एक लंबी कहानी सेक्स परिवार एमए सेक्स संबंध अध्याय 6
इतने में चाय आ गई हम चाय पीने लगे। मैंने चाय का कप रखते हए कहा- “अब कुछ अच्छा लग रहा है.” कहते हुए मैं उठकर बाहर बाल्कनी में चला गया।
मैंने 3 चाय और बटर टोस्ट का आर्डर दे दिया। फिर हम लोग बातें करने लेगे की बैकफस्ट कहां करना है?
ऋतु ने कहा- मुझे तो गरमा-गरम पराठे खाने हैं।
अनु ने कहा- मुझे भी।
मैंने कहा- चला फिर माल रोड पर चलते हैं। वहां बेकफस्ट करेंगे।
इतने में चाय आ गई हम चाय पीने लगे। मैंने चाय का कप रखते हए कहा- “अब कुछ अच्छा लग रहा है.” कहते हुए मैं उठकर बाहर बाल्कनी में चला गया।
दो मिनट बाद ऋतु और अनु दोनों मेरे पास आ गई।
मैंने कहा- मौसम कितना साफ है आज।
अनु बोली- “भगवान करे, इतनी जोर की बारिश आए की रात तक रूके ही नहीं…”
ऋतु ने अन् को चौक कर देखा और बोली- “दीदी बारिश हो गई तो घूमने कैसे जाएंगे? और वापिस भी तो जाना
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मैंने कहा- “मौसम बिल्कुल साफ है, बारिश नहीं आने वाली। चलो तैयार होते हैं..” फिर हम सब गम में आ गये।
मैंने रूम में आते ही अनु से कहा- “चलो एक-एक करके नहाकर आओ…”
अनु ने ऋतु की तरफ देखा तो ऋतु बाली- “सब साथ में नहाते हैं। मजा आएगा.
मैंने कहा- “ऋतु तुमने सच में बदिया आइडिया दिया है। चलो सब साथ नहाते हैं…”
अनु भी खुश हो गई। हम सब बाथरूम में चले गये। वहां जाकर मैंने अपने कपड़े उतार दिया, अपना जाकी भी उतार दिया।
मुझे ये सब करता देखकर अनु ने मुझसे कहा- “आपको शर्म नहीं आती, सबके सामने नंगा होने में?”
मैंने अनु को अपनी बाहों में लेकर कहा- “तुम भी हो जाओ। तुम भी मेरी तरह बेशर्म बन जाओ..”
अनु हँसने लगी, और बोली “ना बाबा ना.. मैं तो कपड़ों में ही नहा लेंगी..”
ऋतु तो अपने कपड़े उतरने लगी थी। उसने अपनी सलवार कमीज उतार दी, ब्रा पैटी उसने पहनी ही नहीं थी। वो बिल्कुल नंगी थी।
मैंने अन् को पकड़कर उसकी कमीज को उतार दिया फिर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा भी खोल दिया तो उसकी
सलवार भी उत्तार गई। अनु भी अब नंगी थी।
मैंने कहा- “अब तुम दोनों भी मेरे जैसी नंगी हो। चलो शावर में आ जाओ.” और शावर चला दिया अनु और ऋतु दोनों मेरे साथ अब शाबर के नीचे थी हम तीनों एक दूसरे से मस्ती कर-करके नहा रहे थे।
मैं अन् की चूची सहला देता था तो अन् मेरे लौड़ें को पकड़कर सहलाती थी। कभी ऋतु मेरे लण्ड को पकड़ती थी। काफी देर तक हम लोग ऐसे ही मजा करते रहे। इस सबसे हम सब में सेक्स करने की इच्छा जाग गई।
मैंने अनु को कहा- “मेरा लण्ड नहीं चूसोगी?”
अनु ने बिना कुछ कहे लण्ड को मुँह में ले लिया।
मैंने ऋतु से कहा- “तुम भी मेरे लण्ड को शेयर कर लो अनु के साथ.”
ऋत् भी नीचे बैठ गई। अब वो दोनों मेरे लौड़े को बारी-बारी से चूस रही थी। मैं जन्नत के मजे ले रहा था। अन् मेरे लौड़े को जब चूसती थी तब ऋतु मेरे टट्टों को सहलाती थी। इस तरह मेरा लौड़ा विकराल रूप में आ गया।
मैंने उन दोनों से कहा- “चलो अब मैं तुमको चोदूंगा..”
ऋतु ने चुटकी लेटे हुए कहा- “दोनों को एक साथ?”
मैंने कहा- “ही…. फिर हम तीनों रूम में आ गये। मैं बेड पर सीधा लेट गया, फिर कहा- “मेरा लण्ड तुम दोनों का झला है, पहले कौन झूला झलेगा?”
दोनों एक दूसरे को देखने लगी। फिर ऋतु मेरे लौड़े पर बैठ गई। मैंने ऋतु की चूत में अपना लण्ड घुसाकर नीचे से धक्के मारने शुरू कर दिए। ऋतु आह … करने लगी। मैंने जब महसूस किया की ऋतु की चूत में पानी आना शुरू हो गया है, तब मैंने ऋतु से कहा- “अब अनु को आने दो..”
ऋतु के हटते ही अनु झट से लण्ड पे अपनी चूत रखकर बैठ गई। अब अनु की चूत में मेरा लण्ड अंदर-बाहर हो रहा था। मैंने फिर से अनु की गाण्ड के नीचे अपने हाथों से सपोर्ट दे रखी थी। मैं अन् को चोदने लगा।
फिर मैंने अनु से कहा- “तुम अब घोड़ी बनो..”
अन् बैंड पर घोड़ी बन गई। फिर मैंने उसके साथ ऋतु को भी घोड़ी बना दिया। अब वो दोनों अपनी चिकनी चूत को मेरे सामने सजाकर घोड़ी बनी हुई थी। मैं सोचा पहले किसकी चत में लण्ड डालं? मैंने सोचा राउंड के हिसाब से डालता हैं। ऋतु का नम्बर ही बनता है। मैंने ऋतु की चूत में लण्ड डाल दिया।
ऋतु तो कल से लण्ड की प्यासी थी, वो लौड़ा चूत में लेकर मस्त हो गई। मैंने ऋतु की चूत में 20-25 शार मारे इस बीच में अन् की चूत में उंगली डालकर उसको मजा देता रहा था। मैंने अब अपना लण्ड ऋतु की चत से निकालकर अनु की चूत में डाल दिया। अब में ऋतु की गाण्ड को सहला रहा था। दोनों चूतें अपनी-अपनी बारी का इंतजार कर रही थी पर मेरा लण्ड कोई मशीन तो नहीं है।
मैंने अनु से कहा- “में तुम दोनों में से जिसकी चूत में झडॅगा उसको मैं एक बार फिर से चोदूंगा.”
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अन् ने मस्ती में कहा- “मेरी चूत में झड़ना…”
ऋतु की आवाज आई- “नहीं मेरी चूत में…”
पर मेरे मन में तो कुछ और ही था। मैंने अन् की चूत में अपना लौड़ा झाड़ दिया।
ऋतु ने गुस्से से कहा- “ये चीटिंग है। आपने जानकर ऐसा किया है..”
मैंने कहा- “नहीं, सच में में कंट्रोल नहीं कर पाया…”
मैंने अनु को कहा- “अब एक बार तुम और चुदागी…”
अनु ने खुश होते हुए कहा- “आई आम लकी..”
लण्ड झड़ने के बाद मैं बेड पर लेटा हआ था अत ने मेरे लौड़े को साफ कर दिया था वो दोनों भी मेरे दाएं-बाएं लेट गई।
मैंने कहा- “एक काम करते हैं। अभी रूम में ही कुछ मंगवा लेते हैं। बाद में बाहर जाकर जो मन होगा वो खाएंगे.”
ऋतु ने कहा- “हाँ, ये सही है..” क्योंकी तब तक 9:00 बज चुके थे।
मैंने कहा- तुम लोग अपने कपड़े पहन लो। मैं आईर देता हूँ।
दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए। मैंने रूम सर्विस पर फोन किया और कहा- “3 आमलेट और 3 चाय भेज दो…
हम तीनों अपने आईर का इंतजार कर रहे थे, और बातें कर रहे थे। इतने में आईर सर्व हो गया। मैंने एक
आमेलेट उठा लिया और खाने लगा। अनु और ऋतु भी अपना-अपना आमलेट खाने लगी। आमेलेंट का टेस्ट मस्त था चाय की चुस्किया लेटे हुए हमने ये डिसाइड किया की हम रूम से 12:00 बजे तक निकल जाएंगे।
फिर अनु ने कहा- “मैं अभी आई.” और वो उठकर बाथरूम में चली गई।
अनु के बाथरूम में जाते ही मैंने ऋतु को अपनी बाहों में भरकर उसके कान में कहा- “तु तुमने मेरे लिए जो किया है, वो और कोई भी नहीं कर सकता था। तुमने अनु से मुझे मिलवाकर मेरी वो तमन्ना पूरी कर दी, जो मुझे एक ख्वाब लग रही थी..” फिर मैंने ऋतु से कहा- “बस मेरे लिए एक काम और कर दो..”
ऋत् ने कहा- अब कौन सा काम?
मैंने कहा- “मुझे अनु की गाण्ड मारजी है..”
ऋतु ने मुझे चौंकते हुए कहा- “क्या?”
मैंने कहा- “मैं जब अनु की गाण्ड मारूंगा तुम मेरी हेल्प करना..”
ऋतु ने कहा- “वो इतनी आसानी से नहीं मानेंगी। उन्होंने आज तक पीछे से करवाया ही नहीं। आप रहने ही दो…
मैंने कहा- “अच्छा मैंने उसका प्यार से अगर राजी कर लिया तब?”
ऋतु बोली- “आप कोशिश करके देखो। हो सकता है शायद मान जाए…”
मैं बैंड पर अपनी आँखों को बंद करके लेट था, और मेरे दिमाग में सिर्फ अनु का जिस्म घूम रहा था। मैं अनु को जितना भोग चुका था, वो मुझे उतना ही कम लग रहा था। सच में अनु का जिशम था ही ऐसा। उसके गदराए हए जिम की बात ही अलग थी। उसकी मस्त गाण्ड को देखकर मेरे लण्ड में तफान आ जाता था। उसके जिम के उतार चढाब मुझे दीवाना बना रहे थे। मैं अनु को खुद से दूर नहीं होने देना चाहता था। मैं तो अनु को अभी और भोगना चाहता था। मैं अनु के बारे में ही सोच रहा था।
फिर अचानक अनु मेरे पास आई और बोली “आप तो फिर से सो गये..’
मैंने आँखें खोलते हुए कहा- “नहीं तो.”
अनु भी मेरे पास आकर लेट गई और उसने मेरे ऊपर अपनी टांग रखकर मुझे अपने जिएम से चिपका दिया अन् की गर्म सांसें मेरी सांसों से टकराने लगी। अन् बोली- “लग रहा है आपका मन जाने का नहीं कर रहा है…”
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मैंने कहा- नहीं ऐसी कोई बात नहीं है।
अनु बोली- “फिर क्या सोच रहे हो?”
मैंने अनु को अपनी बाहों में कसकर भर लिया और उसके होंठों पर किस किया और कहा- “अनु तुमने मुझे अपना दीवाना बना लिया है। मुझे जो सुख तुमने दिया है वो सुख मुझे आज तक नहीं मिला था ..”
अनु ने भी मुझे अपनी आँखों को बंद करते हए कहा- “बाब, तुमने भी मुझे वो सुख दिया है जिसकी मुझे कब से चाहत थी.”
अनु के मुँह से ये सुनकर मैंने अनु के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसके रसीले होंठों को चूसने लगा। अनु को भी अच्छा लग रहा था, वो भी पूरे प्यार से अपने होंठों को चुसवा रही थी। मेरे हाथ अब तक अनु की बड़ी बड़ी चूचियों को सहलाने लगे थे। अनु भी मस्ती में आती जा रही थी
मैंने अनु से कहा- “तुम अपने कपड़े उतारों”
अनु ने प्यार से कहा- “बाबू फिर से करोगे क्या?”
मैंने कहा- “हौं जान, जाने से पहले एक बार और कर लं। फिर कब मोका मिले पता नहीं.”
अनु के कहा- “आपको तो मस्ती आ रही है, तैयार कब होंगे?”
मैंने कहा- हो जाएंगे पहले तुम कपड़े तो उतारी।
अनु उठकर बेड पर बैठ गई। मैंने झट से अपनी शर्ट उतार दी। मैं सिर्फ अपने जाकी में था। मैंने अनु को देखा बा अभी ऐसे ही बैठी थी
मैंने उसको कहा- उत्तरी ना?
अनु ने मुझे बड़े प्यार से देखते हुए कहा- “खुद उतार लो..”
मैंने उसकी कुरती को उसकी चूचियों तक उठा दिया। अनु ने अपनी बाहों को ऊपर कर दिया। मैंने उसके गले में उसकी कुरती को निकालकर फेंक दिया फिर मैंने कहा- “सलबार भी तो उतरों ना..”
अनु बेड पर खड़ी होकर अंगड़ाई लेते हए बोली- “सिर्फ करना आता है खोलना नहीं आता?”
मैं उसके नाड़े को खोलकर उसकी सलवार को नीचे की तरफ खींच लिया। अब अनु की चिकनी जांघे मेरे सामने थीं। उसकी मोटी-मोटी जांघा में छुपी चूत देखकर, लण्ड में सुरसुरी होने लगी। मैंने अनु की जांघों पर किस करते हुए कहा- “तुम्हारी जांघे कितनी गोरी हैं…”
अनु ने अपनी दाना जांघों का आपस में चिपका कर कहा- “आपको अच्छी लगती है?”
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मैंने कहा- हाँ तुम्हारी जाधों को प्यार करने का मन करता है।
अनु ने हँसते हुए कहा- “मुझे खुद को इतनी भारी-भारी लगती है.”
मैंने मुश्कुराकर कहा- “नहीं, बिल्कुल भी नहीं। तुम लेट जाओ…” और मैंने उसके ऊपर रजाई डाल दी और खुद भी रजाई में घुस गया। अब हम दोनों रजाई में थे अनु को कसकर मैंने खुद से चिपका लिया।
अनु का गरम जिम मेरे जिएम से रगड़ खाने लगा। अनु की चूचियां मेरे जिम में रगड़ खाने लगी थी। मैं अनु को किस करने लगा, कभी उसकी गर्दन पर, कभी उसके गाल पर, कभी उसके गलें पर किस करने लगा। मेरे हाथ उसकी गाण्ड को सहलाने में बिजी थे। अनु की गाण्ड पर हाथ फेरने में मुझे बड़ा अच्छा लगता है। उसकी गोल मटोल गाण्ड की शेप बड़ी मस्त है। मैं अनु की गाण्ड को सहलाता रहा। उसके दोनों चतड़ों को अलग-अलग करके उसकी गाण्ड की दरार में अपनी उंगली फेरने लगा। मेरी हरकतों से अब तक अनु भी गरम हो चुकी थी।
अनु ने मेरे लण्ड का पकड़ लिया और जोर से दबाते हुए कहा- “मुझे नंगी कर दिया और खुद को टके हए हो..”
मैंने हँसते हुए अपने जाकी को उतार दिया और कहा- “ला कर लो, जो करना है..”
अनु ने मेरा नंगा लौड़ा को हाथ में कसकर पकड़ा और बोली- “इसको तो मैं मरोड़ दगी.”
मैंने कहा- “इसपर इतना गुस्सा क्यों हो?”
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अनु ने मुझे चिपटाते हुए कहा- “गुस्सा नहीं, इसपर तो प्यार आ रहा है.”
मैंने कहा- “फिर प्यार करो ना..”
अनु मेरे लौड़े को अपनी मुट्ठी में भरकर आगे-पी करने लगी। मैंने अनु की चूची को अपने मह में ले लिया। अनु ने सस्स्सी किया। मैं अनु के निपल को चूसकर उसका दूध पीने लगा। मुझे अब अनु के दूध का चस्का लग | था। अनु भी मुझे जब चूचियां चुसवाती थी तब उसको बड़ा मजा आता था। क्योंकी चूची चुसवाते समय उसकी सिसकियों से अंदाज लग जाता था की उसको कितना मजा आ रहा है।
मैं अनु के दूध को पीते-पीते उसकी गाण्ड के छेद पर अपनी उंगली फेरता रहा। अनु को अब तक समझ में नहीं
आ रहा था की मैं अब उसकी गाण्ड मारने की तैयारी कर रहा हूँ। मैं जानता था की अनु ने कभी गाण्ड नहीं मरवाई, उसके मन में डर होगा। इसलिए मैं उसके डर को धीरे-धीरे खतम करना चाहता था। ताकी अनु पो प्यार से गाण्ड मरवाने का मजा ले सके।
मैंने ऋतु से कहा- “कोई कोल्ड क्रीम देना…”
ऋतु ने मुझसे कहा- “क्या करना है कीम का?”
मैंने कहा- “दो तो पहले…”
ऋतु ने अपने हैंडबैग से मुझे काम निकालकर दी। मैंने रजाई से हाथ निकालकर क्रीम को अपनी पर ले लिया।
अनु ने अब मुझसे पूछा “क्या कर रहे हो?”
मैंने कहा- “अभी पता लग जाएगा…” कहकर अनु की गाण्ड के छेद पर अपनी उंगली रखकर अंदर घुसा दी।
अनु चंक पड़ी। उसने अपनी गाण्ड को सिकोड़ लिया, और बोली- “बाब, वहां कुछ मत करो…
मैंने कहा- “मुझे सिर्फ अपनी उंगली डालनी है और कुछ नहीं करेंगा..”
अनु ने अपनी गाण्ड को फिर से टीला छोड़ दिया। मैंने उसकी गाण्ड में उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू कर दी। मैं अब उसकी चूची चूसते हए अपनी उंगली से उसकी गाण्ड को टौलाल करने लगा। दो-तीन मिनट बाद मुझे लगनें लगा उसकी गाण्ड में मेरी उंगली फ्री आ जा रही है। अनु को भी मजा आने लगा था। मैंने अपनी एक और उंगली भी डालने की कोशिश कि, तो अनु को फिर से दर्द हआ।
अनु ने कहा- “बाबू दर्द होता है…”
मैंने उसके होंठों को चसना शुरू कर दिया। क्योंकी इससे उसको दर्द का एहसास नहीं होगा। मेरी दोनों उंगलियां भी जब फ्री हो गई तब मैंने अनु की चूची से मुँह हटा लिया और उसके पेट पर किस करते हुये उसकी नाभि तक आ गया। हम दोनों के ऊपर रजाई अभी तक थी। मैं अनु की दोनों जांघों के बीच में लेट गया मैंने अपने मुह को अनु की चूत पर रख दिया और ऐसा चूसना शुरू किया की अनु की सिसकियां जब तक पूरे रूम में नहीं गूंजने लगी मैंने अपना मुँह नहीं हटाया।
अनु अब पूरी तरह से गरम हो चुकी थी उसकी चूत लौड़ा मांग रही थी। पर मैं तो अनु की गाण्ड मारने की फिराक में था। मैंने अनु को बेड के कार्नर पर घोड़ी बना दिया और नीचे फर्श पर खड़ा हो गया।
ऋतु मुश्कुराकर सब देख रही थी। उसने मुझं आँख मारी की काम बन गया।
मैंने भी उसको इशारे में जवाब दे दिया। मैंने ऋतु को लण्ड चूसने का इशारा किया, तो ऋतु मेरे पास आकर घुटनों के बल बैठ गई। मैं ऋतु के मुँह में लौड़ा डालकर उसको लौड़ा चुसवाने लगा और साथ-साथ अनु की गाण्ड में उंगली घुसाता रहा। ऋतु की चूसा से लण्ड फुल तैयार हो गया। मैंने ऋतु के मुँह में लण्ड निकाल लिया और अनु की चूत में डाल दिया।
अनु की प्यासी चूत को राहत मिलने लगी। अनु की चूत मेरे लौड़े को एक बार में पूरा गटक गई और अब अनु अपनी गाण्ड को घुमा-घुमाकर लण्ड का मजा लेने लगी।
मैंने ऋतु को फिर से इशारा किया। वो अनु के मुँह के पास जाकर उसके होंठों को चूसने लगी और उसकी चूचियों से खेलने लगी। अनु और ऋतु दोनों एक दूसरे को किस करने लगी, तो मुझे अब पक्का यकीन हो गया की अनु पूरी मदहोशी में है।
मैंने अभी तक अनु की गाण्ड में अपनी उंगली को डाला हए था। मैंने अपनी उंगली बाहर निकाल ली। फिर मैंने
अनु की चत से लण्ड को बाहर निकाला और अनु की गाण्ड पर लगाकर जोर से दबा दिया। मेरे लण्ड का सुपाड़ा अनु की गाण्ड में आसानी से चला गया।
अनु जोर से चीखी- “बाब नहीं…” अनु ने कहा- “प्लीज वहां मत डालो, दर्द हो रहा है…”
मैंने अपने लण्ड को थोड़ा सा और जोर से दबाया और थोड़ा सा अंदर कर दिया। अनु की दर्द भरी आईईई उईईई
की सिसकियां सुनाई देने लगी। मैंने ऋतु को इशारे से कहा- “अनु का ध्यान दूसरी तरफ कर दे..”
ऋतु ने अनु की चूत को अपने हाथ से सहलाना शुरू कर दिया। मैंने अनु की गाण्ड में अब तक अपने लण्ड को पूरा डाल दिया था।
अनु की गाण्ड पहली बार लण्ड ले रही थी, और अनु की गाण्ड का छेड़ थोड़ा कसा हआ भी था। मैंने अनु के चूतड़ों का हाथ से पकड़कर फैलाते हुए धक्के मारने शुरू कर दिए। इससे अनु की गाण्ड का छेद घोड़ा और फैल गया। अब अनु की गाण्ड को भी मेरे लौड़े की चोट अच्छी लगने लगी। अनु की सिसकियों में जो दर्द था, वो अब मजे में बदल गया।
अनु अब “आहह… मेरा बाबू उईईई… आह्ह..” करने लगी।
अनु की गाण्ड पहली बार लण्ड ले रही थी, और अनु की गाण्ड का छेड़ थोड़ा कसा हआ भी था। मैंने अनु के चूतड़ों का हाथ से पकड़कर फैलाते हुए धक्के मारने शुरू कर दिए। इससे अनु की गाण्ड का छेद घोड़ा और फैल गया। अब अनु की गाण्ड को भी मेरे लौड़े की चोट अच्छी लगने लगी। अनु की सिसकियों में जो दर्द था, वो अब मजे में बदल गया।
अनु अब “आहह… मेरा बाबू उईईई… आह्ह..” करने लगी।
अनु की गाण्ड पर जब मैं चोट मारता था तब उसकी भुलभुले चूतड़ों पर शिरकन आ जाती थी, और उसके चूतड़ों पर चोट पड़ने से पट-पट की आवाज आ रही थी। मुझे ऐसा मजा कभी नहीं आया था। अनु की गरम और टाइट गाण्ड में मेरा लौड़ा खुद को ज्यादा देर तक रोक नहीं पाया और फिर मैंने अनु की गाण्ड में अपने माल को छोड़ दिया। अनु की गाण्ड में मेरा लण्ड झड़ने के बाद भी ऐसे ही तना रहा, जैसे झाड़ा ही ना हो।
मेरा मन नहीं हआ की में उसकी गाण्ड से अपने लण्ड को बाहर निकालूं। मैंने अपने लण्ड को अंदर ही पड़े रहने दिया जब तक की लण्ड टीला नहीं पड़ गया। अनु भी घोड़ी बनी रही। जब अनु की गाण्ड में लौड़ा टीला पड़ गया
तो मैंने अनु की गाण्ड में अपने लौड़े को बाहर खींचा, तो पुच्च की आवाज हुई। अनु बैंड पर झटके से पेंट के बाल लेट गई। मैं अपने लण्ड को पकड़कर सीधा बाथरूम में चला गया। वहां जाकर मैंने अपने लण्ड को देखा तो मेरे माल और अनु की शिट का मिक्स्चर लगा हुआ था। मैंने जल चला दिया और लण्ड नीचे रख दिया। लण्ड धोने के बाद मैं तौलिया से पोंछता हुआ बाहर आ गया।
अनु अभी तक वैसे ही लेटी थी। ऋतु उसके चूतड़ों को सहला रही थी।
मुझे देख कर ऋतु ने कहा- “पता है दीदी को अभी तक दर्द हो रहा है..”
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मैं अनु के पास जाकर लेट गया। मैंने उसकी कमर पर हाथ फेरते हुए कहा- “अनु डियर सारी… मुझे माफ कर दो। मैंने जानबूझ कर तुम्हें दर्द नहीं दिया..”
अनु पहले तो कुछ नहीं बोली। फिर एकदम से मुझे चिपक गई और मुझे चूमने लगी। बेहतशा चमने के बाद अनु ने मेरे सीने में अपना मुँह छुपा लिया। उसके गरम औंस मुझे सीने पर महसूस हुए।
मैंने अनु का चेहरा ऊपर किया और कहा- “अनु मेरी जान प्लीज… रोना नहीं, नहीं तो मुझे लगेगा की मैंने तुम्हें सलाया है। मैं तो तुम्हें यहां खुशियां देने के लिए लाया हूँ। अगर तुमको मेरी वजह से कोई तकलीफ हुई तो मुझं दोषी महसूस होगा…”
अनु ने सिसकते हए कहा- “नहीं-नहीं, मैं उस वजह से नहीं रो रही। मेरा तो मन वैसे ही भारी हो गया था…”
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मैंजे अनु के आँसू पोंछे और उसके गाल को चूमते हुए कहा- “गुड़ अब जरा स्माइल दो..”
अनु ने स्माइल दी। मैंने उसको अपने गले से लगा लिया और कहा- “तुम सिर्फ मकराती हई अच्छी लगती हो। रोए तुम्हारे दुश्मन …”
अनु फिर से मेरे गले से लगकर बोली- “मेरा बाबू कितना स्वीट है.”
मैंने अनु को कहा- “अब दर्द कुछ कम हुआ?”
अनु ने कहा- “हो तो अब भी रहा है, पर उतना नहीं जितना पहले था…”
मैंने अनु को कहा- “चलो तुम्हारा बाकी दर्द भी दूर करता हैं… उठकर खड़ी हो जाओ…”
अनु थोड़ा सा मुश्किल से खड़ी हुई।
मैंने उसको अपनी बाहों का सहारा दिया और कहा- “चलो तुम्हें टायलेट तक छोड़ आऊँ.” सच में अनु के कदम लड़खड़ा रहे थे। मैं अनु को अपनी बाहों में भरकर टायलेट तक ले गया। वहां मैने अनु से कहा- “तुम फ्रेश हो जाओ, मैं बाहर जाता हूँ..”
अनु ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली”मझे छोड़कर मत जाओ…”
मैंने अनु को बड़े प्यार में लेजाकर कमोड पर बैठा दिया, और कहा- “तुम फ्रेश हो जाओ, मैं 10 मिनट में आता हूँ… और मैं बाहर आ गया।
ऋतु ने मुझसे कहा- “पता नहीं दीदी को इतना दर्द क्यों हुआ?”
मैंने हँसते हुए कहा- “तुमको नहीं हुआ था क्या?”
ऋतु शर्माते हुए बोली- “हआ तो था पर ऐसे नहीं जितना दीदी को हो रहा है…”
मैंने कहा- “अनु ने एक तो पहली बार पीछे से करवाया है, दूसरा उसका छेद कुछ ज्यादा ही टाइट है। पर आज के बाद उसको कभी दर्द नहीं होगा.. और मैं अत से बात करने लगा। फिर मुझे याद आया अनु को मैं 10 मिनट में आने को बोलकर आया हैं।
मैं बाथरूम में गया तो अनु तब तक फ्रेश हो चुकी थी और वो मिरर के आगे खड़ी थी। मैंने उसको जाकर पीछे से बाहों में भर लिया और कहा- “अनु जान, तुमको नया जररत है खुद को निहारने की। तुम तो वैसे ही इतनी खूबसूरत हो…”
अनु शर्माकर मेरे कंधे पर अपना सिर रखकर बोली- “सिर्फ आपको ही अच्छी लगती हैं मैं और तो किसी ने नहीं कहा मुझे …
मैंने कहा- “अनु इसमें तुम्हारी क्या गलती? देखने वाले ही अंधे है..”
अनु खिलखिलाकर हँस पड़ी। मुझे उसके चेहरे पर हँसी देखकर अच्छा लगा।
मैंने कहा- “चलो अब तुम नहा लो फिर चलना भी है…’
अनु बोली- “आप नहीं नहाओंगे क्या?”
मैंने कहा- “तुम्हारा मतलब मैं समझ रहा हूँ..”
कहकर मैंने उसको अपनी बाहों में लिया और शाबर के नीचे खड़ा हो गया। मैंने शाबर चलाया। अनु की हाइट मेरे से कम है, वो मेरे कंधों तक ही आती है। अनु मेरे सीने पर अपना सिर रखें हए थी। मैं उसकी कमर को सहला रहा था।
अचानक अनु बोली- “यहां से जाने के बाद भी आप मुझे इतना ही प्यार करोगे?”
मैंने कहा- तुमको क्या लगता है?
अनु ने कहा- आप बताओ ना?
मैंने कहा- “मैं जिंदगी भर तुमको इतना ही प्यार करता रहूँगा…”
अनु ने कहा- “सच या मेरा दिल रखने के लिए कह रहे हो?”
मैंने अनु से कहा- “मैं कसम तो नहीं खाता, पर जब भी किश्मत में कोई ऐसा मौका आया तो मैं प्रमाणित कर दूँगा की मैं तुमसे कितना प्यार करता है?”
अनु ने मुझसे चिपकते हुए कहा- “आपका कहना ही मेरे लिए काफी है.”
हम नहाकर बाहर आए तो मैंने ऋतु में कहा “जाओ तुम भी तैयार हो जाओ..”
ऋतु कहने लगी- “आप दोनों नहा चुके?”
मैंने कहा- “हौं हम दोनों तैयार हैं। तुम भी हो जाओ.”
ऋतु भी 15 मिनट में तैयार हो गई। अब हम सब तैयार थे तो रुकने की कोई वजह ही नहीं थी। मैंने अनु से कहा- “अपना-अपना लगेज भी पैक कर लो। कार में रखकर जहां चलना है चलते हैं.”
अनु ने कहा- हमारा लगेज पैक है।
मैंने वेटर को बुलाया और लगेज उसको दे दिया। मैंने अनु को कार की चाभी देते हुए कहा- “तुम लोग कार में जाकर सामान रखवाओं। मैं होटेल का बिल में करके आता हैं…” फिर रिसेप्शन पर जाकर बिल पे करने लगा बिल में करके में जब कार तक पहुँचा तो अनु आगे की सीट पर बैठी थी।
मैने अत को देखा तो वो बैंक सीट पर आराम से लेटी हुई थी। मैंने कार स्टार्ट कर दी। कार माल रोड की पार्किंग में पार्क की और कहा- “चलो यहां से पैदल चलते हैं…”
हम लोग माल रोड पर आ गये। वहां हमने मनपसंद बैकफास्ट किया। फिर मैंने अनु और ऋतु से कहा तुम लोगों ने शापिंग ता नहीं करनी?”
दोनों ने मना कर दिया।
मैंने कहा- “फिर यहां रुकने का क्या फायदा चलो घर के लिए निकालते हैं। टाइम से निकलेंगे तो टाइम से पहुँचेंगे…”
अनु ने कहा- हाँ ठीक बात है।
हम जब वहां से चले तो 3:00 बज चुके थे। मैंने अनु से कहा- “कुछ लेना है तो बताओं रास्ते के लिए?”
अनु ने कहा- “मेरे लिए कोल्ड ड्रिंक ले लीजिए..”
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मैंने कोल्ड ड्रिंक और चिप्स के पैकेट ले लिए। मैंने कार स्टार्ट की। हम जैसे ही टोल तक आए तो पता चला की रास्ते में कहीं लैंड स्लाइडिंग हो गई है, जिसकी वजह से रास्ता बंद है। मैंने अनु की तरफ देखा।
अनु ने कहा- “अब क्या होगा, कैसे जाएंगे?”
मैंने कहा- “इसमें मेरी तो कोई गलती नहीं है…”
ऋतु बोली- “आज तो हम रुक भी नहीं सकते, मम्मी गुस्सा हो जाएंगी…’
मैंने वहां एक टक्सी वाले से पूछा- “कच तक रास्ता खुलने की उम्मीद है?”
उसने कहा- साब आज तो मुश्किल है।
मैंने अनु से कहा- “हम यहां से वापिस होटेल चलते हैं। जब रोड साफ हो जाएगा तब चलेंगे। इसके सिवा कोई आप्षन ही नहीं था..’ मैंने कार वापिस होटेल की पार्किंग में लगा दी। में रिसेप्शन पर गया और उसको बताया की हम लोगों को दो-तीन घंटे यहां रुकना पड़ेगा।
उसको भी लैंड स्लाइडिंग का पता था। उसने कहा- “सर, आप उसी रूम में जाकर आराम कर सकते हैं…”
हम सब फिर से उसी रूम में आ गये। मैंने रूम में आते ही टीवी आन कर दिया और लोकल चैंजेल लगा दिया। उसपर जो न्यूज चल रही थी उसको देखकर ऋतु में मस्ती में झमना शुरू कर दिया और जोर-जोर से चिल्लाने लगी।
उसमें दिखा रहें थे की रोड कल से पहले साफ नहीं हो सकती। मैंने अनु की तरफ देखा तो उसका चेहरा भी खुशी से चमक रहा था। मैंने उसको कहा- “ऋतु को इतनी खुशी हो रही है तुमको नहीं हुई क्या?”
अनु का चेहरा लाल हो गया, उसने कहा- “मुझे नहीं पता..” और वो भी ऋतु के साथ जाकर मस्ती में उछलने लगी। उन दोनों की मस्ती देखकर मुझे भी मस्ती चढ़ने लगी।
मत ने मेरा हाथ पकड़कर खींच लिया, और बोली- “आप भी हमारे साथ सेलीब्रेट करिए.”
मैं भी उनके साथ मस्ती करने लगा। अनु ने मुझे देखते हुए कहा- “आपके मन की बात सच हो गई..”
मैंने अनु को कहा- “मैंने तो ऐसा नहीं सोचा था। तुम्हारे मन की बात सच हुई है, तभी तो नाच रही हो..”
ऋतु बोली- “आपने अभी दीदी का डान्स देखा ही कहां है? देख लोगे तो होश उड़ जाएंगे…”
मैंने अनु की तरफ देखा तो अनु ने कहा- “ये तो ऐसे ही बोल रही है.”
मैंने अनु में कहा- “प्लीज… मुझे एक बार डान्स करके दिखाओं ना…”
अनु ने शर्माते हुए कहा- “मुझे नहीं आता डान्स करना…”
मैंने कहा- “झूठी, मैंने देखा था तुमको..”
अनु ने कहा- कब?
मैंने कहा- “वीडियो में…”
अनु ने ऋतु की तरफ देखा, तो ऋतु ने कहा- “दीदी करो ना… मैं भी आपके साथ करेंगी.”
मैंने कहा- “अनु मेरे लिए करो ना…”
अनु ने अपने दुपट्टे को उतारकर फेंक दिया और, मुझे शर्माते हुए देखा और कहने लगी. “मुझे सच में डान्स नहीं आता, आप क्यों जिद्द कर रहे हो?”
मैंने कहा- “अच्छा जैसे भी आता है वैसे करके दिखा दो..”
अनु बोली- “आप मेरा मजाक बनाओगे…’
…
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मैंने कहा- “नहीं जान… मैं सच में तुमको डान्स करते हए देखना चाहता हैं… मैंने अनु को फिर प्यार से कहा “करो तो सही…”
अनु ने मुँह बनाकर कहा- “ऐसे कैसे कर म्यूजिक के बिना?”
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मैंने टीवी पर म्यूजिक चैनेल लगा दिया। उसपर गाना आ रहा था
मौजा ही मौजा शाम सवेरे हैं, मौजा ही मौजा।
अनु उसपर डान्स करने लगी। पहले तो वो शर्मा रही थी। पर जब ऋतु ने उसका साथ दिया तो अनु रंग में रंग गई। फिर तो उसने में तुमके मारे की लण्ड को बैंकाबू कर दिया। मैं अनु को देखता ही रह गया। अनु की कमर पतली तो नहीं थी पर उसकी लचक सच में गजब की थी। उसके दोनों चतड़ डान्स करते वक्त ऐसे थिरक उठते थे जैसे की बिजली गिरने वाली हो। में उसका डान्स देखता रहा।
अचानक ऋतु ने चैनेल चेंज कर दिया उसपर। गाना आने लगा
जब कोई बात बिगड़ जाए,
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ये गाना सुनते ही अनु ने मेरे हाथ को पकड़कर मुझे अपने पास खींच लिया और मेरे गले में अपनी बाहों को डालकर मेरी आँखों में आँखें डालकर मुझे अपने साथ डान्स करवाने लगी। मैं भी पता नहीं इस गाने पर खुद को रोक नहीं पाया। मैं भी उसके साथ डान्स करने लगा। डान्स करते-करते हम दोनों इतनें खो गयें की कुछ खबर ही नहीं रही।
शायद हम दोनों ने स्पेशल ही परफार्म कर लिया इस गाने पर। जैसे ही गाना खतम हआ ऋतु ने जोर-जार से ताली बजानी शुरू कर दी। मैं कुछ समझ ही नहीं पाया, और अनु शर्माकर बैड पर अपने हाथों से मुँह को छुपाकर बैठ गई और तेज-तेज सांस लेने लगी। उसकी बड़ी-बड़ी छातियां उठने गिरने लगी।
मैंने ऋतु को देखते हुए कहा- “ऋतु सच बताओ क्या हुआ?”
ऋतु ने कहा- “काश आप दोनों का डान्स मैं ऐकाई करके आप दोनों को दिखा पाती। आप दोनों ऐसे परफार्म कर रहे थे जैसे प्रोफेशनल डान्सर करते हैं…”
मैं अनु के पास गया और उसके हाथों को उसके चेहरा से हटाते हुए कहा- “इतना क्यों शर्म महसूस कर रही हो?
अनु ने मेरे सीने में मुंह छुपा लिया।
मैंने उसकी कमर पर हाथ फेरते हुए कहा- “क्या हआ? इतना क्यों शर्मा रही हो? ऋतु तो तुम्हारी तारीफ कर
अनु ने शर्माते हुए कहा- “मुझे नहीं पता.”
फिर मैंने ऋतु से कहा, “तुम में बताओं किसने ज्यादा अच्छा डान्स किया?”
अत् बोली- “दोनों ने परफक्ट डान्स किया, जैसे की ये पर फक्ट कपल डान्स था.”
अनु फिर में शर्मा गई।
मैंने कहा- “हमें आज यहीं रुकना पड़ेगा। घर फोन करके बता तो दो..”
ऋतु बोली- “ना बाबा ना… मैं तो नहीं करेंगी…”
अनु भी बोली- “मुझे डर लग रहा है..”
मैंने कहा- “चला में ही कर देता हैं..” मैने ऋतु से कहा- “कल झठ बोलने में डर नहीं लग रहा था, आज सच बोलने में डर रही हो?” कहकर मैंने शोभा के सेल पर फोन किया।
शोभा बोली- “आप लोग वहां से चल दिए, कब तक आओगे?”
मैंने कहा- “हम वापिस आ रहे थे पर रास्ते में लैंड स्लाइडिंग की वजह से हमको आज वहीं रूकना पड़ेगा.”
शोभा बोली- “ऊऊह्ह…”
मैंने कहा- “आप टीवी पर देखो, सब पता चल जाएगा.. आज हमको यहां रुकना पड़ेगा, मजकी है…”
शोभा ने कहा- “हाँ, अब तो रुकना ही पड़ेंगा..
.” वैसे भी शोभा मुझसे ज्यादा बोल नहीं सकती थी। उसने कहा
“ऋतु से बात करवा दीजिए.”
मैंने ऋतु का फोन दिया। ऋतु ने भी यही सब बता दिया। फिर फान रखकर बाली- “अब यहां रुकना ही है ता कहीं घूमकर आते हैं…”
मैंने कहा- हाँ चलो, घूमने चलते हैं।
अनु बोली- “मेरे पास तो कोई और ड्रेस ही नहीं बची। मैं तो सिर्फ एक दिन के हिसाब से इस लाई थी…”
मैंने अनु के गले में हाथ डालकर उसकी चूचियों को सहलाया और कहा- “इसमें क्या सोचना, चलो बाजार से खरीद लेते हैं.”
अनु मुझे देखते हुए बोली- “आप तो मुझे पूरा नैनीताल खरीद कर दें दोगे..’
मैंने भी हँसते हुए कहा- “काश मेरे बस में होता..”
अनु बाली- “मेरे साइज की ड्रेस मिले ना मिले पता नहीं.”
ऋतु बोली- “दीदी चलकर देखते हैं, हो सकता है मिल जाए.”
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हम सब माल रोड पर आ गये। हमने वहां तीन-चार शोरूम पर देखा पर कुछ समझ में नहीं आया। मैंने अनु से कहा- “तुम मेरे साथ आओं मैं तुम्हें दिलवाता हू…”
अनु को एक शोरूम में ले गया वहां मैंने जाते ही कहा- “मेडम के साइज की जीन्स दिखाओ…”
अनु मुझं चुटकी काटतं हए बोली- “मैंने आपको बताया नहीं था, मैं नहीं पहनती जीन्स..”
मैंने कहा- वहां नहीं पहनती, यहां तो पहन सकती हो?” और मैंने सेल्सगर्ल को कहा- “दिखाओ..”
सेल्सगर्ल ने दिखानी शुरू कर दी।
अनु मुझे घूरती रही फिर बोली- “मैं तो नहीं पहनूंगी..”
पर मैं अनु की परवाह किए बिना जीन्स के कलर देखता रहा। फिर मैंने कहा- “इनके साइज की लोग करती और दिखाओ…
अनु ने कहा- “आप समझते क्यों नहीं? में नहीं पहनंगी, क्या फायदा देखने से?”
मैंने कहा- “रुको तो दो मिनट..” और मैंने कुरती भी पसंद कर ली। मैंने जीन्स और कुरती अनु को देते हुए कहा- “जाओं चेंज रूम में जाकर ट्राई करो…”
अनु ने बुरा सा मुँह बनाया।
ऋतु ने कहा- “दीदी ट्राई तो करके देखो। अच्छी लगेगी..”
मैंने कहा- “अगर अच्छी ना लगे तो नहीं लेना। बस ट्राई तो करो एक बार..”
अनु बेमन में चली गई। अनु जब चेंज रूम से बाहर आई तो मेरे मुँह से निकला- “वाऊओ…’
ऋतु भी बोली- “दीदी सच में आप इस ड्रेस में बड़ी प्यारी लग रही हो…’
अनु हम दोनों को ऐसे देखने लगी जैसे की हम उसको झठ बोल रहे हों। फिर जिस सेल्सगर्ल ने इस दिखाई थी उसने भी कहा- “मॅडम ये इस आप पर बड़ी प्यारी लग रही है…..
अनु को तब जाकर कुछ कान्फिडेन्स आया।
मैने अनु से कहा- “तुम ऐसे ही डर रही थी। तुम जीन्स में जितनी प्यारी लग रही हो, इतनी ता सलवार सूट में भी नहीं लगती…”
अनु ने मिरर में देखा और कहा- “हाँ सच में… ये तो मुझपर अच्छी लग रही है…
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मैंने कहा- “अब इसी ड्रेस में चलो..”
अनु बोली- “पक्का बुरी तो नहीं लग रही ना?”
मैंने कहा- “कसम से बड़ी कातिल लग रही हो, पता नहीं कितनों को मार डालिगी?”
अनु शर्मा गईं।
हम सब वहां से निकले तो ऋतु बोली- “दीदी जीन्स के साथ स्टाइलिश सँडल भी होते तो मजा आता..”
मैंने कहा- “वो भी ले लेते हैं, चलो..” हम एक फुटवेर के शोरूम में गये। वहां अनु को सँडल लेकर दिए, और एक शानदार हैंडबैग भी लेकर दिया।
अनु बोली- “आप तो मुझे ऐसे शापिंग करवा रहे हो जैसे की……”
हम जब वहां से बाहर आए तो मैंने अनु को देखा वो सच में बड़ी प्यारी लग रही थी। मैंने अनु से कहा- “अब मेरे साथ-साथ मत चलना। लोग देखकर मेरे से जलने लग जाएंगे…”
अनु बाली- “दनियां को जलने दो मुझं क्या?” कहकर अनु ने मेरे हाथ में अपना हाथ डाल दिया। अब अनु और में ऐसे चल रहे थे जैसे नये कपल हो।
ऋतु ने कहा- “आप दोनों यहां अपना हनीमून माजा रहे हो। मैं भी आपके साथ है.”
मैंने हँसते हुए अनु से कहा- “ये कैसी साली है?”
सुनकर अनु शर्मा गई और ऋतु मुझे ऐसे देखने लगी जैसे की मैने।
थोड़ी देर चुप रहने के बाद अनु ने कहा- “चला मामास खाते हैं.”
मुझे भी मोमोस पसंद हैं। मैंने कहा- “हाँ चलो…”
हम लोग मोमोस खाने लगे। अनु ने मोमोस खाते ही सस्स्सी … सस्स्सी … करनी शुरू कर दी।
मैंने कहा- “मुझे तो इतना तीखा नहीं लगा..”
अनु बोली- “आपको तीखा नहीं लगा और मेरी हालत खराब हो गई… मेरे तो कानों में सीटियां बज रही हैं। सीईई… सस्स्सी ..”
मैंने जल्दी से एक आइसक्रीम लाकर अनु को दे दी। अनु ने झट से आइस्क्रीम खतम कर ली। उसको अब रिलैक्स होने लगा। फिर अनु ने मुझे बड़े ही प्यार से देखा और आँखें बंद करके कहा- “थॅंक्स मेरे बाबू..”
मैंने कहा- “मुझे थॅंक्स क्यों बोल रही हो?”
अनु बोली- “आप मेरी इतनी केयर जो करते हो इसलिए..”
मैंने मुश्कुराकर कहा- “में कभी-कभी केयरलेस भी हो जाता हूँ..”
अनु समझ गई में क्या बोल रहा हूँ। अनु शर्मा गई। उसने अपनी निगाहों को नीचे कर लिया।
ऋतु ने कहा- “आप दोनों के साथ मुझे अब ऐसे लग रहा है जैसे कबाब में हड्डी.”
अनु और में दोनों एकसाथ हँस पड़े।
मैंने ऋतु का हाथ पकड़कर कहा- “चलो अब अनु को हड्डी बनाते हैं…” हम लोग जैसे ही रोड पर आए हल्की हल्की बूंदा बांदी होने लगी। मैंने अनु से कहा- “जल्दी बताओं और कुछ खाने पीने का मन है?”
अनु ने कहा- अभी तो नहीं।
मैंने कहा- फिर जल्दी करो बारिश कहीं तेज ना हो जाए।
अनु ने कहा- अब सीधा सम में चलते हैं।
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पर ऋतु का मन नहीं था अभी जाने का। उसने मुँह बनाते हए कहा- “आप दोनों को रूम में जाने की जल्दी क्यों है, मुझे पता है?”
मुझे लगा ऋतु अब बुरा मान गई है। इसलिए मैंने उसको प्यार से कहा- “ऋतु जी, अब जब तक आप नहीं कहोगी हम रूम में नहीं जाएंगे…”
ऋतु मेरी बात सुनकर मुश्कराने लगी। हम लोग फिर इधर-उधर घूमते रहे। अचानक बारिश तेज होने लगी। हम लोग बारिश से बचने के लिए एक जगह रुक गये। हम लोग वहां काफी देर तक रुके रहें, पर बारिश तो और तेज होती जा रही थी।
मैंने ऋतु से कहा- “अब तो यहां से होटेल तक भीगते हुए जाना होगा..”
ऋतु ने कहा- “ये सच मेरी वजह से हुआ है सारी.”
मैंने कहा- “नहीं पार इसमें तुम्हारी क्या गलती है? बारिश तो पहाड़ों पर कभी भी हो जाती है.”
हम लोग बारिश में ही अपने होटल की तरफ चलने लगे। रगम तक जाते-जातें हम सब बुरी तरह भीग गये थे।
अनु की हालत कुछ ज्यादा ही खस्ता हो रही थी, वो ठंड से कॉप रही थी।
मैंने रूम में जाकर ऋतु में कहा- “तुम भी जल्दी से चेंज कर लो, नहीं तो ठंड लग सकती है…” कहकर मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए, फिर अपने जिशम को तालिया से पांछकर बेडशीट में अपने जिएम को लपेट लिया।
अनु को शायद भीगने से ज्यादा ठंड लग गई थी। वो ठंड से काँप रही थी।
मैंने ऋतु से कहा- “अनु को रजाई दे दो..”
ऋतु ने अनु के ऊपर रजाई डाल दी। मैंने विस्की की बोतल खोलकर पेंग बना लिया। में सिप करने लगा। ऋतु मेरे पास आकर बैठ गईं।
मैंने ऋतु से कहा- “अगर तुम्हें ठंड लग रही है तो एक पेग ले लो..”
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–
ऋतु हिचक कर बोली “कुछ होगा तो नहीं?”
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मैंने ऋतु में कहा- “दवाई समझकर पी लो…”
ऋतु ने हाँ में सिर हिला दिया। मैंने एक लार्ज पेग बनाकर ऋतु को दे दिया। वो बुरे-बुरे से मुँह बनाकर पीने
लगी।
फिर मैंने अनु की तरफ देखा तो वो अभी भी ठंड से काँप रही थी और मुझे देख रही थी। मैंने एक छोटा पैग बनाया और अनु के पास चला गया। मैंने अनु के सिर पर हाथ फेरा और उसका कहा- “उठो ये पी ला..”
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अनु ने हिचकिचाते हुए कहा- “मैंने तो कभी नहीं पी आज तक..”
मैंने कहा- “इसका दबाई समझकर पी जाओ। देखो ऋतु भी पी रही है..”
अनु ने ऋतु की तरफ देखा। फिर मैं अनु की रजाई में घुस गया। मैंने उसके पीछे बैठकर उसको सहारे से बैठा दिया। अब अनु की कमर मेरे सीने पर थी। अनु मरे से टेक लगाकर बैठी थी।
मैंने उसके हाथ में पेग देते हुए कहा- “मेरे कहने से पी लो.”
अनु ने मुझे देखा और कहा- “आपके कहने से पी रही हैं, कुछ हो गया तो संभाल लेना..”
मैंने अनु के होंठों को किस किया और कहा- “मेरे होते कुछ नहीं होगा..”
अनु ने अपने मह से ग्लास लगाया और एक घट भरा उसने कभी पी नहीं थी इसलिए उसका बड़ा अजीब सा लग रहा था। अनु ने छी-छीः करते हुए कहा- “इसको पीने से गले में चुभन हो रही है.”
मैंने उसको कहा- “देखो में बताता हैं, इसको कैसे पीते हैं?
मैंने ऋतु से कहा- “मेरा पेंग उठाकर मुझे दे दो…”
मैं जब अनु के लिए पेंग लेकर आया था तब अपना पेग वहीं टेबल पर ही छोड़ आया था। ऋतु मेरा पंग उठाकर ले आई। मुझं पंग देकर वो भी मेरे पास ही बैठ गई।
मैंने अनु से कहा- “देखो पहले हल्का-हल्का सिप करो.”
अनु ने हल्का-हल्का सिप किया।
मैंने कहा- “अब ऐसे ही पी …”
अनु ने तीन-चार छोटे-छोटे सिप लिए। फिर उसने बड़े सिप लेते हए पेंग खतम कर दिया।
मैंने कहा- “अब बोलो चुभन हुई?”
अनु ने कहा- “नहीं, अब तो कुछ नहीं हुआ..”
मैंने अनु से कहा- “अब तुम रजाई में लेटी रहीं। थोड़ी देर में नार्मल लगने लगेगा…” कहकर मैं उठने लगा।
अनु बोली- “बाबू ऐसे ही बैठे रहो ना, अच्छा लग रहा है.”
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मैंने कहा- “अच्छा जी जैसे आपको अच्छा लगे… मेरा पेंग खतम हो गया था।
मैंने ऋतु से कहा- “बोतल उठाकर यहीं ले आओ..” ऋतु उठकर बोतल ले आई।
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मैंने अपना पंग फिर से बनाया और सिप करने लगा। मैंने ऋतु से एक बार फिर पूछा- “और लोगी बया?”
ऋतु ने भी कह दिया- “हाँ एक और..
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मैंने उसका फिर से लार्ज पेग बना दिया, हम दोनों सिप करते रहे।
ऋतु ने कहा- “आप बिना नमकीन के कैसे पी लेते हो?”
मन हँसते हए कहा- “मैं बड़ा पुराना शराबी हैं… मैं जानबूझ कर ऋतु को बड़े-बड़े पैग बनाकर दे रहा था ताकी वो रात को चैन से सो जाए। मैं अनु के साथ रजाई में बैठा हा एक हाथ से उसकी चूचियों को भी सहला रहा था।
अब अनु का जिम कुछ गरम होने लगा था। विस्की अपना असर दिखा रही थी। फिर मैंने ऋतु में कहा- “यार एक-एक पेग सब पीते हैं, और बोतल को खतम कर देते हैं.”
अनु ने मेरे हाथ को रजाई में जार से दबाया। मैंने उसको देखा तो अपनी आँखों की भाषा से मुझे समझाने लगी। अनु की आँखों के इशारें अब मैं समझने लगा था। उसने इशारे से कहा, “मैं नहीं पियंगी…”
मैंने भी उसकी चूचियों को सहलाकर उसको इशारे से समझा दिया. “तुम चुप रहो…
ऋतु दो पंग के बाद शरण में आ गई थी। उसको और पीने की तलब मच गई। मैंने ऋतु को इस बार पहले से हरू का पेग बनाकर दिया। अपने लिए सेम और अनु को बिल्कुल ही जरा सा पेग बनाकर दिया। अनु मुझे देखने लगी। मैंने उसको प्यार से इशारा किया। उसने पेग पकड़ लिया।
ऋतु में अपना पंग झटके में खतम किया और लंबी सांस लेकर बोली “मुझे नींद आ रही है…”
मैंने कहा- “पहले डिनर तो कर लो, फिर सो जाना..” फिर मैंने रूम सर्विस पर आईर कर दिए, और मैं अपना पेग सिप करने लगा। मैं अभी तक अनु के साथ रजाई में ऐसे ही बैठा था।
मैंने अनु से कहा- “अपना पेग खतम करो जल्दी से..”
ऋतु को कुछ ज्यादा ही नशा हो गया था। उसकी हालत देखकर मैंने कहा- “ऋतु तुम थोड़ी देर सो जाओ। जब डिनर आ जाएगा मैं तुमको उठा दूँगा.”
ऋतु के मन में जो बात दबी हई थी वो नशे की वजह से उसके मुंह से निकल गई। उसने कहा- “मैंने आज आप दोनों के बीच में सोना है। आप दोनों को आज अलग-अलग साना पड़ेगा…”
ऋतु की बात सुनकर अनु मुझे देखने लगी। मैंने उसको इशारा किया की वो कुछ ना बोले। मैंने उठकर ऋतु से कहा- “तुम अनु के पास सो जाओ। में बेड के इस साइड में सो जाऊँगा..”
ऋतु अनु के पास सो गई। मैं अपनी साइड में लेट गया। ऋतु का लेटते ही नींद आ गई। मैं कुछ देर ऐसे ही लेटा रहा। इतने में डिनर भी आ गया। मैंने अनु से कहा- “ऋतु को उठा दो..”
अनु ने ऋतु का उठाने की कोशिश की पर ऋतु की नींद नहीं खुली।
मैंने अनु से कहा- “आओं तुम डिनर कर लो। ऋतु जब उठेगी उसके लिए फिर से आ जाएगा… हम दोनों डिनर करने लगे।
अनु भी हल्के शरण में थी उसने मुझसे कहा- “देखा आपने ऋतु का?”
मैंने मुश्कुराकर कहा- “जाने दो, बो अभी होश में नहीं है.”
पर अनु बोली- “मुझे उसकी ये बाद गलत लगी..”
मैंने अनु को प्यार से समझाते हए कहा- “अनु तुम शायद उसकी बात का गलत मतलब निकाल रही हो.. असल में वो खुद को अकेला महसूस कर रही होगी…”
अनु मेरी बात सुनकर और गुस्से में आ गई। उसकी आँखों में नमी भर आई। मुझे बोली- “आप उसका इतना फेवर कर रहे हो। मेरी बात की कोई कीमत ही नहीं आपकी नजर में… और अनु ने खाना बीच में ही छोड़ दिया।
मैने अनु को प्यार से कहा- “अनु तुम मुझे गलत मत समझा। मेरे लिए जो तुम हो, वो कोई नहीं हो सकता। मुझे जब कभी ऐसा लगेगा की कोई तुम्हें डामिनेट कर रहा है, तब मैं तुम्हारा ही साथ दूंगा..” कहते हए मैंने एक कौर अनु के मुह में डाल दिया।
–
अनु ने खा लिया, और बोली- “अब आप मुझे खिलाओगे?”
मैंने मुश्कराकर कहा- “बस इतनी सी बात?” और मैं अनु को खिलाने लगा। फिर अनु और मैं डिनर के बाद बेड पर आ गये।
मैंने अत को देखा तो वो अब तक होश में नहीं थी और अब वो बेड पर इस तरह से सोई हुई थी की बेड पर सिर्फ एक ही इंसान और सा सकता था। मैंने अनु से कहा- “इतनी जगह में दोनों नहीं सो सकते। तुम बैंड पर सो जाओ मैं सोफे पर सो जाता हैं.” कहकर में सोफे पर जाकर लेट गया।
अनु भी अपना मन मार कर बेड पर पड़ गई। थोड़ी देर बाद मुझे अनु की आवाज आई. “मुझे नींद नहीं आ रही, में आपके पास आ जाऊँ?”
मैंने कहा- “आ जाओ…”
अनु मेरे पास आ गई। मैंने उसको मुस्कुराते हुए कहा तुम्हें नींद नहीं आ रही या तुम्हारी. मैंने उसकी चूत
की तरफ इशारा करते हुए कहा।
अनु झंपते हुए मेरी गोद में आकर बैठ गईं।
मैंने उसको कहा- “अच्छा, अगर तुमको सिर्फ सोना है तो हम दोनों साफे पर सो सकते हैं। पर अगर कुछ और मह हो तो फिर हमें नीचे सोना पड़ेगा। बोलो नीचे सो सकती हो, कोई प्राब्लम तो नहीं होगी?”
अनु मेरे होंठों पर अपने होंठ रखकर चूमते हुए बोली “जहां आप हो वहां मैं हर हाल में खुश हूँ.”
मैंने कहा- “चलो फिर…” और हम दोनों नीचे लेट गये। अनु मेरे पास में लेटी हई मेरे सीने के बालों से खेलने लगी। मैंने अनु को अपने और पास करते हए उसके ऊपर अपनी टांग रख दी, और उसके गालों को चूमते हए कहा- “अब बताओ, मेरे साथ सोकर क्या करना है?”
ऋतु ने मुँह से लगाई और दो-तीन घट भरे और बुरा सा मुँह बनाया और कहा- “जी… कित्ता बुरा टेस्ट है..”
मैंने हँसते हुए कहा- “ये मदों की चीज है..” फिर मैंने उसका ग्लास उठाया और गटागट पी गया। ऋतु देखती ही रह गई।
ऋतु बोली- “सर आपने मेरा जूठा पी लिया..”
Good wrinting
मैंने कहा- “क्या हुआ? तुम मेरा जूठा मत खाना। मुझे तो कोई गलत नहीं लगता…”
ऋतु की आँखों में मैंने पहली बार अपने लिए प्यार देखा फिर हमने लंच किया। जब मैंने बिल देने के लिए अपना पर्स खोला तो ऋतु में मेरे पर्स को बड़े ही ध्यान से देखा। मेरा पर्स र 1000 के नोटों से भरा था। मैंने बिल दिया और बाकी उसको रख लेने को कहा। मैंने एक बात नोटिस की कि ऋतु मेरे पर्स को बड़े ध्यान से देख रही थी। हम वहां से वापिस आने का चल दिए।
मैंने कार में ऋतु से कहा- “तुम अब मेरी दोस्त हो, ये बताओ की तुम दोस्ती की क्या लिमिट मानती हो?”
ऋत ने कहा- “मेरी नजर में दोस्ती की कोई लिमिट नहीं होती, क्योंकी दोस्ती की लिमिट दोस्ती के साथ बढ़ जाती है…’
मैं मन ही मन खुश हो गया की इसका आउटलुक बोल्ड है। मैंने अपना हाथ ऋतु की कमर के ऊपर रख दिया। वो कुछ नहीं बोली, सामने देखती रही। फिर मैंने अपना हाथ उसके कंधों पर रखा और अपने हाथ को जरा सा ऐसे करा की उसकी चचियां मेरी उंगली से टच हो जाएं, और ऐसा ही हआ।
अब अत ने मेरी तरफ शरत से देखा और कहा “क्या कर रहे हो आप?”
मैंने अंजान बनते हुए कहा “क्या हुआ.. हाथ हटा लें क्या?”
ऋतु बोली- “नहीं मुझे कोई प्राब्लम नहीं… आप सही से हाथ रख लो..” और बो रिलैक्स होकर बैठ गई।
रास्ते में एक जगह सूनसान आते ही मैंने कार राककर ऋतु से कहा- “मैं सूसू कर लू..”
में कार से उत्तर गया और सूस करने के बाद मैंने जानबूझ कर अपनी जीन्स की जिप बंद नहीं की। मेरे मन में अब कुछ करने का इरादा पक्का हो चुका था। मैंने ऋतु की साइड का दरवाजा खोला और झुककर उसके होंठों पर होंठ रख दिए। ऋतु ने कोई विरोध नहीं किया। उसके होंठ सच में इतने मुलायम थे, मुझे एहसास हो रहा था
और उसकी सांसों की महक महसूस हो रही थी। मन ही नहीं कर रहा था होंठ हटाने का।
फिर उसने मुझे एकदम से धक्का दिया और बोली- “बस अब इतना ही..”
अपनी सीट पर चला गया। मैंने अपनी जिप को खला ही रहने दिया।
इतने में ऋतु बोली- “आपकी जिप खुली है.’
मैंने कहा- “होनें दो जरा हवा लगने दो..”
ऋतु हँस पड़ी, बोली- “हवा से क्या होगा?”
मैंने उसको कहा- “इसको गर्मी हो गई है…”
ऋत मश्रा उठी फिर एकदम से उसने मेरे लण्ड पर हाथ रख दिया। मैंने कुछ कहा नहीं बस कार चलाता रहा, दो मिनट बाद मैंने ऋतु से कहा- “हाथ हटा लो नहीं तो कुछ हो जाएगा..”
ऋतु ने अपने होंठों पर जीभ फिराते हुए कहा- “क्या होगा जी… हम भी तो देखें…”
अनु मेरी बाहों में सिमट गई और बोली- “मुझे आपसे प्यार करना है…”
मैंने कहा- “प्यार… कौन सा वाला?”
अनु ने मेरे लण्ड को पकड़कर कहा- “ये वाला.”
मैंने अनु से कहा- “मेरी इतनी आदत मत डालो, नहीं तो तुम्हें परेशानी होगी..”
अनु ने कहा- “अब तो आप मेरी सांसों में बस गयें हो। आपकी आदत क्या, अब तो आप मेरी जान बन गये हो…” कहते हए अनु मेरे से चिपक कर बोली- “मेरे बाबु , मेरे शोना…”
मैंने अनु से फिर इस बारे में कोई बात नहीं करी। मैंने उसको कहा- “पहले अपने कपड़े तो उत्तारो …”
अनु ने अपने कपड़े उतार दिए। मैंने उसका फिर से अपनी बाहों में ले लिया और अनु के गाल चूमते हए उसके कानों को अपने होंठों में दबा लिया, और फिर उसको अपनी जीभ की नोक से सहलाने लगा।
अनु ने जोर से सिसकी ली- “सस्स्स्स्सीईई अहह… बाबू आह्ह..”
मैंने फिर से ऐसा ही किया। इस बार अनु आउट आफ कंट्रोल हो गई। उसने मेरे चेहरे पर बेहतशा चूमना शुरू कर दिया। बो मेरे पूरे चेहरे को मेरी गर्दन को ऐसे चूम और चाट रही थी जैसे भूखी बिल्ली को मलाई मिल गई हो। अनु ने मेरे पूरे चेहरे को अपनी जीभ से चाट-चाटकर गीला कर दिया। मेरा पूरे चेहरा अनु की लार से भर गया। अनु ने फिर मेरे सीने पर किस करना शुरू कर दिया।
मुझे ऐसा लगने लगा की अनु अगर कुछ देर मुझे ऐसे ही चूमती रही तो मैं खुद को रोक नहीं पाऊँगा। फा में इतनी जल्दी अनु को चोदने के मूड में नहीं था। मैंने अनु को अपने ऊपर से उतारकर अपने नीचे कर दिया। अब में अनु के ऊपर था। मैंने उसकी दोनों चूचियों को हाथ से अलग-अलग कर दिया और दोनों चूचियों के बीच की जगह पर अपनी जीभ रख दी। फिर मैंने अपनी जीभ को नीचे से ऊपर तक फिरा दिया। अनु की दोनों चचियां मेरे दोनों हाथों में थी। मैंने उसकी चूचियों पर अपने हाथों को गोल-गोल घुमाकर उसकी चूचियों में दूध उतार दिया। अनु के निपल से दूध रिस कर गिरने लगा।
में इतना कीमती दूध जाया नहीं होने देना चाहता था। मैंने अपना मुँह उसकी चूची पर लगा दिया, और चूसने लगा। अनु मुझे सिसकियां लेते हुए अपनी चूची चुसवा रही थी। बीच-बीच में वो मेरे होठों को अपने होंठों से चूस लेती थी। फिर मैं उसके होंठों से अपना मुँह हटाकर उसकी चूची चूसने लगता था। मैंने अनु की दोनों चूचियों को जमकर चूसा। अनु की हालत अब ऐसे हो गई थी की वो लण्ड को बार-बार पकड़कर मुझे चुदाई के लिए इन्वाइट कर रही थी। पर मैं तो अभी और मजा लेना चाहता था।
मैंने अनु की चूचियों को अपने हाथ से ऊपर किया और उसकी चूचियों के नीचे के हिस्से पर अपनी जीभ फेर दी। फिर मैंने अनु के पेंट पर अपनी जीभ रख दी। मैं अपनी जीभ को धीरे-धीरे नीचे की तरफ ला रहा था। फिर मैंने अपनी जीभ अनु की नाभि के चारों तरफ घुमा दी।
अनु को फिर से कुछ हो गया। वो मुझे खींचकर मेरे होठों को चूसने लगी। फिर अनु मेरे कान में कांपती हुई आवाज में बोली- “बाबु .. चोदो ना उम्म्म्म …”
मैंने कहा- “अभी और प्यार तो करने दो..”
अनु ने कहा- “बाबु , उहहन चोरो ना..” फिर अनु ने ने कहा- “पहले अंदर डाल दो फिर जो मन में हो करते रहना… बाबू मुझे और नहीं तड़पाओ…’
मैंने अनु से कहा- “रुका नहीं जा रहा क्या?”
अनु ने कहा- “नहीं बाबू अब और मत तड़पाओं मेरे बाबू… जल्दी से डालो ना..”
मैंने अनु की बात मान ली, और अपना लण्ड अनु की चूत पर रख दिया। मैंने अनु से कहा- “लो अपनी चूत को उठाकर डाल लो…
अनु ने अपनी चूत को जितना उठा सकती थी उठाया, और उसकी चूत में थोड़ा सा लण्ड चला गया। अनु ने अपनी चूत को नीचे किया तो लण्ड फिर से निकल गया। अनु ने मेरे सीने पर घूंसे बरसाते हुए कहा- “बाबू मुझे इतना मत सताओं प्लीज़… बाबू .”
मुझे अनु पर बड़ा प्यार आया। मैंने कहा- “अच्छा जान ये लो.” और मैंने अनु की चूत में लण्ड घुसेड़ दिया।
अनु मेरा पूरा लण्ड अपनी चूत में लेकर खुश हो गई। अनु के चेहरा पर अब संतुष्टि के भाव थे। अनु की सिसकियां अब सुख वाली सिसकियों में बदल गई। मैं अनु को पूरे दिल से चोद रहा था। अनु भी मेरी हर चोट पर अपनी चूत उछाल-उछालकर मेरे जोश को बढ़ा रही थी। मैंने अनु की चूत में अब लण्ड डालकर धक्के मारने बंद कर दिए और मैंने अनु के हाथ को अपने हाथ में लेकर उसकी कलाई को ऊपर कर दिया। अनु की चिकनी काँख पर मैंने अपनी जीभ फेरी, तो अनु अपनी चूत को उछाल-उछालकर मेरे लण्ड से रिक्वेस्ट करने लगी की मुझे चोदो।
मेरे लण्ड ने भी अपनी सखी की बात मानकर उसको चोदना शुरू कर दिया। मैं अनु को अब चूमते हुए चोद रहा था। मैं अनु के पूरे जिश्म को सहलाकर उसको चोद रहा था। मुझे भी ऐसी चुदाई करने में मजा आ रहा था। मेरा मन कर रहा था की मैं अनु को बस चोदता ही रहं, उसकी चूत में ऐसे ही अपना लण्ड डाले रहा और फिर अनु की चूत में मैंने अपने लौड़े को जड़ तक धक्के मारते हुए झड़ने का हुकुम दे दिया।
मैं अनु की चूचियों पर अपना मुँह रखकर लंबी-लंबी सांसें लेने लगा। अनु भी ऐसे सांसें ले रही थी जैसे दूर से भागकर आई हो। मैंने अनु से कहा- “जान तुमने तो आज थका दिया..”
अनु ने मेरे सिर पर अपना हाथ फेरते हए कहां मेरा- “बाबू थक गया… उम्म्म्म …”
अनु और में दोनों साथ-साथ लेटे हुए थे। मैंने अनु से कहा- “अब थोड़ी देर सो जाते हैं सुबह जल्दी उठना है.”
अनु ने पूछा- “हम सुबह किस टाइम चलेंगे?”
मैंने जवाब दिया- “9:00 बजे तक…”
अनु ने कहा- “उम्म्म… इतनी जल्दी क्या है? आराम से चलेंगे..”
मैंने कहा- “मुझे तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन तुम सोच लो..’
अनु ने सोचते हुए कहा- “हम यहां से लंच करके चलेंगे…”
मैंने कहा- “जैसे तुम कहो। पर अभी तो सो जाओ, मुझे भी अब हल्की-हल्की नींद आने लगी है..”
अनु ने मेरे हाथ को अपने हाथ में ले लिया, फिर कहने लगी- “मैं आपका हाथ अपने हाथ में लेकर सो जाऊँ?”
मैंने कहा- तुम्हें अगर ऐसे अच्छा लगता है तो सो जाओ।
मैं सोने लगा। थोड़ी देर बाद अनु ने मेरी टांग पर अपनी टांग रख ली, और मेरे कंधों को सहलाने लगी। मैंने अनु की तरफ प्यार में देखा और कहा- “नींद नहीं आ रही बया?”
अनु मुझे देखकर मेरी आँखों में आँखें डालते हुए कहने लगी- “बाबू हम कल सच में चले जाएंगे?”
मैंने कहा- तुम्हारा मन नहीं कर रहा क्या जाने का?
अनु ने अपने नचले हॉट को दबाते हुए कहा “नहीं..”
मैंने कहा- “तुम यहां सिर्फ एक दिन के लिए आई थी और तुमने दो रात का यहां स्टे कर लिया। अभी भी मन नहीं भरा? अब तो जाना ही पड़ेगा..”
अनु मेरे और पास आकर मेरे से चिपक गई और बोली- “बाबू एक बात पछू ?”
मैंने कहा- हाँ पूछो ना।
अनु ने कहा- “आप वहां जाकर मुझे भूल तो नहीं जाओगे?”
मैंने उसके गाल पर अपना हाथ फेरते हए कहा- “तुम्हें अचानक ऐसा क्यों लग रहा है?”
अनु बोली- बताइए ना?”
मैंने कहा- तुम्हें क्या लगता है?
अनु ने मेरे सीने पर अपना सिर रख दिया और कहने लगी- “पता नहीं… पर डर लग रहा है…
मैंने अनु को अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों पर किस किया। फिर मैंने कहा- “ऐसा सोचना भी नहीं कभी…”
अनु ने कहा- सच?
मैंने कहा- “तुम्हारी कसम..”
अनु ने मेरे होंठों को चूसकर कहा- “बाबू..”
मैने अनु को प्यार से सहलाते हए कहा- “अब सो जाओ…”
हम दोनों सो गये। करीब दो घंटे बाद मेरी नींद खुली तो मैंने देखा अनु मेरे हाथ को अपने हाथ में लेकर साई हुई थी, उसके चेहरे पर स्माइल थी। जैसे वो नींद में भी कोई प्यार भरा ख्वाब देख रही हो। मैंने धीरे से अपना हाथ उसके हाथ से छुड़ाया और उसको प्यार से देखा। अनु दुनियां से बेखबर सोई हुई थी। मैंने उसके ऊपर रजाई डाल दी। मुझे सस आ रहा था। मैं बाथरूम में चला गया।
मैं सस करके वापिस आया। मैंने ऋतु को देखा तो वो गहरी नींद में सोई हुई थी। मैं फिर से अनु के पास जाकर रजाई में घुस गया। अनु अब उठी हुई थी बो फिर से मेरे से चिपक गई। मैंने भी उसको खुद से चिपका लिया। मेरे हाथ फिर से अनु के जिस्म को सहलाने लगे।
अनु ने फिर कहा- “आपने जब मुझे वीडियो में देखा था तब आपने मुझ में ऐसा क्या देख लिया था? जो मैं आपको इतनी पसंद आ गई…”
मैंने कहा- “तुम हो ही इतनी खूबसूरत… जो भी तुमको देख ले तो वा तुम्हारा दीवाना बन जाएगा..”
अनु ने कहा- “फिर भी आपको मुझमें क्या अच्छा लगा? प्लीज… बताइए ना…”
मैंने अनु की गाण्ड पर हाथ फेरते हुए कहा- “ये..”
अनु ने शर्माते हुए कहा- “हो… हाय राम… आप सच में बड़े बेशर्म हो..”
मैंने कहा- “तुमने जो पूछा बा मैंने सच-सच बता दिया। सच में अनु तुम्हारी गाण्ड बड़ी मस्त है। इसको देखते ही लण्ड खड़ा हो जाता है.”
अनु कहने लगी- “अच्छा जी… आपको ये मस्त लगती है पर ये तो सबकी एक जैसी होती है…”
मैंने कहा- “सबके पास इतनी मस्त नहीं होती..”
अनु बोली- “मुझे तो अपनी ये चीज बड़ी भारी लगती है। मुझे जब कभी फिटिंग वाली ड्रेस पहननी पड़ती है तो बड़ी शर्म आती है…”
मैंने कहा- क्यों शर्म आती है?
अनु ने कहा- उसमें मेरे चूतड़ों की शेप साफ-साफ नजर आती हैं.”
मैंने कहा- “इसीलिए तो सेक्सी लगती हो…”
अनु बोली- “आपको ही तो लगती हैं…” कहकर अनु ने मेरे सीने में मुंह छुपा लिया और बोली- “सब कहते हैं मेरे चूतड़ भारी हैं, मुझे टाइट ड्रेस अच्छी नहीं लगती। मुझे भी बड़ा अजीब लगता है। मैं जब कहीं जाती है तो सब वही देखते हैं, तो मुझे बड़ी शर्म आती है.”
अनु फिर बोली “शादी से पहले मैं ऋतु जैसी स्लिम दुबली-पतली थी पर शादी के बाद मैं मोटी हो गई। मैं
आपको मोटी नहीं लगती?”
मैंने कहा- “नहीं। तुम्हारें जिम का गदरायापन तुमको और ज्यादा सेक्सी बना देता है… फिर मैंने अनु का हाथ पकड़कर अपने लौड़े पर रख दिया और कहा- “देखो तुम्हारी गाण्ड के नाम से ये भी उठ गया.”
अनु ने मेरे लौड़े को प्यार से सहलाया और बोली- “इसका जो मन करे इसको करने दो। फिर सो
जाएगा.”
मैने अनु की गर्दन पर चूमते हुए कहा- “इसका तुम्हारी गाण्ड मारजे का मन कर रहा है..”
अनु हँसने लगी और बोली. “इसमें सोचने की क्या बात है? जैसे आपको करना है कर लो..”
मैंने कहा- “पर तुम्हें पीछे से करवाने में दर्द होता हैं। मैं तुम्हें दर्द नहीं देना चाहता। रहने दो। आगे से ही कर लंगा..”
अनु बोली- “आपकी खुशी के लिए मुझे हर दर्द मंजूर है। आप पीछे से कर लो..”
मैंने फिर से कहा- “तुम्हें दर्द हुआ तो?”
अनु बोली- “नहीं होगा ना… मैं आपको कह रही हैं, आप करो.”
मैंने कहा- “रहने दो यार.”
अनु ने कहा- “आप करो ना… अच्छा अगर दर्द हआ तो मैं आपको बता देंगी…”
मैंने कहा- “पक्का? अगर तुम्हें जरा सा भी दर्द हुआ तो मुझे बता देना में बाहर निकाल लूगा..”
अनु बोली- “हाँ बाबू, मैं आपको बता दूँगी..’ फिर मुझे किस किया और बोली- “वैसे (घोड़ी) बनूं मैं?”
मैंने अनु के होठों को अपने होंठों में दबा लिया और उसके चूतड़ों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। मेरी उंगली अब उसकी गाण्ड के छेद पर घमने लगी थी। अनु भी मेरे साथ चिपक गई। मैंने कहा- “जाओं कोई कीम उठाकर लाओ…”
अनु ने कीम लाकर मुझे दे दी। मैंने अनु की गाण्ड के छेद पर क्रीम लगा दी और अपनी उंगली को सकी गाण्ड में डाल दिया। अनु ने सीईई… की आवाज करी।
मैंने कहा- दर्द हो रहा है?
अनु बोली- नहीं आप करते रहो।
मैंने अनुकी गाण्ड में फिर से अपनी उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू कर दी। अनु की गाण्ड में अच्छी तरह से कीम लगाकर मैंने कहा- “अब घोड़ी बन जाओ…”
अनु घोड़ी बन गईं। मैंने उसकी गाण्ड में थोड़ी और कीम लगा दी और उंगली में अंदर कर दी।
मैंने कहा- “अब में लण्ड डालं?”
अनु ने कहा- हम्म्म्म ! … आपकी घोड़ी तैयार है।
मुझे अनु का इन्विटेशन अच्छा लगा। मैंने अनु की गाण्ड पर लौड़ा रखकर जोर से दबा दिया। अनु ने हल्की सी सस्स्स अ उईईई… की आवाज निकली।
मैंने कहा- दर्द हो रहा है?
अनु बोली- नहीं नहीं।
मैंने अपना लण्ड अनु की गाण्ड में थोड़ा और डाला। अनु की कोई आवाज नहीं आई। मैंने अपना लण्ड धीरे से पूरा डाल दिया। मैंने अपना पूरा लण्ड अनु की गाण्ड में डालकर धक्के मारने शुरू कर दिए। मेरे धक्के पड़ने पर अनु की सिर्फ हम्म्म्म … की आवाज आ रही थी।
मैंने कहा- “दर्द तो नहीं हो रहा?”
अनु ने सर हिलाकर कहा- “नहीं..”
मैं अनु की गाण्ड मारता रहा। अनु ने कोई विरोध नहीं किया, और फिर जब मेरे लौड़े से बर्दाश्त नहीं हआ, तो मैंने अपना माल अनु की गाण्ड में झाड़ दिया, फिर अपना लण्ड अनु की गाण्ड से निकाल लिया।
अनु अभी तक घोड़ी बनी हई थी। मैंने अपने लण्ड को तौलिया में साफ किया और अनु को कहा- “अब तो सीधी होकर लेट जाओ।
अनु सस्स्स्स … आह्ह.. की आवाज करते हुए सीधा लेट गईं।
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अनु ने कहा- उसमें मेरे चूतड़ों की शेप साफ-साफ नजर आती हैं.”
मैंने कहा- “इसीलिए तो सेक्सी लगती हो…”
अनु बोली- “आपको ही तो लगती हैं…” कहकर अनु ने मेरे सीने में मुंह छुपा लिया और बोली- “सब कहते हैं मेरे चूतड़ भारी हैं, मुझे टाइट ड्रेस अच्छी नहीं लगती। मुझे भी बड़ा अजीब लगता है। मैं जब कहीं जाती है तो सब वही देखते हैं, तो मुझे बड़ी शर्म आती है.”
अनु फिर बोली “शादी से पहले मैं ऋतु जैसी स्लिम दुबली-पतली थी पर शादी के बाद मैं मोटी हो गई। मैं
आपको मोटी नहीं लगती?”
मैंने कहा- “नहीं। तुम्हारें जिम का गदरायापन तुमको और ज्यादा सेक्सी बना देता है… फिर मैंने अनु का हाथ पकड़कर अपने लौड़े पर रख दिया और कहा- “देखो तुम्हारी गाण्ड के नाम से ये भी उठ गया.”
अनु ने मेरे लौड़े को प्यार से सहलाया और बोली- “इसका जो मन करे इसको करने दो। फिर सो
जाएगा.”
मैने अनु की गर्दन पर चूमते हुए कहा- “इसका तुम्हारी गाण्ड मारजे का मन कर रहा है..”
अनु हँसने लगी और बोली. “इसमें सोचने की क्या बात है? जैसे आपको करना है कर लो..”
मैंने कहा- “पर तुम्हें पीछे से करवाने में दर्द होता हैं। मैं तुम्हें दर्द नहीं देना चाहता। रहने दो। आगे से ही कर लंगा..”
अनु बोली- “आपकी खुशी के लिए मुझे हर दर्द मंजूर है। आप पीछे से कर लो..”
मैंने फिर से कहा- “तुम्हें दर्द हुआ तो?”
अनु बोली- “नहीं होगा ना… मैं आपको कह रही हैं, आप करो.”
मैंने कहा- “रहने दो यार.”
अनु ने कहा- “आप करो ना… अच्छा अगर दर्द हआ तो मैं आपको बता देंगी…”
मैंने कहा- “पक्का? अगर तुम्हें जरा सा भी दर्द हुआ तो मुझे बता देना में बाहर निकाल लूगा..”
अनु बोली- “हाँ बाबू, मैं आपको बता दूँगी..’ फिर मुझे किस किया और बोली- “वैसे (घोड़ी) बनूं मैं?”
मैंने अनु के होठों को अपने होंठों में दबा लिया और उसके चूतड़ों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। मेरी उंगली अब उसकी गाण्ड के छेद पर घमने लगी थी। अनु भी मेरे साथ चिपक गई। मैंने कहा- “जाओं कोई कीम उठाकर लाओ…”
अनु ने कीम लाकर मुझे दे दी। मैंने अनु की गाण्ड के छेद पर क्रीम लगा दी और अपनी उंगली को सकी गाण्ड में डाल दिया। अनु ने सीईई… की आवाज करी।
मैंने कहा- दर्द हो रहा है?
अनु बोली- नहीं आप करते रहो।
मैंने अनुकी गाण्ड में फिर से अपनी उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू कर दी। अनु की गाण्ड में अच्छी तरह से कीम लगाकर मैंने कहा- “अब घोड़ी बन जाओ…”
अनु घोड़ी बन गईं। मैंने उसकी गाण्ड में थोड़ी और कीम लगा दी और उंगली में अंदर कर दी।
मैंने कहा- “अब में लण्ड डालं?”
अनु ने कहा- हम्म्म्म ! … आपकी घोड़ी तैयार है।
मुझे अनु का इन्विटेशन अच्छा लगा। मैंने अनु की गाण्ड पर लौड़ा रखकर जोर से दबा दिया। अनु ने हल्की सी सस्स्स अ उईईई… की आवाज निकली।
मैंने कहा- दर्द हो रहा है?
अनु बोली- नहीं नहीं।
मैंने अपना लण्ड अनु की गाण्ड में थोड़ा और डाला। अनु की कोई आवाज नहीं आई। मैंने अपना लण्ड धीरे से पूरा डाल दिया। मैंने अपना पूरा लण्ड अनु की गाण्ड में डालकर धक्के मारने शुरू कर दिए। मेरे धक्के पड़ने पर अनु की सिर्फ हम्म्म्म … की आवाज आ रही थी।
मैंने कहा- “दर्द तो नहीं हो रहा?”
अनु ने सर हिलाकर कहा- “नहीं..”
मैं अनु की गाण्ड मारता रहा। अनु ने कोई विरोध नहीं किया, और फिर जब मेरे लौड़े से बर्दाश्त नहीं हआ, तो मैंने अपना माल अनु की गाण्ड में झाड़ दिया, फिर अपना लण्ड अनु की गाण्ड से निकाल लिया।
अनु अभी तक घोड़ी बनी हई थी। मैंने अपने लण्ड को तौलिया में साफ किया और अनु को कहा- “अब तो सीधी होकर लेट जाओ।
अनु सस्स्स्स … आह्ह.. की आवाज करते हुए सीधा लेट गईं।
मैंने अनु को देखा तो उसकी आँखें लाल हो गई थी। उसका पूरा चेहरा आँसुओ से भीगा हुआ था। मैंने उसका कहा- “तुम रो रही थी ना?”
अनु ने कहा- नहीं तो।
मैंने उसके चेहरे पर अपनी उंगली फेरते हुए कहा- “अभी तक आँसू हैं..”
अनु मेरे से कसकर चिपट गई।
मैंने उसको गुस्से से कहा- “झठी… मुझसे कहा क्यों नहीं? मैं इतना जालिम तो नहीं जो तुम्हारे दर्द को नहीं समझता…
अनु बोली. “बाबू आपकी खुशी से बढ़कर मेरे लिए और कुछ नहीं.”
मैं अनु को देखता ही रह गया।
अनु की प्यार भरी आवाज मेंरे कानों में सुनाई दे रही थी- “उठिए ना… उठिए.”
मैंने नींद में ही कहा- “अभी उठ जाऊँगा जान..”
फिर मुझे अपने होंठों पर अनु के होंठों का एहसास हुआ। उसके नाजुक होंठ मेरे होंठों को चूसने लगे। अनु की महकती सांसें मेरी सांसों में घुल गई। अनु की सांसों की महक मेरी सांसों में बस गईं। मेरे चेहरे
पर उसकी भीगी जुल्फें बिखरी हुई थी। मैंने फिर भी आँखें नहीं खाली।
फिर से आवाज आई- “मेरे बाबू को बड़ी नीद आ रही है..”
अब मैंने अपनी आँखों को खोला तो अनु मेरे ऊपर झुकी हुई थी। मैंने अनु को देखा, तो ऐसा लग रहा था जैसे वो अभी-अभी नहाकर आई हो, उसके बाल गीले थे। अनु का गोरा रंग उसकी बड़ी-बड़ी आँखें और उसके गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठ कयामत लग रहे थे। अनु मुझे बड़े प्यार से मुश्कुराती हुई देख रही थी।
.
अनु ने कहा- गुड मार्निंग
मैंने उसको अपनी बाहों में भरकर कहा- “गड़ मानिंग मेरी जान… काश। तुम रोज मुझे ऐसे उठाती..”
अनु के चेहरा पर लाली और बढ़ने लगी।
फिर मैंने कहा- “आज इतनी जल्दी कैसे उठ गई?”
अनु ने कहा- “पता नहीं अपने आप ही नींद खुल गई थी..” फिर बोली- “जल्दी से उठ जाओं बाबू ..”
मैंने हँसते हुए हुए अनु से कहा- “इतनी जल्दी क्यों कर रही हो?”
अनु ने कहा- “मैंने ब्रेकफस्ट का आर्डर दिया हुआ है। आप जल्दी से तैयार हो जाओ…”
मैंने रूम में देखा तो ऋतु नजर नहीं आ रही थी। मैंने पूछा- “ऋतु कहां है?”
अनु बोली- “वो नहा रही है.”
मैंने अनु को आँख मारते हुए कहा- “क्या बात है जान, आज बड़ी प्यारी लग रही हो?”
अनु ने शांत हुए कहा- “थैक्स.”
इतने में ऋतु नहाकर आ गई।
मैंने उसको कहा. ऋतु अब कैसा लग रहा है?
ऋतु ने कहा- “मैं ठीक हूँ..”
मुझे एहसास हो गया की उसका मूड सही नहीं है। मैंने कुछ नहीं कहा और फिर मैं बाथरूम में चला गया। मैं तैयार होकर बाहर आया तो ऋतु नाश्ता कर रही थी। अनु ऐसे ही बैठी थी।
मैंने अनु से कहा- “तुम नाश्ता नहीं कर रही, किसका इंतजार कर रही हो?”
अनु मुझे देखकर बोली- “आपका..”
मैं अनु के पास जाकर बैठ गया। अनु ने मुझे नाश्ता सर्व किया। फिर वो भी मेरे साथ नाश्ता करने लगी। हम लोगों ने जब नाश्ता कर लिया तब मैंने ऋतु से कहा- “अभी चलें या थोड़ी देर रूक कर चलना है?”
ऋतु बोली- “अब यहां रुकने का मूड नहीं है. जल्दी से चलिए.”
हम सब कार में बैठ गये। मैंने कार स्टार्ट की और चल दिए। अनु मेरे साथ ही बैठी थी। थोड़ी देर बाद मैंने ऋतु से कहा- “क्या बात है तुम कुछ अपसेट लग रही हो?”
उसने कोई जवाब नहीं दिया और बाहर देखती रही। मैंने अनु की तरफ देखा। उसने मुझे इशारा किया की में इस बारे में कोई बात ना करूं। मैं फिर कुछ नहीं बोला।
थोड़ी देर बाद मैंने चुप्पी को तोड़ते हुए अनु से कहा- “कैसा लगा यहां आकर?”
अनु ने मुश्कुराकर कहा- “मुझे तो बड़ा मजा आया। मेरा तो मन ही नहीं कर रहा था वहां से आने का..”
मैंने मिरर में ऋतु को देखा तो उसने बुरा सा मुँह बनाया हुआ था। जैसे उसको अनु की बात अच्छी ना लगी हो। मैं उसको ऐसा करते देख कर कुछ बोला नहीं। मैं अनु से ही बातें करता रहा। हम दोनों आपस में ही मस्त हो गये थे।
काफी देर बाद ऋतु ने कहा- “मुझे टायलेट जाना है। प्लीज कहीं कार रोक देना…”
मैंने कहा- “ओके… कोई सही जगह आने दो रोकता है.”
थोड़ी दर चलने के बाद एक ढाबा नजर आया। मैंने वहां कार रोक दी और ऋतु से कहा- “जाओ…”
ऋतु कार से निकालकर जोर से दरवाजा बंद करते हुए चली गई।
अनु ने मेरी तरफ देखते हुए कहा- “देखा आपने?”
मैने कहा. “ऋतु का मूड़ क्यों अपसेट है?”
अनु ने कहा- “इसका कल रात का गुस्सा है.”
.
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मैंने कहा- “चलो कोई बात नहीं। घर जाकर इसका मूड अपने आप ठीक हो जाएगा..”
अनु बोली- “आपको लगता है पर मुझे नहीं। ये तो अब घर जाकर भी मुझे उल्टा सीधा बोलेगी.”
मैंने कहा- “अगर ऋतु कुछ कहे तो तुम इसकी बात का बुरा नहीं मानना। मुझे बता देना। मैं उसको समझा दूंगा अपने तरीके से…”
अनु बोली- “मैं आपको कैसे बताऊँगी? मेरे पास तो अपना सेल भी नहीं है। और ऋतु ने मुझे अपने सेल से बात ना करने दी तो?”
मैंने अनु को कहा- “तुम्हें सेल मैं अभी दे दूँगा?”
अनु बोली- “पर कैसे? नहीं-नहीं रहने दीजिए, ऋतु को और गुस्सा आएगा..”
मैंने अनु को कहा- “उसकी चिता तुम मत करो..”
इतने में ऋतु आ गई। कार में बैठकर बोली- “अब चलिए, यहां भी रुकने का इरादा है क्या?”
मैंने कहा- “तुम्हारे लिए ही तो सका था..” मैंने रास्ते में ही अपने आफिस फोन कर दिया। मैंने अपने स्टाफ का एक लड़का है उसको कहा- “सुनो नीरज, तम आफिस के पास जो मोबाइल स्टोर है वहां चले जाना और मेरी बात करवा देना…”
हम सब कार में बैठ गये। मैंने कार स्टार्ट की और चल दिए। अनु मेरे साथ ही बैठी थी। थोड़ी देर बाद मैंने ऋतु से कहा- “क्या बात है तुम कुछ अपसेट लग रही हो?”
उसने कोई जवाब नहीं दिया और बाहर देखती रही। मैंने अनु की तरफ देखा। उसने मुझे इशारा किया की में इस बारे में कोई बात ना करूं। मैं फिर कुछ नहीं बोला।
थोड़ी देर बाद मैंने चुप्पी को तोड़ते हुए अनु से कहा- “कैसा लगा यहां आकर?”
अनु ने मुश्कुराकर कहा- “मुझे तो बड़ा मजा आया। मेरा तो मन ही नहीं कर रहा था वहां से आने का..”
मैंने मिरर में ऋतु को देखा तो उसने बुरा सा मुँह बनाया हुआ था। जैसे उसको अनु की बात अच्छी ना लगी हो। मैं उसको ऐसा करते देख कर कुछ बोला नहीं। मैं अनु से ही बातें करता रहा। हम दोनों आपस में ही मस्त हो गये थे।
काफी देर बाद ऋतु ने कहा- “मुझे टायलेट जाना है। प्लीज कहीं कार रोक देना…”
मैंने कहा- “ओके… कोई सही जगह आने दो रोकता है.”
थोड़ी दर चलने के बाद एक ढाबा नजर आया। मैंने वहां कार रोक दी और ऋतु से कहा- “जाओ…”
ऋतु कार से निकालकर जोर से दरवाजा बंद करते हुए चली गई।
अनु ने मेरी तरफ देखते हुए कहा- “देखा आपने?”
मैने कहा. “ऋतु का मूड़ क्यों अपसेट है?”
अनु ने कहा- “इसका कल रात का गुस्सा है.”
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मैंने कहा- “चलो कोई बात नहीं। घर जाकर इसका मूड अपने आप ठीक हो जाएगा..”
अनु बोली- “आपको लगता है पर मुझे नहीं। ये तो अब घर जाकर भी मुझे उल्टा सीधा बोलेगी.”
मैंने कहा- “अगर ऋतु कुछ कहे तो तुम इसकी बात का बुरा नहीं मानना। मुझे बता देना। मैं उसको समझा दूंगा अपने तरीके से…”
अनु बोली- “मैं आपको कैसे बताऊँगी? मेरे पास तो अपना सेल भी नहीं है। और ऋतु ने मुझे अपने सेल से बात ना करने दी तो?”
मैंने अनु को कहा- “तुम्हें सेल मैं अभी दे दूँगा?”
अनु बोली- “पर कैसे? नहीं-नहीं रहने दीजिए, ऋतु को और गुस्सा आएगा..”
मैंने अनु को कहा- “उसकी चिता तुम मत करो..”
इतने में ऋतु आ गई। कार में बैठकर बोली- “अब चलिए, यहां भी रुकने का इरादा है क्या?”
मैंने कहा- “तुम्हारे लिए ही तो सका था..” मैंने रास्ते में ही अपने आफिस फोन कर दिया। मैंने अपने स्टाफ का एक लड़का है उसको कहा- “सुनो नीरज, तम आफिस के पास जो मोबाइल स्टोर है वहां चले जाना और मेरी बात करवा देना…”
नीरज ने कहा- “सर, आप कब तक आएंगे…”
मैंने कहा- “मैं अब कल से ही आऊँगा…”
थोड़ी देर बाद मोबाइल स्टोर से मझे फोन आ गया। मैंने उसको समझा दिया। फिर मैंने नीरज से कहा- “यहां से मोबाइल लेकर तुम मेरे घर छोड़ देना..”
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हम जब अपनी सिटी में एंटर हए तब तक अंधेरा हो चुका था। मैंने कार अपने घर की तरफ मोड़ दी। जैसे ही कार घर के बाहर रूकी वाचमैन ने गेट खोल दिया। मैं कार अंदर ले गया। वाचमैन ने मुझे एक
पैकेंट दिया। मैं समझ गया उसमें मोबाइल होगा जो मैंने अनु के लिए मैंगवाया था।
मैंने वो पैकेट अपने हाथ में ही रखा और अनु से कहा- “तुम पहली बार मेरे घर आई हो, बाहर से ही जाओगी तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा। 5 मिनट के लिए ही सही अंदर चला…”
अनु भी मना नहीं कर सकी। मैंने घर में पहुँचते ही नौकर को कहा- “जरा बढ़िया सी काफी बनाकर मेरे रूम में ले आओ…”
मैने अनु से कहा- “आओं रूम में बैठते हैं.”
ऋतु को शायद अनु का मेरे घर आना अच्छा नहीं लगा। वो बोली- “सर आप हम लोगों को छोड़ते हए ही आ जाते। अब आप एक बार फिर से हमको छोड़ने जाओगे…’
मैंने कहा- “हीं तुम ठीक बोल रही हो। वैसे तो तुम्हारा घर पहले पड़ता। पर मुझे अनु को कुछ देना था इसलिए पहले यहां आना पड़ा…”
अनु को कुछ देने की बात सुनते ही ऋतु के मुँह पर 12:00 बज गयें। उसका चेहरा उसकी फीलिंग्स को शो करने लगा। पर मुझे उसकी कोई परवाह नहीं थी। मैं अनु को अपने रूम में ले गया। ऋतु भी हमारे साथ-साथ आ गई।
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रूम में जाते ही अनु बोली- “आपके रूम का इंटीरियर ता बहुत बदिया है। जिस होटेल में हम रुके थे उससे भी अच्छा लग रहा है.”
मैने मुश्कुराकर अनु से कहा- “वा होटेल था, ये घर है…”
अनु मुस्कुरा उठी। अनु मेरे बाद पर फैले हए कपड़ों को देखकर बोली- “अरे यहां तो कपड़े फैले पड़े हैं। किसी ने सही नहीं किए..”
मैंने मुश्कुराते हए कहा “मेरे रूम में आने की किसी को पमिशन नहीं है। और मैं आज दो दिन बाद आया हैं। कौन करता”
अनु बोली- “क्यों नौकर तो है, वो नहीं कर सकता था?”
मैंने कहा- उसको भी पमिशन नहीं है।
अनु मुझे सवालिया नजर से देखती रही पर बोली कुछ नहीं।
फिर ऋतु में अनु को धीरे से कहा- “इस बारे में सर से कोई बात मत करो, उनको हर्ट होगा..”
मैंने ऋतु में कहा- “अरे नहीं, ऐसा कुछ नहीं है। जो मेरी लाइफ की हकीकत है उसमें क्या छुपाना…”
मैंने अनु से कहा- “मेरी वाइफ अब मुझसे अलग रहती है। मैं आजकल अकेला रहता हूँ..”
अनु का मुँह खुला का खुला रह गया।
मैंने कहा- “शायद मुझमें कई खामियां है। जिनकी वजह से उसने ऐसा फैसला लिया होगा… फिर मैं हँसते हए बोला- “अरे यार मैं भी तुम लोगों को बोर कर रहा हूँ..” अ नके चेहरा के भाव सिर्फ मैंने देखे थे। वो क्या थे मैं आपको बाद में बताऊँगा।
इतने में लाकर काफी लेकर आ गया।
मैंने कहा- चलो काफी पीते हैं।
फिर हम सब काफी पीने लगे।
मैंने ऋतु में कहा- “तुम कल आफिस आओगी ना?”
ऋतु ने कहा- “क्यों नहीं आऊँगी?”
मैंने कहा- “शायद थकान हो इसलिए मैंने पूछा..”
ऋतु अनु को देखकर कमेंट की”जो थका होगा वो ही तो आराम करेगा। मैं कौन सा थकी है वहां जाकर?”
मैं समझ गया उसकी बात। मैंने अनु को देखकर प्यार से चुप रहने का इशारा किया। फिर कोई कुछ नहीं बोला। काफी पीने के बाद मैंने अनु से कहा- “ये लो..” और मैंने उसके हाथ में मोबाइल दिया और कहा- “अब जब मन करे मेरे से बात कर लेना..
अनु ने मोबाइल देखते हुए कहा- “ये तो बड़ा मैंहगा लग रहा है?”
मैंने हसते हुए कहा- “तुम्हारे आगे इसकी कोई कीमत नहीं..”
अनु फिर से शर्मा गई, और बोली- थैक्स।
मैंने कहा- “मुझे बार-बार थॅंक्स सुनने की आदत नहीं है..”
अनु हँसते हुए बोली- “भच्छा जी… मैं अब नहीं कहूँगी..”
ऋतु को अनु का मोबाइल देखकर बड़ी तकलीफ हो रही थी। उसने कहा- “सर, दीदी जब वापिस चली जाएंगी तो में ये वाला मोबाइल रख लैं?”
मैंने कहा- नहीं, बो अनु के पास ही रहेगा। तुमको लेना है तो मैं और दिलवा दूंगा।
अनु चौंक गई, और बोली- “अरे… मैं इसको वहां कैसे ले जाऊँगी? क्या कहँगी किसने दिया? इतना मैंहगा है नहीं तो बोल देती मम्मी ने दिया है.” ‘
मैंने कहा- “तुम बोल देना गिफ्ट दिया है किसी ने.”
अनु ने फिर कुछ नहीं कहा।
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जाने से पहले अनु मेरे रूम को बड़ी बारीक निगाहों से देख रही थी। मैं जानता था वो क्या ढूंढ रही है? पर मैंने उसको कुछ कहा नहीं। मैं जब ऋतु के घर पहुँचा तो मैंने उन लोगों को बाहर ही छोड़ दिया। क्योंकी मैं अंदर जाने के मूड में नहीं था।
अनु और ऋतु में कहा भी आने को। पर मैंने मना कर दिया। मैं वापिस आने लगा। मैंने घर आते ही सबसे बसे पहले दो पेंग लगाए। फिर अपना रुम ठीक किया और बेड पर लेट गया। शायद दो दिन की थकान का असर था की मुझे एकदम से नींद आ गई।
मैं सुबह उठा तो “00 बज चुके थे। मैंने अपने सेल को देखा। मुझे पूरी उम्मीद थी की अनु ने मुझे रात को फोन किया होगा। मैंने मोबाइल देखा तो उसमें कोई मिस काल नहीं थी। मैं फिर तैयार होने लगा। मैं आफिस पहचा तो परे स्टाफ ने पछा, “सर आप कहां गये थे? और ऋतु भी नहीं आई आपके पीछे..”
मैंने कहा- “मैं किसी काम से बाहर गया था.” और मैंने अंजान बनते हुए कहा- “ऋतु क्यों नहीं आई? हो सकता है उसको कोई अजेंट काम पड़ गया हो या फिर उसकी तबीयत खराब हो..” कहते हुए मैं अपने केबिन में चला गया।
थोड़ी देर बाद ऋतु भी आ गईं। उसका मुँह अभी तक सूज़ा हुआ था। मेरे केबिन में आकर बोली- “जी. एम. मर…”
मैंने उसको कहा- “आओं ऋतु बैठो..”
अनु बैठ गईं।
मैंने उसको कहा- “मैं जब आफिस में आया तो सबने मुझे पूछा की मैं कहां गया था और तुम भी नहीं आई मेरे पीछे…
ऋतु बोली- “फिर आपने क्या कहा?”
मैंने कहा- “मैंने उनसे कहा है की मैं किसी काम से बाहर गया था। तुम सबको यही बोलना की तुम किसी काम की वजह से नहीं आई। ओके… समझ गई?”
ऋतु ने कहा- “ओके… बोल दूँगी। अब मैं जा सकती हैं।”
मैंने उसको प्यार से कहा- “ऋतु तुम अभी तक नाराज हो क्या?
ऋतु ने कहा- “मैं कौन होती है न न होने वाली? और अगर हो भी जाऊँ तो किसी को क्या फर्क पड़ेगा?”
मैं उठकर उसके पास गया और मैंने उसको अपनी बाहों में भर लिया फिर उसके होंठों पर होंठ रख दिए। पर उसने कुछ नहीं किया। नहीं तो पहले मैं जब उसके होंठों पर होंठ रखता था तो वो मेरे होंठों को चूसती थी। मैं समझ गया उसका मूड सही नहीं है। मैंने उसको कसकर अपनी बाहों में भर लिया, और अपनी गोदी में उसको उठा लिया।
मैंने कहा- “अच्छा अब मह सही कर लो। पलीजज… अनु तो तुम्हारी बहन है, और वो कौन सा यहां रुकने वाली है। कुछ दिन में चली जाएगी। तुम तो हमेशा मेरे पास रहोगी। है की नहीं?”
ऋतु की आँखों में आँस आ गये। उसने कहा “आपका मेरे से मन भर गया है तो बता दीजिए। अब आप मुझे प्यार नहीं करते। मैं आपको अच्छी नहीं लगती…”
मैंने उसको फिर से चूमते हुए कहा- “पागल हो क्या? जो ऐसी बातें सोच रही हो। और फिर तुमने खुद ही तो नैनीताल जाने का प्रोग्राम बनाया था। मुझे और अनु को साथ नैनीताल लेकर गई थी। फिर खुद ही गुस्सा हो रही हो…”
ऋतु आँसू पोंछते हुए बोली- “हाँ, मैंने ही तो गलती की है। मुझे इसकी सजा तो मिलनी ही है…”
मुझे अब बात समझ में आ गई की उसको सिर्फ अ से प्राब्लम है। मैंने उसको कहा- “ऋतु तुम मुझे समझ पाई हो या नहीं? मैं नहीं जानता पर इतना जरूर कहूगा की जो मेरे मन में होता है वही मेरी जुबान पर। मैं दोहरा जीवन नहीं जीता। और अगर फिर भी तुमको यही लगता है तो, मैं तुम्हें और ज्यादा कबिन्स नहीं कर सकता..” कहकर मैं अपनी चेयर पर जाकर बैठ गया।
ऋतु बहुत देर मह को झकाए बैठी रही फिर कहने लगी- “अच्छा… मैं आपकी बात समझ गई पर अब आप अनु से नहीं मिलोगे…”
में उसके मुँह से दीदी की जगह अनु सुनकर थोड़ा सा चौका। पर मैंने कुछ कहा नहीं। मैंने कहा- “तुम ऐसा क्यों कह रही हो?”
ऋतु बोली- “मुझे नहीं पता। पर अब अगर आप अनु से मिले तो….. और उसने अपनी बात को अधूरा छोड़ दिया।
मैं समझ गया वो मुझे अब एमोशनल बलेकमेल कर रही है। पर मैं उसको कुछ नहीं कहने चाहता था। मैंने उसको कहा- “ऋतु देखो, तुम मेरे ऊपर अपनी मर्जी थोप नहीं सकती। लेकिन मैं तुमसे ये वादा करता हूँ की जब तक अनु यहां है, वो मुझे अगर खुद मिलने आई तो मैं उसको जरूर मिलूंगा । पर यहां से जाने के बाद मैं उसको कभी मिलने नहीं जाऊँगा, ना ही मैं उसको फोन करूँगा …”
मेरी बात सुनकर ऋतु को कुछ राहत मिली, फिर बोली- “अच्छा आप उसको नहीं कहोगे की वो आपको मिले, और आपको मुझे ये प्रामिस करना होगा की यहां से जाने के बाद अनु आपकी लाइफ से बाहर हो जाएगी…”
मैंने कहा- “आई प्रामिस.”
फिर ऋतु कहने लगी- “वैसे भी जीजा अब उसको यहां भेजेंगे नहीं “
मैंने कहा- ऐसा क्यों?
ऋतु बोली- “वो में आपको नहीं बताऊँगी..”
मैंने कहा- “मुझं तुमने जो कहा, मैंने माना और तुम मुझसे छुपा रही हो…”
ऋतु बोली- “आप समझ नहीं रहे हो? वो उनका पर्सनल मामला है…”
मैंने कहा- “फिर भी क्या बात है पता तो चले?”
ऋतु ने कहा- “आप मेरे जीजा से कभी नहीं मिले। अगर मिल लेतें तो आप खुद समझ जाते…”
मैंने कहा- “मुझे डीटेल में बताओ माजरा क्या है?”
ऋतु बोली- “अनु की शादी जब हई थी, तब जीजु की जाब टेम्परारी थी, और उनका अपना घर भी नहीं था। पर हम लोगों से उन्होंने ये बात छुपाई थी..”
मैंने ऋतु की बात काटते हुए कहा- “पहले अनु के पति का नाम बताओ?”
ऋतु ने कहा- “सुमित ..”
मैंने कहा- “हाँ अब बताओं सुमित के बारे में?”
ऋतु बोली- “फिर जब हम लोगों ने रिश्ता पक्का कर दिया, तो वो जल्दी शादी की जिद करने लगे। हमने जैसे तैसे इंतजाम किया…”
मैंने कहा- “हाँ, वो बात तो मुझे पता ही है.”
ऋतु बोली- “शादी के बाद जब हमें जाब वाली बात पता चली तो पापा को बड़ा गुस्सा आया…”
मैंने कहा- “सही बात है। कोई भी होता तो उसका गुस्सा आता…”
तब जीज ने कहा- “अपनी लड़की को ले जाओ, जब मेरी जाब पक्की हो जाएगी मेरे पास छोड़ जाना…”
अत- “अब लड़की को घर में कैसे बैठा लेते। हम कुछ कर नहीं सकते थे। मजबूरी में हमें अडजस्ट करना पड़ा.”
मैंने कहा- “अब उनका अपना घर है या अब भी….”
ऋतु बोली- “नहीं अभी तक वा रेंट पर ही रहते हैं..”
मैंने कहा- “और जाब?”
ऋतु बोली. “वही तो है सारे फसाद की जड़.”
मैंने कहा- “क्या मतलब वो कहीं और जाब कर रहा है?”
ऋतु बोली- “हाँ, 5-6 महीने से वो कहीं और जाब कर रहे हैं। अनु भी बीच में उनकी हेल्प के लिए घर पर बच्चों को पढ़ाती थी। पर बेंबी होने की बजह से उनको अब ट्यशन छोड़नी पड़ी…”
मैंने कहा- फिर?
ऋतु बोली- “अब जीजू जहां जाब करते हैं, वहां उनकी सेलरी ₹9000 है। पहले तो जैसे-तैसे घर चल रहा था पर अब बेबी हो गया है। अब मुश्किल हो रही है…”
मैंने कहा- “तुमने जो भी बात बताई है, उसका इस बात से क्या मतलब है की वो यहां नहीं आएगी? ये बात मुझे समझ में नहीं आई की वो यहां क्यों नहीं भेजेंगा?”
ऋतु बोली- “बता तो रही हूँ। अब जीजू ने ये कहा है की अनु भी जाब करेंगी, तब घर चलेगा..”
मैंने कहा- “हम्म्म्म .. इसलिए वो यहां नहीं आएगी। चलो अच्छा है उसका मन जाब में लग जाएगा, तो वैसे भी मुझे कहां याद रखेंगी?”
ऋतु बोली- “आप अनु को नहीं जानते, वो जाब नहीं करेंगी..”
मैंने कहा- “उसको क्या प्राब्लम है जाब करने में? सुमित की हेल्प ही तो करेगी वो जाब करके। सुमित सही तो कह रहा है। अनु पढ़ी लिखी है अगर जाब करेंगी तो उसकी हेल्प हो जाएगी…”
ऋतु बोली- “अनु भी मान गई है। पर जब तक बेबी छोटा है वो कैसे करें?”
मैंने पूछा- “सुमित के पैरेंट्स उसके साथ रहते हैं या अलग?”
ऋतु ने कहा- “उनके पैरेंट्स नहीं हैं…”
मैंने कहा- “फिर किसी ई-बोडिंग में बेबी को छोड़कर दोनों पति पत्नी जाब कर सकते हैं…
ऋतु बोली- “यही बात तो अनु नहीं मान रही। इसीलिए जीजू अनु को यहां छोड़कर गये थे की उसको हम सब समझाएं की वो जाब कर ले…”
मैंने कहा- फिर अनु मान गई?
ऋतु ने कहा- “हाँ, वो मन तो गई पर जीजू जहां उसका जाब के लिए कह रहे हैं, वो वहां नहीं करना चाहती…”
मैंने कहा- वहां कोई प्राब्लम है तो ना करे, कहीं और कर ले।
ऋतु बोली- यही तो है सारे प्राब्लम की जड़। जीजू उसको वहीं जाब करने के लिए जोर दे रहे हैं।
मैंने कहा- सुमित ने उसकी कोई वजह तो बताई होगी?
ऋतु ने कहा- “वो तो यही कह रहे थे की मैं जहां जाब लगवा रहा हूँ वहां सैलरी ज्यादा मिलेगी और जगह से।
मैंने कहा- फिर अनु को ये बात समझ में नहीं आ रही या कोई और बात है उसके मन में?
ऋतु बोली- “असल में जिस जगह जीजू कह रहे हैं, एक तो वो उनके घर में 15-20 किलोमीटर दूर है, दूसरा वो फैक्टरी बिल्कुल सूनसान जंगल में है, और अनु कह रही थी……”
मैंने कहा- “क्या कहा अनु ने?”
ऋतु बोली- “अनु ने बताया है की उस फैक्टरी में लेडीस का बड़ा बुरा हाल है। मतलब आप समझ सकते हो.”
मैंने होंठों को गोल करके सीटी बजाई, और कहा- “सुमित को कोई शौक तो नहीं? जैसे शराब, जुआ या कोई और?”
ऋतु बोली- “शराब का तो पता नहीं, पर वो मैच पर पैसे लगाते हैं। पता नहीं क्या होता है?”
मैंने कहा- “बॅटिंग करता है इसका मतलब? पर ये बताओं उसके पास पैसा कहां से आता है इसके लिए?”
ऋतु बोली- “दीदी का सारा जेंवर उन्होंने बेच दिया इसी काम में…”
मैंने कहा- “इस काम को करने वाला तो…….”
ऋतु बोली- “आपकी बात मैं समझ गई.”
मैंने ऋतु में कहा- “तुम अनु से कुछ मत कहना की तुमने मुझे ये सब बता दिया है। वरना उसको बुरा लगेगा…”
ऋतु बोली- “नहीं मैंने तो आपकी जिद्द की वजह से आपको बताया है। वरना में आपको बताती भी नहीं..”
मैंने उसको कहा- “अब तुम जरा आफिस का काम देखो। दो दिन में क्या हुआ पता नहीं। में भी देखता हैं, और शाम को जब मेरे पास आना तो मूड ठीक करके आना…”
ऋतु मुश्कुराकर बोली- “आपसे ज्यादा देर तक कोई भी नाराज नहीं रह सकता..”
मैंने कहा- “मजाक बना रही हो?”
ऋतु बोली- नहीं कसम से।
ऋतु के जाने के बाद मैं अनु के बारे में सोचने लगा। सच बात तो ये थी की मैं मन ही मन अनु को प्यार कर बैठा था। मुझे उसकी में तकलीफ अपनी लगने लगी। पर मैं उसकी तब तक कोई हेल्प नहीं कर सकता था जब तक वो मुझसे कुछ ना कहे। क्योंकी वो शादीशुदा है। अगर मैं उसको कोई हेल्प करता तो, हो सकता है इ उसके पति के मन में कोई गलत बात आती। मैं यही सब सोचता रहा। फिर मैंने अनु को फोन मिला दिया।
अनु ने हेलो कहा।
मैंने कहा- पहचाना?
अनु बोली- “आपको भल सकती है क्या? और आपका टाइम मिल गया?”
कहा- “ये बात तो मुझे तुमसे पूऊजी है?”
अनु बोली- “जब से आई हूँ आराम कर रही ह..”
मैंने कहा- “और आज बोर तो नहीं हो रही?”
अनु बोली- “आपके साथ तो नहीं हुई थी। पर अब होने लगी है..”
मैंने कहा- वापिस कब जाना है?
अनु बोली- अभी कुछ नहीं पता।
मैंने कहा- “मैं तुमसे मिल सकता हूँ?”
अनु बोली- कब?
मैंने कहा- “आज। अभी…
अनु ने कहा- कहा?
मैंने कहा- मेरे घर पर।
अनु बोली- मैं वहां किसके साथ आऊँगी, और मम्मी को क्या कहेंगी? ऋतु का भी मूड खराब है कल से।
मैंने कहा- ऋतु का मूड अब सही है, मैंने उसको समझा दिया है। तुम आने की चिंता नहीं करो। कार भेजता हूँ।
अनु बोली- पर मम्मी ?
मैंने कहा- उनसे कोई बहाना बना दो की किसी दोस्त से मिलने जा रही हैं।
अनु बोली- नहीं-नहीं, मैं यहां किसी को जानती ही नहीं। मैं क्या कहूँगी?
मैंने कहा- “चलो मैं तुमको एक आइडिया देता हैं। अगर फिट हो जाए तो मुझे बता देना.. अनु को मैंने
आइडिया बता दिया। मेरा आइडिया फिट बैठ गया।
अनु का फोन आया, “बताइए में कहां आऊँ?”
उसके घर के पास एक बाजार है, उसको वहां बुला लिया। मैंने कहा- “तुम वहां पहुँचो में आ रहा हैं.”
मैं आफिस से ये कहकर निकला की मुझे कोई काम है, और मैं सीधा अनु के पास गया। अनु ने मुझे देख लिया। मैंने उसको अपनी कार में बैठाया और घर आ गया। मैंने अनु को अपने रूम में लेजाकर उसको अपनी बाहों में भर लिया और चूमते हुए कहा- “तुमसे दूर एक दिन भी नहीं रहा गया..”
अनु बोली- “बाब, मैं भी आपसे मिलने को तड़प रही हैं पर क्या करती?”
मैंने कहा- “तुम मुझे फोन तो कर देती..”
अनु बोली- “कल से ऋतु मुझे उल्टा सीधा बोल रही है। मैं कल जब से आई हूँ वो मुझे अकेला छोड़ ही नहीं रही थी। आपका फोन कैसे करती?”
मैंने कहा- कोई बात नहीं।
अनु ने कहा- “ऋतु आफिस में है?”
मैंने कहा- हाँ पर उसको पता नहीं की मैं यहां तुम्हारे पास हूँ
अनु मुश्कुराकर बोली- “आप बड़े चंट हो..”
मैंने कहा- “तुम्हारे लिए बनना पड़ा। तुम कल मेरे गम में जो देख रही थी वो में तुमको दिखा?”
–
अनु झेंप गई।
मैंने कहा- “आओ मैं दिखता है..” कहकर मैं उसको दूसरे रूम में ले गया। वहां मैंने मेरी पत्नी सोनम की फोटो अनु को दिखाई।
अनु पिक देखकर देखती रही फिर बोली- “आपकी वाइफ तो बड़ी सुंदर है मेरे से भी कहीं ज्यादा…”
मैंने कहा- “हो… सुंदरता दो तरह की होती है- तन की, और मन की। दोनों सबके पास नहीं होती..”
अनु बोली- “इसका मतलब?”
मैंने कहा- “तुम्हें टाइम आने पर समझ में आ जाएगा। अब चलो मेरे राम में बैठकर बातें करते हैं..”
मैंने अनु से पूछा- “सुमित का फोन तो नहीं आया था?”
अनु मेरे मुँह में अपने पति का नाम सुनकर चौंक गई।
मैंने कहा- “मुझे उसका नाम ऋतु ने बताया है..”
अनु ने मुझे देखा और कहा- “ऋतु में और क्या बताया है?”
मैंने कहा- कुछ नहीं।
अनु ने कहा- बाब, आप मेरे से झठ मत बोलो।
मैंने कहा- सच में।
अनु बोली- आपको झठ बोलना नहीं आता। आपके चेहरा से पता लग रहा है।
मैंने कहा- हौं ऋतु ने थोड़ा बहुत बताया था, पर जाने दो। ये बताओ क्या लोगी चाय या काफी?
अनु बोली- पहले आप बताओ आपको क्या कहा ऋतु ने?
मैंने अनु को सब बता दिया क्योंकी अब उसको पता चल हो चुका था। मैंने अनु से कहा- “मुझे ये सब सुनकर बड़ी तकलीफ हुई है। तुम जो चाहो तो मैं तुम्हारी हेल्प करने को तैयार हैं। बोलो जितना कहो उतना”
अनु मेरे सीने से लगकर बोली- “बाबू आपने मेरे दर्द को समझा। मेरे लिए वही बहुत है। मुझे कुछ नहीं लेना..”
मैंने कहा- तुमको दुखी देखकर मुझे चैन नहीं आएगा।
अनु ने कहा- “दुख तो मेरी किश्मत में लिखा है आप चाहकर भी उसको बदल नहीं सकते…’ कहते हुए अनु की आँखों से मोती बहने लगे।
मैंने अनु के आँसू पोछते हुए कहा- “अनु अगर तुम ऐसे रोने लगी तो तुम जिंदगी की जंग को बिना लड़े ही हार जाओगी..’ कहकर अनु को मैंने अपने गले से लगा लिया।
अनु अब मेरे सीने पर अपना मुँह रखकर सिसक रही थी।
मैंने अनु को पानी दिया और कहा- “पानी पियो..”
–
अनु ने दो घूँट पिए।
फिर मैंने कहा- “मुझ पर विश्वास है?”
अनु ने कहा- “खुद से भी ज्यादा…” और मेरे से चिपक गईं।
मैंने कहा- फिर तुम वैसा ही करो जैसा मैं कहूँ।
अनु मुझं लाल-लाल आँखों से देखती हुई बोली- “बताइए?”
मैंने कहा- “सबसे पहले तो अपना मूड ठीक करो। लाइफ में दुख तो सबको आता है पर जो लोग उसका सामना करने से डरते हैं, वो अक्सर हार जाते हैं..”
अनु मुझे एकटक देखती ही रह गई।
फिर मैंने कहा- “तुम पहले ये बताओ जाब करोगी या नहीं?”
अनु ने कहा- ” करूँगी पर…..”
मैंने कहा- क्या पर?
अनु ने कहा- मैं कम से कम 3 महीने बाद जाब करूँगी, और वहां किसी भी कीमत पर नहीं करूँगी।
मैंने अनु को कहा- “तुम्हें 3 महीने तक जाब करने के लिए कोई नहीं कहेगा। ये मेरी गारंटी है.”
अनु मुझं हैरान होकर देखने लगी, और बोली- “आप क्या करोगे?”
मैंने कहा- “ये सब मुझ पर छोड़ दो। काई तुम्हें मजबूर नहीं करेगा..” फिर पूछा- “जहा सुमित जाब के लिए कह रहा है, वहां जो प्राब्लम है मुझे बताओ..”
अनु बोली- “क्या बताऊँ? बस इतना समझ लीजिए की वहां जाने के बाद……”
मैंने कहा- वहां ऐसा क्या है बताओ ना?
अनु ने कहा- मेरे घर के पास मेरी एक दोस्त है। उसने मुझे बताया था वहां के बारे में।
मैंने कहा- क्या बताया था?
अनु बोली- “उसने कहा था की वहां जो भी लड़की जाती है, सिर्फ रंडी बनकर बाहर निकलती है.”
मैंने कहा- “हम्म्म्म… लेकिन जो बात तुमको पता है वो सुमित को पता ना हो
अनु मुझे देखकर रवांसी आवाज में बोली- “उसको सब पता है.”
मैंने कहा- “ये बात जानते हए भी वो ऐसा कर रहा है।”
अनु ने कहा- “वो तो मुझे कब से इस्तेमाल करने की सोच रहा है। मेरी किश्मत ही अच्छी है जो मैं अभी तक…”
मैंने कहा- “मतलब इससे पहले भी उसने कोई हरकत करी थी?”
अनु ने कहा- “शादी के 4-5 महीने बाद सुमित ने मेरे को कहा की उसकी जाब टेम्पोरेरी है। उसकी जाब पर्मानेंट हो जाएगी अगर मैं उसकी हेल्प करुँगी तो..”
मैंने कहा- इसमें क्या सोचना है? आप जो कहोगे करने को मैं कर दूँगी…”
तब सुमित ने कहा- “तुम्हें मेरे बास को खुश करना पड़ेगा। बस एक रात की बात है। तुम उसको खुश कर दो मेरा प्रमोशन भी हो जाएगा…”
तब मैंने कहा- “तुम जैसा घटिया इंसान मैंने कभी नहीं देखा। वो सच में बड़ा कमीना है…”
मैंने कहा- ये बात तुमने अपनी मम्मी को बताई थी?
अनु की सनी आँखों में फिर से आँस आ गये। अनु बाली- “मैंने कहा था, पर मम्मी उनसे भी ज्यादा महान हैं…”
मैंने कहा- क्या मतलब?
अनु ने कहा- “मम्मी बोली की अगर उसकी मज़ीं है तो तुझे क्या फर्क पड़ रहा है। मान जा। एक रात में तेरा क्या बिगड़ जाएगा?”
मैंने अनु को अपने गले से लगाकर कहा- “फिर तुमने क्या किया?”
अनु ने कहा- मैंने उसको साफ-साफ बोल दिया की अगर तुमने मेरे साथ जबरदस्ती की तो मैं जहर खा लेंगी। इस बात से वो डर गया। उसने मुझे कुछ नहीं कहा। पर उसके मन में आज तक मेरे लिए प्यार नहीं देखा मैंनें।
मैंने कहा- तुमने बिल्कुल ठीक किया। ऐसे आदमी की कोई बात मत मानना।
अनु ने कहा- मैं आपको कैसे बताऊँ वो कितना जालिम है। मेरे साथ जानवरों जैसे बिहेंब करता है।
मैंने अनु को देखा तो अनु की आँखें फिर से भर आई। फिर बोली- “वो मुझे जानवरों की तरह मारता है। मेरे बाल पकड़कर मुझे घसीटता है, गालियां देता है, मेरे जिश्म को सूजा देता है मार-मार कर…” बोलते-बोलते अनु फिर से रोने लगी।
–
मैंने उसको चुप कराया और कहा- “अनु प्लीज… बस करो। मैं और एक शब्द भी नहीं सुन सकता। तुम्हारी बात सुनकर मेरा खून खोलने लगा है…
अनु बोली- “अभी एक बात तो और है जो मैंने आज तक किसी को नहीं बातयी। पर आपको बता रही है…”
मैंने कहा- क्या?
अनु बोली- जब में प्रेग्नेंट थी तब उसने मुझसे कहा था की शिल्पा को बुलवा लो कुछ दिन के लिए।
मैंने कहा- वो यहां पर क्या करेंगी?
तब उसने कहा था- “जब तक तू मेरे साथ सोने के लायक नहीं है वो सोएगी…”
अनु बोली- “छी… कितना जलील है वो इंसान?”
मैंने कहा- फिर?
अनु ने कहा- उसके मन में शिल्पा के लिए शुरू से ही गंदगी भरी है। मैं जानती हूँ ।
मैंने कहा- तुम्हारे घर शिल्पा कभी गई है रहने?
अनु बोली- “अभी जब गई थी तब भी उसने कोशिश तो करी पर, मैंने उसका कुछ करने नहीं दिया। इस बात के लिए उसने मुझे इतना मारा था की में पूरा दिन बेंड से उठ नहीं सकी। वो अब उसी बात का बदला ले रहा है,
मुझे वहां जाब करने के लिए मजबूर करके…”
मैने अनु की बंद पलकों पर किस करा और कहा- “अब तुम बिल्कुल फिकर मत करो। मैं तुम्हारे साथ हूँ। मैं तुमको अब दुखी नहीं होने दूंगा..”
अनु बोली- “आपके साथ वहां मैं अपने सब गम भूल गई थी। मुझे वहां लग ही नहीं रहा था की मेरे को कोई गम हैं। पर यहां आते ही वही सब याद आ गया.”
मैंने कहा- “मैं हूँ ना… चिता मत करो.” फिर मैंने अनु से कहा- “अब कुछ मन हल्का हुआ?”
अनु ने कहा- “ही… आपसे बात करके अब अच्छा लग रहा है..”
मैंने कहा- “चला अब तुमको छोड़ आता हूँ। मुझे भी आफिस जाना है..”
अनु ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे बैंड पर अपने साथ बैठा लिया। फिर उसने मेरे चेहरा को अपने हाथों से पकड़कर मेरे होठ चूस लिए और बोली- “बाबू मेरा मन कर रहा है की आज आपको प्यार करने का ..”
मैंने कहा- सच में?
अनु ने मेरी आँखों में अपनी आँखें डाली और कहा- “सच में…”
मुझे उसकी बात सच लगी। क्योंकी उसकी आँखों में अपने लिए मुझे प्यार नजर आने लगा था। पर एक औरत के दिल को कोई नहीं समझ सकता। मैंने अनु को अपनी बाहों में ले लिया और उसको चूमते हुए कहा- “अनु आज मेरा मूड बन नहीं रहा तुम बना सकती हो तो?”
अनु ने मुश्कुराकर कहा- “बस इतनी सी बात?” और अनु ने अपने सब कपड़े उतार दिए और मेरे भी उत्तर दिए । अब हम दोनों बेड पर नंगे थे। अनु ने मेरे सीने पर से चमना शुरू किया और मेरे लण्ड के पास तक चूमती रही। फिर अनु ने मेरे लौड़े को अपने मुह में ले लिया और अपनें होंठों में कसकर दबा दिया।
अनु के मुंह में जाते ही मेरे लौड़े को मजा आने लगा। अनु में मेरे लौड़े को अपनी जीभ से सहलाया फिर उसने मेरे लौड़े को अपने मुंह से बाहर निकालकर अपने हाथ में ले लिया और फिर उसने मेरे टटे को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और हाथ से लण्ड को हिलाने लगी। फिर अनु ने मेरे लौड़े को अपनी जीभ से ऐसे चाटा जैसे कोई आइसक्रीम को चाट रहा हो।
मेरे मुँह से- “उफफ्फ़.” की आवाज निकली। अनु ने फिर से मेरी गोलियों को चूसना शुरु कर दिया। मैं मस्ती में भर कर- “आअहह… अनु मेरी जान…” करने लगा।
अनु ने फिर मेरे लण्ड पर अपना मैं रख दिया और अपने होंठों को मेरे लण्ड की जड़ पर लेजाकर रख दिया।
उसकी इस हरकत से मरे पर जिएम में बिजली दौड़ गई। मैं मस्ती की आहे भरने लगा। मैंने कहा- “अनु मेरी जान…”
अनु ने मेरे लण्ड को अपने मुँह से बाहर निकाला और लंबी साँस लेकर कहा. “बाबू मजा आया?”
मैंने कहा- जान ही आअहह… आज क्या कर रही हो… आज तो पागल बना दोगी आअहह..”
अनु ने एक बार फिर से वैसा ही किया। वो मेरे लौड़े को अपने गले तक ले गई। फिर मैंह में लेकर चूसने लगी।
मैं बोला- “अनु मेरी जान … लगता है आज चूत का नम्बर नहीं आने दागी मुँह से ही झाड़ कर मानोगी.”
मुश्कुराकर अनु ने कहा- “झड़ने दो..” अनु ने फिर मेरे लण्ड को अपने मुँह में ले लिया और उसको लोलीपाप की तरह चूसने और चाटने लगी। मेरे लौड़े पर इतना प्यार बरसा रही थी अनु की मेरे लण्ड के भी आँस निकल पड़े।
मैंने कहा- अनु मेरी जान मेरे लौड़े को मैंह से कस-कस कर चसा मैं झड़ने वाला हैं।
अनु ने मेरे लौड़े को मुँह में अच्छे से जकड़ लिया और लण्ड को झड़ा दिया। मेरे माल से अनु का मुँह भर गया। पर अनु ने उसको बाहर नहीं आने दिया सब पी गई।
मैने अनु से कहा- “आहह… मजा आ गया…”
अनु बोली- “आपको मजा आ गया, इसका मतलब मैंने सही किया है.”
मैंने उसकी चूची को पकड़कर कहा “ही मेरी जान…” और पूछा- “उस दिन का टेस्ट अच्छा था या आज का?”
अनु ने नजरें झुका कर कहा- “आज का..”
THE END