गए। सोनू अब घर पहूँचा शाम तो उसके पिता जी भी घर पे ही। सोनू ने झुक के अपने पिताजी और दादी का आशीर्वाद लिया। उसकी खूबसूरत मम्मी के भी झुक के आशीर्वाद लिया पर उसका मन हो रहा था के मां को कास के गले लगा कर। पर डैडी तो वो ऐसा नहीं कर सकता था।
चमन लाल शर्मा :: ओह बेटा तो तुमने बहुत अच्छा किया तेरी मम्मी ने बताया प्रतियोगिता में..और कैसा था तुम्हारा सफर।
पूनम देवी :: हा जी बता तो था मैंने आपको..इतने बड़े कॉम्पिटिशन में दूसरा आया है मेरा बच्चा।
सोनू :: जी मम्मी और मैं तो बिना तैयारी किया ही गया था प्रतियोगिता में ना।
पूनम देवी :: हा बेटा जाते हैं मैं। इसलिये तो इतनी गर्व की बात है
सोनू :: डैडी वो वो कॉम्पिटिशन बहुत बड़ा था और प्राइज मनी भी।
चमन लाल शर्मा :: अच्छा अच्छा कितना था बेटा पुरस्कार राशि।
सोनू के डैडी सोने रहे द प्राइज मनी ज्यादा से ज्यादा 50000 या 1 लाख हो सकता है..
सोनू :: वो डैडी प्राइज मनी 10 लाख।
चमन लाल शर्मा :: क्याआआआआआ
….ओह्ह्ह …इतना बड़ा राशि ………
पूनम देवी :: हे भगवान..इतने पैसे दिए बेटा प्राइज मी।
सोनू :: जी जी मम्मी बहुत बड़ा कॉम्पिटिशन था मैंने बोला ना.. डैडी वो कल चेक बैंक में डालूंगा और मैं पार्सन लाके दूंगा पैसे आपको पूरे।
चमन लाल शर्मा :: हैं बीटा तुझे कुछ बाइक नई लेने हो तो लेना इतने पैसे तो जीत लिए..वैसे जब तेरा रिजल्ट आया है बहुत सी खुश खबरियां मिल रही ही… हैं..वो गान की जमीन भी बाइक .और अब ये… अब तो मैं अपनी दुकान को बड़ी कर सकुंगा बेटा में पैसे से और फिर हम लोग ये घर को भी पहली मंजिल भी बना सकते हैं
पूनम देवी :: हा जी… ऊपर एक मंजिल बना दिजिये और आप दुकान में बाकी पैसे लगा देजिये गा।
सोनू :: हा मम्मी..अब तो पैसे से डैडी का बिजनेस अच्छे से बढ़ जाएगा।
सोनू के पिताजी जैसी खुशी से फूले नहीं समा रहे थे। उसकी मम्मी भी बहुत ज्यादा खुश थी। पर सोनू के दिल में तो बस अभिनव की बातें ही घूम रही थी दिल में। इतने दिन बाद उसकी मम्मी को देखे सोनू के दिल को जैसे आराम सा मिल रहा था। वो बस मम्मी को अब खाते हैं भी ताड़ रहा था खाने की मेज पर आज वो अपनी मम्मी को अपनी मां के रूप में नहीं बाल्की अपनी प्रेमिका के रूप में तड़ रहा था।
डिनर के बाद जब उसकी मम्मी अपने बेडरूम में जा रही थी तो सोनू का दिल जैसा बैठा जराहा था। थोड़ा सा ईर्ष्या भी महसूस होराही थी उसके डैडी के ऊपर हमें। इतनी सुंदर बीवी मिली डैडी को मेरे मम्मी के रूप में सोच रहा था। अपने रूम में जाके सोनू अब जैसे आगे का सोना रहा था। सोनू सोच रहा था की इतनी बड़ी रकम मिलने पर उसकी मम्मी तो खुश हो रही थी साथ में उसके पिता जी दो बहुत खुश होंगे या दूसरी खुशी में सयाद ही उन दोनो को जार को। वैसा तो सोनू के पिता जी को जितनी सुंदर बी मिली थी उस से तो रोज़ रात को उसे जाम कर प्यार करते होंगे पर आज तो वो दोनो खुश इसलिय आज तो सोनू के पिता जी सोनू की मम्मी की जाम कर तबियत से मिलेंगे सोनू के सामने आने लगा की कैसे उसके पिता जी उसकी हसीन खोबसूरत मम्मी को अपनी बहो में भारते होंगे उसके मुलायम गालो को सहलाते
हुए उसे बिस्टर पर ले जाते हैं कैसे वो उसकी मम्मी को नंगी करके उसे होंथो को चुम्ते उसे छोटे होंगे मम्मी की चुदाई के बारे में सोचे ही सोनू ये सोचने लगा की उसके पिता जी उसकी मम्मी को क्या होगा
अब वो सोचने लगा अभिनव ने जैसा बोला। वैसा करुंगा तो मम्मी को मैं सेड्यूस कर सकुंगा.. रिस्क भी है पर अब सोनू भी अपनी मम्मी से बहुत प्यार करने लग गया था और उनसे आकर्षण भी बहुत ज्यादा था..पैसे भी आने से बहुत हिम्मत आया था। पैसा भी अजिब चीज होती है। पैसा अगर पास हो तो उससे ज्यादा हिम्मत कुछ नहीं होता.. दुनिया को जीते का ख्याल भी आजाता अगर पैसा साथ हो तो.. पर उसे दुनिया नहीं बस अपनी खूबसूरत मम्मी का प्यार चाहिए। उसका दिल बस यही कह रहा था। आई नीड यू मम्मी आई नीड यू पूनम माय लव, आई लव यू या सोनू ने अपनी मम्मी की तस्वीर को चुम लिया हमें ऐसा लगा कि वो सच में अपनी मम्मी को ही चुम रहा हाय।
अगले दिन जब सोनू उठा उस समय सोनू की मम्मी खराब बना रही थी या सोनू की पिता जी सोनू की मम्मी के पास खड़े बताए कर रहे थे सयाद दुकान जाने की तयारी कर रहे थे। सोनू को अपनी मम्मी का अपने पिता जी के खड़े होना बिलकुल बी अच्छा नहीं लग रहा था सोनू को अपने पिता जी से ही जालान होने लगी थी क्योंकि सोनू अपनी मम्मी को किसी दुसरे मर्द के साथ नहीं देख सकता
सोनू के पिता जी; सोनू उथ गया
सोनू; जी पिता जी
सोनू के पिता जी; बीटा वो चेक आज बैंक मी दाल देना
सोनू; दाल दूंगा पिता जी
सोनू के पिता जी; बेटा जरा मेरे कामरे से जा कर मेरा मोबाइल या मेरा वॉलेट तो ले आ
सोनू; जी पापा या सोनू उठा कर ये लेने अपने मम्मी के कामरे मील चला गया या जैसे ही सोनू ने मोबाइल उठा उसकी नज़र बस्टर की हलत प्रति पड़ी
तो उसके लिए आईएसआई बिस्टर प्रति जो हुआ होगा आंखों के सामने आने लगा की कैसी रात को इसी बिस्टर प्रति उसके पापा ने उसे मम्मी के साथ भूलभुलैया लिए होंगे
कैसे कैसे उनको छोटा कितनी अच्छे से तसली करवाई होगी। बेड पर मम्मी की टूटी हुई रेशमी झूले टूटी हुई चुदियो के साथ साथ बेड के पास पड़े कूड़ेदान में इस्तेमाल किया कंडोम है बात की गवाही दे रहे द की रात को बस्टर पर क्या हुआ ही तबी तो सोनू की मम्मी कितनी कितनी देख रही थी
अगले दिन जब सोनू उठा उस समय सोनू की मम्मी खराब बना रही थी या सोनू की पिता जी सोनू की मम्मी के पास खड़े बताए कर रहे थे सयाद दुकान जाने की तयारी कर रहे थे। सोनू को अपनी मम्मी का अपने पिता जी के खड़े होना बिलकुल बी अच्छा नहीं लग रहा था सोनू को अपने पिता जी से ही जालान होने लगी थी क्योंकि सोनू अपनी मम्मी को किसी दुसरे मर्द के साथ नहीं देख सकता
सोनू के पिता जी; सोनू उथ गया
सोनू; जी पिता जी
सोनू के पिता जी; बीटा वो चेक आज बैंक मी दाल देना
सोनू; दाल दूंगा पिता जी
सोनू के पिता जी; बेटा जरा मेरे कामरे से जा कर मेरा मोबाइल या मेरा वॉलेट तो ले आ
सोनू; जी पापा या सोनू उठा कर ये लेने अपने मम्मी के कामरे मील चला गया या जैसे ही सोनू ने मोबाइल उठा उसकी नज़र बस्टर की हलत प्रति पड़ी
तो उसके लिए आईएसआई बिस्टर प्रति जो हुआ होगा आंखों के सामने आने लगा की कैसी रात को इसी बिस्टर प्रति उसके पापा ने उसे मम्मी के साथ भूलभुलैया लिए होंगे
कैसे कैसे उनको छोटा कितनी अच्छे से तसली करवाई होगी। बेड पर मम्मी की टूटी हुई रेशमी झूले टूटी हुई चुदियो के साथ साथ बेड के पास पड़े कूड़ेदान में इस्तेमाल किया कंडोम है बात की गवाही दे रहे द की रात को बस्टर पर क्या हुआ ही तबी तो सोनू की मम्मी कितनी कितनी देख रही थी
अब सोनू ने सोच लिया था की अगर उससे अपनी मम्मी को अपना बनाना हाय तो उससे बड़ा होना ही गोगा भले ही उससे मेरा रिस्क बहुत जायदा लग रहा था लेकिन अब वो रिस्क उठने के लिए अपने आप को होगा लिए उसने अभिनव के प्लान पर आगे काम करने की बजाय ली थी।
अब सोनू ने जाके अपना चेक बैंक में जमा करवाएं नकद करने के लिए। एक दो दिन में चेक का राशि उसके खाते में आने वाला था। फिर से जाके वो राज और अभिनव से मिला। राज भी उसके बारे में सुनके बहुत खुश होगा।
राज: वाह सोनू, तेरा तो ये साल बहुत अच्छा जरा, पहले कॉलेज पहले और अब ये।
सोनू: हा यार सही बोला, पर इसमें अभिनव का क्रेडिट है, उसी ने मुझे प्रतियोगिता के नंगे में बताया था और मुझे साइन अप करवा था।
अभिनव: तुझे ही जाता दोस्त का श्रेय जाता है।
राज: हाहा, वैसा ही साल ट्यून तो एक और मजा भी किया ना वो भूल गया क्या।
सोनू: हाहा हैं वो कैसे भूल सकता हूं।
अभिनव: वैसा राज, मैंने तो सोनू को आगे का प्लान भी बता दिया, अब तो सोनू पे निर्भर करता देखते हैं क्या करता है।
राज: ओह कमीन, तुम लोगों ने आगे का भी चर्चा किया कि मुझे बताया नहीं।
अभिनव: अरे वो ट्रेन में ऐसे ही चर्चा किया था इसलिए पुरस्कार राशि जीती तो तबी मुझे आइडिया आया, वर्ना तुझे नहीं बताते क्या हम लोग।
अभिनव ने डिटेल्ड में सब कुछ राज को बताया प्लान आगे का
राज: ओह बढ़िया है यार प्लान तो, पर सोनू इस्मीन तो बस तुझे ही सब मैनेज करना मिलेगा।
सोनू: हा वो तो हैं, पर देखता हूं यार, मेरी मम्मी को सेड्यूस करना मतलब आसमान से चांद तारे तोड के लाने जैसा है।
राज: यार लोग तो पनी मसूक के लिए चांद से तारे तो तोड़ लाते ही तू ना। यार ट्यून वो पहले विश गुदगुदी वाली तो पूरी करली ना, और अब तो तेरे पास पैसे भी हैं धर सारे, मुझे तो लगता है बहुत सुनहरा मौका है तेरे पास।
सोनू: हम्म देखूंगा यार, पहले जैसा अभिनव ने बोला वो सब तो करता हूं, फिर मेरी मम्मी का रिएक्शन कैसा है वो तो पता चलेगा ना। कल पैसे आएंगे तो डैडी को उसमें से 10 लाख दे दूंगा, फिर हम लोग जाके अच्छे से रेस्टोरेंट में पार्टी करेंगे यार। उसके बाद से मैं योजना पे काम करुंगा। पैसे दूंगा से डैडी भी अपने बिजनेस को बढ़ाने में बिजी हो जाएंगे ना इसलिय।
अभिनव: हा तेरे डैड उन पैसे से दुकान को बढ़ाने में व्यस्त हो जाएंगे, और तू तेरी मम्मी को खोजने में व्यस्त हो जाना, हाहा
सोनू: हाहा हैं पहले प्लान के फैसला से करने तो दे यार।
तीन दोस्त अब ऐसे ही जल्दबाजी करते हैं पूरे दिन बिटा दिए।
पाना
सोनू अब अगले दिन जाके पैसे बैंक से नकद करके अपने डैडी के खाते में ट्रांसफर कराये बैंक से ही। उसे डैडी का अकाउंट डिटेल्स ले लिया था घर से ही। उसके पिता को फिर कॉल करके बोला सोनू ने
सोनू: हा डैडी, वो आपके खाते में मैंने पैसे डाले हैं एक बार चेक करें आपको फोन पर मैसेज आया होगा।
सोनू के पिता जी ने फोन पे मैसेज देखा तो बहुत ज्यादा खुश हो गए। 10 लाख कोई ममूली अमाउंट नहीं थी। उनके बेटा जो अभी सिरफ कॉलेज ही कर रहा था इतना पैसा कामया इससे ज्यादा खुशी की बात एक बाप के लिए क्या हो सकता है।
चमन लाल शर्मा: ओह बेटा हा पैसे तो आए, अब तो अच्छे से मैं ये मेरी दुकान को बड़ा कर सकता हूं बेटा, तुझे भी कुछ चाहिए तो बता देना मुझे बेटा ठीक है ना।
सोनू; जी जी डैडी अच्छा डैडी मैं जरा राज और अभिनव के साथ जा रहा हूं। अलविदा पिताजी।
सोनू, राज और अभिनव फिर किसी अच्छे से रेस्टोरेंट में जाके लंच किया, फिर थिएटर गए वहां से और फिल्म देखे घर को वापस आ रहे थे।
तीन अब फिल्म देखने के बाद शाम को जब अभिनव की कार में घर वापस आ रहे थे तब अचानक राज ने देखा के सोनू की मम्मी पढ़ो की चाची के साथ दुकान से कुछ लेके जा रही थी। सोनू भी बस अपनी सुंदर मम्मी को पीछे से देखता ही रह गया। अभिनव ने भी धीरे से कार में ही उनका पीछे किया। उनकी मटकड़ी गान कमर और वापस देखता सोनू तो पागल ही हो रहा था, किसी तराजू के पलड़े की तरह उसकी मम्मी के दोनो मटके से चुतड़ ऊपर आला हो रहे थे देख कर उसका तो लुंड उसे जीन मि ही खड़ा हो गया था
केवल सोनू का ही लुंड बाल्की वही हॉल अभिनव या राज का बी था सोनू के साथ साथ राज और अभिनव भी जैसे आहें भर रहे।
(जीआईएफ के बाईं ओर सोनू की मम्मी)
सोनू भी सोच रहा था मन में इतनी सुंदर मम्मी है मेरी, अगर इन्हें करने की कोशिश ना करुण तो फिर शायद जिंदगी में आगे चलेंगे मैं बहुत पछताउंगा। अब तो पैसे भी हैं हाथ में और आगे ऐसी खूबसूरत मम्मी। सोनू को अब तो किसी भी हाल में अपने मम्मी को पाना था, ये तो मन बना रहा था वो।
((पीछे से उसके चलने के करीब))
सोनू ने अपनी सुंदर मम्मी को मार्केट में देखा तो उनकी सुंदरा पीछे से देखता ही रह गया। ऊपर से उसके दोस्त भी उसे और प्रोत्साहन कर रहे हैं उसकी मम्मी बहुत खूबसुरत है और सोनू को गंभीरता से कोशिश करना चाहिए। अब तो सोनू को मम्मी के ऊपर प्यार उनसे एक हफ्ते दूर रहकर और बढ़ भी गया था। एक अजीब सी मिक्स्ड फीलिंग थी प्यार..आकर्षण और अनाचार वाली। घर पहूँचा और वो देखा की मम्मी किचन में काम कर रही थी। उसका तो मन हो रहा था के बस मम्मी को पीछे से जाकर गले लगाओ। पर घर पर दादी भी थी। वो अपने रूम में चला गया और फैसला किया के अगले दिन मम्मी को शॉपिंग ले जाएगा।
अगले दिन उसके पिताजी जब अपनी दुकान को जाते ही। सोनू अपने मम्मी के पास गया जो किचन में थी।
सोनू :: मम्मी क्या कर रही हो।
पूनम देवी :: कुछ नहीं बस वो दादी मां को चाय बना रही थी बेटा।
सोनू अब उसकी मम्मी के पीछे ही खड़ा था। एकदम पीचे।
सोनू :: मम्मी वो मैंने प्राइज से पैसे जीते हैं ना..चलो आज आपको शॉपिंग कर वता हूं मम्मी..पहली कमयी है ना मेरी..
पूनम देवी :: डैडी को देदिये न बेटा सारे पैसे के बराबर हैं।
सोनू :: वो मम्मी नहीं मैंने कुछ पैसे रख लिए आपके लिए मम्मी।
पूनम देवी :: ओह बेटा क्यों ऐसा..वैसे भी ट्यून जन्मदिन को तोहफा दिया था न मुझे।
सोनू :: वो सब छोड़ो ना मम्मी..मेरी पहली कमयी है तो आपको तो कुछ ना कुछ दिलाऊंगा ना..चलो ना प्लीज मम्मी आज शॉपिंग को.प्लस मम्मी
पूनम देवी :: उफो अच्छा पर बेटा दादी मां है न घर पर क्या बोलूं उन्को।
सोनू :: बोल दो ना कुछ भी के मंदिर जा रहे या पढ़ो की चाची के साथ जा रही..जल्दी आजायेंगे ना ..
पूनम देवी :: अच्छा बेटा ठीक है..मै ये चाय देके आते हैं उनको रुको बोल्डुंगी।
सोनू की मम्मी दादी को चाय देके बोलके सोनू के साथ शॉपिंग जाने को तैयार हो गई। उसकी मम्मी एक दूसरी अच्छी सी साड़ी पहनने के आ गई। मम्मी को देखते ही मेरी आंखे फटी की फटी रह गई सच मी कयामत लग रही थी
सोनू की मम्मी अब सोनू की बाइक पे ही पीछे बैठे गए..सोनू ने बाइक स्टार्ट की और मम्मी को लेके बाइक दौड़ लगा..पर बाइक के साथ उसके और मम्मी के लिए प्यार और अनाचार भावनाएं भी दौड़ रहे थे। वो अब मम्मी के साथ एक बड़े से क्लॉथ शॉपिंग मॉल में पांच गया।
सोनू :: हा मम्मी आज आप जो जो पसंद हो लेना…बस जो पसंद हो साड़ी या कुछ भी..
पूनम देवी :: अच्छा बेटा हा मेरी पसंद का लुंगी।
सोनू :: देखो मम्मी वहा है साड़ी आप पसंद करो।
सोनू की मम्मी साड़ी चेक करने लगी। बहुत अच्छी क्वालिटी की साड़ी थी पर काफ़ी मेहंदी वाली भी थी वो।
पूनम देवी :: ओह ये 10000 की साड़ी.. साड़ी तो बहुत अच्छी है पर इतनी मेहंदी।
सोनू :: मम्मी आपको पसंद है ना बस..लेलो plss पैसे की क्यों चिंता करना हा।
सोनू :: मम्मी बहुत जछेगी ये साड़ी आप पर। माधुरी दीक्षित से बू जायदा सुंदर माधुरी दीक्षित से अपनी तुलना होते देख पूनम देवी के चेहरे पर एक अलग ही चमक आ गौ
पूनम देवी; क्या मैं माधुरी दीक्षित लगी हु क्या। औरत की याही कमजोरी होती ही की मर्द उसके रूप की तारीफ कर दे तो वो न चाहते हुए बी उसकी या खींची चली जाती ही
सोनू; मम्मी माधुरी दीक्षित क्या ही आपके सामने एपी तो उससे भी ज्यादा सुंदर हूं। अपने बेटे के मुह से ये सब सोनू की मम्मी का चेहरे खुशी से लाल हो गया
पूनम देवी; अच्छा अच्छा बस रहने दे
पूनम देवी :: हम्म थैंक यू बेटा हा किसी फंक्शन में देख लूंगी ना।
सोनू :: मम्मी एक और लेलो साड़ी पसंद कोई आये तो
पूनम देवी :: ना ना बेटा ये बहुत मेहंदी वाली है ना
सोनू:: उफो मम्मी आप भी ना..पैसे का मत सोंचो ना। अच्छा चलो अभी आपको कोई अच्छी ज्वैलरी दिलवा दूंगा।
पूनम देवी :: क्या ज्वैलरी भी……. हैं पर वो बेटा क्यों..इतना खारच।
सोनू :: मेरी प्यारी मम्मी के लिए जीता भी खारच करो काम ही है ना..अब चलो न मम्मी प्लीज आओ ना।
पूनम देवी :: अच्छा बेटा पर तू भी अपने लिए कुछ लेले ना।
सोनू :: मेरे पास तो है सब कुछ..बस मुझे मेरी पहली सैलरी से आपको दिलवाने की इच्छा थी।
सोनू अब मम्मी को अभिनव के डैड की ज्वैलरी स्टोर में ले गया..अभिनव के पिता पहचानते थे सोनू को
अभिनव डैड: अरे सोनू बेटा आओ आओ..ओह अच्छा मम्मी को कुछ दिलवाना है क्या।
सोनू :: जी अंकल कुछ अच्छा सा गोल्ड का आइटम मेरी मम्मी के लिए।
वैसा तो अभिनव के पिता को बस पैसा..बिजनेस इसी पे ही ध्यान होता था.पर सोनू की मम्मी की खूबसूरत देख के वो भी अपनी नजरें उनसे हटा नहीं। मन ही मन जैसे वो भी सोने रहे थे के सोनू के पापा कितने लकी हैं।
वैसा इसमे अभिनव के पिता की भी गलती नहीं थी की वो सोनू की मम्मी को ऐसे तड़ रहे थे। खूबसूरत को आगे देख कर शायद किसी की भी आंखें खुद-ब-खुद वैसी ही हो जाती हैं। किसी दो मर्द का इनाम ढोल सकता है
सोनू :: जी अंकल आप कुछ अच्छी सी सोने की वस्तु दिखलाई ना।
अभिनव पिता :: हा बेटा देखो ये गोल्ड की कंगन है..अभी नई नई आई है..बहुत अच्छी है…
सोनू की मम्मी तो बस हमें गोल्ड के कंगन को देखती ही रह गई..उनको गोल्ड पहले से ही पसंद था और कंगन बहुत अच्छा लग रहा था।
पूनम देवी :: भाईसाहब..जी कितने का है ये..बहुत प्यारा है।
अभिनव डैड: जी वैस टू मार्केट प्राइस इस्का है 38000..पर आप सोनू की मम्मी हो इसलिय आप लोगों को 35000 में दूंगा।
पूनम देवी :: ओह्ह्ह सोनू बेटा ..मेहंगा है ना बहुत ..
सोनू :: नहीं मम्मी..अरे…देखो कितना प्यारा कंगन है..बस लेलो आप..आप पे सूट करेगा काफ़ी…जी अंकल आप इसे पैक करदीजिये..
अपने बेटे को इतना सब खर्च करते देख सोनू की मम्मी जैसी खुशी से फूल नहीं समा रही थी। अखिर कौनसी मां दुनिया की खुश नहीं होगी अगर उसका बेटा ऐसा खर्च करेगा मां के ऊपर। पर सोनू की मम्मी को पता नहीं था ये सोनू का उन पर सिरफ बेटे का प्यार नहीं पर कुछ और भी था। सोनू ये सब अपनी मम्मी के ऊपर खरा नहीं कर रहा था। मसूका को खोजने के लिए ही कर रहा था।
सोनू :: मम्मी लेभी लो ना..आपको पसंद है बा कंगन.अच्छा आप देख के देखो अच्छी सूट करेंगे आप पर कंगन ये।
पूनम देवी :: उन अच्छा बेटा देखता हूं पेहेन के।
सोनू की मम्मी शॉप में ही मिरर के सामने जाके वो कंगन अपने सुंदर कलाई में पहनने लगी। कंगन पहने हुए ही वो मिरर में देख रही थी और पीछे से सोनू भी देख रहा था। एक बांध अप्सरा जैसी लग रही थी मम्मी उसकी वो कंगन पहनने के।
सोनू :: वाह देखा मम्मी..कितने अच्छे लग रहे हैं ये कंगन
पूनम देवी :: हा बेटा बहुत प्यारे हैं कंगन। पर तू सारे पैसे ऐसे खर्च मत करदे ना बेटा।
सोनू :: क्या मम्मी…आप के ऊपर तो लाख कुर्बान.. बस आप खुश रहो ये बहुत है मेरे लिए।
बात पे जैसी ग़खुशी से जैसे मुस्कुराई में सोनू की मम्मी। उनकी मुस्कान भी इतनी कामुक थी की सोनू बस देखता ही रह गया। अभिनव के डैडी भी बस सोनू की मम्मी को ही देखे जा रहे थे। उनको शॉप इतनी साड़ी ज्वैलरी थी पर सबसे चमकदार चीज अभी उनकी दुकान में जो थी वो सोनू की खूबसूरत मम्मी ही थी। वो जब स्माइल डिटी तो हमें देख कर आने वाले को लगता है कि बस सारी थकान दूर होगा हो। कंगन अब पैक करते ही सोनू ने कैश में पेमेंट किया।
सोनू :: चलो मुम्मू चलें … आप को कुछ और लेना है क्या।
पूनम देवी : ना ना बेटा..बहुत खारचा होगा न तेरा पहले ही। अब तू भी अपने लिए कुछ खरीद ले ना सोनू।
सोनू :: मम्मी सब कुछ तो है मेरे पास..आप को बस हर दुनिया की खुशी देना है मुझे बस।
पूनम देवी :: बस बस सोनू..ट्यून तो सब खुशी दीदी ना.. हमारा नाम इतना गर्व से पोंचा भी कर डाला।
सोनू :: जी मम्मी वो बस आपका प्यार और आशीर्वाद है मम्मी।
पूनम देवी :: ये सब तेरी मेहंदी का फल है बेटा।
सोनू और उसकी मम्मी ऐसे ही बातें करते हुए अब घर पांच गए। सोनू को बहुत मन था के कम से कम अपनी मम्मी को कसके गले लगाने पर जल्दबाजी में काम खराब नहीं करना चाहता था वो। ख़ुशी ख़ुशी अपनी तिजोरी में सोनू की मम्मी कंगन रख रही थी।
पर सोनू के दिल की तिजोरी में तो उसके सपनों की रानी सोनू की मम्मी ही बसी थी।
रात को सोनू अपने कामरे मील आ गया उसकी आंखो मि नींद गयाब हो चुकी रह रह कर सोनू की आंखों के सामने उसे मम्मी का मुस्काना चेहरे आ रहा था कितनी खुश थी आज पूनम देवी। अब सोनू को कुछ उम्मेद होने लगी की वो अपनी मम्मी को बहकाने के लिए काम्याब हो जाएगा वो लैपटॉप निकल कर अपनी मम्मी की तस्वीर को निहारने लगा। आज सोनू अपनी मम्मी के हर एक था को बड़े प्यार से उसे देखा सोनू को एसा महसस होने लगा था की उसकी मम्मी पूनम देवी उसकी बहो मि ही या वो अपनी मम्मी को अपनी बहो मील लिया अपने ऊपर कींच रहा ही।
दोनो की गरम सांसे एक दसरे की सांसों से तकरा रही थी होंथो से कुछ कुछ ही दूर प्रति। सोनू तो जैसे अपने मम्मी के होंथो का रस चुन के लिए बेटा था सोनू को तो एसा महसूस हो रहा था की वो अपनी मम्मी को अपनी से चिपकाया हुई या उसका हाथ अपनी मम्मी के नारम गद्दार में उसका हाथ प्रति जो की है समय बहुत ही विक्राल रूप ले चुका था या खुले सांड की तरह झूम रहा था सोनू तो ख्यालो में अपनी मम्मी को अपनी बहो मील लिया अपने लुंड को अपने हाथ में लिया आगे पिच कर रहा। कहा सोनू ने पहले कभी मुथ नहीं मारी थी लेकिन जब से सोनू के दिल में उसकी मम्मी पूनम देवी बस्सी थी तब से सोनू का लुंड बी हर पल भागवत करने पर आमदा ही रहता था सोनू तब होश मि आया जब उसके लुंड ने अपने को बहार निकल कर अपनी मम्मी की तस्वीर को बड़ी तराह से नेहला नहीं दिया।
सोनू का पुरा बदन पसीन से भीग चूका था उससे जब होश आया तो देख कंप्यूटर प्रति उसकी मम्मी की पिकुस्के से पूरी तरह से भीग चुकी थी।
सोनू अब अपना ये माल अपनी मम्मी की तस्वीर पर नहीं उससे अपनी मम्मी के अंदर बरसाना चाहता था या उसे अब ये उम्मेद बी होने लगी थी की अगर उसे कोशिश की ओ वो जरा अपनी मम्मी को सेड्यूस करने में कामयाब हो जा
अब सोनू ने अभिनव और राज को बताया अगले दिन के उसे मम्मी को शॉपिंग करवाई थी। साड़ी और मेहंदी वाला कंगन भी उनको दिलवाया था। प्रति सोनू अभिनव या राज से ये बात चुप गया की अब रोज़ अकेले में अपनी माँ की तस्वीर देख कर अपना लुंड निकल कर हिलाता ही उनकी तस्वीर प्रति अपने लुंड का माल निकलाता हाय
अभिनव :: गुड यार सोनू। अब ऐसा करता हूं मैं वो पोट्रेट केले वाले को बोल्डूंगा तेरी मम्मी की बड़ी पोट्रेत वो बन जाएगा मैं।
सोनू :: हा ठीक है यार और वो तूने पंडितजी वाला भी तो बोला था ना।
राज :: हा पंडितजी को बस इतना बोलना होगा की तेरे घर वाले तेरी कदर नहीं करते ज्यादा पर तू उनके लिए हमेश प्रार्थना करता है। पंडितजी को थोड़े से पैसे देंगे इतना तो बोल्डेंगे न पंडितजी।
सोनू :: हैं पर मैं नहीं जनता वो पंडितजी को..बस मम्मी हर शनिवार जाते हैं ना मंदिर को।
राज :: ओके यार फिर मैं और अभिनव ही बात करेंगे पंडितजी को और अच्छे से समझौता देंगे की कैसे उनको बस तेरी मम्मी के सामने तेरी तारीख करनी है अच्छे से।
सोनू :: हा बस इतना बोल्डना की मम्मी के सामने बस मेरी तारीफ करदेन.. वैसा दादी भी जाते मंदिर तो दादी भी सुन लेंगे..हाहा
अभिनव:: ठीक है यार ये पोट्रेट और पंडितजी का तो हम संभल लेंगे..पर तूने कुछ प्रगति की क्या अभी अपनी मम्मी को बहकाने में।
सोनू :: नहीं कल ही तो शॉपिंग करवाई ना..बस किच दिन रुकुंगा मौका देखना भी मिलेगा ना।
राज :: हम्म और तेरी दादी का क्या..तेरी दादी कभी गणव नहीं जाते क्या।
सोनू :: जाती है यार पर कभी कभी जाती है।
अभिनव: ओके सुन तू पर कुछ दिन रुक के मौका देखेंगे फिर कोशिश करना मम्मी को सेड्यूस या कुछ भी थोड़ा भी आगे बढ़ने की.. इस बीच हम वो पोट्रेट और वो पंडितजी से बात करके सेट करेंगे।
सोनू :: अच्छा सूरज..ये ले 10000..वो पंडितजी को पैसे भी देंगे ना..वैसे भी मैंने तुझसे बहुत पैसे लेलिये है।
राज: हा हा अब तो सोनू मम्मी के लिए जितना चाहा खारचा करेगा…हाहा।
सोनू :: हाहा..वो तो है..क्या पता भगवान ने मुझे ये पैसे मम्मी पे खर्च करने को ही दिए हैं।
अभिनव:: सही हैं..खरच करदे दोस्त जीना करना है खार्च पर कोशिश जारी रखना.. एक ही जिंदगी है और इसी जिंदगी में पूरी इच्छा पूरी होनी चाहिए ना।
सोनू:: हम्म वैसा ही एक तो एक ही काश है मेरी…बस मेरी मम्मी
राज :: हाहा…वो तो है..तुझे तेरी मम्मी मिल जाए तो उससे बढ़के कोई चीज नहीं।
सोनू :: हा सच में..मैं अपनी माँ से प्यार करता हूँ।
जब सोनू ने आई लव माई मम्मी बोला..उसकी आवाज में एक बेटे का आपने मां के लिए प्यार भी था और मां के लिए अनाचार की भावना भी।
अब अभिनव ने जाके वो पोट्रेट केले वाले को पैसे दिए और उसे बोला की वो एक हफ्ते के अंदर बड़े से पोट्रेट बनेगा सोनू की मम्मी की। उसे अभिनव ने एक छोटी फोटो दी थी जिसको देखके वो पोट्रेट बनवाडे।
पोट्रेट वॉल पे लगाने वाली बड़ी सी बनवानी थी जो सोनू हॉल में लगाने वाला था। अब अभिनव और राज मिल्कर पंडितजी से मिलने गए। पंडितजी के बारे में राज जनता था के वो पैसे के लिए कुछ भी कर सकते थे।
राज: नमस्ते पंडितजी, कैसे हो आप।
पंडितजी: ओह राज बेटा कैसे हो तुम, बहुत दिन बाद दर्शन हुए तुम्हारे
राज: जी जी वो बस वो पढाई में थोड़ा सा व्यस्त था पंडितजी,
पंडितजी: अच्छा अच्छा बेटा, हा पढाई तो है ना वो तो है जरूरी।
राज: पंडितजी वैसा एक आपसे छोटा सा काम था अगर आप कर पाओ तो
पंडितजी: मुझसे काम, वो क्या बेटा हैं मैं क्या काम आ सकता हूं
राज: वो कुछ नहीं, वो मेरा एक दोस्त है सोनू, बस उसके घर में थोड़ा उसे कोई ज्यादा सुनता नहीं, वो अच्छे से पढाई भी करता है कॉलेज भी पहले आ गया, घर का एकलौता बेटा भी पंडितजी फिर भी घर में उसे नहीं चलते, इसलिय बस वो उसके लिए थोड़े मदद आप कर देंगे तो बहुत मदद होगी
पंडितजी : ओह अच्छा पर मैं क्या उसकी मदद कर पाउंगा राज बेटा। वो सोनू को देखा है कभी कभी आता है वो उसकी मां के साथ।
राज: जी जी वही पंडितजी, बस अगर आप उसकी मम्मी और पिताजी के सामने जरा सा बढ़ा चड्ढा के सोनू की तारिफ करदें जैसे की सोनू आके आपके यहां अपनी मम्मी के लिए अर्चना करना, उनके लिए एक इतना बोल्डन करूंगा में जरा उसका मान बढ़ जाएगा। बस आपको इतना ही बोलना है और कहना है सोनू साल में एक दो बार आके ऐसा करवाता है अर्चना। उसके मम्मी या डैडी या दून जब भी आपके यहां मंदिर में आए तो बस आप इतना बोल्डेंगे तो बड़ी कृपा होगी।
पंडितजी: अच्छा तो तुम्हारे दोस्त के लिए इतना सब करे हो तुम लोग।
अभिनव: जी जी वो खास दोस्त हैं, बचपन का दोस्त है हमारा सोनू इसलिय बस पंडितजी, वैसे आप आपको फ्री में नहीं, आपकी दक्षिणा ये लीजिये 10000 रुपये
पंडितजी ने पैसे देखे तो उनकी आंखें चमक उठी और अब वो कैसा माना कर सकते हैं इस काम के लिए। बस काम भी तो आसन था, सोनू की मम्मी या पिताजी के सामने सोनू की जामकर तारी थी। अब उनको क्या पता था के ये सब सोनू या उसके दोस्त किस लिए कर रहे हैं, ऐसे राज और अभिनव ने बताया मान लिया।
उधार सोनू की मम्मी की बड़ी सी पोट्रेत भी तय्यर हो रही थी,
इधर पंडितजी को भी बोल दिया गया था। सोनू ने अपनी मम्मी के लिए मेहंदी साड़ी और कंगन भी दिलवाडिय द। इस तरह से चारो ओर से जैसे सोनू की मम्मी के दिल पर सोनू के लिए इमोशनल अटैक्स का चक्रव्यूह तय्यर हो रहा था। ऐसे चक्रव्यूह से निकलना क्या मुमकिन होगा !! सोनू की मम्मी के लिए
उधार घर पर सोनू बस अपनी खोबसूरत मम्मी को निहारता ही रहता, जब डाइनिंग टेबल पर हो, जब वो किचन में काम कर रही हो, जब दादी से बात भी कर रही हो, यहां तक कि जब वो कुछ खा भी कभी रही हो तो बस तब भी चेहरे और बदन से जैसे टोपी ही नहीं पाटी थी ऐसे।
उधार घर पर सोनू बस अपनी खोबसूरत मम्मी को निहारता ही रहता, जब डाइनिंग टेबल पर हो, जब वो किचन में काम कर रही हो, जब दादी से बात भी कर रही हो, यहां तक कि जब वो कुछ खा भी कभी रही हो तो बस तब भी चेहरे और बदन से जैसे टोपी ही नहीं पाटी थी ऐसे।
उधार घर पर सोनू बस अपनी खोबसूरत मम्मी को निहारता ही रहता, जब डाइनिंग टेबल पर हो, जब वो किचन में काम कर रही हो, जब दादी से बात भी कर रही हो, यहां तक कि जब वो कुछ खा भी कभी रही हो तो बस तब भी चेहरे और बदन से जैसे टोपी ही नहीं पाटी थी ऐसे।
दो दिन ऐसे ही चुकंदर गए। उधार पोट्रेट केले वाला भी सोनी की मम्मी को तस्वीर देख कर सोनारहा था ये औरत तो बहुत खूबसूरत है। एकदम महारानी जैसी लग रही तसवीर मुझे। वो भी पोट्रेट को बहुत ही इंटरेस्ट से बना रहा था। सोनू की मम्मी की सुंदरता ही कुछ ऐसी थी शायद। वो किसी को भी मंत्र मुग्ध कर सकती थी। वो नैन नक्श..वो गोरा उनका स्किन और वो चेहरे पर एकदम किलर स्माइल, हमें पोट्रेट बनाने वाले को जैसे लग रहा था वो एक किसी सेलिब्रिटी की पोट्रेट बना रहा हो।
इधर अब आज सुबह शनिवार का दिन था और सोनू की मम्मी और दादी मंदिर जाने को तयार थे। सोनू को अभिनव ने बताया दिया था की पंडितजी को समझौता दिया है ठीक से और वो काम करेंगे। सोनू की मुन्नी और दादी ऑटो में बैठ कर अब मंदिर पांच गए।
पूनम देवी :: नमस्ते पंडीजी..ये लिजिये..अर्चना कर दिजिये।
पंडितजी :: जी जी अभी करदेता हुं। वैसे आप तो हर शनिवार आते हो। वो सोनू क्या आपका ही लड़का है ना
दादी :: हा जी हमारा ही लडका है क्यों
पंडितजी :: नहीं वो बस बहुत ही गुनी और सुशील लड़का है। आजकल ऐसे कहां होते हैं लड़के। कभी कभी आकार वो अर्चना पूजा करवाता है। कुछ ही दिन पहले भी आया था और बोला के मैं प्रतियोगिता में पहला आया हूं और मेरी मां की वजह से ही आया। उनके ही नाम की अर्चना कर दीजिये।
पूनम देवी :: ओह सच पंडितजी। मुझे तो बता भी नहीं।
पंडितजी :: हा हा सच में.. बताया नहीं होगा आपको पर आपका बेटा सच में बहुत सुशील हैं। वर्ना आजकल कौन अपने मां बाप का इतना ख्याल करता प्यार करता है।
दादी ::आखिर मेरा पोता है..लाखों में एक।
पूनम देवी :: जी पंडितजी मेरा लाडला बेटा है और मैं खुशकिस्मत हुं के ऐसा बेटा मिला।
पंडितजी:: हा जी..बस अच्छे से ख्याल रखिए गा उसका..फिर वो भी ख्याल रखागा.. ऐसी संतान मिलना आजकल मुश्किल है..ये लीजिये प्रसाद।
क्या घटना ने जैसे सोनू के मम्मी के दिल को पिघलाड़िया था बहुत ही। अपने बेटे के ऊपर जैसे उनको बहुत ज्यादा गर्व और प्यार। वो भी सोने लगी की सोनू का ज्यादा से ज्यादा ख्याल रखना होगा क्यों की वो इतना कुछ कर रहा था उनके लिए। माँ का दिल वैसा भी बेटे के लिए बहुत ज्यादा इमोशनल होता है और ये वाली ट्रिक बहुत सही से जैसे काम कर रही थी। सोनू की मम्मी के दिल में अब सोनू ने बहुत ज्यादा प्यार और ममता भर दी थी।
पर सोनू के दिल में मम्मी के लिए प्यार और अनाचार का आभास भी था..वो क्या अपने मम्मी को सेड्यूस अब कर पाएगा ??
सोनू की मम्मी और दादी घर वापस लौटे तो सोनू घर पर ही था अपने रूम में। सोनू की मम्मी किचन में जाकर चाय बनाके ले गए अपने बेटे के लिए।
पूनम देवी :: लो बेटा चाय लेलो। क्या करे हो।
सोनू :: कुछ नहीं मम्मी वो बस चैट कर रहा था दोस्तों से आगे आप लोग मंदिर से।
पूनम देवी :: हा बेटा अगाये.. आज क्या बनाना लंच में तेरे लिए।
सोनू :: मम्मी आप कुछ भी बनाना स्वादिष्ट हो रहता ना। मैं तो आपके हाथों का बना कुछ भी खा लेता हूं।
पूनम देवी :: हा बेटा जांती हूं ..इस्लिये तो मेरा राजा बेटा है ….((सोनू की मम्मी ने सोनू के बालो में प्यार से हाथ रखके सहलाये इमोशनल होके कुछ ओस तारा से। सोनू आज मम्मी की आंखों में साफ) साफ अपने लिए डबल प्यार देख सकता था)))
सोनू :: मम्मी आज इवनिंग आइसक्रीम खाने जाने क्या कहीं पे।
पूनम देवी :: नहीं बेटा..दादी मां है न घर पर फिर उनका ख्याल रखना भी तो है..वो अगले हफ्ते गान जाएंगे वो चाची के रिश्ते की शादी है। हमको भी बुलाया है। देखते हैं तेरे डैडी आएंगे तो हम भी जाएंगे आएंगे।
सोनू :: अरे मम्मी नहीं मैं नहीं आउंगा वो गानव..बहुत बोर होता है..कोई दोस्त भी नहीं होते उडर तो और इंटरनेट भी नहीं रहता था से मम्मी।
पूनम देवी :: अच्छा बेटा तेरे डैडी बोलेंगे तो बता दूंगा मैं। अच्छा मैं आज दोपहर को तेरे लिए पनीर की सब्जी और रोटी बनाऊंगा.. तुझे पसंद है ना
(सोनू की एक बार दिल आया की वो अपनी मम्मी को बोल दे की मम्मी मुझे तुम सब से कुछ बोल नहीं पाया)
सोनू :: मम्मी आप के हाथों में जादू हैं…हा बहुत पसंद है मुझे।
पूनम देवी :: बस बस अब ज्यादा तारीफ मत कर ठीक है ना..तू आराम कर बेटा ठीक है ना..
सोनू :: मम्मी वो…
पूनम देवी :: हा सोनू बेटा क्या हुआ।
सोनू :: नहीं कुछ नहीं मम्मी बस आप भी बाकी लेलो थोडा..फिर बाद में बना देना लंच।
पूनम देवी :: अच्छा मेरा कितना ख्याल रखता है… मेरा सोनू बेटा.. तेरे जैसा बेटा तो किस्मत से मिलता है।
सोनू :: नहीं मम्मी आप जैसी मम्मी किस्मत से मिलती हैं। आप को देखते ही बस जैसे चेहरे पर मुस्कान आती है।
पूनम देवी :: हा सच..उम्म बातें भी बड़ी करने लगा है.. अच्छा बेटा तू बाकी लेले मैं भी थोड़े देर बाद लंच बनवाऊंगा.
सोनू :: जी मम्मी।
((आज वैलेंटाइन्स डे था..और सोनू के लिए तो उसकी मम्मी ही उसकी वैलेंटाइन थी पर एक बेटे को अपनी मम्मी से दिल की बात के लिए आना आसान नहीं होता। जब भी दिल की बात बोल्डे। के लिए))
अपनी खूबसूरत मम्मी को अपने रूम से जाते पीछे से बस देखता रह गया सोनू। एक बेटे को मां से ज्यादा कोई प्यार नहीं करता और मां को बेटे से ज्यादा कोई नहीं। इसलिये तो माँ बेटा एक दूसरे के वैलेंटाइन हो तो उससे तो रिश्ता कोई नहीं दुनिया में है।
सोनू का लुंड अब हमेशा से ही अपनी मम्मी के बारे में सोच कर खड़ा रहने लगा था। उस दिन दोपहर को लंच के समय सोनू और उसकी दादी जब डाइनिंग टेबल पे बैठे और सोनू की मम्मी खाना सर्व कर रही थी। शोल्डर के पास लगा हुक शायद थोड़ा ढीला हो गया जिससे उनका पल्लू थोड़ा गिर गया। सोनू तो अपना मुह खोलके ही अपनी मम्मी का क्लीवेज घोरने लग गया।
सोनू की मम्मी बी अपने ख्याल मील लंच परोस कर रही वो तो बस ये जनता थी की याहा कोन प्रार्थना ही उसका अपना बेटा ही तो हाय या बेटे से ये क्या छिपाना लेकिन सोनू की मम्मी जैसी चंचला उसका उसे क्या पता था अपना बेटा नहीं बाल्की एक जवान मर्द देख रहा है