मैं दिवाना बहनों का अध्याय 4
कांता और डॉली एक साथ बोलीं- तुमको कैसे पता चला था कि हम सेक्स कर रहे हैं?
मैं- बस पता चल गया किसी तरह..
कांता और डॉली- बताओ ना प्लीज़..
मैं- ओके.. इधर आओ.. चलो मेरे कमरे में..
कांता और डॉली- लो आ गए.. अब बोलो?
मैं टीवी की तरफ़ इशारा करते हुई बोला- उधर देखो..
कांता और डॉली- क्या है.. यह तो टीवी है।
मैं- हाँ लेकिन उसमें क्या चल रहा है.. वो तो देखो।
कांता और डॉली- ऊऊओह.. मतलब उस कमरे में कैमरा लगा हुआ है और उसका कनेक्शन इस कमरे में है..
मैं- हाँ..
कांता और डॉली- तो हम लोगों ने जो कुछ किया.. वो सब इसमें रेकॉर्ड हो गया होगा?
मैं- हाँ सब कुछ..
कांता और डॉली- जरा दिखाओ तो..
मैं- ओके.. ये लो..
मैंने वीडियो प्ले कर दिया।
कांता और डॉली- यह तो लग रहा है कोई लाइव इंडियन पॉर्न चल रहा है।
मैं- और तुम दोनों पॉर्न स्टार की तरह..
कांता और डॉली- हाँ लग तो रहा है।
मैंने आँख मारते हुए कहा- तो क्या अपलोड कर दूँ नेट पर? फेमस हो जाओगी..
कांता और डॉली- नहीं.. नहीं होना फेमस.. और हाँ इसको अभी डिलीट करो.. किसी को दिखना नहीं चाहिए।
मैं- ओके कर दूँगा..
कांता और डॉली- ओके.. चलो ना कुछ शॉपिंग करने चलते हैं।
मैं- हाँ चलो किसी मॉल में चलते हैं।
कांता और डॉली- ओके।
हम लोग रेडी हुए और एक मॉल में पहुँच गए और कुछ ड्रेस खरीदने के बाद लेडीज फ्लोर पर गए.. तो वहाँ बहुत सारी हॉट ड्रेस भरी पड़ी थीं.. तो मैंने उन दोनों को सजेस्ट किया.. तो दोनों ने अपने-अपने साइज़ के हिसाब से कुछ कपड़े ले लिए।
उनको ये सब इतने अधिक पसंद आए थे कि उन दोनों ने मिल कर लगभग 22 जोड़े ब्रा-पैन्टी खरीद लिए थे।
हम लोग घूमते रहे खूब मस्ती की और घर आ गए.. तो कांता ने अपने बैग से एक पैकेट निकाला.. उसमें रबर के 6 सैट लंड के थे।
मैं- ये क्यों लिए?
कांता- रात को पता चलेगा।
मैं- ओके।
उसके बाद दोनों ने सारे ड्रेस पहन कर मुझे दिखाए और जब रात हो गई तो खाना आदि खाने के बाद हम लोग रेस्ट करने लगे।
कुछ देर रेस्ट करने के बाद दोनों कपड़े उतार कर मेरे कमरे में आ गईं, मेरी जरा आँख लग गई थी.. तो दोनों ने मुझे उठाया।
मैं बोला- मेरे जिस्म में दर्द हो रहा है।
तो दोनों मेरे सारे कपड़े उतार दिए और अपनी चूचियों को तेल में डुबो कर मेरे बदन पर घुमाने लगीं।
मैं ये चूचियों से मसाज करना पॉर्न मूवी में देख चुका था.. लेकिन आज पहली बार मेरे साथ भी यही हो रही थी।
अब तो दोनों की चूचियों भी बड़ी और सख्त हो चुकी हैं.. मेरे मिलने से पहले छोटी-छोटी टेनिस की गेंद जैसे आकार की थीं। लेकिन मेरे मिलने के बाद तो फुटबाल सी हो गई हैं तो मसाज भी बड़ी आसानी से हो रही थी और मुझे मजा भी आ रहा था।
फिर मैं पीछे को मुड़ गया.. तो दोनों अपने हाथों और चूचियों से मेरी पीठ पर मसाज देने लगीं और मसाज के बहाने मेरे पूरे शरीर में तेल लग गया था।
दीदी ने कांता के बुरड़ों पर तेल लगाया और मेरे पीठ पर बिठा कर आगे को धकेल दिया.. तेल के कारण फिसलन होने के कारण वो सीधे मेरे सिर के पास आ कर रुकी। फिर तो दोनों इसी तरह आगे-पीछे करते हुए मेरी पीठ की मालिश करती रहीं और मैं बुरड़ों की इस मसाज का मजा लेता रहा।
कुछ देर मसाज का मजा देने के बाद दोनों सामने झुक कर गान्ड हिलने लगीं.. एक तो तेल लगने के बाद गान्ड वैसे ही खूबसूरत दिख रही थी और हिलने के बाद तो और भी कयामत लग रही थी।
अब मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ और मैं भी उठ गया.. दोनों में ज्यादा सेक्सी दीदी की गान्ड लग रही थी.. सो मैंने दीदी को गोद में उठाया और उसकी बुर के पास लंड सटा कर झटके मारने लगा।
तभी मैंने देखा की कांता भी रबर के लंड को पहन कर आ गई। मैं ये देख कर समझ गया कि इसका क्या इस्तेमाल होगा। मैं उसको देख कर मुस्कुरा दिया।
कांता- दीदी ने एक साथ दो लंड का मजा नहीं लिया है.. सो आज उसका मन पूरा कर देती हूँ।
मैं- हाँ कर दो।
डॉली- क्या करने वाले हो तुम दोनों?
कांता और मैं- कुछ नहीं.. बस देखती जाओ.. आगे-आगे होता है क्या?
मैं नीचे लेट गया और दीदी को अपने ऊपर लिटा लिया और बुर में लंड डाल दिया और अन्दर-बाहर करने लगा।
उसकी गान्ड का छेद कांता के सामने थी.. सो कांता ने उसकी गान्ड के मुँह पर लंड रखा.. और झटका मारना चाहा.. लेकिन वो फिसल कर बाहर आ गया।
उसे अभी नकली लौड़े से गान्ड मारने का अनुभव नहीं था ना.. सो मैं रुक गया कांता के उस रबर वाले लंड को पकड़ कर दीदी की गान्ड के छेद के पास ले गया। मैंने इशारा किया और तभी कांता ने झटका मारा.. तो लंड सीधा गान्ड में घुस गया.. रबर का ये लौड़ा मेरे लौड़े से बहुत पतला लंड था। तब भी दीदी की आह्ह.. निकल गई।
अब हम दोनों साथ झटके मारने लगे और दीदी भी 2 लंड एक साथ ले कर मजे ले रही थी।
कुछ देर ऐसे चुदाई करने के बाद मैं दीदी की दोनों टाँगों के बीच आ गया और दोनों टाँगों को कंधे पर रख कर झटके मारने लगा।
फिर कुछ देर बाद मैंने दीदी को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर लेट गया लंड को बुर में पेल कर दीदी को चुम्बन करने लगा।
तभी कांता मेरे बुरड़ों पर फिर से तेल लगाने लगी और लगाते-लगाते ही वो मेरी गान्ड में उंगली घुसेड़ने लगी.. तो मैं उसको हटाने लगा।
तो दीदी ने मुझे पकड़ लिया और कांता अपना रबर वाला लंड मेरी गान्ड में डालने लगी.. वो पेन जितना पतला था। उसने पूरा अन्दर डाल दिया और मेरे ऊपर लेट गई.. तो मैंने उसको हटा दिया।
अब मैंने दीदी को छोड़ कर कांता को उल्टा किया और उसकी गान्ड के छेद पर अपना लंड लगा कर एक ही झटके में पूरा गान्ड की जड़ तक अन्दर पेल दिया.. और जोरदार झटका मारने लगा।
कांता कराह उठी..
गान्ड चुदाई के बीच-बीच में मैं उसके बुरड़ों पर भी चपत मारने लगा। कुछ देर बाद बुरड़ों को छोड़ कर उसकी चूचियों को मसलने लगा और पीछे से गान्ड में झटके मारता रहा। मैंने कांता को तब तक नहीं छोड़ा.. जब तक मैं झड़ नहीं गया और झड़ कर हम तीनों बिस्तर पर एक साथ लेट गए।
डॉली- क्या बात है आज कांता की जबरदस्त चुदाई हो गई।
कांता- आप को भी तो आज मजा आया होगा.. एक साथ दो लंड लिए हैं।
डॉली- हाँ बहुत मजा आया।
मैं- कांता को तो एक साथ दो लंड खाने का अच्छा ख़ासा अनुभव है।
डॉली- क्या सच में?
मैं- उसी से पूछ लो.. बताओ कांता।
कांता- हाँ..
डॉली- कब और किसके साथ?
तो मैंने और कांता ने मिल कर पूरी कहानी बता दी..
कांता- दीदी आप भी लेना चाहोगी क्या?
डॉली- नहीं बाबा..
कांता- ओ के!
डॉली- और तुम भी छोड़ दो.. घर में रहने तक ये सब ठीक है.. लेकिन घर से बाहर नहीं लेना.. कल को किसी को पता चल गया.. तो बदनामी होगी।
कांता- नहीं पता चलेगा..
डॉली- क्यों नहीं पता चलेगा? कहीं उससे झगड़ा हुआ और उसने सबको बता दिया तो?
कांता- नहीं ना बताएगा..
डॉली- क्यों नहीं बताएगा।
कांता- क्योंकि राजा उसकी दोनों बहनों को चोद चुका है।
डॉली- क्या सच में?
कांता- उसी से पूछ लो.. बताओ राजा..
मैं- हाँ दीदी।
डॉली- अरे ये लंड है कि क्या है.. किसी को नहीं छोड़ा है क्या?
मैं- क्या करूँ.. मैं तो सम्भल जाऊँगा.. लेकिन ये लंड है कि मानता ही नहीं है। जो मुझे पसंद आ जाती है.. यह लंड अपना रास्ता खुद ही ढूँढ लेता है।
कांता- अब तक कोई ऐसी लड़की है.. जिसके पीछे तू पड़ा हो.. लेकिन वो नहीं पटी हो तुमसे?
मैं- हाँ हैं ना.. बहुत हैं.. लेकिन उनमें से एक है.. जिसके पीछे मैं पिछले 3 साल से पड़ा हुआ हूँ.. लेकिन लाइन ही नहीं दे रही है।
डॉली- कौन है?
मैं- साधना मेम.. मेरे कॉलेज में टीचर हैं.. पिछले 3 साल से उनके लिए तड़फ रहा हूँ.. लेकिन साली की बुर अब तक मिली नहीं है।
डॉली और कांता- मिल जाएगी.. जल्दी ही.. मुझे पूरा भरोसा है।
मैं- क्या बात है.. इतना भरोसा है मुझ पर?
डॉली और कांता- हाँ क्योंकि जो लड़का अपनी सग़ी बहन को नहीं छोड़ता है.. वो हरामी अपनी टीचर को क्या छोड़ेगा।
मैंने हँसते हुए- हाँ यह बात भी सही है.. वैसे तुम दोनों अब मेरी बहन नहीं हो..
डॉली और कांता- हाँ हमें भी भाई बोलते हुए अच्छा नहीं लगता।
मैं- हाँ आज से मैं दीदी और छोटी नहीं बोलूँगा.. आज से डॉली को बड़ी बीवी और कांता को छोटी बीवी बोलूँगा।
डॉली और कांता- ओके.. और हम दोनों तुमको पतिदेव।
मैं- हाँ लेकिन सिर्फ़ हम लोगों के बीच ही.. बाहर जैसे हम लोग एक-दूसरे से जैसे बात करते थे.. वैसे ही बात करेंगे।
डॉली और कांता- ओके मेरे पतिदेव।
मैं- अच्छा मेरी दोनों बीवियों.. अब हमें सोना चाहिए..
दोनों मेरी बाँहों में नंगी ही सो गईं.. जब मैं सुबह उठा.. तो देखा बिस्तर पर मैं अकेला सोया हुआ हूँ। मैं मन ही मन सोचने लगा कि मेरी दोनों बीवियाँ कहाँ हैं।
तो मैंने आवाज़ दी.. तो दोनों एक साथ अपनी गान्ड मटकाती हुई आईं।
मैं- हैलो स्वीटी.. कल रात मज़ा आया..
कांता और डॉली एक साथ बोलीं- हाँ.. बहुत मजा आया.. वैसे भी अब तो आप हमारे पति बन गए हैं।
मैं- अभी नहीं.. आज हम लोग शादी करते हैं.. तब होंगे।
डॉली- शादी.. वो कैसे करोगे?
मैं- मेरे पास एक आइडिया है।
कांता- क्या आइडिया है बताओ.. कोर्ट मैरिज करोगे क्या?
मैं- नहीं.. आज हम अपने फ्लैट में शादी करेंगे और सिर्फ़ हम तीनों ही होंगे.. मोमबत्ती जला कर फेरे लेंगे।
डॉली और कांता एक साथ चहकीं- वाउ रोमाँटिक आइडिया है।
मैं- तो चलो रेडी हो जाओ।
डॉली और कांता फिर एक साथ बोलीं- तो हम दोनों पहले पार्लर जाते हैं।
मैं- पार्लर क्यों?
डॉली- अरे यार आज शादी है हमारी.. तो सजने तो जाना होगा ना..
मैं- हाँ ये भी सही है.. तो तुम दोनों पार्लर जाओ और मैं मार्केट से कुछ सामान लेकर आता हूँ।
वे दोनों एक साथ बोलीं- ओके..
मैं मार्केट से दुल्हन का सारा सामान ले आया और तब तक दोनों भी पार्लर के लिए रेडी होकर आ गई थीं।
मैंने दोनों को कपड़े दे दिए और बोला- शाम तक सब कुछ रेडी रखना..
मैं अपने काम से चला गया। शाम को जब मैं घर लौटा.. तो मैंने देखा कि मेरे घर के एक हॉल में दोनों सजी-धजी बैठी हुई थीं.. और हॉल पूरा सज़ा हुआ था।
मैं उनको इस रूप में देखकर मुस्कुराया और जल्दी से अपने कमरे में जाकर तैयार होकर आ गया।
अब मैं वापस हॉल में आ गया। मैंने जींस और कुर्ता पहन रखा था.. लेकिन वो दोनों भी लहंगा-चुन्नी में मस्त आइटम लग रही थीं।
डॉली दीदी ने लाल लहंगा और डोरी वाली चोली पहनी हुई थी और कांता ने हल्के गुलाबी रंग का लहंगा और जरी के काम वाली चोली पहनी थी।
उन दोनों के बुरड़ों के उभार मस्त दिख रहे थे और चोलियाँ चूचियों तक ही थीं। चोली और लहंगे के अलावा बाकी का भाग नंगा था.. मतलब कमर.. पेट पूरा नंगा था.. मेरा तो फिर से लंड खड़ा हो गया।
मैं- दोनों हॉट और सेक्सी लग रही हो.. एकदम कंटाप माल लग रही हो।
कांता बोली- ऊऊहह.. तैयार भी तो इसी लिए हुए हैं।
मैं- मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है यार..
डॉली- तो कंट्रोल करो.. अभी कुछ नहीं मिलने वाला है।
मैं- कुछ नहीं.. थोड़ा बहुत तो मिलना चाहिए ना यार..
कांता- नो.. कुछ नहीं.. सब कुछ मिलेगा.. लेकिन कुछ देर बाद..
मैं- वही तो.. कुछ देर इंतज़ार नहीं हो रहा है.. मन हो रहा है कि बस शुरू हो जाऊं और खास करके तुम दोनों ने कपड़े भी इतने हॉट पहने हैं कि मैं तो क्या.. कोई बूढ़ा भी कंट्रोल नहीं कर पाएगा।
डॉली और कांता एक साथ हंसने लगीं।
मैं- ह्म्म्म्म .. ओके.. जो करना है.. जल्दी करो।
डॉली- हाँ बस अब शुरू ही कर देती हूँ।
मैं लण्ड पर हाथ फेरता हुआ बोला- हाँ जल्दी करो।
कांता- ओके आओ.. अब शुरू करते हैं।
इतना सुनते ही मैंने सीधा डॉली को बांहों में लिया और चूमने लगा।
तभी कांता बीच में आई और हम दोनों को अलग करते हुए बोली- अभी रूको.. वो हम दोनों को हाथ पकड़ कर सामने एक जगह पर ले गई.. जहाँ एक मोटी मोमबत्ती रखी थी। उसने मोमबत्ती जलाई और मेरे कंधे पर एक धोती रख कर डॉली की ओढ़नी से गाँठ बाँध दी और बोली- अब फेरे शुरू करो..
मैं बोला- मैं फेरा अलग स्टाइल में शुरू करूँगा।
मैंने डॉली को गोद में उठा लिया.. मेरा एक हाथ उसकी नंगी कमर पर था और दूसरा नंगी पीठ पर कर घूमने लगा।
दो फेरे लेने के बाद मैंने कांता को भी बुला लिया और हम तीनों ने मिल कर फेरे पूरे किए। फेरे पूरे होने के बाद मैंने दोनों की माँग को भरा और मंगलसूत्र पहनाया।
इस तरह हम तीनों की शादी हो गई और आज मुझे एक नहीं दो-दो बीवियाँ चोदने को मिल गई थीं। मैंने दोनों को गले से लगाया।
मैं- अब तो तुम दोनों मेरी बीवियाँ बन गई हो.. चलो सुहागरात मनाते हैं।
डॉली और कांता एक साथ बोलीं- हाँ हम दोनों कमरे में जा रही हैं.. ‘आप’ कुछ देर में आना।
मैं- आप?
डॉली- हाँ.. पत्नियाँ अपने पति का नाम नहीं लेती हैं।
मैं- ओहो.. तो चलो हम भी साथ चलते हैं।
डॉली और कांता एक साथ बोलीं- नो कुछ देर बाद आना.. आप हमारे पतिदेव हैं।
मैं- अपने पति को तड़फा रही हो..
डॉली- नहीं तड़फा नहीं रही हूँ.. बस कुछ देर बाद आ जाइएगा।
मैं- ठीक है.. जैसी आपकी इच्छा।
कांता- हाँ ये हुई ना हमारे पति जैसी बात..
दोनों गान्ड मटकाती हुई कमरे में चली गईं और मैं लण्ड सहलाता हुए इंतज़ार करता रहा। कुछ देर इंतज़ार के बाद मुझे अन्दर बुलाया.. मैं जैसे ही अन्दर गया।
मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि ये मेरा ही कमरा है.. क्योंकि पूरा कमरा बड़े ढंग से सजाया हुआ था.. हल्की दूधिया रोशनी जल रही थी और उस लाइट में मुझे तो सिर्फ़ मेरी दोनों बीवियों के दूधिया गुंदाज बदन दिख रहे थे। मैं जैसे ही अन्दर गया.. उन दोनों ने मुझे एक कुर्सी पर बैठाया और बोलीं- आओ स्वामी आपका मुँह मीठा कराते हैं।
डॉली एक रसगुल्ले को लेकर मेरी तरफ़ आई.. मैंने आधा रसगुल्ला अपने मुँह में दबा कर डॉली को अपनी तरफ़ खींचा और बचा हुआ आधा रसगुल्ला उसको खिलाने लगा।
जैसे ही हम दोनों नजदीक आए.. हम रसगुल्ला खाने के साथ ही होंठों का चुम्बन करने लगे।
अभी तो रसगुल्ला दुगना मीठा लग रहा था। मीठा रसगुल्ला और ऊपर से डॉली के रसीले होंठ.. आह्ह.. मजा आ गया।
कुछ देर बाद हम अलग हुए और मैं कांता को भी किस करने लगा.. कुछ देर चुम्बन करने के बाद हम अलग हुए।
कांता- अब आगे दीदी के साथ मजा करो.. मैं बाद में आऊंगी। वैसे भी मैं एक बार मना चुकी हूँ.. दीदी का इधर फर्स्ट-टाइम है।
मैं- तब तक तुम क्या करोगी?
कांता- लाइव शो का मजा लूँगी.. इतना सेंटी क्यों हो रहे हो.. इसके बाद मैं ही आने वाली हूँ।
मैं- ओके मेरी जान.. लव यू।
कांता- ओके.. एंजाय करो।
अब कांता सामने सोफे पर बैठ गई और डॉली दूध का गिलास लेकर मेरे पास आई। मैंने थोड़ा दूध पिया और थोड़ा उसको भी पिलाया।
मैंने उसको गोद में उठा लिया और बोला- मुझे तुम्हारे ये वाले दूध पीना है।
मैं उसकी चोली के ऊपर की खुली जगह पर किस करने लगा.. तो उसके गहने मुझे दिक्कत करने लगे। मैंने उसको बिस्तर के पास बैठाया और एक-एक करके उसके सारे गहने उतार दिए।
फिर गर्दन और चूचियों के बीच की जगह पर किस करने लगा.. साथ ही मैं उसकी कमर को भी सहलाए जा रहा था।
वो मुझे पकड़े हुए थी और मैं चोली के ऊपर से ही उसकी चूचियों को चूस रहा था। कुछ देर ऐसा करने के बाद मैं उसके पीछे गया और उसकी गर्दन पर किस करने लगा और आगे हाथ बढ़ा कर उसकी मस्त चूचियों को भी दबाने लगा।
उसकी गर्दन पर किस करते-करते मैं नीचे को बढ़ने लगा और उसकी नंगी पीठ पर किस करने लगा.. साथ ही मैं उसकी चूचियों को भी दबाता रहा।
कुछ देर किस करने के बाद उसकी चोली की कपड़े की चौड़ी पट्टी को अपने दांतों के बीच दबा कर खींच दिया.. चोली एकदम से खुल गई। मैंने चोली को हटा दिया और अब वो ऊपर सिर्फ़ रेड ब्रा में थी.. जो पीछे एक पतली सी डोर से बन्धी हुई थी। जिसकी वजह से नीचे से उसकी आधी चूचियों को ऊपर की तरफ़ उठी हुई थीं।
वैसे भी डॉली की चूचियाँ मेरी जिन्दगी की अब तक की सबसे बेस्ट चूचियाँ थीं। एकदम गोल बॉल की तरह.. और दूध की तरह गोरी चूचियां.. एकदम टाइट.. अगर ब्रा नहीं भी पहने.. तब भी एकदम सामने को तनी रहें.. झूलने की कोई गुंजाइश नहीं।
मैं उसकी अधखुली चूचियों को ही चूमने लगा।
कुछ देर किस करने के बाद मैं उसकी ब्रा के अन्दर उंगली डाल कर निप्पल को ढूँढने लगा।
वैसे ढूँढने की ज़रूरत नहीं थी.. निप्पल खुद इतना कड़क था.. जो कि दूर से ही ब्रा के ऊपर दिख रहा था।
मैंने उसके निप्पल को पकड़ कर ब्रा से बाहर निकाल लिया। गुलाबी निप्पल को देख कर लग रहा था कि वो बाहर निकलने का इंतज़ार ही कर रहा था.. मानो बुला रहा हो कि आओ और चूसो मुझे..
मैं कौन सा पीछे रहने वाला था मैं भी टूट पड़ा उस पर.. मैं उसके एक निप्पल को मसलने लगा और दूसरे को होंठ के बीच दबाने और चूसने लगा।
कुछ देर बाद मैंने अधखुली चूचियों के ऊपर चिपकी ब्रा भी खोल दिया.. जैसे ही ब्रा को खोला.. उसकी दोनों चूचियाँ छलकते हुए बाहर आ गईं।
मैं पहले भी बता चुका हूँ कि डॉली की चूचियाँ मेरे अब तक की सबसे बेहतरीन चूचियाँ हैं.. तो जैसे ही उसकी मदमस्त चूचियाँ उछलते हुए बाहर आईं.. मैं चूचियों पर टूट पड़ा।
मैं उसकी मस्त चूचियों को चूसने और मसलने लगा और पूरी चूचियों को मुँह में लेने की कोशिश करने लगा। वो इतनी बड़ी गेदें थीं.. जिनके साथ खेल तो सकते थे.. लेकिन खा नहीं सकते थे। मैं बस उसकी गेदों से खेलता रहा। वो भी चूचियों को मसलवाने के मज़े ले रही थीं।
अब तो वो ऊपर से पूरी नंगी थी.. एक तो गोरा बदन और दूधिया रोशनी में कयामत लग रही थी। मैं उसके पूरे बदन को चूमता-चाटता रहा।
तभी कांता बोली- दीदी आपके कपड़े उतर गए और पतिदेव अभी तक कपड़े में हैं।
डॉली हँसते हुए मेरे कपड़े उतारने लगी, मैंने भी अपने कपड़े उतारने में उसका साथ दिया, अब मैं भी ऊपर से पूरा नंगा हो गया, मैंने उसको अपनी तरफ़ खींचा और गले लगा लिया।
हम दोनों एक-दूसरे के बदन पर किस करने लगे और एक-दूसरे को जकड़ कर पकड़े हुए थे। अब मैं उसके बुरड़ों को लहंगे के ऊपर से ही मसलने लगा और वो मेरे लंड को सहलाने लगी।
मेरा लंड तो पहले से ही खड़ा था ही.. और उसके पकड़ने के बाद तो और टाइट हो गया.. मेरा लौड़ा बिल्कुल लोहे की तरह सख्त हो गया था।
डॉली ने उसको पैंट से बाहर निकाला.. तो आज़ादी महसूस हो रही थी..
लेकिन वो आजादी अधिक देर तक कायम नहीं रह सकी, डॉली लंड को मसलने लगी और वो मेरे पेट पर किस करते हुए नीचे की तरफ़ बढ़ रही थी।
वो मेरे खड़े लंड के आस-पास किस करने लगी। मैंने तो आज की सुहागरात की तैयारी में पहले से ही झांटों का जंगल साफ़ कर रखा था।
वो अपने मुलायम होंठ से मेरे लंड पर किस करने लगी.. और कुछ देर में लंड के ऊपर वाले भाग को चाटने लगी। वो मेरे लंड को पूरा अन्दर लेने की कोशिश करने लगी, कुछ ही देर के बाद पूरा मुँह में लेकर चूसने लगी।
आज पहली बार मुझे महसूस हो रहा था कि यह दिल से लंड चूस रही है.. क्योंकि बता नहीं सकता.. कितना मज़ा आ रहा था।
वो मेरा लंड चूस रही थी और मैं उसके सिर को सहला रहा था। वो मेरे लंड को मसल-मसल कर चूस रही थी.. जैसे किसी पोर्न मूवी में लंड चूसते हैं। मैं तो अन्दर तक हिल गया था.. उसने मुझे लंड चूस कर ही आधा मज़ा दे दिया था।
वो मेरा लौड़ा तब तक चूसती रही.. जब तक मैं झड़ नहीं गया।
मेरे झड़ने के बाद वो मेरा सारा माल पी गई और लंड को चाट-चाट कर साफ़ कर दिया, फ़िर मेरे बगल में लेट गई और मेरे बदन पर उंगली फिराने लगी।
मैं उठा और उसके लहँगे को घुटनों तक उठा दिया और उसके पैरों को चूमने लगा।
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उसके एकदम चिकने पैरों को चूमते-चूमते मैं ऊपर को बढ़ने लगा और अपने सिर को उसके लहँगे के अन्दर घुसेड़ दिया। अब मैं उसकी मरमरी जाँघों को चूमने लगा। कुछ देर तक ऐसा करने के बाद मेरे हाथ उसकी पैन्टी पर गए.. जो गीली हो चुकी थी। मुझसे अब बिल्कुल भी कंट्रोल नहीं हुआ और मैं उसकी भीगी पैन्टी को चाटने लगा।
मुझे नमकीन सा स्वाद लग रहा था.. और कुछ देर यूं ही पैन्टी के ऊपर से चाटने के बाद मुँह से ही पैन्टी को साइड कर दिया और उसकी गुलाबी बुर को जीभ से चाटने लगा।
उसने भी आज ही बुर को साफ़ किया था.. एक भी बाल नहीं था और ऊपर से इतनी मखमल सी मुलायम बुर.. आह्ह.. मजा आ गया।
आप सोच सकते हो मुझे उसकी बुर को चाटने में कितना मजा आ रहा होगा। लेकिन उसकी पैन्टी बार-बार बीच में आ जा रही थी.. तो मैंने उसकी पैन्टी को उतार दिया।
अब नंगी बुर देख कर मैं उसको किस करने लगा और अपनी पूरी जीभ बुर के अन्दर डाल कर चूसने लगा। मेरी पूरी जीभ बुर के बहुत अन्दर तक चली जा रही थी.. वो भी मस्त हो कर अपनी बुर को उठा रही थी।
कुछ देर ऐसा चला.. फिर मैंने उंगली से बुर की फांकों को अलग किया और जीभ को और अन्दर तक ले गया।
उसकी ‘आह्ह..’ निकल गई.. मैं पूरी मस्ती से जीभ को बुर में अन्दर-बाहर करने लगा।
उसके मुँह से सिसकारी निकल रही थी। कुछ देर ऐसा करने के बाद उसका बदन अकड़ने लगा और उसने अपनी जांघों से मेरे सिर को दबा लिया.. तभी अचानक उसकी बुर ने एक जोरदार पानी की धार छोड़ दी.. जिससे मेरा पूरा चेहरा भीग गया। वो झटके ले-ले कर पानी छोड़ती रही और फिर निढाल हो कर लेट गई।
कुछ देर बाद मैंने भी उसको छोड़ दिया करीब 5 मिनट के बाद मैं फिर से हरकत में आ गया और उसकी नाभि पर उंगली घुमाने लगा.. तो वो खुद मेरे ऊपर लेट गई और ‘लिप किस’ करने लगी।
कुछ देर ‘लिप किस’ करने के बाद हम दोनों एक-दूसरे के बदन पर किस करने लगे और एक-दूसरे को चूसने लगे। मैंने कुछ देर ऐसा करने के बाद उसके लहँगे के अन्दर हाथ डाल दिया और उसके भरे हुए बुरड़ों को दबाने लगा।
कुछ देर दबाने के बाद उसके लहँगे को नीचे कर दिया और उसके बुरड़ों को क़ैद से आज़ाद करवा दिया।
उसने भी चुदास से भरते हुए अपने लहँगे को पूरा बाहर ही कर दिया और अब वो भी पूरी नंगी हो गई.. मैं तो पहले से ही नंगा था।
हम दोनों ही नंगे हो चुके थे और वो मेरे ऊपर भी लेटी हुई थी.. सो मेरा लंड उसकी बुर से सटा हुआ था.. और लंड खुद ही अपना रास्ता ढूँढ रहा था।
मेरा कड़क लौड़ा उसकी बुर के दरवाजे को खटख़टा रहा था।
मैं अभी सोच ही रहा था कि तभी डॉली ने मेरे लंड को पकड़ कर बुर का रास्ता दिखा दिया, लंड ने भी जरा सी मदद मिलते ही अपना रास्ता ढूँढ लिया.. सीधा आधा भाग बुर के अन्दर घुसता चला गया।
उसके मुँह से ‘आह्ह.. उई.. माँ..’ की आवाज़ आई।
मैं उसके बुरड़ सहलाने लगा और चूचियों को मुँह में लेकर एक जोरदार झटका मारा और पूरा लौड़ा उसकी बुर के अन्दर घुसता चला गया।
उसकी ‘ऊऊहह आहूऊऊहह..’ की तेज आवाज़ आने लगी.. तो मैं रुक गया और कुछ देर चूचियों को दबाता रहा.. चूमा.. फिर से लण्ड के झटके मारने लगा।
अब उसे भी उतना दर्द नहीं हो रहा था.. बल्कि कुछ ही देर में उसको भी मजा ही आने लगा था।
क्योंकि वो इसी लंड से पिछले 3 साल से चुद रही थी.. सो ये दर्द कम और मजा ज्यादा दे रही थी और पिछले तीन साल में मुझे भी पता लग गया था कि इस बुर को कैसे सम्भालना है।
खैर.. मैं झटके मार रहा था और उसके मुँह से सीत्कार निकल रही थी। इतनी मादक सीत्कार थी.. जिसको सुन कर कोई भी पागल हो जाए। मैं तो इस सीत्कार का दीवाना था ही।
कुछ देर ये सब चलता रहा.. फिर मैंने उसको गोद में उठा लिया और उसकी रसीली बुर में ‘घपाघप..’ चोटें मारने लगा।
अपने लंड से कुछ देर ऐसा करने के बाद मैंने उसको पीठ के बल बिस्तर पर लिटा दिया.. जिसमें वो कमर से ऊपर बिस्तर पर थी.. और उसके बुरड़ और पैर नीचे थे।
मैं भी बिस्तर के नीचे ही खड़ा रहा। मैं उसकी दोनों टांगों के बीच में आ गया और उसके एक पैर को अपने कंधों पर उठा लिया.. जिससे उसकी बुर मेरे सामने खुल उठी थी।
फिर मैंने उसकी बुर में लंड पेल दिया और झटके मारने लगा। अब मेरे इन झटकों से उसका पूरा जिस्म हिल रहा था।
सबसे ज्यादा मजा उसके अमृत फलों को चूसने में आ रहा था.. खास करके निप्पलों को चचोरने में.. मानो वे खुद ही चूसने को बुला रहे हों। उसकी हिलती हुई चूचियाँ तो ऐसे लग रही थीं.. जैसे पानी में कोई दो बड़े से नारियल तैर रहे हों।
जब मैं झटका मारता था.. तो चूचियाँ उसके सिर की तरफ़ को उछलती थीं और फिर से नीचे की तरफ़ को आ जाती थीं। नीचे से उसकी बुर में मेरा लंड तो अपना काम कर ही रहा था.. लेकिन जब भी मैं झटके मारता.. मेरे पैर भी उसके मुलायम और गुदाज बुरड़ों को छू कर मज़े लेने लगते थे।
कुछ देर इसी तरह चोदने के बाद मैंने उसको बिस्तर से उतार कर पूरा खड़ा कर दिया। अब मैं उसको पीछे से चूमने लगा.. पहले बुरड़ों को चुम्बन करने लगा और दबाने लगा। फिर उसके एक पैर को बिस्तर पर रख दिया और अपने लंड के सुपारे को फिर से उसकी बुर के मुँह पर लगाया और अन्दर तक पेल दिया।
अब तो मेरा लंड बड़ी आसानी से अन्दर चला गया.. बिना किसी परेशानी के.. और मैं भी उसकी चूचियों को पकड़ कर हचक कर अपना लौड़ा पेलने लगा.. साथ ही लौड़ा अन्दर ठेलते समय मैं उसकी चूचियों को भी जोर से भींचने लगा।
पूरे कमरे में फिर से एक बार मादक सीत्कारें गूँजने लगीं। कुछ देर हम दोनों ऐसे ही चुदाई का खेल करते रहे.. फिर उसको दीवार से सटा कर उसकी बुर का मजा लेने लगा।
कुछ देर बुर का मजा लेते-लेते उसका शरीर अकड़ने लगा और वो मुझसे एकदम से चिपक गई।
मैं समझ गया कि वो फिर से झड़ने वाली है.. सो मैंने अपना लंड निकाल कर उसको अपने से चिपकाए रखा.. और वो झड़ने लगी और मैंने उसको नंगा ही उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया।
तब तक कांता भी बुर में उंगली करके खुद को झाड़ चुकी थी। फिर भी मैं उसके पास गया और एक राउंड उसको भी चोदा.. और हम तीनों नंगे ही एक ही बिस्तर पर सो गए। मैं बीच में लेटा था और वो दोनों मेरे दोनों बगलों में पड़ी थीं।
………….
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जैसा कि आप लोग जानते हैं कि डॉली दीदी कोलकाता में एक साफ्टवेयर कंपनी में जॉब कर रही है और मैं अपना बी.टेक. खत्म कर चुका हूँ। मुझे डॉली दीदी की चुदाई किए हुए दो महीने से ज्यादा हो गए थे और हम दोनों में से किसी का भी अभी घर जाने का कोई प्लान नहीं था। सो हम दोनों ने कहीं घूमने जाने का प्लान बनाया। बहुत जगह जाने की बात होने पर लास्ट में पुरी (ओडिशा) जाना फाइनल हुआ। यह जगह हम दोनों को सही लगी और हम दोनों पुरी पहुँच गए।
मैं उससे पहले पहुँच कर उसका इंतज़ार करने लगा। मैं स्टेशन पर बैठा हुआ था कि उसकी ट्रेन आई।
मेरी नज़र डॉली को ढूँढ रही थी कि तभी वो सामने से आती हुई दिखी।
वैसे तो मैं उसको 100 से ज्यादा बार चोद चुका हूँ.. लेकिन फिर भी पता नहीं क्यों मन नहीं भरा। उसको देखते ही मेरा लंड तो मानो बोल रहा था कि अब मजा आएगा। मेरी सबसे प्यारी चुत जो सामने से गांड हिलाती हुई आ रही थी।
इस वक्त डॉली ने सफ़ेद जींस और काले रंग का टॉप पहन रखा था। जींस और टॉप दोनों एकदम स्किनफिट थे, जिससे कोई भी उसके सेक्सी बदन को देख कर लंड खड़ा कर सकता था। उसकी 38 की चुची दूर से ही उठी और तनी हुई दिख रही थीं। उसका दूध सा गोरा बदन, ऊपर से काला टॉप.. अह.. कयामत लग रही थी.. और उस पर उसके खुले बाल.. तो सोने पे सुहागा लग रहे थे।
मैं उसके पास गया और उसको बांहों में ले लिया। आस-पास वाले लोग हमें ही देख रहे थे, सो हम दोनों जल्द ही अलग हुए।
मैं उसको ले कर पुरी बीच के पास चला गया और वहीं एक होटल में कमरा बुक कर लिया। मुझे सिंगल बेड वाला कमरा मिला था, रूम में जाते ही मैं उससे लिपट गया और उसको अपनी बांहों में भर कर चूमने लगा।
डॉली बोली- थोड़ा तो सब्र करो यार.. हम लोगों को पूरे चार दिन तक अभी मजा ही करना है।
मैं उससे अलग हो गया तो वो बोली- मैं बाथरूम जा रही हूँ, फ्रेश होकर आती हूँ। इसके बाद हम लोग सी-बीच पर घूमने चलेंगे।
वो बाथरूम में जाने लगी और जैसे ही वो दरवाजा बंद करने लगी तो मैंने मना कर दिया- कम से कम दीदार तो करने दो!
उसने हंस कर फ्लाइंग किस दी और बाथरूम का दरवाजा बंद नहीं किया। वो अपना टॉप उतारने लगी थी कि तभी बाहर से कमरे के दरवाजे पर किसी चूतिया ने दस्तक दी, तो उसने झट से बाथरूम का दरवाजा बंद कर लिया।
मैंने भुनभुनाते हुए कमरे का दरवाजा खोला तो होटल का स्टाफ था.. रूम साफ करने आया था।
मैंने उसे आने दिया। जब तक उसने रूम साफ किया, तब तक डॉली नहा ली।
जैसे ही वो आदमी कमरे से बाहर गया.. मैंने दरवाजा लॉक लगाया और इसी आवाज को सुनकर डॉली केवल एक तौलिया में बाहर निकल आई।
आह.. मैं तो मन ही मन रूम सर्विस वाले को गाली दे रहा था, लेकिन सारा गुस्सा डॉली के भीगे बदन को देख कर गायब हो गया। उसका भीगा बदन.. ऊपर से पानी की बूंदें.. उसके बदन पर मोती की तरह लग रही थीं। तौलिया में जबरन क़ैद उसकी चुची मानो बोल रही हों कि हमें आजाद कर के बाहर निकाल दो।
मैं आगे बढ़ कर उसकी तौलिया को पकड़ने ही वाला था कि उसने मना कर दिया, बोली- चलो पहले बाहर से घूम कर आते हैं.. ये सब तो रात में मिलेगा ही।
उसने मुझे तरसाते हुए कैपरी और टॉप पहन लिया। मेरे कहने पर ब्रा और पेंटी नहीं पहनी।
अब आप को बताने की ज़रूरत तो नहीं है कि 38 साइज़ की चुची बिना ब्रा के सिर्फ़ टी-शर्ट में कैसी लग रही होंगी.. आप बस कल्पना कर सकते हैं।
मैं उसके साथ नीचे आ गया और मैं उसकी कमर में हाथ डाल कर चलने लगा। हम दोनों सी-बीच पर आ गए, शाम का टाइम होने के कारण वहाँ बहुत भीड़ थी। डॉली भीड़ के पास बैठने को बोली.. लेकिन मैं उसको थोड़ा भीड़ से थोड़ा दूर एकांत में ले गया।
भीड़ से दूर होते ही मेरा हाथ उसकी कमर से नीचे हो गया और बुरड़ों पर पहुँच गया। मैंने उसके मुलायम बुरड़ों को दबा दिया।
दीदी बोली- अह.. क्या कर रहे हो यार.. कोई देख लेगा!
तो मैं बोला- यहाँ कोई नहीं देखेगा.. सब अपने में मस्त हैं।
यह बोलते हुए मैंने उसके गालों पर किस कर दिया।
वो बोली- चलो कहीं बैठते हैं।
हम दोनों वहीं समुद्र के किनारे भीड़ से दूर रेत पर बैठ गए। अब हमें दूर-दूर तक कोई नहीं दिख रहा था.. तो हम दोनों मस्ती से बैठ गए और बातें होने लगीं।
बातों के बीच-बीच में मैं उसको किस करता जा रहा था.. कभी गर्दन पर, कभी गाल पर, कभी पीठ पर तो कभी-कभी होंठ पर भी चूमता रहा.. कुछ देर ऐसा चलता रहा।
फिर मैं उसकी गोद में सिर रख कर लेट गया। वो मेरे बालों में हाथ फेरने लगी। मैंने उसके टॉप को थोड़ा ऊपर किया और अब मेरे सामने उसका नंगा पेट था.. सामने सेक्सी सी नाभि थी। मैंने बिना कुछ सोचे समझे उसकी नाभि के पास किस कर दिया।
इस बार वो पूरा सिहर गई.. मतलब मुझे लगने लगा कि अब ये जल्द ही गर्म हो जाएगी। सो मैं रुक-रुक कर उसके पेट पर किस करने लगा, उसकी नाभि में अपना जीभ फिराने लगा और हाथों से उसकी पीठ सहलाने लगा।
मैं उसके पेट पर किस कर रहा था तो वो रोमांचित हो रही थी। इससे मैं और उत्साहित होकर और ऊपर बढ़ने लगा और चुची के निचले भाग पर पहुँच गया। वहाँ किस करने के बाद तो वो एकदम से गर्म हो गई थी। मैंने उसके पूरे टॉप को एक बार में ऊपर कर दिया, जिससे उसकी दोनों चुची उछल कर बाहर आ गईं।
इस बार दीदी ने भी विरोध नहीं किया। डॉली दीदी की चुची के बारे में एक बात बता देता हूँ कि उसकी चुची एकदम गोल, किसी छोटी साइज़ की फुटबॉल की तरह हैं और इतनी अधिक सुडौल हैं कि बिना ब्रा के भी नहीं झूलती हैं।
जैसे ही दीदी की चुची बाहर आईं.. मैं उन पर टूट पड़ा। एक हाथ में तो अब इसकी एक चुची आती नहीं है.. खैर इन दोनों चुची से तो मैं तब से खेल रहा हूँ जब ये सिर्फ़ एक सेब जितनी थीं। पिछले 3 सालों में 28 इंच से बढ़ कर 38 हो गईं.. मतलब एप्पल से छोटी फुटबाल बन गई थीं।
मैंने दीदी की एक चुची को हाथ से पकड़ा और एक चुची में मुँह में लगा लिया ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ वो भी झुक गई ताकि मैं आसानी से उसकी चुची पी सकूँ।
मैंने उसकी एक चुची का निप्पल अपने मुँह में रखा हुआ था और मैं निप्पल चुसकने के साथ ही उसकी चुची को अपने मुँह में पूरा भर लेने की कोशिश करने लगा, लेकिन जो चुची हाथ में नहीं आती है.. वो मुँह में क्या आएगी।
डॉली की दूसरी चुची मेरी गर्दन के पास थी.. मैं उसकी नरमाहट का मजा ले रहा था और सोच भी रहा था कि दीदी इतनी मोटी और बड़ी चुची को कैसे सम्भालती है।
कुछ देर ऐसा करने के बाद उसका हाथ भी मेरे लंड पर लोअर के ऊपर से ही घूमने लगा। उसने मेरे लंड पर हाथ डाला मतलब मैं समझ गया कि अब उसको चुदने का मन हो गया है।
मैंने दीदी को वहीं बालू पर ही लिटा दिया और उसकी चुची को मुँह से चूसने-काटने लगा। इसी के साथ मेरा हाथ दीदी की कैपरी के अन्दर चला गया। हाथ के स्पर्श से मालूम हुआ कि उसने नीचे चुत के बाल साफ कर रखे थे, मतलब वो चुदने का पूरा प्लान बना कर आई थी।
मैं उसकी चुत पर अपनी उंगली घुमाने लगा तो उसके मुँह से मादक सीत्कार निकलने लगी। फिर मैंने धीरे से एक उंगली को उसकी गीली होती हुई चुत में डाल दिया।
हालांकि मुझे पता था कि डॉली दीदी जैसी चुदक्कड़ को अपनी चुत में एक उंगली से कोई फ़र्क तो पड़ने वाला नहीं था.. फिर भी मैंने चुत में खलबली मचाने के लिए उंगली को अन्दर डाल दिया और घुमाने लगा।
इधर दीदी ने भी मेरे लंड को बाहर निकाल लिया और हिलाने लगी।
कुछ देर ये सब चलता रहा.. फिर हम दोनों 69 पोज़िशन में आ गए। वो मेरे नीचे मुँह किए हुई दबी पड़ी थी.. मैं ऊपर था। उसने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया था और मैं उसकी चुत को मुँह से चाटने लगा। अब दीदी भी मेरे लंड को आइसक्रीम की तरह चाट-चूस रही थी। कुछ देर ऐसे ही चुसाई कार्यक्रम चलता रहा। फिर मैं उसके नीचे हो गया और दीदी मेरे ऊपर हो गई। अभी भी 69 पोज़िशन ही थी.. मेरा लंड उसके मुँह के पास था और उसकी चुत मेरे मुँह में दबी थी।
हम दोनों एक-दूसरे के आइटम चूस-चाट रहे थे। मैंने अपना हाथ डॉली की कमर पर रखा और उसकी नंगी पीठ को सहलाने लगा। फिर धीरे-धीरे पीछे से उसकी कैपरी में हाथ डाल दिया और उसके बुरड़ों को सहलाने लगा। फिर मैंने एक झटके में उसकी कैपरी को नीचे कर दिया। अब उसकी कैपरी उसके घुटनों पर पहुँच गई और उसके बुरड़ पूरे नंगे हो गए। मैं उसके नंगे बुरड़ों को मसलते हुए दबाने लगा।
वैसे तो डॉली का पूरा बदन मस्त है लेकिन उसकी गांड और चुची की जितनी भी तारीफ करूँ, उतनी कम है। वो जैसा भी ड्रेस पहने, उसकी 38 की चुची और उठी हुई गांड के इलाके दूर से ही पता चल जाते हैं।
खैर.. कुछ देर मज़े करने के बाद हम दोनों वहीं झड़ गए। उसकी चुत का पूरा पानी मेरे चेहरे पर आ गया और मेरे लंड का सारा पानी उसने पी कर मेरे लंड को चाट-चाट कर साफ कर दिया।
उसके बाद हम दोनों अलग हुए.. तब तक अंधेरा भी होने लगा था या बोलें लगभग अंधेरा हो चुका था।
वो अपने कपड़े ऊपर करने लगी तो मैं बोला- अब तो अंधेरा हो ही गया है.. इसकी क्या ज़रूरत है।
ये बोलते हुए मैंने उसके टॉप को पूरा उतार दिया.. वो ऊपर से पूरी नंगी हो गई थी। वो मुझ से अपना टॉप माँगने लगी.. तो मैं टॉप ले कर भागने लगा। वो मेरे पीछे नंगी ही दौड़ी।
जब वो मेरे पीछे दौड़ रही थी तो उसकी चुची ऊपर-नीचे होते हुए बड़ा सेक्सी सीन बना रही थीं.. जिसके देखने में मुझे बहुत मजा आ रहा था। सो मैं जानबूझ कर और भी उसको अपने पीछे भगा रहा था।
कुछ दूर तक भगाने के बाद मैंने अपनी बनियान उतार कर दे दी और बोला- लो इसको पहन सकती हो, तो पहन लो।
अब हम दोनों भाई-बहन सी-बीच पर ऊपर से नंगे थे।
जब वो मेरे करीब आई तो उसको मैंने अपने सीने से लगा लिया.. उसकी नंगी चुची मेरे सीने पर मजा दे रही थीं।
मैं उसकी पीठ को सहलाते हुए बोला- एक राउंड यहीं हो जाए।
तो वो बोली- यहाँ?
मैं बोला- हाँ क्या प्राब्लम है.. अंधेरा तो हो ही गया है.. कोई तो इधर आएगा नहीं। बंद कमरे में तो हम लोग बहुत बार मज़े कर चुके हैं, कभी खुले आसमान में भी करके देखो.. कितना मजा आता है।
वो बोली- तो हो जाए.. रोका किसने है।
इतना सुनते ही मुझे मानो मुँह माँगी मुराद मिल गई हो।
मैं दीदी की चुदाई के इस मौके का फायदा उठाने में देर करने वाला नहीं था, मैंने सीधे डॉली दीदी के होंठ पर अपने होंठ रख दिए और उसे लिपकिस शुरू कर दिया। अब तक मेरा हाथ उसकी कैपरी को भी नीचे कर चुका था।
कुछ देर लिपकिस करने के बाद हम दोनों पूरे नंगे हो गए और मैंने हम दोनों के कपड़ों को एक पत्थर से दबा दिया कि कहीं हवा में ना उड़ जाएं।
इसके बाद मैं सीधा डॉली दीदी की चुत पर टूट पड़ा। मैंने उसके दोनों बुरड़ों को पकड़ कर अपने से चिपका लिया.. जिससे मेरा लंड उसकी चुत पर रगड़ने लगा। मेरे लंड ने भी अपने जाने का रास्ता देख लिया था, सो मैंने वहीं डॉली डार्लिंग को बालू पर लिटा दिया और लंड को चुत के मुँह पर रख कर एक जोरदार झटका दे मारा। मेरा पूरा लंड एक बार में दीदी की चुत में घुसता चला गया।
उसके मुँह से जोर से ‘आअहह..’ की आवाज़ निकली, तो मैं उसकी चुत के पास अपनी हाथ से सहलाने लगा। थोड़ा देर यूं ही चुत को सहलाने के बाद मैं लंड को आधा बाहर निकाल कर चुत में अन्दर-बाहर करने लगा।
कुछ देर ऐसा करने के बाद मैं उससे घोड़ी बनने को बोला.. तो वो बन गई। मैं पीछे से उसकी चुत में लंड डाल के ‘घाप.. घाप..’ धक्के मारने लगा।
वो भी मजे से मादक सीत्कारों के साथ दीदी की चुत की चुदाई का मजा उठाने लगी। डॉली ‘आआह.. ऊऊओहुउउ..’ की आवाज़ करने लगी। लेकिन उससे ज्यादा तेज आवाज़ समंदर की लहरों की थी। कुछ देर चुदाई का खेल चला.. फिर मैंने उसको गोद में उठा लिया तो दीदी ने अपने दोनों पैरों से मेरी कमर को जकड़ लिया। मैंने उसके बुरड़ों को अपने हाथों में सम्भाल रखे थे।
अब मेरा लंड उसकी चुत में फनफनाते हुए अन्दर जा रहा था.. फिर बाहर आ रहा था। इस खेल में उसकी चुची से मेरा सिर फुटबाल खेल रहा था। बीच-बीच में मैं उसके निप्पलों को भी चूस रहा था और चुत में झटके भी मार रहा था।
कुछ देर ऐसा करने के बाद हम दोनों अलग हुए और मैं समंदर के पानी के ठीक पास पीठ के बल लेट गया.. जिससे समंदर का पानी जब आता तो मेरे पैर तक छू कर लौट जाता था। मैं लेटा तो दीदी अपने मन से ही मेरे लंड पर बैठ गई और खुद से चुदने लगी।
मैं भी नीचे से लंड के झटके मार रहा था और सामने उसकी चुची उछाल मार रही थीं, जिनको देख कर मैं और भी जोर-जोर से झटके मारने लगा। वो भी जोर-जोर से आहें भरने लगी, ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ करने लगी जो कि वहाँ के पूरे वातावरण में गूँज रही थी।
उधर समुंदर का पानी भी जब आता था, तो हम दोनों भिगो कर चला जाता था। दरिया का ठंडा पानी और हम दोनों के गरम शरीर.. अह.. बहुत मजा आ रहा था।
कुछ देर उसी पोज़ में धकापेल चोदा चोदी हुई.. फिर 4-5 आसनों में और चुदाई की। फिर हम दोनों झड़ गए और कुछ देर वहीं लेटे रहे।
फिर कुछ देर बाद अपने शरीर से रेत झाड़ कर हम दोनों ने अपने-अपने कपड़े पहन लिए।
अब तक रात के 9 बज चुके थे.. हम दोनों होटल के कमरे में आए और यहीं फ्रेश हो कर खाना मंगा कर खाना खा कर बिस्तर पर आ गए।
वो बिस्तर पर आते ही मचल कर मेरी बांहों में आ गई और बोली- क्या बात है आज बहुत मूड में थे.. लगता है बहुत दिनों से कोई मिली नहीं है।
मैं बोला- तुम भी तो मूड में थीं। वैसे मुझे मिलती तो बहुत हैं.. लेकिन सब में वो बात नहीं है.. जो तुम में है। वैसे भी तुम मेरी बीवी हो.. तुमको जितना भी प्यार करता हूँ, कम ही लगता है। वैसे आज खुले आसमान के नीचे मज़े करके कैसा लगा?
वो बोली- पहले थोड़ा डर लगा, लेकिन मजा बहुत आया।
‘अब तुम कल का बताओ, क्या प्रोग्राम है?’
तो वो बोली- कल कहीं घूमने चलेंगे.. ओड़ीसा में घूमने की बहुत जगह हैं। कोणार्क मंदिर चलते हैं और बाकी कल सोचा जाएगा। अभी पहले रात का प्रोग्राम बनाते हैं।
ये बोल कर मैंने उसको अपने तरफ़ खींच लिया।
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मेरा एक दोस्त है अविनाश, हम दोनों बचपन से ही साथ रहे हैं। कुछ दिन पहले उसका पूरा परिवार पटना में मेरे घर के पास ही शिफ्ट हुआ। उसके घर में उसकी माँ-पापा के अलावा उसकी 3 बहनें हैं। सबसे बड़ी बहन का नाम नीता है.. उम्र 26 साल, उससे छोटी बहन का नाम दिव्या है.. उम्र 24 साल, फिर मेरा दोस्त है, उसका नाम अविनाश है। अविनाश की उम्र 21 साल है, इसके बाद उसकी सबसे छोटी बहन पायल है, जिसकी उम्र 19 साल है। मतलब अविनाश की तीनों बहने पका हुआ माल थीं। चूंकि दोनों के घर आस-पास होने के कारण हमारा परिवार उसके परिवार से बहुत क्लोज़ हो गया।
मेरे दोस्त की तीनों बहनें मेरे घर काफ़ी आने-जाने लगीं। मेरी भी दोनों बहनें उसके घर जाने लगीं। मेरी फैमिली और मेरे दोस्त की फैमिली में काफ़ी मेल-जोल हो गया था।
उसकी तीनों बहन एकदम ग़ज़ब की पटाखा दिखती हैं, जब मैं उन्हें देखता हूँ तो मेरा मन करता है कि अभी पकड़ कर चोद दूँ। सो मैं तीनों की बुर मारने की प्लानिंग करने में लग गया। इसी फिराक में मैं भी उसके घर जाने लगा, मतलब मेरा ज्यादा टाइम उसके घर में ही बीतने लगा। उसकी तीनों बहनों से मेरी खूब बातें होने लगीं।
उसकी बड़ी बहन एक नजदीक के गाँव में ही टीचर थी, दूसरी दिव्या जिस पर मेरी सबसे ज्यादा नज़र थी, उसे पटना की ही एक कंपनी में जॉब मिला था। मैं आपको दिव्या के बारे में थोड़ा बता दूँ। ये अपनी तीनों बहन में सबसे खूबसूरत थी। उसका फिगर 34बी-28-32 का था। वो हमेशा नॉर्मल ड्रेस, जैसे सलवार-कुरती या कभी कभी जीन्स-टॉप भी पहन लेती थी। उसका दूध सा गोरा बदन, भरा-पूरा शरीर देखने के बाद उसे उसी वक्त चोदने का मन करने लगता है।
पायल अभी पढ़ रही थी।
एक दिन की बात है, जब मैं सुबह बाइक से ऑफिस जा रहा था.. तो मैंने देखा कि दिव्या बस स्टैंड पर खड़े होकर बस का वेट कर रही है। मैं बिना उससे कुछ बोले आगे चलता गया, तभी दिव्या ने मुझे आवाज़ दी।
‘राजा..!’
मैं तो इसी फिराक में था, झट से रुक गया और उसके नजदीक जाकर कहा- बोलो दिव्या?
उसने कहा- तुम कहाँ जा रहे हो?
मैंने कहा- ऑफिस जा रहा हूँ।
उसने कहा- मुझे रास्ते में ड्रॉप कर दोगे.. इधर से मुझे बस नहीं मिल रही है।
मैंने कहा- ठीक है.. कर दूँगा।
फिर मैंने उसे बाइक पर बिठा लिया। वो दोनों तरफ टांगें करके बाइक पर बैठ गई। मैं सिर्फ़ बाइक चला रहा था, अचानक मेरी बाइक के आगे से एक कुत्ता निकला.. जिससे मैंने घबरा कर बाइक के डिस्क ब्रेक दबा दिए। इससे दिव्या एकदम से मेरे से बिल्कुल सट गई और उसकी चुची मेरी पीठ से चिपक कर दब गई.. मुझे उस वक़्त बहुत मजा आया।
फिर मैंने रास्ते में 2-3 बार ब्रेक मारे और इसी तरह खूब मजा लिया।
फिर दिव्या का स्टॉप आ गया, तो दिव्या ने कहा- मुझे यहीं उतार दो, मैं यहाँ से चली जाऊँगी।
मैंने कहा- मैं तुम्हें छोड़ देता हूँ।
उसने कहा- नहीं.. मैं चली जाऊँगी.. तुम चले जाओ वरना ऑफिस के लिए देर हो जाओगे।
मैंने कहा- मेरे पास अभी काफ़ी टाइम है.. आप टेंशन मत लो।
मैंने उसे उसकी कंपनी में छोड़ दिया।
अब दिव्या मुझे काफ़ी मिलने लगी और मैं उसे बार-बार ऑफिस तक ड्रॉप कर देता था।
एक दिन दिव्या ने मुझसे कहा- राजा आप रोज-रोज मुझे ड्रॉप करते हो अगर तुम्हारी गर्लफ्रेंड ने देख लिया तो क्या सोचेगी वो?
मैंने कहा- क्यों मज़े ले रही हो यार, मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।
उसने कहा- झूट मत बोलो.. मुझे सब पता है कि तुम्हारी गर्लफ्रेंड है।
मैंने बोला- नहीं है.. लेकिन बनाने की सोच रहा हूँ। अगर तुम्हारी नज़र में कोई अच्छी सी लड़की हो तो दोस्ती करवा दो।
उसने मुस्कुरा कर कहा- चल देखती हूँ.. कोई होगी तो बता दूँगी।
कई दिनों तक ऐसे ही चलता रहा। फिर एक दिन में घर पर बैठकर लैपटॉप पर काम कर रहा था, तभी मुझे घर में दिव्या की आवाज़ सुनाई दी। वो मेरी दीदी से बात कर रही थी।
मैंने उसकी आवाज़ सुनते ही लैपटॉप में गाना बजा दिया।
वो गाने की आवाज़ सुनकर मेरे कमरे में आ गई और मुझसे पूछने लगी- क्या कर रहे हो राजा?
मैंने कहा- बस काम कर रहा हूँ।
उसने कहा- ज्यादा अर्जेंट काम है क्या?
मैंने कहा- नहीं..
उसने कहा- एक मिनट में तुम्हारा लैपटॉप यूज कर सकती हूँ, मुझे कुछ सर्च करना है।
मैंने उसे लैपटॉप दे दिया, उसने यू-टयूब खोला और गाना सर्च करने लगी।
गाना मिलते ही वो बोली- ये गाना मुझे ऑडियो में चाहिए.. मिल सकता है क्या?
मैंने कहा- मिल तो जाएगा पर सर्च करना पड़ेगा।
उसने कहा- प्लीज़ मुझे ये गाना सर्च करके दे दो।
फिर मैं वो गाना सर्च करने लगा, सर्च करने पर कई साइट खुली और एक वेबसाइट पर पोर्न एड चल रहा था, उसे देखते ही मैं झटका खा गया और कुछ भी ना कर सका। वो भी एड देखकर घबरा सी गई और चुप हो गई।
फिर उसने मुझसे कहा- ये क्या देख रहे हो.. इसे हटाओ ना!
मैंने कहा- मैं देख नहीं रहा हूँ, ये अचानक आ गया।
फिर वो बोली- ठीक है, मैं जा रही हूँ तुम गाना सर्च करके मुझे दे देना।
वो चली गई और फिर अगले दिन वो मेरे घर आई। उस वक़्त मैं नहा रहा था और दीदी किचन में खाना बना रही थीं।
उसने दीदी से पूछा- राजा कहाँ है?
तो दीदी ने कहा- बाथरूम में नहा रहा है।
वो बाथरूम के पास आकर खड़ी हो गई।
जैसे ही मैं नहा कर निकला, उसने कहा- तुमने वो गाना डाउनलोड कर दिया?
मैंने कहा- अभी नहीं किया.. अब कर दूँगा।
उसने कहा- प्लीज़ मुझे अभी करके दे दो।
मैंने कहा- ओके तुम बैठो, अभी कर देता हूँ.. पहले कपड़े पहन लूँ।
उसने कहा- कौन सा कोई तुम्हारे कपड़े लेकर भाग रहा है.. बाद में पहन लेना यार, पहले गाना डाउनलोड कर दो।
मैं उस वक़्त सिर्फ़ तौलिया में था।
मैंने ‘ओके’ कहा और हम दोनों मेरे रूम की तरफ चल दिए। कमरे में घुसते ही न जाने कैसे मेरा पैर फिसला और मैं गिर गया। एकदम से गिरने से मेरा तौलिया खुल गया। मेरे मुँह से एक तेज आवाज भी निकल गई।
अब मैं उसके सामने बिल्कुल नंगा पड़ा था.. मेरे पैर में मोच भी आ गई थी।
वो मुझे इस हालत में देखकर एकदम शांत पड़ गई और मैं ऐसे ही गिरा हुआ पड़ा रहा।
इतनी देर में दीदी की आवाज़ आई- क्या हुआ?
फिर उसने मेरी तरफ देखा और दीदी को जबाब दिया- कुछ नहीं..
फिर उसने आकर मुझे उठाया और बिस्तर पर बिठा दिया.. तौलिया मेरे ऊपर डाल दी।
दिव्या ने कहा- सॉरी राजा मेरी जल्दबाजी की वजह से तुम्हें लग गई।
मैंने कहा- इट’स ओके.. मैं ठीक हूँ।
फिर उसने कहा- पहले आप कपड़े पहन लो.. बाद में डाउनलोड कर देना।
मैंने कहा- अब कपड़े पहन कर क्या करूँगा, तुमने तो सब देख ही लिया है।
वो शर्मा कर बोली- मैंने कुछ नहीं देखा ओके.. मैंने अपनी आँखें बंद कर ली थीं।
मैंने कहा- नहीं देखा तो अब देख लो।
यह कह कर मैंने तौलिया अपने ऊपर से हटा दिया।
वो शर्मा कर बोली- मैंने कुछ नहीं देखा ओके.. मैंने अपनी आँखें बंद कर ली थीं।
मैंने कहा- नहीं देखा तो अब देख लो।
यह कह कर मैंने तौलिया अपने ऊपर से हटा दिया।
उसने मेरा लंड देखते ही अपनी आँखें बंद कर लीं और बोलने लगी- मुझे कुछ नहीं देखना.. तुम कपड़े पहन लो प्लीज़।
फिर मैंने उसकी आँखों से उसका हटा हाथ हटाया और कहा- अब देख ही लिया तो क्यों शर्मा रही हो, जब मुझे दिखाने में शर्म नहीं आ रही है, तो तुम्हें देखने में क्यों आ रही है।
तो उसने मुझे रिप्लाइ दिया- लड़के तो होते ही बेशर्म हैं।
बस यही बात सुनते ही मैंने कहा- अच्छा ये बात.. अब मैं तुम्हें बेशरमाई दिखाता हूँ।
फिर उसे मैंने बेड पर धक्का दिया और उसके ऊपर नंगे ही चढ़ गया और उसे किस करने लगा ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ मजा आ गया…
ये सब देखकर वो भी थोड़ी गर्म होने लगी थी। उसने मेरी हरकतों का बुरा नहीं माना और बस बोलने लगी- राजा मुझे जाने दो.. कोई देख लेगा।
लेकिन मैं नहीं माना और उसकी चुची दबाने लगा।
तभी मुझे किसी के आने की आवाज़ आई, तो उसने मुझे जल्दी से हटाया और खड़ी हो गई।
मैंने जल्दी से तौलिया लपेटा और लैपटॉप निकाल कर ऑन कर दिया।
तभी दीदी कमरे में आ गईं और दीदी मेरे कमरे में ही बैठ गईं।
मैंने कुछ ही देर में दिव्या को वो गाना डाउनलोड करके दे दिया और वो चली गई।
उस वक़्त उसे चोदने का मेरा बहुत मन कर रहा था लेकिन मौका हाथ से निकल गया।
उसके जाते ही दीदी हँसने लगीं।
मैं- हंस क्यों रही हो?
दीदी- क्या बात है.. चान्स मार रहे थे!
मैं मुस्कुराते हुए बोला- हाँ..
दीदी- तो रुक क्यों गए थे?
मैं- मुझे लगा माँ या पापा हैं.. सो अलग हो गया था।
दीदी- माँ-पापा तो कब के ऑफिस चले गए।
मैं- और तुम भी आकर बैठ गईं।
दीदी- मतलब मैं कवाब में हड्डी बन गई थी क्या?
मैं- शायद!
दीदी- तो ठीक है.. मैं जा रही हूँ।
ये बोल कर वो जाने लगीं तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ़ खींच लिया। वो सीधे मेरे गोद में बैठ गईं और बोलीं- सॉरी बाबा.. मैं तो मज़ाक कर रही थी।
इस वक्त डॉली दीदी ने कैपरी और टॉप पहन रखा था। दिव्या ने मेरे लंड को खड़ा कर ही दिया था.. सो मेरा लंड दीदी के दोनों बुरड़ों के पास घुसता सा महसूस हो रहा था।
मैंने दीदी के बालों को हटा कर उनकी गर्दन पर किस करते हुए बोला- सॉरी मेरी जान.. नाराज हो गईं क्या?
दीदी बोलीं- मैं क्यों नाराज़ होऊँगी.. नाराज़ तो तुम्हारी वो मैडम होंगी ना..!
मैं बोला- मुझे कहीं से जलन की बू आ रही है..!
ये कह कर मैं हँसने लगा तो दीदी का चेहारा उदास सा दिखने लगा।
मैंने दीदी को समझाया- अरे यार ये सब तो टाइम पास है.. मेरी असली रानी तो तुम हो।
तो वो बोलीं- झूठ..
और उठ कर जाने लगीं।
मैं भी उनके पीछे खड़ा हुआ और सीधा उनको पकड़ लिया। इसी पकड़ा-धकड़ी में मेरे हाथ में उनकी एक चुची आ गई.. जो कि पूरे हाथ में तो नहीं आती, लेकिन चुची का कुछ भाग आ गया।
दीदी बोलीं- मूड बन गया है.. तो पहले दरवाजा बंद कर दूँ.. वरना कोई आ जाएगा।
मैंने ‘हम्म..’ कहा तो दीदी दरवाजा बंद करने चली गईं। मैं भी उनके पीछे-पीछे दरवाजा तक चला गया। जैसे ही दीदी ने दरवाजा बंद किया.. मैंने डॉली दीदी को अपनी बांहों में ले लिया।
इस वक्त दीदी ने कैपरी और केवल टी-शर्ट पहन रखी थी.. क्योंकि जब भी वो घर में होती हैं तो ब्रा और पेंटी तो पहनती ही नहीं हैं।
हम दोनों ने गेट के पास ही थोड़ा रोमान्स करने के वहीं एक-दूसरे को नंगा कर दिया। मैंने दीदी को अपनी तरफ़ घुमा लिया और सीधे उनके मुँह में अपना मुँह डाल कर पागलों की तरह किस करने लगा।
वो भी जोश में आ गई थीं ‘आहह उह..’
मैं उनके एक चूचे को अपने मुँह में भरने की कोशिश कर रहा था.. लेकिन दीदी के चूचे इतने बड़े थे कि यह नामुमकिन था।
वो उधर मादक सिसकारियां भर रही थीं- एमेम आहह आह ओमम्म..!