मेरी माँ गर्म अध्याय 5
या सोनू का बटुआ खोला तो उसे सोनी की मम्मी की तस्वीर थी
अभिनव ; ये देखी आंटी
सोनू की मम्मी अपने बेटे के अपने लिए इतनी आराधना देखके सोनू की मम्मी इमोशनल सी हो गई थोड़ी और आज एक ही दिन में इतनी सारी खुशी पा के भी जैसी वो इमोशनल हो रही थी। वहन बच्चन के बीच से वो झट से उठ गई वॉशरूम को क्यों की न चाहते हुए भी उनके आंखों से खुशी के आगे चल रहे थे। अपना फेस वाश करके वो वापस आया। ये जो तेरा मारा था इमोशनल राज और अभिनव ने इसे शायद सोनू की मम्मी के दिल में सोनू के लिए बहुत ज्यादा सॉफ्ट कॉर्नर दिया हो गया था। इतना ज्यादा अपनी मां की इज्जत और आराधना करने वाला बेटा किसी मां को मिल जाए तो उससे ज्यादा किस्मत वाली भला कौन मां होगी। ये सोने रही थी पूनम देवी। पर अभिनव और राज बस सोने रहे थे के सोनू की मम्मी कब मना लेंगे.. सोनू भी शायद यही सोने रहा था..पर वो अपनी मम्मी से सिरफ ने सेक्सुअली अट्रैक्ट किया ही नहीं था पर बहुत उनके लिए दिल में इज्जत और आराधना सच बहुत ज्यादा. उसके दीमाग में एक जैसी भावनाओं का युद्ध चल रहा था अपनी मां के लिए सम्मान..प्यार और आकर्षण के कॉकटेल का।
इतनी खुशी पूनम देवी को आज मिली थी आज से पहले सयाद ही किसी ने उसका जन्मदिन मनाया प्रति दिल के किसी कोने में अब बी पूनम देवी के उदासी थी हर औरत की तरह सोनू की मम्मी के दिल मि ये उस तरह था हमारे बेटे दोस्तो ने हमें जन्मदिन की शुभकामनाएं किआ था उसी तरह सोनू के पापा बी उससे करते। बहुत वो उनकी पत्नी थी या एक पत्नी का ख्याल उसका पति नहीं रखागा तो या कोन रखागा आज का दिन जिस तरह सोनू की मम्मी के यादगर था उसी तरह आज का दिन सोनू के लिए अब यादगार था। रात का खाना होगा। रूम मी चले गए सोनू बी अपने रूम मील बिस्टर पर लाया था लेकिन उसकी आंखो मील निंद कोसो दूर थी रे रह कर उसकी आंखों के सामने आज के दिन की साड़ी घटने आने लगी या वो अपना मोबाइल निकल कर अपने सपनों की शहजादी दे की तस्वीर देखने लगे। अपनी मम्मी की तस्वीर देखते ही सोनू की आंख मि एल्क अलग ही चमक आ गई थी मोबाइल मील तस्वीर देखते देखते सोनू अपनी मम्मी की वही तस्वीर निकल लेटा हाय।
जिस मि उसकी मम्मी आइसक्रीम को बड़े से चाट कर रही थी चाट रही थी
वो तस्वीर देखते देखते ही सोनू अपने की ख्यालो मील खोल गया की उसका हाथ कब उसके पजाने के ऊपर खड़े लुंड पर चला गया उससे खुदा है बात का पता ही चला या वो अपनी मम्मी की तस्वीर देख कर अपने लुंड से लगा को पंत के
मानो उससे समाज रहा हो की कुछ दिन सबर कर लो फिर है हुसैन की परी के नज़ुक गुलाबी होने तुम्हारे ऊपर ही हो पर सोनू का लुंड तो एकदम से बेकाबू होता जा रहा था मानो अभी सोनू ने उसे आज़ाद नहीं किया। देगा
अखिर कब तक सोनू अपने लुंड को पंत की गुलामी मि जक्दे रखता अखिर उससे अपने लुंड को आजादी तो देने ही थी या वो ऐसा नहीं करता तो उसका लुंड भागवत कर डालता। तो सोनू ने अपने पजामे को आला खिस्काया या उससे उतर कर अपना तांगो से बहार निकल दिया उसका बांस उसके अंडरवियर में ऐसा खड़ा था जैसा कोई उसे बहुत बड़ा बांस अपने अंडरवियर मि राखा हो। सोनू ने अपने अंडरवियर को आला खिस्काया तो उसका फैनफैंटा खुली हवा में आते ही ऐसे फुंकरने लगा मानो बरसो के बाद उससे आजादी मिली हो बारसो से भुका हो या वो अपने शिकार को देख कर हमें प्रति झपटने को तय्यर जो था या सोनू होने वाली थी वो थी सोनू की अपनी मम्मी। अपने मम्मी की तस्वीर को देखते सोनू अपने लुंड को सहलाने लगा अपने लुंड को सहलाते सोनू को ऐसे महसूस हो रहा था की तस्वीर में उसकी मम्मी जिस तरह से नरमी चाट रही ही उसी तरह वो अब सोनू का लुंड चाट
सोनू; मम्मी कहा था न मैंने तुमे इस से बड़िया या तस्सी सॉफ्टी खिलांग
सोनू की मम्मी; मस्कराते हुए इसे सॉफ्टी की बात कर रहा था
सोनू; क्यू मम्मी तुम्हारे अपने बेटे की ये नरम मजादार नहीं लगी क्या तुम ये स्वदीस्त नहीं लगी
सोनू की मम्मी; अरे नहीं नहीं बेटा ये क्या कह रहा है तेरी ये सॉफ्टी तो बहुत ही स्वादिष्ट ही पता ही तेरी मम्मी ने आज तक ऐसी मजादार सॉफ्टी पहले नहीं खाई
सोनू; अच्छा मम्मी अब से मील रोज आओ को ये मजार टेस्टी सॉफ्टी खिलाउंगा
सोनू की मम्मी ; सच मेरा राजा बेटा आज कितने बरसो के बाद में ये मलाई वाली खुली का आनंद ले रही हूं या इसके साथ ही सोनू की मम्मी तेज तेज अपना मुह सोनू के लुंड प्रति चला लगी
या का सोनू बी अपनी कमर को तेज रेज चला रहा था की सोनू आआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह कर्ता सोनू अपनी मम्मी के मुह मी ही ने देखा उसके विरे की धार से हमें भरा पड़ा इतना वीर्य निकला था उसके लुंड से
सोनू की मम्मी सोनू से अब कुछ कुछ मेरे फ्रेंडली हो चुकी थी अच्छी खासी है। सोनू और उसकी मम्मी घर पर अब ज्यादा डर तक बात करते हैं..दादी के साथ भी साथ के बात करते हैं.. सीरियल्स से नफ़रत थी…पर उसकी मम्मी को पसंद था..इस्लिये उसे मम्मी की पसंद को जैसी अपनी पसंद बना रही थी। दिन गुज़रते जा रहे थे उसी तरह… अभिनव और राज का भी हर रविवार घर को आना होता था….दादी भी अब जैसे उनसे काफ़ी घुल मिल गई थी… किसी और चीज से..बस वो चाहते की आप उनको समय दो उनकी बातें सुन।
सोनू..राज और अभिनव यही कर रहे थे। अगस्त का महिना भी अब आया था। देखते देखते सिक्स माहे बीट गए थे।
सोनू अभिनव और राज ने जब प्लान बनाया था उससे ठीक अब चे माहे बीट चुके थे। मार्च का महिना भी आया था। अब राज थोड़ा सा जैसे बीच हो रहा था। इतने महिन बीट गए थे और उन्होन अब प्लान के हिसब से जैसे कोशिश की थी। अब क्या आए करें ये सोनें रहे हैं राज और अभिनव। उधार सोनू और उसकी मम्मी अच्छे फ्रेंडली हो चुके थे और सोनू दिन में मौका मिलते ही मम्मी के साथ वक्त बिटाता, रात को सोते समय मम्मी की तस्वीरें देखते देखते तो जाते… होली का त्योहार आया कुछ दिन में। सोनू की मम्मी और पापा तो होली ज्यादा नहीं खेलते थे, पर घर पर हम दिन, चाचा चाची, मामा मामी सब लोग आते पर थोड़ा सा गुलाब गालों पे लगा लेते एक दोसरे को। सोनू भी हमें दिन जब उठा तो उसके घर में सब रिश्तेदार। उसकी मम्मी हर दिन की तरह ही एकदम खूबसूरत लग रही थी और वो सोने रहा था की काश आज थोड़ा सा गुलाल मम्मी को लगा का मौका मिल जाए मुझे भी। उधार राज और अभिनव भी अपने घर से निकले ये सोने के काश आज थोड़ा सा मौसी के साथ होली खेलने का गर मौका मिल जाए तो मजा ही आएगा।
सोनू की मम्मी, चाचीजी और मामीजी सब चैट पर गए द घर के। एक दूसरे को थोड़ा बहुत गुलाल लगा रहे थे। सोनू भी अपने हाथ में थोड़ा सा गुलाल लिया और बस इंतजार कर रहा था के काश थोड़ा सा प्राइवेसी मिल जाए मैं भी जाके लगा दूंगा मम्मी के गोरे गालों पे गुलाल। पर चाचीजी, ममीजी तो मम्मी के साथ ही खड़े थे बातें करते थे, दूर हटे का नाम भी नहीं ले रहे थे। इतने में सोनू को अभिनव का कॉल आया।
अभिनव: अरे सोनू कहां पे हैं तू, हम लोग तेरे घर के बहार खड़े हैं।
सोनू : अच्छा हैं मैं इधर ऊपर चैट पे हुं
अभिनव: क्या कर रहा होली खेल रहा क्या
सोनू: अरे नहीं यार, बस चैट पे खड़ा हूं।
अभिनव: अच्छा क्या मम्मी के साथ होली नहीं खेल रहा क्या, हाहा
सोनू: अरे, इतनी किस्मत किधर मेरी, वैसे भी मेरे घर पर सब रिश्तेदार आए हुए हैं
अभिनव: ओह, हमने तो सोना था हम भी थोड़ा सा चाची के गौर लाल लाल गालो को गुलाल लगा कर या फिर दो लाल कर दोगे
सोनू: चुप यार, मेरा ही इधर मौका नहीं, तुम लोग कहां।
अभिनव: ओह, ये साला रिश्तेदार भी ना, बहुत गलत समय पर आजते हैं.वरना आज हमारा दोस्त के मुलायम गालो को अपने हाथ से गुलाल लगा कर लाल कर रहा होता
सोनू; हा यार सही कहां, अच्छा तुम लोग आओ और तो,
सोनू ने जाके अभिनव और राज को अपने कमरे में बुलाया और बात कर रहे थे, उसकी मम्मी और रिश्तेदार अब भी चैट पर थे।
अभिनव: सोनू अब तो छह महीने हो गए हैं जब से योजना शुरू किया था, कुछ आगे का अब सोना तू क्या।
सोनू: हम नहीं यार कुछ नहीं आरा दिमाग में, बस थोड़ी मम्मीसे अब फ्री में बात होती पर पता नहीं कैसे आगे बढ़ गया क्या करुं हमारे प्लान मेरे फेटिश के लिए।
राज: कुछ सोनचो दोस्तो जल्दी प्राथमिकी, वर्ण और तीन माहेन बाद मुख्य परीक्षा भी शुरू होगा फिर पढाई में व्यस्त होगा हम लोग।
सोनू: हम्म हा वो परीक्षा तो आजायेंगे तीन महीन बाद।
अभिनव: अच्छा मैं आज कुछ बैठा सोनचुंगा, वैसा एक बार आंटी से तो मिल लेने क्या, आज होली को विश करें।
सोनू; हा पर यार वो सब चैट पर हैं और पिताजी भी हैं ना।
राज: अच्छा ओह कम से कम एक बार देखो लेने तेरे मम्मी को दूर से
सोनू: अबे, हाहा तू भी ना बहुत बड़ा है, वैसी मम्मी मेरी हैं सिरफ मेरी जाने हो ना तुम लोग।
अभिनव: अरे हा हा जाते हैं, तेरी मम्मी तेरी ही दिल की रानी ही तेरी मम्मी पर तेरा ही सिरफ कॉपीराइट है, यार हमारी भाभी तो है ही ना हम बस दूर से देख रहे ना यार।
सोनू; अच्छा चलो वो सीढिय़ां के पास वेंटिलेटर है वहां से देखेंगे, चैट पर जाएंगे तो फिर सब रिश्तेदार हैं ना।
अभिनव: अच्छा अच्छा चल फिर।
तीन दूध की सीढ़ियां चढ़ने लगे और वहां एक वेंटिलेटर है जहां से चैट का नजर दिखता है।
तीनो ने देखा के सोनू की मम्मी गजब की सुंदर लग रही थी उनके गोरे गालों पे शायद चाची जी, मामीजी ने हलका सा गुलाल लगा था और सोनू तो अपनी मम्मी का सुंदर चेहरा ही देखराहा था, पर राज की नजरें ब्लाउज पे थी क्यों की आज शायद हलका बहुत थोड़ा सा 1 सेमी क्लीवेज नजर आरा था और राज की नजरें उनकी चिकन गोरी कमर पे थी।
सोनू की मम्मी उनकी तारीफ पीठ करके अब पलटी तो अनलोगों ने देखा आज उसकी मम्मी का ब्लाउज पीछे से रोज के मुकाबल थोड़ा सा खुला था डोरी वाला और उनकी नंगी चिकन पीठ भी तीन लड़कों को कमजोर बना रही।
इतने में चाची ने बोला के एक तस्वीर ले लेटे हैं सबकी, तो चाचाजी पहले मम्मी और पिताजी की तस्वीर लेने लगे। तस्वीर तो चाचाजी ने ली थी, पर मम्मी की सुंदर तस्वीर सोनू के दिल में और राज और अभिनव के दिलो दिमाग में बैठ चुकी थी।
पूनम देवी और चमनलाल शर्मा की तस्वीर होली के दिन।
उसके बाद चाचा जी चाची जी के मम्मी की तस्वीर ली या फिर सैन ने एक ग्रुप फोटो ली। और अब कुछ डर बाद सब रिश्तेदार अपने अपने घर चले गए। राज और अभिनव भी घर चले गए थे सोनू के दिल में हसरत ही रह गई की वो अपनी मम्मी के गोर पर रंग लगा खातिर हमें अपने प्यार के रंगो से रंग डाले सोनू ने अपने कमरे में मिल जा कर अपनी मम्मी की तस्वीर निकली तस्वीर को मैं अपनी मम्मी के गालो पर रंग लगा दिया उससे एसा लगने लगा की सच में मम्मी के फूल लाल गालो पर रंग लगा रहा था
वो सोनू ने बहुत तायरी की थी अपनी मम्मी से होली खेलने की सैन धारी की धारी रह गई वो चाहता की अपनी पिचकरुई से अपनी मम्मी को रंग डाले उसकी पिचकारी मील रंग बी पूरा भरा पाड़ा था लेकिन ऐसा नहीं जो था वो आगे के बारे में सोचने लगा
अभिनव अब हम अपने घर जाके आए का प्लान क्या करें सोने में लग गया। कुछ सूझ नहीं रहा था उसे। इतने महिने अब बीट चुके थे। उसे राज को कॉल किया और घर बुलाया..एक घंटे बाद राज पांच गया उसके घर फिर।
अभिनव :: हैं यार कुछ सूझ नहीं रहा यार आने का प्लान…फिर परीक्षा भी आने वाले है तीन माहिने में।
राज :: हा परीक्षा आजायेंगे तो हम भी व्यस्त होंगे थोड़ी पढाई करनी होगी वर्ण तेरा क्या है..मेरे माता-पिता तो चेतावनी देंगे।
अभिनव :: हैं तो मुझे भी कम से कम पास मार्क्स लाने होंगे वर्ना डिग्री में कैसे मिलेंगे।
राज :: हा तो फिर क्या करें..सोनू की मम्मी सोनू से थोड़ी फ्रेंडली हुई..गिफ्ट भी लिया और दादी को भी हमने पाया है….पर यार वो फेटिश को करने को अब भी उसकी मम्मी को मनाना आसान नहीं।
अभिनव :: हम्म..एक आइडिया आया है यार पर उसके लिए एग्जाम तक इंतजार करना पड़ेगा…
राज :: ओह्ह्ह परीक्षा तक…पर अच्छा इतने महिने इंतजार किया तो अब और क्या कर सकते हैं। पर प्लान वर्कआउट होगा क्या…
अभिनव :: प्लान वर्कआउट हो सकता पर उसके लिए सोनू को जी तोड़ पढाई में मेहंदी करके कॉलेज पहला लाना होगा…हम तीन उसके घर कंबाइंड स्टडीज करेंगे और उसे मम्मी से वादा ले लेंगे की सोनू गर कॉलेज फर्स्ट अगया इस बार तो आपको हमें हम सबको ट्रीट दीनी होगी…कॉलेज फर्स्ट की बात से मुझे लगता है आंटी मान लेगी..उनको क्या पता हमारी ट्रीट क्या है.हाहा…
राज :: ओह हा एक काम करेंगे यार रविवार के दिन..उसके पिताजी और दादीजी जब सब होंगे तो ये बात करेंगे और आंटी से इलाज का वादा ले लेंगे..क्या बोलता है….उसके पिताजी भी कॉलेज पहले का सुनके मन थोडी करेंगे और दादी को तो पहले से ही पता लिया ना..
अभिनव :: हैं वाह..राज तू भी मेरे साथ रहके खुराफाती दिमाग होगा है साले..हाहा
अभिनव :: हैं वाह..राज तू भी मेरे साथ रहके खुराफाती दिमाग होगा है साले..हाहा
राज :: हाहा हैं नहीं यार मुझे वो फेटिश का क्रेज होगा है इसलिय बस… याद है हम दिन मैंने अपना लैपटॉप पे तुझे सोनू को कुछ दिखा था…सोंच सोने के बस सोनू की मम्मी को हमें पोजीशन में उफ्फ .. …………
अपडेट यार थोड़ा अनाचार या छेड़खानी करवाओ दोस्तो से भी या बाथरूम में नंगी नहीं हुए कीहोल से ये वेंटिलेटर से वो लोग देखें उसकी ब्रा पैंटी से खेले या हम पर मुंह भी मारे जिस के हमें रंडी को धीरे धीरे सेड्यूस होने में समय लगे वो आनंद लें करने लगे या थोड़ा खुल कर रहे …. जवानी के जलवे है यार सबको लूटने दो ना भाई….
अभिनव और राज फिर से जीआईएफ वीडियो देखे ताजा होगा और उन अगले दिन कॉलेज में लंच ब्रेक में सोनू से बात की।
अभिनव :: यार सोनू हमको एक विचार आया है..अब तो इतने महीने होंगे तुझे वो वो पूरी करनी है के नहीं।
सोनू :: हा यार पर वो कैसे कुछ समझ नहीं आता:
अभिनव :: हा मेरे पास एक प्लान है सुन………
10 मिनट में सोनू को पूरा प्लान बताया।
सोनू :: ओह प्लान तो अच्छा है यार पर…वो दीपक ही आएगा पहला मैं दूसरा या तीसरा ही आउंगा।
राज :: अरे कुछ पाने के लिए बहुत सारी मेहंदी तो करनी पड़ेगी।
अभिनव :: हा सही बोला..मैं भी पहले आओंगा..पर पीछे से..हाहा।
सोनू :: अच्छा माई जी तोड़ मेहंदी तो करुंगा तुम लोग रविवार को सुबह जल्दी आजाना घर नाश्ते का समय क्यों की सब एक साथ खाने की मेज पे होते हैं ना हम समय।
अभिनव :: हा हम लोग पांच जाएंगे 9 बजे तक ही टेंशन मत ले।
संडे अगया और प्लान के हिसब से ही राज और अभिनव 9 बजे ही पांच गए सोनू के घर… लाराही थी नाश्ता।
अभिनव :: नमस्ते अंकल..नमस्ते दादी..
चमन लाल शर्मा :: आओ आओ बच्चन सुर कैसी चल रही पढाई..आओ तुम लोग भी करो नाश्ता।
राज :: नहीं नहीं अंकल हम तो करके आए हैं..वो बस कंबाइंड स्टडीज आज सोना जल्दी शुरू कर दें तो आएंगे।
पूनम :: आर राज और अभिनव बेटा..बैठ जाओ तुम लोग भी..कोई बात नहीं खाके आए तो क्या थोड़ा खालो फिर से आओ आओ बैठाओ।
सोनू :: हा बैठा यार तुम लोग भी आओ।
राज और अभिनव भी टेबल पर बैठे और अब खाने लगेंगे।
चमन लाल शर्मा :: और तो परीक्षा कब से बचपन तुम्हारे।
राज :: जी अंकल वो दो महान बाद हैं..इस्लिये तो अब और मेहंदी करनी होगी।
अभिनव :: जी अंकल। वो अबी बार तो सोनू ने बोला की कॉलेज पहले आने की कोशिश करेगा पूरी।
चमन लाल शर्मा :: हा हा सोनू बेटा गरीब कोशिश करो…कॉलेज पहले आना बहुत गौरव की बात है।
पूनम शर्मा :: सोनू मेरा बेटा कॉलेज पहला गर आया तो फिर पूरे मोहल्ले ने कॉलेज में नाम होगा।
अभिनव :: क्यूं नहीं आंटी..सोनू गर जी तोड़ मेहंदी करेगा तो आ सकता…
राज :: हाहा अंकल आंटी..आप लोग वादा कर दो सोनू को अच्छी सी ट्रीट डोगी तो वो और जी तोड़ मेहंदी करेगा।
चमन लाल शर्मा :: हा हा हैं जो भी मांगेगा दिलवा दूंगा उसमे कोई टेंशन नहीं..
राज :: आंटी आप भी ट्रीट डोगी ना..दादी मां ही गवाह है हा।
दादी :: हैं बहू..हा बोल्डे अब बच्चन को बच्चे इतनी मेहंदी जो कर रहे।
पूनम देवी :: हैं बाबा मैंने कब मना किया है…जो भी मांगेगा दे दूंगा…ले दादी मां के सर की कसम..हाहा खुश..
ये सुनके..राज और अभिनव ने सोनू को बुरी मुस्कान दी…हमें मुस्कुराओ ऐसा लग रहा था उन्हें अब मंजिल उन्हें कुछ कुछ नजर आने वाली थी…मंजिल का नाम था पूनम देवी…सोनू की मम्मी।
सोनू को अब अभिनव और राज ने एक बुराई मुस्कान दी जैसे ही डाइनिंग टेबल पे सोनू की मम्मी ने बोला के ट्रीट जो सोनू मांगेगा दूंगा वो। चमन लाल शर्मा ने भी बोला के जो मांगेगा दूंगा। दादी की भी पूनम देवी ने अब कसम खाली थी सब के सामने, पर सोनू की मम्मी को क्या पता था के सोनू के दिल में क्या है, उसकी क्या ख्वाहिश होगी। ऊपर से उसे दो दोस्त राज और अभिनव के खुराफाती दिमाग भी साथ में सोनू के।
ब्रेकफास्ट करके अब सोनू और उसके दोस्त सोनू के रूम में जाके पढाई करने के बहाने बातें करने लग गए।
सोनू: तुम लोगों ने सब ज़िमेदारी मुझे दाल दी, अब मेहंदी करके पहला लाना पड़ेगा, और पहला आना अपने कॉलेज में कितना मुश्किल है जाने हो ना।
अभिनव: अरे क्या करुं, मम्मी तेरी हैं, पढाई में भी तू ही अच्छा है, वर्ना मैं लाते पहले हाहा
राज: सोनू, तू तो वैसा भी तीसरा तो आता ही है, मेहंदी ज्यादा करले बस दो महीने, तुझे हम लोग भी परेशान नहीं करेंगे अगर तुझे हम लोगन की वजह से परेशान हो रहा तो।
सोनू: अरे ऐसी बात नहीं यार, पर, ठीक है अब क्या कर सकते हैं, मेहंदी तो डबल करनी पड़ेगी मुझे।
अभिनव :: हा बस तू एक बार कॉलेज पहला आजा, फिर अब तो तेरी मम्मी को तेरी इच्छा पूरी करनी ही होगी, पीछे हट भी नहीं सकती, तेरे डैड और तेरे दादी के सामने कसम लेली हैं ना।
सोनू : अच्छा पर अबे तुम दूं होंगे तो मेरे मम्मी बिलकुल नहीं मानेगे शायद।
अभिनव: अच्छा, क्या यार इतनी मेहंदी की ना हम दोंनों ने भी, अच्छा ठीक है, हम तयारी तो कर सकते हैं और कौनसा कुछ गलत काम करने वाले हैं इस्मीन..
सोनू : हा पर फिर भी मेरी मम्मी शर्मीली टाइप की हैं जाने तो हो ना तुम दून
राज: अरे जाते हैं, पर मैं तो बस इतने दिन से वेटिंग में हूं यार के कब तेरी मम्मी के साथ फेटिश पूरी करेगा। मजा आएगा। तेरा माइंड फ्रेश करने को देख मैं कुछ दिखता हूं तुझे।
राज ने जो दिखाया उपयोग देख कर अभिनव और सोनू हेयर रेहगे, ये तो सोनू की मम्मी का जीआईएफ था, जो राज ने सोनू की मम्मी जब पास वाली दुकान गई थी, तो राज ने चुपके से फॉलो किया और, चुपके से बने से वीडियो पीछे लिया था। सोनू की मम्मी के.ए.
अपनी मम्मी की तस्वीर देख कर सोनू बी हेयर था
सोनू :: अबे ये कब खेंची ट्यून।
राज :: अरे वो तेरी मम्मी शायद वो पदोस की चाची के साथ कुछ लाने गए थे मैंने रास्ते में देखा तो बस लेलिया।
अभिनव :: जाने दे ना ले लिया ना..अब सोनू बस तू परीक्षा पे फोकस कर अपनी ख्वाहिश पूरी करनी है तो।
सोनू :: हा वो तो कोषिश करुंगा..पर पहले आने को रात रात भर जग के मेहंदी करनी पड़ेगी।
राज :: अरे दो महेनत है पर देख एक बार.. उफ्फ तेरी मम्मी का बदन क्या तू नहीं चाहेगा ऐसे उनके गदराए और बटर बदन को गुदगुदी करके अपने फेटिश पूरी करना।
राज जैसे सोनू को अपने मम्मी के बार में बोलके जैसा जी तोड़ मेहंदी को ऊंचा रहा था। आखिर कौन नहीं सोनू की मम्मी जैसी औरत के लिए आकर्षित नहीं होगा..सोनू को डबल आकर्षण था क्यों का रिश्ता ही ऐसा था.. मां का रिश्ता.
अब हम दिन के बाद से सोनू परीक्षा के लिए जी तोड़ मेहंदी करने लग गया..कॉलेज को जाता तो फिर सीधा घर आके पढाई में लग गया। राज भी थोड़ा बहुत पढने लगा था क्यों की वारना उसके माता-पिता गुसा करते। अभिनव को कोई चिंता नहीं थी पढाई की..उसके पिताजी की दौलत जो थी। बस पास हो जाने का देख रहा था और बस ये सोने रहा था के सोनू कॉलेज पहला आजे बस।
सोनू रात रात भर भी देर तक पढाई करने लग गया था..कभी कभी उसके पिताजी या मम्मी रात को उठते तो उसके कमरे की रोशनी पर हाय रहते वो पढ़ता रहता। दुनिया को भूल कर बस सोनू अब पूरा फोकस परीक्षा पर रख चुका था।
उसकी ऐसी मेहंदी देखो तो सोनू के पिताजी खुद अपनी पत्नी से बोले के ये कॉलेज पहले आया तो नई बाइक दिलवा दूंगा। पूनम देवी बोल उठी “हा पर पहले उससे पूछ लेना उसे क्या चाहिए। बाइक या कुछ और फिर दिलवाना” .. कुछ और वो क्या था तो सोनू की मम्मी को भी पता नहीं था।
दिन बीट रहे थे और अब तो बारिश का मौसम भी हलका हलका शुरू हो गया था। एक बार जब सोनू अपनी मम्मी को मार्केट में ले गया तो वहां तेज बारिश शुरू होगी..बाइक पार्क करके वहां किसी की दुकान के पास खड़े द डो.. बारिश रुक नहीं रही थी और बाइक पर नहीं जा सकते थे इतने बार मुझे सोनू को आवाज़ सुना दी..कोई उसे जैसा पुकार रहा था..आगे देखा तो अभिनव अपनी कार से बुला रहा था….
अभिनव :: अरे सोनू..चाची..अजय मैं ड्रॉप करदुंगा…तू बाइक इधर ही कहिन पार्क करदे..बाद में आके ले लेना..आजाओ।
सोनू और उसकी मम्मी जल्दी जल्दी उसी कार के पास गए और अंदर बैठे गए..
सोनू :: यार अच्छा हुआ तू मिल गया वर्ना आज यहां पे फस जाते।
पूनम देवी :: थैंक यू बेटा..पर तुम यहां कैसे।
अभिनव :: वो मेरी कार सर्विसिंग को दी थी आंटी। लेने आया..इधर से गुजरा तो आप लोग देख गए।
अभिनव अपनी कार के मिरर से सोनू की मम्मी को ही घोर रहा था.. साड़ी और बाल उनके भीग कर और भी खूबसूरत लगारे थी.. साड़ी से ही वो अपने गाल और गले को पोंच रही थी.. जिस से सोनू से का पल्लू उसकी चुचियो से टोपी चूका या ब्लाउज गीला होने की वजह से एकदम चिपक गया था
सच में ये नज़र देख कर ऋषियो मुनियो का इनाम बी ढोल जाए
पूनम देवी :: और बेटा तुझे कैसी चल रही पढाई..
अभिनव :: वो बस ठीक चल रही आंटी..अबकी बार सोनू तो पक्का लायेगा देखलेना कॉलेज फर्स्ट।
पूनम देवी :: तुम्हारे मुह में घी शककर बेटा..
अभिनव :: आंटी पहले आया तो फिर हम लोगिन को भी ट्रीट चाहिए…सिर्फ सोनू को मिलेंगे क्या ट्रीट।
पूनम देवी :: हैं हा बेटा क्यूं नहीं..तुम लोग जो बोलो बनवाडुंगी..दिला दूंगा…
अभिनव ने सोनू को आंख मारी जैसे के इशारा से बोला के देख हमको भी थोड़ा बहुत मौका देना … 90 प्रतिशत तेरा 10 प्रतिशत हमारा।
सोनू उसे पीछे की सीट से वाट्सएप किया..श अभी ज्यादा बोल मैट परीक्षा के बाद देखेंगे.. सोनू अपनी साइड में बैठी सुंदर मम्मी को भी बार बार देख रहा था…. और udhar अभिनव अपनी कार की मिरर से.. ….घर अगया और वो लोग उतर के चले गए……इस घटना से शायद सोनू की मम्मी भी सोने लगी की सोनू के दोस्त बहुत मददगार हैं…पर असलियत क्या पता थी उनको !! !
दिन बीट रहे थे..परीक्षाएं आने में लग गए..सोनू की मेहंदी परीक्षा के लिए और ज्यादा बढ़ गई थी…परीक्षा के बाद परिणाम आने में 10 दिनों का समय होता है। सोनू बस सोनचरा था अब मेरी नींद पूरी ना हो तो भी दास दिन आराम से सोजाउंगा। सोनू के डैडी अपनी दुकान के लिए ऑर्डर ले रहे थे..ये व्यस्त सीजन होता था उनका..दीवाली आने वाली थी कुछ दिनों में ही..सोनू की मम्मी भी हमेशा की तरह घर के काम में व्यस्त थी।
परीक्षा का समय आखिर अगया एबी।
सुबाह उठते ही परीक्षा के लिए भागा… और पेपर लिखना आके फिर से पढाई करना… बहुत ही तनावपूर्ण होगा था सोनू के लिए। परीक्षा को सोनू उसके दोस्तों के साथ ही जाता था पर अब है मौके पे बस जाते समय भी पढाई होती थी।
सोनू के परीक्षा काफ़ी अच्छे जा रहे थे पार कॉलेज टॉपर दीपक भी बहुत इंटेलिजेंट था बस उसका ही डर था सोनू को। सोनू घर में परीक्षा के दिनों में जब पढाई कराह होता है तो जब बहुत ज्यादा तनाव होता है और देर रात तक पढाई में कभी कभी उसकी जब आंख बंद होने लगती है तो अपना लैपटॉप खोलके अपनी सुंदर मम्मी की तस्वीर देख थोड़ा ताजा हो जाता है। उसकी मम्मी का आकर्षण सारे स्ट्रेस को मिटा सकता था।
एक्जाम बीट रहे थे… बारिश का मौसम भी खतम होके अब तो सरदी का मौसम आया था। सरदी में देर रात तक पढाई करने से सोनू को थोड़ा सा ज़ुखम और बुखार आया…पर सोनू ने मेहंदी कम नहीं की। सोनू के पिताजी और मम्मी ने बोला के बाकी लेले थोड़ा पर वो नहीं मान रहा था..उसके ऊपर तो अब जैसे कॉलेज पहले आने का भूत सवार था….
लास्ट एग्जाम का दिन आया.. सोनू के पापा ने दावा ला दी थी उसके लिए तो बुखार तो कम हो गया था.हलका दा जुखम था अब भी..पर एग्जामिनेशन आज खतम होने का एक सुख भी था उसे। तीन महिने को जी तोड़ मेहंदी आज खत्म होने वाली थी। अभिनव की कार में बैठे सोनू और राज भी अब अंतिम परीक्षा देने कोलाज को निकले पाए।
अभिनव :: अच्छा सोनू आज तो आखिरी है परीक्षा..फिर क्या बोलता आज परीक्षा के बाद कोई फिल्म देखने चलें क्या।
राज :: हा यार बहुत तनाव होगा।
सोनू :: मैं घर पर बोलके नहीं आया हूं ना..कल जाएंगे क्या बोलता वैसा भी कल से फ्री होंगे ना..
अभिनव :: अच्छा ठीक है यारी
टीनॉन स्कूल पांच कर अब परीक्षा देने लग गए। ..परीक्षा तीन घंटे बाद खतम हुआ और सोनू ने पेपर सबमिट करने के लिए चेन की सांस ली … परीक्षा हॉल से बहार निकले हुए बस अब ये सोने रहा था .. मैंने तो अपनी तरह से मेहंदी करदी भगवान .. अब तुम सम्भाल .पहले आना है अबकी बार…सोनू। अभिनव और राज फिर से कार में बैठे घर की ओर निकल पाए…
सोनू :: आज तो जाके ख़ूब सोंगा यार… बहुत दिन से नहीं सोया ठीक से।
राज :: हा मैं भी वैसे भी अभी दास दिन बाद परिणाम हैं..
अभिनव :: हा दास दिन में परिणाम है..देखते हैं हमारे इतने दिन की मेहंदी रंग लाएंगे की नहीं…जनवरी से अब नवंबर अगया…इतनी मेहंदी तो हा कभी नहीं की..
तीन अब बात करते हुए हवे घर चले गए..सोनू घर ले जाके सीधा तो गया तो बस वो रात को डिनर टाइम को ही उठा…आज से फ्री था वो..पर परीक्षा देने के बाद की टेंशन परीक्षा से ज्यादा होते हैं वो अब वही महसूस कर्रहा था।
एक्जाम बीट रहे थे… बारिश का मौसम भी खतम होके अब तो सरदी का मौसम आया था। सरदी में देर रात तक पढाई करने से सोनू को थोड़ा सा ज़ुखम और बुखार आया…पर सोनू ने मेहंदी कम नहीं की। सोनू के पिताजी और मम्मी ने बोला के बाकी लेले थोड़ा पर वो नहीं मान रहा था..उसके ऊपर तो अब जैसे कॉलेज पहले आने का भूत सवार था….
लास्ट एग्जाम का दिन आया.. सोनू के पापा ने दावा ला दी थी उसके लिए तो बुखार तो कम हो गया था.हलका दा जुखम था अब भी..पर एग्जामिनेशन आज खतम होने का एक सुख भी था उसे। तीन महिने को जी तोड़ मेहंदी आज खत्म होने वाली थी। अभिनव की कार में बैठे सोनू और राज भी अब अंतिम परीक्षा देने कोलाज को निकले पाए।
अभिनव :: अच्छा सोनू आज तो आखिरी है परीक्षा..फिर क्या बोलता आज परीक्षा के बाद कोई फिल्म देखने चलें क्या।
राज :: हा यार बहुत तनाव होगा।
सोनू :: मैं घर पर बोलके नहीं आया हूं ना..कल जाएंगे क्या बोलता वैसा भी कल से फ्री होंगे ना..
अभिनव :: अच्छा ठीक है यारी
टीनॉन स्कूल पांच कर अब परीक्षा देने लग गए। ..परीक्षा तीन घंटे बाद खतम हुआ और सोनू ने पेपर सबमिट करने के लिए चेन की सांस ली … परीक्षा हॉल से बहार निकले हुए बस अब ये सोने रहा था .. मैंने तो अपनी तरह से मेहंदी करदी भगवान .. अब तुम सम्भाल .पहले आना है अबकी बार…सोनू। अभिनव और राज फिर से कार में बैठे घर की ओर निकल पाए…
सोनू :: आज तो जाके ख़ूब सोंगा यार… बहुत दिन से नहीं सोया ठीक से।
राज :: हा मैं भी वैसे भी अभी दास दिन बाद परिणाम हैं..
अभिनव :: हा दास दिन में परिणाम है..देखते हैं हमारे इतने दिन की मेहंदी रंग लाएंगे की नहीं…जनवरी से अब नवंबर अगया…इतनी मेहंदी तो हा कभी नहीं की..
तीन अब बात करते जल्दबाजी में घर चले गए..सोनू घर ले जाके सीधा तो गया तो बस वो रात को डिनर टाइम को ही उठा…आज से फ्री था वो..पर परीक्षा देने के बाद की टेंशन परीक्षा से ज्यादा होते हैं वो अब वही महसूस कर्रहा था।
अगली सुबा सोनू काफ़ी डेर से उठा। जब उसकी आंख खुली तो 9 बज रहे थे। उसके पिताजी शॉप को जाने वाले ही और उसकी मम्मी से दादी से बात कर रहे थे।
चमन लाल शर्मा :: अम्मा वो गानव की ज़मीन का सौदा हो गया है…वो सरपंच जी ने करवा दिया तो मुझे दिवाली पे बुलाया है कागज लेके।
दादी :: चलो अच्छा हुआ बेटा..वैसे भी अब कौन रहता है मुझे…
चमन लाल शर्मा :: हा अम्मा..तीन साल से तो वो ज़मीन बेचने की कोशिश में था। अच्छा सुनती हो..वो मैं दीवाली पूजा करके निकल जाउंगा 8 तारिक को फिर ज़मीन का सौदा..वो वकील से सब पेपर बनवाके आजुंगा 10 को..
पूनम देवी :: अच्छा जी ठीक हैं।
सोनू ब्रश करते हुए दूर से अपनी मम्मी को देख रहा था और बातें उनकी सुन रहा था..सुबाह उसकी मम्मी का सुंदर चेहरा देख के फ्रेश हो गया करता था सोनू। उसके पिताजी अभी दुकान को गए और सोनू ने नाश्ता कर लिया और खाते खाते ही कैलेंडर देख रहा था। अचानक उसे याद आया की उसका नतीजा 6 तारिक को आने वाला है…और अभी उसे सुना था के उसके पिताजी 8 को गान जाराहे…हे भगवान। सोनू झट से नाश्ता खतम करके अपने दोस्तों को फोन लगा… अभिनव को कॉल करके वो फिर अभिनव के घर भागा।
कुछ ही डर में सोनू अभिनव के घर में गया और उसके पीछे ही राज भी आया.. कॉफी पीने के बाद वो लोग बात करने लगे..
अभिनव :: हा सोनू तूने क्यों तत्काल मिलने को बोला बता।
सोनू :: यार वो हमारे रिजल्ट 6 को आरे ना..
अभिनव :: हा हा 6 को ही आएंगे क्यों पर।
सोनू: वो आज ही सुबा मेरे डैडी बोल रहे थे की 8 को वो गान जाएंगे कुछ जमीन है वहां बैठने की और फिर 10 को शाम तक आएंगे।
ये सुनके जैसे अभिनव और राज की आंखें जैसे चमक उठी
राज :: ओह्ह वाह..यार तेरे डैड का मतलब है दो दिन नहीं रहेंगे इससे बढ़िया मौका नहीं यार सोनू अगर ट्यून फर्स्ट रैंक लालिया तो।
सोनू :: हा पर यार फर्स्ट रैंक ललिया तो भी मेरी मम्मी को मना… kaise…
अभिनव :: अरे तेरी मम्मी ने तेरी दादी की कसम खाई थी भूल गया क्या वो अब पीछे कैसी टोपी सकती.. तेरी ख़्वाहिश तो पूरी करनी होगी ही ना और फिर दूसरा विकल्प है क्या।
राज :: हा यार बस तू पहले आजा और फिर हम भी तेरी मम्मी को तीन मिल्के रिक्वेस्ट करके कुछ भी करके उनका वादा याद दिलाके मनाएंगे।
सोनू। :: अरे तुम लोग..तुम लोग.पर….
अभिनव :: हैं यार अब भी मेहंदी की ना यार इतनी कृपया क्या हम नहीं शामिल हो सकते हैं..वैसे भी तेरी मम्मी की पवित्रता पे कौनसा आने वाला है यार
राज :: हा यार कृपया यार लगभग एक साल हमने भी प्रतीक्षा करें किया इतनी मेहंदी की … कृपया सोनू।
सोनू :: पर यार मुझे मेरी मम्मी से बहुत प्यार है और मेरा हक है न सिरफ उने।
अभिनव :: हा तेरा ही रहेगा यार हक पर बस ये एक ही तो इच्छा है ना…प्लस अब देख मैंने तो इतने पैसे भी खारच कर डाले..पैसे की बात नहीं पर मैं कर रहा अनुरोध करने के लिए..
सोनू :: अच्छा पर पहले मम्मी माने तो मेरे हाथ में क्या है यार..
राज :: हा बस तेरा फर्स्ट रैंक आने दे फिर देख मजा ही मजा आएगा… वैसा अभी भी मैंने और अभिनव ने कुछ ऑनलाइन ऑर्डर किया है।
सोनू :: क्या ऑर्डर किया..ये अभिनव तू कितने मोबाइल बदलेगा रे।
अभिनव :: अरे मोबाइल नहीं हैं..वो हमारी फेटिश की काम की चीज है।
सोनू :: ओह क्या है वो क्या…
कुछ ही डर में सोनू अभिनव के घर में गया और उसके पीछे ही राज भी आया.. कॉफी पीने के बाद वो लोग बात करने लगे..
अभिनव :: हा सोनू तूने क्यों तत्काल मिलने को बोला बता।
सोनू :: यार वो हमारे रिजल्ट 6 को आरे ना..
अभिनव :: हा हा 6 को ही आएंगे क्यों पर।
सोनू: वो आज ही सुबा मेरे डैडी बोल रहे थे की 8 को वो गान जाएंगे कुछ जमीन है वहां बैठने की और फिर 10 को शाम तक आएंगे।
ये सुनके जैसे अभिनव और राज की आंखें जैसे चमक उठी
राज :: ओह्ह वाह..यार तेरे डैड का मतलब है दो दिन नहीं रहेंगे इससे बढ़िया मौका नहीं यार सोनू अगर ट्यून फर्स्ट रैंक लालिया तो।
सोनू :: हा पर यार फर्स्ट रैंक ललिया तो भी मेरी मम्मी को मना… kaise…
अभिनव :: अरे तेरी मम्मी ने तेरी दादी की कसम खाई थी भूल गया क्या वो अब पीछे कैसी टोपी सकती.. तेरी ख़्वाइश तो पूरी करनी होगी ही ना और फिर दूसरा विकल्प है क्या।
राज :: हा यार बस तू पहले आजा और फिर हम भी तेरी मम्मी को तीन मिल्के रिक्वेस्ट करके कुछ भी करके उनका वादा याद दिलाके मनाएंगे।
सोनू। :: अरे तुम लोग..तुम लोग.पर….
अभिनव :: हैं यार अब भी मेहंदी की ना यार इतनी कृपया क्या हम नहीं शामिल हो सकते हैं..वैसे भी तेरी मम्मी की पवित्रता पे कौनसा आने वाला है यार
राज :: हा यार कृपया यार लगभग एक साल हमने भी प्रतीक्षा करें किया इतनी मेहंदी की … कृपया सोनू।
सोनू :: पर यार मुझे मेरी मम्मी से बहुत प्यार है और मेरा हक है न सिरफ उने।
अभिनव :: हा तेरा ही रहेगा यार हक पर बस ये एक ही तो इच्छा है ना…प्लस अब देख मैंने तो इतने पैसे भी खारच कर डाले..पैसे की बात नहीं पर मैं कर रहा अनुरोध करने के लिए..
सोनू :: अच्छा पर पहले मम्मी माने तो मेरे हाथ में क्या है यार..
राज :: हा बस तेरा फर्स्ट रैंक आने दे फिर देख मजा ही मजा आएगा… वैसा अभी भी मैंने और अभिनव ने कुछ ऑनलाइन ऑर्डर किया है।
सोनू :: क्या ऑर्डर किया..ये अभिनव तू कितने मोबाइल बदलेगा रे।
अभिनव :: अरे मोबाइल नहीं हैं..वो हमारी फेटिश की काम की चीज है।
सोनू :: ओह क्या है वो क्या…
कुछ ही डर में सोनू अभिनव के घर में गया और उसके पीछे ही राज भी आया.. कॉफी पीने के बाद वो लोग बात करने लगे..
अभिनव :: हा सोनू तूने क्यों तत्काल मिलने को बोला बता।
सोनू :: यार वो हमारे रिजल्ट 6 को आरे ना..
अभिनव :: हा हा 6 को ही आएंगे क्यों पर।
सोनू: वो आज ही सुबा मेरे डैडी बोल रहे थे की 8 को वो गान जाएंगे कुछ जमीन है वहां बैठने की और फिर 10 को शाम तक आएंगे।
ये सुनके जैसे अभिनव और राज की आंखें जैसे चमक उठी
राज :: ओह्ह वाह..यार तेरे डैड का मतलब है दो दिन नहीं रहेंगे इससे बढ़िया मौका नहीं यार सोनू अगर ट्यून फर्स्ट रैंक लालिया तो।
सोनू :: हा पर यार फर्स्ट रैंक ललिया तो भी मेरी मम्मी को मना… kaise…
अभिनव :: अरे तेरी मम्मी ने तेरी दादी की कसम खाई थी भूल गया क्या वो अब पीछे कैसी टोपी सकती.. तेरी ख़्वाइश तो पूरी करनी होगी ही ना और फिर दूसरा विकल्प है क्या।
राज :: हा यार बस तू पहले आजा और फिर हम भी तेरी मम्मी को तीन मिल्के रिक्वेस्ट करके कुछ भी करके उनका वादा याद दिलाके मनाएंगे।
सोनू। :: अरे तुम लोग..तुम लोग.पर….
अभिनव :: हैं यार अब भी मेहंदी की ना यार इतनी कृपया क्या हम नहीं शामिल हो सकते हैं..वैसे भी तेरी मम्मी की पवित्रता पे कौनसा आने वाला है यार
राज :: हा यार कृपया यार लगभग एक साल हमने भी प्रतीक्षा करें किया इतनी मेहंदी की … कृपया सोनू।
सोनू :: पर यार मुझे मेरी मम्मी से बहुत प्यार है और मेरा हक है न सिरफ उने।
अभिनव :: हा तेरा ही रहेगा यार हक पर बस ये एक ही तो इच्छा है ना…प्लस अब देख मैंने तो इतने पैसे भी खारच कर डाले..पैसे की बात नहीं पर मैं कर रहा अनुरोध करने के लिए..
सोनू :: अच्छा पर पहले मम्मी माने तो मेरे हाथ में क्या है यार..
राज :: हा बस तेरा फर्स्ट रैंक आने दे फिर देख मजा ही मजा आएगा… वैसा अभी भी मैंने और अभिनव ने कुछ ऑनलाइन ऑर्डर किया है।
सोनू :: क्या ऑर्डर किया..ये अभिनव तू कितने मोबाइल बदलेगा रे।
अभिनव :: अरे मोबाइल नहीं हैं..वो हमारी फेटिश की काम की चीज है।
सोनू :: ओह क्या है वो क्या…
सोनू: अबे ये क्या है.. गुदगुदी किट..पागल मेरी मम्मी बहुत संवेदनशील है ये क्या प्लान कर रहा है..
राज :: हैं यार सोनू..पहले तेरी मम्मी मान जाए तो फिर ये सब ट्राई करने का और कौनसा हम एक साथ ट्राई करेंगे..हाहा ब्रेक देंगे ना।
सोनू :: आर पर यार वो किट में है क्या पर..
अभिनव :: हैं जब आएगा तो सब बताउंगा ना यार आएगा 4 5 दिन में ही।
राज : सुन पर अगर ती पहले आया ना तो तू पहले मना करने की कोशिश करना
अभिनव :: अच्छा एक काम करले फिर…तू ना एक पेपर पर लिख उन्हें देना तेरी इच्छा ठीक है ना..क्या लिखना है मैं बताता हूं तुझे रिजल्ट आते ही टेंशन मैट ले..फिर विह पेपर दे देना दादी भी होंगे ना हॉल मी टैब..तेरी मम्मी कैसे मना कर पाएंगे…हम लोग दादी को पहले से ही और मुखौटा मारेंगे।
सोनू :: यार पर डर लगता है ऐसे मम्मी को बोले को या पूछने को।
राज :: अरे ये अभिनव तो अच्छा लेखक बन सकता है ..हाहा..पढ़ाई में तो नहीं चलता इस्का ऐसा दीमाग।
इधर सोनू आने दोस्तों के साथ बातें कररा था और घर पर सोनू की मम्मी दिवाली के लिए नई साड़ी ब्लाउज लाने चली गई थी..
सोनू की मम्मी जहां अपने लिए दिवाली कोए कपड़ो की शॉपिंग कर रही थी सोनू की मम्मी ने दीवाली पर पेहेन ने के लिए ते साड़ी
ये चूड़ियां का सेतु
ये कान की अंगूठी इस वाले
चेन जो सोनू ने दी बर्थडे पे
जोड़ी जे लिए पायल का सेट पहले से ही था
कुल मिला सोनू की मम्मी इस दिवाली प्रति सोनू के ऊपर बिजली गिराने वाली थी पर वो अल्हड़ थी की उसका बेटा उसके लिए कुछ ही तयरिया कर रहा हाय
सोनू की मम्मी जहां अपने लिए दिवाली कोए कपड़ो की शॉपिंग कर रही थी सोनू की मम्मी ने दीवाली पर पेहेन ने के लिए ते साड़ी
ये चूड़ियां का सेतु
ये कान की अंगूठी इस वाले
चेन जो सोनू ने दी बर्थडे पे
जोड़ी जे लिए पायल का सेट पहले से ही था
कुल मिला सोनू की मम्मी इस दिवाली प्रति सोनू के ऊपर बिजली गिराने वाली थी पर वो अल्हड़ थी की उसका बेटा उसके लिए कुछ ही तयरिया कर रहा हाय
सोनू की मम्मी जहां अपने लिए दिवाली कोए कपड़ो की शॉपिंग कर रही थी सोनू की मम्मी ने दीवाली पर पेहेन ने के लिए ते साड़ी
ये चूड़ियां का सेतु
ये कान की अंगूठी इस वाले
चेन जो सोनू ने दी बर्थडे पे
जोड़ी जे लिए पायल का सेट पहले से ही था
कुल मिला सोनू की मम्मी इस दिवाली प्रति सोनू के ऊपर बिजली गिराने वाली थी पर वो अल्हड़ थी की उसका बेटा उसके लिए कुछ ही तयरिया कर रहा हाय
सोनू अब उधार एक एक दिन जैसे जिन रहा था पर उसे तनाव भी था परिणाम की इतनी मेहंदी करने के बाद कहीं पहले ना आ सका तो फिर उसका दिल टूट जाएगा। उधार अभिनव और राज भी बस जैसे प्रार्थना कर रहे थे के यार सोनू के ऊपर ही सब निर्भर करता है, उसके परिणाम के आके अब पूरा मामला अटक गया है।
सोनू के पिताजी चमन लाल शर्मा काफ़ी खुश थे, गणव की ज़मीन का सौदा होने वाला था और 10 लाख रुपये में ज़मीन वो जाने वाली थी। सोनू के घर अब दो दिन पहले अभिनव और राज आए और बस ऐसे ही हाल में बैठे बात करने लगे।
पूनम देवी: क्यूं सोनू बेटा, परिणाम कब हैं तुम्हारे कल या पार्सन।
सोनू : जी मम्मी पार्सन आएंगे 6 तारिक को।
पूनम देवी; अच्छा अच्छा मतलाब दिवाली से पहले ही।
अभिनव: जी आंटी, दीवाली तो 8 को हैं, पर उससे पहले ही सोनू अगर पहले अगया तो फिर दिवाली के दिन फिर आपको सोनू को ट्रीट देने होंगे, हमको भी।
पूनम देवी: हा हा बाबा याद हैं मुझे, तेरे पिता गणव जाने वाले हैं पर मैं उनसे तेरे इलाज के लिए पैसे लेके रखूंगा, खुश।
पूनम देवी: हा हा बाबा याद हैं मुझे, तेरे पिता गणव जाने वाले हैं पर मैं उनसे तेरे इलाज के लिए पैसे लेके रखूंगा, खुश।
सोनू : अच्छा मम्मी, बस टेंशन है पहले आने की।
पूनम देवी; टेंशन क्यों बेटा, तुमने इतनी मेहंदी की है ना, बस भगवान पे भरोसा रखो।
राज: हा यार सोनू, और वैसे भी आंटी ने वादा करदी है इलाज अब, इलाज की बिलकुल टेंशन नहीं, वैसा भी दादी भी वादा है वादा की, हाहा
पूनम देवी: हाहा, अच्छा बाबा वादा की है तो निभाऊंगी हाय।
इतने में सोनू के पिता जी आएंगे तो अब राज, अभिनव अपने अपने घर चल दिए उन्हें नमस्ते बोलके।
समय धीरे-धीरे बीता और आखिरी में 6 नवंबर का दिन आया।
परिणाम का दिन, जिस दिन का सोनू को बेसब्री से इंतजार था और राज, अभिनव को भी आहिगया। रात भर सोनू को टेंशन से जरूरत ही नहीं आई थी। पर सुबाह 6 बजे उसे आंख लग गई थी। उठा तो अब वो 9 बज रहे थे। उसके फोन जैसे ज़ोर से बज रहा था साइड में पड़ा हुआ। सोनू ने फोन गहरी जरूरत में नहीं उठा। कुछ डर बाद सोनू के घर का लैंडलाइन बजने लगा। सोनू ने पिताजी चमनलाल शर्मा ने फोन उठा।
चमन लाल शर्मा : हैलो, कौन बोला है।
फोन पे :: नमस्ते चमन लाल जी, मैं वो विद्यापीठ कॉलेज का प्रिंसिपल बोलारा हूं। अजय प्रधान।
चमन लाल शर्मा: जी जी नमस्ते, कहिए, मैं सोनू का डैडी बोलारा हूं, सोनू के कॉलेज के प्रिंसिपल हैं आप।
प्रिंसिपल: जी जी, आपको बहुत बहुत मुबारक हो भाईसाहब, सोनू इस बार पूरे हमरे विद्यापीठ कॉलेज में टॉप किया, सिर्फ उसी के कोर्स में नहीं, सभी कॉलेज में अव्वल पे आया है मार्क्स के फैसला से।
चमन लाल : ओह, वाह हैं, ये तो दिवाली से पहले दीवाली से बड़ी खुशखबरी दी अपने भाईसाहब।
प्रधान अध्यापक ; जी जी, आपके बेटे ने नाम रोशन करदिया, सोनू को कहिये गा आके मार्कशीट लेके जाने दोपहर तक।
चमन लाल: जी जी जरूर आपका बहुत धन्यवाद जी, नमस्ते।
चमन लाल : आजी सुनती हो, वो सोनू का रिजल्ट आया है, हमारा लडका पूरे कॉलेज में पहले आया है।
पूनम देवी: हे भगवान, सच्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह.
सोनू की मम्मी तो जैसी खुशी से फूले नहीं समा रही थी।
सोनू के पिताजी और मम्मी ने जाके सोनू को उठा और खुशखबरी सुनाए। सोनू तो जैसा हवा में विद्रोह था। वो झट से तयार होके कॉलेज की ओर भागा बाइक पे। कॉलेज पहंच के मार्कशीट लेली प्रिंसिपल सर से और फिर अपने दोस्तों से मिला। अभिनव और राज भी बहुत खुश होंगे। सोनू ने आखिर कार्डिखाया था। राज भी पास होगा था और अभिनव बस बचते बस पास मार्क्स ला चुका था। तीन अब बहुत ज्यादा खुश थे, पर उनकी असली खुशी तो अभी पूरा होना बाकी थी।
सोनू : यार पहले आया मुझे याकेन नहीं होराहा है… ओह्ह्ह्ह
अभिनव :: आर ट्यून जी तोड़ मेहंदी की थी ना..उसका ही फल है ये
राज: नहीं यार अभिनव..असली फल अभी मिला कहां हमारे दोस्त को।
अभिनव :: हा सोनू देख आज तो तुझे हिम्मत करके तेरी मम्मी को बोलना है..और फिर वादा भी किया हुआ है…
सोनू :: यार ट्यून हमें दिन बोला था ना के वो वोग सीधे नहीं पेपर पे लिखके विश बोल्डेना..वैसे ही करुंगा पर क्या लिखूं..
अभिनव :: चल हम तेरे घर चलते हैं..वाहन तेरे रूम में ही तुझे लिखूंगा वो लेटर।
सोनू :: अच्छा यार ठीक है फिर ऐसा ही करेंगे।
सोनू अपने दोस्तों के साथ घर पहुंचा तो उसके पिता भी दुकान को नहीं गए थे और जाके बाजार से धर सारी मिठाई लेक्स आए थे। सोनू के पिताजी को और मम्मी को मोहल्ले वाले भी आके बधाई डेराहे द सोनू के कॉलेज पहले आने पे। आज उनके बेटे ने उनका सर सबके सामने उंचा करदाला था..सोनू की मम्मी अपने बेटे पे बहुत बहुत ज्यादा खुश थी…कुछ डर में सोनू घर पांच गया। पहले जाके दादी के प्सिर लियोके आशिरवाद भी..फिर सोनू जाके अपने पिताजी और मम्मी का जोड़ा चूके आशीर्वाद लेने लगा..राज अभिनव की नजरें तो बस सोनू की मम्मी पे ही थी।
चमन लाल शर्मा :: जग जग जियो बेटा..आज तो नाम रोशन ही करदाला सोनू बेटा।
पूनम देवी :: मेरा राजा बेटा..हमेशा खुश रहो।
इतने में अभिनव बोल उठा।
अभिनव :: आंटी वैस अभिनव खुश होगा अगर आप ट्रीट डॉगी तो हाहा..
चमन लाल शर्मा :: जग जग जियो बेटा..आज तो नाम रोशन ही करदाला सोनू बेटा।
पूनम देवी :: मेरा राजा बेटा..हमेशा खुश रहो।
इतने में अभिनव बोल उठा।
अभिनव :: आंटी वैस अभिनव खुश होगा अगर आप ट्रीट डॉगी तो हाहा..
पूनम देवी :: जी माई दे दूंगागी जी..आप चिंता ना करिए
राज :: चाची..हमको भी चाहिए इलाज..
चमन लाल :: हा हा बच्चन..भाग्यवान सबको देखो क्या चाहते हैं दिलाना ठीक है पैसे कम पदेन तो मुझे फोन करना ठीक है।
पूनम देवी :: जी जी मैं संभल लुंगी आप चिंता ना करिए।
कुछ डर में सोनू के पिताजो शॉप को गए और अब सोनू और उसके दोस्त रूम में बैठे थे। ..सोनू की मम्मी दादी हॉल मी।
सोनू :: यार अब बता यार क्या लिखूं..पेन पेपर लाया हूं।
अभिनव :: ठीक तू लिख मैं बोलता हूं सोनू.. जैसे इसपे..ऐसे।
“मम्मी सो आप सीधे बोले को हिम्मत नहीं होराही तो ऐसे ऐसे पेपर पे लिखके डेरा है। आप ने वादा की थी ना माई कॉलेज फर्स्ट आया तो जो मांगोगी ट्रीट डॉगी। मम्मी वो मेरी विश प्लस आपको अजीब लगे तो गुसा मत करना। मैंने बस। आपके लिए ही जी तोड़ मेहंदी की है ना..आप जनता हो कितनी आपकी इज्जत और मैं आपको मानता हूं..पर मम्मी वो आप जैसे मुझे आकर्षण सा होगा है मम्मी। मम्मी आप इसे गलत मत… मम्मी वो बस एक हाय विश पूरी करना चाहता हूं मम्मी..प्लीज मम्मी आपने वादा की थी मम्मी और दादी की कसम भी ली थी ना..मम्मी वो मुझे आपको… बॉडी गुदगुदी। करने की इच्छा है… प्लीज मम्मी। ..प्लीज..प्लीज…आपकी वादा याद है ना मत बोलना प्लीज प्लीज प्लीज प्लीज मम्मी…””
आपका प्यारा बेटा सोनू।
राज :: हाहा तो जब तेरी मम्मी तुझे बुलाके पूछे तो एक और लेटर पक्का दे..उसपे लिखे डिटेल से।
अभिनव :: हाहा..सही है..वैसे है वाट्सएप टेक्नोलॉजी के जमाने में भी देख आखिर ये लेटर ही काम आएगा..
सोनू :: अरे यार टेंशन होराही तुम लोग का क्या है लेटर तो मुझे देना है..
अभिनव :: हैं तो अभी देंगे..तेरी मम्मी को जाके देकर आजा..तेरी दादी हो तो भी क्या उनके सामने भी दे सकता..तेरी दादी को कौनसा दिखेगा लेटर पे क्या लिखा है।
सोनू अब लेटर लेके हॉल में गया जहान पे दादी एक सोफे पे थी मम्मी कुछ दूर दूसरे सोफे पे और कपड़े जमा रही थी।
सोनू घबड़ाता हुआ हाय लेटर लेके अपनी मम्मी के पास जाके खड़ा हुआ।
पूनम देवी :: हैं सोनू बेटा गए क्या दोस्त तुम्हारे।
सोनू :: नहीं मम्मी है वो मेरे रूम में लैपटॉप पे गेम्स खेल रहे हैं।
पूनम देवी :: अच्छा अच्छा..मै ये कपड़े जमाकर। चाय बनाऊंगा ठीक है ना।
सोनू :: मम्मी वो ये ये लेटर..
पूनम देवी :: क्या है बेटा ये लेटर।
सोनू :: जी मम्मी वो आपने वादा की थी न वो मैं पहला आया तो आप जो मैंगो कुत्ते…मेरी विश जो हो गरीब करोगी।
पूनम देवी :: हा बेटा..तेरे पिता भी बोलके गए और मुझे…वादा
सोनू :: मम्मी वो इसमे लिखी मैंने विश लेटर मी..
सोनू की मम्मी ने लेटर लिया और पढने लगी..सोनू को तो घबड़ाहट से पसीना आरा था हम सरदी के मौसम में भी..पत्र पंच मिनट में पढ़ने के बाद।
पूनम देवी :: ये क्या है सोनू बेटा..बॉडी गुदगुदी क्या। क्या है ये..मतलाब..
सोनू :: जी मम्मी वो आपने वादा की थी न वो मैं पहला आया तो आप जो मैंगो कुत्ते…मेरी विश जो हो गरीब करोगी।
पूनम देवी :: हा बेटा..तेरे पिता भी बोलके गए और मुझे…वादा
सोनू :: मम्मी वो इसमे लिखी मैंने विश लेटर मी..
सोनू की मम्मी ने लेटर लिया और पढने लगी..सोनू को तो घबड़ाहट से पसीना आरा था हम सरदी के मौसम में भी..पत्र पंच मिनट में पढ़ने के बाद।
पूनम देवी :: ये क्या है सोनू बेटा..बॉडी गुदगुदी क्या। क्या है ये..मतलाब..
सोनू :: मम्मी वो मैं आपको समझूंगा दोसरे लेटर में लिखके…और घबराके चला आया।
पूनम देवी :: हैं सोनू बेटा..उफ्फो ये भी ना..पता नहीं क्या काश है..
सोनू अब जाके रूम में पानी पेय और गहरे सांस ली।
सोनू ::: यार लेटर टू ददिया पर वो वो मम्मी को समझ नहीं आरा क्या काश है यार।
अभिनव :: हम किसलिय है यार फिर..देख ये दूसरा लेटर तय्यर हैं.. इसमे डिटेल्ड मी मैंने लिखा दिया है राज से…बस ये लेटर तेरी मम्मी को देना..शुद्ध हिंदी में लिखा ताकी चाची जी भी समझ जा।
सोनू लेटर लेके पहले पढने लगा..पत्र की सामग्री पढके पागल हो रहा था। उसजी मम्मी udhar कन्फ्यूज्ड थी की आज सोनू ऐसा क्यूं बिहेवियर कर रहा था। पर उसकी मम्मी की जिंदगी में आज बहुत खुशी का दिन था। उसके बेटे ने इतना नाम रोशन किया था।
सोनू : यार लेटर टू सही है पर मेरी मम्मी कायल होगी क्या।
राज :: आंटी ने वादा किया है ना..और तेरे दादी की कसम खाई है..और तूने जी तोड़ मेहंदी की परीक्षा को यार..इतने दिन की प्लानिंग है।
अभिनव :: अरे तू मम्मी को कायल अनुरोध कर यार..और प्यार से लाड से बोलना… कृपया मेरी अच्छी मम्मी हो ना प्यारी मम्मी हो ना ऐसा।
सोनू :: अच्छा ठीक है जाता हूं लेटर देके बोलता हूं।
सोनू गया तो हॉल में दादी हनुमान चालीसा पढ़ रही थी..वो मम्मी के रूम में गया तो वहां उसकी मम्मी पैसे कुछ गिनती करही थी।
सोनू :: मम्मी क्या कर रही हो आप।
पूनम देवी :: हैं सोनू बेटा वो तेरे पिताजी ने पैसे दिए थे तुझे जो चाहिय दिलवाडुं बोलके पैसे दिए तो बस वही गिनती करहे थी बेटा।
सोनू :: मम्मी पर मुझे जो चाहिए उसके लिए पैसे नहीं..वो मैंने देखो ये लेटर मी डिटेल में लिखा है मम्मी।
पूनम देवी :: उफ्फो..अच्छा एक और लेटर… अच्छा बाबा रुक पढती हूं।
सोनू की मम्मी पैसे फिर से तिजोरी में रखके बेड पे बैठाके लेटर पढ़ने लगी..सोनू वही पे खड़ा था।
पांच मिनट बाद ……
पूनम देवी : अरे सोनू… ये ये क्या.. ये क्या अजिब ख़्वाहिश है हा..ना बाबा ना.
सोनू :: मम्मी प्लीज आपने प्रॉमिस की थी ना प्लीज मम्मी मैंने जो आपने बोला किया ना प्लीज मम्मी।
पूनम देवी :: हा पर बेटा नहीं ये कैसी अजीब ख्वाहिश..प्लस बेटा ऐसा नहीं हो सकता..तुझे जो चाहिए दिलवूंगा ना।
सोनू :: कुछ नहीं चाहिए। कृपया। ये चाहिए ना इसमे क्या गलत है प्लीज मम्मी..आप मेरी अच्छी मम्मी हो ना…
पूनम देवी :: बेटा नहीं ना..अरे कैसे समझो ऐसी क्यूं दिमाग में आया तुझे ये मुझे गुडगुडी का … उफ्फ्फ…
सोनू : मम्मी प्लीज मुझे इच्छा है प्लीज
सोनू मम्मी को मनाना मुझे लगा था..और उसकी मम्मी सोनू को..इतने में हॉल से दादी की आवाज़ आई..
दादी :: हैं बहू क्या हुआ…
पूनम देवी :: जी सासु मां..कुछ नहीं वो बस सोनू से बात कर रही थी।
सोनू :: देखो ना दादी..मम्मी ने वादा की थी ना आपके सामने की जो मैंगूंगा दूंगा पहले आया तो अब देखो ना बोल रही मम्मी।
दादी :: हैं बहू..जो चाहिए दिलवाड़े..देदे ना..इतनी मेहंदी की बेचारे ने।
पूनम देवी :: वो वो सासुमा पर..
दादी :: पर वार कुछ नहीं…देना वो जो भी मांगे ठीक है ना तुझे मेरी कसम है।
बेचारे सोनू की मम्मी अब तो चरण ही गई। उनको क्या पता था की उनका बेटा सोनू ऐसी अजीब ख्वाइश की ज़िद करेगा।
सोनू की मम्मी को अचानक नानी मां को फोन आया तो वो बात करने लगी। पर उनके दिमाग में बस बेटे की इच्छा ही घूम रही थी। सोनू अब फिर वापस अपने रूम में आया..उसको ऐसा लग रहा था कि उसके दिल दे बहुत बड़ा बोझ उतर गया हो। सोनू अपने रूम में आते ही हाय।
अभिनव:: अरे सोनू क्या हुआ..देडाला लेटर क्या बोली आंटी।
सोनू :: हा यार दियाला..वो मेरी मम्मी तो ना ही कर रही पर दादी ने वो मम्मी से बोला की बच्चों की जो इच्छा है पूरी करदो..फिर फोन आया नानी का तो मम्मी चली गई रूम में।
राज :: अच्छा चल ट्यून तो बता दिया ना..तेरी मम्मी को अब तो मन्ना ही होगा यार…कोई और रास्ता नहीं….
अभिनव:: हा यार..और अब तेरी मम्मी फिर कायल करने की कोशिश करे तुझे तो उल्टा कायल करना उन्को…ऐसा कर के बोल देना की विदेशी मुझे ऐसा माताओं की शुभकामनाएं पूरी करता है आसन से।
सोनू :: ओके यार पर ये फॉरेन नहीं ना..
अभिनव: हा पर देख इसे सुनहरा मौका नहीं मिलेगा..तेरे पिता भी नहीं रहेंगे दिवाली पर और सिर्फ तेरी मम्मी. दादी होंगे..तू दादी की टेंशन मत ले…उनको माओ संभल लुंगा।
राज :: हैं क्या संभल लेगा … कैसे।
अभिनव:: हैं सिंपल यार..इसके दादी जो रोज़ दावा लेते न उसके साथ एक नींद जी गोली देंगे हम..बस दादी मां आराम स्व गेहरी नींद में होगी कुछ घन्ये..कामसे कम 4 घंटे तक..
सोनू :: ओह यार पर कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगा ना।
अभिनव :: अरे नो टेंशन यार..अच्छा सुनो..तुम दोनो कल सुबह ही मेरे घर आओ कुछ दिखाना है और फिर दिवाली के इलाज की पूरी फाइनल प्लानिंग भी..
उधार अपने रूम में सोनू की मम्मी बस सोने रही थी ये सोनू ने किस दुविधा में दाल दिया मुझे….
शाम का समय होगा था..अभिनव और राज अपने अपने घर चले गए। सोनू अपने रूम में था और फिर सोनू के फोन को कॉल आरा था..ये तो उसे मम्मी का फोन नंबर था..उसने झट से उठा फोन।
सोनू :: हेलो मम्मी हैं आप फोन क्यों बहार हो क्या..
पूनम देवी :: नहीं वो मैं इधर छत पे हुं ..वो बेटा वो तेरी ख़्वाहिश तू कोई दूसरी बोल्डना plss।
सोनू :: मम्मी प्लीज ना..मैंने आज तक कुछ मंगा क्या आप मम्मी..और आपकी मैं पवित्रता पे भी कोई थास नहीं पूँचा रहा न मम्मी।
पूनम देवी :: उफ्फो सोनू बेटा…तू ना क्यूं इतना ज़िद करता…मुझे वो क्या बोला था तूने वो बॉडी गुदगुदी प्लीज़..मुजे गुडगुडी बहुत होती ना..
सोनू :: मम्मी प्लीज मम्मी बस कुछ ही तो घंटे की बात होगी ना।
पूनम देवी ::: क्याआआ…घंटे…ना नाना
सोनू :: कृपया मेरी अच्छी मीठी मम्मी हो ना..कसम है आपको.. सबके सामने कसम..मेरी प्यारी प्यारी मम्मी हो
ना.
पूनम देवी :: हे भगवान .. ये लडका ना … बस अब झूठी तारीफ मत कर बदमाशी करके।
सोनू :: उन कहां की बदमाशी अभी तो.. मम्मी आप दादी की चिंता न करो वो अभिनव एयर राज संभल लेंगे दादी को
पूनम देवी :: अरेय्य्य्य…वो वो तेरे दोस्त क्यों नहीं plsss उनको क्यों बुलाता है सोनू।
सोनू :: मम्मी वो दादी को कौन फिर संभालेगा..मम्मी वो मेरे जिगरी दोस्त है और फिर आपकी इतनी इज्जत भी करते ना..प्लस बस वो दादी को संभलेंगे मम्मी…
पूनम देवी :: हाय राम ….. तुने अभिनव .. राज को भी बता दिया ये….
सोनू:: मम्मी मेरे दोस्त अच्छे हैं ना आपको भी मां की तरह ही तो माने है… मम्मी प्लीज डैडी ने भी परमिशन दीदी ना अब
पूनम देवी :: उनको क्या पता तेरी ख़्वाइश ऐसी होगी बदमाशी वाली।
सोनू ::: हा हा हा ..
पूनम देवी :: चुप बदमाश…हस्ता भी ऊपर से..फसा दिया मुझे…
सोनू :: मेरी अच्छी मम्मी हो न मैं जनता हूं मेरी मम्मी सब बात मानता मेरी..ये फर्स्ट रैंक सब तो आप के लिए ही मम्मी…
इतने में सोनू के डैडी आने की आवाज आई मैं गेट खुली तो मम्मी ने फोन काट दिया और नीचे हॉल में आ गई।
पूनम देवी :: उफ्फो सोनू बेटा…तू ना क्यूं इतना ज़िद करता…मुझे वो क्या बोला था तूने वो बॉडी गुदगुदी प्लीज़..मुजे गुडगुडी बहुत होती ना..
सोनू :: मम्मी प्लीज मम्मी बस कुछ ही तो घंटे की बात होगी ना।
उधार अब रात के 9 बजे राज ने अभिनव को फोन किया।
राज :: अभिनव हैं..वो किट जो ऑर्डर की क्या हुआ उसका
अभिनव :: आर अगाय कल ही वो..इस्लिये तो बोला था ना कल तू और सोनू घर पे आयेंगे तो दिखाउंगा।
राज :: ओह वाह फिर तो अच्छा है। अच्छा यार सुन ये क्या सोनू की मम्मी के साथ सिरफ सोनू को तुझे फेटिश पे ही रोकने का इरदा है या फिर आगे भी।
अभिनव:: यार उसे मम्मी एक पतिव्रत औरत हैं…इसको भी हमको इतने महिन लगे पर आएंगे देखेंगे ना..सोनू को एक बार मजा लग गया तो फिर क्या पता चलेगा क्या होगा… अभी सोनू के मन में मम्मी के लिए यौन विचार है के नहीं पता नहीं।
राज :: इतनी सुंदर मम्मी है उसके मन में भी कुछ तो होगा ही..पर ठीक है एयर वो ट्यून वो दादी के लिए नींद की गोली भी लेली ना..
अभिनव :: नहीं कल लेलूंगा मैं..और सुन ये सोनू ने उसकी मम्मी को सिरफ खुद के लिए मनाएं किया है..हमको भी थोड़ा अनुरोध करके फिर मैदान में कूडना होगा। और अगर ये कामयाब होगा तो मेरे लस धांसू प्लान है नए साल पे हम कुछ और आने का ट्राई करेंगे… पहले शुरुआत तो अच्छी सी होनी चाहिए..
राज ::हाहा सही कहा…शुभकामनाएं आधी हुई। चल मैं कल सूबा आउंगा तेरे घर सोनू के साथ…अब रखता हूं..शुभरात्रि।
उधार सोनू अपनी मम्मी की पिक्चर लैपटॉप में देखते हुए बस दिवाली के दिन का इंतजार है। अपने कामरे में पूनम देवी भी सोनू की अजीब ख्वाहिश से जैसे धर्म संकट में थी। सोनू की मम्मी को वादा तो निभाना ही था..
अगले दिन सुबाह… सोनू उठके नहीं धोके खाने की मेज पर आके बैठाया। उसके पिताजी और मम्मी। दादी भी।
चमन लाल शर्मा :: अच्छा अम्मा माई कल सूबा ही दीवाली पूजा करके निकल जाउंगा गान को..सुबाह 9 बजे ही निकलूंगा तो प्राथमिकी 4 बजे पहंचुंगा।
दादी :: अच्छा बेटा वहा सरपंच जी के लिए भी कुछ मीठा ले जाना।
पूनम देवी :: आप फिर वापस कब लौटेंगे..सबके पास दिवाली मिलने भी तो जाना है ना..
चमन लाल शर्मा :: हा मैं लौटूंगा दो दिन में बस फिर रविवार को जाके सबसे मिल लेंगे … और सोनू बेटा तुमको क्या चाहिए मम्मी को बता सकते हैं। मैंने तेरी मम्मी को पैसे दिए हैं।
सोनू :: जी जी डैडी मैंने बोला है मम्मी को वो और कल देंगे…है ना मम्मी..
सोनू की मम्मी जैसे अब इशारा कर रही उसे के चुपके कर…
चमन लाल शर्मा: हा हा भाग्यवान देने जो भी मांगे..चलो मुझे देर से होराहा..चलता हूं दुकान को।
ब्रेकफास्ट के बाद सोनू अब अभिनव के घर जाने को तैयार ही होराहा था जूते पहनने की उसकी मम्मी आके बोली।
पूनम देवी :: कहां जराहा सोनू।
सोनू :: मम्मी वो अभिनव के घर जाके आजुंगा दोपहर तक।
पूनम देवी :: अच्छा सूरज ..वो वो तेरे दोस्तों को plss मत बुला कल बेटा … कृपया मुझे बहुत शर्म आती है।
सोनू :: मम्मी…आप चिंता ना करो ना..वो तो बस दादी को संभलने के लिए ही ना….वरना दादी घर पे ही है ना मम्मी..
पूनम देवी :: पार पर बेटा…वो तेरे दोस्त नहीं…वो होंगे तो घर पे मुझे शर्म आएगी..
सोनू :: अच्छा मम्मी वो दोनो टेरेस पर रहेंगे…या दादी के रूम में ठीक है ना…टेरेस पे वो लोग दोनो कार्ड्स खेलेंगे दिवाली पे।
पूनम देवी :: उन्न तू भी ना… ज़िद्दी बदमाश लड़का होगा है..
सोनू :: पढाई भी तो करता हूं और बदमाशी कहां की अभी..हाहा…
पूनम देवी :: चल बदमाश..जाके लंच तक आजा वर्ना फिर लंच देर से होगा..
सोनू अब खुशी से निकल पड़ा अपने दोस्तों से मिलने अभिनव के घर..रास्ते में सोनाचरा था ये अभिनव और राज को बस दर्शक रहने दूंगा वर्ना मम्मी शायद शर्म आएगी..दोनो को छत पे ही रुकने के लिए बोलूंगा। घर पांच गया..
सोनू :: ही कैसे हो यारों… अच्छा नाश्ता चलराहा..खालो माई तो खाके आया हूं..
अभिनव :: और सोनू कल दीवाली है…आखिर आ ही गई दिवाली।
राज :: हा कितने महिने बाद आई
सोनू :: हा हा सही बोला… अच्छा सुनो यार वो माई क्या कहरहा था के साथ मेरी मम्मी बहुत शर्मीली टाइप है तुम लोग क्या सिर्फ दर्शक बनोगे pls। मम्मी ने कहां वो प्लीज समझो ना।
अभिनव :: यार हम लोग कौनसा कुछ गलत करने वाले हैं और इतने दिन से तो दूधे ही प्लान बनाया ना।
राज :: हा यार तू अब आज आखरी दिन पे आके ऐसे बोल रहा।
सोनू :: नहीं वो मम्मी मेरी वर्ना ठीक से नहीं करने देंगे तुम लोग होंगे तो फ्री नहीं होगी यार pls।
राज :: क्या यार.. अच्छी दोस्ती निभाएं धुन।
सोनू :: अरे तुम लोग को टेरेस पे से या किसी और रूम से मैं देखने दूंगा ना plss। मेरे तुम भरोसा है यार पर मेरी मम्मी बहुत ही पतिव्रत टाइप है फेटिश में भी तुम लोग होके तो उसे शर्म आएगी..
राज :: इसमे कौनसी अडल्ट्री है यार तू भी ना..और तेरे लिए तो अभिनव ने इतने पैसे खर्च करदाले और तू अब ऐसे बोल रहा..
अभिनव :: अच्छा यार एक है… तेरी दोस्ती के लिए ये भी करेंगे यार..वैसे तो मैं कब से इंतजार कर रहा था दिवाली का पर तू सबसे खास दोस्त है मैं तुझे नहीं निराश करना चाहता…पर मेरी है फिर एक तेज अगर हम दोनो सिरफ दर्शक रहेंगे तो ….. बोल शार तुझे मंजूर होगा ना।
सोनू :: हा हा यार पक्का थैंक यू तुम लोग मेरे जिगरी दोस्त हो.. मुझे तुम लोग की शार्ट सब मंजूर है… वादा
अभिनव :: अच्छा यार ठीक है..हम दून बस दर्शक होंगे पर तुझे ना तेरी मम्मी को शरीर गुदगुदी फिर मैंने जो गुदगुदी बॉक्स मंगाया है उसे सब चीजों से करना होगा..
राज :: हा सोनू..चल अब इतना तो तुझे मन्ना होगा हम लोग इतनी मेहंदी के बाद भी कुर्बानी डेराहे ना।
सोनू :: अच्छा ठीक है मंजूर है पर वो बॉक्स ऑर्डर किया तो आया क्या।
अभिनव :: हाहा कल ही आया।
सोनू :: अच्छा जरा बता रो न मुझे मैंने कभी नहीं देखा पहले…
राज: हा देखो तू भी आज वो सब इंस्ट्रूमेंट्स बॉक्स के… अभिनव ज़रा दिखा तो..कल वैसे भी सोनू को इस्तेमाल करने होंगे न हमारी कोसमट में बस नज़र देखना ही लिखा है वैसा भी।
सोनू :: अच्छा यार पर ठीक है तुम लोग गर मेरे लिए इतनी कुर्बानी डेराहे तो मुझे भी टिम लोगों की बात मन्नी मिलेगी ना..पर वो बॉक्स कहां है क्या है उसमे।
अभिनव :: हा बॉक्स अगया कल ही यार.. रुको तुझको दिखता हूं।
राज :: उअर सोनू ये बॉक्स खुद 8000 का है।
सोनू ::: क्या इतना मेहंदी…ओह माय गॉड पर क्यूं
अभिनव:: यार ये स्पेशल गुदगुदी यंत्र बॉक्स है..बहुत मुश्किल से मिला है और देख उसमें बहुत चीज है अलग अलग… ये देख… अभिनव ने बॉक्स की सब चीज को बिस्तर पे डाला अब।
सोनू :: ओह माय गॉड…इतनी साड़ी चीज…
राज :: हा यार फिर 8000 खारच किए बॉक्स के लिए तो फिर होंगी न अलग अलग चीज..
अभिनव :: हा यार देख मैं तुझे समझाऊंगा करुंगा सब की विशेषता ठीक है ना।
सोनू :: अच्छा यार हम्म बता तो।
अभिनव द्वारा आदेशित गुदगुदी बॉक्स उपकरण।
अभिनव :: हा देख..सब के साथ इस्के उपयोग का विवरण दिया गया है.. जैसे ये देख ये है पंख जो विशेष रूप से गुदगुदी के लिए ही बनाया गया है..इसको तू धीरे से कहीं पे भी उपयोग कर सकता जैसा कि चाची के गर्दन पे, या उनकी जो भी भाग जो साड़ी में उजागर हो ..
वैसे भी तेरी मम्मी कोई तुझे न कपड़े उतरने कहा देगी…
राज :: हा वो तो हैं..पर सोनू उनके गले पे..उनकी कमर पे और उनके ब्लाउज के नीचे कांख पे और फुट पे अच्छे से करना मजा आएगा।
सोनू :: यार मेरी मम्मी बहुत गुदगुदी है पंख से करुंगा तो ओह माय गॉड।
अभिनव :: यार जनता हूं इसलिय तुझे पहले चाची को देख ये नरम मखमली कपड़े से उनके हाथों को बंधन होगा..वरना वो तो हाथ हिलायेंगे ना..ये बहुत नरम मखमली कपड़ा है तो इसे हाथ पे कोई भी ज़ोर भी नहीं पढा। क्या कपड़े है ऐसे तो तू गर पैर भी बंधेगा तो बढ़िया रहेगा…
सोनू ::: क्या पैर हाथ भी बंधन होंगे क्या।
राज :: अरे फिर नहीं तो तेरी मम्मी जैसी ट्यून पहली ही बोला टिक्लिश है हाथ जोड़ी को मूव करेगा और तू कैसे कर पाएगा ठीक से..वैसे भी गुदगुदी ऐसे ही करता है..तू कोई भी वीडियो भी देख लें।
सोनू :: हा पर ठीक है मैं मम्मी को बोल्डूंगा के ऐसे बंधन ही करता है..
अभिनव :: हा सही अब तेरी मम्मी को यकीन करना तेरी जिम्मेदारी है यार।
सोनू :: अच्छा हम्म ये क्या है यार टूथ ब्रश लगारा।
अभिनव :: ये इसे इलेक्ट्रॉनिक टूथ ब्रश बोले है.. इस्के ब्रिस्टल स्पेशल गुदगुदी के लिए बनाए गए हैं..इसको स्पेशल कमर के फोल्ड या आर्मपिट पे लगान से बहुत ज्यादा गुदगुदी होती है।
राज :: ओह भूलभुलैया ही भूलभुलैया है सोनू तेरे तो। हाहा
सोनू :: श यार चुप तू भी ना..मुजे टेंशन भी होराही मेरी मम्मी को इतनी गुदगुदी करुंगा तो कैसे सहेगी।
राज :: ओह भूलभुलैया ही भूलभुलैया है सोनू तेरे तो। हाहा
सोनू :: श यार चुप तू भी ना..मुजे टेंशन भी होराही मेरी मम्मी को इतनी गुदगुदी करुंगा तो कैसे सहेगी।
अभिनव :: यार तेरे पास टू टाइम हाय पूरी दिवाली का..बीच में तेरी मम्मी को ब्रेक देता रहना..हाहा एक एक इंस्ट्रूमेंट यूज करने के बाद ब्रेक..देख ऐसा मौका जिंदगी में एक ही बार आटा..तुझे जिंदगी भर याद रहेगा..जिंदगी में ऐसे लम्हे कहां आते बार बार।
सोनू :: हम्म जनता हुं यार। पर जैसे ट्यून बोला ब्रेक्स बीच में देता हूं मेरी मम्मी को।
राज :: अभिनव.ये बोतल में क्या हैं।
अभिनव :: हैं ये इसे रास्प ऑयल बोले.. खास गुदगुदी के लिए होता है यार। इस्को ना तू आंटी के फीट पे लगाना और फिर तू अनग्लियों से या पंख से भी गर गुदगुदी करेगा ना तो फिर देखना कैसी गुदगुदी होगी की तेरी मम्मी में है के गुदगुदी से जैसे पागल ही हो जाएगा…
राज ::: ओह्ह्ह्ह्ह वाह …. चाची की हसी जोर से मजा आएगा सच में वही।
सोनू ::: ओह यार…मेरी मम्मी की सच में स्माइल और इतनी बहुत ही अच्छी होती..एकदम मीठी सी सी स्माइल और खिलखिलाती हसी हैं।
अभिनव :: और सोनू..तेल वो अच्छे से तेरी हाथ से फीट पे लगाना और उनके जोड़े की उन लोगों के बीच की स्पेस में भी लगान। उधार बहुत गुडगुडी होटर है मैंने सुना था।
सोनू :: अच्छा ठीक है यार लगाऊंगा..
राज :: यार सुन तेरी मम्मी के कमर पे अच्छे से करना pls वो उनकी कमर के साइड्स पे जो फोल्ड्स होते ना वहन पे pls।
सोनू :: हम्म अच्छा यार करुंगा..बहुत ही गोरी है और चिकन कमर है ना..
अभिनव :: अच्छा सूरज..तेरी मम्मी से नाभि नहीं दीखाते न..तूने देखी उनकी नावेल क्या कभी।
सोनू :: वो वो हा कमर तो दिख जाती पर नावेल नहीं…पर…पर..बोलते बोले रुक गया सोनू।
रूम में साड़ी बदल रही थी और मैं गलत से उनके कमरे में गया था..तब देखा..उनका नाभि बहुत बड़ा गहरा है क्या बताऊं..पांच रुपये का सिक्का से ज्यादा होगा बड़ा.. .
राज :: उफ्फ सच… किस्मत वाले सोनू।
सोनू :: अरे मैंने सिर्फ देखा..क्या किस्मत वाला है…
अभिनव :: यार तू अब तेरी मम्मी को जब गुदगुदी करेगा तो उनकी साड़ी पक्का थोड़ा नीचे खिस्केगी मुझे याकेन है उनका नाभि एक्सपोज होगा।
सोनू :: अच्छा फिर तो मजा आएगा..मै हाहा वहा भी गुदगुदी करलंगा चांस लेके हाहा।
अभिनव :: उम्म हा हा करलेना..पर तेरी मम्मी का नाभि अगर एक्सपोज हो जाए तो एक स्पेशल चीज है देख ये बॉक्स में हमें गुदगुदी करने को।
राज :: क्या है रे..बता बता।
अभिनव :: देख ये छोटी दब्बी देखराहा।
सोनू :: ओह क्या है यार इसमे छोटी डिब्बिया में
अभिनव: देख ये दिबिया के अंदर ये इसे बोले हैं गुदगुदी कीड़ा (कीड़ा)
सोनू ::: ओह ये तो कीड़ा है छोटा सा।
राज :: अरे ये बॉक्स में कीड़ा .. गुदगुदी कीड़ा मतलाब क्या होता इसी से।
अभिनव :: अरे ला राज एक बार तेरा हाथ तो आगे कर…
अभिनव ने हमें कीदे को राज की हाथी ले रखा।
राज :: आउच। हैं हटा इसे क्या है क्या है.. हटा यारर्र्र।
अभिनव :: हाहा…देखा इस्का कमाल.. अच्छा बाबा हटा दिया।
राज ::: ओह्ह्ह यार ये तो बहुत गुडगुडी कर्रहा हाथ पे डालते ही मेरे।
अभिनव :: हा…सोनू तुझे बस मौका देख तेरी मम्मी के नावेल के ऊपर ये दिबिया उलटी करदीने हैं…बस ये कीड़ा नावेल में जाते ही। हाहाआआ:
सोनू :::: ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह यार…मम्मी तो मेरीइइइ उचचल कूड करने लगेगी।
राज :: वाह मजा आएगा… pls सोनू देख अब हम दर्शक है तुझे pls ये सब करना होगा plsss यार।
सोनू :: अच्छा यार पर मैं करुंगा तो मम्मी में है के लिए होगी..
अनुभव :: ऐसा मौका जिंदगी में एक ही बार मिलेगा यार… तुझे जी भर के आनंद लेना है… वादा कर के सब करेगा।
सोनू: उन्न्न अच्छा यार ठीक है वादा।
राज ::::फेर मजा आएगा…हम दर्शक ही सही पर मजा आएगा।
सोनू बस और सोंच रहा था उसकी मम्मी को इतना सब कैसे करेगा…क्या हाल होगा…उसकी मम्मी उधार में सब से अंजान थी।
अभिनव: अच्छा सोनू तू समझ गया न अब सब कुछ अच्छे से। और तेरे डैडी कल कितने बजे जाएंगे।
सोनू :: वो तो सुबाह 9 बजे जाएंगे।
राज :: कहीं कल तेरे घर के रिश्तेदार तो नहीं आएंगे न यार फिर से।
सोनू :: यार दिवाली है ना तो थोड़े बहुत आएंगे दिन में रात को तो पिताजी जब होते तो हम सब ही मिले चाचाजी के घर जाते थे।
अभिनव :: अच्छा फिर ऐसा करता है की रात के खाने के बाद हम लोग आएंगे तेरे घर… क्या बोलता है तेरी दादी की दवाई जो लेते हैं रात को उसमे नींद की गोली मिलाना ती खुद ही..
राज :: हा और तू तेरी दादी को हमारे आते ही वो दावा खिलाड़ी देना तकी तेरी दादी आराम से इतने खातिर।
सोनू :: अच्छा यार ठीक है..तुम लोग फिर ऊपर छत पर रहना और कार्ड खेलते रहना मैं फोन पे मिसकल दूंगा तब नीचे आके देखना।
राज :: पर हम दो कहां से देखेंगे तू तो तेरे कमरे में होगा वहां से दिखता क्या।
सोनू :: मेरी मम्मी डैडी के कमरे की जो खिड़की है वो उसका वेंटिलेटर है ना वो उधार से देख सकते हैं यार..वो छत की सीढ़ीयों के पास है वेंटीलेटर।
अभिनव : ठीक है फिर तो ठीक है। और सुन जैसे मैंने बोला तेरे मम्मी के हाथ और पैर पहले अच्छे से बंद देना तू वर्ना मुश्किल होगा..
सोनू :: हा बोलुंगा माई मम्मी को रिक्वेस्ट करने के लिए हाथ ऊपर बिस्तर को बंद दूंगा .. जोड़ी भी नीचे बिस्तर को बंद दूंगा।
राज :: अच्छा तू अकेला क्या बंद होगा.. तुझे मदद चाहिए होगी तो हम करदेंगे ना।
सोनू: अरे अब अकेला ही करना पड़ेगा ना। वर्ना मम्मी नहीं मानेगी।
राज :: तो फिर कल का पूरा प्लान सेट है ना।
सोनू :: यार टेंशन और एक्साइटमेंट मुझे तो आज जरूरत भी नहीं आएगी मुझे।
अभिनव :: हा सुन तेरी मम्मी दोपहर को जाती है क्या…
सोनू :: हा पर क्यों।
राज :: कल दीवाली पे भी पूजा करके बोलना तो जाने..फिर देर रात तक जगना जो है…हाहा।
सोनू :: हा तू भी ना.. अच्छा बोल्डुंगा।
अभिनव :: ओके दोस्तों फिर प्लान सब सेट होगा ना..कल फिर ये बॉक्स लेके हम पांच जाएंगे रात में।
सोनू : अच्छा ओके हो गया।
अब सोनू और राज अपने घर निकल पाए…पर वो शायद सोना रहे हैं की अब तो निकल पड़ी !!
सोनू जब घर पहूँचा तो आज घर पर ही पिताजी। कल गणव जाबे की तय्यारी में वो। उसकी मम्मी भी बिजी थी कल डैडी जाने वाले और ऊपर से दीवाली भी थी। अपनी मम्मी को एक बार अच्छे से ऊपर से नीचे तक निहार के सोनू अब अपने रूम में गया। उसके दोस्तों की बोली हुई बातें हमें तो पागल कर रही थी..कल उसे मम्मी को कुछ करने का मौका उसे मिलने वाला था..वरना तो मम्मी को बस अब तक वो निहारता ही रहता था। मम्मी के साथ डर रात तक मस्ती गुदगुदी करुंगा मैं तो..बस ये सोने रहा था वो।
उधार अभिनव और राज छोटे से उड़ान द के उनको बस दर्शक बनके रहना था। पर अभिनव सोंच रहा था जो गुदगुदी बॉक्स सोनू को इस्तेमाल करना था उससे सोनू की मम्मी तो जैसा पागल हो जाएगा..पूरा घर सर पे उठा लेगा। बस सोनू की मम्मी को हम अवस्था में देखने को वो उत्सुक और उत्तेजित था बहुत।
सोनू ने अपनी दादी की दवाएं मुझे मिलने को नींद की गोली भी लाली थी अभिनव के यहां से। बस कल रात ने दादी को दवाएं ये दूंगा तो वो कुंभकरण की नींद सो जाएगी। डैडी भी घर पर नहीं.. वो और उसकी संख्या ही बस अकेले। एक सुंदर मां और जवान बेटा घर पर अकेले हो तो हमें घर का यौन तनाव अलग ही होता है।
चमन लाल शर्मा :: अच्छा मेरे कपड़े सब रखदाले न तुम भाग्यवान।
पूनम देवी :: जी रखदीये है सब कुछ बैग मुझे।
चमन लाल शर्मा :: और वो तिजोरी में पैसे हैं न तुम्हारे तो लिये न जो सोनू के लिए मैंने तुमको दिए हैं।
पूनम देवी :: हा जी हा जिन लिए हैं..
चमन लाल शर्मा :: हमें जो चाहिए दिलवाडेना..उस्को कोई शिकायत न हो..इतना नाम रोशन किया उसने।
पूनम देवी :: उन्न्नं जी वो हा मैं दिला दूंगा..
सोनू की मम्मी मन ही मन सोने रही की अब इनको कैसे बताऊं सोनू की ख्वाइश क्या थी… की थी पर निभानी होगी का वादा।
सोनू जब सूबा उठा था दिवाली के दिन तो घर में बहुत चहल लहल की आवाज आराही थी। शायद चाची या मामी लोग आए थे। पूजा चल रही थी हॉल मी। सोनू चुपके से उठके अब बाथरूम में जाके नहीं को तैयार होराहा था।
पूजा के बाद शायद अब मम्मी और चाची रूम में और अपने अपने कपड़े और आभूषण चर्चा करें। सोनू बाथरूम से निकला तो उसकी मम्मी के रूम पर नज़र गई.. डैडी दादी हॉल में हाय। उसकी मम्मी आज कयामत ही लगारही थी एकदम। लाल साड़ी रही मम्मी की और सभी गहने भी पहनने द उन..मेरी गिफ्ट की हुई चेन भी…सोनू का तो मन कराह था जैसे की मम्मी को तबी का तबी जाके गले लगाओ।
एम
पर सोनू अभी तो सीधा अपने रूम ने चला गया..कपड़े बदले और जाके पिताजी और दादी का आशीर्वाद लिया..फिर अपनी सुंदर मम्मी का आशीर्वाद लिया झुक के चाची के सामने तो जैसी ही मम्मी के जोड़ी को टच किया.. एहसास होराहा था उसके मम्मी के पैर भी कितने सॉफ्ट हैं..उसकी मम्मी ने भी आशीर्वाद दिया उसे।
सोनू के पिताजी अब गणव को निकल गए थे..सोनू की मम्मी और चाची..दादीमा हॉल में बैठे बातें करते थे। सोनू अकेला अपने रूम में बोर होराहा था।
सोनू ने अब हॉल में हाय बैठे अपनी मम्मी को फोन लगा।
सोनू :: हेलो मम्मी क्या करे हो।
पूनम देवी :: हा बेटा उन इधर ही हुं ना हॉल में फोन क्यों किया।
सोनू :: चाची लोग कब जाएंगे..शाम से पहले चले जाएंगे ना।
पूनम देवी :: हा वो शायद..क्यूं बेटा
सोनू :: आज तो मेरी ट्रीट का दून है…जल्दी भगाओ न चाची जी को
एम
पूनम देवी :: श कुछ भी बोलता है..उन्न
पूनम देवी हॉल में उठके थोड़ा दूर जाके फोन पर बात करने लगी।
सोनू :: उन pls शाम एसएस पहले भागो चाची को
पूनम देवी :: बदमाश..जायेंगे वो मैं कैसे बोलुं उन्को
सोनू :: आज तो मेरी ट्रीट है ना सिर्फ मेरी दिवाली।
पूनम देवी :: बदमाश… रुक ना रात तक तो चाची है घर पे।
सोनू :: अच्छा मम्मी रात को पर सिर्फ तुम मैं और मस्ती..हाहा
पूनम देवी :: पागल लड़का… चल अब रख फोन…
सोनू ने फोन रखा और घड़ी की तरफ देखते हुए बस शाम होने का इंतजार कर रहा था।
सोनू अपने रूम में अब शाम होने का इंतजार करना लगा बसबरी से। दोपहर जेई 3.30 को चाची भी चली गई और सोनू की मम्मी अपने रूम में जाके आराम करने लगी..उनको आंख लग गई और जब सोनू की मम्मी की आंख खुल तो शाम के 6 बजे थे। अंगदाई लेके वो उठी बिस्तर से और खिड़की से देखी तो बहार कॉलोनी के सब लोग बच्चे जमा होरे थे। उनके घर के पास ही जो कॉलोनी का ग्राउंड था वहां सब कॉलोनी वाली दिवाली की रात को डर रात तक पाताखे फोडते थे।
अचानक पर सोनू की मम्मी को एहसास हुआ की आज तो सोनू की ख्वाइश पूरी करनी थी..सोनू की मम्मी को थोड़ा सा टेंशन सा होने लगा था क्यों की ऋषि बेटे के सामने ऐसे गुदगुदी करना और ऊपर से वो खराब बहुत संवेदनशील ..कहीं वो ज़ोर से अगर कोई आवाज़ मचाए और दादी ने सुन ली तो फिर…ये सब सोनेकर खिड़की जे बहार देख रही थी सोनू की मम्मी।
सोनू ने आज अपने फोन से हो रात का खाना ऑर्डर किया था..उसकी मम्मी अब फ्रेश होके फिर से किचन में गई तो सोनू आया किचन में।
सोनू : अरे मम्मी क्या कर रही हो।
पूनम देवी :: बेटा वो..डिनर बनाना जराही थी..
सोनू :: मत बनाओ मम्मी मैंने स्विगी पे ऑर्डर कर डाला है…आज दीवाली है ना आज ऑर्डर करदिया इसलिय।
पूनम देवी :: बीटा माई बना देती हैं न ज्यों खर्च किए पैसे।
सोनू :: मम्मी आपकी सब पसंद का ऑर्डर किया है। वो पनीर, रोटी, जीरा राइस, गुलाब जामुन और आइसक्रीम भी
पूनम देवी :: ओह इतना सब क्यूं पागल..
सोनू :: आज आप ट्रीट डेराही ना तो मैने सोना मैं भी डिनर ट्रीट आपको देुं..
पूनम देवी :: उफ्फो..तू न बहुत शैतान हैं..मुजे टेंशन में दाल दिया न…..दादी भी है ना घर पे।
सोनू :: मम्मी आप उनकी चिंता मत करो..वो अभिनव और राज दादी को संभल लेंगे अयर वो वो लोग छत पे होंगे..मैंने तो बोल्डिया उनको के वो लोग ऊपर ही रहा रात भर…कार्ड्स खेलके वो छत पे हाय सो जाएंगे मम्मी टेंशन नहीं।
पूनम देवी :: उन बेटा वो मुझे बहुत गुडगुडी होती है पर तू तू उन्न शर्म भी आती है ना।
सोनू :: मम्मी प्लीज आज एक ही दिन न मैंने भी इतनी जी तोड़ मेहंदी की सिरफ आपके लिए..अच्छा वो जो मेरी ट्रीट के लिए आपको डैडी ने पैसे दिए न मम्मी वो भी आप ही रखलो..आपको जो खरीदना है ..25000 है ना।
पूनम देवी को जैसे अब सोनू प्यार से दिवाली ट्रीट के लिए जैसा तय्यर था.. अनुभव अयर राज भी अब अपने घर से निकल गए सोनू के घर पहंचने को। फूड डिलीवरी वाला भी कुछ ही डर में आने वाला ही था…दादी हॉल में थी..सोनू की मम्मी और सोनू भी हॉल मी। सोनू जैसे मम्मी को देखेंगे चुपके से मुस्कान डेराहा था और समय दिखला था जैसा कि बोला के 9 बजे से शुरू करेंगे मम्मी… अभी 7 बजे थे..रात का खाना 8 बजे तक हो जाएगा और दादी भी दावा मैदान में… बहार पाठक शूरु होगा ..इधर कब पाठक फूटेंगे सोनू के दिल में वही इंतजार था।
रात के 7.45 बजे अब। डिलीवरी बॉय ने आके फूड डिलीवरी दी और सोनू..उसकी मम्मी और दादी खाना खराहे डाइनिंग टेबल पे बैठेके। उधार अभिनव और राज अपने घर से निकले सोनू के घर के लिए। डिनर के बाद सोनू की मम्मी और दादी छत पर जाके दिवाली की आतिशबाज़ी देखने लगे। सोनू ने अपने दोस्तों को फोन किया। 8 ::30 ko अभिनव और राज अगे सोनू के घर। उसकी मम्मी और दादी टेरेस पे।
अभिनव :: हा सोनू… तेरे डैड तो गए ना..
सोनू: यार वो तो सुबा ही चले गए टेंशन नहीं।
राज :: और वो दादी किधर है। तेरी मम्मी भी नज़र नहीं आराही है ना।
सोनू :: वो ऊपर है यार दोनो टेरेस पे। छत से कॉलोनी की दिवाली आतिशबाजी अच्छे से दिखती है बहुत।
अभिनव : अच्छा ये ले बॉक्स वो गुदगुदी किट वाला हा और तेरी दादी को दवाएं जब दूंगा..
सोनू :: हा अभी जाके दूंगा दवई पानी के साथ..ऊपर छत पे ही दूंगा तुम लोग भी छत पर चलो फिर वही पे कार्ड खेलने का नाटक करना… मैं फिर मम्मी के साथ नीचे आजुंगा..
राज :: ओके पर हमको अभी जाते सनय वो छत पे से रूम का वेंटिलेटर कहां है देखा देना यार।
सोनू :: हा दिखाडुंगा क्यों टेंशन देता है …दिखाडुंगा।
अभिनव :: अच्छा ठीक है फिर चल तू दवाएं ले चलेंगे ऊपर छत पे।
सोनू अपने दो दोस्तों के साथ अब सीधयों से जराहा था..उसे उनको वो वेंटिलेटर दिखया जहां से माँ डैड के बेडरूम का नज़र साफ़ देख सकते हैं। जब टेरेस पे पहुंचे तो सोनू की मम्मी को देखे जैसे फिर से मुह में पानी आगया राज और अभिनव के।
अभिनव :: नमस्ते आंटी..हैप्पी दिवाली..
राज :: हैप्पी दिवाली आंटी।
सोनू :: नमस्ते बच्चन..तुम दोनो को भी दिवाली मुबारक।
अनुभव :: दादी आपको भी दिवाली की शुभकामनाएं।
दोनो ने दादी में की जोड़ी को चुना आशीर्वाद लिया।
दादी :: जग जग जिओं बच्चन..
सोनू :: अच्छा दादी..तुमने फिर दावा लेने भूल गई ना।
पूनम देवी :: ओह अच्छा किया सोनू बेटा तू याद दिलाया।
सोनू :: लो माई लेके आया हूं दवा साथ में ..खालो दादी मां।
सोनू ने दावा दी और दादी खाने लगी। राज और अभिनव ने मुस्कान दी क्यूं की दादी बहुत जल्दी अब गहरे में मुझे जाने वाली थी।
अभुनाव :: आंटी वो हम दोनी इधर छत पे कार्ड खेल लेने क्या आज तो दिवाली है ना।
सोनू :: हा हा खेल लो यार तुम लोग रात भर भी आज कौन रोकेगा।
पूनम देवी :: हा हा बचों खेल लो….वो छटाई बिचालो इधर नीचे।
राज :: जी जी आंटी थैंक यू।
सोनू को अब अभिनव और राज इशारा करहे के मम्मी को लेके जा नीचे। दादी को हम संभल लेंगे..
सोनू :: मम्मी वो नानी का कॉल आया था आपको कॉल करने को बोला है।
पूनम देवी :: ओह अच्छा..फोन नीचे ही है बेटा..अचा तुम लोग रुको माई फोन करके आते हैं।
सोनू की मम्मी अब मटकते हुए जा रही थी नीचे और सोनू भी अभिनव और राज को थम्स अप दिखके धीरे से पेचे पीछे चल दिया.. दादी भी अभिनव और राज अब कालीन पर कुछ पर कुछ ही डर में बंद होने की आंखें। वो नींद में गहरी चली गई…नींद की गोली काम कर गई थी… अब बस सोनू को काम करना था।
दादी अब गहरी मुझे चली गई वही छत पर चाटाई पे ही जाने दो। सोनू की मम्मी नीचे गई और सोनी भी पीछे पीछे उनके गया। सोनू की मम्मी ने अपने रूम में जा के फोन उठा और नानी को फोन करने लगी। फोन लगे आ रहा था। सोनू अब आते हॉल का मुख्य द्वार बंद कर दिया और अपनी मम्मी की कमरे की ओर बड़ा। उसकी मम्मी बस चांद कदम के फसले पे थी।
एम
पूनम देवी :: हैं सोनू..नानी का फोन आरा ना लगाने के लिए।
सोनू :: हेहर मम्मी वो वो मैंने तो ऐसे ही बोल्डिया था आपको नीचे बुलवाने को नानी का फोन है।
पूनम देवी :: बदमाश… बहुत शैतान होगा है
सोनू :: हे.. मम्मी अब तो आज मेरी विश का टाइम आया ना।
रात के 9 बज रहे थे..दिवाली की रात और हर जगह से आतिशबाज़ी की आवाज़ आ रही थी।
पूनम देवी :: उन्न तू ना शैतान…मम्मी को तांग करके ही चोरेगा।
सोनू :: इतनी मेहंदी भी की ना मम्मी..कॉलेज पहले आया ना..मेरी प्यारी मम्मी।
पूनम देवी :: उन बस बस अब ज्यादा मस्का मत मार..
सोनू :: मम्मी आप इधर बेड पे चलो जाओ न मैं आता हूं अभी..फिर शुरू करता हूं।हाहा।
पूनम देवी :: अच्छा बाबा पर कृपया मुझे तांग मत करना ज्यादा।
सोनू अपने रूम में.. गया और जो अनुभव ने गुदगुदी बॉक्स किट दी थी उसे लेकर आने लगा। पूनम देवी अपने बड़े से बिस्तर पर अब सीधा लेटी थी तकिया पे। बार बार देख रही थी दूर को ओर की ये सोनू क्या कर रहा कहां गया। कुछ हमें तरह के बड़े बिस्तर पे लेती थी। बिस्तर काफ़ी बड़ा था जिसपे तीन लोग भी आराम से आ सकते थे
एम
सोनू की मम्मी ऐसे बेड पे लेटे थी, घबड़ाहट भी थी सोनू की मम्मी को पता नहीं क्या होगा। सोनू कुछ ही डर में अपने रूम से गुदगुदी बॉक्स किट लेके आया मम्मी के रूम में। थोड़ा सा तकिया पे से फेस को उठाके सोनू की मम्मी ने देखा और पूछा।
पूनम देवी : अरे सोनू ये क्या हैं बॉक्स।
सोनू: उन् मम्मी वो कुछ नहीं ये वो टिकल किट बॉक्स है मम्मी।
पूनम देवी: मतलब क्या है ये इस्मीन।
सोनू : मम्मी वो गुदगुदी करने का सामान है इसमें वो ऑनलाइन से मैंने ऑर्डर किया था मम्मी,
पूनम देवी: ओह भगवान, पागल, कृपया नहीं इतना मत करना तू पहले ही मुझे गुडगुडी होती बहुत है।
सोनू: ओह, मम्मी आज तो मेरी इच्छा है ना प्लीज अच्छे से दिल भरके करने दो ना, मेरी प्यारी प्यारी मम्मी
सोनू अब बॉक्स में से पहले वो मखमल के कपड़े निकले लगा ताकी उसके मम्मी को बिस्तर पे हाथ जोड़ी बंद खातिर।
सोनू: मम्मी थोडा अब दोनो हाथ ऊपर करो हा लेति रहो ऊपर करो ना प्लस हाथ।
पूनम देवी : हैं क्यों पर, उफो बेटा क्या करने वाला है, घबड़ाहट होती है।
सोनू: श कुछ नहीं होगा न मेरी स्वीट मम्मी बस हाथ ऊपर करो, मैं ये सॉफ्ट सॉफ्ट वेलवेट क्लॉथ से आपको अच्छे से ऐसे हाथ बंद दूंगा ताकी आप हाथ न हिला साको गुदगुदी के बीच।
पूनम देवी: आउच, आह, धीरे से बांध, पागल कहां कहां से सीख के आया सब, शैतान कहीं का, धीरे से बांध हाथों को।
सोनू: मम्मी टेंशन मत लो, वो मखमली कपड़े हैं ना टाइट भी बंधन तो आपको कोई भी दर्द नहीं होगा, लो अच्छे से बंद देता हूं वर्ना निकल जाएगा ये
सोनू ने बहुत अच्छे से बंद दिए उसके मम्मी के दून हाथ मखमल के कपड़े से बिस्तर के स्तंभ पे। अब वो दूसरा वेलवेट क्लॉथ लेके उसकी मम्मी के पेयर के पास गया उनके पायल जो थी वहन पे ही दूसरा वेलवेट क्लॉथ से एक जोड़ी बंधन लगा बेड के नीचे के अपने में।
पूनम देवी: हैं अब वहन क्या कर्रहा सोनू, हैं हाथ तो बंद दिए ना
सोनू: प्लस मम्मी क्या आप भी, हाथ बंधे सिरफ और जोड़ी भी तो बंधन दो ना, वैसा भी कोई दर्द नहीं होगा वादा हमें
पूनम देवी: उफ्फो, पर बंधन क्यूं बेटा ये सब।
सोनू: अरे आप वर्ना हाथ जोड़ी हिलाओगी न मैं कैसे फिर ठीक से गुदगुदी कर पाउंगा आपको इसलिय बंद रहा हूं मम्मी, मेरी भोली मम्मी।
सोनू ने डोनों जोड़ी को भी पायल के थोड़ा ऊपर अब कपड़े से जोड़ी भी बंद दिए थे, अब सोनू की मम्मी बिस्तर पे सीधी लेति थी, हाथ भी बंधे थे, जोड़ी भी बंधे थे और साइड में उनका बेटा सोनू बैठा था। ऊपर पंखे की ठंडी हवा चल रही थी, पर पूनम देवी के दिल की धड़कन बहुत तेजी से धड़क रही थी। हे भगवान ये लड़का आज क्या करेगा, ये बस सोनेके लेति थी सोनू
सोनू ने अब गुदगुदी बॉक्स बेड के साइड पे पैड टेबल पे रख डाला और बॉक्स खोला अब .. थोड़ा सा फेस उठाकर देखने लगी सोनू की मम्मी .. चुपके से सोनू ने वाट्सएप किया अभिनव को भी।
अभिनव और राज अब चुपके से दादी मां को चाटाई पे छटाई पे लिखे अब धीरे से सीढ़ियों के पास से वेंटिलेटर के पास आके खड़े होके देखने लगे। वेंटिलेटर का मेश लूज था तो मेश पूरा निकला दिया उन्होन तो छोटी खुदकी जैसा होगा वो.. अंदर देखा तो सोनू की मम्मी बेड पे लेटी थी..उनके दोनो हाथ बिस्तर को बंधे थे..और नीचे दो जोड़ी भी बिस्तर के अंत पे बंधे द. रूम में फैन स्पीड से चल रहा था जिस्की वहा से सोनू की मम्मी का पल्लू हलके से शोल्डर से थोड़ा हट गया था।
सोनू ने अब बॉक्स में से एक छोटा वाला पंख निकला और उसकी मम्मी के नेक के पास लगा हलके से
पूनम देवी :: ऐ.उन क्या है वो क्या लगाराहा उन गुडगुडी होगी।
सोनू :: हे मम्मी गुडगुडी होगी इसलिये तो लगारह न मम्मी।
सोनू अब पंख को नेक के पास मूव करना लगा तो जैसी उसकी मम्मी हलकी हलकी गुडगुडी के करन हसन लग गई।
पूनम देवी :: उन हे उन्न्नं क्या करता है हीहे। उन्न गुडगुडी होती न…हे…
सोनू की मम्मी फेस को इधर उधर मूव करना लगी ..फेस राइट साइड मूव कार्टी टू वो नेक के लेफ्ट साइड फेदर लगा और लेफ्ट साइड मूव कार्टी टू राइट साइड को।
अभिनव और राज वेंटिलेटर से देखे मजा लाए थे..अभी तो खेल शुरू ही हुआ था..उनको भी हल्की हल्की सी सोनू की मम्मी की आवाज धीमे धीमे थी।
सोनू ने दो तीन मिनट तक पंख से उसकी मम्मी के नेक के पास गुदगुदी करता रहा पर उसे महसूस हुआ के शायद। उसे बॉक्स से अब थोड़ा सा बड़ा वाला पंख लिया और मम्मी के चूड़ियां के ऊपर थोड़ा आर्म्स से लेके उनकी अर्नपिट्स के यहां ब्लाउज के ऊपर ही पंख को लगाना जैसा ही शुरू किया तो उसकी मम्मी थोड़ा सा ऊंचा पड़ा बेड पे
पूनम देवी :: उच ह्हे ..नही सोनू plss वहन नहीं मत कर …..
ऐसे ऊंचाने से उनका एक हाथ जो बिस्तर से बंध था मखमली कपड़ा से थोड़ा सा ढीला हो गया खुल गया। अभिनव और राज ने फिर संदेश भेजा सोनू को की देख मम्मी का एक हाथ का कपड़ा खुल गया है..फिर से तंग बंद दे।
सोनू :: उफ्फो मम्मी देखो खुल गया ना..रुको अब हिलो मत अच्छे से तंग बंधन दो रुको…बिलकुल हिलो मत।
अब सोनू ने अपने मम्मी के हाथों को मखमली कपड़े से फिर से बंद दिए टाइट।
सोनू :: मम्मी अब प्लीज ज़्यादा हिलो मत ना।
पूनम देवी :: अहान ….. गुडगुडी होती हैं बेटा।
सोनू :: हे गुडगुडी करुंगा तो होगी ही ना मम्मी।
सोनू ने अब फिर से वो बड़ा वाला पंख लिया और उसकी मम्मी के बगल की जग पे लगाके घुमाने लगा।
पूनम देवीः
सोनू :: हैं सीधी सीधी लेटो हाहा मम्मी अभी तो बस शुरू हुआ है खेल
सोनू की मम्मी की हसी बढ़ती जराही थी और अब वो साउंड अच्छे से अभिनव और राज को भी सुनाए देने लगी थी जो वेंटिलेटर से सारा नजरे द।
अभिनव ने तो अपने साथ एक एचडी सोनी कैमरा लालिया था जिससे वो सब रिकॉर्ड करने लग गया था अच्छे से।
सोनू फाइव मिनट्स तक ऐसे ही बड़े पंख से डोनो आर्मपिट की जग पे गुदगुदी करता रहा उसकी मम्मी को और सोनू की मम्मी बहुत ज़ोर से हस्के सोनू को रुकने को कहने लगी। पर आज सोनू कहां रुकने वाला था। उसे लगातर 6, 7 मिनट तक बगल के पास गुदगुदी की तो उसकी मुम्मू बहल होराही थी….
पूनम देवी::: आउच…हेहेहेहेही..बस बस plssss थोड़ी देर रुक। हेहेहेहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हहेहेहेहेहेहरहेहरहेहेहेहहेहहहेहेहहेहहहेहहेहेहेहहहहेहेहेहहहेहहेहहेहहहहेहिहर
सोनू अपनी गुदगुदी चलू रखा हुआ और अभिनव ..राज वेंटिलेटर से देख मजा लेते हैं रिकॉर्डिंग भी चालू रखते हैं। दादी माँ गहरी मुझे है छताई पे टेरेस पे। चमनलाल शर्मा इन सब से अंजान गानव में है ज़मीन की डील के लिए।
पूनम देवी :: दस मिनट तक पंख से बगल पे गुदगुदी करने के बाद उसकी मम्मी ने अनुरोध को कुछ डर रुक जा।
पूनम देवी :::: हेहेहेहेहेहेहेहे आउचब कृपया बीटा हेहेगी। Plssss थोडी डेर रुक्कक्कक्क थोडी डेर्र रुक्कक्कक्कक्कक्कक्कक्कक हेहेहेगेगे प्लस्स हेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहे।
सोनू :: हा अच्छा.. उन्न् अच्छा अच्छा ठीक है मेरी मीठी मम्मी को थोड़ी देर तोड़ ठीक है ना मम्मी..
पूनम देवी :: हा हा..हम्प्पप्प्फ्ह हम्पफ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह पाणि ला बीटा प्लस
सोनू :: अच्छा मम्मी लाता हूं.. सोनू जाके पानी लाने गया तो अभिनव ने फोन किया।
अभिनव :: क्या हुआ ब्रेक दिया क्या यार आंटी को।
सोनू : हा यार.. थोड़ी देर ब्रेक दिया पानी ले जराहा।
अभिनव :: उन तेरे तो मजा है..पर पूरा मजा लेना।
सोनू :: हा यार अभी तो खेल शुरू हुआ है…
अभिनव :: हा पूरा यंत्रों का उपयोग करना भूल भुलैया करना .. सभी बेहतरीन दोस्त।
सोनू अब फिर से रूम में गया और अपनी मम्मी के हाथ खोले.. उसकी मम्मी झट से पानी पीने लगी जैसी की ज़ोरों की प्यास लगी हो।
पूनम देवी :: हम्म्फहम्म…हम्मफह्ह्ह्ह्ह्ह्ः ((पीने का पानी))
फिर सोनू की मम्मी ने अपने बाल ठीक किए जो बिखर गए थे। सोनू बस बिस्तर के पास ही खड़ा मम्मी को निहार रहा था.. ऊपर वेंटिलेटर से भी अभिनव और राज उसकी मम्मी को देखे रिकॉर्ड करहे सब। रात के दास बज गए अब।
पूनम देवी :: उफ्फ्फ बदमाश..कितना तंग करता है हा… बहुत बहुत शैतान होगा हा..पढ़ाई में भी तेज और बदमाशी में भी।
सोनू :: हाहा मम्मी..आपके लिए ही तो मैंने इतनी मेहंदी की ना मम्मी…आहे भी आपके लिए अच्छे से पढाई करुंगा…मेरी मम्मी प्यारी है ना।
पूनम देवी :: उन्न्न बस बस बातें केला तो तुझसे कोई।
सोनू :: सच में मम्मी..आप सबसे स्वीटेस्ट हो…मेरी मम्मी दुनिया की बेस्ट मम्मी है।
पूनम देवी :: चल झूठा कहीं का… और ये बदमाशी कहां तलाशी..हा…
सोनू :: हा कहीं नहीं मम्मी वो इंटरनेट पे देखा बस वो मम्मी हम्म मम्मी वो चलो जाओ ना pls फिर से आप।
राज :: उन लगता है सोनू अच्छा ब्रेक डेराहा आंटी को 15 मिनट होगा हाहा।
अभिनव:: चुप चुप कर..आवाज़ जाएंगे तो पके जाएंगे..चुप चाप खड़ा रह यार।
राज ;; अच्छा अच्छा सॉरी यार।
ऊपर दादी सोराही की नहीं भाग के देखे आया अभिनव..वो तो गहरे मुझे थी..खरते मारते सोराही थी।
सोनू :: मेरी अच्छी मम्मी ना प्लीज चलो जाओ ना।
पूनम देवी :: उन्न्न सोनू बेटा…बस न कितनी शैतानी करेगा हा।
सोनू :: हाहा मम्मी अभी तो बस दास ही बाजे न मम्मी..हाथ ऊपर करो pls ..हा ऐसे। ये मेरी प्यारी मम्मी को ऐसे बंद दूं कसकर।
सोनू ने फिर से हाथ अच्छे से बंद डाले अब उसे देखा हाथ ऊपर बंदे द और उसकी मम्मी का। पल्लू थोडा सा खिस्का था तो उनकी कमर आधी तो नज़र आराही थी..उनकी चिकन गोरी कमर का साइड में पड़ा फोल्ड भी कामुक लगरा था। सोनू ने अब धीरे से बॉक्स से इलेक्ट्रॉनिक टूथब्रश निकला।
पूनम देवी :: अरे अरे ये क्या है सोनू।
सोनू :: हाहा इसे इलेक्ट्रॉनिक टूथब्रश बोले मम्मी…इस्को स्पेशल टिकलिंग मी यूज़ करते करते।
पूनम देवी :: बाप रे नहीं नहीं plss उन्न गुडगुडी होगी न बहुत।
सोनू :: हाँ मम्मी.. अब हिलो मत ओके ना प्लीज मेरी अच्छी मम्मी न सीधी लेटो प्लीज.. ये ये ये ब्रश इधर। (सोनू ने विह ब्रश लेके उसकी मम्मी के कमर के साइड फोल्ड्स पे लगाते ही उचचल पडी)))
पूनम देवी :: अहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हेहेहे। नाआही हेहे कृपया सोनू ही अरेई हटाओ नहीं उडर हे नहि बेटा हेहेहेहेहेहेहेहेहीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईी।
सोनू :: अरे सीधी लेटो आर ममी..अच्छा आप इधर पलटोगे तो उधार करुंगा हाहा। पिन ड्रॉप साइलेंस में सब देखराहे))
पूनम देवी::::::पुउउउउउउउउउउहलीईईईईज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ हाहाहेहेहेह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हे सोनू उच्ह नाही उडररेहे ….
सोनू की मम्मी ज़ोर ज़ोर से हसके बहुत पॉट होराही थी बिस्तर पे और उनके पायल की आवाज़ और चूड़ियाँ की ख़नक … उसके ऊपर उनकी ज़ोर से वो खिलखिलाती हसी से कमरा गूंज रहा था।
पूनम देवी :: अरे अरे ये क्या है सोनू।
सोनू :: हाहा इसे इलेक्ट्रॉनिक टूथब्रश बोले मम्मी…इस्को स्पेशल टिकलिंग मी यूज़ करते करते।
पूनम देवी :: बाप रे नहीं नहीं plss उन्न गुडगुडी होगी न बहुत।
सोनू :: हाँ मम्मी.. अब हिलो मत ओके ना प्लीज मेरी अच्छी मम्मी न सीधी लेटो प्लीज.. ये ये ये ब्रश इधर। (सोनू ने विह ब्रश लेके उसकी मम्मी के कमर के साइड फोल्ड्स पे लगाते ही उचचल पडी)))
पूनम देवी :: अहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हेहेहे। नाआही हेहे कृपया सोनू ही अरेई हटाओ नहीं उडर हे नहि बेटा हेहेहेहेहेहेहेहेहीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईी।
सोनू :: अरे सीधी लेटो आर ममी..अच्छा आप इधर पलटोगे तो उधार करुंगा हाहा। पिन ड्रॉप साइलेंस में सब देखराहे))
पूनम देवी::::::पुउउउउउउउउउउहलीईईईईज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ हाहाहेहेहेह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हे सोनू उच्ह नाही उडररेहे ….
सोनू की मम्मी ज़ोर ज़ोर से हसके बहुत पॉट होराही थी बिस्तर पे और उनके पायल की आवाज़ और चूड़ियाँ की ख़नक … उसके ऊपर उनकी ज़ोर से वो खिलखिलाती हसी से कमरा गूंज रहा था।
अब जैसे जैसे सोनू अपनी मम्मी को गोरी गोरू कमर के साइड्स पे बारी बारी टूथब्रश लगाके गुदगुदी करता है..तो वो कभी इज सिड्स लुधाकती है बहुत पॉट होके..कभी हम साइड..इसी में उनकी साड़ी का गाँठ जो कमर पे बंधन था हारे होके खुल गया था और अब पूरा इनका पेट सोनू की आंखों के सामने था। पर अब भी उनकी साड़ी नावेल से ऊपर ही बंधी थी। अभिनव और राज खुदकी से देखो द सोनू की मम्मी के एक्सप्रेशन..हड़ी और उनका हलका हलका क्लीवेज और कमर भी। सोबू को भी नहीं पता था के वो लोग ये सब रिकॉर्ड भी करते हैं।
पूनम देवी :: हेहेहेहेह्रीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईीी। बासएसएसएसएसएसएसएसएसएस. हेहे सोनूउउउउउह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हहे मैटी हेहे बेटाआआआ हेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहे। ओच्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् न नहीं आ नहीं आ नहीं आ नहीं.
सोनू अब भी अपनी मम्मी के कमर के साइड्स में वो इलेक्ट्रॉनिक टूथब्रश से गुदगुदी करने के लिए जराहा था और उसकी मम्मी का जूड़ा जो बंध था बालों को वो भी खुल गया था बहुत पॉट में बिस्तर पे। अभिनव और राज तो भूलभुलैया ले रहे थे देखे और कुछ कुछ डर के बाद जाके वो देखे आते की दादी अब भी सो रही की नहीं।
पूनम देवी: Pllzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzhehehehe सोनू, basbbb bbass bhehehehhe hehehehehehehe heheheheheh हैं plsss rukkkkkk hahahahaha कुछ der rukkkkkkkkkkooo hahahahahahahahahahaha PHHZZLLHLLZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZZHAHHHAHAHAHAHAHAHAHHAHAHAHAHAHAHHAHHAHAHAHHAHAHAHAHAHAHAHAHAHAHAHAH
सोनू: हा क्यों क्यूं मम्मी इधर होराही न गुडगुडी होराही ना हाहा, होराही ना
Pooonam देवी: hehehehe haaaa plsss plss thodi der ruk hahahahahhahahaha plsssssssssssssssssssssssssssssssssshhhehehehehehehehehehehehehehhehehehehhehehehehehehheh plss rukkkkjjaaaa hehehehehehehhehehehehehehehehhehehehehehehhehehehehehehhehehehhehehehehe
सोनू की मम्मी कुछ इस तरह से हिल रही थी।
कुछ दास मिनट बाद सोनू ने जब गुदगुदी करना कमर पे ब्रश से रोका तो उसकी मम्मी की तो साड़ी ही पूरी खुल गई थी और बाल भी बिखरे द थोड़े, ऊपर से जो जोड़ी के पास बांध था एक मखमली कपड़ा तो वो भी टूट गया था .
पूनम देवी: उफ्फ हे भगवान उफ्फ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह
सोनू: मेरी स्वीट मम्मी रुको मैं आपके लिए फ्रिज से पानी और गुलाब जामुन लेके आता हूं ठीक है ना मम्मी।
पूनम देवी: हम्मफ, उफ बदमाश कहीं का, उफ् देख पूरी सारी मेरी खराब हो जाएगी।
सोनू: हा हा आप मेरी बेस्ट मम्मी हो ना, अच्छा मां रुको लाती हूं
सोनू अब उसके गया हॉल में हमारे लिए समय पे पूनम देवी उठके अब जरा अपनी साड़ी और बाल ठीक करने लगी। साड़ी को थोड़ा नीचे करके फिर से पल्लू ठीक करके ऐसे बंद रहे तो ऊपर से अभिनव और राज तो जैसे नजरें जमा के देख रहे थे। सोनू की मम्मी की गोल गहरी नाभि की झलक हल्के से देखोगे राज और अभिनव को इसी बीच।
सोनू अब हाल से गया फिर से और फ्रिज में पानी लेने लगा तो उसे अभिनव का कॉल आया जैसा।
अभिनव :: हैलो हा क्या कररा यार सोनू
सोनू :: वो यार थोड़ा सा ब्रेक लिया है..फ्रिज से पानी और गुलाब जामुन लेके जाराहा मम्मी के लिए।
सोनू :: अरे यार हा मेरी मम्मी बहुत गुदगुदी हैं.. अच्छा हुआ तूने वो हाथ जोड़ी बंधने का भी आइडिया दिया तो बिलकुल संभव नहीं था। और तेरा बॉक्स तो बहुत ही मस्त है यार। अरे वो मेरी दादी तो सोराही ना..ज़ारा नज़र रखना तुम लोग बीच में।
अभिनव :: अच्छा अच्छा और पूरा मजा लेना है याद है ना जो मैंने बॉक्स में तुझे देखा था। वैसी तेरी मम्मी तो बहुत गुदगुदी है सच में..मैंने नहीं सोना था इतनी गुदगुदी होगी वो..अच्छा हुआ के सब दरवाजे खिड़कियां बंद है वर्ना तेरी मम्मी की आवाज तो हाहा पड़ोसियों तक जाते हैं।
सोनू :: अरे यार हा मेरी मम्मी बहुत गुदगुदी हैं.. अच्छा हुआ तूने वो हाथ जोड़ी बंधने का भी आइडिया दिया तो बिलकुल संभव नहीं था। और तेरा बॉक्स तो बहुत ही मस्त है यार। अरे वो मेरी दादी तो सोराही ना..ज़ारा नज़र रखना तुम लोग बीच में।
अभिनव :: हा यार अभी जाके राज देखो आया थाम बोलरा था के कुंभकरण की तरह सोराही है दादी।
सोनू :: चलो अच्छा है फिर..फिर से कुछ डर तोड़ के बाद खेल शुरू करुंगा यार 15 मिनट के बाद ठीक है केयर।
अभिनव :: हा अच्छा अच्छा यार हम लोग भी तब तक छत पर जाके एक सिगरेट मार लेंगे।
सोनू :: sshh हैं सिगरेट पीक चैट पे मत फेनका। बहार फेंक देना यार वर्ना plss..
अभिनव :: हा हा टेंशन मत ले तू..हम बहार फेंक देंगे यार तेरे छत पर नहीं फेंकेंगे..चल फिर रखता हूं और सुन याद है ना पूरा इस्तेमाल करना बॉक्स को plss..इतना मेहंदी बॉक्स है फिर से मिलेगा .
सोनू: हा यार याद है मुझे..ठीक है यार चल फिर ध्यान रखना।
सोनू की मम्मी भी तब तक वॉशरूम जाके फेसवॉश करके आई.. वो सोनाछराही थी मन में की आज तो सोनू कितनी शैतानी करेगा..और अचानक याद आया उनको के दादी कहीं उनकी आवाज सुनी तो नहीं..वो तो भूल दादी ही गई बारे में..दिल ज़ोर से धड़कने लगा उनका। कुछ ऐसा था उनका रिएक्शन।
कुछ इस तरह का रिएक्शन था सोनू की मम्मी का।
सोनू कुछ डर में आया मम्मी के कमरे में तो तब तक उसकी मम्मी वॉशरूम जाके आएगी थी, साड़ी और बाल भी ठीक करके खड़ी थी। पर वो दादी के नंगे में सोनेचरे थी।
पूनम देवी: ओह सोनू, वो दादी मां कहां हैं, मैं तो भूल ही गई थी।
सोनू: उफ्फो मम्मी, कितना टेंशन लेटे हो, फ़िकर मत करो ना, वो ऊपर आराम से सो रहे हैं, मेरे दोस्त हैं ना कार्ड खेल रहे हैं और दादी माँ आराम से तो रहे ही।
पूनम देवी: ओह, शुक्र है, मैं तो डर ही गई थी बेटा।
सोनू: मैं हूं न मम्मी कैसा डरना आओ ये आप जूस पीलो और गुलाब जामुन भी खालो, आपके पसंदीदा।
ऊनम देवी: उन् बस बस मस्का लगाना तो कोई तुझसे पढ़ा हा
सोनू और उसकी मम्मी अब थोड़ा हॉल में आके बैठे और जूस पीने लगे, सोनू की नजरें पर अपनी सुंदर मम्मी पे ही थी और बस सोनचरा था आने का खेल वो तो अपनी मां को देखकर, निहारता हुआ। उधार वेंटिलेटर के पास आए फिर से राज, अभिनव सिगरेट पीक और बस बसबरी से फिर से खेल शुरू होने के इंतजार में। रात के 10.45 होरे थे अभी।
और उसके मम्मी हॉल में बैठे जूस पीने लगे, फिर कुछ डर बाद सोनू ने अपनी मम्मी को उनकी पसंदीदा गुलाब जामुन लाएके दिया जिस बड़े शौक से खाते थी वो। सोनू की मम्मी बड़े ही शौक से खाने लगी और इधर उधार की बातें भी होने लगी।
उधार अभिनव और राज की बेताबी बढ़ रही थी के सोनू कहां है अब तक नहीं आया। रात में थांड भी बढ़ने लग गई थी। टेरेस पे जाके राज ने दादी को एक कंबल भी उड़ादि तकी उनको थंड ना लग खातिर। आधा घंटा बीट गया तो अब अभिनव ने फोन पे संदेश किया सोनू के।
अभिनव; किधर हैं तू
सोनू: हा यहां हॉल में हूं मम्मी के साथ जूस पीराहा था।
अभिनव; अच्छा इतना देर से होगा न, इसलिये मैंने संदेश किया
सोनू; हा हा वो बस थोड़ी इधर उधार की बात होराही थी।
अभिनव; अच्छा अच्छा, अरे जल्दी से शुरू करना यार यहां तक कि बहुत अच्छा है
सोनू; अच्छा हम्म ठीक है यार रुक पंच मिन।
अभिनव: अच्छा चल इंतजार करता हूं, अलविदा
सोनू ने अब जूस का गिलास और गुलाब जामुन का कप भी रख दिया किचन में हॉल में वापस आके।
सोनू :: मम्मी, हम्म वो वो चले क्या वो रूम में फिर।
पूनम देवी: उन्न्न सोनू बेटा, अभी बस न इतना तो किया ना तूने बहुत गुडगुडी होती हियां।
सोनू; कृपया मेरी अच्छी मम्मी ना, उन्न आज एक ही दिन ना मम्मी
पूनम देवी: उफ्फो, ज़िद्दी है बहुत है मनवाके ही छोरेगा ना, उन्न अभी क्या है और करने का इतना सब किया बदमाश,, रुक..
सोनू की मम्मी उठी और कुछ इस तरह की साड़ी एडजस्ट फिर से करने जाने को तैयार हो गई। सोनू आंखें फादे अपनी मम्मी का क्लीवेज घोरने लग गया।
या बहार उसके दोस्त अभिनव या राज ये नज़र देख कर पागल हो उठे। काम की देवी कैसे अपना हुस्न दिखी रही थी जिस्का सिद्ध असर उन दोनो के लुंडो पर हो रहा या पंत फड़ने को बेटाब बहार दूर से देखने पर अभिनव या अज ये हाल था तो और सोनू का क्या हाल हो रहा होगा वो तो है हुस्न को इतने करीब से देख रहा हमसे खेल रहा था। सोनू अपनी मम्मी की नज़र बच्चा कर अपने लुंड को सहने लगा
मानो उससे समाज कर शांत करने की कोहिश कर रहा हो पर जिस तरह किसी चोर ने खज़ाने से भारी तिजोरी को एक बार देख लिया तो फिर वो अपने आप को हमें खज़ाने को लूटने से कैसे रोक सकता है