मेरा परिवार(दि फैमिली) Chapter 11
विजय अपनी माँ के चूतडो को उछालता हुआ देखकर अपने लंड को बुहत ज़ोर से अपनी माँ की चूत में अंदर बाहर करने लगा और रेखा भी बुहत ज़ोर से सिसकते हुए अपने चूतडो को उछाल उछाल कर अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में लेते हुए चुदवाने लगी । रेखा का पूरा जिस्म अपने बेटे से चुदवाते हुए पसीना पसीना हो गया था और उसका बदन अब अकडने लगा था। वह झरने के बिलकुल क़रीब थी ।
रेखा का बदन अचानक झटके खाने लगा और उसके मूह से ज़ोर की सिसकियां निकलने लगी । रेखा ने अपने दोनों हाथों को अपने बेटे के चूतडों में डालकर उसे अपनी चूत पर दबाने लगी, विजय भी अपनी माँ को इतना उत्तेजित देखकर पूरी ताक़त के साथ उसकी चूत में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा ।
“आआह्ह्ह्ह शहहहहह बेटे ओह्ह्ह्हह्ह्” रेखा के मुँह से बस इतना निकला और उसके नाख़ून उसके बेटे के चूतडों में घुस गये।
“उईई माँ” विजय भी अपनी माँ के नाखुनों को अपने चूतड़ों में घूसने से बुहत ज़ोर से चिल्लाते हुए पूरी ताक़त से अपने लंड को अपनी माँ की चूत में पेलने लगा । रेखा झरते हुए हवा में उड़ रही थी । उसे इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया था, अपने ससुर से चुदवाते हुए भी उसे इतना मज़ा नही आया था। क्योंकी उसके बेटे का जवान लंड उसकी चूत के हर हिस्से को बुहत ज़ोर और तेज़ी से रगड दे रहा था।
रेखा ने कुछ देर तक झरने के बाद अपने हाथ को अपने बेटे के चूतडो से हटाकर अपनी टांगों को उसकी कमर में फँसा दिया और अपने बेटे को अपनी टांगों से अपनी चूत पर दबाव देते हुए अपने चूतड़ उछालकर चुदवाने लगी । रेखा की आग एक बार झरने के बाद शांत होने की बजाये ज्यादा भडक गयी थी। इसीलिए वह चुदवाते हुए बुहत ज़ोर से सिसक भी रही थी ।
अचानक रेखा ने अपने बेटे को खींचकर अपने ऊपर गिरा दिया और उसे अपने नीचे करते हुए खुद उसके ऊपर आ गयी । रेखा ने यह सब इतनी चालाकी से किया था की उसके बेटे का लंड उसकी चूत में ही पडा रह गया।
रेखा अब अपने बेटे के लंड पर ज़ोर से उछलने लगी। विजय आराम से लेटे हुए अपनी माँ को अपने लंड पर उछलता हुआ देख रहा था, रेखा की बड़ी बड़ी चुचीयाँ अपने बेटे के लंड पर उछलते हुए बुहत ज़ोर से हिलते हुए इधर उधर झूम रही थी ।
विजय ने अपनी माँ की हिलती हुयी चुचियों को अपने हाथों से दबाने लगा । विजय कुछ देर तक अपनी माँ की चुचियों को दबाने के बाद उसकी कमर में हाथ डालकर नीचे झुकाते हुए अपनी माँ की चुचियों को एक एक करके चाटते हुए अपने चूतडों को बुहत ज़ोर से उछलते हुए अपनी माँ को चोदने लगा।
रेखा का जिस्म फिर से अकडने लगा और उसने अपने बेटे के मूह से चुचियों को निकालते हुए बुहत ज़ोर से उसके लंड पर उछलने लगी । रेखा का जिस्म कुछ देर में ही झटके खाने लगा और वह ज़ोर से हाँफते हुए दूसरी बार झरने लगी, रेखा दूसरी बार झरते हुए बुहत ज़ोर से अपने बेटे के लंड पर उछलते हुए सिसक रही थी ।
रेखा झरने के बाद अपने बेटे के ऊपर ढेर हो गयी, विजय भी अब झरने के क़रीब था वह अपनी माँ को अपने ऊपर से उठाकर सीधा लिटाते हुए अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया और 5 मिनट तक बुहत तेज़ी के साथ बिना रुके हुए उसे चोदता रहा।
“माँ मैं झरने वाला हूँ। माँ कहा झडूं” विजय ने अचानक ज़ोर से सिसकते हुए कहा।
“अपनी माँ की चूत में झरना बेटे । मैं तुम्हारा गरम वीर्य अपनी छुइ में महसूस करना चाहती हू” रेखा ने चिल्लाते हुए कहा।
“ओहहहहहहह माँ आअह्ह्ह्हह” विजय कुछ ही देर में ज़ोर से हाँफते हुए अपनी माँ की चूत में अपना वीर्य छोड़ने लगा, विजय ने झरते हुए अपना लंड पूरी ताक़त के साथ अपनी माँ की चूत में घुसा दिया जिस वजह से उसका वीर्य सीधा उसकी माँ की बच्चेदानी में गिरने लगा।
“आआह्ह्ह्हह बेटे ओह्ह्ह्हह्हह तुम्हारा वीर्य कितना गरम है ओहहह यह तो मेरी बच्चेदानी में गिर रहा है” रेखा भी अपने बेटे का वीर्य अपनी चूत में गिरने से तीसरी बार झरने लगी । दोनों माँ बेटे कुछ देर तक झरने का मज़ा लेने के बाद एक दुसरे की बाहों में ढेर हो गए ।
बेटे मैं तो शर्त हार गई” रेखा ने कुछ देर बाद होश में आते हुए कहा।
“तो क्या हुआ माँ। मैं सारी ज़िंदगी आपकी पूजा करता रहूँगा” विजय ने अपनी माँ से कहा और उसके होंठो को चूमने लगा।
“बेटे मुझे एक बात तुम्हें बतानी है मगर तुम यह बात किसी से नहीं कहोगे” रेखा ने अपने बेटे के होंठो से अपने होंठो को हटाते हुए कहा।
“माँ आप मुझ पर भरोसा कर सकती हो” विजय अपनी माँ की बात सुनकर सीरियस होते हुए कहा।
“बेटे तुम्हें पता है की तुम्हारे बापु मुझे खुश नहीं कर पाते । इसीलिए मैंने अपने जिस्म की आग बुझाने के लिए किसी से सम्बन्ध रखे थे जो हमारा अपना है” रेखा ने अपने बेटे की आँखों में देखते हुए कहा।
“कौन है वह माँ” विजय ने हैंरानी से कहा।
“तुम्हारे दादा” रेखा यह कहकर रुक गई।
“माँ दादा जी लेकिन वह तो बुहत बड़े हैं क्या वह आपको खुश कर पाते हे” विजय ने बड़ी हैंरानी से अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा।
“बेटा उनकी पत्नी को मरे हुए बुहत टाइम हो चुका है। इसीलिए वह भी मेरी तरह प्यासे थे और वह हमें तुम्हारे पिता से कहीं ज्यादा खुश करते है” रेखा ने अपने बेटे को बताते हुए कहा ।
“माँ क्या वह हमसे भी ज्यादा आपको खुश करते है” विजय ने अपनी माँ की आँखों में देखते हुए कहा।
“नही बेटा तुम्हारा जवान गरम खून उससे कहीं ज्यादा बेहतर है मगर हम तुम्हारे दादा से अपना रिश्ता ख़तम नहीं कर सकते क्योंकी उन्होंने मुझे बुहत खुश रखा है और अब मेरा फर्ज है की मैं भी उनका वैसे ही ख़याल रखूं” रेखा ने अपने बेटे को अपने ऊपर से उठाकर साइड में लिटाते हुए कहा।
“माँ मैं भी आपको कुछ बताना चाहता हू” विजय ने अपनी माँ की एक चूचि को पकडकर सहलाते हुए कहा।
“बताओ बेटे क्या बात है” रेखा ने भी अपने बेटे के ढीले लंड को अपनी मुठी में लेते हुए कहा।
“हाहहह माँ हम भी एक लड़की को चोद चुके हैं जो हमारी अपनी है” विजय अपनी माँ का हाथ अपने लंड पर पड़ते ही सिसकते हुए कहा ।
“क्या कहा बेटे तुम किसी को चोद चुके हो और वह भी कोई अपनी । कौन है मेरे लाडले वह?” रेखा ने एक्साइटेडट होकर अपने बेटे के लंड को ज़ोर से अपनी मुठी में दबाते हुए कहा।
“ओहहहह माँ वह वह मैं बड़ी दीदी कंचन को चोद चूका हू” विजय ने भी अपने लंड को इतना ज़ोर से दबने से ज़ोर से सिसकते हुए कहा।
“क्या। ओह मेरे भगवान मुझे यकीन नहीं हो रहा है, बेटे सिर्फ तुमने उसे चोदा है या वह पहले भी किसी से चुदवा चुकी है” अपने बेटे की बात सुनकर रेखा एक्साइटेडट होकर विजय के लंड को ज़ोर से दबाते हुए सहलाने लगी।
“उईए माँ नहीं उसने सिर्फ मुझसे चुदवाया है उनकी कुँवारी चूत की सील मैंने ही तोड़ी है माँ” विजय ने अपनी माँ के हाथ को ज़ोर से अपने लंड पर हिलता हुआ देखकर ज़ोर से चिल्लाते हुए कहा ।
“बेते तुम्हें कैसे पता चला की वह पहले नहीं चुदवा चुकी है” रेखा ने वेसे ही अपने बेटे के लंड को हिलाते हुए कहा । विजय का लंड अपनी माँ की हरक़तों से अब उठकर बड़ा और मोटा होने लगा था।
“माँ जब मैंने उसकी चूत में अपना लंड ड़ाला था तो वह बुहत चिल्लायी थी और उसकी चूत से बुहत खून भी बहा था” विजय ने अपनी माँ की चूचि को ज़ोर से दबाते हुए कहा।
“हाहहह बेटे शुकर है उसने सिर्फ तुमसे चुदवाया है घर की बात घर में ही है । वरना बदनामी का डर रहता, बेटे तुम उसे समझा देना की वह जब चाहे तुमसे चुदवाये मगर अपने घर से बाहर कभी चुदवाने की न सोचे” रेखा ने अपने बेटे के हाथों से अपनी चूचि को ज़ोर से दबाने से सिसकते हुए कहा।
“माँ उसने इसीलिए तो मुझसे चुदवाया क्योंकी वह डरती थी अपनी बदनामी से” विजय ने अपनी माँ की चुचियों को दबाते हुए कहा और अपनी माँ को खींचकर अपने ऊपर लिटा दिया, रेखा ने अपने बेटे के ऊपर आते ही उसके लंड को पकडते हुए अपनी गीली चूत पर रखा और अपने पूरे वजन के साथ नीचे बैठ गई ।
विजय का तना हुआ लंड उसकी माँ की चूत में सरकाता हुआ जड़ तक घुस गया और दोनों माँ बेटे के मूह से मज़े के मारे साथ में सिसकी निकल गई,
“बेटे मुझे तुम्हें कुछ और भी बताना है” रेखा ने अपने बेटे के लंड पर मस्ती से उछलते हुए कहा।
“हाँ बताओ न माँ” विजय ने अपनी माँ की चुचियों को ज़ोर से अपने हाथों में दबाते हुए कहा ।
“ओहहहह बेटा आराम से दबाओ । अब तो सारी ज़िंदगी यह तुम्हारे ही हाथों से मसलती रहेंगी” रेखा ने मस्ती में आकर ज़ोर से सिसकते हुए तेज़ी के साथ अपने बेटे के लंड पर उछलते हुए बोली । रेखा की चूत गीली होने के सबब उसके उचलने से थप थप की आवाज़ें पूरे कमरे में गूँजने लगी।
“माँ यह आवज़ कहाँ से आ रही है” विजय ने अपनी माँ की चूत में अपना लंड आने जाने की वजह से होने वाली आवाज़ सुनकर अपनी माँ से कहा ।
“ओहहहह बदमाश यह तुम्हारे मोटे लंड पर उछलने से मेरी गीली चूत से आवाज़ें आ रही है। बेटे में तो तुम्हारे लंड की दासी बन गई एक बार झरने के बाद भी कितना कड़क और मोटा है कितना मज़ा आ रहा है” रेखा ने अपने बेटे की बात सुनकर उत्तेजना में आकर और तेज़ी के साथ उसके लंड पर ऊपर नीचे होते हुए बोली।
विजय जानता था की उसकी माँ झरने के क़रीब है इसीलिए वह भी अपनी माँ के चूतड़ो में हाथ डालकर उसे अपने लंड पर तेज़ी के साथ उछालने में मदद करने लगा।
“आआह्ह्ह्ह बेटे मैं झर रही हू” अचानक रेखा का पूरा बदन अकडते हुए झटके खाने लगा और रेखा मस्ती में अपनी आँखें बंद करके अपने बेटे के लंड पर बुहत तेज़ी और ज़ोर के साथ ऊपर नीचे होते हुए झरने लगी।
रेखा की चूत ने झरते हुए अपने बेटे के लंड को दोनों तरफ से कस लिया जिस वजह से ऊपर नीचे होते हुए विजय का लंड रेखा को अपनी चूत में बुहत ज़ोर की रगड देने लगा । रेखा की चूत से जाने कितनी देर तक पानी बहता रहा और झरने के बाद वह अपने बेटे के ऊपर ढेर हो गई ।
“माँ आप कुछ बता रही थी” विजय ने अपनी माँ को कमर से पकडते हुए अपने चूतडो को हिलाकर चोदने लगा । इस पोजीशन में उसकी माँ की दोनों चुचियां बिलकुल उसके बेटे के मूह के ऊपर आ गयी। विजय अपनी माँ को चोदते हुए अपना मूह खोलकर अपनी माँ की चुचियों के दानों को बारी बारी चूसने लगा ।
“बेटे मै थक गयी हूँ में नीचे लेट जाती हूँ तुम ऊपर आ जाओ” रेखा ने अपने बेटे के हाथों को अपनी कमर से हटाकर उसके ऊपर से उठते हुए कहा । रेखा के नीचे उतरते ही विजय का लंड उसकी पानी से गीला होकर चमकता हुआ झटके खाने लाग, रेखा अपनी टांगों को फ़ैलाकर सीधी लेट गयी।
विजय अपनी माँ की टांगों के बीच आ गया । विजय ने देखा की उसकी माँ की बड़ी चूत बिलकुल फूलकर बाहर निकली हुयी थी और उसमें से बुहत पानी टपक रहा था।
“माँ आपकी चूत कितनी फूल गयी है। मुझे तो इसे चूमने का मन हो रहा है” विजय अपनी माँ की डबल रोटी की तरह सुजी हुयी चूत को देखकर अपना मूह अपनी माँ की चूत के क़रीब करते हुए कहा ।
“ओहहहह बेटा चूम लो तुम्हें किसने रोका है और यह तुम्हारे मोटे लंड का ही कमाल है जो यह इतना ज्यादा फूल गयी है” रेखा ने अपने बेटे की साँसों को अपनी चूत के क़रीब महसूस करके सिसकते हुए कहा।
“माँ इस में से तो मदहोश करने वाली गंध आ रही है” विजय अपनी माँ की चूत से अपने और उसके मिले जुले वीर्य से आती हुयी गंध को सूँघते हुए बोला और अपना मूह अपनी माँ की फूली हुयी चूत पर रख दिया,
“ओहहहहहह बेटे अपनी माँ की चूत को पूरा मूह में लेकर चूसो” रेखा अपने बेटे का मूह अपनी चूत पर महसूस करके ज़ोर से सिसकते हुए बोली ।
विजय अपनी माँ की चूत को अपने होंठो से चूमते हुए अपनी जीभ से चाटने लगा । विजय को अपनी माँ की चूत को चाटते हुए अजीब किस्म का स्वाद लगा महसूस हो रहा था, कुछ देर तक अपनी माँ की चूत को चाटने के बाद विजय अपना मूह खोलकर रेखा की चूत को पूरा अपने मूह में भर लिया और उसे ज़ोर से चाटते हुए अपने दांतों से हल्का हल्का काटने लगा।
“उई बदमाश खा जाओगे क्या अपनी माँ की चूत को” रेखा अपने बेटे के काटने से उछलते हुए बोली । विजय ने अपनी माँ की चूत से अपना मुँह हटा दिया और उसके ऊपर आते हुए अपना लंड उसकी चूत में घुसाकर चोदने लगा।
“बेटे मैं नरेश से भी एक बार चुदवा चुकी हूँ” रेखा ने अपने बेटे की पीठ में अपने हाथों को डालकर कहा।
“क्या कहा माँ नरेश से” विजय का लंड अपनी माँ की बात सुनकर उसकी चूत में इतनी तेज़ी से झटके खाते हुए फूलने लगा की रेखा के मूह से ज़ोर की सिसकियाँ निकलने लगी और वह अपने चूतडो को उछालकर अपने बेटे के लंड पर दबाने लगी ।
“हाँ बेटे तुम्हारी माँ की चूत में नरेश का लंड भी जा चूका है” रेखा ने अपने बेटे को जोश दिलाते हुए कहा।
“माँ बस करो मैं जान चूका हूँ तुम बड़ी छिनाल हो” विजय अपनी माँ की बात सुनकर पूरे जोश में आते हुए अपनी माँ की चूत में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा ।
“आह्ह्ह्ह्ह् बेटे आराम से” रेखा अपने बेटे के इतने तेज धक्कों से काँपते हुए बोली । विजय अपने लंड को पूरा बाहर निकालकर पूरी ताक़त के साथ अपनी माँ की चूत में पेल रहा था। जिस वजह से उसका पूरा जिस्म कांप रहा था और वह बुहत ज़ोर से सिसक रही थी ।
“क्यों छिनाल नरेश से चुदवाते हुए मज़ा नहीं आया जो अपने बेटे से ही चूत मरवा रही हो” विजय ने गुस्से में आकर अपनी माँ को चोदते हुए कहा।
“ओहहहह बेटे जो मज़ा तुम दे रहे हो वह कहाँ दिया उसने” रेखा ने ज़ोर से सिसकते हुए कहा । विजय ने अचानक अपनी माँ की चूत से अपना लंड निकाल दिया और उसे पकडते हुए उल्टा लिटा दिया ।
“साली रंडी अब मैं तुझे कुतिया की तरह चोदुँगा” विजय ने अपनी माँ को उलटा करने के बाद उसके मोटे चूतडों पर थप्पड़ मारते हुए अपना लंड एक ही झटके में पूरा जड़ तक उसकी चूत में घुसा दिया।
“आआह्ह्ह्ह बेटे धीरे मैं तो सारी ज़िंदगी तुम्हारी कुतिया बनकर रहने को तैयार हू” रेखा ने एक ही झटके में विजय का मोटा लंड पीछे से अपनी चूत में घूसने से सिसकते हुए कहा।
“साली कुतिया नखरे तो ऐसे कर रही हो जैसे पहली बार चुदवा रही हो” विजय ने अपनी माँ को वैसे ही बेदरदी से चोदते हुए कहा।
“यआह्ह्ह्ह बेटे कुतिया की चूत में गधे का लंड घुसाओगे तो उसकी गांड तो फटेगी” रेखा ने अपने बेटे की बात सुनकर ज़ोर से सिसकते हुए कहा ।
“साली मुझे गधा कहती हो लगता है तुम्हारी गांड फाड़नी ही पडेगी” अपनी माँ की बात सुनकर विजय का ध्यान पहली बार अपनी माँ की भूरी गांड की तरफ गया। जिसे देखते हुए उसका लंड ज्यादा फूलने लगा।
“बेटे तुम्हें क्या हो गया है तुम्हारा लंड अचानक इतना मोटा कैसे हो गया है” रेखा ने सिसकते हुए कहा
“साली रंडी इतनी गोरी गांड है कभी किसी से मरवाई भी है या ऐसे ही रखा हुआ है” विजय ने अपनी एक ऊँगली को अपने मुँह में डालकर थूक से गीला करते हुए अपनी माँ की गांड के छेद में ज़ोर से घुसाते हुए कहा।।
“उईई साले कुते मेरी चूत से मन नहीं भरा जो अपनी ऊँगली को मेरी गांड में डाल दिया” रेखा ने ज़िंदगी में सिर्फ एक दो बार गांड मरवाई थी अपने पति से । लेकिन उसको बुहत टाइम हो गया था इसीलिए अपने बेटे की ऊँगली के घुसते ही वह दर्द के मारे तडपते हुए बोली ।
“साली रंडी टाइट माल छुपा रखा है और अपनी खुली हुयी चूत मस्त होकर चुदवा रही हो” विजय ने वेसे ही अपनी ऊँगली अपनी माँ की चूत में घुसाए उसकी चूत में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा । रेखा की गांड का दर्द कुछ ही देर में ग़ायब हो गया और वह मज़े की एक नयी दुनिया की सैर करते हुए अपने चूतडों को पीछे धकलते हुए अपने बेटे से चुदवाने लगी ।
“साली छिनाल मज़ा आ रहा है न अपने दोनों छेदो को भरा हुआ पाकर” विजय ने अपनी माँ की चूत को चोदते हुए अपनी ऊँगली को भी उसकी गांड में अंदर बाहर करने लगा।
“ओहहहहहह बेटे क्या आज मेरी जान ही ले लोगे क्या इसशहहह बुहत मज़ा आ रहा है ऐसे ही करते रहो” रेखा अपने दोनों छेदों में रगड पाते ही मज़े से सिसकते हुए बोली।
“आह्ह्ह्ह साली छिनाल मैं झरने वाला हूँ । बोल कहाँ झडुँ कहे तो तेरी गांड में ही अपना वीर्य भर दूँ” विजय ने सिसकते हुए बुहत तेज़ी के साथ अपनी माँ को चोदते हुए कहा।
“नही बेटे मेरी चूत में अपना वीर्य छोड। वरना मेरी चूत की आग ठण्डी नहीं होगी” रेखा ने ज़ोर से चिल्लाते हुए कहा।
“तो ले छिनाल ओह्ह्ह्हह में झर रहा हू” विजय अपनी माँ की बात सुनकर अपनी ऊँगली को पूरा उसकी गांड में ड़ालकर ज़ोर से सिसकार कर झरते हुए कहा ।
विजय का पूरा जिस्म झडते हुए मज़े से कांप रहा था। उसको अपना लंड अपनी माँ की चूत में बुहत कसा हुआ महसूस हो रहा था । जिस वजह से उसे बुहत ज्यादा मज़ा आ रहा था और उसके लंड से ज्यादा वीर्य निकल रहा था।
“उईईए आहहह बेटे मैं भी झर रही हूँ । ज़ोर से अपना लंड घुसाओ” विजय का गरम गरम वीर्य अपनी चूत में पड़ते ही रेखा भी अपनी आँखें बंद करते हुए अपने चूतडों को विजय के लंड पर दबाने लगी । विजय भी अपना लंड बुहत ज़ोर से अपनी माँ की रस बहाती चूत में अंदर बाहर करते हुए पूरी तरह झरने के बाद उसके ऊपर ही ढेर हो गया ।
विजय को अपने ऊपर गिरने से रेखा भी लडख़ड़ाते हुए बेड पर ढेर हो गई और विजय का लंड सिकूड़ कर उसकी माँ की चूत से निकल गया और उसकी चूत से रस निकल कर बेड पर गिरने लगा । विजय अपनी माँ के ऊपर से उठते हुए उसके साइड में लेट गया, रेखा भी अपने बेटे के हटते ही सीधा होकर लेट गयी ।
विजय उठकर बाथरूम में जाने लगा । उसने देखा उसकी माँ अपनी टाँगें फ़ैलाकर लेटी हुयी थी और उसकी चूत का छेद चुदाई से सुज कर बिलकुल लाल होकर खुला हुआ था। जिस में से उसकी माँ का और खुद उसका पानी निकल कर बेड पर गिर रहा था।
“माँ अपनी चूत तो देखो कैसे खुल गयी है” विजय ने बाथरूम की तरफ जाते हुए अपनी माँ की चूत की तरफ देखकर हँसते हुए कहा।
“हँस बेटा हँस। इसकी ऐसी हालत भी तुमने ही की है, मैं अपनी पूरी ज़िंदगी तुम्हारी यह चुदाई नहीं भुला पाऊँगी” रेखा ने अपने बेटे को हँसता हुआ देखकर अपनी टांगों को सिकोड़कर अपनी चूत को छुपाते हुए कहा ।
“बेटा एक और बात बताओ । मैं बाहर तुम्हारे पिता का पीछा करते हुए गयी थी और जो मैंने देखा मुझे अब तक उसका इतबार नहीं हो रहा है तुम्हारे पिता अपनी बहन मनीषा को चोद रहे थे” रेखा ने विजय के बाथरूम से लौट कर आने के बाद कहा।
“माँ लगता है यहाँ पर सभी किसी न किसी आग में जल रहें हैं । इसीलिए तो सब जिसे दिल में आये उसे चोद रहें है” विजय ने अपनी पेण्ट पहनते हुए कहा।
“बेटा तुमने किसे देखा है?” रेखा ने अपने बेटे की बात सुनकर हैंरानी से पूछा।
“माँ क्या बताऊँ । नरेश अपनी बहन और माँ दोनों को चोद चूका है” विजय ने अपनी पेण्ट पहनने के बाद कहा।
“विजय क्या कहा शीला को न । मुझे तो देखते ही वह आग का समुन्दर लग रही थी” रेखा ने ठण्डी आहहह भरते हुए कहा।
“हाँ माँ शीला साली छिनाल अपने भाई से चुदवाने के बाद भी मुझ पर डोरे डाल रही थी” विजय ने अपनी शर्ट को भी पहनते हुए कहा ।
“विजय एक बात तो बताओ तुम्हारी और नरेश की छोटी बहनें तो अभी तक बची हुयी हैं या वह भी किसी से चुदवा चुकी है” रेखा ने अपने बेटे की बातें सुनने के बाद उससे पूछा।
“नही माँ वह दोनों तो बुहत शरीफ हैं । उन्हें अभी टाइम लगेगा चुदवाने में” नरेश ने सारे कपड़े पहनने के बाद कहा।
“अरे बेटा लंड का स्वाद ऐसा है की यह जब एक बार चुदवा ली तो फिर इनकी सारी शर्म वरम गुम हो जाएगी” रेखा ने बेड से उठकर अपनी नाइटी को पहनते हुए कहा ।
“माँ आप कहाँ जा रही हो” विजय ने अपनी माँ को उठता हुआ देखकर कहा।
“बेटा तुम्हारे साथ एक बार तुम्हारे पिता को देख लूँ। उनका दिल भरा या नही” रेखा ने अपनी नाइटी पहनने के बाद अपने बेटे के साथ बाहर आते हुए कहा ।
दोनों माँ बेटे जैसे ही मनीषा के कमरे के पास पुहंचे तो उन्हें एक आवज़ सुनायी दी।
“हाहहह भैया अब बस करो न मैं तो आपसे चुदवाते हुए 5 बार झर चुकी हूँ ।अब मुझसे और नहीं होगा” मनीषा अपनी भाई से कह रही थी।
“आआह्ह्ह्ह दीदी बस मैं आया ओह्ह्ह्हह ” मुकेश शायद झड़ रहा था ।
“देखा बेटे अपने बाप का कमाल अपनी पत्नी को तो चोदता नहीं और अपनी बहन को छोडता नहीं। चलो मुझे तो बुहत नींद आ रही है तुम भी जाकर सो जाओ” रेखा ने हँसकर कहा अपने बेटे से कहा और दोनों वहां से जाते हुए अपने अपने कमरों में चले गए ।
विजय जैसे ही कमरे में दाखिल हुआ उसने देखा कंचन सो रही थी । विजय भी बुहत थक चूका था । वह भी अपनी दीदी के साइड में जाकर सो गये, रेखा अपने कमरे में आकर सोने की कोशिश करने लगी तभी उसका पति भी कमरे में दाखिल हुआ जिसे देखकर रेखा अपनी आँखें बंद करके सोने का नाटक करने लगी। मुकेश भी अपनी पत्नी के साइड में आकर सो गया।
रेखा को भी कुछ ही देर में नींद आ गयी और वह भी खराट्टे लेते हुए सोने लगी, शीला अपने भाई नरेश से दो दफ़ा चुदवा चुकी थी इस दौरान शीला 4 बार झडी थी। और अब वह भी थक हार कर अपने भाई के साथ नंगी ही लिपट कर सो गयी थी । कंचन की अचानक आँख खुली वह उठकर बाथरूम में मूतने के बाद वापस आकर टाइम देखी तो सुबह के ५ बज रहे थे उसने सोचा अपने भाई को उठाकर अपने कमर में भेज दे कहीं उसकी माँ को न कुछ पता लग जाए।
“कंचन ने जैसे ही अपने भाई के ऊपर से कम्बल को हटाया वह अपने भाई का अंडरवियर में खडा लंड देखकर गरम हो गई और कम्बल को साइड में करते हुए अपने भाई को बिना उठाये उसके अंडरवीयर को खींचकर उसके जिस्म से नीचे सरका दिया ।
अंडरवियर के हटते ही विजय का लंड नंगा होकर कंचन की आँखों के सामने झटके खाने लगा । कंचन की साँसें अपने भाई के खडे लंड को देखकर ज़ोर से चलने लगी, कंचन अपनी नाइटी को उतारते हुए अपने पूरे कपड़े उतारकर बिलकुल नंगी हो गयी।
कंचन ने नंगा होते ही अपने भाई के खडे लंड को अपनी मुठी में पकरते हुए आगे पीछे करने लगी और अपने दुसरे हाथ से अपनी चूत को सहलाने लगी । कंचन का जिस्म कुछ ही देर में बिलकुल गरम होकर आग बन गया, कंचन ने अब अपना मूह नीचे करते हुए अपनी जीभ निकालकर अपने भाई के लंड के गुलाबी सुपाडे पर फिराने लगी ।
विजय अपने लंड पर जीभ के लगते ही थोडा उछला मगर फिर वह नींद की ख़ुमारी में चला गया । कंचन कुछ देर तक अपने भाई के लंड को अपनी जीभ से चाटने के बाद मूह खोलते हुए अपने भाई का लंड जितना हो सकता था उतना अपने मूह में ले लीया और अपने होंठ के बीच लेकर चूसने लगी, विजय अपने भाई के लंड को चाटते हुए अपनी जीभ से उसके छेद को भी चाटने लगी ।
विजय की नींद अपने लंड को अपनी बहन के गरम मुँह में महसूस करके टूटने लगी, उसने अपनी आखों को खोलते ही देखा की उसकी बहन उसका लंड चाट रही है । कंचन ने अब अपने भाई के लंड को अपने मूह से निकालते हुए अपनी टांगों को फ़ैलाकर उसके लंड को अपनी छूट के छेद पर टीका दिया और अपने वजन के साथ नीचे बेठते हुए अपने भाई के लंड को अपनी चूत में घुसाने लगी ।
कंचन के नीचे बैठते ही उसके भाई का लंड उसकी चूत में घूसने लगा ।अपने भाई के लंड को अपनी चूत में लेते हुए कंचन को थोडा दर्द हो रहा था मगर जो मजा उसे महसूस हो रहा था उसके सामने वह दर्द कुछ भी नहीं था, कंचन अपने भाई का आधा लंड अपनी चूत में घुसाने के बाद उसपर अपने चूतड़ो को उछालते हुए अंदर बाहर करने लगी।
कंचन अपने भाई के लंड पर उछलते हुए बुहत ज़ोर से साँसें लेते हुए सिसक रही थी । कंचन की चूत भी गरम होकर गीली होने लगी और वह अपने भाई के लंड पर उत्तेजना के मारे बुहत तेज़ी और ताक़त के साथ उछलने लगी जिस वजह से विजय का लंड पूरा उसकी बहन की चूत में घुसकर अंदर बाहर होने लगा ।
कंचन अपनी चूत में अपने भाई का पूरा लंड घूसने की वजह से मज़े के मारे हवा में उड़ रही थी और बुहत तेज़ी के साथ अपने भाई के लंड पर उछल रही थी। विजय की नींद टूट चुकी थी वह बस चुप चाप पडे हुए अपनी बहन को अपने लंड पर उछलते हुए देख रहा था । कंचन का जिस्म अचानक अकडने लगा और वह पागलोँ की तरह अपने भाई के लंड पर कूदने लगी।
“आह्ह्ह्ह भैया ओहहहहहहः” कंचन अपने भाई को जागता हुआ देख चुकी थी इसीलिए वह काँपते हुए अपने भाई को देखते हुए ज़ोर से सिसक कर झरने लगी । विजय अपनी बहन को झरते हुए देखकर अपने हाथों से अपनी बहन के चूतड़ो को पकडकर अपने लंड पर दबाने लगा ।
कंचन की चूत से जाने कितना पानी बहकर विजय के लंड को गीला करने लगा । कंचन पूरी तरह झरने के बाद अपने भाई के ऊपर ढेर हो गयी।
“दीदी लगता है आपकी तबीयत बिलकुल अच्छी हो गई है” विजय ने अपनी बहन की चुचियों को दबाते हुए कहा।
“चल बदमाश” कंचन इतना कहकर अपना मुँह अपने भाई के मूह पर रख दिया और दोनों भाई बहन एक दुसरे के होंठो और जीभों से खेलने लगे।
विजय अपनी बहन की जीभ को चाटने से बुहत गरम हो गया । विजय ने अपनी बहन को कमर से पकडते हुए अपने ऊपर से उठाते हुए सीधा लिटा दिया और उसकी टांगों के बीचे आते हुए उसकी चूत में अपना लंड घुसाकर उसे पेलने लगा । विजय अपनी बहन की चूत में अपना लंड अंदर बाहर करते हुए उसके ऊपर झुक कर उसकी जीभ को निकालकर चूसने लगा ।
विजय का लंड अपनी बहन की जीभ को चूस्ते हुए उत्तेजना के मारे और ज्यादा फूलकर उसकी चूत में अंदर बाहर होने लगा और विजय का पूरा जिस्म एक नए मज़े के अहसास से सिहरने लगा । कंचन का भी मज़े के मारे बुरा हाल था। उसे इतना ज्यादा मज़ा आ रहा था की वह अपनी टांगों को अपने भाई की कमर में डालकर अपने चूतड़ो को उछाल उछाल कर उसके लंड को अपनी चूत में लेते हुए सिसक रही थी।
विजय भी अपनी बहन के सिसकने से अपना लंड पूरी तेज़ी और ताक़त के साथ उसकी चूत में अंदर बाहर करने लगा । कंचन ने अपनी बाहों को अपने भाई के पीठ में डालकर उसके पीठ को सहलाने लगी । कुछ ही देर में विजय का पूरा जिस्म काम्पने लगा और उसने अपनी बहन की जीभ को अपने मूह से निकालते हुए अपनी जीभ को उसके मूह में डाल दिया, कंचन समझ गयी की उसका भाई झडने वाला है इसीलिए वह उसकी जीभ को पकडकर अपने होंठो से चूसने लगी।
विजय का जिस्म अब झटके खाने लगा और वह अपने लंड को अपनी बहन की चूत से पूरा निकाल कर इतनी ज़ोर के साथ कंचन की चूत में पेलने लगा की उसका पूरा जिस्म भी अपने भाई के साथ काम्पने लगा । विजय के लंड से वीर्य की पिचकारियां निकलकर उसकी बहन की चूत में गिर रही थी और विजय ने झरते हुए अपनी जीभ को पूरा अपनी बहन के मुँह में घुसा दिया था ।
कंचन अपने भाई का गरम वीर्य अपनी चूत की गहराइयों में गिरने से खुद भी मज़े के मारे अपने भाई के पीठ पर अपने नाखूनों को गडाते हुए अपने चूतडों को उछलकर झरने लगी । कंचन झडते हुए अपने भाई की जीभ को बुहत ज़ोर से चूस रही थी, विजय को इतना जयादा मज़ा आया था और उसके लंड से इतना वीर्य निकला था की वह उसकी बहन की चूत से निकलकर नीचे गिर रहा था।
विजय पूरी तरह झरने के बाद अपनी बहन के ऊपर ढेर हो गया और उसका लंड सिकूड़ कर उसकी बहन की चूत से निकल गया । विजय का लंड निकलते ही कंचन की चूत से उसका और विजय का मिला जुला वीर्य बेड पर गिरने लगा, कंचन ने अपने होंठ अपने भाई की जीभ से हटा लिए थे और वह बुहत ज़ोर से हांफ रही थी ।
विजय भी अपना सर अपनी बहन की बड़ी और नरम चुचियों पर रखकर हांफ रहा था।
“विजय अब जाओ यहाँ से सुबह हो गई है कहीं मम्मी न आ जाए” कंचन ने अपने भाई की पीठ को सहलाते हुए कहा।
“आह्ह्ह्ह दीदी पहले ज़ख़्म देती हो और फिर उसको सहलाती हो” विजय अपनी बहन का हाथ अपने पीठ पर लगने से दर्द के मारे सिसकते हुए बोला । कंचन ने झरते हुए अपने नाखुनों को अपने भाई की पीठ पर गडा दिया था । यह वही ज़ख़्म था।
“जखम मैंने क्या किया भाई” कंचन ने अन्जान बनते हुए कहा।
“वाह जब झर रही थी तो पता चला की यह जो इतने बड़े नाख़ून बना रखे हैं। यह मेरी पीठ में गडा रही हो” विजय ने अपनी बहन की एक चुची को सहलाते हुए कहा।
“सॉरी भैया मुझे पता ही नहीं चला था । मैं आगे से ख़याल रखूँगी” कंचन ने अपने भाई की बात सुनकर हँसते हुए कहा ।
“चलो ठीक है । मैं बुहत थक गया हूँ थोडा सा दूध पिला दो” विजय ने अपनी बहन की बड़ी और गोरी चुचियों को देखते हुए कहा।
“चल बदमाश अभी इन में दूध नहीं है” कंचन ने अपने बहन की बात सुनकर शरमाते हुए कहा।
“क्यों दीदी यह इतनी बड़ी तो हैं। इन में ज़रूर दूध होगा आप मुझसे झूठ बोल रही हो” विजय ने यह कहते हुए अपनी दीदी की एक चूचि को अपने मुँह में भर लिया और बुहत ज़ोर से चूसने लगा।
“ओहहहहहह बदमाश आराम से मैंने कहा न इनमें दूध नहीं है” कंचन अपनी चूचि को विजय के मुँह में ज़ोर से चूसने से दर्द के मारे चिल्लाकर कहा ।
वाह दीदी इन में दूध तो नहीं है मगर यह दूध के बगैर ही बुहत मीठे है” विजय ने अपनी दीदी की चूचि से अपना मुँह हटाकर अपने होठो पर जीभ को फिराते हुए कहा।
“चल बदमाश अब जा” कंचन ने अपने भाई की बात सुनकर उसे धक्का देते हुए शरमाकर कहा ।
“दीदी मगर इनमें अब तक दूध क्यों नहीं आया” विजय अपनी बहन की आँखों में देखते हुए बोला।
“अरे पगले लड़की की चुचियों में दूध तभी आता है जब वह शादी के बाद बच्चे की माँ बनती है” कंचन ने विजय को समझाते हुए कहा।
“लेकिन दीदी मुझे आपकी प्यारी चुचियों का दूध पीना है” विजय ने अपनी बहन की बात सुनकर बच्चे की तरह ज़िद करते हुए कहा।
“चल बदमाश जब मेरी शादी हो जाये और में बच्चे की माँ बन जाओं तो यहाँ आकर तुम्हें अपना दूध पी ला जाऊंगी” कंचन ने अपने भाई की तरफ देखते हुए कहा।
“दीदी आप एक काम क्यों नहीं करती। मेरे बच्चे की माँ बन जाओ” विजय ने मुसकुराकर अपनी बहन की तरफ देखते हुए कहा।
“कमीने अपनी बहन को चोद कर मन भरा नहीं जो उसे अपने बच्चे की माँ बनायेगा। क्या मैंने तुझसे इसीलिए चुदवाया था की तेरे बच्चे की माँ बनकर सारे ज़माने के सामने शरमिंदा होती रहुँ” कंचन ने अपने भाई की बात सुनकर गुस्सा करते हुए कहा।
“नही दीदी मैं आपको शरमिंदा नहीं करना चाहता” विजय ने अपनी बहन की बात सुनकर कहा।
“तो फिर क्या चाहता है। जब मैं बिना शादी के माँ बनूँगी तो सभी उँगलियाँ उठाएँगे” कंचन ने अपनी भाई को समझाते हुए कहा।
“ये बात तो ठीक है मगर मैं आपको अपने बच्चे की माँ बनाना चाहता हू” विजय ने अपनी दीदी की तरफ देखते हुए कहा ।
“ठीक है जब मेरी शादी हो जाये तो मैं अपने पेट से पहला तुम्हारा एक बच्चा जनूँगी जो सिर्फ तुझे और मुझे पता होगा” कंचन ने अपने भाई की बात सुनकर सोचते हुए कहा।
“हाँ दीदी यह ठीक है किसी को शक भी नहीं होगा आई लव यू दीदी” विजय अपनी बहन की बात सुनकर खुश होते हुए बोला।
“ठीक है विजय अब तुम जाओ कहीं माँ न आ जाए” कंचन ने अपने भाई को मिन्नत करते हुए कहा।
“ठीक है दीदी में जा रहा हू” विजय अपने कपडे पहनकर वहां से जाते हुए अपने कमरे के पास आकर दरवाज़ा खटखटाने लगा ।
नरेश ने आज अपनी बहन को जी भरकर चोदा था। इसीलिए वह गहरी नींद में सोया हुआ था । शीला भी अपनी कमसीन जवानी को अपने भाई के तगडे लंड से मसलवाने के बाद सुकून से सोयी हुयी थी, दरवाज़ा के खटकाने से शीला की नींद ही टूट गयी और वह नींद से जागते हुए उठकर दरवाज़े की तरफ जाने लगी।
शीला ने जैसे ही दरवाज़ा खोला उसके सामने विजय खडा था।
“भइया सुबह हो गई क्या?” शीला ने विजय को देखकर अँगड़ाई लेते हुए कहा । विजय जहाँ खडा था वहीँ पर बूत बनकर वैसे ही खडा रह गया क्योंकी शीला विजय के सामने बिलकुल नंगी खडी थी । वह नींद के नशे में यह भूल गयी थी की रात को अपने भाई से चुदाने के बाद वह नंगी ही सो गयी थी ।
“क्या हुआ भाई आओ न अंदर ऐसे क्या देख रहे हो” शीला ने विजय को अपनी तरफ ऐसे घूरता हुआ देखकर कहा।
“वो दीदी आपके कपडे” विजय के मूह से बस इतना ही निकल पाया । शीला कपड़ों का नाम सुनकर जैसे ही अपने आप को देखा उसके पेरों के नीचे से ज़मीन निकल गयी। वह बिलकुल नंगी होकर विजय के सामने खडी थी।
“भइया आपको शर्म नहीं आती इतनी देर से मेरे नंगे शरीर को घूर रहे हो और बताते भी नही” शीला ने जल्दी से अपनी नाइटी को उठाकर पहनते हुए विजय को डाँटते हुए कहा।
“दीदी आपको देखकर मेरी बोलती ही बंद हो गई थी” विजय ने शरारती मुसकान के साथ कहा ।
“च भला ऐसा क्या नज़र आ गया तुमको मेरे शरीर में” विजय की बात सुनकर शीला ने विजय के बिलकुल क़रीब आते हुए कहा।
“अब क्या कहुँ। होंठो से लेकर पैरों तक तो तुम्हारी हर चीज़ ख़ूबसूरत है फिर मैं किस चीज़ की तारीफ करुं” विजय ने भी बिलकुल मूड में आकर शीला की तारीफ करते हुए कहा।
“भइया सच में में आपको इतनी अच्छी लगती हू” शीला विजय की बातों से गरम होते हुए उसके बिलकुल क़रीब आ गयी थी । शीला विजय से बिलकुल सट कर खडी थी। जिस वजह से उसकी साँसें बुहत ज़ोर से चल रही थी और उसकी तेज़ साँसें विजय को अपनी साँसों के बिलकुल नज़दीक महसूस हो रही थी ।
“दीदी आप हो ही इतनी सूंदर की मुझे क्या हर किसी को आप अच्छी ही लगेंगी” विजय ने मौके का फ़ायदा उठाते हुए आगे होकर अपना मूह शीला के मूह से बिलकुल सटा दिया।
“दीदी आपके होंठ कितने गुलाबी और रसीले हैं मन करता है इनका सारा रस पी जाऊं” विजय ने अपने हाथों से अपनी बहन के सर को पकडते हुए कहा।
“तो पियो न भैया” शीला ने अपनी जीभ को अपने होंठो पर फिराते हुए कहा । विजय का लंड उसकी पेण्ट में बुहत ज़ोर से उछल रहा था। शीला के इस अन्दाज़ को वह बर्दाशत नहीं कर सका और अपने तपते होंठ अपनी बहन के सुलगते हुए होंठो पर रख दिये ।
विजय शीला के दोनो होंठो को चाटते हुए अपने हाथों से उसके बालों को सहलाने लगा । शीला तो खुद भी यही चाहती थी उसने अपनी जीभ को निकालकर अपने भाई के मूह में डाल दिया, विजय शीला की जीभ को अपने मूह में महसूस करते ही बुहत ज्यादा उत्तेजित होते हुए उसकी जीभ को चाटने लगा।
शीला ने अपना हाथ नीचे ले जाकर विजय की पेण्ट में तने हुए लंड को पकडते हुए ज़ोर से मसल दिया।
“आह्ह्ह्हह्ह दीदी क्या कर रही हो” विजय अपने लंड को मसलने से दर्द के मारे शीला की जीभ को अपने मूह से निकालकर चीखते हुए कहा ।
“सॉरी भैया पर मुझे कंचन के कमरे में जाना होगा सुबह हो गई है” शीला ने विजय से अलग होते ही एक अदा से मुस्कराते हुए कहा।
“दीदी जैसे आपकी मर्ज़ि” विजय शीला की बात सुनकर हैंरान होते हुए बोला।
“आई लव यू भैया” शीला ने जाते हुए विजय के लंड को फिर से पकडते हुए मसल दिया और यह कहकर हँसते हुए वहां से चलि गयी।
विजय शीला को देखते ही रह गया । उसे समझ में नहीं आ रहा था की क्या करे । शीला के जाते ही विजय ने दरवाज़ा बंद किया और नरेश के साथ वहीँ सो गया ।
रेखा ने सुबह उठते ही अपने पति को उठाया और उसे नाश्ता कराके ऑफिस के लिए भेज दिया ।
रेखा ने अपने बच्चों को ४-५ दिन की छुट्टी लेकर घर में ही रहने के लिए कहा था क्योंकी मनीषा और उसके बच्चे घर में थे और इसी लिए रेखा ने किसी को नहीं उठाया सिर्फ अपने पति को उठाकर ऑफिस भेज दिया।
रेखा अपने पति को ऑफिस भेजने के बाद सीधा अपने ससुर के कमरे में चलि गयी । रेखा दरवाज़ा खोलकर जैसे ही अंदर दाखिल हुयी अनिल बेड पर सीधा लेटा हुआ था और उसकी चादर उसके ऊपर से हटी हुयी थी, अनिल का लंड उसकी धोती में ही तंबू बना हुआ था।
रेखा अपने ससुर के पास बैठ गयी और उसकी धोती को उसके लंड से हटा दिया । धोती के हटते ही अनिल का लम्बा और मोटा लंड ऊपर नीचे झटके खाते हुए रेखा को सलामी देने लगा।
रेखा का मन सुबह सुबह अपने ससुर का लंड देखकर खराब होने लगा और उसने अपना हाथ आगे बढाते हुए अपने ससुर के झटके खाते हुए लंड को पकड लिया।
रेखा का पूरा जिस्म अपने ससुर के लंड को पकडने से कांप उठा। क्योंकी वह बुहत ज्यादा कड़क और गरम था । रेखा ने अपने ससुर के लंड को थोडी देर तक अपने हाथ से सहलाने के बाद नीचे झुकते हुए अपने ससुर के लंड के गुलाबी सुपाडे को चूम लिया ।
रेखा अपने ससुर के लंड को चूमने के बाद अपनी जीभ निकालकर उसके गुलाबी सुपाडे को चाटने लगी । रेखा कुछ देर तक अपने ससुर के लंड के सुपाडे को चाटने के बाद अपनी जीभ से अपने ससुर के पूरे लंड को ऊपर से नीचे तक चाटने लगी।
“आह्ह्ह्ह कौन । अरे बेटी तुम कब आयी?” अनिल अपने लंड में हरकत होने पर अपनी आँखें मलकर उठते हुए बोला।
“बाबुजी में अभी आई हूँ अब आपकी तबीयत कैसी है” रेखा ने अपनी जीभ को अपने ससुर के लंड से हटाकर सीधा होते हुए कहा ।
रेखा की जीभ के चाटने से अनिल का लंड बिलकुल साफ़ होकर चमका रहा था।
“बेटी अब कुछ बेहतर महसूस कर रहा हू” अनिल ने रेखा को बाज़ू से खीचते हुए अपने ऊपर गिराते हुए कहा।
“आह्ह्ह्ह क्या हुआ बापु” रेखा सीधा अपने ससुर के ऊपर गिर गयी और उसकी चुचियां सीधा अनिल के सीने में दब गयी जिस वजह से उसने सिसकते हुए कहा।
“बेटी मुझे तेरा दूध पिए हुए बुहत दिन हो गये हैं। देखो कितना कमज़ोर हो गया हू” अनिल ने अपनी बहु की साड़ी का पल्लु हटाते हुए कहा और उसके ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी बहु की चुचियों के उभारों को चाटने लगा।
“आह्ह्ह्ह बापु आप इनका दूध पिएँ और जल्दी से ठीक हो जायें” रेखा ने अपने ब्लाउज को खोलकर ब्रा को अपनी चुचियों से नीचे करते हुए कहा ।
“बेटी तुम मेरा कितना ख्याल करती हो” अनिल ने यह कहते हुए अपनी बहु की एक चूचि को पकडकर अपने मूह में डाल दिया और उसे बुहत ज़ोर से चूसने लगा। रेखा का पूरा जिस्म अपने ससुर के मूह में अपनी चूचि के जाने से सिहरने लगा और उत्तेजना के मारे रेखा ने गरम होते हुए अपने हाथों से अपने पेटिकोट को अपने जिस्म से हटाकर अपनी पेंटी को भी नीचे सरका दिया।
रेखा की चूत से उत्तेजना के मारे पानी टपक रहा था।
“आहहहह बापु एक मींनट” रेखा ने अपनी चूचि को अपने ससुर के मूह से निकालकर अपनी टांगों को फ़ैलाकर अपने ससुर के खडे लंड पर बैठ गयी । अनिल का लंड उसकी बहु की चूत में सरकता हुआ पूरा घुस गया ।
“आह्ह्ह्ह बाबू जी” रेखा अपने ससुर का पूरा लंड घुसते ही ज़ोर से सिसकते हुए उसके ऊपर झुक गयी। अनिल अपनी बहु की चूत में अपना लंड घुसते ही उत्तेजित होते हुए रेखा के चुचियों को एक एक करके बुहत ज़ोर से चूसने लगा और अपने चूतडो को उछालकर अपनी बहु को चोदने लगा।
“ओहहहह बापु आज आपका लंड इतना गरम क्यों है” रेखा ने अपनी चुचियों को चुसवाते हुए अपनी चूत में अनिल का लंड अंदर बाहर होने से उत्तेजना के मारे अपने चूतडो को उछालते हुए अपने ससुर का लंड अपनी चूत में लेते हुए सिसकार कर कहा।
“बेटी इसमें दो दिन की बीमारी की वजह से बुहत ज्यादा आग भर गयी है। इसीलिए यह बुहत गरम है” अनिल ने अपनी बहु की बात सुनकर अपने चूतडों को ज़ोर से उछालते हुए अपना लंड अपनी बहु की चूत में जड़ तक अंदर बाहर करते हुए कहा ।
“हाहहह बाबू जी तो आज अपनी सारी आग हमारी चूत में भर दो” रेखा अपने ससुर की बात सुनकर अपनी चूचि को उसके मूह से निकालते हुए सिसककर बुहत ज़ोर से अपने ससुर के लंड पर उछलते हुए बोली। अनिल अपनी बहु की बड़ी बड़ी चुचियों को जो उसके लंड पर उछलते हुए ज़ोर से हिल रही थी। उन्हें अपने हाथों में लेकर मसलने लगा ।
“हाहहह बेटी माफ़ करना मगर मैं झरने वाला हू” अनिल ने कुछ ही देर में सिसकते हुए अपनी बहु की चुचियों को ज़ोर से दबाते हुए कहा।
“बापु बस एक मिनट मैं भी झरने के क़रीब हू” रेखा अपने ससुर की बात सुनकर उसके लंड पर बुहत ज़ोर से उछलते हुए सिसकने लगी।
“ओहहहह बेटी आआह मैं झर रहा हू” अचानक अनिल अपने चूतडो को ज़ोर से उछलते हुए अपनी बहु की चूत में पानी छोड़ने लगा।
“आआह्ह्ह्ह बाबू जी आपका वीर्य ओह्ह्ह्हह कितना गरम है आहह मैं भी झर रही हुँ” रेखा भी अपने ससुर के लंड से निकला हुआ गरम वीर्य अपनी चूत में गिरने से सिसक कर झरने लगी । रेखा झरते हुए अपने ससुर के लंड पर पागलो की तरह उछालने लगी और पूरी तरह झरने के बाद अपने ससुर के ऊपर ही गिरकर हाँफने लगी ।
रेखा कुछ देर तक अपने ससुर के ऊपर ही पडे रहने के बाद उसके होंठो पर एक चुम्बन लेते हुए उसके ऊपर से उठ गयी।
“बाबू जी आप नहा कर फ्रेश हो जाओ । मैं आपके लिए नाशते का इन्तज़ाम करती हू” रेखा अपने कपडे पहनने के बाद वहां से जाते हुए कहा ।
रेखा अपने ससुर के कमरे से निकलने के बाद अपने कमरे में घुस गयी और नहाने के बाद नाश्ता बनाकर अपने ससुर के कमरे में चलि गई।
“बेटी मुझे बुहत ख़ुशी हो रही है की मुझे तुम जैसी बहु मिली जो मेरा इतना ख्याल रखती है” अनिल ने अपनी बहु को नाश्ता रखते हुए देखकर कहा।
“बाबू जी आप नाश्ता कर लो मुझे काम है” रेखा नाश्ता रखने के बाद वहां से चलि गयी । रेखा ने अपने ससुर के कमरे से निकलते ही सभी को उठा दिया और खुद उनके लिए नाश्ता तैयार करने लगी, नाश्ता तैयार करने के बाद रेखा टेबल पर लगाने लगी। सभी नाश्ते की टेबल पर आ चुके थे ।
नाश्ता ख़तम करने के बाद सभी उठकर अपने कमरों में चले गए । विजय अपनी माँ को बर्तन उठाने में मदद करने लगा और सारे बर्तन किचन में रखने के बाद खुद एक कुर्सी ले कर किचेन में अपनी माँ के पास बैठ गया ।विजय वहां पर बैठे हुए अपनी माँ से बाते करने लाग।
“बेटा खाना खाने के बाद मुझे डॉक्टर के पास जाना है तुम भी साथ चलना” रेखा ने बर्तन धोते हुए अपने बेटे से कहा।
“क्यों माँ आपको क्या हुआ है” विजय अपनी माँ की बात सुनकर हैंरान होते हुए बोला।
“कुछ नहीं बेटा मुझे बच्चा रोकने वाला इंजेक्शन लगवाना है जो मैं हर ३ महीने बाद लगवाती हूँ । कहीं बच्चा हो गया तो फिर उसे गिराने में बुहत तकलीफ़ होगी” रेखा ने अपने बेटे को जवाब देते हुए कहा ।
“माँ इंजेक्शन मत लगवाओ। मैं आपसे एक बच्चा चाहता हू” विजय ने अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा।
“अरे बेटे कहीं पागल तो नहीं हो गये हो। यह कोई उम्र है मेरी बच्चा जनने की। इतना ही शौक़ है तो खुद शादी कर लो” रेखा ने अपने बेटे की तरफ देखकर हैंरान होते हुए कहा
माँ किस डॉक्टर के पास चलना है?” विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर उससे पूछा।
“हमारे फैमिली डॉक्टर रवि मल्होत्रा” रेखा ने अपने बेटे से कहा।
“माँ मैंने सुना है वह बुहत ठरकी किस्म का डॉक्टर है। कहीं वह आपको इंजेक्शन की जगह कोई दूसरी चीज़ न लगा दे” विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर हँसते हुए कहा ।
“बेशर्म वह हमारे फैमिली डॉक्टर है और अपनी माँ से ऐसी बाते करते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती” रेखा ने अपने बेटे की बात सुनकर उसको डाँटते हुए कहा।
“माँ मुझे क्या पता मैंने भी लोगों से ही सुना है की वह लेडी पेशेंटस का इलाज बड़े अच्छे तरीके से करते है” विजय ने वैसे ही मुस्कराते हुए कहा।
“चल बदमाश जा सब्ज़ि लेकर आ। मुझे अभी बुहत काम है” रेखा ने अपने बेटे की बात सुनकर उसे डाँटते हुए कहा । विजय अपनी माँ की बात सुनकर वहां से उठते हुए सब्ज़ि लेने बाहर चला गया, रेखा जानती थी की उसका बेटा सही कह रहा है । वह अपने बेटे की बात को याद करते हुए ख्यालों में चली गयी ।
रेखा उस दिन हमेशा की तरह रवि की क्लिनिक में इंजेक्शन लगवाने के लिए गयी थी । रेखा ने आज लाल रंग की नयी साड़ी पहनी हुयी थी और बुहत सजी संवरी हुयी थी । वह उस ड्रेस में किसी दुल्हन से कम नहीं लग रही थी, रेखा जैसे ही क्लिनिक में दाखिल हुयी उसने देखा आज वहां पर कोई ज्यादा भीड़ नहीं थी और डॉ रवि आज बिलकुल अकेले बैठे थे।
डॉ रवि की उम्र कुछ ज्यादा नहीं थी। वह ३० साल का एक नौजवान हॅडसम डॉ था । रवि की हाइट ५।६ इंच रंग बिलकुल गोरा और दिखने में बिलकुल किसी एक्टर की तरह हॅंडसम था।
“हल्लो भाभी जी आइये क्या हाल है” रेखा को देखते ही रवि ने कुर्सी से उठते हुए अपने दाँत निकालते हुए कहा।
“जी मैं बिलकुल ठीक हू” रेखा ने रवि को देखकर मुस्कराते हुए जवाब दिया और वहां पर पडी एक कुर्सी पर बैठ गई।
“भाभी आपकी तबीयत कैसी है और आप क्या लेंगी ठण्डा या गरम?” रवि ने घण्टी बजाकर अपने पिओन को बुलाते हुए रेखा से पूछा।
“जी शुक्रिया बस मैं वह इंजेक्शन लगवाने आई थी” रेखा ने अपनी साड़ी के पल्लू से अपने माथे को पोछते हुए कहा । गर्मी की वजह से रेखा के मूह से पसीना बह रहा था।
“दो कोक ले आओ बुहत गर्मी है” रवि ने रेखा का पल्लू उसकी चुचियों से हटने की वजह से उसकी चुचियों के उभारों को जो उसके ब्लाउज से थोडे बाहर निकले हुए थे । उन्हें घूरकर अंदर आये हुए पिओन को मुस्कराते हुए आर्डर दिया ।
“भाभी आप यह इंजेक्शन क्यों लगवाती हैं । अभी आपकी उम्र क्या है” रवि ने रेखा को घूरते हुए कहा।
“डॉ जी 3 बच्चे काफी हैं मेरे लिए और उनकी परवरिश पे भी धयान देना है” रेखा ने रवि की बात सुनकर उसे जवाब देते हुए कहा।
“अरे वाह भाभी जी क्या बात कही है। अगर यह सोच इंडिया की सारी औरतों में आ जाये तो हमारी आबादी जो इतनी तेज़ी से बढ़ रही है कुछ कम हो जाए” रवि ने रेखा की बात सुनते ही उसकी तारीफ करते हुए कहा। तभी वह पिओन दो कोक लेकर आ गया और वहां टेबल पर रखते हुए वापस बाहर चला गया ।
“भाभी आप भी लिजीये बुहत गर्मी है” रवि ने एक कोक उठाते हुए रेखा से कहा । रेखा ने भी एक कोक उठाया और आराम से पीने लगी।
“डॉ साहब अब जल्दी से इंजेक्शन लगा दो हमें देर हो रही है” रेखा ने कोक को ख़तम करते ही वापस टेबल पर रखते हुए कहा।
“हाँ भाभी जी अभी लगा देते हैं आप वहां जाकर आराम से लेट जाए” रवि ने रेखा को बिस्तर की तरफ लेटने का इशारा करते हुए कहा । जहाँ पर वह अपने पेशेंटस का चेकअप करते थे । रेखा रवि की बात सुनकर जाकर सीधा वहां पर लेट गयी ।
रवि ने वहां पर लगाये हुआ पर्दा नीचे कर दिया और रेखा का ब्लड प्रेशर चेक करने लगा।
“भाभी आपका ब्लड प्रेशर तो बिलकुल ठीक है” रवि रेखा का ब्लड प्रेशर चेक करने के बाद अपने स्टेथोप को रेखा की चुचियों पर उसकी साड़ी के ऊपर से ही रखते हुए हुए उसका चेकअप करने लगा।
रवि जान बूझकर अपने स्टेथोप को रेखा की चुचियों पर ज़ोर से दबा रहा था । रेखा अपनी चुचियों पर स्टेथोप को ज़ोर से दबने से बुहत ज़ोर की साँसें ले रही थी। क्योंकी स्टेथोप के दबाब से रेखा भी गरम हो रही थी।
“भाभी सब कुछ ठीक है आप उल्टा लेट जाएँ । मैं इंजेक्शन लगा देता हू” रवि ने कुछ देर तक रेखा के चुचियो को अपने स्टेथोप से दबाने के बाद वहां से उठकर अपने माथे से पसीने को पोछते हुए कहा ।
“डॉ जी आज वह लड़की नहीं है क्या” रेखा को हर बार यहाँ पर एक लड़की नर्स इंजेक्शन लगाती थी। आज रवि से इंजेक्शन लगाते हुए उसे कुछ अजीब लग रहा था इसीलिए उसने रवि से पूछा।
“भाभी वह आज छुट्टी पर है आपको कोई प्रॉब्लम है?” रवि ने इंजेक्शन अपने हाथ में उठाते हुए कहा।
“नही डॉ साहब ऐसे ही पूछ रही थी” रेखा रवि की बात सुनकर शर्म के मारे उल्टा सोते हुए बोली। रवि ने रेखा के उल्टा होते ही उसकी साड़ी को पकडकर ऊपर खीँच दिया और इंजेक्शन को रेखा के पेटिकोट के ऊपर से ही उसके चूतड़ में घुसा दिया ।
“ओहहहहः” रेखा के मुँह से न चाहते हुए भी एक हलकी चीख़ निकल गई।
“बस भाभी हो गया आपकी स्किन बुहत नरम है। इसी लिए आपको ज्यादा दर्द हो रहा है” रवि ने इंजेक्शन को रेखा के चूतड़ो से निकालते हुए उसकी चिकनी गोरी जांघों को घूरते हुए कहा।
रेखा रवि को अपनी नंगी जांघों की तरफ देखते हुए पाकर जल्दी से उठते हुए अपनी साड़ी को सीधा कर दिया । रेखा रवि की पेण्ट की तरफ देखकर हैंरान रह गयी क्योंकी वहां पर बुहत बड़ा तम्बू बना हुआ था। रेखा समझ गयी थी की वह रवि का लंड है मगर इतना बड़ा तम्बू लगता था उसका लंड बुहत बड़ा है ।
माँ मैं सब्ज़ि ले आया” विजय की आवाज़ से रेखा अपने ख्यालों से निकली।
“क्या हुआ माँ आप चोंक क्यों गई” विजय ने अपनी माँ के चौकने से हैंरान होते हुए कहा।
“कुछ नहीं मैं तेरे अचानक आने से चोंक गई” रेखा ने रवि के हाथ से सब्ज़ि लेते हुए कहा।
“माँ मैंने सुना है यह बच्चा रोकने वाला इंजेक्शन औरत के चूतडो में लगता है” विजय ने अपनी माँ की तरफ शरारती मुसकान के साथ देखते हुए कहा।
“हाँ लगता है तो फिर” रेखा ने अपने बेटे की तरफ देखते हुए कहा।
“माँ फिर तो डॉ रवि इंजेक्शन लगाते हुए आपके गोरे और मांसल चूतडो को जी भरकर देखता होगा । बेचारे की हालत ही ख़राब हो जाती होगी” विजय ने अपनी माँ को देखकर मुस्कराते हुए कहा ।
“बदमाश वह मुझे नंगा करके इंजेक्शन नहीं लगाता पेटिकोट के ऊपर से लगाता है और आज तुम घुमा फिरा कर डॉ की बात क्यों कर रहे हो” रेखा ने अपने बेटे को गुस्से से देखते हुए कहा।
“माँ ऐसे ही मैंने डॉ रवि की इतनी तारीफ सुनी थी। इसीलिए मुझे शक हो रहा था की कहीं आप का उस से” विजय यह कह कर चुप हो गया।
“कमीने क्या तुमने अपनी माँ को रंडी समझ रखा है जो वह हर किसी से चुदवाती रहेगी” रेखा अपने बेटे की इस बात से बुहत ज्यादा गुस्सा करते हुए बोली।
“नही माँ मैंने आपको रंडी कब कहा। मैं बस आपसे पूछ्ना चाहता था। अगर आपको दुःख पुहंचा हो तो सॉरी” विजय ने अपनी माँ से माफ़ी माँगते हुए कहा।
“बेटा मैंने तुमसे कोई बात नहीं छुपायी है । फिर तुम मुझ पर शक कैसे कर सकते हो” रेखा ने अपने बेटे की बात सुनकर उसे समझाते हुए कहा।
“माँ ठीक है। मैं आज के बाद आप पर शक नहीं करुंगा” विजय अपनी माँ की बात सुनते हुए बोला।
“माँ आप खाना बनाओ मैं अपने कमरे में जा रहा हू” अचानक विजय ने कुर्सी से उठते हुए कहा।
“क्यों बेटा अपनी बड़ी बहन की याद आ गयी क्या?” रेखा ने विजय को उठते हुए देखकर उसे टोकते हुए कहा।
“माँ आप भी इस वक्त भला मैं कुछ कर सकता हू” विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर मुस्कराते हुए कहा।।
“बेटा क्या पता आजकल के लड़के और लड़कियाँ बुहत फास्ट है” रेखा ने वेसे ही मुस्कराते हुए कहा।
“माँ अब बस करो । मैं जा रहा हू” विजय अपनी माँ की बात सुनकर मुस्कराते हुए बोला।
“बेटा कंचन को इधर भेज देना। खाना बनाने में मेरी मदद करेगी” रेखा ने विजय को जाता हुआ देखकर कहा।
ठीक है माँ” विजय इतना कहता हुआ वहां से चला गया । विजय ने अपनी बहन को किचन में भेज दिया और खुद अपने कमरे में आकर लेट गया।
“कंचन बेटी क्या हुआ टांगों में दर्द है क्या” रेखा ने कंचन को धीरे धीरे आता हुआ देखकर मुस्कराते हुए कहा ।
“हाँ माँ में बाथरूम में गिर गयी थी” कंचन ने झूठ बोलते हुए कहा।
“अरे बेटी अगर दर्द था तो फिर क्यों आई। जाओ जाकर आराम कर लो रात को भी फिर से तुम्हें” रेखा इतना कहकर चुप हो गयी।
“नही माँ मैं आपकी मदद करती हूँ और रात को क्या?” कंचन अपनी माँ की बात सुनकर चौकते हुए बोली।
“बेटी रात को काम करने की बात कर रही थी” रेखा ने बात को बदलते हुए कहा।
“बेटी मैंने सुना है कॉलेज में आजकल बुहत गन्दा माहॉल चल रहा है। यह छोड़े लड़कियों के पीछे ही पड़ जाते हैं ज़रा ख्याल रखना” रेखा ने काम करते हुए अपनी बेटी से कहा।
“माँ मैं छोटी बच्ची नहीं हूँ और भैया भी तो मेरे साथ है” कंचन ने अपनी माँ की बात सुनकर उसे समझाते हुए कहा ।
“बेटी अगर तुम बच्ची होती तो चिंता नहीं होती। यही तो चिंता है की तुम बड़ी हो गई हो और अगर तुम बहक गयी तो हमारी सारी इज्ज़त मिटटी में मिल जाएगी। विजय अगर तुम्हारे साथ न होता फिर तो और ज्यादा चिंता होती” रेखा ने अपनी बेटी की बात सुनते ही कहा।
माँ मैं जानती हूँ आप मुझ पर भरोसा रखो” कंचन ने अपनी माँ को तसल्ली देते हुए कहा।
“ठीक है बेटी। बस अपना ख्याल रखना” रेखा ने अपनी बेटी को देखते हुए कहा और फिर दोनों माँ बेटी मिलकर खाना तैयार करने लगी ।
विजय जैसे ही अपने कमरे में पुहंचा वहां पर कोई नहीं था । उसने सोचा जब तक उसकी माँ नाश्ता बना ले तब तक वह फ्रेश हो जाये । वैसे भी उसे अपनी माँ के साथ डॉ के पास जाना था । विजय अपने सारे कपड़े उतारकर बाथरूम में घुस गया और शावर ऑन करके नहाने लगा, इधर शीला अकेले बैठे हुए बोर हो रही थी नरेश भी उसे बताकर बाहर गया हुआ था ।
शीला अचनाक वहां से उठते हुए बाहर आ गयी और अपनी माँ के कमरे में जाने लगी । शीला की नज़र जैसे ही विजय के कमरे पर गयी वह हैंरान रह गयी क्योंकी दरवाज़ा खुला हुआ था, शीला ने सोचा जाकर देख ले कहीं नरेश वापस तो नहीं आ गया और यह सोचते हुए शीला विजय के कमरे की तरफ जाने लागी।
शीला जैसे ही कमरे में अंदर दाखिल हुयी उसे वहां पर कोई दिखाई नहीं दिया वह वापस मुड़ने वाली ही थी के उसकी नज़र विजय पर पडी जो सिर्फ अंडरवियर में था और टॉवल से अपना बदन पोछते हुए बाथरूम से निकल रहा था । शीला विजय के गठीले गोरे बदन को देखकर हैंरान रह गयी।
“शीला दीदी आप कब आई” विजय की नज़र जैसे ही शीला पर पडी। उसने टॉवल को लुंगी की तरह बाँधते हुए हडबडाकर कहा ।
“भइया आप तो लड़कियों की तरह शर्मा रहे हो” शीला विजय को हड़बड़ाता हुआ देखकर उसके क़रीब जाते हुए बोली।
“वो दीदी में नहा रहा था” विजय शीला के क़रीब आने से वैसे से हडबडाते हुए बोला।
“भइया आपकी बॉडी तो बुहत बढिया है” शीला ने अपना हाथ उठाते हुए विजय के सीने पर रख दिया और उसके सीने के बालों को सहलाने लगी ।
“हाहहह दीदी क्या कर रही हो मुझे कपडे पहनने दो” विजय शीला का नरम हाथ अपने सीने के बालों पर पड़ते ही सिसककर काँपते हुए कहा।
“भइया आप ऐसे ही बुहत अच्छे लगते हो । कपडे पहनने की क्या ज़रुरत है” शीला ने अपने हाथ को विजय के सीने से नीचे लाते हुए उसके हाथ पर रख दिया जिससे वह टॉवल पकडे हुए था।
शीला का हाथ अपने हाथ पर पड़ते ही विजय के हाथ से उसका टॉवल छूट कर नीचे गिर गया और विजय का लंड जो उसके अंडरवियर में अब तक तम्बू बना चूका था । शीला की आँखों के सामने आ गया।
“ओहहहह भैया यह अंडरवियर में इतना बड़ा क्या छुपा रखा है” शीला की आँखें विजय के बड़े और मोटे लंड को अंडरवियर में तम्बू बनाये हुए देखकर चमक उठी और वह अपना हाथ विजय के अंडरवियर की तरफ ले जाते हुए बोली ।
दीदी कुछ नहीं है” विजय को जाने क्या हो गया था । वह शीला के हाथ को अपने लंड की तरफ आता हुआ देखकर पीछे हटने लगा।
“भइया आप झूठ बोल रहे हैं । आपने वहां पर ज़रूर कुछ छुपाये है” शीला भी विजय के के पीछे होने से आगे बढते हुए बोली।
“दीदी वहां पर कुछ नहीं है यह मेरा वह है” विजय ने पीछे हटते हुए अपना हाथ अपने अंडरवियर के आगे लाते हुए कहा।
“वो क्या भैया ज़रा हमें भी तो देखने दो” शीला ने अपने भाई के हाथों को पकडकर उसके अंडरवियर के आगे से हटाते हुए कहा।
“दीदी यह हमारा लंड है” अचानक विजय के मूह से निकल गया।
“भइया इतना बड़ा और मोटा। आप झूठ बोल रहे हो मैंने भैया का देखा है वह तुम्हारे जितना लम्बा और मोटा नहीं है” शीला ने विजय की बात सुनकर अपना हाथ आगे बढ़कर विजय के लंड को उसके अंडरवियर के ऊपर से ही पकडते हुए कहा।
“आआह्ह्ह्ह दीदी” शीला का नरम हाथ अपने लंड पर पड़ते ही विजय के मूह से ज़ोर की सिसकी निकल गई,
“आह्ह्ह्ह भैया यह तो सच में आपका लंड है। हमें माफ़ कर दो” शीला का पूरा जिस्म विजय के लंड को पकडने से कांप उठा और उसने विजय के लंड को अंडरवियर के ऊपर से सहलाते हुए कहा ।
“दीदी आप थोडी देर इसे सहलाओ ना” विजय ने सिसकते हुए कहा।
“भइया नहीं यह ठीक नहीं है” शीला ने अचानक विजय के लंड को छोड दिया और वापस जाने लगी।
“साली रंडी जब कह रहा था की इसे मत पकडो तो भागते हुए इसे पकड लिया और अब गलत होने का नाटक कर रही है” विजय ने शीला को वापस जाते हुए देखकर उसे पीछे से पकडकर अपने आप से सटाते हुए कहा।
“भइया आप क्या कह रहे हो । छोड़ो मुझे आपका मेरे चूतडों में चुभ रहा है” शीला ने अपने आपको विजय से छुड़ाने का नाटक करते हुए कहा । विजय से सटकर खडा होने की वजह से उसका अंडरवियर में बना तम्बू शीला के चूतडों में चुभ रहा था ।
“साली चुभ रहा है तो क्या हुआ तेरी गांड में तो नहीं घुस रहा है” विजय ने अपने हाथ को शीला के नंगे चिकने पेट पर फिराते हुए कहा।
“भइया आप बुहत गंदे हो मुझे छोड़ो” शीला को भी अब मज़ा आने लगा था और वेसे भी वह सिर्फ अपने मूह से यह सब कह रही थी ताकी विजय यह न समझे की वह बेचारी इसके लिए पहले से राज़ी है। वैसे तो वह भी यही चाहती थी।
विजय ने अपने एक हाथ को शीला के पेट पर रखे ही उसे थोडा नीचे झुका दिया और अपने दुसरे हाथ से उसकी साड़ी को थोडा ऊपर कर दिया । शीला का पूरा वजन विजय के हाथ पर था और साड़ी के ऊपर होने से शीला के बड़े बड़े चूतड़ सिर्फ पेटिकोट में विजय की आँखों के सामने आ गये थे, विजय ने अब अपने अंडरवियर को अपने हाथ से नीचे सरका दिया और अपने नंगे फनफनाते हुए लंड को शीला के चूतडों में डालकर धक्के लगाने लगा ।
“आआह्ह्ह्हह भइया क्या कर रहे हो । छोड़ो न मुझे” शीला अपने भाई के नंगे लंड को अपने चूतडो पर धक्के लगाने से सिसकते हुए बोली।
“क्यों रंडी मज़ा नहीं आ रहा क्या” विजय ने अब अपने लंड से ज़ोर से शीला के चूतडो पर धक्के मारते हुए कहा।
“आह्ह्ह्ह भैया आप गाली क्यों दे रहे हो छोड़ो मुझे” शीला को भी अब बुहत मजा आ रहा था। मगर वह नाटक करते हुए विजय से छोड़ने को कह रही थी ।
अचानक बाहर से किसी के क़दमों की आवाज़ आई।
“भइया कोई आ रहा है प्लीज मुझे छोड़ो” शीला ने क़दमों की आवाज़ सुनकर सीधा होकर विजय को मिन्नत करते हुए कहा । विजय को भी पता था की अगर ऐसी हालत में उन्हें किसी ने देख लिया तो गज़ब हो जायेगा। इसीलिए उसने शीला के पेट से अपना हाथ हटा लिया।
शीला विजय का हाथ हटते ही उस कमरे से निकल गयी । दरवाज़े से बाहर आते ही उसने देखा की कंचन आ रही थी।
“शीला तुम यहाँ क्या कर रही थी?” कंचन ने शीला को विजय के कमरे में देखकर हैंरानी से पूछा।
“दीदी मैं नरेश को देखने आई थी। मगर वह यहाँ नहीं है” शीला ने झूठ बोलते हुए कहा ।
“दीदी वह तो बाहर है आप भी जाओ खाना लग चूका है । मैं भैया को बुलाकर लाती हू” कंचन ने शीला को बताते हुए कहा । शीला कंचन की बात सुनकर बाहर जाने लगी और कंचन विजय के कमरे में दाखिल हो गयी, विजय शीला के साथ इतना सब कुछ करके बुहत गरम हो चुका था। कंचन को वहां देखते ही उसने उसे अपनी बाहों में भर लिया।
“अरे भाई क्या हुआ छोड़ो मुझे । कोई आ जायेगा बाहर खाने पर सब हमारा इंतज़ार कर रहे है” कंचन ने विजय से छूटने की कोशिश करते हुए कहा।
“दीदी बस दो मिनट वरना मैं मर जाऊँगा” विजय ने कंचन के सलवार के नाडे को खोलते हुए कहा ।
कंचन ने आज सलवार कमीज पहन रखी थी नाड़ा खुलते ही कंचन की सलवार ज़मीन पर जा गिरी। कंचन कुछ समझ पाती इससे पहले विजय ने उसकी पेंटी को भी नीचे सरकाते हुए उसे नीचे झुका दिया और अपना अंडरवियर नीचे करते हुए अपने खडे लंड को सीधा अपनी बहन की चूत में घुसा दिया।
“ओहहहह भैया आज आपको क्या हो गया है आह्ह्ह्ह आराम से कोई आ जायेगा” कंचन अपनी चूत में विजय के लंड को अचानक घूसने और धक्के मारने से दर्द के मारे चिल्लाते हुए बोली।
“दीदी मुझे माफ़ कर दो मगर मैं बर्दाशत नहीं कर सकता” विजय वैसे ही ज़ोर से अपनी बहन की चूत में अपना लंड अंदर बाहर करते हुए कहा ।
कंचन कुछ धक्कों के बाद ही गरम होकर अपने भाई का साथ देने लगी और अपने चूतडों को उसके लंड पर दबाने लगी । 25-30 धक्कों के बाद ही विजय ज़ोर से हाँफते हुए अपनी बहन की बुर में झरने लगा।
“आह्ह्ह्ह भैया ओह्ह्ह्हह आहह विजय का वीर्य अपनी चूत में गिरते ही कंचन भी चिल्लाते हुए झरने लगी । विजय का लंड पूरी तरह झरने के बाद सिकूड़कर कंचन की चूत से निकल गया और कंचन विजय से अलग होते हुए अपनी सलवार को पहनते हुए बाथरुम में घुस गई।
“भइया अब जल्दी करो । कोई आ जायेगा बाहर खाना लग चूका है” कंचन ने बाथरूम से निकलते हुए कहा।
“दीदी आप जाओ मैं अभी आया” विजय अपनी बहन की बात सुनकर बाथरूम की तरफ जाते हुए कहा। कंचन अपने भाई की बात सुनकर कमरे से निकल गयी।।
“कंचन क्या हुआ इतनी देर लगा दी” रेखा जो कंचन को बुलाने आ रही थी उसने कंचन को देखकर कहा।
“माँ भैया नहा रहे थे अभी आ रहे है” कंचन ने अपनी माँ को देखकर कहा।
“बेटी क्या तुम एक्सरसइज़ कर रही थी?” रेखा ने कंचन को देखते हुए कहा।
“नही माँ क्यों?” कंचन ने हैंरान होते हुए कहा।
“अरे बेटी तुम इतना हांफ रही हो और तुम्हारा पूरा बदन भी पसीने से भीगा हुआ है इसीलिए पूछ रही हू” रेखा ने कंचन को टोकते हुए मुसकुराकर कहा।
“ओह माँ वो” कंचन को कुछ सूझ नहीं रहा था की वह क्या कहे।
“ठीक है बेटी तुम आ जाओ आजकल के बच्चे भी कोई टाइम ही नहीं देखते” रेखा ने मुसकुराकर जाते हुए कहा । कंचन अपनी माँ की बात को सुनकर खाने की टेबल की तरफ जाने लगी, कुछ ही देर में विजय भी आ गया और सब मिलकर खाना खाने लगे ।
खाना खाने के बाद सभी अपने कमरों में जाकर आराम करने लगे । रेखा और विजय बर्तन किचन में रखने लगे।
“बेटा में तैयार हो जाऊँ फिर डॉ के पास चलते हे” रेखा ने बर्तनों को किचन में रखने के बाद कहा।
“माँ ठीक है आप तैयार हो जाओ। मैं तब तक अपने कमरे में जा रहा हू” विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर कहा।
“क्यों बेटे एक बार में मन नहीं भरा जो फिर से अपनी दीदी के पास जा रहे हो” रेखा ने अपने बेटे को टोकते हुए कहा।
“क्या कहा माँ मैं समझा नही” विजय अपनी माँ की बात सुनकर हैंरान होते हुए बोला ।
“बेटा में कोई छोटी बच्ची नहीं हूँ। कंचन तुम्हारे कमरे में इतनी देर तक क्या कर रही थी। मैं सब समझ सकती हू” रेखा ने मुस्कराते हुए कहा।
“माँ आप भी न । ठीक है मैं आपके कमरे में ही बैठ जाता हूँ” विजय अपनी माँ की बात सुनकर मुस्कराते हुए कहा और दोनों माँ बेटे कमरे में जाने लगे।
विजय कमरे में अंदर दाखिल होने के बाद बेड पर जाकर बैठ गया । रेखा ने अलमारी से एक नयी साड़ी निकाली और उसे लेकर बाथरूम जाने लगी।
“माँ यह क्या बात हुयी आप मुझसे शर्मा रही हो” विजय ने अपनी माँ को बाथरूम की तरफ जाता हुआ देखकर कहा।
“नही बेटा ऐसी तो कोई बात नही” रेखा ने अपने बेटे की बात सुनकर रुकते हुए कहा ।
“माँ आप वैसे यहीं पर चेंज करती हो और अभी आप साड़ी बाथरूम में ले जा रही हो” विजय ने अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा।
“अरे बेटा वह तो इसीलिए कर रही हूँ की अगर इस वक्त कोई आ गया तो क्या सोचेंगा” रेखा ने अपने बेटे को समझाते हुए कहा।
“माँ अगर यह बात है तो मैं अभी दरवाज़ा बंद कर देता हू” विजय फ़ौरन बेड से उठता हुआ दरवाज़े के पास आ गया और दरवाज़े को अंदर से बंद कर दिया।
“ओहहहह बेटा तुम भी” रेखा ने हार मानते हुए अपने कपडे वहीँ पर रख दिये और खुद बाथरूम में घुस गयी ।रेखा नहाने के बाद अपने जिस्म को पोछकर बाहर निकलने लगी, रेखा उस वक्त सिर्फ एक ब्रा और छोटी सी पेंटी में थी जो उसकी बड़ी चुचियों और मांसल चूतड़ो को ढकने में नाक़ाम हो रहे थे ।
“माँ आप इन कपड़ों में तो क़यामत ढा रही हो अगर इस हालत में आपको मेरी जगह कोई और देख ले तो वह आपको चोदे बिना नहीं रुकेगा” विजय ने अपनी माँ की आधि नंगी चुचियों और मांसल चूतडों में फँसी हुयी छोटी पेंटी को देखते हुए कहा । रेखा का दूध जैसे गोरा जिस्म नहाने के बाद बिलकुल शीशे की तरह चिकना नज़र आ रहा था।
“बेटे तुम भी नहीं छोडते अगर थोडी देर पहले अपनी बड़ी बहन को नहीं चोदा होता” रेखा ने भी सीधा सीधा अपने बेटे को कह दिया।
“माँ अगर आप इजाज़त दें तो मैं अब भी आपको चोद सकता हूँ क्योंकी मेरा लंड आपके जिस्म को देखकर जितना ज्यादा उत्तेजित होता है उतना कंचन को देखकर भी नहीं होता” विजय ने अपनी माँ की आँखों में देखते हुए कहा ।
“बेटे अब चुप करो । हमें डॉ के पास जाना है और इतना टाइम नहीं है की हम यह सब कर सके” रेखा ने पेटिकोट को पहनते हुए कहा।
“माँ में जानता हूँ नहीं तो आपको ऐसे देखकर मैं कहाँ रुकने वाला था” विजय ने ठण्डी आह भरते हुए कहा।
“बेटा पता नहीं क्यों मुझे पेट में भी दर्द हो रहा है” रेखा ने पेटिकोट पहनने के बाद ब्लाउज को पहनते हुए कहा।
“माँ डॉ के पास तो चल रहे हैं। उसी से कोई दवाई ले लेना वेसे भी डॉ साहब लेडीस स्पेशल है” विजय ने अपनी माँ को देखते हुए मुसकुराकर कहा ।
“बेटे तुम सुधरोगे नहीं एक बात पूछो” रेखा ने अपने ब्लाउज को पहनने के बाद साड़ी को पहनते हुए कहा।
“हाँ पूछो माँ” विजय ने अपनी माँ को देखते हुए कहा।
“बेटे अगर वह डॉ तेरे सामने मुझसे कोई गलत हरकत करे तो तुम क्या करोगे” रेखा ने अपनी साड़ी को पहनने के बाद कहा।
“माँ यही तो मैं चाहता हूँ। मुझे तो यह देखकर बुहत मज़ा आयेगा” विजय ने अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा।
“बेटे तुम्हें अपनी माँ की कोई चिंता नहीं उसे कोई भी छेडे। तुम उसे कुछ नहीं कहोगे” रेखा ने नाराज़ होते हुए कहा।
“माँ ज़िंदगी मज़ा लेने के लिए है लड़ने के लिए नहीं जब तक आप उसकी हरक़तों से एन्जॉय करेंगी। मैं भी एन्जॉय करूंगा, अगर आपसे वह ज़ोर ज़बर्दस्ती करेगा तो साले के दाँत तोड़ दूंगा” विजय ने अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा ।
“बेटे मैंने भी तुम्हें एक बात नहीं बतायी जो मैं तुम्हें बताना चाहती हू” रेखा ने अपने बेटे को देखते हुए कहा।
“माँ जल्दी से बताओ ना” विजय ने उत्तेजित होते हुए कहा । रेखा ने रवि के साथ होने वाली घटना अपने बेटे को बता दी।
“माँ मेरा शक सही था। साला वह ठरकी डॉ है” विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर मुस्कराते हुए कहा ।
“माँ एक काम करो साले उस डॉ को थोडी सी लिफ्ट दो देखते हैं वह कितना आगे बढ़ता है” विजय ने अपनी माँ को देखते हुए कहा।
“बेटे तुम क्या कह रहे हो” रेखा अपने बेटे की बात सुनकर उस ख़याल से ही गरम होते हुए कहा।
“माँ सही कह रहा हूँ साले ने बुहत औरतों को फंसाया होगा मगर हम उसे तडपाएंग़े” विजय ने अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा।
“बेटा तुम्हारी मर्ज़ी। वह तो वैसे ही मुझे देखकर खुश हो जाता है अगर लिफ्ट दी तो वह हवा में उड़ने लगेंगा” रेखा ने हँसते हुए कहा।
“माँ साले को थोडा हवा में उड़ाते हैं मगर ऐसा न हो की आप ही बहक जाए” विजय ने अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा।
“बेटे मैं तो उसके छेड़ने में भी मज़ा लूँगी मगर मैं कोशिश करूंगी की मैं न बहकुं” रेखा ने हँसते हुए अपने बेटे से कहा ।
“ठीक है माँ फिर तो आज उस डॉ का मज़ा लेते है” विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर कहा । रेखा ड्रेसिंग टेबल के सामने अपने आप को तैयार करने लगी। कुछ ही देर में वह बिलकुल तैयार होगई और अपने बेटे के पास आ गयी।
“माँ आप कितनी सूंदर लग रही हैं । साला डॉ तो गया काम से” विजय अपनी माँ को इतना सजा संवरा देखकर हैंरान होते हुए बोला।
“चलें बेटा अब टाइम कम है” रेखा ने अपने बेटे से कहा और दोनों कमरे से निकलकर बाहर आ गये।