विधवा मां और बेटा Chapter 3
जैसे की आपने पिचले अपडेट में पढ़ा की बिंदु केसे लेगिंग्स पाहन के नमन को देखने के लिए बुलाती वह और नमन भी केसे पानी मां की बड़ी गान दिखें ऐसे मुझे फोटो खिचवा रहा था .. अब आगे…
नमन – चल मां अब तू खादी होगा तू खादी होके दिवार की तराफ मिट्टी जा पूरी..
बिंदु – अब दिवार के सामने खादी हो जाउंगी तो भला ऐसे कैसे फोटो खिचेगा शकल तो दिखी नहीं ना….
नमन – आर मां तू क्या जाने आज कल नाय पोज मुझे फोटो खिचवाते हे, तू देख तेरा ये बेटा कैसे फोटो खिचता वह मां तू भी देखेंगे तो कहेगी वह मस्त खिचे है ये सब पापा तुझे कहीं फोटो नहीं है कुछ ऐसा है वह मां तू देख अब तेरा बेटा मस्त फोटो खिचवाएगा चल तू दीवार की तराफ खादी होगा और अपना एक हाथ कमर पे रख और मस्त मुस्कान कर के अपनी मुंडी पिछे घुमके कैमरे में देख मोबाइल के….
बिंदु – (हे भगवान न जाने ये लड़का कैसे कैसे फोटो कुछ जाएगा मन मा कहा) हैं बीटा इसमे तो मेरा सिरफ पिचवाड़ा ही आएगा ऐसे कोई थोड़ी तस्वीर खिचवाता हे भला (बिंदू दिवार की तरफ मिट्टी के खादी पुरा न मान पिचहे उब की ट्रैफ द और साइड से दो जंघे भी बहार आ रही थी और एक दम मनो पुरी भाई पूरी घोड़ी गद्रेई रैंड लग रही थी बिंदू ये बात का और बिंदू को भी आ गया था नमन है लिया ही की नमन है थोड़ा सा लोड का प्यार बिंदु को देख के पता चल गया था लेकिन वो थी एक मां अपने बेटे के साथ करना तो क्या सोचना भी अच्छा नहीं लगता था मगर नमन के पंत का तंबू और नमन के साथ नमन के पंत का तंबू और नमन के साथ नमन में खुद खिचवाते थे था उसे वजाह से आज उसे कुछ अलग ही महसूस कर रही थी.. और वो भी बस दिखावे का विरोध कर के फोटो खिचवा रही थी
नमन – ये ही ना मेरी प्यारी मां वाली बात बस थोड़ा सा और मिट्टी और मुस्कान दे और मां कमर के थोड़ा और आला हाथ रख न बहुत ऊपर रखा वह मां ट्यून
बिंदु – क्या वह भगवान कैसे कैसे फोटो खिचेगा तू रे … ले बस रख दिया हाथ चल अब जल्दी खिच बगीचा दर्द कर रही हर मेरी …
नमन – बस मां अब हो ही गया बस 1 सेकंड ये ले नमन ने कैप्चर का बटन दबया और फोटो क्लिक हो गई (जिसमे बिंदू एक पागल मस्त गद्रया देसी माल लग रही थी जिसने पहली बार इतनी टाइट लेगिंग्स में अपने को गद्ररे पिचे मिट्टी के फोटो खिचवेई कमर पे हाथ रख के तो ऐसा लग रहा था मानो खुद गंद दिखा रही हो अपनी 44 या 46 के चौडे चुतड़ जो खुद गंद मार्ने के लिए बुला रही हो एशिया लगा रहा था …..)
बिंदु – क्या बीटा हुई की नहीं खिची की नहीं फोटो है? दर्द कर रहा वह हाथ और कमर दोनो बेटा..
नमन – अरे मां मुझे लगा आपको पता चल जाएगा फ्लैश हुई तो मोबाइल से है आपको बोला नहीं
बिंदू – हैं बेटा ये सब मुझे आता है वह रे तू बताएगा वेसे कर शक्ति हू बस रे तेरे पापा ने मोबाइल यूज ही नहीं करने दिए तो किस सब पता चलेगा (ऐसा कहते हुए बिंदू सीधी खड़ी हुई और बोली) हाय तो फिर से बदन दर्द कर रहा वह ऐसे कमर पे हाथ रख के पिचे घुमने से आह बेटा ठक गई में अब बैठ जाती हूं और ला दीखा कैसा फोटो आया वह तेरी है विधवा घोड़ी का
नमन – हैं मां क्या बताउ कितना मस्त फोटो आया वह आप देखेंगे तो आप भी खुश हो जाओगी..
बिंदु – हैं पहले दीखा तो सही रे…(नमन के हाथ से फोन लिया और देखा) …. हैं हाय बाप रे इसमे तो पिचे से कितनी मोती लग रही है रे घोड़ी ऐसा फोटो मत खिच बेटे रे ये देख मेरा पिचवाड़ा तो पुरा उबर के बहार आ गया वह रे इसमे तो और कमर पे हाथ रखा था जो तूने करवा लिया ये तो मेरे पिचवाड़े को दिखा रहा है वह ऐसा लग रहा है वह रे बेटा ऐसा मत खिचवा फोटो इसमे मुझे कितना खराब रिले लग रहा है कोई देखेंगे तो क्या सोचा देखेंगे विध्वा होते ही केसे रंग चढे वह घोड़ी को देख बेटा कितना बड़ा पिछवाड़ा लग रहा वह रे मेरा ऐसा लग रहा है वह मनो में पिचवाड़े को देखने के लिए ही फोटो खिचवेई कैसे लगा बदल रहा है औरत हूं विधवा मां का ऐसा फोटो खिचा हे रे ट्यून बेटा मेरे लाल…
नमन – आर माँ ऐसा कुछ नहीं वह आप फेसबुक व्हाट्सएप नहीं चलता टीवी नहीं देखते तो आपको केस पता की ये मुद्रा आज कल बहुत लोग मैं फोटो खिचवाते वह औरत भी और लड़की भी खिचवाती वह और रही बात आपके वो बड़े हैं बड़ी बात वह आप से भी मोती मोती औरते ऐसे मुझे फोटो खिचवाती वह आप खमाखा दार रही हो मां बस करो अब कोई ज्यादा बड़ी बात नहीं वह देखो ना आप कैसे मॉडल लग रही हो इस्मे मस्त (नमन उसे मां में को रहा था जो की उसे भी पता था मुझे पोज दे रहा है बिंदू बड़ी रंडी लग रही थी)
बिन्दु – चल अब तू कहता है तो वह वही आदमी लेति हु की ऐसे फोटो लॉग खिचवते होने मुझे आज तक फेसबुक वगेरा चलाना नहीं आता और टीवी वह ही कहा हमारे घर में तू मोबाइल पर देखता रहता है मैं तो बस पेपर पढ़ लेटी हूं रे चल अब तुझे एक बात बोल दू तुझे मेरी कसम ही तू कभी मेरी कोई भी फोटो किसी को नहीं दिखेगा…
नमन – माँ में तेरा बेटा हुआ तू मेरी प्यारी माँ वह मैं भला तेरे फोटो किसको दिखूंगा तू कह मुझे फ्रेम करने के लिए लगवटे वह ना जैसा सब के घर में होते वो वो फोटो तेरा और मेरा दिवार पे लाते वह फोटो..
बिंदु – नहीं रे बाबा मारवेगा क्या एक तो मुझे विधा ऊपर से ऐसे कपड़े में मेरी फोटो दीवर पे टेंगे तो लोग आएंगे वो क्या सोचेंगे भला विधवा घोड़ी पूरी पति के मार्ने के खराब देखो केसे सुखी वह … बेटा दुनिया का पता नहीं दुनिया विधवा औरत की बहुत बाते उड़ती ही बेटा तू कोई भी फोटो मत निकलवाना बस अपने मोबाइल पे रखना तेरी और मेरी याद हम दो मां बेटे की आज मेरे लाल ) बेटा मुझे फोटो खिचवाने का बहुत शौक ता जो तूने आज पुरा किया रे मेरे लाल… चल अब निंद बहुत आ रही वह सो जाते ही अब चल में कपड़े बदल लू..
नमन – तेरा बेटा मां अपने पास ही रखागा फोटो चल अब मुझे भी सोना ही चल सो जाते हैं तू कपड़े बदल ले ना मां में बहार चला जाता हूं
बिंदु – नहीं नहीं बेटा तुझे बाहर जाने की जरूरत नहीं मुझे ये लेगिंग्स कुर्ता नए वह हैं लिए धोने डालने ही में बाथरूम जा रही हूं वही कपड़े बदल की आउंगी तू बस गद्दे बिछा दे हमारे दो और बिंदु पे… हाथ में नाइटी जो की उसी बिस्तर पे ही राखी थी वो लेके गंद मटके की जो की कुर्ता पुरा गंड की दादर में फस गया था बड़ी निश्चिंत होके अपने बेटे के सामने से कमरे से बाहर निकल के चली जाति वह अपने ऊपर और और पुरा पैंटी का सहे और अंदर कोई डार्क कलर की पैंटी पहनी थी उसका भी कलर कुर्ता हैट जाने से सब दिख रहा था और वो रोम से निकल के किचन के पास में बने बाथरूम में चली जाती वह और और से सिरफ दरवाजा देता वह और कुंडी नहीं लगती ऐसे ही कपड़े बदल लेते हैं जो कि उसे पता था की नमन गद्दे बिचएगा याह नहीं आने वाला…
नमन – ( साली क्या मदरचोद रंडी साली घोड़ी लग रही थी एक नंबर की बाजारू रंडी साली लेगिंग्स मी तो चुआत साली के और मदक और गडरे लग रहे थे और पिचे मुदी तो साली कोठे की रंडी लग तो राही को राही को ही है को कर के मुझे फ़िदा कर के पता के छोडूंगा साली को… और ईओ 2 गद्दे बिचा देता वह और उसके ऊपर चादर दाल देता वह)
बिंदु – वह भगवान ये नमन को ना जाने केसे फोटो खिचवाता वह मुझसे और उसका वो भी केसा लग रहा वह …. वह भगवान जवान बेटा वह ऊपर से भी ऐसी गद्रराय घोड़ी हू तो होगा ही ना ऐसा सोचा हो जाता है न और इस बार ब्रा पैंटी सब निकल देता है वह वही है पैंटी निकला ती वह उसकी पैंटी में उसकी चुता पे बना काला जंगल जातो वाला उसमे से एक बाल पैंटी में फस जाता वह जो की पैंटी निकलाने के साथ उसमे फास के हमारे पिता होता और और वह रे… आआआ मां ये बाल भी कटने का समय नहीं रहता कल कटने ही पडेंगे नहीं वक्त… मगर जो भी हो मेरा प्यारा बेटा अपनी विधवा मां का ध्यान भूत रखता वह रे बस भगवान उसे मैट करना मुझसे अलग रखता है सहारा ही रे वो…. ऐसा कर के वो अपने नाइटी पुरी फुल साइज की कॉटन की पहन लेटी वह और अंदर से नंगा एक दम और बहार आके कामरे की तरफ बढ़ती वह….
नमन – इधर नमन गद्दे पे लेटा हुआ था और पंखा पूरी स्पीड से ऊपर चला रखा था और सोने की कोशिश कर रहा था और लाइट्स ऑफ कर दी थी उसे और तबी बिंदू और सब कामरे की लाइट्स ऑफ कर के सोने के लिए दखिल होती हे। …
बिंदु – तो गया मेरा लाल ? अपनी मां का इंतजार भी नहीं किया ट्यून तो?
नमन – अभी कहा सोया हूं मेरी मां बस ऐसे ही तेरे इंतजार में आंख बंद कर के पड़ा हूं मुझे लगा डेर लगेगी लेगिंग कुर्ते को भीगी बाल्टी में तो….
बिंदु – हैं बस बीटा ज्यादा से ज्यादा 10 मिनट में आ गई बस लेगिंग्स कुर्ता भगोया और बाथरूम गई फिर आ गई (उसने ब्रा पैंटी भी धोने दाल दी थी मगर वो नहीं बता उसे)
नमन – अरे मां कोई बात नहीं चलो अब शांति से सो जाएं आप देखो रात के 11.30 हो चुके ही आप सुबह 6.30 बजे उठी हे एमडब्ल्यू से 8 बजे तक पड़ा रहता हूं ना
बिंदु – अरे बीटा उसमे कोसी बड़ी बात वह आज ट्यून है विधवा मां को अच्छी पानी पूरी खिलाड़ी और अच्छे फोटो खिचे तो डर तो होयगिना ऊपर से कोसा सबा उठ के कहीं जाना ही हम… अच्छा एक बात बताता है कब से पुछ थी की तेरे पास इतने पेसे कहा से आए जो ट्यून मेरे लिए इतने कपड़े लिए और मुझे इतने पेसा उदय ट्यून बेटा….
नमन – हैं मां सुनेगी ना तो खुशी के मारे ऊंचे पदेगी तू..
बिंदु – सुना देना और खुश नहीं देखना चाहता क्या तू अपनी विधवा मां को?
नमन – आर मां अब क्या बताउ थोडे दिन पहले मेने एक प्रतियोगिता मुझे हिसा लिया था उसमे एक परीक्षा देना था जिसे मैंने पास किया तो मुझे कॉलेज के अगले 3 साल तक पढूंगा तो उसमे मुझे हर माहे 15000 रुपये की छात्रवृत्ति मिलेगी और जब कॉलेज तो अच्छी नोकरी भी देंगे मुझे बता अब कुछ ना?
बिंदु – क्या हुहुहुहू क्या मेरा लाल ऐसा कह के नमन की मां बिंदु नमन को एक दम से अपनी और खिच के लेटे अपने गले लगा लिया जिससे उसे दोनो चुचे जो की सिरफ एक कपास की पटली नाइटी में नमन वो में नमन वो में एक दब गए प्योर अहह बेटा कितना खुश हुई रे तेरी वजह से अब घर और भी अच्छे से अब पेसो की कमी ज्यादा नहीं लगेगी बेटे ट्यून पूरी जिंदगी का कश्त दूर कर दिया मेरे लाल ऐसा कह के नमन को एक दम भारी में को अपने से लगा के भी दिया जिससे नमन की छत्ती में और भी उसके बड़े बड़े तारबुच जेसे चुचे भी गए और नमन के माथे के घने बालो में हाथ घुमने लगी… मेरा लाल मेरा प्यारा बेटा… उम्म्म कर के गणित पे चुम लिया
नमन – अरे मां ये तो तेरे और मेरे अच्छे नसीब ही मां और नमन ने भी बिंदू के पिचे हाथ दले और पीठ पे हाथ घुमाया और उसे भी पक्का मालुम हो गया की उसे मां ने बिना ब्रा के बड़े बड़े में उसे दिया वह दोनो … मां बेटे एक दसरे को प्यार कर रहे थे और नमन ज्यादा हवा से अपनी मां को गले लगा के उसकी पीठ में हाथ घुमा रहा था … और उसका लुंड भी खड़ा होके मां की जंगो जो मन थी उसपे ही मैं बहुत था था जिस्की गरमी की वजह से लोडा और भी जत्के मार रहा था मां की जांघो पे जो बिंदू को एक पल के लिए अहसास हो भी गया मगर उसे देखा कर के अपने बेटे को ही प्यार से ना कहीं उसे भी अपने बेटे के अलगन में अच्छा लग रहा था…
बिंदु – मेरा लाल आज इतना खुश हुई की क्या बताउ मेरे लाल मुझे तेरे बहुत गर्व हो रहा है वह रे मेरे बेटे इसी कह के अपने बेटे के माथे पे चुम्मे की बरसात कर रही थी और अपने बेटे को और को। .
नमन – मां अब बस भी करो तुम्हारे बदन ने मुझे दबोच लिया वह (ऐसा जुथा विरोध कर के नमन अपनी मां को अलग होने के लिए बोलता है) अभी सो जाओ आराम से
बिंदु – नमन के माथे में आखिरी चुम्मा लेके बिंदु अपने से अलग करता है नमन को और कहती है मेरा लाल तेरी मां को बहुत खुश किया ट्यून
नमन – आर मां अभी भी हर खुशी दूंगा तुझे जो पापा नहीं देते और कोस्टे द तुमको वो हर खुशी दूंगा और अच्छे से रखूंगा तुझे
बिंदु – बीटा अपनी मां को और सर पे मत चड्ढा बहक जाउंगी…
नमन – हैं मां सर पे कह चड्ढा रहा हूं बस बता रहा हूं मुझे खुशी दूंगा अब से मैं… कोई काम नहीं रखूंगा
बिंदु – चल अब कहीं अपनी मां को खुशी देके पागल मत कर देना और सोजा हाहाहा कर के हसने लगी रात बहुत हो गई वह रे ऐसा कर के वो सो गई..
नमन – (यार मैं हैं मां देखती जा तेरा बेटा पागल कर दूंगा तुझे सुख देके) और वो भी सोने लगा
जैसे के आपने पिचले अपडेट में पढ़ा के केसे नमन और बिंदु फोटो सेशन के बाद सो गए और रात के 11.30 बजे तो गए अब आगे…
रात के 2 बजे…
बिंदु – हे भगवान ये गरमी भी ना पुरा बदन पासिन से नाह गया मेरे गद्दा भी गिल कर दिया वह भगवान है गदराए बदन का कुछ करो सोते वक्त बहुत गर्मी लगी वह पूरी तरह से विधवा को ना जाने पसीन से पंखा भी जाती है चल रहा वह फिर भी … (ऐसा कह ही बिंदू ने पासिन से जाने बदन पे हवा लागे इसके लिए अपनी रात को उठना चाहा इसके पहले उसे नमन की तरह मिट्टी के देखा जो की करवा लेके घोडे बीच के सो बिंदू रहा फिर जोकर उठाई कमर तक और पेरो को फेल्या और पाखे की हवा को उसके जांघो और कमर और काले जातो वाले भोसदे पे लगान लगी) पासिन से सनी हुई थी आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह क्या मस्त थंडी हवा लग रही’ क्या मस्त थंडी हवा लग रही है..
थोड़ी देर बाद उसे और ज्यादा आने लगी तो उसके अपने हाथों से रात को पकड़ के पेरो को ढकने के लिए आला डाला और आला देखा नहीं और बस रात आधि भी नहीं गई आला एक पुरा पर दिख रहा था से उसे लगा रात आपको लेकिन अब और के आघोष में उसे ज्यादा पता नहीं चला फिर वो तो गई करवा लेके उसे बीजी पता नहीं चला…
(थोड़ी डेर बाद रात के 3 बजे नमन उठता वह और देखता ही उसे जोरो से सुसु आई वह वो उठा ही और अपनी मां के तराफ न देख के सिद्ध उठा के बत्र्रोम जाता वह 5 मिनट। तो उसका होश उड़ जात वह और उसकी हवा का बच्चा जग जाट वह उसकी मां लेती थी मगर एक दम आला से राती पूरी उपरा खो गई थी और एक प्रति पूरा नंगा दिख रहा था गद्रया मंसल वो ही जंग जिस रात में लेगिंग को दे खा था उसे वो नंगी देख रहा था उसे मां ने सिरफ नाइटी पहानी थी और पूरी नंगी थी वो उसे मालुम था नाइटी जरा सी भी ऊपर चढ़े तो उसे उसकी मां गद्रायि गंद दिखी जो उसके पीछे उसे कुछ नमन पागल लेथा
[img=285×0]https://i.ibb.co/gJrwV1f/images-8.jpg[/img]
नमन – (अरे यार साली क्या लग रही है वह घोड़ी विधवा साली एक नंबर की रैंडी लग रही है देखो केसे बेफिक्रा होके घोड़े बीच के तो राही वह साली कुटिया कहीं की बाजारू सालि क्या मंसल जंघे वह एक नामांची है है और आज उसे मुथ नहीं मारी थी तो वो भी अब ऐसा नजर के हवा को कंट्रोल नहीं कर पाता और अपने खड़े लोडे को रात के पंत में से हिलाने लगा वह और अपनी मां को मैं गलियां देके मुझे मारने देता हूं वह और करीब 15 मिनट जोरो से मुठ मरते मारते ठक जाता वह और जोर से हिला के 20 मिनट में वो जद जाता वह और उसका गढ़ा गढ़ा रस उसके पंत में ही छोड़ देता वह)
(दोस्तो आपको बता दू नमन जब भी मुथ मरता था तो वो उसका मुथ अपने रात के पंत में ही गिराता था जो बिंदू जब धो रही होती वह उसे पंत तब उसे कभी कभी थोड़ा थोड़ा पता चलता भी वह मगर वो सोचती ही वह और मुथ ना मार्ने किवाजा से चूहे में सोटे समय गिर जाता होगा उसे वो ऐसे समाज के अनदेखा कर देती थी)
नमन – आआह अब शांति मिली साली आआह कुट्टिया विध्वा बिंदु साली केसी गद्रेई वह तू तो …. अब जल्दी ही तुझे पता के पेलुंगा दिन रात साली ऐसा बोल के मुथ मरने की वजाह से उसे कब पता है।
(सुबाह के 6.30 बजे वह सूरज की हल्की रोशनी निकल ही और…)
बिंदु – ओह्ह मां कर के उठती वह सुबह के 6.35 हो रहे थे और वो बेथ ती ही गड्डे में तो अपने आप को ऐसे ऐसे ऐसे अध नंगी पति वह तो बिना कुछ सोचे नमन की और सीधी के आती और सोचती वह (आए है रे घोड़ी घर में बाजू में जवान बेटा और मुझे इतनी भी खबर न रही की आला से सब दिख रहा है ऊपर से कुछ कुछ नहीं कहना) बिंदु उठा के चली जाति वह और गढ़ की डर में फासी रात निकले बिना सिद्ध घर में बाथरूम में घुस जाति वह क्यों उसे जोरो से स्नानरोम लगी थी
और बिंदू वही ही ब्रश कर के संदास कर लेटी वह और उसके भोसदे पे उगा हुस घाना बालो का जंगल को कैसी से काट देता है और उसके कटे हुए बालो को साथ ले गई प्लास्टिक की थाली में दाल देता है …. नाह के बिंदू अब वपिस एक फुल साइज नाइटी पाहन लेटी वह जिस्के और ब्रा पैंटी और पेटीकोट भी पाहन लेटी वह… आज तो सुबह थी उसे जवान बेटे के सामने घर में भी तो रहना था काम करना था लिए नादर सब पाहन ले वह जो की उसे गडरे बदन को संभलने की नाकाम कोशिश करता था उसके ब्रा और चड्डी… वापस बहार आके घर के कम में लग जाती ज
(सुबह के 8.30 बजे बिंदू किचे ने नाशते के परोठे बना रही थी और तबी नमन रूम से बाहर वह और अपनी मां को किचन में पता वह जो की गांद में नाइटी घुसी होने के बावजूद भी बेफिकर होके परोथे बना रहा
याह देख के नमन को फिर से कल रात देखी उसकी मां की जंघे याद आ जाति वह आज तो उसके छुटडो की डर में फसी नाइटी भी उसे याद आ जाती वह और वो भी देख के लोड को सहला घुस के बथरोम में कर्ता हे
बिंदु – नमन के बाथरूम के बंद काने के आवाज से बिंदु देख के बोलती वह उठा मेरा लाडला चल आज मस्त नशा बनाया वह आजा नाश कर ने बेथ जा मेरे लाल जल्दी …
नमन – आर मां बस में मैं संदास लगी वह बस कर के आया मैं, [ख] हल मां तू तैयर रख नशता में अभी आता हूं फिर साथ में बुरा करता वह हम
बिंदु – हा बस तू आजा जल्दी कर के भुख लगी हमूझे बहुत बेटे
(15 मिनट बाद नमन आता ही बहार और देखता ही बिंदू आला बुरा लगा देता है और वो भी बैठा जाता हे आला)
नमन – चल मां नशा करता वह पेट हलका हो गया बहुत बुल्ह लगी वह मस्त पराठे बने ट्यून मेरी प्यारी मां चल में तुझे पहला निवाला अपने हाथो से खिलाड़ी और नमन अपनी मां के मुह में निवाला देता हे
बिंदु – चल बेटा अब में भी खिलाड़ी तुझे ये ले खा जी भर के अपनी मां के हाथ के परांठे.. बीटा एक बात बोल दू कल जो तूने बताया था ना की तुझे हर माहे 15000 मिलेंगे छात्रवृत्ति मुझे मेंने एक मन्नत की तू जितनी तारकी करेगा में द्वारकाधीश के दर्शन करने जाउंगी तो तू ले चलेगा तेरी इस विधवा मां को तेरे पापा जिंदा तब से ये मन्नत मेने राखी हा तो बोल यू तेरी इज विधवा मां की मन्नत पूरी करेगा?
नमन – अरे मां तू जो बोल वो करुंगा बोल ना कब जाना ही तू जब बोले तब ले चल तुझे अभी द्वारका खुल गया ही तेरी मन्नत भी पूरी करवा दू मेरी मां ये कह अपनी मां के मुह में और… .
बिंदु – हाय रे बेटा तू जब कहेगा तब चलेंगे तेरे लिए ही तो राखी थी मन्नत हम ने पर बेटा वो सारे के ब्लाउज सिल के नहीं आए ना अभी तक तो फिर केसे जाएंगे हम?
नमन – आर माँ तुझे अब कोंसी साड़ी पहन्नी वह अभी जो लेगिंग्स कुर्ता लिया वह वो ही पाहन लेना माँ अब साड़ी पहन्ना छोड अपनी इच्छा पूरी कर बउत इच्छा थी न तेरे लेगिंग्स कुर्ता पहने की तो आज मोका पुरा अपने बेटे के साथ साड़ी हैसरते इच्छा पूरी कर ले और मैं तो तुझे तू लेगिन्स पढ़नेगी तो तुझे ले चलूंगा द्वारका बताता हूं
बिंदु – ना बाबा ना देखा ना कल केसी गद्रायी घोड़ी की जेसी दिख रही थी में तू अगर लेगिंग्स पहना के लेके जाएगा ना तो पडोसी क्या सोचेगा में विधा के नंगे मैं उडर तो नहीं पहचनेगा कोई मगर होगा के बहार चल ही जाएगा ना और ना जाने केसी बात करेंगे मेरी सब पिचवाड़ा ये जंघे सब दिखता वह उसमे लेकिन मुझे बहुत अच्छी भी लगती है मेरी लेगिंग्स बेटा.. अब क्या करू भगवान ने मुझे बदसूरत बेडोल बनाया तो क्या नहीं है।
नमन – आर माँ किसने तुम्हें और किसने कहा की तू बड़ी बदसूरत वह तू जी भी तेरा हर और मुझे प्यारा है माँ तू पूरी की पूरी मुझे प्यारी है बस तू लेगिंग्स ही पहन और एक बात है तू बहार जाएंगे तो पदोसी घुरंगे तो उसके लिए मेरा एक समाधान वह और आज रात की 12 बजे की बस से जाएंगे सब सो गए होंगे तंब कोई बहार नहीं होगा और हम कल सुबह पाहुच जाएंगे और फिर कल करेंगे हम वापस आएंगे तब भी कोई नहीं देखेंगे तुझे लेगिंग्स में मां बता केसा दिमगा लगा तेरे बेटे ने तेरे लिए बता…
बिंदु – हाय रे केसा दिमाग पाया वह रे ट्यून लगा वह तू तेरी है विधवा घोड़ी को लेगिंग्स में ही लेके जाएगा बदमाश कहिका ऐसा कह के नमन के गाल पे हलकी सी प्यारी सी चपत मार दी….
नमन – (इधर नमन सोच के ही साला बेबक हो गया था साली उसकी मां की गंद केसे लेगिंग्स में मटकेगी और केसी साली दिखेगी एक नंबर की बजारू रंडी जैसी और लोडा अब से ही जत्के मार रहा था) रात मैं तयारी कर और हम नहीं के ही निकलेंगे बस में और कल सुभा उतर के सिद्ध दर्शन कर के द्वारका घूम के शाम को बस में जाएंगे मां .. जो तूने कल नई लेगिंग्स कुर्ते को धो दूंगा। और मैं अभी रात की बस के टिकट बुक कर देता हूं स्लीपर की
बिंदु – आर नमन मुझे एसी बस में मत लेके जाना मुझे उसमे अच्छा नहीं लगता घुतन होति बस तू ऐसे ही सोफ मैं सो खातिर वैसी बस में ले जा जो तेरी विधवा मां को लीता के बस द्वारका पाहुचा दे बस आहा वर्ना सीट बस मुझे मेरी ये (गंद की तरह ईशर कर के) राह जाति वह बैठा के रे ऊपर से बस की सीट इतनी छोटी होती वह मुझे इतनी बाहर फेल जाति हू रे बेटा हाहाहाह है दी
नमन – अरे मां तू क्यो छँटा कर रही ही तेरा बेटा ही जो तुझे ले जाएगा आराम से बस तो चिंता ना कर ले लेंगे हम दोनो तेरे साथ तुझे सत के सोके तेरे बदन के भूलभुलैया लुंगा साली अब बस मुझे रात का इंतजार ही मां
बीएनडीयू – क्यो (एक गंदी वाली स्माइल दी) अपनी मां को लेके जाने के लिए उतार क्यो हे बेटा तू?
नमन – आर मेरी प्यारी मां पहली बार तू और में अकेले कहीं बाहर जा रहे हैं वह मुझे बहुत खुशी है मां चल अब में नहीं जाता हूं (और नमन वहा से उस के नहने चला जाता है)
बिंदु – वह भगवान न जाने ये लडका ले तो जा रहा वह लेगिंग्स पहना के मुझे एल्किन रस्ते में कुछ दीकत ना हो तो न जाने केसी घोड़ी लगूंगी लोग केसे घोड़ी को घुरंगे रे … घर के काम में लग जाती है)
हेलो दोस्तो केसे की पिचले अपडेट ने आपके पढा नमन नाशता कर के स्नानरोम में घुस जाता है नहने और बिंदु घर कम में व्यस्त हो जाती है….
नमन – आज तो रात में बस में तेरे बदन से खेलूंगा सालि देख तू भी तेरे बेटे को इतना प्यार में तड़पौंगा की साली खुद बोलेगी पल दे विरोध करने लायक नहीं हिराखूंगा साली तुझे जटा वह)
बिंदु – देखता वह नमन लम्रे में जाता वह और वो भी अपने लेगिंग कुर्ता जो आज रात पन्ना था उसे धो के सुखाने रख देता है और उसे भी वो रात के लिए बहुत खुश थी बरसो हो गे अपने से बाहर से अपने से बाहर पाना बेटा उसके लेके जाने वाला था
नमन – अनादर कामरे में जेक तैय्यर होके अपने मोबाइल में से दोनो की आज रात की टिकट बुक कर देता वह जो की जान के ऊपर के सोफे की करता है जिस से उसे मां को चढने में दिकतर हो और वो उसे पढ़ा मां को पढ़ा में ढाका देता रहा है उसने आज रात की स्लीपर की ऊपर वाले सोफे की सीट किताब की और बाहर देखने आया जहां बिंदु घर के बाहर निकल के सब्जी वाले से सबजी ले रही थी और गंद में एक दम से एक दम से थी और पवन का हलका सा फतका था जो की नाइटी को पिचे से एक दम गान पे चिपका दे रहा था और वो पर को हिलाने की वजह से चुतड़ की थिरकान ले ले के सब्जिया लेके चल के घर में और नखिल रात के सोफा बुक कर दिया मेरा और तेरा रात 12 बजे की बस वह हम 11.45 को निकलेंगे याहि पास में ही पिकअप प्वाइंट वह वहा बाइक लेके चले जाएंगे वहा से बस में बैठे जाएंगे मां
बिंदु – हाथ में सब्जी की थाली लिए आए हैं मेरे लाल कितना ख्याल रखता है अपनी मां का रे कमिन कितना सर पे चढ़ेगा मुझे पागल कर देगा बेटा आज तक तेरी विधा मां कहीं नहीं निकली आज उसे भारी होगा दिए वो हैं विधवा को प्यार मनु उतना कम वो फिर से…
नमन – माँ ये इतनी साड़ी सब्ज़िया क्यो ली आज तो हम जाएंगे ना बहार फिर भी
बिंदु – अरे बेटा तू भी ना आज सब्जी थी, ले ली और कुछ अच्छा सा बुरा बना के ले लुंगी हमारे लिए शक्ति में तुझे मेरे लाल तू मेरा इतना ध्यान रखता वह तो तुझे थोड़ी ना ऐसी ही रखूंगी आखिर मेरा एकलोता बेटा मेरा खून वह तू मेरे लाल
नमन – बस कर मां इसकी चिंता मत कर में तेरे लिए और मेरे एलिये आलू के चिप्स के पैकेट लेके रखे हे मां चल अब रात की तयारी कर ना….
(ऐसी ही पुरा दिन रात की उत्तेजना के करन केसे बिट जाता वह ऐसी नोक जोक के साथ दोनो को पता ही नहीं चलता और रात का खाना भी खा लिया आज दोनो ने 9 बजे दोनो फ्री होके कामरे में पलंग बिंदु पे बेथे पैक और कर रही हे)
बिंदु – ये देख बेटा तेरे और मेरे अतिरिक्त मास्क सैनिटाइजर रख दिए पहले तक तुझे और मुझे कोरोना ना हो और ये पानी की बोतल 24 घंटे थड़ा पानी रहे इसमे और ये रिश्ता भी रख दिया हे
नमन – आर माँ बासमस्त पैकिंग किया तूने चल अब थोड़ा आराम कर ले 10.30 बजे उठ के हम तयर होंगे
बिंदु – हा बस ये थाली आगे के मारे में रख देता हूं और ये ले रख दी और अब सोती हूं जरा तू खिसक गद्दा नहीं बिचते वह अभी एक घंटे में ही तैयर होना वह ऐसे ही आराम कर ले वह बस
(10.30 हो चुका नमन उठ के बथोरम में जा के नहने लगता है और अंदर से आवाज देता वह ओह मां सो मत जाना उठ जा अब समय हो रहा है जाने के लिए इधर बिंदु भी तौलिया लेके बाथरूम के बहार आ जाति वह नमन के लिए)
बिंदु – अरे बेटा बहार ही खादी हु कब से तू निकले तब ना
नमन – बहार आता वह साइन पे सिरफ तौलिया लाता होता वह और पुरा नंगा और लुंड वाले उसके पे थोड़ा ऊपर होता वह जो बिंदू देखता वह नमन देखता वह उसकी मां हाथ में एक रात ली वह और चड्डी और ब्रा लेके हाथ में खादी वह जो की दिख रही वह नमन देख के उसे तिरची नजर से देखता है और चला जाता है
बिंदु – उसे एक मुस्कान देता वह नहीं लिया मेरे लाल तूने और मुझे जाने दे
नमन – और नमन वह से कामरे में आके कपड़े पहन लेता है एक टीशर्ट और एक जींस…
बिंदु – नाहा के बदन पोछ के सफेद ब्रा और ब्लू पैंटी पहन लेति हे कुछ ऐसे
बिंदु – और बिंदू अपने बदन पे नाइटी दाल देता वह और कहती वह अपने आप से है रामा ये तो चड्डी और ब्रा ही मेरे में दोनो को वर्ना लेगिंग्स मुझे तो नहीं आते और देखते ऊपर से नमन भी ज़िद करता वह पक्का को अपना देखा पसंद करता है कामिना मगर दात भी नहीं शक्ति मन भी नहीं करसशक्ति प्यार जो करता हूं आहा मेरा पिछवाड़ा आह
नमन – चल मां तू आजा अब जल्दी कर देख 11.15 हो गए वह अभी तुझे लेगिंग्स पहनने में भी दीकत होगी न जल्दी आ बहार
बिंदु – नमन की बात सुन के सकपका के बाहर आती वह आदमी मैं (वह भगवान अभी लेगिंग्स को भी चढाना ही जांगो पे और पिचवाड़े पे भी और बहार निकल जाती है और कामरे में वह वहा नमन ने लेगिंग्स रख दिया होता वह और कुर्ते को भी रख दिया होता वह वो देखता वह और नमन वह से बहार चला जाता वह)
और बिंदू फटाफट कोन में जेक नाइटी को निकल की ब्रा पैंटी में आके लेगिंग्स को उठा के तांग दलने लगती वह जोकी धोने की वजह से लेगिंग्स का कपड़ा और सिकुद सा गया था और वो तांगे दाल दूंगा वह और दोनो और पिचे हैं एक हाथ से जबरदत्ती घुसा के लेगिंग्स में दाल देता वह और हनफने लगता है कि हाय रे विधा गद्रेई घोड़ी और शीशे में सिरफ ब्रा और लेगिंग्स में देखता हूं वह अपने आप को और शामरा जाति वह गदरया बदन देखता है ऐसी लग रही थी…
नमन – माँ कपड़े पहने की नहीं 11.40 हो गए हे
बिंदु – हैं बाबा बस बाल बना रही हु पहन ही लिए बस 2 मिनट। में मेरे लाल (और बिंदू तैयर होके बहार आती वह एक रंडी विधवा सॉला बदन थोड़ा बदसूरत चेचरा एक दम कोठे की रैंडी लग रही थी जो आपके बदन को लेगिंग कुर्ते में जबर्दती समा के लोगो के लिए हम रहा था हर एक थिरकान रंदी की मतवाली लगी थी)
नमन – अरे वह मां तू तो एक दम पताका लग रही हो चलो अब…..
बिंदु – क्या बोला ऐसा कह के रंडी जैसी मुस्कान दी अपनी मां को बदमाश पताक बोलता है और उम्रा की विधवा औरता हूं तेरी मां हूं कोई ….. वो नहीं मुझे समझ में आया और मुस्कान दी
नमन – चलो पकडो थाली और ताला लगा दो में बाइक निकलता हूं…
पिचले अपडेट मी आपने देखा नमन और उसकी मां बिंदु 11.45 को घर को ताला लगा के निकल जाते हैं वह अब आगे…
नमन – आज तो लेगिंग्स में मां तुम मेरे जैसे भी बेत शक्ति हो साड़ी से अच्छा ही न चलो मेरे जैसे बेथ जाओ ना
बिंदु – हा बेटा ये ले पकड़ ये थाली और में तेरे कंधे पे हाथ रख के बेथ जाति हू तेरे पिचे आआह मेरे लाल पर नहीं उठा कितना जाना कितना फेलने पदे वह और (बिंदु ने जैसे पिच से और के पर और डाल दिया तो मानो गान पूरी नंगी ही हो ऐसी लेगिंग्स में दिख रही थी और पुरा पैंटी का शेप भी दिख रहा था मगर रात को सब तो चुके थे ये विध्वा अपने बेटे के पिचे बेथने के लिए और पुरा पैंटी का आकार भी। चुतड को सीट पे फेलये बेथ गई पिच से शुद्ध चुतड़ फेल के बहार आ गए और साइड से जंघे तो इतनी मंसल लग रही थी मानो नमन को उसे अपनी गोदी में बिथा लिया हो और नमन दोनो पेरो के बिच आ गया था
नमन – हैं माँ तू जब बैठी वो ना पूरी बाइक हिल जाती है आराम से बैठा कर
बिंदु – अब क्या करू में इतनी भारी हु ऊपर से ये बाइक की सीट इतनी छोटी होती है और इतनी बड़ी होती है कि मुझे केसे बेथू इस्की वजाह से ये सब होता वह मेरे समलैंगिक लाल (बिंदू पिचे कुर्ता अपना गण और पे देखना बी पे चढ़ने की वजह से पुरा एक तरफ हो चुका था और वो गांद से टोपी के पुरा लेगिंग्स और चुतद दिख रहा सीट तो दिख ही नहीं राय थी इस्के बिच
नमन – आर मां चल अब जेसी भी वह मेरी मां वह चल कोई स्नान नहीं चले अब डेर ह रही वह बस ना छुट जाए..
(और नमन बाइक भाग देता वह 5 मिनट चलते ही बस का पिकअप प्वाइंट आ जाता है और वो बाइक रख देता है और बाकी लोग भी पिकअप प्वाइंट पे होते हैं और बिंदू और नमन बाइक से उतर जाते हैं जैसे ही नमन बिंदू के पिचवाड़े को घुरता ही उसका लोडा जाता है लगता है बाइक से उतरने के बाद बिंदु ने गांद में फसे कुर्ते को निकला ही नहीं था)
नमन – अरे माँ ये कुर्ता सही नहीं किया तूने देख ना केसे फसा ही और है देता ही हाहा
बिंदु – हैं और बिंदु अपना हाथ पिचे ले जा के दोनो छुटड़ पे घुमा देते वह और पति वह उसका कुर्ता दोनो चुतद के बिच में फासा वह पुरा और पिचे पुरा लेगिंग्स मुझे उसके चुतद एक दम नानगे जेसे ही दिख तो अंधेरा था जिस्की वजाह से कोई देख नहीं पा रहा था आया है बेटा आदत नहीं वह न तेरी विधवा मां को इसलिए लिया आह बेटा देना ऐ तो जाने मेरे इसमे कितने बड़े दिखते हैं ऊपर से ये सब और फस पता ही तो मुझसे रहा है बता दें तेरी मां को
नमन – आर मेरा मेरा ध्यान पड़ा तो बता ही दिया ना अब में थोड़ा शुद्ध समय इनको ही घुरता रहेगा थोड़ा आप भी हाथ पिछे ले जाके धक लिया करो मां
बिंदु – अरे बेटा चल तू भी ना तो अपनी मां के इनपे ध्यान रख कर तेरी मां लेगिंग्स में पहली बार घर से बार निकली वह इतनी बड़ी गढ़रायी घोड़ी हु तो ध्यान रखना लोग आज कल बहुत गन्दी ही मेरे बेटे को देखते हैं
नमन – अरे मां तेरा बेटा ही ना तेरे पिचवाड़े को अच्छे से देख के उसका ध्यान रखेंगे तू बस आराम से सफर का मजा ले बाकी मेरे पे छोड दे ये लो बस आ गई मां
बिंदु – चलो बेटा बैठे जाते हैं, मैं भी न जाने देते हैं चलो चलते हैं ऐसा कह के ठरका खाते छूत मटके आगे चली और बस रुक गई सब पैसेंजर चढ रह कोई चढ चुके थे
नमन – हा मा चलो ना आज तो तू भी बस की सेर करेगा वो भी स्लीपर मेरी रानी
बिंदु – अरे बेटा तू ही तो करवा रहा वह वन्ना है विधवा घोड़ी के नसीब में ये सब तू ही वह जो इसकी सब चाहता पूरी करता है मेरा लड्डा मेरा लाल ये कहते हुए दो दरवाजे पे आ गए
नमन – चल माँ चाड अब ला थाली दे मुझे दोनो हाथो से पकाड़ के चाड बस का कदम ऊंचा तेरे भारी बदन वह तुझे चढने में दीकत न हो इस्का ध्यान रखना बारबार पकाड़ के चढना
बिंदु – हैं हा बेटा और बिंदू ने एक पांव स्टेप पे राजखा और एक जमीं पे था एक कदम पे था तो पुरा कुर्ता से गांद और जंग बहार रहे थे जिसमे पुरानी चड्डी में बंदे चुतद और ऊपर पनी पैंटी र साफ और दी ये देख के लोड फंफना रहा था और बिंदु हुई मां वह भगवान घोड़ी चड्ढा दो औ ये कह के दसरा पेरे भी बस पे रखा और शुद्ध चुतड मातकने लगे लेगिंग्स में और पिचे खड़े मर्द पैसेंजर भी देख के मस्त
नमन – वाह मेरी मां चढ गई ( साली अब केसे चढ़ेगी ऊपर का सोफा हे देख के चुतड मसाला हु तेरे)
मैं बिंदु – बेटा आजा कोसी सेटा वह चल बता (मुझे मां के पिचे जाने लगा केई यात्री चढ चुके और के गद्रेई घोड़िया मेरी मां जेसी सोफे पे चढ भी रही थी केई बिंदी ने सारे बड़े में गांडी बंद अलग थी सब से फेली बड़ी गांद लेके बस के अंदर पाटली सी चलने की जग में अपने छुटकारे को जांगो समते दोनो साइड से घी के चल रही थी
नमन – माँ हमारा सब से आखिरी वाला सोफा वह तब तक चलती रह
बिंदु – हा बेटा वो तो बस में खुशी की खुशी में थी की अपना बदन संभलना भूल गई ना जाने कहा कह गा और लगा के घी के चले जा रही थी और आखिरी तक चली गई और कहीं बेटा कोसा हे दया गए
नमन – माँ ये 2 लोग समा के लिए वो वाला बाया वाला वह चढ जा में फिर चढता हु ऐसा कह के नमन ने हहहाहाहाहा माँ ये छोटे दो समर्थन वह प्रति रख के चढ जा सोफे में घुस जा
बिंदु – अरे बेटा ये क्या है इसपे केसे छड्ढू मेरा तो पर ही नहीं ऊपर उठा जाता इसपे केसे छधु हे भगवान कहा छोडोगे इस घोड़ी को
नमन – आर माँ यही सोफा खली था केसे भी कर के चड्ढा मिलेगा तुझे ये ले थाली रख दे तू चढने की कोषिश कर में पिचे तुझे पिछे से ढका दूंगा और चड्ढा दूंगा मगर प्रति तो मैं रखूंगा
बिंदु – हा अब घोड़ी को चड्ढा तो तुझे ही वह मेरे लाल केसे चड्ढा पाएगा देखता हूं भी मुज जैसी भारी घोड़ी को केसे चड्ढा पाता वह ये देख में प्रति रख रही हूं
नमन – आर मां प्रति तो राखे अब वो ऊपर वाला हैंडल भी पकाड ले और अपना बदन ऊपर खिच में पिचे से धक्कड़ देता हूं और ये दसरा पर मैं जब धक्का दू तब ऊपर वाले स्टेप पे देके और फिर सोफे के केबिन में घुस जाना तैयार ना माँ आज तक लगा और चढ जा
बिंदु – आर हा बाबा चढ रही हूं बस याह कह के उसने प्रति उठते ही पुरा कुर्ता टोपी गया और नमन की हलत देख ते ही खराब हो गई चल बेटा अब धक्का दे मेरी ऊंचाई काम पद रही ही ऊपर का हैंडल भी पक्का है घोड़ी से
नमन – माँ में पिचे से उठा हुआ हूँ न रुक और नमन ने अपने प्यारे अपनी माँ का सबसे काम से भाग को अपने दो हाथ से छूत को पकड आमगर चुत का आधा हिसा भी दोनो हाथो से कुछ आया और मैं उर्फ थुल थुला गद्रया पेट कमर सब दिख रहा था कुर्ता पुरा ऊपर उठ गया था ये मां चल अब उठा अपना बदन और नमन ने जान ज्यादा के अपना हाथ उसके चुतड के बिच रखा और दोनो अंगुठे को जितना भी दबाता उसके दो हाथ और डर चले चले जाएंगे और साइड से छुटड़ जंग सम्मेट फेल जाते पर मां उसकी साली उठी नहीं थी
मगर नमन ने और अच्छे से चुतड मसाला दिए और बड़े चाव से मतवाले चुतड़ मसाला लगा और बिंदू भी उसके लिए हाथ उधार पाके सोच रही थी आआ कितना दबता वह रे इसे
मेरे बिंदु – हैं बीटा जोर लगा उठा अपनी मां वेसे तो बहुत गप्पे मार रहा था की तेरी जैसी बहुत घोडिय़ों को उठा सकती हूं मगर आज तेरी मां को ही नहीं उठा पा रहा वह अहहहहः
नमन – इधर चुतड़ मसाला में खो गया था और अपनी मां की ये बात सुन के सकपाका गया और उसे जोर से धक्का ममरा और अपनी मां की गंद के छेद में अंगुठे दबा दिया और उसकी मां दी को ऊपर
बिंदु – हाय रे विधे चड्ढा दी तुझे तेरे बेटे नी कितनी तकत वह रे बेटा तू ऐसा कहते हैं अपने आप को ऊपर चढाने लगी और उसे उसकी गंद पे अपने बेटे के हाथो की मसलन से और भी अच्छा लगा एक लगा। रहा था उसके बदन से क्योकी नमन उसे उठा काम रहा था मगर प्यार से मसाला रहा था हर जगह हाथ घुमा रहा था वो
नमन – चल माँ अब दशहरा प्रति रख के सोफ़े में घुस जा बस चल पड़ी वह अभी तक सब और ग़ुस गया वह याहा तू और तक नहीं घुसी
बिंदु – पर क्या करू बेटे बदन इतने भारी वह उठा पति रे आह तू भी तो कम डबव दाल रहा वह पिचे से बस थोड़ा थोड़ा ही तो उठा रहा वह ऐसा कह के नमन को बोल दिया की तू गढ़ डाबा रहा हे
नमन-अरे मां मैं तो देख रहा था कि तू कितना अपने आप चढ रही वह एक जाटके में ढकेल दू अंदर
बिंदु – ढकेल न केसे ढकेल पता तो वह घोड़ी को या खली बाटे ही करता है कितना बांध वह मुझे भी तो देखो मेरे बेटे
नमन – और नमन ने इस बार दोनो चुतड को दोनो हाथो से दबोच के भी इतना जोर से मारा उधर बिंदु सिद्ध और घुस गई
बिंदु – हाया मेरे राजा मान गई रे कितनी तक वह तुझमे एक ही जाटके में पुरा घुसा दिया तूने तेरी मां को रे है विधवा को ….. चल अब तू भी घुस जा ना ला तेरा हाथ दे तुझे खिचती हूं और के नाम को हाथ दिया और दोनो मां बेटे अब सोफे पे मगर बिंदु ने अपने बदन से आगे से ज्यादा सोफा रोक रखा था
नमन – हा मां ले आ गया तेरा लाडला तेरे पास ले चलो अब ये हमारा दरवाजा हम बंद कर देते हैं
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(अंदर बिंदु के प्रति कुछ ऐसी हलत में जो की पुरा निकला हिसा दिख रहा है जिसको देख के नमन का लोडा और फैनफने लगता है)
नमन – क्या मां चल अब बता केसा लग रहा है वह बस में खिडकी खोल तकी ताजी हवा आया और ये थाली साइड में रख दे और ले जाते हे ना हम क्यो मां?
बिंदु – आर क्याबताउ बस ऐसी होती है वह स्लीपर आज पता चला मेरे लडल इतनी खुश हु की क्या बताउ तुझे और वो खुशी के मारे टंगे फेला के लगने लगते हैं मगर नमन के प्रति पे उसके दोनो प्रति तकरा जते वह ओह बेटा तेरी जेई वह भाई गद्रयी मां ने ही ज्यादा जगा रोक ली तू जाने बाजू में ये ले खिडकी खोल दी मेने
नमन – ( साली खुद फेल के सो गई पर फेल के और मुझे बोलती हे ले जा मगर देख ना आज बहुत कुछ दबंग तेरा तुझसे सत के ले के)
बिंदु = क्या सोचा रहा वह अपनी मां नहीं देखी क्या कभी सोते हुए
नमन – देखी तो वह मगर इतनी खुश सोटे हुए नहीं देखी तुझे कभी मां
बिंदु – आर आज तूने ही तो खुश किया वह मुझे मगर तू सोता क्यों नहीं शर्म आती है क्या तेरी मां के साथ आने में
नमन – अरे माँ तुझसे केसी शर्म तू मेरी माँ हे ट्यून तो मुझे बच्चन में नंगा नहलाया हे तुझसे केसी शर्म रे
बिंदु – फिर चलो ना बाजू में बिंदू थोड़ा और नाकाम कोशिश की और खिसकने की क्योकी उसके चुतड़ उसकी जांघो सब बस की खिडकी की तरफ ढसे पदे द
नमन – अरे मां ये ले बस गया और नमन भी जान बहुत के उसे थोड़ा ज्यादा ही सत के ले गया और गर्मी उसे मां के महसूस करने लगा
(खिड़की खुली होने की वजह से बाजू के तरफ से आते जाते वाहन की रोशनी से बिंदू के बदन पे पदे उजले से पुरा साफा बदन कुछ कुछ पास की वजह से चमक रहा था और नमन बड़े ही प्यार से उसे था निहाल रहा)
बिंदु – आखिरी तूने तेरी मां को चड्ढा ही दिया क्यों मेरे पटले पहलवान ऐसा कह के बिंदु नमन के हाथ पर हाथ लगा और उसे अपना और उसे और उसके लिए माथे पे और गालो पे गणित लगे …. नमन भी उसके साथ… पे और गालो पे चुम्ने लगा
नमन – अखोर तू मेरी मां वह तुझे में नहीं उठा पांग तो मेरी जवानी क्या काम की मां
बिंदु – हा मेरा बेटा बहुत जवान और तकतवाला बदन वह तेरा ऐसा कह के नमन की छत्ती ए हाथ घुमने लगी सच बताता बेटा तुम्हारी मां को उठाने में तुझे दीकत तो नहीं हुई ना अगर ट्यून है भारी भरकम घोड़ी तो कहीं हाथ है करने लगे न मेरे लाल
नमन – आह माँ केसी बात कर रही वह भला तुझे तो रोज़ ऐसे उठा सकता हूं उसमे कोसी बड़ी बात वह मुझे तेरी सेवा करने मा मजा आता हे
बिंदु – अच्छा मेरे लाल मगर तूने मेरे पिचवाड़े को बड़े प्यार से उठा मेरे लाल
नमन – अरे माँ चल न शर्मा मत और कहा से उठा ता पिचवाड़े से ना उठा ता तो तू ही बता दे
बिंदु – आर जो किया शाई ही किया वोही तो जग होति वह अगर किसी को उठाना हो तो मेरे लाल मगर मुझे लगा तुझे वहा हाथ लगा देगा मुझे बुरा लगा हो एक तो इतनी भारी और ये लगा मेरे इतने निकले बूरा लगे तो तुझे बीटा
नमन – अरे मां तेरी हर चिज मुझे अच्छी लगती है तो क्या (नमन ने सोटे हुए साइड से ही बिंदू केडब्ल्यू जांगो पे हाथ लगा के बोला)
बिंदु – क्या सच में ये तुझे पसंद है ये अपनी मां को मुखौटा लगा रहा ज रे
नमन – चल मां ऐसी बात क्यो कर रही वह तू मेरी मां तेरे ये इतने बड़े हुए तो क्या हुआ तेरा बेटा ही उसे सब अच्छा लगता है मां आज से कभी ऐसा मत बोलना मां
बिंदु – हाय रे मेरे लाल वह भगवान केसा प्यारा लड़का दिया वह धुन है विधवा को तेरे पापा को बिलकुल पसंद नहीं द बीटा
नमन – चल माँ अब में न वो पापा द मुझे बहुत पसंद है और ये तेरे कितने गद्देदार और मुलायम ही मुझे दबा के …….. (चुप हो गया)
बिंदु – क्या क्या दबा के क्या बता ना दबा के क्या चुप क्यों हो गया
नमन – कुछ नहीं माँ तू बुरा मन जाएगी रहने दे
बिंदु – हैं तुझे तेरी विधवा मां की कसम बता दे बेटा वर्ना तेरी मां मर जाएगी
नमन – हैं माँ ये कहते हैं दिया ट्यून… सुन मुझे ये दबा के बहुत अच्छे लगा तेरे ये बड़े… कहा वापस हाथ हटा लिया)
बिंदु – क्या बदमाश कहिका सच तुझे इतने पसंद आए क्या मेरे ये और (बिंदू ने नमन का हाथ वापस अपने हाथो से वहा रख दिया) बता ना और तू इसे क्या बोलता है मैं मुझे बता
नमन-छोड़ ना मां तुझे क्या बता तू मेरी मां (जुथा शरीफ बन के बोला)
बिंदु – अरे बता ना उसमे क्या ह इसे क्या बोलता ही तू
नमन – कुछ नहीं
बिंदु – तुझे तेरी माँ की कसम बता
नमन – बार बार तुम अपनी कसम देके मुझे मजबूर मत करो मां अब आखिरी बार बात देता हूं
बिंदु – सोच में कर जाउंगी तुझको अच्छा लगेगा या बता दे क्या कहता है यार मैं इसे
नमन – हैं मां क्या बताउ नमन ने शर्मते हुए धीरे से कहा इस्को मन में मुझे चुतड बोलता हूं
बिंदु – हाय रे अपनी मां के ये बड़े बड़े तरबुच से भी बड़े चुतद को केसे दबा दिया था ट्यून मेरे लाल
नमन – अब मां की अकरु जब्स ए तू ये लेगिंग्स पनी वह इस्मे बहुत थरकान खा के हिलते तो तुझे चढां भी था ऊपर से बस डबा दिया आया कभी ऐसा नहीं करुंगा तुझे बुरा लगे तो
बिंदु – हैं बीटा ऐसा कभी मत बोलना मेरे लाल (ऐसा कह के बिंदु नमन की तरफ करवा ली और हमें वजाह से उसमें जंग नमन के प्रति पे चढ गई)
अच्छा क्या सच में तुझे बहुत अच्छे लग रहे हैं क्या तेरी मां के चुर्द बता बेटा डाबा के?
नमन – अरे मां बहुत मस्त लगते हैं वो दिखने में भी और दबने में भी मां
बिंदू – अच्छा मेरे लाल चल अब सोजा कभी दबा देना ऐदा कल फिर से बस एम चढते वक्त तेरी मां के चुआत ये कह के नमन को अपनी बाहो में भी उसके ऊपर जंग चड्ढा के जाने बिंदू
पिचले अपडेट मी आपने देखा नमन और उसकी मां बिंदु 11.45 को घर को ताला लगा के निकल जाते हैं वह अब आगे…
नमन – आज तो लेगिंग्स में मां तुम मेरे जैसे भी बेत शक्ति हो साड़ी से अच्छा ही न चलो मेरे जैसे बेथ जाओ ना
बिंदु – हा बेटा ये ले पकड़ ये थाली और में तेरे कंधे पे हाथ रख के बेथ जाति हू तेरे पिचे आआह मेरे लाल पर नहीं उठा कितना जाना कितना फेलने पदे वह और (बिंदु ने जैसे पिच से और के पर और डाल दिया तो मानो गान पूरी नंगी ही हो ऐसी लेगिंग्स में दिख रही थी और पुरा पैंटी का शेप भी दिख रहा था मगर रात को सब तो चुके थे ये विध्वा अपने बेटे के पिचे बेथने के लिए और पुरा पैंटी का आकार भी। चुतड को सीट पे फेलये बेथ गई पिच से शुद्ध चुतड़ फेल के बहार आ गए और साइड से जंघे तो इतनी मंसल लग रही थी मानो नमन को उसे अपनी गोदी में बिथा लिया हो और नमन दोनो पेरो के बिच आ गया था
नमन – हैं माँ तू जब बैठी वो ना पूरी बाइक हिल जाती है आराम से बैठा कर
बिंदु – अब क्या करू में इतनी भारी हु ऊपर से ये बाइक की सीट इतनी छोटी होती है और इतनी बड़ी होती है कि मुझे केसे बेथू इस्की वजाह से ये सब होता वह मेरे समलैंगिक लाल (बिंदू पिचे कुर्ता अपना गण और पे देखना बी पे चढ़ने की वजह से पुरा एक तरफ हो चुका था और वो गांद से टोपी के पुरा लेगिंग्स और चुतद दिख रहा सीट तो दिख ही नहीं राय थी इस्के बिच
नमन – आर मां चल अब जेसी भी वह मेरी मां वह चल कोई स्नान नहीं चले अब डेर ह रही वह बस ना छुट जाए..
(और नमन बाइक भाग देता वह 5 मिनट चलते ही बस का पिकअप प्वाइंट आ जाता है और वो बाइक रख देता है और बाकी लोग भी पिकअप प्वाइंट पे होते हैं और बिंदू और नमन बाइक से उतर जाते हैं जैसे ही नमन बिंदू के पिचवाड़े को घुरता ही उसका लोडा जाता है लगता है बाइक से उतरने के बाद बिंदु ने गांद में फसे कुर्ते को निकला ही नहीं था)
नमन – अरे माँ ये कुर्ता सही नहीं किया तूने देख ना केसे फसा ही और है देता ही हाहा
बिंदु – हैं और बिंदु अपना हाथ पिचे ले जा के दोनो छुटड़ पे घुमा देते वह और पति वह उसका कुर्ता दोनो चुतद के बिच में फासा वह पुरा और पिचे पुरा लेगिंग्स मुझे उसके चुतद एक दम नानगे जेसे ही दिख तो अंधेरा था जिस्की वजाह से कोई देख नहीं पा रहा था आया है बेटा आदत नहीं वह न तेरी विधवा मां को इसलिए लिया आह बेटा देना ऐ तो जाने मेरे इसमे कितने बड़े दिखते हैं ऊपर से ये सब और फस पता ही तो मुझसे रहा है बता दें तेरी मां को
नमन – आर मेरा मेरा ध्यान पड़ा तो बता ही दिया ना अब में थोड़ा शुद्ध समय इनको ही घुरता रहेगा थोड़ा आप भी हाथ पिछे ले जाके धक लिया करो मां
बिंदु – अरे बेटा चल तू भी ना तो अपनी मां के इनपे ध्यान रख कर तेरी मां लेगिंग्स में पहली बार घर से बार निकली वह इतनी बड़ी गढ़रायी घोड़ी हु तो ध्यान रखना लोग आज कल बहुत गन्दी ही मेरे बेटे को देखते हैं
नमन – अरे मां तेरा बेटा ही ना तेरे पिचवाड़े को अच्छे से देख के उसका ध्यान रखेंगे तू बस आराम से सफर का मजा ले बाकी मेरे पे छोड दे ये लो बस आ गई मां
बिंदु – चलो बेटा बैठे जाते हैं, मैं भी न जाने देते हैं चलो चलते हैं ऐसा कह के ठरका खाते छूत मटके आगे चली और बस रुक गई सब पैसेंजर चढ रह कोई चढ चुके थे
नमन – हा मा चलो ना आज तो तू भी बस की सेर करेगा वो भी स्लीपर मेरी रानी
बिंदु – अरे बेटा तू ही तो करवा रहा वह वन्ना है विधवा घोड़ी के नसीब में ये सब तू ही वह जो इसकी सब चाहता पूरी करता है मेरा लड्डा मेरा लाल ये कहते हुए दो दरवाजे पे आ गए
नमन – चल माँ चाड अब ला थाली दे मुझे दोनो हाथो से पकाड़ के चाड बस का कदम ऊंचा तेरे भारी बदन वह तुझे चढने में दीकत न हो इस्का ध्यान रखना बारबार पकाड़ के चढना
बिंदु – अरे हा बेटा और बिंदू ने एक पांव स्टेप पे राजखा और एक जमीं पे था एक कदम पे था तो पुरा कुर्ता से गांद और जंग बहार रहे थे जिसमे पुरानी चड्डी में बंधे चुतद और ऊपर पनी पैंटी र साफ और दी ये देख के लोड फंफना रहा था और बिंदु हुई मां वह भगवान घोड़ी चड्ढा दो औ ये कह के दसरा पेरे भी बस पे रखा और शुद्ध चुतड मातकने लगे लेगिंग्स में और पिचे खड़े मर्द पैसेंजर भी देख के मस्त
नमन – वाह मेरी मां चढ गई ( साली अब केसे चढ़ेगी ऊपर का सोफा हे देख के चुतड मसाला हु तेरे)
मैं बिंदु – बेटा आजा कोसी सेटा वह चल बता (मुझे मां के पिचे जाने लगा केई यात्री चढ चुके और के गद्रेई घोड़िया मेरी मां जेसी सोफे पे चढ भी रही थी केई बिंदी ने सारे बड़े में गांडी बंद अलग थी सब से फेली बड़ी गांद लेके बस के अंदर पाटली सी चलने की जग में अपने छुटकारे को जांगो समते दोनो साइड से घी के चल रही थी
नमन – माँ हमारा सब से आखिरी वाला सोफा वह तब तक चलती रह
बिंदु – हा बेटा वो तो बस में खुशी की खुशी में थी की अपना बदन संभलना भूल गई ना जाने कहा कह गा और लगा के घी के चले जा रही थी और आखिरी तक चली गई और कहीं बेटा कोसा हे दया गए
नमन – माँ ये 2 लोग समा के लिए वो वाला बाया वाला वह चढ जा में फिर चढता हु ऐसा कह के नमन ने हहहाहाहाहा माँ ये छोटे दो समर्थन वह प्रति रख के चढ जा सोफे में घुस जा
बिंदु – अरे बेटा ये क्या है इसपे केसे छड्ढू मेरा तो पर ही नहीं ऊपर उठा जाता इसपे केसे छधु हे भगवान कहा छोडोगे इस घोड़ी को
नमन – आर माँ यही सोफा खली था केसे भी कर के चड्ढा मिलेगा तुझे ये ले थाली रख दे तू चढने की कोषिश कर में पिचे तुझे पिछे से ढका दूंगा और चड्ढा दूंगा मगर प्रति तो मैं रखूंगा
बिंदु – हा अब घोड़ी को चड्ढा तो तुझे ही वह मेरे लाल केसे चड्ढा पाएगा देखता हूं भी मुज जैसी भारी घोड़ी को केसे चड्ढा पाता वह ये देख में प्रति रख रही हूं
नमन – आर मां प्रति तो राखे अब वो ऊपर वाला हैंडल भी पकाड ले और अपना बदन ऊपर खिच में पिचे से धक्कड़ देता हूं और ये दसरा पर मैं जब धक्का दू तब ऊपर वाले स्टेप पे देके और फिर सोफे के केबिन में घुस जाना तैयार ना माँ आज तक लगा और चढ जा
बिंदु – आर हा बाबा चढ रही हूं बस याह कह के उसने प्रति उठते ही पुरा कुर्ता टोपी गया और नमन की हलत देख ते ही खराब हो गई चल बेटा अब धक्का दे मेरी ऊंचाई काम पद रही ही ऊपर का हैंडल भी पक्का है घोड़ी से
नमन – माँ में पिचे से उठा हुआ हूँ न रुक और नमन ने अपने प्यारे अपनी माँ का सबसे काम से भाग को अपने दोनो हाथ से चुत को पकड आमगर चुत का आधा हिसा भी दोनो हाथो से था उस नाम और मैं उर्फ थुल थुला गडरया पेट कमर सब दिख रहा था कुर्ता पुरा ऊपर उठ गया था ये मां चल अब उठा अपना बदन और नमन ने जान ज्यादा के अपना हाथ उसके चुतड के बिच रखा और दोनो खांके छु को जितना भी दबाता उसके दो हाथ और डर चले चले जाएंगे और साइड से छुटड़ जंग सम्मेट फेल जाते पर मां उसकी साली उठी नहीं थी
मगर नमन ने और अच्छे से चुतड मसाला दिए और बड़े चाव से मतवाले चुतड़ मसाला लगा और बिंदू भी उसके लिए हाथ उधार पाके सोच रही थी आआ कितना दबता वह रे इसे
मेरे बिंदु – हैं बीटा जोर लगा उठा अपनी मां वेसे तो बहुत गप्पे मार रहा था की तेरी जैसी बहुत घोडिय़ों को उठा सकती हूं मगर आज तेरी मां को ही नहीं उठा पा रहा वह अहहहहः
नमन – इधर चुतड़ मसाला में खो गया था और अपनी मां की ये बात सुन के सकपाका गया और उसे जोर से धक्का ममरा और अपनी मां की गंद के छेद में अंगुठे दबा दिया और उसकी मां दी को ऊपर
बिंदु – हाय रे विधे चड्ढा दी तुझे तेरे बेटे नी कितनी तकत वह रे बेटा तू ऐसा कहते हैं अपने आप को ऊपर चढाने लगी और उसे उसे गंद पे अपने बेटे के हाथो की मसलन से और भी अच्छा लगा एक लगा। रहा था उसके बदन से क्योकी नमन उसे उठा काम रहा था मगर प्यार से मसाला रहा था हर जगह हाथ घुमा रहा था वो
नमन – चल माँ अब दशहरा प्रति रख के सोफ़े में घुस जा बस चल पड़ी वह अभी तक सब और ग़ुस गया वह याहा तू और तक नहीं घुसी
बिंदु – पर क्या करू बेटे बदन इतने भारी वह उठा पति रे आह तू भी तो कम डबव दाल रहा वह पिचे से बस थोड़ा थोड़ा ही तो उठा रहा वह ऐसा कह के नमन को बोल दिया की तू गढ़ डाबा रहा हे
नमन-अरे मां मैं तो देख रहा था कि तू कितना अपने आप चढ रही वह एक जाटके में ढकेल दू अंदर
बिंदु – ढकेल न केसे ढकेल पता तो वह घोड़ी को या खली बाटे ही करता है कितना बांध वह मुझे भी तो देखो मेरे बेटे
नमन – और नमन ने इस बार दोनो चुतड को दोनो हाथो से दबोच के भी इतना जोर से मारा उधर बिंदु सिद्ध और घुस गई
बिंदु – हाया मेरे राजा मान गई रे कितनी तक वह तुझमे एक ही जाटके में पुरा घुसा दिया तूने तेरी मां को रे है विधवा को ….. चल अब तू भी घुस जा ना ला तेरा हाथ दे तुझे खिचती हूं और के नाम को हाथ दिया और दोनो मां बेटे अब सोफे पे मगर बिंदु ने अपने बदन से आगे से ज्यादा सोफा रोक रखा था
नमन – हा मां ले आ गया तेरा लाडला तेरे पास ले चलो अब ये हमारा दरवाजा हम बंद कर देते हैं
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(अंदर बिंदु के प्रति कुछ ऐसी हलत में जो की पुरा निकला हिसा दिख रहा है जिसको देख के नमन का लोडा और फैनफने लगता है)
नमन – क्या मां चल अब बता केसा लग रहा है वह बस में खिडकी खोल तकी ताजी हवा आया और ये थाली साइड में रख दे और ले जाते हे ना हम क्यो मां?
बिंदु – आर क्याबताउ बस ऐसी होती है वह स्लीपर आज पता चला मेरे लडल इतनी खुश हु की क्या बताउ तुझे और वो खुशी के मारे टंगे फेला के लगने लगते हैं मगर नमन के प्रति पे उसके दोनो प्रति तकरा जते वह ओह बेटा तेरी जेई वह भाई गद्रयी मां ने ही ज्यादा जगा रोक ली तू जाने बाजू में ये ले खिडकी खोल दी मेने
नमन – ( साली खुद फेल के सो गई पर फेल के और मुझे बोलती हे ले जा मगर देख ना आज बहुत कुछ दबंग तेरा तुझसे सत के ले के)
बिंदु = क्या सोचा रहा वह अपनी मां नहीं देखी क्या कभी सोते हुए
नमन – देखी तो वह मगर इतनी खुश सोटे हुए नहीं देखी तुझे कभी मां
बिंदु – आर आज तूने ही तो खुश किया वह मुझे मगर तू सोता क्यों नहीं शर्म आती है क्या तेरी मां के साथ आने में
नमन – अरे माँ तुझसे केसी शर्म तू मेरी माँ हे ट्यून तो मुझे बच्चन में नंगा नहलाया हे तुझसे केसी शर्म रे
बिंदु – फिर चलो ना बाजू में बिंदू थोड़ा और नाकाम कोशिश की और खिसकने की क्योकी उसके चुतड़ उसकी जांघो सब बस की खिडकी की तरफ ढसे पदे द
नमन – अरे मां ये ले बस गया और नमन भी जान बहुत के उसे थोड़ा ज्यादा ही सत के ले गया और गर्मी उसे मां के महसूस करने लगा
(खिड़की खुली होने की वजह से बाजू के तरफ से आते जाते वाहन की रोशनी से बिंदू के बदन पे पदे उजले से पुरा साफा बदन कुछ कुछ पास की वजह से चमक रहा था और नमन बड़े ही प्यार से उसे था निहाल रहा)
बिंदु – आखिरी तूने तेरी मां को चड्ढा ही दिया क्यों मेरे पटले पहलवान ऐसा कह के बिंदु नमन के हाथ पर हाथ लगा और उसे अपना और उसे और उसके लिए माथे पे और गालो पे गणित लगे …. नमन भी उसके साथ… पे और गालो पे चुम्ने लगा
नमन – अखोर तू मेरी मां वह तुझे में नहीं उठा पांग तो मेरी जवानी क्या काम की मां
बिंदु – हा मेरा बेटा बहुत जवान और तकतवाला बदन वह तेरा ऐसा कह के नमन की छत्ती ए हाथ घुमने लगी सच बताता बेटा तुम्हारी मां को उठाने में तुझे दीकत तो नहीं हुई ना अगर ट्यून है भारी भरकम घोड़ी तो कहीं हाथ है करने लगे न मेरे लाल
नमन – आह माँ केसी बात कर रही वह भला तुझे तो रोज़ ऐसे उठा सकता हूं उसमे कोसी बड़ी बात वह मुझे तेरी सेवा करने मा मजा आता हे
बिंदु – अच्छा मेरे लाल मगर तूने मेरे पिचवाड़े को बड़े प्यार से उठा मेरे लाल
नमन – अरे माँ चल न शर्मा मत और कहा से उठा ता पिचवाड़े से ना उठा ता तो तू ही बता दे
बिंदु – आर जो किया शाई ही किया वोही तो जग होति वह अगर किसी को उठाना हो तो मेरे लाल मगर मुझे लगा तुझे वहा हाथ लगा देगा मुझे बुरा लगा हो एक तो इतनी भारी और ये लगा मेरे इतने निकले बूरा लगे तो तुझे बीटा
नमन – अरे मां तेरी हर चिज मुझे अच्छी लगती है तो क्या (नमन ने सोटे हुए साइड से ही बिंदू केडब्ल्यू जांगो पे हाथ लगा के बोला)
बिंदु – क्या सच में ये तुझे पसंद है ये अपनी मां को मुखौटा लगा रहा ज रे
नमन – चल मां ऐसी बात क्यो कर रही वह तू मेरी मां तेरे ये इतने बड़े हुए तो क्या हुआ तेरा बेटा ही उसे सब अच्छा लगता है मां आज से कभी ऐसा मत बोलना मां
बिंदु – हाय रे मेरे लाल वह भगवान केसा प्यारा लड़का दिया वह धुन है विधवा को तेरे पापा को बिलकुल पसंद नहीं द बीटा
नमन – चल माँ अब में न वो पापा द मुझे बहुत पसंद है और ये तेरे कितने गद्देदार और मुलायम ही मुझे दबा के …….. (चुप हो गया)
बिंदु – क्या क्या दबा के क्या बता ना दबा के क्या चुप क्यों हो गया
नमन – कुछ नहीं माँ तू बुरा मन जाएगी रहने दे
बिंदु – हैं तुझे तेरी विधवा मां की कसम बता दे बेटा वर्ना तेरी मां मर जाएगी
नमन – हैं माँ ये कहते हैं दिया ट्यून… सुन मुझे ये दबा के बहुत अच्छे लगा तेरे ये बड़े… कहा वापस हाथ हटा लिया)
बिंदु – क्या बदमाश कहिका सच तुझे इतने पसंद आए क्या मेरे ये और (बिंदू ने नमन का हाथ वापस अपने हाथो से वहा रख दिया) बता ना और तू इसे क्या बोलता है मैं मुझे बता
नमन-छोड़ ना मां तुझे क्या बता तू मेरी मां (जुथा शरीफ बन के बोला)
बिंदु – अरे बता ना उसमे क्या ह इसे क्या बोलता ही तू
नमन – कुछ नहीं
बिंदु – तुझे तेरी माँ की कसम बता
नमन – बार बार तुम अपनी कसम देके मुझे मजबूर मत करो मां अब आखिरी बार बात देता हूं
बिंदु – सोच में कर जाउंगी तुझको अच्छा लगेगा या बता दे क्या कहता है यार मैं इसे
नमन – हैं मां क्या बताउ नमन ने शर्मते हुए धीरे से कहा इस्को मन में मुझे चुतड बोलता हूं
बिंदु – हाय रे अपनी मां के ये बड़े बड़े तरबुच से भी बड़े चुतद को केसे दबा दिया था ट्यून मेरे लाल
नमन – अब मां की अकरु जब्स ए तू ये लेगिंग्स पनी वह इस्मे बहुत थरकान खा के हिलते तो तुझे चढां भी था ऊपर से बस डबा दिया आया कभी ऐसा नहीं करुंगा तुझे बुरा लगे तो
बिंदु – हैं बीटा ऐसा कभी मत बोलना मेरे लाल (ऐसा कह के बिंदु नमन की तरफ करवा ली और हमें वजाह से उसमें जंग नमन के प्रति पे चढ गई)
अच्छा क्या सच में तुझे बहुत अच्छे लग रहे हैं क्या तेरी मां के चुर्द बता बेटा डाबा के?
नमन – अरे मां बहुत मस्त लगते हैं वो दिखने में भी और दबने में भी मां
बिंदू – अच्छा मेरे लाल चल अब सोजा कभी दबा देना ऐदा कल फिर से बस एम चढते वक्त तेरी मां के चुआत ये कह के नमन को अपनी बाहो में भी उसके ऊपर जंग चड्ढा के जाने बिंदू
जैसे की आपने पिचले अपडेट में पढ़ा के केसे नमन और बिंदू अपने एक दसरे के आघोष में जाने दें कि बस से जा रहे थे और रात के 2.30 बजे और बस एक हाल्ट में रुकी और ड्राइव बोला की चलो चलो 15 मिनट का हाल्ट ही जल्दी जिस्को जाना ही जल्दी चलो….
नमन – उसे और ज्यादा नहीं आ रही थी उसे सुसु लगी थी जोरो से तो वो उसकी मां को उठा वह उसे अपनी मां के चुतड़ पे ही होता वह और वो चुतड पे ही हाथ रख के मां और को हिलाता से वह पूरी हाथी दोनो चुतड़ पे फिरता वह और बोलता ही माँ उठा माँ उठा आया वह उठा
बिंदु – उम्म्म उम्म थोड़ी सी निंद में आंखे खोल के बंद कर के बोलती वह और अपने बेटे नमन को अपने साइन से लगा के कहती वह मेरे लाल मुझे बस निंद आ रही है वह नहीं है, वह सुन और वह आवाज वह जगह है। आई वह क्या?
नमन – क्या मां बहुत जोरो से आई ही वह इससे जग गया इस्की वजाह से मुझे उतरना होगा तुझे कुछ खाना ही तो लेके आ तेरे लिए बोल?
बिंदु – ना बेटा तू बस जा के आ सब तो लिया वह तू भी मत लेना कुछ वहा से आज कल कोरोना वह बाहर का मत खा बेटे
नमन – अरे मां तू चिंता मत कर बस में और गया और आया तू सो अच्छे से (और नमन आला उतर के गेट बंद किया अपने सोफे के केबिन का और उतरने लगा)
बिंदु – बिंदु नंद के आघोष में बोली तेरी मां को ज्यादा अकेला मत रखना बेटे इतनी रात को मुझे डर लगता है
नमन – अरे हा मां बस अबी आता हूं 1 मिन मैं (नमन जटा वह और सुसु कर के वपिस आ जाता ही और अपनी मां के पास आके बेथ के पानी पिता वह अपनी बैग में निकल के और दोस्तो बता दू की नमन ने म्यूट माँ के कहने वाली जल्दी में पंत की चेन बंद करना भूल गया था तो जब वो बेथ टा या तांगे छोडू करता तो नमन की चेन से नादर उसकी चड्डी दिख जाति और हलक लुंड का दर्द भी दिख जाता है))
बिंदु – आ गया मेरा लाल ऐसा कह के नमन पे हाथ घुमाया और कहा बेटे पानी की 2 घुट पिला दे गाला सुख रहा हे
नमन – हा माँ ये लो ना आप लेति रहो में आपके मुह में बोतल का मुह देता हूं
बिंदु – बीटा आराम से गिला मत कर देना पानी गिरा के
नमन – वाह साली क्या लोदा लेने के लिए मुह खोला हे वे खोला वह साली ने और नमन भी पानी की बोतल में से मुह के अंदर पानी डालता हे
बिंदु – घट घाट आधी बोतल पी जाति वह और आंख खोल के देखता है (हाय मा आधी बोतल घट गई तेरी मां बेटा अब क्या करेंगे?)
नमन – आर माँ उसमे क्या वह मैने आला पानी पी लिया उतरा तब अब मुझे सूबा तक नहीं जरुरत पानी की तू सोजा ये कह के नमन ने पानी की बोतल रख दी और खुद भी बिंदू के पास गया और बस चलने लगी…. ..
(थोड़ी डेर बाद नमन की नंद फिर खुल गई तो देखा उसके ऊपर जंघे चड्ढा के लेती थी और उसके चुतड पिचे बस की दीवार से बस से तकरणे की वजाह से लग रहे थे जोर से पाताक नहे दे और लाते वो )
एक नमना – आया है के छुटड़ साली के वहा तकरा रहे वह ऐसा कह के उसे अपना हाथ दोनो चुतड पे दाल दिया जिस्की वजाह से अब बस चलती तो उसकी मां के चुआत नहीं बल की मन दीवर से को निंद ना खुले हैं इस लिए ऐसा कर के उसकी मां के छुटड़ को तारन से रोका और चुतद के दबने का और लेता पुरा और उसे आंख कब ला गई ये उसे पता नहीं चला और उसके टोपी शुद्ध चुतद पर द और दी छुटड को और भी दबा रहे थे
(बस भी अपनी तेज स्पीड से द्वारका की और बढ़ रही थी सुबा के 6.30 हो रहे थे और बिंदु ऐसी लग रही थी)
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बिंदु – उसके उठने का समय हो गया था और उसे पाया अपने बेटे का एक हाथ उसके चुतड को घेरा उसे गंद को बस की तरफ से तकराने को बचा रहा था और एक हाथ उसे नमन अपनी बहो में ले रे नमन कितना था रक्त अपनी मां का पिचवाडा तकरे नहीं है लिए केसे आपके से सात के रखा वह उसे और बिंदू भी सोए हुए नमन को अपने बहो में ले लेटी और उसे पेरो पे हाथ रख के उसे कमर पे घुमा ले उसे जाने दें वह उसे अपने बदन की जरा भी परवाह नहीं थी वो तो अपने बेटे को अपना प्यार की वजह से अपने से साइन में लगाये लेती थी उसके शुद्ध चुचे नमन की छट्टी पे धस गए और बस के चलने की और वहां से कभी नहीं छत्ती पे
वो तो जैसे घर में सोती वह वेस सो रही थी उसे जरा भी मालुम नहीं था की उसका बदन खास कर के जंघे गान और पेट लेगिंग्स में और भी गद्रया और मंसल लग रहा था वो आंख खोल के देखता वह नमन उसे उसे सत के लेता था वो भी नमन को अपने ममता से गाल पे हाथ घुमा के उसे चुम लाती है और जिसे ही उसे नजर आला जाति वह नमन की पंत पे तो देखता वह की नमन ने पंत की चेन नहीं बंद की होती और अंदर ह चड्डी में उसका हलका सा खड़ा लोडा के साथ दिख रहा था यह देख के बिंदु में कहीं न कहीं एक अलग सी महसूस कर रहा था कि वह और सोची हे भगवान में इसे अपना ध्यान रखने के लिए बोल रही थी। मेरा लाडला कह के वो जेसे ही नमन की चेन बंद करने के लिए हाथ ले जाति वह और चेन पकाती वह उसे जाटका लगता है
क्योकी नमन का लोडा एक दम लोहे जैसा था खड़ा नहीं था फिर भी एक दम कड़क था को की चेन को भी ऊपर चढ़ नहीं पाता था और बिंदू सोची वह की ये क्या वह इसका यहां इतना कड़क क्या वह और वह ऊपर से फिर से था एक दम होश खो देती है नमन का सखत लोडा एक दम कड़क और बिंदु के पास कोई विचार नहीं था आज तक नहीं ऐसा सोचा था वह भी अपने बेटे का अपने ऋषि बेटे का जिसे पल बड़ी वो सालो से तो उसके पापा का से छोटे बच्चे जैसा था जो बिंदू को याद आता वह और यहां उसके साथ तुलना करते हैं वह लुंड के नंगे में चारो तरह से ख्याल आते हैं वह उसके दिमाग में क्योकी एक आधा उमर की विधवा औरत सुहागन के कभी कभी भी कभी कामसुख या चारम सुख नहीं पाया उसका हाथ आज यह गरम दांडे पे पद गया था और उसकी साड़ी हवा और अंदर की कामदेवी हलकी सी जग उठी थी
उसे आज तक ऐसा नहीं पाया था कि नहीं देखा था और वो भी अपने बेटे का जो की चड्डी में था सोया हुआ फिर भी इतना कठिन और बड़ा सा लंबा सा लग रहा था जो की बिंदु को गहरा सोच में दाल दिया था हलकी नमन का हाथ अभी भी उसके चुआत पे रखा हुआ था और बड़े चाव से उसे अपनी मां के चुपड़ को अपने से लगा रखा था
बिंदु – हाय रे में क्या सोच रही है मेरे राम मेरे बेटे के नंगे में जो मुझसे इतना प्यार करता है वह है रे विधवा क्या सोच रही है वह तेरा बेटा वह वो कुछ तो शर्म कर बेशरम कहिक ऐसा कह के अपने आप को थी है मगर कल रात नमन के छुटडो का अच्छा से सहलाना उसका चुतड़ को अच्छे से ऐसे डबा के रखना और इतने बड़े कड़क दांडे का होना बिंदु में कहीं न कहीं हवा जगा रहा था किस श में दाल दिया ट्यून…
नमन – बस थोड़ी ज्यादा हिलने की वजह 7 बजे वो भी जग गया तो पाया की उसकी मां आंख खोले सोच रही थी कुछ
नमन ने पुछा मां क्या देख रही थी और क्या सोच रही हो सोना नहीं वह (बहार से आती हल्की सूरज की रोशनी और बिंदु का चिकना बदन सोके उठने की वजह से हो गया था तो और चमक रहा था उसका चेहरा)
बिंदू – अरे कुछ नहीं सोच रही थी कि तू कितना बड़ा हो गया वह अपनी मां का ख्याल रखता है इतना और पूरी रात मेरे इस्पे हाथ रख के ट्यून मुझे निंद खराब ना हो इस्के लिए ट्यून मुझे मेरे बड़े बड़े पिचवाड़े हैं से बच्चा कितना ध्यान रखता हे मेरे लाल
नमन – आर माँ मुझे देख रहा था कल बहुत बस रास्ता खराब था तो हिल रही थी इसके लिए मैने हाथ रखा याहा पे बहुत तकरा रहे थे तेरे ये दोनो तू उस ना जाये इसकी वजाह से में कवर मेरे लिए से तो खातिर
बिंदु – हैं बीटा कितना ख्याल रखता है तेरी विधवा का जरा अपना भी रखा कर देख जरा अपना पंत की चेन बंद कर देख कल रात से खुली हे
नमन – ये देख के सपका जटा वह और देखता वह अपनी चेन खुली पता वह और उसे सतक से बंद कर के शर्मा जाता वह क्या मां तू भी कहा ध्यान रखति हे
बिंदु – क्या मैं कल तुझको बोल रही थी की मैने लेगिंग्स पेहनी वह जरा मेरे कपड़े मेरे गढ़रे बदन को अच्छे से कवर कर रहे हैं वह खुद ही ध्यान रखना लेकिन तू खुद ही अपना ध्यान रखना भूल गया है।
नमन – आर मां कभी कभी हो जाता है वह कल तेरी चिंता में मैं भूल गया इसे बंद करना तू जो डर रही थी की अकेला मत रखना जल्दी आ जाना उसमे भूल गया में
बिंदु – हा तो पहली बार बहार निकली बस में और वो भी रात में तो दर तो लगेगा ही ना बेटे मेरे लाल तेरी विधवा मां को..
नमन – अरे मां में हूं तेरा बेटा हर तार का ख्याल रखूंगा… न जाने तेरी नजर में कहां पद गई मुझे शर्मा दिया तू सुभा सुभा
बिंदु – क्या देखो तो सही भला तू पुरा दिन यह घुरता रहता है उसका कुछ नहीं मुझे सब पता ज तेरी मां मैं बहुत घुरता हे रे तू क्या बोल रहा था मेरे पिचवाड़े को चुतद ना हाहाहा बता उसका क्या? बोल (ऐसा कह के नाम की गल पे हलकी चपत मार दी प्यारे गुसे में)
नमन – अरे मां तेरे ये छुटड कितने हिलते हैं बहुत इंतजार करते हैं वो मुझे लुभाते हैं मां मेरी नजर अपने आप वही चली जाती है अब क्या करू मी ये ही मटवाले
से बिंदु – वह भगवान तेरी है विधवा मां के चुतड़ के नंगे में ये सोचा ही बदमाश कहीं का यह फिर से नमन के गाल पर हलकी सी चपत मार दी सच बता कब से भूत वह तेरी मां मैं हूं कब वह वह तेरी गदरी मां के ये बड़े बड़े फेल हुए हुए छूत बता तुझे मेरी कसम (ऐसा कह के बिंदु एक दम थोड़ा डरने के लिए नमन को पुछी)
नमन – अरे मां अब क्या बताउ वो ही ऐसे की कभी भी देखो बस मस्त लगा वह मुझे बस ऐसे ही बोल दिया सॉरी अगर बुरा मान गई तो… ऐंदा कभी इसे नहीं देखूंगा मां
बिंदु – हैं बीटा (नमन ने फरजी उदास होने का नाटक किया ये देख के बिंदू पिघल गई और कहने लगी) मैं तो बस ऐसे ही पुछ रही थी आखिर तेरे अलावा मेरा दुनिया में वह हिकोन जो मुझे चाहत ही बेटा बस ऐसे ही पुच्छ थी की तेरे पापा को ये बिलकुल पसंद नहीं थे इस्ने मोटे जो हो गए थे ऊपर से तू इसकी टैरिफ कर रहा वह है मुझे बेटा बहुत अच्छा लगा ये कह के नमन को चुंबन किया और कहा उम्म्म घुर बेटा घुर इस्को है मेरे लाल तू ही तो वह जो मेरे गदराए बदन को सम्भलता वह मुझे प्यार करता है तुझे आज तक मैंने कहा किसी चिज का मन किया भला जो इस्का करुंगी मेरे लाल ये कहते हैं नमन का एक हाथ उठा के ऊपर ने रखा है
नमन – ये देख के उसे तूरंत हाथ हटा लिया हैं मां अब तू कहा सो रही वह जो मुझे उसे संभालु अब तो तू उठ गई वह
बिंदु – क्या मैं सोच तुझे ये मेरे इतने पसंद हैं वह उसके लिए तेरे बड़े लेने के लिए मेरे चुतड पे हाथ रखा था चल कोई बात नहीं बेटा अगर तुझे ये जुथा बना के नमन। .
है नमन – अपनी मां को नराज होती देख नमन ने तूरंत अपना हाथ उसके चुआत पे राखा और पुरा हाथी से डबा के मसाला डाला ये ले मां किसने बोला मुझे नहीं पसंद मां तू जैसी भी देखा था वह जो उसकी मां को प्यार करता है वह मां
है बिंदु – नमन के ऐसे चुतद दबने से उसे अलग सा महसूस आ जाति वह क्योकी नमन कुछ अजीब तारिके से चुतद को मसाला रहा था और डबा रहा था आहाह बेटे ओह्ह्ह दबा और डबा ना बहुत ज्यादा। हो गया वह चला भी नहीं जाता उसे लेके बहुत भारी लगे वह और लोग भी बहुत गन्दी नजर से देखते हैं वह तेरी है विध्वा मां को बेटे अहाहा काम करने ना अपय बता बेटा औउआउआउइइइआ माआआ मर गया केश गई
(यह बस अपनी रफ़्तार से चल रही थी न जाने को बस में सोया था न जाने को जग रहा था सुबा के 8 बजने को आए थे और ये आखिरी सोफ़े के केबिन में एक विध्वा गढ़रायी घोड़ी अपने मसाल अपने बच्चे से अपने बच्चों से बाहर निकल गए थे। और सोफ़े में सिसकिया ले रही थी क्यों उसका बेटा उसकी माँ की सबसे मटवाली चिज़ हमच हम्च के डबा रहा था और उसकी माँ एक दम सकपका के मस्ती में आके मसाला रही थी आज तक ऐसे हमें कभी से उठा है था और वो अपने ऋषि बाउ जवान बेटे के साथ लेती थी और सिस्किया भर भर के मसाला रही थी और अपने बेटे को लंबी उमर की ममता से दुआ दे रही थी और अपने बेटे के माथे पे हाथ था घुमा)
बिंदु – बस कर अब आहा पता चल गया बहुत प्यार करता है तेरी विधवा मां को तू बस कर मेरे लाल ऐसा कह के बिंदु अब और हवा न जग जाए उसके लिए
नमन – आर मा तुझे भी तो सबत देना था तेरा बेटा तुझे चाहता था खाली दिखवा नहीं करता तेरा बदन जैसा भी वह तेरा बेटा बहुत पसंद करता है और तेरी सेवा करता तो मेरी प्यारी मां यही तुझे चाहता है रहने दे रहा वह और तेरी मन्नत पूरी करने के लिए तुझे याह लाया वह वारना पापा कही ले गए तुझे बता? माँ तेरा बेटा तेरी ख़ूब सेवा करेगा माँ चल अब हमारा उतरने का समय भी नाज़्डिक आ गया ए वह तेरा कुर्ता पुरा सोने की वजह से केसी सिकुद गया वह सही कर अपने आदा को माँ और लेगिंग्स मुझे और लेगिंग्स में।
बिंदु – यह कह के धीरे धीरे बैठा के तैयर होने लगता है बाल बना लेटी वह और तैयर होके बैठा जाति वह
जैसे की आपने पिचले अपडेट में पढ़ा के कैसे नमन और बिंदु द्वारका पहुचने वाले थे और नमन और बिंदु दोनो तैयर होके बस रुकने का इंतजार कर रहे थे अब अब…
सुबाह के 10 बाजे द की द्वारका आ गया और नमन और उसकी विधवा मां उतरने का इंतजार कर रहे थे और अब द्वारका आ गया था बस बी रुकने ही वाली थी नमन ने अपने केबिन में बाहर देखा की सब के अब लिए बहार शोर शुरू हो चुका था ,,,,
नमन – चलो माँ बहार अब सब उतर ने के लिए तैयार वह तू भी तैयर हो जा
बिंदु – बेटा हम आखिरी में उतरेंगे में उतर नहीं पाउंगी जल्दी है .. तुझे ही उतरन मिलेगा मुझे मेरे लाल
नमन – हा थिक ह मेरी मां में उतर दूंगा तुझे चल अब लगता है बस रुक गई सब उतर रहे वह चल मुझे उतरा और थाली दे मुझे याह रख देता हूं और तू पिचे घुम के दूंगा से समर्थन।
व बिंदू – अच्छा थिक वह बेटा ये ले मैं उतर रही हूं बेटा (बिंदू जैसे ही उतरने के लिए अच्छे जुकी तो और बिंदू का गद्रया पिचवाड़ा नमन के सामने आ गया जोकी गंद लेगिंग्स में बहुत ही पूरी तरह से गढ़रायी लगाउर हो गया था और गांद पे पैंटी भी पूरी कसाव बनी लगी थी और बड़े चाव से नमन देख रहा था और जान बहुत के नमन उसे नहीं सपोर्ट दे रहा था…
नमन – माँ उतरो धीरे धीरे सब उतर गए वह हम दो ही वह बस में माँ जल्दी करो
बिंदु – बिंदु उतर के आला प्रति रखने को जग दुंध रही थी मगर वो जग कफी आला थी तो बिंदू को वो जग मिल नहीं रही थी और प्रति को याहा वहा घुमने लगी और बोला नमन बेटा जरा पिछवाड़े
नमन – तब नमन ने बड़े उसे गराज से बिंदू की गंद पे कुर्ते के आला से लेगिंग के ऊपर ही पुरा 2 2 किलो के चुआत पे अपने दोनो हाथ दो चुआत पे रख दिए और मस्ती से मसाला हुए कहा मां चल अब आला नीचे से उठा के रखता हूं तू धीरे धीरे उतर निचे
बिंदु – हा चल बेटा उतरती गिरा मत देना इस गदरई घोड़ी को मेरे लाल चल में आला उतर रही है
नमन – हा मां तू चिंता मत कर तेरा लाल अपनी घोड़ी को संभल लेगा याह कह के बिंदु की दोनो मुलायम छुटडो पे हाथ को जोर से कस के दबते हुए मसाला हुए आला उतरने लगा
बिंदु – आहाहाहा क्या मस्त दबा के उतर रहा वह तू ओह्ह्ह रे मेरे लाल जिग जग जिओ ओह्ह्ह ये घोड़ी गई एसा कह के नमन पे पुरा बदन छोड़ देता है
नमन – अरे मां ये ले उतर गई तू (बिंदू उतर जाने के बुरे भी उसके चुआतो पे मसाला देता वह और वह दो हाथ दबाता है)
बिंदु – चल बेटा उतर गई है रे ये कह के अपने कुर्ते को अपनी जांघो पे शक्ति जा रही थी और अपने बेटे का हाथ उसे छूत पर अभी भी था तो सरमा के बोली बस कर अब मुझे नहीं गिरूंगा तूने है
नमन – अरे मां तू भी ना कितने मस्त वह रे तेरे ये मस्त एक बांध धोकले जेसे मुलायम और नारम
बिंदु – चल बदमाश कहिका अपनी मां के चुआतडो पे नज़र बिगड़ता ही मेरे लाल (और नमन के दो हाथो को वहा से हटाने को कहते हैं अपने कुर्ते से चुतद ढकने की नाकाम कोशिश कर्ता हे)
नमन – चल मा उतर में थाली लेके पिछे उतर रहा हूं ना
बिंदु – हा बेटा चलो आज मन्नत पूरी करुंगी मेरे बेटे के लिए
नमन- हा मेरी प्यारी मां छुटड को कुर्ते से ढकने की कोशिश कार्ति वह और अहाहा कर के उतरी वह आ गया आया और नमन उसके छुटडो की थिरकान खाते देख के उसका आदमी में हवा जग जाती वह मगर नियंत्रण करता है)
बिंदु – चलो बेटा किधर जाना ही मुझे तो पहली बार आई हूं (बिंदू साली धूप में एक दम कोठे की रैंडी जेसी लग रही थी हल्के बिखरे बाल और मातकते लेगिंग्स मुझे चुतड उसे और कमसिन बना रहे थे)
नमन – माँ चलो और मंदिर नाज़दिक हाय हे
बिंदु – हा चलो बेटा मेरे पिचे क्यो चल रहा वह रे कहीं मेरे पिचवाड़े पे तो नज़र नहीं वह अभी भी तेरी
नमन – अरे मां तेरे ये बहुत थरकान खा रहे हैं वह लोग घुरे नहीं इसे देखे नहीं हैं, तेरा बेटा तेरे पिचे घूम रहा है
बिंदु – हाय राम तबी तो कह रही थी मत पाना लेगिंग्स इसमे बहुत मटके वह मेरे रे
नमन – चल मां अब ज्यादा बन मत तुझे भी तो बड़ा शोक था न कुछ नया पहने का तो अब ये तो होगा ही उसमे कोसी बड़ी बात वह तू मस्त लगी वह ऊपर से तेरी जैसी औरत भी वह कहीं यहां पर पहली है तुझे पसंद नहीं मां अब आदत पड़ जाएगी तेरे बेटे को मस्त लगने वह तू चाह जो भी कहने मां लेडीज और जेंट्स की लाइन अलग ही मां)
बिंदु – क्या बेटा अब क्या करे ?
नमन – हैं मां कोई बात नहीं तू जा ना में मर्दों की लाइन में जाता हूं दर्शन कर के बहार मिलेंगे फिर तो कोई दीकत नहीं हीना
बिंदु – चलो ठिक वह बेटे
(दोनो मां बेटे जाते ही लाइन में लग के और आधे घंटे बाद दो बहार मिलते हैं)
नमन – माँ हो गए दर्शन अब चलो घुमते हे
बिंदु – चलो न बेटा अब थोड़ा भुख लगी हे बुरा करते हे
(फिर दोनो मां बेटे नाशता कर के कुछ बाजार में चक्कर काटते ही और याहा वह घुमते ही उसे उसी शाम के 4 बजेने थे उसे शाम की 4 बजे की बस थी से डोनो 4 बजाते वह वापस जाते जाते पे दोनो कफी ठाके)
(थोड़ी डेर में बस आती वह और चढ जाते ही अब दोनो मां बेटे बस में ही और वापसी उसी जग आके चलो द लास्ट वाली सोफे के केबिन में और बस चल पड़ी थी)
नमन – माँ ठक गई ना?
बिंदु – हा मगर मजा भी बहुत आया बेटे कब पाहुचेंगे घर हम?
नमन – मां रात के 2 बजे तक मां… क्या तुझे जल्दी वह क्या पूछने की?
बिंदु – अरे नहीं बेटा घर ही तो जाना वह उसमे क्या जल्दी में मेरे लड्डू के साथ लेटी जब चाह घर आना हो आया क्या रहता था क्यो बहुत भा गया वह तेरी माँ के गदराए चुतड तुझे क्या मैं रे लाल
नमन – अरे क्या करू मां तू ही इतनी प्यारी जो तेरा ध्यान रखना तेरे पिचे ही रहता था तक मेरी मा को कोई और घुरे नहीं
बिंदु – आया है रे कितना ध्यान रखता है तेरी मां का मेरे प्यारे मेरे राजा बेटा (यह कह के नमन को बहुत जोर से पप्पी भारी)
नमन – आर माँ तू भी कह कम वह बहुत कहल रक्खती वह अब तुझे मेरी मन्नत पुरी करनी थी तो इतना तो करुंगा ही ना माँ
बिंदु – हा मारे लाल चल अब सो जा ना
नमन – माँ मुझ पर नहीं आ रही तू सो जा मुझे तो थोड़ी देर मोबाइल में खेल खेलुंगा माँ
बिंदु – अच्छा ठिक वह खेल मेरे लाल में इतनी जाति हू घोड़ी ते गद्रायी मां आज बहुत चल के ठक गई वह
नमन – हा माँ सो जा ना तू कहे तो तेरे चुतडो पे हाथ रखू तकी बस की दीवार से तकरे नहीं और निंद आ जाए तुझे बोल मां?
बिंदु – अरे नहीं तू आराम से खेल खेल जब खेल खेल के फ्री हो जाए तब मेरे छुटका तकरा रहे हो तो हाथ लगा देना बीटा बहुत थान लग रहा है वह पेरो में दर्द हो रहा है वह लिया है तो जाति हूं थोड़ी देर
नमन – हा मां सो जा फिर तेरा बेटा अपनी मां के पर भी दबा दूंगा आराम से
बिंदु – हा बेटा डाबा दे पर मेरे लाल मेरे प्यारे बेटे तुझे बहुत मिलेगा तेरी है विधवा मां की सेवा का
नमन – अरे मां तू सोजा बस में 5 मि. गाए खेल के तेरे प्रति दबा देता हूं
बिंदु – हैं बीटा आराम से खेल फिर जी भर के दबाना (यह कह के एक गंदी मुस्कान दे दी)
नमन – नमन भी समाज गया उसकी मां अब उसके हाथो को चुना छुटद दबाना अब रोक नहीं रही थी इसलिए 5 मिनट। खेल खेली और देहा उसकी मां ठन से सो गई थी फिर चुतड़ की तरफ देखा कुर्ता तो कब का साइड हैट चूका था और ना जाने कहा सिमत के गयाब हो गया था गांद लेगिंग्स में जबर्दती फासई हुई थी ऐसा और लगा तो और लगा को ऐसे बंद के राखी थी मानो जरा भी फटी पुरी फैट जाएगी ऐसी हो गई थी और नमन ने मटवले गडराय चुतड लाल लेगिंग्स में देख के उसे मन में हवा जग गई और उसे धीरे धीरे हाथ रखना उसे चला से नमन को उसकी मां के छुटपुट की गरमी महसूस होने लगी और लुंड खड़ा होने लगा
बिंदु – आआयाय मां निंद में आदि और में आधे होश में नमन के ऐसे चुतड़ मसाला की वजह से उसके तन में अलग का करंट दौड़ गया और वो भी जान ली थी नमन ने उसे छूतड़ो पे हाथ नं रखा लगे तो उसे भी दबा दे वो भी दर्द कर रहे हैं पेरो के साथ साथ मेरे लाल
नमन – अब वो बिंदु के बाजू में बैठा था और दोस्तो ये गद्रेई घोड़ी बिंदु ने ही ज्यादा जगा रोक राखी थी तो नमन भी बिंदू को सत के बेटा था और बड़े ही कभी कभी वहां से हाथो को मसाला कभी छू कभी छू ला पेरो की पिंडियो पे जोर से मसाला लगा और बोला माँ सुकुन मिल रहा वह दादर में अब क्या
बिंदु – कुछ बोली नहीं बस हा में सर हिला दी (दोस्तो बिंदू लेगिंग्स में केसे लेटी थी उसके विचार के लिए एक फोटो डालता हू वर्ना इस फोटो से बहुत बड़ी गद्रयी गांद और जंघे द बिंदू के बस फोटो को रेफरेंस के लिए करूंगा)
नमन – बस मां फिर भूलभुलैया से लेती रह और दर्द कम करवा और अपने बेटे को मां की सेवा का मोका दे
बिंदु – कुछ बोली नहीं सिद्ध यह कहीं तू बस हाथ मत रोक दबता रे (और गान को उठा के थोड़ा एडजस्ट की)
नमन – हा माँ बस ये ले और कह के दोनो छुटड को बुरी तरह से भी दिए और मसाला लगा और अब वो ज्यादा खुल गया था और कभी पैंटी पे हाथ लगा कभी लेगिंग्स को कमर से आला कभी सा कभी देता है
(दोस्तो लेगिन्स तो मनो ऐसे फासी थी मानो किसी ने लेगिंग्स पहना के चिपका दी हो शुद्ध बदन पे कही पे भी हवा नहीं रही थी इतनी टाइट हो चुकी थी उसे गद्ररे मस्सल बदन पे जात्रा भी कोई चीरा कर दे पुरी फैट थी)
नमन – जोर जोर से चुतड मसाला कभी जंग दबा देता अब वो किसी मसाला वाले जेसे मसाला करने लगा जो की उसे अपना मा को मसाला केसे दे ये वीडियो यूट्यूब पे देख रखा था कभी हम बड़े प्यार से… मसाला देता कभी जंघे और कभी छुटड को फेलता कभी सिकुड़ता
बिंदु – अयायया हाय विद्या तू तो गई रे अहाहाहाहाहा वह भगवान केसा बेटा दिया वह आह कितनी सेवा कर्ता हे भगवान लंबी उम्रा देना अपनी विधवा मां की सेवा केसे कर्ता वह उई मां अहहहाह नमन वो उस और दिया मां अहहाह नमन वो भी और ऊपर उठा देती हूं मां बाप रे है विधा आआआ गया तू तो बेटे आहा मेरे राज केस दबा रहा वह आहा मां दबा आहाहाहा
नमन – क्या माँ इतना क्यों कर रही है तू?
बिडंडु – अरे बेटा तुझे क्या मालुम है विधवा का दर्द बहुत दर्द होता है वह बेटा ऐसे भारीभरम बदन को लेके चलना काम करना ऊपर से ऐसे इतने पतले और टाइट कपड़े पहनने के लिए पुराने दिनों में बहुत ज्यादा बहुत दर्द होता है भी बहुत बढ़ गया वह बहुत परेशन करता है और तू दबा ता है तो क्या कहू कैसा लगता है वह रे तू अहाहा डबा आहा मसाला और मसाला मेरे लाल है विधवा का तू ही ध्यान रखता वह आ गया बताता है तो क्या कहता है वह रे तू दबा बस रुक मत अहह बस दबता रह है आमम ओह बाप रे पेरो की जंघे अहा कर के बस के सोफे में मुह दाल के गबी आवाज में कर रही थी उई मां
नमन – बस उसकी मां के ऐसी आवाज उसे और उसा रही थी और जोर से और शिद्दत से चुतद जंघे दबने के लिए उसे प्रेरणा दे रही ही और वो भी भानक चूका था की उस मां से जोर से उसमें से हमका से हमच के चुतडो को दबना अच्छा लगता था
कभी कभी तो चुतडो पे हल्की सी चपात भी मार देता और चुतड़ मानो वसंत की तरह थिरकते और जोर से मरने को मन करता नमन का लेकिन वो अपने आप को संभलता क्योकी वो उसे मां को मजा देना चाहता था
बिंदु – जब नमन चपत छुटडो पे मार्ता तो उसे और अच्छा लगता है और हमें मिले दर्द के करन और भी मचल जाति और कहत उइइ मां कर ऐसा ही कर मेरे लाल आहा तेरी विधवा मां का आशिर्वाद ले और आगे बढ़ जाएगा मेरे लाल अहा याया मां अहाहा मरना जोर से जरा आह बहुत मजा आ रहा है
नमन – हैं माँ दर्द होगा बस धीरे करने देना
बिंदु – हैं बेटा बहुत तांग करते ही मुझे मार ना मेरी तरफ से मार मेरे चुतद को जोर से जरा मार
नमन _ ले मां और सातक से थप दोनो चुतडो पे लगा दी और चुतद पुरा हिल गए और जोर से मारा अब नमन के मार्ने से छुटडो में और भी लचक आ गई थी और उसकी मां की पैंटी तो बन के पटली पत्ती को थी और नादर घुसने को हो रही थी..
बिंदू – अरे उइइ उइइ मां और मसाला चुतड और दबा हाय राआआम आहा हाहाहा है विध्वा को सेवा करने वाला बेटा देके बहुत प्यार मंती हु तेरा सारा तेरी पूजा का फल वह मां आ गया
नमन – क्या माँ एक बात बोलू हैं? बूरा तो नहीं मांगेगी?
बिंदु – जो बेटा उसकी विधवा मां का इतना ख्याल रखता हो उस मां को कैसा बुरा लगेगा बोल तू चिंता छोड के बस बोल ना मेरे ला
नमन – अरे मां अब क्या बोलू शर्म आ रही है…
बिंदु – बीटा मेने तुझे नंगा नेहलया तू मेरा बेटा ही मेरा लाडला अपनी मां से कैसी शर्म आहाहा और डबा उइमामा बोल क्या कहना चाहत ही मां को
नमन – आआह मां तेरी ये चड्डी कैसी कड़ी पड़ी वह तेरे इस बड़े बड़े गडरे छूतड़ो पे पूरी सिकुद के तेरे दो छुटडो के नाकाम कोशी कर रही है और और निशान पद जाए ये कुछ ऐसा ही है?
बिंदु – बेटा करू तो क्या करू आज तक कभी घर में इतने घंटे में नहीं, और आज पहली बार लगातर 10 से 12 घंटे से मैंने ये पैंटी को सह के पहना वह क्या करू ये लेगिंग्स की वजाह से पहन्ना पद में गर्म में वर्ना तो कब का निकल इतनी आदत ही नहीं वह ये तो चुतडो को बंद के रखने के लिए वह बस मैंने मेरे लाल वर्ना अहा बड़ी खुली माचा राखी वह उसने बहुत चुभ रही वह उइइइइआ हाहा क्या था
नमन – आर माँ तुझे कितनी बार बोला ही मेरे साथ आपको आपको सहुलियत के हब से रखा करो अब कहा कोई तुझे मिलेगा तू चाहा तो निकल दे और आराम से जाने को मन कर रहा ही मेरी मैं तुझे चिंता छोड के अपने मन से रहा कर मेरे साथ (और जोर से सात से चुतड़ पे थप्पड़ मारी)
बिंदु – अब क्या बोलू कब की इच्छा हो रही ही मेरी मगर क्या करू याह केसे निकल शक्ति हू मेरे लाल तेरे सामने? यूआई माँ
नमन – माँ बस तू कह के तो देखता तेरा ये लाल थोड़ा डेर बहार चला जाता सच कहता हूं बहुत बुरी तरह से वह तेरे चुटडो को लेगिंग्स पर साफ साफ दिख रहा है वह मैं हूं कर केबिन और चड्डी को थाली में रख के लेगिंग्स पहन के मुझे बुला लेना में बहार ही खड़ा हूं
बिंदु – आवास घर फुचते पहुचते अगर नहीं निकलती और मुझे खुजली से मार दूंगा तू जा अब्र में निकलती है
नमन – हा मां ये हुई ना मेरी मां वाली बात चल तू आराम से बदल में जाता हूं बहार (यह कह के नमन बहार चला गया और केबिन का दरवाजा बंद कर डाला)
बिंदु – उसकी चुत को जोर से मसाला दी और मन में बोली (हाय रे विधवा तेरी हवा जग गई वह देख चुत केसे पानी बहा रही वह और लेगिंग्स में हाथ फसा के उसे निकलने लगी मगर लेगिंग्स बहुत टाइट होके बहुत कास राही थी और मस्त ठंडा हवा बहार बस के चलने से खिडकी से आ रही थी और हवा थंडी खा के सांस ले ले के लेगिंग्स को आला सरकार रही थी धीरे-धीरे और अब लेगिंग्स पूरी हो पेरो में आ गई थी और एक दुम छोटी के थी और बिंदू ने सोचा है रे कितनी छोटी वह लेगिंग्स ऊपर से गद्रेई घोड़ी भेस के समौंगी आहाह न जाने केसे केसे कपडे निकले वह लोग 20 साला की लड़की को भी मुश्किल से ऐसे ऐसे से ऊपर से ऐसे में वह से सबसे ज्यादा वह लगेगी ये सोच के पुरी लेगिंग निकल देता है और सोफ़े पे साइड में रख देता है और पैंटी की तरफ नज़र दौदाती वह पैंटी तो मनो गद्रेई जंगपो और ऊपर थुल थुला पेट के करन कहा गयाब हो गया ही उसे दिखलाता है
और जेसे करके पेरो को फेल के अपने आप को थिदा एडजस्ट कर के पैंटी में हाथ फासा के निकल ती वह तो पैंटी तो मनो अपने आप में सिकुद के एक दम एक पाटली सी पट्टी बन गई थी जो चुतडो और उसमें और उसकी धातु में थी की दीखे भी नहीं और वो बड़ी मेहंदी से निकलती वह और हाथ लगाने से उसे पता चलता है वह उसकी चुत होना शूरू कर दी थी पैंटी गिकी और शुद्ध पासिन से चिपी हो चुकी थी हाय मां केसी हो गई वह गिली। और वो पैंटी को निकल के देखता वह एक दम सिकुड के निकति ही है राम 40 की पैंटी भी नहीं समति विधवा घोडू तुझे ऐसा अपने आपको कहता है और कहता है देख कैसी गिल्ली हो गई वह और पैंटी से अब तक बड़ा सुखन मिल रहा था तो उसे भी अब बहुत मजा आ रहा था एल अलग ही सुन गद्रई घोड़ी को मिल रहा था उसे वो पैंटी उठाय जो कुछ ऐसी थी बस नमूना के तौर पे
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हाय राम और पकड की पैंटी को बस के बहार खिड़की से निकल के दोनो हाथो से पका के निचोद देता है जिसमे से पासिना और चुत रस निकलाता वह हलका सा पिला और पैंटी को निचोद के थाली में नमन ऐसे दिख रहा था वह
और अब बारी थी लेगिंग्स को चढाने की और लेगिंग्स को सिद्ध कर्ता वह जो कभी उतरते वक्त सिद्ध उतर ही नहीं शक्ति ऐसी हो जाती है तो उसे सिद्ध कर के ढीली और छोटी लेगिंग को वापस जाने अपने लगा वह अहहह राम अब आराम मिला नमन सही कह रहा था कि कितनी धस के निशान बना दिए थे इसे तो है रे बेटा कितना ध्यान रखना वह अपनी विधवा का यह कह के लेगिंग्स को जबरदस्ती बड़ी मुश्किल से बड़े अपने मार डाला रे केसी लेगिंग्स हे सॉरी मेरा बदन केसा वह आह घोड़ी तू तो गई ये कह के एक हाथ चूत को और डाबा के और दसरे हाथ से लेगिंग्स को ऊपर चड्ढा के कैसा भी कर के लाल लेगिंग्स अब तो चड्ढा देता है बड़े लग रहे द लेगिंग्स फड़ दे ऐसे जकाबरदस्ती ढसे पदे थे अंदर और ऐसे ही कोई कुर्ता सही नहीं किया और उसे ब्रा भी अब परशन कर अरही थी और अब उसे ब्रा को नहीं हटा और बस ऐसे ही लेगिन्सग सोचू पहन में और करुंगी चु तद दबने से मेरी चुत बहने लगी वह ये लेगिंग भी बड़ी देगा ये और वो अब केसे भी कर के लेगिंग्स पाहन के नमन को बुलाती हे
बिंदु – बेटा आजा तेरी विध्वा मां ने तुझे बहुत बाहर खड़ा रखा आजा मेरे राजा चलो जा मेरे लाल याह कह के नमन को बुला लेटी वह मगर अब तो चुतद और फेल गए और नमन को अब जाने दिया में जाने दिया
नमन – हैं मां तेरे लिए तो पुरा सफर यह खड़ा रहु बोल…
बिंदु -अरे बेटा में कभी नहीं रख सकती तुझे बहार ये तो लेगिंग्स बड़ी मुश्किल से चढ़ रही थी ऊपर और चुतद पे चढ़ने का नाम ही नहीं ले रही थी तो डर लगी बस आज ले जा याह कह के नमन जा को जाने दे हाय थी
नमन – आर मां अब कोई न चढ गई न बस ले जा अब आराम से
बिंदु – अरे बेटा क्या कहू मेरे चुतड़ काम करने का ऊपर बता न केसे काम करू नहीं आते किसी में अब बहुत परेशा करते हैं वह कुछ करना अटेरी मां के चुतडो का
नमन – आर माँ तुझे क्या दीकत ही तेरा बेटा वह न काम कर देगा तेरे चुतद बस तुमको थोड़ी कसरत करनी पड़ेगी जो तू शायद न कर पाए तेरे भारी बदन से
बिंदु – हैं बेटा दीखा तो सही केसे करना वो बता तो सही
नमन – अरे मां उसके लिए ये वीडियो लिया वह दिखा तू देख मोबाइल निकला के दिखया ऐसा करना मिलेगा मां तेरे छुटडो को आकार में और सही आकार देने के लिए और कम करने के लिए
तत्त्व:
बिंदू- आर आप रे देखो तो घोड़ी केसे साली निकल रही वह अपने छुटड़ हे भगवान ये मुज जेसी गदरी घोड़ी से नहीं होगा देख ये बेटा इसकी कमर कितनी छोटी वह और मवरी देख पेट देख मेरा एक पयेगा मेरी जेसी अड़े औरत कर पाए इसी कसार दिखा ये तो मेरे घुटने दादर करे ऐसी कसरत कर रही हे बेटे ये तो
नमन – आर मां तू क्यों परशान हो रही ही तेरा बेटा वह कुछ कुछ चिंता करने एक दम मस्त भारी की जरूरत नहीं तुझे बस काम करना ही घर का और अपने भी वह मस्त होगा दम मस्त भरी हुई एक दम मस्त और बोल के नमन अटक गया।
बिंदु – बोल क्या भारी भारी क्या बोल ना तेरी मां की कसम सच बता क्या कहना चाह रहा था अपनी मां को बता..
नमन – अरे माँ कुछ नहीं वो तो ऐसे ही छोड़ ना
बिंदु – तुझे तेरी मां पसंद नहीं क्या प्यारी नहीं कसम दी वह मैंने तुझे मेरी बता क्या बोल रहा था
नमन – हैं माँ भारी भारी गदरायी घोड़ी…. मस्त लगती वह तू मुझे एक दम गद्दार….
बिंदु – हैं क्या अपनी मां को गदरी घोड़ी बोला तू बदमाश यह कह के नमन के गाल पे एक थप्पड़ मार दी मस्ती से
नमन – अरे मां चल न बुरा लगा तो नहीं बोलूंगा
बिंदु – कितनी बार बोला तेरी कोई बात नहीं लगती मुझे बुरी बेटा आखिर तू ही तो मेरे बदन को चाहने वाला है घोड़ी का घोड़ा (यह नाम बिंदु ने नमन को दिया)
नमन – अच्छा घोड़ी का घोड़ा हाहाहाहा तू भी ना मां और उसकी मां को एक दम से दबोच के ऊपर चढ़ के चुंबन करना लगा कास के और दोनो मां बेटे आघोष में अपने बदन को किस करने लगे हुए