मैं दिवाना बहनों का अध्याय 10

    



     मैं दिवाना बहनों का  अध्याय     10


मौसेरी बहन की चुदाई


सभी दोस्तों को मेरा नमस्कार! मैं फ़िर अपने वायदे के साथ अपनी दूसरी कहानी लिख रहा हूं। आप सब जानते हैं कि मेरा नाम पुनीत है और मुझे इनसेस्ट सेक्स बहुत अच्छा लगता है। उम्मीद है आपको मेरी पहली कहानी ‘मौसी को चोदा ज़रूर अच्छी लगी होगी। अब मैं आपको अपनी इस कहानी में बताऊंगा कि मैंने कैसे मौसी की बड़ी लड़की सविता की चुदाई की।


मौसी और मौसा जी की चुदाई के बाद शाम को मैंने उनसे अपना वायदा पूरा करने के लिये कहा जिसमें उन्होने अपनी बेटी सविता को चोदने की इजाजत दे दी थी।


मौसा जी बोले- तुम शाम को उसे जब अकेले देखना और फिर मौका देखकर उसकी चुदाई कर लेना।


मैं इस प्लानिंग से मैं बहुत खुश हो गया।


शाम को हम सब एक साथ डिनर कर रहे थे। मेरी नज़र बार बार सविता की चूची पर जा रही थी जो कि उसके नाईट सूट से बाहर आने को बेताब थी। दोस्तों उसकी फ़िगर 34-28-34 हैं। उसके चूंची अपनी मां की ही तरह सभी को बहुत तड़पाती होंगी।


खाना खाने के बाद निशा (छोटी बेटी) और नितिन (छोटा लड़का) बोले- भैया चलो ऊपर कमरे में चलकर कुछ खेलते हैं।


पर मेरा मूड तो कुछ और ही था, मैंने मौसी से कहा- मौसी आप और मौसा जी इन दोनों के साथ ऊपर जाकर खेलो, मैं अभी टीवी देख कर आ जाऊंगा।


उन्होंने कहा- ठीक है।


और वो ऊपर चले गये और साथ ही सविता को मेरा ध्यान रखने को बोल गये।

मौसा जी कहने लगे- सविता, भैया को अपनी सभी नई सीडी दिखा देना।

सविता बोली- ओ के पापा।


हम दोनों अब टीवी के सामने दीवान पर साथ बैठे थे, वो बोली- भैया, आपको कौन सी मूवी देखनी है?

मैंने कहा- कोई भी बड़े बच्चों वाली लगा दो !

तो वो बोली- क्या मतलब?


मैं उसकी तरफ़ आंख मारकर बोला- वही जो लोग शादी के बाद देखते हैं।

इतना सुनकर वो बोली- धत्त ! तुम बड़े गन्दे हो !

और हंसने लगी। मैं समझ गया कि वो तैयार है। और थोड़ी सी तैयारी के बाद आसानी से काम बन जयेगा।


वो बोली- भैया, ऐसी तो कोई सीडी नहीं है मेरे पास।

मैं बोला- कोई बात नहीं ! मैं अभी मारकेट से ले आता हूं।


इतना कहकर मैं बाहर जाने लगा। मुझे उसके चेहरे पर एक अलग मुस्कान दिख रही थी। मारकेट में बहुत मुश्किल से मुझे एक ब्ल्यू फ़िल्म की सीडी मिल गई। जो कि हिन्दी में थी।

मैं अब वापस आकर सविता से बोला- लो सीडी। स्टार्ट करो ! मैं अपनी ड्रेस चेंज करता हूं।

वो बोली- ठीक है।

उसने मुझे मौसा जी का एक पायजामा और कुरता लाकर दिया।


मैंने अपनी पैन्ट खोली तो उसकी नज़र मुझे ही घूर रही थी। मैं मुस्कराने लगा। कपड़े बदलने के बाद मूवी शुरु हो गई तो हम फ़िर साथ दीवान पर बैठ गये। मूवी के पहले सीन में लड़की नहा रही थी। तभी एक लड़का भी बाथरूम में आकर उसके साथ छेड़छाड़ करने लगता है। मैंने देखा कि सविता का चेहरा एकदम लाल हो रहा था। मैंने तभी उसका हाथ पकड़ लिया। उसक पूरा बदन कांप रहा था।


मैं समझ गया के ये सब बैचेनी मूवी के कारण है पर मैं अनजान बनकर उसे पूछने लगा- अरे, तुम्हें क्या हुआ? लगता है तुम्हारी तबियत खराब है, देखो, तुम्हारा पूरा बदन कांप रहा है। लाओ मैं तुम्हारा हार्ट बीट्स चेक करता हूं।


इतना कहते ही मैंने अपना हाथ उसके नाईट सूट में घुसा दिया और उसकी चूची दबाने लगा।


सविता एकदम चौंक कर बोली- पुनीत, यह क्या कर रहे हो। मैं आपकी बहन हूं और कोई आ गया तो बहुत बुरा होगा।

मैं उसको इमोशनल करते हुए बोला- सविता, तुम मेरी बहन हो, यह मेरी मज़बू्री है नहीं तो मैं तुम्हें बचपन से जान से ज्यादा प्यार करता हूं और तुम्हारे बिना रह नहीं सकता।

इतना सुनकर वो इमोशनल होकर मुझसे चिपट गई और बोलने लगी- आई लव यू पुनीत, तुमने पहले मुझसे ये सब क्यूं नहीं कहा।


मैं बोला- हम शादी तो नहीं कर सकते पर थोड़ी मस्ती तो ले ही सकते हैं।

वो बोली- अगर मैं प्रेगनेंट हो गई तो?

मैं बोला- तुम मुझ पर विश्वास करो मैं ऐसे कुछ नहीं होने दूंगा।

वो बोली- तब ठीक है।



अब हमारे बीच किसी तरह की कोई दूरी नहीं रह गई थी। इसलिये मैंने पहले जाकर टीवी ओफ़ कर दिया जिससे पूरा ध्यान सविता की चुदाई पर लगा सकूं। दीवान पर आकर मैंने उसे लेटा दिया और उसके बगल में लेट कर उसके होठों को चूसने लगा। वो भी मेरे पूरा साथ देते हुए अपने जीभ मेरे मुंह में अन्दर बाहर कर रही थी। इस सब में इतना मज़ा आ रहा था कि मैं बता नहीं सकता। मैंने अपना कुरता उतार दिया और बनियान भी। अब मैं केवल पायजामे और उसके अन्दर अन्डरवियर में था। मैंने सविता के नाईट सूट के बटन खोलने शुरू कर दिया। वो शरमा कर सिमटी जा रही थी। पहली बार कोई उसके जवान बदन को छू रहा था।


उसका नाईट सूट हटते ही उसकी चूची ब्रा में कैद होकर भी आधी से ज्यादा दिख रही थी। मैंने ब्रा के ऊपर से ही उन्हें चूमना शुरू कर दिया, मेरा हाथ उसके पैन्टी को खोलने में लगा था और उसकी पैन्टी निकालने कि लिये मैंने उसे इशारा किया तो उसने अपने चूतड़ों को थोड़ा सा ऊपर कर दिया और मैंने उसे टांगों से बाहर निकाल दिया।


उफ़्फ़फ़्फ़फ़ ! उसकी गोरी और मांसल जांघे देख कर मेरा लौड़ा पजामा फ़ाड़ने को तैयार हो गया। मुझसे अब रहा नहीं गया। मैंने अपना पजामा और अन्डरवियर निकालकर फेंक दिया। वो मेरे खड़ा लण्ड देखकर बोली- पुनीत ये लण्ड मेरी चूत में कैसे जायेगा, मैंने तो आज तक इसमें एक उंगली भी नहीं डाली।


मैं बोला- मेरी जान देखती जाओ ! तुम्हारा दीवाना क्या क्या करता है।


मैं उसकी ब्रा का हुक खोलने लगा तो वो मुझसे चिपट गई। मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और उसकी पीठ को सहलाने लगा। मेरा लण्ड बार बार जोर मार रहा था और उसकी जांघो पर छू हो रहा था। आआह्हह्ह ! यह एक अलग मज़ा था। मेरी छाती और उसकी चूंची के बीच बस उसकी ब्रा थी जो मैंने एक तरफ़ खींच कर निकाल दी।


उफ़्फ़फ़फ़्फ़फ़ ! उसकी दूध जैसे गोरी चूची देखकर मन कर रहा था कि उसको काट लूं। उसके गुलाबी चुचूक को मैं मुंह में लेकर चूसने लगा। वो एकदम टाईट हो गये। उसके हाथ मेरे बालों में घूम रहे थे और मैं बहुत बेचैनी के साथ उसकी चूची को सुसक कर रहा था। थोड़ी देर के बाद मैं उसके पैर की तरफ़ आ गया और उसकी पैन्टी अपने दांतों से खींचने लगा। उसको बाहर निकालकर मैं अपना हाथ उसके पैरों को छूते हुए जांघो पर घुमाने लगा। मेरे मुंह उसकी चूत पर था। उस पर बहुत घने बाल थे।


मैं सविता से बोला- तुम कभी अपनी चूत शेव नहीं करती?


वो बोली- कभी इस तरफ़ ध्यान ही नहीं दिया।


मैं बोला- कोई बात नहीं, फ़िर कभी मैं साफ़ कर दूंगा।


मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर घुमानी शुरू कर दी। उसको बड़ा अज़ीब लग रहा था, वो बोली- पुनीत, यह क्या कर रहे हो?


मैंने पूछा- क्यूं? मज़ा नहीं आ रहा क्या?


वो बोली- मज़ा तो बहुत आ रहा है।


उसकी सिसकारी सारे कमरे में सुनाई दे रही थी आआआह ह्ह्हह। पुन्नन्नीईत बस करो आआअह्हह मैं मर जाऊंगी आआ आआअह्हह!


मैं और भी जोश में आने लगा और उसकी चूत में अपनी जीभ घुसाने लगा। मेरे मन था कि वो भी मेरे लण्ड चूसे पर अभी मैं उसे झिझक के मारे कह नहीं पा रहा था। उसने एक हाथ से मेरा लण्ड ज़ोर से पकड़ा हुआ था और अपनी आंखें बंद करके आआअह्हह्ह ऊऊओहह्ह कर रही थी। उसकी चूत एकदम गीली हो रही थी। मैं समझ गया कि एक बार उसकी चूत पानी छोड़ चुकी है। अब मैं उसे चोदने की तैयारी करने लगा।


मैंने उसकी गाण्ड के नीचे एक तकिया लगा दिया। उसकी चूत अब बहुत उभर गई थी। मैंने उसकी दोनों टांगों को खोल कर बीच में आ गया। अपने लण्ड मैंने जैसे ही उसकी चूत पर रखा तो मुझे लगा कि जैसे मेरे लण्ड में आग लग गई हो। उसकी चूत एकदम गरम हो रही थी। मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में घुसाना शुरू किया तो वो दर्द से तड़प कर एकदम हटकर बैठ गई।


सविता बोली- पुनीत। इतना दर्द मुझसे सहन नहीं होगा। तुम्हारा लण्ड मेरी चूत में नहीं जायेगा। मैं मर जांऊगी। तुम चाहे जो कर लो पर मैं चूत में लौड़ा नहीं लूँगी।


मैं बोला- जान, पहले तो सभी को दर्द होता है पर बाद में खूब मज़ा आता है। जरा सोचो अगर तुम्हारी मम्मी चुदने के लिये मना कर देती तो तुम कहां से पैदा होती।


बात उसकी समझ में आने लगी, वो बोली- ठीक है पुनीत, तुम्हारे लिये मैं यह दर्द सह लूगीं, पर तुम थोड़ा सा तेल अपने लोड़े पर लगा लो।


मैंने कहा- ठीक है।

हमने तेल ढूंढना शुरू किया तो उस कमरे में तैल तो नहीं मिला पर दूध में से मलाई अपने लौड़े और उसकी चूत में लगा दी। अब मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत में डालना शुरू किया। लौड़े का सुपारा उसकी चूत में जाते ही उसकी चीख निकल गई, मैंने अपने हाथों से उसके मुंह को सील कर दिया और धीरे धीरे धक्के मारने लगा।


थोड़ी देर बाद उसको भी मज़ा आने लगा और उसने अपने चूतड़ उछालने शुरू कर दिये। पूरा कमरे में एक संगीत सा बजने लगा। उसके हाथ लगातर मेरे चूतड़ पर घूम रहे थे और वो कभी कभी अपनी उंगलियाँ मेरी गाण्ड में डालने की कोशिश कर रही थी जिससे मेरा जोश और भी बढ़ जाता था और मैं और ज़ोर से धक्के मारने लगता। मेरे पूरा लण्ड जब तक उसकी चूत में था और मेरे आण्ड उसकी गाण्ड से टकरा रहे थे। लगातार धक्के मारने के वजह से मैं झड़ने वाला था। इसलिये मैंने लण्ड उसकी चूत से निकाल कर पानी उसके पेट पर झड़ा दिया। मैंने देखा उसकी चूत से खून निकला हुआ था। मेरा लण्ड भी लाल हो रहा था।


यह देखते ही सविता बोली- तुमने आज मेरी सील तोड़कर लड़की से औरत बना दिया है। आई लव यू ।


वो मेरे लण्ड को सहलाते हुए बोली- मुझे कभी भूल तो नहीं जाओगे पुनीत।


मैंने कहा- नहीं जान, मैं तो तुम्हारी शादी होने के बाद भी तुम्हें चोदना चहता हूं।


बहुत देर तक ऐसे ही एक दूसरे हो चूमते और सहलाते और बातें करते हुए ही लेटे रहे। फ़िर सविता बोली- चलो, अब ऊपर कमरे में चलते हैं, नहीं तो मम्मी पापा शक करेंगे।


उसे क्या पता था कि उसको चोदने का प्रोग्राम उसकी मम्मी ने ही बनाया है। मैं मन ही मन मौसी को धन्यवाद कर रहा था।



हाय फ्रेंडस पहले मैं अपने बारे में बता दूँ मेरी उम्र 22 साल है और मैं मध्यप्रदेश से हूँ मेरे लंड का साइज़ 7 इंच है मैं अपनी स्टोरी हिन्दी में लिख रहा हूँ जिससे ज़्यादा लोगो को समझ में आये ये हादसा 2 महीने पहले का है मेरी बहन की उम्र 21 साल है उसका नाम गीत है वो मेरे ताऊजी की लड़की है दिखने में पूरी आइटम है एकदम रंडी जैसी, कातिलाना फिगर गांड देखो तो ऐसा लगता है की एक झटके से मारो और छेद में मुँह घुसाकर चाट जाओ दूध भी काफ़ी सेक्सी थे कुल मिलाकर वो एक सेक्स बॉम्ब है वो बेंगलूर में पढ़ती है उसका सेमस्टर ब्रेक हुआ था इसीलिये वो घर आई थी मैं उसे करीब 6 महीने के बाद देख रहा था वो एक पूरी आइटम बन चुकी थी.


में उसे देख के बहुत खुश हुआ वो भी मुझे देख के बहुत खुश हुई और आकर मुझसे गले मिलने लगी ना चाहते हुये भी मैने उसके कोमल कोमल दूध को फील किया मेरे मन में उसके लिये कोई ग़लत भावना नही थी हम दोनो काफ़ी फ्रेंक थे और सेम उम्र के होने की वजह से काफ़ी करीब भी थे एक दिन मैं अपने रूम में बैठ कर फोन में चेटिंग कर रहा था.


इतने में वो आई और आकर दूसरी कुर्सी पर बैठ गई हम दोनो इधर उधर की बाते करने लगे हम दोनो आजू बाजू बैठे थे तभी मेरे मन में उसको छेड़ने की सूझी तो में उसके कान के पीछे मोर के पंख से गुदगुदी करने लगा वो एकदम हड़बड़ा गई मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था उसको ऐसा देखने में पर धीरे धीरे वो मज़े लेने लगी उसके चहरे से ऐसा लग रहा था की उसे बहुत मज़ा आ रहा है वो पंख से और चिपक रही थी.


मुझे बिल्कुल आइडिया नही था की उस जगह लड़कियो को छेड़ने से लड़कियां गर्म हो जाती हैं मैने पंख हटाया तो उसने आँख खोली और मुझे देख के आंख मारी मैने उसे एक स्माइल दी इतने में मेरे पापा वहा आ गये और ये एपिसोड यही ख़त्म हो गया हमारे घर में 3 रूम थे एक मम्मी पापा का एक मेरा और एक मेरी रियल बहन मन का रूम था वो गीत मन के रूम में रुकी थी हर रूम में एक अटेच टायलेट और बाथरूम था.


भगवान की दया से उस रात मेरे रूम का टायलेट लीक करने लगा और रूम में पानी भर गया तो मम्मी ने कहा की मैं मन के रूम में ही सो जाऊं मेरी तो जैसे किस्मत ही खुल गई थी ये सुनके गीत ने भी स्माइल दी मेरे तो होश ही उड़ गये थे हमने रात के 10 बजे के आस पास खाना ख़त्म किया और कुछ देर टी.वी देखने के बाद सोने चले गये बेड पर मैं एक कोने में सोया था बीच में मन और दूसरी साइड में गीत थी मैं काफ़ी खुश था की आज ज़रूर कुछ होगा रात के करीब 1 बजे तक मैने सोने का नाटक किया एक बजे मैने मन को चेक किया की वो गहरी नींद में है या नही वो काफ़ी गहरी नींद में सो रही थी फिर मैं उठा और गीत के साइड में गया.


उसकी आँखे बंद थी वो बहुत खूबसूरत लग रही थी तो मैने उसके कान के पीछे से ही उसे छेड़ना शुरू किया पहले मैं उंगली से उसके कान के पीछे गुदगुदी कर रहा था पर उसका कोई रिएक्शन नही था तो मुझे लगा की वो सो रही है मैं फिर उसके कान और उसके पीछे वाले पार्ट को जीभ से लिक करने लगा वो थोड़ा हिली मुझे समझ में आ गया की वो जागी हुई है तो मैने देरी ना करते हुये उसके लिप्स पर अपने लिप्स रख दिये मैं उसके लिप्स चूस रहा था.


उसे किस करना नही आता था इसीलिये वो भी वही कर रही थी जो मैं कर रहा था मै उसके लोवर लिप्स को चूस रहा था और वो मेरे उपर वाले लीप को क्या रस भरे होंठ थे उसके मैने अपनी जीभ उसके मुँह के अंदर डाल दी और उसकी जीभ पर वार करने लगा फिर मैने उसकी जीभ मुँह में ली और उसे सक करने लगा ऐसा फ्रेंच किस तो मैने ज़िंदगी में कभी नही किया था.


फिर उसने अपनी आँखे खोली और मुझे देखा और कहा आई लव यू आरूष मैने भी स्माइल दी और उसे फिर किस करने लगा किस करते करते मैं उसके बूब्स भी दबा रहा था काफ़ी बड़े थे उसने एक चैन वाला टॉप पहना हुआ था तो मैने उसकी चैन खोल दी रूम में लाइट ज़्यादा नही थी इसीलिये ज़्यादा साफ नही दिख पा रहा था पर उसके निपल हार्ड हो चुके थे मैने उसके बूब्स पर तुरन्त अटेक कर दिया और उन्हे चूसने लगा बूब्स चूसते चूसते मैने अपना एक हाथ उसके लोवर के अंदर डाल दिया और उसकी चूत को एक्सप्लोर कर रहा था.


हम अपनी रास लीला में मशगूल थे की मेरी बहन मन ने करवट ली जैसे ही उसने करवट ली तो हम दोनो की गांड फट गई में तुरंत भाग के अपनी साइड में गया और सोने का नाटक करने लगा जैसे ही मैं अपनी साइड में पहुँचा तो 5 मिनिट के बाद मन उठ के बाथरूम करने गई.


मैने गीत की तरफ देखा तो वो हँसने लगी मैने उससे कहा बच गये आज तो फिर मन वापस आई और सो गई हम भी पड़े पड़े सो गये सुबह हुई तो देखा घड़ी में 10 बज रहे थे सब कही जाने की तैयारी कर रहे थे मेरे पूछा पर हमारे नौकर ने बताया की सब लोग शिरडी जा रहे हैं मैं थोड़ा निराश हो गया की अब मुझे मौका नही मिलेगा गीत को चोदने का गीत भी थोड़ी दुखी लग रही थी हम सब तैयार हुये जाने के लिये जैसे ही हम घर से निकल रहे थे वैसे ही गीत का सीढ़ियो से पैर फिसल गया.


और वो 2 सीढ़ियो से गिर गई सब उसकी तरफ भागे उसे पैर में चोट आई थी सबने जाने से मना करना ठीक समझा पर गीत ने उन्हे मना कर दिया गीत ने कहा की आप लोग मेरी वजह से अपनी ट्रिप क्यों बर्बाद कर रहे हो मैने भी मौके पर चौका लगाया और मम्मी से कहा की गीत के साथ मैं रुक जाता हूँ वैसे भी वो कुछ दिनो बाद चली जायेगी इसी बहाने उसके साथ टाइम भी बिता लूँगा.


सब मान गये और हमें अकेला छोड़ के सब चले गये सबके जाते ही मैने गेट बंद किया और गीत को स्माइल दी उसने भी रिटर्न स्माइल दी गीत को ज़्यादा चोट नही आई थी बस हल्की सी मोच थी मैने उसे एक ऑयल मसाज की और वो ठीक हो गई मैं ऑयल रखने किचन में गया और वापस आया तो गीत दीवार की तरफ फेस करकर खड़ी थी मैं गया और उसको पीछे से अपनी बाहों में भर लिया.


और उसके कान में कहा तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो वो शरमाई और कहा “सच” मैने हाँ में सर हिला दिया फिर मै उसकी गर्दन पर अपने होठ फेरने लगा उसकी बॉडी का नशा मुझे मधहोश कर रहा था मैने उसकी गर्दन पर किस करना शुरू किया मैं मधहोश था मैने उसे अपनी तरफ घुमाया तो उसका सिर नीचे था और आँखे बंद मैने उसका सिर उठाया और उसके लिप्स पर किस करने लगा.


हमारा किस धीरे धीरे फ्रेंच किस में बदल गया पहले हम धीरे धीरे एक दूसरे के होठो के रस का मज़ा ले रहे थे फिर सेक्स का खुमार हम पर भारी पड गया और हम जोश में किस करने लगे इतना मज़ा लाइफ में पहले कभी नही आया था मुझे फिर मेरे हाथ उसके बूब्स की ओर चल पड़े उसके बूब्स काफ़ी हार्ड थे और मैं उन्हे दबाने लगा उसकी निपल को टॉप के ऊपर से ही पकड़ के मसलने लगा वो सिसकारियां ले रही थी मैने उसका हाथ पकड़ के अपनी ज़िप के ऊपर रख दिया वो मेरे लंड को पेन्ट के ऊपर से ही रगड़ने और दबाने लगी मैने देर ना करते हुये उसका टॉप उतार दिया.


उसके बूब्स मेरे सामने सिर्फ़ एक ब्रा के अंदर बन्द थे मेरे होश उड़ रहे थे मैने उन्हे ब्रा के ऊपर से ही चूसना शुरू किया मैं किचन में जाकर एक पानी की बोतल लाया और उसके बूब्स के ऊपर डाल दिया और उन्हे पीने लगा वो मज़े में खो गई थी वो सिर्फ़ सिसकारियां ले रही थी मैने उसकी जीन्स भी उतार दी और उसकी चूत को पेंटी के ऊपर से दबाने लगा वो पूरी गीली हो चुकी थी मैने उसकी पेंटी उतार दी क्या चूत थी.


उसकी बिल्कुल गोरी चिकनी क्लीन शेव मैं नीचे झुका और उसे सूँघा फिर जीभ की नोक से उसे चाटता रहा और उसकी नवल को चाटने लगा वो ऊवू आआआः कर रही थी इस दौरान उसने मेरा पेन्ट खोल दिया था और वो मेरी चड्डी के अंदर हाथ डाल के मेरे लंड को सहला रही थी फिर मैने उसकी पेंटी उठाई और उसमे पानी डाल के उसका पानी पीने लगा वो मेरे लंड से खेल रही थी.


फिर मैने उसे बेड पर लेटाया और उसको अपना लंड चूसने को दिया जैसे ही उसने मेरा लंड मुँह में लिया मैं तो पागल हो गया उसको होठो का मेरे लंड पर ऊपर नीचे होना मुझे अभी भी मूठ मारने पर मजबुर कर देता है हम 69 की पोज़िशन में आ गये मैने जैसे ही उसकी चूत चाटनी शुरू की वो अकड़ गई और उसने रस छोड़ दिया मैने सारा रस चाट लिया वो काफ़ी मज़े से मेरा लंड चूस रही थी और छोड़ ही नही रही थी.


फिर मैने डिसाइड किया की पहले इसका मुँह चोदूंगा और फिर इसकी चूत तो मैने उसका सिर पकड़ा और ज़ोर ज़ोर से शॉट मारने लगा और 5-6 मिनिट के बाद मैने उसके मुँह को अपने स्पर्म से भर दिया वो पूरा पी गई फिर मैने उसे एक ज़बरदस्त किस दी हमने फिर फोरप्ले स्टार्ट किया अब वो मुझसे भीख माँगने लगी की प्लीज़ डाल दो अपना लंड मेरी चूत में मैने भी उसकी फरियाद सुनी और उसे लेटाया उसकी गांड के नीचे एक तकिया एड्जस्ट किया और उसके पैर फैलाये.


मैने अपना लंड उसकी चूत के होल पर लगाया और मैने अपना लंड उसके होल के आस पास रगड़ना शुरू किया तो उसने खुद ही लंड पकड़ के ज़ोर से चूत की तरफ सरका दिया चूत इतनी गीली थी की लंड का सूपड़ा झट से अंदर चला गया उसकी चीख निकल गई और वो चिल्लाने लगी की बाहर निकालो इसे मुझे नही करना बाहर निकालो मैने उसे शांत करने के लिये उसे किस करने लगा और उसके बूब्स दबाने लगा तो वो थोड़ी रिलेक्स हुई मैं धीरे धीरे अपने लंड को अंदर डालने की कोशिश कर रहा था पर वो नही जा रहा था ऐसा लग रहा था की किसी ने लंड को क़स के मुट्ठी में जकड़ रखा हो.


फिर मैने लिप्स से उसके लिप्स को लॉक किया और एक ज़ोर का धक्का मारा मेरा पूरा लंड अंदर चला गया उसके आँसू निकल आये और वो छटपटा रही थी मैने उसके बूब्स दबाने और चूसने शुरू किये थोड़ी देर में वो शांत हुई और मैने बिल्कुल धीरे धीरे अपना लंड अंदर बाहर करना शुरू किया उसे थोड़ी तकलीफ़ हो रही थी पर अब मज़ा भी आ रहा था वो मेरा साथ देने लगी उसने मेरी कमर पर अपने पैर जमा लिये और मुझे और अंदर पुश कर रही थी मैं भी उसे काफ़ी तेज़ी से चोद रहा था और 15 मिनिट तक चोदने के बाद मैने उसी घोड़ी बनने को कहा.


फिर मैने उसे घोड़ी के पोज़ में चोदा वो मस्ती से मज़े ले रही थी कभी अपनी गांड सिकोडती तो कभी अदा से मुझे देखती वो पूरे टाइम यही कहती रही की भाई आई लव यू चोद मुझे और अंदर मेरे भैया मेरे सैया और 30 मिनिट की चुदाई के बाद वो ढीली पड़ी और मुझसे लिपट गई मैने उसे बाहों में जकड़ लिया और उसी पोज़िशन में उसकी चूत अपने पानी से भर दी.


मेरी फैमिली में चार मेंबर हैं.. मैं, मेरा भाई राहुल और मम्मी-पापा।


बात सर्दियों की है। दिसंबर का टाइम चल रहा था और हम दोनों भाई-बहन की स्कूल की छुट्टियाँ चल रही थीं, हम दोनों ही काफ़ी बोर हो रहे थे।

एक दिन पापा ने कहा कि हम सब मंसूरी जा रहे हैं।


वहाँ हमारे चाचा जी अपनी फैमिली के साथ रहते थे.. पापा उनके घर जाने के लिए कह रहे थे। चाचा एक बैंक में मैनेजर थे, उनकी लड़की की शादी थी।

हम दोनों भाई-बहन बहुत खुश हुए कि चलो इसी बहाने अब कहीं घूमने का मौका तो मिला।


हमने जाने की तैयारी शुरू कर दी। चूंकि वहाँ हमारी फैमिली से कोई भी बंदा 5-6 सालों से नहीं गया था.. इसलिए सभी वहाँ जाने को काफ़ी उत्सुक थे।


हम सभी ने शादी के लिए शॉपिंग आदि भी कर ली थी। पापा ने चाचा के घर कॉल करके बता भी दिया कि हम सभी लोग फलां दिन आ रह हैं। वहाँ भी सब खुश हो गए।


पर होनी को कुछ और ही मंजूर था.. हमारे जाने से एक दिन पहले हमारे पड़ोस वाले घर में पापा के दोस्त की डैथ हो गई तो पापा ने कहा- मेरा जाना अब ठीक नहीं है, तुम दोनों अपनी मम्मी को लेकर निकल जाना।

पर मम्मी ने भी जाने से मना कर दिया।


अब हम दोनों को ही जाना था और हम शादी के दिन सुबह जल्दी रवाना हो गए। मंसूरी पहुँचते-पहुँचते हमें लगभग शाम के 5 बज गए थे।

हम दोनों चाचा के घर पहुँचे, वहाँ सबने हमारा वेलकम किया।

चाचा ने पूछा कि भैया-भाभी नहीं आए तो राहुल भैया ने उन्हें सब बता दिया।


खैर.. शादी वाला घर था, सब काफ़ी जल्दी में थे। इधर हम दोनों की हालत तो सफ़र की वजह से खराब हो चुकी थी। हम दोनों थोड़ा आराम किया और शाम को शादी में चले गए। दोस्तों ये कहानी आप भीआईपीचोटी डॉट कॉम पर पड़ रहे है


बारात आई हम सबने काफ़ी एंजाय भी किया और सुबह को चाचा की लड़की की विदाई भी हो गई। हम भी दोपहर को घर वापसी के लिए निकल पड़े। उस दिन काफ़ी खराब मौसम था। जैसे ही हम दोनों ने मंसूरी क्रॉस की, अचानक आंधी तूफ़ान और पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू हो गई और रास्ते बंद हो गए।


जैसे-तैसे हम देहरादून पहुँचे। इस टाइम शाम के 5 बज गए थे। हम दोनों ने घर पर कॉल किया तो पापा ने कहा कि रात का रास्ता खराब है, तुम वहीं किसी होटल में स्टे कर लो और कल सुबह निकलना।


हम दोनों ने उनकी बात मान ली और होटल में रूम ले लिया।


मैंने और राहुल भैया ने चेंज किया और फिर खाना खाया। चूंकि ठंड ज्यादा ही थी इसलिए राहुल भैया ने रम का इंतजाम कर लिया और रम पीने के बाद तो ठंड मानो गायब सी हो गई।

फिर हम दोनों ने खाना खाया और ना जाने कब हम दोनों भाई-बहन सो गए।


तकरीबन रात हो 2:30 बजे मेरी आँख खुली तो पहले मैं वॉशरूम गई और फिर दुबारा आकर लेट गई। अब तक रम का नशा उतर चुका था इसलिए मुझे फिर से सर्दी लगने लगी। मैं जल्दी से राहुल भैया के कम्बल में जाकर उनसे चिपक गई। अब मुझे थोड़ी राहत मिली।


पता नहीं कब मेरा हाथ उनके सीने पर चला गया और मैं राहुल भैया के सीने को सहलाने लगी। कुछ देर बाद मेरा हाथ खुद उनके सो रहे लंड पर पहुँच गया। मैं उसे पजामे के ऊपर से ही पकड़ कर उससे खेल रही थी।

मेरा हाथ लगते ही उस सो रहे लंड में भी हलचल शुरू हो गई। अब राहुल भैया का तना हुआ लंड अपने हाथ में पकड़ते ही मेरा मन उसे अपनी चूत में लेने को मचलने लगा।


मैंने राहुल भैया को किस करना शुरू कर दिया। मैं उनके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूस रही थी। बहुत ही मजा आ रहा था, अपनी जीभ से राहुल की जीभ को छूना बहुत अच्छा लग रहा था। पर राहुल भैया अब भी सो रहे थे, क्योंकि उन्होंने मुझसे ज़्यादा ड्रिंक की हुई थी।


अब मुझसे रुका नहीं गया तो मैंने जल्दी से अपना पजामा और पेंटी नीचे करके अपनी गीली हो चुकी चूत राहुल भैया के मुँह पर रख कर उनके मुँह पर बैठ गई।

आह.. कितना मजा आ रहा था..

मैं अपनी चूत उनके होंठों पर रगड़ रही थी। जब उनकी गर्म साँसें मेरी चूत के दाने पर लग रही थीं तो बड़ा मजा आ रहा था।

अब मेरी रगड़ की स्पीड तेज होती जा रही थी। मेरी चूत पूरी तरह से पानी से तर हो चुकी थी और राहुल भैया के होंठ भी मेरे चूत के पानी से भीग गए थे।


तभी शायद उनकी आँख खुल गई और जब उन्होंने मेरी चूत अपने मुँह पर देखी तो वो भी लपलपा कर मेरी चूत की माँ चोदने लगे।

अह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… भैया कितने प्यार से मेरी चूत को चाट रहे थे। मैं कामुक भरी आवाज में सिसकारने सी लगी थी।


जैसे ही भैया की जीभ मेरी चूत को खोलते हुए अन्दर जाती.. उस समय मैं सातवें आसामान पर होती।

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तभी भैया ने अपने हाथ बढ़ा कर मेरे दोनों मोटे-मोटे चूचों को पकड़ लिया और मेरे चूचे को बुरी तरह से दबाने लगे। इधर भैया मेरे चूचे दबा रहे थे और उधर अपनी जीभ से मेरे चूत की रगड़ाई भी कर रहे थे। जब राहुल भैया मेरी पूरी चूत को होंठों में लेकर चुसकारी मारते, तो ऐसा लगता था शायद मैं अब पानी छोड़ दूँगी।


मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैंने तुरंत भैया को उठाया और उनके कपड़े उतारने शुरू कर दिए।


मेरा मन था कि राहुल भैया का लंड चूसूं, पर एक तो वो तन चुका था और फिर मुझे राहुल भैया का लंड अपने मुँह से ज़्यादा अपनी चूत में लेने की जल्दी हो रही थी।


भैया भी समझ गए और उन्होंने ढेर सारा थूक अपने लंड पर मल दिया और एक झटके में मुझे गिरा कर लेटा दिया।


भैया की ऐसी हरकत देख कर मैं समझ गई कि आज मेरा प्यारा भैया मेरी चूत को बड़े मज़े से चोदेगा।


फिर मैंने थोड़ा नखरा दिखाना शुरू किया और भैया से कहा- राहुल भैया, ये क्या कर रहे हो?

राहुल- मैं अपनी प्यारी बहन को चोदने की तैयारी कर रहा हूँ।

मैं- भैया नहीं.. मुझे मत चोदो.. मेरे मुँह में लंड देकर अपना पानी छोड़ दो।

राहुल- नहीं मेरी बहना.. मुझे आज मत रोक प्लीज़..

मैं- नहीं भैया बहुत तकलीफ़ होगी।

राहुल- नहीं बहाना कुछ नहीं चलेगा।


मैं- नहीं राहुल भैया मेरी चूत आपका लंड नहीं झेल पाएगी।

राहुल- अरे डर मत.. मुझसे मोटा लंड भी झेल जाएगी।

मैं- राहुल भैया प्लीज़ आपके लंड से मेरी चूत फट जाएगी..!

राहुल- अब फटे तो फटने दे.. बस चुदवा ले मुझसे.. जल्दी.. आआह..


राहुल लंड लगाने लगा।

‘थोड़ा ऊऊऔरर हाँ.. अब गया थोड़ा..’

‘अभी पूरा भी जाएगा साली रंडी..’

‘हाय राहुल साले बहनचोद.. साले आराम से चोद भोसड़ी के.. अह.. कोई भैया इतनी बेहरमी से अपनी बहन की चुदाई करता है क्या.. अह.. जरा आराम से बहनचोद.. मैं कहीं भागी नहीं जा रही.. ऊऊह साले आऐईईए.. मार दिया.. बहन के लंड.. तूने आह्ह..

‘अरे रांड बहना.. बस दो मिनट और झेल ले बहन की लौड़ी.. बाकी लंड भी कर दूँगा अन्दर.. बस ले थोड़ी गहरी साँसें ले ले कमीनी.. आहह उम्म्म्मम.. ऊऊओह.. बस बहना.. मेरी प्यारी छिनाल बहना खाले अपने राहुल का लंड कुतिया.. आआह..’

‘साले मादरचोद भैया मारोगे क्या बहन के लौड़े.. रुक जा साले राहुल.. तेरी मां की चूत साले.. मर गई.. कुत्ते..’

‘ना मेरी रंडी बहन.. तू मत मर मेरी बहन की चूत.. मैं मार तो रहा हूँ.. ऊऊऊऊआआह.. तेरी चूत का बीज रगड़ दूँ.. आह..’

‘राहुल नीचे कर साले अपने होंठ.. ला पिला दे मुझे अपने होंठों का रस.. अह.. मेरा प्यारा राहुल आआआअहह.. चोद दे.. अपनी बहन की चुदाई करके उसे मजा दे!’

‘हाँ बहन की लौड़ी साली चूस-चूस कर सुजा दे मेरे होंठों को बुरी तरह से..’


दोस्तों ये कहानी आप भीआईपीचोटी डॉट कॉम पर पड़ रहे है


यह कहते ही हम भाई-बहन एक-दूसरे के होंठों को चूसते रहे। भैया भी मेरे होंठों को कस-कस कर चूस रहे थे।


तभी..

‘साले राहुल बहनचोद भाई.. अपनी बहन के चूचे तो मसल दे… जल्दी मसल साले दबा-दबा कर इनको लाल कर दे मेरे बहनचोद भाई हाँन्न् ऐसे ही दबा इन्हें कुत्ते राहुल.. हाय क्या अदा है तेरे हाथों में.. मेरे भाई.. जी चाहता है तुझसे ही शादी कर लूँ मेरे प्यारे भाई.. कितनी अच्छी तरह से चुदाई के मज़े देता है मुझे.. कितना प्यारा है मेरा राहुल.. चोद साले चोद मुझे.. अगर आज तूने मेरी चूत फाड़ दी तो मैं तुझसे शादी करके तुझसे रोज अपनी चूत मरवाया करूँगी.. अह.. मेरे राहुल भैया चोद मेरी चूत को, फाड़ इसे आज.. अपने लंड से मेरे भैया..!’


‘हाँ मेरी बहनचोद बहन मैं भी तुझे चोरी छिपे आँखों से चोद-चोद कर थक गया हूँ। मुझे अपना पति बना ले मेरी रानी.. ले मेरा पूरा लंड अपनी चूत की गहराई में खा ले मेरी बहना.. आह इसे पूरा निगल जा अपनी चूत में मेरी बहन आअहह.. ले मेरी बहन मेरा लंड अपनी चूत की प्यास बुझा ले मेरी रानी.. क्या मस्त मजा देती है मेरी बहन की चुदाई मुझे.. आहह बहना ले मेरी बहना..’


‘आहअ राहुल भैयाआ चोद दे मुझेईईई इतनी बुरी तरह से चोद भोसड़ी के कि मेरी चूत तेरे लंड की गुलाम बन जाए राहुल साले भोसड़ी के चोद दे मुझे.. रूला दे मेरे भैयाआआ.. मेरा हरामी राहुल भैया चोद-चोद कर लाल कर दे मेरी चूत मेरे राहुल.. साले तेरी बहन की चूत.. भोसड़ी के चोद मेरे राहुल भैया चोद मुझे आआह.. ऐसे ही और तेज स्ट्रोक लगा साले राहुल बहनचोद.. आह.. ले मैं आ रही हूँउन्न..’


‘हाँआ मेरी बहन.. बस मैं भी आ रहा हूँ.. तेरी चूत में ही अपना सारा रस टपका-टपका कर तुझे निहाल कर दूँगा बहएना.. आअहह..’

‘अहह.. भैया भैया.. राहुल भैया मैं आ गईईईईई सीईईई.. आअह.. राहुल भैया मेरा गिर गया..’

‘मैं भी आ गया.. मेरी बहना आआआहह.. ‘आआहह..’


और इसी तरह हम दोनों भाई-बहन ने रात को 4 बार चुदाई का मजा लिया और फिर वापस अपने घर आ गए।


तो दोस्तो कैसी लगी आपको मेरी भाई बहन की चुदाई की कहानी



मुहंबोला भाई बहनचोद निकला


मेरा कोई सगा भाई नहीं है.इसलिए जब भी राखी या दूज का त्यौहार आता है मैं पड़ोस के एक लडके को राखी बांधती हूँ .उस लडके का नाम विशाल है .वह मेरा दूर के रिश्ते की बुआ का लड़का है .उसकी आयु 24 आयु 17 साल है .विशाल मेरे घर से 7 किलोमीटर दूर सिटी में कम्पूटर की मरम्मत की दुकान है .साथ ही विशाल वहीं पर विडियो लाइब्रेरी भी चलाता था .अपने साथ उसने एक लड़े को भी काम पर रहा था .जिसका नाम सुनील था .


सुनील 27 साल का युवक था .उसका काम ग्राहकों को उनकी पसंद की सीडियां देना था .विशाल का घर दूकान और मेरे घर से बहु दूर था ,इसलिए उसने अपनी दूकान के ऊपर एक कमरा किराये पर ले लिया था .कमरे में लैट बाथ साथ ही थे .जब भी विशाल को समय मिलाता था वह एक दो दिन में मेरे घर जरुर अत था .कई बार मम्मी उस से बाजार से जरूरी सामान मंगवा लेती थी . छोटी होने के कारण विशाल मुझे बहुत चाहता था ,और जब भी आता था मेरे लिए कोई न कोई चीज जरुर लाता मम्मी भी उसे पसंद कराती थीं ,और उस से हरेक बात में सलाह लेती थीं..विशाल के पिता गुजर गए थे ,और वसीयत में एक मकान छोड़ गए थे ,जो दुकान से दूर था ,उसी में विशाल की माँ रहती था ,विशाल दिन भर दुकान पर रहता था ,सुनील उसके लिए घर से खाना ले आता था .रत को विशाल घर में खाना खाता था . यह घटना राखी के दिन की है ,हर साल की तरह मैं विशाल को राखी बांधती थी .और उसी के आने का इन्तेजार हो रहा था .विशाल ने मुझे राखी पर एक मोबाइल गिफ्ट देने का वादा किया था .उस दिन रह रह कर बरसात हो रही थी .और रास्तों में पानी भर गया था ,करीब शाम के पांच के करीब विशाल आया .और देर के लिए माफ़ी मांगी .


फिर मैंने जब उसे राखी बांधी तो ,उसे मोबाइल देने का वादा दिलाया .खाने के बाद विशाल में कहा मेरे साथ मार्केट चलो ,तुम्हें जैसा मोबाईल चाहिए वैसा दिलवा दूंगा .उस समय शाम के सात बज चुके थे ,तभी जोर की बरसात होने लगी .मेरी मम्मी ने विशाल से कहा तुम अगले दिन मोबाइल खरीद देना .लेकिन मैं उसी दिन की जिद करने लगी .विशाल ने कहा अगर पानी के कारण देर हो गयी तो ? मगर मैंने कहा चाहे कितनी भी देर हो जाये नुझे तो मोबाईल चाहिए .मेरी मम्मी भी बोली बेटा यह बड़ी जिद्दी है .अगर तू आज मोबाईल नहीं देगा तो यह मेरी जान खाती रहेगी .मुझे तुम पर पूरा विश्वास है ,भले कुछ देर अधिक भी हो जाये . विशाल बोला आंटी चिंता मत करो ,अगर बरसात जोर से आने लगेगी तो हम अपनी दुकान के ऊपरी कमरे में रुक जायेंगे .क्योंकि वह में सिटी में है .वहीँ नए नए तरह के मोबाइल मिलते है . यह सुनते ही मैं विशाल की बाइक पर बैठ गयी .और जाते जाते विशाल ने ममी से कहा आंटी आप चिंता नहीं करो .मैं आपको फोन कर दिया करूँगा . उस समय थोड़ी बून्दाबून्दी हो ताहि थी ,हमने काफी घुमानेके बाद एक मोबाईल पसंद कर लिया .लेकिन जैसे ही हम दुकान से बहार निकले तो मुसलाधार बरसात होने लगी .साथ में ठंडी हवाएं भी चलने लगी विशाल ने मेरी मम्मी को बता दिया कि हम बाजार में हैं ,हमें देर हो सकती है ,विशाल का कमरा थोड़ी दूर ही था ,उसने कहा कि बरसात रुकने तक मैं उसके कमरे में रुक सकती हूँ ,क्यों वहां कोई नहीं होगा ,कमरे की एक चाभी विशाल के पास थी .दूसरी उसने अपने नौकर को दे रखी थी .कमरे के आने तक हम पूरी तरह भीग चुके थे .मिझे सर्दी लग रही थी .मैं काँप रही थी .लेकिन उस कमरे में मेरे लिए दूसरा कपड़ा नहीं था ,विशाल ने मुझे अपना कुरता दे दिया ,मैं निचे से नंगी थी . विशाल के कमरे में सिर्फ एक तौलिया और लुंगी थी .जब वह गिले कपडे बदने लगा तो उसकी तौलिया निचे गिर गयी .और उसका लम्बा मोटा ,गोरा ,प्यारा लंड मैंने देख लिया .शायद उसने जानबूझ कर ऐसा किया होगा . मैं दो तीन बार मोहल्ले के लड़कों से चुदवा चुकी थी .तब से मुझे लंड लेने की इच्छा होती रहती थी .


विशाल का लंड मुझे अच्छा लगा ,10 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा था .मेरी चूत भर जाने पर भी लंड बचा रहता जब से मैंने विशाल का मस्ताना लंड देखा देखा सर्दी होने बावजूद मेरी चूत में वासना की आग भड़क रही थी ,मैं सोच रही थी की ,किसी न किसी तरकीब से विशाल का लंड लिया जाये ,मैंने विशाल से कहा मुझे ऐसा लग रहा है कि मुझे सर्दी होने वाली है .तुम्हारे कमरे में गैस भी नहीं है ,वर्ना चाय बन सकती थी .विशाल ने कहा मैं तो नीचे से किसी दुकान से चाय मंगवा लेता हूँ .अगर कोई दुकान खुली हो ,मरे पास तो सिर्फ एक बोतल ब्रांडी है .


मुझे जब भी सर्दी हो जाती है ,मैं एक दो पैग ले लेता हूँ .मैं नौकर सुनील को फोन करता हूँ वह चाय का इंतजाम कर देगा ,अगत तुम चाहो तबतक तुम भी एक पैग ले सकती हो .मैं खुश होकर बोली अगर तुम खुद अपने हाथों से पिलाओगे ,तो मैं पी लूंगी . मेरा काम हो गया .मेरी चूत लुप लुपहोने लगी .मैंने फ़ौरन एक कि जगह तिन पैग ले लिए और कहा मेरी सर्दी जल्दी जाने वाली नहीं है ,मुझे और गर्मी चाहिए .विशाल में मुझे अपने पास बिठाया और कहा लो तुम मुझ से सट कर बैठ जाओ ,शायद मेरे शारीर से तुम्हे कुछ गर्मी मिल जाए .बातें करते वक्त विशाल मेरे शारीर पर हाथ फेरने लगा .उसका लंड लुंगी में उछलने लगा था .और मेरी चूत से रस रिसने लगा था .विशाल ने मुहे अपने बिलकुल पास लिटा लिया .और अपनी टाँगें मेरी टांगों में फसा लीं .मेरी चूचियां एकदम कड़क हो गयीं .विशाल कि सांसें मेरी सांसों से मिल रही थीं .


तभी विशाल का नौकर सुनील अचानक कमरे में अगया ,हम दरवाजा बंद करना भूल हाय थे ,हमें ऐसी हालत में देखकर सुनील पहले तो चौंका और बोला यार मॉल तो मस्त लाये हो ,क्या अकेले ही मजा लेने का प्लान था .विशाल ने कहा यह मेरी मुंहबोली बहिन है .सुनील बोला इस से कोई फर्क नहीं होता .यह तेरी सगी बहिन तो नहीं है ,तुझ्र यह कहावत पता नहीं ? “लंड न देखे दिन या रात,छूत ने देखे रिश्ता नात”यार जब लंड टायर हो ,छुट गर्म हो .तो सरे रश्ते नाते भूलकर चुदाई का मजा लेना चाहिए ,ऐसे में अगर मेरी सगी बहिन भी होती तो ,मैं उसे चोदे बिना नहीं छोड़ता .यार छूत का अपमान नहीं करना चाहिए . सुनील में मुझ से कहा ,आप ही बताइए क्या मैंने कोई गलत बात कही है .?ब्रांडी के नशे में ,या चुदवाने की इच्छा में मैंने हाहा तुम सच कह रहे हो .कुदरत ने सर्फ मर्द और स्त्री ही बनाये हैं ,रिश्ते तो लोगों ने बनादिये हैं . विशाल ने कहा इसला मतलब ,तुम चुवाने को राजी हो .सुनील भी बोल पड़ा मैंने यह ज्ञान दिया है ,मेरा भी कुछ हक़ बनता है .इस लड़की को एक साथ दो दो लंड का मजा मिलेगा .यह भी याद करेगी कि चुदाई क्या होती है .विसाल ने मुझ से पूछा कि क्या तुम तय्यार हो ?मैंने अपना सर हिला कर हाँ का इशारा कर दिया .सुनील फ़ौरन नंगा हो गया ,उसका लंड भी दस इंच से कम नहींथा ,और कड़क होकर ऊपर नीचे हो रहा था.मुझे लंड का गुलाबी गुलाबी सुपरा बहुत प्यारे लग रहे थे ,और उनको चूसने कि इच्छा नहीं रोक पा रही थी तभी सुनील ने विशाल हे कहा आओ अज पिंकी को दो दो लंड का मजा इ दें ,यह भी याद करेगी .


अगर यह ऐसा मजा ले लेगी तो हमें खुद चोदने के लिए रोज बुलाया करेगी .विशाल ने कहा पिंकी आओ ,तुम मेरे खड़े लंड पर इस तरह चढ़ जाओ ,जिस से लंड फक से चूत में समां जाए .तुम चुद चुकी हो ,तुम्हे दर्द नहीं होगा .जिस समय में विशाल का लंड लेने के लिए लंड पर सवार होने लगी तो मेरी गंद सुनील के सामने आगई .उसने फ़ौरन अपना लंड मेरी गंद में घुसा दिया .लंड गांड में रास्ता बनाते हुए अन्दर समां गया .मेरी चीख निकने ही वाली थी लेकिन मने उसे रोक लिया .मजा लेने के लिए दर्द सहना ही पड़ता है ,वर्ना मजा कैसे आयेगा .फिर दौनों के लंड अपना कम करने लगे ,मई स्वर्ग के मजे ले रही थी मेरी चूत से चिकना रस रिस रहा था ,लेकिन गांड लाल हो रही थी उस दिन दो घंटे तक मैं दोनो छेदों में दो दो लंड के मजे ले रही थी .थोडा सी ब्रांडी पीकर यही कम दुहराया गया ,दोनो झड गए ,मैंने उनके लंड चाट चाट कर साफ कर दिया .और वादा किया कि जब भी मैं रिंग करूँ तो सब कम छोड़कर मेरी चूत कि सा सर्दी निकल दिया करो . आज भी मैं चुप कर दोनो से लंड ले रही हूँ ,मेरी गांड इतनी पोली हो गयी है कि गांड मरवाने में कोई तकलीफ नहीं होती ,बल्कि मजा आता है अगर आप चाहे तोआप भी मेरे साथ मजा ले सकते हैं आखिर छूट और गांड किस लिए होते है ? जो लड़कियाँ दो दो लंड लेती हैं ,वह जवान बनी रहती हैं गांड मरवा कर देखो!

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