मां और बेटे का प्रेम कहानी सीजन 1 एपिसोड 7

  



     मां और बेटे का प्रेम कहानी सीजन 1 एपिसोड 7




कनखियों से मैने अशोक अंकल की ओर देखा. वे तो पागल से हो गये थे, मा

के पैर से लिपट कर उसे ऐसे चूम और चाट रहे थे जैसे खा जाना चाहते हों.

मेरे देखते देखते उन्होने मा की सॅंडल आधी उतारी और उसका अगला भाग मूह

मे ले लिया. सॅंडल चूस कर मन नही भरा तो मा के पैर का तलवा चाटने

लगे.


पाँच मिनित के बाद वे सीधे हुए और मा के पैर को हल्का सा मोड़ा. मा की ऐईडी

अब उनकी ओर थी. सॅंडल को मा के पैर से थोड़ा अलग करके उन्होने धीरे से अपना

लंड मा के तलवे और सॅंडल के चिकने सपाट तलवे के बीच घुसेड दिया. फिर

दोनों को दबा कर अपने लंड को उनमे सैंडविच कर लिया और धीरे धीरे

चोदने लगे. उनकी नज़र ऐसी गुलाबी हो गयी थी जैसे जन्नत की सैर कर रहे हों.


मेरे चेहरे के भाव देखकर शशिकला खिलखिला उठी “अरे मेरे डॅडी बहुत

रसिक है, पैरों के और लेडीज़ चप्पालों के दीवाने है. ये क्या क्या खेल खेलते

है इनके साथ, तूने सोचा भी नही होगा. अभी वे मम्मी के पैर को चोद रहे

है. तू भी करके देख, ले मैं सॅंडल उतारती हू” उसके मुलायम तलवे और

चिकनी सॅंडल के बीच दबाकर मेरा लंड ऐसा खड़ा हुआ कि मुझे लगा कि मैं

झाड़ जाउन्गा.


उधर मा को भी मज़ा आ रहा था. वह खुद अपनी सॅंडल को अपने पैर से

चिपका कर पैर आगे पीछे करके अंकल के लंड को चोद रही थी. “अशोक, छोड़ो

मेरे पैरों को. अरे मुझे मालूम होता कि तुम भी दीवाने हो इस चीज़ के मेरे

बेटे जैसे तो अपनी कुछ खास चप्पले साथ ले आती, मेरा बेटा तो बहुत खेलता

है उनसे”


अचानक शशिकला ने मुझे दूर किया और उठ खड़ी हुई. मा के पास जाकर अशोक

अंकल को खींच कर अलग किया और बोली “क्या डॅडी, आप भी मम्मी के झाँसे मे

आ गये! अरे ये तो चाहती है कि आप उनके पैरों मे ही झाड़ जाए. देखिए

आपका लंड कैसा शानदार खड़ा हो गया है! चलिए अब, मम्मी की गान्ड

मारिए.”


मा बोली “क्या शशि, अपने डॅडी से ज़्यादा लगता है तू ही मेरे पीछे पड़ी है,

वे तो बेचारे भूल ही गये थे. वैसे इनका इतना मस्त खड़ा है कि लगता है

चूत चुदवा लू, मेरी चूत बुला रही है अपने यार को”


“चुदवाने को तो अब जिंदगी पड़ी है दीदी. चलिए डॅडी, मम्मी वैसे आप ठीक

कहती है, डॅडी तो भोले है, उनकी फिकर मुझे ही करनी पड़ती है और तुमने

ठीक समझा है, मैं देखना चाहती हू कि मेरी प्यारी मम्मी की गोल मटोल

गान्ड मे कैसे यह मतवाला सोंटा अंदर जाता है. आज सुहागरात है यही

समझ लो, सुहागरात मे पत्नी को कुछ तो दर्द होना चाहिए नही तो क्या मज़ा

आएगा”


माको उठाकर वह पलंग पर ले गयी. मा को पट सुलाया और चूम कर बोली.

“फिकर मत करो मम्मी, क्रीम लगा दूँगी, अच्छी इम्पोर्तेड क्रीम, एकदम

चिकनी है, आराम से डॅडी को अंदर ले लोगि”


वह जाकर क्रीम की शीशी उठा लाई. मा के गुदा मे क्रीम चुपडति हुई बोली “अनिल

तुम मेरे डॅडी के लंड मे क्रीम लगा दो. शरमाओ नही, मैं देख रही हू कि

तुम अब भी बहुत शरमाते हो. अब एक बेटा अपनी मा के होने वाले पति का लंड

क्रीम से चिकना करेगा जिससे उसकी मा की गान्ड अच्छे से मारी जा सके. और मैं

अपनी होने वाली मा की गान्ड चिकनी करूँगी. है ना मज़े की बात, चलो जल्दी

करो.”


मैने कुछ शरमाते हुए क्रीम ली और अशोक अंकल के लंड मे चुपडने लगा.

अजीब सा लग रहा था, पहली बार थी जब किसी और के लंड को हाथ मे लिया था. अंकल

का लंड अब घोड़े जैसा हो गया था. मेरी दो मुत्थियो मे किसी तरह समा पा

रहा था. नसे भी फूल गयी थी. किसी जिंदा जानवर की तरह थरथरा रहा था.

मन ही मन मुझे बहुत उत्तेजना हुई, क्या खूबसूरत लॉडा है! जब मा की गान्ड

मे जाएगा तो वह बहाल हो जाएगी. मेरी मा के लिए ऐसा ही पुरुष चाहिए था जो

उसके शरीर को पूरी तरह से भोग सके. अंकल को भी मेरे हाथों का स्पर्श

अच्छा लग रहा था, वे आँखे बंद करके लंबी लंबी साँसे ले रहे थे.

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शशिकला ने हाथ पोंछे और मा के बाजू मे लेट गयी. मा के सिर को अपने

स्तनों पर लेकर उसने एक चूंची मा के मूह मे दे दी. “मम्मी, ये लो, इसे

चूसो, कम से कम मूह भरा रहेगा तो चिल्लाओगी नही. अब अनिल, तुम डॅडी की

मदद करो, उन्हे अपना लंड सम्हलाना पड़ेगा, धीरे धीरे मम्मी की गान्ड

मे डालने को. तुम अपनी मा के चूतड़ फैलाओ, ज़रा मा की गान्ड मारने मे

मदद करो मेरे डॅडी की. एक बेटे का कर्तव्य पूरा करो”


मैं भी हाथ पोंछकर मा के पास जाकर बैठ गया. उसके गोरे चूतड़

पकड़कर मैने फैलाए. बीच का भूरा छेद दिखाने लगा. अंकल अब बहुत उत्तेजित

थे. उनका शरीर पूरा एकदम तना हुआ था. वे मा की टाँगो को फैलाकर उनके

बीच बैठ गये और एक हाथ से लंड पकड़कर झुका कर मा के छेद पर अपना

सुपाडा रखा. वह फूला हुआ छोटे सेब सा सुपाडा देखकर मुझे पूरा विश्वास हो

गया कि मा की गान्ड आज ज़रूर फट जाएगी, इतना बड़ा लंड उसकी गान्ड मे जाना

असंभव लग रहा था. फिर याद आया कि शशिकला की नाज़ुक गान्ड वे रोज मारते

थे.


अंकल ने मुझे आँख मारी और लंड को पेलने लगे. सुपाडा सटकने लगा तो

मैने मा के चूतड़ और फैलाए और सुपाडे को छेद मे वापस धकेल दिया.

तुरंत आधा सुपाडा अंदर चला गया. ‘आम’ ‘आम’ ‘आम’ करती हुई मा छटपटा

उठी. शशिकला तैयार थी. उसने अपनी चूंची और मा के मूह मे ठूंस कर

उसकी बोलती बंद कर दी और मा के हाथ पकड़ लिए. अंकल ने और ज़ोर लगाया और

‘पक’ की आवाज़ के साथ सुपाडा मा के चुतडो के बीच समा गया.


मा का पूरा शरीर काँप उठा. शशिकला उस बाहों मे दबोचे पड़ी रही.

मेरी ओर देखकर अंकल मुस्काराए “थॅंक यू अनिल, काम हो गया, अब कोई मुश्किल

नही होगी. अब आराम से जाएगा. तू घबरा गया था क्या? अरे तेरी मा की गान्ड

मेरा खजाना है, उसे मैं क्यो फाड़ुँगा? जिंदगी भर मज़ा लेना है मुझे. अब

तू जा और मा को प्यार कर, चूतड़ फैलाने की अब कोई ज़रूरत नही है, अब तो तेरी मा

चाहेगी तो भी लंड झड़ने के पहले बाहर नही निकलेगा, सुपाडा मस्त लॉक हो

गया है अंदर”


शशिकला मा के बाल चूमती हुई उसे पुचकार रही थी. मैने मा के शरीर के

नीचे हाथ डाला और उसकी बुर को सहलाने लगा. बुर एकदम गीली थी. मा चाहे

जितनी तड़प रही हो, उसे मज़ा ज़रूर आ रहा था. दूसरे हाथ से मैं मा के

मम्मे दबाने लगा.


मा जब थोड़ी शांत हुई तो अंकल ने लंड फिर पेलना शुरू किया. बड़े प्यार से इंच

इंच करके उन्होने लॉडा मा के चुतडो के अंदर उतारा. मा थरथराती तो

वे रुक जाते. जब उनका पूरा मूसल जैसा लंड अंदर उतर गया और उनका पेट मा

के चुतडो से ठीक गया तो उन्होने गहरी साँस ली “हो गया, अब तुम बच्चो जाओ

और मज़ा करो. अब मम्मी को मैं सम्हाल लूँगा.”


मा के मूह से जब शशिकला ने चूंची निकाली तो वह कराह कर बोली “अशोक, तुम मार डालोगे आज़ मुझे ऐसा लग

रहा है जैसे किसी ने पूरा हाथ डाल दिया हो. अब तक मेरी गान्ड फट गयी होगी, देखो खून तो नही निकला?”


शशिकला मा के नीचे से निकलकर उसके बाजू मे पट लेट गयी. “मा, तुम

मत घबराओ, डॅडी बहुत मस्त मारते है, ये इनका खास शौक है. बस पाँच

मिनिट मे दर्द कम हो जाएगा. तेरी गान्ड एकदम सलामत है” फिर मुझे बोली “आ

जा अनिल, अब तू मज़ा कर ले” अपने नितंब हिलाते हुए वह बोली.


मैं क्रीम उठाने लगा तो बोली “अरे रहने दे, डॅडी का मूसल मैं रोज लेती हू, तेरा

तो ऐसे ही निगल लूँगी. वैसे अगर चाहे तो मूह से गीला कर सकता है” उसकी आवाज़

मे एक चॅलेंज था. मैं तुरंत उसके नितंब चूमने लगा और फिर उन्हे फैलाकर

उसके गुलाबी गुदा को चूसने मे लग गया. जीभ अंदर डाली और स्वाद लिया. मूह

हटाने का मन ही नही हो रहा था. शशिकला मस्ती से सिसकारियाँ भरती हुई

बोली “बहुत अच्छे अनिल, बहुत मन लगाकर गान्ड चूसता है तू, बिना हिचके,

असली रसिक लोगों की पहचान यही है कि गान्ड मे मूह लगाते है कि नही, चूत

तो सब चूस लेते है.”


तभी मेरे लंड को किसीने हाथ मे ले लिया. देखा तो अंकल थे, थोड़ी सी क्रीम लेकर

मेरे लंड मे चुपड रहे थे. “थोड़ी लगा देता हू अनिल, नही तो तू जल्दी झाड़

जाएगा. अब ज़रा मज़ा ले घंटे भर, ये मेरी बेटी महा शैतान है, ऐसे गुदा

सिकॉड़ेगी कि तू झाड़ जाएगा. लंड चिकना रहेगा तो मस्त घुसेगा इसकी गान्ड

मे, ये पकड़ नही पाएगी”


वे बड़े प्यार से मेरे लंड को क्रीम लगा रहे थे. बीच मे उन्होने एक ख़ास

अंदाज से अंगूठे से मेरे लंड के निचले भाग को दबाया तो मैं झड़ने को आ

गया. वे मेरी ओर देखकर प्यार से मुस्काराए जैसे कह रहे हों अब तो और भी

मज़े करने है मेरे यार.


मेरा लंड फनफना रहा था. मैं शशिकला पर चढ़ गया. उसकी गान्ड मे

लंड पेला तो लंड एक बार मे पूरा धँस गया. गान्ड क्या थी, नरम नरम चूत

थी. आख़िर अंकल के उस मूसल से रोज मरवाती थी. मैं शशिकला पर लेट गया और

उसके स्तन हाथ मे लेकर गान्ड मारने लगा “अरे यह तो शुरू भी हो गया! बड़ी

चालू चीज़ है मम्मी तुम्हारा बेटा. मेरे डॅडी देखो अब तक वैसे ही बैठे

है” शशिकला चहकि.


मा कराहती हुई बोली “अरे बैठे है पर लंड को देखो कैसे मुठिया रहे है,

मेरी गान्ड मे उपर नीचे कर रहे है, क्या कंट्रोल है इनका, मान गयी अशोक

मैं तुझे”


“मम्मी, बस थोड़ा खेल रहा था आपकी इस लाजवाब गान्ड से, अब मारता हू. आपकी

गान्ड की ऐसी सेवा करूँगा कि आप को शिकायत का मौका नही आएगा” अंकल बोले और

मा पर लेट कर उसके मासल बदन को बाहों मे भरकर गान्ड मारने लगे.


अगले आधे घंटे मे मैने खुद देख लिया कि वे क्या मँजे खिलाड़ी थे. गान्ड

मारने का वह मानों एक तजुर्बा था, हर तरह से उन्होने मा की मारी.

कभी धीरे धीरे प्यार से, बस एक इंच अंदर बाहर करके. कभी धीरे धीरे पर

पूरे लंड के साथ, धीरे धीरे अपना लंड सुपाडे तक बाहर खींचते और फिर धीरे

से अंदर गाढ देते. साथ साथ मा की चूंचियाँ दबाते जाते और उसके कंधों

और बालों को चूमते जाते. कभी अचानक ज़ोर से मारने लगते, वहशी की तरह

सपासप अपना लंड मा की पूरी गान्ड मे तेज़ी से अंदर बाहर करते. जब मा

छटपटा उठती तो एकदम धीमे होकर मा की बुर को उंगली से मस्त करने

लगते. बीच मे मा के चूतड़ पकड़ लेते और आपस मे दबाकर फिर मारते जिससे

मा की गान्ड उनके लंड के आस पास और कस जाती.


मा तीन चार बार झड़ी. वह लगातार कराह और सिसक रही थी जैसे कोई उसे रेप करा

हो. पर मुझे समझ मे नही आया कि दर्द से कराह रही थी या मस्ती से. शायद

दोनों. कभी मा अंकल को रुकने को कहती “बस अशोक, प्लीज़, अब नही, बहुत

दुख रहा है, मैं मर जाउन्गि, सच मे अशोक, निकाल लो ना, मेरी कसम” और कभी

ज़ोर से चोदने को कहती “हे अशोक, और ज़ोर से चोदो ना प्लीज़, मैं मर जाउन्गि,

बहुत अच्छा लग रहा है, प्लीज़ मुझे झड़ो ना प्लीज़” पर मा ने कभी

मुझे नही कहा कि अनिल मेरे बेटे, मुझे बचा या अंकल को रोक. मैं उसीसे

समझ गया कि मा मज़े मे है.


मैने भी शशिकला की मखमली गान्ड का पूरा आनंद लिया. गान्ड ढीली होने से

मैं सतसत मार रहा था, गान्ड मे लंड ऐसे चल रहा था जैसे गान्ड न हो,

चूत हो, शशिकला बीच बीच मे गान्ड सिकोड लेती, बला की कलाकार थी, अपनी ढीली

गान्ड को कस लेती और मेरे लंड को ज़ोर से पकड़ लेती. पर अंकल ने यह काम अच्छा

किया था कि मेरे लंड को क्रीम लगा दी थी, मेरा लंड उसकी गुदा की पकड़ाई मे

नही आता था, फिसलता रहता, नही तो मैं ज़रूर दो मिनित मे झाड़ जाता.

मैं आख़िर झाड़ ही गया, पंद्रह मिनित से ज़्यादा मैं इसे मीठे आनंद को नही सह

पाया. पर बाद मे पड़ा पड़ा मा की गान्ड मारी जाती हुई देखता रहा. अंकल ने

पूरी जान लग दी, आधा घंटा नही झाडे और लगातार मारते रहे, साथ ही मा की

चूत मे पूरे समय उंगली करके मा की मूठ मारते रहे. आख़िर मा ने

झाड़ झाड़ कर सिर डाल दिया और लस्त हो गयी तब अंकल झाडे.


दस मिनित सब पड़े रहे जैसे जान निकल गयी हो. फिर अंकल और मैं उठे. लंड

एकदम साफ थे, पूरा वीर्य उन प्यासी गान्डो ने सोख लिया था. मेरा कुछ वीर्य

शशिकला की गुदा मे दिख रहा था पर मा का गुदा एकदम साफ था, बस खुल

गया था लाल मूह जैसा. बहुत गहरे जाकर अंकल ने वीर्य छोड़ा था, शायद मा के

पेट मे गया होगा सीधा.


कुछ कहने की ज़रूरत नही थी. हम सब एक दूसरे को लिपटाकर सो गये, इतने

थक गये थे पता ही नही चला कि कब नींद लग गयी.


रविवार सुबह सब देर से उठे. सुबह सुबह कोई चुदाई नही हुई. नौकर आ गया

था. मा और शशिकला नहाने और तैयार होने मे लग गये. ब्रांच करके

नौकर को छुट्टी दे दी गयी. मुझे लगा कि अब फिर खेल शुरू होगा. पर

शशिकला ने मा को तैयार होने को कहा. “चलो मम्मी, यहाँ माल मे होकर

आते है. बहुत अच्छी कलेक्शन है वहाँ लिंगरी की. मैने कुछ देख रखी है

तुम्हारे लिए, डॅडी ने भी कैटालोग देखकर तुम्हारे इस गदराए बदन के लिए

कुछ स्टाइल पसंद की है, अब तो उनकी पसंद की लेना ही पड़ेंगी, आख़िर तुम्हारे

पति बनने वाले है”


मा बोली “चलो, मैं तैयार हू, वैसे अशोक जितना मस्त रहता है हमेशा, उससे

और क्या मस्त होगा मेरी लिंगरी देख कर!”


शशिकला मा की चूंची दबाकर बोली “अरे अच्छी चॉकॅलेट का रॅपर भी

खूबसूरत होना चाहिए, आधा मज़ा तो रैपर निकालने मे ही है. और एक बात

मम्मी, वहाँ कुछ सॅंडल और बाथरूम स्लीपर्स भी लेना है, मेरे और तुम्हारे

लिए. बहुत ज़रूरी है. ये दोनों जैसे शौकीन है हमारे पैरों और चप्पलो

के, उसके हिसाब से उनका भी इंतज़ाम करना पड़ेगा. इन दोनों की तो चाँदी है

अब”


मीठी नोंक झोंक करती हुई दोनों शॉपिंग को चली गयी. मैं और अंकल अकेले

थे. अंकल और मैं अब तक नहाए नही थे. अंकल बोले “अनिल, तुम नहा लो, मैं तब

तक कुछ ईमेल देख लू, आफ़िस का कम निपटाता हू जब तक ये दोनों पारियाँ वापस

आती है. तुम देखो वहाँ टी वी के नीचे वाले ड्रेवार मे बहुत सी सी.डी और डी.वी.डी है,

मज़ा करो, पर और कुछ नही करना, ज़रा अपने लंड पर काबू रखना,

शशिकला आकर डान्टेगी नही तो.”


मैं जाकर नहाया. नाहकार वैसे ही सिर्फ़ जंघिया पहनकर बाहर आया. अब

अच्छा लग रहा था. फिल्म देखने का मूड भी हो रहा था. ड्रेवार खोल कर सी डी

उठाकर देखने लगा. तरह तरह का कलेक्शन था. समझ मे नही आ रहा था कि

क्या देखु. मुझे कुछ डी.वी.डी दिखी गे सेक्स की. अब तक मैने कभी नही देखी थी,

मा के साथ तो सिर्फ़ लेस्बियन या ग्रूप सेक्स की ही देखता था.



एक डी.वी.डी पर बने चित्र मुझे बहुत अच्छे लगे, मैने उसे लगाया बैठकर

देखने लगा. कुछ ही देर मे मेरी हालत खराब हो गयी. लंड ऐसा सनसनाया कि

समझ मे नही आ रहा था कि क्या करू. उस डीवीडी मे एक भी औरत नही थी, सब

मर्द थे, वे भी हॅंडसम गोरे चिकने मर्द. एक से एक जवान और सबके लंड

बड़े बड़े और तन कर खड़े हुए. आपस मे वे जवान तरह तरह के संभोग कर

रहे थे. चूमा चाटी से शुरू करके एक दूसरे के लंड चूसना और फिर गुदा

संभोग, गान्ड मारना! पहले वे जोड़ियाँ बनाकर रति कर रहे थे पर बाद मे

सब एक दूसरे से मिल कर संभोग करने लगे. पास से क्लोज़प मे दिखते वे गोरे

लाल लंड, उन्हे चूसते हुए होंठ और बिलकुल पास से उनकी गान्ड मे घुसते

लंड!


मेरा ऐसा तना की अंकल की हिदायत को नज़र अंदाज करके मैं जंघीए के उपर से

ही अपने तंबू को सहलाने लगा. साथ ही मन चाहे जहाँ दौड़ने लगा. अंकल का

रूप बार बार मेरे सामने आ जाता, उनके लंड का आकार आँखों के सामने आ

गया. मा की चूत और गान्ड मे घुस कर उन्हे चोदते हुए वह कैसा दिख रहा

था वह द्रुश्य याद आ गया. और कितना गाढ़ा वीर्य निकला था उसमे से,

एकदम सफेद मलाई जैसा! अब तक समलिंगी संभोग के बारे मे मैने सोचा

नही था पर दो दिन हुई चुदाई से मन आज़ाद हो गया था, हर चीज़ के बारे मे

सोचने लगा था.


अचानक पीछे से मेरे कंधे पर ज़ोर से किसीने हाथ रखा. मैं चौंक गया और

शरमा गया. अशोक अंकल थे, अभी अभी नहा कर आए थे. तौलिए से सिर पोंछ

रहे थे. वे एकदम नंगे थे, बस मेरी तरह अंडरवेर पहने थे. 


“तेरी मा और शशि आती ही होंगी इसलिए मैने सोचा कि तैयार रहा जाए, वे गरम गरम

आएँगी, कपड़े उतारने मे क्यो समय बरबाद किया जाए. क्या देख रहा है

यार? ओहो, ये वाली डी.वी.डी! मज़ा आया?” शैतानी से मुसकाराकार वे मेरे बाजू मे

ही बैठ गये.


मैं कुछ सकुचा रहा था पर लंड अब भी तना था. मेरी जाँघ पर हाथ रखकर

अंकल बोले “लगता है पसंद आ गयी डी वी डी तुझे. चलो अच्छा हुआ, मैं भी कई

बार देखता हू” वे मेरे बिलकुल पास बैठकर पिक्चर देखने लगे. उनके

जंघीए मे भी अब तंबू तनने लग गया था. मेरी ध्यान बार बार उधर जाता.

कितना बड़ा था उनका लंड! क्या मेरा कभी इतना बड़ा होगा! उनके शरीर से बड़ी

भीनी भीनी खुशबू आ रही थी, शायद नहाते समय लगाए इंपोर्टेड साबुन की.

थी डीवीडी पर अब तीन जवान मिलकर एक जवान के पीछे पड़े थे. एक ने उसकी गान्ड मे

लंड घुसेड कर उसे गोद मे बिठा रखा था और उसके निपल सहलाते हुए उसकी

पीठ का चुंबन ले रहा था. एक सामने बैठकर उसका लंड चूस रहा था और

तीसरा सामने खड़ा होकर अपना लंड उसे चुसवा रहा था.


“लकी बस्टर्ड! है ना अनिल, क्या मज़ा आ रहा होगा उसे!” अंकल बोले. उनके स्वर

मे अजीब सी मादकता थी. बड़े सहज ढंग से उन्होने मेरी जाँघ पर हाथ रख

दिया. मैं कुछ नही बोला पर मेरे तन मे एक लहर सी दौड़ गये, रोमाच हो आया.

मेरा लंड खड़ा हो गया और मेरे मूह से एक हल्की से आह निकल पड़ी. अंकल ने

तुरंत मुझे पास खींचा और मेरा गाल चूम लिया. मुझे अजीब सा रोमांच हो

आया. मैने विरोध नही किया. मैं चुपचाप हू देखकर अब अंकल ने सीधे मेरा

सिर अपनी ओर मोड़ा और मेरा चुंबन ले लिया. मेरी आँखों मे वे तक रहे थे.

उनकी आँखों मे ढेर सा प्यार और सेक्स का खुमार था. पहले मैं वैसे ही रहा,

फिर धीरे धीरे उनके चुंबन का जवाब देने लगा. उनकी साँसों मे से आफ्टर शेव

की खुशबू आ रही थी.


अंकल ने मुझे बाहों मे भर लिया और बेतहाशा चूमने लगे. मैने भी

अपनी बाहे उनके गले मे डाल दी. अब मैं होशोहवास खो बैठा था, मुझे कोई

फिकर नही थी कि कोई क्या कहेगा. बस लंड मे होती अटीटिवर गुदगुदी का अहसास था.

“तुम बड़े सेक्सी जवान हो अनिल, तुम्हे जो देखे वो फिदा हो जाए. कोई ताज्जुब नही की

शशि तुमपर भी मर मिटी है” मेरे होंठों को चूसते हुए वे बोले.


मैने उनके जंघीए मे बने तंबू पर हाथ डाला और पकड़ लिया. कल भी मा

की गान्ड मारने के लिए लंड को तैयार करते हुए मैने उसे हाथ मे लिया था पर

तब की बात और थी, तब मैं मा के लिए कर रहा था, आज खुद की प्यास बुझाने को

मैं उस खूबसूरत लंड को पाना चाहता था. मेरी चाहत देखकर अंकल ने

जंघिया नीचे सरकाया और लंड मेरे हाथ मे दे दिया. मेरी जंघिया उतार कर

उन्होने मेरे लंड को मुठ्ठी मे पकड़ लिया.


मेरे लंड को वे बड़े प्यार से सहलाने लगे. साथ मे कुछ इस तरह से मेरे लंड

के निचले भाग को अपनी उंगलियों से सहलाते हुए अपनी हथेली उन्होने मेरे

नंगे सुपाडे पर गोल गोल रगड़ी की मेरे मूह से उत्तेजना से एक सिसकी निकल आई.

उनके हाथ मे जादू था. मैने उनका लंड कस कर पकड़ लिया. बस एक ही इच्छा

थी, उस रसीले लंड को मूह मे ले लू, उसे गन्ने जैसा चूसू, अंकल की सारी मलाई

निकाल लू. अब कुछ कुछ समझ मे आ रहा था की लंड चूसने को मा इतनी

उत्सुक क्यो रहती थी.


मैने उनसे कहा “अंकल … आप गे भी है क्या? ऐसा सेक्स किया है अपने पहले?”

वे मुझे खींचकर गोद मे लेते हुए बोले “गे होने या न होने की बात नही है

अनिल, मैं उस हर व्यक्ति से प्यार कर सकता हू जो मुझे अच्छा लगता है. तेरी मा

पर तो मैं देखते ही मर मिटा था. उसका एक बेटा है जो उसे चोदता है यह

मुझे शशि ने बताया था पर वह बेटा इतना खूबसूरत और चिकना है यह

मुझे परसों ही पता चला जब तुझे देखा. तब से मुझे लगता था कि अगर

तुझसे भी प्यार मुहब्बत करने को मिले तो सोने मे सुहागा हो जाए. पर मैं

ज़बरदस्ती नही करना चाहता था. जब तुझे मेरे लंड की ओर देखते देखा तो

मैं समझ गया की मेरी दाल गल जाएगी. शशि को भी मालूम है, मेरी आँखों

मे देखकर वह कल ही समझ गयी थी. आज जानबूझकर हमे अकेला छोड़ कर

गयी है, वैसे शापिंग भी ज़रूरी थी. मुझे जता कर गयी है शैतान की डॅडी

सिर्फ़ चख कर देखना, पूरा नही खाना नही तो मैं कभी आप से नही बोलूँगी.”


मैं अंकल की गोद मे बैठा था जैसे छोटे बच्चे बड़ों की गोद मे बैठते

है. उनका लंड अब मेरे चुतडो के बीच की लकीर मे धँस कर मेरी पीठ पर

धक्के दे रहा था. अंकल मेरे निपल दबा रहे थे और कस के मेरे होंठ चूस

रहे थे. उनकी जीभ ने मेरे होंठों को खोला और मेरे मूह मे घुस गयी.

मेरे मूह को अंदर से ठठोलती वह गरम गरम जीभ मुझे मदहोश कर

गयी. मैं उसे चूस कर ऐसा मदहोश हुआ कि तड़प कर उनकी गोद मे से उतर

गया.



“क्या हुआ अनिल, अरे …” वे बोले पर तब तक मैं उनके सामने नीचे बैठकर

उनके लंड को हाथ मे लेकर चूमने लगा. पास से वह लंड इतना रसीला लग रहा

था कि मैने मूह खोला और उनके उसे लाल लाल सेब से सुपाडे को मूह मे लेने की

कोशिश करने लगा. 


“नही अनिल, … रुक जा यार, शशि देखेगी तो ….” “बहुत नाराज़ होगी, हंटर से मारेगी! 


ये क्या चल रहा है? मैने मना किया था ना डॅडी?”

शशिकला की आवाज़ सुनकर मैं चौंक कर अलग हो गया. सामने

शशिकला और मा खड़े थे. शशिकला नाराज़ होने का नाटक कर रही थी पर

उसकी आँखे चमक रही थी. मा भी पास खड़े खड़े मुस्करा रही थी, शायद

उसे पहले ही शशिकला ने बता दिया था.


“मैने कहा था ना मम्मी, इन दोनों को अकेले छोड़ना ठीक नही है. देखो

कैसे कबूतरों के जोड़े जैसे गुतरगु कर रहे है. चल अनिल, अलग हो, ये सब

क्या चल रहा था?” शशिकला ने कान पकड़कर मुझे उठाते हुए कहा.


“छोड़ो ना दीदी, दुखता है” मैने शिकायत की “मा और तुम कल से मज़ा ले रही

हो, मैं और अंकल क्यो नही ले सकते?” सब की आँखों मे दबी हँसी देखकर

मेरा उत्साह अब बढ़ गया था.


“हन अनिल ठीक कह रहा है बेटी. तुमने और मम्मी ने कितनी मज़ा की आपस मे,

हमने कुछ नही कहा, अब ज़रा हमे भी करने दो. क्या हॅंडसम छोकरा है

आपका मम्मी, मुझे पूरा घायल कर दिया. कल से मैं तड़प रहा हू” अशोक

अंकल बोले.


मा इतराती हुई बोली “अशोक, ये तो तुम्हे एक तीर से दो शिकार मिल गये. मेरे पीछे

पड़े थे, अब मेरे बेटे पर भी हाथ साफ करना चाहते हो. वैसे चीज़ ही ऐसी

है, मैं तो कब से जानती हू कि कितना खूबसूरत बेटा है मेरा. पर मुझे ये नही

मालूम था कि तुम्हारा झुकाव इस तरह भी है. वैसे मैं तो बहुत खुश हू कि

मेरे बच्चे को हर तरह का सुख मिले जैसे मुझे शशिकला के साथ मिला”


शशिकला बोली “मम्मी, डॅडी तो परसों से फिदा है उसपर. आपको और उसे एक

साथ देखा तो मुझे कान मे बोले कि मा बेटे, दोनों को साथ साथ लिटा कर उनसे

इश्क करूँगा. पर मैने जता दिया था कि अनिल को हाँ कहने दो पहले. क्यो रे

अनिल, डॅडी पसंद आए? कल से लंड को हाथ लगाया तब से तू इनके इस मूसल का

दीवाना हो गया है, है ना?”


मैने अंकल से लिपट कर कहा “हाँ दीदी, अशोक अंकल सच मे बहुत हॅंडसम

है, हम तीनों को प्यार करने वाला इतना सजीला मर्द घर मे ही हो इससे खुशी

की बात और क्या सकती है”


अंकल मुझे पकड़कर सोफे पर बिठाते हुए बोले “अनिल यार, अब नही तरसा, मैं

तेरी मलाई चखे बिना नही रह सकता. मम्मी, आप सच कहती है, अनिल को हर

तरह का सुख मिलना चाहिए. मैं तो यही विश्वास करता हू कि कभी मन को

पिंजरे मे नही डालना चाहिए, जिस पर दिल आ जाए चाहे वह स्त्री हो या पुरुष,

जवान हो या उमर मे ज़्यादा, बस उससे प्यार कर लेना चाहिए, उसके शरीर को

भोग लेना चाहिए. आ अनिल, तेरा स्वाद देखु” और मेरे लंड को पकड़कर उसकी ओर

झुके.


शशिकला ने खीच कर अपने डॅडी को मुझसे अलग किया “डॅडी, मैं मना कर

रही हू फिर भी आप सुन नही रहे है! अभी आप को और अनिल को राह देखनी पड़ेगी.

अरे कुछ तो छोड़िए सुहागरात के लिए. मम्मी की गान्ड तो अपने मार ली. अब कम

से कम अनिल के साथ अभी मैं आप को कुछ नही करने दूँगी. सुहागरात की राह

देखिए”


“अरे पर सुहागरात तो मेरी और रीमाजी की होगी” अशोक अंकल बोले.


“नही, सुहागरात होगी हमारे परिवारों की, सब शरीर आपस मे ऐसे मिल जाएँगे

कि एक हो जाएँगे. मैने प्लान बनाए है, आप बस देखिएगा” शशिकला ने जवाब

दिया.


तभी बेल बजी. मैं और अंकल नंगे थे इसलिए अंदर चले गये. शशिकला ने

दरवाजा खोला. कुछ बात करने की आवाज़ आई. फिर दरवाजा बंद होने की आवाज़ आई तो

हम बाहर आए. देखा कि दो बड़े पैकेट पड़े थे, सूटकेस की साइज़ के. शायद

अभी अभी कोई डिलीवरी दे गया था.


मैने मा और शशिकला की ओर देखा. वे हँसने लगी. “अरे ये हमारी आज की

शापिंग है.”


“दिखाओ ना मा” मैने कहा. अंकल भी बोले “हन भाई, हम भी तो देखे”


शशिकला धकेल कर हमे अंदर ले गयी “तुम दोनों के देखने लायक चीज़े

नही है. वैसे है तुम दोनों के लिए ही, तुम दोनों मर्दों के लिए यह

हनीमून एकदम मतवाला और न भूलने वाला मौका बनने का समान है,

समझ लो हम दोनों अप्सरए है जो उसे दिन तुम दोनों को स्वर्ग मे ले जाएँगी.

अप्सराओं के सजने धजने का समान है. और भी बहुत कुछ है पर बच्चों

के लायक नही है” मा हँसने लगी.


अशोक अंकल बोले “तो क्या हम बच्चे है? माना अनिल छोटा है पर बच्चा तो

नही है, कल से प्रूव कर रहा है. और मैं, मैं तो बच्चा नही हू”


“तुम दोनों जिस तरह से हमे देखकर बहक जाते हो, उससे तो यही लगता है कि

एकदम बच्चे हो. और हमे पसंद भी है ऐसे बच्चे. इसीलिए खास तैयारी की

है. अब यह बाते बंद करो, बस समझ लो कि आज ये चीज़े आप लोग नही देख

सकते” शशिकला उँचे स्वर मे बोली. अब वह अपनी साड़ी उतार रही थी.


बाकी बचे उस दिन और रात को हमारी रति मे जो मिठास और उत्तेजना थी उसने

हमे रात भर जगाया. तरह तरह से हमने एक दूसरे को भोगा. सब एक दूसरे

से लिपट कर चुदाई करते रहे. मुझे और अंकल को शशिकला ने कुछ नही

करने दिया, बस मेरे हट करने पर एक दो बार किस करने दिया. न रहा जाता तो

हम मौका मिलते ही एक दूसरे के लंड पकड़ लेते.


अंकल जब मा को चोद रहे थे तो मैं मा के बाजू मे बैठकर उंगली से उसके

क्लिट को सहलाने लगा. अंकल का लंड जब मा की बुर के अंदर बाहर होता तो मेरी

उंगली से घिसता. बीच मे झुक कर मैने जब मा के क्लिट पर अपनी जीभ रख दी

तो शशिकला जो मा को अपनी बुर चुसवा रही थी चिल्लाई “क्या हो रहा है अनिल,

दूर हट” 


अंकल बोले “अरे बेटी, वह अपनी मा के क्लिट को चूम रहा है उसकी

मस्ती बढ़ाने को, करने दो उसे.”


शशिकला मुस्करा कर बोली “ठीक है ठीक है, बनो मत, मैं जानती हू क्या हो

रहा है, पर चल अनिल, जीभ लगाकर रख मा के क्लिट पर, देख कैसे चूस रही

है मेरी बुर को, झड़ने को है. पर डॅडी के लंड से दूर रहना.” मैं मा के

क्लिट पर जीभ लगाकर बैठ गया. जैसे अंकल का लंड अंदर बाहर होता, वैसे मा

की बुर से रस निकल निकल कर मेरी जीभ पर आता. बीच मे मैं शशिकला की नज़र

बचाकर अंकल के लंड पर जीभ लगा देता. अशोक अंकल भी मुझे आँखों मे

शाबासी देते कि मज़ा करो, मेरी जीभ लगने से उनके लंड मे भी सनसनाहट

दौड़ जाती.


अंकल मा को चोद कर उठे तब मैं मा की चूत चूस रहा था. इसके पहले कि

अंकल के वीर्य का स्वाद ले सकु, शशिकला ने कान पकड़कर मुझे अलग कर

दिया. वह एकदम तैयार बैठी थी “चल हट बड़ा आया, मम्मी की बुर के इस

खजाने पर आज मेरा हक है, तुझे रुकना पड़ेगा. अब शादी दो दिन बाद ही तो है

है.” और झुक कर मा की बुर पर टूट पड़ी.


मम्मी और मैं दोनों चौंक गये. “इतनी जल्दी शादी! अभी तो तैयारी भी नही

हुई”


“तुम्हे कुछ करने की ज़रूरत नही है अनिल. शादी एकदम प्राइवेट होगी, बस हम

लोग ही होंगे. किसी को अभी बताने की ज़रूरत नही है. रजिस्टर्ड मैरिज करेंगे पर

अभी यह गुप्त रखी जाएगी. कारण बात मे बताउन्गा. अनिल, तुम्हारी मा के नाम मैं

यहाँ बाजू का फ्लैट किराए पर देने का एग्रीमेट बना रहा हू, किराया कंपनी

देगी. वैसे है यह फ्लैट हमारा ही पर लोगों को दिखाना है कि तुम लोग यहाँ

अलग से रहते हो. दोनों फ्लॅटो के बीच एक दरवाजा है इस वार्डरोब के अंदर

से. इस तरह से हम अलग अलग रहने का नाटक करेंगे पर रहोगे तुम लोग यही,

हमारे साथ. मैं रीमाजी के नाम से बीस लाख रुपये उसके ऐकाउन्त मे रख रहा

हू. परसों शादी होगी और शुक्रवार को हम सब एक हफ्ते के हनीमून के लिए

गोआ चलंगे. वहाँ हमारा एक बंगला है, एकदम प्राइवेट” अशोक अंकल

बोले.


“अंकल, मा की नौकरी? वह क्या अब भी आफ़िस जाएगी?” मैने पूछा.


“मम्मी को नौकरी की अब क्या ज़रूरत है, अब वह तो मालकिन है. वैसे मैं अब

मम्मी को एक अलग केबिन देने वाली हू. वह हमारी, याने मेरी और डॅडी की खास

कन्सल्टेंट हो कर रहेगी. जब भी हमे सलाह की ज़रूरत होगी तब हम उसके केबिन

मे चले जाया करेंगे. मम्मी जैसी खूबसूरत औरत की कन्सलटेन्सी की ज़रूरत तो

हमे दिन भर पड़ेगी” शशिकला ने मुझे आँख मारते हुए कहा.



शादी के पहले की उस आखरी रात सोने से पहले हमने एक घंटे की एक पिक्चर

देखी. उसमे बहुत पिक्चरो के सीन थे, एक से एक बढ़कर अश्लील, हर तरह के

जायज़ और नाजायज़ संभोग से भरे हुए. तब अंकल ने कहा “मम्मी और अनिल, आओ

अब तुम्हे मेरा प्रिय आसान दिखाऊ. पिक्चर देखने के लिए हम दोनों इसका

उपयोग करते है. अब आगे दो जोड़ी बनाकर देखा करेंगे, तुम लोग भी देख कर

रखो”


उन्होने शशिकला को अपने सामने खड़ा किया और उसके गुदा पर अपना लंड

टीका कर उसकी कमर पकड़ी और खींच कर गोद मे बिठा लिया. शशिकला अपने

डॅडी का पूरा लॉडा गान्ड मे लेती हुई उनकी गोद मे बैठ गयी. पिक्चर भर वे

शशिकला को गोद मे लिए बैठे रहे और उपर नीचे होते रहे. शशिकला भी

आराम से अपनी गान्ड मे अंकल का मूसल घुसाए बैठी थी और मूड मूड कर उन्हे

किस कर रही थी. अंकल ने अपने एक बाजू मे मा को बिठा लिया और एक बाजू मे

मुझे. हम सब पिक्चर देखने लगे.


मैं बार बार शशिकला को चूमता और उसके मम्मे दबाता. उसकी बुर मे

उंगली करता. मा और अंकल चुमचाटी कर रहे थे. अंकल मा की चूंची

मूह मे लिए थे. इतनी गंदी पिक्चर के बावजूद अंकल एक घंटे नही झाडे, बस

उपर नीचे होकर शशिकला की गान्ड मारते रहे. हमे भी उन्होने नही झड़ने

दिया.


पिक्चर ख़तम होते होते हम सब मस्ती मे डूब गये थे. पिक्चर ख़तम होते

ही मा झट से अंकल के सामने नीचे बैठ गयी और शशिकला की बुर चूसने

लगी. शशिकला ने मुझे सामने खड़ा कर लिया और मेरा लंड चूसने लगी.


शशिकला को हम सब तीनों तरफ से चोदने मे लग गये. उसे बहुत मज़ा आया.

वह इतनी बार झड़ी कि मा को उसने अपनी बुर से आधा कटोरी रस तो पिला ही दिया

होगा. मेरा लंड चूस कर शशिकला ने मुझे झड़ाया और मेरा सारा रस पी गयी.

शशिकला जब पूरी तृप्त होकर लस्त पड़ गयी तो अंकल ने उसकी गान्ड मे से अपना

लंड खींचकर शशिकला को चूम कर कहा “मज़ा आया बेटी? आज कितने दिनों

बाद ऐसा आसान किया है, अकेले मे तो यह ठीक से होता नही, आज अनिल और मम्मी थे

तो आख़िर एक साथ तेरे तीनों अंगों को आनंद मिला.”


शशिकला कुछ बोलने की स्थिति मे नही थी, बस सोफे पर लुढ़क गयी. मैं भी आज

इतनी बार झाड़ा था कि वही फर्श पर ढेर हो गया.


अंकल का अब भी खड़ा था और कस के खड़ा था. उनकी वासना चरम सीमा पर थी

जो शायद उन्होने मा के लिए बचा कर रखी थी. मा भी तब से सिर्फ़ शशिकला

की वासना पूर्ति मे जुटी थी, खुद को बस अपनी बुर को सहला सहला कर गरम

रखे हुए थी.


मा अशोक अंकल को बोली “बच्चे तो लुढ़क गये अशोक, बस हम दोनों बचे

है. आओ, आते हो मैदान मे? आज हो ही जाए मेरी तुम्हारी जुगलबंदी, देखे हम

मियाँ बीबी की कैसी जमती है.” और वही फर्श पर अपनी टांगे पसारकर कर

चूत को अशोक अंकल के सामने खोल कर लेट गयी. उसकी आँखों मे बड़ी

मादक छटा थी, चेहरे पर भी ऐसे भाव थे जैसे रंडियों के होते है

अपने ग्राहकों को रिझाने या उकसाने के लिए.


अंकल उठे और मा पर चढ़ गये. एक बार मे ही उन्होने अपना लंड मा की बुर

मे उतार दिया और मा पर सो कर उसे चोदने लगे. “आइए रीमाजी, आइए, आज आपको

दिखाता हू की आपका यह होने वाला दास, आपका पति क्या चीज़ है. अब तक तो मैं

आपको चोदते समय आपकी सुंदरता और शालीनता का लिहाज कर रहा था, आज अब

दिखाता हू कि असली चुदाई क्या होती है, आप जैसी मतवाली नारी मिल जाए तो उसे कैसे

चोदा जाता है. अनिल देख ले बेटे, तेरी मा को मैं आज ऐसे चोदुन्गा जैसा तूने अब

तक नही चोदा होगा”


मा चूतड़ उछल उछल कर चुदवाते हुए बोली “बिलकुल चोदो अशोक, ऐसे चोदो

कि मैं कल उठने के लायक न रहू. और मुझे अब डार्लिंग भी कहा करो प्लीज़, ये

आप आप क्या लगा रखी है. मैं अब तुम्हारी पत्नी होने वाली हू, मेरे शरीर पर अब

तुम्हारा पूरा हक है कि कैसे भी इसे भोगो.”


धुआँधार चुदाई शुरू हो गयी. अंकल ने पहले तो मा को सधी लय मे चोदा,

धीरे धीरे पूरा लंड अंदर बाहर करते हुए. जब मा दो बार झाड़ गयी तब वे

अपने रंग मे आए. मा को बाहों मे दबोचा, उसके होंठों को अपने

होंठों मे दबाया, अपनी छाती से मा की छातियाँ पिचका दी और हचक

हचक कर चोदने लगे. मा की बुर इतनी गीली थी कि फ़चक फ़चक फ़चक आवाज़

आने लगी.


अंकल ने अगले बीस मिनित मा को चोदा. एक पल भी नही रुके. गजब का स्टेमिना

था उनमे. पसीने पसीने हो गये पर उनकी कमर लगातार उपर नीचे होती रही.

कभी मा का मूह वे पल भर को चोदते तो मा वासना से कराह उठती. वह इस

जंगली किस्म की रति मे उनका पूरा सहयोग दे रही थी. अपनी कमर और चूतड़

उचका उचका कर चुदवा रही थी. अपनी बाहों मे अशोक अंकल को जकाड़कर

उनकी पीठ खरोंच रही थी.


आख़िर जब अंकल झड़ने के करीब आए तो हाँफने लगे. मा ने उन्हे शाबासी दी.

“बहुत अच्छे अशोक, बस ऐसे ही चोदो, और ज़ोर से धक्के नही लगा सकते क्या?

मेरी कमर नही तोड़ी अब तक! अरे मुझे लगा था कि तुम ऐसे पेलोगे कि मेरी कमर

लचका दोगे. प्लीज़, लगाओ ना ज़ोर से और” मुझे बड़ा गर्व हो रहा था. मा आज

अपने पूरे अंदाज मे थी. आज मुझे पता चल रहा था कि मा की वासना कितनी

गहरी थी. अशोक अंकल के हर वार का उसने मुकाबला किया था.


अंकल अब मा को ऐसे चोदने लगे कि हर धक्के से संगमरमर के फर्श पर

मा का शरीर तीन चार इंच आगे फिसल जाता. चोदते हुए सरक सरक कर दोनों

आख़िर जब सोफे के करीब पहुँचे तब मा ने सहारे के लिए सोफे का पैर पकड़

लिया. अंकल ने करारे धक्के लगाना शुरू किए जैसे मा को मार डालना चाहते

हों. वे अचानक झाडे और जोश मे ऐसे चिल्लाए जैसे रोलर कोस्टर मे बैठे

हों. उनका शरीर एकदम तन सा गया और वे मा के शरीर पर गिर पड़े.


मा भी झाड़ गयी थी पर उसमे अब भी गरमी बाकी थी. वह अब भी कमर चला

चला कर अंकल को चोद रही थी. उनके झाडे लंड को वह सहन नही हो रहा था

और वे ‘ओह’ ‘ओह’ ‘बस डार्लिंग प्लीज़’ ‘ओह मत करो ना’ कहते हुए ढेर हो गये.

मा ने उन्हे अलग किया और प्यार से चूमा. वह बहुत खुश लग रही थी.


शशिकला जो पड़े पड़े यह तमाशा देख रही थी, बाहे फैला कर बोली ‘वाह

मम्मी, डॅडी को आज पहली बार अपनी जोड़ का साथी मिला है. इधर आओ ना, मुझे

अपने आगोश मे ले लो, मुझे प्यार करो, तुम तो हमारे लिए अब कामना की देवी हो,

यह घर अब तुम्हारे प्रसाद पर ही चलेगा”


मा उठाकर सोफे पर आई और अपनी टांगे फैलाकर शशिकला के सिर को कैंची की

तरह फाँसती हुई बोली “इसीलिए तो आई हू बेटी तेरे पास, ले इतना प्रसाद है यहाँ,

भोग लगा ले जितना मन चाहे.” शशिकला मा की बुर मे मूह डाल कर मग्न हो

गयी. उधर अंकल इतने थक गये थे की वैसे ही फर्श पर पड़े पड़े सो गये. मा

के गोरी जांघों मे फँसा शशिकला का सिर देखते देखते मेरी भी आँख लग

गयी.


सुबह हम उठाकर सिर्फ़ चाय पी कर घर चल दिए. अंकल तो अब भी सो रहे थे,

उन्हे नही जगाया, आख़िर बेचारों ने बहुत मेहनत की थी कल रात की कुश्ती मे.

शशिकला का चुंबन ले कर मा ने उससे बीड़ा ली. “मम्मी, मैं तैयारी करती

हू शादी की. इसी गुरुवार को है. वहाँ से सीधे गोआ चलंगे. तुम पचाड़े मे

नही पड़ना, बस आराम करो, और अनिल तुम भी. ज़रा अच्छे बच्चे बन कर

रहना. हफ्ते भर अब ब्रह्मचारी बने रहो, मा को भी आराम करना. ज़रा

हनीमून के लिए अपने आप को मस्त करो. मैं भी डॅडी का सब काम बंद करा देती

हू. उन्हे अगले हफ्ते बहुत मेहनत करना है मम्मी की सेवा मे. वैसे अनिल, अब

तुम उन्हे डॅडी कह सकते हो” मुस्करा कर शैतानी से वह बोली.


तीन चार दिन हमने सच मे आराम किया. मा ने भी मुझे अलग सुलाया. कसम भी

दी की मैं मूठ नही मारूँगा. वैसे दो दिन के बाद ही मैं ऐसा ताज़ा हो गया था

कि मा से अलग नही रहा जा रहा था. पर उसने मुझे समझाया कि इतनी मीठी

घड़ी आ रही है, इतनी बड़ी दावत पर ताव मारना है तो भूखा रहना ज़रूरी है.


गुरुवार को हम बस कुछ कपड़े लेकर शशिकला के यहाँ आ गये. वह तो बोल

रही थी कि कुछ मत लाओ, सब यहाँ तैयार है पर मा ने उसके कुछ खास कपड़े,

चुनी हुई ब्रा और पैंटी और अपनी सब सॅंडल और चप्पले ले ली. मैने ही उसे

कहा था, एक तो वे मेरी प्रिय चीज़े थी, दूसरे अशोक अंकल को भी वे बहुत

पसंद आएँगी मुझे मालूम था.


शादी एकदम प्राइवेट हुई. बस एक कोर्ट का आफिसर आया था. उसने दस्तख़त लिए और

मा और अंकल ने एक दूसरे को हार पहनाए. जब वह आफिसर चला गया तो अंकल

मा से लिपट कर उसे चूमने लगे. बहुत जोश मे लग रहे थे, लगता था कि दो

तीन दिन के आराम से उनके लंड को फिर पूरा जोश आ गया था. जिस तरह से वे मा को

बाहों मे भींच कर उसे किस कर रहे थे, मुझे लगा कि अभी पटक कर चढ़

जाएँगे. मा कुछ कुछ शरमा रही थी पर उनके चुंबनो का प्यार से जवाब

दे रही थी.


शशिकला ने उन दोनों को अलग किया “मैने कहा था ना? अभी सब बंद! कल ही

दोपहर को गोआ जाना है. वहाँ कल रात है हमारा हनीमून, फिर देख लूँगी कि

कौन कितने जोश मे है”

फिर मुड़कर मुझे बोली “अनिल, अपने डॅडी के पैर छुओ, मैं भी अब अपनी

मम्मी के पैर पड़ूँगी.”


हम दोनों जैसे ही झुके, अशोक अंकल ने मुझे बाहों मे जाकड़ लिया “अरे ये

तो मज़ाक कर रही है, अनिल, तेरी जगह मेरी बाहों मे है. ये शशि ने

ज़बरदस्ती की नही तो उसी दिन मैं दिखा देता कि तू मुझे कितना अच्छा लगता है”

उनका लंड कस के खड़ा था, कपड़ों के नीचे से ही मेरे पेट पर दब रहा था.

मा ने भी शशिकला को बाहों मे भर लिया और चूमने लगी. “मेरी बेटी,

तुझे मैं बहुत सुख दूँगी, आज जो यह सब सुख मुझे और मेरे बेटे को मिला है,

सब तुम्हारी वजह से है”


हम सब बेहद उत्तेजित थे, ऐसा लगता था कि अभी कपड़े उतार कर शुरू हो जाए.

पर शशिकला मानने के मूड मे नही थी. हम दोनों को उसने जाकर आराम

करने को कहा. “अब सीधे एयरपोर्ट पर मिलेंगे मम्मी. तुम्हारा समान यही

छोड़ जाओ, हम ले आएँगे. खूब आराम करो, कल रात सब मुझे फ्रेश और तैयार

चाहिए”


अगली दोपहर को हम गोआ मे थे. अशोक अंकल का बंगला परवरीम मे एकदम

अंदर जाकर करीब करीब जंगल मे था. आस पास बस पेड़ और घनी झड़ी थी. दूर दूर

तक और कोई घर नही था. बंगले मे एक बूढ़ा नौकर केयरटेकर था.

बंगला आलीशान था. चार बेडरूम थे. उनमे से एक बहुत बड़ा था, वहाँ वैसा

ही बड़ा पलंग था जैसा शशिकला के बेडरूम मे था.


शशिकला ने सब को फिर से जाकर सो लेने को कहा. “अभी दो तीन घंटे और सो लो. अब

रात भर मैं सोने नही दूँगी किसी को. बहुत मेहनत करना है, खास कर तुम

दोनों मर्दों को”


शाम को हम सब तैयार हो कर बाहर गये. फ़ोर्ट अग्वाडा मे खाना खाया, कुछ

वाइन ली, गप्पे लगाई. हम सादे कपड़ों मे ही थे, कोई कह नही सकता था कि

हनीमून पर आए है.


आठ बजे हम वापस आए. नौकर बंगले के गेट के पास बने अपने घर मे

चला गया था. हम आकर बड़े बेडरूम मे बैठ गये. शशिकला ने अंगड़ाई ले

कर कहा “चलो, अब काम की बात शुरू करे. ऐसा करो, तुम दोनों उन दोनों

कमरों मे जाओ, नहा लो और कपड़े बदल लो. तुम्हारे कपड़े वही रखे है.

मैं और मम्मी इस बेडरूम मे कपड़े बदलेंगे. जब मैं आवाज़ दूं तो आ जाना.

और ज़रा संभालना अपने आप को, आज तो मुरदों की रात है”


मैने जाकर नहाया. बाहर आया तो कपड़ों के नाम पर सिर्फ़ एक सफेद एकदम तंग

जंघिया रखा था, और कुछ नही. जंघिया बहुत अच्छी क्वालिटी का था और

खास मेल माडल्स पहनते है वैसा था. मैने खूब ढूँढा, और कोई कपड़े

नही दिखे. मैं समझ गया कि शशिकला यही चाहती है. मेरा लंड अब तन

गया था. बड़ी मुश्किल से मैने वह जंघिया पहना, अपना लंड उसके अंदर

खोंसा. जंघीए की क्रैच मे टाइट इलेस्तिक था जिसने लंड को दबा कर रखा

था. फिर भी जंघीए मे तंबू दिख रहा था. कसे जंघीए के मुलायममेटिरियल

के स्पर्श से लंड और उत्तेजित हो गया था. मुझे समझ मे नही आ

रहा था कि कपड़ा है, कि नायालन या रबड़ है! मैं शशिकला के बुलाने की राह

देखने लगा. दिल उत्तेजना से धड़क रहा था. मैं जानता था कि आज की रात सेक्स के

सारे बंधन टूट जाएँगे.

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शशिकला ने आवाज़ दी तो मैं बड़े बेडरूम की ओर चल दिया. करीडार मे अंकल मिले.

वे भी मेरे जैसा ही जंघिया पहने थे. वे बेचारे और तकलीफ़ मे थे, उनका

बड़ा लंड तो अंदर समा ही नही रहा था. जांघिया नीचे से तन गया था और

लंड बड़ा होकर उसे स्त्रेच कर रहा था. अंकल बहुत हॅंडसम दिख रहे थे.

उनका वह नहाया हुआ दमकता सुडौल गोरा शरीर देखकर मुझे अजीब सा

लगने लगा. मुझे अंदाज़ा होने लगा था कि मा को भी वे कितने अच्छे लगते

होंगे.


मुझे देखकर . “अनिल, तू इतना चिकना लग रहा है कि अगर ये दोनों

अप्सराएँ हमारी राह न देखती होती तो तुझे मैं उठाकर सीधे अपने बेडरूम मे

ले जाता और खूब प्यार करता.” मैं थोड़ा शरमा गया, समझ मे नही आ रहा

था कि क्या जवाब दूं.


हम जब बड़े बेडरूम मे पहुँचे तो हमारी आँखे चौंधिया गयी. मा और

शशिकला सज धज कर वहाँ खड़ी हमारी राह देख रही थी. आज दोनों ने

अर्धनग्न रूप सजाया था. मा हल्के गुलाबी रंग की पैंटी और ब्रा पहने थी.

दोनों बिकिनी मे थी याने एकदम छोटी. ब्रा के कप सिर्फ़ मा के निपलो और

नीचे के आधे स्तनों को ढके थे. उपर के स्तन खुले थे. ब्रा पुशप

होने से मा के गदराए उरोज तन गये थे और उसकी ब्रा मे से उफान कर बाहर आ रहे थे.

पैंटी भी तंग स्टाइल की थी, बस एक पतली पत्ती थी जिससे मा की बुर की लकीर

भर छिप गयी थी. बाकी मा की बुर के बाल दोनों तरफ से दिख रहे थे. मा के

गोरे विशाल नितंब भी करीब करीब पूरे खुले थे. मा ने एक गुलाबी रंग की ही

है हील स्लिपर पहन रखी थी. स्लिपर भी बहुत नाज़ुक थी, एकदम पतले सोल और

पतले पत्तों वाली, हिल भी एकदम पतली थी, गुलाब के पौधे की छड़ी जैसी!

शशिकला का भी यही रूप था. बस उसने गहरे आसमानी रंग की ब्रा और पैंटी

पहनी थी. सॅंडल एकदम सफेद रंग के थे. शशिकला ने मुस्काराकर मुझे

पास बुलाया. मैं उसके पास गया तो उसने मुझे बाहों मे भर लिया और मेरी

आँखों मे आँखे डालकर मुझे चूमने लगी. “मेरा छोटा भाई! अपनी दीदी की

सेवा करेगा ना अब जिंदगी भर?” मैं क्या कहता, मेरी आँखों से उसे पता चल

गया होगा कि उसके गुलामी करूँगा जीवन भर!


अंकल मा के आगे घुटने टेक कर बैठ गये. “दीदी, मम्मी, आप जैसी अप्सरा

मेरी पत्नी बनी है मुझे विश्वास ही नही हो रहा है. आज तो मैं मर जाउन्गा, इतना

आपका रूप मुझे सता रहा है. इस गुलाम को आज प्लीज़ पूरी छूट दीजिए कि वह

आपके रूप का चाहे जैसे पान करे.” और मा की कमर मे बाहे डालकर अपना

चेहरा उसकी बुर मे दबा दिया.


मा ने उन्हे उठाया और गले मे बाहे डाल दी. “आज से तुम मेरे पति हो अशोक,

तुम्हारी हर इच्छा को पूरा करना मेरा फ़र्ज़ है. मेरे शरीर का हर भाग

तुम्हारा है, भोगो जैसे चाहे, मैं नही रोकूंगी”


शशिकला मुझे चूमकर उनके पास ले गयी “मम्मी, आपके शरीर का एक और

भाग है जो डॅडी को बहुत पसंद है, बल्कि मरते है उसपर. अब तक बोलते

नही थे, आज से उसे भी वे प्यार करना चाहते है. वो भाग आपके शरीर का है पर

अब अलग है आपसे”


मा बोली “मैं समझी नही बेटी”

शशिकला मुझे आगे करते हुए बोली “अनिल. अनिल की बात कर रही हू मैं, डॅडी आज

तुम दोनों से प्यार करना चाहते है”


मा मुस्करा दी “बिलकुल करो अशोक, मैं कब की समझ गयी थी, जिस तरह से तुम

अनिल को देखते थे उससे मुझे इसका अंदाज़ा हो गया था. अनिल मेरा बेटा है और

मुझे बहुत अच्छा लगा कि वो इतना खूबसूरत है कि तुम्हे भी अच्छा लगता

है. मैं चाहती हू कि आज तुम अपने मन की हर मुराद पूरी कर लो. अनिल, तुझे

अंकल … मेरा मतलब है डॅडी अच्छे लगते है ना? मैं चाहती हू कि तुझे

भी हर तरह का यौन सुख मिले, जैसा मुझे मेरी बेटी के साथ मिला”


मैं थोड़ा शरमा रहा था. अंकल मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे खा जाएँगे.

उनकी निगाहों मे बेहद प्यार और वासना थी. मैं बोला “हाँ मा, अंकल बहुत

हॅंडसम है, मुझे मंजूर है अगर वे मुझसे भी …. मैं तैयार हू.”


अंकल ने खुश होकर मुझे और मा को पकड़ा और सोफे पर बैठ गये. उनके एक

तरफ मा थी और एक तरफ शशिकला. मुझे उन्होने गोद मे ले लिया. “ये सब से

छोटा है, मेरी गोद मे बैठेगा.” उनका खड़ा लंड मेरी पीठ पर दब गया. वे

बारी बारी से हम तीनों को चूमने लगे. कभी मा के होंठ चूमते, कभी

अपनी बेटी के और कभी बीच मे मेरे होंठ अपने होंठों मे लेकर किस

करने लगते. मेरे तने लंड पर उनका पूरा ध्यान था, उसे वे मुठ्ठी मे

पकड़कर धीरे धीरे उपर नीचे कर रहे थे.


चूमाचाटी के साथ साथ हमारी वासना बढ़ती गयी. हम चारों आपस मे

लिपटे थे. कोई किसी को किस करने लगा, कोई किसी को. सबके हाथ उन मुलायम

स्तनों और जांघों पर घूम रहे थे. मैने बीच मे हाथ पीछे करके अंकल

का लंड पकड़ लिया. एकदम लोहे के डंडे जैसा सख़्त हो गया था.

बीच मे मेरा हाथ मा की ब्रा पर लगा. बहुत मुलायम ब्रा थी, लगता था जैसे

पतले रबड़ की बनी हो. मैने शशिकला की पैंटी को छुआ तो वो भी वैसी ही थी.


मैने पैंटी उतारने की कोशिश की तो शशिकला ने मेरे हाथ पर चपत मार दी.

मा के मूह से मूह अलग करके बोली “हाथ मत लगाना! ये अभी नही उतरेगी.”


मैने चुदासी से व्याकुल होकर कहा “आज नही उतारोगी दीदी तो कब उतारोगी? आज की

रात का तो मैं कब से इंतजार कर रहा हू!”


शशिकला ने जवाब दिया. “जब भूख लगेगी तब उतरेगी ये. पर तू फिकर मत कर,

तेरे काम के लिए इसे उतारना ज़रूरी नही है, खास इसीलिए तो पहनी है ये तंग

स्टाइल की पैंटी, देख!” और उसने पैंटी की पत्ती हाथ से अलग करके दिखाई. सच

मे इतना सी पत्ती थी, रीबन जैसी कि दो इंच खिसकते ही शशिकला दीदी की बुर

दिखने लगी.


“देखा?” मुस्काराकर दीदी बोली “काम रुकेगा नही हमारा. मम्मी की भी ऐसी ही

है”


डॅडी … अशोक अंकल…अब तक व्याकुल हो गये थे. मा को उठाकर बिस्तर पर ले

जाते हुए बोले “डार्लिंग, पहले ज़रा स्वाद तो चखा दो अपने अमृत का, हफ़्ता हो

गया. मैं तो तरस गया इस शहद के लिए”


मा ने लेटते हुए अपनी टांगे फैलाई और बड़ी शोख अदा से अपनी पैंटी की

पत्ती बाजू मे की “लो अशोक, जितना चाहे पी लो मेरा रस. हफ्ते से जमा हो रहा

है इस अमृत कुंड मे, सब तुम्हारे लिए है, सुहागरात की भेंट मेरे प्यारे पति

को” 


अशोक अंकल तुरंत मा की बुर मे मूह डाल कर पेट पूजा मे जुट गये.

मैने भी शशिकला दीदी की बुर से मूह लगा दिया. इन कुछ दिनों मे न झड़ने

से उसका रस और गाढ़ा हो गया था, चासनी की तरह रिस रहा था.

दस मिनिट दीदी की बुर चूसने के बाद मुझसे नही रहा गया. मैं उठकर

उसपर चढ़ गया. वह हंस कर मुझे बाहों मे लेती हुई बोली “इतने मे ही

पेशंस चला गया मेरे भैया! चलो कोई बात नही, आओ, चोद लो पर एक बात.

झड़ना नही! झड़ने के लिए मैं कहूँगी तुझे एक खास मौके पर. अपनी इस

मलाई को बचा कर रख ज़रा. डॅडी…आप तैयार है ना?”



अशोक अंकल भी मा की जांघों के बीच बैठकर अपना जंघिया उतार रहे थे.

“डॅडी, भूल गये, मैने उतारने को मना किया ना था? सामने के फ्लैप मे से

निकाल लीजिए ना, उतारने की ज़रूरत नही है. मैं उतरवाउन्गा जब मुहूरत आएगा”


अशोक अंकल ने बड़ी मुश्किल से जंघीए के फ्लैप मे से अपना लंड निकाला. वह

इतनी ज़ोर से खड़ा हो गया था कि मूड कर फ्लैप मे से निकल ही नही रहा था. किसी

तरह मा की मदद से उन्होने आख़िर लंड निकाला और तुरंत मा की बुर मे

घुसेड कर उसपर लेट कर अपने अंदाज मे चोदने लगे. शशिकला ने प्यार से

मेरा लंड बाहर निकाला और खुद ही अपनी चूत मे डाल लिया. मैं शशिकला को

चोदने लगा.


हनीमून की इस चुदाई मे मज़ा आ रहा था. पर मुझे बार बार लग रहा था कि आज

कुछ खास होगा, ऐसी चुदाई तो हमने कई बार की थी.

कुछ देर बाद जब मैं झड़ने को आ गया तो शशिकला ने मुझे रोक दिया. अशोक

अंकल से बोली ” क्यो डॅडी? चोदते ही रहेंगे या आगे भी कुछ करेंगे? हम

लोगों को भी आना है आप दोनों के साथ”


डॅडी हाम्फते हुए बोले “हा बेटी, अब आ जाओ, तुम्हारी मम्मी आज बला की

नमकीन है, मैं झाड़ जाउन्गा. चूत मैं बहुत चोद चुका, अब उसे आराम देना

चाहता हू कि बाद मे चूस सकु. मेरी जान …” मा को वे बोले “अब ज़रा गान्ड मार

लेने दो प्लीज़, आज की हनीमून की रात मे तुम्हारी गान्ड मारने मे बहुत मज़ा

आएगा.”


“आप गान्ड मारिए डॅडी, मैं रीमा मम्मी की चूत चूसति हू.” शशिकला

उठाकर मा के पास जाकर सो गयी.

मा उसे बाहों मे लेकर बोली “आ जा बेटी पर दूसरी तरफ से आ. मुझे प्यासा

रखेगी क्या? मुझे भी तो ज़रा शहद चखने दे अपने बदन का”


शशिकला चित लेट गयी. मा उसपर उलटी तरफ से लेट गयी. शशिकला ने

जंघे खोलकर मा का सिर उनके बीच ले लिया और अपनी बुर पर उसका मूह दबा

लिया. खुद उसने मा की जंघे फैलाई और प्यार से उंगलियों से मा की बुर

खोलकर चाटने लगी. “बढ़िया माल बनाया है आज मम्मी ने, मुझे तो घंटे

भर की फुरसत हो गयी डॅडी. चलिए आप अपने मन की कर लीजिए.”

मई लंड हाथ मे लिए बाजू मे बैठा था. समझ मे नही आ रहा था की क्या

करू. मुझे देखकर शशिकला मुस्काराई “धीरज रखो मुन्ना भैया. अभी

तेरा और डॅडी का साथ मे इंतज़ाम कर देती हू. तू डॅडी की मदद कर मा की

गान्ड मारने मे. पहले जाकर वहाँ फ़्रिज़ मे से वो सफेद कृमि बटर का डिब्बा ले

आ. आज से अब क्रीम के बजाय मख्खन लगाया जाएगा चुदाई के लिए. क्रीम मूह मे

जाती है तो बड़ा कड़वा मूह हो जाता है. और आज तो अब मम्मी के बदन की हर

जगह का स्वाद लेना है”

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