परिवार में प्यार सेक्स संबंध अध्याय 1



परिवार में प्यार सेक्स संबंध अध्याय 1


 मेरे घर में हम 3 लोग रहते हैं मैं दीपक जिनसे सब प्यार से दीपू कहते हैं मेरी मम्मी मंजू या बहन पूजा। पहले मैं आपको अपने घर के बारे में बताता हूं। मेरे पापा का जब मील **********  * (संपादित) साल का एक दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी मेरे पापा एक बहुत बड़े सरकार ने तो इसलिय हम पेंशन के रूप में एक बहुत ही बड़ी लगभग हर महीने मिली थी।  मेरे पापा के पास पहले ही कफी प्रॉपर्टी थी तो हम से कफी रेंट और जिस से हमारा गुजरा बड़े अच्छे तारिके से होता था हम किसी चीज की कभी कोई कमी महसूस नहीं होती थी।  पापा की मौत के बाद मम्मी ने न दशरी शादी की ना की कभी किसी दसरे मर्द के नंगे मील सोचा उसे अपना सारा जीवन हम दो भाई बहन की प्रवरिश के लिए ऐसे ही निकल दिया।  आसा नहीं था की मेरी मम्मी ख़ूबसूरत नहीं थी काली वो बहुत की ख़ूबसूरत जिस्म की मल्किन थी जिसे कोई एक बार देख तो बस उसे देखता ही रहे।  या मुझे याकेन था की मेरी मम्मी को देखने के बाद आसा ही कोई मर्द होगा जो अपना लुंड सहलया बिना रह पता होगा।  मेरी मम्मी लम्बी उची एचटी 5.5 फीट या मेरी मम्मी का शरीर इसे ही कोई देखे तो तड़प उठे एकदम गोरी चिती 38 साइज की बड़ी बड़ी टाइट चुचियां 30 कमर और 40 के गोल मटोल चुतद।  कहीं से कोई मोटा नहीं, मेरी बहन पूजा भी एकदम मम्मी पर गई है भरा हुआ शरिर 34 के चुचियां गोल मटोल चुतद और एकदम गोरी.पूजा इतनी मस्त या गर्म थी की ना जाने स्कूल के कितने ही लड़के उसके पीछे।  घर के बहार पूजा के मस्त जवानी के एक झलक पाने के लिए स्कूल के लड़के तो क्या मोहल्ला के अंकल बि इंतजार में खड़े रहते हैं।  या जब वो पूजा के मस्त मोती मोती तंग चुचियां या बहार निकली हुई गंद को देख ले तो उन सब से कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता वो सब जा कर पूजा के नाम की मुथ मरते।  मेरी बहन पूजा और मैं एक ही कॉलेज मैं पढ़ते थे, पूजा अंतिम वर्ष मैं थी और मैं प्रथम वर्ष में, हम दोनो साथ ही कॉलेज जाते, हम दोनो भाई बहन काम और दोस्त ज्यादा दोनो मैं बहुत हांसी मजाक होता था, मुख्य कॉलेज मुख्य  बास्केटबॉल टीम मैं था और पूजा मेरा हर मैच देखने आती थी, पूजा कॉलेज जते समय आपके हिस्से को पूरी ताकत लेकिन घर मैं ज्‍यादातर छोटी मैक्सी पहचान कर रहती, मम्मी भी ज्‍यादातर साड़ी और ब्‍लाउज मैं ही रेती थी, मां बीच और पो  ट्यूनिंग थी.सब कुछ अच्छा चल रहा था, मैं ज्यादातर समय या तो बास्केटबॉल या जिम मैं बिटाटा, घर पर मम्मी और पूजा मां बेटी काम और दोस्त ज्यादा बकर रहती, तब तक मेरे मन में उनके लिए कुछ नहीं जाने मैं ज्यादा था।  अच्छी नहीं थी, फिर एक दिन वो हुआ जिसे मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया,

  

 एक बार कोलाज मैं बंद हुई तो मैं दीदी को देखने जब उसके क्लास रूम में गया से कमरा खाली था मैं दरवाजे से वापस मुरने लगा तो मुझे दरवाजे के पिचे से कुछ फुसफुसहत सी होती सुन दी, मैंने रुक गया।  …. लारकी की दबी हुई आवाज “रोहित, कृपया चोरो मुजे अब्ब,, सब लोग जा चुके हैं ..”

 रोहित “बास एक चुंबन या बास एक फिर चलते हैं”

 लार्की “बास, बास, अब छोरो भी मुजे”

 रोहित “थोरा सा और प्लज़, बास एक बार, एक होंठ किस करना दो फिर चली जाना मेरी जान”

 लर्की “, ना आहा अभी भी फिर कभी

 रोहित “अच्छा ये तो देखने दो पैंटी को से रंग की पहचान है आज”

 लारकी “चुप रहो ,,, रोहित, प्लज़ मुजे जाने दो अभी”।

 रोहित “तू कुछ मत कर बास ही खड़ी रहना, मैं बेथ के देख लेता हूं की कोन से रंग की पैंटी पहचान

 लर्की’प्लज़ रोहित मील ही बता देती हैं आज पिंक क्लोर लो पैंटी पेहनी हाय



 लारकी “आआह नो नो” लग रहा था रोहित निचे बेथ के लर्की की स्कर्ट के अंदर झांकने की कोशिश कर रहा था


 रोहित “यार हाथ क्यों पाकर रही ओ मेरा,,,,, या अपनी टांगे क्यू बंद कर रही हो”


 लारकी “प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़ रोहित फ़िर कभी, देख लेना”


 रोहित “ओके ठीक है,,, एक किस टू,,,,”

 लारकी “ओके लास्ट वन”

 

 फ़िर “पीपीपूच” की हल्की सी आवाज़ ऐ जैसे हमें लार्के से हमें लर्की की पप्पी ले ली हो या किस के बाद लर्की शायद रोहित की गिरफट से निकल के जाने लगी तो लग रहा था रोहित ने पीछे से फिर से फिर इस्तेमाल हो  उसके बूब्स मसलन लगा हो, अब जेसे लर्की उसकी बहन मैं कसमसाती हुई हलकी सी फुसफुसहहत माई बोली “रोहित बास भी करो प्लज, दीपू मेरी प्रतीक्षा कर रहा होगा, प्लीज छोरो” अपना नाम सुन के मेरे जाने ये  दीदी की ही आवाज थी, मैं दरवाजे के थोरा और करीब हो गया, अब उनकी तेज सहनो या किसिंग की आवाज सुन दे रही थी एक दसरे के जिस्म को मसाला रहे हैं, मेरी दीदी किसी के साथ साथ  पता नहीं क्यों मुझे ये सब सुन के बहुत मजा आ रहा था या अपनी दीदी के नंगे मैं इसे करते सोच के तो मेरा लुंड अपने आप खरा होना शुरू हो गया। फिर कुछ सेकेंड के बाद दीदी की आवा, रोहित  ,,,

 रोहित; यार क्या कर रही ही अपनी लेग्स तो खोल।

 लरकी; हाथ बहार निकलो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,PLZZ SE SE OF SE OF SE COHAR IN COLOYN INCOLO INHOTE INHOTE INHOTE OF SERITE OF SEKLO MATH SERIES SERIES SERIES SERIES)


 शायद रोहित ने दीदी को पिचे से पके हुए अपना हाथ दीदी की पैंटी माई दाल के दीदी की छुट पे हाथ रख दिया था, अब दीदी शायद घर जाने या मेरे नंगे मैं भूल चुकी थी, या नशीली मो आवाज मैं  री थी जेसे ,, “आह ,,, उम्म ,,

 रोहित मेरी जान, मेरी जान निकल रही है,” शायद दोनो आउट ऑफ कंट्रोल होते जा रहे थे या उनके अंदर का गरम पानी ओबले मरने लगा था

 रोहित ‘यार तेरी कितनी चिकनी ही हाथ फिराने में ही कितना मजा आ रहा है कब इसे चिकना किया’

 लर्की ‘अज्ज ही किया ही, रोहित’


 रोहित दीदी को गरम करने का अपना काम करता रहा या उसके बोले की कोई आवाज नहीं ऐ

 रोहित दीदी को गरम करने का अपना काम करता रहा या उसके बोले की कोई आवाज नहीं ऐ


 फ़िर कुश डेर बाद जेसे माधोशी की आवाज़ मैं दीदी बोली “मत करो ना,,, प्लीज़, मैं पागल हो रही हूं क्यूकी मुजे आसा लगा लगा की रोहित अब दीदी की चुत में अपनी उंगली दाल कर और बाहर।”


 फ़िर “पप्पू पुउ” की हल्की हलकी सी अज़ैन आने लगी, लग रहा था दीदी या रोहित पुरा मज़ा ले रहे हैं लेकिन वो तो मज़ा ले रहे हैं मगर मुजे पहली बार पता नहीं क्यों ये महसूस हो रहा है  , मेरा लुंड पंत माई से उबरा हुआ नज़र आ रहा था या बहुत अच्छा लग रहा था, मैं उनकी मस्ती भरी अाजैन सुन के ही मस्त हुआ जा रहा था तबी दीदी बोली “रोहित, अब इसे क्यों निकल कर रहे”




 रोहित “पैंटी उतरने दो ना प्लीज”


 दीदी “पागल हो गया हो किया, मैं एसा कुछ नहीं करूंगी, वो भी यहां”


 रोहित “नि पूजा माई एसा वेसा कुछ नहीं करुंगा लेकिन मुझे बास अपनी पैंटी तो उतर के दे दो आज,,”


 दीदी “ना नहीं नहीं, मैं घर केसे जानूगी”


 रोहित “स्कर्ट के निचे से किया पता चलेगा, यार”


 दीदी “नि माई घर से दुसरी ला दूंगा, ये रहने दो”


 रोहित यार वो तो कल ला कर कुत्ता आज रात में क्या करुंगा प्लीज दे दो आज तुम्हारी पैंटी पर अपना निकलेगा प्लीज जान तुम्हारी पैंटी होगी तो मेरा जल्दी निकल जाएगा

 मैं भी उनके भूलभुलैया के साथ पूरा मजा ले रहा था तबी पिचे से मेरा दोस्त मोहित आ गिया या बोला “दीपक तू यहां क्यों खड़ा है यार, घर नहीं जाना”

 मैंने कहा “यार दीदी को ढूंड रहा हूं”



 वो बोला “दीदी गेट पे तुम को ढूंढ़ रही होगी, चल गेट पे देखते हैं, सेल ने सारा मजा खराब कर दिया,, ये सोचा मैं उसके साथ गेट की तरफ चला गया, हम गेट के पास जा के खरे हुए  तो कुश ही डर माई दीदी भी उस कमरे की तरफ से गेट की तरफ भागी एक राही थी या बोली “सॉरी दीपू माई लेट हो गई” शायद मुझे बहाना देना उसे जरुरी न समझ, लेकिन उसकी सिल्वत परी शर्ट या लाल साफ हुए होंथन  मैं पता चल रहा था के वो अभी भी कोसा खेल, खेल के आ रही थी, शायद उसे मेरी या मेरे दोस्त की बात चीट सुन ली थी इसी लिय जल्दी से भाग के हमारे पिचे ही आ गई थी, आज मैं इसे  ध्यान से देख रहा था कितनी खूबसूरत थी मेरी बहन कितनी सेक्सी थी साली, किसी नायिका से कम नहीं लग रही थी,

  

 पाताला लंबा जिस्म, उसके गोरे लाल गाल जेसे माखन माई सिंधुर मिक्स किया हो, गोल गोल गोरी लंबी तंगैन, इतने लाल के लग रहा था जैसा अभी भी खून तपक परेगा, स्लिम जिस्म पे गोल गोल तंग मम्मी (स्तन)  मैं बहुत टाइट नज़र आ रही थी, गांद के ऊपर उबरी हुई स्कर्ट कितनी सेक्सी लग रही थी दीदी चलती तो गंद पे लंबी छोटी जेसे दीदी की गांद को थाप रही हो, गोल घुटने, लंबे से गरदन,  के लिए बाल दीदी की गोरी गैलन पे कितने खूबसुरत लग रहे थे, आज पहली बार में दीदी के जिस्म के एक उसके लिए अपनी आंखों से तलाशी ली थी,


 दीदी की स्लिम बॉडी पर अगर कोई हिसा उभरा नजर अता था तो वो दीदी की शर्ट माई टाइट चुचिया या पिची से उबरी हुई गांद बाकी सारा जिस्म लंबा पाता था, मेरा ध्यान दीदी के जिस्म की तरफ था या मेरा लुंड दे दीदी के  वर्तमान पकार रहा था लेकिन दीदी इधर उधर देख रही थी शायद देख रही थी के हम घर ले जाने वाली स्कूल बस निकल चुकी थी, फिर दीदी ने मेरी तरह देखा या मुझे हमें के लाल हुए जिस्म की तरह इतने ध्यान से देखा  के इशरे से पूसा फिर बोली “किआ है” मैं कुश नहीं बोला, उसकी तार देखता रहा, चोर की दारी माई तिनका, जेसे अपने पाकर जाने की टेंशन हनी लगी थी का उपयोग करें

 

 दीदी फिर बोली “दीपू,,, ऐसी मेरी तरह किया देखा है”

 माई “दीदी बस कहां है” दीदी ने अपने लेफ्ट मुमी (बूब) पे हाथ रखा या थंडी सान्ह्स लेटे बोली “बस शायद चली गई हम लोग देर हो गई, चलो रिक्शा पे जाना परेगा”

 रिक्शा पे मैं दीदी के साथ सत् के बेठ गिया आज पहली बार मुजे दीदी के करीब बनने में कितना मजा आ रहा था, रिक्शा पे बेथे भी मेरा ध्यान दीदी की गोल गोरी गोरी लंबी टंगो ही और पंत के  मेरा लुंड तंबू में बांस की तारा खरा बेकाबू हो रहा था लेकिन मैंने पंत की जेब में हाथ दाल के अपने लुंड को दबा रखा था, मेरा दिल चाह रहा था के मैं किसी तारा दीदी के जांघ पे हाथ भी था  मैं सरक खराब हनी की वाजा से रिक्शा पे झटका लगा तो मैंने झट से अपने दाहिने हाथ से दीदी के बाएं जांघ को पकार लिया, मेरा बाएं हाथ अपनी जेब मैं लुंड को पाकर था लेकिन आगे ही झटके में मुझे बाएं हाथ को भी जेब से  बहार निकल के एक तरफ से रिक्शा को पकरना पर अब मेने एक हाथ से दीदी की बाईं जांघ को पक्का था या दूजे हाथ से लेफ्ट साइड से रिक्शा का किनारा, मेरा लुंड पंत मैं तना हुआ अब साफ नजर आ रहा था, दीदी के  ना बोले की वजह से मेरा होसला बरता गया, मेरा ध्यान दीदी की टैंगो या अपने हाथ की स्थिति  पे था, या दिल धक धक कर रहा था, रिक्शा टूटी हुई सरक पे जा रहा था या झटके लग रहे थे वे इन झटके की मदद से मेरी कोशिश अपने हाथ को दीदी की छुट की तरफ सरकने की थी या कफी है  करीब चला भी गया, जेसे मेरा हाथ दीदी की छुट की तरफ सरता तो स्कर्ट मेरे हाथ की उम्र इकाठी हनी के करन दीदी के गोरे गोल नांगे घुटने भी दीखाई देने लगे थे, मेरा हाथ दीदी की तांग या पैंच के संयुक्त  था लेकिन इससे आगे जाने की हमत नहीं हो रही थी, मैंने टेडी आंख से देखा तो दीदी का ध्यान मेरे लेफ्ट साइड से तंबू की तारा उठा मेरी पंत पे था, मेरी गल्ती की मैंने अपनी आंखे दीदी की आंखों में डाली मैं  दीदी चोंकी या बोली “दीपू अब रास्ता सही है आराम से बेथ”, मेरे उसकी जंग से हाथ उठते ही दीदी ऊपर उठा के अपनी स्कर्ट सेट करने लगी थी या हम घर के करीब भी पहले चुके थे, मेरा सारा मूड खराब था  ,घर पूँछते ही दीदी अपने कपड़े उठा के टॉयलेट माई चली गई या फिर 15-20 मिनट के बाद कपरे चेंज करके ही  पंजाबी सूट माई बहार निकली, देखने माई वो अब कुश रिलैक्स लग रही थी..

 

 रात को जब मील अपने काम में आया तो मेरा दिमाग सुबह वाली घाटना पर चला गया जिसको सोच कर मेरा लुंड फिर से खड़ा हो गया।  में यही सोच रहा था की रोहित ने केसी दीदी की दोनो टांगे खोल कर अपना हाथ दीदी की पैंटी में घुसाया होगा या कासे वो दीदी की चुत पर रेशमी झंटो से खेल कर अपनी उंगली दीदी की चुत मी और के दीदी बाहर कर  दीदी की शर्ट प्रति पाडी सिल्वेट साफ बात रही थी की रोहित ने केसी दीदी की चुचियो को संतरे के जैसे के निचोड़ा होगा या कासे उसे मेरी दीदी की पैंटी को अपने हाथ से उतर कर अपने पास रखा होगा या जब हम करेंगे  बैठा कर उतरा होगा हमारे लिए ने जरूर दीदी की तंग गुलाबी चुत को देखा होगा देखा क्या होगा हमें कमने ने उसे जरूर दीदी की गुलाबी चुत को चुमा छटा होगा।  लुंड प्रति रख कर अपना लुंड हिला रहा होगा।  दीदी की पैंटी को अपने लुंड के वीर्य से पूरी तरह से गिला कर देगा या जब वो अपने विरिए से भारी हुई पैंटी दीदी को वापस देगा तो दीदी पता नहीं हमें पैंटी का क्या करेगा हम विरे लगी पैंटी को ऐसे ही फिर हम लागी के  विरे लगी पैंटी को चटेगी मि याही सब सोच रहा था की तबी मुझे ध्यान आया की देख दीदी अपने रूम में क्या कर रही ही।

 

 जैसे ही मील दीदी के कमरे के पास से निकला मुजे लगा की दीदी किसी से बात कर रही ही जब मैंने ध्यान लगा कर सुना तो पता चला की दीदी फोन प्रति उसी लड़के रोहित से बात कर रही थी।  मुझे लड़कों की बात तो नहीं सुन रही थी पर दीदी की बात सुन रही थी।  मैंने दीदी की बात सुन ने या देखने के लिए की दीदी इस समय क्या कर रही खिड़की के पास गया तो यहां से खिड़की से दीदी एक हाथ मील फोन हमें लड़के से बात कर रही जबकी दीदी का दसरा हाथ से ऊपर सलवार के ऊपर  अपनी चुत को सहला रही या कभी खुलला बी रही थी।  दीदी को इस तरह उस लड़के के साथ फोन प्रति बात करते हैं या अपनी चुत सेहते देख मेरा लुंड तो रॉकेट के जैसे तंताना गया।

 दीदी, हा हा रोहित तुझे कहा न कल दे दूंगा तुझे अपनी पैंटी फिर दसरी तरह से हमसे लड़कों से कुछ कहा फिर दीदी बोली पर तू मेरी आज वाली पैंटी वापस कर देगा तब दूंगा कल तुझे।  इस लडके से फिर कुछ कहा हमारे लिए बार दीदी बोली थिक ही कहा ना जो पैंटी आज पेहनी ही वो बिना धोए ही दे दूंगा या हा तुझे जो कुछ कुछ गिराना हो तो उसे पैंटी के अंदर ही गिराना बहार नहीं मैं समाज गया की दीदी हम  को अपना वीर्य अपनी पैंटी के और गिराने को बोल रही थी।  दीदी हम के कफी देर तक फोन प्रति बात करती रही।  मेरा लुंड ये बात सोच कर या बी हार्ड हो रहा था की कल दीदी फिर उससे अपनी इस्तेमाल की गई की पैंटी देगी या वो लड़का पता नहीं दीदी की इस्तेमाल की हुई पैंटी की साथ पता नहीं क्या करेगा।  सुबाह जब दीदी मम्मी के बुलाना प्रति नास्ते के लिए निचे आई तो मि बहना बना कर ऊपर दीदी के रूम में गया या जल्दी से दीदी का पर्स खोल कर देखा उसमे दीदी की लाल पैंटी पड़ी थी मेने एक बार उससे निकल प्रति अपने होने से लगा कर  अपने लुंड प्रति लगाया या जल्दी से उससे दीदी के पर्स में रख दिया। मैं अब दीदी की हर हरकत को नोट करने लगा था, पता नहीं क्यों।

 

 एमआई तो दीदी को बहुत ही शरीफ समाज था या आज मुझे दीदी के बड़े बड़े चूचो का राज पता चला था की दीदी ने अपने मम्मो को अपने बॉयफ्रेंड से खूब मसाला या चुसवा कर इतना पता की होगी।  था, लेकिन लुंड अक्सर अपने आप खरा होना शुरू हो जाता था, दोस्तो के साथ बात करते हमेश ये जाने की कोशिश करता के सेक्स केसे करते हैं लुंड कहां डालते हैं लड़की के पिचे मैं वाले  जब मुझे मुजे मारने के भूले का पता चला तो मैं हर वक्त सेक्स के नंगे मैं ही सोचा रहता था या मुथ मार के खोब मजा लेता या अब दीदी को रोहित के साथ ऐसा करता हूं या सोचता हूं  दीदी आज ऐप्नी ने पैंटी रोहित को देगी या वो दीदी को कल जो पैंटी दीदी ने उसे दी थी वो वापस करेगा पता नहीं वो किस हलत मि होगी याही सोच कर उत्साहित हो रहा था का इस्तेमाल किया।

 

 उस दिन स्कूल में मेरा बिलकुल बी मान नहीं लगा, यही सोच रहा था की दीदी ने अपनी इस्तेमाल की हुई पैंटी रोहित को दी होगी या रोहित ने दीदी की जो पैंटी उतर कर अपने पास राखी थी उससे दीदी को वापस दिया होगा।  जरूर रोहित ने दीदी की पैंटी मील अपना माल गिराया होगा दीदी पता नहीं रोहित के वीर्य का क्या करेगा यही सोचा मेरा लुंड सारा दिन खरा रहा शाम को छुटटी के समय दीदी मेरे साथ बैठा मैं ये स्कर्ट सोच कर उत्साहित हूं  के आला नंगी ही होगी घर आ कर दीदी ने अपना बैग अपने रूम में रखा या आला मम्मी के पास आई तो बनने बना कर दीदी के रूम में गया से दीदी का बैग देखा तो हमें दीदी की पिंक कलर की पैंटी पड़ी थी जो रोहित के  विरे से भरी पड़ी थी।  दीदी इज है तक जा चुकी थी ये मुझे आज मालुम हुआ।  मेरे मान में अब दीदी के बारे में ये सब चलता था की रोहित ने दीदी की पैंटी को उतर कर दीदी की छुट को देखा होगा तो दीदी ने रोहित के अंडरवियर को उतर उसके मुसल लुंड को देखा होगा हो ताकता दे  ले कर चुसा बी हो।  याही सोच कर मुझे दीदी के साथ साथ रोहित पर बी गुसा आ रहा था।  बास, लेकिन मेरी बहन को पता नहीं, मैंने किया नजर आया, जितनी सेक्सी या खूबसूरत मेरी दीदी थी मुजे सारे स्कूल माई ऐसी लर्की नजर नहीं अति थी, सब लर्क उसके पिचे पिचे होते वे, लेकिन कुछ रोहित तो है  नहीं था शायद उसमे लर्की को खोजने की कला थी, मेरी बहन इतनी सेक्सी थी के उसे मुझे भी पागल किया हुआ था, सेक्स के मामले में मैं बहुत गरम था पता नहीं एक दिन मैं कितनी बार दीदी को सोच के  उसी को दिमाग माई रख के वक्त गुजरा जा रहा था या मुझे ये डर रहा था के कहीं मेरी बहन बाहर से किसी से ना चुद जय, अगर ऐसा हो गया, एक तो बदनामी, स्कूल मैं मेरा घर सब मेरे  पेट से हो जाति तो ठीक घरवालों को ही उपयोग करें संभलना भाग, तीसरा पता नहीं दुसरी लार्क्यों के साथ सेक्स करने वाला रोहित, उसके के  साथ सेक्स सेफ भी था या नहीं हो सकता था कोई बीमार वगेरा भी हो, सुन माई ये भी इतना था के वो ड्रग्स भी लेता है, लर्कयों को पाने का भी उसका रिकॉर्ड था, मेरे दिमाग माई जब भी दीद  रोहित के साथ चुमा चट्टी वाला देखा तो मुझसे कंट्रोल नहीं हो पाता या मुझे उसी वक्त मुठ मरनी पार्टी थी फिर कुश दिन बाद स्कूल मैं किसी लड़की ने मुझे बताया के तुम्हारी दीदी अपने क्लास रूम मैं रो रही है तो कुछ ऐसा ही  चुप करवा रही थी मेने जा के उसका चेहरा अपने हाथों में ले के पुचा “किआ हुआ का प्रयोग करेंदीदी”, उसने मेरी तरफ देखा फिर मुझसे लिपट के रोने लगी लेकिन कुछ बोली नहीं, दीदी अपना मुह मेरे छती मैं चुप रही थी, दीदी को अपनी थी बहन मैं संभल के आज मुजे अजीब महसूस कर रही हूं,” वाह राही  !!  किआ मजा आ रहा था मुजे,, उसकी दोनो बड़ी बड़ी चुचिया मेरे चेस्ट के सामने पूरी तारा डब चुके वे मेरा दिल धक धक कर रहा था।  , पता नहीं कब मेरा एक हाथ दीदी के चुतड़ के ऊपर उसकी स्कर्ट पे था फिर दसरे बाएं हाथ से मैं उसका चेहरा ऊपर कर के पुचने लगा “



 बताओ तो सही दीदी हुआ किया है ”उसकी आंखें झुकी हुई थी वो मेरी आंखें मैं आंखें नहीं दाल रही थी, कितनी खूबसूरत थी मेरी बहन गोरा रंग लाल हो चुका था या एक अंश उसकी गैलन पे बहुत था,  मैं अपनी बहन की पूरी बॉडी है या गरम सहन को बिलकुल करीब से महसूस कर रहा था उसकी चुचिया उसकी गंद उसका पैत उसकी कमर, उसके सम्मान तो मेरे सम्मान के बिलकुल करीब वे दिल भी कर रहा था।  ,लेकिन मजबूर था माई सेक्सी पूजा दीदी का छोटा भाई था या सब के सामने कुछ भी नहीं कर सकता था, शुक्र है मेने वी-आकार अंडरवियर पहन रखा था उसमे मेरा लुंड पुरा तंग हुआ खरा था।  अपनी बहन का देखता बदन फील कर के शायद मेरा लुंड भी मुझसे कह रहा था के ये बहन होगी तेरी ये मेरा लिए तो मेरी मासूमा ही मेरे तो तुझे का सामना है, वो रोई या मैं रहा है  ,, कोई कुछ बता भी नहीं रहा था के किया हुआ है फिर मेने एक लर्की से पुचा के आपको पता किया हुआ वो बोली पता नहीं रोहित या रितु का कोई चक्कर है दोनो माई कोई झगड़ा हुआ है या सिद्धांत सर ने दोनो को चेतावनी दी  है या कल अपने माता-पिता या गार्डियन को साथ लेने को कहा है, मैं समझ गया के किया झगड़ा हुआ होगा, चलो मेरे लिए अच्छा ही था, अब मुजे अपना रास्ता साफ दिखाई देने लगा था, मैं तो दीदी को दूर करूंगा  था लेकिन मेरा दिमाग बास अपनी सेक्सी बहन को चुनने की योजना मैं लगा था, दीदी के जिस्म ने अभी जो मेरे अंदर आग लगा दी थी उसे शांत करने का मौका नहीं मिल रहा था, घर जाते ही मैंने बाथरूम से दीदी और की पैंटी  उसकी गंध लेने लगा धूली हुई। पैंटी से भी शायद उसकी छुट की थोरी बहुत महक आ रही थी, मेरे अंदर का पानी या भी उबल  ए मार्ने लगा, मैंने पहले कल्पना किया कि किआ के पैंटी का कोनसा हिसा दीदी की मस्त चिकनी छूत को छूता होगा फिर हमें उससे पे अपनी जीब फिराई या फिर उसी उसके अपने लुंड पर रख के मुठ मरना बंद कर दिया गया,  दिमाग माई वही तस्वीर थी, दीदी का मुझसे लिपटना या दीदी के तने हुए चुचिया की चुबन मुजे अभी भी महसूस हो रही थी उसे देखता बदन उसके लाल होने की सोचे मेरी मां मरने की गति तेज थी, अब मेरे पास  खाली उसके लाल होते फिर फ्लैश के या एक ख्याल आया के काश मैं दीदी के होंथों पे अपने लुंड का पानी निकला फिर ऐसा लगा के जिसे पूजा दीदी के गुलाबी होने मेरे लुंड के बिलकुल सामने मेरे लुंड का पानी निकालने में, करने के लिए  उसी वक्त मेरे अंदर से गरम मलाई निकली या मैंने अपने लुंड को दीदी की पैंटी के अंदर ही मसाला दीया, पैंटी का छुट वाले उसके से ले कर ऊपर तक साड़ी पैंटी मेरे लुंड की मलाई से भरी थी में पैंटी अपने  से पोंच के धीरे से पैंटी है तारिके से वापस रख दी के हम पर मेरा क्यू  एम निचे ना गिरे, अब एसा करना यानी दीदी की पैंटी प्रति अपने लुंड का पानी निकलना मेरा रोज का काम हो गया था लेकिन पता नहीं क्यों दीदी कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही थी आखिरी वो अपनी पैंटी को जांच करने के लिए फिर भी कोई पैंटी  दे रही थी, मैं उसकी तरफ से बास एक प्लस प्वाइंट का इंतजार कर रहा था,




 हमारे दिन घर आ के पहली बार में दीदी को इतनी भ्रमित या उदास देखा,, अखिर आज दीदी को मेरी मदद की जरुरत भी पर्नी ही थी, शाम को दीदी मेरे पास ऐ या बोली “दीपू अब क्या करें कल सिद्धांत ने माता-पिता को साथ  लेन को कहा” मेने कहा दीदी मम्मी को ले जाओ, वो कुछ सोचने लगी फिर बोली “अगर मुझे पता होता के रोहित ऐसा है तो मैं कभी भी,” फिर कुछ कहती है रुक गई, मैंने कहा “बात किया हुई थी  दीदी”

 दीदी “वो सब छोर तू एक बात बता तू एक काम करेगा”


 माई “किआ दीदी”


 दीदी “कल सुभा तू मेरे साथ सिद्धांत के पास चलेगा”

 माई “ओके दीदी” दिल को लगा शायद दीदी की मदद करने के लिए दीदी को चुनने का कोई रास्ता मिल जय, उड़ हमारे कॉलेज के सिद्धांत का रिकॉर्ड भी कोई अच्छा नहीं था वो एक नंबर का थारकी बुद्धा था, उसकी बीवी मार चुकी थी  एक लर्की थी जिस्की शादी कर चुका था या अभी भी अपनी शादी करने की सोच रहा था, कोलाज मैं कोई भी नई मैडम उसकी मर्जी के बिना नियुक्त नहीं होती थी, या नियुक्ति करने की उसकी कुछ होती है व्यक्तिगत।  याहा एपियंट माननीय वाली हर मैडम से सिद्धांत से चुडवाना होता था।


 अगले दिन हम दोनो बहन भाई सिदा सिद्धांत के ऑफिस माई गई, उसने पूजा दीदी को खरे रहने को बोला या मुजे कुर्सी पे बेथने को, माई बेथ गिया या अभी कहने ही लगा था के “सर हमारे माता-पिता,,” सिद्धांत ने मेरी  बात कात दी या बोले “बहार कहीं गए होंगे ना, छात्र अक्सर ऐसे बताते हैं, देखो बेटा तुम ही बताओ के रोहित अच्छा लरका है किया”

 माई “नहीं सर”


 सिद्धांत “फिर भी तुम अपनी बहन की मदद कर रहे हो, रोहित की जग अगर कोई या लरका होता तो शायद मैं ये एक्शन न लेटा, हम लोग तुम लोगो को गलत रस्ते या गलत लोगो से बचने के लिए ये सब करते हैं  है,”

 मेने मौका देख के हमला किया “सर दीदी साड़ी रात रोटी रही है के पता नहीं सुभा क्या होगा इसे बहुत टेंशन हो रही है सर”




 सिद्धांत “देखो बेटा, हमारा मकसद सिरफ तुम को समझौता है या कुछ नहीं, तनाव वाली कोई बात नहीं, इदर आओ बेटा मेरे पास” दीदी मेरी कुर्सी के पिची खड़ी थी वो सिद्धांत की बारी साड़ी कार्यालय की मेज की बाईं ओर से घूम  के सिद्धांत की कुर्सी के पास जा के खड़ी हो गई, मैं सिद्धांत के सामने था लेकिन कार्यालय की मेज के उस पार सिद्धांत की कुर्सी को ऊपर से ही देख सकता था, सिद्धांत ने दीदी का हाथ पकारा या बोला “देखो बेटा रोहित अच्छा लरका नहीं  है उसकी कंपनी तुम्हारे लिए अच्छी नहीं है, अगर तुमको कोई परशानी या किसी चीज की जरूरत है तो तुम सिदा मेरे ऑफिस माई आ जया करो”



 फ़िर सिद्धांत ने आज का नया पेपर उत्थान या मेरे सामने रखते हुए कहा देखो बेटा आज कल शहर में किया किया हो रहा है ये न्यूज पर के देखो जरा, मैने अपनी आंखें न्यूज पेपर पे घुमनी शूरु कर दी बीच मेरी हल्की सी न  की तराफ गई ‘मेने उसके चेहरे को देखा वो लाल हो रहा था, दीदी लंबी लंबी संसे ले रही थी, जिस से उसकी शर्ट से उसे बड़ी बड़ी चुचिया ऊपर निचे होटे बिलकुल साफ दिखई दे रहे थे, मुझे कुछ पता नहीं आया  मेने थोरी निचे नज़र डाली तो एसा लग रहा था के




 दीदी की कमर के निचे उसकी स्कर्ट मैं कुछ रईंग रहा है मुझे समझौता डर नहीं लगा के वो सिद्धांत सर का हाथ था, वो दाहिने हाथ से अपने दोज़ मैं कुश दूँ रहे वे या उनका बायाँ हाथ दीदी का प्रतिक्रिया चेक कर रहा था, फ़िर  कुछ डर बाद सिद्धांत सर बोले “दीपक बेटा तुम को क्लास लगानी होगी तुम अगर जाना चाहो तो जाओ फिकर की कोई बात नहीं”

 मैं “नहीं सर मेरा पहला पीरियड फ्री है आज” मुझे पता चल गया था के साला मुझे भगाने के चक्कर में है या मुझे याह से भागकर दीदी के साथ भूलभुलैया लेगा,

 फिर बोला “मैं तुम्हारी दीदी का एक टेस्ट लुंगा या को एक प्रश्न हल करने के लिए दूंगा अगर ये एक अच्छी स्टूडेंट है या फिर मैं इसकी चेतावनी भी वापस ले लूंगा, थिक है” फिर सर ने एक  पेन या खाली पेपर निकल के अपनी कुर्सी के करीब दीदी के सामने रख दिया या मुझे बोले “बेटा तुम सामने सोफी पे बेथ जाओ, आज टेकर्स मीटिंग है टेकर्स भी एट ही होंगे” माई चेयर से उठा से प्रिंसिपल सर ने मुजे न्यूज पेपर भी  साथ ले जाने को कहा, माई सामने पारे लेफ्ट सोफी पे बेथ गिया या न्यूज पेपर परने लगा,



 सिद्धांत या दीदी को देखने के लिए अपने दाएं कंधे की तरफ बगीचे गुमना भाग था, अब सिद्धांत सर दीदी को कुछ समझौता रहे वे शायद कोई सवाल दे रहे हैं या बिना मेरी परवाह के अपने बाएं हाथ से अपना दूजा काम भी हैं  वे, दीदी भी उनके और नज़र गई थी, मेरी आंखें बयान समाचार पत्र पे थी लेकिन किन उन दोनो की हरकतों की तरफ ही, कुछ डर उन दोनो की हरकतों की तरफ ही कुछ डर बाद




 दीदी, सर की कुर्सी के करीब ही थोरा झुकी या कुछ लिखने लगी अब दीदी के झुकने से सिद्धांत को अपना काम करने माई या भी आसन हो रही थी, उनका व्यू या भी अच्छा हो गया था, मैने एक नजर सिद्धांत की तर  उनका ध्यान दीदी की गंद की तरह था, लग रहा था के वो दीदी की चुतड पे हाथ फिर रहे हैं, मैंने भी नजर बचा के देखना शुरू कर दिया, मेरा लुंड खरा हो चुका था में अपनी जेब में अपना पंत  के अपने लुंड को मसाला शुरू कर दिया, फिर कुछ डर बाद ज़ोर से




 तक की आवाज ऐ, साफ पता चल रहा था के दीदी की पैंटी की लोचदार की आवाज है लेकिन मैंने नोटिस नहीं लिया है से शायद वो परेशान हो जाते हैं, माई न्यूज पेपर परने का नाटक करता रहा, फिर थोरी डेर के  बाद नज़र घुमाई से दीदी टेबल पे पारे पेपर पे झुकी कुछ जैसी राही थी लेकिन धीरे से हिल रही थी या सिद्धांत सर के दोनो हाथ टेबल के निचे वे एसा लग रहा था के वो कुर्सी से बेथे एक है  द हिला रहे हैं या दूजा हाथ दीदी की टैंगो या गंद पे फिर रहे हैं, उनकी कुर्सी पिची की तरफ सरकी होई थी, फिर कुछ डर बाद सर ने जान बूज के अपनी कुर्सी के सामने जिस जगह उनकी वहां होती है  या दीदी को बोले “



 बेटा पेन उठा जरा” मैं टेडी आंख से सब देख रहा था दीदी उनकी कुर्सी के आगे बेथ गई या पेन उठा के उठने लगी तो सर ने पहले मेरी तरफ देखा फिर मुजे न्यूज पेपर भाग देख जल्दी से अपने दोनो हाथ पर दीदी के कांडो  उसे उतना नहीं दिया फिर दीदी की शर्ट के गली से अपना हाथ और दाल के उनके चुचियो को दबना शूरु कर दिया कुछ ही डर के बाद सिद्धांत की “हह हुउउह हुउहू” की हलकी सी और उन पिचकर ऐ शूट से ऐ।  उठ के खड़ी हो गई।


 दीदी की शर्ट के ऊपर वाले दोनो बटन खुले वे या उन माई से नज़र आ रही दीदी की गोरी गोरी चुचिया बहुत सेक्सी लग रही वे दीदी झट से बोली “सर माई जाउ अब”

 सिद्धांत “हं बेटा, तुम लोग जाओ,,,, या पूजा बेटा अगर तुम कोई बी तकलीफ हो तो सीदा मेरे पास चली आना किसी पारकर की झिझक मत करना था ही” हम सिद्धांत के कमरे से निकल ऐ बहार आ के दीदी मुज  पे भरक रही थी या बोली” सर ने कहा था जाने को फिर भी दफा क्यों नहीं हुआ,,,,,,,,, शुक्र है फिर भी वो मान गए”,,

 दीदी की शर्ट के ऊपर वाले 2 बटन अभी भी खुले वे उनमे से नज़र आ रही गोरी चुचयान मेरी हवा को और हवा दे रही थी, मेरा ध्यान दीदी के स्तन पर ही था या मैं इसे ही पॉकेट मैं हाथ मसलता लुंड हुआ को दी  के साथ चल रहा था फिर कुछ डर बाद में कहा “दीदी अब तो शर्ट के बटन तो बैंड कर लो”

 दीदी “तू अपना काम कर ठीक है मुझे पता है कि करना है” वो मुझ पर भारी रही थी तो सामने से पीटी सर आ गई दीदी के बहार झाँक रही चुचियो पे उनकी सीधी नज़र गई या वो अपने होने को न खातिर गोल शहद से  से एक आवाज निकली बहुत तेजी से मिर्ची खाने के बाद हमारे मुंह से निकली है “Iiiiissssssss” दीदी मुस्कान के साथ उन “गुड मोर्निग सर” केह के उम्र बार गई का साली मेरी ही किस्मत खराब थी बकी  था बास मैं ही तरास रहा था दीदी अपनी जवानी को लोगो मील ऐसी बात रही थी जैसे मंदिर में प्रसाद दीदी के दो कबूतर भले ही कोई 60 साल का बुद्ध हो या फिर कोई जवान लड़का देख कर ऐसे बाहर जाने के लिए  हो लोग दीदी के मस्त कबूतरो से खेलते मजा लेते या मील दूर खड़ी अपनी किस्मत को रोटा

 

 कुछ दिन बाद मैं अपने दोस्तों के साथ फ्री पीरियड माई ग्राउंड माई जा के बेथ ग्या मेने दसरी ग्राउंड में नजर मारी तो वह पहले ही कुछ लोग वे या कुछ खेल रहे हैं वे ग्राउंड माई एक साइड पे 1 कुर्सी राखी थी हम पे पीटी सर बेथे  वे उन के आस पास कुछ या छात्र भी बेथे थे, माई या मेरे दोस्त हमें तारफ चल डाई उन में मेरा दोस्त मोहित भी साथ था हम सब पीटी सर के पिचे जा के खरे हो गए, सामने दीदी एक लर्की के साथ बैडमिंटन खेल रही  थी, दीदी जेसे उचचल कूड कर रही थी उसके स्तन भी वे ही ऊपर नीचे हो रहे वे या कभी कभी जब

 दीदी जंप लगा के हिट कार्ति तो स्कर्ट के आला से गोरी लंबी टैंगो के ऊपर ब्लैक कलर की पैंटी भी नजर आ जाति थी, मेरे ख्याल से सब लोग दो लोगों के सेक्सी जिस्म की उचल कूड का मजा ले रहे थे ना के गेम का मेरे  दोस्त या मैं हम सब भी ये सब देखने लगे

 फ़िर मोहित बोला “दीपक उसके मुमे (बूब्स) देख के अच्छे रहे हैं”


 मैंने कहा “सले पूजा दीदी है”

 मोहित “सॉरी यार, एक बात बोलू गुसा तो नहीं करेगा”


 मैंने कहा बोल, मुझे पता था के वो क्या बोले वाला है लेकिन मुझे उसके मुंह से सुन के या भी मजा लेना था

 मोहित “यार देख गुसा मत होना लेकिन जो बात सच है वो सच है”

 मेने कहा “कुछ बोलेगा या नहीं”

 मोहित “देख तुझे बुरा लगेगा लेकिन यार पूजा दीदी बहुत सेक्सी है, कितने प्यार उसके पीछे लगे हैं, तू किया सोचा है के ये सब लोग बैडमिंटन का खेल देखने के लिए बेथे हैं,  है,,,, यार जब पूजा दीदी उचचल कर शूट लगाती ही तो देख के पूजा दीदी के मोटे मोटे मामे केसे उचचल रहे ही या कासे पूजा दीदी की तन्गो मील चड़ी काले रंग की पेंटी देख रहे थे या शुद्ध स्कूल के  दीदी का नाम सेक्सी बिच रखा हुआ है”

 ये सब मुजे तो पहले ही पता था लेकिन उसके मुह से सुन ने माई या मजा आ रहा था लेकिन अभिनय करना भी जरुरी थी क्यों के अखिर वो सेक्सी कुतिया मेरी बड़ी बहन थी फिर मेने मोहित को कहा “सले बोल यह उसे मेरी  बहन है”

 मोहित “हां यार लाई तो तुझे बता रहा हूं, एक बात या भी है, लेकिन चोर, तू सच मैं गुसा हो जाएगा”



 सब लडके अभी गए ही थेकी मोहित मुज से बोला चल यार मि अभी आता हूं या मुस्कान लगा तो मैंने पुर से उसे हाथ मरते बोला यार थिक ही जा टी भूलभुलैया कर।  मी जान गया था की मोहित बी उन लड़कों के पिचे ही जा कर दीदी के नाम की मुठ मारेगा।  पता नहीं मेरे मान में क्या आया मील बि चुपके से उसके पीछे चल पड़ा ये देखने के लिए वो सब लार्के मेरी बहन के बारे में क्या सोचे गए थे बाथरूम के पास गया मुझे किसी लड़की के सिसकने की आवाज आई या  मैं हमसे के मुख से सुना मील इदर उडर देख और झंझने की कोशिश करने लगा तो मुझे एक छेद दिखा या जब हमें छेद से और देखा और एक लड़का अपना लुंड निकल कर हिला रहा था  .  एसा ही हाल सारे बाथरूम का था वो बोल रहा था पूजा कितने बड़े चूचे ही तेरे साली निचोड़े मील मजा आएगा।  अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मेरी रैंड तुझे घोड़ी बना कर चोदने मैं मजा आएगा ये देख कर मेरा लुंड एकदम से तंतना गया वैसा उनका बी कोई कसूर नहीं था मेरी बहन थी बी एसा ही माल.


 दीदी को सेक्सी दिखने का बहुत शौक था, वो शॉर्ट स्कर्ट पहनने का बड़ा शौंक था, उसकी फिगर या होठों बॉलीवुड की हीरोइन प्रियंका चोपड़ा के जेसे वे अपने आप को कैटरीना कैफ के साथ तुलना करती थीं, उसका 5.7 ”लंबा गोरा जिस्म  ,, कैटरीना से काम भी नहीं था जब वो पंजाबी सूट के साथ पटियाला सलवार पेंटी तो सभी पिचे मुर मुर के देखते थे, या जब जींस या टॉप पैंटी तो उसका एक एक अंग तीर की तरह चुबता वो, जब कभी छोटी स्कर्ट  पहचान किसी सहेली के यह पहचान थी।  माई शॉर्ट स्कर्ट मैं उसके झुक के कोई चीज उठने का इंतजार करता रहता जिस से दीदी की पैंटी नजर आ खातिर, 1-2 बार मैंने देखा के जब उसे जींस के साथ कमर के ऊपर तक का छोटा टॉप पहनना होता मेरी देखने के लिए इस्तेमाल करने के लिए  तो हलत खराब होती ही थी मगर मेरी नज़र भी उसकी तरह बार बार जाति थी, लेकिन लाख कोशिश के बाद भी मुझसे कुछ नहीं हो पा रहा था, अपनी बहन को चुनने के लिए किसी की सलाह ले भी तो  मैं दीदी के स्तन को या उसके जिस्म के किसी भी उसे सेहला के बहकावे में आने की कोशिश करता तो वो मुझे दांत देता, “दीपू किया कर रहा है, दिमग सही है तेरा” मैं डर जाता या कुछ भी लगता है  कर पता अब का बार मैं सोचता हूं के जीता अनुभव लर्की को बहकाना करने या छोडने का मुजे अब है अगर तब्ब होता तो बहुत आसन से दीदी को उस वक्त छोड देता था, श्याम जब मैं दीदी को आकर्षित करने के लिए  पे भी असर होता था या वो है लिए दंत देता था के कहीं वो नियंत्रण से बाहर हो के अपने छोटे भाई के साथ कुछ कर ना शर्त  वह, या मेरी बात बनते हैं बिगर जाति थी अब मुजे लग रहा है के हमें वक्त की मेरी सब से बड़ी कमज़ोरी मेरी घब्रहत या डर था या कुछ भी नहीं, एक बार मेरे परीक्षा चल रहे वे माई या दीदी दो इतने एक कमरे  बिस्तर अलग वे लेकिन कमरा एक ही था, माई पार रहा था या दीदी सो रही थी रात कफी हो चुकी थी

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