मेने फिर भी अपने अटॅक जारी रखते हुए कहा – ये बात आपको पहले सोचनी चाहिए थी एसपी साब, अगर मे ये केस अपने हाथ में ना लेता तो क्या फिर भी आप इसी तरह अफ़सोस जताते..?
इस घर ने क्या नही दिया आपको, पढ़ाया लिखाया, इस काबिल बनाया और आप बाबूजी की बात को भी दरकिनार कर के अपने ऊपर के प्रेशर में आ गये…
वैसे बताना चाहेंगे… कि वो प्रेशर किधर से आया था…?
वो मेरी बात सुनकर सकपका गये… जल्दी ही कोई जबाब नही सूझा उन्हें,… मेने फिरसे चोट करदी…या मे बताऊ, वो प्रेशर किधर से आया था…?
उनके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगी… गिड-गिडाते हुए मेरा हाथ पकड़ा.. और मुझे एक तरफ को लेकर चल दिए…
सब लोगों से दूर मुझे एक कोने में ले जाकर बोले – मेरी इज़्ज़त बचा ले भाई… वादा करता हूँ.. फिर कभी अपने परिवार के खिलाफ नही जाउन्गा…
कामिनी की बातों में आकर मेने बहुत बड़ी भूल कर दी,…एक बार माफ़ कर्दे यार ! अपने भाई का कुछ तो मान रखले…
मे – ठीक है भैया, मे अपना केस वापस लेने को तैयार हूँ… लेकिन मेरी एक बात का जबाब देना होगा आपको…
एक आशा की किरण नज़र आते ही वो बोल पड़े… बोल भाई किस बात का जबाब चाहिए तुझे…मे तेरे हर सवाल का जबाब देने को तैयार हूँ…
मे – तो बताइए… ऐसी कॉन सी बात थी, जिसकी वजह से कामिनी भाभी ने आपको मदद करने से रोका था…?
भैया – शायद वो मोहिनी भाभी से नफ़रत करती है…, उस समय उसने हट ठान ली कि मे उस केस में उनकी कोई मदद ना करूँ, वरना वो शूसाइड कर लेगी…,
और उसकी इस हट के आगे मुझे झुकना पड़ा…
मे समझ गया कि भैया को असल बात पता नही है इसलिए उन्होने ये अस्यूम कर लिया है,
मे – तो फिर अब मुझसे मदद माँगने के बाद उनसे क्या कहेंगे..? क्या अब वो नही रोकेंगी आपको मदद लेने के लिए…?
वो थोड़ा दुखी स्वर में बोले – सच कहूँ मेरे भाई, तो मुझे भी अब उससे नफ़रत सी होने लगी है, उसकी आदतें बहुत खराब हैं… जिन्हें मे तुम्हें बता भी नही सकता…
वो अपने बाप की पॉवर का फ़ायदा उठाकर ना जाने क्या – 2 ग़लत सलत काम करती है..और मुझे भी करने के लिए उकसाती रहती है…
मुझे तो लगता है उसका चरित्र भी ठीक नही है, मे अब उससे किसी तरह छुटकारा पाना चाहता हूँ… लेकिन क्या करूँ मजबूर हूँ.
मेने अपनी नज़रें उनके चेहरे पर जमा दी, और उनके चेहरे को पढ़ने की कोशिश करने लगा, जहाँ मुझे एक बेबस इंसान ही नज़र आया…
अतः उनकी मजबूरी समझते हुए मेने कहा – ठीक है भैया…मे अपना केस वापस ले रहा हूँ, लेकिन वादा करिए… जाने से पहले आप मोहिनी भाभी से माफी ज़रूर माँगेंगे…
उन्होने मुझे अपने गले से लगा लिया, उनकी आँखों से आँसू निकल पड़े… और रुँधे गले से बोले – भाभी मुझे माफ़ कर देंगी…?
मे – बहुत बड़ा दिल है उनका… आइए मेरे साथ…
फिर हम दोनो घर के अंदर गये… भाभी और निशा आँगन में ही बैठी थी, जो हम दोनो को देखते ही उठ कर खड़ी हो गयी…
भैया दौड़ कर भाभी के पैरों में गिर पड़े, और रोते हुए बोले – अपने देवर को माफ़ कर दीजिए भाभी… मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गयी..
भाभी ने उनके कंधे पकड़ कर उठने को कहा और बोली – परिवार में एक दूसरे से माफी नही माँगी जाती देवर जी, कुछ फ़र्ज़ निभाने होते हैं…, जिन्हें शायद आप भूल गये थे…
अब अगर एक देवर अपनी भाभी से बात कर रहा है… तो भाभी कभी अपनों से नाराज़ ही नही हुई… हां एक पोलीस ऑफीसर को मे कभी माफ़ नही कर पाउन्गी…
फिर उन्होने निशा को इशारा किया, उसने भैया के पैर छुये…, तो वो उसकी ओर हैरत से देखने लगे…
भाभी मुस्कराते हुए बोली – अपने छोटे भाई की पत्नी को आशीर्वाद दीजिए देवर जी…
भाभी की बात सुनकर उन्होने मेरी तरफ मूड कर देखा… मे खड़ा-2 मुस्करा रहा था…
भैया – ये क्या भाई… इतनी नाराज़गी… अपने भाई को बुलाया तक नही…
मे – रामा दीदी तक को भी नही बुलाया, ये सब जल्दबाज़ी में और सिंपल तरीक़े से ही हुआ…, और वादा करिए, अभी ये बात आप भी किसी को नही बताएँगे…
वो कुछ देर और भाभी के पास रहे, गिले सिकवे दूर किए, और फिर बाहर चले गये…,
कुछ देर घर में ठहरकर मेने भाभी और निशा को बताया कि, मेने अपना केस वापस लेने का फ़ैसला लिया है, जो उन्होने भी उचित ठहराया..
भैया ने अपने साथ आए पोलीस वालों को वापस भेज दिया, और वो उस रात हमारे साथ ही रुके,
आज हम सभी एक साथ मिलकर बहुत खुश थे, रात में बैठ कर गीले शिकवे दूर करते रहे और फिर एक नयी सुबह के इंतेज़ार में सोने चले गये…
दूसरी सुबह घर से ही हम दोनो भाई सीधे कोर्ट गये, जहाँ मेने अपनी कंप्लेंट वापस ले ली.. इस तरह से मेने अपने भटके हुए भाई को वापस पा लिया था…!
दूसरे दिन बड़े भैया को यूनिवर्सिटी जाना था, कोई ट्रैनिंग प्रोग्राम में, दो दिन का टूर था, तो वो सुवह ही घर से निकल गये…
मेरे पास कोई काम नही था…, एक दो छोटे मोटे केस थे, जो मेरे असिस्टेंट ने ही संभाल लिए थे…तो मे सारे दिन घर पर ही रहा…पूरा दिन ऐसे ही निकाल दिया,
थोड़ा खेतों की तरफ निकल गया… बाबूजी से गॅप-सॅप की, चाचियों के यहाँ टाइम पास किया…
छोटी चाची के बच्चे के साथ खेला, उनके साथ रोमॅंटिक छेड़-छाड़ की.. और सारा दिन इन्ही बातों में गुजर गया… रात का खाना खाकर बाबूजी अपने चौपाल पर चले गये…
घर का काम काज निपटाकर भाभी और निशा दोनो ही मेरे रूम में आ गयी… उस वक़्त मे रूचि के साथ खेल रहा था…
वो मेरे पेट पर बैठी थी, मे उसकी बगलों में गुद-गुदि कर रहा था, जिससे वो इधर-उधर मेरे ऊपर कूदते हुए खिल-खिला रही थी…
जब हम तीनो आपस में बातें करने लगे.., थोड़ी देर में ही रूचि सोगयि तो भाभी उसे अपने रूम में सुलाने ले गयी,…
वापस आकर भाभी हमारे पास ही पलंग पर आकर बैठ गयी, और मुझसे अपने देल्ही के दिनो के बारे में पूछने लगी…
भाभी – आज थोड़ा अपने देल्ही में बिताए हुए दिनो के बारे में कुछ बताओ लल्ला जी, क्या कुछ किया इन 4 सालों में…
मे निशा की तरफ देखने लगा… तो भाभी… मज़े लेते हुए बोली –
अच्छा जी ! तो अब भाभी से ज़्यादा बीवी हो गयी… उसकी पर्मिशन चाहिए बोलने को… कोई बात नही, निशा तू ही बोल इनको ….
वो तो बस नज़र झुकाए मुस्कराए जा रही थी..
मेने कहा – ऐसी बात नही है भाभी… बस ऐसी कुछ खट्टी-मीठी यादें हैं, जो शायद निशा हजम ना कर सके..
भाभी – क्यों ऐसा क्या किया जो उसे हजम नही होंगी..? कोई लड़की वाडकी का चक्कर था क्या…?
मे – ऐसा ही कुछ समझ लीजिए…
निशा शिकायत भरे लहजे में बोली – मेने आपसे एक बार कह दिया है ना, कि आपकी निजी जिंदगी से मुझे कोई प्राब्लम नही है फिर भी आप…बार-बार ऐसा क्यों कहते हैं…जी.
मे – चलो ठीक है बताता हूँ…. और फिर मे उन दोनो को अपने देल्ही में गुज़रे सालों के बारे में बताने लगा…
पहले साल तो ज़्यादा कुछ ऐसा नही था, जो कह सके कि बताने लायक हो, ऐसी ही कुछ सामान्य सी बातें, कॉलेज हॉस्टिल की…
फिर मेने दूसरे साल के बारे में हुई घटना उन्हें कह सुनाई…, कैसे मेने नेहा की इज़्ज़त बचाई, जिसकी वजह से मुझे गोली लगी और मे घायल हो गया..!
गोली लगने की बात सुनकर भाभी और निशा दोनो के ही चेहरों पर पीड़ा के भाव आ गये, भाभी अपने माथे पर हाथ मारते हुए बोली –
हे राम ! कहाँ लगी थी गोली लल्ला…? मेने उन्हें अपने कंधे के निशान को दिखाया…
वो – शुक्र है भगवान का की कंधे पर ही लगी…. फिर क्या हुआ….?
फिर कैसे नेहा मुझे वहाँ से लेकर आई, मेरा इलाज़ कराया…
नेहा के मम्मी दादी से मुलाकात हुई, नेहा के दादी प्रोफेसर राम नारायण जो हमारे कॉलेज के सबसे काबिल प्रोफेसर थे…
उस घटना के बाद मे उनका फेवोवरिट स्टूडेंट बन गया… और मेरा उनके यहाँ आना-जाना शुरू हो गया….!
मेने अपने देल्ही में गुज़ारे हुए वक़्त के बारे में भाभी और निशा को बताते हुए आगे कहा –
प्रोफेसर राम नारायण हमारे कॉलेज के सबसे काबिल प्रोफेसर ही नही, सुप्रीम कोर्ट के जाने माने वकील भी हैं…
उनकी बेटी नेहा लॉ ख़तम कर के उनके अंडर ही प्रॅक्टीस कर रही थी…
उस घटना के बाद मेरा उनके घर आना जाना शुरू हो गया… अगर मे एक हफ्ते उनके यहाँ नही जा पाता तो, या तो खुद प्रोफेसर मुझे कॉलेज में बोलते, नही तो नेहा का फोन आ जाता…
एक तरह से मे उनके घर का सदस्य जैसा हो चुका था, आंटी भी मुझे बहुत प्यार करती थी, बिल्कुल अपने सगे बेटे की तरह….
नेहा और मे जब भी अकेले होते, तो एक दूसरे के साथ छेड़-छाड़ करते रहते, दिनो-दिन हम दोनो के बीच की दूरियाँ कम होती जा रही थी…
हँसी मज़ाक के दौरान, एक दूसरे के शरीर इतने पास हो जाते की एकदुसरे के बदन की गर्मी महसूस होने लगती…,
कभी-2 वो मुझे मारने दौड़ती, जब में उससे पिट लेता तो उसके बाद वो मेरे कंधे पर अपना सर टिका कर सॉरी बोलती…
इसी बीच अगर जब भी हमारी नज़रें टकराती, तो उन में एक दूसरे के लिए चाहत के भाव ही दिखाई देते…
दिन बीतते गये, सेकेंड एअर के फाइनल एग्ज़ॅम का समय नज़दीक था, नेहा मुझे कोर्स से संबंधित ट्रीट देती रहती थी… अब मे ज़्यादातर समय उनके यहाँ ही बिताने लगा था…
जब वो अपने काम से फ्री होती, मुझे बुला लेती, वैसे वो भी जड्ज के सेलेक्षन एग्ज़ॅम के लिए प्रेपरेशन कर रही थी…
एक दिन सॅटर्डे शाम को मे और नेहा एक साथ स्टडी कर रहे थे, प्रोफ़ेसर. और आंटी देल्ही के बाहर गये हुए थे किसी रिलेटिव के यहाँ फंक्षन अटेंड करने…
मेने नेहा को एक प्राब्लम के बारे में पूछा, हम दोनो एक ही सोफे पर बैठे थे…
उसने मेरी प्राब्लम को पढ़ा, बुक मेरी जांघों पर ही रखी थी… वो मुझे बुक में से ही मेरी ओर झुक कर समझा रही थी…
नेहा एक बहुत ही खूबसूरत, फिट बॉडी, परफेक्ट फिगर वाली 25-26 साल की लड़की थी, उसका फिगर 33-28-34 का था…
इस समय वो एक हल्के से कपड़े का स्लीव्ले टॉप, जो कुकछ डीप नेक था, और एक सॉफ्ट कपड़े की ढीली सी लोवर, जो उसके कुल्हों पर टाइट फिट, लेकिन नीचे वो काफ़ी ढीली-ढली पाजामी जैसी थी…
जब वो झुक कर मुझे समझा रही थी… तो उसके गोल-गोल, दूधिया बूब्स लगभग आधे मेरी आँखों के सामने दिखने लगे…
ना चाहते हुए मेरी नज़र उसके सुंदर से दूधिया चट्टानों पर जम गयी…
समझाते हुए जब उसने मेरी तरफ देखा, तो उसने मुझे उसके दूधिया उभारों को ताकते हुए पाया…
उसके चेहरे पर एक मीठी सी मुस्कान आ गयी…उसे पता था, कि मेरी नज़रें उसके सुंदर वक्षो का बड़े प्यार से अवलोकन कर रही हैं…
उसने मुझे कुछ नही कहा, और अपना एक हाथ मेरी जाँघ पर रख दिया.. जिसके कारण वो थोड़ा सा और झुक गयी… अब मे उसके उभारों को और अच्छी तरह से देख पा रहा था…
अब बस मुझे उसके नुकीले निपल ही नही दिख पा रहे थे…लेकिन वो मेरी नज़रों का स्पर्श पाकर उत्तेजना के कारण कड़क हो गये थे… जिसका सबूत वो उसके टॉप के मुलायम कपड़े को उठाकर दे रहे थे…
ऐसा लग रहा था, वो मानो उसके कपड़े को चीर कर पार ही हो जाएँगे…
शायद नेहा ने ब्रा नही पहना था… जो उसने बाद में बताया भी था, कि वो बाहर से आते ही अपनी ब्रा और पेंटी निकाल देती है…
कुछ देर वो ऐसे ही झुक कर मुझे समझाती रही.. और धीरे-2 मेरी जाँघ को अपने बोलने के इंप्रेशन के साथ कभी दबा देती, कभी सहला देती, मानो अपने बोलने का डाइरेक्षन उसके हाथ से दे रही हो….
फिर अचानक मुझे छेड़ने के लिए, उसने मुझसे उसी सब्जेक्ट से संबंधित सवाल पुच्छ लिया… मेरा ध्यान तो उसकी चुचियों की सुंदरता में खोया हुआ था…
तो मे उसके सवाल पर ध्यान ही नही दे पाया, उसने अपना सवाल फिर से रिपीट किया… तो मे हड़बड़ा कर बोला…
क.क.क्ककयाअ पूछा आपने दीदी….??
वो खिल खिलकर हँस पड़ी…. और बोली तुम्हारा ध्यान कहाँ है मिसटर… लगता है, मे बेकार में ही अपनी एनर्जी वेस्ट कर रही हूँ…
मे – नही..नही.., ऐसी बात नही है, दरअसल मे कुछ सोच रहा था… और झेन्प्ते हुए मेने अपनी नज़रें झुका ली…
वो – मुझे पता है, तुम क्या सोच रहे थे…? लेकिन अभी पढ़ने पर ध्यान दो, सोचने पर नही…
मे – सॉरी दीदी… वो मे. .. वो…..
वो फिर हँसने लगी… और शरारत से बोली – इट्स ओके.. होता है.. सामने इतना अच्छा सीन हो तो ध्यान भटक ही जाता है… है ना..!
मे – नही मे.. ..वो… ऐसा नही है…
वो – क्या तुम्हें अच्छे नही लगे वो ….?
मे – क्या…? आप किस बारे में बोल रही हैं… मेरी तो कुछ समझ में नही आ रहा…
वो – मुझे बेवकूफ़ समझते हो… अब बोल भी दो… मुझे अच्छा लगेगा…
मे – क्या बोल दूं.. दी..?
वो – वही की तुम्हें मेरे बूब्स अच्छे लगे… क्यों है ना अच्छे… बोलो…
मे शरमाते हुए बोला – हां ! बहुत सुंदर हैं…सच में आप बहुत ही सुंदर हैं दी…
वो – तो अब तक चुप क्यों थे… या आज ही देखा है तुमने मुझे…!
मे – नही मुझे तो आप हमेशा से ही सुन्दर लगती थी, लेकिन कह नही सका…ये कहते हुए मेने उनके फूले हुए रूई जैसे मुलायम गाल पर एक किस कर दिया…
शर्म से उसका चेहरा लाल हो गया… और चेहरे पर एक मीठी सी मुस्कान गहरा गयी…! नज़र झुका कर वो बहुत ही धीमे स्वर में बोली…
मुझे भी तुम बहुत अच्छे लगते हो अंकुश… आइ लव यू !
उसके मुँह से ये शब्द सुनते ही मेने उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों पर एक किस जड़ दिया…
उसने भी अपनी मांसल गोरी-गोरी बाहें मेरे इर्द-गिर्द लपेट दी.. और मुझे पलटकर किस कर दिया…
उसके सुन्दर से गोल-मटोल चेहरे को अपनी हथेलियों में लेकेर मे उसकी बड़ी-बड़ी, काली आँखों में झाँकते हुए बोला ….
आप बहुत सुंदर हो दीदी… आइ लव यू टू… और उसके सुर्ख रसीले होंठों को चूसने लगा… वो अपनी आँखें बंद कर के मेरा साथ देने लगी…
हम दोनो की साँसें भारी होने लगी, आँखों में वासना के लाल-लाल डोरे तैरने लगे…बिना ब्रा के उसके सुडौल गोल-गोल संतरे… मेरे सीने में दब रहे थे..
मेने उसकी कमर में हाथ डाल कर उसे अपनी गोद में बिठा लिया, अब वो मेरे दोनो ओर अपने घुटने मोड़ कर मेरी गोद में बैठी थी….
मेरे दोनो हाथ उसके संतरों पर पहुँच गये और उन्हें धीरे से सहलाने लगा…
इसस्स्शह….. आआहह….अंकुश… ज़ोर से दबाओ इन्हेन्न…प्लीज़…,
उसकी तड़प देखकर मेने उसके टॉप को निकाल दिया, और गोल-गोल चुचियों को दोनो हाथों में लेकर मसल दिया…
सस्स्सिईईईईईई………आआहह…….बेड रूम में चलें…नेहा तड़प कर बोली…
मे – दीदी, क्या आप मेरे साथ ये सब करना चाहती हैं….?
वो आश्चर्य के भाव अपने चेहरे पर लाते हुए बोली – तो अब तक क्या तुम यौन ही.. ये सब कर रहे थे…? जल्दी चलो.. अब नही रुक सकती मे…आअहह…
मेने उसे उसी पोज़िशन में उठा लिया.. उसकी बाहें मेरे गले में लिपटी हुई थी.. उसके गोल-मटोल तरबूज जैसे चुतड़ों को मसलते हुए उसके बेड रूम में ले आया..
उसे बेड पर पटक कर मे उसके ऊपर आ गया, और उसके होंठों को एक बार और चूम कर उसकी चुचियों को चूसने लगा….
उसके सुडौल सम्पुरन गोलाई लिए कड़क चुचियों की सुंदरता देख कर मे बबला सा हो गया… और झपट्टा सा मार कर उन पर टूट पड़ा….
उन्हें चूस्ते हुए मेने कहा – आपकी चुचियाँ बहुत सुंदर हैं दीदी….जी करता है खा जाउ इनको….
आआहह….हाआंणन्न्…खा जाऊओ..सस्सिईइ…उउउम्म्म्म….और ज़ोर से चूसो इन्हें…
मेने उसके कंचे जैसे कड़क निप्प्लो पर अपने दाँत मार दिए….
वो मज़े और पीड़ा से बिल-बिला उठी….और मुझे ज़ोर से अपनी बाहों में कस लिया…..
मेरी और नेहा के पहले मिलन की दास्तान भाभी और निशा दम साधे हुए सुन रही थी…वो दोनो एक तरह से मानो उस सीन में खो सी गयी…
उन दोनो की साँसें धीरे-2 अनियंत्रित होती जा रही थी…
मेने एक नज़र उन दोनो पर डाली… उनकी अवस्था देख कर मेरे चेहरे की मुस्कान गहरी हो गयी…
मुझे चुप होते देख… वो दोनो मेरी तरफ देखने लगी…फिर उन्होने एक दूसरे की तरफ देखा… और फिर शरमा कर अपनी नज़रें झुका ली…
भाभी से इंतेज़ार नही हुआ सो बोल पड़ी… आगे भी बोलो देवेर जी… फिर क्या हुआ ?
मेने निशा की कमर में हाथ डालकर अपनी ओर खींच लिया, और उसकी कमर सहलाते हुए आगे बोलना शुरू किया….!
नेहा की मस्त मोटी-मोटी गदराई हुई चुचियाँ जो एकदम पेरफक्त गोलाई लिए हुए थी, देखकर मेरा संयम खो गया और मे उन पर बुरी तरह से टूट पड़ा…
पहले तो उन्हें दोनो हाथों में भर कर सहलाया, फिर एक को मुँह में लेकर चूसने लगा…
नेहा मज़े से आहें भरने लगी, और अपने हाथ का दबाब मेरे सर पर डाल कर चुचि चुसवाने का मज़ा लेने लगी..
एक हाथ से मे उसके दूसरे आम को मसल रहा था, उसके निपल लाल सुर्ख किसी जंगली बेर जैसे लग रहे थे… जिसे मेने अपने दाँतों में दबा कर खींच दिया…
वो एकदम से उच्छल पड़ी.. और उसके मुँह से एक मादक सिसकी फुट पड़ी…
ईीीइसस्स्स्स्स्स्सस्स……आअहह….खाजाओ…ईसीईए अंकुश….प्लीज़ और चूसो इन्हें….
बड़ा मज़ा आरहा है…मेरी जानणन्न्…आआययईीीईईई……मुम्मिईीईई…..उउफफफ्फ़….
मेने उसकी चुचियों को चूस-चूस कर लाल कर दिया…
उसने मेरी टीशर्ट को खींच कर निकाल दिया और मेरी नंगी पीठ को सहलाने लगी..
मे पीछे खिसकते हुए पलंग के नीचे आ गया और उसके ढीले ढाले लोवर को खींच कर निकल फेंका… वो बिना पेंटी के ही थी…
अब उसकी मुनिया मेरी आँखों के सामने थी…जिसपर छ्होटे-2 बाल थे, शायद एक हफ्ते के तो रहे होंगे…
मेने पलंग पर घुटने टेक कर उसकी मुनियाँ के आस-पास की फसल को सहला दिया…
सीईईईईईईईईई……ऊहह….गोद्ड़द्ड…इतना मज़ाअ…. वो सिसक पड़ी… उसकी मुनिया गीली हो चुकी थी… जिसे मेने चाट कर और गीला कर दिया…
नेहा ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होंठों पर टूट पड़ी…, साथ में एक हाथ से मेरे लोवर को नीचे कर दिया, फिर पैर से उसे मेरे पैरों तक ले गयी…
मेरा शेर पूरी तरह पोज़िशन में आ चुका था, जो अब उसकी टाँगों के बीच उच्छल-कूद मचा रहा था…
एक बार उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर उसे मुट्ठी में कसकर उसकी सख्ती को चेक किया… फिर मेरे होंठ चूसना बंद कर के वो बोली…
तुम्हारा ये तो बहुत बड़ा है… अपने अंदर कैसे ले पाउन्गि मे इसे…?
मेने कहा – पहले किसी का नही लिया है क्या…?
वो – लिया तो है एक-दो बार पर वो तो… इतना बड़ा नही था…
मेने कहा – कोई नही, ये भी आराम से चला जाएगा.. आप चिंता ना करो…
वो उसे दबाते हुए बोली – तो अब जल्दी करो… डियर, अब और ज़्यादा सबर नही हो रहा मुझसे….
मेने उसकी टाँगों के बीच बैठ कर उसके घुटने मोड़ दिए और उसकी गीली चूत को एक बार चाट कर अपनी जीभ से ऊपर से नीचे तक और गीला कर दिया…
फिर उसकी फूली हुई चूत की फांकों को खोलकर अपने मूसल को उसके छेद पर टिकाया… और एक धक्का धीरे से लगा दिया…
सच में उसकी चूत ना के बराबर ही चुदि थी… मुश्किल से मेरा मोटा सुपाडा उसमें फिट हो पाया… उसने अपने होंठों को कस कर बंद कर लिया…
मेने एक और ज़ोर का धक्का लगाया… मेरा मोटा लंड सरसरकार आधे से ज़्यादा उसकी कसी हुई चूत में घुस गया…
उसके मुँह से कराह निकल गयी….
अहह……धीरीई…अंकुशह…दर्द..होरहाआ…है…उ…..माआ…
मेने थोड़ा रुक कर फिर से एक धक्का और लगाया, अब मेरा पूरा लंड उसकी सन्करि चूत में फिट हो गया था… दर्द से उसके आँसू निकल पड़े…
और उसने बेडशीट को अपनी मुत्ठियों में कस लिया….
मेने उसके होंठ चुस्कर अपने हाथों से उसकी चुचियाँ सहलाने लगा… कुछ देर में उसका दर्द कम हो गया… और वो नीचे से अपनी कमर उचकाने लगी…
मेने इशारे को समझ कर धीरे-2 लयबद्ध तरीक़े से अपने धक्के लगाने शुरू कर दिए, शुरुआत में कुछ देर आराम से आधे लंबाई में…
फिर जब मेरा लंड उसके कामरस से गीला हो गया, तो पूरे शॉट लगाते हुए मेने अपनी स्पीड बढ़ा दी.. नेहा भी फुल मस्ती में अनप शनाप बड़बड़ाती हुई मज़े से चुदाई का मज़ा लेने लगी….!
एक उसके झड़ने के बाद मेने उसे पलंग पर घोड़ी बना लिया, और पीछे से उसकी चूत में लंड डालकर वो रगड़ाई की….
वो हाई..तौबा मचाती हुई, चुदाई में लीन हो गयी… हम दोनो को ही बहुत मज़ा आ रहा था……,
20-25 मिनिट की धुआँधार चुदाई के बाद मेने अपना पानी उसकी गरम-2 चूत में उडेल दिया… वो फिर एक बार झड़ने लगी…
इस तरह से हम दोनो के बीच शरीरक संबंध बन गये…
फिर तो जब भी मौका मिलता… हम एक दूसरे में समा जाते… वो मुझे बहुत प्यार करने लगी थी…
धीरे – 2 समय गुज़रता गया, एक दो अटेंप्ट में उसका सेलेक्षन हो गया, और वो लोवर कोर्ट की जड्ज बन गयी…
उसके बाद भी हम मिलते रहे… जब मेरे फाइनल एअर के एग्ज़ॅम हो गये, और रिज़ल्ट का वेट कर रहा था, तभी प्रोफेसर साब ने उसकी शादी करदी, एक आइएएस ऑफीसर के साथ…
रिज़ल्ट आने के बाद उन्होने मुझे अपने साथ प्रॅक्टीस करने को कहा, अब उनसे अच्छा गुरु कहाँ मिलता सो मेने हां करदी…
शादी के बाद भी नेहा मुझसे मिलने आ जाती थी, फिर मेने एक दिन उसे समझाया, कि अब हम दोनो को नही मिलना चाहिए,
ये उसके और उसके दोनो परिवारों की प्रतिष्ठा के लिए ठीक नही है…वो मानना नही चाहती थी, फिर मेरे ज़्यादा ज़ोर देने पर वो मान गयी, और हम दोनो का मिलना धीरे-2 कम होता गया…
मे ये कहानी पलंग पर बैठ कर ही बता रहा था, सिरहाने से टेक लिए हुए… मेरे एक तरफ निशा बैठी थी और दूसरी तरफ भाभी…
कहानी सुनते-2 निशा उत्तेजित होकर और अपना आपा खो बैठी, भाभी की मौजूदगी में ही वो मेरे बदन से चिपक गयी, और मेरे सीने को सहलाने लगी,
उसकी मिडी जांघों तक चढ़ि हुई थी, और वो अपनी एक टाँग मेरे ऊपर रखकर अपनी सुडौल मक्खन जैसी चिकनी जाँघ से मेरे लंड को मसल रही थी…
भाभी थोड़ा दूरी बनाए हुए अढ़लेटी सी बैठी अपनी मदहोश नज़रों से निशा की हरकतों को देख रही थीं..,
लेकिन अपनी बेहन के पति के साथ उसकी मौजूदगी में पहल नही कर पा रही थी, सो मेने उनकी कमर में हाथ डालकर अपनी तरफ खींच लिया.. और बोला…
अब आप क्यों शरमा रही हो भाभी…जब छुटकी को कोई प्राब्लम नही है तो…
वो हँसते हुए मुझसे चिपक गयी और मेरे होंठों पर किस कर के बोली…
मे तो तुम्हारे रिक्षन का वेट कर रही थी…ये कह कर उन्होने मेरी टीशर्ट निकाल फेंकी और मेरे निप्प्लो को जीभ से चाट लिया…
सस्सिईईईईईई………अहह… भाभी….आप जादूगरनी हो सच में….निशु डार्लिंग…. कुछ सीखले अपनी बडकी से…….
मेरी बात सुन कर दोनो खिल खिला कर हँसने लगी…, फिर उन दोनो ने मिलकर मेरे ऊपर हमला बोल दिया…
उन दोनो के बीच की सारी शर्म लिहाज की दीवार ढह गयी, अब वो दोनो मदरजात नंगी मेरे आगोश में लिपटी हुई थी…
भाभी ने मेरे लंड पर कब्जा कर लिया, तो निशा ने मेरे उपरी हिस्से को संभाला, हम तीनों ही एक दूसरे को भरपूर आनंद देने की कोशिश में जुट गये…
फिर शुरू हुआ चुदाई का दौर… मेने निशा की टाँगें चौड़ी कर के भाभी से कहा –
भाभी मेरी इच्छा है, कि आप अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ कर अपनी छुटकी की चूत पर रखें…
भाभी ने हंस कर प्यार से मेरी पीठ पर एक धौल जमाई… और फिर मेरे मूसल जैसे लंड को अपनी मुट्ठी में लेकर उसे निशा की चूत के होंठों पर रगड़ा….
निशा इसी कल्पना में कि उसकी बड़ी बेहन उसके पति का लंड चूत पर रगड़ रही है, उसकी चूत ने लार बहाना शुरू कर दिया…
फिर उन्होने उसे उसके संकरे छेद पर सेट कर के अपनी एक उंगली मेरी गान्ड के छेद में डाल दी…
ऊुउउक्छ ! ऑटोमॅटिकली मेरी गान्ड में झटका लगा, और मेरा लंड सरसरकार निशा की गीली चूत में चला गया…
भाभी की चुचियाँ चूस्ते हुए मेने धक्के लगाना शुरू कर दिया..
दोनो की कामुक सिसकियों से कमरे का वातावरण चुदाईमय हो गया था…
हम तीनों रात भर रासलीला में मस्त रहे… सुबह के 5 बज गये, लेकिन उनमें से कोई हार मानने को तैयार नही थी…
कभी में भाभी को घोड़ी बनाकर चोद रहा होता तो निशा उनके नीचे लेटकर चूत सहलाती, जीभ से उनकी क्लिट को चाटती…
दूसरे सीन में जब निशा मेरे लंड का स्वाद ले रही होती, और भाभी अपनी चूत मेरे मुँह पर रखा कर उसे चटवा रही होती…
तीनों की आहों करहों और सिसकियों से कमरे का वातावरण बहुत ही मादक हो गया था, वातावरण में वीर्य और कामरस की सुगंध फैली हुई थी…
मे एक बार झड़कर साँसें इकट्ठी करता, कि दूसरी मेरा लंड चुस्कर उसे फिरसे तैयार करने में जुट जाती…
आज मुझे उन दोनो को देखकर ऐसा लग रहा था, मानो उनके अंदर सेक्स की देवी रति की आत्मा घुस गयी हो…
आख़िर में मुझे ही हथियार डालने पड़े, और हाथ जोड़कर बोला…अब मुझे माफ़ करो मेरी मल्लिकाओ… मेरी टंकी अब पूरी खाली हो गयी…
भाभी ठहाका लगा कर बोली – हाहाहा….क्यों लल्लाजी…निकल गयी सारी हेकड़ी… एक अकेली को तो कितना रौन्द्ते हो…
उनकी बात सुनकर मेरी और निशा की भी हसी छूट गयी…
फिर वो दोनो अपने-2 कपड़े पहनकर मुझे किस कर के बाहर निकल गयी क्योंकि अब उन दोनो के सोने का समय नही था…
उनके निकलते ही मे चादर तान कर लंबा हो गया… और सीधा 10 बजे जाकर उठा…!
दोनो बहनें एक दूसरे के सामने खुल चुकी थी, जो एक तरह से मेरे लिए अच्छा ही रहा… अब मे किसी को भी किसी के सामने पकड़ कर चोद सकता था….!
धीरे – 2 मेरी वकालत जमती जा रही थी, एक-दो छोटे बड़े केस मिलने लगे थे.. तो अब मुझे घर से पैसे लेने की ज़रूरत नही पड़ती थी…!
जस्टीस धिन्गरा की वजह से छोटे-मोटे केस तो कॉन्फिडेंट्ली हाल हो ही जाते थे,
धीरे -2 कोर्ट परिसर में मेरा भी नाम अन्य वकीलों के साथ लिया जाने लगा…
फिर एक दिन भाग्यवश, एक बड़ा क्लाइंट मिल गया,
भगवान दास गुप्ता, शहर में रियल एस्टेट का अच्छा ख़ासा नाम, लेकिन थोड़ा सीधा-सादा डरपोक किस्म का इंशान…
गुप्ता जी की शहर के बीचो-बीच एक बहुत बड़ी ज़मीन पर कुच्छ गुंडा तत्वों ने कब्जा जमा रखा था, और फर्दर कन्स्ट्रक्षन ना हो इसके लिए स्टे डाल के रखा था…!
गुप्ता जी बेचारे सीधे सादे बिज्निस, काफ़ी दिनो से इस ज़मीन को लेकर परेशान थे, उनको किसी ने मेरा नाम सुझाया इस मसले को हल करने के लिए….
जब वो आकर मुझसे मिले, अपना केस बताया…मुझे लगा कि ये वाकई में परेशान हैं….
मेने उनका केस ले लिया, और जल्दी से जल्दी उनकी ज़मीन से स्टे हटवाया,
कोर्ट का ऑर्डर लेकर जब साइट पर पहुँचे, उस समय 8-10 मुस्टंडे वहाँ चरस और गांजे की महफ़िल जमाए हुए थे…
वहाँ पहुँचने से पहले ही मेने एसपी ऑफीस को फोन कर दिया था, लेकिन पोलीस को पहुँचने में अभी वक़्त था…
मेरे साथ गुप्ता जी का मॅनेजर और दो उसके असिस्टेंट थे, मेने उन गुण्डों को कोर्ट का ऑर्डर दिखाया और कहा –
भाई लोगो, अपना ये मजमा यहाँ से हटाओ और ये जगह खाली करो, कोर्ट ने यहाँ कन्स्ट्रक्षन की पर्मिशन दे दी है…
उनमें से उनका सरगना आगे आया, बड़ी-बड़ी ऐंठी हुई मूँछे भारी भरकम शरीर, नशे से सुर्ख लाल-लाल आँखें,
अपनी कमर पे हाथ रखकर बोला – जाओ वकील साब, अपना काम करो, हम ऐसे किसी कोर्ट के आदेश से नही डरते…, बहुत बार देखे हैं ऐसे कागज…
मे – देखो, मे प्यार से तुम्हें समझा रहा हूँ, चुप-चाप ये जगह खाली करके निकल जाओ…तुम लोगों की सेहत के लिए अच्छा रहेगा…वरना…!
वो अपने बाजू उपर करते हुए अकड़ कर बोला – वरना क्या कर लेगा तू.. कल का लौंडा मुझे तडी देता है, तेरे जैसे 36 काले कोट वाले हमारी जेब में पड़े है….
वो अपनी बात पूरी करता कि तदददाअक्कक…मेरा भरपूर तमाचा उसके गाल पर पड़ा…, पाँचों उंगलियाँ उसके गाल पर छाप दी…
वो अपना गाल सहलाते हुए भिन्नाता हुआ, मेरी तरफ झपटा, मेने लपक कर बाए हाथ उसका गला जाकड़ लिया, और सीधे हाथ का एक भरपूर मुक्का उसकी नाक पर मारा…!
उसकी नाक से खून बहने लगा, दर्द से वो तिलमिला उठा, और चीख कर अपने नशेड़ी चम्चो से बोला –
देख क्या रहे हो मदर्चोदो, मारो सालों को, वो लोग जैसे नींद से जागे हों, नशे की वजह से वो गिरते पड़ते अपनी जगह से उठे, कि तभी…
इससे पहले कि वो उसकी मदद के लिए आते, मैदान में पोलीस साइरन की आवाज़ गूंजने लगी…
वो जहाँ के तहाँ खड़े रह गये..
कृष्णा भैया अपने दल-बल के साथ समय पर पहुँच गये, और उन सबको ड्रग्स के साथ अरेस्ट करके जैल में डाल दिया…
इस तरह से उनकी मदद से पोलीस के द्वारा उन गुण्डों को वहाँ से हटाया… और उनकी ज़मीन उनको दिलवा दी…!
दरअसल वो गुंडे उनके राइवल्री बिल्डर योगराज के बिठाए हुए थे, गुप्ता जी को परेशान करने के लिए…, ये बात मुझे पोलीस से ही पता चली…
इससे पहले पोलीस बड़े-बड़े प्रेशर की वजह से उन पर हाथ ही नही डालती थी, क्योंकि योगराज की दोस्ती यहाँ के कमिशनर और एमएलए के साथ थी…
अब वो गुंडे अवैद्य कब्ज़े और ड्रग बेचने के जुर्म में दो-चार साल तक बाहर आने वाले नही थे…
जब ये बात मेने गुप्ता जी को बताई, तो उन्हें बड़ा दुख हुआ, लेकिन भले आदमी ने योगराज के खिलाफ एक शब्द नही कहा,
बस प्रभु उन्हें सद्बुद्धि दे, ये कहकर बात को टाल दिया…
लेकिन इस सब से खुश होकर उन्होने उस ज़मीन से एक बंगले के लायक ज़मीन मेरे नाम करदी,
मेने उन्हें बहुत माना किया… लेकिन वो नही माने, और अपनी फर्म का मुझे लीगल आड्वाइज़र ही बना दिया…..
यही नही, अपनी ही एक बिल्डिंग में 3बीएचके फ्लॅट भी मुझे रहने के लिए दे दिया, जिससे मे एमर्जेन्सी पड़ने पर शहर में रुक सकूँ…
गुप्ता जी जैसा बड़ा क्लाइंट मिलने से मेरी खुद की फाइनान्षियल प्राब्लम काफ़ी हद तक पटरी पर आने लगी…!
कभी कभार कोर्ट के काम से कृष्णा भैया से भी मुलाकात हो जाती थी,
वो अपने एसपी आवास पर आने के लिए मुझे बोलते थे, लेकिन मे उन्हें मना कर देता, क्योंकि जब तक कामिनी भाभी उनके साथ रह रही है, तबतक मे उनके यहाँ नही जाना चाहता था…!
उधर कामिनी को जब पता चला कि उसका मोहरा निशा के मामले में बुरी तरह से पिट गया है, और उपर से कृष्णा भैया ने मेरे साथ राज़ीनामा कर लिया है, तो वो और बुरी तरह से भिन्ना उठी…
जिसका असर उन दोनो के संबंधों पर और ज़्यादा पड़ने लगा,
अब वो आए दिन उनके साथ बुरे से बुरा वार्ताव करने लगी, भैया की मजबूरी थी, कि वो उसके खिलाफ कोई कड़ा फ़ैसला नही ले सकते थे…
बस लहू का सा घूँट पीकर वर्दास्त कर रहे थे…!
एक दिन उन्होने मेरे ऑफीस में आकर अपनी दुख भरी दास्तान सुनाई, उनकी आँखों में मजबूरी के आँसू थे..
मेने उन्हें हिम्मत बाँधते हुए कहा – हौसला रखिए भैया, हर बुराई की अपनी समय सीमा होती है, उसके बाद उतना ही सुखद सबेरा भी आता है…
आप देखना एक दिन खुद ही नियती ऐसा कोई खेल खेलेगी कि आप उसके चंगुल से आज़ाद हो जाओगे…!
और वाकाई में नियती धीरे-2 इस दिशा में आने वाले समय की पटकथा लिख रही थी…
दिनो-दिन कामिनी की गति-विधियाँ रहस्यमयी होती जा रही थी…, अब उन्होने उसपर ध्यान देना ही बंद कर दिया था…!
कृष्णा भैया अपनी पोलीस की ड्यूटी में व्यस्त रहने लगे और कामिनी अपनी दुनिया में…
पति-पत्नी का रिस्ता तो जैसे नाम मात्र का ही रह गया था…
खैर.. इन्हें अपने हाल पर छोड़ देते हैं…, और अपने रास्ते लगते हैं…
क्योंकि जो जैसा करता है, फल भी उसे उसी हिसाब से मिलता है…, इन्हें भी मिलेगा……,
हां थोड़ा समय ज़रूर लग सकता है…
हेरा फेरी फिल्म के इस गाने की लाइन्स की तरह……
दरबार में उपरवाले के अंधेर नही पर देरी है…!
तक़दीर का सारा खेल है ये, और वक़्त की हेरा फेरी है…..!!
राजेश की रिहाई और फिर कृष्णा भैया के फिरसे घर के साथ संबंध सुधरने के बाद, घर का माहौल थोड़ा रिलॅक्स हो गया था, फिलहाल मुसीबतों का दौर गुजर गया था…
हमारी शादी बहुत ही नॉर्मल तरीक़े से आनन-फानन में हुई थी,
निशा और मे एक तरह से सही मैने में ये भी नही जान पाए कि नयी शादी का एंजाय्मेंट क्या होता है…
भाभी ने हम दोनो को कहीं अच्छी जगह जाकर हनिमून मनाने की सलाह दी..
मेने उन्हें टालना चाहा, तो उन्होने ये बात भैया और बाबूजी के सामने रख दी, जिसे उन्होने भी सही ठहराते हुए मुझे कहीं घूमने जाने के लिए मजबूर कर दिया…
मेने सोचा ! क्यों ना देल्ही जाया जाए, एक पन्थ दो काज, रामा दीदी के साथ-साथ अपने गुरु और नेहा से भी निशा को मिला लाउन्गा…
मेने अपना प्लान घर में सबको बताया, और टिकेट बुक कराकर एक दिन हम दोनो देल्ही निकल लिए…
एक अच्छे से होटेल में कमरा लिया, कमरे में पहूचकर फ्रेश हुए और उसके बाद रामा दीदी को फोन लगाया…
पहले तो वो मेरी आवाज़ सुनकर बहुत खुश हुई, और जब मेने बताया कि मे और निशा यहीं देल्ही में ही हैं…तो वो तुरंत बोली..
ये तो बहुत ही अच्छी बात है, तुम लोग जल्दी आ जाओ, तब तक मे तुम्हारे खाने-पीने का इंतेज़ाम करके रखती हूँ..
लेकिन जब मेने उसे ये बताया कि हम होटेल में ठहरे हुए हैं, तो वो बहुत नाराज़ हुई, मेने उसे समझाने की कोशिश करते हुए कहा,
हमारी वजह से तुम्हारी प्राइवसी खराब होगी, 2 बीएचके फ्लॅट में जगह ही कितनी होती है… इसलिए हमने सोचा कि हम बाद में तुम्हारे घर आते हैं…
मेरी बात सुनकर रामा दीदी भिन्ना उठी, और फोन पर ही चीखते हुए बोली –
तुझसे किसने कहा भेन्चोद कि तुम लोगों की वजह से हमारी प्राइवसी ख़तम होगी…
अरे जब आलोक यहाँ है ही नही तो क्या घंटा की प्राइवसी…?
उसके गुस्से से भरी आवाज़ सुनकर मेरी गान्ड फट गयी.., फिर भी मेने डरते हुए पूछा- क्ककयाआ..? जीजू घर पर नही हैं..?
वो थोड़ा शांत लहजे में बोली – नही ! वो तो एक हफ्ते के टूर पर मुंबई गये हैं… अब ज़्यादा बकवास मत कर, अपना समान उठा, और जल्दी से यहाँ आजाओ तुम दोनो…
बताओ, ये भी कोई बात हुई भला…अपना घर होते हुए होटेल में रुके हैं हरम्खोर…,
नयी भाभी क्या सोच रही होगी अपने मन में ? ननद का घर होते हुए होटेल में रुकना पड़ रहा है…
मे – लेकिन दीदी अब तो हमने कमरा ले लिया..ऐसा करते हैं, आज यहीं रुक जाते हैं, कल पक्का तुम्हारे यहाँ आ जाएँगे…
ये सुनते ही उसका पारा फिरसे चढ़ गया…और उसी गुस्से में बोली – मे तेरे से बात नही करना चाहती, तू निशा को फोन दे…
मेने निशा को फोन पकड़ा दिया.., कुच्छ औपचारिक बातों के बाद उसने हुकम दन-दना दिया कि अभी के अभी यहाँ चले आओ, वरना मे वहाँ आकर तुम दोनो के कान खींच कर लाउन्गि…
निशा भी तैयार होगयि, सो हम होटेल का एक रात का भाड़ा छोड़ कर जो अड्वान्स दे चुके थे, अपना झोला-डंडा उठाकर चल दिए जी उसके घर…..
डोर बेल बजते ही 1 मिनिट में ही दरवाजा खुल गया, हमें देखते ही, रामा दीदी ने निशा को अपने गले से लगा लिया…!
रामा – वाउ ! कितनी सुंदर लग रही है मेरी भाभी, तेरे तो भाग ही खुल गये बेवकूफ़..
वो इस समय स्लेक्स की एक कॅप्री और ढीला-ढाला सा टॉप जो उसकी नाभि तक ही आ रहा था, पहने थी,
जिसमें से उसके बिना ब्रा के मस्त उच्छलते बूब्स ऐसे लग रहे थे मानो दो कबूतर चोंच बाहर को किए फड़फदा रहे हों…
एकदम सीधे आगे से टॉप को ऐसे उठा रखा था उन्होने, मानो वो दो खूँटियों पर बस टाँग रखा हो..देखते ही मेरे लौडे ने एक मस्त अंगड़ाई ली…
बहुत देर तक वो दोनो गेट पर ही खड़ी गले मिलने और बतियाने लगी…
मेने चुटकी लेते हुए कहा – वाह दीदी, फोन पर तो थूक भी नही निगलने दे रही थी, और अब घर में घुसने ही नही दे रही…
वो एकदम से झेंप गयी, और प्यार से मेरे गाल पर एक चपत लगा कर बोली – तुझसे तो मे कभी बात नही करूँगी,
शादी में बुलाया तक नही, और अब साबजादे होटेल में रुक गये..
फिर वो अंदर आने के लिए जैसे ही पलटी, मेरे लौडे की तो शामत ही आगयि…
स्लेक्स की केप्री में उसके चूतड़, एकदम अलग-अलग किन्ही दो फुटबॉल जैसे, उसकी चाल के साथ उपर-नीचे होते हुए..
देखते ही मेरा लंड ठुमकाने लगा, मेने पीछे आते हुए उसे अपने जीन्स में जैसे तैसे करके सेट किया…
अंदर आकर वो दोनो फिरसे गप्पें लगाने लगी, मे अपना आर्यन (दीदी का बेटा) के साथ खेलने लगा…
जितनी देर वो बातें करती रही, दीदी ने मेरी तरफ एक-दो बार बस तिर्छि नज़र डालकर देखा, जैसे दिखा रही हो कि वो मुझसे ना जाने कितनी नाराज़ हो…और निशा के साथ बातों में लगी रही…
हमें यहाँ आते-आते काफ़ी अंधेरा हो चुका था, कुच्छ देर बाद वो दोनो, खाने का इंतेज़ाम करने किचन में चली गयी…!
आर्यन और मैं टीवी देखते-2 सोफे पर ही सो गया, तो मे भी किचन की तरफ बढ़ गया…
रोमांस
निशा चाय बना रही थी, और दीदी साथ में खड़ी कोई सब्जी काट रही थी, थोड़े से आगे को झुकने की वजह से उसके गोल-गोल पीछे को उभरे हुए नितंब देख कर मेरा लंड सॉरी मन मचल उठा…
मेने पीछे से जाकर दीदी को अपनी बाहों में भरते हुए, उसके गले पर किस करके कहा-
नाराज़ हो गयी, मेरी बहना, सॉरी ! हमें पता नही था कि जीजू यहाँ नही है, इसलिए हमने सोचा कि कल तुम्हारे यहाँ आएँगे…
मेरे लंड को अपनी गान्ड की दरार के ठीक उपर फील करके वो एकदम से गन्गना गयी, उसके रोंगटे खड़े हो गये, और बड़ी ही सेक्सी आवाज़ में मेरे गाल को सहला कर धीरे से बोली –
मे भला तुझसे कभी नाराज़ हो सकती हूँ मेरे भाई..?
मेने धीरे से उसके आमों को सहला दिया, और अपने लंड का दबाब उसकी उभरी हुई गान्ड पर डालकर बोला – तो फिर फोन पर शेरनी की तरह क्यों दहाड़ रही थी…?
वो कसमसा कर फुसफुसाते हुए बोली – आअहह…क्या कर रहा है नालयक, छोड़ मुझे, पास में निशा खड़ी है, क्या सोचेगी हमारे बारे में ..?
उसके मूह से आअहह… सुनकर निशा ने तिर्छि नज़र से देखा, और मूह ही मूह में मुस्कराने लगी…!
मेने उसके गले को चाटते हुए कहा – उसे हमारे बारे में सब पता है दीदी, तुम निशा की चिंता मत करो..
मेरी बात सुनकर वो ताज्जुब से मेरी तरफ देखने लगी, मेने एक हाथ से उसकी मुनिया को सहला कर कहा-
ऐसे क्या देख रही हो मेरी हॉट दीदी…, उसे भाभी ने सब कुच्छ शादी से पहले ही बता दिया था…!
फिर मेने अपना हाथ लंबा करके निशा की कमर में डाला, और उसे भी अपनी ओर खींचकर हम दोनो के साथ चिपका लिया और बोला – निशा ! देखो तो दीदी क्या हॉट लग रही है, है ना !
रामा – चल हट, झूठा कहीं का, निशा के सामने तो मे कुच्छ भी नही, सच में निशा वाकई बहुत सुंदर है, तेरे तो भाग खुल गये..!
निशा ने दीदी की बिना ब्रा की चुचियों को सहलाया और उसके गाल पर किस करके कहा – नही दीदी, ये झूठ नही कह रहे, आप वाकई में सेक्स बॉम्ब हो…
बेचारे जीजा जी, बाहर घूमने जाते होंगे आपको लेकर तो किस तरह से लोगों की नज़र से बचाकर लाते होंगे…!
रामा ने भी निशा की चुचियों को ज़ोर्से मसल डाला, उसके मूह से जोरदार सिसकी निकल गयी, फिर उसने निशा की सलवार के उपर से उसकी चूत को मसल्ते हुए कहा-
तुम दोनो तो बड़े ही बेशर्म हो गये हो… इरादा क्या है, हां…!
मेने दोनो को अपने दोनो बाजुओं में लपेटकर अपने बदन से चिपका लिया, और एक-एक हाथ से दोनो की चुचियों को सहलाते हुए कहा-
देखो दीदी ! हम घर से निकले हैं हनिमून मनाने, अब तुमने हमें अकेले तो रहने नही दिया… तो अब जो भी करना होगा, सब मिलकर ही करेंगे…!
रामा – चल हट बदमाश, तुम दोनो अपना हनिमून मनाते रहो, मे खम्खा कबाब में हड्डी क्यों बनू …!
मेने उसके ढीले-ढाले टॉप में नीचे से अपने दोनो हाथ डाल दिए, और उसके बिना ब्रा के दशहरी आमों को मसल्ते हुए कहा –
कबाब में हड्डी तो तुम बन गयी हो दीदी, अब इस हड्डी का रस चूसे बिना अलग कैसे कर सकते हैं, ये कहकर मेने उसका टॉप निकाल फेंका..
उसकी गोरी-गोरी सुडौल 34 साइज़ की मक्खन जैसी चुचियाँ नंगी हो गयी, जिसे उसने अपने दोनो हाथों से ढांपने की नाकाम कोशिश करके कहा –
अरे बेशर्म क्या कर रहा है, अपनी बीवी के सामने ही अपनी बेहन को नंगा कर रहा है, भेन्चोद…
निशा ने उसकी कॅप्री को नीचे सरका दिया, और उसकी चूत को सहलाकर बोली – भेन्चोद बनाने वाली भी तो आप ही हो ना ननद रानी जी…!
रामा – तो बेशर्मो ! मुझे अकेली को ही नंगा क्यों कर रखा है, तुम दोनो फिर कपड़ों में क्यों खड़े हो अभी तक,
ये कहकर उसने निशा की सलवार का नाडा खींच दिया, वो सरसरकार उसके पैरों में जा गिरी…
फिर क्या था, देखते ही देखते एक-एक करके हम तीनों के कपड़े कुच्छ ही देर में किचन के फर्श पर एक-दूसरे में गुड-मूड हुए पड़े थे…!!!
दो हुश्न पारियाँ जवानी से भरपूर, बिना कपड़ों के अजंता की मूरत जैसी मेरे खड़े लंड को मंत्रमुग्ध होकर निहार रही थी,
और वो मदर्चोद किसी अकड़ू सड़क छाप गुंडे की तरह 120 डिग्री का आंगल बनाए तन्कर खड़ा उन दोनो रसीली चुतो को चॅलेंज दे रहा था…
मेने रामा दीदी को अपने पास खींच लिया, और उसके होठों को चूमते हुए, उसके पके कलमी आमों को मसलकर उनसे रस निकालने की कोशिश करने लगा…
वो सिसक कर बोली – आअहह….भाई, यहीं किचन में ही शुरू कर दिया तूने…हाईए….बेडरूम में तो चलो…
मेने उसकी रसीली चूत में उंगली पेलकर कहा – एक राउंड यहीं कर लेते हैं बहना, फिर खाने के बाद बेडरूम में देखेंगे…
तब तक निशा ने मेरे लंड पर कब्जा कर लिए था, और वो उसे अपनी मुट्ठी में लेकर मसल्ने लगी, सुपाडे को चूमकर उसने उसे अपने मूह में ले लिया…
जैसे ही निशा ने मेरे लंड को अपने मूह में लेकर एक बार ज़ोर्से सक किया, उन्माद के मारे मेरी सिसकी निकल पड़ी,
और मेने अपनी दो उंगलियाँ पूरी की पूरी दीदी की रसीली चूत में पेल दी… वो मज़े में आकर अपने पंजों पर खड़ी हो गयी, और मेरे होठों को चूसने लगी…
दीदी की चूत में उंगलियों के चलने की स्पीड का कंट्रोल शायद निशा के पास था, जिस स्पीड से वो मेरे लंड को मूह में ले रही थी, मेरी उंगलियाँ रामा दीदी की चूत को चोद रही थी…
और वो भी मेरे होठों को उसी अंदाज में चूसे जा रही थी…, दीदी की चूत का कामरस बह-बहकर मेरी अंजलि में जमा होने लगा, जिसे मेने सडप करके चाट लिया…
मेरे ऐसा करने से वो बुरी तरह शरमा गयी, और मेरे कंधे में अपना सर देकर सीने पर हल्के से मुक्का मारते हुए बोली – बाज़ीगर…
मेने निशा का सर अलग करते हुए कहा – बस कर मेरी कबुतरि, अभी इसका रस पीने के लिए नही मिलेगा.. वरना दो-दो चुते प्यासी रह जाएँगी…
मेरी बात मानकर निशा ने लंड मूह से बाहर निकाला… इतनी देर की चुसाई के बाद उसका सुपाडा लाल सुर्ख, फूल कर लालू की लालटेन के शीशे की तरह हो गया…
मेने दीदी की एक जाँघ के नीचे हाथ लगाकर उसे अपनी कमर पर रख लिया, उसकी रस गागर का मूह खुलकर मेरे लौडे के सामने आगया…
मेने निशा को कहा – डार्लिंग..! थोड़ा मेरे पिस्टन को दीदी के सिलिंडर के मूह पर सेट तो करो…
निशा ने नीचे बैठे ही बैठे, पहले एक बार अपनी ननद रानी की चूत के रस को अपनी जीभ से चाटा, जिससे रामा के मूह से एक मीठी सी सिसकी फुट पड़ी….,
सस्स्सिईईईईई…. आआहह…मेरी प्यारी भाभी…अब जल्दी से मेरे भाई के लंड को अपनी ननद की चूत पर सेट करो प्लेआसीए….!
उसने भी एक अच्छी भाभी का फर्ज़ निभाते हुए अपनी अमानत को हाथ में लेकर अपनी ननद के स्वर्ग द्वार पर टिका दिया…और फिर अपनी ननद की गान्ड के खुले छेद में अपनी उंगली डाल दी….
आआईयईई…..क्या करती है….सालीइीइ…कहकर रामा की कमर अपने आप मेरी तरफ सरक्ति चली गयी…और मेरा लंड सरसराता हुआ, उसकी गीली चूत में आधे तक सरक गया…
रामा के मूह से मादक कराह फुट पड़ी…
आआहह….अंकुश….चिर गयी मेरी चूत…बहुत मोटा हो गया है ये तेरा हथियार….हाए निशा…कैसे ले गयी तू ईसीए…
निशा ने भी मज़ाक का कोई मौका हाथ से जाने नही दिया.. और अपनी पूरी उंगली उसकी गान्ड में पेल दी…और कहा…
क्यों ! पहली बार आपने भी तो लिया था, तब पता नही चला इस घोड़े जैसे लंड का…
उंगली गान्ड में जाते ही, रामा की गान्ड के द्वार ने उसे बुरी तरह जकड लिया, और उसकी कमर और आगे को सरक गयी, जिससे मेरा पूरा लंड उसकी चूत में फिट हो गया…,
वो उसे जड़ तक लेकर हाँफने लगी… मेने अपना एक हाथ उसकी मस्त फूली हुई गान्ड के नीचे लगाकर उसे अपनी ओर खींचा,
और दूसरे हाथ से उसकी मस्त रसीली चुचि को मसल कर धक्के देना शुरू कर दिया…, कुच्छेक ही धक्कों में रामा की चूत ने मेरे लंड के साइज़ को सेट कर लिया..
अब उसे भी बहुत मज़ा आने लगा था, सो सिसकते हुए अपनी गान्ड उठा-उठाकर मेरे लंड पर पटकने लगी…!
जब ज़्यादा मज़ा आने लगा, तो मेने उसकी दूसरी टाँग को भी उठाकर अपनी कमर पर रख लिया, वो मेरे गले में झूल गयी, मेने दे दनादन चुदाई शुरू कर दी…
सस्सिईइ…उउउफफफ्फ़…एयेए..हईए…भीइ…. बहुत मज़ा आरहाआ…है…झरने की याद ताज़ा हो गाइिईई……रीए…
हाईए…निशाअ…तेरा पति…कितना मस्त चुदाई करता है ,…तेरे तो भाग खुल गाईए…र्रइ….काश..ऐसा लंड रोज़ ले पाती मईए….
निशा मेरे नीचे बैठी, मेरे टटटे चाट रही थी, दीदी की बात सुनकर उसने अपनी जीभ की नोक उसकी गान्ड के भूरे छेद में डाल दी…
आययईीीई… साली छिनाल कितनी एक्सपर्ट हो गयी है रीए…..चाट और चाट मेरी गाअंड….हाईए…जीभ घुस्साआ….दीए…..
आआईयईई….और… तेजज़्ज़्ज…सस्सिईइ…उउउऊऊहह…गाइिईई…रीई…, और फिर रामा अपने प्यारे भाई के सीने से चिपक कर भल-भलकर झड़ने लगी…
मेने भी अपने दो-चार तगड़े धक्के लगाए, और अपनी प्यारी बेहन की चूत को अपनी मलाई से भर दिया….
बहुत देर तक वो मेरे सीने से चिपकी रही…, फिर जब नीचे उतरी, तो पक्क की आवाज़ के साथ मेरा आधा खड़ा लंड उसकी चूत से बाहर आकर किसी पानी के पाइप की तरह झूलने लगा…
साथ ही ढेर सारा रॉ मेटीरियल उसकी चूत से बाहर निकल कर टप्प्प से फर्श पर टपक गया…
मेने दीदी के होठों को चूमते हुए पुछा – मज़ा आया दीदी…
वो मुझसे किसी बेल की तरह लिपट गयी, और मेरे सीने पर किस करके बोली – थॅंक्स मेरे प्यारे भाई..,
तेरे साथ तो मुझे हमेशा ही बहुत मज़ा आता है…काश ! निशा की जगह मे तेरी बीवी होती…!
मेने कहा – तो ठीक है, मज़ा ले लिया ना, अब अपने इस भाई की पेट पूजा का इंतेज़ाम करो फटाफट…
मेरी बात सुनकर निशा का मूह लटक गया…, जिसे मेने अच्छे से नोटीस किया..
मेने मुस्कराते हुए उसे अपनी ओर खींचा, और उसे अपने सीने से सटकर कहा – मे मज़ाक कर रहा था मेरी जान,
मुझे पता है, तुम्हारी क्या हालत हो रही होगी हम दोनो की चुदाई देखकर…
ये कहकर मेने उसे अपनी गोद में उठा लिया और डाइनिंग टेबल के सिरे पर बिठाकर उसे उसपर लिटा दिया, उसकी टाँगों को अपने कंधे पर रखा,
और अपना मूह उसकी रस टपका रही मुनिया के मूह पर लगा दिया…, दीदी ने नीचे बैठ कर मेरे पप्पू को अपने मूह में ले लिया, और अपने दोनो के मसाले को चाट लिया…
मेने निशा की चूत के दाने को अपने दाँतों में दवाकर कुरेद दिया…उसने अपनी कमर को उचका कर अपनी चूत को मेरे मूह पर दबाया…
उसकी मुनिया लगातार रस बहाए जा रही थी, उधर दीदी ने मेरे पप्पू को चुस्कर फिरसे खड़ा कर दिया, अब वो उसे ज़ोर-ज़ोर्से चूस रही थी…
मेने अपने होठों को निशा की चूत के होठों पर टिकाकर एक बार उसकी मुनिया को ज़ोर्से सक किया…सस्स्सिईईईईईईईई……आअहह….रजाअजीीइईईईई…..
उन्माद के मारे उसकी कमर उपर को उचक गयी, और उसने अपने पैरों को मेरे गले में लपेट दिया, मेरे मूह को अपनी चूत पर बुरी तरह से दवाकर अपना पानी छोड़ दिया…
अब तक दीदी की चुसाई से मेरा मूसल भी उसकी मुनिया की कुटाई करने के लिए पूरी तरह तैयार हो गया था….
सो, मेने उसकी टाँगों को चौड़ाया, और अपने मूसल को उसकी सुरंग के मूह पर रखकर एक तगड़ा सा धक्का लगा दिया…
एक ही झटके में मेरा 3/4 लंड उसकी चूत में चला गया… उसके मूह से एक मादक भरी चीख निकल गयी….
आआईयईईईईईईई…..रजीईए….धीरीईई……आअहह….सस्स्सिईईईईई…उउउफफफ्फ़..
दीदी उसके बगल में लेट गयी, और उसकी चुचियों को मसल्ते हुए, किस करने लगी…
मेने अपना पूरा लंड पेलकर धक्के लगाना शुरू कर दिया…, साथ में दो उंगलिया, दीदी की चूत में पेल दी…
हम तीनों की सिसकियाँ पूरे घर को चुदाईमय बनाए हुए थी…,
एक बार झड़ने की वजह से मेरी चुदाई थोड़ा लंबी हो गयी… निशा दो बार झड चुकी थी, सो उसने रुकने के लिए कहा…
मेने दीदी को नीचे खड़ा कर लिया, और टेबल के उपर झुका कर पीछे से उसकी चूत मारने लगा…!
जब मुझे लगा कि अब मेरा नल खुलने ही वाला है, तभी मेने उसे बाहर खींच लिया…और अपनी पूरी मलाई, उन दोनो के मूह, और चुचियों पर उडेल दी…
वो दोनो, एक दूसरे के शरीर से मलाई लेकर चाटने लगी, और मे बाथरूम में घुस गया…..
फ्रेश होकर वो दोनो खाना बनाने में जुट गयी, और मे हॉल में आकर टीवी देखने लगा…!
खाने के बाद हम तीनों एक ही बेडरूम में आगये, दीदी ने मुझे एक बड़ा सा ग्लास बादाम और केसर डालके दूध दिया और हस्कर बोली –
ले पीले, आज बहुत मेहनत करनी है सारी रात… दो दो घोड़ियों की सवारी करनी पड़ेगी…,
दूध पीकर हम तीनों फिर से चुदाई में जुट गये, लेकिन एक-एक राउंड करके ही हम जल्दी ही नींद में डूब गये…!!
इस तरह पूरे हफ्ते हम तीनों ने आलोक जीजू के आने तक थ्रीसम चुदाई का भरपूर मज़ा लिया,
रामा ऐसे कॉपरेटिव भैया-भाभी पाकर फूली नही समा रही थी…क्योंकि उसकी अब तक की अधूरी प्यास अच्छे से बुझ रही थी…!
निशा भी चुदाई के ज़्यादा मौके उसी को दे रही थी, रामा के ये पुच्छने पर की वो ऐसा क्यों कर रही है तो उसने कहा…
ये घोड़ा तो मेरे नाम रिजिस्टर्ड ही है, जिसे मे जब चाहूं दौड़ा सकती हूँ, लेकिन मेरी प्यारी ननद को फिर कब-कब ऐसा मौका मिलेगा…
उसकी बात सुनकर वो गद-गद हो उठी, और उसने उसे अपने गले से लगा लिया…
इसी बीच हम ने निशा को दिल्ली दर्शन भी कराए, सिनिमा देखने भी गये…
और फिर एक दिन मे उन दोनो को लेकर अपने गुरु और आंटी से मिलने भी गया,
उन्होने उन दोनो को अपनी बहू और बेटी जैसा ही प्यार दिया, सारे दिन अपने पास रखा, वहीं से नेहा को फोन करके भी बुला लिया…
नेहा, निशा और दीदी से मिलकर बहुत खुश हुई, फिर लौटते वक़्त वो उन दोनो को गिफ्ट देना नही भूले…!
आलोक जीजू के लौटने के बाद एक दिन रुक कर, मे और निशा अपने घर लौट लिए……,
शाम तक हम घर लौटे, जहाँ एक खुशी हमारा बेसब्री से इंतेज़ार कर रही थी, घर भर में खुशी का माहौल था,
सबसे पहले हमें छोटी चाची मिली, और उन्होने हमें बताया की मोहिनी बहू माँ बनने वाली है…
हम दोनो ही लपक कर उनके कमरे में गये, देखा तो भैया उनके पास बैठे हुए थे..और बड़े खुश दिखाई दे रहे थे…
देखते ही उन्होने मुझे गले से लगा लिया, और खुशी से कांपति आवाज़ में बोले- छोटू मेरे भाई ! तू फिर एक बार चाचा बनाने वाला है…!
मेने खुशी से उच्छलते हुए कहा – सच भैया… ! ये तो बड़ी खुशी की बात है.., उसके बाद मे भाभी के पास गया.. जहाँ दोनो बहनें एक दूसरे के गले लगी हुई थी…
मेने कहा – भाभी इस बार मुझे नन्हा-मुन्ना प्यारा सा भतीजा चाहिए… क्यों रूच बेटा ! तुम्हें अपने लिए छोटा सा भाई चाहिए ना !
उसने हां में अपनी गर्दन हिलाई और बोली – मम्मी मुझे छोटा भाई दोगि ना…!
भाभी ने मुस्करा कर कहा – बेटा ! ये तो भगवान जी ही जाने, भाई होगा या छोटी सी गुड़िया…
इस तरह हसी खुशी सबने मिलकर भाभी भैया की खुशी को बाँटा…
अकेले में भाभी ने मेरे कान में कहा – ये तुम्हारा उस दिन की मेहनत का फल है मेरे लाडले देवर्जी….
ये सुनकर मे उनके मूह की तरफ ताकता ही रह गया….!
वो मुस्करा कर बोली – ऐसे क्या देख रहे हो… मे सच कह रही हूँ… !
भला माँ से अधिक किसे पता होगा कि उसके बच्चे का बाप कॉन है…, क्या ये सुनकर तुम्हें खुशी नही हुई…?
मे – नही भाभी ! ऐसी बात नही है… पर मुझे विश्वास नही हो रहा…!
वो – अपनी भाभी की बात पर भी नही…?
मे – अब आप कह रहीं हैं तो ज़रूर सही ही होगा… वैसे आप खुश तो हैं…?
भाभी ने मेरे गाल को कचकचाकर काट लिया, और फिर उसे चूमते हुए बोली –
बहुत से भी ज़्यादा मेरे होने वाले बच्चे के पापा जी….तुम्हारा अंश अपनी कोख में पाकर कॉन खुश नही होगी भला….
मेने भाभी के डिंपल में अपनी जीभ की नोक डालकर कहा – क्यों ! ऐसी क्या खास बात है मेरे अंश में…?
वो मेरे लौडे को सहला कर बोली – दो रिज़ल्ट सामने हैं इसके, फिर भी पुच्छ रहे हो…?
उनकी इस बात पर मे हँस पड़ा और वो मन ही मन खुश होती हुई रसोई की तरफ चली गयी…!
उस दिन के बाद मेरे अंदर एक अजीब तरह की उत्तेजना सी रहने लगी…,
मेरा अंश भाभी की कोख में पल रहा है…, ये सोचकर मे अजीब से रोमांच से भर गया…
इसी खुशी के साथ मे मन लगाकर अपने काम में लग गया, और रेग्युलर कोर्ट/ ऑफीस जाने लगा…. !
भगवान दास गुप्ता जी का लीगल आड्वाइज़र होने के नाते, अब मेरा उनके ऑफीस और घर आना जाना अक्सर लगा रहता था…
कई एकड़ में बनी शानदार कोठी में उनका 4 प्राणियों का छोटा सा परिवार और कई सारे नौकर चाकर जिनके लिए रहने को सर्वेंट क्वॉर्टर्स भी कोठी के पीछे बने हुए थे…
48 वर्षीया गुप्ता जी धरम करम को मानने वाले, उनका सुबह का टाइम अधिकतर पूजा-पाठ में ही जाता था, ख़ासतौर से मैया लक्ष्मी के घोर उपासक थे गुप्ता जी…
माँ की कृपा भी खूब थी उनके उपर, धन दौलत की कोई कमी नही थी, बस कमी थी तो समय की जिसके लिए उनका परिवार हमेशा तरसता रहता था…!
उनकी 45 वर्षीया पत्नी सेठानी शांति देवी, एक भारी-भरकम औरत, शरीर से तो इतनी नही लेकिन स्वाभाव से…
बस नाम की ही शांति देवी थी, वाकी तो घर के नौकरों और यहाँ तक बच्चों के लिए तो वो चंडिका देवी थी…
गुप्ता जी भी उनके सामने ज़्यादा बोलने की गुस्ताख़ी नही करते थे…
एकदम कड़क तीखी आवाज़, घर के किसी भी कोने में वो जब किसी को डाँटती थी, तो उनकी आवाज़ लगभग कोठी के हर कोने में पहुँचती थी, जिससे सबके कान खड़े हो जाते…
24 वर्षीय बेटा संकेत अपना ग्रॅजुयेशन कंप्लीट करके बिज़्नेस मॅनेज्मेंट का कोर्स कर रहा था, जिससे आगे चलकर अपने पिता के कारोबार को सुचारू रूप से संभाल सके…
बेटी खुशी, 19 साल की, इसी वर्ष कॉलेज में पहुँची है, बी.कॉम करने, शुरू से ही थोड़ी दोहरे बदन की है,
ज़्यादा नही मध्यम हाइट के साथ शायद 34-32-36 का फिगर होगा, कभी मापने का मौका नही लगा अभी तक…
ज़्यादा गोरी तो नही पर सॉफ रंग है अपनी माँ के जैसा…, गोल मटोल चेहरा, किसी गुड़िया की तरह..
देखने में ही बहुत मासूम और भोली-भाली सी लगती है,
बेचारी सिर्फ़ नाम की ही खुशी है, वाकी उसके लिए खुशी दूर-दूर तक नही थी…बस थोडा बहुत हंस खेल लेती है, जब उसका भाई या पापा साथ में हों तो..
ना ज़्यादा सज-संवार सकती है, और ना ज़्यादा मॉडर्न कपड़े पहन सकती है…माँ की इन्स्ट्रक्षन, ये मत करो, वो मत करो… ये क्यों किया.. वग़ैरह…वग़ैरह, यू नो…
हां बेटे को वो बहुत चाहती है, उसकी हर बात मानी भी जाती है, करने की छूट भी है…
गुप्ता जी बेचारे को इन सब चीज़ों से कोई सरोकार नही, कि उनके घर में क्या चलता रहता है, क्या नही.. वो बस अपनी धन कमाने की दुनिया में ही मस्त रहते हैं…!
एक दिन मे सुवह-सुवह एक ज़रूरी काम से उनके यहाँ गया था, गुप्तजी रोज़ की तरह पूजा पाठ में लगे थे, मे हॉल में बता उनका इंतेज़ार कर रहा था…
नीचे सेठानी के रूम से तेज-तेज आवाज़ें आ रही थी, वो अपनी बेटी को डाँट रही थी, वैसे ये उनकी नॉर्मल आवाज़ थी हां !
शांति – तू आए दिन कॉलेज मिस करती रहती है, बात क्या है..? ऐसे तो कैसे कर पाएगी अपना कोर्स पूरा..?
खुशी – मे अपने सर से ट्यूशन में कर लूँगी, लेकिन मुझे नही जाना कॉलेज…
शांति – लेकिन बात क्या है, तू कॉलेज के नाम से इतना डरती क्यों है..?
खुशी – कॉलेज के लफंगे लड़के बहुत परेशान करते हैं,
शांति – अरे तुझे उन लफंगों से क्या लेना-देना, सीधी जा और सीधी आ, और फिर कोई परेशानी है तो संकेत को भी बोल सकती, वो भी तो वहाँ होता ही है…
खुशी – मेने बताया था भैया को, लेकिन उन्होने भी कुच्छ नही किया…, कुच्छ गुंडे टाइप के लड़के हैं, जो किसी की नही मानते…
शांति – अब परेशान तो करेंगे ही, इत्ति सी उमर में, देख अभी से कैसा पहाड़ जैसा सीना हो गया है तेरा…, कुच्छ ग़लत हरकतें तो नही करने लगी है…
खुशी – क्या मम्मी ! अनाप-शनाप बोलती रहती हो, खुद ने ही तो जबरदस्त खिला-खिलाकर मोटा कर दिया है मुझे.. अब इसमें मेरी क्या ग़लती है…
शांति – चल ठीक है, तेरे पापा से बात करती हूँ, वो प्रिन्सिपल से बात कर लेंगे..
इसके बाद खुशी हॉल में से होती हुई उपर अपने रूम में चली गयी…,
उपर जाने के लिए हॉल से एक बड़ा सा गोलाई लिए स्टेर्स थे…, मेरी नज़र उसके थिरकते हुए भारी भरकम कुल्हों पर जम गयी..
सच में इस उमर में खुशी कुच्छ ज़्यादा ही भरकम हो गयी थी…, लेकिन उसकी बात भी सही थी, अब लाड़ प्यार ने खिला-पिलाके ऐसा कर दिया तो इसमें वो बेचारी भी क्या करे…
गुप्ता जी के घर में मुझे सभी नौकर यहाँ तक कि उनके दोनो बच्चे भी वकील भैया बोलते थे…!
उसके पीछे-2 सेठानी भी बाहर आई, मेने नमस्ते किया, और गुप्ता जी के बारे में पुछा तो वो बोली –
अरे भाई, उनका क्या ठिकाना कब तक निपटाते हैं, तुम ऐसा करो ऑफीस में ही मिल लेना मे उन्हें बोल दूँगी, कि तुम आए थे…!
इतना कहकर वो रसोई घर की तरफ बढ़ गयी, और मे उठकर वहाँ से चलने को हुआ, कि तभी खुशी मुझे नीचे आती हुई नज़र आई..,
उसके चेहरे से लग रहा था कि वो कुच्छ परेशान है, वैसे उसकी परेशानी की वजह मुझे कुच्छ – 2 पता लग ही गयी थी, फिर भी मेने उसे आवाज़ दी…अरे खुशी ! कैसी हो ?
वो थोड़ा दुखी मन से बोली – ठीक ही हूँ वकील भैया, आप सूनाओ, पापा से मिलने आए थे..?
मे – हां ! पर वो तो पूजा से ही फारिग नही हुए…, वैसे ना जाने क्यों मुझे ऐसा लग रहा है कि तुम कुच्छ परेशान हो…
खुशी – जाने दीजिए भैया, अब घर में ही मेरी किसी को परवाह नही है, तो आपको बताने से क्या फ़ायदा…
मे – मुझे भी तुम अपने घर का हिस्सा ही समझो, नौकर हूँ तो क्या हुआ…, हो सकता है मे तुम्हारी कोई मदद कर सकूँ…!
खुशी – कॉलेज में कुच्छ आवारा टाइप के लड़के हैं, अक्सर लड़कियों को छेड़ते रहते हैं, अभी तक तो बातों से छेड़ते थे, लेकिन अब तो वो…
वो बोलते-बोलते चुप रह गयी, मे उसके चेहरे की तरफ देखने लगा तो उसने अपनी नज़रें नीची कर ली और अपना होठ काटने लगी…
मेने उसे आगे बोलने के लिए कुरेदा – लेकिन अब क्या हुआ खुशी बोलो…देखो मान सको तो मुझे भी अपना भाई समझो, और अपनी परेशानी खुल कर कहो…
खुशी – कैसे कहूँ वकील भैया, कहते हुए भी शर्म आती है, अब तो वो हरम्जादे हमारे कहीं भी हाथ लगा देते है, कभी पीछे, तो कभी…
मे – बस मे समझ गया खुशी, लेकिन तुम लोगों ने प्रिन्सिपल से शिकायत नही की..
वो – की थी, लेकिन थोड़ा बहुत डाँट फटकार कर उन्होने छोड़ दिया…
मे – संकेत को बताया…?
वो – भैया तो बहुत बड़ा वाला फट्टू है, वो उन लोगों के डर की वजह से कुच्छ कहता ही नही…
मे – कहाँ रहते हैं वो लफंगे…?
वो – वहीं बाय्स हॉस्टिल में, वो 4 लड़के हैं जो 2-2 के हिसाब से दो रूम में रहते हैं, फिर उसने उनके नाम और रूम नंबर भी बताए…
मे – तुम बिंदास कॉलेज जाओ, कल से वो लौन्डे तुम्हें कुच्छ नही कहेंगे, लेकिन हां ! इस बात का जिकर तुम किसी से नही करोगी, अपने घर में भी किसी से नही…ओके.
उसने हां में अपनी गार्डेन हिला दी, फिर मे वहाँ से कोर्ट की तरफ निकल आया…
कुच्छ इम्पोर्टेंट केस निपटाकर मैं गुप्ता जी के ऑफीस चला गया, उनके साथ ज़रूरी डिसकस करके मे अपने फ्लॅट में आगया जो उन्होने मुझे रहने के लिए दिया था…
इन लफंगों का कुच्छ तो करना पड़ेगा, ये सोचकर मेने कुच्छ ज़रूरी समान लिया और कॉलेज बंद होने के बाद एक चक्कर हॉस्टिल का लगाया,
बिना किसी की नज़र में आए कैसे उन लोगों तक पहुँचा जा सकता है, ये सब देखभाल कर मे वापस लौट आया…
वो दोनो कमरे ग्राउंड फ्लोर पर ही थे, हॉस्टिल की पिच्छली बाउंड्री वॉल थोड़ी उँची थी, कोई 10-12 फीट, लेकिन कोशिश करके अंदर जाया जा सकता था…
रात करीब 11 बजे मे पीछे की बाउंड्री वॉल फांदकर हॉस्टिल कॉंपाउंड में दाखिल हो गया,
इस समय मेरे शरीर पर उपर से नीचे तक काला स्याह लबादा था, चेहरा भी स्याह कपड़े से ढँक रखा था…
मेने पीछे की दीवार से उनके कमरे की आहट ली, एक कमरे में शांति थी, लेकिन दूसरे कमरे से विंडो की झिर्री से लाइट भी आ रही थी, और कुच्छ आवाज़ें भी…
अब हॉस्टिल की विंडो, सील टाइट तो होने से रही, कुच्छ दिनो के बाद अंदर की चितखनी लगना भी मुश्किल होती है,
ये सोचकर मेने विंडो के उपर अपने हाथ का थोड़ा सा दबाब डाला, तो उसका एक पाट हल्का सा खुल गया…
अंदर का जायज़ा लिया, तो मेरे चेहरे पर मुस्कान आगयि…
विंडो का पाट खुलते ही, अंदर से चरस की स्मेल के साथ धुआँ बाहर आया, अंदर वो चारों ही मौजूद थे, जो चरस की सिगरेट में कस पे कस लगाए जा रहे थे…
और सबसे खास बात कि चारों के बदन पर एक भी कपड़ा नही था, दो लड़के घुटनों पर थे और दो उन दोनो की गान्ड में अपने-2 लंड डालकर उनकी गान्ड की धुनाई करने में लगे हुए थे,
चरस की सिगरेट अलग-2 चारों के मूह में लगी हुई थी, बीच-बीच में उनके मूह से आहें मज़े की कराहें भी निकल जाती…
सीन देख कर तो मज़ा ही आगया, अब इन मादर्चोदो को लाइन में लाने के लिए मुझे ज्यदा कुच्छ नही करना था, बस जेब से मोबाइल निकाला, और शुरू करदी जी रेकॉर्डिंग…
एक बार जब वो दोनो उन दो की गान्ड में झड गये, तो सीन चेंज हो गया, अब वो उन दोनो की गान्ड मार रहे थे…
मस्त गान्ड मराई का वीडियो बन गया यो तो, फिर जब उनका खेल ख़तम हो गया, तो चारों नंगे ही अपनी-अपनी टाँगें लंबी करके फर्श पर पसर गये…
उनके झड़े हुए ढीले लंड किसी मरे चूहे जैसे कमरे के फर्श पर पड़े थे..
अब मुझे भी एंट्री मार देनी थी, सो घूमकर चुपके से गॅलरी में आया, और जाकर हल्के से डोर नोक कर दिया…!
डोर खटखटाने की आवाज़ सुनकर वो चारों उछल पड़े, फिर कुच्छ देर बाद उनमें से एक ने पुछा – कॉन..?
मेने थोड़ा आवाज़ चेंज करके कहा – वॉर्डन, गेट खोलो…
सुनते ही उनके होश गुम हो गये, झट-पट अपने कच्छे पहने और फिर दो मिनिट के बाद एक ने डोर खोल दिया…
जैसे ही गेट खुला, मेरा जबरदस्त घूँसा उस गेट खोलने वाले की नाक पर पड़ा..
कुच्छ तो नशे की हालत, गान्ड मराई की थकान, उपर से एक जोरदार घूँसा नाक पर पड़ते ही उसकी नाक से खून की तेज धार फुट पड़ी, और वो चीख मारते हुए कमरे के बीच में जाकर गिरा…
वो तीनों भी अपने सामने एक नकाबपोश को देखकर भोन्चक्के से रह गये, उपर से उनका दोस्त लहू-लुहन पड़ा दर्द से तड़प रहा था…
इससे पहले की वो अचानक पैदा हुई इस नयी सिचुयेशन को समझते तब तक मेने अंदर से गेट बंद कर दिया, और उन तीनों की तरफ सधे हुए कदमों से बढ़ा…
नशे में उन तीनों की टाँगें काँपने लगी, फिर उन्हें कुच्छ होश आया कि हम तो 4-4 हैं, ये अकेला क्या हमारा उखाड़ लेगा, ये सोचते ही उनमें से एक बोला…
कॉन हो तुम..? और यहाँ हमारे कमरे में आकर हमारे साथ ही मार-पीट क्यों कर रहे हो..?
मे – काला चोर..! सुना है, तुम लोगों के कुच्छ ज़्यादा ही पर निकल आए हैं, इसलिए सोचा थोड़ा कुतर दिए जाएँ तो अच्छा रहेगा… क्यों ठीक है ना ठीक…!
अब तक वो चौथा भी अपनी नाक का खून पोन्छ्ते हुए उठ गया था…
ठीक तो अब हम तुझे करेंगे हरम्जादे, ये कहकर वो चारों मेरे उपर एक साथ झपटे…!
मेने फुर्ती से अपनी जगह छोड़ दी, झोंक-झोंक में वो चारों एकदुसरे में ही उलझ गये…, इसका फ़ायदा उठाकर मेने बिजली की सी तेज़ी से उन चारों की धुनाई सुरू करदी…
उनमें से एक भी इस हालत में नही था, जो मेरा हाथ पड़ने के बाद तुरंत सामना कर पाए..
फिर मेने अपने लिबास से पीठ पर बँधे हुए 3/4″ डाया के एक लोहे के पाइप के टुकड़े को निकाला, और उनके हाथ पैर तोड़ना शुरू कर दिया…
15 मिनिट में ही वो चारों कमरे में पड़े कराह रहे थे, किसी की टाँग फ्रॅक्चर थी, तो किसी का हाथ…
हाथ जोड़े वो मेरे पैरों में पड़े दया की भीख माँग रहे थे…
मेने उनमें से एक को गिरहबान से उठाया, और सर्द लहजे में कहा – आइन्दा तुम लोगों में से कॉलेज में किसी भी लड़की के साथ बदतमीज़ी की, तो समझ लेना, वो हाल करूँगा..कि किसी को मूह दिखाने के लायक नही रहोगे…फिर मेने मोबाइल की क्लिप ऑन करके उनके सामने करदी और कहा…
ये देखो, तुम लोगों के कुकर्म पूरे कॉलेज में सब लोग देख रहे होंगे…और तुम पर थूक रहे होंगे…
वीडियो देखकर उनकी रही-सही हवा भी सरक गयी… वो मिन्नतें करने लगे, प्लीज़ ये वीडियो किसी को मत दिखाना.. वरना हम किसी को मूह दिखाने लायक नही रहेंगे…
आप जो कहेंगे हम वैसा ही करेंगे, आज से कॉलेज की हर लड़की हमारी बेहन होगी…,
मेने उनको धमकाते हुए कहा… और बेहन के साथ क्या करते हैं, तो अब अगर कोई और भी किसी लड़की को छेड़े तो तुम लोग उसकी मदद करोगे…
वो तुरंत बोले- हांजी-हांजी हम ऐसा ही करेंगे… प्लीज़ हमें छोड़ दो…
मे – ठीक है, अभी मेने तुम लोगों को माफ़ किया, लेकिन ध्यान रहे अगर तुम लोगों ने आइन्दा कुच्छ भी ग़लत किया… तो समझ सकते हो मे क्या कर सकता हूँ…
इतना डोज उन लड़कों को देकर मे चुप-चाप जैसे आया था, वैसे ही हॉस्टिल से निकल आया…!
का रोमांस
दो दिन तक कोई बात नही हुई, खुशी रोज़ कॉलेज जाने लगी, वो चारों भी कॉलेज में कहीं नज़र नही आए…
लेकिन चौथे दिन खुशी का फोन आया, वो इस समय चहक रही थी..
खुशी – हेलो ! वकील भैया.., उसकी आवाज़ में खुशी साफ-साफ झलक रही थी,
…… आपने उन चारों लड़कों के साथ ऐसा क्या किया, आज वो सभी लड़कियों के सामने हाथ जोड़कर बहनजी – बहनजी करते फिर रहे थे..!
यही नही, उनके शरीरों पर जगह जगह प्लास्टर और पट्टियाँ भी बँधी थी…
जब सबने कारण पुछा तो बोलने लगे – कि हम लोगों का आक्सिडेंट हो गया था…
हहहे… लेकिन भैया मे सब समझ गयी.. कि ये आक्सिडेंट कैसे हुआ…
मे – अब तो तुम खुश हो ना खुशी.., लेकिन ये बात किसी और को मत बताना…
खुशी – नही बताउन्गि भैया, थॅंक्स सभी लड़कियों की तरफ से और हां ! आइ लव यू.., आप बहुत अच्छे हैं.. शाम को घर आना फिर बात करती हूँ..आओगे ना..!
मे – नही खुशी आज में अपने गाओं जा रहा हूँ, फिर कभी आता हूँ, और हां, अगर कोई और भी किसी भी लड़की को परेशान करे, तो उन चारों लड़कों को बोलना..
वो अब तुम लोगों की मदद करेंगे…
वो चोन्कते हुए बोली – क्या…? ऐसा क्या काला जादू कर दिया आपने उन हरम्जादो पर…?
मेने हँसते हुए कहा – कोई जादू-वादू नही किया है, बस थोड़ा हेवी डोज़ दे दिया है, जिससे वो अब अपनी औकात में आगये हैं…!
खुशी – लेकिन मुझे आपसे मिलना था, मेरी हेल्प करने के लिए स्पेशल थॅंक्स करना था आपको,,
मेने हँसते हुए कहा – स्पेशल थॅंक्स क्या होता है..? फोन पर ही बोल दे ना…
खुशी – नही, वो तो जब आप मिलोगे तभी कहूँगी..
मे – चल ठीक है कह देना, अब फोन रखता हूँ, टेक केर.. बाइ.
खुशी – बाइ भैया…थॅंक्स अगेन, लव यू…!
इस घटना के बाद खुशी के कॉलेज में रोमीयो गॅंग का जैसे नाम ही ख़तम हो गया…
उन चारों के अलावा अगर कोई और लड़का भी किसी लड़की के साथ इस तरह की हिमाकत करता तो वो लड़के अपने तौर पर उसे सबक सीखा देते.., और अगर उनके बस से बाहर की बात होती,
तो वो अपना एग्ज़ॅंपल देकर उनके अंदर डर पैदा करते…, बताते कि कोई नकाब पॉश है जो ये सब नही होने देगा, और वो डरकर उनकी बात मान लेते…
इस कॉलेज की सभी लड़कियाँ एक तरह से सेफ हो गयी थी..
उन चारों लड़कों के अंदर आए बदलाव से स्टूडेंट्स के साथ साथ कॉलेज प्रशासन भी आश्चर्यचकित था…!
दो दिन बाद मे गुप्ता जी से मिलने जब उनके घर गया, रोज़ की तरह गुप्ता जी पूजा में थे, अनायास ही कॉलेज को निकलती खुशी मुझे हॉल में ही मिल गयी…
मुझे देखते ही वो खुशी से उच्छल पड़ी, आव ना देखा ताव, दौड़कर वो मेरे गले में झूल गयी…और अनगिनत चुंबन मेरे गालों पर जड़ दिए…
मे अरे खुशी रुक तो सही, क्या करती है बोलता ही रह गया, लेकिन वो अपने मन की करके ही रुकी…
फिर उसने मेरे हाथों को अपने हाथों में लेकर चूम लिया और बोली – थॅंक यू भैया मेरी मदद करने के लिए…
ये नज़ारा अपने कमरे से बाहर निकलते हुए उसकी माँ चंडिका देवी…ओह्ह्ह सॉरी शांति देवी ने देख लिया…!
कयामत ही टूट पड़ी उस बेचारी के उपर, वो वहीं से बुरी तरह चीखते हुए दहाडी – खुशिीिइ……! ये क्या हिमाकत है ? नौकर और मालिक का लिहाज भी नही है तुझे…
उपरोक्त डाइलॉग बोलती हुई वो हमारी ओर लपकी और तडाक…तडाक्क्क्क… दो तीन तमाचे उस बेचारी के गाल पर जड़ दिए…
मेने उस बेचारी को बचाने की कोशिश की, लेकिन वो मेरी ओर पलटकर दाहडी… दूर रहो, खबरदार जो आगे बढ़े तो…
नमकहराम कहीं का, जिस थाली में ख़ाता है उसी में छेद करने की कोशिश कर रहा है…, निकल जा यहाँ से अभी के अभी…!
खुशी तो बेचारी बुरी तरह से रोने लगी, मेने कहा – देखिए आप मेरी बात तो सुनिए…
मेरी बात अभी पूरी भी नही हुई कि तडाक… एक जोरदार तमाचा मेरे भी गाल पर पड़ा…तब जाकर मुझे अंदाज़ा हुआ कि खुशी इतना क्यों रो रही है…
क्या भारी हाथ था हिटलरनी का…. दिन में तारे नज़र आने लगे मुझे… तो खुशी का क्या हाल हुआ होगा…?
इतने में हंगामा सुनकर घर के सारे नौकर, संकेत जो कॉलेज के लिए रेडी हो रहा था, यहाँ तक कि गुप्ता जी भी अपनी पूजा छोड़ कर दौड़े चले आए,
गुप्ता जी – क्या बात है शांति, क्यों इतना हंगामा कर रही हो सुवह-सुवह…, और ये खुशी इतना क्यों रो रही है…?
शांति उसी दहाड़ के साथ – पुछो अपनी इस लाडली से, एक नौकर के गले लग्के मूह काला कर रही थी, ये हरामी ना जाने इसे कब्से अपने जाल में फँसा रहा है…
गुप्ता जी चोन्कते हुए बोले – तुम अंकुश की बात कर रही हो…? क्या किया है इन्होने..?
शांति – ये इसके गले लगकर इसके मूह को चूम रही थी,
गुप्ता जी – क्यों वकील साब ! क्या शांति सच बोल रही रही है…?
मेने उनके चेहरे पर अपनी नज़र गढ़ाते हुए कहा – हां ! जो इन्होने देखा वो सच है, लेकिन इनके कहने का मतलव ग़लत है…
शांति – अच्छा ! मे अंधी हूँ, नासमझ हूँ, इतनी भी समझ नही है मुझे कि एक लड़की क्यों किसी पराए मर्द के गले ल्गकर उसे चूमती है…!
मेने एकदम शांत लहजे में कहा – लेकिन मे क्या कर रहा था…?
शांति – इससे क्या फरक पड़ता है, कि तुम कुच्छ कर रहे थे या नही… छुरि खरबूजे पर गिरे या खरबूजा छुरि पर, काटना तो खरबूजे को ही है ना…
अपनी माँ की बात सुनकर खुशी का धैर्य जबाब दे गया और वो पूरी ताक़त लगाकर चीखते हुए बोली – ये क्या बकवास है, कुछ तो शर्म करो मम्मी ! अपनी बेटी पर इतना घिनौना इल्ज़ाम लगाने से पहले एक बार भी नही सोचा कि आख़िर मेने वो क्यों किया…?
गुप्ता जी – तुम कहना क्या चाहती हो बेटी ? सच्चाई क्या है…?
खुशी – सच्चाई जानना चाहते है डेडी ! तो सुनिए…! पुछो इनसे मुझे ये ज़बरदस्ती कॉलेज भेजती रहती थी, बाबजूद इसके कि मेने इनसे कहा था कि मुझे कॉलेज में कुच्छ गुंडे परेशान करते है…पुछिये अपने लाड़ले बेटे से, इनको भी बोला था, लेकिन कुच्छ करना तो दूर ये उन लड़कों से बात करने से भी डरते थे…
फिर वकील भैया ने मेरी परेशानी का कारण पुछा, मे इन्हें नही बताना चाहती थी, लेकिन मेरी परेशानी देखकर इन्होने कहा – तू मुझे अपना भाई समझकर बोल..क्या प्राब्लम है… तो मेने इन्हें वो बात बताई, और जानते हैं डेडी उसके बाद क्या हुआ…?
इससे पहले कि खुशी कुच्छ बोले, मेने बीच में आते हुए कहा – अरे छोड़ ना खुशी, इतनी छोटी सी बात के लिए क्यों इतना बखेड़ा कर रही है…
मेने प्रिन्सिपल से शिकायत करके उन लड़कों को समझा दिया है, बस इतनी सी बात के लिए तू इतना एक्शिटेड हो गयी कि मेरे गले से लगकर मुझे थॅंक्स करने लगी…
अब इसमें सेठानी जी की भी क्या ग़लती है, उन्हें लगा कि तुम पता नही क्यों ऐसा कर रही हो…!
गुप्ता जी संकेत को डाँटते हुए बोले – ये काम तू नही कर सकता था, प्रिन्सिपल से शिकायत तो तू भी कर सकता था ना…!
संकेत नीची नज़र झुकाए हुए बोला – मेने कहा था उनसे, लेकिन वो लड़के बहुत बदमाश थे, नही माने बदले में उनकी हरकतें और बढ़ गयी…
गुप्तजी – तो फिर अब कैसे मान गये…?
खुशी भभक्ते हुए स्वर में बोल पड़ी – क्योंकि इस नौकर ने उन लड़कों की हड्डियाँ तोड़ के रख दी हैं, जिससे उसके मालिक की बेटी सकुन से कॉलेज जा सके..
सभी के मूह से एक साथ निकाला – क्य्ाआ……?????
खुशी – हां ! और इस काम में इनको भी कुच्छ हो सकता था, लेकिन इन्होने इस बात की परवाह ना करके, एक पराई लड़की के लिए ये ख़तरा मोल लिया, और मेरा सगा भाई, दुम दबाए रहा…
इसलिए मेने सच्चे दिल से इन्हें अपना भाई माना है, और अपने भाई के गले लगकर उसके गाल पर किस करना कॉन्सा गुनाह है डेडी… आप ही बताओ, सही मायने में भाई का फ़र्ज़ किसने निभाया है…
ये कहते कहते खुशी.. हिचकियाँ ले-लेकर रोने लगी… शांति देवी लज्जा के मारे अपना सर झुकाए खड़ी थी…
गुप्ता जी का पारा अपनी बेटी को रोते हुए देख कर चढ़ गया, और शायद जिंदगी में पहली बार उन्होने शांति के गाल पर एक तमाचा जड़ दिया…
शांति देवी को इस बात की कतयि आशा नही थी, कि उनका चूहा पति, एक शेरनी को तमाचा भी मार सकता है, सो वो गुर्राते हुए बोली – तुम्हारी इतनी हिम्मत्त….
तडाक्क्क…वो अपनी बात पूरी भी नही कर पाई, की एक और तमाचा पड़ा…और इसी के साथ गुप्ता जी किसी सोए हुए शेर के जागने के बाद वाले स्वर में बोले-
अब और एक शब्द नही…, बिना सोचे समझे इतना बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया तुमने, एक भले आदमी को ना जाने क्या-क्या बोलती रही…,
इस घर की मालकिन हो तो इसका ये मतलव तो नही कि किसी के साथ जैसा चाहो बर्ताव करो, और एक ये हैं जिन्होने हमारे उपर अनगिनत एहसान किए हैं,
आज हमारी बेटी की इज़्ज़त बचा कर तो इन्होने वो काम किया है जो तुम्हारे इस लाड़ले बेटे को करना चाहिए था,
उसका एहसान मानने की वजाय ना जाने क्या-2 बोलती रही..इन्हें जॅलील करती रही तुम..
फिर भी इनकी भलमांसाहत देखो, तुम्हें ग़लत नही ठहराया – अरे अब तो सुधर जाओ, और हरेक के साथ एक जैसा व्यवहार करना बंद करो…!
फिर वो मेरे सामने हाथ जोड़कर बोले – इसके व्यवहार के लिए हम तुमसे माफी माँगते हैं अंकुश…
मेने उनके हाथ पकड़ लिए और कहा – ये क्या कर रहे हैं आप, ये उनसे अंजाने में हुआ है, और इसमें उनकी अपनी बेटी की चिंता ही दिखाई देती है… प्लीज़ सर, आप माफी मत मांगिए, सेठानी जी के लिए मेरे मन में कोई ग़लत विचार नही हैं…
शायद शांति देवी को बात समझ आगयि थी, सो चुप चाप किसी मुजरिम की तरह सर झुकाए खड़ी रही,
दोनो बच्चे उन्हें उसी अवस्था में खड़ा छोड़ कर वहाँ से चले गये…
गुप्ता जी भी भुन-भुनाते हुए अपने काम में लग गये, तो फिर मेने भी वहाँ से सरकने में ही अपनी भलाई समझी…
और बिना किसी से कुच्छ कहे सुने मे बाहर की तरफ चल दिया…,
मेरे मुड़ते ही शांति देवी मेरे सामने आई, और हाथ जोड़कर बोली – अंकुश बेटा ! हो सके तो मुझे माफ़ कर देना…!
उनकी आँखों में पश्चाताप के आँसू थे, रुँधे गले से बोली – मे सच में बहुत बुरी हूँ, लेकिन मे भी क्या करूँ,
कोई समझाने वाला था ही नही, इन्होने कभी मुझे रोका-टोका नही, अपने पैसा कमाने में ही लगे रहे, तो जैसा मेरे मन में आया करती रही..!
मेने उनके हाथ पकड़ लिए और कहा – मे समझता हूँ, आंटी जी, आप बिल्कुल ग़लत नही हैं, बस स्वभाव थोड़ा तीखा है, इसलिए सबको ग़लत लगता है…!
सच मानिए मुझे आपकी बात का बुरा नही लगा, और इसमें थोड़ी सी ग़लती खुशी की भी है, उसे अपनी भावनाओं पर कंट्रोल नही रहा…!
शांति – नही बेटा ! वो तो बच्ची है, उसके मन में जो आया उसने कर दिया, लेकिन मे तो इतनी उमर गुजर चुकी हूँ, अभी तक अपने बच्चों को नही समझ पाई…!
पर अब बेटा मेरी एक विनती है, भगवान के लिए इसी तरह मेरे बच्चों का ख्याल बनाए रखना, मेरी वजह से हमें छोड़ मत जाना…!
मे – आप चिंता मत करो ! मे हमेशा इस परिवार के साथ खड़ा हूँ…!
बहुत – बहुत धन्यवाद बेटा, तुम सच में बहुत अच्छे इंसान हो, ये कहते हुए उनकी रुलाई फुट पड़ी और वो मेरे सीने से लग कर रोने लगी…..!
शांति देवी उपर से जितनी कड़क दिखती थी, आज मेरे सीने से लग कर रोते हुए देखकर मुझे लगा कि वो अंदर से कितनी कोमल हैं, उन्होने सच ही कहा था,
उनके इस स्वाभाव का मूल कारण भी कहीं ना कहीं गुप्ता जी की पैसे कमाने की धुन ही थी, जिसकी वजह से उन्होने अपने परिवार पर कोई ध्यान नही दिया…
मेने उन्हें चुप करते हुए कहा – आप शांत हो जाइए आंटी जी, प्लीज़ रोइए मत..
वजाय चुप होने के उन्होने मुझे और ज़ोर्से कस लिया और बोली – नही बेटा ! मुझे आज जी भरके रो लेने दो,
आज तक मे अपने इन आँसुओं को मुद्दत से अपने अंदर समेटे हुए थी, इन्हें बह जाने दो,
क्योंकि मेरे इस घर में आने के बाद से आज तक कोई मजबूत कंधा मिला ही नही जिसका सहारा पा कर मे अपने अंदर के गुबार को निकाल पाती…!
आज तुमने जो खुशी के लिए किया है, उसे देखकर मुझे लगने लगा कि मेरे अलावा भी कोई तो है, जो मेरे बच्चों का साथ दे सकता है…!
शांति देवी सीने से लगी मेरे कंधे को अपने आँसुओं से तर करती रही, मेने भी उन्हें अलग करने की कोशिश नही की, अच्छा है, आज इनके मन का गुबार जितना हो सके निकल जाए….
उनके अंदर का डर, गुस्सा, चिंता सब आज उनके आँसुओं के माध्यम से बाहर निकल रहे थे…
लेकिन…! अब उनके 38” के खरबूजे मुझे परेशान करने लगे थे, जो कि बुरी तरह से मेरे सीने में दबे हुए थे…,
उनको सांत्वना स्वरूप पीठ सहलाता हुआ मेरा हाथ अनायास ही उनकी कमर तक चला गया, मांसल जांघें मेरी जांघों से सटाती जा रही थी…!
मुझे लगने लगा कि ये एमोशन्स कोई दूसरा ही रूप लेते जा रहे हैं, इससे पहले कि मेरी पॅंट में क़ैद मेरा शेर जाग जाए, मेने उनके कंधे पकड़ कर अपने से अलग कर दिया,
उनके आँसू पोन्छे, और सांत्वना देकर मे वहाँ से चला आया …………………………!
अपने ऑफीस में आकर एक केस स्टडी करने लगा, तभी मेरे फोन की बेल बजने लगी, मेने कॉल करने वाले का नाम देखा, तो मेरे चहरे पर मुस्कान आगयि…
मेने कॉल पिक की और बोला – हेलो ! डॉक्टर. वीना, कैसी हैं आप ?
वो – ओ..हाई हॅंडसम ! तुम सूनाओ… लगता है जनाब हमें तो भूल ही गये…
मे – आप जैसी स्वपन सुंदरी भूलने वाली चीज़ थोड़ी है… मे तो आपके बुलावे के इंतेज़ार में ही था…
वो – हहहे….तो अब में चीज़ हो गयी… चलो कोई बात नही… इस चीज़ के बारे में क्या ख़याल है…
मे – हुकुम कीजिए मालिको…. बंदा हाजिर हो जाएगा….
वो – वैसे अभी फ्री हो क्या..?
मे – नही हैं, तो भी हो जाएँगे…. बोलिए कब और कहाँ आना है..?
वो – अभी आ जाओ मेरे घर… अकेली हूँ…
मे – क्यों ! आपके डॉक्टर साब कहाँ गये.. ? और आज हॉस्पिटल नही गयी…?
वो – मेरे हज़्बेंड फॉरिन गये हैं… किसी काम से एक हफ्ते में लौटेंगे… और आज हॉस्पिटल बंद रहेगा… कोई एमर्जेन्सी होगी तो ही खुलेगा…,
बस पुराने मरीज़ों को ही देखा जाएगा…, जो नर्सस संभाल लेंगी…
मे – ठीक है.. मे एक घंटे में हाज़िर हो जाता हूँ, आप अड्रेस बताइए…
वो – मे अभी मेसेज कर देती हूँ…जल्दी आना…
मे एक घंटे के बाद डॉक्टर. वीना के बंग्लॉ के सामने खड़ा था,
वाउ ! क्या शानदार बंग्लॉ था, लगता है काफ़ी दौलत कमाई है, दोनो ने मिलकर…
मेने मैन गेट की बेल बजाई…कुच्छ देर में एक मोटी सी अधेड़ औरत ने आकर गेट खोला, उसकी पहाड़ जैसी चुचिया… उसके गाउन को फाडे दे रहे थे…
मुझे देख कर वो बोली… किसकू मिलना है… ?
तभी पीछे से डॉक्टर. वीना की आवाज़ आई, जुली कॉन है…?
वो – पता नही मेम्साब ! कोई छोकरा सा है….
तब तक वीना ने अपने हॉल के गेट से ही मुझे देख लिया… और बोली – आने दो जली… इन्हें मेने ही बुलाया है…
वो मुझे अंदर लेकर वापस जाने को पलटी,… बाप रे…. इतनी बड़ी गान्ड…, ऐसा लगता था मानो दो बड़े-2 मटके उल्टे करके कमर से बाँध दिए हों…
वो उन्हें हिलाते हुए मेरे आगे – आगे चल दी… मेरी नज़र उसकी हिलती हुई भारी भरकम गान्ड पर ही टिकी थी…
मुझे देख कर डॉक्टर. वीना, वहीं खड़ी – 2 मुस्करा रही थी, जुली दूसरी तरफ चली गयी और मे वीना के साथ हॉल में आगया….
वीना चुटकी लेते हुए हस्कर बोली – क्या देख रहे थे..?
मे – बाप रे ! क्या गान्ड है इसकी… कैसे संभालती होगी इतने वजन को, उपर से इतनी भारी चुचियाँ….
वो मेरी बात सुन कर ठहाका लगा कर हँसने लगी… और बोली – लगता है… जूली की गान्ड पर मन आगया है तुम्हारा….!
मे हँसते हुए कहा – कोई पागल ही होगा… जो ऐसे माँस के लोथडे पर अपनी एनर्जी वेस्ट करेगा…
कुच्छ देर हम दोनो हँसते रहे.. फिर वो बोली – क्या लोगे, ठंडा, गरम…, कोई हार्ड या सॉफ्ट ड्रिंक…
मे – मुझे तो बस एक ही चीज़ की प्यास है इस समय…
वो मेरी बात को समझते हुए बोली – क्या…?
यहाँ हर चीज़ मौजूद है… तो मेने खड़े-2 ही, उसके चहरे को अपने हाथों में लेकर उसके होठों को चूम लिया…
इन रसीले होठों को छोड़ कर भला और रस पीना क्यों चाहेगा कोई…
वो – ये भी मिलेगा… थोड़ा बैठो, जल्दी तो नही है ना…, और ये कहकर उसने हाथ पकड़ कर सोफे पर बिठा लिया…
वैसे अब तक तुमने ये नही बताया कि तुम काम क्या करते हो..? उसने सवाल किया.
मे आड्वोकेट हूँ, और यहीं डिस्टिक कोर्ट में प्रॅक्टीस कर रहा हूँ…मेने कहा.
हम दोनो हॉल में पड़े मास्टर सोफे पर एक दूसरे से सटे हुए ही बैठे थे, उसने मेरी जाँघ सहला कर पुछा…
ओह्ह्ह…! तो वकील साब कैसी चल रही है आपकी वकालत…?
मेने भी उसकी एक चुचि को मसलते हुए जबाब दिया – ठीक ही है, धीरे – 2 गाड़ी पटरी पर आती जा रही है…
बातों – 2 में ही हम दोनो एक दूसरे के बदन को छेड़ते हुए गरम होने लगे…
उसने मेरा पॅंट खोल कर लंड बाहर निकाल लिया, और अपनी मुट्ठी में लेकर बोली – जब से तुम्हारा ये हथियार देखा है, सपने में भी मुझे यही दिखाई देता है…
ना जाने कितनी बार इसे सोच-सोच कर अपनी पुसी में फिंगरिंग कर चुकी हूँ… आज नही छोड़ूँगी इसे… आज तो इसका रस पीकर ही रहूंगी…
इतना बोलकर उसने उसे अपने मूह में ले लिया, और लॉलीपोप की तरह चूसने लगी…
वीना एक झीने कपड़े की शॉर्ट मिडी पहने थी, जो उसके घुटनों तक ही थी…
सोफे पर बैठी वो झुक कर मेरा लॉडा चूस रही थी… मेने उसकी मिडी को उसकी गान्ड के उपर तक कर दिया और उसकी गद्देदार गान्ड को मसल्ने लगा…
उसकी छोटी सी पेंटी गान्ड की दरार में घुसी पड़ी थी…जिसे मेने साइड में करके.. उसकी गान्ड के सुराख में उंगली डाल दी…
वो अपनी गान्ड को इधर-उधर हिलाकर अपनी गान्ड के छेद से मेरी उंगली को निकालने की कोशिश करने लगी, लेकिन लंड मूह से नही निकलने दिया…
मेने उसकी मिडी को और उपर करके उसके सर के उपर से निकाल दिया… उतने समय के लिए मेरा लंड उसके मूह से बाहर आया…
वो अब ब्रा और पेंटी में थी……
मेने उसे पुछा – बेड रूम में चलें.. तो वो इठलाकर बोली – मुझे गोद में उठाकर ले चलो, तो ही जाउन्गि…
वो थोड़ी सी भारी तो थी, लेकिन मेने उसे आराम से उठा लिया और उसके बेडरूम में ले जाकर बेड पर पटक दिया…
सॉफ्ट गद्दे के उपर वो दो-तीन बार उपर-नीचे जंप हुई…
मेने भी अपने सारे कपड़े निकाल दिए और उसकी ब्रा और पेंटी को निकाल कर, पलंग पर लेट गया…
वो अपनी धरा सी गान्ड लेकर मेरे मूह पर बैठ गयी, फिर मेरे उपर लेट कर मेरा लंड फिर से मूह में ले लिया…
अब हम 69 की पोज़िशन में थे, वो मेरा लंड चूस रही थी, और मे उसकी चूत की खुदाई अपनी जीभ घुसा-घुसा कर करने लगा…
कभी उसकी चूत को दाँतों से काट लेता तो वो अपनी गान्ड को और ज़ोर से हिला-हिला कर मेरे मूह पर रगड़ देती…
10-15 मिनिट में ही हम दोनो एक दूसरे के मूह में झड गये…और अगल-बगल में लेट कर लंबी- 2 साँस भरने लगे…
मूह एक दूसरे के रस से सना हुआ था, तो फिरसे किस्सिंग में जुट गये… और अपने-2 रस का स्वाद बाँट लिया….
कुच्छ देर बाद हम फिरसे एक दूसरे से लिपट गये,
डॉक्टर वीना, जल्दी ही कमतूर होकर मेरा लंड लेने को बाबली सी हो गयी…
मेने उसकी गान्ड के नीचे दो पिल्लो रखे, और उसकी रसीली चूत में अपना मूसल पेल दिया…
शुरू-शुरू में उसे मेरा लंड अड्जस्ट करने में थोड़ी तकलीफ़ हुई, लेकिन फिर जल्दी ही मज़े लेकर चुदने लगी…
शाम तक मेने डॉक्टर. वीना के दोनो छेदो की जम कर खुदाई की… वो मेरे लंड की दीवानी हो गयी,…
सच में बहुत मज़ा देते हो तुम, किसी औरत को सॅटिस्फाइ करने की कला अच्छे से आती है तुम्हें.. वो मेरे बालों में अपनी उंगलिया घूमाते हुए बोली…
मेने कहा – मज़ा तो आया ना मेरे साथ सेक्स करके….?
बहुत…! मेरे हज़्बेंड ने कभी मुझे इतनी देर तक नही छोड़ा… और वैसे भी उनका लंड तुम्हारे से छोटा भी है,
इसलिए शुरू में थोड़ा हार्ड लगा मुझे इसे अपनी पुसी में लेने में…, वो मेरे लंड से खेलते हुए बोली..
हम दोनो अभी भी नंगे उसके बिस्तेर पर पड़े हुए थे… फिर वो उठी, बाथ रूम से फ्रेश होकर कॉफी बनाने चली गयी… इतने में मेने भी अपने कपड़े पहन लिए थे…
कॉफी का मग मुझे पकड़ते हुए वो बोली – अरे यार अंकुश !
एक बेचारी लड़की मेरे हॉस्पिटल में है, उसके साथ गॅंग रेप हुआ है, अब रेप करने वाले लड़के बड़े-2 घरों से हैं.. तो पोलीस भी उसकी कंप्लेंट नही ले रही…
तुम लॉयर हो, कुच्छ करो ना यार.. बेचारी के घरवाले भी बड़ी मुसीबत में हैं…
उनको धमकी भी मिल रही हैं लगातार.. कि अगर उन्होने पोलीस में रिपोर्ट करने की कोशिश की तो सारे परिवार को ख़तम करवा देंगे…
मेने कहा – चलो चलके देखते हैं, क्या हो सकता है…?
कॉफी ख़तम करके वो भी रेडी हो गयी… वो अपनी कार से और मे अपनी बुलेट से उसके हॉस्पिटल की तरफ चल दिए…!
राम लाल, मुनिसिपल कॉर्पोरेशन में चपरासी है, अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ, दो कमरों एक के छोटे से मकान में अपनी जिंदगी बसर कर रहा था…
बड़ी बेटी रेखा, कॉलेज में पढ़ती है, इस समय वो सेकेंड एअर की स्टूडेंट है, उमर अभी 20 पूरा ही किया था…
दूसरी बेटी प्राची 12थ में है, और सबसे छोटा एक बेटा, सुनील जो 9थ में पढ़ता है…
पाँच प्राणियों का ये परिवार राम लाल की छोटी सी पगार से ही चलता है, और इसी में सब लोग हसी खुशी जिंदगी बसर कर लेते थे…
गुणी पत्नी सरला देवी, अपने पति की आमदनी को सही ढंग से इस्तेमाल करके घर का खर्चा पूरा कर लेती थी, थोड़ा बहुत बचत करके घर के लोन की ईएमआई भी भर जाती थी…
बड़ी बेटी रेखा, पड़ोस के ही दो चार बच्चों को ट्यूशन देकर थोड़ा बहुत सहारा दे रही थी… सहारा भी क्या, बस समझ लो अपने कॉलेज का खर्चा निकाल लेती थी…
रेखा, मध्यम कद काठी, गोरे रंग और अच्छे नयन नक्स वाली एक आवरेज सी लड़की थी,
32-24-32 के फिगर के साथ उसमें इतना आकर्षण तो था, कि कॉलेज के लड़के उससे नज़दीकी रखने की कोशिश करते रहते थे…
लेकिन सरल स्वभाव और संस्कारी रेखा, अपने काम से काम रखती, घर से कॉलेज, कॉलेज से घर, बस यही उसका रुटीन रहता… ,
कॉलेज में उसकी ज़्यादा फ्रेंड्स भी नही थी…बस दो-चार लड़कियों से जस्ट हाई-हेलो हो जाती थी…
इसका बहुत बड़ा कारण था, उसका अपना घरेलू स्टेटस, जो उन दूसरी लड़कियों से मेल नही ख़ाता था…
शहर का नामी गिरामी गुंडा… नाम है उष्मान ख़ान… सभी उसे उस्मान भाई कह कर बुलाते हैं… ऐसा कोई ग़लत काम नही है, जो उसने अपने जीवन में ना किया हो…
किसी जमाने का एक टुच्छा सा गली का गुंडा, आज शहर का ड्रग माफ़िया था, शुरू- 2 में उसने पॉकेट मारी से लेकर छोटी- मोटी चोरियाँ करना, ऐसे कामों से शुरुआत की…
फिर वो लोगों को लूटने लगा, धीरे -2 और छोटे-मोटे गुंडे उससे जुड़ते गये और उसने देखते-2 एक बड़ा सा गॅंग खड़ा कर दिया…
पॉल्टिकल मर्डर, ज़मीन हथियाना ऐसे कामों से आगे बढ़ते हुए उसने ड्रग का धंधा, गैर क़ानूनी शराब और यहाँ तक की हथियारों की तस्करी भी करने लगा…
अब तो शहर के जाने माने पॉलिटीशियन, बुरॉकरटेस और बिल्डर्स भी उसकी मदद लेने लगे, और वक़्त आने पर वो उनकी मदद से अपने को बचाए भी रखता था…
जिस कॉलेज में रेखा पढ़ रही थी, उसी में उस्मान का बेटा असलम भी पढ़ता था…
वो गाहे बगाहे लड़कियों को छेड़ना, किसी को भी मारना पीटना उसके लिए आम सी बात थी..
असलम के दोस्तों की फेहरिस्त में भी अच्छे-2 परिवार के लड़के ही थे, जो कहीं ना कहीं उसके बाप के कारोबार में उसके सहभागी थे…
रेखा के बयान के मुतविक असलम ने कई बार उसको भी छेड़ा, पर वो बेचारी लहू का सा घूँट पीकर बस उस जैसे गुण्डों से किसी तरह अपने आपको बचाती रही…
एक दिन कॉलेज में फंक्षन था, सब उसमें बिज़ी थे…रेखा भी उस वक़्त कॉलेज में ही थी…साथ में एक रूबिया नाम की लड़की बैठी थी…
अचानक से रूबिया उससे बोली – चल रेखा कॅंटीन में चल कर कुच्छ ठंडा गरम पीते हैं…
रेखा ने बहुत मना किया, लेकिन वो नही मानी और उसे जबर्जस्ति खींच ले गयी…
रेखा को कॅंटीन की ब्रेंच पर बिठाकर वो रिसेप्षन से दो ठंडे की बॉटल ले आई, एक रेखा को दी और दूसरी उसने खुद ले ली…
ठंडा पीने के कुच्छ देर बाद ही रेखा का सर चकराने लगा…, जब उसने रूबिया को ये बात बताई.. तो वो बोली –
हो सकता है, तुझे कॉलेज के शोर शराबे की वजह से ऐसा फील हो रहा हो, चल में तुझे घर छोड़ देती हूँ…
उसने रेखा को रिक्शा में बिठाया और वहाँ से निकल गयी… रिक्शा में बैठने के कुछ देर बाद ही रेखा की आँखें बंद हो गयी और वो रूबिया की गोद में लुढ़क गयी….
जब उसे होश आया, तो उसने अपने आप को किसी फार्म हाउस के एक बड़े से कमरे में बेड पर लेटे हुए पाया…
उसका सर अभी भी चकरा रहा था, लेकिन शरीर में एक अजीब सी उत्तेजना भरती जा रही थी….
अभी वो उस बेड से उतर कर खड़ी ही हुई थी…, कि उसने असलम को कमरे के अंदर आते हुए देखा…
रेखा असलम को देखकर चोंक पड़ी, और बोली – त्त्त्त्तुम्म्म…., मे यहाँ कैसे पहुँच गयी…?
असलम – हम लेकर आए हैं मेरी जान तुम्हें यहाँ…! चिंता मत करो.. यहाँ तुम्हें कोई तकलीफ़, नही होगी… बस थोड़ा सा हमें खुश कर देना…
इतना कह कर वो एक दरिंदगी वाली हँसी हँसते हुए उसके नज़दीक आया, और उसके बदन के साथ छेड़ खानी करने लगा…
रेखा ने अपने हाथ से उसका हाथ अपने बदन से दूर झटक दिया और बोली – मुझे जाने दो … मे ये सब नही कर सकती…
तब तक कमरे में उसके तीन साथी और आगये, जिनमें एक एमएलए रस बिहारी का भतीजा भी था.
वाकई दो को वो नही पहचानती थी…
उन चारों ने मिल कर उसे घेर लिया…, और उसके साथ ज़ोर जबर्जस्ती करने लगे…
वो उनसे बचने की कोशिश करती रही, लेकिन बच नही पा रही थी, कभी एक से बचती, तो दूसरा उसे पकड़कर उसके नाज़ुक अंगों से छेड़-छाड़ कर देता…
एक पल को वो भी उन्माद से भर जाती, शायद ये उसको दी गयी दवा का असर था, लेकिन दूसरे ही पल वो उनसे फिर बच निकलने के प्रयास करने लगती…
वो चीखती रही चिल्लाति रही… लेकिन उन दरिंदों ने उसकी एक ना सुनी, और उसके बदन से एक-एक करके सारे कपड़े नोच डाले…
फिर खेल शुरू हुआ दरिंदगी भरा…और वो चारों मिलकर उसे नोचते- खसोटते रहे.. उसके बदन पर कई जगह दाँतों के काटने से घाव बन गये, जो उसके गाल, थोड़ी, गले पर साफ साफ दिख रहे थे…
उन चारों ने उसको जी भर कर मसला, बुरी तरह से रौंदा, इस दौरान वो कई बार अपनी चेतना भी खो चुकी थी…
लेकिन वो नरभक्षी भेड़िए उसके बदन को तब तक भभोड़ते रहे, जब तक उनकी खुद की उत्तेजना शांत नही हो गयी…
फिर उन्होने उसके बेदम हो चुके शरीर को गाड़ी में डाला और हॉस्पिटल के सामने फूटपाथ पर फेंक कर भाग गये…!
फुटपाथ पर भी ना जाने वो कितनी देर तक पड़ी रही, फिर एक राह चलते आदमी ने हॉस्पिटल में आकर बताया, तब कहीं जाकर उसे अंदर लाए और उसका ट्रीटमेनेट शुरू किया…
उसकी दुख भरी कहानी सुन कर मेरे शरीर के रौंय खड़े हो गये…गुस्से से मेरा शरीर काँपने लगा……..!
मे उसके चेहरे और गर्दन के घावों को ही देख रहा था, कि तभी डॉक्टर. वीना
बोली – क्या देख रहे हो अंकुश… ये तो कुच्छ भी नही हैं…
इसके वाकी के शरीर के घावों को तो तुम देख भी नही सकोगे… इसके वक्षों को तो इस कदर दाँतों से काटकर घायल किया है.. कि बस क्या कहूँ…? बता भी नही सकती मे..
इसके निपल्स को तो बिल्कुल खा ही लिया है उन हराम्जादो ने…
पिच्छले 48 घंटों से ये इसी तरह दर्द से तड़प उठती है… अभी भी ज़्यादा हिलने डुलने की कोशिश में इसकी यौनी से खून बहने लगता है…
मेने वीना से कहा – इसकी रिपोर्ट मिल सकती है मुझे…?
उसने मुझे रिपोर्ट लाकर दी, जिसे मेने एक बार पढ़ा और फिर कृष्णा भैया को फोन लगा दिया…….!
कॉल पिक होते ही मेने कहा – मे आइ टॉक टू एसपी कृष्ण कांत शर्मा…?
वो – यस ! एसपी कृष्ण कांत हियर …
मे अंकुश बोल रहा हूँ भैया, क्या आप अभी सहयोग हॉस्पिटल आ सकते हैं…इट्स आन अर्जेन्सी …
वो – ईज़ सम थिंग सीरीयस…?
मे – यस ! मोर दॅन सीरीयस…
वो – ओके, आइ विल बी देयर, विदिन अवर…
एक घंटे के बाद भैया अपने दल-बल के साथ हॉस्पिटल पहुँच गये… मेने उन्हें सारी वस्तु स्थिति से अवगत कराया…
उन्होने रेखा का स्टेट्मेंट दर्ज कराया, फिर उसके पिता से बोले – राम लाल जी ! आपने कॉन से थाने में फरियाद की थी…
उसने उस थाने का नाम बताया, तो भैया ने उस थाने का नंबर लगाया, और उस इनस्पेक्टर को इम्मीडियेट तलब किया…
उसके आते ही उन्होने उसे बुरी तरह से लताड़ा… और वहीं खड़े-2 लाइन हाज़िर कर दिया… वो गिड गीडाता रहा… और बड़े – 2 नाम होने की वजह से रिपोर्ट ना लिखने का कारण बताया…
लेकिन उन्होने उसकी एक ना सुनी… वहाँ से हम सीधे कमिशनर ऑफीस पहुँचे…
जब उन दो लड़कों के नाम बताए, तो वो हड़बड़ा गये और बोले – जानते हो एसपी उन चार लड़कों में एक हमारा भी बेटा है…!
एसपी – क्या कह रहे हैं सर ! आपका लड़का रेपिस्ट में शामिल है…?
कमिश्नर- हां ! और इसलिए हम तुम्हें ये सलाह देंगे, कि तुम इस मामले को जैसे भी हो रफ़ा दफ़ा करो, लड़की के परिवार को हम संभाल लेंगे…
अब मेरा माथा ठनका, क्यों ये पोलीस इनस्पेक्टर रिपोर्ट नही लिख रहा था, बेचारे की इतनी औकात नही थी कि कमिशनर के बेटे को ही अरेस्ट कर सके…
मेने कहा – कमिशनर साब आप क़ानून के रखवाले हैं, और आप ही ऐसा करेंगे मुजरिमों को बचाने की कोशिश करेंगे, ये तो अपने पद के साथ गद्दारी हुई ना…
वो भड़क कर बोले – हू आर यू..? मुझे मत सिख़ाओ क़ानून के साथ क्या करना है क्या नही…!
मेने कहा – मे भी क़ानून का मुहाफ़िज़ हूँ, और क़ानून की इज़्ज़त करना मेरा धर्म है..!
कमिश्नर – हम इस मामले में तुम लोगों के साथ कोई बहस नही करना चाहते, बस एक बात हमारी सुन लो एसपी, इस केस में आगे बढ़ाने के लिए हम तुम्हें पेर्मिशन नही दे सकते…
मेने सीट से उठते हुए कहा – कोई बात नही सर, हम सीधे कोर्ट से ही अरेस्ट वॉरेंट निकलवा लेते हैं, चलो एसपी साब…
मेरी बात सुनकर कमिशनर चड्डा भड़क गया, और भैया को धमकाने लगा…
लुक एसपी, अगर तुमने मेरे बेटे या उसके दोस्तों को हाथ भी लगाया, तो समझ सकते हो तुम्हारा क्या हाल होगा…
मे – ज़्यादा से ज़्यादा ट्रान्स्फर ही कर सकते हैं आप, इससे ज़्यादा आपके हाथ में कुच्छ नही है..
इतना बोलकर हम उसकी और कोई बात बिना सुने वहाँ से निकल आए, मे भैया को लेकर सीधा जस्टीस ढीनगरा के पास पहुँचा….!
उनको सारी बात बताई, मेडिकल सर्टिफिकेट की बिना पर उन्होने तुरंत अरेस्ट वॉरेंट इश्यू कर दिया….
आनन फानन में उन तीन लड़कों को अरेस्ट कर लिया गया, चौथे का नाम उनसे उगलवा कर, उसे भी दबोच लिया, जो योगराज बिल्डर का बेटा था…
चार्ज शीट बना कर उन्हें दूसरे दिन ही कोर्ट में पेश किया गया…और पोलीस कस्टडी ले ली…
भैया ने अपने तौर पर तो अपना काम कर दिया था… जिसके लिए उन्हें कमिशनर से काफ़ी लताड़ भी सुननी पड़ी….!
लेकिन हवालात में उन लड़कों के साथ मुजरिमों जैसा वार्तब कतयि नही किया गया, हमारे निकलते ही पोलीस वाले किसी मेहमान की तरह उन हराम्जादो की सेवा में लग गये….
इस दौरान राम लाल पर काफ़ी दबाब भी डाला, यहाँ तक कि, उसको खरीदने की भी कोशिश की गयी…
लेकिन रेखा ने अपने बाप को साफ-2 बोल दिया, कि अगर उसने ऐसा कुच्छ भी करने का सोचा भी तो वो मौत को अपने गले लगा लेगी… लेकिन अपने जीते जी, उन कुत्तों को माफ़ नही करेगी…!
दो दिन बाद रेखा को हॉस्पिटल से छुट्टी मिल गयी, और वो लोग अपने घर आगये…
8 दिन की पोलीस रेमंड के दौरान उन लोगों ने जी तोड़ कोशिश की… वो कहावत है ना ! कि पैसों से यहाँ सब कुच्छ खरीदा जा सकता है…!
वही सब हुआ, राम लाल 10 लाख लेकर कोर्ट में मुकर गया… उसने रेखा को भी सच्चाई बयान नही करने दी,
पैसों के दम पर उन्होने सुनवाई भी अपने फेवर के जड्ज के यहाँ करा ली…जो उनका ही आदमी था…
सारे सबूत झूठे साबित कर दिए गये…, यहाँ तक कि मेडिकल रिपोर्ट भी बदलवा दी गयी, और उन चारों को बा-इज़्ज़त रिहा कर दिया गया…जिन्होने कभी किसी की इज़्ज़त नही की.
उसके दो दिन बाद ही रेखा ने अपने आपको पंखे से लटका लिया… और वो इस लालच से भरी दुनिया को छोड़ कर चली गयी…!
पैसों के वजन के आगे, राम लाल को बेटी का गम भी हल्का महसूस हुआ… जो उन लोगों ने बाद में और बढ़ा दिया था, और उसने इस मामले में अपनी चुप्पी साध ली….!
इस घटना के बाद भैया के संबंध उनकी ससुराल से और ज़्यादा खराब हो गये, और कामिनी भाभी उनका बंगला छोड़ कर अपने पिता के घर रहने चली गयी….
खैर ये तो अच्छा ही हुआ, क्योंकि वो भी उनसे छुटकारा पाना चाहते थे, सो उन्होने अपनी तरफ से पहल करते हुए, डाइवोर्स केस फाइल कर दिया….!
मेने उनके यहाँ कोर्ट के थ्रू उसका नोटीस भिजवा दिया…
राजनीति का एक नेगेटिव पहलू भी होता है, ये साले नेता लोग परिवारिक प्रतिष्ठा को हर हालत में बचाए रखने का यता संभव प्रयास करते हैं..
सो जैसे ही डाइवोर्स नोटीस उन्हें मिला… वो लोग हड़बड़ा गये, दौड़े-दौड़े भैया के पास आए… और अपनी इज़्ज़त की दुहाई देने लगे.
भैया ने कहा – कि पहल तो तुम्हरी तरफ से हुई है… मे तो इस बेमानी रिस्ते से निजात ही दिला रहा हूँ… तुम भी खुश और मे भी चैन से रह सकूँगा…
जब वो ज़्यादा मिन्नतें करने लगे तो भैया ने दो टुक जबाब देते हुए बोल दिया… कि अब जो भी बात करनी हो, मेरे लॉयर से करो…,
मेरे ऑफीस का अड्रेस तो मेरे लेटरहेड में था ही, सो दूसरे ही दिन कामिनी मेरे ऑफीस आ धमकी….!
मुझे सामने देख कर वो चोंक गयी… और बोली – अरे देवेर जी ! आप और यहाँ..?
मेने पहले उनको नमस्ते किया फिर आराम से बैठने को कहा… जब वो मेरे सामने बैठ गयी तो मेने कहा – हां ! ये मेरा ही ऑफीस है… कहिए क्या सेवा करूँ आपकी…
वो मायूसी वाले स्वर में बोली – आप तो हमसे इतने ज़्यादा नाराज़ हैं, कि घर पर भी आपने ऐसा व्यवहार किया… जैसे मे आपकी भाभी ना होकर कोई दुश्मन थी…
मे – अपने उस व्यवहार के लिए मे माफी भी माँग चुका था, और आपको वादा भी किया की आइन्दा आपको टच भी नही करूँगा…,
वो – वही तो रोना है, मे तो चाहती थी, कि आप मेरे साथ वो बार – बार करो… थोड़े से दर्द के बाद मज़ा भी तो था उसमें,
पर आपने मुझे कुच्छ कहने का मौका ही नही दिया…
मे – क्या…? क्या सच में आप उस बात से नाराज़ नही थी…?
वो – ऑफ कोर्स नोट !
मे – ओह.. सच में मेने कितनी बड़ी भूल करदी, जो आप जैसी मस्त हॉट भाभी से दूर हो गया…
कामिनी को लगा कि उसका तीर चल गया है, वो उसकी धार और बढ़ाने के लिए अपनी चेयर से उठकर मेरे पास आगयि और पीछे से मेरे गले में बाहें डाल कर बोली –
अभी भी कोन्सि देर हुई है देवेर जी, मे तो आप जैसे मर्द के लिए कुच्छ भी सहने को तैयार हूँ… प्लीज़ मुझे वो तकलीफ़ एक बार फिर से दो ना..!
इतना कह कर वो मेरी गोद में आकर बैठ गयी… और मेरे गाल को किस कर लिया…
मेने उसे गोद से उठने का इशारा किया, तो वो थोड़ी नाराज़ सी दिखी,…
मेने कहा – एक मिनिट उठिए तो सही, एकदम से कोई आगया तो लेने के देने पड़ जाएँगे…
मेरा तो अभी धंधा ठीक से जमा भी नही है, उससे पहले ही बंद हो जाएगा…
वो मेरी बात का मतलव समझ कर गोद से उतर गयी, मेने जाकर गेट लॉक किया और फिरसे उसे अपनी गोद में लेकर अपनी सीट पर बैठ गया….
वो इस समय एक लाल रंग का टॉप और लोंग स्कर्ट में थी, गोद में आते ही वो मेरे होठों पर टूट पड़ी…मे उसकी बड़ी-2 चुचियों को मसल्ने लगा…
अभी भी कामिनी ने अपने फिगर को अच्छे से मेनटेन किया हुआ था, शायद जिम वगैरह जाती होगी,.
चुचियों में वही सुडौलता, कड़क टाइट गान्ड, सपाट पेट…भैया शायद अच्छे से उसकी मस्ती को मिटा नही पाते होंगे ड्यूटी के बोझ की वजह से…
बहुत गर्मी चढ़ि थी उसको… वो किसी भूखी कुतिया की तरह मेरे होठों को खाए जा रही थी….
मेने भी उसकी चुचियों को मसल्ने में अपनी पूरी ताक़त लगा दी, मस्ती से उसका चेहरा लाल भबुका हो गया था…
मेने उसकी स्कर्ट में हाथ डालकर उसकी चूत को जैसे ही मसाला…, वो मेरा हाथ झटक कर मेरी गोद से उतर गयी…
मे आश्चर्य से उसको देखने लगा, सोचा- साली इसको अचानक से क्या हो गया..?
मेने उसे पुछा – क्या हुआ भाभी मेरे साथ मज़ा नही करना है…?
वो एक नशीली सी स्माइल करते हुए बोली – करना है ना ! लेकिन ज़रा खुलकर..
अच्छा तो ये बात है, ये कहकर मेने उसकी स्कर्ट को खींच दिया, अब वो टॉप और पैंटी में आ गयी…
मेने उसे फिरसे अपनी गोद में खींच लिया, और उसकी चूत को पैंटी के उपर से अपनी मुट्ठी में लेकर मसल दिया…
वो मस्ती से सिसकने लगी…, हइईई…मेरे…रजाआ…. तुम्हारे हाथों में तो जादू है….
थोड़ा सा ज्ञान अपने भाई को दे देते तो कितना अच्छा रहता… उूउउफफफ्फ़……उन्हें तो बस अपनी ड्यूटी ही दिखाई देती है.. अपनी बीवी की तो कोई परवाह ही नही…. आअहह….ससिईईई…
मेने उसकी पेंटी को एक ओर करके अपनी दो उंगलिया उसकी गीली चूत में डाल दी और अंदर बाहर करने लगा….
उसने लपक कर मेरा हाथ पकड़ा और अपनी चूत से हटा दिया, खड़े होकर एक मिनिट में ही अपने वाकी के सारे कपड़े निकाल फेंके, और फिर मेरे कपड़ों पर टूट पड़ी…
उसकी व्याकुलता देख कर मेने मन ही मन कहा… लगता है साली जाने कब्से लंड की भूखी है…
जब मेरे भी सारे कपड़े निकल गये तो मेने उसे टेबल के उपर लिटा दिया, और उसकी टाँगों को उठाकर उसकी गीली चूत में अपना सोटा सा लंड पेल दिया…
सर्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर………….से एक ही झटके में मेरा तीन-चौथाई लंड उसकी चूत में सरक गया… उसकी आँखें बंद हो गयी…. और एक मीठी सी कराह उसके होठों से फुट पड़ी…
आहह….भाभी…क्या टाइट चूत है तेरी…. अभी भी एकदम कसी कसी है….
तुम्हें अच्छी लगी….आअहह….फिर फाडो…. राजा….. बना दो इसका भोसड़ा…अब देर मत करो, आहह…. डाल दो पूरा…
उसकी उत्तेजक बातें सुनते ही मुझे जोश आ गया… और पूरी ताक़त से धक्का लगा दिया….
ढपाक से मेरे अंडे उसकी गान्ड से जा टकराए… जड़ तक मेरा लंड उसकी चूत में था, जो उसकी बच्चेदानी तक पहुँच चुका था….
आईईईईईई……….माआअ……थोड़ा धीरे ..देवरजीीइईईईई….आअहह…मज़ा आगया…मेरी जानन्न…
उसके होठ चूस्ते हुए मे उसकी चुचियों को मसल्ने लगा… और धक्के भी लगाता रहा….
मेरे तीन तरफ़ा हमले को वो ज़्यादा देर झेल नही पाई और उसकी चूत भल भला कर झड़ने लगी…, उसकी एडीया मेरी गान्ड के उपर कस गयीं….
मेने अब उसको नीचे खींच लिया और टेबल पर हाथ टिका कर उसको घोड़ी बना दिया..
उसकी चौड़ी गान्ड देख कर मेरा मन फिर ललचा गया…
भाभी ! गान्ड दोगि ?
वो – नही नही… ! तुम बहुत बेदर्दी से मारते हो… ऊस्दिन का दर्द अभी भी याद आजाता है…
मे – लेकिन अभी कुच्छ देर पहले तो आप बोली थी, वैसी ही तकलीफ़ दो मुझे.. फिर अब क्या हुआ…?
वो हँसते हुए बोली – हहहे… वो तो मेने वैसे ही तुम्हें उकसाने के लिए बोला था, और फिर मुझे घर भी तो जाना है,
लंगड़ी घोड़ी की तरह चलूंगी तो कोई भी पहचान लेगा कि छिनाल कहीं गान्ड मरा कर आई है…
मे भी इस समय उसे नाराज़ नही करना चाहता था, सो उसकी चूत में फिरसे लंड पेल कर ढका-धक चुदाई शुरू कर दी…
आधे घंटे में वो तीसरी बार झड रही थी, उसके साथ ही मेरा भी नल खुल गया और अपने वीर्य से उसकी चूत को भर दिया…
वो कुच्छ देर टेबल पर गाल टिकाए पड़ी रही, फिर अपनी पैंटी से ही अपनी चूत और मेरे लंड को सॉफ किया…, चिपचिपी पैंटी को अपने बॅग में डाल लिया, फिर हमने अपने -2 कपड़े पहन लिए….
उसके बाद मेने गेट अनलॉक किया, और फिर अपनी-2 सीट पर बैठ कर बातें करने लगे..
मे – हां भाभी ! अब कहिए… कैसे आना हुआ…?
वो कोर्ट के थ्रू मिले डाइवोर्स का नोटीस टेबल पर रखते हुए बोली – ये क्या है देवेर जी…?
मे – डाइवोर्स का नोटीस है, साइन कीजिए और अलग हो जाइए आप दोनो,
वैसे भी शुरुआत तो आपकी तरफ से हो ही चुकी है, भैया तो उस बेमानी रिस्ते से आपको आज़ाद ही कर रहे हैं बस…
वो – मेरे अपने डॅड के घर चले जाने से ही उन्होने ये सोच लिया कि हमारा रिस्ता ऐसे ही ख़तम हो जाएगा..?
मे – और भी बहुत सी बातें हैं, जो आपकी और उनकी सोच से मेल नही खाती…
अब यही ले लीजिए… आपकी शादी को इतने साल हो गये, अभी तक आप माँ नही बनना चाहती, ये भी एक बहुत बड़ी वजह है, जो दिखती है कि आप इस बंधन से आज़ादी चाहती हैं…
दूसरी वजह… जो चीज़ें उनको हर्ट करती हैं, आप जान बुझ कर वही काम करती हैं…
इन सबके बावजूद, अब आप बिना उनसे कुच्छ कहे सुने अपने पिता के घर जाकर रहने लगी…
तो इससे अच्छा है कि ये रिस्ता ही ख़तम करिए…और जी लीजिए अपनी –अपनी लाइफ, जैसे जीना चाहते हो…
वो कुच्छ देर चुप रही, फिर कुच्छ सोचकर बोली – मे मानती हूँ, कि मुझसे कुच्छ ग़लतियाँ हुई हैं… और हो रही हैं…
अब में तुम्हें अश्यूर करना चाहती हूँ.. कि आगे से उन्हें सुधारने की कोशिश ज़रूर करूँगी …मुझे बस एक मौका दिला दो…
और रही बात डॅड के पास जाकर रहने की, तो ये जानते हुए कि सन्नी मेरा चचेरा भाई है, उन्होने उसे अरेस्ट करवा दिया…
डेडी की इज़्ज़त का भी कोई ख्याल नही किया…
मे – तो आपका मतलव है कि वो बेगुनाह है,…?
वो – हम कॉन होते हैं, किसी को गुनेहगर या बेगुनाह कहने वाले, ये तो अदालत में ही साबित होना है, और हुआ भी… देखलो वो बेगुनाह साबित हुआ भी…
मे – देखिए भाभी हम यहाँ कॉन बेगुनाह है, या कॉन गुनहगार, इस विषय पर बहस करने नही बैठे,
बस मे यही कहना चाहता हूँ, कि उन्होने सिर्फ़ अपनी ड्यूटी की है…, अगर आप यही सब कहने आई हैं, तो सॉरी ! इस मामले में मे आपकी कोई मदद नही कर सकता…
और वैसे भी एक अच्छी पत्नी का कर्तव्य है, कि वो हर परिस्थिति में अपने पति के फ़ैसले के साथ खड़ी रहे… जो आपने कभी नही किया…
वो – चलो मान लिया कि मेने ग़लती की है, पर आगे से कोशिश करूँगी अपने को अच्छी पत्नी साबित कर सकूँ… बस इस बार किसी तरह से उनको समझाओ, और ये केस वापस लेलो…
मे – इसके लिए मे आपकी मदद कर सकता हूँ… लेकिन फिलहाल मामला गरम है, कुच्छ दिन और इंतेज़ार करो, सब ठीक हो जाएगा…
ये वादा करता हूँ, कि आप दोनो को फिरसे मिलने का भरसक प्रयास करूँगा…अगर आपने अच्छा बनके साबित कर दिखाया तो…
इसी तरह की कुछ और बातों के बाद वो फिर मिलते रहने का वादा करके चली गयी… और मे अपने अगले कदम को सोच कर मुस्करा उठा….!
मे किसी भी तरह से इन लोगों के बीच घुसना चाहता था, कोई रास्ता मुझे दिखाई नही दे रहा था, लेकिन अब ये सामने से ही मौका मेरे हाथ आता दिखाई देने लगा.
मे ठान चुका था, कि रेखा के क़ातिलों को उनके किए की सज़ा तो देकर ही रहूँगा, जो रास्ता मुझे अब तक नही मिल पा रहा था, वो कामिनी के द्वारा मिलता दिखाई दे रहा था…
मेने उसे भैया से दोबारा संबंध सुधारने का आश्वासन देकर अपने जाल में फँसा लिया था, अब वो मेरे खिलाफ कभी सोच भी नही सकेगी…
उसका मुख्य कारण था, अपने बाप की पोलिटिकल इमेज बचाना….!
मेने अपने एक आदमी को उसके पीछे लगा दिया, वो कहाँ जाती है, क्या करती है, किसके साथ उठना बैठना है…!
वो ग़लत कामों में लिप्त है, ये मुझे हिंट मिल चुकी थी…, अब कितनी अंदर तक है ये जानना ज़रूरी था…
मेने अपना आदमी उसके पीछे लगा तो दिया था, लेकिन इतनी बड़ी हस्ती के अंदर तक घुसकर ऐसे सीक्रेट निकाल पाना बड़ा मुश्किल काम था…
लेकिन कहते हैं ना कि जहाँ चाह होती है, वहाँ कोई ना कोई राह अवश्य निकल आती है, और ऐसी ही एक राह मुझे जल्दी ही मिलने वाली थी….
कुच्छ दिन रेखा वाले रेप केस में, मे इतना उलझ गया, की गुप्ता जी का एक टॅक्सेशन का मामला ही भूल गया,
वैसे तो वो अपना बिज़्नेस पूरी ईमानदारी से करते थे, समय पर टॅक्स भरना वो कभी नही भूलते थे,
लेकिन फिर भी एक घूसखोर बाबू ने जाली पेपर बनाकर कमिशनर की सील और फ़र्ज़ी साइन करके उनके ऑफीस में 25 लाख टॅक्स वकाया का नोटीस भिजवा दिया..!
गुप्ता जी ने ये मामला हल करने के लिए मुझे बोला, सारे पेपर चेक करने के बाद मे समझ गया कि ये सब फर्ज़ीबाड़ा है, तो मेने बाद में मिलने का सोच कर पेंडिंग रखा…
इसी बीच डॉक्टर. वीना से मुलाकात के बाद रेखा वाले रेप केस में बिज़ी हो गया, जिसमें उस बेचारी को इंसाफ़ तो नही मिला, उल्टे अपनी जान देनी पड़ गयी…
इस मामले से मे थोड़ा अपसेट भी था, कि इसी बीच उस बाबू का फोन भी गुप्ता जी के ऑफीस में आगया, उन्होने मुझे फोन करके याद दिलाया…
तब मुझे याद आया और उन्हें आज के आज ही ये मामला हल करने का आश्वासन देकर मे उस बाबू से मिलने उसके ऑफीस चल दिया…
स्मार्ट फोन मेरी जेब में ही था जिसे मेने उसके ऑफीस में एंटर होने से पहले ही वीडियो रेकॉर्डिंग मोड पर सेट कर दिया, अब बस ओके करने की देर थी और रेकॉर्डिंग स्टार्ट हो जानी थी,
मेने उसको सारे डीटेल समझाए, इतनी इनकम हुई, इतना पर्चेस हुआ, इतना ओवरहेड्स हुए, इतना इनकम टॅक्स जमा हुआ, इतना सेल्स टॅक्स जमा हुआ वो सारी वर्क शीट सील साइन के साथ उसको दिखाई…
उसने वो सारे पेपर एक साइड को सरका दिए, मे समझ गया, अब ये अपनी औकात पर आनेवाला है, सो चुपके से ओके बटन दबा दिया, रेकॉर्डिंग शुरू हो गयी…
वो बोला – देखिए वकील साब, अब इस बाबू की नौकरी से तो दो जून की रोटी ही हो पाती है, मे ये सब जानता हूँ कि गुप्ता जी जैसा क्लाइंट कभी धोखा धड़ी नही करता..
लेकिन कुच्छ अपना भी तो भला सोचिए, ये 25 लाख की रिकवरी का नोटीस है, कुच्छ आप भी कमा लो, और एक-दो % हमें भी दिलवा दो, मामला यहीं रफ़ा दफ़ा हो जाएगा…
वरना आप तो जानते ही हैं, एक बार मामला कोर्ट के हाथ में चला गया, तो हमारे ऑफीस को सारे ओरिजिनल डॉक्युमेंट्स चेंज करने में कितना वक़्त लगेगा…
आप लाख सबूत पेश करते रहिए कोई सुनने वाला नही है, 25 लाख खम्खा सरकार की तिजोरी में जमा करना ही पड़ेगा…, ना हमें कुच्छ हासिल होगा और ना आपको…
मे शांत होकर उसका सारा भाषण सुनता रहा, फिर वो आगे बोला – बोलिए, फिर क्या विचार है…!
उसे लाइन पर लाने के लिए इतना सबूत काफ़ी था, सो चुपके से मोबाइल की रेकॉर्डिंग ऑफ करते हुए कहा – देखिए साब मेरा उसूल है,
मे जिसके लिए भी काम करता हूँ, उसके साथ पूरी ईमानदारी निभाता हूँ, तो मे तो ये अलाउ नही करूँगा कि आपकी बात मान ली जाए…
रही बात केस करने की तो उसके लिए आप फ्री हैं, देख लेंगे अगर 25 लाख देना ही पड़ा तो सरकार को ही देंगे, कम से कम हमारा पैसा विकास के कामों तो लगेगा…
मेरी बात सुनकर वो चिड गया और झूठी गीदड़ भभकी देते हुए बोला – जुम्मा- जुम्मा चार दिन हुए हैं आपको वकालत शुरू किए हुए… ज़्यादा ईमानदारी मत दिखाओ, वरना लेने के देने पड़ सकते हैं…
हम जैसे बाबुओं के चक्कर में पड़कर अच्छे-अच्छे अपनी वकालत भूल जाते हैं…! मे फिर कहता हूँ, मेरी बात मानिए और आप भी थोड़ा बहुत कमा लीजिए…
गुप्ता जैसी मोटी मुर्गी से दो-चार अंडे ले भी लोगे तो भी उसको कोई फरक नही पड़ने वाला…!
मे – लेकिन मुझे तो फ़र्क पड़ता है, मे अपने जमीर को नही मार सकता, और रही बात पैसे कमाने की, तो गुप्ता जी मुझे बिना माँगे ही इतना दे देते हैं, कि मुझे ऐसे कामों की ज़रूरत ही नही पड़ती…
मेरी बात से वो और ज़्यादा चिढ़ गया और ठंडे से लहजे में बोला – तो नही मानेंगे आप, ठीक है फिर कोर्ट में ही मिलते हैं…!
मे – शायद मुझे इतनी दूर जाने की ज़रूरत ही ना पड़े, हो सकता है कमिशनर साब के ऑफीस में ही बात बन जाए…!
मेरी बात सुनकर वो चोंक गया…, मेने टेबल पर अपने दोनो हाथ रख कर उसकी तरफ झुकते हुए बोला – वैसे कितने बच्चे हैं आपके…?
बाबू – बच्चों से क्या मतलव है तुम्हारा…?
मे – उनका भविश्य सुरक्षित कर लिया है या उसी के लिए रिश्वत माँग-माँग कर पैसे जमा कर रहे हो…!
ऐसा ना हो नौकरी चले जाने पर बेचारे दर-दर भटकते फिरें…
बाबू – धमकी दे रहे हो, जाओ जाकर कमिशनर साब से शिकायत करदो, कोई सबूत नही है कि मेने तुमसे पैसे माँगे हैं…
मे – जानते हो मे कमिशनर साब के ही पास क्यों जा रहा हूँ..?
उसने सवालिया नज़रों से मुझे घूरा…जैसे पूछना चाहता हो कि क्यों..?
मेने आगे कहा – क्योंकि मे तुम्हारे बच्चों का बुरा नही चाहता, कमिशनर साब ज़्यादा से ज़्यादा तुम्हें कुच्छ दिनों के लिए सस्पेंड ही करेंगे…
लेकिन अगर मामला कोर्ट में चला गया ना, तो हो सकता है, रिश्वत माँगने के जुर्म में हमेशा के लिए नौकरी चली जाए और साथ में जैल भी हो सकती है…
वो भड़कते हुए बोला – क्या सबूत है तुम्हारे पास कि मेने तुमसे रिश्वत माँगी है…!
मेने उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा – लो देखो, ये कहकर मेने मोबाइल की क्लिप उसके सामने चला दी…!
देखते ही उसका शरीर डर से थर-थर काँपने लगा, गिरगिट की तरह फ़ौरन रंग बदलते हुए मेरे पैर पकड़ लिए और गिडगिडाकर बोला –
मुझे माफ़ करदो वकील साब, प्लीज़ ये सबूत किसी को मत दिखाना वरना मेरे बच्चे भूखे मार जाएँगे… रहम करो मुझ पर…!
मे – वादा करो, आइन्दा कोई ग़लत रास्ते से पैसा कमाने की कोशिश नही करोगे…
वो – मे वादा करता हूँ, आइन्दा ऐसा काम कभी नही करूँगा…!
उसने वो सारे फर्जी पेपर मेरे सामने फाड़कर डस्टविन में डाल दिए, मे उसे सबक सिखाकर उसके ऑफीस से बाहर आ गया….!
करने को तो और बहुत कुच्छ हो सकता था, लेकिन उसके बाल-बच्चों का सोचकर मेने उसे धमका कर ईमानदारी पर चलने के लिए मजबूर कर दिया था…
और ये मेरा उसूल रहा है, कि पापी को मत मारो, हो सके तो उसके अंदर के पाप को ख़तम करो, जिससे वो पाप करे ही नही..
वहाँ से सीधा गुप्ता जी के ऑफीस पहुँचा, पता चला वो किसी साइट विज़िट को निकल गये थे, उन्हें फोन करके बता दिया कि मामला निपट गया है, कल घर आकर मिलता हूँ..…!
दूसरे दिन जब सुबह मे उनके घर पहुँचा, हमेशा की तरह वो पूजा में ही थे, हॉल में सेठानी नज़र आई, जो मुझे देखकर खुश हो गयी, और बड़े अपनत्व भाव से मेरी आव-भगत की…
सेठानी – सेठ जी तो अभी पूजा में है, तब तक तुम खुशी से मिल लो, बहुत याद करती रहती है तुम्हें, हर समय तुम्हारी ही बातें रहती हैं उसकी ज़ुबान पर…
मे – अभी वो कॉलेज नही गयी…
सेठानी – नही, अभी वो अपने रूम में तैयार ही हो रही होगी, जाकर मिल लो…
मे खुशी के रूम में जाने के लिए सीडीयों की तरफ बढ़ गया, मेरे पीछे सेठानी के चेहरे पर एक गहरी मुस्कान तार उठी, जिसे मे नही देख पाया…!
खुशी के रूम का दरवाजा ढलका हुआ ही था…मेरे हल्के से दबाब से वो खुल गया, उसके बेड पर उसके नाइट के कपड़े बिखरे पड़े थे, लेकिन वो कहीं नज़र नही आ रही थी…
मेने धीरे से उसे आवाज़ दी, लेकिन कोई जबाब नही आया, सोचा शायद बाथरूम में होगी, बाद में मिल लूँगा, ये सोच कर मे जैसे ही पलटा की बाथरूम का दरवाजा खुलने की आवाज़ आई…
मेने पलटकर बाथरूम की तरफ देखा, वो नहा कर बाथरूम से बाहर ही आ रही थी, इस समय उसके मांसल बदन पर मात्र एक टॉवेल लिपटा हुआ था..…
उसकी तरफ ज़्यादा ध्यान ना देकर मे वहाँ से निकलने लगा, तो पीछे से खुशी की आवाज़ सुनाई दी…!
अरे अंकुश भैया आप, आओ ना, चल क्यों दिए…?
मे – नही ! तू तैयार होज़ा मे नीचे ही हूँ, इतना कहकर मे फिर से कमरे के गेट की तरफ बढ़ा, तब तक वो मेरे पास तक आगयि, और पीछे से मेरा हाथ पकड़ कर बोली…
आप थोड़ी देर बैठो तो सही, मे दो मिनिट में तैयार हो जाउन्गि, फिर बात करते हैं… मुझे आपसे बहुत ज़रूरी काम है…
उसके हाथ पकड़ते ही मे उसकी तरफ पलटा, अब वो अपने मांसल बदन पर मात्र एक तौलिया लपेटे हुए, मेरे एकदम नज़दीक ठीक मेरी नज़रों के सामने थी…,
ना चाहते हुए मेरी नज़र उसके महकते बदन पर ठहर गयी…, मुझे यूँ अपने बदन को निहारते देख वो मंद-मंद मुस्करा रही थी…!
उसके गोल, सुडौल उमर से बड़ी चुचिया 1/3 से ज़्यादा तौलिया के बाहर थी, जिनपर उसके गीले बालों से टपकते पानी की बूँदें मोतियों के समान चमक रही थी..
उसके दूधिया उभारों को देख कर मेरे मन में हलचल सी होने लगी, मुझे लगा कि अगर एक पल और मे इन्हें देखता रहा, तो कहीं अपना संयम खोकर इन मोतियों जैसी चमाति पानी की बूँदों को चाट ना लूँ…!
सो फ़ौरन मेने अपनी नज़र नीचे झुका ली, लेकिन कहते हैं ना कि, आसमान से टपके और खजूर में अटके…!
जैसे ही मेरी नज़र नीचे को हुई, कि उसकी मोटी-मोटी केले के तने जैसी एकदम चिकनी गोरी जांघों पर जा टिकी, जो तौलिया से मात्र उसके यौनी प्रदेश को ढकने के बाद मुश्किल से 4-6” नीचे तक ही धकि हुई थी…,
एकदम गोलाई लिए उसकी जांघें इतनी सुडौल थी, क़ी फट की वजह से उसके घुटनों की डिस्क भी पता नही चल रही थी कि हैं भी या नही…! एकदम कॉनिकल उसकी टाँगें..
देखकर ही मेरा लंड खड़ा होने लगा…,
खुशी ने मेरे हाथ पकड़कर जबर्जस्ती बेड के पास पड़े सिंगल सोफे पर बिठा दिया, और खुद अपने कपबोर्ड की तरफ बढ़ गयी…!
उसके पलते ही जैसे कयामत टूट पड़ी मेरे लौडे पर…, पीछे से उसकी तरबूज जैसी पीछे को निकली हुई गान्ड से तौलिया एकदम उठी हुई थी, जिसमें से उसका जांघों और कुल्हों के बीच का संधि स्थल साफ-साफ दिखाई दे रहा था…
ऐसा नही था कि तौलिया छोटा था, वो तो बेचारा फुल साइज़ ही था, लेकिन इसका क्या किया जाए कि ढकने वाली का शरीर ही ऐसा था कि सामने से चुचियों को ढकना और पीछे से उसकी गान्ड को ढकना उसे भारी पड़ रहा था…
उपर से खुशी की हाइट भी ठीक-ठाक ही थी, शायद साडे 5 फीट…!
वो अपनी गान्ड मटकाते हुए कपबोर्ड के सामने खड़ी हो गयी, और अपने कपड़े निकालने के लिए उसने उसे खोला…
कुच्छ देर वो सामने से कुच्छ ढूँढती रही, शायद अपने ब्रा-पैंटी, फिर जब वो उपर नही दिखे तो उससे नीचे वाले ड्रॉ में देखने के लिए जैसे ही झुकी…
इसकी माँ की आँख, उसका तौलिया बग़ावत कर बैठा, उसने उसकी गान्ड को ढकने से साफ मना कर दिया….
अरे यार नही … ऐसा नही …जो आप सोच रहे हो, वो खुला नही लेकिन भरकम गान्ड के पीछे होते ही वो उपर चढ़ गया, और ख़ुसी की गान्ड आधे तक नंगी हो गयी…!
मोटी-मोटी जांघों के बीच से उसकी मुनिया की फांकों का निचला भाग ऐसे झाँकने लगा, मानो दो बड़े बल्लों के बीच से कोई मूह निकालकर किस करने के लिए होठ आगे कर रहा हो…!
खुशी को अपनी स्थिति का पूरा अंदाज़ा था कि उसके इस पोज़ से क्या स्थिति बन रही होगी, और मे उस पोज़ को देखने का पूरा मज़ा ले रहा हूँगा, सो उसने ऐसे ही झुके हुए ही एक बार पलटकर मेरी तरफ देखा…!
मेने सकपका कर अपनी नज़र दूसरी तरफ फेर ली, और तिर्छि नज़र से देखा, खुशी मेरी हालत को देखकर मंद-मंद मुस्करा रही थी…!
फिर वो सीधी खड़ी हो गयी, और मुझे आवाज़ दी – भैया, ज़रा इधर आना…!
मेने वहीं बैठे-बैठे कहा – क्यों, क्या काम है? जल्दी से कपड़े पहन कर तैयार हो जा, मुझे जाना भी है…
वो – अरे एक मिनिट आओ तो सही…
मे असल में उठना नही चाहता था, ताकि मेरी जीन्स में बना उभार खुशी देख पाए, लेकिन अब झक मारकर उठना ही पड़ा, और उसके पास जाकर खड़ा हो गया…
मेने उसके पीछे खड़े होकर कहा – हां बोलो क्या है..?
वो ऐसे ही कपबोर्ड के कपाट खोले उनके बीच खड़ी रही और बोली – मेने ये दोनो ड्रॉ चेक कर लिए, लेकिन मेरी ब्रा कहीं दिख नही रही…
अब उपर वाले ड्रॉ तक मे देख नही पा रही, तो प्लीज़ आप ज़रा उसमें से ढूंड कर मेरी ब्रा दे दो ना…!
मेने कहा – ठीक है, अब हटो वहाँ से ताकि में देख सकूँ…!
वो – आप मेरे पीछे खड़े होकर भी देख सकते हो ना, जल्दी करो मुझे कॉलेज के लिए लेट हो रहा है…!
मुझे अब पक्का यकीन हो गया, कि ये लड़की जान बूझकर सब कर रही है, अब मे जैसे ही इसके पीछे खड़ा होऊँगा, ये अपनी मोटी गान्ड मेरे लंड पर रगडे बिना नही माँगी…
लेकिन अब मे इसको खुलकर मना भी तो नही कर सकता, सो उसके पीछे खड़ा होकर उपर वाले ड्रॉ को चेक करने लगा,
पहले तो मेने कोशिश के, कि उससे ना सट पाऊ, लेकिन ड्रॉ कुच्छ ज़्यादा उँचा था, सो मुझे थोड़ा और आगे बढ़ना पड़ा, और वही हुआ जो मे सोच रहा था…
मेरा आगे का उभरा हुआ हिस्सा खुशी की मोटी गान्ड और कमर के बीच की उठान पर जा टिका…
अपनी गान्ड के उठान पर मेरे लंड के उभार को महसूस करते ही खुशी अपनी गान्ड को और पीछे करते हुए अपने पंजों पर खड़ी हो गयी, कुच्छ इस तरह से मानो वो भी उचक कर ड्रॉ में झाँकने की कोशिश कर रही हो..
उसके पंजों पर उचकने से गान्ड की दरार मेरे लंड से रगड़ गयी…! उसके मूह से दबी-दबी सी सिसकी निकल गयी…!
मेने ड्रॉ चेक किया, लेकिन उसमें उसकी ब्रा थी ही नही तो मिलती कहाँ से, कुच्छ देर उसके अंदर के कपड़ों को उलट-पलट कर देखने के बाद मेने कहा –
खुशी इसमें तो वो दिख नही रही, ये कहकर में पीछे को हटने लगा कि तभी उसने मेरे दोनो हाथ पकड़ कर अपनी चुचियों पर रख दिए और बोली –
कोई बात नही मे दूसरी निकाल लूँगी…!
उसकी मस्त मुलायम चुचियों का स्पर्श पाकर मेरे लंड को एक झटका सा लगा…
लेकिन मेने उन्हें दबाया नही और अपने हाथ छुड़ाकर पीछे को हट गया…
खुशी मेरी तरफ पलट गयी, और अपनी गद्दार चुचियों को मेरे सीने से सटाते हुए बोली – भैया मे आपको अच्छी नही लगती..?
मेने उसकी आँखों में देखकर कहा – तुम तो बहुत सुंदर हो लेकिन अभी ये सवाल क्यों किया तुमने…?
उसने मुझे अपनी बाहों में जकड लिया, उसके मोटे-मोटे गदर अनछुए उभार मेरे सीने में दब गये, जिसके मखमली एहसास से मेरी हालत खराब होने लगी..
वो मेरे बदन से चिपकते हुए बोली – तो मुझे अपनी बाहों में लेकर प्यार करो ना प्लीज़…, मुझे आपका प्यार चाहिए…!
मेने उसके कंधे पकड़कर अपने से अलग करने की कोशिश करते हुए कहा – ये क्या बच्पना है खुशी, जानती भी हो कि तुम क्या कह रही हो…
वो किसी जोंक की तरह मुझसे चिपकते हुए बोली – मुझे पता है मे क्या कह रही हूँ.., और सोच समझ कर ही कह रही हूँ, मुझे अपनी मजबूत बाहों में ले लो भैया… प्लीज़.
मे – मुझे छोड़ो खुशी, ये वक़्त इस सब के लिए सही नही है, कोई आ गया तो मेरे लिए मुशिबत खड़ी हो जाएगी..
अपनी मम्मी को तो जानती ही हो, कि वो कैसी हैं…!
वो – यहाँ मेरे पास आपको किसने भेजा था…?
मे – तुम्हारी मम्मी ने, बोला था कि तुम्हें मुझसे कुच्छ काम है…
वो – तो फिर वो यहाँ क्यों आएँगी…?
मे उसकी बात सुनकर लाजबाब हो गया, उसकी बात भी सही थी, कि जब वो ही मुझे यहाँ आने के लिए बोली थी, तो अब क्यों आएँगी…!
लेकिन फिर भी में फिलहाल इन सब पचडो में पड़ने के मूड में नही था, गुप्ता जी की पूजा कभी भी ख़तम हो सकती थी,
इसलिए फोर्स्फुली मेने उसको अपने से अलग किया, और उसके कंधे पकड़ कर बोला – तुम जो चाहती हो वो तुम्हें मिलेगा, लेकिन अभी नही…
अभी मुझे तुम्हारे पापा से कुच्छ काम है, और वैसे भी जो तुम्हें चाहिए उसके लिए सही जगह और समय की ज़रूरत होगी, जो फिलहाल नही है…
वो मचल कर बोली – तो फिर कब और कहाँ..?
मे – चिंता मत करो, मे तुम्हें इस तरह से प्यार करना चाहता हूँ, जिसे तुम हमेशा याद रखो, और हां वो समय जल्दी ही आएगा…ओके.
ये कहकर मेने आगे से उसके तौलिए की गाँठ खोल दी, वो एकदम नंगी मेरी आँखों के सामने थी, उसके लाजबाब वक्षों को कुच्छ देर देखता ही रह गया…
उसकी उम्र के हिसाब से वो आकार में ज़रूर बड़े थे, लेकिन उसके भरे हुए बदन के हिसाब से एकदम परफेक्ट अनछुए, अनटच, एक दम कसे हुए गोल-मटोल सुडौल,
एकदम सीधे ताने हुए…जिनके शिखर पर दो किशमिश के दाने जैसे कच्चे निपल जो अभी तक ज़्यादा बाहर भी नही आ पाए थे…
मेने खुशी के होठों को चूम लिया, और हल्के से उसके सुडौल मुलायम, मक्खन जैसे, स्पंज के गोलों जैसे उभारों को सहला कर उसके कमरे से निकल आया…!
इस पल भर के एहसास ने खुशी को किसी दूसरी ही दुनिया में भेज दिया, वो अपनी आँखें बंद किए हुए कुच्छ देर यौंही खड़ी रही, और फिर मन ही मन मुस्कुराती हुई अपने कपड़े पहनने लगी……!
……………………………………
बिल्डर योगराज की शादी सुदा बेटी श्वेता, जिसका भाई रेखा वाले गांग रेप में शामिल था.., कामिनी की बेस्ट फ्रेंड है….
वो दोनो एक दिन माल में मुझसे टकरा गयी…श्वेता भी कामिनी की ही तरह मस्त भरे सुडौल बदन वाली औरत है…
वो दोनो इस समय जीन्स और टॉप में थी, दोनो के एकदम तने हुए कलमी आम, और मटकते हुए तरबूज जैसे कुल्हों को देखकर मेरा लंड अंगड़ाई ले उठा….!
मुझे देखते ही कामिनी चहकते हुए बोली…अरे ! देवेर जी आप और यहाँ..? व्हाट आ प्लेज़ेंट सर्प्राइज़…?
मेने अपने फेस पर स्माइल लाते हुए कहा – क्यों मे यहाँ नही हो सकता..?
वो – नही ऐसी बात नही है… मे तो बस आपको यहाँ आकस्मात देख कर बोल उठी…
फिर वो अपनी सहेली से बोली – श्वेता ही इस अंकुश शर्मा, मेरे देवर, यहीं पर लॉयर हैं.
और देवर जी ये मेरी बेस्ट फ्रेंड श्वेता, इसके हज़्बेंड बिज़्नेस मॅन हैं, इसके पापा के पार्ट्नर…
मे – इनके पापा मतलव…? मेने जानबूझ कर ये सवाल किया…
वो – बिल्डर हैं, उनका नाम योगराज है, शहर के जाने माने बिल्डर, बहुत बड़ा कारोबार है उनका…
मेने श्वेता से हाई बोला और अपना हाथ आगे कर दिया…
उसने भी हाई बोलकर मेरा हाथ अपने मुलायम रूई जैसे हाथ में ले लिया… और उसे देर तक पकड़े रही…
मेने उसकी आँखों में झाँक कर देखा, तो उनमें मेरे लिए एक प्रणय निमंत्रण दिखाई दिया…
मे समझ गया, कि ये भी कामिनी की तरह लंड की भूखी कुतिया ही है…
मेने उसकी तरफ अपनी एक आँख दबा कर बोला – नाइस टू मीट यू श्वेता जी…
वो सेक्सी स्माइले देते हुए बोली – ओह… सेम टू यू, और ये जी लगाने की ज़रूरत है क्या आपको…? मे भी लगभग आप ही की एज की होंगी… सो वी जस्ट फ्रेंड्स…
मे – ओह सॉरी ! श्वेता, ऑफ कोर्स नाउ वी मे फ्रेंड्स… क्यों भाभी ?
वो भी हँसते हुए बोली – इट्स युवर प्लेषर…, आइ हॅव नो इश्यू…
फिर उसने अपना सेल नंबर मुझे दिया, हम तीनों ने मिलकर एक रेस्तरा में बैठ कर कॉफी शेयर की, और कुच्छ देर बातें करके वो दोनो चली गयीं …………………………..!
अगले दिन भाभी के मायके में कोई फंक्षन था, तो वो दोनो बहनें भैया को साथ लेकर अपने मायके चली गयीं, दूसरे दिन लौटने का उनका प्रोग्राम था,
मुझे थोड़ा काम था, और वैसे भी घर पर भी कोई तो रहना चाहिए था, बाबूजी तो नौकरी के साथ-2 ज़िम्मेदारियों से भी रिटाइर हो गये थे…
घर के सारे-हिसाब किताब की मालकिन तो भाभी ही थी, तो वो ज़्यादातर खेतों पर ही रहते थे…, और आजकल अपनी सेट्टिंग मनझली चाची की सेवा से खुश थे.
मे आँगन में चारपाई डालकर बैठा, अपने ऑफीस की फाइल में लगा पड़ा था, अपने क्लाइंट गुप्ता जी के काम में,
लगभग 12:30 के समय छोटी चाची मेरे लिए खाना लेकर आई.. उन्होने किचेन से प्लेट लेकर मुझे खाना परोस कर दिया…
मेने पुछा की बाबूजी का खाना, तो उन्होने बताया कि उनके लिए तुम्हारे चाचा के हाथों भिजवा दिया है…
मे फाइल एक तरफ करके वहीं चारपाई पर बैठ कर ही खाना खाने लगा… दरअसल सर्दियों की धूप बड़ी अच्छी लगती है, तो वहाँ से मेरा उठने का मन ही नही हुआ…!
चाची वहीं मेरे बगल में बैठ गयी, और बातें करने लगी…
वो – लल्ला आजकल मुझे तो तुम भूल ही गये हो, कभी कभार घर की तरफ आजाया करो…, तुम्हारा बेटा बहुत याद करता रहता है,
मे – वो आपका बेटा है चाची…, घर के रिश्ते कभी बदल नही सकते…
वो – लेकिन सच्चाई तो यही है ना ! और फिर यहाँ हमारे अलावा और कॉन है…?
मे – दीवारों के भी कान होते हैं, ये कहावत तो सुनी होगी आपने…!
वो – मुझे पता है लल्ला… मे तो बस कह रही थी, कि कभी समय निकाल कर अपनी चाची का भी ख्याल कर लिया करो…
बातों – 2 में मेरा खाना हो गया… हाथ धोकर मेने पानी पिया, और बोला – असल में अब थोड़ी ज़िम्मेदारी बढ़ गयी हैं,
अब मेरी कोई नौकरी तो है नही कि काम करो या ना करो घर बैठे महीने के महीने पगार आजाए… मे तो जितना समय काम को दूँगा, उतना ही कमा पाउन्गा..
वो – मे जानती हूँ, इसलिए मेने पहले तुम्हें कभी कहा नही, आज अकेले देख कर बोल दिया आगे तुम्हारी इक्च्छा है, मेरा क्या है काट लूँगी किसी तरह दिन…
ये कहते हुए वो कुच्छ मायूस सी हो गयी… मेने हँसते हुए उन्हें अपनी ओर खीच लिया और उनके गाल को चूम कर बोला –
सच में चाची समय नही मिल पाता, वरना इतनी हॉट और सुंदर चाची को कैसे भुला सकता हूँ… एक काम करना आज रात को आ जाना…मज़े करेंगे..
वो – तुम्हारे चाचा तो घर ही होंगे, और फिर बिट्टू को अकेला छोड़ कर कैसे आ सकती हूँ…
मे समझ गया कि चाची का अभी का मन है चुदने का, सो लपक कर गया और मेन गेट की अंदर से कुण्डी लगा दी…
आकर मेने चाची को अपनी गोद में खींच लिया और उनके होठ चूसने लगा…
चाची शायद मुझे अकेला देखते ही मन बना चुकी थी, सो हाथ लगते ही गरम हो गयी…
मेने उनकी चुचियाँ मसलते हुए, चारपाई पर लिटा दिया, उन्होने नीचे हाथ डाल कर मेरा लंड पकड़ लिया…
मुट्ठी में आते ही वो फूलने लगा, चाची मस्ती में भरकर बोली – अह्ह्ह्ह…लल्ला क्या मस्त लंड है तुम्हारा… इसकी याद आते ही मेरी चूत पनियाने लगती है…
देखते – 2 हम दोनो ही नंगे हो गये, और समय बरवाद ना करते हुए मेने अपना लंड चाची की गरम चूत में पेल दिया…
वो सिसक पड़ी… और मज़े में उनकी कमर उपर उठ गयी… जिससे मेरा पूरा लंड उनकी रसीली चूत में समा गया….
सर्दियों की मखमली धूप में खुले आसमान के नीचे हम दोनो चुदाई का आनंद लेते रहे…
एक बार चुदाई के बाद मेने चाची को गान्ड मारने के लिए भी राज़ी कर लिया,
चाची की गान्ड मेरे लिए हमेशा ही फॅवुरेट रही थी, सो उनको वहीं चारपाई के नीचे खड़ी करके घोड़ी बना लिया…
चाची की मस्त चौड़ी चकली गान्ड के छोटे से सुराख पर थूक लगाया, और धीरे-2 करके पूरा लंड अंदर करके चोदने लगा…
चाची भी कुच्छ देर में ही गान्ड मारने का मज़ा लूटने लगी, और अपनी गान्ड को मेरे लंड पर मारने लगी…
दो घंटे के बाद वो पूरी तरह संतुष्ट होकर बर्तन उठाकर चली गयी और मे फिर से अपनी फाइल में खो गया…
शाम को खेतों की ओर निकल गया, बाबूजी के पास थोड़ी देर बैठा, अंधेरा होने पर वापस लौट लिया…
गाओं में घुसते ही रास्ते में वर्षा भौजी मिल गयी, वो अपने बेटे की उंगली पकड़े कहीं जा रही थी, मुझे देखते ही वो खड़ी गयी…
वो शिकायत करते हुए बोली – देवर जी आप तो अब दिखाई भी नही पड़ते.. कभी कभार कुच्छ नही तो अपने बेटे को ही देखने आ जाया करो..
मेने अपनी व्यस्तता का हवाला देकर समझाया…! लेकिन उसकी मायूस शक्ल देखकर मुझे उस पर तरस आगया….!
मेने उसे पुछा – तो बताइए कहाँ और कैसे मिल सकती हो, आज मेरे पास समय है थोड़ा बहुत तो कुच्छ कर सकते हैं…
मेरी बात सुनकर वो खुश हो गयी, और बोली – आप जहाँ कहोगे मे वहीं आ जाउन्गि…
तो फिर ठीक है, आज रात मेरे घर आ जाइए…,
ये सुनकर वो इतनी खुश हो गयी, की उसने बीच रास्ते पर ही मेरे होठों को चूम लिया, वो तो अच्छा हुआ, आस-पास कोई था नही…
और फिर रात 11 बजे आने का वादा करके खुशी में झूमती हुई, अपने बेटे को लेकर अपने घर की तरफ चली गयी…और मे अपने घर की तरफ.…!
शाम का खाना मे चाची के यहाँ खाने चला गया, कुच्छ देर बैठकर, मेने बाबूजी का खाना बैठक में लेगया, तो वहाँ पहले से ही वो खा रहे थे..
मनझली चाची नीचे बैठे, उन्हें प्यार से खाना खिला रही थी…उनके खाने को वापस ले जाकर मेने छोटी चाची को थमाया, फिर उन्हें थोड़ा सा खड़े खड़े ही उपर से प्यार करके अपने घर आ गया…
इसी में 9:30 हो गये, मेने थोड़ा बहुत अपने ऑफीस का काम निपटाया, और फिर टीवी देखने बैठ गया… वारसा रानी के इंतेज़ार में.
अभी 11 बजने में कुच्छ समय शेष ही था कि, दरवाजे पर हल्की सी दस्तक हुई, मेने उठकर गेट खोला, तो सामने कांपति हुई सी वर्षा भौजी खड़ी थी…
मेने पुछा – क्या हुआ भौजी, काँप क्यों रही हो इस तरह…
वो झट से अंदर आई और जल्दी से दरवाजे को बंद करते हुए अपने सीने पर हाथ रख कर बोली –
देवर जी ! आपके बाबूजी जाग रहे हैं, मे जैसे ही बैठक के बराबर से गुज़री, तो मुझे अंदर से कुच्छ आवाज़ें सुनाई दी…
मेने कहा – किस तरह की आवाज़ें थी,
वो बोली – मुझे लगा जैसे उनके पास कोई औरत हो, और वो दोनो हंस-हंस कर बातें कर रहे थे…
मे समझ गया, कि आज मनझली चाची की चूत शाम से ही खुजा रही थी, और वो अभी भी वहीं जमी हुई हैं…
फिर मेने प्रत्यक्ष मे कहा – औरत..? ये कैसे हो सकता है, ज़रूर आपको कोई वहम हुआ होगा… खैर छोड़ो ये सब, हम अपना काम करते हैं क्यों..? ये कहकर मेने उसकी कमर में हाथ डालकर अपने से चिपका लिया…
मेरे शरीर से चिपकते ही वो सब बातें भूल गयी, और मेरे शरीर से लिपट गयी..
उसकी गान्ड सहलाते हुए मे उसे अपने बेडरूम तक लाया, कमरे में आते ही वो किसी अमरबेल की तरह मुझसे लिपट गयी, और मेरे होठों को चूम लिया…!
मेने उसकी चुचियों को मसल्ते हुए पुचछा – और सूनाओ भौजी, रवि भैया, कभी-कभार मौज लेने आते हैं या नही…
उसने मेरे गले में अपनी मांसल गोरी-गोरी बाहों का हार डालते हुए अपनी चूत को मेरे शॉर्ट में उमड़-घूमड़ रहे लंड पर दबाते हुए कहा…
काहे की मौज, आकर मेरी प्यास और भड़का जाते हैं, पता नही इतनी उमर हो गयी, अभी तक उन्हें इतना भी नही आता कि एक औरत को कैसे खुश किया जाता है, बस अपना पानी निकालने से मतलब…
मेने उसकी उठी हुई गान्ड मसल्ते हुए कहा – तो तुम उसे सिख़ाओ ना…
वो मचलते हुए बोली – हाए देवर जी, मे इतनी बेशर्म नही हो सकती, अगर कुच्छ बताने बैठी, और उन्होने पुच्छ लिया कि ये सब कहाँ से सीखा तो…?
मेने खड़े-खड़े ही उसके कपड़े निकाल दिए, अब वो मात्र ब्रा और पेंटी में ही थी…
उसका शरीर, पहले से ज़्यादा भर गया था, जिसकी वजह से वो इस समय किसी सेक्स बॉम्ब जैसी लग रही थी,
मात्र दो छोटे-2 कपड़ों में उसकी उफनती जवानी देख कर मेरे लौडे का बुरा हाल हो रहा था…
मेने उसकी चुचियों को ज़ोर्से मसलकर कहा – कह देना जो भूत तुम्हारे उपर सवार हुआ था, उसी ने सिखाया है…,
मेरी बात सुनकर वो खिल-खिलाकर हंस पड़ी, और बोली – वैसे आइडिया बुरा नही है…फिर मेरे एकमात्र शॉर्ट को नीचे करके, लंड को मुट्ठी में कसते हुए बोली –
लेकिन ऐसा हथियार कहाँ से मिलेगा, वो तो उनके पास नही है…
मेने उसकी ब्रा के स्टेप्स खोल दिए, वो किसी स्प्रिंग की तरह छिटक कर नीचे टपक गयी, उसकी गोल-मटोल परफेक्ट 34 की गोलाइयों को सहलाने, चूसने लगा,
वो मेरे लंड को मुत्ठियाने लगी… फिर अपनी एकमात्र बची हुई पेंटी भी निकाल कर फेंक दी, और मेरे लंड को अपनी मुनिया के होठों के उपर रगड़ते हुए बोली….
आअहह….देवेर्जी, इसे अब डालो ना, सस्सिईइ….देखो तो बेचारी कैसी विरह में आँसू बहा रही है…
मेने खड़े-खड़े ही उसकी एक टाँग उठा ली, और दूसरी जाँघ को हाथ का सहारा देकर अपना लंड उसकी रसीली चूत में डालने लगा…
मेरे लंड की सरसराहट अपनी चूत की दीवारों पर फील करते ही उसने मेरे गले में बाहें डाल दी और मेरे होठों को चूमकर सिसकने लगी…
सस्स्सिईईई….आआहह….उूउउम्म्म्म….मज़ा आगेया….उउउइई…माआ….हाईए…थोड़ा धीरे सीए…रजाआ….आअहह…
लंड जड़ तक उसकी चूत में समा चुका था, वो उसे अपनी सुरंग के अंतिम छोर पर फील करके मस्ती में भर गयी, और अपने एक पैर के सहारे से अपनी कमर को चलाने लगी…
मज़े की पराकाष्ठा क्या होती है, वर्षा से कोई पूछे आज, वो दीवानावर अपनी कमर को चलते हुए मेरे लंड को पूरी लंबाई तक अपनी सुरंग में अंदर बाहर करने लगी…
लेकिन ये ज़्यादा देर नही चल पाया, और उसकी गति रुकने लगी, तो मेने पलंग पर ले जाकर उसकी टाँगों को अपने कंधे पर रखा और एक ही झटके में अपना मूसल फिर से उसकी ओखली में उतार दिया…
उसके मूह से आअहह…निकल गयी…और उसने अपना मूह मेरे कंधे में गढ़ा दिया…
20 मिनिट की दमदार चुदाई के बाद हम दोनो का ही ज्वार शांत हुआ, और एक दूसरे के बाजू में लेटकर अपनी साँसों को कंट्रोल करने लगे…
कुच्छ देर बाद ही हमारे हाथ फिरसे सरारत करने लगे, और एक दूसरे के अंगों को सहलाने लगे…
मेने अपनी एक उंगली वारसा की गान्ड के छोटे से छेद में डाली…
वो एकदम से उछल पड़ी, आआवउक्च्छ…. ये मत करो प्लीज़, कहकर उसने अपने हाथ से मेरी कलाई पकड़ कर उंगली बाहर निकल दी…
मे उसके कत्थयि रंग के छेद पर उंगली के पोर से सहलाते हुए बोला – कभी यहाँ ट्राइ किया है भौजी…?
वो ना में गर्दन हिलाकर बोली – भला ये भी कोई करने की जगह है..?
मेने उसकी चुचि को मसल्ते हुए कहा – अरे रानी, एक बार लेकर तो देखो, बार-बार लेने का मन ना करे तो कहना…!
वो मेरे लंड को सहलाते हुए बोली – क्या सच में वहाँ भी इतना ही मज़ा आता है, जितना आगे से आता है…
मेने अपनी उंगली उसकी चूत में डालकर गीली की, और फिर उसी को उसकी गान्ड में डालकर बोला – उससे भी ज़्यादा, एक बार ट्राइ तो करो…
ना जाने क्या सोचकर वो तैयार हो गयी, और बोली – ठीक है, पर एक बार और आगे से करना पड़ेगा..
बातों और हरकतों ने हम दोनो को एक बार फिरसे गरम कर दिया था, सो मेने उसे घोड़ी बनाकर पीछे से उसकी चूत में लंड डालकर अच्छे से उसको झडा दिया,
फिर एक वैसलीन की ट्यूब उसकी गान्ड के छेद में डालकर उसको चिकानाया, उसकी चुचियों को सहलाते हुए धीरे से अपना लंड उसकी गान्ड के छेद पर रख कर पुश किया…
कराह कर उसने अपनी गान्ड के छेद को सिकोड लिया, और मेरा अंदर गया हुआ सुपाडा भी बाहर को सरक लिया…
आअहह…देवर्जी, रहने दीजिए, नही जाएगा प्लीज़ मान जाइए, मेरी गान्ड फट जाएगी….
मेने उपस्की पीठ को सहलाते हुए चूम लिया, फिर उसकी चूत को सहला कर बोला – ओह्ह्ह भौजी, ऐसे तो दर्द होगा ही,
आप उसे अंदर जाने ही नही दे रही, थोड़ा ढीला तो छोड़िए अपनी गान्ड को तभी तो जाएगा…
बिना अंदर गये मज़ा कैसे आएगा, प्लीज़ इस बार थोड़ा ढीला रखना , ओके.
उसने हां में गर्दन हिला दी, मेने एक बार फिरसे अपना सुपाड़ा उसकी गान्ड के छेद पर रखा, और एक करारा सा धक्का मार दिया….
वो दर्द से बिल-बिला उठी, और अपनी गान्ड को इधेर-उधर करने लगी, लेकिन मेरा आधा खूँटा उसके छेद में फँस चुका था,
उपर से मेरे मजबूत हाथों का दबाब उसकी पीठ पर था, सो उसके हिलने के कोई चान्स नही थे…
कुच्छ देर उसकी चुचियों को सहला कर, उसकी चूत में उंगली डालकर उसके दर्द को मज़े में कॉनवर्ट किया, जब उसे थोड़ा राहत हुई,
तो मेने अपना पूरा लंड उसकी गान्ड के संकरे से छेद में पहुचकर रुक गया…
वो नीचे से गिगाड़ते हुए उसे निकालने की गुहार करती रही, लेकिन मेने उसकी एक नही सुनी, और धीरे-2 अपने मूसल को बाहर किया,
लंड को और थोड़ा चिकना किया, और फिर पेल दिया…
दो-तीन बार ऐसा करने से उसकी गान्ड का छेद खुल गया, और उसकी दीवारों के सेन्सेशन से उसकी चूत से काम रस टपकने लगा…
अब उसको भी मज़ा आने लगा था, सो मादक सिसकियाँ लेते हुए वो अपनी पहली गान्ड मराई का मज़ा लेने लगी…!
मेने उसका एक हाथ पकड़ कर पीछे को कर दिया, वो अपना सिर तकिये में गढ़ाए, मेरे धक्कों का मज़ा लूटने लगी…!
मेरे तबाद-तोड़ धक्कों ने उसकी रेल बनादी, लेकिन चोरी की चुदाई के लिए वो ये भी झेल गयी…
टाइट गान्ड के छेद की रगड़ से मेरा लंड और ज़्यादा फूल गया था, लेकिन ज्यदा घर्षण के कारण, 15 मिनिट में ही उसने हथियार डाल दिए,
और उसकी गान्ड के छेद में च्चिड़काव कर दिया…
गान्ड में गरम-गरम वीर्य की धार से उसकी चूत फिर से झड़ने लगी…
कुच्छ देर वो ऐसे ही औंधे मूह पड़ी रही, मेने उसकी गान्ड के उठान को पकड़ कर भींचते हुए कहा –
क्यों भौजी, गान्ड मारने में मज़ा आया की नही…तो वो मुस्करा उठी, फिर जैसे ही उसने सीधे होने की कोशिश की, उसके मूह से कराह निकल गयी…
वो मेरे होठों पर एक चुंबन लेकर बोली – मज़ा तो बहुत आया, पर दर्द भी है..
कुच्छ देर बाद वो कुच्छ संयत हुई, बाथरूम जाकर फ्रेश होकर अपने कपड़े पहनकर बोली…
अब बहुत रात हो गयी है देवर जी ! मुझे मेरे घर तक छोड़ दो, उसकी बात भी सही थी, इतनी रात को उसे अकेला नही जाने दे सकता था,
सो मेने भी कपड़े डाले, और उसे उसके घर के दरवाजे तक छोड़ कर वापस अपने घर आकर, तान चादर सो गया…
अभी रात के 9 ही बजे थे, सदर रोड पर लोगों की चहल पहल बढ़ती जा रही थी…
इतनी भीड़ भाड़ के बबजूद भी एक काले रंग की कार जिसके शीशे भी काले थे अंदर कॉन है, क्या कर रहा है बाहर से किसी को कुच्छ दिखाई नही दे रहा था…
काले रंग की कार निरंतर हॉर्न बजाती हुई लोगों को रास्ता देने पर मजबूर कर रही थी, जो हटने पर ज़रा ही हिचकिचाया या देर करता, वो उसकी चपेट मे आजाता…
उसके कोई 300 मीटर की दूरी पर एक पोलीस जीप उसके जस्ट पीछे स्प सिटी की गाड़ी, लगातार सायरन बजाती हुई चली आ रही थी….
देखने से ही पता चल रहा था कि पोलीस उस काली कार का पीछा कर रही है…
दोनो के बीच की दूरी निरंतर घटती ही जा रही थी, कारण था, काली कार को भीड़ का सामना ज़्यादा करना पड़ रहा था, वहीं पोलीस की गाड़ियों को भीड़ पहले से ही हटी हुई मिल रही थी…
एका-एक वो काली कार रोड के डिवाइडर के बीच में बने कट से उसी रफ़्तार में टर्न लेती है…
लेकिन स्पीड ज़्यादा होने की वजह से वो यू टर्न लेने के कारण सामने वाले फूटपाथ पर चढ़ गयी,
ना जाने कितने लोग उसकी चपेट में आए, चारों तरफ चीखो पुकार मच गयी..
फूटपाथ पर लोगों को रौन्दति हुई, वो काली कार जैसे ही फिर से रोड पर आई, कि पलट गयी… और कुच्छ दूर तक घिसती चली गयी…
कार के उपर वाले डोर से जैसे तैसे करके 3 लोग बाहर निकले…उनके हाथों में रेवोल्वेर लगे हुए थे..और मूह कपड़े से ढके थे…
जब तक पोलीस की गाड़ियाँ अगले चौराहे से टर्न लेकर उस कार तक पहुँचती, तब तक वो तीनों कार से निकल कर एक गली में घुस गये…
आनन फानन में पोलीस की गाड़ियाँ कार के पास आकर रुकी, और उनमें से पोलीस वाले निकल कर उस गली की तरफ भागे, जिधर वो तीन नकाब पॉश गये थे…
पोलीस ने हवाई फाइयर करके लोगों को एक तरफ हटने को कहा… जिससे वो उन लोगों पर निशाना साध सकें, जो लोगों की उपस्थिति के कारण संभव नही हो पा रहा था…
वो तीनों भीड़ का सहारा लिए भागे जा रहे थे, अभी वो अगले मोड़ से थोड़ा दूर ही थे कि पोलीस की तरफ से एक गोली आई और उनमें से सबसे पीछे वाले की पीठ में घुस गयी….
वो चीख मारते हुए कुच्छ देर तो उनके साथ-2 भागा… लेकिन कुच्छ दूर चल कर ही लहरा कर गिर पड़ा…
उन दोनो ने ठिठक कर अपने साथी को देखा, तब तक उनमें से एक ने दूसरे का बाजू पकड़कर उसे खीचते हुए भागने लगा…
जब तक पोलीस उन पर अगला निशाना लगाती, वो मोड़ मूड चुके थे…
ये बाज़ार के पीछे वाला रोड था, जहाँ लोगों की भीड़ भाड़ कम ही हुआ करती थी…
वो दोनो बेतहाशा भागे जा रहे थे, पोलीस शिकारी कुत्तों की तरह उनका पीछा कर रही थी…
जैसे ही पोलीस वाले उस मोड़ पर पहुँचे, उनके बीच की दूरी बढ़ गयी थी… लेकिन ऐसा भी नही था, की वो उनकी हद से बाहर निकल चुके थे…
अगर सामने से पोलीस दल आ धमका तो वो घिर सकते थे, लेकिन उन्होने भागते रहने में ही अपनी भलाई समझी…
पीच्चे से उनपर लगातार फाइयर भी किए जारहे थे…
आकस्मात दूसरी गली से कुच्छ पोलीस वाले निकल पड़े, तब तक वो उस गली को क्रॉस कर चुके थे, लेकिन अब वो दूसरी गली से आने वाले पोलीस वाले उनके बेहद करीब थे…
दूसरी गली से आने वाले पोलीस की टुकड़ी में से सबसे आगे वाले पोलीस वेल ने गोली चला दी, जो उनमें से एक नकाबपोश की पिंडली चीरती हुई निकल गयी…
अभी वो लड़खड़ा कर गिरने ही वाला था कि तभी चर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर….के साथ ब्रेक लगने की आवाज़ वातावरण में गूँज उठी…,
एक सिल्वर कलर की मारुति वॅन आकर रुकी, और रुकते ही उसका पिच्छला गेट बड़ी तेज़ी से खुला, एक हाथ बाहर निकला और उस घायल नकाब पोश को गाड़ी के अंदर खीच लिया,
इतने में वो दूसरा भी वापस मुड़ा और गाड़ी में समा गया…
देखते – 2 वो मारुति वॅन अपनी फुल स्पीड में वहाँ से भागी, और कुच्छ ही पलों में पोलीस की आँखों से ओझल हो गयी…
ये सब इतनी जल्दी में हुआ की पोलीस वाले सिवाय उस वॅन को जाते हुए ही देखते रह गये… एक दो फाइयर भी किए उसके टाइरन को निशाना बना कर….
लेकिन वॅन का ड्राइवर ये जनता था, इसलिए वो उसे लहराते हुए चला रहा था.
मज़े की बात ये थी, कि उस पर कोई नंबर प्लेट भी नही थी…
उधर एसपी कृष्ण कांत के साथ कुच्छ पोलीस वाले उस उल्टी पड़ी कार के पास ही थे, जिसमे दो इंसानी जिस्म अभी भी फँसे पड़े थे…
चूँकि कार ड्राइवर साइड को पलटी थी, सो ड्राइवर वहीं सीट और स्टेआरिंग के बीच ही फँसा पड़ा था, रोड से घिसतने के कारण उसका गेट उखाड़ चुका था…
वो दोनो बुरी तरह से घायल हो चुके थे… ड्राइवर को जैसे तैसे करके गाड़ी सीधी करके ही निकाला जा सका…
अभी वो इसी काम में जुटे थे, कि हताश टीम भी वापस आगयि…उनके साथ एक मृत नकाबपोश भी था…
आनन फानन में आंब्युलेन्स बुलाई गयी… ड्राइवर की हालत ज़्यादा गंभीर थी, सो उसने आंब्युलेन्स में चढ़ते ही दम तोड़ दिया…
दूसरे घायल को सिटी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ उसे एमर्जेन्सी ट्रीटमेंट देकर बचा लिया गया…
कार के बारे में पता किया गया, तो पता चला कि वो दूसरे पास के शहर के किसी बिज़्नेसमॅन की थी, जो दो दिन पहले चोरी हो गयी थी, और उसकी संबंधित थाने में रिपोर्ट भी लिखाई जा चुकी थी…
ड्राइवर और दूसरे मरे हुए नकाबपोश की बॉडी क्लेम करने कोई नही आया था, घायल को होश में आने का इंतेज़ार के अलावा अब पोलीस के पास और कोई चारा नही था…
काली कार से भारी मात्रा में ड्रग्स बरामद हुए थे…जाहिर था, पोलीस को ये खबर मिली थी कि फलाँ रंग की कार से शहर के अंदर ड्रग डीलिंग होने जा रही है…
और खबर मिलते ही पोलीस उनके पीछे लग गयी, उन्हें कुच्छ हद तक इसमें सफलता भी मिली…
लेकिन कोई ऐसा सबूत अभी तक हाथ नही लग सका था, जिससे उस माफ़िया तक पहुँचा जा सकता हो, जो इस सबके पीछे था…
उधर आँधी तूफान की तरह सड़क का सीना चीरती हुई वो सिल्वर कलर की वॅन शहर छोड़ चुकी थी, और घने जंगलों की तरफ दौड़ रही थी…
शहर से कोई 15 किमी दूर जाकर वो सड़क को छोड़कर जंगलों में घुस गयी, कुच्छ अंदर जाते ही वो एक खंडहर हो चुके चरागाह के सामने जाकर खड़ी हो गयी…
वॅन के अंदर की लाइट ऑन की गयी तब पता चला कि अंदर कॉन-कॉन थे…
उन नकाबपोश को बचाने वाले ड्राइवर के अलावा, एक गोरा चिटा 6’ 2” लंबा, हॅटा कट्टा एक 25-26 वर्षीया नौजवान था, जिसकी हल्की सी फ्रेंच कट दाढ़ी थी,
नीली आँखों वाला ये हॅंडसम नौजवान किसी भी एंगल से किसी ग़लत काम करने वाले गिरोह या संघटन से जुदा नही लग रहा था…
वो तो किसी फिल्मी हीरो जैसा, जिसे देखते ही कोई भी लड़की या औरत अपनी चूत खोलकर चुदने के लिए बेकरार हो उठे…
अरे ये क्या…? ड्राइवर की जगह कोई पेशेवर ड्राइवर नही ये तो कोई बेहद हसीन कमसिन सी लड़की थी, जो शायद 18-19 साल की ही होगी…
लेकिन जिस तरह से वो गाड़ी ड्राइव करके लाई थी, लगता ही नही था, कि उसे कोई लड़की चला रही है…
किसी तरह मोबाइल की टॉर्च की रोशनी की मदद से उन्होने आग का इंतेज़ाम किया, और एक चाकू की मदद से उस नकाब पॉश की गोली निकालने में सफलता हासिल की…
अब समस्या थी कि उसके घाव का खून कैसे बंद हो… तो वो नौजवान बोला – रूबी डार्लिंग, ज़रा अपना थोबड़ा दूसरी तरफ रखना…
और फिर उसने वो किया जिसकी किसी ने कल्पना भी नही की थी….
नौजवान ने अपने पॅंट की जिप खोली और लंड बाहर निकल कर पेशाब की मोटी सी धार उसके घाव पर मारने लगा…
वो दोनो उसको देख कर भोंचक्के रह गये… जब पेशाब उसके घाव पर पड़ा, तो उसे बेहद जलन सी हुई,
लेकिन चमत्कारिक रूप से इससे पहले कि उसका पेशाब करना बंद होता, उससे पहले ही घाव से खून निकलना ऐसे बंद हो गया जैसे कि वो किसी गोली का घाव ना होकर, मामूली सी खरोंच हो…
उसके बाद मोबाइल की टॉर्च से वो ज़मीन पर कुच्छ ढूढ़ने लगा, और एक छोटे-2 फूलों वाली घास तोड़ कर उसे अपने हाथों से उसका रस निचोड़ कर उसके घाव पर टपकाया…
उसके घाव में उसे तीव्र जलन का एहसास हुआ, और उसकी चीख निकल गयी..
हौसला रखो दोस्त, ये तुम्हारे घाव को एकदम सही कर देगी, ये कहकर उसने अपनी हथेलियों से ही उस घास की चटनी जैसी बनाकर उसके घाव पर रख दी, और एक रुमाल उसके घाव पर बाँध दिया…
इतना सब करने के बाद जब वो फारिग हुआ, और अपने दोनो हाथों को आपस में रगड़ कर सॉफ कर रहा था तब उस घायल के साथी ने अपना मूह खोला और उस नौजवान से बोला…
थॅंक यू दोस्त ! हम लोगों को तुमने बचा कर बहुत बड़ा एहसान किया है… वैसे अपना परिचय नही दोगे…?
वो बोला – मेरा नाम जोसेफ है, और ये मेरी दोस्त रूबी… हम दोनो कल ही इस शहर में आए हैं, आज इधर घूमने चले आए थे…
समय पास करने के लिए वहीं पास वाली पुलिया पर बैठे बातें कर रहे थे कि तुम लोगों को भागते देखा, और उसके बाद तुम्हारे पीछे पोलीस को…
अब पोलीस से तो हमारा पहले से ही 36 का आँकड़ा रहा है, हमने सोचा कि ये तो कोई हमारी लाइन के लोग लगते हैं, और मुशिबत में हैं…
सो पास ही खड़ी ये वॅन हमें दिखी, इसका ड्राइवर वहीं पास में खड़े होकर मूत रहा था… लक अच्छा था तुम लोगों का कि चाबी गाड़ी में ही लगी थी…
बस फिर क्या था, दौड़ा दी… और देखो हमारे इस प्रयास से तुम जिंदा हमारे सामने हो वरना अब तक तो गॉड को प्यारे हो चुके होते दोस्त !
उस बंदे ने जो कोई और नही उस्मान का बेटा असलम था, उसका दूसरा साथी, जो घायल था, वो उसका दोस्त था…बोला.
सच कहा दोस्त तुमने, आज अगर तुम लोग समय पर हमें नही बचाते तो हम दोनो ही अल्लाह मियाँ को प्यारे हो गये होते…वैसे तुम लोग करते क्या हो…?
वो – अभिषेख बच्चन और रानी मुखर्जी की बंटी और बबली फिल्म देखी है… हम वही हैं…
असलम – क्या मतलव…?
वो – बस इधर का माल उधर करके जिंदगी के मज़े ले रहे हैं…
कभी ये शहर तो कभी वो शहर…अब तो हमें याद भी नही कि असल में हम पैदा कहाँ हुए थे…
किसी दिन पोलीस के हत्थे चढ़ गये… तो खुदा जाने क्या होगा… तब तक जी लेते हैं जैसे जीना चाहते हैं अपनी जिंदगी…
असलम ने अपना हाथ आगे करते हुए कहा – तो मिलाओ हाथ… लगता है, अल्लाह की कोई नेमत होगी.. जो तुम लोग हमें मिल गये…
फिर उसने अपने बारे में सब कुच्छ बताया…उसके बाद उसने अपने बाप को फोन किया, और सारी बातें डीटेल में बताई…
उस्मान – तुम लोग वहीं रहो, अब उस वॅन से शहर की तरफ मत आना, मे दूसरी गाड़ी भेजता हूँ…
06-02-2019, 01:22 PM, #191
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RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
करीब एक घंटे बाद ही वहाँ एक स्कॉर्पियो खड़ी थी, जब असलम ने उन दोनो से चलने को कहा तो उन्होने उनके साथ आने से मना कर दिया,
फिर असलम ने उसे अपने ऑफीस का अड्रेस लिख कर दे दिया.. कल आकर मिलने का वादा लेकर वो दोनो वहाँ से निकल गये..
उन दोनो के जाने के 15 मिनिट बाद ही वो वॅन शहर की ओर जा रही थी, अब उस पर बाक़ायदा नंबर प्लेट थी…
कुच्छ देर बाद वो दोनो बंटी-बबली एक 3 स्टार होटेल के रूम में थे, और एक ही पलंग पर एक दूसरे की तरफ पीठ करके सो रहे थे…!
सुबह जब लड़के की आँख खुली तो उसने देखा कि पास सोई उसकी साथी लड़की की एक टाँग उसके उपर पड़ी थी, और एक हाथ उसके पेट पर था…
यह देख कर उसके चेहरे पर एक मीठी सी मुस्कान आगयि, और उसने धीरे से उसका हाथ और पैर अपने उपर से हटाए, और फ्रेश होने बाथ रूम में घुस गया…
बाहर आकर उसने दो चाय ऑर्डर की, जब चाय आगयि… तब उसने अपना एक हाथ उसके कंधे पर रख कर उसे सीधा किया और उसके माथे पर एक चुंबन लेकर उसे जगाया…
अरे उठो ! सुवह हो गयी, चाय पी लो…वो नींद में ही कुन्मुनाई, और उसका हाथ पकड़ कर अपने सीने में भींच लिया…
उसने फिर से आवाज़ दी और अपना हाथ खींचने लगा… वो उसके हाथ को और कस्ति हुई नींद में बड़बड़ाई…उउन्न्ं…सोने दो ना…भाई…
वो – उठो देखो कितना दिन निकल आया है, 9 बज गये… हमें असल्म के यहाँ भी जाना है…
कुच्छ देर की कोशिश के बाद वो उठ कर बैठ गयी, और उसने कहा – गुड मॉर्निंग भैया, और आगे उचक कर उसने उस युवक के गाल पर किस कर लिया…
चाय पीते हुए वो बोली – आप अकेले चले जाना, मे उस हराम्जादे की शक्ल भी नही देखना चाहती… अब तो मे सीधे उस कुत्ते के मूह पर थूकने ही जाउन्गि..
यह कहते -2 उसका सुंदर सा चेहरा लाल भभुका हो गया था, जिसे देख कर उस युवक ने फिर उसे और कुच्छ नही कहा…
उसके बाद वो दोनो तैयार हुए, और होटेल से बाहर आगये, अब वो युवक, वो रात वाला जोसेफ नही था… उसका हुलिया एक दम बदला हुआ था…
बाहर आकर वो दोनो अलग – अलग दिशाओं में निकल पड़े…
……………………….
मे अपने ऑफीस में बैठा आज का न्यूज़ पेपर देख रहा था जिसमें रात वाली घटना पूरे विस्तार के साथ छपी थी,
यहाँ तक कि कैसे दो गुण्डों को एक बिना नंबर की मारुति वॅन बचा कर ले गयी, उस वॅन को तलाश करने की कोशिश जारी है…
खबर पढ़ कर मेरे चेहरे पर स्माइल आगयि, और न्यूज़ पेपर सोफे पर फेंक कर अपने काम में लग गया..…!
शाम तक मे कोर्ट के कामों में उलझा रहा, इस बीच घर से निशा का फोन भी आया, भाभी से भी बात हुई…
उन्होने कई दिनो से घर ना आने का कारण पुछा तो मेने काम की व्यसतता बता कर उन्हें समझा दिया…
घर पर बातें करके मेने अभी फोन रखा ही था, कि वो फिरसे बजने लगा, देखा तो गुप्ता जी का लॅंड लाइन नंबर था,
कॉल रिसीव करते ही कानों में खुशी की आवाज़ सुनाई दी, मेने उसकी आवाज़ सुनते ही कहा – हां खुशी, बोलो कैसे फोन किया…!
खुशी – भैया, आप अभी क्या कर रहे हो..?
मे – क्यों कोई काम था ? मे अपने ऑफीस में ही हूँ, बस काम ख़तम करके निकलने की तैयारी में ही था, कि तुम्हारा फोन आगया…
वो – आप ऑफीस से सीधे यहीं आ जाओ, मे यहाँ अकेली हूँ मम्मी भैया के साथ किसी फंक्षन में गयी हैं, पापा का आने-जाने का कोई ठिकाना नही है…
मे – अरे तो तुम भी अपनी किसी फ्रेंड के पास चली जाओ,
वो – अब ज़्यादा बहाने मत बनाओ, और जल्दी आओ, वरना मे वहाँ आ जाउन्गि…
मेने हँसते हुए कहा – ठीक है आता हूँ, मेरे खाने का इंतेज़ाम करके रखना..
शाम को 7 बजे मेने अपना बॅग उठाया, ऑफीस बंद करवाया, और गुप्ता जी के बंगले की तरफ चल दिया…
गुप्ता जी के बंगले पर पहुँचते ही, खुशी मुझे हॉल में ही मिल गयी, मुझे देखते ही उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने कमरे में खींच कर ले गयी…!
जाते ही उसने गेट लॉक किया और मुझसे लिपट गयी, मेने उसके कंधे पकड़कर अलग किया और कहा – अरे मेरी बेबी डॉल सबर तो कर…!
वो मुझसे अलग होते हुए बोली – आपने जो वादा किया था, उस हिसाब से अब हमारे पास समय भी है और मौका भी, अब आपका कोई एक्सक्यूस नही चलेगा…
मेने उसके बेड पर बैठकर उसे अपनी गोद में बिठा लिया और हँसते हुए कहा – हां.. हां ठीक है मे कॉन्सा मना कर रहा हूँ, पर मुझे एक बात का जबाब देगी…
वो बोली – क्या..?
मे – तुम एक कमसिन नव यौवना, जवानी की दहलीज़ पर अभी-अभी कदम रखी हो, चाहोगी तो हज़ारों लड़के मिल सकते हैं, फिर तुम मेरे जैसे शादी शुदा इंशान के साथ ही ये सब क्यों करना चाहती हो…?
वो – क्योंकि मुझे आपसे ज़्यादा कोई हॅंडसम, और केरिंग मर्द नही मिला अभी तक…, अब मे आपको एक और बात बताना चाहती हूँ…!
मेने उसकी मोटी-मोटी मखमल जैसी चिकनी जांघे जो उसके छोटे से शॉर्ट के बाहर नंगी थी उन्हें सहलाते हुए पुछा – क्या..?
खुशी के मुलायम, थोड़े भारी गुदगूदे नितंबों के नीचे दबे मेरे लौडे ने अपना सर उठा लिया था, पॅंट के अंदर से ही उसने उसकी गान्ड के नीचे हलचल मचा रखी थी…
उसे फील करते ही, खुशी मदहोश होने लगी, और उसने मेरा एक हाथ अपनी जाँघ से उठाकर अपनी गदर कलमी आम जैसी चुचि पर रखकर दबाते हुए कहा –
उस दिन मेने मम्मी से सारे दिन कोई बात नही की, जब भी वो मेरे सामने पड़ती, मे मूह फेर्कर निकल जाती, वो मुझसे बात करना चाहती थी…
रात को जब मे अपने कमरे में पढ़ रही थी, तब वो मेरे कमरे में आई, मेने उन्हें अनदेखा कर दिया और अपनी पढ़ाई में लगी रही…
वो मेरे ठीक सामने आकर अपने घुटने टेक कर बेड पर बैठ गयी, और अपने दोनो हाथ से कानों को पकड़ कर बोली – खुशी बेटा एक बार मेरी तरफ देख तो सही.
उनकी आवाज़ में एक ममतामयी करुणा थी, जिसे मेने पहली बार सुना था, सो तुरंत मेने उनकी तरफ देखा…
मम्मी की आँखों में आँसू थे, उन्हीं आँसुओं भरी आँखों से वो अपने कान पकड़े हुए बोली – खुशी, मेरी गुड़िया मुझे माफ़ कर्दे…
तेरी माँ बहुत बुरी है… अपने बच्चों से किस तरह बर्ताव करती है…, पर तूने कभी ये सोचा कि मे ऐसी क्यों हूँ..?
मुझे आज अपनी मम्मी में माँ की ममता नज़र आई, जो अपनी बेटी के नाराज़ होने पर तड़प उठी थी…
मेने फ़ौरन उनके हाथ पकड़ कर उनके कानों से हटाए और उनके कलेजे से लग कर फफक पड़ी, हम दोनो माँ-बेटी बहुत देर तक रोते रहे फिर मेने उन्हें शांत करते हुए कहा-
मे आपसे नाराज़ नही हूँ मम्मी, हां थोड़ी दुखी ज़रूर थी, कि मेरी माँ ने बिना कुच्छ सोचे समझे अपनी बेटी को इतना गिरा हुआ समझ लिया,
मम्मी सुबक्ते हुए बोली – नही मेरी बच्ची, मेने तुझे गिरा हुआ नही समझा, बल्कि वो सब मेरे कम्बख़्त स्वाभाव बस मेरे मूह से निकल गया…
तू तो जानती है, घर की ज़िम्मेदारियाँ संभालते-2 कब मेरा स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया, मुझे खुद पता नही चला, कोई समझाने वाला था नही, तेरे पापा ने घर की तरफ कभी ध्यान नही दिया…
तुम दोनो बच्चे पढ़ाई में लग गये, मे अपने दुख-सुख किसके साथ बाँटति..?
इन नौकरों के बीच रहकर अपनी मन मर्ज़ी चलती रही, और वही मेरी आदत बनती चली गयी…!
लेकिन आज जब तुम सब लोग मुझे अकेला छोड़ कर चले गये, तब मेने अंकुश से माफी माँगी, और उसकी बातों ने मुझे रियलाइज़ कराया…
मे उसके कंधे से लगकर खूब रोई, मेरा सारा गुस्सा, कुंठा, और घमंड मेरे आँसुओं के द्वारा बह गया, तब मुझे रियलाइज़ हुआ कि मे क्या से क्या बनती जा रही हूँ…!
तभी मेने मन बना लिया था, कि मे अपनी गुड़िया से माफी माँगूंगी, शायद वो मुझे माफ़ कर्दे, लेकिन सारे दिन तूने मेरी तरफ देखा तक नही तो मे दर्द से तड़प उठी,
मुझसे रहा नही गया, और मे तेरे पास चली आई, अब तो मुझे माफ़ कर्दे मेरी गुड़िया…!
मम्मी की बातें सुनकर मेरी रुलाई फुट पड़ी, और मे एक बार फिर मम्मी के सीने से लग कर रो पड़ी…!
फिर मम्मी ने मुझे अलग करके प्यार से मेरे गाल को सहलाते हुए कहा – लेकिन बेटा ये ग़लत फ़हमी पैदा ही नही होती, अगर हम माँ-बेटी अपनी बातें एक दूसरे से कह सुन पाते…
अब मे चाहती हूँ, कि जो भी तेरे मन में हो वो मुझे खुलकर बता दिया कर, जिससे मे तुझे ग़लत और सही का फ़र्क बता सकूँ…!
वैसे तूने अंकुश को अपना भाई मानकर अच्छा किया है, वो लड़का सही मैने में एक भाई की तरह तेरी रक्षा कर सकता है..,
ये जमाना बहुत जालिम है बेटा, कदम-कदम पर झूठ और फरेब से ये दुनिया भरी पड़ी है,
वैसे मुझे अपनी बेटी पर पूरा भरोसा है, लेकिन फिर भी, तू किसी ऐसे वैसे लड़के के चक्कर में मत पड़ना, जो झूठे प्यार के वादे करके लड़कियों को बहला फुसलाकर उन्हें इस्तेमाल करते हैं, ब्लॅकमेल करके उन्हें चूस्ते रहते हैं,
बेटा मे तुझे इसलिए ये सब बता रही हूँ, कि इस उमर में इंसान के कदम बहक ही जाते हैं, जिसे हम प्यार समझते हैं, वो छनिक मात्र शरीर की ज़रूरत होती है,
मे ये नही कहती कि ये ज़रूरत पूरी ना हो, इस उमर में सभी करते हैं लेकिन किसी ऐसे हाथों में ना पड़ना कि वो इसका ग़लत फ़ायदा उठाए,
अंकुश एक ऐसा लड़का है, जो हज़ारों में तो क्या लाखों में एक है, भरोसेमंद है, ऐसा आदमी ढूँढने से भी नही मिलता है…जो हमें नसीब से मिला है…
तेरी ऐसी कोई ज़रूरत हो तो तू खुलकर उसे बता देना.., तू समझ रही है ना बेटी मे क्या कहना चाहती हूँ,
मे मूह फाडे मम्मी की बातें सुन रही थी, मे मम्मी की बातों का मतलव समझ रही थी, सच कहूँ तो जो इस उमर के हिसाब से इंसान की चाहत होती है, वो उन्होने बयान करदी थी..
शायद वो उनके अपने अनुभव रहे होंगे, या क्या पता उन्होने ये सब भोगा हो, लेकिन जो भी हो, ये एक ऐसी सच्चाई थी जिससे दो-चार होते-होते मे भी बची थी,
मे भी एक लड़के से अट्रॅक्ट हुई थी, लेकिन समय रहते उसकी सच्चाई मेरे सामने आ गयी और मेने उससे अपने संबंध ख़तम कर लिए…
मम्मी की बातों का मेरे उपर बहुत गहरा असर हुआ, और मन के किसी कोने में आपकी केरिंग छवि, एक मर्द की छवि में बदलने लगी, जो एक लड़की को उसके लड़की होने के एहसास से अवगत करा सकता है…
मे अवाक खुशी की बातें सुन रहा था, जब वो रुकी तो मेने पुछा – तुम्हारे उस लड़के से संबंध कहाँ तक पहुँचे थे..?
खुशी – बस मिलने मिलाने तक, लेकिन वो मुझे पाने के लिए हर संभव प्रयास में था, मे भी चाहती थी, कि हम शरीरक तौर पर एक हो जायें, बस एक उचित मौके की तलाश में थे…
लेकिन तभी मेरी एक सहेली ने उसकी सच्चाई बता दी, कि इसके कई और लड़कियों से भी संबंध हैं, और ये उन्हें ब्लॅकमेल कर रहा है…!
उसके बाद मेने उससे मिलना छोड़ दिया, चिढ़कर उसने उन गुण्डों का सहारा लिया जिनको आपने सबक सिखाया था…!
मे – क्या वो लड़का तुम्हारे कॉलेज में ही पढ़ता है…?
खुशी – नही, 12थ तक मेरे साथ था, लेकिन अब वो किसी दूसरे कॉलेज से इंजीनियरिंग कर रहा है, लेकिन उन लड़कों ने ही ये बात मुझे बताई, और ये भी कहा – कि अब वो तुम्हारे सामने कभी नही पड़ेगा…
मेने खुशी के अनारों को सहला कर कहा – तो तुम अभी तक वर्जिन ही हो..?
खुशी अपने चेहरे पर एक कामुक सी हँसी लाकर बोली – तो आपको क्या लगा कि मे ऐसे ही किसी को भी अपना ये खजाना यौंही ही लूटा……
इससे पहले की वो अपना वाक्य पूरा करती, मेने अपने होठ, उसके होठों पर चिपका दिए…..!
मेने खुशी को स्मूच करते हुए एक हाथ उसकी चुचि पर ले जाकर उसे मसल दिया.., और दूसरे हाथ से उसकी मुनिया को शॉर्ट के उपर से सहलाया…!
खुशी की आँखों में गुलाबी डोरे तैरने लगे…, उसने घूमकर मेरी तरफ मूह कर लिया और अपने आमों को मेरे सीने से रगड़ने लगी…!
खुशी मेरी गोद में मेरे दोनो तरफ को टाँगें फैलाकर बैठी थी, मेने उसके चेहरे को दोनो हथेलियों में लेकर पुछा – तो अपनी वर्जिनिटी खोने के लिए रेडी हो…!
वो – हां ! क्योंकि मुझे आपसे ज़्यादा केरिंग पार्ट्नर और नही मिल सकता..,
मेने उसके मोटे-मोटे कुल्हों को मसल्ते हुए कहा – सोच लो, तकलीफ़ होगी तुम्हें…
वो अपने होठों पर कामुक सी मुस्कान लाकर बोली – झेल लूँगी, लेकिन उसके बाद जो खुशी मिलेगी, वो ज़्यादा मायने रखती है मेरे लिए…!
मे – जैसी तुम्हारी मर्ज़ी, इतना कहकर मेने उसके टॉप को निकाल दिया…! बिना ब्रा के उसका मदमाता यौवन छल-छलाकर बाहर आगया…!
उसके 34 के बूब, एकदम सीधे तने हुए, लेशमात्र भी लटकन नही, जिनके शिखर पर एक-एक किस्मिश के दाने जैसे निपल… आअहह… क्या मस्त थे वो…
देखकर मेरा जी मचल उठा, और मेने उसके निपल को अपनी जीभ से चाट लिया…
आआहह….सस्स्सिईईई….ऊओह…और चाटो इन्हें….बहुत अच्छा लगता है मुझे…खुशी ने मादकता भरी आवाज़ में कहा….
आअहह…खुशी, तुम्हारी ये चुचियाँ वाकई ग़ज़ब की हैं, ये कहकर मेने एक को अपने मूह में भर लिया, और दूसरी को हाथ में लेकर ज़ोर्से मसल दिया…
आअहह…भैयाअ….धीरे..से म्मस्सालू…कहकर खुशी अपनी गान्ड को मेरे लंड के उभार पर रगड़ने लगी…!
खुशी ने मेरी शर्ट के बटन खोलकर उसे मेरे बदन से अलग कर दिया, और मेरे सीने के बालों को सहला कर मेरे निपल को जीभ से चाट लिया…
मेरे मूह से आहह… निकल गयी…, खुशी मेरे कशरति बदन पर हाथ फेर्कर बोली – क्या बॉडी बनाई है आपने, साले गुण्डों की क्या बिसात जो टक्कर ले पाते…
मेने उसके अनारों को मसल्ते हुए कहा – तू अब अपनी खैर मना…
वो मेरी जीन्स खोलकर उसे नीचे सरकाते हुए बोली – मुझे कोन्सि आपसे फाइट करनी है जो अपनी खैर मनाऊ…!
अच्छा देखते हैं, ये कहकर मेने उसे बेड पर धकेल दिया, और उसका शॉर्ट निकालते हुए बोला – अब जो फाइट होने वाली है वो उन गुण्डों से ज़्यादा ख़तरनाक होगी…!
खुशी की छोटी सी पैंटी, उसकी मोटी-मोटी, मक्खन जैसी चिकनी जांघों के बीच ठीक से चमक भी नही रही थी, मेने उसकी जांघों को सहलाते हुए उन्हें एक दूसरे से जुदा किया…
उसकी पैंटी थोड़ी सी गीली लग रही थी, मेने उसकी पैंटी के गीले भाग को जीभ लगा कर चाट लिया…!
खुशी किसी जलबीन मछली की तरह तड़प उठी, और उसने मेरे सर के बालों को अपनी मुट्ठी में जाकड़ लिया…!
मेने उसकी तरफ देखकर कहा – खुशी तेरा रस तो बड़ा टेस्टी है…, मेरी बात से वो बुरी तरह शर्मा गयी, और अपना सर दूसरी ओर घूमाकर मुस्करा उठी…!
फिर मेने उसकी इकलौती छोटी सी पैंटी को भी निकाल बाहर किया, वाउ ! क्या मुनिया थी उसकी, सफाचट, बिना बालों के एकदम चिकनी, लगता है जैसे कुच्छ समय पहले ही चिकनी की होगी…
मसल गुदगुदी सी, थोड़े से उसके होठ फूले हुए, लेकिन दोनो आपस में जुड़े हुए, दो इंच लंबी बीच की दरार…!
सच कहूँ दोस्तो ! इतनी सुंदर पुसी मेने आजतक नही देखी थी, देखकर मेरे मूह और लंड दोनो से लार टपकने लगी…!
मेने खुशी की दोनो टाँगों को चौड़ा करके एकदुसरे से जुदा किया, तबजाकर बमुश्किल उसकी फाँकें एक दूसरे से जुदा हुई, और उसकी पुसी के निचले भाग पर एक छोटा से छेद दिखाई दिया…
मेने अपनी जीभ की नोक बनाकर उस छेद को कुरेदा…., सस्स्स्सिईईई….आआहह… मुम्मय्यी…, खुशी सिसक पड़ी…,
उन्माद में आकर उसने अपनी मोटी-मोटी जांघों को भींचना चाहा, लेकिन बीच में मेरा सर था, सो उसने अपने दोनो केले के तने मेरे कंधों पर रखकर गान्ड उपर को उचका दी…,
मेने अपने दोनो हाथ उपर ले जाकर उसके दोनो उरोजो को हाथों में कस लिया और थोड़ा सख़्त हाथों से उन्हें मीँजने लगा…!
चुचियों की मींजाइ के साथ-साथ उसकी चूत की चटाई से खुशी की हालत ख़स्ता होने लगी, वो अपनी गान्ड को ज़ोर-ज़ोर से थिरका कर अपने सर के बालों को खींचने लगी…!
उसकी कोरी करारी मुनिया बेहद गीली हो चुकी थी, फिर जैसे ही मेने उसकी क्लिट जो अब थोड़ी बाहर उभर आई थी को अपने दाँतों के बीच दबा लिया,
और एक हाथ को नीचे लाकर अपनी उंगली के पोर को उसके छेद में थोड़ा अंदर तक डालकर रगड़ने लगा…!
खुशी उत्तेजना में आकर अपने सर को इधर से उधर पटाकने लगी, अब उसे अपने आप पर काबू रख पाना बहुत मुश्किल हो रहा था,
अंत में उसने मेरे सर को अपनी मोटी-मोटी जाँघो के बीच कस लिया और अपनी गान्ड को हवा में उठाकर झड़ने लगी,
एक मिनिट तक वो बदस्तूर रस छोड़ती रही, और मे उसके मीठे रस को चपर-चपर चाटने लगा, मानो कोई कुत्ता दूध पी रहा हो…
मेरा कुत्ता दूध पीते हुए ऐसी ही कुच्छ आवाज़ करता है, इसलिए लिख दिया…हहहे.
जब उसका स्खलन समाप्त हो गया, तो वो अपनी गान्ड को बिस्तेर पर लॅंड करके हाँफने लगी…!
मेने अपने होठों पर जीभ फेरते हुए उसकी तरफ देख कर कहा, ऊओउउंम्म पेट भर गया, कितना माल भर रखा है ख़ुसी…?
वो बुरी तरह से शरमा गयी, उसने बड़ी बेदर्दी से मेरे घुंघराले बालों को पकड़ कर अपने उपर खींच लिया, और मेरे चिप-चिपे होठों पर टूट पड़ी…!
मे पलट कर नीचे आगया, और उसे अपने उपर लिटाकर बोला – क्यों मेरी गुड़िया रानी, मज़ा आया…?
वो मेरे सीने में मूह छिपाकर बोली – ऊओह भैया, यू आर सो केरिंग गाइ…, मम्मी ने सच ही कहा था, आप भाग्यबस हमारे जीवन में आए हो..
ये मेने अभी तक कहानियों में या एक दो बाय्फ्रेंड में ही देखा पढ़ा था, आज सच में अनुभव करके पता चला की ब्लोवजोब होता क्या है…!
मेने उसके मोटे-मोटे चुतड़ों पर थपकी देकर कहा – ऊहह.. तो इसके बारे में पहले से ही पता है, हां…
फिर तो ये भी पता होगा, कि अब ब्लो जॉब देने की तुम्हारी बारी है…!
वो मेरे होठ चूमकर बोली – एक्सपीरियेन्स तो नही है, पर आप गाइड करते जाना, इतना कहकर उसने मेरे होठों से चूमना शुरू करते हुए नीचे की तरफ बढ़ने लगी…
अब सिसकने की मेरी बारी थी, खुशी हर वो पेन्तरा अपना रही थी, जो उसने पढ़ा और देखा था…
चूमते चाटते हुए वो मेरी कमर तक पहुँच गयी, मेरा लंड एक छोटी सी फ्रेंची के अंदर उच्छल कूद कर रहा था, हल्का सा गीलेपन का धब्बा उसपर लग चुका था…!
खुशी ने एक बार फ्रेंची के उपर से ही मेरे लौडे को नीचे से उपर की तरफ अपने हाथ से सहलाया…., फिर बड़ी कामुक अदा से अपनी उंगलियों को एलास्टिक में फँसाकर धीरे-धीरे वो उसे नीचे की तरफ सरकाने लगी…!
जैसे ही उसकी एलास्टिक मेरे लंड की सीमा से नीचे हुई, वो किसी स्प्रिंग लगे गुड्डे की तरह उच्छल कर बाहर आगया…!
कुच्छ देर तक अपने मूह पर हाथ रखे खुशी उसके रूप जाल मे फँसी उसे एकटक निहारती रही, फिर उसे अपनी मुट्ठी में कसते हुए बोली –
क्या सबके कॉक ऐसे ही होते हैं भैया…?
मेने शरारत से उसके अनारों को मसल्ते हुए कहा – क्यों तुम्हें पसंद नही आया…?
उसने उसे अपने गाल पर सटा कर उसकी गर्मी को फील करते हुए बोली – पसंद तो बहुत आया, लेकिन क्या सबके कॉक इतने ही बड़े और मोटे होते हैं…, इससे तो मेरी पुसी बुरी तरह फट जाएगी…मुझे तो इसे देखकर डर सा लगने लगा है…
मेने उसके छोटे-छोटे निप्प्लो को अपनी उंगलियों के बीच लेकर सहलाते हुए कहा – पहले तो तुम अपनी भाषा सुधारो खुशी, हिन्दी में इसे लंड कहते हैं, और तुम्हारी इसको….
पता है… आपको बताने की ज़रूरत नही है, खुशी ने मेरी बात को बीच में काटकर हँसते हुए कहा, वो सब बाद में बोलना सीख लूँगी, पहले आप मेरी बात का जबाब दो,
मेने कहा – सबके एक जैसे तो नही होते, कुच्छ बड़े-छोटे भी होते हैं…
वो – तो क्या इससे भी बड़े होते हैं…?
मे झिड़कते हुए बोला – अरे यार तुम सवाल बहुत करती हो, हो सकते हैं लेकिन मेने किसी का नही देखा… चलो अब बातें बंद करके इसे मूह लो,
खुशी ने झेंपकर मेरे लंड को चूम लिया, और फिर उसके सुपाडे को पूरा खोलकर उसे चाटने लगी…,
उसपर हल्की सी प्री-कम की चिपकी थी, तो वो उसका स्वाद लेकर बोली – आपका भी टेस्टी है, ये कहकर उसने उसे अपने मूह में गडप्प कर लिया……!
खुशी पूरे इंटेरेस्ट के साथ मेरा लंड चूस रही थी, वो एक दम स्टील रोड की तरह शख्त हो चुका था, जो अब किसी भी चूत की सील फाड़ने में सक्षम था,
मेने अपना हाथ खुशी के सर पर रख कर उसने रुकने का इशारा किया, वो लंड मूह लिए हुए ही मेरी तरफ देखने लगी…
मेने कहा – बस अब बहुत हो गया, इसका रस मूह से ही पीना है या फिर…अपनी बात अधूरी छोड़ कर मे हँसने लगा…
वो मेरी बात समझकर रुक गयी, तो मेने उसे अपने बगल में लिटा लिया और उसके होठों को चूमकर उसके पूरे बदन पर हाथ फिराया,… वो मचल उठी…
फिर मे उसकी जांघों के बीच आकर अपने घुटने टेक कर बैठ गया, उसकी मखमली जांघों को सहलाकर उन्हें चूमने, चाटने लगा…
अपने हाथ को अपने थूक से गीला करके उसकी चूत के आस- पास सहलाया…
खुशी के अंदर बहुत चुदास भरी हुई थी, मेरा हाथ लगते ही उसकी चूत फिरसे चुहुने लगी.., मेने एक बार उसके रस को जीभ से चाटा…खुशी की सिसकी निकल गयी…!
अब वो वक़्त आ गया था, जिसके इंतेज़ार में खुशी ना जाने कितने दिनो से आस लगाए हुए थी, सो अपने लौडे को हाथ में लेकेर उसकी मुनियाँ के होठों पर रखकर उपर नीचे फिराया…
गरम लंड के एहसास को अपनी चूत की बंद फांकों के उपर महसूस करके, खुशी ने एक झूर-झूरी सी ली…
फिर मेने उसके बंद होठों को फैलाकर अपने सुपाडे लायक जगह बनाई, और अपना टमाटर जैसा गरम सुपाडा उस जगह में फिट कर दिया….
एक बार फिर उसके मांसल बदन को सहला कर उसकी चुचियों को मसल्ते हुए कहा – रेडी बेबी…?
उसने बंद आँखों से हुउंम्म…करके अपनी रज़ामंदी दी, और मेने एक हल्का सा धक्का उसकी कोरी चूत में लगा दिया…!
खुशी ने अपने होठ कसकर बंद कर रखे थे, फिर भी उसके मूह से उउउन्नग्ज्ग…जैसी आवाज़ निकल ही गयी, और मेरा सुपाडा उसकी चूत की पतली सी झिल्ली से जा टकराया…
मेने खुशी के होठ चूमकर उसके कान में फुफुसा कर कहा – यही वो दीवार है खुशी जो अब धराशाहि होनी है, और इसके उस पर तुम्हारे लिए असीम आनंद का खजाना छुपा है…
इसलिए थोड़ा सा सहन करना मेरी गुड़िया, उसने बंद आखों से ही सर हिलाकर हामी भर दी…
मेने अपना लंड थोड़ा सा बाहर को किया, और दूसरे ही पल एक करारा सा धक्का उसकी चूत में मार दिया….
छ्हाअर्र्र्र्र्र…की आवाज़ के साथ ही खुशी की सील टूट गयी, और मेरा आधे से भी ज़्यादा लंड उसकी कोरी गदर चूत में पेवस्त हो गया….
खुशी दर्द के मारे तड़प उठी, लाख कोशिश के बाद भी उसकी चीख निकल गयी…
म्म्म्माआआआआअ……मर गाइिईईईईईई…., दर्द से उसकी आँखें छल-छला गयी.
मेने उसके बालों में सहलकर कहा – बस हो गया मेरी बेहन, ये कहकर मे उसके होठों को चूसने लगा…
एक हाथ से उसके अनारों को सहलाता रहा…, कुच्छ देर में उसका दर्द कम हो गया, मेने फिर एक फाइनल कोशिश की और अपने लंड को जड़ तक उसकी नयी चूत में डालकर कर ठहर गया…
खुशी दर्द से कराह रही थी, मेने फिर से उसके निपल्स को चाटने मसल्ने से उसके दर्द को कम करने की कोशिश की…
कुच्छ देर बाद वो शांत हुई, तो मेने धीरे-धीरे अपनी कोशिश शुरू कर दी…और हल्के हल्के धक्के लगाकर उसे चोदने लगा…!
थोड़े से धक्के तेज करते ही खुशी दर्द से दोहरी हो गयी, धनुष की तरह पीठ मोड़ कर उसने अपना सिर बिस्तर से टिका लिया…,
धक्कों के कारण उसका मूह खुल गया, वो बुरी तरह कराहने लगी…
लेकिन मेने अब अपनी स्पीड कम नही की, कुच्छ देर के बाद उसकी चूत रस छोड़ने लगी, अब उसे भी मज़ा आने लगा था,
वो अब दर्द को दरकिनार करके, मज़े से मेरा लंड लेने लगी, उसकी दर्द भरी कराहें सिसकियों में बदल चुकी थी…!
एक बार खुशी को उपर से चोदने के बाद, मेने उसे अपने उपर बिठा लिया…, अब वो मेरे लंड के उपर बैठकर अपने मनमाने तरीक़े से चुदने लगी….!
मे खुशी को एक घंटे तक चोदता रहा, इस बीच वो अनगिनत बार झड़ी, मे भी दो बार अपना वीर्य उसकी चूत में भर चुका था,
आख़िर में घोड़ी बनाकर उसकी मोटी-मोटी गान्ड को दबाकर चोदने में मुझे सबसे ज़्यादा मज़ा आया, और इसी पोज़िशन के बाद हमने अपनी चुदाई ख़तम की…
खुशी के चेहरे पर संपूर्ण तृप्ति के भाव थे, वो मेरे बदन से बहुत देर तक चिपकी रही…!
मेने उसकी गान्ड मसल कर पुछा – अब तो खुश हो तुम, करली अपने मन की…!
थॅंक यू भैया, आपने मेरी इक्च्छा पूरी कर दी, ये कहकर खुशी ने मेरे लंड को चूम लिया…
फ्रेश होकर खुशी किचन से नौकरानी की मदद से अपन दोनो के लिए खाना वहीं बेडरूम में ही ले आई,
मीठी-मीठी छेड़-छाड़ और हसी-ठिठोली के बीच हम दोनो ने साथ मिलकर खाना खाया, कुछ देर रुक कर मे उसे एक किस करके उसके रूम से बाहर आ गया…
मे अभी हॉल पार करके निकल ही रहा था कि तभी सेठानी की गाड़ी पोर्च में आकर रुकी, संकेत भी साथ में ही था…!
गाड़ी से उतरकर उनका अंदर आना हुआ और मेरा बाहर निकलना, मुझे देखते ही वो चहकते हुए बोली – अरे वकील बेटा ! चल दिए…!
मे – हां आंटी…! आप आ गई ? कैसी रही पार्टी…?
वो कामुक अंदाज में स्माइल करते हुए बोली – हमारी पार्टी तो ठीक ही रही, तुम बताओ, तुम्हारा काम पूरा हुआ कि नही…?
मेने चोन्क्ते हुए कहा – मेरा काम..? मेरा कॉन्सा काम था जो पूरा करना था,,?
वो बात को संभालते हुए बोली – अरे वही, जिसके लिए खुशी ने तुम्हें बुलाया था, कुछ गाइडेन्स चाहिए था ना उसे, अपनी फर्दर स्टडी के लिए…!
मे समझ गया, कि शायद खुशी ने इनको बहाना बता कर मुझे बुलाने के लिए कहा होगा सो तुरंत बोला – हां जी, हां जी ! हो गया…!
वो – खाना खाया या ऐसे ही जा रहे हो…
मे – हां जी, खाना भी हो गया…जी, अब में चलता हूँ, गुड नाइट..
वो नशीले अंदाज में बोली – ओके, गुड नाइट, टेक केर, आते रहा करो…!
मेरे वहाँ से निकलते ही संकेत अपनी मम्मी से बोला – मम्मी आपको नही लगता कि आप और खुशी दोनो वकील भैया को कुछ ज़्यादा ही लिफ्ट देने लगे हो…
उन्होने चोंक कर संकेत की तरफ देखा, और बोली – तुम कहना क्या चाहते हो..?
संकेत – मुझे लगता है, कि खुशी इनको कुछ ज़्यादा ही तबज्ज़ो देने लगी है, और आप भी उसे एनकरेज करती हो…
सेठानी – चलो अंदर चलो, बैठकर बात करते हैं, फिर वो उसे हॉल में ले आई, और सोफे पर बैठ कर दोनो बातें करने लगे…
सेठानी – संकेत ! तुम कहीं अपनी छोटी बेहन के बारे में कुछ ग़लत सलत तो नही सोच रहे…?
संकेत ने अपनी नज़र झुका ली लेकिन कुछ कहा नही, सेठानी समझ गयी कि जो उन्होने सवाल किया है, वही उसके मन में है…
देखो बेटा ! तुम भले ही उसके सगे भाई हो, लेकिन आज तक तुमने ऐसा कोई काम नही किया जिससे खुशी को तुम्हारे उपर भरोसा हुआ हो,
वहीं एक नेक दिल होने की वजह से उसने उसके साथ वो किया जो शायद ही कोई कर पाए, अपनी जान जोखिम में डालकर एक पराई लड़की के मान सम्मान की रक्षा की…जो किसी भी ग़ैरतमंद लड़की या औरत के लिए सबसे उपर होता है…
अब ऐसे में खुशी का अंकुश पर विश्वास करना क्या ग़लत है…? और आज तो मेने ही खुशी को उसे यहाँ बुलाने के लिए कहा था, ताकि वो अकेलापन महसूस ना करे..
वैसे भी आजकल जमाना बहुत खराब है, नौकरों पर भरोसा करके एक जवान लड़की को अकेला नही छोड़ा जा सकता था…
संकेत – सॉरी मम्मी, मेरा ये मतलब नही था, मे तो बस ऐसे ही बोल दिया, कि एक बाहर के आदमी पर ज़रूरत से ज़्यादा भरोसा करना ठीक नही…
सेठानी – कोई बात नही, जेलौस फीलिंग होती है इस उमर में कोई नयी बात नही है, वैसे उसी बाहर के आदमी के बहुत अहसान हैं इस घर पर,
अब जाओ जाकर सो जाओ, मे भी थक गयी हूँ…!
जब संकेत वहाँ से उठकर चला गया, तो सेठानी मन ही मन मुस्करा उठी, उन्हें अपनी चाल कामयाब होती नज़र आ रही थी……!
शहर का 5 सितारा होटेल रिवेरो, रात के अंधेरे में कुछ ज़्यादा ही जगमगाने लगता है, इसके अंदर की रंगिनियों की तो बात ही अलग है…
एक सामान्य आदमी के लिए तो इसके अंदर पहुचना एक सपने देखने जैसा ही है..…
होटेल रिवेरो का बेसमेंट, जो खुद किसी आलीशान महल से कम नही है, इसके विशाल हॉल में इस समय ऐसा जान पड़ता था मानो किसी राजा महाराजा का दरबार लगाने वाला हो…
एक विशालकाय मेज के पीछे एक बड़ी सी सुसज्जित कुर्सी जो इस समय खाली थी…, उस विशाल मेज के तीन तरफ शानदार कुर्सियों पर शहर की जानी मानी हस्तियाँ विराजमान थी…
उनमें से ही कुछ कुर्सियों पर उस्मान भाई, उसका बेटा असलम, बिल्डर योगराज, उसका बेटा गुंजन, कमिशनर का बेटा विकी और एमएलए का भतीजा सन्नी बैठे हुए थे…
पोलीस और नारकॉटिक डिपार्टमेंट के कुछ अफसरों के अलावा और भी बहुत से लोग थे… जिनका जिकर करना यहाँ ज़रूरी नही है…!
तभी हॉल का गेट खुला, और उस स्पेशल हॉल का दरवान एक नौजवान के साथ अंदर दाखिल हुआ…
सभी की नज़र उधर को मूड गयी…, वहाँ बैठे तमाम लोगों की नज़र उस नौजवान पर टिक जाती है, जो एक हॅटा-कट्टा, 6’2” के करीब लंबा, चौड़ा सीना, गोरे-चिट्टे चेहरे पर फ्रेंच कट दाढ़ी, नाक थोड़ी सी फूली हुई…
नीली आँखों वाले किसी हिन्दी फिल्म के हीरो जैसे इस युवक का व्यक्तित्व देख कर वहाँ बैठे सभी लोग जैसे उसमें खो से गये…
तभी असलम अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ, और तेज-2 कदमों से चलता हुआ उस नौजवान के पास पहुँचा और उसके गले से लगकर बोला….
वेलकम दोस्त, तुम्हारा हमारे ग्रूप में स्वागत है… सब मूह बाए उन दोनो की तरफ देखने लगे…
असलम ने वहाँ बैठे सब लोगों को संबोधित करके कहा – यही है वो शख्स जिसने कल मौके पर आकर हमारी जान बचाई थी… नाम है जोसेफ.
फिर उसने वहाँ बैठे सब लोगों से उसका परिचय करवाया… और उसे अपने पास वाली चेयर पर बिठा लिया…
जोसेफ उस चेयर, जो कि सबसे अलग टेबल के पीछे किसी राज सिंघासन की तरह सजी हुई थी को खाली देख कर चोंका, और उसने असलम से फुसफुसाकर उसके बारे में पुछा…
इससे पहले कि वो उसको कोई जबाब देता, कि उसी चेयर के ठीक पीछे वाली दीवार एक हल्की सी गड़गड़ाहट के साथ एक तरफ को सर्की, और उसमें से एक स्याह काले लबादे में लिपटी हुई, एक मोह्तर्मा प्रगट हुई, जिसकी केवल आँखें ही चमक रही थी…
उसे देख कर सब लोग एक साथ खड़े हो गये… वो दो कदम आगे बढ़कर उस सिंघासन नुमा कुर्सी पर बैठ गयी…
स्याह लबादे के अंदर से उस औरत की बस दो आँखें ही नुमाया हो रही थीं, जो वहाँ बैठे सभी लोगों का निरीक्षण करने लगी…
घूमते – 2 जब उसकी नज़र जोसेफ नाम के उस युवक पर पड़ी, तो वो उसे देखती ही रह गयी… फिर उसने अपनी खनकती आवाज़ में पास ही बैठे असलम से उसके बारे में पुछा…
जब उसने सब कुछ बता दिया, तो वो औरत बोली – ये तुमने अच्छा किया असलम, हमारे संघटन को ऐसे ही लोगों की ज़रूरत है…
इसे हमारे काम और संघटन के उसूलों के बारे में सब समझा देना, फिर वो सब लोग कल हुई घटना का विश्लेषण करने लगे कि ऐसा हुआ तो आख़िर कैसे…
इतनी पक्की खबर पोलीस के कानों तक कैसे पहुँची…ये सभी इसी तरह की चर्चा में लगे थे,
लेकिन जोसेफ का ध्यान उन सब की बातों से हटकर उस औरत की आँखों का एक्स्रे करने और उसके बोलने के तरीक़े की तरफ ही था…
उसके दिमाग़ में उस औरत की धुंधली सी छवि बनने बिगड़ने लगी…और एक अंजाना सा सक़ पैदा होने लगा…पता नही क्यों उसे उसकी वो आँखें जानी पहचानी सी लग रही थीं…
जो शक़ अबतक उसके दिमाग़ में पनप रहा था, वो सही साबित होता दिखाई दे रहा था…
कुछ देर में वो मीटिंग ख़तम हो गयी, जिससे उसे कोई लेना देना नही था… असलम को दूसरे दिन मिलने का वादा करके वो वहाँ विदा हुआ.
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अगले पूरे दिन मैं अपने एक केस में उलझा हुआ था, कि तभी मेरा मोबाइल बजने लगा, स्क्रीन पर जो नंबर फ्लश हो रहा था, उसे देख कर मेरे चेहरे पर मुस्कान आगयि…
मेने कॉल पिक की, दूसरी तरफ से प्राची (रेखा जिसका रेप हुआ था की छोटी बेहन) की सुरीली आवाज़ सुनाई दी, मेरे हेलो बोलते ही वो बोली…
आप कहाँ हो अभी, मेने उसे बताया कि मे अपने ऑफीस में काम कर रहा हूँ…
वो बोली – मुझे आपसे मिलना था, आपके ऑफीस आ जाउ…?
मेने उसे शाम को घर आने का बोलकर कॉल कट कर दी…
उसी शाम 4 बजे असलम अपने नये दोस्त को लेकर अपने मेन अड्डे पर पहुँचा, जहाँ उसके धंधे का ज़्यादातर माल स्टोर होता था, और यहीं से सप्लाइ होता था…
ये शहर के बाहर इंडस्ट्रियल इलाक़े में एक बड़ा सा गॉडाउन जैसा था, जहाँ पर बहुत सारे आदमी सख़्त पहरे पर थे…
असलम ने बताया, कि ये हमारा मेन गॉडाउन है, यही से सब जगह ड्रग और हथियार सप्लाइ होते हैं…
बाहर से देखने पर ये एक बड़ी फॅक्टरी दिखाई देती है… लेकिन अंदर सब दो नंबर का माल भरा पड़ा था…
उसके बाद उसने वो सारी जगह दिखाई, जहाँ पर वो सब ड्रग और हथियार रखे हुए थे, जिन्हें इस शहर ही नही देश विदेश के लिए भी सप्लाइ किया जाता था…
ये फॅक्टरी किसी जगन सेठ के नाम से रिजिस्टर थी, जो मुंबई का बहुत बड़ा कारोबारी था,
दिखावे के लिए यहाँ बिजली के केबल बनाए जाते थे… लेकिन सामने असल तो कुछ और ही थी…
वहाँ से निकल कर शहर में एक दो डीलर्स से मुलाकात करवाई…., अपने धंधे के कामों के बारे में बातें बताता रहा…
फिर एक बीअर बार में जाकर दोनो ने बीअर पी, बीअर पीते हुए, असलम ने उसके अतीत के बारे में पुछ ताछ भी की…
इस बीच असलम ने रूबी के बारे में पुछा कि वो क्यों नही आई…,
जोसेफ ने कहा, कि वो सिर्फ़ काम के वक़्त ही मेरे साथ होती है, वाकी समय वो होटेल के कमरे से बाहर नही आती जब तक कोई काम उसे ना करना हो..……………!
देर रात जब मे अपने फ्लॅट में पहुँचा , घर खुला देख कर ही मे समझ गया कि प्राची आ चुकी है, क्योकि चाबियों का एक सेट उसके पास भी होता था…
जब मे घर के अंदर पहुचा तो वो सोफे पर बैठी टीवी देखते हुए मेरा इंतेज़ार कर रही थी…
वो शिकायत करते हुए बोली – कितनी देर कर दी, कब्से मे यहाँ आई हूँ.. चलिए अब जल्दी से फ्रेश हो जाइए, खाना ठंडा हो रहा है…
मे – खाना..? तुमने बनाया है…?
वो – हां ! मे तो यहाँ 7 बजे ही आगयि थी…
फिर हम दोनो ने साथ बैठ कर खाना खाया, और फिर सोफे पर बैठ कर टीवी देखते हुए बातें करने लगे…
मेने प्राची से कहा – ये कैसा भूत सवार है तुम्हारे सिर पर…?
अपनी पढ़ाई लिखाई छोड़ कर, पिच्छले 6-7 महीनों से फाइटिंग, ड्राइविंग, शूटिंग ये सब सीखने में लगी हो..
जिस उमर में हाथों में कलम और कंप्यूटर होने चाहिए उन हाथों में गन लेकर घूमती हो…
उसने मेरा हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा – मेने अपनी बेहन की चिता पर कसम खाई थी, कि जब तक उन दरिंदों का अंत होते हुए अपनी आखों से नही देख लूँगी, चैन से नही बैठूँगी…
कलम-कंप्यूटर तो बाद में भी आ सकते है अंकुश भैया, लेकिन मेरी बेहन अब कभी वापस लौट कर नही आएगी…, ये कहते हुए उसकी आँखें नम हो गयी..
मे – तुम्हारे घर वाले…. उनका क्या रुख़ है तुम्हारे इस फ़ैसले पर…?
वो – मम्मी मेरे साथ हैं, पापा से हम कोई भी वास्ता ही नही रखते… और ना ही अब उनसे कोई पैसे की मदद ले रहे हैं, एक तरह से वो हमसे अलग थलग ही समझो…
उन्होने लाख कोशिश की हमें मनाने की लेकिन हम में से कोई उनके साथ नही है, यहाँ तक कि मेरा छोटा भाई भी नही…
मे – लेकिन उन्हें पता तो होगा तुम्हारे मंसूबों के बारे में…
वो – पता भी हो तो भी मुझे अब कोई फरक नही पड़ता…,
मे – लेकिन मुझे फ़र्क पड़ता है प्राची, तुम मेरे साथ मिलकर अपनी बेहन के क़ातिलों से रिवेंज ले रही हो ये बात अगर उन्हें पता है तो जाहिर सी बात है वो इसे कहीं और भी लीक कर सकते हैं,
जो आदमी पैसों के लिए अपनी बेटी को मरते हुए देख सकता है, उसके लिए ये बातें हमारे दुश्मनो तक पहुँचाना क्या बड़ी बात है…
फिर जिस आसानी से हम अपने काम को अंजाम देना चाहते हैं, उसमें अड़चनें पैदा हो सकती हैं…
इसलिए पता करो, कि उन्हें इन बातों का पता तो नही है…
प्राची – लगता तो नही कि उन्हें कुछ भी पता हो, क्योंकि हम में से उनसे कोई बात भी नही करता, फिर भी में पता करूँगी, और ये ख़याल रखूँगी कि ये राज किसी के भी सामने उजागर ना हो…!
मे – लेकिन मेने तुमसे वादा किया है, कि मे उन हराम्जदो को उनके अंजाम तक पहुँचा कर ही रहूँगा… फिर तुम्हें अपनी जान जोखिम में डालने की क्या ज़रूरत है….?
प्राची अपना सर मेरे कंधे से टिकाते हुए बोली – जब आप बेगाने होकर मेरी बेहन को न्याय दिलाना चाहते हो, उसकी आत्मा को शांति दिलाना चाहते हो,
तो क्या थोड़ा सा ख़तरा मे नही ले सकती… एक से भले दो…और सच कहूँ तो हम तीनों ही आपके बहुत अभारी हैं..
मम्मी तो मानती हैं कि आप आम इंसान नही हो, कोई फरिस्ता हो, भला कॉन किसी दूसरे के लिए इतना सोचता है…
मेने उसकी पीठ पर हाथ से सहलाते हुए कहा – मे कोई फरिस्ता-वरिस्ता नही हूँ, बस मेरे जमीर ने कहा कि रेखा के हत्यारों को उनके किए की सज़ा मिलनी ही चाहिए, क़ानून के तहत नही दिला पाया, तो गैर क़ानूनी ही सही…
प्राची मेरे बदन से सटते हुए बोली – ये सोच किसी आम इंसान की तो नही हो सकती…आप सच में कोई फरिस्ता ही हो.. ये कह कर उसने मेरे गाल पर किस कर दिया…
मेने उसकी तरफ देखा, तो वो सर झुका कर बोली – सॉरी भैया…
मे – किस बात के लिए…?
वो – वो मे अपनी भावनाओं को काबू में नही कर पाई, और आपको किस कर लिया…आपको बुरा तो नही लगा..?
मे – तुमसे किसने कहा कि मुझे बुरा लगा…? मे तो तुम्हारे मासूम चेहरे को देख रहा था…तुम मेरे से छोटी हो, और तुम्हें पूरा हक़ है, अपना प्यार जताने का..
वो मेरे गले से लिपट गयी, और सुबक्ते हुए बोली – आप सच में बहुत अच्छे हो…
मेने भी उसकी पीठ सहलाते हुए उसके माथे पर किस कर दिया…और बोला – अब तुम घर जाओगी, या यहीं सो जाओगी…
वो – अब तो बहुत रात हो गयी, अब सुवह ही चली जाउन्गि अगर आपको कोई प्राब्लम ना हो तो…
मेने उसके गाल पर हल्की सी चपत लगाते हुए कहा – बहुत मारूँगा तुझे इस तरह की बात की तो, भला मुझे तुझसे क्या प्राब्लम होने लगी…जहाँ तेरी मर्ज़ी हो वहाँ सो जा..
वो – मे तो आपके साथ ही सोउंगी… सच में उस दिन होटेल में बड़ी अच्छी नींद आई थी आपके साथ…
मे उसके चेहरे की तरफ देखने लगा, जहाँ मुझे सिर्फ़ मासूमियत के सिवा और कुछ नज़र नही आया…………………….!
रात का ना जाने कॉन्सा पहर था, किसी के मुलायम हाथों का स्पर्श अपने बदन पर पाकर मेरी नींद टूट गयी….
देखा तो मेरी टीशर्ट उपर को थी, लोवर भी नीचे खिसका हुआ था, और प्राची अपने कोमल हाथों से मेरे बदन को उपर से नीचे तक सहला रही थी…
मेरे बदन में झूर झूरी सी फैल गयी, और मेरे फ्रेंची में तंबू सा बनने लगा…
प्राची मेरे कंधे पर अपना सर टिकाए…नीचे को मूह करके मेरे बदन से खेल रही थी, अंडरवेर में बने तंबू को देख कर उसका हाथ अनायास ही मेरे लंड पर पहुँच गया, और वो उसे सहलाने लगी…
मेने कुछ देर चुप रहना ही ठीक समझा, मे देखना चाहता था, कि प्राची के आख़िर मन में क्या है… क्या वो मेरे साथ सेक्स करना चाहती है या, बस ऐसे ही पुरुष स्पर्श को फील करना चाहती है…
जब कुछ देर उसने मेरे लंड को सहलाया तो वो और ज़्यादा सख़्त हो गया, जिसे प्राची ने अपने हाथ में लेकर फील किया…
ज़िग्यासा वश उसने मेरे फ्रेंची को जैसे ही नीचे किया, मेरा नाग फन फैलाए सीधा खड़ा होकर उसको घूर्ने लगा…
मेने साफ-2 फील किया, कि मेरे फुल खड़े लंड को देख कर प्राची ने अपने बदन में फूरफ़ुरी सी ली…और वो उसे अपनी मुट्ठी में कसकर दबाने लगी…
उसने उसके सुपाडे को खोल कर देखा… लाल टमाटर की तरह चमकता सुपाडा देख कर वो मंत्रमुग्ध सी अपना सर नीचे को ले जाने लगी…
जैसे – 2 उसका सर नीचे को बढ़ रहा था, मेरी साँसें भी उसी गति से बढ़ने लगी…वो निरंतर उसे खोल-बंद कर रही थी…
आख़िर वो अपने मूह को उस तक ले ही गयी…, अब उसकी गरम – 2 साँसें मेरे लंड को छुने लगी थी…
उसकी गरम साँसों को महसूस करते ही, मेरा लंड झटके खाने लगा…
ना जाने क्या सोच कर उसने मेरे सुपाडे पर अपने तपते होंठ रख दिए और उसे चूम लिया…
ना चाहते हुए भी मेरे मूह से सस्सिईईईईईईईईईईईईईईईईईई……..सिसकी निकल गयी…
प्राची ने झट से मेरा लंड छोड़ दिया, और मेरी तरफ पलटी…
लेकिन मेरी आँखें अभी भी बंद थी… उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था, खुद उसे अपने दिल की धड़कनें साफ-साफ सुनाई दे रहीं थी….!
मेरी आँखें बंद देख कर उसने राहत की साँस ली, और कुछ देर अपनी साँसों को नियंत्रित करती रही….!
उसने कुछ देर और इंतेज़ार किया, लेकिन मेरी तरफ से कोई हलचल ना देख उसने फिर से उसे मुट्ठी में दबा लिया और उलट-पलट कर देखने लगी…
कुछ देर यूँही देखने के बाद उसने फिर से उसे चूमा और सुपाडे पर अपनी जीभ से चाट लिया…
मेने इस बार कस कर अपने होंठ भींच लिए, अब वो अपने होठों को गोल घेरे में करते हुए उसे अपने मूह में भरने लगी… एक दो बार धीरे-2 से अंदर बाहर किया…
लेकिन उसका भी अब कंट्रोल हटता जा रहा था, सो वो उसे जल्दी-2 अंदर-बाहर करने लगी… लाख कंट्रोल के बाद भी मेरा हाथ स्वतः ही उसके सर पर पहुँच गया..
और मे उसके सर को अपने लंड पर दबाने लगा…
प्राची मेरे लंड को मूह से बाहर निकालना चाहती थी, लेकिन मेरे हाथ के दबाब के कारण वो ऐसा नही कर सकी, तो उसने तिर्छि नज़र से मेरी तरफ देखा…
मे भी उसको ही देख रहा था सो बोला – अब तेरे जो मन में है वो कर प्राची.. शरमाने का अब कोई फ़ायदा नही है…
उसके चेहरे पर मुस्कराहट खेल गयी और वो उसे पूरे मन से चूसने लगी…
मे भी उसके सर पर हाथ रख कर उसको इशारे से गति देने लगा… जब चुसते – 2 उसका मूह दुखने लगा… तो उसने उसे बाहर निकाला और अपने हाथ से मसल्ने लगी…
मेने उसके कंधे पकड़ कर अपने उपर खींच लिया… और उसके पतले – 2 रसीले होठों को चूसने लगा…
कुछ देर उसके होंठ चूसने के बाद मेने उसको पुछा – क्या इरादा है प्राची…?
वो मदहोशी भरी आवाज़ में बोली – अब मत रुकिये भैया… मे इस आनंद की सीमा को पाना चाहती हूँ…प्लीज़ दे दीजिए मुझे…वो सुख…
मेने कहा – सोच ले ! बड़ी कठिन राह है, इस सुख की… झेल पाएगी…?
वो – मेरी चिंता मत करिए आप, बस मे आज वो सुख पाना चाहती हूँ…
मे – जैसी तेरी मर्ज़ी, तकलीफ़ तुझे झेलनी है, मेरा क्या………….!
मेने प्राची के सारे कपड़े निकाल दिए…. उसकी कंचन सी काया देख कर मे बौरा गया…
मेने उसे पलग पर लिटा दिया, और खुद के कपड़े निकाल कर पलंग के नीचे फेंक दिए, उसके बगल में बैठ कर एक बार उसके पूरे बदन पर हाथ फेरा…
जैसे जैसे मेरा हाथ उसके बदन पर घूम रहा था, उसका बदन किसी बिन पानी की मछली की तरह फडफडाने लगता…
उसके पेट से होते हुए उसकी कठोर 32” की गोल-गोल गेंद जैसी चुचियों को सहलाता हुआ, उसकी गर्दन, और फिर गालों से होते हुए…उसके पतले होठों पर अपनी एक उंगली उल्टी करके फिराई…
वो अपनी आँखें मुन्दे शरीर में होरहे सेन्सेशन में डूबी हुई थी…
अब मे उसके टाँगों के बीच आकर घुटने टेक कर बैठ गया, और उसकी जांघों को अपनी जाँघो के उपर रख कर उसकी चुचियों को अपने हाथों में कस कर मसल दिया…
आअहह…………आराम…. सीईए……सीईईईईई….दरद होता है….
फिर मेने उसकी बगलों में हाथ डालकर उसको किसी बच्ची की तरह उठा कर अपनी गोद में बिठा लिया….
मेरा लंड इस समय ठीक 60 डिग्री पर था सो उसके गोद में बैठते ही उसकी चूत के होठों से सॅट गया…
उसकी पीठ को सहलाते हुए मेने उसके होठ चूसना शुरू कर दिया… प्राची तो मानो किसी प्लास्टिक की गुड़िया की तरह मेरे इशारों पर चल रही थी…
होठों को चूसने के बाद उसकी गर्दन को चूमते हुए उसकी चुचियों को चूमने चाटने लगा…
उसके कड़क हो चुके अंगूर के दानों को जीभ से चूसने लगा… प्राची मस्ती भरी सिसकियाँ लिए जारही थी…
उसके लिए तो आज ना जाने जिंदगी का ये कॉन्सा अनौखा सुख था, जिसके ना मिलने पर उसकी जान ही ना निकल जाए…
सुख सागर में गोते लगाते हुए वो किसी और ही अनूठी दुनिया में पहुँच चुकी थी.. फिर मेने धीरे से उसे पलग पर छोड़ दिया…और उसकी टाँगों को मोड़ कर उनके बीच में बैठ गया…
एक बार अपनी हथेली से उसकी रसीली कोरी करारी चूत को रगड़ा, और फिर प्यार से हाथ रख कर सहलाया…
जब मेने अपनी जीभ से उसकी मुनिया को चाट कर गीला किया, तो वो बुरी तरह से सिसकते हुए बोली – आअहह…सस्स्सिईइ…भैयाअ..कुकच..कारूव……
मेने मुस्कराते हुए प्राची से पुछा – तुम तैयार हो ना… उसने हामी भर दी तो मेने अपने लंड को सहला कर, उसकी सांकरी सी सुरंग के छेद पर रखा और हल्के से दबा दिया…
वो एकदम सिहर गयी… मेने उसकी कड़क चुचियों को सहलाकर एक तगड़ा सा धक्का मार दिया….
मेरा लंड उसकी झिल्ली को तोड़ता हुआ… आधे से ज़्यादा उसकी चूत को चौड़ाते हुए अंदर फिट हो गया…
उसके कंठ से दिल दहलाने वाली चीख निकल गयी…भािईय्य्ाआअ…आआ……… मररर…गाइिईईईईईईईईईईईई…….माआअ…..
मेने प्यार से उसके बदन को सहलाया…होठों को चूमा…और कुछ देर ऐसे सी पड़ा रहा… फिर धीरे-2 कोशिश करके लंड को अंदर बाहर किया…
जब उसकी टाइट चूत गीली होने लगी और लंड को अंदर बाहर होने में आसानी होने लगी… तो मेने अपने धक्कों में तेज़ी लाते हुए चुदाई शुरू कर दी…
प्राची अब अपनी जिंदगी की पहली चुदाई का मज़ा लेने लगी थी, उसे ऐसा महसूस हो रहा था मानो कोई कारुन का खजाना मिल गया हो… !
वो बढ़ चढ़ कर अपनी कमर को हवा में उठा-उठाकर मेरे धक्कों का जबाब दे रही थी, एक बार झड़ने के बाद भी उसने कोई प्रति रोध नही किया…
मेरे धक्के निरंतर जारी रहे, वो फिरसे गरम हो गयी, और मेरे होठों को चूस्ते हुए चुदाई का भरपूर आनंद उठाने लगी…!
आधे घंटे के बाद वो फिरसे छेड़ छाड़ करने लगी…मेने भी उसे निराश नही होने दिया… और एक बार फिरसे उसकी कोरी चुदि चूत की सर्विस करदी……………………..
सुवह हम देर तक सोते रहे, तकरीबन 8 बजे मेरी नींद मोबाइल के बजने से खुली… रिंग मेरे सीक्रेट नंबर पर थी, देखा तो असलम लाइन पर था…
मेने अलसाए हुए कॉल अटेंड की… दूसरी तरफ से उसकी घबराई और गुस्से से मिश्रित आवाज़ जिसमें कंपकपि साफ सुनाई दे रही थी…
असलम – जोसेफ… कहाँ हो तुम..?
मे – अपने रूम में हूँ, सो रहा था, बोलो क्या बात है…?
वो – गजब हो गया यार ! रात हमारे मैं गॉडाउन पर पोलीस की रेड पड़ गयी… सारा माल जप्त हो गया, हमारे कुछ लोग मारे गये, कुछ पोलीस की गिरफ़्त में हैं…
मे हड़बड़ाने की आक्टिंग करते हुए बोला – क्या बात कर रहे हो भाई… ऐसा कैसे हो गया…? कल ही तो हम लोग वहाँ जाकर आए थे…
वो – वही तो, वही तो मे जानना चाहता हूँ… कि आख़िर ऐसा क्यों हुआ जो पहले कभी नही हुआ था…? वो भी कल हमारे वहाँ जाने के बाद…?
मे – तुम कहना क्या चाहते हो…? कहीं तुम मेरे उपर शक़ तो नही कर रहे…?
असलम – तो फिर ये हुआ कैसे…?
मेने कुछ देर सोचने की आक्टिंग की फिर कहा – मुझे कुछ – 2 अंदाज़ा है, कि ये कैसे हुआ है…?
मे शाम तक तुम्हें कन्फर्म करता हूँ.. कि ये किसने और क्यों किया होगा..?
वो – क्या..? तुम्हें पता है… बताओ मुझे ये किसकी हिमाकत है…?
मे – अभी मुझे सिर्फ़ शक़ है… मे जल्दी ही तुम्हें पूरा पता लगा कर देता हूँ..
वो – लेकिन तुम पता कैसे करोगे.. तुम तो इस शहर में नये हो…!
मे – याद है मेने क्या कहा था… हम बंटी और बबली हैं… जिस शहर में होते हैं उसका सारा इतिहास-भूगोल पता कर लेते हैं…
वो – ठीक है, जल्दी पता करके मुझे उस हराम्जादे का नाम बताओ…
मे – तुम चिंता मत करो, जैसे ही कन्फर्म होगा मे तुम्हें सामने से फोन करूँगा…यह कहकर मेने फोन कट कर दिया…
प्राची अभी भी नंगी पड़ी सो रही थी, जो मेरी फोन पर बातें सुन कर उठ बैठी, और इस समय मेरे लौडे से खेल रही थी…
फोन कट होते ही मेरे होठों पर किस करके बोली – लगता है, कुछ बड़ा धमाका हो गया है…
मेने उसकी चुचियों पर हाथ फेरते हुए कहा – हाँ…जंग शुरू हो चुकी है, और अब शिकार को आगे करके शेर का शिकार करने का वक़्त आ गया है…
वो मेरे लौडे पर अपनी मखमली जाँघ रगड़ते हुए बोली – अब क्या करने वाले हैं आप..?
मे – देखती जाओ, जल्दी ही तुम्हें बड़ी खुशख़बरी मिलेगी…कह कर मेने उसे अपनी गोद में खींच लिया और उसकी चूत में उंगली डालकर हिलाने लगा…
प्राची सीसीयाने लगी और अपनी गान्ड से मेरे लंड को मसाज देने लगी…
मेने एक बार फिर उसे पलंग पर लिटाया, और सुवह – 2 में हुए एरेक्षन से कड़क लंड को उसकी नयी चुदि चूत में डाल दिया…
वो हाए-हाए करते हुए मस्ती में झूमती हुई चुदाई का मज़ा लेने लगी..
आधे घंटे की मस्त चुदाई के बाद मेने अपना वीर्य उसके मूह, चुचियों समेत उसके पूरे बदन पर छिड़क दिया.. जिसे उसने बड़े नशीले अंदाज से अपने शरीर पर क्यूपेड लिया…!
सुवह – 2 की चुदाई से बदन एकदम हल्का फूलका हो गया था, सो प्राची के होठों की एक मस्त किस लेकर मेने पलंग से नीचे छलान्ग लगाई और बाथरूम में घुस गया…
पीछे प्राची पलंग पर बैठी अपने शरीर पर हाथ फेरती हुई होठों पर मुस्कान लिए, मुझे जाते हुए देखती रही…..!
तैयार होकर मेने प्राची को अपने साथ लिया, उसे उसके घर ड्रॉप किया और मे कोतवाली की तरफ बढ़ गया…
वहाँ भैया से मुलाकात करके सब स्थिति अपडेट की, जो लोग रेड में पकड़े गये थे.. उनकी सेवा चालू ही थी, लेकिन सालों ने अभी तक ज़्यादा कुछ बका नही था…
कुछ तो ऐसे थे, जिन्हें अभी तक ये भी मालूम नही था, कि फॅक्टरी की आड़ में ये धंधा भी होता था वहाँ…
पोलीस ने ऐसे लोगों को छांट कर अलग रखा था, वाकी जो घाघ थे, और मंझे हुए खिलाड़ी थे उनकी धुलाई जारी रही…
फिर मेने अपने अगले स्टेप के बारे में भैया को जब बताया, वो आँखें चौड़ी करके बोले – वाउ ! प्लॅनिंग तो सॉलिड है यार,… लेकिन संभलकर मामला कहीं उल्टा ना पड़ जाए…
मेने कहा – आप बेफिक्र रहो, बस इसी तरह पोलीस की हेल्प देते रहना, जल्दी ही हम इन्हें नेस्तनाबूद करके इस शहर को अपराध मुक्त कर सकते हैं…
भैया – यार ! लेकिन ये कमिशनर भेन का लॉडा मुश्किलें खड़ी करता जा रहा है… आज भी बौराया हुआ उल्टी-सीधी बकवास कर रहा था…
मे – ये अब तक आपके द्वारा लिए गये दोनो आक्षन की रिपोर्ट आइजी/डीआइजी और होम सीक्रेटरी को भेज दो, अपने आप ठंडा हो जाएगा… मेरे ख्याल से तो ये आपको इम्मीडियेट बॅक-अप करके रखना चाहिए था…
वो – ये तूने बिल्कुल सही कहा, हां ये ठीक रहेगा, मे अभी रिपोर्ट भेजता हूँ, और हिंट भी कर दूँगा, कि लोकल प्रेशर है, केस को दबाने के लिए…अब देखता हूँ इस हरामी, साले कमिशनर को.
कुछ और इधर-उधर की बातें करके मे कोर्ट चला आया……………..!
शाम को 4 बजे असलम के मोबाइल पर उसे एक मेसेज के साथ एक वीडियो क्लिप का लिंक मिला… जब उसने उसे खोल कर देखा तो उसकी आँखें चौड़ी हो गयी…
गुस्से से उसका चेहरा तमतमा उठा…अपने जबड़ों को कसते हुए वो अपने आप से ही गुर्राया….तेरी ये मज़ाल भोसड़ी के… हमें ही ट्रॅप करना चाहता है…
अब देख मे तेरी कैसे माँ छोड़ता हूँ मदर्चोद…
इससे पहले कि असलम गुस्से में कोई कदम उठाता, या किसी को फोन करता, उसका मोबाइल बजने लगा…
उसने कॉल पिक करके कान से लगाया और बोला – हां भाई बोल…
दूसरी तरफ से क्या बातें हुई… वो उसके जबाब में बस हां, हूँ, ठीक है… ऐसा ही करेंगे जैसे शब्द बोलता रहा…फिर कुछ देर के बाद कॉल एंड हो गयी..
उसने फिर किसी को एक कॉल की, उधर से कॉल कनेक्ट होने के बाद असलम ने उसको बोला…
हां भाई, मुझे तुझसे अर्जेंट काम है, आज शाम को 9 बजे **** रोड पर जो बंद फॅक्टरी पड़ी है, उसमें अजाना…
उधर से कुछ बोला गया… उसके जबाब में असलम ने कहा – वो मे अभी सीक्रेट रखना चाहता हूँ, मुझे लगता है, हमारे खिलाफ कोई बहुत बड़ी साजिश हो रही है…
तू समझ रहा है ना भाई… तेरे अलावा मे किसी पर फिलहाल भरोसा नही कर सकता..
उधर से – @@@@@
असलम – ओके मिलते हैं फिर, ठीक 9 बजे , बाइ…
फिर उस बंदे को फोन लगाया जहाँ से पहले उसे फोन आया था, और उसको दूसरे के साथ हुई बात-चीत का पूरा व्योरा दिया…
उधर से उसे कुछ हिदायत भी दी गयी… जिसे वो गौर से सुनता और समझता रहा..
फिर असलम ने उसे कहा – ठीक है मे अकेला ही मिलता हूँ उससे, ज़रूरत पड़े तो संभाल लेना…! ओके बाइ…
उसी शाम 8:45 को, शहर से **** रोड पर स्थित एक बंद फॅक्टरी में दो इंसान एक अंधेरे पोर्षन में खड़े किसी का इंतेज़ार कर रहे थे…
अभी 9 बजने में 5 मिनिट शेष थे, कि उन्हें रोड से नीचे उतरती हुई एक फोर व्हीलर की हेडलाइट दिखाई दी…
धीरे – 2 वो हेडलाइट फॅक्टरी के कॉंपाउंड में आकर रुक गयी…
उसमें से असलम बाहर निकला, वो अकेला ही था, फिर उसने जोसेफ को फोन लगाया…और कन्फर्म किया कि वो आ चुका है या नही…
उसके कुछ मिनटों के बाद ही एक और गाड़ी वहाँ आकर रुकी, उसमें से जो बंदा बाहर आया, वो कोई और नही बिल्डर योगराज का बेटा गुंजन था…
वो दोनो, गाड़ियों के पास से चल कर थोड़ा और अंदर की तरफ आए, और फॅक्टरी के कॉंपाउंड में जाकर आमने सामने खड़े होकर बातें करने लगे…
गुंजन – हां असलम बोल, यहाँ अकेले में क्यों बुलाया है मुझे…?
असलम – पिछले दिनो हमारे उपर पोलीस के दो बड़े-2 अटॅक हुए उसके बारे में तेरे से बात करनी थी…!
गुंजन – ये बात तो तू सबके साथ बैठ कर भी कर सकता था, फिर यहाँ क्यों बुलाया…?
असलम – अब पता नही है ना कि हम में से कॉन गद्दार है ? बिना अंदर के किसी आदमी के पोलीस के पास अंदर की खबर पहुँची कैसे..?
गुंजन – तो इसमें मे क्या कह सकता हूँ, और कैसे उस गद्दार को ढूंड निकालें, तेरे पास कोई प्लान है..?
असलम – हां है ! प्लान ही नही गद्दार कॉन है, ये भी पता है…!
गुंजन – क्या…? तुझे पता है… कॉन है वो..? बता साले को अभी पकड़ कर उसकी खाल खींचते हैं..
असलम – वो गद्दार तू है गुंजन, हराम्जादे… पोलीस से मिलकर हमें ट्रॅप करना चाहता था, रंडी की औलाद…
गुंजन – ये क्या बकवास कर रहा है तू…? होश में तो है, मे भला क्यों ऐसा करूँगा..? और ये तू किस बिना पर कह रहा है…
असलम – ये देख भोसड़ी वाले! और उसने मोबाइल में एक वीडियो क्लिप ऑन करके स्क्रीन उसके सामने कर दी, जिसमें वो एसपी के सामने बैठा दिखाई दे रहा है,
जो बातें उस वीडियो में सुनाई दे रही थी, वो भी पहले अटॅक से रिलेटेड इन्फर्मेशन देती हुई लग रही थी…
क्लिप देख कर गुंजन हक्का –बक्का रह गया…हकलाते हुए बोला – ये..ये.. झूठ है, म..मेरे खिलाफ ये कोई बहुत बड़ी साजिश है, मेने ऐसा कभी नही किया..
असलम – अब भी झूठ बोल रहा है मदर्चोद… मे ही बेवकूफ़ हूँ जो तेरे से अभी तक बातें कर रहा हूँ, तुझे तो सीधे गोली से उड़ा देना चाहिए था…
इतना कह कर उसने अपनी रेवोल्वेर निकाल कर गुंजन पर तान दी…
वो गिडगिडाते हुए बोला – मे सच कह रहा हूँ असलम ऐसा मेने कुछ भी नही किया…, मेरा विश्वास कर भाई… व.वउूओ…
उसके गिडगिडाने का असलम पर कोई असर नही हुआ, और उसने अपने अंगूठे से रेवोल्वेर का लीवर ऑन कर दिया…
मरता क्या ना करता, फुर्ती दिखाते हुए गुंजन ने भी अपना रेवोल्वेर निकाल लिया, इससे पहले कि वो उसे अपने निशाने पर ले पाता, असलम की रेवोल्वेर से एक गोली चली और सीधी उसकी छाती को भेदती चली गयी..
गुंजन के चेहरे पर आश्चर्य के सेकड़ों भाव उभर आए, इससे पहले कि वो कुछ बोल पाता, धडाम से ज़मीन पर गिर पड़ा…
असलम ने उसके मुर्दा शरीर पर थूका और एक गंदी सी गाली बक कर अपनी रेवोल्वेर का रुख़ नीचे किया ही था, कि एक गोली और चली,
और वो सीधी असलम की आँखों के बीच आकर उसके भेजे के चिथड़े उड़ाती हुई निकल गयी…!
असलम को तो ये भी जानने का मौका नही मिला कि उसका असल दुश्मन कॉन है…?
तभी जोसेफ और रूबी अंधेरे से निकल कर उन दोनो की लाशों के पास आए, रूबी के चेहरे पर उन दोनो के प्रति जमाने भर की घृणा थी…
उसने उन दोनो के उपर थूका, और पैर की ठोकरें मारने लगी… जोसेफ ने उसे रोकने की कोशिश की.. तो वो रोती हुई उसके सीने से लिपट गयी…
फिर आसमान की तरफ देख कर बोली …
देखो दीदी, तुम्हारी मौत का आधा बदला ले लिया है हमने… जल्दी ही वो दोनो हराम्जादे भी तुम्हारे पास आने वाले हैं…
उसे शांत करके मेने अपना रेवोल्वेर गुंजन के हाथ में दे दिया, और उसका रेवोल्वेर लेकर हम दोनो वहाँ से निकल लिए…!
दूसरी सुवह किसी अंजान कॉल से पोलीस को पता चला कि पुरानी फॅक्टरी में दो लाशें पड़ी हैं, आनन फानन में मौके पर पोलीस ने जाकर हालत का जायज़ा लिया…
दोनो डेड बॉडीस को मौकाए वारदात की सारी ज़रूरी कार्यवाही के बाद पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया…
पोलीस ने ये निष्कर्ष निकाला, कि दोनो ने एक दूसरे को गोली मार कर एक दूसरे को मार डाला.. उनकी बॉडी और उनके पास से मिले सारी चीज़ों को कस्टडी में ले लिया गया…
झगड़े का मोटिव असलम के पास से मिले मोबाइल की क्लिप से क्लियर हो गया, जो साफ-2 बयान कर रही थी, कि उन दोनो का संबंध ड्रग डीलिंग से था,
फिर किसी कारण से गुंजन पोलीस से मिल गया, और उसने अपने ही गॅंग के खिलाफ पोलीस को इन्फर्मेशन दे दी…
ये बात किसी तरह असलम को पता चल गयी, और उसने उसे अकेले में बुला कर मारना चाहा, लेकिन इससे पहले कि वो उसे उड़ाता, दम तोड़ने से पहले गुंजन ने भी उसका भेजा उड़ा दिया…
इस बिना पर पोलीस ने योगराज और उस्मान को भी गिरफ्तार कर लिया, लेकिन उनके वकील ने ये साबित कर दिया, कि उन दोनो का अपने बेटों के इस मामले से कोई संबंध नही था…
बहरहाल तो वो दोनो छूट गये थे, लेकिन जातिय तौर पर दोनो में दुश्मनी ठन चुकी थी… और दोनो एक दूसरे के खून के प्यासे हो गये…
दोनो की ही अपनी-अपनी पॉवेर थी, एक के पास पैसे की तो दूसरा नामी गुंडा था ही, जिसके पास अभी भी अपना गॅंग बचा था…
इस सबके बावजूद दो और शख्स थे, जो इस बात को पचा नही पा रहे थे, उनके गले से नीचे ये बात उतर ही नही रही थी, कि ये सब आपसी ग़लतफहमी के कारण हुआ है या फिर कोई गहरी साजिश है…?
एमएलए और कमिशनर ने उस्मान और योगराज को समझाने की पूरी कोशिश की, लेकिन जवान बेटों की मौत ने उन दोनो के सोचने समझने की शक्ति ख़तम करदी, वो कुछ भी सुनने और समझने को राज़ी नही थे…
एक दिन उस्मान को मौका मिल ही गया, और उसके आदमियों ने योगराज को मौत की नींद सुला दिया….!
पिता और भाई की मौत के बाद उनकी सारी प्रॉपर्टी की मालिक एक तरह से श्वेता ही हो चुकी थी,
क्योंकि योगराज की मिल्कियत उसकी पत्नी के नाम हो गयी, जो कि संभालने की पोज़िशन में नही थी, इसलिए सारा काम श्वेता और उसका पति पुष्प्राज ही संभालने लगे…!