Mohini Chapter 2
अपने आँखों के सामने ऐसी खूबसूरत रूप की रानी देखके अभिषेक जी का मुह खुला का खुला था। क्या बोलेंगे क्या करेंगे कुछ समझ ही नहीं पा रहे थे।
बस देख रहे थे के आधार हसीना उनके तारफ बरती चली आ रही है। उसकी वो नीली आंखें, आकर्षक मुस्कान, घनी जुल्फें इन सब में जैसे खोते जा रहे थे अरुण के पापा।
तबी अचानक वो लड़की रुक गई और तूरंत लेफ्ट साइड देखने लगी। पर वो लड़की क्या देख रही है? क्यों यहां और कोई नहीं है। तबी वो लड़की अचानक बोली –
आज… आज मैं चलती हूं… कल आऊंगी….
ऐसा बोले ही पता नहीं वो खिरकी के रोशनी के बहार चली गई।
अरे कहां गई आप? कहन गई? अरुण के पापा पुकारने लगे उसे।
अचानक जरूरत टूट गया उनका। आंख खोलके देखे के सब कुछ नॉर्मल है। खिड़की बंद है, रात का दीपक जल रही है, बेटा और पत्नी बाजू में ही तो रहे हैं।
ओह्ह्ह्ह्ह… तो ये सपना था? अरुण के पापा खुद पर ही हस्कर फिर से सो गए। अजीब सपना था। पर वो लड़की का चेहरा कितना खूबसूरत था। खास करके वो नीली आंखें। ये सब सोचते हुए वो सो गए।
अगले दिन सुबाह मम्मी की पुकार से अरुण का नींद खुला। मम्मी पापा की चाय टेबल पे रखके नीची किचन में चली गई। जाते जाते बेटे को ताजा हो जाने को बोल के गई।
अरुण बिस्तर से उठके बहार आया। बाथरूम जाते वक्त बेसिन के सामने पापा से मुलकत हुई। पापा शेविंग कर रहे थे।
पापा को देखते ही अरुण को अचानक कल रात की एक अजीब घाटना याद आ गया। वो तो सोया हुआ था पर पता कुछ करन से उसका जरूरत खुल गया। पूरी कामरे में एक अजीब सा बदबू था। बहुत ही गंदा बदबू तो नहीं पर एक अजीब सा बदबू जैसा कोई चिस आग में जल रही हो।
अरुण आंख खोल के आधार उधार देखते ही उसे नजर अपने पापा के तारफ जाति है और वो देखता है एक अजीब और दरवाजा दृश्य।
कोई उसके पापा के बिस्तर के साइड पे बैठा है शायद और पुरा जिस्म काले चादर या ऐसा ही कुछ से ढाका हुआ है। तबी वो डर के थोरा उठा के देखता है। तबी वो जो कुछ भी वहां था जैसे तूरंत टोपी जाता है। अरुण अच्छे से देखने की कोशिश करता है पर अब कुछ नहीं दिखता उसे।
उसे लगता है शायद वही था उसका। अंधेरी में ऐसा कुछ होना नॉर्मल है। वो देखता है तब भी पापा भी शायद उठ गए थे। क्यूंकी पापा थोरा अपना सर हिला रहे थे। अरुण तुरंत आंख बंद करके मम्मी के तार घुमके सो जाता है।
ये सोच रहा था अरुण तबी पापा के पुकार से वो पापा के तार देखता है।
पापा: क्या हुआ? क्या सोचा रहा है?
अरुण : हा? नहीं पापा….
वो बाथरूम चला जाता है। थोरी डेर बाद पापा भी मार्केट के लिए निकल जाते हैं। आज मटन खाने का मन कर रहा था सबको तो पापा मटन और कुछ ज़रुरी चिस ख़रीदने बाज़ार चले गए।
अरुण की मम्मी अपने ससुर को मेडिसिन देकर ससुमा को सुबाह की चाय देकर बालकनी के पौधे को पानी दे रही थी। अरुण भी मम्मी के आस पास ही फुटबॉल से खेल रहा था।
तबी उनके सामने के घर में रहने वाली रीता चाची बहार से आ रही थी। अरुण के मम्मी को देखकर जल्दबाजी हुई गेट के सामने आकार बोली – कैसी हो दीप्ति बेटा?
वो आंटी भी लगभाग अरुण के दादी मतलाब दीप्ति की ससुमा के उमर की थी। उनको भी दीप्ति बहुत सम्मान कार्ति थी। इसलिये उनको देखने के लिए अरुण की मम्मी उनको घर के नीचे आने को बोली।
रीता आंटी: नहीं बेटा… अभी नहीं… अभी थोरा काम है… इस्ली जल्दी है। बस तुमको देखा तो आ गई। तुम्हारे पति को देखा बाजार जाते हुए।
दीप्ति: हा… वो आज रविवार है ना… तो उनको थोरा म्यूटों खाना था इसलिये गए।
रीता आंटी: वो अच्छा.. संडे को तो अच्छे से बिटाना चाहिए… एक ही तो छुटटी का दिन होता है।
तबी आंटी ने एक अजीब बात बोली।
रीता आंटी: अच्छा बेटा एक बात बताओ काल उतनी रात को तुम दूसरी मंजिल की बालकनी में क्या कर रही थी?
अरुण की मम्मी हुरान हुई बोली: क्या? मुख्य? बालकनी में? किस वक्त आंटी?
आंटी बोली : अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हरं’ मैंने घर नहीं देखी थी पर रात के 3 या सारे दस बजेंगे. असल में तुमको तो पता है के मुझे थोरा प्रॉब्लम है। बाथरूम बार बार जाना भाग है। इसी काम से रात को बाथरूम के लिए उठी थी। बाथरूम से जब वापस आ रही थी तब मेरी नज़र खिड़की से तुम्हारी बालकनी पर परी। मैंने देखा के तुम बालकनी में खड़ी हो। इतनी रात को तुमको वहन देख लगा के क्या हुआ? एकबार सोचा बहार बालकनी में आकार तुमको पूछ के क्या हुआ? पर इतनी रात को ये पूछना सही नहीं होगा इसलिय मैं वापस चली गई।
अरुण की मम्मी तब भी बालों थी। क्या बोल रही है आंटी? वो उनसे पूछी है: आपने मुझे ही देखा था?
आंटी: आह्ह्ह्ह्ह… नहीं मतलब एकदम तुम्हारा चेहरा नहीं देखा… पर वहां कोई तो था… लेकिन वो कोई औरत थी ये तो पक्का है। और वहां तुम्हारे इलावा और कौन होगा?
अरुण की मम्मी मस्कुराके बोलती है: आपको कोई गलत फैमी हुई होगी… रात को मैं एक बार भी नहीं उठी।
अब आंटी हेयरन हो जाती है। पूंछी है: क्या? तुम नहीं थी? मेरी गलत फैमी थी? पर साफ देखा कोई बालकनी में खड़ी है… इतना गलत देखा मैंने?
अरुण की मुम्मू पूछी: हमें वक्त आपके चश्मा पहनने वाली थी?
आंटी: नहीं…. चश्मा तो नहीं था… पर मुझे साफ लगा के कोई…
दीप्ति हैस्कर बोली: शायद आपके ये नारील का प्रति का छाया को देखा होगा… इस्का छाया हमारे बालकनी पर भाग है… इसकी छाया को देखकर आपको लगा होगा कोई खरा है वहां।
आंटी कन्फ्यूज्ड हो जाती है। फिर खुदको ही बोलती है: इतना गल्ती हुई मुझे? शायद हुआ होगा …. वैसे भी चश्मे के इलावा ज्यादा कुछ तीन से दिखता नहीं मुझे……
फ़िर आंटी मस्कुराके अरुण की मम्मी को बाय करके अपने घर के तारफ चली जाती है। अरुण की मम्मी फिरसे पौधे को पानी देने लगती है।
दोपहर का खाना बहुत बरिया हुआ। अरुण की मम्मी ने बहुत बरिया मटन कुक करती है। खाने के बाद जो पर हुआ खाना था वो फेका नहीं जाता। अरुण और उसका दादाजी रोज घर का बच्चा कुछ खाना गोलू को देते हैं।
गोलू इलाके का कुत्ता है। रोज़ गोलू अरुण के घर के बहार आता है। अरुण उसके साथ खेलता है, उसे खाने भी देता है।
पर कल से गोलू को अरुण ने आस पास भी देखा। खैर….. गोलू के लिए खाना गेट के बहार रख कर अरुण और दादाजी इधर उधार देखते हैं। एक दो बार गोलू को पुकार ते भी है। तबी गोलू डरते हुए दूर से आने लगता है।
पर अरुण और दादाजी को हेयरन करके गोलू दूर ही रुक जाता है। घर के सामने ही नहीं आया। अरुण बार बार बुलाता है उसे आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ः गोलू आजा..
पर कोई फैदा नहीं हुआ। गोलू आज आ ही नहीं रहा उनके घर के सामने।
अरुण : दादाजी… ये गोलू को हुआ क्या आज?
दादाजी : पता नहीं बेटा… गोलू आज आ क्यूं नहीं रहा? गोलू…. आज देख मटन है… आ
पर गोलू अटा ही नहीं। दूर से अपना पुंछ हिलाता रहता है। आखिर अरुण के दादाजी वो खाने का लेकर गोलू के पास जाते हैं और गोलू के सामने रखते ही गोलू पुरा मुह घुसके खाने लगता है। बहुत भुखा था शायद बेचारा।
पर अगर इतना भुखा है तो घर के पास क्यों नहीं आ रहा था गोलू?
सारा दिन जल्दबाजी खेलते हुए बीट गया। अभी अरुण के दादाजी पहले से बहुत ज्यादा हैं। इस्लीए दादाजी और पोटा मिल्की बहार से घूमकर भी ऐ। लौटने के वक्त फिर से गोलू के साथ मुलकत हो गई। गोलू और अरुण खेलते हुए घर लौटेंगे। पर जैसे ही अरुण का घर नज़र आया गोलू फिर से रुक गया। अरुण उसे बुलाने लगा पर गोलू आया ही नहीं।
दादाजी को ये बात अजीब लगी। जो कुट्टा हर रोज घर के गेट के बहार बैठा रहता है, यहां तक की गेट के नीचे आकर भी अरुण के साथ खेलता है…. आज घर के पास भी नहीं आ रहा है।
रात को भी अच्छे से खाना खाया सब ने। फिर थोरी फैमिली एक दसरे के साथ समय बिटाके अरुण दादाजी और दादिमा को गुडनाइट बोलकी मम्मी पापा के साथ ऊपर चला आया। कल फिर से दिमाग है यानी स्कूल शुरू। इसलिय मम्मी जल्दी उसे सुला देता है। आज भी अरुण को लेकर कामरे में चली गई।
लेकिन अरुण के पापा को रात को कुछ डर टीवी देखने का आदत है। इसलिये वो ड्रॉइंग रूम में सोफे पे बैठे टीवी ऑन कारके न्यूज देखने लगते हैं।
अरुण की मम्मी आकार उन्हें बोलती है के टीवी का वॉल्यूम कम करने और ज्यादा डर तक टीवी नहीं देखने के लिए। ये बोलके वो बेडरूम में चली जाती है।
अरुण के पापा अब अकेले हैं ड्राइंग रूम में। घर अँधेरा है। बस टीवी के लाइट से रूम में रोशनी है।
थोड़ी देर न्यूज देखता वो चैनल चेंज करके मूवीज चेक करने लगते हैं। तबी एक चैनल पे उनका नज़र जाता है। हमें चैनल पे एक कामुक दृश्य चल रहा था। एक लड़का और लड़की किस करते हुए कमरे के नीचे आ गए, और लड़की बहुत लगन से लड़कों का ड्रेस खोल देती है और दोनो बेडरूम में चले जाते हैं।
वैसा तो अरुण के पापा एक बहुत ही सज्जन है पर एक मर्द भी तो ही। ऐसा सीन तो किसी भी मर्द को उत्तेजित कर देगा। वो भी थोड़ा उत्तेजित हो जाते हैं। कुछ डर एक कामुक दृश्य चलता है फिर वो दृश्य बदल हो जाता है।
फिर से अरुण के पापा चैनल चेंज करके इधर उधार देखने लगते हैं। फिर धीरे-धीरे उनको जरूरत आने लगी है। टीवी देखते हुए ही अब उनकी आंख हलका बंद होने लगता है। एनिमल्स को चैनल को देखते हुए वो पता नहीं कब जरूरत में खो जाते हैं।
कब तक सोए हुए थे उन्हें याद नहीं पर किसिके बुलाने पर उनका नींद खुल गया। पुरा घर वैसा ही अंधेरी में है और सिर्फ टीवी के स्क्रीन से रोशनी आ रही है।
उसी रोशनी में उनको देखा के सोफा में ठीक उनके बाजू में कोई बैठा है। अचानक किसको देखते हैं वो चौक जाते हैं। ऐसे डरता हुआ देखके वो जो बैठा थी वो हंसने लगी है। अभिषेक जी देखते हैं अरे!!! ये तो वो ही लड़की है!!! जिसको काल सपने में देखा था उनको !!
टीवी से आती हुई रोशनी में अभिषेक जी ने देखा के सोफा में ठीक उनके बाजू में कोई बैठा है। अचानक ऐसे किसको देखते हैं वो चौक जाते हैं। ऐसे डरता हुआ देखके वो जो बैठा थी वो हंसने लगी है। अभिषेक जी देखते हैं अरे!!! ये तो वो ही लड़की है!!! जिसको काल सपने में देखा था उनको !!
अभिषेक जी डरते हुए पूछे हैं: ए… आ.. आप यहां?!!
वो लड़की अपनी मधुर आवाज में बोलती है: हा…. मैं… यहां आपके पास।
अरुण के पापा: पर… पर… आप… आप कौन हो और यहां कैसे?
लड़की हस्कर बोली : आप भूल गए? कल ही तो नाम बताया था… मोहिनी है मेरा नाम… और मैं यहां आपके लिए आया हूं… सिरफ आपके लिए।
अरुण के पापा: मेरे लिए? एम…. मैटलैब?
लड़की फिर से हस्ती है और फिर अरुण के पापा के और पास आ जाती है। तबी अरुण के पापा देखती है एक सलाह दृश्य। अबतक लड़की के बदन पे जो ब्लैक ड्रेस समझ रही थी वो असल में हम लड़कियों की जुल्फें है। इतना लंबा और इतना घनी जुल्फें।
लेकिन जुल्फों के बहार जीना भी जिस्म दिख रहा है उसमें कोई कपड़ा या कोई ड्रेस नहीं है। अरुण के पापा हेयरन हो जाते हैं।
तो इसका मतलब लड़की के जिस्म पे कोई कपड़ा ही नहीं है !!
-ऐसे क्या देख रहे हो आप?
लड़की की काम तारिके से बात सुनके अरुण के पापा उस लड़की के जिस्म से नज़र हटाके थोरा शर्मा गए फिर बोले: ये… ये आपके शरिर पे कोई… कोई कपड़ा क्यों नहीं है?
लड़की : मुझे ज़रुरत नहीं है काप्रे की। मुझे तो कुछ और चिस की ज़रुरत है।
अभिषेक : और चिस की? कौनसी चिस की?
ये सुनकी वो लड़की थोरी डेर अरुण के पापा को देखने लगती है। फ़िर उनके बिलकुल पास आकार उनके जांघों के ऊपर अपना कोमल हाट रक्खी है और अरुण के पापा के जोड़ी को सहलाने लगती है। फिर अपना दशहरा हाट अरुण के पापा के चाट पे बुलाने रखती है।
लड़की : कितना मर्दानी जिस्म है आपका… एक मर्द का जिस्म ऐसा ही तो होना चाहिए। कब से ऐसे ही इंसान की तलाश थी। एक तकतवार जवान मर्द।
अरुण के पापा को हम लड़की बात कुछ समझ नहीं आता। वो बस देख रहे थे के आधार खूबसूरत लड़की उनके बदन पे हाट सेहला रही है।
एक मर्द होने के करन उनके नीचे की उत्तेजन बरते ही जा रही थी। पंत के अंडर चुप हुआ शेर नींद से जाने लगा था। ये कौन है? कहां से आई है? कैसे यहां आई? ये सब स्वाल जैसे उनके बाद से ही निकल गया था। बस आँखों के सामने एक रूप की रानी थी।
अब मोहिनी अरुण के पापा की आंख में देखती है। फिर अरुण के पापा के और पास आ जाती है। एकदम जिस्म के साथ जिस्म लग जाता है। अब दोनो एक दसरे को देखे जा रहे हैं। दोनो के सासें ज़ोर से चल रही है।
अरुण के पापा हर पल जैसे भुलते जा रहे हैं के वो एक शादीशुदा इंसान है, उनका एक बेटा है… अब ये सब बातें जैसे उनके लिए जरूरी नहीं है, जरूरी है वक्त जो हो रहा है। उनकी पत्नी भी बहुत खूबसूरत है। उनसे अरुण के पापा बहुत प्यार भी करते हैं। कभी दसरे किसी औरत के साथ रिश्ता बढ़ने के लिए में सोचा भी नहीं था उन्होनें। पर…. पर अब क्या हो रहा है उनको? अपने ऊपर नियंत्रण कैसे खो रहे हैं वो?
वो मोहिनी अब अपना हाट अभिषेक जी के चाट से होते हुए नीचे के तरफ ले जाती है। मोहिनी का हाट टच होता है अभिषेक जी के पंत के नीचे चुप हुआ असली मर्द से।
तूरंत हमें असली मर्द को पंत के ऊपर से ही मोहिनी पकार लाती है और ऊपर नीची करने लगती है। आज पहेली कोई गैर औरत अभिषेक का लिंग पकार के हिला रही थी। हाँ अद्भुत महसूस कर रहा है. पर साथ में गलत भी। वो अरुण की मम्मी से बहुत वफादार है तो ये कैसे कर सकते हैं वो ये सब?
किसी तरह मोहिनी का हाट पकाने के वो रोक देते हैं। फिर बोले हैं: ये… ये मत करो… ये… ये गलत है… मैं शादीशुदा हूं… ये गलत है।
ये सुनके मोहिनी अरुण के पापा का हाट अपने हाट में लेकर उनके हाट को अपनी मुह के पास ले आती है। फिर अरुण के पापा के हाट के एक उन्गली को अपनी मुह में लेके चुन्नी लती है।
उम्म्मम्म… उम्म्मम्म… ऊउउउम्मम्मम्म…
अरुण के पापा हेयर होकर देख रहे हैं एक हसीना कैसे उनकी उन्गली चुस रही है। थोरी डेर बाद मोहिनी मुह से उनगली निकल के अभिषेक जी के हमें हाट को अपनी चाट के पास ले जाती है।
और फिर… और फिर अरुण के पापा के हाट में पकरा देती है अपना एक स्तान। आज पहेली बार किसी दुसरी अंजान औरता की चुची अरुण के पापा के हाट में था। कितना बड़ा है लड़की का चूची है! जैसे कोई मध्यम आकार का तर्मूज़।
उफ्फ्फ कितना आकर्षक है ये बूब्स। अरुण के पापा जैसे सब कुछ अब भूल चुके हैं। अब खुद से ही हमें चुची को दबने लगते हैं अरुण के पापा। और एक मर्द के बूब प्रेस से मोहिनी सिसकारी लेने लगती है।
अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्म्म्म्मन… और दबिये..ये आप ही का है..
अरुण के पापा का अंडर का पति, पिता जैसा हवा के आगे माथा टेक देता है। एक तो इतनी खूबसूरत लड़की ऊपर से ऐसी चुची। उफ्फ्फ्फ किसी भी मर्द का नियत खराब हो जाएगा।
अभी मोहिनी एक उत्तेजक काम करता है। अरुण के पापा का हाट पकार के उनके हाट को नीची के तारफ ले जाती है। फिर अपनी दोनो तांग सोफे जोड़ी फेला के अरुण के पापा के हाट को अपनी प्राइवेट पार्ट के पास लेकर आती है।
और फिर मोहिनी उनके हाट को अपनी योनि के पास ले आती है और योनि के ऊपर उनका हाट रख देती है।
उफ्फ्फ्फ क्या योनि है मोहिनी का। उधार टीवी चल रहा है और हमें रोशनी में अरुण के पापा स्पष्ट रूप से देख रहे हैं एक अंजान लड़की की खूबसूरत योनि को। गुलाबी योनि और आस पास एक भी बाल नहीं। जैसे वहां बाल बढ़े ही नहीं हुआ। कितनी गोरी है मोहिनी। और प्राइवेट एरिया भी कितनी गोरी और क्लीन है।
न चाहते हुए भी अरुण के पापा के मुह में पानी आ जाता है। उनका हाट अपने आप हमें छुट के ऊपर घुमने लगता है। मोहिनी अपनी तांग और फेला देती है।
ईशर ऐसी छू देख कर अभिषेक जी का अंडर का हवा बहुत बार गया है आब। जो भी हो वो एक हटे कटे मर्द है। और ऐसा दृश्य देख किसी भी मर्द को कमजोर कर दूंगा।
कमज़ोर मत हवा के आगे कामज़ोर… लेकिन दूसरी तरफ से देखा जाए तो मर्द और तकतवार हो जाता है उत्तेजन से।
अरुण के पापा के पंत अब तंबू बन गया है। उनका पेनिस साइज नॉर्मल से थोरा ज्यादा ही बड़ा है। इस्ली जब भी उनका लुंड खरा होता है तो एक लंबा बांस बन जाता है पंत के नीचे। वैसा तो अभिषेक जी एक सज्जन है, शांत स्वभाव के।
लेकिन वो कहते हैं ना…. जो शांत स्वभाव के मर्द होते हैं उनका सेक्स पावर और लुंड दोनो शानदार होते हैं।
उधार ऐसी रसीली छुट को हाट के सामने पकार उनका हाट अपने आप हमें छुट को घिसने लगता है। अपनी उनगली को मोहिनी के छुट के ऊपर नीचे रबिंग करते करते हमें क्लिट को दसरी उनगली से रबिंग करते हुए अरुण के पापा मोहिनी को देखने लगते हैं।
मोहिनी ज़ोर ज़ोर से सिसकरी लेने लगती है।
आहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्फ़ ….. yapffffffffffffffffffff …।
अरुण के पापा मोहिनी का ये तड़प देखना और उत्तेजित हो जाते हैं। अब अपना बीच की उँगली मोहिनी की योनि के नीचे धीरे-धीरे घुसने लगते हैं।
ये जो भी हो रहा है… ये संभव है या नहीं, सही है या गलात, सच है या सपना ये बातें हैं वक्त अरुण के पापा के दीमाग से पूरी तरह मिट गया है। अब सिरफ एक ही बात उनके बाद में घूम रहा है। हवा और हवा।
उधार मोहिनी को तड़पता हुआ देखके अरुण के पापा को एक अलग ही सुख मिल रहा है। ज़ोर ज़ोर से मोहिनी के छुट में फिंगरिंग करते हुए उसे क्लिट को रगड़ने लगते हैं।
उधार मोहिनी वायंकर निगाह से अरुण के पापा को देख रहे हैं। लेकिन वो नज़र गुसे का नहीं, बाल्की तेज़ उत्पन्ना की है। दांत से दांत चबाते हुए वायनाकर नीली आंखों से मोहिनी अरुण के पापा को घुर रहे हैं।
किसी और समय होता तो कोई भी ऐसी वायनक आंख देखना डर के बेहश हो जाता पर हवा के उम्र डर भी कमज़ोर है। अरुण के पापा मोहिनी के तार देखते हुए जितना ज़ोर है उनके शरिर में उतने जोर से उन्गली करने लगते हैं। अब वो जैसे खुदके ऊपर भी कंट्रोल खो चुके हैं।
अब जैसे वो एक शांत स्वभाव के इंसान नहीं, एक वायनक गुंडा है।
उधार मोहिनी अब ज़ोर से उत्पन्ना से चिल्ला रही है। और कामुक से बाहरी निगाह से अभिषेक को देख रहे हैं।
फिर मोहिनी की नज़र पार्टी है उनके पंत की तरफ जो अब फुल के तंबू बन गया था। मोहिनी अरुण के पापा के पेट के नीचे से हाट दाल के पंत के ऊपर से ही उनके लुंड को पकाने वाली है और ऊपर नीचे करने लगती है।
पर मोहिनी को अब अभिषेक जी के जिस्म पर एक भी कपरा नहीं चाहिए था। मोहिनी अभिषेक जी का हाट छुट से निकला के उनको ढका देकर हटा देता है।
फ़िर मोहिनी कामुक घुस भारी नज़र से अभिषेक को देखते हुए अभिषेक के पंत को ज़ोर से खीचके बहार निकल के दूर फेक देता है। पंत से फ्री होकर अभिषेक जी का टैगरा लंबा मोटा लुंड हिलने लगा।
अब मोहिनी के सामने अरुण के पापा का तगरा लुंड था। एक दम खरा होकर सलाम दे रहा था।
मोहिनी अब अभिषेक के गोदी के ऊपर दोनो तांग रखके बैठा जाती है। नंगी छुट के साथ अभिषेक के लुंड रबिंग होते ही उनका जिस्म पे एक अजीब सा फील होता है। लुंड के ऊपर गरम गीली योनि को महसूस करते हैं अरुण के पापा।
अब मोहिनी अपने बदन के ऊपर से अपने जुल्फें हटाके पीछे कर देती है। और अरुण के पापा के सामने आ जाता है एक खूबसूरत हसीना का कामुक जिस्म।
करो तर्मूज़ के साइज़ के बूब्स, नंगे गुलाबी निप्पल। मोहिनी जान बुझके थोरा अपना शरीर अभिषेक जी के सामने अपनी चुचियां उनके सामने हिलाने लगी है।
अभिषेक जी के आंखों के सामने 2 तर्मूज जैसी बूब्स लेफ्ट राइट अप डाउन डाउन उचल रहे हैं। कोई भी मर्द ऐसा दृश्य देखकर अनियंत्रित हो जाएगा।
मोहिनी अब अपनी चुचियों को अपने हाट में पकार के अरुण के पापा के पास लेकर कामुक सुर में बोलती है
मोहिनी : इनका स्वद नहीं लेना आपको? आपकी पत्नी से ये ज्यादा स्वस्थ है। स्वद लिजिये न इंका।
अरुण के पापा अभिषेक जी ने कभी सोचा भी नहीं होंगे ऐसा एक समय भी उनके जिंदगी में आएगा। वो करेंगे कुछ समझ नहीं पा रहे थे।
मोहिनी फिर से बोली : लिजिये ना….. चुसिये ना इनको…. आप के लिए ही तो मैं आई हूं… ये आपके लिए ही है… चुसिये ना… आप मुह खोलिए ना। ….
अभिषेक : पर…. पर मैं शादी शुदा हूं… और मेरा एक बेटा है… हुमे ये नहीं करना चाहिए… ये पर्व…
अभिषेक जी “गलत” शब्द बोलना चाहते थे… पर पुरा बोल नहीं पाए… क्योंकि इतने में मोहिनी की चुची का निप्पल उनके मुह में घुस गया था।
उम्म्मम्मम्ममम्म… ऊमम्मम्मम्म… ऊउउउम्मम्मम्म… श्रुउउप्पप्प… आह्ह्ह्ह्ह… ऊम्मम्मम्म…
अभिषेक जी ने चुची को ज़ोर से चुन्नी लागी छोड़ दी। अपनी आखिरी कंट्रोल भी अब वो खो चुके थे। अब तो मोहिनी का स्वदेशी चुची में पूरी तरह वो खो चुके थे।
मोहिनी अभिषेक जी के बालो को पाकर के काम सिसकारी लाते हुए बूब चूसने का मजा ले रही थी।
बूब सकिंग से मर्द को मजा तो मिला ही पर औरत को ज्यादा मजा आता है… जब एक मर्द जोर से उसकी निप्पल को चुस्ता है।
मोहिनी अपना गंद हीला के अरुण के पापा के लुंड को अपने जिस्म पे महसूस भी कर रही थी और उल्लू चूसना को मजा भी कर रही थी।
उधार अरुण और उसकी मम्मी गहरी नींद में सोया है। उन्को पता ही नहीं चला के बाजू के कामरे में उनका पति और अरुण के पिता एक पराई औरत के चुची चुस रही है…..
और उससे भी वायनक बात ये है के चुची चुनने में अरुण के पापा इतने खो गए हैं के उनको पता भी नहीं चला के मोहिनी उनको देखते हुए मन ही मन शैतानी मुस्कान दे रही है।
अरे रात भर यहीं पे तो रहे थे?
बीवी की पुकार से अचानक नींद खुल गया अरुण के पापा का। वो आंख खोलके देखे के सुबाह हो गई है और वो सोफा पर ही बैठे हैं। मतलाब रात को टीवी देखते हुए यहां पर सो गए थे। और….. तो फिर जो भी हुआ….वो क्या था?
उफ्फ्फ्फ्फ…. टीवी भी बंद नहीं किया तुमने। सरिरात टीवी पर। क्या तुम भी…..
उधार अरुण की मम्मी गुसा करते हुए ये सब बोल रही थी और वो एक भी बात अरुण के पापा के कान में नहीं जा रहा था। रात की वो सब बातें उन्हें याद आ रही थी। मतलाब वो जो भी हुआ…. वो एक सपना था? पर इतना विशाल सपना?
फिर अरुण के पापा सोचते हैं सपना ही तो था… क्योंकि रात को उनके बदन पे एक भी कपड़ा नहीं था… और अब तो पुरा ड्रेस पहनने हुए हैं। तबी उनको महसूस हुआ पंत के पास कुछ गिला गिला है। उन्होन हाट लगाकर ही समझ गए के वो क्या है।
रात के उत्तेजक सपनों की वजह से उनका काम निकल गया है। इसे सपना दोश बोलते हैं। पर आज तक उनको ऐसा कुछ नहीं हुआ…. और आज क्यों?
किसी तरह अपना गिला पंत चुप के सोफ़ा से उठते हैं वो। उधार अरुण की मम्मी मतलाब उनकी पत्नी अब भी बोल रही है…
दीप्ति : तुम अगर ऐसा लापरवाह बन जाओगे तो हमारा बेटा हम से क्या मांगा? सरिरात टीवी ऑन कारके सो गए… मतलब क्या है ये सब?
बहुत हाय नॉर्मल तारिके से उनकी पत्नी उनको ये बोल रही थी पर ये सब सुनकर अचानक पता नहीं अभिषेक जी को गुस्सा आ गया। वो चिल्ला के बोले –
अभिषेक – अरे बस…! बहुत हुआ… बंद करो अपना ज्ञान देना… उफ्फ्फ्फ..
इतनी सी बात का ऐसा रिएक्शन मिलेगा ये दीप्ति सोची भी नहीं थी। वोब हेयर होकर अपने पति को देखने लगी। यहां तक की अरुण के पापा खुद भी हेयरां हो गए अपना रिएक्शन देखे। ये ऐसे कैसे अपनी पत्नी जो जवाब दे रहे हैं वो?
फ़िर सिचुएशन को कंट्रोल करने के लिए हस्कर दीप्ति को बोली: सॉरी…. मजाक किया… वो तुम गुसे में थी ना… तो जीके किया… सॉरी..
दीप्ति भी मुस्कान के बोली : आब… जल्दी से चाय पीने बाथरूम जकार फ्रेश हो लो…. तुम्हारा बेटा कब का स्नान कर लिया… इधर पापा अभी भी सोया हुआ है… जाओ …
चाय पीके अरुण के पापा बाथरूम चले गए। इधर बहार अरुण की मम्मी बेटी को ड्रेस पहनना के उसके बैग में किताब डालने में और स्कूल की बात करने में व्यस्त हो गई।
उधार बाथरूम में अभिषेक जी अब भी भ्रमित थे। ये क्या हुआ कल मेरे साथ? ऐसा अजीब सा सपना क्यू देखा मैंने? वो टीवी पर कामुक दृश्य देखा था क्या से है? लेकिन इससे पहले भी बहुत कामुक दृश्य देखा था मैंने… तब तो ऐसा कोई भी सपना नहीं आया मुझसे… पर वो सब कुछ सपना लग ही नहीं रहा था मुझे…. वो जो भी था बहुत रियल लग रहा था… वो हर एक पल…
शावर के नीचे होकर अरुण के पापा फिरसे कल। रात के हमें पल में खो गए।
उनके ऊपर मोहिनी बैठा है और वो मोहिनी के तर्मूज जैसे रसील बूब्स को चूसना कर रहे हैं। कुछ डेर बाद मोहिनी अभिषेक जी के मुह से अपना कुछ हटा के ऊपर से उठ जाती है और खड़ी हो जाती है।
अरुण के पापा उस आधार हसीना का जिस्म देखना और उत्तेजित हो जाते हैं….वहह… क्या जिस्म है, क्या रूप है मोहिनी का… ऐसा रूप भी होता है किसिका?
अब वो लड़की अरुण के पापा के पास उनके दोनो जोड़ी को दोनो तरह से फेल होने के उनके तांग के बीच बैठा है।
अब मोहिनी के आंखों के सामने अरुण के पापा का तगरा लुंड था जो अब पुराना खरा था।
लेकिन ये क्या !! मोहिनी क्या लुंड को ऐसी वायनक नज़र से क्यूँ देख रही है?
अभिषेक जी देखे के मोहिनी बहुत ही घिनिनी कामुक नजर से उनके लुंड को घुर रही है। उसकी नज़र इतनी असली है के शायद कोई मर्द भी किसी औरत को ऐसे वल्गुर नज़र से नहीं देखता। किसी औरत की नज़र भी क्या इतनी असली हो सकती है?
वो और नहीं सोच पाए… क्यूंकी तबी मोहिनी उस लुंड को मुह में ले लेटी है। लुंड का लगभाग आधा मोहिनी के मुह के नीचे चला जाता है।
लुंड की चुसाई से मर्द को कैसा महसूस होता है ये अभिषेक जी को आज समझ आया। क्यों अरुण की मम्मी के साथ उनका सेक्स रिलेशन बहुत अच्छा है लेकिन दीप्ति को ये सब पेनिस चूसना गंदा लगता है…. इसलिये अरुण के पापा हमें कभी फोर्स नहीं किया।
लेकिन आज उनको जो महसूस हो रहा है वो सलाह है…. उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ… क्या इतना मजा आता है जब कोई औरत किसी मर्द का लुंड चुनती है?
अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ..
अब अरुण के पापा उत्पन्ना से तड़पने लगे। उधार मोहिनी बेशरम होकर अरुण के पापा की मर्दानी लुंड को अशील तारिके से चुस रही थी।
अब मोहिनी ने जो किया उससे अरुण के पापा का हलत ही खराप हो गया। हमारे लुंड को मुह से निकल के मोहिनी लुंड का चमरी यानी मुंडी से हटाके अंडर का टोपा बहार निकली और फिर अपनी जुबान से लुंड के तोपा को चटनी लगी। खास करके पिशाब करने की होल को।
लुंड का सबसे संवेदनशील क्षेत्र को मोहिनी अब जीव से चाट रही थी…. और अरुण के पापा का हलत पुरा खराप हो गया था।
उत्तेजाना लेवल पे भी जा सकता है ये उन्होन कभी अनुभव ही नहीं किया था आजतक।
अब मोहिनी लुंड के मुंडी के ऊपर मुझे लेकर आती है। फिर उसी मुह से लंबा सा तू निकल कर सीधा लुंड के तोप पे गिरता है। लुंड का मुंडी पुरा भर जाता है हम ठूंठ से। अब मोहिनी एक काम करती है।
लुंड को फिर से उसकी चमड़ी यानी चमरी से ढक देती है। और लुंड के ऊपर के उनसे को बहुत धीरे धीरे ऊपर नीचे करना लगता है। ठुक के करन लुंड स्लीपरी हो गया था और जब लुंड की चमरी उस तोपा के साथ घी रही थी तब अभिषेक जी का पुरा शरीर को जैसा वर्तमान लग रहा था।
लेकिन उनको क्या पता था के मोहिनी का खेल तो अभी सिरफ शुरू हुआ है।
मोहिनी अरुण के पापा का ये हाल देख जैसे बहुत ही खुश हो रही थी। मर्द को ऐसा तड़पता हुआ देख कर उसे एक अलग सुख मिल गया था।
अब अरुण के पापा को और तड़पना चाहती थी मोहिनी। इस्लिये अचानक मोहिनी अपना मुह अभिषेक जी के बॉल्स के पास लेकर आई झटके से एक बॉल को मुह में ले लिया और खीचने लगी दुसरी तरह।
आज तक अरुण के पापा को लुंड चुसाई का सुख नहीं मिला था तो गेंद चूसने तो दूर की बात थी। पर आज मोहिनी की इस हरकत से अरुण के पापा हेयर भी हो गए, घबड़ा भी गए और डर भी लगा।
डर है बात का ये… ये क्या कर रही है? मेरे बॉल्स को ऐसे ज़ोर से कुछ लय रही है? अहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हे … जेस केवल टैटी निकाल लीगी आहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ..
मोहिनी लेफ्ट पेनिस बॉल को ज़ोर से चुस रही थी और इसे बेचारे अरुण के पापा को हलत था वो बयान नहीं किया जा सका…
मर्द का संवेदनशील क्षेत्र यानी पेनिस बॉल्स को एक लड़की अगर ऐसी चुनेगी तो शायद ही कोई मर्द कंट्रोल कर पाएगा खुदको।
अरुण के पापा भी कंट्रोल नहीं कर पा रहे थे… इसलिये उन्होने मोहिनी को बोले..
अभिषेक – आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ःः किये ऐसे और मत करो … ये … ये मैं और सही नहीं कर पा रहा हूं … अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ः..
मोहिनी मुह से तत्काल निकल के हस्कर बोली – लगता है आपकी पत्नी आजतक आपको ये सुख नहीं दिया है… इसलिय आप इतना तड़प रहे हो… कैसी बीवी है आपकी? ‘आपकी’ लिंग को उसे आजतक नहीं है? कामरस से भरे बिरजा थाली को नहीं चुसी में आजतक? कैसी बेकर पत्नी है आपकी? कैसे लुंड को बिना चुने कोई औरत रही शक्ति है?
अभिषेक : नहीं… ऐसा मत बोलो… वो… वो बहुत अच्छी है…
मोहिनी ये सुनके अरुण के पापा के मुह के पास अपना मुब लकर बोली – सिर्फ अच्छी होने से कोई असली औरत नहीं बन जाती… असली औरत वो होती है जो एक मर्द को असली सुख दे… मर्द को। जो औरत पूरी तरह संतोषी देती है वो होती है असली औरत… उम्म्मम्मम्म… उम्म्मम्मम्म…
ये बोलके मोहिनी फिर से लुंड को चुन्नी लगती है।
अरुण के पापा सोचते हैं के मोहिनी जो भी बोली क्या वो गलत था? आजतक ये सुख उनको नहीं मिला… एकबार वो दीप्ति से बोली थी मुह में लेने के लिए पर दीप्ति गुस्सा हो गई थी।
लेकिन मोहिनी …. उफ्फ्फ्फ कैसे चुस रही है उनके लुंड को।
उत्तेजना से अब अभिषेक जी भी मोहिनी का साथ देने लगे थे। सोफा से उठके मोहिनी के मुह में हलका हलका ढाका देने लगे थे। उधार टीवी पे क्या चल रहा था उसपे थोरा भी नजर नहीं था उनका। सिर्फ टीवी के रोशनी में वो देख रहे थे एक हुस्न की मलिका उनके लुंड को बहुत ही घिनोना तारिके से चुस रही है।
पुरा लुंड मोहिनी के मुह के रस से गिला हो गया था। अब मोहिनी लुंड से मुह हटाके धीरे-धीरे अभिषेक जी को किस करते हैं ऊपर उठने लगे।
पहले अरुण के पापा के पेट पे किस किया, फिर उनके चौरे चाटी पे, फिर उनके गली पे, उनके कंधे पे।
अब अभिषेक जी भी रुक नहीं पाए और मोहिनी के बालो को मुट्ठी में पकार के अपने मुह के पास लेकर आए और होने से होंथ लगाकर जोश से किस करने लगे।
मोहिनी भी दो हातों से अरुण के पापा को जकर के उनके पीठ को सहेलते हुए किस करने लगी उनको।
फिर अचानक मोहिनी ने उनको एक ढका दिया और अभिषेक जी सोफा पर गिर गए। और मोहिनी उनके पास आकार सोफ़ा पे चरखी खड़ी हो गई और अरुण के पापा के शरीर के दोनो तराफ तांग रखके उनके पास, अपनी छुट और गंद लेकर आई।
मोहिनी अब बोली – अब आप की बारी है…. आपकी मोहिनी को सुख दीजिये… मेरी जिस्म का स्वद लिजिये।
अभिषेक जी एक तगरे मर्द है। ये बात अलग है के उन्होन आजतक कभी अपनी मर्दानी को गलत तरीके से इस्तमाल नहीं किया पर आज उनके अंडर का मर्द का बहुत बहुत बार गया है। अब हमें रोक पाना मुश्किल है।
अरुण के पापा अपना जीव निकल के मोहिनी के योनि को चटनी लगे और मुह घिसने लगे।
मोहिनी सिसकारी लाते हुए अपनी चुची से खेलने लगी और देखने लगी कैसे एक तगरा मर्द उनको सुख दे रहा है।
अभिषेक जी मोहिनी की गंध पकार की प्यूरी हवा के साथ हम अंजान लड़की की योनि को चाट रहे थे। ये लड़की कौन है, कहां से आई है, अब ये सब उनके बाद से कब का निकला है। अब सिरफ उनका अंडर का मर्द है मोहिनी की योनि का स्वद लेने में खोया हुआ है।
मोहिनी अभिषेक जी के बाल मुट्ठी में पकार के अपनी योनि के साथ उनका मुंह घी रही है और काम सिसकारी ले रही है।
योनि का स्वद इतना स्वस्थ होता है क्या? जितना अरुण के पापा मोहिनी की छुट को जिव से चाट रहे हैं उतना ही वो हमें रसीली छुट के स्वद में खो जा रहा है।
कुछ डर बाद मोहिनी अभिषेक जी के ऊपर से हटकर नीची आ जाति है और अरुण के पापा का हाट पाकर के उनको सोफा से उठाती है। अभिषेक जी भी खरे हो जाते हैं।
मोहिनी अरुण के पापा के पीछे जाती है और उनके पीठ को चुन्नी लगती है। चुमते चुमते मोहिनी अभिषेक जी के बगीचे के पास अचानक एक प्यार काटने देता है ज़ोर से।
आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह जब भी अरुण के पापा के मुह से आवाज निकल जाता है.
अब उनका हवा और ज्यादा बार जाता है। तूरंत वो मोहिनी के तार घुमके मोहिनी को अपने तार खीचके उसके बगीचे पे प्यार काटने देते हैं। इसी मोहिनी भी अरुण के पापा के पीठ पर नखुन से चीयर देती है। उफ्फ्फ्फ्फ जब कोई औरत किसी मर्द को ऐसा करती है तब मर्द को जालान नहीं… सुख महसूस होता है।
मोहिनी अरुण के पापा का हाट पाकर के उनको अपने साथ कहीं ले जाने लगती है। और अरुण के पापा भी उनके साथ जाने लगते हैं।
कहन? उनको पता नहीं…. बस चल रहे हैं। एक खूबसूरत लड़की के साथ वो चल रहे हैं।
ये क्या? ये कहां आ गए वो? अब तक वो अपने घर के तहत…… अब ये कहां आ गए वो?
अरुण के पापा देखते हैं एक अजीब सा जग। एक बहुत बड़ा दरवाजा और ऊपर एक मशाल जल रहा है।
ये…. ये कहां लेकर ऐ मुझे तुम? — पूछे है अरुण के पापा।
मोहिनी मस्कुराके अरुण के पापा को बोलती है : ऐये… आकार दरवाजा को खोलके खुद देख लिजिये..
मोहिनी की बात सुनकर अरुण के पापा उम्र बरके उस दरवाजे को ढका देकर खोलने की कोशिश करते हैं। दरवाजा बहुत बारा है इसलिय बहुत जोर लगाना पर उनको खोलने के लिए।
लेकिन जब वो दरवाजा खुला तब अरुण के पापा ने जो देखा वो देखे अरुण के पापा शॉक्ड हो गए!
ये क्या था उनके सामने !!