मां बेटी और बेटा CHAPTER 3

  

            मां बेटी  और बेटा  CHAPTER 3




तो ये बात थी दीदी। तुम ही बोलो हम कुच्छो गलत बोले थे। उसपर हमको दो थप्पड़ मारे काल रात में।” माया सुबकते हुए बोली। 

ममता तुमने फिर क्या किया? शशीजी को पलट के कुछ कहा तो नहीं? 

माया- नहीं दीदी, माँ के संस्कार हमको याद हैं, कैसे भी हैं पति हैं जो करेंगे ठीक ही। 

ममता- चुप हो जा तूने बिल्कुल ठीक किया, रात को आने दो देवरजी को तब देखेंगे। पर उन्होंने ऐसा कुछ किया, ये हमको पता ही नहीं चला। खैर कंचन को बुला ले, साथ में खाना खाएंगे।

माया ने कंचन को आवाज़ लगाई- कंचन, अरे देखो ना कौन आया है? तेरी मौसी आयी है। आजा।

कंचन दरवाज़ा खोली और दौड़ के पास आई, ममता मौसी कैसी है तुम? कब आयी? 

ममता ने उसे गले लगा लिया, और आंखों से उसके आंसू जाने लगे। मन ही मन बोली- अरे पगली, हम तुम्हारी मौसी नहीं माँ हैं।

ममता- सुबह आये हैं। तुम कहां गयी थी? 

कंचन- ट्यूशन गए थे। 

माया- पढाई में मन ही नही लगता है इसका तो, कब पास करेगी भगवान जाने। शादी की उम्र हो गयी है, फिर भी सहेलियों के साथ घूमती फिरती है। 

ममता- चुप कर, पास हो जाएगी। हाँ पर सयानी हो गयी है। बेटी तुम्हारे लिए सलवार सूट लाये हैं।

कंचन- सच, जैसा हम बोले थे वैसा ना। दिखाओ ना मौसी।

ममता- अरे पहले खा लो।

कंचन- नहीं पहले देखेंगे।

ममता- बहुत ज़िद्दी है, जा सूटकेस में रखा है।

ममता और माया एक दूसरे को देखके मुस्कुराई, कंचन अपने कपड़े देखने चली गयी।दोनों इधर खाना खाने लगी। 

कंचन ने सारे कपड़े उठाये और अपने कमरे में चली गयी। ममता और माया भी खाना खाकर आराम करने चली गयी।


कविता अपने भाई की बाहों में कोई आधा घंटा बैठी उसकी छाती पर सर रखके आराम कर रही थी। कविता की बारी थी अपना वादा निभाने की।उसने अपनी गाँड़ के छेद में उंगली घुसाई। बड़ी दिक्कत से उसकी गाँड़ में उंगली घुसी। उसने दूसरे हाथ से जय के फूले लण्ड को पकड़ा, और जय की ओर देखा। अपनी उंगली गाँड़ से निकालके उसको दिखाते हुए बोली,” जय, ये तो बहुत दिक्कत से इतना ही घुसा, तुम अपना लौड़ा कैसे घुसओगे? 

जय उसकी उंगली को मुंह मे रख के चूसने लगा। कविता ने अपनी उंगली निकालनी चाही, पर जय उसकी कलाई पकड़के उसे हटाने नहीं दिया। 

जय जब पूरा चूस चुका, तब बोला-  क्या स्वाद है तुम्हारी गाँड़ का, बिल्कुल मीठी और स्वादिष्ट है।

कविता- छी, तुम कैसे चूस लिए। वहां से हम हगते हैं। गन्दी जगह है ना वो तो।

जय- अरे मेरी भोली दीदी, तुम्हारी कोई भी चीज़ हमको गंदी नहीं लगती। हम तो तुम्हारी पाद को भी खुसबू समझते हैं। 

कविता –  तुम ना पागल हो। कोई किसी की पाद का कैसे दीवाना हो सकता है। 

जय कविता की गाँड़ को टटोलते हुए बोला,” तुम हो ही इस पागलपन और दीवानगी के लायक। हम तुमको अब बताएंगे, जाओ तेल लेके आओ।

कविता- तुमको जो अच्छा लगे वो करो, हम तुमको कभी नहीं रोकेंगे। आज हमारे पिछले दरवाज़े में घुसा के ही मानोगे ना। कहकर हंसते हुए उसकी गोद से उठ गई। थोड़ी देर में वो नारियल तेल लेके वापिस आयी। वो बैठने लगी तो जय ने उसे खड़े रहने को बोला। 

जय- अपनी गाँड़ हमारे चेहरे के सामने लाओ, और अपने चूतड़ों को फैलाओ। 

कविता जय के कहने पर वैसे ही खड़ी हो गयी। उसने कविता के चुतरो पर तीन चार थप्पड़ मारे। कविता हर थप्पड़ पर – ईशशशश कर उठती।

जय ने कविता की गाँड़ की दरार में ढेर सारा थूक डाला। वो थूक उसकी गाँड़ की दरार को गीली करते हुए में किसी नदी की तरह चूते हुए उसकी गाँड़ की छेद को गीला करने लगी। कविता उसको अपने हाथों से वहां थूक मलने लगी। जय ने उसके हाथ को वहां से हटा दिया, और अपना मुंह उसकी गाँड़ की घाटी में घुसा दिया। उसका पूरा चेहरा कविता की गाँड़ की दरार में खो गया। कविता अपने भाई के चेहरे पर गाँड़ का दबाव बढ़ाने लगी। जय के चेहरे पर गाँड़ को रगड़ने लगी। जय के मुंह से आआहह निकल रही थी, पर गाँड़ की वादियों में उसकी आहें, गूँ.. गूँ में बदल गयी थी। कविता की चुच्चियाँ कड़क हो चुकी थी, बुर से पानी निकल रहा था।

जय ने उसकी गाँड़ की छेद को अपनी जीभ से छेड़ने लगा।गाँड़ की सिंकुड़ी हुई छेद उसके मुंह मे समा जा रही थी। उसकी गाँड़ के छेद को अपनी जीभ से खोलने की कोशिश कर रहा था। धीरे धीरे गीला होने की वजह से जीभ ने थोड़ी जगह बना ली, और कविता के गाँड़ में आधा इंच प्रवेश पा लिया। जय उस जगह को चाटने लगा। चाटने क्या लगा मानो उसकी सफाई करने लगा। कविता को अपनी गाँड़ में अजीब सा आनंद महसूस हो रहा था। 

कविता सिर्फ उफ़्फ़फ़फ़फ़फ़, आह आह कर रही थी। गाँड़ चटवाने में इतना आनंद मिलता है ये उसे पता नहीं था। जय तो मानो जैसे कविता की गाँड़ खा जाना चाहता था। जय ने उसे इसी तरह खड़ा रखा, और दस मिनट तक यूँही चूसता रहा। कविता ने फिर मस्ती में अपनी गाँड़ को जय के चेहरे पर दांये बायें हिलाकर रगड़ा।

फिर उसने कविता को कहा- दीदी, हम लेटते हैं। तुम हमारे मुंह पर बैठके अपनी गाँड़ को रगड़ना।

जय लेट गया, और कविता उसके चेहरे के दोनों तरफ टांगे रखके, उसके मुंह पर अपनी पहाड़ जैसे गाँड़ टिका दिया। जय की नाक कविता के गाँड़ के छेद और मुंह उसकी बुर पर टिक गए। जय ने कविता को अपने चूत्तर हल्के ऊपर उठाने का इशारा किया। कविता जैसे उठी, जय ने बोला अब अपनी 

गाँड़ को हमारे मुंह पर रगड़ो। कविता बोली,” ठीक है, पर वजन तो ज़्यादा नही है। तुम जब गाँड़ में जीभ घसाके चूस रहे थे, तब बड़ा मजा आ रहा था।

जय ने उसकी गाँड़ में उंगली घुसा दी, ” अभी और मज़ा आएगा तुमको, जब गाँड़ हिला हिलाके रगड़ोगी। तुम्हारे बुर और गाँड़ को एक साथ मज़ा आएगा।

कविता ने फिर गाँड़ आगे पीछे हिला हिलाके जय के चेहरे में रगड़ने लगी। कविता को इसमें सच में बड़ा आनंद आ रहा था। जय के मुंह पर रिसती हुई बुर और भूरी गाँड़ भी टकड़ा रही थी। कविता के आनंद का ठिकाना ना था।

वो जोर ज़ोर से सीत्कारे मार रही थी। बुर की लंबी चिराई जब जय के नाक को रगड़ खाती हुई, उसके मुंह से टकराती तो जय उसे चूसने लगता। फिर गाँड़ की बारी आ जाती। जिसमे जय की उंगली पहले से घुसी थी, और जय उसके सामने आते ही उंगली निकाल देता और गाँड़ चूसने लगता। फिर जैसे ही गाँड़ पीछे होती तो उसमें उंगली घुसा देता। फिर बुर की चुसाई होती। कविता ये बड़े आराम से कर रही थी। उसे इसमें बहुत मज़ा जो आ रहा था। ऐसे ही दोनों आहें और सीत्कारें भरते हुए इस आसन में आनंद के गोतें लगा रहे थे। थोड़ी देर इस तरह चुसाई के बाद जय का लौड़ा कड़क हो उठा था, और कविता भी बेहद कामुक हो उठी थी।

जय ने कविता को उठने का इशारा किया, कविता अपने बालों को दोनों हाथों से उठाते हुए खड़ी हुई । उसकी आंखों में चुदने की प्यास साफ झलक रही थी। 

जय – कविता दीदी, तुम सोफे पर झुक जाओ। हम तुम्हारे गाँड़ पर तेल लगाते हैं।

कविता- जो हुकुम मेरे आका। और अपनी गाँड़ को उठाके बाहर निकाली। उसने सोफे का किनारा पकड़ रखा था। जय ने फौरन तेल की बोतल लेकर उसकी गाँड़ और अपने लण्ड पर आधी बोतल खाली कर दी। जय ने खूब सारा तेल कविता की गाँड़ के छेद और बोतल के आगे का हिस्सा संकडा होने की वजह से उसमें घुसाके उसके अंदर डाल दिया। उसने लण्ड पर भी ढेर सारा तेल लगाया था। फिर उसने कविता की गाँड़ में एक साथ दो उंगलिया घुसा दी, ताकि तेल अंदर की त्वचा पर भी अच्छे से लग जाये। अंदर तेल लगने की वजह से जय की उंगलियां आराम से अंदर बाहर कर रही थी। 

जय- तुमको दर्द तो नहीं हो रहा है?

कविता- नहीं, अभी नहीं हो रहा है। 

जय ने तीसरी फिर चौथी उंगली घुसा दी। कविता को दर्द महसूस हुआ,” ऊईईईई माआआआ दर्द हो रहा है।

जय ने और तेल डाला, फिर धीरे से आगे पीछे करके तेल को गाँड़ के अंदर तक पहुंचाया। कविता की गाँड़ तब रिलैक्स हुई।

जय – अब तुम अपनी गाँड़ मरवाने के लिए तैयार हो, दीदी।

कविता- हां भाई, गाँड़ में तुम्हारी चारो उंगलियां हमको महसूस हो रही है। और दर्द भी ना के बराबर है। लगता है तुम्हारा लौड़ा अब गाँड़ में घुस जाएगा।

जय- तो तैयार रहो, दीदी, अब तक बुर की सवारी की थी लण्ड ने अब तुम्हारी गाँड़ की सवारी करेगा।

जय ने उंगलियां निकाल ली, तो कविता ने जय की ओर देखके बोला,” तुमने कहा था कि हमारी गाँड़ का टेस्ट तुमको बड़ा अच्छा लगता है। हम भी टेस्ट करे ले क्या?

जय- नेकी और पूछ पूछ, ये लो दीदी चखो अपनी गाँड़ का स्वाद। ताज़ी ताज़ी उंगलियाँ, तुम्हारी गाँड़ की भट्टी से।

कविता ने जय की एक उंगली चाटी, और जीभ पर उस टेस्ट को महसूस किया। कविता ने फिर दूसरी चखी, और इस तरह सब चाट गयी। कविता फिर बोली- गाँड़ का स्वाद इतना बुरा भी नही है। इसे चूसने में मज़ा आ रहा है। 

जय- ये कुछ भी नहीं है, तुमको और मज़ा आएगा, जब तुमको इसकी आदत लग जायेगी। तुम बस किसी भी चीज़ में हिचकिचाना नहीं। जो भी करने का मन हो बोल देना।

फिर जय उसके गाँड़ पर लौड़ा को सेट कर दिया। ” तुम तैयार हो दीदी, घुसा दूं लौड़ा। जय बोला।

कविता- तैयार हूं डालो अब।

जय ने लौड़ा उसकी गाँड़ के प्रवेश द्वार पर रखके ज़ोर लगाया, तो सुपाडे का आधा हिस्सा ही घुसा। अभी सब ठीक था, कविता की गाँड़ की छेद जय के सुपाडे की आकार में चिपक कर खुल रही थी। जय ने फिर ज़ोर लगाया तो कविता की चीख इस बार दर्द के मारे फूट पड़ी। उसकी गाँड़ में जय का सुपाड़ा प्रवेश कर चुका था। पर वो चिल्लाए जा रही थी। ऊउईईई,  ऊऊईईईईईईईई मा माआआआ हआईईईईई रे गाँड़ फट गईईईईई, उ उ ऊऊ हहदहम्ममम्म

जय उसकी पीठ को सहला रहा था, और उसे सांत्वना दी रहा था, ” घबराओ मत दीदी थोड़ी देर में ठीक हो जाएगा, बस थोड़ा बर्दाश्त करो। 

कविता- बहुत दर्द हो रहा है, ऐसा लगता है गाँड़ फट गईईईईई है। 

जय- अपनी गाँड़ को रिलैक्स करो, कसो मत, ढीला छोरो और सांस लो। कविता वैसा करने लगी जैसा जय बोल रहा था। थोड़ी देर बाद कविता को आराम मिला। जय ने पूछा- ठीक लग रहा है। कविता- हाँ, पहले से बेहतर अब ठीक है।

जय- देखो हम धीरे से पूरा लण्ड उतारेंगे, अब तुम्हारी गाँड़ में।

कविता- ठीक है, घुसाओ ना।

जय धीरे से प्रेशर बढ़ाता है, और धीरे से इंच भर उसकी गाँड़ में ठेलता है। कविता की गाँड़ की छेद, उसकी लण्ड की गोलाई के अनुसार ढल रही थी। इस बार उसे उतना दर्द नहीं महसूस हुआ। धीरे धीरे इंच दर इंच जय ने अपना लंड आखिरकार कविता की गाँड़ में उतार ही दिया। अब उसके आंड कविता की बुर से टकड़ा रहे थे। उसने कविता की गाँड़ में लगभग आठ इंच लंबी और तीन इंच मोटी जगह कब्ज़ा कर ली। जय अभी भी स्थिर था, वो हड़बड़ा नहीं रहा था। वो कविता के मूड में आने का वेट कर रहा था। कविता थोड़ी देर बाद पूरी तरीके से दर्दरहित होक मस्ती में आ गयी। उसने जय की ओर मुड़के बोला-  जय अब तुम्हारा लण्ड गाँड़ से तालमेल बिठा चुका है। हमारे गाँड़ ने लण्ड को जगह दे दी है। तुम अब गाँड़ मारना शुरू करो। 

जय-  बिल्कुल दीदी, हम इसका वेट कर रहे थे कि कब तुम बोलोगी। आजके बाद देखना तुमको गाँड़ चुदाई में ही खूब मन लगेगा। तुम खुद गाँड़ मरवाने आओगी।

कविता- तो ठीक है, पर पहले गाँड़ मरवाने तो दो। 

जय- ये लो। जय ने गलके हल्के धक्के लगाने शुरू किए। कविता आगे को भागी तो जय ने उसे पकड़ लिया, और खींच लिया। और फिर धक्के मारने लगा। कविता की गाँड़ जय के लण्ड को पूरा अंदर ले रही थी। कविता बीच बीच में, ऊफ़्फ़फ़, हाय ऊउईईई जैसी आवाज़ें निकाल रही थी। कविता को अब मस्ती पूरी तरह चढ़ गई थी। वो अब अपनी कमर पीछे करके धक्के ले रही थी। उसके चूत्तर भी खूब मटक रहे थे, जय के धक्कों से।

जय- अब बोलो दीदी खूब मजा आ रहा है ना, कैसा लग रहा है गाँड़ में अपने भाई का लौड़ा? 

कविता- हमको पता नहीं था कि गाँड़ मरवाने में इतना मज़ा आता है, हमारे राजा भैया। क्या बात है, ऊफ़्फ़फ़?

जय- दरअसल गाँड़ में नर्व एन्डिंग्स होती है जिस वजह से गाँड़ बहुत सेंसिटिव होती है। इसलिए इसमें बुर चुदाई से भी ज़्यादा मज़ा आता है। तुमको इसीलिए अच्छा लग रहा है, हमारी रानी दीदी।

कविता- ओह्ह, अच्छा तुमको तो सब पता है। अपनी बहन की गाँड़ मारने का भी तो मज़ा दुगना होता है ना। कविता खिलखिलाकर बोली।

जय धक्के लगाते हुए बोला- वो तो है ही, तुमको भी तो मज़ा आ रहा है ना अपने छोटे भाई से गाँड़ मरवाने में।” उसकी आवाज़ में धक्के मारने की वजह से कंपन थी।

जय अब कविता के गाँड़ को पूरी रफ्तार से चोद रहा था। वो उसके चुतरो  को कसके दोनों हाथों से भींच रहा था। कविता की चुच्चियाँ भी धक्कों के साथ ज़ोर से हिल रही थी। 

जय- क्या मस्त चीज़ होती है, औरत की गाँड़ चलती है तो मर्दों को लुभाने का काम करती है और चुदती है तो बुर से भी ज्यादा मज़ा देती है। लण्ड को पूरे गिरफ्त में ले लेती है ये गाँड़ महारानी। हमको औरत का यही हिस्सा मस्त लगता है।

कविता- इसका मज़ा तो हर औरत को लेना चाहिए, आखिर इसमें इतना मजा जो आ रहा है। 

जय- सही कहा कविता रानी, तुमको भी ये बहुत अच्छा लग रहा है। मर्दों को औरतों की गाँड़ मारने में मजा आता है और औरतों को मरवाने में।

कविता- ऊफ़्फ़फ़फ़, आआहह सही कह रहे हो भैया, उम्म्म्म्ममम्ममम्म हम लगता है झड़ने वाले हैं, कितना मज़ा आ रहा है, हाय 10 मिनट में ही झड़ जाऊंगी। आआहह ऊउईईई झाड़ गई रे ओह्ह।

जय- हां दीदी तुम्हारी गाँड़ भी बहुत कसी हुई है। हम भी ज़्यादा देर नही टिक पाएंगे। पर तुम्हारी गाँड़ को अच्छे से चोद के फैला देंगे। आज के बाद तुम अपनी गाँड़ की साइज बढ़ते हुए महसूस करोगी। दीदीssss हम झड़ने वाले हैं, आआहह…. मुंह इधर करो अपना, तुमको मूठ पीना है ना।

कवीता- हाँ, भाई हमको मूठ पिलाओ अपना, तुम्हारा ताज़ा ताज़ा मूठ। हमको वही पीना है। अपनी प्यासी बहन को पिला दो ना।” कहते हुए कविता घुटनो पर बैठ गयी।और अपना मुंह खोलके बैठ गयी, जैसे कोई कुतिया खाने के लिए मुंह खोलके जीभ बाहर लटकाती है। जय ने कविता के खुले मुंह मे उसकी गाँड़ से निकला लण्ड दे दिया। कविता को जैसे इसीकी प्रतीक्षा थी। उसने लण्ड को बिना छुए, पहले उसे खूब चूसा, जिसमे उसकी गाँड़ का स्वाद भरा रस लगा हुआ था। उसे खुद की गाँड़ का रस खूब अच्छा लग रहा था। जय के लण्ड पर लगा उसकी गाँड़ का रस गाड़ियों में इस्तेमाल होनेवाले ग्रीज़ की तरह मुलायम और चिपचिपा था। कविता उसे पूरा मज़ा लेके चुस रही थी। जय ने देखा उसकी बहन बिल्कुल पोर्नस्टार्स की तरह बेहिचक, चूस रही है तो, उसने कविता के चेहरे पर ही मूठ निकाल दिया। जय ,” आआहह आ गया दीदी ये लो, बुझाओ अपनी प्यास।”

कविता के खूबसूरत चेहरे पर, जय के लण्ड से निकल सफेद चिपचिपा मूठ पहले उसकी आँखों और पलको पर जा गिरा। अगला उसके होंठो पर, फिर, उसके गालों पर ढेर सारा मूठ चिपक गया। जय की जाँघे कांप रही थी।  कविता उसके लण्ड को चूसकर उसमे बचा मूठ निकाल ली। फिर उसके लण्ड से अपने चेहरे पर फैला मूठ, पूरा रगड़ने लगी। 

जय – ये क्या कर रही हो?

कविता- हम इसको पहले पूरे चेहरे पर मलेंगे, फिर इकठा करके पी लेंगे। चेहरे की खूबसूरती बढ़ती है मूठ लगाने से और पीकर भी।

जय हँसकर- अच्छा है, फिर तो पी जाओ।

कविता ने पूरा मूठ मलने के बाद इकठ्ठा किया और जितना मिला उसे मुंह मे रख ली। कविता अपना मुंह खोलके जय को दिखाने लगी। फिर अपने मुंह से बुलबुले बनाने लगी। 

जय- तुम तो बिल्कुल पोर्नस्टार जैसे कर रही हो। 

कविता एक घूंट में पूरा पी गयी, और बोली,” हम किसी से कम थोड़े ही हैं। और खिलखिलाकर हंसने लगी।

जय- चल अपनी गाँड़ तो दिखाओ की क्या हाल है उसका? 

कविता पीछे मुड़ गयी, और चूतड़ फैलाके दिखाई,” हमको तो दिख नहीं रहा है, कैसी लग रही है हमारी चुदी हुई गाँड़, जय।

जय- वाह……  कितनी खूबसूरत लग रही है। चुदके पूरी खुल गयी है। अंदर का गुलाबी हिस्सा अभी दिख रहा है। हमारे लण्ड ने इसकी खूब खबर ले ली, 10 मिनट में ही। जय उसकी गाँड़ में उंगली घुसाके बोला।

कविता- एक तस्वीर ले लो, अच्छा रहेगा।

जय  ने फौरन कैमरे से उसकी गाँड़ की तस्वीर ले ली। उसने कविता की गाँड़ को फैलाने को कहा, फिर कभी करवट लेके तो कभी पेट के बल लेटके तस्वीर निकली।

जय ने फिर कविता को बोला- खाना लगा दो। दीदी भूख लगी है।

कविता उठके बोली- अभी लगा देती हूँ। फिर बैंक भी जाना है, इस ढाई करोड़ को जमा भी तो करना है।

कविता गाँड़ मटकाते हुए, खाना लगाने चली गयी।



जय वहीं बैठा रहा। 

कविता थोड़ी देर बाद खाना लेके आयी, और अपने थके हुए भाई को प्यार से देखी। उसकी आंख लग गयी थी। कविता ने उसके माथे से पसीना पोछा और अपने नीचे बैठ गयी। उसके सर को अपने चुच्चियों के बीच रख लिया,” हमारे भैया अब लगता है तूम थक गए हो। खाना तो खा लो।” और निवाला तोड़के उसके मुँह में दी। 

जय- तुमने शुरू से हमारा ख्याल रखा है, पहले दीदी की तरह और माँ की तरह भी। 

कविता- अब पत्नी की तरह भी रखेंगे। एक पत्नी का पति की ओर जो भी कर्तव्य होता है, तुम्हारे लिए करेंगे।

जय- दीदी, तुम भी खाओ ना।

कविता- तुम खिलाओगे तभी ना।भूल गए क्या?

जय- अच्छा ये लो, उसने अपने मुंह मे चबाया आधा निवाला कविता के मुंह मे दे दिया।

कविता- जल्दी खाते हैं, और चलते हैं, ये जमा करने।

दोनों ने जल्दी खाना खाया और तैयार हो गए। कविता लेग्गिंग्स और कुर्ती पहनी थी। जय हमेशा की तरह टी शर्ट और जीन्स डाल चुका था। जय ने कविता को देखा, तो बोला,” क्या माल लग रही हो जानेमन, तुम तो बाहर जाने का इरादा ही बदल दोगी।” जय कविता को अपने गोद मे उठा के बोला।

कविता- हहम्म, जय तैयार होने दो ना। वरना बैंक बंद हो जाएगा।

जय ने उसे किस करते हुए बोला,” हहम्मम्म ठीक है, अभी छोड़ देता हूँ।

कविता हँसकर बोली – बदमाश, कहीं के !

दोनों बाहर आकर ऑटो लेकर सीधा बैंक पहुंच गए, जहां कविता की माँ की पेंशन आती थी। कविता जानती थी कि मैनेजर उसको गंदी नज़रो से देखता है, इसीलिए वो अपने भाई से चिपककर, उसके हाथ मे हाथ डालके बैंक में घुसी।

मैनेजर उसे देखके हतप्रभ रह गया। वो इतना मेक अप कभी नहीं करती थी।

बोल्ड रेड लिपस्टिक, आईलाइनर, काजल, मस्करा, गालों पर फाउंडेशन इत्यादि सब लगाई हुई थी। और साथ में एक मुस्टंडा लड़का भी। मैनेजर को देखके वो खुद बोली,” मैनेजर साहब, कैसे हैं? 

मैनेजर- जी ठीक हूँ। आप…

कविता- एक छोटा सा काम है, हेल्प करेंगे।” वो डीडी उसके तरफ बढाके बोली,” इसे जमा करना है।

मैनेजर- जी जरूर। उसने जब राशि देखी तो मुंह खुला रह गया।” क्या बात है, आइये आइये केबिन में, मेरा तो पूरा काम बन गया। इससे मेरा टारगेट पूरा हो जाएगा। थैंक यू।

कविता और जय उसके चैम्बर में बैठे थे। कविता जय के कंधों से चिपक के बैठी थी, जैसे मैनेजर को एहसास दिला रही हो, की ये मेरा मर्द है।

मैनेजर ने जय के खाते में वो जमा करवा दिया। 

मैनेजर- कुछ लेंगे आपलोग?

कविता मैनेजर के सामने जय से बोली- डार्लिंग, आप कुछ लोगे। मैनेजर साब कुछ पूछ रहे हैं।

जय- नहीं, जानू कुछ नहीं।

मैनेजर- ये कौन है कविता जी?

कविता- जय से चिपकते हुए बोली, ये हमारे होने वाले पति हैं। 

जय और मैनेजर दोनों चौंक गए। जय कविता के उस बेबाक रवैये से जिससे वो अपने सगे भाई को होने वाला पति बता रही थी। और मैनेजर तो अपना दिल टूटने की वजह से।

 दोनों मैनेजर को शॉक में छोड़कर बाहर निकल आये। जय कविता को वेहा से एक ऑटो में बिठा ले गया। जय रास्ते में कविता से उत्सुकता से पूछा, ” तुमने मैनेजर को क्यों बोला कि हम तुम्हारे होने वाले पति हैं?

कविता मुस्कुराती हुई,” क्यों, गलत कहा। तुम हमसे शादी नहीं करोगे क्या?

वो मैनेजर हमको हरदम गंदी नज़रों से देखता था। आज उसका मुंह देखा, कैसा हो गया था। अब तुम हमारे पति बनके ही बाहर घूमना।

जय- अच्छा ये बात है। फिर ठीक किया तुमने हमारी धर्मपत्नी।” उसे बाहों में भर लिया।

कविता – अरे ये ऑटोवाला गलत जा रहा है। हमारा घर तो उधर है। रोको इसको। अरे…..भैया

जय उसको रोकते हुये बोला- सही जा रहा है, मत रोको हम तुमको एक खास जगह ले जा रहे हैं। ये जगह हम बहुत खोजके निकाले हैं।

ऑटोवाला एक बिल्डिंग के पास रोककर उनको उतार दिया। जय ने उसे भाड़ा देकर छोड़ दिया। जय कविता को अंदर लेकर गया। वहां अंदर बहुत अंधेरा सा था। कुछ लड़के लडकिया वहा खड़े थे। अंदर एक कमरे में जाकर जय ने देखा कि वेहा एक महिला बैठी थी। जय ने उससे कुछ बात की और कविता की ओर इशारा किया। महिला ने उन दोनों को बैठने का इशारा किया। 

कविता- ये कैसी जगह है जय, कहा लाये हो हमको।

जय- यहां नाभि और अंदर के हिस्सों में छिदाई और टैटू करते हैं ये लोग।

कविता-तुम क्या करवाने वाले हो?

जय- हम नहीं तुम करवाओगी, दीदी। 

कविता- क्या? हम नहीं जय हम नहीं छिदवाएँगे अंदर में कुछ भी। 

जय- अभी छिदवाने का इरादा नहीं है। अभी तो बस टैटू करा लो।” जय कविता के चुत्तरों को दबाके बोला, ” इस पर करा लो, तुम एकदम बवाल लगोगी।”

कविता- कोई देख लेगा तो, क्या समझेगा? जय- कौन देखेगा तुम्हारे नंगी गाँड़ को हमारे अलावे। तुम डरो मत, हम हैं ना।

कविता- पर, 

जय- पर वर कुछ नहीं, ये करवाओ ना तुम बहुत सेक्सी लगोगी।

कविता- ठीक है, तुम जीते और क्या चाहते हो? अपने नाभि पे इशारा करके बोली, यहां छिदवा लें?

जय उसको बाहों में उठाके बोला- तुमने मुंह की बात छीन ली। बहुत सेक्सी लगोगी जब तुम्हारा पेट खुला रहेगा, और उसमें छोटी रिंग लगी होगी। बिल्कुल प्रियंका चोपड़ा जैसी। तुमको ये करवाने का मन था क्या?

कविता- हम कई बार देखें हैं तुम्हारे लैपटॉप पर प्रियंका की छिदी नाभि की तस्वीर। हमको पता था कि तुमको ये पसंद है। इसलिए पूछे।

जय- कविता दीदी तुम तो हमको एकदम बीवी की तरह समझती हो। आई लव यू।

कविता- हम भी तुमको बहुत प्यार करते हैं। इस प्यार की कसम है कभी अकेले मत छोड़ना हमको।

जय- प्राण छोड़ देंगे, पर जान तुमको नहीं छोड़ेंगे।

तभी वो महिला आयी, और कविता को अंदर चलने को कहा। कविता उसके साथ अंदर चली गयी।

कविता अपने नाभि की ओर इशारा करी और बोली- यहां पियरसिंग करवानी है।

महिला- पर आपके पति ने तो सिर्फ टैटू के लिए बोला है।

कविता- हमने अभी सोचा कि ये भी करवाएंगे।

महिला हँसकर- ओके। उन्होंने आपको ऐसा करने बोला ?

कविता- नहीं हमने ही कहा।

महिला- क्या बात है, मैडम आप जैसी औरतें रहेंगी तो सब मर्द खुश रहेंगे। आखिर यहाँ कितनी औरतें हैं जो ये सब करवाने को तैयार होती हैं। मैं तो कहती हूँ कि अपने पति को सरप्राइज देना हो तो वेजिनल पियरसिंग करवा लीजिये।

कविता- आप वेजिनल पियरसिंग करती हैं ! क्या वो करवाने के बाद सेक्स से दूर रहना पड़ता है।

महिला- नहीं, बस कुछ दिनों तक पूरा ख्याल रखिये की इन्फेक्शन ना हो। मैं यहां से कुछ दवा दूंगी सफाई और लगाने के लिए।

कविता- क्या करवाना सेफ होगा, और पता नहीं पसंद आएगा उनको?

महिला- एकदम सेफ है, और मर्दों को आजकल ऐसी ही औरतें पसंद हैं।

कविता- क्या करूँ समझ नहीं आ रहा।

महिला- अगर आपके पति को किंकी सेक्स पसंद है तो जरूर करवाइए, आपका मज़ा दुगना हो जाएगा।

कविता- ठीक है, फिर कर दीजिए।

महिला- ये हुई ना बात! आइये अपनी लेग्गिंग्स और पैंटी उतार दीजिए। 

कविता ने अपनी लेग्गिंग्स और पंतय उतार दी। और कमर के नीचे से नंगी हो गयी। महिला ने उसे सोफे पर लेटने को कहा। कविता के लेटने पर महिला ने उसकी कुर्ती नाभि से ऊपर उठा दी। महिला ने एक कैंचिनुमा औजार पकड़ रखा था, जिससे उसने पहले बुर के ऊपर की चमड़ी को ऊपर उठा लिया। फिर उसने एक सुई लेकर धीरे से छेद कर दिया और छोड़ दिया। फिर उसने नाभि की चमड़ी को ऐसे ही उठाके उसमें भी छेद कर दिया। कविता को ज्यादा दर्द नहीं हुआ शायद इसलिए कि वो महिला काफी अनुभवी थी। फिर उसने छोटा सा लंबा आभूषण उसकी दोनों नए छिदी छेद में घुसा दिया। 

महिला- आप पर बहुत जँच रही है दोनों। आपको ज्यादा तकलीफ नहीं हुई होगी।

कविता- नहीं, हल्का सा ही दर्द हुआ। 

महिला- अब पलट जाइये आपकी टैटू की बारी।

फिर वो महिला टैटू करने वाली मशीन लेकर उसकी दांयी चूत्तर पर लाल होठों की टैटू बनाने लगी। कविता को दर्द हो रहा था, पर अब जब वो जय को पति मान चुकी थी, तो उसकी हर इच्छा पूरी करना चाहती थी।

थोड़ी देर में उसके चूत्तर पर लाल होठ का टैटू बनके तैयार हो गया। फिर काली स्याही से उसपर जय लिख दिया। महिला ने उसे आधे घंटे लेटे रहने को कहा। कविता वैसे ही लेटी रही। कुछ देर बाद कविता फिर कपड़े पहन कर बाहर आ गयी। जय उसे देखके खुश हो रहा था। महिला ने उसे एक किट दिया था जिसमें दवाइयां थी।

जय ने पैसे दिए और कविता को ऑटो में बैठाके घर ले आया। 

शाम हो चली थी।

उधर दूसरी तरफ शशिकांत घर पहुंचा तो सीधा अपने कमरे में चला गया। माया ने खाना भिजवाया, तो उसने खाने से इनकार कर दिया। 

ममता और माया ने कुछ खास तैयारियां कर रखी थी, उसे खुश करने के लिए। ममता को पता था कि शशिकांत कैसे मानेगा। रात को जब बारह बज गए तब ममता शशि के कमरे में पहुंच गई। शशि ने ममता को देखा तो खुश हो गया। वो वहां दारू पी रहा था। उसने माया को आवाज़ लगाई की वो चखना लेके आये। ममता उसके लिए चखना लेकर आई थी।

ममता- हम लेके आये हैं, आपके लिए देवरजी।

शशि पर दारू का नशा चढ़ा हुआ था। उसने ममता को देखा और बोला- अरे हमरी रंडी भौजी, आयी है चखना लेकर। क्या लायी हो? शशि दारू पीने के बाद गालियां बहुत देता था, और ममता को इसकी आदत थी।

ममता- मछली फ्राई और पनीर रोल साथ में हम भी है, चाहे तो चख लीजिये।

शशि- इधर आओगी तब ना चखेंगे। इधर आ कपड़े उताड़ दो।

ममता हंसते हुए बिस्तर पर चखना रख दी। और शशि के सामने जाकर खड़ी हो गयी। फिर बोली,” अपनी भौजी को खुद नंगी करने में आपको बहुत अच्छा लगता है ना। तो आप ही नंगी करो ना हमको।”

शशि ने ममता के साये का नाड़ा खोल दिया, जो उसकी चिकनी मोटी जांघों से फिसलकर उसके पैरों में जा गिरा। फिर वो पीछे मुड़कर बोली- ये ब्लाउज को भी मत छोड़िए, उताड़ दीजिए। शशि ने उन धागों को भी खोल दिया। उसने ब्लाउज को खुद अपनी बाहों से निकाल दिया। ममता अब एक दम नंगी हो चुकी थी। पर शर्म की शिकन भी उसके चेहरे पर नहीं थी। 

ममता अपने देवरजी की ओर मुड़ी और उसकी जांघों पर बैठ गयी। शशि ने उसे कमर से पकड़ लिया। शशि के मुंह से दारू की महक आ रही थी। 

ममता- देवरजी, लाइये हम पिलाते हैं।” और उसके हाथ से गिलास ले ली। फिर अपने हाथों से उसको दारू पिलाने लगी। वो चखना लेने के लिए हाथ बढ़ा ही रहा था कि ममता, ने रोक दिया,” आप मत छुइये ना, ये लीजिये।”  और अपने हाथों से मछली खिलाने लगी।

शशि- तुमको देखके कौन बोलेगा की ऊंची जाति और शरीफ घर की औरत हो। कोई कोठे की सस्ती रंडी लग रही हो। हा..हा

ममता- हम ऊंची जाति और शरीफ घर कि औरतें समझदार होती हैं। बाहर समाज के लिए हमारा दूसरा रूप होता है, एक दम पवित्र वाला। पर घर के अंदर अपने मर्दों के साथ किसी भी हद तक जा सकते हैं। इससे आपलोगों को दो फायदे होते हैं, घर में ही आपलोगों को पूरा आनंद मिलता है और हमारी भी रंडीपन का शौक पूरा हो जाता है, इसके साथ साथ खानदान और जात की इज़्ज़त पर कोई आंच नहीं आता है।

शशि- क्या बात बोली तुमने एक दम खुश कर दी।

ममता- एक और बनाऊ, ये तो पूरा गटक गए। 

शशि- बनाओ साली, फिर पूछ क्या रही है । 

ममता पेग बनाके फिर उसको पिलाते हुए बोली,” आप दारू नहीं छोड़ पाएंगे ना। आपको कुछ हो गया तो, हमलोगों का क्या होगा? कभी सोचे हैं, हम, माया आपके तीनों बच्चे।

शशि- भौजी, दो के नज़रो में हम इस दुनिया के सबसे बड़का कमीना हैं। वो कभी हमको माफ करेंगे पता नहीं पर उनके लिए हमने बहुत दिन बाद कुछ किये हैं।

ममता- हमको पता चल गया है, की ढाई करोड़ का चेक भेजवाये हैं ना। इतना दिन से ये केस लड़ रहे थे आप। हमको भी नहीं बताए। 

शशि- ममता ई केस हम अपना मन का बोझ हल्का करने के लिए लड़ रहे थे। हम अपने बच्चे का भविष्य बनाये हैं इससे। हम तो कुछ दिए नहीं हैं। बड़े भैया का अधिकार था, तो उसपर जय का ही अधिकार है ना।

ममता- सही कह रहे हैं आप, पर क्या कंचन हमारी बेटी नहीं है। उसकी शादी नहीं करनी है। ये बात जब माया आपको समझाई, तब आप गुस्साए काहे। जय की सगी बहन तो जय का फर्ज बनता है ना उसके लिए।

शशि- ई अब जय के ऊपर है कि वो पैसा कैसे खर्चा करे। और कंचन का ब्याह हम करने में सक्षम हैं। वकील हैं कोई ना कोई जुगाड़ तो लगा ही लेंगे। तुमलोग चिंता मत करो। हमको पता है कि माया तुमको बताई है। कल रात इसी बात पर बहस हुई और हम उसको बहुत मारे हैं। अब पछता रहे हैं।

ममता- आप कितने अच्छे हैं। जब कविता और जय को पता चलेगा ना कि आप उनके असली बाप हैं तो देखना वो आपको बहुत प्यार देंगे। और पछताइये मत आज हम और माया आपको खुश करेंगे। माया को मिस कॉल दे दीजिए ना आप। 

शशि- माया हमको माफ की है। हम गलत किये हैं उसके साथ बहुते।

ममता- अरे आप को माया माफ करनेवाली कौन होती है। आप उसके पति हैं, और मार दिए तो गलत क्या हुआ? आप घर के मर्द हैं, आप जो चाहेंगे वही होगा। आपके बिना ना माया का कोई अस्तित्व है ना हमारा ना बच्चों का।

शशि ममता की ओर देखता ही रह गया, की उसने कितनी बड़ी बात कह दी।







शशि- ठीक है मिस कॉल देते हैं। उसने मिस कॉल दिया तो माया चुपके से कोई 5 मिनट बाद कमरे में आ गयी। उसने दरवाज़ा बंद कर दिया। इस वक़्त वो नाइटी में थी। ममता के इशारे पर उसने पहले अपनी नाइटी उतारी अंदर उसने ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी, और इसीलिए बिल्कुल नंगी हो गयी, आकर सीधा शशि के पैरों में गिरी। माया माफी मांग रही थी।

शशि- उठो माया, हमारे पास आओ।

माया- पहले हमको माफ कीजिये तब।” सुबकते हुए बोली। माया जो कि दिन में स्कूल टीचर होती है, जिसको सब माया मैडम कहके बुलाते हैं। इस वक़्त किसी भिखारी की तरह भीख मांग रही थी।

शशि- अरे माफ किये आओ ना। तुम हमारी धर्मपत्नी हो, हमने गलती की थी, तुमको मारके।

माया उठकर उसकी दूसरी जांघ पर बैठ गयी, और उसके गाल सहलाते हुए बोली- आप कभी गलत नहीं हो सकते। आप हमसे माफी क्यों मांग रहे हैं। 

दोनों बहनें, शशि की जांघ पर नंगी बैठी थी। शशि दोनों को कमर से पकड़ रखा था। 

माया- ये लीजिये, चखना खाइये। आप माफी मांगेंगे ना तो हम आपको खिलाते रहेंगे। 

शशि- माया, ममता तुम दोनों एक ही मर्द के साथ रहना कैसा लगता है।

ममता- जैसा आपको दो सगी बहनों को सौतन बनाने में आता है। और तीनों ज़ोर से हँसे। 

शशि- तो तुम दोनों क्या करने वाली हो ?

माया और ममता दोनों एक साथ बोली- हम दोनों आपको खुश करेंगे।

फिर दोनों ममता और माया ने गोद से उताड़ गयी। ममता ने एक बेहद गंदा भोजपुरी गाना अपने मोबाइल पर लगा दिया, जिसके बोल थे,” बुरिया करे लस लस ऐ जीजा”। फिर दोनों बहनों ने अपने बचपन मे सीखा हुआ नृत्य करने लगी। दोनों बिल्कुल नंगी होने की वजह से चुचियाँ और चूतड़ हिल रहे थे। लगभग दोनों जुड़वा लग रही थी। दोनों की ऊंचाई, बदन का डील डॉल एक सा ही था। दोनों बहुत ही गंदी हरकत कर रही थी, नाचने के क्रम में। इस वक़्त दोनों किसी रंडियों से कम नही लग रही थी। दोनों के बाल खुले हुए थे। माया के माथे में सिंदूर था, बाल काले घने थे, जिस वजह से मांग में लगा सिंदूर बहुत सेक्सी लग रहा था। वो गले में सोने का मंगलसूत्र काली मोतियों में पिरोए धागे से गूँथी हुई पहने थी, पैरों में चांदी के पायल सज रही थी। कानों में सोने के छोटे आकार के टॉप थे। हाथों में केवल चार चार कांच की चूड़ियाँ थी। पैर की उंगलियों में चांदी की ही बिछिया पहनी थी। एक शादी शुदा औरत का पूर्ण नग्न अवतार लग रही थी। गाँव मे रहने के बावजूद वो खुद को बहुत मेन्टेन रखती थी। उम्र की वजह से अपनी बहन की तरह उसकी कमर, जांघों, बाहों पर चर्बी जमा हो गयी थी। अपने पेट को उसने निकलने नहीं दिया था, पर चिकने और भारी चूतड़ काफी बाहर आ चुके थे। जाँघे बिल्कुल गोरी, बाल ना होने की वजह से एक दम मुलायम और चिकनी थी। उसकी चुच्चियाँ थोड़ी झूल गयी थी, पर अभी भी काफी तनी थी।  पर इस उम्र में औरत इसकी वजह से और खूबसूरत हो जाती है। दोनों का चेहरा तो वैसे ही बहुत खूबसूरत था। माया की गाँड़ और चुचियाँ सब ममता के तरह ज़ेरॉक्स थे। वही आकर वही साइज। शशि उन दोनों के नाच में मस्त होकर 5 6 पेग पी गया। फिर वो भी उठकर आ गया उनके बीच में। दोनों बहनों ने मिलकर सबसे पहले उसका पजामा उतारा फिर उसका कुर्ता। उसके गंजी और जांघिये समेत सारे कपड़े उतार दिए और उसको नंगा कर दिया। ममता और माया दोनों घुटने पर बैठ गयी।

शशि- तुम दोनों बहनों का नाम इतिहास में लिखा जाएगा, की दोनों एक ही मर्द के साथ चुदति हो और खुश भी रहती हो। वैसे तुम दोनों ये गाना ही क्यों चलाई।

माया- आप हमारे राजा हैं और राजा की कई रानियां होती हैं। आप की किस्मत में तो सिर्फ हम दो बहनें हैं। और ये गाना इसलिए क्योंकि आप दीदी के जीजा भी हैं और दीदी को चोदते हैं तो हमारे जीजा भी हुए। इसलिए ये वाला गाना। 

ममता और माया शशि का लौड़ा एक साथ चुसने लगी। दोनों उसके लण्ड पर पहले खूब थूक लगाई और फिर उसके लण्ड को चूमने लगी। कभी माया उसके शिश्न को चूसती तो ममता लण्ड के पिछले हिस्से को। कभी ममता आंड को चूसने लगती। शशि काफी नशे में था। शराब ने तो जो नशा किया वो किया ही सामने दो शबाब भी कमाल का नशा कर रही थी। दोनों खूब मज़े से शशि का काला लौड़ा चूस रही थी। 

ममता और माया बेशर्मों की तरह शशि की आंखों में देखकर हंसते हुए लण्ड चूस रही थी। दोनों लण्ड चूसने में एक दूसरे की मदद कर रही थी। जब ममता चूसने लगती, तो माया शशि का लण्ड पकड़के उसके मुंह में घुसाने लगती, और वैसा ही ममता करती, जब माया चूसती। लण्ड के दोनों साइड दोनों ने अपनी जीभ चिपका कर लण्ड को रगड़ना चालू किया। दोनों लण्ड चाटते चाटते एक दूसरे के लटके जीभ से जीभ टकराने लगी। दोनों बहनें और भी कामुक हो उठी। लण्ड को छोड़कर एक दूसरे की जीभ से जीभ जानबूझकर टकराने लगी और चार पांच बार ऐसा करके, एक दूसरे को चुम्मा लेने लगी। शशि ने ये देखकर दोनों के मुंह पर थूक दिया। दोनों बहनों ने उसकी ओर देखा और चुम्बन के दौरान ही मुस्कुराई। फिर एक दूसरे के चेहरे को चाटकर साफ कर दिया। बहुत ही कामुक दृश्य था वो। दोनों फिर लण्ड चूसने में व्यस्त हो गयी।शशि खड़ा होकर लण्ड चुसवाने का आनंद ले रहा था। 

वो तीनो अपने मे मशगूल थे, इस बात से अनजान की कोई और भी उनकी हरकतों को देख रहा है।

तभी दोनों उठी और शशि को बिस्तर पर लिटा दिया। दोनों उसके दोनों तरफ लेट गयी और अपनी चुच्चियों को उसके चेहरे पर लटका दी। ममता एक हाथ से उसके सर को सहलाते हुए, अपनी चुच्ची उसके मुंह मे दे दी और दूसरी तरफ माया अपनी 36 साइज की चुच्चियों के चूचक उसके मुंह में रगड़ते हुए लण्ड को हाथों से हिला रही थी। माया की बांयी और ममता की दांयी जांघ शशिकांत के जांघों पर जमी हुई थी।

शशि दोनों की नंगी पीठ सहलाते हुए, ममता की चुचियों को पी रहा था।

ममता- देवरजी, हम दोनों बहनें आपको अच्छे से खुश कर रहीं हैं ना?

शशि ने नसीली आंखों से उसकी ओर देखकर हां में सर हिलाया।

तभी हिलाते हिलाते नशे की वजह से शशि को खुद पर काबू नहीं रहा और आआहह करते हुए उसके लण्ड से मूठ चूने लगा। 

“ममता दीदी, लण्ड से मूठ निकल गया, देखो ना।” माया बोली

दोनों ने एक दूसरे का मुंह देखी, और लण्ड की ओर झपटी। दोनों कुतिया की तरह, भोज खत्म होने पर जो जूठे पत्तल को बेसब्री से चाटती हैं, वैसे ही मूठ को चाटने लगी। पल भर में ही सारा मूठ चाट गयी।

दोनों ने शशि की तरफ देखा तो वो खर्राटे मारकर सो चुका था। माया के हाथ पर लगा मूठ, ममता चाट गयी, और ममता के गालों से चिपका मूठ माया चट कर गयी। 

माया- दीदी ये तो सो गए अब क्या करेंगे, बुर में तो अभी आग लगनी शुरू हुई है।

ममता- तू चिंता मत कर, हम दोनों हैं ना। अभी खूब मस्ती करेंगे। 

माया- अब इनसे भी नहीं हो पाता है, उम्र भी 52 हो गयी है। दारू पीने के बाद तो कुछ कर ही नहीं पाते। इन मर्दों को क्या पता, की औरतों की चुदने की प्यास उम्र के साथ बढ़ती ही जाती है। और इन लोगों का एंटीना तभी ढीला हो जाता है।

ममता- चल हम और तुम इस एंटीना को छोड़, अपने हाथों को एंटीना बनाते हैं। और खुद अपना चैनल चलाते हैं। 

दोनों एक दूसरे को चुम्मा लेने लगी, बैठे बैठे ही। कब उन दोनों का चुम्मा जंगली हो गया पता ही नहीं चला। एक दूसरे को बिल्लियों की तरह नोचने लगी। एक दम जंगली बिल्लियां लग रही थी। ममता उसके ऊपर लेट गयी और माया ममता चूतड़ों पर थप्पड़ मार रही थी। दोनों ने चुम्बन जारी रखते हुए एक दूसरे की बुर में उंगलियां घुसा रखी थी, और तेजी से उंगलियां हिला रही थी। थोड़ी देर में दोनों झड़ गयी और फिर लेट गयी। 

माया- ऐसा करके कब तक हम काम चलाएंगे। हमारा सेक्स जीवन खत्म हो गया है। अब इस उम्र में कौन मिलेगा हम लोगों को? 

ममता- घबराओ मत जो भी होगा, ठीक ही होगा। शायद अब हमारे नसीब में कोई नहीं हैं। हमें एक दूसरे का सहारा बनना पड़ेगा। अब कौन देगा हमारा साथ, ये ही तो थे बस।

“हम हैं ना। तुम बेफिक्र रहो।” 

ममता- तुमने कुछ सुना माया। माया- नहीं तो! क्यों

ममता- हमको लगा हम किसीका आवाज़ सुने।


“हम हैं ना। तुम बेफिक्र रहो।” जय बोला ” आज तुम आराम करो, खाना बाहर से मंगवा लेते हैं।” कविता को सोफे पर बैठाके बोला। जय और कविता खाना खाके बिस्तर पर लेट गए। कविता उसके बगल में ही चिपकी हुई लेटी थी। जय अपने मोबाइल पर तस्वीरें देख रहा था। उसमें उसकी माँ ममता की तस्वीर भी थी, जिसपर उसकी आंखें टिकी हुई थी। ममता का चेहरा बहुत चुदासी लग रहा था। जय ने उसको देखकर कहा- क्या दिखती है, हमारी माँ, तुम बिल्कुल उसकी परछाई हो, दीदी।

कविता- ये हमारी तारीफ है या माँ की ?

जय- तुम दोनों की।

कविता आँखे खोली, और जय की आंखों में कुछ देर देखकर बोली,” जय, हम तुमसे कुछ पूछें, बुरा तो नहीं मानोगे ना ?

जय- बिल्कुल नहीं, पूछो ना।

कविता- इस समय जो हम तुम्हारी आँखों मे देख रहे हैं, वो एक बेटे का प्यार नहीं, बल्कि किसी आशिक़ का अपनी माशूका के लिए होता है। क्या ये सच है, कि तुम माँ को बेटे की तरह नहीं बल्कि औरत के तरह चाहते हो? क्या …..

जय- इसके आगे सवाल मत करना, दीदी। तुम शायद सुन नहीं पाओगी। जय ने कविता के होंठों पर उंगली रखते हुए कहा।

कविता- हम अब सब सुन सकते हैं, हमको कोई अचम्भा या आश्चर्य नहीं होगा अगर तुम कह दो की तुम माँ को चाहते हो ! क्योंकि तुम कहो ना कहो तुम्हारी आंखे सब बता रही हैं।

जय कविता को खुद से अलग करके उठ गया और खिड़की के पास जाकर खड़ा हो गया, वो दरअसल कविता से कहने में झिझक रहा था, कि कहीं कविता बुरा ना मान जाए। अभी अभी तो उनकी प्रेम कहानी शुरू हुई थी।

कविता उसके पीछे से आकर उसको बांहों में पकड़ लेती हैं, और उसके दिल की बात समझ चुकी थी। उसके पीठ पर सर रखके उसको बोलती है,” जानू, हम तुमको हमेशा खुश देखना चाहते हैं, तुम खुश रहोगे तभी हमको अच्छा लगेगा। और अब तो हम तुमको अपने पर अधिकार दे चुके हैं, और तुम पर भी अगर हमारा थोड़ा सा हक़ है, तो प्लीज बता दो। दीदी ना सही बीवी समझ के बता दो।

जय- इतना आसान नहीं है ये कहना, पता नहीं तुम क्या सोचोगी। अभी अभी तुम्हारा और हमारा संबंध बना है। तीन दिन पहले तक तुम सिर्फ हमारी बहन थी, पर अब बीवी बनना चाहती हो। हाँ, तुमको हक़ है कि हमारे बारे में सब जानो, पर कोई भी औरत अपने पति/ प्रेमी के साथ दूसरी औरत बर्दाश्त नहीं करती। हाँ हम ममता को प्यार करते हैं। भले ही हम उसके बेटे हैं पर वो हमको बहुत पसंद है। माँ जब सामने होती है, तो लगता है जैसे उसको देखते रहें। इस उम्र में भी कितनी खूबसूरत है। उसको जब देखते हैं तब मन करता है कि उसको हमेशा के लिए अपना बना लें। उसके अंदर एक अजीब सा आकर्षण है, जो हमको उसकी ओर खींचता है। ममता और तुमको हम एक समान चाहते हैं। तुम दोनों ही हमारी अंदर की दबी वासना को बाहर लाती हो। बाहर की औरतें हम पर कोई खास आकर्षण नही डालती। जब घर में तुम दोनों जैसी कामुक औरतें हो तो कोई बाहर की औरतों को देखे भी क्यों।

हम दरअसल तुम दोनों को अपनाना चाहते हैं, तुम दोनों को अपनी बीवी बनाना चाहते हैं। अब चाहे तुम जो भी सोचो, पर सच ये है कि हम यही चाहते हैं, कि माँ और तुम हमेशा के लिए हमारी बनकर रहो। 

जय ये सब कहके मुड़ा नहीं, उसकी हिम्मत हुई नहीं। कविता उसके सामने घूमके आई, उसकी आँखों में जय ने देखा, तो वो बोली,” तुम माँ को इतना चाहते हो? ये तो हमको पता ही नही था। हमसे पहले माँ का हक़ है। तुमने तो आज, माँ बेटे, भाई बहन के रिश्ते की परिभाषा ही बदल दी। हम तुमको अपने ऊपर पूरा हक दे चुके हैं, और अब माँ पर भी एक बेटी के तौर पर छूट देते हैं। भले अंजाम जो भी हो, हम तुम्हारा भरपूर साथ देंगे। अगर हम भाई बहन के रिश्ते को नया नाम दे सकते हैं, तो माँ बेटे के बीच भी ये बीज बोया जा सकता है। आज तुमने ये बात बोलकर हमको पत्नी से भी ऊंचा दर्जा दे दिया। हमारा रिश्ता इस सच्चाई की बुनियाद पर और मजबूत होगा। अगर हमको और माँ को तुम्हारी बनना है, तो हम दोनों को मिलकर ये करना होगा। हम तुम्हारे साथ हैं जय। 

जय ने कविता को देखा, कविता को ये पूरा एहसास था कि वो क्या बोल रही है। कविता की इन बातों को सुनकर जय ने उसे गोद में उठा लिया, और बोला,” तुम जैसी दीदी मिले तो हर भाई खुश रहेगा। आज तुमको हम अपनी दीदी से बीवी बनाएंगे।” जय ने उसकी मांग में भरने को सिंदूर ढूंढने लगा। पर घर में सिंदूर नहीं मिला। जय बड़ी बेसब्री से ढूंढ रहा था। कविता हंसने लगी, फिर उसको रुकने बोली। उसने ड्रेसिंग टेबल से रेड लिपस्टिक निकाली और जय को देकर बोली,” ये लो, इसीसे भर दो हमारी मांग, ताकि तुम्हारी पहली सुहागन हम बने। और अपनी आंखे बंद कर ली।

जय उसके करीब आकर उसकी मांग लिपस्टिक के गाढ़े लसलसे पदार्थ से भर दी। जैसे चारों ओर सहनाइयाँ बजने लगी। बाहर अचानक से तेज बारिश शुरू हो गयी। हवाएं चलने से खिड़कियां खुल गयी। जैसे प्रकृति भी इस मनोरम दृश्य को देखना चाहती हो कि जब एक बहन अपने भाई की बीवी बनती है तो कैसा लगता है। 

कविता ने फिर आंखे खोली और जय के पैरों को झुककर छुवा। जय ने उसे उठाया, तो कविता शर्म से उसकी ओर देख नहीं रही थी। जय ने उसकी ठुड्ढी पकड़के उसके चेहरे को देखा,” अब तुम हमारी बीवी भी हो गयी दीदी। हमको डर लगता था कि कहीं तुम माँ के बारे में हमारे खयाल जानकर हमको छोड़ ना दो। तुम्हारी शादी भी किसी औरसे होते हम देख नहीं पाते। आज अभी से तुम बस हमारी हो।

कविता- आजसे हम आपकी पत्नी होने का गौरव तो उठाएंगे पर अपनी मांग ऐसे ही रखेंगे। हमारी असली शादी उस दिन होगी जब आप माँ को अपनी बना लेंगे, और आपकी उनकी शादी हो जाये। जब माँ और आप एक दूसरे को अपना लेंगे, तब हम अपने रिश्ते की असलियत बताकर उनकी बहू और सौतन बन जाएंगे।

जय- ठीक है, पर ये आप आप क्या लगा रखा है?

कविता- अब हम आपको आप ही बुलाएंगे। अब आप पति हो गए हैं हमारे। 

जय- क्या बात है हमारी बिहारी संस्कारी दुल्हन।

तभी ममता का फोन जय के मोबाइल पर आया। जय ने मोबाइल उठाया और कविता को मोबाइल दिखाकर बोला, ” देखो तुम्हारी सौतन का फोन है।”

कविता,” नहीं अभी तो ये हमारी सास हैं।

ममता ने फोन पर बताया कि वो परसों सुबह पहुंच जाएगी। जय और कविता ये सुनकर खुश हुए और योजना बनाने लगे की अब कैसे ममता को जय के प्यार में गिराना है।

उस रात कविता और जय ने कसम खायी की जब तक जय ममता को चोद ना ले, वो दोनों भी चुदाई नहीं करेंगे। अगले हफ्ते जय के फाइनल ईयर के पेपर भी थे, इस वजह से भी ये इरादा किया गया। कविता फिर अलग कमरे में सोने चली गयी। और जय अपने कमरे में।

 

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