एक लंबी कहानी सेक्स परिवार एमए सेक्स संबंध अध्याय 4

 



एक लंबी कहानी सेक्स परिवार एमए सेक्स संबंध अध्याय 4





ऋत ने शरारत भरी आवाज से कहा- “मैं जानती थी आप ऐसे ही कहोगे..” फिर ऋतु ने अपने सब कपड़े उतार दिए और मुझसे कहा- “आप क्या कपड़ों में नहाते हो?”


मैंने भी हँसते हुए अपने सच कपड़े उतार दिए। हम दोनों नंगे थे।


ऋतु ने मुझसे कहा- “मेरे प्यारे पिया जी, अब मुझे अपनी गोदी में उठाकर बाथरुम तक के चलो..”


मैं ऋतु के मुँह से ये सुनकर दंग भी हो गया और खुश भी मैंने कहा- “फिर से कहो..”


ऋतु ने अबकी बार मेरे गले में अपनी बाहों को डालकर मेरी आँखों में देखते हए कहा- “पियाजी मुझे बाथरूम में

ले चलिए ना..


मैंने उसको चमते हए अपनी गोद में उठा लिया हम बाथरूम में आ गये। वहां मैंने ऋत को शावर के नीचे खड़ा कर दिया। शाबर से ठंडा-ठंडा पानी उसके जिम को भिगोने लगा। ऋतु ने मुझे अपने जिम से चिपका लिया। हम दोनों शाबर के नीचे खड़े हए होंठों पे होंठ रखकर शावर ले रहे थे। मेरे दोनों हाथ ऋतु के चूतड़ों पर थे और उसके मेरी कमर पर। मैं हल्के-हल्के नीचे झुकता गया और अब मेरा मुँह ऋतु की चूत के पास था। मैंने अत की चत पर नीचे से ऊपर तक अपनी जीभ फिरा दी।


ऋतु में अपनी जांघों को सिकोड़ लिया। मैंने ऋतु की दोनों जांघों को अपने हाथ से चौड़ा किया और फिर से उसकी चत पर मैंह लगा दिया। ऋत ने मादक सिसकियां लेनी शरू कर दी। मैं इतने में कहां मान जाता। मैंने अत को घमा दिया। अब उसकी गाण्ड मेरे सामने थी। मैंने ऋत की गाण्ड पर एक काट लिया ऋत ने उद्दई की आवाज निकाली। मैंने अब उसके दूसरे चूतड़ पर हल्के से काटा।


ऋतु ने फिर से- “उईईई आह्ह…” किया।


मैंने ऋतु को कहा- “जान तुम्हारी गाण्ड बड़ी मस्त है.”


ऋतु भी आज पूरे मूड में थी। वो मुझसे बोली- “आपका लण्ड भी कितना मस्त है..”


मैंने कहा- “मेरे लण्ड का क्या करोगी?”


उसने कहा- “देखते जाइए…’ कहकर उसने मेरे लण्ड पर साबुन लगा दिया और फिर मेरे लण्ड को रगड़-रगड़कर धोने लगी।


अब मेरा लण्ड बिल्कुल खड़ा हो गया था।


ऋतु ने अपना मुँह मेरे लण्ड पा रखा और बोली- “आप मेरे मुँह में अपना लण्ड जितना डाल सकते हैं डाल दीजिए…


मैंने कहा- “पागल हो क्या?”


ऋत बोली- “आप डालिए तो…”


मैंने उसके मुँह में अपना लण्ड आधा डाल दिया और उसके मुँह में धक्के मारने लगा। धीरे-धीरे मेरा लण्ड ऋतु के गले तक जाने लगा।


ऋतु ने मेरे लण्ड को मह से निकाला और कहा- “और डालिए..”


मैने अबकी बार ऋत का सिर पकड़कर अपना लण्ड आधे से ज्यादा उसके मुँह में डाल दिया। मुझे एहसास हो गया की मेरा लण्ड उसके गले में चला गया है, तो मैंने लण्ड को बाहर निकाल लिया।

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ऋतु ने मेरी तरफ प्यार से देखा और कहा “मैं अब आपका लण्ड अपने मुँह में कितना ले लेती हैं देखा.”


मैंने कहा- “हाँ, पहले तो सिर्फ जरा सा ही लेती थी..” फिर ऋतु के मुँह को चूत बनाकर मैं उसके मुँह को चोदने लगा। थोड़ी देर में मेरा लौड़ा झड़ गया।


ऋतु में मेरा सारा माल पी लिया।


मैंने ऋतु से कहा- “मुझे सूसू आया है…”


ऋतु ने कहा- “रुकिये, मैं आपको सूसू करवाती हूँ…”


में हैरानी से ऋतु को देखने लगा। ऋतु ने मेरे लण्ड को अपने मुंह में ले लिया। अब मेरा लण्ड उसके मुंह में ऐसे था जैसे की मुँह में कोई चीज पकड़कर कोई चलता है।


अतु ने कहा- “अब आप सूसू करिए..”


मैंने आज तक ऐसा कभी ना देखा ना सुना था। मैंने जोर लगाया तो मेरे सस निकालने लगा। ऋतु को ये आइडिया कहां से आया, मैं समझ नहीं पाया। पर जो भी था गजब का था।


सूस करने के बाद मैंने ऋतु से कहा- “पानी में रहने से भूख लगने लगी है..” फिर मैंने ऋतु से कहा- “तुमने खाना खा लिया बया?”


अत ने ना में सर हिला दिया। हम बाथरूम से बाहर आ गये।


मैंने कहा- “मैं बाहर से कुछ ले आता हूँ..”


ऋतु ने कहा- “नहीं, मैं आपको अब कहीं नहीं जाने दूँगी। आप मुझे बताओं आपको क्या खाना है, बना देती हूँ..”


मैंने कहा- “पहले तौलिया तो दो..”


ऋतु बोली- “नहीं जी… आपको सुबह तक ऐसे ही रहना होगा..”


मने हँसते हुए कहा- “और तुम?


बा बोली- “मैं भी आपके साथ ऐसे ही रहंगी…”


उसका आइडिया मुझे पसंद आया फिर हम दोनों किचेन में नंगे हो गये वहां अत ने आलू के पराठे बनाए हम दोनों ने किचन में ही खाया। फिर हम रूम में आ गये।


मैंने ऋतु से कहा- “जान तुम मुझे कितना प्यार करती हो…”


ऋतु ने कहा- “मैं आपको अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करती हैं.”


मैंने कहा- “तो फिर आज मुझे सच-सच बताओं की मैंने तुमको चोदने के लिए जो भी किया वो तुमको बुरा तो जरूर लगा होगा?”


ऋतु ने मुझसे चिपकते हुए कहा- “जरा सा भी नहीं…”


मैंने कहा- “क्यों, मैंने तो तुमको मजबूर किया था चोदने के लिए?”


ऋतु ने फिर जो बात मुझे बताई सुनकर मुझे यकीन ही नहीं हुआ। ऋतु में जैसे ही बोलना शुरू किया उसकी

आँखों में आँस आ गये। मैं उसकी बात ऐसे सुन रहा था जैसे की में कोई सस्पेंस वाली कहानी सुन रहा हैं


ऋतु ने कहा- “अगर आप ये सब नहीं करते तो हो सकता है की मैं आज जिदा ही नहीं होती या तो मैं घर छोड़कर कहीं चली जाती या में अपनी जान दे देती…’


मैंने कहा- “तुम मुझे पूरी बात सही-सही बताओ… फिर मैंने ऋतु को दिलासा देते हुए पानी पिलाया।


ऋतु हिचकियां लेते-लेत बोली- “आपको मैं सब शुरू में बताती हैं। वो दिन मेरी लाइफ का सबसे मनहस दिन था, जिस दिन अनु दीदी की शादी की डेट फाइनल हुई थी..”


पापा ने माँ से कहा “हम लोग अभी इतने पैसे का इंतजाम नहीं कर सकते। शादी की डेट इतनी जल्दी फिक्स नहीं करनी चाहिए थी…”


पर माँ ने पापा की एक ना सुनी। वो बोली- “आप पैसे की चिंता मत करो…”


पापा की वैसे भी माँ के आगे नहीं चलती थी। माँ की कोई सहेली है आशा जिसने माँ को कहा था की तुम्हें जितने भी पैसे की जरूरत हो मैं इंटेरस्ट पर दिलवा दूंगी। उसने ही माँ को तिवारी से मिलवाया था। तिवारी ने जिस दिन पैसे देने थे उस दिन उसने मम्मी को अपने आफिस में बुलाया था। मैं उस दिन पहली बार मम्मी के साथ ही तिवारी के आफिस में गई थी। मैं, मम्मी और आशा हम तिवारी के पास जब गये तो वो बोला।


तिवारी शोभा जी में आपको पैसा तो दे दूँगा पर आप मुझे गारंटी में क्या दे रही हो?


मम्मी- आपको हम जैसा शरीफ आदमी काई मिलेगा ही नहीं। हम आपका पैमा टाइम पर दे देंगे।


तिवारी- फिर भी कोई तो गारंटी होनी चाहिए। मैंमें बिना गाउंटी किसी को पैसा नहीं देता।


आशा तिवरी जी आप चिंता नहीं करिए। शोभा मेरी बहन जैसी है, आपको कोई शिकायत नहीं मिलीगे।


मम्मी- फिर भी आप जो कहाँ हम आपको गारंटी दे सकते हैं।


तिवारी शोभा जी, आप मुझे इस बात की गारंटी दो की अगर आप मेरा पैसा नहीं लोटा पाई तो मैं आपकी बेटी ऋतु को अपने घर में नौकरानी बनाकर रखेगा, और उसको मैं जो भी कहगा वो उसको करना होगा।


शोभा. “नहीं नहीं तिवारी जी, आपको इसकी कोई जरूरत ही नहीं पड़ेगी…”


तिवारी ने मुझे गंदी नजर से देखते हए कहा- “ना ही पड़े तो इसके लिए अच्छा है..”


में उसकी नजरों में भरी हई दरिंदगी देखकर डर गई थी।


तिवारी- “मैं आपको बिना गारंटी के पैसा नहीं दे सकता। हाँ या ना आप सोच लो…”


आशा और मम्मी ने इशारों-इशारों में कुछ बात किया फिर आशा बोली- “चल शोभा, कोई बात नहीं तिवारी जी की बात मान लें। अगर इनका पैसा नहीं दिया तभी तो ये ऋतु का कुछ कर सकते हैं। ऐसी नौबत आएगी ही नहीं…”


मम्मी- “पर मैं ऋतु को इनके हाथ कैंस दे दूंगी? जवान लड़की है कोई जानबर तो नहीं…


तिवारी बोला”उसकी चिता आप मत करो। मैं उसको बड़े प्यार से रखूगा। आपके घर में ज्यादा ऐश से रहेगी। वहां मेरे घर में और भी लड़कियां काम करती है..”


फिर मम्मी ने तिवारी से कहा- “चलिए मुझे आपकी बात मंजूर है…”


तिवारी ने हँसते हए कहा- “ऐमें कहने से क्या मैं तुम्हारी बात का यकीन कर लेंगा? मुझे लड़की के मुंह से हाँ कहलवाओं और मैं इसमें कुछ पेपर भी साइन करवा गा.”


आशावो हम सब करवा देते हैं।


शाभा- हाँ हाँ हम आपकी सब शर्ते पूरी कर देते हैं।


फिर तिवारी ने मम्मी को एक पैकेट दिया और मुझे कहा- “सनों लड़की इधर आकर बैठो…”


मैं तिवारी के सामने वाली चेयर पर बैठ गई। मैं सब समझ चुकी थी की अब वो दिन दूर नहीं जब मुझे तिवारी की हवस का शिकार बनना पड़ेगा और पता नहीं तिवारी मेरे साथ और क्या-क्या करेंगा? पर मैं मजबूर थी कुछ बोल नहीं पा रही थी।


फिर मम्मी ने मुझे प्यार से कहा- “ऋत बेटी, अब त ही अपनी बहन की शादी करवा सकती है और तिवारी जी शरीफ आदमी हैं, गारंटी हो तो माँग रहे हैं। त पेपर पर साइन कर दे…”


मैं कुछ बोल नहीं पाई।


मैं तिवारी के सामने वाली चेयर पर बैठ गई। मैं सब समझ चुकी थी की अब वो दिन दूर नहीं जब मुझे तिवारी की हवस का शिकार बनना पड़ेगा और पता नहीं तिवारी मेरे साथ और क्या-क्या करेंगा? पर मैं मजबूर थी कुछ बोल नहीं पा रही थी।


फिर मम्मी ने मुझे प्यार से कहा- “ऋत बेटी, अब त ही अपनी बहन की शादी करवा सकती है और तिवारी जी शरीफ आदमी हैं, गारंटी हो तो माँग रहे हैं। त पेपर पर साइन कर दे…”


मैं कुछ बोल नहीं पाई।


दराज से कई सारे सादे पेपर निकालें और मुझे बोला- “इस पर तिवारी ने मुझे अपनी बहशी नजरों से देखते ह

अपने साइन कर दो…”


मैंने चुपचाप साइन कर दिए।


फिर तिवारी ने एक वीडियो कैमरा निकालकर आन किया और मुझसे कहा- “कैमरे में देखो और मुस्कराकर बोलो

की मैं जो भी कर रही हूँ अपनी मर्जी से कर रही हूँ। मुझे किसी ने मजबूर नहीं किया है.”


मुझे ऐसा ही करना पड़ा। उसके बाद तिवारी ने मम्मी से कहा- “अब तुम लोग जा सकती हो.”


में पूरे रास्ते में सोचती रही की क्या मैंने सही किया है? काश मैं मना कर पाती। मैं घर आकर बेजान लाश जैसी बेड पर पड़ गईं।


अनु दीदी और शिल्पा ने मेरे से पूछा “क्या हुआ?”


पर मैं कुछ बोली नहीं।


मम्मी ने कहा- “इसकी तबीयत ठीक नहीं है, इसको आराम करने दो…”


मैंने बाद में मम्मी से कहा- “आपने एक बेटी का घर बसाने के लिए दूसरी बेटी को दौंच पर क्यों लगा दिया? आपने ऐसा क्यों किया? मैं आपकी सगी बेटी नहीं हैं क्या?”


मम्मी ने मुझे समझाते हुए कहा- “ऋतु तू ऐसी बात नहीं कर। मैं जो भी कर रही हैं सोच समझ कर कर रही हैं। मैं तेरी माँ हूँ कोई दुश्मन नहीं, और तू इस बात को किसी से भी नहीं कहेगी। तुझं तेरा पापा की कसम होगी..”


मैंने मम्मी को वादा किया- “मैं किसी से कुछ कहूँगी…” और उस दिन से मैं घट-घट कर जी रही थी। आपसे मिलने के बाद मुझे लगा की काश आप मेरी लाइफ में आ जाए और भगवान ने मेरी सुन ली की आप मेरी लाइफ में आ गये। में जब आपके साथ पहली बार लंच पर गईं थी। मैंने उसी दिन सोच लिया था की मैं कुछ भी करके आपको अपना बना लेंगी…”


मैंने ऋतु को देखा उसकी आँखें अभी तक नम थीं। मैंने उसको कहा- “तुम किसी बात की फिकर मत करो मेरे होतं कोई तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। मैं तिवारी से तुम्हारी वो क्लिप और पेपर तमको वापिस ला देगा…”


ऋतु मेरे से चिपक कर हिचकियां लेने लगी।


मैंने उसकी कमर पर हाथ फेर कर उसको दिलासा दिया। मुझे अब शोभा से नफरत होने लगी थी। मैंने सोच लिया था की मैं शोभा को सबक सिखाकर रहगा। ऋतु के लिए मेरे मन में प्यार का बीज और बढ़ गया था मैंने ऋतु को अपनी बाहों में लेते हुए कहा- “अब सब भूल जाओं और मुझे प्यार करो.”


ऋतु ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए।


फिर एक दिन ऋतु ने मुझसे कहा- “सर, मैं दो दिन के लिए आफिस नहीं आऊँगी..”


मैंने पूछा- “क्या हुआ, काई प्राब्लम है क्या?”


उसने कहा- “अनु दीदी के बेटे का नामकरण है। मुझे वहां जाना है.”


मैंने पूछा- “घर से और कौन-कौन जा रहा है?”


उसने कहा- “सब लोग जा रहे हैं.”


मैंने कहा- “पूरी परिवार जा रही है तो तुम्हारा भी जाना बनता है। कब जाना है?”


उसने कहा- “कल सुबह…”

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मैंने कहा- “मैं अपनी कार भेज देता हूँ। तुम सब आराम से चले जाना..”


ऋतु ने कहा- “सर आप क्या परेशान हो रहे हैं। हम लोग बस में चले जाएंगी.”


मैंने कहा- पागल हो क्या? बस में कितना मुश्किल होगा परिवार के साथ। मेरे पास दो-दो गाड़ियां होते हए तुम बस में जाओगी। कार से सीधा अपनी बहन के घर जाना और सीधा उनके घर में वापिस आ जाना…”


ऋतु मना नहीं कर पाई।


फिर मैंने कहा- “जिस टाइम जाना हो मुझे फोन कर देना। मैं कार भेज दूंगा…”


फिर अगले दिन सुबह 7:00 बजे ऋतु का फोन आया “सर हम सब तैयार हैं, आप गाड़ी भेज दीजिए.”


मैंने ड्राइवर को बुलाया और समझाकर कहा “तुम ऋतु मेमसाहब के घर चले जाओ, उनको देल्ही जाना है अपनी फेमिली के साथ। जहां वो कहें उनको पहुँचा देना..” और मैंने ड्राइवर को ₹5000 दिए और कहा- “पेट्रोल तुम खुद इलवा लेना। उनका कोई पैसा खर्च नहीं होने देना…”


डाइबर कार लेकर चला गया। में भी आफिस के काम में बिजी रहा। इसलिए ऋतु को फोन ही नहीं किया। वो भी वहां जाकर बिजी हो गई। उसका भी फोन नहीं आया।


जब मेरा ड्राइवर दो दिन बाद घर वापिस आया तब मैंने हाइवर से कहा- “कोई परेशानी तो नहीं हुई?”


उसने कहा- “नहीं साहब, सब लोग आराम से गये थे…”


मैंने उसको कहा- “तुम अब अपने घर जा सकते हो…”



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मैं सिटी में कार खुद ही ड्राइव करना पसंद करता हैं। ड्राइवर तो मैंने सिर्फ आउट आफ सिटी जाने के लिए रखा हुआ है। ऋतु से मिले दो दिन बीत गये थे। मैं ऋतु से मिलने का बेताब हो गया था। मैंने ऋतु को फोन किया


पर उसका फोन स्विच-आफ था। मैंने कई बार ट्राई किया पर हर बार स्विच-आफ ही मिला। मैंने अब शोभा को फोन मिलाया तो उसका भी सेल आफ आने लगा। मुझे बड़ा गुस्सा भी आया और चिता भी होने लगी की सब ठीक तो है? मैने दो पंग विस्की के खींचे, और ऋतु के घर चला गया। मैंने बेल बजाई तो 5 मिनट बाद शोभा ने दरवाजा खोला।


मैंने उसको कहा- “क्या बात है इतनी देर क्यों लगा दी?”


शोभा बोली- “मैं बाथरूम में थी। बेन सुनकर जल्दी से कपड़े पहनकर आई हैं.”


मैंने उसको देखा तो वो सच बोल रही थी। उसके बाल गीले थे और उसने जो मैक्सी पहनी हुई थी वो भी उसके गीले जिश्म से चिपकी हुई थी। मैं उसको गुस्से में देखता हआ घर के अंदर चला गया। मैंने अंदर जाकर देखा तो कोई भी नहीं दिखा।


मैंने पूछा- “ऋतु कहां है? उसका सेल भी स्विच आफ जा रहा है.”


शोभा ने बताया- “उसका सेल जाते ही खराब हो गया था। इसलिए वो आपसे बात भी नहीं कर पाई…”


मैंने कहा- ऋतु कहां गई है?


शोभा बोली- “वो तो अभी एक-दो दिन बाद आएगी…”


मैंने कहा- “क्या मतलब… वो तुम्हारे साथ नहीं आई?”


उसने कहा- “उसके दीदी जीजा ने उसको आने ही नहीं दिया। शिल्पा और उसके पापा भी वहीं रूक गये हैं। वो सब परसों तक साथ में आएंगे…”


ये बात सुनते ही मेरा मूड और खराब हो गया। मेरा लण्ड दो दिन से ऋतु की चूत का प्यासा था। मेरे दिमाग में उस टाइम सिर्फ ऋतु की मस्त जवानी नजर आ रही थी। मेरे अंदर जैसे कोई खोलता हआ लावा भरा हो। मैंने शोभा को गौर से देखा तो उसको एहसास हुआ की वो मेरे सामने जिन कपड़ों में खड़ी है, उसमें उसके जिम के हर अंग की नुमाइश हो रही है।


मेरी वासना से भरी आँखों को देखकर शोभा बोली- “आप बैठिए, मैं जरा चेंज करके आती हैं.”


मेरे अंदर की आग भड़क चुकी थी। जिसकी वजह से मुझे शोभा भी अपने लण्ड की खराक नजर आ रही थी। मैंने शाभा के पास जाकर उसकी चूचियों पर हाथ रख दिया। शोभा को शायद इस बात की उम्मीद नहीं थी।


शोभा ठिठक कर पीछे हट गई और बोली- “आप ये क्या कर रहे हो?”


मैंने उसकी चूचयों को कसकर मसलते हुए कहा- “आज तू मेरी प्यास बुझा दे… और मैंने शाभा को अपनी बाहाँ में भर लिया।


शोभा ने खुद को छुड़ाते हुए कहा- “नहीं नहीं ये गलत है… मैं आपको ऐसा नहीं करने दूंगी..”


मैंने उसको अपनी बाहों में फिर से जकड़ते हुए कहा- “शोभा में इस बढ़त तुम्हारी कोई बात नहीं सुनँगा। मेरे लण्ड को इस वक़्त चूत की भूख है। तुम मेरी भावनाओं को समझा और मेरी भूख को शांत कर दो…”


शोभा बोली- “प्लीज… आप मुझे इस काम के लिए मजबूर मत करिए। मैं कैसे भी करके कल तक ऋतु को बुलवा लँगी…”


मैंने कहा- “मैं कल तक रुक नहीं सकता…”


शोभा सोच में पड़ गई फिर बोली- “मैं शायद आपकी बात मान भी जाती, पर मैं मजबूर हैं…”


मैंने उसको घूरते हुए कहा- “क्या मजबूरी है?”


शोभा बोली- “मेरा आज तीसरा दिन है। मेरा मासिक चल रहा है। अगर आप मुझे चोदना ही चाहते हैं तो आप कल मेरे साथ जो मर्जी कर लेना..”


मुझे उसकी बात का यकीन नहीं हो रहा था। मैंने उसकी चूत पर हाथ लगाकर देखा तो मेरे हाथ को एहसास हआ की उसकी चत पैड से टकी हैं। मैं समझ गया की वो सच बोल रही है। मैंने उसको कहा- “चलो मैं तुमको कल चोदूँगा। पर अभी मेरी प्यास कैसे बुझेगी?”


शोभा बोली- “मैं आपका लण्ड चूसकर आपको शांत कर देती हैं..”

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मैंने मन ही मन सोचा- “चलो खाना नहीं मिला, नाश्ता ही सही…”


में पलंग पर लेट गया और अपनी दोनों टांगों के बीच में शाभा को बैठने को कहा। शोभा मेरी दोनों टांगों के बीच में बैठ गई। उसने मेरे लौड़े को अपने हाथों से सहलाना शुरू कर दिया।


मैंने शोभा को कहा- “तुम अपनी मॅक्सी उत्तार दो, मुझे तुम्हारी बड़ी-बड़ी चूचियां देखनी हैं.”

शोभा ने अपनी मैक्सी उतार दी। अब वो मेरे सामने सिर्फ पैंटी में थी। उसने मेरे लण्ड को अपने मैंड में भर लिया और चूसना शुरू कार दिया। शोभा खेली खाई औरत थी। उसको सब पता था की कैसे एक मर्द को खुश किया जाता है। उसने बड़े ही मस्त तरीके से मेरे लौड़े की चुसाई करनी शुरू कर दी। फिर थोड़ी देर बाद उसने मेरे लण्ड को अपनी बड़ी-बड़ी चूचियों में रखकर दबा लिया, और अपनी चूचियों से मेरे लण्ड की मालिश करने लगी।


मैंने ऋतु के साथ ऐसा कभी नहीं किया था। मुझे मजा आने लगा। कुछ देर बाद मुझे लगने लगा की मैं अब झड़ने वाला हूँ। मैंने शोभा से कहा- “अब रुका नहीं जा रहा है…”


शोभा ने ये सुनकर मेरा लौड़ा अपने मह में फिर से भर लिया, और अपना होंठों में कसकर दबा लिया। मैंने एक जोर का झटका उसके मुँह लगाते हुए उसके मुँह को अपने माल से भर दिया। शोभा ने मेरे माल को पूँट भरते हए सारा माल अपने गले से नीचे उतार लिया।


मैं अब बिल्कुल शांत हो गया था। मैंने शोभा से कहा- “तुमने मुझे खुश कर दिया..”


शोभा ने ये सुनकर बड़ी जालिम अदा से मैंह बनाकर कहा- “आपका काम तो निकल गया। हम तो प्यासे ही रह गये…”


मैंने उसके निप्पल को कस के मसलते हुए कहा- “मैं क्या कर सकता हूँ? तेरी रेड लाइन हो रही है..”


शोभा बोली- “आज ही तो है, कल तक में माहवारी से निपट जाऊँगी…”


मैंने कहा- इसका मतलब तम कल मेरे से चदबाने की सोच रही हो?


शोभा के चेहरा पर चमक आ आ गई उसने कहा- “हाँ..”


मैंने उसको कहा- “फिर ठीक है। कल सनडे है तुम मेरे घर आ जाना। वहीं तुम्हारी प्यास बुझा दूँगा..”


शोभा बोली- “हाँ यही ठीक रहेगा। मैं कल आ जाऊँगी…”


में वहां से आ गया। मुझे रात भर शोभा की चूत के ख्वाब आते रहें। मैं उसकी चूत को देख नहीं पाया था। इसलिए भी मेरे मन में उसकी चत देखने की उत्सुकता थी। अगले दिन सुबह ठीक 11:00 बजे शोभा का फोन आ गया।


मैंने उसको कहा- “तुम 12:00 बजे तक आ जाना…”


फिर मैंने अपने रूम में सीसीटीवी लगाने की जगह देखी। मैं शोभा की चुदाई लीला की वीडियो बनाना चाहता था। मैंने बेड के ठीक ऊपर कैमरा फिट कर दिया और शोभा का इंतजार करने लगा। शोभा ठीक 12:00 बजे आ गई। जब मैंने उसको देखा तो देखता ही रह गया। बया गजब की सुंदर लग रही थी वो।


शोभा ने ब्लैक कलर की साड़ी पहनी थी लो-कट बैंकलेष ब्लाउज उसकी चूचियों को आधा भी टक नहीं पा रहा था। उसने बड़ा मस्त सा हेयर स्टाइल बनाया हुआ था। जैसे ही वो मेरे पास आई बड़ी मादक मी खुशबू मेरी । सांसों में समा गई। मैं समझ गया की आज में साली परे मह में है। वैसे भी पीरियड के बाद औरत की सेक्स की भूख बढ़ जाती है।


मैंने उसको कहा- “बैठो…. फिर मैंने उसको कहा- “थोड़ी सी बिगर चलेंगी?’


शोभा बोली- “हाँ चलेंगी.”


मैं मन में सोचने लगा की इसको समझने में मैंने बड़ी देर करी है। मैं तो बड़ी कमीनी है। मैंने ठंडी बियर दो ग्लास में डाली और एक ग्लास शोभा को पकड़ा दिया। उसने उल्लास को मैंह से लगाया और एक ही सांस में आधा पी गई। मैं उसको देखता ही रहा।


फिर मैंने उससे कहा- “कुछ नमकीन तो ले लो..” और मैंने काज का पैकेट खोलकर प्लेट में डाल दिया।


दो-तीन काजू खाने के बाद शोभा ने बाकी की बियर भी गले में उड़ेल ली। मैंने एक बियर और खोलकर उसका ग्लास भर दिया। फिर मैंने शोभा से उसके पति के बारे में बात छेड़ दी। शोभा को अब तक शरुर आने लगा था। वो बिंदास होकर बोल रही थी।


मैंने उसको कहा- “तुम अपने पति के साथ सेक्स कितने दिन में करती हो?”


शोभा ने ये सुनकर बुरा सा मैंह बनाकर कहा- “सेक्स तो उसने तब भी नहीं किया, जब वो जवान था। अब तो उसका खड़ा ही नहीं होता…”


मैं सुनकर थोड़ा और मजा लेते हुए बोला- “फिर तुम अपनी प्यास कैसे बुझाती हो?”


उसने कहा- “मैं अपनी प्यास को दबा-दबाकर अपने अरमानों का गला घोंट रही हैं। कल तमने जो करा उससे मेरे अंदर की औरत फिर से जाग गई है..


मैंने उसको कहा- “तुमने कितने टाइम से सेक्स नहीं किया?”

शोभा बोली- “अब तो याद ही नहीं..”


मैंने कहा- “फिर भी लास्ट टाइम की कोई याद हो?”


उसने कहा- “लगभग दो-तीन साल पहले…”


मने हैरान हाते हुए कहा- “फिर तुम कैसी रह लेती हा?”


उसने कहा- “मैं जब ज्यादा ही गरम हो जाती हैं तो अपनी उंगली से अपनी चूत की प्यास बुझा लेती हैं। पावो हमेशा अधूरी ही रहती है…”


मैंने कहा- “तुमने कोई सेक्स दवाय इस्तेमाल नहीं किया?”


उसने कहा- घर में दो-दो जवान बेटियां हैं, और इतना छोटा सा घर है। किसी के हाथ में कुछ आ गया तो?


ना बाबा ना… मैं इतना बड़ा रिस्क नहीं ले सकती.’


मैंने कहा- “तुमने कोई सेक्स दवाय इस्तेमाल नहीं किया?”


उसने कहा- घर में दो-दो जवान बेटियां हैं, और इतना छोटा सा घर है। किसी के हाथ में कुछ आ गया तो?


ना बाबा ना… मैं इतना बड़ा रिस्क नहीं ले सकती.’


मैं हँसने लगा। मैंने उसको कहा- “मैं जब ऋतु को तुम्हारे घर में चोद रहा था, तो तुम साथ वाले रूम में सब सुन रही थी?”


शोभा ने कहा- हौं, मझे सब पता चल रहा था। ऋतु की चीखों को सुनकर मेरे मन में कुछ-कुछ होने लगा था। में इतनी गरम हो गई थी की मैं भी अपनी चूत में उंगली डालकर अपना पानी निकाल रही थी।


मैंने कहा- तुम कल तो मुझे मना कर रही थी।


शोभा ने कहा- आपकी बात सुनकर मेरा मन तो ललचा गया था पर मैं इतना जल्दी अगर मान जाती तो आपको भी लगता की में पहले से ही ऐसा सोच रही हैं।


मैंने कहा- “हम्म्म्म… अपना ग्लास खाली करो। एक-एक ग्लास और पीते हैं..”


शोभा बोली- “नहीं नहीं बस और नहीं। मैं इससे ज्यादा नहीं पी सकती…”


मैंने कहा- तुमको शाम तक यहा रहना है। एक ग्लास और पी लो तो मूड बना रहेगा।


शोभा बोली- हाँ ये भी ठीक है।


मैंने उसका ग्लास फिर से भर दिया।


शोभा बोली- “मैंने कल जब आपका लण्ड देखा तब से ही मेरा मन आपसे चुदवाने को कर रहा है। पर कल मैं इस लायक नहीं थी, वरना कल ही आपका लौड़ा अपनी चूत में घुसवा लेती.” उसको इस अंदाज में बात करते देखकर मैं समझ गया अब ये पूरी तरह से फिट हो गई है।

मैंने उसको कहा- “बाकी खतम करो फिर मजा लेटते हैं…”


शोभा ने झटके से उलास खाली किया और खड़ी हो गई। बड़ी मादक सी अंगड़ाई लेते हुए बोली- “मजा आ गया..’ उसने जब अपने हाथ उठाए तो उसकी गोरी गोरी चिकनी कौंख देखकर मेरे लण्ड में तनाव बढ़ने लगा।


मैंने उसको पूज- “तुम काँखें हमेशा शेब करती हो या आज ही करके आई हो?”


शोभा ने कहा- “मैं वैसे तो कभी कभार ही करती हैं। पर आज इतना बड़ा दिन है मेरे लिए तो आज तो मैं पूरी तरह से खुद को तैयार करके आई है..”


मैंने हँसते हुए कहा- “अपनी चूत को भी तैयार किया है?”


उसने कहा- हाँ वहां भी तैयार है।


मैंने कहा- जरा मेरे पास आकर मुझे अपनी चत के दर्शन तो करवाओ।


शोभा मेरे पास मस्त चाल से चलती हुई आकर खड़ी हो गई। मैंने उसकी साड़ी में हाथ डाला तो सीधा उसकी चूत पर जाकर रुका।


मैंने उसको कहा- “तुम पैंटी नहीं पहनकर आई?”


शोभा ने शरारत से कहा- “पैंटी उतरवाने आई है. पहनकर क्या करती?”


मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी। शोभा में मस्ती से भरी हुई सिसकी ली। मैनें उंगली को 4-5 बार अंदर-बाहर किया तो उसकी चूत में पानी छोड़ दिया। मैं समझ गया की इसकी चत अब लौड़ा माँग रही है। पर मैं तो उसको तड़पा-तड़पाकर चोदना चाहता था, मैंने उसकी साड़ी को खींचकर उतारना शुरू कर दिया, तो वो अपनी जगह खड़ी-खड़ी घूम गई। शोभा अब पेटीकोट ब्लाउज में खड़ी थी। उसका गोरा जिम मेरी आँखों के आगे था। उसकी बाड़ी सच में जवान लड़कियों जैसे थी। कहीं में टीलापन नहीं था।


मैंने उसको कहा- “मेरा मूड अभी पूरी तरह से नहीं बना। पहले मेरा मूड बनाओ तब तुमको चुदवाने में मजा आएगा…”


शोभा ने मुझे सवालिया नजर से देखा, और कहा- “आपका मह कैसे बनेगा? आप खुद बता दीजिए..”


मैंने उसको कहा- “तुम बैंड पर खड़ी हो जाओ, और अपने कपड़ों को एक-एक करके उतारा। मुझे अपनी अदाओं से दीवाना बनाओ, मुझे तुम्हारी जो अदा सबसे मस्त लगेगी मैं अपना एक कपड़ा उतार दूँगा। जब तुम मुझे पूरा नंगा कर दोगी, तब मैं तुम्हें चोदूंगा। ये एक खेल है खेलागी मेरे साथ? बोलो मंजूर है?”


शोभा मस्ती में डूबी हुई बोली- “मंजूर है..” फिर शोभा पलंग पर खड़ी हो गई।


मैंने म्यूजिक ओन कर दिया और शोभा बेड पर खड़ी होकर दो मिनट तक तो म्यूजिक के साथ अपने जिएम को हिलती रही। फिर उसने अपने ब्लाउज के हक को एक-एक करके खोलना शुरू कर दिया। फिर उसने अपने ब्लाउज को उतारकर फेंक दिया। मैं उसके हर आक्सन को बड़े ध्यान से देख रहा था, और मन ही मन हँस भी रहा था की इसकी हर हरकत कामुक हो रही है। फिर शोभा ने अपनी ब्रा को खोल दिया तो उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां उसके जिश्म के साथ हिलने लगी। मुझे उसकी ये अदा पसंद आई तो मैंने अपनी शर्ट उतार दी। ये देखकर शोभा को जोश आ गया। उसने अपना पेटीकोट अपनी जांघों तक उठाया।


मैं उसकी गोरी गोरी चिकनी जांघं देखकर मदहोश हो गया। फिर शोभा ने मेरी तरफ अपनी गाण्ड कर दी और अपने पेटीकोट को अपनी गाण्ड तक उठा दिया। उसके गोरे-गोरे सेब की तरह के चतड़ मस्त लग रहे थे। शोभा अपनी गाण्ड को म्यूजिक के साथ गोल-गोल करके किसी डान्सर की तरह घुमाने लगी। मुझे उसकी ये अदा और ज्यादा पसंद आई, तो मैंने अपनी जीन्स उतार दी।


शोभा ने जब मेरी तरफ मुँह घुमाया तो मैं सिर्फ अपने जोक्की में था। शोभा को लगा की उसकी मेहनत सफल हो गई। अब शोभा पूरे जोश में आ गई थी। उसने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और पूरी नंगी होकर मेरे सामने अपने जिस्म को म्यूजिक के साथ थिरकाने लगी। फिर उसने अपना हाथ अपनी चूत पर रख दिया, और अपनी चूत को सहलाने लगी। शोभा में मेरी तरफ देखा।


मैंने कहा- “थोड़ा सा और…”


अब शोभा बेड पर अपनी दोनों जांघों को फैलाकर बैठ गई, और अपनी उंगली को अपनी चूत में डालकर बड़ी सेक्सी आवाज में- “अहह… आआआ.. आहह…” करने लगी।


उसकी इस अदा पर मैंने अपना जोक्की भी उतार दिया। अब मैं बिल्कुल नंगा था। मेरे ताने हए लौड़े को देखकर शोभा की चूत मचलने लगी।


शोभा ने अपनी बाहों को फैलाकर कहा- “मेरे राजा अब और मत तड़पाओ, मेरी चत में अपना लौड़ा डाल दो..”



में सुनकर मुझसे रहा नहीं गया। मैं शोभा की दोनों जांघों के बीच में बैठ गया और अपना लौड़ा उसकी चूत में घुसा दिया। मेरे लौड़े को शोभा की चूत में जाने में कोई अड़चन नहीं हुई। शोभा की चूत का अगर भोसड़ा नहीं बना था तो टाइट भी नहीं थी। मेरा लौड़ा शोभा की चूत में बड़े आराम से जा रहा था। मैं अपना पूरा लौड़ा शोभा की चूत में अंदर-बाहर कर रहा था। फिर शोभा ने जब अपनी गाण्ड उठाकर मेरे हर शाट का जवाब देना शुरन किया तब मैंने शोभा की गाण्ड के नीचे तकिया लगा दिया।


अब शोभा की चूत मेरे लौड़े के बिल्कुल पास हो गई। मैं उसकी चूत में अपना लौड़ा पूरा निकालकर धक्का मार रहा था। मेरा इंच का लौड़ा जब एक ही झटके में शोभा की चत में जाता था तो शोभा की सिसकी मिकलती थी। अब दोनों तरफ से आग लगी हुई थी। पर चुदाई के खेल में हमेशा बलिदान लण्ड को ही देना पड़ता है। और फिर शोभा की चूत में मेरा माल झड़ गया। इतनी मेहनत के बाद 5 मिनट का आराम तो बनता है। मैं शोभा की चूचियों पर अपना मुँह रखकर अपनी सांसों को कंट्रोल करने लगा। फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों बेड पर नंगे पड़े थे एक दूसरे के साथ चिपके हुए।


मैंने शोभा से पूछा- “मजा आया?”


शोभा ने मेरे लण्ड को पकड़कर बड़े प्यार से कहा- “मैं तो अब इसकी दीवानी बन गई हैं। सच कहूँ तो में अपनी लाइफ में आज तक इतना संतुष्ट कभी नहीं हुई। आज आपने मुझे वो सुख दिया है जिसका मैं आज तक कभी नहीं ले पाई। काश आप मेरी लाइफ में पहले से होते..”


में उसकी सब बातों को सुन रहा था मैं कुछ बोला नहीं।


फिर मैंने शोभा से कहा- “मुझे सस आया है..”


शोभा ने कहा- “मुझे भी.”


मैं हँसते हुए बोला- “चलो दोनों करके आते हैं.”


फिर हम दोनों टायलेट में गये वहां जाकर शोभा शीट पर बैठ गई और बड़ी तेज आवाज में शुउउउ उउउ करके मम करने लगी।


मैंने उसको कहा- “तुम सूसू करते टाइम कितना शोर कर रही हो?”


शोभा ने कहा- “आपको पता नहीं हम लोगों की मी ही आवाज होती है…”


फिर मैंने शोभा से कहा- “मेरा लौड़ा अपने हाथ में लेकर सूसू करवाओ..”


शोभा ने मेरे लण्ड को बड़े प्यार से अपने हाथों में पकड़ा और बोली- “करिए.


मैंने सूस करना शुरू कर दिया। शोभा मेरे लौड़े को बीच-बीच में कस के दबा देती थी, जिससे मेरा सस रुक जाता था। फिर एकदम से छोड़ देती जिसमें धार बनकर मूस आता था। मैं शोभा की इस हरकत को देख रहा था की साली कितनी कमीनी है, मुझे हर तरीके से मजा दे रही है। हम दोनों बेडरूम में आ गये।


मैंने शोभा से कहा- “थोड़ी-थोड़ी बियर और पीते हैं.”


मैंने सूस करना शुरू कर दिया। शोभा मेरे लौड़े को बीच-बीच में कस के दबा देती थी, जिससे मेरा सस रुक जाता था। फिर एकदम से छोड़ देती जिसमें धार बनकर मूस आता था। मैं शोभा की इस हरकत को देख रहा था की साली कितनी कमीनी है, मुझे हर तरीके से मजा दे रही है। हम दोनों बेडरूम में आ गये।


मैंने शोभा से कहा- “थोड़ी-थोड़ी बियर और पीते हैं.”


शोभा ने हाँ कर दी। मैंने फ़िज़ से बिगर निकाली और उल्लास में डालकर शोभा को दी, और बोतल अपने मुँह से लगा ली। शोभा मुझे इस तरह सहयोग देगी मैं सोच भी नहीं सकता था।


मैंने शोभा को कहा- “में अब तुम्हारी गाण्ड का मजा लेना चाहता है.”


शोभा बोली- “इसका मतलब आपको मेरी चूत में मजा नहीं आया?”


मैंने कहा- “ऐसा कुछ नहीं है। मैं तो बस तुम्हारी गाण्ड का दीवाना है. इसलिए गाण्ड मारने को कह रहा हूँ…”


शोभा बोली- “आपका जो मन करें आप वा करो…”


मैंने कहा- “गाण्ड में कोई क्रीम लगानी है क्या?”


शोभा ने कहा- मुझे कोई जरूरत नहीं है। आप मुझे घोड़ी बनाकर मेरी चूत को चोदो। जब लण्ड मेरी चूत में गीला हो जाए तो मेरी गाण्ड में डाल देना.”


मुझे आइडिया सही लगा। मैंने शोभा को घोड़ी बना दिया और उसकी चूत में लण्ड पेल दिया। थोड़ी देर में मेरा लण्ड उसकी चूत के पानी से भीग गया था। मैंने उसकी चूत से अपने लण्ड को निकालकर उसकी गाण्ड में पेल दिया। मैंने शोभा की गाण्ड में जब लण्ड पैला तब उसने हल्की सी चीख मारी, पर उसके बाद वो अपनी गाण्ड को खुद आगे-पीछे करने लगी। मुझे शोभा की मस्त गाण्ड का पूरा मजा आने लगा। मेरे लौड़े को शोभा की गाण्ड में जन्नत नजर आ रही थी। मेरी हर चोट पर पट-पट की आवाज आ रही थी। फिर आखीर में जो होता है वही हआ। मैं शोभा की गाण्ड में अपना लौड़ा झाड़ कर लंबी सांसें लेने लगा।


थोड़ी देर बाद शोभा के संल पर ऋतु का फोन आया की मम्मी हम लोग आ रहे हैं रास्ते में हैं एक घंटे तक घर पहुँच जायेंगे।


सुनकर शोभा बोली- “वा लोग आ रहे हैं, मुझे उनके आने से पहले घर पहुँचना होगा…”


मैं भी अब तक चुका था। मैंने शोभा को कहा- “मैं तुमको घर छोड़ आता है.. मैं अपनी कार से शोभा को उसके घर छोड़ने जा रहा था।


रास्ते में शोभा ने कहा- “आज मुझे वो सुख मिला है जिस सुख की हर औरत की तमन्ना होती है। मुझे अब इर लग रहा है की ऋतु के आने के बाद आप कभी ये मोका मुझे दोगे या नहीं?”


मैंने शोभा को कहा. “मैं तुम्हारी प्यास को जब तुम कहोगी बुझाऊँगा। अगर तुम मेरा साथ दोगी तो मैं भी तुम्हारा कभी साथ नहीं छोड़ेगा..” फिर शोभा का घर आ गया।


मैंने उसको बाड़ बोलकर कार बैंक कर दी। शोभा को छोड़कर जब मैं वापिस घर आया तो आते ही सबसे पहले मैंने कैमरे की कार्डि चेक करी, तो देखा क्लियर थी। मैंने वो कार्डि एक सी.डी. में सेव कर के रख दी और फिर मुझे नींद में अपनी बाहों में भर लिया।


अगले दिन मैं आफिस थोड़ा देर से गया था। अत पहले से ही आई हुई थी। मझे देखते ही वो मेरे साथ-साथ मेरे केबिन में आ गई। उसने मुझे कुछ बोलने का मौका ही नहीं दिया। एकदम से मेरे से चिपक कर मेरे होंठों पर अपने होंठों रख दिए, 5 मिनट तक हम ऐसे ही एक दूसरे के साथ चिपके रहे।


फिर ऋतु रंधे गले से बोली- “आपसे 4 दिन दूर रहकर मुझे ऐसा लग रहा है जैसे की 4 साल बीत गये हो..”


मैंने उसको कहा- “मैंने भी तुमको बहुत मिस किया…”


ऋतु अपना मुँह फुलाकर बोली- “और तो और मेरे सेल में भी मुझे धोखा दिया। वहां जाते ही खराब हो गया। मैं आपसे बात भी नहीं कर पाई…”


मैंने कहा- “चला अब जो होना था सा हो गया। फिलहाल तो तुम मेरे पास हो.”


अत् ने मुँह बनाकर कहा- “अगर सेल खराब नहीं होता तो मैं आपको बहां की वीडियो बनाकर दिखाती..”


मैंने कहा- वहां कुछ खास था, जिसकी वीडियो मुझे दिखानी थी?


ऋतु बोली- “मैंने वहां खूब मस्ती करी, खूब डान्स किया…”

.

मैंने ऋतु को चिटाते हुए कहा- “तुम्हें डान्स करना भी आता है?”


ऋतु ये सुनकर लाल होते हुए बोली- “अगर आपने मेरा डान्स देख लिया तो कहोगे की ऐसा डान्स किसी मूवी में भी नहीं देखा..”


मैंने कहा- अच्छाजी… अगर ऐसा है तो तुम उस फंक्सन की डी.वी.डी. मगवाओ। मैं देखकर ही बताऊँगा की तुम डान्स कैंसा करती हो?” फिर मैं बोला- “ऋतु तुम अब अपनी आँखों को बंद करो..”


ऋतु बोली- क्या?


मैंने कहा- करो तो सही।


ऋतु ने अपनी आँखों को हल्के से बंद किया।


मैंने कहा- “ऐसे नहीं सही से बंद करो…”


उसने कर ली।


मैंने एक पैकेट उसके हाथ में पकड़ा दिया और कहा- “अब अपनी आँखों को खोलो..”


ऋत् ने आँखें खाली और बोली- “इसमें क्या है?”


मैंने कहा- खोलकर देखो।


ऋतु में जल्दी से पैकेट खोला तो उसकी खुशी देखते ही बन रही थी। वो बोली- “सर, इतना मःगा मोबाइल मैंने कभी इस्तेमाल नहीं किया…”


मैंने कहा- “अब कर लो…”


ऋतु खुशी से भरी मेरे पास आकर मेरी गोद में बैठ गई, और मेरे गले में अपनी बाहों को डालकर बोली- “आप कितने स्वीट हो, मेरा कितना खयाल रखते हो…”


मैंने कहा- “मुझे जब पता चला की तुम्हारा मोबाइल खराब हो गया है। मैंने तभी साच लिया था की तुमको बदिया सा मोबाइल दगा। अब इसमें अपना सिम डालकर सबसे पहले अपनी दीदी को फोन करो और उस फंक्सन की डी.वी.डी. मैंगवाओ..”


ऋतु ने खुश होते हए अपना सिम मोबाइल में लगाया और अपनी दीदी को फोन किया। पहले तो उनकी खैर खबर ली फिर बोली- “दीदी फंक्सन की डी.वी.डी. आ गई?”


उधर से जवाब मिला- “हाँ आ गई.”


ऋतु ने कहा- “दीदी आज ही उसकी कारिगर से भेज दो… फिर दो-चार इधर-उधर की बात करके ऋतु ने फोन काट दिया और मुझे देखकर बोली- “कल डी.बी.डी, आ जायेंगी तब पता चलेगा आपको.”


मैने मुश्कुराकर कहा- “अगर तुमको मेरी बात का बुरा लगा है तो आई आम वेरी सारी…”


ऋतु ने कहा- “दीदी आज ही उसकी कारिगर से भेज दो… फिर दो-चार इधर-उधर की बात करके ऋतु ने फोन काट दिया और मुझे देखकर बोली- “कल डी.बी.डी, आ जायेंगी तब पता चलेगा आपको.”


मैने मुश्कुराकर कहा- “अगर तुमको मेरी बात का बुरा लगा है तो आई आम वेरी सारी…”


अगले दिन आफिस में कॉरियर में एक पैकेट आया। पैकेट ऋतु के नाम था। वो समझ गई। अत पैकेट लेकर सीधा मेरे पास आई और बोली- “लीजिए, और इसका अभी देखिए..”


मैंने डी.वी.डी. अपने लप्पी में लगा दी। प्ले होतें ही ऋतु बोली- “इसको फारवई करिए, मैं आपको वो सीन दिखाती हैं, जिसमें मैं डान्स कर रही हैं.”


मैंने डी.बी.डी, का फारवर्ड किया, जहां से ऋतु का डान्स शुरू हुआ वहां से देखनी शुरू की। सच में जैसा ऋतु ने कहा था, उसका डान्स उससे भी बढ़ कर था। उसकी बल खाती कमर गजब ढा रही थी। उसकी शिरकन किसी आर्टिस्ट जैसी थी।


फिर मेरा ध्यान किसी और पर गया जो ऋतु के साथ डान्स कर रही थी। मैंने दिल ही दिल में आऽऽ भरी। ऋतु के साथ डान्स करने वाली जो भी थी मैं उसको नहीं जानता था। पर उसका चेहरा ऋतु में मिल रहा था। वो थोड़ी मोटी थी पर थी बला की संदर। उसका डान्स उससे भी सेक्सी था। वो अपने चूतड़ों को ऐसे मटका रही थी की देखने वाला अपना आपा खो बैठे। वो अपनी चूचियों को हिला-हिलाकर डान्स कर रही थी। डान्स करते टाइम उसका पूरा जिम थिरक रहा था। फिगर भी बिल्कुल 36-30-36 था। इतना मस्त फिगर देखकर लण्ड में हंकार मारी। मैं उसको देखता ही रह गया। उसकी मोटी-मोटी जांघों को देखकर में पागल हो उठा।


मैंने ऋतु में कहा- “ये कौन है?”


ऋतु ने कहा- यही तो है अनु दीदी जिनके घर हम गये थे।


मेरे मुँह से सीटी बज उठी। मैंने कहा- “वाह… कितना सेक्सी डान्स कर रही हैं। कितनी सुंदर है तुम्हारी दीदी…”


ऋतु ने ये सुनकर मुझे घूरते हुए कहा- “आपके मन में क्या चल रहा है?”


मैंने कहा- “कुछ नहीं। मैं तो हुश्न का पुजारी हूँ। तारीफ के लायक जिसको भी देखता हूँ तारीफ कर देता हैं.”


सुनकर ऋतु हसने लगी, और बोली- “आप भी ना…”


मैंने कहा- मैं भी ना क्या?


ऋतु बोली- कुछ नहीं


फिर मैंने ऋतु से कहा “मैं तुम्हारा डान्स देखकर मान गया की तुम सच में बहुत अच्छा डान्स करती हो… मैं इस डी.बी. डी. को अपनी लप्पी में सेव कर लेता हैं रात को ठीक से देखूगा..”


फिर मैंने ऋतु से कहा “मैं तुम्हारा डान्स देखकर मान गया की तुम सच में बहुत अच्छा डान्स करती हो… मैं इस डी.बी. डी. को अपनी लप्पी में सेव कर लेता हैं रात को ठीक से देखूगा..”


ऋतु बोली- “हाँ आप कर लीजिए..”


मैंने झट से डी.वी.डी. अपने लप्पी में सेव कर लिया और डी.वी.डी. ऋतु को देते हुए कहा- “चार दिन बाद आफिस आई हो, जरा जाकर देखा तो कितना काम पेंडिंग पड़ा है?”


ऋतु ने कहा- “हाँ, मैं अब जाकर सब पंडिंग काम देखती हूँ..”


मैंने ऋतु के जाते ही फिर से डी.वी.डी. प्ले कर दी। मेरा सारा ध्यान अब अन् को देखने में था। मेरे दिमाग में उसका भरा हआ बदन उसकी मोटी-मोटी जांघे और उसकी मस्त छातियां घूम रही थीं। मैं हर उस सीन को पाज करके देखने लगा जिसमें अन् थी। फिर एक सीन ऐसा देखा जिसमें वीडियो कवर करने वाले में पूरा हरामीपना किया था। वो सीन कुछ ऐसा था जिसमें अन सोफे पर बैठी थी, उसकी मोटी-मोटी जांचें फैली हुई थी, उसकी अंदर की जांघ क्लिपर दिख रही थी। अन में सफेद कलर की लेगिंग पहनी हुई थी, जिसमें उसकी जांघ की पूरी शंप बिलयर दिख रही थी। अन की मोटी-मोटी जांघों में उसकी चूत कैसी होगी? उसकी चूचियां कितनी मस्त होगी? मैं उसके बारे में सोचने लगा। मैंने डी.बी.डी. को कई बार देखा। शाम कब हो गई पता ही नहीं चला। अनु के जिम को देख-देखकर मेरे लण्ड का बुरा हाल हो गया था।


मैंने अत को बुलाया तो बो आते ही बोली- “आपके पास टाइम ही नहीं है मेरे लिए “


मैं समझ गया की वो गुस्से में है। मैंने उसको कहा- “ऐसा नहीं है। मैं काम में बिजी था..”


ऋतु मेरे पास आ गई उसने मेरी शर्ट के दो बटन खोल दिए और मेरे सीने के बालों से खेलने लगी। मैं समझ गया की ये 4 दिन से चुदी नहीं, इसलिये इसकी चूत में खुजली मच रही है, और उसकी चूत अब लण्ड माँग रही हैं। मैंने ऋतु को अपनी गोद में खींच लिया और किस करने लगा। अन् को देखकर में पहले से ही गरम हो गया था। ऋतु के जिम से खेलते हुए आग और बढ़ गई।


मैंने ऋतु को कहा- “चलो अपनी चुदाई वाली जगह पर…”


ऋतु समझ गई और साफ की और चल दी। मैंने जाते ही ऋतु की कमीज उतार दी। उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। मैं उसकी चूचियों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। फिर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खींच दिया झटकं से, तो उसकी सलवार उतर गई। में परे जोश में था। मैंने उसकी पैटी को नीचे खिसकाया। ऋतु में बाकी का काम खुद कर लिया। मैं ऋतु को सोफे पर लेकर पड़ गया।


मैंने उसकी चूची को मुँह में लेते हुए कहा- “आज मेरा लण्ड तुम अपने हाथ से पकड़कर अपनी चूत पर रखो..”


ऋतु भी 4 दिन से चुदासी हो रही थी। उसने झट से मेरा लौड़ा अपने हाथ से पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया। मैंने जोर का झटका मारा और ऋतु की चूत में लण्ड घुसा दिया। लौड़ा पूरा डालकर धक्के मारने लगा। मैं ऋतु को चोदते समय अन की कल्पना कर रहा था। मैंने अपनी आँखों को बंद करके ये सोचा जैसे की मैं अन् को ही चोद रहा हूँ। मुझे ऋतु में अनु नजर आ रही थी।


ऋतु आज जल्दी ही झड़ गई। उसने झड़ते ही मुझे अपनी बाहों में कस लिया। मैं भी अब कहां रूकने वाला था। दो मिनट बाद मैंने भी अपना माल ऋतु की चूत में झाड़ दिया। ऋतु और में दोनों कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे।


फिर मैंने ऋतु से कहा, “मेरे लण्ड को साफ कर दो..”


ऋतु समझ गई की उसको क्या करना है। उसने अपनी पैंटी से मेरे लौड़े को पोंछकर साफ कर दिया। मैं अब उसकी पैंटी से ही लण्ड को साफ करवाता था। फिर ऋतु में अपने कपड़े पहने, और जाने के लिए तैयार हो गई।


ऋतु आज जल्दी ही झड़ गई। उसने झड़ते ही मुझे अपनी बाहों में कस लिया। मैं भी अब कहां रूकने वाला था। दो मिनट बाद मैंने भी अपना माल ऋतु की चूत में झाड़ दिया। ऋतु और में दोनों कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे।


फिर मैंने ऋतु से कहा, “मेरे लण्ड को साफ कर दो..”


ऋतु समझ गई की उसको क्या करना है। उसने अपनी पैंटी से मेरे लौड़े को पोंछकर साफ कर दिया। मैं अब उसकी पैंटी से ही लण्ड को साफ करवाता था। फिर ऋतु में अपने कपड़े पहने, और जाने के लिए तैयार हो गई।


मैंने उसको कहा- “अनु तुमसे कितने साल बड़ी है?”


ऋतु ने कहा- “4 साल… वैसे आपको उनकी उम का क्या करना है?”


मैंने कहा- “कुछ नहीं, वैसे ही पूछ रहा हूँ… अनु के पति क्या करते हैं?”


ऋतु ने कहा- वो जाब करते हैं।


मैंने कहा- चलो अब तुम जल्दी से जाओ, नहीं तो देर हो जाएगी।


ऋतु मुझे बाइ बोलकर चली गई।


ऋतु के जाते ही अंजू मेरे केबिन में आई और बोली- “सर ऋतु का नया मोबाइल आपने देखा है?”


मैं समझ गया इसको ऋतु का मोबाइल देखकर जलन होने लगी है। मैंने कहा- “उसके हाथ में देखा तो था मैंने। पर क्या हुआ?”


अंजू बोली- “सर, उसकी दो महीने की सेलरी से भी ज्यादा का मोबाइल है। उसने कैसे लिया होगा?”


मैंने कहा- “हा सकता है उसको किसी ने गिफ्ट दिया हो?”


अंजू मुझे शक भरी निगाहो से देखते हुए बोली- “कहीं आपने तो गिफ्ट में नहीं दिया उसको?”


मैंने कहा- “मैं क्यों देने लगा?” में अंजू के सामने बिल्कुल अंजान बन गया। फिर मैंने कहा- “अज तुम इन सब बातों में क्यों पड़ती हो? तुमको अगर बैसा मोबाइल पसंद है तो तुम भी ले लेना, इसमें कौन सी बड़ी बात है?”


अंजू एक लंबी सांस लेते हुए बोली- “सर हमारी ऐसी किश्मत कहां की हम इतना महंगा मोबाइल खरीद सकें?”


मैंने उसको कहा- “कुछ पाने के लिए मेहनत तो करनी ही पड़ती है..”


अंजू मुझे सवालिया नजरों से देखते हुए बोली “मर क्या में मेहनत नहीं करती? मुझे इतने टाइम हो गया आपके आफिस में, आपको भी पता है मैं अपना काम जितनी मेहनत से करती हैं…”


मैंने अंजू से कहा- “अजू मेरी बात का वो मतलब नहीं, जो तुम समझ रही हो…”


अंजू बोली- “प्लीज सर आप मुझे बताइए ना… मुझे किस तरह और मेहनत करनी चाहिए?


मैंने अंजू से कहा- “अभी तो मुझे जाना है। कल मैं तुमको अच्छे से समझाऊँगा…”


अंजू बोली- “ओके सर… कल मैं आपसे जरा समझंगी…”


फिर मैं आफिस से निकाल आया। मैं रात को देर तक सोचता रहा की अंजू खुद मेरे पास आकर मुझे अपनी जवानी आफर कर रही हैं और मैं कितना चुतिया है जो उसको आज तक ट्राई नहीं किया। पहले से किया होता तो आज तक उसकी चूत का मजा ले रहा होता। मैं मन ही मन उसको चोदने का ख्वाब देखने लगा। मुझे अपनी किश्मत पर जाज होने लगा की मेरे पास चत खुद आकर चुदवाने को बोल रही है। फिर इन्हीं सोचो में कब नींद आ गई पता ही नहीं चला।


अगले दिन लंच टाइम से पहले अंजू मेरे केबिन में आई।


मैंने उसको कहा- “आओ अंजू कोई काम है?”


अंजू बोली- “सर, आप कल जो बात कर रहे थे। उसी बात को पा समझने आई हैं.”


मैंने कहा- “ही ही याद आ गया.” मैंने अज से कहा- “बैठा…”


अंजू मेरे सामने चेयर पर बैठ गई।


मैंने बोलना शुरू किया. “देखो अज, इस दुनिया में हर इंसान की किश्मत अलग होती है। ज़्यादतर लोग अपने हालात से समझौता कर लेते हैं, और जिस हाल में होते हैं उसी को अपनी किश्मत समझ लेते हैं। पर कुछ लोग जिनमें हौसला और हिम्मत होती है, वो अपनी किश्मत को खुद बनाते हैं। अब तुम सोचकर बताओ की इनमें से तुम अपने को किस टाइप का मानती हो?”


अंजू ने कहा “सर मैं अपनी किश्मत को बदलना चाहती हैं पर कैसे? ये मेरी समझ नहीं आ रहा। पर मुझे कुछ बनना है। इसके लिए मैं कुछ भी कर सकती हैं। मुझे इस लाइफ से नफरत होने लगी है। मुझे इस तरह से घुट घुट कर जीना पसंद नहीं है…”


मैंने उसकी आँखों में आँखें डालते हुए कहा- “तुम आगे बढ़ने के लिए क्या कर सकती हो?”


अंजू में कहा मैं कुछ भी कर सकती है।


में अपनी चेयर से उठा और अंजू के पीछे जाकर खड़ा हो गया और अपना हाथ उसके कंधे पर रख दिया। अंजू ने अपना चेहरा घुमाकर मेरी तरफ देखा। मैंने उसको कहा- “मैं तुमको कामयाब होने का रास्ता बता सकता हैं। और मुझे यकीन है की तुम कामयाब हो जाओगी। पर हर कामयाबी की कोई कीमत होती है। अगर बो कीमत चुकाने का होसला तुम में है तो बताओ?” कहकर में दो मिनट चुप रहा।


फिर मैंने अंजू से कहा- “किस सोच में डूब गई?”


अंजू ने सोचते हुए जवाब दिया- “क्या कीमत हैं कामयाब होने की? मैं हर कीमत अदा करने को तैयार हैं..”


मैंने कहा- “गड..” और में फिर जाकर अपनी चेयर पर बैठ गया। मैंने अंजू से कहा- “उठकर खड़ी हो जाओ..


अंजू खड़ी हो गई।


मैंने उसको कहा- “पहले केबिन को अंदर में लाक कर दो..”


अंजू ने कहा “लाक क्यों करना है?”


तम में सबसे बड़ी कमी यही है की तुम हर बात में सवाल करती हो…”


अंजू ने लाक कर दिया।


फिर मैंने अंजू से कहा- “अब जरा अपनी शर्ट के बटन खोला..”


अंजू मुझे ऐसे देखने लगी जैसे की मैंने उसको कोई गाली दी हो। वो बोली- “सर, ये आप क्या कह रहे हैं? मैं आपके सामने अपनी शर्ट के बटन कैसे खोल सकती हैं? में इस टाइप की लड़की नहीं हैं। मैं आपकी इतनी स्पक्ट करती हैं, और आप मुझे इतनी चीप बात बोल रहे हो। आपको कोई गलतफहमी हो गई है सर। में कोई कालगर्ल नहीं हूँ.”


मैंने उसको कहा- “तुमने अभी क्या कहा था? की मैं कोई भी कीमत अदा कर सकती हूँ..”


अंजू बोली- “सर, मेरा मतलब वो नहीं था। मैं तो अपने काम से, अपनी मेहनत और लगान से आपका दिया कोई भी काम पूरा करने को कीमत समझ रही थी..”


मैंने कहा- “अंजू, तुम सच में इतनी भोली हो या बनकर दिखा रही हो?”


अब तो अंजू की आँखों में आँसू आ गये, और वो अपने हाथों से अपने चेहरा को टक करके फफक-फफक कर रोने लगी। में समझ चुका था की पासा उल्टा पड़ गया। मैं उठकर उसके पास गया और अंजू को दिलासा देते हए बोला- “अंजू तुम पास हो गई..”


अंजू ने मुझे देखा और बोली- “पास… मतलब?”


मैंने कहा- “अंजू, मैं तुम्हारा टेस्ट ले रहा था तुम उसमें 100% पास हो गई..”


अंजू का रोना बंद हो गया।


मैंने उसको कहा- “मैं तुमको क्या इतना कमीना लगता ही तुम अगर ऐसा करने को तैयार हो भी जाती तो भी मैं तुमको नहीं करने देता। पगली में तो सिर्फ ये देख रहा था की तुममें सेल्फ रेस्पक्ट कितनी है?”


अंजू हैरान होते हए बोली- “सर, आप सच बोल रहे हैं?”


मैंने अपने चेहरा पर शराफत की चादर ओट ली। मैंने कहा- “हौं अंजू, मैं सिर्फ तुम्हारा इंतेहन ले रहा था। अगर तुमको बुरा लगा हो तो मुझे माफ करना..”


अंजू मेरे आगे हाथ जोड़ती हुई बोली- “नहीं सर, आप मुझसे बड़े हैं। आप मुझसे माफी नहीं माँगी। मैं ही पागल हूँ जो आपको गलत समझ बैठी। आप मुझे माफ कर दीजिए.”


मैंने अजू में कहा- “मैं तुमसे बहुत खुश हूँ। मैं तुम्हारी सैलरी 11000 बढ़ा दूंगा.”


अंजू सुनते ही खुश हो गई और बोली- “सर आप इंसान नहीं देवता हैं..”


मैं मन ही मन सोचने लगा- “इसने आज मेरा खेल बिगड़ दिया, वरना में इसको आज दिखाता की मैं कितना कमीना …”


मैंने कहा- “अब तुम जाओ और इस बात का जिक्र किसी से नहीं करना, वरना कोई गलत ना समझ बैठे…”


अंजू ने कहा “नहीं, मैं किसी से कोई बात नहीं करूंगी… और वो चली गई।


अंजू के जाने के बाद मैं लंबी सांस लेकर सोचने लगा- “आज किश्मत अच्छी थी जो बच गया, वरना ये साली पागल लड़की आज मेरी इज्जत का तमाशा बनवा देती…”


में घर आया तो अपना खराब मह ठीक करने के लिए विस्की पीने लगा। मैंने एक बार पीनी शुरू करी तो पीता हो गया। 4 पंग पीने के बाद मुझे लगने लगा की अब मेरा दिमाग फ्री हआ है। मैंने कभी सोचा भी नहीं था की मेरे जैसे खिलाड़ी को काई अनाड़ी समझकर हरा जाएगा। मुझे अपनी हार बर्दाश्त नहीं हो रही थी, पर मैं कर भी क्या सकता था?


मैं अपने को समझाता हआ बोला- “कोई बात नहीं। आज नहीं तो फिर सही। इसको तो मैं अब चोदकर ही दम लँगा। कभी ना कभी मोका जरूर मिलेगा और फिर मैं इसको कुतिया बनाकर चोदूंगा। इसकी शराफत की ऐसी बैंड बाजाऊँगा की साली याद रखेगी….


फिर मझें याद आया को मैंने जो डी.वी.डी. सेब की है उसको तो देखा ही नहीं। मैंने अपना लप्पी आन किया

और डी.बी.डी. देखने लगा। मैंने शुरू से आखिर तक डी.बी.डी. को देखा। अनु के बल खाते जिस्म को देख-देखकर मैं आहे भरता रहा, उसके दिल के आकार के चूतड़ों में थिरकन देखकर होश खोने लगा। मैं दिल ही दिल में सोचने लगा की अन् को में कैसे चोद सकता है? उसकी तो शादी हो चुकी है और वो देल्ही में रहती है। कैसे उसका चोद सकता है? कौन मेरे इस काम में हेल्प कर सकता है? मुझे कोई भी विकल्प नहीं मिला। दिमाग खराब होने लगा था अनु को देख-देखकर। पर जो चीज हासिल नहीं हो सकती उसको कैसे हासिल करग? ये बात समझ में नहीं आ रही थी। यही सोचते-सोचते में सो गया।


कई दिन बीत गये। मैं अपने दिल में अनु को चोदने की तमन्ना लिए हए था। पर कुछ हो नहीं पा रहा था। मुझे अब अन् को चोदना एक ख्वाब जैसा लगने लगा था। अचानक मेरी किश्मत एक बार फिर से मेरा साथ देने लगी। मैं अपने कैबिन में बैठा था।


ऋतु मेरे पास आई और बोली- “सर मुझे घर जाना है..”


मैंने कहा- क्या हुआ?


उसने कहा- “आज मेरी दीदी आ रही है…”


मैंने कहा- कौन अनु?


ऋतु ने कहा- हाँ अनु दीदी और जीजू भी,


मैंने कहा- कब आना है उन लोगों ने?


तु ने कहा- “3:00 बजे तक आ जाएंगे..”


मैंने कहा- किसी खास काम से आ रहे हैं क्या?


ऋतु ने कहा- जब से अन दीदी की शादी हुई है तब से वो कभी रहने नहीं आई। अब बो रहने आ रही है।


मैंने कहा- और तुम्हारे जीजू भी यही रहेंगे?


ऋतु ने कहा- नहीं, वो तो सिर्फ उनको छोड़ने आ रहे हैं। दीदी तो 15-20 दिन अब यही रहेंगी..”


मैं मन ही मन खश होने लगा।


फिर ऋतु ने कहा- “जब से अन् दीदी की शादी हुई है वा आईता है कई बार, पर कभी रुकी नहीं। अब वो कुछ दिनों के लिए रहने आ रही है…”


मैंने कहा- “ओके.. तुम जब मन हो चली जाना..”


अत ने मुझे स्वीट सी स्माइल दी और चली गई। मैं फिर से अन के बारे में सोचने लगा। आज फिर में उसकी चूत की याद मुझे सताने लगी। में चूत भी क्या चीज है? सब लड़कियों की होती एक जैसी है, पर हर चूत को हम देखते अलग-अलग हैं। मैं अपने काम में ध्यान देने की नाकाम कोशिश करने लगा। पर मेरा मन अब भी अन् की तरफ भटक रहा था। मैं अब फिर से सोचने लगा की मैं कैसे अन को अपने लण्ड के नीच ला सकता हैं। इसी सोच ने मुझे किसी काम में मन नहीं लगाने दिया। फिर मैंने एक आइडिया सोचा। अगर वो काम कर गया तो मैं अन् को अपने नीचे ले सकता है।


मेरे मन में लड्डू फूटने लगे।


अगले दिन ऋतु आफिस जरा देर से आई।


मैंने पूछा- “सब ठीक तो है?”


ऋतु बोली- “सारी सर, मैं लेट हो गई..”


मैंने कहा- कोई बात नहीं कल वैसे भी तुम्हारे गेस्ट आए हए थे पर आज तुम मुझे थोड़ा सा थकी लग रही हो।


ऋतु ने कहा- सर, बों में रात को ठीक से सो नहीं पाई इसलिए थोड़ा थकी हैं।


मैंने कहा- रात को नींद नहीं आई?


उसने कहा- “बस ऐसी ही दीदी से बातें करती रही। बातों-बातों में पता ही नहीं चला कब सुबह हो गई..”


मैंने जरा उत्सुक होते हुए पूछा- “ऐसी कौन सी इंटरेस्टिंग बातें हो रही थी?”


उसने कहा- “कोई खास नहीं बस इधर-उधर की…”


मैंने कहा- “फिर भी कुछ पता तो चले हमें भी बताओ..”


ऋतु ने मुझे छेड़ते हए कहा, “आपके बताने की बात नहीं है. उसके चेहरा से साफ लग रहा था की वो कछ छुपा रही है।

पर मैं कहां मानने वाला था। मैंने कहा- “प्लीज बताओं ना…”


तब ऋतु बोली- “वो हमारी पसनल बातें थी..”


मैंने कहा- “फिर भी कुछ पता तो चले हमें भी बताओ..”


ऋतु ने मुझे छेड़ते हए कहा, “आपके बताने की बात नहीं है. उसके चेहरा से साफ लग रहा था की वो कछ छुपा रही है।

पर मैं कहां मानने वाला था। मैंने कहा- “प्लीज बताओं ना…”


तब ऋतु बोली- “वो हमारी पसनल बातें थी..”


मैंने उसको अपनी गोद में खींच लिया और उसकी चूचियों को दबाते हए कहा- “अब हमसे भी ज्यादा कुछ परसजल हो गया है?”


ऋतु बोली- “नहीं आपमें कुछ नहीं पाती है। पर वो ना कुछ और बात थी..’ कहते-कहते उसके चेहरे पर शर्म

छा गई।


मैंने उसको कहा- “अगर तुम मुझे नहीं बताना चाहती तो मत बताओ। मैं भी अब तुमसे पर्सनल बातें नहीं शेयर करेंगा…


ऋतु ने कहा- “आप तो नाराज हो गये। अच्छा बाबा मैं आपको सब बताती है। पर पहले आप कसम खाइए की ये बातें सिर्फ आप अपने तक ही रखोगे…”


मैंने उसको कहा- “मैं तुम्हारी कसम खाता हूँ..”


ऋतु ने बताना शुरू किया. “कल रात जब जीज चले गये तब दीदी ने कहा- “मैं आज ऋतु के साथ सो साऊँगी..”

इसलिए शिल्पा मम्मी के रूम में सो गई, मैं और दीदी दसरे रूम में सो गये। मैं दीदी से काफी फ्रैंक हैं। दीदी

और में एक दूसरे से सब तरह की बातें शेयर करती हैं। पहले तो दीदी अपनी ही बातें करती रही।


फिर दीदी ने मुझसे कहा- “ऋतु तेरी बाड़ी में एकदम से चेंज आ गया है। मैंने ये बात तभी नोटिस कर ली थी जब तू मेरे घर आई थी। पर वहां मुझे बात करने का मौका नहीं मिला। अब बता क्या कर रही है आजकल?”


मैंने ऋतु से कहा- “फिर तुमने क्या कहा?”


ऋतु बोली- “ना जानें क्यों में दीदी से कुछ छुपा नहीं पाई, और मैंने दीदी को सब बता दिया की कैसे मैं आपसे मिली और फिर क्या-क्या हुआ?”


मैंने कहा- फिर अनु ने क्या कहा?”


ऋतु- “दीदी ने कहा की ये सब मेरी बजह मा है। मेरी शादी के लिए अगर मम्मी ने लोन ना लिया होता तो तुम्हारे साथ ये सब नहीं होता। मेरी बजह से तुम्हारी लाइफ बर्बाद हो गई.”


मैंने थोड़ा अपने को संभालते हुए कहा- “फिर तुमने क्या कहा?”


ऋतु- “मैंने कहा की नहीं दीदी ऐसा कुछ नहीं है। वो बड़े अच्छे इंसान हैं। उन्होंने मुझे पाने के लिए जो कुछ भी किया बेशक वो देखने में गलत लगता हो। पर वो मुझे जिस तरह प्यार करते हैं, शायद मेरा पति भी नहीं करता….


ये सुनकर दीदी ने मुझसे हैरान होकर पूछा “इसका मतलब तू इस बात से खुश है?”

मैंने कहा- “हौं। मैं उनसे बहुत खुश हैं। शायद मुझे अपनी लाइफ में उनसे बढ़कर कोई मिल भी नहीं सकता था..” और ऋतु मुझे बड़े प्यार से देखने लगी।


मैंने कहा- बस यही बातें करती रही रात भर या कोई और बात भी हुई?



ऋतु बोली- “और भी बहुत बातें हुईं अभी मैं आपको सब बता रही है रुकिये तो…”


उसके बाद दीदी ने मुझसे पूछा- “तुझे सेक्स में मजा आता है या मजकी समझ के करती है?”


मैंने कहा- “पहली बार तो इतना दर्द हुआ था की लगने लगा था जैसे मर जाऊँगी। पर अब मजा आता है…”


दीदी हँसते हए बोली- “पागल पहली बार तो सबको दर्द होता है। पर मजा लेने के लिए थोड़ा सा दर्द तो सहना ही पड़ता है..” फिर दीदी ने मुझसे पूछा- “आपका लण्ड कितना बड़ा है?”


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मैंने उनको जब बताया तो एकदम से उनके चेहरा के भाव बदल गये थे। ऐसा लग रहा था जैसे की उन्हें मुझसे जलन होने लगी हो। फिर अन् दीदी के मुंह से निकला- “हाय राम… इतना बड़ा लण्ड… काश मुझे भी मिलता..”


मैंने दीदी से कहा- “जीजू का छोटा है क्या?”


दीदी ने कहा- “नहीं। इतना छोटा भी नहीं है पर तेरे वाले का साइज इनसे बड़ा है। पर मुझे तो जो मिलना था मिल गया अब क्या होना है?” फिर दीदी ने मुझ से पूछा- “वो तुझं रोज चोदता है या कभी-कभी?”


तब मैंने बता दिया- “मुझं रोज ही चोदते हैं, और कई बार तो दो-दो बार भी हो जाता है, और हम तो अब नई नई स्टाइल में सेक्स का मजा लेते हैं…’ कहकर ऋतु ने मुझे शरारत से देखा।


में भी मुश्कुरा पड़ा। मुझे अब्ब मजा आने लगा था। क्योंकी ऋतु अब सब बात बिना शर्माये बता रही थी। मैंने कहा- “फिर उनका क्या रिएक्सन था?”


दीदी ने ये सुनकर आइ: भरी और बोली. “हम तो सिर्फ अपनी टांगों को फैलाकर पड़ जाते हैं, और वो अपना काम निकालकर मुँह फेर के सो जाते हैं। मैं सारी-सारी रात आग में झुलसती रहती हैं, उनको कुछ खबर ही नहीं होती…”


मैंने ऋतु में कहा- “अनु से तुमने ये नहीं पूछा की वो लोग ओरल सेक्स करते है या नहीं?”


ऋतु बोली- “मैंने पूछा था पर वो बोली की जीज सीधा चुदाई करने लग जाते हैं और कुछ नहीं करते। अगर मैं कहूँ भी तो मेरी बात टाल देते हैं। जीजू दीदी की सिर्फ उसी चीज को ही काम में लेते हैं, बाकी उनको कुछ नहीं करना होता…


मैंने कहा- उसी चीज का मतलब?


ऋतु ने शर्माते हए कहा- “जाओ मैं आपसे बात नहीं कर रही। आप मेरे मुँह से क्या-क्या बुलवा रहे हो?”


मैंने कहा- “अच्छा-अच्छा मैं समझ गया। तुम आगे बताओं और क्या कहा अनु ने?”


ऋतु बोली- “फिर मैंने और दीदी ने एक दूसरे की चूचिया दबाड़ और एक दूसरे की….”


मैंने कहा- “साफ-साफ बताओ ना?”


ऋतु बोली- “आप समझ जाओ ना.”


मैंने कहा- “मुझे समझ में नहीं आया, तुम साफ बता दो। अब सब बता दिया फिर क्यों शर्मा रही हो?”


ऋतु ने कहा- “हम दोनों ने एक दूसरे की चूत को चाटा…”


मैंने कहा- अन् को मजा आया?


मैंने कहा- “मुझे समझ में नहीं आया, तुम साफ बता दो। अब सब बता दिया फिर क्यों शर्मा रही हो?”


ऋतु ने कहा- “हम दोनों ने एक दूसरे की चूत को चाटा…”


मैंने कहा- अन् को मजा आया?


ऋतु ने कहा- “वो तो पागल हो गई थी, बोली की मैंने आज तक इतना सुख कभी नहीं पाया, जितना तूने मुझे दिया है। और आपको पता है मैंने जब दीदी से कहा की मैं तो कुछ भी नहीं करना जानती जितना बो (मेरे लिए) जानते हैं। वो जब मेरी चूत को चाटते हैं तो ऐसा लगता है जैसे मैं स्वर्ग में आ गई हैं..” कहते-कहते उसने अपनी निगाहों को मुझसे चुरा लिया।


मैंने कहा- “तुमने मुझे तो ये बात कभी नहीं बताई की मैं जब तुम्हारी चूत चाटता हूँ, तुम स्वर्ग में चली जाती हो.”


ऋतु बोली- “आपको क्या बताऊँ मैं… आपको खुद पता चलना चाहिए…”


मैंने कहा- “हाँ, ये तो मेरी कमी है। चलो अब पता चल गया…” और मैं उसको बोला- “अब मैं तुमको इससे भी ज्यादा मजा दूंगा..”


फिर मैंने कहा- “तुम्हारी दीदी ने फिर क्या कहा?”


ऋतु बोली- “उन्होंने कहा तो कुछ भी नहीं पर आपकी बातें मुझसे सुन-सुनकर उनको कुछ हो जाता था.”


मैंने ऋतु से कहा- “ऋतु एक काम करोगी?”


ऋतु ने पूछा- क्या?


मैंने कहा- “आज रात को तुम अपनी दीदी के साथ जब बात करो, तब अपने मोबाइल में रेकार्ड कर लेजा। पर ये बात अनु को पता नहीं चलनी चाहिए की बातें रेकार्ड हो रही हैं..”


ऋतु मेरी बात सुनकर बोली- “सर, ये ठीक नहीं है, मैं ऐसा नहीं करूँगी। दीदी मुझे अपना समझकर मेरे से बात करती हैं, मैं उनको धोखा नहीं दे सकती.”


मैंने ऋतु से कहा- “तुम मुझसे ऐसी बात कर रही हो? मैं क्या गैर हैं? मैं तो ये देखना चाहता हूँ की तुम लोग कैसी बात करते हो। मुझे आज तुमने जो बातें बताई हैं, उनको सुनकर ही इतना उत्तेजित हो गया है और जब मैं तुम लोगों की असली आवाज में बातचीत सुनूँगा, तो उसमें कितना मजा आएगा?”


ऋतु बोली- “नहीं सर। में आपको जो भी बात होगी सब आकर बता दूँगी । पर प्लीज… आप मुझे ये सब करने को मत कहिए…”


मैंने ऋतु को एमोशनल ब्लैकमेल करते हुए कहा- “मैं तुमको अपनी बाइफ समझता हैं, और तुम मेरी इतनी छोटी सी बात नहीं मान सकती। तम्हारी इस बात से मझे लग रहा है की तम मुझे अपना हब्बी नहीं मानती। अगर मानती होती तो अपने हब्बी के लिए इतना भी नहीं करती?” मेरा तीर सही निशाने पर लगा।


ऋतु ने हथियार डाल दिए और बोली- “मैं आपकी बात मानकर जैसा आप कहोगे वैसा करेंगी। पर आप कभी ऐसा नहीं कहना…”


मैंने कहा- “अपने मोबाइल की रेकार्डिंग जरा चेक करवाओं मुझे?”


फिर मैंने उसके मोबाइल मैं अपनी आवाज की काई करी और सुनी। मस्त साफ आवाज थी। मैं खुश हो गया। मैंने मन में सोचा मोबाइल की कीमत डबल हो गई।


मैने ऋतु को कहा. “अब तुम जाओ। तुम आराम करोगी तभी रात को बातें करोगी..’


ऋतु चली गई।

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अगले दिन सुबह जब मेरी नींद खुली तो सबसे पहले दिमाग में यही बात आईकी ऋतु में रंकाई की होगी या नहीं? अगर की होगी तो क्या होगा? और फिर इतने में आफिस जाने का टाइम हो गया। मैं जल्दी से आफिस चला गया।


ऋतु अभी तक नहीं आई थी में उसका इंतजार करने लगा। ऋतु को देखकर मुझं चैन मिला।


मैंने उसको अपने केबिन में आते ही पीछे से पकड़ लिया, और उसकी दोनों चूचियों को अपने हाथ से दबाता हुआ बोला- “मेरी जान आज बड़ी प्यारी लग रही हो..” और उसकी गाण्ड से रगड़ खाकर मेरा लण्ड खड़ा हो गया तो मैंने उसको कहा- “पहले ये बताओं वो काम हुआ या नहीं?”


ऋतु ने अपना मुँह बनाते हुए कहा- “सारी कल मेरी दीदी से बात ही नहीं हो पाई..”


मैंने कहा- क्यों?


उसने कहा- “कल शिल्पा भौहमारे पास सोने की जिद करने लगी। उसके सामनें कैसे बातें होती?”


मैं अपना मन मसोसकर रह गया। मैंने कहा- “मुझे पता था कोई ना कोई गड़बड़ जरूर होगी…”


ऋतु ने मेरी तरफ बड़े प्यार से देखा और कहा- “कोई बात नहीं। आपको वैसे भी सिर्फ सुनकर मजा ही तो लेना

था, वो तो आपको वैसे ही आ रहा है..”


मैंने कहा- कहां आ रहा है?


ऋतु ने मेरे लौड़े को पकड़ते हुए कहा- “इतनी देर में ये मुझे चुभ रहा है इसलिए.”


मैंने कहा- “वो तो तुम्हारी गाण्ड की गर्मी से हो गया..” फिर मैंने कहा- “अब मैं तुम्हें कोई काम नहीं कहंगा.”


ऋतु ने जब मैरा मूड खराब होते देखा तो ऋतु जोर से हँसने लगी और बोली- “मैं तो आपको बना रही थी..


मैंने कहा- क्या मतलब?


उसने कहा- आपका काम हो गया है।


मैंने खुशी से उसको चूमकर कहा- “सच?”


उसने कहा- “लीजिए सुन लीजिए..”


मैंने उसका सेल लिया और रेकार्डिंग की फाइल को प्ले किया और सुनने लगा।


एकदम से ऋतु में कहा- “जरा रुकिये.”


मैंने बंद कर दिया।


ऋतु बोली- “आप इसको सुन लीजिए। मैं बाकी काम निपटाकर आती हूँ..”


मैंने कहा- “बाद में कर लेना…”


ऋतु ने कहा- “इसको सुनने के बाद आप मुझे कोई काम नहीं करने दोगे…”


ऋतु बोली- “आप इसको सुन लीजिए। मैं बाकी काम निपटाकर आती हूँ..”


मैंने कहा- “बाद में कर लेना…”


ऋतु ने कहा- “इसको सुनने के बाद आप मुझे कोई काम नहीं करने दोगे…”


मैं समझ गया की इसमें सब लण्ड खड़ा करने वाली बातें हैं। मैंने कहा- “चलो तुम काम निपटाकर आओ मैं सुनता हूँ..” मैंने फिर से प्ले किया पर सुनकर यकीन नहीं हो रहा था मुझे अगर ऋतु की आवाज की पहचान नहीं होती तो मैं इस रेकार्डिंग को नकली ही समझता। बातचीत कुछ इस तरह थी। आप लोग यकीन माना या ना मानो, मैंने स्टोरी के इस पार्ट को लिखने से पहले आज वो कार्डि फिर से सनी, और अल्लमोस्ट मैं सेम लिख रहा है।


अन्- और आज आफिस में कैसा रहा?


ऋतु- जैसा रोज होता है।


अनु- आज कुछ हुआ नहीं क्या, या मोका नहीं मिला?


ऋत्- क्या दीदी आप भी ना… हर टाइम सिर्फ सेक्स के बारे में सोचती रहती हो।


अनु- अरे मुझसे क्या छुपा रही है, बता ना आज तुम लोगों ने सेक्स किया?


ऋतु- नहीं दीदी, मैं आज बहुत थकी थी फिर उनको भी लग रहा था की मैं थकी है। इसलिए आज कुछ नहीं हुआ बस किस ही किया उन्होंने।


अनु- इसका मतलब बो तेरी फीलिंग को देखकर सेक्स करता है?


ऋतु. ही दीदी सच में वो बड़े अच्छे हैं। उनको मेरी छोटी से छोटी प्राबलम भी अपनी लगती है। सच में वो मझे बड़ा प्यार करते हैं।


अनु- मैं तो आज सोच रही थी की तो से मजेदार किस्सा सुनेंगी। तनें तो सच मजा ही खराब कर दिया। चल में बता बो तुझें सेक्स करने से पहले क्या-क्या करता है। पर सब साफ-साफ बोलियो उसमें मजा आता है।


ऋतु- यार दीदी आपको भी ना… चलो मैं आपको सब साफ-साफ ही बताती हैं। सबसे पहले वो मुझे पूरा नंगी करते हैं, फिर वो मेरी एक चूची को चूसते हैं, और दूसरी का निप्पल मसलते हैं। फिर उनका हाथ मेरी गाण्ड पर आ जाता है। वो मेरी गाण्ड को कस-कस के मसलते हैं। मैं उनका लण्ड पकड़कर हिलाती रहती हैं फिर बो मेरी चूत में अपनी उंगली डाल देते हैं। उनकी उंगली पता नहीं क्या करती है की मेरी चूत गीली हो जाती है। वो मेरे दाने को मसलते हैं तो अहह…” साथ में अन् की भी आह्ह… निकलती है।


अन्- हाँ यार सच में… अगर कोई दसरा मेरे दाने को रगड़े तो मजा आ जाए। पर वो तो मेरी चूत को देखते भी नहीं।


ऋतु- दीदी आप उनसे कभी कहो ना की आपको ये सब अच्छा लगता है।


अनु- उहह… क्या कहूँ उनका एक ही डायलाग होता है की ‘अनु मुझे सुबह जल्दी उठना है टाइम मत खराब करो जल्दी से पैंटी उतारी और बस ना किस ना चूची दबाते हैं। मेरा इतना मन करता है की वो मेरी चूचियों को मसल दें, और अपने मुँह में लेकर चूसें। पर कुछ भी नहीं करते। बस लण्ड को चूत में डालकर धक्के मारते हैं, दो-चार मिनट में झड़कर बोलते हैं- गुड नाइट…”


ऋतु- “दीदी, आप उनको बायफ्रेंड दिखाओ। हो सकता है उसे देखकर उनका मइ चेंज हो जाए..”


अनु रुचांसी आवाज में. “अरे यार मैं सब ट्राई कर चुकी हैं। वो बायफ्रेंड देखकर भी कुछ नहीं करते। उनका दिमाग सिर्फ अपना पानी निकालने में रहता है। दूसरे के एमोशन्स की कोई परवाह नहीं। अब में अगर ज्यादा कुछ बोलूगी तो पता है उनके दिमाग में यें आएगा की मैं उनसे खुश नहीं हो पाती, और कहीं वो मुझे गलत समझ बैठे तो पता नहीं क्या होगा? हौँ फिर त बता ना… तेरी चत पनिया जाती हैं फिर?”


ऋतु- हाँ फिर में उनका लण्ड अपने मुँह में लेकर चूसती हैं, उनके लण्ड से हमेशा स्वीट सी महक आती है। मन करता है चूसती ही रहा


अन्- “किस टाइप की महक समझी नहीं मैं?” मैंने पहले भी लिखा हैं मैं अपने लण्ड पर डी.ओ. लगाता हैं।


ऋतु- अब मैं आपको कैसे समझाऊँ? जैसे की भीनी-भीनी खुशबू आती है।


अनु- फिर वो तेरी चूत कब चाटता है? उसका लण्ड जब तैयार हो गया तो वो चूत में नहीं डालता क्या?


ऋतु- दीदी नही तो खासियत है उनकी। वो बड़े धैर्य वाले हैं। पहले मैं उनका लौड़ा चूसती है, उसके बाद वो मेरी चत को बड़ी मस्ती से चाटकर तैयार करते हैं। पता है मैं तो उनका लण्ड डालने से पहले ही झड़ जाती हैं। उनकी जीभ भी उनके लण्ड की तरह है।


अन्- हे में तो सुन-सुन केही पनिया गई। अच्छा फिर उसके बाद?


ऋतु- वो मेरी चूत को चाटकर गीली कर देते हैं उसके बाद मुझे फिर से अपना लौड़ा चुसवाते हैं। फिर वो मेरी चूत में अपना लौड़ा डालते हैं, और लौड़ा डालकर रुक जाते हैं। मेरी हालत खराब हो रही होती है।


फिर मुझे कहेंगे. “बताओ चुदना है?”


मैं कहती हूँ- “हो…


फिर कहेंगे- “मैंह से बोलो..”


और जब तक मैं ना कहूँ की- “प्लीज मुझे चोदो.” तब तक धक्के नहीं मारते।


अनु- इस बात का क्या मतलब हुआ?


ऋतु- अरे बाबा वो मुझे इतना गरम कर देते हैं अपनी हरकतों से की मैं उनको खुद कहने को मजबूर हो जाती हैं, और उसके बाद तो बस उनकी स्पीड हाईईई… वो जब तक 8-10 मिनट तक धक्के ना मारें उनका झड़ता ही नहीं।


अन् की चौंकाने वाली आवाज- “क्याउ:58-10 मिनट?”


ऋतु- ही दीदी इससे कम कभी नहीं लगता।


अनु- तुझ टाइम का आइडिया नहीं है, तू गलत सोच रही है।


ऋतु-दीदी मैं भी पही सोचती थी। पर मैंने जब टाइम चेक किया तब मैं मान गई।


अनु- है राम… आदमी है या घोड़ा? होहोहोही..” और हँसती है।


ऋतु- हाँ दीदी, यही समझ लो वो घोड़े जैसे हैं। मुझे जब घोड़ी बनाते हैं तो मुझे ऐसा लगता है मैं सच में घोड़ी


अनु- “अच्छा-अच्छा में बता वो तुझं आगे से ही चोदता है या कभी पीछे से भी कहता है हम्म्म्म

..”


ऋतु- पीछे से मतलब डागी स्टाइल में?


अन्- अरे यार गाण्ड में… तु भी पागल है।


ऋतु- “तो इसमें क्या बात है? मैने कई बार पीछे भी डलवाया है आप लोग करते हो या… ….”


अन्- “ओहह… त कैसे करवाती है? मैंने तो सुना है उसमें गाण्ड फट जाती है, बड़ा दर्द होता है। मैंने तो कभी ट्राई किया ही नहीं, बस सुना है…”


ऋतु- “दीदी, मैंने भी सुना था और मैंने जब पहली बार उनसे गाण्ड मरवाई तो मुझे भी डर लग रहा था। पर वो सच में जो भी करते हैं, उसमें मजा आता है।


अनु- अच्छा ये बता वो गाण्ड मारने से पहले क्या करता है? कीम तो लगाता ही होगा?


अन्- “ओहह… त कैसे करवाती है? मैंने तो सुना है उसमें गाण्ड फट जाती है, बड़ा दर्द होता है। मैंने तो कभी ट्राई किया ही नहीं, बस सुना है…”


ऋतु- “दीदी, मैंने भी सुना था और मैंने जब पहली बार उनसे गाण्ड मरवाई तो मुझे भी डर लग रहा था। पर वो सच में जो भी करते हैं, उसमें मजा आता है।


अनु- अच्छा ये बता वो गाण्ड मारने से पहले क्या करता है? कीम तो लगाता ही होगा?


ऋतु- “वो तो लगानी ही पड़ती है। पर जब वो अपनी उंगली से लगाते हैं तब बड़ा मजा आता है। गाण्ड में सुरसुरी हो जाती है…


अनु- हाय रे कितना अजीब लगता होगा गाण्ड में उंगली इलवाना? और उसको कुछ गंदा नहीं लगता उंगली करने में


ऋतु- नहीं वो बड़े ही प्यार से उंगली डाल-डाल के गाण्ड को बिल्कुल मुलायम कर देते हैं।


अनु- पर गाण्ड तो बो निरोध लगाकर ही मारत होगा?


ऋतु- नहीं दीदी, बो कभी निराध इस्तेमाल नहीं करते। आज तक कभी नहीं किया।


अनु- पर जब गाण्ड मारने में उसके लौड़े पे शिट लग जाती होगी तो उसको घिन नहीं आती क्या?


ऋतु. “दीदी आप भी ना पता नहीं क्या-क्या बोलती हो? अरे बाबा कहा ना वो इन सब बातों से नहीं घबराते। मैंने उनको कहा था एक बार तो वो बोलें- “मैं अपने नंगे लण्ड से ही चोदूँगा’ जब उनको अच्छा लगता है तो मैं क्यों मना करंग?”


अनु- चल यार, आज तेरे से सुना है मैंने की लोग बिना निराध के भी कर लेते हैं। पर एक बात बता बायफ्रेंड में जो गाण्ड मारते हैं, उनका लण्ड कभी नहीं गंदा होता। वो क्या करते होंगे?”


ऋत्- “मैंने भी इनसे पूछा था, तो उन्होंने बताया था की वो औरतें पहले एनीमा करवाती हैं। इसलिए उनकी गाण्ड साफ रहती है। पर उसमें आदमी को मजा नहीं आता। अगर गाण्ड का असली मजा लेना है तो ऐसे ही गाण्ड मारनी चाहिए, उसी में मजा आता है.”


अनु- बड़ा ही तजुर्बे वाला लगता है।


ऋतु- हाँ दीदी मुझे उन्होंने खुद ही बताया था की वो सैकड़ों चूत मार चुके हैं। अब इतनी चूत मारने वाले का तजुर्बा तो होगा ही।


अनु- हाँ ये भी है। पर अगर वो सच बोल रहा है तो वाकई जो भी उससे चुदी होंगी, सब उसको याद करती होंगी।


ऋतु. “जैसे मैं याद कर रही हूँ हेहेहेहे..”


अनु- “हेहेहेहे..


ऋतु- दीदी, मैं तो उनको अब किसी काम के लिए मना नहीं करती। मझे पता है ये जो भी नया करेंगे बा मस्त ही होगा।


अनु- काश हम भी मजा ले सकते ऐसे लण्ड से? हमें तो एक जैसा खाना खाने की सजा मिली है।


ऋतु- दीदी एक बात बताओ, अगर आपको मौका मिले तो आप क्या करोगी?


अनु- “अरे यार मुझे अगर ऐसा मोके मिला तो मैं उसके लण्ड को अपनी चूत में डालकर पूरा दिन निकालने ही नहीं दूंगी हेहेहेहे..”


ऋतु- “हेहेहेहे… दीदी अगर आपको सूम आ गया तो कैसे करोगी? हेहेहेहे..”


अनु- “उसके लण्ड पा कर दूँगी हेहेहेहे..”


फिर ऋतु की आवाज़ आती है- “दीदी आप कब से कर रही हो?”


अनु- हाईई इतनी मस्त बातें सुन-सुनकर रुका जाता है क्या?


ऋतु- आप भी बड़ी चंट हो, चुपचाप अपना काम कर लिया।

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अनु- अरे यार क्या काम कर लिया? इससे तो और आग लग रही देख जरा।


एक मिनट के बाद।


ऋतु- हाय रे दीदी.. आपनें कितना पानी छोड़ा हुआ है?


अनु- ऋतु प्लीज… आज जरा मुझं वैसे ही मजा दें, जैसे समीर तुझे देता है। उसके जैसे चाटकर दिखा तो सही।


ऋतु- मुझे क्या पता वो कैसे करते हैं?


अनु- तू जब चटवाती है तो पता नहीं चलता होगा?


ऋतु- मुझे होश कहा होता है?


अन्- चल फिर भी जितना पता है उतना तो कर।


इसके बाद अनु की मस्त सिसकियां चलती रहती हैं।


अनु- हायइंडई… आह्ह… बस्स ऐसे ही कर आईई… जुल्मी उईईई… आआआ..”


मैंने स्टाप कर दिया। मैंने जितना सोचा था उससे कहीं ज्यादा था उस रेकार्डिंग में मेरे लिए। मैं रेकॉडिंग सुनकर अपने लौड़े को कंट्रोल में नहीं रख पाया।


मैंने ऋतु को बुलाया और कहा- “अब्ब कोई काम नहीं करना, बस मेरे लण्ड को ठंडा कर दो.”


ऋतु ने कहा- “मुझे पहले ही पता था.”


मैंने कहा- “कैसे पता था?”


ऋतु बोली- “मैंने सुबह रेकार्डिंग चेक करने के लिए सुनी थी..”


मैंने ऋतु को अपनी ओर खींच लिया और कहा- “चलो जल्दी से अपनी सलवार खोलो। मुझे तम्हारी चत का रस पीना है.

ऋत् ने कहा- इतने जोश में आज आपको देखकर कुछ-कुछ हो रहा है।

मैंने कहा- जल्दी करो, नहीं तो सलवार फाड़ दूँगा।


ऋतु में जल्दी से अपनी सलवार उतारी। मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को अपने मुँह में दबा लिया। ऋतु की मस्ती में सिसकी निकल गई- उईई… इस्स्स्स … आहह..” मैंने उसकी चूत को अपने दांतों से कसकर दबा रखा था, जैसे कोई लेंग-पीस हो, और फिर मुझ ऋतु की चूत के पानी का टेस्ट मिलने लगा। उसकी चूत में पानी छोड़ दिया था। मैंने बिना रुके उसकी पैंटी उतार दी और उसको सोफे पर लिटा दिया। उसके मैंह पर अपना लण्ड रखते हुए उसकी चूत पर झुक गया।


जैसे ही मैंने उसकी चूत में अपना मुंह लगाया उसकी फिर से सिसकी जिकली. आहहह। मैंने उसकी चूत की फांकों में अपनी जीभ सा दी। ऋतु भी कहां होश में थी, उसने मेरा लौड़ा झट से अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। अब हम दोनों 69 पाज में थे। मैंने अपनी जीभ का और घुसा दिया। अब तो ऋतु को जैसे कुछ होने लगा हो। वो मेरे लण्ड को अपने मुह में ऐसे चूसने लगी जैसे बकरी का बच्चा बकरी का धन चूसता है।


च-बीच में उसकी चूत का दाना भी अपने हाथ से रगड़ देता था, जिससे उसका मजा दोगुना हो जाता था। फिर मैंने उसकी चूत के ऊपर अपनी जीभ ऐसे फिरानी शुरू की जैसे कोई बिल्ली मलाई चाट रही हो। मेरा पूरा चेहरा ऋतु के पानी से चिपचिपा हो गया था। ऋतु की सिसकियां मुझे अब और तंज सुनाई देने लगी।


ऋतु- “उहह … आह्ह… ओहह … हाईईई… आआआ..”


मैं समझ गया इसको अब पूरा मजा मिल गया है। मेरे लण्ड का भी कुछ यही हाल था। मैंने उसके मुँह में अपना लण्ड काफी अंदर तक घुसेड़ दिया। इस पोज में उसका मुँह मेरे लण्ड की सीध में था। मुझे अपना लण्ड उसके गले में जाता महसूस हो रहा था। पर ऋतु बिना किसी पर शनी के गले तक लण्ड ले रही थी, और जब मेरा झड़ा तो सीधा उसके गले में जाकर झड़ा। फिर में ऋतु के मुँह में ही डालकर पड़ा रहा। वा उसको चूमती चाटती रही।


जब उसने मेरे लण्ड को चाट चाटकर परा साफ कर लिया तो बोली- “अब तो उठ जाइए.”


मैंने कहा- अब बताओं चुसाई में मजा आया?


ऋतु ने मुझे चिढ़ते हुए कहा- “नहीं..”


मैंने कहा- “चलो फिर से चाट देता हैं.”


ऋतु बोली- “नहीं जी अब हिम्मत नहीं है मुझमें। आपको क्या पता मेरी टाँगें काँप रही हैं। मुझे अभी तक अपनी चूत फा आपकी जीभ महसूस रही है..”


मैंने हँसते हुए कहा- “तुमने अनु को कल जब चाटा तब उसका क्या हाल था?”


ऋतु बोली- “वो तो मस्ती में पता नहीं क्या-क्या बोल रही थी?”


मैंने कहा- “तुम अगर बुरा ना मानो तो एक बात कहूँ?”


ऋतु ने कहा- “मैं आपकी किसी बात का बुरा नहीं मानेंगी, आप कहो…”


मैंने कहा- “मैं तुम्हारी बहन की चूत भी एक बार चाटकर देखना चाहता हैं…”


सुनते ही ऋतु बोली- “उधर वो आपकी बातें करती है, और इधर आप उनकी। लगता है आप दोनों को एक बार मिलवाना पड़ेगा…”


मैं इस बात को सुनते ही खुशी से ऋतु का अपनी बाहों में लेकर उसकी चची मसलते हए बोला- “सच तुम ऐसा कर सकती हो क्या?”


ऋतु बोली- “मैं क्यों कर? मुझे क्या आप दोनों से कुछ मिलना है, जो में ऐसा कर?”


मैंने कहा- “अभी तो तुमनें कहा था..”


ऋतु बोली- “वो तो मेरे मुँह से निकाल गया…”

मैंने कहा- प्लीज एक बार मिलवा दो ना?


ऋतु ने कहा- “आपको मिलवा दिया तो आप उनके पीछे पड़ जाओगे। फिर मेरे लिए आपके पास टाइम ही नहीं होगा। ना बाबा ना… मैं नहीं करूंगी…”


मैंने कहा- प्लीज एक बार मिलवा दो ना?


ऋतु ने कहा- “आपको मिलवा दिया तो आप उनके पीछे पड़ जाओगे। फिर मेरे लिए आपके पास टाइम ही नहीं होगा। ना बाबा ना… मैं नहीं करूंगी…”


मैंने उसको कहा- “वो तो यहां से 5-7 दिन में चली जायेगी। तुम तो मेरी लाइफ में हमेशा रहोगी। तुम मेरे लिए इतना भी नहीं करोगी?”


अतु ने कहा- “मुझे क्या मिलेगा? मैं क्यों करंग ये काम?”


मैंने उसको कहा. “तुम जो माँगोगी मैं तुमको दूंगा..”


सुनते ही ऋतु ने कहा- “ओके… मैं आपका काम कर दूंगी। पर मैं जो कहूँगी आपको करना पड़ेगा…”


मैंने कहा- “पक्का… तुम जो कहोगी मैं वो करूंगा.”


ऋतु ने कहा- “इसके लिए आपको मेरे घर आना होगा। मैं आपको कहीं बाहर चलने को कहूँगी। दीदी को मना कर साथ ले चलेंगे। इसी बहाने उनसे आपकी बात बन जाएगी.”


मैंने कहा- “ठीक है। मैं कब आऊँ?”


ऋतु ने कहा- आज ही आ जाइए।


मैंने कहा- मैं किस बहाने से आऊँगा?


ऋतु ने कहा- आप उनके बेबी को देखने के बहानें आ जाना।


मैंने कहा- अबें ही यार ये आइडिया सही है।


शाम को करीब 7:00 बजे ऋतु का फोन आया- “आपके काम की शुरुवात मैंने कर दी है। आप मेरे घर आ जाओ। मैं आपकी दीदी से मीटिंग करवाती हैं…”


मैंने कहा- “मैं आता है.” कहकर में जल्दी से तैयार हआ और ऋतु के घर पहुँच गया।


वहां जाते ही ऋतु की स्माइल से मैं समझ गया की उसने कोई चाल चलकर काम बना दिया है। मैं जैसे ही रूम में एंटर हुआ, साफ पर अन् बैठी थी। उसकी गोद में उसका बेबी था।


आनु मुझे देखते ही बोली- “आइए सर, नमस्ते..”


मैंने भी उसको स्माइल देते हुए कहा- “नमस्ते..”


शोभा बोली- “आइए सर बैंठिए…”


मैंने कहा- “मुझं ऋतु ने बताया की आप आई हुई हैं, तो मैंने सोचा मैं आपके बेबी को देख आऊँ..”


इतने में शोभा में अनु की गोद में बैबी को ले लिया और मेरे पास ले आई। मैंने उसको अपनी गोद में लिया

और देखकर कहा- “बड़ा प्यारा बेबी है.” और मैंने अपनी जेब से ₹1000 का नोट निकाला और उसको दे दिया। मैंने इसको पहली बार उठाया है शगुन तो बनता है।


अनु और शोभा दोनों एक दूसरे को देखने लगी। अन् बोल पड़ी. “सर ये क्या? इतने सारे मत दीजिए…”

मैंने मुश्कुरा के कहा- “मैंने बेबी को दिया है। आप कुछ ना बोलिए.”


अनु बोली- “पर सर……..”


मैंने उसको रोकते हुए कहा- “प्लीज आप कुछ नहीं कहेंगी…”


इतने में ऋतु बोली- “दीदी कोई बात नहीं रख लीजिए। बार-बार कहने से उनको बुरा लगेगा..”


अनु चुप हो गई। फिर मैंने देखा अनु मुझे अलग ही नजरों से देख रही है। फिर दुनियादारी की बातें होती रही।


मैंने कहा- “अच्छा अनु जी आपसे मिलकर बड़ा अच्छा लगा। आप तो अभी यहां है किसी दिन ऋतु के साथ मेरे घर आइए डिनर पर, मुझे बड़ी खुशी होगी… फिर मैंने कहा- “अच्छा मैं चलता है.”


अनु बोली- “अरे आप अभी तो आए हैं, अभी जा रहे हैं। डिनर करके जाइए ना..”


मैंने कहा- नहीं नहीं थैक्स। मैं तो बिना बताए आ गया। आप परेशान नहीं होइए।


अनु समझ गई मुझे पता है की अभी डिनर की कोई तैयारी नहीं है। अनु ने ऋतु को देखा।


ऋतु ने कहा- चलिए आज कहीं बाहर डिनर कर के आते हैं।


मैंने कहा- “ओके… पर एक शर्त पर। डिनर मेरी तरफ से होगा…”


ऋतु बोली- “ऐसा कैसे हो सकता है? आप हमारे घर आए हैं, हम आपको लेकर जाएंगे.”


मैंने ऋतु को कहा- “फिर मैं नहीं जाने वाला..”

सुनकर ऋतु शरारत से बोली- “अच्छा सर, आपकी जैसी मज़ीं। वैसे भी आपके आगे किसी की चलती है क्या? सर हम 10 मिनट में तैयार हो जाएंगे। तब तक आप मम्मी से बात कीजिए..”


अनु, शिल्पा, मैं और ऋतु सब घर से निकले। मैं सबको अपनी पसंद के रेस्टोरेंट में ले गया।


वहां जाकर शिल्पा अनु से बोली- “अनु दीदी यहां का खाना बड़ा टेस्टी होता है…”


मैंने शिल्पा को देखा और उसको कहा- “तुम यहां पहले भी आई हो?”


शिल्पा बोली “नो सर, पहला टाइम आई हैं। वो तो मेरी दोस्तों ने बताया था इसलिए मैंने कहा..”


मैंने कहा- “चलो आज खुद ही टेस्ट करके देख लेना..”


हम सब अंदर जाकर बैठ गये। टेबल के इस साइड में अनु और शिल्पा थी। ऋतु और मैं दूसरी साइइ थे। मेरे सामनें अनु थी मैंने उसको पूछा- “डिनर से पहले क्या लेंगी आप?”


अनु बोली- “जो आप लेंगे..”


मैंने कहा- “मैं बियर पियूँगा। अगर आपको भी बियर पीनी है तो आईर कर…”


अनु ने कहा- “नहीं नहीं मैंने कभी नहीं पी.”


मैंने मुश्कुराते हुए कहा “आप सूप पीजिए। मैं बियर पियूँगा तो आपको बुरा तो नहीं लगेगा?”


अनु ने स्माइल देते हुए कहा- “नहीं आप लीजिए, मुझे कोई बुरा नहीं लगेगा..”


मैंने वेटर बुलाया और आईर दिया, 3 सूप और एक बियर का। 5 मिनट में आईर सर्व हो गया। मैंने अपने ग्लास को उठाते हुए सिप किया, और कहा- “आपको और क्या-क्या पसंद है?”


अनु ने कहा- “मुझे पहाड़ों पर जाना बहुत पसन्द है.”


मैंने कहा- “आप नैनीताल गई हो?”


उसने बताया- नहीं।


मैंने कहा- “आप जब से यहां आई हो कहीं घुमने गई या नहीं?”


अनु ने कहा- “कैसे जाएं ऋतु जाब पर चली जाती हैं। शिल्पा कालेज। मम्मी और मैं घर पर ही टाइम पास कर लेते हैं। कहीं जाने का मौका ही नहीं मिलता…


मैंने कहा- “आप जब से यहां आई हो कहीं घुमने गई या नहीं?”


अनु ने कहा- “कैसे जाएं ऋतु जाब पर चली जाती हैं। शिल्पा कालेज। मम्मी और मैं घर पर ही टाइम पास कर लेते हैं। कहीं जाने का मौका ही नहीं मिलता…


मैंने कहा- “अगर आप कहो तो हम सब जैनीताल चलें एक दिन के लिए। पर आपका मूड हो तब मैं पायाम बनाऊँ..” कहकर मैंने अनु को देखा।


अनु ने हिचकते हुए कहा- “एक दिन में आना जाना मुश्किल हो जाता है, और मेरा बेबी अभी छोटा है। मुश्किल हो जाएगा… फिर बोली- “रहने दीजिए…”


मैंने कहा- “अरें इसमें क्या बात है? आप, मैं, ऋतु सब चलते हैं और मैंने शिल्पा से कहा- तुम भी चला…”


शिल्पा बोली “नहीं सर, मुझे तो कालेज में काम है। मैं नहीं जा सकती…”


ऋतु ने कहा- “दीदी चलो ना… बड़ा मजा आएगा, खूब मस्ती करेंगे वहां…”


अनु बोली- “मम्मी जाने देंगी तब ना?”


मैंने कहा- “आप उनकी चिंता मत करो। उनको मैं समझा लेंगा। बस आप ही करो…”


अनु बोली- “मेरी तो कोई मना नहीं है…”


मैंने कहा- फिर ठीक है। हम सब परसा चलते हैं, सथ ही अगले दिन ऑफिस भी आफ है। आराम भी हो जाएगा..”


ऋतु बोली. “सर इतनी दूर एक दिन में आना जाना हो जाएगा?”


मैंने कहा- “हम सुबह जल्दी निकाल जाएंगे। रात तक आ जाएंगे, 4-5 घंटे वहां मस्ती हो जाएगी…”


ऋतु बोली- “ये ठीक है..”


इतने में डिनर लग गया। हम सब डिनर करने लगे। अत् बार-बार मेरी प्लेट से खाना खा रही थी।


अनु सब देख रही थी। जब अनु से रहा नहीं गया तो बोली- “आप दोनों तो एक प्लेट में ही खा लेते हैं….’


मैंने हँसते हुए कहा- “इसको चिड़िया की तरह चुग्गै मारने की आदत है..”


ऋतु शर्मा गई और अनु हँस पड़ी बोली- “यही तो प्यार होता है.”


फिर डिनर के बाद हम वहां से निकले तो रास्ते में ऋतु बोली- “मुझं कुलफी खानी है.”


मैंने कहा- “ओके खिलाता है…” और एक जगह कार रोकी और कुलफी का आईर दिया। 4 कुलफी कार में आ गई। ऋतु में जल्दी से अपनी कुलफी खा ली।


मैंने कहा- “और खानी हैं तो बोलो..”


ऋतु ने कहा- “नहीं खानी..” फिर एकदम से मेरी कुलफी लेकर खाने लगी।

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