माँ और पुत्र अध्याय 2

 चाची मेरी माँ

 आंचल को समर्पित

 “बिरजू अरे ओ बिरजू, उठ जा बेटा सुबाह हो गई है, जल्दी से मुह हाथ धो के नास्ता कर ले, खेत में जाने में डर हो रही है” — विमला बिरजू को जगते हुई बोली।

 उत्तर प्रदेश के एक गांव के बोहत और एक झोपरे जैसे घर में रहते हैं विमला, उमर 42, बोहत ही लंबी और छोटी मोती, ऊंचाई 5 फीट 7 इंच, एक दम मदमस्त मदा हाथी का जैसा बदन है विमला का, यह दोनो और चुचिया  हुई है के कांधे से 1 फुट 6 इंच आला नवी तक लटक रही है चुचिया, मोटे मोटे गोल गोल जंघे, सुंदर गोल हाथ, चौरी पीठ, एकदम पक्के गेहु का जैसा रंग बदन का।

 विमला के साथ रहते हैं उसका पति रमेश, उमर 50, पटला शरिर, ऊंचाई 5 फीट 5 इंच, विमला की बेटी आंचल उमर 4, घर में ही खेलती है, और रमेश के बड़े भाई का बेटा बिरजू, उमर 20, ऊंचाई 5 फीट 4  इंच, पटला शरिर, लेकिन मोटा लुंड।

 बिरजू – “ठिक है चाची, तू जल्दी से नास्ता दे दे।”

 बिरजू उत्तकर घर के पिचे आंगन में जाता है और अपनी लंगोट सरकार के मुत ने लगता है, विमला घर बैठे छर छर बिरजू के मुत की आवाज सुनती है, आज कल न जाने जबवी बिरजू की सुनने की है  महसूस कार्ति है।

 बिरजू मुह हाथ धो कर आता है, विमला उससे खाना देती है, खाना खा के दोनो खेत के लिए निकल ने वाले होते हैं, विमला बोलती है,

 विमला – “कितनी बार कहा है खेत में जाने के वख्त ये पुरानी लंगोट मत पेहं ना, फटा हुआ है जग से, इसे सिरफ रात को सोने का वक्त पहचान कर, पर बात नहीं मानता तू”

 बिरजू – “एक नई लड़ो, कब से कह रहा हूँ,”

 विमला – “इस साल फसल अच्छी होने दे बेटा, तुझे नए कपड़े दिलाऊंगी तेरे चाचा को बोलके”

 बिरजू – “तथिक है चाची मैं दसरा लंगोट पेहन लेता हूं, क्या ही तो बच्ची है, चाचा आ गए खेतो की रखवाली कर के?”

 विमला – “नहीं रे अभी नहीं आया, चल हम दोनो पूरब वाली खेत में चलते हैं, खेत जोतने का काम शुरू करना होगा जल्दी”

 बिरजू – “पश्चिम वाली खेत में कब फसल कटेगी चाची?”

 विमला – “अभी कुछ दिन बाकी है”

 दोनो खेत के लिए निकल ने ही वाले होते हैं के बिरजू बोला,

 बिरजू – “ये क्या चाची तुम मुझे खेत में जाने के वख्त फटते पुराने कपड़े पहनने ने से मन करता है और तुम खुद ही …”

 विमला – “क्या बोल रहा है…” ये कहने खुद की तरफ देखती है और पति है की उसकी चोली (ब्लाउज) साइड से कफी फटी हुई है और बेई चुची काफी हिसा फुलकर सामने आके दिखी, बिरजू पता है  नहीं कैसी अंजन नजरो से अकटक नांगे चुची की तरफ देख रहा है।”

 विमला फ़ोरन साड़ी के पल्लू सर के ऊपर से घुमा के ले आती है और चुची को धक देती है।

 विमला – “कल फट गई थी ये चोली, इस बार अच्छी फसल हुई तो मैं वि कुछ कपडे किलोरिडुंगी अपने लिए, मेरे पास और कोई चोली नहीं है, अब चल”

 बिरजू और कुछ नहीं बोलता, दोनो खेत की तरफ चल देता है, बिरजू के मां बाप की मौत बचपन में ही हो गई थी, तब से विमला ही उसे अपने बेटे की तरह पलती आई है,

 खेत में जाने के रास्ता बीच में सुनसान था और घने पढो से और झड़ियो से ढाका हुआ था, जाते अचानक विमला बोली,

 विमला – “बोहत ज़ोर की पेशाब लगी है, तू यहीं रुक बेटा, मैं आती हूं”

 ये बोलकर विमला रस्ते के दैनिक तार झड़ियो में घुस जाती है,

 बिरजू को ना जाने आज क्या हुआ था, जब से उसे विमला की फुली चुचि के दर्शन किए थे उसके शरीर में अजब सी हलचुल हो रही थी, वो विमला के पिचे झड़ियो में घुस जाता है, उससे वि थोडा

 थोड़ा दूर भूत ही बिरजू चोंक उठा है, विमला साड़ी और पेटीकोट को एक साथ कमर तक उतरकर छर छर आवाज करके मुत राही थी, विमला की नंगी चुतद को बिरजू कवि ने इसे देखा  गया, उसका पेशाब का दबाव कम हो गया,

 थोड़ी देर बाद विमला पेशब कर की उठी, साड़ी पेटीकोट को नीच किया और जब पलटी तो अब होश उड़ने की बारी विमला की थी,

 विमला-“तू…तू याह क्या कर रहा है…”

 बिरजू – “वो चाची ..मुजे वि पेशब लगी है।”

 विमला सोच में पद गई क्या ये सच बोल रहा है?  फिर उसे सोचा के उसे बिरजू को बचपन से मां की तरह पाला है, बिरजू उससे कवि झूठ नहीं बोलता।

 विमला – “याही मुत ले, ज़दा दूर मत जा, सांप हो सकता है झड़ियो में”

 बिरजू- “ठीक है चाची।”

 बिरजू लंगोट से अपना लुंड निकला कर मुत ने लगता है, और विमला के होश उड़ जाते हैं, नारम होने के बावजूद इतना लंबा और मोटा, वायनक सांप जैसा दिख रहा है, असल में पेशाब के दबाव से बिरजू का दबाव से बिरजू हुआ।  वो अपने मुह में साड़ी का पल्लू दलके वो से निकल आती है, बिरजू की मुत की धर बिलकुल वो गीर रही थी जहां विमला ने मुता था-ये देखते ही विमला के शरिर में एक अजब जान सी काम हूं।  वोह रुकी नहीं।

 से बहुत झड़ियो से निकला के रास्ते पर बिरजू का इंतजार कर रही थी, थोड़ी देर बाद बिरजू निकला, दोनो खेत की तरफ जाने लगे, बिरजू ने विमला की चुची की तरफ नजर डाली तो देखा से विमला से  लिया है

 खेत में पोहाच ने के बाद दोनो खेत की जोताई में लग गए, विमला रोज की तरह अपना काम कर रही थी के काम के बीच में उसने ख्याल किया के बिरजू काम के बीच में, ये तिरछी नजर से उसे देखा की बीच में  देखते ही विमला को बहुत हुआ, बिरजू क्या बड़ा गया है, ये सोचते हुए विमला के मन में ख्याल आया के वो बिरजू का कान पकाड़ के उसे दांते, अचानक उसके अंदर की ममता जगा विमला, कोई बच्चा  की तरह पाला था, विमला ने तय किया के वो बिरजू को बाद में प्यार से समझेगी

 खेत का काम खतम करते करते शाम हो गई थी, बीच में दोपहर को विमला और बिरजू ने पास के तालाब से नहीं लिया था और बाद में खाना खा लिया था, विमला बहुत चलाकी से बिरजू को काम जल सौप कर जला दिया।  ता के बिरजू नहीं वख्त विमला का अध नंगा बदन देख न खातिर इतने साल तक बिरजू विमला के शारिर का कोई वि हिसा नंगा नहीं देख पाया था शिवये आज के।

 घर पोहच ने के बाद विमला रात का खाना बनाने में लग गया, उसका पति रमेश वि आ चुका था,

 रमेश रात वर खेत की रखवाली करता था ता के फसल को कोई और काट न ले या किसी और तरह से फसल बरबाद ना हो, खाना बनाने के बाद मोका पाके विमला रमेश के पास गई, विमला के झोपरे दो जैसे घर  मिट्टी का घर था, और दो कामरो के बीच वि मिट्टी की देवर, और आने जाने के लिए बन गया काट कर बनाया गया एक दरवाजा, रमेश के पास जा के विमला बोली,

 विमला- “सुनते हो, इस साल फसल अच्छी कटने के बाद मेरे लिए दो तीन जोड़े खारेद ने होंगे,”

 रमेश -” टिन जोडें ? ?”  रमेश चौकटे हुए बोला

 विमला – “इतना चौकने की क्या ज़रुरत है?”

 रमेश – “एक साड़ी से नहीं होगा?”

 विमला – “अगर पैसे कम होंगे तो एक ही से काम चलूंगी, पर दो चोली तो चाहिए ही”

 रमेश – “अब चोली वि चाहिए?”

 विमला – “हां ये आखिरी चोली फट गई है, देखो, ये कहके विमला ने साड़ी का पल्लू उठा के रमेश को देखा, फटी चोली से बाहर निकली फुली हुई चुची को देख का रमेश चौक गया और तूरंत को  बोला,

 रमेश – “क्या कारती है, बिरजू अब बड़ा हो गया है, कहीं उसे देखा तोह ….कही उसे देखा तो नहीं?

 विमला अचानक रमेश के इस साल से चौक गई फिर उसे धीरे से कहा,

 विमला – “नहीं बिरजू ने नहीं देखा”

 विमला जनता थी के अगर उसे रमेश को सच बता तो वो चिल्लाएगा और बिरजू को दांतेगा इसिलिए विमला ने रमेश को नहीं बताया और ये तय किया कि वो बिरजू को खुद समझौता करेंगे।

 रात को रमेश फसल की रखवाली करने के लिए निकल गया, सब एक साथ रात का खाना खाते थे झोपरे के बहार रसोई घर में, बिरजू एक कामरे में सोता था और दसरे कामरे में विमला, रमेश और आंचल,

 बिरजू सोने के लिए अपने कामरे में बैठा था के विमला उसके कामरे में आई,

 विमला – “बिरजू मुझसे तुझसे कुछ बात करनी है”

 बिरजू – “हां बताओ चाची”

 विमला – “देख बिरजू अब तू बड़ा हो गया है, मैं जनता हूं इस उमर में लड़कों को लड़की अच्छी लगती है, तुझे अच्छी लगती है ना?”

 बिरजू – “नहीं चाची, मुझे तो कोई लड़की अच्छी नहीं लगती”

 विमला – “अरे मैं तुझे कैसे समझौता … विमला जनता थी के बिरजू सिरफ शरिर से बड़ा हुआ है, उसका दिमाग अवि वि बच्चे जैसा है …. देख बेटा घर में बेटा जब बड़ा हो जाता है तो उसकी शादी  एक लड़की से कर दी जाति है, तेरी वी शादी किसी अच्छी लड़की से कर दूंगा, तब तक तू किसी और लड़की या औरत की तरह मत देखना, खास कर अगर उस लड़की या औरत के कपड़े फटे हो…  .संझा ??”

 बिरजू – “पर मैं तो किसी लड़की या औरत की तरफ नहीं देखता चाची”

 विमला – “मुझे पता है, दिनवर हम खेत में काम करते रहते हैं, तुझे किसी की तरफ देख का वख्त नहीं मिलता है, फिरवी मैं बताता हूं, आंदा किसी की तरह मैट देखना है, “तथिक है

 बिरजू – “तथिक है चाची”

 विमला ने समझौता तो दिया पर उसे वि याकेन नहीं था के बिरजू कितना समझा

 अगले दिन दोनो फिर खेत के लिए जा रहे थे फिर झड़ियो के पास से जब दोनो गुजर रहे थे तब विमला को जोर की पेशाब लगी,

 विमला – “तू यही रुक बेटा, मैं आती हूं,”

 बिरजू – “कहा जा रही हो चाची?”

 विमला – “बोहत ज़ोर की पेशब लगी है, समझ कर, इन झड़ियों में और क्या करने जाऊंगी?”

 पेशाब का नाम सुनते ही बिरजू के मन में कल की घाटा याद आई विमला की विशाल बड़ी नंगी चुतड याद आई, और उसके लुंड ने एक झटका मारा, बिरजू समाज नहीं पा रहा था, उससे ऐसा हुआ था  उस कदम से अपने आप झाडिय़ों के अंदर ले गए, झड़ियो में भूत ही बिरजू ने देखा के विमला कल की तरह साड़ी, पेटीकोट को एकथ कमर तक उत्थानकर छर छर आवाज करने के बाद आजी जन्मी  के पास ही खड़ा होके म्यूटने लगा, विमला चौक उठा, विमला के खुद की पेशब की धर अवी जोरो पर थी इसिलिए वो वि नहीं उठ पा रही थी, और यहां उसके मुह के बिलकुल पास, जैसा मोटा लुंड निकला।  विमला ने मुह फेर लिया और म्यूटने लगी, फिर ना जाने उससे क्या हुआ, हजारो कोशिशो के बाद विमला का मुह अपने आप बिरजू के लुंड की तरफ मिट्टी गया और विमला फटी आंखों से बिरजू के मोटे लुंड थी को देख रहा,

 बिरजू – “चाची बोहत ज़ोर की पेशाब लगी थी,”

 विमला बिरजू के लुंड से मुह उठाकर उसके मुह की तरफ देखती हुई धीरे से बोली

 विमला – “किसी दुसरी तारफ वि तो जा सकता था ना? ..याह क्यू आया?”

 ये कहे विमला उठी और साड़ी, पेटीकोट को नीच किया,

 बिरजू मुटना खतम करके लुंड को लंगोट में घुसते हुए बोला

 बिरजू – “कही और अगर गया और सांप निकला तो मुझे बचाता चाची ? और अगर यह सन निकला तो तुम्हें कौन बचाता चाची?”

 विमला बिरजू का मोटा लुंड देखकर काम उत्तेजित हो गई थी, उस पर आज दोबारा बिरजू ने उसकी नंगी विशाल बड़ी चुतडो को देख लिया था, विमला इस काम उत्तेजना की हलत में बोली,

 विमला – “बड़ा आया मुझे सांप से बचने वाला, तो मुझे आज कल हर जगह दिखी दे रही है, विमला बिरजू के लुंड का ख्याल करते हुए बोली

 बिरजू – “ये क्या बोल रही हो चाची, फिर तो मैंने अच्छा ही किया न के इसी तरह मुड़ने चला आया”

 विमला – “तथिक है चल अवी,”

 विमला ने तय किया के कल से अगर उससे पेशब लगे तो वो बिरजू को किसी कहने कहीं वेज कर फिर मुड़ने जाएंगे झड़ियो में, ये रोज अच्छा नहीं हो रहा बिरजू के साथ एकथ म्यूटा  के बाद अपना लुंड लंगोट में घुसा रहा था तो लुंड घुस नहीं रहा था, इतना मोटा है बिरजू का लुंड।

 खेत में जकार दो काम करने लगे, काम करने के बीच में गर्मी के करन विमला का शरिर पासिन से जग जग भीग गया था, बिरजू के शारिर में वि पासिना था, विमला को लगा के वि नाह, इससे लेना चाहिए

 विमला – “बेटा पानी देने का काम खतम कर ले तब तक मैं पास वाले खेत से आती हूं”

 बिरजू – “तथिक है चाची”

 विमला चली गई कहने से नहीं, इधर बिरजू खेत में पानी देने लगा, लेकिन आज पानी कम होने के करन पानी जल्दी ही खतम हो गया, बिरजू ने सोचा के जब पानी खतम ही हो गया है तो ऐसा क्यों नहीं किया  में गरमी बढ़ती जा रही है, ये सोच कर बिरजू तालाब की तरफ जाने लगा

 वो बिरजू जब घने झाडिय़ों से घिरी तालाब के करीब पोहुचा तो तालाब के पास एक छोटे से पढ़ा की डाली पर उसे अपना लंगोट उतर के रखा ता की मिट्टी की धूल से वो गंदी न हम, और तल  ही ऐसा ही करता है, थोड़ा चल ने के बाद ही एक दुसरी छोटी पढ़ाई की डाली पे उसे देखा की एक पेटीकोट और चोली लतक रही है, जब बिरजू ने पहचान के ये फटी चोली तो उसमें तो है तो है

 बिरजू का लुंड ने अचानक एक झटका दिया, उसका शुद्ध शरीर में पता नहीं कैसी उत्तेजना हो रही थी उससे समझ नहीं आया, बिरजू तेजी से तालाब की तरफ जाने लगा, जैसा ही बिरजू ने दो कदम बढ़ने  और झड़ियों से ढाका हुआ था) झड़ियों के अंदर से किसी के चल के आने की आवाज सुनी, बिरजू का दिल जोरो से धड़क रहा था, बिरजू सोच रहा था कहीं ये चाची तो नहीं, बिरजू ऐसा सोचा के उसे ही रहा  पर चलते चलते विमला आके खादी हो गई

 विमला सिरफ एक साड़ी पहन कर अधनंगी बिरजू के सामने खड़ी थी, बड़ा सा मां हटी जैसा बदन, चुचिया नवी तक लटकी हुई, और मोती मोती जंघे, उफ्फ क्यामत धा रही थी, और सबसे ज्यादा बिरजू।  दोनो ही एक दसरे को देख के इतना भोचक्का हो गए के कुछ पल के लिए तो दो मूर्ति बन कर एक ही जग खड़े के खड़े रह गए, ऊपर से विमला का मदमस्त शारिर और लंबी फुली हुई यहां तक ​​कि मैं छू हूं  कर आसमान की तरफ से उठान लगा, ऐसा बिरजू के साथ पहली बार हुआ था का उसका लुंड अकड़ कर लुंड का मुह ऊपर उठा गया

 उधार विमला वि अचमवित थी, ये तालाब उसके पति रमेश का है, इसिलिए याह बहार का कोई नहीं आता, इसिलिए विमला रोज पढ़ा पर पेटीकोट और चोली रख कर अदनांगी तालाब पर नहीं जाने जाति है, पर उससे क्या आता है  जब विमला होश में आई तो उसे देखा की बिरजू उस से फटी आंखों से देखे जा रहा है, और बिरजू ने उसे देख कर अपना लुंड मोटे आजर सन जैसा कर लिया है, शर्म के मारे विमला हाट से आपने रखा है  मैंने अपनी चुत को ढक लिया और बिरजू की नजरों की तरह न देखते हुए तेजी से दौड़ी लगी, विमला उस पढ़ा की तरफ दौडने लगी जहां उसकी पेटीकोट और चोली लटक रही थी, बिरजू वह खड़ा था।  विमला को अधनंगा देख कर वो होश खो बैठा था, बिरजू ने देखा के विमला ने जलदी से अपने कपड़े पढे की डाली से सामने और एक बार हलका सा बिरजू की तरफ देख के ही तुरंत अपना मुंह फेर लिया।  बिरजू वो खड़े होके पिछे से विमला की चु  त और नंगी पीठ देख रहा था बिना पलक झपकाये।

 तालाब से जब बिरजू लौट का आया तो उसे देखा के विमला खेत में चुपचाप काम कर रही थी, बिरजू वि चुपचाप आकार काम करने लगा, विमला ने बिरजू को देखा लेकिन कुछ नहीं बोला, रेह रह कर विमला को वो ल  की तस्वीर याद आने लगी, विमला तालाब के पास से आने वख्त वी अपने आप पर नियंत्रण नहीं कर पाई थी, और एकबार मुदके बिरजू के मोटे लुंड को देख ने के लिए मुड़ी थी,

 कुछ डेर तक विमला ने चुपचाप काम किया फिर अचानक बिरजू से बोली,

 विमला – “क्यू रे, अचानक तू तालाब पर क्यों आ गया?”

 बिरजू – “क्या करू चाची, तुमने खेत में पानी देने के लिए कहा था, पर पानी आ नहीं रहा था, लगता है पंप खराब हो गया है चाची, और मुझे बोहत गर्म लग रही थी, इसिलिए नहीं चला तुम,  टू पास का खेत देखने गई थी ना, तुम तालाब कब चली गई?”

 विमला – “मुझे वि बोहत गरमी लग रही थी, इसिलिए मैं तालाब गई थी”

 दोनो के बीच और कोई बात नहीं हुई और दोनो खेत का काम खतम कर के शाम को घर आ गए।

 घर आकार विमला खाना बनाने में लग गई, बिरजू अपने कामरे में जा कर आराम करने लगा, खाना बनाते बनते विमला सोचने लगी के बिरजू को क्या हुआ था उस वक्त, कैसी अंजन नजरो से मुझे देख रहा था  कितना मोटे सनप जैसा लंबा कर लिया था अपना लुंड, इशश।

 उधार बिरजू वि बिस्तर पर सोई हुई चाची की बारी में सोच रहा था, ओह बिना चोली के चाची की चुचिया तो शुद्ध उनकी नवी तक लत रही थी और ओह कितनी फुली हुई थी चुचिया, और जते वख्त उनी वो नंगी गो  सोचते ही बिरजू के लुंड ने एक झटका दे कर आसमान की तरफ सर उठान लगा,

 उधार विमला ने सोचा जल्दी ही ये चोली बदलनी मिलेगी, बिरजू अब बड़ा हो गया है उसके सामने ऐसा घुमना इतना नहीं होगा और खसकर आज जो हुआ उसके बाद, विमला ने सोचाविता का कभी नहीं होगा तो मैं क्या हूं  यह मांग लुंगी एक, थोड़ा छोटा हो सकता है पर मुझे काम चलाना पड़ेगा, ये सोचे हुए चोली कितनी फटी हुई है ये देखने के लिए विमला ने अपना साड़ी हटा और जैसा ही उसे अपना वहां से वहां गया था  बहार कोई है, जैसे ही विमला बाई तारफ मुद्रा देखने के लिए वो वोचक्का हो गई, बहार बिरजू रसोई घर की खिड़की से बिना पलक झपकाये विमला की चुचियो को देख रहा था

 बिरजू को देखते ही विमला ने साड़ी आला करके अपनी बाई चुची को धक लिया और बिरजू को कहा

 विमला – “तू अचानक यहाँ क्यों आया?”

 बिरजू – “चाची बोहत ज़ोर की भुक लगी है, खाना बन गया क्या?”

 विमला – “तू मुह हाट धो कर आजा तब तक बन जाएगा”

 मैं बिरजू मुह हाथ धो कर आकार रसोई घर में बैठा, विमला हाट उठाकर सबजी हिला रही थी, बिरजू वि चुपचाप विमला की बाई नंगी चुची को देखा जा रहा था कुछ डर चुटा बाद में बड़ा दे बिरख  ही है, विमला ने बिरजू को अच्छा दांता चाहा लेकिन तब भी विमला को एहसास हुआ और कोई उससे रोक रहा है और विमला ने ये वि खयाल किया के बिरजू के ऐसे देखने से उसमें चुत में कुछ हलचुल है  है के वो बिरजू को और अच्छी तरह से अपनी चुचिया दिखाये, विमला को समझ नहीं आ रहा था उसके साथ ये क्या हो रहा था।

 बोहत मुश्किल से विमला ने अपने आप को समझौता और अपने मन को कबू में किया, इस बात का ध्यान रखने लगी की सब्जी हिलाते वख्त उसे बया हाट जदा न ही और विमला ने साड़ी से अपनी कुछ बेहतर  देख ना पाए।  थोड़ी देर बाद रमेश आ गया और आंचल को बुला कर चारो ने खाना खा लिया, रमेश खेतो की रखवाली करने चला गया और विमला वि अपने बिस्तर पे जकार आंचल को सुलाने लगी, आंचल तो इतनी गई लेकिन गरमी खराब है  करन विमला को नींद नहीं आ रही थी, उसके विशाल हाथी जैसा शरीर पासिन से वीग रहा था, विमला उठी ये देखने के लिए के बिरजू सो गया या नहीं, विमला के और बिरजू का कामरे के बीच बन गया था।  देखा बिरजू बिस्तर पर सो गया है,

 विमला ने देखा ये बीच का दरवाजा तो थिक से बंद है, फिर वो अपने बिस्तर की तरफ आई और गर्मी से थोड़ी राहत मिले इसलिये अपनी साड़ी उतर ली, लेकिन फिर विखा बोहत गर्मी लग रही है विमला  जो बन्स की बनी खिड़की है वो परदे से आधा ढाका हुआ है, विमला ने सोचा शायद इसिलिए हवा से नहीं आ रही, विमला ने खिड़की के परदे हटे, लेकिन आज हवा इतना जदा नहीं बह रही थी, इसिलिए  थी, विमला परशान हो गई गरमी से, उसे देखा की उसे चोली पासिन से विगकर उसके शरीर से लिपटी हुई है, विमला ने सोचा के ये चोली उतर लुंगी तो शायद थोड़ी राहत मिले, लेकिन फिर विमला ने सोचा कि एक खिलाड़ी  गया तो, इतनी इतनी रात को कौन आएगा, और फिर इस्स इलके में उतनी चोरिया वी नहीं होती, और बिरजू वी सो गया है, ये सोच कर विमला अपनी चोली उतरने लगी, एक दो करके धीरे से विमला की फिर से फिर से विमला की फिर से  बिस्तर पर बैठ गई, पासिन से वेगी चोली को सुखने के लिए उसे एक रस्सी पर तांग डी  हीया, विमला बिस्तर पर बैठी हुई थी सिरफ एक पेटीकोट पहनने कर, उसके दोनो विशाल लौकी की तरह फुली हुई चुचिया नवी तक लटक रही थी, उसके दोनो पाओ नीचे जमीन पर, विमला खिड़की से बोहत अबाटी धीमा हूं  थी

 और गर्मी के करन बिरजू को विनींद नहीं आ रही थी, उससे थोड़ा पेशाब लगा तो वो उठा, विमला के काम में जाने का जो दरवाजा था उसकी दुसरी तारफ एक और दरवाजा था बहार निकल ने  बहार निकला, अब विमला के कामरे के पिचे एक झड़ी थी जिस्मी घर के सभी लोग खाना खा का हाट धो ते और कवि रात को ज़रुरत पड़ी तो म्यूट लेटे द, बिरजू उस झड़ी की तरह जाने के तो उसे देखा बड़ा बड़ा  के कामरे की खिड़की से लालें की धिमी रोशनी आ रही है, तो क्या चाची वि तक जग रही है?  ये सोच कर बिरजू आगे बढ़ा और जैसे ही उसे खिड़की से और झंका तो उसके तो होश ही उड़ गए, विमला अपने विशाल चुचियो को नंगा करके बिस्तर पर बैठी हुई थी, उसे दो इतने बड़े बड़े चुचिया नवी तक  का प्रेशर काम हो गया ये देख के और वो वोचक्का हो कर वही खड़ा रह गया, उसका लुंड फिर से अकड़ कर झटके मरता हुआ सर उठान लगा लेकिन पेशब के समलैंगिक दबाव के करन पूरा खड़ा नहीं हुआ पर फूल कर अधा खड़ा,

 में कुछ विमला की खिड़की पर ध्यान नहीं था, बिरजू जी वर कर विमला की नंगी चुचिया देख ने लगा, अचानक विमला की नजर खिड़की पर पड़ी, और अब होश उड़ने की बड़ी विमला की थी, विमला यह  मुझे खुला का खुला रह गया, विमला और बिरजू दोनो वोचक्का हो कर एक दसरे को देखने लगे, विमला अपनी हिरानी से बहार निकली और झट से हाट बढ़ाकर सामने रस्सी से झूली हुई चोली को खराब लेने में  बड़ी चुचिया क्या उस छोटे से चोली से ढक पति, विमला सिरफ चुचियो के एकदम आगे नोकले हिसे पे जो गोल गोल एरिओला और निप्पल द उन्हे ही धक पाई, बाकी पूरी की पूरी चुचिया नंगी खुली रही,

 विमला ने गुसे से बिरजू की तरफ देखा और गुसे से बोली,

 विमला – “इतनी रात को याह क्या कर रहा है?”

 बिरजू – “वो … वो चाची बोहत जोरो की पेशाब लगी थी, इसिलिए मुत ने जा रहा था” विमला का गुसा फिर वि शांत नहीं हुआ

 विमला – “मुट ने जा रहा था तो यहाँ क्यों रुक गया?”

 बिरजू इस बात का फट से कोई जबाब नहीं दे पाया, फिर थोड़ी देर बाद बोला

 बिरजू – “वो चाची। .रात को झड़ियों में सांप हो सकता है न इसिलिए संवल कर चल रहा हूं”

 बिरजू की ये बात सुंकर विमला थोडा सा शांत हुई लेकिन उसके मन से शक पूरी तरह गया नहीं, कही बिरजू झूठ तो नहीं बोल रहा, ये देखने के लिए विमला ने कहा

 पी विमला – “रुक मैं ललते लेके आती हूं, कहीं सांप न कट ले तुझे” विमला के मन में अजीब सी हलचुल हो रही थी, उसे चुचियो को बिरजू ने नंगा देख लिया, ये सोच ते ही विमला  हलचुल वही किलबिलाहट होने लगी,

 विमला ने साड़ी लिया और जैसे तैस अपने शारिर में चड्ढा लिया, बिरजू बहार इंतजार कर रहा था, विमला बहार लते लेके आई, विमला को ये देखना था के बिरजू को क्या सच में, विमला बिरजू  की तरफ बढ़ने लगे

 झड़ी तक दोनो पोहच गए

 विमला – “ले मैं ललते लेके सनप पे नज़र रखती हु तू मुत ले”

 बिरजू – “तथिक है चाची”

 ये बोलकर बिरजू अपनी लंगोट से लुंड को बहार निकल ने लगा, लेकिन बिरजू का लुंड फूल कर इतना बड़ा हो गया था के लंगोट से बहार नहीं निकल रहा था

 विमला – “क्या हुआ? कह रहा था बड़े जोरो की पेशाब लगी है तो अब क्या हुआ?”

 बिरजू –“पेशाब तो लगी है चाची पर ये बहार नहीं निकल रहा है, और चरण गया है, लगता है लंगोट पूरी खोलनी मिलेगी”

 विमला – “है राम इतना बड़ा हो गया है फिर से एक काम से नहीं कर पाता, मैं उधार मुह फेर लेटी हूं, कर ले जल्दी से”

 विमला दुसरी तारफ मुह फेर के खादी हो गई और इधर बिरजू ने अपनी लंगोट पुरी खोली और छर आवाज करके मुट ने लगा,

 बिरजू – “चाची इधर वि नज़र रखना कहीं न कहीं”

 बिरजू की बात सुंकर विमला बिरजू की तरह थोड़ा पलटी सांप देखने के लिए पर उसे नहीं दिखी, लेकिन विमला की नजर बिरजू के लुंड पर पड़ी, विमला ने देखा बिरजू पूरा नंगा हो कर, यह है मो है  का लुंड, इशश विमला की छुट जो इतनी डर से किबिला रही थी अब उस चुत से थोड़ा थोड़ा रश तपक ने लगा, विमला बोहत कोशिशो के बाद वि अपने आप में कबू नहीं रख पाई, और तिरची नजर से सामने  का मोटा लुंड देखने लगी और अपनी छुट से दाने टपकाने लगी,

 असल में रमेश का लुंड बिरजू के लुंड की तरह इतना लंबा और मोटा नहीं था, रमेश जब विमला की छुट में अपना लुंड डालता था तो विमला को लगता था के एक बच्चा उसकी चुत में अपनी उनगलिया घुसा है, जो हूं।  विमला बोहत काम उत्तेजित हो गई थी, विमला अपने आप को कबू नहीं कर पा रही थी, बिरजू का मोटा लुंड और उसे गिरती पेशब की धर देख कर वो बहल हुई जा रही थी, थोड़ी चला और ऐसा आप पर  रख पाई, बिरजू के पेशाब खतम होते ही उसे बोला

 विमला – “अब तू ये पकड़ और सांप पर नज़र रख, मैं मुत लेति हु” विमला को थोड़ी पेशब लगी थी

 बिरजू – “तथिक है चाची”

 विमला ने ललन बिरजू को थमाया और वही खादी हो कर अपनी साड़ी और पेटीकोट ऊपर कमर तक उतरकर खड़े खड़े ही मुत ना शुरू कर दिया

 बिरजू वोचक्का हो गया, वो फटी आंखों से विमला की विशाल चुतड को देखने लगा, उसे पहले कवि किसी औरत को खड़े हो गए मु ते नहीं देखा था, विमला की पेशाब की धर ऊपर से नीचे गिर कर नीचे गिर गया  फिर से खड़ा होने लगा, बिरजू ने हाट से अपने लुंड को पक्का तो उससे बोहत आराम मिला, ऐसा आराम उसे कवि हाट जोड़ा की मलिश से कवि नहीं आया था, बिरजू ने ख्याल किया के उसके लुंड के अगले उसके कुछ कुछ चिपा  लग रहा है, (बिरजू को क्या पता था के ये मदन रश है जो असली बिरया निकलने से पहले गरम लुंड से निकला है)

 बिरजू – “ये क्या चाची, खड़े खड़े ही?”

 विमला – “तुझको क्या, तू इधर मत देख, सांप पे नज़र रख”

 बिरजू – “तथिक है चाची”

 में पेशा खतम करके विमला ने बिरजू की तरफ देखा तो पाया के बिरजू उसकी नंगी चुतद की तरफ ही देखे जा रहा है, विमला ने अपनी विशाल नंगी चुतद पर अपना हाट फेरा और फिर इतनी सारी और पेटी  पीठ पर वी नजर फेरा, विमला ने देखा पर कुछ नहीं बोल पाई, दो चुपके घर चले आए।

 अगले दिन विमला और बिरजू खेत में काम करने के लिए निकले गए, खेत में काम करते करते दोपहर हो गई, विमला दोपहर का खाना साथ लाती थी,

 विमला – “बिरजू खेत में पानी दे दे, तब तक मैं पास वाले खेत के चक्कर लगाकर आती हूं”

 विमला फिर बनाना नहीं जाने चली गई, इधर बिरजू सोचने लगा, कल वि चाची पास वाले खेत में जाती हूं कहकर नहीं गई थी, कही आज फिर से।  ..

 में सोच ते ही बिरजू के लुंड ने एक झटका दिया और खड़ा होने लगा, बिरजू ने अपने लुंड को कल की तरह मसाला और उसे बोहत आराम मिला, बिरजू के कदम अपने आप तालाब की तरफ बढ़ने बिरजू  अपना लुंड मसाला उसे उतना आराम मिल्टा,

 बिरजू जब तालाब से पहले झड़ियों तक पोहुचा तो वो पेड़ की डालियों पर विमला की चोली और पेटीकोट धुंड ने लगा, अचानक उसे एक डाली पे विमला की फटी चोली और पेटीकोट दिखी दी, हटा बिरगा  ने अपना लुंड मसाला और लंगोट उतर कर नंगा तालाब की तरफ जाने लगा

 न तालाब पर पोहच ते ही बिरजू ने देखा विमला पानी में नहीं रही थी, विमला की साड़ी उसके बदन से लिप्टी हुई थी, विमला की बड़ी बड़ी लौकी जैसी चुचिया उवर के बहार आ गई थी, और गोरी है दूंगा  देख कर बिरजू चला आ रहा था, विमला की नज़र जब बिरजू पर पड़ी तो उसे देखा के बिरजू तालाब की तरफ बढ़ा आ रहा है पूरा नंगा, उसका मोटा लुंड आसमान की तरफ सर उठा है तांग हुआ है

 शर्म से विमला ने साड़ी से अपना मुह धक लिया

 विमला – “क्यू रे बिरजू, मैंने तुझे खेत में पानी देने के लिए कहा था ना तो यह क्यों चला आया?”

 आज विमला उतना गुस्सा नहीं थी बालके बिरजू का मोटा लुंड देखने की चाहत उसकी दिनबदिन बढ़ती जा रही थी,

 बिरजू – “चाची बोहत गर्मी लग रही थी इसिलिए मैं नहीं चला आया, पर तुम तो पास वाले खेत में गई थी ना”

 विमला – “मुझे वि बोहत गर्मी लग रही थी, इसिलिए मैं वि नहने चली आई, अब जल्दी से नाहकर आजा, खाना लगा देती हूं”

 विमला जब उठी पानी से तो बिरजू एक तक विमला के शरीर का दाने आंखों से पाइन लगा, इतनी विशाल मदा हाथी जैसा शारिर अध नंगा देख कर बिरजू का लुंड फूल कर झटके पे झटके देने लगा, विमला नजर से विमला  झटके मरते हुए देख लिया, विमला ने सोचा, इस्स कितना मोटा और लंबा है इस पिद्दी से लड़कों का लुंड, है राम मुझे ये क्या है, इस्का लुंड देख कर, विमला खुद हेयरन थी के बिरजू के लुंड ने उसपर क्या दिया  है, दिन बाकी दिन वो अपना आप खो रही थी

 अगले दिन सूबा खेत में जाने के रास्ते पर झड़ियो में से जाते वख्त विमला को बोहत जोर की पेशब लगी

 विमला – “तू यहीं रुक बेटा, मैं आती हूं”

 बिरजू अब इतने दिनों में समझ गया था के विमला किस काम के लिए झड़ियो में गई है बिरजू को वि थोडा पेशाब करना था तो वो वि झड़ियो में घुस गया

 तो थोड़ी देर जाने के बाद बिरजू ने देखा के विमला अपना साड़ी और पेटीकोट उठे खड़े खड़े ही मुत राही थी उस रात की तरह, बिरजू का लुंड पेशाब का दबाव का बवजूद आधा खड़ा हो गया दिन बाद में बदल गया।  में खड़े खड़े मुत त देख कर

 इधर बिरजू के आने की आहट पा कर विमला पीछे मुड़ी और बिरजू को देखा, विमला को बोहत शर्म आ रही थी दिन के उजले में बिरजू पीछे से उसकी नंगी चुतद देख रहा है ये सोच कर

 विमला – “मैंने तुझे कहा न वहा रुक ने के लिए तो याह क्यों आया?”

 बिरजू – “चाची मुझे वि तो मुत ना है”

 विमला – “तथिक है वही पे कर ले, मेरे ज़दा पास मत आ”

 बिरजू – “तथिक है चाची”

 बिरजू विमला के थोड़े पिचे खड़ा हो कर लंगोट सरकार के मुत ने लगा, दोनो के मुत ने की छर आवाज हो रही थी,

 अचानक बिरजू चिलया, “संप सनप चाची सनप…”

 ये चिलते हुए बिरजू विमला की तराफ बढ़ा और सांप से डर से विमला को पिचे से जकाद लिया,

 इस से पहले के विमला पिचे मिट्टी पति या कुछ सोच पति बिरजू ने विमला को पिचे से जकड़ लिया था, बिरजू का बदन विमला का बदन से एकदम चिपक गया था, इस्का नतेजा ये खा हुआ के विमला जो कमर खड़ा और पेटीको  थी उसकी नंगी चुतड के नीचे से बिरजू का लुंड घुस कर विमला की नंगी चुत पे जकार रागद गया, बिरजू का लुंड इतना लंबा था के विमला ने देखा के जैसे उसके चुत के आला से एक लुंड उग आया है,

 विमला एकदम वोचक्का हो गई और उसके मुह से कुछ से कुछ शब्द वि नहीं निकल पाए

 विमला –” बीर…ओक…….ओह…तू…

 बिरजू –“चाची वो देखो…संप…”

 ये कहे बिरजू ने हाट उठाकर सामने देखने को कह:

 विमला ने देखा के सच बहुत एक काला ज़हरीला सनप उनसे कुछ ही दूर पे था, विमला के वी होते सुख गए

 विमला – “ज़रा सा वि हिलना मत बेटा, चुपचाप खड़ा रे ..”

 बिरजू – “तथिक है चाची…”

 दोनो की पेशाब की धार बंद हो गई थी सनप को देख कर, बिरजू का नंगा लुंड विमला की नंगा चुत पे चिपका हुआ था, बिरजू ने पिचे से दोनो हाट बढ़ाकर विमला के पेट को जकाड के पक्का रखा था।  वो से नहीं गया, बिरजू के लिए अब पेशाब की धर रोक न मुश्किल हो रहा था, अचानक विमला ने महसूस किया के उसके चुत के थिक आला बिरजू के लुंड की मोटे मुंडी से पेशाब की धर निकल में  में गिर रही है

 विमला – “ये … ये तू क्या कर रहा है …”

 बिरजू – “क्या करू चाची, मैं और रोक नहीं पा रहा।”

 बिरजू के पेशाब की धार का एहसास पाए ही विमला वि अब खुद को रोक नहीं पाई और वो मुत ने लगी, विमला की पेशब की धार आला थिक बिरजू के लुंड की मुंडी पर गिर रही थी और फिर जमीं पर

 बिरजू – “ये क्या चाची?”

 विमला – “मैं वि रोक नहीं पा रही बिरजू ..”

 दोनो ही छर आवाज में एक दसरे से चिपके हुए म्यूट ने लगे

 बिरजू – “चाची कितना गरम है तुम्हारी पेशब की धर।”

 विमला – “चुप कर ..दिन ब दिन बदमाश होता जा रहा है”

 बिरजू- “मैंने क्या किया?”

 विमला – “चुप कर..”

 बिरजू – “ये सनप ही तो…”

 विमला – “मैंने कहा न चुपचाप खड़ा रह”

 बिरजू और कुछ नहीं बोला, चुपचाप खड़ा रहा, दोनो का ही पेशाब खतम हो गया था लेकिन वो स्नैप अवि वि वही था, अब विमला और बिरजू दोनो ही काम उत्तेजित हो रहे थे, पेश बिरजू का मैं होता हूं  पे चिपका हुआ था वो फूल कर आसमान की तरफ सर उठान लगा और विमला की नंगा चुत की गरमी पा कर झटके मारने लगा, बिरजू की लुंड के मुंडी के मुह से चिप मदन दाने निकल ने लगा,

 उधार पेशाब खतम होते ही विमला की छुट वि बिरजू के लुंड की गरमी से किलबिला उठा और काम रश चोदने लगा, विमला कुछ वि करके अपने आप को रोक नहीं पा रही थी, इतने डेर खड़े हैं जो बिरजू हैं।  त हिला दुला तो उसके लुंड का मुह विमला की नंगी चुत में रागद गया, बिरजू को बोहत अराम मिला तथिक कुछ वैसा ही जैसा उसे हटा से लुंड को मसाला मिला था, लेकिन ये थोड़ा और जदा अच्छा था की नंगी की  , बिरजू और ज़दा हिलने दुलने लगा और अपनी लुंड का मुह विमला की नंगी चुत में रागद ने लगा  था

 इधर विमला का बुरा हाल था, जब जब बिरजू का लुंड उसकी चुत पे घी जाता तो पुछत करके उसे चुत से थोड़ा काम दाने निकला आटा, विमला इतना काम उत्तेजित शायद ही कवि हुई थी

 कुछ डर बाद ही सन चला गया, संप के जाते ही विमला को ख्याल आया के ऐसे बिरजू के लुंड से अपनी नंगी चुत को रागद ते हुए खड़े रहना तथिक नहीं हो रहा, कितना वि मजा आया हमें पर बिरजू  पाला है, वो एक तरह से मां है उसकी, ये ख्याल विमला के मन में आया और उसकी और की मां जग उठी, विमला पिचे मुदी और बिरजू से कहा

 विमला – “अब छोड मुझे, सांप चला गया है, दरपोक कहीं का”

 बिरजू – “तुम तो जनता हो चाची मैं सांप से कितना डरता हूं, वैसे चाची, वो सांप कितना लंबा और मोटा था”

 विमला से अलग होके बिरजू तवी वि अपना लुंड लंगोट से बहार लटका के खड़ा था

 विमला बिरजू की लुंड की तरफ देखते हुए बोल

 विमला – “हां, बोहत लंबा और मोटा था वो संप, न जाने कोन सी बिल में घुसेगा,”

 बिरजू – “मुजे तो ये समझ में नहीं आता चाची में संपो को बिल कहा से मिल जाता है घुसने के लिए”

 बिरजू की बात ने फिर विमला को थोड़ा काम उत्तेजित किया

 विमला ने साड़ी और पेटीकोट आला कर दिया था, बिरजू के सामने एकदम बेशरम हो कर अपनी छुट पे हाट फिरते हुई बोली,

 विमला – “इतना लंबा और मोटा सांप जहां वि मुह मरता है वही बिल बन जाता है, और एकबार बिल में भूत है तो भूत ही चला जाता है, फिर उसे बिल से और बिल को उससे प्यार हो जाता है”

 विमला की बात बिरजू को थिक तरह से समझ नहीं आया

 बिरजू –“बिल को सांप से प्यार कैसे हो जाता है चाची?”

 विमला – “तू नहीं समझेगा, खेत में चल अवी”

 दोनो खेत में गए और रोज़ की तरह काम ख़तम करके घर आ गए

 खाना खाने से पहले रमेश बोला

 रमेश – “तेरी फटी चोली को ठिक से धक कर खेत में काम करती है ना, कहीं बिरजू की नजर तो उस पर नहीं पढती?”

 विमला ने थोड़ा सोचा और फिर धीरे से बोल

 विमला – “क्या बोले हो तुम वि … बिरजू का दिमाग अवी बच्चे जैसा है ..वो क्या ऐसी बातों में ध्यान दूंगा”

 रमेश – “हां वो तो है, लेकिन फिर वि ध्यान रखना”

 सब लोगो ने खाना खा लिया और रमेश निकल गया खेतो की रखवाली करना, विमला आंचल के साथ अपने कामरे में तो राही थी और उधार बिरजू अपने कामरे में, गर्म इतनी बढ़ गई थी के विमला का पूरा से शार  नींद नहीं आ रही थी,

 विमला मन में आज की घाटा याद कर रही थी, इस्श हाय भगवान ने क्यू इस पिद्दी से लड़कों को इतना मोटा और लंबा लुंड दिया, रमेश को क्यू नहीं दिया, मेरी तो सांस अचानक गई थी जब अब मेरी बिरजू  घीस रहा था, ये सब बाते विमला जीता याद कर रही थी उतना काम उत्तेजित हो रही थी,

 उधर बिरजू वि याही बात सोच रहा था, हाय कितनी नार्म थी चाची के शरीर का वो हिसा जहां मेरा लुंड रागद रहा था, इतना मजा तो हाथो से रागद के वि नहीं आ रहा

 बिरजू ये सब सोच ही रहा था के उसे कुछ आवाज सुनी,

 बिरजू ने सोचा शायद चाची अपने कामरे की खिड़की खोल रही है, लेकिन थोड़ी देर बाद बिरजू ने देखा के उसके और चाची के कामरे की बिचकी जो दरवाजा है वो खुल रहा है

 बिरजू ने देखा के दरवाजा खुलते ही विमला और आई

 विमला का पुरा शरिर पासिन से वीग गया है

 बिरजू – “क्या हुआ चाची?”

 विमला –” बिरजू बेटा, बोहत गरमी लग रही है, नींद नहीं आ रही थी, तेरे काम की वो खिड़की से अच्छी हवा आती है, ये दरवाजा खुला रहेगा तो उस खिडकी की हवा यहां मेरे कामरे “

 बिरजू – “तथिक है चाची, ये दरवाजा खुला रहने दो”

 विमला चली गई, अब थोड़ी हवा आ रही थी और विमला को अच्छा लग रहा था, घर के अंदर लतेन बोहत धीमे जल रही थी, थोड़ी देर बाद विमला उठी और बीच के दरवाजे पे खड़े हो गए हैं, विमला समलैंगिक  से पहले से लतपत अपनी साड़ी और चोली उतरी और झूली हुई रस्सी पे तांग दिया,

 इधर बिरजू को पेशाब लगी और वो उठा, बहार जेक जब वो चाची की खिडकी के पास से गुजर रहा था तब ऐसे ही उसे एकबार और झका और बिरजू का हाल बुरा हो गया

 मैं अंदर आंचल के साथ विमला सिरफ पेटीकोट पेहन कर सो रही थी, उसके कमर का ऊपर का हिसा पुरा नंगा था, इतनी बड़ी गोरी पीठ और इतने बड़े फुली हुई नंगी चुचिया देख कर बिरजू का लुंड फिर झटके मारने लगा  म्यूट के वपस आया और बीच के दरवाजे पर खड़ा हो गया, एक परदा था दोनो कामरो के बीच दरवाजे पे, बिरजू ने धीरे से परदे को हटया और विमला की नंगी बदन का रस मिला हुआ अपना लुंड को, और लगा को  उस्का गरम लुंड मदन रस तपाने लगा

 इधर विमला को परदे के पास किसिकी आहट सुनायी दी, विमला ने झट से मिट्टी कर देखा तो पाया के बिरजू परदे के पास खड़ा पाया, बिरजू ने झट से अपना लुंड लंगोट में घुसा दिया, विमला गुसा हो गई थी उस चुकी बिरजू  को चुपके के देखा और एक साथ काम वासना का शिकार वि हो रही थी

 विमला – “इतनी रात को यह क्या कर रहा है”

 बिरजू –“वो…वो ..चाची नींद नहीं आ रही है”

 विमला (गुसे से पेटीकोट को उठाकर चुचियो को धक्ते हुए) – “नींद नहीं आ रही है तो मैं क्या करू? याहा खड़े खड़े क्या कर रहा है”

 असल में विमला और ही और काम उत्तेजित हो रही थी लेकिन उसमें और की ममता उससे रोक रही थी, इसिलिए विमला न चाहते हुए वि बिरजू को दांत रही थी

 बिरजू बोहत डर गया था लेकिन अचानक उसके दिमाग में एक बात आई

 बिरजू – “चाची वो पहले की तरह मुझे कहानी सुनगी तो मुझे नींद आ जाएगी”

 विमला – “क्या कहता है, तू अवि बच्चा थोड़ी है”

 बिरजू – “पर चाची कहानी सुनागी तो मुझे जल्द ही आ जाएगी और मेरे कामरे में खिडकी की हवा वि ज़दा है, तुम्हारे गरमी से राहत वी मिल जाएगी”

 बिरजू की इस बात ने विमला को सोचने पर मजबूर कर दिया;  सही में विमला के कामरे से ज़दा हवा बिरजू के कामरे में था, और आंचल वि सो चुकी थी विमला ने सोचा बिरजू को कहानी सुना कर नींद आ गई तो वो वि आराम से वही तो शक्ति है क्यू की बिस्टार के काम बड़ा

 विमला ने पेटीकोट को थिक से अपने चुचियो पे बंध और कहा

 विमला – “चल मैं आती हूं,”

 बिरजू के काम में आके विमला ने कहा

 विमला –“वो खिड़की के पास में सुनूंगी”

 बिरजू – “तथिक है चाची, जैसा तुम कहो”

 विमला पीठ के बाल गई खिडकी के पास, विमला का मुह आसमान की तरफ था, बिरजू ले ने ही वाला था विमला की नजर उसकी लंगोट पर पड़ी विमला बोली

 विमला – “ये क्या तूने फिर से खेत में जाने वाली लंगोट पेहन ली, कितनी बार तुझे कहा है के सोटे वक्त पुरानी लंगोट पहचान कर”

 बिरजू – “तथिक है चाची, पुरानी वाली पहचान लेता हूँ”

 ये कहते हैं बिरजू उठा और विमला के नज़रो के सामने अपनी लंगोट उतरी और पुरानी फटी हुई लंगोट पेहन ली, इस पुरानी लंगोट सामने से इतना फटा हुआ था के बिरजू का पूरा लुंड विमला के सामने लंगोट से।  “इस्सशः हे भगवान, खड़ा न होने के बवजूद कितना लंबा और मोटा है इस पिद्दी से लड़कों का लुंड” इशश

 बिरजू विमला की दिन तारफ ले गया, बिरजू के शारिर का बया हिसा बिस्तर पर था और दिन हिसा आसमान की तरफ, विमला के सोटे ही बिरजू ने बचपन की तरह अपना दिन जोड़ी उठा के विमला की दोनो पाओ के बीच में

 इस्का नतीजा ये हुआ के बिरजू का लुंड विमला की दिन पाओ की जंघो को चुनने लगा

l विमला – “क्या कर रहा है?”

 बिरजू – “चाची तुम तो जनता हो बचपन से मुझे ऐसे ही कहानी सुनने की आदत है”

 विमला – “पर अब तू बच्चा नहीं रहा बिरजू,”

 बिरजू –“कहानी सुनते वक्त मैं छोटा सा बच्चा ही हु चाची”

 विमला को अपने दिन घुटनो के ऊपर दिन जांगो पे बिरजू के लुंड का एहसास अच्छी तरह से हो रहा था, उसके अंदर की ममता उस से बार कह रही थी के बिरजू को थिक से उसके शरिर से अलग सोने में  उससे ऐसा करने से बार रोक रही थी, अंत में विमला की और की काम वासना की ही विजय हुई और विमला बोली

 विमला – “तथिक है मेरा छोटा सा बिरजू, कहानी सुन।”

 बिरजू – “सुनाओ चाची” ये कहके बिरजू और विमला से चिपक गया,

 गरमी बोहत थी लेकिन दोनो एकदम खुली खिड़की के पास सो रहे थे, और हवा ज़ोर से बह रही थी, इसिलिए दोनो का शारिर चिपका होने के बावजूद उन गर्मी नहीं लग रही थी

 विमला – “बोहत दिनो पहले एक राजा था ….”

 बिरजू – “ये कहानी तो बचपन में बोहत बार सुनी है चाची… कोई दसरी कहानी सुनाओ ना।”

 विमला सोच में पद गई और फिर उसके काम उत्तेजित शारिर ने उसके दिमाग में एक अनोखी कहानी का जन्म दिया, विमला ने कहानी सुरु की

 विमला – “तथिक है एक दसरी कहानी सुनाती हु..

 एक गांव में एक औरत थी।  .पुरा गोरा बदन।  .

 बिरजू बीच में कट ते हुए बोला “बिलकुल तुम्हारी तारः चाची?”

 विमला – “हां बिलकुल मेरी तरह। .उसकी एक बेटी थी और उसकी बड़ी बहन का एक लड़का जिससे उसे अपने बेटे की तरह पाला था।”

 बिरजू फिर विमला की बात काट ते हुए बोला

 बिरजू –“बिलकुल मेरी तारः चाची?”

 विमला – “हां बिलकुल तेरी तरह था वो लड़का… रोज दोपहर को नदी पे वो औरत…”

 बिरजू – “क्या चाची …” ये कहके बिरजू ने विमला की आँखों की तरफ देखा, विमला ने वि बिरजू की आँखों में देखा और कहा

 विमला –“…नंगी हो कर नहीं जाति थी…(बिरजू की तरफ देखते हुए)…पुरी नंगी हो कर”

 विमला के इतना कहता ही बिरजू ने अपना लुंड विमला की जंघो में ज़ोर से रगड़ा और विमला को कासके अपने दो हाथो से जकाद लिया

 बिरजू-“फिर क्या हुआ चाची?”

 विमला बिरजू के उत्तेजना का करन समझी थी और उसका वि बदन गरम हो रहा था

 विमला –“उसने अपने दीदी के लड़के को मना किया था के जब वो नदी पे न जाने जाए तो वो मैट आए लेकिन फिर वो लड़की हर रोज़ दोपहर को नदी पे अपनी चाची को नंगा देखने के लिए जाता था

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