रामा बेटी… कहाँ हो सब लोग…?
उनकी आवाज़ सुनकर, हम तीनों को जैसे साँप सूंघ गया, जो जिस पोज़िशन में था, वहीं जम गया…
फिर भाभी को जैसे होश आया हो, वो झटपट मेरे मुँह से उठी, और दीदी से बोली –
रामा तुम जल्दी से नीचे चलो, मे दो मिनिट में आती हूँ…
दीदी लपक कर उठी, और गेट खोलकर नीचे भागती हुई चली गयी…
भाभी भूंभुनाते हुए अपनी मेक्सी पहनने लगी – ये बाबूजी को भी अभी आना था, थोड़ी देर बाद नही आ सकते थे…
हम दोनो की हालत हद से ज़्यादा खराब थी, हम ऐसी स्थिति में थे जहाँ से लौट पाना हर किसी के वश में नही होता…
लेकिन मेरे लिए खड़े लंड पे धोका (कलपद) कहो या, भाभी के लिए गीली चूत पे धोका (गक्पद).. हो ही गया था…दीदी तो बेचारी अभी शुरू ही हुई थी.
वो मेक्सी पहन कर थोड़ा अपने बाल वाल सही कर के, मेरे नंगे लंड को चूमकर जो किसी टोपे की तरह अभी भी सीधा खड़ा था बोली..
कोई बात नही बच्चू, तुझे मे बाद में देखती हूँ, और स्माइल कर के वो भी नीचे चली गयी…
आज हमें भैया का गौना करने जाना था.. सुबह से ही घर में चहल-पहल थी… दोनो भाई कल शाम को ही घर आ चुके थे..
दो गाड़ियों से हम भाभी के घर पहुँचे… एमएलए साब ने हम लोगों की खूब खातिरदारी की…
कामिनी भाभी ने जाते ही मेरा गिफ्ट मुझे दे दिया… ये एक बहुत ही वेल नोन ब्रांड का स्मार्ट फोन था जो अभी-2 लॉंच हुआ था…
मेने भाभी के गालों को किस कर के थॅंक्स कहा… तो वो मुस्कराते हुए बोली – ये तो आपका उधार था जो मेने पटाया है.. इसका थॅंक्स में आपसे कैसे ले सकती हूँ..
उसी दिन शाम को हम भाभी को लेकर विदा हो लिए… एमएलए साब ने विदा के तौर पर भैया और भाभी को एक शानदार रेनो फ्लूयेन्स कार गिफ्ट में दी…जिसे अच्छे से डेकरेट कर के नव बधू को विदा किया…
भैया खुद गाड़ी चलके लाए और उनकी दुलहानियाँ उनके आगोश में थी…
बड़े भैया तो दूसरे दिन ही अपनी ड्यूटी पर निकल गये…, छोटे भैया भी दो दिन अपनी दुल्हन को भरपूर प्यार देकर अपनी ड्यूटी लौट गये…
वो अब एसपी प्रोमोट हो चुके थे…, तो लाज़िमी है, ज़िम्मेदारियाँ भी बढ़ गयी थी.. इसलिए वो ज़्यादा समय नही दे पाए अपनी नव व्यहता पत्नी को…
लेकिन उनका प्लान था.. कि कुछ दिनो के बाद वो भाभी को साथ रखने वाले थे… इसमें घर पर भी किसी को एतराज नही था…!
इधर कॉलेज में रागिनी मुझसे हर संभव मिलने का मौका ढूढ़ती रहती…
मुझे नही पता कि उसके मन में क्या चल रहा था… लेकिन कुछ तो था जो मेरी समझ से परे था…
छोटी चाची की प्रेग्नेन्सी को भी पूरा समय हो चुका था… जिससे मोहिनी भाभी ज़्यादातर उनके पास ही रहती थी…
आक्शर मे भी उनके पास चला जाता, उनकी खैर खबर लेने, या कोई बाज़ार का अर्जेंट काम हो तो, ये सब जानने के लिए.
लेकिन शायद इतना काफ़ी नही था, कोई तो एक ऐसी अनुभवी औरत चाहिए थी, जो अब 24 घंटे उनके पास रह सके…
सो चाचा अपनी ससुराल जाकर अपने छोटे साले की पत्नी (सलहज) को ले आए…जो चाची की उमर की ही थी…
30 वर्षीया सरला मामी, भरे पूरे बदन की मस्त माल थी, खास कर उनकी गान्ड देख कर किसी का भी लंड ठुमके लगाने पर मजबूर हो जाए..
हल्के से साँवले रंग की 2 बच्चों की माँ सरला मामी, 36-32-38 का उनका कूर्वी गद्दार बदन बड़ा ही जान मारु था. कुछ-2 इस तरह का…
मे शाम को जब चाची के यहाँ पहुँचा तो मामी को उनके पास बैठा देख कर सर्प्राइज़ हो गया, मेने पहले उन्हें कभी देखा नही था.. सो चाची से पुच्छ लिया..
चाची ये कॉन हैं…? चाची ने बताया, कि ये मेरी छोटी भाभी हैं, तुम्हारी मामी…
मेने उन्हें नमस्ते किया, तो उन्होने अपनी कजरारी आँखें मेरे ऊपर गढ़ा दी, और बड़ी ही कामुक नज़र से देखते हुए मेरी नमस्ते का जबाब दिया…
चाची – भाभी, ये मेरे बड़े जेठ जी के सबसे छोटे लल्ला हैं, अंकुश नाम है इनका… कॉलेज में पढ़ते हैं…
मामी बोली – बड़े ही प्यारे लल्ला हैं दीदी आपके… ! इनसे तो मेल-जोल बढ़ाना पड़ेगा…
मे – क्यों नही मामी, आप जैसी नमकीन मामी से कॉन उल्लू का पट्ठा दूर रह सकता है.. मेरी बात पर वो दोनो खिल-खिलाकर हँसने लगी…
फिर चाची आँखें तिर्छि कर के बोली – हैं…लल्ला ! आते ही मामी पर लाइन मारने लगे…!
मामी – अरे दीदी ! हमारी ऐसी किस्मेत कहाँ ? इनके जैसा सुन्दर सजीला नौजवान, मुझ जैसी 2 बच्चों की माँ पर भला क्यों लाइन मारने लगा…
मेने ब्लश करते हुए कहा – अरे मामी, आप इशारा तो करिए… लाइन तो क्या.., और भी बहुत कुछ मिल जाएगा आपको…
और रही बात दो बच्चों की, तो उससे क्या फरक पड़ता है… ज़मीन उपजाऊ होगी तो फसल तो उगनी ही है…
मामी – हाए दैयाआ….दीदी ! ये लल्ला तो बड़ी पहुँची हुई चीज़ मालूम होते हैं… इनसे तो बचके रहना पड़ेगा…
चाची – अरे भाभी, अब मामी से मज़ाक नही करेंगे तो और किससे करेंगे.. वैसे मेने तो आज पहली बार इन्हें ऐसी मज़ाक करते देखा है…
ऐसी ही हसी मज़ाक के बाद चाची बोली – अरे भाभी, ज़रा लल्ला के लिए चाय तो बना दो, हम भी थोड़ी सी पी लेंगे…
जब वो चाय बनाने किचिन में चली गयी, तो चाची बोली – हाए लल्ला, मुझे नही पता था, कि तुम ऐसे भी खुलकर मज़ाक कर सकते हो…
मे – अरे चाची, जब वो ऐसी मज़ाक कर रही थी, तो मे क्यों पीछे रहता, और वैसे भी मामी के साथ तो खुलकर मज़ाक कर ही सकते हैं ना…
वो – हां सो तो है, खैर ये बताओ – कैसी लगी मामी…?
मे – क्या कड़क माल है चाची… सच में, देखना कहीं चाचा लाइन मारना शुरू ना करदें…
चाची – अरे लल्ला ! वो क्या लाइन मारेंगे, तुम अपनी कहो… मज़े करने हों तो जाओ कोशिश कर के देखलो, शायद हाथ रखने दे…
मे – क्या चाची आप भी, मे तो बस ऐसे ही मज़ाक कर रहा था…
चाची – जैसी तुम्हारी मर्ज़ी, मे तो बस तुम्हें खुश देखना चाहती थी…
मे – ठीक है चाची, आप कहती हैं तो ट्राइ मारके देखता हूँ… ये कह कर मे चाची को किस कर के, उनके आमों को तोड़ा सहलाया, और किचन की तरफ बढ़ गया.
मामी स्लॅब के पास खड़ी होकर चाय बना रहीं थी… कसे हुए सारी के पल्लू की वजह से उनकी गान्ड के उभार किन्ही दो बड़े तरबूज जैसे बाहर को उठे हुए मुझे अपनी ओर खींचने लगे…
मे चुप चाप से मामी के एक दम पीछे जाकर खड़ा हो गया… और उनके कान के पास मुँह ले जाकर बोला – मामी, बन गयी चाय…?
अपने कान के इतने पास मेरी आवाज़ सुनकर मामी, एकदम से चोंक गयी, और पलटने के लिए जैसे ही वो पीछे को हटी, उनकी गान्ड मेरी जांघों से सट गयी….
आहह… क्या मखमली अहसास था उनकी गद्देदार गान्ड का, ऐसा लगा जैसे दो डनलॉप की गद्दियाँ मेरी जांघों पर आ टिकी हों…
इतने से ही मेरा बब्बर शेर अंगड़ाई लेने लगा…, फिर उन्होने जैसे ही पलट कर मेरी तरफ मुँह किया, उनके मस्त दो पके हुए हयदेराबादी बादाम आम, मेरे सीने से रगड़ गये…!
उनकी आँखों में खुमारी सी उतरने लगी, अपनी पलकों को उठाकर मेरी तरफ देख कर बोली – बस बन ही गयी, अभी लाती हूँ, तुम चलो तब तक…!
मे – क्यों मेरा यहाँ आना आपको अच्छा नही लगा मामी…?
वो मेरे सीने से अपने दोनो आमों को रगड़ते हुए बोली – ऐसा तो नही कहा मेने… वो तो बस मे….
मेने भी उनकी आँखों में झँकते हुए अपने हाथ उनकी गद्देदार गान्ड पर रखकर अपने से और सटाते हुए कहा – वो बस क्या मामी… बोलो ना !
वो – हाए लल्ला जी, छोड़ो ना ! दीदी क्या सोचेंगी, तुम यहाँ ज़्यादा देर रहे तो ?
मे – चाची की चिंता मत करो, आप क्या सोच रही हैं, ये बताओ…? इसके साथ ही मेने उनकी गान्ड को ज़ोर से मसल दिया…
ससिईईईईईईईईईईईईईईई…………हइईईईई……लल्लाअ… मेरे सोचने से क्या होगा….? वो मादक सिसकी लेते हुए बोली…..
सब कुछ, जो आप चाहें…बस आप हां तो बोलिए…कहकर मेने उनकी गान्ड को और ज़ोर से मसल दिया…
मेरे गान्ड मसल्ते ही वो अपने पंजों पर खड़ी हो गयी… जिससे मेरे लंड का उभार ठीक उनकी रामप्यारी के दरवाजे पर दस्तक देने लगा…
मेरे लंड का उभार अपनी दुलारी के मुँह पर महसूस करते ही उन्होने उसको अपनी मुट्ठी भर लिया और कसकर मसल्ते हुए बोली –
इतने शानदार हथियार को भला कैसे मना कर सकती हूँ मे, …लेकिन अभी तो छोड़ो लल्ला जी, रात को मौका लग जाए तो देखेंगे…
मेने कहा – पहले मेरा हथियार तो छोड़ो…, वो खिल खिला कर हंस पड़ी, और मेरा लंड छोड़ दिया…
फिर वो जैसे ही स्लॅब की तरफ पलटी, मेने पीछे से उनके दोनो आमों को अपने हाथों में भर लिया, और उनकी गान्ड की दरार में अपना लंड फँसाकर बोला…
आज रात को बहुत मज़ा आने वाला है मामी.. मे अपनी इस पिस्टन से आपके सिलिंडर को अच्छे से रॅन्वा कर दूँगा…
मामी ने मेरे हाथ अपने आमों से अलग किए, और पलट कर मेरे होंठ चूम लिए..
फिर अपने होंठों पर कामुक हसी लाते हुए मेरे सीने पर हाथ रख कर किचन से बाहर धकेलते हुए बोली –
देखते हैं, कैसी सर्विस कर लेते हो ? अब जाओ यहाँ से…
मे मन ही मन मुस्करता हुआ चाची के पास आकर बैठ गया…!
मेरे बैठते ही चाची ने पूछा – बात बनी…?
मेने चाची के आमों को सहलाते हुए कहा – अरे चाची ! आपके लाड़ले को भला मामी मना कर सकती हैं…?
कुछ देर बाद मामी चाय ले आई, हम तीनो गप्पें मारते हुए चाय पीने लगे…
चाची ने कहा – लल्ला, आज खाना यहीं खा लेना, क्यों भाभी…आपको कोई प्राब्लम तो नही होगी ना…
मामी – कैसी बात करती हैं दीदी आप भी, भला मुझे क्या प्राब्लम होगी…!
चाची ने मुझे आँख मारते हुए कहा – तो ठीक है लल्ला, आज घर मना कर देना खाने के लिए, और हां जल्दी आ जाना…
मे उन्हें हां बोल कर अपने घर आ गया….
भाभी ! मेरे लिए खाना मत बनाना…जब मेने ये भाभी को बोला, तो भाभी मुझे अजीब सी नज़रों से घूरते हुए बोली …
क्यों ? कहीं स्पेशल दावत में जा रहे हो क्या…?
मे – नही ऐसी कोई दावत नही है, वो छोटी चाची ज़िद करने लगी कि आज हमारे साथ खाना, तो फिर मुझे भी हां करनी पड़ी…
वो – तो इसका मतलव, नयी मामी के हाथ का खाना खाओगे… हुउंम्म…ठीक है भाई, अब तरह – 2 के पकवान खाने की आदत जो पड़ गयी है जनाब को, …ये कह कर वो मंद -2 मुस्कराने लगी…
मेने भाभी की द्विअर्थि बातों को सुनते ही मन ही मन कहा, सच में ये बहुत तेज हैं, इनसे कोई बात च्छुपाना बहुत मुश्किल है…लेकिन फिर भी मे बोला…
ऐसा कुछ नही है भाभी, आप तो जानती ही हैं, सबसे ज़्यादा अच्छा खाना तो मुझे आपके ही हाथ का लगता है…
पर उन्होने ज़िद कर के कहा, तो फिर मे भी मना नही कर सका……
वो – हां तो ठीक है, चले जाना खाना खाने उसमें क्या है, वो भी तो अपना ही घर है… लेकिन सोने तो आओगे, या फिर सोना भी…..और अपनी बात अधूरी छोड़ कर वो मुस्कारने लगी..
मे भी मुस्करा दिया और बोला – देखता हूँ, ज़्यादा कोई काम नही हुआ तो आ जाउन्गा..
वो हंसा कर बोली – पूरी रात का काम है वहाँ ….?
फिर वो मेरे एकदम करीब आकर बोली – लगता है, देवर जी को नयी मामी पसंद आ गयीं… क्यों ?
मेने बिना कोई जबाब दिए नज़रें झुका ली, तो भाभी मेरे गाल चूमते हुए बोली – मामी भी क्या करे बेचारी, नज़र मिलते ही लट्तू हो गयी होगी अपने हीरो पर…
मे बिना कोई जबाब दिए मुस्करता हुआ चाची के घर की तरफ चला आया.. वरना भाभी और भी टाँग खींचने लगती..
मे जब चाची के घर खाना खाने पहुँचा, तब मामी खाना बना रहीं थी, और चाचा खाने बैठे थे…
चाची ने चाचा से कहा – सुनो जी, आज आप जेठ जी के साथ बैठक में सो जाना, मे और भाभी, एक कमरे में सो जाएँगे, और लल्ला भी यहीं सो जाएँगे..
चाचा ने अपनी मंडी हिलाकर हामी भर दी, और खाना खा कर कुछ देर बैठे, बात-चीत की, और फिर बैठक में सोने चले गये…
उसके बाद हम तीनों ने मिलकर खाना खाया, मेने मामी के खाने की जम कर तारीफ की, जिससे वो खुश हो गयी…
खाना खाकर मे यौंही चाची के बगल में ही लेट गया, उनकी तरफ मुँह कर के, और उनसे बातें करने लगा…
मामी किचन का काम निपटाकर हमारे पास आ गयी, इस समय वो एक सिल्क की टाइट फिटिंग मेक्सी पहने थी, जिसमें से उनके कूर्वी बदन का सारा इतिहास-भूगोल पता चल रहा था…
डेलिवरी के पहले पेट की मालिस करवाने से मांसपेशियाँ सॉफ्ट रहती हैं, जिससे नॉर्मल डेलिवरी में कोई कॉंप्लिकसी नही होती…
सो मामी तेल गरम कर के चाची की मालिस के लिए लाई थी, और वो हम दोनो के पैरों की तरफ बैठ कर पहले उनके पैरों के तलवों और पिंडलियों की मालिश करने लगी…
मामी का शरीर हिलने से मेरे पैर उनके मांसल कुल्हों से टच हो रहे थे, जिससे मेरे शरीर में झंझनाहट सी होने लगी…
फिर वो हम दोनों के बीच आकर चाची के पेट की हल्के हल्के हाथों से मालिश करने लगी…
जब वो चाची के पेट को दूसरी साइड तक मालिश करती तो उनकी गजभर चौड़ी गान्ड ऊपर को उठ जाती…
मेने मज़ा लेने के लिए जैसे ही उनकी गान्ड हवा में उठी, मे और थोड़ा उनकी तरफ खिसक गया…, अब उनकी गान्ड जैसे ही नीचे आती, तो मेरे खड़े हो चुके लौडे से ज़रूर रगड़ती…
हुआ भी ऐसा ही…, जैसे ही उनकी गान्ड नीचे आई, वो मेरे लौडे से रगड़ गयी…
मामी ने थोड़ा ठहर कर स्थिति को समझा, और मन ही मन मुस्करा दी…
अगली बार जैसे ही उनकी गान्ड हवा में उठी, मेने फटाफट हाथ डालकर अपना लंड अंडरवेर को नीचे कर के बाहर निकाल लिया, अब केवल पाजामे का हल्का सा कपड़ा ही बीच में था…
लंड पूरा अकड़ चुका ही था, अब वो पाजामे के हल्के से कपड़े को आगे से उठाए हुए एकदम सीधे खड़ा था…
मामी ने भी इसबार जान बूझकर नीचे की तरफ लाते हुए अपनी गान्ड को और ज़्यादा पीछे की तरफ लहरा दिया…..
नतीजा… मेरा लंड उनकी गान्ड की दरार में फिट होकर उसके छेद पर अटक गया…
उईई….माआ…., मामी के मुँह से ना चाहते हुए भी एक हल्की सी सिसकी निकल पड़ी, जिसे चाची ने सुन लिया और अपनी आँखें खोलकर बोली – क्या हुआ भाभी…?
मामी – दीदी ! ऐसा लग रहा था जैसे मेरे पीछे कुछ चुबा हो…?
चाची बात को समझते हुए मन ही मन मुस्कराते हुए बोली – लल्ला ! ज़रा देखो तो क्या चुभ रहा है भाभी के पीछे…?
मेने अपने लंड को और थोडा पुश करते हुए कहा – मुझे तो कुछ दिखाई नही दे रहा चाची यहाँ…?
मामी ने भी अपनी गान्ड का दबाब मेरे लंड पर डालते हुए कहा – रहने दो मुझे ऐसे ही कुछ लगा होगा… और वो फिर से मालिश करने में लग गयी…
बार-बार लंड की ठोकर, अपनी गान्ड के छेद पर महसूस कर के मामी की आखों में लाल लाल डोरे तैरने लगे, चाची सब समझ रहीं थी, सो कुछ देर में ही खर्राटे लेने का नाटक करने लगी…
मेने मामी की गान्ड को सहला कर कहा – चाची सो गयीं मामी, अब तुम भी आ जाओ सोते हैं…
वो बोली – तुम भी यहीं सोने वाले हो क्या…?
मेने कहा – तो क्या हुआ ! आ जाओ, एक साथ सोते हैं…
वो – नही नही ! भला दीदी क्या सोचेंगी… ?
मे दूसरे पलंग पर चला गया, और मामी को भी अपने पलंग पर खींचते हुए बोला – तुम बहुत डरती हो मामी,
इतना कहकर मेने उनकी कमर में अपने हाथ लपेट कर उन्हें अपने बाजू में लिटा लिया…
वो मेरी ओर पीठ कर के लेट गयीं.. हम दोनो का मुँह चाची की तरफ ही था..
मेने अपना सर उठाकर उनके होंठों को चूम लिया, फिर गान्ड मसल्ते हुए मेने कहा – आअहह…. मामी क्या सेक्सी माल हो आप..?
वो मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर बोली – इतनी भी सेक्सी नही हूँ…
मेने उनकी इकलौती मेक्सी भी निकलवादी, उनके शरीर की बनावट देख कर मेरा लंड ठुमके मारने लगा…
मेने अपने लंड को मामी की गान्ड की दरार में फंसकर एक जोरदार रगड़ा लगाते हुए उनके गले को चूम लिया….
सस्सिईईईईईईईईई….आआअहह…..मेरे राजा… कितना गरम और मोटा मूसल है तुम्हारा…
मे – आहह…क्या मस्त गान्ड और चुचियाँ हैं आपकी… जी करता है…खा जाउ इन्हें…
वो सिसकते हुए बोली – सीईईईई… तो खाओ ना… मना किसने किया है…तुम्हारे लिए ही तो आई हूँ यहाँ…
मामी की गान्ड और मस्त बड़ी-2 एकदम तनी हुई चुचियों को देख कर मेरा लॉडा टन टॅना कर पेंडुलम की तरह ऊपर नीचे होने लगा…
मेने भी अपने सारे कपड़े निकाल दिए… मेरा लंड देख कर मामी अपनी पलकें झपकाना भूल गयीं…
मेने पूछा – क्या देख रही हो मामी… पसंद आया…?
वो – आहह….क्या मस्त लंड है तुम्हारा… इसे तो पूरी रात मे अपनी चूत में ही डाले रहूंगी…
और उसे कसकर मसल्ते हुए, उन्होने उसे अपने मुँह में भर लिया और मस्त लॉलीपोप की तरह चूसने लगी…
मे उनकी गान्ड और चुचियों को मसलने लगा…
जल्दी ही मेने उनको सीधा लिटा दिया और उनकी टाँगों को चौड़ा कर के मेने अपना सोट जैसा मूसल उनकी हल्की झांतों वाली गरम चूत में पेल दिया…
ससिईईईई….आआहह….. लल्लाअ… क्या मस्त लंड है तुम्हारा….थोड़ा आराम से…उफफफ्फ़…
मेरी चूत को पूरी तरह कस दिया है….इसने… हाईए… रामम्म….मज़ा आ गया… कसम सी….
चुदाई करते हुए मेरी नज़र चाची की तरफ गयी.. वो अपनी पलकों से हल्की सी झिर्री बनाकर हमारी चुदाई का मज़ा ले रही थी…
उनका एक हाथ उनकी चूत के ऊपर था, जिसे वो मसले जा रही थी…
वाह ! क्या सीन था, एक मस्त भरे बदन की औरत मेरे लंड से चुद रही थी, दूसरी एक प्रेग्नेंट औरत उस चुदाई को अपनी आँखों से देख कर अपनी चूत मसल कर आनंद के दरिया में गोते लगा रही थी…
हम तीनों ही अपने अपने हिस्से के मज़े को पाने की कोशिश में जुटे हुए थे…
अब तक मामी दो बार अपना पानी छोड़ चुकी थी, तब जाकर मेने अपना गाढ़ा गाढ़ा मक्खन उनकी रसीली चूत में भरा…
थोड़ी देर एकदुसरे से चिपके पड़े रहने के बाद, मेरा लंड मामी की गान्ड की गर्मी पाकर फिरसे अंगड़ाई लेने लगा…
उठके मेने अपना लंड मामी के मुँह में डाल दिया, जिसे वो बड़े तन-मन से चूसने लगी…
फिर मेने उनसे उनकी गान्ड मारने को कहा…
कुछ ना नुकुर के बाद वो मान गयी…
उनकी गान्ड थी ही ऐसी की वो अगर नही भी मानती, तो मे आज उसे जबर्जस्ती फाड़ देता…
पास में ही तेल था, सो अच्छे से मामी को चौड़ी गान्ड की मालिश कर के, थोड़ा धार बनाकर उनके छेद में डाला…
फिर अच्छे से दो उंगलियों से गान्ड को अंदर तक चिकनाया, और अपना लंड उनकी कसी हुई गान्ड के छेद में पेल दिया…
मामी के मुँह से कराह निकल गयी, लेकिन जल्दी ही उन्होने अपने होंठ कसकर भींच लिए,
मेने मामी की दोनो टाँगों को उनके पेट से सटा रखा था, जिससे उनकी गान्ड का छेद पूरी तरह लंड के सामने आकर खुल गया…
इस पोज़ में गान्ड मारने का अपना अलग ही मज़ा था, पूरा लंड आसानी से गान्ड में आ-जा रहा था…
मामी के पपीतों को मसलते हुए, मे उनकी गान्ड में सटा-सॅट लंड पेलने लगा, मामी ने मस्ती में आकर अपनी दो उंगलियाँ अपनी चूत में डाल दी, और उसे चोदने लगी…
कभी वो उंगलियों को अंदर पेल देती, तो कभी बाहर निकाल कर अपनी चूत को थपथपाने लगती….
अब वो फूल मस्ती में अपनी गान्ड को पलंग से अधर उठाकर चुदाई का मज़ा ले रही थी…ज़ोर ज़ोर से मादक आवाज़ें निकालते हुए,
मेरी जाँघो की थप उनकी गान्ड के टेबल पर ताबड तोड़ तरीक़े से पड़ रही थी…
अब उन्हें चाची की भी कोई परवाह नही थी…हम दोनो ही अपने चरम की तरफ तेज़ी से बढ़ते जा रहे थे…
मामी का पूरा शरीर बुरी तरह अकड़ने लगा, और उन्होने अपनी तीन उंगलियाँ एक साथ अपनी चूत में डालकर कस्ति हुई झड़ने लगी…
इधर मेने भी अपना नल उनकी गान्ड में खोल दिया… और उसने मदमस्त गान्ड के छेद को अपनी मलाई से भर दिया…
अपनी गान्ड का आज पहली बार उद्घाटन करवा कर मामी को बहुत मज़ा आया, मुझे भी मामी जैसी चौड़ी गान्ड वाली जोबन से भरपूर औरत को चोदने में,
और हम दोनो की मस्त चुदाई का लाइव शो देखकर चाची को अपनी चूत मसलकर पानी निकालने में……
हम तीनों ही अपनी अपनी तरह से देर रात तक मज़े लेते रहे…..
ऐसे ही मस्तियों में कुछ दिन और निकल गये, मौका लगते ही मामी और मे शुरू हो जाते अपने पसंदीदा काम में, चाची को हमारा गेम देखने में बड़ा मज़ा आता..
और फिर एक दिन चाची ने एक सुंदर से बेटे को जन्म दिया…, घर भर में खुशियों की जैसे बहार ही आ गयी…
शादी के इतने सालों के बाद छोटे चाचा को पिता बनने का सुख प्राप्त हुआ था, उनकी तो खुशी का कोई परोवार ही नही था…
डेलिवरी नॉर्मल घर पर ही हो गयी थी… लास्ट मूव्मेंट तक घर के कामों की वजह से कोई कॉंप्लिकेशन नही हुई… एक नर्स को बुलाकर सब कुछ अच्छे से हो गया था…
गाँव की दाई की देखभाल से चाची को कोई परेशानी पेश नही आई.. भाभी और बहनों ने भी अपने परिवार के नाते अपना फ़र्ज़ निभाया था…
बच्चे का नामकरण भी संपन्न हो गया… भाभी ने ही उसका नाम अंश रखा..
बीते कुछ दिनो में परिवार में एक के बाद एक खुशियाँ मिलती जा रही थी…
हफ्ते-के हफ्ते कुछ महीनो तक मे पंडितजी की बहू वर्षा को उसके इलाज़ के बहाने ले जाता रहा.. और उसे जंगल में मंगल करवाता रहा,
इस बीच मेने उससे जैसे चाहा सेक्स किया…, वो तो जैसे एक तरह से मेरी दीवानी ही हो गयी थी…!
लेकिन ये ज़्यादा लंबा नही चल सकता था…, फिर एक दिन वो भी प्रेग्नेंट हो गयी.. और उसके मुताविक ये बच्चा भी मेरा ही अंश था…,
पंडिताइन उसे लेकर हमारे घर आईं, ख़ासतौर से भाभी का धन्यवाद करने, जिनके सुझाव से उनकी बहू एक बड़ी मुशिबत से निकली थी, साथ ही एक बड़ी खुश खबरी भी सुनने को मिली…
उनका मानना था, कि भूत बाधा हटने के बाद ही वो उनके बेटे का अंश धारण करने योग्य हो पाई है..
लेकिन एकांत पाते ही वर्षा ने भाभी को ये सच्चाई बता दी, कि ये बच्चा मेरा ही अंश है…
उसी दिन शाम को भाभी ने मेरी टाँग खींचते हुए कहा…. क्या बात है लल्ला जी… आजकल गाँव की खूब आबादी बढ़ा रहे हो…
मेने भी हँसते हुए कहा – ये सब आपकी मेहरवानी से हो रहा है भाभी, मेरा इसमें कोई हाथ नही है….!
वो प्यार से मेरा कान खींचते हुए बोली– अच्छा जी ! बीज़ तुम डालो… और बदनाम भाभी को करते हो…
ये कह कर वो खिल-खिलाकर हँसने लगी…, मे भी उनके साथ हँसी में शामिल हो गया…!
हम दोनो को इस तरह ज़ोर-ज़ोर से हँसते हुए देख कर कामिनी भाभी वहाँ आ गयी और बोली-
क्या हुआ ?… ऐसी कोन्सि बात हो गयी, जो देवर भाभी इतने खुल कर हँस रहे हैं ? अरे भाई हमें भी तो कुछ बताओ…!
मोहिनी भाभी बात संभालते हुए बोली – अरे कामिनी ! ऐसी कोई बात नही है.. लल्ला जी एक जोक सुना रहे थे.. तो उसीको सुन कर हसी आ गयी…
कामिनी भाभी – देवर्जी हमें नही सूनाओगे…वो जोक..?
भाभी ने मुझे फँसा दिया.., अब मे उन्हें क्या जोक सुनाऊ..?
मुझे चुप देख कर वो ज़िद ले बैठी.. सूनाओ ना देवेर्जी… क्या अपनी बड़ी भाभी को ही सुना सकते हो.. हमें नही..!
अचानक से मेरे दिमाग़ में स्कूल के समय का एक जोक क्लिक कर गया जो मेरे दोस्त ने सुनाया था..
मेने कहा – ठीक है तो फिर सुनिए… लेकिन सेन्स आपको निकालना पड़ेगा…
जोक – “ सारी रात गुजर गयी, उसके इंतेज़ार में….
मगर वो नही आई.. और हिला के सोना पड़ा….??? “
दोनो भाभी मुँह बाए मुझे देखने लगी…..
मेने कहा – ऐसे क्या देख रही हो आप लोग…?
कामिनी भाभी – ऐसे जोक पसंद करते हो..? और वो भी हमारे सामने ही…?
मेने कहा – इसमें ग़लत क्या है…? ओह ! इसका मतलव आप कुछ और ही समझ रही हो…अरे भाई, सारी रात लाइट नही आई.. और पंखा हिला के सोना पड़ा….
इसपर दोनो खिल-खिलाकर हँसने लगी… ओह्ह्ह – तो ये था… हम तो कुछ और ही समझे… कामिनी भाभी बोली..
मेने कहा – आप क्या समझी….? हाहहाहा……!
वो झेंप गयी… और चुप-चाप वहाँ से चली गयी… मे और मोहिनी भाभी फिरसे हँसने लगे…
फिर भाभी थोड़ा सीरीयस होते हुए बोली – लल्ला ! निशा से कभी बात चीत होती है..?
मे – हां ! कभी कभार मे ही अपनी तरफ से फोन कर लेता हूँ..क्योंकि उसके पास मोबाइल तो है नही,
भाभी – वैसे तुम दोनो कितना आगे तक बढ़ चुके हो..? मेरा मतलव है, कि सिर्फ़ बात-चीत तक ही सीमित है या इसके आगे भी कुछ…
मेने भाभी के चेहरे की तरफ गौर से देखा, आज अचानक भाभी ने निशा की बात क्यों छेड़ी..? मे अपने मन में ये सोच ही रहा था कि वो फिर बोली..
क्या हुआ ? क्या सोचने लगे..? कुछ ऐसी-वैसी बात तो नही है ना..? मुझे बताओ अगर कुछ भी है तो…
मेने कहा – नही भाभी ऐसी-वैसी कोई बात नही है, बस ये सोच रहा था, कि आज अचानक से आपने ये बात क्यों छेड़ी..?
वो मुस्कराते हुए बोली – अरे लल्ला ! तुम परेशान ना हो, मे तो बस ऐसे ही पुच्छ बैठी, वैसे तुमने कोई जबाब नही दिया मेरी बात का..?
मेने कहा – बस एक दो बार किस ज़रूर किया था हम दोनो ने, उससे ज़्यादा और कुछ नही..
वो – तुम एक रात वहाँ रुके थे, तो बस इतना ही हुआ…?
कुछ सोचकर, मेने भाभी को उस रात की पूरी दास्तान सुना दी, कि कैसे मेरी रिक्वेस्ट पर निशा ने मुझसे अपने सारे कपड़े निकल्वाकर अपने नग्न रूप का दीदार करवाया था..
मेरी बातें सुनकर ना जाने क्यों भाभी की आँखें डब-डबा गयी, और उन्होने मुझे अपने गले से लगा लिया…
जब कुछ देर गले लगने के बाद वो अलग हुई, तो उनकी आँखों में आँसू देखकर मेने पूछा –
क्या हुआ भाभी, मुझसे कोई भूल हो गयी..?
उन्होने मेरे माथे को चूमकर कहा – मेरे लाड़ले से कोई भूल हो सकती है भला,
ये आँसू तो इस खुशी से निकल पड़े, कि जैसा मेने सोचा था, तुम दोनो का प्यार तो उससे भी बढ़कर निकला…
तुम दोनो जिस पोज़िशन में पहुँच चुके थे, वहाँ से वापस मुड़ना ही तुम्हारे सच्चे प्रेम को दरसाता है…
अब में तुम दोनो को मिलने के लिए सारी दुनिया से लड़ सकती हूँ…
भाभी की बातें सुनकर मे भी अपना कंट्रोल खो बैठा, और झपट कर उनके सीने से लग गया, मेरी आँखें भी भाभी का प्यार देख कर छलक पड़ी…
वो मेरी पीठ को स्नेह से सहलाती रही, कुछ देर हम इसी पोज़िशन में एक दूसरे से लिपटे रहे…
तभी रूचि वहाँ आकर हमारे पैरों से लिपट गयी, और हम दोनो एकदुसरे से अलग होकर उसके साथ खेलने लगे…
मनझले चाचा का लड़का सोनू भी अब मेरे साथ कॉलेज में ही पढ़ने लगा था, उसके आर्ट्स सब्जेक्ट थे, कभी-2 हम दोनो एक ही बाइक पर कॉलेज चले जाते थे…
आज भी वो मेरे साथ ही कॉलेज आया था… दो पीरियड के बाद एक पीरियड खाली था, तो मे लाइब्ररी में चला गया.. और स्टडी करने लगा….
कुछ देर बाद रागिनी आई और मेरे बगल में आकर बैठ गयी…. मेने जस्ट उसे हाई.. बोला और पढ़ने लगा…!
कुछ देर बाद वो बोली – अंकुश ! तुम्हें नही लगता कि तुम मुझे इग्नोर करने की कोशिश करते हो…!
मे – नही तो ! ऐसा तुम्हें क्यों लगता है.. बस में थोड़ा रिज़र्व टाइप का हूँ.. तो पढ़ाई पर ध्यान ज़्यादा रहता है मेरा…!
वो – जब मे तुमसे माफी भी माँग चुकी हूँ… तुमने मुझे अपना फ्रेंड भी मान लिया है… तो फ्रेंड के साथ भी ऐसा कोई वर्ताब करता है भला…?
मे – तुम ग़लत समझ रही हो मुझे… अच्छा एक बात बताओ… तुमने किसी और से भी कभी मुझे बात करते या गप्पें लगाते देखा है…?
वो – लेकिन मे किसी और में नही हूँ…, मे तुम्हारी दोस्त हूँ यार !
मे – मेरा कोई दुश्मन भी तो नही है कॉलेज में… सभी दोस्त ही हैं… अब मेरा नेचर ही ऐसा है तो इसमें तुम्हें बुरा मानने की ज़रूरत नही है प्लीज़…
वो – मे तुम्हारी खास दोस्त हूँ.., मुझे तो टाइम देना ही पड़ेगा तुम्हें..!
मे – खास दोस्त मतलव..! किस तरह की खास… क्या मेने कभी कहा तुम्हें कि तुम मेरी खास दोस्त हो…!
वो अपनी नज़रें झुका कर वॉली – वो मे तुम ना… मुझे अच्छे लगते हो .. मे..तुम्हें चाहने लगी हूँ…!
मे बहुत देर तक उसकी तरफ ही देखता रहा.. वो नज़र नीची किए हुए थी… फिर जब उसने मेरी ओर देखा तो मेने उससे कहा….
ये तुम क्या बोल रही हो… मुझे चाहने लगी हो मतलव.. कहना क्या चाहती हो.. साफ-साफ कहो प्लीज़… ये पहेलियाँ मत बुझाओ…
वो – मे तुमसे प्यार करने लगी हूँ… ये कह कर उसने मेरे दोनो हाथ अपने हाथों में ले लिए…
मे मुँह फाडे उसे देखता ही रह गया…फिर मेने थोड़ा सम्भल कर कहा… लेकिन मे तो तुम्हें प्यार नही करता…! मेरी दोस्ती को तुमने प्यार समझ लिया…!
वो – तो करो ना मुझे प्यार… क्या कमी है मुझमें… यहाँ कॉलेज ही नही पूरे टाउन में कितने सारे लड़के हैं, जो मुझे पाना चाहते हैं…
मे किसी और से प्यार करता हूँ… और उसे ही जिंदगी भर करता रहूँगा.. सो प्लीज़ ये सब बातें यहीं ख़तम करो और मुझे पढ़ने दो….!
वो – तो मे कॉन्सा तुम्हें जीवन भर प्यार करने के लिए कह रही हूँ, बस एक बार मुझे जी भरके अपना प्यार दे दो, उसके बाद मे तुम्हें कभी परेशान नही करूँगी… प्रॉमिस !
मे – तो ये कहो ना कि तुम मेरे साथ सेक्स करना चाहती हो…
वो – हां ! प्लीज़ अंकुश बस एक बार … देखो मान जाओ…
मे – नही मे ये नही कर सकता, प्लीज़ तुम मेरा पीछा छोड़ो…
वो – मान जा ना यार ! क्यों ज़्यादा भाव खा रहा है…
मेने कहा – मे यहाँ सिर्फ़ पढ़ने आता हूँ, ना कि इश्क फरमाने, तू जाके किसी और का दामन पकड़..
वो – लगता है, तू ऐसे नही मानेगा, तेरी अकल ठिकाने पर लानी ही पड़ेगी, उस दिन अपने भाई से बचाकर मेने भूल करदी, अब देख मे तेरा क्या हाल करवाती हूँ…
मे – जा तुझे जो अच्छा लगे वो कर, और मेरा पीछा छोड़..
इतना कह कर मे वहाँ से उठ कर बाहर चला आया, और बाइक उठाकर सीधा अपने घर का रास्ता नाप लिया…
मे अपने रूटिन के हिसाब से सुबह-सुबह अपने आँगन में कसरत और एक्सर्साइज़ कर रहा था…
वैसे तो घर में इस वक़्त तक केवल मोहिनी भाभी ही जाग पाती थी..
लेकिन आज पता नही कामिनी भाभी कैसे जल्दी उठ गयी और वो अपने कमरे से बाहर आई.. मुझे कसरत करते देख.. वो वहाँ आकर खड़ी हो गयी..
मेरा कसरती बदन देख कर वो मानो सम्मोहित सी हो गयी.. और मेरे पास आकर मेरे नंगे बदन को दबा-दबा कर देखने लगी….!
कभी बाजुओं को तो कभी कंधों को, या कभी मेरे सीने को टटोलकर देख रही थी…
मेने हँसकर कहा… क्या देख रही हो भाभी..?
वो – बिना जिम के आपका शरीर कितना मस्त फिट है.. कैसे..?
मे – अपनी देसी जिम है ना इससे, देख रही हो ना.. जो मे कर रहा हूँ.., अब यहाँ जिम तो है नही….देसी डंड ही पेलने पड़ते है…!
कुछ देर और देख-दाख के वो चली गयी… मे फिरसे अपने एक्सर्साइज़ में जुट गया.
अगले दो-तीन दिन रागिनी मुझे कॉलेज में दिखाई नही दी…मुझे कुछ गड़बड़ी की आशंका हो रही थी…
चौथे दिन मे जैसे ही कॉलेज से घर जाने को निकला… रागिनी का भाई आपने गुंडे साथियों को लेकर आ धमका….
सोनू मेरे पीछे बैठा था.. उन्होने मेरी बुलेट रुकवाई.. और गाली गलौच करने लगा… सोनू ने बीच में बोलना चाहा.. तो मेने उसे चुप रहने को बोला…
मे मामले को ज़्यादा तूल नही देना चाहता था.. लेकिन वो मुझसे उलझने के इरादे से ही आया था.. तो थोड़े से वार्तालाप के बाद ही उसने मेरे साथ मार-पीट शुरू कर दी…
सोनू भाई..ने बीच बिचाव करने की कोशिश की तो उन्होने उसको भी दो-चार थप्पड़ जड़ दिए..
उन्होने मुझे बहुत मारा.. होककी स्टिक से मेरा सर भी फोड़े दिया… लेकिन मेने अपना हाथ नही उठाया… देखने वालों की भीड़ जमा हो गयी…
फिर प्रिन्सिपल ने आकर मुझे बचाया… और मेरा फर्स्ट एड करवा कर घर भेज दिया..
चौपाल पर ही बाबूजी ने जब मेरे सर पर पट्टियाँ देखी… मेरे मुँह पर भी चोटों के निशान थे.. तो वो घबरा गये.. और उन्होने पूछ-ताच्छ की..
सोनू भैया ने उन्हें सारी बात बता दी.. उन्हें बहुत गुस्सा आया… सारे परिवार के लोग जमा हो चुके थे…
बाबूजी ने गुस्से में आकर भाभी से कहा – बहू अभी के अभी तुम कृष्णा को फोन लगाओ… उस ठाकुर की इतनी हिम्मत बढ़ गयी.. कि किसी के साथ भी कुछ भी करेगा…
मेने बाबूजी को समझाया… कि खमोखा बात को बढ़ाने से कोई फ़ायदा नही है..
सब ठीक हो जाएगा… अगर आगे कुछ और बात बढ़ती है तब देखा जाएगा..
कुछ देर समझाने के बाद वो मेरी बात मान गये,.. जब में घर के अंदर पहुँचा.. तो भाभी ने मुझे आड़े हाथों लिया, और चटाक से एक चान्टा मेरे गाल पर जड़ दिया…
क्योंकि सोनू ने बता दिया था कि मेने अपना हाथ नही उठाया था, इतना सब होने के बाद भी.., ये सुन कर उन्हें बड़ा दुख हुआ, और वो मेरे ऊपर भड़क गयी…
वो गुस्से से बोली – मुझे तुमसे ये उम्मीद नही थी लल्ला… तुमने आज मेरी उम्मीदों पर पानी फेर दिया..
मे – क्यों भाभी ? ऐसा क्यों कह रही हो..?
वो – मेने तुम्हें इसी दिन के लिए खिलाया-पिलाया था, … तुम्हारी देखभाल के.. कि तुम नामर्दों की तरह पिट-पिटा के घर लोटो…
मे जानती हूँ, अगर तुम चाहते तो उन हरामजादो को उनकी औकात दिखा सकते थे…लेकिन तुम तो खुद ही फूट-फाट कर चले आए…!
मे – मुझे माफ़ करदो भाभी…! आप ही ने तो मुझे शालीनता का पाठ पढ़ाया है, और आप ही मुझे मार-पीट करने को बोल रही हो..
वो – शालीनता का मतलव ये नही होता लल्ला… कि कोई तुम्हें मारता रहे.. और तुम चुप-चाप पिटते रहो… अपराध को सहन करना भी अपराध ही होता है… वादा करो.. आइन्दा ये नौबत नही आएगी.
मेने उन्हें वादा किया कि ऐसा से आगे कभी नही होगा… तो उन्होने मुझे लाड से अपने सीने से लगा लिया और मेरी तीमारदारी में जुट गयीं..
मे दो दिन कॉलेज नही गया… क्योंकि सर की चोट थोड़ा गहरी थी, बदन पर भी चोटों की वजह से दर्द सा था..
तीसरे दिन जब मे कॉलेज पहुँचा.. तो मुझे देखकर रागिनी मेरा मज़ाक उड़ाने लगी.. और मुझे सुना सुनकर अपनी सहेलिओं से कहने लगी…
क्यों री तुम लोग तो इसे हीरो समझ रही थी.. ये देखो इस चूहे की क्या गत बना दी मेरे भाई ने…
उसकी सहेलियों ने कुछ नही कहा.. वो चुप-चाप उसकी बकवास सुनती रही.. फिर वो आगे बोली –
कुछ लोगों को अपने ऊपर बड़ा गुमान हो जाता है.. और अपने आप को पता नही क्या समझने लगते हैं..!
मुझसे अब और बर्दास्त नही हुआ.. और उसके सामने खड़े होकर बोला – ये मेरी शालीनता की इंतेहा थी… जो अब ख़तम हो गयी…
अब तू अपने उस मवाली भाई से बोल देना, भूल से भी मेरे सामने ना पड़े.. वरना हॉस्पिटल में पड़ा अपनी हड्डियों की गिनती करता नज़र आएगा…!
और तू, साली छिनाल…, क्या कह रही थी, कि तेरे अलावा कोई और मुझसे प्यार करेगी उसका खून पी जाएगी..हां ! यही औकात है तुम लोगों की…दूसरों का खून पीना तुम लोगों की आदत जो है..
मेरी बातें सुनकर वहाँ खड़े सभी लोग अचंभे में पड़ गये… क्यों की उनको सच्चाई का अंदाज़ा ही नही था अब तक…!
रागिनी भुन-भुनाकर वहाँ से चली गयी अपने घर.., सब लोग आपस में ख़ुसर पुसर करने लगे.. उन्हें रागिनी से इतनी ओछि हरकत की उम्मीद नही थी.
लेकिन अब सबको लग रहा था.. कि आने वाले पलों में कोई बहुत बड़ा तूफान आने वाला है..
क्योंकि उन्हें उसके भाई के बारे में जो पता था, उसके हिसाब से अब वो मुझे छोड़ेगा नही…
मे वहाँ से अपनी क्लास में चला गया… और सारे पीरियड अटेंड किए…
कॉलेज के बाद जैसे ही मे स्टॅंड पर पहुँचा अपनी बाइक लेने, तभी एक लड़का भागता हुआ आया.. और बोला…
अंकुश, तू कही छुप जा.. रागिनी का भाई आया है अपने गुण्डों के साथ…
मेने कहा – कहाँ है…?
वो बोला – वो गेट पर खड़ा तेरा ही इंतेज़ार कर रहा है…
मे बिना बाइक लिए गेट की तरफ बढ़ गया… सोनू भाई ने मेरा बाजू पकड़ते हुए मुझे रोकने की कोशिश की..
मेने उसके हाथ से अपना बाजू छुड़ाया और बोला – भैया मुसीबत से छुटकारा पाना है तो उसका सामना करना पड़ता है, वरना वो और बढ़ जाती है..
आप चिंता मत करो.. मुझे कुछ नही होगा.. आप बस देखते जाओ…
मे गेट पर जैसे ही पहुँचा, वो गुटका रागिनी का भाई..मेरी ओर लपका और बोला- क्यों रे लौन्डे .. !
लगता है अभी ढंग से मरम्मत नही हो पाई है तेरी…, क्या बोल रहा था तू.. मेरी बेहन को..?
मे – तू ही बता दे क्या कह रहा था मे, तेरी उस छिनाल बेहन से…
मेरे मुँह से अपनी बेहन के लिए ऐसे अप-शब्द सुनने की उसे उम्मीद नही थी.. वो दाँत भींचते हुए मेरी तरफ बढ़ते हुए चीखा…उसके साथ उसके चम्चे भी बढ़े…
अब तू जिंदा नही बचेगा हरामजादे…
मेने उसे हाथ के इशारे से रोका… और कहा –
अगर तू असल बाप से पियादा है… तो अकेला लड़ के दिखा…फिर देख कॉन हरामजादा है और कॉन नही…..
उसे मेरी बात लग गयी.. और उसने अपने साथियों से कहा – कोई मेरे साथ नही आएगा… इससे में अकेला ही निपटाउंगा…उसके साथी जहाँ थे वहीं खड़े रह गये…
मेरे चेहरे पर स्माइल आ गयी…और मेने उसे अपनी उंगली का इशारा कर के अपनी तरफ आने को कहा…
मेरे इस तरह इशारा करने से उसकी झान्टे और ज़्यादा सुलग उठी…वो अपने दाँत पीसते हुए मेरी ओर झपटा……….!
मे अपनी टाँगें चौड़ा कर, कमर पर हाथ रखे खड़ा उसका इंतेज़ार कर रहा था… कोई 10 फीट दूर से उसने तेज़ी से मेरे ऊपर झपट्टा मारा, जैसे आम तौर पर गुंडे मार-पीट में करते हैं…..
वो पूरी तरह कॉन्फिडेंट था, कि इस कल के लौन्डे को दो मिनिट में ही धूल चटा देगा…
मेने अपनी रोज़ की एक्सर्साइज़ का दाव अपनाते हुए, मे अपने एक पैर पर बैठ गया.. और दूसरा पैर ज़मीन के पॅरलेल रखा,
चूँकि में साइड में एक पैर पर बैठ चुका था, तो वो सीधा झोंक में मेरे बगल से गुज़रता चला गया, जिधर मेरा दूसरा पैर ज़मीन के समानांतर था, तभी मेने उसी पैर से उसको अड़ंगी मार दी…
वो झोंक में पैर की अड़ंगी लगने से भडाम से मेरे पीछे जाकर मुँह के बल ज़मीन पर गिरा…
मे उसके पीछे जाकर फिर से खड़ा हो गया.., अब वो और गुस्से में आ चुका था… उसका चेहरा गुस्से से तम तमा उठा… मे भी यही चाहता था..
वो उठ कर खड़ा हुआ और पलट कर किसी भैंसे की तरह हुंकारता हुआ फिर से पूरा दम लगाकर मेरे ऊपर झपटा..
मे वहीं के वहीं अपने एक पैर पर घूम गया… वो झोंक में आगे को बढ़ता चला गया… इतने में मेने फिरकी लेते हुए, पीछे से उसकी गान्ड पर किक जमा दी…
वो अपने को संभाल ना सका और फिरसे मुँह के बल जा गिरा…, इस बार वो ज़्यादा तेज़ी से पक्की ज़मीन पर गिरा था, सो इस वजह से उसका होंठ फट गया और उसमें से खून रिसने लगा…
कॉलेज के तमाम लड़के-लड़कियाँ वहाँ जमा हो चुके थे… वो कुछ देर तक पड़ा रहा.. तो मेने उसको ललकारा… उठ… आ.. आजा.. क्या हुआ… निकल गयी तेरी सारी हेकड़ी..
ये कहते हुए मे उसके सर के ऊपर जा खड़ा हुआ.., यहाँ उसने फुर्ती दिखाते हुए मेरे दोनो पैर पकड़ लिए और एक तेज झटका दिया.. मे पीछे को अपनी गान्ड के बल जा गिरा…
इतना ही नही, उसने फुर्ती दिखाते हुए मेरे ऊपर जंप भी लगा दी, और मेरे सीने पर सवार हो गया…
वो मेरे सीने पर बैठकर उसने मेरे गले को कस कर पकड़ लिया और उसे पूरा दम लगाकर दबाने लगा…
दाँत पीसते हुए बोला – तू तो गया लौन्डे, ग़लत आदमी से पंगा ले बैठा तू मादर्चोद….
मेरे गले की नसें तक फूलने लगी थी, मेने मन ही मन सोचा कि अब अगर जल्दी ही कुछ नही किया, तो ये मेरे ऊपर हाबी हो जाएगा…
ये सोचते ही मेने अपने दोनो टाँगों को फुर्ती से हवा में लहराया, यहाँ तक कि मेरी कमर भी हवा में उठ गयी…और देखते ही देखते मेने अपनी लंबी टाँगों को उसकी गर्दन में केँची की तरह लपेट दिया…
टाँगों में एक जोरदार झटका देकर मेने उसे अपने से दूर उछाल दिया…
इससे पहले कि वो उठ कर मुझ पर अगला वार कर पाता.. मे अपनी साँसों को नियंत्रित कर के फुर्ती से उच्छल कर उठ खड़ा हुआ…
वो भी खड़ा हो चुका था, और उसने मुझे मारने के लिए अपना मुक्का चलाया…, जिसे मेने हवा में ही थाम लिया.. और उसी बाजू को लपेटते हुए, उसके शरीर को अपनी पीठ पर लेकर एक धोबी पछाड़ दे मारा…
धोबी पछाड़ एक ऐसा दाँव है, जिसके बाद अच्छे-अच्छे पहलवान दोबारा उठ नही पाते…
पक्की सड़क पर ज़ोर से वो पीठ के बल पड़ा, ….साले की कमर ही चटक गयी…
अपने बॉस का हश्र देख कर उसके चम्चे आगे बढ़े… तो उनमें से एक को सोनू भाई ने लपक लिया.. और तीन को मेने लात घूँसों पर रख लिया..
फिर वाकी के स्टूडेंट्स को भी लगा.. कि ये ग़लत हो रहा है, तो वो भी हमारी हेल्प के लिए आ गये…
मार-मार कर उन पाँचों का भुर्ता बना दिया… 10 मिनिट में ही वो साले ज़मीन पर पड़े कराह रहे थे… मेने रागिनी के भाई को कॉलर पकड़ कर जबर्जस्ती से खड़ा किया और उसका मुँह दबाकर बोला-
बेटा ! अभी तो ये ट्रेलर था, मुझे अभी अपनी औकात दिखाना वाकी है… आशा करता हूँ.. तेरे भेजे में ये बात आ गयी होगी… कि सब जगह तुम लोगों की दबन्गयि नही चल सकती…!
सच्चाई जाननी हो तो अपनी उस नासमझ बेहन से पुच्छना, कि असल बात क्या थी….!
इतना कहकर मेने उसे पीछे को धक्का दिया और वहाँ से चल दिया…..
पीछे से सभी स्टूडेंट्स तालियाँ बजकर मुझे अप्रीश्षेट कर रहे थे…!
रात को हम सब खाने की टेबल पर बैठे डिन्नर कर रहे थे.. बाबूजी पहले ही खाना खा लेते थे… क्योंकि उन्हें ट्यूबिवेल पर सोने जाना होता था…
वैसे आजकल उनकी मंझली चाची के साथ अच्छी ट्यूनिंग चल रही थी…, घर का सारा हिसाब किताब तो भाभी के कंधों पर डाल दिया था, जिसमें वो मेरी और दीदी की मदद भी ले लेती थी.
खाना खाते समय मोहिनी भाभी बोली – कामिनी ! तुम कार चला लेती हो ना !
कामिनी – हां दीदी ! मे तो बहुत पहले से ही चलाना सीख गयी थी…
भाभी – तो फिर ये इतनी बड़ी गाड़ी दरवाजे पर खड़ी क्यों है… देवर जी भी ले नही गये, और शायद फिलहाल उनका कोई इरादा भी नही है.. तो ये भी कुछ थोड़ी बहुत चलनी तो चाहिए ना…, वरना खड़े-2 बेकार ही हो जाएगी…!
कामिनी – हां दीदी ! बात तो आपकी सही है, लेकिन यहाँ ज़रूरत भी तो नही पड़ती कहीं आने जाने की…
भाभी – वही तो ! अब कोई चलाना जाने तो ज़रूरत पड़ने पर ले तो जा सकते हैं.. क्यों ना तुम लल्ला जी को गाड़ी चलना सिखा दो…, वो सीख गये तो ज़रूरत पड़ने पर काम तो आएगी…
कामिनी – लेकिन दीदी ! यहाँ गाँव में कहाँ है जगह सीखने लायक… ले देके एक सिंगल पुराना सा रोड है… उसपे तो वैसे ही चलना मुश्किल होता है, सीखने की तो बात ही अलग है…
भाभी – लल्ला.. ! अपने गाँव से थोड़ा दूर पर एक उसर पड़ी बहुत सारी ज़मीन थी ना..! वहाँ जाके सीख सकते हो ना..!
मे – हां भाभी ! वो बहुत बड़ी ज़मीन है… और समतल भी… क्रिकेट के टूर्नमेंट भी लोग करते हैं वहाँ..कभी-2…
कामिनी – अच्छा ! फिर तो बात बन सकती है.. एक काम करते हैं… कल हम सब लोग चल्लेन्गे.. एक बार देख लेते हैं उसे.. फिर मे देवर जी को सिखा दूँगी.. उसमें कोई बहुत बड़ी बात नही है..
मे कार सीखने की बात से बहुत एक्शिटेड था… जैसे-तैसे रात काटी, और सुबह ही नाश्ता पानी निबटा के हम चारों गाड़ी लेकर चल दिए मैदान देखने…
ये गाँव से कोई 2-ढाई किमी दूर था.. जाकर देखा तो कामिनी भाभी खुश हो गयी.. और बोली –
एक दम परफेक्ट ग्राउंड है… अब देखना देवर जी, मे आपको एक हफ्ते में ही कार चलाना सिखा दूँगी…
तो भाभी बोली – शुभ काम में देरी क्यों ? शुरू करदो आज से ही…,तो कामिनी भाभी बोली – आप लोगों के साथ थोड़ा रिस्क रहेगा…
भाभी – तो हमें किसी पेड़ के नीचे उतार दो.. घंटा, आधा घंटा बैठे रहेंगे.. क्यों रामा ? ठीक है ना.. !
रामा – हां भाभी ! हम लोग दूर से ही देखते रहेंगे… आप लोग शुरू करो..
मैदान के पास से ही एक नहर (केनाल) निकलती है.. तो उसके किनारे एक पेड़ के नीचे वो दोनो बैठ गयी.. और कामिनी भाभी ने फिर एक बार गाड़ी को मैदान में लाकर एक जगह खड़ी कर दी…
वो मुझे समझते हुए बोली – देखो देवर जी, अब जो मे आपको बताने जा रही हूँ, उसे ध्यान से देखना और अपने दिमाग़ में अच्छे से सारी बातें बिठा लेना…
फिर उन्होने सारे मेकॅनिसम को बताया, ये गियर हैं… और इस तरह से डाले जाते हैं.. और उन्होने फिज़िकली डलवा कर भी बताए..
उसके बाद, क्लच, एक्शीलाटोर सबकी नालेज दी… वाकई फंक्षन सब जैसा आप बाइक चलाते हो वैसा ही रहेगा ओके…
मेने समझने वाले अंदाज में अपनी मुन्डी हलाई,
इतना सब कुछ समझा कर उन्होने मुझे ड्राइविंग सीट पर बिठा दिया और खुद साइड सीट पर आ गयी… मेने चाबी घुमा कर गाड़ी स्टार्ट की… स्टार्ट होते ही मेरे शरीर में कंप-कपि सी होने लगी…
भाभी ने कहा.. डरो नही अब क्लच को पैर से दबाकर फर्स्ट गियर डालो… और धीरे-2 से क्लच को छोड़ो…
गियर डालकर मेने धीरे से क्लच से पैर का दबाब कम किया लेकिन गाड़ी नही बढ़ी…तो और दबाब कम किया, फिर भी नही बढ़ी, फिर एक साथ ज़्यादा पैर ऊपर हो गया और गाड़ी एक झटके के साथ आगे बढ़ी..
झटका थोड़ा ज़्यादा था, तो मेरा चेस्ट स्टीरिंग से जा टकराया… मेरा ध्यान क्लच की तरफ था, तो स्टीरिंग लहराने लगी..
भाभी भी डर गयी.. और उन्होने झट से स्टर्रिंग को एक हाथ से संभाला और बोली – देवर जी ध्यान स्टीरिंग पर रखो और उसे सीधा रखने की कोशिश करो.
वो स्टर्रिंग को संभालने की कोशिश कर रही थी.. और मे उसे सीध रखने की.. बात बिगड़ गयी और गाड़ी एक तरफ को भागने लगी…
भाभी चिल्लाई – क्या कर रहे हो ? स्टीरिंग छोड़ो.. और एग्ज़िलेटर से अपना पैर हटाकर उसे ब्रेक पर रखो..
मेने स्टीरिंग छोड़ कर एग्ज़िलेटर से पैर हटा कर जैसे ही ब्रेक पर रखा, वो एकदम से डूब गया और गाड़ी झटके खाकर बंद हो गयी…
भाभी – उफफफफफ्फ़… आपको सिखाना थोड़ा मुश्किल होगा.. आप थोडा इधर आके बैठो और मे जैसा करती हूँ, उसे पहले ध्यान से देखो..
हम एक बार फिरसे बदल गये.. भाभी गाड़ी समझाते हुए चलाने लगी.. और बोली – देखो कितना आसान है.. इसमें क्या है..?
06-01-2019, 02:18 PM, #101
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RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
हम फिर से अदला बदली कर के बैठ गये और फिर कोशिश की… नतीजा ढाक के तीन पात….! फिरसे वही ग़लती हो गयी, और गाड़ी झटके खाकर फिरसे बंद हो गयी…
कामिनी भाभी बोली – इतना आसान काम भी आपसे नही हो पा रहा,
मेने कहा – ये आपके लिए आसान होगा भाभी, क्योंकि आप जानती हैं, लेकिन मेरे लिए तो ये अभी बहुत मुश्किल लग रहा है…
मेरी बात समझते हुए वो बोली – सही कह रहे हो, अब आपको सिखाने का एक ही तरीक़ा है..,
मेने पूछा – क्या ?
तो वो थोड़ा मुस्कराते हुए बोली – कल ही बताउन्गी, अब चलो चलते हैं यहाँ से.., अब कल से ही शुरू करेंगे…,
फिर हमने उन दोनो को भी वहाँ से पिक किया और घर वापस लौट लिए…
दूसरे दिन मंडे था, मे सुबह-2 कॉलेज चला गया… अपने पीरियड अटेंड किए..
फिर जैसे ही घर निकलने लगा… तो कुछ दोस्तों ने मुझे रोक लिया… और उस दिन हुई घटना के बारे में चर्चा करने लगे…
मेने उन सबको साथ देने के लिए थॅंक्स बोला,… उनमें से कुछ ने प्रॉमिस किया.. कि वो हमेशा उसके साथ रहेंगे…
ज़्यादातर का विचार था कि रागिनी और उसका भाई ग़लत हैं.. और उन्हें जो सज़ा मिली है वो एकदम सही है..
उसके बाद मे घर आया, खाना- वाना ख़ाके.. थोड़ा लेक्चरर रिव्यू किए.., कोई 3 बजे कामिनी भाभी मेरे पास आई और गाड़ी सीखने जाने के लिए कहा..
वो आज भी साड़ी- ब्लाउज में ही थी.. जो एक गाँव में ससुराल के चलन के हिसाब से अवाय्ड नही किया जा सकता था.. पहनना मजबूरी थी..
फेब्रुवरी का एंड था, ज़्यादा ठंड भी नही थी तो मेने भी एक ट्रॅक सूट पहन लिया और चल दिए गाड़ी सीखने…
ग्राउंड में पहुँच कर भाभी ने गाड़ी खड़ी की और मुझे कहा – देवर्जी.. ज़रा बाहर जाकर खड़े हो जाओ…
मेने कहा – क्यों भाभी..?
वो – अरे बस थोड़ी देर के लिए… जाओ तो सही… मे बाहर उतर गया.. वो भी बाहर आ गयी और बोली – गाड़ी के पीछे खड़े होकर देखो, कोई इधर-उधर है तो नही..
मे पीछे जाकर चारों तरफ नज़र दौड़ा कर देखने लगा.. भाभी पीछे की सीट पर गयी, वहाँ जाकर उन्होने अपनी साड़ी और ब्लाउज निकालकर एक टीशर्ट पहन ली….
नीचे वो पेटिकोट की जगह एक स्लेकक जैसी पहने हुए थी, जो बहुत ही सॉफ्ट और हल्की एकदम फिट.., साड़ी मोटे कपड़े की होने की वजह से पता नही चला कि वो पेटिकोट पहने थी या नही..
वो फिर से बाहर आकर साइड वाली सीट पर बैठ गयी और मुझे आवाज़ दी कि अब आ जाओ..
मेने जैसे ही उन्हें देखा… मेरा तो मुँह खुला का खुला रह गया… गाढ़े लाल रंग की टीशर्ट और ब्लू स्लेकक जो दोनो ही इतने टाइट फिट की उनके शरीर का एक एक कटाव साफ-साफ दिख रहा था,.. इन कपड़ों में वो एकदम माल लग रही थी..
ऐसे क्या देख रहे हो…? भाभी ने जब मुझसे कहा… तब मेरी तंद्रा टूटी….
मेने अपना सर झटक कर कहा – ये आपने इतनी जल्दी चेंज कर लिया… ? पर भाभी आपको यहाँ किसी ने इन कपड़ों में देख लिया तो..?
वो – यहाँ कॉन जानता है कि हम कॉन हैं..? वैसे साड़ी में आपको ड्राइविंग सिखाना मुश्किल पड़ता इसलिए मेने कल नही सिखाया ..
अब चलो गाड़ी स्टार्ट करो, देखें कितना तक कर पाते हो…
मे ड्राइविंग सीट पर बैठा, और गाड़ी स्टार्ट की, फिर वो जैसे-2 बताती गयी… क्लच दबाया, फिर फर्स्ट गियर डाला, और गाड़ी आगे बढ़ाई कि वो साली फिरसे झटका खाकर बंद हो गयी…
भाभी बोली – अभी आपके बस का नही है… अब मुझे ही बैठना पड़ेगा आपके पास.. तभी कुछ हो पाएगा..
फिर वो उतर कर मेरी तरफ आई, गेट खोल कर बोली.. चलो खिस्को उधर….
मे थोड़ा गियर साइड को खिसक गया.. और आधी सीट उनके लिए खाली कर दी…
वो मेरे साथ सॅट कर बैठ गयी… मेरी तो सिट्टी-पिटी गुम हो गयी यार…
क्या अहसास था उनकी मांसल जाघ के टच होने का मेरी जाँघ के साथ… ऊपर से ना जाने कॉन्सा पर्फ्यूम लगाया था उन्होने…
उनके टच और बदन की मादक खुश्बू से मेरा शरीर झनझणा गया… उनकी खनकती आवाज़ से मे होश में लौटा..
वो बोली – अब गाड़ी स्टार्ट करो…देवर्जी ! या ऐसे ही बैठके मुझे देखते रहोगे..
अपनी तो साली इज़्ज़त की वाट लग गयी.. और मेरी स्थिति पर वो मन ही मन खुश हो रही थी..
मेने गाड़ी स्टार्ट की.., उन्होने कहा अपना लेफ्ट पैर क्लच पर रखो… मेने रख लिया.. फिर उन्होने राइट पैर को एग्ज़िलेटर पर रखने को कहा…और मुझे स्टीरिंग पकड़ा दी…
फिर उन्होने मेरे पैरों के ऊपर से अपना भी एक पैर भी रख लिया और क्लच दबा कर गियर डालने को कहा….
मेने ठीक वैसा ही किया… फिर वो बोली.. देखो एग्ज़िलेटर जब तक में ना कहूँ दबाना मत और क्लच से जैसे – जैसे में आपके पैर के ऊपर से अपने पैर का दबाब कम करूँ, आप भी उतना ही उसको छोड़ते जाना… ठीक है…
मेने हां में सर हिलाया.. लेकिन मेरा दिमाग़ आधा उनके रूप लावण्य और टाइट फिट कपड़ों से उभरते हुए यौवन पर ही अटका पड़ा था…
फिर उन्होने जैसे-2 अपने पैर का दबाब हटाया.. मे भी अपना पैर ऊपर करता गया..
उन्होने झिड़कते हुए कहा.. पूरा पैर क्यों उठाते हो…खाली पंजे का दबाब कम करना है.. हील गाड़ी के फ्लोर पर ही टिकी रहनी चाहिए…
फिर मेने वैसे ही किया.., अब गाड़ी बिना एंजिन बंद हुए आगे को बढ़ने लगी…
वो बोली – यस ! अब स्टीरिंग को जस्ट देखो… और गाड़ी तुम्हारे हिसाब से दूसरी तरफ जाती हुई दिखे तभी उसे हल्के से दिशा देना है… अब थोड़ा-2 एग्ज़िलेटर पर दबाब डालो..
मेने जैसे ही पैर दबाया.. वो थोड़ा ज़्यादा दब गया और गाड़ी झटके के साथ आगे बढ़ने लगी.. हड़बड़ी में मे स्टीरिंग संभालना भी भूल गया..
देखते-2 गाड़ी मैदान से बाहर की तरफ जाने लगी… भाभी एकदम से चिल्लाई.. सम्भालो.. और उन्होने झटके से अपने हाथ स्टीरिंग पर लगाए तो उनकी मांसल गोरी-2 नंगी बाहें मेरे सीने से रगड़ने लगी..
गाड़ी तो कंट्रोल हो गयी.. लेकिन अब भाभी का शरीर मेरे शरीर से और ज़्यादा सॅट गया.. मुझे कंपकपि सी होने लगी…
अभी में अपने होश इकट्ठा करने की कोशिश में ही था… कि तभी वो बोली – देवर जी.. देखो गाड़ी के एंजिन की आवाज़ ज़्यादा है.. इसका मतलव अब तुम्हें दूसरा गियर डालना पड़ेगा..
और उन्होने मेरे क्लच वाले पैर को दबा दिया.. जब क्लच दब गयी तो वो बोली – अब एग्ज़िलेटर कम करो… और दूसरा गियर डालो..
मेने एग्ज़िलेटर कम कर के दूसरा गियर डाला तो वो नही पड़ा.. क्योंकि मे उसे न्यूट्रल स्लॉट में लाना भूल गया था…
वो – अरे.. क्या करते हो देवर जी.. डालो ना.. मेने कहा – पड़ ही नही रहा भाभी..मे क्या करूँ..?
तो फिर उन्होने अपना हाथ लंबा कर के गियर डालने के लिए बढ़ाया.. जिससे उनकी एल्बो…आहह….मेरे लंड को दबा दिया… मेरे मुँह से अह्ह्ह्ह… निकल गयी…
गियर तो पड़ गया… और उन्होने अपनी एल्बो का दबाब भी कम कर दिया.. लेकिन
लेकिन मेरे नाग को जगा दिया… जिसको अब यहाँ मनाने का कोई इलाज़ संभव नही था…
मेरी आह… सुन कर उन्होने एक नज़र मेरी ओर देखा और मुस्करा उठी…
अब लगभग गाड़ी का सारा कंट्रोल तो उनके हाथ में ही था.. तो दूसरे गियर में भी गाड़ी अच्छे से चल रही थी, लेकिन ऐसे हम दोनो को ही बड़ी दिक्कत हो रही थी.
कुछ देर के बाद उन्होने गाड़ी रोक दी और गेट खोल कर बाहर निकल गयी…
उतरो.. उन्होने आदेश सा दिया… मे बाहर आ गया.. तो उन्होने सीट का लीवर उठाकर सीट को थोड़ा और पीछे को कर दिया..
अब बैठिए… वो बोली .. मे सीधा तन्कर बैठ गया..
वो बोली – अरे आराम से पीठ टिका कर बैठिए… जब मे उनके हिसाब से बैठ गया.. तो वो फिर बोली –
अपनी टाँगें चौड़ी करिए…, मेने अपनी टाँगें चौड़ी करदी.., अब मेरे आगे काफ़ी जगह बन गयी थी,
मे अभी ये सोच ही रहा था, कि आख़िर इनका आइडिया है क्या, तभी वो मेरे आगे की जगह पर आकर बैठ गयी…
सत्यानाश हो सिचुयेशन का……वैसे भी साला शरीर में गर्मी बढ़ने लगी थी..
अब ये गुदगूदे रूई जैसे सॉफ्ट कूल्हे एकदम मेरे खुन्टे के सामने रखे थे, वो भी एकदम सट कर,
उनके कपड़े तो वैसे भी इतने सॉफ्ट और टाइट फिट थे, कि उनका होना ना होना एक बराबर था…
ऊपर से उनकी टाइट टीशर्ट से झँकते आमों के उभर और उनका दूध जैसा गोरा सफेद चित्त क्लीवेज मेरी आँखों के ठीक सामने था,
सोने पे सुहागा… उनके बदन से उठती मादक सुगंध….,
कुल मिलकर मेरे लॉड की माM-बेहन एक होने लगी…., वो मेरे शॉर्ट के अंदर किसी ग़ुस्सेल नाग की तरह फुफ्कार मारने लगा…!
ऊपर से मुशिबत ये, कि दोनो के बीच इतनी जगह भी नही थी, कि अपना हाथ डालकर उसे अड्जस्ट भी कर सकूँ… साला एक्दाM खूँटे की तरह खड़ा होकर उनकी कमर में ठोकरें मारने लगा…
आख़िर में मेने हथियार डालते हुए कहा… भाभी छोड़िए.., अब घर चलते हैं, ये गाड़ी चलाना मेरे बस का नही है……!
उन्होने तिर्छि नज़र कर के मेरी तरफ देखा… अब उनके कंधे का दबाब भी मेरे सीने पर था, और नज़रों का तीखापन देख कर… मेरी रही सही हिम्मत की माँ चुद गयी…
यहाँ तबसे मज़ाक चल रहा है.. उहोने किसी इन्स्ट्रक्टर की तरह कड़क आवाज़ में कहा … चलो चुप चाप गाड़ी स्टार्ट करो.. ऐसा कोई काम है जो इंसान ना कर सके..
बात वो नही थी कि मुझे कोई प्राब्लम हो रही थी…, मेरे लौडे के तो मज़े हो रहे थे, बहुत अच्छा भी लग रहा था… लेकिन मेरे लंड महाराज की उत्तेजना लगातार बढ़ती जा रही थी उसका क्या किया जाए…?
नयी भाभी.. ठीक से अभी तक हसी मज़ाक भी नही हो पाई थी उनके साथ…, ऊपर से एमएलए की बेटी और एसपी की बीवी.., साला कुछ उल्टा-पुल्टा हो गया…., तो इतने जूते पड़ेंगे की गान्ड लाल हो जाएगी… बस ये डर सताए जा रहा था मुझे…!
अब शुरू करो… या सोचते ही रहोगे… ? उनके एक साथ झटके से बोलने पर मेरे हाथ पैर और ज़्यादा फूल गये…, फिर भी काँपते हाथों से मेने गाड़ी स्टार्ट की…
भाभी मेरी स्थिति पर मन ही मन खुश हो रही थी… लेकिन मान-ना पड़ेगा.. कमाल की आक्टिंग थी उनकी…
मज़ाल क्या है…, ज़रा भी फेस पर ऐसा एक्सप्रेशन आने दिया हो कि वो मेरे मज़े ले रहीं हैं…
चलो अब वो सब दोहराओ.. जो पहले कर चुके हैं.. गाड़ी अनकंट्रोल दिखेगी तो ही मे हाथ लगाउन्गी…
मेने क्लच दबा कर गियर डाला.. और धीरे-2 क्लच छोड़ा.. शुरुआत तो सही हुई.. लेकिन लास्ट में झटका लग ही गया.. और वो स्टीरिंग की तरफ झुक गयी…
मे भी झटके से उनकी पीठ से चिपक गया.. झुकने से उनके दशहरी आम एक दम से मेरी नज़रों के सामने आ गये…,
दूसरा सबसे बुरा ये हुआ कि, मेरे सीने के दबाब से वो जैसे ही आगे को हुई, उनकी मखमली गान्ड थोड़ी अधर हो गयी…
लंड महाराज तो इसी ताक में थे, कि कब स्पेस मिले, सॅट्ट से गान्ड के नीचे सरक गये…, और गान्ड की दरार के उपरी भाग पर कब्जा जमा लिया…
खैर.. मेरे पप्पू की तो बल्ले-2 हो रही थी.. लेकिन अपनी तो साली आफ़त में जान अटकी पड़ी थी.., भाभी की गुदगुदी गान्ड के स्पर्श मात्र से ही वो फूल कर कुप्पा हुआ जा रहा था…
भाभी गाड़ी संभालते हुए बोली – कोई बात नही.. ये अच्छा है, कि इस बार गाड़ी बंद नही हुई.. गुड.. अब थोड़ा-2 एग्ज़िलेटर दो…
पैर फिर से थोड़ा ज़्यादा दब गया एग्ज़िलेटर पर, .. और गाड़ी फिर से झटके से आगे बढ़ी.. स्टेआरिंग थोड़ा डिसबॅलेन्स हुई… तो भाभी ने अपने हाथ मेरे हाथों के ऊपर रख कर उसे कंट्रोल कर लिया..
लेकिन उनकी गान्ड और मेरे खूँटे के बीच एक अच्छा सा घिस्सा लग गया…
जब गाड़ी कंट्रोल हुई.. तो उन्होने क्लच दबा कर गियर चेंज करने को कहा.. मेने क्लच तो दबा दी लेकिन एग्ज़िलेटर कम नही किया.. गाड़ी का एंजिन हों..हों.. करने लगा…
भाभी – देवर्जी ! मेने कितनी बार कहा है.. कि जब क्लच दबाओ तो एग्ज़िलेटर नही देना है….. क्या बुलेट भी ऐसे ही चलाते हो..?
मेने दूसरा गियर ठीक से चेंज कर के कहा – वो तो मेरी प्रॅक्टीस में आ गयी है.. इसलिए…, अब इन्हें कॉन बताए, की इस सिचुयेशन में जो भी आता है वो भी भूले बैठे हैं…
अब धीरे – 2 मेरा थोड़ा-2 कॉन्फिडॅन्स आने लगा था.. तो वो बोली- गुड ! वैसे उसी एक्सपीरियेन्स से इसको भी कंट्रोल करो…
जब गाड़ी ठीक से चलने लगी… तो मेने कहा भाभी अब तीसरा डालूं…
वो – नही, आज दो तक ही प्रॅक्टीस करो.. यहाँ तक की अच्छी प्रॅक्टीस होने दो..
उनके हाथ अभी भी मेरे हाथो पर ही थे..
जब गाड़ी सही से कंट्रोल में आने लगी.. तो मेरा ध्यान भटकने लगा… वो मेरे सीने से अपनी पीठ टिकाए हुए थी… मेरा पप्पू उनकी गान्ड की दरार के साथ शरारत कर रहा था…
उसका मे फिलहाल कुछ कर भी नही सकता था, क्योंकि मेरे पास पीछे हटने के लिए स्पेस भी नही था…
लाख कंट्रोल के बबजूद भी वो, गाहे-बगाहे ठुमके मार ही देता था,
उसकी ठोकर भाभी को भी महसूस हो रही थी… मेरा मुँह उनके कान के बिल्कुल पास था… और नाक से निकलने वाली हवा उनके कान की लौ को सर-सरा रही थी…
ऐसे मादक बदन की महक और जवानी से लवरेज़ यौवन अगर किसी युवक की गोद में हो तो ये कहना बेमानी होगी.. कि वो अपने आप पर कंट्रोल रख पाएगा…
मेने अपना मुँह उनके गाल के पास करलिया.. मेरे होंठों और उनके गाल का फासला ना के बराबर था.. मेरे मुँह की भाप से वो भी उत्तेजित हो रही थी…
ना जाने कब उनके हाथ स्टेआरिंग से हटकर मेरी जांघों पर आ गये और वो धीरे-2 उन्हें सहलाने लगी…
उनकी ज़ुल्फो की खुसबु मेरा नियंत्रण खोने पर मजबूर कर रही थी,.. लंड बुरी तरह उनकी गान्ड पर ठोकरें मार रहा था… जिसका वो अपनी आँखे मूंदकर स्वाद ले रही थी…
मेरे लौडे की हालत लगातार बद से बदतर होती जा रही थी, वो अंडरवेर के अंदर एंथने लगा था…प्री-कम से उसका टोपा गीला होने लगा…
मेरा अपने ऊपर से नियंत्रण हटता जा रहा था, नतीजा ध्यान स्टीरिंग से हट गया और मेरे होंठ उनके गाल से जा टकराए….
गाड़ी ना जाने कब मैदान छोड़ कर बाजू के खेत में चली गयी और रेत में जा फँसी…और हों-हों करने लगी..
हम दोनो ही हड़बड़ा गये.. हों-हों कर के एंजिन बंद हो गया.. हम दोनो की नज़रें मिली तो वो एक नशीली मुस्कराहट देकर गाड़ी का गेट खोल कर नीचे उतर गयी..
फिर उन्होने मुझे भी उतरने का इशारा किया.. और खुद ड्राइविंग सीट पर बैठ कर गाड़ी को बॅक गियर में डाल कर वहाँ से निकाला…
फिर उन्होने मुझे बगल वाली सीट पर बैठने का इशारा करते हुए कहा – अब आज के लिए इतना ही काफ़ी है…, आगे का कल सीखना.. चलो अब घर चलते हैं.. वैसे दूसरे गियर तक आपने अच्छा किया… वेल डन…!
फिरसे उन्होने पीछे सीट पर जाकर कपड़े चेंज किए, मौके का फ़ायदा उठाकर मे थोड़ी दूर झाड़ियों के पीछे जाकर अपनी टंकी रिलीस करने चला गया.
खड़े लंड से मूत भी रुक-रुक कर आ रहा था, जिससे बहुत देर तक में मुतते रहा, आख़िर जब टंकी रिलीस हुई, तब जाकर कुछ राहत महसूस हुई.
रास्ते में हमने ज़्यादा कोई बात नही की.. बस कुछ एक दो ड्राइविंग से ही रिलेटेड कुछ बातें…!
घर आते-2 शाम हो चुकी थी…. तो मे थोड़ी देर के लिए चाची के पास चला गया.. बच्चे को गोद में लेकर खेलता रहा.. चाची अपने काम काज में लगी रही…
रात का खाना खा-पीकर मोहिनी भाभी ने मुझे अपने कमरे में आने का इशारा किया…
मेरे पहुँचते ही वो बोली – हां तो आज कितना तक सीखा..?
तो मेने उन्हें बताया कि आज दूसरे गियर तक ही सीखा है.. लगता है हफ्ते-दस दिन में आजाएगी…!
वो – थोड़ा डीटेल में बताओ.. कैसे शुरुआत की क्या-2 प्राब्लम हुई.. ?
मे – अरे ! इन सबको जान कर आपको क्या लेना देना..?
वो – मेरा भी मन किया तो मे तुमसे सीख लूँगी ना.. वो थोड़ा शोख अंदाज में बोली…
मे उनके कहने का मतलव समझ गया… और वैसे भी मे भाभी से कोई बात छिपा भी नही पाता था… पता नही वो कैसे मेरे मन के चोर को भाँप लेती थी..
सो मेने सब डीटेल उन्हें बता दिया… वो कुछ देर तक मुस्करती रही…
मेने पूछा – आप मुस्करा क्यों रही हो .. ?
वो – बस ऐसे ही.. अब तुम मन लगा कर ऐसे ही सीखते रहो…अब जाओ आराम करो.. कल कॉलेज भी जाना है..
मे अपने कमरे में चला आया और कुछ देर किताब निकाल कर पढ़ता रहा.. और फिर सो गया..
दूसरे दिन मे और सोनू कॉलेज गये…लेक्चर अटेंड किए..
तीसरे पीरियड में पीयान ने आकर कहा – अंकुश शर्मा..! आपको प्रिन्सिपल साब बुला रहे हैं..
मे जब उनके ऑफीस में पहुँचा.. ! देखा कि उनके सामने एक अधेड़ व्यक्ति मध्यम हाइट.. गोरा लाल चेहरा.. जिसपर बड़ी-2 ठाकुरयती मुन्छे फक्क सफेद कुर्ता और धोती.. ऊपर से एक नेहरू कट जकेट पहने बैठे हुए थे.
मेने ऑफीस के गेट से ही अंदर जाने की पर्मिशन ली … प्रिन्सिपल साब मुझे देखते ही बोले –
आओ अंकुश.. हम तुम्हारा ही इंतेज़ार कर रहे थे… इनसे मिलो.. ठाकुर सुर्य प्रताप सिंग.. यहाँ के ज़मींदार… साब..
और ठाकुर साब यही है.. अंकुश.. बहुत ही नेक और मेहनती लड़का है.. अपनी पढ़ाई के अलावा वाकी से इसको कोई मतलव नही… सभी स्टूडेंट्स इसे बहुत मानते हैं..
मेने उनको नमस्ते किया.. तो उन्होने अपनी बगल वाली कुर्सी पर बैठने के लिए कहा…
मेने कहा – मे ऐसे ठीक हूँ.. ठाकुर साब.. फिर उन्होने बात शुरू की…
बेटे तुम *** गाँव के मास्टर सुंदर लाल शर्मा के बेटे हो ना.. ?
मेने कहा – जी..
वो बोले – बड़े ही भले आदमी हैं मास्टर जी, मेरे ख्याल से सबसे ज़्यादा पढ़ा लिखा परिवार है तुम्हारा… एक भाई प्रोफेसर है,.. और दूसरा भाई एसपी है..
मे सही कह रहा हूँ ना..
तो मेने कहा जी बिल्कुल…
और एसपी साब की शादी अपने एमएलए की बेटी से हुई है.. है ना.. !
देखो बेटे… मे यहाँ अपनी बेटी और लड़के की हरकतों के लिए तुम्हारे पिताजी से माफी माँगने जाने वाला था.. फिर सोचा उससे पहले तुम से मिल लूँ..!
बेटा ! मेरे बच्चों से अंजाने में जो ग़लती हुई है… उसे तो मे सुधार नही सकता.. लेकिन आगे के लिए विश्वास दिलाता हूँ कि ऐसा फिर कभी नही होगा..
मे – मुझे आपकी बात पर भरोसा है ठाकुर साब…!
वो – अब मे तुम्हारे पिताजी के पास जा रहा हूँ… क्या तुम मेरे साथ चलना चाहोगे..?
मे – बिल्कुल चलिए.. मेरे घर पर आपका स्वागत है… ये कह कर वो उठ गये.. और प्रिन्सिपल साब को नमस्ते बोल कर हम बाहर आ गये…
वो अपनी गाड़ी में थे… मे आगे-2 अपनी बुलेट पर आ रहा था, हम घर की तरफ चल दिए…….
ठाकुर सूर्य प्रताप ने बाबूजी से मिलकर सबसे पहले हाथ जोड़कर अपने बेटे के व्यवहार के लिए माफी माँगी, .. एक दूसरे से बड़े अपनेपन से मिले..
घर – परिवार की चर्चा की.. और भविश्य में आपस में संबंध अच्छे रहें इस बात का आश्वासन दिया, और कुछ देर बैठकर चाइ नाश्ता लेकर वो चले गये…
उनके जाने के बाद बाबूजी ने मुझे अपने पास बुलाया, और उनके साथ जो भी बात-चीत हुई, वो सब उन्होने बताते हुए कहा..
बेटा ! ठाकुर साब ने कहा है, कि अब इस बात को यहीं ख़तम करो, तो मे चाहता हूँ, तुम अपनी तरफ से उनके बच्चों के प्रति कोई बैर मत रखना..
मेने हां में अपनी सहमति जताई, और अपने कमरे में आकर कुछ देर के लिए सो गया…
3 बजते ही मे और कामिनी भाभी गाड़ी लेकर चल दिए ग्राउंड की ओर.. मेरे मन में उथल-पुथल मची हुई थी…,
भाभी की कल की हरकतों ने मुझे मेरे लंड तक हिला दिया था, ना जाने आज क्या होने वाला था…?
कल का वाक़या याद करते ही मेरा लौडा खड़ा होने लगा.. और उसने पाजामे के अंदर तंबू बनाना शुरू कर दिया…!
जान बूझकर मेने आज काफ़ी पुराना पड़ा हुआ अंडरवेर पहना था, जिससे उसका कपड़ा काफ़ी लूस हो गया था, उसमें मेरे मूसल महाराज आज कुछ कंफर्टबल फील कर रहे थे,
उसकी लंबाई आज ऊपर से पाजामे के बबजूद भी कुछ ज़्यादा ही लग रही थी.
भाभी गाड़ी चलाते हुए बीच-2 में मेरी तरफ मुँह कर के बातें भी करती जा रही थी… लाख छुपाने के बबजूद भी उनकी नज़र मेरे तंबू पर पड़ गयी..,
जिसे देखकर उनके चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान तैर गयी…
मैदान में पहुँचकर कल की तरह अपने उन्होने अपने कपड़े चेंज किए… और मुझे ट्राइयल देने को कहा…
कई बार की कोशिशों के बाद भी में गाड़ी को ठीक से उठा नही पाया.. हर बार झटके मार कर बंद हो जाती…!
भाभी ने कहा – देवर्जी क्या बात है, अभी भी आपका क्लच के ऊपर पैर का कंट्रोल सही नही आ रहा.. !
खैर कोई बात नही धीरे-2 आ जाएगा… चलो कल की तरह ही चलाते हैं…!
आज भाभी के कपड़े कल से भी ज़्यादा टाइट थे… उनके दशहरी आम आज टाइट टॉप की वजह से थोड़े दबे हुए से लगे, जिसकी वजह से उनकी बगलें ज़्यादा मासल दिख रही थी…, और ऊपर से कुछ ज़्यादा ही दर्शन हो रहे थे…
नीचे तो कहने ही क्या, एक बहुत ही सॉफ्ट कपड़े की लोवर में उनकी पेंटी का आकर भी साफ-साफ पता चल रहा था…!
मुझे लगा जैसे उनकी पेंटी गान्ड की तरफ तो ना के बराबर ही रही होगी… दोनो कलश एकदम गोल मटोल… एकदुसरे से जुड़े-जुड़े.. मानो दो बॉल फेविकोल से चिपका दिए हों..
जब वो अपनी एक टाँग अंदर डाल कर मेरी गोद में बैठने को हुई, तो उनकी गान्ड का दूसरा भाग, किसी फुटबॉल की तरह और ज़्यादा पीछे की तरफ उभर गया..
सीन देखते ही मेरे लौडे ने एक जोरदार झटका खाया, और वो एकदम से अंडरवेर में तन गया…
बीच की दरार एकदम से क्लियर ही दिखाई दे रही थी…, कपड़े का जैसे कोई उसे ही नही दिख रहा था…
आज भाभी शायद ये ठान के आई थी, की मेरा पानी निकलवा कर ही रहेंगी…
भाभी आज कुछ आगे को झुक कर बैठ गयी मेरी गोद में… जिससे उनकी गान्ड की दरार का ऊपरी भाग मेरे पप्पू के ठीक सामने आ गया…
मेरा लॉडा तो वैसे भी बिगड़ैल भेंसे की तरह अंडरवेर के अंदर फडफडा रहा था, ऊपर से अंडरवेर का कपड़ा भी आज उसे कंट्रोल में रख पाने में असमर्थ लग रहा था,
उनके पिच्छवाड़े के एलिवेशन को देखकर तो सारी हदें तोड़ने पर आमादा होने की कोशिश करने लगा…
बेचारा अंडरवेर जैसे-तैसे कर के उसे संभाले हुए था…
बैठने के समय उन्होने हल्का सा गॅप बनाके रखा था, … मेने गाड़ी स्टार्ट की और उनके पैर के गाइडेन्स से क्लच छोड़ने से आगे बढ़ गयी…
गाड़ी के आगे बढ़ते ही आज उन्होने अपना पैर मेरे पैर से हटा लिया… कुछ देर बाद उन्होने मुझे गियर चेंज करने को कहा… मेने क्लच दबा कर दूसरा गियर डाला..
क्लच छोड़ने में फिरसे थोड़ा झटका सा लगा.. जिससे भाभी की तशरीफ़ पीछे को खिसक गयी, और हमारे बीच का गॅप ख़तम हो गया… अब लंड महाशय को उनकी फ़ेवरेट जगह मिल चुकी थी…!
आज मेरा स्टेआरिंग पर कंट्रोल कल के मुक़ाबले अच्छा था… हम 20-25 की स्पीड तक गाड़ी को कुछ देर चलाते रहे… भाभी की दरार में मेरे पप्पू की उच्छल कूद जारी थी…
कुछ देर बाद भाभी के कहने पर मेने 3र्ड गियर भी डाल दिया… अब गाड़ी तेज चलने लगी…लेकिन मुझे कुछ डर सा लगने लगा… तो मेने कहा –
ओह.. भाभी ! ये तो बिना एग्ज़िलेटर के ही इतनी तेज भाग रही है…
वो हँसते हुए बोली – भागने दो ना .. ! 3र्ड गियर में है.. भगेगी ही.. आप बस स्टेआरिंग को संभाले रखो.. अगर ज़रूरत हो तो बस ब्रेक मार देना.. हल्के से…
बातों-2 में भाभी ने अपने कुल्हों को थोड़ा सा और पीछे को दबा दिया… मेरा लॉडा कड़क होने लगा…, उसकी हार्डनेस फील करते ही भाभी बोली—
ओउच… देवेर जी मेरे पीछे कुछ चुभ सा रहा है… ?
मेने कहा – आप थोड़ा सा आगे खिसक जाओ…, तो वो स्माइल करते हुए बोली – नही चलेगा.. आगे होने से मेरे पैरों को मूव्मेंट नही मिलेगी…आपको तो कोई प्राब्लम नही है ना..?
मेने कहा… मुझे तो कोई प्राब्लम नही है, वो आपको कुछ चुबा था इसलिए मे बोला.., इतना सुनते ही उन्होने अपनी पीठ भी मेरे सीने से सटा दी…
उनकी बगलों की मांसलता मेरी बाजुओं को छु रही थी.., मेरी साँसें उनके गाल को सहलाने लगी… भाभी के ऊपर मदहोशी सी छाने लगी.. और उन्होने अपनी गान्ड को मेरे लंड के ऊपर और ज़्यादा दबाया…
भाभी ने अपनी बाजुओं को मेरी बाजुओं के ऊपर से बाहर की साइड से लाकर स्टेआरिंग पर रख लिया…
अब उनके उभारों की गुंडाज़ बग्लें मेरी बाजुओं पर फील हो रही थी…!
इधर मेरा लॉडा उनकी गान्ड की दरार में फिट हो चुका था, जो बीच-बीच में ठुमके लगा देता…
इस चक्कर में एक बार मेरा कंट्रोल स्टेआरिंग से हट गया.. गाड़ी 30-35 की स्पीड में लहरा उठी… मेने फिरसे अपने ऊपर कंट्रोल किया और गाड़ी को संभाला…!
बीच बीच में भाभी अपने एक हाथ को अपनी जांघों के बीच लाकर अपनी मुनिया को सहला देती, और इधर-उधर होकर मेरे लौडे को अपनी गान्ड की दरार से रगड़ देती..
उनके इधर-उधर होने के मोमेंट से उनकी चुचियों की साइड मेरे बाजुओं से दब जाती, जिसके मखमली अहसास से मेरा हाल बहाल हो रहा था…
ढेढ़ घंटे की प्रेक्टिस में हम दोनो के शरीर दहकने लगे…
इससे पहले कि बात कंट्रोल से बाहर हो… मेने गाड़ी रोक दी… क्योंकि मेरा लंड फूल कर फटने की कगार तक पहुँच गया था…
मुझे लगने लगा कि मेरा पानी छूटने ही वाला है.. अगर ऐसा हो गया तो भाभी ना जाने क्या सोचेंगी मेरे बारे में…
मेने गाड़ी रोक दी… झटके की वजह से उनकी आँखें खुल गयी… और मेरे से पूछा – क्या हुआ…? गाड़ी क्यों रोक दी..?
मेने कहा – आज के लिए इतना ही काफ़ी है..
उन्होने मुस्करा कर कहा – ठीक है.. कल चौथे गियर की प्रॅक्टीस करेंगे… और वो मेरे आगे से उठ गयी…
मे फ़ौरन सीट से उठा.. और अपनी लिट्ल फिंगर दिखा कर झाड़ियों की तरफ भागा… मे जल्द से जल्द अपने लौडे को रिलीस करना चाहता था..
मेरी तेज़ी देख कर भाभी समझ गयी.. और मंद मंद मुस्कुराती रही…!
झाड़ियों के पीछे जाकर आज मुझे अपने लंड को मुठियाना ही पड़ा…, कुछ ही पलों में उसने इतनी तेज धार मारी कि वो कम से कम 5-7 फीट दूर तक चली गयी…!
जब लंड का टेन्षन रिलीस हुआ तब जाकर मुझे शांति मिली…!
यही सब एक हफ्ते तक चलता रहा… मेरा गाड़ी पर अच्छा कंट्रोल आने लगा था.. आज जब हम लौटने लगे तो भाभी ने कहा…
कल आपका लास्ट ट्रैनिंग सेशन होगा… कल आपको बॅक गियर की प्रॅक्टीस करनी है.. उसके बाद आपकी ट्रैनिंग पूरी……
अब मे घर से मैदान तक गाड़ी खुद ही चलाकर ले जाने लगा था…..!
आज गाड़ी सीखने का लास्ट दिन था, इस लास्ट सेशन में गाड़ी को रिवर्स गियर डालकर चलाने का तरीक़ा सीखना था…
मे घर से ग्राउंड तक गाड़ी को अच्छी स्पीड से चलाकर ले गया..
भाभी ने मेरी ड्राइविंग को अप्रीश्षेट करते हुए कहा…वाह देवेर्जी, आप तो एकदम मज़े हुए ड्राइवर की तरह चलाने लगे… वेल डन..
अब वो मेरे आगे नही बैठती थी लेकिन अलग अलग तरीकों से मुझे सिड्यूस करना उन्होने बंद नही किया था,
कभी समझाने के बहाने मेरी जांघों को सहला देना, तो कभी जान बूझकर मेरे लंड पर हाथ रख देना, बाद में सॉरी बोलकर जताना कि ये अंजाने में उनसे हुआ हो जैसे…
ना जाने उनके मन में क्या चल रहा था… लेकिन मेने अपने मन में ठान लिया था… कि किसी भी परिस्थिति में पहल मेरी तरफ से नही होगी… चाहे जैसे भी हो, मुझे अपने आप पर कंट्रोल बनाए रखना ही होगा..
उधर भाभी भी दीनो दिन मेरे धैर्य की परीक्षा ले रही थी…, नित नये तरीक़े अपनाकर मुझे उनके साथ पहल करने पर मजबूर करने की कोशिश में लगी थी.
आज उन्होने फिर से कपड़े चेंज किए… जो पिच्छले दो दिन से बंद कर दिए थे..
मेने पूछा.. अब क्यों चेंज कर रही हो भाभी… तो वो बोली – आज आपको नया सबक सीखना हैं, आंड आइ आम शुवर, वो आप मेरे बिना नही कर पाओगे…
भाभी चेंज कर के जैसे ही गाड़ी से बाहर आईं… मेरा भाड़ सा मुँह खुला का खुला रह गया… मेने उनसे ऐसे कपड़ों की उम्मीद कतयि नही की थी…
वो एक स्लीव्ले वेस्ट टाइप के उपर में जो बहुत ही लो कट जिसमें से उनकी आधी चुचियाँ दिखाई दे रही थी…और वो उनकी 34 साइज़ की चुचियों से कुछ ही नीचे तक कवर कर रहा था..
नीचे एक बहुत ही सॉफ्ट कपड़े का मिनी स्कर्ट, जो झुकने पर पेंटी की झलक भी दिखा सके… जो शायद मात्र 8-10 इंच लंबा ही होता.. वो कमर की हड्डियों पर ही टिका हुआ था.. और पीछे से उनकी ऊपरी दरार भी दिख रही थी…
कमर पर उनकी पेंटी की एक डोरी जैसी ही दिखी मुझे, जो उनकी गान्ड की दरार में फँसी दिखाई दे रही थी…
नीचे वो सिर्फ़ गान्ड की गोलाईयों के ख़तम होने से पहले ही उसकी हद ख़तम हो रही थी…, यानी उनका वो शॉर्ट कुल्हों की ढलान तक ही सिमट कर रह गया था…
उनको इन कपड़ों में देखते ही मेरे पप्पू ने एक जोरदार अंगड़ाई ली…, मानो आज वो खुशी में झूमना चाहता हो…
भाभी ने शायद आज ठान लिया था, कि वो मेरे धैर्य की माँ-बेहन एक कर के ही मानेंगी… क्योंकि वो जैसे ही मेरे सामने बैठी…
कुछ देर तो मेरे मुँह के आगे वो अपनी गान्ड लिए खड़ी रही रही, जो उनकी नाम मात्र की स्कर्ट से साफ-2 दिखाई दे रही थी…
बहुत कोशिश कर के में अपने हाथ को कंट्रोल किए हुए था, वरना वो बार बार उसे सहलाने के लिए उठने की कोशिश करता.
फिर एक लंबा सा घिस्सा अपनी गान्ड से मेरे लंड पर मारते हुए वो मेरे आगे बैठ गयी…
ठुमके मारता मेरा पप्पू अपने लिए आरामगाह देखते ही भड़क उठा… और बुरी तरह से अकड़ कर उनकी गान्ड की दरार मे घुसने लगा…
ये बात तय थी, कि अगर बीच में कपड़े नही होते.. तो वो आज किसी के बाप की भी सुनने वाला नही था…, आज वो शर्तिया भाभी की गान्ड फाड़के ही रहता.
मेने जैसे-तैसे कर के अपने आप पर कंट्रोल रखा.. यहाँ तक कि मेरे लौडे का मुँह चिपचिपाने लगा था…
वो बोली – देवर्जी पहले आप सिर्फ़ देखो उसके बाद में आपको स्टेआरिंग दूँगी, इतना कहकर उन्होने मेरे दोनो हाथ अपनी नंगी जांघों पर रखवा दिए…
आअहह…. क्या मखमली अहसास था उनकी चिकनी मुलायम मक्खन जैसी जांघों का… हाथ रखते ही, मेरे पूरे शरीर में झुरजुरी सी दौड़ गयी..
मेरा लंड खूँटा तोड़कर कर उनके बिल में घुसने की फिराक में था…
भाभी ने बॅक गियर में गाड़ी डाल कर, स्टेआरिंग कैसे कंट्रोल करना होता है, ये सब वो बताने लगी… लेकिन उनका ध्यान पूरी तरह से गाड़ी सिखाने पर नही था…
मेरे लंड और हाथों के अहसास ने उनकी भी साँसें फूलने पर मजबूर कर दिया था…
जिसकी वजह से गाड़ी कहीं की कहीं जाने लगी… वो तो अच्छा था, कि कुछ कंट्रोल मुझे भी आ गये थे, सो मेने अपने हाथ स्टेआरिंग रख लिए और गाड़ी को कंट्रोल करने में हेल्प की.
भाभी की हरकतें बढ़ती ही जा रही थी, एक बार तो उन्होने अपनी गान्ड को खुजाने के बहाने ऊपर को उचकाया, और सीधे अपने गान्ड के छेद को मेरे लंड के ऊपर ही टिका दिया…
इतना ही नही, उन्होने दो-तीन झटके भी आगे पीछे कर के अपनी गान्ड को दिए…
मेरा पेशियेन्स जबाब देता जा रहा था, ..मुझे लगा मेरा पानी निकल जाएगा, सो मेने उन्हें गाड़ी रोकने को कहा –
भाभी प्लीज़ जल्दी से गाड़ी रोकिए.. मुझे टाय्लेट जाना है…
भाभी की वासना इस समय एकदम चरम पर थी…, मेरे कहने पर उन्होने गाड़ी तो रोक दी, लेकिन नीचे उतरने की वजाय, वो पलट कर मेरी गोद में आ बैठी,
और मेरे सर के बालों को जकड़कर उन्होने मेरे होंठों को अपने मुँह में भर लिया..
मेरी हवा वैसे ही टाइट थी… कुछ देर तो मेने अपने हाथ अलग रखे.. लेकिन जब कोई चारा नही बचा तो मेने उनकी फुटबॉल जैसी गान्ड की गोलाईयों को कस्के मसल दिया…
एक मादक सीईईईईई….सस्स्सकी भरते हुए उन्होने अपनी गान्ड को मेरे लंड पर ज़ोर से रगड़ दिया…
किस करते करते दोनो की साँसें डूबने लगी… भाभी लगातार अपनी गान्ड के साथ साथ अपनी चूत को भी मेरे लंड पर रगड़ा दे रही थी…!
मेरे हाथ अनायास ही उनके आमों पर कस गये…, और उन्हें ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा…
भाभी की कमर बुरी तरह से ऊपर नीचे हो रही थी, मेरे लंड को अपनी चूत के होंठों पर फील कर के उन्होने मेरे होंठों को चब-चबा दिया…
वो मेरे ऊपर किसी भूखी बिल्ली की तरह टूट पड़ी थी…, लंड की हालत बहुत ही खराब होती जा रही थी, मुझे लगने लगा कि अब सिबाय पानी छोड़ने के और कोई चारा नही बचा है..
उधर भाभी भी अपने होसो-हवास खो चुकी थी, वो बुरी तरह कमर मटका-मटका कर मेरे लौडे को अपनी चूत की फांकों पर घिस रही थी…
एका एक हम दोनो के शरीर अकड़ने लगे, मेने उनकी कमर को अपने दोनों हाथों से कसकर उनकी गान्ड को अपने लंड पर दबा दिया…
इसी के साथ मेरे लंड ने और भाभी की चूत ने एक साथ अपना अपना पानी छोड़ दिया…
वो मेरे गले में बाहें डाले लटक गयी, मुन्डी अपने आप पीछे को लटक गयी…, उनके आमों ने मेरे मुँह को दबा रखा था…
कुछ देर वो ऐसे ही बैठी रही..
फिर जब सब कुछ शांत हो गया तो वो अपनी नज़रें झुकाए नीचे उतर गयी..
और पिच्छली सीट पर जाकर अपने कपड़े चेंज करने लगी, में अपनी टंकी खाली करने झाड़ियों की तरफ चला गया……..!
झाड़ियों के पीछे जाकर मेने पाजामा की जेब से रुमाल निकाला, और अपने लंड और अंडरवेर को उससे पोंच्छ कर सॉफ किया…,
वरना धीरे-2 उसका गीलापन पाजामे के ऊपर से भी दिखने लगता..
रास्ते में हम दोनो के बीच गेहन चुप्पी छाइ रही…
कहीं ना कहीं वो अपने मन में गिल्टी फील कर रही थी…
कुछ देर की चुप्पी के बाद वो बोली – देवर जी सॉरी फॉर दट..! प्लीज़ आप मुझे ग़लत मत समझना… दरअसल मे अपने आप पर कंट्रोल नही कर पाई…
मे – इट्स ओके भाभी… हम दोनो ही जवान हैं.. अब इतने नज़दीक रह कर ये सब तो हो ही जाता है… प्लीज़ इसके लिए आपको सॉरी कहने की ज़रूरत नही है…
वो कुछ देर चुप रही, फिर बोली – तो क्या मे ये समझू.. कि आज जो कुछ हम दोनो के बीच हुआ… उसे और आगे बढ़ाना चाहिए…..?
मेने उनकी तरफ देखा, वो मुझे ही देख रही थी…फिर मेने अपनी नज़रें सामने कर ली और रास्ते पर ध्यान केंद्रित कर के बोला – मेरे ख्याल से ये सब अब और नही होना चाहिए…., ये ठीक नही होगा…
वो – किस आंगल से ठीक नही होगा…? लाइफ में थोड़ा एंजाय्मेंट मिलता है.. तो उसमें बुराई क्या है..? और ये हम दोनो की ज़रूरत भी है…!
मे – ये भैया के साथ धोखा नही होगा…?
वो – तो आप क्या समझते हो, कि आपके भैया ये सब नही करते होंगे..? ओह्ह.. कामन डार्लिंग… ऐसा कों है इस दुनिया में जो इससे अछुता हो…?
मेने मन ही मन सोचा, कि बात तो आपकी सही है… अब मुझे ही ले लो.., हर रोज़ गिनती बढ़ती जा रही है,
यहाँ तक कि बाबूजी भी नही रह पा रहे हैं इसके बिना… फिर भी मेने प्रत्यच्छ में कहा…
लेकिन मे उनके साथ धोका नही कर सकता…, प्लीज़ भाभी आप मेरी मजबूरी समझने की कोशिश कीजिए…!
वो कशमासाते हुए बोली – धोका तो तब होगा ना, जब ये बात उनको पता चलेंगी, अब ये शरीर की ज़रूरतें तो पूरी करनी ही होगी ना…!
मेने उन्हें काफ़ी समझाने की कोशिश की, लेकिन हर बार उन्होने कोई ना कोई लॉजिक देकर मुझे हथियार डालने पर मजबूर कर दिया.. और आख़िर में मुझे कहना ही पड़ा…
जैसा आप ठीक समझो भाभी… अब में आपको क्या कह सकता हूँ… मेरे से ज़्यादा तो आपने दुनियादारी देखी है…
वो – तो फिर आज रात को मेरे कमरे में आजना प्लीज़, मे आपका इंतेज़ार करूँगी !
उनकी इस बात का मेने कोई जबाब नही दिया.., इतने में घर आ गया.. और हम गाड़ी खड़ी कर के घर के अंदर चले गये…!
घर मे घुसते ही दो खबरें एक साथ सुनने को मिली..
एक – मोहिनी भाभी के भाई राजेश की शादी तय हो गयी थी, जिसकी डेट भी नज़दीक थी.. और भाभी को अभी बुलाया गया था…
चूँकि उनके यहाँ कोई और नही था उन्हें ले जाने के लिए.. तो हमें ही छोड़ कर आना था उनको… वो भी दो दिन बाद ही, 15 दिन बाद शादी थी…
दूसरा- मनझले भैया आज आने वाले हैं, .. उनका फोन आ गया था.. वैसे तो वो कामिनी भाभी को ले जाने के लिए आ रहे थे,
ये खबर कामिनी भाभी को कुछ नागवार गुज़री…, उनके चेहरे को देखकर लग रहा था, मानो गरम चूत पर ठंडा पानी डाल दिया हो…
लेकिन चूँकि बड़ी भाभी अपने घर जाने वाली हैं.. तो शायद अगर वो मान गये तो उन्हें कुछ दिनो के लिए और यहाँ रुकना पड़ सकता है…
भैया देर रात घर पहुँचे.. तो आपस में कोई बात नही हो पाई…!
रात को में मोहिनी भाभी के पास बैठने चला गया, क्योंकि अब वो कुछ दिनो मुझसे दूर रहने वाली थी,
मे रूचि को गोद में लिए उनके बगल में बैठा था, कि तभी भाभी ने पुच्छ लिया…!
लल्ला, गाड़ी अच्छे से चलाना आ गया तुम्हें, या और सीखना वाकी है..
मे – चलाना तो सीख गया हूँ भाभी, अब तो बस जैसे-जैसे प्रॅक्टीस होगी, हाथ साफ होता रहेगा..
वो – वैसे आज जब तुम लौटे थे, तो तुम्हारे हॉ-भाव कुछ अजीब से थे, कुछ हुआ था क्या..?
मे – नही तो ऐसा तो कुछ नही हुआ, आपको ऐसा कैसे लगा…?
वो – नही वो, तुम्हारी आँखें कुछ चढ़ि हुई थी, शरीर भी कुछ कांप-कंपा रहा था…, सच बताना कुछ तो हुआ है..
मेने मान में सोचा – भाभी आप क्यों इतनी तेज हो, कुछ भी परदा नही रहने दोगि…,
जब कुछ देर मेने कोई जबाब नही दिया, तो उन्होने फिर पूछा – बोलो ना क्या हुआ था..?
मेने हिचकते हुए आज की घटना उन्हें सुना दी, कुछ देर तो वो मौन रहकर मन ही मन मुस्करती रही, फिर बोली –
जिसका मुझे अंदेसा था वही हुआ, खैर छोड़ो ये सब, ये बताओ अब आगे क्या सोचा है..?
मे – किस बारे में…?
वो – अरे कामिनी के बारे में, मेरे पीछे अगर उसने फिरसे पहल की तो…
मे – कोशिश करूँगा, उनसे दूर ही रहूं…, फिर भी बात ना बनी तो साफ-साफ मना कर दूँगा…
वो – भूल से भी ये ग़लती मत करना, एक बार उसे समझाने की कोशिश भर ज़रूर करना, अगर नही माने तो फिर हालत से समझौता कर लेना,
क्योंकि ये ऐसे मामले होते हैं, जिन्हें तूल पकड़ते देर नही लगती…, अपनी बात मनमाने के लिए औरत किसी भी हद तक जा सकती है..
बातों के दौरान रूचि मेरी गोद में ही सो गयी, तो उसे भाभी ने मेरी गोद से लेकर बेड के एक सिरे पर सुला दिया, और फिर वो मुझसे सॅटकर बैठ गयी..
उन्होने मेरी जांघों को सहलाते हुए कहा – मे इतने दिन तुमसे दूर रहूंगी, याद करोगे ना मुझे… या नयी भाभी की मस्ती में भूल जाओगे..?
भाभी सोने से पहले मात्र एक गाउन ही पहनती थी, सो मेने उनके गाउन की डोरी खींच कर आगे से उनके बदन को उजागर कर दिया…
उनके भरे-भरे आमों को प्यार से सहलाया, और होंठों का चुंबन लेकर कहा – ये तो मरते दम तक भी नही हो पाएगा भाभी मुझसे, की मे आपको भूल जाउ..!
मौत आने के बाद ही आप मेरे दिल से निकल पाओगि…!
मेरी बात सुनते ही भाभी ने मुझे अपने अंक से लिपटा लिया, और फिर आँखों में आँसू भरकर भर्राए गले से बोली –
भूल कर भी ऐसे शब्द मत निकालना अपने मुँह से, वरना मे तुमसे कभी बात नही करूँगी,,, समझे.
मे भी किसी बच्चे की तरह उनसे लिपट गया…, भाभी आगे बोली –
लेकिन समय के साथ ये प्यार बाँटना तो पड़ेगा ही तुम्हें, जब निशा व्याह कर इस घर में आ जाएगी…
मे – वो तो मे अभी भी उससे करता ही हूँ, आगे भी करता रहूँगा, लेकिन जो प्यार आपके लिए है, उसमें कभी कमी नही आएगी.. इतना कह कर मेने भाभी को अपने चौड़े सीने से सटकर उनके होंठों को चूम लिया…
भाभी ने मेरी आँखों में झाँकते हुए कहा – लल्ला जी आज मुझे तुम्हारा इतना प्यार चाहिए की आनेवाले 15-20 दिन तक मुझे तुम्हारी तलब महसूस ना हो..,
मेने मुस्कराते हुए भाभी की चुचियों को मसल कर कहा – जो हुकुम मेरे आका, इतना कहकर उन्हें निवस्त्र कर के, बेड पर लिटा दिया…और उनके नाज़ुक अंगों से खेलने लगा…..
भाभी ने भी, पूरी सिद्दत से अपने बदन को मेरे सुपुर्द कर दिया, बेड पड़ी वो मेरी हरकतों से बिन जल मछलि की तरह मचल रही थी.…
एक समय था, जब मे भाभी के इशारों पर नाचता था, लेकिन आज वो मेरे हाथों के इशारों पर इस तरह मचल रही थी, जैसे उनके बदन का रिमोट मेरे हाथों में हो…
कुछ ही पलों में कमरे का वातावरण वसनामय हो गया…मादकता से भरी आहों, करहों के बीच तूफान आए, चले गये, फिर आए फिर चले गये….
भाभी अब पूरी तरह तृप्त हो चुकी थी, फिर उन्होने मुझे बड़े प्यार से मेरे माथे को चूमकर कोई 3 बजे अपने कमरे में सोने के लिए भेज दिया..
सुबह जब सबने मिलकर नाश्ता किया, उस समय बाबूजी ने भैया से बात चलाई…
बाबूजी – और कृष्णा बेटा, कैसी चल रही है तुम्हारी ड्यूटी…?
भैया – वैसे तो ठीक है बाबूजी, ड्यूटी की कोई प्राब्लम नही है, लेकिन घर में खाने पीने का सब कुछ गड़बड़ रहता है,
सब कुछ नौकरों के सहारे नही हो पता है, तो मे सोच रहा था, कि कामिनी को भी अपने साथ ले जाता हूँ…
बाबूजी – हमें तो कोई दिक्कत नही है, बस एक छोटी सी समस्या है, बड़ी बहू के भाई की शादी है, कल वो अपने घर जाने वाली है, तो तब तक के लिए कामिनी बहू यहाँ बनी रहती तो कुछ सहारा रहता इन बच्चों को…
रामा बिटिया अभी इतनी परिपक्व नही है, जो अकेले घर संभाल ले…
भैया – वैसे मुझे तो कोई प्राब्लम नही है.. अगर कामिनी रुकना चाहे तो भाभी के आने तक रुक सकती है.. लेकिन क्या वो अकेली घर संभाल पाएगी..?
मोहिनी भाभी – रामा तो है ना…यहाँ पर.. उसके साथ…!
भैया ने कामिनी भाभी की तरफ देखा – तुम क्या कहती हो कामिनी.. रुक सकती हो…!
वो तो चाहती भी यही थी, सो तपाक से बोली – अब दीदी चली जाएँगी तो मुझे तो रुकना ही होगा.. मेरा भी घर है, मे नही सोचूँगी तो और कॉन सोचेगा…
दीदी ने इस घर के लिए इतने साल न्युचचबर कर दिए.. अब वो अपने घर की खुशी में शामिल होने जा रही हैं.. तो मेरा भी कुछ फ़र्ज़ बनता है.. कि उनके बाद घर की देखभाल करूँ…
भैया – ठीक है… ठीक है… बाबा… मेने तो बस पूछा ही था.. तुमने तो पूरा भाषण ही दे डाला…
वैसे अपने घर के प्रति तुम्हारी संवेदन शीलता देख कर अच्छा लगा.. है ना बाबूजी..
पिताजी बस मुस्काराकर रह गये… और कामिनी भाभी के सर पर हाथ रख कर बाहर चले गये…
भैया उस रात और रुके.. अगले दिन मुझे भी भाभी को छोड़ने जाना था.. तो
भाभी ने मनझले भैया से गाड़ी लेजाने के लिए पूछा…
भाभी – देवर्जी, आप कहो तो हम लोग आपकी गाड़ी ले जाएँ…?
भैया – चला के कॉन ले जाएगा.. भाभी ?
भाभी – लल्ला जी ने ड्राइविंग सीख ली है देवर्जी .. क्यों कामिनी, तुम्हें भरोसा तो है ना.. इनकी ड्राइविंग पर…!
कामिनी भाभी – भरोसा तो है दीदी.. पर मे क्या कहती हूँ, क्यों ना मे भी आपके साथ चलूं.. भले ही देवर्जी ड्राइव करेंगे.. लेकिन अगर कुछ प्राब्लम आई तो मे हेल्प तो कर सकती हूँ..
भैया – तो इसमें मेरी पर्मिशन की क्या ज़रूरत थी भाभी..
भाभी – आख़िर आपकी गाड़ी है.. पुच्छना ज़रूरी है देवर्जी..
भैया – ये कह कर आपने मुझे पराया कर दिया भाभी.., मे अगर ऐसा सोचता तो गाड़ी अपने साथ नही ले जाता..,
अपने घर के मान सम्मान के लिए ही तो इसे यहाँ छोड़ा है…! फिर इसपर मेरा हक़ कहाँ रह गया..?
भाभी – सॉरी देवर्जी मेरा मतलव आपका दिल दुखाना नही था… मेने तो बस इसलिए पूछा कि घर की एकता बनी रहे.. और आपस में कभी कोई ऐसी बात ना बने जिससे किसी को कोई उंगली उठाने की नौबत आए…!
अब जब ये तय हो गया कि मे और कामिनी भाभी दोनो ही भाभी को छोड़ने जा रहे हैं.. तो रामा दीदी भी बोलने लगी..
रामा – फिर मे अकेली यहाँ क्या करूँगी मे भी आप लोगों के साथ चलती हूँ..!
भाभी ने कहा – ये भी ठीक है, फिर ये फिक्स हुआ कि भैया के निकलते ही हम सब भी भाभी को छोड़ने उनके गाँव जाएँगे.. बाबूजी का ल्यूक रेडी कर के रख दिया जाएगा..
अगर शाम को आने में हमें देर होती है.. तो वो छोटी चाची के यहाँ खाना खा लेंगे..और ये बात चाची को भी बता दी गयी..
सुबह चाय नाश्ते के बाद ही भैया अपनी ऑफीस की गाड़ी से निकल गये.. उनके कुछ देर बाद ही हम चारों भी चल दिए भाभी के घर की तरफ…
11:30 को हम उनके घर पहुँच गये.. सारे रास्ते में ही ड्राइव कर के ले गया था, .. अब मुझे और ज़्यादा कॉन्फिडॅन्स आने लगा था…
निशा, मेरी जान ! मुझे देखते ही किसी ताज़े फूल की तरह खिल उठी… भाभी के घरवाले हम लोगों की आव-भगत में लग गये..
उनके गाँव में भाभी का सम्मान दुगना हो गया, उनको इतनी शानदार गाड़ी में आते देख कर.
किसी तरह मौका निकाल कर मे और निशा एकांत में मिले.., वो तड़प कर मेरे सीने से लग गयी…, मेरी छाती के बालों से खेलते हुए शिकायत भरे लहजे में बोली-
निर्मोही कहीं के, जब से मुझे छोड़कर गये हो, एक बार पलट कर भी नही देखा इधर को, कम से कम एक बार मिलने नही आ सकते थे…
मेने उसके गोल-गोल नितंबों को सहलाते हुए कहा – घर की ज़िम्मेदारियाँ और कॉलेज से कहाँ समय मिलता है, वैसे फोन तो करता ही हूँ ना मे..
वो मेरे होंठों को चूमकर बोली – फोन से कहीं इस बेकरार दिल की प्यास बुझती है भला.., अब ये दूरियाँ सही नही जाती हैं जानू !
मेने उसकी झील सी गहरी आँखों में झाँकते हुए कहा – निशा मेरी जान ! मे भी कहाँ तुमसे दूर रहना चाहता हूँ, लेकिन अपनी कुछ मजबूरियाँ हैं, जिन्हें हम नज़र अंदाज तो नही कर सकते ना…!
इतना कहकर मेने जैसे ही उसके गले पर चुंबन लिया, वो सिसक कर मेरे सीने से लिपट गयी…
उसकी कठोर कुँवारी चुचियाँ मेरे बदन से दब कर एक सुखद अहसास का अनुभव करा रही थी…
वो मेरे गले में बाहों का हार डाले हुए बोली – मे समझती हूँ जानू ! पर इस दिल का क्या करूँ, ये जानते हुए भी कि तुम नही आनेवाले, फिर भी हर समय तुम्हारे आने की आस लगाए रहता है…!
मेने उसकी चिन को हाथ लगाकर उसके चेहरे को ऊपर किया, और उसके होंठों को फिर एक बार चूम कर बोला – इस दिल से कहो, कुछ दिन और इंतेज़ार करे…
कुछ देर हम यूँही एक दूसरे की बाहों में खड़े बीते दिनो की याद ताज़ा करते रहे.. कुछ नये कसमे वादे, नये इरादे किए…
बातों-2 में कुछ एमोशनल मूव्मेंट भी आए..हम दोनो की आँखे नम हो गयी…,
ये समय और मौका हमें इससे ज़्यादा की इज़ाज़त नही दे सकता था…. सो शादी पर आने का वादा कर के हम अलग हुए ही थे, कि तभी रामा दीदी हमें ढूँढते हुए वहाँ आ पहुँची…
अच्छा ! तो तोता-मैना यहाँ चोंच भिड़ा रहे हैं, कब्से ढूंड रही हूँ, हमें यौं खड़े देख कर वो बोली…
निशा झेंप कर वहाँ से भाग गयी, फिर मेने उससे कहा – क्या हुआ दीदी, हमें क्यों ढूँढ रहीं थी ??
वो – अरे वहाँ आंटी तुम्हें खाने के लिए बुला रही हैं, और तुम यहाँ अपनी मैना के साथ गुटार गू कर रहे हो…ये कहकर वो खिल खिलाकर हंस पड़ी…
मे अपनी नज़र नीची कर उसके साथ बैठक की तरफ चल पड़ा, जहाँ वाकी लोग बैठे खाने पर मेरा इंतेज़ार कर रहे थे…
शाम ढलते ही हम ने वहाँ से विदा ली… भाभी के घर वाले रोकना चाहते थे.. लेकिन वहाँ घर सुना पड़ा था.. सो उन्हें भी इज़ाज़त देनी ही पड़ी…
रात 8 बजे तक हम अपने घर लौट आए…हम लोगों को तो कोई खास भूख नही थी, और बाबूजी के लिए चाची ने खाना बनाकर भेज दिया था… तो उन्हें खाना खिलाकर बस अब सोना ही था…
कामिनी भाभी ने कई बार इशारे कर के वो बात मुझे याद दिलाने की कोशिश की लेकिन मे अंत तक अंजान बनाने का नाटक करता रहा.. और अपने कमरे में सोने चला गया…!
मुझे आज नींद नही आ रही थी.., करवट बदलते -2 काफ़ी रात निकल गयी, रह-रह कर निशा मेरी आँखों के सामने आ जाती थी.. उसकी बातें मेरे कानों में गूज़्ने लगती…
रात कोई 11:30 को मेरे गेट पर आहट हुई… मेने उठ कर गेट खोला.. देखा तो सामने एक मिनी गाउन पहने कामिनी भाभी खड़ी थी…. जो इस समय रति का स्वरूप लग रही थी…!
जिसमें से उनके चुचक भी बाहर झाँकने का भरसक प्रयास कर रहे थे…
06-01-2019, 02:30 PM, #111
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RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
भाभी को इस रूप में देखकर मेरे अंडरवेर में उथल पुथल शुरू हो गयी..
अब प्लीज़ बातों में वक़्त जाया मत करो जानू, आज मुझे भरपूर प्यार करो मेरे राजा… ये कहकर वो मेरे बदन से किसी बेल की तरह लिपट गयी..
मेने चूतिया बनाने की आक्टिंग करते हुए कहा – लेकिन भाभी मुझे तो कुछ भी नही आता है… आप ही बताइए कि कैसे करते हैं प्यार.. मेने उन्हें ये जताना चाहा, जैसे मेने ये पहले कभी किसी के साथ किया ही नही है..
क्या ? आपने अभी तक किसी के साथ सेक्स किया ही नही है.. ? कोई गर्ल फ्रेंड भी नही बनाई अभी तक… वो मेरी बात सुन कर आश्चर्य से बोली..
मेने कहा – नही सच में मेरी कोई गर्ल फ्रेंड नही है.. अब आपको ही बताना होगा ये सब..
उन्होने कहा – कोई बात नही देवेर जी मे आपको सब कुछ सिखा दूँगी.. हाए.. मेरा अनाड़ी देवेर.. ये कह कर उन्होने अपने हाथ मेरी पीठ पर कस दिए.. जिससे उनकी 34” साइज़ की कठोर चुचिया मेरे सीने में दब गयी…
उन्होने अपना वो नाम मात्र का गाउन भी निकल कर फेंक दिया… नीचे वो बिना ब्रा के ही थी, बस एक माइक्रो पेंटी.. जिसमें से उनकी चूत के मोटे-मोटे होंठ भी बाहर को दिख रहे थे.
पीछे एक डोरी सी थी, जो उनकी गान्ड की दरार में घुसी पड़ी थी…अब इसको क्या कहते हैं, आप लोग खुद नामकरण कर लेना…हहहे..
भाभी को ऐसे रूप में देख कर मेरा लॉडा मेरे अंडर वेअर को फाडे दे रहा था.. उन्होने मेरी टीशर्ट निकाल कर फर्श पर फेंक दी…
वो मेरे चौड़े सीने पर हाथ से सहलाने लगी और उसे चूम लिया.. अपनी जीभ निकाल कर मेरे चुचकों पर फेरने लगी… मेरे शरीर में झंझनाहट सी शुरू हो गयी….
मेरे हाथ स्वतः ही उनके फुटबॉल जैसे चुतड़ों के उभारों पर पहुँच गये.. और मेने उन्हें अपने हाथों में लेकर मसल दिया….
वो मेरे सीने को चूमते चाटते हुए नीचे बैठने लगी.., अपने पंजों पर बैठ कर उन्होने मेरा शॉर्ट खींच दिया… नीचे में बिना अंडरवेर के था…
मेरे फुल्ली एराक्टेड लंड को देख कर जो अब 120 डिग्री पर हिल-हिल कर उनके इस जानमारू हुश्न को सलामी दे रहा था..
उसे देख कर वो मन्त्र मुग्ध हो गयी…और अपने हाथ में लेकर अपने गालों से रगड़ते हुए बोली….
आअहह… देवेर्जी … तुम कितने बड़े झूठे हो… आपका ये हथियार बता रहा है… कि इसने ना जाने कितनों की सील तोड़ी है..
मे – क्या भाभी आप भी… ! इसने आपको कैसे बता दिया ये सब…?
वो मेरे लंड को सहलाते हुए मेरी आँखों में देख कर बोली – देवेर जी आप मुझे अनाड़ी समझते हो..?
जिस तरह से ये मस्ती में अपना मुँह खोले झूम रहा है.. लगता है इसे सब पता है कि अब इसे क्या करना है…
फिर उन्होने मेरे सुपाडे को खोल कर अपनी जीभ से चाट लिया…
अहह…….भाभी….सीईईईई……मेरी सिसकी निकल गयी.. चूसो ईसीए…उउउम्म्म्मन्न.. वो उसे अपने होंठों में ले चुकी थी और अब लॉलीपोप की तरह चूस रही थी…
मे मस्ती से उनके सर को सहलाने लगा…थोड़ी देर लंड चूसने के बाद उन्होने मुझे पलंग पर धक्का दे दिया.. और अपनी नाम मात्र की पेंटी भी निकाल फेंकी…
अब वो किसी भूखी शेरनी की तरह मेरे पूरे शरीर पर हाथ फेरती हुई मेरी छाती पर चढ़ बैठी…
उनके गोरे-2 मस्त भरे डुए आमों को देख कर मेरी उत्तेजना दुगनी हो गयी, और मेने उन्हें अपनी मुट्ठी में भरकर बहुत ज़ोर से मसल दिया….
आआहह……देवर्जी…आराम से मेरे राजा….उखाड़ोगे इन्हें…?
तो मेने उनके कंधों को पकड़ कर अपने ऊपर झुका लिया, और उनके आमों को चूसने लगा…वो अपनी रसीली चूत को मेरे पेट पर मसलने लगी…
फिर धीरे-2 नीचे को सरक्ति हुई अपनी सुरंग के मुंहने को मेरे शेर की तरफ ले गयी…एक-एक इंच का फासला तय करती उनकी रसीली मुनिया मेरे पप्पू की तरफ सरक रही थी….
मेरा पप्पू मन ही मन बड़बड़ा रहा था, बेन्चोद साली जल्दी से पास आ, इतना तरसा क्यों रही है…
शायद उसकी बात भाभी ने सुन ली ही, सो अपने पंजों को मॉड्कर मेरी जांघों पर रख लिया…इस तरह से उनकी रस से सराबोर हो चुकी चूत के होंठ अपने आप फैल गये,…
मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में पकड़ कर पहले कसकर दबाया, शायद वो उसकी ताक़त आजमा रही थी…
फिर अपनी गर्म भाप जैसा पानी छोड़ती चूत को उसके ऊपर रख कर वो उसपर बैठती चली गयी…
आआहह……….सस्सिईईईईईईईईईईईईईई…..उउउफफफफफफफफफ्फ़….म्म्म्मा आ…..
मस्ती में उनकी आँखें बंद होती चली गयी…, मुँह अपने आप खुल गया.. मेरे तगड़े लंड को लेने में शुरुआत में उन्हें थोड़ी तकलीफ़ हुई…
लेकिन अपने होंठों को कस कर भींचते हुए धीरे-धीरे वो उसके ऊपर बैठ ही गयी…, और पूरा साडे आठ इंच का मेरा सोते जैसा लंड उनकी चूत में जड़ तक समा गया…
जब पूरा लंड जड़ तक उनकी रसीली चूत में समा गया… तो वो कुछ देर मेरे ऊपर बैठ कर लंबी लंबी साँसें लेने लगी…
उउउफ़फ्फ़… मेरे राजाजी…कितना तगड़ा और दमदार हथियार है तुम्हारा…, मेरी बुर को अंदर तक भर दिया है इसने…सस्सिईइ….आअहह….मज़ाअ…आ गायाअ….
कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद उन्होने अपनी गान्ड को ऊपर नीचे करना शुरू किया.. वो धीरे-2 चूत के मुँह को सुपाडे तक निकाल लेती.. और फिर से धीरे-2 ही पूरा अंदर कर लेती..
मुझे इस तरह से बहुत मज़ा आ रहा था, जब मेरा सुपाडा उनकी मुनिया के होंठों से रगड़ता…आअहह…, मस्ती में मेने उनके दोनो आमों को अपनी मुत्ठियों में भरकर ज़ोर-ज़ोर से मसल्ने लगा….
आअहह…. मेरे रजाआाअ…… हान्न्न.. ऐसे ही करो… बड़ा मज़ा आरहााआ…….हाीइ…हइईए……सीईईईईईई…..उफफफफ्फ़…मुऊुआाहह……
अब उनकी स्पीड कुछ बढ़ने लगी.. और वो तेज़ी से मेरे लंड पर कूदने लगी…
मेने भी नीचे से अपनी कमर उच्छालना शुरू कर दिया…
कभी वो मेरे होंठ चूसने लगती.. तो कभी मेरे सीने को सहलाती… और अजीब-अजीब सी आवाज़ें निकालते हुए.. मुझे चोद रही थी…
10 मिनिट बाद वो बड़ी बुरी तरह से झड़ने लगी.. उन्होने मेरे लंड और टट्टों को अपने चूत रस से गीला कर दिया, और मेरे ऊपर पसर गयी…
इधर मेरा मज़े से बुरा हाल था.. सो मेने उन्हें पलट कर नीचे लिया और एक बार उनकी रस छोड़ती चूत को जीभ से चाटा और एक तगड़े से झटके में अपना लंड उनकी चूत में पेल दिया…
उनके मुँह से एक लंबी सी सिसकी निकल गयी… आआहह……धीरीईए….डार्लिंग, थोड़ा साँस तो लेने दो….
लेकिन मेने अनसुनी करते हुए अपने धक्के शुरू कर दिए..
कुछ देर बाद वो फिरसे गरम होने लगी और अपनी कमर उच्छाल – 2 कर सहयोग करने लगी…
मेरे धक्के इतने तेज और पॉवेरफ़ुल्ल होते जा रहे थे.. की पूरे कमरे में मेरी जांघों की धाप उनकी गान्ड पर पड़ने की आवाज़ गूँज रही थी..
आधे घंटे मेने उनको रगड़ रगड़ कर छोड़ा.., उसके बाद उनकी चूत को अपने वीर्य से लबा लब भर दिया.. और उनके ऊपर लेट कर हाँफने लगा…
भाभी मेरे साथ चुदाई कर के मस्त हो गयी थी…
कुछ देर बाद हम दोनो बाथरूम में जाकर फ्रेश होने लगे…
थोड़ी देर के बाद भाभी अपने हाथों से मेरे हथियार को फिरसे धार देने लगी और उसकी सेवा करते हुए बोली – क्या कह रहे थे जनाब की, तुम्हें कुछ नही आता है, फिर ये क्या था…? हां !..
उनके सेवा भाव से खुश होकर मेरा शेर फिर से दहड़ने लगा.. और फन फनाकर उन्हें मुँह चिढ़ाने लगा…
मेने भाभी को चूमते हुए कहा – हहहे… वो तो बस अपने आप ही होने लगा… वैसे कैसा लगा आपको मेरे साथ सेक्स करने में..?
वो अपनी मखमली जाँघ से मेरे लौडे को मसल्ते हुए बोली – बस कुछ पुछो मत…मेरे पास ये सब बताने के लिए शब्द नही हैं…
बस इतना ही कहूँगी – यू आर सिंप्ली बेस्ट ! थॅंक्स देवर जी… मेरी इच्छा पूरी करने का बहुत-बहुत धन्यवाद…बिन मोल खरीद लिया आपने मुझे…
उनकी जाँघ की रगड़ से मेरा पप्पू नाराज़ हो गया, और वो उनकी गुदाज जाँघ में ही अपने लिए रास्ता ढूँढने लगा…
मेरे लंड की शख़्ती देखकर भाभी को भी ताव आ गया… और उन्होने उसे अपने मुँह में गडप्प कर लिया… और फिर वो चुसाई की.. कि साले को नानी याद आने लगी…
मेने उन्हें अपनी गोद में उठाया और पलग पर लाकर औंधे मुँह पटक दिया.. और उनकी पीठ पर चढ़ गया…
भाभी ने अपनी गान्ड को पलंग से अधर उठा लिया… जिससे उनकी गगर का मुँह खुल कर अपने साथी को बुलाने लगा……
मेने उनके मस्त गोल मटोल कलश जैसे चुतड़ों को मसल-मसल कर लाल कर दिया, साइड से कमर में हाथ डालकर उनकी गान्ड को और थोड़ा उठा कर चूत का मुँह खोला और अपनी 3 उंगलियाँ उसमें पेल दी…
भाभी के चूतड़ हवा में और ज़्यादा उठ गये…
मेने पीछे से अपना मूसल उनकी सुरंग के मुँह पर रखकर पूरी ताक़त से अंदर पेल दिया…
उउउइईईईईईईई…………माआआ……….उउफफफफफफफफफफ्फ़…..आराम से मेरे रजाआाअ….
उनकी कराह की परवाह ना करते हुए, मेने उनके सुनहरे लंबे बालों को जाकड़ कर पीछे को खींचा, जिससे उनका सर भी हवा में उठ गया…
तकिये पर हाथ टिकाए वो मस्ती से मेरे लंड का मज़ा लूटने लगी…
मेने उनकी चिकनी पीठ को चूमते हुए अपने धक्के शुरू कर दिए.. उनकी गान्ड और थोड़ी ऊपर हो गयी…
क्या मस्त नज़ारा था.. मेरी जांघें जैसे ही उनकी गान्ड के निचले हिस्से पर पड़ती.. तो उनके गोल-गोल चूतड़ बॉल की तरह और ऊपर को उठ जाते….
गान्ड को मसलते हुए बीच-2 में मे उसपर चान्टे भी बरसाता जा रहा था, जिससे उनकी गान्ड लाल सुर्ख हो गयी….
जब ज़्यादा मज़ा आने लगा तो वो अपनी घुटने टेककर घोड़ी बन गयी…
फिर तो चुदाई का वो तूफ़ानी दौर शुरू हुआ की बस पूछो मत… धक्के-पे धक्के… थपा-थप.. फुचा-फूच… शरीर भट्टी की तरह दहकने लगे…
आअहह….मेरे चोदु रजाअ… मेरे लाड़ले देवर जी, चोदो मुझे … फाड़ डालो मेरी चूत को…..
हआइई रीई… मईए.. तो गायईयीईई…….और आइसिस के साथ वो भल्भलाकर झड़ने लगी…
कुछ धक्कों के बाद मेने भी अपना कुलाबा उनकी चूत में खोल दिया…और में उनके ऊपर पसार कर हाँफने लगा…
लंड अंदर डाले डाले ही मेरी आँखें बंद हो गयी… करीब 10 मिनिट मे यौंही उनकी पीठ पर पड़ा रहा फिर उन्होने मुझे अपने ऊपर से साइड को लुढ़का दिया.. और फ्रेश होकर मेरा भी लंड सॉफ किया…
उस रात मेने उन्हें दो बार और चोदा.. वो मेरे लंड की दीवानी हो चुकी थी…
लेकिन भाभी थी बहुत गरम औरत.. उसने मुझे एकदम से जैसे निचोड़ ही लिया था…
थकान और नींद की खुमारी में सुबह के 4 बजे मे जैसे तैसे कर के अपने कमरे में पहुँचा, और धडाम से बिस्तर पर गिर पड़ा…
बेड पर पड़ते ही, मुझे होश नही रहा कि कब नींद आ गयी…
सुबह 8 बजे रामा दीदी ने मुझे झकझोरकर बड़ी मुश्किल से उठाया…
घड़ी पर नज़र पड़ते ही मेने झटपट से बिस्तर छोड़ा, और आधे घंटे में फ्रेश होकर नाश्ता कर के कॉलेज को भाग लिया… !
दूसरे दिन कॉलेज में ग़रीब अनाथ बच्चों के वेलफेर के लिए हम सभी स्टूडेंट्स को टाउन में जाकर लोगों के घरों में कुछ काम – धाम कर के उनसे खरी कमाई कर के फंड इकट्ठा करने का टास्क मिला…
रागिनी उसके भाई की पिटाई की घटना के बाद बिल्कुल सिंपल तरीके से, दूसरे स्टूडेंट्स की तरह ही कॉलेज में सबके साथ बिहेव करने लगी थी…
उसने मुझे रिक्वेस्ट के, की अगर में उसके साथ, उसके घर जाकर फंड इकट्ठा करूँ…, इसी बहाने वो भी मेरे साथ मिलकर अपने घर का कुछ काम करना चाहती है…
वैसे तो घर में उसे कोई कुछ करने नही देता, मुझे भी इसमें कोई बुराई नही लगी… तो हम दोनो उसके घर की तरफ चल दिए…
ठाकुर साब मुझे देख कर बड़े खुश हुए… और अपनी पत्नी और नौकरों को बोल कर मेरे लिए खाने पीने का इंतेज़ाम करने को कहा… तो मेने उन्हें हाथ जोड़कर रोका और कहा…
ठाकुर साब आज मे आपका परिचित या अतिथि नही हूँ… मे और रागिनी मिलकर आपके घर में कुछ काम करने आए हैं..
उससे जो कमाई होगी वो हम ग़रीब और अनाथ बच्चों की भलाई के लिए कुछ करेंगे…
वो बोले – अरे ! भाई तुम लोग बोलो… कितना पैसा चाहिए.. मे देता हूँ ना ! तुम लोगों को काम करने की क्या ज़रूरत है…
रागिनी – नही पापा… हम बिना काम किए आपसे एक पाई भी नही लेंगे.. सो प्लीज़ बताइए… हम दोनो आपका क्या काम करें..?
वो सोचते हुए हॅस्कर बोले – ठीक है.. भाई ! अगर तुम लोग कुछ करना ही चाहते हो तो गॅरेज में हमारी गाड़ियों की सफाई करदो… ठीक है.. कर लोगे ना !
मे – जी बिल्कुल… और हम दोनो पानी की बल्टियाँ भर के गॅरेज की तरफ चल दिए..
हम दोनो ही इस समय टीशर्ट और जीन्स पहने हुए थे.. टाइट टीशर्ट में रागिनी की बड़ी-2 चुचिया एक दम कसी हुई.. कपड़ों को फाड़ कर निकल पड़ने को हो रही थी..
गॅरेज में दो गाड़ियाँ खड़ी थी… एक उनकी स्कॉर्पियो और दूसरी सूडान मॉडेल कार…
मेने दोनो को पहले कपड़ा मार कर धूल सॉफ की फिर रागिनी को पानी मारने को बोला..
उसने एक मॅग से भर-भर कर गाड़ियों पर पानी उच्छालना शुरू किया… उसके अनाड़ीपन की वजह से गाड़ियों पर पानी कम पड़ रहा था.. लेकिन खुद पूरी भीग गयी…
कपड़े गीले होने से उसके बदन से बुरी तरह चिपक गये… मेरा उसे देखते ही लंड खड़ा होने लगा.. जिसे मेने अपनी जीन्स में अड्जस्ट किया…
मुझे उसे देख देख कर हँसी आरहि थी… मुझे हँसता हुआ देख कर उसने एक मॅग भरके मेरी तरफ उछाला… मेने पीछे हट कर बचने की कोशिश की लेकिन फिर्भी उसने मुझे भिगो ही दिया…
मेने कहा… तुम्हें तो कुछ भी नही आता, लाओ मे ही करता हूँ.. तो उसने मना कर दिया और फिरसे गाड़ियों पर पानी डालने लगी…
जब वो पानी डाल चुकी तो मे एक कपड़े से उन्हें फिर से पोंच्छने लगा… स्कॉर्पियो उँची गाड़ी थी… तो मे उसके पयदान पर चढ़ कर उसकी छत को पोंच्छ रहा था…
रागिनी भी गाड़ी के दूसरी तरफ पायेदान पर खड़ी हो गयी, और मेरी तरह ही कपड़ा मारने का प्रयास करने लगी…
उसकी हाइट कुछ कम थी, सो गाड़ी की छत तक पहुँचने के लिए वो उसपर अपने बूब्स टिका कर पोन्छने लगी…
मोटे-मोटे दूधिया उसके बूब्स गाड़ी की शीट से दब कर बाहर को निकलने के लिए मचल उठे, मेरी नज़र अनायास उसकी चुचियों पर चली गयी….!
दो बड़ी-बड़ी बॉल मानो एक दूसरे से मिला कर रखड़ी गयी हों उसके टॉप के अंदर,
मेरी नज़रों को ताडकर उसने उन्हें और ज़्यादा उभारते हुए गाड़ी को पोन्छ्ना शुरू कर दिया…
कुछ देर बाद वो मेरे बाजू में ही आ गयी.. और मेरे हाथ से कपड़ा लेने लगी.. मेने मना किया तो वो छीना-झपटी करने लगी.. !
मेने उससे कहा – रहने दे रागिनी, मे सॉफ कर लूँगा, वैसे भी तुझे कुछ आता जाता नही है…
ये बात उसे और ज़्यादा पूछ कर गयी, और वो मेरे हाथ से जबरजस्ती से कपड़े को खींचने लगी…
मेने उस कपड़े को अपने पीछे छिपाने की कोशिश की, तो वो ऊपर ही चढ़ने लगी, और कपड़ा लेने के बहाने मेरे सीने से चिपक गयी..
गीले हो चुके टॉप से वैसे भी उसकी बड़ी-2 चुचियाँ उबली पड़ रही थी… मेरी छाती से दब कर और चौड़ी होकर आधी तक ऊपर को उभर आई..
आख़िर मर्द के लौडे को इस सिचुयेशन में जो फील होता है, वहीं मेरे वाले को भी हुआ, भले ही सामने वाली से कैसा भी रबिता रहा हो…
अब वो कड़क होकर रागिनी की चूत के ऊपर ठोकर मारने लगा, जिसकी वजह से उसकी चूत और ज़्यादा खुन्दस में आकर आँसू बहाने लगी होगी…
वैसे तो मे उसकी मनसा बहुत पहले ही समझ चुका था… लेकिन फिर भी मेने अपनी ओर से उसे और ज़्यादा कुछ नही कहा,
चुप-चाप से वो कपड़ा उसे थमाया, और दूसरा कपड़ा उठा कर दूसरी गाड़ी को पोन्छ्ने लगा…
वो बुरा सा मुँह बना कर गुस्से में भुन-भुनाई और कपड़ा ज़मीन पर फेंक कर अपने पैर पटकती हुई घर की तरफ चली गयी…
ये मेरे लिए अच्छा हो गया, चलो मुसीबत टली, अब मे शांति से गाड़ियों को सॉफ कर सकता था…
आधे घंटे में मेने दोनो गाड़ियों को एक दम साफ कर के चमका दिया… और आकर ठाकुर साब को बोला – लीजिए सर आपकी दोनो गाड़ियाँ सॉफ हो गयी.. चाहो तो आप चेक कर सकते हैं…
वो बोले – अरे बेटा ! कैसी बात करते हो… बोलो तुम्हारी कितनी खरी कमाई हुई..?
मेने कहा – जो आप अपने नौकर को देते हो इतने काम के लिए उतना ही दे दो…
तो उन्होने मुझे 500/- का एक नोट पकड़ा दिया.., मेने कहा – ये तो इतने छोटे से काम के लिए बहुत ज़्यादा है…
वो बोले – अरे रखलो, ग़रीब बच्चों के ही तो काम आना है…
मेने उनकी बात का मान रखते हुए वो नोट ले लिया, तब तक रागिनी भी अपने कपड़े चेंज कर के आ चुकी थी…
फिर हम दोनो वापस कॉलेज लौट आए… लेकिन रास्ते भर वो मुझे गुस्से से ही घुरति रही…, लेकिन बोली कुछ नही.
कॉलेज पहुँचते -2 दूसरे स्टूडेंट्स भी आ चुके थे… सबका कलेक्षन कर के जितना पैसा इकट्ठा हुआ, उसे अनाथ आश्रम को भिजवा दिया…
ये सब काम निबटाने में 3 बज गये थे… मे घर आया और सीधा बाथ रूम में जाकर कपड़े चेंज किए.. और एक टीशर्ट के साथ शॉर्ट पहन कर बाहर आया…
बाहर मुझे कोई नही दिखा… किचेन से बर्तन खटकने की आवाज़ आ रही थी.. जाकर देखा तो दीदी बर्तन साफ कर रही थी…
दीदी ने मुझे देखते ही पूछा – अरे भाई तू आज इतना लेट कैसे हो गया रे..?
मेने उन्हें पूरी बात बताई और खाना लेकर वहीं बैठ कर खाने लगा…
खाना खाते-2 ही मेने दीदी से पूछा.. दीदी ! भाभी कहाँ हैं, जो तुम बर्तन सॉफ कर रही हो…!
दीदी – महारानी साहिबा सो रही हैं..! उनका वैसे भी काम करने का कोई मतलव नही है… कुछ आता-जाता हो तो कुछ करें भी..!
इससे अच्छा था कि भैया अपने साथ ले ही जाते तो ठीक रहता…कम से कम मेरे लिए काम तो कम होता…!
मे – अरे ! ये क्या कह रही हो.., वो तो काम की वजह से ही रुकी थी… ऐसा है तो आप उन्हें सिख़ाओ ना…!
दीदी – सिखाया उसको जाता है मेरे भाई… जो सीखना चाहे… उन्हें ये काम करने ही नही हैं तो सीख कर क्या करेंगी… भैया की कमाई पर ऐश करनी है उनको तो…
मे – तो क्यों ना हम भैया को फोन करदें कि उन्हें अपने साथ ले ही जायें…?
दीदी – रहने दे भाई… उन दोनो को ही बुरा लगेगा.. अब जैसे-तैसे कर के ये दिन तो निकालने ही पड़ेंगे… पर मे क्या बोलती हूँ.. तू ना ! उनके साथ इतना मत चिपके रहा कर..
मे कहाँ चिपका रहता हूँ.. जब मेने ये कहा, तो वो एकदम से बोल पड़ी.. रात भर कहाँ था तो फिर…?
मेने झटके से दीदी की तरफ देखा… वो मेरे पास आकर बैठ गयी और मंद-2 मुस्कराते हुए बोली –
अब मे बच्ची नही हूँ.. छोटे लाल ! तेरे से बड़ी हूँ, और ग्रॅजुयेट भी हूँ.. मुझे सब पता है.. तू क्या-2 करता है…
फिर कुछ सीरीयस होकर बोली – तुझे अपनी बेहन के अलावा वाकी सब दिखाई देते हैं इस घर में.. !
मे उनकी बाद सुनकर खाना, खाना ही भूल गया और उसकी तरफ देखने लगा… वो फिरसे बोली – क्या मेने ग़लत कहा कुछ…?
अब तक तो मोहिनी भाभी ही थी, … अब ये भी आ गयी. मे तो जैसे तेरे लिए इस घर में हूँ ही नही..
फिर वो मेरे कंधे को हिलाते हुए बोली – अब खाना खाले… यौं मुँह फाडे मत देखता रह मुझे… भाभी ने भी कभी-कभार के लिए तो बोला ही था..!
मेने कहा ठीक है दीदी… आज हम दोनो एक साथ सोएंगे…, वो खुशी से मेरे गले से लिपटे हुए बोली – सच… !
फिर अलग होते हुए बोली – लेकिन इस भाभी का क्या करेगा.. ये तुझे अकेला छोड़ेगी..?
मे – उसका भी कोई ना कोई हल निकल आएगा…आज रात तुम मेरा अपने कमरे में इंतजार करना…
मेरी बात सुनकर वो खुश हो गयी.. और जाकर अपने काम में लग गयी… मेने भी अपना खाना ख़तम किया, अपनी बुलेट उठाई और टाउन की तरफ निकल गया…
मेने सोचा कि अगर भाभी को यहाँ से जल्दी से जल्दी विदा करना है, तो उनके साथ ऐसा कुछ करना होगा, जिससे वो भैया को सामने से बुलाकर यहाँ चली जाएँ.
यही सब सोचते सोचते, मेने अपनी बुलेट एक मेडिकल स्टोर के सामने रोकी, और उससे एक 500एमजी विग्रा लेकर घर लौट लिया…
रात के खाने के बाद, भाभी ने मुझे अपने कमरे में आने का इशारा किया… मेने उन्हें थोड़ी देर इंतेज़ार करने का इशारा कर दिया…
रामा दीदी तिर्छि नज़र से ये सब देख रही थी.. और मन ही मन उनको गालियाँ दे रही थी…..
खाने के बाद मेने वो कॅप्सुल पानी के साथ गटक लिया, इस दवा के बारे में ये जानकारी मेने नेट से निकाली थी, जिसका असर डेढ़-दो घंटे के अंदर पूरी तरह हो जाना था…
मेने दीदी को शांत रहने का इशारा कर के, अपने कमरे में चला गया… कुछ देर के बाद उसको गेट खुला रखने का बोल कर मे भाभी के कमरे की तरफ बढ़ गया…
कॅप्सुल लिए हुए अभी मुझे एक घंटा ही हुआ होगा, कि उसका असर मेरे शरीर में महसूस होने लगा…
मुझे उनके घर के कामों में सहयोग ना देने से गुस्सा आ रहा था…, भैया के सामने तो बड़े-बड़े भाषण दे रही थी, मानो वो इस घर के लिए कितनी फैथफुल है और अब अपनी औकात दिखाने लगी.
बड़े घर की बेटी होगी अपने लिए, यहाँ उसे रहना है तो एक आदर्श बहू बनके ही रहना होगा, ना कि किसी महारानी की तरह हुकुम चलाके.
रामा दीदी को मोहिनी भाभी ने अब तक अपनी छोटी बेहन की तरह माना है, और इसने उसे अपनी नौकरानी बना दिया…
ये सब सोच कर मेरे अंदर उनके प्रति एक गुस्से की भावना पनप चुकी थी, इसलिए मेने अब सोच लिया था कि इनको इनकी औकात दिखानी ही पड़ेगी…
भाभी चुदने की पूरी तैयारी कर के बैठी थी.. अपनी मिनी ब्रा और पेंटी के ऊपर एक छोटा सा पारदर्शी गाउन डाल रख था जिसका होना ना होना एक जैसा ही था…
मेने भी देर नही की और अपने कपड़े निकाल दिए, फिर उनके गाउन को उतार कर एक ओर फेंक दिया…
भाभी मेरी जल्दबाज़ी देख कर बोली – क्यों देवर जी आज बड़े उतावले हो रहे हो…
मे – अरे भाभी ! सामने इतना हॉट माल हो तो सबर कहाँ होता है.. ये कह कर मेने अपने भी कपड़े निकाल दिए और अपना कड़क लंड उनके मुँह के सामने लहरा दिया…
मेरे मस्ती में झूमते लौडे को देख कर उन्होने उसे अपनी मुट्ठी कस लिया, और उसके सुपाडे को चाटते हुए बोली –
आअहह… देवर जी, क्या बात है, आज तो ये और ज़्यादा मस्त कड़क लग रहा है..
मेने मुस्कराते हुए कहा – कल की मलाई खाकर ये और ज़्यादा चाक-चौबंद हो गया है…
मेरी बात सुनकर वो भी मुस्कारने लगी, और मेरी आँखों में देखते हुए उसे अपने मुँह में भर लिया…!
कुछ देर वो उसे मज़े ले लॉलीपोप की तरह चुस्ती रही, फिर जैसे जैसे मेरी उत्तेजना में बढ़ोत्तरी हुई, मेने अपनी कमर भी चलाना शुरू कर दिया, और एक तरह से उनके मुँह को चोदने लगा…
मेरा लंड गोली के असर से एकदम डंडे की तरह शख्त हो चुका था, अचानक मेने उनके सर को अपने हाथों में जकड़ा, और पूरा लंड मुँह में ठेल दिया…
वो जाकर उनके गले में फँस गया… कुछ देर में यौंही उसे दबाए रहा..
उनकी गले की नसें फूलने लगी, आँखें बाहर को उबल पड़ने को हो गयी…
मेने सोचा, अगर ज़्यादा देर ऐसे ही रखा तो कहीं कुछ गड़बड़ ना हो जाए, सो मेने झटके से उसे बाहर खींच लिया…
पूरा रोड जैसा शख्त लंड उनकी लार से लिथड़ा हुआ था, वो कुछ देर तक खाँसते हुए अपनी साँसें नियंत्रित करती रही… फिर कुछ राहत की साँस लेकर, शिकायत करते हुए बोली…
बड़े जालिम हो.., ऐसे भी कोई करता है, मेरी साँस ही रोक दी तुमने तो…
मेने मासूम सा चेहरा बनाकर कहा – सॉरी भाभी, मुझसे रहा नही गया, ग़लती हो गयी.. अब नही करूँगा…
फिर मेने उनकी ब्रा और पेंटी भी निकलवा दी.. और उनके चुचे मसल्ते हुए बोला…
भाभी मुझे आपकी गान्ड बहुत अच्छी लगती है.. एक बार दो ना प्लीज़…
वो ना नुकुर करने लगी.. तो मेने भी धमकी दे दी.. तो ठीक है रखो उसे अपने शोकेस में सज़ा कर, मुझे नही चाहिए… और अपने कपड़े उठाने लगा…
उन्होने झपट कर मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली – प्लीज़ ज़िद मत करो.. मेने कभी ट्राइ नही की है… फिर भी अगर आपको वो ही चाहिए तो प्लीज़ एक बार मुझे आगे से करदो…लेकिन थोड़ा प्यार से करना प्लीज़… मुझे दर्द होगा..
मेने कहा ठीक है.. अब आप बेफिकर रहो.. मे आपको दर्द नही होने दूँगा…
मेने थोड़ी देर उन्हें गरम किया.. और जब उसकी चूत पानी देने लगी तो मेने अपना मूसल उसकी चूत में डाल दिया… और जबरदस्त चुदाई शुरू कर दी…
वो हाए- हाए करती हुई 10 मिनिट में ही झड़ने लगी…
फिर मेने उसे घोड़ी बनाने को कहा… वो बोली – प्लीज़ देवर्जी मान जाओ ना.. मुझे दर्द होगा…
मेने कहा – इसकी आप चिंता ना करो.. और मेने उसकी गान्ड चाटना शुरू कर दिया.. घोड़ी बनाने के बाद भी मेने उसकी टाँगों को और चौड़ा कर दिया, अब उसकी गान्ड का सुराख थोड़ा खुल गया था..
मेने उसकी चूत में तीन उंगलियाँ डाल कर उन्हें मोड़ कर बाहर निकाला.. तो उनकी चूत की मलाई ढेर सारी मेरी उंगलियों के साथ आ गयी… जिसे मेने उसकी गान्ड के सुराख में डाल कर एक उंगली से अंदर बाहर कर के चिकना कर दिया…
कुछ देर उंगली से गान्ड चोदने के बाद मेने अपने सुपाडे थूक लगा कर गीला किया और उसके टाइट गान्ड के सुराख पर रख कर अंदर ठेल दिया..
वो कराह कर अपनी टाँगें सिकोड़ने लगी… मेरा पूरा सुपाडा उसकी गान्ड में घुस चुका था…
फिर मेने अपनी टाँगों को उसकी जांघों के आगे से अड़ा दिया और कंधों पर दोनो हाथों को जमा कर एक करारा सा धक्का दे मारा…
अरईईईईईईई…………..मैय्ाआआआआआआअ……….माआआआअरर्र्र्र्ररर……..डलल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्लाआाआअ……….रीईईईई……
वो मुझे अपने ऊपर से धकेलने की भरसक कोशिश कर रही थी… लेकिन मेरी टाँगें उसे हिलने तक नही दे रही थी.. ऊपर से दोनो हाथों ने उसका अगला धड़ दबोच रखा था…
मेरा आधे से ज़्यादा लंड उसकी गान्ड में था… एक बार लंड की साइड में अपना थूक और डाल कर उसे थोड़ा सा बाहर खींचा…
और एक लंबी साँस खींचकर एक जबरजस्त झटका मारा… मोटे बबूल के डंडे जैसा मेरा सख़्त लंड, भाभी की कोमल गान्ड को चीरता हुआ जड़ तक फिट हो गया….
अपना एक हाथ में पहले ही उसके मुँह पर फिट कर चुका था… उसने चीखना चाहा… लेकिन चीख ना सकी… उसकी आँखों से आँसू झरने लगे…
मेने यहीं हद नही की और उसकी चुचियों को मसलते हुए.. धक्के देना शुरू कर दिया… बहुत देर तक वो कराहती रही… दर्द से तड़पति रही.. अपनी गान्ड को हिला डुला कर मेरे सोटे को गान्ड से निकालने का प्रयास करती रही…
लेकिन मेरी टाँगों की केँची ने उन्हें हिलने तक नही दिया…फिर मेने अपना एक हाथ उसकी चूत पर ले जाकर सहलाने लगा..
उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मेने अपने धक्कों की गति बढ़ा दी…
मे पूरी लंबाई के स्ट्रोक के साथ उनकी गान्ड फाड़ने में लगा हुआ था…
वाइग्रा के असर से मेरा लंड गान्ड में जाकर और ज़्यादा फूल गया, उनकी टाइट गान्ड के होल की दीवारें छिल सी गयी, मेरे लंड में भी दर्द सा होने लगा था…
लेकिन उसकी परवाह ना करते हुए मे लगा रहा गान्ड चोदने में, टाइट गान्ड की रॅगडन और उसके अंदर की गर्मी से मेरा लंड भी जल्दी ही पिघलने लगा और में झड गया…
मेरे पैर हटते ही वो धप्प से बिस्तेर पर औंधे मुँह गिर पड़ी.. उसके गिरते ही मेरा लंड ऑटोमॅटिकली बाहर आ गया…
मेने देखा तो उसपर कुछ खून के धब्बे से लगे हुए थे.. जो उसकी गान्ड की अन्द्रुनि दीवार के फटने से लग गये थे…
कामिनी भाभी की गान्ड का छेद लाल सुर्ख हो गया था, लंड बाहर आने के बाद भी कुछ देर तक वो एक सर्कल के शेप में खुला ही रहा…
उन्हें यौंही पड़ा छोड़कर मेने चुप चाप अपने कपड़े उठाए… और उनके रूम से खिसक लिया…,
दरवाजे को भिड़ा कर बाहर निकल आया.. वो यौंही बेसूध पड़ी रह गयी…
बाहर आकर मेने बाथ रूम में जाकर अपने लंड को साफ किया.. और बिना कपड़े पहने ही दीदी के रूम में घुस गया…
टाइट गान्ड की ज़बरदस्ती की रगड़ और कॅप्सुल के असर से मेरे लंड में भी थोड़ा सा दर्द जैसा था… लेकिन उसकी अच्छी-ख़ासी कशरत होने से वो अभी भी ढीला नही हुया था..
दीदी एक चादर ओढ़े मेरा इंतेज़ार कर रही थी… गेट बंद कर के मेने उसकी चादर हटाई…………..वाउ ! उसके बदन पर कपड़े के नाम पर एक रेशा तक नही था..
मे उनके साथ लेट गया.., और उसके नंगे तपते बदन को अपनी कामुक हरकतों से और ज़्यादा पिघलने लगा…
जब वो लंड लेने के लिए उताबली दिखने लगी, तो मेने बड़े प्यार से अपना डंडे जैसा लंड जो अभी भी दवा के असर में था, उसकी रसीली चूत में धीरे-2 डालने लगा.
लंड फूल कर इतना कड़क हो चुका था, की दीदी की गीली चूत आधे में ही फडफडाने लगी…
उसके मुँह से कराह निकलने लगी.. मे आधे लंड से ही उसकी तमन्ना पूर्ति करता रहा और जितनी निर्दयता से मेने भाभी की गान्ड फाडी थी… उसके ठीक उलट मे दीदी के साथ बड़े इतमीनान के साथ चुदाई करने लगा…
अब मेरी कोशिश रहती थी… कि मे अपनी दीदी को आधे लंड से ही संतुष्ट करूँ.. जिससे उसके कुंवारेपन पर ज़्यादा फ़र्क ना पड़े… ये भाभी का ही सुझाव था हम दोनो के लिए…
कभी-कभी तो बिना अंदर डाले ही हम दोनो संतुष्ट हो जाते थे…
आज भी बड़े सॉफ्ट तरीके से चोद्कर मे दीदी को संतुष्ट करना चाहता था, लेकिन दवा का असर, ऐसा ना करने पर मजबूर कर रहा था…, और ना चाहते हुए भी जब वो मेरा सहयोग करने लगी तो मेने उन्हें थोड़ा ज़ोर से रगड़ दिया…,
वो तो इस तरह का वाइल्ड सेक्स पाकर मस्त हो गयी, देर रात तक हम दोनो एक दूसरे में गूँथे रहे, और फिर मे उसके बगल में ही सो गया……!
दूसरे दिन सुबह मेरे कॉलेज जाने तक भी कामिनी भाभी अपने कमरे से बाहर नही आई.. तो मे एक नज़र उनको देखने चला गया… वो अभी भी सो रही थी.. लेकिन अब उनके बदन पर व्यवस्थित कपड़े थे…
फिर मेने सोचा की कॉलेज से लौट कर ही बात करता हूँ… और मे वहाँ से अपने कॉलेज चला गया…
दोपहर को कॉलेज से वापस आने के बाद देखा, तो कामिनी भाभी अभी भी अपने कमरे में ही थी.. मे सीधा उनके पास चला गया…
वो मुझे देख कर सुबकने लगी… और शिकायत करते हुए बोली…
मेरे साथ आपने ऐसा क्यों किया देवर्जी…? आपने कोन्से जन्म की दुश्मनी निकाली मेरे साथ ?
मेने कहा – सॉरी भाभी ! मे आपकी सुन्दर सी मदमस्त गान्ड देख कर अपने आप पर कंट्रोल नही कर पाया.. और वो सब मुझसे हो गया जो में कभी नही करना चाहता था… प्लीज़ मुझे माफ़ कर दीजिए…
अब मे आज आपसे एक वादा करता हूँ… कि आज के बाद मे आपको कभी हाथ भी नही लगाउन्गा..
वो हड़बड़ाते हुए… कुछ बोलना चाहती थी, कि मेने हाथ का इशारा कर के उन्हें रोक दिया और बोला –
आपको कुछ कहने की ज़रूरत नही है.. अब मेरे लिए यही सज़ा है.. कि मे आज के बाद अपनी प्यारी और परी जैसी सुन्दर भाभी के पास भी ना फटकू.. हो सके तो मुझे माफ़ कर देना…
उसके बाद मेने उनके जबाब का भी इंतेज़ार नही किया और उनके पास से उठ कर चला आया…
रामा दीदी छिप्कर हमारी बातें सुन रही थी… मुझे बाहर आते देख वो किचेन में चली गयी…
और मुझे इशारे से अपने पास बुलाकर हँसते हुए बोली – वाह भाई… क्या सबक सिखाया है तूने उनको… मज़ा आ गया…,
साँप भी मर गया और लाठी भी नही टूटी, इस बात पर हम दोनो ही ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे…
दो दिन बाद ही भाभी ने भैया को फोन कर के बुला लिया और एक रात रुक कर वो उनके साथ शहर चली गयी…
जाते हुए उनके चेहरे के भाव मेरे प्रति कुछ अच्छे नही थे, मुझे लगा जैसे एक गुस्से की आग उनके अंदर दबी हुई हो, जिसे मे समझ नही पा रहा था…
खैर अब जो होना था, सो हो गया, पर अब मे और दीदी… दोनो ही घर में अकेले रह गये थे, जो अब मस्ती से मनमाने तरीके से रह सकते थे…….!
अब दीदी ने घर में ब्रा और पेंटी पहनना बंद ही कर दिया था, वो बस एक वन पीस गाउन ही डाल लेती थी, जिससे उसके नाज़ुक अंग मेरी उत्तेजना बढ़ाते रहते थे..
जानबूझ कर वो उन्हें मेरे सामने और ज़्यादा उभार कर निकलती, तो मे उसे भी निकाल देता, और अपने खड़े लंड पर बिठाकर सारे घर में घूमता…
वो भी चलते फिरते अपनी गान्ड मेरे लौडे से रगड़ कर मुझे छेड़ देती, और हम दोनो ही गरम हो जाते.. लेकिन इन सबके बबजूद फिज़िकल सेक्स को अवाय्ड करने की कोशिश करते थे…
जब पानी सर से गुजरने लगता, तभी चुदाई करते…!
एक दिन दीदी रसोई में काम कर रही थी, वो थोड़ा आगे को झुक कर बर्तन धोने में लगी थी, टाइट फिट मिनी गाउन में उसके गोल-गोल चूतड़ बाहर को निकले हुए थे…
पेंटी ना होने की वजह से उसकी गान्ड की दरार भी साफ-साफ दिखाई दे रही थी…
मे उसी समय कॉलेज से लौटा था, कमरे में कपड़े चेंज कर के मे सीधा रसोई में ही चला गया,
गेट से ही मेरी नज़र जैसे ही उस नज़ारे पर पड़ी…मेरा लॉडा बिना अंडरवेर के शॉर्ट में फड़फड़ाने लगा…
मे दबे पाँव उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया, वो अपनी धुन में मस्त काम करने में व्यस्त थी…
मे अपना लॉडा उसकी गान्ड में फिट कर के उससे सॅट कर जैसे ही खड़ा हुआ, वो एक साथ चोंक पड़ी, फिर अपनी गान्ड का दबाब मेरे लौडे पर डालते हुए बोली…
मान जा ना भाई, क्यों परेशान करता है, मुझे काम करने दे ना…
मेने उसकी बगलों से हाथ आगे लेजाकर उसके अनारों को सहला कर कहा – लाओ मे भी मदद कर देता हूँ…
वो – मुझे पता है, तू कैसी मदद करेगा… छोड़ मुझे…आअहह… नही भाई… ज़ोर से नहियिइ….
जब मेने फिर भी उसे नही छोड़ा… तो वो काम छोड़कर मेरी तरफ पलट गयी, और मेरा लंड पकड़ कर उमेठ दिया…
आआईयईईई…..डीडीिई…क्या करती हो… तोडोगी क्या…?
वो शरारत से मुस्कराते हुए बोली – अच्छा ! तब से तू मेरी चुचियों को मरोड़ रहा था तब कुछ नही था, अपनी बारी आई तो लगा चिल्लाने…
फिर उसने मेरे होंठों को चूम लिया, और बोली – अब जा बाहर मुझे काम निपटाने दे, वरना मे आराम नही कर पाउन्गि…!
मेने वहाँ से जाने का नाटक किया, जब वो मुड़कर फिरसे काम पर लग गयी, तो मेने झटके से उसका गाउन कमर तक ऊपर उठा दिया, और नीचे बैठ कर उसकी गान्ड की दरार में मुँह डालकर चाट लिया…
आआहह…..कुत्ते… नही मानेगा तू…सस्सिईइ…छोड़ .. आई…
वो एक तरफ मना करती जा रही थी, और दूसरी तरफ उसने अपनी टाँगें चौड़ी कर दी, जिससे में और आसानी से अपनी जीभ को उसकी चूत तक ले जेया सकूँ…
थोड़ी ही देर में वो गरम हो गयी, उसने अपना गाउन निकाल कर एक तरफ फेंक दिया… और मेरी तरफ पलट कर एक टाँग मेरे कंधे पर रख दी…
मे उसकी चूत को अच्छे से चाटने लगा.. वो अपनी आँखें बंद कर के मेरे बालों को सहलाने लगी…
कुछ देर बाद उसने मेरा सर पकड़कर, मुँह अपनी चूत के द्वार पर दबा दिया…
और आआईयईईई….मे..गाइिईई….करते हुए वो मेरे मुँह में झड़ने लगी…
कुछ देर तक वो मेरे मुँह को यौंही दबाए एक टाँग पर खड़ी रही…फिर जब उसका स्खलन बंद हो गया, और जैसे ही अपनी आँखें खोल कर सामने देखा…
झटके से उसने मुझे अपने से अलग किया, और अपने गाउन की तरफ लपकी… मेने बैठे-बैठे ही पीछे मुड़कर देखा….
सामने गेट पर अपने मुँह पर हाथ रखे हुए छोटी चाची खड़ी थी…
दीदी अपना गाउन पहनकर गर्दन झुकाए किसी अपराधी की तरह खड़ी हो गयी…
चाची अपने हा पर हाथ रखे हुए ही बोली – हाए लल्ला ! रामा बेटी ! तुम दोनो इतने बेशर्म भी हो सकते हो मुझे पता ही नही था…,
सगे भाई-बेहन होकर ऐसा काम करते तुम दोनो को लज्जा नही आती…?
दीदी की तो हवा ही खराब हो चुकी थी, वो सूखे पत्ते की तरह खड़ी-खड़ी काँप रही थी…
मे मंद-मंद मुस्कराते हुए चाची की तरफ बढ़ा, और जाकर उनकी एक चुचि को मसल्ते हुए कहा –
हम ऐसा क्या कर रहे थे चाची, जिसमें हमें लज्जा आनी चाहिए थी…?
मेरे चुचि मसल्ते हुए ऐसा कहने से दीदी की और ज़्यादा हालत खराब होने लगी.. वो फटी-फटी आँखों से मेरी तरफ देख रही थी…
चाची ने अपने चेहरे पर बिना कोई भाव लाए कहा – यही सब में जो अभी तुम दोनो कर रहे थे, वो तुम्हारे सामने नंगी खड़ी थी, और तुम उसकी वो ..वो..वो..चाट रहे थे.. और क्या..
मेने चाची की दोनो चुचियाँ एक साथ मसल दी, और कहा – वो क्या चाची…?
चाची मेरे लंड को दबाकर मुस्कराते हुए बोली – हाए लल्ला ! तुम वाकई में बहुत बेशर्म होते जा रहे हो…
मे – तो आप भी हो जाओ ना हमारे साथ बेशर्म, ये कहकर मेने उनकी साड़ी पेटिकोट समेत कमर तक उठा दी…
छ्होटे-2 बालों से घिरी, मोटे-मोटे होंठों वाली चूत को देखकर रामा दीदी बुरी तरह चोंक पड़ी…वो समझ ही नही पा रही थी, कि आख़िर ये हो क्या रहा है…
अब चाची ने भी मेरा शॉर्ट नीचे खींच कर मेरा लंड सहलाने लगी…! मे उनकी माल पुआ जैसी चूत को अपनी मुट्ठी में भरकर मसल्ने लगा…
रामा जो कुछ देर पहले खड़ी डर के मारे थर-थर काँप रही थी, ये नज़ारा देख कर उत्तेजित होने लगी…
मेने इशारे से उसको भी अपने पास बुला लिया, अब हम तीनों ही एक दूसरे में गुत्थम-गुत्था होते जा रहे थे…
कुछ ही पलों में हमारे बदन से कपड़े अलग हो गये… मेने रामा दीदी को स्लॅब के किनारे पर बिठा दिया, और चाची को झुका कर उसकी चूत के सामने खड़ा कर लिया…
फिर पीछे से मेने चाची की चूत में अपना लॉडा डाल दिया…. वो आआहह…सस्सिईईई….जैसी आवाज़ के साथ आँखें बंद कर के मेरे लॉड को अपनी चूत में निगल गयी…
दीदी ने चाची का मुँह अपनी चूत पर दबा दिया, और वो उसे चाटते हुए चुदाई का मज़ा लूटने लगी…
हम तीनों ही मज़े की खोज में निकल पड़े, और 15 मिनिट की मस्त चुदाई के बाद क़हचही ऊंट (कॅमल) की तरह गर्दन आकड़ा कर झड़ने लगी….
उनके कामरस के प्रेशर से मेरा मूसल अपने आप चूत के बाहर आ गया… मेने रामा दीदी को अपनी गोद में लेकर स्लॅब के नीचे फर्श पर लेट गया…
वो अपनी अधझड़ी बुर लेकर मेरे डंडे के ऊपर बैठती चली गयी… मेने उसके अनारों को मसल्ते हुए नीचे से कमर चलाना शुरू कर दिया…
चाची हमारी चुदाई देख कर मस्त हो गयी.. और अपनी चुचियों को खुद ही मसलने लगी…
कुछ देर के बाद वो भी झड गयी…, तो मेने उसे अपने ऊपर से हटाया, खुद खड़ा होकर अपने लंड में दो हाथ के सट्टी लगाए, और अपनी गढ़ी-गढ़ी मलाई उन दोनो के चेहरे पर उडेल दी.
वो दोनो किसी भूखी कुटियाओं की तरह एक दूसरे के चेहरे से मेरी मलाई चाटने लगी…
मेने चाची की मस्त मोटी गान्ड मसल्ते हुए कहा – क्यों चाची…भतीजे- भतीजी के साथ चुदने में मज़ा आया कि नही…
चाची – हाए लल्ला… तुम तो सच में बहुत बड़े वाले चोदु हो गये हो… मुझे भी अपनी तरह बेशर्म बना ही दिया…
पर सच कहूँ… आज एक अजीब ही तरह का मज़ा आया… क्यों रामा… तुम्हें आया या नही…?
दीदी ने बोलने की जगह चाची के होंठों पर किस कर लिया…
आज घर में एक नया अध्याय ओपन हो गया था, जो चाची और रामा दीदी के लिए सुखद अनुभव देने वाला साबित हुआ था……
ऐसी ही मौज मस्ती के बीच समय का पता ही नही चला और राजेश की शादी का दिन भी आ गया.. बड़े भैया दो दिन पहले ही घर आ गये थे…
अगले दिन बाबूजी समेत हम सभी लोग उसकी शादी अटेंड करने चल दिए….!
भैया को जीजा होने के नाते कुछ मंडप वग़ैरह की रस्में निभानी थी…, इस वजह से हमें सुबह जल्दी ही निकलना पड़ा… गाड़ी से आधे घंटे में 10 बजे तक उनके यहाँ पहुँच गये..
फाल्गुन का शुरुआती महीना था… हल्की-2 सुबह में ठंडी रहती है…, भैया तो जाते ही कुछ ख़ान-पान की मेहमान नवाज़ी के फ़ौरन बाद अपनी रस्मों में बिज़ी हो गये…
पिताजी अपने समधी और वाकी के बुजुर्गों के पास बैठ कर राज़ी खुशी में व्यस्त हो गये,
राजेश के कुछ साथ के कुलीग भी आए थे.. तो मे उनके साथ छत पर कुर्सी डालकर बैठ गया और उनके साथ गप्पें लगाने लगा…
तभी वहाँ कुछ शादी शुदा औरतें आई जो शायद निशा की भावियाँ लगती थी…
उनके हाथ हल्दी से पुते हुए थे, आते ही वो उन लोगों को हल्दी लगाने लगी…इतने में मे सतर्क हो गया…
और इससे पहले कि उनमें से कोई मेरे पास आकर मुझे हल्दी लगाती, मे वहाँ से उठ कर एक तरफ भाग गया…
अभी मे सीडीयों के पास वाली बौंड्री से सट कर खड़ा हुआ ही था की तभी मेरी जान का दीदार हुआ… आँखों -2 में हमने एक दूसरे को ग्रीट किया….
मे धीरे-2 उसकी तरफ सरक ही रहा था… कि वो मुस्कुराती हुई.. नीचे भाग गयी… मे अभी भी उसे भागते हुए देख रहा था की ना जाने कहाँ से एक लड़की..
मेरे पीछे से आ गयी और उसने मेरी पीठ पर जोरदार थप्पड़ जड़ दिए..
जो असल में हल्दी लगे हाथों के थे… मेने जैसे ही उसकी तरफ पलट कर देखा…वो वही हल्दी लगे हाथ मेरे चेहरे पर भी रगड़ने लगी..
चूँकि वो लंबाई में निशा से भी कम थी… और मे ठहरा सवा 6 फूटा… तो उसको अपने हाथ काफ़ी ऊपर करने पड़े जिसकी वजह से उसके बड़े-बड़े कलमी आम मेरे पेट से रगड़ने लगे…
वो हँसते हुए मेरे गालों पर हल्दी मल रही थी.. मेने उसके हाथ पकड़ लिए और मॉड्कर उसके ही हाथ उसके गालों से रगड़ दिए जिससे रही सही हल्दी उसके गालों पर भी मल गयी…
वो झूठ-मूठ की नाराज़गी भरे लहजे में बोली – क्या जीजा जी… ये तो चीटिंग है.. आपने हमारी ही हल्दी हमें ही लगा दी…
बाजू में खड़ी औरतें बोली – क्यों ननद रानी… अब आया ना मज़ा.. ये जीजा आसानी से तुम्हारे हाथ आने वाले नही हैं…
वो नकली गुस्सा दिखाते हुए.. पैर पटकती हुई वहाँ से नीचे चली गयी…
वो जैसे ही वहाँ से गयी, उन औरतों ने मुझे चारों ओर से घेर लिया, और मेरे साथ खुल्लम खुल्ला मज़ाक करते हुए मेरे कपड़ों पर हल्दी लगाने के बहाने अपने नाज़ुक अंगों को मेरे शरीर के साथ रगड़ने लगी…
मेने जैसे तैसे कर के अपने आप को उनके चंगुल से आज़ाद किया, इस कोशिश में एक दो की रगड़ाई भी करनी पड़ी, और वहाँ से भाग के नीचे आ गया.
नीचे आकर मे निशा को ढूँढ रहा था… जो मुझे एक झलक दिखा कर एक तरफ को भाग गयी…
मे भी उसके पीछे -2 उसके पास पहुँच गया… वो एक ऐसी जगह खड़ी थी जहाँ लोगों का आना-जाना कम था…
मेने उसे बाहों में भर कर चूम लिया और शिकायत करते हुए कहा – तुमने मेरा स्वागत इस तरह से कराया है..? मुझे तुमसे ये उम्मीद नही थी…
वो मुस्कराते हुए बोली – ससुराल में आए हो… सालियों से तो ऐसी ही आशा करनी चाहिए आपको… इसमें ग़लत क्या है…
में उसकी बात का जबाब उसके होंठों को चूमकर देना चाहता था कि उसने मुझे धक्का देकर अपने से दूर कर दिया, मे जैसे ही एक कदम पीछे हुआ….
एक भारी बाल्टी गाढ़ा-गाढ़ा रंग, मेरे गर्दन से नीचे तक मुझे रंगता चला गया… निशा मेरे सामने खड़ी खिल-खिला रही थी…
मे जैसे ही उस रंग डालने वाली की तरफ पलटा… वही लड़की जो कुछ देर पहले मुझे हल्दी लगा गयी थी, मेरे चेहरे पर टूट पड़ी… मेरा पूरा चेहरा उसने गाढ़े-2 रंग से पोत दिया…
मेने भी अब उसे मज़ा चखाने का सोच लिया, एक हाथ से उसकी मोटी- गुदगुदी गान्ड को कसा, और दूसरे हाथ को उसके सर के पीछे से पकड़कर कर अपने से सटा लिया.
वो मेरी पकड़ से आज़ाद होने का भरसक प्रयास कर रही थी, लेकिन उसे क्या पता था कि ये फेविकोल का मजबूत जोड़ है, आसानी से टूटने वाला नही है..
और फिर मेने अपने चेहरे का पूरा रंग उसके गालों से रगड़ -2 कर पोंच्छ दिया…
उसके दोनो आम मेरे सीने से दबे हुए थे… दूर खड़ी निशा खिल-खिलाए जा रही थी… उस लड़की की साँसें भारी होने लगी.. और उसकी आँखों में वासना के कीड़े तैरने लगे…
उसने उचक कर मेरे चेहरे को अपने हाथों में लेकर मेरे होंठों पर किस कर दिया और दूर छिटक कर लंबी- 2 साँसें लेने लगी…
निशा ने पास आकर हम दोनो का इंट्रोडक्षन कराया – ये है मेरी दोस्त मालती… आपसे मिलने के लिए बहुत उतावली हो रही थी… फिर वो मल्टी से बोली – अब खुश… मिल ली ना अपने जीजा जी से…
मालती अपना हाथ आगे कर के बोली – थॅंक यू जीजा जी… आपसे मिलकर बड़ी खुशी हुई..
मेने भी उसका नरम मुलायम हाथ अपने हाथ में लेकर चूमते हुए कहा – मुझे भी ऐसी हॉट & सेक्सी साली से मिलकर बड़ी खुशी हुई…
हाथ मिलाते हुए उसने एक गाढ़े से रंग का पेस्ट मेरे हाथ में थमा दिया, और अपनी एक आँख दबा कर इशारा कर दिया…
मेरे मुँह से उसके लिए हॉट & सेक्सी सुनकर निशा के चेहरे पर नाराज़गी वाले भाव दिखाई दिए…
जिन्हें देख कर मालती उसे चिढ़ाते हुए बोली – क्यों जल गयी ना… जीजा जी के मुँह से मेरे लिए हॉट सुन कर…
निशा – अच्छा ! साली मुझे चिढ़ाएगी… ठहर, इतना कहकर वो मालती की तरफ झपटी…
मौके का फ़ायदा उठाकर मेने वो रंग अपने हाथों में माला, और पीछे से निशा को लपक लिया…
अचानक हुए हमले से वो मेरी बाहों में कसमसाने लगी, लेकिन तबतक मेने उसके चेहरे को पूरी तरह से रंग दिया…
अब वहाँ खड़े हम तीनों की सूरत बंदरों जैसी लग रही थी…
निशा झूठा गुस्सा दिखाकर मेरे सीने पर घूँसे मारते हुए बोली – धोखेबाज़ कहीं के, मुझे क्यों खराब किया..?
फिर वो मालती से बोली – मे क्यों जलने लगी..तू जाने, तेरे जीजा जी जाने… मे कॉन हूँ.. जीजा साली के बीच आने वाली.. ये कह कर वो जाने लगी…
मेने उसका हाथ पकड़ कर एक झटका दिया.. और वो सीधी मेरे सीने से आ लगी… मेने उसे अपनी बाहों में कसते हुए कहा… मेरी जान बुरा मान गयी…,
वो मेरी बाहों में कसमसाते हुए बोली – छोड़िए प्लीज़…. कुछ तो शर्म करिए.. मालती खड़ी है यहाँ…
मालती हँसते हुए बोली – लगे रहो… मुझे कोई प्राब्लम नही है… मियाँ बीवी राज़ी, तो क्या करेगा काज़ी… और खिल-खिला कर वो वहाँ से भाग गयी…
हम दोनो कुछ देर यौंही खड़े एक दूसरे से चिपके एक दूसरे को किस करते रहे.. फिर किसी के आने की आहट सुन कर अलग हो गये..
तभी भाभी वहाँ आ गयी… और बोली – हूंम्म… तो तोता-मैना का मिलन हो ही गया… चलो भाई ठीक है…
फिर वो हम दोनो की हालत देख कर मुस्कराते हुए बोली – वैसे मैना रानी तुमने अपने तोता राजा का स्वागत अच्छे से किया है.. वेल डन..!
निशा उनकी बात सुनकर शरमा कर वहाँ से भाग गयी… फिर भाभी ने मेरे से घर के हालत के बारे में बात की, और पूछा कि कामिनी क्यों नही आई.. ?
मेने उन्हें बता दिया, कि वो ज़्यादा दिन अड्जस्ट नही कर पाई गाँव के माहौल में इसलिए भैया के साथ चली गयी…
भाभी का मन था मेरे गाल पर किस करने का लेकिन मेरे चेहरे की हालत देख कर मन मसोस कर रह गयी…!
थोड़ी देर बाद निशा, रूचि को लेकर वहाँ आ गयी… वो ताली बजाते हुए बोली – ओहो.. चाचू को बंदर बना दिया… ये किसने किया मौसी… आपने..?
निशा – नही ! ये मालती मौसी ने किया है… तो वो बोली – मालती मौसी बहुत गंदी है… मेरे चाचू को बंदर बना दिया.. अब में उनको क़िस्सी कैसे करूँगी…?
मेने कहा – कोई नही ! अपनी बिताया रानी के लिए चाचू फिरसे नहा लेंगे…
ऐसी ही हसी खुशी के माहुल में पूरा दिन व्यतीत हो गया…पूरे घर में मेहमानों की भीड़ भारी पड़ी थी… सो फिर चान्स नही लगा निशा से मिलने का..
रात को खाना पीना खाकर सारे मेहमानों के सोने का इंतज़ाम भी करना था.. हल्की-2 सर्दी थी मौसम में तो रज़ाई गद्दों का इंतेज़ाम तो टेंट हाउस से कर दिया गया… लेकिन घर में जगह की कमी थी…
तो आस-पड़ोस में लोगों को सुविधा अनुसार सेट किया गया… निशा ने मालती से कह कर उसके घर में मेरे लिए विशेष इंतज़ाम करा दिया था….
सब रीति रिवाजों के संपन्न होने के बाद वो मुझे लेकर अपने घर को चल दी…
मालती बाइ कास्ट ठाकुर थी, उसके माता – पिता नही थे, वो उसके जन्म के कुछ सालों बाद ही किसी दुर्घटना का शिकार हो गये थे… वो अपने दादा-दादी के साथ ही रहती थी.. !
घर काफ़ी बड़ा था, और भाभी के घर से थोड़ा ही दूरी पर था…
मालती निशा की बचपन की सहेली थी… उन दोनो के बीच कोई भी बात छिपि नही थी…
वो मेरे और निशा के संबंध के बारे में भी जानती थी…
मालती शरीर में निशा से कुछ भारी थी, जो शायद दादा-दादी के लाड़ प्यार का नतीजा था…
उसने घर पहुँच कर मेरे लिए एक सेपरेट कमरे में मेरा बिस्तर लगाया था..
मुझे उस कमरे में पहुँचा कर वो अपने दादा-दादी के पास चली गयी..
जब वो दोनो सो गये तो मेरे लिए एक बड़े से ग्लास में दूध लेकर वो मेरे पास आई…………!
दिनभर की भागदौड़ से मेरी आँख जल्दी ही लग गयी, इससे पहले की मे गहरी नींद में जा पाता, कि मालती की आवाज़ ने मुझे चोन्का दिया…..लीजिए जीजा जी दूध पी लीजिए..
मेने अनमने भाव से अपनी आँखें खोली, सरक कर बेड पर सिरे की तरफ बैठ कर जमहाई लेते हुए कहा – अरे मालती जी ! इसकी क्या ज़रूरत थी…?
वो बोली – मुझे पता है… आपको दूध पीने की आदत है.. लीजिए, अब ये फॉरमॅलिटी अपनी साली के साथ मत करिए… और ज़बरदस्ती ग्लास मेरे हाथ में थमा कर वहीं मेरे पास बैठ गयी…!
आपको पता है… मे और निशा बचपन से ही पक्की दोस्त हैं… आज तक हमारे बीच ऐसी कोई बात नही है जो एक दूसरे से छिपि हो…
आपके यहाँ से जाते ही उसने आपके और अपने बारे में सब कुछ बता दिया था…
वो रोज़ आपके बारे में ही बातें करती रहती है… उसकी बातें सुन सुन कर आपसे मिलने की मेरी जिग्यसा बढ़ती गयी…
और देखिए आज आप मेरे पास बैठे हैं… सच में निशा ने मुझे आपके बारे में कम ही बताया था… आप तो उससे कही बढ़कर ही निकले…
मेने मुस्कराते हुए कहा – किस बात में… ?
वो – मुझे ये उम्मीद नही थी कि आप इतने हॅंडसम होंगे… सच कहूँ तो मुझे निशा से जलन हो रही है… कि काश उसकी जगह में होती…?
मे – अरे साली जी ! क्यों आप मुझे चने के झाड़ पर चढ़ा रही हो… मे इतना भी हॅंडसम नही हूँ…!
वो – आप मेरी जगह होते तब पता चलता आपको की आप क्या हैं.. सच में निशा कितनी भाग्यशाली है.. की आप जैसा हॅंडसम उसका लवर है… और इसमें कोई गुंजाइश भी नही है.. की एक दिन आप दोनो एक भी हो जाओगे…!
मेने उसे ब्लश करते हुए कहा – वैसे आप भी कम नही हो… जब भी घर से निकलती होगी.. लड़कों की लाइन लग जाती होगी…!
वो कुछ बुझे-बुझे से स्वर में बोली – अपनी ऐसी किस्मत कहाँ… मे कितनी मोटी हूँ.. !
जब भी हम दोनो सहेलियाँ बाहर निकलती हैं… तो लड़के उसको ही देखते रहते हैं.. और में कुढती रहती हूँ…
मे – ये तो अपनी – 2 नज़र का ख़याल है… वैसे आपके जैसे कूर्वी फिगर वाली लड़कियाँ ही ज़्यादा हॉट लगती हैं..
वो – आप मज़ाक कर रहे हैं… मे और हॉट…?
मे – हां ! कम से कम मेरी नज़र में तो आप हॉट ही हो… दूसरों का मे कह नही सकता… मेने उसका मन रखने के लिहाज़ से कहा…
वो मेरी तरफ और खिसक आई, और मेरे शरीर से अपना बदन सटाती हुई बोली – क्या में सच में हॉट लगती हूँ आपको..?
मे अब सोच में पड़ गया… मेरा उसको ब्लश करना मुझे अब भारी पड़ता नज़र आने लगा…
अब अगर मे इसका दिल दुखाता हूँ… तो बेचारी का दिल टूट जाएगा.. सो अपनी बात पर कायम रहते हुए बोला…
देखो… हर आदमी की अपनी-अपनी चाय्स होती है… कोई तो इकहरे बदन की लड़की पसंद करता है… तो वहीं बहुत से लोग कूर्वी फिगर के दीवाने होते हैं…!
आपको कैसा फिगर अच्छा लगता है…वो मुझसे और चिपकते हुए बोली… उसके बदन की गर्मी मुझे पिघलाने लगी थी…
और मे उसके मादक कूर्वी फिगर की तारीफ़ कर बैठा…
सच कहूँ तो मुझे तुम्हारे जैसी फिगर वाली लड़कियाँ ज़्यादा अच्छी लगती है…
मेरा इतना ही कहना था कि उसने मेरे गले में अपनी मांसल बाहें डाल दी…, और अपने कलमी आमों को मेरे सीने से सटाते हुए बोली –
ओह ! जीजू आप सच में बहुत अच्छे हैं.. आइ लव यू… ये कह कर उसने मेरे गाल पर किस कर दिया…
मेने उसके कंधे पकड़ कर अपने से अलग करते हुए कहा – लेकिन मे तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड से बहुत प्यार करता हूँ..
वो मेरी आँखों में झाँकते हुए बोली – तो मेने कब कहा है कि आप उससे प्यार मत करो… बस उसमें से थोड़ा सा… बस इत्तु सा (अपनी उंगली के पोर पर अंगूठे से निशान बना कर बोली) मुझे भी दे दीजिए…
मे – ये तुम क्या कह रही हो मालती..? मे अपने प्यार से बेवफ़ाई नही कर सकता …
वो – ओह…जीजू.. आप भी क्या दकियानूसी बातें करने लगे.. मे अपनी सहेली के प्यार को बाँटने की बात थोड़ी ना कर रही हूँ… मे तो बस थोड़ा सा आपका प्यार माँग रही हूँ..
ये वादा है मेरा, कि इस बात का किसी को भी, कभी भी पता नही चलेगा…ये कहते हुए वो मेरे बदन से लिपट गई…
मे – प्लीज़ मालती… समझने की कोशिश करो… मे ये तुम्हारे साथ नही कर सकता….
वो – प्लीज़ अंकुसजी…! मे आपसे विनती कर रही हूँ.. प्लीज़ बस एक बार… फिर जीवन में कभी आपसे नही कहूँगी…
मे उसकी गुहार सुनकर पिघलने लगा और स्वतः ही मेरा हाथ उसकी पीठ पर सरक गया…
वो दीवानवार मेरे चेहरे को चूमने लगी… उसकी मादक चुचियाँ.. मुझे उत्तेजित कर रही थी… ना जाने कब हम दोनो के कपड़े एक दूसरे के बदन से जुदा हो गये…
वो जल्दी से जल्दी मुझ में समा जाना चाहती थी…उसकी हरकतों से ही मुझे लगाने लगा कि वो ये सब पहले भी कर चुकी है…
मुझे क्या फरक पड़ने वाला था… एक और नाम लिस्ट में जुड़ जाना चाहता है तो वो भी सही.. सो जोड़ लिया…,
वो मेरा लंड लेने के लिए उतावली हुई जा रही थी, देखते देखते उसने हम दोनो के बदन से कपड़े नोच डाले..
मेने उसके बड़े बड़े आमों को चूस्ते हुए…अपना लॉडा जैसे ही उसकी रसभरी मुनिया के मुँह पर रखा…
कामांध मालती ने झटके से अपनी गान्ड ऊपर को उचका दी, गीली चूत में मेरा आधा तक मूसल सरक गया……
उसके मुँह से मादक कराह फुट पड़ी…. आआहह…. जीजू… धीरे…हाए… बहुत मोटा है आपका…
मेने उसके कलमी आमों को मसल्ते हुए कहा – मेने तो कुछ भी नही किया साली साहिबा… तुम्हें ही उतावली हो रही थी इसे लेने की…
मेरी बात सुन कर शर्म से उसने अपना सर मेरे सीने में छुपा लिया, फिर अपना हाथ नीचे ले जाकर उसने मेरे लंड को टटोला…
वो समझ रही थी, कि पूरा लंड अंदर चला गया होगा.. सो बाहर बची हुई लंबाई नाप कर बोली –
हाए राम… ये तो अभी भी इतना सारा वाकी है..? मेरे अंदर तक तो पूरा भरा-भरा सा लग रहा है… अब ये कैसे जाएगा पूरा…?
मेने उसके माल पुआ जैसे गाल पर अपने दाँत गढ़ाते हुए कहा – ये अब मेरा काम है रानी, तुम बस देखती जाओ..
आआययययीीई…जीजू प्लीज़ दाँत मत गढ़ाओ, निशान बन जाएँगे…
मेने अपने दाँतों के निशान पर जीभ से उसके गालों को चाटते हुए एक करारा सा धक्का और जड़ दिया…
मालती ने दर्द के मारे मेरे कंधे पर अपने दाँत गढ़ा दिए… और मेरे नीचे दबी हुई मचलने लगी…
दर्द से मेरी कराह निकल गयी… मेने उसके चुचे मसलते हुए कहा – साली कटखनी बिल्ली…
कुछ देर ठहरकर मेने उसे चोदना शुरू किया… वो जैसे ही दोबारा मज़े में आई… बस फिर तो पुछो ही मत…
वो घमासान लड़ाई हुई पलंग के मैदान पर.. कि मैदान भी चूं-छाँ करने लगा…
सारी रात मेने उसकी चूत की वो धुनाई की, कि अब वो कुछ दिनो तक इसे याद रखने वाली थी…उलट-पलट कर खूब जम कर चोदा मेने मालती को उस रात…
जब उसकी टंकी रीति हो गयी.. तो अपने कपड़े समेट कर लड़खड़ाती हुई सोने चली गयी और मे अपने बिस्तर में तान रज़ाई गहरी नीद में डूबता चला गया…!
सुबह उसके जगाने से ही मेरी नींद खुली… वो मुस्कराती हुई चाय का प्याला हाथ में लिए मेरे पलग के पास खड़ी थी…
गुड मॉर्निंग स्वीटहार्ट… उसने मुझे मॉर्निंग विश किया तो मेने भी हॅस्कर उसे विश किया और चाय का कप उसके हाथ से लेते हुए बोला…!
अबसे हमारा वही रिश्ता रहे तो ज़्यादा उचित रहेगा…
वो – ओह्ह..जीजू… मेने तो अकेले में आपको बोला… ठीक है, प्रॉमिस .. अब कभी नही कहूँगी… सॉरी जीजू….
मेने चाइ पी और उसके घर में ही फ्रेश होकर भाभी के घर चला आया…
आज बारात लेकर लड़की वालों के यहाँ जाना था… तो सभी उसी तैयारियों में लगे पड़े थे… निशा से एक फौरी तौर पर ही-हेलो हो पाई…
धूम धाम से शादी संपन्न हो गयी…
निशा की भाभी एक पढ़ी लिखी मध्यम घराने की सुंदर और शुशील लड़की थी…
शादी के दूसरे दिन हम सभी उनसे विदा होकर अपने घर लौट आए… भाभी को और कुछ दिन वहाँ रहना पड़ा था..
कुछ दिनो बाद मेरे फर्स्ट एअर के एग्ज़ॅम थे… सो घर लौट कर मेने अपनी पढ़ाई पर ध्यान लगा दिया…
कुछ दिनो बाद भाभी भी आ गयी, उनका भाई उन्हें छोड़ गया था…
मेने मन लगा कर अपने एग्ज़ॅम दिए और एक साल की पढ़ाई ख़तम हुई… मेरे साथ ही रामा दीदी ने भी अपने फाइनल के पेपर दिए.. अब वो ग्रॅजुयेट कंप्लीट करने वाली थी…
तो बाबूजी ने उनके लिए लड़का तलाश करना शुरू कर दिया.. उधर आशा दीदी की भी शादी तय कर दी थी…
रिज़ल्ट के बाद दोनो बहनों की बारी-बारी से शादियाँ हो गयीं… और वो दोनो अपनी नयी दुनिया बसाने अपने-2 घर चली गयी..
रामा दीदी की शादी हमारे कॉलेज के प्रिन्सिपल के लड़के लोकेश के साथ कर दी थी.. वो देल्ही में इंजिनियर है…
खुद प्रिन्सिपल साब ही दीदी का हाथ माँगने आए थे हमारे यहाँ…
इधर कॉलेज में एक और क्लास बढ़ गयी थी… और कॉलेज की फर्स्ट एअर की पर्फॉर्मेन्स देखते हुए फाइनल तक की स्पेशल पर्मिशन ग्रांट हो गयी..
कुछ कोशिशों के बाद बड़े भैया प्रमोशन के साथ हमारे कॉलेज में ही आ गये, और वो अब वहाँ वाइज़ प्रिन्सिपल थे.
उधर मनझले भैया ने भी अपने शहर में ही ट्रान्स्फर ले लिया था…. सब कुछ एक दम सही से सेट हो चुका था… हमारी फॅमिली एक हॅपी वाली फॅमिली कहीं जा सकती थी…
मौका देख कर मे पंडितानी की बहू से भी मुलाकात कर लेता था.. जो अब कुछ महीनों में ही एक बच्चे को जन्म देने वाली थी…
निशा से फोन पर ही बातें हो पाती थी… वैसे उसके ग्रॅजुयेशन तक कोई प्राब्लम नही थी फिर भी भाभी ने अपने माँ और पिताजी के कानों में ये बात डाल दी थी..
कि उनके बिना पुच्छे वो निशा की शादी ना करदें..
रूचि अब बड़ी हो रही थी.. और वो अब गाँव के स्कूल में पढ़ने जाने लगी थी…
छोटी चाची – चाचा अपने बच्चे के साथ खुशी – 2 जीवन जी रहे थे…मेरे पास अब ज़्यादा ऑप्षन नही बचे थे अपने लंड को शांत करने के…
बस चाची और कभी -2 भाभी के साथ मौका मिल जाता था…या फिर अपनी वर्षा रानी…अरे वहीी…पंडिताइन…
समय अपनी मन्थर गति से गुज़रता रहा, देखते – 2 दो साल और निकल गये, धीरे – 2 हमारे फाइनल के एग्ज़ॅम का समय नज़दीक आ रहा था, की तभी एक दिन हम सभी फाइनल एअर स्टूडेंट्स एक साथ कॉलेज ग्राउंड में बैठे बातें कर रहे थे, तभी मेरे एक दोस्त रवि ने कहा…
रवि – दोस्तो ! हम सब लोग पिच्छले 3 सालों से एक साथ रहे हैं, हम लोग एक तरह से इस कॉलेज की नींव कहे जा सकते हैं…
कुछ दिनो बाद हम सभी एक दूसरे से बिछड़ने वाले हैं, फिर पता नही कॉन कब, कहाँ क्या करेगा.. फिरसे हम एक दूसरे से मिल भी पाएँगे या नही…
मे – हां यार ! सही कह रहे हो तुम, भले ही हम लोगों के बीच पिच्छले लगभग 3 सालों में कुछ भी हुआ हो, कैसे भी हालत पैदा हुए हों, लेकिन हम रहे तो एक साथ ही हैं…!
तो क्यों ना कुछ ऐसा किया जाए, जिससे एक दूसरे से बिछड़ने के बाद भी आने वाले कुछ दिनों तक हम एक दूसरे को याद रख सकें…!
आशु – आइडिया अच्छा है यार, लेकिन ऐसा क्या करें जिसकी यादें ताज़ा बनी रहें ?
मे – क्यों ना कुछ सांगीतीक कार्यक्रम रखा जाए कॉलेज में, सभी मिलकर धमाल करेंगे एक रात…
करण – क्या यार नचनियों वाले आइडिया देता रहता है, कुछ ऐसा करो जिसमें 2-4 दिन तक हम सब एक साथ ही रहें… सब कुछ मिल-जुलकर जो जी में आए वो एक साथ ही करें…!
तभी रागिनी बोल पड़ी – अगर पसंद हो तो एक आइडिया है मेरे पास…?
रवि – बिल्कुल दो ! यहाँ सभी के आइडिया से ही डिसाइड होगा, की हमें क्या करना चाहिए…
रागिनी – क्यों ना हम सब किसी लंबे पिक्निक तौर पर चलें, जहाँ कुछ एतिहासिक चीज़ें भी देखने को मिलें और जहाँ थोड़े बहुत जंगल भी देखने को हों…
4-6 दिन तक सब कुछ अपना हो, अपने तरीक़े का हो, और अपनी तरह से रहें…
उसकी बात सुनकर लगभग आधे से भी ज़्यादा लोग एक साथ बोल पड़े… सही आइडिया है, मज़ा आएगा… यही करते हैं…
मे – आइडिया बुरा नही है, लेकिन इसके लिए सबसे पहले हमें कॉलेज प्रशासन की मंज़ूरी लेनी होगी, उसके अलावा खर्चा बहुत होने वाला है, जो शायद हम में से कुछ लोग उसे अफोर्ड भी ना कर पाएँ…
कॉलेज अगर कुछ हेल्प करे तो संभव हो सकता है…!
रागिनी – उसमें क्या बड़ी बात है, कॉलेज हमारी बात क्यों नही मानेगा, और रही बात फंड की, तो वो एस्टिमेट कर के देखते हैं…
मे – ठीक है, तो चलो पहले प्रिन्सिपल साब से बात करते हैं, उसके बाद ही कुछ फ़ैसला लेना होगा…
फिर हम 8-10 स्टूडेंट्स मिलकर प्रिन्सिपल से मिलने चल दिए, उनके ऑफीस में राम भैया भी मौजूद थे…
इतने सारे स्टूडेंट्स को एक साथ देख कर वो दोनो चोंक पड़े, और हमसे पूछा –
क्या बात है बच्चो, यूँ एक साथ..? कोई समस्या है क्या…?
भैया को देखकर मे थोड़ा पीछे की तरफ जाकर खड़ा हो गया, उनके सवाल करने पर सभी मेरी ओर देखने लगे…,
जब कुछ देर मेने कुछ नही कहा तो करण आगे आकर बोला…
सर ! हम सभी फाइनल एअर स्टूडेंट्स चाहते हैं, कि एग्ज़ॅम से पहले कुछ ऐसा करें जिससे, वो हम सब के लिए एक यादगार मोमेंट हो…
तो हम सबने ये तय किया है, कि कहीं ऐसी जगह का पिक्निक टूर बनाएँ जहाँ हिस्टॉरिकल मॉन्युमेंट भी हों, और जंगल सफ़ारी भी हो जाए…
उसकी बात सुनकर प्रिन्सिपल साब ने भैया की तरफ देखा और बोले – बात तो सही कह रहे हैं ये बच्चे, आप क्या कहते हो राम मोहन बाबू…!
भैया – मे भी आपसे सहमत हूँ सर, क्योंकि ये वो बच्चे हैं, जिन्होने इस कॉलेज की नींव रखने में अपना सहयोग दिया है, तो हमें भी इनकी इच्छा का सम्मान करना चाहिए…
लेकिन मेरा सुझाव ये है, कि इनको जंगलों में जाने की इज़ाज़त नही होनी चाहिए, इन सबका ये फाइनल साल है, किसी के साथ कुछ ऐसा वैसा हुआ, तो उसके भविष्य के लिए ठीक नही होगा…और कॉलेज का भी नाम खराब होगा…!
प्रिन्सिपल – आपकी बात सही है, फिर वो हम लोगों की तरफ मुखातिब होकर बोले – वैसे आप लोगों ने कुछ तो सोचा होगा, कहाँ जाना चाहते हो…?
रागिनी तपाक से बोल पड़ी – सर एंपी भ्रमण कैसा रहेगा, वहाँ हिस्टॉरिकल प्लेसस भी हैं, और नॅचुरल ब्यूटी भी देखने को मिलेगी…
प्रिन्सिपल – देखो बच्चो… अब आप लोगों के फाइनल्स में ज़्यादा समय भी नही है, और ज़्यादा लंबे टूर के लिए कॉलेज फंड भी मुहैया नही कर पाएगा,
तो उस हिसाब से आप लोग प्लान कर के हमें बता दो, फिर देखते हैं कि आगे का क्या कर सकते हैं..
हम सब उनकी बात सुनकर बाहर चले आए, और एक बार फिर ग्राउंड में बैठकर डिस्कशन करने लगे…
रागिनी की इच्छा थी खजुराहो घूमने की, साथ ही साथ उसके आस-पास के हिस्टॉरिकल प्लेसस और छोटे-2 जंगलों में सफ़ारी भी की जाए…
इसमें और भी स्टूडेंट्स सहमत थे, लेकिन क्या कॉलेज इतना लंबा टूर करने के लिए सहमत होगा…
फिर बात आई एस्टिमेशन की… सब कुछ मिलाकर 6 दिन के टूर के लिए सबसे पहले एक टूरिस्ट बस की ज़रूरत होगी…
कुल मिलकर हम 45-50 स्टूडेंट्स तो थे जो टूर पर जाना चाहते थे.., एक टूरिस्ट बस की बात चली तो रागिनी ने उसकी ज़िम्मेदारी अपने ऊपर ले ली, और कहा-
वो अपने पापा से कहकर अपनी खुद की बस ले जाएगी…
ये तो सबसे बड़ा काम हो गया, फिर तो बचना ही क्या था, खाना-पीना और रहना..
फिर डिसाइड हुआ कि रहने के लिए वो सब खुले मैदान में टेंट लगाएँगे, लेकिन इतना सारा समान जाएगा कैसे… तो उसके लिए भी उसने एक टेंपो अपने ट्रॅवेल्ज़ का ले जाने के लिए बोला..
वाकी का खर्चा कॉलेज ने अपने सर ले लिया.. और हमने दो दिन बाद का टूर डिसाइड कर लिया..
हमारे साथ दो जेंट्स टीचर और एक लेडी टीचर जाने वाले थे… इधर कॉलेज में एक और क्लास बढ़ गयी थी… और कॉलेज की फर्स्ट एअर की पर्फॉर्मेन्स देखते हुए फाइनल तक की स्पेशल पर्मिशन ग्रांट हो गयी..
कुछ कोशिशों के बाद बड़े भैया प्रमोशन के साथ हमारे कॉलेज में ही आ गये, और वो अब वहाँ वाइज़ प्रिन्सिपल थे.
उधर मनझले भैया ने भी अपने शहर में ही ट्रान्स्फर ले लिया था…. सब कुछ एक दम सही से सेट हो चुका था… हमारी फॅमिली एक हॅपी वाली फॅमिली कहीं जा सकती थी…
मौका देख कर मे पंडितानी की बहू से भी मुलाकात कर लेता था.. जो अब कुछ महीनों में ही एक बच्चे को जन्म देने वाली थी…
निशा से फोन पर ही बातें हो पाती थी… वैसे उसके ग्रॅजुयेशन तक कोई प्राब्लम नही थी फिर भी भाभी ने अपने माँ और पिताजी के कानों में ये बात डाल दी थी..
कि उनके बिना पुच्छे वो निशा की शादी ना करदें..
रूचि अब बड़ी हो रही थी.. और वो अब गाँव के स्कूल में पढ़ने जाने लगी थी…
छोटी चाची – चाचा अपने बच्चे के साथ खुशी – 2 जीवन जी रहे थे…मेरे पास अब ज़्यादा ऑप्षन नही बचे थे अपने लंड को शांत करने के…
बस चाची और कभी -2 भाभी के साथ मौका मिल जाता था…या फिर अपनी वर्षा रानी…अरे वहीी…पंडिताइन…
समय अपनी मन्थर गति से गुज़रता रहा, देखते – 2 दो साल और निकल गये, धीरे – 2 हमारे फाइनल के एग्ज़ॅम का समय नज़दीक आ रहा था, की तभी एक दिन हम सभी फाइनल एअर स्टूडेंट्स एक साथ कॉलेज ग्राउंड में बैठे बातें कर रहे थे, तभी मेरे एक दोस्त रवि ने कहा…
रवि – दोस्तो ! हम सब लोग पिच्छले 3 सालों से एक साथ रहे हैं, हम लोग एक तरह से इस कॉलेज की नींव कहे जा सकते हैं…
कुछ दिनो बाद हम सभी एक दूसरे से बिछड़ने वाले हैं, फिर पता नही कॉन कब, कहाँ क्या करेगा.. फिरसे हम एक दूसरे से मिल भी पाएँगे या नही…
मे – हां यार ! सही कह रहे हो तुम, भले ही हम लोगों के बीच पिच्छले लगभग 3 सालों में कुछ भी हुआ हो, कैसे भी हालत पैदा हुए हों, लेकिन हम रहे तो एक साथ ही हैं…!
तो क्यों ना कुछ ऐसा किया जाए, जिससे एक दूसरे से बिछड़ने के बाद भी आने वाले कुछ दिनों तक हम एक दूसरे को याद रख सकें…!
आशु – आइडिया अच्छा है यार, लेकिन ऐसा क्या करें जिसकी यादें ताज़ा बनी रहें ?
मे – क्यों ना कुछ सांगीतीक कार्यक्रम रखा जाए कॉलेज में, सभी मिलकर धमाल करेंगे एक रात…
करण – क्या यार नचनियों वाले आइडिया देता रहता है, कुछ ऐसा करो जिसमें 2-4 दिन तक हम सब एक साथ ही रहें… सब कुछ मिल-जुलकर जो जी में आए वो एक साथ ही करें…!
तभी रागिनी बोल पड़ी – अगर पसंद हो तो एक आइडिया है मेरे पास…?
रवि – बिल्कुल दो ! यहाँ सभी के आइडिया से ही डिसाइड होगा, की हमें क्या करना चाहिए…
रागिनी – क्यों ना हम सब किसी लंबे पिक्निक तौर पर चलें, जहाँ कुछ एतिहासिक चीज़ें भी देखने को मिलें और जहाँ थोड़े बहुत जंगल भी देखने को हों…
4-6 दिन तक सब कुछ अपना हो, अपने तरीक़े का हो, और अपनी तरह से रहें…
उसकी बात सुनकर लगभग आधे से भी ज़्यादा लोग एक साथ बोल पड़े… सही आइडिया है, मज़ा आएगा… यही करते हैं…
मे – आइडिया बुरा नही है, लेकिन इसके लिए सबसे पहले हमें कॉलेज प्रशासन की मंज़ूरी लेनी होगी, उसके अलावा खर्चा बहुत होने वाला है, जो शायद हम में से कुछ लोग उसे अफोर्ड भी ना कर पाएँ…
कॉलेज अगर कुछ हेल्प करे तो संभव हो सकता है…!
रागिनी – उसमें क्या बड़ी बात है, कॉलेज हमारी बात क्यों नही मानेगा, और रही बात फंड की, तो वो एस्टिमेट कर के देखते हैं…
मे – ठीक है, तो चलो पहले प्रिन्सिपल साब से बात करते हैं, उसके बाद ही कुछ फ़ैसला लेना होगा…
फिर हम 8-10 स्टूडेंट्स मिलकर प्रिन्सिपल से मिलने चल दिए, उनके ऑफीस में राम भैया भी मौजूद थे…
इतने सारे स्टूडेंट्स को एक साथ देख कर वो दोनो चोंक पड़े, और हमसे पूछा –
क्या बात है बच्चो, यूँ एक साथ..? कोई समस्या है क्या…?
भैया को देखकर मे थोड़ा पीछे की तरफ जाकर खड़ा हो गया, उनके सवाल करने पर सभी मेरी ओर देखने लगे…,
जब कुछ देर मेने कुछ नही कहा तो करण आगे आकर बोला…
सर ! हम सभी फाइनल एअर स्टूडेंट्स चाहते हैं, कि एग्ज़ॅम से पहले कुछ ऐसा करें जिससे, वो हम सब के लिए एक यादगार मोमेंट हो…
तो हम सबने ये तय किया है, कि कहीं ऐसी जगह का पिक्निक टूर बनाएँ जहाँ हिस्टॉरिकल मॉन्युमेंट भी हों, और जंगल सफ़ारी भी हो जाए…
उसकी बात सुनकर प्रिन्सिपल साब ने भैया की तरफ देखा और बोले – बात तो सही कह रहे हैं ये बच्चे, आप क्या कहते हो राम मोहन बाबू…!
भैया – मे भी आपसे सहमत हूँ सर, क्योंकि ये वो बच्चे हैं, जिन्होने इस कॉलेज की नींव रखने में अपना सहयोग दिया है, तो हमें भी इनकी इच्छा का सम्मान करना चाहिए…
लेकिन मेरा सुझाव ये है, कि इनको जंगलों में जाने की इज़ाज़त नही होनी चाहिए, इन सबका ये फाइनल साल है, किसी के साथ कुछ ऐसा वैसा हुआ, तो उसके भविष्य के लिए ठीक नही होगा…और कॉलेज का भी नाम खराब होगा…!
प्रिन्सिपल – आपकी बात सही है, फिर वो हम लोगों की तरफ मुखातिब होकर बोले – वैसे आप लोगों ने कुछ तो सोचा होगा, कहाँ जाना चाहते हो…?
रागिनी तपाक से बोल पड़ी – सर एंपी भ्रमण कैसा रहेगा, वहाँ हिस्टॉरिकल प्लेसस भी हैं, और नॅचुरल ब्यूटी भी देखने को मिलेगी…
प्रिन्सिपल – देखो बच्चो… अब आप लोगों के फाइनल्स में ज़्यादा समय भी नही है, और ज़्यादा लंबे टूर के लिए कॉलेज फंड भी मुहैया नही कर पाएगा,
तो उस हिसाब से आप लोग प्लान कर के हमें बता दो, फिर देखते हैं कि आगे का क्या कर सकते हैं..
हम सब उनकी बात सुनकर बाहर चले आए, और एक बार फिर ग्राउंड में बैठकर डिस्कशन करने लगे…
रागिनी की इच्छा थी खजुराहो घूमने की, साथ ही साथ उसके आस-पास के हिस्टॉरिकल प्लेसस और छोटे-2 जंगलों में सफ़ारी भी की जाए…
इसमें और भी स्टूडेंट्स सहमत थे, लेकिन क्या कॉलेज इतना लंबा टूर करने के लिए सहमत होगा…
फिर बात आई एस्टिमेशन की… सब कुछ मिलाकर 6 दिन के टूर के लिए सबसे पहले एक टूरिस्ट बस की ज़रूरत होगी…
कुल मिलकर हम 45-50 स्टूडेंट्स तो थे जो टूर पर जाना चाहते थे.., एक टूरिस्ट बस की बात चली तो रागिनी ने उसकी ज़िम्मेदारी अपने ऊपर ले ली, और कहा-
वो अपने पापा से कहकर अपनी खुद की बस ले जाएगी…
ये तो सबसे बड़ा काम हो गया, फिर तो बचना ही क्या था, खाना-पीना और रहना..
फिर डिसाइड हुआ कि रहने के लिए वो सब खुले मैदान में टेंट लगाएँगे, लेकिन इतना सारा समान जाएगा कैसे… तो उसके लिए भी उसने एक टेंपो अपने ट्रॅवेल्ज़ का ले जाने के लिए बोला..
वाकी का खर्चा कॉलेज ने अपने सर ले लिया.. और हमने दो दिन बाद का टूर डिसाइड कर लिया..
हमारे साथ दो जेंट्स टीचर और एक लेडी टीचर जाने वाले थे…
06-01-2019, 02:33 PM, #121
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RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
कुल मिलाकर 50 लोगों का टूर बना, जिसमें एक लेडी टीचर को मिलकर 20 फीमेल और वाकई के मेल स्टूडेंट्स & दो टीचर्स थे.
दूसरे दिन रागिनी ने आकर कन्फर्म भी कर दिया, कि उसके पापा एक लग्षुरी बस और टेंपो के लिए मान गये हैं, लेकिन उनका आधा भाड़ा हमें पे करना पड़ेगा…
जिसे हम सभी स्टूडेंट्स कंट्रिब्यूट कर के पे कर सकते हैं..
सभी अपने नये टूर को लेकर बहुत ही एक्शिटेड थे, क्योंकि जीवन में पहली बार कुछ समय के लिए हम सब अपनी तरह से जीने वाले थे…
घर पर भैया और भाभी ने खुशी-खुशी मुझे टूर पर जाने की पर्मिशन दे दी, साथ ही भाभी पूरे दिन मेरे लिए कुछ ना कुछ खाने की चीज़ें बनती रही…!
मेरे लाख मना करने के बावजूद भी वो नही मानी, और ना जाने क्या-क्या बनाती रही, इस तरह से उन्होने 3-4 डब्बे खाने का समान पॅक कर के रख दिया…
उनके इस तरह मेरे लिए परवाह करते देख, मेरी आँखें नम हो गयी, जिन्हें देखकर उन्होने मुझे अपने सीने से लगा लिया और बोली…
क्या हुआ मेरे लाड़ले को, क्यों रो रहे हो..?
मेने रुँधे गले से कहा – मेरी इतनी परवाह क्यों करती हो भाभी ? इतना तो कोई सग़ी माँ भी नही करती होगी अपने बेटे के लिए…!
मेरी बात सुनकर उनकी आँखों में भी आँसू छलक पड़े, मुझे अपने आप से और ज़ोर से कसते हुए बोली –
मे भी नही जानती लल्ला कि मे क्यों तुम्हारी इतनी परवाह करती हूँ, शायद हमारे पूर्व जनम का कोई नाता रहा हो, और ऊपरवाले ने सोच समझकर फिरसे हम दोनो को एक साथ रहने के लिए भेजा दिया हो…
वरना मेरे इस घर में कदम रखते ही, माजी को क्यों बुला लेता वो अपने पास….
हम दोनो का ये रिस्ता मेरी भी समझ से परे है, कभी-कभी जब सोचती हूँ इस बारे में, तो उलझकर रह जाती हूँ, पर कोई जबाब नही मिलता…
फिर उन्होने मेरा माथा चूमकर कहा – लो ये पैसे रखो, तुम्हारे काम आएँगे, ये कहकर उन्होने मुझे एक 500/- के नोटों की गॅडी पकड़ा दी..
मेने कहा – इतने सारे पैसे..? इनका मे क्या करूँगा भाभी…?
वो – कहीं ज़रूरत लगे तो दिल खोलकर खर्च करना अपने दोस्तों के साथ…लो रखलो..तुम्हारे ही हैं…अब ज़्यादा सोचो मत, और अपनी जाने की तैयारी कर्लो..
भाभी का प्यार देखकर एक बार फिर में उनके वक्षों में सर देकर लिपट गया..
आज शाम 4 बजे कस्बे से बस निकलने वाली थी, मेने अपना समान पॅक किया और बाबूजी और भाभी का आशीर्वाद लेकर अपनी बुलेट उठाई, और कॉलेज के लिए निकाल लिया…
बस रेडी खड़ी थी, एक-एक कर के सभी आते जा रहे थे, मे थोड़ा लेट हो गया था…
अपनी बुलेट कॉलेज की पार्किंग में लगाई, और बॅग लेकर बस में चढ़ गया…
अंदर नज़र डाली तो लगभग सारी सीटें भर चुकी थी, सो लास्ट वाली सीट पर जाकर अपना डेरा डाल लिया…
वैसे, लास्ट वाली सीट पर सारे रास्ते जंप ज़्यादा लगने वाले थे, लेकिन इट’स ओके, जब और कहीं जगह नही थी तो अब कर भी क्या सकते थे…
कुछ देर बाद जब सभी बैठ गये तो पीछे की सीट पर ही हमारे एक टीचर और मेडम आकर मेरे पास बैठ गयी…
एक टीचर ड्राइवर के पास बैठे थे, मेरे बगल में मेडम और उनके बाजू वाली सीट पर हमारे स्पोर्ट्स टीचर बैठ गये…!
सबने मिलकर एक जैयकारा लगाया… शेरॉँवली की जय, ….. और इसके साथ ही बस वहाँ से रवाना हुई…!
बस के चलते ही सब मस्ती में आ गये, एक दूसरे के साथ ग्रूप बनाकर मस्ती करने लगे…
कुछ देर बाद स्पोर्ट्स टीचर भी अपने साथी टीचर के साथ गप्पें लगाने चले गये…
मेने विंडो सीट मेडम को दे दी, एसी बस में वैसे तो विंडो खोलने का तो कोई मतलव नही था, लेकिन फिर भी उन्हें बाहर के नज़ारे देखने का शौक रहा होगा शायद…
ये हिस्टरी की मेडम थी, उम्र कोई 35 की, शरीर थोड़ा चौड़ा गया था.. बड़ी-2 चुचियाँ शायद 38 की रही होगी, मोटी गान्ड 38-40 की… पेट थोड़ा बाहर को निकला हुआ…
इतने सबके बाद भी गोरा रंग, नाक-नक्श ठीक तक ही थे…वो इस समय एक हल्के कपड़े की साड़ी में थी…
डीप गले का टाइट ब्लाउज से उनकी दूध जैसी गोरी और मोटी चुचियाँ ऊपर से किन्हीं दो आपस में जुड़ी हुई चोटियों जैसी दिख रही थी…
मेरा इससे पहले उनसे कोई ज़्यादा वास्ता नही रहा था, बस कॉलेज में टीचर स्टूडेंट वाला हाई-हेलो, क्योंकि मे साइन्स स्टूडेंट था और वो हिस्टरी की टीचर…
लास्ट की सीट थी तो थोड़ी बड़ी… सो मे उनसे टोड़ा दूरी बनाए ही बैठा था… लेकिन हिचकोले भी लास्ट में ही ज़्यादा लगते हैं, तो कभी-2 हम दोनो के शरीर टच हो ही जाते थे..
उन्होने मेरे साथ बात-चीत करना शुरू कर दिया… उन्हें पता तो था ही, कि मे राम मोहन का भाई हूँ, तो घर-परिवार के बारे में कोई ज़्यादा बात-चीत नही हुई…!
अपने बारे में उन्होने बताया, कि उनके पति एक शॉप चलाते हैं, दो बच्चे हैं, जो अभी स्कूल शुरू किए हैं…
कुछ देर में ही मेने नोटीस किया की बस के हिचकॉलों के बहाने मेडम कुछ ज़्यादा ही हिल-डुलकर मुझसे टच होने की कोशिश कर रही हैं, तो मे थोड़ा और उनसे दूर सरक कर बैठ गया…
मुझे सरकते देख मेडम बोली – अरे अंकुश ! आराम से बैठो, इतना दूर क्यों बैठे हो… कोई प्राब्लम है क्या…?
मे – नही वो आपको कोई प्राब्लम ना हो इसलिए इधर को आ गया, अब आप आराम से बैठ सकती हैं..
वो – अरे मुझे कोई प्राब्लम नही है, आओ मेरे पास बैठो,
वो क्या है, कि कभी-2 बस के झटके लगते हैं, वैसे कोई बात नही, आ जाओ…ये कहकर उन्होने मेरा हाथ पकड़कर अपने पास ही कर लिया…
मेने सोचा, मेडम भी मज़े लेना चाहती हैं, लेने दो, अपने को क्या… कुछ ज़्यादा लिमिट क्रॉस होती दिखेगी तब देखा जाएगा…
कुछ देर तो वो ठीक ठाक रही, मेने अपनी आँखें बंद करली, और मेडम अपनी तरह से मेरे शरीर के साथ मज़े लेती रही…
ग्वालियर निकालकर हमने एक रोड साइड होटेल में खाना खाया..और कुछ देर रुक कर बस फिर चल पड़ी…
खाने के बाद कुछ देर में ही ज़्यादातर लोगों के खर्राटे गूंजने लगे…
इस बार मेडम ने मुझे खिड़की की तरफ बैठने को कहा…हमारे ऑपोसिट सीट पर स्पोर्ट टीचर अकेले बैठे थे…
मुझे भी झपकी सी आने लगी थी, सो मे बस की बॉडी का सहारा लेकर उंघने लगा..
कुछ देर शांति से गुज़री, लेकिन जल्दी ही मुझे लगा की मेडम की भारी-भारी चुचियाँ मेरे बाजू पर लदी पड़ी हैं…
मेने कोई प्रतिक्रिया नही दी, और चुप चाप सोने का बहाना करता रहा…
अभी मे उनके शरीर की गर्मी को सहन करने लायक भी नही हो पाया था कि उनका एक हाथ रेंगता हुआ मेरे लौडे पर आ गया, और वो उसे पॅंट के ऊपर से ही सहलाने लगी…
बस की पिच्छली सीट के अनएक्सपेक्टेड झटके मेडम के बूब्स को मेरे साइड से रगड़ रहे थे…
लंड का आकर भाँपते हुए मेडम पर खुमारी चढ़ने लगी, और उन्होने मेरा एक हाथ पकड़ कर अपनी मोटी पपीते जैसी चुचि पर रख लिया और ऊपर से अपने हाथ का सपोर्ट देकर उसे अपने पपीते पर दबाने लगी.
मेडम को अब कुछ बड़ा चाहिए था, लेकिन मेरी तरफ से कोई रेस्पॉन्स ना मिलने से वो मन ही मन कसमसा रही थी, अपनी साड़ी ऊपर कर के आगे से उन्होने अपनी चूत में अपनी उंगलियाँ पेल दी…
दूसरे हाथ की उंगलियाँ मेरे पैंट की चैन से खेलने में लगी हुई थी, और वो उसे नीचे करने का प्रयास करने लगी, लेकिन टाइट जीन्स ऊपर से लंड खड़ा, पॅंट और ज़्यादा टाइट हो गया था, तो वो खुल ही नही पा रही थी…
उन्होने अपना दूसरा हाथ भी अपनी चूत से निकाला और दोनो हाथों के सहारे से वो चैन खोलने लगी…
इससे पहले कि वो मेरी चैन को नीचे कर पाती, कि उन्हें अपने कंधे पर किसी के हाथ का अहसास हुआ,
चोंक कर उन्होने झट से अपने हाथ मेरे पॅंट से हटाए और उधर को देखा…
स्पोर्ट्स टीचर जो अब तक का मेडम का सारा खेल देखकर गरम हो चुके थे, इशारे से उन्हें अपनी सीट पर बुला लिया…
मेडम के मना करने का तो अब कोई चान्स ही नही था, उनकी चोरी जो पकड़ी गयी थी, सो वो उनके बगल में जाकर बैठ गयी,
मेने चैन की साँस ली, और अपनी आँखें बंद कर ली…
लेकिन साला मन तो उधर को ही लगा था, तो नीद आने का कोई मतलव ही नही था अब… सो 5-10 मिनिट के बाद आँखों की झिर्री से नज़र डाल ही ली…
वाह ! क्या नज़ारा था, मेडम की साड़ी कमर तक चढ़ि हुई थी, और वो अपने 25-25 किलो के गान्ड के पाटों को लेकर सर की 4” की लुल्ली को अपनी चूत में लेकर उनकी गोद में बैठी कूद रही थी…
सर के हाथ उनकी चुचियों पर थे, और वो उन्हें आटे की तरह गूँथ रहे थे….
कुछ मेडम कूदने का प्रयास कर रही थी, कुछ बस के झटके सहयोग कर रहे थे… सो कुछ ही देर में वो अपना-अपना पानी छोड़कर शांत पड़ गये…
सुबह होते-2 हम ओरछा पहुँच गये, जहाँ की पहाड़ी नदी के किनारे बस खड़ी कर के सब लोग नित्य क्रिया में लग गये…
सबने जंगल में ही शौन्च इतायादि की, और नदी के निर्मल जल में नहा धोकर वहाँ के मंदिरों में दर्शन किए…
आपको अगर पता हो तो यहाँ एक ओर्छा का महल है, जिसके पास ही राम राजा का भव्य मंदिर है…
कहावत है, कि भगवान राम, दिन निकलते ही, अयोध्या छोड़कर यहाँ आ जाते थे… और यहाँ की प्रजा की देखभाल करते थे…
ओरछा झाँसी से कोई 20-25 किमी दूर साउत ईस्ट में पड़ता है….!
आस-पास के यहाँ के हिस्टॉरिकल जगह और राम राजा के दर्शन कर के हमने अपना कारवाँ फिर आगे बढ़ा दिया…!
शाम से पहले हम खजुराहो के पास पहुँच गये…, हाइवे से हटकर थोड़े से जुंगली इलाक़े में हमने अपनी बस रोकी,
पीछे – 2 समान से लड़ा टेंपो भी आ गया, जिसमें चार आदमी काम करने के लिए साथ आए थे, वहीं हम सबका खाना भी बनाने वाले थे..
छोटी-छोटी पहाड़ियों के बीच एक छोटे से मैदान में हमने अपने टेंट लगाने का सोचा…
दो-दो मेंबर के हिसाब से आनन-फानन में टेंट खड़े होने लगे, सारे स्टूडेंट्स भी इस काम में हाथ बाँटने लगे…
एक घंटे के अंदर अंदर सारे टेंट लग चुके थे… मेरे साथ रवि था.
एक एक्सट्रा टेंट थोड़ा सा बड़े आकार में रसोई के सामान के लिए रखा गया…
उसके बाद रसोई का बनाना शुरू हुआ, कुछ इंटेसटेड लोग उन चारों की मदद करने लगे, वाकी के इधर-उधर के एरिया में घूम-फिर कर वहाँ का जायज़ा ले रहे थे…
अंधेरा होते ही, वहाँ पेट्रोमक्ष जला दिए गये… 9 बजे तक खाना तैयार हो गया, और सबको इत्तला करदी..
सब अपना अपना खाना प्लेट्स में लेकर जिसको जहाँ अच्छा लगा वहाँ बैठकर खाने लगे…इस तरह का अनुभव बड़ा ही भा रहा था सबको…
मे, रवि, करण और आशु, एक साथ बैठे खाना खा रहे थे, कि तभी वहाँ रागिनी और रीना, जो एक ही टेंट में थी, अपनी प्लेट लेकर आ गयी,
रागिनी ने पूछा – अगर तुम लोगों को कोई प्राब्लम ना हो तो हम भी साथ बैठकर खाले..
करण – आओ बैठो, हमें क्यों प्राब्लम होगी…, तो हम 6 लोग एक गोलाई बनाकर बैठ गये और खाना खाने लगे,
कोई इधर उधर से कुछ ख़तम हो जाता तो एक दूसरे की प्लेट से ले लेता.. बड़ा ही रोमांचकारी अनुभव था ये हम सबके लिए…
बातों के बीच खाना खाते हुए, अजीब सी सुखद अनुभूति हो रही थी सबको, एक अपनापन सा लग रहा था…..
सबने खाना ख़तम किया, कुछ देर बैठकर बातें की, फिर दोनो लड़कियाँ हम सबकी प्लेट उठाकर ले गयी धोने के लिए…
हमें बड़ा आश्चर्य हुआ, कि रागिनी जैसी बड़े घर की लड़की हमारी झूठी प्लेट धोने के लिए ले गयी… शायद ये ग्रूप में होने की वजह से हो…
कुछ देर हम चारों बैठे बातें करते रहे फिर मुझे नींद के झटके लगने लगे तो उठ कर अपने अपने टेंट में चले गये……!
लेटते ही में गहरी नींद में डूब गया…!
पता नही रात का कॉन्सा प्रहर था, की सोते-सोते मेरी साँसें रुकती सी महसूस होने लगी, सीने में एक गोले सा अटकने लगा, बैचैनि इतनी बढ़ गई…की मे हड़बड़ा कर उठ बैठा…
बॉटल से पानी पिया, लेकिन ज़्यादा राहत नही मिली…तो उठ कर टेंट से बाहर आया, और बाहर आकर टहलने लगा…
चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था, सभी गहरी नींद में डूबे हुए थे… मोबाइल में समय देखा तो 1 बजने को था…
मे थोड़ा टेंट एरिया से निकल कर थोड़ी दूरी पर हरियाली से घिरी एक छोटी सी चट्टान पर आकर बैठ गया…
आसमान में चाँद की रोशनी के बीच तारे टिम-तिमा रहे थे…ठंडी-ठंडी हवा मेरे गालों को सहलकर मेरे बैचैन मन को राहत दे रही थी…
कभी कोई जीव, किसी झाड़ी से निकल कर भागता, तो एक अजीब सा डर का अनुभव भी होता, और मेरे रोंगटे खड़े हो जाते…
इस तन्हाई में घिरे मेरे मन में निशा के साथ बिताए लम्हे याद आते ही मेरे चेहरे पर एक मीठी सी मुस्कान तैर गयी…
मे अपना सर आसमान की तरफ उठाकर चाँद के आस पास के झिलमिलाते तारों में ना जाने क्या तलाश करने लगा…
मे अपने ख्यालों में डूबा हुआ था, कि तभी मुझे अपने पीछे किसी के आने की आहट महसूस हुई, और मेने मुड़कर उधर को देखा…
कुछ दूरी पर मुझे एक मानव आकृति सी दिखाई दी, जो धीरे-2 मेरी तरफ ही बढ़ती चली आ रही थी…..!
चन्द कदमों में वो मेरे इतने पास आ चुकी थी, अब में उसे देख पाने में समर्थ था, और जैसे ही मेने उसे पहचाना…
चोंक कर मे अपनी जगह से खड़ा हो गया और उससे कहा – तुउउंम….इस वक़्त … यहानं..?
ये रागिनी थी, जो अपने शरीर को एक चादर में लपेटे हुए मेरे सामने खड़ी थी, इस समय उसका सिर्फ़ चेहरा ही दिखाई दे रहा था…
मेने उसे देखते ही कहा – रागिनी तुम यहाँ इस वक़्त क्या कर रही हो…?
वो मेरे एकदम पास आकर बोली – यही सवाल में तुमसे करूँ तो…?
वैसे मे टाय्लेट के लिए बाहर निकली थी, तुम्हें अकेले इधर आते देखा तो देखने चली आई, कि यहाँ अकेले क्यों आए हो…?
मे – मन अचानक से बैचैन हो रहा था, तो खुली हवा में चला आया…, तुम जाओ, जाकर सो जाओ, मे थोड़ी देर और बैठकर आता हूँ…!
मेरी बात अनसुनी सी करते हुए वो मेरे पास आई, और हाथ पकड़ कर मुझे उसी पहाड़ी पर बिठाते हुए बोली – आओ थोड़ी देर मे भी तुम्हारे साथ बैठती हूँ, फिर साथ साथ चलेंगे सोने.
रागिनी बात करने के क्रम को आगे बढ़ाते हुए बोली – वैसे जंगल की रात के मौसम की बात ही अलग है, कितना सुहाना मौसम है, नही…
मे – हां, सही कह रही हो तुम, घर की चारदीवारी के अंदर की सारी सुख सुविधाओं के बबजूद इतना सुकून नही मिलता, जितना यहाँ के शांत वातावरण में है…
वैसे तुम्हारा आइडिया सही रहा, वरना ये सब देखने का मौका कहाँ मिलता.. थॅंक्स.
लेकिन रागिनी, यहाँ तो इतनी ठंडक भी नही है, फिर तुमने ये चादर क्यों डाल रखी है अपने ऊपर…
रागिनी – वो तो बस ऐसे ही, नाइट ड्रेस में थी, तो सोचा किसी ने देख लिया तो क्या सोचेगा बस इसलिए….
ये कहकर उसने अपने बदन से चादर हटा कर एक तरफ उछाल दी…लो अब ठीक है..
मेरी जैसे ही नज़र उसके तरफ गयी… तो… उसे देखते ही मेरा मुँह खुला का खुला रह गया…
वो इस समय एक पारदर्शी मिनी गाउन में थी, जो बस उसकी कमर से थोड़ा सा ही नीचे तक था, उसका वो गाउन उसके सीने पर इतना टाइट था, मानो उसकी चुचियाँ उसमें जबर्जस्ती से ठूँसी गयी हों.
उसके पारदर्शी कपड़े से उसकी ब्रा में कसे हुए उसके 34 साइज़ के बूब्स चाँद की चाँदनी में साफ-साफ दिखाई दे रहे थे…
वो मेरी जाँघ सहलाते हुए बोली – वैसे थॅंक्स तो मुझे कहना चाहिए, कि तुमने मेरे प्रपोज़ल पर अपनी हामी भर दी,
वरना तुम्हारे बिना कोई तैयार नही होता यहाँ आने को…और शायद कॉलेज से भी पर्मिशन नही मिलती.
उसका हाथ लगते ही मेरे बदन में एक अजीब सी हलचल होने लगी, जहाँ कुछ देर पहले एक अजीब सी बैचैनि थी, वहीं अब उत्तेजना पैदा होने लगी…
मेरा सर थोड़ा भारी सा होने लगा, मानो उसको कोई पकड़े हुए हो, साँस भी रुकने लगी थी…
लेकिन इस सब के बबजूद मेरे लंड में अजीब सी हलचल पैदा हो रही थी, वो शॉर्ट के अंदर अपना आकर बढ़ाता ही जा रहा था…
जांघें सहलाते हुए रागिनी ने अपनी उंगलियाँ मेरे कोबरा से टच करा दी, जिससे वो और भड़क गया…
उसकी हलचल वो अपनी उंगलियों पर अच्छे से फील कर रही थी, मेरी आँखों में देखते हुए बोली –
सच कहूँ तो मेरी ये फेंटसी रही है, कि रात के इस सुहाने से मौसम में खुले आसमान के नीचे तारों की छान्व तले, किसी जंगल में एक साथी के साथ बैठकर बातें करूँ..
मे उसकी बातों में खोता जा रहा था, की तभी रागिनी ने मेरे नाग का फन अपनी मुट्ठी में दबा लिया, और उसे धीरे-2 सहलाने लगी…
मे उसे ये सब करने से रोकना चाहता था, लेकिन पता नही क्यों उसे रोक नही पा रहा था…
कुछ देर शॉर्ट के ऊपर से ही सहलाने के बाद रागिनी अपना हाथ मेरे शॉर्ट के अंदर डालने लगी…
इससे पहले की वो मेरे हथियार को पकड़ पाती, मेने उसका हाथ पकड़कर झटक दिया, और अपनी जगह से खड़ा होकेर कुछ दूर जाकर उसकी तरफ पीठ कर के खड़ा हो गया…!
दूसरी तरफ मुँह किए हुए ही मेने उसे कहा – तुम यहाँ से जाओ रागिनी, प्लीज़ मुझे अकेला छोड़ दो…!
अभी मे खड़ा उसके जाने की आहट सुनने की कोशिश कर ही रहा था, कि तभी
उसने पीछे से आकर मुझे अपनी बाहों में भर लिया, उसके कठोर लेकिन मखमली उभार मेरी पीठ से दबे होने का अहसास दे रहे थे…
वो मेरी गर्दन चूमते हुए बोली – इतना क्यों दूर भागते हो मुझसे… क्या मेरे शरीर में काँटे हैं, जो तुम्हें चुभते हैं…!
मे तो सिर्फ़ तुमसे तुम्हारे कुछ पल चाहती हूँ, फिर क्यों मुझे बार-बार जॅलील कर के दूर चले जाते हो…
उसके इस तरह लिपटने से मेरी उत्तेजना में और इज़ाफा हो रहा था, मेने बिना कुछ किए उससे कहा – देखो रागिनी ! हम दोनो परिवारों के संबंध किसी तरह से सुधरे हैं…
मे नही चाहता कि फिरसे उसमें कोई दरार पैदा हो, सो प्लीज़ मुझसे दूर ही रहो तो ये हम दोनो के लिए अच्छा होगा…!
मेरी बात सुनकर उसने मुझे अपनी बाहों से आज़ाद किया और मेरा बाजू पकड़ कर अपनी ओर घूमाकर थोड़ी दबे लेकिन सख़्त लहजे में बोली…
किस दरार की बात कर रहे हो..? ये होगा भी कैसे..? यहाँ वीराने में हम दोनो को देखने वाला कॉन है, कि हम क्या कर रहे हैं… तो उन्हें कैसे पता लगेगा..?
सीधे – 2 क्यों नही कहते कि तुम मुझे जान बूझकर अवाय्ड करना चाहते हो…क्या मे इतनी बुरी हूँ..? तुम्हारा दो पल का प्यार ही तो माँग रही हूँ..
वादा करती हूँ, इसके बाद मे कभी तुम्हारे रास्ते में नही आउन्गि….!
मेरे दूर होते ही रागिनी ने अपने गाउन के बटन खोल लिए थे, जब मेरी नगर उसके आधे से अधिक उसकी कसी हुई ब्रा से झाँकते उसके दूधिया उरोजो पर पड़ी…
मेरी उत्तेजना मेरे दिमाग़ पर हावी होने लगी, ऐसा मेरे साथ आज से पहले कभी नही हुआ था कि इन मामलों में मेने अपने दिमाग़ का कंट्रोल खोया हो…!
मेरे दिमाग़ का कंट्रोल मेरे ऊपर से पूरी तरह ख़तम हो चुका था, मेने लपक कर रागिनी के बाजुओं को पकड़ा और अपने दहक्ते होंठ, उसकी रसीली गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठों से चिपका दिए…!
रागिनी को तो जैसे मुँह माँगी मुराद मिल गयी हो… आँखें बंद किए वो भी किस करने में मेरा सहयोग करने लगी, उसकी मरमरी बाहें मेरी पीठ पर कसने लगी…
बहुत देर तक हम एक दूसरे के होंठों का रस पान करते रहे, साँसें उखड़ने लगी, मुँह से गून..गून की आवाज़ें पैदा हो रही थी, लेकिन दोनो में से कोई भी किस तोड़ने को तैयार नही था…
वासना से आँखें लाल हो चुकी थी, दोनो के बदन दहकने लगे थे,
मेरे हाथों ने हरकत करते हुए, उसके गाउन को उसके कंधों से नीचे सरका दिया, वो सर्सराकर उसके पैरों में जा गिरा…
रागिनी के हाथ भी कुछ कम नही थे, वो मेरे अप्पर में घुसकर बदन पर सरसारा रहे थे…
इन सबके बीच हमारी किस्सिंग बदस्तूर जारी थी, फिर उसने मेरे शॉर्ट को नीचे सरका कर मेरे मूसल को अपने हाथ में पकड़ लिया, और उसे मुठियाने लगी…
मेने उसकी ब्रा के हुक भी खोल दिए, और उसके नंगे उरोजो को मसल्ने लगा…
अब हमें ये सीन चेंज करने की ज़रूरत महसूस होने लगी थी, सो रागिनी किस तोड़कर अपने पंजों पर बैठ गयी, और मेरे कड़क मूसल को अपने हाथ में लेकर बोली…
आअहह…..अंकुश क्या जानदार लंड है तुम्हारा… 3 साल लग गये इसे पाने में… आज मे इसका रस निकाल कर ही रहूंगी…ये कहकर उसने उसे चूम लिया…
मेने उसके निपल को उमेठते हुए कहा – चुसले रानी मेरा जूस, देख क्या रही है मदर्चोद…. जल्दी कार्रररर…
अपने मुँह से इस तरह की गाली सुनकर मे खुद हैरान रह गया… लेकिन कोई कंट्रोल नही था अपने आप पर…
रागिनी ने भी कोई रिक्षन नही दिया, और मेरे टमाटर जैसे सुपाडे को अपने होंठों में क़ैद कर लिया…!
अनायास ही मेरा हाथ उसके सर पर चला गया, और उसे दबाकर मेने अपनी कमर को एक करारा सा झटका दिया…
सरसराकर मेरा मूसल जैसा लंड उसके मुँह में चला गया, और जाकर उसके गले में बुरी तरह से फँस गया…..
रागिनी की साँस अटक गयी, और वो उसे बाहर निकालने के लिए ज़ोर लगाने लगी…जब वो कुछ देर अपने प्रयास में असफल रही, तो उसने फटी-फटी आँखों से मेरी तरफ देखा…
मुझे लगा जैसे वो मुझसे अपना लंड निकालने के लिए फरियाद कर रही हो…मेरे दिमाग़ को एक झटका सा लगा… और मेने अपना लंड उसके मुँह से खींच लिया….!
रागिनी ने राहत की साँस ली और अपनी साँसों को नियंत्रित करते हुए कतर नज़रों से मेरी तरफ देखते हुए बोली ….
बहुत बेरहम हो… जान लेना चाहते थे मेरी… ऐसे भी कोई करता है भला…
मेने अपने कानों को हाथ लगाते हुए कहा – सॉरी डार्लिंग, पता नही आज -मुझे क्या होता जा रहा है, बार-बार अपने आप से कंट्रोल खो रहा हूँ…
वो मन ही मन मुस्करा उठी, लेकिन प्रत्यक्ष में कहा – कोई बात नही डार्लिंग, लेकिन आगे ध्यान रखना प्लीज़…
ये कहकर उसने उसे फिरसे अपने मुँह में ले लिया और पूरी लगान से मन लगाकर उसे चूसने लगी….!
मेरा लंड उसकी जीभ की मालिश और मुँह की गरम-गरम साँसों से और ज़्यादा फूल के कुप्पा हो गया था…
बीच बीच में रागिनी मेरे सुपाडे पर दाँत गढ़ाकर रगड़ देती, जिससे मेरे लंड में और ज़्यादा सुरसूराहट होने लगती…
आयईयी…मदर्चूद्द्द….ऐसा मत कर साली कुतियाअ…, वरना पछ्तायेगी फिरसे…,
ये सुनकर वो मेरी आँखों में देखते हुए मुस्कराने लगी, साथ ही अपने होंठों का दबाब और बढ़ा दिया…
मज़े की वजह से मेरी आँखें मुन्दने लगी, मुँह से स्वतः ही सिसकियाँ निकलने लगी…
कुछ देर लंड चूसने के बाद उसका मुँह दुखने लगा…, तो वो चूसना बंद कर के खड़ी हो गयी, और अपनी नाम मात्र की पेंटी नीचे करते हुए बोली..
बड़ी ही सख़्त जान है तेरा ये मूसल, मेरा मुँह दुखने लगा, लेकिन इस भोसड़ी वाले पर कोई असर ही नही हुआ, और ज़्यादा फूलता जा रहा है…कहते हुए एक थप्पड़ मेरे लंड पर मार दिया उसने…
उसका थप्पड़ खाकर वो फुफ्कार उठा, और चटक से मेरे पेट पर आकर लगा…
उसका ये रूप देखकर रागिनी जैसे फिदा ही हो गयी उसपर…और उसको पकड़कर अपनी चूत के मुँह पर रगड़ने लगी…
आअहह… राजा…अब जल्दी से इसे मेरी चूत में डालकर मेरी खुजली मिटा दे यार… अब नही रहा जा रहा मुझसे, ये कहकर उसने एक बार फिर मेरे होंठ चूस लिए…
फिर उसने अपनी चादर एक साफ सी जगह पर बिच्छा दी और अपनी टाँगें चौड़ी कर के लेट गयी…
मे भी उसकी टाँगों के बीच घुटने टेक कर बैठ गया, वो अपनी चूत को थप-थपाकर बोली… डाल अब इसमें जल्दी से… और फाड़ दे मेरी चूत को अपने मूसल से…
आहह.. क्या मस्त कड़क लंड है तेरा… फिर उसने अपने हाथ से उसे पकड़कर अपनी गीली चूत के मुँह पर रखकर अपनी टाँगों को मेरी गान्ड पर लपेट लिया…
उसका उतबलापन देख कर मे मन ही मन मुस्करा उठा… और उसकी आँखों में देखते हुए उसकी चुचियों को लगाम की तरह पकड़ लिया..
फिर उसकी टाँग चौड़ी कर के एक करारा सा धक्का उसकी चूत में मार दिया…..
आआयययययययययीीईईईईईईईईईईई…………….मुम्मिईीईईईई….मररर्ररर….गाइिईई…रीइ…
रागिनी के मुँह से चीख उबल पड़ी…. मेने उसके मुँह को दबा कर कहा…
भोसड़ी की चिल्लती क्यों है कुतिया साली… तबसे तो इसे लेने के लिए इतनी उतावली हो रही थी, अब क्यों गान्ड फट गयी तेरी…
वो कराहते हुए बोली… आअहह…भेन्चोद साले….इतनी बेदर्दी से कोई पेलता है क्या…? आराम से चोद, फिर देखती हूँ, कितना दम है तेरी गान्ड में…
वैसे इतना कड़क डंडे जैसा लंड है तेरा…. मेरी चूत अंदर तक चीर दी इसने…उफफफफ्फ़… अब आराम आराम से करना… मेरे… रजाअ..जीिीइ…
मेने धीरे-धीरे अपना लंड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया… रागिनी सिसकियाँ भरती हुई, चुदाई का मज़ा लूटने लगी…
अब उसको भी मज़ा आने लगा था शायद, सो अपनी गान्ड उठा उठाकर मेरे मूसल जैसे लंड को जड़ तक लेने लगी…
10 मिनिट की धुआधार चुदाई के बाद वो चीख मारकर झड़ने लगी…और फिर सुस्त पड़ गयी…
मेरे धक्के बदस्तूर जारी थे… वो कराहते हुए बोली – थोड़ा रुक ना यार, चूत सूख गयी है मेरी… जलन होने लगी है…
मेने अपने धक्कों को विराम देकर उसकी गान्ड थप-थपाकर उसे घुटनों के बल कर के घोड़ी बना दिया, और पीछे से उसकी गान्ड में मुँह डालकर अपने थूक से उसकी चूत को गीला करने लगा…
थोड़ी देर में ही वो अपनी गान्ड मटकाने लगी और मज़े में आ गयी… तो मेने अपना मूसल फिर से उसकी चूत में पेल दिया…
वो आअहह…..सस्स्सिईईईईई…करती हुई पूरा लंड एक बार में ही निगल गयी… मे उसकी गान्ड पर थप्पड़ बरसाते हुए दनादन धक्के लगाने लगा… !
वो भी अपनी गान्ड को मेरे लंड पर पटक-पटक कर चुदाई का मज़ा ले रही थी..
उसके चुतड़ों पर मेरी जाँघ की थप-थप की आवाज़ रात के शांत वातावरण में गूँज रही थी…
मुझे अभी मज़ा आना शुरू ही हुआ था, कि किसी ने पीछे से मुझे अपनी बाहों में लपेट लिया….
धक्के मारते हुए मेने मुड़कर देखा तो रागिनी की टेंट मेट रीना… एकदम नंगी मुझे अपनी बाहों में भरे हुए मेरे बदन से लिपटी हुई थी…!
धक्कों के साथ साथ उसका बदन भी मेरे शरीर के साथ रगडे खा रहा था…
मस्त माल कूर्वी फिगर रीना अपने मोटे-मोटे आम मेरी पीठ से सटाये हुए थी…, उसके कड़क निपल्स मेरी पीठ से रगड़ कर मेरे मज़े को और दुगना कर रहे थे..
बाजू से पकड़ कर मेने रीना को अपने बगल में खड़ा किया, और रागिनी की चूत में धक्के लगाते हुए उसके होंठ चूसने लगा…
फिर मेने उसकी चूत में अपनी दो उंगलियाँ डालते हुए पूछा…
रीना तुम यहाँ कब आई…?
वो सिसकते हुए बोली – सस्सिईईईई….आआहह….जब तुम दोनो किस करना शुरू किए थे, मे तभी से तुम दोनो का खेल देख रही हूँ….
उसकी आवाज़ सुनकर रागिनी ने मुड़कर पीछे देखा…और अपनी गान्ड को ज़ोर ज़ोर से पटकते हुए बोली- आअहह….साल्ल्लीइीइ….कुतियाअ…तू भी आ गयी…. अपनी चूत की खुजली मिटाने…
आआहह…हाईए रे.. बहुत मस्त चुदाई करता है…रीि ये अंकुश….तो.. आहह…आईईई…मे तो फिर गाइिईई….उउउऊओह… करती हुई रागिनी भालभाला कर झड़ने लगी…
इधर मेरा भी नल कभी भी खुल सकता था… सो पूरा दम लगाकर दो-तीन धक्के मारे.. और उसकी चूत में पूरा जड़ तक लंड पेलकर धार मार दी…
साथ ही उत्तेजना में मेरी दोनो उंगलियाँ जड़ तक रीना की चूत में घुस गयी…जिससे वो भी अपने पंजों के बल उचक कर पानी छोड़ने लगी….!
मेने अपना टॅंक खाली कर के पाइप को उसकी टंकी से बाहर खींचा…. फुकच्छ… की आवाज़ के साथ मेरा लंड रागिनी की चूत से बाहर आया, जिसपर रागिनी की चूत का रस लगा हुआ था…
पता नही क्यों… लेकिन वो अभी भी अपनी फुल फॉर्म में ही लग रहा था… उसका आकर देख कर रीना की घिग्घी बँध गयी… वो उसे फटी-फटी आँखों से देख रही थी…
रीना अपने मुँह पर हाथ रखकर बोली – हाए राअंम्म… रागिनी.. तू इतना बड़ा लंड झेल गयी… बाप रे ये मेरी तो चूत के परखच्चे उड़ा देगा…!
रागिनी – बकवास मत कर, मुझे पता है, तू कितनी सील पॅक है, साली खुद के चाचा का सोटा खा जाती है, और अब यहाँ नाटक कर रही है…
रीना – हहहे… वो उनका इतना बड़ा नही है यार… सच में ये तो किसी घोड़े के जैसा लग रहा है…, ये कहकर उसने उसे अपने हाथ में पकड़ा, और उसकी स्ट्रेंत चेक करने लगी..
रागिनी – चल अब बहुत नाटक हुआ, इसे चाट कर सॉफ कर, अगर चाहिए तो जल्दी से चुस्कर तैयार कर…
रीना – पर यार ये तो ऑलरेडी तैयार ही है…
मेने उसे झिड़कते हुए कहा – फिर भी थोड़ी सेवा तो करनी पड़ेगी इसकी, अगर अपनी चूत को मेवा खिलानी है तो..
मेरे झिड़कते ही, उसने उसे अपने मुँह में ले लिया, और चाट-चाट कर चमका दिया…
5 मिनिट बाद ही मेरा खूँटा फिरसे ज्यों का त्यों सख़्त हो गया, जिसे मेने रीना की टाँगें चौड़ा कर उसकी चूत में ठोक दिया…
पहले धक्के पर वो बिल बिलाकर कर गान्ड हिलाने लगी, लेकिन कुछ ही देर में फूल मस्ती में आकर चुदाई का मज़ा लेने लगी…
रीना भी खेली खाई थी, सो अपनी गान्ड उचका-उचका कर लंड का मज़ा अपनी चूत को दिलाने लगी….
दोनो की अच्छे से बजाने के बाद मेने अपने कपड़े समेटे, और उनको गुड नाइट बोलकर अपने टेंट में आकर सो गया…
वो दोनो भी मेरे आने के कुछ देर बाद अपनी जगह पर जाकर सो गयी…!
दूसरे दिन हम सब खजुराहो का मंदिर देखने गये, मंदिर की कलाकृतियाँ इतनी सुंदर और कामुक थी, की जहाँ खड़े होकर देखने लगें लंड अपने आप पेंट के भीतर ठुमके मारने लगता…
वो तो अच्छा था, कि लड़के और लड़कियों को अलग अलग ग्रूप में रख कर घूम रहे थे… कामसूत्र के सारे आयाम उन दीवारों पर दर्शाये गये थे…!
ये सब देखकर बाहर जब सब इकट्ठा हुए तो लड़के और लड़कियों के चेहरों से साफ लग रहा था, कि वो कितनी उत्तेजना में हैं…
मेडम बारी-बारी से सबके पॅंट के उठानों को देख रही थी, और शायद मन ही मन चुदने की कल्पना भी कर रही हो…
लेकिन कुछ होने वाला नही था, सो उसने नज़र बचाकर अपनी टाँगों के बीच हाथ डालकर अपनी गीली चूत को पेटिकोट से सूखा लिया…
इस तरह से रोज एक-दो नये मोनुमेंट को हम लोग देखने जाते और शाम को अपने अपने टेंट में आ जाते…
कुछ लड़के लड़कियाँ की सेट्टिंग भी हो गयी थी, और वो शाम के वक़्त जंगलों की सैर के बहाने अपनी रास लीला का लुफ्त भी उठा लेते थे…
इसी तरह 3-4 दिन निकल गये, रागिनी और रीना ने इस बीच फिरसे मेरे नज़दीक आने की बहुत कोशिश की, लेकिन मेने उन्हें मौका नही दिया…!
ऐसे ही एक दिन एक मंदिर में हम घूम रहे थे, मंदिर प्रांगड़ में एक पीपल का बड़ा सा पेड़ था, जिसके तने (स्टेम) के चारों ओर मिट्टी का गोलाई लिए हुए चबूतरा सा बना हुआ था..
मे भीड़ से अलग होकर उसपर बैठ गया, मौका ताड़ कर रीना मेरे पास आई, और एक चान्स और देने के लिए गिडगिडाने लगी..
मेने उससे कहा – देखो रीना तुम तो जानती ही हो, मे इस तरह का आदमी नही हूँ, वो तो पता नही मुझे क्या हुआ था उस दिन, और मे बैचैनि में उठ कर अकेले बाहर चला गया, और तुम लोगों ने मौके का फ़ायदा उठा लिया..…
वो – मे मानती हूँ, हमने मौके का फ़ायदा उठाया, और ऐसा तुम्हारे साथ उस दिन क्यों हुआ ये भी जानती हूँ…!
मेने चोंक कर उसकी तरफ देखते हुए पूछा – क्या कहना चाहती हो तुम..? वो तो बस ऐसे ही कुछ बाहर का खाया पीया था तो गॅस बनने लगी होगी, इसलिए बैचैनि हो रही थी… !
रीना – एक काम करो, उस दिन की घटना फिर से एक बार याद करो, क्या वो सब जस्ट गॅस से होने वाली स्वाभाविक सी प्रतिक्रिया थी..?
उसकी बात सुनकर मे सोच में पड़ गया, फिर मुझे कुछ लगा कि वो सब स्वाभविक तो नही था, ऐसा कभी मेरे साथ नही हुआ था की मेने अपना मानसिक कंट्रोल ही खो दिया हो…
और मेरे मुँह से निकलने वाले वो अपशब्द…. ये सब दिमाग़ में घूमते ही मे सोच में पड़ गया…
मुझे यूँ सोच में डूबे हुए देखकर वो फिर बोली – क्या सोच रहे हो…?
मेने अपनी सोच को विराम देते हुए कहा – तुम सही कह रही हो, मेरे साथ उस दिन कुछ तो गड़बड़ थी… क्या तुम्हें पता है…?
रीना मुस्करा कर बोली – मुझे सब पता है, कि तुम्हारे साथ क्या हुआ और किसने किया…?
मेने उसके कंधे पकड़ कर कहा – बताओ मुझे क्या हुआ था उस दिन?, और किसने किया था मेरे साथ…?
एक अर्थपूर्ण मुस्कान रीना के चेहरे पर आ गयी, और उसी अंदाज में वो बोली – मेरी एक शर्त है, अगर मानो तो मे तुम्हें सब कुछ बता सकती हूँ…!
मेने उसकी मनसा समझते हुए अपना एक हाथ उसके पीछे ले गया, और उसकी गान्ड सहला कर कहा – क्या शर्त है तुम्हारी…?
उसने मेरे पेंट के ऊपर से मेरे लौडे को सहला का कहा – एक बार और ये चाहिए मुझे… बोलो दोगे..?
मेने भी हाथ आगे कर के उसकी चूत को सहला दिया, और कपड़े के ऊपर से ही अपनी एक उंगली घुसाकर कहा – ठीक है, मे तुम्हें एक बार और चोदुन्गा, अब बोलो…
वो एक बारगी सिसक पड़ी, और मेरे हाथ को अपनी चूत पर दबाते हुए बताने लगी..
रीना मुझे उस दिन के बारे में बताते हुए बोली – तुम्हें याद होगा…,
उस रात, जब तुम लोग खाना खा रहे थे, तो मेने और रागिनी ने आकर तुम्हें जाय्न किया, और साथ बैठ कर खाने लगे…
मेने हामी भरी…. फिर
रीना – फिर हम सबने एक दूसरे का खाना भी शेयर किया था, …
उसी समय मौका देख कर रागिनी ने एक ऐसा ड्रग तुम्हारे खाने में मिला दिया
जिसके असर से आदमी या औरत सेक्स करने के लिए बैचैन होने लगते है…
5-6 घंटे तक इसका असर इतना रहता है, कि अगर लगातार सेक्स करे तो भी उत्तेजना बरकरार रहती है…
मे उसकी बात ध्यान से सुन रहा था…. हुउऊउंम्म फिर..
रीना आगे बोली – तुम्हारे सोने के कुछ देर बाद ही तुम्हें अजीब सी बैचैनि होने लगी… और तुम उठ कर बाहर चले गये…
रागिनी को पक्का पता था कि ऐसा होगा, इसलिए वो तुम पर नज़र बनाए हुए थी.. और तुम्हारे कुछ देर बाद ही वो तुम्हारे पास चली आई…
मे – ये बातें तुम्हें कैसे पता लगी…?
रीना – यहाँ का टूर डिसाइड होते ही रागिनी बहुत एक्शिटेड थी, मेने उससे इसका कारण पूछा तो वो जोश-जोश में कह गयी… कि ये साला अंकुश अपने आप को बहुत बड़ा हीरो समझता है…
अब देखूँगी ये मेरे चंगुल से कैसे बच पाता है…
जब मेने पूछा कि तू क्या करने वाली है… तो उसने ये कहकर बात टाल दी, की ये तो समय आने पर ही पता चलेगा, तू बस देखती जा.
यहाँ आते ही मेरी नज़र हर समय उसकी हरेक आक्टिविटी पर ही थी, मेने उसे वो ड्रग तुम्हारे खाने में मिलाते हुए देख लिया था…
फिर खाने के बाद जब सोने गये, तब मेने उससे पूछा कि उसने तुम्हारे खाने में क्या मिलाया था, तो उसने ये सब बताया…
मेने कहा – तो तुम वहाँ क्यों गयी…? क्या तुम भी पहले से ही उसके साथ मिली हुई थी…..?
रीना – झूठ नही बोलूँगी, मेरे मन में भी तुम्हें पाने की चाहत तो थी जैसे कॉलेज की ज़्यादातर लड़कियों की है, लेकिन मे रागिनी की तरह तुम्हें पाना नही चाहती थी..
फिर जब मौका हाथ आ ही गया था, तो मेने रागिनी को धमकाया, कि मे तुम्हें ये बात बताने जा रही हूँ,
मेरी धमकी से वो घबरा गयी और मुझसे बोली – अरे यार मिलकर मज़ा करते हैं… मेरे बाद तू आ जाना…
मे – हुउंम्म… तो ये बात है, तभी मे साला सोचते – 2 पागल हुआ जा रहा था, कि मेरा दिमाग़ काम क्यों नही कर रहा था उस दिन…
खैर ग़लती तो तुमसे भी हुई है, और इस ग़लती की माफी तुम्हें तभी मिलेगी, जब तुम मेरा भी एक काम करोगी…
रीना गिडगिडाते हुए बोली – देखो अंकुश, मेरी ऐसी कोई इंटेन्षन नही थी कि तुमसे कोई ज़ोर जबर्दुस्ति से अपना काम निकलवाऊ, वो तो बस रागिनी की बातों में आ गयी, प्लीज़ मुझे माफ़ करदो यार…!
मेने हँसते हुए कहा – डरो नही ! मे तुम्हें कोई सज़ा नही देने वाला, बस जैसा कहूँ वैसा करती जाना,
इसमें तुम्हारा भी फ़ायदा होगा, तुम जैसे चाहो मेरे साथ सेक्स कर सकती हो…
वो खुश होकर बोली – सच ! बोलो मुझे क्या करना होगा…?
मे – पता करो वो ड्रग अभी भी रागिनी के पास है, या कन्स्यूम हो गया…
रीना – वो तो होगा ही, मे पता लगा लूँगी, फिर…?
मे – शायद कल हमारे टूर का लास्ट दिन है, हो सकता है कल ही हम लोग यहाँ से निकल लें, तो तुम्हें आज ही उसमें से थोड़ा सा ड्रग, जितना मुझे उसने दिया था, लेकर तुम्हें रागिनी को देना होगा किसी भी तरह…और थोड़ा सा मुझे भी देना…
रात को जब उसका असर उसके ऊपर होने लगे, तो उसे लेकर उसी जगह पर आ जाना…
रीना – लेकिन मेरे साथ कुछ ग़लत तो नही करोगे ना तुम…
मे – विश्वास रखो, मे तुम्हें तुम्हारी मन मर्ज़ी से ही मज़ा दूँगा…
मेरी बात सुनकर रीना खुशी से झूम उठी, और उचक कर मेरे होंठों को चूमकर वहाँ से चली गयी…!
घूम घाम कर शाम को हम सब अपने टेंट्स में लौट लिए… कल दोपहर बाद हमें यहाँ से लौटना था,
सबको बोल दिया गया, कि कल जिसको जंगल वग़ैरह देखने हो वो सुबह के टाइम जा सकता है, और 1 बजे तक लौट कर अपना समान वग़ैरह पॅक कर के 3 बजे तक रेडी होना है…
कुछ देर हम सब मिलकर धमा-चौकड़ी मचाते रहे, तब तक खाना रेडी हो गया, सबने एक साथ मिलकर खाना खाया…
रीना ने थोड़ी सी ड्रग मुझे भी दे दी थी, और ये भी कन्फर्म कर दिया, कि जैसा तय हुआ था, उतना उसने रागिनी के खाने में मिला दिया है…
जैसा सोचा था वैसा ही हुआ, लगभग 11 बजे रागिनी और रीना अपने टेंट से बाहर निकली, और उस ओर चल दी… मेने उनके पास थोड़ा देर से जाने की सोची..,
करीब 20-25 मिनिट के बाद में भी उस ओर चल दिया…. वो दोनो एक दूसरे के साथ लेज़्बीयन सेक्स करने में गुत्थी हुई थी…
दोनो के शरीर पर कपड़ा नाम की चीज़ नही थी, रीना तो जैसे बस उसका साथ ही दे रही थी, लेकिन रागिनी पर तो जैसे हवस का भूत ही सवार था…
मुझे देखते ही उसने रीना को छोड़, मेरे कपड़ों पर धावा बोल दिया, और एक मिनिट में ही मुझे भी बिल्कुल नंगा कर दिया…
वो मेरे लंड पर किसी भूखी कुतिया की तरह टूट पड़ी.. और चूस-चूस कर चमका दिया…
मेने भी उसे ज़्यादा तरसने नही दिया, और खड़े खड़े ही उसकी एक टाँग उठाकर अपना खूँटा, उसके छेद में ठोक दिया…
जोरदार झटकों की वजह से रागिनी ज़्यादा देर एक टाँग पर खड़ी नही रह पाई, तो मे उसे घोड़ी बनाकर चोदने लगा…
एक बार जमकर रागिनी की चूत चोदने के बाद मेने रीना को अपने पास खींच लिया…
वो तो पहले से ही वासना की आग में बुरी तरह झुलस रही थी, उसकी चूत लगातार चासनी टपका रही थी…
मेने अपना मूसल उसकी गीली चूत में डाल दिया, और उसके मन मुताविक चोदने लगा, वो खुश होगयि…और अपनी गान्ड उठा उठाकर चुदाई का मज़ा लूटती रही…
रीना की मोटी- मोटी चुचियों का रस निचोड़ते हुए मेने उसे उलट-पुलट कर जमकर मज़ा दिया.. अब वो पूरी तरह से संतुष्ट नज़र आ रही थी…
कुछ देर सुस्ताने के बाद मेने फिरसे रागिनी की तरफ अपना रुख़ किया….
थोड़ी देर उससे लॉडा चुसवाने के बाद, वो फिरसे फनफनाकर खड़ा था अगली जंग जीतने के लिए…
ड्रग का असर उसे ज़्यादा देर शांति से बैठने ही नही दे रहा था…
रागिनी की हवस भी बुरी तरह बढ़ चुकी थी… उसे अब सिवाय मेरे मोटे लंड के और कुछ भी दिखाई नही दे रहा था…!
मेने उसकी वासना को और थोड़ा भड़काया, और उसके कठोरे निप्प्लो को अपने दाँतों से काटने लगा…
प्रतिक्रिया स्वरूप उसकी हवस और भड़क उठी, और वो मेरे लौडे को जबर्जस्ती से पकड़ कर अपनी चूत पर घिसने लगी…
मेने थोड़ा उसे तरसाते हुए कहा – रागिनी अब अगर तुझे मेरा लंड चाहिए तो जैसे मे चाहूं वैसे तुझे चुदवाना पड़ेगा…
मेरी बात वो फ़ौरन मान गयी, और किसी भूखी कुतिया की तरह पून्छ हिलाते हुए बोली – तुझे जैसे, जो करना है जल्दी कर, और मेरी भट्टी को ठंडा कर्दे प्लीज़…
मेने उसे एक पेड़ के पास खड़ा किया और उसके तने से उसीकि ब्रा से उसके हाथ बाँध दिए…
उसका मुँह पेड़ की तरफ था और वो पीछे को अपनी गान्ड चौड़ा कर झुक गयी…
मेने रीना को बोलकर उसकी ब्रा रागिनी के मुँह में ठूंसवा दिया, जिससे वो चीख ना सके… और अपने लंड को रीना के मुँह में देकर गीला किया…
मेरा लंड ड्रग के असर से इस समय इस पोज़िशन में आ चुका था, कि अगर किसी दीवार में भी पेलता तो वो उसमें भी छेद कर देता…
मेरे लंड का आकार और उसकी कठोरता देख कर रीना ने एक झूर झूरी सी ली…
अब रागिनी को उसके किए का सबक सिखाने का वक़्त आ गया था,
मेने ढेर सारा थूक लेकर उसकी गान्ड के छेद पर रखा, रीना को इशारा किया तो उसने अपने हाथों से उसकी गान्ड के छेद को चौड़ा दिया…
मेरी मनसा जानकार रागिनी कसमसाई, और अपनी गान्ड को इधर उधर करने लगी…
मेने अपनी एक हथेली उसकी गान्ड के एक पाट पर जमाई, मूसल को उसके छेद पर टीकाया, और एक सुलेमानी धक्का अपनी कमर को मार दिया….
छर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर……..की आवाज़ के साथ रागिनी की गान्ड फट गयी…. उसके चूतड़ बुरी तरह से हिलने लगे…. मेरा आधे से भी ज़्यादा लंड उसकी गान्ड में फिट हो चुका था…
उसके मुँह से बस गून..गूणन्.. जैसी आवाज़ें ही निकल पा रही थी… मेने रीना को उसकी चूत सहलाने के लिए कहा, और खुद उसकी चुचियों को मसल्ने लगा…
वो कुछ शांत हुई, तो एक और फाइनल स्ट्रोक लगा कर बॉल बाउंड्री के बाहर…. बोले तो जड़ तक लंड रागिनी की गान्ड में फिट कर दिया…
उसकी आँखों से आँसुओ की बाढ़ सी आ रही थी…टाइट गान्ड पाकर मेरे मूसल की तो बल्ले-बल्ले हो गयी…
वो साला उसके अंदर जाकर और ज़्यादा फूल गया…, कुछ देर और अंदर रखने के बाद मेने अपने खूँटे को बाहर खींचा…
उसपर लाल खून के रेशे दिखाई दे रहे थे, माने रागिनी की गान्ड की दीवारें बुरी तरह डॅमेज हो गयी थी….
लंड निकालकर मेने देखा तो उसकी गान्ड का छेद किसी ब्लॅक होल जैसा दिख रहा था…
थोड़ा सा थूक और उसके छेद में थूक कर मेने फिर से अपने खूँटे को एक साथ ही गाढ दिया… रागिनी एक बार फिर बुरी तरह कसमसाई…
लेकिन हाथ बँधे थे, मुँह में रीना की ब्रा ठूँसी हुई थी, इस बजह से वो कुछ विरोध करने की स्थिति में नही थी…
मेने अपने धक्के लगाना शुरू कर दिए…, ड्रग के असर से मेरा लंड इतना जल्दी हार मानने वाला नही था…
लगभग आधे घंटे तक में बदस्तूर उसकी गान्ड फाड़ता रहा, फिर उसकी छत-विच्छित गान्ड को अपने वीर्य से भर दिया…
अपनी साँसें इकट्ठा करने के बाद मेने रागिनी के हाथ खोल दिए, उसके मुँह से रीना ने अपनी ब्रा निकाली.. वो वहीं पेड़ की जड़ में पस्त होकर पड़ी रह गयी,
उसकी आँखों से अभी भी पानी बह रहा था…, कुछ ड्रग का असर, और ऊपर से उसकी गान्ड सुन्न हुई पड़ी थी सोते जैसे लंड की मार से….!
बहुत देर तक उसकी गान्ड का सुराख खुला का खुला ही रह गया. जिसमें से मेरा वीर्य, एक सफेद लकीर के रूप में धीरे-2 बाहर रिस रहा था..
उसकी गान्ड के होल की दीवारें लाल सुर्ख हो चुकी थी…मुझे लगा कि ये कुछ दिन ठीक से चल भी पाएगी या नही…
खैर इस सबसे अपना ध्यान हटाकर मेने अपने कपड़े पहने और रीना को उसके पास छोड़कर अपने टेंट में जाकर सो गया…
अगली सुबह, मेरे उठने से पहले ही, अधिकतर लोग जंगल घूमने निकल गये, मेने अनमने भाव से नित्या क्रिया की, और फिर रागिनी की खैर खबर लेने उसके टेंट की तरफ चल दिया…
रीना उठ चुकी थी, लेकिन रागिनी अभी भी बेसूध पड़ी थी, कुछ तो ड्रग का असर, ऊपर से फटी गान्ड का दर्द…
रीना को उसका ख़याल रखने का बोलकर मे भी थोड़ा नदी की तरफ निकल गया, और एकांत जगह देख, उसके किनारे पर बैठकर नदी के निर्मल जल को निहारते हुए सोचने लगा…
रागिनी के बारे में सोचकर, मुझे अपने मन में बड़ी ग्लानि सी होने लगी, मुझे रागिनी के साथ ऐसा दुर्व्यवहार नही करना चाहिए था…
वो तो जैसी थी सो थी, लेकिन मुझे ऐसा नही करना चाहिए था…
बहुत देर तक में यूँ ही बैठा पानी को निहारता रहा, फिर सोचा थोड़ा नहा लिया जाए, और अपने कपड़े निकाल कर नदी के पानी में उतर गया…
नदी के ठंडे पानी का अहसास बदन पर होते ही मुझे राहत महसूस हुई, बहुत देर तक में पानी में नहाता रहा…
फिर बाहर आकर अपने कपड़े उठाए, और गीले बदन मात्र अंडरवेर में ही जंगल के बीच से होते हुए अपने टेंट की तरफ चल दिया…
अभी में जंगल से बाहर निकल भी नही पाया था, कि सामने से मुझे रीना आती हुई दिखी…
उसे देखते ही मेने झट से अपने कपड़ों से गीले अंडरवेर को ढक लिया… जब वो पास आ गयी तो मेने पूछा…
रीना तुम यहाँ क्या कर रही हो…, मेरी बात सुनकर वो बोली…
चलो तुम्हें रागिनी बुला रही है, जब मेने उसे पूछा कि अब वो कैसी है..?
तो उसने बताया, कि अभी ठीक तो है, लेकिन चलने में थोड़ी तकलीफ़ हो रही है…
फिर उसकी नज़र नीचे को गयी, और मेरे कपड़ों से अंडरवेर को ढके देखा, तो शरारत करने से वो बाज़ नही आई, और झटके से मेरे कपड़े छीन्कर खिल-खिलते हुए झाड़ियों की तरफ भागने लगी…
मे उसके पीछे पीछे दौड़ा, थोड़ा सा ही आगे जाकर वो झटके से रुक गयी, और एकदम से मेरे सामने आकर उसने मेरे गीले अंडरवेर के ऊपर से ही मेरे लंड को पकड़ लिया…
मेने उसकी गान्ड मसल्ते हुए कहा – कल रात से मन नही भरा तुम्हारा..?
वो मेरी आँखों में झाँकते हुए बोली – इसे देखकर फिर से मन करने लगा है..
प्लीज़ अंकुश एक बार और कर्दे ना यार.., ना जाने फिर मौका मिले या ना मिले…
मेरा भी रात के ड्रग का असर अभी वाकी था, सो मेने वही उसे घोड़ी बनाकर पीछे से उसकी मस्त गान्ड को मसल्ते हुए अपना लंड उसकी गान्ड में ठोक दिया…
वो बुरी तरह से कसमसाने लगी, लंड अभी आधा भी अंदर नही गया था, और वो हाए-तौबा करने लगी, और लंड बाहर निकालने के लिए गुहार करने लगी…
मेने भी उसे ज़्यादा परेशान करना ठीक नही समझा, वरना एक और लंगड़ी घोड़ी ग्रूप में शामिल हो जाती,
मेने उसकी गान्ड से अपना लंड खींचकर उसकी चूत में पेल दिया, उसकी एक बार और अच्छे से खुजली मिटाकर हम दोनो वापस आ गये…
अपने टेंट में जाने से पहले रीना ने मेरे होंठों को चूम लिया और बोली –
थॅंक यू अंकुश… तुम्हारे साथ बिताए लम्हों को जीवन भर नही भूल पाउन्गि.
मेने अपने टेंट में जाकर कपड़े चेंज किए, और फिर डरते-डरते रागिनी के पास गया, मुझे देखते ही रागिनी सुबकते हुए बोली –
मुझे तुमसे ये उम्मीद नही थी, मेने जो तुम्हारे साथ किया वो मेरी ज़िद थी तुम्हें पाने की, लेकिन तुमने तो….
अपनी बात अधूरी छोड़कर वो फिरसे सुबकने लगी…
मे उसके पास जाकर बैठ गया, और उसके कंधे को सहलाते हुए कहा – मुझे माफ़ कर दे रागिनी, सच्चाई जानने के बाद में अपने आपे में नही रहा.. सो तुम्हें सबक सिखाने के लिए ये सब कर बैठा…
सच कहूँ तो सुबह से ही मेरा मन आत्मगीलानी से भरा हुआ था, इसीलिए में नदी की तरफ चला गया था…
रागिनी ने अपने को शांत करते हुए कहा – इट्स ओके, ग़लती हम दोनो से ही हुई है..अब बेहतर होगा, कि बीती बातें भूलकर हम फिर से दोस्त रहें..
रागिनी के मुँह से ऐसी समझदारी भरी बातें सुनकर मेने उसे अपने बाजुओं में भरते हुए कहा…
ओह… थॅंक यू रागिनी, तुमने मुझे माफ़ कर दिया, अब हम पक्के वाले दोस्त हैं..
तभी रीना बीच में बोल पड़ी – मुझे भूल गये क्या…?
हँसते हुए हमने उसे भी अपने पास खींच लिया, और हम तीनों ही एक दूसरे से लिपट गये…
जीवन के किसी मोड़ पर फिरसे मिलने का वादा कर के मे अपने टेंट में चला गया, और अपना समान पॅक करने लगा…
दिन ढले हमारा टूर वापसी के लिए चल पड़ा, और दूसरे दिन सुबह हम अपने कस्बे में थे…
कुछ दिनो बाद ही हमारे फाइनल एग्ज़ॅम हो गये, मेने अच्छे ग्रेड से ग्रॅजुयेशन कंप्लीट कर लिया….!
रिज़ल्ट के बाद घर में बड़ों के बीच डिस्कशन का दौर शुरू हुआ, वीकेंड में दोनो भाई घर में मौजूद थे…
बड़े भैया का सुझाव था, कि मे उनकी तरह हाइयर स्टडी करूँ और किसी कॉलेज में लग जाउ…
लेकिन कृष्णा भैया चाहते थे, की मे उनकी तरह किसी प्रशासनिक पद के लिए तैयारी करूँ….
किसी को मुझे पूच्छने की तो जैसे कोई ज़रूरत ही महसूस नही हो रही थी, कि मे क्या चाहता हूँ…
तभी बाबूजी ने अपनी अलग ही राई रख दी और बोले – वैसे तो तुम सब लोग समझदार हो, जो भी कहोगे छोटू के भले के लिए ही कहोगे,
लेकिन मे चाहता हूँ, कि घर में कोई एक ऐसा भी हो जो क़ानून और अदालती कार्यों की जानकारी रखता हो.. तभी हमारा परिवार पूर्ण होगा…
भाभी ने मेरी तरफ देखा और बोली – तुम क्या चाहते हो लल्ला…?
मेने भाभी की तरफ धन्यवाद वाली नज़रों से देखा, कि चलो कम से कम भाभी को तो मेरी इच्छाओं का भान है…
उनकी बात सुनकर सब मेरी तरफ देखने लगे…
मेने कहा – मेरे विचार से हम सभी को बाबूजी की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए, रही बात मेरी अपनी इच्छा की तो वो भी उनके सम्मान से ही जुड़ी हुई हैं…
मेरी बात से बाबूजी की आँखें भर आईं, उन्होने मुझे अपने सीने से लगा लिया..और भरे कंठ से बोले –
जीता रह मेरे बच्चे…, पर बेटा मेने तो बस अपना विचार रखा था, ये तेरे ऊपर निर्भर करता है, कि तू क्या चाहता है…?
मेने उनसे अलग होते हुए कहा – मे बस ये चाहता हूँ, कि आप मुझसे क्या चाहते हैं…
हर माँ बाप अपनी आधी अधूरी हसरतों को अपने बच्चों के रूप में पूरा करना चाहते हैं, और यही सोच लेकर वो अपने बच्चों की परवरिश अपनी ख्वाहिशों को दफ़न कर के करते रहते हैं