भाई और बहन की सेक्स कहानियां Chapter 4

 




भाई और बहन की सेक्स कहानियां Chapter  4





ज़ाहिद के लंड से निकलती मनी की धार इतनी तेज और गरम थी. कि शलवार में मलबोस होने के बावजूद शाज़िया को ऐसे लगा. जिसे उस के भाई ने उस की चूत के अंदर ही अपना पानी निकाल दिया हो.


अपने सगे भाई को अपनी टाँगों के दरमियाँ फारिग होता देख कर शाज़िया तो शरम से पानी पानी हो गई.


मगर साथ ही शाज़िया ने सकून का साँस भी लिया. क्यों कि ना जाने क्यों शाज़िया को ये शक हुआ कि अपनी गर्मी निकालने के बाद शायद उस का भाई अब उस की जान बक्शी कर देगा. मगर ये शाज़िया की भूल थी.


क्यों कि शाज़िया के शोहार के मुक़ाबले उस का भाई ज़ाहिद उन मर्दो में से था. जिन के लंड से एक बार पानी निकलने के बाद उन में चुदाई का जोश पहले से ज़्यादा भर जाता था. और वो रात भर कई कई बार फारिग हो कर भी फुद्दि के प्यासे रहते थे.


इसीलिए अपने लंड की मनी से अपनी बहन की शलवार को तर ब तर करने के बाद भी ज़ाहिद उसी जोश में अपनी बहन के गालो और गर्दन को चूमता और काटता रहा.


जब शाज़िया ने देखा कि उस के भाई पर उस की किसी बात का असर नही हो रहा. तो अपनी बे बसी के मारे उस की आँखों से आँसू जारी हो गए.


गुस्से में आते हुए उस ने ज़ाहिद को एक ज़ोर दार धक्का मारा. तो ज़ाहिद की पकड़ शाज़िया के जिस्म से छूट गई. और झटके से ज़ाहिद अपनी बहन के पहलू में गिर गया.


ज्यों ही ज़ाहिद बिस्तर पर गिरा. शाज़िया ने उठ के कमरे से जाने की बजाय एक दम अपनी शलवार का नाडा खोला और साथ ही गुस्से में आ कर अपनी मलमल की पतली कमीज़ को अपनी भारी छातियों से पकड़ कर फाड़ दिया.


शाज़िया के इस अमल से वो ना सिर्फ़ नीचे से बिल्कुल नंगी हुई गई. बल्कि ऊपर से उस के मम्मे अपने भाई के सामने नीम नंगे हो गये.


अपने जिस्म को अपने भाई के सामने आधा नंगा करते ही शाज़िया रोते रोते बोली” लो भाई मेने खुद ही अपने आप को तुम्हारे लिए नंगा कर दिया है,आगे बडो और नोच लो मेरे नंगे जिस्म को,पूरी कर लो अपनी गंदी हवस को अपनी बहन के जिस्म से खेल कर”


ज़ाहिद ने जब अपनी बहन की आँखों में आँसू देखे. तो उस का खड़ा हुआ लंड मुरझा कर बैठने लगा.जब कि ज़ाहिद का पत्थर दिल एक दम से पिघल गया.


ज़ाहिद को अपने आप से शरम आने लगी.और अपने ऊपर लानत भेजते हुए ज़ाहिद ने एक दम अपने कपड़े उठाए और शाज़िया को रोती छोड़ के वो उस के कमरे से निकल आया.


आज ज़ाहिद को उस की बहन के आँसुओं ने मजबूर कर दिया और वो चाहते हुए भी अपनी सग़ी बहन का रेप ना कर सका.


अपने कमरे में लेट कर ज़ाहिद अपने और शाज़िया के बारे में सोचने लगा.कि लाख कोशिश के बावजूद शाज़िया उस के साथ चुदाई पर राज़ी नही हो रही. तो बेहतर है कि उसे उस के हाल पर छोड़ दिया जाए.


और उस ने ये तय कर लिया कि वो अब कभी ग़लती से भी अपनी बहन के मुतलक सोचे गा भी नही.


भाई के कमरे से जाने के बाद शाज़िया काफ़ी देर अपने बिस्तर पर पड़ी अपने आँसू बहाती रही. 


फिर जब कुछ देर बाद उस ने रोना बंद किया. तो शाज़िया को अपनी चूत के ऊपर खारिश महसूस हुई.


शाज़िया ने बे इख्तियारी में शलवार के ऊपर से ही अपने हाथ को अपनी चूत पर रख कर खुजली करनी चाही. तो शाज़िया के हाथ की उंगलियाँ उस की शलवार के ऊपर छोड़े हुए अपने सगे भाई के थिक वीर्य से जा टकराया.


शाज़िया की शलवार पर लगा उस के भाई का वीर्य अब थोड़ा थोड़ा खुशक होने लगा था. जिस की वजह से उस जगह पर जहाँ ज़ाहिद का वीर्य गिरा था. शाज़िया की शलवार का वो हिस्सा वीर्य के सोखने की वजह से अकड़ कर सख़्त हो गया था. 


ज़ाहिद का वीर्य इतना ज़्यादा और इस कदर थिक हो कर शाज़िया की शलवार के ऊपर गिरा था. कि थोड़ा सूखने के बावजूद उसके अपने भाई का वीर्य शाज़िया की उंगलियों पर चिपक सा गया था


शाज़िया को ज्यों ही अहसास हुआ कि उस का हाथ अपने ही भाई की मनी सर भर गया है. तो वो फॉरन उठी और उस ने अपनी शलवार को अपने जिस्म से अलहदा कर के दूर कोने में पड़ी टोकरी में फैंक दिया. 


उस के बाद शाज़िया आधी नंगी चलती हुई बाथरूम में गई और अपने हाथ को अच्छी तरह से धो कर अलमारी से दूसरी शलवार कमीज़ निकाल कर पहनी. और अपने कमरे के दरवाज़े को फिर से लॉक लगा कर बिस्तर पर दुबारा सोने के लिए लेट गई.


अगली सुबह शाज़िया के उठने से पहले ही ज़ाहिद अपनी नोकरी पर जा चुका था. 


शाज़िया भी तैयार हुई और नाश्ता कर के अपने स्कूल रवाना हो गई. 


शाज़िया ने नीलोफर से नाराज़गी के बाद से नीलोफर वाली स्कूल वॅन में जाना छोड़ दिया था. इसीलिए उसे स्कूल पहुँच कर पता चला कि नीलोफर आज स्कूल नही आई.


अंदर अपने घर में छुट्टी कर के बैठी नीलोफर ने अपने सुबह सवेरे के काम निबटा कर ज़ाहिद को फोन कॉल मिला दी.


नीलोफर को ज़ाहिद से बात और मुलाकात किए काफ़ी दिन हो चुके थे. इसीलिए आज वो ज़ाहिद से बात कर के पता करना चाहती थी. कि उसे अपनी बहन शाज़िया की फुददी में अपना लंड डालने का फक्र अब तक नसीब हुआ है या नही.


अपने पोलीस स्टेशन में बैठे ज़ाहिद ने नीलोफर का नंबर अपने मोबाइल पर देखा तो फॉरन फोन उठा लिया.


ज़ाहिद: हेलो नीलोफर कैसी हो.


नीलोफर: में ठीक हूँ यार,तुम सूनाओ क्या चल रहा है?.


“बस यार वो ही रोज़ की रूटीन” ज़ाहिद ने नीलोफर को बोझिल आवाज़ में जवाब दिया.


ज़ाहिद के इस अंदाज़ में बात करने से नीलोफर समझ गई. कि ज़ाहिद अभी तक अपनी बहन शाज़िया को चोद नही पाया है.


“इतने मायूस क्यों हो,लगता है शाज़िया के मामले में तुम्हारी दाल नही गली अभी तक” नीलोफर ने ज़ाहिद से पूछा.


“बस यार कुछ ऐसा है बात समझो” ज़ाहिद ने जवाब दिया.और फिर नीलोफर के इसरार पर ज़ाहिद ने सारी बात उसे तफ़सील से बयान कर दी.


ज़ाहिद की बात ख़तम होते ही नीलोफर ने ज़ोर का कहकहा लगाया और इंडियन फिल्म निकाह का गाना ,


“दिल के अरमां आँसुओं में बह गये

हम वफ़ा कर के भी तेन्हा रह गये”.


की तर्ज का एक शेर बोली,


“ लंड के अरमां ,मूठ लगा कर बह गये.

हम लंड नंगा कर के भी, कंवारे रह गये.”


ज़ाहिद नीलोफर की हँसी और उस का सुनाया शेर सुन कर गुस्सा हो गया और बोला “ बहन की लौडी मुझे शर्मिंदा करवा कर तेरी हँसी निकल रही हैं”.


“गुस्सा मत करो में कोई हल निकालती हूँ” नीलोफर ने ज़ाहिद को गुस्से में आते सुना तो फॉरन जवाब दिया.


कहते हैं ना कि “चोर चोरी से जाय,मगर हेरा फेरी से ना जाय” की मिसाल के मुताबिक नीलोफर की बात सुन कर ज़ाहिद को अपने आप से किया रात वाला वादा भूल गया. और अपने गुस्से को ठंडा करते हुए उस ने नीलोफर से इश्तियाक भरे लहजे में फॉरन पूछा “ तुम क्या करो गी अब”


“इस जुम्मे (फ्राइडे) को जो तुम्हारे पड़ोस में शादी हो रही है,वो हमारे रिश्ते दार हैं,और में भी उस शादी में शामिल हो रही हूँ” नीलोफर ने ज़ाहिद से कहा.


“ इस शादी में तो में भी हूँ गा,तो फिर?” ज़ाहिद ने नीलोफर की बात काटते हुए कहा.


“जिस लड़की की शादी है वो शाज़िया की अच्छी दोस्त है,इसीलिए शाज़िया और तुम्हारी अम्मी भी इस में ज़रूर शामिल हों गीं, तो में पूरी कोशिश करूँगी कि शाज़िया की अपने साथ नाराज़गी दूर करवा लूँ” नीलोफर बोली.


“मगर शादी के रश में तुम उस से मेरी बात कैसे करो गी” ज़ाहिद नीलोफर की बात को ना समझते हुए पूछने लगा.


“तुम जुम्मे को अपनी अम्मी और शाज़िया के साथ मुझे शादी वाले घर मिलो,बाकी सब तुम मुझ पर छोड़ दो” कहते हुए नीलोफर ने फोन काट दिया.


नेक्स्ट डे ज़ाहिद फिर अपनी ड्यूटी पर था कि उसे नीलोफर का फिर फोन आया. 


“ख़ैरियत तो है, अभी कल ही तो तुम से बात हुई थी?” ज़ाहिद ने नीलोफर का फोन सुनते ही पूछा.


“यार आज में भाई के साथ बाज़ार आई हुई हूँ. सोचा तुम फ्री हो तो तुम से मुलाकात ही कर लूँ”नीलोफर को ज़ाहिद से चुदाये काफ़ी दिन गुज़र चुके थे. इसीलिए उसे आज ज़ाहिद के मोटे लंड की शिद्दत के साथ अपनी फुद्दि में तलब हो रही थी.


ज़ाहिद समझ गया कि नीलोफर को उस के लंड की प्यास लगी हुई है.इसीलिए वो उस से मिलना चाह रही है.


नीलोफर की तरह ज़ाहिद को भी फुद्दि मारे काफ़ी दिन हो चुके थे. इसीलिए नीलोफर की बात सुन कर उस ने एक घंटे बाद उस को अपने पुराने मकान पर मिलने का कहा.


नये थाने में पोस्ट होने के बाद भी ज़ाहिद ने काला गुजरं पोलीस चोकी के करीब लिया हुआ किराए का मकान अभी तक अपने पास रखा हुआ था.


ज़ाहिद के बताए हुए टाइम पर जमशेद अपनी बहन को ले कर ज़ाहिद के पास आन पहुँचा.


मकान के कमरे में जाते ही नीलोफर ने अपने गले में लटके हुए बॅग और दुपट्टे को एक झटके से अपने जिस्म से उतार कर कमरे में पड़े सोफे पर फैंका. और तेज़ी के साथ दौड़ती हुई ज़ाहिद की खुली बाहों में जा गिरी.


नीलोफर को अपनी बाहों के हसार में जकड़ते ही ज़ाहिद ने नीलोफर के मुँह,गालो और होंटो पर किस्सस की बरसात कर दी.


जमशेद अपनी बहन को एसआइ ज़ाहिद के साथ इस तरह गरम जोशी से मिलता देख कर मुस्कुराया. और उस ने नीलोफर के बॅग में से उस का सॅमसंग गॅलक्सी नोट मोबाइल फोन निकाल कर अपनी बहन और एसआइ ज़ाहिद की वीडियो बनाना शुरू कर दी.


जमशेद अपनी बहन और ज़ाहिद की वीडियो बनाने के साथ साथ एक एक कर के अपने कपड़े उतारने लगा और आख़िर कार बिल्कुल नंगा हो गया. 


ज़ाहिद ने जब जमशेद को वीडियो बनाने के साथ साथ नंगा होते देखा. तो उसे भी जोश आया और उस ने आहिस्ता आहिस्ता कर के पहले नीलोफर के कपड़े उतार के उसे बे लिबास कर दिया. 


फिर वो खुद भी जल्दी से अपने कपड़े उतार कर नीलोफर और जमशेद के सामने मुकम्मल नंगा हो गया.


जब जमशेद ने देखा कि उस समेत कमरे में सारे जिस्म अपने अपने कपड़ो से बे नियाज़ हो गये हैं. तो उस ने अपने हाथ में पकड़ा हुआ अपनी बहन का मोबाइल कमरे के टेबल पर इस पोज़िशन में रखा. जिस एंगल पर ज़ाहिद के कमरे में बिछा हुआ बेड पूरे का पूरा कवर हो सकता था.


जमशेद मोबाइल फोन की वीडियो रेकॉर्डिंग को ऑन छोड़ कर ज़ाहिद की बाहों में जकड़ी अपनी बहन के पीछे आया.और नीलोफर की गान्ड को अपने हाथों में दबोचते हुए पीछे से उस की गर्दन पर प्यार से काटने लगा.




अपनी बहन की गर्दन को चूमने के साथ साथ जमशेद के हाथ आगे बढ़े और ज़ाहिद की छाती में दबे दबे अपनी बहन के जवान मम्मो को हाथ में ले कर मसलने लगा.


“हाई आज फिर मेरी बहन को दो लंड से एक साथ चुदवाने का दिल कर रहा है” जमशेद ने ज़ाहिद की तरफ देखते हुए उस से कहा. और अपने तने हुए लंड को पीछे से अपनी बहन की गान्ड की दरार में फैरने लगा.


“क्यों ना हम इसे बिस्तर पर लिटा कर एक साथ प्यार करें” ज़ाहिद ने जमशेद की बात का जवाब देते हुए कहा. 


साथ ही ज़ाहिद ने नीलोफर को पास पड़े पलंग पर पीठ के बल लिटा दिया. इस के साथ ही ज़ाहिद नीलोफर की एक तरफ लेट कर उस के एक मम्मे को अपने मुँह में लेते हुए सक करने लगा.


जब कि जमशेद ने नीलोफर की दूसरी तरफ लेट कर उस के दूसरे मम्मे को अपने मुँह में भरा. और अपनी एक उंगली अपनी बहन की चूत में गुस्सेड कर आहिस्ता आहिस्ता अंदर बाहर करने लगा. 


दोनो मम्मो को एक साथ चुसवाने और चूत के देने पर अपने भाई की रगड़ को महसूस कर के नीलोफर बे इंतेहा गरम हो गई. 


मज़े का ये आलम नीलोफर की बर्दाश्त से बाहर हो रहा था. इस लिए गरम होते हुए नीलोफर चली, “आह आह अब रहा नहीं जाता अब तुम लोग जल्दी से मुझे चोदो दो प्लीज़.” 


नीलोफर की लज़्ज़त भरी आवाज़ सुन कर मम्मे को चूस्ते हुए जमशेद ने ज़ाहिद की तरफ देखा. और उसे अपनी आँखों के इशारे से नीलोफर की चूत चोदने का कहा.


साथ ही जमशेद नीलोफर के पहलू से उठा और उठते साथ उस ने अपना मोटा लंड अपनी बहन के खुले हुए होंठो के दरमियाँ रख दिया.


अपने भाई के गरम सख़्त लंड को अपने होंठो के ऊपर पा कर नीलोफर ने बेचैनी से अपना मुँह खोला. और जमशेद के लंड को अपने मुँह के अंदर ले जा कर उस का चुसाइ लगने लगी.


ज़ाहिद,जमशेद की हिदायत पर अमल करते हुए नीलोफर की टाँगों के दरमियाँ बैठा. और उस ने नीलोफर की टाँगों को उठा कर अपने कंधो पर रख लिया. इस के साथ ही ज़ाहिद ने एक झटके में अपना लंड नीलोफर की चूत में पूरे का पूरा दाखिल कर दिया.


नीलोफर की चूत में ज़ाहिद का लंड फिसलता हुआ उस की गान्ड तक अंदर चला गया. तो नीलोफर मज़े से चिल्ला उठी “हाईईईईईईईईईई ज़ाहिद तुम्हारा लंड तो सीधा मेरी बच्चे दानी पर जा कर चोट मार रहा है,अहह मुझे बहुत मज़ा मिल रहा है.”



“आज काफ़ी दिनो बाद तुम्हारी चूत को चोद कर मुझे भी बहुत ही स्वाद मिल रहा है मेरी जान” ज़ाहिद ने नीलोफर की चुदाई करते हुए उस के मम्मो को हाथ में थामा और जोश से बोला.


“ज़ाहिद आज मेरी चूत को अपनी बहन शाज़िया की चूत समझ कर चोदो” नीलोफर ने ज़ाहिद की बात के जवाब में कहा.


नीलोफर ने ज्यों ही शाज़िया का नाम अपने मुँह से निकाला. तो अपनी बहन का नाम सुनते ही ज़ाहिद के जिस्म में एक करंट से दौड़ गया.


ज़ाहिद के लंड की रगों में खून पूरे जोश से दौड़ने लगा.जिस से ज़ाहिद का लंड पहले से भी ज़्यादा सख़्त हो गया.


ज़ाहिद ने मज़ीद जोश में आते हुए अपनी आँखे बंद कीं. और अपनी बहन शाज़िया के गरम प्यासे बदन को ज़हन में लाते हुए .नीलोफर की फुद्दि को अपनी बहन शाज़िया की चूत समझ कर ज़ोरदार तरीके से चोदना शुरू कर दिया.


ज़ाहिद के जोशीले और तेज घस्सो ने नीलोफर के जिस्म को उधेड़ कर रख दिया. और फिर चन्द ही लम्हों बाद ज़ाहिद “शाज़िय्ाआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ,मेरिइईईईईईईईईई बहन कहते हुआ नीलोफर की चूत में फारिग हो गया.


“हां भर दो अपनी बहन शाज़िया की गरम फुद्दि अपने लंड के पानी से ज़ाहिद” नीलोफर ने ज़ाहिद के जिस्म के गिर्द अपनी बाहों और टाँगों को लपेट कर उस के लंड को अपनी चूत की तह तक ले जाने पर मजबूर कर दिया. 


ज़ाहिद ने आज अपनी बहन शाज़िया के नाम पर उस की सहेली नीलोफर की चूत में इतना पानी छोड़ा. कि ज़ाहिद खुद भी हेरान हो गया कि ये इतना ज़्यादा पानी उस के लंड से कैसे निकला.




ज़ाहिद ज्यों ही नीलोफर को चोद कर उस के ऊपर से हटा. तो जमशेद फॉरन अपना लंड नीलोफर के मुँह से निकाल कर अपनी बहन की टाँगों के दरमियाँ आया. और अपनी बहन की चूत से बह बह कर निकलते ज़ाहिद के पानी को देखने लगा.




ज़ाहिद के गरम पानी से भरी हुई बहन की चूत को देख कर जमशेद को ना जाने किया सूझी. कि वो एक दम आगे बढ़ा और अपनी बहन की चूत पर अपना मुँह रख कर ज़ाहिद के लंड के पानी को अपनी बहन की फुद्दि से चूसने लगा.


“उफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ जमशेद ये तुम क्या कर रहे हो मेरे भाई” नीलोफर ने अपने भाई को ज़ाहिद का वीर्य चाटते देखा तो हडबडाती हुई बोली.


“कुछ नही बाजी में तो बस आप से अपने प्यार का इज़हार कर रहा हूँ” जमशेद ने ज़ाहिद के पानी से तर होती अपनी बहन की गान्ड के सुराख पर अपनी ज़ुबान फेरते हुए कहा.


“मगर भाई ये बहुत गंदी हरकत है जो तुम इस वक्त कर रहे हो” नीलोफर ने अपने भाई को ज़ाहिद की मानी चाटने से रोकने के लिए कहा.


“बाजी आप जानती हैं कि में आप से कितना प्यार करता हुआ,इसीलिए मुझे आप मत रोको ” जमशेद ने अपनी बहन की गान्ड से ले कर उस की चूत तक अपनी ज़ुबान को फेरते हुए कहा.


नीलोफर अपने भाई की बात सुन कर खामोश हो गई. और मज़े से बे हाल होते हुए अपनी चूत उठा उठा कर अपने भाई के होंठो पर रगड़ने लगी. जिस वजह से जमशेद के होंठ ज़ाहिद के लंड के जूस से भर गये.


कुछ देर मज़ीद अपनी बहन की चूत को सक करने के बाद जमशेद उठा और उस ने ज़ाहिद के पानी से भरी हुई अपनी बहन की फुद्दि में अपना लंड डाल दिया.


ज़ाहिद के पानी से पच पुच करती चूत में जमशेद का लंड बगैर किसी दिक्कत के टहलता हुआ एंटर हुआ.


जमशेद भी ज़ाहिद की तरह पूरे जोश में था. उस ने अपने लंड को अपनी बहन की चूत में पेलते हुए नीलोफर के मुँह पर अपने मुँह रखा. और चुदाई के साथ साथ अपनी बहन के होंठो को सक करते हुए अपने होंठो पर लगा ज़ाहिद का वीर्य अपनी बहन से शेयर करने लगा.


नीलोफर भी ज़ाहिद के लंड का ज़ायक़ा मज़े दार महसूस हुआ. और उस ने भी जोश में आते हुए अपने दाँतों से अपने भाई के नमकीन होंठो को काटना और खाना शुरू कर दिया.


जमशेद अपनी बहन और ज़ाहिद की चुदाई और नीलोफर की चुसाइ की वजह से पहले ही बहुत गरम हो चुका था. 


इसीलिए ज़ाहिद के पानी से तर अपनी बहन की फुद्दि में जमशेद का अंदर बाहर होता हुआ लंड कुछ ही देर में अपना पानी छोड़ने लगा. और जमशेद के लंड का पानी भी अपनी बहन की बच्चा दानी में जा कर ज़ाहिद के पानी से मिल गया.


ज़ाहिद और जमशेद की ज़ोरदार चुदाई ने नीलोफर की फुद्दि और जिस्म को थका कर रखा दिया. और वो बिस्तर पर दो मर्दो के दरमियाँ पड़ी अपनी बिखरी सांसो को संभालने लगी.


जब कि बिस्तर के कोने पर पड़े नीलोफर के मोबाइल फोन ने उन तीनो की मस्त चुदाई के सारे मंज़र को अपने अंदर महफूज़ कर लिया.


अगले जुम्मे वाले दिन ज़ाहिद और उस की अम्मी शादी पर जाने के लिए तैयार हो रहे थे. तो रज़िया बीबी ने देखा कि शाज़िया तैयार नही हो रही. 


रज़िया बीबी जानती थी कि दुल्हन शाज़िया की सहेली है. इसीलिए जब रज़िया ने शाज़िया को तैयार होते नही देखा तो उन को हैरत हुई और रज़िया बीबी ने शाज़िया से पूछा “ शाज़िया क्या बात है तुम क्यों तैयार नही हो रहीं”


“अम्मी मेरा दिल नही कर रहा,आप हो आएँ” शाज़िया ने अम्मी को जवाब दिया.


“बेटी कैसी बातें करती हो,एक तो दुल्हन तुम्हारी पुरानी सहेली है,ऊपर से पड़ोस का मामला है,इसीलिए तुम्हारा जाना लाज़मी है,उठो तैयार हो जाओ” रज़िया बीबी ने शाज़िया की बात सुन कर अपनी बेटी को समझाते हुए कहा.


शाज़िया का दिल जाने को नही था.मगर अपनी अम्मी के कहने पर तैयार होने लग गई.


शाज़िया ने अपने चेहरे पर हल्का हल्का मेक अप किया. और अपनी शादी के दिनो वाला एक पुराना मगर तेज कलर वाला एक सूट निकाल कर पहन लिया


जब शाज़िया तैयार हो कर कमरे से बाहर निकली. तो रज़िया बीबी आज काफ़ी अरसे के बाद अपनी बेटी को मेकप किए हुए और शादी के शोख रंगो वाले कार्प्डों में मलबोस देख कर एक दम बोलीं “ चश्मे बद्दूर मेरी बेटी आज कितनी प्यार लग रही है”




शाज़िया अपनी अम्मी के मुँह से अपनी तारीफ सुन कर मुस्करा दी और बोली “ अम्मी आप भी ना”.


“बेटी तलाक़ के बाद तो तुम ने अपना ध्यान रखना ही छोड़ दिया है,जो कि अच्छी बात नही” रज़िया बीबी ने शाज़िया को शरमाते देखा तो फिर बोली.


इस से पहले कि शाज़िया से मज़ीद और बात करती. ज़ाहिद एक दम घर में दाखिल हुआ और बोला “ चलो अम्मी देर हो रही है”.


घर में दाखिल होते वक्त ज़ाहिद की नज़र भी जब शादी में जाने के लिए तैयार अपनी बहन पर पड़ी.तो अपनी अम्मी की कमरे में मौजूदगी के बावजूद ज़ाहिद ने अपनी बहन के हुश्न का एक भरपूर जायज़ा लिया. 




और अपने दिल ही दिल में अपनी अम्मी की तरह अपनी बहन के जवान गरम बदन की तारीफ किए बिना ना रह सका.


जब सब घर वाले एक साथ शादी वाले घर पहुँचे. तो नीलोफर को वहाँ पहले से माजूद देख कर शाज़िया को हैरत हुई.


शाज़िया नीलोफर के सामने नही होना चाहती थी. मगर रज़िया बीबी की नज़र कुर्सी पर बैठी हुई नीलोफर पर पड़ी.


रज़िया बीबी जानती थी कि नीलोफर शाज़िया की सहेली है. (मगर उन दोनो की नाराज़गी का उस को ईलम नही था)


इसीलिए नीलोफर को बैठा देख कर शाज़िया के ना चाहने के बावजूद उस की अम्मी नीलोफर की तरफ चल पड़ी .


शाज़िया को भी ब अमरे मजबूरी अपनी अम्मी के पीछे चलते हुए नीलोफर के पास जाना पड़ ही गया.


नीलोफर रज़िया बीबी और शाज़िया से बहुत तपाक से मिली और उन को अपने पास बैठने की दावत दे दी.


रज़िया बीबी अपनी बेटी की सहेली से काफ़ी अरसे बाद मिल कर बहुत खुश हो रही थी. इसीलिए वो नीलोफर के पास ही बैठ गईं.


शाज़िया नीलोफर के पास बैठना तो नही चाहती थी .मगर अपनी अम्मी के साथ नीलोफर से अपनी नाराज़गी का ज़िक्र भी नही करना चाहती थी.


इसीलिए उसे भी चर-ओ-नाच्छर अपनी अम्मी के साथ नीलोफर के पास बैठना पड़ गया.


नीलोफर शाज़िया को साथ बैठा देख कर बहुत खुश हुई और उस ने रज़िया बीबी के साथ साथ शाज़िया से भी बात चीत शुरू कर दी.


अपनी अम्मी के सामने शाज़िया के पास नीलोफर की बातों का जवाब देने के सिवा कोई चारा नही था. इसीलिए वो ना चाहते हुए भी हूँ हां में नीलोफर की बातों का जवाब देती रही.


थोड़ी देर बाद ज़ाहिद भी किसी बहाने लॅडीस सेक्षन में आ कर उन सब के पास बैठ गया.


शाज़िया को अपने अम्मी की मौजूदगी में नीलोफर और अपने भाई के साथ बैठने में उलझन महसूस हो रही थी. मगर उधर से उठ कर कहीं और जाना उस के लिए नामुमकिन बात थी.


कुछ देर बाद रज़िया बीबी उठ कर दुल्हन की माँ से मिलने के लिए गई. तो शादी की मूवी बनाने वाला उन की तरफ आन कर उन सब की मूवी बनाने के साथ उन की फोटो भी खैंचने लगा.




मूवी वाले को सब की फोटो खैंचते देख कर नीलोफर को मज़ाक सूझा और वो अपने सेल फोन को ज़ाहिद के हाथ में देते हुए बोली “ ज़ाहिद साब आप मेरी एक फोटो खींचेंगे प्लीज़?”


ज़ाहिद को अपना मोबाइल दे कर नीलोफर उठी तो ज़ाहिद ने उस की एक तस्वीर खैंच ली.




शाज़िया ने जब देखा कि उस की अम्मी उधर से जा चुकी हैं. और उस का भाई ज़ाहिद उस की सहेली नीलोफर के साथ मसरूफ़ है. तो उस ने मोका जान कर वहाँ से खिसकने का सोचा.


ज्यों ही शाज़िया जाने के लिए अपनी कुर्सी से उठी. तो नीलोफर फॉरन दौड़ कर उस के पास आन पहुँची और ज़ाहिद की तरफ देखते हुए ज़ू महनी ज़ुबान में बोली “ ज़ाहिद साब किया आप हम दोनो की इकट्ठी “लेना” पसंद करेंगे, फोटो”.


नीलोफर “लेने” के लफ़्ज पर ज़ोर देते हुए शाज़िया की तरफ देख कर मुस्कुराइ.


शाज़िया को नीलोफर की इस बात पर गुस्सा आया मगर ज़ाहिद का लंड नीलोफर की बात सुन कर खड़ा होने लगा और वो भी बोला “ क्यों नही आप दोनो की एक साथ ले कर मुझे बहुत ही ज़्यादा मज़ा आएगा.”


शाज़िया ने जब अपने भाई को नीलोफर की ज़ू महनी बात ( द्विअर्थि बात ) को आगे बढ़ाते सुना. तो उसे बहुत शरम आई.कि कहीं ज़ाहिद और नीलोफर की बकवास को किसी इर्द गिर्द के लोगो ने सुन लिया तो क्या हो गा.


इस से पहले कि शाज़िया अपनी जगह से हट पाती. ज़ाहिद ने एक दम से शाज़िया और नीलोफर की एक साथ फोटो खींच ली.


फुट खैंचते वक्त मोबाइल फोन के लेंस में से ज़ाहिद ने अपनी बहन के उसकी कमीज़ में कसे हुए बड़े बड़े मम्मो का जायज़ा लिया. तो पॅंट में से उस का लंड अपनी बहन की बड़ी बड़ी चुचियों को देख कर उछलने लगा.




ज्यों ही ज़ाहिद ने उन दोनो की तस्वीर खैंची. तो शाज़िया गुस्से में अपना पैर पटकते हुए स्टेज पर बैठी हुई दुल्हन के पास चली गई.


ज़ाहिद नीलोफर के पास खड़ा शाज़िया को दुल्हन की तरफ जाता देखता रहा.


शाज़िया स्टेज के पास गई और दुल्हन बनी अपनी सहेली को शादी की मुबारक देने लगी . उस वक्त उस की गान्ड का रुख़ नीलोफर और ज़ाहिद की तरफ था. 


ज़ाहिद नीलोफर के साथ खड़ा हो कर ब गौर टाइट कपड़ों में मलबूस अपनी बहन की उठी हुई भारी गान्ड की पहाड़ियों को देख देख कर मस्त हो रहा था.




ज़ाहिद को अपनी बहन की गान्ड की गहराइयों में डूबा देख कर नीलोफर बोली “ क्यों ज़ाहिद क्या सोच रहे हो अपनी बहन की बड़ी गान्ड को देख कर”.


“यार दिल कर रहा है कि जा कर अपनी बहन की इस दिल फरेब गान्ड की पहाड़ियों पर “सौ” (100 रुपीज़) का एक नोट रखूं और ढोल वाले को बुला कर अपनी बहन की मस्तानी गान्ड की “वेल” ही दे दूं.


(हमारे इलाक़े में शादी ब्याह की रश्मों में ढोल या बॅंड बाजे वाले पर पैसे लुटाने की रसम होती है. जिसे हम लोग “वेल” देना कहते हैं)


नीलोफर ज़ाहिद की बात सुन कर कहकहा लगा कर हँस पड़ी.


दुल्हन की रुखसती के बाद जब सब मेहमान एक एक कर के रुखसत होने लगे. तो रज़िया बीबी ने नीलोफर को अपने घर आ कर चाय पीने की दावत दे दी.


नीलोफर तो इसी मोके की तलाश में थी.इसीलिए नीलोफर बिना किस झिझक शाज़िया की अम्मी की बात मान कर उन के साथ उन के घर चली आई.


शाज़िया को रह रह कर अपनी अम्मी पर गुस्सा आ रहा था. कि वो क्यों “इस मुसीबत” (नीलोफर) को अपने साथ चिपका कर उन के घर ले आईं हैं.


मगर अब क्या हो सकता था. अब नीलोफर उन के साथ आ कर उन के ड्राइंग रूम में बैठी उस की अम्मी से बातों में मसरूफ़ थी.


शाज़िया अपनी अम्मी और नीलोफर को ड्राइंग रूम में बातें करता छोड़ कर किचन में चाइ बनने चली आई. जब कि ज़ाहिद अपने कमरे में आ बैठा.


कुछ देर बाद जब रज़िया बीबी किसी काम के सिलसिले में ड्राइंग रूम से बाहर निकली. तो नीलोफर ने फॉरन अपने मोबाइल से ज़ाहिद को टेक्स्ट करते हुए कहा. कि वो किसी तरह अपनी अम्मी को कुछ वक्त के लिए घर से बाहर ले जाए.ता कि नीलोफर को अकले में शाज़िया के साथ खुल कर बात करने का मोका मिले सके.


ज़ाहिद की अम्मी कुछ दिनो से अपने बेटे को कह कह कर थक गई थी. के वो उसे सीएमएच झेलम (कम्बाइड मिलिटरी हॉस्पिटल) में अपने दाँतों (टीत) की सफाई के लिए डेंटिस्ट के पास ले चले.मगर अपनी नोकरी की मसरूफ़ियत की वजह से ज़ाहिद कई दिन से अम्मी को वक्त ना दे पा रहा था.


इसीलिए नीलोफर ने आज जब उसे अपनी अम्मी को घर से बाहर ले जाने का कहा.तो ज़ाहिद के लिए ये अच्छा मोका था. कि वो अम्मी को डॉक्टर के बहाने घर से बाहर ले जाए.


ज़ाहिद ने फॉरन नीलोफर को रिप्लाइ किया कि वो अभी अम्मी को ले कर डेंटिस्ट के पास जा रहा है. और दो घंटे से पहले वापिस नही लोटे गा.


नीलोफर को टेक्स्ट का रिप्लाइ करते ही ज़ाहिद अपने कमरे से निकला. और अम्मी के पास आ कर उन को डेंटिस्ट के पास चलने का कहा.


रज़िया बीबी अपनी बेटी शाज़िया को डॉक्टर के पास जाने का बता कर अपने बेटे ज़ाहिद के साथ डेंटिस्ट के पास चली गई.


अम्मी की गैर मौजूदगी में शाजिया के लिए अब नीलोफर के साथ ड्राइंग रूम में अकेले बैठने के सिवा को चारा नही था. 


इसीलिए मजबूरन वो चाय की ट्रे उठ कर नीलोफर के पास चली आई और उसे चाय पेश की.


दोनो सहेलियाँ ड्राइंग रूम में खामोशी के साथ बैठ कर चाहिए पीने लगीं.


चाय से फारिग होते ही नीलोफर ने सामने सोफे पर बैठी शाज़िया को मुखातिब करते हुए कहा “शाजिया मुझे अंदाज़ा है कि मेने जो कुछ भी किया वो सब ग़लत है और में अपनी इस हरकत की तुम से माफी माँगना चाहती हूँ”.


नीलोफर अपनी बात ख़तम करते ही सोफे से उठी. और माफी माँगने के अंदाज़ में अपने दोनो हाथ जोड़ कर शाज़िया के सामने खड़ी हो गई.


(कहते हैं कि दोस्तों में किसी भी किस्म की ग़लत फहमी या नाराज़गी के बाद आपस में कम्यूनिकेशन ही वो कई फॅक्टर है.जो आपस की रंजिश को ख़तम करने में हेल्प करती है)


इसी लिए पिछले चन्द घंटो के दौरान ना चाहते हुए भी नीलोफर के साथ बातें करने की वजह से शाज़िया के दिल में अपनी दोस्त के लिए गुस्सा काफ़ी हद तक काम हो चुका था. 


फिर जब शाज़िया ने नीलोफर को अपने सामने हाथ जोड़ कर माफी माँगते देखा तो उस का दिल पसीज गया.



गुज़री सब बातों को भुला कर शाज़िया अपने सोफे से उठी और उस ने अपनी सहेली को गले से लगा लिया.


दोनो सहेलियो ने एक दूसरे को कस कर गले लगाया. तो नीलोफर के दरमियाने साइज़ के मम्मे शाज़िया के बड़े बड़े मम्मो के बोझ तले दब से गये.


“तुम ने वाकई ही मुझे माफ़ कर दिया है ना शाज़िया” नीलोफर ने शाज़िया के गले में बाहें डाले हुए पूछा.


“हां मेने तुम को सच्चे दिल से माफ़ कर दिया है नीलोफर” शाज़िया ने नीलोफर से अलग होते हुए जवाब दिया. और इस के साथ ही दोनो सहेलियाँ एक ही सोफे पर साथ साथ बैठ गईं.




फिर औरतों की आदत के मुताबिक शाज़िया और नीलोफर शादी में पहनी हुई दुल्हन की ज्वेलरी और लहंगे वग़ैरह पर अपनी अपनी राई देने लगीं. 


इन ही बातों के दौरान शाज़िया ने नीलोफर से उस के शोहर बारे में पूछा.


“यार मेरा अपने शोहर से आज कल बड़ा सख़्त झगड़ा चल रहा है,” नीलोफर ने शाज़िया के पूछने का जवाब दिया.


“क्यों क्या हुआ” शाज़िया ने नीलोफर से से दर्याफ़्त किया.


“बस यार क्या बताऊ कि मुझ से शादी से पहले ही मासूफ का मसकॅट में एक बूढ़ी औरत के साथ चक्कर था. और अब मेरे शोहर ने उस से शादी भी कर ली है,जिस का मुझे ईलम हो चुका है” नीलोफर ने शाज़िया को बताया.


“चलो खैर है तुम्हारे शोहर का दूसरी औरत से और तुम्हारा अपने ही भाई से चक्कर है तो हिस्सब बराबर” नीलोफर की बात सुन कर शाज़िया के मुँह से बे इख्तियार निकल गया.


नीलोफर को शाज़िया इस तरह के जवाब की उम्मीद नही थी. इसीलिए वो शाज़िया का जवाब सुन कर अपनी सहेली का मुँह देखने लगी.


ज्यों ही शाज़िया को अहसास हुआ कि उसे नीलोफर को उस के मुँह पर इस किसम का जवाब नही देना चाहिए था. तो उस ने नीलोफर की तरफ देखते हुए फॉरन कहा “यार पता नही कैसे मेरे मुँह से ये बात निकल गई,आइ आम सो सॉरी”.


“कोई बात नही यार मेने बुरा नही महसूस किया” नीलोफर ने शाज़िया को बड़े प्यार से जवाब दिया.


नीलोफर के जवाब पर शाज़िया को सकून मिला और उस ने नीलोफर से कहा “ यार अगर बुरा ना मानो तो एक बात पूछूँ”


“तुम मेरी सहेली हो,जो चाहिए पूछ लो,में तुम्हारी बात का हरगिज़ बुरा नही मानूँगी यार” नीलोफर ने जवाब दिया.


“यार मुझे आज तक ये समझ नही आई कि तुम ने क्यों ना सिर्फ़ अपने बल्कि मेरे भी भाई से इस किसम का “चक्कर” चला लिया” शाज़िया को ना जाने किया सूझी कि उस ने झिझकते हुए नीलोफर से उसी पुरानी बात का किस्सा छेड़ दिया.


नीलोफर शाज़िया की बात पर दिल ही दिल में बहुत खुश हुई. क्यों कि वो तो ये ही चाह रही थी. कि वो शाज़िया से फिर किसी तरह ज़ाहिद की बात स्टार्ट करे.


अब शाज़िया ने खुद ही इस बात को दुबारा से स्टार्ट कर दिया. तो नीलोफर के लिए ये सुनेहरी मोका था. कि वो अब शाज़िया को किसी तरह दुबारा अपनी राह पर चलाते हुए शाज़िया और ज़ाहिद की चुदाई का आगाज़ करवा सके.


“यार क्या बातों तुम तो जानती हो कि ये जवानी की आग कितनी ज़ालिम हो होती है. जब इस आग का शोला जिस्म में भड़कता है तो फिर इंसान को कुछ होश नही रहता,कि वो क्या कर रहा है” नीलोफर ने शाज़िया को उस के सवाल का जवाब देते हुआ कहा. और अपने एक हाथ को शाज़िया की मोटी रान पर आहिस्ता से रख दिया.


“ठीक है मगर फिर भी जो तुम कर रही हो वो बहुत ग़लत है नीलोफर” शाज़िया ने नीलोफर को समझाने के अंदाज़ में कहा.


“हां तुम कह तो सही रही हो मेने जो किया वो सब ग़लत और गुनाह है,मगर तुम ही बताओ इस दुनिया में कौन सा ऐसा इंसान है जो कोई गुनाह नही करता.मेरे शोहर ने शादी के बाद भी दूसरी औरत अपने पास रखी, क्या ये गुनाह नही” शाज़िया ने नीलोफर की बात का जवाब दिया.


“मगर फिर भी नीलोफर” शाज़िया ने नीलोफर की बात के जवाब में कुछ कहना चाहा.


“अगर मगर कुछ नही शाज़िया, चोर जानता है चोरी करना ग़लत है,लेकिन वो करता है,इसी तरह दुनिया में गुनाह और सवाब का पता होने के बावजूद भी हमारी तरह के लोग शैतान के बहकावे में आ जाते हैं, नीलोफर ने शाज़िया की टाँग पर अपने हाथ रखे हुए कहा.


ये शायद नीलोफर के लबो लहजे और उस की बातें करने का अंदाज़ था. की आज अपनी सहेली की बातें सुनते हुए शाज़िया को नीलोफर की कोई भी बात अजीब नही महसूस हुई. बल्कि ना जाने क्यों आज वो बहुत गौर से अपनी सहेली की जानिब मोत्वजो थी.


“तो तुम इस काम से बाज़ क्यों नही आ जाती” शाज़िया ने अपनी सहेली की बात सुन कर उसे फिर समझाते हुए कहा.


“क्या करूँ मेरा भाई मुझे प्यार ही इतना करता है कि चाहते हुए भी उसे रोकना अब शायद मेरे लिए ना मुमकिन बात है” ये कहते हुए नीलोफर ने अपने पर्स से अपना मोबाइल निकाला. और फोन में रेकॉर्ड की हुई जमशेद और ज़ाहिद के साथ अपनी चुदाई की मूवी को ऑन कर के मोबाइल शाज़िया के हाथ में पकड़ा दिया.


शाज़िया ने नीलोफर का दिया हुआ फोन अपने हाथ में ले लिया था .और मोबाइल पर चलती नीलोफर की चुदाई की मूवी को आँखे फाड़ फाड़ कर देखने लगी.


ये शायद नीलोफर से गुनाह और सवाब के बारे में की गई गुफ्तगू का असर था. या अपने ही प्यास ए जिस्म की गर्मी की मेहरबानी थी. कि शाज़िया आज काफ़ी टाइम बाद जब दुबारा अपने भाई के मोटे,सख़्त और तने हुए लंड को मोबाइल की स्क्रीन के ज़रिए अपनी सहेली की गरम फुद्दि में जाते देखने लगी. 


तो नज़ाने क्यों आज अपने ही भाई का नंगा जिस्म और मोटा लंड देख कर शाज़िया को शरम ना सिर्फ़ पहले के मुक़ाबले ज़रा कम महसूस हुई. बल्कि आज तो शाज़िया अपने ही भाई के लंड को बड़े गौर से देखने भी लगी थी.


शाज़िया आज पहली बार अपने भाई का पूरा वजूद बिना किसी एडटिंग या चेहरे को छुपाए बगैर देख रही थी.


शायद अपने भाई के पूरे जिस्म और लंड को उस के चेहरे समेत देखने का ही ये असर था. कि शाज़िया की फुद्दि जो कि उस के तलाक़ शुदा होने की वजह से गुज़शता दो साल से चुदाई की लज़्ज़त से महरूम थी.उसे आज पहली बार अपने ही सगे भाई के लंड की तड़प महसूस होने लगी. 


शाज़िया ने तो कभी ख्वाब में भी नही सोचा था. कि अपने ही भाई के लंड को देख कर उस की चूत कभी इतनी गीली हो गई . कि वो गर्मी से बहाल हो कर अपनी चूत का पानी भी छोड़ने लगेगी.


शाज़िया के अंदर इस तब्दीली की वजह शायद ये रही हो गी. कि वक्त गुज़रने के साथ साथ शाज़िया जाने अंजाने में अपने भाई की उस से छेड़ छाड़ और गंदी हरकतों की आदि होने लगी थी.


इसीलिए ज्यूँ ज्यूँ स्क्रीन पर चलती मूवी के सीन बदलते गये. त्यू त्यू शाज़िया के चेहरे के रंग बदलने के साथ साथ उस के जिस्म में भी बेचैनी सी होने लगी.


मूवी देखते देखते शाज़िया ने जब वो सीन देखा जिस में नीलोफर, ज़ाहिद को उसे अपनी बहन शाज़िया समझ कर चोदने का कहती है. और फिर ज़ाहिद, नीलोफर को चोदते चोदते “शाज़िया मेरी बहन्ंननननननणणन्” कहता हुआ नीलोफर की फुद्दि में अपना पानी गिरा देता है. तो मूवी का ये मंज़र देख कर शाज़िया की चूत की तह में एक हल चल मच गई.


शाज़िया तो अभी इस सीन से अपने आप को संभाल नही पाई थी. कि ज़ाहिद के वीर्य से तर नीलोफर की चूत पर जमशेद का लपकने और अपनी बहन की ताज़ा ताज़ा चुदि हुई फुद्दि को वहशियों की तरह सकिंग ने शाज़िया की रही सही कसर निकाल दी.


मूवी के ये दोनो मंज़र शाज़िया के लिए बे इंतिहा इरोटिक थे. जिन को देख कर शाज़िया को अपनी चूत का पानी अपनी टाँगो पर बहता हुआ महसूस होने लगा था.


शाज़िया के लिए पूरी मूवी देखना मुहाल हो गया. और उस ने घबरा कर मूवी बंद कर के मोबाइल फोन नीलोफर को वापिस लोटा दिया.


नीलोफर अपनी सहेली की बदलती हुई रंगत और हालत को देख कर ब खूबी समझ चुकी थी. कि चुदाई की इस मूवी ने शाज़िया की चूत और बदन में जवानी की आग को भड़का दिया है.


नीलोफर ने सोचा कि अब मोका है कि शाज़िया से छेड़ छाड़ कर के उसे मज़ीद गरमा दे.


ये ही सोचते हुए नीलोफर ने शाज़िया की रान पर रखे हुए अपने हाथ को आहिस्ता आहिस्ता हरकत में लाते हुए पूछा” शाज़िया अगर तुम्हारे पास मेरे जिस्म की गर्मी को दूर करने का कोई और हल है तो बता दो”




शाज़िया ने अपनी रान पर अपनी सहेली का हाथ महसूस तो किया. मगर उस ने ना तो नीलोफर को कुछ कहा और ना ही खुद अपनी सहेली के हाथ को अपनी गुदाज रान से हटाने की कोशिश की.


शाज़िया की तरफ से किसी भी किसम की मोज़मत ना पा कर नीलोफर समझ गई. कि शाज़िया अब बहुत गरम हो चुकी है. इसीलिए नीलोफर अब जो कुछ भी करे गी शाज़िया उस को माना नही कर सके गी.


ये ही सोचते हुए नीलोफर शाज़िया के नज़दीक हुई और उस ने अपना मुँह आगे बढ़ा कर अपने होंठ अपनी सहेली के होंठो पर रख दिए.




नीलोफर के होन्ट अपने होंठो से टकराते हुए महसूस कर के शाज़िया के गरम जिस्म में एक झटका लगा. और उस ने भी बिना कुछ सोचे समझे अपने होन्ट खोल दिए.


दोनो सहेलियो की ज़ुबान एक दूसरे के साथ टकराई और दोनो ने एक दूसरे के जिस्म को अपनी बाहों में कसते हुए एक दूसरे की ज़ुबान को चूसना शुरू कर दिया.


“हाईईईईईईईईईईई शाज़िया यकीन मानो मुझे इतना मज़ा अपने या तुम्हारे भाई के साथ किस्सिंग का नही आता जितना मज़ा मुझे तुम्हारे साथ आता है” नीलोफर ने शाज़िया की ज़ुबान को चुसते हुए कहा और साथ ही हाथ बढ़ा कर शाज़िया के मोटे मम्मे को अपनी हथेली में थाम कर दबाना शुरू कर दिया.


“उफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ निलो क्यों मुझे गरम कर के पागल करने पर तुली हो तुम” शाज़िया ने भी गरम जोशी से अपनी ज़ुबान को नीलोफर के मुँह में डालते हुए उसे जवाब दिया.


“यार मुझे तुम्हारी गरम जवान चूत को छेड़ने और उस में से निकलते पानी को पीने का बहुत मज़ा आता है,मेने तुम्हारी चूत के बिना इतने दिन कैसे गुज़ारे हैं,ये में ही जानती हूँ मेरी जान,अब जल्दी से अपने कपड़े उतार कर मुझे अपनी चूत का दीदार करवा दो ना” नीलोफर ने बेताबी से शाज़िया के कपड़ों को उस के जिस्म से अलग करने की कॉसिश करते हुए कहा.


दोनो की साँसें तेज़ी से चल रही थी. और दोनो बिल्कुल दीवानी और पागल होती जा रही थीं.


“नही यार आज नही अम्मी लोग आने वाले होंगे ” शाज़िया ने नीलोफर को रोकने की कॉसिश करते हुआ कहा.


“तुम फिकर ना करो वो अभी नही आएँगे” कहते हुए नीलोफर ने शाज़िया की शलवार और कमीज़ को खोल कर उस के बदन से अलग कर दिया.


नीलोफर का जवाब सुन कर शाज़िया समझ गई. कि ये सब कुछ जो इस वक्त हो रहा है ये नीलोफर ने उस के भाई ज़ाहिद के साथ पहले से प्लान किया हुआ है. और जब तक नीलोफर नही चाहेगी उस वक्त तक ज़ाहिद भाई और उस की अम्मी घर वापिस नही लोटेंगे.


इसीलिए नीलोफर की देखा देखी शाज़िया को भी जोश आया. और उस ने भी नीलोफर की शलवार के नाडे पर हाथ डाल कर पहले नीलोफर की शलवार उतारी और फिर फॉरन ही नीलोफर के जिस्म को कमीज़ के बोझ से भी बेपरदा कर दिया.


अब शाज़िया और नीलोफर के जिस्म पर उन के ब्रेजर्स और अंडरवेार्स ही बाकी रह गये थे. और ब्रेजर्स में मलबूस दोनो सहेलियाँ एक दूसरे की आँखों में आँखे डालते हुए एक दूसरे के मम्मो को हाथ में थाम कर प्यार से मसल रही थी.




दोनो सहेलियो के हाथ एक दूसरे की छातियों पर बहुत बेताबी और गरम जोशी से फिस्सल रहे थे.


“हाईईईईईई बन्नो तुम्हारी छातियाँ तो पहले से भी ज़्यादा भारी हो गईं हैं”नीलोफर ने बड़े प्यार से शाज़िया को कहा.


फिर देखते ही देखते नीलोफर और शाज़िया के लिप स्टिक्स से भरे होन्ट आपस में टकराए .और दोनो सहेलियाँ एक दूसरे के होंठो को ऐसे सक करने लगीं. जैसे आज के बाद ये होन्ट उन को दुबारा नही मिलेंगे. 




किस्सिंग करते करते दोनो के लब तो जैसे जुवैसी से हो गये थे. और अब होंठो की सकिंग के साथ साथ दोनो की ज़ुबान की सकिंग भी शुरू हो गई थी. 


नीलोफर और शाज़िया की ज़ुबाने एक दूसरे के मुँह से बाहर आ कर आपस में टकराने लगी थी.


इस दौरान नीलोफर ने अपना एक हाथ नीचे ला के शाज़िया के अंडरवेार को अपने हाथ में थामा. और अंडरवेार को शाज़िया की फुद्दि से थोड़ा नीचे करते हुए शाज़िया की फुद्दि पर अपना हाथ फेरा .तो नीलोफर के हाथ को अपनी गरम प्यासी फुद्दि पर महसूस कर के शाज़िया की चूत की आग मज़ीद भड़क उठी.




शाज़िया ने आहिस्ता से अपनी टाँगें थोड़ी सी मज़ीद खोल दीं.तो नीलोफर की उंगली शाज़िया की चूत के नरम होंठो को आहिस्ता आहिस्ता सहलाने लगी.


अपनी सहेली की इस हरकत से शाज़िया की तो जैसे सांस ही रुकने लगी.


“हाईईईईईईईईईई निलो क्या जादू है तुम्हारे हाथो में मेरी जान,आज मेरी तड़पती फुद्दि की प्यास बुझा दो मेरी जान” शाज़िया ने अपनी फुद्दि को अपनी सहेली की उंगली पर रगड़ते हुए कहा.


“तुम फिकर ना करो,में आज तुम्हारी फुद्दि का सारा गरम पानी पी जाऊंगी शाज़िया” नीलोफर ने अपनी बे चैन होती सहेली को तसल्ली दी और शाज़िया का अंडरवेअर और ब्रेज़ियर उतार कर उसे मुकम्मल नंगा कर दिया.


शाज़िया को अंदाज़ा तो हो चुका था कि उस के घर वाले अभी इतनी जल्दी वापिस नही लोटेंगे. मगर इस के बावजूद वो कोई रिस्क लेने के मूड में नही थी.


इसी लिए वो नीलोफर को अपने जिस्म से हटा कर नंगी हालत में उठ कर ड्राइंग रूम के दरवाज़े की तरफ गई. और जल्दी से दरवाज़े को अंदर से लॉक लगा कर बंद कर लिया.


नीलोफर ने जब शाज़िया को अपनी मोटी और भारी गान्ड मटकाते हुए दरवाज़े की तरफ जाता देखा. तो अपनी सहेली की उठी हुई और हिचकोले खाती गान्ड की पहाड़ियों को देख कर नीलोफर सबर ना कर सकी. और वो भी सोफे से उठ कर शाज़िया के पीछे ही चली आई.


ज्यों ही शाज़िया दरवाज़े को लॉक लगा कर वापिस पलटी. तो पीछे खड़ी नीलोफर ने शाज़िया को कमरे की दीवार से लगाया. और खुद शाज़िया की लंबी गुदाज टाँगों के दरमियाँ बैठ कर अपना मुँह उस की पानी छोड़ती चूत पर रख कर शाज़िया की फुद्दि का पानी चाटने लगी.



नीलोफर के होन्ट ज्यों ही शाज़िया की फुद्दि से टच हुए. तो शाज़िया के मुँह से सिसकारियों का सैलाब उमड़ आया और नीलोफर के मुँह को अपने हाथ से अपनी फुद्दि में घुसेड़ती हुए चिल्लाई, “ओह निलूऊऊऊऊऊओ.”


शाज़िया मज़े से इतनी बे हाल हुई. कि उस के लिए दीवार से लग कर खड़े होना और अपनी तवज्जो कायम रखना मुहाल हो गया.


शाज़िया की फुद्दि को चाटती नीलोफर को भी ये अंदाज़ा हो चुका था. कि शाज़िया के लिए अब दीवार के सहारे खड़ा होना मुश्किल हो रहा है. 


और इस से पहले के नीलोफर की सकिंग से बहाल हो कर शाज़िया फर्श पर गिर पड़ती.


नीलोफर शाजिया की टाँगों के दरमियाँ से उठी. और उस ने देखते ही देखते अपने से भारी शाज़िया को अपने बाजुओं में उठा लिया.


(लगता था कि जिस तरह पॉपी दा सेलर कार्टून में पॉपी, स्पीनेच खा कर अपनी बॉडी में ताक़त पेदा करता है. इसी तरह शाज़िया की चूत का गरम और नमकीन पानी पीने से नीलोफर के जिस्म में भी इतनी ताक़त पेदा हो गई थी .कि उस ने अपने से ज़्यादा वज़नी शाज़िया को अपनी बाहों में उठा लिया था.)




ज्यों ही नीलोफर ने शाज़िया को अपनी बाहों में उठाया. तो शाज़िया ने गरम जोशी से अपनी बाहों का घेरा नीलोफर के गले में डालने के साथ साथ अपनी टाँगों को भी नीलोफर की कमर के गिर्द कस लिया.


नीलोफर ने शाज़िया को अपनी बाहों में उठा कर पास ही रखे सोफे पर लिटा दिया. 


शाज़िया की फुद्दि को टेस्ट कर के नीलोफर पर ना जाने क्या नशा तरी हो गया था. कि वो शाज़िया के सोफे पर लेटते ही उड़ती हुई आई. और सोफे पर लेटी शाज़िया की खुली टाँगों के दरमियाँ अपना मुँह रख कर उस की फुद्दि को जोंक की तरह चिमटाए हुए शाज़िया की फुद्दि का रस पीने लगी.


नीलोफर लपर लपर कर के शाज़िया की फुद्दि को पागलों की तरह चाटे जा रही थी.




“उफफफफफ्फ़ हाईईईईईईईईईईईईईई ओह” शाज़िया के मुँह से सिसकारियाँ अपनी पूरी रफ़्तार से जारी थी.


शाज़िया की फुद्दि में ज़ुबान फिराते हुए नीलोफर ने शाज़िया को थोड़ा करवट बदल कर साइड के बल लेटा दिया .


जिस की वजह से शाज़िया की भारी मोटी गान्ड की पहाड़ियो में पोषीदा शाज़िया की गान्ड की मोरी नीलोफर की नज़रों के समाने पूरी तरह नंगी हो गई.


अपनी सहेली की कंवारी गान्ड की सावली मोरी को देख कर नीलोफर की आँखों में एक अजीब सी चमक आई. और उस ने शाज़िया के पीछे आ कर शाज़िया की गान्ड की मोरी पर अपनी ज़ुबान की नौक रखी और फिर शाज़िया की गान्ड के ब्राउन सुराख को मज़े ले ले कर चाटने लगी.




“हाईईईईईईईईईईईई निलूऊऊऊऊओ क्या खूऊऊब मज़ेययययययययी देती हो तुम,कश्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह तुम एक लड़का होटिईईईईईईईईईईईईई मेरी जनंननननणणन्” शाज़िया मज़े की शिद्दत से बे हाल होते हुए नीलोफर से बोली.


“शाज़िया में तो तुम को कब से कह रही हूँ कि तुम अपनी जवानी को यूँ ही बर्बाद कर रही हो, मेरी मानो और इक बार अपनी जवानी का रस अपने भाई को चखा दो यार” नीलोफर ने शाज़िया के जिस्म को फिर से सीधा लिटाया और उस की टाँगों के दरमियाँ आ कर अपनी ज़ुबान शाज़िया की चूत में फैरने लगी.


“तुम सुधरोगी नही, यार तुम क्यों नही समझती कि ये गुनाह है” शाज़िया ने नीलोफर की बात का जवाब दिया.


“शाज़िया में तो कहती हूँ कि तुम ये गुनाह सवाब की बात को अपने दिल से निकाल कर सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने जिस्म की आवाज़ सुनो, अपनी चूत की आवाज़ सुनो” नीलोफर ने अपनी सहेली को काल करने की कोशिश की.


“मुझे अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए अपने भाई की मदद की ज़रूरत नही” शाज़िया ने सिसकते हुए नीलोफर को उस की बात का जवाब दिया.


“अच्छा अगर तुम्हारी चूत को अपने भाई के लंड की ज़रूरत नहीं तो फिर उस के लंड ने तुम्हारी फुद्दि को आज इतना गीला क्यों कर दिया है?” ये कहते हुए नीलोफर ने शाज़िया की पानी छोड़ती गरम चूत से अपना मुँह ऊपर उठाया. और शाज़िया को अपनी ज़ुबान और होंठो पर लगा उस की गरम चूत का पानी देखते हुए पूछा.


आज वाकई ही शाज़िया अपने भाई की चुदाई की मूवी को देख कर अपने भाई के लंड के लिए बहुत ही गरम हो चुकी थी.और अब उस के लिए नीलोफर से अपनी जिस्मानी हालत को छुपाना ना मुमकिन हो रहा था.


“नीलोफर जब तुम मेरे भाई के गधे जैसे लंड से चुदवाने की अपनी मूवी मुझे दिखाओ गी.तो ये सब देख कर मेरी चूत गीली नहीं होगी क्या ?” शाज़िया ने अपनी सहेली को जवाब दिया.


शाज़िया को अपने भाई के मोटे लंड का पहली बार इतने खुले अंदाज़ में ज़िक्र करता सुन कर नीलोफर समझ गई कि उस की मेहनत रंग ला चुकी. इसीलिए वो बोली”अच्छा जब तुम्हारे भाई के लंड ने तुम्हारी चूत को इतना गीला कर ही दिया है तो उसे अपनी प्यारी खूबसूरत सी चूत का रस भी पी लेने दो ना,और अब तुम अपनी आँखे बंद कर के ये तस्व्वुर करूँ के तुम्हारी चूत में इस वक्त मेरी नही बल्कि तुम्हारे अपने सगे भाई ज़ाहिद की ज़ुबान फिर रही है.” 


(कहते हैं जब जिस्म की आग का शोला सुलगता है तो फिर वो किसी चीज़ की परवाह नही करता. आख़िर कार शाज़िया थी तो एक औरत. जिस की प्यासी जवानी की आग के शोले को आज फिर उस की अपनी सहेली की हरकतों ने भड़का दिया था.और अब अपनी जिस्मानी प्यास के आगे बेबस होते हुए शाज़िया के जज़्बात इस मुक़ाम पर आन पहुँचे थे. कि वो अपने जिस्म के हैवानी जज्बातों की असीर बनते और नीलोफर और उस के भाई जमशेद की तल्कीद करते हुए ग़लत,सही,गुनाह,सवाब सब कुछ भुला बैठी थी.)


इसीलिए ज्यों ही नीलोफर ने ये बात कहते हुए अपनी ज़ुबान को शाज़िया की चूत पर फिराना शुरू किया. 


तो शाज़िया ने बिना कुछ सोचे समझे एक रोबोट की तरह नीलोफर की हिदायत पर अमल करते अपनी आँखे बंद कर लीं. 


अपनी आँखे बंद कर के ज्यों ही शाज़िया अपने भाई ज़ाहिद के चेहरे को अपने तसव्वुर में लाई. तो उस को पहले से पानी छोड़ती अपनी फुद्दि में एक भूचाल सा आता हुआ महसूस हुआ.


शाज़िया के लिए अपनी चूत पर अपने भाई की ज़ुबान का तसव्वुर ही इतना दिल कश और मज़े दार था. कि शाज़िया के लिए अपने जज़्बात को संभालना मुश्किल ही नही था बल्कि ना मुमकिन हो रहा था.


शाज़िया की फुद्दि के लिप्स के दरमियाँ ज़ुबान फेरते फेरते नीलोफर ने अपना मुँह हटाया और शाज़िया से पूछा “ कैसा लग रहा है अपने भाई से अपनी चूत को सक करवाना शाज़िया”


नीलोफर के इतना कहने की देर थी कि शाज़िया को यूँ लगा जैसे उस की फुद्दि में एक आतिश फिशन फॅट पड़ा हो.


शाज़िया ने नीलोफर के सर पर हाथ रख कर उसे ज़ोर से अपनी चूत के साथ चिपका लिया. और “हाईईईईईईईईईईईईईईईईईईई ज़ाहिद्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्दद्ड भाईईईईईईईईईईईई कहते हुए अपनी गरम प्यासी फुद्दि का सारा लावा अपनी सहेली के खुले मुँह में उडेल दिया.




शाज़िया के मुँह से अपने सगे भाई के नाम की पुकार सुन कर नीलोफर के होंठो पर एक शैतानी मुस्कराहट फैल गई. और वो शरप शारपप्प्प करते हुए अपनी सहेली शाज़िया की फुद्दि से उस के भाई के नाम का निकलता हुआ पहला ताज़ा पानी अपने मुँह के रास्ते अपने हलक में डालने लगी.


जब शाज़िया के जिस्म को लगते हुए झटके की शिद्दत कुछ कम हुई. तो नीलोफर शाज़िया की टाँगों के दरमियाँ से उठ कर शाज़िया के नंगे जिस्म के ऊपर लेट गई. 


निलफोर ने शाज़िया की चूत के पानी से भरे हुए अपने होन्ट अपनी सहेली के होंठो पर रख कर शाज़िया को उस की फुद्दि के पानी का स्वाद चखाया.


अपनी सहेली के होंठो पर लगे हुए अपनी ही चूत के पानी के गरम और नमकीन ज़ायक़े को चख कर शाज़िया को बहुत मज़ा आया. और उस ने भी जोश से नीलोफर के होंठो को अपने होंठो में ले कर सक करते हुए नीलोफर के होंठो पर लगा हुआ अपनी चूत का पानी पीना शुरू कर दिया.


नीलोफर के मुँह और हाथों की मेहरबानी की बदोलत शाज़िया की फुद्दि की गरमी तो पहले की मुक़ाबले कुछ कम हो चुकी थी. मगर शाज़िया के बदकस नीलोफर की फुद्दि का पानी अभी तक उस की चूत से बाहर आने के लिए रास्ता तलाश कर रहा था.


इसीलिए शाज़िया को उसी की फुद्दि का पानी पिलाने के बाद नीलोफर ने शाज़िया के मुँह से अपना मुँह अलग किया.




और शाज़िया की भारी छातियों के साथ अपनी जवान चुचियाँ रगड़ने के साथ साथ अपनी चूत को भी शाज़िया की फुद्दि के साथ मिला कर रगड़ना शुरू कर दिया.


दोनो सहेलियो की गरम फुद्दियो का आपस में मिलाप हुआ. तो दोनो के जवान जिस्मो में ऊपर से ले कर नीचे तक एक करंट सा दौड़ गया.


शाज़िया की तरह नीलोफर भी एक बहुत ही गरम लड़की थी. और अपनी सहेली शाज़िया की फुद्दि को चाट चाट कर नीलोफर तो पहले ही मज़े में बे हाल हो रही थी.


इसीलिए ज्यों ही दोनो सहेलियों की गरम,प्यासी और पानी से तर होती चूते आपस में एक दूसरे से टकराई. तो नीलोफर की चूत में उबलता हुआ उस की फुद्दि का पानी गरमी की शिद्दत को बर्दाश्त ना कर सका. और नीलोफर को भी मंज़िल मिल गई.


शाज़िया ने अपने जिस्म के ऊपर हिचकोले खाते हुए नीलोफर के बदन को अपनो बाहों में क़ैद करते हुए अपने चौड़े और भारी सीने के साथ लगा कर नीलोफर को अपने साथ चिपका लिया.


थोड़ी देर बाद जब नीलोफर की हालत संभली. तो दोनो ने एक दूसरे की आँखों में आँखे डाल कर देखा. और मुस्कुराते हुए एक दूसरे के होंठो को चूस चूस कर एक दूसरे का शुक्रिया अदा करने लगीं.




नीलोफर ने पास पड़े अपने फोन को उठा कर टाइम चीक किया.तो उसे अंदाज़ा हुआ कि शाम का वक्त हो चुका है.


“हाईईइ बाहर तो शाम हो चुकी है अब मुझे चलना चाहिए” कहते हुए नीलोफर जल्दी से शाज़िया के ऊपर से उठी और फरश पर बिखरे अपने कपड़े उठा कर पहनने लगी.


नीलोफर की देखा देखी शाज़िया ने भी उठ कर अपने कपड़े पहन लिए.


ज्यों ही दोनो सहेलिया अपने अपने कपड़े पहन चुकीं.तो नीलोफर ने फिर से सोफे पर बैठे हुए शाज़िया को खैंच कर उस का सर अपनी गोद में रखा और बोली “क्यों बनो मज़ा आया क्या ”.




“यार ये भी कोई पूछने वाली बात है भला,मज़ा तो बहुत आया मगर जिस्म में अभी भी काफ़ी गरमी बाकी है निलो”. शाज़िया ने हंसते हुआ जवाब दिया.


“तुम्हारे जिस्म की ये गर्मी सिर्फ़ मेरे मुँह या हाथों से कम नही हो गी बनो,इस के लिए तुम्हारे भाई के मोटे और सख़्त लंड की हेल्प चाहिए ,तो फिर ज़ाहिद को भेज दूं आज रात तुम्हारे पास” नीलोफर ने अपनी सहेली के गाल पर प्यार से हाथ फेरते हुए पूछा.


“नीलू जो आग तुम ने मेरी चूत में लगा दी है,वो में अब अपने भाई के बड़े लंड से बुझवाऊगी तो ज़रूर,मगर वादा करो कि तुम ज़ाहिद भाई से मेरे बारे में कोई बात नही करो गी अभी” नीलोफर अपनी सहेली की बात सुन कर थोड़ी हेरान तो ज़रूर हुई.मगर फिर भी उस ने शाज़िया से वादा कर लिया कि वो ज़ाहिद से इन की आज की गरम मुलाकात का ज़िक्र नही करे गी.


इस के साथ ही नीलोफर ने शाज़िया को खुदा हाफ़िज़ कह कर अपने घर की राह लेने का इरादा किया तो शाज़िया बोली “यार जाने से पहले ज़ाहिद भाई के साथ अपनी चुदाई की मूवी तो व्हाट्सअप के ज़रिए मुझे ट्रान्स्फर कर दो प्लीज़”


“लगता है भाई के लंड ने मेरी बानो की फुद्दि को आज कुछ ज़्यादा ही गरमा दिया है” नीलोफर ने हंसते हुए अपने पर्स से मोबाइल निकाल कर मूवी को शाज़िया के मोबाइल पर सेंड करते हुए कहा.


“बकवास ना करो बहन चोद” शाज़िया ने भी हँसते हुए नीलोफर को जवाब दिया.


“बहन चोद में तो नही, बल्कि जल्द ही तुम्हारा भाई ज़ाहिद बनने वाला है जानू” नीलोफर ने तर्कि ब तर्कि अपनी सहेली की प्यार भरी गाली का जवाब देते हुए शाज़िया से कहा.


नीलोफर के जवाब पर दोनो सहेलियाँ एक कहकहा लगा कर हँसने लगी.


इस के साथ ही नीलोफर वापिस अपने घर जाने के लिए शाज़िया के घर से बाहर चली आई.


नीलोफर के घर से निकल कर रिक्शा में बैठते साथ ही उस ने ज़ाहिद को टेक्स्ट मसेज कर दिया. कि वो उस के घर से नाकाम हो कर वापिस अपने घर जा रही है.


ज़ाहिद तो नीलोफर की अपनी बहन शाज़िया के साथ मुलाकात के बाद बहुत उम्मीद लगा कर इस इंतजार में डॉक्टर के क्लिनिक में बैठा था. कि नीलोफर आज किसी ना किसी तरह शाज़िया को उस के साथ चुदाई करने पर क़ायल कर ले गी.


मगर नीलोफर के ना के मेसेज को पर कर ज़ाहिद को बहुत मायूसी हुई. 


ज़ाहिद की अम्मी के दांतो की सफाई का काम ख़तम होने में अभी 10,15 मिनट्स बाकी थे. इसीलिए ज़ाहिद वेटिंग रूम में बैठ कर अपनी अम्मी के आने का इंतिज़ार करने लगा.


उधर दूसरी तरफ नीलोफर के जाने के बाद शाज़िया ड्राइंग रूम से चाय के बर्तन समेट कर अपने कमरे में चली आई.


अब अपने कमरे में वापिस लोटने वाली शाज़िया वो नही रही थी. जो आज सुबह अपनी मोहल्ले वाली सहेली की शादी में जाने से पहले थी.


नीलोफर से आज की मुलाकात ने शाज़िया की सोच और दिमाग़ को कुछ ही घंटो में मुकम्मल तौर पर बदल कर रख दिया था.


शाज़िया के जिस्म पर अभी तक नीलोफर के हाथों,मुँह और अपने भाई के लंड की मस्ती के सरूर छाया हुआ था.


अपने कमरे में आते ही शाज़िया अपने बेड पर बैठ गई. और अपने मोबाइल को हाथ में ले कर नीलोफर की भेजी हुई मूवी को दुबारा से ऑन कर दिया.


मूवी में नीलोफर की चुदाई करते अपने भाई के लंड को बार बार देख कर शाज़िया की चूत की तरह उस की नज़रों की प्यास भी बुझने का नाम नही ले रही थी.


अपने मोबाइल फोन की स्क्रीन पर नज़रे जमाए जब एक ऐसा सीन शाज़िया की नज़ररों के सामने आया. जिस में नीलोफर ज़ाहिद की पॅंट में से वज़िया तौर पर बाहर झलकते हुए उस के लंबे मोटे लंड को अपने हाथों में थामे बैठी है.




तो अपने भाई के बड़े लंड के इस दिल फरेब नज़ारे को देख कर शाज़िया की पहले से पानी छोड़ती फुद्दि में आग शिद्दत इख्तियार कर गई.और ये सीन देखते देखते शाज़िया मोबाइल की स्क्रीन को पॉज़ करते हुए शाज़िया अपनी सोचो में गुम हो गई.


नीलोफर ने आज शाज़िया को ऐसी राह दिखा दी थी. जिस की शाज़िया को शिद्दत से तलाश तो थी. मगर आज से पहले शाज़िया इस किसम के ख्यालात को अपने ज़हन में लाना भी गुनाह समझती थी. 


लेकिन इस के साथ साथ हक़ीकत ये ही थी. कि शाज़िया को अपनी मोटे लिप्स वाली गरम और प्यासी फुद्दि को चुदवाने के लिए एक ऐसे ही मोटे सख़्त और जवान लंड वाले मर्द की तलाश थी.जो प्यार से उसे चोदने के साथ साथ उस की इज़्ज़त का ख्याल भी रखे. और उसे मुसीबतो से भी बचाए. 


इन सब बातों के लिए तलाक़ के बाद से अब तक शाज़िया की निगाहों में कोई मर्द नही गुज़रा था.


मगर आज नीलोफर ने शाज़िया को दुबारा उस के अपने भाई के लंड का दीदार करवा कर शाज़िया की निगाह को उस के अपने भाई की तरफ मोड़ दिया था.


शाज़िया अपने भाई के लंड की तस्वीर को देख कर सोचे जा रही थी.कि मेरा भाई ज़ाहिद एक सेहतमंद और तंदुरुस्त जवान मर्द है.


काफ़ी सारे मर्दो की मुक़ाबले उस के पास एक बहुत ही बड़ा,मोटा और लोहे की तरह सख़्त लंड है.उस का लंड भी तो किसी ना किसी औरत की चूत को चोदने के लिए ही तो है.


ज़ाहिद भाई जिस औरत की चूत में भी अपना लंड डाले गा. तो वो औरत भी तो आख़िर कर किसी ना किसी की बाहें ही हो गी.


शाज़िया सोचने लगी कि पता नही मेरी निगहों पर अब तक क्यों परदा पड़ा था.


ज़ाहिद मेरा भाई है तो क्या हुआ. अगर मेरा भाई किसी और की बहेन को चोद सकता है तो फिर अपनी बहेन की चूत क्यों नहीं.वैसे भी चूत पर कहाँ लिखा होता है कि ये बहन की चूत है या किसी और की. 


ये ही सोचते सोचते शाज़िया के ज़हन में एक ख्याल आया.


शाज़िया अपने कमरे से निकल कर अपनी अम्मी के कमरे में गई. शाज़िया ने अपनी अम्मी की अलमारी से नीलोफर के हाथों भिजवाया हुआ अपने भाई का ब्रेज़ियर और पैंटी का गिफ्ट उठा कर




तेज़ी से अपने कमरे में दुबारा आई.और कमरे के दरवाज़े की कुण्डी लगा दी.


कमरे में आते ही शाज़िया ने एक एक कर अपने सारे कपड़े उतारे और अपने भाई के दिए हुए ब्रेज़ियर और पैंटी बॅग से निकाल कर पहन ली.


अपने भाई के गिफ्ट को पहन कर शाज़िया ने कमरे के शीशे के सामने खड़े हो कर अपने भारी जिस्म का जायज़ा लिया. तो वो अपने बड़े बड़े मोटे मम्मे और अपनी भारी कूल्हे को अपने भाई के दिए हुए तोहफे में लिपटा देख कर मस्ती से खुद भी शर्मा गई.




शाज़िया को ना जाने क्या सूझी. कि उस ने पास ही रखा हुआ अपना मोबाइल फोन उठाया.और भाई के दिए हुए ब्रेज़ियर और पैंटी में मलबूस अपने नीम नंगे जिस्म की दो तीन “सेल्फी” तस्वीरे खैंच लीं. शाज़िया का पूरा जिस्म ऐसा करते हुए कांप रहा था.


(आज कल अपने मोबाइल फोन पर अपनी फोटो खुद ही खैंचने के अमल के लिए लोग सेल्फी की टर्म यूज़ करते हैं)


शीशे में अपने जिस्म को अपने भाई के दिए हुए तोहफे में लिपटा हुआ देख देख कर शाज़िया की चूत ना सिर्फ़ गरम हो चुकी थी. बल्कि गर्मी की शिद्दत से शाज़िया की फुद्दि का पानी उस की चूत से बाहर निकल कर शाज़िया की रानो को भी भिगो रहा था.


नीलोफर की बातें बार बार शाज़िया के दिमाग़ में गूँज रही थी. कि शाज़िया तुम्हारी चूत और जिस्म में एक आग सुलग रही है.शाज़िया तुम्हारी चूत तो एक प्यासी ज़मीन की मानद है. जिस को सराब होने के लिए एक भर पूर मर्द का साथ चाहिए.जो तुम को अपने सीने से लगा कर तुम्हारे अरमानो और जज़्बात को ठंडा कर सके. और वो मर्द कोई और नही बल्कि तुम्हारा अपना सगा भाई ज़ाहिद है,शाज़िया….


नीलोफर की बातों और हरकत को याद कर के शाज़िया इतनी गरम हुई.कि उस ने अपने धोने वाले कपड़ों की टोकरी में से अपनी वो शलवार निकाली. जिस पर उस के भाई ज़ाहिद ने अपनी मानी खारिज की थी.


ज़ाहिद के लंड का पानी शाज़िया की शलवार पर जमने की वजह से शलवार का चूत वाला हिस्सा सख़्त हो कर अकड चुका था.


शाज़िया ने अपनी शलवार को हाथ मे पकड़ कर अपनी पैंटी को अपनी चूत से थोड़ा हटाया.और अपने भाई की सुखी हुई मनी को अपनी नंगी फुद्दि पर रगड कर अपने भाई के लंड के पानी का मज़ा लेने लगी.


अपनी शलवार को अपने भाई का भीगा लंड समझ कर मज़ा लेते लेते शाज़िया को एक दम झटका लगा और वो फारिग हो गई. 


फारिग होते ही उस की फुद्दि ने पानी कर फव्वारा निकाला. जो उस की टाँगों से बैठा हुआ उस की शलवार में जमी उस के भाई ज़ाहिद की खुशक मनी से मिलाप कराने लगी.


इस से पहले कि शाज़िया कुछ और कर पाती. कि घर का मेन गेट खुलने की आवाज़ शाज़िया के कानो में पड़ी. 


शाज़िया समझ गई कि उस की अम्मी और भाई ज़ाहिद वापिस आ चुके हैं. इसीलिए शाज़िया ने जल्दी से अपने कपड़े पहने और किचन में जा कर ऐसे काम काज में मसरूफ़ हो गई. जैसे कुछ हुआ ही नही.


थोड़ी देर बाद जब शाज़िया ने अपनी अम्मी को अकेले ही घर में एंटर होते देखा.तो वो समझ गई कि उस का भाई ज़ाहिद अम्मी को बाहर की उतार कर जा चुका है.


दूसरे दिन सुबह दस बजे शाज़िया की रावलपिंडी से कराची की फ्लाइट बुक थी.


शाज़िया ने कुछ दिन पहले ही अपनी छोटी बहन से मिलने कराची जाने का प्रोग्राम बनाया हुआ था. और उस का इरादा था कि वो एक हफ़्ता अपनी बहन के पास गुज़ार कर वापिस चली आए गी.


इसीलिए उस रात शाज़िया घर के सारे काम निपटा कर अपने कमरे में चली आई.और सुबह कराची जाने की तैयारी में मसरूफ़ हो गई.


अगले दिन ज़ाहिद और उस की अम्मी रज़िया बीबी शाज़िया को एरपोर्ट छोड़ने गये.


एरपोर्ट पर अपना बोरडिंग पास ले कर शाज़िया जब एरपोर्ट के वेटिंग लाउन्ज में पहुँची. तो उस के दिल में एक प्लान आया. 


अपने प्लान पर अमल करते हुए शाज़िया ने अपने मोबाइल फोन में दुबारा उस ही नंबर की सिम डाल ली. जिस को वो “साजिदा” बन कर इस्तेमाल करते हुए पिछले कुछ महीने पहले तक अपने ही भाई ज़ाहिद (रिज़वान) से चाट्टिंग करती रही थी.


मोबाइल में सिम डालते वक्त शाज़िया के हाथ कांप रहे थे और उस का दिल बहुत ज़ोर ज़ोर से धक धक कर रहा था.


अपने हाथ में फोन थामे शाज़िया ने एक लम्हे को कुछ सोचा.




और फिर उस ने अपने फोन की फोटो गॅलरी से अपने भाई के तोहफे में मलबूस अपनी सेल्फी को सेलेक्ट कर के व्हाट्सअप के ज़रिए उस तस्वीर को अपने भाई के (रिज़वान) वाले नंबर पर सेंड कर दिया.


उधर दूसरी तरफ अपनी बहन शाज़िया को एरपोर्ट पर सी ऑफ करने के बाद ज़ाहिद अपनी अम्मी को कार में बिठा कर बाथ रूम यूज़ करने चला आया.


ज्यों ही ज़ाहिद एरपोर्ट के बाथ रूम में घुसा . तो उस को अपने खास नंबर वाले मोबाइल पर मेसेज आने की आवाज़ सुनाई दी.


ज़ाहिद ने जल्दी से अपनी पॉकेट से फोन निकाल कर चेक किया.तो उसे साजिदा का नाम मेसेज पर लिखा नज़र आया. 


कल नीलोफर की बात सुन कर ज़ाहिद के दिल में अपनी बहन शाज़िया के मुतलक कोई भी खुश फहमी बाकी नही रही थी.


इसीलिए अब व्हाट्सअप पर साजिदा के नाम का मेसेज देख कर ज़ाहिद को बहुत हैरानी हुई.


उस ने जल्दी से व्हाट्सअप को अपडेट कर के मसेज चेक किया. तो नीलोफर के ज़रिए साजिदा ( शाज़िया) को भिजवाए हुए ब्रेज़ियर और पैंटी वाले तोहफे में मलबूस अपनी बहन शाज़िया की नीम नंगी फोटो देख कर ज़ाहिद का मुँह खुला का खुला रह गया.


(वो कहते हैं ना कि “आक्षन स्पीक्स लौढ़र देन वर्ड्स”.) 


बिल्कुल इसी तरह शाज़िया की साजिदा के नाम से रिज़वान (ज़ाहिद) के नंबर पर भेजी गई इस तस्वीर ने ज़ाहिद को बिना कुछ कहे सुने भी सब कुछ बता दिया.


क्यों कि “ कुछ भी ना कहा और कह भी गये” वाले गाने की तरह इस एक फोटो में शाज़िया की तरफ से अपने भाई ज़ाहिद को अपनी रज़ा मंदी का एक निहायत खुला पेगाम पोषीदा था.


अपनी बहन की रज़ा मंदी के मेसेज को देख कर ज़ाहिद का दिल खुशी से झूम उठा.


ज़ाहिद ने जल्दी से टाइम चेक किया. तो उसे अंदाज़ा हो गया कि इस वक्त तक शाज़िया जहाज़ में जा चुकी हो गी. और कुछ देर बाद उस का ऐरो प्लेन कराची के लिए रवाना हो जाए गा.


ज़ाहिद का दिल चाहने लगा कि किसी तरह वो उड़ के जाए और अपनी बहन के जहाज़ को उड़ने से रोक ले. मगर ज़ाहिद जानता था कि अब ये बात मुमकिन नही है. 


इसीलिए अपने दिल में उठी हुई अपनी इस ख्वाहिश को उस ने दिल में ही दबा कर सबर का घूँट पी लिया.


अपनी बहन की आधी नंगी तस्वीर देख कर ज़ाहिद का लंड भी उस की पॅंट में खड़ा हो कर उसे अपनी बहन की चूत में घुस जाने की फरमाइश कर रहा था.


ज़ाहिद ने अपनी पॅंट की ज़िप खोल कर अपने मोटे बड़े लंड को पॅंट से बाहर निकाला. और उस ने हाथ में पकड़े हुए अपने मोबाइल से अपने फुल हाइयर हुए लंड की फोटो खैंच ली.




शाज़िया की फोटो को देख कर ज़ाहिद का लंड इतना सख़्त हुआ. कि लंड की इस सख्ती की वजह से ज़ाहिद के लिए पेशाब करना मुहाल हो गया.


ज़ाहिद ने बहुत मुश्किल से अपने लंड को तसल्ली दे कर उस के जोश थोड़ा ठंडा किया. तो फिर कहीं जा कर वो पेशाब करने के काबिल हो सका.


पेशाब से फारिग होते ही ज़ाहिद ने फॉरन शाज़िया के मेसेज का रिप्लाइ किया,“साजिदा मुझे बहुत खुशी है कि तुम ने मेरा भेजा हुआ तोहफा कबूल किया,तुम पर ये ब्रेजियर और पैंटी बहुत सज रही हैं मेरी बहन, तुम्हारी भेजी हुई तस्वीर की वजह से मेरे लंड की जो हालत हुई है, उस की एक झलक तो इस फोटो मे भेजी है,मगर अपने लंड की प्यास बुझाने के लिए मुझे अब तुम्हारी वापसी का बहुत शिद्दत से इंतज़ार रहे गा मेरी जान”.


ये मेसेज लिख कर ज़ाहिद ने अपनी बहन शाज़िया को उस के साजिदा वाले नंबर पर रिप्लाइ कर दिया.


साथ ही साथ ज़ाहिद ने कुछ मिनट्स पहले खैंची हुई अपने लंड की फोटो भी शाज़िया को सेंड कर दी.


ज़ाहिद की तरह शाज़िया भी अपने भाई का रिप्लाइ पढ़ कर और उस के लंड की भेजी हुई तस्वीर देख कर मस्ती में आ गई. मगर वक्त की कमी और इर्द गिर्द दूसरे लोगो की मौजूदगी की वजह से उस ने मज़ीद मेसेज करना मुनासिब ना समझा.


वैसे भी अपनी भेजी हुई फोटो के ज़रिए शाज़िया का मकसद ना सिर्फ़ पूरा हो चुका था. बल्कि वो ये बात भी ब खूबी जान चुकी थी. कि उस के भाई ज़ाहिद के लंड को उस की फुद्दि की तलब अब एक हफ़्ता सकून नही लेने देगी . और वो दिन रात पागलों की तरह शाज़िया के घर वापिस आने का इंतिज़ार करे गा.


इस के साथ ही शाज़िया अपनी चूत के लिए बे चैन होते अपने भाई ज़ाहिद के ख्याल और बेचैनि को अपने ज़हन में सोच सोच कर खुद ही मुस्कुराने लगी.और इस के साथ ही उस के जहाज़ ने कराची के लिए अपनी उड़ान भर ली.


शाज़िया को उस के मसेज का रिप्लाइ करने के बाद ज़ाहिद ने नीलोफर को मसेज किया. और उस से शाज़िया के मसेज का ज़िक्र किए बगैर शाम को मिलने की ख्वाहिश ज़ाहिर की. 


ज़ाहिद के मेसेज के जवाब में नीलोफर ने फॉरन शाम को उसे मिलने का वादा कर लिया.


फिर ज़ाहिद बाथरूम से निकला और अपनी अम्मी को ले कर झेलम लौट आया.


शाम को नीलोफर अपने भाई जमशेद के साथ ज़ाहिद से मिली. तो ज़ाहिद ने उसे शाज़िया की भेजी हुई फोटो दिखाते हुए पूछा “ नीलोफर तुम ने तो मुझे कहा था कि शाज़िया नही मानी तो ये क्या है”.


“ वॉवववव ज़ाहिद तुम्हारी बहन तो बड़ी छुपी रुस्तम निकली,मुझे तुम से कोई बात ना करने का कह कर, अब खुद ही उस ने अपनी गरम तस्वीर तुम को सेंड कर दी यार”नीलोफर ने अपनी सहेली की नीम नंगी तस्वीर को देख कर खुश होते हुए ज़ाहिद से कहा.


“हां निलो, मगर अफ़सोस इस बात का ये है कि अब उस की वापसी तक अपने लंड को हाथ में थाम कर बैठना पड़े गा मुझे यार” ज़ाहिद ने नीलोफर और जमशेद के सामने अपनी शलवार में खड़े लंड पर अपना हाथ फेरते हुए कहा.


“कोई बात नही जानू,एक हफ्ते तक अपने लंड के पानी को अपनी बहन की गरम और प्यासी चूत के लिए संभाल कर रखो,और उस के वापिस आते ही एरपोर्ट पर ही उस की प्यासी फुद्दि में अपना गरम पानी डाल देना” नीलोफर ने हँसते हुए ज़ाहिद से कहा.


“वो तो ठीक है मगर में एक और बात सोच रहा हूँ यार” ज़ाहिद ने नीलोफर के मज़ाक को नज़र अंदाज़ कर के उस से कहा.


“वो क्या” नीलोफर और जमशेद ने एक साथ ज़ाहिद की तरफ देखते हुए पूछा.


“वो ये कि मुझे पता है कि एक बार अपनी बहन की फुद्दि लेने के बाद मेरा उस से अलग रहना मुहाल हो जाए गा” ज़ाहिद ने जवाब दिया.


“तो इस में ऐसी कौन सी बात है,तुम्हारी बहन और तुम एक ही घर में रहते हो,तो मोका मिलने पर अपनी बहन की फुद्दि मार लिया करना” इस बार जमशेद ने ज़ाहिद को सलाह देते हुए कहा.


“ ये ही तो मसला है ना यार, मुझे पता है कि एक बार की चुदाई के बाद मुझे अपने ऊपर कंट्रोल नही रहे गा, और में तुम्हारी तरह छुप छुप और घुट घुट कर अपने लंड की प्यास बुझाने का आदि नही हूँ,इसीलिए अम्मी के होते हुए हर वक्त पकड़े जाने के डर से खुल कर चुदाई का मज़ा क्या खाक आएगा” ज़ाहिद ने जमशेद की बात का जवाब दिया.


“अच्छा फिर तुम खुल कर बताओ कि तुम क्या चाहते हो आख़िर” नीलोफर ने ज़ाहिद की बात को ना समझते और उस की बातों पर झुंझलाते हुए ज़ाहिद से पूछा.


“निलो बात ये है कि असल में, में अपनी बहन शाज़िया से शादी कर के उस को अपनी बीवी बनाना चाहता हूँ” ज़ाहिद ने जमशेद और नीलोफर की तरफ देखते हुए अपनी हैवानी ख्वाहिश का इज़हार कर दिया.


“अनोखा लाड़ला खेलन को माँगे चाँद रे” वाले गाने के बोलों की तरह ज़ाहिद की ये फरमाइश भी बहुत ही अनोखी और अजीब थी. 


इसीलिए ज़ाहिद की ये बात सुन कर जमशेद और नीलोफर के मुँह से एक साथ निकला“क्याआआआआ”.


जमशेद और नीलोफर दोनो के लिए ज़ाहिद की कही हुई ये बात बहुत की अनोखी थी.इसीलिए ज़ाहिद की बात सुन कर कमरे में थोड़ी देर के लिए खामोशी सी छा गई.और नीलोफर और जमशेद दोनो ज़ाहिद को ऐसे देखने लगे जैसे ज़ाहिद पागल हो गया हो.


“ज़ाहिद होश में तो हो तुम, ये सब कैसे मुमकिन है यार” नीलोफर ने थोड़ी देर बाद खामोशी तोड़ते हुए बहुत ही जोशीले अंदाज़ में ज़ाहिद से कहा.


“अगर इंसान चाहे तो कुछ भी ना मुमकिन नही. तुम दोनो का आपस में मिलन भी तो एक ना मुमकिन बात थी. मगर जब जमशेद ने कोशिश की तो उस ने ना मुमकिन को मुमकिन बनाया ना.” ज़ाहिद नीलोफर की बात का जवाब देते हुए बोला.


“ यार मगर हम ने आपस में शादी तो नही की ना” ज़ाहिद की बात सुन कर नीलोफर ने उसे कहा.


“जब तुम दोनो ने बहन भाई होते हुए एक दूसरे को चोद लिया, तो तुम दोनो बहन भाई और एक मियाँ बीवी में क्या फ़र्क रह गया.शादी के बाद एक मियाँ बीवी भी ये ही काम करते हैं, जो तुम दोनो बहन भाई कर चुके हो” ज़ाहिद नीलोफर की बात के जवाब में अपनी दलील देते हुए बोला.


“मगर फिर भी हम ने आपस में शादी तो नही की ना,जब कि तुम अपनी ही बहन से शादी करने पर तुले हुए हो”. नीलोफर ने ज़ाहिद को समझाने वाले अंदाज़ में कहा.


“तो कर लो ना शादी तुम दोनो भी,तुम्हें रोका किस ने है यार”. ज़ाहिद ने फिर नीलोफर को जवाब दिया.


“ज़ाहिद लगता है कि तुम्हारा दिमाग़ चल गया है, ये कैसे हो स्कता है कि में और जमशेद भाई और तुम और शाज़िया आपस में शादी कर लो, मुझे तो तुम्हारी किसी बात की समझ नही आ रही” नीलोफर ने गुस्से से चिल्लाते हुए ज़ाहिद से कहा.


“में पागल और बेवकूफ़ नही, इसीलिए ज़रा गौर से मेरी बात सुनो” ज़ाहिद ने नीलोफर के गुस्से भरे लहजे को नज़र अंदाज़ करते हुए कहा.


“अच्छा सुनाओ मिस्टर अकल्मंद” नीलोफर ने ज़ाहिद की तरफ देखते हुए उसे कहा.


“में चाहता हूँ कि तुम अपने शोहार से तलाक़ ले कर मुझ से शादी कर लो, और शाज़िया की शादी तुम्हारे भाई जमशेद से हो जाय. शादी के बाद तुम दोनो हमारे घर की ऊपर वाली मंज़ल पर शिफ्ट हो जाना. हमारे दरमियाँ ये शादी सिर्फ़ दुनिया को दिखाने के लिए पेपर्स की हद तक ही होगी.जब कि अपने घर में तुम अपने भाई की बीवी बन कर उस के साथ रात बसर करना, जब कि मेरी बहन शाज़िया मेरी बीवी बन कर दिन रात मेरा बिस्तर गरम करे गी”. ज़ाहिद ने बड़े आराम और होसले से अपना सारा प्लान उन दोनो बहन भाई के सामने खोल कर रख दिया.


जमशेद और नीलोफर ज़ाहिद का प्लान सुनते ही मुँह फाड़ कर ज़ाहिद को देखने लगे और फिर जमशेद दूसरी बार ज़ाहिद और अपनी बहन नीलोफर की बात चीत में हिस्सा लेते हुआ बोला “ तुम्हारे ख्याल में ये इतना आसान काम है ज़ाहिद, तुम ने अपनी अम्मी के बारे में नही सोचा अगर उन को पता चल गया तो क्या हो गा”


“तो में ये काम अपनी ही अम्मी की इजाज़त और रज़ा मंदी ले कर ही करूँगा मेरी जान” ज़ाहिद ने जमशेद के सवाल पर मुस्कुराते हुए उसे जवाब दिया.


ज़ाहिद की ये बात सुन कर भी नीलोफर और जमशेद ज़ाहिद को ऐसे देखने लगे जैसे वाकई ही ज़ाहिद का दिमाग़ चल गया हो.


“ज़ाहिद मुझे तो लगता है कि या तो तुम्हारे दिमाग़ के स्क्रू ढीले हैं, या तुम ने आज शराब पी हुई है, जो ऐसी बहकी बहकी बातें कर रहे हो” अपनी सग़ी बहन को अपनी अम्मी के सामने ही अपनी बीवी बना कर रखने वाली ज़ाहिद की बात पर नीलोफर ने चीखते हुए उस से कहा.


“निलो ना तो मेने पी है, ना ही में पागल हूँ.में जो भी बात कह रहा हूँ वो बहुत होश-ओ-हवास में रहते हुए कह रहा हूँ. और में चाहता हूँ कि तुम हमारे घर आ कर मेरी अम्मी से मेरे लिए मेरी बहन शाज़िया का रिश्ते माँगो”. ज़ाहिद ने जमशेद और नीलोफर पर हैरत का एक और प्रहार करते हुए उन से कहा.


जमशेद और नीलोफर के मुँह ज़ाहिद की बातें सुन सुन कर पहले ही खुल चुके थे. और अब उस की ये बात सुन कर उन दोनो के चेहरो के रंग फक हो गये.


“मगर तुम्हारी अम्मी कैसे अपने ही सेगे बेटे की शादी अपनी ही सग़ी बेटी के साथ होने पर तैयार हो जाएँगी ज़ाहिद”.नीलोफर ने हैरत जदा लहजे में ज़ाहिद से सवाल किया.


“ये तुम मुझ पर छोड़ दो,बस तुम मेरी बताई हुई बात पर अमल करो.” ज़ाहिद ने नीलोफर की अपनी बात समझाते हुए कहा.


वैसे तो नीलोफर का दिल ज़ाहिद की किसी बात को कबूल करने पर तैयार नही थी.मगर फिर भी ना जाने क्यों उस ने ज़ाहिद के कॉन्फिडेन्स को देखते हुए उस की बात पर अमल करने की हामी भर ली.


नीलोफर ने ज़ाहिद के प्लान पर अमल करने पर अपनी रज़ा मंदी ज़ाहिर की. तो ज़ाहिद ने नीलोफर के हाथ में एक बंद लिफ़ाफ़ा (एन्वेलप) देते हुए दोनो बहन भाई को आहिस्ता आहिस्ता उस की अम्मी रज़िया बीबी से मुलाकात और बात चीत करने का आइडिया दे दिया.


जमशेद और नीलोफर ज़ाहिद से उस का दिया हुआ एन्वेलप ले कर वापिस अपने अपनी घर चले आए.


फिर अपने घर वापिस आने के बाद उसी रात नीलोफर ने शाज़िया को फोन मिला.


नीलोफर ज़ाहिद के बताए हुए प्लान पर अमल करने से पहली शाज़िया से इस बारे में बात करना चाहती थी. मगर नीलोफर को शाज़िया के दोनो नंबर्स बंद मिले.जिस वजह से नीलोफर की शाज़िया से बात ना हो सकी. 


ज़ाहिद ने नीलोफर को सख्ती से इस बात की हिदायत की थी. कि वो हर सूरत में अगले दिन ज़ाहिद के घर आ कर उस की अम्मी से मिले.


अपनी सहेली से बात करने में नाकामी के बाद नीलोफर ने फिर ठंडे दिल से ज़ाहिद की कही हुई बातों के मुतलक सोचा.तो नज़ाने क्यों उसे अब ज़ाहिद की कही हुई सब बातें अच्छी लगने लगीं थी.


असल में हक़ीकत ये थी. कि अपनी शादी के एक साल बाद अपने ही भाई जमशेद से अपने जिन्सी ताल्लुक़ात कायम करने की वजह से नीलोफर की जिस्मानी ज़रूरत तो पूरी हो रही थी. मगर अपने शोहर की अरबी औरत से दूसरी शादी की वजह से नीलोफर को ये बात समझ आ चुकी थी. कि उस का शोहर ना तो उस को अपने पास मसकॅट बुलाए गा और ना ही अब कभी खुद पाकिसान वापिस लोटे गा.


इस सूरते हाल में नीलोफर का दिल अपने शोहर के साथ गुज़ारा करने पर पहले ही राज़ी नही था. मगर उस को समझ नही आ रही थी कि वो इन हालत में करे तो क्या करे.


और अब ज़ाहिद की तजवीज़ पर गौर करते हुए नीलोफर को यकीन हो गया.कि अगर ज़ाहिद का बताया हुआ प्लान कामयाब हो गया. तो अपने शोहर से छुटकारा पाने के बाद नीलोफर अपनी बाकी की जिंदगी बिना किसी ख़ौफ़ और डर के अपने भाई की बाहों में बसर कर सकती है.ये बात सोच कर नीलोफर का दिल बाग बाग हो गया.


नीलोफर अभी अपनी इन्ही बातों में गुम थी कि इत ने में उस के शोहर का मसकॅट से फोन आ गया.


नीलोफर का अपने शोहर से उस की दूसरी शादी की वजह से मनमुटाव तो पहले ही चल रहा था. और फिर ज़ाहिद की बात को ज़हन में रखते हुए नीलोफर ने आज अपने शोहर से फोन पर लड़ाई के दौरान तलाक़ का मोतलबा कर दिया.


अपनी बीवी के मुँह से तलाक़ का मुतालबा सुन कर नीलोफर के शोहर को कोई हैरत ना हुई.और उस ने भी गुस्से में नीलोफर को बता दिया कि अगले चन्द दिनो में वो उसे तलाक़ के पेपेर्स मैल कर देगा .


असल में नीलोफर का शोहर तो अब खुद भी ये ही चाहता था. कि किसी तरह वो भी नीलोफर से छुटकारा हासिल कर ले.


अपने शोहर से लड़ाई के बाद नीलोफर ने गुस्से में अपना समान पॅक किया और जमशेद को बुला कर अपने भाई के साथ अपने माँ बाप के घर चली आई.


अपने अम्मी अब्बू के घर आ कर नीलोफर ने उन को सारी बात बताई. तो नीलोफर के अब्बू ने उसे धमकी दी कि अगर तुम ने अपने शोहर से तलाक़ ली तो हमारे साथ तुम्हारा जीना मरना ख़तम हो जाएगा. 


अगर आम हालत होते तो नीलोफर अपने अब्बू की ये बात सुन कर अपने शोहर से तलाक़ के मुतलबे से दुस्त बदर हो जाती. मगर अब हर रात अपने भाई के लंड को अपनी चूत में डलवा कर सोने के तसव्वुर ने नीलोफर के दिल से सब ख़ौफ़ ख़तम कर दिया था. इसीलिए अब उसे किसी की भी कोई परवाह नही रही थी.


दूसरे दिन सुबह सवेरे नीलोफर ने ज़ाहिद की अम्मी को फोन मिलाया. 


ज्यों ही रज़िया बीबी ने फोन आन्सर किया तो नीलोफर बोली “ आंटी में नीलोफर बोल रही हूँ”.


“हां बेटी केसी हो तुम” रज़िया बीबी ने नीलोफर से पूछा.


“आंटी मुझे पता है शाज़िया कराची गई हुई है,मगर में आप से मिलने आप के घर आना चाह रही थी”. नीलोफर ने रज़िया बीबी से कहा.


“बेटी ये तुम्हारा अपना घर है जब चाहो आ जाओ” नीलोफर की बात के जवाब में रज़िया बीबी ने कहा.


“अच्छा में आज शाम को आप से आ कर मिलती हूँ” नीलोफर ने रज़िया बीबी को बताया.


रज़िया बीबी से टाइम सेट करने के बाद नीलोफर ने फिर शाज़िया को फोन मिलाया.मगर इस बार भी उसे शाज़िया के दोनो नंबर्स ऑफ मिले.


जिस पर नीलोफर को बहुत गुस्सा आया मगर वो इस के अलावा कर भी क्या सकती थी.इसीलिए नीलोफर ने ज़ाहिद को टेक्स्ट कर के उसे उस की अम्मी से शाम की मुलाकात के बारे इत्तला कर दी.


शाम के वक्त नीलोफर अपने भाई जमशेद को साथ ले कर बहुत ही डरते हुए दिल और काँपती टाँगों के साथ रज़िया बीबी के सामने उन के ड्राइंग रूम में आन बैठी.


चाय पीने और इधर उधर की बातों के दौरान जमशेद और खास तौर पर नीलोफर के जिस्म से पसीना बह कर उस के मलमल के कपड़ों को भिगो रहा था.


रज़िया बीबी ने नीलोफर के गुफ्तागॉ और बैठने के अंदाज़ से महसूस कर लिया कि आज नीलोफर उस से कोई खास बात करने आई है. मगर ना जाने क्यों नीलोफर को उस से बात करने का होसला नही हो रहा.


“अच्छा बताओ क्या बात करनी थी तुम ने मुझ से नीलोफर” रज़िया बीबी ने अपना चाय का कप टेबल पर रखते हुए नीलोफर से पूछा.


“वूओ वूओ असल में कुछ खास बात नही थी,वैसे ही आप से मिलने को दिल चाह रहा था,इसीलिए चली आई” रज़िया बीबी की बात सुन कर नीलोफर चाहने के बावजूद कुछ ना बोल पाई और उस की ज़ुबान उस का साथ छोड़ने लगी.


“कुछ तो बात है जो तुम मुझ से कहना चाह रही हो मगर कह नही पा रही” रज़िया बीबी ने नीलोफर को इस तरह नर्वस होता देख कर कहा.


“वो असल में आंटी बात ये है कि हम लोग आप के बेटे ज़ाहिद के कहने पर आप की बेटी शाज़िया और बेटे ज़ाहिद की शादी के लिए रिश्ता ले कर आए हैं” जब जमशेद ने अपनी बहन नीलोफर को रज़िया बीबी से बात करने में हिचकते हुए महसूस किया तो वो खुद बोल उठा.


जमशेद की बात सुन कर नीलोफर और रज़िया बीबी दोनो ने हैरान होकर जमशेद की तरफ देखा. 


नीलोफर को हैरत इस बात पर हुई कि जिस बात को वो शाज़िया की अम्मी के सामने कहने से डर रही थी. आख़िर कार उस के भाई ने उस से पूछे बिना कह दी.


जब कि रज़िया बीबी को हैरत इस बात पर हुई कि शाज़िया तो उसे अपनी शादी का खुद बोल कर कह चुकी थी. मगर एक तरफ तो ज़ाहिद शादी के लिए राज़ी भी नही हो रहा था.और दूसरी तरफ जमशेद और नीलोफर के ज़रिए अपने और अपनी बहन की शादी के रिश्ते की बात भी अपनी अम्मी तक पहुँचा रहा है.


“शाज़िया की शादी की बात तो समझ आती है, मगर ज़ाहिद???” रज़िया बीबी ने सवालिया नज़रों से नीलोफर और जमशेद की तरफ देखते हुए कहा.


“ऊऊऊऊ जीिइईई ज़ाहिद भाई ने हम दोनो को आप से बात करने को कहा है” रज़िया बीबी की बात का नीलोफर ने फिर डरते डरते जवाब दिया.


रज़िया बीबी तो खुद कब से अपने बेटे की शादी की मुन्तिजर थी.


उस का दिल चाहता था कि उस का बेटा जल्दी से इस घर में उस की बहू को ले आए.और अपनी अम्मी को जल्द अज जल्द दादी बनाए ,ताकि वो अपने पोते पोतियों को अपनी गोद में खिला सके.


इसीलिए आज नीलोफर के मुँह से अपने बेटे ज़ाहिद की शादी की बात सुन कर रज़िया बीबी दिल ही दिल में खुशी से झूम उठी.


“ये तो तुम लोगों ने मुझे बहुत अच्छी खबर बताई है,अच्छा अब मुझे जल्दी से बताओ कि, कौन हैं वो लड़का और लड़की जिन का रिश्ता ज़ाहिद के कहने पर लाए हो तुम लोग” रज़िया बीबी ने खुश होते हुए नीलोफर और जमशेद से सवाल किया.


“वो लड़का और लड़की भी ज़ाहिद और शाज़िया की तरह आपस में बहन भाई है आंटी” नीलोफर ने रज़िया बीबी को बताया.


शाज़िया की अम्मी से बात करते करते अब नीलोफर की घबड़ाहट पहले की मुक़ाबले अब थोड़ी कम हो चुकी थी.


“ये तो अच्छा बात है, वैसे कौन है ये लोग,क्या करते हैं,ज़ाहिद इन को कैसे जानता है और उन दोनो की कोई फोटो भी मुझे दिखो ना” रज़िया बीबी ने एक ही साँस में काफ़ी सारे सवाल कर दिए.


“वो असल में आंटी हो सकता है आप को ये बात बुरी लगे, मगर हक़ीकत ये है कि ज़ाहिद भाई इस लड़की से प्यार करते है और उस से शादी करना चाहते है.जब कि मेरी सहेली शाज़िया भी इस लड़के को पसंद करती है” नीलोफर ने रज़िया बीबी पर आघात करते हुए कहा.


रज़िया बीबी के लिए नीलोफर की कही हुई ये बात हक़ीकत में एक आघात ही था. जिस को सुन कर वो हैरत जदा हो गई.


“ज़ाहिद और शाज़िया किसी को पसंद करते हैं और मुझे इस बात का ईलम ही नही” रज़िया बीबी ने हेरान होते हुए कहा.


“जी आंटी असल में इतने बड़े हो कर भी आप के बच्चे आप से शरमाते हैं ना,इसीलिए आप से उननो के कभी इस बात का ज़िक्र नही किया” इस बार जमशेद ने रज़िया बीबी की बात का जवाब दिया.


“अच्छा लड़के की उम्र किया है, वो जॉब क्या करता है और मुझे उन दोनो की तस्वीर तो दिखाओ ना” रज़िया बीबी ने अपना पहले वाला सवाल फिर दोहराया.


“आंटी लड़का तकरीबन 33 या 34 साल का हो गा, पोलीस मे मुलाज़िम है और उन दोनो की फोटो कार में पड़ी हैं में अभी ले कर आया” जमशेद ने जवाब दिया और ड्राइंग रूम से निकल कर बाहर गाड़ी की तरफ चल पड़ा.


“नीलोफर ये तो अच्छा है कि लड़के की वो ही उमर है जैसे ज़ाहिद और शाज़िया की ख्वाहिश है और पोलीस में होने की वजह से ज़ाहिद भी उस को अच्छा तरह जानता ही हो गा” जमशेद के जाने के बाद रज़िया बीबी ने नीलोफर से खुशी का इज़हार करते हुए कहा.


“जी आंटी ज़ाहिद भाई इस लड़के को अच्छी तरह जानते हैं और उन्होने खुद अपनी बहन के लिए ये लड़का पसंद किया है” नीलोफर ने आंटी रज़िया की बात का जवाब दिया.


“ये लो आंटी इस लिफाफे में उन दोनो बहन भाई की तस्वीरे हैं, जिन को आप के बच्चे ना सिर्फ़ पसंद करते हैं बल्कि शिद्दत से इन से शादी के ख्वाहिश मंद भी हैं,आप ये फोटो देखें और अब हम चलते हैं” जमशेद ने ड्राइंग रूम में एंटर होते ही बंद लिफ़ाफ़ा रज़िया बीबी के हाथ में थमाया और अपनी बहन नीलोफर को उठने का इशारा किया. जिस के साथ ही दोनो बहन रज़िया बीबी को खुदा हाफ़िज़ कह कर तेज़ी से घर से बाहर निकल आए.


जमशेद और उस की बहन नीलोफर को अलविदा करते हुए रज़िया बीबी बहुत खुश थी.कि आज ना सिर्फ़ उस की बेटी शाज़िया की ख्वाहिश के मुताबिक एक जवान मर्द का रिश्ता उस के लिए आ गया था. बल्कि ज़ाहिद भी आख़िर शादी कर के अपना घर बसाने पर रज़ा मंद हो चुका था. और वो भी ऐसे लड़के,लड़की से जो शाज़िया और ज़ाहिद की तरह आपस में बहन भाई थे और एक दूसरे को पसंद भी करते थे.


इसी बात पर खुस होते रज़िया बीबी ने जल्दी से लिफ़ाफ़ा खोला और उस में पड़ी हुई दो कलर फोटो को देख कर रज़िया बीबी हैरान हुई.


जमशेद ने जो लोफ़ाफ़ा रज़िया बीबी को दिया था. वो असल में वो ही एनवोलप था जो ज़ाहिद ने नीलोफर को एक दिन पहले दिया था. और उस में दोनो तस्वीरे किसी और की नही बल्कि ज़ाहिद और शाज़िया की अपनी तस्वीरे थी. 


आज इन ही फोटो के ज़रिए ज़ाहिद ने अपनी सग़ी बहन से शादी के लिए अपना रिश्ता अपनी ही सग़ी अम्मी को भिजवा दिया था.


अपने ही बेटे और बेटी की तस्वीर एँवलोप से बरामद होते देख कर पहले रज़िया बीबी को कुछ समझ में ना आया कि ये सब किया है. 


फिर जब फोटो को देखते देखते रज़िया बीबी के कानों में नीलोफर और जमशेद के कहे हुए अल्फ़ाज़ की आवाज़ दुबारा आने लगी कि “ लड़का 33 साल का है,पोलीस में है ,दोनो लड़का और लड़की आपस में बहन भाई हैं और एक दूसरे को पसंद भी करते हैं इसी लिए वो आपस में शादी के ख्वाइश मंद है” तो नीलोफर और जमशेद की कही हुई इन सब बातों को ज़हन में दोहराते हुए रज़िया बीबी को सारा मामला समझ में आ गया.


रज़िया बीबी को आज अपनी ही सग़ी बेटी के लिए अपने ही सगे बेटे का रिश्ता आया था. 


और इस बात को जानते और समझते हुए रज़िया बीबी पर हैरत का पहाड़ टूट पड़ा और घबड़ाहट के मारे उस का दिल डोलने लगा


रज़िया बीबी अपने हाथ में पकड़ी अपने बच्चो शाज़िया और ज़ाहिद की फोटो को देखते हुए इंतिहाई गुस्से में आ गई. और उस ने जल्दी से अपना फोन उठा कर नीलोफर का नंबर मिलाया, मगर उसे नीलोफर का फोन बंद मिला.


नीलोफर से बात ना होने पर रज़िया बीबी को मज़ीद गुस्सा चढ़ गया. और उस ने नीलोफर और जमशेद को ज़ोर ज़ोर से माँ बहन की नंगी गालियाँ निकालते हुए गुस्से में अपना फोन फर्श पर मारा जो गिरते ही टूट गया.


रज़िया बीबी गुस्से से भरी अपने टीवी लाउन्ज में खड़ी थी. कि इतनी देर में ज़ाहिद अपने घर में दाखिल हुआ.


अपनी अम्मी को फोटो हाथ में पकड़े गुस्से की हालत में तेज़ी के साथ टीवी लाउन्ज में टहलते देख कर ज़ाहिद समझ गया. कि उस की अम्मी शाज़िया और उस की तस्वीरें देख चुकी हैं. 


लेकिन इस के बावजूद ज़ाहिद अपनी अम्मी के सामने ये ज़ाहिर करना चाहता था कि जैसे उस को किसी भी बात का ईलम नही.इसीलिए वो बहुत नॉर्मल अंदाज़ में टीवी लाउन्ज के अंदर आया और अपनी अम्मी को देख कर पूछा “अम्मी ख़ैरियत तो है आप आज इतने गुस्से में क्यों हैं”.


“ ख़ैरियत ही तो नही है ज़ाहिद ,तुम आ ही गये हो तो में ये जानना चाहती हूँ कि ये क्या ज़लील ड्रामा खेल रहे हो तुम सब लोग मुझ से” रज़िया बीबी ने ज्यों ही अपने बेटे को टीवी लाउन्ज में आता देखा.तो गुस्से से फुन्कार्ते हुए उस ने अपने हाथ में पकड़ी ज़ाहिद और शाज़िया की फोटो को ज़ाहिद के मुँह पर दे मारा.


“अम्मी क्या हो गया है आप को मुझे कुछ समझाए तो सही” ज़ाहिद ने जान बूझ कर अंजान बनते हुए अपनी अम्मी से पूछा.


“वाह तुम तो ऐसे अंजान बन रहे हो जैसे तुम को किसी बात का ईलम ही नही” ज़ाहिद का जवाब सुन कर रज़िया बीबी को और तुप चढ़ गई.और वो फिर उँची आवाज़ में चिल्लाई.


“अम्मी में सच कह रहा हूँ मुझे कुछ नही पता है आप ये क्या कह रही हैं” ज़ाहिद ने फिर अम्मी से कहा.


“ वो कुत्ते की बच्ची नीलोफर और उस का बे गैरत भाई जमशेद मुझे ये तस्वीरे दे गये हैं, और कहते हैं कि तुम ने उन लोगो को मेरे पास भेजा है शाज़िया के रिश्ते के लिए,सच सच बताओ क्या ये बात सही है ज़ाहिद” रज़िया बीबी ने गुस्से में चिल्लाते हुए अपने बेटे से पूछा.


रज़िया बीबी अपने दिल ही दिल में ये दुआ माँग रही थी. कि काश ये सब एक भयानक मज़ाक हो. और काश ज़ाहिद उसे ये कह दे कि उस ने नीलोफर से इस किस्म की कोई बात नही कही.


तो फिर वो अपने बेटे ज़ाहिद से कह कर नीलोफर और उस के पूरे खानदान की वो हालत बनवाएँगी. कि उन कमीनो की अगली सात नस्लो भी क्या याद करेंगी. कि किसी के साथ ऐसा गंदा मज़ाक कैसे किया जाता है. 


ज़ाहिद ने अम्मी की फैंकी हुई अपनी और अपनी बहन शाज़िया की फोटो को फर्श से उठाया और उन को हाथ में ले कर बहुत गौर से देखने लगा. मगर उस ने अपनी अम्मी की बात का कोई जवाब ना दिया.


अपनी जवान बहन के मोटे और भरे मम्मो को तस्वीर में देख कर ज़ाहिद की आँखों और मुँह पर एक मक्कारी भरी शैतानी मुस्कुराहट फैलती चली गई.


अपने बेटे ज़ाहिद की खामोशी और उस के चेहरे पर ज़ू महनी मुस्कराहट को देख कर रज़िया बीबी का दिल पहले से ज़्यादा डोलने लगा. और ज़ाहिद से कोई जवाब ना पा कर वो दुबारा चीखी “ज़ाहिद खामोश क्यों हो,कुछ तो बको और मुझे बताओ कि ये सब माजरा किया है”


“क्यों अम्मी आप को अपनी बेटी के लिए भेजा हुआ मेरा रिश्ता पसंद नही आया क्या” ज़ाहिद अपनी शैतानी आँखों को अपनी अम्मी की आँखों में डालते हुए, इतनी बड़ी बात बड़े आराम और होसले से अपनी अम्मी से कह गया.


“ क्या बकवास कर रहे, तुम होश में तो ज़ाहिद, क्या तुम ने वाकई ही नीलोफर के हाथ अपनी ही सग़ी बहन के लिए अपना रिश्ता भिजवाया है??” अपने बेटे की बात सुन कर रज़िया बीबी का सर चकराने लगा. और उसे यूँ महसूस हुआ कि जैसे किसी ने उस के पावं तले से ज़मीन खैंच ली हो.


“हां अम्मी जी ये बात सच है,आप ही तो मुझे बार बार शादी करने पर मजबूर कर रही थी ना” ज़ाहिद ने बड़े सकून से अपनी अम्मी को जवाब दिया.


“ज़ाहिद लगता है तुम पागल हो चुके हो,मेने तुम को किसी दूसरी लड़की से शादी करने का कहा था. और तुम अपनी ही सग़ी बहन के साथ ये गलीज़ हरकत करने का सोचने लगे,तुम जानते हो कि ये बात ना सिर्फ़ ना मुमकिन ही नही बल्कि गुनाह-य- कभीरा भी है बेटा”रज़िया बीबी ने जब ज़ाहिद को इस तरह पुरसकून हालत में अपनी ही सग़ी बहन से शादी करने की बात करते सुना. तो उसे यकीन हो गया कि उस का बेटा ज़ेहनी तौर पर पागल हो चुका है. इसी लिए वो इस तरह की बहकी बहकी बातें करने लगा है.


“क्यों ना मुमकिन है ये बात,आप ही बताएँ क्या कमी है मुझ में,जवान और पड़ा लिखा हूँ और सब से बड़ी बात कि अच्छी नोकरी है मेरी,तो आप को तो खुश होना चाहिए अपनी बेटी के लिए आने वाले मेरे इस रिश्ते पर अम्मी” ज़ाहिद ने अपनी अम्मी के नज़दीक जाते हुए कहा.


अपने बेटे के मुँह से इस तरह की वाहियात बातें सुन कर रज़िया बीबी का मुँह गुस्से से लाल पीला हो गया. और उस ने अपने नज़दीक पहुँचे हुए ज़ाहिद के मुँह पर ज़ोर दार किस्म के थप्पड़ो की बरसात कर दी.


ज़ाहिद ने अपने मुँह पर पड़ते अपनी अम्मी के थप्पड़ो को नही रोका और चुप चाप खड़ा अपनी अम्मी से मार ख़ाता रहा. 


वो खुद चाहता था कि जब उस की अम्मी दिल भर कर अपने अंदर का गुस्सा उस पर निकाल लेंगी. तो फिर ही वो उन से सकून से मज़ीद बात चीत करे गा.


जब रज़िया बीबी अपने बेटे के मुँह पर तमाचे मारते मारते थक गई. तो वो पास पड़े सोफे पर बैठ कर ज़रो कातर रोने लगी.


ज़ाहिद भी अपनी अम्मी से मार खाने के बाद खुद भी उन के सामने पड़े सोफे पर जा बैठा. और अपनी अम्मी के चुप होने का इंतिज़ार करने लगा.


कुछ देर बाद जब रज़िया बीबी रो रो कर थक गई. तो ज़ाहिद अपने सोफे से उठ कर अपनी अम्मी के पास जा बैठा. और उन के कंधे पर हाथ रख कर प्यार से अपने गले से लगा लिया.


रज़िया बीबी आज अपने बेटे की बातें सुन कर उस से नफ़रत करने लगी थी. 


इसीलिए वो ज़ाहिद के हाथ को झटक कर तेज़ी से उठी और दूसरे सोफे पर जा बैठी.


टीवी लाउन्ज के दूसरे सोफे पर बैठते ही रज़िया बीबी ने अपनी आँखों में आते हुए आँसुओं को पोन्छते हुए ज़ाहिद से कहा “ज़ाहिद ये सब क्या है और कब से ये सब गंदा खेल तुम दोनो बहन भाई इस घर में खेल रहे हो”


“अम्मी अगर आप अपने आप में थोड़ा होसला पेदा करें तो में आप को सब कुछ सच सच और पूरा तफ़सील से बता सकता हूँ”. ज़ाहिद ने अपनी अम्मी की तरफ देखते हुए कहा.


रज़िया बीबी अब पहले की मुक़ाबले अब थोड़ा अपने आप को संभाल चुकी थी. और उस का दिल भी अब ये चाह रहा था. कि वो अपने बेटे के मुँह से सारी बात सुन कर ये बात जान सके कि उस की तर्बियत में ऐसी क्या कमी रह गई थी. कि उस की नाक के नीचे ही उस के बच्चे आपस में ही प्यार की पींगे बढ़ाते हुए गुनाह के रास्ते पर चल निकले थे.


“अच्छा बताओ ये सब काम कब और कैसे स्टार्ट हुआ ज़ाहिद” रज़िया बीबी ने अपने रुखसार पर बैठे आँसू को अपने दुपट्टे से पोन्छते हुए ज़ाहिद से कहा.


इस के बाद ज़ाहिद ने नीलोफर और जमशेद से मुलाकात से ले कर पिंडी एर पोर्ट तक और उस के बाद नीलोफर और जमशेद के साथ शाज़िया और अपनी शादी वाले प्लान की सारी बात अपनी अम्मी के गॉश-ओ-गुज़र कर दी.


मगर इस सारी बात में उस ने पूरी कोशिश की कि लंड,फुद्दि जैसा कोई नंगा या गंदा लफ़्ज अपनी अम्मी के सामने उस के मुँह से अता ना हो. 


जब रज़िया बीबी को एक बहन भाई होते हुए नीलोफर और जमशेद के आपस जिन्सी ताल्लुक़ात कायम करने वाली बात का ईलम हुआ.तो ज़ाहिद और शाज़िया की तरह उन की अम्मी का मुँह भी हैरत से खुला का खुला रह गया.


ज़ाहिद और शाज़िया की तरह रज़िया बीबी के लिए भी ये ना काबले यकीन बात थी. कि सगा भाई होते हुए भी जमशेद अपनी ही सग़ी बहन का यार भी बन गया था.


“अच्छा अब में सारी बात जान चुकी हूँ,लेकिन अगर नीलोफर और जमशेद ने एक ग़लत काम किया है. तो तुम लोग भी क्यों उसी ग़लत काम को करने पर तूल गये हो बेटा” रज़िया बीबी ने ज़ाहिद की बात ख़तम होने पर उसे समझाते हुए कहा.


“अम्मी मेने इस वाकये से पहले तक कभी अपनी बहन के बारे में इस तरह की कोई बात सोची तक नही थी,लेकिन नीलोफर और जमशेद से एक मुलाकात ने मेरी ज़हिनियत ही बदल कर रख दी, अब हक़ीकत ये है कि जमशेद की तरह में भी अपनी ही बहन शाज़िया से मोहब्बत करने लगा हूँ और उस से शादी का ख्वाहिश मंद हूँ और उस के लिए आप की इजाज़त चाहता हूँ” ज़ाहिद ने अपनी अम्मी की बात के जवाब में कहा.


“तुम को ऐसी घटिया बात सोचते हुए भी शरम आनी चाहिए ज़ाहिद,मुझे तो शरम आ रही है तुम को अपना बेटा कहते हुए” रज़िया बीबी ने अपने बेटे को कोसते हुए कहा.


“अम्मी चाहे आप कुछ भी कहो में अब शादी करूँगा तो सिर्फ़ शाज़िया से वरना नही” ज़ाहिद ने अपनी अम्मी को अपना फ़ैसला सुनाते हुए कहा.


अपने बेटे की बात सुन कर रज़िया बीबी का दिल फिर काँपा और वो अपने बेटे ज़ाहिद को समझाने वाले अंदाज़ में बोली “ बेटा तुम क्यों ये बात नही समझते कि ये सब जो तुम सोच और कह रहे हो ये एक बहुत बड़ा गुनाह है”


“अम्मी मुझे कुछ नही पता बस मेने अपना फ़ैसला आप को सुना दिया है” ज़ाहिद अम्मी की बात की अन सुनी करता हुआ बोला.


“मगर ज़ाहिद ये बात ठीक नही,तुम दोनो बहन भाई हो कर कैसे ये सब कर सकते हो भला, वैसे भी ये बहुत गुनाह वाला काम है और सोचो कि दुनिया और हमारे रिश्ते दार क्या कहेंगे बेटा” रज़िया बीबी ने अपने बेटे से कहा.


“कौन सी दुनिया और कौन से रिश्ते दार, आप जानती हैं कि अब्बू की मौत के बाद हमारे घर के क्या हालात हो गये थे, उस वक्त कौन सी दुनिया और कौन से रिश्ते दार हम लोगों की मदद को आगे आए थे,अब जब हमारा अच्छा वक्त चल रहा है तो इस वक्त मुझे किसी और की कोई परवाह नही अम्मी” ज़ाहिद ने अपनी अम्मी की बात का जवाब दिया.


“तुम को दुनिया या खुदा का ख़ौफ़ नही मगर मुझे है,इसीलिए में तुम्हे अपनी ही सग़ी बहन को अपनी बीवी बना कर इस घर में रखने की हरगिज़ हरगिज़ इजाज़त नही दूंगी ज़ाहिद” रज़िया बीबी गुस्से से अपने बेटे से कहा.


ज़ाहिद अब अपनी बहन की मोटी फुद्दि को हासिल करने के लिए पूरी तरह तुला हुआ था.और अपनी बहन की जवान गरम और प्यासी चूत में अपना मोटा लंड डालने के लिए उसे चाहे कोई भी हद क्रॉस क्यूँ ना करनी पड़े वो उस पर अब आमादा हो चुका था.


ज़ाहिद अब तक ये समझ रहा था. कि वो किसी ना किसी तरह से अपनी अम्मी को ये सब काम करने पर राज़ी कर ले गा. 


लेकिन जब उस ने देखा कि घी सीधी उंगली से नही निकल रहा. तो उसे पहली बार अपनी अम्मी पर बहुत गुस्सा आया. 


“में आप को सोचने के लिए चन्द दिन की मोहलत देता हूँ अम्मी,में चाहता तो ये ही हूँ कि शाज़िया को अपनी बीवी बनाने में आप की रज़ामंदी शामिल हो,लेकिन अगर दो दिन के बाद आप ने फिर भी मेरी बात ना मानी,तो फिर में ना सिर्फ़ शाज़िया को इस घर से भगा कर ले जाऊंगा, बल्कि में आप से ये मकान,जायदाद और सारा रुपैया पैसा भी छीन कर आप को कोड़ी कोड़ी का मोहताज कर दूँगा, और आप कुछ भी नही कर सकेगीं” ज़ाहिद ने पोलीस वालों के रवायती अंदाज में पहली बार अपनी ही अम्मी को धमकी देते हुए गुस्से में कहा.


ये कह कर ज़ाहिद गुस्से में उठ कर अपने बेड रूम की तरफ चला गया.


(इसी लिए तो लोग कहते हैं ना कि पोलीस वालों की ना दोस्ती अच्छी ना दुश्मनी अच्छी)


रज़िया बीबी के सामने ज़ाहिद आज एक बेटे के रूप में नही बल्कि पहली बार एक असली थाने दार “पुलसिया” के रूप में ज़ाहिर हुआ था. और रज़िया बीबी अपने बेटे का ये रूप देख कर ख़ौफ़ से कांप गई.


अपने बेटे की सारी बातें सुन कर रज़िया बीबी को तो समझहह ही नहीं आ रही थी. कि ये सब क्या हो रहा है.


इसीलिए वो अपने सर पर हाथ रख कर “सुन्न” हालत में सोफे पर ही बैठी रही और अपने आँसू दुबारा बहाने लगी.


उधर दूसरी तरफ अपने घर पहुँच कर नीलोफर ने शाज़िया को फोन मिलाया. तो इस बार शाज़िया ने अपना फोन उठा ही लिया.


“किधर हो यार कल से तुम को फोन कर कर के थक गई हूँ में” शाज़िया के फोन आन्सर करते ही नीलोफर बोली.


“यार इधर कराची में ही हूँ असल में मेरे फोन का चारजर नही मिल रहा था मुझे ” नीलोफर की बात सुन कर शाज़िया ने जवाब दिया.


“अच्छा ये बताओ तुम्हारे आस पास तो कोई नही एक बहुत ज़रूरी बात करनी थी तुम से” नीलोफर ने शाज़िया से पूछा.


“कोई नही में अपने कमरे में अकेली ही हूँ ,बताओ क्या बात है” शाज़िया ने नीलोफर की बात सुन कर उस से पूछा.


इस के बाद नीलोफर ने शाज़िया को ज़ाहिद से मुलाकात और प्लान से ले कर शाज़िया की अम्मी रज़िया बीबी से अपनी बात चीत तक सारी बात तफ़सील से शाज़िया को बयान कर दी.




शाज़िया तो नीलोफर की तरह अपने भाई से छुप छुप कर अपनी चूत मरवाने के चक्कर में थी. मगर उसे क्या ईलम था कि उस का भाई उसे अपनी दुल्हन बना कर अपने हमेशा हमेशा के लिए अपने पास ही रखना चाहता है.


इसीलिए नीलोफर के मुँह से अपने भाई का प्लान सुन कर ही ख़ौफ़ के मारे शाज़िया के पसीने छूटने लगे थे. और जब नीलोफर ने शाज़िया को बता दिया. कि वो उस की अम्मी से मिल कर उन्हे तस्वीरो वाला लिफ़ाफ़ा दे भी आई है. तो इस बात को जान कर शाज़िया का तो जैसे हार्ट ही फैल होने लगा.


“उफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ खुदाया अब क्या होगा,अम्मी या तो मुझे और भाई को क़त्ल कर देंगी या खुद को फाँसी लगा लेंगी ,नीलोफर” शाज़िया ने खोफ़ और परेशानी के आलम में अपनी सहेली से पूछा.


“यार मुझे भी इसी बात का डर था,मगर तुम्हारा भाई ज़ाहिद ही नही मान रहा था,इसीलिए मुझे उस की ज़िद के अगर हार माननी पड़ी”नीलोफर ने शाज़िया को बताया.


“अच्छा तुम फोन बंद करो में ज़ाहिद भाई ने पता करती हूँ कि क्या हो रहा है अभी हमारे घर में” शाज़िया ने नीलोफर से ये बात कहते हुए फोन काट दिया.


नीलोफर से बात ख़तम करते ही शाज़िया ने जल्दी से ज़ाहिद का नंबर मिलाया. तो फोन की पहली ही रिंग के बाद शाज़िया के कानों में ज़ाहिद भाई की आंवाज़ पड़ी“हेलो तुम कराची ख़ैरियत से पहुँच गई हो ना,मेरी जान”.


ज़ाहिद तो जैसे अपनी बहन शाज़िया के फोन के इंतज़ार में ही बैठा था.


“भाई सब ख़ैरियत है ना घर में,अम्मी किधर है,क्या हुआ?” शाज़िया ने घबराई हुई आवाज़ के साथ एक ही सांस में इतने सारे सवाल पूछ डाले.


“उफफफ्फ़ मेरी बनो सब कुशल मंगल (अमन शांति) है तुम चिंता मत करो” ज़ाहिद अपनी “माशूक” बहन और होने वाली बीवी की आवाज़ सुन कर चहक उठा. और हिन्दी अल्फ़ाज़ यूज़ करते हुए बड़े रोमॅंटिक अंदाज़ में अपनी बहन को होसला देते हुए बोला.


फिर ज़ाहिद ने अपनी बहन को अपने और अपनी अम्मी रज़िया बीबी के दरमियाँ होने वाली सारी बात डीटेल से बता दी.


“अब क्या हो गा भाई” अपने भाई के मुँह से सारी तफ़सील सुन कर शाज़िया पहले से ज़्यादा परे शान हो कर रोने लगी.


“अरे यार तुम फिकर मत करो यार,कुछ भी नही हो गा ,में हूँ ना में सब ठीक कर लूँ गा,बस तुम रोओ मत” ज़ाहिद ने अपनी बहन को तसल्ली देते हुए कहा.


शाज़िया को अपने भाई से बात चीत कर के थोड़ा होसला मिला. 


अभी उन दोनो का दिल आपस में कुछ और किस्म की बातें करने को चाह रहा था.मगर इतने में शाज़िया की छोटी बहन उस के कमरे में आ कर उस के पास बैठ गई.


शाज़िया ने ज़ाहिद को अपनी छोटी बहन के कमरे में आमद का बता कर फोन अपनी बहन को पकड़ा दिया. 


ज़ाहिद ने अपनी छोटी बहन से थोड़ी देर बात चीत कर के फोन बंद किया और सोने के लिए लेट गया.


उधर बाहर टीवी लाउन्ज में बैठी रज़िया बीबी कुछ देर सोफे पर बैठी अपने आँसू बहाती रही.और फिर जब वो थक गई तो अपने कमरे में सोने के लिए चली आई.


रज़िया बीबी ने पूरी रात बिस्तर पर करवटें बदलते और ज़ाहिद और शाज़िया के बड़े में सोचते सोचते और रोते रोते ही बसर कर दी.


अगली सुबह ज़ाहिद तो जल्दी ही उठ कर पोलीस स्टेशन चला गया. जब कि रज़िया बीबी बिना कुछ खाए पिए सारा दिन अपने बिस्तर पर बीमार बन कर पड़ी रही.


शाम को जब ज़ाहिद घर वापिस आया. तो वो होटेल से अपने और अपनी अम्मी के लिए खाना ले आया.


जब ज़ाहिद ने अम्मी के कमरे में जा कर उन को खाना दिया.तो रज़िया बीबी ने उसे खाने से इनकार कर दिया.


ज़ाहिद ने अपनी अम्मी को अपनी भूक हड़ताल ख़तम करने का कहा. मगर ज़ाहिद की तरह उस की अम्मी भी अपनी ज़िद पर कायम रहीं. 


आख़िर काफ़ी देर बाद थक हार कर ज़ाहिद ने अपनी अम्मी को उन के हाल पर छोड़ा .और खुद अपने कमरे में सोने चला गया.


ज़ाहिद के जाने के बाद काफ़ी देर तक रज़िया बीबी ने कमरे में रखे खाने की तरफ नज़र उठा कर भी ना देखा. मगर जो भी हो रज़िया बीबी एक बूढ़ी औरत थी. जो कि कल शाम से भूकी भी थी.


इसीलिए आख़िर कार कुछ देर बाद जब भूक रज़िया बीबी के लिए ना काबले बर्दास्त हो गई.तो उस को चारो-ना-चार उठ कर प्लेट में पड़ा खाना खाना ही पड़ा.


पंजाबी ज़ुबान की एक मिसाल है कि, 


“तिढ़ ना पाया रूठेआं

ते सबे गुलान ख़ुतेआं”


(कि जब तक पेट में रोटी ना जाय उस वक्त तक इंसान को कोई बात नही सूझती)


इसीलिए दो दिन की भूकि रज़िया बीबी को पेट भर कर खाना मिला.तो उस के दिल और दिमाग़ को भी कुछ सकून मिला और उस ने ठंडे दिल से कुछ सोचना शुरू कर दिया. 


रज़िया बीबी बिस्तर पर लेट कर अपनी गुज़री जिंदगी के बारे में सोचने लगी.


अपने ख्यालों में मगन हो कर अपनी गोज़िश्ता जिंदगी पर नज़र दौड़ाते दौड़ाते रज़िया बीबी को वो वक्त याद आ गया. जब उस के शोहर की मौत के बाद उस के सब रिश्ते दार उस का साथ छोड़ गये थे. 


तो उस वक्त कैसे ज़ाहिद और शाज़िया ने दिन रात मेहनत कर अपने घर का ना सिर्फ़ बोझ उठाया था. बल्कि खुद शादी के क़ाबिल होने के बावजूद पहले अपनी छोटी बहनों की शादियाँ कर के अपना फ़र्ज़ भी निभाया था.


साथ ही साथ रज़िया बीबी को वो रातें भी याद आ गईं. जब रात की तन्हाई में उस ने अपनी तलाक़ याफ़्ता बेटी को अपनी जिस्मानी प्यास से मजबूर हो कर अपनी गरम चूत से खेलते सुना था. 


अपनी बेटी की गरम सिसकियाँ सुन कर उसी वक्त ही रज़िया बीबी को अंदाज़ हो गया था.कि उस की जवान बेटी के जिस्म में बहुत गर्मी छुपी हुई है. जिस के लिए उसे एक ऐसे जवान मर्द की ज़रूरत है. जो उस के प्यासे जवान बदन की गर्मी को अच्छी तरह से संभाल सके.


ये बात सोचते सोचते पहली बार रज़िया बीबी के दिल में ख्याल आया. कि अगर जमशेद अगर अपनी बहन के शोहर की गैर मौजूदगी में अपनी बहन की चूत की प्यास बुझाने में अपनी बहन की मदद कर सकता है.


तो बाप की वफत के बाद एक अच्छे कपल की तरह घर का बूझ उठाने वाले ज़ाहिद और शाज़िया भी अगर अब शाज़िया की तलाक़ के बाद असल कपल बनना चाहते है तो इस में कोई हैरानगी तो नही.


“उफफफफफफफफफफफफ्फ़ खुदाया में ये क्या सोचने लगी हूँ” रज़िया बीबी के दिमाग़ में ज्यूँ ही ये बात आई.तो उस ने फॉरन अपने आप को कोसा.


मगर इस के साथ ये सब बातें सोचते सोचते रज़िया बीबी के दिमाग़ में गुज़रे हुए कल में की गई ज़ाहिद की सारी बातें भी याद आ गईं. 


(कहते हैं कि इंसान की हलाल की कमाई में जब हराम की अमेज़िश हो जाती है. तो इंसान आहिस्ता आहिस्ता बुरे भले की तमीज़ खो बैठता है)


रज़िया बीबी ने अपने शोहर की जिंदगी में बहुत ग़ुरबत देखी थी. इसीलिए जब उस के बेटे ने पोलीस ऑफीसर बन कर रिश्वत का माल घर लाना शुरू कर दिया. तो रज़िया बीबी इतना सारा रुपया पैसा देख कर बहुत लालची हो गई. और उस ने अपना रंग,रूप और रहन सहन फॉरन ही बदल लिया था.


अब कल जब ज़ाहिद ने अपनी अम्मी रज़िया बीबी को उस की बात ना मानने की शर्त में हर चीज़ से महरूम कर देने की धमकी दी. तो ज़ाहिद के लहजे में मौजूद सख्ती को सोच कर रज़िया बीबी को यकीन हो गया. कि अगर उस ने ज़ाहिद की बात मानने से अब इनकार किया. तो उस का बेटा ज़ाहिद अपनी कही हुई बात पर हर सूरत मे अमल करेगा.


इसीलिए अपनी ग़रीबी से अमीरी और दुबारा फिर ग़रीब हो जाने का तस्व्वुर कर के ही रज़िया बीबी के जिस्म में एक झुर्झुरी से दौड़ गई.


असल में हराम के पैसे की अपनी ही एक लज़्ज़त है. और अपने बेटे के हराम के पैसे से रज़िया बीबी ने अपनी ज़िंदगी में इतनी सारी सहूलियतें हासिल कर लीं थी. कि अब इन तमाम सहूलियतो से एक ही लम्हे में महरूम का तस्व्वुर ही रज़िया बीबी की जान लेवा हो गया था.


रज़िया बीबी सोच रही थी.कि अगर उस ने ज़ाहिद की बात ना मानते हुए अपने बेटे के सामने डट भी गई. तो फिर भी उस का बेटा ज़ाहिद और बेटी शाज़िया अब आपस में अपने जिन्सी ताल्लुक़ात कायम कर के ही रहेंगे.


इसीलिए उस के लिए अब बेहतर ये है कि ,“मियाँ बीवी राज़ी,तो क्या करे गा काज़ी” वाली मिस्साल पर अमल करते हुए उसे ब अमरे मजबूरी अपने बेटे की बात पर राज़ी होना ही पड़े गा.


अपनी इस सोच को जस्टिफाइ करने की खातिर रज़िया बीबी सोचने लगी. कि अपनी शादी के बाद अपने ससुराल में रहते हुए भी अगर नीलोफर और जमशेद के नाजायज़ ताल्लुक़ात के बारे में किसी को कानो कान खबर नही हुई. 


तो फिर जमशेद और नीलोफर के साथ शादी के बाद अपने ही घर में दोनो बहन भाई का मियाँ बीवी की तरह से एक साथ रहने का ईलम बाहर की दुनिया को कैसे हो सकता है.


इन सब बातों पर सोचते सोचते रज़िया बीबी ने अपने दिल को अपने बेटा ज़ाहिद और बेटी शाज़िया के बहन भाई से मियाँ बीवी में बदलते रिश्ते पर राज़ी किया और फिर उस की आँख लग गई.


अगले दिन सुबह जब रज़िया बीबी की आँख खुली. तो उस वक्त तक हुस्बे मामूल ज़ाहिद अपनी नोकरी पर जा चुका था.


नाश्ते से फारिग होने के बाद रज़िया बीबी ने रात वाले अपने फ़ैसले पर एक भर फिर गौर किया. और उस के बाद उस ने अपनी बेटी शाज़िया का नंबर डायल कर दिया.


कराची में माजूद शाज़िया ने जब अपनी अम्मी के नंबर से आती कॉल को अपने फोन पर देखा.तो ख़ौफ़ के मारे उस का रंग उड़ गया.


शाज़िया ने डरते डरते अपना मोबाइल उठा कर फोन को ऑन किया और बोली, हेलो.


“हन बेटी तुम्हारी अम्मी बात कर रही हूँ,केसी हो तुम” रज़िया बीबी ने ना चाहते हुए भी थोड़ा प्यार से अपनी बेटी से पूछा.


शाज़िया तो अपनी अम्मी से गालियाँ और कड़वाहट सुनने को तैयार बैठी थी. मगर अम्मी का ये धीमा लहज़ा सुन कर शाज़िया को बहुत हेरानी हुई.


“में ठीक हूँ अम्मी,आप केसी हैं” शाज़िया ने आहिस्ता से जवाब दिया.


“बेटी तुम्हे पता तो चल गया हो गा,कि जैसा तुम चाहती थी वैसा ही एक जवान रिश्ता तुम्हारे लिए आया है,तो अब शादी के बारे में क्या ख्याल है तुम्हारा” रज़िया बीबी ने बहुत पुरसकून अंदाज़ में अपनी बेटी शाजिया से पूछा.


अपनी अम्मी के मुँह से गुस्से भरी गलीज़ गालियों की बजाय अपने ही बेटे के रिश्ते की बात सुन कर शाज़िया समझ गई, कि ज़ाहिद भाई ने वाकई ही अपना कोई जादू दिखाया है.जो उन की अम्मी दो दिन में ही इतना बदल गई हैं. 


शाज़िया तो अपने तलाक़ के बाद गोजश्ता दो साल से किसी भी जवान लंड के इंतज़ार में अपनी चूत का पानी ज़ाया कर रही थी. 


और फिर अपनी सहेली नीलोफर के ज़रिए अपने ही सगे भाई के मोटे सख़्त और बड़े लंड से रोष नास होने के बाद. तो उस की फुद्दि अपने भाई के लंड को अपने अंदर काबू करने के लिए बे चैन होने लगी थी.


इन हालत में जब उस की अपनी अम्मी ही उसे अपने सगे भाई से चुदने की इजाज़त देने पर आमादा हो गई थी. तो “अंधे को क्या चाहिए दो आँखे” वाली मिसाल को ज़हन में रखते हुए शाज़िया को “हां” करने में भला क्या ऐतराज हो सकता था.


इसीलिए खुशी के आलम में उस ने फॉरन कहा “ जैसे आप की मर्ज़ी अम्मी मुझे कोई ऐतराज नही”.


रज़िया बीबी को भी अपनी गरम और प्यासी चूत वाली बेटी से इसी जवाब की उम्मीद थी. इसीलिए शाज़िया की रज़ा मंदी को सुन कर रज़िया बीबी बोली “ अच्छा तुम अपने उस बे गैरत भाई को ये बात खुद बता देना,अब में तैयारी शुरू करती हूँ और तुम कल की फ्लाइट से वापिस आ जाओ, तो में कल ही तुम्हारी और तुम्हारे भाई की शादी करवा दूं फिर”.


“नही अम्मी कल नही बल्कि ये काम अब आप तीन चार दिन बाद रोक लो तो बेहतर है”अपनी अम्मी की बात सुन कर शाज़िया ने फ़ौरन कहा.


“एक तो मुझे तुम लोगो की समझ नही आती, एक तरफ तुम्हारे भाई को शादी की “अखर” आई हुई है,अब जब मेने हां कर दी तो तुम कह रही हो तीन दिन रुक जाए,मगर क्यों” रज़िया बीबी ने गुस्से से अपनी बेटी शाज़िया से पूछा.


“ वो असल में कराची आते साथ ही मेरे पीरियड्स स्टार्ट हो गये हैं , और अब में तीन दिन बाद ही नहा कर पाक हो सकूँ गी अम्मी” शाज़िया ने शरम से झिझकते हुए कहा और जल्दी से फोन बंद कर दिया.


अपनी अम्मी का फोन बंद होते ही शाज़िया ने फॉरन नीलोफर को फोन मिलाया.


“आज बड़ी खुश महसूस हो रही हो तुम शाज़िया, क्या कारुन का ख़ज़ाना मिल गया है तुम्हें” नीलोफर ने फोन पर ही शाज़िया की आवाज़ में खुशी को महसूस करते हुए अपनी सहेली से पूछा.


“हां यार ये ही समझो, और कारुन के इस ख़ज़ाने का पता भी तो मुझे तुम ने ही बताया था ना, निलो” शाज़िया ने फोन पर खिल खिलाते हुए कहा.और फिर शाज़िया ने नीलोफर को अम्मी से होने वाली सारी बात सुना दी.


“हाईईईईईई यार ये तो बहुत ही जबरदस्त खबर दी है तुम ने, अब में भी तुम को एक अच्छी खबर सुनाती हूँ शाज़िया” नीलोफर ने शाज़िया की बात पर खुश होते हुए कहा.


“वो क्या, जल्दी से बताओ ना” शाज़िया से बेसबरी के साथ नीलोफर से पूछा.


“वो ये कि आज मेरे शोहार ने भी मुझे मेरा तलाक़ नामा भेज दिया है. मज़े की बात ये है कि उस बहन चोद गान्डु ने पिछले 5 महीनो से ये तलाक़ नामा लिख कर अपने पास रखा हुआ तो था.मगर इसे मैल अब मेरे मुतलबे पर किया है. यानी असल में मेरा शोहर मुझे तलाक़ तो काफ़ी टाइम पहले ही दे चुका है.इस सूरते हाल मे मुझे अब अपनी इदत गुज़रने का इंतिज़ार भी नही करना पड़े गा. और अगर में चाहूं तो में तुम्हारे भाई से आज ही निकाह भी कर सकती हूँ” नीलोफर ने शाज़िया को सारी बात बता दी. 


अपनी सहेली नीलोफर से ये बात सुन कर शाज़िया मज़ीद खुश हो गई.


“हाईईईईईईई तुम ने भी तो बहुत अच्छी खबर दी है मुझे ,अब बताओ आगे का क्या प्लान है” शाज़िया ने नीलोफर से पूछा.


“यार अपने शोहर से तलाक़ का मोतलबा करने की वजह से मेरे अम्मी अब्बू मुझ से नाराज़ हो गये हैं. उन का कहना है कि अपने शोहर से तलाक़ माँग कर मेने खानदान में उन की नाक कटवा दी है. और इस मामले में मेरा साथ देने पर अब्बू ने मेरे साथ साथ जमशेद भाई को भी घर से निकल जाने का हुकम दे दिया है. इसीलिए अब हम दोनो बहन भाई सब तुम्हारे घर के ऊपर वाले हिस्से में शिफ्ट हो जाएँगे” नीलोफर ने तफ़सील से सारी बात शाज़िया को बता दी.


“नीलोफर ये तो अच्छा है अब तुम बिना ख़ौफ़ के दिन रात अपने भाई से मज़े कर सको गी” शाज़िया ने नीलोफर को छेड़ते हुए कहा.


“हां यार अब मज़ा आएगा जब में और तुम दोनो अपने अपने भाइयों की बीवियाँ बन कर अपने ही भैया का बिस्तर गरम करेंगी.” नीलोफर ने भी शाज़िया की बात सुन कर खुशी से जवाब दिया.


“अच्छा निलो तुम ज़ाहिद भाई को फोन कर के उन्हे मेरी अम्मी के फ़ैसले से आगाह कर दो” शाज़िया ने नीलोफर से कहा.


“ना बाबा, अब तुम्हारा टांका अपने भाई से फिट हो गया है,इसीलिए मुझे दरमियाँ में से निकाल कर तुम खूद ज़ाहिद को ये बात बताओ” नीलोफर ने शाज़िया की बात सुन कर उसे जवाब दिया.


“बहुत बे फ़ैज़ सहेली हो तुम” शाज़िया ने नीलोफर के इनकार पर उस से नकली गुस्सा करते हुए कहा.


“वाह जी वाह, एक तो तुम्हारी प्यासी गरम फुद्दि के लिए तुम्हारे ही भाई के इतने बड़े और मोटे ताज़े लंड का बंदोबस्त किया है में ने, और अब में ही बे फ़ैज़ हो गई हूँ” नीलोफर ने हँसते हुए शाज़िया की बात का जवाब दिया.


दोनो सहेलियाँ इस बात पर खुल कर हस पड़ी .


“अच्छा बताओ तुम कब वापिस आ रही हो शाज़िया” नीलोफर ने थोड़ी देर बाद अपनी हँसी रोकते हुए शाज़िया से पूछा.


“ये तो अब फ्लाइट मिलने पर है कि कब वापसी होती है,वैसे अम्मी तो कह रही थी कि में कल ही घर वापिस आ जाऊं ” शाज़िया ने जवाब दिया.


“एक काम करना जब भी तुम्हारी सीट बुक हो, तुम ज़ाहिद को इस के बारे में ना बताना, तुम सिर्फ़ मुझे इत्तला करना, फिर में और जमशेद तुम को एरपोर्ट से पिक कर के ज़ाहिद को सर्प्राइज़ देंगे” नीलोफर ने शाज़िया को समझाते हुए कहा.


“ठीक है में ऐसा ही करूँगी ” शाज़िया ने जवाब दिया.


फिर थोड़ी देर अपने अपने वाले कल के बारे में गप शप लगा कर शाज़िया ने फोन बंद किया. और उस के बाद अपने भाई ज़ाहिद को फोन मिला दिया.


उस वक्त ज़ाहिद अपने किसी सरकारी काम से लाहोर आया हुआ था. इसीलिए अपनी कार ड्राइवर करते वक्त ज्यों ही ज़ाहिद ने अपनी बहन का नंबर अपने मोबाइल पर देखा.तो उस ने अपने कान में लगे हुए फोन के ब्लूटूथ को फॉरन ऑन कर दिया.


एक दूसरे की ख़ैरियत पूछने के बाद शाज़िया ने ज़ाहिद को अम्मी के फ़ैसले से मुतला किया.तो खुशी का मारे ज़ाहिद अपनी सीट से उछल पड़ा.


वैसे तो ज़ाहिद को पहले से ही यकीन था. कि उस की अम्मी भी आख़िर अपने बेटे की ज़िद के आगे हर मान जाएँगी. 


मगर ज़ाहिद को ये यकीन हरगिज़ नही था. कि दो दिनो में ही उस की लालची अम्मी अपने सारे हितीयार फैंक कर अपनी शिकस्त कबूल कर लेंगी. 


बहरहाल अपनी अम्मी की “हां” के फ़ैसले को अपनी बहन के मुँह से सुन कर ज़ाहिद का लंड उस की पॅंट में फुल खड़ा हो गया. और उस ने एक हाथ से कार के स्टियरिंग को पकड़ा और अपने दूसरे फारिग हाथ से अपने लंड को मसल्ते हुए शाज़िया से कहा “ तो अब जल्दी ही वापिस आ जाओ ना जान.अब तुम्हारे इस आशिक़ से तुम्हारी चूत की दूरी मज़ीद बर्दाश्त नही होती”.


“में जल्द ही वापिस आऊँगी मगर इस के लिए मेरी दो शर्ते होंगी जनाब” शाज़िया ने इठलाते हुए अपने आशिक़ भाई की बात का जवाब दिया.


“शर्तें, केसी शर्तें मेरी जान” ज़ाहिद ने भी उसी अंदाज़ में अपनी बहन से पूछा.


“पहली शर्त ये कि मेरी घर वापसी के बावजूद आप मुझे शादी वाले दिन तक हाथ नही लगाएँगे. और दूसरी शर्त ये कि मुझे अपनी बीवी बनाने के बाद आप नीलोफर को दुबारा कभी नही चोदेन्गे” शाज़िया ने अपने भाई को अपनी दोनो शर्ते बता दीं.


“हाईयययययययी कुर्बान जाऊं में अपनी शहज़ादी के,तुम अभी बहन से बीवी बनी भी नही और बीवियों वाले हुकम पहले ही चलाने शुरू कर दिए हैं मेरी जान” अपनी बहन की दूसरी शर्त सुन कर ज़ाहिद की हँसी निकल गई और वो बोला.


“में मज़ाक नही कर रही भाई,अगर आप को मेरी ये शर्ते मंजूर हैं तो बताओ वरना में घर वापिस नही आ रही” अपने भाई की तंज़िया हँसी सुन कर शाज़िया को तुप चढ़ गई.


“अच्छा जैसे मेरे दिल की रानी कहेगी में वैसे ही करूँगा बाबा,वैसी भी जिस भाई को तुम जैसी भरी हुए मस्त बदन और जनम जनम की प्यासी चूत वाली बहन चोदने को मिल जाय, तो उस का लंड किसी और की चूत में कैसे जाएगा जानू”. ज़ाहिद ने अपनी बहन को मक्खन लगाते हुए जवाब दिया.


“ठीक है में एक दो दिन में वापिस झेलम आने का प्रोग्राम बनाती हूँ” शाज़िया ने अपने भाई ज़ाहिद को कहा और फोन बंद कर दिया.


ज़ाहिद अपनी बहन शाज़िया से बात कर के बहुत खुश था.वो उस वक्त लाहोर की लिबर्टी मार्केट के पास से गुज़र रहा था.


इसी दौरान कार ड्राइवर करते हुए ज़ाहिद की नज़र लॅडीस अंडर गारमेंट्स वाली एक दुकान पर पड़ी.


ज़ाहिद ने सोचा कि क्यों ना अपनी बहन के लिए अपनी पसंद का खास ब्रेज़ियर और पैंटी खदीद के ले जाए. जिस को शादी के दिन पहन कर उस की बहन शाज़िया उस के साथ अपनी सुहाग रात मनाएगी .ये ही सोच कर ज़ाहिद ने अपनी कार पार्क की और फिर उस दुकान में चला आया. 


सेल्स मॅन ने ज़ाहिद को मुक्तिलफ स्टाइल और कलर्स में काफ़ी सारी इंपोर्टेड ब्रेज़ियर और पॅंटीस दिखाई. जिन को देखने के बाद आख़िर ज़ाहिद को रेड कलर में मेटल हुक्स और स्ट्रॅप्स वाला स्पेशल ब्रिडाल ब्रेज़ियर. और उस के साथ मॅचिंग थॉंग जिस के साइड में गोल्डन हुक्स थे, पसंद आ गया.


बातों बातों जब ज़ाहिद को पता चला कि ये ब्रा और पैंटी की दुकान कुणाल की वही दुकान है जिसकी कहानी राजशर्मास्टॉरीज( आरएसएस ) पर चल रही है तो ज़ाहिद को बड़ी खुशी हुई उसने बातों बातों में कुणाल से और भी उसके कारनामे सुने और फिर ज़ाहिद ने कुणाल से अपनी कहानी भी राजशर्मास्टॉरीज ( आरएसएस ) पर डालने के लिए कहा तो कुणाल ने राजशर्मा की मैल आइडी दी और कहा आप राज भाई से कॉन्टेक्ट कर लेना वो मुझसे बेहतर आपकी कहानी के साथ न्याय कर पाएँगे . और ज़ाहिद ने राजशर्मा की डीटेल अपने पास सेव की और कुणाल को थॅंक्स बोला . 



ज़ाहिद ने अपनी बहन शाज़िया के मम्मो के साइज़ के मुताबिक 40ड्ड का ब्रेजियर और लार्ज साइज़ का थॉंग खरीदा और पेमेंट कर के वापिस झेलम की तरफ चल पड़ा.


उधर दूसरी तरफ शाज़िया से फोन पर बात ख़तम करने के बाद रज़िया बीबी दुबारा सोच में पड़ गई. 


अपने लालची पन के हाथों मजबूर हो कर रज़िया बीबी ने अपने बेटे ज़ाहिद की बात मान तो ली थी. मगर अंदर से उस का दिल उसे अपने इस फ़ैसले पर अभी भी मालमत कर रहा था. 


इसीलिए रज़िया बीबी ने पक्का इरादा कर लिया. कि ज़ाहिद की बात मानने के बावजूद वो अपने बच्चो के किसी मामले में अमली तौर पर हिस्सा नही ले गी.


बल्कि वो अपनी खुली आँखों के सामने सब कुछ होता हुआ देख कर भी एक बे जान बुत्त की मानद घर के एक कोने में पड़ी रहे गी. 


ज़ाहिद उस शाम घर वापिस आया. तो उस ने अपनी अम्मी को अपने कमरे में बिस्तर पर ही लेटे हुए पाया.


“अम्मी में आप का शूकर गुज़ार हूँ कि आप ने मेरी बात मान कर हमारे घर को टूटने से बचा लिया” ज़ाहिद ने अपनी अम्मी से कहा.


रज़ाई बीबी ने अपने बेटे की बात का कोई जवाब ना दिया. और खामोशी से बिस्तर की चादर ओढ़े पड़ी रही.


ज़ाहिद ने अपनी अम्मी के पास शाम का खाना रखा और सुबह वाले खाली बर्तन समेट कर किचन में रख दिए.


किचन से निकल कर ज़ाहिद शाज़िया के कमरे में गया. और शाज़िया के ड्रेसिंग टेबल के ड्रॉ से अपनी बहन की पड़ी हुई एक अंगूठी (रिंग) निकल कर अपनी पॉकेट में रख ली.


ज़ाहिद अभी शाज़िया के कमरे से निकला ही था. कि उसे जमशेद का फोन आया.


“किधर हो यार” जमशेद की आवाज़ ज़ाहिद के कान में पड़ी.


“में घर में आया था और अभी वापिस पोलीस स्टेशन जाने का सोच रहा हूँ,तुम बताओ ख़ैरियत से फोन किया है” ज़ाहिद ने जमशेद की बात सुन कर उस से पूछा.


इस पर जमशेद ने ज़ाहिद को नीलोफर की तलाक़ वाली सारी बात बताई. और साथ ही साथ ज़ाहिद को नीलोफर के साथ उस घर के ऊपर वाले हिस्से में शिफ्ट होने का बताया.


आज का दिन ज़ाहिद के लिए बहुत सी खुशियाँ एक साथ लाया था. इसीलिए जमशेद से ये खबर सुन कर ज़ाहिद पहले से भी ज़्यादा खुश हो गया.


थोड़ी देर में जमशेद और नीलोफर अपना समान ले कर ज़ाहिद के घर पहुँच गये. तो ज़ाहिद ने घर का ऊपर वाला हिस्सा खोल कर उन दोनो बहन भाई के हवाले कर दिया.


ज़ाहिद उन दोनो को अपने घर छोड़ कर खुद बाज़ार चला आया. और उस ने झेलम में बाज़ार में एक ज्यूयेल्री शॉप पर अपनी बहन शाज़िया की पुरानी अंगूठी देखा कर शाज़िया के लिए एक नई सोने की रिंग साथ में “एसजेड” (शाज़िया ज़ाहिद) के नाम वाला सोने का एक लोकिट और सोने की चूड़ी (बॅंगल्स) भी पसंद कर के खरीद ली.


अगले दिन शाज़िया ने अपनी क़्वेटा और कराची वाली दोनो बहनों को जमशेद के साथ अपनी. और नीलोफर के साथ ज़ाहिद भाई की शादी का बता कर अपनी दोनो बहनों को शादी में शामिल होने की दावत दी. 


मगर दोनो बहनों ने अपने बच्चो के स्कूल में पढ़ाई की वजह से शादी में शिरकत से मज़रत कर ली.


अपनी बहनों को अपनी और ज़ाहिद भाई की शादी की दावत देना शाज़िया का फ़र्ज़ बनता था.


मगर शाज़िया दिल से अपनी दोनो बहनों की शादी में शिरकत नही चाहती थी. क्यों कि अपनी छोटी बहनों की मौजूदगी में शाज़िया का अपने भाई ज़ाहिद से शादी वाले दिन “मिलाप” ना मुमकिन हो जाता. इसीलिए शाज़िया को अपनी बहनों के इनकार पर दिल ही दिल में खुशी हुई. 


फिर शाज़िया ने कॉसिश कर के अगले दिन दोपहर की फ्लाइट पर सीट बुक करवा ली.और अपनी पिंडी आमद की नीलोफर को इतला कर दी. 


नीलोफर और जमशेद ने शाज़िया को एरपोर्ट से पिक किया. और फिर सब इकट्ठे पिंडी में अपनी अपनी शादी की शॉपिंग करने चले गये.


शाज़िया और नीलोफर ने अपनी अपनी पसंद के सुर्ख रंग के लहंगे खरीदे. और शाम को सब एक साथ झेलम वापिस चले आए.


शाज़िया के घर वापिस आने का रज़िया बीबी या ज़ाहिद को ईलम नही था.इसीलिए अपनी बेटी को यूँ अचानक अपने सामने देख कर रज़िया बीबी को हैरानी हुई.


रज़िया बीबी अपनी बेटी से रूखे अंदाज़ में मिल कर चुप चाप अपने कमरे में चली गई.


शाज़िया को अपनी अम्मी के इस रवैये पर हैरत हुई. मगर वो फॉरन ये बात समझ गई कि उस की अम्मी ने ज़ाहिद और शाज़िया के फ़ैसले को अभी दिल से कबूल नही किया.


इतनी देर में नीलोफर ने ज़ाहिद को फोन पर झेलम वापसी की खबर दे दी थी. 


ज़ाहिद अपनी बहन के वापिस आने की खबर पा कर उड़ता हुआ घर आया.तो शाज़िया जमशेद और नीलोफर के साथ ड्राइंग रूम में बैठ कर गप शप में मसरूफ़ थी.


ज्यों ही ज़ाहिद ड्राइंग रूम में एंटर हुआ. तो दोनो बहन भाई के दिल एक दूसरे को देख कर बहुत तेज़ी से धड़कने लगे.


ये दोनो बहन भाई की आपस में प्यार के इज़हार के बाद आशिक़ और माशूक के रूप में पहली मुलाकात थी. 


अपने भाई को यूँ अपने सामने देख कर शाज़िया की पीरियड वाली फुद्दि में से उस की चूत का पानी तेज़ी से टपक टपक कर उस की चूत पर लगे उस के पॅड में जज़्ब होने लगा. 


जब के शाज़िया को देख कर ज़ाहिद का दिल चाहा के वो जेया कर अपनी बहन के गरम जिस्म को अपनी बाहों में भर ले और उसे चूम चूम कर बे हाल कर दे. 


मगर अपनी बहन से किए हुए वादे का पास रखते हुए ज़ाहिद के शाज़िया की तरफ बढ़ते कदम रुक गये.


थोड़ी देर तक दोनो बहन भाई यूँ ही आँखों ही आँखो में एक दूसरे को चूमते और चाटते रहे.


शायद इसी मोके के लिए किसी शायर ने इंडियन मूवी का ये गीत लिखा था कि.


“तेरे नैना बड़े ज़ालिम मार ही डालोगे”


जब नीलोफर ने देखा कि दोनो बहन भाई की नज़रें एक दूसरे से हट नही रही. तो उस के सबर का पैमाना लबरेज हो गया और नीलोफर बोल पड़ी “यार अब तुम लोग लैला मजनू वाला ये ड्रामा ख़तम करो, ता कि खाना खाया जाए”.


नीलोफर की इस बात पर सब ने एक साथ कहका लगाया. और शाज़िया नीलोफर के साथ उठ कर किचन में चली गई.


खाने के दौरान भी दोनो बहन भाई एक दूसरे से नज़रें मिलाते और कभी नज़रें चुराते रहे.


खाने से फारिग हो कर ज़ाहिद नीलोफर को कमरे के एक तरफ ले गया. और कोने में जा कर नीलोफर से उस के कान में कुछ ख़ुसर पुसर करने लगा.


शाज़िया सोफे पर बैठी अपने भाई ज़ाहिद को नीलोफर से राज़-ओ-नियाज़ करता देख कर दिल ही दिल में सोच रही थी. कि नज़ाने ज़ाहिद भाई उस की सहेली से क्या ख़ुफ़िया बात चीत कर रहे हैं.


उधर ज़ाहिद की बात सुन कर नीलोफर के मुँह पर एक मुस्कराहट फैल गई. और वो ज़ाहिद के पास से हट कर शाज़िया के करीब आई. और ज़ू महनी अंदाज़ में शाज़िया की तरफ देख कर बोली “बानो आज खुशी के इस मोके पर मज़े दार सी चाय (टी) तो पिला दो ना”.


“खुशी का मोका,में समझी नही नीलोफर” शाज़िया ने अपनी सहेली की बात ना समझते हुए नीलोफर से पूछा.


“यार असल में तुम्हारा भाई तुम को अपनी बीवी बनाने से पहले तुम्हें मँगनी (इंग़ेज़मेंट) की रिंग पहनाना चाहता है, तो ये खुशी की बात ही हुई ना,चलो अब जल्दी से चाय बना कर लाओ, ता कि फिर हम सब मिल कर तुम्हारी अपने भाई के साथ तुम्हारी मँगनी की रसम अदा करें” नीलोफर ने खुश होते हुए शाज़िया से कहा.


अपनी सहेली की बात सुन कर शाज़िया ने हैरत से अपने भाई ज़ाहिद की तरफ देखा.तो ज़ाहिद ने मुस्कराते हुए अपनी पॉकेट से रिंग का एक डिब्बा निकाला. और उसे अपनी बहन शाज़िया की आँखों की सामने लहराने लगा.


“ये सब करने की क्या ज़रूरत है भाई” शाज़िया ने नीलोफर की बात और अपने भाई की हरकत पर हेरान होते हुए पहली बार अपने भाई को डाइरेक्ट मुखातिब कर के पूछा.


“ज़रूरत है तभी ही तो कह रहा हूँ, तुम्हें नही पता कि शादी से पहले माँगनी की जाती है बुद्धू” ज़ाहिद ने मुस्कराते हुए अपनी बहन को समझाया.


“उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ भाई तो मेरे साथ जाली शादी करने से पहले असली शादी वाली सारी रस्में भी पूरी करने पर तुला हुआ है”अपने भाई की इस बात पर शाज़िया के दिल में एक हल चल मच गई. 


“अच्छा चलो दोनो इकट्ठे मिल कर चाय बनाते हैं” नीलोफर ने शाज़िया को हाथ से पकड़ कर किचन की तरफ धकेलते हुए कहा.


“तो ये ख़ुसर फुसर हो रही थी तुम दोनो में” शाज़िया ने नीलोफर के साथ किचन में दाखिल होते हुए पूछा.


“हां ज़ाहिद ने मुझ से इसी बारे में मशवरा किया था यार” नीलोफर ने शाज़िया को जवाब दिया.


फिर चाय बनाने के बाद शाज़िया चाय की ट्रे ले कर आहिस्ता आहिस्ता चलती हुई टीवी लाउन्ज में वापिस आई. 


उस वक्त शाज़िया का ड्राइंग रूम में चाय की ट्री ले कर आने का अंदाज़ बिल्कुल ऐसे ही था. 


जैसे कोई लड़की अपना रिश्ता देखने के लिए आने वाले मेहमानो के सामने पहली बार चाय ले कर जाती है.


“ज़ाहिद साब ये है हमारी शाज़िया ख़ानम, जिसे देखने आज आप हमारे घर तशरीफ़ लाए हैं,तो बताइए केसी लगी आप को हमारी बानो” शाजिया ज्यों ही टीवी लाउन्ज में दाखिल हुई. तो उस के पीछे पीछे आती नीलोफर ने सोफे पर बैठे ज़ाहिद से पूछा.


शाज़िया अपनी सहेली के मुँह से ये इलफ़ाज़ सुन कर मस्त हो गई. और उस ने एक अदा के साथ चाय का कप अपने भाई के हाथ में ऐसे पकड़ाया, जैसे वाकई ही में उस का भाई ज़ाहिद अपनी ही बहन से शादी के लिए उस का रिश्ता देखने आया हो.


“हाईईईईईईई क्या बताऊ नीलोफर साहिबा, आप की बानो तो इस चाय से भी ज़्यादा गरम दिखती है मुझे ” ज़ाहिद ने एक हाथ से चाय का कप अपने होंठो से लगते हुए, अपनी बहन शाज़िया की तरफ देख कर आँख मारी. और दूसरे हाथ से शाज़िया के हाथ को पकड़ कर उसे अपने साथ सोफे पर बिठा लिया.


बे शक शाज़िया अपनी सहेली की मेहरबानी की वजह से अब अपने ही भाई से जिन्सी ताल्लुक़ात कायम करने के लिए ज़ेहनी तौर पर पूरी तरह आमादा हो चुकी थी.


मगर इस के बावजूद जमशेद और नीलोफर की मौजूदगी में अपने भाई के साथ इस तरह की बातें करना. और उस के साथ एक सोफे पर इतने करीब हो कर बैठने पर शाज़िया को एक उलझन सी होने लगी थी. 


लेकन इस से पहले कि शाज़िया अपने भाई ज़ाहिद के पास से उठ कर दूसरे सोफे पर बैठ पाती. ज़ाहिद ने चाइ के कप को टेबल पर रख कर अपने हाथ में पकड़ी अपनी बहन के हाथ की उंगली में अपने “नाम” की अंगूठी डाल दी.और साथ ही अपनी बहन के हाथ को अपने होंठो पर ला कर उसे चूम लिया.


शाज़िया अपने भाई के प्यार का ये अंदाज़ देख कर खुशी से फूली ना समाई.और उस ने शर्मो हया को बुला कर बे इख्तियारि में अपनी बाहें अपने भाई के जिस्म के गिर्द लपेट ली.


ज्यों ही ज़ाहिद ने शाज़िया की उंगली में सोने की रिंग पहनाई. तो जमशेद और नीलोफर ने तालियाँ बजा कर शाज़िया और ज़ाहिद को उन की मँगनी की मुबारकबाद दी.


अपनी बहन को इस तरह वलिहाना अंदाज़ में खुद से चिपटा हुआ पा कर ज़ाहिद अपनी बहन से किया हुआ वादा भूल गया.

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