कामूकता की इंतेहा Chapter 2

कामूकता की इंतेहा
वो बोला- नखरे मत कर, बाहर गाड़ी खड़ी है, चुपचाप चल के बैठ जा, समझी!
मैं मुँह सा बनाती, उन ऊंची एड़ी के सैंडलों पर धीरे धीरे उसके साथ चलने लगी। ऐसा लग रहा था कि मेरे चूतड़ निकर फाड़ के कभी भी बाहर आ सकते हैं, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
चूतड़ मटकाती उसकी फारचूनर गाड़ी में आगे उसके साथ बैठ गयी और वो गाड़ी चलाने लगा।उसकी बड़ी गाड़ी के शीशे काले थे, जिनमें से बाहर से अंदर कोई नहीं देख सकता था। बहुत बड़े घर का लौंडा था। जेड ब्लैक शीशों वाली गाड़ी को भी रास्ते में खड़े किसी पुलिस वाले ने हाथ न दिया।
कुछ देर के बाद उसने ठेके पर गाड़ी रोकी और बीयर की पेटी उठा लाया; 2 बोतलें खोल लीं, एक मुझे दे दी और एक खुद पीने लगा।मैंने उसकी एक घूंट भरी तो मुझे उसका टेस्ट बिल्कुल अच्छा न लगा और उससे कहा- मैं नहीं पिऊंगी।तभी उसने चिल्ला के कहा- साली बोतल फुद्दी में डालूंगा और गाँड में से निकालूंगा, चुपचाप पी ले।
उसकी रोबीली और भारी भरकम आवाज़ से मैं सहम गई और चुपचाप धीरे धीरे कड़वे घूंट भरने लगी। मुझे दारू से नशा नहीं हुआ था मगर जब मैंने बीयर की आधी बोतल ही पी तो, मेरा सर चकराने लगा। शायद दारू के ऊपर से बीयर ज़्यादा नशा कर देती है।मैंने गाड़ी का शीशा खोला और आधी बोतल बीयर की बाहर सड़क पर फेंक दी। उसको इस बात पर बहुत गुस्सा आया और बोला- भेनचोद, नखरे करने लग गई है, रात को इतनी टिका के मारूँगा न कि नीचे से निकल निकल के भागेगी, याद रखना मेरी बात को!
मैं डर गई; 2 बार उससे चुद चुकी थी, मुझे पता था कि अगर ये बुरी पे उतर आया तो करेगा बहुत बुरी … और उसकी जकड़ से छूटा भी नहीं जा सकता था। दो बार उसने मारी तो मेरी बहुत टिका कर थी, लेकिन उसने मुझे इस तरह चौड़ा किया था कि उसका हलब्बी लंड सीधा मेरी फुद्दी में धुन्नी तक जाए और उसका टोपा भी अंदरूनी दीवारों में न लगें।
कुछ नए खिलाड़ियों ने मुझे कई बार दर्द भी दिया था क्योंकि उन्हें चोदना नहीं आता था और वो अपने लंड को टेढ़ी दिशा में धकेल कर घस्से मार देते थे, जिसके कारण मुझे दर्द हुआ था। लेकिन ऐसा सिर्फ 7-8 इंच से बड़े लौड़ों से होता है, इससे छोटे लौड़े आम तौर पर इस तरह की तकलीफ नहीं देते। मुझे यह बात बखूबी पता थी कि अगर वो मुझे दर्द देने पर आ गया तो ऐसी हरकत कर सकता है, जिससे चूत तो न फटेगी लेकिन अंदर सूज़न ज़रूर हो सकती है और जिस दौरान चुदने में वहुत तकलीफ होती है।
तो इसी डर के कारण उसको मनाने के लिए मैंने कान पकड़ कर सॉरी कहा और उससे हाथ से बोतल छीन कर पीने लगी और गाड़ी की गीतों वाली लीड उठा कर अपने फोन पर चमकीले का गाना लगा दिया। ये गाने बेहद रोमांटिक हैं और मेरे पंजाबी लड़के लड़कियां दोस्त उसे अच्छी तरह जानते हैं।
ये गाने सुन कर वो बहुत खुश हुआ और गुस्सा भूल गया। इस दौरान मैं उसकी आधी बीयर की बोतल पी गयी और और पूरी तरह टुन्न हो गयी। तभी उसने गाड़ी मेले के करीब लाकर पार्क कर दी।
कार के अंदर तो फिर हीटर चल रहा था और मुझे ठंड महसूस नहीं हुई लेकिन जब मैं कार से नीचे उतरी तो मुझे यूं महसूस हुआ जैसे बेहद ठंडी फ्रिज का दरवाजा खोल कर होता है। मैं नीचे उतर कर खड़ी हो गई और वो आया और मुझे एक बांह में लेकर धीरे धीरे चलते हुए मेला दिखाने लगा, यानि कि मेले में मेरे भरे और अधनंगे जिस्म की जबरदस्त नुमाइश करने लगा। शायद उसने मुझे इस तरह बाँह में इसलिए लिया था मैं कहीं नशे में टल्ली सैंडल्स के ऊपर से फिसल कर अपना पैर न तुड़वा लूं।
उस रात के मेले में औरतें बहुत कम थीं और ज़्यादातर मर्द ही थे। जिधर से वो मुझे लेकर गुज़रता, मेले के तमाम मर्दों और औरतों की निगाहें मुझ पर जम जातीं और खिंचती ही चली आती। एक तरह की भीड़ उमड़ कर हमारे पीछे पीछे चोरी चोरी घूमने लगी।
तभी वो एक जगह रुका और मुझसे बोला- तुम सामने उस ऊंची चूड़ियों वाली दुकान पे जाओ, मैं अपने दोस्तों को लेकर वहीं आता हूँ, और हां … धीरे-धीरे चलना, गिर मत जाना।यह कह कर वो भीड़ में गायब हो गया।
वो दुकान वहां से कोई 60-70 कदम दूर थी और काफी ऊंची थी जिसके कारण भरी भीड़ में भी दूर से दिखाई दे रही थी। मैं उसकी हरकतों से हक्की बक्की बेहद ठंड महसूस करती हुई अपनी बांहों को हाथों से मसलती हुई उस दुकान की तरफ बढ़ी।
रूपिन्दर कौर मेले मेंमेरे चलने से पहले रास्ते के बीच में ज़्यादा भीड़ नहीं थी लेकिन जैसे ही मैंने 8-10 कदम भरे, भीड़ इतनी ज्यादा हो गयी कि चलना मुश्किल हो गया। मुझे अकेली देख कर भीड़ मुझ पर टूट पड़ी थी।

8-10 कदम और तो किसी ने मुझे टच करने की बजाए कोई खास हरकत नहीं की और आराम से इधर उधर चलते रहे। लेकिन जैसे जैसे मैं चलती गई, मैं उनमें घुटती गई। अब चलना बहुत मुश्किल हो गया था, मेरे आगे पीछे दाएं बाएं मर्द ही मर्द जमा हो गए।
मुझे पता था कि यह ढिल्लों की शरारत है, फिर भी मैं जैसे तैसे दुकान जी तरफ अपने शराबी कदम बढ़ाती रही। दुकान अभी 30 कदमों की दूरी पर दिखाई दे रही जब पीछे से कुछ हाथ आये और मेरी तरबूजी चूतड़ों की मुट्ठियाँ भरने लगे।
कुछ पलों बाद आगे से भी लड़ते झगड़ते हाथ आये और मेरी फुद्दी में उंगलियां डालने लगे। कुछ हाथ और आये और टीशर्ट के नीचे घुस कर मेरे मम्मे मसलने लगे। अचानक हुए इन हमलों से मैं बहुत घबरा गई और मुझे लगने लगा कि ये भीड़ तो मेरे कपड़े फाड़ कर मेरा काम कर देगी।
यह तो शुक्र था कि निकर बहुत ज़्यादा टाइट थी और बहुतों की घमासान कोशिशों के बाद भी किसी का हाथ अंदर नहीं सरक पाया। उन लोगों की इन हरकतों से मैं चंद मिनटों में ही गर्म हो गयी और मुझे वो हाथ चुभने बंद हो कर अच्छे लगने लगे। लेकिन नंगी और बेइज़्ज़ती से डर कर मैंने खुद को संभाला और अपनी फुद्दी और चूतड़ों से हाथ हटाते करते दुकान की तरफ बढ़ने लगी।
अभी दुकान बस 15 कदमों की दूरी पर थी कि पीछे से एक बड़ा हाथ बढ़ा और उसने मेरे ठीक नीचे अच्छी तरह सेट हो के एक मर्दाना झटके से मुझे उठा लिए और आगे बढ़ने लगा। मैं बहुत सहम गई कि अब तो मेरा काम तमाम होना और बेइज्जती पक्की है.पर जब मैंने पीछे मुड़ के देखा तो मेरी जान में जान आ गयी क्योंकि वो कोई और नहीं ढिल्लों ही था।मेरे मुंह से अपने आप निकला- ओह, ढिल्लों, मेरी जान, बचा लिया।
तभी ढिल्लों ने अपना रिवॉल्वर निकाल कर भीड़ को सिर्फ इतना कहा- चलो ओए, तितर बितर हो जाओ।और भीड़ गिरती पड़ती बिखर गई और उसने मुझे नीचे उतार दिया।
इसके बाद वो मुझे उस दुकान पर के गया और पीछे आते अपने दोस्तों को हाथ उठा कर आवाज़ लगाई। वो तीनों जब हमारे पास आये तो मुझे देखते हो रह गए। सभी ने मुझसे अपने हाथ मिलाये और मेरा हालचाल पूछा।उन तीनों में से दो तो लगभग ढिल्लों जितने ही लंबे थे और तीसरा उनसे छोटे कद का था, लेकिन उसका कद भी 6 फ़ीट के आसपास ही होगा।
तभी उनमें से एक जिसका नाम जग्गी था, ने मुझे देख ढिल्लों को कहा- इस बम्ब पटोले को कहाँ से ढूंढा? ऊपर से नीचे तक तराशी हुई है।ढिल्लों ने उससे कहा- चुप कर साले, भाबी है तेरी … हां, मैंने इसे नहीं, इसने मुझे ढूंढा है, सोंह रब्ब दी, बड़ी लाटरी लग गयी इस बार तो।
तभी उसमें से छोटे कद वाले जिसका नाम गिल था (जनाब ये सब बदले हुए नाम हैं), ने मुझे अपना कोट उतार कर पहना दिया और बोला- ढिल्लों कमीने, नंगी को ही ले आता इससे तो, भैनचोद कुछ पहना तो देता, देख कैसे ठंड लग रही है इनको। और काम भी ये तेरा ही है साले हब्शी।
यह सुन कर ढिल्लों ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा और कहा- तुम लोगों की नई भाभी को मेले को दिखाना था, दुनिया को जला रहा था, साले आज आधे घर जाकर मुठ्ठ मारेंगे।
वे ऐसे बेतकलुफ्फ होकर बातें करने लगे जैसे मैं कोई लड़का हूँ, मुझे थोड़ी शर्म महसूस हुई।यह देख कर वो चुप हो गए और हम सब हल्की फुल्की बातें करते मेले में टहलने लगे। ढिल्लों के दोस्त किसी न किसी बहाने मुझे टच करते ही रहे और ढिल्लों से डबल मीनिंग बातें करते रहे।तभी हम लोग एक चूड़ियों की दुकान पर रुके और ढिल्लों ने मुझे ना-नुकर करती हुई को भी एक लाल चूड़ा पहना दिया, ये उसने क्यों किया इसका जवाब उसने नहीं दिया और सिर्फ इतना बोला कि अच्छा लग रहा है।

F
1 घंटा घूमने के बाद हम वापिस गाड़ी की तरफ चले और ढिल्लों ने अपनी कार का दरवाज़ा खोल कर मुझे अंदर बिठा दिया और मैंने गिल को उसका कोट वापस लौटा दिया।इसके बाद तो वो चारों 20-25 मिनट बीयर पीते हुए पता नहीं क्या बातें करते रहे।
इसके बाद ढिल्लों अकेला आया और कार चलाने लगा।“तेरे रूम में ही चलना है कि कहीं और लेके चलूं?”“जहां तेरी मर्ज़ी मुंडया, पर सवेरे 7 बजे तक रूम में ओके?”उसने ‘ठीक है!’ कहा और गाड़ी चलाने लगा.
और 25-30 मिनट के बाद हम एक बड़े फ्लैट में थे; देखकर ही पता चलता था कि किसी शौकीन आदमी का फ्लैट है। दीवारों पर काफी हथियार टंगे हुए थे और फर्नीचर बेहद बेहद महँगा था।तभी उसने मुझे फिर उठाया और एक कमरे में ले गया और दूर से ही एक बड़े बेड पर पटक दिया।
दोस्तो रूम देख कर मेरी आँखें खुली की खुली रह गईं, बहुत ही महँगा फर्नीचर और बेड पूरा बड़ा और गिरते ही मैं गद्दों से दो बार उछली। मुझे अब पता था कि इन मखमली गद्दों पर चुदने का बहुत मज़ा आएगा।वैसे तो मैं भी बहुत बड़े घर की हूँ, लेकिन ऐसे इम्पोर्टेड गद्दे मैंने आजतक नहीं देखे थे। गद्दे में मैं पूरी धंस कर लेट गयी और ढिल्लों ने फिर सही कोण बना का कर ट्राइपॉड और कैमरे फिट कर लिए।
ढिल्लों ने मुझे यकीन दिलाया था कि इसमें सिर्फ हमारा लंड और फुद्दी का खेल ही आएगा और चेहरे नहीं आएंगे।
और फिर मुझ से कड़क के बोला- चल नीचे उतर के बाथरूम जा और अपनी फुद्दी अच्छी तरह से धोकर आ।मैंने निकर को वहीं कमरे में उतारने की बहुत कोशिश की मगर सब बेकार … और थक कर उससे कहा- ये निकर तो उतार दो जानू … बहुत टाइट है, उतर ही नहीं रही।
“भेनचोद तेरा पिछवाड़ा कितना बड़ा है साला, फंस गयी है और मैंने इतनी टाइट नहीं मंगवाई थी, तेरे साइज़ ही बड़ा निकला उम्मीद से भी।” यह कहकर उसने मुझे बेड पर फिर लिटाया और सांप की कुंज की तरह निकर उतार फेंकी.और निकर उतारते ही तीन उंगलियां फुद्दी में पिरो दी और बहुत जोर जोर से पूरी निकाल के 3-4 बार अंदर बाहर कीं जैसे फुद्दी में से कुछ निकालना चाहता हो और अचानक मुझे छोड़ दिया। मैं उसके इस वार से हिल गयी, ये तो शुक्र था कि चूत पूरी तरह पनियायी हुई थी, वरना सारी फुद्दी छिल जाती।
मैं चुपचाप नीचे उतर गई और साथ अटैच बाथरूम में गर्म पानी से अपनी फुद्दी और बुंड अच्छी तरह से अंदर बाहर से धोयी।
जब बाहर निकली तो हब्शी ने आते ही बेड पर मेरी एक पटखनी लगाई और पूरी जीभ फुद्दी के अंदर धकेल दी और अपनी सबसे लंबी उंगली थूक लगा के बुंड में पिरो दी।मैं पागल हो गयी और मेरी कमर अपने आप हिलने लगी। मेरी इस हरकत से उसको और जोश आ गया और वो और ज़ोर से मेरी फुद्दी पीने लगा। वो इस तरह मेरी चाट जैसे उसे पूरी भूख और प्यास लगी हो!
चटवायी तो मैंने बहुत है मगर इस तरह साली किसी ने डीक लगा कर नहीं पी थी।
5-7 मिनट लगे और उछल उछल के झड़ी लेकिन उसने मेरा वीर्य नहीं पिया और झड़ते वक़्त एकदम मुंह निकाल के हाथ का चप्पा (चार उंगलियाँ) चढ़ा दिया था। जब मैं झड़ी तो कमान की तरह टेढ़ी हो गयी थी।
इस 6-7 मिनट के छोटे से खेल के कारण ही मेरा मुंह सूखने लगा और मैं बुरी तरह हांफने लगी- हूं, हूँ, हूँ …यह आवाज़ 3-4 मिनट तक मेरे मुंह से निकलती रही। सेक्स में इतना मंझा हुआ खिलाड़ी मैंने आज तक नहीं देखा था।
तभी वो मेरी तरफ हंसते हुए बोला- बड़े जोर नाल झड़दी एं, झोटीए (बड़े जोर के साथ झड़ती हो… भैंस जैसी), काम बहुत है तेरे अंदर, मुंह तो देख अपना, जैसे शेरनी के मुंह को खून लगा हो।

चटवायी तो मैंने बहुत है मगर इस तरह साली किसी ने डीक लगा कर नहीं पी थी।
5-7 मिनट लगे और उछल उछल के झड़ी लेकिन उसने मेरा वीर्य नहीं पिया और झड़ते वक़्त एकदम मुंह निकाल के हाथ का चप्पा (चार उंगलियाँ) चढ़ा दिया था। जब मैं झड़ी तो कमान की तरह टेढ़ी हो गयी थी।
इस 6-7 मिनट के छोटे से खेल के कारण ही मेरा मुंह सूखने लगा और मैं बुरी तरह हांफने लगी- हूं, हूँ, हूँ …यह आवाज़ 3-4 मिनट तक मेरे मुंह से निकलती रही। सेक्स में इतना मंझा हुआ खिलाड़ी मैंने आज तक नहीं देखा था।
तभी वो मेरी तरफ हंसते हुए बोला- बड़े जोर नाल झड़दी एं, झोटीए (बड़े जोर के साथ झड़ती हो… भैंस जैसी), काम बहुत है तेरे अंदर, मुंह तो देख अपना, जैसे शेरनी के मुंह को खून लगा हो।अब आगे:
फिर उसने अपनी जेब से रुमाल निकाला और मेरी फुद्दी और गांड को अच्छी तरह से पौंछ दिया।
इतने ज़ोर से झड़ने के बाद अब मुझमें हिम्मत नहीं थी कि फौरन चुदाई के लिए तैयार हो जाऊं। मैंने ढिल्लों से विनती की- प्लीज़ जानू, 10-15 मिनट रुक जाओ, सारी ताकत तो फुद्दी से तेरे चप्पे और मुंह ने निकाल ली। बड़ी बुरी तरह से उंगलियां डालता और मुंह से चूसता है यार तू, सारा नशा उतर गया, कुछ पिला दे पहले, अब बाहर तो नहीं ले के जायेगा?वो बोला- अब नहीं जाना, जितनी पीनी है पी ले, जल्दी तैयार हो जा, मेरे पास सबर नहीं है इतना!
इस बार उसने ड्रावर में से विस्की की बोतल निकाली और एक पटियाला पेग भर के मुझे दे दिया, विस्की बहुत कड़वी थी, मैंने फिर नाक बंद किया और बड़े बड़े घूंट भर के एक सांस में पी गयी। मुँह एकदम कड़वा हो गया तो मैंने उससे कुछ खाने के लिए मांगा, तो उसने कहा- अभी कुछ नहीं है।
मुँह का कड़वापन मेरी जान ले रहा था, तभी मेरे दिमाग में पता नहीं क्या कि मैंने एक झटके से ढिल्लों की पैंट खोली और नीचे उतारी और उसका लंड मुँह में भर के चूसने लगी। मैं उससे अपनी चूत इतने बुरे तरीके से चाटने का बदला देना चाहती थी और मेरा मुँह भी बहुत कड़वा था।
लंड जनाब का खड़ा ही था; मैंने पहले तो उसके टोपे को अच्छी तरह से चाटा, फिर भर लिया मुँह में उसका काला लौड़ा, मैंने कभी इतनी जोर से किसी का नहीं चूसा था. मैंने आंखें बंद कर लीं और टोपे तक मुँह ले आती और फिर पूरे ज़ोर से मुंह खोल कर जितना मुँह के अंदर लिया जाता, ले जाती।मुँह के झटके मैंने मुठ्ठियां भींच कर मैंने तूफानी रफ्तार में शुरू कर दिया।
मैं चाहती थी कि वो झड़ जाए ताकि मुझे थोड़ा वक्त मिल सके खुद को तैयार करने में। लेकिन वो झड़ा नहीं, 10 मिनट में मेरे जबड़े दर्द करने लगे. फिर भी मैंने हार न मानते हुए टोपे से लेकर उसका लौड़े पर इस तरह इस तरह मुँह का झटका मारा कि लौड़ा मेरे हलक तक चला गया। मुठ्ठियां एक और बार भींची और फिर एक बार पूरा निकाला और हलक तक ले गयी.
तीसरी बार की हिम्मत नहीं थी, लेकिन फिर भी जट्टी थी, उसकी जांघों को कस के पकड़ा और तीसरी बार फिर पूरा निकाल के हलक में ठूंस लिया।लेकिन फिर भी वो न झड़ा तो मैंने उसे हलक में फंसाये ही अपना मुंह हिलाना जारी रखा।
मेरे जबड़े अब बहुत तेज़ दर्द करने लगे, जिसकी वजह से मैंने हलक से लौड़ा निकाल लिया। लेकिन उसका काम नहीं हुआ। मैं बहुत तेज़ तेज़ खाँसने लगी। वो मेरे पास आया और मुझे पानी का गिलास दिया और मेरे मम्मे और फुद्दी धीरे धीरे मसलने लगा लेकिन इस बार मैं गर्म न हो सकी।
पिछले 4 घण्टों में मैं 3 बार तृप्त हो चुकी थी जिसकी वजह से मेरे काम की आग अब ठण्डी पड़ गई थी, यानि कि मेरा बाजा पहले से ही अच्छी तरह से बजाया जा चुका था।उसने दो-चार मिनट और कोशिश की लेकिन मैं पूरी तरह गर्म न हो सकी। दारू का नशा अब मेरे सिर चढ़ के बोल रहा था और अब मैं सीधी खड़ी नहीं हो सकती थी।कुछ और कोशिश करते ढिल्लों बोला- बस जट्टीये, इतनी ही ताकत थी तेरे अंदर, बड़ी जल्दी हार मान गयी तू तो?
मैंने जवाब दिया- ढिल्लों जान थोड़ा वक्त तो दे, सारा सिस्टम ही हिला दिया है मेरा, मेरी ऐसी तसल्ली पहले कभी न हुई थी। रौंद रौंद कर तो तूने कुश्ती खेली है मेरे साथ, हूँ तो फिर भी औरत ही, कोई और होती तो भाग जाती, लेकिन जट्टी अभी भी मैदान में है, बस थोड़ा वक्त दे प्लीज़, इतना तो कुश्ती के असल खिलाड़ियों को भी मिलता है, जबकि ये कुश्ती नहीं, उससे भी मुश्किल खेल खेल रही हूं आज मैं।
ढिल्लों मुस्कराया और बोला- बड़ी धड़ल्लेदार औरत हो, कोई बात नहीं तू आराम से ऊपर चढ़ जा बेड पर और आराम कर ले, अगला राउंड अब और ज़बरदस्त होगा, देखती जाना, और हां, तब मुझे पूरा जोर चाहिए और अगर 35-40 मिनट से पहले हार मानी तो देख लेना।”

मैं बेड के किनारे से उठी और उस मखमली बेड की बेक पर सिरहाना लगा कर बैठ गई और अपने ऊपर चादर चढ़ा ली। तभी मैंने एक बार फिर चोरी चोरी अपनी फुद्दी का मुआयना किया। हाथ लगा कर देखा तो उंगली सीधी फुद्दी के अंदरूनी हिस्से से जाकर टच हुई जैसे उसका बाहरी भाग तो खत्म ही हो गया हो। उसने इन 2-3 वारों से ही मेरी फुद्दी को चौड़ा कर दिया था।
मेरे मुंह से एक सिसकारी सी निकली और सोचा कि अगर ढिल्लों से चुदती रही तो ये फुद्दी को कुछ और ही बना डालेगा।
घड़ी में देखा तो 8:30 बज चुके थे, तभी मैंने अपना फोन उठा कर अपने पति को लगाया। उसने कहा- कहाँ हो रानी क्या कर रही हो?”मैंने कहा- जानू रूम में हूं और बड़े ज़ोरों से पढ़ाई (चुदाई) चल रही है।उसने कहा- तुझे एक बार फिर पढ़ाई का शौक कैसे चढ़ गया, देख मेरे लंड की हालत बहुत बुरी हो रही है, आज की रात तो मुश्किल से ही गुज़रेगी, चल कोई बात नहीं, तुझे पढ़ना है तो पढ़ ले। कुछ पेपरों की ही बात तो है।
मैंने जवाब दिया- पढ़ाई (चुदाई) का शौक तो मुझे शुरू से ही था, लेकिन ये 2 साल मैं तुम्हें ही देना चाहती थी, अब सोचा कि एम ए तो कर ही लूँ और उसके बाद एक जॉब तलाश कर करूं, घर में बोर हो जाती हूँ सारा दिन!तभी उसने कहा- चलो कोई बात नहीं, पढ़ ले तू, मैं थोड़ी देर में फिर करता हूं, पेग लगा रहा हूं, बहुत ठंड हो गई है, बाय।
ढिल्लों बातें सुन कर मुस्कुराता रहा और अब उसने कहा- साली, बड़ी चालू औरत है, देख उसको कैसे फुद्दू बनाया है।इसके बाद ढिल्लों मेरे पास आ गया और मुझे बांहों में भर के कुछ हल्की फुल्की बातें करता रहा और मेरे भरे हुए जिस्म पर हाथ फेरता रहा। हालांकि कोई होता और तो मैं इतनी जल्दी तैयार न हो पाती, लेकिन ढिल्लों के फ़ौलादी हाथों की हरकतों से फुद्दी एक बार फिर गीली कर दी और मेरी आवाज कामुक हो गई।
मेरी आवाज से वो समझ गया कि जट्टी एक बार फिर कुश्ती के लिए तैयार है और उसने पक्का करने के लिए अपना एक हाथ नीचे सरका कर फुद्दी में एक उंगली पिरो दी और 2 दिन बार गोल गोल घुमाई।मैं गर्म तो हो गई थी लेकिन मेरी फुद्दी इस बार ज़्यादा नहीं पनिया पायी थी क्योंकि मेरे जिस्म का सारा रस तो वो पहले ही निचोड़ चुका था। इस बार चिकनाहट काम होने की वजह से मुझेपता था कि मेरी फुद्दी अब छिलने वाली है।
यह सोच कर मैंने उससे कहा- जानू मिन्नत है कि कुछ लगा लेना अपने हथियार पर, मुझे तो तुमने नीम्बू की तरह निचोड़ दिया है, पहली बार जट्टी को किसी ने ये कहने पे मजबूर कियाहै।उसने कहा- वैसे मूड तो यही था कि उधेड़ के रख दूं, लेकिन तेरे जैसी घोड़ी मस्ती में चुदती ही अच्छी लगती है।
तभी वो उठकर दूसरे कमरे में गया और एक अंडा उठा लाया और उसको एक गिलास में डाल कर बार बार हिलाया। जब वो पूरी तरह से घुल गया तो उसने मेरे ऊपर से चादर हटा के दूर फेंक दी और गिलास लेकर खुद मेरी टांगों में बीच में गया और दो उंगलियां अंडे से भिगो कर अंदर डाल दीं। अंडे की चिकनाहट की वजह से मुझे उसकी उंगलियां भी छोटे लंड जैसे लगीं। उसने बार उंगलियां और अंडे से भीगो कर अंदर बाहर कीं और मेरी मक्खन शेव फुद्दी को ज़बरदस्त तरीके से ग्रीस कर दिया।
उंगलियों की वजह से मैं एक बार फिर घोड़ी के तरह चुदने के लिए तैयार हो गई।
तभी उसने अपना सेक्स टॉय जो बच्चों की निप्पल जैसा था और जो गांड में जाकर एकदम फिट हो जाता था, उठाया और अंडे में डुबो कर मेरी गांड में ठूंस दिया।
तो दोस्तो, अब फिर एक बार मेरी ठुकाई की तैयारी पूरी हो चुकी थी, मेरे चोदू यार ने मेरी टाँगें एक बार फिर अपने डौलों पर धर लीं और मेरी तह लगा दी मगर उसने खुद लौड़ा अंदर नहीं डाला और मुझसे बोला- डाल जट्टीये अपने आप अंदर!मुझे यह बात बहुत पसंद है कि लौड़ा पकड़ कर मैं खुद अंदर डालूँ … पर ढिल्लों को यह बात पता नहीं कैसे पता थी।
खैर मेरे मन की यह छोटी सी मुराद पूरी हुई। मैंने हाथ नीचे ले जा कर उसके वज़नदार लौड़े को अपनी मुट्ठी में भर लिया और दो तीन बार ऊपर नीचे किया। ये मैंने इसलिए किया क्योंकि उस बड़े और मोटे गर्म लौड़े को अपने छोटे से हाथ में लेकर एक न बयान की जा सकने वाली तसल्ली मिलती थी।
इसके बाद मैंने उसे पकड़ कर अपनी फुद्दी पर ऊपर से नीचे तक 8-10 बार रगड़ा और फिर मुहाने पर रख कर नीचे से धक्का मारने की कोशिश की।मगर मैं असफल रही।ढिल्लों हंस पड़ा और फिर अचानक उसने अपनी कमर ऊपर उठाई और अपना खूँटा मेरी फुद्दी में जड़ तक पेल दिया। अंडे की चिकनाहट की वजह से मुझे बिल्कुल दर्द न हुआ और मेरे मुंह से अपने आप उसके कान में निकला- हाय ओऐ जट्टा, धुन्नी तक ला दित्ता। (हाय रे जाट … नाभि तक पहुंचा दिया.)
जाट और जाटनी की पेलम पेल कहानी जारी रहेगी.

तो दोस्तो, अब फिर एक बार मेरी ठुकाई की तैयारी पूरी हो चुकी थी, मेरे चोदू यार ने मेरी टाँगें उसने एक बार फिर अपने डौलों पर धर लीं और मेरी तह लगा दी मगर उसने खुद लौड़ा अंदर नहीं डाला और मुझसे बोला- डाल जट्टीये अपने आप अंदर!मुझे यह बात बहुत पसंद है कि लौड़ा पकड़ कर मैं खुद अंदर डालूँ … पर ढिल्लों को यह बात पता नहीं कैसे पता थी।
खैर मेरे मन की यह छोटी सी मुराद पूरी हुई। मैंने हाथ नीचे ले जा कर उसके वज़नदार लौड़े को अपनी मुट्ठी में भर लिया और दो तीन बार ऊपर नीचे किया। ये मैंने इसलिए किया क्योंकि उस बड़े और मोटे गर्म लौड़े को अपने छोटे से हाथ में लेकर एक न बयान की जा सकने वाली तसल्ली मिलती थी।
इसके बाद मैंने उसे पकड़ कर अपनी फुद्दी पर ऊपर से नीचे तक 8-10 बार रगड़ा और फिर मुहाने पर रख कर नीचे से धक्का मारने की कोशिश की।मगर मैं असफल रही।ढिल्लों हंस पड़ा और फिर अचानक उसने अपनी कमर ऊपर उठाई और अपना खूँटा मेरी फुद्दी में जड़ तक पेल दिया। अंडे की चिकनाहट की वजह से मुझे बिल्कुल दर्द न हुआ और मेरे मुंह से अपने आप उसके कान में निकला- हाय ओऐ जट्टा, धुन्नी तक ला दित्ता। (हाय रे जाट … नाभि तक पहुंचा दिया.)जब बिना किसी दर्द के ढिल्लों का पूरा लौड़ा अंदर चला गया तो मुझे ऐसी तसल्ली हुई जो बयान के बाहर है। तभी उसने फिर कमर ऊपर उठाई और पूरा लंड निकाल के फिर जड़ तक पेला और ऐसा 8-10 बार किया।ये गद्दे बहुत नर्म थे और जब ऊपर से धक्का मारता तो मैं नीचे उनमें समा जाती और जब वो अपनी कमर ऊपर उठाता तो मेरी कमर भी उसके साथ ही लगभग एक-सवा फुट ऊपर चली जाती और जब वो पूरी तरह ऊपर उठती तो ढिल्लों ऊपर से एक और बड़ा झटका मार देता और जब इस तरह होता तो फुद्दी लौड़े की तरफ जाकर इस झटके को और तीखा बना देती थी।
अब वो लंबे लंबे झटके मार रहा था मगर हर झटके के बीच में वो लगभग एक सेकंड जितने समय के लिए रुक जाता और जब फुद्दी ऊपर आ रही होती तो पूरा निकाल के फुद्दी में मारता और उसे नीचे धकेल देता।जब वो घस्सा मारता तो हर घस्से में साथ मेरे मुंह से निकलता- हाय, मेरी माँ, हाय मेरी माँ!
अब तक उसने मेरी चुदाई इसी पोज़ में की थी, शायद इसलिए कि इस तरह करने से वो मेरे बिल्कुल ऊपर होता था तो और मुझे हिलने का भी मौका नहीं मिलता था और इस पोज़ में बहुत लंबी चुदाई भी की जा सकती थी।तो दोस्तो, 10-15 मिनट तक वो इसी पोज़ में मुझे उछल उछल कर चोदता रहा और मैं हर घस्से के साथ ‘हाय मेरी माँ …’ मेरे मुंह से निकलता रहा। व्हिस्की के पेग का नशा बहुत ज़्यादा हो गया था और अब कमरा मेरी अधखुली आंखों में घूमने लगे।
तभी उसने अचानक मुझे अपने ऊपर खींच लिया। अब आलम यह था कि हम दोनों ही बैठे हुए थे लेकिन मेरी टाँगें उसकी जांघों के ऊपर थीं और मैं उसके फ़ौलादी लौड़े को अपनी फुद्दी में जड़ तक पेल कर बैठी थी।दारू के नशे की वजह से मुझ में हिलने की भी हिम्मत नहीं थी।
तभी वो बोला- अपने आप मार घस्से जट्टीये, देखता हूं कितना दम है।मुझे यह सुन कर थोड़ा जोश चढ़ गया और मैंने उसे कस कर अपनी बांहों में भर कर अपनी कमर को उठा कर 7-8 बार उसके लौड़े पर जोर से मारा।और लो जी मेरे मुंह से बहुत ऊंची ऊंची ‘हाय मेरी माँ, गई मैं तो …’ निकलते हुए हो गया मेरा काम!
मुझे खुद पर गुस्सा आ रहा था कि मैं इतनी जल्दी क्यों झड़ जाती हूँ, शायद ये उसके लौड़े की चौड़ाई और लंबे के कारण ही था, यह सोच कर मैं उसी तरह उसका लौड़ा जड़ तक फुद्दी के अंदर फंसाये बैठी रही। मुझमें अब इतना दम नहीं था कि खुद चुदाई कर सकूं।

तभी ढिल्लों बोला- बस इतना ही दम था जट्टीये, बातें तो बड़ी बड़ी कर रही थी?तभी मैंने अपनी बेहद उलझी हुईं सांसें संभाल कर उसे प्यार से कहा- ढिल्लों, बहुत टिका-टिका के मारी है यार तूने, इतना बड़ा भी पहले कभी नहीं लिया था, और दारू भी कितनी पिला दी, लेकिन देख ले फिर भी डटी हुई हूँ, फुद्दी जितनी मर्ज़ी मार ले, मोर्चे से नहीं हटूंगी, पर मारेगा तू ही, मुझमें बिल्कुल दम नहीं बचा है, अभी अभी 1 बार झड़ के हटी हूँ.
“ओह … वाह ठीक है, फिर डटी रहना!” ये कहकर वो मुझे उसी तरह लंड अंदर किए बेड से उतर गया और 1 पल के बाद जब मैंने देखा कि वो मेरी बड़े और बेहद गोल पिछवाड़े को अपने हाथों में भर के खड़ा है तो मेरी हैरानी की कोई हद न रही। मेरे जैसी हैवी गाड़ी को इस तरह उठाना आसान काम नहीं है। हैवी इसलिए कि मैं बेहद भरे हुए बदन की हूँ। कद चाहे थोड़ा छोटा है मगर बड़े बड़े मम्मे और जाँघें हैं मेरी।
रूपिंदर कौरऔर उस हब्शी जट्ट ने अब क्या किया था कि लौड़ा अंदर फंसाये ही वो मुझे लेकर के खड़ा हो गया था और इससे भी आगे खड़ा ही नहीं चार पांच कदम चल कर मेरे पिछवाड़े को कैमरे के आगे भी ले गया था। अब मैं उससे इस तरह लिपटी हुई थी जैसे कि कोई बेल हूँ, ऊपर से मैंने उसे जफ्फी डाली हुई थी और नीचे मेरा पिछवाड़ा उसके दो हाथों में था, फुद्दी में लौड़ा और गांड में निप्पल अटकी हुई थी और टाँगें नीचे लटक रही थीं।
इस पोज़ में चुदने की मेरी सदियों से इच्छा थी क्योंकि मैंने बहुत सारी ब्लू फिल्मों में घोड़ियों (मज़बूत लड़कियों को मैं घोड़ियां ही कहती हूँ) को इस तरह चुदते हुए देखा था। मैंने अपनी पति और दो-एक आशिकों को ऐसे चुदने के लिए भी बोला था, लेकिन आशिक तो मुझे उठा ही नहीं पाए और पति ने उठा तो ली लेकिन घस्से 2 ही मार सका और हम गिरते गिरते बचे।
अब वो बोला- आ जा जट्टीये, फिर मैदान में!और यह कहकर उसने अपने हाथों से मेरे गोल तरबूजी पिछवाड़े को ऊपर उठाया और पूरा लौड़ा टोपे तक बाहर निकाल के जड़ तक पेल दिया। एक बहुत ऊंची ‘फड़ाच’ की आवाज़ आयी और सुनसान कमरे में भर गई, यह आवाज़ मेरे चूतड़ों और उसकी जांघों की ही नहीं थी, मेरी फुद्दी की भी थी।
अब मेरे मुंह से निकला- जान ले ली ढिल्लों, स्वाद आ गया सोंह रब्ब दी।(भगवान की कसम)वो बोला- तो ले फिर और लूट मज़े जट्टीये!यह कहकर उसने फिर मेरा पिछवाड़ा उसी उठाया और मेरी फुद्दी को अपने लौड़े पर ज़ोर से दे मारा और फिर रुक गया। फिर वही आवाज़ आयी, फड़ाच और मेरे मुंह से निकला- अज्ज चक्क दित्ते फट्टे जट्टी दे, ओए ढिल्लों।
अब ढिल्लों ने अपनी रफ्तार तेज़ कर दी और मेरी गांड को पीछे लेकर वो और तेज़ी से घस्से मारने लगा। जनाब इसे चुदाई नहीं कहते। ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरी फुद्दी से कोई दुश्मनी निकाल रहा हो लेकिन इससे मुझे तकलीफ नहीं हो रही थी बल्कि एक असीम आनंद मिल रहा था।
मेरे जिस्म का सारा भार मेरी फुद्दी पर था और वो एक हल्लबी लौड़े के उपर किसी छल्ले की तरह लिपट गयी थी। ढिल्लों जब दूर ले जा कर लौड़े को फुद्दी के अंदर बेरहमी से मारता तो मेरे मुंह से पता नहीं क्या क्या अनाप शनाप निकल जाता जैसे कि- हाय मर गई … नज़ारा आ गया … चक्क ता कम्म ओए… हाय … मेरे शेरा!वगैरा वगैरा।
तभी उसके हाथों के साथ मैं खुद कमर हिला के देने लगी और जितने ज़ोर से मेरी फुद्दी उसके लौड़े पर पर बज सकती थी, मारी। तभी एकदम मैं फिर अकड़ गई और मेरी फुद्दी “बूम बूम बूम” करके झड़ी। मेरा काम होते वक़्त मेरे से मुंह से बहुत ऊंची आवाज़ निकली- फिर आ गयी घोड़ी तो, हम्म … हुम्म … हंह हूँ।
अब जी करता था कि ढिल्लों मुझे छोड़ दे … मगर वो कहाँ मानने वाला था। मैंने मैदान में डटी रहने का वादा किया था और मैं वादा नहीं कभी नहीं तोड़ती चाहे दुनिया इधर की उधर हो जाये। जब मैं हिल हिल कर झड़ गई तो उसके बाद ढिल्लों ने मुझ पर थोड़ा रहम करके अपनी गति कम कर दी और धीरे मगर वही लंबे शॉट मरता रहा। मैं उसकी ताकत से बलिहारी जा रही थी क्योंकि इसी पोज़ में चोदते हुए उसे 20-25 मिनट हो चुके थे मगर उसकी घस्सों में कोई कमी नहीं आयी थी।
वैसे आपको बता दूं कि जनाब ये चुदाई नहीं होती जो वो मेरी कर रहा था, ये हार्डकोर ठुकाई होती है और इसके दोनों औरत और मर्द का धडल्लेदार होना ज़रूरी है नहीं तो ये ठुकाई नहीं दर्द बन जाती है।
जैसे कि मैंने बताया कि अब वो मेरी बिल्कुल धीरे धीरे चुदाई कर रहा था। मेरे काम रस की वजह से उसके टट्टे भी भीग गए थे। मेरी फुद्दी के पानी और अंडे ने मिल कर फुद्दी को बिल्कुल ग्रीस कर दिया था और उसमें फंसा हुआ काला बादशाही लौड़ा मेरी बहुत अच्छी सर्विस कर रहा था जिसकी मुझे जन्मों से ज़रूरत थी।

जब मेरी अकड़ी हुई पंजाबी फुद्दी का मिलन उसके भारी भरकम लौड़े से होता तो ‘पड़ाच …’ की आवाज़ कमरे में गूँज जाती। अब मुझे ये तो यकीन हो गया था कि अब मेरी फुद्दी उसके लौड़े के आकार से ढल गई है और मेरी उससे आगे होने वाली ठुकाइयों में दर्द का नामोनिशान तक नहीं होगा और सिर्फ़ मज़ा ही मज़ा होगा।
10-12 मिनट वो इसी तरह मुझे उठाये धीरे धीरे चुदाई करता रहा और इस तरह से घोड़े ने अगले राउंड के लिए थोड़ी ताकत भी जमा कर ली थी। अब उसका थोड़ी सांस चढ़ गई थी। तभी उसने मेरी मेहंदी लगी जांघ को अपनी फ़ौलादी बाहों पर उठाया और मेरी फुद्दी को ज़ोर से अपने लौड़े पर मारा, आवाज़ आयी ‘फड़ाच’ और मेरे मुंह से निकला- हाय, मेरी जान!
मैं अभी गर्म तो नहीं हुई थी लेकिन दर्द न होने की वजह से मैंने उसे कहा- चक्क दे कम्म, ढिल्लों, फुद्दी तेरे हवाले ही है।ढिल्लों यह सुन कर खुश हुआ और उसने अपनी पूरी ताकत इकठ्ठी कर के मुझे पेलना शुरू कर दिया और मार मार घस्से मेरी गांड लाल कर दी। आवाज़ आ रही थी- थक, थक, थक, थक!और मेरे मुँह से निकल रहा था- हूं … हूं … हूं …
जब उसने इसी तरह 40-50 तूफानी घस्से मारे तो मैं भी जोश में आ गयी और उसकी ताकत पे पूरा भरोसा करके अपनी नीचे लटकी हुई टाँगें उसकी कमर के गिर्द लपेट दीं और अपनी जफ्फी हटा कर उसके कंधों पर दोनों हाथ धर लिए और उसकी आँखों में अपनी अधखुली आंखें डाल कर टिकटिकी लगाए उसे चैलेंज की तरह उसे देखने लगी।
तभी ढिल्लों बोला- घोड़ीए, थक गया, रुक ज़रा!यह कहकर उसने मुझे नीचे उतार कर बेड के किनारे लिटा दिया और कपड़े से मेरी फुद्दी और अपना लौड़ा अच्छी तरह से साफ कर लिया।फिर उसने मेरी गांड में से वो छोटा सा खिलौना निकाल दिया, जो पूरी तरह फिट था।
रूपिन्दर कौर के चूतड़और जब उसने मुझे दूसरी बार फिर अपनी बाहों में उठाया तो मुझे अपनी गांड खाली ख़ाली लगी। इस बार ढिल्लों से मुझे उठाकर एक झटके से लौड़ा मेरी फुद्दी के अंदर पेल दिया और इतनी जोर से ठुकाई करने लगा कि मेरे जिस्म का रोम रोम हिल गया। घस्से वो मेरी फुद्दी पर मार रहा था लेकिन महसूस मेरा सारा जिस्म कर रहा था। उसका हरेक तूफानी शॉट मेरे जिस्म में करंट की तरह फैल रहा था।
इस घमासान चुदाई के कारण मेरा मुंह पूरी तरह खुल गया और अब आ … आ… आह … आह … की लगातार आवाज़ निकल रही थी। मेरे जोश को देख कर वो पागल हो गया और उसी तरह लगातार मेरी आँखों में आंखें डाल कर मुझे चोदता रहा।
तभी उसने अपनी एक बड़ी उंगली मेरे थूक से गीली करके पीछे ले जाकर कर मेरी गांड में पेल दी तो मुझे जन्नत मिल गयी।8-10 मिनट की इस जंगी चुदाई में मेरी टाँगें अपने आप उसकी पीठ पर लिपट गईं और हम दोनों एक दूसरर की आंखों में आंखों डाल कर बहुत ज़ोरों शोरों से झड़े। इस पोज़ में भी घोड़े ने अपना माल (जो कि काफी होगा) मेरी फुद्दी के बहुत अंदर निकाला जिसकी गर्मी पाकर आपकी जट्टी धन्य हो गई।
ढिल्लों ने हांफते हुए मुझे बेड पर उतारा और खुद मेरी बगल में लेट कर कहा- कमाल की घोड़ी है यार तू … तुझे अपना पूरा ज़ोर लगा कर पेला, मगर तूने टांग नहीं उठाई, सचमुच मज़ा आ गया। बड़ी करारी फुद्दी है तेरी! और हां तेरी फुद्दी ही नहीं, तेरी गांड भी मेरी है, लेकिन उसका उद्घाटन अगली बार!
अपनी यह तारीफ सुन कर मैं बहुत खुश हुई और उससे कहा- देखता जा ढिल्लों, तेरी इस जवान घोड़ी में बहुत ताकत है, बस तू मोर्चे पर डटे रहना, मैं तो हिल हिल के चुदूँगी तेरे से … मेरी फुद्दी में आग है आग, और वो सिर्फ तू ही बुझा सकता है अब जैसे कि इस बार बुझाई, थैंक्यू यार तेरा, बड़ी टिका के मारी है जट्टी की।

प्रिय दोस्तो आपको मेरी चुदाई स्टोरी कैसी लगी जरूर बताएं।

घमासान चुदाई के कारण मेरा मुंह पूरी तरह खुल गया और अब आ … आ… आह … आह … की लगातार आवाज़ निकल रही थी।तभी उसने अपनी एक बड़ी उंगली मेरी गांड में पेल दी तो मुझे जन्नत मिल गयी और हम बहुत ज़ोर से झड़े। इस पोज़ में घोड़े ने अपना माल मेरी फुद्दी के बहुत अंदर निकाला जिसकी गर्मी पाकर आपकी जट्टी धन्य हो गई।
ढिल्लों ने हांफते हुए मेरी बगल में लेट कर कहा- कमाल की घोड़ी है यार तू … तुझे अपना पूरा ज़ोर लगा कर पेला, मज़ा आ गया। बड़ी करारी फुद्दी है तेरी! और हां तेरी गांड भी मेरी है, लेकिन उसका उद्घाटन अगली बार!
अपनी तारीफ सुन कर मैं बहुत खुश हुई और उससे कहा- देखता जा ढिल्लों, तेरी इस जवान घोड़ी में बहुत ताकत है, बस तू मोर्चे पर डटे रहना, मैं तो हिल हिल के चुदूँगी तेरे से … मेरी फुद्दी में आग है आग, और वो सिर्फ तू ही बुझा सकता है अब जैसे कि इस बार बुझाई, थैंक्यू यार तेरा, बड़ी टिका के मारी है जट्टी की।एक बार फिर बुरी तरह चुदने के बाद मैं निढाल हो कर बेड पर लेट गई। इतनी रूह से मेरी फुद्दी कभी किसी ने नहीं मारी थी और ऊपर से मुझे विहस्की का भरपूर नशा था। रात के 11 बज चुके थे और अब मेरी आँखों में नींद उतरने लगी थी इसीलिए मैं आँखें बंद करके चादर ऊपर तान कर लेट गई।आंखें बंद की तो कमरा घूम रहा था क्योंकि मैंने पहले कभी इतनी दारू नहीं पी थी।
ढिल्लों अब भी थोड़ी थोड़ी दारू पी रहा था और इसी तरह वो बाथरूम में घुस कर नहा कर आया।तभी उसने मुझे बुलाया- ओये रूपिंदर, नींद आ रही है? चल उठा कर नहा ले, कुछ खाया भी नहीं तुमने, मैं मंगवाता हूँ कुछ खाने के लिए, चल उठ जा।मेरा उठने का न तो मूड था और न ही हिम्मत थी- नहीं ढिल्लों, बस मुझे सोना है, बहुत नींद आ रही है, बड़ी ज़्यादा पिला दी तूने, कमरा घूम रहा है।
रूपिंदर कौरढिल्लों को मेरी हालत का अंदाज़ा था, शाम पांच बजे से वो मुझे लगातार दारू पिला रहा था और 3 बार मुझे हब्शियों की तरह चोद चुका था। उसे पता था कि अब मुझे किस चीज़ की ज़रूरत है, इसीलिए उसने काली अफीम की एक बड़ी गोली बना के मुझे दी और मुझसे कहा- ये खा ले, दारू का नशा, नींद और थकावट सब उतर जाएगा और इसकी जगह जोश आ जाएगा।मैंने उससे गोली ली और पानी के गटक ली।
इसी दौरान उसने चिकन आर्डर किया और अपनी किसी गर्लफ्रैंड से 15-20 मिनट बातें करता रहा। जब मैंने उसे उसकी गर्लफ्रैंड के बारे में पूछा तो उसने बताया- सुंदर तो काफी है, फिगर भी अच्छा है, मगर मैंने बहुत कोशिश की, आधा ही अंदर ले पाती है। एक बार मैं इसे अपने फार्महाउस पे गया था, नशा भी काफी दिया, मगर जब मैंने दो-तीन बार ज़बरदस्ती पेल दिया तो उसने मेरी बाँह पर बुरी तरह काट लिया और नीचे से निकल कर कमरे से बाहर नंगी ही दौड़ गई। मेरे सभी दोस्त बाहर बैठे पार्टी कर रहे थे। उन्होंने उसे कपड़े वगैरा दिए और घर छोड़ कर आये। इसकी वजह से मुझे अपने दोस्तों से बहुत गालियां सुनने को मिलीं। मैंने इसे बहुत पैसे खिलाये हैं, अब ये मुझसे चुदना भी नहीं चाहती और उल्टा प्यार का बहाना बना कर पैसे भी मांगती है। इसके जैसे ही कई औरतें मेरे लौड़े को बर्दाश्त न करके भाग खड़ी हुईं है।मैंने इसका कारण अपने एक डॉक्टर दोस्त से पूछा तो उसने बताया कि आम तौर पर औरतों की योनि की गहराई 7-8 इंच ही होती है जिसके कारण वो 6-7 इंच से ज़्यादा नहीं ले पाती लेकिन बहुत कम औरतों की फुद्दी की गहराई 11-12 इंच से भी ज़्यादा होती है, उन्हें बड़े लौड़ों से ही मज़ा मिलता है, जैसे कि तू। जब तूने मुझे अपनी सारी कहानी बताई थी तो मैं समझ गया था कि तुझे बड़े लौड़े की ज़रूरत है, इसीलिए तू कई मर्द बदल चुकी है। और एक बात सच बताऊं तो मुझे भी तेरे जैसी औरत की ही ज़रूरत थी जिसे मैं अपने पूरे जोश से ठोक सकूँ। वैसे तू अगर कुंवारी होती तो शायद मैं तुझसे शादी भी कर लेता। मगर अब तू काफी आगे निकल चुकी है और शायद सेक्स के मामले में तू मुझसे भी आगे निकल जाए। मुझसे मिल कर तू अब एक बेलगाम घोड़ी बन चुकी है और सारे रिकॉर्ड तोड़ कर ही तू दम लेगी।
मैं ढिल्लों की बातें सुन कर बहुत हैरान हुई और मैंने उसे जवाब दिया- नहीं ढिल्लों मेरी जान, मुझे जो चाहिए था, मिल गया। अब मैं सिर्फ तेरी गुलाम हूँ, मुझे किसी की ज़रूरत नहीं है सच में।ढिल्लों ने बस इतना ही कहा- चलो देखते हैं कि मैं तुझ जैसी घोड़ी की कितनी देर तक सवारी कर सकता हूँ।

20-25 मिनट के बाद अफीम ने अपना असर दिखाया। दारू का नशा उतर और थकावट एकदम काफूर हो गई। मैंने खुद को बहुत तरोताज़ा महसूस किया और अच्छी तरह से गर्म पानी से नहा कर आई।अभी नहाकर बाहर निकली ही थी कि आते ही ढिल्लों फुद्दी में दो उंगलियां डाल कर स्मूच करने लगा। अब मुझमें जोश था, मैंने उसका पूरा साथ दिया और उसमें मगन हो गयी। इसी तरह एक दूसरे में घुसे हुए हम बेड पर गिरे और मैं उसके हर एक अंग को चाटने लगी। इसके बदले में वो भी ऊपर से नीचे तक मेरा अंग अंग चाटने लगा। मेरे दोनों मम्में उसने बड़ी महारत से चाटे और पिए।
तभी वो मेरे मम्मों के बीच में से चाटते चाटते मेरी नाभि से हुए मेरी फुद्दी तक पहुंचा और उसे बुरी तरह चाटते हुए पीने लगा। मैं उसकी इस हरकत से कमान की तरह टेढ़ी हो रही थी। लेकिन अब मैं बिना चुदे झड़ना नहीं चाहती थी, इसलिए मैंने उसे हल्का सा धक्का दिया और एक झटके से उसकी अंडरवियर निकाल कर उसका 10 इंच लंबा लौड़ा रूह से चाटने लगी। जितना मेरे मुँह में जा सकता था मैं ले रही थी।
पता नहीं क्यों … मुझे उसका लंड इतना अच्छा लग रहा था कि जी करता था कि रात भर चूसती ही रहूं। मैं जब सब कुछ भूल कर उसका लौड़ा अलग तरीकों से 15-20 चूमती चाटती रही तो ढिल्लों ने हैरान होकर कहा- बहुत पसंद आ गया लगता मेरा हथियार, छोड़ ही नहीं रही?मुझे ऐसा लगा जैसे मुझे एकदम किसी ने नींद से जगा दिया हो। मुझे अपनी इस हरकत से थोड़ी शर्मिंदगी महसूस हुई और मैं बस मुस्कुरा दी।
उसने मेरी फुद्दी में हाथ लगा कर चेक किया और बोला- तैयार है तू, आ जा फिर।
यह कहकर उसने दो तकिए मेरी गांड के नीचे रखे और फुद्दी ऊपर को बुलंद करके अपने लौड़े को 8-10 बार ऊपर से नीचे तक फुद्दी और गांड पर रगड़ा। तभी उसने मेरी टाँगें अपनी बाहों में लीं और मेरी तह लगा कर एक झटका मारा और आधा लौड़ा यानि 5-6 इंच फुद्दी के अंदर उतार दिया। मुझे बेहद तसल्ली का अहसास हुआ और मेरी मुंह से निकला- हाय ओए एएए…
इसके बाद उसने 10-15 घस्से इसी तरह मारे मगर पूरा अंदर नहीं डाला; मैंने खीझ कर ढिल्लों से कहा- पूरा डाल अंदर ढिल्लों, आधे से काम नहीं चलता अब।ढिल्लों बोला- मैं यही सुनना चाहता था!और हंस पड़ा।
इसके बाद उसने बुरी तरह से अपना पूरा जोर लगा कर 8-10 ऐसे तूफानी घस्से मारे कि मेरे वजूद का कच्चा मकान ढह ढेरी होकर बिखर गया। जब वो तेज़ी से लौड़ा जड़ अंदर पेलता तो मेरी फुद्दी भी 2-3 इंच अंदर को लौड़े के साथ ही भिंच जाती थी और जब उसी स्पीड से लौड़ा बाहर निकालता तो फुद्दी भी कुछ इंच तक साथ ही बाहर निकल आती थी। मुझे यह पता था कि अगर ढिल्लों इसी तरह 10-12 दिन तक मुझे चोद दे तो फुद्दी की बुनियाद ढह-ढेरी कर देगा और मांस को बाहर लटका देगा।
खैर इसी तरह जब उसने और 5-10 मिनट मुझे ठोका तो मैं धन्य हो गयी और एक अजीब सी बेसबरी और जोश में आकर मैंने पूरे ज़ोर से होठों में होंठ और फुद्दी में लौड़ा लिए हुए ही एक पटखनी लगा कर उसके ऊपर आ गयी।ढिल्लों ने थोड़ा हैरान होकर कहा- बल्ले नी घोड़ीए, दिखा दे फिर अपनी ताकत, थक गई तो बता देना।
अब आलम यह था कि मैं उसके ऊपर थी, उसका लौड़ा मेरी फुद्दी में जड़ तक घुसा हुआ था, मेरा मुंह उसके मुंह में और मेरे बड़े बड़े मम्में उसकी छाती पर लगे हुए थे। शायद यह अफीम का नशा था कि 3 बार कसाइयों की तरह चुदने के बाद भी मुझमें इतना जोश था।
खैर अब मैं 10-12 उसे स्मूच करते करते हल्के हल्के घस्से मारती रही। तभी मुझे लगने लगा कि मैं झड़ने वाली हूँ तो मैंने घस्से तेज़ कर दिए। चूंकि स्मूच करते करते मैं ज़्यादा तेज़ घस्से नहीं मार सकती थी इसीलिए मैंने उसके होठों से होंठ अलग किए और अपने हाथ उसकी छाती पर रख कर पूरे ज़ोरों से अपनी फुद्दी को उसके लौड़े पर मारने लगी।
जब मैं उसका पूरा 10 इंच का लौड़ा टोपे तक बाहर निकाल कर फिर फुद्दी के अंदर ठोकती तो मेरे मुंह से निकलता ‘हाय…’ और इसी तरह मैं 10-15 मिनट में मैं काफी लंबे और ज़बरदस्त घस्से मारती चली गई। अजीब बात है कि मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं अभी झड़ी, अभी झड़ी, लेकिन मैं झड़ नहीं पा रही थी, शायद ये अफीम का नशा था। लेकिन आनंद की सभी सीमाएं टूट चुकी थी।अब मैं थकने लगी थी, मैं चाहती तो ढिल्लों को ऊपर आने के लिए बोल सकती थी लेकिन अबकी बार मैं ड्राइवर सीट पर झड़ना चाहती थी। इसीलिए मैंने अपनी पूरी ताकत इकठ्ठी की और उसके लौड़े पर ज़ोर ज़ोर से उछलने लगी। बेड का बेहद महँगा गद्दा भी पूरी शिद्दत से मेरा साथ देने लगा और जब मैं उछल कर नीचे आ रही होती तो ढिल्लों का लौड़ा उसी गति से ऊपर जाता और जब फुद्दी और लौड़े का पूरी बेरहमी से मिलन होता तो ‘फड़ाच… फड़ाच… फड़ाच…’ की आवाज़ आती।

अपनी मर्ज़ी से उसका हलब्बी लौड़ा धुन्नी तक इस अंदाज़ से अंदर लेने में मुझे ढिल्लों पर एक बड़ी जीत लग रही थी। अब मुझे एहसास हो गया था कि अब मैं ढिल्लों को बराबर की होकर मिल सकती हूँ और जब इतने तगड़े जवान को कोई मेरे जैसे बराबर की औरत मिलती तो जो सेक्स होता है, वो बहुत शक्तिशाली और बुलंद होता है। हमारे बीच अब यही हो रहा था।
जब मैं इस तरह से रबड़ की गेंद की तरह उसके ऊपर उछलने लगी तो ढिल्लों हैरान होकर बोला- बड़ी खतरनाक औरत हो, सोंह रब्ब दी, ढिल्लों के लौड़े के ऊपर इस तरह कोई नहीं उछली थी, तेरे जितनी आग नहीं देखी किसी में, क्या खाती हो?मैं कुछ नहीं बोली और वहशियों की तरह पागल होकर कर उसके लौड़े पर उछलती रही। मेरे इस प्रचंड रूप के सामने ढिल्लों जैसे पहलवान भी समय से पहले हार मान गया और फुद्दी के अंदर ही झड़ने लगा और उसके मुंह से निकला- जान ले ली जट्टीये, कमाल की औरत हो, हाय, हाय, हाय।
जब उसका ढेर सारा वीरज मेरे अंदर निकला तो मुझे फुद्दी के बहुत अंदर तक गर्मी महसूस हुई जो मुझे बहुत शानदार लगी और मैं भी उसके बाद 8-10 प्रचंड घस्से मार कर झड़ने लगी.
दोस्तो, मेरे मुंह से बहुत चीखों के रूप में यह ये आवाज़ निकली थी- हाय… हाय ढिल्लों मर गई गई … हाय मां … ढिल्लों!इस तरह बहुत खतरनाक तरीके से हांफते-हांफते मैं ढिल्लों से ऊपर गिर पड़ी। न तो मुझमें कुछ बोलने की हिम्मत थी न ही हिलने तक की। मैंने अपनी सारी कसरें खुद इस तरह चुदाई करके निकाल की थीं।10-12 सालों से ये डींगें मारने वाली रूपिंदर की जिसकी कोई तसल्ली नहीं करा सकता था, आज एक जट्ट के ऊपर ऊपर पूरी टाँगें खोल कर लेटी हुई थी और जिसमें अब इतनी हिम्मत भी नहीं थी कि पलटी मार कर उसकी बगल में लेट जाए।
3-4 बार इतने ज़ोर-शोर से ठुकने के बाद मेरा हाल बहुत बिगड़ चुका था। दोस्तो, मैं वो बन-ठन कर आई रूपिंदर नहीं रही थी। मेरे बाल ऐसे बिखर गए थे, जैसे पिछले 1-2 महीनों से कंघी न की गयी हो, आंखों के नीचे काले घेरे बन गए थे, मुंह हल्का सा खुल गया था।
दोस्तो आपकी रूपिंदर का बाजा अच्छी तरह बजाया जा चुका था। फुद्दी का हाल तो आपको पता ही होगा। फिर भी बता देती हूं कि मेरी कुदरती तौर पर हल्की सी फूली हुई सफेद फुद्दी का मुंह अब पूरी तरह खुल चुका था और उसे बंद होने के लिए 1-2 हफ्तों की ज़रूरत थी। फुद्दी फट तो गई थी लेकिन मैं पहले ही काफी चुदी होने के कारण ज़्यादा हल्का सा ही निशान था। इसके अलावा अंदर जाने वाला रास्ता अब और खुल गया था। ढिल्लों के हलब्बी लौड़े ने फुद्दी का दाना थोड़ा बाहर को सरका दिया था।
जब मैं कुछ देर बाद उठ कर बाथरूम में गई तो मेरी चाल में एकदम बहुत फर्क आ गया था, यानि कि बहुत मतवाली हो गई थी। बहुत ज़्यादा चुदने वाली औरतों की चाल में ये चीज़ अक्सर देखी जा सकती है।
खैर तभी ढिल्लों का आर्डर किया हुआ चिकन आया और हम हल्की हल्की दारू पीते हुए खाने लगे और एक दूसरे से बातें करते लगे।

दोस्तो आपकी रूपिंदर का बाजा अच्छी तरह बजाया जा चुका था। फुद्दी का हाल तो आपको पता ही होगा। फिर भी बता देती हूं कि मेरी कुदरती तौर पर हल्की सी फूली हुई सफेद फुद्दी का मुंह अब पूरी तरह खुल चुका था और उसे बंद होने के लिए 1-2 हफ्तों की ज़रूरत थी। फुद्दी फट तो गई थी लेकिन मैं पहले ही काफी चुदी होने के कारण ज़्यादा हल्का सा ही निशान था। इसके अलावा अंदर जाने वाला रास्ता अब और खुल गया था। ढिल्लों के हलब्बी लौड़े ने फुद्दी का दाना थोड़ा बाहर को सरका दिया था।
जब मैं कुछ देर बाद उठ कर बाथरूम में गई तो मेरी चाल में एकदम बहुत फर्क आ गया था, यानि कि बहुत मतवाली हो गई थी। बहुत ज़्यादा चुदने वाली औरतों की चाल में ये चीज़ अक्सर देखी जा सकती है।
खैर तभी ढिल्लों का आर्डर किया हुआ चिकन आया और हम हल्की हल्की दारू पीते हुए खाने लगे और एक दूसरे से बातें करते लगे।खाना खाने के बाद और ढिल्लों से अगली मीटिंग के बारे बातें करते करते आधा पौना घंटा बीत गया। ज़िन्दगी में पहली बार मैंने अल्फ नंगी होकर खाना खाया था। कमरे में हीटर की वजह से ठंड का नामोनिशान भी नहीं था। ढिल्लों ने भी सिर्फ अंडरवियर पहना था।
तभी सिगरेट पीते हुए वो मुझसे बोला- अगली चुदाई के लिए तैयार हो जा जल्दी, इस बार घोड़ी बना के मारूँगा। ठीक है?दरअसल इतनी ताबड़तोड़ चुदाइयों की वजह से मैं बिल्कुल तृप्त हो चुकी थी और अब मुझे फुद्दी मरवाने में बिल्कुल दिलचस्पी नहीं थी। इसके इलावा मुझे घोड़ी बनकर चुदना पसंद भी नहीं है क्योंकि इससे मुझे दर्द होता है।यही बात मैंने ढिल्लों से कही- ढिल्लों, वैसे तो अब कोई कसर नहीं छोड़ी है तुमने मेरा बैंड बजाने में, लेकिन फिर भी अगर और मारनी है तो आगे से मार लो, पीछे नहीं हटूंगी अपने कहे से, लेकिन घोड़ी बनके मुझे बहुत दर्द होता है।मेरी बात सुनकर ढिल्लों मुझसे बोला- कोई बात नहीं वादा करता हूं दर्द नहीं होगा, उन्हें फुद्दी मारनी ही नहीं आती, सही एंगल में करो तो कोई दर्द नहीं होगा, फिर भी अगर ज़्यादा दर्द हुआ तो बता देना।
मुझे उसकी बात सुनके बहुत तसल्ली हुई। इन तीन-चार चुदाइयों में मुझे पता चल चुका था कि ढिल्लों फुद्दी मारने में बहुत एक्सपर्ट है क्योंकि उसने हर बार मेरी फुद्दी मारने से पहले एंगल बहुत अच्छा बनाया था। जब पहली बार उसने मेरी टाँगें उठा के मारी थी तो टांगें अपनी बांहों से पूरी तरह फैला दी थीं और 2 तकिये मेरी गांड के नीचे रख दिए थे। इस तरह हुआ यह था कि मेरी फुद्दी चौड़ी भी हो गयी और ऊपर उठ कर उसके लौड़े के हिसाब से बिल्कुल सही कोन में आ गयी थी।उसने चुदाई भी इस तरह की थी कि लौड़ा बिल्कुल सीधा अंदर जाए और पूरा जड़ तक अंदर जाए।
यही सोच कर मैंने अपना सिर हिला कर और मुस्कुरा कर उसे मंज़ूरी दे दी।
तभी वो बेड पर चढ़ आया और मुझे पूरी तरह अपने आगोश में लेकर किस करने लगा और मेरी घूटें पीने लगा। मैं गर्म नहीं थी और मेरा चुदाई का मूड नहीं था इसीलिए मैंने ये सोच कर कि अब चुदना तो है ही, गर्म तो कर लूं खुद को, मैंने उसे जफ्फी डाल ली और उसका साथ देने लगी।किस करते करने मैं थोड़ी हीट में आई और अपनी फुद्दी उसकी जांघों पर रगड़ने लगी; 10-15 मिनट के अंदर ही फुद्दी फिर लौड़ा लेने के लिए तरसने लगी। मुझे तैयार हुआ देख ढिल्लों ने कहा- बन जा घोड़ी, घोड़ीए।
मैं चुपचाप उल्टी ही गयी और घोड़ी बन कर अपनी प्यासी फुद्दी उसे पेश कर दी। फिर वो मेरे पीछे आया और नीचे मेरे दोनों घुटनों को पकड़ कर चौड़ा कर दिया। इस तरह मेरी गांड और फुद्दी दोनों थोड़ी नीचे होकर पूरी तरह फैल गयीं। तभी उसने मेरे पिछवाड़े के ऊपर अपना एक हाथ रखा और उसे थोड़ा और नीचे सरका दिया। जनाब फुद्दी और खुल गयी और उसे पूरी तरह दिखाई देने लगी। तभी वो मुझसे बोला- अब नहीं दर्द होगा।
यह कहकर उसने अपने मोटे खीरे जैसे काले लौड़े को फिर उसी तरह फुद्दी और गांड पर अच्छी तरह ऊपर नीचे से 8-10 बार रगड़ा और फिर फुद्दी के ऊपर सेट करके एक तूफानी झटका मारा। लौड़ा शायद 7-8 इंच अंदर घुस गया। जब उसने झटका मारा तो मेरी आँखें बाहर आ गईं और मुंह पूरी तरह खुल गया और मेरे मुँह से एक तेज़ चीख ‘अईईईईई…’ करके निकली।दर्द की तेज लहर फुद्दी से होती हुई पूरे जिस्म में दौड़ गयी। मैंने उंगलियों से बेड के गद्दे को ज़ोर से भींचा और अपने घुटनों के बल ही “हूं, हूं” करते हुए फौजियों की तरह आगे निकल गयी और उसकी गरिफ्त से आज़ाद हो गई।
उसका यह वार बहुत ज़बरदस्त था जिसे मैं सह नहीं पाई। आगे निकल कर मैं बेड के नीचे उतर गई। फुद्दी में हो रहे दर्द के कारण मैं बहुत गुस्से में आ गई और उसे गालियां निकालने लगी- भेनचो, कमीने, आराम से नही कर सकता, मैंने कहा था कि मुझे दर्द होता है ऐसे, फ्री की फुद्दी रास नहीं ना आई तुझे, नहीं देती अब कर ले क्या करना है, जा रही हूँ मैं।क्योंकि मेले से वो सीधा मुझे इसी कमरे में ले आया था।

मैंने नीचे पड़ी वही छोटी सी निक्कर उठाई और पहनने लगी लेकिन वो फिर आकर मेरी मोटी जांघों में फंस गई। मैं बहुत गुस्से में थी इसीलिए मैंने अपना पूरा ज़ोर इकठ्ठा किया और जैसे तैसे उसे खींच कर अपनी अपनी कमर तक ले आयी। अब मेरी गांड एक बार फिर उस निक्कर में बुरी तरह फंस गई।
अभी मैं टीशर्ट पहनने ही लगी थी कि ढिल्लों ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा और कहने लगा- मेरी छमकछल्लो, मैं तो मज़ाक कर रहा था, आजा, तू तो बहुत गुस्से हो गई, चल अब प्यार से करूँगा।लेकिन गुस्से में मैंने उसकी बात न सुनी और टीशर्ट पहनने लगी थी.
वो उठा और मुझे उठा कर हल्के से बेड पर पटक दिया और मुझे बुरी तरह चूमने चाटने लगा। मैंने बहुत हाथ पैर मारे लेकिन उसके आगे मेरी एक ना चली। उसने अगले एक मिनट के अंदर ही मेरे पिछवाड़े में फंसी निकर को केले के छिलके के तरह उतार दिया और फुद्दी पर मुट्ठी भर के मुझे किस करने लगा।
एक तो वो इतना तकड़ा मर्द था कि उसका ये वार भी न सहन कर पाई और फिर उसकी बांहों में बर्फ की तरह पिघल गयी; 5-7 मिनट के बाद उसने मुझे फिर घोड़ी बना लिया और अच्छे से मेरी गांड सेट करके लौड़ा धीरे से फुद्दी के अंदर धकेल दिया।जनाब … इस बार उसने दो तीन झटकों से 4-5 इंच लौड़ा अंदर डाला था मगर मुझे इस बार बिल्कुल दर्द न हुआ और उसके तजरबे पर मैं वारे वारे गई। अब वो इसी तरह आधा लौड़ा अंदर डाल कर हल्के हल्के घस्से मारने लगा। फुद्दी फिर पूरे उफान पर आ गयी और मेरे मुंह से फिर ‘हाय मां, हाय मां…’ निकलने लगा।
जब उसने 8-10 मिनट के बाद भी और अंदर नहीं डाला तो मैंने जोश में आकर चादर अपनी मुट्ठी में ज़ोर से भींच कर अचानक ही एक तेज़ घस्सा पीछे को मारा और उसका 10 इंच का काला लौड़ा जड़ तक अंदर चला गया, मुझे थोड़ा दर्द ज़रूर हुआ और इसीलिए मैंने सिसियाते हुए ढिल्लों से कहा- तू रुक जा, मुझे करने दे थोड़ी देर!मेरी इस हरकत से बहुत खुश हुआ और अपनी कमर रोक ली। तभी मैं आगे को हुई औऱ एक बार आगे हो गयी और पूरी अपनी ताकत इकठ्ठी करके फिर पीछे को घस्सा मारा, इस बार दर्द नहीं हुआ और फुद्दी और लौड़े के टकराव से एक ऊंची ‘फड़ाच’ की आवाज़ आयी और मेरे मुंह से अनायास ही निकल गया- आह, स्वाद आ गया ढिल्लों!
इसके बाद मैं ‘हाय हाय’ करती खुद घस्से मारती रही और मज़े लेते रही लेकिन 10-12 मिनट के बाद मैं फिर झड़ गई। झड़ते ही मेरा मुँह बेड में धंस गया। मैं फिर फ़ौजियों की तरह आगे निकलने वाली थी कि ढिल्लों ने मेरी कमर पकड़ ली और बोला- जाती कहाँ हो, जानेमन, अभी तक मैंने तांगा जोड़ा ही कहाँ है।
उसकी गिरफ्त से छूटना मेरे लिए मुमकिन नहीं था इसीलिए मैं एक बार फिर तृप्त होकर भी मन मसोस कर ढिल्लों से आगे होने वाली ताबड़तोड़ चुदाई के लिए मोर्चे पर डट गयी और आगे बंद करके चादर को मुठियों में भर लिया।मेरे मुंह से कुछ नहीं निकला, न ही मुझमें बोलने की अब हिम्मत थी। अब सारा खेल ढिल्लों के हाथ में था।
मुझे मोर्चे से हटती न देख कर ढिल्लों ने मेरी कमर से अपनी पकड़ ढीली कर दी और 4-5 धीरे मगर लंबे घस्से मारे। मुझे अब बिल्कुल भी मज़ा नहीं आ रहा था, मैं रंडियों की तरह मजबूर थी और इस इस इंतज़ार में थी कि जल्दी उस घोड़े जैसे मर्द का काम हो जाये।
दोस्तो, मैं इससे पहले 13-14 अलग अलग मर्दों से चुद चुकी हूं, और कइयों ने तो गोलियाँ खाकर भी मुझपर अपनी ज़ोर आज़माइश की थी मगर मेरी ऐसी हालत कभी नहीं हुई थी। आपकी जट्टी रूपिंदर कौर की फुद्दी की प्यास एक ही रात में 3-4 बार पूरी तरह बुझायी जा चुकी थी।मैं दिल से यही चाहती हूं कि हर औरत की प्यास इसी तरह बुझे।
तो जनाब, ढिल्लों ने जल्दी नहीं की और 10-15 मिनट मुझे इसी तरह पुचकारते हुए चोदता रहा। शायद उसे भी पता चल चुका था कि मेरी प्यास फिर बुझ चुकी और इसीलिए वो धीरे धीरे घस्से मार रहा था कि कहीं घोड़ी टांग ही न उठा ले।इसी तरह चोदते हुए उसने मुझे हौले से कहा- बता देना जब मूड बन गया तो, तब तक तेरी ऐसे ही मारूँगा।और यह कहकर उसने अपना काम जारी रखा।
यह तो शुक्र है कि झड़ने के कारण मेरी फुद्दी पूरी तरह गीली थी और लौड़ा आराम से अंदर बाहर हो रहा था। कुछ और देर के बाद जट्टी फिर मूड में आ गयी और थोड़ा थोड़ा हिलने लगी। तो जनाब … मेरे इस इशारे को समझ कर ढिल्लों मोर्चे पर पूरी तरह डट गया।
हुआ ये कि उसने अपना एक घुटना सीधा कर लिया और फुद्दी के अंदर लौड़ा फंसाये ही आधा खड़ा हो गया और सही कोण की जांच करने के पूरा लौड़ा बाहर निकाल कर थोड़े ज़ोर से अंदर धकेल दिया।मुझे चीखती न देख अब दोनों हाथों से मेरी कमर पकड़ ली और लगा मेरी पहलवानी चुदाई करने। जनाब उसके घस्से इतने भीषण थे कि मेरा मुँह और आंखें पूरी तरह खुल गई और मुँह में से बुरी तरह लार टपकने लगी।कमरे में ‘फड़ाच फड़ाच फड़ाच…’ की तेज आवाज़ें गूंजने लगी मगर मेरे मुंह से सिर्फ ‘आ… आ …’ निकल रहा था। इस बार ढिल्लों इतना ज़ोरलगा रहा था कि वो हांफ रहा था और हर घस्से के साथ उसके मुंह से ‘हूँ … हूँ … हूँ …’ की आवाज़ निकल रही थी।

दरअसल उसका ध्यान मुझमें बिल्कुल नहीं था, ऐसा लग रहा था जैसे मेरी फुद्दी से कोई पुरानी दुश्मनी निकाल रहा हो। इतनी ताबड़तोड़ चुदाई … वो भी घोड़ी बनकर … मैंने सोची तक नहीं थी।तभी चोदते चोदते उसके दिमाग में पता नहीं क्या आया कि उसने रुक कर गर्दन को नीचे धकेल दिया और मेरी कोहनियों को सीधा कर दिया, टाँगें जो पूरी तरह फैली हुईं थी उन्हें थोड़ा सा आपस में जोड़ दिया और खुद दोनों पैरों के सहारे आधा खड़ा हो गया। मेरी हालत यह थी कि मुँह बेड के गद्दे में धंस गया और बांहें सीधी होकर बेड के नीचे लटकने लगी।
इसके बाद ढिल्लों ने आधा खड़ा होकर फुद्दी में फड़ाच से लौड़ा धकेल दिया और इसी तरह मेरी ताबड़तोड़ चुदाई करने लगा। इस ज़बरदस्त चुदाई से मैं और मस्त हो गयी और जितना हिल सकती, हिल हिल के उसके तूफानी घस्सों का साथ देने लगी। मेरे मुंह से एक बार फिर तरह तरह की आवाज़ें निकल रही थी।
इसी तरह मैं आधा घण्टा घोड़ी की तरह की तरह चुदती और 2-3 बार बहुत बुरे तरीके से झड़ी। ढिल्लों को मेरे दूसरे जिस्म से कोई मतलब नहीं था वो तो बस मेरा मेरा बड़ा पिछवाड़ा पकड़ के दे दनादन मेरी फुद्दी की धज्जियां उड़ाता रहा।
इस खतरनाक हो रही चुदाई से अब मेरे हाथ खड़े होने हो वाले थे कि ढिल्लों ने पूरा जोर लगातार हांफते हुए अपनी रफ्तार बुलेट ट्रेन की तरह तेज़ कर दी और अपनी दो उंगलियां थूक से गीली करके मेरी गांड में पेल दीं और बोला- अगली बार इसका भी उद्घाटन करूँगा, बड़ी टाइट गांड है घोड़ीए।
तभी वो जोश में आकर झड़ने लगा और अपना बेहद गर्म लावा मेरी बच्चेदानी तक भर दिया। किसी मर्द के मेरे अंदर इस झड़ने को मैं पहली बार महसूस कर रही थी। उसके झड़ने के बाद मेरी जान में जान आयी और इसके बाद उसी तरह बेड पर औंधे मुँह लेटी रही।
इसके पांच मिनट बाद ढिल्लों ने मुझे उठाया और अपनी बगल में लिटा लिया।रात का 1 बज गया था। इसी तरह लेटे लेटे 10-15 मिनट के बाद ढिल्लों बोला- ले अफीम खा ले अगर थक गई है तो, अभी 2-3 बार और चुदेगी तू!
यह सुन कर मेरे तो तोते उड़ गए और मैंने उसके सामने हाथ बांध दिए और कहा- बस ढिल्लों, पहले ही तूने मुझे बहुत उधेड़ दिया है, मेरी मिन्नत है अब नहीं चुद पाऊँगी यार, तसल्ली हो गयी पूरी तरह। बाकी कसर अगले पेपर वाले दिन निकाल लेना। फुद्दी को भोसड़ा तो बना दिया है।मेरी बात सुन कर ढिल्लों हंस पड़ा- अभी तो शुरुआत है मेरी जान, ले अफीम खा ले और हो जा तैयार, चल!
मैं फिर उस सांड की मिन्नतें करने लगी कि अब और चूत नहीं दे पाऊँगी- मेरी फुद्दी भी छिल गई है यार … अगर और चुदी तो बाहर निकल आएगी। और सुबह मेरा पेपर भी है। अगर मेरे पति को पता चल गया तो दोनों इससे भी जाएंगे। प्लीज मेरी बात मान लो और मुझे मेरे रूम में छोड़ आओ, अब तो बहुत नींद भी आने लगी है।
पति की बात सुनकर ढिल्लों ढीला पड़ गया और बोला- एक वादे पे छोड़ कर आऊंगा?मैंने पूछा- क्या?तो वो बोला- अगली बार कोई भी बहाना बना कर लहंगा चोली पहन कर और पार्लर से तैयार होकर आना है, मैं तुझे एक शादी में लेकर जाऊंगा, उसके बाद पहाड़ों पे चलेंगे। तीन दिन पहले आ जाना पेपर से, ठीक है?
मैंने मिन्नत तरले करके उसे 2 दिनों के लिए मना लिया और बोली कि अब मुझे छोड़ कर आये रूम में।
उसने मुझे वही निक्कर और टीशर्ट पहनने के लिए कहा तो मैंने उसे वो पहनने से मना कर दिया क्योंकि उसे पहनना और उतारना मेरे बस में नहीं था और वैसे ही हील पहन के पास पड़ी हुई लोई ले ली और ऐसे ही जाकर उसके साथ गाड़ी में बैठ गई।रात डेढ़ बजे के करीब वो मुझे कमरे में छोड़ गया।
मैं रूम में आते ही लोई उतार कर नंगी ही कंबल में घुस गई और कई घंटों की हुई ज़बरदस्त सर्विसिंग के बारे में सोचती होई सुबह 7 बजे का अलार्म लगाकर सो गई।

खतरनाक चुदाई के बाद रात डेढ़ बजे के करीब ढिल्लों मुझे मेरे कमरे में छोड़ गया। मैं रूम में आते ही लोई उतार कर नंगी ही कंबल में घुस गई और कई घंटों की हुई ज़बरदस्त सर्विसिंग के बारे में सोचती होई सुबह 7 बजे का अलार्म लगाकर सो गई।अगले दिन सुबह 9 से 12 बजे तक पेपर था। मैंने सुबह उठकर ढिल्लों को अब फोन न करने के लिए कह दिया था। पहले भी जब भी उससे कांटेक्ट करना होता था तो मैं ही करती थी।ढिल्लों ने मुझे आज तक फोन करके किसी तरह की परेशानी से बचाये रखा था और इसका इनाम मैंने उसे पिछली रात अपने आठों द्वार खोल कर चुद कर दिया।
तो दोस्तो, पेपर मेरा ठीक हो गया था क्योंकि मैंने पहले से ठीक ठाक तैयारी कर रखी थी।
लगभग दोपहर साढ़े बाहर बजे मेरा पति कार पर मुझे लेने आ पहुंचा और मेरी तरफ देख कर कुछ हैरान होकर पूछा- एक दिन में ही तुम्हारी आंखों के नीचे इतने काले धब्बे क्यों बन गए हैं और ये सूजी हुईं क्यों हैं?मैंने बड़े आत्मविश्वास से झूठ बोला- जनाब, रात भर पढ़ती रही, सोई तो बिल्कुल नहीं, पेपर की … पता कितनी फिकर थी।इतने में मेरी सहेली भी पेपर देकर आ गयी।
क्योंकि उसे भी सुबह उठकर मैंने रात की सारी बात बता कर समझा दिया था कि पति को क्या कहना है तो वो भी आते ही बोली- जीजू, दीदी तो रात भर पढ़ती रही, मैंने बहुत कहा लेकिन ये सोई नहीं!तभी वो मेरी तरफ देखकर बोली- क्यों दीदी, पेपर कैसा हुआ?मैंने आंख मार कर उसे ‘मस्त’ कहा और अपने पति से चलने के लिए बोली।
दरअसल पिछली रात मेरी ठुकाई बहुत ही वहशियाना तरीके से हुई थी, सुबह भी मैं बड़ी मुश्किल से उठी थी और अब मैं सोना चाहती थी। कार में बैठकर मैं अपने पति से हल्की फुल्की बातें करने लगी और इसी दौरान मुझे ज़बरदस्त नींद आ गयी और मैं कार में ही सो गई।2 घण्टों का सफर कैसे बीत गया मुझे पता ही नहीं चला।
घर आकर मैं अच्छी तरह से नहाई और फिर बैडरूम में जाकर सो गई। शाम को उठी और घर में थोड़ा बहुत काम किया। अंधेरा होते ही मेरा पति काम से लौट आया और खाना खाने के बाद अब सोने आ गए।
आपको तो मैंने बताया था ही था कि मेरा पति लगभग रोज़ मेरी टिका के मारता है। आज भी उसका मूड था और दारू भी पीकर आया था। लेकिन मेरा हाल तो आप समझ ही सकते हैं कि क्या होगा। तो जनाब होने लगी कशमकश … वो मुझसे लिपटता जा रहा था और मैं थी कि उसके काबू में नहीं आ रही थी।
दरसअल मेरा भर 72 किलो है और मेरे पति का भार 65 है और इसके इलावा मैं उससे 3 साल बड़ी भी थी, इसीलिए मैं उससे काफी तगड़ी थी। हमारा मेल ऐसे था जैसे वो एक गधा हो और मैं एक ऊंची वज़नदार नुक़री घोड़ी।मैंने उसे गधा इसलिए कहा है कि उसका लौड़ा भी कोई कम नहीं था, 6-7 इंच का तो था ही। और दूसरा ये कि एक वही था जिसके नीचे मैं पिछले 2 साल टिकी रही थी वर्ना ये किसी आम मर्द की बात नहीं थी। दरअसल वो था जिस्म का कुछ हल्का और मुझसे कमज़ोर लेकिन पक्का अफीमची और वैली होने के कारण मारता वो मेरी टिका के ही था। ज़्यादा नशा करने की वजह से उसके स्पर्म कम हो गए थे जिसकी वजह से अभी तक मुझे बच्चा नहीं हुआ था लेकिन रात ढिल्लों ने हर बार मेरी बच्चेदानी तक अपना लौड़ा डाल कर ही वीर्य अंदर गिराया था और मेरी डेट आयी को भी अभी 3-4 दिन ही गुज़रे थे तो मुझे यकीन था कि बच्चा तो उसने ठहरा ही दिया होगा।
खैर मुझे अपनी सास से बहुत सारी बुरी भली बातें सुननी पड़ती थी इसीलिए मैंने 72 घंटे वाली कोई गोली नहीं खाई।
मैं रात की बहुत थकी हुई थी और मेरा पति जिसका घर का नाम ‘काला’ है, दारू से टुन्न था इसीलिए मैं उसका मुकाबला ज़्यादा देर तक नहीं कर सकी और इसी दौरान उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल कर अपनी 2 उंगलियां मेरी फुद्दी में घुसेड़ दीं। अब मेरी फुद्दी पूरी तृप्त होने के कारण बिल्कुल सूखी हुई पड़ी थी जिसकी वजह से मुझे बहुत दर्द हुआ और मैंने अपनी पति को एक गाली निकाली और ज़ोर लगाकर उसकी उंगलियां बाहर निकाल दीं।
दरअसल मेरी सूखी फुद्दी में उसकी दो उंगलियां “घड़प्प” के जैसे अंदर चली गईं थी जिससे मेरे पति ने हैरान होकर पूछा- भेनचो, ये आज इतनी खुली क्यों लग रही है आज तेरी?थी तो मैं धड़ल्लेदार घोड़ी, इसीलिए मैंने उससे अपनी ज़ोरदार रोबीली आवाज़ में कहा- भेनचो, रोज़ दारू पीकर आ जाता है, साले नशा कुछ कम कर लिया कर, वही फुद्दी है, तुझे ही नशा ज़्यादा चढ़ गया है।मेरी इस रोबीली आवाज़ को सुनकर वो अक्सर चुप हो जाया करता है और इस बार भी वो खामोश हो गया। इतना रोब तो मैंने शुरू से रखा था। खैर मेरा पैंतरा काम कर गया और वो चुपचाप मेरी फटकार सुनकर दूसरी तरफ मुँह करके सो गया।यह देखकर मेरी जान में जान आयी और मैं भी रब्ब का शुक्र मना कर सो गई।

अगले दिन फिर मैं उठकर सारा दिन आम कामकाज करती रही और खाना खाकर मैं और मेरा पति फिर उसी बेड पर आ गए। आज फिर मेरे वैली पति ने बहुत ज़्यादा पी रखी थी और वो थोड़े गुस्से में भी था।आधा-पौना घंटा तो वो चुपचाप लेटा रहा और मुझे कि आज फिर मैं बच गयी।
दरसअल ढिल्लों ने एक रात में ही मेरी कई रातों की प्यास बुझा दी थी.
लेकिन इसके बाद उसके दिमाग में पता नहीं क्या आयी के आव देखा न ताव। सलवार का नाड़ा खोल कर और मेरी पैंटी एकदम निकाल के फेंक दीं और धर लीं मेरी भारी टाँगें अपने कंधे पे। दरअसल ये सब इतनी जल्दी हुआ कि मुझे संभलने का मौका ही नहीं मिला क्योंकि मैं तो गहरी नींद में थी। मेरा पति मुझे 2 सालों तक चोदने के बाद भी ये नहीं जानता था कि कहां घुसाना या शायद उसे ये अच्छा लगता था इसीलिए उसने हर बार की तरह मुझे खुद घुसाने के लिए कहा।
मैंने अपने पति से मिन्नत की कि आज मेरा मूड नहीं है और मैंने उसका लण्ड नहीं पकड़ा। मुझे दो-तीन मोटी मोटी गालियां निकाल कर उसने खुद ही अपने लण्ड को सीधा करके ऐसे ही गुस्से में एक घस्सा दे मारा।लंड सीधा मेरी सूखी फुद्दी के अंदर जाकर जड़ तक घुस गया और जो आवाज़ आयी उससे मैं और मेरा पति दोनों हैरान हो गए ‘घड़ापपपप…’
मेरी फुद्दी पूरी तरह सूखी होने के कारण भी मुझे बहुत ही कम दर्द हुआ। मैंने जान बूझ कर दर्द होने का नाटक किया।तभी मेरे पति ने मुझसे पूछा- भेनचो, ये फुद्दी आज इतनी खुली क्यों लग रही है, क्या बात है?मैंने बहाना बना कर कहा- मुझे तो नहीं लग रहा … शायद 3-4 दिन पहले आयी डेट की वजह से है.
इसके बाद मेरे पति ने मुझसे कोई बात न की और मेरी सूखी फुद्दी में ताबड़तोड़ धक्के मारने लगा। असल में ढिल्लों ने मेरी हल्की सी खुली हुई फुद्दी को अब गुफा जैसा फुद्दा बना दिया था। हालत यह हो गयी कि 5-7 मिनट की ज़ोरदार चुदाई में बाद मैं गर्म न हुई क्योंकि ढिल्लों के आधे साइज का लंड मुझे मेरी फुद्दी में महसूस नहीं हो रहा था। अब मुझे पता चल चुका था कि अब मैं ढिल्लों के बजाए और किसी के काम की नहीं रही थी।
फिर भी अपने पति को धरवास देने के लिए मैं नीचे से हिलने लगी और जान बूझ कर ‘आह … आह …’ करती रही। 10-15 मिनट की चुदाई में मैं गर्म तो गयी लेकिन मुझे बिल्कुल भी मज़ा नहीं आ रहा था।मेरा पति पूरे ज़ोर से मुझे पेल रहा था और तभी वो बोला- साला आज पता ही नहीं चल रहा, तेरी घुस्सी(चूत) मुझे आज बहुत खुली लग रही है।
यह सुन कर मैंने उसे मज़ा देने के लिए अपनी टाँगें पूरी तरह भींच लीं ताकि लंड रगड़ कर फुद्दी में जाये। मेरी इस हरकत से मेरे पति को थोड़ा मज़ा आने लगा और वो मुझे ‘आह … आह …’ करके पेलता रहा और कुछ देर बाद हांफते हुए झड़ने लगा।इस समय मैं पूरी गर्म थी और मेरा काम भी नहीं हुआ।
अब आप खुद समझ सकते हैं कि मेरा क्या हाल हुआ होगा। मेरी दरियायी प्यास को अब सिर्फ कोई ढिल्लों जैसा मोटा और लंबा जैसा ही बुझा सकता था।
खैर अगले पेपर में अभी 5 दिन बाकी थे और मैं रोज़ अपने पति से चुदती रही। मेरी मारता तो दारू पीकर वो रोज़ टिका के था लेकिन उसका लंड अब मेरी प्यास नहीं बुझा पा रहा था। मैं बहुत हिल हिल कर उससे चुदी और 2-3 बार झड़ी भी, लेकिन उसके लंड की मार मेरी फुद्दी की आधी गहरायी तक ही थी। अब मुझे ढिल्लों से अगली मीटिंग की उडीक(प्रतीक्षा) थी।
मैंने अपने पति को और अपनी सहेली से पूरी सेटिंग करके औ अपनी किसी सहेली की शादी में जाने के लिए उसे पेपर से 2 पहले यूनिवर्सिटी जाने के लिए मना लिया था। इसके अलावा मैंने ढिल्लों से वादा पूरा करते हुए लाल रंग के ज़बरदस्त लहंगा चोली का प्रबंध भी कर लिया था।
मैंने जान बूझ कर थोड़ा छोटा लहंगा चोली आर्डर किया था। लहंगा और चोली में लगभग 15-16 इंच का फासला था क्योंकि चोली ऊपर से लहँगा नीचे से बेहद लो कट था। चोली ऐसी थी कि मेरे बड़े बड़े मम्मों में पूरी तरह फंसती थी जिससे उनका आकार पूरी तरह से नुमाया हो जाता था। लहँगा मैं नाभि के बहुत नीचे तक पहनने वाली थी ताकि मेरा हल्का सा बाहर को निकला हुआ पेट ज़्यादा से ज़्यादा दिखे। लहँगे चोली के साथ पहनने वाली चुनरी भी मैंने बहुत झीनी ली थी ताकि अंदर के नजारे में कोई बाधा न आये।
इसके अलावा मैंने एक दिन बाज़ार जाकर बेहद ऊंची एड़ी की सैंडल ले ली थी और ऊपर से नीचे तक अपने जिस्म की दो बार वैक्सिंग करवा ली थी जिसमें फुद्दी और गांड भी शामिल थी। मेरे सर और आंखों के अलावा अब मेरे जिस्म पर बाल नाम की कोई चीज़ मौजूद नहीं थी।
अब मुझे बेसब्री से अगले दिन का इंतज़ार था कि कब मेरा फुद्दू पति मुझे अपनी सहेली के पास छोड़ कर आये।
मेरी फुद्दी की ठुकायी की कहानी आपको मजा दे रही है या नहीं? मुझे कमेन्ट करके बतायें

मैंने अपने पति को अपनी किसी सहेली की शादी में जाने का बहाना करके उसे पेपर से 2 पहले यूनिवर्सिटी जाने के लिए मना लिया था। इसके अलावा मैंने लहंगा चोली का प्रबंध भी कर लिया था। मैंने बेहद ऊंची एड़ी की सैंडल ले ली थी, और ऊपर से नीचे तक अपने जिस्म की दो बार वैक्सिंग करवा ली थी जिसमें फुद्दी और गांड भी शामिल थी। मेरे सर और आंखों के अलावा अब मेरे जिस्म पर बाल नाम की कोई चीज़ मौजूद नहीं थी।
अब मुझे बेसब्री से अगले दिन का इंतज़ार था कि कब मेरा फुद्दू पति मुझे अपनी सहेली के पास छोड़ कर आये।मुझे आज तक कभी इतना किसी का इंतज़ार नहीं हुआ था जितना ढिल्लों से अगले दिन होने वाली पता नहीं किस तरह की चुदाई का था। रात को भी ढिल्लों को याद कर कर के करवटें बदलती बीती।
खैर अगला दिन आ गया और मैं सुबह से ही सज धज के तैयार होने लगी। लहँगा चोली पहन कर अपनी कमर तक लंबे बाल सीधे करके खुले छोड़ दिए। पैरों में ऊंची एड़ी की जबरदस्त सैंडल पहन कर बैठ गयी अपने पति के साथ कार में। मुझे मेरी सहेली के पास छोड़ कर मेरा फुद्दू पति चला गया।
समय दोपहर 12 बजे का था और अपने पति के जाते ही मैंने अपने यार ढिल्लों को फोन कर दिया। उसे भी मेरे फोन की प्रतीक्षा थी। आधे पौने के घंटे के बाद वो अपनी बड़ी गाड़ी में मुझे लेने आया और कुछ पलों के बाद मैं उसकी बांहों में थी।
मुझे अपनी कार में बिठा के लगभग 2 घंटे पहाड़ों की तरफ गाड़ी चलाकर वो मुझे एक बहुत ही अमीराना शादी में ले गया। ऐसी शादी मैंने तो पहले कभी नहीं देखी थी। शायद उसके किसी दूर के दोस्त की शादी थी जिसके कारण मुझे वो अपने साथ ले गया। मैं तो आपको बता हो चुकी हूं कि मैं किस तरह पटाखा बन के घर से निकली थी। दूल्हे दुल्हन की तरफ कम, लोग मुझे ज़्यादा घूर रहे थे।
कुछ देर बाद उसने मुझे अपने 4-5 दोस्तों से मिलवाया। शादी रात को भी चलने वाली थी। फेरे होने लगे तो ढिल्लों मुझे बहुत महंगी शराब के दो-तीन पेग पिला कर रिसार्ट के ऊपर वाले कमरे में ले गया जहां उसकी बुकिंग थी।
दरवाज़ा बंद करते ही उसने मुझे चूमना चाटना शुरू कर दिया। एक और बात, दरवाज़ा उसने बंद तो किया था लेकिन उसने जान बूझ कर कुंडी नहीं लगाई थी। मेरे अंदर तो उससे भी ज़्यादा आग लगी थी जिसके कारण मैं भी उसके रह रह के घूंट पीने लगी। कुछ देर बाद जब हम दोनों बुरी तरह गर्म हो गए तो उसने मेरा लहँगा ऊपर उठाकर नीचे से मेरी हरे रंग के पैंटी एक झटके से उतार दी और उसे पास में फेंक दिया। तभी वो पास पड़े एक स्टूल पर जा बैठा और मुझसे कहा कि मैं उसके ऊपर आकर बैठूं। उसने भी अपनी पैंट पूरी तरह से नहीं उतारी थी, बस ज़िप खोल कर नीचे ही की थी।
मैंने उससे अपना भारी लहँगा उतारने को कहा तो उसने मना कर दिया और बोला- ऐसे ही लहँगा ऊपर उठा के बैठ जा।मैंने लहँगा ऊपर उठाया और उसके लौड़े पर बैठने की कोशिश करने लगी लेकिन स्टूल बहुत ऊंचा था। यह देख कर ढिल्लों ने मुझे ज़रा ऊपर उठाया और फुद्दी अपने हलब्बी लौड़े के ऊपर रख कर नीचे से एक तीखा घस्सा मारा… कितनी मर्तबा चुद चुकी थी मैं ढिल्लों से लेकिन उस दिन फिर भी मुझे बहुत तेज़ दर्द हुआ और मेरी चीख निकल गयी। वैसे मैं चाहती थी कि पहले मैं उसका लौड़ा अच्छी तरह से चुसूं और वो मेरी फुद्दी। लेकिन इस बार वो सीधा मुद्दे पे उतर आया था।
नीचे से 2-3 और तेज़ झटके मारने के बाद उसने मुझे खुद हिलने को कहा। दर्द के कारण भी मैं उसे मना न कर पाई ओर ऊपर बैठे ही गोल गोल तरीके से हिलने लगी। तभी उसने मुझे डांट कर कहा- साली, अच्छी तरह से उछलती है या नहीं?डर के मारे मैंने अपनी पूरी ताकत इकट्ठी की और उछल उछल कर 4-5 लंबे घस्से दे मारे। बस इतनी ही देर थी, मैं दर्द भूल गयी और आंनद के सागर में गोते खाने लगी। जब मुझे लगा कि मैं झड़ने वाली हूँ तो मैं और तेज़ी से 5-7 घस्से मारे और मेरा काम तमाम।
दोस्तो, आप उसके लौड़े के साईज़ का अन्दाज़ा खुद लगा सकते हैं, क्योंकि मेरा पति एक रात पहले मुझ पर आधा घण्टा चढ़ा रहा था लेकिन मेरा काम न हुआ था, लेकिन उस वहशी लौड़े के 10-12 घस्सों से ही मैं पूरी तरह बह निकली। उसे मेरी फुद्दी की आवाज़ से पता चल गया कि मेरा काम हो गया है क्योंकि अब गीलेपन की वजह से ‘फड़ाच फड़ाच…’ की आवाज़ ऊंची हो गयी थी। काम तमाम होते ही मुझमें अब जुर्रत नहीं बची थी कि और घस्से मार सकूँ और मैं उसका पूरा लौड़ा अंदर डाल कर उसकी बांहों में पसर गयी।

तभी वो फिर चिल्लाया- साली, उछलती है या नहीं? भेनचोद इतनी जल्दी हो भी गया तेरा, रुक तेरी तसल्ली करता हूँ मैं!उसने मुझे फुद्दी में लौड़ा डाले ही ऊपर उठाया और चलता चलता अपने बैग तक पहुंचा, जिसमें से उसने एक बड़ा काला डिलडो वाइब्रेटर निकाला और मेरी गांड में ठूंस दिया।
मेरी जान निकल गयी, दोस्तो मैंने आज तक गांड नहीं मरवाई थी जिसके कारण वो बहुत टाइट थी और वी डिलडो बहुत बड़ा था। मैंने बाद में उसे नापा था तो वो 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा था। डिलडो के ऊपर पहले से ही कोई चिकना पदार्थ लगा था जिसके कारण एक ही वार में वो मेरी गांड के पूरा अंदर तक जाकर, मेरी गांड के छल्ले में फिट हो गया।
मेरी हालत खराब हो गयी थी लेकिन ढिल्लों ने मुझे संभलने का कोई मौका नहीं दिया और मुझे बांहों में पूरी तरह उठाकर धाड़ धाड़ चुदाई करने लगा। मेरा भारी लहँगा नीचे लटक रहा था और मैं उसके घोड़े जैसे लौड़े पर सवार थी। कुछ ही देर बाद वो रुका और बैग से रिमोट निकाल कर वाइब्रेटर एक नंबर पर चालू कर दिया और फिर मेरी ताबड़तोड़ तरीके से चुदाई करने लगा। अब मुझे वो डिलडो रास आ गया और मैं पूरी तरह गर्म होकर ऊपर से उछलने लगी।
उसने मेरी हरकत देख कर पूछा- क्यों, आया मज़ा?मैंने कहा- बहुत ही ज़्यादा, ढिल्लों।
और हम दोनों घोड़ा घोड़ी तूफानी चुदाई के समंदर में गोते लगाने लगे। मुझे कोई होश नहीं था जब अचानक से धाड़ करके दरवाज़ा खुला और ढिल्लों के पांचों दोस्त हमें देख कर हँसने लगे।उन्हें देख कर मेरे होश उड़ गए। इस तरह मुझे चुदते हुए पहले कभी किसी ने नहीं देखा था।तभी मैं उन पर शेरनी की तरह चिल्लाई- बाहर निकल जाओ मादरचोदो!यह कहते हुए मैंने ढिल्लों की गिरफ्त से आज़ाद होने की कोशिश करते हुए लहँगा अपने पिछवाड़े के ऊपर करने की कोशिश की। यह तो शुक्र था कि मैंने पूरे कपड़े नहीं उतारे थे।
ढिल्लों की मज़बूत जकड़ से आज़ाद होना इतना भी आसान नहीं था।तभी मैं उसपर भी चीखी- साले मैंने तुझ पर यकीन करके कुंडी नहीं लगाई, अब पता चला कि तूने कुंडी क्यों नहीं लगाई थी। बहनचोद, चोद ले इस बार जितना मरज़ी, अगली बार से नहीं आऊँगी, रंडी बना के रख दिया मुझे।और मैं रोने लगी।
मुझे रोते हुए देख उसके दोस्तों में से एक जिसका नाम बिल्ला था, बोला- रो ले जितना मर्ज़ी, चोदेंगे तो तुझे इस बार हम भी।मैं ढिल्लों की गिरफ्त से आज़ाद होने के लिए और हाथ पैर मारने लगी।
जब मसला ढिल्लों को अपने हाथों से बाहर जाते दिखा तो उसने डाँट कर उन्हें बाहर जाने को कहा। सालों सभी ने अपने मोबाइल निकाल कर इसी पोज़ में मेरी तस्वीरें लीं और हसंते हुए बाहर निकल गए।मैं बहुत गुस्से में थी और मेरे दिमाग से काम का सारा नशा उतर गया था। लेकिन ढिल्लों था कि उसने मेरी एक न मानी और उसी तरीके से ताबड़तोड़ मुझे चोदता रहा और बीच में रुक कर वाइब्रेटर की स्पीड और बढ़ा दी।
8-10 मिनट वो मुझे चोदता भी रहा और कहता भी रहा कि कुछ नहीं होगा, सारे मेरे दोस्त ही हैं। मैं नशे में थी और उस वक़्त मैंने सोचा कि चलो जो होगा देखा जाएगा और दूसरी तरफ वाइब्रेटर की गति तेज हो जाने से मेरी गांड में भूचाल आ गया था और इसी के कारण मेरा सारा गुस्सा काफूर हो गया और चंद मिनटों के अंदर मैं फिर से गर्म होकर चुदाई का मज़ा लेने लगी।
दस मिनट ढिल्लों ने मेरी गांड में वाइब्रेटर चलाया और साथ में मेरी चूत की वो ताबड़तोड़ चुदाई की कि पूछिये मत। पूरा कमरा ‘फड़ाच फड़ाच…’ की आवाजों से गूंज उठा। मेरे मुंह से बस ‘हाँ … हाँ हाँ…’ ही निकल रहा था।इस चुदाई ने मुझे एक बार धन्य कर दिया और मैं ढिल्लों के वारे-वारे जा रही थी। इस दौरान मैं 2 बार हिल हिल के झड़ी और जन्नत के दरवाज़े तक जा पहुंची। मेरे दूसरी बार कांप कांप के झड़ने के 5-7 मिनट बाद ढिल्लों अपना मूसल लौड़ा जड़ तक अंदर डाल कर झड़ा और फिर मुझे नीचे उतार दिया।
वाइब्रेटर अभी भी मेरी गांड में फसा हुआ था और उसी गति से चल रहा था। मैंने ढिल्लों को उसे बाहर निकालने के लिए कहा मगर ढिल्लों ने उसे बाहर निकालने से मना कर दिया, लेकिन उसने उसे बंद कर दिया था।
कुछ देर वहीं बेड पर आराम करने के बाद जब मैं लहँगा ऊपर उठ कर चड्डी पहनने लगी तो ढिल्लों ने उसे भी मना कर दिया और मुझे अपनी ब्रा भी उतारने को कहा। मैंने चुपचाप उसका कहना मान लिया और चोली उतार कर अपनी काली ब्रा उसके हवाले कर दी और फिर चोली पहन ली।
मेरी चोली बैकलेस थी, पहले तो लोगों को मेरी काली ब्रा की पिछली पट्टी दिख रही थी लेकिन अब मुझे देख कर कोई नहीं कह सकता था कि मैंने ब्रा पहनी है। खैर अब मैं और ढिल्लों फिर शादी में आ गए और घूमने लगे और साथ में चिकन और दारू पीते रहे। इतनी ठंड में भरी शादी में बगैर पैंटी पहने मुझे यूं लग रहा था जैसे मैं नंगी घूम रही हूँ। पैंटी न होने अहसास मेरे जिस्म में एक अजीब सनसनी पैदा कर था, ऊपर से ढिल्लों ने अपनी जेबमें हाथ डाल कर वाइब्रेटर को रिमोट से ऑन कर दिया। मेरे जिस्म के अजीब तरह की लहरें पैदा होने लगीं।
खैर जट्टी हूँ तो मैंने खुल कर ढिल्लों के बराबर पेग लगाए। आधे पौने घंटे बाद दारू ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया और घंटा पहले ज़बरदस्त तरीके से चुदी हुई मैं अब अपने जिस्म का कंट्रोल खोने लगी। दूसरा ढिल्लों ने वाइब्रेटर की गति पूरी तेज़ कर दी। चूत फिर लौड़े के लिए तड़प उठी।
तभी मैंने लोगों के परवाह न करते हुए ढिल्लों को जफ्फी डाल ली और उसके कान में कहा- फुद्दी आग बन गयी है, ठोक दे यार जल्दी प्लीज। बर्दाश्त नहीं हो रहा!

मैं जट्टी हूँ तो मैंने खुल कर ढिल्लों के बराबर पेग लगाए। आधे पौने घंटे बाद दारू ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया और घंटा पहले ज़बरदस्त तरीके से चुदी हुई मैं अब अपने जिस्म का कंट्रोल खोने लगी। दूसरा ढिल्लों ने वाइब्रेटर की गति पूरी तेज़ कर दी। चूत फिर लौड़े के लिए तड़प उठी।
तभी मैंने लोगों के परवाह न करते हुए ढिल्लों को जफ्फी डाल ली और उसके कान में कहा- फुद्दी आग बन गयी है, ठोक दे यार जल्दी प्लीज। बर्दाश्त नहीं हो रहा!जब मैंने ढिल्लों से यह बात कही तो वो खुश होकर हँसने लगा और उसने मुझसे कहा- बस यही सुनने के लिए तो वाइब्रेटर लाया था, थोड़ा और तड़प ले मेरी जान!
उसकी यह बात सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आया। मेरी फुद्दी रिसने लगी थी और ऊपर से पूरी ठंड थी। अपने ऊपर काबू न होता हुआ देख मैंने ढिल्लों से कहा- अच्छा फिर वाइब्रेटर तो बंद कर दे भेन चो… गांड में तबाही मचा रखी है, ऊपर से पी भी काफी ली है मैंने!ढिल्लों फिर हँसने लगा और उसने मुझसे सिर्फ इतना कहा- अब साली … तुझे यहां पंडाल में ठोक दूं, रुक जा अभी।
मैं बस मुंह बना के रह गयी और उसी तरह उसके साथ घूमने फिरने लगी। मेरी चाल में वाइब्रेटर और दारू की वजह से इतना फर्क आ गया था कि लोग मुझे मुड़ मुड़ कर देखने लगे कि माजरा क्या है। लेकिन उन्हें क्या पता था कि जट्टी की अनचुदी गांड में 8″ का मोटा वाइब्रेटर फंसा हुआ है और बहुत ज़ोर से वाइब्रेट भी कर रहा है।
वैसे वाइब्रेटर तो गांड में चल रहा था लेकिन उसकी सनसनी मेरी फुद्दी में फैल गयी थी। जी चाहता था कि अब कोई भी चीज़ मेरी फुद्दी में घुस जाए चाहे वो कोई लकड़ी का डंडा ही क्यों न हो। जब फुद्दी ज़ोर से हाहाकार मचाने लगी तो मुझसे मेरे जिस्म का पूरा काबू छूट गया और मेरी जिस्म की सारी वासना फुद्दी में आ गयी। जल्दबाज़ी में मैंने ढिल्लों से कहा- मुझे बाथरूम जाना है।लेकिन ढिल्लों सिरे का कमीना था वो मेरी बात अच्छी तरह समझ गया और कस के मेरी बाँह पकड़ के चलने लगा।
उसकी इस हरकत के बाद मैं उसके सामने गिड़गिड़ाने लगी- ढिल्लों, आग लग गयी है, कंट्रोल नहीं हो रहा, मैं तेरे पैर पड़ती हूँ, ठोक दे यार प्लीज़, कभी तेरा कहना नहीं वापस करूँगी।यह पहली बार था कि मैं किसी के सामने फुद्दी देने के लिए इस तरह गिड़गिड़ाई थी, वरना इस तरह कई बार मैं मज़े लेने के लिए दूसरों की मिन्नतें अक्सर करवाती हूँ।
खैर मेरी बात सुनकर ढिल्लों समझ गया कि मामला अब वाकयी संजीदा हो गया है। बेगानी शादी में मैं कोई उल्टी सीधी हरकत न कर बैठूं इसीलिए वो मुझे तेज़ी से चलाते हुए गाड़ी तक ले गया और अपनी गाड़ी के पीछे बिठा दिया और खुद जल्दी से ड्राइव करने लगा। दरअसल अब हुआ यूं कि बैठने के कारण जो वाइब्रेटर पहले 1-2 इंच बाहर था, जड़ तक मेरी गांड में ठूंसा गया। जब मैं थोड़ा सा भी इधर उधर हिलती तो वो गांड की अंदरूनी दीवारों से ज़ोर से टकराता जिससे मुझे हल्का सा दर्द होता। इसीलिए मैं टाँगें भींच के जैसे तैसे बैठी रही।
ढिल्लों ने गाड़ी को तेज़ी से चलाकर पहाड़ों में एक सुनसान मोड़ पर रोक ली क्योंकि रास्ते में उसे कोई होटल नज़र नहीं आया शायद। पर बात यह निकली कि इस बार वो मुझे खुले में चोदना चाहता था क्योंकि उस रिसोर्ट में उसका एक कमरा बुक था।
आसपास कोई कमरा वगैरा न देख कर मैं घबरा गई। पहले ही मैं उसके दोस्तों के सामने एक बार बेइज़्ज़त हो चुकी थी और इस बार मैं किसी अनजान व्यक्ति के सामने उस तरह नहीं आना चाहती थी।शाम का वक़्त था और रोशनी बहुत कम हो चुकी थी। गाड़ी रोक कर ढिल्लों ने मुझे कहा- यार, मेरी एक बहुत बड़ी तमन्ना है कि तेरे जैसी औरत को खुले में चोदूं। आज ये तमन्ना पूरी कर दे जानेमन!
मैं उसकी मंशा पहले से ही जानती थी इसीलिए मैंने उसे कड़क लहजे में जवाब दिया- देख ढिल्लों, पहले ही तूने मेरी एक बार बेइज़्ज़ती कर दी है, मैं इस तरह खुले जंगल में सेक्स करने, चुदने की बिल्कुल भी शौकीन नहीं हूँ, किसी कमरे में ले जाना है तो चल, नहीं तो निकाल ये डंडा मेरी गांड से मुझे मेरी सहेली के पास छोड़ आ।मुझे इस तरह गुस्से में देख कर वो पागल हो गया और बाहर निकल के पीछे का दरवाज़ा खोला और एक झटके में ही मैं उसके कंधों पर थी। आस पास किसी को न देख कर ढिल्लों मुझे उठा कर खाई में उतरने लगा। मैं चाहकर भी कुछ नहीं कर सकती थी।

मैंने उसकी बार बार मिन्नतें कीं लेकिन वो नहीं माना और 15-20 मिनट चलने के बाद नीचे जंगल में घने दरख्तों के बीच एक बहुत छोटा सा मैदान था। ढिल्लों को वो जगह जच गयी क्योंकि चारों तरफ कोई भी नहीं था और न ही उन घने दरख्तों में से कोई देख सकता था। उसने मुझे घास पर लेटा दिया और मुझे बुरी तरह चूमने चाटने लगा।मैं बहुत डरी हुई थी लेकिन मेरी फुद्दी में आग भी शिखर तक पहुंच चुकी थी। बीच में मैंने उसे रोक कर कहा- यह जंगल सेक्स करने की जगह है? अगर कोई आ गया तो मारे जाएंगे ढिल्लों, बेवकूफी न कर, गाड़ी में लेजाकर ठोक ले।ढिल्लों ने मुझे चूमते हुए कहा- जानेमन, ये रिवाल्वर मैंने गांड में लेने के लिए नहीं रखा, साला अगर कोई हरामी आ भी गया तो बस मेरे एक हवाई फायर का खेल है, तू डर मत, मेरा नाम ढिल्लों है।उसकी इस तकरीर से पूरी तरह संतुष्ट हो गयी और जंगल सेक्स का मज़ा लेने लग गयी।
बेहद ठंड थी। ढिल्लों ने मेरी फुद्दी में एक चप्पा चढ़ा के धीरे धीरे सारे कपड़े मेरे जिस्म से अलग कर दिए। अब मैं सिर्फ ऊंची एड़ी के सैंडल और अपने सोने के गहनों में ही थी। बाकी अल्फ नंगी उसके नीचे पड़ी थी। 15-20 मिनट के बाद पूरा अंधेरा छा गया और मैं पूरी तरह से बेफिक्र थी। ढिल्लों ने मुझे इस बार अपने लौड़े के लिए इतना तड़पा दिया था कि मैंने खुद अपनी सारी ताक़त इकठ्ठी करके उसका लौड़ा पकड़ा और अपनी फुद्दी लगा कर नीचे से एक करारा झटका मारा। आधा लौड़ा बेपरवाही से मेरी फुद्दी में जाकर फंस गया, जिससे मुझे इतना चैन मिला कि मैं बयान नहीं कर सकती।
ढिल्लों ने मेरी हरकत को देखकर अपनी कमर ऊंची की, लौड़ा पूरी तरह से बाहर निकाला, मेरी अच्छी तरह से तह लगाई और एक लंबा, तीक्षण शॉट मारा और लौड़ा मेरी धुन्नी तक पहुंचा दिया। उसके एक वार से ही मेरी फुद्दी ने बूम बूम करके पानी छोड़ दिया। मैं धन्य हो गयी थी। पिछले एक घंटे से मैं झड़ने के लिए तड़प रही थी और ये तो एक लंबा, काला और मोटा लौड़ा था जो मेरी धुन्नी तक जा पहुंचा था।
मेरे मुंह से बहुत जोर से ‘हाय … ओये …’ निकला और मैंने उसकी पीठ में अपने नाखून गड़ा दिए और टाँगें जितनी मैं ऊपर कर सकती थी, कर लीं। एक बार फिर ढिल्लों ने अपनी तूफानी चुदाई शुरू कर दी। मैं ढिल्लों का लौड़ा लेने के लिए इतनी मजबूर हो चुकी थी कि घने जंगल में सर्दियों की रात में बेफिकर हो कर नंगी चुद रही थी। जब ढिल्लों तूफानी रफ्तार से पूरा लौड़ा बाहर निकाल कर जड़ तक अंदर पेल देता तो फुद्दी से ‘पुच्च’ की तेज़ आवाज़ आती और घने जंगल को चीरती हुई घाटी में गूंज जाती।
दूसरा जो मैंने आपको पहले भी बताया है कि मैं एक भरे जिस्म वाली औरत हूँ, जिसके कारण मेरी जांघें और गांड गैरमामूली तौर पर बड़ी बड़ी हैं, जब दूसरा ढिल्लों की जांघें भी खूब भरी हुईं थीं, और जब ढिल्लों घस्सा मारता तो मेरा तरबूजी पिछवाड़ा और उसकी जांघें टकरा के बहुत ऊंची ‘पटक’ की आवाज़ पैदा कर रही थी, जो मेरी फुद्दी की ‘पुच्च’ की आवाज़ से मेल खाकर चुदाई को एक जबरदस्त रंगत दे रही थी।
मेरी गांड में एक बड़ा वाइब्रेटर चालू था और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं दो मर्दों से चुद रही हूं। खैर मैं उसकी इस चुदाई से इतनी मखमूर^ हो गयी कि मैंने सब कुछ भूल कर अपनी टाँगें उसकी पीठ के गिर्द नागिन की तरह लपेट दीं और उसका मुंह अपने दोनों हाथों में लेकर उसकी आँखों में आंखें डाल लीं और बिना पलकें झपकाए उसको तकती रही।
मेरे पूर्ण समर्पण और मुझे मोर्चे पर इस तरह डटे हुए देख कर ढिल्लों ने अपनी पूरी ताकत से अपना हलब्बी लौड़ा बाहर निकाल कर मेरी फुद्दी में ठोकने लगा। ये वो इतना ज़ोर लगा कर करने लगा था कि उस जैसे घोड़े की भी सांस फूल गयी थी। आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि पौने फुट लंबा और 4 इंच मोटा काला हब्शी लौड़ा मेरी तरबतर फुद्दी में इस गति से अंदर बाहर होकर उसका क्या हाल कर रहा होगा।मेरी फुद्दी का बाहरी छल्ला जो उसके लौड़े पर इलास्टिक की तरह कसा हुआ था, हर गुज़रते सैकंड के साथ तीन चार इंच अंदर धंस रहा था और जब वो अपना लौड़ा बाहर निकालता तो ऐसा लगता कि फुद्दी भी उसके साथ बाहर आ रही है लेकिन वो छल्ला ही था जो उसके लौड़े पर कसे होने के कारण 3-4 इंच बाहर को आ जाता था।

Leave a Comment