मेरा परिवार(दि फैमिली) Chapter 6

 मेरा परिवार(दि फैमिली) Chapter 6



हाँ हाँ आपका यह तो अपनी ख़ूबसूरत बहु का ही दीवाना है, किसी और को कहाँ देखेगा” मनीषा ने हँसते हुए अपने बाप के लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा ।अनिल का ख्याल पहली बार अपनी बेटी की बातों को सुनकर उसके जिस्म की तरफ गया ।

अनिल अपनी बेटी को पहली बार गौर से एक औरत के रूप में देखने लगा । मनीषा भी कोई कम ख़ूबसूरत नहीं है तीन बच्चों की माँ होकर भी उसकी बॉडी बिलकुल किसी २० साल की लड़की की तरह था, अनिल अपनी बेटी को गौर से देखने के बाद मन ही मन में सोचने लगा।

“बेटी ऐसी कोई बात नहीं तुम भी किसी से कम नही” अनिल ने अपनी बेटी की तारीफ करते हुए कहा।

“बापु जी झूठ मत बोलो आपको तो भाभी ही अच्छी लगती हैं” मनीषा ने अपनी तारीफ सुनकर अनिल से कहा ।

“बेटी सच कह रहा हूँ तुम बुहत ख़ूबसूरत हो” अनिल ने अपनी बेटी की तारीफ करते हुए कहा।

“सच बापू मैं आपको अच्छी लगती हू” मनीषा ने अपनी तारीफ सुनकर शरमाते हुए कहा।

“हा बेटी तुम किसी से कम नहीं हो” अनिल ने अपनी बेटी की आँखों में देखते हुए कहा ।

“बापु मेरी वजह से आज आप प्यासे ही रह गये” मनीषा ने हँसते हुए कहा।

“सही कहा बेटी बहु को तो तुमने भगा दिया अब यह बेचारा तो सारी रात तडपता रहेंगा” अनिल ने अपनी बेटी की गोरी जांघों की तरफ देखते हुए कहा जो नाइटी के हट जाने से नंगी हो गई थी ।

“बापु जी क्या यह एक दिन का सबर भी नहीं कर सकता बदमाश” मनीषा ने हँसकर अपने हाथ से अपने बाप के लंड को पकडकर दबाते हुए कहा।

“हाहहह बेटी यह कहाँ रुकेगा एक दिन, इसे हाथों से ही शांत करना पडेगा” अपनी बेटी का हाथ अपने लंड पर लगते ही अनिल ने सिसकते हुए कहा।

“नही बापू जी जब हमने भाभी को भगाया है तो इसका इलाज भी हम करते हैं” यह कहते हुए मनीषा ने अपने बापू की धोती को उतार दिया ।

“वाह बापू जी आपका लंड तो बुहत तगड़ा है तभी तो भाभी आपकी दीवानी हो गई है” मनिषा ने अपने बाप की धोती उतरते ही उसका नंगा तगड़ा लंड देखकर थूक गटकते हुए कहा।

मानिषा ने अपना हाथ आगे बढाते हुए अपने बाप के तगडे लंड को पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी ।

“हाहह बेटी मेरे लिए तुम्हें तकलीफ करनी पड़ रही है” अपनी बेटी का हाथ अपने लंड पर पड़ते ही अनिल ने सिसकते हुए कहा।

“इस में तकलीफ की क्या बात है हमारी वजह से आपका नुकसान हुआ अब उसकी भरपाई तो हमें ही करनी पडेगी” मनीषा ने अपने बाप के लंड को तेज़ी के साथ सहलाते हुए कहा ।

“ओहहह बेटी तुम बुहत अच्छी हो” अनिल ने सिसकते हुए कहा।

“बापु जी आप बेड पर सीधे लेट जाओ” मनीषा ने अपना हाथ अपने बाप के लंड से हटाते हुए कहा । अनिल अपनी बेटी की बात सुनकर सीधा लेट गया।

“बापु जी इसे उतार देते कहीं आपके लंड के वीर्य से खराब न हो जाए” मनीषा ने अपने बाप के लेटते ही अपनी नाइटी को उतारते हुए कहा । अनिल अपनी बेटी का गोरा जिस्म सिर्फ एक ब्रा और पेंटी में देखकर पागल हो गया ।

अनिल का लंड अपनी बेटी की आधि नंगी चुचियों और उसके मांसल चूतडों को देखकर फूलकर और ज़्यादा मोटा हो गया । मनीषा भी अपने बाप के लंड को देखकर बुहत ज़्यादा गरम हो गई थी और उत्तेजिना के मारे उसकी चूत से पानी टपक रहा था ।

मानिषा ने अपने नरम हाथों से अपने बापू का लंड आगे पीछे करते हुए अचानक अपना मूह नीचे करते हुए उसके गुलाबी सुपाडे को चूम लिया।

“आह्ह्ह्ह बेटी यह क्या कर रही हो” अपनी बेटी के होंठ अपने लंड पर पड़ते ही अनिल ने ज़ोर से सिसकते हुए कहा।

“ऐसा करने से आपका जल्दी निकल जाएगा” मनीषा ने इस बार अपना मूह खोलते हुए अपने बाप के लंड का सुपाड़ा अपने मुँह में लेते हुए कहा ।

“ओहहह हाँ बेटी सही कह रही हो, बुहत मजा आ रहा है” अपने लंड का सुपाड़ा अपनी बेटी के मूह में जाते ही अनिल ने ज़ोर से सिसकते हुए कहा । मनीषा अपने बाप के लंड के सुपाडे को कुल्फ़ी की तरह चाटने लगी और अपने हाथ से अपने बाप के लंड के नीचे लटकती गोटियों को सहलाने लगी ।

“आआह्ह्ह इसशहहह बेटी मेरा निकलने वाला है ओह्ह्ह्ह” अनिल यह कहते हुए झरने लगा और उसके लंड से निकलता हुआ वीर्य उसकी बेटी के मुँह में गिरने लगा । मनीषा ने जितना हो सकता था अपने बापू का वीर्य गटक लिया और बाकी का उसके होंठो से टपकता हुआ नीचे गिरने लगा ।

बेटी यह क्या तुम्हारा तो सारा चेहरा ही ख़राब हो गया” अनिल ने कुछ देर तक सिसकते हुए झरने के बाद कहा।

“बापु जी कोई बात नहीं मैं साफ़ कर देती हूँ” मनीषा ने अपने होंठो पर लगे अपने बाप के वीर्य को अपनी जीभ से चाटते हुए कहा और अपनी नाइटी से अपने मूह को साफ़ कर दिया ।

“बेटी तुम बुहत अच्छी हो मुझे सारी रात तडपने से बचा लिया” अनिल ने बेड से उठते हुए अपनी धोती को पहनते हुए कहा।

“बापु जी आपके वीर्य का स्वाद तो बुहत शानदर था” मनीषा ने भी अपनी नाइटी को पहनते हुए कहा।

“बेटी तुम्हारी माँ भी मेरे वीर्य की एक बूँद तक नहीं गिरने देति थी, तुमने तो आज उसकी याद दिला दी” अनिल ने धोती पहनने के बाद बेड पर बैठते हुए कहा।

“बापु जी आप तो शांत हो गये अब मैं जाती हूँ आप सो जाओ” मनीषा ने बेड से उठते हुए अपने बाप से कहा ।

“बेटी जैसे तुम्हारी मर्जी” अनिल भी अपनी बेटी के साथ उठकर खडा हो गया । अनिल अपनी बेटी के साथ दरवाज़े तक आ गया, मनीषा ने दरवाज़े तक पुहंचकर अपने बापू से लिपटकर गले लग गयी और फिर वहां से जाने लगी ।

अनिल अपनी बेटी के जाने के बाद दरवाज़ा बंद करके बेड पर आकर लेट गया । अनिल का लंड फिर से तन चुका था क्योंकी जब मनिषा ने जाते हुए अपने बापू को गले लगाया था तो उसकी चुचियां अनिल के सीने में दब गयी थी जिन्हें अनिल अब भी अपने सीने पर महसूस कर रहा था ।

अनिल अपनी बेटी के बारे में सोचते हुए अपने लंड को हिलाने लगा । अनिल लंड को हिलाते हुए अपनी बेटी की चुचियों और चूतडों को ज़हन में ला रहा था, अनिल को अचानक ज़हन में आया की उसकी बेटी की चूत कैसी होगी और यह ख़याल आते ही अनिल का लंड पानी छोड़ने लगा।

अनिल दो बार झरने के बाद आराम से सो गया । मनीषा की हालत बुहत बिगड चुकी थी उसने अपने कमरे में आते ही अपनी नाइटी और पेंटी को उतार दिया और अपनी चूत में दो उँगलियाँ डालकर अंदर बाहर करने लगी ।

मानिषा की चूत कुछ ही देर में पानी छोड़ने लगी और वह भी कपड़े पहनकर सो गयी । रेखा को मनीषा पर बुहत गुस्सा और उसे अपने ससुर के लंड से बुहत मजा आ रहा था और वह झरने ही वाली थी की वह आ गयी थी ।

रेखा अपने कमरे में आकर उंगली से अपनी चूत का पानी निकाल दिया और बेड पर लेट गयी ।।।। रेखा को अचानक नरेश की याद आ गयी जब वह उसके गले लगी थी तो उसका लंड उसको अपनी चूत पर महसूस हुआ था।

रेखा जान चुकी थी की उसके भांजे का लंड तगड़ा है और वह उसकी फिगर को देखकर गरम भी हो गया था तभी तो उसे गले लगते वक्त उसका लंड खडा था, रेखा ने सोच लिया की नरेश से चुदवायेगी ज़रूर मगर पहले उसको थोडा तडपायेगी और वह यह सोचते हुए सो गयी।

सूबह हर रोज़ की तरह रेखा ने सब से पहले उठकर अपने पति और बच्चों को उठा दिया । नरेश रात को पेशाब करने के लिए उठा था तो उसने अंडरवियर पहन लिया था और विजय को भी उठाकर अंडरवियर पहनने के लिए कह दिया था ।

मुकेश तैयार होकर ऑफिस के लिए निकल गया ।।।। और विजय और उसकी दोनों बहनें कॉलेज के लिए निकल गए । रेखा ने मनीषा और उसके बच्चों को नहीं उठाया था, रेखा कुछ देर तक अपने घर का काम करती रही जब वह फ़ारिग हुयी तो सुबह के ९:३० हो चुके थे।

रेखा सीधे अपने बेटे के कमरे में चली गयी जहाँ नरेश सोया हुआ था, रेखा जैसे ही कमरे में आई तो देखा नरेश सिर्फ अंडरवियर में सीधा लेटा हुआ था और नींद में ही उसका लंड खडा होकर अंडरवियर में बुहत बड़ा उभार बनाये हुए था ।

रेखा अंदर आकर नरेश के अंडरवियर पर हाथ फेरने लगी, नरेश के अंडरवियर पर हाथ रखते ही रेखा के पूरे जिस्म में करंट जैसे झटका लगा । रेखा ने अपना हाथ वहां से हटा लिया। वह जान चुकी थी की नरेश का लंड लम्बा होने के साथ बुहत मोटा भी है।

रेखा ने खडे होते हुए अपनी साड़ी का पल्लु नीचे गिरा दिया और थोडा झुकते हुए अपनी चुचियां जो उसके ब्लाउज में से आधी बाहर थी नरेश के मूह के पास कर दी और नरेश को झंझोरते हुए उठाने लगी ।

नरेश ने जैसे ही अपनी ऑंखें खोलि उसकी आँखों के सामने दो बड़ी बड़ी चुचियों के उभार थे । नरेश की ऑंखें वहीँ अटक गई।

“सुबह सुबह किसी गर्लफ्रेंड का सपना देख रहे थे भांजे” तभी रेखा ने सीधे होते हुए अपनी चुचियों पर पल्लु रखते हुए कहा ।

“किसी का नहीं मामी” नरेश ने अपने सामने सुबह सुबह जन्नत जैसे मजा देने वाली चुचियों के हटते ही निराश होते हुए कहा।

“फिर यह जनाब किसको याद करके सुबह सुबह उछल रहा है” रेखा ने मुसकुराकर नरेश के अंडरवियर पर हलकी चपत लगाते हुए कहा ।

रेखा की इस हरकत नरेश हडबडाकर उठ गया और चादर को उठाकर अपने ऊपर कार दिया।

“अरे भांजे इतना शर्मा क्यों रहे हो, मैं जा रही हूँ फ्रेश हो जाओ ” रेखा हँसते हुए यह कहकर वहां से जाने लगी।

रेखा वहां से जाते हुए सब को उठाते हुए किचेन में चलि गयी और नाश्ता तैयार करने लगी । आधे घंटे में ही नाश्ता तैयार हो गया और वह टेबल पर लगाने लगी, सब उठकर टेबल पर आ चुके थे और साथ में नाश्ता करने लगे ।

नाश्ता ख़तम होने के बाद रेखा बर्तन उठाकर किचन में रखने लगी, मनीषा अपने बापू और उसकी दोनों बेटियां आपस में मिलकर अपने कमरों में जाकर बातें करने लगे।

“भान्जे कुर्सी लेकर किचन में आ जाओ बातें करते है” रेखा ने नरेश को अकेला देखकर कहा ।

नरेश कुर्सी लेकर किचन में जाकर बैठ गया।

“भान्जे तुम हो तो बुहत शरमीले कॉलेज में कोई गर्लफरैंड वगैरह है या नही” नरेश के बेठते ही रेखा ने उसे छेडते हुए कहा।

“मामी मेरे जैसे उल्लु से कौन सी लड़की दोस्ती करेगी” नरेश ने अपनी मामी का जवाब देते हुए कहा ।

“क्यों क्या कमी है तुममें?” रेखा ने हैंरानी से पुछा और वहां बैठते हुए बर्तन धोने लगी।

“ऐसा है ही क्या मुझ में जो लड़कियाँ मुझसे दोस्ती करे” नरेश ने अपनी मामी की बड़ी बड़ी चुचियों की तरफ देखते हुए कहा जो उसका पल्लु बर्तन धोते वक्त उसकी चुचियों से सरकने की वजह से नंगी हो गई थी।

“भान्जे आजकल की लड़कियाँ तो शकल सूरत देखती नहीं उनको तो बस लम्बा और मोटा चाहिए जो उनकी खुजलि सही तरीके से मिटा सके और तुम्हारा तो मोटा और लम्बा होने के साथ तुम हॅंडसम भी हो” रेखा ने नरेश को अपनी चुचियों की तरफ घूरता हुआ देखकर बर्तन को अपने हाथ से तेज़ी के साथ धोते हुए कहा। जिस वजह से उसकी चुचियां ज़ोर से हिलते हुए नरेश के आँखों के सामने लहराने लगी।

“मामी आप भी तो एक औरत हो । अगर हर लड़की लम्बे और मोटे लंड की दीवानी होती है तो आप भी होगी, क्यों नहीं आप मेरी गर्लफरैंड बन जाती” नरेश ने अपनी मामी के मुँह से खुली बातें सुनकर खुद भी हँसते हुए उसको सीधा कह दिया ।

“नालायक अपनी मामी पर बुरी नज़र रखते हो । मैं तुम्हारी कॉलेज की लड़कयों की बात कर रही थी, इस उम्र में मुझमें क्या रखा है जो ऐसा कह रहे हो” रेखा ने उठकर बर्तनो को उठाकर ऊपर रखते हुए कहा । रेखा के ऐसा करने से उसकी आधी से ज़्यादा चुचियां नरेश को कुछ देर के लिए देखने को मिल गयी।

रेखा ने कुछ बर्तन नीचे रखने के बाद बाकी के ऊपर रखने की कोशिश करने लगी मगर उसका हाथ वहां तक नहीं पुहंच पाया।

“नरेश मुझे बर्तन रखने में मदद करो” रेखा ने नरेश की तरफ देखते हुए कहा ।

रेखा आज जानबूझ कर वहां बर्तन रखने की कोशिश कर रही थी । नरेश उठकर अपनी मामी के पास पुहंच गया। मगर उसका हाथ भी वहां तक पुहच नहीं पाया।

“मैं स्टूल लेकर आता हूँ” नरेश ने सोचते हुए कहा ।

“भान्जे एक काम करो तुम मुझे उठा कर थोडा ऊपर कर लो, में बर्तन रख दूंग़ी” रेखा ने नरेश से कहा।

“ठीक है मामी” नरेश जो पहले से ही अपनी मामी के गठीले बदन को देखकर आँखें सेक रहा था, उसने अपनी मामी की बात को सुनते ही जल्दी से कहा ।

नरेश के क़रीब आते ही रेखा ने उसे दीवार से सटाकर खड़ा कर दिया और खुद कुछ बर्तन उठा लिये और अपने दोनों बाज़ू ऊपर कर लिए । नरेश ने अपनी मामी के दोनों चूतडों में हाथ ड़ालते हुए उसे ऊपर उठा लिया।

“आजहहह शह” रेखा अपने भांजे के हाथ अपने मोटे चूतडों पर पड़ते ही सिसक उठी।

क्या हुआ मामी” नरेश अपनी मामी के नरम चूतड़ों को अपने हाथों पर महसूस करके मज़े लेते हुए बोला।

“कुछ नहीं भांजे” रेखा ने बर्तन रखते हुए कहा ।

रेखा ने वह बर्तन रखने के बाद जैसे ही नीचे झुककर दुसरे बर्तन उठाने लगी उसकी साड़ी का पल्लु उसकी चुचियों से हट गया और उसकी चुचियों का ऊपर वाला नंगा उभार सीधा नरेश के मुँह में दब गया । नरेश को तो अपनी मामी की चुचियों को अपने मूह पर महसूस करके ही जन्नत का मजा आने लगा ।

रेखा की भी हालत बुरी थी उसने दुसरे बर्तन उठा तो लिए थे मगर उसे अपनी चुचियां अपने भांजे के मूह पर रगडने से इतना मजा आ रहा था के उसका मन बर्तन ऊपर रखने का ही नहीं हो रहा था ।

रेखा अपनी चुचियों के उभार नरेश के मुँह पर रगडते हुए बर्तनों को इधर उधर कर रही थी की अचानक कीचन में शीला दाखिल हुयी जिसे देखकर रेखा जल्दी से बर्तन उठाकर ऊपर रख लिये और नरेश ने अपनी मामी को नीचे उतार दिया ।

शीला बेटी क्या बात है?” रेखा ने नीचे उतारते ही अपनी साड़ी को सीधा करते हुए कहा ।

“वो मामी मैं भाई को ढून्ढ रही थीं” शीला ने रेखा से कहा।

“हा दीदी क्या बात है?” नरेश ने अपने माथे से पसीना साफ़ करते हुए कहा जो रेखा के भारी भरकम जिस्म को उठाने से निकला था ।

“भइया मुझे कुछ मंगवाना है प्लीज हमारे कमरे में चलो” शीला ने अपने भाई से कहा । नरेश अपनी बहन की बात सुनकर उसके साथ जाने लगा, शीला नरेश के आगे चल रही थी।

नरेश अपनी बहन की गांड को चलते हुए बड़े गौर से देख रहा था । उसकी बहन की गांड चलने से कभी एक तरफ तो कभी दूसरी तरफ झटके खा रही थी जिसे देखकर नरेश का दिल भी ज़ोर से धक धक कर रहा था।

“भइया मेरे लिए पैंटीन शम्पू लेकर आओ मुझे यह अच्छा नहीं लग रहा” शीला ने कमरे में पुहंचकर अपने पर्स से पैसे निकालकर अपने भाई को देते हुए कहा।

“मेरे पास पैसे हैं तुम इन्हें अपने पास रखो मैं अभी लेकर आता हूँ” नरेश यह कहता हुआ वहां से चला गया।

शीला अपने भाई के जाने के बाद सीधे बाथरूम में घुस गयी जहाँ पर उसने पहले से अपने कपड़े रख लिये थे। शीला अपने भाई का ख्याल अपनी जवानी की तरफ दिलवाना चाहती थी इसीलिए उसने बाथरूम में जाने से पहले अपने जिस्म पर पहनी हुयी ब्रा और पेंटी बेड पर रख दी थी ।

शीला बेफिक्र होकर अपने पूरे कपडे उतारकर शावर के नीचे खड़ी होकर नहाने लगी । नरेश जैसे ही शम्पू लेकर कमरे में दाखिल हुआ उसे बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ सुनायी दी।

“दीदी शेम्पू लेकर आ गया” नरेश ने तेज़ आवाज़ में कहा।

“भइया प्लीज शम्पू मेरे पास ले आओ” शीला ने बाथरूम से ही आवाज़ दी । नरेश का लंड बाथरूम से अपनी दीदी की आवज़ सुनकर खडा होने लगा ।

“अभी आया दीदी” यह कहते हुए नरेश बाथरूम की तरफ बढ्ने लगा, नरेश का दिल बाथरूम की तरफ जाते हुए ज़ोर से धडक रहा था ।

“कहाँ है शम्पू भइया” नरेश बाथरूम के दरवाज़े तक पुहंचा ही था के शीला ने दरवाज़ा खोलते हुए कहा। अपने भाई को सामने देखकर शीला ने जल्दी से दरवाज़ा बंद कर दिया ।

शीला दरवाज़ा बंद करके नरेश की हालत के बारे में सोचकर हँस रही थी । क्योंकी उसे पता था की उसका भैया उसको नंगा देख चूका है । नरेश को जो झटका दरवाज़ा खुलने से लगा था इतना बड़ा झटका उसे ज़िंदगी में कभी नहीं लगा था ।

नरेश की साँसें बुहत ज़ोर से चल रही थीं और उसका लंड पेण्ट में खडा होकर उथल पुथल मचा रहा था, नरेश वहीँ बूत बनकर खडा था । शीला ने दरवाज़े से अपना हाथ निकालते हुए अपने भैया के हाथ से शम्पू ले लीया और दरवाज़ा बंद कर दिया।

नरेश की आँखों के सामने अपनी बहन का नंगा जिस्म घूम रहा था, वह वहां से चलते हुए बेड पर आकर बैठ गया । नरेश मन ही मन में सोचने लगा उसकी बहन शीला तो इतनी सूंदर है आज तक उसका धयान अपनी बहन की तरफ कभी क्यों नहीं गया ।

नरेश ने अपनी बहन की गोरी चुचियां और काले काले बालों वाली चूत देखि थी जिसे याद करके उसके हाथ बेड पर चलने लगे जैसे वह अपनी बहन की रसीली चुचियों और चूत को सहला रहा हो, ऐसा करते हुए उसके हाथ में अपने बहन की पेंटी और ब्रा आ गयी ।

अपनी छोटी बहन की पेंटी और ब्रा अपने हाथ में आते ही नरेश का पूरा बदन उत्तेजना के मारे काम्पने लगा। नरेश अपनी बहन की छोटी पेंटी देखकर पागल हो चुका था, उसने अपनी बहन की पेंटी को देखते हुए उसे अपने नाक पर रख दिया ।

नरेश अपनी बहन की पेंटी से आने वाली गंध अपने नाक में जाते ही समझ गया की यह पेंटी उसकी बहन की चूत से अभी उतरी हुयी है क्योंकी नरेश को पेंटी में से मदहोश करने वाली गंध आ रही थी । नरेश का लंड उसकी पेण्ट के अंदर इतना तन गया था की उसे अपने लंड में दर्द होने लगा था।

शीला जो दरवाज़े को हल्का खोलकर सब कुछ देख रही थी वह अपना प्लान कामयाब होता देखकर बुहत खुश होगई ।

शीला ने अपने प्लान के मुताबिक जान बूझकर एक टॉवल लपेट कर दरवाज़े को ज़ोर से खोल दिया । दरवाज़े की आवज़ से नरेश के हाथों से उसके बहन की पेंटी नीचे गिर गयी और उसने जैसे ही दरवाज़े की तरफ देखा तो उसकी बहन सिर्फ एक छोटे से टॉवल में खड़ी थी, शीला ने जैसे ही देखा की उसका भाई उसे घूर रहा है वह बाथरूम में चलि गयी ।

“भइया आप अभी तक यहीं हो, मैं अपने कपड़े वहीँ भूल गयी थी प्लीज उठाकर दो” शीला ने बाथरूम में जाते ही कहा । नरेश के दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था, उसने अपनी बहन को दूसरी बार नंगा देखा था ।

शीला जो टॉवल लपेट कर बाहर निकली थी उसमें उसकी आधी चुचियां और उसकी पूरी टाँगें नंगी नरेश को दिखाई दी थी । नरेश अपनी बहन की पेंटी और ब्रा को लेकर बाथरूम की तरफ जाने लगा, नरेश का लंड बिलकुल ठोस होकर उसकी पेण्ट को टक्कर मार रहा था।

नरेश जैसे ही दरवाज़े के क़रीब पुहंचा शीला ने दरवाज़ा खोल दिया और अपने भाई से पेंटी और ब्रा लेने लगी, दरवाज़े के खुलते ही नरेश की आँखें फिर से अपनी बहन के जिस्म पर जो सिर्फ टॉवल में लपेटा हुआ था उस पर टिक गयी ।

“क्या हुआ भैया?” शीला ने ब्रा और पेंटी को लेते हुए मुसकुराकर कहा । नरेश जो पहले से अपनी बहन की जवानी को देखकर पागल हो चुका था । अपनी बहन को मुस्कराता हुआ देखकर वह अपने पूरे होश हवास खो बैठा और आगे बढकर बाथरूम में घुस गया ।

शीला अपने भाई को अपने प्लान के मुताबिक अपने हुस्न का दीवाना बना चुकी थी मगर वह अपने भाई के बाथरूम में घूसने से डरने का नाटक करते हुए पीछे हटने लगी । नरेश हवस की आग में जल कर बिलकुल पागल हो चुका था ।

शीला जैसे जैसे पीछे हो रही थी नरेश वेसे ही आगे चलते जा रहा था, पीछे हटते हटते शीला की पीठ बाथरूम की दीवार से जा टकरायी । शीला के पास अब पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं था उसकी साँसें उत्तेजना और अनजाने दर के अहसास से बुहत ज़ोर से चल रही थी जिस वजह से शीला की चुचियां भी बुहत ज़ोर के साथ ऊपर नीचे हो रही थी।

शीला के बदन पर सिर्फ एक टॉवल लपेटा हुआ था जिसे उसने अपने हाथ से पकड रखा था । नरेश अब आगे बढ़कर बिलकुल अपनी बहन के पास पुहंच चूका था । नरेश ने अपने दोनों हाथों से अपनी बहन के दोनों बाज़ू पकड लिया और उन्हें ऊपर करते हुए दीवार से सटा दिया ।

शीला के हाथ ऊपर होते ही उसके बदन पर लपेटा हुआ टॉवल उसके मख़मली बदन से सरकता हुआ नीचे गिर गया।

नरेश के सामने उसकी सगी छोटी बहन उसके इतना नज़दीक बिलकुल नंगी खडी थी, नरेश ने अपनी बहन के भीगे हुए गुलाबी लबों को देखते हुए अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिये । नरेश और शीला के होंठ आपस में मिलते ही दोनों एक दुसरे में खो गये ।

दोनों तरफ आग बराबर लगी हुयी थी इसीलिए कभी नरेश के होंठ शीला के मूह में होते तो कभी शीला के होंठ नरेश के मूह में । उस वक्त वह दोनों अपने होश खो बैठे थे वह दुनिया से बेखबर एक दुसरे के रसीले होंठो का रस पीने में मगन थे।

दोनों भाई बहन के हाथों की उँगलियाँ एक दुसरे के हाथों में फँसी हुयी थी, नरेश अचानक अपनी बहन के होंठो को छोडते हुए उसके काँधे को चूमने लगा । शीला को अपने पूरा जिस्म में चींटियां रेंगते महसूस हो रही थी और उसका पूरा जिस्म टूट रहा था ।

नरेश अपनी बहन के काँधे को चूमते हुए नीचे होता हुआ जैसे ही उसकी चुचियों की तरफ बढ़ने लगा शीला ने अनोखे मज़े के अहसास को बर्दाशत न करते हुए अपने बड़े भाई के हाथों से अपने हाथों को छुड़ाते हुए उसे गले लगा दिया ।

शीला के गले लगते ही उसकी नरम नरम चुचियाँ नरेश के सीने में दब गयी । नरेश की हालत पहले से बुहत ख़राब थी । अपनी बहन की नरम नरम चुचीयों के अहसास से ही उसकी हालत और ज़्यादा बिगड गयी।

नरेश ने थोडा पीछे हटते हुए शीला को दीवार से थोडा आगे सरकाते हुए बुहत ज़ोर से अपने गले लगा लिया ।वह अपनी बहन को चूमने चाटने लगा।

“आहहहह ईश भइया” नरेश ने अपनी बहन को इतनी ज़ोर से अपनी बाँहों में भरा था की उसके मूह से मज़े और मीठे दर्द की वजह से हलकी चीख़ निकल गई।

शीला की चुचियां नरेश के सीने में दब गयी और उसकी चूत सटकर नरेश की पेण्ट में तने हुए लंड के उभार पर दब गई, नरेश को अपने लंड के दबने से इतना मजा आया की उसने अपने दोनों हाथों से अपनी छोटी बहन के चुतडों को पकड कर अपने लंड पर दबाने लगा ।

“आहहह शीला” दो चार झटको में ही नरेश के मूह से एक चीख़ निकली और उसका लंड उसकी पेण्ट में ही झरने लगा, नरेश को झरने के बाद अहसास हुआ की वह अपनी नंगी सगी बहन के साथ खडा है । वह जल्दी से अपनी बहन को अपने बाँहों से आज़ाद करते हुए वहां से बाहर चला गया, शीला बेचारी अपने भाई के अचानक चले जाने से वहां पर तडपति हुयी अकेली रह गयी ।

शीला नरेश के जाने के बाद हैंरान होकर वहीँ पर खड़ी थी, उसकी साँसें बुहत ज़ोर से ऊपर नीचे हो रही थी। उसका प्लान बिलकुल कामयाब हुआ था । वह सोचने लगी की नरेश को आखिर अचानक क्या हुआ जो वह अपनी नंगी छोटी बहन को ऐसे तडपता हुआ छोडकर चला गया ।

शीला को तभी याद आया के आखिर में उसके भाई ने उसकी गांड पकड़कर अपनी पेण्ट पर दबाई थी और वह ज़ोर से काम्प रहा था। अच्छा तो यह बात थी, शीला को उस वक्त अपनी चूत पर कुछ गीला गीला अहसास हुआ था । तभी नरेश ने उसे छोड दिया था।

शीला मन ही मन में मुस्कुरा रही थी वह समझ गयी थी के उसका भाई अपनी गर्मी को संभल न सका और यों ही झर गया था । शीला ने अपने कपडे पहने और बाहर निकल आई।

नरेश अपने कमरे में आकर बेड पर लेटा हुआ सोच रहा था की जो कुछ भी हुआ पता नहीं शीला उसके बारे में क्या सोच रही होगी, कहीं वह सब कुछ सब को बता तो नहीं देगी । मगर जब उसने शीला को किस दी थी तो वह भी उसका साथ दे रही थी, पर फिर भी एक अन्जाना डर नरेश के दिल में था ।

रेखा कुछ देर तक अपने बाप और मनीषा से बातें करने के बाद वहां से उठते हुए खाना बनाने की तैयारी करने लगी ।

“बापु जी रात को नींद तो अच्छी आ गयी आपको?” मनीषा ने रेखा के जाते ही अपने बाप से कहा ।

“हा बेटी नींद तो बुहत बढिया आई थी, मगर सब तुम्हारी मेहनत की वजह से” अनिल ने मोका देखकर अपनी बेटी पर लाइन मारते हुए कहा ।

“बापु जी आपकी सेवा करते करते हमारी हालत ख़राब हो गई थी रात को” मनीषा ने बात को आगे बढाते हुए कहा।

“क्यों क्या हुआ था बेटी?” अनिल ने अन्जान बनते हुए कहा।

“वो बापू जी आपको शांत करते करते हम गरम हो गये थे” मनीषा ने यह बात कहते हुए शर्म से अपना सर नीचे कर रखा था ।

“ओह इसका मतलब हमारी वजह से हमारी बेटी को तकलीफ उठानी पडी” अनिल ने अपनी बेटी की बात सुनने के बाद कहा।

“नही बापू इस में तकलीफ की क्या बात है वह तो हमारा फ़र्ज़ था” मनीषा ने कहा।

” वह तुम्हारा फ़र्ज़ था, तो क्या मेरा कुछ फ़र्ज़ नहीं बनता था की मैं तुम्हारी कुछ मदद कर पाता” अनिल ने गुस्से से कहा ।

“बापु आप इतना दुखी क्यों हो रहे हो, हमने अपने आप को शांत कर दिया था” मनीषा ने अपने बाप से कहा।

“वही तो कह रहा हूँ बेटी के अगर तुम्हें मेरी वजह से तकलीफ हुयी थी तो उसे हमें ही दूर करने देती मगर तुम तो हमें इस लायक समझती ही नहीं हो” अनिल ने अपनी बेटी के पास जाकर बैठते हुए कहा ।

“बापु जी आपका तो अभी भी खडा है क्या बात है अपनी बहु की बुहत याद आ रही है क्या?” मनीषा ने अपने हाथ से अपने बाप के लंड की चिकोटी लेते हुए कहा।

“हमारी इतनी चिंता मत करो अपने बारे में कुछ सोचो, तुम अभी बूढ़ी नहीं हुयी हो” अनिल ने अपनी बेटी के गालों की चिकोटी लेते हुए कहा।

“बापु आप हमारी झूठी तारीफ मत किया करो” मनीषा ने शरमाकर उठते हुए कहा । अब मनीषा अपने बाप के सामने उलटी खडी थी और अनिल अपनी बेटी के चूतडों को घूर रहा था।

“बेटी मैं सच कह रहा हूँ तुम्हें देखकर बिलकुल नहीं लगता की तुम ३ जवान बच्चों की माँ हो” अनिल ने अपनी बेटी की और ज़्यादा तारीफ करते हुए कहा।

“तुम्हे क्या लगता है बापु” मनीषा ने उलटे खडे हुए ही कहा।

“बेटी तुम्हें देखकर ऐसा लगता है की तुम किसी कॉलेज की लड़की हो” अनिल ने अपनी बेटी से कहा।

“बापु में जा रही हूँ,आप तो बुहत ज़्यादा फ़ेंक रहे हो” मनीषा यह कहते हुए जाने लगी की अनिल ने उसे कमर से पकडते हुए कहा।

“बेटी मैं सच कह रहा हूँ । कहाँ जा रही हो” ।

मानिषा अचानक अपनी कमर में हाथ पड़ने से बैलेंस खोकर अपने बाप की गोद में जा गिरी।

“आह्ह ओहह” मनीषा के चूतड़ सीधे अपने पिता के खडे लंड पर आकर पडे थे । जिस वजह से उसके मुँह से हलकी सिसकी निकल गई।

“बेटी क्या हुआ कहीं चोट तो नहीं लगी” अनिल भी अपनी बेटी के नरम नरम चूतडों को अपने लंड पर दबते ही मजा लेते हुए बोला।

“नही पिता चोट तो नहीं लगी है बस थोडी मोच आ गयी है” मनीषा ने अपने बाप के गोद से बगैर उठे उनके लंड को अपने चुतडों से दबाकर मजा लेते हुए कहा ।

“कहाँ पर मोच आ गयी है हमारी बेटी को” अनिल अपना एक हाथ अपनी बेटी के नंगे पेट पर रखते हुए उसे दबोच लिया और थोडा नीचे झुकते हुए अपने दुसरे हाथ से अपनी बेटी के पैर से साड़ी को थोडा ऊपर करते हुए कहा।

अनिल के झुकने और अपनी बेटी के पेट पर हाथ रखने से उसका लंड मनीषा के चूतडों में और ज्यादा चुभने लगा।

“आजहहह बापू यहाँ नहीं थोडा और उपर” मनीषा को अपने चुतडो के बीच अपने बापू का लंड बुहत अच्छा लग रहा था इसीलिए वह यह खेल कुछ देर तक यों ही खेलना चाहती थी।

“यहाँ बेटी” अनिल ने अपनी बेटी की साड़ी को अब घुटनों तक ऊपर कर लिया था ।

मानिषा की चूत मज़े से थोडा थोडा पानी टपकाने लगी थी । उसका पूरा बदन मज़े और खुमारी में टूट रहा था।

“बस थोडा और ऊपर बापु” मनीषा ने मज़े से अपने बाप को और तडपाते हुए कहा।

“अब बताओ बेटी कहाँ दर्द है” अनिल ने अपनी बेटी की साड़ी को अब उसके घुटनों से भी ऊपर कर दिया था। जिस वजह से अनिल को अपनी बेटी की पेंटी भी नज़र आ रही थी और अनिल अपनी बेटी की गोरी और चिकनी जाँघ पर हाथ फिरा कर पूछ रहा था ।

“आह्हः बापू आउच यहीं पर है दरद” मनीषा अपने बाप का हाथ अपने घुटनों के ऊपर अपनी जाँघ पर पड़ते ही मज़े के मारे सिसकते हुए बोली।

“अभी तुम्हारा दर्द ग़ायब कर देता हूँ” अनिल अपने हाथ से अपनी बेटी की गोरी गोरी जाँघ को ऊपर से नीचे तक रगडते हुए कहा।

“ओहहहह बापू अभी कुछ अच्छा लग रहा है” अनिल का हाथ अपनी जांघों पर बुहत ज़ोर से रगडने से मनीषा को बुहत मजा आ रहा था । अनिल ने अब अपनी बेटी की जाँघ पर अपना हाथ रगडते हुए बुहत ऊपर तक जा रहा था । जिस वजह से कभी कभी उसकी उंगलिया अपनी बेटी की पेंटी को छू रही थी,

“उईई ओह बापू ऐसे ही अब दर्द कम हो रहा है” अपने बाप की उंगलिया अपनी पेंटी पर महसूस होते ही मनीषा का पूरा जिस्म में चींटिया दौडने लगी और वह बुहत ज़ोर से सिसकते हुए कहने लगी ।

अनिल कोई कच्चा खिलाडी तो था नहीं वह समझ चूका था की उसकी बेटी को कोई दर्द नहीं है वह बस बहाने से मजा ले रही है। सो उसने अब अपने हाथ को बुहत ऊपर करते हुए अपनी बेटी की पेंटी को बुहत ज़ोर से अपनी उँगलियों से रगडना शुरू कर दिया । मनीषा का जिस्म इतना गरम हो चुका था की उसके जिस्म से पसीना निकल रहा था जिस वजह से अनिल का दूसरा हाथ भी उसकी पीठ पर फिसल रहा था ।

मानिषा का जिस्म अब काम्पने लगा वह अपनी मंजिल के बिलकुल क़रीब थी और वह किसी भी वक्त झर सकती थी, अनिल भी अपनी बेटी के पेंटी को गीला महसूस करके जान चूका था की उसकी बेटी किसी भी वक्त झर सकती है । इसीलिए उसने अपनी उँगलियाँ को सीधा अपनी बेटी की पेंटी के ऊपर से उसकी चूत पर रगडने लगा।

“आह्ह्ह्ह शहहहह बापू ओह्ह्ह्ह” मनिषा का जिस्म अचानक अकडने लगा और वह अपने बाप की उँगलियों की हरकत को बर्दाशत न करते हुए झरने लगी।

अनिल का हाथ उसकी बेटी के झरने से उसकी पेंटी के ज़्यादा गीले होने होने थोडा गीला हो गया। मगर अनिल ने अपने हाथ को फ़ौरन वहां से हटाते हुए अपनी बेटी को थोडी देर के लिए बिलकुल शांत छोड दिया।

“बेटी अब दर्द तो नहीं हो रहा है” थोड़ी देर बाद मनीषा ने जैसे ही आँखें खोली अनिल ने उससे पुछा ।

“नही बापू जी अब दर्द नही है” मनीषा ने शर्म से पानी पानी होते हुये कहा।

“बेटी मैं तो परेशान हो गया था”अनिल ने खुश होते हुए कहा।

“बापु अब मैं जा रही हूँ थोडा रेखा दीदी से काम है” मनीषा ने अपने बापू की गोद से अपने चुतडो को उठाते हुए कहा।

“ठीक है बेटी तुम अपनी भाभी से जाकर बात करो” अनिल ने मनीषा के उठते ही कहा । मनीषा अपने बापू की बात सुनकर वहां से चलि गयी ।

मानिषा अपने बापू के कमरे से निकलकर अपने कमरे में आ गयी और दरवाज़ा बंद करके अलमारी से दूसरी पेंटी निकाली । मनीषा की पेंटी पूरी भीग चुकी थी इसीलिए वह अपनी पेंटी को चेंज करने अपने कमरे में आई थी ।

कंचन खाली पीरियड में अपने क्लास से बाहर आकर बैठी थी, आज उसकी सहेली नीलम भी नहीं आई थी इसीलिए वह बोर हो रही थी । विजय का भी खाली पीरियड था तो वह अपने क्लास से बाहर निकलकर टहलने लगा, अचानक विजय की नज़र अपनी बड़ी बहन पर पर गई वह सीधा चलते हुआ कंचन के पास आ गया।

“वीजू तुम कैसे आओ बैठो” कंचन ने अपने भाई को देखकर खुश होते हुए कहा।

“वो दीदी खाली पीरियड था इसीलिए टहल रहा था की आपको देख लिया और यहाँ आ गया” विजय ने बैठते हुए कहा ।

“मैंने कहा था न विजु के कोई गर्लफ्रेंड बना ले देखो अब अगर तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड होती तो ऐसे अकेले तो न घूमते” विजय के बैठते ही उसकी बड़ी बहन ने उसे छेडते हुए कहा।

“दीदी मैंने एक गर्लफ्रेंड बना ली है” विजय ने अपनी बहन से कहा ।

“सच विजु मुझसे नहीं मिलवाओगे?” कंचन ने खुश होते हुए कहा।

“हाँ क्यों नहीं मगर उसे देखकर जल मत जाना, मेरी गर्लफ्रेंड बुहत ख़ूबसूरत है” विजय ने अपनी बड़ी बहन की तरफ देखते हुए कहा।

“वीजू चलो मुझे उससे मिलवाओ ना” कंचन ने अपना भाई को हाथ से पकड़कर खीचते हुए कहा, वह अपने भाई की बातों से अंदर ही अंदर में जल रही थी की उसके भाई को ऐसी कौन सी लड़की मिल गई जो वह उसकी इतनी तारीफ कर रहा है।

“अरे ठहरो दीदी इतनी जल्दी क्या है पहले उसके बारे में पूरा जान तो लो” विजय ने अपनी बहन से हाथ छुड़ाते हुए कहा।

“वीजू मैं उसे देखकर जान जाऊँगी” कंचन ने गुस्सा होते हुए कहा।

“नही दीदी पहले उसके बारे में तुम जान लो फिर मैं तुम्हें उसकी तस्वीर दिखाऊँगा” विजय ने अपनी बहन को चिढाते हुए कहा ।

“वीजू तुम्हारे पास उसकी तस्वीर है, मुझे दिखाओ न प्लीज” कंचन अपने भाई की बात सुनकर उससे मिन्नतें करते हुए बोली।

“दीदी मैंने कहा न दिखाऊँगा पहले उसके बारे में जान तो लो” विजय को भी अब अपनी बहन को चिढाने में मजा आ रहा था इसीलिए उसने कंचन को चिढाते हुए कहा ।

“वीजू चलो जल्दी से बताओ क्या कहना चाहते हो” कंचन ने मूह बनाते हुए कहा।

“ये हुयी न बात दीदी, मेरी गर्लफ्रेंड इतनी सूंदर है की कॉलेज का हर लड़का उससे दोस्ती करना चाहता है मगर उसने सिर्फ मुझे अपना बॉयफ्रेंड बनाया है” विजय ने खुश होते हुए कहा ।

“उसका नाम क्या है विजू” कंचन ने वैसे ही गुस्सा करते हुए पुछा। अब तो वह सच में वह उस लड़की से जल रही थी।

“दीदी आप उसे जानती हैं नाम से आपको पता लग जाएगा” विजय ने अपनी बहन की तरफ देखते हुए कहा।

“विजू मैं उसे जानती हूँ बताओ न कौन है वह । तुम्हें मेरी कसम?” कंचन ने बुहत ज़्यादा परेशान होते हुए कहा। अब तो कंचन का सच में दिमाग घूम रहा था ।

“दीदी आपने अपनी कसम दे दी है तो अपनी ऑंखें बंद कर लो मैं उसकी तस्वीर दीखाता हूँ” विजय अपनी प्यारी बहन की कसम का सुनते ही बोला।

कंचन ने अपने भाई की बात सुनकर अपनी आँखें बंद कर ली।

“दीदी मेरी गर्लफ्रेंड को ज़रा प्यार से देखना दुनिया की सब से हसीन लड़की है वो” विजय ने अपने हाथ में कोई चीज़ लेकर अपनी बड़ी बहन के ऑंखों के सामने कर दी।

कंचन का दिल ज़ोर से धड़क रहा था की उसके भाई की गर्लफ्रेंड कौन है जिसे वह भी जानती है। उसने जैसे ही अपनी आँखें खोली उसका शर्म और गुस्से का कोई ठिकाना न रहा । कंचन गुस्से में आकर अपने भाई को अपने हाथों से मारने लगी ।

“क्यों दीदी हमारी गर्लफ्रेंड आपको पसंद नहीं आई क्या?” विजय ने हँसते हुए कहा।

“भइया आप बुहत बूरे हो हमें इतनी देर तक यों ही सताते रहे” कंचन ने गुस्से से अपना मूह दूसरी तरफ करते हुए कहा।

विजय ने अपनी बड़ी बहन की आँखें बंद करते ही उसके सामने एक आईने का टुकडा रख दिया था, जब कंचन ने आँखें खोलि तो उसे अपना चेहरा नज़र आया था जिस वजह से वह विजय से नाराज़ थी । कंचन दिल में तो बुहत खुश थी के उसका भाई किसी और की नहीं बल्कि उसकी इतनी तारीफ कर रहा था ।

“दीदी आपने सोच कैसे लिया की मैं आपके होते हुए किसी और को गर्लफ्रेंड बनाऊँगा” विजय ने अपनी बहन को सर से पकरते हुए उसका कन्धा ऊपर करते हुए कहा।

“सच में भैया आप बुहत अच्छे हो” कंचन ने इधर उधर देखते हुए अपने भाई के होंठो पर अपने होंठ रख दिये और तीन चार सेकण्डस तक अपने छोटे भाई के होंठो को चूसने के बाद अपने होंठ वहां से हटा दिए ।

कंचन को अपने छोटे भाई पर इतना प्यार आ रहा था की अगर लोगों के देखने का डर न होता तो वह अपने भाई को कभी न छोड़ती । दोनों भाई बहन कुछ देर तक आपस में बैठकर बाते ही करने के बाद अपने अपने क्लासेज में चले गए ।

रेखा किचन में अभी खाना बनाने की तैयारी कर रही थी की अचानक उसे नरेश का ख्याल आया की वह इतनी देर से दिख ही नहीं रहा है आखिर क्या कर रहा है वह ।

रेखा किचन से निकलकर सीधा नरेश के कमरे में पुहंच गयी । दरवाज़ा खुला हुआ था अंदर पुहंचते ही रेखा ने देखा के नरेश वहां नहीं था, वह जाने ही वाली थी की उसे बाथरूम से पानी गिरने की आवज़ सुनायी दी।

नरेश कुछ देर तक बिस्तर पर लेटे रहने के बाद फ्रेश होने के लिए बाथरूम गया था । रेखा ने बेड की तरफ देखा वहां पर नरेश के कपडे पडे थे, रेखा मन ही मन में खुश होते हुए वहीँ पर बैठकर नरेश का इंतज़ार करने लगी ।

रेखा को यकीन था की नरेश सिर्फ टॉवल में ही बाहर निकलेगा क्योंकी उसके कपडे बेड पर पडे थे । नरेश नहाने के बाद अपने आपको बुहत ज़्यादा फ्रेश महसूस कर रहा था। उसका लंड अब भी तना हुआ था क्योंकी उसके ज़हन में अपना जिस्म साफ़ करते हुए उसे अपनी बहन का नंगा जिस्म नज़र आ रहा था ।

नरेश अपने जिस्म पर टॉवल लपेटकर बाहर निकलने लगा, पानी का आवज़ ख़त्म होते ही रेखा बेड से उठकर दरवाज़े पर जाकर खडी हो गई । रेखा नरेश को यह अहसास बिलकुल नहीं दिलाना चाहती थी की वह जान बूझकर उसको नंगा देखना चाहती है, नरेश जैसे ही दरवाज़ा खोलकर बाहर निकला रेखा भी सामने से आगे बढ़ने लगी ।

“भान्जे तुम्हें शर्म नहीं आती नंगे होकर बैठे हो और दरवाज़ा भी बंद नहीं किया” नरेश बेड की तरफ बढ़ रहा था की अचानक रेखा की आवज़ ने उसे चौंका दिया । नरेश के हाथ से इस अचानक हुयी आवाज़ से अपना टॉवल छूट गया और वह अपनी मामी के सामने बिलकुल नंगा हो गया।

“अरे बेशर्म इतना बड़ा साँप पाल रखा है कुछ तो शर्म करो” रेखा ने अपने भांजे के नंगा होते ही उसके खडे बड़े और मोटे लंड को घूरते हुए झूठा गुस्सा करते हुए कहा, नरेश ने अपनी मामी की बात सुनकर जल्दी से टॉवल उठा लिया और अपने आपको ढ़क लिया ।

“मामी आप अचानक क्या काम है” नरेश ने टॉवल लपेटने के बाद हकलाते हुए कहा।

“अरे मैं तो तुम्हें देखने आई थी की कहाँ चले गए। किचन में कुछ मदद कर देते मगर तुम तो यहाँ नंगे होकर अपनी मामी को ही अपना साँप दिखा कर डरा रहे हो” रेखा ने बड़ी बेशरमी से अपने भान्जे से कहा।

वो मामी आप जाओ में कपड़े पहन कर अभी आता हूँ” नरेश ने यों ही हकलाते हुए कहा।

“हा हाँ मैं तो जा रही हूँ मगर अपने साँप को सँभालकर रख। कॉलेज की लड़कियों को डराने के काम आएगा। अपनी मामी के सामने इसे छुपाकर रख” रेखा ने जाते हुए मन ही मन में खुश होते हुए कहा ।

नरेश अपनी मामी के जाते ही बुहत परेशान हो गया। आखिर आज हो क्या रहा है, वह अपने कपड़े पहनकर अपनी मामी के पास किचन में चला गया।

“आ गये मेरे लाडले भांजे, अपने साँप को तो सुला दिया या फिर से वह अपना फन उठाकर हमें डरायेगा?” रेखा ने अपने भान्जे के आते ही उसे छेडते हुए कहा।

“मामी आप इस उम्र में इतना डरती क्यों हो । आप ने ऐसे कई साँप अब तक निगल लिए होंगे” नरेश ने भी अपनी मामी को करारा जवाब देते हुए कहा।

“अरे भांजे कुछ तो शर्म कर कोई कॉलेज की लड़की नहीं पटी तो क्या इस साँप का डंक अपनी मामी को लगाओगे” रेखा ने बनावटी गुस्सा करते हुए कहा ।

“मामी कैसी बातें कर रही हो । मैं आपके बारे में ऐसा कैसे सोच सकता हूं। मगर क्या करुं यह साँप जिस ख़ूबसूरत चीज़ को देख ले बस खडा हो जाता है। मादरचोद यह भी नहीं समझता की यह मामी है या कोई और” नरेश ने अपनी मामी की तरफ देखते हुए कहा।

“भान्जे फिर इसको किसी ख़ूबसूरत चीज़ के बिल में घुसा दे वरना यह तुझे यूँ ही तंग करता रहेंगा” रेखा ने अपने भान्जे से वैसे ही बेशरमी से बात करते हुए कहा।

“मामी अब जब तक कोई दूसरी ख़ूबसूरत बला मिले तब तक यह साँप तो यों ही फनफनाता रहेंगा” नरेश ने अपनी पेण्ट के ऊपर ही अपने लंड को सहलाते हुए कहा।

“तेरी मम्मी से कहकर तुम्हारे साँप के लिए कोई परमानेंट बिल का इन्तज़ाम कर देती हूँ” रेखा ने नरेश की तरफ देखते हुए कहा।

“मामी फिर तो आपकी बुहत बड़ी महरबानी हो जायेगी और मेरा साँप भी हमेशा आपको दुआ देता रहेंगा” नरेश ने खुश होते हुए कहा।

“ठीक है चल अब एक काम करो मुझे वह बर्तन उठाना है । मुझे थोडा ऊपर उठाओ और हाँ अपने साँप को कण्ट्रोल में रखना कहीं वह ख़ुशी में अपनी मामी की बिल में न घुस जाए” रेखा ने अपने भांजे को बड़ी बेशरमी से कहा ।

मामी मेरे साँप का ऐसा नसीब कहाँ के आप जीतनी ख़ूबसूरत औरत की बिल में जाने का मौका मिले” नरेश अपनी मामी की बात सुनकर उसके क़रीब आते हुए कहा।

“चल बदमाश मेरी झूठी तारीफ मत कर” नरेश के क़रीब आते ही रेखा ने अपनी बाहों को ऊपर करते हुए कहा।

“मामी कसम से आप बुहत सूंदर हो, मेरा क्या दुनिया का हर साँप आप जैसी सूंदर औरत की बिल में जाना पसंद करेंगा” नरेश ने अपनी मामी की कमर में बाहें ड़ालते हुए उसे ऊपर उठाते हुए कहा।

“नलायक चुप करो मैं तुम्हारी माँ जैसी हूँ मेरे बारे में ऐसा सोचते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती” रेखा ने अपने भांजे की मज़बूत बाहों में आते ही ऊपर से कुछ सामान उतारते हुए कहा।

“क्या करुं मामी मेरे साँप ने मुझे परेशान कर दिया है। इसीलिए ऐसी बातें ज़हन में आ रही हैं” नरेश ने अपनी मामी के नंगे गोरे पेट पर अपने होंठ रखते हुए कहा।

“आह्ह” नरेश के होंठ अपने नंगे पेट पर पडते ही रेखा के पूरे जिस्म में करंट के एक झटके की लहर दौड गई,

“क्या हुआ मामी” नरेश ने अपनी मामी से अन्जान बनते हुए कहा।

“कुछ नहीं भांजे, वह एक काक्रोच था” रेखा ने अपने आप पर काबू रखते हुए कहा।

“मामी थोडा ख़याल रखो यह काक्रोच बुहत शरारती होते हैं कहीं भी घुस जाते हैं । नरेश ने अपने होंठ अपनी मामी के गोर पेट पर ऊपर से नीचे तक फिराते हुए कहा ।

“वो तो मुझे पता है भांजे ज़रा यह तो लेना” रेखा ने इस बार अपनी सिसकी को अपने मुँह में ही दबाते हुए कहा।

नरेश ने जैसे ही अपना मुँह अपनी मामी के पेट से हटाते हुए ऊपर किया उसके होश ही उड़ गये।

रेखा की साड़ी का पल्लु उसकी चुचियों से नीचे गिरा हुआ था और उसके ब्लाउज से आधि चुचियां नंगी होकर नरेश को दिखाई दे रही थी, रेखा का ब्लाउज गर्मी होने के कारण पूरा भीग चूका था । जिस वजह से रेखा के ब्लाउज के अंदर की काली ब्रा बिलकुल साफ़ नज़र आ रही थी ।

“क्या देख रहे हो भांजे, कभी देखि नहीं क्या ऐसी चीजें” रेखा ने अपने भांजे को अपनी चुचियों की तरफ घूरता हुआ देखकर कहा । रेखा के हाथों में दो बर्तन थे।

“मामी बुहत देखे हैं मगर यह तो बिलकुल अनोखे और सब से ख़ूबसूरत हैं” नरेश ने अपनी मामी की चुचियों को यों ही देखते हुए कहा ।

“भान्जे इन में दूध रखती हूँ” रेखा ने बर्तनों को नीचे झुककर रखते हुए कहा।

“मामी कितना दूध रख सकते हैं इन में” नरेश ने अपनी मामी के नीचे होकर बर्तन रखने से उसकी दोनों चुचियों को बुहत नज़दीक से देखते हुए कहा ।

“भान्जे बुहत ज़्यादा दूध समां जाता है इन में” रेखा ने बर्तन रखने के बाद जान बूझकर अपनी चुचियां नरेश के मूह से रगडकर ऊपर करते हुए कहा।

“मामी कभी हमें भी तो दूध पीला दिया करो” नरेश ने फिर से अपनी मामी की चुचियों को देखते हुए कहा।

“भान्जे कहो तो अभी गरम गरम पिला दूँ” रेखा ने फिर से दूसरा एक बर्तन उठाकर नीचे झुककर उसे रखते हुए कहा । रेखा के झुकने से उसकी बड़ी बड़ी चुचियां सीधा नरेश के आँखों के सामने आ गयी ।

“भान्जे क्या कहते हो पियोगे न गरम दूध” रेखा ने नरेश को अपनी चुचियों में खोया हुआ देखकर उससे फिर कहा।

“हा मामी क्यों नहीं पीयेंगे ताज़ा दूध है हम तो ज़रूर पिएँगे” नरेश ने यह कहते हुए इस बार अपने होंठ अपनी मामी की चुचियों के बने उभार पर रख दिये ।

“यआह्ह्ह्ह हहह क्या कर रहे हो भांजे मुझे नीचे उतारो तुम्हें अभी गरम दूध बनाकर देती हूं, नालायक़ तुम तो अपनी मामी की चुचियां का दूध ही पीने लगे” रेखा ने अपने भांजे के होंठ अपने उभारों पर पड़ते ही सिसकते हुए कहा ।

रेखा अपने भांजे को कुछ तडपाना चाहती थी इसीलिए उसने उसे टोक दिया । नरेश अपनी मामी की बात सुनकर होश में आते हुए अपनी मामी को नीचे उतार दिया।

“अरे हमारा भंजा तो बुहत थक गया, जाओ कुर्सी पर बैठो में तुम्हारे लिए दूध बनाती हूँ” रेखा ने नीचे उतरते ही अपने भांजे के माथे से पसीना पोछते हुए कहा।

नरेश की हालत बुहत बिगड चुकी थी, उसका लंड तनकर उसकी पेण्ट को फटने के लिए तैयार था । नरेश का दिल कर रहा था की अभी जाकर अपनी मामी को पकडकर अपना लंड उसकी चूत में घुसा दे, मगर वह ऐसा नहीं कर सकता था ।

नरेश किचन में ही कुर्सी पर बैठ गया, रेखा फ्रीजर से दूध निकालकर अपने भांजे के लिए गरम करने लगी । कुछ ही देर में दूध गरम हो गया जिसे वह एक गिलास में ड़ालने लगी ।

रेखा दूध को गिलास में ड़ालते हुए उसे लेकर नरेश के पास आ गयी । नरेश अपना कन्धा झुकाये हुए कुर्सी पर बैठा था जैसे कुछ सोच रहा हो।

“भान्जे गरम दूध” रेखा ने नीचे झुककर दूध का ग्लॉस अपने भांजे के सामने कर दिया, मगर नीचे झुकने से रेखा की साड़ी का पल्लु उसकी चुचियों से हट गया और उसकी चुचियां फिर से आधि नंगी होकर नरेश के आँखों के सामने आ गई ।

नरेश जो अपने ख्यालों में बैठा था अपनी मामी की आवाज़ सुनकर जैसे ही अपना कन्धा ऊपर किया उसकी हालत फिर से खराब होने लगी, उसकी मामी की चुचियां आधि नंगी उसके सामने थी । नरेश की नज़रें अपनी मामी की नंगी चुचियों में ही अटक गयी।

“नालायक इधर क्या देख रहे हो। यह लो गरम दूध, तुम तो बिलकुल ही बेशर्म हो गये हो। अपनी मामी की चुचियों के पीछे पड़ गए हो । अगर तुम्हें इनका दूध पीना है तो अपनी माँ से कहकर शादी कर ले और अपनी बीवी की चुचियों का दूध पी” रेखा ने नरेश को अपनी चुचियों की तरफ देखता हुआ पाकर गुस्से से कहा ।

“मामी आपकी यह हैं ही ऐसी के कोई भी देखकर इनका दीवाना हो जायेगा” नरेश ने अपनी मामी के हाथ से दूध का ग्लॉस लेते हुए उसकी चुचियों की तारीफ करते हुए कहा।

“शटअप मैं सब जानती हूँ यह झूठी तारीफ करके तुम आजकल की छोरियों को फँसा सकते हो हमें नही” रेखा ने ग्लास के दूध पीते ही उसके हाथ से गिलास लेते हुए कहा।

“मामी आपको क्या पता की आजकल की लड़कियाँ तारीफ सुनकर पट जाती हें?” नरेश ने अपनी मामी से पूछा।

“क्यों बेटा हमने अपनी सारी उम्र ऐसे ही नहीं बिता दी। हमें पता है की तुम लड़के छोरियों को फ़साने के लिए उनकी झूठमूठ की तारीफ कर देते हो और वह भी खुश होकर अपना सब कुछ तुम पर निवछावर कर देती हैं” रेखा ने अपने भांजे को जवाब देते हुए कहा और नीचे बैठकर आटे को थाल में डालकर गूंथने लगी।

रेखा के आटे को गूंथने से उसकी साड़ी का पल्लु फिर से उसकी चुचियों से हट गया। मगर उसका ख़याल वहां नहीं था इसीलिए वह आटे को गूंथने में ही मसरुफ रही । नरेश जो कुर्सी पर बैठा था अपनी मामी की चुचियों से पल्लु के हट जाने से अपनी आखों को वहीँ पर जमा लिया ।

रेखा के नीचे बैठने से और आटे को ज़ोर लगाकर गूंथने की वजह से नरेश को उसकी चुचियां तकरीबन ८०% तक नज़र आने लगी । नरेश का लंड इतना तन चूका था की उसे अपने लंड में फिर से दर्द होने लगा।

नरेश का हाथ अपने आप अपनी पेण्ट पर चला गया और अपनी मामी की चुचियों को देखते हुए अपने लंड को पेण्ट के ऊपर से ही सहलाने लगा । रेखा ने अचानक जैसे ही अपनी नज़रें उठाये उसने देखा की उसका भान्जा अपने लंड को सहला रहा है और उसकी नज़र सीधे उसकी चुचियों की तरफ है, तभी रेखा को ख़याल आया की उसकी चुचियों से पल्लु हटा हुआ है। इसेलिए उसका भान्जा उसकी तरफ देख कर ठण्डा हो रहा है।

“भान्जे कुछ कण्ट्रोल रख अपने ऊपर अपनी मामी की चुचियों को देखकर अपने लंड को सहलाते हुए शर्म नहीं आती तुझे” रेखा ने अपने पल्लु को बिना सही किये ही नरेश को टोक दिया।

“मामी क्या करों आपकी चुचियां बार बार हमें तंग कर रही हैं कहाँ से कण्ट्रोल करुं” नरेश अचानक अपनी मामी की आवाज़ सुनकर अपने लंड से अपना हाथ हटाते हुए कहा।

“बेटे तुम इधर हो?” अचानक मनीषा अपने बेटे को ढूँढ़ते हुए किचन में आ गयी।

रेखा ने अपनी भाभी को आता हुआ देखकर जल्दी से अपनी चुचियों को पल्लु से ढक लिया।

“जी मम्मी मैं इधर हूँ” नरेश ने अपनी माँ को जवाब देते हुए कहा ।

“बेटा हमें बाजार से कुछ ख़रीदना है हमारे साथ चलो” मनीषा ने किचन में आते ही अपने बेटे से कहा उसने गुलाबी रंग की नयी साड़ी पाहन रखी थी वह बिलकुल तैयार होकर आई थी ।

“ठीक है मम्मी हम भी ऐसे ही बैठे थे चलो” अपनी माँ की बात सुनकर नरेश ने उठते हुए उसके साथ जाने के लिए राज़ी होते हुए कहा।

नरेश अपनी माँ के साथ घर से निकलकर बाहर आ गया और बस स्टैंड पर बस का इंतज़ार करने लगे क्योंकी बाजार यहां से काफी दूर था । थोड़ी ही देर में बाजार की तरफ जाने वाली बस आ गयी, नरेश अपनी माँ के साथ जल्दी से बस में चढ गया ।

बस में अंदर आते ही नरेश और उसकी माँ को पता चला की इस बस में चढ़कर उन्होने गलती की है क्योंकी वहां पर बैठना तो छोड़ो। खडे होने की भी बुहत कम जगह थी।

“अरे भाई बुहत भीड़ है यहां” अचानक मनीषा के पीछे से एक शख्स से उससे सटकर खडे होते हुए कहा।

मानिषा को अपनी गांड पर उस शख्स का लंड चुभ रहा था । मनीषा ने आगे होने की कोशिश की मगर भीड इतनी थी की वह थोडा ही आगे होकर फँस गयी। उसके आगे उसका बेटा खडा था, मनीषा के थोडा आगे सरकने से उसकी चुचियां अपने बेटे के सीने में दब गयी ।

मानिषा को लगा की अब वह शख्स उससे दूर हो गया होगा। मगर दो मिनट में ही फिर से मनीषा को अपनी गांड पर कुछ चुभता हुआ महसूस हुआ ।

“बुहत भीड़ है मेंम साहब” मनीषा ने जैसे ही पीछे मुड़कर देखा तो उस काले रंग के शख्स ने अपने दाँत निकालते हुए कहा।

मानिषा को उस शख्स की शक्ल देखते ही बुहत गुस्सा आया मगर वह मजबूर थी। उसने अपना मुँह वापस फेर लिया । नरेश की हालत भी बिगडती जा रही थी वह पहले से अपनी मामी के टॉर्चर से बुहत गरम था और ऊपर से इस भीड में उसके सीने से उसे अपनी माँ की चुचियां दबने से उसकी हालत बिगडने लगी।

मानिषा को अब अपनी गांड के बिलकुल बीच में उस शख्स का लंड धक्के मारते हुआ महसूस होने लगा।मनीषा के होश ही उड़ने लगे वह शख्स जानबूझकर भीड का फायदा उठा रहा था।

मानिषा ने सोचा चलो साले को देखती हूँ की इस भारी भीड में और क्या करता है । वह शख्स मनीषा का कोई विरोध न पाकर अपने दोनों हाथों से मनीषा के दोनों चुतडो को पकडते हुए अपने लंड पर दबाने लगा, उस शख्स के ऐसा करने से मनीषा के पूरे जिस्म में एक सुरसुरी दौडने लगी और उसका जिस्म गरम होने लगा।

मानिषा ने अब अपने चूतड़ खुद उस शख्स के लंड पर दबाने शुरू कर दिये । नरेश जो अपनी माँ की चुचियों को अपने सीने पर महसूस करके ठण्डा हो रहा था वह उस शख्स और अपनी माँ का खेल बुहत मज़े से देखने लगा, अपनी सगी माँ को एक गैर मरद के लंड पर अपने चूतडों को दबाते हुए देखकर नरेश का लंड उसकी पेण्ट में उबाल मचाने लगा ।

वह शख्स अचानक थोडा पीछे हट गया। मनीषा के समझ में नहीं आया की वह शख्स क्यों पीछे हट गया है। मगर दुसरे ही पल वह शख्स फिर से मनीषा से सट गया । उस शख्स ने मनीषा के एक हाथ को पकड कर अपने लंड पर रख दिया था । मनीषा अपने हाथ उस शख्स के लंड पर लगते ही कांप उठी। क्योंकी उस शख्स ने अपने लंड को अपनी पेण्ट से बाहर निकालकर बिलकुल नंगा कर दिया था ।

मानिषा ने अपना हाथ जल्दी से उसके लंड से हटा दिया । नरेश अपनी माँ और उस शख्स का सारा खेल देख रहा था। वह उस शख्स की बहादुरी पर हैंरान रह गया, उस शख्स ने इस बार मनीषा की साड़ी को थोडा ऊपर करते हुए अपने लंड को उसकी पेंटी के ऊपर मनीषा की गांड पर रगडने लगा ।

मनीषा ने साड़ी के नीचे पेटिकोट नहीं पहना था, उस शख्स का नंगा लंड सीधे अपनी पेंटी से टकराते ही उसको अपने पूरे शरीर में ज़ोर की सिहरन दौडने लगी । मनीषा को भी उस शख्स का लंड अपनी पेंटी पर रगडते हुए बुहत मजा दे रहा था ।

मानिषा को यह पता नहीं था की उस शख्स के साथ होने वाली सारी हरकत उसका बेटा भी देख रहा है । उस शख्स ने अब अपने दोनों हाथों को भी मनीषा की साड़ी के अंदर डाल दिया और उसके चुतडो को जो छोटी सी पेंटी में क़ैद थे अपने हाथों से मसलने लगा।

वह शख्स अपने हाथों से मनीषा के चूतडों को मसलते हुए अपने लंड को उसके चूतडों के बीच हल्के धक्के लगाने लगा । मनीषा को भी मजा आ रहा था इसीलिए वह ज़्यादा से ज़्यादा आगे झुकने की कोशिश कर रही थी ।

“मम्मी क्या हुया” नरेश ने अपनी मम्मी को अपनी तरफ झुकने से मन ही मन में मुस्कुराते हुए कहा।

“बेटा जाने क्यों चक्कर आ रहे हैं” मनीषा ने अपने बेटे के काँधे पर अपना सर रखकर अपने चूतडों को उस शख्स के लंड पर दबाते हुए कहा ।

“मम्मी भीड़ बुहत ज़्यादा है आप ऐसे ही खड़े रहिए मैं आपको गिरने नहीं दूंगा” नरेश ने अपने हाथों को अपनी माँ के पीठ पर रखकर उसकी चुचियों को अपने सीने की तरफ ज़ोर से दबाते हुए कहा ।

उस शख्स से अपने हाथों से मनीषा की पेंटी को भी थोडा नीचे कर दिया । मनीषा को कुछ समझ में नहीं आ रहा था । उसका पूरा जिस्म उस शख्स की हरक़तों से गरम हो चुका था और उसकी साँसें बुहत ज़ोर से चल रही थी । नरेश कुछ ज़्यादा देख नहीं पा रहा था उसे बस इतना पता था की वह शख्स उसकी माँ के चूतड़ो पर अपना लंड दबा रहा है।

वह शख्स अपने नंगे लंड को मनीषा की नंगे चुतडो पर सहलाते हुए उसकी गांड के छेद में ड़ालने की कोशिश करने लगा । मगर वह ऐसा करने में सफल नहीं हो पाया ।

उस शख्स ने अपने लंड को मनीषा के चूतडों से हटाते हुए अपनी ऊँगली से मनीषा को गांड से लेकर उसकी चूत तक सहलाने लगा । मनीषा की चूत पहले से ही बुहत गरम थी। उस शख्स की ऊँगली के लगते ही उसकी चूत से ज़्यादा पानी टपकने लगा ।

उस शख्स ने मनीषा का हाथ फिर से पकडते हुए अपने लंड पर रख दिया और अपनी ऊँगली से उसकी चूत को सहलाने लगा । मनीषा का हाथ उस शख्स के लंड पर पड़ते ही अपने आप उस पर आगे पीछे होने लगा ।

मानिषा को उस शख्स के तने हुए गरम लंड पर अपने हाथ के लगते ही जाने क्या हो गया उसकी साँसें बुहत ज़ोर से चलने लगी और उसका हाथ उस शख्स के लंड पर ज़ोर से चलने लगा। नरेश का लंड अपनी माँ का हाथ उस शख्स की पेण्ट तरफ जाता हुआ देखकर बुहत ज़ोर से अकड़कर झटके मारने लगा।

उस शख्स ने अपनी ऊँगली से मनीषा की चूत को सहलाते हुए उसकी चूत में अपनी ऊँगली को अंदर डाल दिया । मनीषा उस शख्स की ऊँगली को अपनी चूत में जाते ही अपनी सिसकी को अपने मूह में ही दबा दिया ।

मानिषा अपने हाथ से उस शख्स के लंड को ज़ोर से सहलाने लगी । कुछ देर तक दोनों का यह खेल चलते रहा और अचानक मनीषा का जिस्म अकडने लगा

उसकी चुचियों के दाने इतने सख्त हो गये की नरेश को अपनी माँ की चुचियों के दाने अपने सीने में चुभते हुए महसूस होने लगे ।

मानिषा की चूत झटके खाते हुए उस शख्स की ऊँगली पर पानी छोड़ने लगी, मनीषा ने झरते हुए अपना पूरा वज़न अपने बेटे पर डाल दिया और अपने हाथ को बुहत ज़ोर से उस शख्स के लंड पर दबाते हुए मज़े से अपने होंठ अपने बेटे के काँधे पर दबा दिया ।

वह शख्स भी मनीषा के हाथ की गर्मी बर्दाशत न कर सका और अपनी ऑंखें बंद करके झरने लगा । नरेश अपनी माँ का वजन अपने ऊपर पड़ते ही अपने हाथ से उसकी पीठ को सहलाने लगा। नरेश उस शख्स के चेहरे को देखकर समझ गया की वह झड़ गया है।

मानिषा का हाथ उस शख्स के झरने से उसके वीर्य से गन्दा हो गया। जिसे उसने अपनी साड़ी से साफ़ करते हुए सीधा हो गई । मनीषा जैसे ही सीधा हुयी उसे बुहत ज़ोर का झटका लगा क्योंके सीधा होते ही उसको अपने बेटे का लंड अपने पेट पर टकराता हुआ महसूस हुआ ।

नरेश का क़द बुहत लम्बा था जिस वजह से उसकी पेण्ट में बना हुआ लंड का उभार मनीषा के पेट पर रगड रहा था । मनीषा ने अपने बेटे के लंड पर बिना धयान दिए ही अपनी पेंटी को खींचकर ऊपर कर दिया।

अपना लंड अपनी माँ के पेट पर लगते ही नरेश के पूरे शरीर में झुरझुरी दौड़ गयी । नरेश ने अपनी माँ को पेंटी ऊपर करते हुए देख लिया, उसका लंड यह सोचकर बुहत ज़ोर से अकडकर झटके मारने लगा की उसकी माँ जब उस शख्स के लंड पर अपने चूतड़ रगड रही थी तो वह बिलकुल नंगी थी ।

नरेश अब जानबूझकर अपने लंड को आगे करते हुए अपनी माँ के पेट पर रगडने लगा।

“ये क्या लग रहा है मुझे पेट पर” मनीषा ने अपने हाथ से अपने पेट के ऊपर लगते हुए अपने बेटे के लंड को सहलाते हुए कहा।

“हाहहह मम्मी बुहत भीड़ है इसीलिए हमारा वह आपके पेट पर लग रहा है” नरेश ने अपनी माँ का हाथ अपने लंड पर लगने से सिसकते हुए कहा । मनीषा का पूरा जिस्म पेण्ट के ऊपर से ही अपने बेटे के लंड को हाथ लगाने से सिहर उठा ।

मानिषा मन ही मन में सोचने लगी उसका बेटे का लंड तो बुहत तगडा लगता है।

“ओह बेटे मुझे तो पता ही नहीं था की मेरा बेटा भी जवान हो गया है” मनीषा ने अपने बेटे के लंड को यों ही पेण्ट के ऊपर से टटोलते हुए कहा ।

“हाहहह मम्मी आपके जिस्म की गर्मी की वजह से यह उठ गया है” नरेश ने अपनी माँ के नरम हाथों को अपने लंड पर महसूस करते हुए मज़े से सिसकते हुए कहा।

“बेटे तुम्हारा तो बुहत बदमाश है अपनी माँ के जिस्म को देखकर उठ गया है” मनीषा ने अपने बेटे की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए कहा ।

“माँ इस में इसका कोई क़सूर नहीं वह मैं आपको उस शख्स के साथ कब से देख रहा था। इसीलिए यह बेचारा फडक रहा है” नरेश ने अपनी माँ को सीधे सीधे कह दिया । मनीषा के चेहरे से अपने बेटे की बात सुनकर पसीना बहने लगा।

“अरे माँ हम किसी को नहीं बतायेंगे हम अपनी माँ की मजबूरी समझ सकते है” नरेश ने अपनी माँ के चेहरे से अपने हाथ से पसीना पोछते हुए अपनी उँगलियों को उसके गुलाबी लबों पर फिराते हुए कहा ।

“नरेश वह हम बहक गए थे मगर में तुम्हारी माँ हूँ” मनीषा ने गुस्सा करते हुए अपने बेटे के हाथ को अपने चेहरे से हटाते हुए कहा।

“माँ जब आप इतना बहक सकती हो की अपने बेटे के सामने किसी और के साथ यह सब कर लो तो मेरा क्या क़सूर” नरेश ने अपनी माँ की नंगी कमर को अपने हाथों से पकडकर अपनी तरफ खीचते हुए कहा ।

“हाहहह बेटा प्लीज ऐसा मत करो” अपने बेटे का हाथ अपनी नंगी कमर में ड़ालने और उसका लंड अपने पेट पर रगडने से मनीषा ने सिसकते हुए कहा।

“मम्मी मुझे माफ़ कर देना मगर मैं इस वक्त अपने होश में नहीं हूँ” नरेश ने अपनी माँ की कमर से लेकर अपने हाथ को उसके चिकने पेट पर फिरते हुए कहा ।

“ओहहह बेटा क्या कर रहे हो” मनीषा ने सिसकते हुए अपने बेटे से कहा, उसका पूरा जिस्म अपने बेटे का हाथ अपने नंगे पेट पर महसूस होते ही गर्म होने लगा।

“माँ आप ने जैसे उस शख्स को शांत कर दिया प्लीज मुझे भी कर दो वरना मैं मर जाऊँगा” नरेश ने अपनी पेण्ट की ज़िप खोलते हुए अपने अंडरवियर से अपना खडा लंड निकालते हुए कहा ।

“बेटे यह सब पाप है” मनीषा की साँसें अपने बेटे का लंड देखकर अटकने लगी, ज़्यादा चिपके होने कारण नरेश का नंगा लंड उसके नंगे पेट पर ठोकरे मारने लगा। जिस कारण मनीषा ने भी गरम होते हुए अपने बेटे के लंड को अपने हाथ से पकडकर बुहत तेज़ साँसें लेते हुए कहा । नरेश का लंड अपनी माँ के नरम हाथ पड़ते ही ज़्यादा तनकर फूलने लगा ।

“आह्ह मम्मी आपका हाथ कितना नरम है” नरेश ने अपनी माँ का हाथ अपने लंड पर पड़ते ही सिसकते हुए कहा और अपने हाथ से अपनी माँ की साड़ी का पल्लु उसकी चुचियों से नीचे गिरा दिया ।

मानिषा का पल्लु नीचे गिरते ही उसके ब्लाउज में क़ैद चुचीयाँ आधि नंगी होकर उसके बेटे के सामने आ गयी ।मनीषा की साँसें बुहत तेज़ चल रही थी। जिस वजह से उसकी चुचियां भी बुहत ज़ोर से ऊपर नीचे हो रही थी, नरेश ने अपनी माँ की आधि नंगी चुचियों को देखते हुए अपने होठ उसके चुचियों के उपरी उभार पर रख दिये।

“आह्ह्ह्ह हहह बेटे” मनीषा ने अपने बेटे के होंठ अपनी चुचियों पर पड़ते ही धीरे से सिसकते हुए कहा और उसका हाथ अपने बेटे के तने हुए गरम लंड पर बुहत ज़ोर से चलने लगा । नरेश किसी भी वक्त झर सकता था। क्योंकी वह इतनी देर से सबकुछ देखकर बुहत ज़्यादा उतेजित हो चुका था, मनीषा भी अपने बेटे के गरम मोटे और लम्बे लंड पर हाथ पड़ने से बुहत ज़्यादा एक्साईटेड हो गई थी और उसकी चूत से भी पानी टपकने लगा था । मनीषा अपना दूसरा हाथ अपने बेटे के बालों में डालकर उसके बालों को सहलाते हुए अपनी चुचियों पर दबाने लगी ।

मानिषा अपनी आँखें बंद करके एक हाथ से अपने बेटे के बालों और दुसरे हाथ से उसके लंड को सहलाने लगी।

“आह्ह मम्मी मैं झरने वाला हूँ” नरेश ने धीमी आवज़ में अपनी माँ से कहा और उसके लंड से वीर्य निकलने लगा ।

मानिषा ने अपने दुसरे हाथ को भी अपने बेटे के बालों से निकालते हुए अपने बेटे के लंड के सामने कर दिया ताकी उसके बेटे के लंड से निकालते हुए वीर्य से उसकी साड़ी ख़राब न हो । नरेश के लंड से कुछ देर तक वीर्य की पिचकारी निकलने के बाद उसका लंड मुरझाते हुए ढीला हो गया।

मानिषा ने अपने बेटे के लंड को छोडते हुए अपनी पर्स से रुमाल निकालते हुए अपने हाथ को साफ़ कर दिया। मनीषा जानती थी की अगर इस बार उसने अपनी साड़ी से हाथ साफ़ किया तो उसकी साड़ी पर बुहत ज़्यादा दाग हो जाएंगे ।

नरेश झरने के बाद शांत होकर सीधा हो गया तभी बस रुक गयी और उस स्टॉप तक आने वाले लोग उतरने लगे । मनीषा और नरेश को भी उसी स्टॉप पर उतरना था तो मनीषा ने अपनी साड़ी को ठीक कर दिया और नरेश ने अपनी पेण्ट की ज़िप बंद कर लिया, दोनों माँ बेटे एक साथ नीचे उतरने लगे ।

बेटे तुम्हारे लिए जल्दी से कोई लड़की देखनी पडेगी। आज हमें पता चल गया की तुम बिलकुल जवान हो चुके हो” मनीषा ने बस से उतरने के बाद अपने बेटे के साथ एक अंडरगारर्मेन्टस की दूकान में दाखिल होते हुए कहा ।

“मम्मी हमें माफ़ कर दो हम आपको उस शख्स के साथ देखकर अपना कण्ट्रोल खो बैठे थे” नरेश ने शरमिंदा होते हुए कहा ।

“बेटे तुम्हारा कोई क़सूर नहीं हम ही बहक गए थे तो तुम्हारा क्या क़सूर, वैसे जिस लड़की के साथ तुम शादी करोगे वह दुनिया की ख़ुशनसीब लड़की होगी” मनीषा ने अपने बेटे के गाल की चिकोटी लेते हुए कहा।

“क्या चाहिए मेंम साहब” जिस दूकान में वह दाखिल हुए थे उस में से एक ख़ूबसूरत लड़की ने मनीषा की तरफ देखते हुए पूछा।

मानिषा ने उस लड़की से अपने लिए कुछ पेंटी और ब्रा लाने को कहा ।

मानिषा की बात सुनकर वह लड़की ढेर सारी अलग अलग किसम की ब्रा और पेंटी निकालकर मनीषा के सामने रख दी ।

“नरेश देखो इन में से तुम्हें कौन सा रंग पसंद है” मनीषा ने कुछ पेन्टियां अपने बेटे को दीखाते हुए पुछा ।

अपनी माँ को ऐसे पेंटी दीखाते हुए नरेश का लंड अकडकर उसकी पेण्ट में झटके मारने लगा और उसका गला ख़ुश्क होने लगा।

“नरेश बताओ न क्या हुआ तुम्हें” मनीषा ने अपने बेटे को खामोश देखकर फिर से कहा ।

“जी मुझे वह दोनों रंग पसंद है” नरेश ने अपनी मम्मी की बात सुनकर अपने गले से थूक को निगलते हुए ब्लैक और पिंक पेंटी की तरफ इशारा करते हुए कहा।

मानिषा ने अपने बेटे की बात सुनकर उसकी पसंद वाली पेंटी ब्रा समेत कुछ और भी चीजे खरीद कर ली।

मानिषा ने अपने लिए पेंटी और ब्रा ख़रीदने के बाद उस लड़की से अपने बेटे के लिए अंडरवियर देने को कहा।वह लड़की मनीषा की बात सुनते ही ढेर सारे अंडेरवियर्स निकाल लाई और नरेश की तरफ देखते हुए कहा।

“सर आप चेंजिंग रूम में जाकर ट्राई कर सकते हो”।

नरेश उस लड़की की बात सुनकर वहां से दो तीन अंडेरबियर्स उठाकर चेंजिंग रूम में जाकर ट्राई करने लगा। मगर सभी अंडरबीयर्स उसे छोटे और टाइट लगे।

“यह तो छोटे हे” नरेश ने वापस आते ही अंडरवियर वापस टेबल पर रखते हुए कहा।

ए लड़की हमारे बेटे का ज़रा लम्बा है थोरा बड़ा साइज लो” मनीषा ने हँसते हुए उस लड़की से कहा । वह लड़की मनीषा की बात सुनकर हडबडाते हुए वह अंडरवियर उठा लिए और बड़े साइज वाले अंडरबियर्स निकाल लाई।

नरेश की हालत पहले से ख़राब थी ऊपर से अपनी मम्मी के मूह से अपने बारे में ऐसी बात सुनकर उसकी हालत और ज़्यादा खराब होने लगी । नरेश ने वह अंडरबियर्स उठाये और चेंज रूम में चला गया।

“ये साइज सही है” थोडी देर बाद नरेश ने वापस आते हुए कहा।

उस लड़की ने सारा सामन पैक कर दिया । मनीषा ने उस लड़की को पेमेंट दे दी और अपने बेटे के साथ वहां से जाने लगी, वह लड़की दोनों माँ बेटों को जाते हुए गौर से देखते हुए सोच रही थी।

“अजीब लोग हैं माँ बेटे होकर एक साथ अंडरर्गर्मेन्ट्स खरीद कर रहे थे” ।

मानिषा ने कुछ और सामान भी खरीद लिया और वापसी के लिए फिर से बस में चढ़ गए । इस बार बस में भीड़ नहीं था तो दोनों माँ बेटे एक सीट पर जा बैठे।

मानिशा ने सीट पर बैठते ही अपना हाथ अपने बेटे की जाँघ पर रख दिया ।

नरेश का लंड अपनी माँ का हाथ अपनी जांघ पर पड़ते ही फिर से तनने लगा।

“मम्मी आप मेरी शादी के बारे में कुछ कह रही थी, ऐसा क्या है मुझ में जो मुझसे शादी करने वाली लड़की ख़ुशनसीब होगी” नरेश ने अपनी माँ से कहा ।

“अरे बेटा तुम ने यह जो इतना बड़ा पाल रखा है, आजकल हर लड़की को बस लम्बा और मोटा चाहिये” मनीषा ने अपना हाथ अपने बेटे की पेण्ट पर रखते हुए कहा। नरेश का लंड अपनी माँ की बात सुनकर ज़ोर से झटके खाते हुए उसके हाथ को चूमने लगा।

“देख बेटे मेरा हाथ लगते ही यह की फडकने लगा” मनीषा ने अपने हाथ से अपने बेटे के लंड को दबाते हुए कहा।

“आहहह मम्मी दर्द होता है” नरेश ने अपने लंड पर थोडा दबाव पड़ते ही सिसकते हुए कहा ।

“अरे हाँ मैं तो भूल ही गयी इस पर तो तुम्हारी पत्नी का ही हक़ है तुम हमें कहाँ इसे छूने देगा” मनीषा ने अपना हाथ अपने बेटे के लंड से हटाकर मूह बनाते हुए कहा।

“अरे माँ यह क्या कह रही हो हमारे पूरे जिस्म पर तो सिर्फ आप का हक़ है” नरेश ने अपनी माँ का हाथ पकडते हुए कहा ।

“तुम मेरा दिल रखने के लिए कह रहे हो” मनीषा ने अपना हाथ अपने बेटे के हाथ में ही रखे हुए कहा।

“सच्ची माँ हमारे जिस्म पर पहले हक़ आपका है क्योंकी आपकी वजह से हम पैदा हुए हैं” नरेश ने अपनी माँ के हाथ को सहलाते हुए कहा ।

“बेटे सच में मुझे खुद पता नहीं की मुझे यह क्या हो गया है। मगर तुम्हारा वह देखकर मुझे कुछ होने लगता है” मनीषा ने शर्मा से अपना सर झुकाते हुए कहा।

“माँ मेरा भी वही हाल है। आपको देखकर ही मेरे इस में हरकत होने लगती है” नरेश ने अपनी माँ का हाथ पकडकर अपनी पेण्ट पर रखते हुए कहा।

“हाहहह बेटा तुम्हारा तो सच में अब भी तना हुआ है” मनीषा अपने हाथ को अपने बेटे की पेण्ट पर लगते ही सिसकते हुए कहा।

“हाँ माँ मुझे खुद पता नहीं की ऐसा क्यों हो रहा है अपनी माँ को देखते ही यह क्यों फडकने लगता है” नरेश ने अपनी माँ का हाथ अपने लंड पर दबाते हुए कहा।

“बेटा इसपर हाथ लगाते ही मुझे यहाँ पर कुछ होने लगता है” मनीषा ने अपना दूसरा हाथ अपनी चूत पर रखते हुए कहा ।

“माँ हमें पता नहीं की यह पाप है या पुण्य पर अब हम से बर्दाशत नहीं होता आप हमें अपनी शरण में ले लो वरना हम यों ही तडपते मर जाएंगे” नरेश अपनी माँ की बात सुनकर अपना दूसरा हाथ उसकी जाँघ पर रखकर जज़्बाती होते हुए कहा ।

तभी बस का स्टोप आ गया और बस रुक गई, दोनों माँ बेटे बस से उतरते हुए घर की तरफ जाने लगे । घर पुहंचकर मनीषा अपने कमरे की तरफ बढ़ने लगी । नरेश भी उसके पीछे पीछे जाने लगा क्योंकी सामान उसके हाथ में था।

“मैं जाऊँ माँ” नरेश ने सामान को बेड पर रखते हुए अपनी माँ से कहा जो अपना मूह दुसरे तरफ किये हुए थी । मनीषा अपने बेटे की बात सुनकर अचानक सीधा होते हुए उसके गले से लग गयी और उसके पूरे चेहरे को प्यार से चूमने लगी।

“नही यह ठीक नहीं है” मनीषा कुछ देर तक अपने बेटे के चेहरे को चूमने के बाद उससे अलग होते हुए बोली ।

“माँ अब बुहत हो चुका जो हो रहा है उसे होने दो । कब तक हम दोनों यों ही तड़पते रहेंगे” नरेश ने अपनी माँ को अपनी बाहों में भरते हुए कहा ।

नरेश के होंठ अपने होंठो पर पड़ते ही मनीषा भूल गयी की वह उसका बेटा है और अपने बेटे के साथ फ्रेंच किस में डूब गई।

“बेटा दरवाज़ा तो बंद कर लो” कुछ मिनटों तक यों ही एक दुसरे के साथ किसेस करते हुए साँसें अटकने के बाद मनीषा ने अपने होठ अपने बेटे से जुदा करके हाफ्ते हुए कहा ।

नरेश का दिल अपनी माँ की बात सुनकर ख़ुशी से नाचने लगा। उसने जल्दी से भागते हुए दरवाज़ा बंद कर दिया और वापस आते हुए अपनी माँ को अपनी बाहों में भरते हुए उसके गुलाबी लबों का रस पीने लगा।

मानिषा की चूत बुहत ज़्यादा गरम होकर पानी टपकाने लगी थी, उसने अपने बेटे के होंठो को छोडते हुए नीचे झुकते हुए उसकी पेण्ट में हाथ डालकर उसे नीचे सरका दिया ।

नरेश ने जल्दी से अपनी शर्ट को भी उतार दिया । मनीषा अपने बेटे की गाठीली बॉडी को देखकर पागल हो गई और सीधा होते हुए अपने होंठो से अपने बेटे के बालों वाले चोडे सीने को चूमने लगी, अपनी माँ के होंठ अपने सीने पर पड़ते ही उत्तेजना के मारे नरेश का लंड तनकर उसके अंडरवियर को फाडने लगा ।

नरेश अपनी माँ की साड़ी को पकडते हुए उतारने लगा, मनीषा भी अपने बेटे की मदद करते हुए गोल घुमते हुए अपनी साड़ी उतारने में अपने बेटे की मदद की । मनीषा साड़ी उतरने के बाद अपने बेटे के सामने सिर्फ एक छोटी सी पेंटी और ब्लाउज में खड़ी थी ।

मानिषा की साँसें उत्तेजना के मारे बुहत ज़ोर से चल रही थी । नरेश अपनी माँ का का गोरा चिकना बदन सिर्फ एक छोटी सी पेंटी और ब्लाउज में देखकर अपने होंठो पर जीभ फिराने लाग, मनीषा का भी उत्तेजना के मारे बुरा हाल था।

नरेश अपनी माँ के आधे नंगे जिस्म को देखते हुए उसकी तरफ बढने लगा, अपने बेटे को अपनी तरफ आता हुआ देखकर मनीषा की साँसें और तेज़ चलने लगी । नरेश अपनी माँ के पास आते हुए उसकी पीठ की तरफ चला गया ।

नरेश ने अपनी माँ के नंगे गोरे पीठ को देखते हुए अपनी बाहें आगे बढाकर अपने हाथ अपनी माँ के नंगे पेट पर रखते हुए उसके चूतड़ो को अपने अंडरवियर में खड़े लंड पर दबा दिया ।

“आहहह शह” अपने बेटे का खडा लंड अपने चूतडों पर लगते ही मनिषा सिसक उठी।

नरेश अपने लंड को यों ही अपनी माँ के चूतडों पर चिपकाये हुए अपने हाथ से उसके गोर पेट को सहलाने लगा । मनीषा की चूत से उत्तेजना के मारे पानी की नदियाँ बह रही थी और वह मज़े से अपनी आँखें बंद किये सिसक रही थी ।

नरेश ने कुछ देर तक अपने माँ के नंगे पेट को सहलाने के बाद अपना हाथ वहां से हटाते हुए अपनी माँ के ब्लाउज को उतार दिया । नरेश अपनी माँ के ब्लाउज को उतारने के बाद अपने होठ उसके नंगी गोरी पीठ पर रखकर उसे चूमते हुए अपने हाथों से उसकी ब्रा को भी खोल दिया।

मानिषा का पूरा जिस्म अपने बेटे के होंठ अपनी नंगी पीठ पर लगने से सिहर उठा । नरेश ने अपनी माँ की ब्रा को खोलने के बाद उसकी पीठ से अपने होंठो को हटाते हुए उसे सीधा कर दिया ।

नरेश ने अपनी माँ के सीधा होते ही अपना हाथ आगे बढाकर उसकी चुचियों से ब्रा को खींचकर अलग कर दिया।

“वाह माँ आपकी तो सच में आपकी चूचियां दुनिया की सब से अच्छी चुचियां है” अपनी माँ ब्रा के हटते ही उसकी चुचियों को पूरा नंगा देखते ही नरेश के मूह से निकल गया ।

मानिषा ने शर्म के मारे अपना सर झुका रखा था । अपने बेटे की बात सुनते ही उसने नरेश को अपनी बाहों में भर लिया।

“आह्ह्ह्ह इसस” एक दुसरे से गले लगते ही दोनों माँ बेटे के नंगे सीने एक दुसरे में दबने से दोनों के मूह से एक साथ सिस्कियान निकल गयी ।

नरेश का लंड लोहे की तरह सख्त होकर अपनी माँ की गीली पेंटी पर ठोकरें मारने लगा । नरेश ने अपनी माँ को ज़ोर से अपनी बाँहों में दबाते हुए उसके गुलाबी होंठो पर अपने होंठ रख दिये और अपनी सगी माँ के होंठ बुहत ज़ोर से चूसने लगा।

नरेश को अपनी माँ की नरम चुचियां अपने सीने में दबती हुयी इतना मजा दे रही थी की उसने अपनी माँ के मूह को खोलते हुए अपनी जीभ उसमें घुसा दी । मनीषा कोई बच्ची तो थी नहीं अपने बेटे की जीभ अपने मूह में आते ही वह उसे अपने होंठो के बीच लेकर चूसने लगी ।

मानिषा ने कुछ देर तक अपने बेटे की जीभ को चाटने के बाद अपने बेटे की जीभ को अपने मूह से निकालते हुए अपनी जीभ को उसके मूह में डाल दिया।नरेश अपनी माँ की जीभ अपने मूह में आते ही उसे बड़े प्यार से चाटने लगा ।

नरेश को अपनी माँ की जीभ बुहत ज़्यादा टेस्टी लग रही थी । नरेश ने अब अपनी माँ की जीभ को अपने मूह से निकाल दिया और उसके काँधे को चूमते हुए नीचे होता हुआ अपनी माँ की चुचियों तक आ गया।

नरेश ने अपनी माँ की एक चूचि को अपने हाथ से पकडते हुए उसके तने हुए दाने को अपने मूह में भर लिया और उसे बुहत ज़ोर से चूसने लगा ।

“आजहहह बेटे ऐसी ही अपनी माँ की चुचियों को ज़ोर से चूस बुहत मजा आ रहा है” मनीषा अपनी चूचि को अपने बेटे के चूसने से गरम होकर सिसकते हुए बोली।

“हाँ माँ आज मुझे आपकी चुचियों का सारा रस पीना है” नरेश ने अपनी माँ की बात सुनकर उत्तेजित होते हुए उसकी दोनों चुचियों को बारी बारी चुसते हुए कहा ।

अपने बेटे से अपनी चुचियां चुसवाते हुए मनीषा को अपने पूरे शरीर में अजीब किसम की सनसनाहट महसूस हो रही थी । मनीषा ने अपना हाथ आगे बढाकर अपने बेटे के तने हुए लंड को उसके अंडरबियर के ऊपर से ही पकड़ लिया।

“आह्ह्ह्ह माँ” अपनी माँ का हाथ अपने लंड पर लगते ही नरेश के मूह से सिसकी निकल गयी और वह अपनी माँ की चूचि को जितना अपने मूह में हो सकता था उतना अंदर लेकर चूसने लगा ।

मानिषा ने कुछ देर तक अपने बेटे के लंड को यों ही अंडरवियर के ऊपर सहलाने के बाद अपनी चुचियों को उसके मूह से अलग करते हुए घुटनों के बल नीचे बैठ गयी और अपने बेटे के अंडरवियर में बने लंड के उभार को अपने होंठो से चूमते हुए उसके अंडरवियर में हाथ डालकर उसे उतार दिया ।

नरेश का लंड अंडरवियर के उतारते ही अपनी माँ के मूह के सामने ज़ोर से उछलता हुआ सलामी देने लगा। मनीषा की चूत अपने बेटे का गुलाबी मोटा और लम्बा लंड अपनी आँखों के इतना क़रीब देखकर और ज़्यादा उत्तेजित होकर पानी बहाने लगी ।

मानिषा ने अपने बेटे के लंड को अपने हाथ से पकड लिया और उसे धीरे धीरे सहलाने लगी।

“आह्ह्ह्ह” अपनी माँ का हाथ अपने लंड पर पड़ते ही नरेश के मूह से सिसकी निकल गयी । नरेश का लंड उत्तेजना के मारे तन कर बुहत गरम हो चुका था और उसके लंड से वीर्य की कुछ बूँदे निकलने लगी।

मानिषा ने अपने बेटे के लंड से वीर्य की बूँदों को निकलता हुआ देखकर अपनी जीभ निकलकर अपने बेटे के लंड के छेद से निकलती हुए वीर्य की बूँदों को चाट लिया।

“आहहहहह आअह्ह्ह माँआ” अपनी माँ की जीभ अपने लंड पर लगते ही नरेश का पूरा जिस्म काम्पने लगा ।

मनीषा को अपने बेटे के लंड का गुलाबी सुपाडा बुहत प्यारा लग रहा था । उसने अपना मूह खोला और अपने बेटे के लंड का गुलाबी सुपाडा अपने मूह में भर लिया। मनीषा अपने बेटे के लंड के सुपाडे को बड़े प्यार से किसी कुल्फ़ी की तरह अपने होंठो के बीच लेकर चाटने लगी।

“आह्ह्ह्ह शहहहहह माँ ओह्ह्ह्हह्ह्” नरेश के मूह से बुहत ज़ोर की सिसकिया निकलने लगी। उसका उत्तेजना के मारे बुरा हाल था । नरेश ने अपनी माँ के सर को पकडते हुए उसका मूह अपने लंड से निकाल दिया। क्योंकी वह जानता था की अगर उसका लंड कुछ देर और उसकी माँ के गरम मुँह में रहा तो वह झर जाएगा जो वह नहीं चाहता था ।

नरेश ने अपनी माँ को सीधा खडा कर दिया और उसे बड़े गौर से एक बार देखने के बाद अपनी बाहों में उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया । नरेश अपनी माँ के टांगों के बीच आ गया और उसकी छोटी सी पेंटी को अपने हाथों से खीच कर उसके जिस्म से अलग कर दिया।

मानिषा की पेंटी के उतरते ही उसकी हलकी झाँटों वाली गोरी चूत उसके बेटे के सामने आ गयी । नरेश अपनी माँ की चूत को बड़े गौर से देखने लगा। मनीषा ने अपने बेटे को अपनी चूत की तरफ यो घूरता हुआ देखकर शर्म से अपनी टांगों को आपस में मिला दिया।

“माँ हमें देखने दो हम देखना चाहते हैं की हम जिस चूत से पैदा हुए हैं वह कितनी ख़ूबसूरत है” नरेश ने अपनी माँ की टांगों को पकडते हुए पूरा फैलाकर कहा ।

नरेश फिर से अपनी माँ की चूत को गौर से देखने लगा। मनीषा की छूट से उत्तेजना के मारे रस तपक रहा था।

नरेश अपना मूह अपनी माँ की चूत के तरफ ले जाने लगा।

“आह्ह्ह्ह माँ क्या खुशबु है तुम्हारी चूत की हमें तो पागल बना रही है” नरेश ने अपनी माँ की चूत के क़रीब पुहंचते ही ज़ोर से अपनी साँसें लेते हुए अपनी माँ की चूत की गंध को सूँघते हुए कहा।

मानिषा की चूत अपने बेटे की बात सुनकर और ज्यादा उत्तेजित होकर पानी बहाने लगी । नरेश ने अपनी जीभ निकाली और अपनी माँ की चूत से निकलते हुए पानी को चाटने लगा।

“आजहहह हहहह बेटे ओह्ह्ह्ह तुम बुहत अच्छे हो” अपने बेटे की जीभ अपनी चूत पर लगते ही मनीषा के मूह से बुहत ज़ोर की सिसकिया निकलने लगी।

नरेश ने अपनी माँ की चूत को बाहर से ही चाटते हुए अपने हाथ से अपनी माँ की चूत के मोटे दाने को सहलाने लगा । नरेश कुछ देर तक अपनी माँ की चूत को ऐसे ही चाटने के बाद अपने दोनों हाथों से अपनी माँ की चूत के झाँटों को हटाते हुए अपने हाथ से उसकी चूत के लबों को खोलते हुए अपनी जीभ को कडा कर के अपनी माँ की चूत में घुसा दिया ।

“आआह्ह्ह्ह इसशहहहह बेटे ओह्ह्ह्हह्हह क्या कर दिया ओईए हाँ और अंदर तक मेरी चूत को चाट बुहत मज़ा आ रहा है” अपने बेटे की जीभ अपनी चूत में जाते ही मनीषा बुहत ज़ोर से सिसककर अपनी चूत को अपने बेटे की जीभ पर उछालते हुए बोली ।

नरेश अपनी माँ की चूत में बुहत ज़ोर से अपनी जीभ को अंदर बाहर करने लगा । मनीषा का पूरा जिस्म अपने बेटे की जीभ के अपनी चूत में अंदर बाहर होने से काँपते हुए अकडने लगा, मनीषा किसी भी वक्त झर सकती थी। उसके मूह से बुहत ज़ोर की सिसक़िया निकल रही थी।

ओहहहहह आआह्ह्ह्ह बेटे में आईईसश्ह ओफ्फफ्फ्फ्फफ्फ” मनीषा की चूत झटके खाते हुए अपने बेटे के मूह पर पानी की नदियाँ छोड़ने लगी । झरते वक़त मनीषा ने मज़े से अपनी आँखें बंद कर ली और बुहत ज़ोर से सिसकते हुए झरने लगी ।

नरेश अपनी माँ की चूत का नमकीन पानी बड़े प्यार से चाटने लगा । मगर मनीषा की चूत से बुहत ज़्यादा पानी निकल रहा था जिस वजह से उसका पूरा मूह गीला हो गया । नरेश जब तक उसकी माँ की चूत से पानी निकलता रहा उसे अपनी जीभ से चाटता रहा और फिर अपनी जीभ को अपनी माँ की चूत से निकालकर उसकी साड़ी उठाकर अपना मूह साफ़ कर दिया।

नरेश की हालत बुहत बिगड चुकी थी। उसने जल्दी से अपनी माँ की टांगों को उठा कर घुटनों तक मोड़ दिया और अपने लंड को उसकी चूत के छेद पर रखकर रगडने लगा, मनीषा ने जैसे ही अपनी आँखें खोली अपने बेटे का लंड अपनी चूत से रगडता हुआ देखकर फिर से गरम होते हुए सिसकने लगी ।

“आआह्ह्ह बेटे अब और मत ताडपा घुसा दे अपनी माँ की चूत में अपना मोटा लंड। दिखा दे अपनी माँ को की उसकी चूत से निकला हुआ ही अपने मोटे और लम्बे लंड से कैसे उसकी चूत को शांत करता है” मनीषा ने उत्तेजना में बोलते हुए कहा ।

नरेश अपनी माँ की बात सुनकर बुहत ज्यादा एक्साइटेड हो गया और अपना लंड अपनी माँ की चूत के छेद पे टीका कर धक्का मारने ही वाला था की बाहर से दरवाज़ा खटखटाने की आवज़ आई ।

“भाभी खाना बन चूका है बाहर आ जाओ। मैं खाना लगा रही हूँ” बाहर से रेखा की आवाज़ आ रही थी।

“दीदी आप खाना लगाओ में 5 मिनट में आती हूँ” मनीषा ने अपने गुस्से को काबू में रखते हुए कहा।

“भाभी वह नरेश को जल्दी से भेजो खाना लगाने में मदद करेंगा” रेखा की फिर से आवाज़ आई ।

नरेश को अपनी मामी पर इतना गुस्सा आ रहा था की उसका दिल कर रहा था की अभी जाकर अपना लंड उसकी चूत में घुसेड़े । मनीषा ने लाचारी में अपने बेटे की तरफ देखा, नरेश समझ गया की उसकी माँ उसे बाहर जाने के लिए कह रही है । नरेश ने गुस्से से अपनी माँ को छोडते हुए अपने कपडे पहनने लगा और कपडे पहनकर वहां से बाहर आ गया ।

मानिषा अपने बेटे के जाने के बाद उठकर कपडे पहनने लगी, उसे भी बुहत गुस्सा आ रहा था उसके बेटे का लंड उसकी चूत को छु चूका था। बस अंदर घूसने ही वाला था की रेखा ने उसे आवाज़ देकर बुला लिया । मनीषा बेड से उठकर बाथरूम में घुस गयी और पेशाब करने के बाद कमरे से बाहर निकल आई ।

मानिषा बाहर निकल कर खाने की टेबल पर जाकर बैठ गई, रेखा खाना लगा रही थी और नरेश भी उसकी मदद कर रहा था, अनिल और मनीषा की दोनों बेटियाँ भी वहां पर बैठी हुयी थी।

“भाभी शीला से कह देती मदद के लिए। नरेश तो लड़का है उसे क्यों यह काम करा रही हो” मनीषा ने रेखा की तरफ देखते हुए कहा।

“हाँ माँ मेने भी यही कहा था मामी से की मैं कर देती हूँ मगर मामी ने मना कर दिया” शीला ने रेखा के जवाब से पहले ही बोल दिया।

“हाँ हाँ मुझे सब पता है मगर नरेश खुद मेरे साथ यह सब करने की ज़िद करता है, कहता है की बैठे बैठे बोर हो जाता है तो अपनी मामी का थोडा सा हाथ बंटा देता है क्यों नरेश” रेखा ने नरेश की तरफ देखते हुए झूठ बोलते हुए कहा ।

“हाँ माँ मैंने ही मामी से कहा था मुझे मामी के साथ काम करने में मजा आता है” नरेश ने दिल में रेखा को गाली देते हुए कहा।

“जाब मामी भांजा राज़ी तो क्या करेगा काज़ी” यह कहते हुए मनीषा के साथ सब हंसने लगे।

“भाभी अपने बच्चों के आने का इंतज़ार कर लेती। मनिषा ने रेखा से कहा।

“नही दीदी फिर तो देर हो जाती उन्हें मैं गरम करके दे दूंगी । आप बेफिक्र होकर खाओ” रेखा ने सारा खाना टेबल पर रखने के बाद खुद भी बैठते हुए कहा ।

सब मिलकर खाना खाने लगे और खाना खाने के बाद अपने अपने कमरों में जाने लगे, नरेश उठकर अपनी माँ के कमरे में जाने लगा।

“भान्जे कहाँ माँ के पीछे पीछे लटू हो रहे हो इधर आओ। यह बर्तन उठाने में हमारी मदद करो” रेखा ने नरेश को आवज़ देते हुए कहा।

“लगता है साला आज नसीब ही खराब है” नरेश दिल ही दिल में बड़बड़ाते हुए अपनी मामी की तरफ लोटने लगा।

“क्या बात है नरेश बुहत अपसेट लग रहे हो” रेखा ने बर्तन उठाते हुए अपने भांजे से कहा।

“कुछ नहीं मामी” नरेश ने भी बर्तन उठाते हुए कहा।

“नही नरेश कोई बात तो ज़रूर है, ज़रूर हम से कुछ छुपा रहे हो” रेखा ने बर्तन उठाकर कीचन की तरफ जाते हुए कहindi Sex kahaniya – Antarvasna Sex Stories – Bangla Choti Kahini

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09-24-2019, 02:01 PM, #127

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RE: Incest Kahani परिवार(दि फैमिली)

“वो मामी सुबह से हमें यह बुहत तँग कर रहा है इसीलिए परेशान था” नरेश भी बर्तन उठाकर अपनी मामी के पीछे कीचन में दाखिल होते हुए कहा।

“च हमारा भंजा अपने साँप को काबू में नहीं रख सकता इसीलिए परेशान है” रेखा ने बर्तन नीचे रखते हुए नरेश की तरफ देखते हुए कहा।

नरेश ने अपनी मामी की बात सुनकर अपना कन्धा नीचे कर दिया।

“अरे पागल फ़िलहाल अपने हाथ से इसे शांत कर दे। जब तक शादी नहीं हो जाती तुम्हारी” रेखा ने नीचे बैठकर बर्तन धोते हुए कहा।

नरेश बाहर जाकर जल्दी से एक कुर्सी ले आया और अंदर आते हुए किचन का दरवाज़ा बंद करते हुए कुर्सी पर बैठ गया।

“भान्जे यह दरवाज़ा क्यों बंद किया” रेखा ने हैंरान होते हुए नरेश से पुछा ।

“मामी अगर कोई अचानक आ गया तो हमारी बातें सुन लेगा इसीलिए बंद किया” नरेश ने अपने हाथ से अपने लंड को पेण्ट के ऊपर से ही खुजलाते हुए कहा।

“लगता है तुम्हारा साँप बुहत बेसब्र है उसे बस कोई भी बिल चाहिए घूसने के लिये” रेखा ने अपने भांजे को लंड खुजाते हुए देखकर कहा।

“मामी मुझे तो इसे शांत करना भी नहीं आता । आप ही कुछ तरीका बताओ न हाथ से इसे की शांत कैसे किया जाता है” नरेश ने भोला बनते हुए कहा।

“भान्जे इतने भोले दीखते तो नहीं क्यों अपनी मामी से गन्दी बातें सुनकर मजा आता है। जो ऐसी बातें कर रहे हो” रेखा ने अपने हाथ से अपनी चुचियों के ऊपर खुजाते हुए कहा ।ऐसा करने से उसकी साड़ी का पल्लु भी उसकी चुचियों से हटकर नीचे गिर गया। जिसे उसने ऊपर नहीं किया और ऐसे ही बर्तन धोने लगी ।

“नाही मामी हम सच कह रहे हैं हमें कुछ नहीं पता। प्लीज हमें बताओ ना” नरेश ने अपनी मामी की चुचियों के नंगा होते ही उसे गौर से देखते हुए कहा।

“अपनी मामी की चुचियों को देखना आता है पर अपने साँप का इलाज नहीं पता” रेखा ने अपने भांजे को अपनी चुचियों की तरफ घूरते हुए देखकर कहा।

“मामी आप की चुचियां है ही इतनी सूंदर की हर वक्त उन्हें देखने का मन करता है” नरेश ने भी इस बार अपनी मामी को सीधे कह दिया।

“हाय हाय क्या कलयूग का दौर आ गया है भान्जा अपनी मामी की चुचियों को देखना चाहता है” रेखा ने अपने भांजे की बात सुनकर बिना अपना पल्लु चुचियों पर रखे बर्तनों को धोने का नाटक करते हुए कहा।

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09-24-2019, 02:01 PM, #128

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RE: Incest Kahani परिवार(दि फैमिली)

“मामी प्लीज बताओ न आपके सिवा है कौन जिससे मैं पूछुं। यह देखो अब भी कैसे खडा हो चुका है” नरेश ने अपनी पेण्ट की ज़िप खोलकर अंडरवियर में खडा लंड अपनी मामी को दिखाते हुए कहा।

“अरे तुम ने इसे क्यों खोला” रेखा ने अपने भांजे का अनडरवियर में ही खडा लंड देखकर ज़ोर की साँसें लेते हुए कहा।

“फिर क्या करुं मामी पेण्ट में तो दर्द होने लगता है इसमे” नरेश ने अपने लंड को यों ही अपनी मामी की आँखों के सामने सहलाते हुए कहा।

“भान्जे जैसे इसे अभी सहला रहे हो वेसे ही नंगा करके ज़ोर से सहलाने से इसमें से पानी निकल जाएगा और तुम शांत हो जाओगे” रेखा ने अपने भांजे के लंड को गोर से देखते हुए यों ही ज़ोर से साँसें लेते हुए कहा।

“मामी एक बार आप करके बताओ न मुझे नहीं आता” नरेश ने इस बार अपने लंड को अंडरवियर से भी निकालते हुए कहा।

“अरे तुम पागल हो गये हो क्या भांजे । इसे अंदर वापस डालो तुम्हें शर्म नहीं आती अपनी मामी को अपना इतना बड़ा साँप दिखाते हुये” रेखा ने अपने भांजे को डाँटते हुए कहा । उसके पूरे जिस्म अपने भांजे का नंगा लम्बा और तगडा लंड देखकर अजीब किस्म की सिहरन और गुदगुदी हो रही थी।

“मामी प्लीज तुम्हे मेरी कसम करके बताओ ना” नरेश ने अपनी मामी को मिन्नतें करते हुए कहा । नरेश जानता था की उसकी मामी नाटक कर रही है । उसके लंड को छूने का मन तो उसका भी हो रहा है।

“ठीक है मगर तुम किसी को बताना मत” रेखा जिसके दिल में इतनी देर से अपने भांजे का लंड अपने हाथ में लेने की इच्छा हो रही थी । अखिरकार अपने भांजे के सामने हार मानते हुए कहा

“हाँ मामी मैं किसी को नहीं बताऊँगा” नरेश ने अपनी मामी की बात सुनते ही खुश होते हुए कहा । रेखा वहां से उठते हुए अपने भांजे की कुर्सी के सामने आकर घुटनों के बल बैठ गयी और अपने भांजे के गुलाबी लम्बे और तगडे लंड को गौर से देखते हुए अपने हाथ में ले लिया।

“आजहहह मामी आपका हाथ कितना नरम है बुहत मजा आ रहा है” अपनी मामी का हाथ अपने लंड पर पड़ते ही नरेश ने सिसकते हुए कहा ।

“नरेश तुम्हारा तो बुहत गरम है” रेखा ने अपने भांजे के लंड पर हाथ के रखते ही कहा । रेखा को अपने भांजे का लंड अपने हाथ में लेते ही पूरे शरीर में बिजली के करेन्ट लग रहे थे।

“हाँ मामी इसीलिए तो कह रहा हूँ कोई इलाज करो ना” नरेश ने अपनी मामी की बात का जवाब देते हुए कहा।

“नरेश मैं पहले इसे अपनी जीभ से कुछ ठण्डा करती हूँ” रेखा का दिल अपने भांजे के लंड के गुलाबी सुपाडे को चूमने का कर रहा था इसीलिए उसने नरेश से कहा।

“हाँ मामी जैसे भी करो मगर मेरे इसको ठण्डा करो” नरेश ने अपन लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा।

“हाँ भान्जे अब तुम फिकर मत करो । मैं तुम्हारे इस शैतान साँप को आज ठण्डा करके ही दम लूंग़ी” रेखा ने अपने भांजे के लंड को अपने हाथ से थोडा आगे पीछे करते हुए कहाindi Sex kahaniya – Antarvasna Sex Stories – Bangla Choti Kahini

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09-24-2019, 02:01 PM, #129

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RE: Incest Kahani परिवार(दि फैमिली)

रेखा ने अपना मुँह अपने भांजे के लंड की तरफ ले जाते हुए उसके गुलाबी सुपाडे को अपने होंठो से चूम लिया।

“आह्ह्ह्ह मामी” अपने लंड पर अपनी मामी के नरम होंठ पड़ते ही नरेश के मूह से सिसकी निकल गयी और उसका लंड उत्तेजना के मारे ज़्यादा फूलने लगा ।

रेखा ने जैसे ही अपने होंठ अपने भांजे के लंड से हटाये तो उसके लंड के छेद में से वीर्य की कुछ बूँदे निकलने लगी, रेखा ने इस बार नीचे झुकते हुए अपनी जीभ निकालकर अपने भांजे के लंड के छेद से निकालते हुए वीर्य को चाट लिया।

“आह्ह्ह्ह ” नरेश अपनी मामी की जीभ अपने लंड के छेद पर लगते ही काम्पने लगा । रेखा की भी हालत अपने भांजे के लंड से खेलते हुए बिगडती जा रही थी। उत्तेजना के मारे उसकी चूत से ढेर सारा पानी निकल कर उसकी पेंटी को गीला कर चुका था।

रेखा अपनी जीभ से कुछ देर तक अपने भांजे के लंड को यों ही ऊपर से नीचे तक चाटती रही और फिर अचानक अपना मुँह खोलकर अपने भांजे के लंड का गुलाबी सुपाड़ा अपने मूह में भर लिया ।

रेखा अपने भांजे के लंड के सुपाडे को अपने गुलाबी लबों के बीच लेकर आराम से आगे पीछे करते हुए उसे चाटने चूसने लगी।

“आह्ह्ह्ह आहह मामी मेरा निकलने वाला है” नरेश का पूरा जिस्म अपना लंड अपनी मामी के होंठो के बीच रगडने से काम्पने लगा और वह ज़ोर सिसकते हुए बोला क्योंकी उसे लग रहा था की वह किसी भी वक्त झर सकता है।

रेखा नरेश की बात सुनकर उसके लंड पर अपने होंठो की पकड और ज्यादा मज़बूत करते हुए उसके लंड को चूसने लगी । नरेश समझ गया के मामी उसके लंड का वीर्य अपने मूह में लेना चाहती है। नरेश का पूरा जिस्म काँपते हुए झटके खाने लगा।

“आह्ह्ह्ह आहहहह मामी ओह्ह्ह्हह्हह मजा आ गया” नरेश का लंड अपनी मामी के मुँह में पिचकारियां छोडने लगा और नरेश झरते वक्त बुहत ज़ोर से सिसकते हुए अपनी मामी को बालों से पकडते हुए उनके मुँह को अपने लंड पर आगे पीछे करने लगा।

नरेश के लंड से निकलती हुए पहली पिचकारी इतनी तेज़ थी की वह सीधा रेखा हलक से उतरती हुयी उसके पेट में जा पुहंचा और फिर उसके मूह में जैसे पिचकारियों की बारिश होने लगी, रेखा अपने भांजे का जितना हो सकता था वीर्य चाटने लगी ।

नरेश का लंड कुछ ही देर में अपना सारा वीर्य निकलने के बाद ढीला पड़ने लाग। रेखा के होंठो से भी वीर्य निकल कर नीचे गिर रहा था । रेखा ने अपने भांजे के लंड के ढीला पड़ते ही उसे पूरा अपने मुँह में भर कर ज़ोर से अपने होंठो के बीच दबा कर उसमें से सारा वीर्य चाट लिया और फिर उसके लंड को 

अरे अब तो अपने साँप को वापस अपने पिटारे में डालो” रेखा ने मुँह धोने के बाद बर्तनों को उठाकर ऊपर अपनी जगह पर रखते हुए कहा।

“मामी सच में आप बुहत अच्छी हो । मेरा कितना ख़याल रखती हो काश आप मेरी मामी नहीं होती तो मैं अपने साँप को सिर्फ आपके बिल में ही रखता” नरेश ने अपने लंड को वापस अपने अंडरवियर में डालकर पेण्ट की ज़िप को बंद करते हुए कहा।

“बदमाश क्या मैं तुम्हें इतनी अच्छी लगती हूँ । जो तुम मेरे भांजे होते हुए भी तुम मेरी बिल में अपने साँप को घुसाने के सपने देख रहे हो” रेखा ने बर्तन रखने के बाद अपने भांजे के पास आते हुए उसके गाल की एक चुटकी लेते हुए कहा ।

“हाँ मामी सच में मुझे आप दुनिया की सब से अच्छी औरत लगती हो” नरेश ने इस बार हिम्मत करते हुए अपनी मामी को बाज़ू से खींचकर अपनी गोद पर बिठाते हुए उसे अपनी बाहों में मज़बूती से दबाकर कहा।

“छोड़ो नालायक कोई देख लेगा तुम्हें शर्म नहीं आती अपनी मामी को अपनी गोद पर बिठाते हो” रेखा ने अपने भांजे की गोद से उठने की नाक़ाम कोशिश करते हुए कहा । रेखा का पूरा जिस्म अपने भांजे की गोद में बैठते हुए उत्तेजना के मारे कांप रहा था।

“मामी दरवाज़ा बंद है थोडी देर हमारी गोद में बेठो न। हमें बुहत अच्छा लग रहा है” नरेश ने अपने दोनों हाथ अपनी मामी के नंगे पेट पर दबाते हुए कहा।

“बदमाश अभी अगर मैं नहीं उठी तो तुम्हारा साँप फिर से उठने लगेगा और हमें फिर से उसे शांत करना पडेगा” रेखा ने इस बार अपने भांजे की गोद से उठने की कोशिश किये बिना ही उसके हाथों को अपने नंगे पेट पर महसूस करते हुए मस्ती लेते हुए कहा ।

“नही मामी हम आपसे अपने साँप को शांत करने के लिए नहीं कहेंगे पर बस आप थोडी देर यों ही हमारी गोद में बैठी रहिये” नरेश ने अपनी मामी के नरम चूतडों को अपनी गोद पर महसूस करते हुए मज़े से कहा। नरेश का लंड अपनी मामी की बात सुनकर फिर से तनने लगा।

“आह्ह्ह्ह बदमाश लड़के तुम्हारा साँप तो हमारी बिल में घूसने की कोशीश कर रहा है” रेखा ने अपने भांजे का लंड अपने चुतडो में चुभता हुआ महसूस करके मज़े से सिसकते हुए कहा।

“मामी बेचारा बस आपकी बिल को कपड़ों के उपर से ही चूमने की कोशिश कर रहा है अंदर तो घुस नहीं सकता” नरेश ने अपने लंड को अपनी मामी के भारी चूतडों में ज़ोर से दबाते हुए कहा।

“आह्ह बदमाश तुम्हारा साँप तो बुहत बदमाश है मुझे तो लगता है कहीं यह मेरे कपड़ों को फाड कर न मेरी बिल में घुस जाए” रेखा ने अपने भांजे के फुल तनकर कर उसके चूतडो में धक्के मारते हुए लंड को अपने चूतडों के बीच मज़े से दबाते हुए कहा।

मामी इस बदनसीब का इतना नसीब कहाँ के आपकी नंगी बिल को छु सके” नरेश ने अपने मामी के नंगे पेट को अपने हाथों से सहलाते हुए कहा।

“भान्जे एक बात कहूं” रेखा ने यों ही मज़े से अपने भांजे के लंड पर बैठे हुए ही कहा । वह बुहत गरम हो चुकी थी और उत्तेजना के मारे उसकी चूत से बुहत ज्यादा पानी टपक रहा था।

“हाँ मामी बोलो” नरेश ने इस बार अपने होंठ अपनी मामी के नंगे गोर पेट पर रखते हुए कहा।

“ओहहहह बदमाश मैं कह रही थी की अगर तुम कहो तो मैं तुम्हारी खातिर अपनी बिल को एक बार नंगा करके तुम्हारे साँप को छूने दे सकती हूँ। मगर तुम उसे सिर्फ ऊपर से अपने साँप को रखोगे अंदर नहीं घुसओगे” रेखा ने अपने भांजे के होंठ अपनी नंगी पीठ पर पड़ते ही सिसकते हुए कहा।

“मामी सच में आप बुहत अच्छी हो । हमारे लिए आप इतना कर सकती हो। हम भी वादा करते हैं के आपकी बिल में अपना साँप नहीं घुसाएंगे” नरेश ने अपने मामी की बात सुनकर बुहत खुश होते हुए कहा।

“ठीक है मुझे छोडो और अपने साँप को बाहर निकालो। जब तक मैं अपनी बिल को नंगा करती हूँ” रेखा ने अपने भांजे के हाथों को अपने पेट से जुदा करते हुए उसकी गोद से उठकर कहा ।

रेखा ने अपने भांजे की गोद से उठने के बाद अपनी साड़ी को उतारकर अपने पेटिकोट और पेंटी को भी उतार दिया।

“वाह मामी आपकी गुलाबी बिल को देखकर तो उसे चूमने का मन करता है” नरेश ने अपनी मामी की चूत के नंगा होते ही अपने लंड को अपने हाथो से सहलाते हुए कहा।

नरेश ने अपनी पेण्ट और अंडरवियर को खीचकर अपने पाँव तक सरका दिया था।

“अरे बदमाश तुमने भी अपने साँप को नंगा कर दिया” अपने भांजे की बात सुनकर रेखा ने उसके तरफ देखते हुए कहा। रेखा सिर्फ एक ब्लाउज और ब्रा में नरेश के सामने खडी थी और उसकी चूत उत्तेजना के मारे बुहत गीली हो चुकी थी । नरेश का लंड अपनी मामी की चूत और उसकी गोरी चिकनी टांगों को देखकर झटके खाने लगा ।

रेखा अपने भांजे की तरफ आये हुए उसके बिलकुल सामने आकर उल्टा हो गई और अपने नंगे चूतड़ अपने भांजे की गोद पर रख दिये।

“आहहहह मामी” नरेश अपनी मामी के नंगे चूतड़ अपने लंड पर पड़ते ही सिसक उठा । नरेश को अपनी मामी की गांड का भूरा छेद उल्टा होते हुए बुहत भा गया उसने सोच लिया जब भी मोका मिला वह अपनी मामी की गांड ज़रूर मारेगा।

“आह्ह्ह्ह हहहहः” रेखा अपनी गीली चूत को अपने भांजे के लंड पर ज़ोर से घिसते हुए सिसकने लगी।

नरेश की हालत भी अपनी मामी की गीली चूत को अपने लंड पर घिसते हुए खराब होने लगी ।

“आह्ह्ह्ह मामी आप सीधी होकर हमारा इस पर बैठ जाओ न हमें ज्यादा मजा आयेगा” नरेश ने सिसकते हुए अपनी मामी से कहा । रेखा को उस वक़त कुछ समझ में नहीं आ रहा था । वह अपने भांजे के ऊपर से उठते हुए अपनी टांगों को फ़ैला कर अपने भांजे के ऊपर सीधा होकर बैठ गई।

“ओहहहहहह भाँजे” रेखा ने जैसे ही सीधा होकर अपने भांजे के उपर बैठी। उसका लंड रेखा की चूत के छेद को छूते हुए उसकी पूरी चूत से घिसता हुआ उसके पेट से जा टकराया । जिस वजह से रेखा के मूह से बुहत ज़ोर की सिसकी निकल गयी । नरेश की तो जैसे आज लाटरी निकल आई थी । सीधा होते ही उसकी मामी की दोनों बड़ी बड़ी चुचियां बिलकुल उसके मूह के सामने आ गयी थी, नरेश ने अपनी मामी की दोनों बड़ी चुचियों को गौर से देखते हुए अपना मुँह उसकी दोनों चुचियों के बीच बने क्लीवेज पर रख दिया ।

“आहहह भांजे क्या कर रहे हो” अपने भांजे के होंठ अपनी चुचियों के क़रीब महसूस करके रेखा ने सिसकते हुए कहा । रेखा की हालत बिगडती जा रही थी । उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या करे, रेखा ने अपने हाथ से अपने भांजे के लंड को पकडते हुए अपनी चूत के छेद पर रख दिया और बुहत ज़ोर से घीसने लगी ।

“आआह्ह्हह्ह्ह्ह ह ओह्ह्ह्ह भाँजे” रेखा अपनी चूत से अपने भांजे के लंड को घिसते हुए बुहत ज़ोर से सिसक रही थी और उसका पूरा जिस्म कांप रहा था । नरेश का मज़े के मारे बुरा हाल था। उसने मोका देखकर अपने हाथों से अपनी मामी की दोनों चुचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही पकडते हुए सहलाने लगा।

“आआह्ह्ह्ह भांजे क्या कर रहे हो” रेखा ने वैसे ही नरेश के लंड को अपनी चूत पर घिसते हुए कहा । रेखा का पूरा जिस्म अकड रहा था वह किसी भी वक़त झर सकती थी, रेखा की आँखें अब मज़े के मारे बात करते हुए बंद हो रही थी । नरेश ने अपनी मामी की एक चूचि से हाथ हटाते हुए उसको सर से पकड कर अपने होंठो को उसके गुलाबी गरम तपते होंठो पर रख दिया ।

नरेश अपनी मामी के दोनों होंठो को अपने पूरे मुँह में लेकर चूसने लगा । नरेश की इस हरकत से रेखा का पूरा जिस्म काँपते हुए झटके खाने लगा और वह उत्तेजना के मारे अपने भांजे के लंड को अपनी चूत के छेद में थोडा सा डालकर घीसने लगी।

रेखा की चूत अचानक झटके खाते हुए झरने लगी। झरते वक्त रेखा ने मज़े से अपने दोनों हाथों से अपने भांजे के सर को ज़ोर से अपने मूह पर दबाते हुए अपनी जीभ को उसके मूह में डाल दिया । रेखा की चूत से निकलता हुआ पानी नरेश के लंड पर गिरने लगा ।

नरेश का लंड अब भी रेखा की चूत के छेद से सता हुआ था। नरेश ने अपने हाथों को अपनी मामी के चुतडो में ड़ालते हुए उसे अपने लंड पर दबा दिया । नरेश का लंड एक ज़ोर के झटके के साथ अपनी मामी की चूत में 2 इंच घुस गया।

रेखा अपनी चूत में अपने भांजे के लंड के जाते ही उछल पडी और अपना मूह अपने भांजे के मूह से हटाकर उससे अलग होने लगी । मगर नरेश ने अपनी मामी को ज़ोर से अपनी बाहों में दबा रखा था ।

“नरेश छोडो मुझे तुमने वादा किया था” रेखा ने वैसे ही अपने भांजे से छूटने की कोशिश करते हुए कहा।

“हाँ मामी मगर हम अपने ऊपर कण्ट्रोल नहीं कर सके प्लीज थोडी देर ऐसे ही रहने दो । हम और अंदर नहीं घुसाएंगे” नरेश ने अपने लंड को यों ही अपनी मामी की चूत में 2 इंच लंड डाले हुए कहा।

“नरेश तुम बुहत बूरे हो” रेखा ने बनवटी गुस्सा अपने भांजे पर करते हुए कहा, रेखा को तो अपने भांजे का लंड अपनी चूत में स्वर्ग का मज़ा दे रहा था ।

“मामी आप बुहत अच्छी हो” नरेश ने अपनी मामी के ढीला होते ही उसके सर को पकडते हुए अपनी जीभ को अपनी मामी के मुँह में घुसा दिया ।

रेखा ने अपने भांजे की जीभ अपने मूह में घुसते ही उसे अपने होंठो से चूसने लगी । रेखा के ऐसा करने से नरेश का पूरा जिस्म कापंने लगा, रेखा समझ गयी की वह झरने वाला है । इसीलिए वह अपनी चूत को अपने भांजे के लंड से उठने लगी मगर नरेश ने अपने दोनों हाथ अपनी मामी के चुतडो में डालकर उसे ऐसा न करने दिया।

“नरेश ऐसा मत करो मेरी चूत में मत झरो प्लीज” रेखा ने अपने भांजे को मिन्नतें करते हुए कहा । मगर नरेश अपनी मामी की कोई बात सुने बगैर अपनी मामी को चुतडो से पकडे उसकी चूत में पिचकारियां छोडने लगा।

“आह्ह्ह्हह भांजे तुम बुहत बदमाश हो” अपने भांजे के लंड से निकलती हुए पिचकारिया अपनी चूत में पड़ते ही रेखा ने सिसकते हुए मज़े से अपने आप को ढीला छोड दिया । नरेश ने अपनी मामी के ढीले होते ही अपने चुतडो को ज़ोर से अपनी मामी की चूत पर धक्का मार दिया और अपनी मामी के चूतडों को ज़ोर से अपने लंड पर दाब दिया। जिस वजह से उसका लंड अपनी मामी की चूत को चीरता हुआ आधे से ज्यादा उसकी चूत में घुस गया ।

आहहह शह्ह्हह्ह्ह्ह भाँजे” अपनी चूत में अपने भांजे का आधे से ज्यादा लंड घूसने से रेखा ने सिसकते हुए अपने चुतडो को और ज़ोर लगा कर अपने भांजे के लंड पर दबा दिया। जिस वजह से उसका पूरा लंड अपनी मामी की चूत में घुस गया और रेखा की चूत अपने भांजे का पूरा लंड घुसते ही ख़ुशी से लार टपकने लगी ।

रेखा दूसरी बार झर चुकी थी और नरेश भी अपना पूरा वीर्य अपनी मामी की चूत में भर चूका था, दोनों कुछ देर तक यों ही एक दुसरे की बाहों में पडे हाँफते रहे । कुछ देर बाद जब रेखा को होश आया तो वह जल्दी से अपने भांजे के ऊपर से उठ गयी।

नरेश के ऊपर से उठते ही रेखा की चूत से अपने भांजे और उसका मिला जुला रस ज़मीन पर गिरने लगा।

“नरेश तुमने अच्छा नहीं किया तुम बुहत बूरे हो” रेखा ने अपनी चूत को एक कपडा उठाकर साफ़ करते हुए कहा।

“मामी मेरा कोई दोष नहीं है । आप हो ही इतनी सूंदर की मैं अपना कण्ट्रोल खो बैठा” नरेश ने अपने अंडरवियर को ऊपर करने के बाद अपनी पेण्ट भी पहनते हुए कहा ।

“अच्छा अब जाओ यहां से में जल्दी से सफाई कर दूँ कोई आ न जाए” रेखा ने भी अपनी साड़ी को पहनते हुए कहा।

“मामी फिर कब अपने भांजे के साँप को अपनी बिल में घूसने दोगी” नरेश ने कुर्सी से उठते हुए अपनी मामी को अपने बाहों में भरते हुए उसके होंठो को चूमते हुए कहा।

“जाओ बदमाश मैं तुमसे बात नहीं करूंगी तुम बुहत गंदे हो” रेखा ने अपना मूह बनाते हुए कहा ।

“च बाबा सॉरी में जा रहा हूँ पर अपने भांजे के साँप के बारे में ज़रूर कुछ सोचना” नरेश ने अपनी मामी को छोडते हुए शरारत से हँसते हुए कहा।

“भाग बदमाश” रेखा ने भी हँसते हुए अपने भांजे को मारने की कोशिश करते हुए कहा । नरेश वहां से चला गया और रेखा किचन को पूरा साफ़ करने लगी ।

विजय और उसकी दोनों बहनें छुट्टी होने के बाद हर रोज़ की तरह रिक्शा में बैठकर कॉलेज से घर आ गये। रेखा ने अपने बच्चों को खाना दे दिया जिसे खाने के बाद सभी अपने अपने कमरों में आगये ।

“क्या हाल है यार । क्या कर रहे हो” विजय ने अपने कमरे में ही बेड पर लेटे नरेश से पुछा।

“कुछ नहीं यार बस नींद आ रही थी” नरेश अब सुकून की नींद करना चाहता था इसीलिए उसने करवट लेते हुए अपना मूह दूसरी तरफ करते हुए कहा।

विजय ने नरेश को बात न करते हुए देखकर चुप हो गया और खुद भी बेड पर आकर लेट गया।

“क्या हो रहा है शीला की बच्ची” कंचन ने शीला के साथ बेड पर बेठते हुए कहा।

“छोड़ो यार अपना नसीब ही खराब है” शीला ने ठण्डी साँस लेते हुए कहा ।

“क्यों क्या हुया” कंचन ने एक्साइटेडट होते हुए कहा। शीला ने अपने भाई के साथ होने वाली सारी बात कंचन को बता दी।

“शीला तुम तो बुहत चालाक हो पर यार हमारा नसीब ही खराब है कुछ सोचो न रात के बारे में” कंचन ने शीला की बात सुनकर गरम होते हुए कहा।

“यार एक बात मेरे दिमाग में है अगर हमारे भाइयों को अक्ल होगी तो मान जाएंगे” शीला ने सोचते हुए कहा।

“क्या बात है ज़रा मुझे भी तो पता चले” कंचन ने शीला से कहा । शीला ने अपना आईडिया कंचन को सुना दिया जिसे सुनकर वह उछल पड़ी ।

“यार अगर ऐसा हो जाये तो हमारी सारी हसरतें पूरी हो सकती हैं” कंचन ने खुश होते हुए कहा और दोनों बेड पर लेट कर आपस में बातें करते हुए नींद की आग़ोश में चलि गई।

मानिषा अपने कमरे में बेड पर लेटी करवटे ले रही थी उसे बार बार अपने बेटे का तगडा लंड अपनी चूत से रगडता हुए याद आ रहा था, अपनी ऊँगली से वह एक दफ़ा अपनी चूत को शांत कर चुकी थी मगर अब उसकी चूत को तो अपने बेटे का तगडा लंड ही चाहिए था ।

रेखा की भी वही हालत थी वह अपने भांजे का लंड अपनी चूत में तो ले चुकी थी मगर उसकी चूत की आग अभी तक शांत नहीं हुयी थी क्योंकी उसकी चूत की चुदाई अभी सही तरीके से नहीं हुयी थी और उसे भी उत्तेजना के मारे अपनी चूत में बुहत ज़ोर की खुजलि हो रही थी । रेखा कुछ सोचते हुए अपने कमरे से निकल कर अपने ससुर के कमरे में जाने लगी।

रेखा ने अपने ससुर के कमरे में पुहंचकर उसका कमरा अंदर से बंद कर दिया । अनिल गर्मी होने की वजह से सिर्फ धोती में सोया हुआ था, अपनी बहु को कमरे में आता हुआ देखकर वह समझ गया की उसके लंड को अपनी बहु की छूट मिलने वाली है ।

रेखा बुहत गरम थी तो उसने अपने ससुर के पास बैठते ही अपने ससुर की धोती को अपने हाथ से हटा दिया,

“अरे बेटी यह क्या कर रही हो हमें नंगा क्यों कर दिया” अनिल मोके का फ़ायदा उठाते हुए अपनी बहु से नाटक करते हुए कहा।

“मुझे आपके इस शैतान को उठाना है” रेखा ने अपने हाथ से अपने ससुर का ढीला पर लंड सहलाते हुए कहा।

“अरे बेटी तुम्हें शर्म नहीं आती अपने ससुर के लंड को पकडते हुये” अनिल ने अपनी बहु से फिर से नाटक करते हुए कहा।

“क्यों बाबूजी क्या हुआ आपका मूड नहीं है” रेखा ने परेशान होते हुए कहा।

“नही बेटी मूड क्यों नहीं होगा जब इतनी सूंदर बहु अपने ससुर से चुदवाने के लिए खुद उसके कमरे में आ गयी है तो मूड क्यों नहीं होगा” अनिल ने अपने बेड से उठते हुए अपनी बहु को भी सीधा कर दिया और उसकी साड़ी को उसके जिस्म से अलग करते हुए बोला।।

“वाह बेटी क्या जिस्म है तुम्हारा। काश तुम मेरी बहु नहीं बीवी होती” अनिल ने अपनी बहु की तारीफ करते हुए कहा।

“बाबू जी इस वक्त आप हमें अपनी बीवी समझकर ही चोदिये। हमारी चूत बुहत प्यासी है” रेखा ने अपने ससुर की बात सुनते ही उसको गले लगाते हुए कहा।

अनिल ने अपनी बहु की बात सुनकर उसके होंठो को चूमते हुए उसका पेटिकोट उतार दिया और खुद घुटनों के बल बैठते हुए अपनी बहु की गीली चूत को देखने लगा।

“बेटी तुम्हारी पेंटी इतनी गीली की हो गई है” अनिल ने अपनी बहु की पेंटी को सूँघते हुए कहा।

“हाहहह बाबूजी हमें पेंटी के अंदर कुछ हो रहा है । इसी लिए उसमें से यह पानी निकल कर हमारी पेंटी को गीला कर रहा है” रेखा ने सिसकते हुए कहा ।

“बेटी फिर तो इसका इलाज करना पडेगा” अनिल ने अपने दोनों हाथों से अपनी बहु की पेंटी को पकड कर उतारते हुए कहा।

“बाबूजी इसीलिए तो आपके पास आई हूँ तुम्हारा बेटा तो सही इलाज नहीं कर पाता तो हमारा ख्याल तो आपको ही रखना पडेगा” रेखा ने वैसे ही खडे कहा ।

“बेटी तुम्हारी चूत से बुहत पानी निकल रहा है लगता है बेचारी के अंदर कोई ज़ख़्म है अब हमें अपनी इंजेक्शन डालकर इसमें अंदर दवाई ड़ालने पडेंगी” अनिल ने अपनी बहु की हलकी झाँटों वाली चूत को अपने होंठो से चूमते हुए कहा।

बाबूजी जो करना है करो मगर हमारा इलाज सही तरीके से करो हमें बेचारी अंदर बुहत खुजलि हो रही है” रेखा ने अपने ससुर को बालों से पकडते हुए अपनी चूत पर दबाते हुए कहा।

“हाँ बेटी करता हूँ मगर बेड पर आराम से लेटकर” अनिल सीधा होते हुए अपनी बहु के ऊपर वाले भी सारे कपडे उतार दिये और उसे बेड पर सीधा लेटाते हुए उसके ऊपर चढ़ गया ।

अनिल ने अपनी बहु को होंठो को चूमते हुए नीचे होते हुए उसकी दोनों बड़ी चुचियों को ज़ोर से मसलते हुए उन्हें एक एक करके चाटने लगा।

“आआह्ह्ह्ह बाबू जी आराम से दर्द हो रहा है” रेखा ने अपनी चुचियों के ज़ोर से दबने से सिसकते हुए कहा।

अनिल अचानक अपनी बहु के पेट पर बैठते हुए अपने लंड को उसकी दोनों बड़ी बड़ी चुचियों के बीच डालकर आगे पीछे करने लगा । अनिल का लंड उसकी बहु की चुचियों से होता हुआ रेखा के होंठो को टच करने लगा। रेखा ने अपना मूह खोल दिया और जैसे ही उसके ससुर का लंड उसके होंठो के क़रीब आता वह अपनी जीभ से उसे चाट लेटी।

अनिल कुछ देर तक ऐसा करने के बाद नीचे होते हुए अपनी बहु की टांगों को पूरा फ़ैला दिया और खुद उसके बीच बैठते हुए अपनी जीभ निकालकर अपनी बहु की चूत से निकलता हुआ नमकीन पानी चाटने लगा ।

“आह्ह्ह्ह बाबजी अब अपना घुसा दो न बुहत तकलीफ हो रही है” अपने ससुर की जीभ को अपनी चूत पर महसूस करते ही रेखा ने सिसकते हुए कहा।

“क्या घुसा दूँ बहु” अनिल ने अपनी बहु से कहा और उसकी चूत के दाने को अपने होंठो में लेकर चूसने लगा।

“ओहहहह स्सस्स्स्शह्ह्ह बापू अपना इंजेक्शन घुसाओ न हम और बर्दाशत नहीं कर सकते” रेखा ने अपनी चूत का दाना अपने ससुर के मूह में आते ही बुहत ज़ोर से सिसकते हुए कहा।

“हाँ बेटी थोडा रुको अभी घुसाते है” यह कहते हुए अनिल ने अपनी बहु की टांगों को घुटनों तक मोडते हुए अपना लंड अपनी बहु की चूत पर घीसने लगा ।

रेखा की हालत बहुत खराब थी । वह बुहत ज़्यादा एक्साइटेडट हो गई थी । अपने ससुर का लंड अपनी चूत पर घिसता हुआ देखकर वह अपने चूतड़ उछलकर अपने ससुर के लंड को अपनी चूत में लेने की कोशिश करने लगी।

अनिल ने अपना लंड अपनी बहु की चूत के छेद पर रखकर एक ज़ोर का धक्का मार दिया।

“आह्ह्ह्हह्ह शह्ह्हह्ह्ह्ह बाबूजी” अनिल का लंड एक ही झटके में पूरा अपनी चूत में घूसने से रेखा के मूह से मज़े की एक सिसकि निकल गयी । अनिल अपना पूरा लंड घुसाकर अपनी बहु के ऊपर लेट गया और उसकी चुचियों को चाटने लगा।

“बाबूजी करो ना” रेखा ने अपने चूतड़ो को अपने ससुर के लंड पर उछालते हुए कहा ।

बेटी घुसा तो दिया अब क्या करुं” अनिल ने अपनी बहु की चुचियों को अपने मूह से निकालकर नाटक करते हुए कहा।

“बाबुजीआप बुहत बदमाश हो । आप मुझसे गन्दी बाते सुनना चाहते हो तो सुनो । बाबुजी अपने लंड को अपनी बहु की चूत में अंदर बाहर करो। आपकी बहु की चूत में बुहत ज़ोर की खुजलि हो रही है उसे मिटा दो” रेखा ने खुलकर अपने ससुर से कहा ।

अनिल अपनी बहु के मूह से यह सब सुनकर बुहत ज्यादा एक्साइटेडट होगया और उसका लंड भी उसकी बहु की चूत में और ज्यादा मोटा हो गया । अनिल सीधा होते हुए अपनी बहु की चूत में अपना लंड बुहत तेज़ी से अंदर बाहर करने लगा।

“आह्ह्ह्ह शहहह हाँ बाबुजी ऐसे ही हमारी चूत में ज़ोर से अपना लंड अंदर बाहर करो । बुहत मजा आरहा है” रेखा ने सिसकते हुए अपनी दोनों टांगों को अपने ससुर की कमर में डाल दिया । अनिल भी अपनी बहु की बातों से ज्यादा एक्साइटेडट होकर अपना लंड पूरा बाहर तक खीचकर उसकी चूत में पेल रहा था, अनिल के हर धक्के के साथ रेखा का पूरा जिस्म कांप रहा था।

रेखा झरने के बिलकुल क़रीब थी इसीलिए उसका पूरा जिस्म अकडने लगा था।

“आह्ह्ह्हह्ह बाआबूउउउउजी ज़ोर से अंदर बाहर करो मैं झरने वाली हूँ” अचानक रेखा की साँसें उखडने लगी ।और उसने ज़ोर से चिल्लाते हुए कहा।

अनिल अपनी बहु की बात सुनकर अपने लंड को जितना हो सकता था उतनी ज़ोर और तेज़ी के साथ अपनी बहु की चूत में अंदर बाहर करने लगा।

“आआह्ह्ह्हह हहहह ओह्ह्ह्हह्हह बाबू जी” यह कहते हुए रेखा की आँखें बंद हो गई और उसकी चूत ने अपने ससुर के लंड को ज़ोर से पकडते हुए उस पर झटके मारते हुए पानी छोडने लगी । अनिल भी अपनी बहु की चूत से अपना लंड के दबने से अपने आप को रोक नहीं पाया और वह भी हाँफते हुए अपनी बहु की छूट में पानी छोडने लगा ।

“आह्ह्ह्ह बेटी” अनिल झरते हुए बुहत ज़ोर से हाँफते हुए अपनी बहु की चूत में झटके मारने लगा और अपना पूरा वीर्य निकलने के बाद अपनी बहु के ऊपर ही ढेर हो गया।

रेखा अपने ससुर के झरने के बाद अपनी आँखें खोलते हुए उसको अपने ऊपर से हटाते हुए खुद बाथरूम में चलि गयी । मनीषा को करवटे लेते हुए अचानक ख़याल आया की क्यों न अपने पिता के कमरे में जाकर उनसे बाते करे, रेखा बाथरूम से निकल कर अपने कपडे पहनने लगी।

“बेटी इतनी जल्दी है क्या” अनिल ने अपनी बहु को कपड़े पहनता हुआ देखकर कहा ।

“हाँ बाबू जी आप तो जानते ही हैं कोई आ गया तो फिर मुसीबत हो जाएगी” रेखा ने कपडे पहनने के बाद वहाँ से जाते हुए कहा । मनीषा जैसे ही अपने कमरे से निकलकर अपने पिता के कमरे में जाने लगी। उसने देखा की उसके पिता के कमरे से उसकी भाभी निकल रही है।

“भाभी आप कहाँ जा रही हो आओ बैठकर बाते करते है” मनीषा ने अपनी भाभी को अपने सामने देखकर कहा।

“नही दीदी मैं इतनी देर से बाबजी से बाते कर रही थी। अभी मुझे नींद आ रही है” रेखा ने मनीषा का जवाब देते हुए कहा ।

“भाभी ठीक है आप बापू से बाते करते हुए बुहत थक गयी होंगी जाकर आराम करो” मनीषा ने अपनी भाभी के बिखरे बालों को गौर से देखकर मुस्कराते हुए कहा। रेखा मनीषा की बात सुनकर वहां से जाने लगी मगर वह समझ गयी थी की मनीषा इसीलिए हँस रही थी क्योंकी उसको शक हो गया है।

मानिषा अपनी भाभी के जाने के बाद अपने बापू के कमरे में जाने लगी । अनिल ने अपनी बहु के जाते ही अपनी धोती पहन ली थी, मनीषा जाते हुए यह सोच रही थी की उसके बापू ने अभी अभी उसकी भाभी की सेवा की है तो वह तो थक गए होंगे । यह सोचते हुए मनीषा की चूत में भी कुछ कुछ होने लगा की जिस कमरे में वह जा रही है। वहां पर थोडी देर पहले उसका बाप उसकी भाभी को चोद चूका है ।

मानिषा अपने बापू के कमरे में आ गयी । अनिल धोती में बेड पर लेटे हुए था, मनीषा सीधा अपने बापू के बेड पर उसके पास जाकर बैठ गयी ।

“अरे बेटी तुम कब आई” अनिल ने अपनी बेटी को देखकर बेड से उठकर बैठते हुए कहा।

“हाँ बापू आपको अपनी बहु की सेवा से फुर्सत मिले तभी तो अपनी बेटी के बारे में सोचेंगे” मनीषा ने अपने बापू पर बनावटी गुस्सा करते हुए कहा ।

“नही बेटी ऐसी कोई बात नहीं । तुम मुझे अपनी बहु से ज्यादा अच्छी लगती हो” अनिल ने अपनी बेटी को जवाब देते हुए कहा।

“छोड़ो बापू सारा दिन अपनी बहु के पल्लु के पीछे छुपे रहते हो और हमारी झूठ मूठ की तारीफ कर रहे हो” मनीषा ने अपने बापू से कहा।

“अरे बेटी तुम तो सब जानती हो हम अपनी बहु को अपने इसके लिए प्यार करते हैं अब इस उम्र में भी यह हमें चैन से रहने नहीं देता” अनिल ने अपनी धोती के ऊपर अपने लंड पर हाथ रखते हुए कहा।

“हाँ लगता है इसे अपनी बहु का माल बुहत पसंद आ गया है। तभी तो हर वक्त आपको तंग करता रहता है” मनीषा ने हँसते हुए अपने बाप से कहा ।

“बेटी यह हमारी बहु ही नहीं बल्कि हर ख़ूबसूरत चीज़ को देखकर उसका स्वाद लेने के लिए उतावला हो जाता है” अनिल ने अपने लंड को अपने हाथ से सहलाते हुए कहा।

“फिर तो बापू आपके पास बैठने में भी खतरा है कहीं यह आपको अपनी बेटी का स्वाद लेने के लिए न भडका दे” मनीषा ने वेसे ही हँसते हुए कहा।

“बेटी मेरा ऐसा नसीब कहाँ की तुम्हारे जैसी ख़ूबसूरत लड़की का रस चख सकूँ, भगवान ने अगर तुम्हें हमारी बेटी न बनाया होता तो मैं एक बार ज़रूर तुम्हारा रस इसे पिलाता” अनिल ने मायूस होते हुए कहा ।

“बापु क्या सच में मैं आपको इतनी सूंदर लगती हूँ।” मनीषा ने हैंरान होते हुए कहा।

“हाँ बेटी तुम मुझे बुहत अच्छी लगती हो” अनिल ने अपनी बेटी को जवाब दिया।

“फिर आपके लिए हम कुछ भी कर सकते हैं हम आपकी बेटी हुई तो क्या हुआ । हम आपके इसकी ही पैदाइश हैं आपका हम पर पूरा हक़ है” मनीषा ने जज़्बाती होते हुए अपने बापू को गले लगाते हुए कहा।

“बेटी सच में तुम बुहत महान हो” अनिल ने अपनी बेटी के माथे पर चुम्बन देते हुए कहा । मनीषा को अपने बापू के बालों वाले सीने में अपनी चुचियों के दबने से बुहत सुकून मिल रहा था । इसीलिए वह अपने बापू को कस कर अपने सीने से लगा रही थी ।

“बेटी इस वक्त यह सब करना खतरनाक होगा हमें रात का इंतज़ार करना होगा, मगर बेटी यह सिर्फ मैं जानता हूँ की मुझसे यह दिन कैसे गुज़रेंगा” अनिल ने अपनी बेटी के पीठ को सहलाते हुए कहा।

हाँ बापू आप सही कह रहे हो हमें रात का इंतज़ार करना होगा” मनीषा ने यह कहते हुए अपने होंठ अपने सगे बाप के होंठो पर रख दिये । अनिल अपनी बेटी के गुलाबी सुलगते होंठो को अपने होंठो पर पड़ते ही पागलोँ की तरह चूमते हुए अपना मूह खोल कर उन्हें चाटने लाग। मनीषा की चूत उत्तेजना के मारे अपने बाप से होंठ चुसवाते हुए गीली होकर रस टपकने लगी ।

अनिल का लंड भी फिर से उठने लगा था, मनीषा को अपने पूरे जिस्म में अजीब किस्म की झूझुरी हो रही थी। उसने अपने हाथ को अपने बापू की धोती में डालकर उसका आधा तना हुआ लंड पकड लिया और अपने कोमल हाथों से उसे सहलाने लगी ।

“आहहहहह बेटी” अपनी बेटी का हाथ अपने लंड पर पड़ते ही अनिल के मूह से सिसकी निकल गई।

मानिषा ने अपने बापू के मूह में अपनी जीभ को डाल दिया जिसे अनिल अपने होंठो से चूस्ते हुए अपना एक हाथ अपनी बेटी के कपड़ों के ऊपर उसकी एक चूचि पर रख दिया।

“आह्ह्ह्ह शहहहहः” अपने बाप का हाथ अपनी चुचियों पर पड़ते ही मनीषा को एक करंट का झटका लगा । उसका सारा बदन अपने बाप के हाथ को अपनी चूचि पर लगते ही काम्पने लगा ।

“बापु हम आगे निकल रहे हैं इस वक्त यह सब ठीक नहीं होगा” अचानक मनीषा ने होश में आते हुए अपने बापू के लंड से हाथ हटा लिया और उससे अलग होते कहा । मनीषा यह कहकर अपने बाप के कमरे से निकल कर अपने कमरे में आ गयी ।

मानिषा अपने कमरे में आकर सोचने लगी के उसे क्या हो गया है। पहले वह अपने बेटे के साथ और अब अपने बापू के साथ बुहत गलत कर रही है वह। पर अचानक फिर उसका मन बदल गया और वह सोचने लगी इसे में बुरा ही क्या है । अगर उसका बेटा और उसका बाप उसे पसंद करते हैं तो इसमें उसका क्या क़सूर है ।।।। और वैसे भी उसे अपनी ज़िंदगी को कैसे भी जीने का हक़ है तो वह क्यों न अपनी ज़िंदगी का फुल मज़ा ले।

मानिषा ऐसे ही सोचते हुए सो गयी, रेखा भी अपने कमरे में आकर सुकून की नींद सो चुकि थी । ऐसे ही डेली की तरह टाइम गुज़रता गया और रात हो गई सभी खाना खाने के बाद सोने की तैयारी करने लगे ।

खाना खाने के बाद सभी अपने कमरों में आ गये थे।रेखा दोपहर की दो दफ़ा की चुदाई से बुहत संतुषिट थी इसीलिए वह अपने पति के साथ घोड़े बेचकर सोने लगी। नरेश विजय के सोने का इंतज़ार करने लगा की कब वह सो जाये और वह अपनी माँ के कमरे में जाकर दोपहर को छोड़ा हुआ अधूरा काम कर सके।

कंचन ने शीला से कहा की तुम जाकर जो मैंने कहा था वैसे करो। अगर हमारा आईडिया कामयाब हो गया तो हम दोनों अपने भाइयों के साथ फुल मस्ती कर सकती हैं, शीला कंचन की बात सुनकर वहां से उठकर विजय के कमरे में जाने लगी।

“क्या बात है शीला तुम इस वक्त यहाँ कैसे” नरेश अपनी बहन को अचानक अपने कमरे में देखकर हैंरान होते हुए बोला।

“वो भैया मुझे सर में बुहत दर्द है और कंचन बुहत खराटे मारती है । इसीलिए मुझे वहां पर नींद ही नहीं आ रही है” शीला ने कंचन की बतायी हुयी बात वहां पर कह दी ।

“शीला फिर तुम मम्मी के साथ सो जाओ” नरेश ने परेशान होते हुए कहा।

“नरेश ऐसा करते हैं मैं कंचन के साथ जाकर लेट जाता हूँ और तुम शीला को यहीं पर लेटने दो” अचानक विजय ने बीच में बोलते हुए कहा ।

“हाँ भैया आईडिया बुरा नहीं है” शीला ने भी विजय की बात को सुनकर कहा।

“बात तो ठीक है मगर किसी को पता चल गया तो वह गलत सोचेंगे” नरेश ने अपने सर को खुजाते हुए कहा।

“अरे किसी को की पता चलेगा, मैं सुबह को सवेरे आकर यहीं पर लेट जाऊँगा और शीला दीदी को अपनी बहन के कमरे में भेज दूंगा” विजय ने फिर से जल्दी से कहा।

“ठीक है भाई जैसे आपको अच्छा लगे करो” नरेश ने भी हार मानते हुए कहा।

“थैंक्स दीदी” विजय ने जल्दी से उठते हुए शीला को देखते हुए कहा और वहाँ से निकल कर अपनी दीदी के कमरे में आ गया । विजय ने अपनी दीदी के कमरे में आते ही दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया ।

कंचन नाइटी में बेड पर लेटी हुयी थी, अपने भाई के कमरे में दाखिल होते ही उसका दिल ज़ोर से धडकने लगा और उसने नाटक करते हुए अपनी आंखें बंद कर दी।

“दीदी में आ गया हूँ” विजय ने अपनी बहन के क़रीब आते ही बेड पर बैठते हुए कहा।

कंचन ने अपने भाई का कोई जवाब नहीं दिया, वह सीधा लेटी हुयी थी और उसकी सांसों के साथ उसकी चुचियां बुहत ज़ोर से हील रही थी।

“दीदी उठो न क्यों सता रही हो” विजय ने अपना हाथ अपनी बहन के लम्बे बालों में ड़ालकर उसे सहलाते हुए कहा । कंचन फिर भी चुप रही और अपने भाई को कोई जवाब नहीं दिया ।

“वाह हमारी दीदी कितनी सूंदर है । शायद दुनिया की सब से ख़ूबसूरत लडकी, सोते हुए भी कितनी प्यारी लग रही है” विजय समझ गया की उसकी बहन सोने का नाटक कर रही है।उसने अपने हाथ से अपनी बहन के बालों को सहलाते हुए उसकी तारीफ करते हुए कहा।

विजय ने अब अपना हाथ अपनी बहन के बालों से निकालते हुए उसके गोर गालों को सहलाते हुए उसके गुलाबी होंठो पर अपने होंठ रख दिये । अपनी बहन के नरन नरम गुलाबी होंठो पर अपना हाथ पड़ते ही विजय का लंड उसकी पेण्ट को फाड़ने के लिए उतावला होने लगा ।

कंचन वैसे ही सोने का नाटक कर रही थी, विजय अपनी बहन के होंठो पर अपने हाथ फिराने के बाद नीचे होता हुआ अपना हाथ उसके काँधे से नीचे ले जाते हुए अपनी बहन की चुचियों की तरफ बढ़ने लगा।

कंचन अपने छोटे भाई के हाथ से बुहत ज़्यादा उत्तेजित हो चुकी थी । उसकी साँसें बुहत तेज़ चल रही थी और उसकी चूत उत्तेजना के मारे पानी टपकाने शुरू कर दिया था । विजय अपना हाथ धीरे धीरे नीचे कर रहा था, अब उसका हाथ अपनी बहन की चुचियों के ऊपर बने क्लीवेज तक पुहंच चूका था ।

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