मां बेटी और बेटा CHAPTER 5

 

             मां बेटी  और बेटा  CHAPTER 5




बिस्तर पर ममता बिल्कुल नंगी लेटी थी। उसे विश्वास ही नही हो रहा था कि अपने बेटे के साथ इस अवस्था में चिपकी हुई है। हालांकि वो इस खेल की पुरानी खिलाड़ी थी पर बेटे के सामने शर्म से आंखे बंद हो रही थी या फिर उसकी तरफ नहीं देख रही थी। जय ने इस बात को समझ लिया। उसने ममता के माथे को चूमा और उसके गालों को सहलाते हुए कहा,” तुमको शर्म आ रहा है, है ना? 

ममता,” हहम्मम,। ममता दूसरी ओर देखते हुए बोली। 

जय- शशिकांत जब तुमको चोदता है, तब शर्म आती है?

ममता ने उसकी ओर चौंकते हुए देखा,” तुम्हें किसने कहा?

जय- ये सब बातें छुपती नहीं है, हमारी भोली माँ। कभी ना कभी तो पता चल ही जाता है। ममता हम चाहते तो कल रात ही तुमको ये सब बताकर तुमको ब्लैकमेल कर सकते थे और चोदते तुमको। पर हम चाहते हैं कि जब तुम हमसे चुदो तो खुलकर चुदवाओ। तुमने तो हमको पागल कर दिया है माँ। और उसने ममता के होंठों का रसास्वादन शुरू कर दिया। ममता ने उसको रोका नहीं।

थोड़ी देर बाद ममता साँस उखड़ने की वजह से उससे अलग हुई। फिर ममता ने जय की ओर देखा और मुस्कुराते हुए बोली कि,” शर्म तो औरत का गहना होता है। इसी शर्म को जब हम औरतें बंद कमरों में धीरे धीरे उतारती हैं तभी मर्दों को मज़ा आता है। हमारा ये गहना तुमने उतार दिया। 

जय- माँ….

ममता – माँ नहीं ममता कहो। बिस्तर में जो औरत नंगी पड़ी हो तो वो माँ नहीं होती। अभी हम तुम्हारी माँ नहीं बल्कि एक औरत हैं।

जय- ठीक है ममता। पर इस वक़्त हम खुद को रोक नहीं पा रहें हैं। हमको वो जगह देखना है जहां से हम पैदा हुए थे। जय ने उसकी जांघों को सहलाते हुए कहा। जय उसकी जांघों के पास आ गया। उसकी जाँघे थोड़ी थुलथुली थी। एक दम चिकनी और गोरी। जय जांघों को चूम रहा था और ममता गुदगुदी की वजह से हंस रही थी। फिर जय ने ममता की जांघों को अलग किया और जांघों के अंदरूनी हिस्से को चूमते हुए उसकी बुर को छुआ। ममता सिहर उठी। ममता की बुर पर बेहद हल्के बाल थे जिससे ये पता चलता था कि उसने चार पांच दिन पहले ही बाल काटे थे। बुर की फाँके मोटी और गहरी सावली थी। बुर की पत्तियां बाहर की ओर निकली थी। उससे काफी लसलसा पारदर्शी चिपचिपा पदार्थ निकल रहा था, जो उसकी बुर को चिकना बना रहा था और ममता की कामुकता का प्रमाण था। जय को उसकी खुशबू अपने नथुनों को सुगंधित करती हुई महसूस हुआ। जय ने अपने हाथों में लगे ममता के बुर के रस को चाटा। ममता उसे देख मुस्कुराई और बोली,” यहीं से पैदा हुए थे तुम, देख लो।

जय उसकी टांगों के बीच आ गया था और उसने उसके बुर को चूम लिया। जय ने बुर की फाँकों को अलग किया अंदर गुलाबी सा दिखने लगा। बुर के पत्तियों के बीच बुर से निकला चिपचिपा पदार्थ लाड़ की तरह लटक रहा था।जय ने जीभ से उसको मुंह मे ले लिया। फिर ममता के बुर को अच्छे से चाटने लगा। पहले तो उसने चाटकर पूरे बुर के रस को चूस लिया, बल्कि यूँ कहें कि बुर की जीभ से सफाई की। ममता को ऐसा आनंद पहली बार मिला था, क्योंकि शशिकांत ने कभी बुर को चूसा नहीं था। ममता को ऐसा असीम सुख का अनुभव खुद अपने बेटे से मिल रहा था। ममता अपने दोनों हाथों से खुद को सहला रही थी। जय ममता के बुर के दाने को मुंह मे रखके चूसता कभी जीभ बुर में घुसाके चोदने लगता। बुर के अंदर का भी स्वाद ले रहा था। बुर अगर सूखने लगती तो उस पर थूक देता और फिर चाटने लगता। ममता की सीत्कारें उस कमरे में गूंजने लगी। ममता को बुर चुसवाने में असीम आनंद मिल रहा था। जय ने ममता के बुर के किसी हिस्से को नहीं छोड़ा। ममता छटपटाने लगी। उसको अब लण्ड की जरूरत थी। उसने जय को बोला,” बुर में अब लण्ड चाहिए बेटा। हमको अब बहुत बेचैनी हो रही है। दो ना लण्ड।

जय ने ममता को तड़पते हुए देखा तो बोला,” माँ ओह्ह सॉरी ममता तुमको लण्ड चाहिए ना। अपने बेटे का लण्ड लोगी? बोलो

ममता- हाँ जय हमको लंड चाहिए। दे दो प्लीज।

जय ने ममता से कहा,” ऐसे नहीं मिलेगा लण्ड समझी। इसके लिए तुमको हमको खुश करना पड़ेगा। जय ममता की बुर को छेड़ते हुए बोला।

ममता बोली तड़पाओ मत बस हमको चोदो ना। बुर में लण्ड घुसाके।

जय- ऐसे नहीं तुमको भी कुछ करना होगा। 

ममता- हम सब करेंगे, पर तुम अभी बस चोद दो। ममता बिन पानी की मछली की तरह तड़पते हुए बोली।

जय- नहीं ऐसे नहीं पहले हमको भी तो मज़ा आना चाहिए।

ममता- बोलो क्या करूं? तुम जीते हम हारे।

जय- ये हुई ना बात। बिस्तर से उतरो और कुतिया बन जाओ। 

ममता ने वैसा ही किया और जय उसके सामने लण्ड लहराते हुए खड़ा हो गया । फिर ममता को लण्ड चूसने का इशारा किया और बोला,” बिना हाथ लगाए चूसना है तुमको। ममता बिल्कुल एक पालतू कुतिया की तरह चूसने के लिए आगे बढ़ी। ममता जय के लण्ड को चूमने लगी। उस लण्ड की भूखी माँ ने अपने बेटे के साथ वो काम कर रही थी जो उसने उसके बाप के साथ किया था। जय ममता के चेहरे पर लण्ड रगड़ने लगा और ममता अपना मुंह खोले हुए जीभ लटकाई हुई थी। कुछ देर तक यूँ करने के बाद ममता ने अपना काम शुरू किया और उसके लण्ड को चूसने लगी। जय उसके मुँह में लण्ड घुसाकर बाकी सब ममता पर छोड़ दिया। ममता चुदाई के खेल की अनुभवी खिलाड़ी थी इसलिए उसने अपने अनुभव का फायदा उठाते हुए बहुत शानदार तरीके से लण्ड चूस रही थी। जैसा कि जय ने बोला था, बिना हाथ लगाए वो अपने मुँह का उपयोग कर रही थी।

जय- माँ क्या लण्ड चूस रही हो तुम। मज़ा आ रहा है। उफ़्फ़ तुम जैसी औरत को हमारी माँ नहीं बल्कि बीवी होनी चाहिए। ओहह….

ममता ने उसकी ओर देखा और लण्ड को और जोर जोर से चूसने लगी। ममता जय के लण्ड को अपने थूक से सरोबार कर चुकी थी। जीभ से उसके सुपाड़े को चूसती, चाटती थी। फिर वापिस मुंह में ले लेती। 

जय ने एक हल्की शरारत शुरू की। ममता के मुंह से लण्ड खींच लिया और धीरे धीरे पीछे हटने लगा। ममता कुतिया की तरह लण्ड की चाह में आगे बढ़ने लगी। उसका मुंह खुला हुआ था। जैसे ही वो लण्ड के करीब पहुंचती जय और पीछे हट जाता। ममता और आगे बढ़ती जय की ओर कामुक नज़रों से देखते हुए। जय बोला,” लण्ड के लिए तुम कितनी तड़प रही हो ममता। सच कहा है किसीने की हर औरत के अंदर एक रंडी जरूर होती है। आओ ले लो इस लण्ड को मुँह में और अपनी प्यास मिटाओ।

ममता,” आआहह तुम हमको ऐसे तड़पा रहे हो अपने लण्ड के लिए। मत भूलो की इस लण्ड को हम पैदा किये हैं। और अब कुतिया बनके उसको चूस रहे हैं। लण्ड की भूख बहुत तड़पाती है। सीधी साधी औरत भी कुतिया बन जाती है।

जय ने हंसते हुए ममता को एक गोल चक्कड़ लगवा दिया ऐसा करके। ममता जब दोनों हाथ और घुटनों पर चलती तो उसके चूतड़ मस्ती से हिल रहे थे। ममता ने आखिर जय के लण्ड को दबोच लिया किसी जंगली बिल्ली की तरह और जय को बिस्तर पर बैठा दिया। और उसके लौड़े को कसके चूसने लगी। वो कभी जय के लण्ड को गीला करने जे लिए उसपर थूकती और फिर चूसने लगती। 

जय- शर्म को पूरी तरीके  से हटाने के लिए आंखों में आंखे डालकर चूसो। 

ममता उसकी ओर देखकर लण्ड चूसने लगी। दोनों की नजरें मिली। जय ने देखा कि ममता के आंखों में अब वासना पूरी तरह उफान मार रही है। जय ने ममता को खींचकर ऊपर अपनी गोद में बैठा लिया। ममता ने उसकी आँखों मे देखते हुए उसके लण्ड को अपनी गाँड़ से मसलने लगी। ममता और जय एक दूसरे को बाँहों में कसे हुए थे। जय ने ममता को चुम्मा लेना शुरू कर दिया। और ममता उसके चेहरे को पकड़के अपने होंठ चुसवा रही थी। मुंह के अंदर दोनों एक दूसरे की जीभ को लड़ा रहे थे। ममता की बुर से पानी लगातार चू रहा था। 

ममता ने चुम्मी तोड़कर कहा,” अब डाल दो ना।

जय- क्या?

ममता- तुम्हारा हमारे अंदर।

जय- क्या हमारा तुम्हारे अंदर, खुलकर कहो शर्माओ मत।

ममता- अपना लण्ड हमारी बुर में।

जय – ये हुई ना बात तुम्हारे मुंह से ये सब सुनके कितना मज़ा आ रहा है। लण्ड को पकड़ो और बुर में घुसा लो। और हम बन जाएंगे……

ममता- मादरचोद। ममता ने ये बोलकर जय के लण्ड को अपनी बुर में घुसाने लगी। जय का लण्ड बड़ा और मोटा तगड़ा था पर ममता की चुदी चुदाई बुर ने उसको आराम से अपने अंदर ले लिया। दोनों के मुंह से आआहहह…… निकली। इसी पल का दोनों को इंतज़ार था। जय ने ममता को कमर से पकड़ रखा था और ममता जय को कंधों से। ममता अपनी कमर हिलाते हुए, जय के लण्ड पर हौले हौले उछलने लगी, जिससे उसकी चुच्चियाँ भी हिल रही थी। जय के चेहरे को उसने अपनी चूचियों के बीच रख लिया। क्या दृश्य था। माँ अपने बेटे के गोद मे बैठके चुदवा रही थी। जय ने ममता की बांयी चुच्ची को मुँह में लेकर चूसने लगा। और अपने उंगलियों से उसकी गाँड़ की दरार में रगड़ने लगा। ममता बिल्कुल खुलके मस्ती में चुदवा रही थी। पूरे कमरे में दोनों की आआहह ओह्ह सीत्कारें गूंज रही थी। दोनों माँ बेटा चुदाई का भरपूर आनंद ले रहे थे। ममता अब तेजी से उछल रही थी। जब वो उछलती और बैठती थी तो भारी भरकम चूतड़ जय की जांघों से टकराती हुई चपटी हो जाती और थप थप की आवाज़ होती थी। जय  बारी बारी से दोनों चूचियों को चूस रहा था। ममता उसके सर को पकड़ी हुई बोली,” पी ले बेटा खूब चूस अपनी माँ की चुच्चियों को। तेरे लिए ही हैं। बचपन में खूब चूसता था। बहुत दूध पिलाए हैं, तुमको। आज अपनी माँ के दूध की ताकत दिखाओ हमको। हम देखना चाहते हैं कि हमारे दूध ने तुम्हारे अंदर कितनी मर्दानगी भरी है।  आज हमको ये एहसास करवाओ की तुम्हारे अंदर हमारा दूध खून बनके दौड़ रहा है, जो तुम्हारे लण्ड को कड़क किये हुए है। इस लण्ड को हमारे इतना अंदर घुसा दो की ये हमारे दिल से कभी निकले ना। सच दुनिया में केवल दो जात हैं, मर्द और औरत बस। बाकी सब ढकोसला है। रिश्ते नाते सब यहां आके बनते हैं। इन रिश्तों के बंधन खोलके आओ हम तुम खुलके साँस ले। हमारी बुर से निकलकर उसी बुर को चोदने का मज़ा कुछ और ही है, है ना? आआहह….. और चुदवाने का भी। जय ने उसके चूतड़ों पर एक थप्पड़ मारा और बोला,” तुम सच कह रही हो माँ। तुम माँ बनने से पहले एक औरत थी, हो और रहोगी। क्या मज़ा आ रहा है तुमको चोदने में?  आखिर हर माँ बेटे में ये रिश्ता थोड़े ही कायम होता है। औरत की गर्मी हमेशा मर्द को पिघला देती है, भले ही वो उसकी माँ क्यों ना हो। हमारे लिए तुम कामरूपी देवी हो। हम इन रिश्ते के बंधन को इन बंद कमरों में उतार फेंकेंगे।”

जय ने ममता को गोद से उठाके बिस्तर पर पटक दिया और उसके ऊपर चढ़ गया और लण्ड घुसा दिया। ममता के मुंह से आआहह निकल गयी। फिर जय बोला,” अब हम तुमको तुम्हारे दूध की ताकत दिखाते हैं। आज तुमको अपने बेटे पर नाज़ होगा, की तुमने एक हट्टा कट्टा मर्द पैदा किया है।”

जय ममता को तेजी से चोदने लगा। पूरे कमरे में दोनों की आवाज़ें गूंज रही थी। 

ममता अपने पैरों की कैंची बना ली थी जय के कमर पर और जय ममता को चूमते हुए चोद रहा था। ममता को वो इस तरह करीब पांच मिनट तक उसने चोदा। ममता भी कमर उछाल कर उसका साथ दे रही थी। तभी ममता बोली, ” जय आआहह हमारा छूटने वाला है, आआहह….. और ज़ोर से आआहह और ज़ोर से चोदो। चोदो अपनी माँ को।

जय- आहहहहह…. हाँ हमारा भी निकलने वाला है। उफ़्फ़फ़…. हम चाहते हैं कि ये कभी खत्म ना हो पर अब रुका नहीं जा रहा है। बुर में ही गिरा दे। 

ममता- गिरा दो आआहह। 

दोनों के दूसरे को कसके पकड़े हुए थे। जय धक्के मार रहा था। तभी दोनों की चीखभरी आवाज़ गूंजी और दोनों झड़ गए। ममता को अपने बुर में मूठ की धार महसूस हुई। जय ममता पर निढाल हो गया। ममता उसे बाँहों में भरे हुए थी। दोनों करीब 10 मिनट यूँही पड़े रहे। फिर जय ममता के बगल में लेट गया। ममता उससे चिपक गयी और जय ने उसे बाँहों में भर लिया। 

ममता की ओर देखा तो ममता उसके लण्ड को सहला रही थी। ममता  फिर जय की बाँहों से निकलने की कोशिश करने लगी। जय ने पूछा, ” क्या हुआ?

ममता,” बाथरूम जाना है, मूतने के लिए।

जय ने उसे जाने दिया और ममता उठकर नंगी ही बाथरूम की ओर चल दी। जय को विश्वास नही हो रहा था कि अभी अभी उसने अपनी माँ को चोदा है।

ममता बाथरूम में मूतने बैठी और उसके दिमाग में भी यही सब चल रहा था। पहले तो बुर से जय का वीर्य निकला फिर मूत की पीली धार। ममता जब बाथरूम से आई तो जय ने बोला,” माँ ज़रा पानी देना प्यास लग रही है। 

ममता ने गिलास में पानी लाके जय को दिया। जय ने पानी पी लिया फिर ममता ने पानी पिया। ममता बिस्तर पर आ गयी तो जय ने उसे खुद से चिपका लिया। ममता उससे चिपकी हुई बोली,” ये बात सिर्फ हम दोनों के बीच ही रहेगी ना।

जय,” बिल्कुल। तुमको मज़ा आया ना?

ममता- हहम्मम, बहुत। लेकिन हम सोच रहे थे कि…..

जय- बोलो बोलो

ममता- हमको पता होता कि तुम इतना बढ़िया चोदते हो तो तुमसे कब की चुद जाती। एक विधवा औरत की जरूरत अगर घर मे पूरी हो जाये, तो बाहर बदनामी का डर नही होगा।

जय- हम तो तुम पर कबसे नज़रे रखे हुए थे, पर मौका आज मिला। हम तुम्हारी हर जरूरत पूरी करेंगे। 

ममता- तुमको शशि बाबू की बात किसने बताई।

जय- वो छोड़ो वो जरूरी नहीं है। पर हम चाहते हैं कि आज के बाद तुम उसके पास नहीं जाओगी। तुमको अब हमारी बनके रहना है। अबसे तुम हमारी मिल्कियत हो।

ममता- तुम नहीं बताना चाहते हो तो हम दबाव नहीं देंगे। औरत पर कभी भरोसा नहीं किया जाता। ये सच है कि अब हम तुम्हारे हैं। पर हर मर्द को चाहिए कि वो औरत को हमेशा काबू में रखे। तुमको हमारी हर जरूरत का ध्यान रखना होगा और अपना दावा हम पर मज़बूत रखना होगा। वरना जैसे शशि बाबू ने अभी अभी हम पर अपना हक खोया वैसे ही तुम ना कहीं खो देना। हम जो बोल रहे हैं ध्यान से सुन रहे हो ना।

जय- तुम्हारी बातें बहुत जटिल हैं, पर हम कुछ कुछ समझ रहे हैं।

ममता- इस दुनिया मे शुरू से ही मर्द ने औरत को दबाया है क्यों हम बताते हैं। औरत नदी की तरह होती है, जिसे अपनी सीमाओं में रहना चाहिए। अगर सीमा के बाहर गयी तो बर्बादी लाती है। तुम मर्द जात हमेशा से हम औरतों की सीमाएं यानी मर्यादाएं निर्धारित करते आये हो। और यही होना चाहिए। हम औरतों को मर्दों के बनाये नियम मानने चाहिए। उनका हक है हम पर। मर्दों का काम कठिन है, क्योंकि तुम लोगों को हमारे मन की बात पढ़नी होती है। हम बहुत चीज़ें मन मे रखती हैं और उम्मीद करती हैं कि ये पूरे हो जाये। जैसे कि आज की बात ले लो। ये हमारे मन में था पर पूरा तुमको करना पड़ा।इसलिए हमारी कुछ जरूरतें हम बता नही पाते। इनको पढना तुम्हारा काम है और पूरा करना भी। 

जय- तुम ये कह रही हो कि हमको तुम पर काबू रखना होगा। एक औरत के तौर पर हम तुमको हमेशा अपनी सीमाओं में रखें। अगर तुम गलती करोगी तो हम क्या करेंगे? तुमको मारेंगे। 

ममता- हाँ, क्यों नहीं औरतों को हमेशा माथे पर चढ़ाओगे तो गड़बड़ हो जाएगी। जब भी तुमको लगे कि औरत अपनी औकात भूल रही है, तो वो भी जायज है। ये आजकल की लड़कियां ये सब नही जानती समझती हैं।

जय- तुम तो बेहद पुराने खयाल की बाते कर रही हो माँ। अब जमाना बदल गया है।

ममता- औरत के लिए जमाना कभी नही बदलता। ये बातें तुमको सब नही बताएंगे। हम चाहते हैं कि तुम एक अच्छे घरवाले बनो ताकि जब तुम्हारी शादी हो तो घर और घरवाली दोनों पर तुम्हारा नियंत्रण रहे।

जय- हम फिलहाल शादी के मूड में नही हैं। 

ममता ने जय की ओर देखा और बोली कोई बात नहीं पर अब सो जाओ कल हमारी गाड़ी है। कल दिल्ली जाना है। और वो पलट के सो गई।

सुबह करीब आठ बजे उसकी आंख खुली। वो इस वक़्त भी नंगी ही थी। ममता ने देखा जय सो रहा था। खजुराहो में आज उनका आखरी दिन था। ममता जय को उठाने के लिए सोची पर उसने पहले खुद फ्रेश होने की सोची।

जय वैसे ही सोता हुआ छोड़ वो बाथरूम चली गयी। जब वो टट्टी कर चुकी तब नहाने चली गयी।

जब वो नहा रही थी, और पूरे बदन में साबुन लगा रही थी, तभी पानी खत्म हो गया। ममता अब क्या करे उसने तो चेहरे पर भी साबुन लगा रखा था। उसने जय को आवाज़ लगाई, और उसको बोला कि पानी खत्म हो गया है। उसने सारे बदन पर साबुन लगा रखी है। 

जय ने रिसेप्शन पर फोन करके बता दिया, उन्होंने कहा कि 5 मिनट में पानी आ जायेगा। 

जय ने ममता को बता दिया, पर ममता बोली की वो पूरे बदन पर साबुन लगाई हुई है, कैसे 5 मिनट रहेगी। तभी उसकी आंखें जलने लगी और वो चिल्लाने लगी। जय ने पूछा,” माँ क्या हुआ, चिल्ला क्यों रही हो ?

ममता,” आंख में साबुन का पानी चला गया है, बहुत जल रहा है। आ…आ… आ जय कुछ करो आआ…. आआ….

जय- माँ यहाँ जग में पानी है, उससे आंखे धो लोगी ना।

ममता- हाँ, जल्दी लाओ, हम कुंडी खोल दिये हैं।

जय जग लेकर दरवाज़े पर पहुंचा और दरवाज़ा खोला उसने जो नज़ारा देखा वो होश उड़ाने वाले थे। ममता पूरी नंगी थी और बदन पर साबुन मली हुई थी। वो अपनी आंखों को मल रही थी, और चिल्ला रही थी। जय उसके पास गया और उसकी आँखों पर पानी डाला। ममता को थोड़ा राहत महसूस हुआ। जय ने और पानी मारा। फिर ममता की आंखों को राहत हुई। उसकी आंखें लाल हुई थी। ममता ने जब आंखें खोली तो सामने जय को पाया। रात को तो सब अंधेरे में हुआ था पर अभी तो दिन था।वो अपने बेटे के सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी। उसकी आँखों झुक गयी और उसने अपने हाथों से अपनी चुच्चियाँ और बुर को ढक लिया। जय ने अपनी नज़रें नहीं हटाई और जग में बचा पानी ममता के नंगे बदन पर डालने लगा। ममता कुछ नहीं बोली, बस वैसे ही खड़ी रही। तभी शावर में पानी आने लगा और सीधा ममता के ऊपर गिरने लगा। ममता के बदन पर गिरता पानी उसके देह पर लगी साबुन को साफ करने लगी। 

ममता धीरे से बोली,” जय बाहर जाओ ना।

जय ने आगे बढ़कर उल्टा उसके हाथों को चुच्चियों और बुर से हटा दिया। जय,” अभी भी शर्मा रही हो, लगता है तुम्हारी ये शर्म और हया कैसे जाएगी। हम जानते हैं कि तुमको अभी क्या चाहिए।” और उसको अपनी ओर खींच लिया। दोनों पानी में भीग रहे थे। जय ममता के कमर पर हाथ डाले हुए था, और उसके होंठों को चूमने लगा। ममता कुछ सोच समझ पाने की स्थिति में नहीं थी। उसने जय को रोका नहीं। जय के इस चुम्बन से उसके अंदर की स्त्री बाहर आने लगी, उसने जय के लण्ड को पकड़ लिया। जय ने अपनी बॉक्सर उतार दी और अपनी माँ की ही तरह पूरा नंगा हो गया। दोनों एक दूसरे को चूम रहे थे, और ममता भी खुलकर उसको चूम रही थी। जय ने ममता के मुंह में अपनी जीभ घुसा दी और उसके मुंह के अंदर चाटने लगा। दोनों की जीभ आपस में कुश्ती कर रही थी। जय ने ममता को खुद से चिपका लिया था। कभी ममता के ऊपर के होंठ को चूसता तो कभी निचले होंठों को। ममता ने उसे बाहों में जकड़ लिया था।

जय ने फिर ममता की ठुड्ढी से लेकर गले तक चूमने लगा। ममता अपनी गर्दन झुकाके उसके सर को अपने और करीब ला रही थी। ममता के मुंह से आआहह….. इससस्स…. आआऊ…. आआहहहहहहहहहह आवाज़ निकल रही थी। ममता की बड़ी बड़ी चुच्चियाँ उत्तेजना और पानी की वजह से तनके खड़ी हो गयी थी एवं जय को आमंत्रण दे रही थी कि आओ और हमको चूसो। उसके चूचक कड़े हो गए थे। जय ने ममता की चुच्चियों को निहारा और दांयी चुच्ची को कसके पकड़ लिया। ममता चुच्ची पर जय के पंजे के कसे हुए शिकंजे से आआआ हहहहहह कर उठी। वो भूरे रंग के चूचक जो भारतीय नारी की पहचान हैं। जय ने उसे मुँह में भर लिया ममता एक औरत की तरह उसकी बांहों में बलखाते हुए चुसवा रही थी। यूूँ तो कल रात दोनों सब कर चुके थे पर  ये प्यास कभी खत्म नहीं होती। ऐसे ही प्यासे दो लोगों का गजब मिलन था। जय ने ममता की चुच्चियों को तबियत से चूसा। 

ममता- आये हाय……. उफ़्फ़फ़ जय इतना मज़ा आ रहा है। चूस ले इनको।

जय मुस्कुराके बोला- बचपन में चूसने से हमारी पेट की भूख शांत होती थी, पर अब इनको चूसकर हमारे लण्ड की भूख और तेरी बुर की प्यास बढ़ेगी।

ममता पूरी तरह गीली थी, सर से लेकर पांव तक बिल्कुल नंगी।उसके बाल गीले होकर चिपक उसके कंधों और पीठ पर चिपक गए थे। जय से चुच्चियों को चुसवाते हुए उसकी पीठ हल्की वक्र हो गयी थी और गाँड़ बाहर की ओर हो चुकी थी। उसके हाथ जय के सर पर थे, और आंखे मस्ती में बंद थी। 

जय चूसने के क्रम में उसकी चुचकों को काट भी लेता था, ममता का बदन सिहर जाता। पर वो उसको रोकती नहीं क्योंकि वो तज़ुर्बेदार औरत थी, और इन चीजों से परिचित थी। वो बस ईशशशश करके रह जाती। साथ साथ जय उसकी चूचियों को खूब दबा रहा था। 

जय तो जैसे रुकना ही नही चाहता था, पर ममता ने आखिर उसको रोका और बोली,” जय भगवान ने हमको इन चुच्चियों के अलावा बुर भी दिया है जो तुम्हारे लण्ड के लिए बनी है। उसकी चुदाई भी जरूरी है। 

जय- वाह माँ, ये हटाई ना तुमने शर्म की चादर कितना मज़ा आया सुनके। अरे तेरी बुर की खूब चुदाई करेंगे। और एक और चीज़ दिया है भगवान ने तुमको।

ममता- क्या? मुस्कुराते हुए बोली जबकि वो सब जान रही थी।

जय- ये मस्त गोरी भारी भरकम गाँड़, इसको भी चोदूंगा। ममता मुस्कुरा दी।

जय- आये हाय क्या बात है? 

जय ने शावर बंद कर दिया। और ममता को घुटनों पर बिठा दिया। ममता मुस्कुराते हुए उसके काले तने हुए लण्ड को अपने हाथों में थाम लिया। इस बार ममता ने बेझिझक बिना किसी भी शर्म के अपने बेटे की आंखों में आंखे डालके लण्ड पर भूखी शेरनी की तरह टूट परी। पहले उसने लण्ड के सुपाड़े को अपने नथुनों के पास लाकर सूंघा, जैसे उसकी मादक गंध को अपने साँसों में बसा लेना चाहती हो। फिर अपने चेहरे पर उसके लण्ड को रखके लण्ड से चेहरे की लंबाई नापने लगी। लण्ड उसके ठुड्ढी से उसकी मांग तक लंबा था। ममता ऐसे करते हुए मुस्कुराई तो एक मस्त कामुक झलक उसके चेहरे पर आई। जय ने ममता को बोला,” तुम एक मस्त रंडी लग रही हो माँ।

ममता ने उसकी ओर देखा। तो जय को लगा कि ममता को बुरा लगा कि उसका बेटा उसको एक रंडी बुला रहा है। जय फिर कुछ नही बोला ममता भी कुछ नही बोली। ममता उसका लण्ड चूसने में भिड़ गयी। पहले तो उसने लण्ड को पूरा ऊपर से लेकर नीचे तक चाटा और अपने थूक से पूरा गीला कर दिया। फिर उसने धीरे धीरे लण्ड चूसना शुरू किया। पहले सुपाड़े को जीभ से छेड़ती फिर उसको मुंह मे रखके जीभ से चारो ओर घुमाती। फिर धीरे धीरे पूरा लण्ड चूसने लगी। जब पूरा लण्ड मुँह में लेती तो जय की ओर देखते हुए उसके लण्ड को गले की गहराई में उताड़ लेती। लण्ड को तब तक मुँह में समाए रहती जब तक उसकी साँस नहीं उखाड़ जाती और स्वतः ही लण्ड बाहर फेंक देता। ममता ने ऐसा कई बार किया। बीच बीच में जय के झूलते आंड़ को भी चूसती। जय उसको देख के अवाक रह गया। तब ममता बोली,” ये है मस्त रंडियों का तरीका, मज़े लो।

जय को विश्वास नहीं हुआ, की ममता क्या बोल गई। वो मस्ती से अब तक शांत होकर लण्ड चुसवा रहा था। जय,” साली, तुम एक नंबर की रंडी हो चलो तुमको बताते हैं। कुतिया बन जा साली रांड। 

ममता हंसते हुए कुतिया बन गयी और अपनी गाँड़ उठाके अपनी सावली बुर जय के लण्ड के सामने परोस दी।

जय ने देखा ममता की बुर से काफी लसलसा पानी निकल रहा था। उसने पहले बुर पर थूका और बुर में अपनी दो उंगलियां घुसा दी। ममता पर कामुकता पूरी तरह सवार थी, पीछे मुड़ी और जय की ओर देखते हुए बोली,” रंडियों को उंगली नहीं लण्ड घुसाके चोदा जाता है।

जय – लण्ड तो पेलूँगा ही तुम्हारे बुर में रंडी साली। लगता है गाली सुनके तुमको बहुत मज़ा आ रहा है। खूब मस्त हुए जा रही हो।

ममता- हर गाली औरतों के उपर बनी है। हम जैसी घरेलू औरतें इन गालियों का चुदाई के दौरान सदुपयोग करती हैं। अगर हमारी बात करो तो बंद कमरों में चुदने के दौरान ये सब आम बात है। गालियां सुनके चुदने और चोदने का मज़ा डबल हो जाता है। इसलिए खूब गंदी गंदी और भद्दी गालियों का इस्तेमाल करो, मादरचोद। देखो बुर में कितना पानी आ गया है।

जय ममता के मुंह से मादरचोद सुनके मस्त हो गया और बोला- तू तो बहुत बड़ी छिनाल निकली साली बहुत बड़ी चुदक्कड़ है।

जय अपना लण्ड ममता के बुर के उपर छुआ रहा था, ताकि ममता खुद लण्ड के लिए तड़पकर भीख मांगे। ममता के बुर पर लंड का एहसास उसको पागल बना रहा था। वो आखिरकार बोल उठी, जय लण्ड घुसा दो ना, बुर में। 

जय- लण्ड तो घुसाउंगा ही तुम्हारी बुर में पर, एक बात बता कि आज के बाद हमसे शर्माएगी नहीं ना।

ममता- नहीं जय, तुमको अब कोई कमी महसूस नहीं होने देंगे।

जय ममता के चूतड़ पर एक थप्पड़ मारा और बोला, ” खुलके बोलो तुमको क्या चाहिए ?

ममता- तुम्हारा लण्ड हमारी बुर में घुसा दो राजाजी।

जय- तो ये ले रंडी अपने बेटे का लौड़ा। और ममता की बुर की गहराइयों में उतार दिया। लण्ड ममता की बुर को चीरते हुए पूरा अंदर चला गया। 

ममता,” आआहह…. आगे की ओर बढ़ना चाही पर जय ने उसको कमर से थाम लिया। ममता कुछ कर ना सकी। जय ने ममता के बुर में धक्के लगाने शुरू किए। ममता चौपाया थी और जय अपने घुटनों पर था। 

ममता भी हल्के हल्के पीछे की ओर धक्का देकर अपने बेटे का लण्ड ले रही थी। जय इस मधुर आनंद को महसूस कर रहा था। 

जय ममता को चोदते हुए बोला,” माँ तुम खजुराहो की नंगी सजीव प्रतिमा लग रही हो। बेहद खूबसूरत बदन है तुम्हारा।

ममता- हमको अभी माँ नहीं ममता बोलो, राजाजी।

जय- ठीक है ममता रानी, तुम इस वक़्त हमारी रानी हो। वैसे तुम जरूर किसी जन्म में हमारी बीवी रही होगी, तभी इतनी मस्ती से चुदवा रही हो।

ममता- औरत का दायित्व है मर्दों को खुश रखना। अगर सच में हम तुम्हारी बीवी रहे होंगे और कोई कमी रही होगी तो इस जन्म में पूरी कर लेना।

जय उसको अब जोर जोर से चोद रहा था। ममता और जय की कामुक मिलन की सीत्कारें पूरे बाथरूम में गूंज रही थी। जय ममता के गाँड़ के छेद को देखा तो उसे पता चल गया कि ममता गाँड़ भी खूब मरवाती है। पर उसने तभी कुछ नही कहा बल्कि गाँड़ के छेद को सहलाने लगा। और एक उंगली उसकी गाँड़ में घुसा दी। 

ममता ने पीछे मुड़के कहा,” ओह्ह,,….. राजाजी बताके तो घुसाते।

जय- साली मादरचोद, भोंसड़ीवाली… रंडी की बच्ची गाँड़ इतनी मरवा चुकी है कि गाँड़ का छेद खुला ही रहता है, और चूतड़ भारी हो गए हैं। उंगली घुसाई तो दर्द हो गया। इसमें लण्ड घुसेगा हमारा तब क्या होगा। छिनाल कहीं की।

ममता- घुसाने से कहाँ मना किया है जानू, बस इशारा कर दिया करो।

जय- अच्छा, तो ये ले बाकी की तीन उंगलियां अपनी गाँड़ में। और सब घुसा दिया। ममता गाँड़ तो कई बार मरवा चुकी थी इसलिए उसे ज्यादा तकलीफ नहीं हुई।

जय ममता की बुर को बेदर्दी से चोदे ही जा रहा था। ममता भी बिना रुकावट ठुकवा रही थी। जय को चोदते हुए पूरे बीस मिनट हो चुके थे। ममता भी चुदवाने की चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी। ममता बोली,” जय हमारा छूटने वाला है, आआहह रुकना मत, मस्ती से इसी तरह चोदते रहो राजाजी।”

जय- हमारा भी निकलने वाला है रानी। माम्यत चीखते हुए झड़ गयी। जय ने फिर लण्ड बाहर निकला और ममता के खुले मुँह में लण्ड घुसा दिया। ममता के प्यासे मुँह में लण्ड का सारा रस चूने लगा। थोड़ी देर में जय शिथिल होकर फर्श पर गिर गया। और ममता उसका सारा मूठ पी गयी। ममता जय के लण्ड को सहलाते हुए उसके ऊपर लेट गयी। 

जय ने ममता के होंठ चूम लिए और बोला,” कमाल की हो तुम माँ।

ममता- तुम भी।

जय और ममता दोनों बहुत देर से गीले थे। जय ने ममता से कहा,” ऐसे सर्दी लग जायेगी चलो।

फिर ममता को जय ने अपनी गोद में उठा लिया। दोनों बाथरूम से बाहर आ गए। जय ममता को ड्रेसिंग टेबल के सामने ले आया और एक टॉवल उसको दिया और एक से खुद को सुखाने लगा। दोनों थोड़ी देर में सूख चुके थे। जय ममता के करीब आया और उसको बाँहों में भर लिया और शीशे में देखा। ममता की आंखे कुछ कहना चाहती थी। जय ने उसकी आँखों को गौर से देखा और समझ गया।



ममता के खूबसूरत चेहरे को जय बड़े गौर से देख रहा था। ममता शायद कुछ कहना चाह रही थी, पर कह नहीं पा रही थी। जय ने उसकी आँखों में गौर से देखा और ममता को बिस्तर पर ले गया। ममता को नंगी अपनी गोद में बिठा लिया। ममता के बाल सवारते हुए बोला,” माँ तुमको अगर कुछ कहना है तो कहो ?

ममता,” क्या?

जय- तुम्हारे मन में कुछ बात है, जो तुम कह नहीं पा रही हो। हम चाहते हैं कि तुम खुलकर कहो।

ममता- ऐसा कुछ नहीं है, हम तुमको पा लिए और क्या चाहिए?

जय- हम जो तुम्हारी आँखों में साफ साफ पढ़ रहे हैं, तुम हमसे बेबाक होकर कहो।

ममता- ऐसा कुछ नहीं है जय।

जय- फिर कोई बात नहीं है तुम तैयार हो जाओ हमें निकलना है।

ममता ने घड़ी देखी गाड़ी का टाइम होने जा रहा था। ममता तैयार होने लगी। उसने एक कॉटन की साड़ी पहनी। जय ने कुर्ता पायजामा पहना। ममता उसको देखके बोली,” तुम कुर्ता पायजामा क्यों पहन रहे हो? आज कुछ खास है क्या?

जय- हहम्मम, खास दिन तो है ही आज। और मुस्कुरा दिया। ममता भी मुस्कुरा उठी।

थोड़ी देर में दोनों समान लेकर होटल छोड़ टैक्सी में निकल गए। ममता और जय चिपक कर बैठे थे। ममता ने देखा कि गाड़ी का टाइम हो गया पर स्टेशन नहीं आया। ममता बोली- जय गाड़ी छूट जाएगी, हम लेट हो जाएंगे। 

जय- हम स्टेशन नहीं जा रहे हैं, माँ।

ममता- क्या? फिर हम कहा जा रहे हैं।

जय- वो सामने देखो।

ममता- मंदिर?? पर क्यों? यहाँ तो हम घूम चुके हैं।

जय- तुम आओ तो तुमको पता चल जाएगा। और ममता का हाथ पकड़के उसको मंदिर के पास ले आया। फिर जय एक आदमी से बात करने लगा। ममता कोनकी कोई बात नहीं सुनाई पड़ी। पहले जय ने उसको कुछ बाते बताई फिर उसने जय को कुछ बताया। ममता सिर्फ इतना सुन पाई की 2500 लगेगा भैया, जो उस आदमी ने बोला। 

फिर वो आदमी एक छोटे लड़के को अपने पास बुलाया और उसको स्थानीय भाषा में धीरे से कुछ बोला। वो लड़का चला गया। ममता बस सब कुछ देखती जा रही थी। फिर वो आदमी जय को अपने पीछे आने को कहा। जय ममता का हाथ पकड़के उसको अपने साथ ले जाने लगा। दोनों उसके पीछे चलते हुए एक दूसरे रास्ते से मंदिर में के अंदर पहुंच गए। ममता उन मूर्तियों को फिरसे देख रही थी। जय ने ममता को तब होश में लाया जब वो ममता के सामने घुटनो पर बैठ गया और बोला,” वैसे तो रिश्ते में तुम हमारी माँ हो जिस रिश्ते को तुमने बहुत जिम्मेदारी से निभाया है। पर आज हम एक और जिम्मेदारी और रिश्ते का बोझ तुम पर डालना चाहते हैं और हम जानते हैं कि तुम उसको बखूबी निभाओगी। 

उस आदमी ने उसे एक मंगलसूत्र दिया जो कि सोने की थी। जय ने ममता को दिखाते हुए उससे पूछा,”क्या तुम हमारी पत्नी बनोगी, क्या तुम हमसे शादी करोगी ममता?

ममता की आँखे नम हो गयी, जो बात वो जय से होटल के कमरे में नहीं कह पाई। वो उसके बेटे ने कह डाला। ममता की आंखों में प्यार और स्नेह झलक रहा था। वो कुछ बोली नहीं बस हाँ में सर हिलाया।जय ने पहले ममता को मंगलसूत्र पहना दिया। फिर उसकी मांग में सिंदूर भरा। फिर फूल माला जो वो बच्चा लेकर आया था उसके गले में डाल दिया। 

ममता ने भी फूल माला जय के गले में डाली और फिर परंपरा के हिसाब से उसने जय के पाँव छुए। जय ने उसको आशिर्वाद दिया,” सदा सुहागन रहो। ममता की आंखों से खुशी के आंसू जय के पैरों पर गिरे। जय ने ममता को उठाया और बोला,” क्यों रो रही हो? तुम खुश नहीं हो क्या?

ममता के मुंह से अचानक निकला,” हम बहुत खुश हैं कि आपने एक विधवा को स्वीकारा।” और मुस्कुराई।

तब तक पंडितजी आये और उन दोनों को प्रसाद दिया। दोनों ने उनके पैर छुए। पंडितजी बोले,” बेटा अपनी पत्नी का ध्यान रखना, तुमसे उम्र में बड़ी हैं, इसलिए इनकी इज्जत करना। फिर ममता की ओर मुड़कर बोले,” तुमको इस उम्र में विधवा से फिर से सुहागन बनने का मौका मिला है, बेटी। ये मौका सबको नहीं मिलता है। अपने पति का पूरा सम्मान करना, उसकी सेवा करना। ऐसे लोग कम होते हैं जो इस उम्र में औरतों को अपनाते हैं। ये तुम्हारे लिए देवता हैं। इनका पूरा ध्यान रखना।”

ममता- पंडितजी, हम पूरा कोशिश करेंगे कि हम अछि पत्नी बने। चुकी आप बोले हैं कि ये हमारे देवता हैं तो हम इनका चरणामृत पीना चाहते हैं। हमको एक लोटा पानी मिलेगा क्या?

पंडितजी अवाक रह गए और बोले- बिल्कुल सती की तरह हो तुम बेटी, ऐसी नारी तो अब होती नहीं। ठीक है ये लो। पंडितजी ने थाली से लोटा दे दिया।

जय- ये क्या कर रही हो ममता?

पंडितजी- इसकी इच्छा है इसे रोको मत बेटा। तुम भाग्यशाली हो जो तुम्हे ऐसी पत्नी मिली है।

ममता जय के चरणों के करीब बैठ गयी और लोटा से पानी डालकर उसके पैरों को अपने हाथों से धोया। फिर उसके चरणों में मत्था टेका और चुल्लू में चरणामृत लेकर पी गयी और अपनी मांग में भी लगाया। जय ने उसे उठाया और बोला,” तुम्हारी जगह यहां है।” और गले से लगा लिया। 

कुदरत का अद्भुत खेल था, जो कुछ घंटे पहले इसी मंदिर में माँ के पैर छू रहा था, अब वही माँ उसकी पत्नी बनके उसके पैर छू रही थी। 

जय ने फिर उन सबको दान दक्षिणा दिया और दोनों नवविवाहित जोड़े की तरह मंदिर से निकलकर बाहर चले गए। जय ने ममता को कार में बिठाया। फिर दोनों एक दूसरे होटल की ओर चल दिये। टैक्सी होटल के सामने रुकी, ममता और जय उतर गए। जय ने टैक्सी को रवाना किया। फिर दोनों अंदर गए और जय ने रिसेप्शन पर हनीमून स्वीट बुक किया।

जय ने नाम पर मिस्टर एंड मिसेस झा बताया। थोड़े ही देर बाद दोनों उस कमरे में थे।

रूम में पहुंचते ही जय सोफे पर लुढ़क गया। ममता को अपने भाग्य पर भरोसा नहीं हो रहा था। ममता बिस्तर पर बैठी थ, क्योंकि वो कमरे में पहले आ चुकी थी। पर जैसे ही जय आया, ममता खड़ी हो गयी। और उसके बगल में बैठ गयी। ममता- आप थक गए हैं, लाइये हम आपकी थकान दूर कर देते हैं। आप ये पानी लीजिए। ममता ने गिलास बढाके कहा।

जय ने ममता के हाथों से गिलास ले लिया और उसको वहीं टेबल पर रख दिया। फिर ममता को अपने गोद में बिठा लिया। फिर उसके होंठों को चूमकर बोला,” हमारी प्यास तो इन रसीले होंठो से बुझेगी, माँ। ममता मुस्कुराई और उसकी आँखों में कामुक नज़रों से देखते हुए बोली,” अब तो सब आपका है, जो मन चाहे कीजिये।”

जय,” आये हाय हमारी जान तुम्हारे साथ अभी बहुत कुछ करना है। पर तुम ये आप आप क्यों बोल रही हो, हम तुम्हारे बेटे हैं ना। तुम हमको अभी जय ही बोलोगी जब तक हम तुमको ऐसे करने के लिए नहीं कहेंगे।”

ममता- नहीं अब हम आपको ऐसे नहीं बुलाया सकते। अब आप हमारे बेटे नहीं बल्कि पति हैं। हम ऐसा नहीं कर सकते।

जय- ममता इस रिश्ते में बने रहकर तुमको चोदने का मज़ा अलग ही है।” जय धीरे से बुदबुदाते हुए” यही बात कविता से कहा था।”

ममता- क्या कुछ कहा आपने?

जय- वही कह रहा था कि तुम बिस्तर पर चुदते हुए अभी माँ बनके चुदो। फिर वो मौका भी आएगा जब तुम हमारे लिए करवा चौथ भी करोगी यानी तुम दुनिया के सामने हमारी पत्नी बनोगी।”

ममता- ठीक है बेटा, जैसा तुम कहो। पर हम तुम्हारी पत्नी होने का सब धर्म निभाएंगे।

जय- तुम मंदिर में बिल्कुल भावुक हो चुकी थी माँ। हमारे पैर छूवे और उसको धोकर चरणामृत पी। तुम बहुत अच्छी पत्नी बनोगी। हम तुमसे शादी इस पवित्र मंदिर में करना चाहते थे, क्योंकि यहाँ की सुंदर कामुक चुदाई की मुद्रा में अश्लील मूर्तियां देखकर तुम्हारे उपर की पवित्र साफ सुथरी विधवा स्त्री के अंदर से एक कामुक अप्सरा को चुदक्कड़ रंडी की तरह बाहर निकालना चाहते थे। माँ तुम एक मस्त औरत हो और जो कल अपना रूप तुमने दिखाया वैसी तो हमने कभी कल्पना भी नहीं कि थी।” जय ने ममता के कमर पर जोर से चिकोटी काट ली।

ममता चिहुंक उठी,” आउच….., फिर बोली,” अभी तो शुरुवात है जय हम तुमको अपना ऐसा रूप दिखाएंगे की तुमको विश्वास ही नहीं होगा कि तुम्हारी माँ ऐसी गंदी और घिनौनी हरकते भी कर सकती है। अब तक तुमने हममें एक संस्कारी पवित्र माँ को देखा है, पर अब हमको अपनी पत्नी के रूप में एक मदमस्त कामुक औरत के रूप में देखोगे।”

जय- माँ जब तुम ऐसी बातें करती हो तो हमको बड़ा मजा आ रहा है। औरत को अपने मर्द के सामने ऐसे ही रहना चाहिए। कोई पर्दा नहीं।

ममता- यही बात हम तुमसे कहना चाहते हैं, तुम हमसे कभी कुछ नहीं छुपाना और हमसे खुलकर बताना। 

जय ने ममता को खुदसे एक दम से चिपका लिया और उसके चेहरे को दोनों हाथों में ले लिया। फिर बोला,” माँ तुम अबसे हमारी अर्धांगनी हो और अपने अंग से कुछ छुपता है क्या? ममता ने उसके चेहरे को अपने चुच्ची पर रख सीने से लगा लिया। थोड़ी देर दोनों इसी अवस्था में बने रहे फिर जय ममता के साड़ी के अंदर पीछे से हाथ घुसा दिया। ममता की गाँड़ की दरार में उंगली रगड़ रहा था। ममता की साड़ी उठकर घुटनो तक आ चुकी थी। 

ममता- बहुत भूख लगी होगी आपको ना, सुबह से कुछ खाया नहीं है। कुछ मंगा लीजिए।

जय- फिर तुम आप बोल रही हो माँ? 

ममता- आज हमारी शादी हुई है, आज हमको ये अधिकार दीजिए ना प्लीज, राजाजी। ममता बिल्कुल भीख मांगते हुए बोली।

जय- ठीक है आज के लिए ही। पर भूख तो तुमको भी लगी होगी। 

ममता- आप मंगा लीजिए जो खाना हो।

जय- ठीक है। फिर जय ने सोफ़े के बगल में रखे फोन से रूम सर्विस में कॉल करके खाना आर्डर किया। 

ममता- कितनी देर में खाना आएगा?

जय- माँ कोई 45 मिनट लगेंगे। तब तक हम बातें करेंगे।

ममता- क्या बातें करें जी?

जय- हमारे बारे में माँ। 

ममता- आप हम पर कबसे नज़र रखे हुए थे? ममता मुस्कुराते हुए पूछी।

जय- जब से हम व्यस्क हुए हैं। तुम्हारे इस रूप ने हमको मुग्ध कर दिया था। ये सुंदर चेहरा, ये काले घुंघराले बाल, ये संभाले ना संभलने वाले तुम्हारे उभार, तुम्हारी चाल। सर से लेकर पैर तक तुम एक अप्सरा सी लगती हो। ऐसा नहीं है कि हम तुमको एक बेटे के तौर पर प्यार नहीं करते थे, पर जब भी हम तुमको गौर से देखते थे तो तुम्हारे अंदर एक प्यासी औरत की झलक मिलती थी। हम भी सिर्फ ब्लू फिल्मों से मन बहलाते थे। कितनी बार तुमको सपने में बेतहाशा चोदे हैं, तुमको ब्लू फिल्मों की हीरोइन समझ के तुम्हारी पैंटी में मूठ मारे हैं। कई बार तुम्हारी मैली पैंटी को सूंघकर मज़े लिए हैं। तुमको जब भी देखते थे तो मन होता था कि काश तुम हमारी पत्नी होती। तुम जैसी औरत को विधवा देख दिल जलता था हमारा। मुहल्ले की सारी औरतें फुल मेक अप करती थी, पर तुम सिवाय काजल के कुछ नहीं लगती थी। तुम्हारी सूनी मांग देख हमको बहुत गुस्सा आता था। पर इस कमी को हम आज दूर कर दिए हैं। तुम अबसे सब कुछ करोगी, सिंदूर लगाओगी, बिंदी भी, लिपस्टिक, रूज़, मंगलसूत्र, हाथों में चूड़ियां, पैरों में पायल और बिछिया जो भी चीज़े शादी शुदा औरतें करती हैं।”

ममता- इतना चाहते हैं आप हमको। हम कितने भाग्यशाली हैं कि अपनी कोख से इतना अच्छा बेटा पैदा किये और फिर अब उसी बेटे की पत्नी बन गए। आप जैसे लोग कम ही पैदा होते हैं। हमको माफ कर दीजिए कि हम आपके प्यार को इतनी देर से स्वीकारे, बेटा सैयांजी। आप ब्लू फिल्में देखकर खूब मूठ बर्बाद किये हैं, अब वो सब बर्बाद नहीं होगा। अब उसका एक एक बूंद हमारे तीनो छेद के माध्यम से हमारे अंदर जाएगा। हम अब एक शादी शुदा औरत की तरह रहेंगे आपसे वादा करते हैं।

जय- माँ हम तुमसे एक सवाल पूछना चाहते हैं। तुम्हारे मासिक बंद हो चुके हैं या चालू हैं?

ममता- अभी 5 दिन पहले हमारा मासिक हुआ था।

जय- मतलब अभी हो रहे हैं। आमतौर पर औरतों की मासिक बन्द हो जाती है, पर तुम्हारी अभी चालू है।

ममता- हाँ, चालू तो है पर आप टेंशन ना लो अभी 12- 15 दिन नहीं होगा।

जय- अरे हम उसके लिए नहीं बोल रहे थे।

ममता- फिर।

जय- अगर ये चालू रहे तो, तुम माँ बन सकती हो। क्या तुम अपने बच्चे के बच्चे की माँ बनोगी?

ममता- हर पत्नी का धर्म होता है कि अपने पति को बाप बनाये। ये तो सौभाग्य की बात है बेटा सैयांजी। आपने हमारे मुँह की बात छीन ली। 

जय- हमको तुमसे यही उम्मीद थी, माँ की तुम हाँ ही कहोगी।पर उसके लिए तुमको चोदना होगा।

ममता ने उसके लण्ड पर हाथ रखके, कहा, ” हम कब मना किये हैं बेटा सैयांजी।” 

जय ने उसको गोद में लिए ही खड़ा हो गया। ममता के पैर जय की कमर पर कैंची बने हुए थे, जय ममता के चूतड़ों को कसके पकड़ा हुआ था। जय,” तेरी चुदाई अभी होगी।” और ममता को बिस्तर पर ले गया। ममता को बिस्तर पर लिटा दिया। जय ममता की साड़ी उतारने लगा तो ममता कहाँ पीछे हटने वाली थी। वो उसकी मदद करते हुए खुद अपनी ब्लाउज और ब्रा उतार फेंकी। उधर जय ने उसकी साड़ी उतार दी थी। और पेटीकोट को भी झटके के साथ उतार कर फेंक दिया। ममता ने खुद अपनी पैंटी उतार दी जय ने उसके हाथों से ले लिया और सूंघने लगा। ममता ने उसका पायजामा उतार दिया। और उसकी चड्डी को उसके घुटनों तक ले आयी।जय ने अपना कुर्ता और बनियान भी निकाल दिया। ममता,” क्या मस्त लण्ड है बेटा सैयांजी आपका।”

जय- तुम्हारी बुर भी काफी गीली हो चुकी है साली छिनाल की बच्ची। तेरी बुर से तो ऐसा लग रहा है, नदी की धारा फूटी हो। चल अपनी उंगलियों से अपनी बुर का पानी हमको चटवाओ।” ममता ने बिना झिझिके अपना हाथ बुर पर रखा और बुर का पानी अपने हथेली पर लगाकर जय के मुंह के सामने रख दिया जिसे जय जीभ निकालकर चाटने लगा। ममता बुर से बार बार पानी अपने हाथ में लगाके जय को चटवा रही थी। 

ममता,” बचपन में इन्ही हाथों से खाना खिलाया था आपको, अब बुर का रस चटवा रही हूँ। अच्छा लग रहा है इन लम्हों को जीना।

जय ममता के चुच्चियों को सहला रहा था और दबा भी रहा था।” ममता कितनी नमकीन बुर है तुम्हारी, लगता है उम्र के साथ साथ और नमकीन हो रही है। तुम्हारे बुर में क्या जादू है? जितना इसको चखो उतनी प्यास बढा देती है।” और जय ने ममता को अपनी ओर खींच लिया,और उसकी बुर को मुंह में भर लिया। बुर का नमकीन स्वाद उसकी जीभ पर छा गया। ममता ने अपनी उंगलियों से बुर की दोनों फाँकों को फैला दिया था। ममता बोली,” ये हुई ना बात राजाजी, आपने तो नदी की धारा में ही मुंह लगा दिया। यही है मर्दों का तरीका। आआहह…….……..आ… आ। चाटो बेटा सैयांजी अपनी जन्मस्थली अपनी जीभ से रगड़ रगड़ के चाटो। ऊईई…..मम्म…. उम्म्महह…हहम्मम अपनी माँ की बुर चूसना सबको नसीब नहीं होता है।”

जय बुर के एक एक हिस्से को जीभ से छेड़ते हुए, कभी उपर कभी नीचे, कभी बुर के भीतर घुसेड़ रहा था। जय खूब कस कसके बुर को चाट और चूस रहा था। ममता अपनी दोनों घुटने मुड़े हुए थे और अपनी गाँड़ उछाल उछाल कर बुर अपने बेटे से चुसवा रही थी। ममता की अधेड़ चुच्चियाँ उसकी चढ़ती उतरती साँसों के साथ ऊपर नीचे हो रही थी। उसकी चुच्चियाँ वासना और कामानंद से कड़क हो गयी थी जैसे किसी पर्वत श्रृंखला की दो चोटियाँ हो। उन दोनों पहाड़ियों के बीच की घाटी से ममता का कामोन्मादित चेहरा साफ नजर आ रहा था। उसकी आंखें अनायास आनंद से बंद हो जाती तो, कभी खुलकर अपने बेटे को बुर चूसते हुए निहारती। कभी मुंह खोलकर जोर से सीत्कारें भर्ती तो कभी कसके चूसे जाने पर अपने होंठों को दांतों से काटती। जय जब अपने दांतों से बुर के दाने को छेड़ता तो माथे पर शिकन आ जाती पर वो, उस मीठे दर्द को उफ़्फ़फ़…. आउच.. आआहह करके झेल जाती। बुर चुसवाते चुसवाते ममता का शरीर अकड़ने लगा। 

ममता- उममहः जय …..आआहह…. बहुत अच्छा लग रहा है। आईईईई….. कहकर वो शांत हो गयी। जय बुर को अभी भी चूस रहा था। ममता बस थकी हुई मुस्कान दे रही थी। 

जय फिर बोला,” माँ तुमको मज़ा आया ना? खूब बुर से रस चुवाई हो।

ममता- खूब मजा आया है। अब आपका लण्ड चूसना है हमको।

जय- लण्ड तुमको मिलेगा पर हम तुम्हारे मुँह को चोदेंगे।” जय ने इशारा किया, तो ममता पैर मोड़कर जैसे नमाज़ में बैठते हैं, वैसे बैठ गयी। फिर जय बिस्तर पर खड़ा हो गया। ममता के आँखों के सामने जय का लण्ड मूसल सा खक़द था। जय,” पहले तुम इसको गीला करो और खेलो इसके साथ फिर हम तुम्हारे सुंदर मुंह को चोदेंगे। दिखाओ अपना रंडिपन।” ये बोलकर उसने ममता के खुले बालों को कसके पकड़ लिया और खींच कर उसके खुले मुंह में लण्ड पेल दिया। ममता उसके लण्ड को हौले से चूसने लगी, वो जय के आंड को सहला रही थी। जय अपनी माँ को लण्ड चूसते हुए देख और उत्तेजित होने लगा। उसने ममता के बालों को कसके खींचा, और बोला,” साली रंडी, आंखों में आंखे डालकर चूसो। ताकि तुमको एहसास हो कि किसका लण्ड चूस रही हो, अपने सगे बेटे का।” ममता मुंह लण्ड में लिए उसकी तरफ देखने लगी, और मुस्कुराई। अपने बेटे को पहले पति और अब एक मर्द की तरह कड़क होते देख रही थी। ममता की कामुक आंखें, उसकी ओर बिना पलक झपके देख रही थी। जय ममता की ओर देखा और उसने अपना लण्ड बाहर निकालकर उसके खुले मुँह में थूक दिया, फिर मुस्कुराते हुए अपना लण्ड उसके होंठों पर रगड़ने लगा। ममता बिना विरोध किये उसका सारा थूक निगल गयी। जय ने अपना गीला लौड़ा ममता के पूरे चेहरे पर घुमाने लगा। जय के लण्ड पर लगे ममता की लार उसके ही चेहरे का मेक अप कर रही थी। जय ने ममता के माथे पर थूका, फिर उसके गालों पर। फिर अपने लण्ड के सहारे उस थूक को उसके चेहरे पर फैला कर गीला कर रहा था। ममता उसके आंड को मुंह में रखी हुई थी। 

जय- मज़ा आ रहा है तुमको। तुम्हारे चेहरे को हम अपने थूक से गन्दा कर रहे हैं। ये चुदाई जितनी घटिया, घिनौनी हो उतना मज़ा आता है।”

ममता आंड़ मुँह से निकालकर बोली,” चेहरा को गंदा नहीं साफ कर रहे थे, आप अपने थूक से बेटा सैयांजी। आपका थूक हमारा प्रसाद है। हमारे लिए कुछ भी घिनौना नहीं है, जो आपको पसंद है। आपका जो मन चाहे वो कीजिये। हम आपको नहीं रोकने वाले।” जय उसकी बातें सुनके मुस्कुराने लगा। वो अभी भी उसके चेहरे पर लण्ड फेर रहा था। इस तरह ममता के खूबसूरत चेहरे के साथ खेलने के 10 मिनट बाद जय ने ममता के मुंह मे फिर से लण्ड दिया।

ममता बिल्कुल बेफिक्री से उसका लण्ड पूरा अपने मुँह में समा ली। जाय के लण्ड का करीब 90% भाग उसके मुंह मे था। ममता अपनी एड़ियों पर चूतड़ टिकाए हुए थी और जय की जांघों पर अपनी हथेली रखी हुई थी। जय ममता के खुले मुंह को चोद रहा था। ममता के मुंह से थूक के लंबे धागे और तार लटकने लगे थे। जय के आंड़ ममता के मुंह से चूते लार से गीले हो चुके थे, और उसके सीने और गले दोनों जगह चूकर उसको और कामुक रंडी बना रहे थे। जय ने बहुत कोशिश की पर लण्ड पूरा उसके मुँह में समा नहीं रहा था। ममता समझ गयी कि जय क्या चाह रहा है। उसने जय से कहा,” हम कोशिश करते हैं पूरा लेने का, आप हमारे सर को पीछे से कसके पकड़ना।”

और फिर ममता ने एक लंबी सांस लेकर जय के लण्ड को धीरे धीरे अपने मुँह में समाने लगी। उसने धीरे धीरे सब निगल लिया, और जय उसके सर को पकड़े हुए दबाव बना रहा था,ताकि पूरा घुस जाए। 

जय ऐसे ही ममता को पकड़े हुए बोला,” क्या बात है, तुम तो कमाल कर दी माँ, ऐसे ही रहो थोड़ी देर। हमारे लण्ड को अपने मुँह की गहराई नापने दो। संस्कारी औरतें पति को खुश करने के लिए कुछ भी कर सकती हैं। बिस्तर में तुम तो ब्लू फिल्म की रंडियों से भी आगे निकल सकती हो। आआहह हहहहहह आआहह……। 

ममता कोई दस पंद्रह सेकंड के बाद स्वतः लण्ड छोड़ दी, और जोर जोर से साँसे लेने लगी। आ…आआहह…..हहहम्म…. हहहम्म वो हांफ रही थी। ममता ने जय की ओर देखा और हल्की मुस्कान से बोली,” यही चाहते थे ना आप, हम सब करेंगे। कोई शक मत रखियेगा।” ममता के मुँह से थूक के धागे जय के लण्ड से जुड़े थे। ममता ने जय के लण्ड को फिर से मुँह में घुसा लिया और इस बार वो उसकी ओर देखते हुए, आंखों से भौएँ उठाकर जैसे ये पूछ रही थी कि कैसा कर रहे हैं हम?

जय ने ममता को बोला,” माँ तुम मस्त चूस रही हो।” 

इस तरह कई बार ममता ने ये किया और हर बार उसकी टाइमिंग बढ़ रही थी। उसकी आंखों से आंसू आ रहे थे। जब वो लण्ड छोड़ती तो हाफबे लगती। अब जय वापिस से ममता का मुखचोदन कर रहा था। ममता पीछे नहीं हटी, बिल्कुल एक अनुभवी नारी की तरह कमान जय के हाथ में सौंप दी। कुछ देर तक उसको ऐसे चोदने के बाद जय ममता से पूछा,” लण्ड चाहिए ममता रानी? 

ममता- हहम्मम राजाजी। देखो ना बुर कितनी गीली हो गयी है।

जय- क्या हरामी रंडी हो तुम! चल दिखा अपनी भीगी बुर को। दिखाओ की तुमको लण्ड कहां चाहिए।

ममता बिस्तर पर कुतिया बन गयी और चूतड़ों को फैला कर भीख मांगते हुए बोली- बुर में चाहिए, देखो अपनी रंडी माँ की बुर कैसे अपने बेटे के लण्ड के लिए पनिया गयी है। अपनी माँ को अपनी बीवी बनाकर विधवा से सुहागन कर दिए। सुहागन औरत पति की रखैल होती है। हम तुम्हारी रखैल हैं। पहले माँ, फिर बीवी, और अब रखैल। इसी बुर से आप पैदा हुए और अब आपकी औलाद भी यहीं से पैदा होगी। अपनी माँ को चोदकर उसे अपने बच्चों की माँ बनाएंगे। इस बुर में अपना पवित्र वीर्य गिराकर हमको पवित्र कर दीजिए। ये आपकी रंडी बनी माँ का आग्रह है। 

जय पहले ममता के गोरे नंगे भारी भरकम चूतड़ को सहलाने लगा फिर अपनी माँ की बुर पर थूका और अपने लण्ड को उसके ऊपर रगड़ने लगा। जय- तुम्हारी बुर तो अभी भी मस्त है। इतनी चुदाई और ठुकाई के बाद भी बुर अभी ज्यादा छितराई नहीं है। आज तो तुम्हारी बुर हमारे लण्ड का शिकार होगी। 

ममता लण्ड छुवाये जाने से उत्तेजित हो चुकी थी,” रे हरामी जल्दी से डाल ना बुर में मादरचोद। आआहह… तड़पा रहा है अपनी माँ को लण्ड के लिए उसका एहसास दिलाकर।”

जय- क्या बात है संस्कारी माँ, बिस्तर पर संस्कारों को छोड़ पूरी रंडियों की भाषा बोल रही है। हाहाहा… और उसके चिकने गाँड़ पर दो थप्पड़ लगाए।

ममता- आउच….आह……बिस्तर में हर घरेलू औरत के लिए ये आम बात है।

जय तो ये ले रंडी माँ, अपने बुर में तगड़ा लौड़ा। ममता की भीगी बुर और जय के गीले लण्ड की वजह से लण्ड बिल्कुल माखन में चाकू की तरह घुस गया।

ममता के मुंह से एक लंबी सीत्कार निकली और पूरे कमरे में गूंज गयी। जय भी आहें भर रहा था। वो ममता के पीछे घुटनो पर था।और ममता के बाल किसी घोड़ी की लगाम की तरह पकड़े हुए था। जय ज़ोर ज़ोर से धक्के लगा रहा था। हर धक्के के साथ थप..थप की आवाज़ गूंज रही थी। 

जय- आह… बुर में लण्ड घुसाने का मज़ा ही कुछ और है खासकर अगर वो अपनी माँ की हो। मन तो करता है कि जिंदगी भर इस बुर को चोदते रहें। 

ममता- हाँ, बेटा सैयांजी… खूब चोदना इस बुर को।अब तो दिन रात हाज़िर रहेंगे हम आपके लिए। हम औरतों को इस उम्र में ज़्यादा चुदवाने का मन होता है। आह…आह..

जय ममता के बाल कसके खींचता है और ,” आज और आनेवाली कई रातों में तुमको सोने नहीं देंगे हम। तुमको अपनी बुर के साथ साथ अपनी गाँड़ भी हमको देनी होगी। खूब चुदवा चुदवा के गाँड़ फैलाई हो।” जय ने एक जोरदार थप्पड़ ममता के दाएं चूतड़ पर चिपका दिया। 

ममता ईश……शशश… हाँ दूंगी अपनी गाँड़। मर्दों को आजकल बुर और गाँड़ दोनों ही चाहिए। ये ब्लू फिल्मों का जादू है। हम औरतों को आजकल घर के अंदर भी एक रंडी की तरह जीना पड़ता है। ताकि बिस्तर पर पति हमेशा खुश रहे।

जय ने ममता की गाँड़ की छेद को प्यार से सहलाया और फिर उस पर थूक दिया। उसने अभी गाँड़ के साथ और कोई छेड़खानी नहीं की। वो अभी ममता की गाँड़ को बस निहार रहा था। उधर ममता बुर चुदवाये जा रही थी। दोनों पसीने पसीने हो चुके थे, जबकि रूम में ऐसी लगा हुआ था। ममता को कुछ देर इसी तरह चोदने के बाद, जय ममता को अपनी ओर पीठ कर करवट लेने को कहा। ममता करवट ले ली और जय ने उसको पीछे से बाँहों में भर लिया। जय ने ममता की दोनों चुच्चियाँ अपने पंजों की गिरफ्त में ले ली। जय का लण्ड अभी भी ममता की बुर में अंदर बाहर हो रहा था। ममता अपनी गर्दन जय की ओर घुमाकर उसको चूम रही थी। दोनों एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थे। धक्के खाने की वजह से ममता और जय दोनों हिल रहे थे। जय ममता की अधेड़ चूचियों को कस कस कर दबा रहा था। जिसमे ममता उसका पूरा साथ दे रही थी। ममता की चुच्चियों को जय स्पंज की तरह चाँप रहा था। ममता की चुच्चियाँ पूरी तरह दबकर उसके हाथों में समा जाती थी। फिर वो उनको कबूतरों की तरह आज़ाद कर देता और निप्पल से खेलने लगता। दोनों का चुम्बन रह रहकर और जोशीला होता जा रहा था। ममता की बांहे दोनों ऊपर की ओर थी। एक से उसने जय को अपनी ओर खींच रखा था। दोनों एक दूसरे में खोए थे और चुदाई का आनंद ले रहे थे। 

जय ममता के कान के पास बोला,” आआहह ममता आई लव यू जान। 

ममता पूरे कामुक अंदाज़ में लगभग फुसफुसाते हुए जय का जवाब दी,” आई लव यू टू।”

ममता अब झड़ने वाली थी। वो तजुर्बेदार थी। पर युवा जोश अभी भारी था।ममता को चुच्चियों की छेड़ छाड़ और चुदती बुर को एक साथ सम्भालना मुश्किल हो गया था। आखिकार ममता के बुर शांत हुई और जय को एहसास हुआ कि बुर जैसे लण्ड को अंदर ही अंदर चूस रही है। जय थोड़ी देर रुक गया। फिर अपना लण्ड बाहर निकालकर ममता के ऊपर आ गया। वो ममता की टांगों के बीच आकर फिरसे लण्ड उसकी बुर में घुसा दिया। और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा। ममता अभी झड़ी थी पर जय का पूरा साथ दे रही थी। ममता गाँड़ उठा उठा कर बुर चुदवा रही थी। तब थोड़ी देर बाद ममता एक बार और झड़ी, फिर जय ने अपना लण्ड निकाल लिया और ममता फुर्ती से जय का इशारा पाकरके लण्ड के पास आ गयी। 

जय के लण्ड से मूठ का फव्वाड़ा छूटा, जो ममता के माथे से जा चिपका, दूसरी धार ममता के गाल पर, तीसरा उसके होंठो पर, फिर धार हल्की हो गयी और ममता के पूरे चेहरे को गीला कर गयी। जय अपना लण्ड उसके गाल पर रगड़ रहा था। ममता मुस्कुरा रही थी। जय- ऐसे ठूम और खूबसूरत लग रही हो।” ममता- असली मेक अप जो अब हुआ है।” दोनों ठहाके मारके हंसे। जय ने ममता की एक तस्वीर ले ली। तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई,” रूम सर्विस, सर आपका खाना।”

ममता बिस्तर से उठकर बाथरूम की ओर चली गयी। जय तौलिया लपेट कर गेट खोला,” आ जा यार।” उस वेटर ने रूम में हुई चुदाई की खुश्बू पहचान ली। वो मुस्कुराते हुए खाना रखके चला गया। 

तभी जय के मोबाइल पर फ़ोन आया। जय ने फोन देखा वो फोन कविता का था। जय मुस्कुराया उसकी माँ अभी अभी उससे चुदी थी और बहन चुदने के लिए दिल्ली में तड़प रही थी। 

जय- हेलो…कैसी हो दीदी?

कविता- हमारी छोड़ो, ये बताओ माँ तुमसे पटी की नहीं?

जय- अरे ममता को तो हम अभी अभी चोदे हैं। कल रात ही चोदे थे।

कविता- सच्ची, हम जानते थे तुम कर लोगे। 

जय- तमीज़ से बात करो, तुम्हारी माँ को छोड़कर तुम्हारे बाप बन गए हैं। हाहाहा

कविता- अच्छाजी, ठीक है पापा। 

जय ने बीते रात की पूरी बात बता दी कविता को, और कैसे उसने ममता के साथ मंदिर में शादी की।

कविता- तब तो सच में हमारे बाप बन गए।हाहाहा

जय- और नहीं तो क्या? दीदी तुम्हारी याद आ रही है।

कविता- झूठे ! हमारी माँ को चोदके मज़े ले रहे हो आप पापा। 

जय हंसते हुए- अरे सच में।

कविता- हमको आपकी बहुत याद आती है। आप जल्दी से माँ को हमारे आपके रिश्ते के बारे में बताये ताकि कोई प्रॉब्लम ना हो।

जय- हम पूरी कोशिश करेंगे….

तभी बाथरूम का दरवाजा खुला और ममता अंदर आयी। जय ने संभालते हुए कहा,” हाँ पूरी कोशिश करेंगे कि परसों की ट्रेन पकड़ ले। दीदी माँ से बात करो।

जय ममता को फोन देते हुए बोला, ममता ने हाल चाल पूछा थोड़ी बात की और फ़ोन रख दिया। 

ममता टॉवल लपेटने लगी तो जय ने वो टॉवल खींचकर फेंक दिया और बोला,” इस कमरे में ना हम और ना तुम दोनों कपड़े नहीं पहनेंगे। आजसे दो दिन तक यानी परसों तक हम कमरे में रहेंगे और कहीं नहीं जाएंगे। सिर्फ चुदाई करेंगे और कुछ नहीं।” जय ममता को अपनी ओर खींच लिया जो पहले से नंगा था। उसको कमर से पकड़ लिया और दूसरे हाथ से ममता के हाथों में झुमके रख दिये जो उसने मार्केट से खरीदे थे। और बोला,” तुम गहने और मेक अप के अलावे और कुछ नहीं पहन सकती।” ममता मुस्कुराई और बोली ठीक है, पर आप ही ये पहना दीजिए ना।” जय ने ममता के कानों में वो पहना दिया। जय- हम जानते हैं कि अभी कुछ भी नहीं हैं पर दिल्ली में तुमको गहनों से लाद देंगे।”

ममता- खाना लगाते हैं, आपको भूख लगी होगी। आप बैठिए।

जय- ठीक है।

ममता नंगी ही थिरकते चूतड़ों के साथ, खाना लगाने चली गयी। ममता ने जय को खाना लाकर दिया। जय – ये तो बहुत ज्यादा है। इतना कौन खायेगा? 

ममता- आप जो खाएंगे खाइये बाकी हम कहा लेंगे।

जय ने ममता को अपनी गोद मे बिठा लिया और बोला,” तुम ही हमे खाना खिलाओगी।

ममता ने उसे खिलाना शुरू किया। बचपन में ममता उसे एक बच्चे की तरह खिलाती थी, टैब भी वो नंगा होता था उसकी गोद में, पर आज उसे अपने पति की तरह खिला रही थी, खुद नंगी होकर उसकी गोद में बैठक

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