एक लंबी कहानी सेक्स परिवार एमए सेक्स संबंध अध्याय 2

 


एक लंबी कहानी सेक्स परिवार एमए सेक्स संबंध अध्याय 2





ऋतु ने कहा- हाँ मैं घर पहुँच हूँ।


मैंने कहा- तुम्हारे बिना मन नहीं लग रहा है।


ऋतु हँसकर बोली- “घर मत भेजा करा, अपने साथ ही रखा करो। अपने घर ले जाया करो..”


मैं उसकी बात सुनकर कुछ बोला नहीं। क्योंकी उसने जो बात कहीं उसका क्या मतलब था? मैं समझ सकता था। मैंने उस बात को घुमा दिया और बात करने लगा।


इतने में अंजू मरे केबिन में आई। मैंने उसको बैठने को कहा। मेरे दिमाग में ऋतु का जिपम घूम रहा था। मैंने

आज पहली बार अंजू को कामुकता भरी नजर से देखा।


मैंने कहा- क्या काम है?


अंजू बोली- “सर, आज मुझे कुछ पैसों की जरूरत है…”


मैंने कहा- “कितने लेने है?”


उसने कहा- “15000..”


मैंने उसको कहा. “तुम अपनी सेलरी ता ले चुकी हो। अब इतना अमाउंट क्यों माँग रही हो?”


उसने कहा- “मेरी माम की तबीयत ठीक नहीं है…”


मैंने कहा- “ओके ले जाओ… और मैंने उसको 1000 के 5 नोट निकालकर दिए और कहा- “कोई और जरूरत हो

तो माँग लेना…


उसने मुझे बैंक्स कहां और कहा- “सर आप कितने अच्छे हो, आपका एहसान कैसे चुकाऊँगी?”


मैंने हँसकर कहा- “टाइम आने पर बता दूँगा…”


अंज उठकर जाने लगी। उसकी चूचियां देखकर मेरा फिर से मह उत्तेजित होने लगा। पर मैंने खुद को संभाल लिया। अंजू ने स्माइल दी और चली गईं। अगले दिन में आफिस में जल्दी आ गया सब मुझे इतनी जल्दी देखकर दंग रह गये।



मैंने कहा- “ओके ले जाओ… और मैंने उसको 1000 के 5 नोट निकालकर दिए और कहा- “कोई और जरूरत हो

तो माँग लेना…


उसने मुझे बैंक्स कहां और कहा- “सिर आप कितने अच्छे हो, आपका एहसान कैसे चुकाऊँगी?”


मैंने हँसकर कहा- “टाइम आने पर बता दूँगा…”


अंज उठकर जाने लगी। उसकी चूचियां देखकर मेरा फिर से मह उत्तेजित होने लगा। पर मैंने खुद को संभाल लिया। अंजू ने स्माइल दी और चली गईं। अगले दिन में आफिस में जल्दी आ गया सब मुझे इतनी जल्दी देखकर दंग रह गये।


मैने केबिन में जाकर अंज को बुलाया और उसकी मोम का हाल पूछा।


अंजू बोली- “सर मेरी मोम का इलाज किसी बड़े हास्पिटल में होगा और उसमें बहुत पैसा लगेगा। पर मेरे पास इतना इंतजाम नहीं है और ना ही कोई ऐसा जरिया है, जहां से पैसा मिल सकता हो…”


अंजू के पापा नहीं थे। उसकी मौ और उसका छोटा भाई ही थे। बो लोग किराए के मकान में रहते थे। बस अंजू की कमाई से ही उसका घर चलता था।


मैंने अंजू को कहा “कोई बात नहीं, तुम अपनी मोम को लेकर सिटी हास्पिटल में जाना। मैं वहां डाक्टर को फोन कर दूँगा। एक बार वहां मोम को दिखाकर आना और इसमें तुम्हारा कोई पैसा नहीं खर्च होगा। मैं अपने आप देख लगा…”


अंजू की आँख में आँसू आ गये। वो बोली- “सर, आप कितने अच्छे हो। मैं आपके लिए कुछ भी कर सकती हैं.”


मैंने अजू के पास जाकर उसके कंधों पर प्यार से हाथ फेरा और कहा- “इसान ही इंसान के काम आता है.”


अंजू मेरे गले से लगकर सिसकने लगी। मैंने उसकी कमर पर हाथ फेर कर उसको दिलासा दिया। अंजू की चूचियां मेरे सीने से टकराकर मुझे उत्तेजित कर रही थी।


मैंने अंज को कहा- “अब जाओ और शाम को जल्दी चली जाना…”


वो चली गई। अब में अंजू को भी चोदने की सोच रहा था। क्या करंग ये साली चत चीज ही ऐसी है की इसके आगे सब बैंकार लगता है। मुझे किसी काम से जाना था। मैं आफिस से जल्दी निकल गया।


जब मैं काफी देर तक नहीं आया तब ऋतु का फोन आया- “सर आप कहां हो?”


मैंने कहा- मैं एक मीटिंग में हैं।


उसने कहा- “मुझको जल्दी घर जाना है..”


मैंने कहा- “ही जा सकती हो…”


में जब आफिस गया तो काफी शाम हो चुकी थी। सब चले गये थे बस चपरासी था वहां मैंने सोचा मैं भी घर चला जाता है। तभी मेरे दिल में आया की क्यों ना अंज को फोन करके पलं की वा हास्पिटल में गई या नहीं? अंजू को फोन किया।


अंज ने कहा “में डाक्टर को दिखाकर घर आ गई हैं, और मेरी मोम आपसे मिलने को कह रही हैं। क्या आप आ सकतं हो?”


मैंने कुछ सोचकर ही बोल दिया।


मैंने अंजू के घर की तरफ कार मोड़ दी अंजू का घर आफिस के पास ही था। वहां जाकर मैंने कार पार्क की और उसके दरवाजे को खटखटाया। अंजू ने दरवाजे खोला और मुझे बड़ी प्यारी सी स्माइल दी। फिर उसने मुझे कहा “वेलकम सर.


मैं अंदर पहुँचा तो उसकी माम ने मुझसे कहा- “सर, आप हमारे घर आए मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है। आज आपकी वजह से हम इतने बड़े डाक्टर को दिखा पाए। मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था की मैं इतने बड़े डाक्टर से इलाज करवा सकती हैं…”


मैंने कहा- नहीं आंटी, आप मुझे शमिंदा नहीं करें और कोई परेशानी तो नहीं हुई?


अंज इतने में पानी लेकर आ गई थी। कहने लगी- “सर, डाक्टर ने हमसे अच्छे से बात की थी। आपका नाम लेने की वजह से हमको ज्यादा इंतजार भी नहीं करना पड़ा…”


मैंने कहा- मुझे पता है मेरी डाक्टर से बात हो गई थी।


फिर अंजू की मोम ने कहा- “आप चाय पीकर जाइएगा..”


मैंने कहा- जी नहीं, मैं अब चलूँगा कुछ काम है।


अंजू ने कहा- “सर, प्लीज आप पहली बार आए हैं कुछ तो लीजिए.”


मैंने कहा- “आज नहीं फिर कभी ले लेंगा..” और मैंने हाके से अंज को आँख मार दी।


अंजू शर्मा गई। मैंने अजू की माँ को नमस्ते की और खड़ा हो गया।


अंजू की मोम ने कहा- “अंज, सर को बाहर तक छोड़ आओ..”


अंजू मेरे साथ बाहर तक आई मैंने हल्के से अजू को कहा- “कल आफिस आओगी या नहीं?”


अंज बोली- “सर, मैं कल क्यों नहीं आऊँगी?”


मैंने कहा- आज का नाश्ता रह गया ना?


अंजू ने भी मुश्कुराते हुए कहा- “मंजूर है कल आपको जैसा नाश्ता करना हो कर लेना सर। आपने हमारे लिए इतना करा है हम तो आपके एहसान से दब गये हैं.”


मैंने कहा- “ऐसा कोई एहसान नहीं करा मैंन। बस में तो इंसानियत है…’ कहकर मैं चला आया। मेरे दिमाग में अब ऋतु के साथ अंज का भी चोदने का खयाल पनप गया था। मेरे दिमाग में अब दो-दो सीलबंद चूत घूम रही श्री अंजू और ऋतु दोनों को मैं अब अपने लण्ड के नीचे लाने की तरकीब सोचने लगा।



मेरा घर कब आ गया पता ही नहीं चला। मैंने दिमाग को फ्रेश करने के लिए बियर पी और डिनर लगाने को कहा। डिनर के बाद मुझे नींद आने लगी। मैं जल्दी सो गया अगले दिन सुबह मैंने आफिस जाने से पहले ऋतु को फोन किया की आज मैं आफिस देर से आऊँगा। तुम मेरे केबिन में जाकर वहां कुछ चेक रखें हैं उनको बैंक में लगवा देना। में जब आफिस पहुँचा तो ऋतु मेरे केबिन में ही बैठी थी।


ऋतु ने कहा- “सर, मेरी मोम आपसे मिलना चाहती हैं। अगर आप कहो तो उनको मैं आफिस में बुला ल…


मैंने ऋतु से पूछ- “उनको क्या काम है मेरे सं?”


उसने कहा- पता नहीं क्या बात है?


मैंने कहा- “ऑक बुला लो… और में बैठा सोच रहा था की ऐसा क्या काम होगा? कहीं मेरे और ऋतु के बारे में कोई बात तो नहीं पता चली? फिर मैंने सिर झटका और कहा देखते हैं।


करीब 3:00 बजे ऋतु की मोम आ गई। ऋतु की मोम को देखकर उनकी उम का आइडिया लगा पाना मुश्किल लग रहा था। ऋतु की मोम भी ऋतु जैसे गोरी और सुंदर थी, उनका फिगर एकदम मस्त था। ऋतु जैसा ही काले लंबे बाल। बस एक खास चीज जो मैंने नोटिस की, वो थी उनकी गाण्ड जो कि बिल्कुल सेंब के आकार में थी। साड़ी में अलग ही उभर रही थी।


ऋतु की मोम मेरे सामने बैठी थी फिर वो बोली- “सर, वैसे तो आपसे कुछ कहते भी नहीं बन पड़ रहा। पा मजबूरी ऐसी है की अगर आप हेल्प कर दो तो आपका बड़ा एहसान होगा हम पर…”


मैंने कहा- “आप बताइए तो सही। अगर मैं आपकी हेल्प कर सकता हैं तो जरूर करेंगा..”


वो बोली- “ऋतु की बड़ी बहन जिसकी शादी को अभी एक साल हुए हैं उसकी शादी के टाइम हमने किसी से इंटरेस्ट पर पैसा ले लिया था। लेकिन ऋतु के पापा अभी तक पैसों का इतजाम नहीं कर पाए। अब जिसको पैसा देना है वो हमको कल धमकी देकर गया है की अगर7 दिन में उसके पैसे नहीं लोटाये तो वो हमको जेल में भिजवा देंगा, और वो बड़ा गंदा आदमी है गंदी-गंदी गालियां देकर बात करता है। हम बड़ी मुशीबत में है और कोई सहारा नहीं है। अगर उसको पैसा नहीं लौटाया तो वो हमें बर्बाद कर देगा। हम कहीं के नहीं रहेंगे…” कहते कहते ऋतु की मम्मी की आँखों में आँसू भर गये और वो सिसकियां लेकर रोने लेगी।


मैंने उनको पानी दिया और कहा- “आप रोना बंद करिए। मैं देखता हैं आप मुझे उस आदमी का नाम बताओ, जिसको पैसे देने हैं, और कितने देने हैं ये बताइए..”


ऋतु की मम्मी ने मुझे उस आदमी का नाम बताया। नाम सुनकर मैं मन ही मन मुश्कुरा उठा। वो बंदा मेरे दोस्त का भाई था, जिसकी मैंने कई बार हेल्प की है। मैंने ऋतु की मम्मी से कहा- “ये आदमी तो सच में ही बड़ा गलत हैं। आपने इससे पैसे क्यों लिए आपको पता नहीं था बया?”


इसके बारे में वो बोली- “अत की बहन की शादी के टाइम हमको अचानक रुपयों की जरूरत पड़ गई और कहीं से इंतजाम नहीं हुआ। मजबूरी में इससे लेना पड़ा। उसने हमसे ब्लैंक चेक और स्टाम्प पेपर साइन करवा के रखें मैंने एक गहरी सांस लेते हुए कहा- “पैसा कितना लिया था?”


बो बोली- “275000 जोकि अब इंटरेस्ट जोड़कर एक लाख हो गया है। अब तो आपका ही सहारा है। अगर आप मदद कर दो तो हम इस मुशीबत से बच सकते हैं..”


मैंने कहा- “आप मुझे थोड़ा सोचने का टाइम दीजिए। मैं देखता है की मैं आपकी क्या हेल्प कर सकता है?” फिर मैंने कहा- “आप ये बताइए की आपको अगर मैं कहीं से इंतजाम करवा भी दूं तो आप वो पैसा कब तक लौटा सकते हैं?”


वो बोली- “ऋतु के पापा की तो कोई ज्यादा इनकम नहीं है। अत को जो आप सेलरी देते हैं, उससे ही घर चलता है। ऋतु की एक छोटी बहन और है जोकि अभी बी.ए. में हैं…


मैंने ये सुनकर कहा- “आप खुद सोचिए की आप किस तरह से इन हालात में पैसा लौटा पाएंगी?”



मैंने कहा- “आप मुझे थोड़ा सोचने का टाइम दीजिए। मैं देखता है की मैं आपकी क्या हेल्प कर सकता है?” फिर मैंने कहा- “आप ये बताइए की आपको अगर मैं कहीं से इंतजाम करवा भी दूं तो आप वो पैसा कब तक लौटा सकते हैं?”


वो बोली- “ऋतु के पापा की तो कोई ज्यादा इनकम नहीं है। अत को जो आप सेलरी देते हैं, उससे ही घर चलता है। ऋतु की एक छोटी बहन और है जोकि अभी बी.ए. में हैं…


मैंने ये सुनकर कहा- “आप खुद सोचिए की आप किस तरह से इन हालात में पैसा लौटा पाएंगी?”


ऋतु की मम्मी ने मेरे आगे हाथ जोड़ दिए और कहा- “अब आप ही हमारी मदद कर सकते हैं, वरना हम कहीं के नहीं रहेंगे…”


मैंने कहा- “आप मुझे शर्मिदा नहीं करिए। लेकिन मैं आपकी मदद कैसे करण? ये सोचने की बात है। आप अभी घर जाइए मैं आपको कल तक बता दूँगा.. और ये कहकर मैंने अपनी बात खतम कर दी।


ऋतु की मम्मी चली गई। मैं अपनी चेंगर पर झला झलने लगा। थोड़ी देर में ऋतु मेरे कैबिन में आई।


मैंने उसको बोला- “तुम जानती हो तुम्हारी मम्मी यहां क्यों आई थी?”


ऋतु से कोई जवाब नहीं दिया गया। वो बोली “सर, प्लीज हमारी हेल्प कर दीजिए। नहीं तो हम सबकी लाइफ बर्बाद हो जायेगी और मेरे पापा को हार्ट की प्रोबलम है। उनका कुछ हो गया तो हम सबका क्या होगा?”


मैंने ऋतु को कहा- “मुझे अभी सोचने दो की मैं क्या कर सकता हूँ? और तुम जाने से पहले मुझे मिलकर जाना…”


जानें से करीब 30 मिनट पहले ऋतु मरे केबिन में आईं।


मैंने उसको बड़े प्यार से कहा- “देखो ऋतु, मैं अभी तुमको कोई वादा नहीं कर सकता। पर तुम मुझे ये बताओ की इतना बड़ा अमाउंट वापिस कैसे करोगे तुम लोग? ऋतु मैं जानता हैं की तुम्हारी सेलरी से ही तुम्हारा घर चलता है। उससे अगर कटवावगी तो ये भी सोचकर देखो की घर का खर्चा कैसे चलेगा?”


ऋतु ये सुनकर रूबांसी सी हो गई और मेरे से चिपक कर रोने लगी। कुछ बोली नहीं।


मैंने उसको कहा- “रोना बंद करो। मैं कुछ ना कुछ करता है। पहले तुम जरा मुझं रिलॅक्स तो कर दो..”

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ऋतु समझ गई मैं क्या चाहता है। उसने मेरी जीन्स की जिप खोली और मेरा लण्ड बाहर निकालकर चूसने लगी। मुझे आज चुप्पे में मजा नहीं आ रहा था। वो लण्ड चूस जर रही है, पर मजा नहीं आ रहा था।


मैंने उसको कहा- “तुम दिल से नहीं चूस रही हो..”


उसने कहा- “ऐसा तो नहीं है सर.”


फिर मैंने उसको कहा- “मुझे मजा नहीं आया तो में फ्री दिमाग कैसे हो पाऊँगा?”


सुनकर वो एकदम से मेरे लौड़े का पूरा मुँह में लेकर जोर-जार से चूसने लगी। अब मुझे मजा आने लगा। मैं उसकी चूची पर हाथ फेरता रहा। फिर मैंने उसके मुह में ही अपना सारा माल झाड़ दिया। वो सारा माल पी गईं।


अब मैंने उसको अपनी गोद में बैठा लिया और उसके गाल चूमने लगा। फिर मैंने उसकी कुरती में हाथ डाल दिया, तो वो कुछ नहीं बोली। फिर मैंने हल्के-हल्के उसकी सलवार के ऊपर से उसकी चूत को सहलाया। आज पता नहीं क्यों उसने कोई ना-नकुर नहीं की। मैं थोड़ी देर उसके जिश्म से खेलता रहा।


फिर मैंने उसको कहा- “अब घर जाओ, देर हो जाएगी..”


फिर मैंने उसको कहा- “अब घर जाओ, देर हो जाएगी..”


उसने कहा- “सर प्लीज… आप हमको इस परेशानी से बचा लीजिए। आप जो कहोगे में करोगी। आपकी हर बात माऊँगी। आपको कोई भी शिकायत नहीं मिलेंगी…”


मैं जानता था की अब उसके पास और कोई रास्ता नहीं है। वो जानती है की मैं हेल्प की कीमत उसकी कुंवारी चूत को फाड़कर वसूल करगा। मैंने कहा- “चिंता मत करो। मैं हैं ना…”


वो चली गई। ऋतु के जाने के बाद मैं कुछ देर सोचता रहा। अब मेरे दिमाग में कुछ और ही नया प्लान चलने लगा था। मैं अब ये तो जान ही चुका था की ऋतु मेरे आगे पूरी तरह से समर्पण कर चुकी है। जब मर्जी उसको चोद सकता है। पर अब मैं उसको ऐसे नहीं चोदना चाहता था।


मैंने तिवारी को फोन लगाया। तिवारी वो बंदा था जिसने ऋतु की मम्मी को लोन दिया था। मैंने उसको कहा की मुझे आज रात को विक्टर बार में मिलो। वो बार मेरे दोस्त का ही है जिसमें मैं कभी-कभी चला जाता हैं। मैं ठीक 9:00 बजे बार में पहुँचा, तो तिवारी वहां पहले से बैठा था। मुझे देखकर तिवारी ने कहा- “आज अचानक से मुझे कैसे याद करा आपने?”


मैंने तिवारी से कहा- “पहले एक-एक पेंग पीते हैं। फिर बात करते हैं…”


तिवारी ने मेरे पेग में आइस डालते हुए कहा- “सरजी, आप मुझे जल्दी से बताओं की क्या बात है। जब में

आपका फोन आया है मैं सोच में पड़ा है.”


मैंने मुश्कुराते हुए कहा “तिवारी तुमने किसी रमेश नाम के आदमी को कोई लोन दिया है?”


सुनते ही तिवारी बोला- “हाँ सरजी दिया है। पर आप में क्यों पूछ रहे हो?”


मैंने तिवारी से कहा- “तुमको इंटरस्ट मिल रहा है या नहीं?


तिवारी ने गली देते हुए कहा- “उसकी तो मैं अब माँ चोदकर ही पैसा वसूल करेंगा..”


मैंने कहा- “शांत बैठकर बात करो, गुस्सा मत दिखाओ। मैं तेरा फैसला करवा सकता है.”


सुनकर तिवारी उल्लू की तरह मुझे देखने लगा।


मैंने मुश्कुराकर कहा- “पहले मुझे सब बात सच-सच बता। तूने उसको पैसा क्या देखकर दिया था?”

तिवारी बोला “सर, मैं उस छिनाल की बातों में आ गया था…”


मैं समझा गया की वो ऋतु की माँ की बात कर रहा है। मैंने उससे अंजान बनते हए कहा- “कॉन छिनाल?”


तिवारी बोला. “उसकी रमेश की बीबी। शोभा साली अपनी चूचियां दिखाकर मेरे से पैसा ले गई और कहा की हर

महीने टाइम पर इंटरेस्ट देती रहेगी…”


मैंने भी सोचा- “इसकी दो जवान लड़कियां हैं, साली मुझसे क्या धोखा करेंगी? मैं उसकी लड़कियों को चोदकर पैमा ले लँगा..”


मेरी समझ में अब पूरा माजरा आ गया था। मैंने तिवारी को अपनी जेब से एक लाख का पैकेट निकालकर दिया

और कहा- “मैं अब जैसा बोलता है वैसा ही करता जा.”


मेरी समझ में अब पूरा माजरा आ गया था। मैंने तिवारी को अपनी जेब से एक लाख का पैकेट निकालकर दिया

और कहा- “मैं अब जैसा बोलता है वैसा ही करता जा.”


तिवारी कभी मुझे और कभी पैसों को देख रहा था। उसकी समझ में नहीं आया की मैं क्या कह रहा हैं।


मैंने उसको कहा- “अपना दिमाग ज्यादा मत लगा। मेरी बात सुन। त कल ही उसका चेक बैंक में लगा दें…”


तिवारी बोला, “मैंने तो उसको 7 दिन का टाइम दिया है…”


मैंने कहा- “उल्लू के पट्टे तुझें पैसा मैं अभी दे रहा हूँ। तू 7 दिन क्या झक मरवाता रहेगा?”


तिवारी ने मुझसे कहा- “सर जी आप इन जैसे फकले लोगों के चक्कर में कहा से आ गये, माजरा क्या है?”


मैंने कहा- पहले कल चेक बैंक में लगवा, और जब तक मैं तुझे फोन नहीं कर त मेरे आफिस नहीं आना। तू मुझे जानता भी नहीं है। ये बात शोभा को नहीं बोलोगे समझा?”


तिवारी ने ही में मंडी हिला दी।


मैं वहां से घर आ गया। अगले दिन ऋतु आफिस में गुमसुम सी बैठी थी। मैंने उसको अपने केबिन में बुलाया

और पूछा- “क्या बात है?”


ऋत ने कहा- “सर, घर में सब उसी बात से परेशान हैं। इसलिए थोड़ा सा मूड खराब है और कोई बात नहीं..” फिर उसने कहा- “सर आप हमारी हेल्प करेंगे ना?”


मैंने कहा- “मैं तुमसे बाद में बात करता हैं। तुम अभी रूको जरा…” और मैंने पूरा दिन ऋतु को यह कहकर टाल दिया की मैं कुछ ना कुछ करता हूँ।


अगले दिन मैं आफिस में गया ही नहीं, मुझे कुछ काम था। ।


उसके अगले दिन में आफिस में देर से गया। तब तिवारी का मेरे पास फोन आया की शोभा का चेक बाउन्स हो

गया है।


मैंने उसको कहा की आज ही उसको लीगल नोटिस भेज दे और कल तक का टाइम दे दे…”


मैंने उस दिन भी ऋत् को कोई पाजिटिव जवाब नहीं दिया। बस उसको यही कहा की में कुछ ना कुछ करता है। टाइम बीत रहा था, ऋतु की बेचैनी बढ़ती जा रही थी। मुझे अंजू से पता चला की ऋतु के घर से उसकी मोम का भी कई बार फोन आया था। मैं तो बस अब कल का इंतजार कर रहा था।


और अगले दिन जब नाटिस शोभा को मिली तो उसका बुरा हाल हो गया। वो सीधा मेरे आफिस में आ गई। उसकी हालत ऐसी हो रही थी जैसे उसके जिश्म में खून ही नहीं हो, और था भी कुछ ऐसा ही।


मैंने कहा- क्या हुआ?


वो बोली- “तिवारी ने 7 दिन का टाइम दिया था। पर उसने तो 3 दिन में ही नोटिस भेज दिया। अब क्या होगा?” वो डर से काँप रही थी।


ऋतु ने मेरी तरफ देखते हुए कहा- “सर अब क्या होगा?”


मैंने कहा- “मैं तिवारी से बात करता हूँ… मैंने तिवारी को फोन लगाया।


तिवारी ने जो कहना था वो मैं उसको पहले ही समझा चुका था। मैंने जानबूझ कर सेल का स्पीकर आन कर दिया था, ताकी शोभा को सब सुनाई दे की क्या बात हो रही है? तिवारी ने मेरा फोन उठाकर मुझसे अंजान बनते हए कड़क आवाज में बात की। उसने मेरी बात सुनते ही मुझं साफ-साफ बोल दिया की मुझे पूरा पैसा अगर आज ही दे दो तब मैं केस वापिस ले सकता है।


मैंने उसको कहा- “एकदम से इतनी बड़ी रकम का इंतजाम कैसे हो पाएगा? प्लीज… तुम हमको कुछ दिन की मोहलत दे दो। हम पैसे का इंतजाम जल्दी कर लेंगे…”


उसने साफ-साफ मना कर दिया। तिवारी ने कहा- “मैं आज के बाद किसी भी कीमत पर केस वापिस नहीं लेगा। में तो अब शोभा को जेल भिजवाकर ही रहँगा..”


मैंने कहा- “हम तुमको अभी दुबारा फोन करते हैं…


फिर मैंने शोभा से कहा- “देखिए तिवारी कुछ नहीं सुन रहा। कुछ भी करके इसको आज ही पैसा देना होगा,

अगर नहीं दिया तो कल पोलिस आपके घर आ जाएगी..” कहकर मैंने शोभा की तरफ गौर से देखा।


शोभा ने मुझसे बिल्कुल रोते हुए कहा- “सर, हमारे पास तो काई भी इंतजाम नहीं है। हम तो सिर्फ आपकी हेल्प से ही कुछ कर सकते हैं.


मैंने ऋतु को कहा- “तुम जरा बाहर जाओ। मुझे अकेले में कुछ बात करनी है.”


ऋतु बाहर चली गई।


उसके जाने के बाद मैंने शोभा से कहा- “देखिए अगर आप इस प्राब्लम से निकलना चाहते हो तो आपको मैं जैसा कह बैंसा करना होगा…”


शोभा ने कहा- “आप जो भी कहा हम करने को तैयार हैं.”


मैंने शोभा की आँखों में आँखें डालकर कहा- “मैं आपके लोन का पैसा आज ही चुका ,गा, और तिवारी से आज ही केस भी वापिस करवा दूंगा। लेकिन इसके बदले में में ऋतु को अपनी रखैल बनाकर रखूगा…”


ये सुनते ही शोभा ने मुझे गुस्से में देखा और जोर से चीखते हुए कहा- “आप जानते भी हैं की आप कितनी घटिया बात कर रहे हैं….


मैंने कहा- “मैंने सिर्फ आपको आप्षन दिया है मानो या ना मानो आपकी मी…”


शोभा बोली- “हम लोग मजबूर हैं। पर है इज्ज़त दार लोग हैं। आपसे ये उम्मीद नहीं थी की आप हमारी मजबूरी का ऐसा नाजायज फायदा उठा रहे हो। आपने इतनी घटिया बात सोची भी कैसे?”


मैंने कहा- “शोभा जी आपकी इज्जत की धज्जियां उड़ने में अब देर नहीं है। अगर तिवारी को पैसा नहीं दिया तो कल आपका क्या होगा सोच लो। मैं सिर्फ इसी शर्त पर आपकी हेल्प कर सकता हैं। अगर आप चाहती हो की

आपकी इज्ज़त का जनाजा नहीं निकले और आप जेल नहीं जाना चाहती तो आप मेरी बात मान लो। वरना मैं आपकी कोई हेल्प नहीं करेंगा। एक बात और याद रखना की अगर तिवारी ने आपको एक बार जेल में भिजवा दिया तो आपकी बेटियां तो वैसे ही सड़क पर आ जाएंगी। फिर तो उनका कोई भी आसानी से नोंच सकता है। तब आप क्या कर लोगी?”


मेरी बात सुनकर शोभा को लगा की अब उसके पास कोई और रास्ता नहीं है। वो अपना सिर झुका कर बैठी रही।


मैंने शोभा को कहा- “आप ऋतु की चिंता मत करो, ऋतु पहले से ही इस बात के लिए राजी है..”


शोभा ने बाजी में मुझे देखा और बोली- “क्या आपने उसको राजी कर लिया है?”


मैंने मुश्कुराते हुए कहा “यकीन नहीं तो पूछ लो अत से। लेकिन मैं सब काम आपकी मज़ी से करना चाहता है। में ऋतु के साथ अपनी सुहागरात मनाना चाहता हैं वो भी आपके घर पर…”


शोभा फिर से चौक गई और तिलमिलते हए बोली- “तो आप क्या चाहते हो?”


मैंने कहा- “मैं ऋतु को उसके ही घर में नई नवेली दुल्हन के लिबास में चोदूंगा। आपको मेरी सुहागरात का इंतजाम करना होगा.”


शोभा की हालत तो ऐसी हो गई जैसे काटो तो खून नहीं। उसकी जबान सूखने लगी। वो बोली- “हमारे घर पर कैसे होगा ये सब? वहां तो ऋतु के पापा भी होंगे। और हम तो सिर्फ दो रूम के किराए के घर में रहते हैं। घर में एक जवान बेटी और है, कालोनी के लोग क्या कहेंगे। मैं शिल्पा (ऋतु की छोटी बहन) को क्या कहूँगी?”


मैंने कहा- “किसी को पता नहीं चलेगा। आप सिर्फ अपने पति को दो दिन के लिए सिटी से बाहर भेज दो। बाकी सब में संभाल लेंगा। मैं खुद यही चाहता था की शिल्पा को सब पता चलना चाहिये की मैं उसकी बहन को उसके ही घर में चोद रहा हैं, और उसकी माँ की मर्जी से। क्योंकी में उसको भी बाद में लाइन पर लाने की सोच रहा था…”


फिर शोभा ने कहा- “पहले आप तिवारी से बात कर लीजिए और हमको जेल जाने से बचा लीजिए। जैसा आप

कहोगे मैं वैसा ही करेंगी…”


मैंने कहा- “आज शाम तक आपका केस फाइनल हो जाएगा। बस आप अपने पति को कल सुबह ही भेज दो, पूरे दो दिन के लिए…”


शोभा को मैंने भेज दिया।


उसके जाने के बाद मैंने ऋतु को बुलाया और कहा- “कल हमारी सुहागरात है। तुम कल आफिस नहीं आओगी..”


ऋतु ने मुझे हैरानी से देखा। मैंने उसको पूरी बात समझा दी की उसकी मम्मी से मेरी बात हो गई है, और में उसके ही घर में उसको चादूँगा। मैंने ऋतु को एक ए.टी.एम. कार्ड दिया और कहा- “कल बदिया सी लाल साड़ी और जो भी कछ लेना हो खरीद लेना, और किसी बंदिया पालर में जाकर मेकप करवा लेना मेहन्दी याद से लगवा लेना। तुम मुझे कल दुल्हन के लिबास में दिखनी चाहिए हो। समझी या नहीं?”


ऋत् ने हाँ में सिर हिलाया और चली गई।


उसके जाने के बाद मुझे एक बात और याद आ गई। मैंने उसको फोन किया और कहा- “तुम पेटीकोट सफेद कलर का ही लेना…”

ऋतु बोली- “वो किसलिए?”


मैंने कहा- “वो तुमको कल पता चल जाएगा…”


में अगले दिन की प्लानिंग करने लगा। फिर मैंने तिवारी का फोन किया की तुरंत उस नोटिस का रेफ्यूज करवा दे और शाम तक शोभा को फोन करके बता देना की उसको अब इरने की कोई जरबत नहीं है। लोन का पैसा मिल गया है।


आज आफिस में काई और काम नहीं था, मैं घर जाने के लिए निकल पड़ा। शाम को जैसे ही तिवारी का फोन शोभा के पास आया।


शोभा ने मुझे तुरंत ही फोन करके कहा- “आपने जैसा कहा था वैसा ही हो गया..”


मैंने उसको कहा- “अब तुम भी वैसा ही करो जैसा मैंने कहा है…


वो बोली- “आपने जैसा कहा है वैसा ही होगा…”


और फिर अगले दिन सुबह शोभा ने अपने पति को बाहर भेज दिया। मैंने दोपहर में शोभा को फोन किया। मैंने पूछा- “ऋतु तैयार हो रही है या नहीं?”


तब उसने कहा- “अभी हम बाजार में है, यहां से सीधा पार्लर जाएंगे..”


मैंने कहा- “उसकी फुल बाडी बैक्स जरगर करवा देना..” बयाकी मुझे पता है की ऋतु की टांगों पर बाल हैं।


शोभा ने कहा- “ठीक है करवा दूंगी..”


फिर मैंने कहा- “मैं रात को 9:00 बजे तक आ जाऊँगा…”


5:00 बजे में आफिस में सीधा घर चला गया। मैं जाकर दो घंटे सो गया क्योंकी रात को जागरण करना था। लगभग 8:00 बजे में उठा और मैंने 15 मिनट शाबर लिया और तैयार होकर घर से निकला। मैंने कार में विस्की की बोतल रखी और सीधा शोभा के घर की ओर चल दिया। में अपने साथ विस्की इसीलिए ले गया था,


क्योंकी में चुदाई से पहले जरा मूड बनाना चाहता था। शोभा का घर आ गया। मैंने घर के पास कार लगा दी


और डोरबेल बजा दी। शोभा ने दरवाजा खोला। मैं घर के अंदर दाखिल हो गया।


शोभा ने मुझसे कहा- “बैठिए.”


मैं सोफे पर बैठ गया। मैंने शोभा से कहा- “ऋतु किधर है?”


उसने कहा- “दूसरे रूम में तैयार होकर बैठी है…”


मेरे लण्ड में तनाब आजा शरन हो गया। मैंने कहा- “पहले मैं जरा ड्रिंक करेंगा। तम मेरे लिए ग्लास और ठंडे पानी का इंतजाम करो…”


शोभा उठकर जाने लगी तो मैंने कहा- “शिल्पा कहां है?”


शोभा में घबराते हुए कहा “जी वो ऋतु के पास बैठी है। मैं लेकर आती है…”


मैंने कहा- “तुम यही बैठा, शिल्पा को बुला लो..” फिर शोभा से कहा- “तुम्हारा पति कब वापिस आएगा?”


उसने कहा- “वो दो दिन बाद ही आएंगे..”


मैंने हम्म्म्म कहा, फिर मैं बोला- “शोभा तुम अभी घबराई हुई लग रही हो। रिलैक्स हो जाओ..”


शोभा ने अपने चेहरा पर फेक स्माइल लाते हुए कहा- “नहीं नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है..”


इतने में शोभा ने आवाज दी- “शिल्पा बैटा इधर आओ…”


उधर से आवाज आई- “जी मम्मी..” और शिल्पा रूम में आ गई।


मैंने शिल्पा को देखते हुए अपने लण्ड पर हाथ फेरा। शिल्पा ने मेरी इस हरकत को देख लिया और फिर उसने अपनी निगाहों को नीचे कर लिया। मैं अपनी नजरों से उसका एक्सरे कर रहा था। क्या माल था चिकना नाजुक जिश्म, बड़ी-बड़ी आँखें, पतली कमर बड़ी प्यारी सी लग रही थी। उसने ब्लू कलर की सलवार कमीज पहना हुआ था। उसकी चूचियां अभी छोटी-छोटी थीं। पर उभार साफ दिख रहा था। रंग गोरा, होंठ गुलाबी। कुल मिलाकर मस्त माल थी।


मैंने अपने लण्ड पर फिर से हाथ फेरते हए उससे कहा- “इधर आओ…”


वो मेरे पास आ गई।


मैंने उसको कहा- “तुम्हारा नाम क्या है?”


उसने कहा- “जी शिल्पा…”


मैंने उसको कहा- “शिल्पा जाओ जरा किचेन में एक ग्लास और ठंडा पानी लेकर आओ…”


वो बोली- “जी.” और जाने लगी।


मैंने उसको पीछे से देखा तो उसकी चाल बड़ी सेक्सी थी। उसकी गाण्ड ऊपर-नीचे हो रही थी। उसकी गाण्ड को मटकता हुआ देखना मुझे अच्छा लग रहा था।


मैंने शोभा को कहा- “तुम्हारी छोटी लड़की भी बड़ी सुंदर है…”


शोभा मेरी बात का मतलब समझ गई, पर माकुरा के बोली- “हाँ जी…”


इतने में शिल्पा ग्लास और पानी लेकर आ गई। उसने टेबल पर रख दिया और जाने लगी।


मैंने उसको कहा- “रुको… जरा एक काम और कर दो। कोई नमकीन लेकर आओ…”


वो फिर से गईं। मैं उसके चूतड़ों को उठते गिरते देखता रहा। सच में उसकी गाण्ड बड़ी मस्त थी। मन कर रहा था की इसको अपनी गोद में बैठाकर इसके हाथों से जाम पियं। पर अभी उसका नम्बर नहीं था। इसलिये मैं मन को मार कर रह गया।


शोभा सब देख रही थी। मैं भी यही चाहता था की इसको सब पता चल जाए।


फिर शिल्पा नमकीन लेकर आई। मैंने तब तक पेंग बना लिया था। मैंने उसको जाने को कहा। फिर मैंने पंग को खतम किया और दूसरा पेंग बना लिया।


मैंने शोभा से कहा- “शिल्पा को भी कहीं जाब पर क्यों नहीं लगा देती। काम करेंगी तो कछ पैसा घर में आएगा…”


शोभा ने कहा- अभी वो पद रही है पढ़ाई खतम होने के बाद जाब करेंगी।


मैंने कहा- “तुम चिता मत करो। मैं इसकी जाच कहीं अच्छी जगहा लगवा दूंगा… फिर मैंने दूसरा पेग खतम किया और शोभा से कहा- “जरा ऋतु को जाकर देखा तैयार है ना?”


शोभा उठकर दूसरे रूम में गई। दो मिनट में वापिस आकर बोली- “वो बिल्कुल तैयार है.”


में मन ही मन में मश्कुरा उठा की ये अपनी लड़की को आज अपने सामने ही चुदवाते हुए देखेंगी। मैं ऋतु के रूम में गया। वहां जाते ही मुझे गुलाब के फूलों की महक महसूस होने लगी। मुझे देखते ही ऋतु पलंग पर । सिमट के बैठ गई। मैं ऋतु के पास जाकर बैठ गया और उसको बोला रिलैक्स हो जाओ, स्माइल लाओं अपने चेहरे पर मैंने उसका चेहरा अपने हाथ से ऊपर उठाया जैसे कोई चाँद हो ऐसे लग रही थी। मत वैसे भी सुंदर श्री पर दुल्हन के लिबास में उसकी खबसूरती गजब की लग रही थी। फिर मैंने उसके हाथों को अपने हाथों में लिया मेहन्दी वाले कामल मुलायम हाथों का स्पर्श पातं ही लण्ड में हलचल सी मचने लगी।


मैंने अत को कहा- “तुम आज बड़ी प्यारी लग रही हो…”


उसने शर्माकर अपना जवाब दिया।


मैंने ऋतु से कहा- “तुमने पेटीकोट किस कलर का पहना है?”


उसने कहा- “जी सफेद ही पहना है…


मैंने कहा- “हम्म्म्म …” फिर मैंने ऋतु के होंठों पर अपने होंठों रख दिए होंठ चसते हुए मैंने अपना एक हाथ उसकी कमर में डाल दिया। उसकी कमर पर हाथ फेरा तो उसके पूरे जिश्म में कंपन होने लगी।


मैंने उसको कहा- “ऋतु मैं तुमको आज तुम्हारे ही घर में दुल्हन बनाकर चोदूंगा। कैसा लग रहा है?”


उसने कोई जवाब नहीं दिया।


सच में ये सब सोचने में कितना अजीब लग रहा है। पर नियति ने ऐसा करके दिखा दिया। मैंने ऋतु को कहा “मुझे अब अपना पति समझ कर मेरे से प्यार किया करो। मुझे में महसूस होना चाहिए की तुम मुझे अपने पति जैसा प्यार कर रही हो..’


उसने सिर हिला दिया।


मैंने उसको कहा- “ऋतु मैं तुमको आज तुम्हारे ही घर में दुल्हन बनाकर चोदूंगा। कैसा लग रहा है?”


उसने कोई जवाब नहीं दिया।


सच में ये सब सोचने में कितना अजीब लग रहा है। पर नियति ने ऐसा करके दिखा दिया। मैंने ऋतु को कहा “मुझे अब अपना पति समझ कर मेरे से प्यार किया करो। मुझे में महसूस होना चाहिए की तुम मुझे अपने पति जैसा प्यार कर रही हो..’


उसने सिर हिला दिया।


फिर मैंने ऋतु को अपनी गोद में खींच लिया और उसकी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा। ऋतु में अपनी आँख बंद कर ली। मैंने उसके बलाउज के बटन खोल दिए। उसकी रेड ब्रा को मैंने बिना हक खोले ऊपर कर दिया। अब ऋतु के दोनों कबूतर मेरे सामने नंगे थे। मैंने उसकी एक चूची को मुँह में ले लिया और दूसरी को हाथ से सहलाने लगा।


ऋतु की धड़कन तेज हो गई थी। मैंने अब उसकी दूसरी चूची को मुँह में ले लिया और उसकी पहली चूची को जोर से दबाया। ऋतु ने एक सिसकी सी ली। अबकी बार मैंने थोड़ा सा और जोर से दबाया। अब उसकी सिसकी में दर्द पैदा हो गया। अब मैंने ऋत को पलंग से उतार कर नीचे खड़ा होने को कहा। वो नीचे आकर खड़ी हो गई। मैंने उसके ब्लाउज को उसके जिएम से अलग कर दिया। फिर मैंने उसकी साड़ी को खोल दिया। अब त मेरे सामने सिर्फ सफेद पेटीकोट में खड़ी थी।


मैंने उसको कहा- “अपने दोनों हाथ अपने सिर के पीछे रख लो.”


ऋतु में चुपचाप रख लिए। मैंने अब उसके पेटीकोट को ऊपर उठा दिया और उसके पेटीकोट के नाड़े में उसका पेंटीकोट मोड़कर फैंसा दिया। फिर मैंने ऋतु की पैटी के ऊपर से उसकी चूत को हल्का सा सहलाया। उसकी टांगों की कंपन में साफ देख रहा था। मैंने उसकी दोनों जांघों को अपने हाथ से पकड़कर घुमा दिया। अब अत की गाण्ड मेरे सामने थी। उसकी लाल रंग की कच्छी में उसके गोरे-गोरे चूतड़ बड़े प्यारे लग रहे थे। फिर मैंने उसकी कच्छी के इलास्टिक में उंगली डालकर कच्छी को आधा नीचे किया। उसके चूतड़ों की दरार में मैंने अपनी उंगली फिरानी शुरू कर दी। चिकने चूतड़ों में उंगली फिसली जा रही थी।


मैंने अब उसकी पेंटी को थोड़ा और उत्तार दिया उसके चूतड़ों को कच्छी से बाहर निकाल दिया और उसके चूतड़ों पर किस करा। फिर मैंने पी से ही उसकी चत के मुँह पर उंगली रख दी। उसकी चूत में जैसे आग निकल रही थी। मैंने अपनी उंगली को जरा सा अंदर डाला, तो वो सीईईई… कर उठी, मैंने अब उसकी पूरी पैंटी उतार दी।


मैंने ऋतु से कहा- “ऋतु अब तुम मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसा..”


ऋतु ने अपनी जीभ से मेरे लौड़े को चाटना शुरू कर दिया। मैं पलंग पर लेट गया और मैंने ऋतु का अपने पेट पर बैठा लिया। फिर मैंने ऋतु की चूत अपने मुँह के पास कर ली। अब हम दोनों 69 पोज में थे। ऋतु की चूत आज बिल्कुल चिकनी थी। मैंने उसकी चूत पर अपनी जीभ रख दी। बड़ी मस्त सी महक मेरी सांसों में समा गई। ऋतु मेरा लौड़ा अब अपने मुँह में लेकर चूस रही थी। मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से रगड़ रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने ऋत को सीधा लिटा दिया और उसकी टांगों के बीच में बैठ गया। मेरा लौड़ा अब पूरी तरह टाइट था और चूत में जाने को बेकरार था।


मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा ऋतु की कुँवारी चूत के छोटे से छेद पर रख दिया। ऋतु अब लंबी-लंबी साँसे लेने लगी थी। मैंने अपने लौड़े को जरा सा जोर से दबाया तो थोड़ा सा लण्ड उसकी चूत में घुसा। ऋतु के चेहरे पर दर्द दिखाई दे रहा था। मैं उसको अभी और तड़पा के चोदना चाहता था। मैंने उसकी चूत में अपना लण्ड थोड़ा

सा और घुसा दिया, तो उसकी हल्की सी चीख निकल गईं।


अब ऋतु की आँखों में आँसू आने लगे। मैंने अबकी बार अपना लौड़ा चूत से सटाकर कसकर शाट मारा, तो मेरा लण्ड उसकी कुँवारी चूत की झिल्ली को चीरता हुआ आधा अंदर चला गया। ऋतु ने जोर से एक चीख मारी। मैंने भी उसको रोका नहीं। क्योंकी में यही चाहता था की ऋतु की चीख उसकी माँ को सुनाई देनी चाहिए। मैं जानता था की वो साथ वाले रूम में होगी।


मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा ऋतु की कुँवारी चूत के छोटे से छेद पर रख दिया। ऋतु अब लंबी-लंबी साँसे लेने लगी थी। मैंने अपने लौड़े को जरा सा जोर से दबाया तो थोड़ा सा लण्ड उसकी चूत में घुसा। ऋतु के चेहरे पर दर्द दिखाई दे रहा था। मैं उसको अभी और तड़पा के चोदना चाहता था। मैंने उसकी चूत में अपना लण्ड थोड़ा

सा और घुसा दिया, तो उसकी हल्की सी चीख निकल गईं।


अब ऋतु की आँखों में आँसू आने लगे। मैंने अबकी बार अपना लौड़ा चूत से सटाकर कसकर शाट मारा, तो मेरा लण्ड उसकी कुँवारी चूत की झिल्ली को चीरता हुआ आधा अंदर चला गया। ऋतु ने जोर से एक चीख मारी। मैंने भी उसको रोका नहीं। क्योंकी में यही चाहता था की ऋतु की चीख उसकी माँ को सुनाई देनी चाहिए। मैं जानता था की वो साथ वाले रूम में होगी।


मैंने अपना लण्ड थोड़ा सा बाहर निकाला और अब मैंने कस के शाट मारा, तो मेरा पूरा लण्ड अब ऋतु की चूत में घुस गया था। ऋतु की आवाज में दर्द था और वो रोने लगी।


ऋतु बोली- “प्लीज बाहर निकाल लीजिए। मैं मर जाऊँगी, बड़ा दर्द हो रहा है..” और वो ऊऊऊ… आईईई… की

आवाजें निकालने लगी।


मैंने अब उसकी चूची को मुँह में ले लिया और हल्के-हल्के धक्के मारने लगा। ऋतु को अब जरा सा आराम मिला था जैसे।


मैंने उसके होंठों को चसते हुए कहा- “अब कैसा लग रहा है?”


उसने कोई जवाब नहीं दिया।


मैंने उसको कहा- “अपनी जीभ मेरे मुँह में दो..’ उसने दे दी। मैं उसकी जीभ को चूसने लगा। फिर मैंने उसको कहा- “अपने दोनों हाथ मेरी कमर पे रख दो…”


उसकी चूड़ियों की खनक सेक्स का मजा दोगुना कर रही थी। उसका नाजुक बदन मेरे जिम से चिपका हुआ था। मैंने उसकी टांगों को थोड़ा और फैला दिया। मैंने अब धक्कों की स्पीड बढ़ा दी। ऋतु की अब जोर-जोर से सिसकियां निकल रही थी। उसकी चूड़ियां में हर धक्के पर खनक उठती थी। उसकी पायजेब और चूड़ियां मेरे हर धक्के के साथ लय बना रही थी। फिर मैंने उसके होंठों पे होंठ रख दिए और कस-कस के धक्के मारे। 20-25 धक्कों में मेरा सारा वीर्य उसकी चूत में भर गया। मैं उसके ऊपर ही लेट गया मेरा। लौड़ा झड़ने के बाद भी ऋतु की चूत में चिपक कर फंसा हुआ था। फिर धीरे-धीरे लण्ड सिकुड़कर बाहर आने लगा।


ऋत तेज-तेज सांसें ले रही थी। उसकी चूचियां अब ऊपर-नीचे हो रही थी। मैंने उसकी टांगों को अपनी टांगों में फंसा लिया था। मेरे हाथ जब उसकी गाण्ड पर लगे तो कुछ गीला-गीला सा लगा। मैंने देखा तो उसके सफेद पेटीकोट पर खून के धब्बे साफ दिख रहे थे।


मैंने उसको कहा- “अपने पेटीकोट से मेरा लण्ड पॉछ दो, और अपनी चत भी इसी से साफ कर लो..” उसने ऐसा ही किया। हम दोनों लिपटकर लेटे रहे।


थोड़ी देर बाद मैंने ऋतु में कहा- “जरा मेरे लिए पानी लेकर आओ..”


ऋतु में उठने की हिम्मत नहीं थी। मैं जानता था की उसकी कुंवारी चूत मेरे लण्ड की चोटों में सूज गई हैं। उसकी चूत में अभी भी दर्द हो रहा है। पर वो मजबूरी में उठी और कपड़े पहनने लगी।


मैंने उसको कहा- “कपड़े नहीं पहनों बस अपनी चूचियों को दुपट्टे से टक लो और इसी पेटीकोट में ही जाओ..”


ऋतु ये सुनकर मुझे अजीब तरह से देखने लगी। ऋतु ने दुपट्टे से अपनी चूचियों को टका और पानी लेने जाने लगी। उससे चला नहीं जा रहा था। वो अपनी जांघों को फैलाकर चल रही थी। मैं जानता था की बाहर शोभा उसको मिलेंगी। मैं भी चुपके से दरवाजे के पास जाकर खड़ा हो गया।


वैसा ही हुआ। बाहर निकालते ही शोभा ने अत को अपने गले से लगा लिया। ऋतु और शोभा दोनों गले लग कर रोने लगी। धीरे-धीरे क्या बात करी उन दोनों में मैं मन नहीं पाया। ऋत का पेटीकोट शोभा को दिखाई दे गया था। पर वो बोली नहीं कुछ। फिर ऋतु किचन से पानी लेकर मेरे पास आई।


मैंने पाजी पीकर उसको कहा- “अब मेरा लण्ड चूसकर खड़ा करो..”


ऋतु ने मुझसे कहा- “आपके लण्ड पर खून लगा हुआ है..”


मैंने कहा- “कोई बात नहीं। तुम मेरे साथ बाथरूम में चला। वहां तुम मेरे लौड़े को धोकर साफ कर देना…” कहकर मैं उठकर खड़ा हो गया। ऋतु मेरे साथ चल दी। हम दोनों बाथरूम में गये। वहां नल के नीचे मैंने अपना लौड़ा रखा। ऋतु ने मेरे लौड़े को साबुन लगाकर धोया।


मैंने ऋतु में कहा- “अपनी चूत भी धो लो..”


उसने अपनी चूत भी धोई। अब हम फिर से गम में चले गये। ऋतु का घर बड़ा छोटा सा था।


मैं जानता था की हम जो भी कर रहे हैं, वो शोभा और शिल्पा को सब पता चल रहा है। मैंने रूम में जाकर ऋतु को लण्ड पकड़ा दिया और कहा- “अब चूसो..”


ऋतु मेरे लौड़े को चूसने लगी। दो मिनट में मेरा लौड़ा टनटना का पूरा तैयार हो गया। ऋतु पलंग पर जाकर लेट गई, और अपनी दोनों टांगों को फैला दिया। मुझे देखकर हँसी आ गई।


मैंने उसको कहा- “मैं अब तुमको आगे से नहीं पीछे से चोदूंगा..”


ऋतु सुनकर घबरा गई। हाथ जोड़कर बाली- “प्लीज… आप वहां मत करिए बड़ा दर्द होगा..”


मैंने कहा- “सुनो। मैं तमको जैसा कहें वैसा करो.. मेरा मह खराब मत करो समझी?”


मैंने जब गुस्से से कहा तो वो डर गईं।


मैंने उसको कहा- “चलो एक काम करो, कोई तेल लेकर आओ..”


उसने कहा- “सामने खिड़की के पास से उठा लीजिए.”


मैंने तेल की ट्यूब उठा ली और ऋतु को कहा- “तुम घोड़ी बन जाओ..”


वो घोड़ी बन गई। मैंने खूब सारा तेल उसके चूतड़ों पर डाल दिया। तेल की धार उसके चूतड़ों की दशा में होती हुई उसकी गाण्ड तक जा रही थी। मैंने अपनी उंगली उसकी गाण्ड में घुसा दी। ऋतु ने अपनी गाण्ड आगे कर दी।


मैंने उसको कहा- “अगर अब तेरी गाण्ड एक इंच भी हिली तो मैं बिना तेल के ही तरी गाण्ड मार दूँगा…”


सुनकर ऋतु बोली- “नहीं-नहीं अब नहीं हिलाऊँगी…”


फिर मैंने उसकी गाण्ड में उंगली पेल दी। अब उसकी गाण्ड हिल नहीं रही थी, बस वो अपनी गाण्ड को सिकोड़ रही थी। दो-तीन मिनट मैं उसकी गाण्ड में उंगली चलाता रहा। फिर मैंने अपनी दूसरी उंगली भी उसकी गाण्ड में पेल दी। अब ऋतु को दर्द होने लगा और वो रोने लगी। मैंने उसको कुछ कहा नहीं, अपना काम करता रहा। जब मैंने देखा इसकी गाण्ड अब लौड़ा लेने को तैयार हैं तब मैंने उसको पलंग के कार्जर में घोड़ी बना दिया, और मैं नीचे खड़ा होकर उसकी गाण्ड पर अपना लौड़ा अइजस्ट करने लगा।


फिर मैंने उसकी गाण्ड में उंगली पेल दी। अब उसकी गाण्ड हिल नहीं रही थी, बस वो अपनी गाण्ड को सिकोड़ रही थी। दो-तीन मिनट मैं उसकी गाण्ड में उंगली चलाता रहा। फिर मैंने अपनी दूसरी उंगली भी उसकी गाण्ड में पेल दी। अब ऋतु को दर्द होने लगा और वो रोने लगी। मैंने उसको कुछ कहा नहीं, अपना काम करता रहा। जब मैंने देखा इसकी गाण्ड अब लौड़ा लेने को तैयार हैं तब मैंने उसको पलंग के कार्जर में घोड़ी बना दिया, और मैं नीचे खड़ा होकर उसकी गाण्ड पर अपना लौड़ा अइजस्ट करने लगा।


सही आंगल बजाकर मैंने उसको कहा- “में अब लौड़ा पेलने जा रहा है.”


उसने फिर से रोना शरू कर दिया और बोली- “प्लीज मान जाइए ना..”


.

मैंने कहा- “चुपचाप घोड़ी बनी रह, नहीं तो कुतिया बनाकर चोदूंगा..”


फिर मैंने अपना लण्ड उसकी गाण्ड में जैसी ही डाला वो उछल पड़ी और मेरे पैरों में गिर के रोने लगी। मैंने उसको गुस्स से कहा- “प्यार से गाण्ड मरवा लें, नहीं तो तेरी माँ को यही बुलाता है। उसके सामने ही तेरी गाण्ड मारेगा…”


से सुनकर वो सिहर कर रह गई, और चुपके से फिर से घोड़ी बन गई। मैंने अब उसकी गाण्ड में लण्ड डाला। मेरा सुपाड़ा अब उसकी गाण्ड के छेद में चला गया था।


मैंने उसको कहा- “तू अपनी गाण्ड को पीछे की तरफ जोर लगाकर धकेल..” मैं जानता था वो ऐसा नहीं कर पाएगी पर में देखना चाहता था की वो करती है या नहीं?


उसने करने की कोशिश की। अब मेरा पूरा लण्ड उसकी गाण्ड में था। मेरी हर चोट पर उसकी एक जोर की चीख निकल रही थी। मैं उसकी चीखों की परवाह करें बिना उसकी गाण्ड में अपना लण्ड पेले जा रहा था।


ऋतु- “उईईई माँ उईईई माँ..” करती जा रही थी।


करीब 7-8 मिनट बाद मुझे लगा की मैं अब झड़ने वाला हूँ, तो मैंने कस के धक्के मारने शुरू कर दिए। उसकी चीखें और तेज हो गई। मैंने कस के एक शाट मारा और मैं उसकी गाण्ड में झड़ गया। उसकी गाण्ड में मैंने अपना लण्ड ऐसे ही पड़ा रहने दिया। मेरे लण्ड को उसकी गाण्ड ने अभी तक कस के दबाया हुआ था। ऋतु अभी तक अपनी गाण्ड को सिकाई जा रही थी। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरे लण्ड की मालिश हो रही हो। अब मैंने अपना लण्ड बाहर खींचा तो फुच्च की आवाज के साथ मेरा लौड़ा बाहर आ गया।


मैंने ऋतु में कहा- “जान मेरे लौड़े को साफ कर दो…”


उसने तौलिया से मेरा लौड़ा साफ किया। मैं पलंग पर लेटा रहा। ऋतु भी पेंट के बल पलंग पर लेट गई फिर

बोली- “आपने मुझे इतना दर्द दिया है, आप बड़े खराब हो…”


मैंने ऋतु के गाल को चूमते हुए कहा- “जान अब इस दर्द की आदत डाल लो..”


ऋतु ने कहा- “मैं टायलेट जा रही हूँ..”


मैं समझ गया उसकी गाण्ड में मेरा माल चिपचिप कर रहा होगा, मैंने कहा- “जाओ। लेकिन जल्दी से आजा…”

वो उठकर चली गई। थोड़ी देर में ऋतु आ गई।


मैंने उससे कहा- “मुझे अब नींद आ रही है… मैंने अपने सेल में 6:00 बजे का अलार्म लगा दिया और मत से कहा- “अलार्म बजते ही मेरा लौड़ा मुँह में लेकर चसना शुरू कर देना। मेरा लौड़ा खड़ा करोगी तो मैं उठ जाऊँगा समझी या नहीं?”


ऋतु ने सिर हिला दिया।


मैं ऋत को अपनी बांहों में भरकर सो गया। फिर मुझे नींद आने लगी। सुबह मेरी नींद खुली तो पता चल गया की मेरे लौड़े को ऋतु चूस रही हैं। मैं जाग गया पर आँखें बंद करके लेटा रहा। ऐसें चुप्पा लगवाने में मुझे बड़ा मजा आ रहा था।


फिर मैंने अपनी आँखों को खोला, और ऋत को कहा- “अब तुम मेरे ऊपर आ जाओ और मेरे लण्ड पर अपनी

चूत रखकर बैठ जाओ..”


ऋतु मेरे ऊपर आ गई। उसने अपने नाजुक हाथ से मेरा लौड़ा पकड़ा और अपनी चूत के मुंह पर लगा दिया,


और हल्का सा दबाया। मैं तो इसी माके की इंतजार में था। जैसी ही ऋतु ने अपनी चूत को मेरे लण्ड पर दबाया, मैंने नीचे से जोर का धक्का मारा।


ऋतु को शायद इसकी उम्मीद नहीं थी, इसलिए उसने एक जार की चौख मारी- “उईईई मर गई..” मैंने उसकी

मर को कस के पकड़ रखा था। वो उठ नहीं पाई। एक मिनट तक लण्ड पूरा उसकी चूत में घुसा रहा।


फिर मैंने उसकी गाण्ड के नीचे हाथ रखकर उसको ऊपर उठाया और कहा- “अब मेरे लौड़े पर उछल-उछलकर इसको अपनी चूत में अंदर-बाहर करती रहो…


ऋतु ने हल्के-हल्के ऊपर-नीचे होना शुरू कर दिया।


ऋतु को शायद इसकी उम्मीद नहीं थी, इसलिए उसने एक जार की चौख मारी- “उईईई मर गई..” मैंने उसकी

मर को कस के पकड़ रखा था। वो उठ नहीं पाई। एक मिनट तक लण्ड पूरा उसकी चूत में घुसा रहा।


फिर मैंने उसकी गाण्ड के नीचे हाथ रखकर उसको ऊपर उठाया और कहा- “अब मेरे लौड़े पर उछल-उछलकर इसको अपनी चूत में अंदर-बाहर करती रहो…


ऋतु ने हल्के-हल्के ऊपर-नीचे होना शुरू कर दिया।


मैंने ऋतु में कहा- “अगर हर बार में पूरा लण्ड अंदर नहीं लिया तो मैं नीचे से फिर धक्का मारूंगा..”


सुनते ही ऋतु ने कहा- “नहीं नहीं प्लीज… आप मत करना..”


में मुश्कुरा पड़ा। मैं जानता था अब वो सही से लौड़ा खायेगी। फिर मैंने ऋतु से कहा- “मेरे मुँह में अपने हाथ से पकड़कर अपनी चूची चुसवाओ.”


उसने मेरे मुँह में अपनी चूची लगा दी। मैं उसकी चूची चूसने लगा। अब मेरा लण्ड ऋतु की चूत में फिसल फिसल के जा रहा था। क्योंकी ऋतु की चूत अब पानी छोड़ रही थी।


ऋतु ने कहा- “अब आप मेरे ऊपर आ जाइए..”


मैंने कहा- “ऐसे नहीं, पहले तुम मुझे कहाँ की- ‘प्लीज मेरे ऊपर आकर मेरी चूत मारो.”


सुनकर ऋतु शर्मा गईं।


मैंने कहा- “ऋत सेक्स का मजा तभी आता है जब सेक्सी बातें की जाएं…


ऋतु ने हल्के से कहा- “मेरी जान मेरे ऊपर चढ़ कर मुझे चोदो..”


मैंने कहा- “ऐसे नहीं, जार में बोला..”


ऋतु ने अब जोर से कहा- “मेरी जान मेरे ऊपर चढ़कर मुझे चोदो..”


ये सुनकर मेरा जोश और बढ़ गया। मैंने ऋतु को नीचे कर दिया और उसकी चूत में अपना लण्ड अंदर-बाहर करने लगा। मैंने ऋतु से कहा- “अब तुम भी नीचे से अपनी चूत को उठा-उठाकर चुदवाओ…”

.

ऋत को अब मजा आ रहा था। वो अब नीचे से अपनी चत उठा रही थी। ऐसा करने में उसकी चत दो बार झड़ गई। उसने अपनी आँखों को बंद कर लिया और उसके चेहरा पर स्माइल दिखने लगी। 5 मिनट ऐसे ही चलता रहा। फिर मैंने अपना सारा जोर लगाकर 10-15 शाट में ऋतु की चूत में माल झाड़ दिया। ऋतु ने मेरी पीठ पर अपने नाख़ून गड़ा दिए थे। चुदाई में इसका पता नहीं चला। पर अब इसका एहसास होने लगा था। मैं ऋतु के ऊपर से उठने लगा, पर उसने मुझे अपनी बाहों में कसकर दबा लिया।


मैंने कहा- “क्या हुआ?”


ऋतु ने कहा- “प्लीज… ऐसे ही लेटे रहिए ना..”


मैंने कहा- “मुझे अब जाना है, सुबह हो गई है..”


पर ऋतु ने कहा- “प्लीज… प्लीज मत जाइए…”


मैंने उसकी बात मान ली पर दो मिनट बाद जैसे ही उसकी पकड़ टोली हुई में उठकर खड़ा हो गया। फिर मैंने

अपने कपड़े पहन लिए। ऋतु में भी उठकर कपड़े पहन लिए।


मैंने कहा- “तुम आज भी आफिस मत आना। मैं शाम को जल्दी आ जाऊँगा…


ऋतु ने मेरे सीने पर अपना सिर रख दिया, और मेरे सीने से कसकर चिपक गई। मैंने ऋत का चेहरा अपने हाथों में लिया तो उसकी आँखों में आँस देखकर सोच में पड़ गया।


मैंने उसके बालों में प्यार से हाथ फेरते हुए कहा- “क्या हुआ?”


ऋत बोली- “आपको समझ में नहीं आएगा…”

F

मैंने भी बात को ज्यादा नहीं बढ़ाया। फिर मैंने उसको कहा- “अब मुझे जाने दो..”


मैं राम से बाहर निकला तो मुझे शोभा बाहर ही मिल गई। मैंने उसको कहा- “मैं जा रहा हूँ तुम ऋतु का आराम करने देना। शाम को मैं आऊँगा…”


शोभा में अपने सिर को हिला दिया। मैंने कार स्टार्ट की तो मुझे याद आया की मैंने ऋतु का सफेद पेटीकोट जिसपर उसकी चत का खन लगा हुआ था, वहीं छोड़ दिया है। पर मैं अब वापिस जाने के मह में नहीं था। सो मैंने कार घर की और बढ़ा दी। मैं घर पहुंचा तो 8:00 बज चुके थे। मैं सीधा बाथरूम में घुस गया।


सुबह मैं आफिस टाइम से चला गया था। मैं अपने केबिन में बैठा था। तभी अंजू ने आकर मुझसे पूछा- “सर, ऋतु कल से नहीं आई..”


मैंने उसको कहा- “उसकी तबीयत ठीक नहीं है। उसने मुझे फोन से बता दिया था, और तुम बताओं की तुम्हारी मम्मी कैसी है?”


अंजू ने कहा “सर अब वो ठीक है…”


मैंने उसको कहा- “अब तुम जाओ..


अंजू चली गई।


मैंने ऋतु को फोन किया पर उसने फोन उठाया नहीं। दो मिनट बाद उसका फोन आया।


मैंने कहा- “क्या हुआ सोई हुई थी क्या?”


उसने कहा- “जी सर…”


मैंने कहा- “तुम अपना पेटीकोट जो रात को पहना था उसको संभाल कर रख देना। उसको धोना नहीं..”


ऋतु ने कहा- “ठीक है, मैं उसको रख दूँगी। पर आप उसका क्या करोगे?”


मैंने कहा- “आज शाम को बता दूँगा.” फिर मैंने उसको कहा- “अब तुम आराम करो…”


मैंने स्टाफ से कहा- “अब मुझे कोई डिस्टर्ब मत करना। मैं कुछ जरनी काम कर रहा है… और मैं अपने काम में लग गया। काम में टाइम का पता ही नहीं चला कब 4:00 बज गये।


में रात को भी नहीं सोया था, इसलिए थोड़ा थका हुवा था। मैं आफिस से घर आ गया। मैंने आते ही एक पेग विस्की पी, और लेट गया। मुझे नींद कब आ गई पता ही नहीं चला। मेरे सेल की रिंग बाजी तो मेरी नींद खुल

गई। मैंने देखा ऋतु का फोन था मैंने पिक किया।


ऋत् ने कहा- “आप कब तक आओगे?”


मैंने चुटकी लेटे हुए कहा- “क्यों चुदने का मूड हो रहा है क्या?”


उसने शर्म से कहा- “नहीं वो बात नहीं है, मैं तो आपके लिए खाना बना रही थी आप खाना खाकर मत आना…”


मैंने कहा- “क्या बना रही हो?”


उसने कहा- आपकी पसंद की डिश है।


मैं समझ गया। मैं उठा और तैयार होकर अत के घर की और चल दिया। मैंने डोर बेल बजाई। अत ने ही दरवाजा खोला और प्यारी सी मुश्कन से मुझे वेलकम किया। मैं अंदर चला गया। ऋतु मेरा हाथ पकड़कर सीधा मुझे अपने रूम में ले गई, जिसमें कल हमारी सुहागरात हुई थी। मैं चयर पर बैठ गया।


ऋतु मेरी गोद में बैठ गई और बोली- “कब से आपका इंतजार कर रही हैं.”


मैंने उसको सब बताया की कैसे मुझे देर हो गई।


ऋतु ने कहा- “आपके लिए ड्रिंक बनाकर लाती हैं…” और ऋतु ने मेरे लिए पेग बनाया मैं बिस्की की बोतल रात को उसके घर ही छोड़ गया था वा काम आ गई।


मैंने ऋतु में कहा- “तुम आज मेरा बड़ा खयाल रख रही हो, क्या बात है?”


ऋतु ने अपने चेहरे को गुस्से वाला करके कहा- “आपको जो समझना है समझिए। मैं तो अब ऐसी ही करेंगी..”


मैंने कुछ नहीं कहा। मेरा पेग खतम हो गया था। ऋतु को मैंने इशारा किया। उसने पैग बना दिया।


ऋत बोली- “आप पेंग खतम करिए मैं चेंज करके आती हैं.” और वो चली गई।


मैं सिप करते-करतें सोच रहा था की एकदम से ऋतु का बिहेब कैसे इतना चेंज हो गया?


इतने में शोभा रूम में आकर मुझसे बोली- “डिनर तैयार है लगा दू?”


मैंने कहा- “10 मिनट में लगा देना..” कहकर मैं अपने मोबाइल को चेक करने लगा।


थोड़ी देर में ऋतु आ गई। जैसी ही वो रूम में एंटर हुई, रूम में खुशबू ही खुशबू भर गई। मैंने ऋतु को देखा तो देखता ही रह गया। उसने पिक कलर की नाइटी पहन रखी थी, बाल खुले हुए थे, बिना लिपस्टिक के भी उसके होठों पिंक लग रहे थे। नाइटी ज्यादा तो नहीं पर थोड़ी सी ट्रान्सपरेंट थी। क्योंकी ऋतु की ब्रा पैटी साफ दिख रही थी। ऋतु आकर मेरी गोद में बैठ गई और अपनी गोरी गोरी बाहें मेरे गले में डाल दी, और अपने होंठ मेरे आगे कर दिए। मैं समझ गया मैंने भी उसके होंठों पर होंठ रख दिए और डीप-किस करने लगा। हम दोनों इस पोजीशन में पता नहीं कितनी देर से होंगे। तभी शाभा की आवाज में हमें हड़बड़ा दिया।


ऋतु मेरी गोद में वैसे ही बैठी थी। शोभा को देखकर वो शर्मा गई। हमने दरवाजा बंद नहीं किया था। इसीलिए ऐसा हो गया। ऋत उठने लगी।


तब मैंने उसको कहा- “शांती क्यों हो?”


मैंने शोभा से कहा- “हम अभी आते हैं.”


हम दोनों दूसरे गम में गये। वहां डिनर लगा हुआ था। ऋतु ने मेरे लिए खाना लगा दिया।


मैंने उसको कहा- “तुम नहीं खाओगी?”


उसने कहा- “मैं आपके साथ ही खा लेंगी अगर आपको कोई पाब्लम ना हो तो..”


मैंने कहा- मुझे कोई प्राबलम नहीं है…. फिर हम दोनों में खाना खाया।


शोभा और शिल्पा ने हमारे साथ खाना नहीं खाया। मैंने कहा तो बोली हम बाद में खा लेंगे।


डिनर के बाद मैंने ऋतु को इशारा किया। वो समझ गईं। मैं उठकर दूसरे रूम में आ गया। मेरे पीछे ऋतु भी आ गई और दरवाजा बंद कर दिया। मैंने ऋत को अपनी बाहों में भर लिया। वो भी मेरे से चिपक गई। ऋत ने मेरी शर्ट के बटन खोल दिए। मैंने शर्ट उतार दी। फिर ऋतु में मेरे लण्ड को जीन्स के ऊपर से पकड़ लिया। मैं समझ गया की अब उसकी चत चुदासी हो गई है, और होती भी कैसे नहीं। उसकी शादी की उम्र हो चुकी थी और शादी का चान्स अभी दूर-दूर तक नहीं था। 18 साल के बाद लड़की की चत लौड़ा माँगने लगती है।


हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े उतार दिए, और बैंड पर लेट गयें। ऋतु मेरे लण्ड को अपने कोमल हाथों में

सहला रही थी।


मैंने ऋतु से कहा- “कल से कैसे तुम मेरे साथ रात को रह पाओगी?’


ऋतु ने कहा- “मैं भी यही सोच रही हैं। कल से मैं अकेली कैसे साऊँगी? मुझे तो आपके बिना नींद ही नहीं

आएगी.”


मैंने कहा- “कोई बात नहीं। मैं कुछ ना कुछ करेगा। अभी तुम रात खराब नहीं करो…” और मैंने उसके होंठों को चूसना शुरु कर दिया। धीरे-धीरे मैं उसकी चूत को सहलाने लगा।


ऋतु ने कहा- “मैं ऊपर आऊँगी…”


मैंने हँसते हुए कहा- “ऊपर ज्यादा मजा आता है क्या?”


उसने कहा- “हाँ..”


मैंने उसको अपने ऊपर ले लिया। इस तरह रात भर चुदाई का खेल चलता रहा। सुबह में 7:00 बजे ऋतु के घर से निकाल आया। मैंने ऋतु से कहा- “तुम भी 11:00 बजे तक आफिस आ जाना..”


अगले दिन ऋतु थोड़ा देर में आफिस आई। आते ही वो मेरे कैबिन में आ गई। आज उसकी अदाएं कहर ढा रही थीं। उसने सफेद कलर का पाजामी सूट पहना हुआ था। सफेद कलर ऋतु पर खूब फबता है।


मैंने उसको देखते ही कहा- “आज बड़ी प्यारी लग रही हो.”


उसने स्वीट सी स्माइल से मुझे मेरे कांप्लिमेंट का जबाब दिया। मैं अपनी चेयर से उठा और ऋतु के पास जाकर उसको अपनी बाहों भर लिया। वो भी मुझसे किसी बेल की तरह लिपट गई।


मैंने उसको किस करते हुए कहा- “जानेमन तुम्हें देखकर तो अभी से मूड बन रहा है.’


ऋतु ने मुझसे खुद को छुड़ाते हुए कहा- “जी नहीं, अभी कुछ नहीं करना…”


मैंने हँसकर कहा- “फिर कब करना है”


उसने कहा- “बाद में…” और फिर वो मुझसे बोली- “आप अपना काम करिए। मैं भी जाकर काम करती है। दो दिन से आफिस नहीं आई ” मैंने उसको जाने दिया।


उसके जाने के बाद में भी अपने काम में लग गया। करीब 4:00 बजे मैंने उसको बुलाया, और कहा- “आज मैं तुम्हारे घर कैसे आऊँगा?”


ये सुनकर ऋतु उदास हो गई। लेकिन वो जानती थी मैं जो कह रहा है वो सच है। क्योंकी आज ऋतु के पापा घर पर होंगे और उनको किसी बात का पता नहीं था।


ऋतु बोली- “आप कुछ करिए ना..”


मैंने उसको कहा- “मैं जल्दी ही कुछ काँगा.” और मैंने ऋतु को अपनी गोद में उठा लिया, सोफे पर ले जाकर लिटा दिया। मैंने उसको कहा- “आज बैंड की जगह सोफे पर ही काम चलाना पड़ेगा…”


ऋतु ने कहा- “आपके साथ फर्श पर भी मंजूर है…”


सुनकर मेरा दिल खुश हो गया।


ऋतु ने अपनी कमीज उतार दी, और मुझसे बोली- “प्लीज मेरी ब्रा का हुक खोल दो..”


मैंने उसकी ब्रा का हक खोलकर उसकी चूचियों को आजाद कर दिया। मैंने भी अपनी जीन्स और शर्ट उतार दी। ऋतु ने अपनी पाजामी का नाड़ा खोलकर अपनी पाजामी को उतार दिया। अब वो मेरे सामने सिर्फ पैटी में थी।


मैंने उसकी ब्रा का हक खोलकर उसकी चूचियों को आजाद कर दिया। मैंने भी अपनी जीन्स और शर्ट उतार दी। ऋतु ने अपनी पाजामी का नाड़ा खोलकर अपनी पाजामी को उतार दिया। अब वो मेरे सामने सिर्फ पैटी में थी।


मैंने उसको कहा- “इसको भी उतार दो…’


ऋतु ने बड़ी अदा से कहा- “इसको आप खुद उतार लो.”


मैंने उसकी पैटी के एलास्टिक में अपनी उंगली डालकर पैटी को नीचे कर दिया, तो ऋतु की चूत मेरे सामने नंगी थी। मैंने ऋतु की चूत पर उंगली फेरते हुए कहा- “तुम जरा अपनी दोनों टाँगों को खोल लो..”


उसने खोल दी, तो मैंने उसकी चूत की दोनों फांकों को फैलाकर उसकी चूत पर अपनी जीभ रख दी। ऋतु की चूत की महक मेरी सांसों में समा गईं। मैंने आज तक ऋतु की चूत जैसी महक किसी और चूत में नहीं महसूस की थी। ऋतु की चूत में कुछ अलग ही महक है। मैं कुछ देर तक ऋतु की चूत पर अपनी जीभ फेरता रहा। फिर मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ को जरा सा घुसा दिया। ऐसा करते ही ऋतु में अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़कर अपनी चूत पर दबा दिया और सीईड… सीईईई की आवाजें करने लगी। उसको चूत चटवाने में कितना मजा आ रहा होगा मैं समझ सकता था।


फिर मैंने ऋतु में कहा “अब मेरा लण्ड को गुस्सा आ गया है.”


ऋतु ने कहा- “इसको तो मैं अभी खुश कर दूँगी..”


फिर ऋत में मेरे लण्ड को अपने होंठों पर रखकर उसको हल्के-हल्के अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया। वो मेरे सुपाड़े को अपने मुँह में दबाकर जीभ से छूने लगी। दिनों दि ऋतु का लण्ड चूसने का तरीका मस्त होता जा रहा था। अब वो नये-नये तरीकों से लण्ड को चूसती श्री। सच कहूँ तो उसको लण्ड चुसवाने में मुझे चुदाई से ज्यादा मजा आता था। क्योंकी ऋतु लण्ड पूरे दिल से चूसती थी और चूसते वक़्त मुझे ऐसे देखती थी जैसे बिल्ली मलाई चाट रही हो। ऋतु जब लण्ड चूसती है तब वो लण्ड को आइसक्रीम जैसे चाटती है, पूरा गीला कर देती हैं। अब मेरा लण्ड ऋतु के गले तक जा रहा था।


मैंने ऋतु से कहा- “अब तुम सोफे पर घोड़ी बन जाओ…”


उसको घोड़ी बनाकर मैंने उसकी चूत में लण्ड डाला। उसकी चूत में मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लण्ड गरम पानी में हो। मैं अत की चूत पर कस-कस के शाट मार रहा था, और मैंने ऋतु की दोनों चूचियों को अपने हाथों में पकड़ रखा था। बल्कि ऐसा समझो की मैं उसकी चूची को पकड़कर उसे आगे पीछे करके चोद रहा था। ऋत् भी मुझे पूरा सहयोग कर रही थी। फिर जोश बढ़ता गया और मेरा माल ऋतु की चूत में झड़ गया। मैंने अपना लण्ड ऋतु की चूत से निकाल लिया और सोफे पर बैठ गया।


मैंने ऋतु से कहा- “यहां कोई कपड़ा तो है नहीं, लण्ड कैसे साफ करं?”


ऋतु ने हँसते हुए कहा- “मेरे राजा जी आप चिंता मत करो..” फिर ऋतु में अपनी पैटी से मेरा लण्ड पोंक दिया।


उसकी इस हरकत से मेरे झड़े हुए लण्ड में भी जोश पैदा हो गया। ऋतु ने अपनी चूत भी अपनी पैटी में साफ की और पेंटी को अपने बैग में रख लिया।


मैंने कहा- “इसको कहीं फेंक देना..”


ऋतु ने कहा- “मेरे पास इतनी ज्यादा पैटी नहीं है.”.


मैंने उसको कहा- “कल मैं तुमको शापिंग करवाने ले चलूँगा…”


सुनकर ऋतु खुश हो गई, और बोली- “सोच लीजिए में खूब सारी शापिंग करेंगी..”


मैंने कहा- “जब तक दिल ना भरे कर लेना… फिर मत चली गई।


ऋतु के जाने के बाद अंज मेरे केबिन में आई और बोली- “सर, आजकल आप सब काम ऋतु से ही करवाते हैं, मुझे कोई काम नहीं देते..”


मैंने मन ही मन सोचा की इसको क्या पता की मैं उससे क्या काम लेता हूँ। फिर मैंने अंजू से कहा- “देखो त अभी नई है। इसलिए मैं उसको सब काम समझा रहा हैं…..


अंजू के चेहरे पर जलन का भाव आ गया। मैंने कुछ कहा नहीं। पर साफ पता लग रहा था की अत को मेरे साथ ज्यादा मिक्सप होते देखकर अंजू को जलन हो रही है। मैं भी तो यही चाहता था।


फिर मैंने अंज से कहा- “मैं भी अब जा रहा है…” और मैं आफिस से निकल गया।


घर जाकर मुझे आज बड़ा अजीब सा लग रहा था। क्योंकी दो दिन जो मस्ती में गुजरे थे, और आज कितना अकेलापन लग रहा था। मैंने विस्की का सहारा लिया और तीन-चार पेग लगाकर सो गया। अगले दिन मैं ऋतु को शापिंग करवाने ले गया। मैंने उसको दिल से शापिंग करवाई। अत ने कभी इतने बड़े शोरूम में शापिंग नहीं की थी।


उसका प्राइस दिखा-दिखाकर शापिंग करवाते हुए मैं बोला- “तुम मेरे साथ आई हा घबराओ नहीं..”


फिर भी उसने ज्यादा कुछ नहीं लिया। तीन-चार ड्रेस ही ली।


मैंने अत से कहा- “अपने लिए ब्रा पैटी भी तो ले लो…”


सुनते ही वो शर्मा गई। मैं उसको शाप में ले गया। वहां मैंने उसको लेटेस्ट स्टाइल की एक दर्जन ब्रा-पैंटी लेकर दी। मैंने ऋतु को उसके घर के बाहर ही छोड़ दिया और मैं वापस आ गया। इसी तरह दिन बीत रहें थे। मैं कभी आफिस में, कभी अपने घर लेजाकर ऋत का आफिस टाइम में चोद लेता था। पर वो दो रातें, जो मैंने ऋत के घर बिताई थी उनका मजा कुछ और ही था।


फिर एक दिन ऋतु आफिस में ही थी की शोभा का फोन आया की अन (ऋतु की बड़ी बहन) का बेटा हुआ है। हमको आज ही वहां जाना होगा। तू आफिस से छुट्टी लेकर आ जा।


ऋतु ने मुझे बेमन से कहा- “सर में जाऊँ क्या?”


मुझे सब बात पता लग गई थी। मैंने अत् को कहा- “क्या हआ, उदास क्यों हो रही हो?”


ऋतु बोली- “मेरा जाने का मन नहीं कर रहा है….


मैंने उसको कहा- “तुम कोई बहाना बनाकर देख लो.”


ऋतु घर चली गई। रात को करीब 8:00 बजे ऋतु का फोन आया- “आप मेरे घर आ जाओ..”


मैंने कहा- “तुम वहां नहीं गई?”


ऋतु ने कहा- “पहले आप आ तो जाओ..”


में फटाफट ऋतु के घर पहुंचा। ऋतु मुझसे छिपट गई। मैंने कहा- “तुम क्यों नहीं गई?”


ऋतु बोली- “मैंने घर आकर मम्मी से कहा- “मेरी तबीयत ठीक नहीं लग रही। कहीं रास्ते में ज्यादा खराब ना हो जाए.


मम्मी ने कहा- “फिर तू घर ही रुक जा। हम चले जाते है..”


मैंने हँसते हुए कहा- “इतना नाटक किसलिए किया?”


ऋतु बोली- “आपके साथ पूरी रात मस्ती करने के लिए.”


मैंने उसको अपनी बाहों में भर लिया और गाद में उठाकर अंदर ले गया। मैंने ऋतु को बैंड पर लेजाकर लिटा दिया और मैं भी उसके ऊपर लेट गया। मैंने ऋतु से कहा- “जान सच में तुमने आज मुझे खुश कर दिया है.”


मत ने मेरे हाथ को चूमते हए कहा- “आपको छोड़कर जाने का मन नहीं कर रहा था सा कैसे जाती?”


मैंने ऋतु से कहा- “तुमने मुझे आज जो साइज दिया है वो मैं जीवन भर याद र गा.”


ऋतु बोली- “मुझे नहीं पता था की आप इतनी जल्दी से आ जाओंगे में तो नहाने जा रही थी। अब अगर आप कहाँ तो मैं नहाने जाऊँ…”


मैंने उसको कहा- “मैं भी तुम्हारे साथ चलता है दोनों एक साथ नहाते हैं…


ऋत ने शरारत भरी आवाज से कहा- “मैं जानती थी आप ऐसे ही कहोगे..” फिर ऋतु ने अपने सब कपड़े उतार दिए और मुझसे कहा- “आप क्या कपड़ों में नहाते हो?”


मैंने भी हँसते हुए अपने सच कपड़े उतार दिए। हम दोनों नंगे थे।


ऋतु ने मुझसे कहा- “मेरे प्यारे पिया जी, अब मुझे अपनी गोदी में उठाकर बाथरुम तक के चलो..”


मैं ऋतु के मुँह से ये सुनकर दंग भी हो गया और खुश भी मैंने कहा- “फिर से कहो..”


ऋतु ने अबकी बार मेरे गले में अपनी बाहों को डालकर मेरी आँखों में देखते हए कहा- “पियाजी मुझे बाथरूम में

ले चलिए ना..


मैंने उसको चमते हए अपनी गोद में उठा लिया हम बाथरूम में आ गये। वहां मैंने ऋत को शावर के नीचे खड़ा कर दिया। शाबर से ठंडा-ठंडा पानी उसके जिम को भिगोने लगा। ऋतु ने मुझे अपने जिम से चिपका लिया। हम दोनों शाबर के नीचे खड़े हए होंठों पे होंठ रखकर शावर ले रहे थे। मेरे दोनों हाथ ऋतु के चूतड़ों पर थे और उसके मेरी कमर पर। मैं हल्के-हल्के नीचे झुकता गया और अब मेरा मुँह ऋतु की चूत के पास था। मैंने अत की चत पर नीचे से ऊपर तक अपनी जीभ फिरा दी।


ऋतु में अपनी जांघों को सिकोड़ लिया। मैंने ऋतु की दोनों जांघों को अपने हाथ से चौड़ा किया और फिर से उसकी चत पर मैंह लगा दिया। ऋत ने मादक सिसकियां लेनी शरू कर दी। मैं इतने में कहां मान जाता। मैंने अत को घमा दिया। अब उसकी गाण्ड मेरे सामने थी। मैंने ऋत की गाण्ड पर एक काट लिया ऋत ने उद्दई की आवाज निकाली। मैंने अब उसके दूसरे चूतड़ पर हल्के से काटा।


ऋतु ने फिर से- “उईईई आह्ह…” किया।


मैंने ऋतु को कहा- “जान तुम्हारी गाण्ड बड़ी मस्त है.”


ऋतु भी आज पूरे मूड में थी। वो मुझसे बोली- “आपका लण्ड भी कितना मस्त है..”


मैंने कहा- “मेरे लण्ड का क्या करोगी?”


उसने कहा- “देखते जाइए…’ कहकर उसने मेरे लण्ड पर साबुन लगा दिया और फिर मेरे लण्ड को रगड़-रगड़कर धोने लगी।


अब मेरा लण्ड बिल्कुल खड़ा हो गया था।


ऋतु ने अपना मुँह मेरे लण्ड पा रखा और बोली- “आप मेरे मुँह में अपना लण्ड जितना डाल सकते हैं डाल दीजिए…


मैंने कहा- “पागल हो क्या?”


ऋत बोली- “आप डालिए तो…”


मैंने उसके मुँह में अपना लण्ड आधा डाल दिया और उसके मुँह में धक्के मारने लगा। धीरे-धीरे मेरा लण्ड ऋतु के गले तक जाने लगा।


ऋतु ने मेरे लण्ड को मह से निकाला और कहा- “और डालिए..”


मैने अबकी बार ऋत का सिर पकड़कर अपना लण्ड आधे से ज्यादा उसके मुँह में डाल दिया। मुझे एहसास हो गया की मेरा लण्ड उसके गले में चला गया है, तो मैंने लण्ड को बाहर निकाल लिया।

.

ऋतु ने मेरी तरफ प्यार से देखा और कहा “मैं अब आपका लण्ड अपने मुँह में कितना ले लेती हैं देखा.”


मैंने कहा- “हाँ, पहले तो सिर्फ जरा सा ही लेती थी..” फिर ऋतु के मुँह को चूत बनाकर मैं उसके मुँह को चोदने लगा। थोड़ी देर में मेरा लौड़ा झड़ गया।


ऋतु में मेरा सारा माल पी लिया।


मैंने ऋतु से कहा- “मुझे सूसू आया है…”


ऋतु ने कहा- “रुकिये, मैं आपको सूसू करवाती हूँ…”


में हैरानी से ऋतु को देखने लगा। ऋतु ने मेरे लण्ड को अपने मुंह में ले लिया। अब मेरा लण्ड उसके मुंह में ऐसे था जैसे की मुँह में कोई चीज पकड़कर कोई चलता है।


अतु ने कहा- “अब आप सूसू करिए..”


मैंने आज तक ऐसा कभी ना देखा ना सुना था। मैंने जोर लगाया तो मेरे सस निकालने लगा। ऋतु को ये आइडिया कहां से आया, मैं समझ नहीं पाया। पर जो भी था गजब का था।


सूस करने के बाद मैंने ऋतु से कहा- “पानी में रहने से भूख लगने लगी है..” फिर मैंने ऋतु से कहा- “तुमने खाना खा लिया बया?”


अत ने ना में सर हिला दिया। हम बाथरूम से बाहर आ गये।


मैंने कहा- “मैं बाहर से कुछ ले आता हूँ..”


ऋतु ने कहा- “नहीं, मैं आपको अब कहीं नहीं जाने दूँगी। आप मुझे बताओं आपको क्या खाना है, बना देती हूँ..”


मैंने कहा- “पहले तौलिया तो दो..”


ऋतु बोली- “नहीं जी… आपको सुबह तक ऐसे ही रहना होगा..”


मने हँसते हुए कहा- “और तुम?


बा बोली- “मैं भी आपके साथ ऐसे ही रहंगी…”


उसका आइडिया मुझे पसंद आया फिर हम दोनों किचेन में नंगे हो गये वहां अत ने आलू के पराठे बनाए हम दोनों ने किचन में ही खाया। फिर हम रूम में आ गये।


मैंने ऋतु से कहा- “जान तुम मुझे कितना प्यार करती हो…”


ऋतु ने कहा- “मैं आपको अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करती हैं.”


मैंने कहा- “तो फिर आज मुझे सच-सच बताओं की मैंने तुमको चोदने के लिए जो भी किया वो तुमको बुरा तो जरूर लगा होगा?”


ऋतु ने मुझसे चिपकते हुए कहा- “जरा सा भी नहीं…”


मैंने कहा- “क्यों, मैंने तो तुमको मजबूर किया था चोदने के लिए?”


ऋतु ने फिर जो बात मुझे बताई सुनकर मुझे यकीन ही नहीं हुआ। ऋतु में जैसे ही बोलना शुरू किया उसकी

आँखों में आँस आ गये। मैं उसकी बात ऐसे सुन रहा था जैसे की में कोई सस्पेंस वाली कहानी सुन रहा हैं


ऋतु ने कहा- “अगर आप ये सब नहीं करते तो हो सकता है की मैं आज जिदा ही नहीं होती या तो मैं घर छोड़कर कहीं चली जाती या में अपनी जान दे देती…’


मैंने कहा- “तुम मुझे पूरी बात सही-सही बताओ… फिर मैंने ऋतु को दिलासा देते हुए पानी पिलाया।


ऋतु हिचकियां लेते-लेत बोली- “आपको मैं सब शुरू में बताती हैं। वो दिन मेरी लाइफ का सबसे मनहस दिन था, जिस दिन अनु दीदी की शादी की डेट फाइनल हुई थी..”


पापा ने माँ से कहा “हम लोग अभी इतने पैसे का इंतजाम नहीं कर सकते। शादी की डेट इतनी जल्दी फिक्स नहीं करनी चाहिए थी…”


पर माँ ने पापा की एक ना सुनी। वो बोली- “आप पैसे की चिंता मत करो…”


पापा की वैसे भी माँ के आगे नहीं चलती थी। माँ की कोई सहेली है आशा जिसने माँ को कहा था की तुम्हें जितने भी पैसे की जरूरत हो मैं इंटेरस्ट पर दिलवा दूंगी। उसने ही माँ को तिवारी से मिलवाया था। तिवारी ने जिस दिन पैसे देने थे उस दिन उसने मम्मी को अपने आफिस में बुलाया था। मैं उस दिन पहली बार मम्मी के साथ ही तिवारी के आफिस में गई थी। मैं, मम्मी और आशा हम तिवारी के पास जब गये तो वो बोला।


तिवारी शोभा जी में आपको पैसा तो दे दूँगा पर आप मुझे गारंटी में क्या दे रही हो?


मम्मी- आपको हम जैसा शरीफ आदमी काई मिलेगा ही नहीं। हम आपका पैमा टाइम पर दे देंगे।


तिवारी- फिर भी कोई तो गारंटी होनी चाहिए। मैंमें बिना गाउंटी किसी को पैसा नहीं देता।


आशा तिवरी जी आप चिंता नहीं करिए। शोभा मेरी बहन जैसी है, आपको कोई शिकायत नहीं मिलीगे।


मम्मी- फिर भी आप जो कहाँ हम आपको गारंटी दे सकते हैं।


तिवारी शोभा जी, आप मुझे इस बात की गारंटी दो की अगर आप मेरा पैसा नहीं लोटा पाई तो मैं आपकी बेटी ऋतु को अपने घर में नौकरानी बनाकर रखेगा, और उसको मैं जो भी कहगा वो उसको करना होगा।


शोभा. “नहीं नहीं तिवारी जी, आपको इसकी कोई जरूरत ही नहीं पड़ेगी…”


तिवारी ने मुझे गंदी नजर से देखते हए कहा- “ना ही पड़े तो इसके लिए अच्छा है..”


में उसकी नजरों में भरी हई दरिंदगी देखकर डर गई थी।


तिवारी- “मैं आपको बिना गारंटी के पैसा नहीं दे सकता। हाँ या ना आप सोच लो…”


आशा और मम्मी ने इशारों-इशारों में कुछ बात किया फिर आशा बोली- “चल शोभा, कोई बात नहीं तिवारी जी की बात मान लें। अगर इनका पैसा नहीं दिया तभी तो ये ऋतु का कुछ कर सकते हैं। ऐसी नौबत आएगी ही नहीं…”


मम्मी- “पर मैं ऋतु को इनके हाथ कैंस दे दूंगी? जवान लड़की है कोई जानबर तो नहीं…


तिवारी बोला”उसकी चिता आप मत करो। मैं उसको बड़े प्यार से रखूगा। आपके घर में ज्यादा ऐश से रहेगी। वहां मेरे घर में और भी लड़कियां काम करती है..”


फिर मम्मी ने तिवारी से कहा- “चलिए मुझे आपकी बात मंजूर है…”


तिवारी ने हँसते हए कहा- “ऐमें कहने से क्या मैं तुम्हारी बात का यकीन कर लेंगा? मुझे लड़की के मुंह से हाँ कहलवाओं और मैं इसमें कुछ पेपर भी साइन करवा गा.”


आशावो हम सब करवा देते हैं।


शाभा- हाँ हाँ हम आपकी सब शर्ते पूरी कर देते हैं।


फिर तिवारी ने मम्मी को एक पैकेट दिया और मुझे कहा- “सनों लड़की इधर आकर बैठो…”


मैं तिवारी के सामने वाली चेयर पर बैठ गई। मैं सब समझ चुकी थी की अब वो दिन दूर नहीं जब मुझे तिवारी की हवस का शिकार बनना पड़ेगा और पता नहीं तिवारी मेरे साथ और क्या-क्या करेंगा? पर मैं मजबूर थी कुछ बोल नहीं पा रही थी।


फिर मम्मी ने मुझे प्यार से कहा- “ऋत बेटी, अब त ही अपनी बहन की शादी करवा सकती है और तिवारी जी शरीफ आदमी हैं, गारंटी हो तो माँग रहे हैं। त पेपर पर साइन कर दे…”


मैं कुछ बोल नहीं पाई।


मैं तिवारी के सामने वाली चेयर पर बैठ गई। मैं सब समझ चुकी थी की अब वो दिन दूर नहीं जब मुझे तिवारी की हवस का शिकार बनना पड़ेगा और पता नहीं तिवारी मेरे साथ और क्या-क्या करेंगा? पर मैं मजबूर थी कुछ बोल नहीं पा रही थी।


फिर मम्मी ने मुझे प्यार से कहा- “ऋत बेटी, अब त ही अपनी बहन की शादी करवा सकती है और तिवारी जी शरीफ आदमी हैं, गारंटी हो तो माँग रहे हैं। त पेपर पर साइन कर दे…”


मैं कुछ बोल नहीं पाई।


दराज से कई सारे सादे पेपर निकालें और मुझे बोला- “इस पर तिवारी ने मुझे अपनी बहशी नजरों से देखते ह

अपने साइन कर दो…”


मैंने चुपचाप साइन कर दिए।


फिर तिवारी ने एक वीडियो कैमरा निकालकर आन किया और मुझसे कहा- “कैमरे में देखो और मुस्कराकर बोलो

की मैं जो भी कर रही हूँ अपनी मर्जी से कर रही हूँ। मुझे किसी ने मजबूर नहीं किया है.”


मुझे ऐसा ही करना पड़ा। उसके बाद तिवारी ने मम्मी से कहा- “अब तुम लोग जा सकती हो.”


में पूरे रास्ते में सोचती रही की क्या मैंने सही किया है? काश मैं मना कर पाती। मैं घर आकर बेजान लाश जैसी बेड पर पड़ गईं।


अनु दीदी और शिल्पा ने मेरे से पूछा “क्या हुआ?”


पर मैं कुछ बोली नहीं।


मम्मी ने कहा- “इसकी तबीयत ठीक नहीं है, इसको आराम करने दो…”


मैंने बाद में मम्मी से कहा- “आपने एक बेटी का घर बसाने के लिए दूसरी बेटी को दौंच पर क्यों लगा दिया? आपने ऐसा क्यों किया? मैं आपकी सगी बेटी नहीं हैं क्या?”


मम्मी ने मुझे समझाते हुए कहा- “ऋतु तू ऐसी बात नहीं कर। मैं जो भी कर रही हैं सोच समझ कर कर रही हैं। मैं तेरी माँ हूँ कोई दुश्मन नहीं, और तू इस बात को किसी से भी नहीं कहेगी। तुझं तेरा पापा की कसम होगी..”


मैंने मम्मी को वादा किया- “मैं किसी से कुछ कहूँगी…” और उस दिन से मैं घट-घट कर जी रही थी। आपसे मिलने के बाद मुझे लगा की काश आप मेरी लाइफ में आ जाए और भगवान ने मेरी सुन ली की आप मेरी लाइफ में आ गये। में जब आपके साथ पहली बार लंच पर गईं थी। मैंने उसी दिन सोच लिया था की मैं कुछ भी करके आपको अपना बना लेंगी…”


मैंने ऋतु को देखा उसकी आँखें अभी तक नम थीं। मैंने उसको कहा- “तुम किसी बात की फिकर मत करो मेरे होतं कोई तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। मैं तिवारी से तुम्हारी वो क्लिप और पेपर तमको वापिस ला देगा…”


ऋतु मेरे से चिपक कर हिचकियां लेने लगी।


मैंने उसकी कमर पर हाथ फेर कर उसको दिलासा दिया। मुझे अब शोभा से नफरत होने लगी थी। मैंने सोच लिया था की मैं शोभा को सबक सिखाकर रहगा। ऋतु के लिए मेरे मन में प्यार का बीज और बढ़ गया था मैंने ऋतु को अपनी बाहों में लेते हुए कहा- “अब सब भूल जाओं और मुझे प्यार करो.”


ऋतु ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए।


फिर एक दिन ऋतु ने मुझसे कहा- “सर, मैं दो दिन के लिए आफिस नहीं आऊँगी..”


मैंने पूछा- “क्या हुआ, काई प्राब्लम है क्या?”


उसने कहा- “अनु दीदी के बेटे का नामकरण है। मुझे वहां जाना है.”


मैंने पूछा- “घर से और कौन-कौन जा रहा है?”


उसने कहा- “सब लोग जा रहे हैं.”


मैंने कहा- “पूरी परिवार जा रही है तो तुम्हारा भी जाना बनता है। कब जाना है?”


उसने कहा- “कल सुबह…”

:

मैंने कहा- “मैं अपनी कार भेज देता हूँ। तुम सब आराम से चले जाना..”


ऋतु ने कहा- “सर आप क्या परेशान हो रहे हैं। हम लोग बस में चले जाएंगी.”


मैंने कहा- पागल हो क्या? बस में कितना मुश्किल होगा परिवार के साथ। मेरे पास दो-दो गाड़ियां होते हए तुम बस में जाओगी। कार से सीधा अपनी बहन के घर जाना और सीधा उनके घर में वापिस आ जाना…”


ऋतु मना नहीं कर पाई।


फिर मैंने कहा- “जिस टाइम जाना हो मुझे फोन कर देना। मैं कार भेज दूंगा…”


फिर अगले दिन सुबह 7:00 बजे ऋतु का फोन आया “सर हम सब तैयार हैं, आप गाड़ी भेज दीजिए.”


मैंने ड्राइवर को बुलाया और समझाकर कहा “तुम ऋतु मेमसाहब के घर चले जाओ, उनको देल्ही जाना है अपनी फेमिली के साथ। जहां वो कहें उनको पहुँचा देना..” और मैंने ड्राइवर को ₹5000 दिए और कहा- “पेट्रोल तुम खुद इलवा लेना। उनका कोई पैसा खर्च नहीं होने देना…”


डाइबर कार लेकर चला गया। में भी आफिस के काम में बिजी रहा। इसलिए ऋतु को फोन ही नहीं किया। वो भी वहां जाकर बिजी हो गई। उसका भी फोन नहीं आया।


जब मेरा ड्राइवर दो दिन बाद घर वापिस आया तब मैंने हाइवर से कहा- “कोई परेशानी तो नहीं हुई?”


उसने कहा- “नहीं साहब, सब लोग आराम से गये थे…”


मैंने उसको कहा- “तुम अब अपने घर जा सकते हो…”


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ऋतु की माँ शोभा की चुदाई का वीडियो बनाया


मैं सिटी में कार खुद ही ड्राइव करना पसंद करता हैं। ड्राइवर तो मैंने सिर्फ आउट आफ सिटी जाने के लिए रखा हुआ है। ऋतु से मिले दो दिन बीत गये थे। मैं ऋतु से मिलने का बेताब हो गया था। मैंने ऋतु को फोन किया


पर उसका फोन स्विच-आफ था। मैंने कई बार ट्राई किया पर हर बार स्विच-आफ ही मिला। मैंने अब शोभा को फोन मिलाया तो उसका भी सेल आफ आने लगा। मुझे बड़ा गुस्सा भी आया और चिता भी होने लगी की सब ठीक तो है? मैने दो पंग विस्की के खींचे, और ऋतु के घर चला गया। मैंने बेल बजाई तो 5 मिनट बाद शोभा ने दरवाजा खोला।


मैंने उसको कहा- “क्या बात है इतनी देर क्यों लगा दी?”


शोभा बोली- “मैं बाथरूम में थी। बेन सुनकर जल्दी से कपड़े पहनकर आई हैं.”


मैंने उसको देखा तो वो सच बोल रही थी। उसके बाल गीले थे और उसने जो मैक्सी पहनी हुई थी वो भी उसके गीले जिश्म से चिपकी हुई थी। मैं उसको गुस्से में देखता हआ घर के अंदर चला गया। मैंने अंदर जाकर देखा तो कोई भी नहीं दिखा।


मैंने पूछा- “ऋतु कहां है? उसका सेल भी स्विच आफ जा रहा है.”


शोभा ने बताया- “उसका सेल जाते ही खराब हो गया था। इसलिए वो आपसे बात भी नहीं कर पाई…”


मैंने कहा- ऋतु कहां गई है?


शोभा बोली- “वो तो अभी एक-दो दिन बाद आएगी…”


मैंने कहा- “क्या मतलब… वो तुम्हारे साथ नहीं आई?”


उसने कहा- “उसके दीदी जीजा ने उसको आने ही नहीं दिया। शिल्पा और उसके पापा भी वहीं रूक गये हैं। वो सब परसों तक साथ में आएंगे…”


ये बात सुनते ही मेरा मूड और खराब हो गया। मेरा लण्ड दो दिन से ऋतु की चूत का प्यासा था। मेरे दिमाग में उस टाइम सिर्फ ऋतु की मस्त जवानी नजर आ रही थी। मेरे अंदर जैसे कोई खोलता हआ लावा भरा हो। मैंने शोभा को गौर से देखा तो उसको एहसास हुआ की वो मेरे सामने जिन कपड़ों में खड़ी है, उसमें उसके जिम के हर अंग की नुमाइश हो रही है।


मेरी वासना से भरी आँखों को देखकर शोभा बोली- “आप बैठिए, मैं जरा चेंज करके आती हैं.”


मेरे अंदर की आग भड़क चुकी थी। जिसकी वजह से मुझे शोभा भी अपने लण्ड की खराक नजर आ रही थी। मैंने शाभा के पास जाकर उसकी चूचियों पर हाथ रख दिया। शोभा को शायद इस बात की उम्मीद नहीं थी।


शोभा ठिठक कर पीछे हट गई और बोली- “आप ये क्या कर रहे हो?”


मैंने उसकी चूचयों को कसकर मसलते हुए कहा- “आज तू मेरी प्यास बुझा दे… और मैंने शाभा को अपनी बाहाँ में भर लिया।


शोभा ने खुद को छुड़ाते हुए कहा- “नहीं नहीं ये गलत है… मैं आपको ऐसा नहीं करने दूंगी..”


मैंने उसको अपनी बाहों में फिर से जकड़ते हुए कहा- “शोभा में इस बढ़त तुम्हारी कोई बात नहीं सुनँगा। मेरे लण्ड को इस वक़्त चूत की भूख है। तुम मेरी भावनाओं को समझा और मेरी भूख को शांत कर दो…”


शोभा बोली- “प्लीज… आप मुझे इस काम के लिए मजबूर मत करिए। मैं कैसे भी करके कल तक ऋतु को बुलवा लँगी…”


मैंने कहा- “मैं कल तक रुक नहीं सकता…”


शोभा सोच में पड़ गई फिर बोली- “मैं शायद आपकी बात मान भी जाती, पर मैं मजबूर हैं…”


मैंने उसको घूरते हुए कहा- “क्या मजबूरी है?”


शोभा बोली- “मेरा आज तीसरा दिन है। मेरा मासिक चल रहा है। अगर आप मुझे चोदना ही चाहते हैं तो आप कल मेरे साथ जो मर्जी कर लेना..”


मुझे उसकी बात का यकीन नहीं हो रहा था। मैंने उसकी चूत पर हाथ लगाकर देखा तो मेरे हाथ को एहसास हआ की उसकी चत पैड से टकी हैं। मैं समझ गया की वो सच बोल रही है। मैंने उसको कहा- “चलो मैं तुमको कल चोदूँगा। पर अभी मेरी प्यास कैसे बुझेगी?”


शोभा बोली- “मैं आपका लण्ड चूसकर आपको शांत कर देती हैं..”

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मैंने मन ही मन सोचा- “चलो खाना नहीं मिला, नाश्ता ही सही…”


में पलंग पर लेट गया और अपनी दोनों टांगों के बीच में शाभा को बैठने को कहा। शोभा मेरी दोनों टांगों के बीच में बैठ गई। उसने मेरे लौड़े को अपने हाथों से सहलाना शुरू कर दिया।


मैंने शोभा को कहा- “तुम अपनी मॅक्सी उत्तार दो, मुझे तुम्हारी बड़ी-बड़ी चूचियां देखनी हैं.”

शोभा ने अपनी मैक्सी उतार दी। अब वो मेरे सामने सिर्फ पैंटी में थी। उसने मेरे लण्ड को अपने मैंड में भर लिया और चूसना शुरू कार दिया। शोभा खेली खाई औरत थी। उसको सब पता था की कैसे एक मर्द को खुश किया जाता है। उसने बड़े ही मस्त तरीके से मेरे लौड़े की चुसाई करनी शुरू कर दी। फिर थोड़ी देर बाद उसने मेरे लण्ड को अपनी बड़ी-बड़ी चूचियों में रखकर दबा लिया, और अपनी चूचियों से मेरे लण्ड की मालिश करने लगी।


मैंने ऋतु के साथ ऐसा कभी नहीं किया था। मुझे मजा आने लगा। कुछ देर बाद मुझे लगने लगा की मैं अब झड़ने वाला हूँ। मैंने शोभा से कहा- “अब रुका नहीं जा रहा है…”


शोभा ने ये सुनकर मेरा लौड़ा अपने मह में फिर से भर लिया, और अपना होंठों में कसकर दबा लिया। मैंने एक जोर का झटका उसके मुँह लगाते हुए उसके मुँह को अपने माल से भर दिया। शोभा ने मेरे माल को पूँट भरते हए सारा माल अपने गले से नीचे उतार लिया।


मैं अब बिल्कुल शांत हो गया था। मैंने शोभा से कहा- “तुमने मुझे खुश कर दिया..”


शोभा ने ये सुनकर बड़ी जालिम अदा से मैंह बनाकर कहा- “आपका काम तो निकल गया। हम तो प्यासे ही रह गये…”


मैंने उसके निप्पल को कस के मसलते हुए कहा- “मैं क्या कर सकता हूँ? तेरी रेड लाइन हो रही है..”


शोभा बोली- “आज ही तो है, कल तक में माहवारी से निपट जाऊँगी…”


मैंने कहा- इसका मतलब तम कल मेरे से चदबाने की सोच रही हो?


शोभा के चेहरा पर चमक आ आ गई उसने कहा- “हाँ..”


मैंने उसको कहा- “फिर ठीक है। कल सनडे है तुम मेरे घर आ जाना। वहीं तुम्हारी प्यास बुझा दूँगा..”


शोभा बोली- “हाँ यही ठीक रहेगा। मैं कल आ जाऊँगी…”


में वहां से आ गया। मुझे रात भर शोभा की चूत के ख्वाब आते रहें। मैं उसकी चूत को देख नहीं पाया था। इसलिए भी मेरे मन में उसकी चत देखने की उत्सुकता थी। अगले दिन सुबह ठीक 11:00 बजे शोभा का फोन आ गया।


मैंने उसको कहा- “तुम 12:00 बजे तक आ जाना…”


फिर मैंने अपने रूम में सीसीटीवी लगाने की जगह देखी। मैं शोभा की चुदाई लीला की वीडियो बनाना चाहता था। मैंने बेड के ठीक ऊपर कैमरा फिट कर दिया और शोभा का इंतजार करने लगा। शोभा ठीक 12:00 बजे आ गई। जब मैंने उसको देखा तो देखता ही रह गया। बया गजब की सुंदर लग रही थी वो।


शोभा ने ब्लैक कलर की साड़ी पहनी थी लो-कट बैंकलेष ब्लाउज उसकी चूचियों को आधा भी टक नहीं पा रहा था। उसने बड़ा मस्त सा हेयर स्टाइल बनाया हुआ था। जैसे ही वो मेरे पास आई बड़ी मादक मी खुशबू मेरी । सांसों में समा गई। मैं समझ गया की आज में साली परे मह में है। वैसे भी पीरियड के बाद औरत की सेक्स की भूख बढ़ जाती है।


मैंने उसको कहा- “बैठो…. फिर मैंने उसको कहा- “थोड़ी सी बिगर चलेंगी?’


शोभा बोली- “हाँ चलेंगी.”


मैं मन में सोचने लगा की इसको समझने में मैंने बड़ी देर करी है। मैं तो बड़ी कमीनी है। मैंने ठंडी बियर दो ग्लास में डाली और एक ग्लास शोभा को पकड़ा दिया। उसने उल्लास को मैंह से लगाया और एक ही सांस में आधा पी गई। मैं उसको देखता ही रहा।


फिर मैंने उससे कहा- “कुछ नमकीन तो ले लो..” और मैंने काज का पैकेट खोलकर प्लेट में डाल दिया।


दो-तीन काजू खाने के बाद शोभा ने बाकी की बियर भी गले में उड़ेल ली। मैंने एक बियर और खोलकर उसका ग्लास भर दिया। फिर मैंने शोभा से उसके पति के बारे में बात छेड़ दी। शोभा को अब तक शरुर आने लगा था। वो बिंदास होकर बोल रही थी।


मैंने उसको कहा- “तुम अपने पति के साथ सेक्स कितने दिन में करती हो?”


शोभा ने ये सुनकर बुरा सा मैंह बनाकर कहा- “सेक्स तो उसने तब भी नहीं किया, जब वो जवान था। अब तो उसका खड़ा ही नहीं होता…”


मैं सुनकर थोड़ा और मजा लेते हुए बोला- “फिर तुम अपनी प्यास कैसे बुझाती हो?”


उसने कहा- “मैं अपनी प्यास को दबा-दबाकर अपने अरमानों का गला घोंट रही हैं। कल तमने जो करा उससे मेरे अंदर की औरत फिर से जाग गई है..


मैंने उसको कहा- “तुमने कितने टाइम से सेक्स नहीं किया?”

शोभा बोली- “अब तो याद ही नहीं..”


मैंने कहा- “फिर भी लास्ट टाइम की कोई याद हो?”


उसने कहा- “लगभग दो-तीन साल पहले…”


मने हैरान हाते हुए कहा- “फिर तुम कैसी रह लेती हा?”


उसने कहा- “मैं जब ज्यादा ही गरम हो जाती हैं तो अपनी उंगली से अपनी चूत की प्यास बुझा लेती हैं। पावो हमेशा अधूरी ही रहती है…”


मैंने कहा- “तुमने कोई सेक्स दवाय इस्तेमाल नहीं किया?”


उसने कहा- घर में दो-दो जवान बेटियां हैं, और इतना छोटा सा घर है। किसी के हाथ में कुछ आ गया तो?


ना बाबा ना… मैं इतना बड़ा रिस्क नहीं ले सकती.’


मैंने कहा- “तुमने कोई सेक्स दवाय इस्तेमाल नहीं किया?”


उसने कहा- घर में दो-दो जवान बेटियां हैं, और इतना छोटा सा घर है। किसी के हाथ में कुछ आ गया तो?


ना बाबा ना… मैं इतना बड़ा रिस्क नहीं ले सकती.’


मैं हँसने लगा। मैंने उसको कहा- “मैं जब ऋतु को तुम्हारे घर में चोद रहा था, तो तुम साथ वाले रूम में सब सुन रही थी?”


शोभा ने कहा- हौं, मझे सब पता चल रहा था। ऋतु की चीखों को सुनकर मेरे मन में कुछ-कुछ होने लगा था। में इतनी गरम हो गई थी की मैं भी अपनी चूत में उंगली डालकर अपना पानी निकाल रही थी।


मैंने कहा- तुम कल तो मुझे मना कर रही थी।


शोभा ने कहा- आपकी बात सुनकर मेरा मन तो ललचा गया था पर मैं इतना जल्दी अगर मान जाती तो आपको भी लगता की में पहले से ही ऐसा सोच रही हैं।


मैंने कहा- “हम्म्म्म… अपना ग्लास खाली करो। एक-एक ग्लास और पीते हैं..”


शोभा बोली- “नहीं नहीं बस और नहीं। मैं इससे ज्यादा नहीं पी सकती…”


मैंने कहा- तुमको शाम तक यहा रहना है। एक ग्लास और पी लो तो मूड बना रहेगा।


शोभा बोली- हाँ ये भी ठीक है।


मैंने उसका ग्लास फिर से भर दिया।


शोभा बोली- “मैंने कल जब आपका लण्ड देखा तब से ही मेरा मन आपसे चुदवाने को कर रहा है। पर कल मैं इस लायक नहीं थी, वरना कल ही आपका लौड़ा अपनी चूत में घुसवा लेती.” उसको इस अंदाज में बात करते देखकर मैं समझ गया अब ये पूरी तरह से फिट हो गई है।

मैंने उसको कहा- “बाकी खतम करो फिर मजा लेटते हैं…”


शोभा ने झटके से उलास खाली किया और खड़ी हो गई। बड़ी मादक सी अंगड़ाई लेते हुए बोली- “मजा आ गया..’ उसने जब अपने हाथ उठाए तो उसकी गोरी गोरी चिकनी कौंख देखकर मेरे लण्ड में तनाव बढ़ने लगा।


मैंने उसको पूज- “तुम काँखें हमेशा शेब करती हो या आज ही करके आई हो?”


शोभा ने कहा- “मैं वैसे तो कभी कभार ही करती हैं। पर आज इतना बड़ा दिन है मेरे लिए तो आज तो मैं पूरी तरह से खुद को तैयार करके आई है..”


मैंने हँसते हुए कहा- “अपनी चूत को भी तैयार किया है?”


उसने कहा- हाँ वहां भी तैयार है।


मैंने कहा- जरा मेरे पास आकर मुझे अपनी चत के दर्शन तो करवाओ।


शोभा मेरे पास मस्त चाल से चलती हुई आकर खड़ी हो गई। मैंने उसकी साड़ी में हाथ डाला तो सीधा उसकी चूत पर जाकर रुका।


मैंने उसको कहा- “तुम पैंटी नहीं पहनकर आई?”


शोभा ने शरारत से कहा- “पैंटी उतरवाने आई है. पहनकर क्या करती?”


मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी। शोभा में मस्ती से भरी हुई सिसकी ली। मैनें उंगली को 4-5 बार अंदर-बाहर किया तो उसकी चूत में पानी छोड़ दिया। मैं समझ गया की इसकी चत अब लौड़ा माँग रही है। पर मैं तो उसको तड़पा-तड़पाकर चोदना चाहता था, मैंने उसकी साड़ी को खींचकर उतारना शुरू कर दिया, तो वो अपनी जगह खड़ी-खड़ी घूम गई। शोभा अब पेटीकोट ब्लाउज में खड़ी थी। उसका गोरा जिम मेरी आँखों के आगे था। उसकी बाड़ी सच में जवान लड़कियों जैसे थी। कहीं में टीलापन नहीं था।


मैंने उसको कहा- “मेरा मूड अभी पूरी तरह से नहीं बना। पहले मेरा मूड बनाओ तब तुमको चुदवाने में मजा आएगा…”


शोभा ने मुझे सवालिया नजर से देखा, और कहा- “आपका मह कैसे बनेगा? आप खुद बता दीजिए..”


मैंने उसको कहा- “तुम बैंड पर खड़ी हो जाओ, और अपने कपड़ों को एक-एक करके उतारा। मुझे अपनी अदाओं से दीवाना बनाओ, मुझे तुम्हारी जो अदा सबसे मस्त लगेगी मैं अपना एक कपड़ा उतार दूँगा। जब तुम मुझे पूरा नंगा कर दोगी, तब मैं तुम्हें चोदूंगा। ये एक खेल है खेलागी मेरे साथ? बोलो मंजूर है?”


शोभा मस्ती में डूबी हुई बोली- “मंजूर है..” फिर शोभा पलंग पर खड़ी हो गई।


मैंने म्यूजिक ओन कर दिया और शोभा बेड पर खड़ी होकर दो मिनट तक तो म्यूजिक के साथ अपने जिएम को हिलती रही। फिर उसने अपने ब्लाउज के हक को एक-एक करके खोलना शुरू कर दिया। फिर उसने अपने ब्लाउज को उतारकर फेंक दिया। मैं उसके हर आक्सन को बड़े ध्यान से देख रहा था, और मन ही मन हँस भी रहा था की इसकी हर हरकत कामुक हो रही है। फिर शोभा ने अपनी ब्रा को खोल दिया तो उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां उसके जिश्म के साथ हिलने लगी। मुझे उसकी ये अदा पसंद आई तो मैंने अपनी शर्ट उतार दी। ये देखकर शोभा को जोश आ गया। उसने अपना पेटीकोट अपनी जांघों तक उठाया।


मैं उसकी गोरी गोरी चिकनी जांघं देखकर मदहोश हो गया। फिर शोभा ने मेरी तरफ अपनी गाण्ड कर दी और अपने पेटीकोट को अपनी गाण्ड तक उठा दिया। उसके गोरे-गोरे सेब की तरह के चतड़ मस्त लग रहे थे। शोभा अपनी गाण्ड को म्यूजिक के साथ गोल-गोल करके किसी डान्सर की तरह घुमाने लगी। मुझे उसकी ये अदा और ज्यादा पसंद आई, तो मैंने अपनी जीन्स उतार दी।


शोभा ने जब मेरी तरफ मुँह घुमाया तो मैं सिर्फ अपने जोक्की में था। शोभा को लगा की उसकी मेहनत सफल हो गई। अब शोभा पूरे जोश में आ गई थी। उसने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और पूरी नंगी होकर मेरे सामने अपने जिस्म को म्यूजिक के साथ थिरकाने लगी। फिर उसने अपना हाथ अपनी चूत पर रख दिया, और अपनी चूत को सहलाने लगी। शोभा में मेरी तरफ देखा।


मैंने कहा- “थोड़ा सा और…”


अब शोभा बेड पर अपनी दोनों जांघों को फैलाकर बैठ गई, और अपनी उंगली को अपनी चूत में डालकर बड़ी सेक्सी आवाज में- “अहह… आआआ.. आहह…” करने लगी।


उसकी इस अदा पर मैंने अपना जोक्की भी उतार दिया। अब मैं बिल्कुल नंगा था। मेरे ताने हए लौड़े को देखकर शोभा की चूत मचलने लगी।


शोभा ने अपनी बाहों को फैलाकर कहा- “मेरे राजा अब और मत तड़पाओ, मेरी चत में अपना लौड़ा डाल दो..”



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