‘उंगली डाल अंदर’ उसने मुझे कहा. मैने गांद मसल्ते मसल्ते अपनी एक उंगली उसके गांद के छेद में डाल दी और अंदर बाहर करने लगी.
‘और एक उंगली डाल और ज़ोर से हिला’ मैने अब दो उंगली से मेडम की गांद को ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया.
उसकी चूत से जो पानी छूट रहा था वो मेरे मूह में जा रहा था और मुझे उसे निगलने के सिवाई कोई चारा नही था. मेडम की चूत से ढेर सारा पानी बह रहा था.
मेडम को इतना मज़ा कभी नही मिला था. वो नीचे मुझे देख रही थी और खुशी से मुस्कुरा रही थी. उसे यकीन नही हो रहा था कि मुझ जैसी खूबसूरत और जवान लड़की उसकी चूत चाट रही थी. अब वो झरने के बहुर करीब थी. उसने अपनी चूत और नीचे कर दी और अपनी गांद हिला के मेरे मूह पे घीसने लगी. मैने अपने होंठ उसकी चूत पे लगाके रखे थे और चूस रही थी इसी मेरे मूह मे उसकी गीली चूत का पानी जा रहा था. मेरी जीब उसकी चूत में थी और उसके हिलने से उसकी चूत के अंदर बाहर हो रही थी.
अब उसका झरना शुरू हो गया था ‘आआआहह.. और ज़ोर से चाट साली रांड़ आआआआआहह….’ मैं अपनी जीब से और ज़ोर से चाटने लगी और अपनी उंगलियाँ भी उसकी गांद में ज़ोर से अंदर बाहर कर रही थी. मेडम तीन या चार मिनिट तक ऐसे ही ज़ोर से झरती रही. उसकी चूत से बहुत पानी निकला जो मुझे सब पी जाना पड़ा. आख़िर मेडम का झरना बंद हो गया.
मेडम खड़ी हो गयी ‘वाह डिज़िल्वा, मान गये क्या माल हैं’
‘जी थॅंक्स मेडम, अगर इजाज़त हो तो मैं भी थोड़ा ….’ डिज़िल्वा अपने खड़े लंड की तरफ इशारा करके बोला.
‘मुझसे पूछने की ज़रूरत नही डिज़िल्वा, तुम्हारा ही तो माल हैं’
में वहाँ ज़मीन पे लेटी हुई रो रही थी. डिज़िल्वा काफ़ी देर से अपना झरना रोके हुए था और अब वो अपने घुटनो को मेरे सर के दोनो बाजू मे रख के बैठ गया और अपना लंड ज़ोर के हिलाने लगा.
‘हाई मेरी जान, यह ले..’
मैं समझ गयी की डिज़िल्वा मेरे चेहरे पे वीर्य निकालने वाला था. मैने अपना मूह साइड में मोड़ दिया. डिज़िल्वा ने अपने एक हाथ से ज़बरदस्ती मेरा चेहरा सीधा कर दिया.
‘यह ले साली रांड़ आआहह…… आआआआहह…’ कह के डिज़िल्वा का झरना शुरू हो गया.
डिज़िल्वा एक हाथ से मेरे गले को पकड़ मेरे मूह को हिलने से रोके हुआ था और दूसरे हाथ से अपना मोटा लंड ज़ोर से हिला रहा था.
मेरे मूह के इतने नज़दीक उसका मोटा लंड और भी बड़ा लग रहा था. डिज़िल्वा ने झरना शुरू किया
‘यह ले साली रांड़ आआहह…… आआआआहह…’ कह के डिज़िल्वा का झरना शुरू हो गया.
मुझे उसके मोटे लंड का छेद दिख रहा था जिसमे से अब लगातार वीर्य निकलने लगा था.
डिज़िल्वा ‘आआआआहह…. आआआआआअहह’ करके चिल्ला रहा था और ढेर सारा वीर्य मेरे चेहरे पे निकाल रहा था. धीरे धीरे मेरे होंठ, नाक, माथे और गालो पे वीर्य फैल रहा था. वीर्य बह के मेरे गालों से मेरे कान पे और बालों मे चला गया था. डिज़िल्वा तीन चार मिनिट तक ऐसे ही झरता रहा और वीर्य निकालता रहा. उसका गाढ़ा वीर्य मेरे सारे चेहरे पे छा गया था.
आख़िर उसका झरना बंद हुआ. उसने फिर भी मेरा चेहरा पकड़ के रखा. उसने मुझे ऐसे ही खड़ा कर दिया और मेडम को कहा ‘मेडम ज़रा देखो इस रांड़ को’
‘वाह अब तो तू असली रांड़ लग रही हैं’ उसने अपना चेहरा मेरे चेहरे के नज़दीक लाकर मेरे मूह पे थूक दिया. दोनो को मुझे ऐसे ज़लील करके मज़ा आ रहा था. मैने अपना चेहरा नीचे कर दिया. पर मेडम ने मेरे बाल पकड़ मे मेरा चेहरा ज़बरदस्ती उपर कर दिया और ‘साली गटर की रांड़’ कह के फिर से दो बार मेरे चेहरे पर थूक दिया. ऐसा करने के बाद मेडम वाहा से चली गयी. में सारे वक़्त रोती रही. में ज़िंदगी में कभी इतनी ज़लील नही हुई थी.
डिज़िल्वा ने आख़िर मुझे छोड़ दिया. मैने धीरे धीरे अपने आप को साफ किया और कपड़े पहेन लिए. डिज़िल्वा ने फिर मुझे घर छोड़ दिया.
मैने फ़ैसला कर दिया कि में डिज़िल्वा से कभी नहीं मिलूँगी. मैने कुछ दिनो के लिए स्कूल जाना बंद कर दिया क्यूँ की मैं जानती थी के डिज़िल्वा स्कूल के बाहर मेरे लिए ज़रूर इंतेज़ार करेगा. मैं घर पे ही रही पर सेक्स के बिना मेरा दिल बैचाईन हो रहा था. मैं रोज़ तीन चार बार अपनी चूत से खेलती और झरती. पर अब मुझे अपनी उंगलियाँ से कुछ ज़्यादा मज़ा नहीं मिलता था. आख़िर मैने फ़ैसला कर लिया कि मैं स्कूल जाऊंगी और सिर्फ़ डिज़िल्वा से सेक्स करूँगी. अगर वो किसी और से सेक्स की बात करेगा, तो में इनकार कर दूँगी.
अगले दिन मैं स्कूल चली गयी. जैसे मैने सोचा था वैसे ही डिज़िल्वा स्कूल के बाहर खड़ा था. मैं चाहती थी कि वो मुझे कही ले जा के सेक्स करे, पर वो थोड़ा उदास लग रहा था. मैने उसको देख के कहा ‘क्या हुआ बहुत उदास लग रहे हो’
‘मुझे अभी अभी पता चला कि मेरे चाचाजी बहुत बीमार हैं, मुझे उनको मिलने जाना होगा, तुम चलॉगी प्लीज़’
मुझे बिचारे पे तरस आ गया और मैने सोचा शायद बादमें वो मेरे साथ सेक्स करेगा.
‘ठीक हैं’ मैने कहा और हम उसकी गाड़ी में चल पड़े. कुछ देर बाद हम एक बड़े से घर पे पहुच गये. हम घर के अंदर चले गये.
घर में हम अंदर के एक कमरे में चले गये. अंदर जाते ही डिज़िल्वा ने दरवाज़ा बंद कर दिया. कमरे में कोने मे एक कुत्ता बँधा हुआ था. इतना बड़ा कुत्ता मैने ज़िंदगी मे देखा नही था, पूरा काला था, उसका मूह खुला था और जीब बाहर लटक रही थी, उसके मूह से लार टपक रही थी. मुझे छोटे कुत्ते से भी डर लगता था, इस कुत्ते को देख तो में काँपने लगी.कुत्ता भौंक नही रहा था पर उसके मूह से गुर्राने की आवाज़ आ रही थी, जिसस से मेरा डर और बढ़ गया. कमरे में एक बड़ा बिस्तर था और उसपे एक बहुत ही बूढ़ा आदमी लगभग 80 साल का नंगा अपने पेट तले लेटा था. उसका चेहरा दूसरी तरफ था. उसके दोनो बाजू नर्स थी.दोनो जवान और काफ़ी सुंदर थी. एक नर्स आदमी के पीठ पे तेल से मालिश कर रही थी और दूसरी उसकी गांद पे मालिश कर रही थी. हमे कमरे आते देख नर्स ने आदमी की गांद को चादर से धक दिया.
‘नमस्ते सर जी’ डिज़िल्वा ने कहा. मैने सोचा कि यह तो डिज़िल्वा के चाचा नही. क्या उसने मुझे फिर से उल्लू बनाया ?
‘डिज़िल्वा, तू यहाँ क्यूँ आया हैं, मैने कहा था तुझे तेरे जैसे फालतू भदवे के माल से मेरा पेट नहीं भरेगा’ बूढ़े आदमी की आवाज़ भी ठीक से निकल नही रही थी. बहुत बूढ़ा था.
‘सर जी आप ज़रा मूड के देखिए तो यहाँ’. आदमी ने हमारी तरफ सर मोड़ लिया. उसने मुझे देखा और उसके मूह पे हँसी आ गयी. उसके मूह में एक दाँत नही था.
‘वाह देसील्वा ये तो बिल्कुल कटरीना कैफ़ जैसी दिखती हैं. नर्स ज़रा मुझे ठीक से बिठा दो’ दोनो नर्स ने मिलकर सर जी को पीठ के बल बिठा दिया. सर जी मुझे उपर से नीचे घूर रहा था. मुझे उसका नंगा शरीर दिख रहा था. उसका लंड बहुत बड़ा था पर पूरा बैठा हुआ था.
‘वाह देसील्वा मान गये, इधर आओ’ डिज़िल्वा सरजी के पास गया. सरजी ने उससे कुछ कहा जो मुझे सुनाई नही दिया. सर जी के कहने से डिज़िल्वा और दोनो नर्स के चेहरे पे आश्चर्या आ गया. मैं सोच रही थी कि ऐसा क्या कहा उसने.
‘सर जी ये क्या कह रहे हैं आप’ डिज़िल्वा ने कहा.
‘फिकर मत कर टॉमी को मैने ठीक से ट्रेन करके रखा हैं, वो काटे गा नहीं’
‘वो सब ठीक हैं पर माने गी नही’
‘हमे उससे क्या फरक पड़ता हैं’ सरजी ने हस्ते हस्ते कहा. अब सरजी, डिज़िल्वा और दोनो नर्स मुझे देख रहे थे, चारों मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे वो मुझे खा जाने वाले हो. मुझे कुछ समझ में नही आ रहा था कि क्या बात हो रही हैं. डिज़िल्वा मेरे पास आ गया. उसने मुझे जाकड़ लिया और कहा
‘आज तो तेरी खैर नहीं’. ऐसा कह के डिज़िल्वा मेरी स्कर्ट निकालने लगा. में उसके चंगुल से निकलने की कोशिश कर रही थी.
‘मैं इस बूढ़े से सेक्स नही करूँगी’ मैने कहा.
‘उससे नही साली, सरजी का तो लंड खड़ा भी नही होता, तेरी तो चुदाई होगी उसके कुत्ते टॉमी से’ डिज़िल्वा की आखों में जंगलीपन था जिससे मुझे पता चला कि वो मज़ाक नही कर रहा था. मेरा दिल गुस्सा और डर से भर गया और मैं चिल्लाने लगी और पूरे ज़ोर से डिज़िल्वा के चंगुल से निकलने की कोशिश करने लगी. मेरी नज़र कुत्ते पे पड़ी. उसका लंड खड़ा था, तकरीबन 8 इंच लंबा, बहुत मोटा और पूरा गुलाबी था. डिज़िल्वा ने ज़बरदस्ती मेरे सारे कपड़े उतार दिए. अब में पूरी नंगी थी. डिज़िल्वा ने कही से रस्सी निकाल मेरे हाथ मेरे पीठ पीछे बाँध दिए.
‘बहुत खूब अब आएगा मज़ा’ ऐसा कह के सरजी ने दोनो नर्स के सर को अपने लंड की तरफ खीच लिया.
‘मेरा लंड चूस्सो’ दोनो नर्स सरजी के बैठे हुए लंड को एक साथ चाटने लगी.
मेरे हाथ बाँध, डिज़िल्वा ने मुझे छोड़ दिया और जा के कुत्ते की रस्सी खोल दी. मैं डर से काँप रही थी, मेरा चिल्लाना बंद हो गया. मैं घूम गयी और भागना चाहती थी पर डर के मारे मेरे पैर हिल नही रही थी. कुत्ते ने गुर्राते हुए मेरी तरफ लपक के मुझ पे छलाँग लगा दी. में ज़मीन पे गिर पड़ी. कुत्ता मेरे उपर था और अपना लंड मेरी गांद पे मार मार कर मुझे चोदने की कोशिश कर रहा था. उसके वजन से में दब गयी थी.
‘डिज़िल्वा, ज़रा टॉमी पे रहम करो बैचारे की मदद कर दो’. डिज़िल्वा ने पास से एक कुर्सी लाकर उसे उल्टा ज़मीन पे रख दिया. उसने फिर मुझे उठा कर कुर्सी पे ऐसा बैठा दिया कि मैं कुतिया की तरह हो गयी. डिज़िल्वा ने मुझे कुर्सी के साथ कस्के बाँध दिया. अब में बिकलूल लाचार हो गयी थी. टॉमी फिर से पीछे से मेरे उपर चढ़ गया और लगातार अपने लंड को धक्के मार के मेरी चूत में घुसाने की कोशिश करने लगा.
‘अब तू बनेगी टॉमी की कुतिया’ कहते हुए डिज़िल्वा ने मेरी चूत को टॉमी के लंड के रास्ते में रख दिया.
टॉमी का लंड मेरी चूत को चीरते हुए एक झटके में पूरा अंदर घुस गया. मेरी चूत को अपने लंड के उपर महसूस करके टॉमी के मूह से ज़ोर से गुर्राने की आवाज़ निकली. में ज़ोर से चिल्ला पड़ी ‘आाआऐययईईईईईईई…’ इतना बड़ा लंड मेरे अंदर एक झटके में जाने से मुझे बहुत दर्द हुआ.
‘बहुत खूब टॉमी, फाड़ दे साली की चूत’ सर जी इस नज़ारे का मज़ा ले रहे थे
लंड पूरा घुसेड कर टॉमी ने अब मुझे मशीन की तरह चोदना शुरू कर दिया. वो सटा सॅट अपना लंड मेरे चूत में अंदर बाहर करने लगा. मैं दर्द से चिल्ला रही थी.
दोनो नर्स सरजी का बैठा हुआ लंड चाटते चाटते मेरी चुदाई का नज़ारा लेते हुए अपनी उंगलियाँ से अपनी चूत को सहला रही थी. ऐसा नज़ारा देख दोनो को सेक्स चढ़ गया था.
पाँच छे मिनिट तक टॉमी की चुदाई ले कर मेरा दर्द धीरे धीरे कम होने लगा था. उसके लंड का एहसास किसी भी मर्द के लंड के एहसास से बिल्कुल अलग था, उसका लंड पूरा गीला था और एकदम गरम भी. मुझे अब चुदाई में मज़ा आने लगा था. टॉमी लगातार अपने तगड़े लंड को मेरे चूत में अंदर बाहर कर रहा था.
‘साली रांड़ ने चिल्लाना बंद कर दिया, लगता हैं उसे मज़ा आ रहा हैं’ सरजी ने कहा. अब उनका पूरा लंड नर्स ने अपने मूह में ले लिया था और चूस रही थी. दूसरी नर्स सरजी के बॉल चाट और चूस रही थी. दोनो नर्स का ध्यान सरजी के लंड पे नही मेरी चुदाई में था. मेरी चुदाई देख कर दोनो अपनी उंगलियाँ से अपनी चूत को सहलाकर मज़ा ले रही थी.
दस मिनिट तक लगातार टॉमी की चुदाई ले कर अब में झरने के करीब आ गयी थी. मुझे यकीन नही हो रहा था कि में कुत्ते के लंड से चुद कर झरने वाली थी. मेरा झारना शुरू हो गया. मैने अपना मूह बंद रखने की कोशिश की ताकि किसी को पता ना चले कि मैं कुत्ते से चुदवा कर झार रही हूँ. पर मेरे मूह से सिसकियारी निकल ही पड़ी ‘आआअहह… आआआहह… आआआआहह..’ मैं ज़ोर से झार रही थी. चार पाँच मिनिट तक मैं झरती रही. आख़िर मेरा झरना बंद हो गया लेकिन टॉमी की चुदाई में कोई फरक नही आया था वो अभी भी लगातार एक ही रफ़्तार से मेरी चूत में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था. इतनी ज़ोर के झार के मैं थक गयी थी और मेरा सारा बदन पसीने से गीला हो गया था. टॉमी रुकने का नाम ही नही ले रहा था. मेरे मूह से थकावट से ‘आआअहह.. आआआआअहह’ की आवाज़े निकल रही थी. दो मिनिट में ही मुझे अपने बदन मे फिर से गर्मी बढ़ती महसूस हुई. मैं फिर से झरने वाली थी. अब बिल्कुल बेशरम हो के मैं अपनी गांद को पीछे धकेल धकेल के टॉमी के लंड से चुदवा रही थी. में बेशरम हो कर आवाज़े निकाल रही थी और चुदाई का मज़ा ले रही थी. मेरे दिमाग़ ने अब काम करना बिल्कुल बंद कर दिया था. मैं सच में ही कुतिया बन गयी थी.
डिज़िल्वा ने मेरे बॉल पकड़ के खीच लिए ताकि सरजी मेरा चेहरा देख सके.
‘सरजी जी, ज़रा इसका चेहरा तो देखिए’
मेरी आँखें आधी खुली थी और मेरे होंठ भी आधे खुले थे. मेरे मूह से ‘आआहह… आआआआअहह….. आआअहह’ की आवाज़े निकल रही थी. टॉमी सट्टा सॅट तेज़ी से मेरी चूत में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था. मैं भी कुतिया की तरह अपनी गांद पीछे धकेल के उसके हरेक धक्के का जवाब दे रही थी.
यह नज़ारा देख सरजी पागल हो गये. मुझ जैसी खूबसूरत और जवान लड़की बिल्कुल सेक्स से बहाल और मेरे उपर उनका जंगली कुत्ता. सरजी का लंड अब भी बैठा था पर वो अब झरने वाले थे.
‘उसका सर पकड़ के रख डिज़िल्वा लगता हैं में झरने वाला हूँ’ ये बात सुन नर्स सरजी का लंड पूरे ज़ोर से चूसने लगी. में भी फिर से झरने लगी ‘आआहह… आआआआहह…’.
अपने मालिक की तराह टॉमी का भी अब झरना शुरू हो गया, उसके लंड से वीर्य निकलना शुरू हो गया. चूत के अंदर वीर्य के एहसास से मैं और ज़ोर से झरने लगी. टॉमी झरते वक़्त बहुत तेज़ी से अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था. सरजी के लंड से भी वीर्य छूटने लगा. नर्स लंड चूस्ते चूस्ते सरजी का वीर्य पीने की कोशिश कर रही थी पर वो सारा पी नही पा रही थी और काफ़ी वीर्य बह के सरजी के बॉल्स पे जा रहा था. दूसरी नर्स ये बाकी का वीर्य सरजी के बॉल से चाट चाट के सॉफ कर रही थी.
कुछ देर तक हम यूँ ही झरते रहे. टॉमी फिर झट से अपना लंड बाहर निकाल के कोने में जा के बैठ गया.
‘वाह डिज़िल्वा 5 साल के बाद झारा हूँ मैं, मान गये’ ये कह के सरजी बिस्तर पे तक के गिर पड़ा
‘मैं थक गया हूँ, हिसाब बाद में करलेंगे, अब जाओ यहाँ से’
‘ठीक हैं सरजी’ डिज़िल्वा बोल के मेरे पास आ गया. मेरी रस्सी खोल के उसने मुझे खड़े होने में मदद की. मैं थक के चूर हो गयी थी और खड़ा रहना भी मुश्किल हो रहा था. कैसे भी करके डिज़िल्वा की मदद से कपड़े पहेन के हम बाहर आ गये. मैं डिज़िल्वा की गाड़ी में पीछे की सीट पे जा के लेट गयी. डिज़िल्वा गाड़ी चलाने लगा.
कुछ देर बाद गाड़ी रुक गयी. मैने सोचा कि घर आ गया. मैं आँखें खोलके बैठ गयी तो देखा कि डिज़िल्वा ने गाड़ी किसी जंगल जैसी जगाह मे लाके पार्क करदी थी. मेरे कुछ पूछने से पहले ही डिज़िल्वा गाड़ी से उतार कर पीछे का दरवाज़ा खोल दिया.
मैने देखा कि उसने अपनी पॅंट उतार दी थी. उसका मोटा लंड पूरा खड़ा था.
‘आज तेरी चुदाई देख के में पागल हो गया हूँ, तुझे चोदे बिना में जाने कैसे दूँ ?’
‘प्लीज़ मैं बहुत थक गयी हूँ’
‘तुझे वैसे भी कुछ करना नही हैं मेरी जान. बस नीचे लेटी रह और मुझे तेरी गांद मारने दे’
गांद मारने की बात सुनकर मैं डर गयी.
‘ये क्या कह रहे हो तुम’
डिज़िल्वा दरवाज़े से गाड़ी के अंदर आने लगा. मुझे अभी भी याद था कि 8 इंच के लंड से गांद चुदवा कर कितना बुरा हाल होता हैं. डिज़िल्वा के 10 इंच का लंड तो मुझे मार ही डाले गा. मैं बहुत ही डर गयी और चिल्लाने लगी
‘चिल्लाके कुछ नही होगा मेर जान, इस जंगल में कोई सुनने वालाः नहीं, अब तो इस गोरी गांद की खैर नही’ उसने मेरा हाथ पकड़ के घुमा दिया और मुझे अपने पेट तले सीट पे लेटा कर मेरी जाँघो पे बैठ गया. उसने मेरी स्कर्ट निकाल दी और अपने दोनो हाथों से मेरी गांद मसल्ने लगा.
‘तेरी चिकनी गांद को आज अछी तरह से चोदुन्गा, कितने दिनो से तेरी छोटी सी गांद में अपना लंड डालने का जी कर रहा था, आज इस मौके को नहीं जाने दूँगा’
‘प्लीज़ मुझे जाने दो’
पर डिज़िल्वा को सिर्फ़ मेरी गांद दिख रही थी वो कुछ सुन नही रहा था. उसने कही से एक क्रीम की बॉटल निकाल ली और दोनो हाथों में क्रीम डाल के अपने लंड पे लगा लिया. फिर वो थोड़ी और क्रीम हाथों में ले कर मेरी गांद पे मसल्ने लगा. एक मिनिट में मेरी गांद क्रीम से चमकने लगी.
‘हाई क्या गांद हैं तेरी’
‘प्लीज़ मुझे जाने दो’ मैं अब डर के मारे रो रही थी पर डिज़िल्वा का ध्यान सिर्फ़ मेरी गांद पे था. वो मेरी चमकती गांद को दोनो हाथों से ज़ोर से दबा रहा था और अपना लंड मेरी गांद के बीच में रगड़ रहा था. उसके मूह से ‘आआअहह…. आआआआअहह…’ की आवाज़ आ रही थी.
कुछ देर ऐसे गांद मसल्ने के बाद उसने थोड़ी क्रीम अपनी दो उंगलियों में लेकर अचानक मेरी गांद में घुसेड दी.
अचानक उसकी मोटी उंगलियाँ गांद में जाने से में चीख पड़ी ‘आऐईयईई…’ ठंडा ठंडा क्रीम मेरी गांद में मुझे महसूस हो रहा था. डिज़िल्वा ने दो मिनिट तक ऐसे ही अपनी उंगलिया मेरी गांद में अंदर बाहर की. फिर उसने अपनी उंगलियाँ निकाल दी.
‘बहुत क्रीम हो गया. अब मेरे लंड की बारी’ ये कह के उसने अपना मोटा लॉडा मेरी गांद के छेद पे रख दिया…..
कुछ देर तक वो अपना लंड मेरी गांद पर रगड़ता रहा जब उसने देखा की मैं थोड़ा नॉर्मल हो गई हूँ डिसिल्वा ने एक करारा झटका लगाया उसका ४ इंच लंड मेरी गान्ड को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया मेरे मुँह से चीख निकल गई मररर्र्ररर गैईईइ हाइईईईईईईईईई मेरिइईईईईई फाद्द्दद्ड दीईईईई बचाऊऊऊओ डिसिल्वा ने फिर दूसरा झटका मारा अब ६ इंच लॅंड मेरी गांद के अंदर था दोस्तो ये तो सेक्स की पुजारन बन चुकी है अब इसकी गान्ड या चूत मे ८ इंच का लंड हो या १० इंच का क्या फरक पड़ता है डिसिल्वा बार बार धोका देता है एक ये है साली फिर भी उसके साथ चल देती है अब ये तो होना ही था
चूतिया चूत को बदनाम करते है
चूत वो चीज़ है जहाँ लंड आराम करते हैंडेसिल्वा ने अपना 10 इंच का मोटा लॉडा मेरी गान्ड के छेद पे रख दिया और अंदर घुसाने की कोशिश करने लगा. वो लंड का उपर का हिस्सा मेरी गान्ड के छेद पे रगड़ रहा था पर उसका लंड इतना मोटा था कि क्रीम लगाने के बावजूद अंदर जा नहीं रहा था.
‘लगता हैं थोड़ा ज़ोर लगाना पड़ेगा’ कह के डिज़िल्वा ने अपना लंड गान्ड के छेद से 3-4 इंच पीछे ले कर ज़ोर से आगे धकेला. उसका मोटा लंड मेरी गान्ड के छोटे से छेद को चीरता हुआ 3 इंच तक अंदर घुस गया.
‘आआआआऐययईईईईईईईईईईई’ में ज़ोर से चिल्ला बैठी. मुझे ऐसा लगा कि किसी ने मेरे अंदर चाकू घुसेड दिया हो.
‘आआआहह…. कितनी टाइट हैं तू आआआआहह….’ करके डिज़िल्वा मज़ा ले रहा था.
डिज़िल्वा अपने पूरे शरीर का वज़न नीचे की ओर धकेल रहा था और अपने लंड को पूरे ज़ोर से मेरी गान्ड में और ज़्यादा घुसेड ने की कोशिश कर रहा था. उसका लंड बहुत ही धीरे धीरे मेरी गान्ड को फैला के आगे जा रहा था. में दर्द के मारे चिल्ला रही थी, मेरे आँखों से आँसू निकल रहे थे. डिज़िल्वा मेरे उपर लेटा हुआ था और अपना लंड आगे धकेलने की कोशिश कर रहा था, पर मेरी गांद इतनी टाइट थी कि उसका लंड अभी भी सिर्फ़ 6 इंच तक ही अंदर गया था. ज़ोर लगाके डिज़िल्वा का सारा शरीर पसीने से गीला हो गया था. में भी पसीने से लतपथ हो गयी थी.
डिज़िल्वा ने अब अपना लंड लगभग पूरा बाहर निकालके फिर से ढेर सारा क्रीम लगा दिया और फिर से पूरे ज़ोर से धक्का मारा. इस बार उसका लंड 8 इंच तक मेरी गान्ड में घुस गया.
में चिल्ला चिल्ला कर डिज़िल्वा के नीचे छटपटा रही थी. डिज़िल्वा को मेरी हालत देख और मज़ा आ रहा था. उसका लंड अभी सिर्फ़ 8 इंच तक ही मेरी गान्ड में घुसा था. डिज़िल्वा ने अब अपना लंड धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू किया. डिज़िल्वा अपना लंड लगभग पूरा बाहर निकालता और फिर 8 इंच तक अंदर घुसेड देता. मेरी गान्ड का छेद इतना टाइट था कि हर बार जब डिज़िल्वा अपना लंड बाहर लेता तो छेद फिर से सिकुड जाता और डिज़िल्वा को अपना लंड अंदर घुसेड़ने में ज़ोर लगाना पड़ता. मेरी टाइट गान्ड से डिज़िल्वा को मज़ा आ रहा था. उसके हरेक धक्के पे मेरा सर गाड़ी के दरवाज़े पे लग रहा था और जैसे डिज़िल्वा अपना मोटा लंड बाहर खीचता उसके साथ मेरा सारा बदन भी खिच कर थोड़ा नीचे सरक जाता. कुछ देर डिज़िल्वा ने मेरी गान्ड को ऐसे ही 8 इंच तक चोदा पर अब उससे सबर नही हो रहा था.
उसने अब एक तगड़ा धक्का लगा के अपना पूरा 10 इंच का मोटा लंड मेरी गान्ड में घुसेड दिया. ‘आआआआहह… आआआआआअहह.’
डिज़िल्वा ने अपना पूरा लंड मेरी गान्ड के अंदर घुसा के रखा और ज़ोर से मेरे बाल पकड़ के खीच दिए. फिर धीरे धीरे उसने मेरी गान्ड की चुदाई शुरू की. पूरा 10 इंच का गरम लॉडा अब अंदर-बाहर होने लगा. हरेक बार जब वो अपना लंड अंदर धकेल्ता मेरा पूरा बदन आगे की ओर सरकने लगता और वो मेरे बाल खीच मुझे सरकने से रोक लेता. इतनी टाइट गान्ड को चोद के डिज़िल्वा को बहुत मज़ा आ रहा था और वो बहुत उत्तेजित हो गया था. दस मिनिट चोदने के बाद उसका झरना शुरू हो गया और उसने चुदाई की रफ़्तार बढ़ा दी. ऐसा करने से मेरा दर्द और बढ़ गया.
में चिल्ला चिल्ला कर उसको गाली दे रही थी ‘आाऐययईईई… जाने दे मुझे साले कुत्ते’ पर इससे डिज़िल्वा को और मज़ा मिल रहा था. वो अपने मोटे लंड से मेरी गान्ड में अपना वीर्य निकालने लगा. ‘आआआआआहह… ये ले साली कुतिया आआआआआहह….’ मुझे मेरी गान्ड में डिज़िल्वा का गरम वीर्य महसूस हो रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे मेरी पूरी गान्ड उससे भर गयी हो. डिज़िल्वा की चुदाई से अब ‘चुप चुप’की आवाज़ आ रही थी. तीन चार मिनिट तक डिज़िल्वा झरता रहा. आख़िर उसका झरना बंद हुआ और वो मेरे उपर लेट गया. उसका लंड उसने मेरी गान्ड के अंदर ही रखा. उसका मोटा लंड अभी भी मेरी गान्ड के अंदर थोड़े थोड़े झटके खा रहा था. उसका पूरा वज़न मेरे उपर होने के कारण में उसको अपने उपर से हटा नही पा रही थी.
‘प्लीज़ अब तो बाहर निकालो इसको’ मैने उससे रोते रोते भीक माँगी
‘आअहह चुप बैठ साली रंडी’
कुछ देर बाद डिज़िल्वा का लंड मेरी गान्ड के अंदर बैठ गया. इसके बाद उसने मेरी गान्ड से अपना लंड आख़िर बाहर निकाला. लंड निकालने पे मेरी गान्ड से डिज़िल्वा का ढेर सारा वीर्य बाहर बह गया.
‘वाह मज़ा आ गया’ कह के डिज़िल्वा ने अपने कपड़े पहेन गाड़ी चलानी शुरू कर दी और मेरे घर की ओर चल पड़ा. मैने भी कैसे भी करके धीरे धीरे अपने कपड़े पहेन लिए.
हम घर के नज़दीक पहुचे. काफ़ी देर हो गयी थी. में अभी भी रो रही थी और मेरी गान्ड के दर्द से मुझे बैठने में भी तकलीफ़ हो रही थी. घर नज़दीक आते ही मेने देखा कि मा बाहर खड़ी थी. वो मेरा इंतेज़ार कर रही थी. में डर गयी कि अब क्या होगा. मेने अपने आँसू झट से पोंछ दिए.
गाड़ी पार्क करते ही मा गाड़ी के पास आ गयी और उसने मुझे और फिर डिज़िल्वा को देखा.
‘इतनी देर कहाँ थी, और ये कौन हैं’ मा ने गुस्से से पूछा. मेरी तो डर के मारे बोलती बंद हो गयी थी. तभी डिज़िल्वा ने कहा
‘जी नमस्ते सावित्री जी मेरा नाम डिज़िल्वा हैं’
‘जी नमस्ते’ मा की आँखों में शक था
‘जी में इसके स्कूल के पास से जा रहा था तो मैने देखा कि एक लड़का इसके साथ छेड़खानी कर रहा था, मैने गाड़ी रोकके उस लड़के को ठीक कर दिया’ डिज़िल्वा की बात सुन मा के चेहरे पे से गुस्सा चला गया और मेरा दिमाग़ भी चलने लगा.
‘हां मा, एक विवेक करके लड़का हैं, मेरी क्लास में पढ़ता हैं, कई दिनो से स्कूल में कहता फिरता था कि में उसकी गर्लफ्रेंड हूँ, और आज में स्कूल के बाद पढ़ाई करके, घर आ रही थी तो उसने मेरे पीछे आ के मेरे साथ गंदी गंदी बातें करनी शुरू कर दी, तभी डिज़िल्वा अंकल ने आकर मुझे उससे बचा लिया’
‘आप का बहुत शुक्रिया भाई साब, आप अंदर आइए प्लीज़, चाइ पी के जाइए’
‘जी ठीक हैं’
हम अंदर जा कर बैठ गये. मुझे चलने में और बैठने में बहुत तकलीफ़ हो रही थी पर मैने अपनी मा को इसकी भनक नही होने दी.
‘आप का बहुत शुर्किया भाई साब, मुझे तो इसकी बहुत चिंता होती हैं’
‘आप खमखा चिंता करती हैं बहेनजी, बड़ी भोली और सीधी साधी हैं आपकी लड़की, आपने इसे बहुत अच्छी तरह से बड़ा किया हैं, बहुत गुणवान लड़की हैं’
‘जी वो तो हैं, पर इसका रंग रूप ऐसा हैं कि मुझे हमेशा चिंता होती हैं’
‘जी हां सुंदर तो बहुत हैं, बिल्कुल अपनी मा के जैसी’ डिज़िल्वा ने मुस्कुरा के कहा
मा के मूह पे मुस्कुराहट आ गयी. ये देख डिज़िल्वा की हिम्मत थोड़ी और बढ़ गयी
‘आप तो सच मुच श्रीदेवी जैसी दिखती हैं बहेनजी’
‘जी आप भी भाई साब. बड़े शरारती हो.’ मा ने शरमाते हुए कहा
‘नही सच कहता हूँ बहेन जी.पहले तो मुझे लगा आप इसकी बड़ी बहन हैं‘
में चोंक के उनकी बातें सुनती रही. डिज़िल्वा मेरी मा पे बिंदास लाइन मार रहा था और मा भी उसे लाइन दे रही थी.
कुछ देर डिज़िल्वा ऐसे ही मा की तारीफ़ करता रहा और मा उसकी बातें सुनकर खुश होती रही. पिताजी के मरने के बाद मा बिज़्नेस और अपनी बेटी को संभालने में मुशगूल हो गयी थी. पर वो भी अभी जवान ही थी, उसकी उमर सिर्फ़ 35 साल की थी. अपने जिस्म की ज़रूरतों को उसने बिल्कुल दबा दिया था. और किसी मर्द की हिम्मत नही होती कि सावित्री देवी के साथ कोई हरकत करे. डिज़िल्वा जिस तरह से मा की तारीफ कर रहा था वैसे किसी ने पहले मा की तारीफ नही की थी और इससे मा को बहुत अछा लग रहा था.
‘जी भाई साब आपको हमारे यहाँ खाने पे आना पड़ेगा, आप कहिए आप कब आ सकते हैं’
‘जी ज़रूर क्यूँ नहीं, अगले हफ्ते में आ सकता हूँ’
‘बस तो बात पक्की, आप सोमवार को 8 बजे आ जाना’
‘ठीक हैं बहेन जी अब आप इजाज़त दीजिए’ डिज़िल्वा चला गया.
‘बहुत ही अच्छे जेंटालमेन हैं ना बेटी ? आजकल ऐसे मर्द नहीं मिलते’ डिज़िल्वा ने मा की तारीफ कर कर के उसको खुश कर दिया था. मैने कुछ नहीं कहा और अपने कमरे में चली गयी.
मेरी गान्ड का दर्द मुझे बहुत परेशान कर रहा था. में ठीक से सो भी नहीं पा रही थी. मैने सोच लिया था कि अब पानी सर के उपर से चला गया था और मुझे डिज़िल्वा से मिलना बंद करना ही पड़ेगा. मैं जानती थी कि मेरी सेक्स की भूक मुझे फिर से डिज़िल्वा के पास ले जाएगी. इस कारण मैने अगले दिन मा को कह दिया कि में दसवी के एग्ज़ॅम शुरू हो तब तक शहर के बाहर जो हमारा फार्महाउस था वहाँ जा के एग्ज़ॅम की तैयारी करूँगी. मेरी एग्ज़ॅम को दो महीने बाकी थे. अगले ही दिन मेने डॉक्टर से दर्द की दवाई लेली और फार्महाउस चली गयी.
मेरे फार्महाउस जाने के बाद वाले सोमवार को डिज़िल्वा हमारे घर खाने पे आया.
‘जी नमस्ते भाई साब’
‘नमस्ते बहेनजी, आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं आज’ मा नें एक सफेद रंग की साड़ी पहनी थी और स्लीवेलेस्स ब्लाउस पहना था. डिज़िल्वा उसे देख सोच रहा था ‘साली क्या सेक्सी हैं, बिल्कुल अपनी बेटी की तरह, क्या चिकना बदन हैं’
‘जी शुक्रिया’ मा नें मुस्कुराते हुए कहा
‘जी में थोड़ी सी वाइन ले आया हूँ, आप को कोई ऐतराज़ तो नहीं ?’
‘जी बिल्कुल नहीं’
दोनो खाना खाने के लिए बैठ गये.
‘जी आप भी थोड़ी वाइन लीजिए’ डिज़िल्वा ने मा से कहा
‘जी में पीती नहीं’
‘जी में अकेला तो पी नहीं सकता, आप ऐसा करो सिर्फ़ एक ग्लास पी लो बाकी का में पी लूँगा’ ऐसा कह के डिज़िल्वा ने मा का ग्लास भर दिया. मा भी उसकी बात का लिहाज़ रख के धीरे धीरे वाइन पीने लगी.
खाने के वक़्त इधर उधर की बातें करते करते डिज़िल्वा सारे वक़्त मा की खूबसूरती की तारीफ़ कर रहा था. वो धीरे धीरे अपनी बातों को थोड़ा और सेक्सी कर रहा था.
कुछ देर बाद मा ने अपनी वाइन ख़तम कर दी तो डिज़िल्वा ने उसे फिर से पूछे बिना पूरी भर दी. मा भी बातों बातों में धीरे धीरे वाइन पीती गयी. अब डिज़िल्वा की हिम्मत और बढ़ गयी थी.
‘सच कहता हूँ बहेन जी आप का फिगर कोई 18 साल की लड़की के जैसा हैं, 35 साल का तजुर्बा और 18 साल का बदन, क़िस्सी मर्द को और चाहिए ही क्या, मुझे समझ नही आ रहा कि आपने दूसरी शादी क्यूँ नही की’
‘जी छोड़िए भाई साब, बिज़्नेस का ख्याल रख के मुझे टाइम ही कहाँ मिलता हैं’ वाइन पी के मा का दिमाग़ अब थोड़ा हल्का हो गया था और उसकी शरम थोड़ी कम
‘आप बताइए भाई साब, आप ने क्यूँ अभी तक शादी नही की?’ डिज़िल्वा सारी रात अपने बारे में झूठी कहानी बना रहा था.
‘जी अब में क्या कहु बहेन जी. मुझे कारण कहने में थोड़ी झिझक होती हैं, आप शायद नाराज़ हो जाएगी’
‘जी बिल्कुल नहीं आप बेजीझक हो कर कहिए’
‘नही नही आपको सच में ही बुरा लग जाएगा’
मा की उत्सुकता अब बढ़ गयी थी ‘नही भाई साब, में सच कहती हूँ आप जो भी कहेंगे मुझे बुरा नहीं लगेगा’
‘जी ठीक हैं तो. असल में बात ये हैं कि जब भी कोई औरत से बात बनती हैं तो वो मेरे लंड का साइज़ देख के घबरा जाती और आगे बात ही नहीं बढ़ती’
मा यह बात सुनकर बहुत शर्मा गयी. उसके गाल गुलाबी हो गये और उसने कुछ कहा नही. उसने अपनी आँखें झुका के अपने प्लेट में देखने लगी.
‘आप बुरा मान गयी’
‘जी ऐसा कुछ नहीं’ मा ने कहा. उसके दिमाग़ में अब डिज़िल्वा ने अपने लंड का ख्याल डाल दिया था.
डिज़िल्वा मौके का फ़ायदा लेकर बोलता गया
‘वैसे तो कहते हैं कि मर्द का लंड अगर बड़ा हो तो औरत आसानी से मिल जाती हैं, पर असल में ऐसा नहीं होता हैं’
‘जी क्या आपका इतना बड़ा हैं कि लड़कियाँ डर जाती हैं?’ डिज़िल्वा अब समझ गया कि मा उसके चंगुल में फस रही हैं.
‘जी हां पूरा 10 इंच लंबा और काफ़ी मोटा हैं, इसी का तो रोना हैं’ मा के मन में अब हलचल होने लगी थी. खाना अब ख़तम हो गया था. मा ने तीन ग्लास वाइन पी ली थी और उसका सर थोड़ा थोड़ा नशे से घूम रहा था. उसके दिमाग़ में अब डिज़िल्वा का लंड छाया हुआ था.
‘जी सोफा पे बैठ के बात करे’ डिज़िल्वा ने कहा. उसके मन में अब आइडिया आ गया था. दोनो अपने वाइन का ग्लास ले के सोफा पे बैठ गये. मा का ये चौथा ग्लास था. डिज़िल्वा ने एक ग्लास भी ख़तम नही किया था. तभी डिज़िल्वा ने अपना ग्लास ले कर सारी वाइन अपनी पॅंट पे गिरा दी.
‘उफ़फ्फ़… बहुत वाइन गिर गयी, आप ज़रा सॉफ कर देंगे प्लीज़’ डिज़िल्वा खड़ा हो गया.
‘जी ?..’ मा ने पूछा
‘प्लीज़ जल्दी वरना दाग लग जाएगा’
‘जी ठीक हैं’ मा अपने साड़ी के पल्लू से डिज़िल्वा के पॅंट पे घिसना शुरू कर दिया. डिज़िल्वा को मा के छोटे से ब्लाउस मे से उसके गोरे बूब्स आधे से ज़्यादा दिखाई दे रहें थे. जैसे मा अपना हाथ हिला के सॉफ करती उसके बूब्स भी हिल जाते. डिज़िल्वा का लंड अब खड़ा होने लगा. उसका सारा पॅंट आगे से गीला हो गया था. उसने अपने लंड पे इशारा करके कहा
‘जी यहाँ पे बहुत गीला हो गया हैं’ मा ने अपनी साड़ी का पल्लू डिज़िल्वा के लंड पे रगड़ना शुरू किया.
मा के गाल गुलाबी हो गये थे. उसकी सेक्स की भूक ने उसके दिमाग़ को चलने से रोक लिया था. दो ही मिनिट में डिज़िल्वा का लंड खड़ा हो गया था. मा को डिज़िल्वा के लंड के साइज़ पे यकीन नहीं हो रहा था. वो अपना हाथ नीचे से उपर तक डिज़िल्वा के लंड पे घिस रही थी.
‘लगता हैं अब काफ़ी सॉफ हो गया हैं’
‘नहीं बहेन जी. अभी भी गीला है, थोड़ा और सॉफ कीजिए’
‘ठीक हैं’ मा जानती थी कि उसे अब अपने आप को रोक लेना चाहिए पर वो अपना हाथ रोक नही पा रही थी. कुछ देर वो ऐसे ही घिसती रही.
डिज़िल्वा से अब रहा नहीं गया और वो अपने पॅंट के बटन खोलने लगा
‘जी ये क्या कर रहे आप भाई साब’
‘अब मुझसे नहीं रहा जाता’ डिज़िल्वा जानता था कि मा को बहुत सेक्स चढ़ गया था और वो जो कहेगा वो वैसा ही करेगी. उसने पॅंट खोल दी और दो कदम पीछे ले कर पॅंट ज़मीन पे गिरा दी. उसका पहाड़ जैसा लंड अब मा की आँखों के सामने था.
मा की आँखें लंड देख के फैल गयी. उसके दिल और दिमाग़ में अब सिर्फ़ सेक्स था. इतने सालों तक अपने जिस्म की भूक जो दबा के रखी थी अचानक बाहर आ गयी थी. डिज़िल्वा को मा की हालत का अंदाज़ा हो गया था और वो ऐसे ही खड़ा रहा. मा एक मिनिट तक वही पे बैठी लंड को देखती रही. डिज़िल्वा को मा को लंड के सामने लाचार देख के मज़ा आ रहा था.
डिज़िल्वा अपनी शर्ट के बटन निकालके पूरा नंगा हो गया. मा की साँसें तेज़ हो गयी थी और उसके बदन पे पसीना छा गया था. उसकी चूत गीली हो गयी थी.
अब डिज़िल्वा पूरा नंगा हो के मा की तरफ बढ़ा….
डिज़िल्वा नंगा मा के पास जा के खड़ा हो गया. डिज़िल्वा का लंबा लंड उसके चेहरे से दो इंच दूर था.
मा ज़ोर ज़ोर से साँसें ले रही थी और डिज़िल्वा के लंड को देखती रही.
‘और कितना देखोगी बहेनजी, अब चूसने का वक़्त हैं’ डिज़िल्वा ने कहा.
पिताजी के मरने से पहले मा उनके साथ काफ़ी सेक्स करती थी लेकिन तब भी मा ने कभी उनका लंड मूह में नही लिया था. लेकिन पिताजी का लंड था सिर्फ़ 6 इंच का और उतना मोटा भी नही था. डिज़िल्वा का लंड अपने चेहरे के इतने नज़दीक पा कर मा का मूह अपने आप खुल गया और जीब बाहर निकल गयी. इस मोटे लंड को वो चखना चाहती थी.
मा नें अपनी जीभ पूरी बाहर निकालके डिज़िल्वा का लंड पूरा नीचे से उपर तक चाटना शुरू कर दिया. मा का सारा बदन गरम हो गया था. उसने लंड को मूह में ले के चूसना शुरू कर दिया. उसको डिज़िल्वा के लंड का स्वाद बहुत अछा लग रहा था.
डिज़िल्वा ने मा के सर पे हाथ रख उसको और नीचे धकेला और मा का मूह अपने बड़े बॉल के नज़दीक ला दिया.
‘मेरे बॉल को चूसो’ जैसा डिज़िल्वा चाहता था, मा अब डिज़िल्वा की पूरी गुलाम बन गयी थी. उसने डिज़िल्वा के बॉल को चूसना और चाटना शुरू कर दिया. दो तीन मिनिट तक बॉल चूसने के बाद माँ ने अपनी जीब फिर से उपर कर के डिज़िल्वा का लंड चाटना शुरू कर दिया.
डिज़िल्वा ने मा के बाल दोनो हाथो से पकड़ के ज़ोर से खीच लिए.
‘किसने कहा बॉल पे से मूह हटाने को’
‘आऐईयईईई…’ मा डिज़िल्वा के इस बर्ताव से चोंक गयी. पर पता नहीं क्यूँ मा को ये अछा भी लगा. असल में इतने साल बिज़्नेस और घर पे दूसरे मर्दो को ऑर्डर करते करते मा को किसी मर्द के हाथो इस्तेमाल होने पे अच्छा लग रहा था.
‘साली, मैने कहा मेरे बॉल चाट’ डिज़िल्वा ने अपने बॉल मा के मूह पे लगा के ज़ोर्से घिसने लगा.
डिज़िल्वा कुछ देर तक ऐसे ही मा के बाल पकड़ के उसके मूह को अपने बॉल पे दबा के रखा और अपनी गांद हिला हिला के अपने बॉल को मा के चेहरे पे रगड़ता रहा.
डिज़िल्वा ने अब अपना एक पैर उठा के मा के छाती पे रख के मा को पीछे धकेल दिया. मा ज़मीन पे गिर पड़ी. मा को अब डिज़िल्वा के लंड की प्यास पागल बना रही थी. ज़मीन पे लेट के वो डिज़िल्वा का मोटा लंबा लंड देख रही थी. डिज़िल्वा वही पे खड़ा रहा. मा ने अपनी साड़ी उपर करदी.
‘प्लीज़ अब मुझसे रहा नही जाता’
डिज़िल्वा ने उसकी पैंटी देखी. मा की सफेद पैंटी अब पूरी गीली हो गयी थी. डिज़िल्वा ने अपना पैर आगे कर के अपने पैर का अंगूठा मा की चूत पे रख दिया
‘बहुत गीली हो गयी हैं तुम्हारी पैंटी’ ऐसा कह के डिज़िल्वा ने अपने अंगूठे को मा की चूत पे रगड़ना शुरू कर दिया. मा के बदन में एक करेंट सा फैल गया.
मा के मूह से सिसकारी निकल रही थी ‘आअहह…. प्लीज़ मुझसे और बर्दाश्त नहीं होता, और मत छेड़ो मुझे’
डिज़िल्वा अंगूठा मा की चूत पे घिसता रहा ‘अगर तुम मुझे कहोगी नही तो मुझे पता कैसे चले गा कि तुम्हे क्या चाहिए’
‘प्लीज़ मुझे तुम्हारा …. चाहिए’ मा ने लंड की ओर इशारा करते हुए कहा
‘मेरा क्या ?’ डिज़िल्वा जान बूझ कर मा को छेड़ रहा था.
‘तुम्हारा लंड, मुझे तुम्हारा लंड चाहिए’ मा ने डिज़िल्वा से विनती की.
डिज़िल्वा भी अब चुदाई करने के लिए बेताब था. वो ज़मीन पे मा के पैरों के बीच बैठ गया और एक झटके से मा की पैंटी को खीच के निकाल दिया.
‘प्लीज़ थोड़ा धीरे से, मुझे कई साल हो गये हैं ऐसा करे हुए’ मा ने कहा. डिज़िल्वा के मोटे लंड से वो थोड़ी घबरा रही थी.
डिज़िल्वा अपना लंड चूत पे रख के उपर नीचे रगड़ने लगा. मा इतनी उतेज़ित हो गयी कि वो क़िस्सी भी वक़्त झर सकती थी. डिज़िल्वा ने आख़िर अपने लंड मा की चूत पे रख एक तगड़ा झटका मारा. उसका लंड मा की चूत में 4 इंच तक घुस गया. इतनी गीली होने के बावजूद मा की चूत को इतनी टाइट पा के डिज़िल्वा चोंक गया. मा इतनी उतीजित हो गयी थी की अपनी चूत में लंड के एहसास से उसका झरना शुरू हो गया. ‘आआआआअहह….. आआआआहह……’ करके मा का झरना शुरू हो गया. उसकी चूत डिज़िल्वा के लंड के उपर सिकुड रही थी. इससे डिज़िल्वा को मज़ा आ रहा था.
‘साली इतनी जल्दी झरने लगी ? तू तो एक नंबर की रांड़ हैं’ ऐसी बात सुन कर मा का झरना और बढ़ गया, आज तक सारे मर्द उससे मेडम या मेम्साब ही कहते थे और यहाँ डिज़िल्वा ने उसको रांड़ कह दिया. डिज़िल्वा ने मा को 4 इंच तक ही चोदना जारी रखा मा ज़ॉरो से झर रही थी. चार पाँच मिनिट तक मा झरती रही फिर आख़िर उसका झरना बंद हुआ. डिज़िल्वा सारे वक़्त उससे 4 इंच तक चोदता रहा.
‘मज़ा आया’ डिज़िल्वा ने मा को पूछा. मा के चेहरे पे संतुष्टि की मुस्कान थी.
‘अब असली चुदाई शुरू करते हैं’ ऐसा कह के डिज़िल्वा ने एक ज़ोरदार झटका मारा. उसका पूरा 10 इंच का मोटा लंड मा की चूत को चीरता हुआ अंदर घुस गया.
‘आऐईयईईईईई…..’ मा के मूह से चीख निकल पड़ी. ‘प्लीज़ निकालो, ये बहुत बड़ा हैं’. डिज़िल्वा कुछ सुनने को तैयार नही था. मा की चूत को इतनी टाइट पा के वो खुश हो गया था. मा की चूत ने उसके लंड को जैसे जाकड़ लिया था. ‘बाहर निकालु ? अभी तो में शुरू हुआ हूँ मेरी जान’ ऐसा कह के डिज़िल्वा ने अपने लंड मा की चूत में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. डिज़िल्वा को मा की टाइट चूत को चोदने में बड़ा मज़ा आ रहा था वो सोच रहा था ‘इसकी चूत तो इसकी बेटी जितनी टाइट हैं’
पाँच मिनिट ऐसे चुदाई का मज़ा लेने के बाद मा का दर्द कम हो गया था और उसके बदन में फिर से गर्मी बढ़ने लगी थी. डिज़िल्वा लगातार मा की चूत मैं अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था. मा को यकीन नहीं हो रहा था कि चुदाई में इतना मज़ा आ सकता हैं. वो अब जन्नत में पहुच गयी थी, अपनी गांद उछाल उछाल के डिज़िल्वा का लंड ले रही थी और ‘आआआअहह…. आआआहह…’ की आवाज़ निकाल रही थी वो अब दूसरी बार झरने वाली थी.
डिज़िल्वा मा को इस तरह देख खुश हो गया था. चुदाई का मज़ा लेते लेते मा की साड़ी सरक के साइड पे हो गयी थी और अब वो सिर्फ़ अपनी ब्लाउस पहने हुई थी. डिज़िल्वा को मा के बूब्स चूसने का मन हो रहा था. उसने अपना हाथ आगे कर के मा का ब्लाउस और ब्रा ज़ोर से खीच के फाड़ दिया. अगले ही पल डिज़िल्वा ने मा के बड़े बूब्स दोनो हाथो से मसल्ने लगा. उसने झुक के एक बूब को अपने मूह मे ले ज़ोर से चूसने लगा. सारे वक़्त वो मा को चोदता जा रहा था. मा ऐसे अपनी बूब की चुसाइ झेल नही पाई और उसका झरना फिरसे शुरू हो गया
कांटा….शीतल का समर्पण….खूनी सुन्दरी
‘प्लीज़ और ज़ोरो से करो’ डिज़िल्वा ने ये सुनकर अपनी रफ़्तार और बढ़ा दी. मा की चूत झरते वक़्त डिज़िल्वा के लंड पे सिकुड जाती और डिज़िल्वा को इसी और मज़ा आता. तीन चार मिनिट तक मा का झरना जारी रहा. आख़िर उसका झरना बंद हुआ तो डिज़िल्वा ने कहा
‘चलो अब बेडरूम में चलते हैं’ डिज़िल्वा ने अपना लंड मा की चूत के अंदर ही रखा और मा को उठा के खड़ा हो गया. उसका लंबा लंड मा की चूत में था, एक हाथ उसका मा की गान्ड पे और दूसरा हाथ मा के पीठ पे था. मा ने गिरने के डर से अपनी दोनो टाँग और हाथ से डिज़िल्वा को जाकड़ लिया था. डिज़िल्वा ऐसे ही मा को उठा के बेडरूम मे पहुँच गया.
बेडरूम में जा के डिज़िल्वा ने बिस्तर पे मा की ज़ोरदार चुदाई फिर से चालू कर दी. अपना पूरा लंबा लंड वो मा की चूत में अंदर बाहर कर रहा था. वो अब झरने के करीब था और इसके वजह से उसने चुदाई की रफ़्तार बहुत तेज़ करदी थी. इससे मा को भी बहुत मज़ा आ रहा था. डिज़िल्वा ने अपना मूह झुका के मा के होंठो पे अपने होंठ लगा दिए और मा को चूमने लगा.
‘अपनी जीब बाहर निकाके किस कर मुझे’ डिज़िल्वा ने मा को कहा. मा ने उसकी बात मान अपनी पूरी जीब बाहर निकाल दी. डिज़िल्वा ने भी अपनी जीब आगे कर के मा की जीब पे उसको रगड़ना शुरू कर दिया. इस तरह से किस कर के मा और उत्तेजित हो गयी और फिर से झरने लगी. देसील्वा का भी अब झरना शुरू हो गया ‘आआअहह…. आआआआआआआहह’
दोनो इसी तरह तीन चार मिनिट तक ज़ोर से चुदाई करते रहे और झरते रहे. आख़िर दोनो का झरना बंद हुआ. डिज़िल्वा ऐसे ही अपना लंड मा के अंदर रख के उसके उपर लेट गया. दोनो ज़ोर से साँसें ले रहें थे. कुछ देर बाद डिज़िल्वा मा के उपर से हट के उसके बगल में लेटके सो गया, मा भी ऐसे ही खुश हो के सो गयी.
सुबह होने तक डिज़िल्वा ने मा को रात में दो बार और चोदा. दोनो सुबह 11 बजे तक सोते रहे. फिर मा की आँख खुली और वो शवर करने गयी, डिज़िल्वा उठ कर उसके पीछे पीछे बाथरूम में चला गया और वहाँ जाके मा को खड़े खड़े पीछे से एक और बार चोदा. आख़िर दुपेहर का लंच करके डिज़िल्वा चला गया. जाते जाते मा ने उससे रात को फिर से आने की विनती की. डिज़िल्वा समझ गया था कि मछली जाल में फस गयी हैं.
डिज़िल्वा की तो जैसे लॉटरी ही लग गयी थी. उसने अब हर रोज़ मा को मिलना शुरू कर दिया. रोज़ रात वो मा की जम कर चुदाई करता. मा का जीवन तो अब आनंद से भर गया था. डिज़िल्वा भी इतनी खूबसूरत औरत की चुदाई करके बहुत मज़े ले रहा था. डिज़िल्वा को औरत को ज़लील करके चोदने में बहुत मज़ा आता था और मा को ज़लील हो कर चुदने में मज़ा आता था. दोनो जैसे एक दूसरे के लिए बने थे. कुछ ही दिनो में, मा और डिज़िल्वा की गहरी दोस्ती हो गयी. में फार्महाउस पर अपनी दसवी की पढ़ाई कर रही थी. मा के साथ फोन पे बात करके में जान गयी थी कि मा और डिज़िल्वा में दोस्ती हो गयी हैं, मा डिज़िल्वा की तारीफ करने से थकती नही थी, पर मुझे ये पता नही था कि दोनो सारे वक़्त चुदाई कर रहे थे. मुझे मा और डिज़िल्वा की दोस्ती पे बहुत गुस्सा आ रहा था. में नहीं चाहती थी कि मा, देसील्वा जैसे गिरे हुए आदमी से दोस्ती रखें.
एग्ज़ॅम शुरू होने के कुछ दिन पहले में वापस घर आ गयी. में घर में आई तो देखा कि डिज़िल्वा हमारे घर पे था, मा उपर के बेडरूम में आराम कर रही थी.
‘तुम यहाँ क्या कर रहे हो’ मैने डिज़िल्वा से पूछा. उसको देख के मुझे गुस्सा आ गया था.
डिज़िल्वा ने मुस्कुरा के कहा ‘तुम्हारी मा से मिलने आया था, आज कल हम रोज़ मिलते हैं’
‘मा कहाँ हैं’
‘वो उपर आराम कर रही हैं’
‘देखो तुम मेरी मा से मिलना बंद करदो, वरना में उसको बता दूँगी कि तुम कैसे आदमी हो’
‘तुम्हारी मा को बहुत अच्छी तरह पता हैं कि मैं किस तरह का आदमी हूँ, तुझे क्या लगता हैं हम रोज़ मिलके क्या करते हैं, तेरी मा मुझसे और मेरे लंड को अच्छी तरह से जान गयी हैं’ डिज़िल्वा ने हँसते हुए कहा.
‘देखो मेरी मा के बारे में ऐसी गंदी बातें मत करो’
‘यकीन नही होता तो ऐसा कर, पाँच मिनिट रुक के उपर आजाना और देखना मैं और तेरी मा क्या कर रहें हैं’ ऐसा कह के डिज़िल्वा उपर चला गया.
मुझे यकीन नही हो रहा था कि मा डिज़िल्वा जैसे आदमी के साथ सेक्स कर सकती हैं. पाँच मिनिट रुक के में उपर गयी और मैने मा की बेडरूम का दरवाज़ा धीरे से थोड़ा खोलके अंदर देखा. अंदर का नज़ारा देख में दंग रह गयी. अंदर डिज़िल्वा पूरा नंगा बिस्तर पे लेटा हुआ था. उसका मोटा काला लंड पूरा खड़ा था. मा उसके उपर लेटी हुई थी, उसकी चूत में डिज़िल्वा का लंड था और वो अपनी गान्ड उपर नीचे कर रही थी. मा की गोरी गान्ड मुझे दिखाई दे रही थी, उसका चेहरा दूसरी तरफ था और वो ज़ोर से सिसकियाँ भर रही थी.
कांटा….शीतल का समर्पण….खूनी सुन्दरी
डिज़िल्वा मेरी तरफ देख रहा था और मुस्कुरा रहा था. में वहाँ से चले जाना चाहती थी पर मेरी नज़र उन दोनो की चुदाई से हट नही रही थी. मेरे बदन मे गर्मी छा गयी थी और डिज़िल्वा का लंड इतने दिनो बाद देखने पे चूत में हलचल होने लगी थी.
डिज़िल्वा ने अपने हाथ मा की गान्ड पे रख अपनी उंगली को मा के गान्ड के छेद पे घुमाने लगा.
‘प्लीज़ अमित …’ मा ने कहा.
‘प्लीज़ क्या, तुम बोलोगि नही तो मुझे कैसे पता चले गा’
‘प्लीज़ मेरी गान्ड में उंगली डालो’
डिज़िल्वा मेरी तरफ देख के मुस्कुरा के बोला ‘ऐसी चीज़ तो सिर्फ़ गंदी रांड़ को ही अच्छी लगती हैं’
‘हां में गंदी रांड़ हूँ, मुझे मेरी गान्ड में तुम्हारी उंगली चाहिए, प्लीज़’ मेरी मा के मूह से ये बात सुनके में दंग रह गयी. मुझे मेरी आँख और कान पे यकीन नही हो रहा था.
डिज़िल्वा ने झट से मा की गान्ड के छेद में अपनी उंगली डाल दी.मा की मूह से सिसकियाँ निकल गयी और उसका झरना शुरू हो गया. वो डिज़िल्वा के मोटे लंड पे और ज़ोर से उपर नीचे होने लगी. दो तीन मिनिट तक मा ऐसे ही झरती रही.
‘अब मेरा लंड चूसो सावित्री देवी’ डिज़िल्वा अभी भी मुझे देख मुस्कुरा रहा था.
‘जैसे आपका हुकुम’ मा ने हँसते हुए कहा और वो मुड़ने लगी. उसकी नज़र मुझ पर ना पड़े इसलिए में वहाँ से चली गयी और नीचे आ गयी. अगले दो घंटे तक मा और डिज़िल्वा कमरे में रहे. मेरा दिल कर रहा था कि में उपर जा के देखु कि डिज़िल्वा मा के साथ क्या कर रहा हैं पर में नीचे ही बैठी रही. आख़िर मा और डिज़िल्वा बाहर आए. मा के चेहरे पे बड़ी मुस्कान थी. वो बहुत खुश लग रही थी.
‘अरे मानसी तुम कब आई’
‘जी बस दो मिनिट पहले’
‘पढ़ाई कैसी चल रही हैं तुम्हारी’
‘जी अच्छी चल रही हैं’
‘तुम्हारे जाने के बाद मेरी और डिज़िल्वा जी की काफ़ी अच्छी दोस्ती हो गयी हैं.’ मैने कुछ नहीं कहा.
‘जी में फ्रेश हो आती हूँ’ कह के मैं वहाँ से चली गयी.
अगले कुछ दिन ऐसा ही चलता रहा. हर रोज़ शाम को डिज़िल्वा घर आता. घर आते ही वो और मा बेडरूम मे चले जाते ‘हम बेडरूम मे जा रहें हैं बाते करने’ मा मुझसे कहती. फिर 2-3 घंटे बाद दोनो बाहर आते और हम सब खाना खाते.
कुछ दिनो बाद मेरी एग्ज़ॅम ख़तम हो गयी. एग्ज़ॅम ख़तम होने के दिन मा मेरे पास आई और मुझसे कहा ‘कुछ दिनो पहले डिज़िल्वा ने मुझसे शादी करने का प्रस्ताव रखा हैं. और मैने हां करली हैं. तेरी एग्ज़ॅम थी इसलिए हम तुझे डिस्टर्ब नही करना चाहते थे’ ऐसा कह के मा मेरे गले लग गयी. ‘मैं बहुत खुश हूँ आज’ उसने कहा. मेरे तो पैरों तले ज़मीन निकल गयी, में कर भी क्या सकती थी. शादी की तैयारी सब शुरू हो गयी थी. मैने सोचा डिज़िल्वा भले ही गंदा आदमी हो पर वो कम से कम मा को खुश तो रखे गा. ये सोच के मेने अपने आप को मना लिया. ऐसे करते करते शादी का दिन आ गया.
शादी में कई बड़े लोग आए थे. फिल्म इंडस्ट्री के भी कुछ लोग आए थे. सलमान ख़ान, अमिताभ बचन, करटिना कैफ़ वगेरे वगेरे.
शादी के रीति रिवाज के बाद डिज़िल्वा ने मुझे अकेले बात करने के लिए बुलाया. उसके पास जा कर मैने कहा ‘आज से तुम मेरे डॅडी हो, अब तुम मेरे साथ कुछ नहीं कर सकते’
‘बिल्कुल ठीक बात कही तुमने, मैं भी ये ही कहने वाला था. सुन तुझे सलमान ख़ान कैसा लगा, शादी में देखा उसे ?’
‘हां देखा, बहुत हॅंडसम हैं ना ?’
‘पता हैं उसे भी तू बहुत पसंद आ गयी हैं, मुझे बार बार तेरे बारे में पूछ रहा था’
‘हटो तुम मज़ाक मत करो’
‘मज़ाक नही तेरी कसम, भला अपनी बेटी से झूठ थोड़े ही बोलूँगा, अगर तू चाहे तो अभी उसके साथ सेक्स कर सकती हैं, मेरे सिर्फ़ एक फोन से काम हो जाएगा’
‘तुम सच कह रहे हो ?’
‘हां, लगा दू फोन ?’
‘ठीक हैं’ मैने कहा.