मेरी माँ गर्म अध्याय 2

                      मेरी माँ गर्म अध्याय   2 उस दिन के बाद अब सोनू हर रात को डिनर के बाद उसके दोस्त अभिनव की भीगी हुई कहानी पढ़के और फिर वीडियो देखे ही सोने लगा।  और दिन में भी बस वही कहानी और वीडियो के ख्याल उसके … Read more

मेरी माँ गर्म अध्याय 1

                          मेरी माँ गर्म अध्याय 1  बहुत सी कहानियां पढी होंगी, मैंने बहुत तो कुछ कुछ ही पढी हैं।  कहानियों कुछ नहीं होते पर हमारे ही जीवन से कहीं न कहीं प्रेरणा होती, जो कुछ हमने देखा या पढ़ा होगा, उसमें ही हम कुछ … Read more

PYAR IN FAMILY CHAPTER 3

          PYAR IN FAMILY    CHAPTER   3 Holi ke din Dil Jud Jaate Hai Raat ke takriban 2 baje the aur Kaushalya ji ke kamre me soi hui Maadhuri ki neend pyaas ki wajah se khul gai thi. Kamre me halki roshni me usne dekha ke paani bilkul viprit disha me … Read more

PYAR IN FAMILY CHAPTER 2

         PYAR IN FAMILY    CHAPTER   2 Jyoti Ki Aag “Tannnnnnnnnnn Tannnnnnnnnnn” ki pehali he awaaj se Arjun uthkar baith gaya. Alaarm ka button daba ke usko band kia aur fir nazar gai ek jannat se najaare para. Maadhuri didi ka poora youvan uski aankhon ke saamne the. Bade thos boobs jo … Read more

PYAR IN FAMILY CHAPTER 1

              PYAR IN FAMILY    CHAPTER 1 Aap sabhi Jan ko Mera hardik naman. Kaafi samay se Mai yaha likhi Hui kahaniyon ko padh Raha hu. Aur sabhi lekhak apne ster pe bahut he atche hai. Aap sabhi se prerna lekar Mai bhi yaha ek kahani ki shuruat Kar … Read more

मेरा घर और मैं अध्याय 10

                 मेरा घर और मैं अध्याय   10 संतोष हाथ मुह धो कर वापस से कजरी के कामरे जा चुका था।  वही कजरी संतोष के लिए एक थाली में पूरी और सब्जी, साथ ही एक कटोर में खीर एक तरफ रख दी थी।  फिर कजरी चली दी अपने कामरे … Read more

मेरा घर और मैं अध्याय 9

                 मेरा घर और मैं अध्याय   9 “ये क्या है संतोष। तुम ने ऑफिस का दरवाजा क्यो बंद किया। तुम भूल रहे हो, मैं तुम्हारा प्रिंसिपल हू। चुपचाप यहां झुक जाओ और दांडे खाओ।”  प्रिंसिपल महेंद्र सिंह ने संतोष को अंदार इस तरह आते हुए देख कर ये … Read more

मेरा घर और मैं अध्याय 7

                   मेरा घर और मैं अध्याय 7 जब कजरी लाजवंती के साथ कामरे पाहुची तो उन्होन देखा की जहां पहले लाजवंती खादी थी वही पर अब संतोष खड़ा था।  उन किए देख की संतोष के हाथ में एक किताब थी, जिसके पन्ने बदल रहा था, थोड़ा थोड़ा … Read more

मेरा घर और मैं अध्याय 8

               मेरा घर और मैं अध्याय   8 “हां तो दीदी आपको लड़की पसंद आया की नहीं। अगर आपकी ना है तो में मां से कहूं, आपको लड़की पसंद नहीं है।”  संतोष ने अपनी दीदी गीता से कहा।  खाना खाने के बाद अब गीता अपने कामरे में आराम करने आ … Read more

मेरा घर और मैं अध्याय 6

                       मेरा घर और मैं अध्याय   6  राधिका झडने के बाद वैसे बिस्तर पर पड़ी रही।  पता ही नहीं चला की कब उसकी आंख लग गई का इस्तेमाल करें।  आगर समय कोई राधिका कोई देखता है तो खड़े खड़े झड़ जाता है क्योकी राधिका की … Read more