मां बेटी और बेटा CHAPTER 8

 

            मां बेटी  और बेटा  CHAPTER 8



ममता की बात सुन जय,” हमारे अंदर चोदने की ललक और बढ़ गयी है। तुम्हारी ये बात सुनकर। हम तुम्हारे प्यास को जानते हैं। तुम जल्दी से संतुष्ट होने वाली नहीं हो। और नाही तुम्हारी बेटी। दोनों बिस्तर पर चुद्दक्कड़ रंडियां बन जाती हो।और आज तो दोनों साथ में हो,इसलिए तुमलोगों ने ऐसा किया है ना।”

ममता- हहम्मम्म, हाँ बेटा सैयांजी। इरादा कुछ ऐसा ही था। 

जय- तो देख क्या रही हो, लण्ड पर वापस चढ़ जाओ और अपनी नारीत्व का  नग्न नाच फिर शुरू करो।

कविता दरवाज़े पर आते ही बोली,” लण्ड पर चढ़ कर नाचने की अब हमारी बारी है।हम और माँ बारी बारी से चुदायेंगे।”

ममता मुस्कुरा उठी,” देखा, बेटा सैयांजी दो बीवियों के फायदा। इस लण्ड पर चढ़ने को कोई ना कोई तैयार ही रहेगी। माँ के बाद बेटी की बारी। 

कविता बिस्तर पर चढ़ आयी थी। वो जय के लण्ड पर थूक की मालिस कर रही थी। 

जय- माँ, तुम चुदाई की सबसे अनुभवी खिलाड़ी हो। लेकिन तुम्हारी बेटी, तुमसे कम नहीं है। ब्लू फिल्मों की तरह खूब चुदवाती है, और तुम भी पारंपरिक चुदाई से आगे बढ़ो, और आजकल जिस तरह से चुदाई की जाती है वैसे करो। जाकर अपनी बेटी के बुर से अंदर बाहर होते लण्ड को जीभ से चाटो। ताकि बुर का सौंधा नमकीन पानी, तुम्हारे मुंह में समाए। और थोड़ी भी हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।

ममता- ठीक है, हम समझ रहे हैं, तुम जो कहना चाहते हो। यही ना कि अब हमको तुम्हारी तरह गंदी, और घिनौनी चुदाई करनी पड़ेगी।” वो उसके माथे को चूम कर बोली,” हम तुमको अब खुश करने के लिए, हर हद पार कर देंगे।”

कविता- माँ, इसी में तो मज़ा है, आ जाओ और भाई के लण्ड की सवारी करने में अपनी बेटी की मदद करो। 

ममता नीचे खिसकते हुए गयी। और कविता के हाथों से लण्ड लेकर, उसको जय के लण्ड पर बैठने का इशारा किया। कविता दोनों पैर जय के कमर के अगल बगल रख बैठने लगी। वो अपने दोनों हाथों से चिकनी चूतड़ को हिला रही थी। कविता जब नीचे आआई, तो ममता ने अपने मुंह से थूक निकालकर, उसके बुर पर मला। फिर बुर को एडजस्ट की, लण्ड के सामने और ममता ने लण्ड खड़ा रखा था। कविता के नीचे आते ही लण्ड उसके बुर में समाने लगा, जैसे माखन पर गरम चाकू हो।कविता और जय दोनों के मुंह से आआहह निकली। ममता अब कविता के पीठ से चिपक गयी। अपनी चुच्चियाँ उसकी पीठ में गराने लगी। कविता की चुच्चियों को पकड़कर सहला रही थी। कविता और ममता माँ बेटी अब कम सेक्स पार्टनर ज्यादा लग रही थी। दोनों आपस में चुम्मा ले रही थी।

कविता चूमने के बाद अलग होते हुए बोली,” माँ, हम ठीक से चुदवा रहे हैं ना? हम कुछ गलत तो नहीं कर रहे हैं, देखो चूचियाँ पूरी तनी हुई है, बुर एक दम भीगा है, मन में चुदने की प्यास है और बुर में भाई का लौड़ा भी है। तुम भी ऐसे ही चुदवाई होगी ना, अपने पहले सुहागरात में। हम तुम्हारी परंपरा आगे बढ़ा रहे हैं। आखिर तुमसे ये चुदवाने की कला विरासत में जो मिली है।”

ममता अपनी बेटी को ज्ञान देते हुए बोली,” कविता, ये हमेशा से ही औरतों का कर्तव्य रहा है, कि बिस्तर में रंडी का स्वभाव अपनाए। एक औरत को जीवन में सब किरदार, निभाने होते हैं, पत्नी का, माँ का, बहन का, बेटी का और बिस्तर में वेश्या का। हर पत्नी पति की वेश्या होती है। और वेश्या का काम, अपने मर्द को खुश करना होता है।बिस्तर में उनकी नाज़ायज़ मांग भी पूरी की जाती है,ताकि वो तुम्हारे बदन का भोग करके, संतुष्ट हो जाये। इस वक़्त तुम और हम एक वेश्या के किरदार में है। अगर हम दोनों बिस्तर पर, जय का पूरा ध्यान रखेंगे, तो ही ये हमारी हर ज़रूरत पूरी करेगा। हम चाहते हैं, तुम इस बात को ध्यान में रखो। और खुदको, समर्पित कर दो। तुम जब भी चुदवाती हो, तुम्हारे अंदर हम खुद को देखते हैं। अपनी जवानी की झलक मिलती है। वही चुच्चियों को हिलना, वही गाँड़ का थिरकना, बुर से बहता लसलसा पानी और चेहरे पर चुदने की प्रबल इच्छा। तुम वाकई, किसी भी मर्द को खुश कर सकती हो।” ममता उसकी उछलती चुच्चियों को भींचते हुए ज्ञान दे रही थी। एक माँ, अपनी बेटी को चुदाई का प्रैक्टिकल क्लास दे रही थी। 

जय- वाह, रे रंडी बहुत अच्छा ज्ञान दे रही हो, अपनी बेटी को। तुम जैसी महान माँ, हो तो घर में बेटी को रंडी की ट्रेनिंग फ्री में मिलेगी। चलो अब लण्ड चाटो, और अपनी बेटी के बुर का स्वाद चखो।”

ममता हंसी, कविता कामुकता की वजह से सिर्फ मुस्कुराई। ममता झुककर सीधा, बुर से अंदर बाहर होते, उसके रस से भीगे चमकते लण्ड पर, अपनी जीभ फेरने लगी। वो ने के टांगों के बीच लेटी थी, कविता लण्ड पर सवारी कर रही थी। बेटी बुर में लण्ड घुसाए कूद रही थी, और माँ उसके बुर के रस को बेटे के लण्ड पर से साफ कर रही थी। ममता की आंखे, दोनों के यौनांगों, के एक दम करीब थी। जय का आंड़ जामुन की तरह लटका था, और लण्ड कविता के बुर में घुसकर गायब हो जाता था, फिर उछलने से आधा दिखता था। कविता की बुर जैसे लण्ड को चारों तरफ से पकड़के सिकंजा कसे हुए थी। ममता, कविता के चूतड़ पकड़के, उसकी उछलने में मदद कर रही थी। लण्ड के निचले हिस्से, की फूली हुई नली और नसें, उसके जीभ के संपर्क में आकर और लण्ड की फड़कन बढ़ा रही थी। कविता की बुर का निचला हिस्सा, जिधर गाँड़ होता है, उस हिस्से से गजब की महक आ रही थी। कविता के बुर का रस, लण्ड और बुर की गर्मी से, कामुक गंध में बदल कर ममता के नाक में घुस रही थी। कविता के गाँड़ और बुर के बीच का हिस्सा कोई आधा इंच का गहरा साँवला रंग का था। ममता उस हिस्से को जीभ से चाटने लगी और जय के आंड़ को सहला रही थी। ममता चाटते हुए बीच में थूक लगा देती। कविता के चूतड़ों से जय के लण्ड के बांए और दांये, बुर के रस और थूक के मिश्रण से बने गीली पदार्थ के धागे जुड़ गए थे। पूरे कमरे में थप थप की मधुर आवाज़ें गूंज रही थी, जो कविता के चूतड़ों के प्रहार से उत्पन्न हो रही थी। कमरे की निर्जीव चीज़े, भी जैसे इस मनोरम दृश्य को देख रही थी। तभी कविता के तेजी से चूतड़ उछालने की वजह से लण्ड बाहर आ गया और ममता के गालों से टकराया। कविता हंसने लगी और बोली,” माँ, देखो ना लण्ड नाराज़ तो नहीं है, बाहर भाग गया।”

ममता- रुक जा मना के वापस भेजते हैं।” ममता ने जय के लण्ड को पकड़ा, वो बहुत ज्यादे, गीला था। उस पर बुर का रस बहुत ज्यादे लगा हुआ था। लण्ड को छूने से एक दम चिपचिपा सा महसूस हो रहा था। ममता लण्ड को अपने मुंह में घुसा ली और जीभ से चाटने लगी। उसे जय के लण्ड से निकले रस और कविता के बुर के रस से बना, ये बेहद गीला, चिपचिपा मिश्रण बहुत भा रहा था। जैसे ममता कोई चासनी चाट रही हो। कविता अपनी माँ, को ये करते हुए देख रही थी। जय ने भी ममता के इस हरकत को देखा तो अपने तलवे से ही उसकी पीठ थपथपाई। ममता जय के लण्ड को अपने पूरे चेहरे पर मल रही थी। फिर सुपाडे पर थूक का बड़ा लौंदा, चुआ दिया और उसे पूरे लण्ड पर मल दिया। ममता ने ऐसा दो तीन बार थूका, और लण्ड वापस कविता के बुर में ठेल दी। कविता बेहद कामुक अंदाज़ में अपने एक हाथ से गाँड़ सहला रही थी, और दूसरे हाथ की बड़ी उंगली मुंह में घुसाए थी। वो फिरसे उछलने लगी। जय ने उसके चूतड़ों पर अब तक 20 25 तमाचे लगा दिए थे। कविता हर थप्पड़ पड़ने पर जोर की आआहहहहहह भरती थी। उसके आंखों में उस दर्द से कामुक तरंगे उठती थी, जो उसके कामुक चेहरे को और अधिक काम पिपासी बना देती थी। हर थप्पड़ पर गाँड़ में थिरकन होती थी। तभी, जय कविता को अपनी बांहों में कसके पकड़ लिया। और अपनी कमर नीचे से ही बहुत तेजी में उछाल कर ताबड़तोड़ चोदने लगा। कविता की कामुक आँहें और तेज हो गयी और धीरे धीरे वो आँहें कामोन्माद से भरी चीखों में तब्दील हो गयी। कविता बहुत तेजी से झड़ी और लण्ड खुद ही बह आ गया। कविता के बुर से पानी की धारा बह निकली। ये उसके जीवन का सबसे बड़ा झड़ना था। वो जय के शिकंजे में फड़फड़ा रही थी। जय उसके चुच्ची पर काट रहा था। वो पूरा पसीना पसीना हो गया था। शायद वो भी झड़ना चाहता था। कविता अब तक दो बार झड़ी थी। और होश थोड़े देर के लिए सुन्न पर गए थे। ममता ने कविता को जय से अलग किया और खुद लण्ड को बुर में ले ली। कविता बाजू में लेट गयी। जय इस वक़्त बहुत ही उत्तेजित था। उसने ममता को बिस्तर पर पटक दिया, और खुद उसके पीछे करवट होकर लेट गया। ममता की टांग उठा कर, अपना लण्ड उसके बुर में पेल दिया। एक हाथ से उसके काली जुल्फों को कसके पकड़े हुए था, जिससे ममता उसकी आँखों में देख रही थी। दूसरे हाथ से उसकी टांग उठाये हुया था।ममता अपना दाहिना हाथ पीछे की ओर उसके सर पर रखे थी। और उसकी आँखों में, आंख डालकर आहें भरते हुए, पेलवा रही थी। नीचे बुर पर तगड़े शॉट्स, और बाल खिंचने से उत्पन्न दर्द होने के बावजूद उसकी आँहें और सीत्कारें बढ़ती ही जा रही थी। जय तो जैसे रुकना ही नहीं चाहता था। वो ताबड़तोड़ ममता के बुर को चोदे जा रहा था। 

जय- आआहह, आह, आह, क्या चीज़ हो तुम ! तुम्हारी पेलाई करने में बड़ा मजा आ रहा है। 

ममता- आ…आ….आ आआ ….. हहम्मम्म हह हह…. तुम जैसा आदमी मिले तो पेलवाने में और मज़ा आता है। चोदो हमको, देखो हम तुम्हारी माँ हैं, अपनी माँ को चोदो। देखो हमको कितना मज़ा आ रहा है। आआहह…. आईई….

जय ममता के बाल को और खींचता है, ममता का मुंह खुल जाता है। जय उसके खुले मुंह में थूक देता है। जय,” घोंट जाओ।” ममता वो घोंट गयी,जैसे वो कोई प्रसाद हो। ममता अपनी जीभ बाहर निकालकर मुंह खोल रखी थी,तभी वो फिरसे थूक देता है, वो उसे भी घोंट लेती है। 

कविता जय की पीठ सहला रही थी। जय का चेहरा लाल हो चुका था, पसीने से तीनों, ऐसी कमरे में भी बेहाल थे। ममता दो बार चुद चुकी थी, पर फिर भी जय की ताबड़तोड़ चुदाई से खुद पर काबू रख नहीं पाई। कामुकता से ओत प्रोत होकर बुर की बांध खोल दी। उधर जय चिंघाड़ते हुए, झड़ने लगा, ममता भी अपने बुर को सहलाते हुए झड़ गयी। कविता ने लण्ड से मूठ निकलने से तुरंत पहले, बुर से लण्ड निकालकर अपने मुंह में रख ली। जय ने करीब 10 12 झटकों में सारा मूठ, कविता के मुंह में निकाल दिया। उधर ममता भी बहुत तेज़ झड़ी। उसके बुर से भी काफी रस चू कर बिस्तर पर फैल गया। ममता अपनी बुर पर अपनी हथेली पटक रही थी। जय बिस्तर पर निढाल हो गया। वो पिछले दो घंटों से अपनी माँ बहन को बारी बारी से तीन तीन बार चोद चुका था। वो पलंग के किनारे लगे ऊंचे हिस्से पर पीठ के बल बैठ गया। उसका लण्ड अभी भी फड़क रहा था। कविता घुटनो पर बैठी, दोनों हाथ आगे रख, जय को देख मुस्कुराई। ममता उठी और कविता के पास ठीक वैसे ही बैठ गयी, जैसे कि वो। कविता ने फिर अपना मुंह खोला, और जय को उसका मुठ दिखाया। कविता का मुंह उसके सफेद गर्म रस से भरा हुआ था। कविता ने फिर ममता के चेहरे को झुकाया और अपना मुंह उसके खुले मुंह के सामने ले आई। जय ने ममता के चेहरे को गौड़ से देखा जैसे वो कह रही थी, की जल्दी से ये मूठ, हमको दे दो। कविता ने फिर धीरे धीरे मूठ उसके मुंह में दे दिया। सारा मूठ मुंह में लेने के बाद, ममता जय की ओर देखी और फिर मुंह खोलकर उसे दिखाई। इसके बाद मुंह मे उसे चारों ओर घुमाया और कविता के मुंह में आधा दे दी। दोनों माँ बेटी ने आधा आधा मुंह में लेकर उसको मुँह में चलाया। उसके बाद दोनों उसको बेहिचक घोंट गयी। फिर दोनों आपस में किस की। दोनों तिरछी नज़रों से जय को देख एक दूसरे की जीभ चाट रही थी।

जय ने फिर कविता को अपने करीब आने का इशारा किया, और कविता पालतू कुतिया की तरह उसके पास पंजों और घुटनों के बल चलकर पहुंच गई। जय उसके होंठों को खूब चूमने लगा और कविता अधरों को अपने गिरफ्त में लेकर खूब चूसा। फिर ममता भी उसके इशारे पर उसके पास आई और खुद ही उसके चेहरे को पकड़कर होंठों को चूमने लगी। जय बारी बारी से दोनों को चूम रहा था। ममता और कविता उसके सीने को सहलाकर अपनी अपनी चुच्चियाँ उसके बदन पर रगड़ रही थी। जय थोड़ा थका सा था। उसने ममता की आंखों में देखा, जिसमें अब बेटे के तौर पर उसके लिए, प्यार काम था, और पति के तौर पर ज्यादा था। जय ने उन दोनों के चूतड़ों को दोनों हाथों से थामा, और सहला रहा था। उनकी गाँड़ की दरार में उंगलियां रगड़ रहा था, और दोनों चूतड़ उठाकर उसका सहयोग कर रही थी,ताकि उसका हाथ और अंदर तक पहुंचे। 

कविता- भाई, लगता है तुम थक गए हो? सोना भैया, माँ को चोदने में ज़्यादा मज़ा आया या हमको? 

जय- अरे मादरचोद, तुम जैसी दो बीवियां एक साथ चोदेंगे तो थकेंगे ना, दोनों बहुत गरम, चुदैल रंडियां हो। 

ममता हंसते हुए बोली,” अब तो आदत बना लो बेटा सैयांजी, अभी तो चुदाई पूरी कहाँ हुई है। अभी तो रात बाकी है, देखो अभी तो ढाई ही बजे हैं। ये लो दूध पी लो, ताक़त आएगा।

जय ममता के बुर को दबोच लिया, ममता चिहुंक उठी। जय बोला,” हमारा भी मन नहीं भरा है। तुम दोनों को जब तक मन भर चोद ना लें तब तक सोएंगे नहीं। चलो दूध पिलाओ ना रानी अपने हाथों से।

ममता गिलास उठा ली, जो बिस्तर से लगे मेज़ पर रखा था और उसकी ओर घूमकर दूध पिलाने लगी। कविता उन दोनों को देख रही थी। ममता उसकी आँखों में आंखे डालकर दूध पिला रही थी, और जय भी बिना पालक झपकाए ममता को देख रहा था। जय ने फिर ग्लास हटाने का इशारा किया। उसके ऊपरी होंठ पर दूध लगा हुआ था,होंठों से दूध टपक रहा था। ममता उसके होंठों को चूमने लगी।दोनों अलग हुए, तो जय ने ममता के हाथ से ग्लास ले लिया और घूंट भर लिया। और ममता के खुले मुंह में गिराने लगा। ममता सब पी गयी। कुछ देर बाद जय ने कविता के साथ भी यही किया। दोनों बेबाक हो चुकी थी। लेकिन जय को थोड़ा, आराम चाहिए था इसलिए उसने, कविता से पूछा,” तो तुमलोगों ने मामा और मौसी को कैसे मना लिया? 

ये सुनकर दोनों हसने लगी, फिर ज़ोर के ठहाके लगाई। दोनों पांच मिनट तक हंसती ही रही। फिर कविता बोली,” माँ, ये तुम ही बताओ ना। ज़्यादा मज़ा आएगा। 

ममता- अच्छा, ठीक है। तो सुनो हम दोनों उस रात एक दूसरे के साथ ही सो गए। ये जाने बगैर की आगे हमारा क्या होगा? दो दिन बाद जब सत्य के आफिस जाने के बाद, हम और कविता घर की सफाई कर रहे थे। हमारी नज़र एक सूटकेस पर पड़ी ( ये वही सूटकेस था, जिसे ममता पहले भी देखी थी)। हम उसको खोले तो, उसमें एक डायरी और एक पुरानी चिट्ठी थी। कहते हैं कि जिस चीज़ को चाहो, तो कभी कभी वो खुद ही तुम्हारे पास चली आती है। उस चिट्ठी में, सत्य ने माया के नाम चिट्ठी लिखी थी। वो माया को बहुत प्यार करता था, उसे अपनी प्रेमिका बनाना चाहता था। पर कभी उसकी हिम्मत नहीं हुई वो चिट्ठी, देने की। उसमें उसने एक घटना का भी जिक्र किया था, जब माया की तबियत खराब हुई थी, तो कैसे उसने उसके लिए मन्नतें मांगी थी। ये चिट्ठी उसने बारहवीं, पास करने पर लिखी थी। जब माया और हम, माँ के देहांत के बाद गए थे। हम कविता को ये चिट्ठी दिखाए और हम दोनों सोच लिए, कि अब सत्य को मनाना आसान हो जाएगा। और उस दिन जब वो घर आया तो…..

ममता खाना खाने के बाद सीधे उसके कमरे में गयी। सत्य कपड़े बदल कर बिस्तर पर, लेटा हुआ था। ममता को देख वो बोला,” अरे दीदी क्या हुआ? सोई नहीं।

ममता- तुमसे कुछ पूछना था। 

सत्य- हां, पूछो क्या बात है? 

ममता- सत्य सच सच बताओ कि तुम शादी क्यों नहीं कर रहे हो?

सत्य- क्या दीदी, तुम फिर शुरू हो गयी।

ममता- अरे, सीधे सीधे बताओगे की नहीं।

सत्य- अरे हम अभी शादी नहीं करेंगे। 

ममता- कब करेगा ये बता दो,खाली?

सत्य- अरे छोड़ो ना, क्या तुम भी पीछे पड़ी हो। जाओ सो जाओ।

ममता- क्यों, गलत पूछे हैं? कि तुम किसी और को चाहता है?

सत्य- ऐसा कुछ नहीं है। हम बस ऐसे ही खुश हैं।

ममता उसकी आँखों में देखते हुए, बोली,” माया को बहुत प्यार करते हो ना। अपनी ही सगी बहन को लव लेटर लिखे हो। 

सत्य अवाक रह गया, उसकी नज़र सीधे उस सूटकेस पर पड़ी, वो ममता की ओर फिर देखा, तो ममता अपने हाथ में चिट्ठी पकड़े हुए थी।

ममता ने सत्य को वो वापस दे दिया, और बोली,” तुम बिल्कुल अपने भांजे पर गए हो। वो भी अपनी ही बहन को प्यार करता है। हां, जय और कविता एक दूसरे को प्यार करते हैं। तुम भी माया को बहुत प्यार करते हो ना? संकोच मत करो। सच कह दो, शायद हम तुम्हारी कुछ मदद कर सकें।

सत्य- अच्छा, पर.. पर तुम ये सब क्या कह रही हो? जय और कविता को तुमने कुछ नहीं कहा। ये रिश्ता तुम स्वीकार कैसे कर ली दीदी? तुम पागल तो नहीं हो गयी हो?

तभी कविता रूम में आ गयी,” प्यार में कोई सही गलत नहीं होता मामाजी, प्यार तो खुद में एक पवित्र बंधन है। जो आपको हुआ है, माया मौसी से, जो हमको हुआ है, अपने भाई जय से। समाज तो प्यार में भी रिश्तों का बंधन खोज लेता है। पर प्यार इन सब चीजों से ऊपर है, ना कोई छोटा है ना कोई बड़ा, ना कोई बहन है ना कोई भाई।

तभी ममता बोली,” नाहीं कोई माँ और नाहीं बेटा।

सत्य- मतलब? अचंभित होकर बोला

कविता- मतलब, ये कि हम और माँ दोनों जय से प्यार कर बैठे हैं। और आपसे कहने में हिचक रहे थे। पर आपकी चिट्ठी, मिलने पर हम दोनों की हिम्मत बंधी है। आप अगर चाहे तो, माँ आपको आपके प्यार से मिलवा सकती है। शायद वो भी अब तक किसी सच्चे प्यार की उम्मीद में इंतज़ार कर रही हैं। वो प्यार आपकी आंखों में हम देख सकते हैं।”

ममता- सत्य, क्यों खुद के जज्बात, को दबाने की कोशिश कर रहे हो। तुम्हारी आँखे चीख चीखकर कह रहीं है, कि तुमको माया से बहुत प्यार है। जब भी वो घर आती थी, तो तुम उसके इर्द गिर्द ही मंडराते थे। जब वो बीमार हुई थी, तो रात रात भर हॉस्पिटल में रहे थे, लगातार 4 दिन तक। कितनी अभागन है कि, वो जिस प्यार को ढूंढ रही थी, वो उसके भाई के दिल में था। तुम्हारे दिल में था। तुम उसके सपनों के राजकुमार हो। और वो भी इस बात को नहीं पहचान पाई अब तक।”

सत्य फिर गहरी सांस लेकर बोला,” दीदी, तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो। हम माया दीदी को शुरू से ही बहुत चाहते हैं। उनको कभी किसी और के साथ नहीं देख सकते थे हम। पर जब तक हमको होश आया, उसकी और छोटे जीजजी की शादी हुए 18 बरस बीत चुके थे। हम तब सोच लिए, की उनको सब बताएंगे। पर घर की इज़्ज़त का ख्याल रखकर, हम अपने प्यार की बलि दे दिए। और हमको ये भी नहीं पता था, कि वो हमारा साथ देगी की नहीं। इसलिए हम चुपचाप थे। पर आज तुमलोगों ने हमारे अंदर दबी आग फिर भड़का दी है। वो अगर हमको मिल जाये तो, हम अपनी पूरी ज़िंदगी खुशी से काट लेंगे। और अगर तुम ऐसा कर दी, तो तुम्हारे लिए कुछ भी करेंगे।

ममता- हम तुमसे वादा, करते हैं कि आज से 3 दिन के अंदर माया, तुम्हारे पास होगी और तुम्हारे प्यार को क़ुबूल करेगी। पर तुमको भी एक वादा करना है, की तुम अपनी भांजी की शादी अपने भांजे के साथ, सारे रीति रिवाज से करवाओगे।

सत्य- वादा दीदी, अगर तुम कहो, तो तुम्हारी शादी भी तुम्हारे बेटे से उसी मंडप में करवा दें।

कविता- बहुत सही कहा, मामा जी। हम माँ बेटी एक ही मंडप में शादी करेंगे और एक साथ एक ही आदमी की दुल्हन बनकर, एक साथ विदा होंगी। क्या मस्त आईडिया है।

सत्य- दीदी, ये ठीक कह रही है। तुम खुद भी जय से शादी कर लो। 

ममता मुस्कुराते हुए,” फिर तो ये हमारी दूसरी शादी होगी।”

सत्य और कविता उसकी ओर एक पल देखे और फिर मुस्कुरा उठे। सब इतनी आसानी से हो जाएगा, ममता ने कभी नहीं सोचा था। पर ये उसीका आईडिया था, की वो अभी ये बात किसी से नहीं कहेंगी। यहां तक कि जय को भी नहीं।

ममता ने उसी समय कविता को फोन लगाया और बोली कि सत्यप्रकाश बहुत बीमार है, जल्दी आ जाओ अगली गाड़ी पकड़ कर। माया बहुत हड़बड़ा गयी, पर अगले ही दिन गाड़ी पकड़ अकेले ही चल दी थी। और 24 घंटे के अंदर दिल्ली पहुंच गई। जब वो स्टेशन पर उतरी तो, सामने सत्य को देखी, उसने सत्य की ओर देखा और पूछी,” क्या हो गया है, ठीक हो ना तुम, दीदी बोली कि तुम्हारी तबियत बहुत खराब है। 

सत्य- हां, हम ठीक हैं, तुम घबराओ मत, चलो घर चलो।

दोनों ऑटो पकड़ घर की ओर चल दिये। वैसे तो, सत्य पहले भी माया को ऐसे अपनी प्रेमिका के तौर पर देखता था। पर आज कुछ और ही बात थी।ममता की कही बात उसे एक नए उमंग और ऊर्जा से भर चुकी थी। शायद हां शायद माया उसकी हो जाएगी या शायद इस बार माया से उसकी आखिरी मुलाक़ात होगी। ऑटो में माया सो गई थी। उसकी जुल्फे हवा में लहरा रही थी। उसका ब्लाउज काफी लो कट था। चुच्चियों कि अर्ध गोलाइयों काफी बाहर थी। उसका आँचल ढलकर किनारे हो चुका था। चूचियों के बीच उसका मंगलसूत्र उसकी सुहाग की निशानी था। सत्य को वो काफी चुभ रहा था। 

घर पहुंची तो वो सीधे ममता से बोली, की तुम बोली थी कि सत्य बीमार है पर वो तो सामने ठीक ठाक खड़ा है।

ममता- ये ऊपर से ठीक है, पर अंदर से बीमार है। इसे बहुत गंभीर बीमारी हो गया है।

माया- क्या कौन सा कहीं एड्स वगैरह तो नहीं हो गया है? 

ममता- अरे नहीं, उससे भी खतरनाक बीमारी, इसे लवेरिया हो गया है।

माया- लवेरिया, ये कौन सा बीमारी है।

ममता- इसको एक लड़की से प्यार हो गया है। और उससे इसकी शादी करनी है। नहीं तो ये पागल हो जाएगा। पिछले 10 साल से ये उसको प्यार करता है, पर उससे कुछ कह नहीं पा रहा है।

माया- अरे हमको तो तुमलोग डरा दिए। हम बोले कि पता नहीं क्या हो गया। सत्य को कौन पसंद है। चलो उससे बात करें। बहुत उम्र हो गया है इसका वैसे भी। 

ममता- कहीं जाना नहीं है। वो लड़की यहां है।

माया- अच्छा कहां है, घर पर बुलाये हो। किधर है?

ममता- मिलवाएंगे, पर तुम पहले नहां लो, तैयार हो जाओ।

माया- चलो ये भी ठीक है। हम फ्रेश हो जाते हैं।

माया अंदर कमरे में चली गयी। ममता ने सत्य को आफिस जाने को बोल दिया। सत्य ऑफिस चला गया। उसके जाने के बाद ममता माया के साथ कमरे में घुस गई। माया जल्दी से नहा ली, और जैसे ही बाहर आई उसने देखा कि ममता कमरे का दरवाजा बंद कर चुकी थी। माया ने इस वक़्त सिर्फ पेटीकोट पहनी थी। और ममता बिल्कुल नंगी होकर उसके सामने खड़ी थी। दोनों ने आंखों का इशारा पाकर खुद को एक दूसरे की बांहों में झोंक दिया। दोनों आपस में चुम्मा चाटी करने लगे। और पलक झपकते ही माया साया उतारकर अपनी बड़ी बहन की ही तरह संगमरमर की नंगी मूरत लगने लगी। दोनों का दूधिया बदन और एक दूसरे पर हावी होकर बिस्तर पर गिर पड़ी। दो परिपक्व औरतों के बीच, एक बहुत ही उत्तेजना से भरपूर काम लोलुपता की चाशनी में डूबी हुई, चुदाई का नंगा नाच चल रहा था। दोनों एक दूसरे के नंगे बदन को ऐसे चाट रहे थे, जैसे प्यासा कुवें से पानी पीता है। दोनों लण्ड की आग में, जल रही थी। पर बुर मसलने के अलावे कोई दूसरा साधन नहीं था। ये बिल्कुल ऐसा ही था कि दो सेक्स की भूखी शेरनियों, को शेर ही ना मिले। दोनों एक दूसरे को कभी ऊंचे, तो कभी नीचे पटक रही थी।

माया- ऊफ़्फ़फ़, दीदी आह तुम्हारा साथ भी, गजब है। हमको अकेले छोड़ आती हो। अब तो जैसे सेक्स की भूख घट नहीं रही है, बल्कि इस उम्र में लण्ड की प्यास बढ़ती जा रही है। अब तो उनसे कुछ खास होता नहीं है। हम तो दिन रात सेक्स की आग में जल रही है। आआहह, ज़रा और बुर में अंदर घुसाओ।

ममता- माया, हम खूब समझते हैं, लण्ड की प्यास को। हम तो खुद ही बहुत प्यासे रहते हैं। अब तक तो हम दोनों ही एक दूसरे का सहारा हैं। आआहहहहह… पर तुम चाहो तो हम दोनों की इस भूख प्यास का इलाज हो सकता है।

माया अपने भारी भरकम चूतड़ों पर थप्पड़ लगाते हुए बोली,” कैसे दीदी, इस उम्र में अब हमलोगोंको कौन अपनाएगा? हम दोनों तो वैसे भी जवानी की चौखट पर हो चुकी है।

ममता उसके होंठ चूमकर बोली,” यही तो तेरी गलतफहमी है। सारे मर्द एक से नहीं होते बल्कि कुछ लोगों को हम जैसी परिपक्व औरतें पसंद आती है। और आज भी हम तुम कई मर्दों के नींद उड़ाने का दम रखते हैं। 

माया ममता की बुर मसलते हुए बोली,” सच दीदी, अब तो अगर हमको कोई बस लाइन मार दे, तो खुश हो जाते हैं। पर ऐसा कौन है जो हमको चाहेगा। 

ममता- बहुत हैं, हमको तो एक मिला है, और तुम चाहो तो तुम्हारे लिए भी एक नया जवान लण्ड, मिल जाएगा। जो तुमको खूब चोद चोद कर अपनी रंडी बना लेगा। वो तुमसे प्यार भी बहुत करता है।

माया- कौन है वो?

ममता- वो तुम्हारा आज से नहीं, बहुत दिनों से आशिक़ है। तुमको दिन रात याद करता है। तुम्हारे याद में अब तक शादी नहीं कि है। वो आज भी तुम्हारे प्यार का प्यासा है। और अगर तुम चाहो तो उस प्यासे का कुवां बनके इलाज कर सकती हो, और वो भी तुमको बहुत खुश रखेगा।

माया- पहेलियां, मत बुझाओ हमको, जल्दी से नाम बताओ उसका। कौन है जो हमको इतना प्यार करता है और हम उसको जानते नहीं हैं। 

ममता- तुम जिसकी दुल्हन देखना चाहती हो, वो और कोई नहीं तुम खुद हो। सत्य जिससे शादी करना चाहता है, वो तुम हो। तुम ही उसके सपनों की रानी हो। वो तुमको बहुत खुश रखेगा। 

माया उत्तेजना में थी,” क्या बोल रही हो, हमको अपने छोटे भाई की दुल्हन खोजना है, खुद उसकी दुल्हन नहीं बनना है। वैसे भी ये तो समाज के खिलाफ है, ये कैसे कर सकते हैं।

ममता- क्योंकि……. ये गलत नहीं है।

इस वक़्त तुम हमारे साथ, जो कर रहीं हो, वो क्या जायज है। या हम दोनों एक साथ शशि से चुदवाते थे, वो सही था क्या? यहां तो वो तुमको चाहता है। शशि से तुम्हारी शादी तो मजबूरी में हुई थी, पर यहां कोई बंधन नहीं है। तुम चाहो तो उसके प्यार को स्वीकार कर एक प्यारा पति पा सकती हो, और नहीं तो उसके प्यार को ठुकड़ा कर उसका दिल तोड़ सकती हो। पर उसके जितना प्यार शायद ही तुमको कोई करेगा। ये पढ़ो चिट्ठी, जो उसने तुम्हारे नाम से लिखी थी, तुम्हारी आंखों से जो आंसू ना निकल जाए तो कहना।

माया उसके हाथों से चिट्ठी लेकर बोली,” क्या लिखा है इसमें? जब वो पूरा पढ़ी तो, सही में उसकी आँखों से आंसू निकल आये। शायद ही किसी ने उसके जीवन में अब तक, उसको इतना महत्व दिया था। उसके हर शब्द जैसे माया के दिल में उतर गए। उसे ना चाहते हुए भी सत्य के तरफ झुकाव होने लगा। उसकी हर छोटी नन्ही हरक़तें याद आने लगी। वो सोच भी नहीं सकती थी, की कोई उसे इतना प्यार भी कर सकता है।

माया चिट्ठी सीने से लगाकर, हल्के आवाज़ में बोली,” सत्य इतना चाहता है हमको।” पर उसकी बहन है हम ये रिश्ता चाहकर भी नहीं भुला सकते। उसकी सगी बहन होकर उसकी बीवी का स्थान कैसे ले लें। ये गलत नहीं होगा क्या?

ममता- नहीं क्योंकि…… ये गलत नहीं है। यहां कौन जानता है कि तुम उसकी बहन हो। और अगर रिश्तों के बंधन में इतनी ताकत होती तो, वो तुमको एक औरत के नज़र से कभी नही देखता। जब से उसने होश संभाला है,तुमको हमेशा उसने एक भाई के नहीं, प्रेमी की आंखों से ताड़ा है। आज भी वो तुम्हारे हां के इंतज़ार में है। 

माया- दीदी, पर शशिकांत?

ममता- उसने कभी तुमको प्यार से रखा है। हमेशा तंग ही किया है। पर अब एक मौका है, खुलकर जीने का। सच में किसीकी अर्धांगिनी बनने का। वो तुमको खुश रखेगा। 

माया- सच दीदी, क्या ये ठीक होगा? 

ममता- देखो, हम भी आजतक सच्चे प्यार से वंचित थे, हमको हमारा सच्चा प्यार अपने सगे बेटे में मिला है। और कविता को भी जय से प्यार हो गया है। हम तीनों इससे खुश है। जीवन में अगर साथ में रहकर खुशी मिले, तो कहीं बाहर क्यों जाना? जिस प्यार के लिए हम आज तक तरस रहे थे, वो अपने बेटे ने ही दे दिया। कविता को उसके भाई ने दे दिया। तो तुमको अगर वही प्यार सत्य में मिल रहा है तो इसमें कोई बुराई नहीं है। बल्कि, हम दोनों को अफसोस होना चाहिए कि, इस प्यार को हमलोग देर से पहचान रहे हैं। आखिर इस उम्र में और कोई मर्द हमलोगों को ले तो जाएगा, पर कुछ ही दिनों में छोड़ देगा। पर ये लोग हम लोगों को वो प्यार देंगे, जो शायद एक भाई ने अपनी बहन को और एक बेटे ने अपनी माँ को शायद कभी किया हो। हम तो तुम्हारे साथ हैं, चाहे तुम उसके साथ जाओगी या नहीं ये तुम्हारे ऊपर है। ये लो अपने कपड़े पहन लो।” ममता बिस्तर से उतरकर नंगी ही कमरे से बाहर निकल गयी। घर में कविता, ममता और माया के अलावा कोई नहीं था। ममता तो दोनों के साथ नंगी सो चुकी थी। माया सोच में पड़ गयी। ममता का बहाने से बुलाना और उसीको सत्य की दुल्हन बनाना। ये सब एक सपने जैसा लग रहा था। सब बहुत जल्दी हो गया था। 

पूरा दिन सोचने के बाद शाम में माया, ममता और कविता के सामने सत्य के सामने गयी और उसका हाथ पकड़ ली। उसे पकड़कर कमरे में ले गयी। पर दरवाज़ा बंद किये बगैर सिर्फ सटा दिया था। 

माया- कितना प्यार करते हो, हमको?

सत्य की आंखों में आंसू आ गए,” कितना प्यार??? पता नहीं। बस ये जानते है कि तुमको रात दिन अपनी आंखों के सामने मुस्कुराता हुआ देखना चाहते हैं। और अपनी ज़िंदगी की हर साँस तुम्हारे लिए कुर्बान कर देंगे।

माया- तो इतने दिनों से कहा क्यों नहीं?

सत्य- तुम भी जानती हो दीदी, ये समाज लोक लाज के डर से। तुम्हारा जीवन खराब नहीं करना चाहते थे। तुम्हारे लिए हम हर ग़म सह सकते हैं। 

माया- चाहे खुद आग में झुलसते रहो। तुम हमसे वो प्यार किये हो जो शायद कहानियों में होती है। ये हमारा दुर्भाग्य था, की तुम हमारे भाई बनके पैदा हुए हो और हम तुम्हारी बहन। लेकिन अब ये रिश्ता तुम्हारे हमारे बीच दीवार नहीं है। हमको अपनाओगे?

सत्य- हहम्मम्म, 

माया- तो देख क्या रहे हो, उस राखी के बंधन को तोड़, हमको अपना बना लो। 

दोनों एक दूसरे के सीने से लग गए। एक 28 साल का भाई अपनी 43 साल की बहन को प्रेमिका बना कर चूम रहा था।  तभी कविता और ममता अंदर आ गए। कविता बोली,” मौसी, मामाजी हमारे मौसाजी बन गए, और आप मामीजी। लेकिन बिस्तर में दोनों भाई बहन बनके ही रहना, मज़ा डबल हो जाएगा।

माया शर्मा गयी। फिर बोली,” अच्छा तो तुम हमको हमारे दामादजी से कब मिलवायेगी। 

ममता- अब शादी वाले दिन मिलेंगे वो। तुम दोनों को ही हम दोनों का कन्यादान करना है। 

सब जोर से हंसे और सत्य माया को लेकर, बाहर आ गया। माया उससे चिपककर बैठी थी। ममता ने सत्य के हाथ से माया की मांग भरवा दी। दोनों काफी खुश थे। अब शादी में बस चार पांच दिन ही तो बाकी थे।”

आज का दिन…..

जय- मतलब, तुम मौसी के साथ भी शारीरिक संबंध बना चुकी हो। तुम तो बहुत बड़ी रंडी हो माँ। तुमने आज दिल जीत लिया। दो भाई बहनों को मिलवाकर।

ममता- अब पता चला पूरा कहानी। अब आपकी और हमारी सुहागरात पूरी करें। अभी सुबह तक चलेगा ये सिलसिला। इधर तुम हम दोनों की ले रहे हो। उधर सत्य, माया को चोद रहा होगा। दोनों मामा भांजे के हाथ लॉटरी लगी है। 

कविता लण्ड सहलाते हुए। जय का लण्ड कड़क हो चुका है, अब हम दोनों की गाँड़ मरवाने की बारी है। जय उन दोनों की गाँड़ ही इस वक्त सहला रहा था। दोनों माँ बेटी तैयारी के साथ आई थी। 


अब आगे कैसी चुदाई होगी ? दोनों माँ बेटी किस हद तक जाएंगे। सुहागरात कब तक चलेगी? अगले भाग में।



जय ममता के मस्त चूतड़ों पर थपथपाते हुए उसके होंठों को चूम रहा था। ममता के खुले बाल, गोरा दपदपाता मुखड़ा, भवों के बीच लाल बिंदी, आंखों में काजल, पलकों पर हल्के गहरे रंग का ऑय शैडो, गालों पर रूज़, होंठों पर लाल लिपस्टिक, उसका मेक अप परफेक्ट था, जो आसानी से नही निकलने वाला था।जय उसके हुस्न के हर एक हिस्से को चूमना चाहता था। दूसरी तरफ कविता भी उतनी ही खूबसूरत लग रही थी। माथे पर भाई के नाम का सिंदूर, हाथों में उसके नाम की मेहन्दी, पूरा श्रृंगार जय के नाम का था। दोनों कपड़े का एक टुकड़ा भी बदन पर नहीं रखे थी। पर गहने और जेवर वैसे ही  बंधे हुए थे। कानों में झुमका, माथे पर टीका, नाकों में नथिया, गले में मंगलसूत्र और हार, हाथों में खनकती चूड़ियां जो उनके मेहन्दी लगे हाथों को और खूबसूरत बना रही थी, उंगली की अंगूठियां वो बस खोली थी, ताकि लण्ड पकड़ने में हिलाने में कोई दिक्कत ना हो, कमर में कमरबन्द, पैरों में पायल और पैर की कोमल उंगलियों में बिछियां, जो रंगे हुए पाऊं को और खूबसूरत बना रही थी। सर से लेकर पाँव तक दोनों ही बहुत आकर्षक और कामुक लग रही थी। जहां, ममता की कमर चौड़ी थी, वहीं कविता की थोड़ी कम थी। ममता की जाँघे चर्बीदार और थुलथुली सी थी, कविता की जाँघे फिट थी। ममता के गाल और जबड़े के नीचे की चर्बी उम्र के साथ साथ थोड़ी  बढ़ गयी थी, तो कविता की भी चर्बी थी, पर हल्की। कविता की गाँड़ जो सुडौल थी, वहीं ममता की गाँड़ बड़ी, भारी, और वसा से भरी हुई थी। हालांकि दोनों ने फिटनेस सेन्टर जॉइन तो किया था, पर 10 दिन में ममता में बदलाव आया तो था,पहले से वो काफी फिट थी, पर अभी भी वो भारी थी।

जय इन दोनों औरतों को अब तक तीन तीन बार झरवा चुका था। पर उसके लण्ड ने अब तक उनकी गाँड़ की खबर नहीं ली थी। कविता के चूतड़ पर लाल होंठों का टैटू और उस पर जय का नाम उसको और आकर्षक बना रहा था। जय ममता के होंठों को चूसते हुए, उसके खूबसूरत लाल लाल होंठों को थूक से भिगोते हुए, रह रहकर अपना लार उसके मुंह में दे रहा था। और ममता भी किसी पोर्न हीरोइन के जैसे जीभ निकाल निकालकर उसके थूक का भरपूर स्वाद लेकर घोंट रही थी। उसके चेहरे पर काम की ज्वाला साफ दिख रही थी। वो एक दम बेचैन हो उठी थी।

ममता- बेटा सैयांजी, अब आप क्या करेंगे हमारे साथ?

जय- तुम बताओ माँ, तुम क्या चाहती हो, तुम्हारा मन क्या चाहता है? तुम्हारे चेहरे पर इतने सुंदर कामुक भाव उभरे हैं, वो दरअसल क्या कहना चाहते हैं? 

ममता उसकी आंखों में प्यासी नज़रों से देखते हुए बोल पड़ी,” तुम तो चेहरे के भाव पढ़ने में माहिर हो, पढ़ लो हमारी आंखों को। तुम तो हमारे मन का बात समझ जाते हो। 

जय ममता के बालों को भींचते हुए बोला- हम तुमसे पहले भी बोले हैं, बिस्तर पर अपनी शर्म कपड़ों के साथ फेंक दिया करो। हम चाहते हैं कि तुम अपने मुंह से बोलो कि तुम क्या करना चाहती हो?

कविता- हां, जय माँ को हम बोले भी थे, कि तुम बिस्तर पर कोई मान मर्यादा नहीं चाहते, हमको बोलने में कोई हिचक नहीं है कि हम तुमसे अपनी गाँड़ चुदवायेंगे। माँ तुम भी सस्ती छिनाल बनो, ताकि आज हम दोनों जय के और करीब पहुंच जाएं। 

ममता- सही बोलती हो तुम, कविता अब ऐसे ही होगा।” फिर जय की ओर देखकर बोली,” जय, अपनी माँ की गाँड़ चोदो, आज इसी सुहागरात को यादगार बनाओ। हमारे मन की प्यास बुझा दो।

जय- ये हुई ना बात माँ। कुतिया की तरह हाथों और पैरों से चौपाया हो जाओ। ममता तुरंत चौपाया हो गयी। जय उसके भारी चूतड़ पर थप्पड़ मारते हुए बोला,” अरे हमरी रंडी! अपना चूतड़ उठाओ। ममता मुस्कुराते हुए पीछे मुड़कर गाँड़ उठा ली और जय के नाक के पास ले गयी। जय ने कविता को इशारा किया और बोला,” कविता दीदी, इन पहाड़ जैसे चूतड़ों को अलग करो, और हमारी आंखों के सामने सूंदर नज़ारा पेश करो।”

कविता मुस्कुराते हुए बोली,” ये लीजिए अपनी माँ की गाँड़ का खूबसूरत नज़ारा देखिए।” और चूतड़ों को अपने हथेलियों से अलग कर दी। सामने जय के वो खूबसूरत नजारा था, जो मर्दों को शायद ही पहली रात में देखने को मिलता है। ममता के चूतड़ जैसे ही अलग हुए वैसे ही उसके सामने ममता के चूतड़ों के गहरे रंग के अंदरूनी हिस्से साफ साफ नजर आ रहे थे। ममता की गाँड़ की दरार जो कि ठीक उसके कमर के नीचे से शुरू हुई थी। बड़े ही खूबसूरत ढंग से कामुक प्रतीत होती थी। वो गली पूरे गाँड़ को दो खूबसूरत तरबूजों में बांटते हुए, उसकी बुर को पीछे से ढकते थे, जब वो अपनी वास्तविक स्थिति में होते थे। पर बुर से ठीक पहले वो खज़ाना था, जिसे जय लूटना चाहता था। ऊपर से आती, चूतड़ की अंदरूनी दीवारें थोड़ी ज़्यादा गहरी भूरे रंग की थी, और उसी बीच में एक सिंकुडा हुआ, भूरा छेद था। जो कि कविता के चूतड़ फैलाने से साफ साफ दिख रहा था। लगातार हुई चुदाई से उस हिस्से में जो पसीना आया था, एक अजीब कामुक गंध दे रहा था। बुर से चूते हुए पानी की वजह से भी वो गंध और अधिक उत्तेजक हो गयी थी। जय ने ममता के गाँड़ के छेद को पहले उंगलियों से छुवा। ममता की गाँड़ उसके छुवन से स्वतः टाइट हो गयी। उस जगह सिंकुड़े हुई चमरी, और अधिक साँवली होकर, एक छेद में कहीं गुम हुई जाती थी। जोकि दरअसल वहीं खत्म हो रही थी। जय उसकी गाँड़ के छेद को अच्छे से महसूस कर सहलाया। जय ने फिर एक उंगली उस कसी हुई छेद के ऊपर रखकर अंदर की ओर धकेला, पर उंगली घुस नहीं पाई। कविता ने ये देख थूक का बड़ा लौंदा, ममता की गाँड़ पर उगल दिया। जोकि ममता की चूतड़ों के बीच की दरार से लुढ़कते हुए गाँड़ की छेद पर टपक गए। जय ने उसको पूरा उस छेद पर मल दिया। कविता ने दो तीन बार थूक से गाँड़ के छेद को गीला कर रही थी। आखिरकार जय ने थूक से सनी अपनी उंगली, और ममता के गाँड़ का छेद जो कि थूक से काफी गीली हो चुकी थी, उसके अंदर प्रवेश कर दिया। उंगली पर अब ज़्यादा ज़ोर नहीं लगा था, पर फिर भी वो ममता की कसी हुई गाँड़ में रास्ता बना, घुस गई। ममता ने हालांकि, ये एहसास पहले तो किया था, पर गाँड़ की यही खासियत होती है कि जब भी कुछ घुसता है लगता है, जैसे पहली बार ही जा रहा है। ममता के मुंह से कामुक दर्दभरी उफ़्फ़फ़ निकली। जय ने ये सुना तो, दूसरी उंगली भी गाँड़ में उताड़ दी, फिर तीसरी। हर उंगली घुसने से ममता, का दर्द का एहसास बढ़ता जा रहा था। पर अगले ही पल वो पीछे से हुए हमले को शरीर के अंदर कामुक तरंगे, उत्पन्न करने में व्यस्त कर रही थी। जय ने उसकी गाँड़ में उंगलियां आगे पीछे करनी शुरू कर दी थी। कविता, चूतड़ों को और फैलाकर जय को उत्साहित कर रही थी। ममता अपनी गाँड़ में अंदर बाहर होती उंगलियों के एहसास से मचल रही थी और पीछे घूमकर कामुक सीत्कारें मार रही थी। अब तक ममता की गाँड़ का छेद जय के उंगलियों की मोटी गोलाई पर अभ्यस्त हो चुकी थी। जय ने उंगलियां बाहर निकाली, तो वो छेद गहरा हो चुका था, और अंदर शुरू में तो कुछ नहीं दिखा, बाद में अंदर की लाल मांसल त्वचा दिख रही थी। इससे पहले की गाँड़ का छेद, वापस सिंकुड़कर पुरानी अवस्था में आता, जय ने वापिस अपनी उंगलियां घुसा दी। इस तरह जय ने कई बार उंगलियां अंदर बाहर की। ममता की कामुक चीख, उसे और गहराई में घुसाने का न्योता दे रही थी। जय का लण्ड एक दम लोहे जैसा सख्त हो चुका था। वो अपने घुटनों पर आकर, अपना तना हुआ लण्ड ममता के गाँड़ की दरार पर रगड़ने लगा। ममता पीछे मुड़कर उसे प्यासी नज़रों से देख रही थी। कविता ने जय के लण्ड को अपने चेहरे के इतने करीब देखा, तो उसे बर्दाश्त नहीं हुआ और लण्ड को मुंह में ले ली। वो जय की ओर लण्ड मुंह में लिए ही देखकर मुस्कुराई। जय ने उसके गालों को प्यार से सहलाया, उसका दाहिना गाल लण्ड के जोर से उभरा हुया था। जय ने भी कामुकता में आकर उसके मुंह में दो चार धक्के मारे। कविता ने लण्ड को गीला करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, और लण्ड को अपने मुंह की लार से इतना गीला किया, की वो चूकर उसके आंड़ से लिपट गया। जय ने ममता की गाँड़ के छेद पर थूका, और गीला किया। फिर अपना लण्ड ममता के गाँड़ के छेद पर टिका दिया, जो कि अभी अधखुला था। और फिर जय ने जोर लगाया, गाँड़ अंदर की ओर सूखा था, और जय का कड़क लण्ड थोड़ा ही अंदर गया। पर इतने में ही ममता की चीख निकल गयी। जय उसके चूतड़ों पर थप्पड़ मारते हुए बोला,” चुप कर साली रंडी, अभी से क्यों चिल्ला रही है। अभी तो लण्ड घुसा भी नहीं है पूरा। तुम तो वैसे भी चुदी चुदाई खिलाड़ी हो, गाँड़ मरवा मवाक़े इतना बड़ा कर ली हो। आज तो खूब चोदना है तुम्हारी गाँड़ को, भोंसड़ीवाली। अभी से मिमया रही हो?

ममता लंबी लंबी सांस लेते हुए बोली,” अरे बेटा सैयांजी, वो बात नहीं है, उफ़्फ़फ़…. ऊऊई। गाँड़ चाहे कितना भी चुदवा लें, पर हर बार ऐसा लगता है, जैसे पहली बार घुसा हो। आआहह.. देखो ना थोड़ी देर में अभ्यस्त हो जायेगा, उफ़्फ़फ़फ़फ़ फिर हमको भी बहुत मज़ा आएगा।

कविता- हाँ, जय माँ सही कह रही है, यही तो खास बात है गाँड़ का। जब भी चुदवायो नया जैसा ही महसूस होता है, वैसे अभी गाँड़ के अंदर की त्वचा पूरी तरह गीला नही हुआ होगा, जहां तक तुम्हारा लण्ड जाएगा। लण्ड को निकालो और गाँड़ में थूकने दो हमको। ताकि अंदर भी पूरा तरह गीला हो जाये। 

जय ने लण्ड बाहर निकाल लिया, और कविता को थूकने के लिए इशारा किया। कविता ने चार पांच बार खूब लार चुवाई। फिर जय ने लण्ड को अंदर घुसा दिया। अबकी लण्ड पूरी तरह अंदर घुस गया। कविता जैसे अपनी लण्ड घुसाने की युक्ति पर इतराते हुए मुस्कुराई। उधर ममता जय के लण्ड की गोलाई पर अपनी गाँड़ की गिरफ्त ढीली छोड़, लण्ड को पूरी तरह प्रवेश करने के लिए मुक्त की हुई थी। जय ने धीरे धीरे सारा लण्ड अंदर बाहर करना शुरू किया। लण्ड के अंदर बाहर होने से अब ममता की गाँड़ अभ्यस्त हो चुकी थी। अब ममता की चीखें, कामुक आहों में बदल चुकी थी। अपने पिछले छिद्र में प्रवेश किये घुसपैठिये का ममता अब स्वागत कर रही थी। जय का तना हुआ लण्ड भी ममता की गाँड़ की अंदर की त्वचा से रगड़ खाकर, और अधिक वेग से चुदाई करने लगा। ममता अब लण्ड को और अंदर लेने के लिए, अपना पिछवाड़ा जय के उदर पर मार रही थी। कविता ममता के चूतड़ों  को अलग किये हुए वहीं अपना चेहरा टिकाए हुए लण्ड को अंदर बाहर होते देख रही थी। जय ममता के खुले बाल अपने बांए हाथ से पकड़कर हमला किये जा रहा था। तीनों उमंग में थे। 

कविता- ओह्ह, आआहह, वाह कितना मस्त नज़ारा है, लण्ड गाँड़ की गहराइयों में उतरकर एक दम अद्भुत लग रहा है।

ममता लण्ड के धक्कों से अपने खुलते सिंकुड़ते गाँड़ के छेद से हो रहे एहसास से अलग ही उमंग में थी।

जय के लण्ड ने तो ममता की गाँड़ में कहर लाया हुआ था। लण्ड पूरा बाहर निकलकर फिरसे पूरा अंदर घुस जा रहा था। जय को ममता की गाँड़ मारने में एक अजीब सा सुख औ सुकून मिल रहा था। 

जय- आह… ओह्ह हहम्मम्म हहम्ममम्म क्या मस्ती है तुम्हारे गाँड़ में माँ, जितना चोद रहे हैं, उतना और मन हो रहा है। सच में औरतों की गाँड़ चोदने में बहुत ज़्यादा मज़ा आता है। हमको तो औरतों की चाल उनकी गाँड़ हिलने की वजह से ही मस्त लगती हैं। खजुराहो में भी तुम्हारी गाँड़ मारे थे, पर आज जो सुख दे रही हो वो लाजवाब है। एक तो इतने मस्त बड़े बड़े भारी चूतड़ है, तुम्हारे। मन तो करता है, इन चूतड़ों के बीच ही अपना मुंह फंसाये रखें। इन मस्त चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से भी मटकते देखते थे, तो लगता था कि वहीं तुमको नंगी करके गाँड़ मारे तुम्हारी। आज तुम्हारी गाँड़ चोदने में सचमुच स्वर्ग जैसा अनुभव हो रहा है।”

ममता पीछे घूमकर, लगातार होते धक्कों की वजह से कांपते हुए कामुक स्वर में बोली,” बेटा सैयांजी, आआहह… ओहह… पहले ही हमको काबू में कर लेते, और आआह…. अपने लण्ड से हमारी खूब गाँड़ मारते। एक औरत तभी काबू में आती है, जब मर्द उसकी गाँड़ मार लेता है। औरत का ये सम्पूर्ण आत्मसमर्पण होता है। उसका बचा खुचा आत्मसम्मान और गरिमा दोनों मर्द के लण्ड के साथ, गाँड़ में घुस जाते हैं। औरत तभी एक मर्द का सच्चा साथ निभाती है। और इस तरीके से हम औरतें आप मर्दों के दिलों में घर कर जाती हैं।

कविता- उफ़्फ़फ़, माँ ये ज्ञान सिर्फ तुमसे ही मिल सकता था। तुमने सच्ची मायनों में औरत की गाँड़ का महत्व खोल कर रख दिया है। और आज तो जय को हम दोनों का गाँड़, मारना है। हम भी बहुत बेचैन हो रहे हैं, अपने नन्हे मुन्हें गाँड़ की छेद की ठुकाई के लिए।पहले माँ तुम मरवा लो, फिर तुम्हारी बेटी मरवायेगी। आघघ… उसके खुले मुंह में लण्ड जा टकराया, और गले तक पहुंच गया। जय ने जबरदस्ती, उसके मुंह में लण्ड पेल दिया था। जय ने ममता के गाँड़ से ताज़ा निकला लण्ड जिसमें उसकी गाँड़, से निकला चिकना, चिपचिपा पदार्थ लगा था। उसका स्वाद कविता उसकी बेटी के मुंह में समा रहा था। 

जय- ले चाट दीदी, अच्छे से चाटो, माँ की गाँड़ का स्वाद चखो। इसी लण्ड पर तुमको, और माँ को खूब नचवाएँगे। तुम और माँ अब एक दूसरे के अंग अंग से वाकिफ हो जाओ। माँ की गाँड़ और तुम्हारा मुंह में अब कोई फर्क नहीं है। और वैसे ही तुम्हारी गाँड़ और इसका मुंह सब बराबर हैं। तुम दोनों के बीच, कोई भी मतभेद नहीं होना चाहिए। खूब गाँड़ मरवाओ समझी।

कविता लण्ड को बहुत अच्छे से चूस रही थी। लण्ड के हर एक हिस्से को सुपाडे से लेकर आंड़ तक अपनी जीभ फिरा रही थी। 

जय उसे देख मुस्कुराया और बोला,” हाय रे कितनी प्यासी हो तुम दीदी, अच्छा लगा तुमको ऐसे देख कर।”

ममता पे चुदाई का नशा सा था,वो बोली,” उफ़्फ़फ़, अरे छिनाल की बेटी लण्ड वापिस गाँड़ में डाल दे, कितना चूसेगी। तुम भी मरवाओगी ना, पहले हमारा होगा तभी ना मरवाओगी। ज्यादा लेट मत करो, डाल दो।

कविता- हां, तुम भी तो छिनाल ही हो, साली रंडी कहीं की, बेटे से चुदवा रही हो, मादरचोद, तो तुम्हारी बेटी भी ऐसी ही होगी ना। लण्ड की भूखी, गाँड़ मरवा रही हो, मज़े से। घबराओ मत आज भैया, तुम्हारी गाँड़ फाड़ डालेगा। और हम जय का पूरा मदद करेंगे।

ममता- तो चोदने दो ना अपने भाई को, अपनी इस रखैल माँ की गाँड़। घुसा दे ना…… आहहहहहह

जय ने ममता की कांपती गाँड़ के छेद पर लण्ड का सुपाड़ा सेट करने के लिए, कविता के मुंह से लण्ड निकाल लिया। और छेद के आस पास की मोटी चमरी को लण्ड के सुपाड़े से दबाते हुए, ममता की गाँड़ की गहराइयों में उतार दिया। फिर लण्ड को जोरों से गाँड़ में अंदर बाहर करने लगा। इस धका धक हो रही चुदाई से गाँड़ का छेद फैलता चला गया। जय लण्ड पूरा बाहर निकालता और फिर उसकी गाँड़ में उतार देता। कविता जय की बेरहम चुदाई देख सहम सी गयी। जय ने कविता से कहा,” क्यों दीदी, तुमको गाँड़ नहीं चुदवाना है क्या? अपनी गाँड़ मरवाने की पूरी तैयारी करो। तुम्हारे गाँड़ में हलवा डाले थे याद है ना? तुम तो एक दम मस्त पेलवाओगी, हम जानते हैं। 

कविता- जय तुम आज बहुत बेरहम होकर चोद रहे हो। ऐसे चोदोगे तो हम दोनों की गाँड़ फाड़ ही डालोगे। हम अपने गाँड़ में आज हलवा नहीं दिलवाएंगे, बल्कि गाजर ही दैल लेते हैं। ताकि जब तक माँ को चोदोगे तब तक हमारी गाँड़ तैयार रहे।” ये बोल वो उठकर गाँड़ मटकाते हुए,किचन गयी। उसके चलने से उसके गहनों की खनक साफ सुनाई दे रही थी। जय उसके उछलते चूतड़ों को देख, और तेजी से गाँड़ मारने लगा। ममता की कामुक चीखें, पूरे कमरे में गूंज रही थी। जय ने ममता की गाँड़ से फिर लण्ड निकाला और ममता के सामने आ गया। उसने ममता के चेहरे को पकड़के, उसके ऊपर लण्ड मलने लगा। ममता हंस रही थी। उसके पूरे चेहरे पर लण्ड पर लगी चिकनाई फैल गयी। जय ने फिर अपना लण्ड ममता के खुले मुंह में घुसेड़ दिया। ममता एक दम से लण्ड गले से टकराने से चोक कर गयी। और खांस उठी। पर जय ने उसे लण्ड मुंह से निकालने नहीं दिया। ममता के सर को पकड़के, और कमर से जोर लगाके लण्ड उसके मुंह में घुसा रहा था। 

जय- हहहह हहम्ममम्म, ऊफ़्फ़फ़ मादरचोद, चूस साली, हरामज़्यादी, माँ होकर भी, तुझमे अभी बहुत जवानी बाकी है। 

ममता के मुंह से लण्ड के चारो तरफ लेर चू रहा था। थोड़ी देर चुसवाने के बाद, जय ममता के माथे पर लण्ड रकहा दिया, जहां सिंदूर लगा रखी थी। 

ममता उसकी हरकत देख, मुस्कुराई और बोली,” तुम्हारे लण्ड से जब मूठ हमारी मांग में गिरेगा, तब हमारा श्रृंगार पूरा होगा।”

जय- सब तो तुम माँ बेटी पी लेती हो, इसके लिए अलग से कैसे व्यवस्था करें। 

तभी कविता, कमरे में अंदर आ गयी, उसके हाथ में गाजर था और वो कूद कर बिस्तर पर चढ़ गई। उसने दूसरे हाथ में एनल लुब्रीकेंट रखा था। उसने सबसे पहले तो जय के आगे अपनी गाँड़ फैला दी। फिर अपनी गाँड़ पर काफी लुब्रीकेंट लगा ली। और गाजर को अपनी सिंकुड़ी, भूरी, छेद में दबाकर उतारने लगी। उस तरल की वजह से गाजर आराम से गाँड़ में उताड़ गया। धीरे धीरे कर पूरा गाजर गाँड़ में घुस चुका था। बाहर सिर्फ पत्ते दिख रहे थे। जय ने कविता के चूतड़ों पर कस कसके तीन चार थप्पड़ जड़ दिए। कविता फिर जय की ओर घूम गयी। ममता और कविता दोनों कुतिया बानी हुई थी। दोनों माँ बेटी लण्ड चूसने लगी। जय दोनों के सर सहलाते हुए, अपना लण्ड चुसवा रहा था। दोनों बड़े ही भक्तिमय अंदाज़ से लण्ड को भगवान समझ, अपने थूक से उसका अभिषेक कर रही थी। थोड़ी देर बाद जय लण्ड निकालकर दोनों से बोला,” कविता दीदी अब हम तुम्हारी गाँड़ चोदेंगे। तबसे गाजर गाँड़ में डाले हुए हो, अब अपने भाई का लण्ड लो। माँ को भी थोड़ा, आराम करने दो। माँ तुम दीदी के आगे लेट जाओ, दीदी तुम्हारा बुर चुसेगी और ये गाजर तुम्हारे गाँड़ में डालेगी। तुम दोनों की गाँड़ अब खाली नहीं रहेगी।”

जय कविता के पीछे आ गया और ममता उसके आगे दोनों टांग उठाकर पीठ के बल लेट गयी। जय ने पहले उसकी गाँड़ से गाजर निकाल लिया और कविता के हाथों में थमा दिया। कविता की गाँड़ थोड़ी सी खुली थी, जय ने लण्ड को कविता के अधखुले छेद में घुसा दिया। उधर कविता इस हमले से चिहुंक उठी। हालांकि उसने गाँड़ में गाजर डाल रखा था, पर लण्ड से उसकी गाँड़ बुरी तरह फैल गयी। ममता अपनी बुर पर कविता का सर पकड़के रगड़ रही थी। कविता अब दोनों तरफ से व्यस्त हो गयी। फिर उसने ममता से बोला,” माँ, ये गाजर तुम्हारे गाँड़ में ठूसना है। उठाओ मादरचोद।

ममता- घुसा दो ना, गाँड़ मारकर तुम्हारे भाई ने वैसे ही फैला दिया है। ले घुसा ले।

कविता ने घुसा दिया फिर ममता खुद से ही उसे आगे पीछे करने लगी। कविता गाँड़ मरवाते हुए, अब अपनी माँ की पवित्र बुर चूस रही थी। बुर का नमकीन पानी, उसके पूरे चेहरे पर लगा हुआ था। पीछे उसकी गाँड़ का भुर्ता बन रहा था। कविता की गाँड़ का छेद कोक के ढक्कन के निचले हिस्से की तरह, उबर खाबर थी। पर मांसल होने से उसमे रगड़ खाने से और मज़ा आ रहा था। ये इस तरह बहुत देर तक चुदाई का आनंद लेते रहे। जय ने तब ममता और कविता को इकट्ठा एक साथ बिस्टेर पर करवट कर लिटा दिया। जिससे उन दोनों की पीठ एक दूसरे को सहारा दे रही थी। जय ने ममता की गाँड़ से गाजर निकाल कर, दोनों से चटवाया। फिर दोनों अपने अपने चूतड़ फैलाकर, अपनी खुली हुई गाँड़ जय को परोस रही थी। दोनों अपने अपने गाँड़ की छेद पर अपना अपना थूक मल रही थी। जय के सामने, दो दो मस्त औरतें, लेटकर गाँड़ मरवाने को तैयार थी। जय ने अपना लण्ड पहले ममता की गाँड़ में घुसा दिया। कविता अपने हाथ से अपना बुर सहला रही थी। दोनों की बुर नीचे तरफ से साफ दिख रही थी। जो कि उनकी चिपकी जांघों के बीच गायब हो जा रही थी। जय अब ममता की गाँड़ फिरसे चोदने लगा। उधर ममता भी कमर नीचे की ओर हिलाकर उसका लण्ड ले रही थी। वो भी अपना बुर सहला रही थी। चारों तरफ कमरे में तीनों की सिसकारियां, आहें फैली हुई थी।तीनो दुनिया से बेखबर काम के सागर में डूबे हुए थे। तभी कविता बोली,” जय अब हमारी गाँड़ चोदो ना, माँ का तो बहुत चोदे हो।”

जय,” दीदी, हमको अफसोश है कि हमारे पास एक ही लण्ड है, अगर दो होते तो तुम दोनों को एक साथ चोदते। खैर ये लो।” और लण्ड निकाल लिया। प्लूप कि आवाज़ से लण्ड ममता की गाँड़ से निकल गया। ममता की गाँड़ अब तक चुद चुदकर, पूरी तरह खुल गयी थी। जिस वजह से गाँड़ के अंदर की गुलाबी मांसल त्वचा साफ दिख रही थी। ममता गाँड़ में उंगली डालकर  हिला रही थी। जय ने अपना लण्ड अब कविता की गाँड़ में घुसा दिया। अब तक कविता की गाँड़ भी अभ्यस्त हो चुकी थी। जय के लण्ड की गोलाई कविता के गाँड़ को अपने जितना चौड़ा कर चुकी थी। हालांकि उसकी गाँड़ ममता जितनी नहीं चुदी थी। पर क्षमता उसमें भी बहुत थी। अपनी बुर को मसलते हुए, कविता बेहद कामुक आहें भर रही थी। जय बड़ी ही बेरहमी से गाँड़ को ढीला कर रहा था। ममता अपने गाँड़ से उंगली निकालकर खुद चाट रही थी। और बुर भी रगड़ रही थी। थोड़ी देर कविता की गाँड़ चोदने के बाद जय ने लण्ड निकाला, कविता की गाँड़ भी चुदकर बहुत ढीली हो गयी थी। वहां भी अंदर से उसकी मांसल त्वचा साफ दिख रही थी। जय ममता की गाँड़ में लण्ड घुसा दिया, फिर तुरंत निकालजेर कविता की गाँड़ में घुसा दिया। इस तरह वो एक बार ममता की गाँड़ और दूसरी बार कविता की गाँड़ में लण्ड घुसा देता था। ममता और कविता की हंसी छूट गयी। दोनों के चूतड़ आपस में चिपके हुए थे। दोनों आपस में अब एक दूसरे के बुर को मस्लरहि थी। तब जय ने कविता की गाँड़ में फिरसे लण्ड घुसा दिया और कसके चुदाई शुरू कर दी। अबकी बार बुर की मसलन और गाँड़ में लण्ड का एहसास कविता के लिए भारी था, और वो जोर से दहाड़ कर झड़ गयी। उसकी बुर से काफी पानी चू रहा था। जय अपने लण्ड के चारों ओर कविता की गाँड़ की सिकुरन महसूस कर रहा था। फिर आखिर में 2 मिनट बाद जब वो नार्मल हुई तब लण्ड को निकाला। गाँड़ का छेद बुरी तरह फैल चुका था, अंदर काफी तबाही मची थी। उसकी गाँड़ से बहुत सारा, गीला पदार्थ बाहर चू रहा था। इतनी चुदाई की वजह से, फैली गाँड़ के अंदर लाल त्वचा स्पष्ट दिख रही थी। कविता पसीना पसीना हो चुकी थी। उधर ममता ने बिना देर किए लण्ड को अपनी गाँड़ में डालने को कहा। जय ने उसकी गाँड़ में लण्ड घुसा दिया। ममता भी अपनी बुर मसल रही थी। जय अब बहुत ही तेजी से उसकी गाँड़ मारने लगा। 

ममता- ऊफ़्फ़फ़, क्या मस्त चोदते हो हमारी गाँड़ को तुम। मन खुश कर दिए हो आहहहह….

जय- अरे तुझ जैसी रंडी को ऐसे ही चोदा जाता है। अपनी कोख से एक मादरचोद पैदा किया है तुमने और एक बेहद छिनाल बेटी जो अब तुम्हारी सौतन भी है। तुम दोनों हमारी रखैल बनकर रहोगी। तुम दोनों को जब मर्ज़ी तब चोदेंगे, आठहठहद ऊफ़्फ़फ़ तुम दोनों की ब्लू फिल्म बननी चाहिए। 

ममता- वो तो बन ही रही है। चारो तरफ कविता ने कैमरे लगवाए हैं। इस रात की हर हरकत रिकॉर्ड हो रही है। ये हम तीनों के बेहद निजी और कामुक पल हैं। 

जय- अरे क्या बात है कविता रंडी दीदी, तुम तो लाखों में एक हो। 

ममता- जय अब हमारा झरने वाला है। बुर से पानी का फवारा छूटने ही वाला है।

जय- माँ, हमारा भी होने ही वाला है, तुम दोनों की गाँड़ इतनी देर से मार रहे हैं, अब बर्दाश्त नहीं हो रहा।

ये सुन्ना था कि कविता उठ बैठी, और अपना मुंह ममता की गाँड़ में अंदर बाहर होते लण्ड के पास खोलकर टिका दी। कविता- आआहह, हां, भाई, अपना मूठ माँ की गाँड़ में ही चुआ दो। दोनों माँ बेटे अब कीड़ी भी पल छूटने वाले थे। जय और ममता आखिरकार एक साथ झड़े। ममता की बुर से खूब बड़ा फव्वारा छूटा। और जय ने 7 8 झटकों में ममता की गाँड़ में अपना मूठ गिरा दिया। ममता की गाँड़ की अंदरूनी दीवारें, उस गरम सफेद रस से भीगकर सन गयी। जय का लण्ड अभी भी ममता की गाँड़ में ही था। कविता अपनी जीभ निकाले, इंतज़ार कर रही थी कि कब लण्ड गाँड़ से निकले और ममता की गाँड़ से चूता गरम मूठ पिये। थोड़ी देर में लण्ड, गाँड़ से निकल गया, और कविता ने पहले ममता की चुदी चुदाई फैली गाँड़ पर हाथ रख दिया और जय के लण्ड को चूसने लगी। लण्ड पर ममता की गाँड़, कविता की गाँड़ और जय के लण्ड का रस अछि तरह लिपा पुता था। कविता बिल्कुल आइस क्रीम की तरह सब साफ कर गयी। जय को ये देख बहुत सुकून मिल रहा था। ममता तभी बोली,” अरे मादरचोद खुद ही सब साफ कर जाएगी या अपनी माँ को भी चाटने देगी। लाओ इधर लाओ जय का लण्ड।

जय घुटनो के बल चलकर, ममता के चेहरे के पास लण्ड ले आया। ममता मुस्कुरा रही थी। जय भी थकी सी मुस्कान दे रहा था। ममता बेहिचक उसके लण्ड को चूसने लगी। उसने भी अपनी गाँड़ का स्वाद चखा। और बोली,” कविता, हम दोनों की गाँड़ बहुत मीठी है। और ज़ोर से हंसी। कविता भी हंसी रोक नही पाई। जय बोला,” अब तो तुम दोनों बराबर एक दूसरे की गाँड़ को टेस्ट करोगी।”

कविता ने फिर अपने हाथ ममता की थरथराती गाँड़ के छेद से हटाया, जैसे ही हाथ हटा, अंदर से ढेर सारा मूठ चूने लगा। कविता ने बिना देर किए, अपना मुंह ममता की गाँड़ के छेद पर लगा दिया और तब तक लगाए रखी जब तक मूठ चूता रहा। ममता की गाँड़ का छेद काफी खुल चुका था, और अंदर से सफेद लुवादार मूठ सरकते हुए, चूतड़ों से होते हुए कविता के मुंह में समा रहा था। ममता की गाँड़ से अजीब सी गंध आ रही थी। एक बहुत ही मादक गंध, वो गंध उतनी ही मादक थी जितनी पहली बारिश के बाद, मिट्टी के भीगने से आती है। वहां, जय के मूठ, ममता और कविता की गाँड़, पसीने की खुश्बू व्याप्त थी। ममता चूतड़ हिलाकर, गाँड़ से मूठ निकाल रही थी। आखिर में जब सब निकल गया, तो ममता खुद उंगली घुसाकर, अंदर से बचा खुचा, गाँड़ की अंदरूनी दीवार से चिपका, रस निकाल रही थी। फिर वो उसे उंगली निकाली और जीभ से चाटने लगी। और अपनी उंगली चूस कर सूखा दी। इसके बाद, कविता ममता के ऊपर चढ़ गयी। और दोनों एक दूसरे को चूमने लगी।और उसी क्रम में मूठ ममता के मुंह में भी गिर रहा था। दोनों बिल्कुल प्यासों की तरह चटखारे लेते हुए सब पी गयी। जय उन दोनों को देख बहुत खुश था। उसकी नज़र घड़ी पर गयी सुबह के 4:30 बज रहे थे। वो लेटा हुआ था, और उसकी दो नई बीवियां आपस में उलझी हुई थी।

Leave a Comment