मेरा परिवार(दि फैमिली) Chapter 9

 



     मेरा परिवार(दि फैमिली) Chapter 9





कंचन और विजय कुछ देर तक आपस में बाते करने के बाद एक दुसरे से गले लगकर यो ही नंगे सो गये । इधर शीला अपने भाई का इंतज़ार करते करते थक गयी और अपने हाथों से ही अपने आपको शांत करने लगी, वह कुछ देर की मेंहनत के बाद झड गयी और अपनी नाइटी को पहनकर बेड पर सो गयी ।
नरेश अपनी माँ को दो बार चोदने के बाद थक हारकर उसके कमरे से निकलते हुए अपने कमरे में आ गया। नरेश ने अपने कमरे में आते ही देखा की उसकी बहन सो चुकी है, नरेश भी बुहत थका हुआ था। वह अपनी दीदी के बगल में लेट गया और कुछ ही देर में वह नींद के आग़ोश में चला गया।

मानिषा भी अपने बेटे से दो बार चुदवाने के बाद आराम की नींद करने लगी । विजय की मोबाइल का अलारम बजने लगा वह चौँककर उठ गया और अपनी मोबाइल के अलारम को बंद करते हुए बाथरूम में चला गया। विजय उठकर पेशाब करने के लिए बाथरूम में चला गया ।
विजय ने सुबह के ५ बजे का अलारम अपनी मोबाइल पर सेट किया था, बाथरूम से लौटते ही वह अपनी बहन के जिस्म से चादर हटाकर उसे देखने लगा, विजय अपनी बहन के पैरों से होता हुआ उसकी दोनों टांगों को आपस में से अलग कर दिया।

कंचन की चूत के छेद को देखकर विजय का लंड तनने लगा, क्योंकी चुदाई से पहले कंचन की चूत के दोनों होंठ आपस में मिले हुए थे। मगर अब उसकी चूत का मूह थोडा खुल गया था । विजय अपने मूह को अपनी दीदी की चूत के पास ले जाकर सूँघने लगा ।
विजय की आँखें अपनी दीदी की चूत की गंध सूंघकर बंद होने लगी । क्योंकी उसे अपनी दीदी की चूत की गंध बुहत अच्छी लग रही थी । विजय को कंचन की चूत से उसके वीर्य और उसकी दीदी की चूत के पानी की मिली जुली ख़ुश्बू आ रही थी।

विजय कुछ देर तक अपनी दीदी की चूत को सूँघने के बाद अपनी जीभ को निकालकर अपनी बहन की चूत को चाटने लगा, कंचन जो गहरी नींद में थी अपने भैया की जीभ को अपनी चूत पर महसूस करके हिलने लगी ।विजय अपनी बहन की चूत को चाटते हुए अचानक अपनी जीभ को कडा करते हुए अपनी दीदी की चूत में डाल दिया ।
कंचन का जिस्म अपने भाई की जीभ के घुसते ही ज़ोर से काम्पने लगा, विजय अपनी बहन की चूत में पूरी तेज़ी के साथ अपनी जीभ को अंदर बाहर करने लगा। कंचन की नींद टूटने लगी और उसने अपनी आँखें खोलकर ज़ोर से सिसकते हुए अपने हाथों को नीचे करते हुए अपने भाई के सर को पकडकर अपनी चूत पर दबाने लगी।

विजय ने कुछ देर तक अपनी दीदी की चूत को अपनी जीभ से चोदने के बाद उसकी चूत से अपनी जीभ को निकाल दिया और सीधा होते हुए अपना तना हुआ लंड उसकी चूत पर रखते हुए एक ही झटके में उसे पूरा अपनी बहन की चूत में घुसा दिया।
“हाहहहहह भैया ओह्ह्ह्हह फिर से कर रहे हो” कंचन ने अपने भाई का लंड एक ही झटके में अपनी चूत में घूसने से दर्द से चीखते हुए कहा ।
“दीदी मेरा मन तो आपको सारी ज़िंदगी चोदने से भी नहीं भरेंगा” विजय यह कहते हुए अपनी दीदी की चूत में अपने लंड को ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा।
“आआह्ह्ह्ह भैया आप ओह्ह्ह्हह ज़ोर से करो फ़ाड़ दो अपनी बहन की चूत को । बुहत मज़ा आ रहा है” कंचन भी अपने भाई की चुदाई से पूरी तरह नींद से जागते हुए चिल्लाकर अपने भाई को जोश दिलाते हुए कहने लगी।

विजय अपनी बहन की बात सुनकर उसे बुहत तेज़ी के साथ चोदने लगा । कंचन ने अपनी दोनों टांगों को अपने भाई की कमर में डाल दिया और बुहत ज़ोर से सिसकते हुए अपने भाई के लंड को अपनी चूत की गहराइयों में रगड देता हुआ महसूस करने लगी ।
विजय अपनी बहन को 15 मिनट तक कई एंगल्स में छोड़ते रहने के बाद हाँफते हुए उसकी चूत में झडने लगा । कंचन अपने भाई का वीर्य अपनी चूत में गिरता हुआ महसूस करके दूसरी बार झरने लगी। विजय पूरी तरह झरने के बाद अपने दीदी की चूत से अपना लंड निकालते हुए उसकी साइड में लेट गया।

“दीदी मैं अब अपने कमरे में जा रहा हूँ सुबह होने वाली है” विजय ने कुछ देर लेटे रहने के बाद बेड से उठकर अपने कपडे पहनते हुए कहा।
“भइया आपने तो मुझे चलने के क़ाबिल नहीं छोड़ा। किसी को पता चल गया तो” कंचन ने अपने भाई की बात को सुनकर उसे अपनी चिंता के बारे में बताते हुए कहा ।
“अरे पगली अब तुम चल सकती हो । वह तो पहली चुदाई की वजह से तुम्हें तकलीफ हो रही थी । मगर अब तुम्हारी चूत पूरी तरह खुल चूकी है । ज़रा उठकर देखो” विजय ने अपने कपड़े पहनने के बाद अपनी बहन के हाथ को पकडते हुए कहा।

कंचन अपने भाई की बात सुनने के बाद अपने भाई के हाथ को पकडकर उठने लगी । कंचन ने उठते हुए महसूस किया की उसे अब तकलीफ नहीं हो रही थी ।कंचन ने उठने के बाद अपने भाई के हाथ को छोडते हुए थोडा आगे चलि गयी और वापस आते हुए अपने भाई को गले लगाते हुए उसके होंठो को चूम लिया।
“भाइ आपने सही कहा था हमें बिलकुल तकलीफ नहीं हो रही है” कंचन ने खुश होते हुए कहा।
“ठीक है दीदी मैं जा रहा हू” विजय ने भी अपनी दीदी को एक चुम्मा देते हुए कहा और वहां से निकलकर अपने कमरे की तरफ जाने लगा।

विजय अपने कमरे के पास आकर दरवाज़े को खटकाने लगा, दरवाज़े के खटकाने से शीला की नींद टूट गयी और वह हडबडाकर उठते हुए दरवाज़ा खोलने चली गई।
“क्या हुआ भैया” दरवाज़ा खोलते ही शीला ने एक अँगड़ाई लेते हुए कहा ।
“दीदी आप कंचन दीदी के पास जाओ ना” विजय ने शीला को गौर से देखते हुए कहा।
“क्यों भैया पेट भर गया क्या। कैसी लगी हमारी कंचन दीदी आपको” शीला ने विजय की बात सुनकर उसे टोकते हुए कहा।

“क्या दीदी में समझा नही” विजय का लंड शीला के मूह से ऐसी बात सुनकर फिर से तनने लगा, विजय ने अपने लंड को आगे से दबाते हुए शीला से कहा।
“भइया अब इतने भोले भी मत बनो । तुम ने तो दीदी को खूब मजा दिए होंगे हमारी तरह थोडी सो गये होगे” शीला ने विजय की तरफ देखते हुए कहा ।
“क्यों दीदी नरेश भैया तो थे यहाँ फिर आप” विजय इतना कहकर चुप हो गया। शीला के मूह से ऐसी बातें सुनकर विजय का लंड अब झटके मारने लगा था।
“भइया माँ की तबीयत खराब थी तो वह भैया को अपने कमरे में ले गयी सर दबाने के लिए । पता नहीं वह कब उसके कमरे से निकलकर यहाँ आये” शीला ने फिर से अंगड़ाई लेते हुए कहा । शीला ने इस बार जानबूझकर अपनी चुचियों को जितना हो सकता था । आगे करते हुए अंगड़ाई ली ताकी उसका भाई उसकी चुचियों का फिगर सही तरीके से जान सके।

“दीदी आपका फिगर तो बुहत बढ़िया है, मगर नरेश भाई ने आपको जगाया नही” विजय ने शीला की चुचियों को बाहर की तरफ आने से गौर से देखकर उसकी तारीफ करते हुए उससे पूछा।
“नही भैया जाने क्या हो गया उसे” शीला ने यह कहते हुए बाथरूम का दरवाज़ा खोलते हुए उसमें घुस गयी। शीला ने बाथरूम का दरवाज़ा बंद नहीं किया और अपनी नाइटी को उतार दिया ।
विजय के दिल की धडकनें शीला के जिस्म को सिर्फ छोटी सी पेंटी और ब्रा में देखकर ज़ोर से धडकने लगी और वह ज़ोर से साँसें लेते हुए शीला को देखने लगा। विजय का लंड उसकी पेंट में झटके मारते हुए इतना अकड़ चूका था की उसे अब अपने लंड में दर्द महसूस होने लगा था।

“क्या भैया कंचन को देखकर आपका मन नहीं भरा क्या जो मुझे देख रहे हो” शीला ने मुसकुराकर अपने भाई को अपनी तरफ देखते हुए टोक कर कहा।
“शीला दीदी आप बुहत सूंदर हो” विजय के मूह से सिर्फ इतना निकला ।
“क्यों झूठी तारीफ कर रहे हो, कंचन के सामने तो हम पानी भरेंगी” शीला ने नीचे झुककर अपने एक पाँव को खुजाते हुए कहा।
“दीदी सच में आप बुहत सूंदर हो” शीला के नीचे झुकने से विजय ने उसकी चुचियों को आधा नंगा होकर अपने सामने आने से अपने गले में थूक को गटकते हुए कहा।

भइया हमें पता है आप हमें खुश करने के लिए हमारी झूठी तारीफ कर रहे हो। अब अपना मूह दूसरी तरफ करो हम अपनी पेंटी उतारकर मूतने वाले हैं” शीला ने विजय को मुस्कराते हुए कहा ।
विजय को अपने कानों पर इतबार नहीं आ रहा था। शीला की बात सुनकर उत्तेजना के मारे उसका पूरा जिस्म काम्पने लगा। वह सोच रहा था की शीला बाथरूम का दरवाज़ा बंद क्यों नहीं कर रही है। इसका मतलब वह जानबूझकर उसपर लाइन मार रही है। मगर शीला की कुंवारी चूत देखने के ख़याल से ही विजय का पूरा जिस्म गुदगुदी करने लगा।

“ओहहहहह भैया आप नहीं मानेगे। चलो आपसे क्या शरमाना” शीला यह कहते हुए अपनी पेंटी को अपने चूतडों से नीचे करते हुए नीचे बैठकर मूतने लगी । विजय शीला के नंगे चूतडों और उसकी गुलाबी हलके बालों वाली चूत को देखकर बूत की तरह खडा होकर शीला को मूतते हुए देखने लगा ।
विजय का उत्तेजना के मारे बुरा हाल था । उसका लंड उसकी पेंट में ही उत्तेजना के मारे वीर्य की बूँदे टपका रहा था, विजय की बर्दाशत जवाब देने लगी थी । उसे अपने लंड में बुहत दर्द महसूस हो रहा था। उसने अपने हाथ से अपनी पेण्ट की ज़िप खोल दी और अपनी आँखें शीला की नंगी चूत पर टिका दी । शीला की चूत से मूतते हुए मधुर आवज़ आ रही थी।

“भइया आप तो सच में बुहत बदमाश हैं सारी रात अपनी बहन से मजा लेने के बाद भी हमारी चूत को देख रहे हैं” शीला ने मूतने के बाद सीधा होते हुए कहा और अपनी चूत विजय को सही तरीके से दिखाने के बाद अपनी पेंटी को ऊपर खीँच लिया ।
विजय बिना बोले बस बूत की तरह खडा था। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या करे । उसके अंडरवियर में बुहत बड़ा उभार बना हुआ था।
“भइया इसे आपने अपनी दीदी का रस नहीं पिलाया क्या। फिर यह क्यों प्यासा है” शीला ने बाथरूम से निकालते हुए विजय के लंड को अंडरवियर के ऊपर से ही अपने हाथ से दबाकर हँसते हुए कहा और कमरे से निकलकर चलि गयी।

विजय की हालत बुहत बुरी थी । उसने शीला के जाते ही अंडरवियर को उतार दिया और बाथरूम में घुस गया, विजय ने उत्तेजना के मारे अपने लंड को अपने हाथों में लेकर ज़ोर से हिलाने लगा । विजय मुठ मारते हुए शीला की चूत को याद कर रहा था ।
विजय को अब भी शीला का हाथ अपने लंड पर पडा महसूस हो रहा था । विजय का जिस्म अचानक अकड़ने लगा और वह ज़ोर से काम्पने लगा।
“ओहहहह शीला दीदी” विजय के लंड से ज़ोर से पिचकारियां निकलकर बाथरूम में नीचे गिरने लगी और वह शीला को याद करते हुए झडने लगा ।

विजय शांत होने के बाद बाथरूम में अपने कपडे उतार कर नहाने लगा । विजय नहाने के बाद बाथरुम से निकलकर नरेश की साइड में लेट गया, विजय को कुछ ही देर में नींद आ गयी ।
आज संडे था तो रेखा आज सवेरे नहीं उठी थी और उठते ही किसी को उठाया भी नहीं । वह खुद नहाने बाथरूम में चलि गई, रेखा ने नहाने के बाद कपडे पहन कर सीधा कीचन में चलि गयी और नाश्ते का इन्तज़ाम करने लगी।

रेखा को नाश्ता तैयार करते हुए अचानक दिमाग में आया वह जाकर सभी को उठा दे । जब तक सभी फ्रेश हो जाएंगे वह नाश्ता बना लेगी । रेखा ने यह सोचते हुए कीचन से निकलते हुए सीधा अपने बेटे के कमरे में आ गयी, रेखा की नज़र कमरे में दाखिल होते ही अपने बेटे और भांजे पर पडी जो दोनों सीधा होकर बेखबर सिर्फ एक अंडरवियर में सो रहे थे ।
रेखा की नज़र सीधा अपने बेटे और भांजे के अंडरवियर में बने उभारों पर पडी, रेखा अपने बेटे और भांजे के खडे लन्डों को अंडरवियर में क़ैद देखकर ही गरम होने लगी । रेखा दोनों के लन्डों को देखकर एक दुसरे से मिलाने लगी।

रेखा ने अपने भांजे का लंड तो देखा भी था और अपनी चूत में लिया भी था । मगर उसके बेटे का लंड इस वक्त उसे नरेश के लंड से थोडा बड़ा और मोटा लग रहा था। रेखा की चूत अपने बेटे के लंड को देखते हुए उत्तेजना के मारे पानी टपकाने लगी ।
रेखा सोचने लगी जब उसे अपने भान्जे से चढ़वाते हुए इतना मज़ा आया था तो अगर उसे उसका बेटा चोदेगा तो वह तो स्वर्ग की ही सैर करेगी । रेखा का हाथ यह सोचते हुए अपनी साड़ी के ऊपर से उसकी चूत तक आ गया और वह अपने बेटे के लंड को देखकर अपनी चूत को सहलाने लगी।

रेखा के जिस्म की आग उसका हाथ अपनी चूत पर आते ही ख़तम होने के बजाये और ज़्यादा बढ़ने लगी ।रेखा आगे बढ़्ते हुए अपने बेटे के साइड में जाकर बैठ गई और उसके अंडरवियर के उभार को गोर से देखते हुए अपनी चूत को सहलाने लगी ।
रेखा के मन में आया की वह अपने बेटे के लंड को अपने हाथ से छु कर देखे । मगर वह ऐसा कर नहीं पा रही थी । रेखा ने आखिरकार अपने मन की बात मानते हुए अपना हाथ को आगे बढाकर अपने बेटे के अंडरवियर के ऊपर से ही विजय के लंड को पकार लिया। रेखा का पूरा जिस्म अपने बेटे के लंड पर अपना हाथ पड़ते ही ज़ोर से काम्पने लगा।

रेखा ज़ोर की साँसें लेते हुए अपने हाथ को अपने बेटे के अंडरवीयर पर थोडा आगे पीछे करने लगी । रेखा का दूसरा हाथ अपने आप उसकी चूत पर चला गया, एक हाथ से अपने बेटे के लंड को महसूस करते हुए दुसरे हाथ से अपनी चूत सहलाने में रेखा को इतना मज़ा आ रहा था की वह बुहत ज़ोर से साँसें लेकर अपने हाथ को जितना हो सकता था तेज़ी के साथ अपनी चूत को सहला रही थी ।

रेखा का जिस्म कुछ ही देर में आखिरकार झटके मारने लगा।
“आआह्ह्ह्हहहहहः” रेखा सिसकते हुए झरने लगी और उसे झरते हुए इतना मज़ा आने लगा की उसके हाथ ने अपने बेटे के लंड को ज़ोर से पकड लिया । रेखा की चूत से झरते हुए बुहत सारा पानी निकलने लगा। इसीलिए वह मज़े के मारे अपनी आँखें बंद करते हुए झरने का मज़ा लेने लगी, विजय गहरी नींद में था फिर भी उसका लंड दबने से उसे थोडी तकलीफ हुई और वह घबराकर अपनी आँखें मलते हुए उठने लगा।

रेखा ने जैसे ही अपनी आँखें खोली। उसका बेटा अपनी आँखें मल रहा था।
“क्या हुआ मम्मी” विजय ने हैंरानी से अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा।
“क्या बेटे सुबह सुबह किसका सपना देख रहे थे। जो यह ऐसे सीना तानकर खडा था” रेखा ने अपने बेटे को उठता हुआ देखकर अपने हाथ से फिर से उसके लंड को दबाकर उसकी तरफ देखते हुए कहा । नरेश अपनी माँ की बात सुनकर जल्दी से सीधा हो गया और अपनी माँ के हाथ के हटते ही अपने लंड को वहां पर पडी चादर से ढकने लगा।

“बेटा अब इसे क्यों छुपा रहे हो। मैं तुम्हारी माँ हूँ मुझे सब कुछ पता है और बचपन से मैंने तुझे नंगा देखा है” रेखा ने चादर को अपने बेटे के ऊपर से उठाते हुए कहा।
“हाँ मगर माँ बचपन और अब में फर्क है” विजय ने शरमाते हुए कहा ।
“बेटा मुझे कोई फर्क नहीं पडता । तुम तो मेरे लिए वही छोटे विजु हो। जिसे मैं बचपन में नंगा नहलाती थी, अब तुम्हारी लूली बड़ी हुयी तो क्या हुआ हो तो तुम मेरे बेटे ही” रेखा ने विजय के लंड की तरफ देखते हुए कहा।

“माँ आप आई किसलिए थी” विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर अब शरमाना छोडकर कहा।
“बेटे आई तो तुम्हें उठाने थी । मगर तुम्हारे इस शैतान को देखकर में यहीं बैठ गई, सच बता सपने में किसे चोद रहा था” रेखा ने बड़ी बेशरमी से अपने बेटे से बात करते हुए कहा ।
“माँ आप क्या कह रही हैं मुझे कोई सपना नहीं आया था” विजय अपनी माँ के मुँह से ऐसी बात सुनकर हैंरान होते हुए बोला।
“बेटा मैं तुम्हारी माँ हूँ । सब जानती हूँ अगर तुम्हे कोई सपना नहीं आया था तो फिर यह ऐसा खडा होकर क्यों झटके मार रहा था” रेखा ने इस बार अपने बेटे के लंड पर एक चिकोटी लेते हुए कहा।

“ओहहहहह माँ सच्ची मुझे पता नहीं मगर मैं सपना नहीं देख रहा था” विजय अपनी माँ के हाथ से अपने लंड की चिकोटी लेने से हल्का चिल्लाते हुए बोला।
“लगता है तुम्हारी शादी करनी पड़ेगी। तुझे अब यह सताने लगा है, मगर जिस लड़की से तू शादी करेगा वह बुहत ख़ुशनसीब होगी” रेखा ने अपने बेटे की बात सुनने के बाद उसकी तारीफ करते हुए कहा ।
“माँ मुझ में ऐसा क्या है। जो मुझसे शादी करने वाली ख़ुशनसीब होगी” विजय ने अपनी माँ की बात सुनने के बाद हँसते हुए कहा।
“बेटा जो चीज़ तुमहारे पास है उसकी तम्मना हर औरत करती है मगर यह किसी किसी के नसीब में आती है” रेखा ने वैसे ही अपने बेटे को समझाते हुए कहा।

“माँ आप किस चीज़ की बात कर रही हो” विजय समझ चूका था की उसकी माँ उसके लंड की बात कर रही है। जिसे देखकर वह मदहोश हो गई थी मगर फिर भी वह अपनी माँ के मूह से सुनना चाहता था इसीलिए वह अन्जान बनने का नाटक करते हुए बोला।
“बेटा तुम तो बुहत बुधु हो। मैं तुम्हारे इस लंड की बात कर रही हूँ । इतना बड़ा और मोटा ख़ुशनसीब औरत को ही मिलता है” रेखा ने एक बार फिर अपने बेटे के लंड को अपने हाथ में पकडते हुए कहा।

“माँ सच में मुझे कुछ पता नहीं है । इससे औरत को क्या मिलता है” विजय को अपनी माँ के मुँह से ऐसी बाते सुनते हुए बुहत अच्छा लग रहा था । इसीलिए वह फिर से अन्जान बनने का ढ़ोंग करते हुए बोला।
“वाह री किस्मत जिसे आता है उसके पास ऐसी चीज़ नहीं और जिसके पास इतनी क़ीमती चीज़ है वही इसका इस्तमाल करना नहीं जानता” रेखा ने अपने माथे को पकडकर कहा ।
“माँ आप बताओ न मैं समझ नहीं पा रहा हू” विजय ने अपनी माँ को फिर से कहा।
“बेटे यह जो तुम्हारा लंड है इसे औरत की चूत में डालकर उसे चोदा जाता है । जिससे औरत को बुहत ज्यादा सुख मिलता है” रेखा ने फिर से अपने बेटे के लंड को पकडते हुए कहा।

“माँ मगर यह तो हर मरद के पास होता है” विजय ने फिर से अपनी माँ से कहा।
“हाँ बेटा होता तो सभी के पास है । मगर औरत को जितना बाद और मोटा लंड हो उतना ज्यादा मज़ा आता है जो हर किसी के पास नहीं होता और तुम्हारा तो बुहत ही तगडा लंड है इसीलिए कह रही थी जिसे तू एक बार चोदेगा । वह फिर से तुझसे चुदवाने के लिए भीख मांगेगी” रेखा ने अपने बेटे को एक ही बार में समझाते हुए कहा ।

बेटा अब देर हो रही है। तुम ऐसा करो किचन में आ जाओ मैं वहां पर तुम्हारे बाकी सवालों का जवाब दूंगी और नरेश को भी उठा लेना” रेखा यह कहते हुए वहां से उठते हुए अपनी बड़ी बेटी कंचन के कमरे में आ गयी। रेखा ने देखा की कंचन और शीला दोनों गहरी नींद में थी । रेखा ने आगे जाते हुए कंचन को अपने हाथों से झझोडते हुए उठा दिया ।
“कोन है” कंचन अपनी आँखें मलकर उठते हुए बोली,
“बेटी क्या सारा दिन सोयेगी। उठ और शीला को भी उठा देना” रेखा यह कहते हुए वहां से जाने लगी । रेखा ने अपनी छोटी बेटी और मनीषा को भी उठा दिया और आखिर में अपने ससुर के कमरे में आ गयी।

“बाबूजी उठो बुहत देर हो गई है” रेखा ने अपने ससुर को उठाते हुए कहा।
“हाँ बेटी तुम। मुझे बुखार है मुझसे उठा नहीं जा रहा है” अनिल ने अपनी बहु की तरफ आघी आँखें खोलकर देखते हुए कहा।
“क्या हुआ बाबूजी आपने कोई दवाई ली है” रेखा ने परेशान होते हुए कहा ।
“बेटी तुम चिंता मत करो हल्का बुखार है । मैंने गोलियां खा ली है” अनिल ने अपनी बहु को परेशान होते हुए देखकर कहा।
“ठीक है बाबूजी मैं आपका नाशता यहीं लाती हूँ” रेखा ने अपने ससुर से कहा।
“नही बेटी तुम नाश्ता कर लो । मेरा मन नहीं है अभी” अनिल ने अपनी बहु से कहा।
“ठीक है बाबुजी आप आराम कर लो” यह कहते हुए रेखा अपने ससुर के कमरे से निकलकर किचन की तरफ जाने लगी।

रेखा जैसे ही किचन में दाखिल हुई उसने देखा की उसका बेटा पहले से वहां मौजूद था।
“बेते तुम कुर्सी ले आओ और यहां पर बैठ जाओ” रेखा ने अपने बेटे को देखकर मन ही मन में हँसते हुए कहा।

विजय बाहर जाकर एक कुर्सी ले आया और किचन में आकर बैठ गया।
“बेटे बुहत जल्दी आ गया” रेखा ने किचन में काम करते हुए कहा।
“माँ आपसे बुहत कुछ जानना है इसीलिए आया हूँ” विजय ने अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा।
“बेटे जो पूछ्ना है जल्दी पूछो” रेखा ने अपने बेटे की बात को सुनकर कहा ।
“माँ आप कह रही थी की इसे औरत की चूत में ड़ाला जाता है तो औरत को बुहत मजा आता है यह मुझे समझ में नहीं आया” विजय ने अपनी माँ को देखते हुए कहा।
“क्यों बेटे इस में समझने की क्या बात है” रेखा ने हैंरान होते हुए कहा।

“माँ मैंने एक दफ़ा एक फिल्म में देखा था । जब एक गोरा एक गोरी लड़की की चूत में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था तो वह बुहत ज़ोर से चिल्ला रही थी। अगर औरत को मजा आता है तो वह चिल्ला क्यों रही थी” विजय ने अपने दिमाग का इस्तेमाल करते हुए अपनी माँ से कहा।

बेटा फिल्मों में यह लड़कियां मरद को उत्तेजिन करने के लिए चिल्लाती हैं। वैसे औरत को जो सुख चुदाई से मिलता है वह शायद उसे दुनिया की किसी चीज़ में नही मिलता” रेखा ने अपने बेटे को समझाते हुए कहा।

“माँ एक और बात आप ने कहा मेरा लंड बड़ा और मोटा है और मैं जिस लड़की को इससे चोदुँगा वह मेरी गुलाम बन जायेगी। क्या औरत को सिर्फ बड़े और मोटे लंड से ही मजा आता है” विजय ने भोला बनने का नाटक करते हुए अपनी माँ से कहा ।
“बेटा मजा तो औरत को हर लंड से आता है मगर तुम्हारे जैसे लंड मिल जाए तो औरत की प्यास पूरी तरह बूझ जाती है” रेखा ने अपने बेटे की तरफ देखते हुए कहा।
“माँ क्या बापू का लंड भी मेरी तरह लम्बा और मोटा है” विजय ने फिर से अपनी माँ से पूछा।

“बेटे मैंने कहा न हर औरत के नसीब में इतना भाग्य नहीं होता” रेखा ने मायूस होते हुए कहा।
“माँ क्या बापू का लंड छोटा है” विजय ने फिर से अपनी माँ से कहा।
“बेटा तुम्हारे बापू का लंड छोटा भी है और अब तो कमज़ोर भी हो गया है । इसीलिए वह मेरी प्यास नहीं बूझ पाते” रेखा ने वैसे ही मायूसी से कहा ।
“माँ आप इतनी मायूस मत हो। मैं हूँ ना” विजय के मूह से अपनी माँ को दिलासा देते हुए निकल गया।
“बेटे मैं जानती हूँ तुम मुझे दुखि नहीं देख सकते। मगर जो सुख मुझे चाहिए वह मैं अपने पति से नहीं ले पा रही हूँ और तुम मेरे बेटे हो” रेखा ने विजय की बात सुनकर अपनी आँखों से आंसू बहाते हुए कहा।

“माँ आप रो मत मैं आपको रोता हुआ नहीं देख सकता” विजय ने अपनी माँ को रोता हुआ देखकर जज़्बाती होते हुए कहा और कुर्सी से उठते हुए अपनी माँ के पास जाते हुए अपने हाथ से उसके बहते हुए आंसूं को पोंछने लगा।
“बेटे यह तो सब भाग्य का लिखा है तुम और मैं इसे नहीं बदल सकते हैं । मेरे नसीब में यह सुख शायद लिखा ही नहीं था” रेखा ने अपने बेटे को अपने पास खडा देखकर उसके गले लगते हुए कहा ।
“माँ मैं आपको दुखी नहीं देख सकता। मैं हूँ न आपको खुश रखने के लिये” विजय ने फिर से जज़्बाती होते हुए कहा।
“ओहहहह बेटे में जानती हूँ । तुम मुझसे प्यार करते हो मगर तुम मेरे सगे बेटे हो । इसीलिए तुमसे मैं वह सुख नहीं ले सकती जिसकी मुझे ज़रुरत है” रेखा ने अपने बेटे के काँधे पर अपना सर रखकर फिर से रोते हुए कहा।

माँ में कुछ नहीं जानता। बस मैं आपको खुश देखना चाहता हूँ” विजय ने अपनी रोती हुई माँ के सर में हाथ डालकर उसके बालों को सहलाते हुए कहा।
“बेटे मगर यह ज़माना क्या कहेंगा” रेखा इतना कहकर रुक गई।
“माँ जब मुझे कोई ऐतराज़ नहीं और आप भी राज़ी हो तो क्यों आप अपने आप को ज़माने की खातिर तडपा रही हो और वैसे भी हम किसी को नहीं बताएँगे अपने बारे में” विजय ने अपने हाथ को अपनी माँ के बालों से हटाकर उसकी पीठ को सहलाते हुए कहा ।

“आआह्ह्ह्ह बेटे सच बताना क्या मैं तुम्हें अच्छी लगती हू” रेखा ने भी अब रोना बंद करके अपने हाथों को अपने बेटे की पीठ को पकडते हुए अपनी चुचियों को उसके सीने से सटाते हुए कहा।
“माँ क्या कहा। आप तो मुझे दुनिया की सब से ख़ूबसूरत औरत दिखती हो” विजय ने भी अपनी माँ को ज़ोर से अपने सीने में दबाकर सिसकते हुए कहा।
“बेटे फिर आज तक तुमने मुझसे कहा क्यों नही” रेखा ने भी अपने बेटे के जवान सीने में अपनी चुचियों के दबने से मज़ा लेते हुए कहा।
“माँ मैं क्या कहता मुझे तो डर लगता था की कहीं आप बुरा न मान जाए” विजय ने अपनी माँ के पीठ से अपने हाथ को आगे ले आते हुए उसके गोरे पेट को अपने हाथ से सहलाते हुए कहा।
“ओहहहह बेटे क्या कर रहे हो गुदगुदी हो रही है” रेखा ने अपने बेटे का हाथ अपने पेट पर लगते ही सिहरते हुए कहा।

“आह्ह्ह्ह माँ आपका जिस्म कितना चिकना और नरम है मुझे इसे महसूस करने दो ना” विजय ने सिसकते हुए कहा और अपने हाथ को अपनी माँ के चिकने पेट पर फिराते हुए ऊपर ले जाते हुए कहा।
“ओहहहहह बेटे मुझे कुछ हो रहा है । अपना हाथ कहाँ ले जा रहे हो” रेखा ने अपने बेटे के हाथ को अपनी चूचि की तरफ जाता हुआ देखकर सिसकते हुए कहा।
“आह्ह्ह्ह माँ मुझे भी कुछ हो रहा है। मैं अपने आपको रोक नहीं पा रहा हू” विजय अपने हाथ को अपनी माँ के ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चुचियों को पकडते हुए कहा ।

“आह्ह्ह्ह बेटा क्या कर रहे हो कोई आ जायेगा” रेखा ने अपने बेटे के हाथ को अपने ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी चूचि पर पड़ने से सिसकते हुए कहा।
“आआह्ह्ह्ह माँ आपकी चूची कितनी बड़ी और नरम है” विजय ने अपनी माँ की चुचियों को उसके ब्लाउज के ऊपर से सहलाते हुए कहा।
“आआह्ह्ह्ह बेटा इस वक्त कोई भी आ सकता है तुम कुर्सी पर जाकर बैठ जाओ” रेखा ने यह कहते हुए विजय को अपने आप से दूर कर दिया और खुद नाश्ता बनाने का इन्तज़ाम करने लगी ।

विजय अपनी माँ से अलग होते ही मायूस होकर कुर्सी पर जाकर बैठ गया।
“क्या हुआ बेटे नाराज़ हो गये क्या” रेखा ने काम करते हुए जैसे ही अपने बेटे को देखा उसका मुँह फूला हुआ देखकर उसकी तरफ देखते हुए कहा।

“माँ मैं आपसे नाराज़ कैसे हो सकता हूँ । मगर मुझे इतना मज़ा आ रहा था की आप से अलग होने से कुछ अजीब लग रहा है” विजय ने अपनी माँ की बात सुनते ही कहा।
“बेटे अब सच बताओ सुबह किसका सपना देख रहे थे” रेखा ने फिर से काम करते हुए कहा ।
“माँ सच कहूँ तो मुझे रात को सपने में आपकी यह बड़ी बड़ी चुचियां और आपके यह बड़े बड़े चूतड़ दिखाई देते हैं । जिन्हें देखकर मेरा लंड तन जाता है” विजय ने अपनी माँ की बात का जवाब बड़ी बेशरमी से देते हुए कहा।

“बेटे क्या मज़ाक कर रहे हो तुम भी मुझे बना रहे हो क्या” रेखा ने अपने बेटे की बात को सुनकर हँसते हुए कहा।
“क्यों माँ मैंने ऐसा क्या कह दिया” विजय ने हैंरानी से अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा।
“बेटे तुम्हें तो कोई कॉलेज की लड़की सपने में आती होगी मुझ में क्या है जो तुम्हें सपने में आती हू” रेखा ने अपने बेटे की तरफ देखते हुए कहा।
“माँ मुझे तो आपकी बड़ी बड़ी चुचियां और यह बड़े चूतड पसंद है। कॉलेज की लड़कयों की तो चुचियां भी छोटी होती है और उनके चूतड भी आपके जैसे बड़े नहीं होते और मैं तो अपनी माँ का दीवाना हू” विजय ने अपनी माँ को घूरते हुए कहा।

“बेटे लगता है तुम्हारी शादी के लिए भी कोई ऐसी लड़की ढूंढ़नी पड़ेगी जिसकी चुचियां और चूतड बड़े हो” रेखा ने हँसते हुए कहा।
“नही माँ मैं शादी नहीं करूँगा मुझे तो बस अपनी माँ को खुश रखना है” विजय ने अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा।
“बेटे ऐसा मत बोलो मैं तुम्हारी शादी तो ज़रूर कराऊँगी” रेखा ने अपने बेटे की बात को सुनते हुए कहा ।
“माँ जब होगी तब देखेंगे अभी तो मुझे बस आप ही अच्छी लगती हो” विजय ने अपनी माँ से कहा।
“बेटे नाश्ता तैयार हो गया है । अब तुम जाकर बाहर बैठ जाओ मैं नाश्ता लेकर आती हू” रेखा ने अपने बेटे से कहा।
विजय अपनी माँ की बात सुनकर बाहर चला गया और नाशते के टेबल पर जाकर बैठ गया जहाँ पर पहले से ही उसके पिता और बाकी लोग बैठे थे।
विजय अपने पिता की तरफ देखकर सोचने लगा क्या बात है । उसका बाप इतना बूढा भी नहीं है फिर उसका लंड क्यों उसकी माँ को शांत नहीं कर पाता, विजय यह सोच ही रहा था की उसकी माँ नाश्ता ले आई और सब मिलकर नाश्ता करने लगे।

नाश्ता ख़तम करने के बाद रेखा बरतन उठाने लगी और सभी उठकर अपने अपने कमरों में जाने लगे।
“बेटा तुम बर्तन उठाने में मेरी मदद करो” रेखा ने अपने बेटे को वहां पर बैठा देखकर कहा।
“जी मम्मी” यह कहते हुए विजय अपनी माँ के साथ बर्तन उठाकर किचन में रखने लगा ।
कंचन शीला के साथ अपने कमरे में आ गयी और उसके साथ बैठकर बाते करने लगी, मनीषा अपने बापू के कमरे में जाकर उसे देखने लगी । अनिल अब भी बेड पर लेटा हुआ था और वह गहरी नींद में था।

मानिषा ने अपने बापू को उठाना ठीक नहीं समझा और वहां से निकलकर बाहर आ गयी । अचानक मनीषा को सूझा क्यों न वह अपने भाई के साथ कुछ देर जाकर बाते करे और वह अपने भाई के बारे में भी पता लगाए की क्यों वह भाभी में इंट्रेस्ट नहीं ले रहे हैं। यह सोचकर वह अपने भाई और भाभी के कमरे में दाखिल हो गई।
मानिषा जैसे ही कमरे में दाखिल हुयी उसने देखा की उसका भाई पेपर पढ रहा था।
“क्या भाई साहब हम इतने दिनों से यहाँ पर हैं और आप हैं की हम से बात करने के लिए भी टाइम नहीं है” मनीषा ने अंदर दाखिल होते ही शिकायत करते हुए कहा और दरवाज़ा बंद करते हुए अंदर आ गयी।

“नही दीदी ऐसी तो कोई बात नहीं है” मुकेश ने अपनी बहन को देखकर खुश होते हुए कहा।
“तो फिर भैया क्यों आप ने हमसे बात भी नहीं की” मनिषा ने यों ही झूठे गुस्से से अपने भाई की तरफ देखते हुए कहा।
“दीदी डेली ऑफिस वर्क की वजह से मैं तुम से बात नहीं कर सका और यकीन करो आज मैं खुद तुम से मिलने आने वाला था की तुम आ गयी” मुकेश ने अपनी बहन की बात सुनकर शर्म से पानी पानी होते हुए कहा ।

“भइया फिर देख क्या रहे हो इतने दिनों के बाद मिले हैं हमें अपने गले तो लगाओ” मनीषा ने अपने भाई को देखकर अपनी बाहों को खोलते हुए कहा । मुकेश अपनी बहन की बाहें खुलते ही उसकी चुचियों और अपनी बहन के जिस्म के फिगर को देखकर हैंरान रह गया ।
मानिषा ने आज सल्वार कमीज पहनी थी और वह अपने कमरे से नाश्ता करने के चक्कर में जल्दी से निकलने की वजह से ब्रा भी नहीं पहन कर निकली थी । मनीषा ने जैसे ही अपनी बाहों को खोला उसका पल्लु उसके आगे से फिसल गया और मनीषा की चुचियां बगैर ब्रा के उसके भाई के सामने आ गयी, मुकेश का टेम्प्रेचर भी अपनी बहन की चुचियों को बगैर ब्रा के सिर्फ कमीज में हिलता हुआ देखकर गरम होने लगा।

मुकेश को अपनी बहन की चुचियां उसकी कमीज में भी नंगी ही महसूस हो रही थी । क्योंकी उसने बुहत पतली कमीज पहन रखी थी । जिस वजह से मुकेश को कमीज के ऊपर से अपनी बहन की चुचियों के गोल नासी दाने साफ़ नज़र आ रहे थे।
“कहा खो गये भइया” मनीषा ने अपने भाई को अपनी चुचियों की तरफ घूरता हुआ देखकर उसे टोकते हुए कहा ।

दीदी कहीं नहीं मगर आपने अपने फिगर को तो बुहत बढिया रखा हुआ है” मुकेश ने अपनी बहन के टोकने से होश में आते हुए अपनी थूक को गटका और आगे बढ़ते हुए अपनी बहन को बुहत ज़ोर से अपने गले लगा लिया,
“आआह्ह्ह्ह दीदी तुम से मिलकर बुहत अच्छा लग रहा है । कितने टाइम के बाद हम गले लगे है” मुकेश ने अपनी बहन के गले लगते ही उसकी चुचियों को अपने सीने में दबने से सिसककर कहा ।
“भइया आपके सीने से लग मुझे भी बुहत अच्छा लग रहा है। अभी तक आपका बदन बुहत गठीला है” मनीषा ने अपने भाई के सख्त सीने से अपनी नरम चुचियों को रगडते हुए कहा।
“ओहहहहह दीदी और बताओ हमारे जीजा जी कैसे हैं और तुम खुश तो हो ना” मुकेश ने अपनी बहन की चुचियों को अपने सीने से रगडता हुआ महसूस करके ज़ोर से सिसकते हुए उससे पुछा।

“भइया मैं खुश हूँ और आपके जीजा जी भी बुहत अच्छे हैं । मगर आप आज मेरी इतनी तारीफ क्यों कर रहे हो आपकी पत्नी तो सेक्स की देवी है उसके सामने मेरी क्या औकात” मनीषा ने यह बात कहते हुए अपनी चुचियों को बुहत ज़ोर से अपने भैया के सीने में दबाकर घिस दिया ।
“हाहहह दीदी तुम क्या कह रही हो । तुम भी कम नहीं हो” मुकेश ने फिर से सिसककर कहा।
“भइया आपकी सेक्स लाइफ तो बुहत बढिया होगी रेखा भाभी के साथ” मनीषा ने अब अपने भाई के गले से अलग होते हुए कहा और अपने भाई के साथ जाकर सोफ़े पर बैठ गई।

“दीदी रेखा बुहत सेक्सी है और शायद मैं उसकी ज़रुरत को पूरा भी नहीं कर पाता हू” मुकेष ने अपनी बहन की बात सुनकर ठण्डी आह्ह्ह्ह भारते हुए कहा।
“मगर क्यों भैया आप में कोई कमी है क्या” मनीषा ने अपने भाई की बात को सुनकर चौकते हुए कहा ।
“नही दीदी मगर मैं उसका मुकाबला नहीं कर पाता और जल्द ही ठण्डा हो जाता हूँ और इसीलिए मैंने उसके साथ सेक्स करना भी कम कर दिया है” मुकेश ने मायूस होते हुए कहा।

“भइया आप किसी डॉक्टर से क्यों नहीं बात करते” मनीषा ने अपने भाई की बात को सुनने के बाद कहा।
“दीदी मैंने कोशिश की थी मगर सब का मानना है की मैं नार्मल हू” मुकेष ने फिर से अपनी दीदी की बात का जवाब देते हुए कहा ।
“भइया मैं समझी नहीं अगर आप नार्मल हो तो क्या तकलीफ है जो आप भाभी का साथ नहीं दे पाते” मनीषा ने फिर से हैंरान होते हुए कहा।
“दीदी डॉक्टर्स का कहना है की ऐसा किसी किसी मरद के साथ होता है की वह बिलकुल सही होते हुए भी किसी एक औरत के सामने टिक नहीं पाता। जिसके साथ वह एक बार सही तरीके से सम्भोग नहीं बनाया हो । शायद वह डर दिल में हर वक्त उस मरद को होता है जब वह उस औरत के क़रीब जाता है मगर अपनी पत्नी के साथ ऐसा होने वाला मेरा पहला केस है” मुकेश ने अपनी दीदी को सारी बात बताते हुए कहा।

“भइया मगर इसका कोई हल तो होगा” मनीषा ने मायूस होते हुए कहा।
“हा है मगर मैं वह नहीं कर सकता” मुकेश ने अपनी बहन की तरफ देखते हुए कहा।
“क्या हल है भैया मुझे जल्दी से बतओ” मनीषा ने एक्साइटेडट होते हुए कहा ।
“दीदी मैं अगर किसी ऐसी औरत से सम्भोग बनाऊँ जो मेरी अपनी हो और जिससे मुझे कोई हिचकिचाहट न हो तो में हमेशा के लिए ठीक हो सकता हूँ” विजय ने अपनी दीदी को बताते हुए कहा।

“भइया मगर यह आपको कब से रेखा भाभी से डर लगने लगा” मनीषा ने फिर से हैंरान होते हुए अपने भाई से कहा।
“दीदी पहले सब कुछ नार्मल था। मगर पिछले कुछ सालों से काम ज्यादा होने के कारण मैं सेक्स में कम इंट्रेस्ट ले रहा था तो एक दफ़ा संभोग करते वक्त तुम्हारी भाभी ने कुछ ऐसे लफ्ज़ कहे जिन्हें सुनकर मैं सेक्स करते वक्त हर बार उससे डरने लगा ।
“क्या कहा था भाभी ने जो आप उससे डरने लगे” मनीषा ने अपने भाई को देखते हुए कहा।
“दीदी 3 दिन बाद सम्भोग हो रहा था और मैंने जैसे ही उसे नंगा करके अपने लंड को उसकी चूत में ड़ाला वह उत्तेजना के मारे अपने चूतड़ उछालते हुए कहने लगी। मुकेष आप को क्या हुआ है मेरी आग क्यों नहीं बुझा पाते । मुझे अब आपके लंड से वह मज़ा नहीं मिलता जो पहले मिलता था” मुकेश ने अपनी बहन को बताते हुए कहा।

“भइया पर इससे आपको क्या हो गया” मनीषा ने हँसते हुए कहा।
“दीदी उसके बाद जब भी मैं अपनी पत्नी को चोदता तो मुझे वह लफ्ज़ याद आ जाते और में अपनी इन्सलट होने के ख़याल से ही उसे इतना एक्साइटेडट होकर चोदता की मेरे लाख कोशिश के बाद भी मैं जल्दी ही फ़ारिग हो जाता” मुकेश ने अपनी बात अपनी बहन को बताते हुए कहा ।
“भइया फिर आप अपने खातिर न सही मगर भाभी के लिए तो अपने आप को ठीक करने की कोशीश किजिये। ऐसा न हो की भाभी कहीं और बहक जाए” मनीषा ने अपने भाई को समझाते हुए कहा।
“दीदी आपकी बात तो ठीक है मगर मैं ऐसी औरत कहाँ से लाऊँ जो मेरे नज़दीक की हो और मैं उससे डरता न हू” मुकेष ने सोचते हुए कहा।

“भइया आप दूर मत जाओ आपके सामने भी तो एक औरत है जो आपसे बुहत प्यार करती है और शायद आप उससे ड़रते भी नही” मनीषा ने अपने भाई के क़रीब जाकर उसके साथ चिपक कर बैठते हुए कहा।
“दीदी आप मगर आप तो मेरी बहन है क्या यह ठीक होगा” मुकेश अपनी बहन के जिस्म का फिगर देखकर उसका दीवाना हो चुका था । मगर फिर भी वह अपनी सगी बहन के साथ होने वाले इस रिश्ते को सोचकर ही काम्पने लगा ।

“क्यों भइया मैं आपको अच्छी नहीं लगती क्या” मनीषा ने अपने भाई के मुँह के क़रीब अपने मुह को लाते हुए कहा । मनीषा का मूह अपने भाई के इतने क़रीब था की उसे अपनी बहन की साँसें अपनी साँसों से टकराती हुयी महसूस हो रही थी।
“दीदी आप तो बुहत सूंदर हो पर” मुकेश सिर्फ इतना कह पाया।
“पर छोड़ो भैया मुझ पर भरोसा करो । इस बारे में किसी को पता नहीं चलेगा” मनीषा ने यह कहते हुए अपने तपते होंठो को अपने भाई के होंठो पर चिपका दिया ।

मुकेश के सारे जिस्म में अपनी बहन के गरम होंठो को अपने होंठो पर महसूस करते ही एक करंट का झटका लगा । मुकेष का सिकुडा हुआ लंड अचानक उत्तेजना से उसकी पेण्ट में उठने की कोशिश करने लगा, मुकेश ने भी अपनी बहन का साथ देते हुए उसके बालों में हाथ ड़ालते हुए अपनी बहन के नरम नरम होंठो को ज़ोर से चूसने लगा ।
मानिषा अपने भाई का साथ मिलते ही सोफ़े पर सीधा लिटाते हुए उसके ऊपर चढ़ गयी और अपनी चुचियों को अपने भाई के सीने में दबाते हुए उसके किसेस का जवाब देने लगी, मुकेश कुछ देर तक अपनी बहन के होंठो को चूसने के बाद अपना मूह उसके होंठो से हटा कर हाँफने लगा।

“भइया लगता है आप बूढ़े हो गये हो” मनीषा ने अपने भाई को हाँफता हुआ देखकर अपने चूतडों को उसके लंड पर दबाते हुए हँसकर कहा।
“दीदी भले मैं बूढा होगया हूँ मगर तुम जैसी गरम चीज़ को देखकर तो हिजडे का लंड भी झटके खाने लगेगा। मैं तो फिर भी सही हू” मुकेश ने यह कहते हुए अपनी बहन को अपने ऊपर से उतारते हुए अपनी गोद में उठा लिया और उसे बेड पर जाकर लेटा दिया ।
मानिषा बेड पर सीधी पडी थी और वह बुहत ज़ोर से साँसें ले रही थी जिस वजह से उसकी चुचियां कमीज में बुहत ज़ोर से ऊपर नीचे हो रही थी । मुकेश अपनी बहन की चुचियों को देखता हुआ उसके ऊपर चढ़ गया और अपने एक हाथ से अपनी सगी बहन की एक चूचि को उसकी कमीज के ऊपर से पकडते हुए दबाने लगा।

“आआह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो भैया” मनीषा का पूरा जिस्म अपने भाई का हाथ कमीज के ऊपर से ही अपनी चुचियों पर पड़ने से सिहर उठा जिस वजह से उसने सिसकते हुए कहा।
“ओहहहहह दीदी आपकी चुचियां कितनी नरम हैं । मुझे इन्हें छूने से बुहत मज़ा आ रहा है” मुकेश ने वैसे ही अपने हाथ से अपनी बहन की चुचियों को दबाते हुए कहा ।

“भइया आप तो छुपे रुस्तम निकले पहले तो इतना शरमा रहे थे और अब अपनी बहन की चुचियों को इतनी बेशरमी से दबा रहे हो” मनीषा ने अपने भाई को देखकर हँसते हुए कहा।
“क्या करुं दीदी तुम चीज़ बड़ी हो मस्त मस्त” मुकेश ने यह कहते हुए अपना मूह अपनी दीदी की चूचि पर उसकी कमीज के ऊपर से ही रख दिया ।
मुकेश ने अपनी बहन की चूचि के एक दाने को कमीज के ऊपर से ही अपने मूह में भर लिया और उसे बुहत ज़ोर से चूसते हुए अपनी बहन की दूसरी चूचि को अपने हाथ में लेकर ज़ोर से दबाने लगा।

“ओहहहहह भैया आप ने तो कमीज के ऊपर से ही इसे अपने मूह में ले लिया” मनीषा अपनी चूचि के दाने को कमीज के ऊपर से ही अपने भाई के मुँह में महसूस करके सिहर उठी और अपने भाई के बालों में हाथ ड़ालते हुए बुहत ज़ोर से सिसकते हुए बोली ।
मुकेश कुछ देर तक अपनी बहन की चूचि को यों ही उसकी कमीज के ऊपर से चूसने के बाद नीचे होते हुए अपनी बहन की कमीज को पकड कर ऊपर करते हुए अपना मुँह उसके गोरे चिकने पेट पर रख दिया।

मुकेश अपनी बहन के गोरे पेट को चाटते हुए ऊपर बढने लगा, मुकेश का लंड उसकी पेण्ट में अब पूरी तरह तन चूका था । मुकेश अपनी बहन के पेट को चाटते हुए उसकी कमीज तक आ गया और वह अपने हाथों से अपनी बहन की कमीज को खीच कर और ऊपर कर दिया, कमीज के ऊपर होते ही मनीषा की चुचियां अब बिलकुल नंगी होकर उसके भाई के मुँह के सामने आ गयी ।
“दीदी क्या चुचियां है। इतने दिन आप कहाँ थी” मुकेश ने अपनी बहन की गोरी नंगी चुचियों को अपना मूह थोडा ऊपर करके देखते हुए कहा । मनीषा अपने भाई की हरक़तों और बातों से बुहत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी । इसीलिए उसने अपने भाई को बालों से पकडते हुए उसका मुँह अपनी एक नंगी चूचि पर दबा दिया।

मुकेश अपना मुँह अपनी बहन की नंगी चूचि पर महसूस करते ही बुहत ज़्यादा उत्तेजित हो गया और अपनी सगी बहन की चूचि के तने हुए नासी दाने को अपने मूह में भरते हुए ज़ोर से चूसने लगा । मुकेश कुछ देर तक अपनी बहन की चूचि के एक दाने को ज़ोर से चूसने के बाद अपना पूरा मूह खोलते हुए अपनी बहन की चूचि को पूरा अपने मूह में भरकर चूसने लगा ।
“आह्ह्ह्हह भैया आप के ऐसा करने से मुझे बुहत ज्यादा मज़ा आ रहा है” मनीषा ने अपने भाई के बालों को वैसे ही सहलाते हुए उसके मुँह में अपनी चूचि को ज़ोर से दबाते हुए कहा।

मुकेश ने कुछ देर तक अपनी बहन की एक चूचि को चूसने के बाद उसकी दूसरी चूचि को भी वैसे ही अपने मूह में भर लिया और उसे बुहत ज़ोर से चूसने लगा । मनीषा की चूत से उत्तेजना के मारे बुहत ज्यादा पानी निकल रहा था और मनीषा भी उत्तेजना के मारे सिसकते हुए अपने हाथ को नीचे करते हुए अपने भाई के लंड पर रखकर उसकी पेण्ट के ऊपर से ही उस पर फिराने लगी ।

“माँ मुझे आपकी चुचियां देखनी है” विजय और रेखा पूरे बर्तन उठाने के बाद किचन में आ गये थे। जहाँ पर रेखा बर्तनों को साफ़ कर रही थी।जिस वजह से उसकी साड़ी का पल्लु नीचे गिर चूका था । जिस वजह से उसके बेटे ने अपनी माँ की बड़ी बड़ी चुचियों को आधा नंगा देखकर उसकी तरफ देखते हुए कहा ।
“बेटे तुम पागल तो नहीं हो गये । मैं तुम्हारी माँ हू” रेखा ने गुस्से से अपने बेटे की तरफ देखते हुए कहा और अपनी साड़ी के पल्लु से अपनी चुचियों को ढक लिया,
“माँ मैं जानता हूँ मगर कब तक आप तडपति रहेंगी।मैं आपको दुनिया की हर ख़ुशी और सुख देना चाहता हू” विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर उसे समझाते हुए कहा।

“बेटा तुम उसकी चिंता मत करो जो मेरा नसीब होगा वह ही मुझे मिलेंगा” रेखा ने बर्तनों को धोते हुए कहा। वह अपने बेटे को थोडा तडपाना चाहती थी। इसीलिए वह नाटक कर रही थी।
“पर माँ जब आपका बेटा आपके सामने आप की सेवा के लिए खडा है तो फिर आप क्यों सारी ज़िंदगी ऐसे ही तडपना चाहती हो” विजय ने फिर से अपनी माँ को देखते हुए कहा ।
“बेटे मुझे यह सब अच्छा नहीं लगेगा यह पाप है” रेखा ने वैसे ही नाटक करते हुए कहा।
“माँ मगर आप मुझे बुहत अच्छी लगती हैं । मैं आपको एक बार बिना कपड़ों के देखना चाहता हूँ” विजय ने फिर से अपनी बात करते हुए कहा।

“बेटे सच में तुम पागल हो गये हो। मैं तुम्हारी माँ हूँ कोई रंडी नहीं जो तुम्हारे सामने नंगी हो जाऊं” रेखा ने फिर से गुस्सा करते हुए कहा।
“माँ अगर आप रंडी होती तो अब तक में आपसे मिन्नतें नहीं कर रहा होता। मगर आपको अब तक चोद चूका होता” विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर उसे करारा जवाब देते हुए कहा।
“बेटे चुप करो तुम्हें अपनी माँ से बात करने की ज़रा भी तमीज नहीं है” रेखा ने अपने बेटे की बेचैनी देखकर मन ही मन में मुस्कराते हुए कहा ।

“माँ आपको क्या हो गया है। मैं आपसे प्यार करता हूँ इसीलिए ऐसा बोल दिया मगर आप भी तो मुझसे प्यार करती थी । अब अचानक क्या हो गया आपको” विजय ने अपनी माँ को गुस्सा करता हुआ देखकर अपना मुँह बनाते हुए कहा।
“हाँ बेटे मैं तुम से प्यार करती हूँ मगर मैं यह सब गलत मानती हूँ इसीलिए यह सब नहीं करना चाहती” रेखा ने अपने बेटे को समझाते हुए कहा ।

“माँ मैं कुछ गलत नहीं करूँगा। मगर कम से कम एक बार मुझे अपने प्यार का जिस्म देखने का तो हक़ है” विजय ने अपनी आखरी कोशिश करते हुए कहा।
“बेटे अब मैं तुझे कैसे समझाऊँ मैं मजबूर हू” रेखा ने अपना कन्धा नीचे करते हुए कहा।
“माँ मैं समझ गया की आप अब तक मेरे प्यार को समझी ही नहीं है” विजय ने कुर्सी से उठते हुए कहा ।

विजय कुर्सी से उठते हुए जाने लगा।
“बेटे कहाँ जा रहे हो” रेखा ने अपने बेटे को जाता हुआ देखकर कहा।
“माँ मैं आज के बाद आप से कभी बात नहीं करूंगा” विजय यह कहकर वहां से जाने लगा।
“बेटे ज़रा इधर तो देख तेरी माँ तुम्हारे प्यार की खातिर हार मान गई” रेखा ने विजय को जाता हुआ देखकर कहा ।

विजय ने जैसे ही अपना मूह घुमा कर अपनी माँ को देखा । वह हैंरान रह गया उसकी माँ अपनी साड़ी उतारकर सिर्फ ब्लाउज और पेटिकोट में खड़ी थी और वह अपनी बाहों को अपने बेटे को अपने गले लगाने के लिए खोले हुए थी और उसकी आँखों से आंसू निकल रहे थे । विजय अपनी माँ को इस हालत में देखकर भागता हुआ उसके पास जाकर उसके गले लग गया।

“माँ आप रो क्यों रही हो आई लव यू” विजय ने अपनी माँ को अपनी बाहों में भरते हुए उसके गालों पर अपने होंठो को रखकर उसके निकलते हुए आंसू को पीते हुए कहा।
“बेटा मैं कितनी खुशनसीब हूँ । मुझे तुम्हारे जैसे प्यार करने वाला बेटा मिला” रेखा ने वैसे ही अपने बेटे की बाहों में रोते हुए कहा ।

माँ मैं जानता था आप मेरे प्यार को पहचानती हो मगर आप सिर्फ ज़माने के डर की वजह से मुझे नहीं कह पा रही थी” विजय ने वैसे ही अपनी माँ को अपनी बाहों में भरे उसके गालों को चूमते हुए कहा।
“बेटे शायद तुम सच कह रहे थे मगर अब मुझसे दूर हटो कोई आ गया तो” रेखा ने अचानक अपने बेटे से दूर होते हुए कहा ।
“माँ एक बार तो मुझे अपना जिस्म दिखा दो” विजय ने अपनी माँ से अलग होकर उसकी तरफ देखते हुए कहा।
“बेटे मैं समझ सकती हूँ तुम्हारी बेक़रारी। मगर इस वक्त यह ठीक नहीं होगा” रेखा ने अपने बेटे की तरफ देखते हुए कहा।
“माँ एक काम करते हैं । मैं दरवाज़ा बंद कर देता हूँ और कुर्सी पर बैठ जाता हूँ । आप सिर्फ एक बार अपने कपड़े उतारकर अपना प्यारा जिस्म हमें दिखाओ। हम वादा करते हैं हम यहाँ से चले जाएंगे” विजय ने अपनी माँ से मिनट करते हुए कहा।

“बेटे तुम बुहत ज़िद्दी हो मानोगे नहीं अपनी माँ को नंगा देखे बगैर जाओ दरवाज़ा बंद कर लो” रेखा ने अपने बेटे के सामने हार मानते हुए कहा।
“माँ सच में आप मुझसे बुहत प्यार करती हो” विजय अपनी माँ की बात सुन कर ख़ुशी से उछलते हुए कहा और आगे जाकर दरवाज़ा बंद कर दिया ।
विजय दरवाज़ा बंद करने के बाद सीधा आकर कुर्सी पर बैठ गया और गौर से अपनी माँ की तरफ देखने लगा, रेखा अपने बेटे को यो घूरता हुआ देखकर शर्म के मारे यों ही पेटिकोट और ब्लाउज में चुप चाप खडी थी।

“माँ उतारो न अपने कपडे” विजय अपनी माँ को चुपचाप खडा देखकर बेचेनी से बोला । विजय का लंड आने वाले पल के बारे में सोचते ही उसकी पेण्ट में झटके खाने लगा।
“बेटे मुझे शर्म आ रही है । तुम अपनी आँखें बंद करो जब मैं अपने कपडे उतार दूं तो तुम अपनी आँखें खोल देना” रेखा ने अपने बेटे को अपनी परेशानी बताते हुए कहा।
“माँ आप भी चलो मैंने अपनी आँखें बंद कर ली अब जल्दी से आप अपने कपडे उतार दो” विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर जल्दी से अपनी आँखों पर अपने हाथ रखते हुए कहा ।

रेखा ने अपने बेटे की आँखें बंद होते ही अपने पेटिकोट में हाथ ड़ालते हुए उसे अपने जिस्म से अलग कर दिया । विजय ने अपनी आँखें ऐसे ही बंद की थी की दूर से रेखा को दिख रहा था की उसका बेटा अपनी आँखें बंद किये हुए है जबकी विजय अपनी माँ को पूरी तरह देख रहा था ।

विजय का लंड अपनी माँ की नंगी गोरी चिकनी टांगों को देखकर झटके मारने लगा । रेखा ने अपना पेटिकोट उतारने के बाद अपने ब्लाउज को खोलते हुए उसे अपने जिस्म से अलग कर दिया और ब्लाउज उतारने के बाद फिर से अपने बेटे की तरफ देखने लगी, रेखा ने देखा उसका बेटा वैसे ही अपनी आँखों के सामने अपने हाथों को रखे हुए था । मगर उसकी पेण्ट की तरफ देखते ही रेखा का जिस्म कम्पने लगा उसके बेटे का लंड पूरी तरह तनकर उसकी पेण्ट में तम्बू बनाये हुए था।

विजय की हालत बिगडती जा रही थी। उसकी माँ अब उसके सामने सिर्फ एक छोटी सी पेंटी और ब्रा में खडी थी, रेखा की बड़ी बड़ी चुचियां उसकी ब्रा में पूरी तरह समा नहीं पा रही थी। जिस वजह से उसकी आधी चुचियां नंगी होकर विजय के आँखों के सामने मण्डरा रही थी ।
नीचे से भी रेखा की वही हालत थी उसके बड़े बड़े चूतडों के बीच उसकी छोटी सी पेंटी फँसी हुयी थी। जिस वजह से रेखा की फूली हुयी चूत आधि नंगी होकर विजय को दिख रही थी । रेखा ने अचानक अपना मूह फेरते हुए दूसरी तरफ कर दिया और अपनी ब्रा को नीचे करते हुए उसके हुक्स को आगे की तरफ़ कर दिया, रेखा ने ब्रा के हुक खोलकर उसे अपने जिस्म से उतारकर नीचे फ़ेंक दिया।

विजय को अपनी माँ की चुचियां तो नहीं दिख रही थी मगर उसका लंड अपनी सगी माँ की चुचियों के नंगे होने के ख़याल से ही उसकी पेण्ट में ज़ोर के झटके खाने लगा, विजय से अब बर्दाशत से बाहर हो गया उसका लंड अब उसकी पेण्ट में अकड़कर दर्द करने लगा था ।
विजय ने अपनी पेण्ट में हाथ ड़ालते हुए कुर्सी से उठकर उसे नीचे करते हुए अपने पेरों में फ़ेंक दिया और अपने अंडरवियर को भी थोडा नीचे सरकाते हुए अपने लंड को नंगा करते हुए वापस कुर्सी पर बैठ गया । रेखा ने अपनी ब्रा को उतारने के बाद अपनी पेंटी में हाथ ड़ालते हुए उसे अपने चूतडों से नीचे सरका दिया।

रेखा ने नीचे झुकते हुए अपनी पेंटी को अपने पैरों में से निकालकर ज़मीन पर फ़ेंक दिया । विजय अपनी माँ के नंगे चूतडों को देख कर पागल होने लगा और रेखा ने जैसे ही नाचे झुककर अपनी पेंटी को अपने पाँव से निकाला उसके चूतड पीछे से निकलकर विजय की आँखों के सामने आ गये। विजय अपनी माँ की फूली हुयी काले बालों वाली चूत को नंगा देखकर अपने लंड को हाथ में लेकर ज़ोर से हिलाने लगा और उसकी साँसें बुहत ज़ोर से चलने लगी ।

विजय ने ज़िंदगी में आज दूसरी चूत देखी थी । पहली उसकी बहन की गुलाबी चूत जो बुहत छोटी सी थी । और दूसरी उसकी माँ की जो वह अभी देख रहा था। मगर उसकी माँ की चूत उसकी दीदी की चूत से बुहत ज़्यादा बड़ी और फूली हुयी थी और विजय को अपनी माँ की चूत अपनी बहन की चूत से बुहत ज़्यादा अच्छी लग रही थी ।
विजय की साँसें अपनी माँ की फूली हुयी चूत को देखकर बुहत ज़ोर से चल रही थी।
“बेटा अब अपनी आँखें खोलों मैंने अपने कपडे निकाल दिए है” रेखा ने वैसे ही उलटे खडे हुए कहा । उसे क्या पता उसका बेटा उसे कब से देख रहा है।

“माँ सीधी हो जाओ ना” विजय ने अपने मुँह से जाने कैसे यह लफ़्ज़ निकाले। वह उत्तेजना के मारे मरा जा रहा था । रेखा अपने बेटे की बात सुनकर सीधी हो गई मगर उसने अपना एक हाथ अपनी दोनों चुचियों के ऊपर और दूसरा अपनी चूत के आगे रखे हुए सीधा हो गयी, रेखा ने अपनी आँखें बंद किये हुयी थी ।
“माँ यह क्या है प्लीज अपने हाथ हटाओ ना” विजय ने अपनी माँ को अपने सामने ऐसे देखकर अपने गले से थूक को गटकते हुए कहा।
“विजय मुझे शर्म आ रही है” रेखा ने वैसे ही अपनी आँखें बंद किये हुए कहा। उसे पता नहीं था की उसका बेटा भी उसकी सामने बिलकुल नंगा बैठा हुआ है।

“माँ अगर आप ने अपने हाथ नहीं हटाए तो मैं आपके पास आकर आपके हाथ हटा देता हू” विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर उत्तेजना के मारे अपने लंड को सहलाते हुए कहा।
“नही बेटा प्लीज ऐसा गज़ब मत करना” रेखा ने अपने बेटे की बात सुनकर जल्दी से कहा ।
“माँ फिर आप खुद ही अपने हाथ हटा दो । अब मुझसे सबर नहीं हो रहा है” विजय ने वैसे ही बेचैनी से कहा।
“हाँ बेटा मैं हटाती हू” रेखा ने यह कहते हुए अपना एक हाथ अपनी चुचियों से अलग कर दिया।

“वाह माँ आपकी चुचियां कितनी बड़ी हैं और कितनी सूंदर ओहहहह माँ आपके चुचियों के दाने कितने कठोर दिख रहे हैं” विजय ने अपनी माँ की बड़ी बड़ी गोरी चुचियों को देखकर उत्तेजना के मारे ज़ोर से सिसककर उसकी तारीफ करते हुए कहा।
“माँ नीचे से हाथ हटाओ ना” विजय ने अपनी माँ की चुचियों को जी भरकर देखने के बाद अपने होंठो पर अपनी जीभ को फिराते हुए कहा।
रेखा ने अपने बेटे की बात सुनकर अपना हाथ अपनी चूत से हटा दिया।
“आआह्ह्ह्ह माँ क्या गज़ब है आपकी चूत कितनी बड़ी और फूली हुयी है और बेचारी काले बाल इसे और ज़्यादा सूंदर बना रहे है” विजय ने अपनी माँ की चूत को देखकर अपने लंड को ज़ोर से हिलाते हुए उसकी तारीफ करते हुए कहा।

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