HINDI SEXY STORY PART 1

 

मैं भी जोश में आ गया और तौलिया भी खोल दिया। मेरा लंड पूरी मस्ती से खड़ा था.. लंड देखकर दीदी मेरे लंड को अपनी हथेली से सहलाने लगीं। कुछ देर बाद दीदी को लंड से मजा आने लगा तो उन्होंने किस करते हुए मेरे लंड को ज़ोर से दबा दिया।

फिर मैंने कहा- चलिए हम आज सुहाग दिन ही मनाएँगे।

मैंने उनको अपने बांहों में उठा लिया और ले जाके बेड पर लिटा दिया।

उनको किस किया तो वो बोलीं- किस में ही टाइम खराब करोगे या कुछ आगे भी करोगे?

मैं उनके एक निप्पल को चूसने लगा.. और वो ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थीं- अह.. राजा और ज़ोर से चूसो.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… ऊहह..

वो चुदास से छटपटा रही थीं।

मैं दोनों हाथों से उनकी चुची को दबा रहा था और मुँह से एक-एक करके चूस रहा था। फिर मैं एक हाथ से उनकी बुर के बालों पर हाथ फेरने लगा।

दीदी पैर को उछाल-उछाल कर चिल्ला रही थीं- अह.. राजा और ज़ोर से कर, और ज़ोर से दबा भैनचोद और ज़ोर से चूस साले।

मैं उनके पूरे बदन को चूमने लगा। वो मानो नई दुल्हन की तरह कामुक सिसकारियां भर रही थीं और मैं उनके पूरे बदन को किस पर किस करता चला जा रहा था।

फिर मैंने उन्हें उल्टा लिटा दिया और उनके पिछले हिस्से पर अपनी जीभ फिराने लगा। उन्हें तो मानो स्वर्ग का आनन्द मिल रहा था।

मैंने उनकी दोनों जाँघों के बीच भी अपनी जीभ को घुमाकर उन्हें मस्त कर डाला और फिर ऊपर से नीचे तक उन्हें किस किया।

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था, मैंने कहा- दीदी लंड चूसो और मैं तुम्हारी बुर चूसता हूँ।

फिर मैं दीदी के ऊपर ओर वो मेरे नीचे हो गईं।

मैं उनकी बालों वाली बुर को जीभ डालकर सक करने लगा.. तो वो मानो आसमान में उड़ने लगी और मस्ती में मेरा लंड अपने मुँह में जितना अन्दर ले सकती थीं, उतना लेकर चूसने लगीं।

दीदी को अब खूब मजा आ रहा था। करीब 15 मिनट बाद दीदी बोलीं- राजा मैं झड़ने वाली हूँ और ज़ोर-ज़ोर से मेरी बुर को चूसो.. खा जाओ मेरी बुर को.. आआअहह.. आज तक कभी किसी ने इस तरह मेरी बुर नहीं चाटी आआमम..

यह बोलते हुए उन्होंने मेरी गर्दन को अपनी टांगों में कस ली और अपनी बुर ऊपर उठा दी। मैं समझ गया कि वो झड़ गई हैं।

इतनी देर में दीदी की बुर का रस मेरे मुँह के रास्ते मेरे गले में उतर गया। वो शांत हो चुकी थीं लेकिन मेरा लंड अब भी चूस रही थीं।

कुछ देर बाद मैं उठ कर उनकी टांगों के बीच में बैठ गया और उनकी पुसी के मुँह पर लंड रख कर थोड़ी देर के लिए उन्हें सताने के लिए उस पर धीरे-धीरे रगड़ने लगा।

दीदी को सुपारे की रगड़ से इतना मजा आ रहा था कि वो बोल नहीं पा रही थी, पर उनके चेहरे से साफ़ जाहिर हो रहा था कि वो लंड को लीलने के लिए बेकरार हो रही थीं।

फिर मैंने उनकी बुर के मुँह पर लंड का एक हल्का सा धक्का मारा। इससे वो सिहर उठीं.. अब उन्हें दर्द होने लगा। मैं उनके मुँह पर झुककर उन्हें किस करने लगा। उन्हें वो अच्छा लगा और मैंने इसी किसिंग के दौरान एक और धक्का दे दिया। मेरा लंड कुछ अन्दर घुस गया.. तो उनकी सीत्कार निकल गई, पर मेरे किस करने की वजह से उनकी आह मेरे मुँह में ही रह गई। मैंने किस करना चालू रखा.. उन्हें इससे बहुत अच्छा लग रहा था। साथ ही मेरे दोनों हाथ उनकी चुची को मसल रहे थे। उन्हें बहुत मजा आ रहा था।

फिर मैंने अगला धक्का दे मारा और मेरा लंड दीदी की बुर में और अन्दर चला गया।

इस बार दीदी ज़ोर से चिल्ला पड़ीं, पर मैंने उनके मुँह को किस से बंद कर दिया और उनके चूचों को ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा। उनको थोड़ा दर्द ज़रूर हुआ.. पर वो मेरे लंड से चुदाई के मज़े लूट रही थीं। फिर थोड़ी देर उनकी चुची सहलाने के बाद मैंने एक और आखरी तगड़ा धक्का दे दिया और मेरा पूरा 7 इंच लंबा लंड दीदी की बुर की जड़ तक अन्दर हो गया था।

वो तड़फ कर ज़ोर से सिसकारी भर रही थीं- अहह उईईईईईई मर गई.. मजा आ गया.. अह.. चोद दे यार.. साले भैनचोद.. अहह.. चोद… चोद अपनी दीदी को…

मैं फिर से धक्का मारने लगा। धीरे-धीरे अब वो मुझे अपने चुचों को उछालटे हुए साथ देने लगीं।

कुछ देर बाद मैंने उनके पैर अपने कंधों पर रखे और अपना पूरा लंड उनकी बुर में अन्दर-बाहर करने लगा। उनके पैर मेरे कंधे पर होने से पोज़िशन बड़ी टाइट हो गई थी और मेरा लंड भी दीदी की बुर के अन्दर तक चला गया था।

अब मेरा लम्बा लंड डॉली दीदी की बुर में उछल-कूद करने लगा। वो मस्ती में चिल्ला रही थीं ‘अह.. चोद दिया रे… बहुत बड़ा है.. उईई.. अब बस कर साले.. मुझसे सहा नहीं जा रहा है प्लीज़.. मान जा बेदर्दी.. अह..’

पर मैं इतनी जल्दी बस थोड़ी करने वाला था।

कुछ देर बाद उनकी बुर में मेरे लंड ने अपनी जगह बना ली थी और अब दीदी भी मुझसे कह रही थीं कि और ज़ोर से चोद दो.. और मैं धक्के पर धक्के दिए जा रहा था। दीदी भी उछल-उछल कर मेरा साथ दे रही थीं। मैं ज़ोर-ज़ोर से अपना लंड उनकी बुर में पूरा अन्दर-बाहर करने लगा। दीदी कभी अपने बाल नोंच रही थीं.. तो कभी अपने चूचे को दबा रही थीं।

मुझे भी उनके साथ आज ज़िंदगी का मज़ा लूटने में मजा आ रहा था। अब वो इतनी तेज़ी से उछल रही थीं कि वो उनकी बुर से ‘फ़च.. फ़च..’ की आवाज़ें पूरे कमरे में भरने लगीं। दीदी भी मेरा हौसला बढ़ा रही थीं।

‘और ज़ोर से राजा.. मेरी जान.. और ज़ोर से चोद.. अब बस मैं झड़ने वाली हूँ.. तू मुझे बहुत मजा दे रहा है.. आहह आअम्म.. हाँ और ज़ोर से आआअहह.. लो मैं झड़ गईई..’

दीदी झड़ गईं.. कुछ देर बाद मैं परेशान हो गया था कि मैं झड़ क्यूँ नहीं रहा था दस मिनट बाद मैंने उनकी बुर में गरम-गरम रस डाल दिया और इस दौरान दीदी भी दोबारा झड़ गई थीं।

मेरा लंड अभी तक उनकी बुर के अन्दर था। थोड़ी देर बाद हम दोनों अलग हुए। मैंने कहा- यार अभी मेरा मन नहीं भरा है।

दीदी बोलीं- तो चुदाई करते रहो ना!

मैंने कहा- उसके लिए पहले तुम्हें इस लंड महाराज की सेवा करनी होगी।

दीदी ने उसे हाथ में लेकर सहलाना चालू किया। मैं उनके निप्पलों को मसलने लगा। दीदी के निप्पल भी अब टाइट होने लगे थे। उन्होंने मेरे लंड को चूमा.. फिर मुँह में ले कर चूसने लगीं।

मुझे बड़ा आनन्द आ रहा था, मैं भी बोल रहा था- रानी आज इस लौड़े को पूरा चूस लो और ज़ोर से चूस साली.. पूरी जीभ से चाट कर खा लो ना.. अह.. खूब ज़ोर से चूस लो प्लीज़।

वो भी ‘उम्म्म्म..’करके लॉलीपॉप की तरह चूसे जा रही थी।

दीदी ने अपनी जीभ से मेरा पूरा लंड साफ कर दिया और उसे वापस ताजे केला की तरह तैयार कर दिया और चूस-चूस कर मेरा लंड गरम लोहे की तरह कड़क बना दिया। मैं दीदी की चुची से खेल रहा था, जिससे दीदी भी अब कड़क हो गई थीं।

‘अब तुमको फिर चोद कर मजा देता हूँ रानी.. आओ नीचे..’

‘ओके..’

‘इस बार मैं तुम्हें डॉगी स्टाइल में चोदूँगा।’

वो बोली- कैसे?

मैंने कहा- अरे पागल.. आज तक ऐसे नहीं करवाया.. तो क्या मस्ती मिली रे, रोज नई-नई स्टाइल से चोदने का आनन्द लेना चाहिए मेरी जान।

दीदी गांड हिलाते हुए बोलीं- तो आज मेरे ऊपर कर नई-नई स्टाइल का इस्तेमाल.. मैं भी तो देखूं सही कि कैसा मजा आता है।

मैंने दीदी के दोनों हाथ को साइड में रख कर टेबल पर जमा दिए और बोला- अब थोड़ा झुक जाओ।

फिर मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में खड़ा कर दिया और पीछे से उनके दोनों चूचों को पकड़कर मसलते हुए अपना लंड उनकी दोनों जाँघों के बीच में डालकर अपने लंड को उनकी बुर पर थोड़ा रगड़ा और दीदी को गरम कर दिया। फिर मैंने अपना पूरा लंड एक ही झटके में अन्दर ठेल दिया। मेरे हाथ उनके चूचों को मसल रहे थे.. निप्पलों को पकड़ कर खींच रहे थे.. मसल रहे थे।

इस स्टाइल में उन्हें दोनों तरफ से इतना मजा आ रहा था कि वो मस्ती में ‘अहह..’ करती जा रही थी.. और बोल रही थीं- अह.. चोद… चोद… रुकना नहीं.. बड़ा मजा आ रहा है मेरी जान..

अब मेरा लंड उनकी बुर में स्क्रू की तरह चला गया था और पूरा फिट हो गया था। इससे उन्हें इतनी उत्तेजना हो रही थी कि वो अपनी गांड हिला-हिला कर लंड खा रही थीं। मुझे भी इतना आनन्द आ रहा था कि बस पूछो मत।

मैंने उनसे कहा- अब मेरी हॉर्स पावर का कमाल देखो.. अब मैं तुम्हें घोड़े की तरह चोदूंगा।

मैंने अपनी पोज़िशन मजबूत करने के लिए उनकी चुची को ज़ोर से पकड़ लिया और धक्का देने लगा। दीदी भी अपनी गांड को पीछे कर-कर के मेरा पूरा लंड लीलना चाह रही थीं।

मैं भी ज़ोर-ज़ोर से धक्के देने लगा। दीदी के गोल-गोल बुरड़ों को धक्के देने में मजा आ रहा था।

वो मस्ती में बोल रही थीं- अह.. चल मेरे घोड़े फटाफट चोद.. और ज़ोर से और जोर से चोद भैनचोद.. आज तेरी रानी मस्त हो गई है राजा.. आज मान गई तुझको.. आज तक इतना ज़ोर का मजा नहीं आया।

अब मेरा भी वक़्त आ गया था कि कभी भी मैं अपना रस छोड़ सकता था।

दीदी भी अब झड़ने वाली थीं। मैंने अब उनकी गांड को दोनों हाथों से पकड़कर धक्के देना चालू किए और वो भी काफ़ी एग्ज़ाइट्मेंट में चिल्लाए जा रही थीं ‘आआहह ऊफफ्फ़.. ईईसस्स्स.. और ज़ोर से धक्का मार साले.. मेरी बुर फाड़ दे चोद चोद के.. अह..’

फिर हम दोनों एक साथ झड़ गए और धीरे-धीरे शिथिल होते हुए अलग हो गए।

इसके बाद मैंने दीदी से थोड़ी इधर-उधर की बातें की कि उनको कैसा लगा।

दीदी बोली- अब और कौन से स्टाइल बाकी है?

मैं बोला- अभी तो कई हैं.. अच्छा अभी एक नई स्टाइल से और चुदाई करवाना चाहोगी?

वो बोलीं- कैसी है.. जल्दी बोलो जो करना है.. जैसे करना है, बस करते जाओ.. कुछ ना पूछो मेरी जान राजा!

मैंने कहा- क्या मैं तुम्हारी चुची को फक कर सकता हूँ?

वो बोलीं- वो कैसे?

मैंने उन्हें बताया- मैं तुम्हारी चुची को पकड़कर आपस में भींच दूँगा और मैं उस में से अपना लंड घुसाकर चुची को फक करूँगा।

‘ओके..’

मैंने उन्हें बताया कि मेरे लंड के आगे-पीछे होने से तुम्हारे निप्पल और चुची दोनों को मजा आएगा।

तो वो बोलीं- ठीक है, चलो आजमाते हैं.

मैंने उसे सोफे पर लिटा दिया और उनकी कमर तक आ गया। फिर दीदी ने अपनी चुची को दोनों हाथों से दबाकर दोनों को भींच दिया। मैंने उनके बीच में से अपने लंड के लिए जगह बनाई और चुचों के बीच में लंड डाल कर अन्दर-बाहर किया।

पहले तो दीदी को मजा नहीं आया, पर बाद में जब उनके निप्पल धीरे-धीरे कड़क हो गए और मैं भी ज़ोर-ज़ोर से चुचों को चोदने लगा तो उन्हें मजा आने लगा।

मैं भी उनकी चुची को और जोर से दबाने लगा.. तो बहुत मजा आने लगा। बीच-बीच में मेरा लंड उनके होंठों को भी छू लेता था, जिससे उनको सुपारे को चखने का अवसर भी मिल रहा था।

उन्हें चुची की चुदाई का मजा आ गया और वे मेरा लंड अपने मुँह में भर कर चूसने लगीं। मैं लंड से उनके निप्पलों मसल रहा था.. एक हाथ से उनकी बुर को मसल रहा था। वो भी बुरी तरह गर्म हो गई थीं। अब मैंने लंड को उनके मुँह से बाहर निकाला क्योंकि मैं झड़ने वाला था। मैंने अपने लंड का फव्वारा उनकी चुची पर छोड़ दिया। मुझे इस चुदाई से इतना मजा अधिक आया कि क्या बताऊँ।

फिर मैंने उन्हें लिपटाकर अपनी गोदी में बिठा लिया और लंड उनके दोनों बुरड़ों के बीच में से उनकी गांड में डालकर पीछे से उनकी किस करने लगा।

मैं उन्हें आगे से सहलाता, उनके चूचे मसलता, उनकी बुर रगड़ता, सबको चूमता-चाटता.. दबाता, उंगली करता हुआ उनसे बात करता रहा।

मैंने उन्हें इसी पोज़िशन में सोफे पर लिटा दिया। अब हम दोनों एक-दूसरे से चिपट कर लेट गए और चुम्मा-चाटी करने लगे। मुझे मानो आज जन्नत और उसमें हूर की परी मिल गई थी, जन्नत का नज़ारा देखने को मिल गया था।

हम दोनों एक-दूसरे की बांहों में आ गिरे और कमरे के बिस्तर पर जाकर लेट गए। मैं नीचे और वो मेरे ऊपर थीं। मैंने उन्हें अपनी बांहों में भर लिया और मैंने एक ज़ोर का चुम्मा लेकर उनकी जीभ भी चूस ली। थोड़ी देर बाद हम दोनों उठे और अपने कपड़े बदल लिए।

मेरी प्यारी डार्लिंग दीदी के चेहरे पर चुदाई से मिली ख़ुशी साफ़ नज़र आ रही थी। वो चुदाई से पूर्णत: संतुष्ट थीं। दीदी मेरे लिए नाश्ता बनाने चली गईं। जब वे नाश्ता बना कर लाई तो मेरी गोद में बैठ गईं.. मुझे अपने हाथों से खिलाया और खुद भी खाया।

दीदी- तुम दिव्या को पसंद करते हो क्या?

मैंने हंसते हुए कहा- नहीं यार, बस टेस्ट चेंज करना चाहता हूँ।

दीदी- मतलब?

मैं- नई बुर लिए हुए बहुत दिन हो गए हैं.. तो उसी के चक्कर में हूँ।

दीदी- ऊऊओह.. क्या मैं पुरानी हो गई हूँ?

मैंने डॉली दीदी की बुर पर हाथ रखते हुए कहा- ये बुर कभी भी पुरानी नहीं होगी।

डॉली दीदी हँसने लगीं..

तो मैं बोला- अब हंसना बंद करो और दिव्या की बुर लेने में मेरी हेल्प करो।

वो बोलीं- ठीक है.. कल आती है तो बात करती हूँ।

अगले दिन दिव्या नहीं आई, फिर वो दूसरे दिन जब मेरे घर आई, तो मैंने कहा- यार तुम कल क्यों नहीं आईं?

तो उसने थोड़ा गुस्से में कहा- मेरी मर्ज़ी.. मैं कभी भी आऊँ!

मैंने ‘ओके..’ कहकर उसकी बात को इग्नोर कर दिया और उससे कहा- चलो दिव्या मेरे रूम में चलते हैं.. वहीं बात करेंगे।

उसने कहा- राजा बहुत ज्यादा हो गया.. मैं यहाँ तुमसे मिलने नहीं आई हूँ। मैं यहाँ डॉली दीदी से मिलने आई हूँ और जो कल हुआ उसे भूल जाना।

यह बोलते ही वो दीदी से बात करके अपने घर चली गई।

उसके जाने के बाद दीदी ने पूछा- क्या हुआ हीरो.. लौंडिया हाथ में नहीं आ रही है क्या?

मैं बोला- कुछ नहीं.. थोड़ा भाव खा रही है।

दीदी ने बोला- वो भाव नहीं खा रही है.. डर रही है। कभी अकेले में मिलो.. तो बात करेगी।

‘अकेले में कब मिलेगी?’

तो दीदी बोलीं- परसों।

मैं बोला- कैसे?

तो दीदी बोलीं- परसों हम लोग एक शादी में जा रहे हैं.. तुम किसी बहाने से रुक जाना, बाकी तुम तो हो ही माहिर खिलाड़ी।

मैं बोला- थैंकयू दीदी.. बहन तो सिर्फ़ आप जैसी होनी चाहिए, जो भाई के हर दुःख को समझती हो।

ये बोलते हुए मैंने दीदी को अपनी बांहों में ले लिया और उन्हें किस करने लगा। तो वो अलग हो गईं और बोलीं- अभी सब घर में हैं।

फिर जिस दिन सब को जाना था, उस दिन दीदी मेरे पास आईं और बोलीं तेरा काम बना दिया है.. माँ-पापा को बोल दिया है कि तुम्हारा शादी में जाने का मन नहीं है, सो तुम यहीं घर पर ही रुक रहे हो.. और दिव्या को भी बोल दिया है कि तुम्हारे लिए खाना पहुँचा दे।

मैं बोला- थैंक्स डार्लिंग..

मैंने दीदी को अपनी बांहों में लेकर एक किस कर दिया, तो वो मेरे लंड को पकड़ कर बोलीं- ये बड़ा उतावला है।

मैं बोला- होगा क्यों नहीं.. इसको नई बुर मिलने की जो उम्मीद हो गई है।

तो दीदी हँसने लगीं और जाने के लिए तैयार होने चली गईं।

कुछ ही देर में माँ-पापा के साथ वो शादी में चली गईं।

मैं सोच रहा था कि पता नहीं दिव्या आएगी भी या नहीं।

लेकिन शाम को जब दिव्या मेरे घर आई तो उसने मुझे आवाज़ दी- राजा?

तो मैंने कहा- अभी आ रहा हूँ।

मैं उस वक़्त नहा रहा था और नहाकर वापस आया तो देखा दिव्या खाना लेकर खड़ी थी। उसने ट्राउजर और टी-शर्ट पहना हुआ था बड़ी मस्त लग रही थी। उसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। उसने मेरे लंड की तरफ देखा तो तौलिया में से उसे बंबू बना दिखाई दिया।

उसने कहा- मैं तुम्हारे लिए खाना लाई हूँ.. खाना खा लो।

मैंने कहा- बस अभी कपड़े पहन कर आता हूँ।

मैं कमरे में जाकर लोवर और बनियान पहन कर आ गया। हम टीवी वाले कमरे में चले आए और टीवी देखने लगे। मैं खाना खाने लगा.. दिव्या अभी भी मुझसे बात नहीं कर रही थी।

मैंने सोच लिया था कि आज तो इसे ऐसे ही जाने नहीं दूँगा।

मैंने दिव्या से कहा- तुम मुझसे बात क्यों नहीं कर रही हो?

तो उसने कहा- मेरा मन नहीं है। मैं फालतू लोगों से बात नहीं करती।

तभी मैंने खाने को छोड़ दिया और कहा- ले जाओ खाना.. मैं भी फालतू लोगों का खाना नहीं ख़ाता।

मैं बिस्तर पर लेट गया।

उसने कहा- मेरा गुस्सा खाने पर क्यों दिखा रहे हो, खाना खा लो चुपचाप!

मैंने कहा- मैं बाहर होटल पर जाकर खा लूँगा।

उसने कहा- खाना तो आपको खाना ही पड़ेगा।

वो रोटी का टुकड़ा तोड़कर मेरे मुँह में डालने लगी। मैंने तभी उसे अपनी बांहों में भर लिया और कहा- प्लीज़ दिव्या, बताओ तुम मेरे साथ ऐसा क्यों कर रही हो?

उसने कहा- राजा जो हमारे बीच हुआ.. वो नहीं होना चाहिए था, मैं तुम्हें अपना भाई मानती हूँ और तुमसे बड़ी भी हूँ।

मैंने मन ही मन सोचा कि भाई..! मैंने तो अपनी सगी बहन को नहीं छोड़ा, ये तो मुँह बोली बहन बन रही है।

लेकिन मैंने कहा- यार तुम पहले एक लड़की हो और बाद में कुछ और हो।

यह कहकर मैंने उसे दबोच लिया।

वो बोलने लगी- नहीं राजा प्लीज़ मुझे छोड़ दो.. मुझे घर जाना है।

मैंने कहा- बस थोड़ी देर रुक जाओ, फिर चली जाना।

मैं उसे किस करने लगा, वो झटपटाने लगी और अपने आपको मुझे छुड़ाने लगी। लेकिन मैंने उसे नहीं छोड़ा और किस करता गया।

फिर मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और गेट बंद कर दिया। वो डर गई और बोलने लगी- राजा प्लीज़ कुछ ग़लत मत करना..!

उसकी शक्ल रोने जैसे हो गई।

मैंने कहा- कुछ भी ग़लत नहीं होगा, बस थोड़ा बहुत ही करूँगा।

फिर मैं उसके ऊपर लेट गया और उसके चूचे मसलने लगा.. किस करता गया। फिर मैंने उसकी टी-शर्ट ऊपर करके उसके चूचे ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा। कुछ देर बाद मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी, तो वो रोने लगी।

मुझे पता चल गया कि इसका भी मन है, पर ये नखरे दिखा रही है।

फिर मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके एक चुचे को मुँह में लिया तो वो एकदम से चीख पड़ी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… अहह.. लगती है।

मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी। अब उसका ऊपर का हिस्सा मेरे सामने बिल्कुल नंगा था। अब मैं अपने कंट्रोल से बाहर हो गया और अपने कपड़े उतारने लगा। जैसे ही मैंने अपनी अंडरवियर उतारने के लिए हाथ लगाया, उसने मेरा हाथ पकड़ा और रोने लगी।

वो बोलने लगी- प्लीज़ ये सब मत करो।

मैंने कहा- कुछ नहीं होगा.. तुम टेंशन मत लो और अपना अंडरवियर उतार दिया। अब मैं बिल्कुल नंगा हो चुका था। फिर मैंने उसका पजामा उतारा। उसने काफ़ी रोकने की कोशिश की, पर मैं नहीं माना और उसका पजामा उतार ही दिया। फिर उसकी पेंटी भी उतार दी।

अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी पड़ी हुई थी। वो बिल्कुल अप्सरा की तरह लग रही थी, बिल्कुल गोरी।

उसने अपना एक हाथ अपनी बुर पर रख लिया और एक हाथ अपनी चुची पर रख लिया.. वो अपने आपको छुपाने लगी।

मैंने उसका हाथ उसकी बुर पर से हटाया और उसकी बुर पर अपना मुँह लगा दिया। उसकी बुर में जैसे ही जीभ डाली.. वो एकदम से लम्बी सी सांस लेकर उठी और ‘अहह..’ की आवाज़ करने लगी।

फिर मैंने करीब 2-3 मिनट तक उसकी बुर चाटी।

अब वो भी पूरे जोश में आ चुकी थी, उसने अपनी बुर पूरी खोल दी थी।

फिर मैंने अपना लंड उसकी बुर पर रखा और रगड़ने लगा। वो लंबी-लंबी साँसें ले रही थी। उससे बिल्कुल भी सब्र नहीं हो रहा था। वो बस ये चाहती थी कि जल्दी से मैं उसकी बुर में लंड डाल दूँ।

लेकिन मैंने कुछ देर सुपारा रगड़ने के बाद लंड हटा लिया और उससे कहा- इसे मुँह में लो।

पहले तो वो मना कर रही थी.. मगर मेरे ज्यादा ज़ोर देने पर उसने मेरा लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

कुछ देर चूसने के बाद मैंने उसे लेटा कर उसके ऊपर लेट गया। उसके होंठों पर किस करने लगा और चुची भी दबाने लगा।

अब मैंने एक हाथ से अपना लंड उसकी बुर के छेद पर रखा और ज़ोर से धक्का मारा। मेरा लंड बुर में घुस गया और फिर मैं लंड को अन्दर-बाहर करने लगा और थोड़ी देर बाद मैं झड़ कर शांत हो गया.. लेकिन वो अभी भी गर्म थी।

मैं ढीला होकर लेट गया.. तो उसने मेरे ऊपर बैठकर मेरा लंड पकड़ा और अपनी बुर में लगाकर ऊपर-नीचे होने लगी। कुछ देर बाद वो भी झड़ गई।

फिर हम दोनों ऐसे ही नंगे लेटे रहे। थोड़ी देर बाद हमने दुबारा सेक्स किया।

उसके बाद वो अपने घर जाने लगी, तो मैंने पूछा- अब खाना कब मिलेगा?

वो बोली- कल ले कर आती हूँ।

फिर कुछ देर बाद दीदी का फोन आया कि वो लोग पहुँच गए हैं।

मैंने कहा- ओके..

फिर दीदी ने मुझसे पूछा- क्या हुआ?

मैं बोला- वही.. जो होना था, काम पास हो गया।

तो वो बोली- यार तू चीज़ ही ऐसी है.. कोई भी फ्लैट हो जाएगी।

उसके बाद भी हमने कई बार सेक्स किया।

साथियों अब तक मैं बी.टेक. के अंतिम साल में पहुँच चुका हूँ.. सो अब नौकरी के लिए इंटरव्यू देना शुरू कर दिए हैं.. जॉब की तलाश में हूँ।

मैंने गेट के एग्जाम के लिए भी फॉर्म भरा हुआ था.. और उसका सेंटर मैंने ओडिशा का ही दिया था.. क्योंकि उधर बहुत सारी इलेक्ट्रिकल की कंपनी भी हैं और इसी बहाने उधर घूम भी लूँगा।

वैसे आपको याद होगा मैंने इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग राउरकेला से ही किया था। वो इतनी बेहतरीन जगह है कि मुझे दुबारा उधर ही आने का मन कर रहा था.. लेकिन कभी मौका नहीं मिल पाया। मेरे गेट के एग्जाम का सेंटर राउरकेला फिर से पड़ा।

मैं मन ही मन खुश हो रहा था कि एक बार फिर से मुझे तीन चूतें मिलेंगी.. क्योंकि पिछली बार जब ट्रेनिंग के लिए आया था.. तो यहाँ 40 दिन रुका था और तीन चूतों को चोद कर गया था।

अगर याद नहीं आ रहा हो या जो नए पाठक हों.. तो वो मेरी पिछली कहानियाँ पढ़ सकते हैं।

नंगी नहाती मोनिका का बदन

वैसे फिर से मैं थोड़ा बता देता हूँ कि राउरकेला में मैंने तीन को चोदा था। एक थी मोनिका.. जो कि मेरे पापा के दोस्त की बेटी है और उसके बाद उसकी ही एक कुँवारी फ्रेण्ड सोनी को और अंत में मोनिका की माँ यानि पापा के दोस्त की बीवी को चोदा था।

मेरे मन में इस बात की कसक थी कि तीनों की बुर तो मैं ले चुका था लेकिन गान्ड किसी की नहीं मारी थी। तो शायद मुझे इस बार यह मौका मिल जाए।

जैसे ही मैंने अपना एड्मिट कार्ड देखा.. तो मैंने सबसे पहले मोनिका को कॉल किया और उसे बताया कि मैं एग्जाम के लिए राउरकेला आ रहा हूँ।

तो वो खुश हो गई और उसने यह बात अपनी माँ को बताई।

फिर मैं ट्रेन पकड़ कर एग्जाम के 3 दिन पहले ही राउरकेला पहुँच गया।

मैंने पहुँच कर मोनिका को कॉल किया तो वो बोली- बाहर निकलो.. मैं कार में इंतज़ार कर रही हूँ।

मैंने कार देख ली और उसके पास गया, वो कार के पास खड़ी थी, मैंने उसको देखते ही गले लगा लिया।

यार क्या बताऊँ.. वो तो बहुत ज्यादा बदल गई थी.. पहले से और भी ज्यादा हॉट और सेक्सी लग रही थी।

मैंने गले लगते ही उसके बुरड़ दबा दिए.. तो बोली- यहाँ नहीं.. सब हमें ही देख रहे हैं.. कार में बैठो।

मैं कार में बैठ गया और उससे बोला- क्या बात है यार और भी ज्यादा हॉट और सेक्सी हो गई हो.. क्या कर रही हो?

उसने बस ‘थैंक्स’ बोला।

फिर मैंने पूछा- माँ-पापा घर पर ही है क्या?

तो वो बोली- हाँ..

‘तब तो अभी घर पर कुछ नहीं हो सकता?’

वो बोली- शायद नहीं..

उस वक्त उसने जीन्स और टॉप पहन रखा था.. तो मैं उसके जाँघों पर हाथ रख कर सहलाने लगा।

उसने मेरा हाथ हटा दिया.. तो मैंने उसके कंधों पर हाथ रखा और हाथ को सहलाने लगा.. तो उसने मेरा हाथ भी हटा दिया।

मैंने पूछा- क्या हुआ.. नाराज़ हो क्या?

बोली- हाँ.. तुमको दो साल बाद टाइम मिला आने का?

तो मैं बोला- क्या करता.. आने के लिए कोई कारण ही नहीं मिल रहा था.. मैं तो तुम्हारी याद में रोज तड़पता था.. लेकिन क्या कर सकता था?

वो बोली- हाँ मिलना नहीं चाहते थे.. तो बहाना बना रहे हो।

मैं बोला- डार्लिंग मैं बहाना नहीं बना रहा.. सच में बहुत मिस कर रहा था।

बोली- मुझे.. या मेरे बदन को?

‘अरे नहीं.. तुमको और तुम्हारे बदन को भी..’ ये बोलते हुए उसकी चूचियों को छूने की कोशिश करने लगा।

वो बोली- यहाँ कुछ नहीं.. घर चलो और वहाँ से कहीं और चलेंगे।

मैं बोला- ओके मेरी जान।

हम दोनों घर पहुँच गए.. उसने रास्ते में कुछ नहीं करने दिया बल्कि चूचियों को भी नहीं दबाने दिया।

खैर.. मैं घर के अन्दर गया और उसके पापा और मॉम दोनों को प्रणाम किया।

मुझे देख कर दोनों खुश हो गए.. ख़ास करके उसकी मॉम.. वो तो और भी हॉट और सेक्सी लग रही थी। मुझे देख कर लगा ही नहीं कि 2 साल पहले जिससे मिला था.. वो यही थी।

शायद इनकी उम्र बढ़ने की जगह घट रही हो, ये तो और भी जवान होती जा रही है।

मेरा मन तो कर रहा था कि अभी ही पकड़ लूँ और गले से लग जाऊँ.. लेकिन नहीं कर सकता था.. क्योंकि सब वहीं थे..

तो मैं फ्रेश होने बाथरूम में गया और तब तक उसके पापा ऑफिस चले गए.. मैं अभी बाथरूम में नहाने जा ही रहा था।

मैं जब बाथरूम से निकला.. तो सिर्फ़ एक तौलिया ही लपेट कर निकला.. तो दोनों मुझे बहुत हवस की नजरों से देख रही थीं।

मैंने तो वैसे भी बॉडी बहुत अच्छी बना ली है, मुझे देखते ही दोनों बोलीं- वाउ… एब्स बना लिए हो।

मैंने बस ‘थैंक्स’ बोल दिया।

तभी मोनिका को उसकी माँ ने कुछ लाने के लिए बाहर भेज दिया और खुद रसोई में खाना बनाने चली गईं।

मोनिका के जाते ही मैं रसोई में पहुँचा और उसकी माँ को पीछे से पकड़ लिया तब उन्होंने साड़ी और बैकलैस ब्लाउज पहना हुआ था।

मैं उनको कंधों पर चुम्बन करने लगा और उनके नंगे पेट को सहलाने लगा।

मैंने मादक अंदाज में पूछा- कैसी हो मेरी जान?

वो बोलीं- छोड़ो.. नहीं तो मोनिका आ जाएगी।

मैं बोला- जब तक नहीं आ रही है.. तब तक तो रूको.. मैं बहुत दिनों से तड़फ रहा हूँ।

मैंने उनकी चूचियों को दबाते हुए चूमा, उनकी चूचियाँ अब तक हार्ड हो चुकी थीं।

वो मेरी तरफ़ घूम गईं और बोलीं- अभी जाओ और कपड़े बदल कर आओ.. मैं नाश्ता लगाती हूँ।

मैं बोला- पहले एक होंठों से चुम्बन दो।

तब तो उन्होंने मेरे गालों पर एक चुम्बन कर दिया और बोलीं- जाओ..

तो मैं बोला- गालों पर नहीं..

और अपना तौलिया खोल कर लण्ड को दिखाते हुए बोला- इस पर..

वो बोलीं- नो.. अभी नहीं.. जाओ अब यहाँ से.. बाद में..

मैं बोला- किस मिलने के बाद ही जाऊँगा।

उन्होंने जल्दी में मेरे लण्ड पर किस कर दिया और बोलीं- जाओ..

मैं उनके बुरड़ दबाते हुए कमरे में चला गया।

फिर कुछ देर बाद मोनिका सामान ले कर आई.. रसोई में सामान रख कर कमरे में आई.. तो उसने देखा कि मैं नंगा ही खड़ा था।

वो लौट कर जाने लगी.. तो मैंने उसको पकड़ने की कोशिश की.. तब तक वो कमरे से बाहर निकल गई।

मैं भी कपड़े पहन कर बाहर आया.. तो देखा आंटी रसोई में खाना बना रही थीं।

मैंने पूछा- ऊपर और कमरे बनवा रहे हैं क्या?

तो आंटी बोलीं- हाँ सब कुछ हो चुका है.. बस छत ढालना बाकी है।

मैं बोला- मैं देख कर आता हूँ।

मैंने मोनिका को बोला- चलो मोनिका।

वो बोली- पहले नाश्ता तो कर लो.. फिर देखने जाना.. और तब तक मैं भी नहा लेती हूँ।

वो नहाने बाथरूम में गई और अन्दर से ढीला-ढाला सा स्कर्ट और टी-शर्ट पहन कर निकली।

उसको देखने से लग रहा था कि इसने इस वक्त ब्रा नहीं पहनी हुई है।

मैं समझ गया कि इसका भी मन हो गया है।

नाश्ता करने के बाद आंटी बोलीं- अब जाओ देख लो ऊपर का मकान..

मैंने मोनिका को साथ चलने को बोला.. तो वो नहीं जा रही थी।

लेकिन आंटी बोलीं- जाओ न.. दिखा दो.. तब तक मैं भी घर साफ़ करके नहा लेती हूँ।

तो वो मेरे साथ ऊपर चली आई।

ऊपर आते ही मैंने उसको अपने तरफ़ खींचा और अपने होंठों को उसके होंठों पर रख दिए।

उफ़.. बहुत मुलायम थे उसके होंठ.. बता नहीं सकता कितने..

वो भी मेरा साथ देने लगी.. तो मैं अपना हाथ हटा कर नीचे उसकी कमर को सहलाने लगा और उसके बुरड़ों की तरफ़ बढ़ने लगा। अब तक मेरे हाथ उसके बुरड़ों तक पहुँच भी चुके थे और मैं उनको दबाने लगा था साथ ही ऊपर ‘लिप-किस’ में बिज़ी था।

लेकिन मेरा हाथ सही से नहीं बैठा हुआ था.. वो स्कर्ट के ऊपर से ही उसके बुरड़ को दबा रहा था।

कुछ देर लिप किस करने के बाद हम अलग हुए।

हम दोनों के चेहरे पर एक अलग सी ख़ुशी थी और वो मुझे देख कर मुस्कुरा दी।

मुझे तो वो ग्रीन सिग्नल लगा आगे बढ़ने का.. सो मैं उसकी गर्दन पर किस करने लगा और पीछे हाथों से उसके बुरड़ को दबाने लगा।

साथियों ये मोनिका के साथ मुझे मजे करने का अवसर तो था ही.. साथ में मोनिका के लिए भी एक अवसर था।

अब रहा नहीं जा रहा था तो अपने हाथ को उसकी स्कर्ट के इलास्टिक में डाल दिया और उसके बुरड़ों को सहलाने लगा।

ऊपर गर्दन से होते हुए खुले गले वाली टी-शर्ट थी तो मुझे किस करने के लिए भी बहुत जगह खाली थी.. मैं किस करने लगा और नीचे बुरड़ों को भी दबाने लगा।

उसके बुरड़ भी इतने ज्यादा मुलायम और गोल थे कि बता नहीं सकता। अगर बुरड़ों में भी एक निप्पल लगा होता.. तो पता ही नहीं चलता कि चूचियों को दबा रहा हूँ.. या बुरड़!

कुछ देर दबाने के बाद मैं उसके पीछे चला गया और पीछे से गर्दन पर किस करने लगा और उसकी चूचियों को दबाने लगा।

धीरे-धीरे मैंने टी-शर्ट के अन्दर अपना हाथ घुसा दिया और नंगी चूचियों को दबाने लगा.. क्या मस्त मखमली चूचियाँ थीं यार.. क्या बताऊँ।

मेरा लण्ड ट्राऊजर के अन्दर ही टाइट हो के फनफना रहा था.. इतना ज्यादा टाइट था कि उसकी गान्ड को मेरा लण्ड फील हो रहा था।

उसने जैसे ही लण्ड को ऊपर से ही सहलाया.. मैं एकदम से आगे आ गया और उसकी टी-शर्ट को ऊपर उठा दिया जिससे उसकी चूचियाँ बाहर आ गईं.. और मैं उन पर टूट पड़ा उनको चूसने काटने लगा।

अब तक उसने मेरा लण्ड बाहर निकाल लिया.. लण्ड देख कर बोली- यह तो पहले से काफ़ी बड़ा हो गया है।

वो लण्ड को मसलने लगी और मैं उसकी चूचियों को।

कुछ देर ऐसा करने के बाद वो अलग हुई और झुक गई और लण्ड पर किस करने लगी और मैं उसके सिर को सहलाने लगा।

किस करने के बाद जैसे ही वो लण्ड को मुँह में लेने की कोशिश करने लगी कि तभी नीचे से उसकी मॉम की आवाज़ आई।

शायद वो हमें नीचे बुला रही थीं।

हमारे चेहरे पर उदासी छा गई.. लेकिन फिर भी मैं उसकी स्कर्ट को थोड़ा नीचे करने लगा.. मुझे उसकी बुर देखनी थी।

उसने मना कर दिया और हम दोनों को अपने अपने कपड़े ठीक करके जाना पड़ा।

नीचे आने पर उसकी मॉम बोली- राजाबाबू थका होगा.. इतनी दूर से आया है.. इसको आराम करने दो.. कुछ देर आराम कर लो फिर बैठ कर पढ़ो.. परसों एग्जाम है ना तुम दोनों का?

तो मैं बोला- परसों मेरा है.. उसका तो और एक दिन बाद है।

मोनिका अपने कमरे में पढ़ने चली गई और मैं आंटी के कमरे में ही सोने चला गया। तभी कुछ देर बाद आंटी शायद अपने कपड़े लेने कमरे में आईं.. मुझे जगा हुआ देख कर बोलीं- अब तक सोए नहीं हो?

मैं बोला- क्या करूँ नींद ही नहीं आ रही है.. आप तो पहले से ज्यादा सेक्सी हो गई हो.. लगता है आजकल पूरा फिटनेस पर ध्यान दे रही हो।

‘बस थोड़ा वजन कम किया है..’

‘तभी तो आपके ये और भी ज्यादा सेक्सी हो गए हैं.. मुझे तो दूध पीने का दिल कर रहा है!’

बोलीं- नो.. मोनिका यहीं है.. उसको पता चल जाएगा तो प्राब्लम हो जाएगी।

मैं बोला- कम से कम एक बार दिखा तो दो।

तो वो पोंछा लेकर आईं कमरे में पोंछा लगाने के बहाने से.. और उन्होंने मुझे आँख मारते हुए अपने ब्लाउज के 2 बटन खोल दिए और कमरे में पोंछा लगाने लगीं।

उनकी आधी चूचियाँ उनके ब्लाउज से बाहर ही थीं.. देख कर मेरा लण्ड फिर से टाइट हो रहा था लेकिन कुछ कर नहीं सकता था.. सो जब तक वो चूचे हिलाते हुए कमरे में पोंछा लगाती रहीं.. तब तक देखता रहा।

जब वो नहाने चली गईं तो मैं भी सो गया।

मैं नींद में ही था कि तभी मुझे लगा कि कोई मेरे बदन पर हाथ घुमा रहा है।

आँख खोली तो देखा मोनिका थी।

मुझे लगा कि मैं सपना देख रहा हूँ।

तभी वो बोली- अब कोई प्राब्लम नहीं है।

और मुझे किस करने लगी.. तो मैंने पूछा- आंटी कहाँ गई हैं?

बोली- मार्केट गई हैं.. कुछ शॉपिंग करने.. वे 2-3 घंटे से पहले नहीं आएगीं।

इतना बोलते ही वो मेरे ऊपर टूट पड़ी उसने मेरे होंठों को अपने होंठों में क़ैद कर लिया और चूसने लगी।

मैंने भी अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी और उसकी जीभ को चूसने लगा।

अब हम एकदम वाइल्ड स्मूचिंग कर रहे थे.. बिल्कुल जंगली जानवरों की तरह.. क्योंकि हमारे पास ज़्यादा टाइम नहीं था।

मैंने उसको बिस्तर पर खींच लिया और उसको वहाँ पर लिटा दिया.. और खुद उसके ऊपर लेटकर उसे किस करने लगा। साथ ही साथ उसकी चूचियाँ भी दबाने लगा।

उसकी चूचियाँ एकदम टाइट और गोल थीं.. मैंने ज़्यादा देर ना करते हुए उसके टॉप को उतार दिया और साथ ही ब्रा भी उतार दी।

उसकी गोल-गोल गोरी चूचियाँ और उन पर ब्राउन कलर का अरोला बहुत ही सुंदर लग रहा था। मैंने उसकी लेफ्ट साइड की चूची को मुँह में ले लिया और सीधे तरफ की चूची के निप्पल को चुटकी में लेकर मींचने लगा.. वो मदमस्त होकर ‘आहें’ भर रही थी।

कुछ देर चूची चूसने के बाद यही मैंने उसकी दूसरी चूची के साथ किया.. पर लेफ्ट साइड की चूची नहीं दबाई बल्कि उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी बुर को सहलाने लगा..

वो एकदम से मस्त हो गई थी, मैं भी जोश में आ गया था।

अब मैंने उसकी सलवार भी उतार दी, उसकी पैन्टी उसके बुर के रस से बिल्कुल गीली हो गई थी.. तो देर ना करते हुए मैंने उसकी पैन्टी भी उतार दी।

उसकी एकदम चिकनी क्लीन शेव.. गोरी बुर का दीदार करने लगा।

एकदम फूली हुई बुर थी उसकी.. और लाल रंग का क्लाइटॉरिस बाहर को निकला हुआ था..

मैंने देर ना करते हुए उसके क्लाइटॉरिस को अपने होंठों में भर लिया और उसकी बुर का रस पीने लगा। मैंने अपनी जीभ उसकी बुर के अन्दर डाल दी और उसकी बुर की दीवारों का सारा रस चाट-चाट कर मज़ा लेने लगा।

वो तो जैसे पागल ही हो गई थी। ऐसे ही कुछ देर बुर चाटने पर वो झड़ गई.. और हाँफने लगी।

अब मज़ा लेने की बारी मेरी थी.. मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए।

मेरे लण्ड को देख कर बोली- बताया नहीं कि ये पिछली बार से थोड़ा बड़ा और मोटा कैसे हो गया है?

मैं बोला- मेहनत हुई है इसके साथ..

इतना कहकर मैंने उसके मुँह में अपना लण्ड डाल दिया और वो लण्ड को चूसने लगी।

पिछली बार तो उसे चूसना नहीं आता था.. लेकिन इस बार ऐसे चूस रही थी.. जैसे एक्सपर्ट हो गई हो।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और टाइम भी कम था.. तो मैंने लण्ड को उससे अच्छी तरह से गीला करवा दिया और उसको बिस्तर पर आधा लिटा दिया।

अब मैं बिस्तर के कोने पर आ गया और उसकी टाँगों को अपने कंधों पर रख लिया। उसकी बुर का छेद और मेरे लण्ड का टोपा.. एकदम आमने-सामने थे.. मैंने देर ना करते हुए उसकी बुर पर अपना लण्ड फिराया.. वो तड़प उठी और बोली- बस अन्दर डाल दो..

उसका इतना कहना था कि मैंने लण्ड का टोपा उसके छेद से लगाया और एक जोरदार धक्का मारा.. मेरा आधा लण्ड उसकी बुर में चला गया।

वो एकदम से चिल्लाई.. तो मैं उसकी बुर के पास सहलाने लगा।

कुछ देर बाद फिर नॉर्मल हो गई.. तो मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में दबाया और एक जोरदार धक्का और मारा और पूरा का पूरा लण्ड उसकी बुर में उतार दिया।

वो तो तड़पने लगी.. पर मुझे पता था कि जरा सी देर के बाद ही इसे मज़ा आना शुरू हो जाएगा।

मैं धक्के लगाने लगा।

पहले मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाए और फिर तेज-तेज.. उसको भी मज़ा आने लगा और वो भी गान्ड उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी।

इस पोज़िशन में चोदते हुए कुछ समय हो गया था.. तो मैंने उसे उठाया और ड्रेसिंग टेबल के सामने ले गया, उसका एक पैर ड्रेसिंग टेबल पर रखा और एक नीचे को थोड़ा सा झुकाया और शीशे में देखते हुए उसकी बुर में लण्ड पेल दिया।

इस पोज़िशन में काफ़ी मज़ा आ रहा था, मुझे शीशे में उसके फेस के एक्सप्रेशन्स और उसकी हिलती हुई चूचियाँ नज़र आ रही थीं.. तो मज़ा दो गुना हो गया था।

इसी पोज़िशन में चोदते हुए काफी देर हो गई.. तो उसने बोला- मैं झड़ने वाली हूँ..

मैं भी झड़ने के ही करीब था.. तो मैंने उसको कहा- बस मैं भी झड़ने वाला हूँ.. कहाँ निकालूँ?

तो उसने बोला- बुर में ही निकाल दो.. अभी मेरा सेफ टाइम है।

तो 20-25 धक्कों के बाद हम दोनों साथ ही झड़ गए और बाद में मैंने अपना बचा हुआ माल उसकी चूचियों में झाड़ दिया।

वो बड़े प्यार से उसको उंगली से उठा कर चाट रही थी।

मैं निढाल होकर उसकी कमर को चूमने लगा.. वो भी पूर्ण सन्तुष्ट हो चुकी थी और मैं भी।

एक फेरा होने के बाद हम दोनों अलग हुए और बिस्तर ठीक किया। हम दोनों ने अपने-अपने कपड़े पहन लिए.. क्योंकि उसके मॉम और पापा दोनों के आने का टाइम हो गया था।

मोनिका के साथ एक बार चुदाई का दौर चल चुका था और अब हम दोनों अपने अपने कपड़े पहन चुके थे।

मैं बैठ गया.. वो मेरे लिए कॉफी बना कर लाई और बोली- पहले से काफ़ी ज्यादा एक्सपर्ट हो गए हो.. लगता है इन 2 सालों में काफ़ी प्रेक्टिस हुई है।

मैं हँसने लगा और बोला- तुम भी तो काफ़ी सेक्सी हो गई है.. मेहनत तो हुई है मेरे जाने के बाद इस पर.. कौन है.. बताओ तो ज़रा?

तो वो बोली- नो.. पहले तुम?

और मैं भी बोला- पहले तुम?

पहले आप पहले आप में तो मैं ही झुकते हुए बोला- हाँ हैं चार लड़कियाँ..

तो वो बोली- बाप रे.. चार गर्ल्स.. क्या बात है तुम तो बहुत फास्ट हो यार.. प्लेब्वॉय बनने का इरादा है क्या?

मैं बोला- नहीं वैसा कुछ नहीं है.. बस लाइफ एंजाय कर रहा हूँ.. तुम बताओ तुम्हारा चोदू कौन है।

तो हँस कर बोली- है एक ब्वॉय-फ्रेंड मेरे कॉलेज का ही है.. तुम तो इतने दिन रहे कि लण्ड लेने की आदत हो गई थी.. तुम्हारे जाने के बाद मन ही नहीं लगता था.. सो वीक में एक दो-बार हो जाता है.. या कभी-कभी नहीं भी होता है।

तो मैं बोला- वाओ.. तब तो मस्त है पूरा एंजाय कर रही हो।

‘तुम बताओ तुम्हारी चार कौन हैं?’

‘एक गर्लफ्रेंड थी काजल

तुम्हारे यहाँ से जाने के बाद वही सहारा बनी.. लेकिन एक साल के बाद ब्रेकअप हो गया।

बाकी एक रिलेटिव है.. और दो दोस्त की बहनें हैं।

अभी वो कुछ आगे बोलती.. उससे पहले उसके मॉम-पापा आ गए.. तो हमने बात को यहीं ख़त्म कर दिया और उन लोगों का बाहर से लाया हुआ नाश्ता था.. वो खाया और सब बैठ कर बातें करने लगे।

फिर शाम हो गई.. सो हम दोनों पढ़ने लगे.. क्योंकि एग्जाम था।

रात को खाने के लिए जब हम लोग बाहर आए तो आंटी ने बोला- बेटा मोनिका के कमरे में ही एक बिस्तर लगा देती हूँ.. तुम वहीं सो जाना।

मैं बोला- ठीक है आंटी।

मैं तो मन ही मन बहुत खुश हो रहा था कि अब तो रात को भी मोनिका के साथ मज़े होंगे।

उनके यहाँ 4 रूम हैं लेकिन ऊपर मकान बन रहा था.. सो दो कमरों में सामान रखे हुए थे।

खाना खाने के बाद मैं मोनिका के कमरे में ही पढ़ने लगा तब 10 बज रहे होंगे।

मैंने लॅपटॉप ऑन किया और स्काईप पर दीदी से चैट करने लगा। मैं आप लोगों को बता दूँ कि मैं कहीं भी जाता हूँ.. तो दीदी से चैट ज़रूर करता हूँ.. क्योंकि आप लोग भी जानते हैं कि वो मेरी बेस्ट गर्ल है और शायद मैं उसको दिल से प्यार करने लगा हूँ।

खैर दीदी ने पूछा- क्या हीरो.. क्या हो रहा है?

मैंने सब बता दिया और तब तक मोनिका भी कमरे में आ गई..

तो मैंने चैट बंद करके पूछा- सब सो गए क्या?

‘पापा सो गए हैं मॉम तुमको दूध पीने के लिए बुला रही हैं।’

वो पढ़ने बैठ गई।

जब मैं रसोई में गया तो देखा आंटी सेक्सी सी नाईटी में खड़ी थीं.. मैं पीछे से गया और उनके दूध में मुँह लगा दिया।

तो बोलीं- आराम से.. कोई देख लेगा।

थोड़ा ही चूसा होगा कि एक गिलास में दूध पकड़ा कर बोलीं- जाओ.. अब ये दूध पियो।

मैं बोला- रात को मिलोगी?

बोलीं- नहीं.. आज नहीं लेकिन जिस दिन मौका मिलेगा.. उस दिन.. अभी नहीं।

दूध गर्म था तो गिलास लेकर कमरे में आ गया और बैठ कर दूध पीने लगा।

कुछ देर बाद मोनिका को देख कर बोला- आओ.. मम्मी-पापा दोनों सो गए।

वो बोली- नहीं.. पहले तुम देख कर आओ..

मैं उधर से घूम कर आया और दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया। वो पेट के बल लेट कर पढ़ रही थी। उसके बुरड़ ऊपर थे, तब उसने वही टी-शर्ट और कैपरी पहन रखी थी। मैं उसकी गान्ड की दरार में उंगली घुमाने लगा और कैपरी नीचे करके उसके बुरड़ छूने लगा और काटने भी लगा।

उसके उठे हुए बुरड़ों की क्या तारीफ करूँ.. इससे बेहतर सिर्फ़ एक ही के ही बुरड़ देखें है मैंने अब तक.. वो डॉली के.. बाकी सबसे बेहतर इसके बुरड़ हैं।

इतनी बेहतरीन गोलाई है कि बता नहीं सकता। कमर के पास उठने के बाद कभी भी सपाट नहीं है.. उतरी ही है.. और नीचे झुकती ही गई है.. मतलब बहुत ही बेहतरीन है.. इतना ही आप जान लीजिएगा।

मैं किस कर रहा था कि वो उठी और हम दोनों ने अपने-अपने कपड़े अलग किए और दोनों नंगे ही मैदान में आ गए, एक-दूसरे के गले लग कर.. एक-दूसरे को जहाँ-तहाँ चूमने लगे।

किस करने के बाद मैंने उसको लिटा दिया और उसकी दोनों चूचियों के बीच में लण्ड डालने लगा।

जब चूचियों को चीरता हुआ लण्ड उसके मुँह तक पहुँचता.. तो वो टोपे पर किस कर देती.. फिर मैं इसे पीछे खींच लेता।

यही सिलसिला कुछ देर तक चलता रहा।

फिर कुछ देर के बाद उसको उठा कर पूरा का पूरा लण्ड उसके मुँह में घुसेड़ दिया और वो बड़े आराम से लौड़ा चूसने लगी.. जैसे कोई गन्ना चूस रही हो।

कुछ देर चूसने के बाद उसने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया.. और खुद मेरे लण्ड को पकड़ कर उस पर बैठने लगी। मैंने भी उसकी एक चूची को पकड़ लिया और दबाने लगा।

तब तक वो मेरे लण्ड पर बैठ चुकी थी और लण्ड उसकी बुर में जा चुका था.. मैं उसको अब झटके मारने वाला था।

मैं उसको पकड़ कर लिप किस करने लगा और झटके मारने लगा।

फिर मैं हाथ पीछे ले गया और उसके बुरड़ को पकड़ कर ऊपर-नीचे करने लगा और उसके मुँह को छोड़ दिया था क्योंकि अब दर्द नहीं होने वाला था।

अब वो खुद ही ऊपर-नीचे होने लगी और जब वो ऊपर-नीचे हो रही थी.. तब उसकी चूचियाँ देखने लायक लग रही थीं, उसकी चूचियाँगोल तो नहीं हैं.. हल्की लम्बी टाइप की हैं.. वो जब वो ऊपर-नीचे हो रही थी तो कयामत लग रही थी।

जब उसके बुरड़ मेरे ऊपर बज रहे थे.. तब मुझे लग रहा था जैसे कोई गुदाज चीज़ मखमल की तरह मेरे ऊपर गिर रही हो।

कुछ देर यह चलता रहा.. फिर हम दोनों अलग हुए और मैं उसको बोला- आज कुछ अलग करते हैं।

तो वो बोली- क्या अलग?

मैं उसकी गान्ड के छेद पर हाथ रखते हुए बोला- आज मैं यहाँ डालता हूँ।

तो वो बोली- नहीं.. बहुत दर्द होगा।

लेकिन मेरे समझाने पर वो मान गई.. बोली- ठीक है करो.. लेकिन दर्द होगा तो निकाल लेना।

मैं बोला- भरोसा रखो.. ज्यादा दर्द नहीं होगा.. थोड़ा बहुत तो होगा.. लेकिन इतना ज्यादा मजा आएगा कि तुम भूल जाओगी कि दर्द भी हुआ था।

उसकी तरफ़ से ग्रीन सिग्नल मिलते ही मैं उसको नीचे लिटा दिया और उसकी गान्ड में उंगली घुमाने लगा और एक उंगली को अन्दर डाल दिया।

टाइट थी उसकी गान्ड.. क्योंकि अब तक लण्ड नहीं गया है इसके अन्दर.. कुछ देर करने के बाद मैं पास में रखा हुआ तेल उठाया और उसकी गान्ड के छेद पर ढेर सारा डाल दिया।

अब उसकी गान्ड में दो उंगली भी आराम से जाने लगीं।

अब मैंने अपने लण्ड को भी पूरी तरह से तेल से भिगो दिया और उसकी गान्ड पर घुमाने लगा।

पास ही उसकी ओढ़नी पड़ी थी जिससे उसके मुँह को पूरा बन्द कर दिया.. ताकि वो आवाज़ ना करे।

अब मैंने उसको घोड़ी बनने को बोला।

जब वो झुकी तो उसकी गान्ड का छेद मेरे ठीक सामने था।

मैंने उसके बुरड़ों को फैलाया और अपने लण्ड का सुपारा उसके छेद पर लगा दिया। एक झटका मारा तो लण्ड का थोड़ा भाग अन्दर गया और वो चीखी.. लेकिन उसके मुँह में मैंने कपड़ा लगा दिया था.. सो आवाज़ नहीं आई।

अब मैं उसकी बुर और आगे सहलाने लगा।

कुछ देर बाद उसे आराम मिला.. तो मैंने उसकी चूचियों को दबाया और उसकी नंगी पीठ पर किस किया।

फिर एक जोरदार झटका मारा और अबकी बार पूरा का पूरा लण्ड उसकी गान्ड में जा चुका था। वो दर्द के मारे रो रही थी.. तो मैं उसकी चूचियों को एक हाथ से दबा रहा था.. दूसरे हाथ से उसकी बुर के दाने को मसल रहा.. और उसकी नंगी पीठ को किस कर रहा था।

फिर कुछ देर में जब वो नॉर्मल हुई तो मैंने लण्ड को हल्का सा निकाला और फिर से पूरा डाल दिया।

शायद इस बार थोड़ा कम दर्द हुआ उसे.. तो अब मैं आराम से अन्दर-बाहर करने लगा.. और अब शायद उसे भी मज़ा आने लगा था।

मैंने लण्ड को हल्का सा निकाला और फिर से पूरा डाल दिया। शायद इस बार थोड़ा कम दर्द हुआ उसे.. सो अब मैं आराम से अन्दर-बाहर करने लगा.. और अब शायद उसे भी मज़ा आने लगा था.. सो वो भी मज़े करने लगी।

कुछ देर तक इसी तरह से चोदने के बाद उसको मैंने गोद में उठा लिया.. कैसे उठाया ये भी ज़रा बता देता हूँ। उसके दोनों हाथ मेरे गर्दन पर थे.. और वो दोनों पैर मेरी कमर में फंसाए हुए थी और मैंने अपने दोनों हाथों से उसके बुरड़ों को पकड़ा हुआ था।

हम दोनों किस करने लगे।

कुछ देर किस करने के बाद उसी ने एक हाथ से लण्ड को पकड़ कर अपनी गान्ड के छेद पर लगा दिया.. तो मैंने अन्दर डाल दिया। अब मैं उसके बुरड़ों को पकड़ कर अन्दर-बाहर करने लगा।

अब तक वो मुझे किस किए जा रही थी और उसकी चूचियाँ मेरे सीने पर महसूस हो रही थीं।

कुछ देर मज़े करने के बाद मैं डिसचार्ज होने वाला था। उससे पूछा.. तो वो बोली- अन्दर ही डाल दो।

मैं ज़ोर-ज़ोर से झटके मारने लगा और अपना सारा माल अन्दर ही डाल दिया।

फिर उसके बगल में ही बिस्तर पर लेट गया।

कुछ देर बाद हमने फिर से एक बार किया। उस रात हम ने सिर्फ़ दो बार ही सेक्स किया और अपने-अपने कपड़े पहन कर सो गए।

सुबह जब उसकी माँ मुझे जगाने आईं.. तब मेरी नींद खुली.. तो देखा मोनिका अपने बिस्तर पर नहीं है।

मैंने मोनिका के बारे में पूछा.. तो वो बोलीं- वो बाथरूम में नहा रही है।

तो मैंने उसकी माँ को झट से अपने ऊपर खींच लिया और अपने खड़े लण्ड को पकड़ा दिया.. तो वो छोड़ते हुई अलग हुईं और रसोई में चली गईं।

मैं भी पानी के बहाने पीछे-पीछे चला गया और वहाँ जाकर पूछा- इस बेचारे का क्या होगा?

वो बोलीं- मोनिका अभी हमेशा घर में रहती है.. तो मौका मिलने पर ही होगा ना।

मैं कुछ सोचने लगा कि तभी उन्होंने मेरे लण्ड को पकड़ कर कहा- तब तक इसको सबर करने को बोलो। देखो मोनिका का एग्जाम सेंटर भुवनेश्वर पड़ा है.. तो वो एग्जाम देने जाएगी ही.. तब इसको खुश कर दूँगी और अब जाओ इसको शान्त करके जल्दी से फ्रेश हो जाओ.. मैं नाश्ता लगा देती हूँ।

इसी तरह दो दिन बीत गए.. मेरे एग्जाम का दिन आ गया मैं उनकी गाड़ी लेकर खुद एग्जाम देने चला गया।

जब एग्जाम देकर आया.. तो मोनिका बैग पैक कर रही थी।

पूछने पर मालूम हुआ कि एग्जाम दस बजे से है.. तो वो आज ही जा रही है।

वो अपने पापा के साथ एग्जाम देने जा रही थी, उसके पापा को भी वहाँ से कुछ काम है.. रात भर रुकेगी और सुबह एग्जाम देकर लौट आएगी क्योंकि सुबह वाली गाड़ी पकड़ने में रिस्क है.. एग्जाम छूट भी सकता है।

तब तक उसके पापा भी ऑफिस से आ गए और उन्होंने मुझसे पूछा- एग्जाम कैसा हुआ?

मैं बोला- अच्छा गया.. अब रिज़ल्ट ही बताएगा कि कैसा गया।

तब तक वे दोनों तैयार हो गए, उन्होंने मुझे स्टेशन तक छोड़ देने को बोला।

मैं गाड़ी से दोनों को स्टेशन छोड़ कर गाड़ी में बैठा कर उतनी ही तेज़ी से घर की तरफ़ भागा।

घर पहुँचते ही दरवाजे को अन्दर से लॉक कर दिया और अन्दर गया.. तो देखा घर के बाकी के सारे खिड़की और दरवाजे भी बंद हो चुके थे.. मतलब एक बंद घर में सिर्फ़ हम दोनों अकेले थे.. कुछ मज़ेदार होने वाला है।

आंटी अपने आपको सज़ा रही थीं.. शायद अभी अभी वो नहा कर निकली थीं और कपड़े पहन कर मेरे पास आने वाली थीं।

मैं पीछे से गया और मुझे देखते ही वो मुझसे लिपट गईं।

मैं समझ गया कि आग दोनों तरफ़ है.. सो हम दोनों लिपट कर एक-दूसरे को किस करने लगे।

कुछ देर बाद हम अलग हुए।

मैं बोला- आज तो कोई रोकने वाला भी नहीं है.. आज छोड़ने वाला नहीं हूँ।

मैं उन्हें किस करने लगा.. और वो मेरे तने हुए लण्ड को हाथ में ले कर सहलाने लगीं। मैंने उनकी साड़ी.. पेटीकोट पूरी कमर से ऊपर कर दिया और नंगी बुर देखी।

ओह यारो.. क्या नज़ारा था मेरी प्यारी आंटी की पतली लकीर वाली बुर का.. आज भी याद आता है.. तो आंटी पर प्यार आ जाता है.. और मेरा लण्ड फनफना कर खड़ा हो जाता है।

मैं बुर के लब खोलने लगा तो आंटी बोलीं- चलो बिस्तर पर आराम से करेंगे।

वो मुझे फ्रेंच किस देने लगीं..

मैंने उनकी साड़ी निकाल दी और उनका ब्लाउज भी खोल कर तनी हुई चूचियों को ब्रा के ऊपर से सहलाने लगा।

बहुत कोशिश करने के बाद भी ब्रा का हुक नहीं खुल पा रहा था, मैंने पीछे हाथ ले जाकर ज़ोर से खींचा तो हुक टूट गए और चूचियाँ आज़ाद हो गईं।

मैंने झट से उन्हें मेरे हाथ में ले लिया फिर नीचे झुक कर बारी-बारी से दोनों चूचियों को दबाने और चूसने लगा।

आंटी बहुत धीरे-धीरे ‘उउउ..श..इशह..’ कर रही थीं।

आंटी ने मेरा साथ देते हुए अपने पेटीकोट का नाड़ा ढीला कर दिया और पेटीकोट भी रहम की भीख मांगता हुआ नीचे गिर गया।

अब आंटी मेरे सामने सिर्फ़ अधखुले ब्लाउज को पहने खड़ी थीं।

मैं अब भी पैंट-शर्ट पहने था.. अभी नंगा नहीं हुआ था।

आंटी ने ब्लाउज उतार फेंका और नंगी होकर मेरे से लिपट गईं।

मैंने उनके कूल्हे सहलाते हुए.. उनको गोदी में उठाया।

आंटी मेरे गले में हाथ डाल कर सिमट गईं और मुझे फ्रेंच किस देती रहीं।

मैं उन्हें गोदी में लेकर बेडरूम में ले गया और उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया।

‘राजाबाबू.. तुम भी नंगे होकर आ जाओ..’

मैंने कहा- यह शगुन तो आपको ही करना होगा।

मैं यह कह कर पैंट-शर्ट पहने हुए ही नंगी आंटी के बगल में लेट गया।

सामने फुल साइज़ मिरर में हमारा सेक्स का सीन दिख रहा था।

ओह क्या समा था यारो..!

आंटी ने जल्दी-जल्दी मेरी पैंट-शर्ट शॉर्ट्स उतारा और मैंने उनका साथ देते हुए सब कुछ उतार दिया।

आंटी मेरे से 20 साल बड़ी थीं.. पर क्या चीज़ दिख रही थीं इस नंगी अवस्था में।

हम लोग थोड़ी देर एक-दूसरे की बाँहों में लिपटे एक-दूसरे के शरीर से खेलते रहे और इधर-उधर किस करते रहे।

मैंने कहा- आंटी.. आपकी बुर अच्छे से देखनी है।

आंटी बोलीं- तो देखो ना.. पूछते क्या हो?

यह कह कर उन्होंने अपनी दोनों टाँगें फैला दीं।

ओह.. क्या दृश्य था..

बुर की दाना हीरे जैसा चमक रहा था।

इतने साल बाद भी बुर सिर्फ़ एक दरार जैसी थी.. और गुलाबी पुत्तियाँ.. बिना बालों की.. चमकदार चिकनी बुर..

मुझे लगा कि ये बुर मोनिका की बुर से ज़्यादा गदराई हुई बुर है।

आंटी की बुर अभी शानदार गदरा रही थी।

मैंने बुर फैला कर अच्छे से उसका दीदार किया.. जहाँ तक बुर के अन्दर निगाह जा सकी.. और क्या महक आ रही थी वाह्ह..

आंटी ने मेरे सर को अपनी बुर की तरफ खींच कर कहा- चूम लो इसे राजाबाबू!

‘ओफ्फ़ आंटी’ कह कर मैं बुर चूमने लगा और अपने आप ही उससे चाटने भी लगा।

आंटी बुरड़ उठा-उठा कर बुर चटवा रही थीं।

‘आंटीईई..’ मैं चिल्लाया।

आंटी बोलीं- आंटी नहीं.. मुन्नी कहो राजाबाबू..

मैं बुर को चाटते हुए उनकी चूचियाँ भी रगड़ रहा था ‘ओह्ह.. मेरी प्यारी मुन्नीईईई..’ मैंने कहा।

आंटी ने अपनी टाँगों से मेरा सिर जकड़ लिया और गान्ड उचका-उचका कर मेरे सर के बाल सहलाने लगीं।

मेरा लण्ड प्यास से तड़प रहा था।

मैंने कहा- मुन्नी लण्ड का कुछ करो प्लीज़..’

मुन्नी आंटी बोलीं- ठीक है मैं तुम्हारे ऊपर आ जाती हूँ तभी हम एक-दूसरे को मज़ा दे सकेंगे।

फिर आंटी ने मेरे ऊपर आकर अपनी बुर को मेरे मुँह के ऊपर रखा और सामने झुक कर मेरे लण्ड को जितना हो सकता था.. अपने मुँह में लेकर चूसने लगीं।

अब तो मुझे भी मज़ा आने लगा था और आंटी को दुगना मज़ा आ रहा था।

आंटी अपनी बुर के पानी की धार मेरे मुँह में डाल रही थीं।

थोड़ी देर में अपनी बुर को मेरे मुँह के ऊपर ज़ोर से दबाते हुए आंटी की बुर से पानी मेरे पूरे चेहरे को गीला कर गया।

वो ‘आहह.. राजाबाबू.. मैं झड़.. गईई..’ कहते हुए थोड़ी देर शांत रहीं।

वो अब भी अपनी बुर मेरे मुँह पर ही रखे हुए थीं।

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