सीता –एक गाँव की लड़की अध्याय 2

कोमल दीदी खुद ही चलकर मेरे पास आ गई।
“सीता,मैं आप लोगों की दिल दुखाना नहीं चाहती थी। मैं तो बस एक दोस्त की तरह जुड़ना चाहती हूँ। अगर आप लोगों को मेरी बातों से ठेस पहुँची हो तो प्लीज माफ कर देना। पर प्लीज दोस्ती मत छोड़ना।”
मैं उन्हें एक टक देखी जा रही थी। उनकी आँखें बोलते-2 नम सी हो गई थी। उनकी हालत देख मैं भी भावुक सी हो गई। फिर वो अपनी आँखें पोँछती बोली,”ये लो मेरी कार्ड, अगर अपनी इस नादान से बात करने की इच्छा हुई तो बेहिचक फोन करना।”
मैं अब उन्हें ज्यादा देर तक ऐसी देख नहीं पा रही थी और जल्द से जल्द निकलना चाहती थी। मैंने कार्ड ली और ओके कहते हुए सीढ़ी से नीचे उतरने लगी।
पूरे रास्ते गुमशुम सी बैठी रही, मानोँ साँप छू गई हो। कई बार बोलने की कोशिश भी की पर उसने कोई जवाब ही नहीं दी। घर आते ही उसने रूम में घुस कमरे लॉक कर ली। मैं भी कुछ देर टाइम पास करने टीवी के सामने बैठ गई।
बैठे-2 नौ कब बज गए, मालूम ही नहीं पड़ी। श्याम भी आ गए थे। जल्दी से खाना बनाई और श्याम को खाना खिला दी। फिर पूजा को आवाज दी तो वो भी आई और चुपचाप खाना खा चली गई। मैं भी सोने चली गई।
अगली सुबह फिर वही कल वाली बात। दूध लेने के बाद उस ऑटो वाले की बेहूदा हरकतेँ देख के भागना। मन ही मन सोचने लगी कि ये ऑटो वाला रोज कैसे हमारी गली में आ जाता है।कहीं वो सिर्फ मुझे ही देखने ही नहीं आता है।
नहीं. नहीं. शायद घर होगा आगे। तभी तो रोज इधर से ही आता है। कल भी तो दोपहर में इधर की तरफ ही तो आ रहा था। पर मुझे देखते ही वापस हो गया था। खैर मैं अपने सिर को झटकते हुए उसकी बातों को दिमाग से निकाल देना चाहती थी।
सुबह भी पूजा कुछ नहीं बोल रही थी। नाश्ता करने के बाद वो कॉलेज निकल गई। श्याम भी कुछ देर में ड्यूटी पर निकल गए। मैं भी सारे काम निपटा आराम करने रूम में चली आई पर दिल में अब बेचैनी सी होने लगी थी। पता नहीं पूजा कुछ क्यों नहीं बोल रही है। अगर उसने नहीं बोली कभी इस बारे में तो पता नहीं मैं खुद को कैसे मना पाऊंगी। कैसे अपने दिल को समझा पाऊंगी। इन्हीं सब बातों में खोती कब सो गई मालूम नहीं।
पूजा कॉलेज से आ गई थी और नाश्ता कर रही थी, तब मेरी नींद खुली। मैं उसकी तरफ एक नजर डाली और बाथरुम की तरफ चली गई। फ्रेश होने के बाद जैसे ही निकली, पूजा बोली,”भाभी, अब आपको क्या हो गया जो मुँह फेर रही हो।”
मैं ठिठकती हुई रुक गई और पूजा की तरफ मुड़ के बोली,”मुझे क्या होगी! खुद ही कल से ऐसे चुप हैं मानोँ जैसे आसमान गिर गई हो तेरे सिर पे।”
मैं शिकायत करते हुए मुस्कुरा दी। पूजा तब तक नाश्ता कर चुकी थी। हाथ साफ करती हुई बोली,”भाभी, मैं उनकी बातों से बिल्कुल नाराज नहीं थी क्योंकि वो झूठ तो नहीं कह रही थी।” मैं भी पूजा की बातों को हाँ में सहमति दी। पूजा मेरे निकट आ गई और बोली,” बस थोड़ी सी डर गई थी कि इन शहरी लोगों का पता नहीं पैसों के लिए कब किसे हलाल कर दे।”
“मतलब……!”मैं चौंक कर पूजा को बात समझाने के लिए पूछी।
“मतलब ये कि कहीं वो हमें ब्लैक-मेल तो नहीं करने की सोच रही ये सब बातें कह कर। यहाँ तो रोज ऐसी बातें होती रहती है।”पूजा मुझे समझाते हुए बोली।
मैं तो हैरान सी रह गई पूजा की सोच देख कर। किसी भी बात को तुरंत ही अंत तक ले जाकर सोचती है कि परिणाम क्या होगी इसकी।
मेरी दिमाग में ये बातें आते ही आगे की सोच सिहर गई।तभी पूजा बोली,”पर अब टेँशन लेने की कोई बात नहीं है भाभी।”
“क्यों?”मैं तो पूजा की हर बात सुन परेशान हुई जा रही थी। कभी कुछ कहती, कभी कुछ।
“आज कॉलेज में उसी दोस्त को सारी बात बताई थी। वो तो पहले खूब हँसी फिर बोली कि वो फायदा उठाने वाली लेडिज नहीं हैं। जहाँ तक वो एक दोस्त की तरह हर मुसीबत में हर वक्त साथ देती है।”
मैं भी पूजा की बात से कोमल दीदी को याद कर मुस्कुरा पड़ी।
“वो तो ठीक है पर अगर गाँव की देख उनकी नेचर बाद में बदल गई तो…।”अब मेरे मन में भी थोड़ी शंका हुई।
“भाभी, मैं ये कहाँ कह रही कि उनसे दोस्ती कर ही लो। जस्ट उनके बारे में बता रही हूँ और आप हो कि….”
मेरी बात पर पूजा हैरानी भरी आवाजोँ में बोली। मैं मुस्कुराती हुई बोली,”अच्छा छोड़ ये सब। चलो छत पर थोड़ी लाइव देखते हैं।”
“Wow मेरी जानेमन! कुछ तो बोली। पर अभी तो धूप निकली ही है और लाइव शुरू होने में करीब 30 मिनट बचे हैं।” पूजा तो ऐसे समझाने लगी कि मानो वो तो उनका पूरा टाइम टेबल जानती है।
“अच्छा चलो ना फिर भी। कुछ देर यूँ ही टाइमपास करेंगे।” मैं पुनः जोर देते हुए बोली।
पूजा मुस्कुरा दी और हामी भरते हुए छत की तरफ चल दी। अब पूजा को क्या पता कि मैं तो कुछ और ही देखने जा रही थी। गेट लॉक की और कुछ ही देर में हम दोनों छत पर थे।
मेरी नजर तो सबसे पहले उस छत की तरफ गई जहाँ कल लाइव शो चल रही थी। वहाँ तो अभी एक भी लोग नहीं थे। मैं फिर दूसरी तरफ देखने लगी। मेन रोड की तरफ देखी तो एक से एक बिल्डिँग नजर आ रही थी। यहाँ से मेनरोड नजर तो नहीं आ रही थी पर वहाँ सड़कों पर दौड़ रही गाड़ियों की तेज आवाजें जरूर सुनाई दे रही थी।
दूसरी तरफ नजर दौड़ाई तो गली आगे जा कर बाएँ और दाएँ की मुड़ गई थी। इधर की तरफ घर भी धीरे-धीरे छोटे होते जा रहे थे आगे।
“पूजा,ये सड़क आगे जाकर खत्म हो जाती है क्या?” पूजा को अपनी बगल में खड़ी देख पूछी।
“नहीं भाभी,ये सड़क आगे उस कॉलोनी से होती हुई आगे पुनः मेनरोड पर निकल जाती है।”पूजा हल्के शब्दों में बता दी।
मेरी नजर दोनों कॉलोनी की तरफ गई जहाँ कोई भी घर दो मंजिल से ज्यादा की नहीं थी।कुछ घर तो बिल्कुल गाँवों की झोपड़ी की तरह थी। तभी पूजा आगे बोली,”भाभी, इन दोनों कॉलोनी में सिर्फ कम आय वाले लोग रहते हैं जैसे कि मजदूर,दूधवाला, ऑटोवाला वगैरह-2। यहाँ मेन रोड से जितनी अंदर जाओगी, वैसी ही लोगों की रैंक भी कम होती जाती है।”
पूजा की बात सुन हम दोनों इस वर्गीकरण पर हँस पड़े।

मैं छत पर खड़ी उस कॉलोनी की तरफ देख रही थी या कहो किसी को ढूँढने की कोशिश कर रही थी। पूजा मेरी बगल से निकल दूसरी तरफ चली गई।
मैं मन में सोचे जा रही थी कि कहाँ पर होगी उस ऑटो वाले का घर?
अचानक मैं अपने सिर को झटकी… छिः.. पता नहीं मेरे अंदर उस मामूली ड्राइवर कैसे आ गया। ड्राइवर तो था पर था वो मेरी हुस्न का दीवाना… ड्राइवर तो सब दिन अपनी बीबी या रण्डी को ही चोदता है तो उसकी ऐसी हरकत तो वाजिब थी। अगले ही पल मैं एक बार सोचनी लग गई..
ऑटो ड्राइवर है तो किसी झोपड़ी में ही रहता होगा। घर में उसकी बीबी-बच्चे होंगे। दिन भर कमा कर आता होगा थका हुआ और खाना खा सो जाता होगा। नहीं.. नहीं.. दिखने में तो काफी हिष्ट-पुष्ट है.. जरूर अपनी बीबी को जम के चोदता होगा फिर सोता होगा।घनी-2 मूँछेँ,सिर पर गमछी लपेटे,कमीज की सिर्फ नीचे की एक बटन लगी, लाल-2 आँखें, मुँह में गुटखा चबाए भयानक लग रहा था। और किसी लड़की को देखता तो मानोँ अगर वो लड़की अकेली मिल जाए तो उसी जगह पटक के चोद ले। उसकी तरह उसकी बीबी भी काली होगी पर काफी सेक्सी होगी.. क्योंकि काले लोगों में सेक्स कूट-2 के भरी होती है। दोनों जब सेक्स करते होंगे तो पड़ोसी की निश्चित ही नींद टूट जाती होगी…
और ऐसी बातें सोचते-2 मेरे होंठों पर मुस्कान तैर गई।
“ओ भाभी,कहाँ खोई हुई है? आपके फोन में किसी का मैसेज आया है..”तभी दूसरी तरफ से आई पूजा की आवाज सुन मैं ख्वाबोँ की दुनिया से बाहर निकली। पूजा की तरफ नजर दौड़ा एक छोटी सी स्माइल दी और मैसेज देखने लगी।
“कुछ दोस्त जिंदगी में इस कदर शामिल हो जाते हैं,
अगर भुलाना चाहो तो और याद आते हैं।
बस जाते हैं वो दिल में इस कदर कि,
आँखें बंद करो तो सामने नजर आते हैं।।”
मैसेज पढ़ मेरी होंठों पर मुस्कान आ गई। पूजा मुझे मुस्कुराते देख पास आती हुई बोली,”क्यों मेरी रानी, बड़ी चवनिया मुस्कान दे रही है मैसेज देख कर। जरा हमें भी तो दिखाओ किसके हैं।”
मैं अभी भी मुस्कुराए जा रही थी।पूजा मेरे हाथों से फोन ले पहले नम्बर देखी,फिर हँसते हुए जोर-जोर से मैसेज पढ़ने लगी। मेरी तो हँसी के साथ-2 शर्म भी आने लगी थी। जैसे ही मैसेज खत्म हुई पूजा फोन मेरी तरफ बढ़ाते हुए बोली,”हाय, अपने इस दीवाने को जल्दी से उत्तर दो।”
मैं ना में सिर हिला दी। पूजा चौँकती हुई बोली,”ओ मेरी सती सावित्री, ऐसे कैसे चलेगा। जल्दी से जवाब दे वर्ना तुम जिंदगी भर अंकल के लंड को याद करने में ही गुजार दोगी। समझी कुछ.”

पूजा की बात सुनते ही मैं उसके हाथ से फोन ली और बोली,”बड़ी आई मैसेज-2 खेलने वाली.. मैं नहीं खेलने वाली।”
और फोन लेते हुए नम्बर डायल कर फोन कान में लगा ली। ये देखते ही पूजा खुशी से उछल पड़ी और बोली,” Woww! भाभी, तुम तो बड़ी कमीनी निकली। मैं कहाँ मैसेज करने की सोच रही और तुम तो सीधी..”
पूजा अपनी बात पूरी भी नहीं कर सकी कि तब तक मैंने उसके मुँह को हाथों से बंद कर दी।
“प्रणाम अंकल..” फोन रिसीव होते ही मैं बोली।
“जीती रहो बेटा, कैसी हो? नई जगह पर मन तो लग रहा है ना।पूजा जब तक कॉलेज रहती तब तक तो अकेली बोर हो जाती होगी।”अंकल एक ही बार में कई सवाल कर गए।
मैं हँसती हुई बोली,”बिल्कुल ठीक हूँ अंकल। और यहाँ हम दोनों काफी मजे में हैं.. हाँ कभी कभी बोर जरूर हो जाती।”
“ओह मेरी बच्ची.. तो तुम फोन क्यों नहीं कर लेती। बात कर लेगी तो थोड़ी रिलेक्स हो जाएगी और बाहर भी घूमने चली जाया करना।”अंकल तरस खाते हुए बोले।इधर पूजा गौर से हम दोनों की बातें सुन रही थी।
“जी अंकल।”मैं अंकल की बातों को समर्थन देते हुए बोली।
“अंकल, आप हमसे मिलने कब आओगे?” पूजा की नाचती नजरों में देखती मुस्कुराती हुई बोली। पूजा मेरी इस सवाल पर Wow कहने की मुद्रा में अपनी होंठ कर ली।
“अरे सीता बेटा, मैं खुद ही आपसे मिलने के लिए कितना तरस रहा हूँ; तुम सोच नहीं सकती। कल तक किसी तरह समय निकाल कर आ जाऊँगा।”अंकल के हर शब्दों में बेकरारी साफ-2 झलक रही थी।
“ठीक है अंकल,मैं इंतजार करूँगी।” मैं अंकल की बेसब्री पर मुस्कुराती हुई थोड़े और जख्म दे दी।
“ओफ्फ…. थैंक्स बेटा.. मन तो नहीं है पर अभी एक जरूरी मीटिंग में जाना है इसलिए रख रहा हूँ। फुर्सत में आराम से बात करेंगे।” अंकल के बुझे हुए शब्द मेरे कानों में पड़ी तो मैं झूम सी गई। अंकल तो सच में पूरे फिदा थे।
“ठीक है अंकल पर….”मैं अंकल को लगभग रोकती हुई बोली। इधर पूजा मेरी तरफ आँखें फाड़ कर देखने लगी कि अब क्या कहने वाली है।
“पर क्या बेटा?”अंकल एक बार फिर जोश में आते हुए बोले।मैं कुछ देर खामोश सी हो गई। पूजा भी मुझे समझने की कोशिश करती देखी जा रही थी।
“हैल्लो.. सीता बेटा.. अरे बोलो ना.. कुछ दिक्कत है या कोई बात है, बेहिचक बोलो।”अंकल की आवाजें एक बार फिर गूँजी। मैं थोड़ी हकलाती हुई बोली,”वो अं..अंकल.. मुझे उस दिन वाला प्यार चाहिए था आपसे..”
मैं अब सच में थोड़ी शर्मा गई कहते हुए और साथ में मेरी चूत भी। पूजा तो अपने दोनों हाथ से मुँह ढँक दबी हुई हँसी हँसने लगी। वो दोनों समझ गए थे कि मैं चुम्मा माँग रही हूँ।मैं अपने चेहरे पर आई पसीने साफ करती हुई पूजा को चुप रहने की इशारा की।
“अम्म..म.. वो पूजा नहीं है क्या घर पर।” अंकल भी थोड़े डर गए और हकलाते हुए बोले। अब हँसी निकालने की बारी मेरी थी अंकल की हालत देख,पर किसी तरह काबू पाते हुए नाराज भरे शब्दों में बोली,”अंकल,पूजा घर पर रहती तो थोड़े ही ना माँगती। वो अपने दोस्त के साथ बाहर गई है..प्लीज अंकलललल…”
पूजा की तो हँसी से हालत खराब हो रही थी। वो वहीं अपनी पेट पकड़ बैठ गई। पूजा घर पर नहीं है सुन अंकल थोड़ी राहत की साँस लिए और नॉर्मल होने की कोशिश करते हुए बोले,”अच्छा बेटा, अभी तो जल्दी में हूँ वर्ना ढेर सारी देता। कहाँ पर दूँ, जल्दी बोलो.”
मैं थोड़ी इठलाती हुई बोली,”अंकल..जहाँ पर उस दिन दिए थे।”
“वो तो ठीक है मेरी रानी बिटिया, पर अगर उस जगह की नाम बता देती तो और भी अच्छे ढंग से देता।”अंकल थोड़े से सकुचाते हुए बोले शायद उन्हें झिझक हो रही थी। पर कह तो सही रहे थे। कोई लड़की अगर खुल के सेक्सी बातें बोलती है तो पार्टनर दुगुने उत्साह से मजे दिलाता है।
मैं अब ज्यादा वक्त नहीं लेना चाहती थी क्योंकि अब मेरी भी चूत फव्वारे छोड़ने लगी थी।
अबकी बार तो मैं सच में सिहर गई और शर्माते हुए बोली,” ज..जी अंकल वो मेरी होंठों पर…”
इतनी ही कह पाई कि मेरी साँसें तेज होने लगी थी। और पूजा तो हँसते-2 एक तरफ लुढक चुकी थी। दूसरी तरफ अंकल एक मुख से एक आहहह निकली और घबराई हुई शब्दों में बोले,” बेटा, होंठ नहीं कहो… प्यारी-2, सुंदर, रसीली और शहद जैसी मीठी होंठ कहो। अच्छा अब जरा आप अपने होंठों पर मोबाइल रखिए..”
मैं हल्की हँसी हँसती हुई बोली.. “जी अंकल, रख दी।”
तभी अंकल की एक जोरदार और लम्बी सी चुम्मी की तेज आवाज मोबाइल से निकली…
और पीछे से अंकल हल्के शब्दों में बोले,”आह मेरी रानी”
मैं समझ गई कि अंकल अब पूरे जोश में आ गए हैं.. मैं हल्की हँसी के साथ मुस्कुराती हुई बोली,”थैंक्स अंकल,अब आप जाइए.. और जल्दी ही मिलने आइएगा। उम्मुआहहहह….” इस बार अंकल को एक झटके देती हुई मैं भी उतावला हो गई थी.. अंकल तो बदहवास से कहीं खो गए। उनकी तरफ से कोई आवाज नहीं सुन मैं हैल्लो की तो अंकल की सिर्फ सिसकारि निकल सकी। मैं तेजी से बाय अंकल कहती हुई फोन रख दी। फोन रखने के साथ ही हम दोनों की 15 मिनट की रुकी हुई हँसी एक साथ गूँज उठी…

हम दोनों की हँसी रुकते नहीं रुक रही थी। वहीं बैठ किसी तरह हँसी रोकने की कोशिश कर रही थी। तभी पूजा की नजर उस तरफ गई जहाँ वही जोड़ा खुली छत पर सेक्स कर रही थी। पूजा देखते ही बोली,”क्या यार, रोज-2 ऐसे करते मन नहीं उबता क्या? कभी तो जगह,पोज बदला करो। इससे अच्छी मस्ती तो हम लोग कर रहे हैं।”पूजा उसकी तरफ देख कहते हुए हँस पड़ी।
कुछ देर यूँ ही छत पर टहलने के बाद हम दोनों नीचे आ गए। फिर रात का खाना खा सो गए।
अगले दिन सुबह दूध ले वापस अपने फ्लैट की तरफ आ रही थी। तभी रोज की तरह वही ऑटो वाला गाना बजाते हुए आ रहा था। पता नहीं मन में क्या सुझी? पहली सीढ़ी पर रखी पैर वापस खींचते हुए बाहर उस ऑटो की तरफ देखने लगी। रोज की तरह ऑटो रुकी और ड्राइवर अपने लंड मसलते हुए जीभ फेरने लगा। बिना किसी शर्म के मैं उसकी आँखों में देखे जा रही थी। तभी उस ड्राइवर ने फ्लाइंग किस मेरी तरफ उछाल दिया। ना चाहते हुए भी मैं मुस्कुरा पड़ी और वापस भागती हुई अपने फ्लैट में चली आई। मेरी साँसें तेज चलने लगी थी.. मैं किचन में खड़ी हँसते हुए साँसें पर काबू पाने की कोशिश करने लगी। मैं तो उसकी हिम्मत की कायल हो गई। कैसे वो बिना डर के पहले लंड मसल रहा था, फिर थोड़ी रिस्पांस मिलते ही फ्लाइंग किस दे बैठा। इसी तरह उसके बारे में सोचते किचन के काम में लग गई। रोज की तरह श्याम ड्यूटी,पूजा कॉलेज और मैं खाना खा के आराम करने चली गई।
दोपहर में करीब 1 बजे डोरबेल की आवाजें से मेरी नींद खुली। मैं तेजी से उठी और गेट खोली। सामने अंकल को देखते ही मैं चौंक पड़ी। अगले ही पल मैं संभलती हुई प्रणाम की। अंकल मेरी दोनों बाँहेँ पकड़ते हुए बोले,”अरे बेटा, दिल में रहने वाले लोग पैर नहीं छूते, बल्कि गले मिलते हैं।” कहते हुए अंकल अपने मजबूत बाँहों में मुझे समेट लिए। मैं भी सिमटती हुई अंकल के बाँहों में सिमट गई। सच अंकल के बाँहों में काफी सुकून मिल रही थी। कुछ देर किसी प्रेमी जोड़े की तरह लिपटी रहने के बाद मैं ऊपर उनकी आँखों में देखते हुए बोली,”यहीं पर से वापस जाएँगे क्या? अंदर चलिए ना….!”
मेरी बात सुन अंकल मेरी होंठों को हल्के से चूमते हुए बोले,”ओके बेटा,जैसी आपकी मर्जी।”
फिर हम दोनों अलग हुए और गेट बंद करते हुए अपने रूम की तरफ चल दी। अंकल भी मेरे पीछे आते हुए रूम में आए और सोफे पर बैठ गए। मैं फ्रिज से पानी की बोतल निकाल उनकी तरफ बढ़ा दी। बोतल पकड़ते हुए अंकल बोले,”सीता, खाना नहीं खाती क्या? कितनी दुबली हो गई। गाँव में थी तब अच्छी लगती थी। और पूजा कॉलेज से नहीं आई क्या?”
अंकल की बात सुन मैं हँसती हुई बोली,”अंकल मैं तो वैसी ही हूँ जैसी गाँव में थी। पूजा भी कुछ देर में आ जाएगी।” कहते हुए मैं किचन में आई और चाय बनाने लगी। जैसी की मुझे उम्मीद थी, अंकल अगले ही पल किचन में मौजूद थे। मैं मन ही मन मुस्कुरा दी और बिना मुड़े चाय बनाने में मग्न रही। पर शरीर में तो अंकल के अगले कदम को सोच झुरझुर्री आ गई थी। तभी अंकल पीछे से अपनी लंड मेरी गांड़ के ऊपर रखते हुए चिपक गए और मेरी बाल एक तरफ करते हुए कान की बाली अपने मुँह में भर लिए। मैं तो जोर से सिहर गई। ओफ्फ करती हुई कसमसाने लगी। उनकी गर्म साँसें सीधे मेरी सुर्ख गालोँ पर पड़ रही थी जिससे मैं कांप सी गई। अगले ही पल अंकल अपने हाथ मेरी साड़ी के नीचे होते हुए नंगी पेट पर रख दिए। मेरी तो हालत जल बिन मछली की तरह हो गई। मैं सिसकती हुई अंकल के सीने पर अपने सर टिका दी। मेरी आँखें मदहोशी में बंद हो चुकी थी और नीचे मेरी चूत रस बहाने लगी थी। तभी अंकल मेरी कान की बाली को मुँह से आजाद कर दिए। मेरी साँसें अब तेज चलने लगी कि पता नहीं अब अंकल क्या करेंगे। तभी अंकल अपना दूसरा हाथ मेरी चूत के ठीक बगल में रख दिए। मैं मस्ती के सागर में डूबती हुई अपने दोनों पैर सिकुड़ कर पीछे को हुई। पर पीछे से अंकल अपने लंड को तैनात किए हुए थे जो किसी काँटे की भाँति मेरी मांसल चूतड़ में धँस गई। अंकल की एक छोटी सी हँसी सुनाई दी जिससे मैं शर्मा गई। तभी अंकल चूत के पास रखे अपने हाथ धीरे-2 ऊपर की तरफ सरकाने लगे। हाथ थी तो साड़ी के ऊपर पर वो अपने जलवे मेरी रूहोँ को तक दिखा रही थी। अंकल बिना रुके अपने कड़क हाथ पेट के ऊपर से गुजारते जा रहे थे। जैसे ही हाथ मेरी चुची के निचले हिस्से को छुई, मैं तड़प के अपने हाथों से उन्हें रोकने की कोशिश की। पर मेरी हाथ क्या पूरे शरीर में थोड़ी भी ताकत नहीं रह गई थी कि अंकल को अब रोक सकूँ। अंकल मेरे हाथ सहित अपने हाथ मेरी चुची पर ऊपर की तरफ ले जाने लगे। मेरी चुची के ठीक बीचोँबीच आते ही उन्होंने अपने हाथ नचा दिए। मैं काम वासना में इतनी जल गई थी कि इसे बर्दाश्त नहीं कर पाई और चीखते हुए झड़ने लगी। मेरी पूरी शरीर कांपने लगी थी, जिसे अंकल तुरंत समझ गए और पेट पर रखे हाथ से मुझे कस के पकड़ लिए ताकि मैं उनके साथ खड़ी रह सकूँ। तब तक अंकल के हाथ मेरी चुची को रगड़ती हुई मेरी गाल तक पहुँच गई। फिर मेरी गालोँ को हल्के से घुमाते हुए अपने तरफ करने लगे। मेरी साँसे उखड़ने लगी। मैं चाह कर भी कुछ करने लायक नहीं बची थी। अगले ही क्षण मेरी कांपती होंठ पर उनके होंठ चिपक गए। उनके होंठ लगते ही मैं जन्नत में पहुँच गई। मैं एक बार झड़ने के बावजूद पुनः गर्म हो गई और आपा खोते हुए किस करने लगी। मेरी तरफ से अनुमति मिलते ही अंकल तेजी से किस करने लगे। अगले ही पल मेरी पेट पर रखे हाथ को सीधा मेरी चुची पर रख दिए। अब मैं सारी दुनिया भूल अपने रसीली होंठ के रस चुसवा रही थी। और अंकल भी बदहवास मेरी चुची मर्दन करते किस किए जा रहे थे और नीचे अपने लंड से हौले-2 धक्का दे रहे थे। गैस पर चढ़ी का तो पता नहीं जल के बची भी होगी या नहीं..
10 मिनट तक लगातार चुसाई के बाद भी हम दोनों अपनी जीभ से जीभ लड़ाते हुए किस किए जा रहे थे कि तभी “Please Open The Door” की आवाज सुनते ही अंकल से छिटकते हुए गेट की तरफ लपकी।

जब मैं गेट खोली तो सामने देखते ही चौंक पडी़ … सामने पूजा खड़ी थी और उसके पीछे ऑटो ड्राइवर खड़ा मुस्कुरा रहा था… मैं एक बारगी तो सकपका गई… अगले ही पल मेरी नजर अंकल की तरफ पहुँच गई.. अंकल भी किचन से निकल आ गए और ड्राइवर पर नजर पड़ते ही बोले,”क्या हुआ पूजा?”
पूजा अंकल की तरफ हँसती हुई बोली,”कुछ नहीं अंकल, आज रास्ते में मेरी पर्स पता नहीं कहाँ गुम हो गई.. ये ऑटो वाले हैं, किराया लेने के लिए आए हैं..”
कहते हुए पूजा अंदर चली आई.. अंकल भी घूरते हुए ड्राइवर की तरफ देखते पूजा के पीछे चल दिए.. शायद अब वे पूजा को भी…
तभी मेरी नजर ड्राइवर पर पड़ी जो बेशर्मी से अपना लंड मसलने लगा… मेरी तो डर के मारे कांप सी गई.. मैं पलटती हुई तेजी से अपने रूम की तरफ भागी..
रूम में जाते ही मेरी नजर पूजा और अंकल पर पड़ी जो कि आते ही चिपक कर किस कर रहे थे..
मैं चौंकती हुई वापस मुड़ी कि पूजा किस रोकती हुई बोली,”भाभी, वो ड्राइवर को प्लीज किराया दे देना.. ” और फिर वो दोनों अपने काम में जुट गए..
मैं मुस्काती हुई उनके बगल से होती हुई अपने पर्स लेने गई.. पैसे निकाल वापस आ रही थी कि अंकल किस करते हुए अपने हाथ बढ़ा मेरी चुची पकड़ लिए.
मैं अंकल की इस हरकत के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी.. मैं जोर से चीख पड़ी.. चीख इतनी तेज थी कि बाहर खड़े ड्राइवर स्पष्ट सुना होगा.. पूजा मेरी चीख सुन अंकल के हाथों पर एक चपत लगा दी.. अंकल बिना किस तोड़े हँसते हुए अपने हाथ हटा लिए..
मौं साड़ी ठीक करती हुई ड्राइवर के पास आई और पैसे बढ़ा दी..
वो मुस्कुराता हुआ पैसे लेने के लिए हाथ बढ़ा मेरी केहुनी को सहलाता नीचे मेरी हाथ तक आया और पैसे लेते हुए मेरी हाथ दबा दी ..
मैं इस्ससस करती हुई सिसक पड़ी.. तभी वो आगे बढ़ते हुए काफी निकट आते हुए बोला,”मैडम, आप तो खूब मजे लेती हैं.. एक बार हमका भी मजा दे के देखो ना़.. आप मुझे काफी अच्छी लगती हो..”
मैं पहले से ही काफी गर्म थी ही, अब उसकी बात हमें पिघलाए जा रही थी.. मैं वासना की आग में जलती कुछ बोल नहीं पा रही थी..फिर वो आगे बोला,”मैडम, अभी तो आप इन साहब को मजे दे दो, बाकी कुछ बचा तो अपने इस दिवाने का ख्याल रखना..”
और कहते हुए वापस नीचे की तरफ बढ़ गया…मैं अचानक ही धीरे से आवाज लगाती हुई उसे रूकने बोली.. वो फौरन वापस मेरे पास आ खड़ा हो गया..
“तुम ना वो जो मुझे देख गंदी हरकत करते रहते हो वो प्लीज आगे से मत करना.. अच्छी नहीं लगती हमें.. ठीक है अब तुम जाओ..”
मेरी बात सुनते ही वो मुस्कुराता हुआ हामी भर चल दिया.. उसके जाते ही मैं गेट बंद की .. तभी अंकल और पूजा भी रूम से निकलते हुए आए.. मेरे पास आते ही अंकल मूझे अपनी बाँहों में कसते हुए बोले,” थैंक्स मेरी रानी, आज तो आपका आधे प्यार पा मैं गदगद हो गया.. मैं बहुत जल्द ही आपके पूरे प्यार को पाने आउंगा..”
“मतलब अभी आप जा रहे हैं..”मैं उनके सीने से चिपकते हुए बोली..
बगल में खड़ी पूजा मुस्कुरा रही थी..अब पूजा के सामने अब शर्म करने से कोई फायदे की बात तो थी नहीं जो शर्म करती…
“मन तो तनिक भी नहीं है आपसे हटने की पर क्या करूँ इन 1 घंटे भी सैकड़ों फोन आ चुके हैं..वो तो शुक्र है कि फोन साइलेंट थी वर्ना …..”
अंकल कहते हुए अपना लंड मेरी चुत पर रगड़ते हुए मेरी नंगी पीठ पर पर हाथ चलाने लगे.. तभी बीच में पूजा बोल पड़ी,” अंकल, मेरी समझ में नहीं आ रही है कि भाभी आपको आधे प्यार कैसे दे दी..”
पूजा की बात सुनते ही अंकल झुकते हुए मेरी उभारों को चूमते हुए बोले,” यहाँ से पूजा..”
अंकल के चूमते ही मैं सिसक पड़ी..और शर्म से नजरें छुपाती हुई मुस्कुराने लगी…
“वाह अंकल, भाभी को तो अभी भी शर्म आ रही है.. अच्छा बाकी के प्यार कब लेने आओगे?”पूजा मेरे कंधों पर हाथ रखती हुई पूछी..
“बहुत जल्द आउंगा साहिबा..अब तो रूक पाना मेरे बस की बात नहीं है..अगर विश्वास नहीं हो तो सीता से पुछ लो”अंकल अपने लंड की हालत बयान करते हुए बोले जो कि मेरी चूत में घुसी जा रही थी..
पूजा अंकल की बात सुन हँसती हुई बोली,”ओहो अंकल, मगर थोड़ा आराम से,, कहीं भाभी की साड़ी मत फाड़ देना..”
मेरी हालत पूजा की बात से और खराब होने लगी..
“वो सब छोड़ो अंकल, अब आप जल्दी जाओ वर्ना आपको जाने भी नहीं दूँगी..”मैं अंकल को थोड़ी ढ़ीली करते हुए बोली..
“हाँ हाँ अंकल, अब आप जाओ नहीं तो मेरी गरम भाभी आपका रेप कर देगी..” पूजा अंकल को हमसे अलग करती हुई हँसती हुई बोली.. मैं और अंकल भी साथ में हँस पड़े..
“जैसी आज्ञा मेरी रानी, रात में फोन करूँगा.”अंकल गेट खोलते हुए बोले..
पूजा हाँ में सिर हिला दी..फिर अंकल को छोड़ने बाहर तक चली गई.. फिर वापस आते ही जल्दी से गेट लॉक की और अपनी चूत की गरमी निकालने के लिए पूजा को दबोच पलंग पर कूद गई…

पूजा के साथ झड़ने के बाद कुछ देर खुली छत पर हवा खाई.. फिर वापस नीचे आ घर के काम में लग गई..

रोज की तरह अगली सुबह भी दूध लेने के बाद कुछ देर रूक उस ड्राइवर का इंतजार करने लगी…

इंतजार तो ऐसे कर रही थी कि मानों मैं उसकी प्रेमिका ही हूँ.. ज्यादा देर तक इंतजार करनी नहीं पड़ी..

आज वो काफी अच्छे से साफ-सुथरा लग रहा था.. हम दोनों की नजर टकराते ही याथ मुस्कुरा दिए और वापस अंदर आ गई..

आज वो कोई गंदी हरकत किए बिना ही चला गया, जिससे मैं काफी खुश लग रही थी..

घर के कामों से फ्री हो आराम करने लगी..आज पता नहीं अकेली काफी बोर क्यों हो रही थी…

फोन उठाई और नम्बर डायल करने लगी.. कुछ ही पल में भैया फोन रिसीव कर लिए..

भैया: “हैल्लो सीता, कैसी है तू और फोन क्यों नहीं करती..”

“मैं तो मस्त हूँ भैया, आप कैसे हैं?”

भैया: ” मैं भी ठीक हूँ सीता, तुम तो वहां जाते ही हमें भूल गई..”

“नहीं भैया, भला अपने प्यारे भैया को कैसे भूल सकती हूँ.. अच्छा भैया भाभी कहां है..”

भैया: “वो तो घर पर है.. घर जाते ही बात करवा दूंगा..”

“ठीक है करवा देना, और आप कब आ रहे हैं हमें वो वाली दर्द देने……” मैं थोड़ी सकुचाती हुई बोली..

“ओहो मतलब मेरी रानी अभी अकेली है.. आउंगा जान, मौका मिलते ही तुम्हारी चूत मारने आ टपकूंगा” कहते हुए भैया हंस पड़े..

मैं भी भैया से चुदने की बात सुन शर्म से लाल हो गई..

“जल्दी आना भैया,, आपकी याद में काफी गीली हो जाती हूँ..” मैं अपनी हालत बयां करने की कोशिश की..

भैया: ” जरूर रानी, और हाँ रानी जरा अपनी चूत को मजबूत बना कर रखना..अब तुझे प्यार से चोदने वाला नहीं हूँ..”

मेरी चूत ऐसी कामुक बातें सुन पानी छोड़नी शुरू कर दी थी..मैं बोली,”कोई बात नहीं भैया, जब एक बार ले ली तो डरने की क्या जरूरत अब..”

भैया: “अच्छा, वो तो तब पूछूंगा ना जब तू चिल्ला के छोड़ने की भीख मांगेगी और मैं तुझे किसी रंडी की तरह पेलता रहूँगा..”

भैया के मुँह से रंडी शब्द सुन मैं काफी रोमांचित हो उठी.. कैसे भैया मुझे बाजारू रंडी की तरह मसलेंगे..

“मैं इंतजार करूंगी भैया, मुझे सब मंजूर है..” मैं अपने भैया से एक रंडी की चुदने की हामी भर दी.

भैया: “आहहहह मेरी रंडी बहना, अब सब्र नहीं हो रहा.. अगली बार आएगी तो तुझे रंडी की तरह पूरे गांव वाले से चुदवाउंगा…”

भैया की बात से मेरी उंगली कब मेरी चूत में समा गई, रामजाने….मैं तेज तेज उंगली चलाती हुई बोली,”पहले आप तो पहले ठीक से कर लो भैया, फिर औरों की सोचना..हीहीहीही..

तभी भैया जोर से चीख पड़े…

“आहहहहहहह मेरी रंडी सीता.आ.आ.आ.आ.आ….”

भैया झड़ रहे थे… तभी मेरी चूत की भी नली खुल गई और आहहहहहहहह भैया कहते हुए मैं भी झड़ने लगी..

कुछ देर तक हम दोनों बिना कुछ बोले झड़ते रहे…फिर भैया बिना कुछ कहे फोन काट दिए..शायद वो फ्रेश होने चले गए थे…

मैं भी उठी और बाथरूम में फ्रेश होने घुस गई…फ्रेश हो रूम में आई और बेड पर लेट गई.. मेरी नजर घड़ी की तरफ गई जिसमें अभी 11:30 बज रहे थे… पूजा तो 2 बजे से पहले आती नहीं थी..

मन विचलित सी हो रही थी.. झड़ने के बावजूद प्यास कम नहीं हो रही थी… अकेली घर में काफी बोर फील कर रही थी..

अगले ही पल उठी और ब्लैक कलर की साड़ी निकाली.. साथ में मैच करती हुई एक लो कट ब्लाउज भी निकाली..

फिर साड़ी पहन हल्की मेकअप की… बालों को खुली छोड़ दी जो कि पीठ पर लहरा रही थी…और गेट लॉक कर बाहर निकल गई…

मेन रोड तक पैदल ही पहुंच गई..इतनी देर में ना जाने कितने मर्द मुझे देख अपना लंड मसल चुके थे… मेन रोड पर तो काफी गाड़ी दौड़ रही थी पर मैं तो किसी और की इंतजार कर रही थी..

सड़क पर सभी की नजर मेरी आधी नंगी चुची पर टिक के थम जाती जो कि ब्लाउज से साफ दिख रही थी…

पल्लू तो जान बूझकर सिर्फ एक चुची पर रखी थी… तभी धड़धड़ाती हुई एक ऑटो मेरे आगे आ रूक गई…जिसमें पहले ही काफी लोग बैठे थे सिवाए एक सीट के…

मैं एक नजर ड्राइवर पर डाली.. उसे देखते ही मैं चुपचाप बैठ गई… और अगले ही पल झटके लेती हुई ऑटो चल पड़ी..

ज्यों ज्यों ऑटो आगे बढ़ रही थी, सभी पैसेंजर अपनी मंजिल के पास उतर रहे थे.. सिवाए हमके, क्योंकि मैं कहां जा रही थी खुद नहीं जानती थी….

और वो ड्राइवर मिरर में मुझे देख मुस्कुराता हुआ बढ़ा जा रहा था…कोई 10 मिनट बाद सभी यात्री उतर चुके थे… बस मैं ही बची थी ऑटो में…;

जब से मैं बैठी थी तब से गौर कर रही थी कि अब वो सिर्फ लोगों को उतार रहा है,, कोई चढ़ने के लिए इशारे भी करता तो वो बिना देखे चला जा रहा था…

इस हरकत पर मैं मुस्कुराते हुए पूछी,” इन लोगों को बिठा क्यों नहीं रहे हो..?”

वो मिरर में झाँकते हुए बोला,”मैडम, कमा तो मैं बाद में भी लूँगा पर आप से बातें करने का मौका थोड़े ही हरदम मिलेगा.”

उसकी बातें सुन मैं मुस्कुराती हुई बोली,” अच्छा, मैं बातें करने के लिए थोड़े ही बैठी हूँ…मैं तो कोमल दीदी की पॉर्लर पर जाने के लिए बैठी हूँ…”

पर सच तो यही थी कि मैं ईसी से बातें करने आई थी.. कोमल दीदी तो एक बहाना है…

“क्यााा? पॉर्लर जाएगी आप? अरे अभी भी तो काफी सुंदर लग रही हैं फिर पॉर्लर जा के करेगी क्या?”ड्राइवर चौंकते हुए बोला.

“नहीं मेरे बाल कुछ गड़बड़ सी लग रही है,उसी को ठीक करवाउंगी..”मैं उसकी बात का जवाब देती हुई बोली.. पर सच में मेरे बाल ठीक ही थी..

“पता नहीं मैडम, इतने अच्छे बाल में आपको कहां गड़बड़ लग रही है..” उसने पीछे पलट एक नजर डाली और फिर आगे देखने लगा…

उसकी बात सुन मेरी हल्की हंसी आ गई, फिर मैं बिना कुछ कहे दूसरी तरफ देखने लगी…

कुछ ही देर में मैं पॉर्लर के पास पहुँच गई थी..मैं ऑटो से उतर पैसे दी और पॉर्लर की तरफ बढ़ गई….
[…कहानी जारी है]

कोमल दीदी की पॉर्लर में नजर पड़ते ही मेरी नजर कोमल दीदी पर पड़ी.. जो कि बैठी अपने साथ काम करने वाली लेडिज से बात कर रही थी..

मुझे देखते ही उन्होंने अपनी बात बंद कर मुस्कुरा दी और बोली,”आओ सीता, कैसी हो और इधर कैसे भटक गई…

“नहीं दीदी. भटक के नहीं , बस आपसे मिलने आई हूँ.. घर पर अकेली बोर हो रही थी तो सोची कहीं घूम आऊँ..”मैं आगे बढ़ती हुई हँसते हुए बोली..

“जरूर सीता,, हमारी इस छोटी सी कुटिया में हर वक्त स्वागत है… अच्छा वो पूजा नहीं आई क्या?”कोमल दीदी हमें बैठने के लिए इशारा करती हुई बोली.

मैं पास में पड़ी कुर्सी पर बैठते हुए बोली,”पूजा कॉलेज गई है दीदी, वर्ना वो भी आती..”

तब तक उनकी सहकर्मी उठ गई और कोने में पड़ी फ्रिज से कोल्ड ड्रिंक ले आई..

“पूजा तो हमसे नाराज ही हो गई तो कैसे आएगी मिलने?”दीदी ड्रिंक की एक घूँट लेती हुई बोली..

“नहीं दीदी, वो नाराज नहीं है बस थोड़ी सी डर गई थी..”

“क्यों?”कोमल दीदी चौंकती सी पूछी..

“दीदी वो क्या कहते हैं उसको ब्लैकमेल करना.. बस इसी से डरती है कि कहीं आप भी…..”मैं थोड़ी सकुचाती हुई बोली..

मेरी बात सुनते ही वो आश्चर्य और गंभीर नजरों से हमें देखने लगी…मैं भी डर गई कि शायद इन्हें मेरी बात अच्छी नहीं लगी..

कमरें में पूरी तरह सन्नाटा छा गई थी..हम तीनों की नजरें आपस में टकरा रही थी..

अचानक ही कोमल दीदी और उनकी दोस्त सहकर्मी ठहाका लगा जोर से हँसने लगी..

मैं उनकी इस हँसी को समझने की कोशिश करती मुस्कुराते हुए देखने लगी.. फिर वो बोतल में बची सारी ड्रिंक एक ही घूँट में खत्म कर दी…

फिर वो चेयर से उठी और मेरी तरफ देख बोली,”चलो इधर आओ.. तुम्हें कुछ दिखाती हूँ.”

मैं तुरंत ही उठ गई और उनके पीछे चली गई..वो कमरे के एक तरफ लगी बड़ी सी दर्पण के पास गई और वहाँ लगी एक बटन दबा दी…

बटन दबते ही वो दर्पण बिना चूँ किए एक तरफ साइड हो गई.. ये तो अदंर जाने की गेट थी..वो आगे बढ़ती हुई बोली,”अंदर आओ सीता, ये हमारा सीक्रेट रूम है.”

मैं उनके पीछे अंदर आ गई..अंदरआते ही कोमल दीदी गेट लॉक कर दी.. कमरे में सोफे लगी हुई थी.. और एक तरफ मेकअप की सारी सामग्री सजी हुई थी…

और साथ में बाथरूम अटैच थी..तभी कोमल दीदी आगे बढ़ एक दीवार की तरफ गई और वहाँ दीवार पर अपने हाथ रख दी.

गौर से देखी तो मालूल पड़ी कि जहाँ वो हाथ रखी थी वहाँ 4 वर्गाकार डॉट बिंदु थी जो नहीं के बराबर मालूम पड़ती थी..

तभी उस दीवार की ठीक विपरीत वाली दीवार से हल्की सी आवाज आई..नजर घुमाई तो वहाँ दीवार पर से बिल्कुल पतली सी परत हट गई जो कि दीवार के रंग की थी..

मैं एक एक चीजों को गौर से देखी जा रही थी.. और कोमल दीदी मुस्कुराती हुई अपने कामों में लगी हुई थी…

उस खुली परत के अंर देखी तो वहाँ ढ़़ेर सारी लॉकर थी.. वैसी लॉकर तो मैं सिर्फ फिल्मों में ही देखती थी.. बड़े बड़े लोग अपनी कीमती वस्तुओं की सुरक्षा में इसका उपयोग करते हैं.

कोमल दीदी उस लॉकर की बटन दबाने लगी..अगले ही पल एक लॉकर खुल गई…

कोमल दीदी उसमें हाथ बढ़ा रखी एक मोटी सी एलबम निकाली…फिर वो मेरी तरफ देख बोली,”इधर सोफे पर बैठते हैं…” और वो एलबम ले सोफे की तरफ बढ़ गई…

मैं भी उनके पीछे चलती उस सोफे पर दीदी के बगल में बैठ गई…दीदी मेरी तरफ एलबम बढाते हुए बोली,”लो पहले एलबम देखो..”

मैं सोच में पड़ गई कि आखिर ये कैसी एलबम है जिसे ईतनी सुरक्षा में रखी जाती है.. अगर इतनी सीक्रेट है तो फिर हमें क्यों दिखा रही है.. मैं तो आज तक सिर्फ दो ही बार मिली हूँ इनसे…इसी तरह की ढ़ेर सारी बातें सोचती एलबम पकड़ ली..

मैं एलबम के कवर पलट दी.. सामने एक बहुत ही खूबसूरत लेडिज की फोटो थी..

फोटो में उसकी चेहरे थी जो कि देखने से काफी आकर्षक लग रही थी.. साथ में उस फोटो की एक तरफ उसकी पूरी फोटो भ एडिट कर डाली हुई थी..

दिखने से ये काफी अमीरजादी लग रही थी.. रंग- रूप और बनावट से भी काफी धनी लग रही थी…

“फोटो की पीठ पर इनके बारे में थोड़ी सी जानकारी लिखी हुई है..”तभी दीदी की आवाज मेरी कानों गूँजी… मैं उनकी बातों को सुन फोटो की पीठ पर देखी…

जूली सिन्हा
पति- Mr. रॉबिन सिन्हा(Gov. judge of Patna high court)
उम्र- 30
पता- मजिस्ट्रेट कॉलोनी, आशियाना नगर, पटना
फोन – +9194300#####

मैं पूरी पढ़ने के बाद एक बार फिर वापस उसकी तस्वीर देखने लगी… मतलब ये एक जज की बीवी है..

फिर मैं अगली तस्वीर देखने लगी.. आगे भी इसी तरह की ढ़ेर सारी तस्वीरें थी…. जिसमें कोई जज की बीवी, कोई वकील की बीवी, किसी नामी नेता की बहू, तो कोई बड़े डॉक्टर की बेटी है..

मैं एक-2 कर सभी तस्वीरें देख रही थी.. कोई 30 मिनट तक लगातार देखती रही तब जाकर समाप्त हुई कहीं… इनमें एक भी ऐसी औरत या लड़की नहीं थी जो निम्न वर्ग की थी… सभी ऊंचे और अमीर परिवार की थी… 200 के करीब सारी तस्वीरें थी..

फिर मैं एलबम को बंद करती हुई बोली,”दीदी ,आपकी दोस्ती तो काफी अच्छे-2 से हैं…”

मेरी बात सुनते ही दीदी मुस्कुराती हुई बोली,”हाँ, ये सब मेरी बेस्ट फ्रेंड हैं…अच्छा ये एलबम तुम्हें क्यों दिखाई, पता है क्या?”

मैं कुछ सोच में पड़ गई जीदी की सवालों से..फिर बोली,”शायद आप अपने दोस्तों के बारें में बताना चाहती हो.”

कोमल दीदी कुटीली सी हँसी हँसते हुए बोली,” हाँ पर साथ में तुम्हारी डर दूर करने के लिए भी..”

“मतलब???”मैं एक बार फिर दीदी की बात को समझ नहीं पाई.

“मतलब ये कि तुम जितनी फोटो देखी, सब की सब सेक्स रैकेट से जुड़ी है.. यानी ये सब धंधे करती है.. और आज तक ये सभी सुरक्षित हैं.. कुछ तो अपनी शरीर की प्यास बुझाने करती है और कुछ शौक से..”कोमल दीदी एक बारगी से बेहिचक बता रह थी..

मुझे तो जैसे शॉक लग गई..मैं एकटक दीदी को निहारती उनकी बातें सुन रही थी.. बार बार मेरी नजर एलबम की तरफ जा रही थी..

“और तुम शायद ये सोच रही होगी कि कहीं मैं इन्हें ब्लैकमेल तो नहीं कर रही.. तो तुम किसी को फोन पर पूछ सकती हो कि ये अपनी मर्जी से आई या जबरदस्ती…”

मैं क्या जवाब देती..? मेरी तो ऐसी बातें सुन के ही आवाजें बंद हो गई थी..तभी दीदी दूसरी तरफ दिवाल में लगी बटन दबा दी जिससे एक और गेट खुली… मेरी तो दिमाग अब काम करना लगभग छोड़ चुकी थी..

गेट खुलते ही दीदी मेरी तरफ पलट के मुझे आँखों से ही बुलाई.. मैं चुपचाप उठी और दीदी के पास पहुँच गई.. दीदी आगे उस गेट में प्रवेश कर गई..

ये एक संकरी गली थी जो कि आगे जा के खत्म हो गई थी.. इसमें आने से पहले ये एक किसी गुफा की तरह अंधकारमय थी..

पर कोमल दीदी जैसे ही अपना एक पैर रखी, पूरी की पूरी गली प्रकीश से नहा गई.. मैं तो चकरा सी गई ऐसी व्यवस्था को देखकर..

कुछ ही पल में हम इस तंग गली की अंतिम छोर पर थी जहाँ पर लिफ्ट लगी थी.. दीदी ने बटन दबा दी लिफ्ट की जिससे क्षण भर में ही लिफ्ट पहुँग गई..

दीदी मुस्कुराती लिफ्ट के अंदर दाखिल हो गई.. मैं भी उनके पीछे लिफ्ट में घुस गई.. चंद सेकंड में लिफ्ट रूक गई…

लिफ्ट के रूकते ही हम दोनों बाहर निकले..
नजर दौड़ाई तो मैं किसी आलीशान भवन के कॉरिडोर में खड़ी थी.. सामने दोनों तरफ कई कमरे बने थे जो दूर तक जाती दिख रही थी..

यहाँ से बाहर देखने की कोई व्यवस्था नहीं थी जिससे मैं अनुमान लगाती कि आखिर मैं कहाँ हूँ…

तभी कोमल दीदी सामने उस कमरे की तरफ देखती हुई बोली,”तुम्हें पता है अभी तुम कहाँ हो”

दीदी के सवाल मेरे कानों में पड़ते ही मैं ना में सिर हिला दी..

“अभी तुम पटना की नामी 3 स्टार होटल के कॉरिडोर में खड़ी हो…और ये जो सामने जितने रूम देख रही हो ना… यही हमारी हाई प्रोफाईल लेडिज की रंडीखाना है..”

“यहाँ आने के सिर्फ दो रास्ते हैं.. एक जहां से हम लोग आए हैं.. सभी लेडिज भी इसी होकर ही आती है.. जबकि दूसरा रास्ता नीचे 3री मंजिल पर एक सीक्रेट रूम से होते हुए है.. उधर से सिर्फ कस्टमर ही आते हैं..”

मैं तो हैरत भरी नजरों से सिर्फ दीदी की बातों को सुने जा रही थी..

“दीदी फिर आप इन होटल वालों से मैनेज कैसे???”मैं कुछ होश में आती अपनी बेतुका सवाल कर गई..

दीदी मेरी बात सुन हँस पड़ी और आगे की तरफ बढ़ गई..मैं भी कोमल दीदी के साथ धीरे-2 आगे बढ़ी..

“ये होटल मेरे पति के हैं.. और सभी कस्टमर से सीक्रेटली वही बात करते हैं तो किसी तरह की प्रोबलम की बात ही नहीं है..और यहाँ तो बड़े से बड़े लोग किसी कुत्ते की तरह दुम दबाते मजे के लिए आते हैं…”

मैं दीदी की की बात सुनते ही ठिठक पड़ी.. ये दोनों पति पत्नी तो सेक्स रैकेट बड़े ही आसानी से चला रहे हैं… इन पर किसी का शक करना आसान नहीं सिवाए इनके ग्रुप में शामिल लेडिज और कस्टमर के….

कॉरिडोर पूरी तरह से रोशनी से जगमगा रही थी और लाईट से नहाई हुई थी…. कॉरिडोर में पूरी AC लगी हुई थी जिसकी सनसनाती हुई हवा हमें ठंडक देने की कोशिश कर रही थी…

पर मैं तो दीदी के हर एक विस्फोट से लगातार पसीने छूट रहे थे.. मैं दीदी के साथ आहिस्ते-2 चलती बातें सुन रही थी..

तभी सामने एक गेट खुली और एक मोटा सा काला आदमी कमर पर तौलिया लपेटे निकला.. वो पसीने से तरबतर हो हाँफ रहा था मानों काफी लम्बी दौड़ लगा कर आया हो..

दीदी उसे देखते ही मुस्कुराती हुई बोली,”क्यों पांडे जी, आज कुछ ज्यादा ही मेहनत हो गई क्या?”

पांडे मेरी तरफ बड़ी बड़ी आँखें नचाते हुए भूखे भेड़िये की तरह देख रहा था.. मैं तो डर के मारे दीदी के पीछे हो गई..

“हा” मैडम ,पिछले 2 दिनों से इस लौंडिया का भाई नाक में दम कर रखा था.. सारा गुस्सा इसके अंदर डाल दिया शाली के..” कहते हुए उसने अपना लंड बाहर से ही मसल दिया और हल्की हंसी हँस दिया..

उसकी इस हरकत से दीदी जहां नॉर्मल थी, वहीं मैं शर्म से मरी जा रही थी..दीदी हंसती हुई उसकी बात सुन कमरे की तरफ बढ़ गई जहाँ से वो आदमी निकला था..

मैं भी तेज कदमों से दीदी के पीछे जल्दी से अंदर आ गई.. सामने बेड पर एक नंगी लड़की पड़ी हुई थी जिसकी चूत से ताजी वीर्य बह रही थी.. उसकी चुची पर कई जगह दांत के निशान थे.. वो आंखें बंद किए तेज सांस ले रही थी..

कोमल दीदी उस लड़की के पास बैठती हुई उसके सर पर हाथ रखती प्यार से बोली,” रश्मि, तुम ठीक तो हो ना?”

रश्मि दीदी की आवाज सुनते ही मुस्कुराते हुए हां में सिर हिला दी.. दीदी फिर बेड से उठती हुई बोली,”अब उठ को फ्रेश हो जाओ, फिर आराम करना..”

और दीदी वापस रूम के बाहर की तरफ चल दी..रूम के बाहर निकलते ही वो आदमी दीदी से पूछा,”मैडम, इनको कभी देखा नहीं.. परिचय नहीं करवाइएगा?”

कोमल दीदी उसकी बात सुनते ही मुस्कुरा के मेरी तरफ देखती हुई बोली,” ये मेरी नई दोस्त है.. आज बस घूमने आई हैं.. फिर कभी आपकी मुलाकात अच्छे से करवा दूंगी.. आज इसे जल्दी जाना है..”कहते हुए कोमल दीदी वापस लिफ्ट की तरफ बढ़ गई…

मैं अपनी मुलाकात सुनते ही समझ गई कि दीदी कैसी मुलाकात करवानी वाली है.. तेज कदमों से भागती मैं तुरंत ही लिफ्ट तक पहुँच गई..

लिफ्ट में घुसते ही दीदी बोली,”ये पांडे जी यहां के इंस्पेक्टर हैं.. ये अक्सर ही यहां आते रहते हैं”

तब तक लिफ्ट रुक चुकी थी..मैं दीदी की तरफ कान लगाए बाहर उसी तंग गली में घुस गई..

“और ये लड़की S.P. की छोटी बहन है.. SP अपने काम के प्रति काफी सक्रिय हैं जिससे सभी इंस्पेक्टर परेशान हो जाते हैं.. हर वक्त काम-2 की रट लगाए रहता है..”
अब हम दोनों रूम में आ गए थे और कोमल दीदी एलबम को लॉकर में रखती हुई बोली,”पांडे जी भी इसके भाई से कैफी परेशान रहता है.. इसे तो उसके घर के काम भा करने पड़ते हैं.. बस इसी का गुस्सा उसकी बहन को चोद कर निकालने अक्सर आते हैं..और इस रश्मि को भी हॉर्ड सेक्स की आदत लग गई है..वो भी दौड़ती हुई आ जाती है..”

हम दोनों वहीं सोफे पर बैठ गई.. मैं अब यहां से जाना चाहती थी पर जब कोमल दीदी बैठ गई तो मैं कैसे निकल सकती थी..

मुझे कुछ परेशान देख दीदी सीधी प्वाइंट पर आ गई..कोमल दीदी मेरे हाथों को अपने हाथों से दबाती हुई बोली,”मैं जानती हूं कि अभी तुम मुझे या मेरे इस काम को लेकर बिल्कुल भी सहज नहीं हो..सो ज्यादा कुछ नहीं कहूंगी.. बस मैं यही कहूंगी कि अगर कभी मेरी जरूरत पड़े तो बेहिचक चली आना.”

आखिर मैं इसी बात का इंतजार कर रही थी कि अब तक दीदी बोली क्यों नहीं..मैं एक टक दीदी को देखे जा रही थी..

“घर में बैठी बोर होने से बेहतर है कि जिंदगी के ये मजे भी उठा लो..और मस्ती के साथ कुछ पैसे भी मिल जाएंगे..पूजा से भी बात कर लेना..”

और इपनी बात खत्म कर दीदी बाहर की तरफ चल दी..मैं भी उनके पीछे पॉर्लर तक आ गई..

“दीदी, मैं अब निकलती हूँ,”मैं गेट की तरफ नजर दौड़ती हुई बोली..

दीदी हहं कहते हुए बोली,”ठीक है. निकलो तुम.. इसी तरह घूमते हुए आती रहना..”

मैं हां में सिर हिला अपने पसीने पोंछती निकल गई.. आज मैं औरों दिन की भांति उतनी परेशान नहीं थी.. शायद आदत लग रही थी ऐसी बातों को नॉर्मल की तरह सुनने की..

मैं बाहर सड़क के साइड खड़ी किसी ऑटो का इंतजार करने लगी..तभी तेज रफ्तार से एक बाइक सवार हेलमेट लगाए मेरे करीब आ रूक गई…




[…
“लिफ्ट?”उस बाइक सवार ने अपने हेलमेट के कांच को ऊपर करते हुए पूछा..

मैं एक बार तो चौंक पड़ी पर जल्द ही संभल गई कि ये गांव नहीं शहर है और यहां तो ऐसी बातें होती रहती है..

मगर मैं फिर भी सहज महसूस नहीं कर रही थी. मैं ना में सिर हिला दी..वो अगले ही पल बोला,”मैडम, मैंने देखा कि आप अकेली हैं तो पूछ लिया, आगे आपकी मर्जी…”

कहते हुए उसने अपने गाड़ी की सेल्फ लगा दी..मैं बिना कुछ कहे उसकी तरफ देख रही थी..फिर एक नजर चारों तरफ दौड़ाई कि कोई मेरी तरफ…. मगर यहां कौन इतना फ्री रहता है कि…..

अगले ही पल मैं आगे बढ़ उसके साथ बैठ गई.. जैसे ही मैं बैठी उसने बाइक बढ़ा दिया..

बाईक की सीट काफी ऊंची थी जिससे मैं साड़ी में काफी डर भी महसूस कर रही थी..कुछ ही दूर चलने के बाद उसने पूछा,”मैडम, किधर जाओगी?”

बाइक वाले का चेहरा तो अभी तक नहीं देखी थी पर कद-काठी से काफी स्मॉर्ट लग रहा था.. रंग भी साफ था..

हालांकि उसने अभी तक कोई ऐसी वैसी हरकत नहीं की थी कि जिससे हमें कोई परेशानी होती…बस हम दोनों आगे की तरफ बाइक से जा रहे थे….

मैं उसे अपने घर की तरफ चलने बोल दी..मेरी बात सुन वो ओके कह बाइक दौड़ाने लगा.

आगे चौराहा थी जहां पहले से रेड लाइट जल रही थी..उसने भी बाइक रोक ली.. मैं बैठी आगे सड़क पर क्रॉस करती गाड़ी देख रही थी..

अचानक से मुझे पूजा एक बाइक पर चिपकी दिखी.. मैं गौर से देखी पर वो किसके साथ बैठी थी उसे पहचान नहीं सकी..

वो कुछ ही पल में आँखों से ओझल हो गई..मैं सोचने लगी कि क्या करूं..उसके पीछे जा के देखूं कि वो किसके साथ है..

तब तक इधर भी हरी लाइट जल गई.. तभी अचानक से मुझे क्या सूझी, बोली,”वो जरा इधर चलिएगा..”

वो मेरी बात सुन उधर बाइक मोड़ दी जिधर पूजा गई थी..कुछ देर चलने के बाद भी मुझे पूजा कहीं नजर नहीं आई..

तभी मैंने अपने एक हाथ उसके कंधे पर रख दिए और दूसरी हाथ से मोबाइल निकाल के पूजा को फोन करने लगी…

ऐसी अवस्था में मैं सटी थी कि मेरी दोनों चुची उसकी पीठ को दबा रही थी और मेरी गर्म सांसें उसके सीधे गर्दन पर पड़ रही थी…

पूजा कुछ देर बाद फोन रिसीव कर ली..उसके फोन रिसीव करते ही मैं बोली,” हैलो पूजा, कहां हो तुम?”

मेरी बात सुनते ही पूजा थोड़ी घबराई हुई आवाज में बोली,”क्यों, क्या हुआ आपको… ठीक तो हो ना?”

शायद पूजा को लगा कि मुझे कुछ दिक्कत आई है..मैं थोड़ी हंसती हुई बोली,”अरे नहीं, मैं बिल्कुल ठीक हूं..दरअसल घर पर बोर हो रही थी अकेली तो सोची घूमने चली जाउं…वैसे तुम्हारा कॉलेज टाइम भी खत्म हो गया तो फोन कर ली..”

मेरी बात सुन पूजा राहत की सांस लेती हुई बोली,”क्या बात है … मैं मॉल की तरफ जा रही हूँ,,आ जाओ इधर..मैं रूकती हूं…”

पूजा के फोन रखते ही मैं पूजा के बताए जगह पर चलने बोली.. वो भी अब तेजी से बाइक दौड़ता चला जा रहा था क्योंकि अब मैं उससे चिपक के बैठी जो थी…

कुछ ही देर में मैं पूजा के पास थी.. पूजा हमें बाइक पर देख आश्चर्य भरी नजरों से देखे जा रही थी..

“क्या हुआ पूजा? अब चलो ना? “मैं चोरी से पूजा को आंख मारते हुए पूछी..

पर पूजा तो अभी भी घूरे रह रही थी मानों वो जानना चाहती थी कि तुम किसके साथ आई…मैं जल्द ही पूजा को इन बातों से बाहर लाने की सोच बोली,”लो मैं आ रही थी तो रास्ते में इनसे लिफ्ट ले ली थी.. अब आप भी तो इनका परिचय करवा दो..”

पूजा मेरी बात सुन मुस्कुराती हुइ बोली,”हम दोनों एक ही कॉलेज में हैं तो इनसे दोस्ती हो गई है..”

“ओके अब तो चलो..”मैं हंसती हुई पूजा से बोली जिसे सुन पूजा मुस्कुराती हुई बाइक पर बैठ गई..

“आप फ्री तो हैं ना अभी, वर्ना बेवजह आपको तकलीफ नहीं दूँगी..”मैं अपने बाइक वाले से पूछी..

मेरी बात शायद पूजा और उसके दोस्त भी सुन चुके थे जिस वजह से पूजा के दोस्त तपाक से बोले,”अरे इसकी टेंशन आप क्यों ले रही हो.. ये पूरे दिन फ्री ही रहता है.. इसका बाप इतना कमाता है कि इसे कोई काम करने की जरूरत ही नहीं.”

उसकी बात सुनते ही मैं और पूजा एक साथ चौंक पड़ी..क्या ये दोनों एक दूसरे को जानते हैं? पूजा को भी शायद ये बात नहीं मालूम पड़ी थी..वो उससे पूछी,” तुम दोनों दोस्त हो क्या?”

“हाँ पूजा जी हम दोनों दोस्त हैं और आपके बारे में ये बता चुका है बस मिलना बाकी था जो कि आज इनकी वजह से संभव हो गया..”

मेरे बाइक वाले ने पूजा को उत्तर देते हुए कहा..जिसे सुन पूजा का दोस्त हां में सहमति कर दिया..

“अच्छा पूजा, ये कौन हैं, इनसे तो परिचय करवाओ.. पहले तो कभी नहीं बताई इनके बारे में?” पूजा का दोस्त धीरे-2 बाइक बढ़ाते हुए पूछा..

पूजा हंसती हुई बोली,”कभी पूछे हो क्या जो नहीं बताई हूँ..तुम तो बस हर वक्त मेरे बारे में ही पूछते रहते..”

“पूजा, ये शाला है ही चुतिया..जब से तुम इसकी दोस्त बनी हो ना तब से हमें भी भूल गया है तो औरों के बारे मों खाक पूछेगा”मेरे बाइक वाले ने हंसते हुए पूजा को कहा..

जिसे सुन हम सब की हँसी निकल गई..पूजा का दोस्त हँसते हुए बोला,”पूजा, अब बता भी दो कि ये कौन हैं..वैसे अगर बात जम तो शायद इन दोनों की भी दोस्ती हो जाएगी..इसे मैरिड गर्ल्स से दोस्ती काफी पसंद है”

उसकी बात सुन मैं झेंप सी गई और मुंह दूसरी तरफ कर ली..तभी पूजा आगे बोली,”ये मेरी सीता भाभी हैं पर रहते हम दोनों बहन की तरह.. अकेली होती हूँ तो दीदी ही कह के बुलाती हूँ इन्हें..”

मैं पूजा की बात सुन हंस पड़ी.तब तक हम सब मॉल पहुँच चुके थे..गाड़ी पॉर्क करने वो दोनों दूसरी तरफ चले गए..पूजा आगे आती हुई बोली,”क्यों दीदी, मस्त है आपका बाइक वाला.. दोस्ती कर ले .खूब मजे देगा..”

“अच्छा, तुम्हें कैसे पता?”मैं मुस्कुरा के बोली..

“बॉडी से..” पूजा एक ही शब्दों में उत्तर देती हुई बोली..

“तुम कितनी बार मजे ले चुकी हो अब तक इससे..” मैं हंसती हुई पूछी..

“अभी तक तो नहीं.. काफी दिनों से पीछे पड़ा था तो आज ही हाँ बोली हूं..”पूजा अपनी सफाई देते हुए बोली..

तभी सामने से वो दोनों दोस्त काफी खुश होते हुए आ रहा था..

पूजा भी ये देख जल्दी से बोली,”अगर प्रपोज करे तो प्लीज हां कह देना.. काफी मजा आएगा..”

पूजा की बात सुन मैं मुस्कुरा पड़ी..तब तक दोनों पास आ चुके थे.. उसे आते ही पूजा और मैं मॉल की तरफ बढ़ गई..

पीछे से वो दोनों भी मुस्कुराते हुए हम दोनों की गांड़ पर नजर गड़ाए आ रहे थे…

हम सब मॉल में कुछ देर घूमे.. फिर पूजा अपने लिए कुछ ड्रेस देखने लगी.. तभी उसका दोस्त आगे पूजा के पास गया और पूछा,”क्या लेगी?”

“तुम कहो अभी तो कुछ सोची नहीं, बस देख रही हूँ..”पूजा मुस्कुराती हुई जवाब दी..

“अच्छा,, फिर तो मेरी मानो सिर्फ अंडर गारमेंट्स के सेट ले लो… मस्त लगोगी…”हंसता हुआ उसने जवाब दिया..

“रहने दो.. मरना नहीं हमें अभी.”पूजा चिढ़ती सी बोली.

तब तक पूजा अपने लिए एक शॉर्ट्स और काफी पतली सी टी-शर्ट चूज कर ली और मेरी तरफ दिखाती हूई बोली,”दीदी, ये अच्छी है?”

मैं कुछ बोलती इससे पहले ही उसका दोस्त बोल पड़ा,”वॉव,, कयामत लगेगी मेरी जान.. प्लीज जल्दी से पहन के दिखाओ..”

उसकी बातें सुन हम सब की हंसी निकल गई.. पूजा भी हल्की हंसी हंसते हुए ट्रायल रूम की तरफ बढ़ गई..

पूजा के जाते ही पूजा के साथ वाला लड़का अपने दोस्त को बोला,”ओए घोंचू, बाप का पैसा बचा के क्या करेगा? अपने दोस्त को को भी कोई अच्छी ड्रेस ले लो”

उसकी बात सुन मेरी बाईक वाला मेरे निकट आ बोला,”अभी तो ठीक से जाने भी नहीं है फिर भी मैं आपसे दोस्ती करना चाहता हूँ..अगर आपको पसंद है हमारी दोस्ती तो प्लीज मेरी तरफ से कुछ ले लीजिए..”

उसकी बात सुन मैं अंदर ही अंदर मुस्कुरा रही थी कि ये सच में इतना अच्छा नेचर का है फिर बस यूँ ही…

फिर मुझे कुछ शरारत सूझी.. उसके सीधे में आते हुए बोली,”अभी तक आपने अपना नाम तो बताया नहीं और गिफ्ट देने तक पहुँच गए..”

मेरी बात सुनते ही वो झेंप गया.. और पूजा का दोस्त अच्छी वाली गाली देने लगा उसे…

“सॉरी जी, आपसे जब से साथ हूँ खुद को ही भूल गया हूँ.. वैसे मेरा नाम सन्नी है..” वो अपनी गलती स्वीकारते हुए बोला..जिससे मेरी हंसी निकल गई..

“और मैं बंटी.. बाद में मत कहना कि मैंने अपना नाम नहीं बताया..” पूजा का दोस्त भी खुद को बचाते हुए बोल दिया जिससे हम सब एक साथ हंस पड़े…

तभी पूजा ट्रायल रूम से निकली.. वो छोटी सी शॉर्टस और V-shep की टी- शर्ट में काफी सेक्सी लग रही थी..

शॉर्टस जो कि आधी जांघें तक ही आ रही थी, जबकि टी-शर्ट में उसकी आधी चुची निकली सभी के हाथों को बुला रही थी…

और टी-शर्टस इतनी पतली थी कि अंदर की ब्रॉ की shape साफ-2 नजर आ रही थी..इधर बंटी के साथ-2 सन्नी भी पूजा को ऐसे देखे जा रहा था; मानों आँखों से ही चोद रहा हो…

पूजा पास आते ही हम तीनों से एक-मुश्त ही पूछी,” हैलो….अच्छी नहीं लग रही हूँ क्या?”

बंटी हड़बड़ाते हुए बोला,”वॉव पूजा,मुझे नहीं पता था कि तुम छोटे कपड़ों में तो और धांसू लगती हो…अगर कोई कह दे कि अच्छी नहीं लगती तो शाले का मुंह तोड़ दूं..क्यों भाभी जी??”

उसकी बाते सुन मैं हामी भर दी और शिकायत भरी लब्जों में बोली,”बंटी, मेरा नाम सीता है…आगे से याद रखना.. मैं भाभी हूं तो सिर्फ पूजा की, वो भी थोड़ी सी.. बाकी तो उसकी बेस्ट फ्रेंड हैं ही..”

मेरी शिकायत सुनते ही बंटी ओहहह करते हुए सॉरी बोलने लगा..तभी सन्नी बोल पड़ा,” हे सीता, प्लीज अब तो मत तरसाओ.. देखो पूजा कितनी बवाल की लग रही है..अब जल्दी से तुम भी…”

सन्नी की बात को बीच में ही काटते हुए बोली,” नो सन्नी, मुझे नहीं पसंद..मैं ऐसे ही ठीक दिखती हूं..”

“अरे तुम तो साड़ी में भी मस्त लगती हो पर बस हम सब की इच्छा है कि तुम भी अगर वेस्टर्न ड्रेसेज ले लोगी तो…”

तभी पूजा बीच में टपकती हुई बोली,”..तो बाइक पर आराम से चिपक के बैठ सकती है…”

पूजा की बात पूरी होते ही सब जोर से हंस पड़े जबकि मैं शर्म से लाल हो मुंह दूसरी तरफ कर मुस्कुराने लगी…

तभी पूजा हमें साथ लेती आगे बढ़ी और एक काले रंग की कैप्री और टी-शर्ट चूज कर मेरे हाथों देती बोली,”लो मेरी जान और जल्दी से इसे पहन के जरा अपने जलवे तो दिखा दो..”

अब जब पूजा कह रही है तो ना कहने की हिम्मत कैसे करती,,क्योंकि वो मानने वाली थोड़े ही थी..

मैं दबी हुई हंसी के साथ ट्रायल रूम की तरफ शर्माती हुई बढ़ गई…वो दोनों बंटी व सन्नी भी मुस्कुरा रहे थे…

अंदर घुसते ही मैंने जल्दी से साड़ी को अलग फेंक दी…बेशब्री तो हमें भी थी पर कुछ तो नाटक करनी ही थी ना…

चंद घड़ी बाद ही मैं सिर्फ ब्रॉ और पेन्टी में खड़ी थी…खुद को एक बार सामने मिरर में देखी तो खुद ही शर्मा गई…

फिर मुस्कुराते हुए कैप्री पहन ली…जो कि घुटने से थोड़ी ऊपर ही आ रही थी..कुछ कैप्री तो नीचे तक रहती है पर ये कुछ ज्यादा ही छोटी थी…शायद सेक्सी दिखने के लिए ही थी इतनी छोटी…

फिर टी-शर्ट पहन लो जो कि काफी तंग आ रही थी..मेरी चुची की पूरी shape साफ साफ नजर आ रही थी…

साथ में ब्रॉ भी हल्की-2 नजर आ रही थी.. कुल मिला काफी हॉट बना रही थी जो किसी भी मर्द के पानी यूँ निकलवा सके…

मैंने अपने साड़ी- पेटिकोट व ब्लॉउज समेट बाहर निकलन मुड़ी ही थी कि मिरर में मेरी गांड़ की उभार दिखी…

ओह गॉड,, ये तो काफी कसी और बाहर की तरफ निकल रही थी…खुद की गांड़ देख मेरी मुँह में पानी आ गई कि इतनी कामुक और विशाल गांड़….

अभी सिर्फ चूत चुदवाई तो ये हालत है, आगे गांड़ में ली तो पता नहीं क्या हालत होगी???

फिर हल्की सी सेक्सी पोज देती मुस्कुराती हुई सभी लंड के पानी छुड़वाने गेट खोल बाहर निकल गई…

बाहर तीनों गोल-मटोल हो गुटर-गूं कर रहे थे..उन सब की नजर हमारी तरफ नहीं थी…हाँ, मॉल में और सब लंड की नजर जरूर टिक गई थी हम पर..

उनके निकट पहुंच हाय कहती हुई सबका ध्यान अपनी तरफ की..मुझे देखते ही उन सब की आवाजें ही गुम हो गई…

सन्नी की नजरें तो मेरी उठी हुई चुची से हट ही नहीं रही थी, जबकि बंटी मेरी पूरी फिगर को ऊपर से नीचे देख शायद पछता रहा था कि शाला, कहां मैं पूजा को फंसा के गलती कर दिया…

पूजा आंखें निपोरती हुई बोली,”वॉव भाभी,, क्या मस्त आइटम लग रही हो… पता नहीं बेचारा सन्नी कैसे बर्दाश्त करेगा?”

कहते हुए पूजा खिलखला कर हँस पड़ी.. मैं अपनी आंखें निकालती हुई पूजा को नजरों से ही डांट दी…

उधर वो दोनों तो अभी भी बेखबर हो देखे जा रहे थे.. पूजा क्या बोली, वो तो सुना भी नहीं वर्ना उसका सीना फूल के 72इंच हो जाता…

तभी पूजा को भी आभास हुआ कि दोनों अब इस दुनिया से सपनों की दुनिया में पहुँच गए हैं…तो पूजा बंटी के गालों पर हल्की चपत लगाती हुई बोली,”ऐ मिस्टर, भाभी अगर अच्छी नहीं लग रही है तो अपनी मुंह खोलते हुए कोई दुसरी ड्रेस चूज करो..”

शायद पूजा उसकी प्रतिक्रया देखना चाहती थी कि दोनों कैसा रिएक्ट करते हैं…पूजा की बात सुनते ही सन्नी हड़बड़ाता हुआ बोला,”नहीं नहीं पूजा,, हम दोनों की आँखों पर तो विश्वास ही नहीं हो रही है कि साड़ी में सिम्पल सी सीता ऐसी ड्रेस में इतनी बलाल मचा देगी मेरे अंदर…amazingggg ….”

“सीता,प्लीज.. इसमें तुम काफी सुंदर लग रही हो और तुम्हारी फिगर…उफ्फफफ…साड़ी में तो मालूम ही नहीं पड़ती थी कि तुम इतनी हॉट हो…कसम से…”बंटी भी कुछ बोले रह नहीं सका…अब तो मेरी अनुमान भी सटीक हो गई थी कि बंटी सच में पछता रहा है…

और बंटी की ऐसी सेक्सी तारीफ सुन मैं अंदर ही अंदर शर्मा गई थी…पर अपनी शर्म को साइड करती हुई बोली,”थैंक्स, अब 2 मिनट रूको मैं चेंज कर आती हूँ.. फिर चलेंगे..”

सच ये तो मैं खुद नहीं चाहती थी पर कुछ तो फॉर्मिलीटी करनी थी ना….

मेरी बातें सुनते ही तीनों गिड़गिड़ाने लगे…प्लीज सीता,मेरे लिए…..प्लीज भाभी…..आदि आदि…

मेरी तो हंसी रूक नहीं सकी और हँसते हुए ओके बोली…मेरी हाँ सुनते ही तीनों ऐसे चियर्स किए मानों कोई बड़ी बाजी जीत गए…

फिर हम सब काउन्टर पर थोड़ी देर रूके.. पेमेन्ट दोनों कर बाहर की तरफ चल दिए…इस दौरान वहां मौजूद सारे मर्द आँखों से ही हम दोनों हॉट माल को चोदे जा रहे थे… पर अब तो हमें भी आदत सी हो गई थी…

फिर मैं सन्नी की बाइक पर और पूजा बंटी की बाइक पर चिपक के बैठी थी… अब तो शायद सन्नी भी समझ गया था कि मुझे उसकी दोस्ती ही नहीं,लंड भी चाहिए…

अगले ही पल बाइक तेज गति से सड़कों पर दौड़ने लगी थी… अभी कुछ ही देर चली थी कि ओहहहह नो…

…बारिश की धीमी धीमी बूंदें पड़ने शुरू हो गई…मेरी होंठों पर पड़ रही हर एक बूंद से बरसाती मुस्कान रेंगने लगी थी..बगल में बाइक पर पूजा खुशी से झूमती अपने बंटी की पीठ पर कई चुम्मे जड़ चुकी थी..

उसे ऐसा करते पा बंटी अपनी बाइक और स्टाइल से चला रहा था..और सन्नी दोनों को आशा भरी नजरों से मुड़ मुड़ के देखे जा रहा थाकि काश, मेरी पीठ को कोई प्यार से चूमे…

तभी अचानक से बारिश तेज पड़ने लगी थी..मेरी पतली सी टी-शर्ट ज्यादा पानी बर्दाश्त नहीं कर पाई और मेरी चुची पर लगी सफेद रंग की ब्रॉ को स्पष्ट कर दी..

सड़क पर के लोग तो पानी से बचने इधर उधर भाग रहे थे, पर जो सुरक्षित खड़े थे,, उनकी नजर मुझ पर पड़ते ही खुल जाती..

इन सब को नजरअंदाज करती मैं एक अलग दुनिया में खो जाना चाहती थी..हम अपनी घरों की तरफ बढ़े जा रहे थे..तभी सन्नी बोला,”सीता,तुम्हें बारिश से एलर्जी तो नहीं है ना..”

अब तक जो मैं सिर्फ सट के बैठी थी, उसकी बात सुनने के बहाने अपने दोनों हाथ उसके सीने में लिपटाती अपने होंठों को सन्नी के कान में सटाती बोली,”एलर्जी तो नहीं है पर जनाब को और भींगाने का इरादा है क्या?”

“हाँ.. पर आपकी इजाजत के बिना नहीं…”

मैं उसकी बात सुन हल्की सी मुस्कुरा दी और बोली,”पूजा से पूछ लेती हूँ.. अगर वो हाँ कह दी तो ठीक है…”

तभी पल भर में ही सन्नी पूजा के काफी करीब पहूंचते हुए बोला,”ए बंटी, चल ना रूम पर चलते हैं..” सन्नी की बात सुनते ही मुस्काता हुआ पूजा से बोला,”डॉर्लिंग, अब तो अपना काम बन गया…”

फिर हम दोनों की तरफ देखता हुआ बोला,”चल…” और तेजी से बाइक बढ़ा दिया..बंटी के आगे बढ़ते ही मैं सन्नी से पूछ बैठी,”कौन सा काम बना बंटी का?”

“चलोगी तब तो देखोगी कि कौन सा काम बन गया..” सन्नी हंसता हुआ बोला.. मेरी जेहन में तुरंत ही ये बात समा गई कि कहीं ये दोनों सेक्स तो नहीं….

मैं एक तरफ रोमांच से भर गई थी तो दूसरी तरफ ये सोच के मरी जा रही थी कि इन दोनों के बीच मैं क्या करूंगी?? कहीं सन्नी जोश में आ मेरे साथ जबरदस्ती तो नहीं करेगा…

इसी तरह की कई ख्यालात में डूबी कब मैं उसके रूम पर पहुंच गई, मालूम ही नहीं पड़ी…

पूजा और बंटी बाइक से उतर अंदर की तरफ चले गए.. मैं अभी भी सन्नी के साथ बारिश में भींग रही थी..मुझे सोच में डूबी देख सन्नी बोला,”हे सीता,, तुम क्या सोचने लग गई..”

मैं अपनी निंद्रा से बाहर निकल फीकी मुस्कान देती हुई बोली,” कुछ नहीं.. बस ज्यादा देर मत रूकना..घर भी जाना है..”

सच में मैं डर रही थी.. अगर ये दोनों जबरदस्ती ही करते तो मैं क्या कर सकती..पूजा तो खैर अपने मन से आई तो उसे कोई फिक्र नहीं थी पर मैं तो नहीं रेड्डी थी..

मेरी डर को सन्नी जल्द ही भापं गया..वो मेरे सामने होते हुए बोला,”देखो सीता,तुम जिस बात की डर है वो अपने दिमाग से निकाल दो..हाँ ये सच है कि वो दोनों यहां सेक्स करने आए हैं, पर हम तुम्हारे साथ किसी तरह की ऐसी वैसी बात नहीं करेंगे..सच कहूं तो आज मैं ऑफर जरूर करूंगा पर जब तक तुम हाँ नहीं कहोगी तब तक मैं छूऊंगा भी नहीं…अब चलो अंदर, ज्यादा देर तक भींग गई तो सर्दी लग जाएगी..”

मैं उसकी पूरी बात ध्यान से सुनी जा रही थी..अब तक मैं पूरी भींग गई थी..थोड़ी-2 ठंड भी लग रही थी..मैं जड़बुत बनीं वहीं पर खड़ी उसकी तरफ निहारे जा रही थी…

तभी वो मेरी कलाई पकड़ अंदर की तरफ चल दिया..मैं खिंचती हुई उसके पीछे चलने लगी…कुछ ही पलों में मैं रूम के अंदर थी जहां दो अलग-2 रूम लॉक थी और हम दोनों रूम के बाहर छोटी सी बरामदे में थी..उतनी छोटी भी नहीं थी..

पूजा बाहर नहीं थी..एक रूम की तरफ इशारा करते हुए सन्नी बोला,” वो दोनों इसमें काम बना रहे हैं..चलो हम दोनों अपने रूम में काम बनाने…”

उसकी बात खत्म होते ही मैं उसकी तरफ आंखें निकाल कर देखने लगी…वो मुझे इस तरह देख हंसता हुआ बोला,”अरे तुम तो मजाक को भी सच मान बैठती हो..चलो रूम में शरीर साफ कर लेना…”

मैं उसकी बात पर हल्की सी मुस्काती रूम की तरफ बढ़ गई..सन्नी भी मेरे पीछे-2 रूम में दाखिल होते हुए एक तौलिया मेरी तरफ बढ़ा दिया…मैं तौलिया से शरीर सुखाने की कोशिश करने लगी..

“अच्छा सीता, तुम्हारे रहते भी पूजा चली गई उधर..तुम्हे बुरा नहीं लगा?” सन्नी पास में पड़ी चेयर पर बैठते हुए पूछा..जो कि एक कमप्यूटर डेस्क के साथ लगी थी..

मैं उसकी तरफ देख हंसती हुई बोली,” बिल्कुल नहीं..क्योंकि पूजा खुद चाहती है..अगर वो नहीं चाहती तो मैं बर्दाश्त नहीं कर पाती..”

सन्नी हामी भरता हुआ मेरी बदन को अब निहार भी रहा था..कब तक बेचारा आग के सामने रह उसकी ज्वाला को नजरअंदाज करता…मैं भी हालात समझती ज्यादा ध्यान नहीं देने की कोशिश की..

फिर वो कुर्सी से उठा और अपने कपड़े खोलने लगा..मैं क्षण भर तो सकपका गई, पर जल्द ही समझ गई कि ये भी तो भींग चुका है…मैं अपने शरीर से कुछ गीलापन जा चुकी थी पर कपड़े अभी भी भींगी ही थी…

“ये भी खोल के पानी सुखा लो ना,,अंदर ब्रॉ तो पहनी ही हो..” सन्नी अपनी टी-शर्ट खोल चौड़ी छाती दिखाते हुए मुझे टी-शर्ट खोलने कह रहा था..

उसकी बात सुनते ही मैं गुस्से से आंखें दिखाने लगी…जिस पर वो हंसता हुआ हुआ मेरे पास आया और मेरी कमर पकड़ कर जोर से अपने शरीर से सटाता हुआ बोला,” मैडम,हमसे दोस्ती की हो तो कुछ तो बेशर्म बनना पड़ेगा ही..वैसे तुम्हारी ब्रॉ साफ-2 दिख रही है इसलिए बोला.. और सिर्फ ऊपर के कपड़े ही खोलने हैं,पूरी नहीं..”

मैं तो उसके शरीर से चिपकते ही चिहुंक उठी थी..उसके सीने की घनी बालें मेरी छाती से रगड़ खा रही थी और नीचे तो उफ्फफ उसका पूरा तना हुआ लंड सीधा मेरी चूत पर जा टिका था…साथ में उसकी मर्दाना खुशबू,, हमें उत्तेजित करने के लिए काफी थी.. मैं कसमसा कर रह गई क्योंकि उसकी पकड़ काफी जोर से थी जिससे निकल पाना लगभग असंभव थी….

और मैं ज्यादा जोर भी नहीं कर रही थी निकलने की,,क्योंकि लंड का आभास होते ही मेरी चूत मुझ पर कंट्रोल करने जो लग जाती थी…तभ सन्नी मेरी कमर से हाथहटा मेरी टीशर्ट के दोनों बगलें पकड़ ली…मैं अब अंदर ही अंदर काफी उत्तेजित हो गई थी…पर उसे अंदर ही दबा दी थी..

फिर सन्नी आहिस्ते-2 टीशर्ट ऊपर की तरफ खींचने लगा…मेरे होंठ अब कंपकपाने लगे थे जिसे मैं पूरी ताकत से रोकने की कोशिश कर रही थी…

कुछ ही पल में मेरी टी-शर्ट खोलते उसकी हाथ मेरे बूब्स के निकट पहुंच गई..अब मैं बर्दाश्त करने लायक नहीं रह गई थी..तभी उसने मेरी बूब्स को टी-शर्ट पकड़े ही अपने अंगूठे से रगड़ता हुआ ऊपर कर लिया…

अब मेरी टी-शर्ट दोनों बूब्स से ऊपर आ चुकी थी…ब्रॉ में कैद मेरी बूब्स उसके सीने से सट-हट रही थी…

मैं अब बिल्कुल ही होश गंवा बैठी थी…एक बार तो सोची कि अब वो टी-शर्ट निकालने को लिए मेरे हाथ ऊपर करेगा पर नहीं…उसने तो टी-शर्ट को ही थोड़ी जोर से ऊपर किया जिससे मैं खुद ही हाथ ऊपर उठा उसे मदद कर दी…ये मैं कैसे कर दी या उसकी कला थी, पता नही…..

मेरी टी-शर्ट अब बेड पर फेंकी हुई थी…और मैं अपनी आँखें बंद की उससे चिपक के खड़ी थी…तभी उसने हाथ मेरी पीठ पर ले जाते हुए मेरी ब्रॉ की हुक खोल दी…

मैं उफ्फ्फ करती हुई सिसक पड़ी…उसके सीने से चिपकी थी इसलिएनहीं तो मेरी ब्रॉ जमीन पर पड़ी होती अब तक….

तभी सन्नी ने अपने एक हाथ से तौलिया बेड से उठाया और मेरे सीने पर आगे से रख वो थोड़ी सी पीछे हो गया…उसके पीछे हटते ही तौलिया मेरी बूब्स को कवर करती नीचे जांघ तक गिर गई…मैं तो उसकी हर एक अदा की दीवानी हो गई थी…कितनी शालीनता से कर रहा था ये सब…

फिर वो तौलिया मेरे शरीर पर बांध दिया और अपने हाथ नीचे बढ़ा मेरी कैप्री के हुक यूं खोल दिया, जिसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकती…

अगले ही पल उसने मुझे कुर्सी पर बिठा दिया और खुद नीचे बैठते हुए कैप्री को खींच बेड की तरफ उछाल दिया…कुर्सी पर मैं पीछे की तरफ सिर झुकाए तेज-2 सांसें ले रही थी..मैं कुछ सोच ही नहीं पा रही थी कि अब क्या करेगा?

तभी उसकी उंगली मेरी जांघ के पास तौलिया के अंदर महसूस हुई..मैं सिहर उठी..उसने अपनी दोनों उंगली से मेरी पेन्टी की बगल पकड़ा और तेजी से घुटने तक खींच दिया…

मैं काम वासना से लबालब भरी चिहुंकती हुई उठ खड़ी हुई..वो शायद समझ चुका था कि अब मैं क्या चाहती हूँ..वो भी उतनी ही तेजी से खड़ा हो मुझे अपने बांहों में कस लिया..मैं गरम तो थी ही उसके बांहों में आते ही चीख पड़ी

और कांपती हुई चूत से पानी निकालती घुटने पर टिकी पेन्टी भिंगो रही थी…वो मेरे बालों पर धीरे से हाथ फेरता हुआ सहला रहा था..जब मैं पूरी तरह झड़ गई तो उसने अपने पैरों से ही मेरी गीली पेन्टी को पकड़ा और बाहर कर दिया…

कुछ देर मैं यूं ही उसकी बांहों में पड़ी रही, फिर उसने मुझे आहिस्ते से कुर्सी पर बिठा दिया…मैं ना चाहते हुए भी बैठ गई..इस वक्त अगर सन्नी की जगह कोई और होता तो कब का चोद चुका होता, पर सन्नी में कुछ इंसानियत तो थी जिसकी मैं दिवानी हो गई थी…फिर वो मेरे चेहरे के सामने अपना चेहरा झुका मुस्कुराते हुए बोला,” अगर तुम खुद कपड़े निकाल लेती तो तुम्हारी ये हालत नहीं होती ना..”

वो झड़ने की बातें कर रहा था जिसे सुन मैं शर्म से मुस्काती नजरें चुरा ली..अगले ही पल उसने भी अपनी जींस खोल कर अलग कर दी और दूसरी तौलिया लपेट वो भी अंदर से पूरा नंगा हो गया…

फिर उसने मेरे और खुद के भींगे कपड़े से पानी निचोड़ सुखने के लिए कमरे में ही लगी तार पर रख दिया…

फिर वो एक दूसरी कुर्सी बाहर से ला मेरी बगल में लगाता हुआ बैठ गया और सामने कमप्यूटर ऑन कर दिया…मेरी नजर कमप्यूटर की स्क्रीन की तरफ चली गई….

कमप्यूटर स्क्रीन ऑन होते ही मेरी शरीर में झुरझर्री सी दौड़ गई…सामने स्क्रीन पर पूजा कुतिया की तरह मादरजात नंगी झुकी मुंह खोले चिल्लाए जा रही थी और बंटी उसकी कमर पकड़ दनादन अपना लंड उसकी गांड़ में पेले जा रहा था…

पूरी तरह से छिनाल की तरह चुद रही थी हमारी पूजा..इसे देख मैं थोड़ी सी शर्मा गई पर अब सन्नी पर इतनी विश्वास तो थी ही कि वो बिना इजाजत टच भी नहीं करेगा…

हम दोनों एक- दूसरे की तरफ देखे बिना पूजा की लाइव चुदाई देखने लगे…मैं अपनी आंखों को तिरछी कर सन्नी की तरफ देखी तो वो तौलिया के भीतर अपना हाथ घुसा लंड मसल रहा था..

तभी सन्नी की-बोर्ड पर एक बटन दबा दी जिससे पिक्चर जूम हो गई..अब पूजा की गांड़ में जाती लंड काफी निकट से दिखाई दे रही थी…

तभी मेरी नजर पूजा की चूत पर गई जो बंटी के लंड से ठीक नीचे थी..गौर से देखी तो उसकी चूत सूजी हुई थी और कुछ गाढ़ा रस टपक रही थी…मतलब इतनी देर में उसकी चूत का कबाड़ा करने के बाद बंटी उसकी गांड़ के पीछे पड़ गया था…

अब मेरी भी चूत रोने लग गई थी…शरीर में अंदर से काफी ऐंठन हो रही थी..ये सन्नी अब भोंदू दिखने लगा था कि मैं सिर्फ टॉवेल में बैठी चुदाई देख रही हूं और ये सन्नी कुछ नहीं कर रहा है..

तभी बंटी पूजा की बाल पकड़ जोर से खींचते हुए घुरसवार की तरह तेज धक्के लगाने लगा…पूजा की आँखों से आंसू बह रहे थे…तभी सन्नी टेबल के नीचे से हेडफोन निकाल कान में लगा लिया, मतलब वो अब आवाज भी सुनेगा..

मैं उसकी तरफ देखी तो वो हल्की मुस्कान दे दिया..मैं भी मुस्कुराती उसकी तरफ देखी..उसने एक और हेडफोन ले मेरे कानों में लगा दिया…

पूजा और बंटी की एक- एक शब्द अब स्पष्ट सुनाई पड़ रही थी…

“आहहहह मादरचोद ये ले……ओफ्फफफ शाली रंडी आज तेरी मां चोद चोद के भोसड़ा कर दूँगा कुतिया…..”

“आउउउउउउउ शाबास मेरे राजा…कमीनी चूत हर वक्त तंग करती है हमें..याहहहह याहहहहह..कस के चोदो अपनी इस कुतिया की चूत और रंडी बना डालो मेरे चोदू…”

“जरूर बनाऊंगा तुझे और साथ में तेरी भाभी को भी शाली,,, आहहह क्या फिगर है उस रंडी के भी यूहहह यूह आह ले और ले..”

मैं अपने बारे में सुन गुस्से से सन्नी की तरफ देखने लगी..जिसे देख सन्नी होंठो पर हंसी लाता मेरी कानों से हेडफोन हटाते हुए बोला,”देखो जान, सेक्स में थोड़ी बहुत गाली ना हो तो मजा नहीं आता सो प्लीज माइंड मत करना..”

“और मेरे बारे में जो बोल रहा है उसका क्या?” मैं झूठी ही सही गुस्से में आती हुई बोली…

“ओहो डॉर्लिंग, जोश में बोल दिया, तुम बेकार में गुस्सा कर रही हो..छोड़ो उसे और मजे से देखो..” कहते हुए सन्नी हेडफोन वापस लगा अपने हाथ मेरे कंधों पर रखते हुए मेरे गाल सहलाने लगा..

मैं उसकी तरफ पलटी तो मुझे नजरअंदाज कर लाइव चुदाई के मजे लेने लगा..उसकी ये हरकत देख मैं अंदर ही अंदर मुस्कुरा पड़ी..और मैं भी सीधी हो पूजा की लाइव देखने लगी…

बंटी अब काफी तेज तेज शॉट मार रहा था…शायद झड़ने वाला था…जबकि पूजा भी अब जोर से चिल्ला और चीखती हुई अपनी गांड़ पीछे धकेल रही थी..

तभी अचानक से बंटी ठप्प की आवाज के साथ अपना लंड खींचा और वो पूजा को बेरहमी की तरह बाल खींचता हुआ बैठा दिया और तेजी से अपना लंड उसके मुंह में ठेल दिया…

पूजा बालों के दर्द से हल्की चीख निकल पड़ी पर लंड मुंह में जाते ही वो दर्द भूल चूप्पे लगाने लगी..

इधर सन्नी की उंगली कब मेरे मुंह में चली गई, पता नहीं..और तो और सन्नी की उंगली को मैं भी पूजा के माफिक ही चूसे जा रही थी..

सन्नी के साथ अब मेरी भी उंगली अपनी चूत पर रगड़ रही थी..उधर बंटी चुदाई के बाद हो रही गहरी- गहरी चुसाई को सह नहीं पाया..और पूजा के सिर को जोरों से दबाता हुआ चीख पड़ा..

बंटी अपने लंड के पवित्र जल को झटके के साथ पूजा के गले में उतार रहा था..पूजा का चेहरा प्रसन्नचित्त हो सारा रस मुंह में लेने लगी..

बंटी और पूजा को देख मेरी सब्र की बाँध टूट गई और मैं लपकती सी कुर्सी से उठी और सन्नी के होठों पर अपन दहकते होंठ रख दिए..सन्नी भी एक भूखे शेर की भांति मेरे होंठो को निचोड़ने लगा..

कुर्सी पर बैठे सन्नी के शरीर पर लदी मस्ती में अपने रस निकलवा रही थी..सन्नी कुछ
सहज महसूस नहीं कर रहा था ऐसी अवस्था में…वो मुझे अपने होंठो से अलग करता हुआ खड़ा हुआ…

पल भर अलग होते ही मेरी नजर वापस स्क्रीन पर गई जहाँ पूजा सारा वीर्य किसी रांड की तरह गटकने के बाद चुप-चुप करती बंटी के लंड को जीभ से चाटकर साफ कर रही थी…

तभी सन्नी एक झटके से मुझे बेड की ओर धक्का देते हुए मेरे तन की तौलिया का एक सिरा पकड़ लिया…जिससे मैं नंगी होती हुई बेड पर धम्म से गिरी…सन्नी भी पीछे से मेरे शरीर पर गिरा और गिरते के साथ ही मेरे होंठो को कैद कर चूसने लगा..

अब जब हरी झंडी मिल गई उसे तो भला अपने लंड को क्यों तकलीफ देता..वो एक हाथ से मेरी बूब्स मसलते हुए मस्ती के सागर में डुबकी लगाए जा रहा था..

मैं भी वासना से मरी जा रही थी तो उसे पूरी आजादी देते हुए आनंद ले रही थी..कुछ देर में ही वो अपनी उंगली से मेरी चूत भी रगड़ने लगा..मैं मस्ती से लबालब होती अपने चूत ऊपर की उछाल कर उंगली को गहराई तक पहुंचाना चाहती थी…

मेरी इस हरकत को देख सन्नी तुरंत समझ गया कि मैं कितनी गरम हूं…वो मेरे होंठ को आजाद किया और अगले ही पल उसके होंठ मेरी चूत में उतर गई..मैं तड़प के उछल पड़ी और उसके बाल नोचने लगी…मैं लाख कोशिश की उसे हटाने की पर वो उतनी ही जोरों से मेरी चूत को खाए जा रहा था…

मैं ज्यादा देर तक खुद पर काबू नहीं रख सकी और सन्नी के बाल नोंचते हुए पैर पटकने लगी…तभी मेरे अंदर के बादल फटी और सारा पानी सन्नी के चेहरे को धोने लगी..जितना उससे संभव हुआ.उतना पानी वो अंदर गटक लिया,बाकी बेडसीट और उसके चेहरे को भिंगो दिया..मैं झड़ते हुए जोरों से हांफ रही थी…इस दौरान सन्नी भी नंगा हो गया था..

अगले ही क्षण वो उठा और अपना 7 इंची लंड से मेरे होंठो पर मारते हुए बोला,” आहहह मेरी रानी, अपने मुंह तो खोल” मैं इससे पहले एक-दो बार लंड मुंह में ली जरूर थी, पर अभी तक आदत नहीं पड़ी थी इसकी..थोड़ी सी हिचकिचाती हुई अपने होंठ थोड़े खोले कि सन्नी पूरी ताकत से अपना लंड ठूस दिया..मैं उबकाई लेती हुई कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थी पर मुश्किल लग रही थी मेरे लिए..मेरे चेहरे की उड़ती रंग देख वो समझ गया कि मैं मुंह में नहीं लेती..

उसने लंड के दबाव को थोड़ा कम किया और बोला,”अब आदत डाल ले मेरी रानी,क्योंकि रोज लेने होंगे चुदाई से पहले..”

मैं उसकी तरफ आंखें उठा के देखी और आंखों से हामी भरती धीरे -2 अंदर बाहर करने लगी..पूजा की तरह ढ़ंग से तो नहीं कर पा रही थी जिससे सन्नी को उतना मजा आता..पर पहली बार की वजह से वो आहें भरते हुए मजा ले रहा था…

कुछ मिनटों में ही वो जोर से चीखते हुए “नहीईईईई” किया और अपना लंड को जोर से आखिरी धक्का मेरी मुंह में मार खींच लिया…शुक्र है वो झड़ा नहीं था वर्ना मैं कैसे उसके पानी को मुंह में ले पाती..

फिर वो बेड से नीचे उतरा और मुझे अपनी दिशा में लाते हुए मेरे पैरों को अपने कमर में लिपटा लिया..जिससे मेरी गर्म चूत ठीक उसके लंड से टकराई..मैं सिहरती हुई कराह उठी..और सांस रोके उसके लंड का इंजार करने लगी..

अगले ही पल दनदनाता हुआ उसका पूरा लंड जड़ तक मेरी चूत में उतर गया था..मेरी सांसें तो ऊपर ही अटक गई थी क्योंकि ऐसा करारी शॉट ना ही श्याम मारे थे और ना मेरे भैया….

वो अपने लंड को वहीं रोक नीचे झुक मेरी बूब्स को बारी- बारी चूसने लगा..कुछ ही पल में मेरी दर्र भाग गई और मस्ती आने लगी..जिससे मैं अपनी चूत ऊपर की तरफ मारने लगी…

वो मेरी ओर देखते हुए बूब्स से अपना मुंह हटाया और मुस्कुराते हुए अपना लंड आगे-पीछे करने लगा…साथ ही मेरी बूब्स को मसलने लगा…

मेरी मुंह से अब सेक्स वाली आवाजें निकलनी शुरू हो गई थी..जिससे वो और उत्तेजित हो तेज-2 धक्के लगा रहा था..

पूरे कमरे में हम दोनों की सेक्सी आवाजें और फच-फच की धुन गूंज रही थी..मेरी शरीर तो ऐसे हिचकोलें खा रही थी मानों कोई लोकल ट्रेन हो..जिसे मेरी दोनों भोंपू दबाए सन्नी ड्राइवर चला रहा था…

हम दोनों की पहली चुदाई की वजह से सन्नी और मैं ज्यादा दूरी तक इस ट्रेन को नहीं ले जा सके…

मैं चीखती हुई सन्नी के साथ 3री बार झड़ गई..जिसे देखा देखी सन्नी भी चिल्लाते हुए अपना गरम लावा मेरी चूत के अंदर उड़ेल दिया.. मेरी चूत की सारी गर्मी को सन्नी के वीर्य ने शांत कर दिया…

सन्नी हांफता हुआ बेड पर मेरे बगल गिर पड़ा..जिसे मैं अपनी बांहों में लेती हुई उसके बाल सहलाती खुद पर भी काबू पाने की कोशिश कर रही थी…

काफी देर तक हम दोनों चिपक के सोते रहे…फिर सन्नी उठा और बाथरूम में फ्रेश होने घुस गया..मैं उसे जाते ही गीली तौलिया से बदन को ढ़क ली..और कमप्यूटर स्क्रीन पर नजर डाली तो दोनों कपड़े पहन रहे थे..

मतलब वो दोनों कभी भी इधर आ सकते थे…मैंने तेजी से उसी तौलिये से खुद को साफ की..और कपड़े पहन ली..

तभी बंटी बाहर आया और हमें कपड़े में देख आश्चर्य से देखने लगा तो मैंने उसे कमप्यूटर की तरफ इशारा कर दी..वो स्क्रीन की तरफ देखते ही मुस्कराता हुआ अपने कपड़े पहन लिए और कमप्यूटर पर कोई नई गाने प्ले कर दिया…

मैं भी अपनी नजर चल रही संगीत की तरफ कर दी मानों जब से आईहूं, गाने ही देख रही हूँ..तभी मैंने सन्नी से पूछी,”तुम पूजा की फिल्म क्यों बनाए हो?”

” बस यादगार के लिए ताकि जब किसी वजह से ये सब नहीं हो पाता तो वही सब देख के खुद को शांत कर लेता हूँ” सन्नी मेरी तरफ देख बेहिचक बोल दिया…उसके बोलने से ऐसा बिल्कुल नहीं लग रहा था ये मेरी इस सवाल से थोड़ी भी नर्वस है…

मतलब आदमी जब ऐसे कुछ कहता है तो लगता नहीं कि ये कुछ गलत करेगा..मैंने उसकी बातों को सुन चेहरे पर हल्की मुस्कुराहट लाती हुई बोली,” अच्छा तो तुमने मेरी भी बना ली है?”

उसने हंसते हुए हां में सिर हिला दिया..मैं बेड से हंसते हुए उठी और उसके गोद में जाकर बैठती हुई उसके होंठो के पास अपने होंठ ले जाती हुई बोली,” फिर तुम्हें बताना चाहिए था ना ताकि मैं और अच्छी से परफॉमेंस करती जिससे मूवी और बेस्ट लगती..”

वो एक बार तो सोच में पड़ गया कि पता नहीं मैं कैसा बिहेव करूंगी पर शायद उसे इतना जरूर विश्वास था कि मैं ज्यादा गुस्से नहीं करूंगी..पर अब तो वो शायद ये सोच रहा होगा कि या तो इसे काफी मजा आ रहा है या पहले से ही रंडी है….

मेरी बात सुनते ही उसने अपने होंठ मेरे होंठ पर चिपका दिया..कुछ देर चूसने के बाद वो हटा और बोला,”चिंता मत करो जान, अभी तो शुरूआत है..अगली बार से मैं और भी बहुत कुछ करूंगा जो शायद तुम सोच भी नहीं सकती..”

“अच्छा….” और मैं उसके गालों पर अपने दांत लगा दी..वो कसमसा गया दर्द से… तभी गेट धड़ाम से खुली और पूजा मुझे सन्नी की गोद में देख वॉव करती हुई अपने होंठ गोल कर देखने लगी..

पीछे से बंटी भी आया और मुझे देखते ही बोला,”सीता, अब अगर तुम्हारी ये तोता-मैना का प्यार खत्म हुआ हो तो घर चलने का कष्ट करेंगे क्योंकि बारिश बंद हो चुकी है..”

ओह गॉड! मैं भी कितनी पागल थी, अब तक सन्नी की गोद से उठी नहीं थी..मैं झेंपते हुए तेजी से उठी और खड़ी हो गई..सब मेरी इस हरकत से हँस पड़े..

“भाभी, चलेंगे या और रूकेंगे..” पूजा मेरी तरफ हंसती हुई बोली..मैं उसकी बात सुनते ही बिना कुछ कहे बाहर की तरफ चल दी..

फिर वो तीनों भी पीछे से हंसते हुए आए..फिर हम सब बाइक पर बैठे और घर की तरफ चल दी..सच, काफी मजा आया आज सन्नी के साथ..सन्नी कितना केयर करता था मेरी…मैं बाईक पर ही सन्नी के कंधे पर सर टिकाती चिपक के सो गई थी…एक तो सन्नी जैसा केयरिंग बॉयफ्रेंड पा कर और दूसरी बारिश के बाद लग रही ठंड की वजह से…

कुछ कुछ अंधेरा घिरने लगी थी तो मैंने उसे घर तक चलने बोली वर्ना मेन रोड पर उतरनी पड़ती..5 मिनट में ही हम घर पहुंच गए..हम दोनों गुड बाय किस किए और फिर वो दोनों चला गया…

अंदर आते ही हम दोनों कपड़े चेंज किए और किचन में घुस गए..कुछ घंटों में श्याम भी आ गए थे..फिर खाना खा एक चरण जम के श्याम से चुदी और सो गई…

सुबह रोज की भांति मेरी नींद खुली तो देखी मैं सिर्फ पेंटी में अपने पति की बांहों में सोई थी..चेहरे पर मुस्कान लाते हुए मैं आहिस्ते से उठी ताकि श्याम की नींद ना खुले..फिर नंगी शीशे के पास खड़ी हो जोर की अंगड़ाई ली..ऐसी अवस्था में देख मैं खुद शर्मा गई..

फिर मेरी गंदी दिमाग एक्टिव हो मुझे एक आइडिया दे गई जिसे सोच मैं पानी-2 हो गई..फिर मैं अपने होंठो पर हंसी लाते चल दी…

अब मै सिर्फ पेंटी में या यूं कहिए पूरी नंगी..अपने फ्लैट के बालकनी में खड़ी थी..सुबह की ताजी हवा सीधी मेरे अंदर प्रवेश कर रही थी जिससे मैं तेजी से तरोताजा हो रही थी.. एक नजर दूसरे घरों पर नजर डाली जहां कुछ पक्षी के अलावा कोई नहीं था..

अब मैं निश्चिंत हो कर खड़ी हो गई और अपनी दोनों बांहें दोनों तरफ फैला दी..सूरज की हल्की किरणों के साथ ताजी हवा का आनंद लिए जा रही थी..अगली कुछ ही पलों में मेरी आँखें अनायास ही बंद हो गई..और सिर ऊपर की तरफ कर तन के खड़ी थी…मेरी दोनों कबूतर पर पड़ रही लाल रोशनी से काफी चमक रही थी..और मेरी तरह उसकी निप्पल भी सुबह का आनंद कड़क हो ले रही थी…

अचानक मेरे कानों में डोरबेल की आवाज गनगनाती हुई घुसी..मैं चौंकती सी आंख खोल के सामने देखी तो…ओहहह मर गईई…दूधवाले अंकल घंटी बजा कर मुंह खोल मेरी तरफ ताके जा रहे थे..

मैं तेजी से मुड़ भागती हुई अंदर दौड़ पड़ी..अंदर आते ही मैं हांफ रही थी..ये मैं दौड़ने से नहीं बल्कि खुद को नंगी दूधवाले के सामने दिखने से हो रही थी…

फिर मैं हंसती हुई शांत हुई और कपड़े पहनने के लिए आगे बढ़ी…सामने मेरी कल वाली कैप्री और टी-शर्ट टंगी थी जो रात भर में सूख गई थी..मैं आगे बढ़ी और कैप्री टीशर्ट पहन ली..अंदर ब्रॉ नहीं पहनी जिससे मोरी कड़क निप्पल अभी भी खड़ी थी..फिर मैं किचन से बर्तन ले बाहर की तरफ चल दी…

बाहर मेन गेट खोलते ही मेरी नजर दूधवाले से टकरा गई..मैं अगले ही पल नजरे नीची करती बर्त्तन आगे कर दी..वो चुपचाप अपने खड़े लंड पर काबू करते हुए बर्त्तन ले दूध डालने लगा..मैं दूध ले वापस जाने मुड़ी ही थी कि वो बोला,”मैडम जी, मैं तो यहां रोज कई घरों में ऐसे देखता हूं..और यहां तो अपने देह को नंगी करना एक फैशन है..कुछ तो पूरी नंगी दूध लेने भी आ जाती..आप यहां नई हो और शायद पहली बार ऐसा कीतो शर्म आ रही है,,पर जल्द ही आदत पड़ जाएगी..”

मैं अभी भी उसकी तरफ गांड़ किए खड़ी उसकी बातें सुन रही थी..और वो अपनी बात कहते हुए ठीक मेरे पीछे आ गया..फिर अपने एक हाथ मेरी टीशर्ट को उठा पेट पर रख हल्के से पीछे खींच मेरी गांड़ में अपना लंड फंसाते हुए बोला,”वैसे आप मस्त लग रही थी नंगी..काश ये मेन गेट लॉक नहीं रहता…पर कोई बात नहीं, अगली बार गेट खोल के रखना मैडम,,आपको मैं इस दूध के साथ वो दूध भी दे दूंगा..”

और उसने एक झटका मार मुझे छोड़ वापस अपने साइकिल की तरफ चला गया; बिना मेरी जवाब सुने…मैं भी उसकी हरकत से काफी गरम हो गई और पेंटी को भिंगोने लगी थी..

तेज कदमों से चलती मैं अपने रूम में घुस गई…उसकी इस हिम्मत की तो दाद देनी होगी..कैसे वो एक ही पल में अपना बड़ा सा लंड मेरी गांड़ पर अड़ा दिया…ओफ्फफ..मेरी चूत भी पानी छोड़ रही थी जब उसका लंड सटा था…तभी मुझे बाहर तेज आवाज की गानों के साथ ऑटो की आवाज सुनाई दी…

पर मैं अब बहती चूत लेकर वापस उस ऑटो वाले को लाईन देने नहीं जाने वाली थी..मैंने दूध किचन में रखी और दूधवाले के नाम पर अपनी चूत रगड़ने बाथरूम में घुस गई..

बॉथरूम से निकल मैं किचन में घुस गई जहाँ पहले चाय बनानी शुरू की…चाय बनाते वक्त भी मेरे जेहन में दूधवाले की बातें दिमाग में नाच रही थी…किसी तरह चाय बनाई और श्याम को जगाने बेडरूम की तरफ चाय ले चल दी…

रोज की भांति आज भी मैंने मॉर्निंग किस करते हुए श्याम को जगाई.. उनकी नींद भी मेरे लब सटते ही खुल गई पर आँखें बंद ही थी..वे बंद आँखों में ही जोरदार किस किए, फिर आँखें खोलते हुए जम्हाई सहित उठ बैठे…

उनकी आँखें खुलते ही चौंक से गए मुझे ऐसे कपड़ो में देख..फिर वो एक बार अपने सिर को झटक पूरी तरह से जगते हुए देखने लगे..अब तो उन्हें पूरी यकीं हो गई थी कि वे किसी सपने में नहीं बल्कि सचमुच मैं चुस्त टीशर्ट और कैप्री में खड़ी हूँ…सच कहूँ तो मैं बस उनकी रजामंदी लेने के लिए पहनी थी कि अगर इन्हें ठीक लगे तो पहनूंगी वर्ना नहीं..अगर ये खुश रहेंगे तभी तो मैं भी अपनी जिंदगी के मजे उठा सकती हूँ…

“वॉव सीता, मुझे नहीं मालूम नहीं था कि ऐसे ड्रेस में मेरी पत्नी नहीं, एक टंच माल लगोगी..कब ली ये ड्रेस?”अपनी राय और मुझे आगे पहनने की हां कहते हुए वे बेड से उतर मेरी तरफ आने लगे..मैं जल्द ही भांप गई कि इनको माल दिख रही हूं मतलब सुबह-2 ये अब हमें छोड़ने वाले नहीं हैं..

“कल खरीदी हूं और हाँ आप पहले फ्रेश हो लीजिए फिर मेरे निकट आइएगा..” कहते हुए मैं तेजी से पीछे पलट किचन की तरफ भाग खड़ी हुई..अपने मनसूबे पर पानी फिरता देख ये भी “भागती किधर है, रूक पहले…” कहते हुए मेरी तरफ लपके..मैं तब तक किचन में घुस गई थी और किचन का गेट बंद करनी चाही, तब तक ये पहुंच गए और हल्का धक्का देते हुए हंसते हुए अंदर घुस गए..

“प्लीज, अभी कुछ मत करिएगा वर्ना आपको भूखा ही ऑफिस जाना होगा..” मैं भी इनकी शरारत के मजे लेती कुछ मस्ती और बढ़ाते हुए बोली..वैसे पति- पत्नी में रोज हल्की- फुल्की नोंक-झोंक हो तो जिंदगी कितनी रंगीन हो जाती, आप अंदाजा नहीं लगा सकते…

“भांड़ में जाए ऑफिय और खाना..पहले जो मस्त पीस सामने मौजूद है,उसे तो खाने दो..” कहते हुए श्याम मुझ पर झपट्टा मारते हुए दबोच लिए और सीधा अपने दांत से मेरी चुची को मुंह में भर लिए..मैं किकयाती हुई छटपटाते हुए छूटने की पूरी कोशिश की पर नाकाम रही…मेरी टीशर्ट इतनी पतली और चुस्त थी कि उनके दांत मुझे अपनी नंगी चुची पर महसूस हो रही थी..मेरी आँखें गीली हो गई थी दर्द से…

जब लगा कि मेरी चुची के कुछ अंश कट जाएंगे तो किसी तरह इनसे बोली,”आहहहह प्लीज, धीरे करिए ना…काफी दर्द कर रही है ओहहहहहह मम्मीईईईईईई…”मेरी दर्द भरी स्वर इनके कानों पड़ते ही चुची को छोड़ मेरे गले पर किस करते हुए बोले,”सॉरी जानू, तुम इतनी कयामत लग रही हो कि मैं बेकाबू हो गया था..” और फिर वे अपने काम में भिड़ गए मतलब कभी गर्दन पर कभी गालों पर,कभी उरेजों पर किसे की बौछार करने लगे..मैं थोड़ी नाराजगी दिखाते हुए शिकायत की,”भागी थोड़े ही जा रही थी जो ऐसे काट लिए..चलिए हटिए अब, कैसे खून बहा दिए है..”

मेरी बात सुनते ही किस करना रोक दिए और एक ही झटके में मेरी टीशर्ट ऊपर करते हुए मेरी चुची आजाद कर दिए…फिर निहारते हुए बोले,”जान, खून तो नहीं निकला पर हमारे प्यार की निशानी जरूर पड़ गई है…” और उन्होंने फिर अपने होंठ उसी चुची पर लगाते हुए दर्द मिटाने की कोशिश करने लगे..मैंने उनके गाल पर प्यार वाली थप्पड़ जड़ते हुए बोली,”अब क्या,सच्ची की खून निकालोगे?”

वे मुस्कुराते हुए ऊपर मुंह किए और बिना कुछ कहे मेरे होंठों को अपने होंठों से मिला दिए…

मॉर्निंग स्मूच कितनी मस्त होती है, आज मालूम पड़ी..हल्की दुर्गंध आती हुई लब, पल भर में मदमोहक हो गई…मैं अपने सारे दर्द भूला उनके गर्दन को जोर से भींचती कस ली और इस स्मूच को और गहरी कर दी..हम दोनों के लार ट्रांसफर हो रहे थे वो भी रॉकेट की गति से..उनका हाथ मेरी नंगी चुची को धीमे-2 मसल रहा था..

ऊपर से आनंदमयी स्मूच और नीचे रोमांटिक अंदाज में चुची की सेंकाई…ओफ्फ्फ्फ..मैं और मेरी वो बर्दाश्त नहीं कर पाई और पेंटी को लगातार दूसरी बार नहलानी शुरू कर दी..अगली ही पल मेरी हाथ उनके तौलिये के अंदर घुसी और अंडरवियर के ऊपर से ही अपने प्राण को मसलने लगी…अब उफ्फ करने की बारी इनकी थी…ज्यादा देर तक ये मेरे स्पर्श को सह नहीं सके और “आहहहह सीताआआआआ” कहते हुए स्मूच तोड़े और तौलिया नीचे करते हुए अपने लंड को आजादवकर दिए..उफ्फ..पूरी तरह गर्म जलती कोयले वाली ताप निकल रही थी..ऐसा महसूस कर रही थी कि मेरी नाजूक हाथ अब इस गरमी में जल जाएगी…

और ये भी देख ली कि सुबह के पल लंड में कितनी तनाव,गर्मी,जोश और खतरनाक रहती है…सुबह के वक्त मर्द की स्टेमिना भी काफी बढ़ जाती है..मैं अपने ठंडे और कोमल हाथों से उनके लंड को आगे पीछे करने लगी..वे सिसकारी भरते हुए अपने मुंह ऊपर की तरफ कर लिए..उनका हाथ मेरी नंगी चुची पर जरूर था पर कोई हरकत नहीं कर रहा था..

हम दोनों की हालत खराब होने लगी थी..इस हालत को और खराब करने के ख्याल से मैं सेकंड भर के अंदर ही बैठी और गप्प से गर्म रॉकेट को मुंह में भर ली…आदी तो नहीं हुई थी पर अब उतनी बुरी भी नहीं लगती थी..श्याम तो मेरी इस अदा पर झूम उठे और मस्ती की सेकेंड लास्ट वाली गेट पर पहुंच गए…उन्हें उम्मीद भी नहीं थी मैं बिना कहे ऐसे मुँह में ले लूंगी..

कुछ मिनटों की चुसाई में ही उत्तेजना से हांफने लगे..उनका लंड इन चंद घड़ी में बढ़ के 6.5 से 7.5 इंच हो गई..ये सब सुबह की ताकत के परिणाम थे…वे अब बर्दाश्त नहीं कर सकते थे मेरी और चुसाई को तो एक झटके से मेरी खुली बाल को समेटते हुए पकड़े और अगले ही क्षण मेरी थूक से तरबतर उनका लंड मेरी आँखों के सामने ठुमके लगाने लगा..

अगले ही पल वो मेरी बालों को पकड़े ही ऊपर उठा दिए हमें…उनकी इस पहली बार की वहशी देख मैं फूला नहीं समा रही थी..दर्द में हर औरत कितनी जोश में आ जाती है, ये बात काश दुनिया के सारे मर्द समझ पाते…मैं दर्द की मुस्कान देते हुए उठ गई और अपने पति की अगली आज्ञा का इंतजार करने लगी..श्याम अगले ही पल मेरी कैप्री में उंगली डाले और जोर से नीचे कर दिए..टाइट तो थी पूरी, ताकत लगते ही छोटी सी बटन छिटकती हुई दूर जा गिरी और मैं सिर्फ पेंटी में रह गई…

अब इतनी कामुक घड़ी में मेरी चूत कब तक पेंटी के सहारे खुद को बचा पाती..उफ्फफफ…मैं चूत की सलामती ढंग से सोची भी नहीं थी कि तब तक मेरी पेंटी चर्रर्रर्रर्रर्र की आवाज के साथ दो टुकड़ो में बंट गए…और मैं कुछ सोचने की सोचती, तब तक श्याम के मुंह मेरी द्वार में समा गई…ओहहहहह मम्मीई,,,श्याम तो पहले मेरी चूत को चूसने के बारे में कभी बोले भी नहीं थे,, पर आज पता नहीं क्या हो गया इन्हें…शायद मैं बिना बोले इनका लंड मुंह में ली तो ये भी….

मैं दीवाल के सहारे लग गई और अपनी चूत पर हो रही जीभ के हमले को सहने की कोशिश करने लगी..वे मेरी चूत के दाने को दांतों से पकड़ खींचने लगे..मैं तड़पती हुई उनके बालों को जोर से पकड़ी और नोंचने लगी..मेरी सिसकारी अब किचन में गूंजने लगी.और मेरी चूत लगातार रस बहाए जा रही थी जो श्याम के पूरे चेहरे को भिंगोती नीचे गिर रही थी…

मैं चीखती हुई “श्याम्म्म्म्म्म्म प्लीईईईईज” बोली जिसे सुन श्याम मेरी चूत से हटे और मेरी कैप्री को मेरे पैरों से निकाल खड़े हो गए..मैं हांफती हुई श्याम की तरफ नशीली आँखों से देखने लगी..बदले में श्याम भी मेरी इन नशीली नयन को अपनी आँखों से पीते हुए मेरी एक पैर उठा दिए..मैं अपनी मुंह खोली उनकी तरफ देखे जा रही थी..

तभी उनका गर्म काका मेरी धुली हुई काकी से टच करने लगी..फिर मेरी आँखों में झांकते हुए पोजीशन लिए और एक वहशीपूर्ण धक्का दे दिए..धक्का इतनी तीव्र थी कि मैं दीवाल में पूरी तरह चिपक गई…हम दोनों के मुख से आहहहह निकल पड़ी..उनका लंड अंदर पड़ते ही मेरे जेहन में अपने भैया का लंड याद आ गया जो 8 इंची था और इसी तरह मेरी नाजुक चूत को चीरा था…

अचानक से पड़े दूसरी धक्के ने मुझे वापस किचन में अपने पति के लंड के नीचे पटक दिया..फिर चल पड़ा एक धुंआधार काका-काकी की लड़ाई..जिसमें हम दोनों पति-पत्नी सुरीली कामुक धुनें बिखेरते मजे ले रहे थे..मेरी तन की गर्मी झरने की तरह बहती हुई नीचे आ रही थी..

पर साथ ही ये भी जानती थी कि झरना नीचे आ और खूबसूरत तरीके से उग्र हो जाती है,वही हालत मेरी भी होगी अब कि और चाहिए लंड…

काफी देर तक सुबह की ताकत से मेरी चूत बजाने के बाद श्याम मेरे कंधों पर दांत गड़ाते हुए दबी आवाज में चीखने लगे, जिसे मैं सह नहीं पाई और अपने तेज नाखून से उनकी पीठ छलनी करती रोती हुई झड़ने लगी..पर हम दोनों को इस स्खलन में दर्द कहीं भी नजर नहीं आई..बस एक अलग दुनिया में खोई रही..

झड़ने के पश्चात ही हम दोनों एक-दूसरे से लिपटे ही धम्म से नीचे बैठ गए..करीब 5 मिनट तक यूं ही बैठे रहने के बाद श्याम मेरे होंठों पर किस दिए और बोले,”शुक्रिया जानू, अब उठो, जब तक मैं फ्रेश होता हूँ तुम नाश्ता तैयार कर दो.”

मैं मुस्काती हुई कैप्री पहनती हुई बोली,”मस्त चीज खा ही लिए, अब नाश्ता नहीं बनेगा..”मेरी बात को सुनते ही मेरे गालों को चूमे और हंसते हुए बाथरूम की तरफ चल दिए..पीछे मैं भी कपड़े पहन किचन के ही बेशिन में हाथ मुँह धोई और नाश्ता तैयार करने लगी..

नाश्ता करने के बाद श्याम ऑफिस चले गए..पूजा भी कॉलेज के लिए निकल गई..

मैं भी स्नान आदि से सम्पन्न हो आराम करने चली गई..बेड पर अभी लेटी ही थी कि मेरी फोन बजने लगी..

मैंने बेड के एक कोने में पड़ी फोन लेते हुए स्क्रीन पर नजर डाली कि कौन हैं इस वक्त याद करने वाले?

नागेश्वर अंकल का फोन था..मैं फिर से बेड पर लेटी और होंठो पर हल्की मुस्कान लाते हुए फोन रिसीव की..

“प्रणाम अंकल,आज गलती से कैसे नम्बर इधर आ गई..” मैंने शिकायत भरी लब्जों में पूछी..

“प्रणाम मोहतर्मा, फोन गलती से नहीं बल्कि पूरे होशोहवास में किया हूँ..समझी..”अंकल रौब के साथ अपनी सफाई देते हुए हंस पड़े..

मैं भी खुद पर काबू नहीं रख सकी और हंसते हुए बात को आगे बढ़ाई,”अच्छा, फिर तो जरूर फुर्सत में लग रहे हैं.”

“हाँ,बस दो दिन और..आज वोटिंग हो रही है और परसों रिजल्ट..फिर तो फुर्सत ही फुर्सत..”अंकल अपने आने वाले दिनों के बारे में छोटी सी नमूना आगे रख दिए..

“मतलब जीतने के बाद घोड़े बेच के सोने का इरादा है क्या?”मैं थोड़ी सी मजाकिया लहजे में चुटकी ली..

“मैं वैसा नहीं हूँ मैडम, अगर होता तो जनता हमें मुखिया पद में हैट्रिक नहीं लगाने देती..अब विधायक में तो और काम करने का मूड है..बस आप साथ देती रहना..”अंकल अपनी इमानदारी और कर्मनिष्ठ का परिचय देते बोले..साथ में बड़ी ही सफाई से बातचीत की ट्रैक को चेंज कर दिए..

मैं उनकी इस अदा पर हँसती हुई बोली,”मैं,…विधायक बनने के बाद आप तो खुद पावर में रहेंगे तो भला मैं क्या साथ दूंगी..”

“हाँ पर उस पावर को लागू करने में हमारी जो एनर्जी खर्च होगी तो उसे रिचार्ज तो तुम्हें ही करनी होगी ना..”अंकल सीधे मुँह तो नहीं पर द्विअर्थी शब्दों में कह डाले जिसे मैं क्या सब समझ जाए..

“मिलने तो ढ़ंग से आते नहीं फिर रिचार्ज कैसे होंगे?”मैं हल्की आवाजों में शिकायत की मानों पड़ोसी ना सुन ले कहीं..

“ओह मेरी जान, अब नहीं होगी ऐसी गलती..बस दो दिन की बात है..वैसे जीतने के बाद मैं भी पटना में ही रहूँगा.” अंकल गलती स्वीकारते हुए बोले..

“सच में..”मैं उनके पटना रहने वाली बात सुन चहकती सी बोली..

“शत-प्रतिशत सच मेरी जान..”अंकल अपनी बात को पूरे विश्वसनीय करते हुए बोले..

मैं उन्हें पटना रहने की बात सुन भविष्य में होनी वाली अंकल से हर वक्त मुलाकात की दुनिया में खो गई..कैसे जब मन होगी तब मैं चली जाउंगी मिलने और अंकल की इच्छा हुई तो वे आ जाएंगे..

“हैल्लो साहिबा, कहां खो गई आप..”अंकल मेरी तरफ से कोई जवाब ना पाकर बोले..

मैं उनकी बात से झेंपती हुई मुस्कुराते हुए बोली,”कुछ नहीं अंकल.”

“अच्छा, काफी बातचीत हो चुकी है, अब जल्दी से एक चुम्मा दे दो..”अंकल इस बात को खत्म कर नई बातें शुरू कर दी..

मैं अंकल की अचानक सी कही बात पर चौंक सी गई..फिर हँसते हुए बोली,”यहाँ से…?”

“हाँ, क्यों फोन पर श्याम को कभी नहीं दी क्या..अब बहाने मत बनाओ और जल्दी से दो..अभी घर पर ही हूँ तो ज्यादा देर बात करना ठीक नहीं होगा..”

मैं अंकल की बात और उनकी हालात समझ हल्की सी हँसी और फोन को अपने होंठो से सटाती हुई एक चुम्मी दे दी,”मुअअआआआह..”

“मिली ?”किस देने के बाद शर्माते हुए पूछी..

“क्या, तुम दे दी..उफ्फ..कितनी धीमी देती हो..कुछ सुनाई नहीं दिया..फिर से दो..”अंकल बिल्कुल ही नकारते हुए बोल पड़े..

मैं तो अंदर ही अंदर गुस्से से भर गई पर क्या कहती..

ठीक पहले वाली तरीके से पर ज्यादा जोर से एक और किस दे दी और बोली,”अब आप भी दो एक..”

जल्दी से मैं भी मांग ली ताकि फिर ना कहें कि नहीं मिली..मेरी किस मिलते ही आहें भरते हुए बोले,”आहह मेरी रानी..कितनी गरम थी किस..”

और उन्होंने फिर एक के बाद एक कई किस देते हुए बोलने लगे,” ये होंठों पर, ये गालों पर…ये गर्दन पर…ये चुची पर…ये पेट पर…ये नाभि पर…

उनकी किस के क्रम को जल्द ही भांप गई और बीच में रोकती हुई बोली,” बस,..बस.. अंकल..एक किस कब की हो चुकी.”और हँस पड़ी जिससे अंकल भी हँस पड़े..

फिर हम दोनों बॉय कर फोन रख दिए..इस फोन के दौरान हुई किस से ही मेरी चूत पानी छोड़ने लगी थी..

मैंने जल्दी से साड़ी उतार फेंकी और चूत में एक साथ तीन उंगली घसेड़ दी..मुंह से एक आह निकल गई..

फिर तेज तेज चूत को चोदने की कोशिश करने लगी..

मैं काफी देर तक उंगली चलाती रही पर मेरी चूत झड़ने का नाम ही नहीं ले रही थी..इसे तो अब लण्ड की आदत पड़ गई थी..

अगर लंड को मेरी चूत स्पर्श भी कर लेती तो शायद झड़ जाती पर क्या करती..इस वक्त कहां से लाती लंड..पूजा के आने में भी अभी 3 घंटे बाकी थी..

तो क्या तब तक मैं तड़पूं..ये कुत्ते अंकल बेवजह हमें फंसा दिए..कितनी आराम से सोने वाली थी..

तभी मेरे दिमाग में एक आइडिया कौंधी..गांव में हमारी भाभी एक बार बहुत ही सुंदर और बड़ी सी ककड़ी हमें दिखाती हुई बोली थी,” सीतीजी, ये चाहिए क्या?”

मैं तो समझी कि भाभी शायद खाने के लिए दे रही है..जैसे ही मैं लेने के लिए बढ़ी तो भाभी पीछे हटती बोली,”खाने के लिए नहीं दूँगी..”

मैं चौंकती हुई अपनी भौंहे खड़ी करती प्रश्नवाचक मुद्रा में देखने लगी..तो भाभी बड़ी ही बेशर्मी के साथ ककडी को अपनी चूत पर सटाई और बोली,”यहां डालने के लिए लीजीएगा तो बोलो..”

मैं चूत लंड जानती थी पर कभी कुछ की नहीं थी.. और भाभी की ऐसी बातें सुन मैं शर्म से लाल हो गई और गुस्से में “कमीनी” कहती भाग गई थी..पीछे भाभी जोर-2 से हंसने लगी..

मैं तेजी से उठी और किचन की तरफ भागी..सामने टोकरी में पड़ी ककड़ी जैसे ही दिखी मैं उठाई और एक ही झटके में अंदर कर ली..

फिर बेडरूम में ककड़ी डाले आई और बैठते हुए ककड़ी से चुदने लगी..कुछेक देर तक चलाने के बाद मेरी हाथ ऐंठने लगी..उफ्फ..अब ये कौन सी मुसीबत है..

मैं जल्द से जल्द झड़ना चाहती थी..हाथ में दर्द के बावजूद ककड़ी धकेलने लगी..पर जिस चूत की खुजली लंड से ही बुझती हो उसे ककड़ी से कैसे शांत करती..

मैं अब रोती हुई चीखती जा रही थी..अपनी ही चूत से रहम की भीख मांग रही थी कि मुझ पर तरस खाओ प्लीज…

पर ये कमीनी लंड की जिद किए जा रही थी..काफी देर बाद मेरी हालत देख थोड़ी सी रहम कर दी..

और मैं चीख पड़ी.. चूत अपनी सिर्फ छोटी नल खोली..मतलब झड़ तो रही थी पर खुजली नहीं मिटी थी..मैं सोची ककड़ी और डालती हूँ संतुष्ट भी हो जाऊं..

पर शाली चूत तो लॉक कर रखी थी बड़ी नल..बस धीमी-2 पानी बह रही थी..कुछ देर बाद तो वो पानी भी कम होती नजर आने लगी..

मैं गुस्से से खीझ उठी और ककड़ी को झटके से चूत से निकालती मुंह मेमं लेती जोरों से खच्च करती आधी काट ली..

कटे ककड़ी को धीमी गति से चबाए जा रही थी जो मेरी चूतरस से भींगी थी और सोचे जा रही थी कि अब क्या करूं..

अगर जल्द से जल्द कोई लंड की सूरत नहीं दिखाई तो से कमीनी हमें तड़पा-2 के जान लेगी..वो तो शुक्र है कि थोड़ी सी रहम कर दी..

झड़ तो गई थी पर खुजली कैसे मिटाऊँ…??

कुछ देर तक यूँ ही बैठी रहने के बाद भी समझ नहीं आई कि क्या करूँ इस चूत की? फिर उठी और कपड़े पहने…

कपड़े पहनने के बाद हल्की मेकअप जल्दी वाली की..बालों को केवल झाड़ी ताकि सीधी रहे बाल..फिर चेहरे पर क्रीम लगाने के बाद होंठो पर गहरी लाल रंग की लिपिस्टिक लगाई..आँखों में हल्की काजल तो थी ही..

फिर घर से निकल गेट लॉक की और चल पड़ी सड़को पर..मंजिल तो अभी तक सोची नहीं थी..बस चली जा रही थी..

इधर मेरी चूत भी घंटी बजानी शुरू कर चुकी थी कि जल्द से जल्द कोई लंड दिखाओ..मैं अब मेन रोड तक आ साइड में खड़ी सोचने लगी..काश ऑटो वाला आ जाए या सन्नी..

ऑटो वाले का नं0 तो जानती भी नहीं तो कैसे बुलाऊं..फिर सन्नी को फोन करने की सोची..ओह गॉड..मोबाइल तो ली ही नहीं..इस चूत ने तो सब कुछ गड़बड़ किए जा रही है..

इस दौरान कई ऑटो आई और चलने की बात पूछी, पर मैं सबको ना कह दी..कहीं जाने की तो थी नहीं, बस लंड को ढ़ूँढ़ने आई हूँ..जो एक बार ऊपर से ही सही पर स्पर्श करा दे..

अब मैं वापस घर फोन के लिए लौटने के सिवाए कोई रास्ता नहीं सूझ रही थी..मैं वापसी के कदम बढ़ाने ही वाली थी कि सामने से आदमी से कचाकच भरी नगर बस आती दिखाई दी..बस के गेट पर करीब 5-7 आदमी थे तो अंदर कितने होंगे..

फिर जितने आदमी, उतने लण्ड…मेरी शरीर में झरझुर्री दौड़ गई..मैं वहीं खड़ी बस को आती देख रही थी, और उस बस में मुझे सिर्फ लंड ही नजर आ रही थी..तभी बस ठीक मेरे सामने आ रूकी..

“स्टेशनऽ…गाँधी मैदानऽ…” और ढ़ेर सारे जगह के नाम बोलता बस का उपचालक चिल्लाने लगा..मैं सरसरी नजर से बस के अंदर झांकी, जिसमें एक-दो लेडिज आगे केबिन में बैठी थी और एक-दो पीछे बैठी थी…बाकी सब मर्द भरे थे..

बस के रूकते हीदो आदमी उतरे..तभी वो खलासी मेरी तरफ देख बोला,”आइए मैडम, आगे सीट खाली होगी तो बैठ जाना..ऽ”मैं उसकी बात सुन जैसे ही पहली कदम बढ़ाई कि उसने मेरी बाँह पकड़ अपनी तरफ खींच लिया…

शुक्र थी कि मेरे पांव तेजी से बस पर चढ़ गए वर्ना गिर ही जाती..फिर वो मुझे अंदर की तरफ करते हुए मेरी बगलों से हाथ घुसा आगे वाले को जगह देने कहने लगा..जिससे उसके हाथ पूरी तरह मेरी चुची को दबा रही थी..

चंद घड़ी में ही थोड़ी सी जगह बन गई तो वो उसने हाथ पीछे खींचने लगा और अंत तक आते-2 अपनी चुटकी से मेरी निप्पल को मसल तेजी से हाथ खींच लिया…मैं चीख को किसी तरह अंदर दबा दी पर आह नहीं रोक पाई..

मेरी आहह कुछ तेज थी जिसे वहां पर खड़े सभी पैसेंजर सुन के मुस्कुराने लगे..और सभी की नजर मेरी तरफ दौड़ गई..मैं झेंपती हुई सिर नीचे की और आगे बढ़ने के लिए पैर आगे की..उफ्फ..अभी तो इतनी जगह थी और अभी मेरे पैर रखने की भी जगह नहीं है..मैं थोड़ी सी बेशर्म बनने की सोच ली कि अब जब लंड खोजने निकली तो शर्म क्यों..

मैं एक नजर सामने खड़े लोगों पर डाली तो दो साँवले एक-दूसरे की तरफ मुँह किए घूरे जा रहा था , फिर उनके आगे भी दो काले लोग इसी मुद्रा में थे..उनका लंड आपस में टच कर रहा था..मुझे इसी होकर आगे बढ़नी थी..

मैं सीधी तो किसी कीमत पर नहीं जा सकती थी इस बीच से..तभी बस हल्की धीमी हुई और एक जवान लड़का तेजी से घुसा और उसने मेरी गांड़ पर जोरदार धक्का दे दिया..ओहहह गॉड..मैं आगे दोनों मर्दों के बीच झुक गई..

इसी मौके का फायदा उठा दोनों मर्द अपने हाथ से मेरी चुची पकड़ मुझे उठाने के बहाने रगड़ने लगे..पीछे वो लड़का अभी भी लंड मेरी गांड़ पर जमाए ही था..मैं सीधी होती हुई पीछे मुड़ी तो वो लड़का एक शब्द “सॉरी” बोला और फिर अपने फोन कान में लगा लिया..भीड़ ज्यादा थी तो मैं उसे हटने भी नहीं बोल सकती थी..

“ओऽ मैडम..आगे बढ़िए ना..आगे कितनी जगह है और आप यहां जाम कर रखे हैं..” पीछे से उस खलासी की आवाज पूरे बस में गूँज उठी..तत्पश्चात सभी लंडों की नजर एक बार फिर मेरी तरफ गड़ गई..

मैं नजरे नीची की और तिरछी होती उन दोनों मर्दों के बीच घुस गई..ओहहहह…मैं जैसे ही उन दोनों के ठीक बीच पहुँची कि दोनों और जोर से चिपका गए..मैं कसमसा सी गई..नीचे उनका लण्ड फनफनाता हुआ खड़ा हुआ और मेरी चूत-गांड़ पर ठोकरें मारने लगा…

मेरी चूत पलक झपकते ही रोनी शुरू कर दी, आखिर उसे अपना यार जो काफी देर बाद मिला था..मैं कुछ ही पलों में पसीने से भींग गई..तभी पीछे वाला लड़का आया और अपना लंड सीधा मेरी कमर चिपकाते हुए बोला,”भाभीजी, और आगे बढ़िए..”

उसकी बात सुनते ही दोनों उस लड़के की तरफ ऐसे घूरने लगे मानों उसने बम फोड़ दिया हो..मैं आगे की तरफ की तरफ देखी तो आगे दो मर्द दोनों बगल से, जबकि एक थोड़ी तिरछी मेरी तरफ खड़ा था..और जगह भी इतनी सी ही थी..

सोची थोड़ी इसके भी लंड को अनुभव कर लूँ..मैं इस जकड़न से छूट अगली लंड
की कैद की तरफ बढ़ी..मगर दोनों मर्द तो चुम्बक की तरह चिपके थे..उनका लंड पूरी तरह मेरी साड़ी के ऊपर से ही पर धंसी हुई थी…मैंने पूरी ताकत लगा दी निकलने में तब जाकर निकल पाई..

और निकलते ही मैं अगली कैद में फंस गई…ये तो और बेशर्मी से पेश आ रहा था..मैंने आस पास नजर दौड़ाई तो सब अपनेआप में मशगूल था…जिसके सामने थाली मिली वो खाना शुरू., दूसरे से मतलब नहीं…पर हाँ कुछ अपनी नजरों से जरूर मजे ले रहे थे…

इसी बात का फायदा उठा सामने वाला अपना मुँह ठीक मेरे माथे के पास ले आया, जबकि पीछे वाला मेरी गर्दन पर झुक गया और दोनों तेज-2 साँसे छोड़ने लगा…तभी तिरछा वाला आदमी सीधा हुआ और अपना लंड मेरी कमर पर ठोकता हुआ बोला,”आगे और जगह नहीं है, आप यहीं पर रहो..”जिसे सुन बाकी दोनों मर्द मुस्कुरा दिया..

तभी मेरी छाती पर जोर से फूँक पड़ी..मैं चौंकती हुई नीची देखी तो ओह गॉडडडड..मेरी पल्लू तो थी ही नहीं…और ब्लॉउज में कैद बड़ी सी चुची पसीने से लथपथ उसके सीने से दबी जा रही थी…मैंने तुरंत ही पल्लू का पीछा की…

पर तब तक वो लड़का आ धमका और मेरी खाली दूसरी कमर पर भी अपना कठोर लिंग गाड़ दिया..और पल्लू उसकी बगल से गुजरती हुई दिख रही थी..मैंने एक हाथ से खींचने की कोशिश की पर नहीं आई…

“मैडम, अब वो तभी आपके पास आएगा जब आप नीचे उतरिएगा..कोई कमीना पैर से दबाए होगा..आप निश्चिंत हो सफर का मजा लीजिए.” पीछे वाला आदमी मेरे कानों में बोला और अंत में अपनी जीभ मेरी कानों के नीचे फेर दिया..

मैं कांप सी गई इस छोटी सी चुसाई से और मेरे कांपते होंठो से इसससस निकल पड़ी..जिसे मेरे तरफ के चारों मर्द सुने और मुस्कुराते हुए और जोरों से कस दिए मुझे…मेरी हड्डियां तो लग रही थी मानों अब टूट जाएगी..

अचानक से दो हाथ नीचे से मेरी चुची पर जम गए..मेरी आँखें मदहोशी में बंद की कगार पर थी पर किसी तरह देखी तो ये हाथ उस लड़के और तिरछे वाले मर्द के थे…मैं कुछ बोलनी चाही कि तभी वो मेरी चुची मसलनी शुरू कर दी..

मैं जो भी कहना चाहती थी वो अगले ही पल मेरी आहहह में तब्दील हो बाहर निकल गई.. और मेरी आँखों के सामने अँधेरा छा गई…मैं आँखें बंद किए इस चतुर्मुखी लंड और द्विमुखी चुची-मर्दन के मजे लेने लगी…

पीछे वाला तो बीच बीच में अपनी जीभ भी फेर रहा था…तभी खट्ट की आवाज आई..मैं तुरंत आँखें खोली तो देखी आगे वाला आदमी अपना हाथ नीचे कर रहा था…मेरी नजर उसके हाथ से हटी तो ये क्या? मेरी चार बटन की ब्लाउज अब दो बटन की हो गई थी..और मेरी आधी चुची बाहर छलक गई…

आज ब्रॉ भी नहीं पहनी थी…आगे वाले मर्द की तरफ देखी तो वो बड़े ही बेशर्मी से अपने होंठ पर जीभ फिरा रहा था..तभी मेरी निप्पल को उस लड़के ने जोर से उमेठ दिया..मेरी चीख निकलते-2 बची पर चूत को नहीं बचा पाई…

मेरी चूत से झरने गिरने लगी..शुक्र है पेन्टी रानी की वरना पूरी बस में पानी फैल जाती…और मैं हल्की सिसकारी लेती आगे वाले के सीने पर लद गई…पीछे वाला मेरी हालत पर बोला,”लगता है शाली का सिग्नल गिर गया..” जिसे सुन चारों हँस पड़े..

झड़ने के बाद जब थोड़ी होश आई तो मैं सीधी हुई और अपनी दोनों चुची पर से हाथ हटाते हुए निकलने की कोशिश की..अब जब काम पूरी हो गई तो भला रूकने से क्या फायदा…मैं जोर लगाई निकलने की पर नहीं निकल पाई…

“चलो ना रूम पर, 2000 दूँगा..”आगे वाला आदमी मेरे होंठो के पास अपना होंठ लगभग सटाते हुए बोला…अब मेरी हालत सच में खराब होने लगी थी..खुद पर काफी गुस्सा भी कर रही थी और पछता भी रही थी कि काश घर पर ही थोड़ी सब्र कर लेती..

ये सब तो मुझे रंडी समझ बैठे..वैसे गलती इनमें नहीं, मुझमें थी..कैसे इनके लंड के मजे ले रही थी तब से…अब झड़ गई तो सोचने लगी कि गलत हो रही है मेरे साथ…पर अब खुद को शरीफ कहती तो और इज्जत जाती मेरी इन पब्लिक बस में…क्योंकि इस मैं लग भी रही थी रंडी की तरह…

मैं सोच में पड़ गई कि क्या करूँ? तभी एक युक्ति सूझी…मैंने जोर की साँसें ली और चिल्लाते हुए बोली,”कंडक्टर साब, बस रोकिए” मेरी तेज आवाज बस से बाहर तक गूँज पड़ी..जिसे सुनते ही चारों मर्द पीछे की तरफ हो गए…

बस इतनी वक्त काफी थी मेरे लिए..अगले ही पल बस रूक गई थी…मैं फुर्ती दिखाती हुई अपने पल्लू समेटते गेट की तरफ लपकी…और फिर मैं बस से बाहर खड़ी थी…मेरे उतरते ही बस चल पड़ी आगे की ओर..

मैं सोचने लगी कि पैसे क्यों नहीं मांगे इसने…तभी बस से वो कंडक्टर फ्लाइंग किस मेरी ओर उछाल रहा था..मैं उसे देख अपनी हँसी रोक नहीं पाई..

अब मैं नजर घुमा देखी कि इस वक्त कहाँ हूँ..सामने बड़ी सी हरी भरी मैदान दिखी जिसके बीच में एक स्टैचू थी और वो मैदान चारों तरफ से लम्बे वृक्षों से घिरी थी..साथ में लोहे की छोटी चारदीवारी भी थी सभी ओर…

मतलब मैं गाँधी मैदान आ गई थी…आज पहली बार यहाँ आई हूँ तो थोड़ी घूमने की सोची अंदर जा कर…करीब 12 – 12:30 बज रहे होंगे अभी तभी तो पूरा मैदान खाली पड़ा था..पर उससे हमें क्या? पूजा भी 2 बजे के बाद ही आएगी..अगर पहले आ गई तो रहेगी अकेली बोर होती…

तभी मुझे अपनी भींगी चूत की तरफ ध्यान गई जिससे मुझे फ्रेश होने की जरूरत और बढ़ गई..सामने कहीं शौचालय नजर नहीं आ रही थी..सोची आगे बढ़ के देखती हूँ और मेरे पांव चल दिए…

सड़कों पर सभी आने-जाने वाले की आँखें मुझे ही घूर रही थी..पसीने से लथपथ शरीर, ब्लाउज के ऊपरी दो बटन टूटी जिसे अपने पल्लू से ढ़ंकने की कोशिश..आँखें पूरी चुदासी सी लग रही थी…मैं सूरज की खड़ी धूप के नीचे बढ़ी जा रही थी..

तभी मेरी नजरें मैदान के अंदर हमसे कुछ ही दूरी पर एक कुतिया अपने कुत्ते का लंड फंसा रखी थी; चली गई..वहीं पर 4-5 आवारा किस्म के लड़के खड़े हो इसका मजा ले रहा था…मेरी नजर उस कुत्ते के लंड पर चली गई जो चूत के अंदर कैद थी..

“देखऽ ना भऊजी..कइसन हाल कऽ देले बारऽन ईऽ कुतिया केऽ”ये शब्द जैसे ही मेरे कानों में पड़ी, मेरी नजर उठती उस लड़के पर चली गई..सब मुझे ही घूरते हुए हँसे जा रहे थे…मचलब सब मुझे ही कह रहे थे..

मैं मुंह नहीं लगना चाहती थी..चुपचाप एक आखिरी नजर कुत्ते के लऩ्ड पर डाली और तेजी से आगे बढ़ने लगी..तभी मुझे सामने कुछ ही दूरी पर शौचालय दिखी..मैं उस तरफ बढ़ गई..यहां अंदर जाने वाली मेनगेट पर ही रेट-तालिका की बोर्ड टंगी थी..

मेरी तो हंसी निकल सी गई कि इन सब के लिए भी पैसे…वैसे शहर होती ही है इतनी तंग कि मजबूरन ये सब कदम उठाने पड़ते हैं…

गेट के अंदर घुसते ही सामने कुर्सी पर बैठा एक मोटा सा आदमी पेपर पढ़ रहा था..उसके आगे टेबल लगी थी और पूरा शौचालय खाली पड़ा था सिवाए एक साफ सफाई करने वाली औरत को छोड़कर..वो औरत फर्श को पानी से धुल रही थी..

मैं समझ गई कि ये आदमी पैसे लेने के लिए ही बैठा है…मैं पैसे निकालने पर्स ब्लॉउज में ढ़ूढने की कोशिश की…पर अब मेरी होश ही गुम हो गई थी..वैसे मैं छोटी सी पर्स रखती हूँ वो भी हाथ में ही…पर कभी-2 जरूरत होने पर अंदर डाल लेती हूँ..

अंदर से कब पर्स गायब हुई, मालूम नहीं..कहीं गिर गई या बस में कोई खींच लिया जब ये बटन टूटे थे और आँखें मेरी बंद थी..या फिर चढ़ते वक्त ही उस कंडक्टर ने हाथ लगाया था तब…उसी ने लिया होगा तभी तो किराये भी नहीं मांगे…पर अब क्या करूँ..

आसपास तो क्या, यहां किसी को जानती तक नहीं…पर फ्रेश जल्द होना चाहती थी क्योंकि अंदर से अब गर्मी की वजह से घुटन सी हो रही थी और ऊपर कपड़े तो भींगे तो थी ही…मैं खड़ी खड़ी सोची पहले बाथरूम से आ जाती हूँ,फिर देखी जाएगी…

यही सोच मैं बिना कुछ पूछे उस आदमी को क्रॉस करती आगे की तरफ बढ़ी..कि उस आदमी ने रॉबीले तरीके से बरस पड़ा,”ऐ मैडम…उधर कहाँ…सरकारी है क्या जो आई और धड़धड़ती अंदर चली जा रही हो…पहले फीस दो इधर,,फिर जाना…”

उसके तेवर देख मेरी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई..अंदर से अचानक तेज प्रेशर पेशाब की जोर मारने लगी..अब क्या कहती इसे कि पैसे तो गुम हो गए हैं..आप बाद में ले लेना..फिर भी हिम्मत कर एक कोशिश की..

“भाग थोड़ी ही जाऊंगी..जल्दी है इसलिए प्लीज जाने दो अभी..”मैं भी कड़क लहजों में बोलनी चाही पर शायद बोल नहीं पाई…जिसे सुनते ही वो आँखें बड़ी बड़ी किए उठा और मेरे निकट आने लगा..मैं डर सी गई कि पता नहीं क्यों आ रहा है..

“देख, वापसी में भी देनी ही है और अभी भी देनी ही है तो अभी ही क्यों नहीं दे देती…बेकार की क्यों प्रेशर बनवा रही होे..” उसने थोड़ा सा झुक अपना चेहरा मेरे चेहरे के निकट लाते बोला…

कह सही रहा था वो पर उसे क्या पता कि मेरे साथ कैसी प्रॉब्लम है इस वक्त…अब कुछ सूझ नहीं रही थी कि क्या जवाब दूँ…

“दरअसल बस में मेरे पर्स चोरी हो गए हैं जिसमें सारे पैसे थे..अब मेरे पास एक भी पैसे नहीं हैं..पर आप टेंशन मत लो मैं कल सुबह 10 बजे तक आपके पैसे लौटा दूँगी.पर अभी प्लीज जाने दो अंदर…”मैं अब सोच ली कि सच कह देती हूँ, थोड़ी नानुकर के बाद तो मान ही जाएगा..

पर शायद मैं गलत थी..उसने मेरी बाँह पकड़ी और सड़क के उस पार मैदान की तरफ दिखाते हुए बोला,”वो जो कचरा है ना जमा, वहां जा और आराम से सूसू कर…कल वापस इधर नहीं भी आएगी ना तो चलेगा…कोई पैसे नहीं लगते हैं ना वहां…भाग इधर से..” कहता हुआ वो बाहर की तरफ धक्का दे दिया…

मैं बाहर की तरफ हल्की सी दौड़ पड़ी ताकि गिरूं नहीं…और अपनी इस तरह की बेइज्जती देख रूआँसी सी हो गई…आँखों से अब लगती कि आँसूं छलक पड़ेगी…काफी घृणा हो रही थी खुद पर कि सब मुसीबत की जड़ तो मौैं खुद ही हूँ…

अब क्या करती..वापस फिर लटके हुए चेहरे ले अंदर घुसी और रिक्वेस्ट करने लगी..तभी वो जोर से चिल्लाया,”विमला, इधर आ..इस शाली की दिमाग मे मेरी बात नहीं जा रही है..समझा के बाहर का रास्ता दिखा नहीं तो….”

मैं उसकी चिल्लाहट सुन घबरा सी गई..मन ही मन कोई और जगह चलने की सोच ली थी..तब तक वो सफाई वाली औरत विमला आई और मुझे बाहर कर बोली,”इतना बुरा नहीं है मेरे साब पर वो क्या है कि धंधे के टाइम, कोई हमदर्दी नहीं..वही बात है…तू यहीं रूक, मैं कहती हूँ..”

मैं नम आँखों से हाँ में सिर हिला दी और इस विमला के वापस आने का इंतजार करने लगी..

कुछ ही पलों बाद विमला वापस आई और बोली,”आ जा अंदर..” मैं खुशी से फूला नहीं समाई और तेज कदम से अंदर घुस गई…

“ऐ…उधर कोने वाली में जा और हाँ पानी लेती जाना..उसका नल खराब है आज..”पीछे से वो आदमी चिल्लाते हुए बोला..मैं आगे बढ़ते हुए उसकी बात सुनी और कोने में बने बाथरूम में पानी की बाल्टी लिए घुस गई…

अंदर घुसते ही बाल्टी पटकी और धम्म से साड़ी उठा पेशाब करने बैठ गई..मेरी चूत हेलीकॉप्टर माफिक तेज साउण्ड करती पानी की नदी बहाने लगी..मेरे होंठ से रिलेक्स की आँहें निकल पड़ी..ढ़ेर सारी पानी बाहर करने के बाद मैंने कपड़े सारे खोल अच्छी से चूत साफ की और जांघ पर लगे पानी भी साफ की..

फिर सारे कपड़े पहनी और बाहर निकल गई..मुझे बाहर देख वो आदमी वहीं से गुर्राते हुए बोला,”ऐ, पानी मारी कि नहीं अच्छी से…रूक वहीं मैं आ रहा हूँ देखने..एक तो फोकट का उपयोग करने दो, दूसरी ढ़ंग से पानी भी नहीं मारेगा” इसी तरह भनभनाता वो उठा और मेरे निकट आ गया..

मेरी तरफ घूरा ,फिर बाथरूम में झाँका…तभी वो मेरी तरफ मुड़ते हुए बोला,”ऐ…ये क्या है??…”मैं सोच में पड़ गई कि क्या है वो जो वो बता रहा है…बस यही सोचती उसके बगल में से अंदर झाँकने लगी..पर कुछ नहीं था..मैं आश्चर्य से उसकी तरफ देखी तो बड़ी बड़ी आँखों से मेरी तरफ ही देखे जा रहा था…

अचानक से वो मेरी बाँह पकड़ा और अंदर करते हुए मुझे बाँहों में जकड़ लिया…मैं तो डर से थरथर कांपने लगी कि अब मैं तो गई…बड़ी शौक थी ना चूत मरवाने की ना…अब भुगत….

तभी उसने मेरे बाल पकड़े और नीचे खींचते हुए मेरे चेहरे को ऊपर करते हुए बोला,”देख शाली, मैं रंडी कभी नहीं चोदता हूँ…पर तेरी फिगर देख मैं खुद को रोक नहीं पाया और सोचा साथ में पैसे भी वसूल कर लूँ…अब चुपचाप मेरे लंड को शांत कर और हाँ…खबरदार जो अपनी बुर में डालने की कोशिश की तो…समझी….”

मैं उसके इस बर्ताव से तुरंत ही हामी भर दी क्योंकि मेरी चूत जो बच गई थी…अगर वो चोदने की कहता तो शायद कुछ जबरदस्ती भी करता..पर हां सुनते ही मेरे बाल को छोड़ मेरे कंधे पर जोर दे दिया…

जिससे मैं अपने घुटने पर उसके उसके लंड के सामने बैठी थी…फिर वो तेजी से अपना जिप खोला और काला नाग को बाहरमेरे होंठ के सामने कर दिया…उफ्फ…पेशाब की बू आ रही थी उसके लंड से..और काफी गंदा भी था…

अचानक से उसने लंड को पकड़ा और मेरे होंठो पर सटा अंदर करने की कोशिश करने लगा…मैं चाहती तो नहीं थी पर मेरे होंठ अनायास ही खुल गए…होंठ के खुलते ही बदबूदार और काला लंड मेरी गुलाबी होंठ को चीरती अंदर धँस गई..

मैं अपनी नाक-भौं सिकुराने लगी थी..तभी वो मेरे बाल को पकड़ मेरे सिर को कसते हुए स्थिर किया और दनादन करते हुए धक्के लगाने लगा…मैं तो चौंक सी गई कि ये क्या?इसने तो मेरी मुँह चूत समझ चोदना चालू कर दिया…

पर वो तो ताबड़तोड़ अपने लंड को मेरे गले में उतारे जा रहा था..वो तो समझ रहा था कि मुझे इन सब की तो आदत है…मैं गूं गूं करती हुई बैठी अंदर बाहर करती लंड को देखे जा रही थी..अंदर ही अंदर उबकाई हो रही थी…

इधर मेरी चूत एक बार और पानी छोड़ने लगी थी…मै एक हाथ चूत पर ले जाकर रगड़ने लगी और दुसरे हाथ जमीं पर रख अपनी मुँह चुदवाए जा रही थी…

अचानक से उसने कस के धक्के लगाने शुरू कर दिए और भद्दी गाली बके जा रहा था ..और फिर वो अपना अंतिम शॉट मेरे गले में उतारते हुए चीखने लगा…मैं हक्की बक्की सी छूटने की कोशिश कर रही थी पर….

वो अपने लंड का एक एक कतरा मेरे पेट तक पहुँचा कर ही छोड़ना चाहता था…उसके लंड से गर्म-2 पानी मेरे गले में उतर रही थी..ऊपर गर्म पानी की गरमी से मेरी चूत कुनबुनाई और वो भी नीचे फर्श को भिंगोने लगी…

जब वो पूरी तरह झड़ गया तो अपना लण्ड बाहर खींच लिया..झड़ने के बाद वो सिकुड़ गई थी..मैं अपने मुंह में आज मिली इस सौगात को अंदर करती खड़ी हुई…

“ये नीचे देख…क्या है?” उसने नीचे फर्श की तरफ इशारा करते हुए बोला…मैं जब नीचे देखी तो चूतरस को देख वापस उसकी तरफ गुस्से में आँख नचाती हुई देखी…

थैंक्स गॉड…कम से कम उसके होंठो पर हंसी तो आई…वो हँसता हुआ बाहर चला गया…पीछे मैं भी हंसती हुई पानी से भरी बाल्टी बाथरूम में उड़ेल दी…

फिर कपड़े ढ़ंग से ठीक की और बाहर निकल गई…

घर से बाहर आज पहली बार किसी अन्जाने का लंड चूसने से मेरे शरीर में एक अलग ही उमंग थी…खुद पर एक वेश्या जैसी सलूक से मैं इस नई मोहजाल में लगभग फंस चुकी थी…काफी आनंदचित्त मुद्रा में बाहर निकल सोचने लगी कि अब घर कैसे जाऊँ…

अगर सच की वेश्या रहती तो इस लंड चुसाई के भी पैसे ले लेती..पर अगर चुप नहीं रहती तो शायद वो बिना चोदे छोड़ता भी नहीं..अच्छी भी लगी थी हमें उसकी भद्दी गाली सुनते…एक अलग ही नशा चढ़ जाती सेक्स की…

वो सब तो ठीक है पर अब घर कैसे जाऊं..क्या करूं…चलो वापस उस मोटे से ही मांगती हूँ..दो- चार और गाली ही देगा ना..सुन लूँगी..नहीं दिया तो लंड चुसाई के एवज में ही मांग लूँगी…तब तो देगा ना…

भला किसी की कमाई कैसे मार सकता है…मैं यही सोच जैसे ही पीछे मुड़ी कि विमला गेट से बाहर निकल मेरे निकट आ धमकी….

मैं कुछ कहती इससे पहले ही उसने मेरे हाथों में एक पाँच सौ नोट थमाते हुए बोली,”नई लगती है इस धंधे में वरना इस तरह पैसे के लिए बाहर रूक कर इंतजार नहीं करती..”

मैं उसकी बात सुनते ही मंद मुस्कान अपने होंठों पर बिखेर हां में सिर हिला दी…मुझे मुस्काते देख उसने मेरे दोनों हाथों को अपने हाथों में लेती हुई धीमे स्वर में बोली…

“देख, तू इधर आ जाया कर रोज…मैं तेरे वास्ते ग्राहक फिट कर के रखूंगी…मैंने और भी कई लड़कियो को यहां से काम दिलवाती हूं..तुझे भी दिलवा दूँगी…समझी ना…कल से आ जाना..”विमला एकसुर में ही बोले जा रही थी..

“और हां कल सुबह ही आना यहीं..फिर तुम्हें सब चीज समझा दूंगी…ठीक है ना…ऐसे सड़क पर ग्राहक नहीं मिलने वाली…सीधी घर चली जा..”विमला मुझे अपनी टिप्स देती हुई विदा कर दी…

मैं मन ही मन हँसती हां में सिर हिलाई…तभी सामने आती ऑटो को रोकती मैं उसमेम बैठ गई…कोई आधे घंटे बाद मैं अपनी गली के मेन रोड पर खड़ी थी…

मैं अभी कुछ ही दूर बढ़ी थी कि पीछे से एक ऑटो आ रूकी…मैं नजर घुमाई तो ऑटोवाले को देखते ही मैं मुस्कुराते हुए ऑटो में घुस गई…

आज ये कुछ अलग जैसी ऑटो चला रहा था…एकदम धीमी धीमी…मानो किसी की मैय्यत में जा रहा हो…फिर मैं सोचने लगी कि ऐसा क्यों?

अचानक से मेरी नजर मिरर पर गई जिसमें अधढ़ँकी चुची बाहर निकलने को आतुर हो रही थी..दो बटन तो थे ही नहीं, तीसरी भी आधी टूट गई थी…अगर ठीक से सीधी होती तो वो भी टूट जाती…

वो मिरर में ही आँखें गड़ाए हुए था तो ऑटो खाक चलाता..मैं पल्लू से पूरी ढ़ँकने की सोची पर इरादे बदल दिए..फिर आगे की तरफ हल्की झुकती उससे बोली,”ऐ..कुछ देर आगे भी देख लो…कहीं ऐसा ना हो कि पीछे देखने के कारण आगे किसी से भिड़ जाओ…”

मेरी बात सुनते ही वो सकपका सा गया..फिर गौर किया तो पाया मैं उसकी इस हरकत से नाराज तनिक नहीं हूँ..वो अपने चेहरे पर हँसी लाते हुए पीछे मेरी तरफ पलटा…

“मेम साब,, आप इस वक्त इतनी कातिल लग रही हो कि मैं अपना ड्राइवरी करना भूल गया…कसम से किसी फिल्मी हिरोइन से कम नहीं लग रही हो.” वो अपने दां दिखाते हुए तारीफ करने लगा…

मैं उसकी बात सुन हँसती हुई बोली,”अच्छा -2 ठीक है…फिलहाल तो हमें जल्दी से घर पहुँचा दो वरना ये बंद कर ली तो देखने से रहे..”

“नहीं नहीं मेमसाब…मैं अभी पहुँचाए दिए देता हूँ…पता नहीं फिर कभी दर्शन नसीब में है भी या नहीं.” वो आगे मुड़ते ऑटो थोड़ी तेजी से चलाते हुए बोला..मैं अपनी बाहर आती चुची को थोड़ी और साड़ी से बाहर लाती हुई बोली..

“जैसे आज हो गए वैसे ही फिर कभी हो जाएंगे. बस थोड़े सब्र की जरूरत है …..वैसे तुम्हारा नाम नहीं पता मुझे…क्या नाम है?”

“केतन नाम है मेमसाब..मेमसाब आप से एक रिक्वेस्ट करूँ..प्लीज मना मत करना…मैं आपका कितना बड़ा दिवाना हूँ आपको यकीन नहीं होगा..”अपना नाम बताने के साथ गुजारिश भी करने लगा पर पता नहीं किसलिए…

मैं हाँ कहती हुई हँसते हुए पूछी कि कैसी रिक्वेस्ट है?अचानक से उसने ऑटो रोक दिया और पीछे पलटते हुए बोला,”मेम साब..मुझे गलत मत समझना…पर क्या करूं…बर्दाश्त नहीं कर पा रहा हूँ..”

मैं सोच में पड़ गई कि आखिर बात क्या है जो इसने ऑटो रोक दिया..और जहाँ पर रूकी थी वहाँ एक बड़ी गोदाम थी, जबकि दूसरी तरफ एक बड़ी सी बिल्डिंग बन रही थी..मतलब एक छोटी सी विरान जगह थी…

मैंने फिर से पूछी,”अब बोलोगे भी या बस ऐसे ही घुमाते रहोगे..?” डर तो अब होने वाली थी नहीं जो डरती…और खास कर उससे जिसे मैं खुद देखने की आजादी दे रही हूँ..

“मेमसाब, बस एक बार ये निप्पल दिखा दो..प्लीज मना मत करना..मैं सिर्फ देखूंगा..”उसने अपनी आँखें मेरी चुची की ओर करते हुए तेजी से बोल पड़ा..

मैं तो जानती थी कि कुछ इस तरह की ही बात होगी पर इस तरह यहां सड़को पर ऐसी रिक्वेस्ट की उम्मीद नहीं थी..मैं मना तो नहीं की कि नहीं दिखाऊंगी…वैसे भी कुछ देर पहले बस में मसलवा आई थी…

“पागल हो…यहां बीच सड़क पर वो भी इस खुली ऑटो में..” मैं राजी तो थी दिखाने की पर यहां मेरी गली की खुली सड़को पर…वो भी दिन में…साफ मना कर दी..

“प्लीज मेमसाब, अभी कुछ देर तक कोई नहीं यहां तक आने वाला है..जल्दी से दिखा दो..ताकि हमें कुछ शांति मिल जाएगी..”केतन गिड़गिड़ाते हुए सड़कों पक दिखाने लगा कि देखो, इस वक्त कोई नहीं आ रहा है…

मैं उसकी बेसब्री देख हंस पड़ी..फिर सड़को पर देखने लगी कि अगर सच में कोई नहीं है तो दिखा दूँगी…वरना बेचारा रात में सो भी नहीं पाएगा..सच में दूर तक कोई नहीं था…

मैं वापस उसकी तरफ सीधी हुई और बोली,”ओके पर सिर्फ एक का…और जल्दी से देखना होगा…अगर नहीं देख पाए तो दुबारा मत कहना क्योंकि मैं दुबारा नहीं दिखाऊंगी..”

मेरी बात सुनते ही वो चहकते हुए सीधे मेरी चुची पर नजर गड़ा दिया और हाँ-2 कह दिया कि मुझे मंजूर है एक का देखना और वो भी एक बार…इस दृश्य के एक पल भी खो ना दे कहीं..इस डर से उसने पलक भी झपकना बंद कर दिया और बगुले की तरह ध्यान लगा दिया….

मैं मुस्काती हुई साड़ी को ऑटो की सीट पर बगल में उतार कर रख दी..केतन की साँसें तो मेरी साड़ी के उतरने के साथ-2 उतरने लगी थी..उसकी आँखों के आगे डेढ़ बटन की ब्लॉउज में बड़ी सी चुची उभर आई…

मैंने उसे बोनस देने के इरादे से चुची को बाहर ना निकाल ब्लॉउज के बचे दो बटन ही खोलनी शुरू कर दी..अब तो उसकी साँसें थम सी गई और उसके मुँह खुल गए…

जैसे ही मेरी दोनों बटन खुली, उसके खुले मुँह से लार टपक कर नीचे गिर गई…मेरी तो हँसी निकल पड़ी…पर वो तो दूसरी दुनिया की सैर कर रहा था…एक बार मैंने फिर से तसल्ली के लिए सड़को पर नजर डाली तो दूर दो छोटे-2 बच्चे आते हुए दिखे…

ज्यादा टेंशन वाली बात नहीं थी..मैं उसकी तरफ देखते हुए ब्लॉउज के दोनों तरफ पकड़ अपनी बांहे फैला दी…इसके साथ दी मेरी लाल हुई चुची पर गहरी भूरी रंग की निप्पल केतन के आँखों के सामने छलक गई….

वो साँस रोक बड़ी बड़ी आँखें किए इस पल का आनंद लेने लगा..तभी मैंने ब्लॉउज को वापस बंद कर लिया..उसका चेहरा लटक सा गया किसी मुरझे हुए लंड की तरह…

पर वो कर भी क्या सकता था..वो मुँह बिचकाते हुए मेरी तरफ देखा…पर कुछ बोला नहीं…मैं जल्दी से बटन लगाई और साड़ी ठीक कर ली…

वापस उस आते हुए बच्चे की तरफ नजर दौड़ाई तो वो कहीं नजर नहीं आया..शायद उधर ही उसका घर होगा..

“मेमसाब, एक बार ऊपर से छूने दो ना…देखा दिखते वक्त सिर्फ देखा ही..”केतन अपनी दूसरी मांग करते हुए अपनी इमानदारी का सबूत याद दिलाने लगा…

“बिल्कुल नहीं…अगली बार अगर मौका मिला तो छू लेना…पर इस तरह सड़क पर नहीं”मैं मुस्कुराती हुई साफ मना करती हुई न्यौता भी दे डाली..

वो इतने में ही खुश होता हुआ सीधा हुआ और ऑटो स्टॉर्ट कर दिया..मैं भी मुस्काती हुई एक नजर मिरर पर डाली तो इस बार मैं कुछ तिरछी लग रही थी…

मैंने खुद को सीधी करती हुई अपनी चुची को मिरर के ठीक सामने कर दी…जिसे देख केतन पीछे मुड़ कर मुस्कुरा दिया जिससे मैं भी मुस्कुरा दी…

“मेमसाब, आज हमारी गली में एक बारात आने वाली है..अगर आपको शादी देखना पसंद है तो शाम 8 बजे तक आ जाना…और शायद मौका भी मिल जाएगा छूने का..”केतन बात को कहते हुए हँस पड़ा..

“नहीं..मुझे कोई निमंत्रण भी नहीं है और किसी को जानती तक नहीं हूं तो कैसे आ सकती..” मैं अंदर से जाना चाहती थी इस मौके के लिए पर पहले जो समस्या थी उसे सामने रख दी…

“अरे मेमसाब..जिनकी बेटी की शादी हो रही है वो कोई बड़ी हस्ती नहीं है..वैसा तो बड़े हस्तियों में ही होता है कि बिना कॉर्ड दिखाए
आप शादी में नहीं जा सकती…इसे बस एक गाँव की शादी समझ आ जाना..आगे मैं हूँ ना, आपकी सेवा के लिए..”केतन एक ही सुर में समस्या का निदान कर डाला…

तब तक मैं अपने घर तक पहुँच गई..मैं ऑटो से उतरती हुई हँसती हुई बोली,”ओके ओके…सब तो ठीक है पर मैं नहीं आने वाली क्योंकि मेरे साहब कभी अनुमति नहीं देंगे..” और मैं उसके जाने का इंतजार करने लगी खड़ी होकर..

वो बोला कुछ नहीं पर मंद मंद मुस्काता हुआ अपनी जीभ से गाल को ऊंची करते हुए देख रहा था..पता नहीं उसके मन में क्या चल रहा था..फिर वो अपनी बांईं आंख दबाते हुए हँसता हुआ आगे बढ़ गया…

मैं भी हँसती हुई अपने रूम की तरफ चल दी और सीढ़ी चढ़ने लगी…पता नहीं आज पूजा कितनी गुस्सा करेगी मुझपर…एक तो बता कर नहीं गई थी…ऊपर से फोन भी नहीं ले गई थी…

गेट अंदर से लॉक थी..पूजा द्वारा पड़ने वाली गाली को ख्याल करते हुए बेल बजाई…दो-तीन बार बजाने के बावजूद भी पूजा नहीं आई…

काफी गुस्से में है शायद…तभी खटाक की आवाज से गेट खुली..सामने पूजा थी..उसकी हालत देख मैं सोचने पर मजबूर हो गई…मेरी हालत तो बस और पब्लिक बाथरूम में ऐसी हुई पर इसकी हालत घर में ही किसी रंडी से भी बदतर लग रही थी..

बदन पर सिर्फ तौलिया लपेटी थी..बाल अस्त व्यस्त..चेहरे पर दातं के कई निशान..मुख पर असीम सुख..उसके हालात बता रही थी कि इसकी दमदार चुदाई हुई है अभी-अभी…वो मुझे देखते ही मुस्कुराती हुई अंदर आने की जगह दे दी…

मेरी हैरान नजर उससे पूछ रही थी कि अंदर कौन है जिसने तेरी ये हालत की है..बंटी की चुदाई तो देखी थी उस दिन पर तुम्हारी ऐसी हालत नहीं हुई थी…

पर वो बिना कुछ बोले मेरे बेडरूम की तरफ इशारा कर दी…शाली अपने यार से चुदवाती है वो भी मेरे बेडरूम में…रूक पहले देखती हूँ कहाँ का साँड़ है जिसने तबीयत से तेरी खबर ली है, फिर तुझे बताती हूँ…

मैं तेजी से अपने बेडरूम की तरफ बढ़ गई..

मैं टिमटिमाती हुई जैसे ही बेडरूम में घुसी, मेरे चेहरे की सारी रंगत ही उड़ गई…मुझे तो अपनी आँखों पर विश्वास ही नहीं हो रही थी..

सामने बेड पर भैया सिर्फ तौलिया लपेटे बैठे सिगरेट के कश लगा रहे थे..(वैधानिक चेतावनी: धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है..) मुझे देखते ही बेड से उतर गए…

और मुस्कुराते हुए मेरे पास आए..फिर एक लंबी कश लेते हुए मेरी आँखों में देखते हुए सारा धुआँ मेरे चेहरे पर छोड़ दिए..मैं धुएँ को बर्दाश्त नहीं कर पाई और मुँह दूसरी तरफ कर खाँसने लगी…

भैया : “क्या हुआ डार्लिंग, ऐसे क्या घूर रही हो…”

भैया के इस तरह के बर्ताव को बिल्कुल भी अंदर नहीं कर पा रही थी..कितने सलीके से पेश आने भैया को पता नहीं क्या हो गया…और आते ही पूजा के साथ….

मैं एकटक उन्हें निहारे ही जा रही थी…आखिर ये सब कैसे?भैया मेरी हालत को पढ़ते हुए कुछ बोलने से पहले अपनी सिगरेट बुझाई और बाहर कचरे के डिब्बे में फेंकने रूम से निकल गए…

मैं बुत बनी वहीं पर खड़ी थी..तभी पूजा अंदर आई मेरे पास आते हुए बोली,”अब समझी कि मेरी ऐसी हालत करने वाला कौन था..भाभी प्लीज बुरा मत मानना..कॉलेज से आई तो आप नहीं थी तो सोची कहीं गई होगी…सो मैं सारे कपड़े खोल कर नंगी आपका इंतजार कर रही थी कि आप जैसे ही आओगे एक राउण्ड कर लूँगी..”

तब तक भैया अंदर आ गए थे..आते ही वो पूजा के बगल में खड़े हो पूजा की बात सुनते हुए मुस्कुरा रहे थे…

“कुछ ही देर बाद आपके भैया बेल बजाई तो मैं समझी आप ही हो तो नंगी ही गेट खोली और बिना कुछ देखे लिपट गई..मुझे 1000 वोल्ट के झटके पड़े पर तब तक देर हो चुकी थी और ये मुझे स्मूच करते हुए आहहह सीता करने लगे…ये भी नहीं देखे कि मैं सीता नहीं, पूजा हूँ..जब किस रूकी तो इनका चेहरा देखने लायक था..गलती तो कर दिए थे आपका नाम लेकर..फिर क्या..आपकी सारी कहानी इन्हें शेयर करनी पड़ी और मुझसे भी आपकी पूरी कहानी उगलवा लिए…बस आज की मस्ती बची है आपकी कहनी..वो आप कह दो कि कहां से ब्लॉउज फड़वा के आ गई..”

मैं तो हैरान,परेशान दोनों को बारी-2 घूरे ही जा रही थी..ऊपर से पूजा के कमेंट..गाली से भी कहीं ज्यादा चुभ गई..तभी भैया मुझे अपने सीने से चिपकाते हुए बोले..

भैया : “देखो सीता,, जो हुआ अच्छा ही हुआ..प्लीज, गुस्सा मत करना… ये सब अचानक हो गया..और रही बात तुम्हारी मस्ती की तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है इन सब से..पर हाँ आगे से ऐसे बाहर किसी से भी कपड़े मत फड़वाना वर्ना जीना मुश्किल हो जाएगा..किसी सुरक्षित जगह और जिम्मेदार मर्द के साथ जो मन हो करना…समझी..”

भैया की बातें सुनते ही मेरी आँखें छलक पड़ी..सॉरी कहते हुए मैं रोने लगी…जिसे देख भैया हंसते हुए मुझे और कस के भींच लिए..पूजा भी हँसते हुए नम आँखों से मेरी बगल से चिपक गई…

कुछ देर बाद जब मेरी रोनी बंद हुई तो भैया मेरे होंठ पर किस करते हुए बोले,”अब जाओ…पहले फ्रेश हो के आ जाओ, फिर बात करते हैं और वो भी…”

भैया की वो भी सुनते ही मेरी मुस्कान शर्म के साथ बाहर आ गई..और मैं भैया से अलग हो बाथरूम में घुस गई…पीछे पूजा भैया से चिपकते हुए बोली,”भाभी, तब तक मैं एक राउण्ड कर लेती हूँ इनसे…पता नहीं बाद में इन्हें आप छोड़ोगे भी नहीं…”

“हाँ कर ले…वो तो आधी रात के बाद मालूम पड़ेगी कि कितना मजा आता है…”मैं कहते हुए बाथरूम में घुस गई..पीछे पूजा चौंकती हुई “आधी रात के बाद” को समझने की कोशिश करने लगी…

बाथरूम में मैं सभी कपड़े खोल नहाने लगी मल मल के…आज भैया के लिए साफ कर रबी थी रगड़ रगड़ के…कुछ ही पल में मुझे पूजा और भैया की सेक्सी आवाजें सुनाई पड़ने लगी…

मैं मुस्कुराते हुए खुद से बोली,”चुदवा ले रंडी..जब आधी रात को चूत में दर्द शुरू होगी ना देहाती लंड की, तब मालूम पड़ेगा..फिर आगे से चुदने के ख्याल से तू डर नहीं जाएगी तो मेरा नाम बदल देना…”

फिर मैं स्नान कर बाहर निकली और बेडरूम में आ गई…पूजा चुदाई का काम पूरा कर बेड पर नंगी ही पड़ी हुई थी..मैं पूजा को देख मुस्कुराते हुए भैया की तरफ मुड़ी तो भैया मेरी तरफ ही देख मुस्कुरा रहे थे…

फिर मैं अपने कपड़े एक-2 कर पहनने लगी..और इस दौरान हल्की फुल्की घर की बातें भैया से पूछे जा रही थी..कपड़े पहनने के बाद मैं पूजा को उठाती हुई बोली,”कॉफी लाती हूँ पूजा, तब तक कपड़े पहन के फ्रेश हो लो..फिर थोड़ी देर छत पर चलेंगे..”

कहते हुए मैं किचन की तरफ चल दी..पूजा कुनमुनाती हुई उठ के बैठ गई..कॉफी लेकर अंदर आई तो पूजा फ्रेश हो बैठी भैया से बातें कर रही थी..मैं मुस्काते हुए कॉफी बढ़ा दी दोनों को…

और खुद भी वहीं बैठ कॉफी पीने लगी..फिर हम तीनों बाहर निकल छत की तरफ बढ़ गए…

छत पर जैसे ही पहुँचे कि पूजा हमें पीछे से जकड़ती हुई बोली,”भाभी, अब तो कहो…आज कहाँ जाकर कुटाई करवा के आ गई.”

मैं हँसते हुए पीछे गर्दन नचाई और बोली,”पागल है क्या? यहाँ किसी को ठीक से जानती नहीं फिर कैसे करवा लूँगी..”

भैया : “अच्छा, तो फिर बिना किए ही तुम्हारे चेहरे पर सेक्स की नशा चढ़ी हुई थी..”

“की नहीं थी पर मजे ले कर आई थी..”मैंने हंसी लाते हुए भैया की तरफ देखते हुए बोली..जिसे सुनते ही पूजा मेरी एक चुची को मसलते हुए बोली,”वॉव,,कौन है वो खुशनसीब जिस पर अपने जवानी के रस छिड़क के आ गई..”

“नाम नहीं पता और ना ही उसे जानती हूँ..”मैं भी सोची अब थोड़ी मजे ले ही लूँ बता कर..

“क्या? मतलब किसी अंजाने को मजे दे कर आई हो..ओफ्फ भाभी…देख रहे हैं ना अपनी लाडली बहन को जी कैसे गुल खिला रही है…ही..ही..ही..”पूजा भैया की तरफ मेरे चेहरे को दूसरे हाथ से करती हुई बोली..

जिसे सुन भैया आगे बढ़ ठीक मेरे सामने से सटते हुए बोले,”हाँ पूजा जी…पर आप भूल रही हैं कि मेरी बहन पहले थी..अब मेरी बहन से पहले आपकी भाभी और मि. श्याम की बीवी हैं..तो आप टेंशन लो..मैं नहीं”

कहते हुए भैया मेरी दूसरी चुची को अपनी चुटकी से रगड़ दिए जिससे मेरी चीख निकल गई…शुक्र है आसपास की छत बिल्कुल खाली थी वरना सभी तक मेरी चीख गूँजती…

“अच्छा तो आप अपनी बहन की नहीं, मेरी भाभी की बैंड बजाते हैं..”पूजा अपनी आँखें नचाती हुई व्यंग्य पूर्ण शब्दों में पूछी..जिसके जवाब में भैया “बिल्कुल” कह अपनी हामी भर दी…

जिसे सुन हम तीनों की हँसी छूट गई..तभी पूजा एक बार फिर से आज की रंगरलिया के बारे में पूछ बैठी..मैंने ओके कहते हुए पूजा को खुद से अलग की और छत की रेलिंग के सहारे पीठ करके खड़ी हो गई…

जिसे देख वो दोनों भी मेरे बाएं-दाएं सट के खड़े हो गए और शांत मुद्रा में मेरी हाल-ए-बयां सुनने का इंतजार करने लगे..

मैंने मुस्कुराते हुए सुबह घर से निकलने से लेकर ऑटो तक हुई हर एक पल का हाल सुनाने लगी..जिसे सुन दोनों की आँखें फटी की फटी रह गई…

उन्हें तो विश्वास नहीं हो रहा था कि मैं सेक्स की आग में इतनी जल रही थी आज..बस में कई लोगों द्वारा रगड़ाई सुन वो दोनों अपनी सांसें रोक सुन रहे थे…और जब उस बाथरूम वाले की तरफ से दिए 500 रूपए की बात सुने तो हँस हँस के लोटपोट हो रहे थे…साथ ही लंड चुसाई, उसका पानी पीना, रंडी समझना ये सब बातें सुने तो गर्म भी हो रहे थे…

पूजा अपने चूत को ऊपर से ही सेंक रही थी जबकि भैया अपने पैंट के अंदर हाथ डाले हुए थे…मेरी चूत भी पानी के धार छोड़नी शुरू कर दी थी..मैं अपनी जांघों से ही चूत को दबाते हुए बोली जा रही थी..

फिर ऑटो वाले को बीच सड़क पर अपनी निप्पल दिखाई जिसे सुनते ही पूजा धम्म से नीचे बैठ गई और झड़-झड़ पानी बहाने लगी…भैया भी पूरे चरम सीमा पर थे..और जैसे ही मेरी बात पूरी हुई उन्होंने तेजी से अपना घोड़ा निकाल दिया…

और उनका घोड़ा एक पर एक लगातार कई पिचकारी छोड़ने लगा…खुली छत पर उनका 8 इंची लण्ड पूरे छत को गीला करनी शुरू कर दी थी…

अब जब दो ज्वालामुखी भड़क गई हैं तो मैं भला पीछे क्यों रहती…मैं खड़ी खड़ी ही रेलिंग पर सिर टिका झड़ रही थी…कुछ देर तक यूँ सब चुपचाप खड़े रहे…तभी पूजा उठी और हँसते हुए बोली..

पूजा : “भाभी, पता नहीं उन सब की हालत क्या हुई होगी…अभी भी कहती हूँ उनमें से किसी का पप्पू सोया नहीं होगा..ही..ही..ही..”

भैया : “एकदम सही पूजाजी…मेरी तो सिर्फ सुनने भर से ये हालत हो गई..उनके पप्पू पर तो हमला किया गया है…वैसे सीता एक बात बोलूँ..”

मैं अब तक सीधी हो चुकी थी..भैया की तरफ देख हाँ कह उन्हें बोलने का इंडार करने लगी..

भैया : “वो केतन ऑटो वाला 8 बजे तक आने बोला है ना तो तुम चली जाना..”

“नहीं भैया, आज तो आपको छोड़ कर कहीं नहीं जाउंगी..”मैंने साफ मना कर दी क्योंकि भैया आए हैं और इन्हें छोड़ बिना निमंत्रण कहीं जाने की सोच भी नहीं सकती…

भैया : “वही तो मैं कह रहा हूँ जान..8 बजे तक चली जाना तुम दोनों और 10 तक आ जाना..फिर पूरी रात तुम्हारे नाम जानू…”

मैं चौंक सी गई कि 8-8:30 तक श्याम आते हैं..फिर अगर मैं चोरी से भी करूँगी तो एक बार से ज्यादा नहीं कर पाती…हाँ दिन में कर लूँगी पर पूरी रात…

पूजा : ” वॉव मतलब इन दो घंटों में उनका काम कर सुबह तक सूला दोगे फिर उनकी बीवी को रात भर बजाएंगे..”

भैया : ” बिल्कुल पूजा जी…और बीच बीच में श्याम की बहन की भी…हा..हा…हा..”

मैं और पूजा उनका प्लान सुन शरमा सी गई कि मेरे पति की मौजूदगी में ही मुझे पेलेंगे…थोड़ी सी डर भी होगी कि अगर उन्हें नशा टूट गई तो….पर डर के बीच सेक्स का एक अलग ही मजा होता है..ये तो आज देख ही ली हूँ…

और केतन से भी कुछ करने का मिल जाएगा..मैं बिना कुछ बोले मुस्कुराए जा रही थी..जिसमें मेरी सहमति साफ झलक रही थी…

तभी पूजा की नजर उसी छत पर घूमी हुई दिखी जहां वो दोनों पति-पत्नी रोज शाम को सेक्स करते हैं…पूजा के साथ मैं भी देखी तो ओहह..वो दोनों स्मूच करने में लीन थे..

हम दोनों की नजर का पीछा भैया भी कर दिए..उनकी नजर पड़ते ही वे चौंकते हुए “ओह साला” कह पड़े..

हम दोनों हंस पड़े उनकी बात पर…शायद ये उनका पहला अवसर था किसी को ऐसे खुले में देखने का…मैं बिना भैया की तरफ देखे बोली,”ये दोनों रोज शाम को छत पर खुले में मस्ती करने आते हैं…”

पूजा : ” मस्ती बोले तो खुल्लम खुल्ला चुदाई..कुछ ही देर में दोनों भिड़ जाएंगे..देखते रहिएगा बस..”

तभी भैया को पता नहीं क्या सूझी..एक पल में ही मुझे जकड़े और पलक झपकते ही उनके होंठ मेरे होंठ से चिपक गए..मैं सोच भी नहीं पाई थी कुछ…जिसे देख पूजा खिलखिला कर हँस पड़ी…

मैं छूटना चाहती थी पर कुछ ही पल में शां हो गई और किस का साथ देने लगी..करीब 5 मिनट तक लगातार किस करती रही जिससे मेरी चूत एक बार फिर पानी बहाने लगी थी…

और भैया का लंड तो कब से मेरी चूत पर ठोंकरे मार रहा था…किस के बाद भैया मुझे नीचे बैठने के लिए दबाव देने लगे..मैं बैठती हुई भैया से बोली,”भैया प्लीज, अब कुछ नहीं करो ना…अंदर चलो फिर करना..”

पर भैया कुछ सुने बिना ही अपना देहाती गबरू लण्ड बाहर निकाला और मेरे सिर को पकड़ एक ही बार में पूरा लंड ठूस दिया…मैं उबकाई लेती किसी तरह खुद पर काबू पाई और लंड को धीरे धीरे चूसने लगी…

अगले ही पल पूजा ठीक मेरे बगल में खड़ी हुई…लंड मुंह में रखे ही ऊपर नजर की तो देखी भैया अब पूजा को स्मूच किस करते हुए मेरे मुंह में लंड डाले मजे ले रहे थे…

भैया के हाथ मेरे बालों पर महसूस हुई जो अगले पल ही पकड़ में तब्दील हो गई और फिर चला दिए अपनी रेलगाड़ी नो इंट्री वाले क्षेत्र में…

पूजा के होंठो का रसपान करते हुए मेरे मुँह में लंड अंदर बाहर करने लगे…अगले कुछ ही पल में उनकी स्पीड बढ़ने लगी..मेरी सांस उखड़ने लगी थी पर भैया बिना रूके और तेज शॉट मारने लगे थे…

मेरे मुंह से लार बहने लगी थी जिसमें भैया के रस की दुर्गंध आ रही थी..माथे से पसीना टपकती हुई पूरे चेहरे को भिंगों रही थी..अब मेरी मुँह दुखने लगी थी..मैंने पीछे हटने के लिए हल्की दबाव उनके पैर पर डाली तो अगले ही पल पूजा मेरी बगल में बैठी दिखी…

फिर अचानक से लंड बाहर निकला और सीधा पूजा के गले में उतर गई..जो कि इस हमले से पूरी तरह वाकिफ थी..मैं हांफते हुए नीचे सिर झुकाए मुंह से लार जमीन पर गिरा रही थी..बगल में पूजा गूं-गूं करती हुई लंड के तेज धक्के अपने मुख में ले रही थी…

तभी भैया मेरे बाल पकड़े और लंड की तरफ करते हुए बोले,”अण्डे चूस शाली…इतनी जल्दी कोई राण्ड नहीं थकती..” भैया से गाली सुनते ही मेरी जोश दुगनी हो गई और अगले ही पल मेरी जीभ उनके अण्डों से टकराने लगी…

और 8 इंच में से 5 इंच तक लंड पूजा के मुंह में जा रही थी जिससे हमें भी ज्यादा परेशानी नहीं हो रही थी अण्डे को चूसने में…पूरा लण्ड हम दोनों के थूक-लार से भींगी चमक रही थी…

कुछ देर बाद ही भैया अपने सर को आसमान की तरफ कर चीखने लगे और लंड को बाहर खींच अपने हाथों से पकड़ बारी बारी से हम दोनों के चेहरे को भिंगोने लगे…लंड के गर्म पानी महसूस होते ही हम दोनों भी चीखती हुई झड़ रही थी…

उनका लंड इतनी बार झड़ने के बाद भी इतना वीर्य छोड़ा कि हम दोनों के चेहरे कहीं से खाली नहीं बची थी…झड़ने के बाद भी उनका लंड दूसरे लंड की तरह सिकुड़ा नहीं थी…मैंने लंड को मुंह में भर चंद मिनटों में ही साफ कर दी…

फिर भैया मेरी साड़ी से ही अपना लंड पोंछे और लंड अंदर कर रिलेक्स मूड में दूसरे छत पर नजर दौड़ाए…उनकी हंसी निकल गई वहां देख कर…हम दोनों भी झट से खड़ी हो वीर्य से चमकते चेहरे उस छत की तरफ घुमा दी…

ये क्या…वो दोनों आज चुदाई ना कर आँखें फाड़े हमारी तरफ देखे जा रहे थे..हम तीनों हँस पड़े उसे देख..वो दोनों हमारे चेहरे पर पड़ी ढ़ेर सारी वीर्य देख एक-दूसरे की तरफ आश्चर्य से देखे जा रहा था…शायद उन्हें यकीं नहीं हो रहा था कि इतना पानी कैसे निकला एक लंड से…

तभी पूजा मुझे बांहों में जकड़ी और चेहरे की एक एक वीर्य के कतरे को खाने लगी..वो भी उन दोनों को दिखा दिखा कर…उसके बाद मैं भी पूजा के चेहरे पर पड़ी सारी वीर्य को खा कर चट कर दी…

फिर पूजा उन दोनों की तरफ हाथ हिला कर बॉय की और हम तीनों हँसते हुए नीचे आ गए..फिर फ्रेश हुई साथ ही और शादी में जाने के लिए किचन का सारा काम निपटाने घुस गई…

किचन का सारा काम निपटा मैं तैयार होने चली गई…पर तभी अचानक से बेल बजी..मैंने घड़ी की तरफ निहारी तो अभी साढ़े सात ही बजे थे..इतनी जल्दी श्याम कैसे आ गए आज…

तब तक पूजा भैया से गप्पे लड़ाना बंद कर गेट खोलने चली गई..मैं भी बाहर निकली पर पूजा को देख आगे बढ़ भैया के साथ लगी चेयर पर बैठ गई..जहाँ पर अभी तक पूजा के साथ बैठे थे…

अंदर आते ही श्याम और भैया ने प्रणाम किए और वहीं साथ में एक कुर्सी पर बैठ गए..मैं उठ के अंदर चली आई..कुछ ही देर बाद श्याम भी कपड़े चेंज करने अंदर आए…

अब मैं तो काफी उलझन में पड़ गई थी..अगर ये नहीं आते तो चली जाती शादी में और बाद में कोई बहाना बना देती कि बगल वाली खींच के ले गई..पर अब तो पूछनी पड़ेगी..

खैर,, पूछ लेती हूँ…अगर हाँ बोले तो ठीक नहीं तो बाद में देखी जाएगी केतन के साथ….मैंने अपने अंदर थोड़ी हिम्मत लाती हुई बोली..

“वो बगल में एक शादी है, तो देखने का मन है..काफी दिन हो गए देखे…”इतनी कह मैं चुप हो गई और उनकी तरफ देखने लगी..वो पहले तो एकटक से देखने लगे फिर मुस्कुराते हुए बोले,”खाना बना ली क्या?”

थोड़ी सी उम्मीद की किरण देख मैं चहकती हुई बोली,”हाँ और खाना फ्रिज में रख दिया है…” वो मेरी बात सुन हँस पड़े जिससे मैं भी हँसे बिना रह ना सकी..

श्याम : “शादी किसकी है?”

श्याम ने अपने नाइट ड्रेस निकालते हुए पूछे जिसे मेरी हलक एक बार फिर सूखने लगी कि कैसा सवाल कर दिए? अब मेरी जगी हुई उम्मीद की किरण पर एक बार फिर बादल छाने लगी थी क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलना चाहती थी…

“जी….वो…आगे वाले मुहल्ले में किसी लड़की की है…नाम नहीं पता..”मैं उन्हें देखती हुई बोल दी…जिसे सुनते ही उनका चेहरा आश्चर्य से भर मुझे घूरने लगा…

श्याम : “बिल्कुल नहीं जाना…जिसे तुम जानती तक नहीं और कोई निमंत्रण नहीं है…और ना ही कोई पड़ोसी दोस्त के साथ जाओगी…तो कैसे सोच ली कि जाने के लिए हाँ कर दूँगा मैं…अगर कोई वहाँ पूछ दिया कि कौन हो तुम तो क्या जवाब दोगी…ख्वामखाह बदनाम हो जाओगी…समझी?”

उन्होंने साफ मना कर दिया…थोड़ी सी दिक्कत जरूर हुई पर वो सच ही कह रही थी..मैं ज्यादा जिद नहीं करना चाहती थी…अगर निमंत्रण रहती तो करती भी…और मैं कैसे कहती कि केतन बुलाया था….

“खाना लगा दूँ?” मैं अब जाने की प्रोग्राम कैंसिल करती हुई पूछी..जिसे सुन वो मेरे पास आते हुए गले से लगा लिए और प्यार से पीठ सहलाने लगे…

“सीता, मुझे कोई दिक्कत नहीं होती अगर कोई निमंत्रण रहती तो पर ऐसे जाना मुझे ठीक नहीं लग रहा..”श्याम मुझे शायद पूरी तसल्ली दिलाने के लिए अपने दिल की बात कह रहे थे…

मैं उनकी बात सुन धीरे से सिर पीछे की और मुस्कुराते होंठ उनके होंठ पर रख दी..किस करने के बाद बोली,”मैं बिल्कुल नाराज नहीं हूँ जी…मैं आपसे बहुत प्रेम करती हूँ और आप भी मुझे हर वक्त खुश देखने की कोशिश करते हैं..तो आप मना किए हैं तो उसकी वजह मैं समझ सकती हूँ..”

मेरी बात सुनते ही उन्होंने I Love You कहते हुए जोर से अपनी बाँहों में भींच लिए..फिर मुझे उसी तरह चिपकाए हुए पूछे,”जान, आपके भैया कुछ लेते हैं कि नहीं…आज पहली बार आए हैं तो कुछ पार्टी तो होनी चाहिए ना…”

मैं उनकी बात सुनते ही चौंक पड़ी…कहाँ भैया इन्हें बेहोश करने का प्लान बना रहे थे, पर ये तो खुद ही फंसना चाहते हैं…ये सोचते हुए मैं मुस्कुराती हुई थोड़ी पीछे हुई….

” हाँ, लेते हैं पर कभी कभी…”मैं हँसती हुई बोली जिसे सुनते ही श्याम चहकते हुए मुझे अपने से अलग करते हुए बोले,”थोड़ी देर रूक जाओ फिर खाना लगाना…बाहर से कुछ लेकर आ रहे हैं..”

और श्याम हँसते हुए बाहर निकल गए…उनसे ज्यादा हँसी तो मेरी निकल रही थी कि ये पीने की खुशी में हँस रहे हैं या अपनी बीवी की चुदाई में साथ देने के लिए….

कुछ देर में ही श्याम और भैया बाहर निकल गए…करीब आधे घंटे बाद दोनों हँसते हुए आ गए थे…फिर बरामदे में ही बैठ गए दोनों…

मैं उनका खाना दे आई…वे पार्टी के लिए सारा समान दारू,नमकीन,सिगरेट आदि रख दिए बगल में..खाना मिलते ही पहले वे खाना शुरू कर दिए….

करीब आधा खाना खाने के बाद उन्होंने अपनी मिनी पार्टी शुरू कर दी..2-3 पैग चलने के बाद उनका खाने की स्पीड धीमी और बात करने की गति तेज हो गई..

बाद में थोड़ी और खाना की मांग किए..खाना देने पहुँची तो देखी बोतल अभी आधी भी खत्म नहीं हुई थी जबकि एक छोटी बोतल अभी बंद ही थी…

और दोनों के बैठे करीब 1:30 घंटे हो चुके थे…वहाँ से आने के बाद मैं सीधी पूजा के कमरे में गई जो अंदर कुछ पढ़ रही थी..मुझे देखते ही पूजा मुस्कुरा दी…

“खाना नहीं है क्या?” मैं पूजा के बगल में लेटती हुई पूछी..पूजा के हाथ में कोई मैगजीन थी जिसे वो दरकिनार करती हुई बोली,”हाँ ,भैया लोग खा लिए?”

“उंहहहु.. उनका अभी 2 घंटा और लगेगा..सब कुछ दे दी, अपना खाते रहेंगे..चलो, हम लोग भी खाना खा कर कुछ आराम कर लेते हैं..”मैं बाहर के हालात बताती हुई बोली..

मेरी बात सुन पूजा मुस्कुराई और उठती हुई चलने की हाँ कह दी..हम दोनों खाना खा अपने अपने रूम में आ आराम करने लगी..

अभी कुछ ही देर हुई थी कि बाहर से श्याम की लड़खड़ाती आवाज हमें पुकारने लगी..मैं उठी और बाहर चली आई…

मुझे देखते ही श्याम नशे में मेरी तरफ देख मुस्कुराते हुए बोले,”बैठो इधर..” श्याम और भैया आमने-सामने बैठे थे और मुझे अपने दाएं तरफ बैठने का इशारा किए..

मै असमंजस में पड़ी चुपचाप बैठ गई और उनके आगे की बात का इंतजार करने लगी…तब श्याम अपने सामने रखे तीन ग्लास में दारू उड़ेलने लगे…शायद ये पहले ही एक ग्लास ले आए थे…

पर उससे ज्यादा मैं ये सोच में चिंतित थी कि तीन क्यों? पीने वाले तो दो ही हैं..कीं ये मेरे लिए तो…..उफ्फ्फ.. मैं ये सोच के ही सिहर गई…

श्याम : “सीता, आपके भाई साहब की ये शिकायत है कि मैं आपको यहाँ शहर में ले तो आया हूँ, पर यहां के रहन सहन की छूट नहीं दे रहा हूँ तुम्हे…अब ये ग्लास उठाओ और भैया को बता दो कि मैं तुम्हें किसी भी चीज पर पाबंदी नहीं लगा रहा हूँ…”

मैं उनकी बात सुन आश्चर्य से कभी श्याम की तरफ तो कभी भैया की ओर देखे जा रही थी..कुछ समझ में नहीं आ रही थी..

“नहीं भैया, मुझे किसी तरह की पाबंदी नहीं है..”मैं अपने भैया की तरफ मुड़ बोली..

भैया : “जानता हूँ सीता, पर मुझे देखना है…यहाँ शहर में तो सब लड़की -औरतें ऐसी पार्टी अक्सर जाती हैं जहां दारू-शराब चलती है और वो इसका मजे से लुत्फ उठाती है…पर तुम तो आज तक तो वही गांव वाली ही सीता हो…”

श्याम :” सुन ली ना…अब जल्दी से उठाओ वर्ना कड़वी हो जाएगी ये…वैसे मैं भी चाहता हूँ ताकि कभी मन हुआ तो तुम्हारे साथ भी सर्व कर लूंगा…तुम तो जानती हो मैं बाहर लेता नहीं..कभी कभार दोस्त के साथ ही हो जाता है पर घर पर ही, बाहर नहीं…और अब घर पर किसी को बुलाना मुझे ठीक नहीं लगता क्योंकि मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ..प्लीज..”

अब मैं तो और सोच में पड़ गई थी क्या कहूँ…इनकी बात ठीक थी..घर पर पी के सो जाते हैं और वो भी कभी कभार ही..और मेरी सहमति के बाद ही….पर आज तक पीना तो दूर, सूंघी भी नहीं थी मैंने…मैं अब राजी तो थी पर जो समस्या थी उसे सामने लाती हुई बोली,”पर आज तक कभी पी नहीं तो..”

मैं इतनी ही बोल पाई कि दोनों उछलते हुए अपने अपने चेहरे मेरे सामने लाते हुए बोले,” अरे…कुछ नहीं होता…बस पहली बार थोड़ी लगेगी फिर सब ठीक और मस्ती ही मस्ती…” दोनों एक साथ हाँ कहते हुए बोल पड़े…

तभी भैया मेरे कानों में धीमे से बोले,”बिल्कुल पहली चुदाई जैसी…” और पीछे हट मुस्कुरा दिए..जिससे मैं भी मुस्कुरा दी..श्याम भैया की बात नहीं सुन पाए थे…मैं एक बार फिर उन दोनों की तरफ देखी…

तभी मेरी नजर सामने पड़ी जहाँ परदे की ओट से पूजा की बड़ी आँखें चमक रही थी..अचानक से पूजा का पूरा चेहरा सामने आया और मुझे पीने की हाँ का इशारा कर ओझल हो गई फिर परदे की ओट में..

मैं अंदर ही अंदर काफी खुश थी अपनी इस नई तजुरबे को सोचकर…फिर मैंने हाथ को धीमे से ग्लास की तरफ बढ़ा दी…”ये हुई ना बात…”कह दोनों भी अपने-अपने ग्लास उठा चियर्स करने लगे…

वो दोनों को एक बार फिर पीने का इशारा किए जिसे देख मैं ग्लास अपने होंठ तक ले गई…पर गंध लगते ही अगले ही पल ग्लास एक बार फिर नीचे आ गई…

भैया : ” साँस मत लो सीता,, और आँखें बंद कर जय माता दी कह एक बार में ही खत्म कर दो…दुबारा नहीं होंठ पर लगना चाहिए जूठी ग्लास…”

श्याम : ” बिल्कुल करेक्ट…शुरू करो सीता डॉर्लिंग….” श्याम की बात खत्म होते ही भैया भी “हाँ डॉर्लिंग” कह दिए…जिस पर श्याम ध्यान नहीं दिए..

मैं मुस्कुराई और मन ही मन जय माता दी बोलती हुई साँस पर काबू करती हुई ग्लास को अपने लबों पर रखते हुए पूरी ग्लास खाली कर दी…

जिसे देख दोनों खुशी से झूम उठे और थोड़ी सी नमकीन मेरी तरफ बढ़ा दिए…मैं कड़वी से मुँह बिचकाती नमकीन ली और झट से अंदर कर ली जिससे थोड़ी राहत मिली पर अंदर से काफी जलन हो रही थी…

फिर वो दोनों भी अपने – 2 ग्लास खाली कर दिए…मेरी नजर परदे की तरफ गई जहाँ से पूजा अपने अँगूठे दिखाती हुई शाबासी दे रही थी..

कुछ देर बैठ हम तीनों कुछ इधर उधर की बात किए…फिर मेरे अंदर अभी भी जलन महसूस हो रही थी पर कम थी…सोची आराम कर लेती हूँ तो ठीक हो जाएगी…यही सोच जैसे ही मैं उठनी चाही कि श्याम मुझे कस के पकड़ लिए…

श्याम : ” अब कहाँ चली जान…पहले खत्म तो कर लो, अभी तो शुरू ही हुई है आपके साथ…और हाँ अब पैग आप बनाएगी..”

मैं श्याम की बात सुन चौंक पड़ी…मतलब अभी से बैठ के अंत तक पीनी है…मर गई…

भैया : ” कुछ नहीं होगा सीता,, अब कड़वी नहीं लगेगी और मजा तो अब आएगा…जब कोई लड़की साथ होती है तो पीने का मजा ही अलग है..”

भैया की बात सुन मैं शर्मा गई कि श्याम के सामने ही मुझे ऐसी बात कह रहे हैं…क्या सोचेंगे ये..पर मेरी सोच के विपरित श्याम बोले…

श्याम : “बिल्कुल सही…और हाँ सीता., अब तुम ये बिल्कुल भूल जाओ कि मैं तुम्हारा पति और ये भैया हैं..बस एक दोस्त की तरह मजे लो और दो…”

फिर श्याम बोतल और ग्लास मेरे सामने रख दिए…मैं सोचने लगी कि क्या करूँ? फिर अंदर से आवाज आई,”सीता, ऐसे मौके मत गंवा..जो होगा देखा जाएगा कल..पर आज की रात शादी में मिलने वाली मजे के बदले घर पर मजा लेने का मौका मिल रहा है तो इसे हाथ से जाने मत दे..”

और फिर मैं बोतल उठाई और तीनों ग्लास में डालने लगी…मदद के ख्याल से भैया बता दिए कि कितनी मात्रा में डालनी है..और तब चल पड़ा रात को रंगीन करने का सफर…

एक पर एक पैग चलने लगा और मैं इन मस्ती की दुनिया में डूबती जा रही थी…जिससे आज तक मैं बेखबर थी और पहली ही दिन इतनी रंगीन होगी, ये सोच भी नहीं सकती थी…

तभी अचानक से मुझे क्या सूझी, मैं उठी और म्यूजिक प्लेयर ऑन करती हुई सेक्सी गानों से भरपूर सीडी प्लेयर के अंदर डाल दी और वापस अपनी जगह पर बैठ गई…

आवाज इतनी कम थी जिससे बाहर नहीं जा पा रही थी और हम तीनों को आसानी से सुनाई पड़ रही थी..वो दोनों वाह कहते हुए गानों की धुन पर झुमते पार्टी को बढ़ाने लगे…मैं भी झूमनी शुरू कर दी थी…

अचानक से मुझे कुछ ज्यादा गर्मी महसूस हुई और ये गर्मी मेरे होंठो से बाहर आ गई,”श्याम, काफी गर्मी लग रही है…” और मैंने अपने साड़ी के पल्लू को जमीन पर रख दी बिना उनके जवाब का इंतजार किए..

जाम का शुरूर अब मेरे ऊपर हावी हो चुकी थी जिससे सारी शर्म-ह्या भूल गई थी…भैया की कंट्रोल पावर काफी थी जिससे वो मेरी तरफ देखने लगे जबकि श्याम मेरी बात सुने भी या नहीं पता नहीं..वो मस्ती में झूमे जा रहे थे…मैं ज्यादा नहीं ली थी तो अब तक सिर्फ झूम रही थी, बेहोश नहीं हुई थी…

भैया : “इनरवियर पहनी है ना तो इसे भी उतार तो ना..क्यों श्याम? ” श्याम अब बेहोश होते नजर आ रहे थे..भैया क्या बोले, वो सुने या नहीं पता नहीं पर हाँ जरूर कर दिए…

अगले ही पल मैं सिर्फ पेन्टी और ब्रॉ में दो मर्दो के बीच नशे में झूमने लगी..श्याम की आँखें एक बार खुली और मुझे ऐसी अवस्था में देख हल्के से हँसे…फिर वो ठीक से देखने की कोशिश करते तब तक उनकी आँखों पर शराब ने परदा डाल दिया…

तब मैंने अगली पैग बनाई..भैया जैसे ही ग्ललास उठाने आगे हाथ किए मैं रोक दी..और उनका ग्लास उठा मैं खिसक के उनकी जांघों पर बैठ गई और अपनी नशीली आँखों से देख उनको पिलाने लगी…

भैया भी मेरी इस अदा पर हँस दिए और पूरी ग्लास खाली कर दिए..अंत में मेरी उभारों पर श्याम की तरफ देख किस कर दिए जिससे मैं सिसक पड़ी और किसी तरह उठ गई श्याम को पिलाने…

ठीक इसी तरह ग्लास लिए श्याम की जांघ पर बैठी और उन्हें पिलाने लगी..श्याम होश में थे नहीं पर वाह सीता कहते हुए गटकने लगे..पूरी ग्लास खाली होते ही मैंने अपने होंठ उनके होंठ पर रख किस करने लगी…

किस रूकते ही मेरे मन में क्या आई कि अचानक से बोल पड़ी,”जानू, इस मस्ती की महफिल में अगर आप पूजा को भी शामिल कर लें तो वो बहुत खुश होगी..”

मेरी आवाज सुनते ही वो एकाएक शांत हो गए, मानों सारा नशा चूर हो गया हो..वो एकटक से मुझे घूरने लगे…

इधर मेरे साथ-2 भैया का नशा टूट चुका था…मैं खुद पर काफी शर्मिंदगी महसूस कर रही थी कि ये क्या बोल दी..इनको बुरा लग गया, पता नहीं क्या कहेंगे…

श्याम अपनी लड़खड़ाती आवाज में बोले,”उतरोओओऽ नीऽचे…..”

मैं डर के मारे नीचे उतर गई और सिर नीचे कर बैठ गई…भैया भी ऐसी सिचुएशन देख उठे और बाथरूम की तरफ बढ़ गए…

मैं बैठी मन ही मन खुद को कोसे जा रही थी…कितना मजा आ रहा था हम तीनों को…क्या जरूरत थी पूजा के बारे में बोलने की…यही सब सोचते मेरी आँखों में आँसूं उतर आई और बाहर निकालती सिसकने लगी…

कुछ पल रोने के बाद जब आँखें ऊपर उठाई तो ये क्या?श्याम जा चुके थे…और भैया अभी भी बाथरूम में ही थे..मैं तेजी से उठी और माफी मांगने के ख्याल से बेडरूम की तरफ दौड़ पड़ी…

अंदर घुसते ही एक और शॉक सगी…श्याम नहीं थे…उफ्फ…क्या हो रहा है मेरे साथ…एक बार फिर मैं वहीं खड़ी दिवाल के सहारे रोने लग गई…फिर ढ़ूँढ़ने के ख्याल से वापस छत पर जाने की सोची शायद वहीं होंगे…

बाहर निकल गेट की तरफ बढ़ ही रही थी अचानक पूजा के रूम से श्याम की हल्की आवाज सुनाई दी..जिससे मेरे पांव ठिठक कर रूक गए…मेरी नजर गेट के लॉकर पर पड़ी जो अभी भी बंद थी..

मेरे चेहरे पर हल्की सुकून की लकीरें उभर आई और अंदर खुशी…मतलब श्याम पूजा को बुलाने गए हैं..मेरे कदम पूजा के कमरे की ओर बढ़ने लगी…और गेट पर रूक अंदर के नजारे देखने लगी…

पूजा : “सच भैया, मैं बिल्कुल नाराज नहीं हूँ..और मैं लेती भी नहीं सो प्लीज आप लोग इंज्वाय करो..मैं नाराज नहीं होऊँगी..प्रॉमिस भैया…”

श्याम : “जानता हूँ पूजा पर अगर नाराज नहीं हो तो चलो बाहर..जस्ट फ्रेंड…और सीता भी तो पहली बार ली कि नहीं आज…और यहाँ जब फ्रेंड बनेंगे तो उनके साथ पार्टी में कोई शर्मिंदगी नहीं झेलनी होगी ऐसी बात का…चलो उठो माई बेबी..”

पूजा कुछ सोचने लगी, जबकि श्याम बार बार रिक्वेस्ट किए जा रहे थे..और श्याम के इस रवैये को देख मेरी दिल भर आई कि श्याम नाराज नहीं हैं…

पूजा : “ठीक है भैया, मैं पार्टी ज्वाइन करूँगी पर आज नहीं..किसी और दिन..आज वैसे भी पार्टी इंड होने वाली होगी आज की…” और पूजा पर हल्की मुस्कान फैल गई कहते कहते…

श्याम भी उसकी हामी से मुस्कुराने लगे और उसे देखने लगे..अचानक वो आगे बढ़े और बोले,”तू ऐसे नहीं मानेगी….” और फिर..श्याम अपना एक हाथ पूजा के गर्दन के नीचे,जबकि दुसरा हाथ जांघों के नीचे डाले और हँसते हुए झटके से गोद में उठा लिए…

पूजा हँसते हुए चिल्ला पड़ी,”आहहह भैया…प्लीज नीचे करो..चलती हूँ….” पर श्याम बिना कुछ सुने बाहर की तरफ मुड़ गए..पूजा गोद में छटपटा रही थी और हँस भी रही थी..जिसे देख मेरी भी हँसी निकल पड़ी और वापस जल्दी से अपने जगह पर आ कर बैठ गई…

पूजा की नजर जैसे ही मेरी नजर से टकराई कि शर्म से उसकी आँखें बंद हो गई..अजीब बात है…ब्रॉ -पेन्टी में मैं बैठी हूँ और शर्मा वो रही है.. खैर, बात तो कुछ और थी जो मैं अच्छी तरह से जानती थी…

तब तक भैया बाथरूम से निकल चुके थे और उनकी बाँछें पूजा को देखते ही खिल पड़ी..वो आते ही पूजा के बगल में बैठते हुए चुपके से उसकी चुची मसल दिए जिससे पूजा चौंक पड़ी..

श्याम के बैठे दो मिनट भी नहीं हुए कि वो एक बार फिर आँखें झलफलाने लगी उनकी..हम दोनों पर भी खुमारी छाई थी पर फिर भी होश में थी…तभी श्याम अपने कांपते हाथों से बोतल लिए और एक सिंगल पैग बनाने लगे…

श्याम : “हम्म्म…सीता डॉर्लिंग..वो क्या है ना कि घर की पार्टी में मैं घर के मेम्बर को ही भूल गया था..तुम अगर याद नहीं दिलाती तो कसम से कल मैं खुद को काफी कोसता…थैंक्यू जान..”

मैं उनकी बात पर पूजा की तरफ देख मुस्कुरा पड़ी…पूजा की नजर तो श्याम के हाथों में ग्लास पर ही जमी थी..शाली, मन तो इसकी भी है पर क्या करती बेचारी..किसी ने ऑफर ही नहीं किया अब तक..

श्याम : “पूजा, लोऽ…और सीता की तरह जय माता दी कह अंदर कर लो एक ही बार में…नो कमेंट…चुपचाप..” श्याम ग्लास पूजा की तरफ बढ़ाते हुए बोले…

पूजा की नजर हम पर आ टिकी, फिर मैंने लेने की इशारा की तो वो भैया की तरफ देखी..हे राम! ये तो अपना लंड दबा रहे थे खुलेआम…पूजा से नजर मिलते ही बोले,” पी लो डियर…बाद में ये भी पीना है..” और वो अपने लंड की तरफ इशारा कर दिए…

जिसे सुनते ही श्याम चौंकते हुओ भैया की तरफ देखते हुए “ऐंऽऽऽ “कह पड़े.. भैया तेजी से छोटी बोतल श्याम के सामने करते हुए बोले,”ये जनाब..आप तो कुछ और ही समझ गए…”

जिसे सुनते ही श्याम हँस पड़े और बोले,”हम्म्म, देखिए जनाब..वो चढ़ने के बाद पता नहीं ऐसे गंदे ख्याल कैसे आ जाते हैं..पर डोंट टेक सिरीयस…चियर्स पूजा..”अबकी बार ग्लास पूजा के हाथ में थी और हम तीनों की नजरें पूजा पर…

फिर तो वही होना था…पूजा सारा ग्लास खाली कर दी….और सब ताली बजा पूजा का स्वागत कर गानें की धुन पर झूमने लगे..अगले कुछ ही पल में छोटी बोतल की सील टूटी और फिर चली एक रंगीन रात का सफर…

पर अब इस सफर में सिर्फ श्याम ही थे…भैया के आज्ञानुसार बड़ी 2 पैग श्याम को पिलाती तो एक छोटी पैक पूजा की तरफ कर देती..पूजा तुरंत समझ
गई कि क्या होने वाला है अब…वो बस मुस्कुरा के रह गई…

अंत होते होते श्याम चारों खाने चित्त वहीं पर ढ़ेर हो गए…जबकि भैया की आवाजें लड़खड़ा रही थी पर होश में थे कि क्या कहना है और क्या करना है…मैं भी टुल्ल थी, आँखें नशे में कभी-2 बंद हो जाती थी पर फिर जोर से खोल कर जगने की कोशिश करती…जबकि पूजा तो बिल्कुल होश में थी..बस उस पर हल्की नशा थी..

श्याम के बेहोश होते ही भैया पूजा पर कूद गए और उसे वहीं जमीन पर लिटा किस करने लगे और चुची मसलने लगे…शायद अब वो बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे..अगले ही पल वो पूजा की समीज में अंदर हाथ घुसाकर चुची पकड़ने की कोशिश करने लगे…

पूजा चिल्लाने लगी कि फट जाएगी…मैं भी देखी तो वाकई काफी वहशी लग रहे थे भैया…मैं तेजी से उनके पास गई और उन्हें पकड़ती हुई बोली,”भैया, रूक जाओ ना…वो निकाल रही है कपड़े…तब तक इनको अंदर सुला आते हैं…”

मेरी बात सुनते ही भैया अपने दांत जोर से पूजा की चुची पर लगा दिए जिससे पूजा चीख पड़ी… और फिर उठते हुए बोले,” जल्दी खोल शाली वर्ना बाद में कुछ मत कहना…” जिसे सुन पूजा मुँह बिचकाती हुई उठी और समीज सलवार खोलने लगी…

तब तक मैंने और भैया ने किसी तरह गिरते पड़ते श्याम को बेडरूम में लाए और उन्हें बेड पर पटक दिए…मैं एक बार भैया की तरफ देख हंस दी, फिर बाहर की तरफ चल दी कि अब भरपूर मजे लूँगी…

पर जैसे ही मेरी पहली कदम बढ़ी कि भैया के हाथ तेजी से मेरी ब्रॉ पर पड़ी और अगले ही पल ब्रॉ दो टुकड़े में बँट जमीन पर पड़ी थी…जितनी दिवानी मैं भैया से चुदाई की थी, उतनी ही उनके दरिंदगी की भी…

और फिर भैया कस के जकड़ते हुए अपने होंठ मेरे होंठ पर रख दिए…मैं तुरंत ही अपनी सुधि खो बैठी और किस का साथ देने लगी…किस करते हुए मेरी आँखें बंद हो गई….जब काफी देर तक किस करने के बाद किस रूकी तो ये क्या? मैं श्याम के बगल में नंगी लेटी थी…पेंटी कब फटी, पता नहीं..

और भैया अपने सारे कपड़े जल्दी-2 खोल रहे थे…मैं एक बार सिहर गई कि अगर श्याम की नींद खुल गई तो….भैया जब पूरे नंगे हो गए तो नीचे झुक मेरी चुची चूसने और मसलने लगे…मैं सिसक पड़ी दर्द और मस्ती में…

किसी तरह अपनी सिसक को दबाती हुई बोली,” भैया प्लीज, यहाँ नहीं..अगर ये जग गए तो…” मैंने अपनी बातें अधूरी छोड़ दी..भैया मेरी बात सुनते ही अपने मुँह ऊपर किए और बोले…

भैया : “हम्म्मऽ तो डर लग रहा है…”मैं उनकी बात सुन श्याम की तरफ देख डर से भयभीत चेहरे को हाँ में हिला दी…

भैया : “तो सुन, अगर मजे लेने हैं तो ये डर-वर निकाल दे अपनी जेहन से..क्योंकि इस गांड़ू की सुबह से पहले नशे फटने की उम्मीद नहीं…और आज तुम मेरी बहन नहीं, सिर्फ एक रंडी हो और मैं तेरा यार..समझी कुछ..अब चुपचाप मजे ले…”

भैया की बात सुनते ही मैं मुस्कुरा दी…उनकी बात मेरे दिल में चुभने की बजाय., मस्ती की लहरें जगा दी थी..तभी पूजा भी अंदर भैया से सटते हुई बोली,”और मैं…?” भैया पूजा को देख अपने लंड सहलाते हुए बोले,” तुम इसकी कुतिया हो जानेमन…मेरी तो रंडी बनने लायक भी नहीं हो…” जिसे सुन हम तीनों हंस पड़े..

मेरी हंसी अभी रूकी भी नहीं कि भैया अपने तने हुए लंड का मोटा सुपाड़ा मेरे मुँह में धकेल दिए…मैं चौंकी फिर सहज होती हुई अंदर कर ली…और ऊपर पूजा को जकड़ते हुए उसके होंठ पर टूट पड़े….

कुछ ही पलों में मैं जोर जोर से चुप्पे लगाने लगी जिससे भैया तड़प उठे और चीखते हुए गंदी-2 गालियाँ बरसाने लगे…

भैया : “आहहहहह मेरी रंडीईईईईईई..शाबासऽऽ ़ चूऊंऊऊऊऊससस छिनाललललऽ अपने पति को छोड़ मेरा लंड चूससस…आज तो खूब चोदूंगा तेरी चूत…ऐसी हालत करूंगा कि कुत्ते भी तेरी चूत देख हंस पड़ेगे…..”
और ना जाने क्या क्या बक रहे थे…

कुछ ही पल में हम सब पसीने से तर बतर हो गए और भैया अकड़ने लगे…और फिर वही हुआ…झड़ने के कगार पर पहुँचते ही भैया ने अपना लंड तेजी से बाहर खींच लिए…पता नहीं क्यों? मैं रस पीना चाहती थी पर ऐन वक्त पर…..

और फिर बाहर निकाल सीधा मेरे चेहरे पर अपनी पिचकारी छोड़ने लगे…मैं आँखें बंद कर ली और मुस्काती हुई हर झटके से पड़ रही पानी का लुत्फ लेने लगी…हल्की चोट भी लग रही थी जो रोमांच पैदा कर रही थी…ऐसा नहीं था कि मैं गर्म नहीं हुई…मेरी चूत तो बाहर से ही कई दफा नदी बहा चुकी थी…

अब रस आनी बंद हो गई थी…तभी भैया की आवाज सुनाई पड़ी,”चल कुतिया., अपने मालिक का पानी चाट के खा जल्दी इसके चेहरे से…” और तभी पूजा की जीभ मेरे चेहरे पर फिसलने लगी…वो चटकारे लेती खाई जा रही थी…मैं आँखें बंद किए चटवा रही थी…

पूरी साफ करने के बाद पूजा एक किस दी जिसमें वीर्य की दुर्गंध आ रही थी, फिर उठ गई..तभी भैया ने उसे अगली हुक्म दे दी,”उस मादरचोद का भी चेहरा साफ कर दे छिनाल…” मैं सुनी तो होश ही उड़ गई…क्या श्याम पर भी…

मैं तेजी से आँखें खोली तो उफ्फ….श्याम का चोहरा भी पूरी तरह वीर्य से नहाया थी..मेरी तो हँसी निकल गई..पूजा एकटक भैया को देखे जा रही थी कि तभी चटाकऽऽऽ भैया ने उसकी चुची पर जोर से थप्पड़ जमाते उसे खींच कर श्याम के चेहरे के पास कर दिए…

बेचारी दर्द से कुलबुला गई पर क्या करती…अपनी जीभ अपने प्यारे भैया के चेहरे पर रख दी…और वीर्य खाने लगी चाट-2 के…

पूजा श्याम के चेहरे पर पड़ी एक-एक बूँद साफ कर रही थी और डर भी रही थी…तभी अचानक से मेरी बुर पर कुछ खुरदुरी चीज महसूस हुई..नीचे देखी तो आउच्चच…भैया मेरी बुर पर दांत गड़ा दिए जिससे मैं तड़प उठी…

भैया तेजी से अपनी जीभ अंदर बाहर करनी शुरू कर दी थी जिससे मैं मचलती हुई उन्हें कभी रोकने की कोशिश करती तो कभी अंदर कर रही थी…अजीब हालात बन गई थी धोबी के कुत्ते की तरह..ना घर ना घाट के…

“आहहह सीताऽ” ये आवाज सुनते ही मैं और भैया एक साथ रूक गए और सांसें रोकती हुई घूमी…आवाजें श्याम की थी जो शायद पूजा की जीभ की गर्मी से जोश में आ गए थे…पूजा हक्की बक्की रोनी सूरत बनाई पसीने से तर बतर हो गई थी…

भैया हल्के से ऊपर उठे और श्याम को गौर से देखने लगे…हमारी नजर भी वहीं जम गई..अगर श्याम जग गए तो आज तो गई काम से…थोड़ी देर बाद श्याम सीताऽ..सीताऽ…कह फिर सो गए…

हम्म्म…थोड़ी राहत मिली कि वो होश में नहीं आए थे…बस शरीर की गर्मी मिलते ही वो जोश में आ गए थे और मुझे समझ नाम लेने लग गए..तभी भैया अपना हाथ बढ़ाकर श्याम की निक्कर एक झटके में नीचे कर दिए…

ओह गॉड…भैया की हिम्मत को देख दंग रह गई…पूजा की नजर श्याम के लंड पर पड़ते ही वो शर्म से अपना चेहरा ढ़ँक ली…पूरा तना हुआ आसमान की तरफ खड़ा था…मतलब जो अनुमान लगाई थी वो बिल्कुल सही थी मेरी…

तभी भैया पूजा का हाथ पकड़े और श्याम के लंड पर दबाते हुए बोले,”देख शाली, ये नशे में है…तुम चुपचाप इसके मजे ले लो..ऐसा मौका शायद फिर मिलेगा..” और फिर पूजा के बाल पकड़ श्याम के लंड पर झुका दिए..

पूजा बिल्कुल नहीं करना चाहती थी और वो ऊपर उठने के लिए जोर लगा रही थी..पर शराब की नशे और लंड की गंध पाते ही पूजा टूट कर बिखड़ गई…अगले पल ही श्याम का लंड अपनी प्यारी बहनिया के मुँह में था और अपने प्यारे भैया की जीभ पुन: मेरी चूत पर चिपक गई थी…

कुछ ही देर बाद कमरे में मेरी और भैया की सेक्सी तरंगे गूँजने लगी और पूजा पूरे जोर से अपने भैया का लंड चूसे जा रही थी…तभी भैया एक हाथ बढ़ा कुतिया की तरह झुकी पूजा की बुर पर रख दिए जो पहले से पानी छोड़ रही थी…

भैया की उंगली पूजा की बूर में शायद घुस गई थी., तभी तो पूजा बिल्ली की तरह उछल पड़ी..अब एक पल भी बर्दाश्त करना संभव नहीं था..मैं लगभग रोती हुई भैया से बोली,” प्लीज, अब मत तरपाओ भैया..मरररर जाऊंगीईऽ”

जिसे सुनते ही भैया आँख लाल पीली करते बोले,”मादरचोद, मैं किसी रंडी का भाई नहीं हूँ…बोल अपनी कुतिया रंडी को चोदो..तब पेलूंगा हरामी…”

मरती क्या ना करती…बिल्कुल हू-बहू डॉयलाग बोल दी…जिसे सुनते ही भैया ऊपर मुस्काते हुए आए और अपना लंड मेरी बुर पर घिसने लगे…और लंड चूसने में लगी पूजा को घूरते बोले,”ऐ हरमिन, ये क्या रात भर चूसती ही रहेगी..नशे में है बिना चूत मिले नहीं झड़ेगा वो…चल उठ और चढ़ के चोद अपने यार को….

एक बारगी तो पूजा सहमी, फिर होंठो पर मुस्कान लाती उठ गई..शायद अब पूजा को भी मजा आने लगा था..वो दोनों तरफ पैर करके श्याम के लंड के सामने चूत कर नीचे बैठने लगी..मेरे हाथ अचानक श्याम के लंड की जड़ को पकड़ लिए ताकि पूजा इधर-उधर ना हो जाए…

भैया के 1-2-3 करते ही पूजा सीधी श्याम के लंड को जड़ तक निगल गई और ठीक उसी पल भैया भी अपना रामपुरी पूरी की पूरी मेरी नाजुक बूर में उतार दिए…मेरी और पूजा की एक साथ आहहह निकल पड़ी..

फिर चल पड़ा असली पार्टी का दौर जिसे हम सब शाम से इंतजार कर रहे थे…ये तो जानती थी कि आज की रात रंगीन होगी पर ऐसी हसीन होगी सोची भी नहीं थी…

भैया दनादन पेले जा रहे थे और मेरी बूर की धज्जियां उड़ाए जा रहे थे जबकि भैया का नाम सुनते ही बिदकने वाली पूजा मस्ती से कूद-2 कर श्याम का लंड अपने अंदर लिए जा रही थी…

समय ज्यों-2 बढ़ती जा रही थी, हम सब की गूँज उसी अनुपात में बढ़ती जा रही थी…भैया बीच बीच में कभी पूजा की तो कभी मेरी चुची पर चपत लगा रहे थे…एक बेड पर हम पति पत्नी दोनों चुद रहे थे…फर्क सिर्फ इतनी थी कि मुझे गैर मर्द मर्जी से चोद रहे थे जबकि मेरे पति को एक लड़की बेहोशी की हालत में चोद रही थी….

आखिर वो पल आ ही गई…इस तूफान की अंत घड़ी आ गई जो कि करीब आधे घंटे से हम सब इसका इंतजार कर रहे थे…एक तेज चीख गूँजी कमरे में जिसमे भैया,मेरी और पूजा की मिली जुली आवाज थी और एक साथ झड़ने लग गए…

श्याम भी बेहोशी की हालत में भी खुद पर काबू नहीं पा सके और आहहहह सीता कहते हुए पूजा की बूर में अपना पानी डालने लगे…जो पूरी तरह बूर से वापस बेड पर गिर रही थी..जबकि मेरी बूर में पूरी की पूरी बोतल जा रही थी…

और इस अनोखे पल की घड़ी रूकते ही भैया मेरे शरीर पर लद गए जबकि पूजा श्याम के शरीर पर…अब उसके चेहरे पर डर बिल्कुल नहीं थी..थी तो
बस असीम सुख वो भी चुदाई वाली….

हम दोनों की नजर एक बार मिली जिसमें पूजा थैंक्स बोलती नजर आई और फिर अपनी-2 आँखें बंद कर सुस्ताने लगी…

अभी दस मिनट भी नहीं बीती कि भैया का लंड एक बार फिर से अंगराई लेता हुआ उठ गया…मेरी बूर पर उनके लंड की दस्तक हुई तो मैंने अपनी आँखें खोल दी…भैया भी सर ऊपर कर देख मुस्कुराते हुए बोले,”आज बिना कबाड़ा किए ये भी नहीं रूकने वाला है….”

और भैया उठते हुए पूजा की बाँह पकड़ अपनी तरफ खींच लिए और उसकी चूत में उंगली घुसाते बोले,” अब तुम अपने प्राण प्रिय का लंड चूस,,तब तक मैं इस पूजा की मां चोदता हूँ…” ये सुनते ही मैं श्याम के लंड की हो गई और मुंह में गप्प से सोए लंड भर जगाने की कोशिश करने लगी…

पूजा की कुतिया की तरह करते हुए उसका मुँह बेड पर टिका भैया ने एक झटके में ही पूरा उतार दिए….पूजा की भयंकर चीख गूँज उठी जिससे मैं भी घबरा गई..उधर नजर की तो देखी मिशन शुरू हो गई तब तक और सटासट पेले जा रहे थे…

इधर मेरी कोशिश भी रंग लाई और श्याम का लंड एक बार फिर मिशन चुदाई के लिए तैयार था…मैं उधर देखी तो अभी भी खेल जारी थी…सोची वक्त क्यों जया करूँ और अपनी बुर को श्याम के लंड को सेंटर में मिलाती धम्म से बैठ गई…हल्की चीख के साथ मैं पूरी निगल गई थी…

और फिर मैं कूदने लगी…गाड़ी समान थी पर ड्राईवर अब चेंज थी…मैं अभी 10 धक्के भी नहीं लगाई थी कि पूजा हुंकार भरती हुई झड़ने लगी..जिसे देख भैया बोले,”मादरचोद मेरा अभी ठीक से एडजस्ट भी नहीं हुआ कि झड़ गई…” और फिर भैया बड़बड़ाते हुए अपना लंड खींच लिए जिसे देख मैं बोली,”आपका है ही इतना ताकतवर तो इसमें उसकी क्या गलती..”

भैया : ” तू चुप छिनाल, पता है मुझे झड़ी चूत मारने में मजा नहीं आता…चल कोई बात नहीं है..तुम तो हो ना…”और भैया मेरी तरफ सरकने लगे…

पूजा : ” भाभी, काफी दर्द कर रही है…आहहहहहह…मर जाऊंगी भाभीईईई…”
पूजा अचानक दर्द से कराह पड़ी…मतलब अब भैया के लंड उस पर असर करनी शुरू हो चुकी थी..मैं श्याम के लंड भीतर कर स्थिर हो भैया की तरफ देखनी लगी…

भैया मुझे अपनी तरफ देखते हुए पा, बाहर की तरफ निकले और कुछ ही देर में पानी और दवा ला पूजा को देते हुए बोले,”लो खालो, आराम हो जाएगा..” और फिर पूजा दवा खा फिर आराम करने लगी…

और फिर भैया बेड पर चढ़ मेरे पीछे आ मुझे आगे की तरफ झुकाते हुए बोले,”एक का तो काम हो गया, अब तो पूरी रात तुझे ही बजाऊंगा..” और फिर बिना श्याम का लंड मेरी बूर से निकाले अपना लंड मेरी गांड़ पर टिका दिए और रगड़ने लगे….ओह गॉड….पीछे करेंगे और एक साथ दो-2…

मैं कुछ कहती इससे पहले ही मेरी कोरी गांड़ में पूरी ताकत से लंड पेल दिए…मैं चीखती हुई श्याम के ऊपर धम्म से गिरी…दर्द से मैं तड़पने लगी और कोसने लगी कि क्यों नहीं कुछ देर रूक गई..अगर रूकती तो शायद गांड़ बच जाती…

अचानक एक और हमला हुआ और मैं बेहोश सी हो गई…बस सांसे चल रही थी और इतनी महसूस कर रही थी कि मैं चुद रही थी…

भैया : ” शाबास…एक दम ताजी गांड़ मिली…बहनचोद मजा आ गया..कुछ तो मेरे लंड को नसीब हुआ…अब मजे कर सीता राण्ड…आज से तू परमानेंट रंडी बन गई…”

और फिर भैया कुछ रहमदिली दिखाते हल्के हल्के धक्के लगाने शुरू कर दिए…मैं कराहती हुई थोड़ी होश में आई पर इतनी हिम्मत नहीं कि कुछ रिएक्ट करूँ..बस शांत पड़ी धक्के खाने लगी…

तभी मेरे होंठ पर कुछ गीली महसूस हुई..आँखें खोली तो पूजा मेरे होंठ चूस रही थी…शायद पूजा को थोड़ी राहत मिल गई थी…कुछ ही पल में मेरी भी दर्द कम गई…जिससे मैं भी अब पूजा के किस का जवाब देती अपनी कुल्हों में हरकत करने लगी…

जिसे देखते ही भैया मेरी कमर पर दवाब बनाए और लगे दनादन पेलने…करीब 10 मिनट बाद भैया मेरी कसी गांड़ पर अपना लंड दबाते हुए जोर से चीख पड़े और अपना गरम लावा मेरी गांड़ में उड़ेल दिए…

और फिर लुढ़क गए हम सब..रात के करीब 2-3 बज रहे थे…और हम सब थक भी गए थे..सो भैया और पूजा दूसरे कमरे में,जबकि मैं वहीं पर सो गई…

सुबह सबसे पहले श्याम जगे…मेरी नींद तब खुली जब वो ऑफिस जाने के लिए तैयार मुझे जगा रहे थे…गुड मॉर्निंग किस आज उन्होंने ही दिया जिससे मैं मुस्कुराती हुई उठ गई…फिर वो लेट हो गया कह बाहर निकल गए…

फिर भैया व पूजा को जगा फ्रेश होने चली गई…सारा काम खत्म करने के बाद भैया एक-एक राउंड हम दोनों की चुदाई की और फिर विदा ले चले गए घर…

पूजा : “सच भाभी, मेरी तो जान निकाल दिए थे..ऐन वक्त पर मेडिसीन ना लेती तो शायद मैं जिंदा भी नहीं बचती…ओफ्फ….”

मैं हँसती हुई बोली,” पागल है क्या, चुदाई से कोई मरती है क्या? वो तो उनके स्टाइल से दर्द हो रही थी…मेरी भी पहली दफा यही हालत हुई थी..आज भी है पर कम…”

और फिर इस तरह रात की हर पल की बातें करती रही और फिर सो गए…अचानक फोन की रिंग से मेरी नींद खुली..देखी उठा के तो अंकल का था…

मैंने तेजी से बैठते हुए पिक करती हुई नमस्ते की..अंकल भी प्यार से खुश रहने की दुआ कर बोले,” कहाँ थी फोन रिसीव नहीं कर रही थी…”

“वो अंकल आराम कर रही थी..”

अंकल : “समय देखो, 5 बजने वाले हैं..रात में श्याम सोने नहीं देता क्या?”

अंकल की बात सुन मैं बिना जवाब दिए बस हँस दी…

“अंकल, आज तो इलेक्शन का रिजल्ट था ना…”मैं बातों को आगे बढ़ाती हुई पूछी..

अंकल : “हाँ, वही बताने तो फोन किया हूँ…अभी-2 वहीं से आया हूँ और पटना आ रहा हूँ…मैं एकतरफा बहुमत से जीत गया हूँ और इस जीत की पार्टी तुम्हारे साथ मनाने आ रहा हूँ..”

अंकल के शब्दों में अपार खुशी झलक रही थी..मैंने अंकल को हंसते हुए बधाई दी जिसे सुनते ही अंकल बोले,” थैंक्स माई लव पर इतने से काम नहीं चलेगा अब…”

मैं अंकल के मंसूबे को पलक झपकते ही ताड़ ली और फिर थोड़ी इठलाती हुई बोली,”..तो फिर काम चलाने के लिए क्या करना होगा मेरे प्यारे अंकल..”

अंकल : “हम्म्म..समझदारी तो दिखाई हाँ कह के…बस ज्यादा नहीं, मेरे तोप की देखभाल करनी होगी और ये शुभ काम आज हुआ तो ठीक वर्ना कल निश्चित करना होगा…” और फिर अंकल हंस दिए…

“हम्म्म…ठीक है..पहले जल्दी से आ जाओ फिर अपनी ड्यूटी शुरू कर दूँगी..”मैं भी अंकल से बेहिचक बोल दी…जिसे सुन अंकल के मुख से एक ठंडी आहह निकल पड़ी और इधर मेरी बूर से…

2 घंटे में आने को बोल अंकल फोन रख दिए…मैं भी अंकल की चुदाई को याद करती मुस्कुरा दी…और फिर पूजा को उठाती फ्रेश होने बाहर निकल गई…

शाम में श्याम के साथ ही अंकल आए जिनके हाथ में मिठाई और गिफ्ट भरे थे…मैं तो मन ही मन सोच रही थी कि काश..आज भी छोटी पार्टी हो जाए…

पर नहीं हुई…खाना पीना के बाद अंकल आज यहीं रूक गए…अंकल और श्याम एक रूम में और पूजा मेरे साथ दूसरे रूम में चले गए…उन दोनों का तो पता नहीं पर हम दोनों की नींद आ ही नहीं रही थी..

बस करवट बदल रही थी और जब पूजा से नजरें मिलती तो आँखों ही आँखों बात करती कि ऐसा क्यों? कभी बाढ़ आ जाती तो कभी एक बूंद को तरस रही हूँ….

खैर, रात के 1 बजे करीब गेट पर हल्की दस्तक हुई…मैं झट से उठ गई..लगता है कि अंकल हैं…पूजा भी उठनी चाही पर उसे रोकती हुई बोली,”तुम रूको, मैं देखती हूँ…और श्याम को भी देख लूँगी…”

कहते हुए मैं उठी और गेट खोली..गेट खुलते ही मैं सन्न रह गई..सामने श्याम थे…शायद ये भी तड़प रहे होंगे…पहली बार साथ रहते अलग सोए हैं ना इसलिए..मैं तुरंत ही अपने चेहरे पर मुस्कान बिखेरती हुई पूछी,”क्या हुआ?”

श्याम धीरे से मुझे बाँहों में कसते हुए बोले,”तुम्हें भी नींद नहीं आ रही क्या..?” मैं उनके होंठों को चूमती हुई ना में सिर हिला दी…श्याम भी किस का जवाब देते मेरे होंठ चूसने लगे…

जब किस रूकी तो श्याम मेरे चेहरे पर आई बाल को पीछे कान पर ले जाते हुए बोले,”मैं तो सो जाता पर अपनी जान की फिक्र ने हमें सोने नहीं दिया..”

मेरे प्रति फिक्र देख मेरे अंदर ढ़ेर सारा प्यार उमड़ आया…मैं उनके सीने को अपनी जीभ से चाटने लगी…तभी श्याम मेरे कानों में फुसफुसाते हुए बोले,”भैया को मिस कर रही हो…?”

मेरी जीभ जस की तस रूक गई श्याम की बात सुनकर…ऐसा लगा मानों किसी ने विस्फोट कर दिया हो मेरे अंदर…क्या श्याम रात में…..मेरी आँखें छलक पड़ी और आंसे उनके सीने पर पड़ने लगी…

श्याम ने मेरे चेहरे को पकड़ सीधे किए जिससे मेरी आँखें बंद हो गई और लगातार आँसू निकली जा रही थी…फिर वो मेरे होंठ के पास अपने होंठ लाते हुए बोले…

श्याम : “ऐ सीता, रोती क्यों हो? ज्यादा कुछ मैं नहीं जानता…बस इतना जानता हूँ कि इस चारदीवारी के बाहर भी एक जिंदगी है…किसी की पत्नी के बाद भी तुम्हारी अपनी जिंदगी है…मेरी भी है…अब जिसे मैं प्यार करता हूँ,उसकी इच्छा-पसंद को मैं कैसे दबा सकता..फिर तो मेरा प्यार बेकार है…मैं तुम्हें दिल से चाहता हूँ सीता…और शायद तुम भी…तुम्हें जो भी पसंद हो बेहिचक करो पर मेरे प्यार को कभी चोट मत पहुँचाना…क्योंकि प्यार एक बार होता है और शारीरिक आकर्षण बार-बार…तुम्हारी आँखें जब देखता हूँ तो मैं दुनिया से चिल्ला कर कह सकता हूँ कि तुम मुझे बेइंतहा प्यार करती हो..और बाकी के लिए तुम्हारी नजरें सिर्फ शरीर की भूख मिटाने उठती है…ऐसा नहीं है कि तुम मेरे साथ भूखी रहती पर तुम्हारी भूख कुछ और है…ऐसा सिर्फ तुम्हारे साथ ही नहीं बल्कि कईयों के साथ होती है…मैं भी ऐसा ही हूँ…कभी बताने की हिम्मत नहीं पड़ती थी तुम्हारे प्यार को देखकर…मैं ड्यूटी के बाद रोज अपनी गर्ल-फ्रेंड के पास जाता हूँ…”

अब मेरी सिसकी रूक गई थी पर आँसूं बह रही थी…और सारा ध्यान श्याम की कही एक-एक शब्द पर थी….

श्याम : “कभी कभी गर्लफ्रेंड से जब ऊब जाता हूँ तो रेड लाईट भी चला जाता हूँ…मैं ऐसे हालात से अच्छी तरह वाकिफ हूँ…आज तुमसे मैंने ये बात कह डाली दिल काफी हल्का हो गया…पहले तो कभी-2 तुमसे नजरें भी नहीं मिला पाता था…खैर अगर ऐसे कहता रहा तो पूरी रात निकल जाएगी पर बातें खत्म ना होगी…अब अगर मेरी बात को समझ गई हो तो प्लीज माफ कर देना…मैंने ये बातें तुमसे छिपाई थी…”

मैं उनके माफी मांगने पर आश्चर्य से आंसू भरे चेहरे ऊपर कर उनकी नजरों में देखने लगी…वो मुस्कुराते हुए मेरे आँसू पोंछते हुए बोले,”ऐसे क्या देख रही हो? अब तुम कहोगी कि मैं भी तो नहीं बोली थी तो सुनो…मैं तुम्हें कब का माफ कर चुका हूँ…तुम्हारे कारण ही आज पहली बार सुकून मिल पाया दिल के बोझ हटाकर…अब जल्दी से माफ करो और एक किस दो….”

उफ्फ्फ…मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी ऐसा प्यार पा कर..आज मन हो रही थी कि शादी के बाद हुई सारी घटना बता दूँ…पर इतनी खुशी में मेरी आवाजे ही नहीं निकल रही थी…अगर गॉड अगले जन्म का प्यार मुझे दे देते तो वो भी न्योछावर कर देती….और अंतत: मैं रो पड़ी, फिर हँसी और अपने होंठ चिपका दिए….

सच अब महसूस कर रही थी कि मैं सीधे दिल से किस कर रही हूँ…पहले तो ऐसी सुकून कभी नहीं मिली थी…

कूछ देर बाद जब किस रूकी तो श्याम मेरी तरफ निहारते हुए मुस्कुरा रहे थे…मैं उनकी तरफ देखीतो मुस्कुराए बिना ना रह सकी…

श्याम : “अच्छा मैडम जी, अब मैं सोने जा रहा हूँ…मैं गहरी नींद में सो जाऊंगा..फिर आप चुपके से अंदर आना और अंकल को उठा के इधर ले आना…ओके..” और फिर श्याम जाने के लिए हल्की सी जोर लगाते मुझे हटाने की कोशिश किए…

पर मैं उनकी बात सुनते ही उनके सीने पर हल्की चपत लगाते पुन: चिपक गई और बोली,”मुझे नहीं जाना अब कहीं…”

श्याम : “अच्छा तो फिर बुलाई क्यों उन्हें…और शाम से आप दोनों की नजरें ताड़ रहा था…दोनों की आँखें कह रही थी काफी दिनों से प्यासी हूँ…अब ये झूठे नखरे बंद करो…”

मैं कुछ देर बिना कुछ कहे मुस्कुराती रही…फिर बोली,”अंकल के साथ आज पहली दफा होगी…थोड़ी सी शर्म आती है इसलिए….”

मैं पूरी बात कह भी नहीं पाई कि बीच में श्याम रोकते हुए बोले,”रियली…वॉव…फिर तो अंकल किसी स्वर्ग से कम नहीं महसूस करेंगे…प्लीज हाँ कह दो…मैं भी थोड़ी लाइव देख लूंगा अपनी जान की….”

“प्लीज…अब ऐसी बातें मत करिए वर्ना फिर से रो पड़ूंगी…”मैं रोनी सूरत बनाते हुए बोली तो श्याम हंसते हुए सॉरी बोल पड़े…फिर गुड नाइट बोले और चल दिए…

एक कदम चलने के बाद अचानक ठिठके और वापस मुड़ गए…फिर आगे बढ़ते हुए सीधे पूजा के पास पहुँच गए…पूजा के बगल में बैठते हुए मेरी तरफ देख बोले,”पता नहीं क्या हो जाता है मुझे…बार-2 मैं अपनी इस गुड़िया जान को भूल जाता हूँ…”

“वो सो रही है अभी तो छोड़ दीजिए ना उसे…कल याद कर लीजिएगा अपनी गुड़िया को…” मैं झूठी झूठ बोल के देखी…मैं भी जानती थी कि पूजा हम दोनों की बातें सुन रही थी…अब पूरी सुनी या नहीं पता नहीं क्योंकि हमलोग धीमे बोल रहे थे…

श्याम मुस्कुराते हुए “अभी दिखाता हूँ कि ये कैसी सो रही है..” कहते हुए पूजा की बाँह पकड़े और औंधें मुँह कर सो रही पूजा को सीधे चित्त कर दिए…वॉव..ये तो सचमुच सोने का नाटक कर रही थी या सच में सो गई…कह नहीं सकती..

तभी श्याम ने पूजा की एक चुच्ची की निप्पल पकड़े और कस के उमेठ दिए…पूजा “ओह नो भैया” कहती हुई चीख पड़ी…चीख इतनी तेज नहीं थी कि कि आवाज रूम से बाहर निकलती…शायद पूजा अपनी चीख दबा दी थी…और फिर पूजा हँसती हुई अपने चेहरे को ढ़ंक ली…

फिर श्याम मेरी तरफ देख हंस पड़े…मानों कह रहे थे कि देखी, कितना सो रही थी…फिर आगे बढ़ पूजा के शरीर पर लद गए जिससे पूजा के चेहरे के ठीक सामने उनका चेहरा आ गया…फिर पूजा के हाथों को पकड़ दोनों तरफ कर बोले,”वाह मेरीशाली, रात में तो बड़ी मजे ले रही थी..अब जब मेरी बारी आई तो शर्माने की नाटक कर रही है…”

उनकी बात खत्म होते ही मैं बोल पड़ी,”ऐ…ये आपकी शाली कब से हुई…सेक्स अपनी जगह और रिलेशन अपनी जगह..समझे…”

श्याम : “आज से….क्योंकि तुम दोनों कहीं से भी ननद-भाभी नहीं लगती…बिल्कुल सगी बहन लगती…तुम किसी से भी पूछ लो…”

“अच्छाऽ तो जनाब यहाँ तक पहुँच गए…चलिए अब उठिए और जाइए सोने…बाकी बात कल कीजिएगा अपनी शाली से…”मैं समझ गई कि अब ये पूजा को तंग करेंगे उल्टी सीधी बोल के…

श्याम : “क्यों, ज्यादा खुजली हो रही है क्या अंदर जो अंकल के लिए उतावले हो रही हो..”
उफ्फ…क्या बोल दी…मैं थोड़ी नाराजगी में उनकी तरफ देखी और फिर बेड पर चढ़ सोती हुई बोली,”गुड नाइट..अब आप जितनी देर तक हो, आराम से बात करिए अपनी पूजा शाली से…” और मैं आँखें बंद कर सोने का नाटक करने लगी…

श्याम : ” ओहो नाराज क्यों होती हो..जा रहा हूँ बाबा…बस पूजा को गुड नाइट किस करने आया था…”

और फिर किस करती हुई मालूम होते ही मैंने देखी तो दोनों आराम से किस कर रहे थे…कुछ देर किस करने के बाद श्याम मेरे चेहरे को अपनी तरफ कर गुड नाइट किस दिए और बोले,”आ जाना कुछ देर में…ओके…”

मैं मुस्कुराती हुई हाँ में सिर हिला दी…फिर पूजा की तरफ देखते बोले,”शाली जी, थोड़ा अपने जीजू के लिए भी बचा के रखिएगा…ओके…” जिसे सुन पूजा हँसती गुई अपनी आँख खोल दी…

फिर श्याम बेड से उतर गए और बाहर की तरफ चल दिए…तभी पूजा पीछे से बोली,”जीजू….”

पूजा की आवाज सुनते ही श्याम एकाएक रूक गए और मुस्कुराते हुए पीछे मुड़ र देखने लगे..उनके पीछे पलटते ही पूजा एक फ्लाइंग किस उनकी तरफ उछाल दी…श्याम कैच करते हुए अपने दिल से लगाए और फिर एक फ्लाइंग किस देते हुए बाहर निकल गए…

श्याम के जाते ही मैं पूजा पर चढ़ गई और उसके गाल काटती हुई बोली,”हाय मेरी बहना, ये क्या हो गया….हम लोग एक निवाला को तरस रहे थे, वहीं अब पूरी थाली मिल गई..”

पूजा चीखती हुई हंसी और बोली,”यस दीदी जी, अब तो बाहर भी मस्ती और अंदर भी…” फिर हम दोनों एक जोरदार किस किए…काफी देर बाद किस रूकी तो मैं उठी और बोली,”अब अपनी बूर की जुगाड़ कर के आती हूँ…तब तक तुम नंगी हो जा मेरी बुल्लो…”

पूजा ओके कहती हुई कपड़े खोलने लग गई और मैं बाहर दूसरे रूम की तरफ चल दी जहां मेरे पति के साथ अंकल सो रहे थे, उन्हें जगाने…

अंकल बेसुध हो पड़े लम्बी लम्बी खर्राटे भर रहे थे जबकि श्याम दूसरी तरफ मुँह किए सोने का नाटक कर रहे थे..मैंने धीमे से अंकल के पास बैठते हुए झुकी और अपने दांत अंकल के गालों पर भिड़ा दी…

श्याम अगर नहीं जानते तो मैं कभी हिम्मत नहीं करती ऐसा करने की, पर अब तो डर नाम की कोई चीज तो बची ही नहीं थी..मेरे दांत गड़ते ही अंकल हड़बड़ कर “कौन है” कहते हुए उठ बैठे…जिसे देख मैंने फौरन अपने हाथ अंकल के मुँह पर रख दी और बोली,”अंकल…मैं सीता. चलो उस रूम में.. “

अंकल मुझे देख हैरानी से उनकी आँखें फट गई..वे कभी सोए श्याम को देखते तो कभी मेरी तरफ…उन्हें ऐसा देख मैंने उनकी बाँह कस के पकड़ी और खींचते हुए इस रूम में ले आई…

रूम में आते ही मैं उनसे कस के लिपट गई और अपने होंठ उनके होंठ पर रखती बेतहाशा चूमने लगी…अंकल को कुछ समझ नहीं आ रही थी कि आखिर ये हो क्या रहा है..पर कब तक समझने की कोशिश करते…आखिर वे दिमाग चलाना छोड़ अपने जीभ मेरे मुँह के अंदर चलाने लगे…

तभी एक और जीभ मेरे गालों से सटती हम दोनों के होंठों के बीच आ गई..ये पूजा थी..अंकल ने पूजा को अपनी ओर भींच जगह दे दिए और अब हम तीनों अपनी – 2 जीभ टकरा के खेल रहे थे…

और अंकल के दोनों हाथ बारी-2 से हम दोनों की चुचिया मसल रहे थे…चुसाई के बीच चुची में हो रही दर्द से हम दोनों आनंदमयी मस्ती की गली में घूम रही थी…अचानक अंकल हम दोनों को अलग किये और अपने तन पर की एक-दो कपड़े खोल दिए…

बस फिर क्या था..अंकल के आदेश का इंतजार किए बिना ही मैं और पूजा एक-साथ नीचे उनके विशाल लंड की तरफ लपकी…सच काबिल-ए-तारीफ था अंकल का लंड..एकदम लोहे की तरह कड़क…ऊपर टमाटर इतनी बड़ी लाल सुपाड़ा…साइज करीब 9 इंच…

मैं हाथ में जैसी ही ली कि मेरी बुर से कामरस टपकने लगी..और मेरी जीभ से लार टपकने लगी…अनायासतः अंकल के हाथ मेरे सर को हल्के दबाव देने लगे…

बदले में मैं किसी चुम्बक की तरह लोहे की तरफ खिंचती चली गई और अब मेरे मुँह के अंदर गरम गरम रॉड समाई हुई थी…काफी उत्तेडक दृश्य थी…पूजा नीचे से आधे लंड को जीभ से सेवा दे रही थी और मैं जितनी तक हो सकी अंदर की हुई सेवा कर रही थी…

ऊपर अंकल आकाश की तरफ मुँह किए आहें भर रहे थे…काफी देर तक अंकल को हम दोनों एक पर एक तरीके से मुँह से सुख दे रहे थे…अब शायद अंकल की सहन शक्ति जवाब देने वाली थी…अचानक वे पूजा को एक तरफ कर दिए और मेरे बाल पकड़ कर तेज तेज शॉट मारने लगे…हचाक…हचाक की तेज आवाजों के साथ मेरी आँखें निकलने लगी और मेरी गले की नस नस खींचने लगी थी…

आँखों से आँसू की धार फूट कर बाहर निकलने लगी थी…पर अंकल इन सब चीजों को अनदेखा कर धमाधम मेरी होंठो को चीरते धमाका किए जा रहे थे…मेरे मुँह से ढ़ेर सारी लार बह कर नीचे मेरी पर्वतनुमा चुची से टपकती जमीन पर गिर रही थी और पसीने से नहा गई थी….

तभी अचानक से अंकल अपना लंड बाहर कर लिए और तेज साँसें लेने लगे और मेरी तो जान में जान आ गई…मैं सर नीचे कर हाँफ रही थी…कुछ देर बाद जब थोड़ी शांत हुई तो नजर ऊपर की तो उफ्फ्फ…अंकल का लंड को अब और विकराल लग रहा था…

अंकल अभी झड़े नहीं थे…शायद वो झड़ना नहीं चाहते थे तभी लंड बाहर कर लिए…वर्ना अगर दो धक्के भी और लगते तो वे झड़ जाते…बगल में पूजा अंकल से पूरी तरह वाकिफ अपनी टांगें चौड़ी किए बुर में अंगुली घुसा कर अंदर बाहर कर रही थी और चुची मसल रही थी…

फिर अंकल मुझे उठाए और बेड पर धक्का दे दिए..मैं गिर पड़ी पीछे की तरफ जिससे मेरी टांगे जमीन पर थी और मेरी भींगी हुई चूत बेड के किनारे पर ऊपर की तरफ थी…अंकल मेरे गिरने के साथ ही मुझ पर झुकने लगे और अगले ही पल उनका 9 इंची लंड सटाक से मेरी बुर में समा गया….

मैं “आहहहह श्याम…” करती चिल्ला पड़ी…जिससे डर के मारे अंकल मेरे मुँह पर अपना हाथ रख दिए…सच में इतनी देर से पानी में फूल रही लंड काफी मोटा हो गया था और एक ही बार में पूरा जाने से मेरी बुर तो फट ही गयी थी…मुझे तो अजीब लग रही थी कि लगातार लंड की साईज बढ़ती ही जा रही थी और पहली बार सबके साथ लगती आज ही मेरी सील टूटी है…

कुछ देर तक मेरी निप्पल को दांतों से कुरेद कर मेरी दर्द को कम करते रहे…जब कुछ दर्द कम हुई तो मैं नीचे अपनी बुर को ऊपर कर लंड की रगड़ पाने की कोशिश करने लगी..जिसे अंकल तुरंत समझ गए कि अब सब ठीक है, अब गाड़ी को बढ़ाना चाहिए…

फिर अंकल मेरी चुची पर एक लम्बे चुप्पे मारे और सीधे हो गए…वे इतनी सरलता से सीधे हुए कि उनका लंड आधी इंच भी बाहर नहीं निकली..पर पूरे खड़े नहीं हो पाए थे….

उन्होंने तकिया बगल से खींचा और पूजा की तरफ उछाल दिए…पूजा समझदारी दिखाई और तकिया लेती हुई मेरे निकट आई…तभी अंकल ने मेरी कमर को थोड़ा ऊपर किए..उसी समय पूजा तकिया मेरी गांडं के नीचे घुसा दी…

वॉव…अब अंकल बिल्कुल ही सीधे हो पा रहे थे. .और साथ ही मैं अपनी बुर में घुसे लंड को साफ देख रही थी…तभी अंकल मेरी कमर दोनों हाथों से जकड़ लिए जिससे उनके दोनों अँगूठे मेरी नाभी के पास मिल रही थी…

और फिर अपना लंड बाहर खींचना शुरू किए, जब सिर्फ सुपाड़ा निकलनी बची थी कि तभी रॉकेट की गति से वापस अंदर कर दिए…आउच्च्च…कितनी भयंकर थी ये प्रयोग…मैं कसमसा कर रह गई…

फिर ठीक उसी तरह हौले-2 बाहर निकालना और फिर तड़ाक से अंदर घुसेड़ देना…काफी असहनीय, पर लाजवाब थी मेरे लिए…मेरी बुर की नस नस बिखर जाती थी…ऐसी लग रही थी कि मेरी बुर कतरी जा रही है…

उनके तेज धक्के से मैं बार -2 पीछे की तरफ खिसक जाती थी…मेरी बुर से पानी की पतली धारें निकलनी शुरू हो चुकी थी..मैं आतुर हो गई थी अब लगातार ऐसी ही अपनी बुर को कतरवाऊं…

अंततः मैंने अपने पांवों को मोड़कर अंकल के चूतड़ को जकड़ ली ताकि ना फिसलूं अब…और साथ ही लंड को ज्यादा से ज्यादा अपनी चूत में कर सकूँ…मुझे ऐसा करते देख अंकल मुस्कुराते हुए पूजा की तरफ देखे और…

तभी पूजा झुकती हुई मेरी बुर के पास आई और अपनी जीभ लपलपाती हुई मेरी बुर पर रख दी..जिससे वो मेरी बुर के साथ-2 लंड का भी स्वाद चख रही थी…ऊपर पूजा के हाथ बढ़कर मेरी चुची को मसलने लगी…

और अंकल अपने काम में लग गए…वे धीरे-2 पर लगातार लंड मेरी बुर में चलाने लगे…जिसे पूजा बड़ी सफाई से अंकल के लंड का स्वाद चख रही थी…मैं इस दोहरी मार को नहीं झेल पा रही थी और सिसकी लेती हुई अपने सर बाएँ-दाएँ करने लगी…

कुछ ही पलों में अंकल की स्पीड काफी तेज हो गई….उनका लंड सटासट मेरी बुर को छलनी किए जा रहा था…बीच-2 में उनका लंड पूरा बाहर आ जाता तो अगला शॉट सीधा पूजा के गले में उतर जाती….

ओफ्फ…काफी उत्तेजक थी ये पोजीशन…मैं इस तरह की खेल में नई थी तो झेल नहीं पाई और नदी की बाँध टूट गई…जिसे पूजा कुतिया की तरह चट कर गई…पर अंकल की स्टेमिना लाजवाब थी..वो अब दुनिया से बेखबर लगातार मेरी धज्जियाँ उड़ा रहे थे…

अब तो वे जान बूझकर भी अपना लंड बाहर खींचकर पूजा के मुँह को बूर बना कर पेल देते…5 शॉट पूजा के मुख में तो 10 शॉट मेरी चूत पर लगती…तभी अंकल और जोर से शॉट लगाने लगे, शायद चरम सीमा की तरफ बढ़ रहे थे…

अंकल : “आहहहह…शाबासऽ मेरी पूजाऽ राण्डडडडडऽऽ…ऐसे ही अपने मुँह खोल के रखा कर कुतिया….ओहहहहह…याहहह..याह…याहहह….यस मेरी सीता रानीईईईऽ आज से तू भी मेरी रखैलऽलऽलऽलऽ… है शाली….”

मैं भी अब अपना नियंत्रण खो चुकी थी..अंकल के साथ मैं भी बड़बड़ाने लगी,”हाँ अंकअअलऽऽ मुझे अपनी रखैल बना लोओओओ….रण्डी हूँ आपकी.ई.ई.ई..आहहह याईईई…हाँ अंकललल…ऐसे ही…और जोर से चोदो अपनी कुतिया कोओओ…आहहह..”

इधर पूजा अपने भींगे चेहरे से लगातार मेरी चूत से निकल रही पानी को सोख रही थी…मेरे हाथ अब बढ़ के पूजा के बाल पकड़ कर अंदर बूर की तरफ धकेल रही थी और पूरे कमरे में मेरी और अंकल की चीखें गूँज रही थी…

एक बारगी मेरे मन में इच्छा हुई कि श्याम को देखूं…जरूर गेट पर छुप के देख रहे होंगे…पर आँखें खोली तो सामने अंकल का विशाल मांसल पेट नजर आया…फिर अपनी आँखें बंद कर मस्ती में श्याम को भुला खो गई…

तभी अंकल एक हुंकार से लबालब चीख मारी और बड़बड़ाते हुए मेरी बुर में अपना पानी डालने लगे…

अंकल: “ले रंडी, मेरे लंड का पानी अपनी बुर में लेएएएऽ..आहहहह..पहले तेरी सास की बुर में डालाआआआऽ…फिर तेरी ननद पूजा के बूर मेंऐऐएऽ…और अब तेरी बूर को भर रहा हूँ…आहहहह…आहहहह…”

मैं अंकल के साथ ही झड़ रही थी पर झड़ने से ज्यादा विचलित अपनी सास के बारे में सुन के हो गई थी…क्या अंकल सबको चोदते हैं….झड़ने के साथ ही अंकल मेरे शरीर पर औंधे मुँह लेट कर हाँफने लगे…मैं भी हांफती हुई अंकल को बांहों में भर ली…

कुछ देर बाद जब आँख खुली तो मेरी नजर सीधी गेट की तरफ गई जहाँ श्याम बिना हिचक के अंदर आ अपने लंड को मसलते बीवी को चुदते देख रहे थे…मेरी नजर मिलते ही वो मुस्कुराते हुए अपना अंगूठा ऊपर की तरफ करते हुए वापस सोने चले गए…ये देख मैं भी हौले से हँस पड़ी…

वापस पूजा की तरफ देखी तो वो लाल आँखें किए अंकल को घूरे जा रही थी…शायद मम्मी के बारे में सुन उसे भी शॉक लगी थी…

कुछ देर बाद जब अंकल साइड हुए तो पूजा को अपनी तरफ यूँ देख सकपका गए, पर जल्द ही माजरा समझ गए…फिर भी अंकल अनजान बन मुस्कुराते हुए पूछे,”क्या हुआ डियर?”

पर पूजा तो बस यूँ ही घूरे ही जा रही थी…मैं पूजा को ऐसे देख उठी और उसके बालों को सहलाती हुई बोली,”सॉरी पूजा, पर इसमें तुम्हारी गलती नहीं है..जैसे हम दोनों चाहते थे, शायद वैसे भी मम्मी जी भी चाहती हों…हाँ अंकल आपको ऐसे नहीं बोलना चाहिए था…”

अंकल: “क्यों? पूजा नहीं जानती है थोड़े ही…नाटक करती है तुम्हारे सामने…पता है दोनों माँ-बेटी को कई बार एक साथ चोद चुका हूँ पूछ इससे…अब अगर तुम भी जान गई तो इसमें प्रॉब्लम क्या है…वैसे इस घर की बात इसी घर में रहती हो, ये पूजा अच्छी तरह जानती है..और हाँ.. पूजा की बूर पेलते वक्त इसकी माँ बड़े ही मजे से मेरा लंड चूसती है, जैसे आज ये चूस रही थी…” और फिर अंकल पूजा की नंगी बूर पर अंगूली फेरने लगे…

मैं अंकल की बात सुनते ही शॉक हो गई कि ये क्या माजरा है…मेरे जेहन में एक डर समा गई कि कहीं मम्मी जी मेरे बारे में सुन….वो करते हैं वो अलग बात है पर मैं…..वो भी ससुर के साथ…मैं पूजा की तरफ देखती सोच में पड़ गई…

तभी अंकल बोले,” तुम क्या सोच रही हो सीता….डरो मत वो ऐसा वैसा कुछ नहीं करेगी अगर जान गई तो…और हाँ तुम अब गाँव आएगी तो तेरी देखना तेरी सासू माता ही तुम्हारी बूर में लंड डालेगी….”

मैं ये सुनते ही शर्म से नीचे कर ली…उसी पल पूजा अंकल के सीने पर एक चपत लगाते हुए हँस पड़ी…जिससे अंकल भी हँस पड़े…मैं उन दोनों को हंसते देख नजरे ऊपर की तो मेरी नजर सीधा अंकल के लंड पर पड़ी जो हॉट बातें सुन अंगड़ाई लेनी शुरू कर दी थी…

खड़े लंड को देखते ही मेरी बुर में हरकत होनी लगी और ललचाई नजरों से अपनी जीभ फेरने लगी होंठो पर…अंकल की नजर मुझ पर पड़ते ही उन्होंने अपना पंजा मेरे गालों पर रख अंगूठा मेरे होंठ पर रख दिए…मैं तुरंत ही आँखें बंद करती अँगूठे को लंड समझ अंदर की और चुसने लगी…

अंकल: “एक बात तो है पूजा,आज तक मैंने ना जाने कितनी रण्डियाँ चोदी है, पर इसके जैसी गरम रण्डी आज तक नहीं मिली…” और तभी अंकल एक झटके से अपना अंगूठा खींच लिए जिससे मैं नशीली और प्यासी नजरों से अंकल की तरफ देखने लगी…

अंकल तभी घुटनों के बल खड़े होते हुए बोले,”चल, कुतिया बन जा मादरचोद…” और मैं सुनते ही किसी दासी की तरह फौरन कुतिया बन गई और अपनी गाँड़ अंकल के लंड की तरफ कर दी…

अगले ही पल अंकल का लंड मेरे गांड़ों के छेद पर महसूस हुई…मैं सिहरती हुईअपनी आँखें भींचती हुई दांत पीस ली अगली वार को सोच कर…

और पूजा आगे बढ़ झुकी और मेरी मुंह में अंगुली डाल निप्पल को अपने मुंह से चूसने लगी…कि तभी एक जोरदार धक्के लगे…मेरी चीख गूँजने से पहले ही पूजा के हाथ मेरे मुंह सील दिए…अंकल जड़ तक लंड पेले मेरी चूतड़ को थपथपा रहे थे…मेरे आँसूं बेड पर बह रही थी…

कुछ पल तक अंकल स्थिर रहे, फिर लगे पेलने…और मेरी बुर से भी बदतर हाल 5 मिनट में ही कर दिए…और फिर कुछ देर बाद तेज धक्के लगाते हुए अपना लंड की टोटी खोल मेरी गांड़ को भरने लगे….

फिर अंकल जैसे ही लंड बाहर खींचे, मैं धम्म सी बेड पर बेहोश गिर पड़ी…अंकल कुछ देर बाद आराम किए फिर पूजा की भी मस्ती में दमदार चुदाई किए…मैं कुछ देर बाद उठी और उन दोनों की हेल्प की, जैसे पूजा कर रही थी…पूजा की भी बूर-गांड़ की अच्छी धुलाई किए अंकल ने….सुबह 4 बज गए गए थे चुदाई करते-करते…

फिर अंकल वापस अपने कपड़े ले श्याम के पास सोने चले गए…जबकि कुछ ही पल में पूजा नंगी ही नींद की आगोश में समा गई…कुछ ही देर में सुबह होने वाली थी या यूँ कहिए सुबह हो गई थी…

मैंने दिन में ही सोने की सोच बाथरूम की तरफ नंगी ही चल दी…

फ्रेश होने के बाद पूजा के रूम में कपड़े पहनने आई…साड़ी उठाई कि मेरी नजर पूजा की एक समीज सलवार पर गई जो क्रीम कलर थी और झीनी सी थी…पूजा ये सूट अब केवल घर पर ही पहनती थी…कॉलेज या कहीं जाती तो चुस्त कपड़े पहनती थी…

मैंने साड़ी वहीं रख सूट-सलवार निकाली..फिर पेन्टी पहनते हुए सलवार डाल के नाड़ा कसने लगी..काफी ज्यादा दिक्कत नहीं हुई पहनने में क्योंकि सलवार अक्सर बड़ी ही रहती है जिसे नाड़े से सही जगह एडजस्ट कर बाँधनी होती है…

दिक्कत थी तो समीज में…दिखने से ही काफी तंग लग रही थी…2 साल पुरानी थी,,,गांव में थी तभी अंकल ही दिए थे पर वहाँ भी ज्यादा नहीं पहन पाई थी…एक या दो बार ही पहनी थी, वो भी शादी में ही…

खैर मैं कुछ सोची फिर सर के ऊपर से डालने लगी…उफ्फ..सच में कितनी कसी थी….मुश्किल से पर आराम-2 पहन ही ली…ओफ्फो, मेरी तो पूरी बॉडी ही बँध गई थी…इतनी चुस्त थी कि अगर थोड़ी अंगराई भी लेती तो फट जाती…

खैर, पहनने के बाद शीशे के पास खड़ी हुई तो ओह गॉड…मेरी चुची इतनी भयंकर लग रही थी कि मैं खुद शॉक रह गई…एकदम बड़ी नींबू की तरह गोल शेप में आ गई थी..और मेरी भूरे रंग की निप्पल साफ झलक रही थी…

मेरे हाथ अनायास ही चुची पर चली गई…और फिर हाथों को ऊपर से हल्की दबाती हुई फिसलाने लगी…कुछ ही पलों में दोनों निप्पल कड़क हो गई और समीज को फाड़ने आतुर होने लगी…मैं मुस्कुराती हुई दोनों को चुटकी से मसल दी जिससे मैं तड़प कर सिसक दी…

मन ही मन सोच ली कि अब दोनों लंड वालों के सामने ऐसे ही जाऊंगी…फिर उनका हरकत देखूंगी…खासकर अंकल का कि उनमें कितनी हिम्मत है…फिर मैंने घड़ी पर नजर डाली तो अभी 5 बजे थे…अचानक कुछ याद पड़ते हीमेरे चेहरे की लाली बढ़ गई…

और फिर गेट के पास टंगी चाभी ली और बाहर ऐसे ही निकल गई…कैम्पस के मेन गेट खोली और दो कदम बाहर निकल सड़क पर नजरें दौड़ाने लगी..कहीं किसी का अता पता नहीं था…मैं वापस अंदर आई और मेन गेट को दो इंच के करीब खुली छोड़ फ्लैट की तरफ बढ़ गई…

अंदर आते ही पहले तो श्याम को देखने गई, जहाँ दोनों गहरी नीं में पड़े हुए थे…फिर दूसरे रूम में पूजा पर बाहर से ही परदा हटा झाँकी तो पूजा नंगी एक पतली जादर ओढ़े लुढ़की पड़ी थी…मैं वापस मुड़ पास रखी कुर्सी पर बैठ गई और रात की बातें याद कर सोच में डूब गई…

अचानक बजी बेल से मैं चौंकती हुई उठ खड़ी हुई…फिर गलियारे की तरफ मुड़नी चाही जहाँ से बेल बजने पर पहले मेन गेट पर देखती थी..पर रूक गई और फिर फ्लैट के गेट की तरफ कदम बढ़ा गेट खोली…सामने दूधवाला खड़ा था…

मैं गेट खुली छोड़ किचन में वापस आई और बर्तन ले दूधवाले के पास जाकर खड़ी हो गई..वो तो मुझे छोड़, मेरी चुची को मुंह फाड़े घूरे जा रहा था…मैं भी अंदर से मुस्काती हुई खड़ी हो उसके तरफ देखने लगी…कुछ पलों के बाद जब उसकी नजर मेरी नजर से टकराई तो वो सकपका सा गया…

पर मुझे मुस्कुराते देख वो भी हंस पड़ा…फिर बिना कुछ कहे नीचे दूध के केन में अपनी लीटर वाला बर्तन डाल दिया…फिर थोड़ा ऊपर होते हुए बोला,”नीचे झुक के लो मैडम वरना जमीन पर गिर जाएगा…” मैं उसकी तरफ देख हल्की मुस्कान लाती हुई अंदर से होंठों पर हल्की जीभ चलाती हुई झुक गई…

और बर्तन उसके केन के पास कर दी…झुकने से चुची दिखने वाली ढ़ीली समीज तो पहनी नहीं थी जो ये झुकने बोला…पर झुकने पर जो चुची जमीन पर गिरती प्रतीत होती है, वो मर्दों को ज्यादा लुभाते हैं…शायद इसी वजह से कहा होगा…

मैं और अपनी चुची को नीचे करने के ख्याल से कुछ ज्यादा नीचे हो गई, जिससे मेरा चेहरा ठीक उसके लंड के सामने पहुंच गया..मैं एक नजर डाली तो लंड धोती में ही ठुमके लगा रहा था..मैं मंद मंद हंस पड़ी….

तभी वो मेरी बर्तन में दूध उड़ेलने लगा…जैसे ही दूध पूरा डाला उसने अपना दूसरा हाथ मेरे सर पर रख हल्का दवाब देने लगा..मैं आश्चर्यचकित रह गई, फिर सोची थोड़ी देर और देखना चाहता है शायद…मैं बिना जोर किए हाथ में दूध लिए झुकी रही…

तभी उसने दूध मापने वाला हाथ मेरे सर पर रख दिया और वो हाथ हटा लिया…उस मापक से दूध की बूँदे मेरे बाल और पीठ पर पड़ने लगी…अचानक से अपना धोती में हाथ डाला और अगले ही पल उसका काला लौड़ा मेरे होंठो से टकराने लगा….

“चूससससऽ लो मैडम…आज के लिए एकदम ताजा है….”दूधवाले सित्कारते हुए अपना लंड धकेलते हुए बोला…और अब उसने एक हाथ नीचे से गर्दन पर रख दिया और दूसरा हाथ तो ऊपर से जकड़े हुए था ही…मेरे हाथों में दूध से भरी बर्तन थी जिससे मैं चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रही थी…

अगर दूध छोड़ती तो दोहरी नुकसान झेलनी पड़ती…क्योंकि लंड तो अब जाता ही मुंह में…मैं दूध के बर्तन पर पकड़ अच्छी से बनाई और साँस रोकती हुई लंड के लिए हल्की जगह दे दी…

पर इस हल्की जगह अगले ही पल बड़ी जगह में बदल गई और पूरा का पूरा लंड मेरे गले में उतर गया…मैं तड़पती हुई पीछे होनी चाही पर हो ना सकी..हाँ वो जरूर समझ गया जिससे अपना लंड हल्का पीछे खींच लिया…

मैं थोड़ी राहत की साँस ली..पर ज्यादा नहीं ले पाई..अगले ही पल दुबारा पेल दिया था..नैं हिचक पड़ी…पर मानने वाले था नहीं…छेद मिलते ही लंड पत्थर समान पत्थरदिल जो हो जाता है…वो इसी तरह हल्के-2 मगर तगड़ा शॉट लगाए जा रहा था…

कुछ ही देर में मेरी लार में सनी उसके लंड के प्रीकम बाहर टपकने लगी जो सीधी नीचे दूध में गिर रही थी…पर अब इस बात की खबर ना हमें थी और ना उसे…मेरी चूत भी गरम हो कर पिघलने लगी थी…

तभी उसने दोनों हाथ हटा लिए और मेरी बड़ी सी शेप लिए चुची को पकड़ लिया…अब चाहती तो पीछे हट सकती थी पर हट ना सकी…ऐसे पोजीशन में चुची पर पकड़ भी ढ़ंग से नहीं बन पाती है…

शांत मुद्रा में अपना मुंह खोली झुकी चुची रगड़वाते लंड खा रही थी वो भी दूधवाले का….वो अब दनादन मेरे मुखद्वार में अपना खूँटा गाड़े जा रहा था…दूध में गिर रही रस की मात्रा भी बढ़ रही थी…

करीब दस मिनट तक यूँ ही झुकी रही और वो पेलता रहा…अगर वो चाहता तो इतनी देर में चूत भी बजा सकता था पर नहीं…शायद धीरे धीरे बढ़ना चाहता हो…तभी एक करारा शॉट लगा और वो दांत भींचते हुए कांपने लगा…

उसके लंड ने फव्वारे छोड़ने शुरू कर दिए थे…इधर मेरी चूत भी नदी बहा दी….उसका लंडरस सीधा मेरे पेट में गिर रहा था…कुछ देर तक यूँ ही रूका रहा…फिर शांत हुआ तो वो अपना लंड बाहर खींचने लगा…

बाहर निकलने के क्रम में सॉलिड वीर्य की कुछ मात्रा नीचे टप्प की आवाज से दूध में गिरी…जिसे हम दोनों की हल्की हंसी निकल पड़ी..फिर मैं सीधी हुई…

वो भी अपना लंड धोती से ही पोंछा और अंदर छुपाते हुए बोला,”आज का दूध में ज्यादा विटामिन है मैडम…ऐसा दूध एक महीने तक लेगी तो पूरी फैमिली तंदुरूस्त हो जाओगी…” और फिर वो हंसने लगा…

मैं भी मुस्कुराती हुई बोली,”सांड़ कहीं का., ऐसे कोई करता है क्या? कोई देख लेता तो…” पर वो मेरी बात का जवाब दिए बिना ही हंसता हुआ दूध का के उठाया और नीचे चल पड़ा…मैं भी वापस किचन की तरफ चल दी…

किचन में दूध रखते ही गेट पर नॉक हुई…गेट बंद भी नहीं की थी…अब क्या लेने आया है? मैं ऐसे ही बड़बड़ाती गेट की तरफ चल दी…जैसे ही गेट पर खड़े व्यक्ति पर नजर गई कि मैं हड़बड़ाती हुई रूम में भागी दुपट्टा लेने…

मकान मालिक खड़े थे बाहर…उनका नाम तो नहीं जानती थी पर पहचानती थी..दुपट्टे को सीने पर रखी और चेहरे को साफ करती हुई वापस गेट पर आई और बोली,”नमस्ते जी..”

उनकी उम्र कोई 35 के आसपास थी…ज्यादा मोटे नहीं थे पर भरा हुआ शरीर था…बाल गोल्डेन कलर की थी और मूंछें तो सफाचट ही थी…निकर और टीशर्ट पहने हुए थे…शायद मॉर्निंग वॉक गए थे…और वो कुछ ही दूर आगे वाले घर में रहते थे…

मकान मालिक: “नमस्ते, वो मेन गेट रात में खुला छोड़ दिए थे क्या?” मैं उनकी बात सुनते ही ना में सिर हिला दी..जिससे उनके चेहरे पर आश्चर्य की लकीरें साफ उभर आई…फिर बोले,”दूधवाला को अभी यहाँ से ही निकलते देखा तो उससे पूछा..तो वो आपका ही नाम बताया कि यहां सिर्फ आप ही दूध लेते हैं तो….”

आगे उनको बीच में ही रोकती हुई बोली,”हाँ…दरअसल आज कुछ जल्दी नींद खुल गई तो नीचे टहलने गई थी और वापस आते वक्त गेट खोल दी थी…”

मकान मालिक: “ओह..फिर ठीक है पर एक बात का ख्याल रखिएगा..अंदर ऐसे लोगों को मत आने दीजिएगा..यही सब घर में गैरमौजूदगी का फायदा उठा लेते हैं…सब कुछ तो अंदर आ मुआयना कर ही लेते हैं, फिर बस मौके की तलाश में रहते हैं…बात को समझ रहे हैं ना..”

मैं उनकी बात समझ हाँ में सिर हिला दी…तभी वो मेरे चेहरे की तरफ आगे बढ़ काफी निकट आ खड़े हो गए, फिर मेरे एक तरफ झुक अंदर देखने लगे…मैं कुछ नहीं समझ पा रही थी कि अब क्या देख रहे हैं…

अंदर देखने के बाद वो फिर सीधे हुए और अगले ही क्षण अपनी एक अंगुली मेरी होंठ पर घिसते हुए हटा लिए…मैं हैरानी से पीछे हटती उन्हें देखने लगी…और फिर वो उसी अंगुली को अपनी नाक से सूंघे, ओह कहते हुए अपनी अंगुली तुरंत ही हटा लिए…

अब मैं सोच में पड़ गई कि क्या कर रहे हैं? यही सोच अपनी अंगुली जब होंठ पर लाई तो कुछ चिपचिपा महसूस हुआ…ओह गॉड…मर गई…मैं वापस मुड़ी ही थी कि उसने मेरी बाँह पकड़ हमें रोक दिए…

और फिर अपनी वही अंगुली एक ही झटके में मेरे मुँह में डालते हुए नजदीक सटते हुए बोले,”आज पहली बार है इसलिए वार्निंग दे रहा हूँ बस…अगर आगे से ऐसी घिनौनी हरकत की तो सीधा घर से बाहर…ये कोई रंडीखाना नहीं, मेरा घर है…और बाहर करने से पहले तेरा वो हश्र करूंगा कि जिंदगी भर हमें याद रखोगी…समझी…”

और फिर अंगुली मेरे मुँह से निकाल मेरी दोनों चुची के बीच की दरार में घुसा पोंछने लगे समीज में…मैं चौंक कर रह गई.. और फिर बाहर की तरफ खींच अंगुली नीचे एक चुची पर होते हुए सरका दिए… जिससे मेरी चुची पूरी तरह दब गई…मेरे मुंह से हल्की आह निकल गई….फिर वो मुझे ऊपर से नीचे एक बार घूरे और वापस निकल गए…

उफ्फ…ये क्या मुसीबत आ गई…अगर श्याम से शिकायत कर दिए तो वो गुस्से से बौखला जाएंगे…उन्होंने मस्ती की प्रमीशन दिए थे, ना कि इज्जत कबाड़ा करने की…मन ही मन सोच भी ली थी कि आज से ऐरे-गैरे से तौबा…

मैं गेट बंद कर वापस गलियारे की तरफ बढ़ गई जहाँ से सड़क साफ दिखती है…

सड़क पर नजर दौड़ाई तो वे जा रहे थे…कुछ देर तक रूकी रही…तभी वे अचानक मेरे फ्लैट की तरफ पलटे..मेरी नजर मिलते ही मैंने झट से अपने दोनों हाथों से कान पकड़ माफी मांगने लगी…पर वो बिना कोई जवाब दिए वापस मुड़ चलते रहे…

आँखों से ओझल होने के बाद मैं भी वापस आ गई….चाय बना कर सभी को जगाती हुई दी..फिर मैं किचन में घुस गई…श्याम मुझे देखे तो उनका मुंह खुला का खुला रह गया…अंकल भी काफी मेहनत से खुद पर कंट्रोल कर रहे थे…

श्याम नाश्ता करने के बाद रूम में जाते ही मुझे आवाज दिए…मैं अंदर ही अंदर समझ गई थी क्यों बुला रहे हैं..बाहर निकली तो देखी अंकल नहीं है और बाथरूम से पानी की आवाजें आ रही है…मैं मुस्काती हुई अंदर गई…

“आउच्च्च्च्च….छोड़ो ना..क्या कर रहे हैं…”अंदर घुसते ही श्याम मुझे कस के दबोच लिए जिससे मैं उछल पड़ी…पर वो हंसते हुए मेरे गाल काटे जा रहे थे…कितनी भी कोशिश कर ली पर श्याम रूके तो अपनी मर्जी से ही…

श्याम: “गजब की माल लग रही हो डॉर्लिंग…जब से देखा हूँ तब से पप्पू खड़ा ही है…पता नहीं आज दिन भर कैसे रोकूंगा…वैसे मेरे जाने के बाद अंकल तुझे नहीं छोड़ने वाले..”

मैं भला क्या बोलती…बस हंस दी..फिर बोली,”वैसे आप अपने पप्पू का क्या करेंगे आज दिन भर…कहो तो जब तक अंकल अंदर हैं तो शांत कर दूँ..” और अपनी जीभ अपने होंठो पर फेर कर इशारा कर दी कि कैसे शांत करूंगी….

श्याम: “थैंक्स जान, पर लेट हो रहा हूँ वर्ना…वैसे जुगाड़ कर लूंगा मैं…अब चलता हूँ…” कहते हुए गुडबाय किस करते हुए मेरे होंठ से चिपक गए…कुछ देर बाद किस टूटी तो वे अलग होते हुए अपना बैग उठाते हुए बोले,”जान, आज नाइट शो चलेंगे मूवी देखने…तुम दोनों तैयार हो के रहना…”

मैं उनकी बात सुनते ही खुश होते हुए बोली,”थैंक्यू जान, जरूर रहूंगी..पर हाँ बाहर अपने पप्पू की सेवा ज्यादा मत करवाना, मेरे लिए भी बचा के रखना…”

श्याम: “ओके पर आज के लिए सॉरी…कोई ना कोई रंडी जरूर चोदूंगा…तुम हाल ही ऐसी कर दी…पर तुम टेंशन मत लेना,,तुम्हारे लिए तो ये हर वक्त तैयार रहता है…”कहते हुए श्याम बाहर की तरफ निकल गए…पीछे से मुस्कुराती हुई बॉय बोल जल्दी आने कही…

कुछ ही देर में किचन का काम तमाम कर मैं अपने बेडरूम में आ गई..तभी बाथरूम से अंकल तौलिया में निकले और सीधे मेरे पास आ गए…आते ही तौलिया दूसरी तरफ फेंके और अपना लंड मेरे होंठ के पास रख दिए…

मैं हंसती हुई अंकल की आँखों में देखती चूसने लगी..अंकल की आहह निकल पड़ी…आखिर काफी देर से इंतजार में जो थे…तभी अंकल मेरे बालों पर हाथ फेरते हुए बोले,”सीता,आज शाम को फ्री हो क्या?”

“मैं तो फ्री ही रहती हूँ अंकल…” मैं लंड को हाथ से पकड़ बाहर निकालते हुए जवाब दी और वापस मुंह में डाल चूसने लगे…फिर अंकल बेड पर बैठ गए और मुझे जमीन पर बैठा सर पर हाथ फेरते हुए लंड चुसवाने लगे…

अंकल: “दरअसल आज एक नई गाड़ी लेने जा रहा हूँ…वो अब पुरानी हो गई है तो उसे गांव में दे दूँगा किसी को चलाने…तो आज शाम हम दोनों अकेले घूमने कहीं जाएंगे,थोड़ी पार्टी करेंगे और फिर रात साथ गुजारेंगे हम और सुबह तुम्हें छोड़ देंगे…श्याम को कह देंगे कि एक पार्टी में गए थे,,लेट होने की वजह से रूक गए थे…चलोगी…”

वॉव, मैं तो अंदर ही अंदर काफी खुश हो गई थी…वैसे श्याम मना तो नहीं करते पर इनसे पहले वो ऑफर कर चुके थे मूवी चलने की…सो उन्हें मना नहीं नहीं कर सकती थी…मैं पुनः लंड को हाथ से हिलाती हुई बोली,”थैंक्स अंकल, पर वो क्या है ना..अभी श्याम बोल के गए हैं कि शाम में मूवी चलेंगे सो प्लीज फिर कभी…उन्हें ना नहीं कर सकती…”

अपनी बात कहने के बाद मैं अंकल की ओर देखने लगी…फिर अंकल मेरे सर को पीछे से पकड़ लंड की ओर धकेल दिए, जिससे मेरे मुंह में पुनः लंड समा गई…

अंकल: “ओके जानू, कोई बात नहीं…हम अगले दिन चले जाएंगे..ओके…” अंकल की बात का जवाब मैं तेजी से लंड को चूस कर दे दी..जिससे अंकल की साँसे अब तेज होने लग गई..

फिर कोई बात नहीं हुई…कोई 5 मिनट बाद अंकल तेज आवाज किए और पूरा पानी मुझे पिला दिए..मैं चटकारे लेती लंड के अंदर बाहर सारा पानी चट कर गई…फिर अंकल मेरी चुची पर किस किए और चलने की बात कह कपड़े पहनने लगे…

मैं उनके लिए खाना लगा दी…अंकल तैयार हो कर नाश्ता किए और बॉय बोल निकल गए..फिर मैं भी खाना खाई और पूजा के रूम की तरफ चल दी..पूजा की नींद मेरी आवाज से जैसे ही खुली वो मुझ पर टूट गई…

काफी देर तक किस के बाद मैंने शाम में मूवी चलने की बात बताई, जिसे सुन वो भी काफी खुश हुई..फिर फ्रेश हो खाना खाई और हम दोनों साथ आराम करने एक-दूसरे को बांहों में समेट सो गई…
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शाम में श्याम जल्दी ही आ गए…फिर हम दोनों तैयार हुए और निकल पड़े श्याम के साथ..खाना बाहर ही खाते…और आज पूजा के साथ मैं जींस-टीशर्ट पहनी थी..वो भी श्याम के कहने पर…

हम दोनों हल्की मेकअप ली थी रात की वजह से…कैम्पस के बाहर सड़क पर एक 4- व्हीलर लगी थी…जिसे देख मैं श्याम की ओर देखते हुए निगाहों से सवाल कर ली…वो बिना कुछ बोले हां में कहते हुए बैठने का इशारा कर दिए…

मैं और पूजा पीछे बैठी और श्याम आगे…फिर गाड़ी चल पड़ी…मामूली सी नौकरी की बदौलत फिलहाल अपनी तो सोच ही नहीं सकती थी…शायद श्याम हमें भाड़े की ही सही पर ढ़ेर सारी प्यार निछावर कर रहे थे ऐसे बाहर ले जाकर…

कुछ ही देर में हम सब एक अच्छे से रेस्टोरेंट के बाहर खड़ी थी…हम तीनों अंदर गए और एक कोने में बनी केबिन में घुस गई…अगले ही क्षण एक स्टाप आया और ऑर्डर ले कर चला गया…मैंने समय देखी तो 7 बज रहे थे…मूवी 8 बजे से शुरू होती है..

करीब आधी खाना खाने के बाद श्याम बाहर की तरफ झाँकें, और फिर सीधे होते हुए तेजी से अपनी जेब से एक दारू की छोटी बोतल निकाले और जल्दी से तीनों ग्लास में उड़ेल दिए…एक ही बार में पूरी समाप्त…वापस खाली बोतल पॉकेट में…

श्याम: “यहाँ अलॉव नहीं है पर मैं जब भी आता हूँ तो अक्सर ऐसे ही मार लेता हूँ…अब जल्दी से तुम दोनों उठाओ…..”कहते हुए श्याम अपनी ग्लास उठा लिए…मैं और पूजा एक-दूसरे को देख दबी हंसी हंस दी और फुर्ती से गिलास उठा गटकने लगी…

पैग लगाने से मेरी नसों में खून दौड़ने लगी थी…और फिर खाना खाने लगे…खाना जब खत्म हुई तो हाथ मुंह साफ करने के बाद जब बाहर निकल समय देखी तो ओह गॉड 8:30 बज रहे थे…

“पूजा,साढ़े बज गए…अब मूवी कैसे जाएंगे…”मैं बगल में खड़ी पूजा से बोली जबकि श्याम अभी काउन्टर पर बिल दे रहे थे..पूजा मेरी बात सुनते ही चौंक पड़ी…

पूजा: “क्या…? ये जीजू भी ना…थोड़ी सी पीने चक्कर में सारा मजा किरकिरा कर दिए…यू नो दीदी…मैं क्या-2 सोच के रखी थी कि अंदर जीजू से ये करूंगी,वो करूंगी…कितना मजा आता सैकड़ों पब्लिक के बीच में कर रही होती…ओफ्फ..”

“आने दो फिर पूछती हूँ…जब केवल खाना ही खिलानी थी तो मूवी का बहाना क्यों किए…”मैं भी गुस्से में आती हुई बोली…तभी सामने श्याम आते हुए दिखे…जैसे ही पास आए मैं गुस्से से सवालों की झड़ी लगा दी…बीच-2 में पूजा भी सपोर्ट कर रही थी…

श्याम कुछ बोले बिना मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखे जा रहे थे…जिससे मैं और आग बबूला हो बोली,”ओ हैलो मिस्टर, अभी आप अपने प्यार को अपने पास ही रखिए…बाद में दिखाइएगा…चलिए घर अब…”

और मैं भड़कती हुई पूजा के हाथ पकड़ बाहर कुछ मीटर दूर सड़क की तरफ मुड़ गई…इतने में ही श्याम तेजी से हम दोनों के आगे आ खड़े होते हुए बोले,”सॉरी डिअर, मेरा इरादा ऐसी बेहूदा हरकत की बिल्कुल नहीं थी…पर पीने बाद खाने की रफ्तार धीमी हो गई और समय मालूम ही नहीं पड़ी…”

मैं उनकी बात सुन मुँह बिचकाती हुई उन्हें क्रॉस कर बगल से आगे निकल गई..पर एक बार फिर श्याम हम दोनों के सामने खड़े थे…

श्याम: “जानू, मेरे दिमाग में एक मस्त आइडिया है जो मूवी से भी मस्त मजा देगी..कहो तो सु….” आगे कुछ कहते कि बीच में ही पूजा रोकती हुई बोली,”जरूरत नहीं जीजू…आप अपनी आइडिया अपने गांड़ में रख लो…बॉय..आपको चलनी है तो मेरे पीछे आ जाओ…”

पूजा की बात सुन मैं हंसना चाहती थी जोर की पर चोरी से ही मुस्कुरा कर रह गई…और पूजा के खिंचने से आगे सड़क किनारे तक आ पहुँची…अब बस किसी ऑटो का इंतजार कर रही थी…तब तक श्याम पुनः आगे आते हुए बोले,”ओए होए मेरी तीखी मिर्ची शाली साहिबा…आपकी अदा तो गुस्से में और कयामत बरपाती है…मन तो होती है यहीं पटक के चोद दूँ…”

पूजा गुस्से में आँख लाल पीली करती बोली,”ओके, जींस खोल रही हूँ…मुझे चुदनी है यहाँ सबके सामने…” और फिर पूजा अपनी जींस की बटन खोलने लगी…मैं देखी तो तेजी से पूजा की हाथ पकड़ खींच ली…

आसपास नजर दौड़ाई कि कोई देख तो नहीं रहा..पर यहाँ सब अपने में मस्त था…तभी मेरी नजर सामने एक छोटी सी पान की दुकान पर गई जहाँ से एक आदमी लगातार घूरे जा रहा था…मेरी नजर उससे मिलते ही वो गंदी सी हंसी हंस पड़ा….

मैं उससे नजर हटा श्याम की तरफ देखते हुए बोली,”आपको चलना है या नहीं…अगर नहीं जाना तो प्लीज हमें जाने दीजिए…यहां सब देख रहे हैं…”

मेरी बात सुनते ही श्याम मेरी तरफ आगे बढ़े और बोले,”शाली साहिबा की खुजली मिटाए बिना थोड़े ही जाऊंगा…कुछ ही दूर आगे रेड लाइट एरिया है…चलो वहीं जा के पेलता हूँ तुम दोनों को…सोचो जब तुम कोठे पर चुदेगी तो कैसा फील करोगी…बिल्कुल रंडी की तरह…बोलो पसंद है आइडिया…वहां एक कोठे मालकिन से जान पहचान है, वो कमरा दे देगी…”

एकदम धाँसू…मेरी तो सुन के ही बूर में सनसनी की लहर दौड़ गई…मन ही मन गाली दे रही थी शाले पहले क्यों नहीं बताया… मैं तो तैयार थी…बस पूजा की हाँ जानने उसकी तरफ देखने लगी…पूजा भी रेडी ही थी मुझे मालूम थी पर फिर भी पूछनी जरूरी थी..पूजा की आँखें चमकने लगी थी रजामंदी में पर बोली कुछ नहीं…

हम दोनों को यूँ घूरते देख श्याम बीच में हल्के से टोकते हुए बोले,”चलो रण्डियों, अपने कर्म-स्थल पर…”जिससे हम दोनों एक साथ उनकी तरफ देख हौले से मुस्कुरा दी, जिसके जवाब में वो भी मुस्कुराते हुए आगे की तरफ बढ़ गए…

हम दोनों भी खुशी-खुशी चल पड़ी…तभी पूजा हौले से मेरे कान में बोली,”अच्छा हुआ जो मूवी छूट गई…क्यों?” मैं पूजा की बात सुनते ही हँसते हुए उसकी तरफ देख हाँ में मूंडी हिला दी…तभी पता नहीं क्या सूझी पीछे की तरफ पलटी…

ओह नो…वो पान की गुमटी पर खड़ा व्यक्ति कुछ ही दूरी पर पीछे पीछे चला आ रहा था…मैं पूजा को बिना कुछ बताए आगे बढ़ श्याम के ठीक बगल में हो गई..फिर श्याम से नजरें मिलाती साथ साथ मुस्कुरा दिए…

श्याम किसी को फोन कर रहे थे, पता नबीं किसे…शायद कोठे मालकिन…ओफ्फ…मैं भी ना…किसी दूसरे को भी तो कर सकते हैं ना..पर इस वक्त तो नहीं कर सकते हैं दूसरे को….

श्याम: “राम-राम आंटी जी,क्या हाल है?” तभी श्याम फोन पर बोल दिए..ये तो आंटी को ही कर रहे थे…मैं उनकी तरफ नजर डाली तो वे हमारी तरफ ही देख मुस्कुरा रहे थे…

श्याम: “अपना भी ठीक है आंटी, बस एक छोटा सा मदद चाहिए आंटी अभी..”
श्याम कान में ही फोन सटा कर बात कर थे जिससे मैं उधर की आवाजें नहीं सुन रही थी…

श्याम: ” आंटी एक रूम चाहिए अभी…दो मस्त लौंडिया हाथ लगी है..” श्याम की बात सुनते ही मैं और पूजा एक साथ मुस्कुरा पड़ी…इसकी वजह थी वो छुपा रहे थे कि मैं उनकी बीवी और पूजा बहन थी…

श्याम: “नहीं आंटी लोकल नहीं है…बाहर से आई है…और कल चली जाएगी..आप तो जानती ही है कि मुझे चोदने का कितना शौक है…और लोकल में तो सब को कर ही चुका हूँ…तो सोचा….”

हम्म्म…जनाब तो एक दम तेज दिमाग लगा दिए थे…अब शायद हम दोनों को भी इस बनावटी हालात को मैनेज करनी होगी आंटी के सामने…मैं और पूजा एक-दूसरे को ताकते हुए फैसला भी कर ली थी स्थिति को मैनेज करने की…

श्याम: “अच्छा आंटी 10 मिनट में पहुँच रहा हूँ..फिर बात करते हैं…बॉय..” और फिर श्याम फोन रख दिए…फोन रखते ही श्याम हँस पड़े जिससे हम दोनों भी अपनी हंसी नहीं रोक पाई…

तभी श्याम की नजर एक शोरूम पर पड़ी..वे हम दोनों को उधर चलने कह बढ़ गए..ये रेडिमेड कपड़ो की बड़ी सी शोरूम थी..हम तीनों अंदर पहुँचे…कस्टमर एक भी नहीं थे..यानि ये भी कुछ देर में बंद होने वाली थी..

श्याम काउंटर के पास जाते ही हेडस्कॉर्फ दिखाने बोले…हम्म्म..समझ गई…ताकि कोई पहचान ना ले दूसरे दिन हमें…कई तरह की हेडस्कॉर्फ सामने बिखेर दिया उसने…हम दोनों ने एक काली और एक पिंक आसमानी कलर की चूज की और अपने चेहरे ढ़क ली…श्याम बिल पे किए और बाहर निकल गए…

बाहर आते ही मेरी नजर उस आदमी को ढूढ़ने लगी जो कुछ देर पहले पीछा कर रहा था…पर वो दूर दूर तक नदारद था..चलो अच्छा हुआ पीछा छूटा कमबख्त से…ख्वामोखाह परेशानी में डाल रहा था…

करीब पाँच मिनट के बाद हम सब एक गली की तरफ मुड़ गए जो गुप्प अँधेरा था…आगे कुछ दूरी पर एक घर में जल रही लाइट से हल्की रोशनी सड़को पर पड़ रही थी पर वो उतनी तेज नहीं थी कि साफ साफ कुछ दिखाई दे सके…

उस घर के समीप पहुँचते ही मेरी नजर उधर घूम गई, पर वहाँ बिल्कुल सन्नाटा था…घर भी कोई खंडहर लग रही थी…बस लाइट की वजह से ही समझ सकती थी कि कोई रहता है…खैर इन बातों को पीछे छोड़ आगे चल पड़ी…

डर भी लग रही थी इस वीरानी अँधेरे से…कुछ दूर और चली तो श्याम बाएँ की ओर मुड़ गए…हम्म्म…सामने काफी दूर तक सड़क नजर आई अब…सड़कों पर स्ट्रीट लाइट तो दिख रही थी पर जल एक भी नहीं रही थी…वो तो हर घर से निकल रही रोशनी सड़कों पर हल्की उजाला ला रही थी….

हाँ जहाँ मुड़ी वहाँ की जरूर जल रही थी जिसके नीचे खड़े 4 लोग आपस में बात कर रहे थे…तभी उनमें से एक बोला,”ऐ हिरो… रूक..”

मैं और पूजा तो बक सी रह गई और झट से रूक गई…जबकि श्याम बिल्कुल ही निडर बन आराम से रूकते हुए उसगी तरफ बढ़ गए…मैं कुछ अनहोनी की डर से श्याम को रोकना चाहती थी पर वो तब तक वो उसके सामने जाते हुए कड़क आवाज में पूछे,”क्या बात है?”

तभी उनमें से एक बोला,” कहाँ से लाए दोनों को…जरा देखूँ तो कौन है…” कहते हुए वो मेरी तरफ बढ़ा जिससे श्याम तुरंत ही अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ा रोकते हुए बोले,”देखने से पहले ये जान तो ले कि ये किस कोठे की है…फिर देख लेना इसकी सूरत…”

वो रूकता हुआ श्याम की घूरता हुआ पूछा,”कहां की है..” तभी श्याम खिसक के उसके ठीक सामने जाते हुए दांत पीसते हुए बोले,”तुम सबकी नानी शबनम आंटी की है ये..” फिर क्या…इतना सुनते ही उसके चेहरे की रंगत हवा हो गई और वो पीछे हो गया बिना कुछ आवाज किए….

जिसे देख श्याम हल्के से मुस्कुराए और फिर हम दोनों को इशारा कर चल दिए…हम दोनों भी तेजी से मुड़ते श्याम के बगल में हो गई..फिर श्याम से बोली,”अगर कोई पुलिस वाला रहता तो…”

श्याम मेरी डर को भांपते हुए नजर घुमाते हुए बोले,”जानू, ये शबनम आंटी के डर से पुलिस क्या, कोई एस.पी. भी इधर आने से डरता है…इसकी एक वजह है आंटी समय पर उसका हिस्सा पहुंचा देती और दूसरी यहाँ का सबसे मोस्ट वांटेड अपराधी से आंटी की जान पहचान…”

हम्म्म्म…मतलब पावरफूल हैं आंटी…मैं उनकी बात का कोई जवाब नहीं दे पाई या कुछ और पूछ नहीं पाई…तभी मेरी नजर दोनों तरफ से आ रही रोशनी का पीछा करने लगी..घर अधिकतर दो मंजिला थी…

कुछ पुरानी तो कुछ ठीक ठाक…और सब घरों में कुछ औरतें अपनी खुली जिस्म लिए बैठी थी…एक-दो की तो आवाज भी सुनाई पड़ी..”आ जाओ साब, आपकी उस दोनों से ज्यादा मजे दूँगी और पैसे भी कम लगेंगे…आ जा…”

पर श्याम बिना उसकी तरफ देखे बढ़े जा रहे थे…कुछ औरतें जो मालकिन टाइप लग रही थी वो गौर से हम दोनों की तरफ घूरे जा रही थी..शायद पहचानने की कोशिश कर रही थी…तभी श्याम एक तीन मंजिले घर की तरफ रूख कर दिए…

ये भी तो उतनी ढ़ंग की नहीं थी…पर हाँ खंडहर बिल्कुल नहीं लगती थी…गेट पर खड़े दो मर्द बिल्कुल पहलवान की तरह खड़े थे…वो श्याम को देखते ही बोला,”क्या साब, क्या हाल है…”

श्याम मुस्काते हुए बोले,”एकदम झकास उस्मान भाई…” तभी उनमें से दूसरा बोल पड़ा,”भाई, आज तो छोकरी साथ लाए हो…कहाँ की है…” जिसे सुन श्याम रूके और फिर कुछ सोचते हुए हम दोनों की तरफ की आए…अपना हाथ बढ़ा एक झटके में हेडस्कार्फ खींच दिए…

श्याम: “पहचानो तो…” वे दोनों एक टक पहचानने की बजाए भूखी नजरों से घूरने लगे…मैं ज्यादा देर तक नजरे नहीं मिला पाई उससे..तो नजरें आगे की तरफ कर दी..आँखें चुराती तो समझ जाते की ये रंडी नहीं है…फिर कुछ देर बाद श्याम बोले…

श्याम: “उस्मान भाई…ये बाहर की लौंडिया है..खास अपने लिए बुलाया हूँ और सोचा आंटी को भी दिखा दूँ ताकि वो भी ऐसी कड़क माल रखें…” जिसे सुन दोनों हकलाते हुए हाँ में हाँ मिला दिए, पर कुछ बोल ना सके…

फिर श्याम को कुछ शरारत सूझी..वो मेरी बांह पकड़े और उससे सटाते हुए बोले,”छू कर देख लो उस्मान भाई…एकदम घरेलू माल है…बिल्कुल आपकी पसंद की है…एक दिन आंटी से छुट्टी ले कर फुर्सत में रहना…बुलवा दूंगा खास आपके लिए…आप आधे पैसे दे देना…बस….”

उफ्फफ…क्या तगड़ा था वो…सटते ही उसने अपना हाथ मेरी कमर पर रख कस लिया अपने से…लुंगी में से उसका धारदार लंड सीधा मेरी जींस को फाड़ती चुत तक पहुंच गई…और उससे भी ज्यादा उत्तेजित तो इस बात से हो गई कि कैसे मेरे पति मुझे रंडी बना कर पराये मर्द को सौंप दिए…

अचानक उसने अपना हाथ मेरी गर्दन पर रख हौले से नीचे करने लगा..मेरी तो हालत खराब हो गई खुरदुरे हाथ की छुअन पा कर…मैं अपनी बंद होती आँखें खोलने की कोशिश करने लगी जो मदहोशी से बंद हो रही थी…ऐसे में मैं बिल्कुल नशीली लग रही थी…

तभी मेरी चुची को कुछ रगड़न महसूस हुई…क्या ये मेरी चुची….ओह नो…तभी उसकी उंगली मेरी टी-शर्ट के गले पर महसूस हुई…ये क्या…जब उंगली ऊपर ही है तो अंदर क्या डाल दिया इसने जो रगड़ती हुई ऊपर की तरफ बढ़ रही है…

मैंने काफी कोशिश कर आँखें नीचे कर अपनी चुची पर की…ओह..ये तो मेरी टी-शर्ट के अंदर घुसी मंगल सूत्र को बाहर खींच रहा था..तभी उसने मंगलसूत्र पूरी बाहर कर मेरी दोनों चुची के बीच रख मेरी चुची दबा दिया…

मैं सिहर सी गई इस चुभन से…तभी उसने मुझे पलट मेरी गांड़ पर अपना लंड चिपका दिया और अपना हाथ मेरी चुची के ठीक निचले हिस्से पर रखते हुए बोला,”साब, अब देखो…एकदम मेरे ख्यालों वाली…”

मैं उसके सीने से चिपकी श्याम की तरफ देख मुस्कुराने लगी..जबकि पूजा को वो दूसरा आदमी टी-शर्ट के अंदर हाथ डाल देख रहा था…श्याम की नजर मुझ पर पड़ते ही मवो मुस्कुरा कर वाव कह पड़े…

उस्मान: “साब, अब ले जाओ दोनों को वरना आप का पैसा बरबाद हो जाएगा…पूरी रात छोड़ूंगा नहीं इसे…”कहते हुए उसने मुझे श्याम की तरफ धकेल दिया..मैं सीधी श्याम के बांहों में आ गई…श्याम हंसते हुए ओके कहे और पूजा को चलने बोले…

पूजा पूरे मस्त हो गई थी पर मजबूरी थी छोड़ने की, मेरी हालत भी बिगड़ ही चुकी थी…मन मसोस कर वो अलग हुई और धीरे से उस आदमी के होंठ पर किस कर अलग हो गई बिल्कुल रंडी की तरह जो कहीं नहीं शरमाती…

फिर श्याम के हाथों से हेडस्कॉर्फ ली और उनके साथ सीढ़ी की तरफ चल दी…सीढ़ी चढ़ते जब वापस उस्मान की तरफ देखी तो मेरी हंसी निकल पड़ी..वो दोनों अपना-2 लंड बाहर निकाल हिला रहा था…मुझे हंसते देख पूजा भी पलट गई…

पूजा के पलटते ही वो दोनों अब हमारी तरफ घूर रहे थे…जिसे देख पूजा एक फ्लाइंग किस दोनों तरफ उछाल दी..जिससे वो कराहते हुए अपना पानी छोड़ दिए…फिर हम दोनों आगे की तरफ भागती हुई चढ़ने लगी…

मैं और पूजा कुछ ही पलों में आंटी के सामने खड़ी थी…आंटी एक बहुत ही गद्देदार डबल बेड पर दीवाल के सहारे बैठी पान चबा रही थी…उनका रौबदार चेहरा देखते ही हम दोनों एक-दूसरे का हाथ डर से पकड़ लिए…

श्याम जाते ही आंटी के बगल में लगी कुरसी पर बैठ गए…मेरी नजर तभी दूसरी तरफ गई जहाँ बेंच पर दो लड़की बैठी थी…बिल्कुल बदसूरत…शायद इसलिए दोनों अभी तक बैठी ही थी…

“ऐ छोकरी, जा के उधर बैठ ना…” आंटी हम दोनों को उसी बेंच पर बैठी लड़की की ओर इशारा करती हुई बोली…जितना दिखने में भयानक लग रही थी, उयये भी डरावनी तो उनकी आवाज थी…पलक झपकते ही हम दोनों उन दो लड़कियों के बगल में थी…

उफ्फफ…कितनी गंदी परिवेश में रहती है ये दोनों…मैं एक नजर बगल में बैठी दोनों लड़की पर डाली,फिर सीधी हो आंटी की तरफ देखने लगी…श्याम के साथ वो हंस हंस के पहले तो हाल समाचार पूछी… शायद श्याम भी कई दिनों बाद आए थे…

फिर हम दोनों की तरफ इशारा करती हुई पूछी,”कहां से फंसा के लाए इन दोनों चिड़िया को..दिखने में तो सुंदर है..लगती नहीं कि कहीं कोठे पर रहती है…” श्याम आंटी की बात सुन हम दोनों की तरफ मुड़ कर देखने लगे…

श्याम: “बिल्कुल सही आंटी…ये कोठे पर नहीं रहती…ये एक होटल के सम्पर्क रहती है…फिर आपकी मर्जी आप होटल में करें या फिर अपने घर बुला ले…बंगाल की है दोनों…वहां एक दोस्त की दोस्ती उसी होटल वाले से है तो उसी ने भिजवाया है..सुबह चली जाएगी…”

आंटी: “ओहो…तो ये बात है…हाई प्रोफाइल है…” कहती हुई आंटी मुस्कुरा पड़ी जिसके साथ श्याम भी हंस पड़े…हम दोनों अपने बारे में ऐसी बाते सुन काफी कसमसा रही थी…बूर में खुजली काफी बढ़ गई थी…

तभी आंटी हम दोनों को अपनी तरफ आने का इशारा की…थोड़ी डर लगी कि पता नहीं क्यों बुला रही है…पर बिना कोई सवाल किए उनके सामने जा कर खड़ी हो गई…

आंटी: “देख,पैसे तो मिल ही गई है तो मैं कह रही थी कि अब इतनी दूर आ ही गई हो तो कुछ मजे भी ले लो…आज मेरे कोठे की रंडी के परिवेश में चुदवा ले…काफी मजा आएगा…और दिन तो जींस पहन के चुदती ही,आज नया करने का मौका मिला तो इसका भी मजा ले लो…”

मैं आंटी की बात से भौचक रह गई और पूजा की तरफ देखने लगी…पर पूजा को जैसे ये मंजूर थी…वो बस मुस्कुरा रही थी…

“तुम्हें कोई दिक्कत है क्या…” तभी आंटी की तेज आवाज मेरे कानों में गूँजी, जिससे मैं हड़बड़ती हुई नहीं में मुंडी हिला…तब आंटी “हम्म्म” करती हुई मुझे ऊपर से नीचे तक देखी…

“ऐ झुनकी,जा इन दोनों को अंदर ले जा और वो कपड़े दे देना…जा पहन के आ जा…”आंटी सामने बैठी एक लड़की को बोलती हम दोनों को जाने कह दी…वो लड़की उठी तो हम दोनों उसके पीछे हो लिए…

अंदर की रूम कुछ ही दूर गलियारे क्रॉस कर थी…इन गलियारे से गुजरते जब दूसरे रूम के गेट के पास से गुजरती तो अंदर से चुदाई की आवाज साफ सुनाई पड़ रही थी…कुछ के तो गेट भी खुली थी जिससे अंदर हो रही चुदाई साफ दिख रही थी….

अंदर पहुंचते ही झुनकी ने दो ड्रेस सामने आलमारी में से निकाल कर दे दी…मैंने ड्रेस उठाई…ड्रेस देखते ही मेरी भौंह सिकुड़ गई..एकदम मैली-कुचली छोटी सी चोली और घुटने तक ही आने वाली छोटी सी घांघरा..वापस रख टी-शर्ट जींस खोलने लगी…

मैं और पूजा कुछ ही पलों में एकदम नंगी खड़ी थी…सामने एक अंजान लड़की थी,जिसकी परवाह किए बिना ही नंगी हो गई…अब तो जब तक यहां हूँ,शर्म को सोच भी नहीं सकती थी…मैंने घांघरे पहनती हुई झुनकी से पूछी,”आज तुम खाली ही हो क्या…?”

झुनकी: “हाँ, शाला अपुन की फेस मर्द लोग को पसंद ही नहीं आती…देर रात तक अगर कोई आ जाता है तो खाने के पैसे मिल जाते हैं, नहीं तो भूखा ही रहना पड़ता…आज भी लगभग यही हालत है…”

मैं उसकी बात सुन थोड़ी भावुक जरूर हो गई, पर बिना कुछ बोले अपने काम में लग गई…चोली तो इतनी तंग आ रही थी कि मानों सीने की हड्डी टूट रही हो…और आधी चुची तो बाहर ही निकली थी…पूजा की भी यही हालत थी….

जींस टीशर्ट वहीं पर तह लगा कर रख दी और झुनकी को चलने की बोल दी…झुनकी के साथ हम दोनों बाहर की तरफ निकल गई…काफी अजीब लग रही थी ऐसे कपड़ों में…खुद को नंगी ही महसूस कर रही थी..

कुछ ही देर में हम सब आंटी के करीब थी..जहाँ श्याम के साथ एक और व्यक्ति बैठा था..मैं तो शर्म से लाल हो गई अंदर ही अंदर. जिसे बाहर नहीं निकलने दी…वो भी हिष्ट-पुष्ट शरीर वाला था श्याम की तरह पर रंग का पूरा काला था…

मैं उस पर एक नजर डाली और फिर सीधी उसी बेंच पर आ बैठ गई एक रंडी की तरह…तभी उस काले की नजर हम पर पड़ी…वो एकटक देखता ही रह गया…उसके मुख से वाह निकल पड़ी…

“वॉव आंटी,क्या माल मंगाई हो…आंटी इसी में एक को दे दो आज…मजा आ जाएगा…” वो काले हम दोनों की आधी नंगी चुची को देख जीभ फेरता हुआ बोला…जबकि श्याम भी हम दोनों को ऐसे रूप में देख अपने लंड पर काबू पाने की कोशिश कर रहे थे…

आंटी: “अए-हए ठिकेदार साहब…पानी निकल गया क्या…पूरे 3 हजार लेती है एक…चाहिए तो रूपए दो मेरी कमिशन सहित और ले जाओ किसी एक को…काहे कि एक तो श्याम ले जा रहा है…दोनों ले जाता ये पर तुम बोल दिए तो नाराज नहीं करूंगी तुम्हें…”

ये क्या..सौदा भी होने लग गई…मैं और पूजा एक दूसर को देख श्याम की तरफ देखी…हम दोनों हैरान थी…यहाँ सिर्फ श्याम के साथ करने आई थी पर यहाँ तो सच की रंडी बन गई..श्याम हम दोनों की तरफ देखते हुए आंटी से बोले….

श्याम: “आंटी, एकदम सही बोली..जैसा मैं,वैसा ये…ये भी चाहते हैं इनमें से ही एक को तो जरूर दो…वैसे ठिकेदार साहब, मैं इन दोनों को सिर्फ अपने लिए मंगाया था…पर अब आप भी कह रहे हैं तो कोई दिक्कत नहीं हमें…पसंद कर लो कोई…”

मतलब श्याम भी चाहते थे पूरे मजे देने और लेने की…हम दोनों श्याम की बात सुन सोची जब इन्हें कोई दिक्कत ही नहीं तो मैं क्यों ज्यादा सोचूं…हाँ, अब नए लंड चखना किसके नसीब में है, वो देखना शेष है…

तब तक वो काला तेजी से हम दोनों के पास आ गया..फिर उसने एक साथ हम दोनों को खड़ा किया और ऊपर से नीचे तक शरीर के एक-एक अंग को गौर करने लगा कि कौन बेस्ट है…वह हम दोनों को देख गोल गोल चक्कर लगाने लगाने…

एक चक्कर लगाने के बाद वो हंसता हुआ बोला,”यार कुछ समझ ही नहीं आता कि कौन बेस्ट है…” जिस पर आंटी और श्याम हंस पड़े…हम दोनों की भी मुस्कानें आ गई होठों पर…तभी आंटी बोली,”अरे तो ज्यादा क्या सोचता है…कोई एक ले ले…”

तभी वो हम दोनों के बीच में घुसा और अंतिम बार एक-एक नजर हम दोनों पर डाला और मेरे कंधों पर हाथ रख सीधा एक चुच्ची को मुट्ठी में कसता आगे बढ़ श्याम के पास रूकते हुए बोला,”दोस्त,मैं इसे ले जा रहा हूँ..तुम उसे ले जाओ…काफी मुश्किल है इन दोनों में से एक को चूज करना…”

श्याम ओके कहते हुए उठे और पूजा को भी ठीक मेरी तरह चुची पकड़ कंधे पर हाथ रख ले आए…

आंटी: “ऊपर एक कमरा खाली है कोने वाली…उसी में चले जाओ दोनों…और सब तो बुक है…”

श्याम: “फिर तो और मजा आएगा आंटी…एक ही कमरे में…मन हुआ तो अदल बदल कर लूंगा…हा..हा..हा…” और फिर सब हंस पड़े..हम दोनों भी हल्की दबी हंसी हंस दी….

कुछ ही देर में हम दोनों अपनी चुचियाँ मसलवाते रूम में घुस गए…रूम में आते ही श्याम पूजा को स्मूच किस करने लगे…जिसे देख मैं गरम हो अपने पार्टनर की तरफ देखने लगी…

“ओए, ये क्या कर रहा है…ये सब रण्डियाँ पता नहीं कैसा-कैसा लण्ड अपने मुंह में लेती है और तुम इसे किस कर रहे हो…संभल के करो यार..कहीं कुछ हो गया तो लेने के देने पड़ जाएंगे…”तभी काले आदमी श्याम को टोकते हुए बोला…हम दोनों तो गस्से से लाल हो गई पर क्या कर सकती थी…अगर डगह दूसरी होती तो इसे पास फटकने भ नहीं देती…

श्याम किस रोकते हुए बोले,”क्या बोलते हो यार…ये औरों की तरह गंवार रंडी लगती है क्या जो खुद को ढ़ंग से साफ भी नहीं रखती…ये शिक्षित हैं जनाब जो इंफेक्शन का पूरा ख्याल करती है और उससे हर वक्त बची रहती है…तभी तो इतने पैसे दिए हैं कि हर तरह से मजे लूँ…यहाँ की रंडी की तरह नहीं जिसे सिर्फ चोदो वो भी कंडोम लगा के…समझा कुछ…”

श्याम की बात उसे बड़ी तेजी से समझ आ गई और बिना कोई जवाब दिए अपना कड़क होंठ मेरे नर्म होंठो पर रख दिया..ओफ्फ्फ…कितनी खुरदुरी लग रही थी..मैं इस खुरदुरेपन से तुरंत ही अपनी बूर से पानी छोड़ने लगी…

कुछ ही पलों में मेरी चोली खुल गई और नंगी चुची उसके हाथों में समा गई…वो पूरी दरिंदगी से चुची मसलता हुआ मेरे होंठ को तरबतर कर रहा था…

कोई 5 मिनट तक चुसाई रगड़ाई करने के बाद वो किस तोड़ते हुए बोला,”मादरचोद, मेरा लंड दर्द करने लगा…पहले इसका दर्द कम करो चूस के…फिर किस करते हुए चोदूंगा..” और उसने तेजी से अपने कपड़े खोल कर फेंक दिए…

इस बीच मेरी नजर पूजा की तरफ गई जहाँ वो दोनों अभी भी किस में डूबे हुए थे…पर अब वो बेड पर थे लेटे…पूजा की भी चुची नंगी थी जिसे श्याम मसले जा रहे थे…अगले ही पल अचानक मेरे बाल जोर से नीचे की तरफ खिंची और मैं चीखती हुई धम्म से नीचे बैठ गई…

मेरी चीख से श्याम और पूजा अचानक ही किस तोड़ते हुए मेरी तरफ देखे..तब तक काले आदमी का कोयलों से भी काली और धनुषाकार विकराल लंड मेरी गोरी-चिट्टी मुंह में अकड़ने लगी…मैं अपनी मुंह को आगे पीछे कर इस टेढ़े लंड को एडजस्ट करने की कोशिश कर रही थी…

मेरे मुंह में लंड को देख पूजा उठी और एक ही प्रयास में अपने भैया का पूरा लंड गटक गई…और फिर अपने मुख से अपने भैया के लंड की सेवा में जुट गई…

तभी इधर इस काले ने अपने दोनों हाथों से मेरे सर को पकड़ा और मेरी मुंह में ही कस कस रे धक्के लगाने लगा और ढ़ेर सारी गंदी गंदी गाली सुनाने लगा…बगल में पति के सामने गाली सुन मैं काफी गरम हो गई और गूं गूं की आवाज तेज कर दी ताकि श्याम भी सुने कि उनकी बीवी आज रंडी बन के चुद रही है कोठे पर…

कुछ ही देर में टेढ़ी लंड से मेरी मुंह दुखने लगी…उसका लंड मेरे मुख में और टेढ़ी होती जा रही थी जिससे अब ऐसी महसूस हो रही थी कि मेरी तालु में छेद हो जाएगी…

अब वो धक्के नहीं लगा रहा था…मैं इतनी देर में दो बार पानी बहा चुकी थी…और मैं अपने हाथ उसके अण्डों पर रख खुद ही आगे पीछे हो रही थी…मेरी जीभ उसके सुपाड़े पर घिसती तो वह कराह उठता…तभी वो एक गहरी चीख के साथ दांत पीसते मेरे सर को झटक अपने लंड से दूर कर दिया…

मैं अपनी जीभ ललचाती हुई ऊपर की तरफ उसकी आँखों में देखने लगी…वो झड़ा नहीं था पर उसके लंड के ऊपरी भाग से प्रीकम साफ दिख रही थी बहती हूई और पूरा लंड मेरी थूक से भींगी…

वो हांफता हुआ मेरी तरफ लाल आँखें किए देखते हुए बोला,”मस्त रांड है तू तो…क्या चूसती है शाली…नस नस ढ़ीला कर दिया…आज पहली बार तेरी मुंह में ही झड़ने के कगार पर था…चल बेड पर अब, देखता हूँ मेरा लंड तेरी बूर को कितना सह पाता है…”

मैं इस खेल में अपनी जीत देख गदगद हो गई और उठती हुई घाघरे को अपनी कमर से वहीं पर नीचे कर दी और बेड की ओर चल दी…बेड कोई गद्देदार नहीं थी…बस एक पतली सी चादर बिछी थी जिस पर इस वक्त मेरे पति अपनी बहन को अपना लंड चुसवा रहे थे…वो दोनों बीच में थे…

मैं उनके पास पहुँची और पूजा की पीठ पर हाथ रखती हुई बोली,”पूजा, उधर खिसको…लेटना है हमें..” पूजा मेरी बात सुन लंड से मुंह हटा सीधी हुई और मुस्काती हुई बोली,”ओके दीदी…” जबकि श्याम मेरी नंगी गोरी जिस्म को देखे जा रहे थे जिसे एक काले भुजंग और चौड़ी छाती वाले नंगे मर्द ने पीछे से पकड़ सहला रहा था…उसका काला लंड मेरी गांड़ के नीचे से होती ऊपर की तरफ घूम के गोरी बूर पर ठुनके लगा रहा था…

श्याम खिसकने के बजाए उठ गए और पूजा को अपनी जगह पर लिटाते हुए बोले,” तू भी बहुत सेवा की अपने मुख से…अब अपनी बूर से मेरे लंड की सेवा कर मादरचोद पूजा रंडी…” पूजा के साथ साथ मैं भी उसके बगल में हल्की हंसी हंसती लेट गई…

फिर दोनों एक साथ अपना-2 लंड पकड़ हम दोनों की बूर पर रख रगड़ने लगा…अपना लंड रगड़ते हुए वो काला आदमी पूछा,”और तेरा क्या नाम है कुतिया..? ” मैं लंड की गरमी बूर पर पा आहें भरती हुई “सीता” बोली…

तभी श्याम बोले,”ये दीदी कहती है तुम्हें…तुम दोनों सगी बहन हो या फिर धंधे में बनी हो…” हम दोनों की तो हंसी भी निकल रही थी कि शाला कितना एक्टिंग करता है…इसे तो फिल्मों में रहना चाहिए… तभी पूजा सिसकती हुई बोली,”हाँ,हम सगी बहन हैं…”

पूजा की बात खत्म होते ही दोनों मर्द एक साथ मेरे शरीर पर दबाव डालते अपना लंड जड़ तक पेल दिए…हम दोनों एक साथ चीख पड़ी…ये सच्ची वाली दर्द की चीख थी…अपने दर्द को कम करने मैं और पूजा एक दूसरे को किस करने सगी…

“तभी तो शाला मैं कन्फ्यूज हो गया चूज करने में…वाह मजा आ गया यार…हम दोनों एक ही बेड पर दो सगी रंडी बहन को चोद रहा हूँ…” मजे में डूबता वो काला आदमी मेरी बूर में धक्का लगाते हुए बोला…

“हाँ यार..और शाली अपनी बूर का भी काफी मेंटेन करती है..इतनी कसी बूर आज तक किसी रंडी की नहीं देखी…” श्याम बगल में पूजा को धक्के मारते हुए बोले…जिससे वो आदमी हाँ में अपनी सहमति कर दी…

कुछ देर तक इसी तरह मैं और पूजा चीखनी बंद कर, सिसकती हुई चुदती रही..और दोनों मर्द एक साथ गाली बकते हुए चोदे जा रहे थे…हर धक्के पर बेड चरमरा जाती थी…नीचे की चादर कब सिमट गई मालूम नहीं..हम दोनों अब बेड की लकड़ी पर थी जो चुभ रही थी…पर ये चुभन बूर में डाती लंड के माफिक कुछ भी नहीं थी…

तभी अचानक से मेरा ग्राहक मेरी बूर से अपना लंड खींचा और बेड से उतर गया..मैं उसकी तरफ प्यासी नजरों से देखने लगी कि क्यों चला गया…फिर वो अपनी पेंट से एक 500 का नोट निकाला और वापस आते ही मेरी बूर में लंड पेलता हुआ बोला,”आज मैं बहुत खुश हुआ तेरे से…ले अपना इनाम…” और फिर उसने 500 का नोट मेरे मुंह में फंसा दिया…मैं नशीली आँखों से मुस्काती हल्के दांतो से नोट दबा ली…

उधर श्याम भी देखा देखी एक 500 का नोट पूजा के भी मुंह में फंसा दिए…अब हम दोनो रंडी के मुंह में बूर की इनाम थी…और फिर लगे दोनों धड़ाम-2 शॉट मारने…हम दोनों की नस ढ़ीली हो गई करारे शॉट से…

काफी देर तक पोज बदल बदल कर चोदते रहे…कभी कुतिया बनाकर तो कभी घोड़ी बनाकर…कभी मुझे नीचे करते तो कभी खुद नीचे रहते…इन सब के दौरान नोट एक बार भी मुंह से नहीं हटाई…जिससे वो दोनों और जोश से पेलते…

अंततः उनका पतन हो ही गया…जीत की पतन थी ये…एक साथ दोनों चीखते हुए हम दोनों की बूर में अपना पानी उड़ेलने लगे…बूर में जाती गर्म पानी से हम दोनों पूरी तरह बेहोश हो गई और नोट मेरे मुख से निकल गालों बगल में गिर गई…पूजा भी बेहोश हो गई थी…

और हम दोनों बेहोशी की हालत में ही फ्रेंच किस कर रही थी..और दोनों मर्द पूरा लंड खाली करने के बाद औंधें मुँह लद गए हमारे शरीर पर…काफी देर तक सुस्ताने के बाद जब हम सब उठे तो वो काला आदमी मेरे होंठों पर किस करता हुआ थैंक्स बोला…पता नहीं क्यों…शायद आज वो पूरी तसल्ली से चोदा और खुश हुआ इसलिए…

फिर वो अपना कपड़े खोज पहनते हुए बोला,”गजब की हो यार तुम दोनों…लग ही नहीं रहा था कि रंडी चोद रहा था आज…बिल्कुल बीवी या gf की तरह महसूस हो रही थी…एक ही बार में पस्त कर दी…अब तो 5 दिन तक आराम से मस्ती में रहूँगा…”

श्याम भी हाँ कहता हुआ अपने कपड़े पहनने लगे..हम दोनों भी मुस्काती हुई उठी और कपड़े पहनी और सब साथ निकल गए…


हम चारों अस्त-व्यस्त खुद को ठीक करते हुए आंटी के पास पहुँच गए…आंटी हम सब की तरफ देख मुस्कुरा रही थी…उसने उस काले की तरफ देख बोली,”कैसी थी टेस्ट? दिल खुश हुआ कि नहीं…”

“पूछो मत आंटी, सीधा स्वर्ग में पहुंच गया था…एक ही बार में पस्त हो गया…”काले आदमी ने अपनी व्यथा कहते हुए कुर्सी पर बैठ गया…मैं और पूजा कपड़े चेंज करने चेंजिगरूम की तरफ जाने से पहले इनाम के पैसे आंटी की कर दी…

आंटी: “अरे वाह..तोहफा भी मिल गई..बहुत ज्यादा खुश कर दी क्या रे छोरी..” आंटी की बात का कोई जवाब सिर्फ मुस्कुरा कर दी और वापस चेंजिग रूम की तरफ बढ़ गई…कुछ ही पलों में हम दोनों अपने कपड़े पहन चलने के लिए आंटी के पास खड़ी थी…

आंटी: “ऐ, तू मेरे यहाँ काम करेगी…तेरे बंगाल से ज्यादा पैसे दिलवाउंगी दोनों को…यहां सब गोरी चमड़ी के दिवाने होते हैं…” मेरी तरफ देख आंटी पूछी…मैं उनकी बात सुन पूजा की तरफ देखने लगी…

“नहीं आंटी, मैं यहां नहीं रह सकती…काफी दिनों से इनके दोस्त कह रहे थे तो बड़ी मुश्किल से शादी का बहाना बना आई हूँ…सुबह तक यहाँ से निकल लूंगी नहीं तो मेरे शकमिजाजी पति हम दोनों की खैर नहीं छोड़ेंगे…”श्याम की तरफ देख मुस्काती हुई मैंने सरासर इस नाटक में भागीदरी कर ली…जिससे श्याम मंद मंद कुटिल हंसी हंस रहे थे…

आंटी:” ओह…मतलब पति प्यास नहीं बुझाता तो चोरी से करती है…अच्छा है…प्यास भी बुझ जाती और पैसे भी…” आंटी कहते हुए पैसे की बंडल मेरी तरफ बढ़ा दी जो काले आदमी ने दिए थे…मैंने पैसे लिए और उनमें से इनाम की राशि निकाल बेंच पर बैठी दोनों लड़की की तरफ बढ़ा दी…

सब अचानक मेरी इस हरकत से भौचक्के हो देख रहे थे..उन दोनों को भी विश्वास नहीं हो रही थी..वे बस मेरी तरफ टकटकी लगाए घूरे जा रही थी…वो लेने के हाथ ही नहीं खोल रही थी तो मैंने खुद आगे बढ़ वो रूपए उसकी चोली में घुसेड़ती हुई बोली…

“जब काम नहीं मिली तो भूखी थोड़े ही रहेगी…, मदद के तौर पर रह ही रख लो…अपनी बिरादरी की है तो ऐसे नहीं देख पाई…चलती हूँ अब..अपना ख्याल रखना…”कहती हुई मैं वापस मुड़ी और श्याम से चलने बोली…

पर सब तो बस घूरे ही जा रहे थे…बिना कोई जवाब दिए श्याम उठ गए…और वो काला आदमी सबसे पहले ही निकल गया…आंटी भी पता नहीं क्यों पहली बार बेड से उतरी और बोली,”रूको,गाड़ी मंगवाए देती हूँ…स्टेशन तक छोड़ देगा…”

मैं मना की पर वो नहीं मानी…कुछ ही देर में गाड़ी में बैठ हम तीनों आंटी से विदा ले स्टेशन पर आ गए…गाड़ी के वापस जाते ही श्याम ने एक गाड़ी की और एक घंटे में हम घर पहुंच गए…घर पहुँचते ही हम सब ने खूब हंसी आज की यादगार मूवी को याद कर….फिर हम तीनों एक ही बेडरूम में घुस पसर गए…

सुबह में घंटी की तेज आवाजों ने मेरी नींद तोड़ ती..मैं उठी तो ये क्या…श्याम पूजा पर चढ़े अपना लंड उसकी बुर में पेले जा रहे थे और पूजा भी मस्ती में चिल्लाए जा रही थी…मैं तो गुस्से से भर गई कि बेल कब से बज रही है और ये दोनों चुदाई में लगे हैं…

मैंने श्याम की पीठ पर एक मुक्का जमाती हुई बोली,”बेल सुनाई नहीं दे रहा क्या? दूध लेने चले जाते तो ये भाग जाती क्या..?” श्याम मुक्के की चोट से आह भर हंसते हुए बोले,”भाग तो नहीं जाती पर अगर लंड शांत हो जाता तो….”

मैं उनकी बातों से हल्की मुस्काती हुई बेड से उतरती हुई बोली,”हाँ तो कोई बात नहीं…वो दूधवाला देखेगा कि रोज सुबह मैं ही आती हूँ और तुम दोनों सोते ही रहते हो तो किसी दिन मौका पा कर आपकी बीवी चोद देगा तो बाद में दोष दूधवाले का मत देना..”

श्याम मेरी बात सुन पूजा को जोरदार धक्के लगाते हुए बोला,”कोई बात नहीं…हम दोनों तो फायदे में ही रहूंगा…मेरे दूध के भी पैसे बचेंगे और तुम्हें नए लंड मिल जाएंगे…जाओ जल्दी चुदवा के ही आना…”

श्याम अपनी बात कह हंस पड़े जिससे पूजा भी आहहहह कहती हुई हंस पड़ी…मैं उन दोनों के कान एक साथ पकड़ती हुई बोली,”तुम दोनों को हंसी आ रही है..अब तो सच में चुदवा के ही आऊंगी…” और फिर उनके कान मरोड़ कर छोड़ दी जिससे दोनों की एक साथ ईससससऽ निकल पड़ी…

मैं फिर बाहर निकल किचन से बर्तन लेती चाभी ली और चल दी बाहर…मेन गेट खुलते ही दूधवाले से नजर मिली तो हम दोनों की अनायास मुस्कान निकल गई…फिर दूधवाले ने दूध माप के दे दिया…मैं दूध ले उसकी तरफ देखी और अंदर ही अंदर मुस्काती हुई वापस मुड़ गई बिना कुछ कहे…

दूधवाला: “आज क्रीम नहीं लोगी मैडम..? आज भी एकदम ताजा है..सोचा आपको दे दूँ फिर किसी और को दूँगा…” दूध वाले मुझे जाते देख बोला…जिससे मैं हल्की रूकी और सड़क पर दोनों तरफ देखी…रूम मालिक को देख रही थी वरना फिर कहीं वो बात करते भी देख लेता बेवजह तो परेशानी में डाल देता…

पर वो कहीं नहीं दिखा तो उसके धोती में फड़फड़ा रहे लंड को देखती बोली,”अब नहीं लेनी, कल रूम मालिक को शक हो गया था…अब कहीं दुबारा शक हुआ तो मुसीबत हो जाएगी…वैसे आपकी क्रीम बेस्ट थी…लेकिन क्या कर सकती…सो अब बस काम से काम रखिएगा…” और मैं वापस मुड़ गई…

बेचारा उस दूधवाले के सपने तो चूरचूर हो गए…रोज सपने देखता होगा कि मेरी बूर में अपना लंड डाल रहा है…वह कुछ कह भी नहीं सका…बस मुझे जाते हुए देखता रह गया…मैं बिना मुड़े अंदर चली गई…

अंदर किचन में दूध रखी और बेडरूम में गई दोनों को देखने…हम्म्म..चुदाई खत्म हो चुकी थी…अब पूजा बेड पर पसरे श्याम के मुरझाए लंड को जीभ से साफ करने में लगी थी…मेरी आहट पाते ही पूजा एक नजर मेरी तरफ देखी, फिर मुस्काती हुई अपने काम में लग गई….

“छोड़ने का मन नहीं है क्या…चलो हटो,अब मैं करूंगी…”कहती हुई मैं पूजा के बगल में बैठ गई…श्याम मेरी बात सुन मुस्काते हुए बोले,”अभी कहाँ रानी…अब एक राउंड और करूंगा अपनी कमसिन शाली की…फिर छोड़ेंगे…वैसे तुम तो दूधवाले से चुदने गई थी ना…”

“उफ्फ्फ, घर की गेट खुली ही छोड़ दी..आती हूँ बंद कर…”मैं दूधवाले के बारे में सोचते-2 गेट बंद भी नहीं की…मैं गेट के पहुंच आधी गेट ही लगाई थी कि सीढ़ी पर किसी की आहट सुनाई दी…

थोड़ी गौर से सुनी तो आहट ऊपर छत की तरफ जाती लग रही थी…इस वक्त सुबह-2 कौन छत पर जा रहा है…नीचे की फ्लैट से तो कोई कभी सुबह जल्दी उठता तक नहीं तो फिर कौन है…और नीचे से अभी आई ही हूँ, रूममालिक भी तो कहीं नहीं दिखे थे…

कौन हो सकता है? यही जानने मेरे कदम बाहर निकल छत की तरफ बढ़ गई…अंतिम सीढ़ी से छत पर देखी तो सामने कोई नजर नहीं आया…अब हल्की डर भी होने लगी कि पता नहीं कौन है जो छत पर आया और गायब हो गया…

एक बार मन हुई वापस हो जाऊं…फिर सोची सुबह हो ही गई तो दूसरी अप्राकृतिक चीजें तो हो ही नहीं सकती…छत पर घूम कर ही देखती हूँ शायद पानी टंकी के दूसरी तरफ हो….और मैं आगे बढ़ छत पर चारों तरफ देखती मुआयना करने लगी…

पानी टंकी के उस तरफ जैसे ही पहुँची सामने रूम मालिक पर नजर पड़ी…मैं राहत की सांस ली पर अब इस मुसीबत से पीछा छुटकारा पाने की सोच में पड़ गई…अगर वो नहीं देखते तो चुपके से रिटर्न हो जाती पर….

रूम मालिक: “आइए..आइए…मैडम…सुबह की ताजी हवा काफी फायदेमंद होती है…ऱोज लेनी चाहिए सबको…” मैं उसकी बात से बेवजह मुस्कुरा पड़ी और ना चाहते हुए भी उनकी तरफ बढ़ गई…

मैं आगे जा रेलिंग के सहारे उनसे काफी हट कर खड़ी हो गई और सामने उगती हुई सूरज की तरफ मुंह कर दी…वो हम दोनों के फासले को कम करने मेरी तरफ खिसक गए और लगभग एक फीट की दूरी पर खड़े हो गए…

मैं उनके करीब आने की आहट महसूस कर सनसना गई…शरीर के रोंगटे खड़े हो गए…वो मेरे बगल में आ मुझे गौर से निहारने लगे जिससे मैं काफी असहज महसूस करने लगी…मेरे हाथ छत की रेलिंग पर कस गई…

“आती हूँ कुछ देर में…गेट खुला ही है कोई आ गया तो…”मैं अब यहां से हटने की सोच बहाने बनाई और जाने के लिए पीछे मुड़ी कि तभी उनके हाथ रेलिंग पर पड़े मेरे हाथों को जकड़ के दबा दिया…मैं अचानक से हुई उनकी हरकत से एकटक आश्चर्य से उनकी आँखों में देखने लगी…

“अरी मैडम, इतनी जल्दी क्यों भागने की कोशिश कर रही हो..मैं कोई बाघ थोड़े ही हूँ जो गिल जाऊंगा…”रूम मालिक ने मुझे अपनी तरफ देख बोला…जिससे मैं अब और मुश्किल में पड़ गई…कल की वारदात से तो हाथ छुड़ाने की भी हिम्मत नहीं पड़ रही थी…

रूम मालिक: “पता है आज मैं आपसे काफी खुश हूँ…कल मैं आप पर जितना गुस्सा था आपने आज सब खत्म कर दिया…मैं वहीं सामने वाले कैम्पस में छुप के बैठा सुन रहा था…आज अगर कोई हरकत करती तो सच बहुत बुरा होता…”

मैं बिना कोई हरकत किए बस उनका चेहरा हैरानी से निहारने लगी…मैं खुद को आज लकी समझ रही थी…अपनी तरफ यूँ ऐसे घूरते पा उसने मुस्कुराते हुए अपनी एक आँख दबा दी,जिससे मैं झेंप सी गई और नजरें घुमा ली…

रूम मालिक: “एक बात तो है आप दिल की बुरी नहीं है…कोई कुछ कहे तो आप उस पर गलत सही सोचने के बाद कोई फैसले लेती हो…यही आप में अच्छी बात है…हाँ कुछ गलत भी करते हैं पर इसमें आपकी गलती नहीं है…”

मैं एक बार दुविधा में पड़ गई कि अब क्या कहेंगे ये..मैं पुनः उनकी तरफ मुंह घुमा दी…सूरज की लालिमा फट चुकी थी जिससे उसकी किरण सीधी हमारी गाल पर पड़ कर और सुर्ख बना रही थी…तभी वो मेरे चेहरे के बिल्कुल निकट आते हुए बोले…

रूम मालिक: “अब आप हो ही इतनी हॉट और सेक्सी कि आप लाख चाहो,खुद को रोक नहीं पाओगी ज्यादा देर…इसी वजह से आप कभी कभार बहक जाती हो…” वो इतना कह चुप हो गए…

पर उनका चेहरा अभी भी ज्यों के त्यों थी..मेरी तेज हो चुकी साँसें उनकी साँसों से टकरा रही थी…और मेरी वासना में बदल चुकी नजरें सीधी उनकी आँखों में झाँक रही थी…

कुछ देर तक यूँ ही खड़े रहे हम दोनों बिना कोई सवाल जवाब के…उनका एक हाथ तो रेलिंग पर मेरी एक हाथ दबाए ही था…अब उन्होंने अपना दूसरा हाथ आगे बढ़ा मेरी दूसरी हाथ पकड़ अपनी अंगलियां मेरी अँगुली में फंसा पकड़ लिए…

मैं चाह कर भी उन्हें नहीं रोक पा रही थी…अगर रोकती तो वे कहीं सवाल कर देते कि दूधवाले से भी बुरा हूँ क्या..? तो मैं क्या जवाब देती…या फिर चाहते तो मेरी इज्जत सरेआम लुटा देते तो क्या करती..आखिर मेरी दुखती नस जो उनकी पकड़ में आ गई थी…

तभी उन्होंने रेलिंग पर से अपना हाथ पीछे खींच मेरी कमर के पास रख दिए और दबाब बनाने लगे अपनी तरफ…मैं होशोहवाश खोती उनके शरीर में सटती चली गई और रेलिंग पर से हाथ उठ के अपने आप उनके कंधों पर पड़ गई…बिल्कुल प्रेमी जोड़ो की तरह चिपक गए थे..

मैं पसीने से तरबतर हो गई थी…और सुबह की उगती सूर्य की किरण से मेरी शरीर दमक रही थी…मेरी साँसें सीधी उनके सीने में घुस रही थी…और तेज साँसों में मेरी चुची उफ्फ्फ…उनके सीने से टच करती हुई एक बार पीछे हटती तो एक बार पूरी धंस जाती….

“दोस्ती करोगी हमसे…अच्छी वाली दोस्ती…” फिर वो हौले स्वर के साथ गर्म साँसे मेरी गालों पर डिम्पल की तरह धँसाते हुए बोले…साँसों की तेजी ने मेरे अंदर गुदगुदी सी कर दी…मैं ईससससऽ की आवाजें करती हुई मुंह फेर ली…

रूम मालिक: “अरे, ऐसे क्यों मुंह फेर रही हो…जो बात तुम सोच रही हो वैसा मैं अब कुछ नहीं करने वाला…कल वाली बात बिल्कुल भूल जाओ…ब्लैकमेल,झाँसा में फँसाना आदि सब चीजों का मैं सख्त विरोधी हूँ…दोस्ती की कह रहा हूँ तो सिर्फ दोस्ती…”

थैंक्स गॉड…जिस बात से डर रही थी इनसे वैसी बात नहीं थी…गलत देखे तो शायद ज्यादा गुस्सा कर गए कल जिससे धमकी दे रहे थे…पर अब जो ये कर रहे हैं ऐसे मुझे चिपका कर वो क्या है…ये फायदा ही तो उठा रहे हैं मेरी बेबसी का…

“मैं समझ सकता हूँ कि आपके मन में क्या चल रहा है इस वक्त…तो मैं बता दूँ कि आप ही के जैसी सुंदर मेरी भी बीवी है, पर वो कुछ अलग किस्म की है…मतलब बीवी तो है मेरी पर बीवी बनना नहीं जानती…”उन्होंने अपनी बात से मेरी अंदर चल रही सवालों का जवाब देते हुए बोले…

काफी तेज दिमाग है इनका तो..बिना सवाल पूछे ही जवाब देने लग गए…

“मैं अपनी बीवी में हर रोज एक दोस्त खोजता रहता हूँ…पर कभी मिली नहीं..वो तो बस बीवी का मतलब सिर्फ सेक्स ही जानती है…सेक्स के बाद कभी मेरे दिल की आवाज सुनने की कोशिश नहीं की और ना ही कभी सुनाई…इसलिए मैं तुम्हारी जैसी हसीन बला से दोस्ती करना चाहता हूँ ताकि हम अपनी दिल की बात कह-सुन सकें…” वो अपने दिल की बयान अपने साफ लफ्जों से सुनाने लगे…

मैं उनके इस दर्द को सुन पिघलने लग गई…अब उनसे हटने की बजाय आराम से खड़ी उनकी बाते सुनने लगी…

“…मेरे और भी कई लेडिज फ्रेंड हैं पर सब सिर्फ फ्रेंड ही हैं…कोई ऐसी नहीं मिली जिससे अपना हाल-ए-दिल सुना सकूँ…पर आज अगर तुम दोस्त बन जाओगी तो मेरी जिंदगी में ये कमी शायद पूरी हो सकती है..क्योंकि तुम सबसे अलग हो…हर रिश्ते को निभाना जानती हो..अब ये मत कहना कि सोचूँगी…दोस्ती लोग सोच कर नहीं करते…वो तो प्यार से भी तेज होता है और इसमें कोई रिस्क भी नहीं…” वे अपनी बात खत्म कर मेरी जवाब का इंतजार करने लगे…

मैं उनकी आखिरी बात पर थोड़ी सी शर्मा के हंस पड़ी..जिससे वे भी हंस पड़े…अब तो मेरे अंदर की सारी डर इनके प्रति जो थी ऱफ्फूचक्कर हो चली थी…इनके अकेलेपन पर तरस आ गई थी…शायद इसी वजह से ये कभी-कभार ज्यादा गुस्से में आ जाते हैं…

“…तो ये कौन सा तरीका है दोस्ती प्रपोज करने की.” मैंने अपनी झिझक समाप्त करते हुए उनसे बोली…जिससे वो खिखिलाकर हंस पड़े…फिर वो बोले,”अपना तरीका है…मैं ऐसे ही सब के साथ रहता हूँ…बोरिंग वाली दोस्ती मुझे नहीं पसंद…दोस्ती में रोमांस,प्यार,शरारत,गुस्सा सब होना चाहिए पर लिमिट तक ही…ऐसा नहीं कि तुम अगर ऐसे मेरे बांहों में हो मैं गलत हरकत कर दूँ…”

“अगर कभी आपको दोस्तों के संग ऐसी हालत में आपकी बीवी देख ले तो…”मैं भी कुछ नॉर्मल हो कुछ अंदर की बात जाननी चाही इनसे…जिसे सुन वो नाक-भौं सिकुड़ाते हुए बोले…

“मोहतर्मा,मुझे इस बात की कोई डर नहीं..बीवी के डर से मैं अपने दोस्तों से मिल रही जिंदगी को कैसे छोड़ सकता भला…वैसे कल सुबह मेरे साथ वॉक पे चलना पसंद करेंगी…4 बजे…”उन्होंने बस शार्ट कट में ही अपनी हिम्मत-ए-दिल बयां कर दी…

“इतनी सुबह तो जगती भी नहीं..5 बजे के बाद नींद….”मैं अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाई कि वो पड़े,”अं.हं….जगने की चिंता छोड़ दो…नींद ठीक 4 बजे खुद खुल जाएगी…मैं इंतजार करूँगा…अब चलता हूँ..बॉय..”

और फिर अलग होने से पहले मेरे माथे को हल्के से चूम लिए…फिर हम दोनों एक साथ मुस्कुराते हुए नीचे चल दिए…मैं नीचे अपने घर के दरवाजे से अंदर हुई और अंदर देखी तो अभी भी दोनों बाहर नहीं निकले थे…

अचानक मैं मुड़ी और और नीचे की तरफ बढ़ रहे रूम मालिक को सीसी की आवाज से बुलाई…वो आश्चर्य से मुड़ते हुए वापस ऊपर की तरफ आया…पास आते ही इशारे से पूछा क्या बात है..

मैं उनके गर्दन पकड़ उनके शरीर पर लद सी गई और कान के समीप अपने लब ले जाती बोली,”थैंक्स फॉर फ्रेंडशिप….” और पीछे हटने से पहले उनके गाल पर एक गहरी चुंबन जड़ दी दोस्ती वाला…फिर मुस्कुराते हुए तेजी से अंदर आ गेट लॉक कर ली…वो भी मेरी इस शरारत पर मुस्कुराते हुए नीचे चले गए….

फिर हमने वापस बेडरूम में गई तो पूजा नहीं थी..शायद बाथरूम गई थी..श्याम अभी भी बेड पर पड़े हुए थे..मैं उनके पास बैठती हुई उनके सीने पर किस करती हुई बोली,”उठिए ना…ऑफिस नहीं जाना…”

श्याम: “उम्म्म्म…मूड नहीं है डियर..आज सोने दो…हुअंअअअ्म्म…”श्याम करवट बदलते हुए सोने की कोशिश करने लगी…मैं भी मुस्कुराते हुए छोड़ दी और उठ गई..फिर पूजा बाथरूम से फ्रेश हो कर निकली तो मैं फ्रेश होने घुस गई…

फ्रेश होने के खाना खाई और आराम करने चली गई..श्याम करीब 12 बजे उठे और फ्रेश होने के बाद बाहर निकल गए…मैं फिर वापस पूजा के बदन से चिपक के सो गई…शाम में करीब 5 बजे नींद खुली…

पूजा और मैं कुछ टहलने छत पर चली गई…कुछ घूमने के बाद बोली,”पूजा,वो सामने वाला नजर नहीं आता..”

पूजा: “हाँ दीदी, अब शायद उसे शर्म आती होगी कि उसका भी बाप है सेक्स में..खुद को मॉडर्न समझता था छत पर चुदाई कर के..शाले की हेकड़ी निकल गई हम दोनों को एक मर्द के साथ देखकर…ही..ही..ही..”

“हाँ…हम दोनो जितने कमीनी हैं,उतनी तो वो सोच भी नहीं सकती…”मैं हंसती हुई पूजा की बात में हाँ मिलाई…फिर इसी तरह की कुछ इधर उधर की बातें होती रही…अचानक तभी सीढ़ी से ऊपर किसी के चढ़ने की पदचाप सुनाई दी…

हम दोनों आपस में गुपचुप ही इशारे से पूछ रही थी कि कौन हो सकता है…तभी पूजा आगे बढ़ नीचे कैम्पस में झाँकी तो तेजी से अपने पास बुलाई…मैं झटपट पुजा के बगल में खड़ी हो गई…

नीचे एक बाइक लगी थी…इस घर में तो बाइक थी पर ऐसी नई नहीं थी…बिल्कुल चमकती हुई…शायद खरीदे हुए कुछ दिन ही हुए हों…मैं हौले से पूजा से बोली,”शायद नीचे किसी के गेस्ट होंगे और वो घूमनेछत पर आ रहे है…”

पूजा: “आने दो, अकेला आया और मस्त लगा तो खा ही जाऊंगी…ही..ही..ही…” और पूजा खिलखिला पड़ी जिससे मैं भी खुद को रोक नहीं पाई…फिर हम दोनों वापस सीढ़ी की तरफ देखने लगी भूखी लोमड़ी की तरह कि शिकार आ रहा है…

तभी सामने देख हम दोनों के सारे अरमान शीशे की तरह बिखर गई…सामने श्याम थे…हम दोनों अपने मंसूबे की नाकामयाबी पर एक दूसरे की तरफ ताक हंस पड़े…जिसे देख श्याम हंसते हुए बोले,”क्यों गर्ल्स, हमें देख के हंसी क्यों निकल पड़ी…”

“नहीं दरअसल हम दोनों नीचे नई बाइक देखी तो सोची नीचे किसी के यहाँ गेस्ट आए हैं जो ऊपर आ रहे हैं तो सोची कुछ लाइनबाजी कर लूँ..पर….वैसे ये किसकी बाइक है…” मैं मुस्कुराती हुई बोली..

“ओहहह…फिर तो बहुत बुरा हुआ तुम दोनों के साथ…खैर इस बुरेपन को दूर करने ही आया हूँ…चलो तैयार हो जाओ और घूमने चलते हैं नई बाइक से…”श्याम हमदरदी जताते हुए बोले…

पूजा: “वॉव जीजू, बाइक लिए हैं क्या…थैंक्स जीजू…” और पूजा श्याम से लिपटती हुई किस करने लगी खुशी से…मैं भी खुश थी कि श्याम को अब ऑफिस ऑटो से नहीं जानी पड़ेगी और साथ में हम लोग भी बाहर घूम लेंगे…

“आज कहाँ ले जाएँगे घुमाने…?” मैं भी आगे बढ़ श्याम के शरीर से चिपक उनके गाल चूमती हुई पूछी…जिसे सुन श्याम और पूजा किस तोड़ दिए…

श्याम: “मेला…शहर के बाहर एक जगह कृष्णाष्टमी का मेला लगा है…वहीं चलेंगे..अब चलो नीचे और तैयार हो जाओ मेरी रानी…” कहते हुए श्याम अपने होंठ मेरे होंठ पर रख दिए …

कुछ देर किस करने के बाद हम अलग हुए और नीचे चले आए…फिर हम एक साथ कपड़े चेंज करने लगी…कुछ ही पलों में हम दोनों लड़की सिर्फ पेंटी और ब्रॉ में थी…

श्याम इस पल का बखूबी से मस्ती लेते हुए बेड पर बैठे देख रहे थे…मैं ब्लैक कलर की एक ट्रांसपैरेंट साड़ी निकाली और साथ की मैच्युवल ब्लॉउज,पेटीकोट बेड पर रख दी…तभी श्याम बीच में बोले..

श्याम: “जान, आज बिना ब्रॉ की ब्लॉउज पहनो…मस्त लगोगी…और पूजा तुम भी ब्रॉ निकाल दो.. ” श्याम कह कर मजे से उड़ते हुए आनंदमय हो गए…मैं भी मुस्कुराते हुए ब्रॉ की हुक खोल दी…

पूजा: “दीदी, मुझे भी साड़ी पहननी है आज…”और फिर पूजा अपनी आँखें नचाती हुई मुस्कुराने लगी..मैं और श्याम उसकी बात पर हंस पड़े,जिससे पूजा भी हँसे बिना रह नहीं पाई…

अगले ही पल एक गुलाबी पारदर्शी साड़ी उसके सामने रख दी…पूजा काफी खुश होती हुई अपनी ब्रॉ की हुक खोलने लगी…

श्याम: “पूजा, अगर साड़ी बाँधने में मदद की जरूरत हो मैं पास ही बैठा हूँ…” कहते हुए चुटकी बजाते हुए अपनी दावेदारी पेश कर दिए…जिस पर पूजा आँखें ऊपर कर हँसती हुई बोली,”सॉरी…मैं साड़ी पहनना अच्छी तरह जानती हूँ…”

कुछ ही देर में हम दोनों तैयार हो गए, जिसे श्याम आँखें फाड़ फाड़ कर देखे जा रहे थे…जब मैं उन्हें ऐसे एकटक निहारती देख इशारे में पूछी क्या हुआ…

श्याम: “माशाल्लाह….लोग उस मेले को छोड़ इस मेले को देखने टूट पड़ेंगे…कसम से, सेक्स की देवी दिखती हो तुम दोनों जो 80 साल के बुड्ढ़े का भी खड़ा कर दे…”

“अच्छा,अच्छा…मैं आज पहली दफा मेले घूमने नहीं जा रही हूँ…वहाँ ढ़ेर सारी खूबसूरत लेडिज बन-ठन के आती हूँ..अच्छी लगती हूँ या नहीं ये बताइए बस…” मैं मुस्कुराहट में बोल पड़ी…

श्याम: “सुपर…बिल्कुल परी लग रही हो…गोरे बदन पर ब्लैक साड़ी…अल्लाह बचाए नजर लगने से…चलें अब..”

मैं खुश होती हुई हाँ कह दी और उनके साथ रूम लॉक कर निकल गई गुलाबी पूजा के साथ…वो तो और खूबसूरत लग रही थी गुलाबी साड़ी,गुलाबी लिपस्टिक,गुलाबी सैंडल,गुलाबी हेयरबैंड,गुलाबी नेलपॉलिश…सुपर…

मैं और पूजा श्याम के संग बाइक से करीब एक घंटे तक चलने के बाद मेला पहुँचे…श्याम ने बाइक स्टैंड में बाइक लगा दी..इस दौरान अकेली लड़की देख ना जाने कितने कमेंट सुनने को मिल गए…

पर हम दोनों कोई जवाब दिए बिना बस बातों में मशगूल मजे लेती रही कमेंट्स के…कुछ पल में श्याम के साथ मंदिर की तरफ गई जहाँ भक्तों की काफी भीड़ थी…हम दोनों लेडिज लाइन में लग गई मंदिर में जाने के लिए..

जबकि कुछेक दूरी पर मर्दों की लाइन थी, जिसमें से कुछ तो चुपचाप थे और कुछ सभी लेडिज को देख हल्के से कमेंट्स कर रहे थे…अजीब इंसान है…भगवान के सामने भी नहीं चुप रहते…

खैर कुछ ही पलों में हम दोनों भगवान के सामने शीश नमन किए…तभी मेरे सर पर हाथ पड़ी और सरकती हुई नंगी पीठ पर रगड़ गई..मैं चौंक सी गई और उठी तो सामने पंडा थे जो मंदिरों में रहते हैं…

ऐसी रगड़ तो सिर्फ वासना की होती है, जिसे हम लेडिज लोग अच्छी तरह पहचान लेते हैं..वो मेरी तरफ वहशी निगाहों से देख आशीर्वाद में कुछ बुदबुदाते हुए प्रसाद बढ़ा दिया..जिसे मैं ली और चुपचाप वापस हो ली…

पूजा: “दीदी, ये तो पाखण्डी लगता था…देखी कैसे पीठ सहला रहा था कमीना…” पूजा चुप ना रह पाई और अपनी व्यथा कह डाली…

“छोड़ ना…आदत होगी उसकी…सभी को शायद ऐसे ही आशीर्वाद देते होंगे…चल अब घूमते हैं कुछ…”मैं बातों को टालती हुई बोली..पर पूजा बोल तो सच ही रही थी…वो भी कुछ समझ चुप रह गई…

पर श्याम अभी भी अंदर ही थे…हम दोनों बाहर खड़ी हो उनके आने का इंतजार करने लगी…कुछ ही देर में वो आते हुए दिखे पर वो अकेले नहीं थे…उनके साथ एक लेडिज थी जो साथ में हंसती हुई बातें करती आ रही थी…

हम दोनों कुछ समझ नहीं पा रही थी कौन है ये..तू तक श्याम मेरे निकट पहुँचते हुए बोले,”सीता, ये मेरी दोस्त है. सुमन..और सुमन से मेरी पत्नी सीता और ये पूजा..”

फिर ना चाहते हुए भी हम ने सुमन को हैलो बोली और फिर हम सब चल दिए…रास्ते में चुपके से श्याम कह दिए कि गर्लफ्रेंड है…जिसे सुन हम दोनों के होंठों पर मुस्कान तैर गई और थोड़ी जलन भी…

जलन इसलिए कि श्याम की प्रार्थना भगवान ने सुन ली और इनकी गर्लफ्रेंड से मिला दिए और हम दोनों….हम दोनों को ठेंगा दे दिए..खैर अब इन्हीं के साथ घूमती हूँ…

“आप अकेली आई है क्या..?”मैं अचानक सुमन से सवाल कर गई…मैं तो सोची कि ये मेरी सवाल से नर्वस हो जाएगी पर वो बोल्ड होती हुई हंसती हुई बोली,”नहीं…मैं अपने दोस्त के साथ आई थी पर यहाँ उसका बॉयफ्रेंड मिल गया तो थोड़ी देर में आती हूँ कह निकल गई और फिर मैं यहाँ एक घंटे से उसके इंतजार में खड़ी थी…”

उसकी बात सुन हम सब हँस पड़े…मन ही मन बोली कि हाँ अब तुम्हारा भी बॉयफ्रेंड मिल गया तो तुम भी उड़ जाओ कहीं…तभी मेरी नजर बगल में पूजा की तरफ मुड़ी तो वो नदारद थी…मैं डरती हुई श्याम से बोली,”पूजा कहाँ गई…”

श्याम भी चौंकते हुए रूकते हुए चारों तरफ नजर दौड़ाते हुए बोले,”तुम्हारे साथ ही तो आ रही थी…हम दोनों तो आगे चल रहे थे…”

“हाँ पर जैसे ही मैं अभी इनसे बात करने थोड़ी आगे हुई इसी बीच कहाँ गायब हुई देख नहीं पाई…”मैं थोड़ी परेशानसी होती हुई बोली…श्याम के चेहरे पर परेशानी साफ झलक रही थी और वो चारों तरफ नजर घुमा ढ़ूँढ़ रहे थे…

अचानक सुमन बोल पड़ी,”श्याम, वो वहाँ गोलगप्पे के पास कौन खड़ी है..” सुमन की आवाज से हम दोनों उस तरफ देखे…जो कि मेले के सबसे एकांत सी जगह थी…मेरी नजर तुरंत ही पूजा को पहचान ली…वो पूजा ही थी…

तभी मेरी नजर उसके साथ बंटी और सन्नी पर पड़ी जो पूजा के साथ गोलगप्पे खा रहे थे…सारा माजरा समझ में आ गई…श्याम भी देख चुके थे और वो मेरी तऱफ घूरने लगे कि ये क्या चक्कर है…

“वो दोनों पूजा के दोस्त हैं कॉलेज के…वही ले गया होगा…”मैं श्याम के सवालिया नजरों का जवाब देती हुई बोली..श्याम को थोड़ा गुस्सा आ गया कि कम से कम बता कर तो जाती…और श्याम भी तुरंत समझ गए कि किस टाइप का दोस्त है और उसे मैं भी अच्छी तरह जानती हूँ…

श्याम: “ठीक है, जाओ पूजा के पास..जब उसका पेट भर जाए लेती आना..तब तक हम इधर घूमते हैं…फोन कर लेना…ओह सिट..तब से ध्यान ही नहीं आया कि पूजा के पास भी तो फोन है…मैं भी ना. “

श्याम की बात से हमें थोड़ी हंसी भी आ गई…फिर ओके कह मैं वहाँ से निकल गई पूजा की तरफ..कुछ दूर जाकर जब वापस मुड़ी तो हमें हंसी आ गई…श्याम सुमन के हाथ में हाथ डालकर चल दिए थे…

मैं जैसे ही सीधी हुई कि एक जोरदार टक्कर हो गई…ओहहह गॉड….आउच्च्च्चचच…मर गईईईईईईई…एक लड़का फिल्मी स्टाइल में पीछे मुड़ने का फायदा उठा ठीक सामने से मेरी एक चुची पर हाथ रख टक्कर मार दिया और हटते वक्त बड़ी सफाई से कस के मसल भी दिया..

“मैडम, भीड़ में आगे देख कर चला करो..कहीं आपका बम फट जाता तो मैं तो गया काम से…”उस लड़के को मैं कुछ कहती इससे पहले ही वो बोल पड़ा और चल दिया…उसके साथ दो और लड़के थे जो उसके पीछे बारी-2 से मेरी चुची पर ही नजर गड़ाए आगे निकल गया…

कुछ देर तक वहीं मूक बनी खड़ी उसे जाते देखती रही कि कितना कमीना था…एक तो मजे भी लूट लिया और गलती हमही को बोल आसानी से निकल गया…उसकी शरारत पर अचानक मेरी हंसी निकल पड़ी…और ठीक उसी वक्त वो तीनों लड़का भी आगे बढ़ मेरी तरफ पलट गया…

और मुझे हँसते देख वो आश्चर्य से भर गया और अचानक मेरी तरफ बढ़ने लगा…मैं उसे अपनी तरफ आते देख चौंकी और तेजी से मुड़ पूजा की तरफ चल दी…पूजा तक आने के चक्कर में मैं खुद कई बार कई औरतें,लड़के,अंकल से टकरा गई…काफी हंसी आ रही थी खुद पर…

पूजा के समीप पहुँचते ही पूजा पर बरस पड़ी, पर पूजा मेरी बातों को दरकिनार कर बस गोलगप्पे खाने में मशगूल रही…अंत में पूजा के शरीर अपनी तरफ करते हुए लगभग डाँटती हुई बोली,”ऐ…मैं तुमहे ही कह रही हूँ..कुछ सुन भी रही है या बहरी हो गई…”

जिस पर वह मेरी तरफ गोलगप्पे दिखाती हुई बोली,”खाओगी…?”

उफ्फ्फ…अजीब किस्म की लड़की है ये…इस पर कोई असर ना देख बंटी को बुरा भला सुनाने लगी…जिस पर वह दूसरी तरफ हो गया और सन्नी को मेरे सामने कर दिया…सन्नी गोलगप्पे की प्लेट रखता हुआ मेरी बाँह पकड़ा और चलने लगा..

“भैया जी, मेमसाब को साइड में ले जाओ तभी शांत होगी…बहुत गरमी है इनमें…” पीछे से गोलगप्पे वाले ने आवाज दी जिसे सुन पूजा और बंटी की हंसी साफ सुनाई दी…मैं गुस्से में उसकी तरफ लपकनी चाही पर सन्नी कस के दबोचता हुआ दूसरी तरफ खींचता चला गया…

गोलगप्पे वाले के पीछे कुछ दूर हट के एक पुराना खंडहरनुमा घर था…आगे एक बड़ी सी वृक्ष जो पूरी तरह उस घर को ढ़ँक रही थी…एकदम गुप्प अंधेरा…शाले मेला संचालक को इस पर ध्यान देनी चाहिए..कम से कम एक लाईट तो दे देते…पर वो मेला से इतनी दूर थी कि शायद जरूरत नहीं समझा होगा…

फिर ये गोलगप्पे वाला इतना एकांत में क्यों है…जबकि इसे मालूम है कि गोलगप्पे ज्यादातर लड़की ही खाती है…यही सब सोच ही रही थी कि तभी सन्नी एक दीवाल से हमें चिपकाता हुआ मेरे होंठों पर टूट पड़ा…

मैं गुस्से के कारण खुद को अलग करना चाह रही थी पर वो अगले ही पल मेरी चुची पर कब्जा करता हुआ रगड़ने लगा…जिससे मैं ज्यादा देर तक खुद को रोक नहीं पाई…और लगी मैं भी चूसने…हम दोनों की किस तब टूटी जब बगल में हरकत हुई कुछ…

मैं रूकती हुई अंधेरे में हाथ बढ़ाई तो मेरे हाथ सीधी किसी लड़की के चुची पर पड़ गई…उसने बिना कुछ कहे मेरे हाथ पकड़ के हटा दी..मैं कुछ कहना चाहती थी पर तब तक सन्नी दुबारा किस करने लगा…मैं भी उस तरफ से ध्यान हटा किस करने लगी…

जब मेरे होंठ दर्द करने लगी तो सन्नी से हल्की अलग हो गई…सन्नी भी समझ गया…वो अलग हो मेरे हाथ थामा और बाहर की तरफ रूख कर लिया…मैं बाहर निकलते वक्त एक बार फिर गौर की उस लड़की की तरफ कि कौन है और लड़का कौन है…पर अंधेरे की वजह से नहीं पहचान पाई…

बाहर निकल जब हल्की रोशनी पड़ने लगी तो सन्नी रूक गया और बोला,”हाँ तो मैडम जी क्या कह रही थी आप…?” सन्नी की बात सुन मेरी हंसी निकल गई…कमीना पहले तो जबरदस्ती किस कर बात को बदल देता है, फिर पूछता है क्या बात है…

मुझे हंसता देख बोला,”दरअसल मुझे नहीं पता था पूजा मेरे इशारों से ही चली आएगी…साथ में आपके पति थे तो हिम्मत नहीं हुई निकट जाने की तो जब पूजा हमलोगों को देखी तो बंटी ने आने का इशारा कर दिया…हम दोनों देखते रह गए कि ये पागल हो गई है क्या…फिर निकट आते ही बोली डरते क्यों हो…भैया पूछेंगे तो कह दूंगी दोस्त हैं…उनकी भी तो दोस्त मिल गई है यहाँ तो मेरे दोस्त से प्रॉब्लम क्यों होगी…फिर हमें क्या दिक्कत होती भला…और इतनी परेशान क्यों हो रही जब फोन था ही तो एक कॉल कर लेती…”

“अचानक से गायब हो गई ना तो ध्यान ही नहीं रहा कि फोन कर लूँ..चलो अब..”मैं भी शांत होती हुई बोली…तो वो मुस्कुराते हुए बोला,”चलो गोलगप्पे खाते हैं…”

“नहीं, मुझे नहीं खानी उसके पास…शाला कैसे बेशर्मो की तरह चिल्ला के बोल रहा था…सुना नहीं..”अचानक से मुझे गोलगप्पे वाले की बात याद आ गई…मैं सन्नी के साथ आगे बढ़ती हुई बोल पड़ी..

सन्नी: “अरे वो वैसा नहीं है..बस बोलने की बीमारी है…दरअसल ये वीमेंस कॉलेज के पास रोजाना बेचता है तो लड़कियों से सीख लिया ज्यादा बोलना..और लड़कियों से हॉट बातें करना ये अच्छी तरह जानता है…एक खास बात ये भी कि अब तक ये सैकड़ों प्रेमी युगल को मिलवा चुका है, पर गद्दारी या गलत फायदा कभी नहीं उठाया किसी का…पर मजाक सबसे करता रहता है एकदम ओपेन…अब चलो और तुम भी कुछ मजे ले लो..मस्त कर देगा…”

मैं उसकी कहनी सुनते-2 गोलगप्पे वाले के पास पहुँच गई…मेरी नजर उन तीन लड़कों को ढ़ूँढ़ने लगी जिनसे टकराई थी…पर वो कहीं नहीं दिखे..तभी मेरी तरफ देख गोलगप्पे वाला दाँत दिखाता बोला,”गुस्सा शांत हुआ कि, और चाहिए कुछ..” उसकी बात सुन सब के साथ मैं भी हँस पड़ी…

“देखा मेमसाब,इनके साथ कुछ देर खड़ी रही तो इतनी खुश हो गई…जब ये साथ में सोएगी तो किता खुश होगी…” अपने आदत से मजबूर उसने मजाकिया लहजे में बोल पड़ा जिसे सुन मैं शर्म से मुँह दूसरी तरफ कर ली जबकि वो तीनों जोर से हँस पड़ा…

“लो मैडम, मेरा वाला भी मुँह में ले को देखो कि कैसा टेस्ट है…”एक बार फिर उसने एक और द्विअर्थी शब्द बोल दिया..इस बार मैं खुद की हंसी रोक नहीं पाई और हंसती हुई वापस मुड़ प्लेट पकड़ गोलगप्पे खाने लगी…

जब तक खाती रही वो कुछ ना कुछ बकड़-2 करता रहा…तभी मेरी नजर उसी अंधेरे से निकलती लड़के-लड़की पर पड़ी…पर पहचान नहीं सकी…फिर हम सब वहाँ से निकल लिए..फिर कुछ देर तक मस्ती में इधर उधर अपने-2 साथी के हाथों में हाथ डाल घूमती रही…

बाहर तो ज्यादा भीड़ नहीं थी पर अंदर मुख्य मेले की जगह भीड़ काफी थी..इस भीड़ में सन्नी के हाथ तो मेरे हाथ पकड़े थे पर औरों बगल से गुजरने वाले के हाथ सीधा मेरी चुची के साइड पर पड़ती या फिर पीछे चूतड़ पर…इन सब के बीच हम दोनों मस्ती में डूबी घूमती रही अपने यार के संग…फिर अचानक से पूजा बोली…

पूजा: “दीदीजी, अभी तक आपके पति महोदय नजर नहीं आए हैं…”

“इतनी भीड़ में वो बगल से भी गुजर जाते होंगे तो मालूम थोड़े ही पड़ेगी..”मैं अपनी बात से पूजा को संतुष्ट करती हुई श्याम पर ज्यादा चर्चा नहीं करना चाहती थी हम और पूजा श्याम के साथ किस तरह रहते हैं…

हम सब पूरे मेले में पहले तो सिर्फ चक्कर ही काटते रहे…कभी कभी किसी मेले में लगी दुकान पर खड़ी टाइम पास करती…पूजा कुछ अपने लिए सामान भी खरीदी तो मैं भी कुछ-2 ले ली…

फिर हम सब मनोरंजन क्षेत्र की तरफ घुसी जहाँ तरह-2 के मनोरंजन के साधन थे…हम चारों फिर इनमें खूब सारी मस्ती की…बड़ी वाली झूला पर जब चढ़ी तो मैं तो डर से पानी-2 हो गई थी और सन्नी से चिपक गई थी…

बस सन्नी को पूरा मौका मिल गया…जैसे ही झूला ऊपर की तरफ बढ़ती वो मेरे होंठों को अपने दांतों से दबा लेता और मेरी साड़ी के अंदर हाथ डाल चुची मसलने लगता…बिना ब्रॉ में ब्लॉउज पर से महसूस होती कि सन्नी मेरी नंगी चुची मसल रहा है…

फिर जब नीचे की तरफ आती तो छोड़ देता क्योंकि इस तरफ से देखने वाले और झूला पर चढ़ने वाले की काफी भीड़ थी…मैं इस तरह की चुसाई में भी गर्म हो गई और फिर सन्नी का साथ भी देनी लगी…

जब झूले कई चक्कर लगाने के बाद रूकी तो मैं सन्नी से अलग हुई…उफ्फ्फ..मेरी साड़ी सीने से सरक कर हम दोनों के बीच फंसी थी…और सामने ढ़ेर सारे मर्द की निगाहें मेरी खड़ी निप्पल को घूर रही थी जो ब्रॉ की अनुपस्थिति में ब्लॉउज से साफ झलक रही थी…

और ऊपर से तेज लाइट में मेरी चुची भी कुछ-2 दिख रही थी…मैं तेजी से साड़ी खींची और बदन पर रख ली…पर इस दौरान ना जाने कितने लोग अपनी आँखें सेंक चुके थे…

मैं उठी और तेजी से सन्नी के पीछे हो ली…तभी पीछे से किसी ने कंधे पर हाथ रख दी…पलटकर देखी तो पूजा थी जिसे देख मेरी हँसी निकल पड़ी…

“अपने लिपिस्टिक साफ कर लो, ओंठ से बहकर नीचे पूरी फैली हुई है…ही..ही..ही…”मैं पूजा धीमे से हँसती हुई बोली जिसे सुन पूजा बंटी से हैंकी मांगी और चारों तरफ नजर दौड़ाती लिपिस्टिक साफ करने लगी…

पर कुछ लोग तो गुलाबी पूजा की चोरी पकड़ ही ली थी और देख कर मंद-2 मुस्कुरा रहे थे…तब तक हम बाहर निकल गए…तभी मेरी नजर सामने पड़ी..ओह गॉड..मर गई…

झूले पर चढ़ने वाले की लाइन में रूम मालिक भी अपने फैमिली के साथ लगे थे…क्या मुसीबत थी..आज सुबह ही वो मुझे दोस्त माने थे और अभी मुझे किस हालत में देख लिए…

बीवी के डर से तो इस वक्त टोकेंगे नहीं पर जब अगले दिन मुलाकात होगी तो क्या जवाब दूँगी…सोचने से ही मेरी फट रही थी…और ऊपर से उनकी बड़ी होती आँखें…मैं सबको चलने बोल तेजी से खिसक ली…

अब तो मैं ज्यादा देर तक रूकना नहीं चाहती थी…पूजा से फोन ली जो कि वो पर्स में डाल रखी थी और श्याम को फोन करने लगी…ऐसे परेशान देख वो तीनों आश्चर्य से मेरी तरफ देखे जा रहे थे आखिर हुआ क्या…

“हाँ हैल्लो, कहाँ हैं अभी…पूरी रात घूमना ही है क्या…घर नहीं जाना..”श्याम के फोन उठाते ही मैं बोल पड़ी…

“हाँ बस आ ही रहा हूँ…बस 10 मिनट और..तुम लोग को हो गया क्या..?”उधर से श्याम की आवाज आई..

“हाँ..”मैं एक ही शब्दों में अपनी बात कह दी और असलियत बात दबा दी..

“अच्छा ठीक है, तुम लोग स्टैंड के पास रूको, मैं वहीं पहुँच रहा हूँ…और हाँ अपने दोस्त को मेरे आने तक जाने मत देना…तुम दोनों अकेली मत रहना..ठीक है..”श्याम ने पूरी बात एक ही सुर में कह दिए…जिसे सुन मैं ओके कह फोन काट दी…

कुछ ही पलों में हम सब स्टैंड के पास थे…यहां रूकते ही पूजा पूछ बैठी,”क्या हुआ जो ऐसे अचानक चली आई..”

मैं पूजा की तरफ मुस्कुराती हुई बोली,”हुआ कुछ नहीं,..बस अब घूमने की इच्छा नहीं हो रही है इसलिए चली आई…तुम्हे और घुमनी थी क्या..?”

पूजा: “नहीं पर ये बात नहीं है…जरूर कोई बात है जो हमसे छिपा रही हो…नहीं बतानी हो तो कह दो, मैं नहीं पूछती…”

मैं पूजा की नाराजगी उसकी आवाजों में साफ सुन ली थी..सो मैं बोली,”वो वहाँ झूले से उतरते रूममालिक देख लिए थे..और हम दोनों को ऐसी हालत में देख लिए तो शायद कहीं उन्हें बुरा लगे और गुस्से में हो हल्ला करेंगे तो अच्छा नहीं ना होगा…वैसे भी काफी मस्ती कर ही ली तो सोची अब घर ही चली जाए…”

मेरी बात सुन पूजा कुछ बोल नहीं पाई..शायद वो भी स्थिति को समझ गई थी…तभी सामने से श्याम और सुमन एक दूसरे का हाथ थामे हंसते हुए चले आ रहे थे…उन्हें देख पूजा और मैं नजरों में ही मुस्कुरा पड़ी…

“तुम दोनों अभी घूमोगे या चलोगे..?” मैं बंटी और श्याम से एक ही साथ पूछी…

“अब यहाँ रह के घंटा बजाएंगे क्या…मैं भी बाइक निकाल रहा हूँ..” कहते हुए दोनों बाइक लेने चले गए…तब तक श्याम और सुमन भी आ गए और मुस्कुराते हुए बाइक लेने चले गए…

हम तीनों अपने-2 यार का इंतजार करने लगी…कुछ ही पलों में तीनों अपनी-2 बाइक हम तीनों के पास खड़ी कर दिए…तभी श्याम बंटी और श्याम से बोले,”बात ऐसा है कि सुमन की दोस्त मिली थी तो हमारे साथ देख बोली कि आप सुमन को घर तक ड्रॉप कर देना और वो अपने बॉयफ्रेंड के साथ चली गई…तो अगर आप दोनों अगर फ्री हो तो इन दोनों को ले कर चलिए और सुमन को पहले छोड़ देंगे फिर इन्हें ले जाएंगे…”

“कैसी बात करते हैं आप, इतनी रात को भला क्या काम रहेगा..चलिए…साथ ही चलेंगे और इनको ड्रॉप करने के बाद ही हम निकलेंगे…”बंटी बोला जिसके साथ सन्नी भी हाँ में हाँ मिला दिया…

और फिर इतना सुनते ही मैं सन्नी की बाइक पर बैठ गई…और पूजा बंटी के साथ जबकि सुमन श्याम के साथ बैठ के चिपक कर बैठ गई…और फिर हम सब एक साथ निकल पड़े..

करीब आधे रास्ते चलने के बाद श्याम एक जगह रूके जहाँ से एक सड़क दूसरी तरफ निकल रही थी..पीछे से बंटी और सन्नी भी बाइक को श्याम के बगल में रोक दिए…

“इधर ही जाना है क्या..?”सन्नी उस दूसरी तरफ निकली सड़क की ओर इशारा करते हुए बोले…

“हाँ और आप लोग को किधर जाना है…”श्याम सन्नी की बात का जवाब देते हुए बोले…

“हम दोनों का घर आपके इलाके से 3-4 किमी और आगे है पर हमारी छोड़िए, पर अब ये कहिए यहाँ रूक कर आपका वेट करूँ या आहिस्ते-2 आगे बढूं..”बंटी बीच में अपनी बात रखते हुए बोला…

“फिर तो अच्छा ही है…आप लोग इन दोनों को लेकर निकलिए…मैं सुमन को ड्रॉप कर के आता हूँ..ठीक है..?” श्याम गंभीरता से मुस्कुराते हुए बोले…

“ओके, ठीक है…मैं इन्हें घर तक ड्रॉप कर निकल जाऊंगा…”सन्नी कहते हुए अपनी बाइक स्टॉर्ट कर दी…श्याम भी ओके कह निकल गए सुमन को छोड़ने…और इधर हम दोनों की बाइक भी चल पड़ी…

फिर मैं और पूजा अपनी-2 बाइक सवार से कस के चिपक गई…साड़ी पहनी थी तो उतनी ढ़ंग से नहीं चिपक पा रही थी पर ऊपर से दोनों चुची उनकी पीठ में तो धाँस ही चुकी थी…

तभी मैं अपने हाथ सरकाते हुए लंड के समीप ले गई और हल्के-2 दबाने लगी…सन्नी अपने लंड पर हाथ महसूस करते ही कराह पड़ा…सन्नी को भी बड़ा मजा आ रह था ऐसे बाइक चलाते….

उधर पूजा की तरफ नजर की तो वो भी बंटी के लंड को जिप से बाहर करने में लगी थी…पर निकल नहीं रही थी जींस से…मैं भी उसकी देखा-देखी सन्नी की जिप खोल दी और हाथ अंदर कर लंड को अंडर वियर से बाहर करने लगी…

तभी बंटी अपनी बाइक काफी स्लो कर ली…मैं और सन्नी एक साथ उसकी तरफ नजर की तो बंटी लंड निकालने के लिए बाइक स्लो की थी और अगले ही पल उसका लंड पूजा के हाथों में थी…

सन्नी भी तेजी से बाइक स्लो किया और झटपट में अपना लंड मेरे हाथों में भर दिया और फिर दोनों लंड मसलवाते बाइक चलाने लगा…अभी 5 मिनट ही हुए थे कि बंटी ने अपनी बाइक अचानक से एक सिंगल सड़क में घुमा दी और कुछ दूर आगे चल कर एक बड़ी सी बिल्डिंग के पास रूक गया…

दिखने से ये कोई कॉलेज लग रही थी…सन्नी तब तक कुछ आगे बढ़ गया था…शायद सन्नी आगे बढ़ना चाहता था और बंटी भी रूकने के लिए बोला नहीं था…आगे से मुड़ कर जब पूजा के पास आई तो ये क्या…दोनों शुरू हो गए थे यहीं सड़क पर…

आसपास नजर दौड़ाई तो कहीं कोई नहीं था…वैसे भी कॉलेज में कौन रात को रहता…
गेट के पास स्ट्रीट लाइट जल रही थी पर उसकी रोशनी पूरी तरह हमारे निकट नहीं पहुँच रही थी ..बस परछाई लग रहे थे हम सब..

पूजा तेजी से बंटी के लंड को मुँह में भर आगे पीछे कर रही थी, जबकि बंटी बाइक पर दोनों पैर एक तरफ किए खड़ा मस्ती से आहें भर रहा था…सन्नी अगले ही पल मेरी कलाई पकड़ अपनी तरफ खींचा और मेरी गर्दन पर हाथ रख हल्के दबाव दे डाला नीचे झुकाने के लिए…

इतने देर से लंड की गर्मी पा कर गर्म तो हो ही गई थी…तो बिना कोई विरोध किए अपने होंठ सन्नी के लंड से छुआते मुंह में भर ली…मेरे होठों की गरमी पाते ही सन्नी की आह निकल गई और वो सिससकारी लेने लगा…

मैं उसे और मजे देने की सोच तेज-2 चुप्पे लगाने लगी और उसके अण्डो को निचोरने लगी…सच में काफी एक्साइटेड हो रही थी मैं…खुली सड़को पर बेफिक्र हो कर लंड चूस रही थी….

करीब 5 मिनट की ननस्टॉप चुसाई में ही सन्नी बदहवाश हो गया और तेजी से मुझे अपने लंड से जुदा कर दिया…अलग होते ही मेरी नजर पूजा की तरफ गई तो वो भी हाँफ रही थी और बंटी अपना जींस खोल रहा था…

बंटी को नंगा होते देख सन्नी भी अपना जींस खोलने गया…मतलब चुदाई होने वाली थी हम दोनों की…पर किसी के आ जाने की डर मेरे अंदर जग गई…

“सन्नी, कोई आ जाएगा…यहाँ सड़क पर ठीक नहीं होगा…”मैं अपनी डर को बाहर करती बोल पड़ी…जिसे सुन बंटी और सन्नी एक साथ मेरी तरफ देखने लगे…

“…मतलब लंड अभी खड़ा है और चूत चोदेंगे कल…” बंटी सेक्स की आग में जलता खिसियाते हुए बोल पड़ा और अपना जींस बाइक की हैंडल में फंसा दिया…

“नहीं, मैं वो नहीं कह रही..आज ही करना पर यहाँ खुले में ठीक नहीं….” मैं अपनी बात पूरी कर भी नहीं पाई कि बीच में बंटी बोल पड़ा,”चुपचाप रह समझी…आज तो हम दोनों ही चोद रहे अगर ज्यादा चपड़-2 की तो 10 लौंडे को बुलवा लूंगा अभी और बीच सड़क पर चोदूँगा दोनों को..शुक्र मना कि साइड में चोद रहा हूँ…”

कहते हुए बंटी अपनी बाइक को बड़ी स्टैंड पर खड़ी करने लगा…मैं बंटी के इस स्वभाव से थोड़ी डर गई और चुप रहने में ही भलाई समझी…तभी सन्नी अपना जींस बाइक पर रखने आगे बढ़ा और मेरी तरफ देखते हुए बोला,”कुछ नहीं होगा..रात के 12:30 बज रहे हैं और उधर मेन रोड छोड़कर कोई इधर सुनसान कॉलेज गली में नहीं आएगा…इधर किसी का घर भी नहीं है…बस कॉलेज है..”

पूजा: “यस दीदी, कॉलेज बंद हो तो दिन में इधर कोई नहीं फटकता..अभी तो रात है…लेट्स इंज्वाय…वैसे भी जीजू सुमन जी की लिए बिना तो आएंगे नहीं…” पूजा के कहने से थोड़ी राहत हुई डर से…पर अंदर ही अंदर एक अलग रोमांच भर गई तन बदन में शहर के बीच सड़कों पर चुदने की सोच से…

फिर सन्नी ने भी अपनी बाइक बड़ी स्टैंड पर कर बंटी के बाइक से बिल्कुल सटा के खड़ा कर दिया…फिर दोनों बाइक के दोनों तरफ खड़ा हो हम दोनों को एक साथ आने का इशारा किया…

“आजा रण्डियों, आज खुले सड़क पर कुतिया की तरह चोदता हूँ…तेरा भड़वा दूसरी औरत को चोदता फिरता है तो तू भी दूसरे लंड को लेती रहा कर…” हम दोनों बंटी और सन्नी की गाली को मजे से सुनती उनकी तरफ बढ़ने लगी…

जैसे ही हम दोनों उसके निकट पहुँचे हम दोनों की साड़ी पलक झपकते ही जमीन पर थी…इतनी तेजी से उसने साड़ी पकड़ के हमें नचा दिया कि पूरी की पूरी साड़ी खुल गई…अब हम दोनों केवल ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी थी…

उन दोनों के जंगलीपन हम दोनों को और मस्ती की गहराई में डुबो रही थी…मैं और पूजा के बीच दो बाइक की दूरी थी जहां हम दोनों की एक साथ अलग-2 मर्दो की प्यास बुझाने खड़ी थी…तभी सन्नी आगे हाथ बढ़ा मेरी ब्लॉउज पकड़ अपनी तरफ खींचा…

कपड़े तो मजबूत थे पर ब्लॉउज के हुक इस हमले को नहीं सह सकी और पट-2 करती टूट गई…यही आवाज पूजा की तरफ से आई और आज की पिंक पूजा बीच सड़क पर नंगी हो गई…

और अब मैं सन्नी के कैद में जकड़ी हुई थी जहाँ उसका अंडरवियर से बाहर निकल चुका लंड सीधा पेटीकोट को धँसाती मेरी बुर में घुसने को आतुर थी…तभी सन्नी ने पेटीकोट के नाड़े खींच दिए और हल्के लंड को पीछे खींच लिया…जिससे पेटीकोट सरकती हुई नीचे चली गई…

तभी दूसरी तरफ बंटी पूजा को लिए दोनों सट के लगी बाइक की सीट पर पीठ के बल लिटा दिया…जिससे पूजा की चूतड़ बंटी की बाइक पर थी जबकि चेहरा सन्नी की बाइक पर पड़ गई…

“आज दिखाता हूँ कि असली चुदाई क्या होती है शाली..”कहते हुए सन्नी मेरी छाती पर हाथ रख पीछे की तरफ ढ़केल दिया..जिससे मैं पूजा के ठीक बगल में पीछे की तरफ गिर गई और गिरने से हल्की दर्द में आह निकल पड़ी…

अब हम दोनों बाइक पर लेटे हुए थे बस बूर से नीचे का हिस्सा जमीन पर था…अपना चेहरा पूजा की तरफ की तो उसकी बूर पर बंटी लंड रगड़ रहा था…और तभी सन्नी का लंड भी मेरी बुर पर महसूस हुई जिसे पूजा आसानी से देख रही थी…

तभी सन्नी और बंटी ने आगे झुक हम दोनों की चुची को कस के पकड़ा और वन-टू-थ्री कहता पावर गियर में जड़ तक लंड पेल दिया…हम दोनों की चीख इस वीरान सड़कों पर गूँज उठी जो कॉलेज की दीवारों से टकरा के देर तक सुनाई देती रही….

पर इस चीख से उन दोनों को कोई असर नहीं हुआ और बेफिक्र हो लगा दनादन पेलने…हम दोनों की चुदी चुदाई बुर रहने के बावजूद उसने चीख निकलवा दी, सोचनीय थी…वो ऐसे चोदता रहा मानों कि कोई मशीन अपनी गति से चल रही हो..सटासट-सटासट-सटासट….

कुछ देर तक दर्द से बिलबिलाने के बाद जब कुछ शांत हुई तो मेरी चीख सिसकारी में बदल गई…”ईसससस…आहह..आहहहह…ओहहहह..यससस..सन्न्न्न्नी…और जोर सेऐऐऐऐऐ….आउच्च्च्च्च…यससस…”

साथ में पूजा भी सेक्स की आग में तड़पती गंदी गंदी गालियां भी बकने लगी,”हाँ ऐसे ही कमीने…जोर से पेल आहहहहह नाआआआआ बहनचोददददद….आउउउउउउउ..साले मैं तेरी बहन नहीं जो आराम से चोद रहाआआआआआआआआआ….”

पूजा की आवाज अचानक आआआआ में बदल गई…बंटी गाली सुनते ही उसकी चुची इतनी जोर से उमेठ जो दिया था और वैसे ही उमेठे तेज धक्के लगाता हुआ बोला,”मादरचोद, बहनचोद बोलती है रण्डी…कुतिया ना बनाया तुझे अपना तो बंटी मेरा नाम नहीं…ले राण्ड की पैदाइश…तेरी तो पूरी खानदान चोदूँगा…बुला ला अपने गाँव से सबको…आहहहह…याहह..याहह…”

फिर इस कड़क चुदाई से मेरे मन में भी जिज्ञासा जग कि मैं भी और दर्दनाक चुदाई करवाऊँ…बस ये सोची और पटापट 10 रंग बिरंगी गालियाँ बक दी…फिर क्या..सन्नी भी गुस्से में मेरी चुची को इतनी जोर से उमेठा कि मेरी आँखों से अश्रु बह निकली और आवाज गुम…

पर वो दोनों तो पूरे दरिंदे बन गए थे…बिना किसी परवाह के तड़ातड़ पेलने लगा…काफी देर तक यूँ ही पेलता रहा दो जानवर हम दोनों को…ऐसा लगता था कि पावर कैप्सूल खा कर आया हो…

तभी उसने हम दोनों की चुचियाँ छोड़ दिया…चुची के आजाद होते ही हम दोनों की आवाजें भी आजाद हो गई और लगी गर्मी से परेशान कुतिया की तरह किकियाने…पर इसमें हम दोनों की संतुष्टि साफ सुनाई पड़ रही थी…सच में,आज की चुदाई जिंदगी भर नहीं भूलूँगी…

तभी सन्नी मेरे एक पांव जमीन से उठा अपने सीने तक कर लिया, जिससे मैं पूजा की बूर की तरफ आधी करवट में आ गई…पूजा तो पहले ही आधी करवट में थी…अब हालत ये थी कि पूजा के बूर ठीक मेरी नाक के सामने थी…और नीचे पूजा की नाक मेरी बूर के सामने…जिसमें लंड जड़ तक धँसे थे…

बूर-लंड की मिली जुली पानी की खुशबू अब हम दोनों के अंदर तक जा रही थी..फर्क थी तो बस ये कि ना बूर मेरी थी और ना मुझे पेलने वाला लंड…दोनों अलग…और इसकी रोमांच तो आग में घी डालने का काम कर रही थी…

तभी एक जोर की ठोकरें बूर में पड़ी जिससे मैं अपनी आहह निकालती मस्ती में डूबने लगी…और यही ठोकर पूजा की भी पड़ी…हम दोनों सेक्सी आवाजें करती आँखों के सामने एक दूसरे की बुर चुदते देख रही थी…

धक्के की तेज गति से मेरे हाथ पूजा की चूतड़ से पीछे की तरफ जा उसके जमीं पर वाले पांव की जांघ थाम ली और पूजा मेरी…अब तो हम दोनों के नाक से कभी-2 लंड टकरा जाता…और फिर लंड की खुशबू से खुद को ज्यादा देर तक नहीं रोक पाई…अपनी जीभ निकाल पूजा की बुर में घुसता निकलता बंटी के लंड पर रख दी…

नीचे पूजा भी सन्नी के लंड पर अपनी जुबान लगा दी और लंड का स्वाद चखने लगी जो कि मेरी बुर की पानी से सनी थी..इधर मैं भी अपनी लपलपाती जीभ बंटी के लंड पर रख पानी सोख रही थी जो पूजा अपनी बूर से निकाले जा रही थी…

हम दोनों की चुचियाँ आपस में दब रही थी…इस अनोखे ढ़ंग हो रही चुदाई से मजे और दुगने बढ़ गए थे…अंदर से एक आवाज निकल रही थी और…और…और…साथ हीमैं भी मना रही थी कि काश ये रात खत्म ना हो…

“आहहह…शाबास मेरी रण्डियों….इसी तरह आहहह…काफी मजा आ रहा है…हम दोनों की ये सदियों की तमन्ना आज तुम दोनों ने पूरी कर दी…आहहहहह..” बंटी मेरे सर पर हाथ रख सहलाता हुआ बोला…

मैं बिना कुछ सुने बस अपने काम में लगी रही…कुछ देर तक इसी तरह चुदती रही…तब अचानक ही मेरे मुंह और बुर दोनों जगह से लंड गायब हो गई…मैं थोड़ी तड़पी पर सामने रस बहाती पूजा की बूर ने इस कमी को खलने नहीं दी…मेरे और पूजा के मुँह एक दूसरे की बूर में घुस गई…

तभी बंटी और सन्नी ने इसी अवस्था में हम दोनों को एक तरफ पलट दिया…जिससे मैं नीचे और पूजा ऊपर आ गई…पर हम दोनों के मुख अब भी नहीं हटी…बस चुदाई की जलन में बूर खाती रही…

फिर सन्नी ने मेरे दोनों पैर उठी के अपने कमर से ऊपर खुद से लपेट लिया…और आगे चेहरे के पास बंटी का लंड दिखा जो ठीक मेरे माथे के ऊपर था और उससे लार टपक के मेरे चेहरे पर पड़ रही थी…

नीचे सन्नी के हाथ एक बार मेरी बूर पर पड़ी और वही हाथ सरक के मेरी गांड़ के छेद पर रेंगने लगी…ओह…गांड़ मारने के लिए छेद गीली कर रहा है…बंटी ने तो ढ़ेर सारा थूक पूजा की गांड़ पर उड़ेल दिया जिसका कुछ अंश बह के मेरे चेहरे पर भी पड़ी…

गांड़ मरवाने की सोच मैं खुद को तैयार कर ली थी और पूजा भी…फिर दोनों के लंड हम दोनों के गांड़ पर रगड़ खाने लगी और कुछ ही देर की रगड़ के बाद एक तड़के से सीधा रांग गली में प्रवेश करा दिया…

एक काँटें की माफिक तेज दर्द हुई जिसका असर सीधा हम दोनों की बूर पर हुआ…जोरों से बूर को मुह से जकड़ती दर्द को सहने की कोशिश करने लगी…और वो दोनों इस दर्द से बेखबर दनादन शॉट मारने लगे…

10-12 शॉट में गांड़ एडजस्ट हो गई…पूजा मेरे शरीर पर लदी थी पर फूल की भांति लग रही थी..कहते हैं ना औरत चुदाई के वक्त अपने से चार गुना ज्यादा वजन सह लेती है…पहले ये बात नहीं मानती थी पर आज देख भी ली और मान ली भी ..

फिर काफी देर तक मुझे नीचे कर गांड़ का चिथड़ा उड़ाया दोनों ने, फिर पूजा को नीचे कर गरदा मचाया सुनसान सड़कों पर…अब हम दोनों थकने लगी थी तभी तो बूर चूसाई बंद हो गई हमारी…

कुछ देर तक इसी तरह बजाने के बाद दोनों की चीख हल्की-2 आने लगी…मतलब अब ये भी चरम सीमा को पहुँच रहे थे…जबकि हम दोनों तो इतनी देर में ना जाने कितनी दफा चरम सुख प्राप्त की….

तभी दोनों ने तेजी से अपना लंड बाहर किए और हम दोनों को पहले की भांति अलग कर दिया…हम थक तो गए ही थे तो तुरंत ही अलग हो गई…और फिर दोनों सटाक से अपना-2 लंड दोनों बुर में घुसेड़ दिया…

पर इस बार कोई दर्द नहीं हुई..बस मस्ती में आह निकल गई…चार-पाँच तेज शॉट दोनों ने चीखते हुए मारे और फिर अपना लंड खींचते हुए दोनों हम दोनों के चेहरे पर लंड रख दिया…

और तभी बंटी के लंड से तेज पानी की धार निकली और मेरे चेहरे को भिगोने लगी…और दूसरी तरफ सन्नी मेरी बूर से अपना लंड निकाल पूजा के गुलाबी होंठों को लंड के पानी से सिंचने लगा..

हम दोनों लंड के गरम वीर्य से तृप्त हो रही थी…फर्क थी तो चोदा एक लंड ने जबकि पानी दूसरा लंड दे रहा था…झड़ने के बाद वो दोनों ने उसी मुंह में लंड साफ करने घुसेड़ दिया,जिस पर पानी गिराया था…

कुछ ही देर में मैं बंटी के लंड को साफ कर दी और पूजा ने सन्नी की…साफ होने के बाद दोनों हट गए हँसते हुए., जबकि हम दोनों अभी भी धमाके की हुई चुदाई में पस्त पड़ी थी…

करीब पाँच मिनट बाद दोनों ने अपने कपड़े पहन हाथों में मेरे कपड़े लिए हम दोनों के पास खड़े हो गए और बांह पकड़ उठा दिया…हम दोनों में इतनी हिम्मत नहीं थी कि बाइक से हट जमीन पर खड़ी होती…

फिर दोनों सहारे दे जमीन पर खड़ा कर दिए…फिर सन्नी ने मुझे आगे बढ़ा दूसरी तरफ खड़े बंटी व पूजा के पास ले गए और बोले,”बंटी, इसे भी पकड़ो मैं गाड़ी निकाल कर अलग करता हूँ…”

मैं और पूजा नंगी बेहोशी की हालत में बंटी के बांहों में पड़ी थी…तब तक सन्नी बाइक को मेन रोड की तरफ कर अलग कर दिया…फिर हम दोनों को किसी तरह बाइक पर नंगी ही बिठाया और मेरी साड़ी ले अपने पीठ से बाँध लिया…

हम दोनों उसके पीठ पर लद गए…

सन्नी: “यार ऐसे बेहोश में इसे घर कैसे ले जाएंगे…चलो अपने ही रूम पर लिए चलते हैं..सुबह पहुंचा देंगे…”

सन्नी की बात सुन बंटी हंसता हुआ बोला,”अरे कुछ नहीं हुआ इसे. .बस गरमी से बेहोश हो गई…बाइक पर हवा लगेगी तो दोनों होश में आ जाएगी…”

फिर दोनों चल पड़े…जब मेन रोड से चल बाइक मेरी गली की तरफ मुड़ी तो सच में मुझे होश आ गई…जबकि पूजा भी आँखें खोली थी पर अभी भी बंटी पर लदी थी…

रात की वजह से मैं नंगी होने के बावजूद तनिक भी शर्म नहीं आ रही थी…कुछ ही पलों में हम अपने घर के गेट के पास थी…बाइक से उतर हम दोनों वहीं पर बैठ गई…बंटी ने बाइक के डिक्की से पूजा की पर्स निकाला और गेट की चाभी सन्नी को थमा दिया..

सन्नी गेट खोला और बंटी बस हम दोनों को कंधे का सहारा दे रखा था जिससे हम दोनों चल कर अपने फ्लैट तक गए…और फिर हम दोनों धम्म से बेड पर पड़ गए…शुक्र है कि श्याम अभी तक नहीं आए थे…और फिर वो दोनों बॉय कह निकल गए……..

सुबह ४ बजे मेरी नींद अचानक खुल गई..रात में इतनी थकान के बावजूद कैसे जग गई, मालूम नहीं…एक बात तो थी कि रात की दमदार चुदाई से एकदम तरोताजा महसूस कर रही थी…

बगल में श्याम पूजा से लिपटे सो रहे थे…पूजा भी सांप की तरह श्याम से लिपटी थी…अभी अगर कोई देख ले तो वो इन दोनों को मियां-बीवी कहेंगे और मुझे बहन…रात में श्याम कब आए,मुझे नहीं पता…

गेट सब तो सिर्फ सटी हुई थी क्योंकि हम दोनों तो आते ही पसर गई थी…श्याम आए तो लगाएं होंगे…खैर मैं उन दोनों को बिना डिस्टर्ब किए बेड से उतर गई और बाथरूम में चली गई…

फिर बाहर निकल सड़क पर नजर दौड़ाई तो अभी अंधेरा ही था…पर सड़कों पर लगी लाइट से काफी हद तक अँधेरापन जा रहा था…

मैं वहीं बालकनी में खड़ी हो ताकने लगी सड़कों पर और रूममालिक का इंतजार करने लगी…सच ही बोले थे कि नींद खुद-ब-खुद खुल जाएगी…

फिर मेले की बात जेहन में आते ही मैं सिहर गई…क्या जवाब दूंगी…एक बारगी तो मन हुई कि वापस जा कर सो जाऊँ..पर कब तक भागती..आज नहीं तो कल, उनके सामने तो पड़नी ही थी…

तभी दूर अँधेरे में कोई आती हुआ दिखाई दिया..मैं गौर से देखने लगी कि कौन हैं…अंदर ही अंदर रूम मालिक के डर से कांप भी रही थी…पर जैसे ही लाइट उन पर पड़ी तो स्पष्ट दिख गए…

कुछ ही देर में वे मेन गेट के पास रूक गए और मेरे फ्लैट की ओर निगाहें कर दिए…उनसे नजर मिलते ही मैं वेट करने बोल अंदर चली आई…

जल्दी से एक कॉटन टीशर्ट और कैप्री पहनी…फिर गेट खोल बाहर की तरफ निकल गई…गेट खुलते ही मेरी नजर उनके नजरें से जा टकराई…हम्म्म्म…नाराजगी साफ झलक रही थी…

मैं बाहर निकल गेट को सिर्फ सटा दी..मैंने गेट जैसे ही लगाई वो चल दिए बिना कुछ कहे..मैं तेजी से गेट को छोड़ी और उनके बगल में जाकर चलने लगी…

कुछ देर तक तो यूँ ही चुपचाप बस बढ़ती गई..उस ऑटो वाले केतन के मोहल्ले से गुजरती मेरी नजर उसके घर को ढूँढ़ने लगी.. पर इतनी सुबह कितने लोग जगते हैं समझ ही सकती हूँ…

अपनी इस नादानी हरकत पर हल्की मुस्कुरा कर रह गई…कुछ ही देर में हम इस मोहल्ले को क्रॉस कर दूसरे मोहल्ले में पहुँच गई थी…हम्म्म्म..दिखने से ही काफी रईस लगता था ये मोहल्ला…कोई भी बिल्डिंग की ऊपरी छत तो बिना सर ऊपर किए तो देख नहीं सकते थे…

खैर, अब काफी देर हो गई थी…ना मैं कुछ बोल रही थी और ना वो..बस चली जा रही थी..मैंने ही बातचीत की पहल शुरू करने की हिम्मत जुटाई और बोली,”सॉरी….” और उनकी तरफ देखने लगी …

वो मेरे मुख से आवाज सुनते ही एकदम रूखे नजरों से मेरी तरफ घूरे…उन्हें अपनी तरफ देख मैं अपने चेहरे पर हल्की मुस्कान लाती हुई एक बार फिर सॉरी बोली पर इस बार आवाज नहीं, सिर्फ मुँह की पटपटाहट थी…

“क्यों….?” वो अपने सख्त लब्जों को अपने चेहरे पर हैरानी दिखाते हुए बोले…

मैं अब क्या जवाब दूँ इस क्यों का..उधेड़बुन में पड़ गई कि आगे की बात कहाँ से शुरू करूँ…आपत्तिजनक हालत में मैं पकड़ी गई थी तो हर बात को स्पष्ट करना काफी मुश्किल हो रही थी..किसी तरह आधी-अधूरी बात शुरू की,”वो…कल रात मेले में…”

“हाँ तो क्या मेले में…तुम्हें पसंद है वो सब करना तो करो…मुझे क्या..नेक्सट मंथ वैसे भी घर खाली करना है तुमलोगों को…आज शाम तक आपके पति को इन्फॉर्म कर दूँगा…”उसने एक ही लब्ज में अपने अंदर का गुस्सा बाहर कर दिया…तभी वे एक दूसरी सड़क की तरफ मुड़ गए..

मैं किसी गहरे चोट से आहत दर्द को सहने की कोशिश करने लगी…अपनी खोई इज्जत को पाने के बाद दुबारा खो दी…वैसे एक बात तो थी ये अलग किस्म के इंसान थे…

एक दम नेकदिल और खुले विचारों से परिपूर्ण व्यक्तित्व वाले…ना कोई डर ना कोई झिझक…और सबसे बड़ी बात उनका आदर्श…अगर कोई और रूम मालिक होता तो अब तक वो मुझे अपने लंड के नीचे सुलाए रहता…

खैर गलती मेरी थी तो क्या कह सकती थी…इतने अच्छे लोगों के साथ कितना गलत कर दी…इनके विश्वास को जख्मी कर दी…खुद को कोसने लगी…अब इस बात को ना छेड़ने की सोच ली थी…

तभी सामने एक पार्क दिखाई दी…पार्क उतनी बड़ी नहीं थी, पर काफी सुंदर और साफ सुथरी थी…हम दोनों अंदर घुसे और हरी भरी घासों पर तेज कदम,छोटे कदम की भांति टहलने लगे…

“तुम्हारे पति के साथ कौन थी…?” अचानक से वे मेरी तरफ मुड़े बिना पूछे..जिससे मैं हल्की चौंकती हुई उनकी तरफ देखने लगी..पर वो सीधी नजरें किए बस बढ़े जा रहे थे…

“..वो दोस्त थी उनकी…मेले में ही मिल गई थी..फिर हमारे दोस्त भी मिल गए तो हम सब साथ हो ली…”मैं अब सच्चाई से पेश आना चाहती थी…

“..फिर अलग-2 घूमने का आइडिया किसका था…” वो अबकी बार मेरी तरफ घूरे पर नजरें काफी भयानक थी मेरे प्रति…मैं डर से अपनी नजरें आगे की और बोली,”..उनका ही था…क्योंकि वो उनकी सिर्फ दोस्त ही नहीं, गर्लफ्रेंड भी थी…”

“…और तुम्हारी. .?”उन्होने जवाब खत्म होते ही एक और सवाल दाग दिया…मैं सोचने पर मजबूर हो गई कि हाँ कहूँ या नहीं…कुछ निष्कर्ष नहीं निकाल पा रही थी…पर वो मेरे जवाब का इंतजार कर रहे थे…

कई चक्कर लगाने के बाद वे पार्क के अंतिम छोर पर पहुँचते ही वहाँ लगी बेंच पर बैठ गए और सुस्ताने लगे…थक गए थे शायद…उनसे ज्यादा तो मैं हांफ रही थी…मैं भी आगे बढ़ उनके बगल में बैठ गई….

“सबकी नजरों में तो बॉय फ्रेंड पर मेरी नजरों में नहीं..”मैं लम्बी साँसों को छोड़ती हुई बोली.. जिसे सुन वे मेरी तरफ देखते निगाहों से ही पूछ बैठे कि वो क्यों?

मैं कुछ रूक गई और फिर उनकी नजरों से नजरें मिलाती हुई बोली,”मैं प्यार सिर्फ अपने पति से करती हूँ..वे मेरी जिंदगी के पहले और आखिरी प्यार हैं…”

वो मेरे इस जवाब को सुन चेहरे पर सिकन लाते हुए बोले,”तो फिर ये सब…” मैं उन्हें भी एक दोस्त…नहीं, अच्छे दोस्त की तरह सारी बात कहने लगी…

“बस शरीर की भूख की वजह से…खुद को रोक नहीं पा रही…ऐसा नहीं है कि मेरे पति सेक्स में कमजोर हैं…पर मेरे अंदर पता नहीं क्या है..हर वक्त नए व्यक्ति,नई जगह,नई तरीके खोजती रहती…” मैं एकदम साफ लहजों में ये सब कह डाली…

जिसे सुन वे थोड़े चौंके और मुझे हैरानी भरी निगाहों से देखते हुए नेक्सट सवाल कर दिए,”..तो तुम्हारे पति को कोई प्रॉब्लम नहीं है तुम्हारी इस बेहूदा शौक से…”

“जिन्हें खुद लत लगी हो उन्हें भला क्या प्रॉब्लम…”मैं हंसती हुई एक ही वाक्य में पति के बारे में भी कह डाली…जिसे सुन वे अपने सर पर हाथ रख सोचने लग गए…

रूम मालिक: “राम मिलाए जोड़ी,एक काना एक कोढ़ी…धन्य हो साहिबा….एक शेर सुनिएगा…पानी से प्यास न बुझी, तो मैखाने की तरफ चल निकला,
सोचा शिकायत करूँ तेरी खुदा से, पर खुदा भी तेरा आशिक़ निकला।…. तो अब कुछ कहने से क्या फायदा…” वो कुछ देर बाद अपने चेहरे पर हल्की खुशी और आश्चर्य लाते हुए बोले…जिससे मैं हंस दी…

“अच्छा आपको कभी जरूरत नहीं पड़ती कि कुछ नई होनी चाहिए..नए पार्टनर होने चाहिए..आई मीन…” मैं उनके चेहरे पर हल्की हंसी देख कुछ और मूड बदलने उनसे पूछी..

वो मेरे सवाल से मेरी तरफ घूरने लगे, फिर मेरी तरफ खिसकते हुए बिल्कुल सट गए और बोले,”होती है..और करता भी हूँ पर जितना मजा तुमलोग लेते हो वो तो मेरी किस्मत में नहीं..काश मेरी बीवी भी तुम्हारी तरह होती…”

“..तो बना दो उन्हें भी मेरी तरह…”मैं थोड़ी मजाकिया बनती हुई हंसते हुए बोल दी जिसे सुन वे अपनी हंसी नहीं रोक पाए..क्योंकि उन्हें पता था ये बात इस जनम में तो संभव नहीं है…

“चलो जाने दो उसे…रात में काफी मस्ती की तो पार्टी बनती है…”वो अब थोड़े रिलेक्स होते हुए बोले जिसे सुन मैं काफी खुश हो गई..

“हम्म्म…गुस्सा शांत हो गया…?”मैं रिस्क लेती हुई पूछी कि देखूं इनका क्या कहते हैं..तब से तो घर से बाहर निकालने की कह रहे थे…वो मेरी सवाल सुन चुप हो गए और एकटक निहारने लगे मुझे…

मैं भी बिना पलक झपकाए उनसे नजरें मिलाए जवाब का इंतजार कर रही थी…अब हम दोनों की साँसे थम चुकी थी जो वाक् के दरम्यान उखड़ गई थी…नजदीक होने के कारण सांसे सीधे एक दूसरे के सीने से टकरा रही थी…

तभी उसने अपना हाथ आगे बढ़ा सीधे मेरी गर्दन पर रख दवाब बना दिए, जिससे मैं अगले ही पल औंधें मुँह उनके गोद में गिर पड़ी..जहाँ पहले से तैनात सिपाही से मैं टकरा गई…

मैं चूं भी नहीं कर पाई..शायद करना भी नहीं चाहती थी…क्यों करती जब एक और लंड मेरी खातिरदारी को मिल रही थी…तभी उनके हाथ मेरे बाल को कस के पकड़ लिए और मुझे सीधी करने एक तरफ खींचने लगे…

बालों खिंचे जाने से हल्की दर्द हुई जिससे मेरी आहहह निकल गई…और मैं अनमने ढ़ंग से किसी तरह उनके गोद में उनकी तरफ मुँह किए पड़ी थी…दर्द भरी नजरों से उनके आँखों में झाँकी तो वहाँ वासना की लाल डोरे साफ नजर आई जिससे मैं दर्द में भी मुस्कुरा पड़ी…

तभी वो नीचे झुके और अपने होंठ मेरी खामोश लबों पर रख दिए…और लगे चूसने…मैं पल भर भी नहीं रूक पाई और बिना किस तोड़े खुद को ठीक से बेंच पर व्यवस्थित करती आराम से लेट गई…

तभी उन्होंने अपना एक हाथ सीधे मेरी चुची पर रख दिए…मैं उनके हाथ को टी-शर्ट पर से ही चुची पर महसूस कर सिहर गई…तभी उन्होंने मसलना शुरू कर दिया…

मेरी हल्की चीख अंदर ही अंदर घुट कर रह गई…कुछ ही पलों में मैं मस्ती में सरोबार हो गई और किसी भूखी कुतिया की तरह उनके होंठो पर वार करने लगी…

पार्क में चिड़ियां जोरों से चहचहा रही थी…कोयल अपनी सुरें वातावरण में फैलाए जा रही थी…रंग बिरंगे फूल अपनी सुगंधे फैलाए जा रही थी..मैं इन प्राकृत्क वातावरण में किस करने में मग्न थी…

उन्होंने किस करते हुए मेरे दोनों अपने गर्दन पर रख दिए..मैं तुरंत ही उनके गर्दन को अपने बांहों से जकड़ ली…फिर वो हल्के ऊपर उठ गए…पर मैं किस टूटने की डर से कस के जकड़ ली तो मैं भी उनके साथ ऊपर उठ गई…

कुछ देर बाद वो फिर वापस नीचे हो गए जिससे मैं उनके गोद में फिर से सर रख ली…पर अब मुझे कुछ भीनी-2 सी सुगंध आने लगी…पर इस सुगंध से अच्छी तरह वाकिफ थी…

मैं इस सुगंध से किस पर पकड़ थोड़ी कम कर दी और उस सुगंध का आनंद लेती किस कर रही थी…तभी उन्होंने अपने होंठ को ऊपर की तरफ हटाने लगे और वे सफल भी हो गए…

वे ऊपर हटने के साथ ही अपने हाथ से मेरे चेहरे को उस सुगंध की तरफ मोड़ दिए…मैं भी चुंबक की माफिक मुड़ती चली गई और मेरे मुँह स्वतः खुल गए…अगले ही पल मेरे मुंह में उनका मोटा और नाटा लंड गप्प से समा गया…

मेरी आँखें बंद हो गई मदहोशी में और चभर-2 चूसने लग गई…वे एक मीठी आहहह भरते हुए उत्तेजना में सर को कभी पीछे तो कभी नीचे करते और अपने हाथ से मेरू टीशर्ट ऊपर कर नंगी चुची को मसलने लगे…

जैसे-2 सुबह की लाली छंटती जाती मैं और जोर से चूसती जाती…और वो मेरी नंगी को लाल किए जा रहे थे…साथ ही अपना दूसरा हाथ नीचे कर मेरी केप्री में घुसा दिए…

उनके हाथ तुरंत ही अपनी मंजिल हासिल कर ली..जैसे ही उनकी उंगलिया मेरी बूर पर पहुँची, मैं तड़प उठी और पूरे लंड को जड़ तक मुंह में घुसेड़ ली…वो सीत्कार मारते हुए बिलबिला उठे और मेरी बूर में दो अंगुली घुसा कस के जकड़ लिए…

अब हम दोनों कंट्रोल से बाहर हुए जा रहे थे…मैं चुदने के लिए तड़पने लगी और अपने एक हाथ नीचे कर उनके हाथ को और अंदर बूर में धकेलने लगी…उनके लिए बस इतनी ही काफी थी…

वो मेरे बालों को पकड़ झटके दे अपने लंड को आजाद किए और मुझे उठाते हुए खुद निकल गए..उनके निकलते ही मैंने बेंच पर ठीक से एडजस्ट हुई और अपनी कैप्री नीचे सरका दी…

कैप्री हटते ही मेरी पनियाई बूर उनके नजरों के सामने आ गई…वे मेरी रसीली पर नजर गड़ाए नीचे की तरफ गए और मेरी एक टांग पकड़ नीचे जमीन पर कर दिए जिससे मेरी बुर खुल के सामने आ गई और उन्हें मुझे बजाने सी जगह भी….

मेरे हाथ खुद की चुची पर हरकत करने लगी और नशीली नजरें उनके लंड पर…कब ये नाटा पहलवान मेरी बूर में दस्तक देगा…कद में छोटा था पर हेल्दी में नॉर्मल लंड की दुगूनी…

वे अपने बंदूक ताने ठीक मेरी बूर के सामने ला मुझ पर लेट से गए…मैं उनके वजन से एक बार दब सी गई पर तुरंत ही एडजस्ट हो गई…लेटने से उनका लंड मेरी बूर में घुसने के व्याकुल होने लगा पर घुसा नहीं…

उन्होने अपने हाथ से लंड को सही दिशा देते हुए टमाटर की भांति सुपाड़े को मेरी बूर में फंसा दिए…सुपाड़े के फंसते ही मैं चिहुंक उठी…और अगली वार की प्रतीक्षा करने लगी…

“पांडे नाम है मेरा…C.P. पांडे… मैं बूर चोदने का दिवाना हूँ, बूर का नहीं…तू सोचती होगी कि अपनी जवानी से मुझे अपने फैसले बदलने पर विवश कर देगी,ऐसा नहीं हूँ मैं…ऐसी सोच ले कर आने वाली हर औरत को मैं सिर्फ एक ही चीज देता हूँ…और वो है….लण्डडडडडड…” वे मेरे कानों में मेरे सवालों का जवाब देते हुए अपना लंड मेरी बूर में धकेल दिए….

मैं इतने मोटे लंड खाकर तड़प कर अपने सर को पीछे धकेल कर बचने की कोशिश की कि लंड कम घुसे और दर्द कम हो…पर नाकाम रही…उन्होने अपने शरीर का पूरा वजन रख दिया जिससे मैं गर्दन से नीचे हिल भी नहीं पाई…

“तू औरों से अलग है इसलिए पहली बार ही सब कुछ दिया..अब अगर तेरी मर्जी हुई मेरे से दोस्ती रखने की तो रखना वर्ना नहीं रखना पर मैं घर अवश्य खाली करवाऊंगा…तेरी गरम जवानी पत नहीं कहाँ-2 गुल खिलाएगी तो मैं ये किसी के मुँह से सुनना नहीं चाहता कि ये तो फलाने बाबू की रेन्टर है…”वो अपने लंड को पीछे कर एक और धक्का मारते हुए बोले…

मैं इस वक्त सिर्फ उनकी बात सुन रही थी और कुछ कहने के बजाय उनके मोटे लंड को एडजस्ट करने में जुटी थी…आउच्च्च्च्चऽ आहहहह…अचानक उन्होंने अपने नुकीले दांत मेरी चुची पर गड़ा दिए…

मैं दर्द से चीख पड़ी जो कि मेरी चीख पूरे पार्क में गूँजने लगी…पर वो इन सब से बेखबर लगातार धक्के मारने लगे…मैं हर धक्के पर हिचकोले खा रही थी…

अभी 10 धक्के ही खाई थी कि तभी मेरे कानों में किसी की हलचल गूँजी…मेरे कान खड़े हो गए और अपनी गर्दन उस आवाज की तरफ कर देखने की कोशिश करने लगी…

“डर मत, इस पार्क में सिर्फ दो ही तरह के लोग आते हैं…” मुझे ऐसे डर से उधर देखते वे बोले जिससे मैं आश्चर्य से मुड़ कर उनकी तरफ हिचकोले खाती देखने लगी…

“एक वो जिसे चूत मरवानी होती है और दूसरा इस कॉलोनी के बुड्ढे-बुढ़िया जो आधे पार्क से उधर ही रहते हैं…इस कॉलनी की हर घर में एक ना एक रंडी है…सब अपने यार संग मॉरनिंग वॉक के बहाने आती है और चुद के जाती है…मैं भी यहाँ से रोज कोई ना कोई बूर पेल के ही जाता हूँ…और खास बात ये कि ये बातें सिर्फ पार्क तक ही रहती है, बाहल सब अनजाने…”मेरी डर को दूर करने के लिए उन्होंने इस पार्क के अंदर की असलियत बता दी…

मैं सुन के दंग रह गई..अब तक मेरी बूर उनके लंड को पूरी तरह एडजस्ट कर ली थी और अब आराम में अंदर बाहर हो रही थी…पर मेरी आवाजें निकलनी नहीं बंद हो पाई थी…हर धक्के पर आहहह कर बैठती…

मैं यूँ ही धक्के खाती ऊपर की ओर देखी तो खुला आसमान पर पार्क के बाउंड्री समीप काफी ऊंचे और घने वृक्ष लगे थे…और यहाँ से मोहल्ले की एक भी इमारत नजर नहीं आ रही थी….

तभी से अचानक वो काफी तेज धक्के मारने लगे..वे चरमसीमा की ओर बढ़ने लगे..मैं भी अपनी आवाजें तेज करती हुई उन्हें सपोर्ट करने लगी…तभी मेरे कानों में हल्की सुरीली हंसी पड़ी…

मैं यूँ ही कस के जकड़ी नजर घुमाई तो मेरी ही उम्र की एक गोरी चिट्टी लेडिज एक अधेड़ मर्द के साथ बगल से क्रॉस करती हम दोनों को देख हंस रही थी…मैं उन दोनों को देख बिना किसी हिचक डर के वापस पांडे संग लग गई…

तभी वो चीखते हुए चिल्ला पड़े,”आई…एएएएम…कमिंईंईईंईंईंगगगगगग…”और अपना ढ़ेर सारा लावा मेरी बूर में बहा दिए…मैं भी इस गरमी को सह नहीं पाई और उसी पल मैं भी अपनी नदी बहा दी…

पूरा झड़ने के बाद वे धम्म से मुझ पर लद गए और झड़ने के पश्चात मैं भी सुकून से आँखें बंद कर उन्हें बाँहों मे, भर ली…

काफी देर तक यूं ही नंगी मैं पांडे को अपने सीने से चिपकाए पड़ी थी…फिर पांडे कसमसाते हुए हिले और आहिस्ते से उठ गए…मैं उन्हें उठने के लिए अपनी पकड़ ढ़ीली कर दी…

मैं अभी भी पड़ी थी…आँखें खोली तो मैं सीधी दूसरी तरफ की बेंच पर नजर दौड़ाई जहाँ अभी कुछ देर पहले कोई लेडिज चुद रही थी…वहाँ देखी तो अचानक से झटके खा गई…

वहाँ पर अब एक नहीं बल्कि तीन मर्द थे और तीनों उस लेडिज की एक साथ हर छेदों में अपना लंड डाल पेले जा रहा था और वो भी मस्ती में किसी कुतिया की तरह कूं-कूं करती चुद रही थी…

मैं झट से उठ के बैठ गई और इस नजारे को फटी आँखों से निहारने लगी…एक चूत तीन लंड…शुक्र है कि ऊपर वाले ने और जगह छेद बना दिए वरना यहाँ हर औरत की चूत चूत नहीं रह जाती, गुफा बन जाती…

मेरी कैप्री अभी भी घुटने तक थी और टीशर्ट गले तक…बूर नीचे खुली हवा ले रही थी और चुची ऊपर सुबह की ताजी हवा से खुद को तरोताजा कर रही थी..मैंने बगल में खड़े पांडे जी की तरफ देखी तो वे अभी भी नंगे मुझे निहारे जा रहे थे…

मेरी नजर उनसे मिलते ही मुस्कुरा दी और फिर टीशर्ट नीचे करने के ख्याल से हाथ रखी ही थी टीशर्ट पर कि तभी किसी ने पीछे से मेरे हाथ पकड़ लिए…

मैं चौंक उठी और तेजी से पीछे की तरफ पलटी…ओफ्फ्फ्फ…पीछे मुड़ते ही मेरी नाक एक तगड़े लंड से जा टकराई…मैं आँखें बंद कर सिसकारी भर ली और फिर नजर ऊपर की तो….

यहाँ तो एक नहीं चार मर्द बिल्कुल नंगे खड़े थे..मैं हौरान रह गई…तभी उनमें से एक बोला,”क्यों पांडे जी, आपने इन्हें बताया नहीं कि यहाँ पहली बार आने पर स्वागत समारोह भी आयोजित की जाती है…” और वो सब एक साथ हल्के से मुस्कुरा पड़े…

पांडे: ” अरे यार, इन्हें कोई प्रॉब्लम नहीं होगी…आप लोग बस अपने काम में लग जाओ…काफी गरम माल है…” कहते हुए पांडे मेरे निकट आए और मेरी टीशर्ट को पकड़ ऊपर गर्दन से हो बाहर कर दिया….

मैं अब बस यही सोच रही थी कि क्या करेंगे सब…कौन सा काम करेंगे मेरे साथ ये…कहीं सब मिल के चुदाई तो नहीं करेंगे…ओहहहहह…मैं ग्रुप चुदाई की अभी सोच ही रही थी और मेरी मनोकामना इतनी जल्द पूरी होती नजर आने लगी…

मैं अंदर ही अंदर काफी रोमांचित सी हो गई…तभी किसी ने मेरी कैप्री को घुटने से अलग करने लगा..मैं नीचे झुके व्यक्ति की तरफ देखी तो ये मर्द नहीं कोई लेडिज थी…मैं चुपचाप अपने पैर बारी-2 से उठा दी और वो कैप्री बाहर कर खड़ी हुई…

उनसे नजर मिलते ही मैं शॉक हो गई…ये तो कोमल आंटी की सहेली थी जो उनके साथ पार्लर में काम करती थी…मैं उन्हें हैरानी से देखने लगी…वो मुझे ऐसे देख मुस्कुराती हुई बोली,”वेलकम सीता, हैरानी की कोई बात नहीं है यहाँ…मैं यहीं पास में रहती हूँ और यहाँ रोज आती हूँ…और ये बात तो जानती ही हो कि यहाँ की बात सिर्फ यहाँ तक ही रहती है…”

मैं उन्हें अब भी लगातार घूरे जा रही थी…फिर वो मेरी कैप्री के साथ पांडे से ले चुकी टीशर्ट दिखाते हुए बोली,”जाते वक्त पहन लेना…” और फिर वो दूर एक कोने में मेरे कपड़े फेंक दिए…मैं अपने ड्रेस हवा में लहराती दूर जाती देखती रही…

वैसे भी यहाँ पर सिर्फ मैं ही नंगी नहीं थी जो कुछ बोलती…अब जो होना है वो तो होगी ही सो बस मैं सोच ली कि बेवजह क्यों परेशान होऊं…मजे करती हूँ…यही सोच मैं उनकी तरफ देख हौले से मुस्कुरा पड़ी…

तभी सब मर्द आगे आए और मुझे चारों तरफ से घेर लिए और सब अपने-2 लंड हिलाने लगे…मैं उन सबको देखने लगी…

“बैठ जाओ सीता..”कभी कोमल की दोस्त बोली जिसे सुन मैं आहिस्ते से बैठ गई…अब मेरी आँखों के चारों तरफ सिर्फ लंड ही लंड थे…

आउच्च्च्च्च…पीछे वाले मेरे बाल पकड़ के पीछे की तरफ जोर से खींच डाले…मैं तड़प कर पीछे की तरफ सिर कर ली और दर्द से आहहह भरने लगी…

तभी सामने वाले ने मेरे गालों को जोर से दबाते हुए मेरे मुँह को खोल रखा और नीचे झुकते हुए ढ़ेर सारा थूक मेरे मुँह में भर दिया…मैं घिन्न सी होती आँखें बंद कर ली…

फिर बारी-2 से सबने थूकते हुए मेरे मुँह को ही भर दिया….मैं सीधी हो उन्हे बाहर करना चाहती थी पर उन लोगों ने होने नहीं दिया…कुछ देर तक यूँ ही रहने के बाद मैं विवश हो सारा थूक गटक ली…

थूक गटकते ही उसने मुझे छोड़ा और अगले ही पल लंड ठूस दिया…लंड की आदी तो हो ही चुकी थी..सो लंड पड़ते ही मैं चूसने लग गई…कुछ ही देर तक चूसी कि बगल वाले ने जबरदस्ती मुझे उस लंड को छुड़ा अपना लंड ठूस दिया….

फिर तीसरी, चौथी…..इसी तरह मैं सब एक-2 कर लंड डालने लगे…मैं अब समझ गई कि सभी को एक साथ चूसना है….

बस मैं अपने आगे दो लंड को नजदीक की और बगल में दो लंड को हाथों से हिलाती हुई चूसने लगी…1-2-3-4 सब की…दो बिना पकड़े ही चूसती तो दो पकड़ के चूसती…

कुछ ही पलो में मैं पूरी मग्न हो गई लंड चुसाई में…एक साथ चार-चार लंड चूस के खुद को जन्नत के द्वार पर खड़ी महसूस कर रही थी…काफी गरम हो गई थी तो बीच बीच मैं एक हाथ से अपनी चूत भी रगड़ लेती…

पर जिसे लंड की जरूरत हो वो भला हाथ की सुनती थोड़ी…जबकि वे चारों मस्ती में झूम रहे थे…काफी देर तक लंड से खेली…जब बर्दाश्त नहीं हुई तो लंड को छोड़ ऊपर की तरफ मुँह कर उन सभी से आँखों से ही कह दी कि ,”प्लीज, अब तो चोद दो…”

तभी उन सब के बीच में कोमल आंटी की दोस्त आई और बोली,”शाली, बहुत गरमी हो रही है चूत में…तो ये डाल ले क्योंकि ये सब आज तुझे चोदेने वाले नहीं है…बस आज तो वेलकम करेंगे सब…समझी..” और फिर उन्होंने लकड़ी की मोटी और चिकनी बिल्कुल लंड की माफिक नीच झुकते हुए एक ही झटके में मेरी बुर में उतार दिए…

मैं चिहुंक कर चिल्ला उठी पर अगले ही पल एक लंड ने मेरी चीख को दबा दी…

कुछ देर तक बूर में लकड़ी का टुकड़ा डाले लंड चूसती रही कुतिया की तरह…बीच बीच में मुझे क्लिक की आवाज आ रही थी जैसे कोई मेरी पिक्स ले रही हो पर मैं अब इन सब की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही थी…

जब ओखल में सर डाल ही दी तो मूसल से डर कैसी…तभी एक ने अपने लंड को जोर में मेरे मुँह में दबाते हुए चीखने लगा और फिर उसके गरम पानी मेरे गले में उतरने लगी…मैं भी पानी की गरमी पाते ही जीभ और दांत से उसके लंड को कुरेद कर और पानी निकालने लगी…

जैसे ही वो शांत हुआ दूसरे ने भी पानी की बौछार कर दी…वो बाहर ही था जिसे मैं तेजी से मुरझाए लंड को बाहर कर उस लंड के सामने मुँह खोल दी और प्रसाद ग्रहण करने लगी…

वो अभी पूरा झड़ा भी नहीं था कि तीसरी नल भी खुल गई…और फिर चौथी भी…मैं सबके अमृत को अंदर करने की भरकस प्रयास की पर नाकामयाब रही…फलस्वरूप जितनी वीर्य लेनी की क्षमता थी वो तो ले ही पर बाकी वीर्य ने मेरे चांदरूपी चेहरे को पूरी तरह ढ़क दी…

गोरी चमडी पर बर्फरूपी लंडरस बिछ गई थी और मैं बिल्कुल किसी कुतिया की तरह बूर से पानी बहा रही थी…तभी एक आवाज मेरे कानों में गूँजी जिसे सुन मैं स्तब्ध रह गई…

“जरा रूकिए तो एक मिनट…सीता की ऐसी पिक्स मेरे लिए काफी फायदेमंद रहेगी..” मैं नजरें ऊठा कर देखी तो सामने कोमल आंटी कैमरा लिए मुस्काते हुअ लगातार पिक्स खींची जा रही थी…

मेरे चेहरे की काफी क्लोज पिक्स ली..फिर बोली,”डोंट वरी सीता, मैं यहाँ की लीडर हूँ…और ये पिक्स मैं अपने एलबम के लिए ली हूँ…जो एलबम तुम देखी थी उसमें सिर्फ फेस की तस्वीरें थी पर ये पिक्स जिस एलबम में डालूँगी उसमें सबकी चुदाई के ही पिक्स होते हैं…अब तो आएगी ही तो देख लेना…और बधाई भी नई जॉब के लिए…”

मैं बस उन्हें देखती रही…कुछ जवाब नहीं दे पा रही थी…बस झटके पे झटके खा रही थी कि कौन कहाँ होता है,पता नहीं…खैर अब तो कोमल आंटी की सेक्स वर्कर बनने के सिवा कोई चारा नहीं थी….

इसमें मेरी विवशता या मजबूरी नहीं थी…ये तो मैं भी चाहती थी कि रोज मैं चुदूँ पर कोई कभी खुल के सामने नहीं आ रही थी…पर आज पांडे जी की वजह से सब दिक्कतें दूर हो गई…

तभी मेरी चुची पर एक जोर की पैरों से किक पड़ी और मैं धम्म से पीछे की तरफ जमीन पर गिर पड़ी…थोड़ी सर में चोट भी लग गई जिससे मैं आहह कर कराह पड़ी…पर ये चोट ऐसी हालत में मायने नहीं रखती थी…

कोमल आंटी एक तरफ हो नेक्सट पिक्स लेने लगी…तभी चारों ने एक साथ अपने मुरझाए लंड से दूसरी टोंटी खोल दी…पेशाब की सीधी धार मेरे चेहरे को भिंगोने लगी…

मैं आँखें बंद करती सर को दूसरी तरफ मोड़ ली कि तभी कोमल आंटी की दोस्त ने आगे बढ़ अपने पैरों से मेरे चेहरे को पुनः सीधी कर दी…मैं समझ गई कि ये सब यही चाहती है तो दूसरी बार हटाने की कोशिश नहीं की…

फिर पेशाब की धार मेरे चेहरे से हट नीचे की तरफ बढ़ने लगी…और कुछ ही पल में मैं पूरी नहा गई थी…उनके पेशाब की धार जब खत्म हुई तो सबने एक साथ मिल के ताली बजा दी…

मैं मन ही मन मुस्कुराने लगी…सच पुरूषों को सेक्स में जितनी गंदी करने दो वो उतने ही खुश होते हैं…कुछ देर तक पड़ी रहने के मैं आँख खोली और उठ कर बैठ गई….

सब वहाँ पर खड़े हो मेरी तरफ ही घूरे जा रहे थे और मुस्कुरा रहे थे…मैं उन सभी को को देख हल्की मुस्कान दे दी…मतलब मैं खुश हूँ,उनको बता दी…

मेरे शरीर से पेशाब और वीर्य की बू आ रही थी, पर अब ये हमें तनिक भी बुरी नहीं लग रही थी…एक अलग ही कामुकता पैदा कर रही थी…तभी मेरी नजरें मेरी बूर पर पड़ी जहाँ अभी भी लकड़ी घुसी थी…

मैं आहिस्ते से हाथ बढ़ा लकड़ी को पकड़ी और नचाती हुई बाहर कर दी…फिर मैं लकड़ी फेंकने के लिए हाथ ऊपर की ही कि फिर मैं रूक गई और कोमल आंटी की तरफ कामुकता से देखती हुई उस लकड़ी पर लगी मेरी बुर के रस को चाटने लगी…

जिसे देख सभी वहां पर हँस पड़े…मैं भी चेहरे पर हंसी लाते हुए नॉनस्टॉप चाटती रही…जब पूरी तरह चाट ली तो फिर साइड में रख दी…तभी कोमल आंटी ने अपने कैमरे को पांडे की तरफ बढ़ा दी…

और फिर कंधे में टंगी बैग से कुथ पेपर निकाले और बेंच पर रखती हुई बोली,”लो सीता, पढ़ के साइन कर दो..आज से तुम मेरे लिए काम करोगी और साथ ही यहाँ की मेंबरशिप भी…यहाँ आने वाले सभी मर्द से तुम अब चुद सकती हो…”

मैं अब क्या सोचती? बस मुस्कुरा पड़ी और बेंच की तरफ खिसक कर आई और कोमल आंटी से पेन ली…फिर उनकी तरफ हंसती हुई साइन करने लगी…

“अरे, पढ़ तो लो एक बार…”कोमल आंटी ने मुझे एक बारगी से बिना पढ़े साइन करते देख बोल पड़ी…

“अब इसे पढ़ के क्या करनी…जब करनी ही है तो करनी है…”मैं साइन करती हुई बोली..

“हम्म्म…ओके पर ये मत सोचना कि ब्लैकमेल कर रही हूँ…पर हाँ एक बात याद रखना और इसमें लिखी भी है कि जब तक तुम इस शहर में हो और जब तक मैं चाहूँ तुम कभी मना नहीं करोगी आने से…किसी वजह से बाहर चली गई या शहर छोड़ दी तो उस स्थिति में तुम्हें वजह बतानी होगी…”कोमल आंटी समझाते हुए बोली..

“मतलब अगर पति का ट्रांसफर हो गया तो तुम पर कोई प्रेशर नहीं…बस बिना वजह तुम मना नहीं कर पाओगी और हाँ सप्ताह में कम से कम 2 दिन तो आना ही होगा…उससे आगे तुम्हारी मर्जी और तुम्हारा कमीशन हैंड टू हैंड…ठीक है…”कोमल आंटी शार्ट कट में पूरी कंडीशन बतला दी…

मैं उनकी बात सुन हामी भर दी “मुझे मंजूर है…” कहती हुई पेपर उनकी तरफ बढ़ा दी…वो हंसती हुई पेपर बैग में डाल ली…

समाप्त

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